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0:03हेलो मेरे प्यारे बच्चों कैसे हो आप सब?
0:06मेरा नाम है सीएस पायल पोपली और आज इस
0:09लेक्चर में मैं आप लोगों के लिए लेके आई
0:11हूं सीजीट अभियान बैच बिजनेस कम्युनिकेशन
0:15सब्जेक्ट का चैप्टर नंबर टू कम्युनिकेशन
0:18का वन शॉट एक ऐसा लेक्चर जिसमें पूरा का
0:22पूरा चैप्टर एक गो में पढ़ाया जाता है। तो
0:26मतलब आज के इस लेक्चर से आप अपना चैप्टर
0:29नंबर टू पूरा कंप्लीट कर सकते हो एक गो
0:32में एक सिंग में। ठीक है? बट इसको शुरू
0:36करने से पहले एक आवश्यक सूचना है आप लोगों
0:39के लिए दैट जिन भी बच्चों ने चैप्टर नंबर
0:41वन एसेंशियल्स ऑफ गुड इंग्लिश का वन शॉट
0:44नहीं देखा है तो बेटा वो जाके देख लीजिए
0:47वो भी YouTube पे अवेलेबल है फटाफट उसे
0:49निपटाओ उसके बाद यह चैप्टर देखने के लिए
0:52आओ। रीज़न बीइंग वहां से आपका इंग्लिश का
0:54बेस सेट होगा। आपका इंग्लिश वहां से
0:57प्रॉपर होगा तो आप कम्युनिकेट अच्छे तरीके
0:59से कर पाएंगे। मतलब इस चैप्टर को अच्छे
1:01तरीके से समझ पाएंगे। ओके? सो नहीं देखा
1:04है अभी तक तो देख लीजिए। देख लिया है तो
1:06कंटिन्यू कीजिए। ठीक है? चलिए आ जाइए।
1:11देखो जो भी यहां पे नोट्स आपको दिखाए
1:13जाएंगे, स्लाइड्स आपको दिखाए जाएंगी। प्लस
1:15मैं जो नोट्स इसमें ऐड करूंगी वो सब अगर
1:18आपको फ्री ऑफ कॉस्ट चाहिए तो आपको एक काम
1:20करना पड़ेगा। आपको क्या करना है?
1:24PW की वेबसाइट
1:27या फिर इसके
1:31ऐप पर जाना है।
1:33सीएस कैटेगरी सर्च करनी है और वहां पर
1:36फ्री बैचेस या फिर अभियान बैच सर्च करना
1:39है। जैसे ही आप इसे सर्च करेंगे आपको यह
1:42बैच दिखाई दे जाएगा। आपको बस इसे बैठ के
1:45एनरोल करना है। द मिनट यू विल एनरोल इट।
1:48ये सारे नोट्स फ्री ऑफ कॉस्ट आपको मिल
1:50जाएंगे। सो जिन भी बच्चों को नोट्स बनाने
1:53में तकलीफ होती है, खुद से नोट्स नहीं
1:54बनाने की आदत है, तो ये नोट्स आप यूज़ कर
1:57सकते हैं। ओके? अंडरस्टुड? क्या अब हम
2:01शुरू कर सकते हैं इस चैप्टर के साथ?
2:03बिल्कुल कर सकते हैं बेटा। चलिए आ जाइए जो
2:07हमारी पहली कांसेप्ट है उस पे। देखो
2:10चैप्टर का नाम क्या है? कम्युनिकेशन। तो
2:13हर बच्चे को यह तो पता ही होना चाहिए कि
2:16कम्युनिकेशन का मतलब क्या होता है? बेटा
2:19देखो जब भी मैं बच्चों से पूछती हूं कि
2:22व्हाट डू यू मीन बाय कम्युनिकेशन? तो कुछ
2:25बच्चे बोलते हैं कम्युनिकेशन का मतलब होता
2:28है बोलना।
2:30ठीक है? और कुछ कहते हैं बात करना।
2:38अक्सर ये दोनों आंसर्स मुझे मिलते हैं।
2:41नाउ आई विल आस्क यू अ क्वेश्चन। एक
2:43एग्जांपल फॉर्मेट में मुझे आंसर करिएगा वो
2:46क्वेश्चन का।
2:48ऐसे इमेजिन करो। यह आप हो जिसका नाम है
2:52चिंटू।
2:55भाई चिंटू अपने घर की अपने टेरेस की
2:58बालकनी पर बैठा हुआ था कि अचानक से उसने
3:01देखा कि उसके सामने वाली जो वॉल है वहां
3:05पे एक बंदर आके बैठ गया है। एक मंकी आके
3:09बैठ गया है। ठीक है?
3:16अब भाई चिंटू भाई साहब खड़े हुए हैं।
3:18सामने मंकी खड़ा हुआ है। मंकी बैठा हुआ
3:20है। ठीक है? और मंकी अपनी तरफ से ची चा छी
3:24चा ची चा करे जा रहा है। ठीक है? मतलब
3:27अपनी तरफ से मंकी तो बोल रहा है। है ना?
3:31बट क्या चिंटू भाई साहब को उसकी बोली समझ
3:34में आ रही है?
3:37सोच के देखिए। अगर यह चिंटू भाई साहब आप
3:41होते तो क्या आपको बंदर की बोली समझ में
3:43आती? मुझे तो नहीं आती। ठीक है? अब आपका
3:46मुझे पता नहीं है। सो जनरली बंदर जब हमसे
3:50बात करता है या बोलता है तो हमें वो चीज
3:52समझ में नहीं आती। तो जो ये आंसर मुझे
3:55अक्सर मिलता है कम्युनिकेशन का मतलब होता
3:57है बोलना बात करना। तो वो तो यहां पे
4:01कंप्लीट नहीं बैठ रहा। वो तो यहां पे फिट
4:03नहीं बैठ रहा। तो बेटा कम्यनिकेशन का मतलब
4:07सिर्फ बोलना बोलना और बात करना नहीं होता
4:10है। कम्यनिकेशन का मतलब होता है अगर मैं
4:14अपने एंड से बोल रही हूं बात कर रही हूं
4:18तुमसे फॉर से तो तुम्हें वो चीज समझ में
4:21भी आनी चाहिए। तभी वो कम्युनिकेशन कंप्लीट
4:25माना जाएगा। अगर चिंटू भाई साहब के पड़ोस
4:29में रहती एक चिंटी
4:33यहां पे रहती एक चिंटी
4:36और चिंटू भाई साहब उसको बोलते वो उनको
4:39बोलती तो ये दोनों क्योंकि इंसान है तो
4:42आपस में एक दूसरे की बात समझ पाते बोल भी
4:44पाते समझ भी पाते तो इनके बीच में जो
4:47वार्तालाप होता उसे हम बोल सकते थे
4:50कम्यनिकेशन बट बंदर क्या बोल रहा है वो तो
4:54चिंटू भाई साहब नहीं समझेंगे दैट दैट मींस
4:56यहां पे कम्युनिकेशन कंप्लीट नहीं हो पा
4:58रहा। तो ये जो डेफिनेशन आप लोग अक्सर मुझे
5:01देते हैं बात करना बोलना दैट इज इनकंप्लीट
5:04वो पूरी नहीं है। कम्युनिकेशन में इनीड
5:07बोलना आता है। बात करना आता है। लेकिन एट
5:10द सेम टाइम सामने वाला आपकी बात समझे वो
5:14भी आता है। अगर मैं यहां पे खड़े होके
5:17आपको वन शॉट पढ़ाए जा रही हूं। पढ़ाए जा
5:19रही हूं। पढ़ाए जा रही हूं। लेकिन
5:20तुम्हारे दिमाग में कुछ ना जाके ऊपर से सब
5:22जा रहा है। मतलब मेरा कम्युनिकेशन कंप्लीट
5:25नहीं हो रहा है। हमेशा याद रखना इस चीज
5:28को। मैं इतना फोकस क्यों कर रही हूं इस
5:30चीज पे? क्योंकि कई बार क्या होता है यहां
5:32से प्रैक्टिकल क्वेश्चंस आ जाते हैं कि एक
5:34बच्चा था। क्लास रूम में बैठा हुआ था।
5:36टीचर सामने बोल रही थी और उसका ध्यान था
5:39क्लास से बाहर। जैसे उसमें हुआ था ना तारे
5:42जमीन पे। उसमें क्या था? वो बच्चा बैठा
5:44रहता था। क्लास से बाहर देखता रहता था।
5:46टीचर पढ़ाती रहती थी। फिर एक टीचर उनमें
5:48से ऐसा भी था जो चौंक मारता रहता था। यहां
5:50पे उन दोनों के बीच में टीचर और बच्चे के
5:53बीच में कम्युनिकेशन नहीं हो पा रहा था
5:54क्योंकि बच्चे का फोकस ही नहीं था। ध्यान
5:57ही नहीं था। उसे समझ में ही कुछ नहीं आ
5:58रहा था। तो कम्युनिकेशन में बहुत ज्यादा
6:00जरूरी होता है। समझ आना चीजें। ऐसा अगर
6:03आपको सिनेरियो पेपर में दे दिया ना केस
6:05स्टडी बेस में तो आपको आंसर लिखना पड़ेगा।
6:07ओके? कि क्यों इसे हम कम्युनिकेशन नहीं
6:10मान सकते हैं। अंडरस्टुड? चलिए। सो
6:13कम्युनिकेशन इज अ टू वे मीन्स ऑफ
6:16कम्युनिकेटिंग इंफॉर्मेशन। यह दो तरफ से
6:19चलने वाली चीज है। अगर मैं कुछ बोल रही
6:21हूं तो तुम सुन रहे हो, समझ रहे हो और
6:23अपना फीडबैक भी मुझे दे रहे हो। तो दैट इज
6:25अ टू वे प्रोसेस। मैं बोल रही हूं। ठीक
6:27है? तुम्हें जैसा भी लगेगा लेक्चर बुरा
6:29लगा, अच्छा लगा, जैसा भी लगा। तुम कमेंट
6:31सेक्शन में लिख के जाओगे। मतलब तुम भी लिख
6:33रहे हो अपनी तरफ से। तुम भी कम्युनिकेट कर
6:35रहे हो अपनी तरफ से। ठीक है? कि समझ में
6:37आया कि नहीं आया? इस चीज को हम बोलते हैं
6:39फीडबैक। बट इसके बारे में मैं आपको आगे
6:41बताऊंगी। ठीक है? सो इट सेस इन द फॉर्म ऑफ
6:44थॉट्स, ओपिनियंस, आइडियाज बिटवीन टू और
6:46मोर इंडिविजुअल्स टू बिल्ड अंडरस्टैंडिंग।
6:49एक से दूसरा इंसान एक दूसरे के साथ क्या
6:51शेयर करता है? मैं अपने आइडियाज शेयर
6:53करूंगी। मेरे दिमाग में कोई नया आईडिया
6:55आया बिज़नेस से रिलेटेड। मैं वो शेयर
6:56करूंगी। मेरी फीलिंग्स शेयर करूंगी। मेरे
6:59थॉट्स शेयर करूंगी। तो ऐसी सारी चीजें एक
7:01इंसान दूसरे इंसान से क्या करता है? शेयर
7:03करता है। ताकि दूसरा इंसान उसे समझ सके।
7:07उसके अंदर उसके रिलेटेड अंडरस्टैंडिंग हो।
7:11एंड बेटा लोग आप लोगों को पता ही होगा
7:13बिजनेस कम्युनिकेशन इज अ सब्जेक्टिव पेपर।
7:16बोले तो आपको लिखना पड़ेगा आंसर। तो हर एक
7:18चीज की डेफिनेशन पढ़ते जाना और समझते जाना
7:21कि पेपर में अगर आ गई तो कैसे लिखनी
7:23पड़ेगी। ठीक है? चलो आ जाओ।
7:28अब ये बात करते हैं सिग्निफिकेंस ऑफ
7:30कम्युनिकेशन के बारे में कि कम्युनिकेशन
7:33क्यों जरूरी है? हम म्यूट मोड पे भी तो रह
7:36सकते थे। हम चुप भी तो रह सकते थे। बिना
7:38कोई इशारा किए भी तो रह सकते थे। फिर इन
7:40सब चीजों की जरूरत ही क्यों पड़ी? तो उसके
7:43कुछ रीजंस हैं। वन बाय वन जान लेते हैं।
7:46पहला है बेस फॉर एक्शन।
7:49आप मुझे एक बात बताओ। मैं आपको पढ़ा रही
7:52हूं। ठीक है? पढ़ाने के बाद लास्ट में अगर
7:56मैं तुम्हें होमवर्क नहीं दूंगी
7:58[नाक से की जाने वाली आवाज़] तो क्या तुम
7:59खुद से होमवर्क करोगे? सोच के देखो। हो
8:02तुम इतने शरीफ और इतने डिसिप्लिंड बच्चा
8:05कि टीचर ने होमवर्क नहीं दिया फिर भी
8:07होमवर्क करके आ रहे हैं। 90% नहीं होते।
8:11तो मुझे अगर तुमसे कुछ काम करवाना है तो
8:14मुझे कुछ काम करना पड़ेगा। मतलब मुझे
8:16बोलना पड़ेगा वो चीज। तो जब भी एक इंसान
8:19को दूसरे इंसान से किसी भी तरह का एक्शन
8:22करवाना होता है, काम करवाना होता है तो
8:24उसे वो चीज उसे बोलनी पड़ती है। बेस फॉर
8:29एक्शन बोले तो सामने वाले से
8:33सामने वाले से
8:36एक्शन करवाना है या फिर काम करवाना है
8:43तो बोलना पड़ेगा। अब यहां तो मैंने
8:45होमवर्क वाला टीचर स्टूडेंट का रिलेशनशिप
8:47बता दिया। बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन होता तो एक
8:50बॉस को अपने एंप्लई से काम कराना है। अगर
8:53वो बोलेगा नहीं कि बेटा मुझे यह काम तुमसे
8:55करवाना है तो क्या एंप्लई समझ पाएगा कि वो
8:58कुछ काम करवाना एक्सपेक्ट कर रहा है उससे
9:00नहीं ना। आपको बोलना पड़ेगा एंप्लई यह
9:03फाइल कंप्लीट कर दो। एंप्लई उस क्लाइंट से
9:06बात कर लेना। एंप्लई मेरे साथ मीटिंग में
9:08चलना। तो जब तक आप बोलोगे नहीं एक्शन नहीं
9:12होगा। काम नहीं होगा। ठीक है? सो एक्शन
9:16करवाने के लिए आपको बोलना पड़ता है।
9:17प्लानिंग बिकम्स ईजी। बहुत समय से ना आपकी
9:21शिवानी मैम गोवा जाना चाह रही हैं। ठीक
9:23है? और मैं गोवा ऑलरेडी जा चुकी हूं। मैं
9:25देख चुकी हूं वहां पे क्या-क्या सीन होता
9:27है। तो उन्होंने मुझसे बोला मैडम आप मुझे
9:29गोवा ले जाओगी? तो मैंने बोला हां हां
9:31मस्त ईयर एंड पे चलेंगे। मस्त वहां की
9:33वाइब बहुत सही होती है। तो अपन चलेंगे। अब
9:36क्या शिवानी मैम और मैं ऐसे ही मुंह उठा
9:38के ईयर एंड पे चले जाएंगे गोवा घूमने के
9:41लिए। पता है ना गोवा ईयर एंड पे कैसा भरा
9:44होता है। मतलब आप वहां पर जाएं आपको रूम्स
9:47तक नहीं मिलेंगे। अगर आपने पहले से ही
9:49वहां पर बुकिंग नहीं कर रखी होगी। तो जाने
9:52से पहले शिवानी मैम और मुझे बैठ के प्रॉपर
9:55प्लानिंग करनी पड़ेगी। बातचीत करनी
9:58पड़ेगी। प्लानिंग का मतलब क्या होता है?
10:00डिसाइडिंग इन एडवांस। पहले से डिसाइड करना
10:02क्या करना है, कैसे करना है, कब करना है।
10:04तो शिवानी मैम और मुझे बैठ के पहले बातचीत
10:07करनी पड़ेगी कि मैम किस तारीख को जाना है,
10:09कौन से कपड़े लेके जाना है, कितने दिन के
10:12लिए जा रहे हैं, वहां पे कौन से होटल में
10:13रुकेंगे, कौन सी वाटर एक्टिविटीज करेंगे,
10:16कौन से पब में जाएंगे, डांस करेंगे। ये
10:18सारी चीजें पहले से बातचीत करके सॉर्ट
10:21करनी पड़ेंगी। तो यह बोलते हैं
10:22कम्युनिकेशन की वजह से प्लानिंग क्या होती
10:24है? ईजी हो जाती है। प्लान करने के लिए
10:27चीजें आपको बातचीत करनी पड़ती है।
10:29कम्युनिकेट करना पड़ता है। ठीक है? बातचीत
10:32करनी पड़ती है। प्लान करने के लिए प्लान
10:36करने के लिए
10:39बात
10:41करनी
10:43पड़ती है।
10:47ठीक है?
10:49देन मींस ऑफ कोऑर्डिनेशन। कोऑर्डिनेशन का
10:51मतलब क्या होता है? तालमेल।
10:56मान लीजिए मुझे और शिवानी मैम को गोवा में
11:00सेम ड्रेसेस पहननी थी। हमारी घड़ियां तो
11:02बाय द वे सेम हो ही गई हैं। मुझे नहीं पता
11:04था मुझे बर्थडे पे इस बार ये घड़ी मिली।
11:06एंड आई जस्ट नाउ चेक्ड शिवानी मैम ने सेम
11:08घड़ी पहनी हुई थी। तो आई आस्क हर कि ये वो
11:11वाली कंपनी की वो वाली घड़ी है? तो शी सेड
11:12यस। तो ऐसे कहा अरे मेरे पास भी आ गई है।
11:14तो हमने सेम घड़ियों के साथ-साथ तालमेल
11:17बिाने के लिए सेम कपड़े भी यू नो सोचे
11:19पहनेंगे। ठीक है? तो ऐसा तालमेल बिठाने के
11:22लिए भी तो हमें बात करनी पड़ेगी ना कि
11:24शिवानी मैम कौन सी ड्रेस ले रही हो आप?
