Free YouTube Transcribe

Video transcript

अनाथ दंपती ने पक्षियों को खिलाया दाना, फिर बदल गई उनकी पूरी जिंदगी! 🐦🌾😱

Nanki Apolo · 2,836 words · 13 min read

Want to search this transcript, jump the video from any line, or download it as TXT, SRT, or VTT?

Open in the transcript tool

Full transcript

0:00कुछ ही दिनों में घर के चारों तरफ

0:02छोटे-छोटे घोंसले बन गए। हर कोना पक्षियों

0:05के नए पर परिवार से भर गया।

0:10इस सुनसान जगह पर मोहन और राधा का बस यही

0:13छोटा सा घर था और यही खेत उनकी पूरी

0:15दुनिया था। इसी फसल से उनकी रोटी चलती थी

0:18और इसी उम्मीद पर उनका जीवन टिका था।

0:20लेकिन उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि

0:23कुछ ही दिनों बाद यही छोटी सी फसल उनके

0:25लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनने वाली है

0:27क्योंकि नजर इसी खेत पर पड़ चुकी थी।

0:29गरीबी ने उन्हें कभी मेहनत से पीछे नहीं

0:31हटाया। मोहन सुबह से मिट्टी खोदता और राधा

0:35उसके साथ मिलकर खेत की हर छोटी सी क्यारी

0:37तैयार करती थी। दोनों ने खेत में मेहनत से

0:40बीज बोए। उनके पास ज्यादा जमीन नहीं थी

0:43इसलिए इस छोटी सी खेती की हर क्यारी उनके

0:46लिए उम्मीद जैसी थी। हर दिन वे धूप में

0:49पसीना बहाते थे। मोहन पौधों को पानी देता

0:53और राधा उनकी मिट्टी ठीक करती ताकि एक भी

0:56पौधा कमजोर ना पड़े। सुबह से शाम तक उनका

0:59यही जीवन था। [संगीत] खेत में मेहनत करना

1:01और रात को अपने छोटे से घर में लौटना।

1:04लेकिन दोनों अपनी छोटी सी जिंदगी से खुश

1:06थे। दिन गुजरते गए और उनकी मेहनत रंग लाने

1:10लगी। खेत की छोटी सी फसल अब तेजी से बढ़

1:12रही थी और दोनों को अपनी पहली अच्छी

1:14पैदावार की उम्मीद दिखाई देने लगी थी।

1:16आखिरकार उनकी मेहनत सफल हुई। खेत की फसल

1:20इतनी अच्छी हो गई कि मोहन और राधा को लगा

1:23अब कुछ समय तक उनके घर में खाने की कमी

1:25नहीं होगी। लेकिन उसी दिन आसमान में उड़ते

1:27पक्षियों का एक बड़ा झुंड इस खेत की तरफ

1:30आने लगा। मोहन और राधा को तब तक पता नहीं

1:32था कि उनकी फसल पर एक नई मुसीबत आने वाली

1:35है। अचानक पक्षियों का पूरा झुंड खेत में

1:37उतर पड़ा और फसल खाने लगा। मोहन दौड़कर

1:40उन्हें भगाने लगा। लेकिन उसे क्या पता था

1:43कि यह तो सिर्फ शुरुआत थी। अगली सुबह

1:45पक्षी फिर लौट आए। मोहन ने उन्हें भगाया।

1:48लेकिन जितने पक्षी उड़ते उतने ही नए पक्षी

1:52खेत में आकर बैठ जाते थे। मोहन जितनी

1:54मेहनत से उन्हें भगाता, पक्षी उतनी ही

1:57जल्दी वापस आ जाते। अब उसे डर लगने लगा था

2:00कि कहीं उसकी महीनों की मेहनत एक ही दिन

2:02में खत्म ना हो जाए। दोपहर तक फसल का एक

2:04हिस्सा खराब हो चुका था। राधा ने टूटे

2:07पौधों को देखा तो उसका दिल दुख गया

2:09क्योंकि यही फसल उनके घर का एकमात्र सहारा

