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0:00आज मुझसे कोई मेरे कवज और कुंडल क्या
0:02प्राण भी मांगेगा तो मैं दे
0:16दूंगा नहीं पिताश्री मैं आपको ऐसा नहीं
0:20करने दूंगा चाहे कुछ भी हो जाए मेरे मार्ग
0:22से
0:23हटो मेरे मार्ग से हटो और मुझे मेरा धर्म
0:26निभाने दो
0:29[संगीत]
0:43[संगीत]
0:46कदाचित स्वयं को सूत पुत्र सिद्ध करने का
0:48यही मार्ग
0:50है कि मैं सूर्य से मिले इस आशीर्वाद
0:55को स्वयं से सदा के लिए दूर कर दू
1:10पता श्री परंतु सूर्यदेव तो अभी तक उदित
1:14भी नहीं हुए सूर्य देखे बिना उन्हे हर
1:16कैसे देंगे
1:24पिता सूर्य उदय
1:27होगा और उनका प्रकाश पहले से अधिक तीव्र
1:32होगा क्योंकि उस प्रकाश
1:35में उनके पश्चाताप और खेत की ज्वाला
1:38सम्मिलित
1:52होगी पश्चाताप तो मुझे भी है पिताश्री
1:56मैं आपको कभी कभी ठीक से समझ ही नहीं
2:02पाया परंतु मैं आपको स्वयं के साथ य
2:05अन्याय नहीं करने दूंगा केवल एक ही
2:07व्यक्ति
2:08है जो इस अन्याय को होने से रोक सकता है
2:14[संगीत]
2:22[संगीत]
2:50सूर्य
2:52देव ये एक पिता का धर्म होता
2:55है कि वह अपने पुत्र को उचित मार्ग दिखाए
2:59क्या
3:00पुत्र अपने पिता को मार्ग दिखाएगा अपने
3:04पुत्र मुह में अपने कर्तव्य से मुंह मत
3:07मोड़िए प्रकट हुए सूर्यदेव प्रकट हुए
3:10सूर्य देव प्रकट सूर्य
3:23[प्रशंसा]
3:42सूर्यदेव ने ना उदय होने का प्रण लिया है
3:45[संगीत]
3:46कण सूर्य उदय की प्रतीक्षा करकर अपना समय
3:49व्यर्थ कर रहे हो
3:53क सूर्यदेव अपना उत्तरदायित्व भूल चुके
3:57हैं प्रकृति निर्मोही है
4:02और उसका संबंध केवल अपने कर्तव्य से
4:06है और स्वयं सूर्यदेव
4:10भी इस प्रकृति का महत्त्वपूर्ण भाग
4:19है उन्हें आना
4:25होगा और आप जिस उद्देश्य से आए हैं जिस
4:29दान की अपेक्षा से आए हैं वो दान आपको
4:32अवश्य
4:35मिलेगा
4:43इंद्रदेव आपने एक भिक्षु की मर्यादा का
4:46उल्लंघन किया
4:49है अपने वास्तविक रूप में आइए इ
5:00इसका अर्थ है कि सूर्यदेव ने तुम्हें पहले
5:03ही मेरे मंतव्य से अवगत करा
5:05दिया परंतु
5:08आश्चर्य फिर भी तुम अर् देने दान देने
5:11भेंट देने चले आए अंगराज सूर्यदेव ने वो
5:14किया जो एक पिता का धर्म होता
5:16है आपने वो किया जो एक पिता का मोह होता
5:22है और मैं वो
5:24करूंगा जो एक योद्धा का कर्तव्य होता है
5:30चन का
5:32पालन और जब देवराज स्वयं भिक्षुक बनकर दान
5:35मांगने आए
5:37हैं तो इस राधे के
5:40लिए इससे अधिक गर्व की बात और क्या हो
5:43सकती है
5:45अदभुत बहुत अधिक आत्मविश्वास है तुम्हें
5:49तुमको परंतु ज्ञात
5:51रहे अति आत्म
5:55विश्वास नाश का कारण बन जाता है विश्वास
5:58तो आप खो बैठे
6:00कि जब तक मेरे पास कवच और कुंडल है आपका
6:03पुत्र अर्जुन मुझे परास्त नहीं कर
6:06पाएगा मेरे लिए यह गर्व की बात
6:09है कि अर्जुन मेरा सामना तब
