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पितृ दोष मुक्ति सिर्फ़ 1 Minute रोज़ का चमत्कारी उपाय | सबकुछ मिलेगा| EP-122

The Vikas Podcast Show · 12,421 words · 57 min read

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Trailer

0:00कि एक मिनट का उपाय बताया ना जो कर लेगा

0:02ना चमत्कारिक और मिरेकल उपाय एक छोटे से

0:04उपाय से मैंने इतने बड़े-बड़े चमत्कार

0:07देखे हैं और एक नहीं 100 से ज्यादा

0:09क्लाइंट्स कि जो पितृ दोष से जो पीड़ित है

0:12जो कि जैसे संतान नहीं हो रही या मैरिज

0:14में प्रॉब्लम आ रही है या एजुकेशन ठीक

0:16नहीं है या पैसा रुका हुआ है इन सबके लिए

0:18दो चार छोटे-छोटे आप उपाय बताइए जैसे कि

0:20किसी का बिजनेस जो है वो सही नहीं चल रहा

0:22जो काम खोल रहे हैं वो बंद हो जा रहा है

0:24तो इसका मतलब वो पितृ दोष से रिलेटेड अगर

0:26हो रहा है तो उसका उपाय क्या है मैं कहता

0:28हूं 100% % कितना ही विकट से विकट पितृ

0:31दोष हो 3 महीना मैंने कोई उपाय बताया उसको

0:33लाभ ना हुआ हो ऐसा कभी नहीं हुआ

0:37पितर कौन है सबसे पहले यह विषय जान लेना

0:39जरूरी है हमें लक्षणों का कैसे पता लगता

0:41है कि हमें पितृदोष हो गया है

0:43देखिए पितृ दोष को पहचानने के कई तरीके

0:46हैं। पितृ दोष के जो लक्षण हैं उसमें राहु

0:48का और शनि का बहुत बड़ा रोल होता है।

0:50किसी के पास कुंडली ना हो, डेट ऑफ़ बर्थ ही

0:52ना पता हो। अब ऐसे में कैसे पता लगता है

0:54कि उसको पितृदोष है?

0:55ऐसी स्थिति में उसको पितृ दोष है या नहीं?

0:57उसको देखने का दो तरीका है।

0:58वो तो हमारे पितृ है। तो हमें क्या वो

1:00नुकसान भी पहुंचाते हैं? एक बार कोई इंसान

1:02मर जाए तो वो एक तरीके से या तो वो दूसरे

1:05जन्म में चला गया। तो जब दूसरे जन्म में

1:07चला गया तो वो हमारे पितृ कैसे अभी बने?

1:09कोई बच्चा हुआ है। वो पैदा ही हुआ है और

1:11पैदा होते ही उसकी डेथ हो गई या थोड़ा सा

1:13बड़ा ही बच्चा है। तो क्या उनको भी पितरों

1:15की श्रेणी में लिया जा सकता है?

1:17आपका एक क्वेश्चंस बहुत अच्छा है क्योंकि

1:19पितृदष और प्रेत दोष ये क्या एक दूसरे से

1:22रिलेटेड है या अंतर है इनमें?

1:24यह आपने सही कहा। दोनों के बीच में इतनी

1:26पतली रेखा है।

1:29तो श्राद्ध का थोड़ा प्रोसीजर बताइए कि

1:31श्राद्ध को कैसे किया जाता है? एक सही से

1:33श्राद्ध कैसे करें? एक सही भोजन क्या माना

1:36जाएगा कि श्राद्ध में करना चाहिए और

1:37किस-किस को दान देना चाहिए? पितृ दोष से

1:40रिलेटेड या पितों के बारे में जो भी

1:42इंफॉर्मेशन है इससे बढ़िया जो है नहीं मिल

1:44सकती जो इस पडकास्ट के अंदर मिल जाए। पितृ

Intro

1:48क्या होते हैं ये पितृ? कौन होते हैं ये

1:50पितृ? और क्या यह पितृदोष हमें लगा है या

1:54नहीं लगा? हम इन चीजों को कैसे पहचानेंगे?

1:57यह सब के बारे में आज इंफॉर्मेशन देने आए

1:59हैं हमारे यहां पे सुधाकर पुरोहित जी। जी

2:02हां, बहुत ही अच्छे वो एस्ट्रोलॉजर हैं।

2:04बहुत ही अच्छा उनका एक्सपीरियंस है।

2:06उन्होंने कई सारी बुक्स भी लिखी है पितरों

2:08के ऊपर और कई सारी और भी बुक्स हैं जिनकी

2:11इंफॉर्मेशन आपको इस पॉडकास्ट में मिलने

2:13वाली है। और हां इस पॉडकास्ट में आपको

2:16पितरों से रिलेटेड जो भी जो भी प्रॉब्लम

2:18है उस सबका सॉल्यूशन आज के इस पॉडकास्ट

2:21में मिल जाएगा। तो जुड़ जाइए इस

2:23इंटरेस्टिंग पडकास्ट के साथ क्योंकि आज

2:25आपको पता लगने वाला है कि पितृ दोष से

2:27आपको जो भी प्रॉब्लम होती है उसका आप कैसे

2:30निवारण कर सकते हैं कैसे बच सकते हैं ये

2:32सब बातें इसके अंदर बताई गई है तो जुड़

2:34जाइए इस इंटरेस्टिंग पडकास्ट के साथ

2:36वीडियो को अभी से लाइक कर दो चैनल को

2:37सब्सक्राइब कर लो और भाई साहब वीडियो को

2:39अभी से हाइप जो नीचे हाइप का ऑप्शन है वो

2:42जरूर कर लीजिए ताकि यह वीडियो और लोगों तक

2:44भी फैल जाए तो जुड़ जाइए इस इंटरेस्टिंग

2:46पडकास्ट के साथ वीडियो को अभी से लाइक

2:48कमेंट शेयर चैनल को सब्सक्राइब करना

2:49भूलिएगा मत और हर बार की तरह नोटिफिकेशन

2:51का बेल जरूर ऑन कर लीजिए ताकि ऐसे

2:53इंटरेस्टिंग द विकास स्पोर्ट का शो के

2:55एपिसोड आप लोगों से मिस ना हो जाए। चलिए

2:58स्टार्ट करते हैं आज का वेरी वेरी

3:00इंटरेस्टिंग एपिसोड।

3:02[संगीत]

3:04[प्रशंसा]

3:10मैं विकास आप सबका एक बार फिर स्वागत करता

3:12हूं अपने YouTube चैनल द विकास pod का शो

3:14में जहां सिर्फ बातें ही नहीं होती बल्कि

3:17स्यूशन भी दिए जाते हैं और आज इस सॉल्यूशन

3:19के पार्ट में हमारे स्पेशल गेस्ट आ गए हैं

3:22तो सबसे पहले हम अपने गेस्ट से मिल लेते

3:24हैं। नमस्कार सर

3:25नमस्कार

3:25कैसे हैं सर आप?

3:26मैं बिल्कुल बढ़िया ठीक

3:28सर सबसे पहले जो आज के नए दर्शक हैं जो

3:31आपको फर्स्ट टाइम देख रहे हैं थोड़ा सा आप

3:32उनको अपने बारे में बताइए सर। नमस्कार मैं

3:35सुधाकर पुरोहित ज्योतिषाचार्य

3:37ज्योतिष के क्षेत्र में

3:4011वीं क्लास से लेकर के और एमफिल तक

3:43शिक्षा प्राप्त करने के बाद पिछले 2005 से

3:46लगातार इसी क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं

3:49और पितृदोष

3:51बाधा मुक्ति का जो निवारण है ऊपरी बाधा

3:54मुक्ति के निवारण ज्योतिष वास्तु तंत्र

3:56अध्यात्म की 15 से अधिक पुस्तकें मैंने

3:59लिखी हैं और सोशल मीडिया पर आप मुझे

4:02ज्योतिष डिवीनेशन और एस्ट्रो सुधाकर

4:04पुरोहित और जयपुर पंडित जी के विभिन्न

4:07माध्यमों के द्वारा जो है देख सकते हैं,

4:09सुन सकते हैं या हमसे संपर्क कर सकते हैं।

4:12इतनी सारी बुक्स लिखी है सर आपने। सर आप

4:15थोड़ी बुक्स बताना मैं भी यहां पे टैग कर

4:17दूंगा डिस्कशन में।

4:18जरूर जरूर

4:18जी जिससे सब लोगों का बेनिफिट हो जाए

4:20उससे।

4:21सर सबसे पहले तो आज का जो हमारा टॉपिक है

4:22इसमें शुरुआत करने से पहले मैं थोड़ा सा

4:24जानना चाहूंगा। सर क्या है ये मतलब जिसको

Pitra dosh kya hai

4:27देखो वो यही बोलता है। कोई भी प्रॉब्लम हो

4:29भैया पितृदोष होगा। जिसका सॉल्यूशन ना

4:31मिले वही पितृदोष होगा। क्या है यह

4:33पितृदोष? थोड़ा सा समझाइए इसके बारे में

4:35मुझे।

4:36देखिए पितृदोष जो विषय है यह बहुत ज्यादा

4:40पुराना नहीं है। अगर आप पहले जाएं तो पहले

4:43जब पुराने ज्योतिषी होते थे वो समस्या में

4:45जाते थे। डीप कैलकुलेशन करते थे और आपको

4:47एक अच्छा सॉल्यूशन बताते थे।

4:49जी।

4:492005 में जब जब मैंने ज्योतिष के क्षेत्र

4:51में कार्य करना प्रारंभ किया। तो बहुत

4:54सारे लोग आके ये कहते थे कि भाई मुझे पितृ

4:56दोष है। तो उस समय मैं विद्यार्थी था।

4:582005 में मैंने पीजी किया जिसे हम आचार्य

5:00कहते हैं। मैंने एमफिल किया था।

5:02अच्छा।

5:02तो मैंने पितृदोष के बारे में पढ़ा तो

5:04मैंने देखा कि बहुत ज्यादा इस विषय पर

5:06ज्योतिष शास्त्र में या इधर-उधर लिखा हुआ

5:08नहीं था। तो ऐसी स्थिति में लोग कहते थे

5:10और ज्योतिष जब मैंने पितृ दोष पे पढ़ना

5:12शुरू किया दिल्ली से कुछ बुक्स थी लेकिन

5:14उसको पढ़ के संतुष्टि नहीं हुई क्योंकि

5:16उसमें जो पितृ दोष के लक्षण

5:18कारण और निवारण बता बताए गए थे। उनके कोई

5:20सिर हाथ पैर ही नहीं थे। तो ऐसी स्थिति

5:22में 2010 में मैंने इस विषय पर अपना

5:25रिसर्च करना शुरू किया और रिसर्च किया वो

5:28भारतीय शास्त्र यानी कि जो हमारी भारतीय

5:30प्राचीन वांगमय की पुस्तक है उस पर ही

5:32सबसे पहले मैंने देखा कि पितरों और

5:34पितृदोष के बारे में कहां किस ग्रंथ में

5:36लिखा गया है तो मुझे बड़ा यह जान के

5:38आश्चर्य हुआ कि वेद से लेकर पुराण स्मृति

5:41ग्रंथ महाभारत रामायण और ज्योतिष सभी में

5:45पितरों का जिक्र है और जो इस मनुस्मृति

5:49उसमें तो साफ स्पष्ट कहा गया है कि अगर

5:51अगर पितर आपके किसी भी कार्य से या आपने

5:53जो अंतिम संस्कार के समय अपने पितरों के

5:56निमित्त प्रॉपर काम नहीं किया है, सही काम

5:58नहीं किया है तो उसके कारण आपको पितृ दोष

6:00होगा। यहां तक कि आयुर्वेद ग्रंथों में यह

6:02भी कहा गया कि अगर पितर जो है अगर आपसे

6:06संतुष्ट ना हो और कुपित हो जाए, नाराज हो

6:07जाए तो वह विभिन्न प्रकार के रोग भी आपको

6:10दे सकते हैं। और ज्योतिष में बृहत पाराशर

6:12होरा शास्त्र या अन्य ज्योतिष के ग्रंथों

6:14में यह बताया गया कि पितर जो हैं उनके

6:16कुपित होने से आपको संतान संबंधी समस्या

6:19हो सकती है। यानी कि आपका जो है कुल नहीं

6:21चलेगा। आपको संतान ही नहीं होगी। तो जब

6:23मैंने इतना पढ़ा लेकिन मैंने देखा कि यह

6:25बातें कहीं भी किसी पुस्तक में नहीं थी।

6:28केवल मैंने इनका अलग-अलग अलग-अलग तरीके से

6:30रेफरेंस लिया और मैंने सोचा कि क्यों ना

6:33आम व्यक्ति को यह बताया जाए कि भाई रियल

6:35में पितृदोष यह है यही इसके कारण होते हैं

6:38और यह इसका वास्तविक निवारण होता है

6:40क्योंकि पितृ दोष के नाम पर जो लिखा जा

6:43रहा था जो बताया जा रहा था वो शास्त्र

6:45सम्मत नहीं था और आपको बात बता दूं कि जो

6:48बात शास्त्र सम्मत नहीं होती ना उसको करने

6:50से किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं होता है।

6:53लाभ तभी होगा जो शास्त्रों में बताया गया

6:55है। उसे आप फॉलो करेंगे तो चाहे पितृ दोष

6:58कितना ही विकट क्यों ना हो उसका कारण भी

7:00होता है और निवारण भी होता है और बहुत इजी

7:02है। डरने की कोई जरूरत नहीं है। बस उपाय

7:05करें और उसका लाभ लें।

7:06ओके। तो आज हम थोड़ा उपाय भी जानेंगे।

7:09लेकिन उपाय जानने से पहले मैं थोड़ा सा

7:10जानना चाहूंगा कि मेन रीजन जो है मेन जो

Pitra dosh ka kaaran aur kaun hai pitra dosh

7:13कारण है पितृदोष का वो क्या होता है?