2:12थी। शाम तक दोनों बहुत थक चुके थे। मोहन

2:16सोच रहा था कि आखिर इन पक्षियों से अपनी

2:18फसल कैसे बचाएं? तभी राधा की नजर आसमान

2:20में उड़ते पक्षियों पर टिक गई। को उनके

2:22पास भी खाने के लिए बहुत कम अनाज बचा था।

2:25फिर अचानक उसके मन में पक्षियों से जुड़ा

2:27एक ऐसा विचार आया जो उनकी पूरी जिंदगी

2:30बदलने वाला था। सुबह राधा ने खेत की फसल

2:33से अलग थोड़े से अनाज के दाने निकाले।

2:35उसने उन्हें खेत के एक कोने में डाल दिया

2:37ताकि पक्षियों के लिए खाना अलग जगह पर मिल

2:39सके। राधा का छोटा सा प्रयोग काम कर गया।

2:42एक कबूतर दाना खाने आया। फिर दूसरा और

2:45देखते ही देखते तोते भी खेत की फसल छोड़कर

2:48उसी जगह दाना चुगने लगे। अगले दिन

2:50पक्षियों की संख्या बढ़ गई। राधा ने फिर

2:52उनके लिए दाना रखा और अब पक्षी फसल में

2:55जाने के बजाय उसी जगह खाना खाने लगे थे।

2:58अब यह रोज का नियम बन गया। राधा पक्षियों

3:01को दाना देती और मोहन खेत में काम करता।

3:04धीरे-धीरे पक्षियों को समझ आने लगा कि इस

3:06छोटे से घर में उनके लिए भी जगह है। जिस

3:08खेत में कल तक पक्षियों से परेशानी थी, आज

3:11वही इंसान और पक्षी साथ दिखाई दे रहे थे

3:14कि यह पक्षी आगे चलकर उसके घर का हिस्सा

3:16बनने वाले हैं। अब हर सुबह उनके छोटे से

3:19घर में सैकड़ों पक्षियों की चहचहाट गूंजने

3:22लगी। सुनसान घर पहली [संगीत] बार जीवंत

3:25दिखाई देने लगा। राधा ने देखा अब पक्षी

3:28सिर्फ खाना खाना खाने नहीं आते थे।

3:31उन्होंने इस छोटे घर को अपना घर भी मान

3:34लिया था। कुछ ही दिनों में घर के चारों

3:37तरफ छोटे-छोटे घोंसले बन गए। हर कोना

3:40पक्षियों के नए पर परिवार से भर गया।

3:46राधा ने दाने के साथ पानी का भी इंतजाम कर

3:48दिया। अब पक्षियों को इस घर में खाना भी

3:51मिलता था और पानी भी। एक दिन कुछ जंगली

3:55मुर्गियां भी इस घर तक पहुंच गई। वे बहुत

3:58डरी हुई थी लेकिन राधा ने उन्हें भी दाना

4:01दे दिया।

4:02मुर्गियां अगले दिन फिर लौट आई।

4:06अब उन्हें भी इस छोटे घर में डर नहीं लगता

4:08था।

4:10मोहन ने मुर्गियों के लिए एक छोटा सा

4:13सुरक्षित घर बना दिया।

4:16अब वे भी परिवार का हिस्सा बन चुकी थी।

4:20अगली सुबह राधा को घास के बीच पहला अंडा

4:23मिला। छोटी सी खुशी ने दोनों की आंखों में

4:27उम्मीद भर दी। दिन बीतते गए और अंडों की

4:31संख्या बढ़ती गई। अब हर सुबह उनकी टोकरी

4:35भरने लगी थी।

4:38पहली बार मोहन उम्मीद लेकर बाजार निकला।

4:41उसे नहीं पता था कि यही अंडे उनकी जिंदगी

4:44बदलने की शुरुआत बनने वाले हैं। मोहन पहली

4:47बार अपनी टोकरी में अंडे लेकर बाजार जा

4:50रहा था। उसके मन में उम्मीद थी कि शायद इन

4:52अंडों से घर का खर्च थोड़ा आसान हो जाएगा।

4:55बाजार में मोहन ने सारे अंडे सावधानी से

4:58निकालकर बेचने के लिए रख दिए। थोड़ी देर

5:01बाद उसकी पूरी टोकरी खाली हो गई। कमाई

