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Tashreeh Ghazal Momin Khan Momin : Asr oss ko zra nhi hota ( اثر اس کو ذرا نہیں ہوتا ) NBF: FBISE

Online Urdu Lessons - Federal & Punjab Board · 2,074 words · 10 min read

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0:08बिस्मिल्लाह रहमान रहीम अजीज तलबा पहले

0:11गजल पढ़ते हैं असर उसको जरा नहीं होता रंज

0:17राहत फजा नहीं

0:19होता बेवफा कहने की शिकायत है तू भी वादा

0:25वफा नहीं होता जिक्र अगियार से हुआ मालूम

0:30हरफे ना से बुरा नहीं होता तुम हमारे किसी

0:35तरह ना हुए वरना दुनिया में क्या नहीं

0:39होता एक दुश्मन के चर्ख है ना रहे तुझसे

0:45यह ऐ दुआ नहीं होता तुम मेरे पास होते हो

0:50गोया जब कोई दूसरा नहीं होता हाले दिल यार

0:55को लिखो क्यों कर हाथ दिल से जुदा नहीं

0:59होता

1:00क्यों सुने अर्ज मुस्तर मोमिन सनम आखिर

1:05खुदा नहीं

1:07होता जी तशरीफ आते हैं पहला शेर है असर

1:11उसको जरा नहीं होता रंज राहत फजा नहीं

1:16होता इस शेर में शाय ने महबूब की बेरुखी

1:19तगाफुल बे नियाजी और संग दिली को मौजू

1:22बनाया है आशिक अपने महबूब से

1:26इल्तजा इल्तजा और फरियाद जैसे हरब आजमा है

1:31इस शेर में शायर कहते हैं कि मेरे महबूब

1:33पर मेरे गम या दुख का कोई असर नहीं होता

1:36गोया मेरा रंज मेरे लिए इत्मीनान का बायस

1:38नहीं है मोहब्बत करने वाला महबूब को पाने

1:41के लिए हर तरह की साई करता है वो खुलूस

1:44सच्चाई वफा जैसी खूबियों से सरशर होता है

1:47वह महबूब के सामने आहो जारी करता है अपनी

1:50मोहब्बत का यकीन दिलाता है लेकिन महबूब पर

1:53इसकी हालत और कैफियत का कोई असर नहीं होता

1:57बकौल शायर क्या करूं अल्लाह सब हैं बेअसर

2:01लवला क्या नाला क्या फरियाद क्या शायर इस

2:05बात का बमला इजहार कर रहा है कि मेरी

2:08खुशियों का ताल्लुक चक बराह रास्त महबूब

2:10के नजरे करम से वाबस्ता है और लगता है कि

2:13महबूब ने नजरे इल्तिजा ना करने की कसम उठा

2:17रखी है यही वजह है कि मेरी जिंदगी में

2:20खुशियों खुशी और मसरत का दूर-दूर तक सुराग

2:23नहीं मिलता पूरी दुनिया मेरे गम से वाकिफ

2:26है लेकिन जिसे वाकिफ होना चाहिए था और

2:29मेरे दर्द का दरमा करना चाहिए था वही उस

2:31कफ इस कैफियत से बेखबर है बकौल शायर इन

2:36लबों ने मसी हाई ना की हमने 100 100 तरह

2:40से मर के

2:41देखा बेवफा कहने की शिकायत है तू भी वादा

2:46वफा नहीं होता हुस्न इश्क की जंग में

2:50चाहने वालों को हमेशा महबूब से गिला रहता

2:52है कि वह वफा नहीं करता वफा करना तो दूर

2:55की बात है सिरे से वाद वफा भी नहीं करता

2:58और अगर वाद वसल कर भी ले उसे टाल रहता है

3:01यहां तक कि आशिक मायूस हो जाता है बकल

3:04गालिब तेरे वादे पर जिए हम तो यह जान झूठ

3:08जाना कि खुशी से मर ना जाते अगर तबार होता

3:12शायर कहता है कि अगर तुमसे बेवफा कहते हो

3:15तो यह याद रखो तुम भी अपने वादों पर कायम

3:18नहीं रहते शेर मोहब्बत में होने वाली

3:21नाराजगी गिला और शिकायत के जज्बात को

3:23जाहिर करता है शायर ने इस शेर में मोहब्बत

3:26के रिश्ते की नजाकत और इसमें वफा की