11:25मैं भी वही ले लेती हूं। दो ऑर्डर कर
11:27लेना। एक मेरे लिए एक अपने लिए आपका ये
11:29साइज मेरा ये साइज। ठीक है? तो इसे
11:31कोऑर्डिनेट करने के लिए तालमेल बिाने के
11:34लिए भी हमें क्या करना पड़ रहा है? बातचीत
11:36करनी पड़ रही है। तो कोऑर्डिनेशन कहां से
11:38आता है? कम्युनिक कम्युनिकेशन से आता है।
11:41अच्छा इसको बहुत सारे लोग ना बहुत अलग-अलग
11:43वे में प्रोनाउंस करते हैं। इट्स कॉल्ड
11:44कम्यनिकेशन। कम्यनिकेशन। कम्यनिकेट करना।
11:49ठीक है? चलिए एड्स एंड डिसीजन मेकिंग तुम
11:52मुझे बताओ जब तुमने 12th पास करी तो
11:55तुम्हारे सामने बहुत सारे दरवाजे खुले हुए
11:58थे। सीए का था, सीएस का था, एमबीए का था,
12:03लॉ का था। लेकिन तुमने कैसे डिसाइड किया
12:06कि तुम्हें सीएस करना है? बातचीत करके ना
12:10अलग-अलग लोगों से पूछा होगा। जैसे अभी भी
12:1211 12th में बहुत सारे बच्चे जो मुझसे
12:14पढ़ते हैं मुझसे पूछते हैं मैम सीएस में
12:16क्या है? डू यू थिंक हमारे लिए वो सही
12:18रहेगा नहीं रहेगा? तो वो मुझसे बातचीत
12:20करते हैं और वो मुझसे गाइडेंस मांगते हैं
12:23और मैं उन्हें जो भी गाइडेंस दूंगी उसके
12:25बेसिस पे वो क्या करेंगे? डिसाइड करेंगे
12:27उन्हें सीएस करना है कि नहीं करना। जैसे
12:29कि तुम लोगों ने भी किया होगा। चार लोगों
12:31से पूछा होगा। चार लोगों ने तुम्हें गाइड
12:33किया होगा। उसके बेसिस पे तुमने डिसाइड
12:35किया कि तुम्हें क्या करना है। तो डिसीजन
12:38मेकिंग के लिए मदद मिल जाती है हमें
12:41किससे? कम्युनिकेशन से। बातचीत करने से।
12:44ठीक है? व्हेन आई से बातचीत इट इंक्लूड्स
12:46कि सामने वाले को आपकी बात समझ में आ रही
12:48है। ठीक है? देन बूस्ट मोरल और मोटिवेशन।
12:52अभी ये तुम्हें समझ में नहीं आएगा लेकिन
12:54थोड़े दिन और गुजर जाने दो। तुम्हारे
12:56अक्टूबर का या फरवरी का एग्जाम बिल्कुल
12:58तुम्हारे सर पे आने दो। उस टाइम पे
13:00तुम्हें एकदम से अचानक से इतना डर लगने लग
13:03जाएगा कि जो भी पड़ा हुआ है याद नहीं आ
13:06रहा। मैम ऐसा लग रहा है हम कर नहीं
13:08पाएंगे। क्या हम इसे नेक्स्ट टाइम के लिए
13:10टाल दें? मैम क्या करें? कुछ समझ में नहीं
13:12आ रहा। मैम लिखना नहीं आता। ये नहीं करना
13:14आता। रोना गाना तुम्हारा शुरू हो जाएगा।
13:16ठीक है? फिर तुम अपने इंडिविजुअल टीचर्स
13:18चूज़ कर लोगे कि शिवानी मैडम से बात करनी
13:19है, पाल मैडम से बात करनी है, सुमित सर से
13:21बात करनी है या ऋषभ सर सर से बात करनी है।
13:23और फिर जब उनसे बात करोगे तो उनका रिप्लाई
13:26क्या होगा? फिर से तुम मुझसे बात कर रहे
13:27हो और मुझे ये सारी बातें बोल रहे हो। तो
13:29मैं तुम्हें बोलूंगी बेटा देखो एग्जाम से
13:32पहले ना सबको यही फील आता है। सबको ऐसा ही
13:34लगता है कि मुझे कुछ भी याद नहीं है। जब
13:36तुम एग्जाम में बैठोगे ना तो तुम्हें सारी
13:38चीजें याद आ जाएंगी। डोंट वरी। अभी ये जो
13:41तुम पैनिकिक कर रहे हो ना इसकी वजह से तुम
13:42ध्यान नहीं दे पा रहे हो कि तुम्हारे
13:44दिमाग में ऑलरेडी बहुत सारी कांसेप्ट्स
13:45फीडेड हैं। डरो मत। पहले तो इस डर को अपने
13:48दिमाग से निकाल दो और पेपर तो डेफिनेटली
13:51दो। तभी तुम्हें समझ में आएगा कि तुम
13:53कितने पानी में हो। ठीक है? तो अभी से
13:55निराश मत हो। अभी भी बहुत समय है। अभी भी
13:57बहुत कुछ हो सकता है। अब मैंने जो इतना
14:00बड़ा लेक्चर दिया। ठीक है? उससे क्या
14:02होगा? तुम्हारे अंदर थोड़ा सा मोराल बूस्ट
14:04आएगा कि हां यार अगर मैडम मेरे ऊपर इतना
14:07कॉन्फिडेंस शो कर रही है तो थोड़ा
14:08कॉन्फिडेंस मुझे भी अपने ऊपर शो करना
14:10चाहिए। ठीक है? तो तुम्हारे अंदर आएगा
14:12नहीं यार मैं कर सकता हूं। मैम बोल रही
14:14हैं तो मैं कर सकता हूं। डेफिनेटली कर
14:16सकता हूं। तो ये मोटिवेशन तुम्हारे अंदर
14:18कैसे आया? मैंने तुमसे बातचीत करी। मैंने
14:21तुम्हें कुछ-कुछ बोला। मैंने तुम्हें
14:22कम्यनिकेट करा। तभी तो यह कॉन्फिडेंस
14:24तुम्हारे अंदर आया। तो मोटिवेट करने के
14:26लिए भी लोगों को आपको क्या करना पड़ता है?
14:28कम्युनिकेट करना पड़ता है। जैसे तुम्हारे
14:31दोस्त लोग तुम्हें कॉल करते होंगे यार
14:33मुझे ऐसा फील हो रहा है। लाइफ में कुछ
14:35बढ़िया नहीं चल रहा। मैं लाइफ में कुछ
14:37नहीं कर पाऊंगा और तुम उस टाइम पे उन्हें
14:39ज्ञान ज्ञान बांटतेगे। तो वो जो ज्ञान तुम
14:41बांट रहे हो ना वो भी कम्युनिकेशन का ही
14:43हिस्सा है। ठीक है? तो ये सारेेंट्स के
14:45पॉइंट्स हैं कम्युनिकेशन के। अब हम आ जाते
14:48हैं हमारे नेक्स्ट टॉपिक पे जो कि है
14:51बिजनेस कम्युनिकेशन। नाउ व्हाट इज द
14:54मीनिंग ऑफ़ बिजनेस कम्युनिकेशन? बेटा देखो
14:56सबसे पहले तो ये जो वर्ड है ना ये दो वर्ड
15:00से मिलके बना है। वन इज बिनेस
15:05अनदर वन इज़ कम्युनिकेशन।
15:12वन इज़ बिज़नेस, अनदर वन इज़ कम्युनिकेशन।
15:15ठीक है? अब देखिए, बिज़नेस का मतलब क्या
15:19होता है? 11वीं कक्षा में पढ़ा था तुमने।
15:22बिजनेस एक इकोनॉमिक एक्टिविटी होती है।
15:28बिजनेस एक इकोनॉमिक एक्टिविटी होती है
15:32जिसमें बेसिकली आप गुड्स एंड सर्विसेस का
15:35गुड्स और सर्विज का सेलिंग और एक्सचेंज
15:39करते हैं और बदले में कमाते हैं प्रॉफिट।
15:42यही पढ़ा था 11th में आपने इसका डेफिनेशन।
15:44और कम्युनिकेशन क्या होता है? एक इंसान से
15:48इस तरीके से बात करना कि उसको आपकी बात
15:52समझ में भी आए।
15:57बात करना जो समझ में भी आए। अगर हम इन
16:00दोनों को ऐड कर दें तो क्या मतलब निकलेगा?
16:05ऐसी बात करना।
16:08ऐसी बात करना
16:12जो बिजनेस से रिलेटेड हो। बोल सकते हैं।
16:19ऐसी बात करना जो बिजनेस से रिलेटेड हो।
16:22मतलब अगर मैं किसी से काम के सिलसिले में
16:25अपने बिजनेस के सिलसिले में बातचीत करती
16:27हूं तो वो कहलाई जाएगी बिजनेस
16:30कम्युनिकेशन। बिजनेस से रिलेटेड बातचीत।
16:34अब मुझे एक बात बताइए। यह बातचीत मैं
16:36किस-किस से कर सकती हूं? सोच के देखिए।
16:40ऐसे मानिए।
16:45यह मेरा बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन है। ठीक है?
16:49यह मेरा बिजनेस ऑर्गेनाइजेशन है। यहां पे
16:52बहुत सारे लोग काम कर रहे हैं। फर्स्ट से
16:55ये पीडब्ल्यू ही है। ऐसा ही मान लेते हैं।
16:56यह पीडब्ल्यू है।
17:00ओके? ये सारे पीडब्ल्यू के टीचर्स हैं।
17:05ओके? ये सारे पीडब्ल्यू के टीचर्स हैं और
17:07यह पीडब्ल्यू ऑर्गेनाइजेशन है। तो आप मुझे
17:09बताइए काम की बातचीत किस-किस के बीच में
17:11हो सकती है? एक तो हम टीचर्स के बीच में
17:15हो सकती है। मानते हैं कि नहीं मानते? एक
17:18तो हम टीचर्स के बीच में हो सकती है।
17:20जिसमें यह टीचर भी टीचर वन और टीचर टू
17:25टीचर वन और टीचर टू दोनों ही ऑर्गेनाइजेशन
17:30के क्या आते हैं? विदिन आते हैं। मतलब
17:32दोनों ही ऑर्गेनाइजेशन के लोग हैं। या फिर
17:35मेरी बातचीत हो सकती है। मैं डीपीएस से
17:37पढ़ी हूं डीपीएस भोपाल से। तो यह डीपीएस
17:40भोपाल की
17:42टीचर थी
17:44जिनसे मैंने बातचीत करी कि क्या और बढ़िया
17:48टॉपिक्स हो सकते हैं बच्चों के काम के।
17:51दैट वाज़ अगेन रिलेटेड टू बिनेस बोल सकते
17:54हैं। तो मैंने डीपीएस भोपाल के टीचर से
17:57बात करी कि क्या-क्या टॉपिक्स मैं कवर कर
18:00सकती हूं जो बच्चों के काम आ सकते हैं।
18:03ठीक है? वो बच्चों से डायरेक्ट कांटेक्ट
18:05में रहती हैं। ऑफलाइन मोड में उन्हें हर
18:07रोज मिलती हैं। तो उन्हें ज्यादा नॉलेज
18:08होगी। तो मैंने काम के सिलसिले में उनसे
18:10बातचीत करी। अब यहां पे टीचर थ्री टीचर
18:14फोर
18:16टीचर थ्री जो है वो तो विद इन
18:18ऑर्गेनाइजेशन है। मतलब ऑर्गेनाइजेशन के
18:20अंदर ही आता है। और टीचर जो फोर है वो
18:23क्या है? आउटसाइड ऑर्गेनाइजेशन है।
18:28पहले तो मुझे यह बताओ ये चारों किस्म के
18:30मतलब सॉरी दो किस्म हो गए और चार लोग हो
18:33गए। दोनों किस्म की जो कन्वर्सेशंस हो रही
18:35हैं, कम्युनिकेशन हो रही हैं। क्या उसे हम
18:38बिजनेस कम्युनिकेशन बोल सकते हैं? तो उसका
18:41आंसर है तुम तो कैसे ही बोलोगे मैं ये बता
18:43देती हूं। उसका आंसर है यस ये बिजनेस
18:45कम्युनिकेशन है क्योंकि सारी जगह बस
18:48बिजनेस की काम की बात ही हो रही है। अब
18:52यहां पे जब दोनों ही लोग जो बात कर रहे
18:56हैं वो ऑर्गेनाइजेशन के अंदर-अंदर ही
19:00होंगे तो वो कहलाए जाएगी इंटरनल
19:04कम्युनिकेशन।
19:06ठीक है? इंटरनल बोले तो अंदर ही अंदर जो
19:09कम्युनिकेशन हो रही है तो ये कहलाई जाएगी
19:10इंटरनल कम्युनिकेशन और जो एक ऑर्गेनाइजेशन
19:14के अंदर और एक ऑर्गेनाइजेशन के बाहर वाले
19:17लोगों के बारे बीच में बात हो रही है इसको
19:20हम बोलते हैं एक्सटर्नल कम्युनिकेशन।
19:24इसे हम क्या बोलते हैं? एक्सटर्नल
19:26कम्युनिकेशन। सो जब ऑर्गेनाइजेशन के ही
19:29दोनों लोग आपस में बातचीत कर रहे होते हैं
19:32तो उसे हम बोलते हैं और काम से रिलेटेड
19:34बातचीत कर रहे होते हैं। ये बहुत ज्यादा
19:35जरूरी है काम से रिलेटेड। ठीक है? अगर दो
19:38लोग ऐसे ही गसिप कर रहे हैं किसी चीज की
19:40रमर स्प्रेड कर रहे हैं तो वो इंटरनल
19:42कम्युनिकेशन नहीं कहलाई जाएगी। अगर उसे
19:44बिजनेस कम्युनिकेशन बनना है तो वो काम से
19:46रिलेटेड होना चाहिए। तो T1 T2 से बात कर
19:49रहा है तो भाई ये इंटरनल कम्युनिकेशन
19:52कहलाई जाएगी क्योंकि दोनों ही
19:53ऑर्गेनाइजेशन के विदिन हैं। लेकिन एक
19:55इंसान ऑर्गेनाइजेशन के अंदर हो एक इंसान
19:58ऑर्गेनाइजेशन के बाहर हो तो इनके बीच में
20:00जो वार्तालाप होगी उसे हम एक्सटर्नल
20:03कम्युनिकेशन कहलाई जाएगी कहेंगे। ठीक है?
20:06इसको हम क्या कहेंगे? एक्सटर्नल
20:08कम्युनिकेशन कहेंगे। अंडरस्टुड?
20:12अच्छा अब एक क्वेश्चन है आप लोगों के लिए।
20:14उसका आंसर आप कमेंट सेक्शन में करना। ठीक
20:17है? उसका आंसर आप कमेंट सेक्शन में करना।
20:22यह फॉर से मैं बोलती हूं आईपीएस स्कूल की
20:27टीचर थी। ठीक है? डीपीएस स्कूल की एक हो
20:30गई। अब बात करते हैं आईपीएस स्कूल की।
20:33आईपीएस स्कूल की टीचर इस टीचर से बातचीत
20:36कर रही है। लेकिन क्या बातचीत कर रही है?
20:40यह बात कर रही है कि मेरे ऑर्गेनाइजेशन
20:43में तो बड़ा ही यू नो टाइम वेस्ट करते हैं
20:47टीचर्स का। मेरे ऑर्गेनाइजेशन में तो
20:48टीचर्स को ओवर बर्डन कर रखा है। मेरे
20:50ऑर्गेनाइजेशन में तो टीचर्स की कोई वैल्यू
20:52ही नहीं है। ये है वो है। यह भी अपना रोना
20:55गाना कर रही है। यह भी अपना रोना गाना कर
20:57रही है। ठीक है? लेकिन यह दोनों ही अपनी
20:59ऑर्गेनाइजेशन से रिलेटेड रोना गाना कर रहे
21:01हैं। तो आपको मुझे कमेंट सेक्शन में यह
21:03बताना है कि क्या यह बिजनेस ऑर्गेनाइज़
21:06बिजनेस कम्युनिकेशन या एक्सटर्नल
21:09कम्युनिकेशन कहलाया जाएगा या नहीं कहलाया
21:11जाएगा। जो भी आपका आंसर हो यस और नो में
21:13उसका रीज़ भी साथ में स्टेट करिएगा। ठीक
21:16है? एक बंदी है ऑर्गेनाइजेशन की विद इन
21:19की, दूसरी बंदी है दूसरे ऑर्गेनाइजेशन की।
21:21इनके बीच में काम से रिलेटेड खिटपिट
21:23खिटपिट वाली जो भी चीजें होती हैं वो
21:24डिस्कस हो रही हैं। ठीक है? अब आपको बताना
21:27है कि क्या यह बिजनेस कम्युनिकेशन कहलाया
21:30जाएगा? एक्सटर्नल कम्युनिकेशन कह के लाहया
21:32जाएगा? यस और नो। और जो भी आपका आंसर हो
21:34उसका रीज़ जरूर स्टेट करिएगा। ओके? चलो आ
21:39जाओ।
21:41अब ये बात करते हैं कम्युनिकेशन स्ट्रेटजी
21:44फ्रेमवर्क के बारे में।
21:47यह बोलते हैं कि जो ऑर्गेनाइजेशन के लोग
21:51होते हैं ना वह सिर्फ ऑर्गेनाइजेशन में ही
21:54अंदर वाले लोगों से बात नहीं करते। वो
21:57बहुत सारे लोगों से बात करते हैं। फॉर से
22:00यह किसी कंपनी का बॉस है। ठीक है? तो इसको
22:03किस-किस से बात करनी पड़ सकती है? इसको
22:05एंप्लई से बात करनी पड़ सकती है। मतलब जो
22:08इसके यहां पे लोग काम कर रहे हैं उससे बात
22:11करनी पड़ सकती है। इसे इन्वेस्टर से बात
22:14करनी पड़ सकती है। जिनसे पैसे लिए हैं या
22:17जिनसे और पैसे लेने हैं उनसे बात करनी पड़
22:20सकती है। इसको कस्टमर से जिसने आपका
22:23प्रोडक्ट खरीदा है
22:27बाय किया है उससे बात करनी पड़ सकती है।
22:31ठीक है? उसके अलावा सप्लायर्स जो आपको रॉ
22:33मटेरियल सप्लाई करते हैं उनसे बात करनी
22:36पड़ सकती है। तो भाई बहुत सारे लोग होते
22:40हैं जिनसे आपको ओवर द टाइम बात करनी पड़ती
22:42है बिजनेस से रिलेटेड तो आपको पता होना
22:45चाहिए बातचीत कैसे होनी चाहिए। एक कस्टमर
22:48का तुम्हारे पास फोन आया। उसने बोला सर
22:50मैं आपके प्रोडक्ट से खुश नहीं हूं। ठीक
22:53है? एंड यू वर लाइक क्यों खरीदा फिर?
22:54मैंने बोला था खरीदने के लिए। आई फोन मत
22:56कर दियो मुझे। समझ में आया तुझे यह बात?
22:58बिना मतलब के फोन लगा देते हैं। कोई काम
23:00धंधा नहीं है इनको। अब तुम मुझे एक बात
23:03बताओ। वो कस्टमर तुम्हारे प्रोडक्ट से बस
23:06थोड़ा सा डिसटिस्फाइड था और उसने तुम्हें
23:08कॉल लगा दिया और तुमने इस लहजे में उससे
23:11बात करी। क्या वो कस्टमर कभी भी गलती से
23:14तुम्हारी दुकान पे दोबारा आएगा? कभी नहीं
23:16आएगा। एक बार जिस कस्टमर से तुम बदतमीजी
23:19से बात कर देते हो या जोर से बात कर देते
23:21हो। अगर वो कस्टमर मेरे जैसा होगा तो भैया
23:23ईगो पे ले लेगा। कभी तुम्हारी दुकान पे
23:25कदम नहीं रखेगा। नो मैटर बाहर से तुम्हारी
23:28दुकान में कितने भी अट्रैक्टिव प्रोडक्ट्स
23:30क्यों नहीं दिख रहे हो। मेरे साथ तो बहुत
23:32होता है। मैं तो ऐसे बहुत सारे यू नो
23:34जिनकी शॉप्स पे जाओ। आप कुछ दुकानदार ऐसे
23:36होते हैं दिखाने के लिए तैयार ही नहीं
23:38होते। उनका एटीट्यूड ही नहीं होता कि हमें
23:39दिखाना है प्रोडक्ट। तो मैं ऐसी शॉप्स पे
23:41दोबारा कभी नहीं जाती। तो आप अपने कस्टमर
23:43से किस तरीके से बात करते हैं वो बहुत
23:45मैटर करता है। आपको जिनसे पैसे लेने हैं
23:48इन्वेस्टर्स। एक बार इन्वेस्टर ने आपको
23:50कॉल किया कि यार कंपनी की परफॉर्मेंस
23:52बढ़िया नहीं चल रही और आप बोल रहे हो पैसे
23:53निकाल ले अपने। निकाल ले और दोबारा आइयो
23:55मत यहां पे। क्या वह बंदा अपने पैसे रखेगा
23:58तुम्हारी कंपनी में? कभी भी नहीं रखेगा।
24:00पैसे निकाल लेगा और तुम्हें क्या होगा?
24:01लॉस हो जाएगा। तुम्हें पैसे और कहीं से
24:03ढूंढने पड़ेंगे। तो हमेशा इन लोगों से
24:05कैसे बात करनी चाहिए। उसकी स्ट्रेटजी बनती
24:08है अच्छे तरीके से। आपको समझना पड़ता है
24:10कि उनसे कैसे बात होनी चाहिए और फिर आप
24:12अकॉर्डिंगली उनसे बात करते हैं।
24:14अंडरस्टुड? चलो इसी बात पे हम चलते हैं
24:16हमारे नेक्स्ट टॉपिक पे। व्हिच सेस रीज़ंस
24:19व्हाई बिजनेस कम्युनिकेशन मैटर। बिजनेस
24:21कम्युनिकेशन क्यों जरूरी होता है? इसके भी
24:25बहुत सारे पॉइंट्स हैं। अब ध्यान दीजिएगा।
24:27एक हमने पढ़ा था सिग्निफिकेंस ऑफ
24:29कम्युनिकेशन। कम्युनिकेशन क्यों जरूरी है?
