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Business Correspondence | Business Communication | CSEET October 2026 | CS Payal Popli

CSEET by PW · 17,940 words · 82 min read

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0:02हेलो मेरे प्यारे बच्चों कैसे हो आप सब?

0:05मेरा नाम है सीएस पायल पोखली और आज के इस

0:08लेक्चर में मैं आप लोगों के लिए लेके आई

0:10हूं सीजीट बूस्टर सीरीज अभियान बैच का

0:14बिजनेस कम्युनिकेशन सब्जेक्ट का चैप्टर

0:17नंबर थ्री जिसका नाम है बिजनेस

0:20कॉरेस्पोंडेंस।

0:21और आज का यह लेक्चर इस चैप्टर का वन शॉट

0:26होने वाला है। मतलब एक ऐसा लेक्चर जिसमें

0:30हम पूरा का पूरा चैप्टर एक गो में फिनिश

0:33कर देते हैं। खत्म कर देते हैं बिना

0:36क्वालिटी से कॉम्प्रोमाइज किए हुए। ठीक

0:38है? तो आज के इस लेक्चर में आपके चैप्टर

0:41नंबर थ्री का खात्मा हो जाएगा बहुत ही

0:43बेहतरीन तरीके से। बट बिफोर आई स्टार्ट

0:46विद दिस चैप्टर यहां देख लीजिए मैंने कुछ

0:48लिखा हुआ है। लेक्चर नंबर थ्री दैट मींस

0:52बिजनेस कम्युनिकेशन के दो लेक्चर्स ऑलरेडी

0:55अपलोड हो चुके हैं YouTube पे। अगर किसी

0:58भी बच्चे ने उन्हें नहीं देखा है तो बेटा

1:00प्लीज जाके उन्हें देख लीजिए। रीज़न बीइंग

1:02वो आपका बेस सेट करेंगे और बेस अच्छा होगा

1:05ना तो उसके बाद आगे की पढ़ाई बहुत अच्छे से

1:08होगी। ठीक है? तो चैप्टर नंबर वन

1:10एसेंशियल्स ऑफ गुड इंग्लिश वो देख लीजिए।

1:13चैप्टर नंबर टू कम्युनिकेशन वो देख लीजिए।

1:16और उसके बाद आइएगा इस वाले चैप्टर पे

1:18जिसका नाम है बिजनेस कॉरेस्पोंडेंस।

1:21ओके? चलिए शुरू करते हैं। देखो मेरी ना एक

1:25आदत है। मैं जब भी कोई सब्जेक्ट पढ़ाती

1:27हूं या जब भी कोई चैप्टर पढ़ाती हूं पहले

1:30मैं ये मेक श्योर करती हूं कि सब्जेक्ट या

1:32चैप्टर का जो भी नाम है ना उसका मतलब

1:34बच्चों को बहुत अच्छे तरीके से पता हो।

1:36ताकि कल की डेट में अगर कोई इंसान तुम्हें

1:38ट्रेनवन में मिल जाता है और तुमसे पूछता

1:40है क्या पढ़ते हो? और तुम उन्हें बता रहे

1:42हो हम बिजनेस कॉरेस्पोंडेंस पढ़ रहे हैं

1:44और वो तुमसे सामने से पूछे इसका मतलब क्या

1:46होता है और वहां पे तुम म्यूट मोड पे चले

1:48जाओ बेइज्जती हो जाएगी ना तो पायल मैडम

1:51तुम्हारी बेइज्जती कैसे होने दे सकती है

1:53ना तो इसलिए पहले इसी का मतलब समझ लो कि

1:56क्या होता है बिजनेस कॉरेस्पोंडेंस ना दो

1:59वर्ड्स से मिलके बना है। वन इज़ बिजनेस

2:01अनदर वन इज़ कॉरेस्पोंडेंस। बिजनेस का मतलब

2:05होता है वही सेम जो 11वीं कक्षा में आपने

2:07पढ़ा था। एक ऐसी इकोनॉमिक एक्टिविटी

2:12जिसमें हम गुड्स एंड सर्विसेस का सेल एंड

2:16एक्सचेंज करते हैं और बदले में कमाते हैं

2:20मुनाफा प्रॉफिट। एक ऐसी इकोनॉमिक

2:24एक्टिविटी बोले तो एक ऐसी एक्टिविटी जिससे

2:26आपको पैसे मिलते हैं जिसमें गुड्स एंड

2:28सर्विज का लेनदेन होता है और बदले में

2:31कमाया जाता है प्रॉफिट। यह मतलब होता है

2:33बिजनेस का। ठीक है? ये तो क्लियर है। अब

2:36इसके बाद बात करते हैं हम सेकंड वर्ड के

2:39बारे में जो कि है कॉरेस्पोंडेंस। इसका

2:41क्या मतलब होता है? तो बेटा एक बात बताओ

2:44मुझे कभी तुम्हारे साथ ऐसा हुआ है

2:49कि तुम्हें अपने माता-पिता से किसी चीज की

2:54परमिशन लेनी है।

2:57जो कि तुम्हें लग रहा है तुम्हें नहीं

2:59मिलेगी। बट स्टिल तुम एक ट्राई मारना

3:04चाहते हो। एक बार तो पूछ के देखना चाहते

3:07हो। फॉर एग्जांपल तुम्हारे सारे फ्रेंड्स

3:09गोवा घूमने जा रहे थे। इफ तुम्हारा बजट कम

3:12है या थाईलैंड घूमने जा रहे थे। इफ

3:13तुम्हारा बजट अच्छा है। तो ऐसे में तुम भी

3:16अपने पेरेंट्स से परमिशन लेना चाह रहे थे

3:18कि क्या मैं भी उनके साथ चला जाऊं क्या

3:20घूमने के लिए? और द मिनट यू केम इन फ्रंट

3:24ऑफ़ देम। और तुमने पूछना शुरू किया उनसे कि

3:27पापा मम्मी आपको पता है मेरे सारे

3:30फ्रेंड्स ना वहां घूमने जा रहे हैं। और

3:34जैसे ही तुमने फुल स्टॉप लगाया इस सेंटेंस

3:36में तुम्हारे पेरेंट्स जो अभी तक स्माइल

3:39कर रहे थे वो एकदम से यूं हो गए। क्या बोल

3:42रहा है तू? मतलब काइंड ऑफ़ वो समझ गए कि

3:45तुम्हारे आगे के शब्द क्या होने वाले हैं।

3:47तुम उनसे परमिशन लेने वाले हो कि क्या तुम

3:49भी उनके साथ जा सकते हो। तो इस वजह से

3:51उनके पूरे एक्सप्रेशन बदल गए। बट यहां से

3:54तुम्हें जरूर पता चल गया कि अब मैं यह

3:56सेंटेंस कंप्लीट नहीं कर सकता। अब मैंने

3:59बोला ना तो पापा की चप्पल और मम्मी का

4:01बेलन दोनों पड़ेगा मुझसे। तो आपने बात ही

4:04पलट दी। आपने बोला वो मुझसे भी पूछ रहे थे

4:06जाने के लिए बट मैंने तो बोला नहीं मैं

4:08ऐसी जगहों पे नहीं जाता। मुझे तो पढ़ाई

4:10करनी है और आप फिर वहां से भाग लिए। हुआ

4:13है कभी तुम्हारे साथ ऐसा? अब तुम मुझे एक

4:16बात बताओ। ये जो तुमने बात पलटी है जो

4:18तुमने एकदम से यू नो 360 शिफ्ट लाया है।

4:21जज्बात बदल दिए। ये बदल दिया, वो बदल

4:23दिया। वो किस वजह से बदला? क्योंकि

4:26तुम्हारे पेरेंट्स के एक्सप्रेशनंस चेंज

4:28हो गए थे। तो तुमने एक्सप्रेशनंस देखे और

4:30तुमने अपनी बात पलट दी। है ना? बट ये चीज

4:33पॉसिबल कब है? जब सामने वाला इंसान

4:36तुम्हारे सामने खड़ा हो या तुम उसे देख

4:38पाओ। अगर तुम लिखित में किसी से परमिशन ले

4:42रहे हो। लिखित में किसी से बातचीत कर रहे

4:44हो। तो क्या तुम उसके एक्सप्रेशन देख सकते

4:47हो? तुम ये देख सकते हो कि वो क्या फील कर

4:50रहा है या वो कैसे एक्सप्रेस कर रहा है

4:52यूजिंग द फेशियल एक्सप्रेशनंस नहीं ना

4:55इसलिए जब भी हम लिखते हैं किसी को कोई

4:58मैसेज तो उसे बहुत सोच समझ के लिखना चाहिए

5:04क्योंकि उसमें यू टर्न लेने की पॉसिबिलिटी

5:07बहुत ज्यादा कम होती है। अब भाई अगर कोई

5:10बच्चा बोलेगा कि मैम WhatsApp मैसेजेस को

5:12तो हम डिलीट कर सकते हैं। तो यू टर्न तो

5:15ले लिया ना हमने। तो बेटा फिर भी सामने

5:17वाले को ये तो समझ में आ जाता है ना यू

5:19डिलीटेड समथिंग। राइट? तो मतलब पता तो चल

5:22ही गया ना कि कुछ तो बोल रहे थे। तुम्हारे

5:24मन में कुछ तो था। राइट? सो जब भी लिखित

5:27में हम किसी से वार्तालाप करते हैं,

5:29कम्यनिकेट करते हैं तो हमें बहुत सोच समझ

5:32के करना चाहिए वो काम। ठीक है? वही सीखने

5:36वाले हैं आज के इस चैप्टर में हम कि जब भी

5:40कोई इंसान अच्छा बाय द वे कॉरेस्पोंडेंस

5:42वर्ड का मतलब क्या होता है? इसका मतलब

5:45होता है रिटन कम्युनिकेशन

5:48लिखित में की गई कम्युनिकेशन।

5:51सो बिजनेस कॉरेस्पोंडेंस का मतलब क्या

5:55होगा? बिजनेस से रिलेटेड जो हम रिटन में

5:58कम्युनिकेशन करते हैं वो हमें कैसे करनी

6:02चाहिए? किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

6:04क्या-क्या रूल्स हैं इस चीज से रिलेटेड?

6:07किस-किस फॉर्म में हम कम्युनिकेट कर सकते

6:09हैं रिटन वे में? वो सारी चीजें आपको इस

6:11चैप्टर में पढ़ने को मिलेंगी। ओके? चलिए

6:15अब हम जान लेते हैं कि सबसे पहले हम

6:17कौन-कौन से अ यू नो रिटन कम्युनिकेशंस

6:20पढ़ने वाले हैं। तो बेटा देखो सबसे पहले

6:23हम पढ़ेंगे लेटर जो कि बहुत ज्यादा

6:26इस्तेमाल होता है बिजनेस में। फिर हम

6:28पढ़ेंगे मैसेजेस

6:30जो अगेन बहुत ज्यादा इस्तेमाल होते हैं।

6:33फिर हम पढ़ेंगे रिपोर्ट।

6:36इसके बाद भी बहुत कुछ है लेकिन शुरुआत हम

6:39इन तीनों से करने वाले हैं। एंड नाउ वी

6:41विल स्टार्ट विद लेटर। बिजनेस लेटर। एक

6:45ऐसा लेटर जो कि हमने लिखा है बिजनेस के

6:49पर्पस से। फॉर एग्जांपल यह एक कंपनी है

6:54एक्स व जी।

6:56X व जी

6:58एबीसी कंपनी को

7:02एबीसी कंपनी को कुछ बोलना चाहती है लेकिन

7:06लिखित में बोलना चाहती है तो वो क्या

7:09करेगी इसे बिजनेस लेटर लिखेगी ताकि वो इसे

7:14पढ़ के उसका रिप्लाई कर सके। अच्छा कुछ

7:18लोगों के दिमाग में यह भी बात आ सकती है

7:19कि अरे फोन पे बात कर लो ना क्या तकलीफ

7:21है? मतलब आसानी से हो जाएगी। 2 मिनट में

7:24बात भी खत्म हो जाएगी। कौन लेटर लिखने का

7:26झंझट पा ले? तो बेटा कई बार ऐसा होता है

7:29कि हमें ना कुछ चीजें लिखित में रखनी

7:31पड़ती हैं ताकि एविडेंस बन सके। तुमने

7:34उनसे क्या बातचीत करी है फोन पे वो तो तुम

7:37दोनों के बीच में होगी। कल सामने वाला

7:38इंसान पलट गया या तुम ही पलट गए तो कौन

7:41जिम्मेदार होगा उस चीज के लिए? इसलिए कुछ

7:43चीजें हमें लिखित में करनी चाहिए ताकि कोई

7:46इंसान बाद में पलट नहीं सके। ठीक है?

7:49इसलिए एबीसी कंपनी या एक्स व जी कंपनी जब

7:51आपस में वार्तालाप करेगी तो वो लिखित में

7:54बिजनेस लेटर के थ्रू उस वार्तालाप को कर

7:56सकती है। ठीक है? अच्छा हर किसी वर्ड मतलब

8:00हर कोई जो टॉपिक हम पढ़ेंगे उसमें बिजनेस

8:02वर्ड तो आएगा ही आएगा और उसका मतलब हमेशा

8:05सेम रहेगा कि बिजनेस पर्पस से किया गया

8:08काम। ओके? चलो यहां पे ये बोलते हैं अ

8:11बिनेस लेटर इज यूजुअली अ लेटर फ्रॉम वन

8:14बिनेस एंटिटी टू अनदर और बिटवीन सच

8:17ऑर्गेनाइजेशंस एंड देयर कस्टमर्स और

8:20क्लाइंट्स एंड अदर रिलेटेड पार्टीज। जैसे

8:23मैंने यहां पे आपको एग्जांपल दिया ना एक्स

8:25व जी कंपनी ने ए बी सी कंपनी को लेटर लिखा

8:28है वैसे ही वो चाहे तो अपने क्लाइंट्स को

8:30भी लेटर लिख सकती है। वैसे ही वो चाहे तो

8:32अपने कस्टमर्स को भी लेटर लिख सकती हैं।

8:34तो हर वो नेचर का लेटर जो कि काम के पर्पस

8:38से लिखा गया है। काम से रिलेटेड चीज के

8:41लिए लिखा गया है उसे हम बिजनेस लेटर

8:43बुलाते हैं। बट बेटा मैंने तो आपको बताया

8:46ही नहीं कि लेटर का मतलब क्या होता है? तो

8:48बेटा यह बताने की जरूरत है क्या तुम लोगों

8:50को? बचपन से पढ़ते ही नहीं हो आए हो तुम।

8:53इंग्लिश में लेटर पढ़ाया जाता था। जब हम

8:55बीमार होते हैं। मुझे तो सबसे ज्यादा लेटर

8:58वही याद है क्योंकि मैंने पूरे अपने जीवन

8:59में सिक लीव्स बहुत लिखी हैं कि अरे आज

9:02मैं बीमार हूं। स्कूल नहीं आ पाऊंगी। तो

9:04उस टाइम पे हम क्या लिखते हैं? टू द

9:06प्रिंसिपल वी आर एस के इंटरनेशनल पब्लिक

9:08स्कूल। दिस दिस दिस दिस दिस। ऐसे ही करके

9:10लिखते हैं ना। तो ये क्या होता है? यह

9:12लेटर ही तो होता है। तो लेटर बताने की

9:14जरूरत है क्या? यह तो तुम लिखते ही हुए आए

9:16हो आज तक। राइट? चलो। अ बिजनेस लेटर इज

9:20समटाइ्स यूजफुल बिकॉज़ इट प्रोड्यूसेस अ

9:22परमानेंट रिटन रेकेट एंड मे बी टेकन मोर

9:27सीरियसली बाय द रेसिपिएंट देन अदर फॉर्म्स

9:30ऑफ़ कम्युनिकेशन। अभी जो बात मैं आप लोगों

9:32को बता रही थी कि कुछ चीजें लिखित में ही

9:34होनी चाहिए। क्योंकि तुम्हें नहीं पता

9:36सामने वाला इंसान कैसा है। कल तुम्हारी

9:38बात को किसी और वे में प्रेजेंट कर दे अगर

9:40वह ओरली की गई हो। तो तुम्हारे पास साबित

9:42करने के लिए यहां पे होगा कि देखो मैंने

9:44तो ऐसा बोला था ये सामने से अपनी तरफ से

9:46ऐड कर रहा है। मिर्च मसाला लगा रहा है। तो

9:48रिटन प्रूफ हो जाता है। रैकेट बन जाता है।

9:52दैट्स व्हाई ज्यादातर अगर आपको बातचीत

9:54करनी होती है फॉर्मल वे में तो आपको

9:56राइटिंग में ही करनी चाहिए। लेटर फॉर्मेट

9:59में ही करनी चाहिए। ओके? चलिए अब हम पढ़ते

10:03हैं कि एक अच्छा लेटर लिखने के लिए

10:06क्या-क्या चीजें आवश्यक होती हैं। आपके

10:10लेटर में कौन-कौन सी चीजें होनी चाहिए? ये

10:13अब हम पढ़ने वाले हैं यहां पे। इन्हें

10:15थोड़ा अच्छे से समझ लीजिएगा। ध्यान से देख

10:18लीजिएगा। क्योंकि पेपर में ना लेटर लिखने

10:20के लिए आता है। तो यहां पे जितनी भी चीजें

10:23मेंशंड होंगी ना आपको वो सारी लिखनी

10:25पड़ेंगी लेटर में। बकायदा ड्राफ्ट करना

10:28पड़ेगा लेटर। तो ये नहीं समझोगे ना तो

10:30लेटर अच्छे से ड्राफ्ट नहीं कर पाओगे।

10:32ओके? तो समझ लो क्या-क्या चीजें हैं। सबसे

10:35पहले है लेटर हेड। मैम ये क्या होता है?

10:38तो बेटा देखो जैसे मान लो

10:43मेरी एक कंपनी है जिसका नाम है पायल

10:47प्राइवेट लिमिटेड। ठीक है? तो मैं क्या

10:51करूंगी? अपनी कंपनी का नाम जो भी मेरी

10:54कंपनी का sin होगा। सिन क्या होता है मैम?

10:57कॉर्पोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर जैसे हर

11:00इंसान के पास उसका आधार होता है ना एक

11:03यूनिक आईडी उसकी जिससे उसकी पहचान होती है

11:06वैसे ही हर कंपनी के पास उसकी एक यूनिक

11:08पहचान होती है जिसे हम sin बुलाते हैं। तो

11:11अगर मेरी कंपनी है तो मैं sin लिखूंगी।

11:13उसके बाद मेरी कंपनी कहां लोकेटेड है?

11:16उसका एड्रेस लिखूंगी। कांटेक्ट नंबर

11:18लिखूंगी। ईमेल आईडी लिखूंगी। ठीक है? और

11:21यह सारी चीजें मैं कहां लिखूंगी? जो भी

11:24पेपर होगा ना उसमें सबसे ऊपर लिखूंगी।

11:27उसमें सबसे ऊपर लिखूंगी। क्या पॉसिबल है?

11:30मैं आपको एक लेटर हेड दिखा सकती हूं

11:32क्योंकि हमारे पास Google तो है ही यहां

11:34पे। व्हाई नॉट? लेट्स ट्राई इट। चलो एक

11:38लेटर हेड दिखाते हैं तुम्हें ताकि और

11:39क्लेरिटी मिल जाए। लेटर हेड। प्रैक्टिकली

11:44समझे ना यार जो भी समझ रहे हैं हम। हां

11:47जी। अब देख लीजिए यहां पे।

11:50यह देख रहे हो? डॉक्टर के पास जाते हो

11:52कभी-कभी दिख रहा है यह थोड़ा सा दिख रहा

11:54है थोड़ा बड़ा करके देखते हैं। हम हम

12:02चलो इसे थोड़ा बड़ा करके देख लेते हैं।

12:05ठीक है?

12:07ये देखो ये दिख रहा है लोगो नेम। लोगो

12:10नेम। आई डोंट नो तुम्हें दिख रहा है कि

12:12नहीं दिख रहा है। मैं तुम्हें बता देती

12:13हूं जो लिखा हुआ है। ठीक है? क्योंकि बहुत

12:14ब्लर हो रहा है। लोगो नेम योर टैगलाइन

12:17मतलब जो भी आपकी कंपनी का लोगो होगा।

12:18लोगों का मतलब आपकी कंपनी का जो भी नाम

12:20होगा प्लस आपकी जो टैगलाइन होगी आपका

12:23एड्रेस फोन नंबर ईमेल आईडी वेबसाइट पहले

12:25तो हम क्या करते थे ये सारी चीजें ऊपर ही

12:27लिखते थे लेकिन आजकल डिज़ाइन बनाने के

12:29चक्कर में खूबसूरत दिखाने के चक्कर में

12:32पेपर को हम उसको अलग-अलग जगहों पे लिख

12:34देते हैं। ठीक है? एक बैक करके और दिखा

12:37देती हूं तुम्हें शॉर्ट में। ड्रीम

12:38स्टूडियो यहां पे भी नंबर इन्होंने नीचे

12:40लिखे हुए हैं। यहां पे देखो यहां पे योर

12:44नेम योर कंपनी गोज़ दिस इन दैट। ये देखो

12:46ऐसे परफेक्ट बनते थे पहले की डेट में

12:48लेटर्स कि पूरी की पूरी इनेशन ये ऊपर ही

12:50मेंशन कर देते थे। कंपनी का नाम, कंपनी का

12:53लोगो कहां सिचुएटेड है? फोन नंबर, ईमेल

12:55आईडी जो जो एड्रेस वगैरह जो भी इंपॉर्टेंट

12:57चीज हैं वो सारी की सारी यहां लिख दी जाती

13:00है। इसे हम बुलाते हैं लेटर हेड। लेटर

13:04हेड। ये लेटर के सर पे आता है। दैट्स

13:07व्हाई इसे हम क्या बुलाते हैं? लेटर का

13:09हेड। लेटर हेड। ओके? क्या-क्या लिखा जाता

13:13है इसमें? आइए वो पढ़ लेते हैं। इसमें

13:15लिखा जाता है कंपनी के बारे में सब कुछ

13:19जैसे कि हमारा सिन, एड्रेस, कौन कांटेक्ट

13:23नंबर, ईमेल आईडी, कंपनी का नाम एंड जितनी

13:26और इंपॉर्टेंट चीजें आपको मेंशन करनी है

13:28वो सब लोगो भी आ जाता है यहां पे। ओके? तो

13:32आप कभी भी लेटर लिख रहे होते हैं तो सबसे

13:33पहले तो लेटर हेड होना चाहिए। यह यूजुअली

13:36प्रिंटेड ही होता है। ठीक है? बट क्योंकि

13:38आपको ड्राफ्ट करना है तो आपको बनाना

13:40पड़ेगा। वरना अगर आप किसी ऑर्गेनाइजेशन को

13:43ज्वाइन करते हैं और वहां पे आप लेटर

13:44ड्राफ्ट कर रहे होते हैं तो लेटर हेड

13:46ऑलरेडी उनके पास प्रिंटेड ही पड़े होते

13:48हैं। ठीक है? मेरे पास घर पे अगर कोई लेटर

13:50हेड पड़ा होगा ना मैं आप लोगों को उसका

13:52प्रिंट आउट दिखाऊंगी। ओके? सेकंड है

13:54रेफरेंस नंबर। अब भाई देखो

13:58एक कंपनी पता नहीं कितने सारे लेटर्स

14:00लिखती होगी। अब मुझे किसी एक्स व इंसान से

14:04बातचीत करनी थी। तो मैं उसको एक लेटर का

14:06रेफरेंस दे रही थी कि यार उस लेटर में

14:08मैंने तूने लिखा था। तू तुझे ये सब चीजें

14:10लिखी थी। तो वो पूछेगा ना यार कौन से वाले

14:13लेटर में यार तेरी कंपनी की तरफ से 10

14:15लेटर आते हैं। तू कौन से वाले लेटर की बात

14:17कर रही है? तो मुझे उसको रेफरेंस नंबर

14:20देना पड़ेगा। हर लेटर को ना एक नंबर दिया

14:23जाता है। फॉर से मैं आज के दिन में एक

14:25लेटर लिख रही हूं तो उसको नंबर वन दिया

14:27जाएगा। फिर मैंने दूसरा लेटर लिखा मैं

14:29नंबर टू दूंगी उसको। तीसरा लेटर लिखा तो

14:31नंबर थ्री दूंगी। तो अब इससे उसकी पहचान

14:34होगी। तो लेटर की पहचान जिस नंबर से होती

14:37है उसे हम रेफरेंस नंबर बोलते हैं। अगर

14:40मैं सामने वाले से बातचीत करना चाहती हूं

14:42कि उस लेटर में मैंने ये चीजें लिखी थी तो

14:43पहले मुझे उसे बताना पड़ेगा कि मैं कौन से

14:46वाले लेटर के बारे में बात कर रही हूं

14:48उसका रेफरेंस नंबर दे के ताकि वो सेम लेटर

14:51रीड करे जो मैंने उसे भेजा था उस

14:53पर्टिकुलर पर्पस के लिए। ठीक है? तो

14:55रेफरेंस नंबर लिखना जरूरी होता है। उसके

14:58बाद हम लिखते हैं डेट तारीख। और तारीख

15:01लिखने की भी एक तरीका होती है। जैसे कि 1

15:04जून 2025 मैं क्यों बोल रही हूं ऐसा?

