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0:08बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अजीज तलबा पहले
0:11गजल पढ़ते हैं असर उसको जरा नहीं होता रंज
0:17राहत फजा नहीं
0:19होता बेवफा कहने की शिकायत है तू भी वादा
0:25वफा नहीं होता जिक्र अगियार से हुआ मालूम
0:30हरफे ना से बुरा नहीं होता तुम हमारे किसी
0:35तरह ना हुए वरना दुनिया में क्या नहीं
0:39होता एक दुश्मन के चर्ख है ना रहे तुझसे
0:45यह ऐ दुआ नहीं होता तुम मेरे पास होते हो
0:50गोया जब कोई दूसरा नहीं होता हाले दिल यार
0:55को लिखो क्यों कर हाथ दिल से जुदा नहीं
0:59होता
1:00क्यों सुने अर्ज मुस्तर मोमिन सनम आखिर
1:05खुदा नहीं
1:07होता जी तशरीफ आते हैं पहला शेर है असर
1:11उसको जरा नहीं होता रंज राहत फजा नहीं
1:16होता इस शेर में शाय ने महबूब की बेरुखी
1:19तगाफुल बे नियाजी और संग दिली को मौजू
1:22बनाया है आशिक अपने महबूब से
1:26इल्तजा इल्तजा और फरियाद जैसे हरब आजमा है
1:31इस शेर में शायर कहते हैं कि मेरे महबूब
1:33पर मेरे गम या दुख का कोई असर नहीं होता
1:36गोया मेरा रंज मेरे लिए इत्मीनान का बायस
1:38नहीं है मोहब्बत करने वाला महबूब को पाने
1:41के लिए हर तरह की साई करता है वो खुलूस
1:44सच्चाई वफा जैसी खूबियों से सरशर होता है
1:47वह महबूब के सामने आहो जारी करता है अपनी
1:50मोहब्बत का यकीन दिलाता है लेकिन महबूब पर
1:53इसकी हालत और कैफियत का कोई असर नहीं होता
1:57बकौल शायर क्या करूं अल्लाह सब हैं बेअसर
2:01लवला क्या नाला क्या फरियाद क्या शायर इस
2:05बात का बमला इजहार कर रहा है कि मेरी
2:08खुशियों का ताल्लुक चक बराह रास्त महबूब
2:10के नजरे करम से वाबस्ता है और लगता है कि
2:13महबूब ने नजरे इल्तिजा ना करने की कसम उठा
2:17रखी है यही वजह है कि मेरी जिंदगी में
2:20खुशियों खुशी और मसरत का दूर-दूर तक सुराग
2:23नहीं मिलता पूरी दुनिया मेरे गम से वाकिफ
2:26है लेकिन जिसे वाकिफ होना चाहिए था और
2:29मेरे दर्द का दरमा करना चाहिए था वही उस
2:31कफ इस कैफियत से बेखबर है बकौल शायर इन
2:36लबों ने मसी हाई ना की हमने 100 100 तरह
2:40से मर के
2:41देखा बेवफा कहने की शिकायत है तू भी वादा
2:46वफा नहीं होता हुस्न इश्क की जंग में
2:50चाहने वालों को हमेशा महबूब से गिला रहता
2:52है कि वह वफा नहीं करता वफा करना तो दूर
2:55की बात है सिरे से वाद वफा भी नहीं करता
2:58और अगर वाद वसल कर भी ले उसे टाल रहता है
3:01यहां तक कि आशिक मायूस हो जाता है बकल
3:04गालिब तेरे वादे पर जिए हम तो यह जान झूठ
3:08जाना कि खुशी से मर ना जाते अगर तबार होता
3:12शायर कहता है कि अगर तुमसे बेवफा कहते हो
3:15तो यह याद रखो तुम भी अपने वादों पर कायम
3:18नहीं रहते शेर मोहब्बत में होने वाली
3:21नाराजगी गिला और शिकायत के जज्बात को
3:23जाहिर करता है शायर ने इस शेर में मोहब्बत
3:26के रिश्ते की नजाकत और इसमें वफा की
3:28अहमियत को बहुत खूबसूरती से बयान किया है
3:31बकौल शायर हमारी शर्तें वफा यही है वफा
3:36करोगे वफा करेंगे यह शेर इंसान के दिल की