5:04बहुत ज्यादा नहीं थी। लेकिन मोहन के लिए

5:07यह बेहद खास थी। अपनी मेहनत से मिली यह

5:10पहली कमाई [संगीत] देखकर उसकी आंखों में

5:12खुशी आ गई। मोहन ने कमाई के पैसों से सबसे

5:16पहले घर के लिए जरूरी सामान खरीदा। उसके

5:19लिए परिवार की जरूरतें अपनी इच्छाओं से

5:21कहीं ज्यादा जरूरी थी। शाम को मोहन वापस

5:24घर आया। राधा ने उसकी छोटी सी कमाई देखी

5:27तो दोनों के चेहरों पर खुशी आ गई। उन्हें

5:30लगा कि शायद अब मुश्किल दिन धीरे-धीरे बदल

5:32रहे हैं। अगले कुछ दिनों में उनके घर आने

5:35वाले पक्षियों की संख्या और बढ़ गई। अब

5:38सुबह होते ही पूरा आंगन पक्षियों और

5:40मुर्गियों से भर जाता था। पक्षियों ने

5:43अपने घोंसलों में अंडे दिए और जल्द ही

5:45उनमें से छोटे-छोटे बच्चे निकल आए।

5:48राधा उन्हें देखकर बहुत खुश होती थी। अब

5:52मोहन और राधा ने एक नियम बना लिया था।

5:54अच्छी फसल का एक हिस्सा घर के लिए, थोड़ा

5:57बाजार के लिए और थोड़ा हिस्सा उनके छोटे

5:59पंख वाले परिवार के लिए। अब मुर्गियां भी

6:02नियमित रूप से अंडे देने लगी थी। राधा हर

6:05सुबह उन्हें सावधानी से इकट्ठा करती और एक

6:08अलग टोकरी में रखती थी। कुछ ही समय में का

6:12छोटा सा घर सिर्फ रहने की जगह नहीं रहा।

6:14खेत, पक्षी और मुर्गियां मिलकर लेकिन असली

6:17बदलाव अभी बाकी था। अब मुर्गियां रोज पहले

6:21से ज्यादा अंडे देने लगी थी। मोहन और राधा

6:24समझ गए कि उनकी छोटी सी मेहनत धीरे-धीरे

6:27नई कमाई का सहारा बन रही है। कुछ ही दिनों

6:29में नए चूजे भी बड़े होने लगे। घर का आंगन

6:32अब खाली नहीं रहता था। वहां हर समय

6:35पक्षियों की चहल-पहल बनी रहती थी। अंडे

6:39बढ़ने लगे तो राधा ने बांस की एक बड़ी

6:41टोकरी बना ली। अब अंडे सुरक्षित रखने और

6:44बाजार तक ले जाने में उन्हें आसानी होने

6:47लगी। एक दिन मोहन ने देखा कि पक्षी खेत

6:50में मौजूद छोटे कीड़े खा रहे थे। इससे फसल

6:53को नुकसान कम होने लगा और पौधे पहले से

6:55ज्यादा स्वस्थ दिखने लगे। धीरे-धीरे खेत

6:58की हालत बदल गई। पक्षियों को अलग दाना

7:01मिलने से फसल बची और खेत में प्राकृतिक

7:03तरीके से कीड़ों का नुकसान भी कम हो गया।

7:06आखिर वो दिन आ गया जिसका दोनों को इंतजार

7:09था। उनकी मेहनत रंग लाई और खेत में पहले

7:13से कहीं बेहतर से फसल तैयार हो गई। इस बार

7:16मोहन अकेले अंडे नहीं लाया था। वह अपनी

7:19अतिरिक्त फसल भी बाजार ले गया जिससे उनकी

7:22कमाई पहले से कहीं ज्यादा होने वाली थी।

7:24बाजार की कमाई से उन्होंने सबसे पहले अपने

7:27घर की टूटी छत ठीक की। वर्षों बाद उनका

7:30छोटा सा घर उन्हें पहले से ज्यादा

7:32सुरक्षित महसूस होने लगा। राधा ने

7:35पक्षियों के लिए घर से अलग एक साफ जगह बना

7:37दी। अब पक्षियों को खाना भी मिलता था और

7:40उनका छोटा सा घर भी साफ सुथरा रहने लगा।

7:44अब उनका छोटा घर पहले जैसा अकेला [संगीत]

