Full transcript
0:00कुछ ही दिनों में घर के चारों तरफ
0:02छोटे-छोटे घोंसले बन गए। हर कोना पक्षियों
0:05के नए पर परिवार से भर गया।
0:10इस सुनसान जगह पर मोहन और राधा का बस यही
0:13छोटा सा घर था और यही खेत उनकी पूरी
0:15दुनिया था। इसी फसल से उनकी रोटी चलती थी
0:18और इसी उम्मीद पर उनका जीवन टिका था।
0:20लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि
0:23कुछ ही दिनों बाद यही छोटी सी फसल उनके
0:25लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनने वाली है
0:27क्योंकि नजर इसी खेत पर पड़ चुकी थी।
0:29गरीबी ने उन्हें कभी मेहनत से पीछे नहीं
0:31हटाया। मोहन सुबह से मिट्टी खोदता और राधा
0:35उसके साथ मिलकर खेत की हर छोटी सी क्यारी
0:37तैयार करती थी। दोनों ने खेत में मेहनत से
0:40बीज बोए। उनके पास ज्यादा जमीन नहीं थी
0:43इसलिए इस छोटी सी खेती की हर क्यारी उनके
0:46लिए उम्मीद जैसी थी। हर दिन वे धूप में
0:49पसीना बहाते थे। मोहन पौधों को पानी देता
0:53और राधा उनकी मिट्टी ठीक करती ताकि एक भी
0:56पौधा कमजोर ना पड़े। सुबह से शाम तक उनका
0:59यही जीवन था। [संगीत] खेत में मेहनत करना
1:01और रात को अपने छोटे से घर में लौटना।
1:04लेकिन दोनों अपनी छोटी सी जिंदगी से खुश
1:06थे। दिन गुजरते गए और उनकी मेहनत रंग लाने
1:10लगी। खेत की छोटी सी फसल अब तेजी से बढ़
1:12रही थी और दोनों को अपनी पहली अच्छी
1:14पैदावार की उम्मीद दिखाई देने लगी थी।
1:16आखिरकार उनकी मेहनत सफल हुई। खेत की फसल
1:20इतनी अच्छी हो गई कि मोहन और राधा को लगा
1:23अब कुछ समय तक उनके घर में खाने की कमी
1:25नहीं होगी। लेकिन उसी दिन आसमान में उड़ते
1:27पक्षियों का एक बड़ा झुंड इस खेत की तरफ
1:30आने लगा। मोहन और राधा को तब तक पता नहीं
1:32था कि उनकी फसल पर एक नई मुसीबत आने वाली
1:35है। अचानक पक्षियों का पूरा झुंड खेत में
1:37उतर पड़ा और फसल खाने लगा। मोहन दौड़कर
1:40उन्हें भगाने लगा। लेकिन उसे क्या पता था
1:43कि यह तो सिर्फ शुरुआत थी। अगली सुबह
1:45पक्षी फिर लौट आए। मोहन ने उन्हें भगाया।
1:48लेकिन जितने पक्षी उड़ते उतने ही नए पक्षी
1:52खेत में आकर बैठ जाते थे। मोहन जितनी
1:54मेहनत से उन्हें भगाता, पक्षी उतनी ही
1:57जल्दी वापस आ जाते। अब उसे डर लगने लगा था
2:00कि कहीं उसकी महीनों की मेहनत एक ही दिन
2:02में खत्म ना हो जाए। दोपहर तक फसल का एक
2:04हिस्सा खराब हो चुका था। राधा ने टूटे
2:07पौधों को देखा तो उसका दिल दुख गया
2:09क्योंकि यही फसल उनके घर का एकमात्र सहारा
2:12थी। शाम तक दोनों बहुत थक चुके थे। मोहन
2:16सोच रहा था कि आखिर इन पक्षियों से अपनी
2:18फसल कैसे बचाएं? तभी राधा की नजर आसमान
2:20में उड़ते पक्षियों पर टिक गई। को उनके
2:22पास भी खाने के लिए बहुत कम अनाज बचा था।
2:25फिर अचानक उसके मन में पक्षियों से जुड़ा
2:27एक ऐसा विचार आया जो उनकी पूरी जिंदगी