3:40गहराइयों से निकले हुए जज्बात का इजहार है
3:42मोहब्बत के रिश्ते में वफा का होना बहुत
3:45जरूरी है लेकिन जब दोनों फरीक एक दूसरे पर
3:47एतमाद नहीं करते और वादों को पूरा नहीं
3:49करते तो यह रिश्ता कमजोर हो जाता है शायर
3:52ने शेर में मोहब्बत के रिश्ते की इसी
3:54कमजोरी को बड़ी महारत से बयान किया है
3:58मुख्तसर यह शेर मोहब्त में वफा की अहमियत
4:01और बेवफाई के तख तजुर्बे को बयान करता है
4:04शायर ने शेर में मोहब्बत के रिश्ते की
4:06नजाकत और इसमें होने वाली नाराजगी को बहुत
4:08खूबसूरती से पेश किया है य शेर इंसान के
4:11दिल को छू जाने वाले जज्बात का इजहार
4:15है जिक्र अगियार से हुआ मालूम हरफे ना से
4:20बुरा नहीं होता महबूब जब गैरों की खूबियां
4:24आशिक के सामने बयान करें तो आशिक के लिए
4:26सूरते हाल निहायत अजियत नाक होती है यह
4:30बात आशिक को बहुत नागवार गुजरती है कि
4:32उसका महबूब उसकी बजाय गैर यानी उसके रकीब
4:35का तजक लिए बैठा है बकौल शायर गैर का
4:39जिक्र वफा और हमारे आगे दाग इस बात से
4:43जलता है कलेजा कैसा इसलिए शायर कहता है कि
4:47जब हमने महबूब की जुबान से रकीब रूसिया के
4:50तजक सुने तो हमें वह लोग याद आए जो हमें
4:53इश्क से बाज रहने की नसीहत किया करते थे
4:56और हम उनकी बात को कोई अहमियत ना देते थे
5:00उर्दू शायरी में नासे को आमतौर पर अच्छा
5:02नहीं समझा गया लेकिन इस शेर में शायर इसके
5:05मुस्त पहलू की तरफ इशारा करते हुए कहते
5:08हैं कि बाज औकात नासे की बातें दुरुस्त भी
5:11होती हैं अब जब हमारा महबूब हमारे सामने
5:14दूसरों का तजक लिए बैठा है तो हमें नासे
5:16की बात मुनासिब मालूम हो रही है कि इश्क
5:19के मैदान में कदम मत रखो यह बहुत तड़पाएगा
5:22अगर हम उनकी नसीहत पर अमल कर लेते तो आज
5:26हमें इस सूरत हाल का सामना ना करना पड़ता
5:31तुम हमारे किसी तरह ना हुए वरना दुनिया
5:35में क्या नहीं होता शायर अपने तकदीर से
5:38शिकवा कुना है और कह रहा है कि खुदा की
5:41वसी अरही सरजमीन में हर तरह के अजाब रमा
5:44होते रहते हैं नामुमकिन मुमकिन बन जाते
5:47हैं गरज दुनिया में सब कुछ होता है एक मैं
5:50बदनसीब हूं कि मोहब्बत में हजारों दुख सहे
5:53लोगों की बातें सुनी रुसवाईयां बर्दाश्त
5:56की लेकिन महबूब मेरा किसी भी तरह ना हो सक
5:59का बकल मीर तकी मीर एक महरूम चले मीर हम
6:03ही दुनिया से वरना औरों को जमाने ने दिया
6:07क्या क्या कुछ शायर कहते हैं कि हमने
6:10महबूब को हासिल करने में हर तरह की कोशिश
6:13की हर हर तरह के जतन किए मसाइल और तकाली
6:16का सामना किया लोगों की तानो तश्नी के
6:19निश्तर नश्तर सहे जी जी कर मरते रहे मग
6:23अफसोस हमारी कोई तदबीर कामयाब ना हो सकी
6:26जब हमारी हर तरह की कोशिशें राय ग गई तो
6:29हमने अल्लाह से रुजू किया रो रोकर अल्लाह
6:32के हुजूर दुआएं मांगी और गिड़गिड़ा कि या
6:34अल्लाह तू हमें वसाले यार से सरफराज फरमा
6:36दे मगर ऐसा ना हो सका हमें यूं लगा कि हम
6:40कि जैसे हमारी सारी कोशिशें अकार और सारी
6:43दुआएं रद्द हो गई गोया महबूब का मिलना
6:47हमारे नसीब ही में ना था वरना हम तो हर