7:15थोड़ा सा आप उसको बताइए कि ताकि हमारे

7:17दर्शक थोड़ा अभी से अलर्ट हो जाए इन चीजों

7:19के बारे में।

7:20पितृ दोष को समझने से पहले पितर कौन है?

7:23ये तो जाने। हम

7:24भाई हमने मान लो पितृ दोष पितृ दोष कह

7:26लिया। पितृ दोष के पितरों के नाम पे हम

7:29क्या जानते हैं कि भाई मेरे जो दादाजी थे

7:31जो इस दुनिया में नहीं है या परदादा थे या

7:33मेरा कोई चाचा या मेरे माता-पिता जो

7:35दिवंगत हैं जो इस दुनिया में नहीं है।

7:37अगर किसी वजह से उनकी मृत्यु जो है किसी

7:40जैसे असामयिक समय पे हो गई है। जल्दी हो

7:43गई है या किसी एक्सीडेंट में हो गई है तो

7:46वो पितर है। वो जो पूर्वज हैं वो पितर बन

7:48जाते हैं। ये आम धारणा है। लेकिन ऐसा नहीं

7:50है। पितर कौन है? सबसे पहले यह विषय जान

7:53लेना जरूरी है। जब मैंने इस पर जो है शोध

7:56कार्य अपना किया तो वह शोध कार्य करके

7:58मुझे पता लगा कि पितर तो भाई तीन श्रेणी

8:00के होते हैं। नंबर एक दिव्य पितर जो समझ

8:04समस्त मनुष्य प्रजाति के पितर हैं। दूसरा

8:07वो पितर, वो पुण्य आत्माएं जो समाज का भला

8:11करते हुए अपने जीवन को न्योछावर कर देती

8:13है। और वो जिन्हें हम लोक देवता भी कहते

8:15हैं, वह भी पितरों की श्रेणी में आती है।

8:17जिन्हें हम मध्यम श्रेणी के पितर कह सकते

8:18हैं। और एक वे पितर जो हमारे पूर्वज हैं

8:22लेकिन अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन

8:23किसी कारणवश उनकी मुक्ति नहीं हुई है।

8:25मुक्ति ना होने के बहुत सारे कारण हो सकते

8:27हैं। जैसे कई लोग ऐसे होते हैं जिनको अपनी

8:30संपत्ति से अपने पुत्र से अपने पुत्री से

8:34इतना मोह होता है कि वो मोह की वशीभूत हो

8:37के उनकी मुक्ति नहीं हो पाती है। कई लोगों

8:39को अपनी संपत्ति से मोह है तो वो उसी से

8:41चिपके रह जाते हैं। कई लोगों की असामयिक

8:43मृत्यु हो जाती है। एक्सीडेंट में मृत्यु

8:45हो जाती है। मान लीजिए कोई स्त्री है उसको

8:47छोटा बालक हुआ है और बालक होते ही मान लो

8:51कि उनकी किसी वजह से मृत्यु हो गई। अब वो

8:53अपने बालक से इतनी अटैच है छोटे बच्चे से

8:56कि उसका जो है वो मोक्ष नहीं हो पाया है

8:58तो ऐसी स्थिति में वह स्त्री भी जो है

9:00आपकी पितर बन सकती हैं और जब उनकी मुक्ति

9:03नहीं होती और वह आपसी किसी कारण कुपित हो

9:05जाए नाराज हो जाए तो इसके कारण पितृष बनता

9:08है लेकिन पितृ दोष तीनों पितर की वजह से

9:10बनता है या नहीं बनता यह जान लेना भी बहुत

9:12जरूरी है। इसके अलावा हम पितृ दोष से

9:15संबंधित जो भी उपाय करते हैं उन उपायों

9:17में इन तीन जो श्रेणी के पितर हैं चाहे

9:19दिव्य पितर हो चाहे मध्यम श्रेणी के पितर

9:22हो जिन्हें हम लोक देवता कहते हैं चाहे

9:23हमारे पूर्वज पितर हो इनका क्या रोल है

9:25अगर यह समझ लोगे तभी आप इस विषय पर क्लियर

9:28हो पाओगे

9:29ओके तो सर सबसे पहले मुझे यह बताइए कि अगर

9:32हम पितरों के बारे में जानने चलें तो पितृ

9:35जो है वो किस तरीके से हमारे को जो है

9:37क्या मतलब एक वो तो हमारे पितृ है तो हमें

9:40क्या वो नुकसान भी पहुंचाते हैं देखिए

9:42देखिए पितर जो हमारे बिल्कुल आपने सही

9:45पूछा नुकसान पहुंचाते हैं। पहले हम अपने

9:47जो तृतीय श्रेणी वाले पितर है पूर्वजों

9:49वाली उनकी बात करते हैं। हम

9:50मान लीजिए कि कोई पितर है उसका अपनी

9:52संपत्ति से बहुत अटैचमेंट है। वो चाहता है

9:55कि यह घर जो मैं अपने बच्चों को देके गया

9:57हूं। यह वहां रहे और आप किसी वजह से उसको

9:59बेचने गए। आपका पितर आपसे नाराज हो गया या

10:02आपके किसी रीजन जैसे आपका कोई आचरण है। आप

10:05शराब पीते हैं। आपने कोई ऐसा आचरण किया

10:07जिससे वह नाराज हो जाए या फिर आपने अपने

10:09पितर जो आपके पूर्वज हैं उनकी मृत्यु के

10:11समय उसका प्रॉपर संस्कार नहीं किया है या

10:14उसके बाद उसका श्राद्ध नहीं कर रहे हैं या

10:16ऐसा कोई भी आचरण कर रहे हैं जो उसे पसंद

10:18नहीं आ रहा है तो ऐसी स्थिति में वो कुपित

10:20होता है और कुपित होकर के आपको श्राप देता

10:22है और वही श्राप पितृ दोष बन जाता है

10:24जिसके कारण आपका विवाह नहीं हो पाएगा।

10:28आपके संतान में दिक्कत हो सकती है। संतान

10:30उत्पत्ति में समस्या हो सकती है। आपके

10:32कामकाज में दिक्कत हो सकती है। और सबसे

10:34बड़ी आश्चर्य की बात कि जिस घर में

10:36पितृदोष होता है

10:38उसके बाद जितने भी बच्चे यदि किसी कारण से

10:40जन्म लेते हैं तो उनकी जन्म पत्रिका में

10:43भी वह पितृ दोष स्पष्ट रूप से दिखाई देता

10:46है कि हां यह ग्रह है और यह पितृ दोष को

10:48दिखाता है और इसके कारण एक व्यक्ति की

10:51नहीं बल्कि पूरे परिवार की पूरे परिजनों

10:53की जो है वह उन्नति बाधित होती है। तो

10:55सबसे पहले उसे समझना होता है। उसका कारण

10:58जानना होता है और प्रॉपर वे में उसका अगर

10:59उपाय किया जाए तो अब वह पितृदष समाप्त

11:02होकर आपका समय ठीक होता है।

Pitra dosh ka lakshan

11:04हमें लक्षणों का कैसे पता लगता है यह कि

11:06हमें पितृदोष हो गया है? देखिए पितृदोष को

11:08पहचानने के कई तरीके हैं। सबसे पहले हम

11:11बात करते हैं जन्म पत्रिका से शुरुआत करते

11:13हैं।

11:13अब जन्म पत्रिका में दो तरीके होते हैं।

11:15इससे कोई व्यक्ति है वो व्यक्ति हमारे पास

11:18आता है। वो देख हमने उसकी जन्मत्री में

11:20पितृ दोष देखा

11:21और हमने कहा भाई देखो तुम्हारी जन्मपत्री

11:22में पितृ दोष बनता है।

11:24लेकिन ये आवश्यक नहीं है कि वो पितृ दोष

11:27अभी भी है। हो सकता है उसका जन्म हुआ उसके

11:2910 साल बाद खत्म हो गया हो। तो हमें उसे

11:31पहचानने के लिए मैं पूछता हूं कि भाई अब

11:33तुम्हारे घर में लास्ट कोई बच्चा जन्म

11:35लिया उसकी जन्मत्री भी दिखाओ। फिर हम यह

11:38देखते हैं कि जैसे हमने जन्म पत्रिका देखी

11:39उसके जन्म पत्रिका में कारग्रहों की दशा

11:41है। पॉजिटिव टाइम चल रहा है। सब कुछ बेस्ट

11:43है। लेकिन उसको उसके अनुसार अच्छे फल नहीं

11:46मिल पा रहे हैं और अवांछित घटनाएं घर में

11:49होती हैं। वो बहुत प्रयास कर रहा है। धन

11:51बेवजह का जा रहा है। हेल्थ में बहुत

11:53इश्यूज है। जबकि उसके कोई कारण नहीं है।

11:55तो ऐसी स्थिति में पूरी बातों को परख के

11:58घर के सभी परिजन परिजनों की जन्म पत्रिका

12:00देख करके इन सब कारणों को देखने के बाद यह

12:03पता लगता है कि यस यह व्यक्ति पितृदोष से

12:05पीड़ित है और इस व्यक्ति को जो है पितृदोष

12:08का जो है उपाय बताएंगे तो इसको आराम

12:10मिलेगा। कई बार ऐसा भी होता है कि तीन भाई

12:12हैं। तीनों में कोई दिक्कत है

12:14और एक भाई हमारे पास आता है। हमने कहा भाई

12:16तू एक काम कर ये पितृदोष के निवारण के

12:18उपाय कर तुझे लाभ होगा। उसने किए उसको हो

12:21जाता है। बाकी भाइयों को नहीं होता है। तो

12:24जो पितरों की से संबंधित उपाय करेगा उसको

12:27लाभ होगा ही होगा। दूसरी बात अपने प्राचीन

12:30शास्त्र हम पढ़ेंगे, वेद पढ़ेंगे, पुराण

12:32पढ़ेंगे जो हमारा प्राचीन उपासना का तरीका

12:35है तो उसमें पितरों का पूजन अनिवार्य

12:38बताया गया है और नित्य पूजन अनिवार्य

12:40बताया गया है। ऐसी स्थिति में जो व्यक्ति

12:42नित्य अपने पितरों का प्रॉपर शास्त्र

12:44तरीके से पूजन करता है, अमावस्या पर

12:46श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध करता है, तर्पण

12:48करता है, पितरों के निमित्त दान करता है,

12:51ऐसे व्यक्ति के घर में कभी भी पितृ दोष हो

12:54ही नहीं सकता है।

12:55ओके। तो सर जैसे यह हमने देखा है कि

Kaal sarp dosh/manglik dosh

12:57कुंडली में जो है वह कालसर्प दोष है या

13:00मांगलिक दोष है। यह भी क्या पितृ दोष से

13:02रिलेटेड है या क्या है? इस हियर जन्म

13:04पत्रिका में पितृ दोष देखने के तरीके होते

13:06हैं। अष्टम भाव शनि सूर्य, चंद्रमा, गुरु

13:10इनकी और राहु इनकी विशेष सिचुएशंस के आधार

13:13पर जो है पितृ दोष को हम देखते हैं।

13:15लेकिन कालसर्प दोष को कुछ लोगों ने अपनी

13:18पुस्तकों में पितृ दोष से जोड़ा है।

13:20देखिए यह पहली बात तो कालसर्प योग जो है

13:22राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह होने से

13:24होता है। आंशिक कालसर्प योग जैसा ना कोई

13:27जो है योग नहीं होता है। लेकिन कालसर्प

13:29योग यह दिखाता है कि आपका पूर्व जन्म में

13:32कोई ना कोई दिक्कत रही है, परेशानी रही है

13:34और उसका इशू आपके जीवन में भी है। 100% ये

13:37कह देना कि कालसर्प योग के कारण पितृ दोष

13:39होता है। बिल्कुल सत्य नहीं है।

13:41ये क्योंकि जब कालसर्प योग होता है तो ऐसी

13:43स्थिति में लाखों करोड़ों बच्चे पूरी

13:45दुनिया में जन्म लेते हैं। एक साथ इतने

13:46बच्चों को कालसर्प योग नहीं हो सकता है।

13:48ये पितृ दोष नहीं हो सकता कालसर्प योग की

13:50वजह से। हम

13:51इसलिए सीधा यह कनेक्ट कर देना यह संभव

13:54नहीं है। हां, लेकिन पितृदोष के जो लक्षण

13:56हैं, उसमें राहु का और शनि का बहुत बड़ा

13:59रोल होता है। और कालसर्प योग में भी राहु

14:01का और केतु का बहुत बड़ा रोल होता है। ऐसी

14:04स्थिति में राहु और केतु के सिमिलर योग

14:07होने की वजह से कई बार ऐसा लगता है कि भाई

14:09ये जो कालसर्प दोष बन रहा है ना यही पितृ

14:11दोष का कारण है। इसीलिए हम ऐसा समझ बैठते

14:14हैं। जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता है।

14:16हम

14:16तो ये मतलब अलग है।

14:18दोनों योग अलग हैं। बिल्कुल अलग-अलग तरह

14:20से विचार

14:21दोष भी

14:22मांगलिक दोष नहीं मांगलिक जो मंगली दो

14:24मांगलिक नहीं होता मंगली बोलते हैं उसे

14:26मंगल से बनने वाला योग यानी मंगली मंगली

14:29योग में क्या होता है लग्न यानी पहला भाव

14:31चतुर्थ भाव सप्तम भाव अष्टम और द्वादश

14:34यानी कि पहला फर्स्ट फोर्थ सेवन एट एंड 12

14:38इनमें अगर मंगल या शनि बैठे हो तो वह

14:40व्यक्ति मंगली होता है। मंगली का मतलब कि

14:42मंगल या शनि से वह प्रभावित है। ऐसी

14:45स्थिति में जब उसका विवाह किया जाता है।

14:47यह योग ओनली फॉर विवाह में विचार नहीं है

14:50कि जब उसके लिए हम जीवन साथी का विचार

14:52करेंगे तो वह व्यक्ति सामने वाला मंगली

14:54इसका पितृ दोष से कोई लेना देना नहीं है।

14:56अच्छा ओके तो सर मुझे यह बताइए कि अगर यह

DOB nahi pata toh pitra dosh kaise pata kare

15:00तो हमने देखा कुंडली देख के कि भाई कुंडली

15:02के अंदर यह दोष आ रहा है। किसी के पास

15:04कुंडली ना हो डेट ऑफ बर्थ ही ना पता हो।

15:06अब ऐसे में कैसे पता लगता है कि उसको पितृ

15:08दोष है या कालसर्प दोष है या यह सब है?