7:46नहीं था। खेत, पक्षी और मुर्गियां मिलकर

7:49उनकी जिंदगी बदल रहे थे। लेकिन यह बदलाव

7:52अभी पूरा नहीं हुआ था। बाजार में अंडों और

7:54फसल की अच्छी बिक्री हुई थी। अब दोनों के

7:57पास इतना अनाज था कि वे अपने लिए भी रख

7:59सकते थे और पक्षियों के लिए भी। मोहन ने

8:03कमाई का लालच नहीं किया। उसने तय किया कि

8:06हर फसल में से थोड़ा हिस्सा हमेशा उन

8:08पक्षियों और मुर्गियों के लिए रखा जाएगा।

8:11अब पक्षियों को पता चल चुका था कि उनका

8:14दाना कहां मिलेगा। इसलिए वे फसल पर कम

8:16बैठते और सीधे अपने तय किए हुए स्थान पर

8:19पहुंच जाते। मुर्गियों की संख्या बढ़ने के

8:22साथ अंडे भी बढ़ते गए। अब हर सुबह राधा के

8:26पास बाजार ले जाने के लिए अच्छी मात्रा

8:28में अंडे तैयार रहते थे। जिस खेत को कभी

8:30पक्षियों से नुकसान होता था, वही खेत अब

8:33सुरक्षित था। मोहन और राधा को पहली बार

8:36अपनी मेहनत पर सच्चा भरोसा महसूस हुआ।

8:38कमाई बढ़ने के बाद भी उन्होंने खेत की

8:41मेहनत नहीं छोड़ी। वे जानते थे कि अच्छी

8:43फसल सिर्फ किस्मत से नहीं रोज की मेहनत से

8:46तैयार होती है। अब अंडों की बिक्री इतनी

8:49बढ़ गई थी कि मोहन हर दिन कमाई का हिसाब

8:52रखने लगा। छोटी सी शुरुआत अब धीरे-धीरे

8:55नियमित कारोबार बन रही थी। पहले मोहन कुछ

8:58ही अंडे लेकर बाजार जाता था। अब उसकी

9:00दोनों टकरियां भर जाती थी और बाजार

9:03पहुंचते ही लोग उसके अंडे खरीदने लगे।

9:06अंडों की कमाई से अब घर की जरूरतें आसानी

9:09से पूरी होने लगी थी। लेकिन मोहन और राधा

9:12ने अपनी पुरानी सादगी और दूसरों के लिए

9:14बांटने की आदत नहीं छोड़ी। कभी इस सुनसान

9:17जगह पर सिर्फ दो अनाथ लोग रहते थे। अब उसी

9:20जगह ने उन्हें मेहनत, फसल, [संगीत] अंडों

9:22और प्रकृति के साथ एक नया जीवन दे दिया

9:25था। अब मोहन ने एक बात साफ समझ ली थी। अगर

9:29पक्षियों को उनका हिस्सा दिया जाए तो वे

9:31भी खेत को नुकसान से बचाने में मदद करते

9:34हैं। राधा ने दाने के साथ पानी की भी

9:36व्यवस्था कर दी। अब गर्म दिनों में भी

9:39पक्षियों और मुर्गियों को अपने घर के पास

9:42ही पानी मिल जाता था। धीरे-धीरे इस जगह की

9:45खबर दूसरे पक्षियों तक भी पहुंचने लगी। अब

9:48हर दिन नए मेहमान आते और बिना फसल खराब

9:51किए अपना भोजन कर लौट जाते। कुछ समय बाद

9:54मिट्टी और फसल दोनों बेहतर दिखाई देने

9:57लगे। मोहन और राधा को समझ आने लगा कि

10:00प्रकृति के साथ मिलकर काम करना ज्यादा

10:02फायदेमंद है। मुर्गियों की संख्या बढ़ रही

10:05थी इसलिए दोनों ने उनके लिए सुरक्षित जगह

10:08भी बड़ी कर दी। अब बारिश और तेज हवा में

10:10भी वे सुरक्षित रह सकेंगी।

10:13मुर्गियों की संख्या बढ़ रही थी इसलिए

10:15दोनों ने उनके लिए सुरक्षित जगह भी बड़ी

10:17कर दी। अब बारिश और तेज हवा में भी वे

10:20सुरक्षित रह सकेंगी। आज मोहन के पास पहले

10:23से कहीं ज्यादा सामान था। अंडों के साथ

10:26अतिरिक्त फसल फसल भी बिकने लगी और उनकी

10:29मेहनत की कमाई लगातार बढ़ती गई। कमाई से

10:31उन्होंने दिखावे की चीजें नहीं खरीदी।

