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L-2 | Modernization | History by Manoj Kumar | Modern India | UPSC | StudyIQ IAS Hindi

StudyIQ IAS हिंदी · 7,485 words · 35 min read

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0:00हिंदी में यूपीएससी की तैयारी से संबंधित

0:02प्रोग्राम्स को देखने के लिए सब्सक्राइब

0:05करें स्टडी आईक्यू आईएएस

0:08हिंदी। आप सभी का स्वागत करता हूं आपके

0:10अपने चैनल स्टडी आईक्यू आईएस हिंदी पर।

0:13दोस्तों आज हम चर्चा कर रहे हैं आधुनिक

0:15भारत का इतिहास और उसमें आज का टॉपिक होगा

0:19भारत में आधुनिकता का उदय। यानी कि आज

0:22हमारी मॉडर्न इंडिया की जो सीरीज स्टार्ट

0:24की है उसका सेकंड लेक्चर है और सेकंड

0:26लेक्चर में हम लोग बात करने चाह रहे हैं

0:28कि आखिर आधुनिकता के मूल्य आधुनिकता के

0:32विचारों के बाद भारत में आधुनिकता का उदय

0:35कैसे हुआ? क्या यह आधुनिकता का जो

0:39सिद्धांत है, आधुनिकता के जो मूल्य हैं,

0:41भारत में अपने आप उद्घाटित हुए या कहीं

0:44बाहर से इनका प्रवेश हुआ और हुआ तो किस

0:47समय हुआ, किस तरीके से हुआ और क्यों हुआ?

0:50आज इन्हीं सभी मुद्दों पर चर्चा करना बहुत

0:53जरूरी है। देखिए हम लोग अच्छे से जानते

0:56हैं कि आधुनिक भारत का इतिहास जब हम पढ़ते

0:58हैं तो लोग सोचते हैं कि हम औरंगजेब के

1:01मरने के बाद लेटर मुगल्स पढ़ें और यूरोपीय

1:03कंपनियों का आगमन पढ़ें कि कौन-कौन सी

1:05यूरोपीय कंपनियां भारत में आई और उन्होंने

1:08कहां-कहां पर अपनी फैक्ट्री बनाई,

1:10कहां-कहां पर सारी चीजें की। ये तो सब जगह

1:12पर सभी लोग पढ़ा भी रहे हैं और सभी

1:14किताबों में यह मौजूद भी है। ठीक है ना?

1:17लेकिन बात आती है कि उस कांसेप्ट को समझना

1:20कि आखिर यूरोपीय कंपनियां भारत में आई तो

1:23क्यों आई? किस तरीके से आई? और 18वीं सदी

1:26का भारत यानी कि औरंगजेब के मरने के बाद

1:29जो भारत की जो स्थिति है वो कैसी है?

1:32क्योंकि अगर उस समय की सही स्थितियों का

1:35आकलन आप लोग और हम लोग नहीं करेंगे तो

1:38इतिहास के साथ सही मायने में हम जस्टिफाई

1:40नहीं कर पाएंगे। और मेरी क्लास में आप लोग

1:43अच्छे से जानते हैं कि मैं जिस टॉपिक को

1:46पढ़ाना पसंद करता हूं वह टॉपिक कम से कम

1:48मान के चलिए कि सारे डायमेंशन को कवर करते

1:51हुए होना चाहिए। जैसा कि मैंने पिछली

1:53क्लास में आप लोगों को पहला टॉपिक जो

1:55डिस्कस किया वो ये था कि आखिर आधुनिकता के

1:58मूल्य क्या है? अगर आप आधुनिकता के

2:01मूल्यों को ही नहीं जानते तो फिर आधुनिक

2:04भारत का इतिहास आप समझेंगे क्या? और इसका

2:06नाम आधुनिक क्यों रखा गया है? क्या जरूरत

2:09है उसकी रखने की?