2:30बदलने वाला था। सुबह राधा ने खेत की फसल
2:33से अलग थोड़े से अनाज के दाने निकाले।
2:35उसने उन्हें खेत के एक कोने में डाल दिया
2:37ताकि पक्षियों के लिए खाना अलग जगह पर मिल
2:39सके। राधा का छोटा सा प्रयोग काम कर गया।
2:42एक कबूतर दाना खाने आया। फिर दूसरा और
2:45देखते ही देखते तोते भी खेत की फसल छोड़कर
2:48उसी जगह दाना चुगने लगे। अगले दिन
2:50पक्षियों की संख्या बढ़ गई। राधा ने फिर
2:52उनके लिए दाना रखा और अब पक्षी फसल में
2:55जाने के बजाय उसी जगह खाना खाने लगे थे।
2:58अब यह रोज का नियम बन गया। राधा पक्षियों
3:01को दाना देती और मोहन खेत में काम करता।
3:04धीरे-धीरे पक्षियों को समझ आने लगा कि इस
3:06छोटे से घर में उनके लिए भी जगह है। जिस
3:08खेत में कल तक पक्षियों से परेशानी थी, आज
3:11वही इंसान और पक्षी साथ दिखाई दे रहे थे
3:14कि यह पक्षी आगे चलकर उसके घर का हिस्सा
3:16बनने वाले हैं। अब हर सुबह उनके छोटे से
3:19घर में सैकड़ों पक्षियों की चहचहाट गूंजने
3:22लगी। सुनसान घर पहली [संगीत] बार जीवंत
3:25दिखाई देने लगा। राधा ने देखा अब पक्षी
3:28सिर्फ खाना खाना खाने नहीं आते थे।
3:31उन्होंने इस छोटे घर को अपना घर भी मान
3:34लिया था। कुछ ही दिनों में घर के चारों
3:37तरफ छोटे-छोटे घोंसले बन गए। हर कोना
3:40पक्षियों के नए पर परिवार से भर गया।
3:46राधा ने दाने के साथ पानी का भी इंतजाम कर
3:48दिया। अब पक्षियों को इस घर में खाना भी
3:51मिलता था और पानी भी। एक दिन कुछ जंगली
3:55मुर्गियां भी इस घर तक पहुंच गई। वे बहुत
3:58डरी हुई थी लेकिन राधा ने उन्हें भी दाना
4:01दे दिया।
4:02मुर्गियां अगले दिन फिर लौट आई।
4:06अब उन्हें भी इस छोटे घर में डर नहीं लगता
4:08था।
4:10मोहन ने मुर्गियों के लिए एक छोटा सा
4:13सुरक्षित घर बना दिया।
4:16अब वे भी परिवार का हिस्सा बन चुकी थी।
4:20अगली सुबह राधा को घास के बीच पहला अंडा
4:23मिला। छोटी सी खुशी ने दोनों की आंखों में
4:27उम्मीद भर दी। दिन बीतते गए और अंडों की
4:31संख्या बढ़ती गई। अब हर सुबह उनकी टोकरी
4:35भरने लगी थी।
4:38पहली बार मोहन उम्मीद लेकर बाजार निकला।
4:41उसे नहीं पता था कि यही अंडे उनकी जिंदगी
4:44बदलने की शुरुआत बनने वाले हैं। मोहन पहली
4:47बार अपनी टोकरी में अंडे लेकर बाजार जा
4:50रहा था। उसके मन में उम्मीद थी कि शायद इन
4:52अंडों से घर का खर्च थोड़ा आसान हो जाएगा।
4:55बाजार में मोहन ने सारे अंडे सावधानी से
4:58निकालकर बेचने के लिए रख दिए। थोड़ी देर
5:01बाद उसकी पूरी टोकरी खाली हो गई। कमाई
5:04बहुत ज्यादा नहीं थी। लेकिन मोहन के लिए
5:07यह बेहद खास थी। अपनी मेहनत से मिली यह
5:10पहली कमाई [संगीत] देखकर उसकी आंखों में
5:12खुशी आ गई। मोहन ने कमाई के पैसों से सबसे
5:16पहले घर के लिए जरूरी सामान खरीदा। उसके
5:19लिए परिवार की जरूरतें अपनी इच्छाओं से