24:32अब हम क्या पढ़ रहे हैं कि बिजनेस
24:33कम्युनिकेशन क्यों जरूरी है? दोनों में
24:36डिफरेंस है। एक बिजनेस से रिलेट कर रहा
24:37है, एक नॉर्मल कम्युनिकेशन की बात कर रहा
24:39है। ठीक है? तो पहला पॉइंट इसमें है
24:41इनक्रीज प्रोडक्टिविटी।
24:44एक बॉस है।
24:48अगर वह अपने एंप्लाइज से
24:52अगर वह अपने एंप्लई से बात ही नहीं करेगा
24:56तो क्या एंप्लई काम करेगा? कतई नहीं
24:59करेगा। बिल्कुल भी नहीं करेगा। तो एक बॉस
25:02को अपने एंप्लई से बात करनी पड़ेगी। उसे
25:05समझाना पड़ेगा कि यह काम करना है कंप्लीट
25:08अपन को। फिर एंप्लई क्या करेगा? और बात भी
25:11कैसे करनी पड़ेगी? टैक्टफुली करनी पड़ेगी।
25:14बहुत ही तसल्ली से करनी पड़ेगी। आराम से
25:15करनी पड़ेगी। तो इससे क्या होगा? एंप्लई
25:17थोड़ा खुश हो जाएगा। वो भी अपना 100% देने
25:20की सोचेगा कि बॉस मुझसे इतने प्यार से बात
25:22कर रहा है। मतलब आप खुद ही सोच के देखो।
25:24अगर कभी आपका बॉस या आपका सीनियर जो भी
25:26होता है वो आपको कॉल करके बोले यार बहुत
25:28बढ़िया काम किया तूने। अब तुझे यह काम
25:30करना है। ठीक है? वो एक बहुत बढ़िया काम
25:33किया तूने। अपने आप में ही एक बड़ी बहुत
25:35बड़ी चीज हो जाती है। उससे इंप्रेस हो के
25:37उससे खुश हो के हम और बढ़िया काम करने के
25:39बारे में सोचते हैं। ठीक है? इसको बोलते
25:41हैं पॉजिटिव मोटिवेशन। तो अगर आप अपने
25:43एंप्लई को थोड़ा सा पॉजिटिवली मोटिवेट कर
25:45दोगे और उसको बोलोगे कि पिछला काम तूने
25:47बहुत बढ़िया करा था। अब ये वाले में भी तू
25:49बहुत बढ़िया काम करना। ठीक है? तो वो अपनी
25:51जान लगा देगा बट तुम्हें अच्छे से काम
25:53करके दिखाएगा और कीड़ा चढ़ गया यार मेरे
25:55ऊपर ये क्या बदतमीजी है? एनीवेज वो
25:59तुम्हारे तुम्हारे लिए बहुत अच्छा काम
26:01करके दिखाएगा। जहां वो दो टीशर्ट
26:04प्रोड्यूस कर सकता था एक दिन में वो चार
26:06करने की कोशिश करेगा। वरना तीन तो वो
26:08डेफिनेटली करके जाएगा। तो कम्युनिकेट करने
26:10से बिजनेस कम्युनिकेशन करने से क्या होता
26:12है? प्रोडक्टिविटी इनक्रीस होती है। ठीक
26:15है? अच्छा मेरी एक बात सुनना। जब भी तुम
26:17इन पॉइंट्स का एक्सप्लेनेशन लिख रहेगे ना
26:19तो तुम्हारा जो एग्जांपल होना चाहिए ना
26:21दैट शुड रिलेट टू बिनेस। ठीक है? जैसे
26:24मैंने अभी कम्युनिकेशन में तुम्हें
26:26एग्जांपल्स दिए थे ना रैंडम वो नहीं तुम
26:28इस्तेमाल कर सकते बिनेस कम्युनिकेशन के
26:30एक्सप्लेनेशन में। यहां पे तुम्हें
26:31स्टिक्ड रहना पड़ेगा बिज़नेस से रिलेटेड
26:33ओनली। जैसे मैंने बोला बॉस है, एंप्लई है
26:35तो ये दोनों बॉस और एंप्लई बिजनेस के ही
26:38पार्ट हैं। दैट्स व्हाई आई हैव टेकन देयर
26:39एग्जांपल। ओके? चलिए सेकंड है इनेशन
26:42एक्सचेंज। एक डिपार्टमेंट है प्रोडक्शन
26:45डिपार्टमेंट। दूसरा डिपार्टमेंट है फॉर से
26:48मैं बोलती हूं अ सप्लाई डिपार्टमेंट।
26:53ठीक है? सप्लाई डिपार्टमेंट।
26:56सप्लाई नहीं बोलते उसको हम बोल सकते हैं
26:59स्टॉक डिपार्टमेंट। फॉर से प्रोडक्शन
27:01डिपार्टमेंट प्रोड्यूस करता है। स्टॉक
27:03डिपार्टमेंट अपने पास स्टॉक रखता है। ठीक
27:05है? अगर मान लीजिए प्रोडक्शन करते-करते
27:07आपको समझ में आता है कि यार रॉ मटेरियल तो
27:09खत्म हो रहे हैं तो आपको ये चीज इंटिमेट
27:12करनी पड़ेगी कि नहीं करनी पड़ेगी स्टॉक
27:14डिपार्टमेंट को ताकि वो रिफिल कर सके।
27:16जैसे आपके घर में अगर कोई सामान खत्म होने
27:19लगता है तो आप पापा मम्मी को बोलते हो ना
27:20मम्मी-मो सामान खत्म हो रहा है भरवा लेना
27:22इस बार। DMart जाओगी या फिर बेस्ट प्राइस
27:24जाओगे कहीं पे भी जाओगे। राइट? ग्रोसरी
27:27शॉप करने ग्रोसरी शॉपिंग के लिए जाओगे तो
27:29भरवा लेना। राइट? तो बस वही चीज है कि
27:31आपको सामने वाले से क्या करना पड़ेगा? बात
27:34करनी पड़ेगी बिनेस से रिलेटेड इन ऑर्डर टू
27:36पास सम इनेशन टू द अदर पर्सन। सामने वाले
27:39इंसान को अगर तुम्हें कोई भी इंफॉर्मेशन
27:42देनी है, एक्सचेंज करना है उसके साथ इनेशन
27:44का तो बातचीत करनी पड़ेगी। इंक्रीस
27:47कस्टमर्स।
27:49यह मैं हूं। ठीक है? मैंने अपना बिजनेस
27:52खोला है। अगर मैं अपने कस्टमर से बात नहीं
27:55करूंगी।
27:56अगर मैं अपने कस्टमर से बात नहीं करूंगी
27:59तो क्या मैं अपने कस्टमर्स और बढ़ा
28:01पाऊंगी। अपने कस्टमर्स को लॉयल बना
28:03पाऊंगी। देखो कस्टमर्स कैसे बढ़ते हैं?
28:06फॉर से मैंने ये घड़ी खरीदी। ठीक है? मुझे
28:09ये घड़ी बहुत बढ़िया लगी। मतलब बारिश में
28:12भी पानी गिरता है। इस पे ये चलना बंद नहीं
28:14करती। ठीक है? मतलब नजर ना लगे। चलना बंद
28:17ना ही करे अभी तो। ठीक है? ये चलना बंद
28:19नहीं करती। ठीक है? पानी गिरने पे भी। अब
28:21कोई मुझसे पूछेगा यार इस रेंज में मुझे
28:23घड़ी चाहिए और अच्छी सी चाहिए। तो मेरे
28:25मुंह से फटाफट क्या निकलेगा कि ये वाली
28:27खरीद लो। ये वाली बहुत अच्छी है। इस पे
28:28पानी भी गिरता है तो खराब नहीं होती।
28:30निकलेगा कि नहीं निकलेगा? तो मैं मैं
28:33बीइंग अ कस्टमर एक और कस्टमर ऐड कर रही
28:35हूं। मैं जब भी mntra से कोई भी शॉपिंग
28:37करती हूं तो मुझसे बहुत सारे लोग पूछते
28:39हैं ये आपने कहां से लिया? तो मैं उनको
28:41सीधा लिंक भेजती हूं। तो वो लोग भी वो चीज
28:43खरीद लेते हैं। एक कस्टमर दूसरे कस्टमर को
28:45अट्रैक्ट करता है। बिल्कुल करता है। ठीक
28:48है? अब जैसे मेरा यह एक लिप बाम है हफन
28:51का। ठीक है? जब मैंने इसे लगाना शुरू किया
28:53था। पिछले सीजेट बैच में बहुत सारे बच्चों
28:55ने मुझसे पूछा कि मैम ये कहां कौन सा लिप
28:58बाम आप लगा रही हो? कौन से वाला यू नो
29:00कहां से लिया था? तो मैंने उनके साथ शेयर
29:02किया कि ये लिंक है और ये वाला लिप बाम
29:04है। खरीदना चाहो तो खरीद लो। तो ना सिर्फ
29:06स्टूडेंट्स ने बल्कि कुछ टीचर्स ने भी इसे
29:08खरीदा। ठीक है? तो बीइंग अ कस्टमर मैंने
29:10क्या किया? और कस्टमर्स ऐड करें। तो अगर
29:12आपको अपने बिजनेस में और कस्टमर्स ऐड
29:15करवाने हैं तो आपको क्या करना पड़ेगा?
29:17अपने कस्टमर से बातचीत करनी पड़ेगी। अपने
29:19कस्टमर्स के बीच में लॉयल्टी एस्टैब्लिश
29:22करनी पड़ेगी। अंडरस्टुड? चलिए एनहांस
29:25बिजनेस पार्टनरशिप।
29:28कोलैब वाली वीडियोस देखी है कभी तुमने
29:30Instagram पे? कोलैब वाली वीडियो में क्या
29:33होता है? एक इन्फ्लुएंसरर जो होता है
29:35दूसरे इन्फ्लुएंसरर के साथ कोलैब करता है।
29:37साथ मिलके वीडियो बनाता है। जिससे दोनों
29:39की ऑडियंस को एक दूसरे का टेस्ट दिखने
29:41मतलब फ्लेवर पता चल जाता है और वो चाहे तो
29:43उन्हें सब्सक्राइब भी कर सकते हैं। राइट?
29:45जैसे एक था इन्फ्लुएंसरर ए, दूसरा था
29:47इनफ्लुएंसर बी। इसके 1 लाख सब्सक्राइबर्स
29:49थे। इसके 1 लाख सब्सक्राइबर्स थे।
29:50इन्होंने कोलैब वीडियो बनाई। 1 लाख इसके
29:52जो सब्सक्राइबर्स थे वो इधर आ गए। इसके जो
29:54थे वो इधर आ गए। दोनों के दो-दो लाख
29:56सब्सक्राइबर्स हो गए। ठीक है? तो ये होता
29:57है कोलैब का फायदा। ऐसे ही बिज़नेस फर्म्स
29:59भी कई बार कोलैब करती हैं अलग-अलग
30:02ऑर्गेनाइजेशन के साथ। जैसे अभी PW ने
30:04Microsoft के साथ किया था। ठीक है? अब PW
30:07ने जेमिनाई के साथ किया है। तो ये क्या
30:10है? यह एक तरह का कोलैबोरेशन है। दो
30:12ऑर्गेनाइजेशन साथ आ रही हैं। बट दो
30:14ऑर्गेनाइजेशन क्या अपने आप साथ आ जाती
30:15हैं? क्या जेमिनाई ऐसे ही पीडब्ल्यू के
30:17साथ कोलैब कर लिया था? नहीं। इन दोनों ने
30:20पहले बातचीत करी होगी। अलग सर ने जेमिनाई
30:22वाले के साथ बातचीत करी होगी। दोनों के
30:24बीच में एक सेटिंग बैठी होगी और उसके बाद
30:26इनका कोलैबोरेशन हुआ है। इनका पार्टनरशिप
30:28हुआ है। तो अगर आपको किसी के साथ
30:29पार्टनरशिप करनी है, देन आल्सो यू विल हैव
30:31टू टॉक टू दैट पर्सन जिसके साथ भी आपको
30:34पार्टनरशिप करनी है। फिर है प्रिपरेशन ऑफ़
30:37प्लांस एंड पॉलिसीज़। आपको अपनी
30:38ऑर्गेनाइजेशन के लिए प्लांस बनाने हैं कि
30:40फ्यूचर में 5 साल में हम अपनी
30:42ऑर्गेनाइजेशन को कहां कहां देखते हैं। ठीक
30:44है? उसके लिए हमें कुछ पॉलिसीज बनानी है
30:46कि ये ये हम करेंगे। ये जनरल गाइडलाइंस
30:48हैं जो मतलब रूल करेंगी आगे की डिसीजन
30:51मेकिंग। तो इसके लिए भी हमें क्या करना
30:52पड़ेगा? बिजनेस कम्युनिकेशन करनी पड़ेगी।
30:55बातचीत करनी पड़ेगी। अभी थोड़ी देर पहले
30:56हमने पढ़ा प्लांस रेडी करने के लिए क्या
30:58जरूरी होता है? कम्युनिकेशन जरूरी होता
31:00है। बस वही चीज है। फैसिलिटेट्स इनोवेशन।
31:04इनोवेशन का मतलब क्या होता है? बदलाव।
31:06चेंज लाना। कुछ नयापन लाना, कुछ यूनिक चीज़
31:09लाना। राइट? तो अगर मान लीजिए आप अपने
31:11ऑर्गेनाइजेशन में सबको बहुत ही खुला हाथ
31:13देके रखते हो कि तुम्हारे दिमाग में जो भी
31:15सजेशन आए, तुम अपने आप अपना सजेशन हमें
31:17बता सकते हो। ठीक है? अब लोग ऐसे में क्या
31:20करेंगे? आके तुम्हें सजेशन देंगे। सजेशन
31:22देंगे तो वहां से कोई नया आईडिया क्लिक कर
31:24सकता है। कोई नया प्रोडक्ट भी बन सकता है।
31:26कोई नई सर्विस भी बन सकती है। तो इनोवेशन
31:28लाने में भी बिज़नेस कम्युनिकेशन काफी हद
31:30तक मदद करता है। बातचीत करोगे तभी तो
31:32इनोवेशन आएगा। बातचीत करोगे।
31:39तभी तो इनोवेशन आएगा, चेंज आएगा।
31:45ठीक है? आ गई बात समझ कि क्यों बिनेस
31:47कम्युनिकेशन जरूरी होता है? नाउ लेट्स टॉक
31:51अबाउट टाइप्स ऑफ बिनेस कम्युनिकेशन। कितने
31:54तरह के बिनेस कम्युनिकेशन होते हैं? दो
31:56तरह के बिज़नेस कम्युनिकेशन मैं ऑलरेडी
31:58आपको पढ़ा चुकी हूं। वन वाज़ इंटरनल, अनदर
32:01वन वाज़ एक्सटर्नल। क्या होता है इंटरनल
32:04एक्सटर्नल में? इंटरनल में ऑर्गेनाइजेशन
32:07के अंदर के ही दो लोग आपस में बातचीत कर
32:10रहे होते हैं। दो या दो से ज्यादा भी हो
32:11सकते हैं। ठीक है? लेकिन एक्सटर्नल में
32:14क्या होता है? आपके ऑर्गेनाइजेशन के लोग
32:16किसी आउटसाइडर के साथ बातचीत कर रहे होते
32:19हैं। ठीक है? इतना आपको क्लियर है? अब
32:21एक्सटर्नल की डेफिनेशन यहीं पे खत्म हो
32:23जाती है। लेकिन इंटरनल में ना दो आगे से
32:26वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल करके वह आ जाते
32:29हैं। इनका क्या मतलब है? यह समझ लीजिए।
32:35एक स्कूल है। ओके।
32:38एक स्कूल है।
32:44जिसमें है हमारे प्रिंसिपल सर।
32:51फिर है हेडमिस्ट्रेस।
32:54फिर है टीचर्स।
33:02अब एक चीज समझिएगा।
33:07कॉन्वर्सेशन
33:09कॉन्वर्सेशन
33:11टीचर की हेडमिस्ट्रेस के साथ भी हो सकती
33:13है। हेडमिस्ट्रेस की प्रिंसिपल के साथ भी
33:15हो सकती है। राइट? जब कॉन्वर्सेशन ऊपर से
33:19नीचे या नीचे से ऊपर जाएगी तो ऐसे में हम
33:22इसे बोलेंगे वर्टिकल
33:26वर्टिकल कम्युनिकेशन।
33:28बोले तो डिफरेंट डिफरेंट पोजीशन के लोग
33:32डिफरेंट डिफरेंट पोस्ट के लोग आपस में
33:41आपस में
33:45बात
33:47कर रहे हैं। डिफरेंट-डिफरेंट पोस्ट के लोग
33:51डिफरेंट-डिफरेंट पोजीशन के लोग आपस में
33:53बात कर रहे हैं। ठीक है? वहीं पे अगर एक
33:59टीचर दूसरी टीचर से बात करता है। अब
34:02टीचर्स तो दोनों सेम लेवल पे आते हैं। फॉर
34:04से मैं सुमित सर से बात करती हूं। अब
34:06सुमित सर भी उसी लेवल पे आते हैं। मैं भी
34:08उसी लेवल पे आती हूं। वो भी टीचर हैं। मैं
34:10भी टीचर हूं। ठीक है? तो अगर मैं उनसे बात
34:13कर रही हूं तो हम दोनों सेम लेवल पे आते
34:15हैं। तो ये किस्म की जो कम्युनिकेशन होती
34:18है इसे हम बोलते हैं हॉरिजॉन्टल
34:23कम्युनिकेशन।
34:25लेटी हुई है तो वह हॉरिजॉन्टल होएगी। खड़ी
34:28है तो वह वर्टिकल होगी। ठीक है? तो अगर दो
34:30पोजीशन के लोग आपस में बात करते हैं वो
34:32वर्टिकल कम्युनिकेशन कहलाई जाती है। और
34:34दोनों सेम लेवल के लोग अगर आपस में एक
34:36दूसरे से बात करते हैं तो वो हॉरिजॉन्टल
34:39कम्युनिकेशन कहलाई जाती है। ठीक है? अब
34:42वर्टिकल में भी ना दो तरह की कम्युनिकेशन
34:44होती हैं।
34:46एक होगा कि प्रिंसिपल कोई आदेश
34:49हेडमिस्ट्रेस को दे रहा है। तो
34:51कम्युनिकेशन कैसे जा रही है? अप टू डाउन
34:54जा रहे हैं। है ना? जिसको हम बोलते हैं
34:57डाउनवर्ड्स।
35:02और दूसरी क्या हो सकती है? हेड मिस्ट्रेस
35:05से कोई कम्युनिकेशन प्रिंसिपल तक जा रही
35:07है। तो ये नीचे से डाउन टू अप जा रही है।
35:11तो इसे हम बोलते हैं अपवर्ड। ऊपर की तरफ
35:15डाउनवर्ड नीचे की तरफ। ठीक है? तो हमने
35:19यहां से पढ़ा चार तरह की कम्युनिकेशन। वन
35:21इज़ वर्टिकल। मतलब दो पोजीशन वाले लोग, दो
35:23पोस्ट वाले लोग जो कि अलग-अलग लेवल पे
35:25बैठे हुए हैं आपस में बातचीत कर रहे हैं
35:26तो उसे हम वर्टिकल बोलेंगे। जो सेम लेवल
35:29पे लोग बैठे हुए हैं वो अगर आपस में बात
35:30कर रहे हैं तो उसे हम हॉरिजॉन्टल बोलेंगे।
35:32एंड अगर नीचे से कम्युनिकेशन ऊपर की तरफ
35:36जाता है तो उसे हम बोलते हैं अपवर्ड्स।
35:38ऊपर की तरफ और ऊपर से कम्युनिकेशन नीचे की
35:40तरफ आता है तो उसे हम बोलते हैं
35:42डाउनवर्ड्स। और ये दोनों क्या हैं?
35:44वर्टिकल के एग्जांपल्स हैं। या टाइप्स हैं
35:47बोल सकते हैं। ये देखिए। आ गई बात समझ?