2:11इसीलिए मेरी क्लास में मैंने पहले ही कहा

2:14कि हम आपके पूरे एनालिटिकल और फ़क्चुअल

2:17दोनों डायमेंशंस को कवर करते हुए चलेंगे।

2:19जिससे कि आप लोगों का इतिहास पढ़ने का जो

2:23आईडी जो कहा जाए कि एक्सपीरियंस है वो बदल

2:26जाए। सामान्य दृष्टिकोण से थोड़ा सा अलग

2:29रहे और जो सही और जरूरी जो पक्ष हैं वो

2:33आपको पता होना चाहिए। तो चलिए इस सेशन को

2:36हम लोग आगे बढ़ाते हैं और सभी लोग कृपया

2:38करके इस क्लास को इस लेक्चर को आप लोग

2:41जरूर लाइक और सब्सक्राइब जरूर कर दीजिए और

2:43इस पर हम लोग चर्चा

2:45करेंगे कि भारत में आधुनिकता का उदय कैसे

2:49हुआ? बाहर से हुआ या यहीं पर स्वयं

2:52उत्पन्न हुआ। यानी कि अगर यह बाहर से आए

2:56या आपका यहीं पर स्वयं उत्पन्न हुआ है।

3:01स्वयं उत्पन्न कैसे हुआ है इस पर हम लोग

3:04चर्चा करेंगे और सभी पहलुओं को जानेंगे।

3:07किस तरीके से आधुनिकता भारत में आई है।

3:11ठीक है ना। और यह मेरा एक छोटा सा परिचय

3:14है। जिन लोगों को नहीं पता है उन लोगों को

3:16पता होना चाहिए। पता कर लेना चाहिए कि आप

3:18लोग जिस टीचर से पढ़ रहे हैं, उसकी

3:21डेग्नेशन या उसकी जो क्वालिफिकेशन है, वह

3:24क्या है, किस तरीके से है? देखिए, यह तो

3:26मेरे एजुकेशनल डिग्री है जो मैंने हाईएस्ट

3:29डिग्री अभी तक ली हुई है और यह मेरा

3:31यूपीएससी का एक्सपीरियंस है जिसमें

3:34यूपीएससी के चार मेंस, चारों मेंस लिखना,

3:37चारों बार प्री क्वालीफाई करना, मेंस

3:39लिखना, जिनमें से तीन बार इंटरव्यू तक

3:41उनको इंटरव्यू फेस करना और यूपीपीसीएस में

3:44सिलेक्शन लेना। ठीक है ना? बाकी मैं लंबे

3:47समय से पढ़ा ही रहा हूं। ये तो आप सभी

3:49लोगों को पता ही है। और कैसे पढ़ाता हूं

3:51ये आप लोगों की क्लास की प्रजेंस मुझे बता

3:53ही देती है। ठीक है ना? चलिए सबसे पहले तो

3:57आप लोगों को मैं बता देता हूं कि स्टडी

3:58आईक्यूआईएस इस समय आप लोगों के लिए 11

4:01अप्रैल से अप्रैल बैच अप्रैल का इवनिंग

4:04बैच लांच कर रहा है। जिसमें आपके पीटूआई

4:07फाउंडेशन की क्लासेस आपकी रन की जाएंगी।

4:09जिसमें आप लोगों की जो क्लासेस होंगी, वह

4:11आपके फाउंडेशन और एडवांस दोनों तरह की

4:14कंबाइंड क्लासेस होंगी। प्री के लिए प्री

4:16के टाइम पे अलग से सेपरेट क्लासेस भी

4:17होंगी, टेस्ट सीरीज भी होगी, मेंस की

4:19टेस्ट सीरीज भी होगी। सारी चीजें हैं। और

4:21साथ के साथ इसमें आप लोगों को प्री और

4:23मेंस का रेजिडेंशियल प्रोग्राम भी मिल रहा

4:25है। मेंटरशिप ड्यूल मेंटरशिप मिल रही है।

4:28मेरी और आपकी दोनों की यानी कि एक पर्सनल

4:31मेंटर भी रहेगा। मैं भी रहूंगा। वो

4:32मेंटरशिप भी है। और मंथली टॉपर को ₹11,000

4:36जीतने का मौका भी है। पढ़ाई के साथ-साथ

4:38प्राइस मनी भी है और प्री क्वालीफाई करने

4:40पर कंप्लीट फीड रिफंड का एक ऑप्शन भी है।

4:43ठीक है ना? ध्यान रखिएगा और इसमें अगर आप

4:46मेरी गाइडेंस में रहकर के तैयारी करना

4:48चाहते हैं तो एमके लाइव कोड पर आप इस बैच

4:50को ज्वाइन कर सकते हैं।

4:52₹33,999 में आपका डायमंड बैच को आप ज्वाइन

4:56कर सकते हैं जिसमें आपको बुक्स और सभी किट

4:58ज्ञान भंडार सत्र कार्यक्रम वगैरह सब कुछ

5:01इंक्लूड होगा इसमें। ओके चलिए बाकी कोई भी

5:05डाउट होता है तो मुझे आप यहां पर कनेक्ट

5:07कर सकते हैं। यह मेरी मेल आईडी और tlegram

5:09WhatsApp नंबर है। लेकिन हां बैच ज्वाइन

5:11करने के लिए या कोई भी बुक परचेस करते

5:13हैं, कोई भी कोर्स परचेस करते हैं मेरी

5:15गाइडेंस में रहना चाहते हैं तो एम के लाइव

5:17कोड जरूर यूज़ करिएगा जिससे आपको डिस्काउंट

5:19भी मिलेगा। मेरी गाइडेंस मिलेगी और यह

5:21Telegram ग्रुप है। जिन्होंने अभी तक

5:23ग्रुप ज्वाइन नहीं किया है तो वो इसके

5:25थ्रू ज्वाइन कर सकते हैं। यह भी है और यह

5:27भी है। ठीक है ना? मनोज कुमार हिस्ट्री।

5:31चलिए तो सबसे पहले हम लोगों ने एक सिलेबस

5:35डिस्कस किया था कि भाई आधुनिकता का भारत

5:37में उदय तो होगा लेकिन सिलेबस के हम लोगों

5:40ने तीन पार्ट किए थे कि आधुनिक भारत का

5:42इतिहास जिसमें हमने 1857 के समय को तो

5:46ध्यान में रखा ही रखा 1857 से पहले का

5:48इतिहास 1857 के बाद का इतिहास इसको हमने

5:52डिवाइड किया था और सिलेबस मैंने पिछली

5:54क्लास में आप लोगों को पूरा डिस्कस भी

5:56किया है। अब बात आती है कि आखिर आधुनिकता

5:59का

6:01जो हम पहली जो यूनिट है ये डिस्कस करेंगे

6:04आपका 1857 से पहले वाला जिसमें पहला जो

6:06टॉपिक होगा 1757 से पहले की कंडीशन यानी

6:10कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की भारत में

6:12विजय यह आप अच्छे से जानते हैं कि 1757 को

6:17एक प्लासी का युद्ध हुआ था क्लाइव और

6:19वाटसन की एक

6:22षड्यंत्र का नतीजा

6:24था जिसमें बंगाल के नवाब को उन्होंने धोखे

6:28से मार दिया और अपना अपना कठपुतली शासक

6:31मीर जाफर को वहां का नवाब बना दिया और

6:33बंगाल जो उस समय पूरे भारत का सबसे

6:36रिचेस्ट प्रोविंस था सबसे धनी प्रांत वो

6:40इनडायरेक्टली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी

6:42के कब्जे में आ गया। ठीक है ना? और इसको

6:46यहां से माना जाता है कि ब्रिटिश ईस्ट

6:48इंडिया कंपनी ने अपने पैर भारत में एक

6:51राजनीतिक शक्ति के रूप में जमा दिए। एक

6:55राजनीतिक शक्ति बनने की ओर शुरू हो गई। और

6:58यहीं पर एक स्टेटमेंट एक बहुत बड़े

7:01इतिहासकार हैं जदुनाथ सरकार।

7:05जदुनाथ

7:07सरकार इन्होंने कहा कि 23 जून 1757

7:12को

7:141757 23

7:16जून यह उन्होंने कहा कि 23 जून 1757 को

7:21भारत

7:23का मध्य

7:25युग मध्य युग समाप्त

7:32हुआ और

7:35आधुनिक युग की शुरुआत

7:37हुई। आधुनिक

7:40युग की शुरुआत

7:45हुई। यानी कि जगन्नाथ सरकार के अनुसार

7:491757 एक ऐसा समय है जिससे पहले भारत में

7:54मध्य युग था और 1757 के बाद आधुनिक युग

7:57शुरू

7:58हुआ। और आज का हमारा टॉपिक क्या है? भारत

8:02में आधुनिकता का उदय

8:04यही टॉपिक है। तो जन सरकार की अगर बात

8:08माने तो 1757 के बाद हमारे यहां आधुनिकता

8:12की शुरुआत होती है। क्या आप इस कथन से

8:15सहमत हैं या नहीं? इन्हीं सारे पक्षों को

8:18पहले बहुत जानना अच्छे तरीके से समझना

8:21बहुत जरूरी है। क्योंकि अगर यह समझ में

8:24नहीं आए तो फिर तो आपको लगेगा कि जगन्नाथ

8:26सरकार सही कह रहे हैं और ये ऑप्शनल में और

8:29जीएस में पूछा हुआ क्वेश्चन भी है।

8:32स्टेटमेंट वाले क्वेश्चन बनते हैं। तो ये

8:34आपका पूछा हुआ क्वेश्चन भी है कि भारत में

8:38मध्य युग की शुरुआत को लेकर के जनना सरकार

8:40का जो व्यू है वो यही है। क्या आप भी ऐसा

8:44मानते हैं कि 1757 के बाद ही भारत में

8:46मध्य युग का शुरू हुआ। आधुनिक युग की

8:48शुरुआत हुई। जबकि आप इतिहास पढ़ते हैं तो

8:511707 औरंगजेब के मरने के बाद पढ़ते हैं।

8:55कि भाई औरंगजेब की मृत्यु हो गई। उसके बाद

8:58लेटर मुगल उत्तर मुगल शासक आते हैं। वहीं

9:01से आप आधुनिक युग पढ़ते हैं। लेकिन जदना

9:03सरकार तो कुछ और कह रहे

9:05हैं। तो चलिए इसके सभी पहलुओं को जानने की

9:09कोशिश करेंगे। लेकिन आपको एक चीज मैं और

9:12डिस्कस कर दे रहा हूं। इसी के साथ में

9:15देखिएगा तो ये आपका एक टॉपिक है जिसमें हम

9:19तीन चीजों को कवर करेंगे। एक भारत में

9:22परिचय यानी कि भारत

9:25में आधुनिकता का

9:30उदय। आधुनिकता का

9:34उदय। यह हम मान करके चलते हैं पहला टॉपिक।

9:38यह है आपकी 18वीं सदी का भारत यानी कि

9:40भारत की स्थिति। भारत की

9:45स्थिति और यह है यूरोपीय कंपनियां। जो

9:49यूरोपीय कंपनियां भारत में आई। यूरोपीय

9:55कंपनियां जो भारत में आई उनके बारे में

9:59जानेंगे और एक-एक करके जानने की कोशिश

10:02करेंगे।

10:04तो आज का हमारा जो टॉपिक है वह है आपका यह

10:07टॉपिक। उसके बाद हम इसको समझाएंगे। उसके

10:09बाद इसको समझाएंगे अच्छे तरीके से एक-एक

10:11करके कवर करते चले जाएंगे और पूरे डिटेल

10:13में प्री और मेंस दोनों को कवर करते हुए।

10:16और यह ध्यान रखिएगा आपका चाहे नेट जेआरएफ

10:18का एग्जाम हो, चाहे टीजीटी पीजीटी का

10:21एग्जाम हो, आईएएस का हो, पीसीएस का हो,

10:23कोई भी एग्जाम हो, इस टॉपिक से आपका कोई

10:26क्वेश्चन बचेगा नहीं। यह मैं आपको एश्योर

10:30कर रहा हूं।

10:32अब आप समझ लीजिएगा आपका कुछ भी टॉपिक यहां

10:35से बच के जाने वाला नहीं

10:38है। चलिए सबसे पहले हम बात करते हैं

10:41आधुनिकता का

10:43उदय। मैंने आप लोगों को बताया था कि

10:46आधुनिकता होती क्या है? पहले तो आधुनिकता

10:48के मूल्य मैंने आपको बताए थे। सामाजिक

10:52स्तर पर इसके जो मूल्य थे सामाजिक स्तर पर

10:56तो मैंने बताया था समानता।

11:02एकता भेदभाव रहित समाज किसी प्रकार का कोई

11:06भी भेदभाव ना हो सबको बराबर का मौका मिले

11:09ठीक है ना और मानवता की जो भावना है वो

11:13इसमें जरूर शामिल रहे

11:15मानवता ये सारी चीजें चाहे वो लैंगिक हो

11:20वर्गीय हो जातिगत हो या कोई भी हो ऐसी

11:23सारी चीजें दूसरा आर्थिक स्तर

11:26पर आर्थिक स्तर पर आपकी कि पूंजीवादी

11:29व्यवस्था बाजारवादी व्यवस्था हो। कैसी हो?

11:33बाजारवादी व्यवस्था

11:36जिसमें बाजारवादी यानी कि मांग और आपूर्ति

11:40के आधार पर वस्तुओं की कीमतें तय होती हो

11:44और वस्तु कीमतें वो तय करता हो जो उत्पादन

11:47करता

11:48हो। राजनीतिक स्तर पर मैंने आपको पिछली

11:51क्लास में बताया था राजनीतिक स्तर पर आपका

11:54लोकतंत्र की परंपरा हो। यानी कि राजा का

11:58बेटा राजा बनेगा ऐसा जरूरी नहीं है। जो

12:01योग्य होगा वह राजा बनना चाहिए। यह

12:03आधुनिकता के मूल्य हैं।

12:06धार्मिक स्तर

12:07पर धार्मिक स्तर पर क्या-क्या मूल्य हैं?