3:28अहमियत को बहुत खूबसूरती से बयान किया है

3:31बकौल शायर हमारी शर्तें वफा यही है वफा

3:36करोगे वफा करेंगे यह शेर इंसान के दिल की

3:40गहराइयों से निकले हुए जज्बात का इजहार है

3:42मोहब्बत के रिश्ते में वफा का होना बहुत

3:45जरूरी है लेकिन जब दोनों फरीक एक दूसरे पर

3:47एतमाद नहीं करते और वादों को पूरा नहीं

3:49करते तो यह रिश्ता कमजोर हो जाता है शायर

3:52ने शेर में मोहब्बत के रिश्ते की इसी

3:54कमजोरी को बड़ी महारत से बयान किया है

3:58मुख्तसर यह शेर मोहब्त में वफा की अहमियत

4:01और बेवफाई के तख तजुर्बे को बयान करता है

4:04शायर ने शेर में मोहब्बत के रिश्ते की

4:06नजाकत और इसमें होने वाली नाराजगी को बहुत

4:08खूबसूरती से पेश किया है य शेर इंसान के

4:11दिल को छू जाने वाले जज्बात का इजहार

4:15है जिक्र अगियार से हुआ मालूम हरफे ना से

4:20बुरा नहीं होता महबूब जब गैरों की खूबियां

4:24आशिक के सामने बयान करें तो आशिक के लिए

4:26सूरते हाल निहायत अजियत नाक होती है यह

4:30बात आशिक को बहुत नागवार गुजरती है कि

4:32उसका महबूब उसकी बजाय गैर यानी उसके रकीब

4:35का तजक लिए बैठा है बकौल शायर गैर का

4:39जिक्र वफा और हमारे आगे दाग इस बात से

4:43जलता है कलेजा कैसा इसलिए शायर कहता है कि

4:47जब हमने महबूब की जुबान से रकीब रूसिया के

4:50तजक सुने तो हमें वह लोग याद आए जो हमें

4:53इश्क से बाज रहने की नसीहत किया करते थे

4:56और हम उनकी बात को कोई अहमियत ना देते थे

5:00उर्दू शायरी में नासे को आमतौर पर अच्छा

5:02नहीं समझा गया लेकिन इस शेर में शायर इसके

5:05मुस्त पहलू की तरफ इशारा करते हुए कहते

5:08हैं कि बाज औकात नासे की बातें दुरुस्त भी

5:11होती हैं अब जब हमारा महबूब हमारे सामने

5:14दूसरों का तजक लिए बैठा है तो हमें नासे

5:16की बात मुनासिब मालूम हो रही है कि इश्क

5:19के मैदान में कदम मत रखो यह बहुत तड़पाएगा

5:22अगर हम उनकी नसीहत पर अमल कर लेते तो आज

5:26हमें इस सूरत हाल का सामना ना करना पड़ता

5:31तुम हमारे किसी तरह ना हुए वरना दुनिया

5:35में क्या नहीं होता शायर अपने तकदीर से

5:38शिकवा कुना है और कह रहा है कि खुदा की

5:41वसी अरही सरजमीन में हर तरह के अजाब रमा

5:44होते रहते हैं नामुमकिन मुमकिन बन जाते

5:47हैं गरज दुनिया में सब कुछ होता है एक मैं

5:50बदनसीब हूं कि मोहब्बत में हजारों दुख सहे

5:53लोगों की बातें सुनी रुसवाईयां बर्दाश्त

5:56की लेकिन महबूब मेरा किसी भी तरह ना हो सक

5:59का बकल मीर तकी मीर एक महरूम चले मीर हम

6:03ही दुनिया से वरना औरों को जमाने ने दिया

6:07क्या क्या कुछ शायर कहते हैं कि हमने

6:10महबूब को हासिल करने में हर तरह की कोशिश

6:13की हर हर तरह के जतन किए मसाइल और तकाली

6:16का सामना किया लोगों की तानो तश्नी के

6:19निश्तर नश्तर सहे जी जी कर मरते रहे मग

6:23अफसोस हमारी कोई तदबीर कामयाब ना हो सकी

6:26जब हमारी हर तरह की कोशिशें राय ग गई तो

6:29हमने अल्लाह से रुजू किया रो रोकर अल्लाह

6:32के हुजूर दुआएं मांगी और गिड़गिड़ा कि या

6:34अल्लाह तू हमें वसाले यार से सरफराज फरमा

6:36दे मगर ऐसा ना हो सका हमें यूं लगा कि हम

6:40कि जैसे हमारी सारी कोशिशें अकार और सारी