15:11कैसे? जब कोई व्यक्ति हमारे पास आता है,

15:13अपनी जन्म पत्रिका उसने दिखाई या जन्म

15:15पत्रिका है ही नहीं जैसा आपने कहा।

15:17जी

15:17तो ऐसी स्थिति में उसको पितृ दोष है या

15:19नहीं है। उसको देखने का दो तरीका है। सबसे

15:21पहले प्रश्न लग्न कुंडली का निर्माण हम

15:23करते हैं।

15:24प्रश्न लग्न कुंडली में जब हम देखते हैं

15:26कि उसको वह पूछता है पितृ दोष है या नहीं

15:28है? उसका उसको स्पष्ट जो है आंसर मिलता है

15:30या नहीं है। अब इसकी पुष्टि कैसे करें? तो

15:33पुष्टि के लिए लक्षण हम उससे देखते हैं

15:35क्या स्थिति है उसकी? उसके आधार पर स्पष्ट

15:37होता है। लेकिन सबसे बड़ी इसकी पुष्टि

15:38होती है उसके घर में जिस भी लास्ट बालक का

15:41जन्म हुआ है लड़की हो चाहे लड़का हो उसकी

15:43जन्मत्री आप देखिए। अगर उसकी जन्म पत्रिका

15:46में काल यह स्पष्ट जो है पितृदोष बन रहा

15:49है इसका मतलब उसके घर में सभी परिजन इससे

15:52पीड़ित हैं और नहीं बन रहा है इट मींस कोई

15:55पितृदोष वाली समस्या नहीं है। जो भी

15:57साधारण जो पितरों के प्रसन्नता के उपाय

15:59होते हैं, पितृदोष निवारण के उपाय होते

16:01हैं, वो कीजिए सब ठीक हो जाएगा। कोई

16:03दिक्कत नहीं है।

16:04ओके। मैं थोड़ा सा ये मेरे अंदर का सवाल

16:06है कि ये एक बात मानी जाती है कि एक बार

Pitra kaise bane

16:09कोई इंसान मर जाए तो वो एक तरीके से या तो

16:11वो दूसरे जन्म में चला गया। तो जब दूसरे

16:14जन्म में चला गया तो वो हमारे पितर कैसे

16:16अभी बने? जब वह दूसरा जन्म ले चुके हैं।

16:18देखिए हमारे शास्त्रों में इसके बारे में

16:20दो बातें कही गई है।

16:22प्रत्येक व्यक्ति जिसकी मृत्यु होती है और

16:24उसकी मुक्ति हो जाए यह संभव नहीं है।

16:27मुक्ति नहीं होने पर वह प्रेत योनि में

16:29चला जाता है। लेकिन क्योंकि वह हमारा

16:31पूर्वज है तो हम उसे कहते हैं पितर। ऐसा

16:34नहीं कि उसने पितृक को प्राप्त कर लिया

16:36क्योंकि पितृ में रहते हैं दिव्य पितर। और

16:38मध्यम श्रेणी के पितर जिन्हें हम लोक

16:40देवता भी कहते हैं। जैसे राजस्थान में

16:42रामदेव जी हैं, तेजाजी हैं, पाबू जी हैं।

16:44हम

16:44लेकिन जो हमारा पूर्वज है जो अभी इस

16:47दुनिया में नहीं है और मान लो वह प्रेत

16:49योनि में है तो उसके जाने के पीछे कारण

16:51होते हैं। आप कहते हैं कि वह अगला जन्म ले

16:53लिया है। लेकिन ऐसा हर आत्मा के साथ नहीं

16:56होता है। कई जो हमारे पूर्वज हैं जैसा

16:57मैंने आपको शुरू में बताया था कि वो अपनी

17:00किसी विशेष कामना के कारण किसी विशेष जो

17:03है उन्होंने जो कर्म किया है वो ऐसा नहीं

17:05किया है जिसके कारण उनकी मुक्ति नहीं हो

17:07पाई है और वो प्रेत योनि में चले गए हैं।

17:09जी। अब प्रेत योनि में कोई व्यक्ति होता

17:11है या नहीं होता है इसके तो अनेक एग्जांपल

17:12पूरी दुनिया देख चुकी है। साइंस भी जो है

17:15प्रेत और पितर को मानती है और जो परा

17:18मनोविज्ञान होती है पैरासाइकोल

17:20पैरासाइकोलॉजी है उसके अंतर्गत इसका

17:22अध्ययन भी किया जाता है।

17:23भारत में भी पहले इसके लिए यूनिवर्सिटीज

17:26में अध्ययन करवाया जाता था। अब तो हालांकि

17:28इस विषय पर कोई पढ़ता नहीं है। जबकि सबसे

17:30ज्यादा जरूरत है। तो जब वह प्रेतावेश को

17:32मानते हैं, जब वह यह मानते हैं कि यस कोई

17:35व्यक्ति जो है हर प्रत्येक व्यक्ति की

17:37मरने के बाद मुक्ति नहीं होती है। कई लोग

17:38जो प्रेत योनि में जाते हैं वो भटकते हैं।

17:41अपनी मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं या

17:43फिर वो जो अपनी अधूरी इच्छाएं हैं जिसकी

17:45वजह से उनकी मुक्ति नहीं हुई उसकी उसकी

17:47पूर्ति के लिए यानी कि उसे पूरा करने के

17:49लिए कोशिश करते हैं। तो ऐसी स्थिति में यह

17:51कहना है कि प्रत्येक व्यक्ति मुक्त हो जाए

17:53तो ऐसा नहीं है। जो प्रेत योनि में जाएगा

17:55संतुष्ट नहीं होगा वह पितृ दोष उत्पन्न

17:57करेगा। पहली बात। दूसरी बात हमारे

17:59शास्त्रों में लिखी गई है जो हमारे

18:01प्राचीन जो श्राद्ध से संबंधित पितरों से

18:04संबंधित ग्रंथ है कि अगर कोई व्यक्ति

18:06जिसका मान लीजिए मुक्ति हो गई है। वह

18:08मनुष्य बन गया है। वह कोई जानवर बन गया है

18:11या किसी और दुनिया में भी है। कोई यक्ष बन

18:14गया है। कोई देवता बन गया है। बहुत अच्छा

18:16उसने काम किया है। कोई मान लीजिए कोई

18:18राक्षस बन गया है। कुछ भी बना हो वो।

18:21लेकिन अगर आपने यहां पर उसके नाम से अपने

18:23पूर्वज के नाम से संकल्प लिया कि मैं अपने

18:26अपने पूर्वज के निमित्त तर्पण करता हूं।

18:28मैं उसके निमित्त यह श्राद्ध करता हूं। तो

18:31वो जिस भी जीवन को जी रहा है। जैसे अगर वह

18:34गाय है तो उसको घास के रूप में जो है वह

18:36अपना भोजन मिलेगा। वह मनुष्य है तो उसको

18:38धन और जो हम अन्न खाते हैं उसके रूप में

18:40प्राप्त होगा। आपका कर्तव्य है अपने

18:43पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध करना। यानी

18:45कि पितृ करना। अगर उसकी मुक्ति हो गई है

18:48तब भी वह उसको प्राप्त होगा। ऐसा नियति ने

18:51तय किया है। हमारे शास्त्र ऐसा कहते हैं।

18:53ओके। अभी-अभी आपने मुझे बताया कि दिव्य

18:56पित्र की एक स्टेज होती है। वो कौन दो

18:58बनते हैं दिव्य?

18:59दिव्य पितर जो हैं ब्रह्मा जी के पुत्र

19:02हुए मनु और मनु के पुत्र हुए सात ऋषि। ये

19:06जो सात जो सात ऋषि हुए थे भृगु अंगीरा

19:08वगैरह इन्हीं के जो पुत्र हैं वो पितर

19:11कहलाए।

19:11अच्छा।

19:12तो हमारे जो पितर हैं इसमें क्या मनुष्यों

19:14के पितर अलग हैं? यक्ष के अलग हैं,

19:16राक्षसों के अलग हैं, नाग जाति के अलग

19:18हैं। तो मनुष्य के जो पितर हैं, वह सोमपा

19:21वगैरह जो हैं, वह सोमपा पितर दिव्य पितर

19:24कहलाते हैं। और वो जो सोमपा पितर है उनके

19:26भी गण होते हैं। सौम्य नाम का उनका गण है।

19:28तो उनका कार्य क्या होता है? हम जब कोई भी

19:31देवता की पूजा करते हैं तो हम स्वाहा

19:33बोलते हैं यज्ञ में। जी

19:34और हम जब पितरों के निमित्त कोई हवन करते

19:36हैं यज्ञ करते हैं तो उसमें स्वधा बोलते

19:38हैं तो उन जो गण गण होते हैं जो सौम्य नाम

19:41का गण है उसका काम है कि वो जो आहुति मिली

19:44है दिव्य पितरों को वो उस तक पहुंचाना

19:46अब आप पूछेंगे भाई दिव्य पित्रों का जिक्र

19:48कहां है तो दिव्य पित्रों का जिक्र जो है

19:50मनुस्मृति में आपको मिलेगा पुराणों में

19:52मिलेगा विभिन्न पुराणों में इसका आप कोई

19:55भी पुराण उठा लीजिए

19:56और मार्कंडेय पुराण जिसमें दुर्गा सप्तशती

20:00जो हमारी पूरी पुस्तक है जिसमें से ली गई

20:02है उसी में यह जो मैं आपको बता रहा हूं

20:05पूरा का पूरा जो विवरण है उसमें प्राप्त

20:08होता है कि उस समय कोई रुचि नाम के

20:11व्यक्ति थे जो कि मोक्ष के लिए जा रहे थे

20:14और जो है वो

20:16नियति ये चाहती थी वो संतान उत्पत्ति करें

20:18तो पितरों ने उनको आकर के समझाया तो

20:20पितरों और रुचि की जो कथा है वो मार्कंडेय

20:23पुराण में मिलती है और मेरे हिसाब से ऐसा

20:25कोई पुराण नहीं होगा जिसमें दिव्य पितरों

20:28का जिक्र या फिर पितरों का जिक्र ना हो

20:32यानी कि सभी में जो है। इसकी व्यवस्था

20:34बताई गई है। विभिन्न प्रकार का अलग-अलग

20:36अलग-अलग विवरण 18 पुराणों के अंदर प्राप्त

20:39होता है।

Shradh ka process

20:40कहा जाता है पितरों को शांत रखने के लिए

20:42या फिर अच्छा उनके लिए करने के लिए

20:43श्राद्ध का बहुत रोल होता है। तो श्राद्ध

20:45का थोड़ा प्रोसीजर बताइए कि श्राद्ध को

20:47कैसे किया जाता है? एक सही से श्राद्ध

20:49कैसे करें? इसके बारे में थोड़ा समझ।

20:51श्राद्ध जो होता है

20:53श्राद्ध का जो शब्द बना है वो बना है

20:55श्रद्धा से। यानी कि श्रद्धा से जो आपने

20:58कार्य किया है वो श्राद्ध है और श्राद्ध

21:01का जो है हमारे यहां सिस्टम बनाया गया

21:03अपने पूर्वजों के लिए।

21:05श्राद्ध जो है प्रत्येक माह की अमावस्या

21:07पर किया जाता है। क्यों किया जाता है उसका

21:09भी आपको लॉजिक बताता हूं। आप सूर्य

21:11सिद्धांत एक पुस्तक है ज्योतिष की जिस

21:13सबसे प्राचीन पुस्तक है जिसमें पूरा

21:15कैलकुलेशन दिया हुआ है। उसमें नवविद

21:17कालमान नौ तरह की गणनाएं बताई गई है।

21:19उसमें पितृ भी है जिसमें एक महीना जो

21:22हमारा होता है जिसमें चंद्रमा पूरा 12

21:24राशियों का चक्कर लगाता है वो पितरों का

21:26एक दिन होता है।

21:27अच्छा

21:28अमावस्या उनकी दोपहर होती है जिस समय वो

21:30भोजन करते हैं और पूर्णिमा उनकी अर्ध

21:31रात्रि होती है। तो प्रत्येक अमावस्या जिस

21:34समय वो भोजन करते हैं तो हमारा कर्तव्य है

21:35कि अपने पूर्वजों के प्रति हम श्राद्ध

21:37करें तर्पण करें उनको और उनके निमित्त हम

21:40ब्राह्मण भोजन करवाएं

21:41हम

21:42तो उनका प्रत्येक अमावस्या को प्रत्येक

21:44व्यक्ति को श्राद्ध अपने पूर्वजों के

21:46निमित्त करना चाहिए तर्पण करना चाहिए

21:48लेकिन पूरे वर्ष में हमारे यहां एक नियम

21:50है सभी देवी देवताओं के लिए कोई ना कोई

21:53विशेष त्यौहार पर्व आते हैं हम

21:55तो ऐसी स्थिति में जो आश्विन का कृष्ण

21:58पक्ष होता है उसमें पितरों के लिए

22:00व्यवस्थाएं की गई क्या की गई उसे उसे पितृ

22:02पक्ष बोलते हैं। जब सूर्य कन्या राशि में

22:04आता है, कन्या में आता है तो कनागत कहा

22:06गया इसे। महालय भी कहा जाता है इसको और

22:08पितृ पक्ष भी कहा जाता है जो कि इस वर्ष 6

22:11सितंबर से प्रारंभ हो रहा है और 21 सितंबर

22:14तक रहेगा। 6 सितंबर को पूर्णिमा का

22:16श्राद्ध है।

22:16अच्छा

22:16तो कहने का तात्पर्य कि ये 15 दिन जो

22:18निश्चित किए गए, 16 दिन जो निश्चित किए

22:20गए, यह 100% अपने पितरों के ही लिए ही

22:24समर्पित है।

22:25अच्छा।

22:25इनमें हमारा कार्य क्या होता है?