6:12करेगा जब मेरे पास कोई सुरक्षा नहीं
6:16होगी तभी मेरा वास्तविक कौशल उसके समक्ष
6:19आएगा बहुत अहंकार है तुम्हें स्वयं पर
6:22अंगराज हला मुझे किस बात का अहंकार
6:25होगा कवच और कुंडल का यह तो एक पुत्र को
6:30उसके पिता की ओर से एक सामान्य
6:33उपहार मेरा अभिमान मेरा पराक्रम और कौशल
6:37है जिसे अब आप भी देखेंगे और आपका पुत्र
6:41भी मैं अपना कवज और कुंडल आपको प्रसन्नता
6:44से भेंट कर
6:45दूंगा क्योंकि युद्ध में बने रहने के लिए
6:49मुझे इनकी आवश्यकता नहीं
6:51है उसके लिए मेरा
6:54पराक्रम और मेरे गुरु का प्रशिक्षण ही
6:56पर्याप्त है
6:59तो आपको दान लेने के
7:01लिए एक ब्राह्मण का रूप धारण करने की
7:04आवश्यकता नहीं
7:06थी आपको देवराज होने की मर्यादा में रहना
7:09चाहिए
7:11था मानता
7:14हूं कि मैंने पुत्र मो में ऐसा किया परंतु
7:18पुत्र मो का अपराधी केवल मैं ही नहीं कोई
7:21और भी
7:23है जो अपने कर्तव्य मार्ग से टिक रहा
7:26है कदाचित तुम्हारे पिता आज उदय ना
7:31होकर तुम्हें दान नहीं करने देना
7:36चाहते दान का वचन मेरा है जिसे मैं पूर्ण
7:40करूंगा और उदय होना सूर्यदेव का धर्म है
7:44जब पुत्र अपना कर्तव्य निभा रहा
7:47है तो एक पिता को भी अपना धर्म निभाना
7:51होगा सूर्य देव कोद होना होगा
8:09इस संसार को प्रकाश का दान देने का समय आ
8:12गया
8:14है पिता व होता है जो जीवन देता है आप
8:18केवल कण के पिता
8:20नहीं इस जगत के पिता
8:23है क्योंकि यह जगत आपके प्रकाश और ऊर्जा
8:26से जीवन पाता है
8:29फिर आप ऐसा कैसे कर सकते
8:32हैं अपने एक पुत्र के हित के लिए अपनी
8:36सारी संतानों के
8:38प्रति आप अपना उत्तरदायित्व भूल
8:42जाएंगे मैं जानता हूं कि आप केवल मेरी
8:45रक्षा करना चाहते हैं परंतु स्मरण रहे
8:48सूर्यदेव एक श्रेष्ठ पिता वो नहीं होता जो
8:51अपने पुत्र के समक्ष ढल बनकर खड़ा
8:54रहे बल्कि एक श्रेष्ठ पिता वो होता है जो
8:58संसार के दि सामना करने
9:01में अपने पुत्र को सक्षम
9:05[संगीत]
9:08बना अफसर की प्रतीक्षा अवसरवादी करते
9:14हैं छल करके अपना मंतव्य पूर्ण करते
9:22हैं परंतु वीर हर पल को अफसर बना देता है
9:29जिस प्रकार सूर्य को छाया के लिए मेघों की
9:32आवश्यकता
9:33नहीं उसी प्रकार इस सूर्य पुत्र
9:37को किसी कवच की आवश्यकता
9:45नहीं आपने अपना कर्म
9:48किया अब मुझे मेरा धर्म निभाने दीजिए
9:55[संगीत]
10:02वासुदेव
10:04वासुदेव
10:06वासुदेव क्या आप मुझे योग्य नहीं
10:09समझते कि मैं अपने जीवन का निर्णय स्वयं
10:11ले
10:14सकूं अगर आपको मुझ पर विश्वास
10:18है तो यह निर्णय मुझे लेने
10:21[संगीत]
10:22दीजिए यह दान मुझे देने दीजिए पिताश्री
10:25क्या आप यह चाहते हैं
10:29इस युद्ध के
10:31पश्चात सारा संसार यह कहे कि करण ने यह
10:35युद्ध अपने कौशल से
10:37नहीं अपने पिता के दिए कवच के बल से जीता
10:41है मेरा विश्वास