35:51सो, हमने यहां से पढ़ा दो तरह की
35:53कम्युनिकेशन होती है। इंटरनल, एक्सटर्नल,
35:55इंटरनल बोले तो विद इन ऑर्गेनाइजेशन,
35:56एक्सटर्नल बोले तो आउटसाइड ऑर्गेनाइजेशन।
35:59इंटरनल में फर्दर बफरकेशन होती है।
36:01वर्टिकल, हॉरिजॉन्टल। अब हॉरिजॉन्टल का
36:04आगे सेग्रगेशन नहीं है। लेकिन वर्टिकल का
36:06फिर सेग्रगेशन है। अपवर्ड्स, डाउनवर्ड्स।
36:09ठीक है? ऐसे याद रख लेना। ओके? अंडरस्टुड?
36:12चलो नाउ लेट्स मूव टू नेक्स्ट टॉपिक जो कि
36:16है हमारा कम्युनिकेशन टेक्स प्लेस विद इन
36:19ऑर्गेनाइजेशन इन टू फॉर्म्स फॉर्मल
36:22इनफॉर्मल
36:23क्या मतलब है इसका
36:27ये टीचर है
36:30अरे रुक जाओ ना हां ठीक है यहां पे हम
36:34एग्जांपल लेते हैं पायल मैडम का अब पायल
36:36मैडम आपको पढ़ा रही है ठीक है पायल मैडम
36:39कौन है टीचर है भैया और तुम कौन हो?
36:43स्टूडेंट हो।
36:45यह कौन हो? तुम हो। और तुम कौन हो?
36:48स्टूडेंट हो। मैं तुम्हें पढ़ा रही हूं।
36:51ओके? तो हमारे बीच में जो बातचीत हो रही
36:54है वो किस किस नेचर की है? काम से रिलेटेड
36:57है। हमारे बीच में जो कम्युनिकेशन हो रहा
37:00है वो काम से रिलेटेड हो रहा है।
37:06मानते हो कि नहीं मानते हो? बिल्कुल मानना
37:08ही पड़ेगा तुम्हें। है ना? वहीं पे
37:10कभी-कभी तुम लोग क्या करते हो? पेड क्लास
37:13में बैठे होते हो। और ये है मानसी।
37:19यह है ध्रुव।
37:23ठीक है? ध्रुव मानसी को लिखेगा। मानसी
37:25मानसी तुम्हारी Instagram आईडी देना जरा।
37:28तुम स्नैप पे हो क्या? मानसी बोलेगी नहीं
37:31ध्रुव मैं स्नैप पे नहीं हूं। मैं
37:32Instagram आईडी दे रही हूं। और फिर तुम
37:34कोड वर्ड में जो भी Instagram आईडी शेयर
37:35करते हो। फिर ध्रुव अगली क्लास में बोलेगा
37:37मानसी मानसी अपना वो देना जरा क्या बोलते
37:40हैं फोन नंबर फिर मानसी पांच अक्षर पहले
37:43लिखेगी फोन नंबर के फिर पांच अक्षर बाद
37:45में लिखेगी क्योंकि पूरा फोन नंबर तो शेयर
37:47किया नहीं जा सकता चैट बॉक्स पे अगर आपको
37:49नहीं पता हो तो बता दूं सो ऐसे क्या करते
37:52हो तुम क्लास चल रही है क्लास के बीच में
37:54अपना लगे हुए हो बेतुकी बात करने में है
37:57ना अब ये बेतुकी बात का काम से कोई भी
38:00लेना देना है पढ़ाई से कोई भी लेना देना
38:03है नहीं है तो जब दो लोग बेतुकी बात करते
38:07हैं। बेतुकी का मतलब होता है बिना तुक की,
38:11बिना लॉजिक की। तो बेतुकी बात, इधर-उधर की
38:15बात
38:20तो उसे हम बोलते हैं इनफॉर्मल
38:23कम्युनिकेशन। जो बातचीत आप बच्चे चैट में
38:27एक दूसरे के साथ करते हैं, उसे हम बोलेंगे
38:29इनफॉर्मल कम्युनिकेशन। क्योंकि वो काम की
38:32बात नहीं है। ठीक है? वो क्या है? वो
38:35इधर-उधर की बात है। जैसे शिवानी मैम को
38:37परसों परसों मैंने कॉल किया था। एंड शी
38:39वाज़ लाइक मैम नेक्स्ट टाइम गोवा चलो तुम
38:40मुझसे बात कर लेना। ठीक है? अब हम लोग
38:43ऑर्गेनाइजेशन के पार्ट हैं। हम दोनों
38:44टीचर्स हैं। ठीक है? हम लोग अगर काम की
38:47बात करते तो वो कहलाई जाती है फॉर्मल बात।
38:50लेकिन हम कौन सी बात कर रहे थे? गोवा साथ
38:51चलेंगे। तो दैट वाज़ इनफॉर्मल बात। तो जब
38:54आप काम की बात नहीं करो, इधर-उधर की बात
38:56करो तो उसे हम बोलते हैं इनफॉर्मल
38:58कम्युनिकेशन।
38:59चलिए अब हम बात करते हैं प्रोसेस ऑफ
39:02कम्युनिकेशन के बारे में। यह अच्छे से समझ
39:04लीजिएगा। ठीक है? वैसे तो अच्छे से सब
39:06समझना था ना लेकिन यह वाला और अच्छे से
39:08समझ लीजिए। यह बोलते हैं एक इंसान होता है
39:12जहां से पूरी ये प्रोसेस शुरू होती है। वो
39:16इंसान जो मैसेज भेजता है फॉर एग्जांपल अभी
39:21के सिनेरियो में देखा जाए तो मैं बोल रही
39:24हूं और मैं अपना मैसेज आप तक पहुंचाने की
39:28कोशिश कर रही हूं। तो मैसेज कौन दे रहा
39:30है? मैं दे रही हूं। तो मैं यहां पे क्या
39:33कहलाई जाऊंगी? मैं यहां कहलाई जाऊंगी
39:36सेंडर। सेंडर का मतलब होता है जो मैसेज
39:41सेंड करता है
39:45और यहां पर मेरा मैसेज कौन रिसीव कर रहा
39:48है? बेटा तुम रिसीव कर रहे हो। बेटा तुम
39:52रिसीव कर रहे हो मेरा मैसेज। तो तुम क्या
39:55कहलाए जाओगे? रिसीवर।
39:58मैसेज रिसीव करने वाला। ठीक है? तुम क्या
40:03कहलाए जाओगे? रिसीवर।
40:06ठीक है? अब जब मैं मैसेज ड्राफ्ट कर रही
40:09होंगी मतलब जैसे भी मैं बोल रही होंगी तो
40:12मैं वो बोलना किसके अकॉर्डिंग करूंगी
40:14तुम्हारे अकॉर्डिंग ना अगर मैं अपनी
40:16फ्रेंड्स से बात कर रही होती तो शायद मैं
40:18पंजाबी में करती या मेरे हरियाणा में भी
40:20फ्रेंड्स हैं तो शायद मैं जाट लैंग्वेज
40:22में करती या अगर मेरे कनाडा में जो
40:24फ्रेंड्स हैं उनसे मैं बात करती मैं
40:26इंग्लिश में करती लेकिन अभी मैं किस
40:28लैंग्वेज में बात कर रही हूं मैं हिंदी
40:30में बात कर रही हूं इंग्लिश में बात कर
40:31रही हूं आई शुड से ठीक है और मैं बहुत ही
40:34प्लेन लैंग्वेज इस्तेमाल कर रही हूं ताकि
40:36आपको मेरी मेरी बात समझ में आ जाए। राइट?
40:38तो मैंने अपना मैसेज तुम्हारे अकॉर्डिंग
40:42ड्राफ्ट किया है, बनाया है। इसी प्रोसेस
40:45को हम बोलते हैं एनकोडिंग।
40:47इसी प्रोसेस को हम बोलते हैं एनकोडिंग।
40:51ड्राफ्टिंग ऑफ मैसेज।
40:53ताकि आपको बात समझ में आ जाए। ठीक है? और
40:56जो संदेश मैं आप तक पहुंचा रही हूं, वह
40:59क्या होगा? मैसेज कहलाया जाएगा।
41:03ठीक है? अब मैसेज आपको पहुंच जाएगा तो आप
41:06उसे समझने की कोशिश करेंगे। है ना? डिकोड
41:09करेंगे मेरी लैंग्वेज को। तो वो क्या
41:12कहलाई जाती है? डिकोडिंग। डिकोड करना।
41:16मतलब अगर मान लो मैंने एक ऐसा वर्ड बोल
41:18दिया बीच में। अकंप्लिश करना है। शायद
41:21तुम्हें अकंप्लिश का मतलब नहीं पता था। तो
41:23तुम क्या करोगे? अकंप्लिश का मतलब सर्च
41:25करोगे। तो वहां से तुमने क्या किया? मेरे
41:27मैसेज को डिकोड किया। अपने आप के लिए इजी
41:31लैंग्वेज में ट्रांसलेट किया। ठीक है? ये
41:33बोल सकते हैं। तो दिस इज़ कॉल्ड डिकोडिंग।
41:35अब क्या होता है? मैं तुम्हारी क्लास ले
41:38रही हूं। फिर से ऑनलाइन क्लास ले रही हूं।
41:39ठीक है? बीच में लैग आ गया। इंटरनेट बंद
41:42हो गया या फिर लाइट चली गई। ये क्या है?
41:44ये बीच में अड़चनें हैं जो आ रही हैं।
41:47जिसकी वजह से हम कम्युनिकेट अच्छे से नहीं
41:49कर पा रहे। तो ऐसी सब अड़चनों को हम बोलते
41:51हैं नॉइज़। ठीक है? हिंडरेंस। हिंडरेंस
41:55इंग्लिश वर्ड होता है जिसका मतलब होता है
41:57रुकावटें।
41:59रुकावटें। तो हिंडरेंस, ऑब्सकल, अड़चनें इन
42:03सबको हम नॉइज़ बुलाते हैं। और जिस जिस
42:07माध्यम का इस्तेमाल करके हम बातचीत करते
42:10हैं। जिस माध्यम का इस्तेमाल करके जैसे
42:12अभी हम क्या कर रहे हैं? इंटरनेट का
42:14इस्तेमाल करके एक दूसरे से बात कर रहे
42:16हैं। राइट? मतलब मैं आपको YouTube पे पढ़ा
42:18रही हूं। YouTube किसकी वजह से चल रहा है?
42:19इंटरनेट की वजह से चल रहा है। आप मुझे
42:22कमेंट कर पा रहे हो। ये किसकी वजह से
42:23पॉसिबल हो पा रहा है? इंटरनेट की वजह से
42:25पॉसिबल हो पा रहा है। तो जो भी हमारे बीच
42:27में बातचीत हो रही है वो इंटरनेट की वजह
42:28से पॉसिबल हो पा रही है। इंटरनेट माध्यम
42:31है। तो इसे इंग्लिश में मतलब इसे इस
42:32लैंग्वेज में बोलते हैं मीडियम।
42:36ठीक है? मीडियम। जिस माध्यम से हम
42:39कम्युनिकेट कर पा रहे हैं। और जब आप मुझे
42:42कमेंट सेक्शन में बताएंगे। हां मैडम हमें
42:45सब समझ में आ गया जो भी आपने पढ़ाया या
42:47नहीं मैडम हमें यह पॉइंट समझ में नहीं आया
42:50तो आप मुझे अपना फीडबैक दे रहे हैं। आप
42:53क्या कर रहे हैं? मुझे यह बता रहे हैं कि
42:54क्या आपको मेरी बात समझ में आई कि नहीं आई
42:57और उसे हम बोलते हैं फीडबैक। तो फटाफट जाओ
43:01और फीडबैक दे दो कमेंट सेक्शन में कि क्या
43:04तुम्हें मेरी बातचीत समझ में आई कि नहीं
43:06आई? और ये होती है प्रोसेस ऑफ
43:08कम्युनिकेशन। ठीक है? बहुत सारे बच्चे
43:10यहां पे बोलेंगे मैम हमारी बुक में तो
43:12नॉइस नहीं है। नॉइस नहीं है। आपने क्यों
43:13पढ़ा दिया? तो बेटा आगे चलके आपको
43:15कम्युनिकेशन बैरियर्स करके एक टॉपिक आएगा।
43:18उसका मतलब नॉइस ही होता है काइंड ऑफ़। ठीक
43:20है? तो अभी से मैंने आपको पढ़ा दिया है
43:22वह। ओके चलो।
43:25नेक्स्ट टॉपिक है हमारा मीन्स ऑफ़
43:27कम्युनिकेशन। देयर आर डिफरेंट-डिफरेंट
43:29मीन्स ऑफ़ कम्युनिकेशन। क्या मतलब होता है
43:31इनका? समझ लेते हैं। मीन्स ऑफ कम्युनिकेशन
43:34का मतलब होता है हम किस-किस ज़रिए से
43:38किस-किस तरीके से कम्युनिकेट कर सकते हैं।
43:41जैसे कि आप मेरे पीछे देख सकते हैं चार
43:43तरीके लिखे हुए हैं। वर्बल, नॉनवर्बल,
43:47रिटन, विजुअलाइजेशन। ये चारों का एग्जांपल
43:51आपको इसी क्लास में मिल जाएगा। स्टार्टिंग
43:53विद वर्बल। मैं अभी आपको कोई कांसेप्ट
43:55समझा रही हूं। मैं क्या कर रही हूं? अपनी
43:57जुबान का इस्तेमाल कर रही हूं। बात कर रही
44:00हूं तुमसे। आवाज का इस्तेमाल कर रही हूं।
44:02आवाज निकाल के तुम्हें कांसेप्ट समझा रही
44:04हूं। तो जब हम किसी से बातचीत करते हैं
44:07जुबान खोल के। उस तरह की कम्युनिकेशन को
44:10हम बोलते हैं वर्बल कम्युनिकेशन। ठीक है?
44:14अब हम बात करते हैं नॉनवर्बल के बारे में।
44:16यह वर्बल का बिल्कुल अपोजिट होता है। जब
44:18हम जुबान नहीं खोलें और इशारों में बात
44:21करें। ठीक है? जैसे मैं यूं करूं तो तुम
44:23समझ जाओगे कि या तो दया कुछ गड़बड़ है या
44:26फिर मुगैंबो खुश हुआ। राइट? अगर मैं बोलूं
44:30तो तुम समझ जाओगे गांधी जी के तीन बंदर
44:32में से एक बंदर बने हुए हैं। अगर मैं यूं
44:34करूं तो तुम समझ जाओगे कि सब ओके है।
44:36राइट? तो ये क्या है? मेरे हैंड जेस्चर्स
44:39हैं जिसकी वजह से आप चीजों को समझ रहे हो।
44:42अच्छा वर्बल में बहुत सारे लोगों को ऐसी
44:44गलतफहमी होती है कि सिर्फ हैंड जेस्चर्स
44:46आते हैं। ऐसा नहीं है बेटा। वर्बल में आप
44:49किस तरह से ड्रेस्ड अप हो? मतलब अगर मान
44:51लो मैं लहंगा चोली पहन के आई हूं यहां पे
44:54तो आपको लगेगा ना कि शायद मैडम किसी
44:56पार्टी से आई हैं या पार्टी पे जाने वाली
44:58हैं। शादीवादी पे जाने वाली हैं। यही
45:00लगेगा ना? तो मैंने क्या ड्रेस किया पहना
45:02हुआ है। उससे आपको समझ में आ जाएगा कि मैं
45:04किस चीज के लिए तैयार हुई हूं। मैं कहां
45:06जाने वाली हूं। क्या मुझे बोलना पड़ा कि
45:08मुझे शादी पे जाना है इस क्लास के बाद?
45:10नहीं। आप मेरी ड्रेस को देख के समझ गए। तो
45:13नॉन वर्बल में हर वो चीज आ जाती है जिसमें
45:15जुबान नहीं खोलनी पड़ती। ओके? फिर आता है
45:18आपका रिटन। जैसे मैंने आपको ये स्लाइड्स
45:20पे बहुत सारी चीजें ऑलरेडी लिख के दी हुई
45:23हैं। तो यहां से अगर आप पढ़ के समझे चीजें
45:26तो इसको बोलते हैं रिटन कम्युनिकेशन।
45:28लिखित में जो कम्युनिकेशन होती है। अपने
45:30दोस्त से WhatsApp पे बात करते हो वो रिटन
45:33कम्युनिकेशन का पार्ट है। उसके बाद आता है
45:35विजुलाइज़ेशन। दोस्त जब कुछ उल्टी सीधी
45:38बात बोल देता है तो उसको जीआईएफ भेजते हो
45:40कि नहीं भेजते हो? जैसे तुम शायद जिफ भी
45:42बोलते होगे। उल्टी-सीधी जिफ्स इस्तेमाल
45:44करते हैं। वो क्या है? पिक्चर्स हैं। आपको
45:47विजुअलाइज कराया जा रहा है। तो जब हम
45:49पिक्चर्स का इस्तेमाल करते हैं,
45:50डायग्राम्स का इस्तेमाल करते हैं। यू नो अ
45:53पाई चार्ट या फिर किसी बार डायग्राम इन सब
45:56चीजों का इस्तेमाल करते हैं तो वो
45:57विजुअलाइजेशन का पार्ट होता है। ठीक है?
46:00तो चार तरह के मीन्स होते हैं कम्युनिकेशन
46:02के। वर्बल मतलब जुबान से बोल के। नॉनवर्बल
46:05बोल के मतलब बिना बोले बात मतलब बाकी सारी
46:08चीजों पे फोकस करके रिटन मतलब लिखित में
46:10और विजुअलाइजेशन मतलब विजुअलाइज करा के
46:13आपको डायग्राम वगैरह दिखा के या पिक्चर
46:15दिखा के
46:17अब बात आती है कि सबसे बेहतर क्या होता है
46:21ये बोल रहा है देखो रिटन करोगे तो उसके भी
46:23कुछ अपने प्रोज़ हैं कुछ क्स हैं वर्बल
46:26करोगे उसके भी कुछ प्रोज़ हैं कुछ के भी
46:28कुछ क्स हैं तो बेटर तुम क्या करो
46:30हाइब्रिड सिस्टम कर लो कम्युनिकेट करने का
46:33हाइब्रिड सिस्टम बोले तो रिटन और वर्बल का
46:36कम्युनिकेशन जो अभी मैं कर रही हूं। यहां
46:39पे कुछ चीजें लिखी हुई हैं। ठीक है? दैट
46:41इज़ रिटन। और साथ में मैं उन्हें एक्सप्लेन
46:44करने के लिए बोल रही हूं। दैट इज़ वर्बल।
46:46तो मैं यहां पे क्या कर रही हूं? हाइब्रिड
46:48सिस्टम। हाइब्रिड का मतलब क्या होता है?
46:49दो अलग-अलग चीजों का मिक्सचर। तो मैं यहां
46:51पे हाइब्रिड सिस्टम को इस्तेमाल कर रही
46:53हूं। रिटेन और वर्बल को। ये बहुत अच्छा
46:56तरीका होता है जिससे आप अच्छे तरीके से
46:58कम्युनिकेट कर सकते हैं। लेकिन ये
47:00कहां-कहां चल सकता है? मतलब कहां पे बेस्ट
47:02होगा? तो ये बोलते हैं जहां पे
47:04कॉम्प्लेक्स इंफॉर्मेशन है। अब जैसे
47:06तुम्हारा मॉड्यूल बहुत कॉम्प्लेक्स है।
47:08उसमें जो भी लिखा हुआ है बहुत मुश्किल
47:09लिखा हुआ है। तभी तो तुम्हें हमारी जरूरत
47:11पड़ रही है। वरना तुम खुद नहीं पढ़ लेते
47:12मॉड्यूल। तुम्हें हमारी जरूरत क्यों पड़
47:14रही है? क्योंकि तुम मॉड्यूल पढ़ के समझ
47:16नहीं पा रहे हो। उसमें क्या लिखा हुआ है?