15:08क्योंकि बेटा देखो इंडिया में क्या होता

15:11है ना इंडिया में हम अ जो डेट होती है वो

15:15पहले लिखते हैं, मंथ बीच में लिखते हैं और

15:18ईयर लास्ट में लिखते हैं। ठीक है? ये चीज

15:20होती है इंडिया में। लेकिन वहीं यूएस में

15:24पता है क्या होता है? पहले मंथ लिखा जाता

15:26है, फिर डेट लिखी जाती है, फिर ईयर लिखी

15:28जाती है। अगर मान लीजिए 5 तारीख छठवें

15:33महीने 1993 की बात हम करें। ठीक है? तो

15:37ऐसे में अगर मान लीजिए यूएस वाले पर्सन ने

15:40इसे पढ़ा तो वो क्या मानेगा कि पांचवें

15:42महीने की बात हो रही है। छठवीं डेट की बात

15:44हो रही है। और इंडियन इसे कैसे पढ़ेगा कि

15:47पांचवें दिन की बात हो रही है और छठवें

15:49महीने की बात हो रही है। राइट? तो थोड़ी

15:51सी कंफ्यूजन फैल जाएगी ना। इसलिए जब भी आप

15:54डेट लिखते हैं, आपको लिखनी चाहिए कैसे? 1

15:57जून

15:5925 मतलब यह चीज अल्फाबेट्स में लिखनी

16:02चाहिए। मंथ हमेशा अल्फाबेट्स में लिखना

16:06चाहिए ताकि कोई कंफ्यूजन ही नहीं रहे।

16:09चाहे वो इंडियन पढ़े या फिर अमेरिकन पढ़े।

16:11ओके? सो डेट इस प्रकार से लिखते हैं। फिर

16:14आती है स्पेशल मार्किंग। बोले तो कभी-कभी

16:17कुछ लेटर्स ना कॉन्फिडेंशियल होते हैं। वो

16:19आपके हाथ में पड़ जाए लेकिन जरूरी नहीं है

16:21आप ही को वो पढ़ना है। किसी रिस्पेक्टिव

16:23इंसान को हो सकता है वो पढ़ना हो। तो ऐसे

16:25कॉन्फिडेंशियल लेटर्स के ऊपर हम क्या

16:27लिखते हैं? स्पेशल मार्किंग देते हैं

16:29कॉन्फिडेंशियल लिख के कैपिटल लेटर्स में।

16:32जैसे ही आप ये वर्ड कॉन्फिडेंशियल

16:34पढ़ेंगे, दैट मींस आपको वो अलाउड नहीं

16:36पढ़ना है। मतलब बहुत जोर-जोर से नहीं

16:37पढ़ना है दुनिया भर के सामने। और जिस

16:39इंसान के लिए लिखा गया है कि वो इसे पढ़े,

16:41उसी को जाके हैंड ओवर कर देना है। ओके?

16:43फिर आता है इनसाइड एड्रेस। बोले तो जिस भी

16:47इंसान को आप लेटर लिख रहे हो फॉर से मैं

16:50लेटर लिख रही हूं मेरी एक दोस्त पमपम को

16:52तो पमपम का नाम, पमपम का एड्रेस कहां रहते

16:55हैं वो सारी डिटेल्स मुझे मेंशन करनी

16:57पड़ेगी यहां पे जिसे हम बोलते हैं इनसाइड

17:00एड्रेस। मतलब एक बार तो हम ये पूरा एड्रेस

17:03ऑनवलप पे लिखेंगे लेटर की कि जहां-कहां

17:05भिजवाना है ये। है ना? लेकिन एक बार हम

17:07इसे लेटर के अंदर भी लिखते हैं इनसाइड

17:11एड्रेस के नाम से। ओके? जो भी चीजें मैं

17:13बोल रही हूं ना अभी फिलहाल आप एक काम

17:15कीजिए मॉड्यूल खोलिए बहुत सारे सैंपल

17:17पेपर्स वहां दिए हुए हैं और वहां पे रिलेट

17:20करते हुए चलिए कि इसके बारे में बात करिए

17:22मैडम इसके बारे में बात करिए मैडम ओके

17:24चलिए फिर आती है अटेंशन लाइन मैंने आपको

17:27बोला ना कुछ लेटर्स कॉन्फिडेंशियल नेचर के

17:29होते हैं जो किसी रिस्पेक्टिव इंसान

17:31द्वारा ही पढ़े जाने चाहिए। तो मैंने लेटर

17:34लिखा है पमपम के फैमिली को। लेकिन मैं

17:37चाहती हूं पमपम की फैमिली में उसकी मम्मी

17:40ये लेटर पढ़े। ठीक है? कॉन्फिडेंशियल लेटर

17:42है ये। बिल्कुल। ओके। तो अब ये लाइन मैं

17:45कहां लिखूंगी कि पमपम की मम्मी इस लेटर को

17:48रीड करे। वो मैं अटेंशन लाइन में लिखूंगी।

17:51पर्टिकुलर पर्सन की लाइन में लिखूंगी। ओके

17:54देन सैलटेशन सलाम नमस्ते। दुआ में याद

17:58रखना। वो सब लिखोगे ना तुम। डियर सर,

18:01रिस्पेक्टेड मैम, रिस्पेक्टेड सर ये जो

18:03सारी चीजें होती हैं वो सब लिखोगे वो

18:05सैलटेशन में आती हैं। ओके? फिर आता है

18:07सब्जेक्ट हेडिंग। मतलब लेटर किस चीज के

18:10बारे में है? फॉर से मैं बीमार थी। मैंने

18:13स्कूल में छुट्टी के लिए लेटर लिखा। तो

18:15मैं वहां पे मेंशन करूंगी अ सिक लीव। मतलब

18:19मैं लीव लेना चाहती हूं बिकॉज़ आई एम

18:21बीमार। तो आपका लेटर किस चीज के बारे में

18:23है? वो आप लिखते हो सब्जेक्ट हेडिंग में।

18:26ओके? देन आता है आपका मेन बॉडी जिसमें आप

18:29बाकी की सारी बातें लिख देते हो। ब्रीफ

18:31देते हो पहले फिर इबोरेटिव वे में

18:32एक्सप्लेन करते हो। फिर कंक्लूडिंग लाइन

18:34में। प्लीज ग्रांट मी लीव फॉर टू डेज,

18:36फाइव डेज, सेवन डेज जो भी आपका होता है वो

18:39सारा आप यहां मेन बॉडी में लिखते हो। फिर

18:41आता है आपका कॉम्प्लीमेंट्री क्लॉज़। योर्स

18:44ट्रूली, योर्स फेथफुली वो लिखते थे ना

18:46बचपन में बस वो सारी चीजें बट उसको ना याद

18:49रखने का एक तरीका है। मतलब हमेशा हर कुछ

18:51नहीं लिख सकते। अगर आप सैलटेशन में ये जो

18:53सैलटेशन आपने लिखी थी इसमें अगर आप लिखते

18:56हो सर तो कॉम्प्लीमेंट्री क्लॉज़ में

18:58लिखोगे यू आर् ट्रूली। सैलुटेशन में लिखते

19:00हो डियर सर। तो कॉम्प्लीमेंट्री क्लॉज़ में

19:02लिखोगे यू आर फेथफुली। सैलटेशन में लिखते

19:04हो डियर मिस्टर एग्स तो कॉम्प्लीमेंट्री

19:06क्लॉज़ में लिखोगे यू आर सिंसियरली ये सारा

19:09आपकी बुक में मेंशंड है। वहां से पढ़

19:10लीजिएगा। ठीक है? तो जैसा सैलटेशन होगा

19:13उसके अकॉर्डिंग ही कॉम्प्लीमेंट्री क्लॉज़

19:15भी होगा। ओके? फिर आता है सिग्नेटरी। बोले

19:19तो यहां पे आप अपना नाम लिखेंगे और अपना

19:21डेज़िग्नेशन लिखेंगे। जैसे पायल मैम नाम हो

19:24गया। क्या करती है? कंपनी सेक्रेटरी हैं।

19:26तो सीएस मेरी डेज़िग्नेशन हो गई। फिर आता

19:29है एनक्लोज़र कॉपी सर्कुलेटेड बीसीसी

19:32ब्लॉक्ड कॉपी सर्कुलेटेड तो मतलब जो भी आप

19:35लेटर के साथ एक्स्ट्रा चीजें लगा रहे हैं

19:37प्लस ये लेटर आप और किस-किस को लिख रहे

19:39हैं उन सारे लोगों का कार्बन कॉपी टाइप्स

19:41वो सारे लोगों का नाम यहां पे आता है और

19:43जो भी एडिशनल डॉक्यूमेंट्स लगते हैं वो

19:45अनेक्सर्स में लग जाते हैं फॉर से लेटर के

19:47साथ में एक लिस्ट भिजवाना चाह रही थी तो

19:50वो मैं एनक्लोज़र्स में अनेक्सर के साथ लगा

19:52दूंगी। ओके? तो इस प्रकार से एक लेटर

19:55बनाने के लिए आपको इन सब बातों का ध्यान

19:58रखना पड़ता है। तभी तभी आप एक अच्छा लेटर

20:02बना पाएंगे। अदरवाइज आपका लेटर अच्छा नहीं

20:05बन पाएगा। अंडरस्टुड?

20:07चलिए अब ये बोलते हैं दो प्रकार के लेटर्स

20:10होते हैं। पहला होता है फॉर्मल बिजनेस

20:14लेटर और दूसरा होता है इनफॉर्मल बिजनेस

20:18लेटर। बेटा एक चीज मैं आपको बता दूं। ये

20:20दोनों ही लेटर्स बिजनेस पर्पस के लिए ही

20:23इस्तेमाल होते हैं। ऐसा नहीं है कि

20:25इनफॉर्मल बिजनेस लेटर लिखा हुआ है तो

20:27उसमें हम गसिप कर रहे होंगे। इधर-उधर की

20:29बात कर रहे होंगे। कल लॉकअप में उसने उसको

20:32मार दिया। ये सब बातें कर रहे होंगे। नहीं

20:34काम की ही बात करेंगे दोनों में। बट किस

20:36तरीके से बात करते हैं उस पे डिपेंड करेगा

20:38कि वो फॉर्मल कहलाया जाएगा या इनफॉर्मल

20:40कहलाया जाएगा। जैसे ये बोलते हैं अगर लीगल

20:43पर्पस के लिए या ऑफिशियल पर्पस के लिए हम

20:47लेटर लिखते हैं तो उसे हम फॉर्मल बिजनेस

20:50लेटर के तरीके से लिखते हैं। जैसे हो गई

20:52बिजनेस डील। आपकी कंपनी किसी और कंपनी के

20:54साथ डील करना चाह रही थी तो उसके लिए

20:56फॉर्मल बिजनेस लेटर लिखा जाएगा। आप ऑर्डर

20:58प्लेस करना चाह रहे थे सप्लायर को। उसके

21:01लिए फॉर्मल बिनेस लेटर लिखा जाएगा। आप

21:03क्लेम डाल रहे थे कि इसने मेरा इतना सामान

21:05लूट लिया। अब मैं इसके ऊपर क्लेम का वो

21:08डालना चाहता हूं। चार्ज डालना चाहते हो या

21:10इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम मांग रहे हो तो

21:11ऐसे में आप फॉर्मल बिज़नेस लेटर लिखोगे।

21:14डिस्प्यूट सेटलमेंट अगर किसी के साथ आपकी

21:16लड़ाई हो गई है तो उसको सेटल करने के लिए

21:18भी आप क्या करोगे? फॉर्मल बिज़नेस लेटर

21:19लिखोगे। ओके? वहीं पे इनफॉर्मल बिज़नेस

21:22लेटर में ये बोलते हैं यूज्ड फॉर कैजुअल

21:25कॉरेस्पोंडेंस बट डज़ नॉट नेसेसरीली हैज़ टू

21:28हैव अ कैजुअल टोन ऑफ़ लैंग्वेजज़। यह कैजुअल

21:31कॉरेस्पोंडेंस के लिए इस्तेमाल होते हैं।

21:33लेकिन जरूरी नहीं है इसमें आप कैजुअल टोन

21:35ही रखो। इसमें आप नॉर्मल टोन भी रख सकते

21:37हो। जैसे कि कस्टमर कंज्यूम अ कंप्लेंट

21:40लेटर किसी कस्टमर ने कोई कंप्लेंट करी थी

21:42तो उसके रिगार्डिंग आप जो जो उसको

21:44सॉल्यूशन प्रोवाइड करोगे वो अप्रेजल्स का

21:46किसी का आपने अप्रेजल कर दिया खुशी की

21:48न्यूज़ है उसके लिए तो उसके लिए आप लेटर

21:50लिखोगे तो इनफॉर्मल वे में लिखोगे

21:52इंटरव्यू एक्सट्रा इंटरव्यू लेते हैं उस

21:54टाइम पे जो लेटर लिखा जाता है वो आप इस

21:56टोन में लिखोगे इस इस वे में लिखोगे ठीक

21:59है तो ऐसे लेटर्स अ जिनमें आप लीगल कोई

22:03बात बोल रहे हो सॉलिड कोई बात बोल रहे हो

22:05जिसका कोई लीगल इंपैक्ट पड़ेगा जो राइट्स

22:07्स को इनफ्लुएंस करती हो उस उसको आप

22:09फॉर्मल टोन में लिखोगे। वेयर एज़ इसको आप

22:11इनफॉर्मल टोन में लिखोगे। तो इस प्रकार से

22:13दो लेटर्स होते हैं आपके। अब ये बोलते हैं

22:16लेटर लिखने का ना तरीका भी अलग-अलग होता

22:18है। लेआउट बोले तो लेटर दिखता कैसे है?

22:23कौन सी चीज कहां लिखी होती है? लेटर का

22:26लेआउट कैसा होगा? तो ये बोलता है दो

22:28प्रकार से होता है। वन इज़ ब्लॉक्ड। अनदर

22:30वन इज़ सेमीब्लॉक्ड।

22:32एक बात मैं आपको बहुत ही अच्छे से

22:34क्लेरिफाई कर दूं। अभी जो मैंने आपको

22:36एसेंशियल्स पढ़ाए थे ना

22:39ये ये आपके ब्लॉक्ड में भी जाएंगे, सेमी

22:43ब्लॉक्ड में भी जाएंगे। ऐसा नहीं है कि

22:45ब्लॉक्ड में इनमें से कुछ चीजें जाएंगी और

22:46सेमी ब्लॉक्ड में से रेस्ट ऑफ द चीजें

22:48जाएंगी। नहीं ब्लॉक्ड में भी सेम चीजें

22:50जाएंगी, सेमी ब्लॉक्ड में भी सेम चीजें

22:52जाएंगी। बट वो लिखी कहां जाएंगी? उस पे

22:56डिपेंड करता है कि वो ब्लॉक्ड बनती है या

22:58अनब्लॉक मतलब सेमी ब्लॉक्ड बनती हैं। फॉर

23:00एग्जांपल ये बोलते हैं यहां पे पढ़िएगा

23:03एक-एक लाइन को। इन द ब्लॉक्ड फॉर्मेट ऑफ

23:06लेटर लेआउट द डेट ऑफ लेटर ऑल रेफरेंसेस

23:11डेट

23:13रेफरेंस

23:15सब्जेक्ट

23:17सैलडेशन

23:19द पैराग्राफ्स इन द बॉडी

23:23आर शोन ऑन द लेफ्ट साइड बोले तो यहां से

23:26अगर पेज शुरू हो रहा है तो यह सारी

23:29इंफॉर्मेशन लेफ्ट साइड पे लिखी जाएंगी

23:32जस्ट पेज से कनेक्टेड लिखी जाएंगी अनदर

23:34पॉइंट टू नोट इज़ दैट दिस फॉर्मेट नो कॉमाज़

23:37आर यूज़्ड आफ्टर इनसाइड एड्रेस। इनसाइड

23:40एड्रेस जब आप लिखते हो तो कॉमा नहीं

23:42लगाओगे। सैलटेशन के बाद आप कॉमा नहीं

23:44लगाओगे। कॉम्प्लीमेंट्री क्लॉज़ के बाद आप

23:46कॉमा नहीं लगाओगे। सो कॉमाज़ का इस्तेमाल

23:49नहीं होता है इस वाले पॉइंट में। दो चीज़ें

23:53हैं जो आपको याद रखनी है। एक तो सारी

23:55चीज़ें लेफ्ट मार्जिन से स्टार्ट होंगी।

23:57ठीक है? लेफ्ट राइट अपना ठीक कर लेना।

23:58कहीं पता चले तुम राइट लिख दो। तो और

24:01दूसरा कॉमाज़ नहीं लगेंगे। वहीं पे जो

24:04हमारा सेमी ब्लॉक्ड लेआउट होता है वो क्या

24:06बोलता है? डेट ऑफ द लेटर कंक्लूजन

24:09सिग्नेचर आर अलाइन ऑन द राइट ऑफ द लेटर।

24:13डेट इधर लिखी जाएगी पेपर के। अगर पेपर ऐसा

24:16है।

24:18अगर पेपर ऐसा है तो डेट इधर लिखी जाएगी।

24:21हमारा कंक्लूजन इधर लिखा जाएगा। सिग्नेचर

24:24हमारे इस साइड किए जाएंगे। ठीक है? द

24:27सब्जेक्ट और रेफरेंस इज़ सेंट्रली अलाइन।

24:29सब्जेक्ट बीच में लिखा जाएगा। उसके अलावा

24:32रेफरेंस बीच में लिखा जाएगा। ठीक है? और

24:36यहां पे कॉमाज़ का भी इस्तेमाल होता है।

24:38ओके? तो, आप क्या देख पा रहे हैं? दोनों

24:40ही जगह हमने एसेंशियल्स ऑफ़ गुड लेटर के

24:43सारे पॉइंट्स लिखे हैं। ठीक है? मतलब डेट

24:46भी लिखी है, रेफरेंस नंबर भी लिखा है, ये

24:48भी लिखा है, वो भी लिखा है। लेकिन यहां पे

24:50हम क्या कर रहे हैं? सारी चीजें लेफ्ट

24:52साइड में लिख रहे हैं। जबकि यहां पे हम

24:54थोड़ा सा उसे क्रिएटिव बनाने की कोशिश लग

24:56रहे कर रहे हैं। कुछ लेफ्ट में लिख रहे

24:58हैं, कुछ राइट में लिख रहे हैं। कुछ सेंटर

25:00में लिख रहे हैं। ओके? बस ये डिफरेंस होता

25:02है दोनों ही टाइप्स के लेआउट में। लेआउट

25:05का मतलब क्या होता है? कैसे दिखते हैं वो

25:08लेटर्स देखने में। कहां पे कौन सी चीज़

25:10लिखी जाएगी। तो उधर में सारी चीज़ें लेफ्ट

25:13साइड में लिखी जाएंगे। नो कॉमाज़, यहां पे

25:15कॉमाज़ भी प्लस सारी चीज़ें लेफ्ट राइट। बीच

25:17में कहीं पे भी लिखी जा सकती है। ओके?

25:20चलिए नेक्स्ट है हमारा एसेंशंस ऑफ गुड

25:23बिजनेस लेटर। अगर कोई इंसान एक बिजनेस

25:26लेटर लिखने के लिए बैठता है तो उसे

25:28किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और

25:31उसके लेटर में कौन-कौन सी चीजें होनी

25:32चाहिए वो यहां पे हम पढ़ेंगे। पहला है

25:35कंप्लीटनेस।

25:37[नाक से की जाने वाली आवाज़]

25:38वो कुछ मूर्ख लोग होते हैं ना

25:42जो आपको एक बार WhatsApp करेंगे। ठीक है?