10:44कीजिए इस युद्ध को जीतने के
10:46लिए मेरे साथ जो अन्याय हुआ है और जो
10:50परिवर्तन में चाहता हूं वही पर्याप्त
10:55है मेरा विश्वास कीजिए कि मुझे यह दान दे
10:59में कोई खेद नहीं रहेगा आपको आपके पुत्र
11:01के स्थान पर गर्व
11:05होगा जागिए पिता श्री जागिए इस संसार के
11:10सामने इस दान का साक्षी
11:15बनिए मेरा आवान है कि आप उदित हो उदित होए
11:22पिताश्री
11:38मेरा आवान है कि आप उदित हो उदित होइए
11:43पिताश्री
12:08तुमहे यं देवस्य
12:14भोजन तत्स वितु महे यम देवस्य भोजन शेषम
12:21सर्व साधकम रम भस
12:28धीमहि विश्वानी देव सतर तानी
12:33परावा विश्वानी देव सतर तानी
12:38पसवा यदा भदम तना
12:44सुवा य भदम कस
13:00[संगीत]
13:08स
13:35वासुदेव शत्र पक्ष यो होकर य क्या कर रहे
13:40हो मैं तुम्ह अभी यही समाप्त कर
13:46दूंगा शांत फख
13:54दर अभी युद्ध प्रारंभ नहीं हुआ है और ना
13:58ही तुम्ह भान हु है कि मित्र कौन है और
14:00शत्रु
14:20कौन मेरे साथ आ वृष सेन
14:39कुछ कीजिए वासुदेव मेरे पिताश्री मुझे सब
14:43ज्ञात है
14:45वस अभी कुछ क्षण
14:47पूर्व इंद्रदेव मुझसे भेंट करके गए
14:53हैं फिर भी आपने ऐसा होने
14:56दिया क्यों
15:01माधव इसका अर्थ वह ब्राह्मण स्वयं इंद्र
15:05देव
15:15थे
15:17नहीं व देवता
15:20नहीं केवल एक पिता
15:25थे
15:27इसीलिए देव होकर भी वो वो कर्म करने जा
15:31रहे हैं
15:33जो जो राक्षसों को भी शोभा नहीं
15:39देता परंतु आप कुछ कीजिए वासुदेव इ
15:42इंद्रदेव आज मेरे पिता श से दान में उनके
15:46कवच और कुंडल मांगने वाला
16:07मेरे पिता श्री को ऐसा करने से रोक
16:12लीजिए उनकी रक्षा कीजिए कौन तयार जा अंतत
16:16वो आपके भा
16:32वो आपके
16:33भयंकर और एक मात्र
16:37प्रतिद्वंदी क्या कवच छीनकर उनसे युद्ध
16:40जीतना चाहते हैं
16:47आप परंतु आपसे क्यों बात कर रहा हूं आप ही
16:51के कारण तो यह सब हो रहा है
16:58मैं भूल कैसे गया
17:01कि इंद्रदेव स्वयं आपके पिता
17:19है वश आपने ही उन्हें ऐसा करने के लिए कहा
17:23होगा ताकि आप द्वंद में मेरे पिता को
17:27परास्त कर सके सावधान
17:31रिश्ते तुम्हें आभास भी नहीं है कि तुम
17:34किसका अपमान कर रहे
17:37हो क्षमा करता हूं
17:40तुम्हें इसलिए कि तुम हमारे शिविर में आए
17:44हो
17:45अन्यथा इस दु साहस का मूल्य तुम्हें
17:49तुम्हारे प्राण देकर चुकाना
17:54पड़ता मरण रखना कि मैं कौरवों की भाति
17:59ल में विश्वास नहीं रखता मैं ऐसी उच नीति
18:03नहीं अपना पिता की संपत्ति यदि पुत्र भोग
18:06सकता
18:08है तो पिता के किए दुष्कर्म भी उसे भोगने
18:12पड़ते हैं
18:14महारथी
18:17[संगीत]
18:21अर्जुन यह उचित नहीं हो रहा है
18:23[संगीत]
18:27माथा देवराज को ऐसा नहीं करना चाहिए था
18:31मुझे इसी क्षण पिता श्री को रोकना
18:46होगा कहिए
18:50इंद्रद क्या दान मांगने आए हैं आप
19:00[संगीत]
19:05क्या