12:11वो है मानवतावादी धर्म।

12:14मानवतावादी

12:16धर्म। यानी कि ईश्वर केंद्रित धर्म नहीं

12:20बल्कि मानव केंद्रित धर्म।

12:23क्योंकि ईश्वर भी अगर हम अवतार की परंपरा

12:26को लेकर के चले तो मानव कल्याण के लिए ही

12:28उन्होंने अवतार लिया था। लोगों के कल्याण

12:30के लिए लोगों के भले के लिए ही अवतार लिए

12:33थे। चाहे वो प्राचीन काल में हो किसी भी

12:35युग में हो। ईश्वर ने अगर अवतार लिया है।

12:38ईश्वर ने अपना संदेश भेजा है। जो भी भेजे

12:41मानव कल्याण के लिए भेजे हैं। तो धर्म का

12:43जो स्वरूप है वो कैसा है? मानव कल्याण

12:46वाला। ना कि कर्मकांडी या रूढ़िवादी तंत्र

12:51मंत्र वाला। ऐसा कुछ नहीं। इन मूल्यों की

12:54बात आती है तो यही मूल्य है आधुनिकता के।

12:57अब बात आती है कि यह मूल्य आपके किस युग

13:00में और कहां पर आपके पैदा हुए? तो आपको

13:03बता दें कि आधुनिकता के इन मूल्यों की जो

13:06शुरुआत होती है, वह होती है

13:09इटली या कह सकते हैं

13:14यूरोप के पुनर्जागरण से।

13:21इटली या यूरोप के पुनर्जागरण से।

13:26ठीक है ना? यह ध्यान रखिएगा।

13:30लेकिन यह आधुनिक युग में हम कह सकते हैं

13:34क्या आपको लगता है कि केवल आर्थिक कारकों

13:38को छोड़ दिया जाए? तो क्या प्राचीन भारत

13:42में महात्मा बुद्ध ने बौद्ध धर्म के जो

13:47सिद्धांत प्रस्तुत किए थे, जो अपने विचार

13:49प्रस्तुत किए थे या जो कुछ भी उन्होंने

13:52अपनी बातें कही थी, शिक्षाएं दी

13:55थी, क्या यह बातें वो उस समय की नहीं है?

13:59क्या महात्मा बुद्ध ने सामाजिक

14:03एकता,

14:04मानवता, जन कल्याण ठीक है ना? स्त्री

14:09पुरुष समानता

14:11ठीक है ना वर्ग विभेद इन सब चीजों पर अपने

14:15विचार नहीं रखे

14:16थे क्या राजनीति में उन्होंने गणतंत्र की

14:19परंपरा नहीं रखी थी जो उन्होंने अपना संघ

14:23बनाया था और संघ के माध्यम से संघ की

14:25व्यवस्था को उन्होंने हमेशा सपोर्ट किया

14:29क्या उन्होंने नहीं रखे धर्म के स्तर पर

14:31उन्होंने क्या मानव कल्याण को ध्यान में

14:34रखते हुए अपने विचार प्रस्तुत नहीं किए थे

14:37क्योंकि महात्मा बुद्ध ने तो ध्यान

14:39रखिएगा। अपना बुद्धत्व प्राप्त किया था तो

14:42उसका उद्देश्य ही था कि मनुष्य दुखी क्यों

14:45है। यानी कि मनुष्य के दुख को दूर करने के

14:48लिए ही वो ज्ञान प्राप्त करने के लिए घर

14:50से बाहर गए थे। अपना गृह त्याग किया था कि

14:52आखिर भाई इन दुखों के कारणों को जाना जाए।

14:56यानी कि लोगों के कल्याण के लिए लोगों के

14:59दुखों को दूर करने के लिए ही उन्होंने

15:02सारा प्रयास किया था।

15:04लेकिन उस समय वह बहुत बड़ा परिवर्तन नहीं

15:07आया क्योंकि आगे जाकर के वह व्यवस्था फिर

15:09से वैसी की वैसी बन गई और वह उस व्यवस्था

15:11में परिवर्तन आ

15:12गया। फिर से ब्राह्मणवाद आ गया। बौद्ध

15:16धर्म भी पतनशील अवस्था में चला गया। सारी

15:18चीजें हो गई। इसीलिए ये जो मूल्य हैं फिर

15:22आगे जाकर के जो स्थाई रूप से चले आए। तब

15:25से हम इनको आधुनिकता के मूल्य मानते हैं।

15:28और इसकी शुरुआत अब आपके भारत में नहीं

15:33बल्कि यूरोप में हुई थी। कहां हुई थी?

15:38यूरोप में। इटली में के पुनर्जागरण से। अब

15:41इटली का पुनर्जागरण कैसे हुआ? किस तरीके

15:43से हुआ? इसको भी हम लोग समझने की कोशिश

15:46करते हैं। देखिए इसको समझने से पहले दो

15:50चीजें हमको जाननी होंगी। एक इसकी

15:53पृष्ठभूमि

15:55प्रश्न भूमि हमको जाननी होगी कि आखिर यह

15:59पुनर्जागरण क्यों हुआ? कैसे हुआ और इसके

16:02मूल्य क्या थे? वो भी मैं आपको चर्चा

16:04करूंगा। बात अगर आप देखेंगे तो प्राचीन

16:08काल की है। मध्यकाल की भी नहीं है।

16:10पृष्ठभूमि में जाएंगे तो हम बात कर रहे

16:12हैं बिल्कुल प्राचीन काल

16:16में। प्राचीन काल में एक ये है आपका रोमन

16:20साम्राज्य। क्या है? रोमन साम्राज्य यह तो

16:24हम लोगों ने सुना था कि भारत के रोमन

16:26साम्राज्य से बहुत अच्छे व्यापारिक और

16:29अच्छे राजनीतिक संबंध भी थे। ठीक है ना?