10:34मोहन ने खेती के बेहतर औजार लिए ताकि अगली

10:38फसल और ज्यादा मेहनत से तैयार की जा सके।

10:40अब उनके पास बेहतर औजार थे। लेकिन मेहनत

10:43वही थी। दोनों ने अगली फसल की तैयारी शुरू

10:47कर दी। जबकि पक्षी और मुर्गियां उनके

10:49आसपास बने रहे। दोनों ने कभी नहीं सोचा था

10:51कि कुछ मुट्ठी दाने से शुरू हुई दया एक

10:54दिन उनकी जिंदगी बदल देगी। लेकिन असली

10:57परीक्षा अभी बाकी थी। उस दिन सुबह से ही

10:59मौसम बदलने लगा था। आसमान पर काले बादल छा

11:03गए और पक्षियों को देखकर राधा समझ गई कि

11:06तेज बारिश आने वाली है। हवा तेज होने लगी

11:10तो दोनों ने अपना काम छोड़कर सबसे पहले

11:12पक्षियों और मुर्गियों को सुरक्षित करने

11:14की तैयारी शुरू कर दी।

11:17कुछ ही देर में तेज बारिश शुरू हो गई।

11:19बारिश इतनी तेज थी कि पूरा खेत पानी से

11:22भरने लगा लेकिन पक्षी राधा के बनाए

11:24सुरक्षित स्थान में आ चुके थे। मोहन ने

11:26देखा कि पानी खेत में जमा हो रहा था। उसने

11:29खेत के किनारे छोटी नाली बनाई ताकि ज्यादा

11:32पानी फसल की जड़ों को खराब ना कर सके। कई

11:35घंटों की बारिश के बाद आखिर मौसम शांत

11:38हुआ। थोड़ी फसल को नुकसान हुआ लेकिन मोहन

11:41की बनाई नाली ने खेत का बड़ा हिस्सा बचा

11:44लिया था। अगली सुबह दोनों ने खेत को देखा।

11:48बारिश ने उन्हें नुकसान तो दिया था लेकिन

11:50उनकी मेहनत और सही तैयारी के कारण फसल अभी

11:53भी बची हुई थी। बारिश से कुछ घोंसले कमजोर

11:55हो गए थे। राधा ने सूखी घास से उन्हें

11:58[संगीत] ठीक किया और मोहन ने उन्हें मजबूत

12:00सहारा दे दिया।

12:03शाम तक पक्षी फिर अपने घोंसलों में लौट आए

12:06और मुर्गियां भी सुरक्षित थी। मोहन और

12:08राधा को लगा जैसे उन्होंने सिर्फ अपना घर

12:10नहीं बल्कि एक पूरा छोटा परिवार बचाया।

12:13दिन गुजर गया। दोनों ने फिर से खेत की

12:15तैयारी शुरू कर दी और नई फसल के लिए बीज

12:18बोने लगे। अब उनका छोटा परिवार पहले से भी

12:21बड़ा हो चुका था। दो अनाथ लोगों का यह

12:23छोटा सा घर बिल्कुल अकेला था। आज यहां

12:26सैकड़ों पंख और छोटे चूजे थे। यही मेहनत

12:29उन्हें एक नई पहचान देने वाली थी। बारिश

12:31के बाद उनकी मुर्गियां फिर से अंडे देने

12:33लगी और खेत की नई फसल भी अच्छी तरह बढ़ने

12:36लगी। अब घर में रोज बेचने के लिए कुछ ना

12:39कुछ तैयार रहता था। अब दोनों अपने सामान

12:41को बहुत सावधानी से तैयार करते थे। अंडे

12:44सुरक्षित रखे जाते और खेत की ताजी पैदावार

12:47भी बाजार के लिए अलग कर दी जाती। मोहन फिर

12:50बाजार के लिए निकल पड़ा। इस बार उसके पास

12:53इतनी पैदावार थी, कि एक छोटी टोकरी उसके

12:56लिए काफी नहीं थी। बाजार में उसकी सारी

13:00चीजें जल्दी बिक गई। अब लोग उसके अंडों और

13:04ताजी फसल को पहचानने लगे थे।

13:07उस दिन की कमाई पहले से ज्यादा थी। लेकिन

13:10घर पहुंचते ही मोहन ने सबसे पहले अपने

13:13परिवार और पक्षियों के लिए दाने का इंतजाम

13:16किया। कमाई बढ़ी तो राधा ने पक्षियों का

13:19हिस्सा भी बढ़ा दिया। वह मानती थी कि

13:22जिसने उन्हें सहारा दिया है उसका हिस्सा