6:43दुआएं रद्द हो गई गोया महबूब का मिलना

6:47हमारे नसीब ही में ना था वरना हम तो हर

6:50मुमकिन कोशिश कर चुके हैं बकौल शायर मैंने

6:54मांगी थी यह मस्जिदों में दुआ मैं जिसे

6:57चाहता हूं वह मुझको मिले जो मेरा फर्ज था

7:01मैंने पूरा किया अब खुदा ही ना चाहे तो

7:04मैं क्या करूं वो जो कहते हैं कि ढूंढने

7:06से खुदा भी मिल जाता है लेकिन अगर कुछ

7:09नामुमकिन ठहरा तो वह यह कि हमारा महबूबे

7:12मजाजी हमें नहीं

7:15मिला एक दुश्मन के चर्ख है न रहे तुझसे यह

7:21ऐ दुआ नहीं

7:22होता शायरी में चर्ख यानी आसमान या फलक

7:25किस्मत या दुश्मन को अक्सर जुल्म बेरहमी

7:28और तकदीर की सख्ती की अलामत के तौर पर पेश

7:31किया जाता है यहां दुश्मन चर्क से मुराद

7:35वह ताकत है जो इंसान के लिए मुश्किलात का

7:37सबब बनती है ख वो जमाना हो किस्मत या कोई

7:41और बैरून कुवत शायर चाहता है कि यह दुश्मन

7:44फना हो जाए लेकिन उसे एहसास है कि ऐसी दुआ

7:46मांगना बे सूद है दूसरे मिसरे में शायर

7:50गोया अपनी दुआ से मुखातिब है जो अभी

7:52कबूलियत के दर्जे तक नहीं पहुंची के मेरी

7:55दुश्मन ना बने कि मेरी किस्मत मेरी दुश्मन

7:58ना बने यानी मेरे बच्चे हूं और मेरा महबूब

8:01मुझे मिल जाए बकौल शायर जो भेजी थी दुआ वह

8:05जाकर आसमान से यूं टकरा गई क्या आ गई है

8:09लौट के सदा यह शेर मजम तौर पर शायर के गमो

8:13गुस्सा और उता हट को जाहिर करता है कि किस

8:15तरह महबूब का हिजर फरात उसे हर दम

8:18मुस्तरबते

8:20है तुम मेरे पास होते हो गोया जब कोई

8:24दूसरा नहीं होता मोमिन के शेर के हवाले से

8:27लिब ने कहा था कि अगर मोमिन अपना शेर मुझे

8:30दे दे तो मैं अपना पूरा दीवान उनकी नजर

8:33करने को तैयार हूं एक आशिक की कुल कायनात

8:37उसका महबूब होता है और इसका तसवर हरदम

8:39उसके कल्ब जहन पर छाया होता है खयाल की

8:42रोह जब शदीद होती है तो उसके इर्दगिर्द

8:44महबूब के वजूद का एहसास उभरने लगता है इस

8:48शेर में मोमिन अपने दिली कैफियत को बयान

8:50करते हुए कहते हैं कि अगर मैं कभी अपनी

8:52जात में अकेला भी हूं तो खुद को कभी अकेला

8:55महसूस नहीं करता बल्कि मुझे य लगता है कि

8:57तुम मेरे पास हो यानी महबूब अगर मुझसे दूर

9:01भी है तो तसव्वुर की दुनिया में व मेरे

9:03बहुत करीब है बकौल शायर जब तुम्हारा ख्याल

9:07आता है सारी दुनिया को भूल जाते हैं इश्की

9:12खूबी यह भी है कि व महफिल में आशिक को

9:13तन्हा कर देता है और इसी तरह इसकी एक

9:16खासियत यह भी है कि यह तन्हाई को महफिल

9:19बना देता है एक आशिक जब अकेला होता है तो

9:21महबूब के तसरा उसे घेर लेते हैं गोया वह

9:25महबूब के ख्वाबो खयाल में खोस आ जाता है

9:27वह अपने इर गिर से बेखबर महबूब के तसव्वुर

9:30में खूबसूरत सी दुनिया आबाद कर लेता है

9:33जहां सिर्फ महबूब उसके पास होता है बकल

9:37शायर अच्छा खासा बैठे-बैठे गुम हो जाता

9:40हूं अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो

9:44जाता हूं शेर को अगर इश्क हकीकी के तनाज

9:47में देखा जाए तो मोमिन इस हकीकत का तरा कर

9:50रहे हैं कि अल्लाह जब मेरे पास कोई भी

9:53नहीं होता और मैं तना होता हूं तो आप मेरे