5:21कहीं ज्यादा जरूरी थी। शाम को मोहन वापस
5:24घर आया। राधा ने उसकी छोटी सी कमाई देखी
5:27तो दोनों के चेहरों पर खुशी आ गई। उन्हें
5:30लगा कि शायद अब मुश्किल दिन धीरे-धीरे बदल
5:32रहे हैं। अगले कुछ दिनों में उनके घर आने
5:35वाले पक्षियों की संख्या और बढ़ गई। अब
5:38सुबह होते ही पूरा आंगन पक्षियों और
5:40मुर्गियों से भर जाता था। पक्षियों ने
5:43अपने घोंसलों में अंडे दिए और जल्द ही
5:45उनमें से छोटे-छोटे बच्चे निकल आए।
5:48राधा उन्हें देखकर बहुत खुश होती थी। अब
5:52मोहन और राधा ने एक नियम बना लिया था।
5:54अच्छी फसल का एक हिस्सा घर के लिए, थोड़ा
5:57बाजार के लिए और थोड़ा हिस्सा उनके छोटे
5:59पंख वाले परिवार के लिए। अब मुर्गियां भी
6:02नियमित रूप से अंडे देने लगी थी। राधा हर
6:05सुबह उन्हें सावधानी से इकट्ठा करती और एक
6:08अलग टोकरी में रखती थी। कुछ ही समय में का
6:12छोटा सा घर सिर्फ रहने की जगह नहीं रहा।
6:14खेत, पक्षी और मुर्गियां मिलकर लेकिन असली
6:17बदलाव अभी बाकी था। अब मुर्गियां रोज पहले
6:21से ज्यादा अंडे देने लगी थी। मोहन और राधा
6:24समझ गए कि उनकी छोटी सी मेहनत धीरे-धीरे
6:27नई कमाई का सहारा बन रही है। कुछ ही दिनों
6:29में नए चूजे भी बड़े होने लगे। घर का आंगन
6:32अब खाली नहीं रहता था। वहां हर समय
6:35पक्षियों की चहल-पहल बनी रहती थी। अंडे
6:39बढ़ने लगे तो राधा ने बांस की एक बड़ी
6:41टोकरी बना ली। अब अंडे सुरक्षित रखने और
6:44बाजार तक ले जाने में उन्हें आसानी होने
6:47लगी। एक दिन मोहन ने देखा कि पक्षी खेत
6:50में मौजूद छोटे कीड़े खा रहे थे। इससे फसल
6:53को नुकसान कम होने लगा और पौधे पहले से
6:55ज्यादा स्वस्थ दिखने लगे। धीरे-धीरे खेत
6:58की हालत बदल गई। पक्षियों को अलग दाना
7:01मिलने से फसल बची और खेत में प्राकृतिक
7:03तरीके से कीड़ों का नुकसान भी कम हो गया।
7:06आखिर वो दिन आ गया जिसका दोनों को इंतजार
7:09था। उनकी मेहनत रंग लाई और खेत में पहले
7:13से कहीं बेहतर से फसल तैयार हो गई। इस बार
7:16मोहन अकेले अंडे नहीं लाया था। वह अपनी
7:19अतिरिक्त फसल भी बाजार ले गया जिससे उनकी
7:22कमाई पहले से कहीं ज्यादा होने वाली थी।
7:24बाजार की कमाई से उन्होंने सबसे पहले अपने
7:27घर की टूटी छत ठीक की। वर्षों बाद उनका
7:30छोटा सा घर उन्हें पहले से ज्यादा
7:32सुरक्षित महसूस होने लगा। राधा ने
7:35पक्षियों के लिए घर से अलग एक साफ जगह बना
7:37दी। अब पक्षियों को खाना भी मिलता था और
7:40उनका छोटा सा घर भी साफ सुथरा रहने लगा।
7:44अब उनका छोटा घर पहले जैसा अकेला [संगीत]
7:46नहीं था। खेत, पक्षी और मुर्गियां मिलकर
7:49उनकी जिंदगी बदल रहे थे। लेकिन यह बदलाव
7:52अभी पूरा नहीं हुआ था। बाजार में अंडों और
7:54फसल की अच्छी बिक्री हुई थी। अब दोनों के
7:57पास इतना अनाज था कि वे अपने लिए भी रख
7:59सकते थे और पक्षियों के लिए भी। मोहन ने