25:46आधी इंफॉर्मेशन देंगे। आधे घंटे बाद

25:49उन्हें याद आएगा। अरे एक और इंफॉर्मेशन

25:51बतानी थी। फिर आधे घंटे में फिर तुम्हें

25:53मैसेज करेंगे। फिर उन्हें याद आएगा 15

25:55मिनट में। अरे ये इनेशन तो रहेगी। फिर 15

25:57मिनट में फिर तुम्हें मैसेज करेंगे। भाई

25:59ये बार-बार मैसेज करना WhatsApp में तो

26:02पॉसिबल है लेकिन लेटर में आप ये चीज नहीं

26:05कर सकते बेटा कि आपने लेटर लिख दिया। 2

26:08घंटे बाद आपको याद आया भेजने के कि अरे वो

26:11चीज तो रह गई। चलो एक और लेटर लिख देते

26:13हैं। अरे वो चीज तो रह गई। चलो एक और लेटर

26:15लिख देते हैं। नहीं एक बार लेटर लिख रहे

26:18हो तसल्ली से लिखो। कंप्लीट वे में लिखो।

26:20सारी चीजें पहले से ही याद कर लो।

26:22क्या-क्या मेंशन करना है और सारी चीजें

26:24मेंशन करो। कंप्लीट वे में। क्लेरिटी होनी

26:27चाहिए। बोलना क्या चाहते हो वो क्लियर

26:30होना चाहिए। जैसे कई बार आप बच्चे मुझे

26:33अपने नोट्स पढ़ने के लिए देते हो। मैं

26:34उन्हें पढ़ती हूं और मुझे लगता है यार ये

26:36बोलना क्या चाह रहा था यार? समझ में ही

26:37नहीं आया। तो ऐसा नहीं होना चाहिए। आप जब

26:40भी लेटर लिख रहे हो सामने वाले इंसान को

26:42पढ़ते ही समझ में आना चाहिए कि आप उससे

26:45क्या एक्सपेक्ट कर रहे हो? आप उस लेटर में

26:47लिखना क्या चाह रहे थे। दैट शुड बी वेरी

26:49क्लियर। ओके? एंबगियस नहीं होना चाहिए कि

26:52सामने वाला बस सोचता ही रह जाए कि इसका

26:54मतलब क्या था। सिंपलीसिटी सिंपल वर्ड्स

26:57में लिखो। ऐसे कोई हाई-फाई इंग्लिश में

26:59लिखने की जरूरत नहीं है। बहुत ही

27:00सिंपलीफाई वे में लेटर लिखो ताकि जो भी

27:02पढ़े सामने वाला इंसान। बिकॉज़ यू नेवर नो

27:04ना। मैं मेरी ऑर्गेनाइजेशन में बहुत अच्छे

27:07इंग्लिश वाले लोग रखती हूं। लेकिन मैं डील

27:09कर रही थी एक एक्स वाई ज़ी अह ऑर्गेनाइज़ेशन

27:12से। वहां पे हो सकता है लोगों को इंग्लिश

27:14नहीं भी आती हो। मैंने उन्हें लेटर लिख

27:16दिया वो भी हाईफाई इंग्लिश में। अब वहां

27:18पे चार लोग मिलके डिकोड कर रहे हैं

27:20डिक्शनरी खोल खोल के कि उसका मतलब क्या

27:22होगा जो लिखा गया है लेटर में वर्ड्स। तो

27:24ऐसे में तो मतलब नहीं बनता ना ऐसा लेटर

27:26लिखने का। तो लेटर बहुत ही सिंपलीफाइड

27:28लैंग्वेज में होना चाहिए। एक्यूरेसी जिस

27:31चीज के बारे में तुम श्योर नहीं हो ना कि

27:33ये सच्ची खबर है। मत लिखो उसे लेटर में।

27:35ऐसा नहीं होना चाहिए कि तुम झूठी-झूठी

27:37खबरें लिख दो कि अरे मुझे पता चला वहां से

27:40यह हुआ है तो डील हमारी हो सकती है। ऐसा

27:41नहीं होना चाहिए। फॉल्स इंफॉर्मेशन नहीं

27:44होनी चाहिए लेटर में। ब्रेविटी ब्रेविटी

27:46का मतलब होता है फिजूल बातें। ये बोलते

27:49हैं काम की बात बोलो। इधर-उधर की फालतू की

27:52बकवास करने की जरूरत नहीं है लेटर में।

27:54लेटर में आपको कुछ भी ऐसा लिखने की जरूरत

27:55नहीं है जिसका कोई रेलेवेंस नहीं हो।

27:57जिसका कोई अर्थ नहीं बनता हो। ठीक है? तो

28:00फिजूल की बातें नहीं करनी चाहिए।

28:02सिंसियरिटी ओरिजिनलिटी मेंटेन करो।

28:05इमिटेशन मत करो। इमिटेशन का मतलब क्या

28:07होता है? किसी की नकल करना। ये बोलते हैं

28:09जैसे तुम हो ना जैसा तुम्हारा ओरिजिनल पन

28:12है तुम वैसे लेटर लिखो। तुम किसी की नकल

28:15करने की कोशिश मत करो इन लेटर में। ओके?

28:17करसी आपके टोन ना बहुत नॉर्मल होने चाहिए।

28:21सामने वाले को पढ़ के ऐसा नहीं लगना चाहिए

28:23कि इंसान बहुत उग्र स्वभाव का है या वो

28:25बहुत बदतमीजी से बात कर रहा है। मतलब बहुत

28:27बदतमीजी से लेटर लिखा है। ऐसा नहीं फील

28:29होना चाहिए। जैसे कई बार क्या होता है

28:30आपने नोटिस किया होगा आप किसी को ना

28:32नॉर्मली मैसेज करते हो। लेकिन सामने वाला

28:34बोलता है यार तू गुस्सा क्यों हो रहा है?

28:36तो तुम पूछते हो यार मैं गुस्सा कहां हो

28:37रहा था? मैं तो नॉर्मली मैसेज कर रहा था

28:39लेकिन उसके अकॉर्डिंग तुम्हारा टोन क्या

28:41था? गुस्से वाला था। तो मतलब तुम क्या

28:44लिखते हो? तुम मैसेज लिखते हुए करसी

28:46मेंटेन नहीं करते हो। ठीक है? तो वो नहीं

28:48करना चाहिए। बहुत ही पोलाइट टोन रखना

28:50चाहिए। और स्टाइल यह बोलते हैं हर बंदे का

28:53ना अपना एक स्टाइल होता है लेटर लिखने का।

28:56हर बंदे का अपना एक स्टाइल होता है लेटर

28:58लिखने का। मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि

29:00मेरे बाल में कोई कीड़ा आके बैठ गया है। ओ

29:03हो हो। चलो बाद में देखते हैं। ठीक है।

29:06कुछ तूफानी करेगा वह। तो चलो स्टाइल यह

29:09बोलते हैं हर इंसान का ना लिखने का एक

29:11तरीका होता है। अपना एक स्टाइल बनाओ और

29:13फिर उसे मेंटेन रखो। बार-बार चेंज मत करते

29:15रहो। ओके? सो ये है एसेंशियल्स ऑफ़ गुड

29:17बिनेस लेटर। अब बच्चा देखो बच्चे कहां

29:20कंफ्यूज होते हैं? एसेंशियल्स ऑफ़ गुड

29:22बिनेस लेटर ये भी लिखा हुआ है और

29:24एसेंशियल्स ऑफ़ गुड बिनेस लेटर। यह भी लिखा

29:27हुआ है। तो बच्चे सोचते हैं मैडम अगर पूछा

29:29जाए तो क्या आंसर लिखें? तो बेटा यूजुअली

29:32जो क्वेश्चन आता है ना वह ऐसे आता है। कि

29:35यह ये सिचुएशन है। इस पर एक लेटर ड्राफ्ट

29:38करो। प्लस हमें बताओ कि क्या-क्या

29:40एसेंशियल्स होते हैं गुड बिजनेस लेटर के।

29:43तो वहां पे जब आप ड्राफ्ट करोगे लेटर तो

29:46पहले वाला जो फ्लो चार्ट वाला एसेंशियल्स

29:47था वो तो वैसे ही कवर हो जाएगा ना क्योंकि

29:49ड्राफ्ट करने में आप सारी चीजें वो मेंशन

29:51कर ही दोगे और उसके बाद आप ये क्लेरिटी

29:54वाला, कंसाइजमेंट वाला ये सारे पॉइंट्स

29:56लिख सकते हो। तो दोनों आ जाएंगे एक ही

29:58आंसर में आपके सारे पॉइंट्स। ओके? चलिए

30:01इसी बात पे हम चलते हैं हमारे सेकंड टॉपिक

30:03पे जो कि है बिजनेस मैसेजेस। मैसेज भेजते

30:07हो जब लिखित में आप सामने वाले इंसान को

30:10तो कौन-कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए

30:13आपको वो पढ़ने वाले हैं हम यहां पे। देखो

30:16जब भी हमें किसी से बातचीत करनी होती है

30:19तो एक तो होता है फॉर्मल तरीका कि उसे हम

30:21क्या करें? लेटर लिख के दे दे। दूसरा अगर

30:24हमें थोड़ा सा इनफॉर्मली चलना है या फिर

30:27थोड़ा सा क्रिस्प वाली बात करनी है जिसका

30:29बहुत ज्यादा प्रूफ रखने की भी जरूरत नहीं

30:31है एज सच तो हम क्या करते हैं? हम बिज़नेस

30:33मैसेजेस लिखते हैं। फॉर एग्जांपल एक

30:36ऑर्गेनाइजेशन का चेयरमैन है

30:38[गला साफ़ करने की आवाज़] एंड ही वांट्स

30:39टू टॉक टू एंप्लाइजज़

30:42या फिर मैं बोलती हूं हमारे कस्टमर्स,

30:46हमारे इन्वेस्टर्स

30:48जिनको हम शेयरहोल्डर्स या स्टेक होल्डर्स

30:51बोलते हैं। तो ऐसे सिनेरियो में चेयरमैन

30:53क्या करते हैं? बिजनेस मैसेज ड्राफ्ट करते

30:56हैं। बिजनेस मैसेज ड्राफ्ट करते हैं। मैम

31:01चेयरमैन करता है ना तो हमें क्यों पढ़ाया

31:03जा रहा है? तो बेटा देखो तुम बनोगे कंपनी

31:06के सीएस। ठीक है? जितने भी काम होते हैं,

31:09जितनी भी ड्राफ्टिंग होती है ना चाहे वो

31:11नॉर्मल पेपर की हो या डिफरेंट चीजों की हो

31:13वो सारी की सारी सीएस के एंबिट के अंदर

31:16आती है। चेयरमैन कहीं पे भी अटकेगा ना

31:18मैसेज ड्राफ्ट करते हुए। वो सीएस को

31:20बुलाएगा पहली फुर्सत में कि बेटा आना जरा

31:22बताना क्या लिखूं इसमें? ठीक है? तो इस

31:24वजह से आपको बीइंग अ सीजीट एस्पिरेंट ये

31:28सारी चीजें आनी चाहिए। ओके? तो दे से

31:32बिज़नेस मैसेजेस इंक्लूड मैसेजेस फ्रॉम

31:34चेयरमैन ऑफ़ द कंपनी टू शेयरहोल्डर,

31:37एंप्लाइजज़ और रिलेटेड टू सेल्स एंड परचेज़,

31:40प्रोडक्ट्स एंड सर्विसेस, कंफर्मेशन और

31:42कैंसिलेशन ऑफ़ ऑर्डर्स, इनवॉइसेस। मतलब

31:44इनमें से किसी भी टॉपिक के रिलेटेड क्या

31:46हो सकता है? मैसेज हो सकता है। आप अपने

31:48लोगों को प्रमोशन का, अवार्ड का,

31:50इंक्रीमेंट का मैसेज करना चाहते हो।

31:52रेज़िग्नेशन का मैसेज करना चाहते हो तो उस

31:54सब सिनेरियो में आप बिजनेस मैसेज ड्राफ्ट

31:57करोगे। और अब हम बात करते हैं कितने तरह

32:00के बिनेस मैसेजेस होते हैं? तीन तरह के

32:03होते हैं। पहला होता है आपका पॉजिटिव,

32:05दूसरा होता है आपका नेगेटिव और तीसरा होता

32:08है आपका पर्सुएसिव।

32:10क्या मतलब होता है मैडम इन सबका? आइए बता

32:12देती हूं। पॉजिटिव मैसेज नाम से ही समझ

32:15में आ रहा है। जब आप किसी को कोई पॉजिटिव

32:18खबर पहुंचाना चाहते हो। पॉजिटिव खबर किसी

32:22को पहुंचाना चाहते हो तो अब आप लिखते हो

32:25पॉजिटिव मैसेज इदर इट विल बी अ पॉजिटिव

32:28खबर या फिर न्यूट्रल वाली खबर।

32:33ठीक है? मान लीजिए तुम्हारी अ यू नो अ

32:36लॉटरी निकल गई है। ये क्या है? पॉजिटिव

32:39मैसेज है। क्योंकि सामने वाले को आप एक

32:40खुशी की खबर वो कर रहे हो। ठीक है? कल तुम

32:43सबकी छुट्टी है। ये क्या है? एक पॉजिटिव

32:45चीज है। क्योंकि तुम सबको छुट्टी दे रहे

32:47हो। ठीक है? या फिर एक ऐसा मैसेज जिससे

32:50सामने वाले इंसान के ऊपर एज सच कोई फर्क

32:52नहीं पड़ेगा। ना वो खुश होएगा ना वो दुखी

32:54होगा। उसको भी हम पॉजिटिव मैसेज में ही

32:56ट्रीट करते हैं। लेकिन जब आप किसी को बैड

32:59न्यूज़ दे रहे होते हो। जैसे कि वी आर

33:02रियली सॉरी आपका इवेंट कैंसिल हो गया है।

33:05वी आर रियली सॉरी। आपको यह क्रेडिट कार्ड

33:07नहीं इशू किया जा सकता। तो ऐसे सब बैड

33:10न्यूज़ देने वाले नाव वाली खबर देने वाले

33:12जो भी वो होते हैं वो हम नेगेटिव मैसेजेस

33:15में काउंट करते हैं। फिर आते हैं हमारे

33:17पर्सुएसिव मैसेजेस। पर्सुएसिव का मतलब

33:20होता है किसी को कन्विंस करना। किसी को

33:22कोई काम करने के लिए यू नो तैयार करवाना।

33:25फॉर एग्जांपल मैं यह पेन आपको बेचना चाहती

33:28हूं। तो मैं आपको क्या करूंगी? कन्विंस

33:31करूंगी ना इस पेन को खरीदने के लिए। तो

33:33यहां पे मैं आपको जो मैसेज दूंगी वो

33:36पर्सुएसिव मैसेज कहलाया जाएगा। मैं अपने

33:39नोट्स बेचना चाहती हूं। तो मैं आपको

33:41बोलूंगी बेटा तुम मुझसे पढ़ रहे हो। अगर

33:42तुम मेरे नोट्स भी खरीद लोगे तो सोने पे

33:45सुहागा हो जाएगा। तुम्हारे को पढ़ाई में

33:46बड़ा मजा आएगा। तो ये जितनी भी लाइनें

33:48मैंने बोली है ये पर्सुएसिव मैसेज हैं।

33:50क्योंकि इसके थ्रू मैं तुम्हें कन्विंस कर

33:53रही हूं। पर्स्यू कर रही हूं कि चलो चलो

33:55मेरे नोट्स खरीद लो। ठीक है? तो पर्सुएसिव

33:58मैसेजेस में हमेशा हम सामने वाले इंसान को

34:01पर्स्यू करते हैं। जिसका हिंदी में मतलब

34:03होता है किसी को ट्राई करना। आपकी बात मान

34:06लें। ठीक है? कन्विंस करना। ओके? तो तीन

34:09तरह के मैसेजेस हमने पढ़ लिए। पॉजिटिव,

34:11नेगेटिव एंड पर्सुएसिव। यूजुअली इन सबका

34:14मीनिंग पूछा जाता है। ओके? बिनेस मैसेजेस

34:17में बस इतना ही था। नाउ लेट्स टॉक अबाउट

34:19हमारा नेक्स्ट टॉपिक जो कि है बिनेस

34:21रिपोर्ट्स। बेटा सबसे पहले तो यह समझो

34:23रिपोर्ट क्या होता है? तुमने कभी भी किसी

34:29न्यूज़ चैनल वाले को

34:35रिपोर्टिंग करते हुए देखा है कैमरामैन

34:38इसके साथ रिपोर्टर इसके साथ मैं ये वो वो

34:41ऐसा सब बोलते हैं वो एंकर जो भी होता है

34:43राइट वो क्या करते हैं वो बेसिकली मान

34:46लीजिए किसी जगह पे आग लगी हुई है वो वहां

34:48जाते हैं वहां वो पूरा दृश्य देखते हैं

34:51फिर वो आपको मतलब जो भी उन्होंने अपनी

34:53आंखों से देखा है वो सब बताते हैं तो मतलब

34:55जो चीज आप अपनी आंखों से नहीं देख पाए, जो

34:58चीज आप खुद वहां पे जाके नहीं देख पाए,

35:01आपके बिहाफ पे वह इंसान वहां गया, उसने

35:04देखा और उसने आपको वो चीज रिपोर्ट करी है।

35:08तो बेटा यही होता है बिजनेस रिपोर्ट।

35:11बेसिकली अगर कोई इवेंट होता है, कोई

35:14मीटिंग होती है, कुछ भी ऐसा होता है जहां

35:17आप नहीं पहुंच पा रहे हैं या ऑर्गेनाइजेशन

35:20कैसा चल रहा है, अगर आप नहीं देख पा रहे

35:22हैं तो एक रिपोर्ट प्रिपेयर की जाती है

35:25जिसमें सारी चीजें लिखी जाती हैं कि कोई

35:28भी इंसान अगर उस चीज से कनेक्टेड नहीं था,

35:30नहीं आ पाया उस इवेंट में। उसे अफसोस नहीं

35:33हो बाद में कि मैंने मिस कर दिया क्योंकि

35:34ए टू सी जितनी भी चीजें वहां पे होंगी, वो

35:37सारी की सारी रिपोर्ट में लिखी जाएंगी। तो

35:40रिपोर्ट बहुत ही डिटेल्ड तरीके से बनाई

35:42जाने वाली एक चीज है जिसमें हम बेसिकली

35:44कोशिश करते हैं सारी चीजें कवर करें। सबसे

35:48पहले ये बोलते हैं रिपोर्ट वर्ड केम फ्रॉम

35:50अ लेटिन वर्ड रिपोर्टर जिसका मतलब होता है

35:53टू कैरी बैक वापस लेके जाना कुछ। ठीक है?

35:56क्या वापस लेके जाना? खबर न्यूज़ या फिर अ

35:59जो भी आपने सीखा जो भी आपने एक्सपीरियंस

36:01किया वो। इट इज़ अ डिस्क्रिप्शन ऑफ़ एन

36:03इवेंट कैरिड बैक टू सम हु वाज़ नॉट

36:06प्रेजेंट ऑन द सीन। आपके दोस्त की बर्थडे

36:10पार्टी थी। कोई दूसरा दोस्त नहीं जा पाया।

36:13तो पार्टी से आने के बाद आप उस दोस्त को

36:15कॉल करके बताते हो ना कि वहां पे पता है

36:17यह हुआ था। ये हुआ था। वहां से वो मैस्केट

36:19बुलाया गया था। उसने ये किया। मैंने डांस

36:21किया। वो लड़की आई थी। वो लड़का आया था।

36:24सारी चीजें बताते हो ना। तो वो रिपोर्टिंग

36:26ही कहलाई जाती है बेटा। एक ऐसा इवेंट जहां

36:29पे सामने वाला इंसान नहीं जा पाया। तुम गए

36:31और तुमने उसकी रिपोर्टिंग पूरी की पूरी उस

36:33इंसान को बताई। मस्ट बी वेल ऑर्डर्ड। ये

36:36बोलते हैं सीक्वेंस फॉलो करना चाहिए। आपको

36:39यूं नहीं करना चाहिए कि पहले आप बोलो वहां

36:41पे केक कट हुआ। फिर आप बोलो कि नहीं नहीं

36:43वहां पे बर्थडे बॉय आया। नहीं सीक्वेंस

36:45फॉलो करो। पहले बर्थडे बॉय आया होगा। उसने

36:47खेलावेला होगा उसके बाद केक कट किया होगा।

36:50तो वेल ऑर्डर्ड होनी चाहिए। मस्ट बी

36:52ऑब्जेक्टिव। आपको पता होना चाहिए रिपोर्ट

36:54किस पर्पस के लिए बन रही है ताकि आप उसे

36:57उसी तरीके से बनाएं। प्रेजेंट इंफॉर्मेशन

36:59फैक्ट्स एंड डेटा जितने भी इंफॉर्मेशन और

37:02डेटा और फैक्ट्स लिखे होने चाहिए सारे के

37:05सारे उसमें मेंशन करो लिखो। ठीक है? जितने

37:08भी जरूरी होने चाहिए वो सारे मेंशन करो।

37:11मस्ट एड इन डिसीजन मेकिंग। जब भी आप

37:13डिसाइड करते हो ऑर्गेनाइजेशन में कोई बड़ा

37:15फैसला लेते हो। तो ये सारे रिपोर्ट्स ना

37:17आपके लिए बहुत हेल्पफुल प्रूव होते हैं

37:19क्योंकि इसमें ऐसी सारी इंफॉर्मेशनेशन

37:20मेंशन होती है जिसको पढ़ के आप चीजों को

37:22और अच्छे तरीके से समझ सकते हैं एंड

37:24ऑब्वियसली उसका फायदा उठा सकते हैं। बीआर

37:27आर वन ऑफ़ द मोस्ट इफेक्टिव वेज़ टू

37:29कम्यनिकेट। बिज़नेस रिपोर्ट्स एक बहुत ही

37:31इफेक्टिव तरीका होता है कम्युनिकेट करने

37:33का रिटन वे में। ओके? आ गई बात समझ? चलिए

37:38देन दे से बिज़नेस रिपोर्ट कैटेगरीज़

37:40कौन-कौन सी होती हैं? ये सारी होती है।

37:43ठीक है? बट द गुड न्यूज़ इज़ दिस दैट ये

37:45सारी आपके बुक में मेंशंड तो हैं। तो एक

37:48बार इनमें निगाह डाल लीजिएगा लेकिन ये

37:50एक्सप्लेन नहीं की गई है। तो ये पूछी नहीं

37:53जा सकती हैं आपसे। ठीक है? जितना आपके

37:55मॉड्यूल में दिया हुआ है ना आईसीएसआई आपसे

37:57सिर्फ उतना ही पूछता है। आउटसाइड मॉड्यूल

38:00बहुत ही रेयर इंस्टेंसेस होते हैं जहां पे

38:02आईसीएसआई आपसे क्वेश्चन कर ले। ठीक है? तो

38:05ये बस नाम से मेंशंड है। दैट्स इट। इनको

38:07एक्सप्लेन नहीं किया गया है आपकी बुक में।

38:11फिर यह बोलते हैं अगर आप लिख रहे हैं

38:14बिजनेस रिपोर्ट तो किन-किन बातों का आपको

38:16ध्यान रखना चाहिए ताकि आपके बिजनेस

38:18रिपोर्ट बहुत ही इफेक्टिव तरीके से लिखी

38:21जाए। ठीक है? रिपोर्ट आएगा यहां पे। तो ये

38:24बोलते हैं इट शुड बी रिटेन इन एस्स फॉर्म।

38:27इट शुड नॉट बी रिटन इन एस्स फॉर्म। ठीक

38:30है? नॉट लगा देना। ऐसे फॉर्मेट में नहीं

38:33लिखी होनी चाहिए। पॉइंटर्स में लिखो। ठीक

38:36है? ऐसे बड़े-बड़े एस्स मत बना लो। ऐसे

38:39समझते हो ना जब बड़े-बड़े पैराग्राफ्स बना

38:41के हम किसी चीज के बारे में लिखते थे

38:43डिस्क्रिप्टिव वे में वैसे नहीं होना

38:44चाहिए। शुड बी एन अ ब्रिज स्टाइल सो दैट द

38:47रीडर कैन आइडेंटिफाई की एलिमेंट्स। ऐसे

38:49लिखा होना चाहिए कि जो की एलिमेंट्स हैं

38:51जो जरूरी खबरें हैं वो हाईलाइटेड हो ताकि

38:53आपका डायरेक्ट फोकस उस पे जाए। यूं नहीं

38:55हो कि आप पढ़ते ही जा रहे हो, पढ़ते ही जा

38:56रहे हो लेकिन आपको समझ कुछ भी नहीं आ रहा।

38:58कुछ ऐसा है जो यूनिक है, कुछ अलग है तो

39:00उसे बोल्ड कर दो, हाईलाइट कर दो। कैन रेंज

39:03फ्रॉम वन टू पेजेस टू 100 पेजेस। ये बोलते

39:05हैं रिपोर्ट कितनी भी छोटी और कितनी भी

39:07बड़ी हो सकती है। बनाने को रिपोर्ट दो पेज

39:09में भी बन सकती है। बनाने को रिपोर्ट 100

39:10पेज से ज्यादा की भी बन सकती है। ठीक है?