9:56पास ही होते हैं कुरान में है कि

9:59हम इंसान की शह रग से भी ज्यादा करीब

10:03हैं आले दिल यार को लिखू क्यों कर हाथ दिल

10:08से जुदा नहीं होता इश्क की शिद्दत दिल की

10:12बेचैनी और बेताबी को बढ़ा देती है दर्दे

10:15दिल इस तरह से बढ़ता है कि इस पर हाथ रखना

10:17पड़ जाता है और इस कैफियत के इजार के लिए

10:20आशिक को की जब महबूब से बात ना हो तो दिल

10:23की हालत कैफियत महबूब तक पहुंचाने का एक

10:26ही तरीका होता है कि खत में बेताबी दिल

10:29लिख कर महबूब को भेज दे मोमिन इस इमकान को

10:32भी रद्द करते हुए कह रहे हैं कि मैं तो

10:34महबूब को अपने दिल की बात लिखने से भी

10:36कासिर हूं इसलिए कि मेरा दिल महबूब की

10:40जुदाई और बेवफाई के सबब इस कदर बेताब और

10:42बेचैन है कि मेरे लिए इसे संभालना मुश्किल

10:46हो रहा है मोमिन का कहना है कि दिल महबूब

10:49की जुदाई में

10:50मुस्तरबत बेकरार को संभालना बहुत मुश्किल

10:53है इस बेकरारी के सबब मैंने अपना हाथ अपने

10:57दिल पर रखा हुआ है इसलिए मैं अब महबूब को

11:00खत भी नहीं लिख सकता कि हाथ जो दिल पर है

11:03यानी जिससे हम इतनी शदीद मोहब्बत है हम

11:05उसे अपने दिल का हाल भी नहीं लिख सकते असल

11:08में शेर महबूब के हिजर फराक में बढ़ी हुई

11:11बेकरारी को जाहिर करता है कि इसकी जुदाई

11:13ने किस कदर दर दिया है कि बताने से भी

11:17कासिर

11:19हैं क्यों सुने अर्ज

11:22मुस्तरबेशन आखिर खुदा नहीं होता मोमिन ने

11:26शेर में महबूब की संग दिली का मजमून बांधा

11:29है

11:29सनम महबूब है और बुत को भी सनम कहते हैं

11:32और बुत पत्थर का होता है इसलिए संग दिली

11:35महबूब का सेवा है सनम महबूब का इस्तरा

11:39इसलिए कहा जाता है कि महबूब भी आशिक की

11:42हालत जार पर संग दिली का मुजहरा करता है

11:45आशिक परेशान हाल और

11:51मुस्तरबेशन कर देता है चुनांचे मोमिन कह

11:55रहे हैं कि किसी की हालत जार पर र्स खाना

11:58उसकी अर्ज सुनना और उसकी दुआ को शरफे

12:00कबूलियत बक्शना अल्लाह ताला का काम है

12:03जबकि महबूब तो सनम यानी पत्थर का बुत है

12:06खुदा तो नहीं है कि व हमारी अर्ज हाल

12:09क्यों सुने शायर का शेर का हकीकी मतलब

12:12लिया जाए तो य शेर तौहीद यानी अल्लाह की

12:14वादा नियत की तरफ इशारा करता है इंसान को

12:17सिर्फ अल्लाह वहद ला शरीक पर भरोसा करना

12:20चाहिए क्योंकि दूसरी तमाम ताकतें आजिज हैं

12:24मोमिन ने यहां इंसान की गलत फहमी पर तंस

12:26किया है कि वह बेजान चीजों से उम्मीदें

12:29बस्ता कर लेता है शायर कहता है कि एक

12:32बेचैन शख्स अगर किसी बेजान बुत के सामने

12:34अपनी हाजत पेश करे तो उसकी सुनेगा ही नहीं

12:37क्योंकि वह खुदा नहीं है इसलिए इंसान को

12:40सिर्फ अल्लाह की तरफ रुजू करना

12:47चाहिए अजीज तलबा यह मशकी सवालात में यह

12:51दाए तरफ जो है वह कंप्रीहेंशन है अार की इ

12:54ऊपर अार दिए गए नीचे सवालात है और इसके

12:56बाए जानिब जो है इन सवालात के जवाबाइकिरण

12:59लिखे

13:00गए इस सवाल में तश्वी इस्तरा किनाया और

13:03मिजाज मुर्सल की शिनाख्त कर दी गई है

13:06जुमलो के आगे ही उनके जो है जवाबाइकिरण

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