47:18तभी तुमने हमें पैसे दिए हैं और हमसे पढ़
47:20रहे हो। राइट? सो कॉम्प्लेक्स इंफॉर्मेशन
47:22होती है तब हम रिटन और वर्बल का इस्तेमाल
47:25करते हैं या फिर डिस्कशन करनी होती है।
47:27कोई ऐसा मुद्दा है जिस पे हमें डिस्कशन
47:29करनी है तो उसमें भी हम वर्बल और रिटन का
47:31इस्तेमाल करते हैं। तो हाइब्रिड सिस्टम हम
47:33कहां-कहां इस्तेमाल कर सकते हैं? कहां
47:35इस्तेमाल करने चाहिए? कॉम्प्लेक्स
47:37इनफॉर्मेशन के टाइम पे और डिस्कशन के टाइम
47:39पे। ओके? चलिए, नेक्स्ट। कम्युनिकेशन
47:43नेटवर्क्स। बहुत सारे अलग-अलग कम्युनिकेशन
47:46नेटवर्क्स होते हैं। स्टार्टिंग विद
47:48फर्स्ट वन वर्बल नहीं वर्बल नहीं होगा।
47:50वर्टिकल होगा। ठीक है? व्हील चेन स्टार
47:54स्टार होगा एंड देन सर्किट। ठीक है? वन
47:57बाय वन वी विल अंडरस्टैंड इनका क्या मतलब
47:59है? ओके? सबसे पहले है वर्टिकल नेटवर्क।
48:02ठीक है? वर्टिकल नेटवर्क क्या बोलता है?
48:04मैंने आपको पहले भी बताया है एक पोजीशन का
48:08इंसान है फॉर से पीडब्ल्यू में अलक सर है।
48:12वो कौन है? पीडब्ल्यू के फाउंडर हैं।
48:17मैं क्या हूं? पीडब्ल्यू की एक एंप्लई
48:19हूं।
48:21मैं कौन हूं? पीडब्ल्यू के एक एंप्लॉय
48:23हूं। तो ऑब्वियसली अलक सर का ओ मुझसे
48:27ज्यादा है। मानते हो कि नहीं मानते हो? वो
48:29कौन है? पीडब्ल्यू के फाउंडर हैं। एंड आई
48:31एम जस्ट एन एंप्लॉय। तो वो मेरे कौन
48:33होंगे? सुपीरियर होंगे, सुपर सुपीरियर
48:35होंगे, सीनियर होंगे, फाउंडर हैं, वह बॉस
48:38होएंगे। राइट? तो हमारे बीच में जिस तरह
48:40की बातचीत होगी, वह क्या कहलाई जाएगी? दो
48:43अलग-अलग पोस्ट पोजीशन वाले लोगों की
48:47बातचीत कहलाई जाएगी। तो ऐसी बातचीत को हम
48:50बोलते हैं वर्टिकल नेटवर्क। बोले तो
48:53जिसमें दो अलग-अलग पोस्ट के लोग बातचीत
48:57करते हैं, बात करते हैं। उन्हें हम बोलते
49:00हैं वर्टिकल नेटवर्क। वर्टिकल नेटवर्क इज
49:02नथिंग। जूनियर और सीनियर के बीच में जो
49:05बातचीत होती है उसे हम वर्टिकल नेटवर्क
49:07बोलते हैं। ठीक है? टॉप टू बॉटम भी हो
49:10सकती है, बॉटम टू टॉप भी हो सकती है। यहां
49:12पे लिखा भी हुआ है टॉप टू बॉटम एंड
49:14वाइसवरसा। वाइसवरसा का मतलब होता है जस्ट
49:16उसका उल्टा। बॉटम टू टॉप। ठीक है? चलिए
49:19नेक्स्ट है हमारा चेन नेटवर्क। यहां पे
49:22क्या होता है? तुमने 12th क्लास में
49:24स्केलर चेन पढ़ी थी। बस वही स्केलर चेन ही
49:27है कि अगर इस इंसान को
49:31इस इंसान से बात करनी है तो बीच में जितने
49:33भी इंसान आएंगे उनका पड़ाव पार करके जाना
49:36पड़ेगा। ए को पहले बी से बात करनी पड़ेगी।
49:39बी सी से बात करेगा। सी डी से बात करेगा।
49:42डी ई से बात करेगा। ई एफ से बात करेगा। एफ
49:45जी से बात करेगा। अगर ए को जी से बात करनी
49:49है तो उसे पूरा यह सर्कल पूरा यह चेन
49:53कंप्लीट करके जाना पड़ेगा। सबसे बातचीत
49:56करनी पड़ेगी। तब जाके इनेशन पास ऑन होएगी।
49:59यहां तक अनलेस एंड अंटिल बहुत ही इमरजेंसी
50:01वाली सिचुएशन है। उसमें क्या होता है? ए
50:03डायरेक्टली जी को कांटेक्ट कर सकता है और
50:05उसको हम बोलते हैं गैंग प्लैंक। ये हमने
50:08पढ़ा था 12th क्लास में। बट बेटा आपके
50:10मॉड्यूल में गैंग प्लैंक करके कोई वर्ड
50:12मेंशन नहीं है। ठीक है? तो अपनी
50:14एक्सप्लेनेशन आप कहां तक रखेंगे? बस वहां
50:16तक रखेंगे कि ए को अगर जी से कांटेक्ट
50:19करना है तो उसको पूरा चेन सिस्टम अपना फुल
50:22करके जाना पड़ेगा। पार करके जाना पड़ेगा।
50:25कम्युनिकेशन फ्रॉम टॉप टू बॉटम विदाउट एनी
50:27ऑल्टरेशन ऑफ मीनिंग और वर्ड्स। नो बॉटम टू
50:29टॉप कम्युनिकेशन टेक्स प्लेस। यहां पे
50:31बॉटम टू टॉप कम्युनिकेशन नहीं होती। टॉप
50:34टू बॉटम ही होती है। मतलब ऊपर से निर्देश
50:36आएगा। अभी मैंने तुम्हें सिर्फ एग्जांपल
50:38दिया था कि कैसे क्या होता है। अब यहां पे
50:40समझिए। ये बोलते हैं यहां पे ना टॉप टू
50:43बॉटम जाता है सिचुएशन। बॉटम टू टॉप नहीं
50:46आता जो कि वर्टिकल में हो रहा था। ठीक है?
50:48तो डी से निर्देश नीचे की तरफ आएंगे।
50:50उल्टा नहीं होगा। ओके?
50:53डी से निर्देश ऊपर नीचे की तरफ आएंगे।
50:55उल्टा नहीं होगा। ठीक है? आ गई यह बात
50:59समझ? चलिए नाउ लेट्स मूव टू हमारा सर्किट
51:02नेटवर्क। सर्किट नेटवर्क का क्या मतलब
51:05होता है? ये टू वे कम्युनिकेशन होता है।
51:08मैं हूं गब्बर सर हैं। ठीक है? पायल मैडम
51:11और कौन? गब्बर सर। दोनों ही क्या हैं?
51:14टीचर हैं। दोनों ही सीएस वाला में भी
51:17पढ़ाते हैं। दोनों ही कॉमर्स वाला में भी
51:19पढ़ाते हैं। ठीक है? तो दोनों टीचर्स हैं।
51:21दोनों इक्वल सेम लेवल पे आते हैं। अब सेम
51:23लेवल पे आते हैं। कोई बात मैं उनको
51:25कहूंगी। कोई बात वो मुझे कहेंगे। फिर मैं
51:27उनको कोई बात कहूंगी। फिर वो मुझे कोई बात
51:29कहेंगे। तो हमारे बीच में बातचीत
51:31साइमलटेनियसली चल रही है। मैं इधर से बोल
51:33रही हूं। वो उधर से बोल रहे हैं। मैं इधर
51:34से बोल रही हूं। वो उधर से बोल रहे हैं।
51:35तो इस ले इस पर्टिकुलर नेटवर्क को हम
51:37बोलते हैं सर्किट नेटवर्क। जहां पे सर्किट
51:40बनता है। मतलब बातचीत कंटीन्यूअसली होती
51:43रहती है। टू वे कम्युनिकेशन। दोनों एक साथ
51:45कम्युनिकेट कर रहे हैं। पीपल इनवॉल्वड एट
51:47द सेम लेवल चूज़ दिस। यूजुअली वो लोग जो कि
51:50सेम लेवल पर होते हैं वो इस नेटवर्क को
51:52चूज़ करते हैं। बट ऐसा मैंडेटरी भी नहीं
51:54है। ठीक है? बस आप जब बात कर रहे होंगे तब
51:58आपको ऐसा मतलब बिलीव करना होगा कि ये मेरे
52:00लेवल का ये इंसान है। जैसे गब्बर सर अब
52:02पीडब्ल्यू में बहुत टाइम से काम कर रहे
52:03हैं। मैंने नया-नया जॉइ किया है। ठीक है?
52:05हां दो हम दोनों वर्टिकल्स में काम कर रहे
52:07हैं सेम वे में। लेकिन है तो वो मेरे
52:09सीनियर काइंड ऑफ़ है ना? बट हमारे बीच में
52:11वो सीनियर और जूनियर वाला रिश्ता नहीं है।
52:13ठीक है? तो ऐसा जब होता है तब सर्किट
52:15नेटवर्क अप्लाई किया जाता है। ओके? चलिए
52:19नेक्स्ट है हमारा व्हील और स्पोक नेटवर्क।
52:21अब इसका क्या मतलब होता है? व्हील का मतलब
52:23क्या होता है? पहिया। पहिया कैसा होता है
52:25गाड़ी का? बीच में एक ऐसी चीज होती है
52:27उससे बाकी का सारा चीज अटैच्ड होता है।
52:29राइट? यही होता है व्हील नेटवर्क। सॉरी
52:32यही होता है व्हील। तो व्हील नेटवर्क में
52:34भी ऐसा ही होता है। बीच में एक इंसान बैठा
52:36होता है। जो इधर वाले से भी बात कर रहा
52:38है। इधर वाले से भी बात कर रहा है। इधर
52:39वाले से भी बात कर रहा है। इधर वाले से भी
52:40बात कर रहा है। इधर वाले से भी बात कर रहा
52:41है। लेकिन यह लोग आपस में एक दूसरे से बात
52:44नहीं कर रहे। ठीक है? यह लोग आपस में एक
52:46दूसरे से बात नहीं कर रहे। सारे लोग इसके
52:50थ्रू ही बात कर रहे हैं। तो इसको हम बोलते
52:53हैं व्हील नेटवर्क। सारे लोग जब एक
52:55बिचोलिय के थ्रू ही बात करते हैं उसको हम
52:58बोलते हैं व्हील नेटवर्क। आपस में कोई
53:00कन्वर्सेशन नहीं हो रही उनके बीच में। तो
53:02इसको हम बोलेंगे व्हील नेटवर्क हाइली
53:04सेंट्रलाइज्ड माना जाता है। क्यों?
53:06क्योंकि सेंट्रल में एक बॉडी बैठी हुई है
53:07जो पूरा देखरेख करती है वही बात करती है।
53:10फिर आ जाता है स्टार नेटवर्क। स्टार
53:12नेटवर्क बोले तो जिसका जिससे बात करने का
53:15मन कर रहा है वो कर सकता है। इसको इससे
53:18बात करनी है। इसको इससे बात करनी है। इसको
53:19इससे बात करनी है। इसको इसके बाद बात करनी
53:20है। इसको इसके इससे ड जिसका जिससे मन करे
53:25उससे बात करो। कोई टेंशन वाली बात नहीं
53:27है। ठीक है? तो जिसका जिससे मन करता है वो
53:29बात कर लेते हैं। नो सेंट्रल पर्सन इज़
53:31इनवॉल्वड। स्टार शेप होता है और यहां पे
53:33फ्री मूवमेंट होती है कम्युनिकेशन की।
53:37देन है कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ़ कम्युनिकेशन
53:39नेटवर्क्स। कम्युनिकेशन नेटवर्क किस
53:41प्रकार का होना चाहिए? हमने टाइप्स पढ़
53:43लिए कम्युनिकेशन नेटवर्क के। कुछ नहीं था।
53:45उसमें बहुत ही सिंपल थे। राइट? मतलब समझना
53:48यहां पे ज्यादा जरूरी है। बहुत ज्यादा
53:50उसमें मत जाना कि मॉड्यूल में इस लाइन का
53:51मतलब क्या है? उस लाइन का मतलब क्या है?
53:53कांसेप्ट समझना क्योंकि केस बेस्ड
53:55क्वेश्चंस आएंगे तो कांसेप्ट से ही आंसर
53:57हो पाएंगे। प्लस ये समझना कि आंसर लिखना
53:59कैसे है? तुम्हारे पास राइटिंग के लिए कुछ
54:00ना कुछ होना चाहिए। तो एग्जांपल्स का
54:02इस्तेमाल करना। ओके? चलिए
54:05कैरेक्टरिस्टिक्स ऑफ़ कम्युनिकेशन नेटवर्क।
54:07कैसा होना चाहिए आपका कम्युनिकेशन
54:08नेटवर्क? ये बोलता है इंफॉर्मेशन शुड बी
54:10क्लियर एंड फ्री फ्रॉम एनी जर्गन। जो
54:13इंफॉर्मेशन आप भेज रहे हैं जो संदेश आप
54:15दूसरे इंसान को भेज रहे हैं वो जर्गन से
54:17मुक्त होना चाहिए। मैम ये जर्गन क्या होते
54:20हैं? तो बेटा देखो हर फील्ड में ना कुछ
54:23वर्ड्स इस्तेमाल किए जाते हैं जो सिर्फ और
54:25सिर्फ उसी फील्ड का इस्तेमाल इंसान समझ
54:27सकता है। ठीक है? जैसे हम लोग कॉमर्स वाले
54:30बैलेंस शीट, एसेट्स, लायबिलिटीज़ ये सब
54:33वर्ड्स इस्तेमाल करते हैं। अब ये साइंस
54:35वाला बंदा समझ पाएगा। ऐसे ही साइंस वाले
54:38आज ही कली क्लास में कोई बच्चा मुझे बोल
54:40रहा था मैम यू आर गोल्ड विदाउट ए है ना तो
54:43अब मेरे को क्लिक ही नहीं किया वो क्या
54:46बोलना चाह रहा है क्योंकि मैंने तो साइंस
54:47पढ़ी नहीं है वो तो अलग बात हुई कि कल कल
54:49मैंने एक रील देखा था किसी टीचर का जिसमें
54:52ये सब बोला गया था और उस टीचर ने
54:54साइंटिफिक फार्मूला बताया था एंड देन उसकी
54:55वजह से गॉट टू नो कि भैया ये मतलब होता
54:58है। ठीक है? तो क्योंकि मैं साइंस
54:59बैकग्राउंड से नहीं हूं तो मुझे वो चीज
55:01नहीं पता। मुझे वो पर्टिकुलर वर्ड नहीं
55:04पता। उसका मतलब नहीं पता। तो जार्गन का
55:06मतलब होता है ऐसे वर्ड्स, ऐसे टेक्निकल
55:09वर्ड्स जो एक पर्टिकुलर फील्ड में
55:10इस्तेमाल किए जाते हैं जो एक पर्टिकुलर
55:13फील्ड में इस्तेमाल किए जाते हैं। ठीक है?
55:15तो आप जर्गंस मत मत इस्तेमाल करो क्योंकि
55:18व्हाट इफ मुझे कोई एक साइंस वाला बच्चा
55:20देख रहा होगा। तो वो कैसे समझेगा कॉमर्स
55:22की लैंग्वेज? नहीं समझ पाएगा ना? एक्टिव
55:25वॉइस शुड बी प्रेफर्ड। दो तरह की वॉइसेस
55:27होती हैं। एक्टिव और पैसिव। पिछले चैप्टर
55:29में पढ़ाया था। तो यही बोलते हैं एक्टिव
55:30वॉइस का ज्यादा इस्तेमाल किया होना चाहिए।
55:34मैसेज शुड बी शॉर्ट एंड इन सिंपल वर्ड्स।
55:36जब तुम किसी को बड़े-बड़े मैसेजेस लिखते
55:38हो, सामने वाला इंसान इरिटेट हो जाता है
55:40कि बोलना क्या चाह रहा है? नॉर्मली बोल
55:42देना। मैं तो आजकल लोगों को बोलती हूं
55:44तुम्हें मुझसे बात करनी है। ऑडियो भेजो।
55:45मैसेज भेजो ही मत। मुझसे इतना पढ़ा ही
55:47नहीं जाता। क्योंकि आंखें बहुत दर्द करने
55:49लग जाती है इतनी देर शूट करने के बाद और
55:51सब कुछ करने के बाद। सो सीधा ऑडियो भेजो।
55:53क्यों? क्योंकि लंबे मैसेजेस इरिटेट कर
55:55देते हैं। दूसरा आपका मैसेज बहुत ही सिंपल
55:57होना चाहिए। ये नहीं कि बहुत ज्यादा दिमाग
55:59लगाना पड़ रहा है डिकोड करने के लिए कि
56:01बोलना क्या चाह रहा है यह इंसान। वैसा भी
56:03नहीं होना चाहिए। जैसे मेरा एक कश्मीरी
56:05दोस्त है। ठीक है? अब वो मुझे मैसेज करता
56:07है ना लिटरली मेरा ना सनक चढ़ जाती है।
56:09मतलब वो अब बहुत प्यार से भी मैसेज करेगा
56:12ना तो मुझे ऐसा लगता है क्या है? तू मुझे
56:13मैसेज मत ही किया कर इससे बढ़िया। क्योंकि
56:15मुझे समझ में ही नहीं आता वो बोलना क्या
56:16चाहता है। उनके कश्मीरी मतलब वो कश्मीरी
56:19लैंग्वेज नहीं बोलता। लेकिन कश्मीर में
56:21हिंदी और इंग्लिश भी थोड़ी डिफरेंट होती
56:23है। तो वो वैसे बोलता है और मैं बिल्कुल
56:25डिकोड नहीं कर पाती कि वो क्या बोलना चाह
56:27रहा है। तो जब मैं बहुत ज्यादा थकी होती
56:28हूं मैं उसके मैसेजेस देखती ही नहीं हूं
56:30क्योंकि उस टाइम मेरा दिमाग उतना काम ही
56:32नहीं करता। इसलिए जब भी आपको चाहिए कि
56:34सामने वाला इंसान किसी भी हालत में हो
56:36आपका मैसेज चेक कर ले, पढ़ ले और समझ ले
56:39उसे उसके लिए जरूरी है। आप सिंपल मैसेज
56:41लिखो। ज्यादा इधर-उधर की बातें
56:43कॉम्प्लेक्सिटी ऐड मत करो। यूज़ बुलेटेड
56:46पॉइंट्स। यहां पे मैंने क्या किया है?
56:47बुलेटेड पॉइंट्स का इस्तेमाल किया है।
56:49लिखने को ये सारी चीजें मैं पैराग्राफ पे
56:52भी लिख सकती थी। लेकिन तुम्हें पढ़ने में
56:53मजा आता? नहीं आता। तो बुलेटेड पॉइंट्स का
56:56इस्तेमाल करो। मैसेज शुड बी एक्सप्लेंड
56:58वेल एंड इनेशन शुड बी कॉनंक्रीट। मैसेज
57:00अच्छे तरीके से एक्सप्लेन करना चाहिए।
57:02प्लस जो इनेशन होनी चाहिए वो कंक्रीट होनी
57:04चाहिए। ऐसे नहीं हवा में बात कर रहे हो और
57:07कोई सर पैर ही नहीं है उसका। फॉल्स इनफेशन
57:09शुड नॉट बी पास्ड। अगर तुम्हारे पास कोई
57:11झूठी खबर है और तुम्हें पता है वो झूठी
57:13खबर है तो उसे आगे पास ऑन मत करो। ठीक है?