6:50मुमकिन कोशिश कर चुके हैं बकौल शायर मैंने
6:54मांगी थी यह मस्जिदों में दुआ मैं जिसे
6:57चाहता हूं वह मुझको मिले जो मेरा फर्ज था
7:01मैंने पूरा किया अब खुदा ही ना चाहे तो
7:04मैं क्या करूं वो जो कहते हैं कि ढूंढने
7:06से खुदा भी मिल जाता है लेकिन अगर कुछ
7:09नामुमकिन ठहरा तो वह यह कि हमारा महबूबे
7:12मजाजी हमें नहीं
7:15मिला एक दुश्मन के चर्ख है न रहे तुझसे यह
7:21ऐ दुआ नहीं
7:22होता शायरी में चर्ख यानी आसमान या फलक
7:25किस्मत या दुश्मन को अक्सर जुल्म बेरहमी
7:28और तकदीर की सख्ती की अलामत के तौर पर पेश
7:31किया जाता है यहां दुश्मन चर्क से मुराद
7:35वह ताकत है जो इंसान के लिए मुश्किलात का
7:37सबब बनती है ख वो जमाना हो किस्मत या कोई
7:41और बैरून कुवत शायर चाहता है कि यह दुश्मन
7:44फना हो जाए लेकिन उसे एहसास है कि ऐसी दुआ
7:46मांगना बे सूद है दूसरे मिसरे में शायर
7:50गोया अपनी दुआ से मुखातिब है जो अभी
7:52कबूलियत के दर्जे तक नहीं पहुंची के मेरी
7:55दुश्मन ना बने कि मेरी किस्मत मेरी दुश्मन
7:58ना बने यानी मेरे बच्चे हूं और मेरा महबूब
8:01मुझे मिल जाए बकौल शायर जो भेजी थी दुआ वह
8:05जाकर आसमान से यूं टकरा गई क्या आ गई है
8:09लौट के सदा यह शेर मजम तौर पर शायर के गमो
8:13गुस्सा और उता हट को जाहिर करता है कि किस
8:15तरह महबूब का हिजर फरात उसे हर दम
8:18मुस्तरबते
8:20है तुम मेरे पास होते हो गोया जब कोई
8:24दूसरा नहीं होता मोमिन के शेर के हवाले से
8:27लिब ने कहा था कि अगर मोमिन अपना शेर मुझे
8:30दे दे तो मैं अपना पूरा दीवान उनकी नजर
8:33करने को तैयार हूं एक आशिक की कुल कायनात
8:37उसका महबूब होता है और इसका तसवर हरदम
8:39उसके कल्ब जहन पर छाया होता है खयाल की
8:42रोह जब शदीद होती है तो उसके इर्दगिर्द
8:44महबूब के वजूद का एहसास उभरने लगता है इस
8:48शेर में मोमिन अपने दिली कैफियत को बयान
8:50करते हुए कहते हैं कि अगर मैं कभी अपनी
8:52जात में अकेला भी हूं तो खुद को कभी अकेला
8:55महसूस नहीं करता बल्कि मुझे य लगता है कि
8:57तुम मेरे पास हो यानी महबूब अगर मुझसे दूर
9:01भी है तो तसव्वुर की दुनिया में व मेरे
9:03बहुत करीब है बकौल शायर जब तुम्हारा ख्याल
9:07आता है सारी दुनिया को भूल जाते हैं इश्की
9:12खूबी यह भी है कि व महफिल में आशिक को
9:13तन्हा कर देता है और इसी तरह इसकी एक
9:16खासियत यह भी है कि यह तन्हाई को महफिल
9:19बना देता है एक आशिक जब अकेला होता है तो
9:21महबूब के तसरा उसे घेर लेते हैं गोया वह
9:25महबूब के ख्वाबो खयाल में खोस आ जाता है
9:27वह अपने इर गिर से बेखबर महबूब के तसव्वुर
9:30में खूबसूरत सी दुनिया आबाद कर लेता है
9:33जहां सिर्फ महबूब उसके पास होता है बकल
9:37शायर अच्छा खासा बैठे-बैठे गुम हो जाता
9:40हूं अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो
9:44जाता हूं शेर को अगर इश्क हकीकी के तनाज
9:47में देखा जाए तो मोमिन इस हकीकत का तरा कर
9:50रहे हैं कि अल्लाह जब मेरे पास कोई भी
9:53नहीं होता और मैं तना होता हूं तो आप मेरे
9:56पास ही होते हैं कुरान में है कि