22:26दुनियादारी भूल जाओ। केवल और केवल अपना

22:29संपूर्ण जो अपना ध्यान है अपने पितरों के

22:31निमित्त रखो और जिस तिथि को आपके पितर का

22:35निधन हुआ था जैसे मान लीजिए किसी का

22:37प्रतिपदा यानी पहली तिथि को हुआ है किसी

22:39का दूसरा किसी का पूर्णिमा अमावस्या उसी

22:41दिन दोपहर के समय आपको अपने उस पितृ के

22:44निमित्त पितृ करना है जिसमें आपको श्राद्ध

22:47भी करना है जिसमें आपको ब्राह्मण भोजन भी

22:49करवाना है तर्पण भी करना है और दान भी

22:51करना है

22:52अच्छा

22:52और दान में क्या श्रेष्ठ माना गया है कि

22:54अपने पितृ के निमित्त आप दान कीजिए अब दान

22:57में ऐसा नहीं कि उसको जो पसंद था वही दान

22:59करना है। दान में क्या बताया गया वो गलत

23:02है। वो गलत है।

23:02अच्छा

23:03तो दान में क्या करना है? दान में आप

23:05वस्त्र का दान कीजिए। जो भी हम ऊपर से

23:07नीचे पहनते हैं चाहे टोपी है, पगड़ी है

23:09इसके अलावा कपड़े हैं, चप्पल है सब दान

23:11में आप दे सकते हैं। कुछ सबसे जो बेस्ट

23:14दान माना गया है इसमें वस्त्र और सिल्वर

23:16चांदी का दान। यानी क्या चांदी मैं सोना

23:19नहीं बोल रहा हूं। चांदी आज हर व्यक्ति

23:20दान कर सकता है। चांदी का दान जो व्यक्ति

23:23अपने पितरों के निमित्त पितृ पक्ष में

23:24करता है उसको मिरेकल चमत्कारिक जो है

23:26परिणाम मिलते हैं।

23:28इसमें दो बातों का जरूर ध्यान रखना चाहिए

23:30कि शास्त्र में जो बताया गया है श्राद्ध

23:33में वही भोजन उस समय बनाया जाना चाहिए। कई

23:36लोग यह कहते हैं साहब हमारा जो पूर्वज था

23:38उसको फलानी चीज बहुत पसंद थी और श्राद्ध

23:40में जब पंडित जी जिमने के लिए आते हैं

23:42भोजन करने आते हैं तो उनको वही खिला खिला

23:45दिया जाता है जबकि

23:46उसे वो वहां पर शास्त्रों में श्राद्ध में

23:48बनाना निषिद्ध बताया गया है। जैसे फॉर

23:50एग्जांपल आपको बताऊं

23:52मेरे एक मित्र हैं

23:53पंडित जी

23:54तो वो कहीं गए श्राद्ध में किसी के घर पे

23:57और उनको बहुत सारा कटोरी के अंदर जो है वो

23:59बैंगन का भरता परोसा गया। अच्छा

24:01तो उन्होंने कहा कि क्षमा करें लेकिन

24:03बैंगन वर्जित माना गया है। बैंगन जो है

24:05नहीं खाया जाता है।

24:06तो उन्होंने कहा महाराज खाना पड़ेगा। यह

24:08हमारे फलाने जिनका आप जीने आए हो ना उनको

24:11बहुत पसंद था। तो उन्होंने समझाया कि

24:13देखिए अब उनकी संज्ञा परिवर्तित हो गई है।

24:15वो अब एक इस समय वो जो है पितृ योनि में

24:18है चाहे प्रेत योनि में है तो उनका मुंह

24:20जो है सुई के समान है और वो मेरे शरीर में

24:23आकर के मान लो अपना भोजन ग्रहण करेंगे

24:25लेकिन जो चीज वर्जित बताई गई है वो ग्रहण

24:27नहीं की जा सकती। उल्टा आप ही को इससे

24:29नुकसान होगा। वो कुपित होंगे वो नाराज

24:31होंगे भले वो तब तब जब पसंद था ना तब उनकी

24:34आयु क्या थी हम

24:35उनका पंचतत्व का शरीर था तब की बात अलग थी

24:38जैसे कोई व्यक्ति बिल्कुल स्वस्थ है सब

24:40कुछ खाएगा अब वो अस्पताल में पहुंच गया है

24:42बीमार है पेट की स्थिति बहुत बुरी है तो

24:45क्या आप उसको वही वस्तु खिलाएंगे क्या

24:46पिज़्ज़ा पसंद है तो पिज़्ज़ा खिला दोगे क्या

24:48नहीं

24:48डोसा पसंद है डोसा नहीं ना क्योंकि उसकी

24:51जो है संज्ञा चेंज हो गई वो एक स्वस्थ

24:53व्यक्ति से अब एक रोगी बन चुका है ऐसे ही

24:56आपके जो पूर्वज थे वो मोहनलाल सोहन लाल

24:59नहीं रहा अब वो जो है एक वो व्यक्ति एक

25:01पितृ योनि में या प्रेत योनि में है। ऐसी

25:04स्थिति में उसके पास में अब पंच तत्व का

25:06शरीर नहीं है। अगर आप यह गलती कर रहे हो

25:09यानी कि शास्त्रों तरीके से आप गलत वस्तु

25:11उसको परेश परोस रहे हो खिला रहे हो वो कतई

25:14सम्मत ना है। दो बात इसमें एक बात और है।

25:17कई लोग कहते हैं कि साहब बच्चा था छ साल

25:19का तो हम बच्चे को जिमाएंगे। महिला थी तो

25:21महिला को जिमाएंगे।

25:22कोई भी पितर जिसका मृत्यु हो जाता है उसकी

25:25कोई लिंग श्रेणी नहीं होती है। ना वह

25:27पुरुष होता है ना वो स्त्री होती है ना वो

25:30कोई आत्मा होती है। वो सिर्फ और सिर्फ

25:33वहां पर एक जो है आपका पितृ है जिसका कोई

25:36लिंग नहीं है। तो जो शास्त्रों में बताया

25:38गया है कि एक युवा ब्राह्मण जो कि

25:40ब्राह्मण कर्म करता हो। अच्छा

25:42जो जनेऊ पहनता हो ऐसे ब्राह्मण को बुला

25:45करके आपको खाना खिलाना भोजन कराना पितरों

25:47के निमित्त और जब वो भोजन कर रहा है तो

25:50आपको ऐसा सोचना है कि जैसे हमारे सामने

25:52हमारे साक्षात वो पितर ही बैठे हैं। चाहे

25:54बच्चा हो चाहे स्त्री हो।

25:55अच्छा

25:56स्त्रियों को भोजन करवाना वर्जित माना गया

25:58है। आपको ब्राह्मण ही बुलाना है। और वो

26:00ब्राह्मण कौन सा होना चाहिए? ऐसा नहीं कि

26:03नाम के पीछे सिर्फ शर्मा लिखा है, जोशी

26:05लिखा है, उपाध्याय लिखा है और आपने बुला

26:07लिया। नहीं उसका कर्म भी यही होना चाहिए।

26:10और यहां तक आपको बता दूं कि जो पितृ जो जो

26:14अपना श्राद्ध पक्ष में बुलाए जाते हैं

26:16जैसे मैं ज्योतिषी हूं तो ज्योतिषी को भी

26:18बुलाना वर्जित माना गया है

26:19ज्योतिषी को भी

26:20ना बिल्कुल नहीं ज्योतिषी भी वर्जित माना

26:22गया है ज्योतिषी को बुला के नहीं जमा सकते

26:24आप भोजन नहीं करवा सकते जो पंडित है जो

26:26पौहित्य कर्म करता हो जो कि जिसका जीवन

26:29सात्विक भी होना चाहिए साधु साधु का

26:31बिल्कुल मना है आप साधु को बुला के अपने

26:34घर में आप देखो अरे बड़े महाराज हैं हमारे

26:35मंदिर में रहते हैं जिन्होंने सन्यास ले

26:37लिया है

26:38वो जो है वो कसाय वस्त्र धारण करते हैं

26:40गेरवा वस्त्र उनको बुला के भोजन करवाएं

26:42बहुत पुण्य मिलेगा ना आपका पितर आएगा ही

26:44नहीं भोजन करने के लिए तो ऐसी स्थिति में

26:46उनको नहीं बुलाना है लोग गलती करते हैं तो

26:49इसके लिए शास्त्र की जानकारी होना बहुत

26:52जरूरी है कि हमें किस तरह के व्यक्ति को

26:54बुलाना चाहिए भोजन कराना चाहिए जो यह

26:56नित्य कर्म जो हमारा पंडित का पौित्य कर्म

26:59करता हो जो जनेऊ पहनता हो जो वाकई में

27:01पंडित है ऐसे ऐसे ही व्यक्ति को बुला के

27:04भोजन कराएं अब एक दिक्कत और होती है कई

27:06बार वो आता नहीं है

27:07तो आता नहीं है तो ऐसा नहीं है आपने वही

27:09बैंगन का भरता बनाया वहां दे दिया या कई

27:11बार एक हमारे मित्र गए थे पंडित जी उनको

27:13चाय बना के दे दी इतनी बड़ी गिलास में

27:15बोले चाय पियो अरे भाई चाय हम तो भोजन

27:16करने आए चाय पिएंगे तो भोजन क्या करेंगे

27:18बोले हमारे पूर्वज को चाय पसंद थी ऐसी

27:20गलती ना करें अगर किसी कारण से आपको ऐसा

27:23पंडित नहीं मिलता है

27:24कई बार शहरों में दिक्कत होती है

27:27तो ऐसी स्थिति में आप क्या करें कि जो

27:28कच्ची सामग्री है भोजन की जैसे चावल है

27:31दाल है तेल है जो भी है आप उसका पूरा किट

27:34बना दीजिए और वह जाकर के पंडित जी को

27:37संकल्प के साथ में दान दीजिए उनको बोलिए

27:38संकल्प करिए कि हमारे हमारे पुराने जो है

27:41पूर्वज हैं उनके निमित्त में यह दान

27:43स्वीकार करता हूं वो नहीं कहे जो संकल्प

27:45ले वो कर लेंगे दान ले लेंगे दान और आपका

27:48जो है यह कार्य पूर्ण हो जाएगा इस बात का

27:50जो है बहुत ज्यादा ध्यान रखना चाहिए

27:52ओके आपने बताया कि भोजन का भी बहुत रोल

27:55होता है इसमें एक सही भोजन क्या माना

27:57जाएगा कि श्राद्ध में करना चाहिए और

27:59किस-किस को दान देना चाहिए?

28:00श्राद्ध में भोजन का बहुत ज्यादा ध्यान

28:02रखना चाहिए। नॉर्मली जो सामान्यतः जमीन के

28:06नीचे वाली जो उगने वाली वस्तुएं हैं जिन

28:08पर सूर्य जो है की किरणें टच नहीं होती है

28:11उनको जो है निषिद्ध माना गया है।

28:13इसके अलावा बहुत सारी चीजें निषिद्ध हैं।

28:15जैसे लहसुन, प्याज, हींग बहुत जिसमें गंध

28:17होती है ऐसी वस्तुएं भी निषिद्ध मानी गई

28:19है। ऐसा भोजन जो बिल्कुल सात्विक हो

28:22वो भोजन जो है जिसमें गाय का दूध शामिल

28:25है। जैसे खीर हम गाय के दूध से बनाएं। घी

28:27का हम प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा

28:30अच्छी सब्जियां हैं। हम

28:31चावल है, गेहूं का आटा है। ऐसी वस्तुएं

28:34काम में ले सकते हैं। लेकिन कई चीजें

28:36इसमें वर्जित मानी गई है। जैसे मैंने आपको

28:38बताया एक तो नॉनवेज मांस का तो पूर्ण रूप

28:40से परिहार कई जगह हम बोलते हैं कि श्राद्ध

28:42में यह भी चलता है। बिल्कुल नहीं चलता।

28:44शास्त्रों में पूर्ण रूप से इसे निषिद्ध

28:46बताया गया है

28:47और जैसे कद्दू है यह भी निषिद्ध बताया गया

28:50है। बैंगन है यह भी निषिद्ध बताया गया है।

28:52आप जो नॉर्मल सब्जी है जैसे तुरई सब्जी है

28:54वो आप बना सकते हैं। दाल आप बना सकते हैं

28:57और बढ़िया सात्विक भोजन जितना हो सकेगा

29:00जितना जो पंडित जी आपके यहां भोजन करके

29:02जाएं जितना जल्दी उनको डाइजेस्ट हो जाए।

29:05पच जाए समझ लीजिए कि वही सबसे जो है

29:07पवित्र और सबसे बेस्ट भोजन है। और बहुत

29:10ज्यादा भोजन कराने की भी उनको कोशिश नहीं

29:12करनी चाहिए। अपचना क्योंकि आपके साक्षात

29:15पितर आकर भोजन कर रहे हैं। अगर मान लीजिए

29:17कि भोजन करते समय ब्राह्मण ने नाराजगी जता

29:20दी या ऐसा भोजन वो मन मान के कर रहा है तो

29:23मन मार के कराए हुए भोजन से आपके पितर को

29:25क्या प्राप्ति होगी?