8:03कमाई का लालच नहीं किया। उसने तय किया कि
8:06हर फसल में से थोड़ा हिस्सा हमेशा उन
8:08पक्षियों और मुर्गियों के लिए रखा जाएगा।
8:11अब पक्षियों को पता चल चुका था कि उनका
8:14दाना कहां मिलेगा। इसलिए वे फसल पर कम
8:16बैठते और सीधे अपने तय किए हुए स्थान पर
8:19पहुंच जाते। मुर्गियों की संख्या बढ़ने के
8:22साथ अंडे भी बढ़ते गए। अब हर सुबह राधा के
8:26पास बाजार ले जाने के लिए अच्छी मात्रा
8:28में अंडे तैयार रहते थे। जिस खेत को कभी
8:30पक्षियों से नुकसान होता था, वही खेत अब
8:33सुरक्षित था। मोहन और राधा को पहली बार
8:36अपनी मेहनत पर सच्चा भरोसा महसूस हुआ।
8:38कमाई बढ़ने के बाद भी उन्होंने खेत की
8:41मेहनत नहीं छोड़ी। वे जानते थे कि अच्छी
8:43फसल सिर्फ किस्मत से नहीं रोज की मेहनत से
8:46तैयार होती है। अब अंडों की बिक्री इतनी
8:49बढ़ गई थी कि मोहन हर दिन कमाई का हिसाब
8:52रखने लगा। छोटी सी शुरुआत अब धीरे-धीरे
8:55नियमित कारोबार बन रही थी। पहले मोहन कुछ
8:58ही अंडे लेकर बाजार जाता था। अब उसकी
9:00दोनों टकरियां भर जाती थी और बाजार
9:03पहुंचते ही लोग उसके अंडे खरीदने लगे।
9:06अंडों की कमाई से अब घर की जरूरतें आसानी
9:09से पूरी होने लगी थी। लेकिन मोहन और राधा
9:12ने अपनी पुरानी सादगी और दूसरों के लिए
9:14बांटने की आदत नहीं छोड़ी। कभी इस सुनसान
9:17जगह पर सिर्फ दो अनाथ लोग रहते थे। अब उसी
9:20जगह ने उन्हें मेहनत, फसल, [संगीत] अंडों
9:22और प्रकृति के साथ एक नया जीवन दे दिया
9:25था। अब मोहन ने एक बात साफ समझ ली थी। अगर
9:29पक्षियों को उनका हिस्सा दिया जाए तो वे
9:31भी खेत को नुकसान से बचाने में मदद करते
9:34हैं। राधा ने दाने के साथ पानी की भी
9:36व्यवस्था कर दी। अब गर्म दिनों में भी
9:39पक्षियों और मुर्गियों को अपने घर के पास
9:42ही पानी मिल जाता था। धीरे-धीरे इस जगह की
9:45खबर दूसरे पक्षियों तक भी पहुंचने लगी। अब
9:48हर दिन नए मेहमान आते और बिना फसल खराब
9:51किए अपना भोजन कर लौट जाते। कुछ समय बाद
9:54मिट्टी और फसल दोनों बेहतर दिखाई देने
9:57लगे। मोहन और राधा को समझ आने लगा कि
10:00प्रकृति के साथ मिलकर काम करना ज्यादा
10:02फायदेमंद है। मुर्गियों की संख्या बढ़ रही
10:05थी इसलिए दोनों ने उनके लिए सुरक्षित जगह
10:08भी बड़ी कर दी। अब बारिश और तेज हवा में
10:10भी वे सुरक्षित रह सकेंगी।
10:13मुर्गियों की संख्या बढ़ रही थी इसलिए
10:15दोनों ने उनके लिए सुरक्षित जगह भी बड़ी
10:17कर दी। अब बारिश और तेज हवा में भी वे
10:20सुरक्षित रह सकेंगी। आज मोहन के पास पहले
10:23से कहीं ज्यादा सामान था। अंडों के साथ
10:26अतिरिक्त फसल फसल भी बिकने लगी और उनकी
10:29मेहनत की कमाई लगातार बढ़ती गई। कमाई से
10:31उन्होंने दिखावे की चीजें नहीं खरीदी।
10:34मोहन ने खेती के बेहतर औजार लिए ताकि अगली
10:38फसल और ज्यादा मेहनत से तैयार की जा सके।