16:34यहां पर एक हूण जनजाति रहती है। हूण रहते

16:37हैं प्राचीन काल में। और यहां पर है आपका

16:41भारत। अगर हम कहें

16:52यह देखेंगे तो यह है आपका

16:55भारत। तो स्थिति यह हुई कि प्राचीन काल

17:00में लगभग चौथी शताब्दी पांचवी शताब्दी के

17:03आसपास में पांचवी शताब्दी के आसपास में

17:06होड़ों की एक शाखा इधर चली गई और एक शाखा

17:10भारत की तरफ आई। ठीक है ना? भारत में इसको

17:14रोक दिया गया इस क्षेत्र में। हालांकि

17:17कुछ-कुछ अंदर की तरफ चले भी आए। इसको रोका

17:20आपने देखा होगा मालवा के यशोधर्मन ने। नाम

17:24सुना होगा। मालवा के यशो धर्मन ने इसको

17:29रोका था। ठीक है ना? गुप्त शासक में

17:34स्कंदगुप्त ने

17:36रोका। और भी कई लोगों ने इसको इन्हें

17:40रोका। पूर्णों को जिनमें तोरमा भी थे,

17:43मेहरकुल भी थे और भी कई सारे लोग थे।

17:45खुशनवाज भी थे। इन सबको भारत के बॉर्डर के

17:49आसपास पे रोक दिया गया। ठीक है ना? ध्यान

17:52रखना। लेकिन जब यह गए तो इन्होंने पूरे

17:55रोमन साम्राज्य को इसे नष्ट कर दिया।

17:59तहस-नहस कर

18:01दिया। पूरा नष्ट कर दिया।

18:06ठीक? और जब यह नष्ट हो गया तो फिर कंडीशन

18:09यह हुई कि इसे फिर बाद में जाकर के

18:13रिऑर्गनाइज किया गया। नष्ट करने के बाद

18:16में यह पुनर्गठित

18:20हुआ। पुनर्गठित हुआ और पुनर्गठित होने के

18:24बाद में इसका जो पूर्वी जो क्षेत्र है

18:27पूर्वी जो यूरोप है यह इधर साइड वाला एक

18:31तो पश्चिमी हो गया और एक पूर्वी साइड वाला

18:34यहां पर एक नया शहर बना जिसका नाम था

18:37कुस्तुनतुनिया राजधानी बनी।

18:43इसी नाम से एक शासक भी था। इसी नाम से

18:48उसने अपनी एक राजधानी एक नगर बसाया। ठीक

18:51है ना? और यह बन गया नया रोमन साम्राज्य

18:56का एक नया केंद्र कुस्तुनतुनिया यह बना।

19:01लेकिन इसको बनाते समय कंडीशन यह हुई कि जब

19:04इसको पूरा जब बिखर गया तो उसको मैनेज करते

19:07समय एक घटना घटित हुई थी। इसीलिए इसमें

19:11क्या कंडीशन हुई कि इसको

19:14छोटे-छोटे उपभागों में विभाजित कर दिया और

19:17यहां पर सामंत या कहा जाए कि बड़े-बड़े

19:21राज राज्यपाल गवर्नर यहां बना दिए गए। तो

19:24यानी कि मुख्य राजा यह रहा और मुख्य राजा

19:27की अपनी राजधानी ये रही। ठीक है ना? सारी

19:30चीजें यह रही और अपने क्षेत्र को

19:32छोटे-छोटे सरदारों के अधीन रख दिया गया।

19:36वह इसलिए रख दिया गया कि इसको जब

19:37रिऑर्गेनाइज किया गया तो इन सभी सरदारों

19:40ने बड़ा अच्छी भूमिका निभाई थी। उसका बड़ा

19:42सहयोग किया

19:44था राजा के लिए। तो उन सब अन्य सभी

19:48सरदारों के अंदर राजनीतिक महत्वाकांक्षा

19:50बहुत ज्यादा ना जागे आगे जाकर के कोई

19:52समस्या ना खड़ी हो। इसलिए राजनीतिक

19:55महत्वाकांक्षा को संतुष्ट करने के लिए

19:58शासकों ने उनको अलग-अलग क्षेत्र का

20:01राज्यपाल गवर्नर बना दिया और एक तरीके से

20:04उन्हें सामंत की स्थिति में लाकर के खड़ा

20:06कर दिया कि भाई आप फ्यूुडल लॉर्ड्स की तरह

20:08हैं। आप अपने-अपने क्षेत्र का शासन

20:11व्यवस्था संभालिए और सबसे ऊपर मैं हूं।

20:15ठीक है ना? आप अपनी रिपोर्ट दे दी जाइए।

20:17वहां पर अब राजा के लिए आप सेना रखिए।

20:21राजा के लिए कर इकट्ठा कीजिए और केंद्र का

20:24हिस्सा केंद्र को भेज दीजिए। बाकी से आप

20:26अपना काम चलाइए।

20:28ठीक है ना? तो जैसे भारत में सामंती

20:31व्यवस्था राजपूत काल में आई थी वो सामंती

20:34व्यवस्था छठी सातवीं शताब्दी में ऑलरेडी

20:36यूरोप में आ चुकी

20:38थी। अब कहोगे कि सर ये आधुनिकता का उदय

20:42पढ़ा रहे हैं या वहां की व्यवस्था पढ़ा

20:45रहे हैं। तो सोचिएगा जब कुस्तुनतुनिया का

20:47विकास हुआ। यह सारी चीजें हुई

20:51तो समझ लीजिए यहीं से यह मध्यकाल की

20:54शुरुआत हुई। यूरोप में मध्यकाल प्रारंभ

20:57हुआ। यानी इससे पहले प्राचीन काल था और

21:01उसके बाद यहां पर क्या हो गया? मध्यकाल की

21:05शुरुआत।

21:07ठीक है? मध्यकाल की शुरुआत हुई। लेकिन फिर

21:09भी कुस्तुनतुनिया एक व्यापार का बहुत बड़ा

21:12केंद्र बना। ध्यान रखिएगा। तो जो

21:16कुस्तुनतुनिया यह जो साम्राज्य का जो बना

21:18यहां पर कुस्तुनतुनिया यह है आज की डेट

21:21में उसे टर्की कहा जाता

21:23है। कुस्तुनतुनिया उस समय का जो

21:26कुस्तुनतुनिया है कॉस्ट

21:30टेनिपो दुनिया

21:33कॉस्टनटेनिपोल वर्तमान का इसे तुर्की कहते

21:36हैं।

21:39तुर्की यह बना और यह एक बहुत बड़ा व्यापार

21:44का केंद्र भी बना। व्यापार का केंद्र भी

21:49बना और एक तरीके से देखा जाए तो

21:52यूरोप और एशिया

21:55का का मध्य बिंदु

22:00बना। मध्य बिंदु बना।

22:04यानी कि एशिया के साथ व्यापार करने वाले

22:07लोग जो भारत

22:08आए, चाइना जाएं या एशिया के किसी भी देश

22:12में जाएं तो वो सभी लोग यहां से होते हुए

22:14यहां पर इकट्ठे होते थे और उसके

22:17बाद उसके बाद यहां से सारे व्यापारी अपना

22:20सामान बेचने के लिए यूरोप के अन्य

22:22क्षेत्रों में चले जाते थे। तो वहां पर वो

22:25अपना सामान बेचते थे और भारत के और एशिया

22:28के अन्य देशों से सामान खरीदते थे।

22:31और यह व्यापार तो देखिए पहले भी होता था

22:34और अभी भी हो रहा था। तो एक बहुत बड़ा

22:36व्यापार का केंद्र बना था। तो इसलिए एक

22:40समृद्ध क्षेत्र भी था।

22:42ये समृद्ध क्षेत्र भी था। पैसा भी था,

22:47व्यापारी भी थे, सब कुछ था। और सोचिएगा

22:50यहां के जो व्यापारी थे,

22:53व्यापारी वो काफी ज्यादा ज्ञानी

22:57लोग भी थे। अब कहोगे ज्ञानी लोग क्यों?

23:00क्योंकि इनको दुनिया भर के रास्तों का

23:02बड़ा ज्ञान था और इसी समय धर्म युद्ध हुए

23:05थे। क्या हुए थे? क्रूशेर यानी कि धर्म

23:08युद्ध और धर्म युद्ध के चक्कर में स्थिति

23:11यह हुई कि व्यापारी उन सेनाओं के

23:13पीछे-पीछे अपना माल बेचने के लिए उन्हीं

23:15रास्तों से निकल भी जाते थे। तो उन्हें

23:17देश दुनिया की बड़ी अच्छी खासी नॉलेज भी

23:20होने लगी

23:21थी। उनको बहुत सारे जगहों की, बहुत सारे

23:24रास्तों की, बहुत सारी स्थितियों की

23:26जानकारी भी थी। अपना माल खरीदते थे, बेचते

23:29थे। सारी चीजें तो अच्छा खासा व्यापार

23:31पैसा भी कमा रहे थे। उनके पास नॉलेज भी

23:34थी, रिच भी थे। ठीक है ना? सारी चीजें सब

23:37कुछ बहुत बढ़िया चल रहा था। कुल मिलाकर के

23:41बहुत अच्छी स्थिति बन गई थी।

23:45ठीक। अब कहोगे तो फिर हुआ क्या? हुआ फिर

23:49इसके बाद में।

23:52हुआ यह कि एक घटना घटित होती है यहीं पर

23:56वह है आपकी

23:581453 की

24:02घटना 1453 की घटना घटित होती

24:07है। और 1453 की घटना के क्रम में स्थिति

24:12बदल जाती है।

24:15यहां पर कंडीशन यह होती है

24:19तुर्कों ने

24:21उस्तुनतुनिया जो मुस्लिम

24:29है पर आक्रमण कर

24:35दिया और उसे जीत लिया जीता।

24:42ठीक है ना? और इसी के साथ ही

24:44कुस्तुनतुनिया का पतन भी हो गया।

24:48कुस्तुनतुनिया का क्या हो गया?

24:52पतन का पतन भी हो

24:55गया। तो पहला पॉइंट तो यह हो गया। उसको

24:58जीत लिया। और जब कुस्तुनतुनिया का पतन हुआ

25:01तो इसी पतन के साथ ही भारत और एशिया के

25:08एशिया की

25:10ओर आने के

25:14रास्ते के रास्ते बंद हो

25:19गए। अब ये व्यापार कैसे करें? यानी कि एक

25:23तरीके से देखा जाए तो इनका सबसे पहले स्थल

25:26मार्ग बंद हुआ। उसके बाद उन्होंने जलमार्ग

25:29पर भी कब्जा कर लिया। वही गल्फ ऑफ ओमान,

25:32ओमान की खाड़ी या लाल सागर वो सारे

25:35क्षेत्र इनके कब्जे में निकल गए। अब इसके

25:39बाद स्थिति यह हुई कि जब यह हुआ तो यहां

25:42से जो व्यापारी वर्ग है व्यापारी जिसे हम

25:46कहते हैं मध्य

25:48वर्ग यह भाग

25:51भागा। भागकर इटली पहुंच गया। इटली पहुंचा।

25:59और वहां से उसने अपना व्यापार का को

26:02बढ़ावा दिया। व्यापार को बढ़ावा दिया।

26:07लेकिन वहां एक समस्या

26:10थी। वहां पर एक समस्या थी कि भाई भारत और

26:15एशिया के देशों से जो सामान मंगाते थे

26:19उसकी आपूर्ति उनके पास नहीं हो पा रही।

26:22बाकी करें तो करें क्या?