29:26ज्यादा लोग पूरी आलू करा देते हैं।

29:28पूरी तो पका हुआ भोजन होता है और पके हुए

29:31भोजन को ही सामान्यत ब्राह्मणों को खिलाया

29:33जाता है।

29:34लेकिन पूरी भी अगर आप बनाएं तो इस बात का

29:36ध्यान रखें कि पंडित जी अगर कह दे भाई अब

29:38मैं नहीं खाऊंगा तो ना जबरदस्ती उनके साथ

29:39में बिल्कुल ना करें। सही बात है।

29:41और जो एक आहार ऐसा है जिसमें बहुत ज्यादा

29:44मसाला ना हो। जब बहुत ज्यादा ऑयली फूड ना

29:46हो। इस तरह का भोजन जो है बैलेंस फूड जैसे

29:48पूरी अगर आपने मान लीजिए कि तेल वाली हो

29:51गई तो सब्जी इस तरीके की बना दो जिसमें

29:52ज्यादा तेल ना हो। बहुत ऑयली फूड ना कराओ।

29:55बैलेंस फूड जो होता है वो आपको कराने का

29:57पूरा प्रयास करना चाहिए। और भोजन कराने के

30:00पहले या बाद में तर्पण जरूर पंडित जी से

30:02करवाएं और दान उन्हें जरूर दें। ऐसा नहीं

30:04भोजन करा के आपने जो है केवल वैसे ही उनको

30:07211 या ₹100 दे दिए। दान कुछ भी करें

30:10छोटा सा ही दान अपने श्रद्धा के अनुसार आप

30:12करें लेकिन जो भी आप दान देंगे वह अपने

30:14पूर्वजों के निमित्त देंगे और कई जगह ये

30:17आप मानते हैं कि अरे भाई ये तो ब्राह्मण

30:19ये जो परंपरा आपने चलाई अपने स्वार्थ की

30:21वजह से चलाई है

30:22तो ऐसा नहीं देखो हमारा जो धर्म है हमारा

30:24जो सिस्टम है दुनिया में पितरों की पूजा

30:27केवल सनातन धर्म में नहीं होती है। मैं

30:29कहता हूं दुनिया का ऐसा कोई भी धर्म उठा

30:31लाओ जिसमें पितरों की पूजा नहीं होती हो।

30:34मुस्लिम में 12 वफात है। क्रिश्चियंस में

30:36ऑल सोल स्टे है। सबके अपने-अपने सिस्टम

30:38है। जापान में भी पूर्वजों की पूजा होती

30:40है। चाइना जैसा नास्तिक देश भी अपने

30:41पूर्वजों की पूजा करता है। ऐसा कौन सा

30:44धर्म है? ऐसा कौन सा संप्रदाय है? ऐसी कौन

30:46सी जाति है जो अपने पूर्वज पूर्वजों की

30:48पूजा नहीं करती है। वो जाके अपने कब्रों

30:50पर जाते हैं, उनको सजाते हैं। उनको धोते

30:52हैं। वहां पे गिफ्ट ले जाते हैं। उन

30:54गिफ्टों को किसको खिलाते हैं भाई? तो

30:56हमारे इस व्यवस्था पर जो आजकल के एक

30:58आधुनिक कुछ लोग उंगलियां उठा रहे हैं वो

31:00बिल्कुल गलत है। ऐसा बिल्कुल नहीं होना

31:03चाहिए। जिन्होंने जो शास्त्रोक्त जो तरीका

31:05बताया गया है जैसे आप श्राद्ध के समय केवल

31:08ऐसा नहीं ब्राह्मण भोजन कराएं तर्पण

31:10कराएं। आप विभिन्न प्रकार के श्राद्ध भी

31:12कर सकते हैं। जैसे मैं आपको बताता हूं

31:14श्राद्ध कई तरह के बताए गए हैं।

31:16खास करके जो हमारे गया तीर्थ है या जो

31:19हमारे विभिन्न प्रकार के तीर्थ हैं नदी के

31:20किनारे जो माने गए हैं वहां जाकर के आप

31:22श्राद्ध अपने पूर्वजों के निमित्त कर सकते

31:24हैं। जिनमें गया श्राद्ध सबसे श्रेष्ठ

31:26माना गया है या त्रंबकेश्वर में है या

31:28हरियाणा में पिहोवा है। कहीं जगह आपके घर

31:30के आसपास भी ऐसा स्थान हो सकता है। अगर आप

31:32ऐसा नहीं कर सकते तो एक गोष्ठी श्राद्ध

31:35होता है। गोष्ठी म का मतलब जो समूह में

31:36श्राद्ध किया जाता है। बहुत सारे लोग

31:38मिलकर के ऐसा आयोजन कर सकते हैं कि 101

31:41लोग मिल गए मिलकर के अपने-अपने जो है

31:43पंडित जी आपको करवाएंगे और आप बैठकर के

31:46करिए श्राद्ध श्राद्ध करने के बाद में सभी

31:48मिलकर के भोजन का आयोजन करें जो बहुत सारे

31:51ब्राह्मणों को बुलाएं उनको भोजन करवाएं और

31:53ऐसा श्राद्ध कहीं भी किया जा सकता है जैसे

31:55मैं जयपुर से हूं जयपुर में जो है नदी

31:57नहीं है हमारे यहां गलता तीर्थ है लेकिन

31:58गलता तीर्थ में भी कई बार जो है पानी की

32:00दिक्कत हुई पिछले दिनों में जब बारिश नहीं

32:02हुई

32:03तो मैं कहता हूं ऐसी स्थिति में आप कहीं

32:04मत जाइए आपके घर के आसपास गौशाला जरूर

32:06होती है आप गौशाला ाला में जाइए। गौशाला

32:09में जाकर के 10 15 20 जितने भी लोग होते

32:11हैं इकट्ठे होइए। और मैं कहता हूं कि जो

32:13श्राद्ध गौशाला में अपने पूर्वजों के

32:16निमित्त कर लेगा उसको पितृ दोष कभी पीड़ित

32:18कर ही नहीं सकता है। गौ सेवा पितृ दोष

32:21निवारण के लिए सबसे श्रेष्ठ मानी गई है।

32:23ओके। अच्छा मैंने यह देखना है। यह सुना है

32:26कि कुत्ते को भी दिया जाता है। कौवे को भी

32:28दिया जाता है। इनका क्या रोल होता है?

32:30क्या इनको भी देना चाहिए? थोड़ा-थोड़ा

32:31खाना पहले ही

32:32पंच बलि कहते हैं इसे। जिस समय हम श्राद्ध

32:34करते हैं, ब्राह्मण भोजन करते हैं, तो

32:36ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि निकाली जाती

32:38है। पंचबलि में सबसे पहली बलि हम देते हैं

32:41अग्नि को।

32:41अच्छा।

32:42अग्नि जो कि देवताओं को और पितरों की जहवा

32:44है, मुख है यानी कि उसके जरिए हम उन्हें

32:46दे रहे हैं। तो वो हम दे रहे हैं दिव्य

32:48पितरों को अग्नि के जरिए।

32:50अच्छा।

32:51दूसरा हम देते हैं चींटी को।

32:53तीसरा हम देते हैं गाय को, कुत्ते को और

32:55कौवे को। यह पंचबली होती है। तो कौवे को

32:57देने का कारण क्या है कि एक तो हमने हमारी

33:00जो प्रत्येक पूजन व्यवस्था है इसमें

33:02प्रकृत प्राकृतिक संतुलन हम बनाते हैं।

33:04हमने इसके जरिए जो है वो जीव-जंतुओं की

33:06सेवा की

33:07और हमने कहीं ना कहीं इसलिए भी यह दिया कि

33:09कहीं ना कहीं हमारे पूर्वजों का जो है वो

33:12एक रोल या यूं कहें कि हो सकता है कि उनका

33:15जन्म क्या इस रूप में हुआ है। तो ऐसी

33:16स्थिति में हमने पूरी प्रकृति को साधने का

33:19प्रयास किया है। हमारे आसपास में ये चारों

33:21तरह के जीव पाए जाते हैं। गाय जिसको हम

33:23माता मानते हैं। डॉगी कुत्ता जो होता है

33:26आप जानते हैं हर गलीगली में पाए जाते हैं

33:27भैरव के जो है वाहन माने जाते हैं। राइट?

33:30चींटी आप जानते हैं हर घर में प्रत्येक घर

33:32में लाखों की संख्या में घर के नीचे

33:34चींटियां हैं। तो ऐसी स्थिति में हम उनकी

33:36इसके द्वारा सेवा करते हैं। और कौवा कौवा

33:38भी आप जानते हैं पक्षी जो कि सब जगह आसानी

33:40से पाया जाता है। तो ये पंचबली निकाल करके

33:43हम एक प्राकृतिक संतुलन को बनाने का

33:45प्रयास करते हैं। ये मान सकते हैं आप।

33:46जी। अच्छा जैसे कोई बच्चा हुआ है वो पैदा

Pitro me paida hua bacha bhi hota hai?

33:49ही हुआ है और पैदा होते ही उसकी डेथ हो गई

33:52या थोड़ा सा बड़ा ही बच्चा है तो क्या

33:53उनको भी पितरों की श्रेणी में लिया जा

33:55सकता है? आपका एक क्वेश्चंस बहुत अच्छा है

33:58क्योंकि भारत के लगभग लगभग सभी लोग जो कि

34:02पंडित कहते हैं अपने आप को ज्योतिषी कहते

34:04हैं विद्वान कहते हैं वो इस विषय को लेकर

34:07बहुत ज्यादा भ्रमित हैं।

34:08हमारे यहां क्या होता है

34:09कि कई बार मेरे पास फोन आता है।

34:12वो कहते हैं कि साहब हमारे गर्भ में चार

34:14महीने का बच्चा था

34:16जो अब नहीं रहा है और कोई कह रहा है वो

34:18पितरों में चला गया है।

34:19कितनी उपहास और कितने परिहास और कितनी

34:22अज्ञान की बात है जो वो ऐसी बात कर रहे

34:25हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि हमारे

34:27यहां 2 साल के उम्र के नीचे का बच्चा अगर

34:30मृत हो जाए किसी कारण से

34:32उसका कोई कर्म नहीं किया जाता। कोई भी

34:34कर्म उसको उसका अग्नि संस्कार भी नहीं

34:36होता है। उसको जाओ

34:38जमीन में गाड़ो आ जाओ। कुछ भी नहीं करना

34:41है आपको।

34:41हम

34:42जब हमारे पूर्वजों ने वहीं कोई सिस्टम

34:44डेवलप नहीं किया है। उसकी मुक्ति की कोई

34:47प्रार्थना ही नहीं की है। तो भाई वो कहां

34:48से पितृ दोष करेगा?

34:49सही बात है।

34:50दूसरी श्रेणी उन्होंने लिखी दो से लेकर छ

34:52वर्ष के बच्चे उनका भी उन्होंने को जो है

34:56अग्नि संस्कार नहीं लिखा है। वहां क्या

34:58लिखा है कि आप जाइए और उसे भी दफना करके आ

35:01जाइए या फिर पानी में बहाकर आ जाइए।

35:03यानी कि उन्होंने क्या कहा है और उसका भी

35:06उन्होंने क्या कहा कि पहले से लेकर और

35:0810वें दिन तक की जो क्रियाएं होती है वो

35:10कीजिए। 11वां यानी कि नारायण बलि और 12व

35:13वाली जो क्रियाएं आपको नहीं करनी है।

35:15कितनी बड़ी बात कही है। लेकिन छ साल के

35:18ऊपर का कोई बच्चा मृत होता है तो उसका वही

35:21सब कुछ किया जाना चाहिए जो एक युवा

35:23व्यक्ति या टीनएज वाले व्यक्ति का होता

35:24है।

35:24मतलब सिक्स इयर्स तक नहीं माना जाता।

35:26यानी कि मेरे कहने का मतलब अगर आपके घर

35:29में कोई बच्चा जो छ साल से कच्ची उम्र का

35:31है और किसी कारणवश उसकी डेथ हो गई है। वो

35:35कभी पितर नहीं बन सकता है। नेवर पॉसिबल।

35:38ऐसा हमारा शास्त्र कहते हैं।

35:39और मैं आपको बता दूं मेरे आसपास ऐसे अनेक

35:42लोग हैं जिनके घर में ऐसी डेथ हुई है और

35:43वह उसे पितर मानते हैं। असंभव है। क्यों

35:46असंभव है? मैंने इस पर भी रिसर्च किया।

35:49मैंने साइंस को देखा, चाइल्ड साइकोलॉजी

35:51देखी तो उसमें यह देखा कि छ साल से छोटे

35:54बच्चे का जो है वो मेमोरी स्टोरेज नहीं

35:56होता है। जैसे आप छ साल से छोटा बच्चा है

35:59उसको एक साल पहले मिलिए और उसके एक साल

36:01बाद आप उसके पास जाइए। वो आपको नहीं

36:03पहचानेगा। अरे ये अंकल को मैंने पहले कहीं

36:05देखा है? पापा कहते हैं बेटा देखा है। देख

36:07एक साल पहले हमारे पहले घर पे आए थे। वो

36:09कहेगा मुझे याद नहीं है। कहेगा ना क्योंकि

36:11उसके पास स्मृति नहीं है। उसके न्यूरॉन्स

36:13पके नहीं है।

36:14हम

36:14तो ऐसी स्थिति में पितर कौन बनता है?