39:12डिपेंडिंग ऑन किस ऑब्जेक्टिव के बारे में

39:15वो बनाई गई है। मतलब ऑब्जेक्टिव क्या था

39:16बेसिकली वो रिपोर्ट बनाने का? अभी

39:18प्रीवियस स्लाइड में मैंने आपको पढ़ाया ना

39:20मस्ट बी ऑब्जेक्टिव। बोले तो आपको क्लियर

39:23होना चाहिए बिनेस रिपोर्ट किस पर्पस के

39:25लिए बन रही है। पर्पस आपको क्लियर होगा।

39:28उसके अकॉर्डिंग आप चूज़ करेंगे। आपको यह

39:29छोटी बनानी है या बड़ी बनानी है।

39:31ऑब्जेक्टिव ऑफ रिपोर्ट बहुत अच्छे से

39:33क्लियर होना चाहिए। फॉर्मेट यूजुअली सेम

39:36रखो एक ऑर्गेनाइजेशन में बिजनेस रिपोर्ट

39:38का। ये ना फॉर्मेट का कोई हार्ड एंड फास्ट

39:40रूल नहीं है। ये मैं आपको पहले भी बता दूं

39:42क्योंकि यहां से क्वेश्चन आते हैं तो

39:43बच्चे बोलते हैं मैम फॉर्मेट तो दिया ही

39:45नहीं हुआ बुक में बिजनेस रिपोर्ट का। तो

39:47बेटा बिजनेस रिपोर्ट हर ऑर्गेनाइजेशन अपने

39:50अकॉर्डिंग बनाती है। तो कोई फॉर्मेट नहीं

39:53है उसका। ठीक है? बस कुछ चीजें हैं जिनका

39:55आपको ध्यान रखना चाहिए। उन चीजों का अगर

39:57आप ध्यान रखते हैं तो आपकी रिपोर्ट बढ़िया

39:59बनेगी। यूज़ क्या है? क्या-क्या होने वाला

40:02है उस बिजनेस रिपोर्ट का? वो आपको क्लियर

40:03होना चाहिए। रेसाइट इंफॉर्मेशन जो जो

40:06इंफॉर्मेशनेशन रिक्वायर्ड हो वो सारी की

40:08सारी आपकी रिपोर्ट में मेंशंड होनी चाहिए।

40:10कलेक्शन ऑफ़ डेटा डेटा कलेक्ट करके अच्छे

40:13से वहां पे प्रेजेंटेबल वे में दिखाया

40:14होना चाहिए। प्लस उसका एनालिसिस भी किया

40:17होना चाहिए। मतलब आपने पहले डेटा मेंशन कर

40:19दिया। उसके बाद आपने उस डेटा से क्या

40:21सीखा, क्या एनालाइज किया वो भी मेंशन करो।

40:23एग्जीक्यूटिव सम एग्जीक्यूटिव समरी बोले

40:26तो एक शॉर्ट में समरी भी दे दो कि पूरे

40:27रिपोर्ट में क्या था। सो दैट अगर किसी के

40:29पास टाइम क्रंच है, टाइम नहीं है उतना

40:32ज्यादा तो वो हल्के वे में पढ़ के समझ जाए

40:34चीजों को कि ये बोलने की कोशिश कर रहा है

40:37सामने वाला इंसान। ओके?

40:40ओके? आ गई बात समझ? और यहां पे हमारे

40:43मैसेजेस, लेटर एंड रिपोर्ट। तीनों ही

40:46टॉपिक्स खत्म होते हैं। और अब शुरू हो रहे

40:49हैं हमारे इंटर एंड इंट्रा डिपार्टमेंटल

40:52कम्युनिकेशन। बेटा सबसे पहले तो मैं आपको

40:55ये दोनों वर्ड्स का मतलब समझाना चाहूंगी

40:58क्योंकि कई बार क्या होता है हम ये इंटर

41:00और इंट्रा में ना थोड़े से कंफ्यूज हो जाते

41:03हैं। ठीक है? तो एक बार क्लेरिटी पालो कि

41:05किसके बारे में बात हो रही है। देखो सबसे

41:08पहले ये समझो कि ये एक ऑर्गेनाइजेशन है।

41:14ठीक है? ऑर्गेनाइजेशन में क्या होता है?

41:17अक्सर हम क्या करते हैं? अलग-अलग

41:19डिपार्टमेंट्स बना देते हैं। हम क्या करते

41:22हैं? अलग-अलग डिपार्टमेंट्स बना देते हैं।

41:31डिपार्टमेंट वन,

41:33डिपार्टमेंट टू

41:41पर से यह था मार्केटिंग डिपार्टमेंट।

41:46यह था प्रोडक्शन डिपार्टमेंट। यह था

41:49फाइनेंस डिपार्टमेंट।

41:51यह था सेल्स डिपार्टमेंट। ठीक है? तो

41:55अलग-अलग डिपार्टमेंट्स हो गए। अब इन

41:57डिपार्टमेंट्स में अगर

42:02एक डिपार्टमेंट का इंसान दूसरे

42:05डिपार्टमेंट के इंसान के साथ बातचीत करता

42:08है। रिटन फॉर्म है वो भी। ठीक है? तो उसे

42:11हम बुलाते हैं इंटर डिपार्टमेंटल।

42:15क्या बुलाएंगे इसे हम? इंटर डिपार्टमेंटल।

42:19मतलब दो डिपार्टमेंट्स के बीच में। वहीं

42:24पे अगर कोई इंसान सेम डिपार्टमेंट का सेम

42:29डिपार्टमेंट के इंसान के साथ राइटिंग में

42:32बातचीत करता है। मार्केटिंग डिपार्टमेंट

42:34के थे दोनों के दोनों ये ए और बी और यह

42:37आपस में एक दूसरे से बात कर रहे हैं। तो

42:39ये इनकी जो वार्तालाप है वो कहलाई जाएगी

42:42इंट्रा डिपार्टमेंटल। बोले तो एक

42:45डिपार्टमेंट के अंदर-अंदर इंट्रा

42:48डिपार्टमेंटल। ओके आ गई बात समझ? इंटर का

42:51मतलब होता है दो डिपार्टमेंट्स के बीच में

42:54और इंट्रा का मतलब होता है एक ही

42:57डिपार्टमेंट के अंदर-अंदर। इंट्रा मतलब

43:00अंदर। ओके? ऐसे मान लेना तुम। ओके? सो

43:03अलग-अलग डिपार्टमेंट के लोग अगर आपस में

43:05बात कर रहे हैं तो वो इंटर डिपार्टमेंटल

43:06कहलाई जाएगी। और सेम डिपार्टमेंट के लोग

43:08अगर आपस में एक दूसरे से बात कर रहे हैं

43:10तो वो इंट्रा डिपार्टमेंटल कहलाई जाएगी।

43:12लेकिन क्योंकि यहां पे बिनेस रिलेटेड बात

43:14हो रही है। क्योंकि यहां पे आप बात किस

43:16नेचर की कर रहे हो? बिज़नेस से रिलेटेड कर

43:18रहे हो तो लिखित में कर रहे हो। ये मेन

43:20है। ठीक है? मतलब इस नेचर की बात है जो

43:22लिखित में ही हो सकती है। तभी हम ये टॉपिक

43:26यहां पे पढ़ रहे हैं। ओके? सो, हम अब पढ़ते

43:28हैं इंटर और इंट्रा डिपार्टमेंटल

43:30कम्युनिकेशन किस प्रकार से होनी चाहिए।

43:32[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]

43:33देखो जब भी कोई इंसान एक ऑर्गेनाइजेशन में

43:37एक डिपार्टमेंट से दूसरे डिपार्टमेंट के

43:39इंसान के साथ बातचीत करने की कोशिश करता

43:41है रिटन फॉर्मेट में या सेम डिपार्टमेंट

43:44के इंसान के साथ बातचीत करने की कोशिश

43:45करता है रिटन फॉर्मेट में तो उसके पास चार

43:48ऑप्शंस होते हैं। ठीक है? पहला होता है

43:50मेमोरेंडम, दूसरा होता है ऑफिस सर्कुलर्स,

43:54तीसरा होता है ऑफिस ऑर्डर्स और एक और होता

43:56है जिसका नाम होता है ऑफिस नोट्स।

44:00वो बहुत ही बेसिक सा है इसलिए मैंने यहां

44:02पर मेंशन नहीं किया। बट मेमोरेंडम ऑफिस

44:05सर्कुलर और ऑफिस ऑर्डर्स क्या होते हैं वह

44:07समझ लेते हैं हम। देखिए हमने थोड़ी देर

44:10पहले लेटर पढ़ा था।

44:13बिल्कुल लेटर जैसे होता है वैसे ही

44:16मेमोरेंडम होता है। बस दोनों में ऑब्वियस

44:19चेंजज़ होते हैं। क्या चेंजज़ होते हैं? भाई

44:22हम लेटर किसको लिखते हैं? जो हमारे

44:24ऑर्गेनाइजेशन के बाहर है कोई इंसान उसको

44:27लेटर लिखते हैं तो हमें उसका एड्रेस मेंशन

44:29करना पड़ता है। फालतू की फॉर्मेलिटीज करनी

44:32पड़ती हैं। थैंक यू सर, दिस सर, दैट सर ये

44:34सब करना पड़ता है लेटर में। तो वो सारी

44:37चीजें मेमोरेंडम में नहीं होंगी। बाकी

44:40मेमोरेंडम का फॉर्मेट ऑलमोस्ट सिमिलर

44:42रहेगा लेटर से। आपकी बुक में सारे

44:45फॉर्मेट्स दिए भी हुए हैं। प्लस पेपर से

44:47पहले मैं हमेशा वाईटी पे आके फॉर्मेट्स का

44:51एक सेशन भी लेती हूं। जिसमें मैं आपको

44:53सारे फॉर्मेट्स पढ़ाती हूं। कैसे क्या

44:55बनना है वो बताती हूं। किससे क्या नेचर के

44:57क्वेश्चंस आएंगे वो बताती हूं। ठीक है? तो

44:59फॉर्मेट्स की अलग से प्रैक्टिस मैं आप

45:01लोगों को करवाऊंगी। बस फिलहाल वन शॉट में

45:04ये समझ लीजिए कि मेमोरेंडम का जो फॉर्मेट

45:06होता है वो लेटर की तरह बनता है। बस कुछ

45:09ऑब्वियस चीजें यहां पे मिसिंग होती हैं।

45:11लेटर वाली चीजें यहां पे नहीं होती। ठीक

45:13है? देयर आर माइनर वेरिएशंस इन द फॉर्मेट

45:16बट मोस्ट मेमोज़ हैव द सेम हेडिंग्स। द

45:19डिफरेंस विथ द लेटर फॉर्मेट इज़ ऑब्वियस।

45:21इंसाइड नेम एंड एड्रेस आर डन अवे विद जो

45:24इनसाइड एड्रेस और नेम वगैरह होता है उन

45:26सबको हम यूज़ नहीं करते। सैलटेशन

45:28कॉम्प्लीमेंट्री क्लॉज़ हम यूज़ नहीं करते।

45:30और यहां पे थोड़ी सी इनफॉर्मल टोन भी

45:33अलाउड होती है क्योंकि ये डिपार्टमेंट टू

45:35डिपार्टमेंट है या फिर इंट्रा

45:36डिपार्टमेंटल है तो ऑब्वियसली अपने लोगों

45:39के बीच में जा रही है चीज तो उनके साथ तुम

45:41थोड़ा सा इनफॉर्मल हो सकते हो लेटर

45:43क्योंकि बाहर जाता है ऑर्गेनाइजेशन के

45:45इसलिए वहां पे आप फॉर्मल नहीं मतलब

45:48इनफॉर्मल नहीं हो सकते आपको थोड़ा सा

45:49फॉर्मल टोन मेंटेन करना पड़ता है

45:51अंडरस्टुड अब हम आ जाते हैं ऑफिस

45:54सर्कुलर्स पे देखिए सर्कुलर वर्ड पे चले

45:57जाओ सर्कुलर का मतलब क्या होता है एक ऐसी

46:00चीज जो सर्कुलेट होती है और सर्कुलेट कौन

46:03सी चीज होती है जो बहुत सारे लोगों तक

46:05पहुंचती है तो भाई जब आपको ऑर्गेनाइजेशन

46:09में कोई मैसेज बहुत सारे लोगों को

46:12पहुंचाना होता है मतलब आपको कोई मैसेज अगर

46:15बहुत सारे लोगों को पहुंचाना है इसको भी

46:18पहुंच जाए इसको भी पहुंच जाए इसको भी

46:19पहुंच जाए इसको भी पहुंच जाए तो उस टाइम

46:21पे आप ऑफिस सर्कुलर्स का इस्तेमाल करते

46:24हैं। दीज़ आर यूज़्ड फॉर डिसमिनेटिंग इनेशन

46:28टू अ लार्ज नंबर ऑफ़ एंप्लाइजज़ विद इन द

46:30ऑर्गेनाइजेशन।

46:32ध्यान दीजिएगा। मैं रिपीट कर रही हूं

46:35बार-बार कि भाई ये तीनों चीजें प्लस ऑफिस

46:39नोट्स चारों चीजें हमेशा ऑर्गेनाइजेशन के

46:42अंदर ही इस्तेमाल होंगी। इंट्रा

46:45डिपार्टमेंटल और इंटर डिपार्टमेंटल दोनों

46:47विद इन ऑर्गेनाइजेशन होते हैं। तो इनमें

46:50से कोई भी चीज आप बाहर वालों को नहीं

46:52लिखोगे। ऑफिस सर्कुलर आप किसी आउटसाइडर को

46:55नहीं लिखोगे। ऑफिस मेमोरेंडम आप किसी

46:58आउटसाइडर को नहीं लिखोगे। ठीक है? तो यहां

47:01पे अगर आपको एंप्लाइजज़ को ही बहुत सारी

47:03इनेशन देनी होती है। मतलब बहुत सारे

47:04एंप्लाइजज़ को साथ में इनफेशन देनी होती

47:06है। तो आप इस पर्टिकुलर फॉर्म का इस्तेमाल

47:08करते हैं। सिंस इट इज़ एन इंटरनल

47:10कम्युनिकेशन। देयर फॉर इट हैज़ ट्रेडिशनली

47:12बीन ब्रीफ एंड बिज़नेस लाइक फॉर्मल एंड

47:15डिवॉइड ऑफ़ सैलटेशन। क्योंकि ये अंदर वाले

47:17लोगों के लिए ही होती है। इंटरनल

47:18कम्युनिकेशन के लिए इस्तेमाल की जाती है।

47:20दैट्स व्हाई इसे हम थोड़ा सा ब्रीफ में

47:22रखने की कोशिश करते हैं। छोटा रखने की

47:24कोशिश करते हैं। और जो एक्स्ट्रा

47:26फॉर्मेलिटीज होती हैं उन सबको हम थोड़ा सा

47:28क्या करते हैं? हटा देते हैं। और

47:30फॉर्मेलिटी भी हम थोड़ा सा अवॉइड करते

47:33हैं। इनफॉर्मल रहने की कोशिश करते हैं।

47:35ओके? तो इसकी क्या खास बात है? यह लेटर की

47:39तरह होता है। बस ऑफिस डिफरेंसेस हटा दिए

47:41जाते हैं। ऑफिस सर्कुलर एक इनेशन बहुत

47:44सारे एंप्लाइजज़ तक पहुंचानी है। फॉर से अब

47:47से सैटरडेज़ को छुट्टी रहा करेगी ऑफिस

47:49वालों की। ये इंफॉर्मेशन आपको

47:51ऑर्गेनाइजेशन में सारे एंप्लाइजज़ को देनी

47:53पड़ेगी जो भी उस ऑर्गेनाइजेशन से कनेक्टेड

47:55है। राइट? तो ऐसे में आप ऑफिस सर्कुलर्स

47:58पब्लिश करोगे। ठीक है? अब फटाफट मुझे ना

48:00एक एग्जांपल दे दो बढ़िया सा कि और कौन से

48:03सिनेरियो में तुम ऑफिस सर्कुलर पब्लिश कर

48:06सकते हो। ठीक है? जैसे मैंने आपको दिया ना

48:08कि छुट्टी हो रही है अब से सैटरडे को। एक

48:10तुम एग्जांपल दो इन द कमेंट सेक्शन। ओके?

48:12चलिए अब बात करते हैं ऑफिस ऑर्डर्स के

48:15बारे में। ये बोलते हैं ऑफिस ऑर्डर्स जो

48:17होते हैं ना वो बिल्कुल मेमोरेंडम जैसे

48:19होते हैं। मेमोरेंडम खुद लेटर की तरह होता

48:23है। लेकिन ऑफिस ऑर्डर्स जो होते हैं वो

48:25मेमोरेंडम की तरह होते हैं। बस फर्क क्या

48:28आता है वो सुन लीजिए।

48:31व्हाट मेक्स देम डिफरेंट? इज़ द पर्पस एंड

48:35टोन एंप्लॉयड। कौन सा पर्पस है? क्या

48:37पर्पस है? क्यों लिखा जा रहा है? वो अलग

48:40होता है मेमोरेंडम में और ऑफिस ऑर्डर में।

48:42प्लस आपने कौन सी टोन का इस्तेमाल किया

48:45है? वो भी क्या होती है? थोड़ी अलग होती

48:47है। जैसे यहां पे हमने पढ़ा थोड़ा सा

48:49पर्सनल प्रोनाउंस इनफॉर्मल टोन अलाउड होती

48:52है। ऑफिस सर्कुलर्स में ऐसा नहीं है। यह

48:55बोलते हैं यहां पे ऐसी टोन लगती है जो

48:58थोड़ी फॉर्मल साउंड करेगी। थोड़ी लीगल

49:01साउंड करेगी। क्यों? क्योंकि यहां पे आप

49:03एंप्लाइजज़ के राइट्स और प्रिविलेजेस के

49:05बारे में बात करते हो। ऐसी कोई चीज जो

49:09एंप्लाइजज़ के राइट्स और प्रिविलजेस को

49:11इंपैक्ट करती है, उस पे फर्क डालती है, उन

49:14चीजों के बारे में बात करते हो। दैट्स

49:16व्हाई आपको लैंग्वेज कैसी रखनी पड़ती है?

49:18फॉर्मल और लीगली कॉमन। एक ऐसी लैंग्वेज जो

49:21लीगली चल सके, आपको वो रखनी पड़ती है।

49:24पैसिव वर्ब्स आर प्रेफर्ड। पैसिव वर्ब

49:26प्रेफर किए जाते हैं। दे कैरी अ नंबर सिंस

49:28दे रिमेन इन फ़ोर्स टिल रिवोक्ड एंड फाइल

49:31फॉर फ्यूचर रेफरेंस। इनको हर किसी को नंबर

49:33दिया जाता है। ऑफिस ऑर्डर्स को जैसे

49:35रेफरेंस नंबर दिया जाता है ना लेटर्स को।

49:37बिल्कुल ऐसे ही इनको भी रेफरेंस नंबर दिया

49:39जाता है। दे कैरी अ बोल्ड अंडरलाइन हेडिंग

49:41टू हेल्प आइडेंटिफाई देम। ये तो एक्चुअली

49:44सब में एप्लीकेबल होगा। और मेमोरेंडम

49:46बनाओगे, ऑफिस सर्कुलर बताओ बनाओगे, ऑफिस

49:48ऑर्डर बनाओगे? इनकी जो स्टार्टिंग होती है

49:50ना वो कैपिटल लेटर से होती है जिसमें लिखा

49:52होता है कि ये क्यों बनाए जा रहे हैं?