19:07हुआ यदि आप याचक बनकर आ ही
19:10गए तो दान मांगने में संकोच
19:14कैसा
19:16कहिए क्या इच्छा है
19:22आपकी दानवीर
19:26कांड मैदान में तुम्हारे कवच
19:29कुंडल
19:40मांगता जो आज्ञा
19:43त्रिदेव आपने मुझसे दान नहीं
19:47मांगा बल्कि मुझ पर उपकार किया
19:50है एक सूत पुत्र के
19:55पास स्वर्ण कवच रहने का क्या लाय
20:00रा भी
20:02सं
20:06नति
20:08[संगीत]
20:14दे मैं आपका दान पूर्ण करने का वचन देता
20:18हूं
20:37दानवीर
20:38कांड मैं दन में तुम्हारे कवच और कुंडल
20:42मांगता
20:50हूं जो
20:53आज्ञा आपने मुझसे दान नहीं मांगा
20:58बल्कि मुझ पर उपकार
21:00किया एक सूत पुत्र के
21:05पास स्वर्ण कवच रहने का क्या
21:10[संगीत]
21:13ला मैं आपका दान पूर्ण करने का वचन देता
21:17हूं
21:34[संगीत]
22:05[संगीत]
22:27धर्मा
22:33महंती धर्मो रक्षति
22:41रक्षित तस्मा धर्मो ना
22:45[संगीत]
22:48अंत मानो धर मोहतो बध
23:02मरेवा दो हंती
23:15[संगीत]
23:50दिव्य दृष्टि से बाण शक्ति से जीते ये
23:54सारा
23:56र शांत चित
23:59आत्म बल भरे जीते हर
24:03बाक छूट ना पाए लक्ष हो चाहे सूक्ष्मता
24:08छुपा
24:10होकर मित्र वेग है सूर्य तेज है कबज चढ़
24:16इसके दन
24:37[संगीत]
24:46री
25:23रे
25:27मा आ
25:59या
26:46ये रा हो
26:50कवच के जिसके
26:54का आपके पुत्र के
27:01आपके हृदय को भे भेद रहे थे
27:08अ ं सु कार्य इंद्र देव सर
27:35इस प्रकार नहीं
27:37इंद्रदेव तो किस प्रकार
27:42पुत्र दान स्वीकारने के
27:46लिए अपने वास्तविक रूप में आईए
27:56इंद्रदेव आपके
27:58[संगीत]
28:00और विलक्षण योद्धा के सम्मान के लिए कह
28:03रहा हूं
28:05मैं उस माता के सम्मान के लिए कह रहा
28:10हूं जिसने अर्जुन जैसे योद्धा को जन्म
28:14दिया दान
28:18में पुण्य का फल होता
28:22है इस जल का भाग मत बनाइए
28:25[संगीत]
28:29अपने वास्तविक रूप में
28:33आइए आइए इंद्रदेव अपने वास्तविक रूप में
28:42[संगीत]
29:04यम
29:06शम या
29:11महो य
29:14काम कवच
29:27कीज सव भूत
29:32समागम
29:37समू
29:41[संगीत]
29:52समागम ये आपने क्या अनत कर दिया पिता श्री
30:05क्यों क्या आवश्यकता थी आपको इसकी जो आपने
30:08कण से उसका कवच कुंडल छीन
30:10[संगीत]
30:26लिया मैंने तो केवल नियति के न्याय का
30:29पालन किया एक पिता धर्म का पालन किया
30:36है यह किस प्रकार का पिता का धर्म है पिता
30:40श्री पिता का धर्म होता है अपनी संतान में
30:43आत्मविश्वास
30:44जगाना परंतु आप अपनी संतान की शक्ति पर
30:47विश्वास ना करके कौन सा पिता का धर्म निभा
30:50रहे
30:53हैं बताइए मुझे बताइए मुझे पिता श्री
31:03अर्जुन मैं तो केवल तुम दोनों के बीच होने
31:06वाले युद्ध में शक्ति का संतुलन बना रहा
31:10था जब तक कण के पास एक कवच और
31:13कुंडल तब तक तुम्हारा कोई भी प्रहार ंड पर
31:17प्रभाव ना
31:20करता जबक तुम्हारे पास ऐसी कोई देव्य ढाल