36:17जिसकी स्मृति हो।

36:19भाई जब काम, क्रोध, लोभ, मोह जैसी

36:21स्मृतियां लेकर के हम आगे जाते हैं। तभी

36:23तो हम जो है वो पितर बनते हैं। तो छ साल

36:25से छोटे बच्चे के पास कोई स्मृति नहीं है।

36:27ना उसके पास अपने पिता का अटैचमेंट है। ना

36:29उसके अपने पास माता का अटैचमेंट है। हमारे

36:31जयपुर की एक घटना बताता हूं। एक बच्चा था।

36:334 साल की उम्र में उसको एक व्यक्ति किडनैप

36:35करके ले गया और कई सालों के बाद में वो

36:37बच्चा कहीं मिला मथुरा में। उसको वापस

36:39लाया गया। अपने मां-बाप के पास जाने को

36:41तैयार नहीं था। वो कहता है मेरा तो पिता

36:42ये है। मैं तो चार साल की उम्र से इसके

36:44साथ रहा हूं। इसने पाला है।

36:46तो सोचिए कि कोई व्यक्ति जो बच्चा जो है छ

36:49साल से पहले मृत हुआ है। जिसकी अपनी

36:50मेमोरी नहीं है। वो मरने के बाद में पितर

36:52कैसे बन सकता है? क्योंकि पितर वही बनता

36:54है जिसकी एक स्मृति है। जिसका कोई मोह है,

36:56कोई अटैचमेंट है कि भाई ये मेरे माता-पिता

36:58हैं। वो असंभव है। क्यों है? यह साइंस भी

37:01कहती है कि मेमोरी नहीं बन रही। उसकी

37:02स्मृति स्मृति बनती है सात वर्ष के बाद

37:05में सात वर्ष के पहले इस प्रकार की कोई भी

37:07स्मृति नहीं बनती है। हमारे यहां पर

37:09प्राचीन काल में उपनयन संस्कार की उम्र

37:12सात वर्ष से ज्यादा हुआ करती थी। 8 वर्ष

37:14से पहले माता ही उसकी गुरु हुआ करती थी और

37:17आठ वर्ष का जब होता था तब उसे गुरुकुल में

37:19पढ़ने के लिए भेजा जाता था।

37:20हम

37:20तो इन सब बातों को आप देखेंगे तो यह संभव

37:23ही नहीं है कि छ साल से छोटा बच्चा पितरों

37:27में जाए। लेकिन सब लोग यह कहते हैं कि

37:29साहब हमारा चार साल का बच्चा कोई कहता है

37:31हमारे गर्भस्थ शिशु पितों में और लोग कहते

37:33हैं कि हां ऐसा होता है लेकिन यह बिल्कुल

37:35भी 100% गलत है। अकॉर्डिंग टू मेरे हिसाब

37:38से नहीं सुधाकर पुरोहित नहीं कह रहा है।

37:40ये भारत के शास्त्र कह रहे हैं और इसे

37:42साइंटिफिक तरीके से भी प्रूव कर सकते हैं।

37:45लेकिन आपने कहा कि मोह बच्चे का नहीं

37:48होता। बट पेरेंट्स का तो होता है ना। तो

37:50वो तो मानते हैं।

37:50पेरेंट्स का मोह तो होगा। 100% होगा लेकिन

37:52मृत तो बच्चा हुआ है ना। हम

37:54हम तो यही हैं। हम उसे याद तभी तो हम उसे

37:56पित पितरों में मान रहे हैं क्योंकि हमारा

37:58मोह है।

37:59हमारी स्मृति उससे नहीं छूट रही है।

38:01राइट

38:01लेकिन उससे कुछ क्या होगा? आप मैं आपको एक

38:04एग्जांपल देता हूं।

38:05एक परिवार था

38:07जो ये मानते थे कि उनका छोटा बच्चा है और

38:09वो पितरों में है।

38:10वो पितरों में है।

38:11तो वो बोलना चाहता है। वो हमसे कुछ कहना

38:14चाहता है। मतलब कहते हैं ना बड़ा कई सालों

38:17बाद बच्चा पैदा हुआ

38:18और किसी कारणवश वह मृत हो गया है।

38:20जी। सोचिए कितना दुख है। उस दुख को कैसे

38:22कोई सहन कर सकता है? असंभव है कि सहन कर

38:25ले। तो हमारा अटैचमेंट होता है। तो ऐसा एक

38:27परिवार मेरे पास आया।

38:28वो बोला हमारा बच्चा हमसे कुछ कहना चाहता

38:30है। मैंने बोला हो ही नहीं सकता। ऐसा नहीं

38:32होता है। बोले नहीं कहना चाहता है।

38:34ठीक है भाई। किसी ने जो है बोला कि फलाने

38:37फलाने जगह एक व्यक्ति है। वो आपको बता

38:39सकता है वो क्या कहना चाहता है।

38:40अच्छा।

38:40गए कोई आंसर नहीं मिला। भटकते रहे भटकते

38:43रहे। एक दिन किसी जगह गए तो वो व्यक्ति जो

38:47ये सोचता था वो बेहोश हो गया। बेहोश होकर

38:49गिर पड़ा। गिर पड़ा। उसको होश आया। होश

38:52आया अपने घर आया। तो उसने कहा कि आप में

38:54वह बच्चा आकर के बोलने लगा है। ऐसा उसने

38:57कहा। बोले वो आत्मा आई थी इसलिए आप बेहोश

38:59हो गए हो उस बच्चे की और वो बोलने लगा है।

39:01अच्छा।

39:02उस व्यक्ति में कोई आत्मा ने प्रवेश किया

39:04होगा। उस क्योंकि वो ऐसी जगह नेगेटिव जगह

39:06गया था किसी तांत्रिक के पास। उसके बाद

39:08में उस घर में ऐसीऐसी घटनाएं होने लगी।

39:11वहां पर दूध देती हुई गाय दूध देना बंद कर

39:14दी।

39:14अच्छा।

39:14बाद में उसकी अकाल मृत्यु भी हुई गाय की।

39:17ओके। और लेकिन उनके दिमाग में एक था हमारा

39:19बच्चा था बोलने लगा है और वो जो उस पुरुष

39:22के शरीर में एक आत्मा आ रही थी वो अपनी

39:24मनचाही इच्छाएं उनसे पूरी करवा रही थी।

39:26मुझे यह चाहिए ऐसा करो मुझे वो चाहिए वैसा

39:29करो।

39:29वो जब मेरे पास आए थे तब लगभग लगभग उनकी

39:32स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो चुकी थी। उनको

39:34लग रहा था ये हमारे पूर्वज हैं।

39:36मतलब हमारा बच्चा है लेकिन हमारा भला

39:38क्यों नहीं कर रहा है? सही बात है।

39:39मैंने उनको समझाया यह आपका बच्चा नहीं है।

39:41यह कोई अतृप्त आत्मा है जो एक नेगेटिव जगह

39:43से आपके साथ चिपक के आ गई है और उसके आने

39:45के बाद में उनकी जो आर्थिक स्थिति

39:47डिस्ट्रॉय हुई। उनका काम धंधा बंद हो गया।

39:49उनके घर में बहुत ज्यादा दिक्कतें होने

39:51लगी। तो मैंने उनको कुछ उपाय बताए लेकिन

39:53उनको यह नहीं बताया कि यह उपाय जो है मैं

39:55सिर्फ आपके पितरों के निमित्त बता रहा हूं

39:57और प्रेत भगाने वाला भी यह उपाय है। मैंने

39:59उनको कहा आप यह फॉलो करो फिर रिजल्ट देखो।

40:01वो गए।

40:02उन्होंने प्रॉपर तरीके से शास्त्रों तरीके

40:04से पितरों का पूजन किया। हम

40:05शास्त्रों तरीके से उन्होंने जब सारा

40:07कार्य किया तो उन्होंने उन्होंने देखा कि

40:09सामने वाली जो भी शक्ति आती थी कुछ ही

40:12दिनों में आना बंद हो गई और उसने वो उनके

40:14द्वारा जो क्रिया वो कर रहे थे वो भोग

40:16लेना बंद कर दिया है।

40:17अच्छा

40:17समय परिवर्तित होने लगा है। तो उनको बाद

40:19में धीरे-धीरे एहसास होने लगा जो मैंने

40:21उनको बताया था और वो स्वयं इस बात को

40:23अनुभव कर रहे थे कि वहां से जाने के बाद

40:26ही हमारे जीवन में नेगेटिविटी आई, परेशानी

40:29आई, दिक्कत आई। हमने जैसे ही शास्त्रोक्त

40:31बातों को फॉलो किया तो उसके बाद हमारा

40:33जीवन बिल्कुल 100% परिवर्तित हो गया।

40:36ओके। अच्छा मैं एक थोड़ा सा मेरा डाउट है।

40:38मैं जानना चाहूंगा कि ये पितृदष और प्रेत

Pitra dosh vs pret dosh

40:41दोष ये क्या एक दूसरे से रिलेटेड है या

40:43अंतर है इनमें?

40:44ये आपने सही कहा। दोनों के बीच में इतनी

40:46पतली रेखा है। इतनी पतली रेखा है। समझ में

40:49ही नहीं आता है कि भाई ये पितृ दोष है या

40:51प्रेत दोष है। देखो पितृ दोष किसे कहते

40:53हैं? हमारा कोई पूर्वज है जो प्रेत योनि

40:56में है, असंतुष्ट है और मुक्ति चाहता है

40:58या अपनी किसी कामना की पूर्ति चाहता है

41:01उसे पितृ दोष कहते हैं। प्रेत दोष में

41:03क्या होता है कि कोई आत्मा है कहीं भटक

41:05रही है और वो अपनी इच्छा पूर्ति के लिए

41:08आपके पास आपके साथ आ गई है। आपके घर में आ

41:10गई है क्योंकि आपके घर का माहौल ऐसा है।

41:12नेगेटिव माहौल है या आपका मन मस्तिष्क

41:14इतना कमजोर है। आपकी मानसिक शक्ति इतनी

41:16कमजोर है कि उस वो आपके यहां आ गया है। अब

41:19देखिए पितर कभी जबरदस्ती आपसे अपनी इच्छा

41:21पूर्ति नहीं करवाएगा लेकिन प्रेत तो

41:23करवाएगा।

41:24वो तो आपके शरीर में भी आएगा तो बोलेगा

41:26मेरे लिए यह लाओ मेरे लिए वो करो मेरे लिए

41:28यह करो। पितर ऐसा कभी नहीं करता है। दूसरी

41:31बात पितर जो होते हैं ना वो उत्पात नहीं

41:34मचाते हैं।

41:35प्रेत उत्पात मचाता है। तो अगर कोई आत्मा

41:39आकर उत्पात मचाए और कहे मैं पूर्वज हूं।

41:41जबरदस्ती अपनी उटपटांग इच्छाएं पूरी कराए।

41:44आपसे शराब मांगे। आपसे नॉनवेज मांगे। आपसे

41:48उटपटांग चीजें मांगे आप कहो अरे पितृ तो

41:50पवित्र आत्मा है वो ऐसा क्यों कर रही है

41:52तो ऐसी स्थिति में आप समझ जाइए कि यह

41:54प्रेत है दूसरा पितृ जब किसी के शरीर में

41:57आए या आपके घर में आए तो कभी आपको ऐसे

41:59खतरनाक रोग नहीं देते हैं कि आदमी की

42:01आंखें के नीचे गहरा गड्ढा हो गया बीमारी

42:04हो गई है घर में जो है वो ऐसीऐसी घटनाएं

42:08हो रही है जो बिल्कुल भी अचानक से होने

42:10लगी पहले नहीं हो रही थी पित ऐसा नहीं

42:12करते हैं पित अगर घर में है भी चुपचाप

42:15किसी अपना जो उनका वायु शरीर होता है उसके

42:17साथ कहीं पर रहेंगे वह आपको पीड़ित या

42:19परेशान नहीं करेंगे। कुपित भी होंगे ना तो

42:22ऐसा दर्शाद नहीं देंगे कि मैं बहुत नाराज

42:24हूं। देखो मैंने आपके शरीर पर कब्जा कर

42:26लिया। आपको बीमार कर दिया है और वह

42:28प्रेतावेश में आकर के व्यक्ति जो है ऊपर

42:30उछलता है, दौड़ता है, भागता है, चीखता है,

42:33चिल्लाता है। ऐसा नहीं होता है।

42:35तो पितृ दोष और प्रेत दोष को आप इस तरीके

42:37से समझ सकते हैं। लेकिन कई लोग पितृ दोष

42:40को प्रेत दोष समझ लेते हैं। प्रेत दोष को

42:41पितृ दोष समझ लेते हैं। तो उन्हें जो ये

42:43मैंने बातें बताई है, लक्षण बताए हैं।

42:46इसके आधार पर जो है उसे समझना जरूरी है।

42:48और सबसे बड़ी बात

42:49आप अपने घर में प्रेत दोष के निवारण का

42:52उपाय कीजिए। पित होगा ना चुपचाप उसको कोई

42:55दिक्कत नहीं इन उपायों से प्रेत दोष होगा

42:57ना ये हनुमान जी की पूजा बंद कर दो ये

43:00भैरव जी की पूजा बंद कर दो या फलानी पूजा

43:02बंद कर दो वो कहेगा पितर नहीं कहेंगे

43:05किसी के शरीर में आकर वो कहते हैं

43:07और इसका जो सबसे बड़ा कारण आज घरों में हो

43:09रहा है

43:10कि पितृ दोष प्रेत दोष मिक्स हो गया है

43:12उसका रीजन मैं आपको बताता हूं हम वास्तव

43:14में पितृ का जो पूजा है पितरों की जो पूजा

43:17है और पितृ दोष निवारण है हम शास्त्रों का

43:20जो सिस्टम है उसको भुला चुके कंप्लीटली

43:22बड़े-बड़े पंडित भी इस सिस्टम को भुला

43:24चुके हैं।

43:25कारण क्या है? पितरों की समस्त पूजा सूर्य

43:29के सानिध्य में की जाती है। हम तो सूर्य

43:31की रोशनी से जो नीचे का पका हुआ जो कोई भी

43:34अन्न है या सब्जी उसे भी हम कहते हैं कि

43:37भाई उस उस सब्जी को या उसको काम में मत

43:39लो।

43:39मैं तो कहता हूं आलू भी आप काम में मत लो।

43:41जो भी जमीन के नीचे उगता है उसको काम में

43:43मत लो। सूर्य की जो ऊर्जा है ना वही

43:45पितरों की मुक्ति का मुख्य आधार है।

43:47अच्छा

43:48और आप ध्यान रखिए कभी हमारे यहां पर

43:51अधिकतर जगह हम

43:52सूर्यास्त के बाद में अंत्यष्टि नहीं की

43:54जाती है।

43:55हां जी बिल्कुल

43:56हमारे यहां पर कोई भी श्राद्ध कर्म कोई भी

43:59तर्पण सूर्यास्त के बाद नहीं करते। दोपहर

44:03के समय करते हैं। सूर्य प्रचंड होता है।

44:05कुतुब काल कहते हैं, अभिजीत काल कहते हैं।

44:07उस समय सारी क्रिया की जाती है। यानी कि

44:09सूर्य के सानिध्य में समस्त काम करते हैं।

44:11लेकिन आजकल उल्टा हो गया है। हमारे

44:12राजस्थान की जयपुर की बात कर लूं मैं। जब

44:15भी घर में कोई मांगलिक काम होना होगा तो

44:16हमारे यहां नादि श्राद्ध किया जाता है वो

44:18दिन में करते हैं। हमारे यहां क्या होता

44:19है? रात जगाई जाती है। रात में क्या

44:21करेंगे? अग्नि जलाते हैं। अग्नि किसका मुख

44:23है?