49:54क्या पर्पस है इस पर्टिकुलर ऑफिस सर्कुलर

49:56का ऑर्डर का या मेमोरेंडम का ठीक है फॉर

49:59से इस संडे छुट्टी नहीं होगी ये हमारा

50:02सब्जेक्ट था तो हम क्या करेंगे संडे नो

50:05छुट्टी ये कैपिटल लेटर्स में लिखेंगे

50:07बिल्कुल सेंटर में कि देख लो ये इस चीज के

50:10रिगार्डिंग ये पूरा सर्कुलर है तो वहां से

50:12आपको काइंड ऑफ़ थोड़ा सा हिंट मिल जाता है

50:14जैसे लेटर में सब्जेक्ट हेडिंग होती है ना

50:17बिल्कुल वैसे ही ठीक है बट यहां पे आप

50:19क्या करते हो बोल्ड में लिखते हो और उसे

50:20अंडरलाइन कर देते हो ताकि सीधा फोकस ही

50:23तुम्हारा वहां पे जाए। ओके? और ऑफिस नोट्स

50:25अगेन इस्तेमाल होते हैं डिपार्टमेंट टू

50:27डिपार्टमेंट अगर किसी को बात करनी होती है

50:29उसके लिए। ओके? तो मेन ये थे जो आपने पढ़

50:32लिए हैं यहां पे। अगर मैं रिपीट करूं तो

50:37मेमोरेंडम लेटर की तरह होता है। कुछ

50:39चेंजेस होते हैं। बस फॉर्मल इनफॉर्मल टोन

50:41रख सकते हैं। ऑफिस सर्कुलर एक इंफॉर्मेशन

50:44बहुत सारे लोगों तक पहुंचानी है तब

50:45इस्तेमाल किया जाता है। ऑफिस ऑर्डर्स

50:48थोड़े से फॉर्मल नेचर के होते हैं क्योंकि

50:49ये एंप्लाइजज़ के राइट्स एंड प्रिविलजेस से

50:52इन्फ्लुएंस होते हैं। मतलब उसके रिलेटेड

50:54होते हैं। अब राइट्स एंड प्रिविलजेस क्या

50:57हो सकते हैं? मान लीजिए मैं बोलती हूं कि

51:00अब से हर इंसान को दिवाली के टाइम पे बोनस

51:04मिला करेगा। अब से हर इंसान को जो भी इस

51:08ऑर्गेनाइजेशन में काम कर रहा है दिवाली के

51:10टाइम पे बोनस मिला करेगा। तो दैट्स अ

51:12प्रिविलेज दैट यू आर गेटिंग बीइंग एन

51:14एंप्लॉय। राइट? तो उस टाइम पे क्या पब्लिश

51:16किया जाएगा? ऑफिस ऑर्डर पब्लिश किया

51:18जाएगा। ओके? अंडरस्टुड? क्या हम आगे चढ़

51:22सक बढ़ सकते हैं? चलिए नेक्स्ट टॉपिक शुरू

51:26हो रहा है एंड दैट इज एमआईएस।

51:29मेरी ग्रीन टी भी खत्म हो रही है।

51:33हम

51:35चलो नाउ व्हाट इज द मीनिंग ऑफ़ एमआईएस?

51:38सबसे पहले तो फुल फॉर्म समझ लो अब्रविएशन

51:41की। एम स्टैंड्स फॉर मैनेजमेंट। आई

51:44स्टैंड्स फॉर इंफॉर्मेशनेशन और एस

51:46स्टैंड्स फॉर सिस्टम। और तीनों को अब हम

51:49पहले अलग-अलग देखेंगे। उसके बाद जाके एक

51:51साथ समा वो करेंगे। इसका मीनिंग समझेंगे।

51:59यहां है। देखिए मैनेजमेंट का क्या मतलब

52:02होता है? 12वीं कक्षा में पढ़ा था तुमने

52:05अगर तुम कॉमर्स वाले थे तो। मैनेजमेंट का

52:08मतलब होता है कि अगर किसी इंसान को इस गोल

52:11तक पहुंचना है। इस गोल को अचीव करना है

52:15एफिशिएंटली

52:17एंड इफेक्टिवली। मतलब कम समय में कम

52:20रिसोर्सेज के साथ। तो उसे मैनेजमेंट यूज

52:23करनी पड़ेगी। उसे क्या करना पड़ेगा?

52:26मैनेजमेंट का इस्तेमाल करना पड़ेगा। आ गई

52:31बात समझ? सो द आर्ट ऑफ गेटिंग थिंग्स डन

52:34इज नोन एज मैनेजमेंट। कोई भी काम करवाना

52:37है, अच्छे तरीके से करवाना है, तो उसके

52:38लिए मैनेजमेंट लगती है। ठीक है?

52:40ऑर्गेनाइजेशन में अगर आपको ऑर्गेनाइजेशन

52:42के गोल्स को अचीव करवाना होता है

52:44इफेक्टिवली एंड एफिशिएंटली तो आपको

52:45मैनेजमेंट की पूरी प्रोसेस करनी पड़ती है।

52:48इंफॉर्मेशन का क्या मतलब होता है?

52:51इंफॉर्मेशन का मतलब होता है प्रोसेस्ड

52:54डेटा। ऐसा डेटा जो कि प्रोसेस हो चुका है,

52:59जिसका निष्कर्ष निकल चुका है, जिसे आपने

53:01एनालाइज कर लिया है उसको हम बोलते हैं

53:05इंफॉर्मेशन। मैम कैसे थोड़ा सा एग्जांपल

53:07दे दो। तो बेटा ऐसे समझो मुझे पता लगाना

53:10था कि

53:13एक क्लास में किसको क्या पसंद है ज्यादा

53:17मतलब ब्लू कलर पसंद है या पिंक कलर पसंद

53:19है और उस क्लास में 30 लोग थे 30

53:23स्टूडेंट्स थे एक क्लास में मुझे पता

53:25लगाना था कि ब्लू ज्यादा पसंद है लोगों को

53:28या पिंक कलर ज्यादा पसंद है तो अब मैंने

53:32एक-एक बच्चे से पूछा तेरे को क्या पसंद

53:34है? एक-एक बच्चे से पूछा तेरे को क्या

53:36पसंद है? मेरे पास जो ये कलेक्ट हुआ है ना

53:39सबकी इंडिविजुअल इंफॉर्मेशन इसको हम बोलते

53:42हैं डेटा। ठीक है? मेरे पास जो नॉलेज आई

53:46है सबके बारे में कि इसको ये पसंद है,

53:47उसको वो पसंद है, उसको वो पसंद है। इसको

53:49हम बोलेंगे डेटा। अब डेटा को जब हम

53:52प्रोसेस करेंगे ना तो हमें पता लगेगा कि

53:5630 में से 18 बच्चों को ब्लू पसंद है। 12

53:59बच्चों को पिंक पसंद है। सो इट मींस

54:03मेजॉरिटी लाइक्स ब्लू कलर।

54:06तो यह मेजॉरिटी लाइक्स ब्लू कलर। दिस इज

54:09एन इंफॉर्मेशन।

54:11डाटा को हमने क्या किया? प्रोसेस किया,

54:13एनालाइज किया और पता लगाया कि मेजॉरिटी

54:16लोगों को क्या चीज पसंद है। ठीक है? तो

54:20एक-एक करके सबके बारे में पता लगाना। डेटा

54:22हो गया। ये अनप्रस्ड होता है। ये रॉ फॉर्म

54:26में होता है। ठीक है? है। बस इसी को जब हम

54:28प्रोसेस कर देते हैं, इस पे थोड़ा सा काम

54:30कर लेते हैं, इसको थोड़ा सा एनालाइज़ कर

54:31देते हैं, तो वो बन जाता है हमारा प्रोसेस

54:33डेटा जिसको हम बोलते हैं इंफॉर्मेशनेशन।

54:36ऐसी चीजें जिससे इनेशन बढ़ा सके। द एमआईएस

54:39इज़ इट इज़ ऑब्टेंड बाय प्रोसेसिंग डेटा इन

54:41द फर्म मीनिंगफुल यूज़र्स टू अ बेसिकली

54:44बोलते हैं डेटा को इस तरीके से एनालाइज़

54:46करना, इस तरीके से रिप्रेजेंट करना,

54:48प्रोसेस करना कि वो मीनिंगफुल बन पाए

54:50कंज्यूमर्स के लिए, कस्टमर्स के लिए। ओके?

54:53एंड सिस्टम सिस्टम का क्या मतलब होता है?

54:55सिस्टम का मतलब होता है हार्डवेयर प्लस द

54:58सॉफ्टवेयर।

55:00हार्डवेयर प्लस सॉफ्टवेयर का कॉम्बिनेशन

55:03इज़ नोन एज सिस्टम।

55:06हार्डवेयर प्लस

55:08सॉफ्टवेयर का कॉम्बिनेशन। सेट ऑफ़

55:11हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, मैन पावर, प्रोसीजर

55:13एक्सट्रा टू प्रोवाइड टाइमली एंड एक्यूरेट

55:15इनफेशन। सिस्टम क्यों इस्तेमाल होता है?

55:18यह सिस्टम इसलिए इस्तेमाल होता है ताकि हम

55:20अच्छे से जो भी काम करना चाह रहे हैं,

55:23मैनेजमेंट करना चाह रहे हैं, टाइमली

55:26इंफॉर्मेशन पाना चाह रहे हैं तो हम वो पा

55:28लें। अब यहां से आई गेस आपको थोड़ी सी एक

55:32बात क्लियर हो गई होगी कि एमआईएस बेसिकली

55:36एक ऐसा सिस्टम होता है जिसमें हमें

55:40इंफॉर्मेशन मिलती है। प्रोसेस डेटा मिलता

55:43है चीजों के बारे में ऑर्गेनाइजेशन के

55:46बारे में जिसको इस्तेमाल करके हम हमारी

55:50मैनेजमेंट अच्छे तरीके से चलाते हैं। आई

55:54बात समझ में? नहीं आई तो एक बार आ जाओ

55:57तुम्हें पिछली दो स्लाइड्स पर ले जाती हूं

55:59यहां पे। यह बोलते हैं किसी भी

56:02ऑर्गेनाइजेशन में ना बहुत सारे फैसले लिए

56:05जाते हैं।

56:07पीडब्ल्यूई ले लो। हर दिन पीडब्ल्यू में

56:10100 200 फैसले लिए जाते होंगे। तो हर

56:12ऑर्गेनाइजेशन में बहुत सारे फैसले लिए

56:14जाते हैं। लेकिन उन फैसलों पर पहुंचने से

56:17पहले उन फैसलों तक पहुंचने के लिए हमें

56:21बहुत सारे इंफॉर्मेशन की जरूरत होती है।

56:24सूचना की आवश्यकता होती है। और वो सूचना

56:27हमें कहां से मिलेगी? वो हमें मिलेगी

56:30एमआईएस से। तो यह बोलते हैं अगर डिसाइड

56:33करना है कुछ तो उसके लिए इंफॉर्मेशन

56:36लगेगी। और इंफॉर्मेशन लगेगी तो उसके लिए

56:40हमें एमआईएस सिस्टम लगेगा। एमआईएस सिस्टम

56:44बेसिकली हमें इंफॉर्मेशन प्रोवाइड करता

56:46है। अपडेटेड इंफॉर्मेशन प्रोवाइड करता है

56:49कि ऑर्गेनाइजेशन में कौन सी चीज कैसे चल

56:51रही होती है जिसकी वजह से हम फैसले अच्छे

56:55से ले पाते हैं। अंडरस्टुड? सो हर

56:59ऑर्गेनाइजेशन को डिसीजन लेने के लिए

57:01इंफॉर्मेशन की रिक्वायरमेंट होती है और

57:03उसी के लिए एमआईएस को पिक्चर में लेके आए

57:06थे।

57:07ये बोलते हैं इंफॉर्मेशन क्या होती है?

57:10डेटा होता है। डेटा को प्रोसेस किया जाता

57:12है और एक पर्टिकुलर पर्पस के लिए मैनेजर

57:15उसे क्या करता है? एनालाइज करता है। और

57:17उससे वो बनाता है क्या? इंफॉर्मेशन। तो

57:20प्रोसेस डेटा इज़ नोन एज इंफॉर्मेशनेशन।

57:24नेक्स्ट एलिमेंट्स कौन-कौन से होते हैं?

57:26तीनों के नाम ले लो। मैनेजमेंट,

57:28इंफॉर्मेशनेशन सिस्टम। मैनेजमेंट क्या

57:30होता है? गोल्स को अचीव करना इफेक्टिवली

57:32एफिशिएंटली। सो दैट हम यू नो अच्छे तरीके

57:35से ऑर्गेनाइजेशन के जितने भी सपने हैं

57:37उनको पूरा कर पाएं। इंफॉर्मेशनेशन क्या

57:39होता है? प्रोसेस डेटा होता है। सिस्टम

57:41क्या होता है? सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर और

57:43मैन पावर और प्रोसीजर्स का कॉम्बिनेशन

57:45होता है। जिससे क्या इंफॉर्मेशन आसानी से

57:47मिल जाती है। तो किसी भी इंसान को

57:49ऑर्गेनाइजेशन से रिलेटेड कोई भी फैसला

57:52लेना है। तुम कौन से भी लेवल पे बैठे हो,

57:53टॉप लेवल पे बैठे हो, मिडिल लेवल पे बैठे

57:55हो या लोअर लेवल पे बैठे हो। तुम्हें

57:57जितने भी फैसले लेने हैं, उसके लिए तुम

57:59इंफॉर्मेशन के लिए डिपेंड कर सकते हो

58:01एमआईएस पे। ठीक है? यह बोलते हैं जो टॉप

58:05लेवल वाले होते हैं वह भी इंफॉर्मेशन यूज़

58:07करते हैं। जो मिडिल लेवल वाले होते हैं वह

58:09भी करते हैं और सुपरवाइज़री लेवल वाले होते

58:11हैं वो भी करते हैं। कैसे-कैसे? आइए समझ

58:13लीजिए। जो टॉप लेवल मैनेजमेंट होती है

58:15जिसमें सीईओ, चेयरमैन जो बड़े-बड़े लोग

58:17होते हैं वो सारे आते हैं। वो क्या करते

58:19हैं? उनका काम क्या होता है? ऑर्गेनाइजेशन

58:21के लिए गोल सेट करना। ऑर्गेनाइजेशन के लिए

58:24सपने देखना, ऑब्जेक्टिव सेट करना कि हमारा

58:26ऑर्गेनाइजेशन हम कहां बढ़ते हुए देखना चाह

58:28रहे हैं? अपकमिंग 5 सालों में हम हमारे

58:30ऑर्गेनाइजेशन को कहां देखते हैं? ये काम

58:33होता है डिसाइड करने का सीईओ या फिर

58:35चेयरमैन का। जितने भी बड़े लेवल के टॉप

58:37लेवल के लोग होते हैं उनका। ठीक है?

58:42सो उसके लिए वो इंफॉर्मेशन कहां से लेते

58:44हैं? एमआईएस से लेते हैं। ओके? वहीं पे जो

58:48मिडिल लेवल वाले होते हैं मतलब मैनेजर

58:51लेवल पे जो होते हैं उनको इंफॉर्मेशन

58:53चाहिए होती है जो कि डायवर्स नहीं हो और

58:55कॉम्प्लेक्स नहीं हो। अगेन वो भी कहां से

58:57मिलती है? वो भी इन्हें एमआईएस से मिलती

58:59है। इन्हें किस नेचर की इनेशन चाहिए होगी?

59:02इन्हें बेसिकली ये चाहिए होगा हर एक

59:03डिपार्टमेंट में क्या चल रहा है? कितना

59:05हमारे अंडर आ रहा है? क्या हमें करना

59:06चाहिए? नई स्कीम्स क्या लानी चाहिए? क्या

59:08जो ऑब्जेक्टिव टॉप लेवल वालों ने देखे हैं

59:11उन्हें इंप्लीमेंट कैसे किया जा सकता है?

59:12तो उन सारे पर्पस के लिए उन्हें काफी सारे

59:15इंफॉर्मेशन की रिक्वायरमेंट होती है जो

59:16अगेन उन्हें कहां से मिलती है? एमआईएस से

59:18मिलती है। वहीं पे हम बात करें सुपरवाइज़री

59:21लेवल की तो यह बोलते हैं यह वो लोग होते

59:23हैं जो डे टू डे रूटीन के लिए रिस्पांसिबल

59:26होते हैं। तो अगेन इनको ऑपरेशनल चीजों से

59:29रिलेटेड इंफॉर्मेशन चाहिए होती है। ऑपरेशन

59:32से रिलेटेड इंफॉर्मेशन चाहिए होती है। और

59:34वो अगेन इनको कहां से मिलती है? एमआईएस

59:37सिस्टम से मिलती है। ठीक है? तो मैंने

59:39जैसे आपको बताया टॉप लेवल का बंदा है,

59:41मिडिल लेवल का बंदा है या फिर सुपरवाइज़री

59:43लेवल का बंदा है। हर एक बंदे को

59:46इंफॉर्मेशन की तो रिक्वायरमेंट होती है

59:48फॉर अलग-अलग पर्पज। वो पर्पस क्या होते

59:50हैं? वो 12थ क्लास में भी आपने पढ़े हैं।

59:52मैंने आपको एक बार रिपीट भी करा दिया है।

59:54ठीक है? अब उन पर्पज़ के लिए जो इंफॉर्मेशन

59:56आपको रिक्वायर्ड होगी वो आपको कहां से

59:57मिलेगी? एमआईएस से मिलेगी। क्योंकि एमआईएस

1:00:00क्या है? एक ऐसा सिस्टम है जो आपको

1:00:03अपडेटेड इंफॉर्मेशन देता है ऑर्गेनाइजेशन

1:00:06के बारे में। ओके? ऑर्गेनाइजेशन का कोई भी

1:00:09इंसान इस इंफॉर्मेशन को इस्तेमाल कर सकता

1:00:11है और अपने फैसले इस इंफॉर्मेशन के बेसिस

1:00:15पे ले सकता है।

1:00:18यह बोलते हैं बेसिक रिक्वायरमेंट क्या है

1:00:20एमआईएस की? तो सबसे पहले तो हार्डवेयर

1:00:23देखो तुम्हें एक सिस्टम बनाना है तो

1:00:25तुम्हें कंप्यूटर तो चाहिए कि नहीं चाहिए।

1:00:27और कंप्यूटर के साथ और भी बहुत छोटे-छोटे

1:00:29गैजेट्स आते हैं। माउस आएगा, कीबोर्ड

1:00:31आएगा, सीपीयू आएगा, यूपीएस आएगा। पता नहीं

1:00:34कितनी सारी चीजें आएंगी। तो वो सारी चीजों

1:00:35की रिक्वायरमेंट होएगी। उसके अलावा MIS

1:00:38जिस उस पे चलेगा वो सॉफ्टवेयर भी तो

1:00:40चाहिए। बिना सॉफ्टवेयर के तो हार्डवेयर

1:00:42कोई काम का है ही नहीं। है ना? जैसे

1:00:44Windows होते हैं, Android होते हैं। जब

1:00:46तक ये नहीं होंगे तो क्या क्या हमारा

1:00:48गैजेट किसी काम का होगा? नहीं होगा। फिर

1:00:51होते हैं ऑपरेशनल ऑपरेशंस पर्सनल। ऐसे लोग

1:00:54जो कि यू नो जानते हो जिनको टेक की नॉलेज

1:00:57हो। जिनको एमआईएस ऑपरेट करना आता हो।

1:01:00जिसमें जिनको एमआईएस पे इंफॉर्मेशनेशन यू

1:01:02नो डालना आता हो। सॉफ्टवेयर रन करना आता

1:01:04हो, प्रोग्रामिंग करनी आती हो, वह सारे

1:01:07लोगों की आवश्यकता है। उसके अलावा

1:01:09प्रोसीजर्स बोले तो मैनुअल्स जो इनेशन

1:01:11इंस्ट्रक्शंस रिक्वायर्ड होती हैं वो

1:01:13बुक्स उनके बारे में बात हो रही है कि वो

1:01:15भी जरूरी है। डेटाबेस डेटाबेस का मतलब

1:01:17क्या होता है? जहां डेटा स्टोर किया जाता

1:01:20है जो टू पूरा स्टोर्ड डेटा होता है ना

1:01:23उसको हम डेटाबेस बोलते हैं। तो वो भी कहीं

1:01:25ना कहीं हमारा एमआईएस का ही पार्ट होता

1:01:28है। सो बेसिक रिक्वायरमेंट्स क्या हैं? ये

1:01:31पांच हैं हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, ऑपरेशन

1:01:33पर्सनल एंड प्रोसीजर्स एंड डेटाबेस। ओके?

1:01:37अगर इनमें से कुछ भी मिसिंग होगा तो हम

1:01:39एमआईएस रन नहीं कर पाएंगे। अब ये बोलते

1:01:43हैं भैया तुमने खूबियां तो बहुत बता दी कि

1:01:45इस चीज को टॉप लेवल भी इस्तेमाल करता है,

1:01:47मिडिल लेवल भी इस्तेमाल करता है, लोअर

1:01:48लेवल भी इस्तेमाल करता है। लेकिन व्हाट

1:01:51अबाउट हमारे नेगेटिव पॉइंट्स? एमआईएस के

1:01:54कोई नेगेटिव पॉइंट्स नहीं होते। क्या कोई

1:01:56लिमिटेशंस नहीं होती? तो आंसर है बिल्कुल

1:01:58होती हैं। ये बोलते हैं आउटपुट क्वालिटी

1:02:01डिपेंड्स ऑन इनपुट क्वालिटी। इसका क्या

1:02:04मतलब है?

1:02:05मैं गन्ने का जूस बना रही हूं। ठीक है?

1:02:08मेरे पास गन्ना ही बिल्कुल थर्ड क्लास आया

1:02:10है। गंदी क्वालिटी का आया है। अब मुझे

1:02:12बताओ क्या जूस अच्छा बन पाएगा? मैं संतरे

1:02:16का जूस बना रही हूं। संतरा गला हुआ था।

1:02:19क्या जूस टेस्टी बनेगा क्या? मैं मैंगो

1:02:21शेक बना रही हूं। मैंगो गल गया था। अब

1:02:24क्या उसका शेक में वह टेस्ट नहीं आएगा?