26:25और भारत की तरफ आने का कोई रास्ता उनके

26:27पास मौजूद नहीं

26:30है। कहां से आए? किस तरीके से आए? तो यहां

26:35पर वो बड़े परेशान हुए कि भाई क्या किया

26:39जाए? कैसे किया जाए? किस तरीके से किया

26:42जाए? क्या हो? तो ध्यान रखिएगा भारत में

26:48जो नवीन परिवर्तन की बात हो रही

26:51है वो परिवर्तन यूरोप में शुरू हो रहे

26:54हैं। प्राचीन भारत में जो मैंने कहा कि जो

26:58नवीन परिवर्तन थे उनको महात्मा बुद्ध जैसे

27:00धार्मिक व्यक्ति सामाजिक व्यक्ति ने

27:02बढ़ावा दिया था। लेकिन यहां पर जो

27:05परिवर्तन हो रहे हैं उनको किसी भी धार्मिक

27:08व्यक्ति ने नहीं किसी सामाजिक व्यक्ति ने

27:11नहीं बल्कि इस मध्यवर्ग ने

27:15डेवलप किया था। यानी कि मध्यवर्ग ने एक

27:18प्रकार से क्रांति खड़ी की

27:20थी। उसको बढ़ावा दिया था। ठीक? तो ये यहां

27:25पर बड़ा परेशान हुए। और उसके बाद अगर हम

27:27बात करें तो यहां पर देखिएगा तो इटली में

27:31यह सभी व्यापारी इकट्ठे हुए। इटली में

27:37मध्यवर्ग और इसके

27:39सामने दो

27:41प्रश्न दो प्रश्न

27:45एक

27:46प्रश्न भारत की

27:52ओर आने

27:55का का मार्ग कैसे खोला जाए? कहां से हो

27:59सकता है? और

28:00दूसरा कि यह

28:05लोग मुस्लिमों

28:10से क्यों हारे?

28:14क्यों हारे? तो यह सारी चीजें इटली में

28:18इटली के जो उस बेहतरीन शहर हैं, वेनिस है,

28:22मिलान है, रोम है, ये सभी व्यापार के बड़े

28:25अच्छे केंद्र

28:26बने। बड़े अच्छे केंद्र बने। और वहीं पर

28:30बैठकर के इन्होंने सोचना शुरू किया कि भाई

28:33भारत और एशिया की तरफ जाने का रास्ता क्या

28:35हो सकता है? और दूसरी तरफ कि हम हारे

28:39क्यों? हमको अपना उस्तुन दुनिया क्यों

28:41छोड़ना पड़ा? हम तो महान रोमन साम्राज्य

28:44के वंशज

28:46हैं। हम महान रोमन साम्राज्य के वंशज हैं।

28:51तो हम हारे

28:53क्यों? हम तो इतने महान थे। राजनीतिक स्तर

28:57पर हमारे पास ऐसे हथियार थे। हमने दुनिया

29:00को यह दिखाया था। हमने दुनिया को वो

29:02दिखाया था। हमने यह किया था। हमारे महल

29:05ऐसे थे। हमारी ये चीजें ऐसी थी। तो फिर

29:07हुआ क्या?

29:09तब जाकर के जब इन्होंने इस प्रश्न पर

29:12चर्चा किया तो फिर इनके दिमाग में

29:16आया कि हम पहले ऐसे थे लेकिन वर्तमान में

29:20ऐसे नहीं है। यानी कि इनके दिमाग में आया

29:23कि प्राचीन काल

29:26में काल में रोमन

29:32साम्राज्य साम्राज्य महान था।

29:37ठीक है ना? और

29:38हम उसके वंशज

29:42हैं। वंशज

29:46लेकिन वर्तमान में यानी कि वर्तमान

29:52में

29:54हमने अपने गौरव

29:57को गौरव

29:59को धूमिल कर दिया

30:03है।

30:04धूमिल किया है। इसका मतलब है

30:09हम सो गए

30:12हैं। सो गए हैं। इसका मतलब है हम यहां पर

30:16जागे हुए थे। यहां जागे थे। अब हम सो गए

30:20हैं। इसका मतलब हुआ

30:23हमें

30:25पुनः जागना

30:27होगा। अगर हमें अपने आप को बचाना है, अपने

30:31अस्तित्व को बचाना है तो क्या करना होगा?

30:33हमें पुनः जागना होगा। इसी को कहते

30:37हैं

30:39पुनर्

30:42जागरण। पुनः जागना। इसका मतलब यह सभी लोग

30:46मध्यकाल में सो गए। अपने गौरव को भूल गए।

30:50अपने इतिहास को विसर्जित कर दिए। सब कुछ

30:53तबाह कर दिए। केवल अपने व्यापार और

30:56छोटी-मोटी चीजों पर ही जिंदा रहे। लेकिन

30:59अपना अतीत, अपनी परंपराएं, अपनी महानता,

31:02अपनी अचीवमेंट्स वो सारी चीजें भूल गए। तो

31:07तब उन्होंने सोचा कि हमें फिर कुछ करना

31:10पड़ेगा और यहां पर जाकर के फिर उन्होंने

31:13अपने हर क्षेत्र में नवीन परिवर्तन के लिए

31:17नवीन विचार प्रस्तुत किए। यहां से आए उनके

31:21नवीन विचार। तो नवीन विचारों का फिर यहां

31:24पर उदय हुआ।

31:27नवीन विचारों का उदय। अब समझ में आ गया

31:31इटली में ही क्यों

31:33हुआ? नवीन विचारों का उदय। यानी कि

31:37पुनर्जागरण के विचार।

31:42यहीं से शुरू होते हैं और ये जो विचार हैं

31:46वो आपके हर तरीके के हैं।

31:51ठीक है ना? हर क्षेत्र में उन्होंने नवीन

31:54विचार दिए। सबसे पहले हम बात करें तो

31:57पुनर्जागरण में उन्होंने सबसे पहले

32:01विज्ञान यानी कि तर्क को बढ़ावा

32:04दिया।

32:06तर्क विज्ञान और तर्क को उन्होंने बढ़ावा

32:10दिया।

32:11ठीक है ना? यानी कि उनकी तर्क

32:15शक्ति यानी कि उनकी वैज्ञानिक

32:19सोच

32:21वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा।

32:25बोले तर्क

32:27करो। उनके वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा। लोगों

32:31के अंदर साहस को बढ़ावा

32:34दिया। साहसी

32:36बनाया। बोले कि हिम्मत हारने की जरूरत

32:39नहीं है। साहसी बनना बहुत जरूरी है।

32:44ठीक है ना? और इसी के तहत ही सोचिए नवीन

32:48आविष्कार उन्होंने किए और उसको अपनाया और

32:52सारी चीजें की। तो जो इस समय उन्होंने कहा

32:55कि जो अच्छे विचार दे सकता है हम उसको

32:56पैसा देंगे, संसाधन देंगे, जो नवीन खोज कर

32:59सकता है उसको प्रमोट करेंगे और यह सब

33:01मध्यवर्ग ने यह सब करना शुरू कर दिया। ठीक

33:04है ना? और यहीं पर सोचिएगा स्थिति क्या

33:08हुई? यहीं पर आपको पता चला कि इन्होंने

33:11पहली बार पृथ्वी गोल

33:16है। यह खोज की इन्होंने।

33:21इससे पहले यह लोग मानते थे कि पृथ्वी चपटी

33:23हुई है और अगर आप अटलांटिक सागर से आगे

33:25जाओगे तो अंतरिक्ष में गिर जाओगे और जब

33:28पृथ्वी गोल है यह पता चला तो फिर आप अब

33:31सोच लीजिए क्या होगा और जब यह पता चला कि

33:34पृथ्वी गोल है तो कोलंबस ने निकला था भारत

33:38खोजने कोलंबस ने अमेरिका की खोज की

33:41अमेरिका खोज

33:44लिया कोलंबस ने खोजने निकला था किसको

33:50भारत को अगर पृथ्वी गोल है तो हम इधर से

33:52भी पृथ्वी की पीछे से होते हुए हम भारत की

33:55तरफ नए रास्ते से जा सकते हैं।

33:58ठीक है ना? इसी समय आपके दूसरे और क्या

34:01हुए? दिशा सूचक यंत्र का विकास हुआ। दिशा

34:06सूचक यंत्रों का विकास। इससे और ज्यादा

34:10फायदा मिला। इसी समय

34:13आपके तीसरी चीज हुई आपकी एक और महत्वपूर्ण

34:16चीज जिसे कहते हैं मानचित्र प्रणाली का

34:18विकास

34:20हुआ। चौथा हुआ आपका बड़े-बड़े जहाज

34:25बड़े-बड़े जहाजों की तकनीक का

34:28विकास। जहाजों की तकनीक का विकास। तो

34:32सोचिए साहसी विज्ञान ने इनको बनाया ही

34:35सारी चीजें की। और इन सारी चीजों की वजह

34:38से अब खुद सोच लीजिए किसको बढ़ावा मिला?