57:16ऑर्डर ऑफ मैसेज शुड बी रेलेवेंट। ऑर्डर
57:18मैसेज का रेवेंट होना चाहिए। पहले
57:19इंट्रोडक्टरी सेशन होना चाहिए।
57:20इंट्रोडक्टरी मैसेज होना चाहिए। उसके बाद
57:22थोड़ा एक्सप्लनेटरी होना चाहिए। और लास्ट
57:24में कंक्लूजन होना चाहिए। ये नहीं कि पहले
57:26कंक्लूजन दे दिया फिर उसके बाद
57:28इंट्रोडक्शन दे रहे हो वो नहीं होना
57:29चाहिए। ट्रांसमीटर शुड बी ऑनेस्ट एंड शुड
57:32नॉट ऑल्टर द मीनिंग ऑफ़ मिसेस। देखो बहुत
57:35बार ऐसा होता है दो अलग-अलग लैंग्वेजज़
57:37वाले लोग मिलते हैं। उनको एक दूसरे की
57:38लैंग्वेज समझ में नहीं आती। फॉर से
57:40जापानीज़ है। ये इंडियन है। ना इंडियन को
57:42जापनीज़ लैंग्वेज आती है ना जैपनीज़ को
57:44इंडियन लैंग्वेज आती है। तो ऐसे में
57:45इन्होंने क्या किया? एक एक बंदे को हायर
57:47किया जिसको दोनों लैंग्वेजज़ आती थी। इसको
57:49हम बुलाते हैं ट्रांसमिटर जो बेसिकली एक
57:52लैंग्वेज को दूसरी लैंग्वेज में क्या करता
57:54है? ट्रांसलेट करता है। तो ऐसा बंदा
57:56ऑनेस्ट होना चाहिए। ये नहीं कि जैपनीज़ कुछ
57:58और बोल रहा है लेकिन तुम उसको इंडियन को
58:00कुछ और बता रहे हो। ऐसा नहीं होना चाहिए।
58:02और ऑल्टर बिल्कुल भी मत करो मैसेज को।
58:04मैसेज को अपने अकॉर्डिंग बिल्कुल चेंज मत
58:06करो। लिसनर शुड आल्सो लिसन केयरफुली एंड
58:08क्लेरिफाई इफ देयर आर सम डाउट्स। ये बोलते
58:11हैं कम्युनिकेशन का मतलब सिर्फ ये नहीं
58:12होता कि सुन मतलब बोलते रहो, बोलते रहो।
58:14सुनना भी उसका पार्ट पार्ट होता है। तो
58:16लिसनर को अच्छा लिसनर बनना चाहिए। अच्छे
58:19से सुनना चाहिए सामने वाले की बात और
58:21फोकस्ड रहना चाहिए। इधर-उधर ध्यान डायवर्ट
58:23नहीं करना चाहिए अपना। इमोशन शुड बी
58:25कंट्रोल व्हाइल पासिंग इनफेशन। जब आप
58:27इनेशन पास कर रहे हो तो इमोशंस को कंट्रोल
58:29करो। अब मैं किसी को कोई इनफेशन बता रही
58:31हूं और मैं हंस रही हूं। मैं हंसी जा रही
58:33हूं, हंसी जा रही हूं, हंसी जा रही हूं।
58:34जो कि होता है। बहुत बार हमें ऐसे लोग
58:36मिलते हैं जो कि बात करते हैं तो वो हंसते
58:38रहते हैं और आपको समझ में भी नहीं आता
58:41उन्होंने बात क्या की है। आप भी बस मुंडी
58:43हिला देते हो जबकि आपको बात कुछ पल्ल नहीं
58:44पड़ी होती। तो ऐसा नहीं करना चाहिए। हंसो
58:46मत रो मत जब तुम बात कर रहे हो। जब
58:48तुम्हारी बात खत्म हो जाए उसके जो उसके
58:50बाद जो मर्जी करना है वो कर लो। ठीक है?
58:52तो ये होते हैं कुछ कैरेक्टरिस्टिक्स
58:54किसके? हमारे अच्छे कम्युनिकेशन नेटवर्क
58:57के। नाउ लेट्स टॉक अबाउट डिजिटल
59:00कम्युनिकेशन।
59:02भाई इसका क्या मतलब होता है? बेटा एक बात
59:04बताओ कम्युनिकेशन का मतलब तुम्हें क्लियर
59:07हो गया है? बातचीत करना ऐसे कि सामने वाले
59:10को आपकी बात समझ में आ जाए। राइट? अब
59:13डिजिटल वर्ड का क्या मतलब होता है?
59:15डिजिटलाइजेशन से रिलेटेड। ये जो इंटरनेट
59:18आया है, ये जो टीवी आया है, ये जो का
59:21कैमरा आया है, ये जो मॉनिटर आया है,
59:23सीपीयू आया है, ये सारे क्या हैं? डिजिटल
59:26वर्ल्ड हैं। राइट? तो इन दोनों को अगर हम
59:28कनेक्ट कर देंगे तो वो क्या बन जाएगा?
59:30डिजिटल कम्युनिकेशन बन जाएगा। डिजिटल
59:33टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके जब आप
59:35कम्युनिकेट करते हैं, उसे हम डिजिटल
59:37कम्युनिकेशन बोलते हैं। ठीक है? तो जैसे
59:40आप और मैं कर रहे हैं। मैं इस टाइम क्या
59:43कर रही हूं? मैं आपको पढ़ा रही हूं। ठीक
59:45है? हम किस चीज का इस्तेमाल कर रहे हैं?
59:48इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। पीसी का
59:51इस्तेमाल कर रहे हैं। तुम आईपैड पे मेरा
59:54यह लेक्चर देख रहे हो। तो यह हमारे बीच
59:56में जो वार्तालाप हो रही है, कम्युनिकेशन
59:58हो रही है, किस नेचर की है? डिजिटल नेचर
1:00:00क्या है? क्योंकि टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल
1:00:02करके तुम मेरी बात समझ पा रहे हो। मैं
1:00:05तुम्हें WhatsApp मैसेज भेजती हूं। तो
1:00:06मैंने किससे भेजा? फोन से भेजा। तुम्हें
1:00:08कहां रिसीव हुआ? फोन में रिसीव हुआ। हमने
1:00:11किसका इस्तेमाल किया? इंटरनेट का इस्तेमाल
1:00:13किया। तो ये भी क्या है? एक डिजिटल
1:00:15कम्युनिकेशन है। ठीक है? आ गई बात समझ? तो
1:00:18डिजिटल कम्युनिकेशन का मतलब होता है
1:00:20कम्युनिकेशन जो कि डिजिटल टेक्नोलॉजी के
1:00:24इस्तेमाल से की जाती है। ओके? सो इट सेज़
1:00:28डिजिटल कम्युनिकेशन इज़ एनी टाइप ऑफ़
1:00:30कम्युनिकेशन दैट रिलाईज़ ऑन द यूज़ ऑफ़
1:00:32टेक्नोलॉजी। ऐसी कम्युनिकेशन जो कि
1:00:34टेक्नोलॉजी पे रिलाई करती है। देयर आर
1:00:37मेनी टाइप्स ऑफ़ कम्युनिकेशन एज़ चैनल्स।
1:00:40दीज़ इंक्लूड ईमेल, फोन कॉल्स। वीडियो
1:00:42कॉन्फ्रेंसिंग एग्जांपल दिए हैं इन्होंने।
1:00:45ईमेल एक क्या है? डिजिटल कम्युनिकेशन है।
1:00:46फोन कॉल्स डिजिटल कम्युनिकेशन है। क्योंकि
1:00:48फोन का इस्तेमाल हो रहा है। ठीक है?
1:00:51वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मेनी अदर टाइप्स ऑफ़
1:00:53इंस्टेंट मैसेजेस लाइक एसएमएस, वेब चैट्स,
1:00:55दिस एंड दैट। इवन ब्लॉग्स, पडकास्ट,
1:00:58वीडियोस आर कंसीडर्ड फॉर्म्स ऑफ डिजिटल
1:01:00कम्युनिकेशन। अभी मैं तुम्हें वीडियो के
1:01:02फॉर्मेट में पढ़ा रही हूं। ये भी क्या है?
1:01:04डिजिटल कम्युनिकेशन का हिस्सा है। ओके?
1:01:07अंडरस्टुड? चलिए नाउ लेट्स मूव टू इसके
1:01:10एडवांटेजेस प्लस इसके डिसएडवांटेजेस। ये
1:01:13अगर तुमने नहीं भी पढ़े होंगे ना, तो तुम
1:01:16खुद से भी इनके पॉइंटर्स लिख सकते हो। ये
1:01:18इतने इजी हैं। तुम खुद सोचो एक बार।
1:01:21डिजिटल वर्ल्ड तुम्हारी लाइफ में जब से
1:01:23आया है क्या फायदे हुए हैं और क्या नुकसान
1:01:25हुए हैं तुम्हें सोच के देखो बस वो सेम
1:01:28पॉइंट्स तुम यहां पे लिख सकते हो जैसे कि
1:01:30एडवांटेजेस बताऊं टाइम सेव हो जाता है अब
1:01:33देखो अब देखो अगर ये ये सेटअप नहीं होता
1:01:38तो तुम घर बैठे-बैठे आसानी से बिना टाइम
1:01:41वेस्ट किए क्या पढ़ पाते क्या तुम्हें
1:01:43कोचिंग क्लास नहीं जाना पड़ता जिसको जाने
1:01:45में आने में 10 घंटा 5 घंटा लग जाता है
1:01:48मतलब नॉट 5 घंटा 10 घंटा 10 मिनट 15 मिनट
1:01:50तो लग ही जाते हैं। तो टाइम वेस्ट होता
1:01:52है, एनर्जी वेस्ट होती है। यहां पे
1:01:54तुम्हारे टाइम भी सेव हो जाती है, मनी भी
1:01:56सेव हो जाता है, एफर्ट भी सेव हो जाता है।
1:01:57एक्सपेंसिव भी कम होता है क्योंकि
1:01:59डिजिटलाइजेशन है। इंटरनेट का इस्तहारा
1:02:02लेंगे। मस्त बढ़िया तरीके से अपनी बात
1:02:03सामने वाले को पहुंचा देंगे। सस्ता
1:02:05पड़ेगा। मिलिट्री एप्लीकेशनेशंस में भी
1:02:07इस्तेमाल होता है। मतलब मिलिट्री वाले भी
1:02:08इस चीज का इस्तेमाल करते हैं। करेक्शन ईजी
1:02:11है। मैंने किसी को WhatsApp मैसेज भेजा।
1:02:13गलत भेज दिया था। एडिट करा फटाफट सेव कर
1:02:15दिया। मतलब ठीक कर दिया। मैंने किसी को
1:02:18Instagram पे मैसेज भेजा। मेरे को लगा गलत
1:02:20है। अनसेंड कर दिया। ठीक है? स्ट्रेट
1:02:23फॉरवर्ड। सीधे-सीधे बातचीत होती है यहां
1:02:25पे। मुझे तुमसे बातचीत करनी है। सीधे-सीधे
1:02:27बातचीत हो रही है। पॉसिबिलिटी ऑफ़ क्रॉस
1:02:29टॉक। अ सामने से रिप्लाई आने के चांसेस
1:02:32ज्यादा होते हैं। पॉसिबिलिटी होती है।
1:02:34क्रॉस टॉक का मतलब होता है मैं अगर बात कर
1:02:36रही हूं तो तुम भी सामने से बात कर रहे
1:02:37हो। ठीक है? तो जैसे मैं ये वीडियो डाल
1:02:38रही हूं, मैं तुमसे बात कर रही हूं। तुम
1:02:40कमेंट सेक्शन में अपना आंसर डालोगे या
1:02:42क्वेश्चन डालोगे या जो भी तुम्हें डालना
1:02:43है वो डालोगे। तो हम क्रॉस टॉक कर रहे
1:02:45होंगे। ओके? चलिए इसके डिसएडवांटेजेस क्या
1:02:48हैं? पावर कंसमशन बहुत ज्यादा होता है।
1:02:50तुम मानो जब से मैंने यह स्टूडियो सेटअप
1:02:53अपने घर पर कराया है मेरे बिजली का बिल
1:02:555000 से ज्यादा आने लग गया है। मतलब 5000
1:02:58सिर्फ इसी सेटअप का ही इनक्रीस हुआ है
1:03:00मेरे बिजली के बिल में। ठीक है? तो काफी
1:03:02हाई कंजमशन होता है पावर का। पॉसिबिलिटी
1:03:05ऑफ़ मिसकम्युनिकेशन। कभी-कभी आप बात बोलते
1:03:08हो मतलब अर्थ का अनर्थ हो जाता है। जैसे
1:03:10कई बार मैं अगर मैसेजेस टाइप करके किसी को
1:03:12भेजूं तो उनको लगता है यार इतना रड
1:03:14रिप्लाई जबकि मेरी तरफ से वो बिल्कुल
1:03:16नॉर्मल होता है। मुझे वो बिल्कुल नॉर्मल
1:03:18लगता है। लेकिन सामने वाले को बहुत ही
1:03:20गुस्से वाला रूड वाला लगता है। तो ये ऐसी
1:03:23मिसकम्युनिकेशन फैलने की पॉसिबिलिटी बढ़
1:03:25जाती है। रिक्वायर सिंक्रोनाइज़ेशन।
1:03:27सिंक्रोनाइज़ेशन का मतलब होता है दोनों
1:03:29इंसान सेम समय पे प्रेजेंट होने चाहिए इन
1:03:32ऑर्डर टू कम्यूनिकेट। तो ये बोलते हैं कुछ
1:03:35जरियों में सिंक्रोनाइजेशन जरूरी होते
1:03:37हैं। जैसे मैंने फोन किया। अब मैं फॉर से
1:03:40हमारी एक मैम है दत्ता मैम उनको कॉल कर
1:03:42रही हूं। तो मेरे को भी वहां पे प्रेजेंट
1:03:44होना जरूरी होगा। दत्ता मैडम को भी वहां
1:03:46पे प्रेजेंट होना जरूरी होगा। तभी हमारे
1:03:47बीच में फोन कॉल हो पाएगी। तो कुछ जरियों
1:03:49में आपको क्या करना पड़ता है?
1:03:50सिंक्रोनाइजेशन करवानी पड़ती है। मतलब
1:03:53दोनों लोगों को सेम टाइम पे प्रेजेंट होना
1:03:55पड़ता है। अब है मींस ऑफ कम्युनिकेशन।
1:03:58देखो ये बहुत सिंपल है। ये बहुत इजी है।
1:04:01इनमें कुछ भी नहीं है। ठीक है? जैसे कि
1:04:03पहला ये बोलते हैं सोशल मीडिया। इस्तेमाल
1:04:06करते हो तुम। Facebook इस्तेमाल करते हो।
1:04:08Instagram इस्तेमाल करते हो। नहीं करते
1:04:10दूसरों को डीएम तुम Instagram पे। नहीं
1:04:12करते Facebook पे मैसेजेस। Facebook तो
1:04:14चलो पुराना हो गया। आजकल कोई Facebook
1:04:16ज्यादा इस्तेमाल नहीं करता। लेकिन
1:04:18Instagram पे तो लोगों को डीएम करते होगे?
1:04:20बातचीत करते होगे उनसे। अपने फोटो अपलोड
1:04:22करते हो। दूसरों से लाइक करते हैं। करते
1:04:24हैं कि नहीं करते? तो बस वो सब सोशल
1:04:26मीडिया पे आ जाएगा। Facebook, YouTube,
1:04:27Twitter, Instagram, Lindin यह सारे आपके
1:04:30क्या सोशल कनेक्टिविटी बिल्ड करते हैं।
1:04:33आपको अगर किसी से बातचीत करनी है तो आप इन
1:04:35सब जरिए का सहारा ले सकते हैं। फिर आता है
1:04:38ईमेल मार्केटिंग। अपना मेल खोल के देखना।
1:04:41Gmail। ठीक है? उसमें नंबर ऑफ मैसेजेस
1:04:44तुम्हें ऐसे मिल जाएंगे। नंबर ऑफ मेल्स
1:04:45तुम्हें ऐसे मिल जाएंगे जो कि सिर्फ और
1:04:47सिर्फ प्रोडक्ट बेचना चाह रहे हैं अपना या
1:04:49फिर सर्विसेज बेचना चाह रहे हैं। अगर मैं
1:04:51अभी एट प्रेजेंट अपना फोन खोलूं। वहां पे
1:04:53लगा हुआ है चार्जिंग पे। अगर मैं अपना फोन
1:04:55खोलूं और तुम्हें ईमेल मार्केटिंग मतलब
1:04:58दिखाऊं अपना Gmail खोल के तो भाई 100
1:05:00मैसेजेस आते हैं मेरे पास। 100 मेल्स आते
1:05:02हैं मुझे हर दिन के। कोई बैंक से आ रहा
1:05:04है, कोई किसी और सर्विस से आ रहा है, कोई
1:05:06इंश्योरेंस वालों का आ रहा है। क्या कर
1:05:07रहे हैं? बस अपनी सर्विज बेचने की कोशिश
1:05:09कर रहे हैं। तो इस चीज को हम बोलते हैं
1:05:11ईमेल मार्केटिंग। जब इंसान अपनी सर्विज या
1:05:14गुड्स बेचने की कोशिश करता है, उसको
1:05:16एडवरटाइज करता है यूजिंग ईमेल, यूजिंग
1:05:19Gmail, तो उसे हम बोलते हैं ईमेल
1:05:21मार्केटिंग। ब्लॉग्स। ब्लॉग्स क्या होते
1:05:23हैं? अच्छा बहुत सारे लोगों को लगता है ये
1:05:25वॉग्स हैं। बेटा वॉग्स डिफरेंट होते हैं।
1:05:28जो सौरव जोशी बनाता है वो डिफरेंट चीज
1:05:31होती है। ये ब्लॉग्स हैं। ब्लॉग्स का मतलब
1:05:33होता है वेबसाइट्स पे
1:05:37वेबसाइट्स पे ब्लॉग बनाना मतलब कुछ लिखना।
1:05:41बहुत सारे लोग मतलब ये एक टाइम था जब ये
1:05:44बहुत चलता था। बहुत ज्यादा ही चलता था।
1:05:46ठीक है? उस टाइम पे लोग बाग क्या करते थे?
1:05:48वेबसाइट पे अपना कुछ एक ब्लॉग बना लेते थे
1:05:51जिसमें अपनी चीजें शेयर करते थे। फर से
1:05:53उन्होंने लाइफ में क्या किया है? अपनी
1:05:54पर्सनल बातें, अपनी प्रोफेशनल बातें, ये
1:05:56वो सब कुछ बहुत सारे ऐसे यू नो अच्छे
1:05:59शेफ्स भी थे जो अपनी रेसिपीज शेयर करते थे
1:06:02ब्लॉगिंग के थ्रू। ठीक है? तो ये लिखित
1:06:04में करा गया काम होता है वेबसाइट्स पे।
1:06:06तुम जाके एक बार Google पे सर्च भी करना।
1:06:08कोई बढ़िया सा ब्लॉग उसे पढ़ना एक बार। यू
1:06:10विल गेट टू अंडरस्टैंड कि क्या होता है ये
1:06:12एग्जैक्टली। देन वेबसाइट। वेबसाइट क्या
1:06:14होती है? आज की डेट में कितनी सारी
1:06:16वेबसाइट्स हैं। जो भी कंपनी एकज़िस्टेंस
1:06:18में आती है वो अपनी वेबसाइट तो जरूर बनाती
1:06:20है जिस पे आप उसके बारे में पढ़ सकते हो।
1:06:21उसके चीजों के बारे में पढ़ सकते हो। वहां
1:06:23कौन-कौन सी सर्विज ऑफर हो रही है वो सब
1:06:25पढ़ सकते हो। जैसे तुम पीडब्ल्यू की
1:06:27वेबसाइट खोल के देख लो। वहां पे तुम्हें
1:06:29सब पता चल जाएगा। पीडब्ल्यू क्या कर रहा
1:06:31है? क्यों खुला है? कांटेक्ट करने का
1:06:32जरिया क्या होता है? क्या-क्या वीडियोस
1:06:34हैं? कौन-कौन से सब्जेक्ट्स हम पढ़ा रहे
1:06:36हैं? कौन-कौन से कैटेगरीज में हम डील कर
1:06:39रहे हैं? वो सारी चीजें वहां पे मेंशंड
1:06:40होती हैं। देन है वीडियोस। YouTube
1:06:43वीडियोस हो गई या नॉर्मल वीडियोस हो गए।
1:06:45ये भी क्या है? एक हमारा मींस ऑफ़
1:06:47कम्युनिकेशन है। बात करने का तरीका है
1:06:50डिजिटल फॉर्म में। ठीक है? फिर आता है
1:06:53एक्सटर्नल कंप्लेंट। देखो बहुत सारे ऐसे
1:06:56यू नो जरिए हैं जहां पे अगर हमें कंप्लेंट
1:06:58करनी होती है किसी थर्ड पार्टी की तो वो
1:07:00हमारी मदद करते हैं। जैसे कि ये Google
1:07:03यहां पे हम क्या कर सकते हैं? कंप्लेंट
1:07:05दर्ज कर सकते हैं। रिव्यू दे सकते हैं।
1:07:07जैसे Google पे अगर आप कोई प्लेस विजिट
1:07:09करते हो और आपका वहां पे अच्छा नहीं लगता
1:07:11तो आप Google पे रिव्यु दे सकते हो। उस
1:07:13प्लेस की फोटो डाल दो। नेगेटिव कमेंट लिख
1:07:15दो। स्टार कम दे दो तो वहां से आपका
1:07:17रिव्यू दूसरों तक भी पहुंच जाएगा,
1:07:19ऑर्गेनाइजेशन तक भी पहुंच जाएगा। मैंने
1:07:21बहुत करा है ऐसा। मैं Google की ना अ क्या
1:07:24बोलते हैं इनमें ना मतलब ऐसा होता है कि
1:07:25आप जितनी बार रिव्यु देते हो ना आपके उतने
1:07:28स्टार्स बनते जाते हैं और स्टार्स में
1:07:30उतने ही आपके ये एजेस बनते जाते हैं। मतलब
1:07:32अगर आपने एक बार दिया है, दो बार दिया है
1:07:34तो ऐसा होगा स्टार। फिर आपका स्टार ऐसा हो
1:07:37जाएगा। फिर आपका स्टार 100 हो जाएगा। ठीक
1:07:39है? तो मैं इनकी बहुत ही बढ़िया वाली वो
1:07:41हूं रिव्यूअर। मैं इनको मतलब बहुत अच्छा
1:07:43वाला स्टार मैं पा चुकी हूं ऑलरेडी। ठीक
1:07:45है? फोन कॉल्स। फोन कॉल्स क्या मदद करते
1:07:47हैं? आप डायरेक्टली किसी से फोन पर बात कर
1:07:49लेते हो। कोई कंफ्यूजन ही नहीं होती। आपने
1:07:51अपनी बात करी, उसने आपकी बात करी।
1:07:52कंफ्यूजन दूर करने का मतलब देखो वैसे
1:07:54कभी-कभी हो जाता है कि इन पर्सन अगर हम
1:07:57कंपैरिजन करें कोई इंसान तुम्हारे सामने
1:07:59बैठा हुआ है और तुमसे बात कर रहा है। तो
1:08:01तब मिसकम्युनिकेशन होने की पॉसिबिलिटी
1:08:04थोड़ी कम होती है। तब आपकी बात सामने वाले
1:08:06को ना समझ में आए उसकी पॉसिबिलिटी थोड़ी
1:08:08कम होती है। कंफ्यूजन बढ़ जाए उसकी
1:08:10पॉसिबिलिटी थोड़ी कम होती है। ठीक है?