1:02:27वैसे कुछ लोगों को तो नहीं आता बट स्टिल

1:02:29मुझे तो आएगा। ठीक है? तो यह बोलते हैं जो

1:02:32आउटपुट की क्वालिटी होती है ना जो भी

1:02:34आउटपुट निकल के आता है वो काफी हद तक

1:02:36डिपेंड करता है इनपुट्स पे। इनपुट की

1:02:39क्वालिटी जैसी होगी ना उसी पे डिपेंड

1:02:41करेगा आपका आउटपुट का क्वालिटी। सो अगर

1:02:43इनपुट की क्वालिटी बेकार है, डेटा की

1:02:45क्वालिटी ही बेकार है, तो इंफॉर्मेशन भी

1:02:47बेकार ही निकलेगी और उससे लिए फैसले भी

1:02:50बेकार ही निकलेंगे। नॉट टू बी फ्लेक्सिबल।

1:02:53नॉट बी दैट फ्लेक्सिबल टू अपडेट क्विकली।

1:02:56बहुत ज्यादा जल्दी या बहुत ज्यादा क्विकली

1:02:59अपडेट भी नहीं हो पाता। दैट इज़ आल्सो अ

1:03:01नेगेटिव पॉइंट ऑफ़ इट। नॉट अ सब्स्टिट्यूट

1:03:03फॉर इफेक्टिव मैनेजमेंट। ये बोलते हैं अगर

1:03:05किसी इंसान को ऐसा लग रहा हो कि मैनेजमेंट

1:03:07सिस्टम को ही बिल्कुल हटा दिया जाए और

1:03:08एमआईएस को ले आओ। वो रिप्लेस कर देगा

1:03:11मैनेजमेंट को। तो ये बिल्कुल झूठी बात है।

1:03:13ऐसा नहीं हो सकता। ठीक है? कांट मेक टेलर

1:03:16मेड इनेशन। टेलर मेड का मतलब होता है देखो

1:03:18टेलर जैसे तुम्हारी रिक्वायरमेंट के

1:03:20अकॉर्डिंग तुम्हारे कपड़े सिलता है। अगर

1:03:22मान लीजिए मुझे कोई शर्ट लेनी है। ठीक है?

1:03:24तो मेरे पास एक ऑप्शन है। मैं दुकान पे

1:03:26जाके बनी बनाई शर्ट ले सकती हूं। लेकिन वो

1:03:28मुझे समऊ फिट करनी पड़ेगी। चाहे वो जैसी

1:03:30भी हो। मेरे को बिल्कुल फिटेड आ रही हो या

1:03:32बहुत ज्यादा खुली आ रही हो मुझे पहननी

1:03:34पड़ेगी। लेकिन वही चीज अगर मैं टेलर के

1:03:36पास जाके बोलती हूं तो फिर वो टेलर मेरे

1:03:38साइज के अकॉर्डिंग वो टी मतलब शर्ट बना के

1:03:40देगा ना मुझे। तो टेलर मेड का मतलब होता

1:03:42है हमारी रिक्वायरमेंट के अकॉर्डिंग जो बन

1:03:44सके। तो ये बोलते हैं एमआईएस को हम हमारी

1:03:46रिक्वायरमेंट के अकॉर्डिंग नहीं बना सकते

1:03:48क्योंकि वो एक पर्टिकुलर रिस्पेक्टिव वे

1:03:50में ही बनता है। टेक्स ओनली क्वांटिटेटिव

1:03:53फैक्टर्स। ये बोलता है बस नंबर वाली चीजें

1:03:55जो होती हैं ना उन्हीं को ही ध्यान में

1:03:56लेता है। ये ऐसी चीजें जो क्वालिटेटिव वे

1:03:59में होती हैं। वो कैसा फील कर रहा था? वो

1:04:01कितना थका हुआ था। इन सब चीजों को वो

1:04:04कंसीडर ही नहीं करता। ठीक है? यूज़फुल फॉर

1:04:07नॉन प्रोग्राम डिसीजन मेकिंग। ऐसी डिसीजन

1:04:09मेकिंग जिसमें प्रोग्रामिंग की ज़रूरत नहीं

1:04:11होती वह वालों के लिए बेस्ट है। अदरवाइज़ न

1:04:15मतलब न अदरवाइज़ दूसरों के लिए नहीं है।

1:04:18ऑर्गेनाइज़ेशंस वेयर इनेशन इज़ होल्ड एंड

1:04:20नॉट डिस्क्लोज़्ड देयर एमआईएस कांट बी

1:04:23यूज़्ड। ऐसी भी तो ऑर्गेनाइज़ेशंस होती हैं

1:04:25ना जो अपनी इनफेशन डिस्क्लोज़ करना पसंद

1:04:26नहीं करती। लोगों को बताना पसंद नहीं

1:04:28करती। वो नहीं चाहती कि ऑर्गेनाइज़ेशन में

1:04:30सबको इस पर्टिकुलर इनेशन के बारे में पता

1:04:32हो। तो ऐसी ऑर्गेनाइजेशंस के लिए ये चीज

1:04:35सही नहीं है क्योंकि यहां पे तो अगर कोई

1:04:37भी इंफॉर्मेशन जाएगी वो सब देख पाएंगे।

1:04:39ऑर्गेनाइजेशन में कोई किसी भी लेवल पे काम

1:04:41कर रहा हो सारी इनेशन सबके सामने होंगी।

1:04:44ठीक है? लास्ट है एमआईएस इफेक्टिवनेस

1:04:46डिक्रीसेस ड्यू टू फ्रीक्वेंट चेंजेस।

1:04:48फ्रीक्वेंट चेंजेस की वजह से इसकी जो

1:04:50इफेक्टिवनेस थी वो क्या हो जाती है?

1:04:51डिक्रीज हो जाती है और होती भी है। हमने

1:04:54बहुत सारे ऑर्गेनाइजेशन में बकायदा इस चीज

1:04:56को होते हुए देखा है कि यह उतना इफेक्टिव

1:04:59नहीं रहता है क्योंकि बहुत बार अलग-अलग

1:05:01चेंजज़ हो जाते हैं। तो ये उसे मैनेज नहीं

1:05:04कर पाता। ठीक है? तो यहां पे एमआईएस की

1:05:07हमारी जो कांसेप्ट है वो कंप्लीट होती है।

1:05:09मैं आपको एक बार रिवाइज़ करा देती हूं।

1:05:10व्हाट इज़ एमआईएस? एमआईएस बेसिकली एक ऐसा

1:05:14सिस्टम है जो हमें

1:05:18जो हमें क्या करता है? इंफॉर्मेशन

1:05:20प्रोवाइड करता है। एंड व्हाट इज़

1:05:22इंफॉर्मेशन? प्रोसेस डेटा।

1:05:26प्रोसेस डेटा

1:05:28इंफॉर्मेशन कहलाया जाता है। तो एमआईएस वो

1:05:31सिस्टम है जो हमें इंफॉर्मेशन प्रोवाइड

1:05:33करता है और वो इंफॉर्मेशन इस्तेमाल करके

1:05:37हम हमारी डिसीजन मेकिंग करते हैं।

1:05:39[गला साफ़ करने की आवाज़]

1:05:41हम फैसले लेते हैं। ठीक है?

1:05:45तो डिसीजन मेकिंग के लिए जो इंफॉर्मेशन

1:05:47रिक्वायर्ड होती है वह हमें प्रोवाइड की

1:05:49जाती है एक सिस्टम द्वारा प्रोवाइड करवाई

1:05:51जाती है एक सिस्टम द्वारा जिसे हम बुलाते

1:05:53हैं एमआईएस

1:05:55और यहां पे हमारा एमआईएस का टॉपिक कंप्लीट

1:05:58होता है और अब हम मूव कर रहे हैं हमारे

1:06:01नेक्स्ट टॉपिक पे जो कि है ई

1:06:03कॉरेस्पोंडेंस नाउ व्हाट इज द मीनिंग ऑफ़ ई

1:06:06कॉरेस्पोंडेंस

1:06:08देखो बेटा ये जो ई कॉरेस्पोंडेंस में ई

1:06:11लिखा हुआ है ना सामने उसका मतलब होता है

1:06:14इलेक्ट्रॉनिक या फिर ईमेल बोले तो डिजिटल

1:06:18प्लेटफार्म पे जो आप रिटन वे में

1:06:20कम्युनिकेशन करते हो ना उसके बारे में बात

1:06:23हो रही है। फॉर एग्जांपल अगर कल की डेट

1:06:26में तुम्हें आईसीएसआई से कोई प्रॉब्लम है

1:06:29तुम्हें कोई प्रॉब्लम उनके साथ डिस्कस

1:06:31करनी है तो तुम क्या करोगे? उन्हें लेटर

1:06:33लिखोगे ना एक लेटर लिखोगे। बढ़िया ड्राफ्ट

1:06:36करोगे और आईसीएसआई को मेल कर दोगे भेज

1:06:38दोगे। यही करोगे ना? बस उसी चीज के बारे

1:06:41में यहां पे बात हो रही है। यह बोलते हैं

1:06:44जब हमें किसी इंसान को मेल लिखना होता है,

1:06:47इलेक्ट्रॉनिकली उसे कनेक्ट करना होता है,

1:06:50कम्यनिकेट करना होता है रिटन वे में तो

1:06:53हमें किन-किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए

1:06:56वो हम यहां पे पढ़ेंगे। ओके? सो, फर्स्ट दे

1:06:59से ई कॉरेस्पोंडेंस इज़ कॉमनली नोन ऐज़ ईमेल

1:07:03कॉरेस्पोंडेंस और इलेक्ट्रॉनिक

1:07:05कॉरेस्पोंडेंस। इट इज़ एन इलेक्ट्रॉनिक

1:07:07मेथड और प्रोवाइडिंग यू विद इंपॉर्टेंट

1:07:10इनफेशन ऑन योर ईमेल एड्रेस। आपके ईमेल

1:07:13अकाउंट पे ईमेल एड्रेस पे जो इंपॉर्टेंट

1:07:15इनफेशन आती है इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में

1:07:17उसके बारे में बात हो रही है। यू मस्ट

1:07:19सप्लाई अ वैलिड ईमेल एड्रेस इन ऑर्डर टू

1:07:21रिसीव इनफेशन व्हाइल ईमेल। जब भी मान लो

1:07:24मान लो मैं कहीं पे फॉर से एक कहीं मॉल

1:07:27में घूमने गई। वहां पे ना कोई वो चल रहा

1:07:30था। लॉटरी सिस्टम चल रहा था। बस आपको वहां

1:07:32पे ना अपनी चिट रख के आनी थी। तो वो आपको

1:07:34ना मेल पे रिप्लाई करते कि वो क्या आपको

1:07:37अवार्ड देने वाले हैं या लॉटरी में आपका

1:07:39नाम निकला है कि नहीं निकला। तो इसके लिए

1:07:41जरूरी है कि आप अपना मेल आईडी ढंग से लिख

1:07:44के लाओ। जैसे मैं आपको बताऊं एक मेल आईडी

1:07:48फॉर से 90

1:07:50अ 8

1:07:52पायल

1:07:55पोपली

1:07:57ठीक है @ gmail.com

1:08:03ठीक है। अब ये क्या है? यह एक वैलिड Gmail

1:08:06आईडी है। अगर कोई मुझे इस पे मेल करेगा तो

1:08:09मुझे वह रिसीव होगा। वैसे है नहीं यह।

1:08:12मेरी रियल वाली मेल आईडी यह है नहीं। पहले

1:08:14ना मैं लिखने वाली थी अपनी रियल वाली मेल

1:08:16आईडी कि एग्जांपल ही तो देना है। बट देन

1:08:18आई रियलाइज़ कि यह तो YouTube पे अपलोड

1:08:20होगा। देन आई रियलाइज़ YouTube पे तो कोई

1:08:22भी मुझे फिर मेल कर सकता है। इसलिए फिर

1:08:24मैंने उसे थोड़ा सा चेंज कर दिया है। ठीक

1:08:26है? बट इस तरीके से आपको प्रॉपर अपनी मेल

1:08:29आईडी देनी पड़ती है। Gmail पे है, Yahoo पे

1:08:31है, किस पे है वो सारा मेंशन करते हुए।

1:08:33एंड देन हाई चांसेस होते हैं कि आपको आपके

1:08:36मेल अकाउंट में राइट कम्युनिकेशन आ जाए।

1:08:39ठीक है? इलेक्ट्रॉनिक मेल कॉमनली नॉन

1:08:42[गला साफ़ करने की आवाज़] कॉमनली बाय इट्स

1:08:43अब्रविएशन ईमेल [खांसने की आवाज़]

1:08:46जो इलेक्ट्रॉनिक मेल होती है ना उसकी

1:08:48शॉर्ट फॉर्म होती है ईमेल जिसको हम अक्सर

1:08:50इस्तेमाल करते हैं इज़ प्रोबेबबली द मोस्ट

1:08:52यूज्ड मीडियम ऑफ कम्युनिकेशन टुडे आज की

1:08:55डेट में जो सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने

1:08:57वाला कम्युनिकेशन का मीडियम है वो ईमेल ही

1:09:00है। तुम खुद सोच के देखो यार तुम्हें कोई

1:09:02भी तकलीफ होती है तुम्हें पीडब्ल्यू से

1:09:04कोई इशू होगा। तुम मेल लिखोगे पीडब्ल्यू

1:09:06की वेबसाइट पे जाके ईमेल आईडी ढूंढ के।

1:09:09राइट? तुम्हें आईसीएसआई से कोई तकलीफ

1:09:11होगी, तुम्हें गवर्नमेंट से कोई तकलीफ

1:09:12होती है। तुम क्या करते हो? मेल ही तो

1:09:14लिखते हो। एक बार मुझे अ मेरे मेरे जो

1:09:18कॉलोनी है ना उसके पास एक एरिया पड़ता है।

1:09:20थोड़ा सा आइसोलेटेड था वो एरिया। ठीक है?

1:09:22वहां पे ना शाम के टाइम पे लाइट्स नहीं

1:09:24लगी हुई थी। तो एक बार मैं बहुत लेटा नाइट

1:09:26आ रही थी स्कूटी पे। देन आई रियलाइज़ कि

1:09:28यार यहां पे तो लाइट्स ही नहीं लगी हुई

1:09:30हैं। एंड आई फेल्ट लिटिल इनसिक्योर सेफ।

1:09:33अनसेफ। बेसिकली इनसिक्योर नहीं अनसेफ।

1:09:35क्योंकि लाइट नहीं हो। रात को आप आ रहे हो

1:09:38अकेले बहुत सारी चीजें होती है। राइट? तो

1:09:40मैंने क्या किया था? मैंने गवर्नमेंट की

1:09:41वेबसाइट पे जाके उनकी मेल आईडी सर्च करी

1:09:44जो एमपी वाला सेगमेंट देखते थे और उन्हें

1:09:46मेल ड्रॉप किया। बैक टू बैक मेल ड्रॉप करे

1:09:49और तीन-चार दिन बाद फाइनली वो लोग आए।

1:09:51उन्होंने मुझसे पूछा कहां पे लाइट्स नहीं

1:09:53है। मैंने उन्हें बताया यहां पे नहीं है।

1:09:54और एक हफ्ते बाद वहां पे लाइट्स लग गई थी।

1:09:57ठीक है? तो गवर्नमेंट से भी हमें कांटेक्ट

1:09:59करना होता है। गवर्नमेंट को भी हमें अपनी

1:10:01प्रॉब्लम बतानी है। तो भी हमें किसका

1:10:03इस्तेमाल करना पड़ता है? Gmail का

1:10:05इस्तेमाल। ईमेल तो मतलब एक मीडियम हो गया।

1:10:07ईमेल का इस्तेमाल करना पड़ता है। ओके? सो

1:10:10क्या भेज सकते हो आप ईमेल पे? बिनेस

1:10:13प्रेजेंटेशंस भेज सकते हो। पूरी-पूरी

1:10:14पीबीटी उठा के भेज सकते हो। इंजीनियरिंग

1:10:17ब्लूप्रिंट्स भेज सकते हो। बुक के

1:10:18चैप्टर्स भेज सकते हो। डिटेल्ड

1:10:20कॉन्ट्रैक्ट्स भेज सकते हो। ग्राफिक्स भेज

1:10:21सकते हो। फाइल्स ऑफ़ आर्ट वर्क भेज सकते

1:10:23हो। ये फाइल्स ऑफ़ आर्ट वर्क से मुझे याद

1:10:25आया। मेरी फ्रेंड ने फैशन डिजाइनिंग की

1:10:27है। ठीक है? और मैं उससे पूछती थी तू

1:10:29स्टोरेज के लिए क्या इस्तेमाल करती है? तो

1:10:31वो बोलती है यार मैं तो मेल पे भेजती हूं

1:10:33हर चीज़। मतलब मेल पे सालों साल अगर कोई भी

1:10:36चीज आपने भेजी होगी तो वो सेव्ड रहती है।

1:10:388 साल पुराने भी जो मेरे मेल्स होंगे ना

1:10:40अगर मैंने वो डिलीट नहीं किए होंगे ना वो

1:10:42मेरे फोन में मतलब मेरी मेल आईडी पे

1:10:44मिलेंगे। तो सबसे बढ़िया स्टोरेज एरिया भी

1:10:46काइंड ऑफ मेल आईडी मतलब आपका ईमेल होता

1:10:48है। ओके? तो ये सारे पर्पजेस के लिए आप

1:10:51उसे इस्तेमाल कर सकते हो। और ये सारे

1:10:53पर्पजेस अ सारे मेल्स भेजने के लिए भी आप

1:10:55उसका इस्तेमाल कर सकते हो। ठीक है? देन दे

1:10:59से क्या होता है? एक मेल बॉक्स होगा। मतलब

1:11:02आपका मेल बॉक्स होगा। ठीक है? वहां से आप

1:11:05एक मेल भेजोगे किसी और इंसान के मेल बॉक्स

1:11:08में। उसको रिसीव होगा। फिर उसके बाद वह

1:11:10रिप्लाई भेजेगा आपको। और ये सारी प्रोसेस

1:11:13होती है आपकी इंटरनेट को इस्तेमाल करके।

1:11:15बिना इंटरनेट के आप ना किसी को मेल भेज

1:11:19सकते हो ना सामने वाला इंसान आपको मेल भेज

1:11:21सकता है। सो आपको क्या करना पड़ेगा? अपना

1:11:24जो भी फाइल मैसेज जो भी भेजना है वो अपने

1:11:26कंप्यूटर में डालना पड़ेगा। उसको मेल आईडी

1:11:29के थ्रू सामने वाले इंसान को भेजना

1:11:31पड़ेगा। उसको रिसीव होगा। वो फिर उसका

1:11:32रिप्लाई करेगा। और ये पूरी प्रोसेस

1:11:34इंटरनेट के थ्रू होती है। बिना इंटरनेट के

1:11:37नहीं होती है। ओके? अब मेल में होता

1:11:40क्या-क्या है? तो ये बोलते हैं मेल में यह

1:11:43सारी चीजें होती है। मैं आपको दिखाऊं

1:11:45क्या?

1:11:47चलो मैं आपको दिखा देती हूं एक बार

1:11:49प्रैक्टिकली। मेल में क्या-क्या होता है?

1:12:03हां हां हां हां हां अगर यहां पे कट लग

1:12:07जाए मेरा वेरीफाई करने के बाद नेक्स्ट

1:12:08करने के बाद ठीक है तो समझ जाना कुछ ऐसा

1:12:11पर्सनल मेल था जो मैं तुम्हें नहीं दिखा

1:12:13सकती थी तो मैंने कट लगा दिया

1:12:15[नाक से की जाने वाली आवाज़]

1:12:17अरे पासवर्ड आ गया यार छोड़ो

1:12:20छोड़ो मैं तुम्हें वैसे ही बता देती हूं

1:12:22मेल आईडी कैसे दिखती है ठीक है

1:12:25मैं तुम्हें वैसे ही बता देती हूं। एक बार

1:12:28रुक जाओ एक सेकंड बस सबर कर लो थोड़ा सा।

1:12:31ठीक है?

1:12:41हां। ये देखो। कुछ ऐसा दिखाई देता है। ठीक

1:12:45है? कुछ ऐसा दिखाई देता है आपका वो।

1:12:51दिख रहा है? इसको हम बोलते हैं मेल बॉक्स।

1:12:55जहां पर आपके सारे मेल्स दिखाई देंगे ना,

1:12:57इन्हें हम बोलते हैं मेल बॉक्स। ठीक है?

1:12:59यहां आप देख सकते हैं ऑल इनबॉक्सेस।

1:13:02इनबॉक्स का मतलब होता है जहां मेल आ रही

1:13:04हैं। बाहर वालों ने जितनी भी मेल भेजी

1:13:06होंगी ना वो इसके अंदर शो होंगे। ठीक है?

1:13:09इनबॉक्स। ओके? अनरेड बेसिकली मतलब जो आपने

1:13:12रीड नहीं करी है, फ्लैग्ड वो सब छोड़ दो।

1:13:14सेंट में बेसिकली आएगा जो मैसेजेस आप भेज

1:13:17रहे हैं। देखो इनबॉक्स में आएगा वो मेल्स

1:13:20जो आपको रिसीव हुआ है। मान लीजिए आपको

1:13:23मैंने एक मेल भेजा है तो वो आपके इनबॉक्स

1:13:26में शो होगा। आपने मुझे कोई मेल भेजा है

1:13:28तो वो आपके सेंट में शो होगा। ठीक है? कि

1:13:31मैंने सेंड किया है ये। ट्रैश में बेसिकली

1:13:34जो डिलीटेड मेल्स होते हैं ना जो डिलीटेड

1:13:36वाले मतलब आपने अपने एंड से डिलीट कर दिए।

1:13:38वो चले जाते हैं। वो 30 दिन तक वहां रहते

1:13:40हैं। कोई उन्हें नहीं वहां से साफ करे या

1:13:42हटाए तो वो 30 दिन बाद अपने आप वहां से

1:13:44साफ हो जाते हैं। ड्राफ्ट में कई बार ऐसा

1:13:46होता है हम मैसेज लिखते तो हैं लेकिन उसको

1:13:48भेजना भूल जाते भूल जाते हैं या फिर भेजते

1:13:51नहीं हैं। वेट करते हैं सामने वाले की।

1:13:52राइट? तो वो मैसेजेस हमारे क्या कहलाए

1:13:54जाते हैं? ड्राफ्ट कहलाए जाते हैं। मेल के

1:13:57साथ भी सेम चीज़ है। हम किसी को मेल लिखते

1:13:59हैं लेकिन हम भेजते नहीं हैं। तो वो

1:14:01ड्राफ्ट में सेव हो जाती हैं। ओके? फिर

1:14:03आता है स्पैम। स्पैम में जाते हैं वो

1:14:05मैसेजेस जो बगिंग नेचर के होते हैं। जैसे

1:14:07तुम लोग कभी-कभी क्लास में करते हो ना

1:14:09स्पैम कर मारते हो एक ही बार-बार बार-बार

1:14:11बोलते रहते हो। तो ऐसे ही बहुत सारी

1:14:13कंपनीज़ ना प्रमोशनल मैसेजेस भेजती हैं।

1:14:15ठीक है? वो इंसान इंटरेस्टेड नहीं होता उन

1:14:17प्रमोशनल मैसेजेस में। फिर भी वो रिसीव

1:14:19होते जाते हैं। होते जाते हैं होते जाते

1:14:21हैं। तो वो फालतू के मैसेजेस स्पैम में

1:14:22चले जाते हैं। ओके? बस इतना ही है मेन जो

1:14:26आपका जानने लायक है। यहां पे आ जाओ वापस।

1:14:28इनबॉक्स बता दिया क्या होता है। ठीक है?