34:41इसकी वजह से बढ़ावा मिला समुद्री खोजों

34:45को। समुद्री खोजों को बढ़ावा

34:49मिला। ये

34:52रहा। जब जिस देश के पास ये सारी चीजें

34:55मौजूद हो तो अब आप समझ सकते हो क्या होगा।

34:59ठीक है ना? यह कंडीशन हो

35:01गई। इस तरीके से सारी चीजें शुरू हो गई

35:05थी।

35:06अमेरिका खोज लिया गया। केप ऑफ गुडोफ खोज

35:10लिया गया।

35:12ठीक है

35:13ना? यह सारी चीजें आप देख सकते हो। तो यह

35:16आपके वैज्ञानिक स्तर पर हुई। इसी समय अगर

35:19हम बात करें तो आपके विज्ञान के स्तर पर

35:22दूसरा हम कह सकते हैं आर्थिक स्तर पर इस

35:24समय क्या हुआ? आर्थिक स्तर पर। आर्थिक

35:29स्तर पर व्यापारिक संघ का निर्माण हुआ।

35:32अकेले नहीं। बोले कि अब तक तो

35:35अकेले व्यापार करते थे। अब हमें क्या करना

35:39होगा? मिलकर के हमें काम करना होगा।

35:42व्यापारिक संघों का निर्माण।

35:45ठीक है ना? किस लिए? कि जिससे कि ज्यादा

35:48से ज्यादा संसाधन पर नियंत्रण कर सकें।

35:50यानी कि ज्यादा संसाधनों का उपयोग

35:54करना। ज्यादा

35:56संसाधनों का उपयोग।

35:59क्योंकि अकेला व्यक्ति व्यापार करेगा,

36:01अकेला व्यक्ति करेगा तो उसके पास उतने

36:03संसाधन नहीं है। अगर 10, 15, 20, 50 लोग

36:05मिलकर के यह सब काम करें तो क्या समस्या

36:10है? ये सारी

36:13चीजें संसाधनों पर कब्जा हुआ और यहीं से

36:17ध्यान रखिएगा कंपनियों की का निर्माण शुरू

36:21हुआ। कंपनियों का निर्माण यह संघ संघ बना।

36:25यही संघ आगे जाकर के कंपनियों में गठित

36:28होने लगा और कंपनियां भी दो तरीके की

36:30कंपनियां बनी। एक सरकारी

36:32कंपनियां जिनको राजाओं ने राजा महाराजाओं

36:35ने सम संरक्षण दिया और दूसरी कंपनियां बनी

36:38निजी कंपनियां।

36:40ठीक है ना? यानी कि एक तरीके से साझेदारी

36:45साझेदार साझेदारी फर में बनना शुरू हो गई।

36:49भर में

36:51बनना शुरू और भारत में ऐसा कभी हो रहा था

36:55क्या इस समय तक हम सोच रहे थे कि हमारे

36:57व्यापारी 810 व्यापारी मिलकर के कोई संघ

36:59का निर्माण करेंगे या कोई भी चीज

37:02करेंगे उस समय हमारे यहां ऐसा कुछ भी नहीं

37:04हो रहा था और जब ये सारी चीजें हुई

37:07कंपनियों का निर्माण शुरू हुआ तो फिर यहीं

37:09पर सोचिएगा इन्होंने क्या किया मुक्ति

37:11व्यापार को बढ़ावा देने का

37:14प्रयास को बढ़ावा देना मूल के राजा

37:17महाराजाओं से कह दिया कि भाई एक काम करिए।

37:20आपके इस भरोसे रहेंगे तो समस्या बढ़

37:22जाएगी। अगर आपके अपने देश को हमारे देश को

37:25अगर पैसे की जरूरत है तो हमें मुक्त

37:27व्यापार करने दीजिए। यानी कि वहां से हमें

37:30टैक्स फ्री ट्रेड करने दीजिए। हमें छूट

37:34दीजिए। और इन सारी चीजों की वजह से

37:37व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला। इन

37:39सारी चीजों की वजह से व्यापारिक

37:41गतिविधियों को बढ़ावा।

37:49को बढ़ावा मुक्त व्यापार मुक्त व्यापार

37:53बोले तो उधर का माल जो हमको चाहिए वो हमको

37:58लाने दीजिए हमको अपना माल बेचने दीजिए

38:00क्योंकि माल नहीं लाएंगे बेचेंगे नहीं तो

38:02मुनाफा कैसे

38:04कमाएंगे तो विज्ञान

38:08अर्थव्यवस्था अब बदलाव हो रहे हैं राजा की

38:11भूमिका को हटाया जा रहा है कम किया जा रहा

38:13है वैज्ञानिक नई-नई खोज नई-नई चीजें आपके

38:16डेवलप की जा रही हैं। यहीं पर देखेंगे तो

38:19आपकी तीसरी चीज और आ जाइए। राजनीतिक स्तर

38:22पर क्या बदलाव आ रहा है? राजनीतिक स्तर

38:26पर। अब सोचिए राजनीतिक स्तर पर क्या

38:29स्थिति होगी जब मुस्लिम शासकों ने

38:30कुस्तनतुनिया को तबाह कर दिया।

38:34ठीक है ना? लेकिन जो आपका पश्चिमी जो

38:37यूरोप है, रोमन साम्राज्य का पश्चिमी जो

38:39क्षेत्र है, वहां पर थोड़ा सा एक बदलाव आ

38:42रहा था।

38:44उस साइड में तुर्की और इसके आसपास में तो

38:47चीजें विघटित हो गई लेकिन उधर जाकर के

38:49संगठन बनना शुरू हुआ और यहीं पर ध्यान

38:52रखिएगा इसी समय एक नई व्यवस्था की शुरुआत

38:56हो रही थी वो थी आपका यूरोप

39:01में राजतंत्रों का विकास हो रहा था।

39:04राजतंत्रों का

39:09विकास। राजतंत्र विकसित होने की कोशिश कर

39:12रहे थे। ठीक है ना? वो चाहते थे कि हम

39:15यहां पर कब्जा करके रहे। सारी चीजें करें

39:17और राजतंत्र को विकास करने के लिए

39:19संसाधनों की आवश्यकता थी। संसाधनों की

39:23जरूरत थी। क्योंकि भाई सेना चाहिए, सारी

39:28चीजें चाहिए। बड़ा साम्राज्य करने के लिए,

39:30हथियार चाहिए और इन सारी चीजों के लिए

39:32चाहिए पैसा।

39:34ठीक है ना? और संसाधन कैसे हो सकता है?

39:37ज्यादा से ज्यादा संसाधन कैसे आएगा? वह

39:40आएगा आपके संगठित व्यापार से। किससे आएगा?

39:43संगठित व्यापार से ही संभव

39:47है। तो हर देश में संगठित व्यापार को

39:52बढ़ावा देने की कोशिश की जाने लगी। यानी

39:54कि राजनीतिक स्तर की जरूरत के लिए सारी

39:56चीजें हुई। ठीक है ना? और संगठित व्यापार

40:00के लिए ही कंपनियों का गठन हुआ।

40:03यानी कि कंपनियों का

40:06गठन। यह रही साझेदार फर्मेंकारी कंपनी और

40:11साझेदार कंपनी। यही आपकी कंपनियों का

40:15गठन। सोचिए कि राजा को पैसे के लिए

40:18व्यापार में भागीदारी करनी पड़ी। क्यों?