31:26नहीं तुम दोनों के म न्याय पूर्ण न जाता
31:30था न्याय नहीं
31:34छल छल किया है आपने पिता
31:38[संगीत]
31:40श्री छल करके आपने कर्म से दान में उसकी
31:43ाल मांग
31:46ली महान बनने के लिए मित्रों की आवश्यकता
31:49होती है और उससे भी अधिक महान बनने के लिए
31:53प्रबल शत्रु की
31:58बनाकर मेरा मान ही कम कर
32:03दिया मुझे आपसे ऐसी आशा नहीं थी पिताश्री
32:11धम पहले एक लव्य के साथ
32:14अन्याय उसका अंगूठा छीनकर उसे पाण संधान
32:18करने के लायक नहीं छोड़ा आचार्य द्रोण ने
32:28कवच छीन लिया
32:31धर्म क्यों क्या आपको मेरी शक्ति पर इतना
32:35भी विश्वास नहीं था जो आपने इतना बड़ा छल
32:37किया पिता
32:47श्री कभी सोचा भी है आपने कि अर्जुन को
32:50इतिहास किस नाम से स्मरण
32:54करेगा कि उसने उन योद्धाओं को परास्त किया
32:58जो उससे कम शक्तिशाली
33:02थे कि समान कौशल रखने वालों के साथ छल
33:07किया
33:11उसने मैंने इस महायुद्ध
33:14में कण को परास्त करने का वचन दिया
33:18था परंतु मेरे लिए मेरी सबसे बड़ी विजय
33:25को आपने
33:29ल से रचा हुआ प्रारब्ध बना दिया
33:35पिता और यदि अब मुझे विजय मिली तो
33:40भी उसे आपका ल गिना
33:45जाएगा मेरी कुशलता
33:49नहीं रक्त क्या
33:53है उसे कोई नहीं जानता अर्जुन
33:59मुझसे मेरे कवच को छीना
34:02है परंतु मेरे कौशल को
34:06नहीं ना मैं धनुष उठाना भूला
34:10हूं ना बाण संधान
34:14करना तुम्हें जिस द्वत की अपेक्षा
34:17है वो द्वत तुम्ह अवश्य
34:25मिलेगा मरण रखिएगा पिता श्री
34:30ना मैं कभी इस ल के बोझ से मुक्त हो
34:34पाऊंगा और ना ही कभी आप इस अपराध बोध
34:44से तुमने सत्य कहा पुत्र
34:48अर्जुन य जानते हुए भी कि मैं कौन हूं
34:52मेरी मंशा क्या है किस अपेक्षा से यहां
34:55आया हूं कण ने मुझे अपने कवच और दान कर
35:01द इस दान से
35:04तुमने आत्मविश्वास का एक अद्भुत
35:08उदाहरण एक महान परिभाषा प्रस्तुत की
35:12है मैं
35:15देवराज ये घोषणा करता
35:19हूं तुम्हारा यह
35:21बलिदान इस युद्ध का सबसे
35:24महान सबसे उच्च बलिदान सिद्ध होगा
35:31समस्त संसार
35:34में तुम महादान वर कण के नाम से प्रसिद्ध
35:37हो
35:44ग
35:46परंतु हमारे इस दान का बोझ बहुत भारी
35:50है इस बोझ के भार के
35:53कारण मैं स्वयं से दृष्टि नहीं मिला पा
35:56रहा हूं क
36:02इसे हल्का कर दो
36:03क और अब मैं तुम्हें वस्त्र देना चाहता
36:07हं जो समस्त संसार
36:09में किसी भी प्रकार की ढाल को बेच
36:17सके आप मेरे दान का भास उड़ा रहे हैं इ
36:24दे ये एक दान था
36:28कोई व्यापार
36:30नहीं यदि आप कवच कुंडल के स्थान
36:33पर मेरे प्राण भी मांगते तो मैं प्रसन्नता
36:36से दे
36:39देता मैं एक सूत पुत्र
36:43हूं और मेरे पिता
36:46ने मुझे सदा देना सिखाया
36:49है लेना नहीं
37:01मैंने अपने दान देने का वचन पूर्ण
37:05किया मेरे लिए यही पर्याप्त