1:14:31सेंड मेल बोले तो जो भी सारी मेल्स आपने

1:14:34सेंड की हैं वो ड्राफ्ट जो मैसेजेस आप

1:14:37नहीं भेज पाए बस आपने बना के रखे हुए थे

1:14:39स्पैम जिसमें आपकी जंक मेल्स जाती हैं

1:14:41ट्रैश जहां पे डिलीटेड मेल्स जाती हैं

1:14:43कंपोज मेल कंपोज मेल आया था क्या यहां पे

1:14:47कंपोज मेल ये जो ये प्लस का साइन दिख रहा

1:14:50है ना न्यू वाला बस इस पे अगर आप क्लिक

1:14:52करोगे ना तो वो कंपोज होगा मेल ठीक है

1:14:55कंपोज मतलब नया मेल शुरू कर रहे हो

1:14:59कांटेक्ट्स मतलब जो भी मेल मेल आईडीज आपके

1:15:02मेल पे ऑलरेडी सेव्ड होंगी। जैसे आप

1:15:04फ्रीक्वेंटली किसी इंसान को मेल करते रहते

1:15:06हो, करते रहते हो तो उसकी मेल आईडी आपके

1:15:08कांटेक्ट्स में सेव्ड हो जाती है। फिर

1:15:10आपको बार-बार वो टाइप नहीं करनी पड़ती है।

1:15:12टू फील्ड टू फील्ड का मतलब होता है किसको

1:15:14भेजना है ये। टू मतलब किसको भेजना है ये

1:15:16मैसेज। इसमें वो भरा जाता है। सब्जेक्ट

1:15:19जैसे लेटर के ऊपर सब्जेक्ट हेडिंग होती है

1:15:22जिसमें बेसिकली यह दर्शाया जाता है कि

1:15:23लेटर के अंदर आपको किस चीज के रिलेटेड बात

1:15:26लिखी हुई मिलेगी। वैसे ही मेल के ऊपर भी

1:15:28एक सब्जेक्ट लिखा होता है जिसमें आपको ये

1:15:30देखने को मिलता है कि मेल किस चीज के

1:15:32रिगार्डिंग है। जैसे टू में आपने लिखा किस

1:15:36इंसान को भेजना है। यह मैसेज हो गया आपका

1:15:39और यहां पे वो नहीं दिखाई दे रहा है। ठीक

1:15:41है? इट्स ओके। कोई बात नहीं वो नहीं दिख

1:15:43रहा। ठीक है? टेक्स्ट एरिया। टेक्स्ट

1:15:45एरिया में आप अपना पूरा यू नो टेक्स्ट

1:15:47लिखेंगे जो भी आपको सामने वाले इंसान को

1:15:49मैसेज भेजना है और सेंड में बेसिकली वो

1:15:51बटन होगा जिसको प्रेस करने के बाद मेल चला

1:15:53जाएगा। तो ये मैंने आपको प्रैक्टिकली दिखा

1:15:56दिए हैं सारे के सारे मेल बॉक्स खोल के

1:15:58ही। अब तुम एक काम करना तुम्हारे पास भी

1:16:00एक मेल होगा ही ईमेल आईडी है ना वहां जाना

1:16:04और ये सारी चीजें नोटिस करना तुम्हें

1:16:05देखने को मिलती हैं कि नहीं मिलती हैं। अब

1:16:08हम बात करते हैं ऑप्टिमाइजिंग पर्सनल ईमेल

1:16:11यूज़। ये बोलते हैं कि कैसे हम ईमेल

1:16:13इस्तेमाल ईमेल के इस्तेमाल को और ज्यादा

1:16:15प्रोडक्टिव बना सकते हैं, बेहतर बना सकते

1:16:17हैं। तो सबसे पहले ये बोलते हैं अवॉयड

1:16:20इमोटिकंस जो ये स्माइली तुम बनाते हो

1:16:23नॉर्मल कॉन्वर्सेशंस में ये सारी तुम

1:16:27ईमेल्स में इस्तेमाल नहीं कर सकते। तुमने

1:16:29देखा भी नहीं होगा कभी किसी को। ईमेल्स

1:16:31में ये सारे इमोटिकंस इस्तेमाल होते हुए।

1:16:33तो ये नहीं करने चाहिए। ये बहुत ही

1:16:35इनफॉर्मल कंसीडर किए जाते हैं। इवन फॉर

1:16:37दैट मैटर अगर आप WhatsApp पे भी कभी किसी

1:16:40को प्रोफेशनल मैसेज भेज रहे होते हो तो

1:16:42इमोटिकंस को आपको इस्तेमाल नहीं करना

1:16:45चाहिए क्योंकि ये इनफॉर्मल मैसेजेस का

1:16:47पार्ट होते हैं। इसके अलावा अवॉइड

1:16:51स्पैमिंग ये तो सारे बच्चों को सीखने की

1:16:53जरूरत है। अवॉयड स्पैमिंग प्लीज स्पैमिंग

1:16:56मत करो। एक ही चीज को बार-बार बार-बार

1:16:58बार-बार मत करो। वरना सामने वाला इरिटेट

1:17:01हो जाएगा। डिलीट ऑल मैसेजेस। कई बार क्या

1:17:03होता है आपका ईमेल ना फुल हो जाता है। तो

1:17:06पुराने जो मैसेजेस होते हैं ना वो डिलीट

1:17:08होना शुरू हो जाते हैं। बट अगर मान लीजिए

1:17:10उसमें कोई इंपॉर्टेंट मैसेज हुआ आपके बिना

1:17:12देखे वो डिलीट हो गया तो आपका तो लॉस हो

1:17:14जाएगा ना। इसलिए जब भी आपको फुर्सत मिले

1:17:16जो फालतू के मेल्स होते हैं ना उनको डिलीट

1:17:18करते रहना चाहिए। ओके? यूज़ रिप्लाई

1:17:21रिप्लाई ऑल फीचर अच्छे से। इसमें क्या बोल

1:17:24रहे हैं? देखो। दो तरीके होते हैं। एक

1:17:27होता है मान लो आपके पास एक मैसेज आया है।

1:17:29वह सेम मैसेज 10 और लोगों को गया होगा।

1:17:32ठीक है? अब आप जब रिप्लाई कर रहेगे तो

1:17:35आपको ये सोच समझ के रिप्लाई करना है कि

1:17:36रिप्लाई आपको उस इंसान को भेजना है जिसने

1:17:39आपको मैसेज भेजा था या उन सब लोगों को

1:17:42भेजना है जिसको उस इंसान ने मैसेज भेजा

1:17:44था। जैसे कई बार पीडब्ल्यू से मुझे मेल

1:17:46आता है और उसमें सीसी में बहुत सारे और

1:17:50लोगों का नाम लिखा रहता है। जैसे बाकी और

1:17:52जितने भी टीचर्स हैं शिवांगी शिवानी मैडम

1:17:54हो गए, ऋषभ सर हो गए, सुमित सर हो गए,

1:17:57डीजी सर हो गए, मेहंदी मैम हो गए। सबके

1:17:59पास वो मेल आया। ठीक है? आया किसकी तरफ

1:18:02से? PW की तरफ से। तो अब मुझे सोचना

1:18:04पड़ेगा कि मुझे जो रिप्लाई करना है मुझे

1:18:06सिर्फ पीडब्ल्यू को दिखाना है या इन सब

1:18:08लोगों को भी दिखा सकती हूं। अगर इन सब

1:18:10लोगों को भी दिखाना है तो रिप्लाई ऑल पे

1:18:12क्लिक करूंगी। लेकिन अगर सिर्फ मुझे

1:18:14पीडब्ल्यू को दिखाना है तो रिप्लाई पे

1:18:16क्लिक करूंगी। ठीक है? तो इस फीचर को बहुत

1:18:17ही आस मतलब ध्यानपूक इस्तेमाल करना चाहिए।

1:18:20कई बार क्या होता है? हमें सिर्फ रिप्लाई

1:18:22एक इंसान को भेजना होता है। रिप्लाई ऑल

1:18:23टाइप कर देता है तो वो गलती से सबके पास

1:18:25चला जाता है। और एक चीज़ मैं और तुम्हें

1:18:27बता दूं। एक बार अगर तुमने किसी को मेल

1:18:29भेज दिया ना उसको डिलीट करने का ऑप्शन

1:18:31नहीं होता बेटा। जैसे WhatsApp मैसेजेस तो

1:18:33हम डिलीट कर लेते हैं फटाफट। है ना?

1:18:35अनसेंड कर लेते हैं Instagram के मैसेजेस।

1:18:38यहां पे वो ऑप्शन नहीं आता। यहां पे 10

1:18:40सेकंड में अनडू तुम कर पाओ सेंड करते ही

1:18:42तो उतने में चल जाएगा। उसके बाद तुम्हारे

1:18:44पास कोई ऑप्शन नहीं है। जब तक तुम खुद उस

1:18:47इंसान की मेल आईडी खोल के उस मैसेज को

1:18:49डिलीट नहीं करते वहां से। ओके? लिमिट साइज

1:18:52ऑफ़ अटैचमेंट्स। यह बोलते हैं कि जब भी आप

1:18:54सामने वाले को अटैचमेंट्स भेज रहे हो साथ

1:18:56में मैसेजेस के साथ ना आपको अटैचमेंट

1:18:58भेजने की भी परमिशन होती है। फोटो अटैच कर

1:19:00सकते हो, पीडीएफ अटैच कर सकते हो। बट सोच

1:19:03समझ के करना चाहिए। उसकी साइज कम रखनी

1:19:04चाहिए क्योंकि सामने वाले को ना फिर मेल

1:19:06खोलते वक्त तकलीफ आती है। उसको ज्यादा

1:19:08डेटा यूसेज लगता है। ठीक है? बड़ी फाइल

1:19:12होगी तो ऑब्वियसली डेटा ज्यादा लगेगा ना

1:19:14उस पे। हैव स्टैंडर्ड सिग्नेचर। अगर

1:19:16तुम्हारी आदत है साइन करने की मेल के एंड

1:19:19में बहुत सारे लोगों की होती है तो कोशिश

1:19:21करो कि वो सिग्नेचर तुम सेम रखो। मतलब ये

1:19:24नहीं हो कि एक ईमेल आईडी में तुमने अलग

1:19:26सिग्नेचर किए हैं। दूसरे ईमेल आईडी में

1:19:28अलग किए हैं। तीसरे में अलग करो। ऐसा नहीं

1:19:29होना चाहिए। रिव्यू इनकमिंग ईमेल्स ओनली

1:19:32टू थ्री टाइम्स अ डे। बार-बार जिनकी आदत

1:19:35होती है ना फोन यूं स्क्रॉल करके सीधे चेक

1:19:36करते रहते हैं। नया मेल आया, नया मेल आया,

1:19:38नया मेला आया वो मत किया करो। दिन में एक

1:19:40से दो बार ही अपना मेल आईडी चेक किया करो।

1:19:42आई एम श्योर ये काम तुम नहीं करते होगे

1:19:44क्योंकि तुम बच्चे हो तुम WhatsApp ज्यादा

1:19:46चलातेगे मेल आईडी के कंपैरिजन में। सीसी

1:19:49का मतलब होता है कार्बन कॉपी। अगर हमें एक

1:19:52मेल एक इंसान से ज्यादा को भेजनी है। फॉर

1:19:54से जैसे मैंने बताया पीडब्ल्यू को एक मेल

1:19:56भेजनी है। वो सारे टीचर्स को भेजनी है। तो

1:19:58वो सीसी में सारे टीचर्स की ईमेल आईडी डाल

1:20:00देंगे। ठीक है? ब्लाइंड सीसी का क्या मतलब

1:20:04होता है? आप एक मेल बहुत सारे लोगों को

1:20:06भेजना चाहते हो। लेकिन आप नहीं चाहते कि

1:20:09वो सारे लोग देखें कि ये मेल उसके पास भी

1:20:11गया है, उसके पास भी गया है, उसके पास भी

1:20:13गया है। फॉर से पीडब्ल्यू हम सारे टीचर्स

1:20:16को मेल भेज रहा था। लेकिन वो नहीं चाहता

1:20:18शिवानी मैडम को पता चले। ये मेल मेरे पास

1:20:19भी आया है। मेरा नहीं चाहता कि यह मेल

1:20:21मुझे पता चले कि ऋषभ सर के पास भी गया।

1:20:23ऋषभ सर का नहीं चाहता कि सुमित सर के पास

1:20:25भी गया। यह पता चले। तो ऐसे सिनेरियो में

1:20:28हम वहां पे लगाते हैं ब्लाइंड कार्बन

1:20:30कॉपी। तो सीसी और ब्लाइंड कार्बन कॉपी

1:20:32दोनों सेम ही चीज है। सीसी में बस आपको ये

1:20:34दिखाई देगी चीज कि ये मेल और भी बहुत सारे

1:20:37लोगों को गया है। ब्लाइंड सीसी में आपको

1:20:38ये चीज नहीं दिखाई देगी। आपको बस ऐसा

1:20:40लगेगा ये मेल सिर्फ मेरे पास आया है और

1:20:42किसी के पास नहीं गया। ओके?

1:20:45फिर आते हैं ईमेल एटिकेट्स। पिछले चैप्टर

1:20:48में भी हमने कुछ एटिकेट्स के बारे में बात

1:20:50करी थी। है ना? यहां पे भी कुछ एटिकेट्स आ

1:20:52गए हैं। क्या-क्या हैं? एक बार पढ़ लेते

1:20:54हैं। ये बोलते हैं माइंड योर मैनर्स। जब

1:20:57भी तुम लिख रहे हो पोलाइट लैंग्वेज में

1:21:00लिखो बदतमीजी मत करो। कोई ऐसी चीज मत लिखो

1:21:03जो सामने वाले के लिए ऑफेंसिव हो। ठीक है?

1:21:06सोच समझ के लिखो जो भी लिख रहे हो। वॉच या

1:21:09टोन जिस भी टोन में लिख रहे हो तुम मैसेज।

1:21:12मैसेज लिखने की भी टोन होती है। ऐसा नहीं

1:21:14है कि सिर्फ बोलने की टोन होती है। मैसेज

1:21:16लिखने की भी एक टोन होती है। ठीक है? जैसे

1:21:18अगर मेरे पास मैसेज आया मैम कल आपकी

1:21:19एक्स्ट्रा क्लास रखी हुई है। एक मैसेज

1:21:21मेरा हो सकता है। ओके मैम। बट आई फील लाइक

1:21:24यस्टरडे वाज़ लाइक यस्टरडे आई डिड ओवरटाइम

1:21:27तो टुमारोस क्लास कैन बी कैंसल्ड व्हाट डू

1:21:30यू थिंक ठीक है क्वेश्चन मार्क लगा दिया

1:21:31तो यहां पे मैंने कितने पोलाइट वे में

1:21:33सामने वाले से बात करी है ऑन द अदर साइड

1:21:34मैं लिखूं नो आई एम नॉट गोइंग टू टेक अ

1:21:36टुमारोस क्लास बिकॉज़ आई ऑलरेडी टू

1:21:38यस्टरडेस क्लास एंड आई डिड ओवरटाइम सो आई

1:21:40एम नॉट गोइंग टू डू इट तो तुम्हें टोन समझ

1:21:42में आई वहां पे टोन अलग थी यहां पे टोन

1:21:44अलग है राइट तो लिखने की भी टोन होती है

1:21:47तो अपनी टोन वॉच करो मतलब देख के लिखो जो

1:21:50भी लिख रहे हो बी कंसाइज छोटे शब्दों में

1:21:53ज्यादा बात बोल जाओ इंस्टेड ऑफ लंबा

1:21:55खींचने के बी प्रोफेशनल इमोटिकंस बीच में

1:21:58इस्तेमाल कर मत करो इनफॉर्मल लैंग्वेज मत

1:22:01लिखो यार दोस्त ये सब मत लिखो ओके यूज़

1:22:04करेक्ट स्पेलिंग एंड ग्रामर ये तो तुम चैट

1:22:06जीपीटी कर लो आज की डेट में सब यही करते

1:22:08हैं जितने भी प्रोफेशनल्स हैं अपना मेल

1:22:10ड्राफ्ट करवाते हैं चैट जीपीटी से ठीक है

1:22:12मैं खुद भी करवाती हूं सो अपनी ग्रामर और

1:22:14अ यू नो इंग्लिश को चेक करके लिखो गलत-लत

1:22:17स्पेलिंग्स मत लिखो ताकि सामने वाला

1:22:19तुम्हारे मेल को सीरियसली ले मानो तुमने

1:22:21आईसीएसआई को एक मेल लिखा है। कोई कंप्लेंट

1:22:23थी तुम्हारी। लेकिन उस मेल में इतनी

1:22:25गलतियां थी। इतनी गलतियां थी। आईसीएसआई ने

1:22:27तुम्हारा मेल पढ़ा ही नहीं ये सोच के कि

1:22:29यार बकवास लिखा हुआ है। तो ये गलत हो

1:22:30जाएगा ना। इसलिए कोशिश करो स्पेलिंग

1:22:32मिस्टेक नहीं हो। ग्रामर मिस्टेक नहीं हो।

1:22:34एड्रेस पीपल केयरफुली। जिस भी इंसान को

1:22:36एड्रेस कर रहे हो केयरफुली करो। मान लीजिए

1:22:38मैं एक मेल भेज रही थी सर को। ठीक है? कोई

1:22:42सर थे। और मैंने लिख दिया मैम। जैसे कई

1:22:44बार तुम लोग लिख देते हो। तुम लोग क्लास

1:22:46में लिखते हो। समझ में आया? यस सर। यस सर।

1:22:50अरे मैं मैम हूं भाई। सर कहां से हो गए?

1:22:52तो वो चीज नहीं होनी चाहिए। पहले देख लो

1:22:54किस इंसान को तुम वो कर रहे हो। वेट टू

1:22:56फेल इन टू टू। ठीक है? यह बोलता है टू

1:22:59वाला जो कॉलम होता है कि भाई किसको भेजना

1:23:01है ये मैसेज उसको बहुत ही आराम से भरो।

1:23:04गलत एड्रेस मत लिख दो। पता चले किसी और को

1:23:06भेजना और किसी और को पहुंच जाए वो मेल।

1:23:09एडवांटेजेस क्या-क्या होते हैं? फायदे

1:23:11क्या-क्या होते हैं मेल के? ये बोलते हैं

1:23:13मेल को मैनेज करना कंपैरेटिवली बहुत इजी

1:23:16है। ठीक है? में बहुत ज्यादा सरदर्दी नहीं

1:23:18लगती है और यह बहुत फास्ट होते हैं। द

1:23:20मिनट यू विल टाइप टक टक टक टक डन सेंड 2

1:23:23मिनट में 2 मिनट में क्या 2 सेकंड में ये

1:23:25ईमेल सामने वाले के अकाउंट में चला जाएगा

1:23:27तो बहुत फास्ट होता है। इनएक्सपेंसिव होता

1:23:29है। ज्यादा खर्चा नहीं होता। इंटरनेट

1:23:31ऑलरेडी सबके पास होता है। मेल टाइप करना

1:23:33है भेज देना है। क्या खर्चा हुआ तुम्हारा?

1:23:35ईमेल इज़ ईजी टू फ़िल्टर। फ़िल्टर करना भी

1:23:37ईजी होता है। यह काम का मेला है। यह नहीं

1:23:39है। यह काम का मेला है। यह नहीं है। यह

1:23:40काम का मेला है। हटाओ इसको। ठीक है? मतलब

1:23:42काम वाले को ना हटाओ। बिना काम वाले को

1:23:44हटाओ। ट्रांसमिशन इज़ सिक्योर एंड रिलायबल।

1:23:47दूसरे मीडियम्स के अकॉर्डिंग दूसरे

1:23:50मीडियम्स के कंपैरिजन में फिर भी मेल थोड़ा

1:23:53सेफ है। हम यह बिल्कुल भी नहीं बोल रहे कि

1:23:55मेल बिल्कुल प्रोटेक्टेड है। इसे कभी लीक

1:23:57किया ही नहीं जा सकता। इसको कभी हैक किया

1:23:59ही नहीं जा सकता। होते हैं। लोगों के मेल

1:24:01आईडीज भी हैक होते हैं। लेकिन कंपैरेटिवली

1:24:04दूसरे ऑप्शंस के कंपैरिजन में मेल आईडी

1:24:07आपका थोड़ा सा सेफ सिक्योर माना जाता है।

1:24:10ओके?

1:24:12वहीं पर कुछ डिसएडवांटेजेस भी हैं आपके।

1:24:14टाइम कंज्यूमिंग होता है। पूरा-पूरा लिखना

1:24:17पड़ता है। फिर भेजना पड़ता है। एक से

1:24:19ज्यादा इंसान को भेजना है तो सबकी ईमेल

1:24:20आईडी डालनी पड़ती है। तो कई-कई बार ये

1:24:22टाइम कंज्यूमिंग हो जाता है। अ कई बार

1:24:26डेटा लूज़ भी हो जाता है सिंगल क्लिक से।

1:24:27फॉर से कोई मेल मेरा बहुत काम का था। बहुत

1:24:30ज्यादा काम का था। ठीक है? लेकिन गलती से

1:24:32मैं कोई और मेल डिलीट कर रही थी। मैंने वो

1:24:34वाला मेल डिलीट कर दिया। मेरा तो पूरा

1:24:36डाटा चला गया ना यार। मेरे पास तो कोई

1:24:38प्रूफ भी नहीं था उस चीज का। मैंने उसका

1:24:39कोई फिजिकल कॉपी भी नहीं निकाल के रखा था।

1:24:41तो एक सिंगल क्लिक से आपका पूरा का पूरा

1:24:44डेटा जा भी सकता है। सिक्योरिटी कभी-कभी

1:24:47सिक्योरिटी इशूज़ आ जाते हैं। इसमें भी

1:24:50इंपर्सनल कम्युनिकेशन ऑब्वियसली फेस टू

1:24:52फेस तो आप मिल नहीं रहे हो ना सामने वाले

1:24:54इंसान से। पर्सनल कम्युनिकेशन तो हो नहीं

1:24:56रहा। ये तो इंपर्सनल हो रहा है ना कि भैया

1:24:58तुम अपने घर पे हो। मैं अपने घर पे हूं।

1:25:00मैं यहां लिख रही हूं। तुम वहां पढ़ रहे

1:25:02हो। तो इंपर्सनल हो जाता है। डिपेंड्स ऑन

1:25:04इंटरनेट कनेक्टिविटी। मैं तुम्हें मेल लिख

1:25:06रही हूं। लेकिन तुम ऐसे इलाके में बैठे हो

1:25:08जहां पे इंटरनेट है ही नहीं। तो ऐसे में

1:25:11हमारी कन्वर्सेशन हैंपर होगी।

1:25:13मिसअंडरस्टैंडिंग बहुत जल्दी फैल जाती है।

1:25:15आप कुछ और लिखना चाह रहे थे। सामने वाले

1:25:16ने कुछ और इंटरप्रेट कर लिया।

1:25:18मिसअंडरस्टैंडिंग फैल गई। तो ये चीज भी

1:25:20काफी होती है इसमें। ठीक है? दैट इज़ आल्सो

1:25:22अ डिसएडवांटेज ऑफ़ ईमेल। ठीक है? चलिए,

1:25:26नेक्स्ट टॉपिक है हमारा इंटरनेट वर्सेस

1:25:29इंटरनेट। अभी थोड़ी देर पहले हमने इंटर

1:25:33डिपार्टमेंटल और इंट्रा डिपार्टमेंटल

1:25:35कम्युनिकेशन के बारे में पढ़ा था। राइट?