10:40अब उनके पास बेहतर औजार थे। लेकिन मेहनत
10:43वही थी। दोनों ने अगली फसल की तैयारी शुरू
10:47कर दी। जबकि पक्षी और मुर्गियां उनके
10:49आसपास बने रहे। दोनों ने कभी नहीं सोचा था
10:51कि कुछ मुट्ठी दाने से शुरू हुई दया एक
10:54दिन उनकी जिंदगी बदल देगी। लेकिन असली
10:57परीक्षा अभी बाकी थी। उस दिन सुबह से ही
10:59मौसम बदलने लगा था। आसमान पर काले बादल छा
11:03गए और पक्षियों को देखकर राधा समझ गई कि
11:06तेज बारिश आने वाली है। हवा तेज होने लगी
11:10तो दोनों ने अपना काम छोड़कर सबसे पहले
11:12पक्षियों और मुर्गियों को सुरक्षित करने
11:14की तैयारी शुरू कर दी।
11:17कुछ ही देर में तेज बारिश शुरू हो गई।
11:19बारिश इतनी तेज थी कि पूरा खेत पानी से
11:22भरने लगा लेकिन पक्षी राधा के बनाए
11:24सुरक्षित स्थान में आ चुके थे। मोहन ने
11:26देखा कि पानी खेत में जमा हो रहा था। उसने
11:29खेत के किनारे छोटी नाली बनाई ताकि ज्यादा
11:32पानी फसल की जड़ों को खराब ना कर सके। कई
11:35घंटों की बारिश के बाद आखिर मौसम शांत
11:38हुआ। थोड़ी फसल को नुकसान हुआ लेकिन मोहन
11:41की बनाई नाली ने खेत का बड़ा हिस्सा बचा
11:44लिया था। अगली सुबह दोनों ने खेत को देखा।
11:48बारिश ने उन्हें नुकसान तो दिया था लेकिन
11:50उनकी मेहनत और सही तैयारी के कारण फसल अभी
11:53भी बची हुई थी। बारिश से कुछ घोंसले कमजोर
11:55हो गए थे। राधा ने सूखी घास से उन्हें
11:58[संगीत] ठीक किया और मोहन ने उन्हें मजबूत
12:00सहारा दे दिया।
12:03शाम तक पक्षी फिर अपने घोंसलों में लौट आए
12:06और मुर्गियां भी सुरक्षित थी। मोहन और
12:08राधा को लगा जैसे उन्होंने सिर्फ अपना घर
12:10नहीं बल्कि एक पूरा छोटा परिवार बचाया।
12:13दिन गुजर गया। दोनों ने फिर से खेत की
12:15तैयारी शुरू कर दी और नई फसल के लिए बीज
12:18बोने लगे। अब उनका छोटा परिवार पहले से भी
12:21बड़ा हो चुका था। दो अनाथ लोगों का यह
12:23छोटा सा घर बिल्कुल अकेला था। आज यहां
12:26सैकड़ों पंख और छोटे चूजे थे। यही मेहनत
12:29उन्हें एक नई पहचान देने वाली थी। बारिश
12:31के बाद उनकी मुर्गियां फिर से अंडे देने
12:33लगी और खेत की नई फसल भी अच्छी तरह बढ़ने
12:36लगी। अब घर में रोज बेचने के लिए कुछ ना
12:39कुछ तैयार रहता था। अब दोनों अपने सामान
12:41को बहुत सावधानी से तैयार करते थे। अंडे
12:44सुरक्षित रखे जाते और खेत की ताजी पैदावार
12:47भी बाजार के लिए अलग कर दी जाती। मोहन फिर
12:50बाजार के लिए निकल पड़ा। इस बार उसके पास
12:53इतनी पैदावार थी, कि एक छोटी टोकरी उसके
12:56लिए काफी नहीं थी। बाजार में उसकी सारी
13:00चीजें जल्दी बिक गई। अब लोग उसके अंडों और
13:04ताजी फसल को पहचानने लगे थे।
13:07उस दिन की कमाई पहले से ज्यादा थी। लेकिन
13:10घर पहुंचते ही मोहन ने सबसे पहले अपने
13:13परिवार और पक्षियों के लिए दाने का इंतजाम