37:10है मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए यि तुमने
37:14मुझसे कुछ नहीं
37:16मांगा तो देवराज होने के नाते इस सृष्टि
37:19में मैं अपना सम्मान खो
37:24बैठ यदि मैंने तुम्हें कुछ नहीं दिया
37:30तो मैं स्वयं को कभी शमा ना कर
37:35पाऊंगा मैंने दान के रूप में तुमसे
37:38तुम्हारी डाल
37:42छीन
37:45मांगो मांगो जो वरदान मांगना है मुझसे
37:49[संगीत]
37:58मांगो
38:00का मैं आपका सम्मान रखने के
38:04लिए यह अस्त्र स्वीकार करता हूं जो किसी
38:09भी ढाल को भेज
38:11सके जिसे जब भी
38:14मैं अपने शत्रु का नाम लेकर प्रयोग
38:20करू तो उसका अंत निश्चित हो
38:40ठीक
38:41है मैं तुम्हें अपनी अमोग वासवी शक्ति
38:44प्रदान करता
38:55हूं ी
39:01योना
39:02प्रचोदयात भर्ग देवस्य
39:09धीमहि त वितु
39:13रेण
39:20श इस शक्ति को जिसका नाम लेकर संधान
39:24करोगे वो अवश्य मृत्यु को प्राप्त हो
39:30किंतु स्मरण
39:31रहे इस शक्ति का प्रयोग तुम केवल एक ही
39:34बार कर
39:37पाओगे मेरा मान रखने के
39:41लिए तुम्हारा धन्यवाद है दानवीर का
40:01मैंने सदेव यही चाहा
40:03था कि तुम्हारा वत मैं तब
40:07करू जब तुमने कवच धारण
40:11किया य
40:14कवच मेरा कौशल मेरी प्रतिभा
40:18नहीं यह कवच छने के
40:22पश्चात अब ये द्वंद समान है
40:27परंतु तुम सावधान
40:32रहना क्योंकि इस अस्त्र का प्रयोग मैं तुम
40:35पर ही
40:41करूंगा मैं उस द्वंद की प्रतीक्षा करू
40:58य कवच मेरा कौशल मेरी प्रतिभा
41:02नहीं य कवच छने के
41:06पश्चात अब न समान
41:10है परंतु तुम सावधान
41:16रहना क्योंकि इस अस्त्र का प्रयोग मैं तुम
41:19पर ही
41:22करूंगा मैं उस दव की प्रतीक्षा करूंगा
41:34आपका मतु जिथा
41:37माता आज मैंने भी स्वीकार
41:39[संगीत]
41:42लिया कड से बड़ा दानवीर कोई नहीं
41:55[संगीत]
42:21निश्चिंत है सूर
42:27आपका पुत्र बडा में
42:34नहीं फन करते क्या
42:44[प्रशंसा]
42:54[संगीत]
43:03क
43:07क कहां ठहर
43:25राजमाता दूर रहिए मेरे पिता श्री
43:28से अभी इनका पुत्र जीवित है इन्हें
43:32संभालने के
43:34लिए मैंने सदा अपने पिता से दूरी बनाए रखी
43:37इन्होंने मेरी माता और मेरे साथ जो
43:39व्यवहार किया उसके लिए मैं इन्ह कभी क्षमा
43:42नहीं कर
43:44पाया परंतु आज भान हुआ कि जितने
43:48कष्ट आपने मेरे पिता को दिए उसके सामने
43:53उसके सामने हमारा क तो कुछ भी नहीं था
44:06मुझे इन्ह चिकित्सा के लिए शिविर ले जाना
44:09होगा इनकी चिकित्सा आवश्यक
44:18है पिता श्री मैं आपको कुछ नहीं होने
44:22दूंगा मैं वचन देता
44:24हूं आपका पुत्र
44:28आपके साथ
44:33है उतरी
44:36कुंती इतनी व्यथित होकर कहां जा रही
44:39है क्या कारण होगा
45:05य ये क्या हुआ इसे लिटा
45:10[संगीत]
45:16[संगीत]
45:20इसे क्या क्या हुआ मेरे मित्र को
45:24[संगीत]
45:30विन मेरे मित्र की यह
45:32दशा किसने
45:38की मैं प्राण ले लूंगा उसके मैं कुछ पूछ