1:25:37बस वैसे ही मिलताजुलता इंटरनेट और इंटरनेट

1:25:41है। यहां पे भी इंट्रा और इंटर का सेम

1:25:43मतलब है। बस ये इंटरनेट है क्या? बेटा ये

1:25:46तो आपको भी पता होगा। सारा दिन इंटरनेट ही

1:25:48तो चलाते रहते हो। अभी तुम मेरी क्लास भी

1:25:50इंटरनेट पे एक ही मतलब इंटरनेट की मदद से

1:25:53ही देख पा रहे हो। राइट? सो बेसिकली

1:25:54इंटरनेट का मतलब होता है चेन ऑफ नेटवर्क्स

1:25:58जिसके थ्रू इंसान एक दूसरे से कनेक्ट कर

1:26:01सकता है। राइट? तो अगर आज की डेट में मुझे

1:26:04तुमसे कनेक्ट करना है, तुम्हें किसी और से

1:26:06कनेक्ट करना है, उसे किसी और से कनेक्ट

1:26:08करना है, तो हम इंटरनेट का सहारा लेते

1:26:10हैं। बस अब ऐसे मानिए ये जो इंटरनेट के

1:26:13चलते हुए यूएस का बंदा, जापान वाले बंदे

1:26:16से, जापान का बंदा, चाइना वाले बंदे से,

1:26:19चाइना का बंदा, कोरिया वाले बंदे से ईजीली

1:26:22बातचीत कर पाता है ना। उसे तुम अपने

1:26:25ऑर्गेनाइजेशन के अंदर डाल दो। और ऐसे बना

1:26:29दो कि इसका इस्तेमाल करके सिर्फ आपके

1:26:32ऑर्गेनाइजेशन के लोग ही आपस में एक दूसरे

1:26:36से कांटेक्ट कर पाएंगे। कोई भी आउटसाइडर

1:26:40कोई भी आउटसाइडर इस सिस्टम को इस्तेमाल

1:26:44करके आपके ऑर्गेनाइजेशन के लोगों से

1:26:46बातचीत नहीं कर पाएगा। तो उस चीज को हम

1:26:50बोलते हैं इंट्रानेट।

1:26:53इंट्राट

1:26:55इंटर मतलब सब लोगों से बातचीत कर सकते हो

1:26:58आप इंटरनेट की मदद से और इंट्राट मतलब वो

1:27:02चीज इंटरनेट के लिए आई वुड से एक

1:27:05ऑर्गेनाइजेशन के अंदर होने वाला इंटरनेट

1:27:08बेसिकली इंटरनेट तो तुम समझते हो राइट बस

1:27:12अगर तुम इसको ऑर्गेनाइजेशन के अंदर फिट कर

1:27:15दोगे और यह बोलोगे कि इस इंटरनेट की मदद

1:27:18से सिर्फ ऑर्गेनाइजेशन के लोग ही एक दूसरे

1:27:20से कनेक्ट कर पाएंगे बाहर बाहर के लोग

1:27:23ऑर्गेनाइजेशन के लोगों से कनेक्ट नहीं कर

1:27:25पाएंगे। तो उस टर्म को हम बोलते हैं

1:27:27इंट्रा नेट। मतलब वो नेट जो कि आपकी

1:27:31ऑर्गेनाइजेशन के अंदर ही अंदर चल रहा है।

1:27:34बाहर वाले उस नेट का इस्तेमाल नहीं कर

1:27:38सकते हैं। ठीक है? अब ये बोलते हैं इंट्रा

1:27:43का मतलब होता है विद इन या फिर इंटरनल। इट

1:27:46कंटेन इनेशन स्पेसिफिक टू अ पर्टिकुलर

1:27:48ऑर्गेनाइजेशन। इसमें सिर्फ एक पर्टिकुलर

1:27:51ऑर्गेनाइजेशन की ही इंफॉर्मेशन कंटेंड

1:27:54होगी। बाहर के लोगों की नहीं होगी।

1:27:57एक्सटर्नल पीपल डू नॉट हैव एक्सेस टू इट।

1:28:00बाहर वाले लोग इस इंफॉर्मेशन को नहीं देख

1:28:02पाएंगे। इट्स सिक्योर। यह बहुत ही सिक्योर

1:28:06होती है। क्योंकि सिर्फ इंसाइडर्स ही

1:28:08इंफॉर्मेशन को एक्सेस कर पाएंगे।

1:28:10ऑर्गेनाइजेशन का जो अंदर का इंसान है ना

1:28:13सिर्फ वही उस इंफॉर्मेशन को देख सकता है।

1:28:15बाहर वाला नहीं देख सकता। यूज्ड इन प्लेस

1:28:18ऑफ पेपर और ईमेल्स। ईमेल और पेपर की जगह

1:28:21इस्तेमाल किया जाता है यह वाला सीन। ठीक

1:28:24है? मतलब पेपर पे सब कुछ ना लिखो। रेदर आप

1:28:26यहां पे लिख दो तो काम चल जाएगा। सेंट्रल

1:28:29कम्युनिकेशन एरिया फॉर अ कंपनी। पूरी

1:28:32ऑर्गेनाइजेशन के जो कम्युनिकेशन का

1:28:34सेंट्रल पॉइंट होता है ना काइंड ऑफ़ वो

1:28:36होता है। यह इफेक्टिव वे ऑफ़ कम्युनिकेशन।

1:28:38कम्युनिकेट करने का एक बहुत ही इफेक्टिव

1:28:40तरीका है। एक बहुत ही सही तरीका है। अगर

1:28:43आपको कम्युनिकेशन ऑर्गेनाइजेशन के अंदर ही

1:28:46अंदर करनी है तो बेस्ट तरीका है उसके लिए

1:28:49ऐसा मानिए। ओके? इसके बाद आता है एक और

1:28:53कांसेप्ट जिसका नाम है एक्स्ट्रा नेट। मैम

1:28:56ये क्या होता है? तो बेटा देखो इंट्रानेट

1:28:59समझा तुमने? मतलब ऑर्गेनाइजेशन के अंदर ही

1:29:03अंदर लोग आपस में बातचीत कर रहे हैं। आपस

1:29:06में इस्तेमाल कर रहे हैं इस चीज को। राइट?

1:29:09उसके अलावा अगर हम बाहर के कुछ सिलेक्टेड

1:29:12लोगों को एक्सेस दे देते हैं। बाहर के कुछ

1:29:16सिलेक्टेड लोगों को बोलते हैं कि हां तुम

1:29:18भी पार्टिसिपेट कर सकते हो इस चीज में।

1:29:20सबको नहीं दिया क्योंकि सबको दे देंगे तो

1:29:23वह इंटरनेट बन जाएगा। हमने इंटरनेट को कुछ

1:29:27रिस्पेक्टिव इंसानों के साथ शेयर कर दिया।

1:29:30कुछ रिस्पेक्टिव इंसानों को बोला कि आओ

1:29:32तुम भी हमसे बातचीत कर सकते हो, वार्तालाप

1:29:35कर सकते हो, नेट का इस्तेमाल कर सकते हो।

1:29:38तो उस चीज को हम बोलते हैं एक्स्ट्रा नेट।

1:29:41पार्ट ऑफ़ कंपनीज़ इंटरनेट। इंटरनेट का

1:29:44पार्ट दैट इज़ एक्सटेंडेड टू यूज़र्स

1:29:47आउटसाइड द कंपनी। जो आपने आउटसाइड कंपनी

1:29:50कुछ यूज़र्स को दे दिया है। बोले तो

1:29:53इंटरनेट क्या होता है? ऑर्गेनाइजेशन के

1:29:56अंदर इस्तेमाल होने वाला नेट। बस आपने

1:29:59उसका क्या किया? कुछ आउटसाइडर्स को, कुछ

1:30:01स्पेसिफिक आउटसाइडर्स को यह मौका दे दिया

1:30:05कि आओ तुम भी इन सारे डॉक्यूमेंट्स को

1:30:07एक्सेस कर सकते हो। तुम भी इन

1:30:08इंफॉर्मेशनेशन को यूज़ कर सकते हो। तो वो

1:30:10हमारा क्या कहलाया जाएगा? एक्स्ट्रा नेट

1:30:13कहलाया जाएगा। ओके? सो यहां पे होता है

1:30:16हमारा इंटरनेट और एक्स्ट्रानेट का मतलब

1:30:18टॉपिक खत्म। अब आ जाते हैं हम हमारे लास्ट

1:30:21टॉपिक पे जो कि है बिजनेस कॉरेस्पोंडेंस।

1:30:24ठीक है? फाइनली जो चैप्टर का नाम था वही

1:30:27टॉपिक आ गया है। इसमें हम तीन टॉपिक्स

1:30:29पढ़ने वाले हैं। वन इज़ नोटिस,

1:30:32अनदर वन इज़ एजेंडा,

1:30:35अनदर वन इज़ मिनट्स। क्या मतलब होता है इन

1:30:39तीनों का? वन बाय वन अंडरस्टैंड।

1:30:41नोटिस क्या होता है भाई? देखो यह तुम्हारी

1:30:45पायल मैडम है जो एक कंपनी की सीएस लगी हुई

1:30:48हैं। अब मुझे इस कंपनी में बीओडी मीटिंग

1:30:52करानी है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग

1:30:55करानी है। ठीक है? बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की

1:30:59क्या करानी है? मुझे इस कंपनी में मीटिंग

1:31:01करानी है तो मैं उनको बुलावा नहीं भेजूंगी

1:31:04क्या कि आओ आओ तुम लोगों की मीटिंग होने

1:31:07वाली है। इनवाइट तो करूंगी ना उन बोर्ड ऑफ

1:31:10डायरेक्टर्स को या अगर मान लो शेयर

1:31:12होल्डर्स की मीटिंग करानी है तो उन्हें भी

1:31:14इनवाइट तो करना पड़ेगा ना कि नहीं करोगे।

1:31:17तो जो इनविटेशन उन लोगों को भेजा जाता है

1:31:20उसे हम बुलाते हैं हमारी ऑफिशियल लैंग्वेज

1:31:23में नोटिस। क्या समझे? मुझे अगर किसी को

1:31:28इनवाइट करना है मीटिंग के लिए तो मुझे

1:31:30उन्हें नोटिस भिजवाना पड़ेगा जिसमें मैं

1:31:34बेसिकली क्या लिखूंगी कि इस तारीख को

1:31:36मीटिंग है ये पर्पस है इतने टाइम पे होएगी

1:31:39इस जगह पे होएगी टाइम पे आ जाइएगा ठीक है

1:31:43तो बेसिकली इनवाइट जो हम पर्सनल लैंग्वेज

1:31:45में वर्ड इस्तेमाल करते हैं इनवाइट बस उसी

1:31:48को हम फॉर्मल लैंग्वेज में बोलते हैं

1:31:50नोटिस ठीक है आ गई बात समझ कैन वी मूव टू

1:31:54द सेकंड वन एजेंडा क्या होता है? देखो

1:31:58बेटा हर मीटिंग में ना

1:32:02कुछ पॉइंट्स डिस्कस करने होते हैं।

1:32:06हर मीटिंग में कुछ पॉइंट्स डिस्कस करने

1:32:09होते हैं।

1:32:12हर मीटिंग में

1:32:15कुछ फैसले लेने होते हैं।

1:32:20हर मीटिंग के कुछ मुद्दे होते हैं। बस अगर

1:32:24आपको वो मीटिंग में जाने से पहले ही पता

1:32:27हो। अगर आपको मीटिंग में जाने से पहले ही

1:32:30वो सारी चीजें पता हो तो आप मीटिंग में

1:32:33अच्छे से पार्टिसिपेट कर सकते हो। फॉर से

1:32:36पीडब्ल्यू के टीचर्स की मीटिंग हो रही थी।

1:32:38पहले से ही पता था कि यह मीटिंग है

1:32:41ओवरटाइम के रिगार्डिंग कि ओवरटाइम आपसे

1:32:44करवाया जाता है नहीं करवाया जाता। आर यू

1:32:45कंफर्टेबल विद इट? आर यू नॉट कंफर्टेबल

1:32:47विद इट? ठीक है? तो ऐसे में मुझे पहले से

1:32:50पता है कि ओवरटाइम रिगार्डिंग हमारी

1:32:51मीटिंग होने वाली है। तो मेरे दिमाग में

1:32:53जो भी पॉइंट्स होंगे वो पहले से ही प्लान

1:32:55करके आ पाऊंगी कि मुझे ये बोलना है, मुझे

1:32:57ये बोलना है, मुझे ये बोलना है। राइट? तो

1:32:59उससे क्या होगा? मैं मीटिंग में

1:33:00प्रोडक्टिवली पार्ट ले पाऊंगी। तो एजेंडा

1:33:03बेसिकली वो एक डॉक्यूमेंट होता है जिसमें

1:33:06बताया जाता है कि इस मीटिंग का क्या

1:33:08मुद्दा है? ये मीटिंग क्यों कंडक्ट कराई

1:33:11जा रही है? तो वो जो ओवरटाइम वर्ड है ना

1:33:13वो एजेंडा मेंशन किया जाएगा जिसके थ्रू आई

1:33:16विल गेट टू नो कि भैया मीटिंग में ये

1:33:19चीजें डिस्कस होने वाली हैं तो मैं पहले

1:33:20से ही पूरी प्लानिंग करके आऊंगी।

1:33:23अंडरस्टुड? तो एजेंडा क्या होता है?

1:33:25मीटिंग में क्या डिस्कशन होने वाला है? वो

1:33:28हमारा एजेंडा कहलाया जाता है। और ये

1:33:31यूजुअली नोटिस के साथ जाता है। लास्ट आ

1:33:35जाता है हमारा मिनट्स।

1:33:37अब भाई देखो मीटिंग हुई है ना? मीटिंग में

1:33:41बहुत सारे डिस्कशन हुए। ओके, बढ़िया है।

1:33:44हो गए। उसके बाद दो-तीन मीटिंग और हो गई।

1:33:48क्या इंसान याद रखिएगा पहली मीटिंग में

1:33:51क्या बात हुई थी? बिल्कुल भी याद नहीं रख

1:33:53पाएगा। तो अगर हमें नहीं भूलना मीटिंग में

1:33:57क्या हुआ था तो बेटर है हम वो सारी चीजें

1:33:59कहीं लिख लें कि इस मीटिंग में ये ये

1:34:03चीजें हुई थी ताकि हम कभी भी नहीं भूलें

1:34:05उस चीज को। राइट? तो ऐसे में हम क्या करते

1:34:08हैं? मिनट्स प्रिपेयर करते हैं। मिनट्स

1:34:11कुछ नहीं है। मीटिंग में क्या-क्या हुआ?

1:34:14कौन-कौन आया? कितने बजे आया? क्या डिस्कशन

1:34:17हुआ? किस फैसले पे पहुंचे? ये सारी चीजें

1:34:20लिखी जाती हैं। मीटिंग में क्या-क्या हुआ?

1:34:24सारी चीजें ए टू जी जिसमें मेंशन की जाती

1:34:27है वो कहलाए जाते हैं मिनट्स ऑफ मीटिंग।

1:34:31मीटिंग के मिनट्स। ठीक है? आ गई बात समझ?

1:34:35सो नोटिस क्या है? बेसिकली बोर्ड ऑफ़

1:34:38डायरेक्टर्स और शेयरहोल्डर्स की या फिर

1:34:40किसी की भी मीटिंग करानी होती है तो पहले

1:34:42उन्हें इनवाइट भेजना पड़ता है। उन्हें

1:34:44बताना पड़ता है कि मीटिंग है। सो दैट तुम

1:34:46लोग आ जाओ। तो वो इनवाइट हमारा फॉर्मल

1:34:48लैंग्वेज में नोटिस कहलाया जाता है।

1:34:50एजेंडा बेसिकली मीटिंग में क्या-क्या

1:34:52पॉइंट्स डिस्कस किए जाएंगे उसके

1:34:54रिगार्डिंग होता है और वो नोटिस के साथ

1:34:56जाता है। और मिनट्स में बेसिकली मीटिंग्स

1:34:58में क्या-क्या हुआ था वो सारी चीजें लिखी

1:35:01जाती हैं। और ये सारे के सारे काम पता है

1:35:04किसके होते हैं ड्राफ्ट करने के? सीएस के

1:35:07होते हैं। इससे तुम्हें इस चैप्टर में ये

1:35:09भी सिखाया जाएगा कि ये सारी ड्राफ्टिंग

1:35:10होती कैसे है? नोटिस बनाना है तो कैसे

1:35:13बनाओगे? एजेंडा बनाना है तो कैसे बनाओगे?

1:35:15मिनट्स बनाने हैं तो कैसे बनाओगे? ठीक है?

1:35:19नोटिस लाइक अ सर्कुलर बट स्लाइट डिफरेंस

1:35:22इट इज़ पुट अप ऑन द नोटिस बोर्ड। सेट एन

1:35:25एडवांस कंटेंस इनेशन, पार्टिसिपेंट्स,

1:35:27नेचर, डेट, टाइम, वेन्यू, पर्पस,

1:35:29सिग्नेचर, डेट ऑफ़ इशू, ड्यूरेशन ये सारी

1:35:31चीजें मेंशन की जाएंगी। एजेंडा में

1:35:33क्या-क्या चीजें डिस्कस की जाएंगी?

1:35:35प्रिपयर्ड इन एडवांस बैकबोन होती है किसी

1:35:37भी मीटिंग की और कंटेंस लेटर हेड आइटम ऑफ़

1:35:40डिस्कशन डेट टाइम प्लेस अपोलॉजीज़ एंड

1:35:42एडवांस ये जितनी भी चीजें हैं वो सारी ठीक

1:35:45है मीटिंग्स में क्या होता है मिनट्स ऑफ़

1:35:47मीटिंग में क्या होता है रिटन रेकेट्स अप

1:35:49टू ऑफ़ डिस्कस हेल्थ एंड डिसीज़ंस रीच नोट्स

1:35:52आर टेकन ड्यूरिंग मीटिंग टू प्रिपेयर इट

1:35:55मिनट्स प्रिपेयर करने के लिए किसी भी

1:35:56इंसान को नोट्स लेने पड़ते हैं मतलब सीएस

1:35:58या फिर सीएस का जो इंटर्न होता है वो

1:36:00बैठता है मीटिंग में वो सारे नोट करता है

1:36:03पॉइंट्स कि यह हुआ था वो हुआ था वो हुआ था

1:36:04सो दैट दैट वो कुछ भी भूले नहीं और मिनट्स

1:36:06में हर एक चीज़ प्रोडक्टिवली लिखी जाए।

1:36:08प्रिपयर्ड बाय सेक्रेटरी और चेयर पर्सन।

1:36:11प्रिपयर्ड बाय सेक्रेटरी और चेयर पर्सन

1:36:13ऐसा लिखा हुआ है। लेकिन बनाते हम सीएस लोग

1:36:16ही हैं इसे। ठीक है? सो यहां पे हमारा ये

1:36:19चैप्टर यहीं पे समाप्त होता है। और आप

1:36:22लोगों को होमवर्क मिलता है कि रीड करके

1:36:25आइए मॉड्यूल को और जो दो-चार क्वेश्चंस

1:36:29मैंने आपको इन बिटवीन दिए हैं वो उनका

1:36:32आंसर मुझे कमेंट सेक्शन में चाहिए। उसके

1:36:35अलावा आपको सारी चीजें समझ में आई? नहीं

1:36:38आई? कोई डाउट तो नहीं है? वो सारी चीजें

1:36:40भी आप कमेंट सेक्शन में मेंशन कर सकते

1:36:42हैं। ठीक है? जब भी वीडियो देख लेते हो

1:36:45अपनी तरफ से कमेंट कर दिया करो। सो दैट

1:36:47टीचर को पता चल जाए कि ये ये स्टूडेंट है

1:36:49जो मुझसे पढ़ रहा है। ओके? सो दैट कई बार

1:36:51आप हमें सोशल मीडिया पे भी यू नो कनेक्ट

1:36:55करते हो। तो हमें पता हो कि ये बच्चा है

1:36:56इससे बात करनी है, कैसे क्या करना है। ठीक

1:36:58है? एंड दैट्स इट। आई वुड से इस चैप्टर

1:37:01में बस इतना ही।

1:37:03आई होप सारी चीजें अच्छे से क्लियर हो गई

1:37:06हैं आपको। बाकी मैंने आप लोगों को बता

1:37:07दिया है फॉर्मेट्स का मैं अलग से सेशन

1:37:10लाऊंगी। ठीक है? बट एक बार मुझे बता देना

1:37:13तुम्हें वो सेशन चाहिए भी कि नहीं चाहिए।

1:37:14पता चले मैं बार-बार बोल रही हूं कि

1:37:16फॉर्मेट्स का सेशन लाऊंगी और तुम्हें वो

1:37:18चाहिए ही नहीं। तो वो भी तुम्हें कमेंट

1:37:19सेक्शन में मुझे बताना पड़ेगा कि हमें

1:37:21फॉर्मेट्स का सेशन चाहिए। तभी मैं उसको

1:37:23जल्दी से जल्दी लाने की कोशिश करूंगी।

1:37:25ओके? चलिए ऑल द वेरी बेस्ट। बहुत ही जल्दी

1:37:27हम फिर से मिलेंगे हमारे लास्ट और फोर्थ

1:37:29चैप्टर के साथ। उसके बाद हमारा बिजनेस

1:37:31कम्युनिकेशन का पूरा सिलेबस कंप्लीट हो

1:37:33जाएगा और हम फ्री हो जाएंगे। बस हमें फिर

1:37:36सेल्फ स्टडी करनी होगी। ठीक है? चलिए

1:37:39बाय-ब टाटा। सर

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