13:16किया। कमाई बढ़ी तो राधा ने पक्षियों का
13:19हिस्सा भी बढ़ा दिया। वह मानती थी कि
13:22जिसने उन्हें सहारा दिया है उसका हिस्सा
13:24कभी कम नहीं होना चाहिए। अब पक्षी भी इस
13:28खेत का हिस्सा बन चुके थे। वे फसल के
13:31आसपास के छोटे कीड़े खाते और खेत को
13:33स्वस्थ रखने में मदद करते। मुर्गियों की
13:36संख्या अब काफी बढ़ चुकी थी। रोज इतने
13:39अंडे मिलने लगे कि उनकी बिक्री से घर का
13:42खर्च आसानी से चलने लगा।
13:45अब उनकी कमाई से सिर्फ घर नहीं चलता था।
13:48वे नए बीज खरीदते, खेती सुधारते [संगीत]
13:51और जरूरत पड़ने पर पक्षियों के लिए भी
13:53दाना जुटाते थे। जिस जगह कभी सिर्फ दो
13:55अनाथ लोग अपने छोटे खेत के सहारे जीते थे।
13:58आज वहीं फसल, अंडे, पक्षी और मुर्गियों ने
14:01एक खुशहाल संसार बना दिया था। समय बीतता
14:04गया और मोहन राधा की मेहनत लगातार बढ़ती
14:07गई। अब उनका छोटा सा घर सिर्फ उनका घर
14:09नहीं रहा था बल्कि सैकड़ों पक्षियों का
14:11सुरक्षित ठिकाना बन चुका था। अब आसपास के
14:14लोगों का ध्यान भी इस छोटे से खेत की तरफ
14:16जाने लगा था। उन्हें समझ नहीं आता था कि
14:19इतने पक्षी यहां रहते हुए भी फसल इतनी
14:21अच्छी कैसे हो रही है। लोगों ने पहली बार
14:23अपनी आंखों से देखा कि पक्षियों को उनका
14:26भोजन अलग देने से खेत भी सुरक्षित रह सकता
14:28है और पक्षियों को भी भरपूर खाना मिल सकता
14:31है। मोहन ने किसी से अपना तरीका छिपाया
14:33नहीं। उसने कहा कुछ नहीं। बस अनाज की एक
14:37मुट्ठी दी और लोगों को दिखा दिया कि
14:39पक्षियों की मदद कैसे की जा सकती है। कुछ
14:42ही दिनों में दूसरे लोगों ने भी यही तरीका
14:44अपनाना शुरू कर दिया। अब सिर्फ मोहन के घर
14:47ही नहीं आसपास के कई घरों में पक्षियों के
14:49लिए दाना और छोटी सी आदत की शुरुआत राधा
14:52ने अपने घर के बाहर की थी। वो अब पूरे
14:54इलाके में फैल रही थी। इंसानों और
14:57पक्षियों के बीच एक नया रिश्ता बन रहा था।
14:59इस बार फसल भी शानदार हुई और अंडों की
15:02संख्या भी बढ़ गई। मोहन और राधा की मेहनत
15:05अब उनके छोटे घर को धीरे-धीरे खुशहाल बना
15:08रही थी।
15:10कई महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने थोड़ी
15:12बचत भी कर ली थी। अब उनके पास सहारा था
15:16[संगीत] और आगे बढ़ने का मौका भी। दोनों
15:18ने तय किया कि खेत का एक हिस्सा हमेशा
15:21पक्षियों और मुर्गियों के लिए सुरक्षित
15:23जाएगा। उनकी मेहनत सिर्फ कमाई के लिए नहीं
15:25बल्कि इस पूरे छोटे संसार के लिए थी। 100
15:27दिन की मेहनत ने उन्हें एक बात सिखा दी
15:30थी। जब इंसान प्रकृति को सिर्फ लेने के
15:32बजाय कुछ लौटाता है तो प्रकृति भी उसे कई
15:35गुना ज्यादा देकर जाती है। अगर आपको मोहन
15:37और राधा की यह प्यारी कहानी पसंद आई हो तो
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