45:42रहा
45:43हूं क्या हुआ क्या क्या
45:47हुआ मैं आपको सब कुछ बताता हूं
46:03माता प्रणिपात
46:06माता आप आप अचानक यहां
46:11पर शग में सा च परंतु कहां माता यह सि
46:16करने के लिए केवल तुम मुझे माता कहते हो
46:19हदय से भी मानते
46:25हो परंतु हुआ क्या है माता श्री कहां ले
46:28जा रही है आप हमें तुम दोनों को
46:31च कण का उपचार करना
46:39[संगीत]
46:48है
46:51अर्जुन ये जल
46:57अर्जुन ने किया
47:01है
47:05वो वो वो कर्ण को समाप्त कर देना चाहता
47:13था उस अर्जुन के साथ-साथ
47:16उन पांडवों को भी समाप्त कर दूंगा
47:24मैं पांडव पुत्रों
47:29मैं आ रहा
47:31हूं मैं आ रहा
47:37हूं
47:40रु आपका वहां जाना उचित नहीं मैं वहां
47:44जाऊंगा अश से जाऊंगा छोड़
47:49मुझे रुक जा मि
47:57जो तुम सोच रहे
47:58[संगीत]
48:00हो वो भूल के भी मत
48:02[संगीत]
48:10करना पर
48:13उन्होने उन्होंने तुम्हारे साथ में छल
48:16किया
48:17मित्र मेरा
48:18मित्र मेरी जीवन की सबसे बड़ी
48:24शक्ति छीनना चाहा उन्होंने
48:30और उने लगता है कि वो हमारा नाश कर देंगे
48:37कैसे मित्र मित्र मेरा कवच लिया गया है पर
48:41मेरी
48:42निष्ठा और मेरा विश्वास
48:47नहीं मेरे कुंडल ले लिए पर मेरा कौशल
48:54नहीं ये अंत नहीं
48:58प्रारंभ
49:01है प्रारंभ है मेरी विजय
49:09का ये क्या कह रहे
49:11[संगीत]
49:19हो यदि
49:23तुमने मुझे मन से अपना मित्र माना है
49:27तो तुम नहीं
49:31[संगीत]
49:40जाओगे मैं जाकर चिकित्सक को ले आ तो
49:56[हंसी]
50:04पता
50:10श्री यह आप क्या कह रही है माता कण हमारा
50:13शत्रु है और हमारे भ्राता अर्जुन के
50:16प्राणों का प्यासा है वह और आप चाहते हम
50:18उसका उपचार
50:20करें और वैसे भी बड़ा शूरवीर बनता है हम
50:24भला उसकी सहायता क्योंकि कन
50:37में क्या हुआ
50:40माते क्या कुछ ऐसा है जो आप उसे छिपा रहे
50:45हैं बताइए
50:49व कण वह मेरा सबसे योग्य शत्रु है जेष्ठ
51:02उसे अधिकार है युद्ध क्षेत्र में स्वस्थ
51:05होकर अपना कौशल दिखाए ताकि मैं भी उस पर
51:08अपना कौशल सिद्ध कर
51:12सकू इंद्रदेव ने कर्ण के साथ जो छल किया
51:15वह किया परंतु मैं चाहता हूं कि युद्धभूमि
51:19में कर्ण अपने पूरे बल के साथ मेरे समक्ष
51:21प्रस्तुत
51:23[संगीत]
51:24हो ताकि ना उसे और ना ही संसार को यह कहने
51:28का अवसर मिले कि अर्जुन
51:30ने एक दुर्बल का वद किया
51:43[संगीत]
52:02क्षमा करें युवराज क्योंकि अंगराज के शरीर
52:05पर घाव अधिक गहरे
52:08हैं इसलिए मैं उनकी रक्षा नहीं कर
52:16सकता कदाचित ईश्वर की यही इच्छा
52:20[संगीत]
52:23है य ईश्वर की नहीं
52:27मेरी मेरी इच्छा चलती
52:31है और मेरा मन ये कहता है कि यदि मेरे
52:36मित्र को कुछ भी
52:38हुआ तो उससे
52:41पहले ईश्वर के दर्शन तुम करोगे आप समझने
52:45का प्रयास कीजिए युवराज अंगराज के शरीर पर