1:08:12लेकिन जब हम फोन पर बात करते हैं तो थोड़ा
1:08:15बहुत कंफ्यूजन हो सकता है। ठीक है? बट इन
1:08:17कंपैरिजन टू अदर मीडियम्स फिर भी फोन कॉल
1:08:20स्टिल बेटर कंसीडर किया जाता है। ठीक है?
1:08:22फोन पे मैसेजेस कर रहे हो उससे बेटर तो है
1:08:25हमारा यह वाला जिसमें कम कंफ्यूजन होती
1:08:27है। कन्व इनफेशन इससे हम क्या करते हैं?
1:08:29इंफॉर्मेशन कन्व कर देते हैं। सामने वाले
1:08:31इंसान को दे देते हैं। लैक्स नॉनवर्बल
1:08:33क्लूज़। मैं किसी से फोन पे बात कर रही
1:08:35हूं। इट्स नॉट अ वीडियो कॉल। नॉर्मल कॉल
1:08:37है। ठीक है? अब मैं किसी से बात कर रही
1:08:39हूं। अब मैं हाथ हिला भी रही होंगी तो
1:08:41क्या उसको दिख रहे होंगे वहां पे? नहीं
1:08:42दिख रहे होंगे। तो नॉन वर्बल क्लूस इग्नोर
1:08:45हो जाते हैं। लैक करता है ये। फिर आता है
1:08:48इन पर्सन। ये सबसे बेस्ट तरीका है। फेस टू
1:08:51फेस मिल दो सामने वाले से। फेस टू फेस उसे
1:08:53बता दो सारी चीजें। अपने सामने बिठाओ और
1:08:55उसको सारी चीजें बोल दो। उसकी सारी चीजें
1:08:57सुन लो। दैट इज़ द इनपर्सन थिंग। ठीक है?
1:09:00कस्टमर सर्विस। बहुत सारे ऑर्गेनाइजेशन
1:09:02ऐसे हैं जो कस्टमर के यू नो चीजों का बहुत
1:09:04ध्यान रखते हैं। उनको एक्स्ट्रा सर्विज
1:09:06प्रोवाइड करने के पीछे लगे रहते हैं। उनको
1:09:08अपनी तरफ से जो बेस्ट दे सकते हैं वो देने
1:09:10की कोशिश करते हैं। तो वो आ जाता है
1:09:12कस्टमर सर्विज में। अंडरस्टैंड पेन
1:09:14पॉइंट्स ऑफ़ प्रोडक्ट। पेन पॉइंट समझते
1:09:16हैं। प्रोडक्ट में क्या कमी जा रही है वो
1:09:17समझते हैं और उसके बेसिस पे रेक्टिफाई
1:09:19करते हैं अपने प्रोडक्ट को। ओके? तो, यहां
1:09:23पे होते हैं हमारे डिफरेंट-डिफरेंट तरीके
1:09:26खत्म। और शुरू हो रहा है हमारा नेक्स्ट
1:09:29टॉपिक जिसका नाम है लिसनिंग स्किल्स। क्या
1:09:32मतलब होता है इसका? आइए समझ लेते हैं।
1:09:35देखो बेटा बहुत सारे बच्चों को ऐसा लगता
1:09:38है कि कम्युनिकेशन का मतलब होता है बोलना।
1:09:41बट ऐसा नहीं है। कम्युनिकेशन जितना बोलने
1:09:45के बारे में है, उतना ही सुनने के बारे
1:09:47में भी है। लिसनिंग के बारे में भी है। तो
1:09:51जितना कम्युनिकेशन में बोलना इंपॉर्टेंट
1:09:53है, उतना सुनना भी इंपॉर्टेंट है। अच्छा
1:09:56सुनोगे नहीं तो बोलोगे कैसे? सिंपल सी बात
1:10:00है। राइट? लेकिन क्या लिसनिंग स्किल्स में
1:10:03सिर्फ और सिर्फ
1:10:05क्या लिसनिंग स्किल्स में
1:10:08या लिसनिंग में
1:10:12सिर्फ सुनना आता है
1:10:15कि मैं सामने वाले की बात सुन रही हूं।
1:10:18सुन रही हूं। सुन रही हूं। आंसर है नो।
1:10:23अगर कोई इंसान बोल रहा है फॉर से आपकी
1:10:26पायल मैम आपके सामने हैं। ठीक है? मैं
1:10:28आपको लेक्चर पढ़ा रही हूं। ठीक है? आप
1:10:31मेरे सामने बैठे हुए हैं और आप मेरी पूरी
1:10:33बात सुन रहे हैं। लेकिन कहीं ना कहीं आपके
1:10:37ख्याल में चल रहा है वो वेब सीरीज जो आपने
1:10:39कल देखा था या आपके ख्याल में चल रहा है
1:10:41कि उस फ्रेंड ने मेरे साथ लड़ाई कर ली
1:10:43मुझे उस टाइम पे यह बोलना चाहिए था वो
1:10:45बोलना चाहिए था। देन इन दैट सिनेरियो आपका
1:10:47फोकस ही नहीं है मेरे बोलने पे मतलब आपने
1:10:50सुना तो सही लेकिन समझा नहीं तो वो
1:10:54लिसनिंग नहीं कहलाई जाएगी। लिसनिंग का
1:10:58मतलब होता है सुनना प्लस समझना। सामने
1:11:03वाला इंसान जो बोल रहा है वो सुनना प्लस
1:11:07वो क्या बोल रहा है उसे समझना भी लिसनिंग
1:11:10का ही पार्ट होता है। बिना समझे हुए सिर्फ
1:11:13और सिर्फ सुन के आप लिसनिंग नहीं कर सकते
1:11:18हो। तो लिसनिंग का मतलब क्या होता है?
1:11:20सुनना प्लस उसे समझना। ठीक है? लिसनिंग
1:11:24प्लस अंडरस्टैंडिंग व्हाट द अदर पर्सन इज
1:11:27सेइंग। ओके? इंग्लिश में भी बता दिया
1:11:29मैंने आपको। तो पायल मैम अगर क्लास ले रही
1:11:31हैं तो आप सिर्फ सुनेंगे नहीं। वो जो
1:11:33समझाना चाह रही हैं वो समझेंगे भी सही।
1:11:36तभी वो क्या कहलाया जाएगा? लिसनिंग
1:11:38स्किल्स कहलाया जाएगा। एबिलिटी टू
1:11:40एक्यूरेटली रिसीव इनेशन व्हेन
1:11:43कम्युनिकेटिंग विथ द अदर्स। सामने वाला
1:11:45इंसान जो भी इनेशन आप तक प्रोवाइड कर रहा
1:11:48है, उसे अपने अंदर लेना। ठीक है? उसे
1:11:50समझना, दिमाग में डालना उसे हम बोलते हैं
1:11:52लिसनिंग स्किल्स। ठीक है? दिस स्किल विल
1:11:55मेक यू बी अ बेटर लिसनर व्हिच विल हेल्प
1:11:57इन। अगर आप एक अच्छे लिसनर होते हैं तो
1:11:59उससे आपकी कैसे मदद होती है? मतलब एक
1:12:02अच्छा लिसनर क्या-क्या फायदे गेन करता है?
1:12:05तो पहला यह बोलते हैं बिल्डिंग रिलेशनशिप।
1:12:07मेरे दोस्त ने मुझे कॉल किया। ठीक है? वो
1:12:09बहुत रो गा रहा था। उसकी लाइफ में कुछ
1:12:11बहुत मेजर हो गया। वह रो गा रहा था। उस
1:12:14टाइम मैं उसकी सुनूं नहीं। ठीक है? या मैं
1:12:16उसकी समझूं नहीं। तो हमारे बीच का
1:12:18रिलेशनशिप कैसा हो जाएगा? बट वहीं पे
1:12:21मैंने उसकी बात समझी। मैं उसको बोल रही
1:12:23हूं बेटा मैं समझती हूं तेरी बात। ठीक है
1:12:25इट्स ओके। मैं हूं तेरे साथ। तू टेंशन
1:12:27नहीं ले। तो मैंने उसकी बात समझी भी, सुनी
1:12:29भी और समझी भी। और फिर उसको रिवर्ट भी
1:12:32किया। तो इससे क्या होगा? हमारा रिश्ता और
1:12:34मजबूत हो जाएगा कि मुसीबत के समय में और
1:12:36कोई खड़ा था, नहीं खड़ा था। लेकिन यह
1:12:38इंसान मेरे लिए खड़ी थी। तो लिसनिंग से
1:12:41अच्छी लिसनिंग से समझ के सुनने से आपके
1:12:44रिलेशनशिप सामने वाले इंसान के साथ अच्छे
1:12:47होते हैं। मैडम ऑर्गेनाइजेशन में कैसे? तो
1:12:50बेटा बॉस तुम्हें कुछ बोल रहा है। तुम
1:12:51उसकी सुन लो। समझ लो उसकी बात तो उसका और
1:12:54तुम्हारा रिश्ता अच्छा हो जाएगा। तुम्हारा
1:12:57टीम मेंबर तुम्हें कुछ बोल रहा है। उसकी
1:12:58सुन लो। समझ लो तुम्हारा उसके साथ रिश्ता
1:13:01अच्छा हो जाएगा। तो बिल्डिंग रिलेशनशिप
1:13:03मतलब रिलेशनशिप बिल्ड होता है अच्छा सुनने
1:13:06से। ठीक है? फिर आता है लर्निंग न्यू
1:13:08स्किल्स। अगर कोई नई स्किल्स सीखनी है
1:13:10जैसे अभी तुम लोग सीट की पढ़ाई कर रहे हो।
1:13:13बहुत सारे चैप्टर्स तुमने नहीं पड़े। अब
1:13:15मैं वो चैप्टर्स तुम्हें पढ़ा रही हूं।
1:13:17ठीक है? वही तुम मान लो स्किल्स हैं। वो
1:13:19स्किल्स पे बेस्ड कुछ चैप्टर्स हैं। मैं
1:13:20वो तुम्हें पढ़ा रही हूं। तुम सुन ही नहीं
1:13:22रहे तो तुम्हें नई स्किल्स आएंगी? नहीं
1:13:24आएंगी। तुम सीएस की आर्टिकलशिप करने गए
1:13:26हो। वहां पे तुम आर्टिकलशिप कर रहे हो। तो
1:13:29सामने वाला तुम्हारा जो भी प्रिंसिपल
1:13:31इंसान है वो तुम्हें कुछ समझा रहा है। तुम
1:13:33वो सुन ही नहीं रहे हो। तो क्या तुम सीएस
1:13:35की आर्टिकलशिप में नए स्किल्स सीख पाओगे?
1:13:37नहीं सीख पाओगे। कोई तुम्हें कैनवा सिखाना
1:13:39चाह रहा है। तुम सुन ही नहीं रहे हो। क्या
1:13:41तुम कैनवा चलाना सीख पाओगे? नहीं सीख
1:13:43पाओगे। तो अगर आपको नई स्किल्स सीखनी है,
1:13:46न्यू स्किल्स सीखनी है तो उसके लिए भी
1:13:48आपको सुनना जरूरी है। लाइफ में अगर कुछ भी
1:13:51नया सीखना चाहते हो तो उसके लिए पहले
1:13:53सुनना पड़ेगा। अंडरस्टुड? तो, यह है हमारा
1:13:57लिसनिंग स्किल्स। इसके बाद यह बोलते हैं
1:14:00टाइप्स ऑफ लिसनिंग स्किल्स। चार तरह की
1:14:02लिसनिंग होती है। ठीक है? वन बाय वन
1:14:04समझेंगे। पहली होती है डीप लिसनिंग। ठीक
1:14:08है? मतलब खो जाना सामने वाले की बात में।
1:14:12इसको मैं कैसे बोलती हूं? खो जाना।
1:14:17सामने वाले की बात में।
1:14:26सामने वाले की बात में बिल्कुल खो जाना।
1:14:29वो जो बोल रहा है वह तो तुम सुन ही रहे
1:14:32हो। लेकिन वो जो हैंड जेस्चर्स कर रहा है
1:14:35उस पर भी तुम्हारी निगाह है। ठीक है? अगर
1:14:37मान लीजिए आप एक इंसान से बात कर रहे हैं।
1:14:40ठीक है? वो जो बोल रहा है आप सुन रहे हैं।
1:14:43सुन रहे हैं, सुन रहे हैं। ठीक है? लेकिन
1:14:45एट द सेम टाइम वो बीच में फोन उठा रहा है।
1:14:48फोन पे कुछ चेक कर रहा है। तो आप वो भी
1:14:50नोटिस कर रहे हैं। बीच में उसके
1:14:52एक्सप्रेशन ऐसे हो रहे हैं। तो आप वो भी
1:14:54नोटिस कर रहे हैं। बीच में वो यूं कर रहा
1:14:56है। तो आप वो भी नोटिस कर रहे हैं। मैंने
1:14:59यहां पे एक्सप्रेशन चेंज किए। बाय द वे
1:15:00अगर आपको नहीं पता चला होगा तो आई एम अ
1:15:02वेरी बैड एक्टर लेकिन आप समझ जाइए कि बीच
1:15:04में अगर उसके एक्सप्रेशनंस चेंज हो रहे
1:15:06हैं वो मुंह से कुछ नहीं बोल रहा लेकिन
1:15:08उसके हावभाव बदल रहे हैं वो हाथ पैर से
1:15:10बोल रहा है देन इन दैट सिनेरियो अगर आप इन
1:15:12सारी चीजों पे फोकस करते हैं और अच्छे से
1:15:15सारी बात समझते हैं मुंह से बोली हुई भी
1:15:18मुंह से नहीं बोली हुई भी तो आप कहलाए
1:15:20जाएंगे कि आपने की है डीप लिसनिंग मतलब
1:15:23गहराइयों में खो के आपने सुना है सामने
1:15:26वाले इंसान को क्या समझे बेटा समझ गए है
1:15:30ना? चलो फुल लिसनिंग का मतलब होता है
1:15:33सामने वाला जो इंसान आपको बात बताना चाह
1:15:35रहा था, प्रैक्टिकल कंटेंट समझाना चाह रहा
1:15:37था स्पीच का वो आपने फुल्ली कॉम्प्रिहेंड
1:15:40किया है। मैडम कॉम्प्रिहेंड का क्या मतलब
1:15:42होता है? मतलब समझना। सामने वाला तुम्हें
1:15:45क्या समझाना चाह रहा है? तुमने अच्छे
1:15:46तरीके से उसका प्रैक्टिकल एस्पेक्ट समझा
1:15:48है। सामने वाले का जो भी मैसेज था वो
1:15:50तुमने अच्छे तरीके से फुल्ली तरीके से समझ
1:15:53लिया है। ठीक है? यहां पे वर्बल नॉनवर्बल
1:15:55पे फोकस नहीं करते। यहां पे आप सिर्फ
1:15:57सामने वाले की बोली पे फोकस करते हो। फिर
1:15:59आता है क्रिटिकल लिसनिंग। अब भाई कुछ लोग
1:16:02होते हैं जो सिर्फ बात नहीं करते। वो बात
1:16:05में लगाते हैं मिर्च मसाला। राइट? होते
1:16:08हैं ना? हम सबके अराउंड होते हैं थोड़े
1:16:09बहुत ऐसे लोग। ठीक है? एक बार क्लास में
1:16:11बोल देते हैं मैडम आप ही ऐसी हो। पता नहीं
1:16:14मैंने तो ऐसा कब किया। मिर्च मसाला लगा के
1:16:16बताया। ठीक है? बट थोड़ा ड्रामा तो ऐड
1:16:18करना ही पड़ता है ना। तो वो थोड़ा ड्रामा
1:16:20ऐड करते हैं जो लोग उनकी जब आप बात सुनते
1:16:23हैं तो आपको फोकस करना चाहिए मेन कंटेंट
1:16:25पे। ठीक है? आपको पता होना चाहिए जब सामने
1:16:28वाला इंसान कोई बात बोल रहा है तो उसमें
1:16:30कितनी सच्ची बात है और कितना मिर्च मसाला
1:16:32है। आपको वो चीज क्लियर होनी चाहिए। अगर
1:16:36वो क्लेरिटी नहीं है तो आप क्रिटिकल
1:16:37लिसनिंग नहीं कर रहे हो। क्रिटिकल लिसनिंग
1:16:39का क्या मतलब है? सामने वाला इंसान जब कुछ
1:16:42बता रहा है तो वो अपनी बात में कुछ तो
1:16:44फैक्ट्स बताएगा। मतलब जो सच्चाई होगी, जो
1:16:47सच सच्ची घटना होगी वो बताएगा। लेकिन उसके
1:16:51साथ-साथ कभी-कभी वो ऊपर से कुछ-कुछ चीजें
1:16:53ऐड भी करता है मसाला ऐड करने के लिए। ठीक
1:16:55है? कुछ-कुछ चीजें ऐसी भी बताता है जो
1:16:57उसके पर्सनल ओपिनियन होते हैं। तो ऐसे में
1:17:00आपको उसको अलग करना है। फॉर एग्जांपल, मैं
1:17:02एग्जांपल से समझा देती हूं। पड़ोस की एक
1:17:04आंटी थी। ठीक है? अब उन्होंने देखा कि
1:17:07सामने वाले घर की जो लड़की है वो रात को
1:17:092:00 बजे लेट नाइट आई है घर पे वापस। ठीक
1:17:12है? तो 2:00 बजे वो आई है। दैट इज अ फैक्ट
1:17:15कि वो 2:00 बजे आई थी। लेकिन वो तो
1:17:18छोटे-छोटे कपड़े पहने हुई थी। वो तो
1:17:21हावभाव से ही मुझे ऐसी सी लगती है। मुझे
1:17:24तो वो ठीक कैरेक्टर की नहीं लगती है। ये
1:17:26सब चीजें क्या है? वो उन आंटी का ओपिनियन
1:17:29है। वो 2:00 बजे घर आई। दैट इज अ फैक्ट।
1:17:31लेकिन तुमने उन्हें जज कर लिया। तुम जज कर
1:17:34लिया। तुमने उस लड़की के लिए ओपिनियंस
1:17:37अपने माइंड में फॉर्म कर लिए। तो अब जो
1:17:38आंटी तुमसे बात कर रही हैं तो आप उनकी बस
1:17:41इसी चीज पे फोकस करोगे कि वो लड़की 2:00
1:17:43बजे घर आई थी क्योंकि वो फैक्ट है वो
1:17:45सच्ची बात है। लेकिन उसके अलावा जितना भी
1:17:47आंटी ने अपनी तरफ से ऐड ऑन किया है ना
1:17:49उसको तुम सेग्रगेट कर दोगे अलग कर दोगे।
1:17:51ये होता है क्रिटिकल लिसनिंग। मतलब आपको
1:17:53पता होना चाहिए सामने वाला इंसान कितनी
1:17:55सच्ची बात बोल रहा है कितना मिलावटी सामान
1:17:57आपको सप्लाई कर रहा है। ठीक है? देन है
1:18:00थेरेपटिक। थेरेपटिक का मतलब क्या होता है?