9:59हम इंसान की शह रग से भी ज्यादा करीब
10:03हैं आले दिल यार को लिखू क्यों कर हाथ दिल
10:08से जुदा नहीं होता इश्क की शिद्दत दिल की
10:12बेचैनी और बेताबी को बढ़ा देती है दर्दे
10:15दिल इस तरह से बढ़ता है कि इस पर हाथ रखना
10:17पड़ जाता है और इस कैफियत के इजार के लिए
10:20आशिक को की जब महबूब से बात ना हो तो दिल
10:23की हालत कैफियत महबूब तक पहुंचाने का एक
10:26ही तरीका होता है कि खत में बेताबी दिल
10:29लिख कर महबूब को भेज दे मोमिन इस इमकान को
10:32भी रद्द करते हुए कह रहे हैं कि मैं तो
10:34महबूब को अपने दिल की बात लिखने से भी
10:36कासिर हूं इसलिए कि मेरा दिल महबूब की
10:40जुदाई और बेवफाई के सबब इस कदर बेताब और
10:42बेचैन है कि मेरे लिए इसे संभालना मुश्किल
10:46हो रहा है मोमिन का कहना है कि दिल महबूब
10:49की जुदाई में
10:50मुस्तरबत बेकरार को संभालना बहुत मुश्किल
10:53है इस बेकरारी के सबब मैंने अपना हाथ अपने
10:57दिल पर रखा हुआ है इसलिए मैं अब महबूब को
11:00खत भी नहीं लिख सकता कि हाथ जो दिल पर है
11:03यानी जिससे हम इतनी शदीद मोहब्बत है हम
11:05उसे अपने दिल का हाल भी नहीं लिख सकते असल
11:08में शेर महबूब के हिजर फराक में बढ़ी हुई
11:11बेकरारी को जाहिर करता है कि इसकी जुदाई
11:13ने किस कदर दर दिया है कि बताने से भी
11:17कासिर
11:19हैं क्यों सुने अर्ज
11:22मुस्तरबेशन आखिर खुदा नहीं होता मोमिन ने
11:26शेर में महबूब की संग दिली का मजमून बांधा
11:29है
11:29सनम महबूब है और बुत को भी सनम कहते हैं
11:32और बुत पत्थर का होता है इसलिए संग दिली
11:35महबूब का सेवा है सनम महबूब का इस्तरा
11:39इसलिए कहा जाता है कि महबूब भी आशिक की
11:42हालत जार पर संग दिली का मुजहरा करता है
11:45आशिक परेशान हाल और
11:51मुस्तरबेशन कर देता है चुनांचे मोमिन कह
11:55रहे हैं कि किसी की हालत जार पर र्स खाना
11:58उसकी अर्ज सुनना और उसकी दुआ को शरफे
12:00कबूलियत बक्शना अल्लाह ताला का काम है
12:03जबकि महबूब तो सनम यानी पत्थर का बुत है
12:06खुदा तो नहीं है कि व हमारी अर्ज हाल
12:09क्यों सुने शायर का शेर का हकीकी मतलब
12:12लिया जाए तो य शेर तौहीद यानी अल्लाह की
12:14वादा नियत की तरफ इशारा करता है इंसान को
12:17सिर्फ अल्लाह वहद ला शरीक पर भरोसा करना
12:20चाहिए क्योंकि दूसरी तमाम ताकतें आजिज हैं
12:24मोमिन ने यहां इंसान की गलत फहमी पर तंस
12:26किया है कि वह बेजान चीजों से उम्मीदें
12:29बस्ता कर लेता है शायर कहता है कि एक
12:32बेचैन शख्स अगर किसी बेजान बुत के सामने
12:34अपनी हाजत पेश करे तो उसकी सुनेगा ही नहीं
12:37क्योंकि वह खुदा नहीं है इसलिए इंसान को
12:40सिर्फ अल्लाह की तरफ रुजू करना
12:47चाहिए अजीज तलबा यह मशकी सवालात में यह
12:51दाए तरफ जो है वह कंप्रीहेंशन है अार की इ
12:54ऊपर अार दिए गए नीचे सवालात है और इसके
12:56बाए जानिब जो है इन सवालात के जवाबाइकिरण
12:59लिखे
13:00गए इस सवाल में तश्वी इस्तरा किनाया और
13:03मिजाज मुर्सल की शिनाख्त कर दी गई है
13:06जुमलो के आगे ही उनके जो है जवाबाइकिरण