44:24देवताओं का है या दिव्य पितरों का? उसका

44:26आपके पितरों से कोई लेना देना नहीं। उसमें

44:27पितरों की वो देंगे आहुति।

44:29अच्छा। अच्छा

44:29सबसे बड़ी गलती कर रहे हैं। दूसरी बात आप

44:32चंद्रमा के सानिध्य में अर्ध रात्रि में

44:34प्रयोग कर रहे हो। भाई अर्ध रात्रि का जो

44:36भोग होता है ना प्रेत लेते हैं। पितर नहीं

44:38लेते हैं।

44:38ओ

44:39पितर नहीं लेते हैं। अर्ध रात्रि के समय

44:41आप पितरों के निमित्त जो भी काम कर रहे

44:43हैं वो सिर्फ प्रेत के निमित्त कर रहे हो।

44:45पितरों के निमित्त वो नहीं हो रहा है।

44:47हमारे यहां पर अमावस्या से एक दिन पहले

44:50रात जगाई जाती है। राजस्थान में ऐसा होता

44:52है और भी कई जगह होता होगा और पितरों के

44:54भजन गाए जाते हैं और पर्टिकुलर किसी लोगों

44:57में आत्माएं आनी शुरू कर देती हैं।

44:59अच्छा

44:59वो झूमते हैं, नाचते हैं, गाते हैं और ऐसा

45:02मानते हैं भाई कोई आत्मा आ गई। पितर आ गए।

45:03फलाने के पितर आ गए इसमें।

45:05और वो पितर आ गए भविष्य भी बताते हैं।

45:07अच्छा।

45:07हो सकता है पितर आते हो। मैं मना नहीं

45:09करूंगा। लेकिन रात में जो भी आप ये

45:11क्रियाएं कर रहे हैं ना अपने पितर को आप

45:13प्रेत बना रहे हो। आप प्रेत शक्ति को जगा

45:16रहे हो। कभी भी जो पितरों के निमित्त पूजा

45:20कर्म कुछ भी किया जा रहा है वह रात्रि में

45:22नहीं करना है। सिर्फ और सिर्फ सूर्य के

45:24सानिध्य सूर्य भगवान के सानिध्य में करना

45:26है। ऐसा हमारे शास्त्र कहते हैं।

45:29आपको इसका एक बहुत अच्छा उदाहरण मैं बताता

45:31हूं।

45:31नारद पुराण में इस घटना का उल्लेख है।

45:33भगवान श्री राम अपने पिता दशरथ जी का

45:36श्राद्ध करने गया जी गए।

45:38और गया जी गए तो वो श्राद्ध कर रहे थे।

45:40पंडित जी बता रहे थे अब ऐसे करो। अब ऐसे

45:41करो। और अब ये पिंड है। इसको यहां रखना है

45:43आपको। तो उसी समय उनके पिता प्रकट हुए

45:46स्वर्ग से और उन्होंने हाथ आगे किया ऐसे

45:49कि ये पिंड मेरे हाथ में रख दे।

45:50भगवान श्री राम ने जो है वो पिंड देखा भी

45:54नहीं। उस हाथ की तरफ भी ध्यान नहीं दिया।

45:57कोई बातचीत नहीं की और वो पिंड जहां रखना

45:59था वहीं रखा।

46:00अच्छा।

46:00यह कथा मिलती है नारद पुराण में जो गीता

46:04प्रेस गोरखपुर में जो श्राद्ध से संबंधित

46:06एक पुस्तक जो कल्याण के नाम से अंक आते

46:09हैं उन्होंने निकाला था। उसके आवरण पृष्ठ

46:11पर यही भगवान श्री राम का फोटो दशरथ जी का

46:14फोटो दिया है और इसकी कथा अंदर भी दी है।

46:17आप उसमें देखेंगे कि उसमें बात बताई गई है

46:19कि देखो भगवान श्री राम जो हैं उन्होंने

46:22भी शास्त्रों का ही अनुसरण किया है। अपने

46:25पिता स्वर्ग से प्रकट होकर हाथ निकाल रहे

46:27हैं। उनके हाथ में वो जो है पिंड नहीं रखा

46:28है। उन्होंने जहां रखा जाना चाहिए जहां

46:30पंडित जी ने बताया कि पिंड यहां रखना है।

46:32यह मंत्र क्रिया ऐसे करनी है। यह उपाय ऐसे

46:34करना है। वही किया है। तो भाई जब भगवान

46:37श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम जो जब इस

46:39क्रिया का अनुसरण कर रहे हैं तो आप

46:41शास्त्र को जो है क्यों झुठला रहे हैं?

46:43अगर आप गलत तरीके से अपने पितरों का

46:45निवारण करने जाओगे तो आपको संतुष्टि कैसे

46:48मिलेगी? उल्टा आप तो इससे ज्यादा आपका जो

46:50है पता लगा करने तो हम गए थे पितरों के

46:53निमित्त उपाय और पता लगा कि पितृ दोष तो

46:55था ही था। प्रेत दोष भी ले आए।

46:57वैसा आपके साथ सीन हो जाएगा।

46:59तो जो शास्त्र सम्मत है उन्हीं उपायों को

47:02करने का प्रयास करें। आपको नहीं जानकारी

47:05है कोई दिक्कत नहीं है। हमारे प्रकाशन की

47:08पुस्तक है पितृदोष पीड़ा मुक्ति के उपाय।

47:10आप वो पुस्तक मंगाइए, पढ़िए। मात्र 256

47:14पेज की पुस्तक है। उसमें इन सब बातों का

47:16जो रिसर्च के आधार पर

47:18जो प्रमाण के आधार पर हमने बताया है और

47:20उनका अनुसरण करते हैं तो बहुत लाभ होता

47:23है। और पिछले 2012 में मैंने पुस्तक लिखी

47:25तब से लेकर आज तक अनेक व्यक्तियों को लाभ

47:28हुआ है। मेरे पास कॉल आती है।

47:29मैंने इसे कभी अपना बिजनेस नहीं बनाया।

47:31मैं पंडित नहीं हूं। मैं पुरोहित्य कर्म

47:33नहीं करता। मैं कभी नहीं कहता मेरे पास

47:34आके आप मैं तो कह देता हूं यह उपाय है

47:36जाके अपने पंडित जी से करा लीजिए और देखिए

47:39हजारों लोगों को इसका लाभ हुआ है और जैसा

47:42जैसा आपको मैंने बताया उन बातों का अनुसरण

47:44करेंगे तो मैं कहता हूं 100% कितना ही

47:46विकट से विकट पितृ दोष हो मेरे पास कोई

47:49व्यक्ति आया और उसको पितृ दोष है तो मैं

47:51कहता हूं कि तीन महीना मैंने कोई उपाय

47:53बताया और उसको लाभ ना हुआ हो ऐसा कभी नहीं

47:55हुआ है। लाभ होगा क्योंकि आपने शास्त्रों

47:57का अनुसरण किया है तो इसके आधार पर 100%

48:00आपको लाभ होगा। ओके। अच्छा मैं थोड़ा

48:03जानना चाहूंगा कि जैसे कि किसी का बिजनेस

Pitra dosh ka upay

48:06जो है वो सही नहीं चल रहा या घर में पैसों

48:08की कमी हो रही है। दरिद्रता आ रही है जो

48:10काम खोल रहे हैं वो बंद हो जा रहा है तो

48:12इसका मतलब वो पितृ दोष से रिलेटेड अगर हो

48:14रहा है तो उसका उपाय क्या है वो थोड़ा

48:16समझिए।

48:17हमारे शास्त्रों में कई तरह के श्राप

48:19योगों का वर्णन है जिसमें एक पितृ श्राप

48:21या पितृ दोष भी है।

48:22तो सबसे पहले तो ये पता लगाइए कि आपके

48:25समस्या का कारण क्या है? जैसे डॉक्टर क्या

48:27करते हैं? बीमार व्यक्ति जाता है तो उसे

48:28डायग्नोस करते हैं

48:29कि भाई इसकी बीमारी का कारण क्या है? कोई

48:31जीवाणु है, कीटाणु है, कोई इंफेक्शन है?

48:34क्या है? इसका रीज़न क्या है?

48:36रीज़ को पता लगाएंगे तभी तो मेडिसिन देंगे।

48:38तो आपकी चाहे किसी का बिजनेस ना चल रहा

48:40हो, नौकरी नहीं लग रही हो, विवाह नहीं हो

48:42रहा है, संतान नहीं हो रही। सबसे पहले

48:43डायग्नोस कीजिए। हमारे यहां तो

48:45ज्योतिषियों के पास में एक ही टेबलेट है।

48:47पैरासिटामॉल की तरह पितृ दोष लो दे दो, सब

48:50ठीक हो जाएगा। ऐसा नहीं है। आपको सबसे

48:52पहले डायग्नोस करना पड़ेगा। अगर आपने पितृ

48:54दोष को डायग्नोस किया है

48:56तो ऐसी स्थिति में आप उसको पितृ दोष का

48:58उपाय बताएं शास्त्र तरीके से बताएं और मैं

49:00कहता हूं कि नित्य कर्म वाला पितृ दोष मैं

49:02कहता हूं अपने दाहिने हाथ में जल लो जल

49:05रखो तीन बार पितृभधा बोल के इस अंगूठे से

49:09आप ऐसे छोड़ दो

49:10एक बार दोबारा बताइए क्या बोलना है

49:11अपने दाहिने हाथ में जल लीजिए

49:13ठीक है

49:14सुबह

49:14पूर्व दिशा की तरफ आपका मुंह होना चाहिए

49:16नित्य जो नित्य आपको तर्पण बता रहा हूं

49:19पूर्व दिशा की तरफ देख के कर सकते हैं जल

49:21लेकर के और ये जो अंगूठा है ये हमारा

49:23हमारा पितृ तीर्थ होता है इस जगह

49:24थोड़ा आप ऊपर दिखा दीजिए स्क्रीन

49:26ये जो हमारा हाथ है यह हमारा पितृ तीर्थ

49:29होता है तो यहां पर हम जल लेंगे और अंगूठे

49:32की तरफ से जो है किसी पात्र में छोड़ेंगे

49:35पितृभ्य स्वधा पितृभ्य स्वधा और पितृभ्य

49:39स्वधा और जो पितृ गायत्री मंत्र है ओम

49:41देवताभ्य पितृभश्च महा योगीभ्यवच नमः

49:45स्वाहाय स्वधाय नित्यमेव नमो नमः ऐसा

49:48मंत्र बोल करके अपने पितरों को प्रणाम कर

49:50लो हम

49:52कि एक मिनट का उपाय भाई बताएं ना

49:53जी

49:54जो कर लेगा ना चमत्कारिक और मिरेकल उपाय

49:57ओके

49:57मैं कहता हूं इतना छोटा सा उपाय जब आपको

49:59लाभ दे रहा है तो क्यों उलझने की जरूरत है

50:01और भी बहुत सारे उपाय हैं इससे रिलेटेड

50:03छोटे-छोटे शास्त्रोक्त उपाय उनको करो

50:06संतुष्ट आपके पितर भी होंगे आपकी तरक्की

50:08भी करेंगे

50:09चाहे आपका बिजनेस बाधित हुआ है

50:11चाहे आपका जो है घर में विवाह नहीं हो रहा

50:13है कोई भी प्रॉब्लम है अगर आप पितरों से

50:15संबंधित बहुत छोटे-छोटे से उपाय होते हैं

50:17वो करोगे तो इससे निश्चित रूप से आपका भला

50:20होगा अगर वह पितृ दोष के कारण हो रहा है

50:22तो मैं 90 90 दिन बोलता हूं आपको कितना ही

50:24विकट से विकट पितृ दोष हो 90 दिन अगर आपने

50:27ऐसे उपाय कर लिए सरल और सिंपल तो इससे

50:29आपका जीवन 100% परिवर्तित होगा और पितृ

50:33दोष आपका समाप्त हो के आपको पितरों का

50:35आशीर्वाद मिलेगा।

50:36ओके तो जो आपने अभी उपाय बताया ये सब में

50:38काम करेगा। किसी का विवाह ना हो रहा हो या

50:41घर में कोई दरिद्रता आ रही हो सब में काम

50:42अगर पितरों के कारण वह इशू है।

50:44अगर हां पितों का ही

50:46आपको उदाहरण बताऊं। मेरे कई क्लाइंट हैं।

50:48मैं पहले मैं अपना ही उदाहरण दे दूं। हम

50:502011 में मेरा विवाह हुआ। संतान नहीं हो

50:53रही थी। 3 साल हो गए थे।

50:54अच्छा।

50:54तो हम एक पितरों का पूजन करवाना चाह रहे

50:57थे। किसी कारणवश जो है हमने पितरों का

51:00पूजन सामूहिक ना करा के व्यक्तिगत कराया।

51:02तो मेरे

51:03जो है वो संतान में इशू आ रहा था। वाइफ को

51:05भी हेल्थ इश्यूज थे। कुछ

51:06हमने टेस्ट भी करवाया था। उनको थायराइड या

51:08और भी तरह के इश्यूज थे। हमको डॉक्टर ने

51:11सितेंंबर 2000 जो है 13 में उनको मिसकरेज

51:14हुआ। तो डॉक्टरों ने कहा कि अभी आप 6 आठ

51:17महीने संतान के लिए ट्राई ना करें। नहीं

51:19हो सकती है।

51:19हम

51:20मैंने सितंबर के मंथ में ही वह अक्टूबर के

51:23पहले सप्ताह में मैंने अपना यह पूजन

51:25करवाया

51:26और जब हमसे पंडित जी ने पूछा कि भाई आप

51:28अपना क्या मनोरथ चाहते हैं? इसमें ये होता

51:30है कि आप अपनी कामना कहिए क्या चाहते हैं?