40:22आपने फ्रांसीसी कंपनी नहीं पढ़ी थी।

40:24फ्रांसीसी कंपनी कैसी थी? सरकारी

40:28कंपनी। क्यों बनानी पड़ी फ्रांसी? फ्रांस

40:31के शासक को

40:33बताइए जिससे कि उसकी आर्थिक जरूरतें पूरी

40:36हो सके। अपने राज्य की जरूरत के भाई

40:38व्यापार करेंगे। वहां से सामान खरीद के

40:40लाएंगे। यहां बेचेंगे उससे फायदा

40:42मिलेगा। ये सारी

40:44चीजें तो ये एक बहुत बड़ा कांसेप्ट था।

40:48ठीक है ना? ध्यान रखिएगा। और इस समय एक

40:51घटना आपके धार्मिक स्तर पर हो रही थी।

40:54चौथी

40:56धार्मिक स्तर पर।

41:00धार्मिक स्तर पर उन्होंने अपने आप के अंदर

41:03जो बदलाव करने की कोशिश की उसको आप

41:06समझिएगा क्या हुआ था।

41:10धार्मिक स्तर पर जो बदलाव लाने की बात कही

41:12थी वो यह था कि मानवता केंद्रित मानव

41:16केंद्रित

41:17धर्म मानव

41:21केंद्रित धर्म

41:23को बढ़ावा दिया जाए।

41:27को

41:28बढ़ावा। हालांकि पोप के राज्य में या

41:32कैथोलिक चर्च के राज्य में यह आसान नहीं

41:35था। लेकिन फिर भी अंदर ही अंदर उदार

41:42विचार आने लगे थे। और यह कैसे होने लगा

41:46था? इसके पीछे कारण था प्रेस। विज्ञान की

41:49खोज प्रेस। और प्रेस ने आपके क्या कर

41:54दिया? अनुवाद करके सामान्य भाषा में

41:57किताबों को छापना शुरू कर दिया। लोगों को

41:59उसके सही विचार पता करना पता मिलना शुरू

42:02हो

42:03गए। इन्होंने साफ-साफ कह दिया कि तर्क को

42:07बढ़ावा दो।

42:09ठीक है ना? विज्ञान को बढ़ावा दो।

42:15रूढ़िवाधिकता को नहीं। रूढ़िवाधिता को

42:19छोड़ो।

42:21रूढ़िवाधिता को छोड़ो। विज्ञान को बढ़ावा

42:24दो और प्रेस ने अनुवाद के

42:29द्वारा द्वारा

42:32लोगों

42:34तक सही ज्ञान

42:40पहुंचाया। पहुंचाया। ये रहा।

42:45तो इसका मतलब हो गया कि जितने भी विचार

42:48हैं यह सभी के सभी आपके इटली में

42:51पुनर्जागरण के समय हो चुके थे। ठीक है

42:58ना? तो ऐसी कंडीशन में अब और क्या बदलाव

43:02आने लगा? इस समय पर ध्यान रखिएगा एक नया

43:05बदलाव और आ रहा था। यह तो हमको पता है कि

43:08अमेरिका की खोज हो गई। अमेरिका

43:14खोज लिया

43:16गया। खोजा और अमेरिका जब खोजा तो यहां से

43:21महंगी

43:22धातुएं सोना, चांदी महंगी धातुएं यूरोप

43:28में जाने

43:32लगी। जाने लगी। अब इसका फायदा क्या था?

43:39यूरोप में सोना चांदी जाने लगा। सारी

43:41चीजें जाने लगा। लेकिन इसका प्रारंभिक जो

43:43उपयोग है ध्यान रखिएगा समझने की जरूरत है

43:47इसका प्रारंभिक जो उपयोग

43:51है

43:52वो राजा महाराजा नहीं कर रहे थे। यह केवल

43:56प्रारंभिक उपयोग व्यापार में निवेश के लिए

43:59किया जा रहा था। व्यापार में किसके लिए?

44:03निवेश के

44:05लिए के लिए किया गया।

44:12अब आप समझिएगा अब कहोगे ऐसा कैसे अमेरिका

44:16से सोना चांदी लाइए एक एग्जांपल समझिए और

44:21वहां से ला के जहाजों में लाद करके भारत

44:24में पहुंचाइए और भारत में पहुंचाने के

44:27बाद भारत से कच्चा माल और अन्य जरूरी

44:31सामान खरीद करके यूरोप में बेचिए मुनाफा

44:34कमाइए और उस मुनाफे को अपने घर में छोड़

44:38दीजिए उस मुनाफे को घर में छोड़ दीजिए।

44:42इसका मैं एग्जांपल देता हूं। ध्यान

44:44रखिएगा। जैसे आपका

44:48अमेरिका अमेरिका से चला

44:52सोना। यह कहां गया? यूरोप

44:55में। और यूरोप से होकर के कहां आया? भारत

44:59में। यह सोना है। और भारत से क्या निकला?

45:05माल। और माल कहां चला गया? सीधा का सीधा

45:09यूरोप में।

45:12ठीक है ना? और यूरोप में बेच के पूरा

45:15मुनाफा कहां छोड़ दिया गया? यूरोप में।

45:18अगर सोचना सोना ₹1 लाख का आया तो ₹1 लाख

45:23अब कहां आया सोना? भारत में। ₹1 लाख का

45:26सामान खरीदा और ₹1 लाख का वही सामान यूरोप

45:29में बेच के यूरोप के उन देशों में अपने रख

45:32दिया गया और फिर सोना लेकर के आए। यानी कि

45:35एक तरीके से देखा जाए तो अमेरिका का सोना

45:38भारत में आ रहा है और भारत का माल कहां जा

45:43रहा है? यूरोप में। और यूरोप में बेच के

45:46जो पैसा आ रहा है यूरोप के यूरोप में ही

45:48है। केवल यूरोप में माल जा रहा है। पैसा

45:52उतना का उतना ही है। यानी कि यूरोप में

45:54कुछ बढ़ा नहीं बढ़ नहीं रहा

45:57है। आपके घर में खूब सारा सामान आए खाए

46:00पिए और खाएं एंजॉय करें।

46:04कुछ बढ़ेगा? बोला नहीं केवल जनसंख्या

46:08बढ़ेगी। कुछ नहीं

46:11बढ़ेगा। बात समझ गए? नहीं। असली फायदा

46:14किसको हो रहा है? असली फायदा हो रहा है

46:18अमेरिका से आने वाले सोने का एशिया के

46:20देशों को यानी कि भारत को। भारत में सोना

46:24आ रहा है और भारत का माल जा रहा

46:28है। यह भी सोचिए आगे जाकर के उनकी बुद्धि

46:31फ्री। यार ये क्या हो रहा है

46:33भाई? तब जाकर के उन्होंने भारत में कहा कि

46:38भाई अब हम सोना नहीं लेकर के आएंगे। 1757

46:42का प्लासी का युद्ध और यह षड्यंत्र इसीलिए

46:45रचा गया था कि हमारा जो अमेरिका से दुनिया

46:49भर से सोना खोद के लाते हैं, वह इंडिया

46:51में दे देते हैं। भाई अब हम सोना नहीं

46:54लाएंगे।

46:57हम भारत से ही कुछ ऐसा व्यवस्था करेंगे कि

47:00भारत का पैसा निकाल लेंगे, भारत से ही

47:02सामान खरीदेंगे और भारत का सामान हम यूरोप

47:05में भेज देंगे। तो यानी कि उनका प्लान था

47:08अमेरिका का सोना भी पहुंच जाए और भारत का

47:10सामान भी पहुंच जाए यूरोप में। यह था उनका

47:13अगला प्लान। तो फर्स्ट प्लान तो उनका यही

47:17चल रहा था। लेकिन तब तक उनको बुद्धि नहीं

47:19आई। इनको सोचिएगा लगभग 200 250 300 साल लग

47:23गए इनको। 200 300 साल तब तक 200 250 डे

47:27200 साल तक इंडिया को यह अपना सोना चांदी

47:31पहुंचाते

47:34रहे। अब आप समझ लीजिएगा इसीलिए पहुंचाते

47:38रहे। अब समझ में आ रहा है कि नहीं आ रहा

47:40कि इतिहास मॉडर्न इंडिया ऐसे नहीं बदला

47:42है। मॉडर्न इंडिया यूरोप में होने वाली

47:45गतिविधियों के कारण बदला

47:50है। समझ में आ गया? और जब यह हो रहा था तो

47:54इसी की वजह से यहीं पर इसी समय यूरोप में

47:59मैंने कहा ना जनसंख्या बढ़ रही है में

48:02कुलीन वर्ग का विकास हो रहा था। कुलीन

48:05वर्ग का विकास यानी कि इलिट क्लास जो

48:09व्यापारी है उसके पास पैसा आ रहा है। सारी

48:10चीजें हो रही है। तो वो विलासितापूर्ण

48:14वस्तुएं खरीद बना रहा है।

48:17विलासितापूर्ण वस्तुएं इस्तेमाल करना

48:20चाहता है।

48:23जरूरी है उसके

48:26लिए और इसकी आपूर्ति कहां से हो रही है?

48:30इसकी आपूर्ति हो रही है पूर्वी एशिया

48:34पूर्वी देशों से। पूर्वी देश बोले तो भारत

48:39जैसे देशों से उनसे आयात करना है। लेकिन

48:42आयात करने के लिए उनके पास साधन नहीं

48:48है। उनके पास साधन नहीं

48:52है। अब बताओ ये तो मैंने एक एग्जांपल के

48:56तौर पर दिया कि उनके पास सोना चांदी आ रहा

48:58है। सब कुछ आ रहा है। लेकिन उनके पास पैसा

49:01आ रहा है। यह मैंने केवल एक उदाहरण दिया

49:04था कि ऐसा हो रहा था। उदाहरण है। लेकिन

49:08असली चीज तो यह थी कि अमेरिका के सोने से

49:10वहां के लोग यूरोप के लोग पैसे वाले होते

49:13जा रहे हैं। उनके पास पैसा है लेकिन कुछ

49:16करने के लिए कुछ खाने के लिए एंजॉय करने

49:17के लिए उनके पास वस्तुएं नहीं है। और

49:19वस्तुएं कहां से आएंगी? पूर्वी देशों से।

49:21और पूर्वी देशों का उनके पास कोई रास्ता

49:24नहीं है। विज्ञान की खोज हो चुकी है।

49:26अर्थव्यवस्था की खोज हो चुकी है। बड़े

49:28साहसी व्यापारी आ चुके हैं। सारी चीजें हो

49:30चुकी हैं। तब जाकर के फिर उन्होंने नई

49:34चीजें की। अब सोचिएगा इनमें सबसे पहले

49:38क्या हुआ? केप ऑफ गुड

49:41होप। ऑफ गुड

49:45होप की खोज हुई।

49:50यानी कि दक्षिण अफ्रीका का

49:54नीचे दक्षिण अफ्रीका के नीचे के ऑफ गुडहोप

49:58वो तमाशा अंतरीप की खोज की इसी

50:02समय और बाद में जाकर के इसी रास्ते से इसी

50:07रास्ते

50:10से पुर्तगाली

50:14यात्री

50:16यात्री कहां पहुंचा?