52:50कवच और कुंडल दिव्य थे जो उनके शरीर से
52:53जुड़े
52:54थे यूं मान लीजिए
52:57उनके शरीर का अंग ही छीन लिया
53:07[संगीत]
53:09गया इसलिए मैं उनकी सहायता नहीं कर सकता
53:14मेरा उपचार उनके लिए असंभव है
53:18युवराज परंतु हमारे लिए संभव है
53:25[संगीत]
53:39त जो कार्य अर्जुन के पिता पूर्ण नहीं कर
53:42पाए वो पूण करने आए हो पा
53:47पुत्र इतना
53:50साहस साहस कैसे हुआ इस शहर में आने का
53:54कैसे
53:57[संगीत]
53:59यह मेरे आदेश से यहां है पुत्र
54:06दुर्योधन की इस दशा का जितना तुम्हे दुख
54:08है उससे कई अधिक हमें
54:11[प्रशंसा]
54:13खेद इसलिए मैंने कुलर से देव को यहां लाई
54:16ह ण का उपचार करने के लिए
54:28धन्यवाद परंतु
54:30मुझे आपकी सहायता की आवश्यकता नहीं है आप
54:34जा सकते
54:38हैं
54:41मैं मैं संसार के सबसे अच्छे वैद को
54:44बुलाऊंगा
54:47अपने अपने मित्र के उपचार के लिए सबसे
54:50अच्छे व वैद ने जो कहा है वो तुम सुन चुके
54:54हो
54:58यह दिव्य कवच निकालने का घव है मनुष्य के
55:01उपचार से नहीं
55:06भरेंगे नकुल और
55:08सदेव अपने पिता अश्विनी कुमार की विद्या
55:12ज्ञात शीघ्र कण को ठीक कर देंगे
55:31क को कुछ भी हो गया तो उसका उत्तरदायित्व
55:35कौन
55:38लेगा इसका उत्तरदायित्व मैं लेता हूं
55:52दुर्योधन मुझे नकुल सहदेव की योग्यता पर
55:55पूर्ण विश्वास
55:56[संगीत]
56:02हम अधिक समय व्यर्थ नहीं कर
56:06सकते कण के
56:09पास समय शेष
56:11[संगीत]
56:12नहीं
56:15मैं अपने अपने मित्र के प्राण अपने शत्रु
56:20के हाथ
56:21में नहीं दे
56:23सकता बस
56:26परंतु एक पुत्र का द एक माता को तो दे
56:30सकते ना दुर्योधन
56:35पुत्र करने
56:39सदा मुझे आके सम्मान का आदर किया
56:45है मैं भी सदा उसकी हित रही हूं
56:50[संगीत]
56:56एक अवसर दो नकुल और सदेव
57:11को एक अवसर तो नकल और सदेव
57:17को
57:21ठीक उपचार आरंभ करो
57:46ओम अश्विनी कुमारा नमः ओम अश्विनी कुमारा
57:52नमः
58:17[संगीत]
58:25इ आ शमो
58:29सेयम शचम इंद्रिय
58:36निग्रह क्षमा क्मो केयम शचम इंद्रिय
58:43निगहा निर् विद्या
58:49सदम दकम धर्म
58:55लक्षण
58:56निद्या सत्यम कोध दकम धर्म
59:02लक्षणं दकम धर्म
59:06लक्षण दकम धर्म
59:19लक्षण तुम दोनों ने जो किया वो प्रशंसा के
59:24योग्य है
59:31अपना स्थान
59:41ख हम प्रस्थान करें अर्थात आप हमारे साथ
59:46नहीं आ रही है माते नहीं
59:49पुत मेरा धर्म मुझे अपना ससुराल छोड़ने की
59:54आज्ञा नहीं देता र्म
59:58[संगीत]
59:59चम मुझे यही गौरव शिविर में रहना होगा हम
1:00:02युद्ध की चौकट पर खड़े हैं माता श्री हम
1:00:05आपको शत्रु शिवर में नहीं रहने दे सकते
1:00:07मेरी रक्षा का
1:00:09दे तुम ता
1:00:12श्री और कर् पर छोड़
1:00:19दो
1:00:21धन
1:00:24हमरा धर्म
1:00:31अब हमें मित्र को विश्राम करने देना
1:00:35चाहिए चलिए यहां से
1:00:38[संगीत]
1:00:56आ