13:24कभी कम नहीं होना चाहिए। अब पक्षी भी इस

13:28खेत का हिस्सा बन चुके थे। वे फसल के

13:31आसपास के छोटे कीड़े खाते और खेत को

13:33स्वस्थ रखने में मदद करते। मुर्गियों की

13:36संख्या अब काफी बढ़ चुकी थी। रोज इतने

13:39अंडे मिलने लगे कि उनकी बिक्री से घर का

13:42खर्च आसानी से चलने लगा।

13:45अब उनकी कमाई से सिर्फ घर नहीं चलता था।

13:48वे नए बीज खरीदते, खेती सुधारते [संगीत]

13:51और जरूरत पड़ने पर पक्षियों के लिए भी

13:53दाना जुटाते थे। जिस जगह कभी सिर्फ दो

13:55अनाथ लोग अपने छोटे खेत के सहारे जीते थे।

13:58आज वहीं फसल, अंडे, पक्षी और मुर्गियों ने

14:01एक खुशहाल संसार बना दिया था। समय बीतता

14:04गया और मोहन राधा की मेहनत लगातार बढ़ती

14:07गई। अब उनका छोटा सा घर सिर्फ उनका घर

14:09नहीं रहा था बल्कि सैकड़ों पक्षियों का

14:11सुरक्षित ठिकाना बन चुका था। अब आसपास के

14:14लोगों का ध्यान भी इस छोटे से खेत की तरफ

14:16जाने लगा था। उन्हें समझ नहीं आता था कि

14:19इतने पक्षी यहां रहते हुए भी फसल इतनी

14:21अच्छी कैसे हो रही है। लोगों ने पहली बार

14:23अपनी आंखों से देखा कि पक्षियों को उनका

14:26भोजन अलग देने से खेत भी सुरक्षित रह सकता

14:28है और पक्षियों को भी भरपूर खाना मिल सकता

14:31है। मोहन ने किसी से अपना तरीका छिपाया

14:33नहीं। उसने कहा कुछ नहीं। बस अनाज की एक

14:37मुट्ठी दी और लोगों को दिखा दिया कि

14:39पक्षियों की मदद कैसे की जा सकती है। कुछ

14:42ही दिनों में दूसरे लोगों ने भी यही तरीका

14:44अपनाना शुरू कर दिया। अब सिर्फ मोहन के घर

14:47ही नहीं आसपास के कई घरों में पक्षियों के

14:49लिए दाना और छोटी सी आदत की शुरुआत राधा

14:52ने अपने घर के बाहर की थी। वो अब पूरे

14:54इलाके में फैल रही थी। इंसानों और

14:57पक्षियों के बीच एक नया रिश्ता बन रहा था।

14:59इस बार फसल भी शानदार हुई और अंडों की

15:02संख्या भी बढ़ गई। मोहन और राधा की मेहनत

15:05अब उनके छोटे घर को धीरे-धीरे खुशहाल बना

15:08रही थी।

15:10कई महीनों की मेहनत के बाद उन्होंने थोड़ी

15:12बचत भी कर ली थी। अब उनके पास सहारा था

15:16[संगीत] और आगे बढ़ने का मौका भी। दोनों

15:18ने तय किया कि खेत का एक हिस्सा हमेशा

15:21पक्षियों और मुर्गियों के लिए सुरक्षित

15:23जाएगा। उनकी मेहनत सिर्फ कमाई के लिए नहीं

15:25बल्कि इस पूरे छोटे संसार के लिए थी। 100

15:27दिन की मेहनत ने उन्हें एक बात सिखा दी

15:30थी। जब इंसान प्रकृति को सिर्फ लेने के

15:32बजाय कुछ लौटाता है तो प्रकृति भी उसे कई

15:35गुना ज्यादा देकर जाती है। अगर आपको मोहन

15:37और राधा की यह प्यारी कहानी पसंद आई हो तो

15:40वीडियो को लाइक जरूर और ऐसी ही खूबसूरत

15:42कहानियों के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब

15:44करना बिल्कुल मत भूलना।

Recently added transcripts

Browse the whole transcript library

This transcript was generated from the captions YouTube publishes for this video. Get the transcript of any YouTube video atfreeyoutubetranscribe.com, free, unlimited, no sign-up.