50:21भारत

50:23पहुंचा। उसने

50:27यहां

50:28का समुद्री मार्ग की खोज कर

50:31ली। 1498

50:36में समुद्री मार्ग

50:41की खोज

50:45की 1498 में।

50:49ठीक है ना? अब यह मार्ग जो है स्थल मार्ग

50:52से तीन गुना लंबा था। लेकिन और कोई उपाय

50:56नहीं था।

50:59लेकिन इस इस रास्ते की सबसे बड़ी चीज यह

51:02थी कि इसमें आपको इस रास्ते

51:05पर पर

51:08जहाज बदलने की आवश्यकता नहीं

51:13थी। जरूरत नहीं थी। बाकी अन्य राष्ट्रों

51:17से जब आप आते थे समुद्री मार से मध्य आपके

51:20भूमध्य भूमध्य सागर से होते हुए लाल सागर

51:23से होते हुए क्योंकि स्वेज नहर तो थी नहीं

51:26ठीक है ना फिर अरब सागर में आते थे तो

51:29वहां पर आपको जगह-जगह पर जहाज बदलने पड़ते

51:31थे अलग-अलग जगह के लिए माल को उठाना डालना

51:35पड़ता था और यहां पर सीधा एक ही चीज यहां

51:38पर आए और इस तरीके से यह लोग यहां पर आ गए

51:42चले गए और आते चले गए तो अपने साथ यह लोग

51:45यहां यहां पर ध्यान रखिएगा सबसे पहले

51:48ध्यान रखिए कौन आया पुर्तगाली

51:51आए फिर उसके बाद में नंबर वन पर आपके डच

51:56आए नंबर तीन पर अंग्रेज

52:00आए नंबर चार पर डेनिस

52:04आए नंबर पांच पर आपके फ्रांसीसी आए

52:09ठीक है ना यह सभी भारत में आए और यह अपने

52:14साथ अपने साथ

52:18यूरोप

52:20के पुनर्जागरण

52:23के

52:25के मूल्यों को लेकर के

52:28आए को

52:30लाए। ठीक है ना? और उन्हीं मूल्यों को

52:33भारत में लागू किया और भारत

52:36में लागू किया।

52:40वह अलग बात है कि भारतीयों ने इनको कितना

52:43अपनाया, कितना नहीं अपनाया और कब अपनाया

52:46यह बाद की बात है। लेकिन यह आधुनिक

52:49मूल्यों को भारत में अपने साथ लेकर के आए

52:51थे। कंपनी का कांसेप्ट, अर्थव्यवस्था के

52:54स्तर पर, राजनीतिक स्तर पर, राजा और कंपनी

52:56के बीच के संबंध जो भारत में नहीं थे।

53:00सामाजिक स्तर पर अपने यहां नवीन

53:03विचारधारा, धार्मिक स्तर पर नवीन

53:05विचारधारा को लेकर के आए थे। अपने धर्म का

53:08प्रचार प्रसार करना चाहते थे। इसमें कोई

53:10शक नहीं है। उदारवादी धर्म जो है उसका

53:12प्रचार प्रसार करना है। ईसाई बनाना है और

53:15धीरे-धीरे भारत पर अपनी सत्ता स्थापित

53:18करने की कोशिश करनी

53:20है। वो भी केवल अपने आर्थिक लाभ के लिए।

53:24भारत को उपनिवेश बनाना है। यह परंपरा

53:28धीरे-धीरे डेवलप हुई। तो भारत में आधुनिक

53:31जो मूल्य हैं उनको किसी भारतीय ने इस समय

53:36में विकसित नहीं किया। बल्कि इन्हीं

53:39विचारधारा की वजह से जब यह मूल्य आए तो

53:43इनको सबसे पहले अगर किसी ने अपनाया, किसी

53:46ने विकसित किया और किसी ने लोगों के अंदर

53:49प्रचार प्रसार करने की कोशिश की। दैट वाज़

53:52द पर्सन राजा राममोहन राय। इसीलिए उन्हें

53:58भारतीय पुनर्जागरण का पिता कहा जाता है।

54:00फादर ऑफ इंडियन

54:03रेनेसा आधुनिक भारत के अग्रदूत कहे जाते

54:06हैं। सबसे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने

54:08अंग्रेजों की और यूरोपीय कंपनियों की इस

54:10विचारधारा को यूरोप की विचारधारा को समझा

54:13और भारत में आधुनिक मूल्यों को लागू करने

54:16का प्रयास किया

54:20था। बात समझ गए कि नहीं? तो यही है

54:24आधुनिकता की भारत में शुरुआत। अब बताइए

54:28भारत में आधुनिक युग को कब से पढ़ा जाना

54:32चाहिए? 1707 से या यूरोपीय कंपनियों के

54:36आगमन से या जदनाथ सरकार के स्टेटमेंट 1757

54:42से? बताइए कब से पढ़ा जाना

54:45चाहिए? कब से देखना चाहिए

54:49इसको? दैट्स इट। आप सोचिएगा अगली क्लास

54:52में हम इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे। 18वीं

54:55सदी का भारत यानी कि भारत 18वीं सदी में

54:59कैसा था। उसके बाद बात करेंगे यूरोपीय

55:02कंपनियां कब-कब और कैसे आई, किस तरीके से

55:04आई और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी कैसे

55:06जीतती चली गई विद फैक्ट और कांसेप्ट दोनों

55:09पढ़ेंगे। इसलिए आप लोगों से गुजारिश है इस

55:12क्लास को जितना ज्यादा से ज्यादा हो सकता

55:14है उसको लोगों तक पहुंचाइए और फिर देखिए

55:17मैं आप लोगों के लिए किस लेवल पर सारी

55:19चीजें आप लोगों को करके देता हूं। ठीक है

55:22ना? ध्यान रखिएगा और मेरे साथ आप लोग

55:25पढ़ना चाहते हैं इतिहास वैकल्पिक विषय 300

55:28से ज्यादा नंबर के लिए जैसा कि इस क्लास

55:30से मैंने आपको समझाने की कोशिश की है। यह

55:32तो एक नमूना है कि इतिहास कैसे पढ़ा जाता

55:35है? इतिहास को कैसे समझा जाता है? इतिहास

55:38कैसे बना और हमें क्या समझना चाहिए तो अगर

55:41आप चाहते हैं समझते हैं तो फिर 300 प्लस

55:45नंबर आपके कहीं नहीं गए इतिहास में मैं

55:48आपको एश्योर कर रहा हूं आइए और मेरे साथ

55:52इस बैच को अभी जॉइ कीजिए 15 अप्रैल तक इस

55:55बैच में आपका एडमिशन हो सकता है। ठीक है

55:58ना? मार्च बैच है। एमके लाइव कोड के

56:00माध्यम से

56:01₹14,999 में इस समय यह बैच आपको मिल

56:04जाएगा। मेरे साथ और किसी तरह की टेंशन

56:08लेने की जरूरत नहीं है। जितना मैं करा

56:09दूंगा मोर दैन एनफ है। और सरल भाषा में

56:12सिंपल भाषा में आप पढ़िएगा आराम से। ठीक

56:15है ना? कोई भी डाउट हो तो मुझे यहां पर

56:17कनेक्ट कर लीजिएगा। लेकिन ग्रुप जरूर

56:19ज्वाइन कर लीजिए। इस क्लास की पीपीटी के

56:21लिए भी और अदर इंपॉर्टेंट मटेरियल के लिए

56:24भी। ठीक है ना? ध्यान रखिएगा। और कोड एम

56:27के लाइव लगाना भूलिएगा नहीं। थैंक यू वेरी

56:29मच। हिंदी में यूपीएससी की तैयारी से

56:32संबंधित प्रोग्राम्स को देखने के लिए

56:34सब्सक्राइब करें स्टडी आईक्यू आईएस हिंदी।

56:39[संगीत]

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