51:33तो हमने कहा भाई संतान की बहुत दिक्कत आ

51:35रही है। हमें संतान हो। बोले ठीक है इस

51:37कामना से हम ये पूजन करते हैं और मिरेकल

51:39देखिए कि उसके तीन महीने बाद प्रेगनेंसी

51:41हुई और 9 महीने बाद यानी कि सितंबर 2014

51:44में मुझे पुत्र की प्राप्ति हुई। बिल्कुल

51:46स्वस्थ और इंटेलिजेंट पुत्र की जो अब लगभग

51:4911 साल का हो चुका है। तो कहने का मतलब वो

51:51लाभ मुझे मिला। मैंने मेरे कई क्लाइंट्स

51:53जिनको पितृ दोष की आशंका थी जिसको मुझे

51:56लगा कि उनको कराना चाहिए कराया। सभी को

51:58लाभ हुआ। किसी का व्यापार नहीं चल रहा था।

52:00मैंने उनका कराया लाभ हुआ। कहने का मतलब

52:02वो पारवण श्राद्ध था। बहुत सिंपल जो

52:04श्राद्ध होता है वो था। एक छोटे से उपाय

52:07से मैंने इतने बड़े-बड़े चमत्कार देखे हैं

52:09और एक नहीं 100 से ज्यादा क्लाइंट्स जो

52:12मेरे यजमान है जिनको मैंने यह उपाय बताया

52:15उनका यह निवारण हुआ मतलब कहने का मतलब

52:17चाहे आपका बिजनेस ना चल रहा हो चाहे आपको

52:19हेल्थ इशू हो अगर पितरों के कारण हैं तो

52:21आप छोटा सा पितरों का उपाय कराओ और जो

52:23डेली के उपाय हैं चाहे पितृ गायत्री मंत्र

52:26है पितृ स्तोत्र का पाठ है वो करो तो लाभ

52:28होगा उसका कारण आपको बताता हूं कि जब आप

52:31पूजा करते हो तो हम दिव्य पितर से

52:33प्रार्थना करते हैं कि भाई ऐसा है दिव्य

52:35दिव्य पितर जी ये हमारे जो पितर है ना

52:37इनको पितृक में शरण दीजिए और इनका भला

52:39कीजिए। वो एप्लीकेशन हम देते हैं। शास्त्र

52:41कैसे काम करते हैं अभी आपको बताता हूं। तो

52:43हम दिव्य पितर को कहते हैं। तो दिव्य पितर

52:45सुनता है। अच्छा ये फलाने के पितर हैं।

52:48प्रेत योनि में पड़े हैं। हमारे पास इसका

52:49एप्लीकेशन आया तो चलो हम इनका भला कर देते

52:51हैं।

52:52और वो अपने हिसाब से भला करते हैं और उनकी

52:54मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। तो

52:56धीरे धीरे धीरे उनका जो भी दिक्कत पू

52:58समस्या होता है जो मुक्ति प्राप्त नहीं हो

53:00रही होती। मुक्ति होती है। अगर आपने अपने

53:03जो आपका पूर्वज प्रेत योनि में बैठा है,

53:05उसका कनेक्शन आपने सीधा आपके दिव्य पितरों

53:08से करा दिया और मध्यम श्रेणी के पितरों से

53:10करा दिया तो पक्का मान करके चलिए कि वह जो

53:13आपका पूर्वज है, चाहे वह किसी प्रेत की

53:16चंगुल में हो, चाहे किसी तांत्रिक ने उसकी

53:18आत्मा को वश में कर लिया हो। वह उसके

53:20चंगुल से मुक्त होकर के दिव्य पितरों के

53:22आशीर्वाद से उसको मुक्ति मिलेगी और आपका

53:25बहुत भला होगा और आपके जीवन में आपको

53:28चमत्कारिक जो है उसके परिणाम देखने को

53:30मिलेंगे।

53:30ओके तो मैं चलते-चलते आपसे बस एक छोटा

53:33लेना चाहूंगा कि आप अगर तीनचार अगर

53:35छोटे-छोटे उपाय बताना चाहे कि जो पितृ दोष

53:38से जो पीड़ित है जो कि जैसे संतान नहीं हो

53:41रही या मैरिज में प्रॉब्लम आ रही है या

53:42एजुकेशन ठीक नहीं है या पैसा रुका हुआ है

53:44इन सबके लिए दो चार छोटे-छोटे आप उपाय बता

53:47दीजिए। मैं तो ये कहूंगा कि आपको पितृ दोष

53:49है या नहीं है उस विषय को छोड़ दो एक बार

53:51हमें नित्य जो है वो पितरों का पूजन करना

53:54है। अभी आपको जो तर्पण बताया वो करना है।

53:56पितरों के निमित्त जो है

53:58आपका कोई भी दिक्कत है। समझ लीजिए आपका

54:00विवाह नहीं हो रहा है। व्यापार नहीं चल

54:02रहा कुछ भी नहीं चल रहा और पितृ दोष को

54:03देखने की भी जरूरत नहीं है। अपने पितरों

54:05से प्रार्थना करो कि हे पितृ देव मुझे ये

54:07दिक्कत है और शास्त्र में ऐसा प्रमाण भी

54:09है कि आप कोई भी देवी देवता है ना उसके

54:12पास जाओगे आपका काम करे नहीं करे गारंटी

54:14नहीं है। वहां तो बहुत सारी एप्लीकेशन है

54:15ऑलरेडी। जी

54:16लेकिन अगर आप अपने पितरों के पास जाओगे और

54:19दिव्य पितरों के पास जाओगे और कहोगे कि

54:20देखो मैं मुझे ये दिक्कत है मेरी हेल्प

54:23करो तो आपको निश्चित रूप से लाभ मिलेगा।

54:26जैसे आपने अपने घर में कोई श्राद्ध कराया

54:28और उस श्राद्ध में आप पहले ही बोलो पंडित

54:30जी को कि मेरा प्रयोजन इस बार है ना पंडित

54:32जी मेरे व्यापार में इतने करोड़ का

54:34टर्नओवर हो ये हो और मैं पूर्ण श्रद्धा से

54:36पितरों से प्रार्थना करता हूं और आप मेरा

54:38श्राद्ध करो वो श्राद्ध करेंगे ना 100%

54:41उसको वो लाभ होगा। अच्छा

54:42अगर और भी कोई दिक्कत है विवाह नहीं हो

54:44रहा तो बोलो विवाह के निमित्त हम यह पितृ

54:46कर रहे हैं तो हमको लाभ होगा। इसके अलावा

54:48आप जो है डेली रूटीन में जैसे आपको मैंने

54:50बताया नित्य तर्पण करें। पितरों का नित्य

54:52पूजन जो होता है वो करें।

54:54इसके अतिरिक्त आप एक पितरों का यंत्र आता

54:56है। उसकी स्थापना करके उसका नित्य पूजन कर

54:58सकते हैं।

54:59कौन सा यंत्र है? पितरों का यंत्र होता

55:01है। आप हमारे पास से या मार्केट में भी

55:03मिलते हैं। आप कहीं से भी कलेक्ट पितरों

55:05की पातड़ी कई लोग बनाते हैं या वो यंत्र

55:07उसे कहते हैं। यह चांदी में बना हो तो

55:08ज्यादा श्रेष्ठ होता है। इसके अतिरिक्त

55:10पीपल के वृक्ष में पितरों का नित्य निवास

55:12माना है। आप पीपल में जो है वो घी का दीपक

55:15करें रविवार छोड़ के और आप जो है वो जल से

55:18सींच के तीन परिक्रमा करें। हाथ जोड़ें।

55:20पीपल में प्रार्थना करें कि है पीपल देवता

55:23में जो भी विराजमान मेरे पितर हैं वो

55:25हमारा भला करें। गौ सेवा करें आप। गौ सेवा

55:28में जो है गौ का दान करें। साल में

55:30₹100100 कोई लेता है। आप 3 महीना, 6

55:33महीना, एक साल किसी गौ की सेवा ले लीजिए।

55:35गौशाला में बोलिए भाई फलानी गाय की सेवा

55:37मैं लेता हूं। यह पैसा आपका मैं हर महीने

55:38भेज दिया करूंगा। मेरी तरफ से इसे पूर्ण

55:41जो है वो सेवा इसकी की जाए। इसको घास या

55:43जो भी भोज्य सामग्री है वो दी जाए। मैं

55:45इसका खर्चा उठाता हूं। ऐसा आप अपने पितरों

55:47के नाम से कर सकते हैं।

55:48अच्छा।

55:49इसके अतिरिक्त आप पितरों के नाम से दान

55:51करिए। जो भी असहाय लोग हैं उनको कर सकते

55:53हैं। ब्राह्मण को आप दान कर सकते हैं।

55:55श्रीमद् भगवत गीता का आप पाठ कर सकते हैं।

55:57भागवत पुराण आप करवा सकते हैं। अपने

55:59पितरों के निमित्त आप एकादशी का कोई भी

56:01व्रत भाई मैं साल में तीन एकादशी अपने

56:03पितरों के निमित्त करता हूं। और ये मेरे

56:05लिए नहीं कर रहा मैं। मैं अपने पितरों के

56:06निमित्त कर रहा हूं। ऐसा बोल के आप कर

56:08सकते हो। नित्य आप पितृ स्तोत्र होता है।

56:10मर्चिता मूर्ता नाम पितृणाम दीप्त तेजसाम

56:13जो कि मार्कंडेय पुराण में उल्लेखित है।

56:15इसका आप पाठ नित्य कर सकते हैं। पितृ

56:18गायत्री का आप नौ बार उच्चारण करिए जो

56:19मैंने अभी बोला था। तो ये तमाम उपाय ऐसे

56:21हैं छोटे-छोटे जिनसे मिरेकल यानी

56:23चमत्कारिक आपको परिणाम मिलेंगे। फिर भी

56:25बहुत दिक्कत है तो आप त्रिपिंडी श्राद्ध

56:27कराइए। पारवण श्राद्ध तो आप घर में करा

56:29सकते हैं। गया जी जाकर के अपने पितरों के

56:32निमित्त करो और सबसे अंत में जो है वह

56:34जाकर के बद्रीनाथ के अंदर जो है कपाल जो

56:37वहां का पितृ तीर्थ है वहां पे जाकर के जो

56:40है लास्ट श्राद्ध होता है वो होता है।

56:42लेकिन उसके पहले पारवण श्राद्ध से शुरुआत

56:44करिए। छया श्राद्ध करिए। उसके बाद में

56:46वहां जाना होता है। सीधा आप वहां जाकर के

56:48श्राद्ध नहीं करवा सकते हैं। लेकिन आप इस

56:50प्रोसेस के जरिए जो जो मैंने प्रोसेस

56:52बताया यह तमाम उपाय करेंगे ना तो कितना ही

56:55विकट पितृ दोष हो वह समाप्त होगा और आपको

56:57जीवन में निश्चित रूप से पितरों की कृपा

56:59प्राप्त होगी।

57:00बहुत ही अच्छी आपने आज की जानकारी दी। आई

57:03थिंक पितृ दोष से रिलेटेड या पितरों के

57:05बारे में जो भी इंफॉर्मेशन है इससे बढ़िया

57:08जो है नहीं मिल सकती जो इस पॉडकास्ट के

57:10अंदर मिल गई है। सर बहुत-बहुत धन्यवाद

57:12आपका। आप हमारे स्टूडियो में आए और एक से

57:14एक आपने इंफॉर्मेशन दी और आप लोगों को भी

57:16अगर यह पडकास्ट अच्छा लगा हो तो प्लीज

57:19कमेंट में जरूर बताइएगा और कुछ और

57:21इंफॉर्मेशन चाहते हैं ये जो सर सामने बैठे

57:24हैं ना इनके पास नॉलेज का भंडार है और

57:26किसी और अगर पडकास्ट आप चाहते हैं इनसे तो

57:29प्लीज कमेंट में जरूर बताइएगा बहुत-बहुत

57:31धन्यवाद थैंक यू सो मच आज हमारे स्टूडियो

57:34में आए सर धन्यवाद

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