1:18:02जो आपको आराम दे। ठीक है? आज की दुनिया
1:18:05में हम सब जानते हैं बोलने के लिए लोगों
1:18:08के पास बहुत कुछ है। लेकिन सुनने के लिए
1:18:11किसी के पास टाइम ही नहीं है। मानते हो कि
1:18:14नहीं मानते हो? मतलब रैंडमली आई सी पीपल
1:18:16जिनके पास इतनी इतनी कहानियां होती हैं।
1:18:19इतना कुछ शेयर करने के लिए होता है। इतनी
1:18:21फीलिंग्स होती हैं। बट सुनने के लिए कोई
1:18:23इंसान नहीं होता। तो ऐसे में वो इंसान
1:18:25कहां जाता है? वो जाता है काउंसलर्स के
1:18:27पास जो कि पेमेंट लेके उनकी बातें सुनते
1:18:29हैं। उनको यह एहसास दिलाते हैं कि कोई बात
1:18:32नहीं जो तुम्हारे साथ हो रहा है वो
1:18:33बिल्कुल नॉर्मल है। तो आप क्या कर रहे हो?
1:18:35सामने वाले इंसान को थोड़ा सा यू नो काम
1:18:38डाउन कर रहे हो। तो इस नेचर की जो लिसनिंग
1:18:41होती है ना उसको हम बोलते हैं थेरेपटिक।
1:18:43थेरेपटिक का मतलब होता है कि आप सामने
1:18:46वाले को एहसास दिला रहे हो कि कोई
1:18:49तुम्हारा सुनने वाला है। हम तुम्हारी बात
1:18:51सुन रहे हैं। हम तुम्हें समझ रहे हैं।
1:18:53यूजुअली काउंसलर्स एंड डॉक्टर्स।
1:18:54काउंसलर्स एंड डॉक्टर्स ऐसा काम करते हैं।
1:18:57ठीक है? तो इसको हम बोलते हैं थेरेपटिक।
1:19:00ठीक है? जो आराम दे, जो चैन दे। ये चार
1:19:03टाइप्स की होती हैं आपके लिसनिंग
1:19:06स्किल्स।
1:19:09इसके बाद आता है हाउ टू प्रैक्टिस
1:19:12इफेक्टिव लिसनिंग स्किल्स। हम अच्छे
1:19:14लिसनिंग स्किल्स कैसे अपने अंदर डाल सकते
1:19:16हैं? तो सबसे पहले वो बोलते हैं लिमिट
1:19:17डिस्ट्रैक्शंस। अगर कोई इंसान आपसे बात कर
1:19:20रहा है, तो फोन मत यूज़ करिए। मेरे एक
1:19:22फ्रेंड है कॉमर्स वाला पे। ठीक है नेहा
1:19:25मैडम अब लास्ट टाइम व्हेन वी मेट हमने
1:19:27बहुत टाइम स्पेंड किया साथ में तो अब
1:19:29हमारी दोस्ती बहुत अच्छी हो गई है तो शी
1:19:31वास लाइक पायल मैडम एक बात बोलूं मैं आपको
1:19:34आप ना वैसे बड़ी बदतमीज हो आप क्या करती
1:19:37हो सामने वाला इंसान बोल रहा होता है आप
1:19:38फोन पे लगी होती हो और लिटरली मेरी ऐसी
1:19:41आदत है मैं ऐसा करती हूं तो यहां पे सामने
1:19:43वाला इंसान को क्या लगता है कि लिसनिंग
1:19:45स्किल्स इसकी पुअर है क्योंकि ये फोन पे
1:19:47लगी हुई है वो उनको नहीं पता कि मैं
1:19:48मल्टीटलेंटेड हूं मतलब नहीं मल्टीटलेंटेड
1:19:51बोलते हैं उसे ये क्या बोलते हैं मतलब मैं
1:19:54दो काम साथ में कर सकती हूं। ठीक है? तो
1:19:56मैं सुन भी लेती हूं उनकी बात और साथ में
1:19:57फोन पे भी लगी रहती हूं। लेकिन देखने में
1:19:59उनको ऐसा लगता है कि मैं उनकी बात अच्छे
1:20:01से नहीं सुन रही हूं। तो ये चीज नहीं होनी
1:20:03चाहिए। ये जो डिस्ट्रैक्शन होता है ना कि
1:20:04कोई बात कर रहा है तुम फोन पे लगे हो। ये
1:20:06नहीं होना चाहिए। साइड रख देना चाहिए। ठीक
1:20:08है? अब तुम बोलोगे मैडम हमें पढ़ा रही हो
1:20:10लेकिन खुद ऐसा करती हो तो बेटा अब मैं ऐसा
1:20:11नहीं करती जब से उन्होंने टोका है मुझे।
1:20:13ठीक है? गिव योर फुल अटेंशन। सामने वाले
1:20:15को अपनी पूरी अटेंशन दो। ठीक है? कभी-कभी
1:20:18मुश्किल हो जाता है बट ठीक है। क्लेरिफाई।
1:20:20जब भी तुम्हें लग रहा है सामने वाला कोई
1:20:22बात बोल रहा है तुम्हें समझ में नहीं आई
1:20:23क्लेरिफाई करो तुम यही बोलना चाह रहे हो
1:20:25ना तुम यही बोल रहे थे ना यही मीन कर रहे
1:20:26थे ना तुम इसके बारे में ही बात कर रहे थे
1:20:28ना उसके बारे में ही बात कर रहे थे
1:20:29क्लेरिफाई करो आस्क मीनिंगफुल क्वेश्चन
1:20:33आस्क मीनिंगफुल क्वेश्चन नहीं आस्क
1:20:35मीनिंगफुल क्वेश्चन मतलब काम के क्वेश्चन
1:20:37पूछो सामने वाले इंसान से अब कई बार क्या
1:20:40होता है तुम बच्चे कैसे क्वेश्चंस पूछते
1:20:41हो तुम्हें बताया जाए कंपनीज़ एक्ट में ये
1:20:43ये लिखा हुआ है तो तुम बच्चे पूछते हो मैम
1:20:46क्यों लिखा हुआ है ऐसा अब ये काम का
1:20:49क्वेश्चन हुआ मैंने बनाया है कंपनीज़ एक्ट।
1:20:51हैं? तुम मुझसे क्यों पूछ रहे हो?
1:20:53जिन्होंने बनाया है उनसे जाके पूछो। तो
1:20:55काम के क्वेश्चन पूछो बेटा। लिसनिंग के
1:20:57टाइम पे ऐसे क्वेश्चन पूछो जिनका मीनिंग
1:20:59बनता हो। जिनका कोई मतलब बनता हो। फिजूल
1:21:02की बातें मत करो। फिजूल के क्वेश्चन मत
1:21:04पूछो। समराइज जब सामने वाला इंसान अपनी
1:21:07बात बोल के खत्म हो जाता है। मतलब चुप हो
1:21:09जाता है। ठीक है? तो उस टाइम पे उसे पूरा
1:21:11रिपीट करके बताओ। लेकिन क्रिस्प में कि
1:21:14तुमने यही बोला ना तुम वहां गई थी, फिर
1:21:15ऐसा हुआ था, फिर यह हुआ था, फिर वो हुआ
1:21:17था। समराइज वे में जैसे पूरा चैप्टर पढ़ने
1:21:19के बाद हम समरी पढ़ते हैं ना बिल्कुल वैसे
1:21:21देन आता है रिकॉल प्रीवियस इनेशन अब कई
1:21:24बार दोस्त क्या बोलता है यार वो दिव्या के
1:21:26बारे में तुझे बताया था ना कौन दिव्या
1:21:28पुरानी कॉन्वर्सेशन याद करो जब तुम्हारे
1:21:30दोस्त ने दिव्या के बारे में तुम्हें
1:21:31बताया होगा तो ये ये भी आपको करना चाहिए
1:21:34अच्छा लिसनर होने के लिए क्योंकि बार-बार
1:21:36सामने वाले से रिपीट कराओगे वो भी सही
1:21:38नहीं लगता यूज़ बॉडी लैंग्वेज बॉडी
1:21:40लैंग्वेज का इस्तेमाल भी करो प्लस स्टडी
1:21:43भी करो सामने वाले की बॉडी लैंग्वेज जैसे
1:21:45अगर मान लो तुम किसी को कोई बात बता रहे
1:21:47हो। ठीक है? अब वो इधर-उधर देख रहा है। वो
1:21:49ऐसे कर रहा है। ऐसे
1:21:52वो मतलब तुम्हारे सामने खड़ा हुआ है। ठीक
1:21:54है? लेकिन वो ऐसे कर रहा है। तो यहां से
1:21:56तुम्हें समझ आ जाना चाहिए। सामने वाला
1:21:57तुम्हारी बात में इंटरेस्टेड नहीं है। तो
1:22:00जब भी तुम्हें लगे कि तुम इंटरेस्टेड नहीं
1:22:02हो। सामने वाले की बात में ऐसे रिएक्शन दे
1:22:04दो। वो समझ जाएगा कि भाई ये मेरी बात में
1:22:06इंटरेस्टेड नहीं है। मुझे चुप हो जाना
1:22:07चाहिए। अगर वो समझदार इंसान हुआ तो जो कि
1:22:09बहुत ही कम होते हैं। चलो तो ये हैं कुछ
1:22:13प्रैक्टिकल। देखो ऐसे ना इन सब में ना कुछ
1:22:15भी ऐसी चीज नहीं है जो तुम खुद से नहीं
1:22:17लिख सकते। तुम्हें खुद भी पता है कि तुम
1:22:19अच्छी लिसनिंग स्किल्स कैसे कर सकते हो।
1:22:21डिस्ट्रैक्शंस हटा दो। सामने वाले की बात
1:22:22सुनो। जब भी क्वेश्चन लग रहा है वो पूछ लो
1:22:24उससे। तो जरूरी नहीं है तुम्हें बुक वाले
1:22:26पॉइंट ही कॉपी करके लिखने हैं अपने पेपर
1:22:28में। तुम अपने से भी पॉइंट्स बना सकते हो।
1:22:30ओके? चलो आ जाओ नेक्स्ट। बैरियर्स एंड
1:22:33इफेक्टिव लिसनिंग। ये बोलते हैं कुछ
1:22:36अड़चनें आती हैं। अच्छा सुनने में। ठीक है?
1:22:39मतलब बैरियर्स का मतलब होता है कुछ
1:22:41रुकावटें। कुछ अड़चनें आती हैं। जैसे मुझे
1:22:43जाना है फॉर से एक सड़क पे। ठीक है? बट बीच
1:22:45में पत्थर पड़ा हुआ है या फिर एक पेड़ गिरा
1:22:47हुआ है। तो वो क्या कहलाया जाएगा? वो
1:22:49बैरियर कहलाया जाएगा। वो अड़चन है जिसकी
1:22:51वजह से मैं रोड क्रॉस नहीं कर पा रही हूं।
1:22:53ठीक है? तो ये बोलते हैं लिसनिंग।
1:22:55इफेक्टिव लिसनिंग में भी बहुत सारे
1:22:57बैरियर्स होते हैं। जैसे कि पहला है
1:22:59फिजिकल बैरियर।
1:23:01फिजिकल बैरियर क्या बोलता है? ऐसा मानो
1:23:05तुम बैठे हो। ठीक है? तुम क्या बैठे हो?
1:23:08मैं अपना ही एग्जांपल दे देती हूं।
1:23:11अब आपकी जो पायल मैडम है ना वह भोपाल में
1:23:14रहती हैं। ओके। और भोपाल में कहां रहती
1:23:17हूं मैं? एड्रेस नहीं बताऊंगी। बस यह बता
1:23:20देती हूं कि मैं स्टेशन के पास रहती हूं।
1:23:23मतलब इतना पास कि मेरी कॉलोनी खत्म होती
1:23:26है और आगे रेलवे ट्रैक्स हैं। ठीक है? अब
1:23:30हमें तो आदत हो चुकी है उस चीज की। हमें
1:23:32तो दिनरा रेलवे की आवाें हॉर्न सुनाई देता
1:23:35है क्योंकि हमारे पास ही स्टेशन है तो
1:23:37रुकती हैं गाड़ियां हॉर्न बजाती हैं।
1:23:39लेकिन जब हम किसी से फोन पे बात कर रहे
1:23:41होते हैं तो बहुत बार ऐसा होता है बैक टू
1:23:43बैक बैक टू बैक बैक टू बैक रेलवे की आवाज
1:23:46आ रही होती है। हॉर्न की आवाज आ रही होती
1:23:48है। तो सामने वाला इंसान हमारी बात सुन ही
1:23:50नहीं पाता। तो ये क्या है? यह एक किस्म का
1:23:53फिजिकल बैरियर है। मतलब आपने बात करने की
1:23:57कोशिश करी लेकिन फिजिकली किसी चीज ने आकर
1:23:59आपको रिस्ट्रिक्ट कर दिया। आपके एक रुकावट
1:24:03डाल दी उसे हम बोलते हैं फिजिकल बैरियर।
1:24:06ठीक है? जैसे कि नॉइज़, डिस्टेंस,
1:24:09ऑब्स्ट्रक्शन एक्सट्रा। ठीक है? तो जब भी
1:24:12ये सारी चीजें आपको सामने वाले की बात
1:24:14सुनने से रोके तो उसे हम बोलते हैं फिजिकल
1:24:16बैरियर्स। सेकंड आता है इमोशनल बैरियर।
1:24:20तुमने कभी अपने मां-बाप को बोलते हुए सुना
1:24:22है? जैसे मान लो तुम बहुत ज्यादा गुस्से
1:24:24में हो और कोई इंसान तुम्हें समझाने की
1:24:26कोशिश कर रहा है। तो वो ऐसे बोलते हैं अभी
1:24:27मत समझा इसको। यह बहुत गुस्से में है।
1:24:29मेरे साथ बहुत होता है ऐसा क्योंकि मैं
1:24:31गुस्सा बहुत करती हूं घर पे अपने। ठीक है?
1:24:33बहुत टैंड्रम्स दिखाती हूं मैं अपने घर
1:24:35पे। छोटी हूं मैं सबसे तो सबके ऊपर राज
1:24:38करती हूं काइंड ऑफ। है ना? तो जब भी
1:24:41गुस्सा आएगा चिल्ला दूंगी। अब मैं उस टाइम
1:24:43पे खुद माइंड से इतनी वो होती हूं कि
1:24:45सामने वाला मुझे अगर समझाने की कोशिश करता
1:24:47है तो मैं उस टाइम पे पॉइंट उसका पॉइंट
1:24:48नहीं समझ पाती। क्योंकि उस टाइम पे गुस्सा
1:24:50हावी हुआ होता है। ठीक है? तो जब आपके ऊपर
1:24:53गुस्सा हावी हुआ होता है या आपका रोने का
1:24:56मन कर रहा होता है या आप बहुत ही ज्यादा
1:24:58एक्सट्रीमली खुश होते हो कि कुछ समझ ही ना
1:25:00पाओ तो ऐसे सब सिनेरियो में आप सामने वाले
1:25:02की बात अच्छे से नहीं सुनते हो और इस नेचर
1:25:05के बैरियर को हम बोलते हैं इमोशनल बैरियर
1:25:08जब आपके इमोशंस इतने ओवरपावरिंग हो जाए
1:25:11इतने ऊपर पहुंच जाए कि आप सामने वाले की
1:25:13बात सुन ही नहीं पाओ तो उसे हम बोलते हैं
1:25:15इमोशनल बैरियर्स अंडरस्टुड
1:25:18चलिए इसके बाद आ जाता है हमारा इसके बाद आ
1:25:22जाता होता है हमारा साइकोलॉजिकल बैरियर्स।
1:25:25अगेन मैंने तुम्हें एक एग्जांपल दिया। मैं
1:25:27तुम्हें पढ़ा रही हूं लेकिन तुम्हारे
1:25:29दिमाग में चल रहा है। कुछ-कुछ और कोई कोई
1:25:32और तो ऐसे सिनेरियो में ये कहलाया जाता है
1:25:35साइकोलॉजिकल बैरियर। जब इंसान के दिमाग
1:25:38में कोई और थॉट्स चल रहे होते हैं। ठीक
1:25:41है? जब इंसान के दिमाग में कुछ और थॉट्स
1:25:44चल रहे होते हैं और वह कन्वर्सेशन सुन
1:25:47नहीं पाता, तो उसे हम बोलते हैं
1:25:49साइकोलॉजिकल बैरियर्स। जैसे कि मैं बोलूं
1:25:52मैं पढ़ा रही हूं। तुम्हें एक जगह डाउट
1:25:54आया। ठीक है? तुमने मुझसे बोला मैडम डाउट
1:25:56है। मैंने बोला बेटा 2 मिनट वेट कर ले।
1:25:59मैं ये ये वाला टॉपिक कंप्लीट कर लूं।
1:26:01उसके बाद मैं डाउट ले लूंगी। तुम उस टॉपिक
1:26:04को उस पॉइंट के बाद सुनोगे ही नहीं।
1:26:06क्योंकि तुम्हारे दिमाग में डाउट डाउट
1:26:08डाउट डाउट क्लिक कर रहा होगा। तुम सुन ही
1:26:10नहीं पाओगे उस टॉपिक को अच्छे तरीके से।
1:26:12क्योंकि तुम्हारा डाउट ओवरपावरिंग हो रहा
1:26:14है। वो थॉट तुम्हारे दिमाग में ओवरपावरिंग
1:26:16हो रहा है। ठीक है? तो उसको हम बोलते हैं
1:26:17साइकोलॉजिकल बैरियर। तुम्हारे दिमाग में
1:26:20थॉट्स अलग चल रहे हैं। ठीक है? नेक्स्ट है
1:26:23कल्चरल बैरियर। देखो तुम यह सब मतलब सभी
1:26:27जानते होंगे इंडिया में कितने सारे
1:26:28कल्चरर्स हैं। इंडिया में छोड़ो वर्ल्ड
1:26:30में कितने सारे कल्चरर्स हैं। एक कल्चर का
1:26:33इंसान जब दूसरे कल्चर के इंसान से बातचीत
1:26:35करता है तो उसमें कई बार आपको ऐसा लगता है
1:26:38यार ये चीज तेरे यहां पे नॉर्मल है। यार
1:26:40ये चीज तेरे यहां पे नॉर्मल है। जैसे एक
1:26:42एग्जांपल दूं मैं तुम्हें हम पंजाबियों
1:26:44में ना हम हमारे घर की लड़कियों को
1:26:48स्पेशली जो अनमैरिड होती हैं। पैर नहीं
1:26:50छूने देते किसी के भी। किसी भी बड़े के वो
1:26:52पैर नहीं छूती। जैसे मेरे घर में मैंने आज
1:26:54तक कभी किसी के पैर नहीं छुए। चाहे वो
1:26:56मेरे चाचा हो, ताऊ हो, यू नो बड़ी मम्मी
1:26:58हो, कोई भी हो। क्योंकि हमारे यहां पे
1:27:01माना जाता है बेटियां लक्ष्मी का रूप होती
1:27:03हैं और लक्ष्मियों से पैर नहीं छुवाते।
1:27:04ओके? लेकिन वहीं पे मेरी मॉम एक बार मेरी
1:27:07बहन के हॉस्टल में गई थी और वहां पे वेस्ट
1:27:10बंगाल से बहुत सारी लड़कियां थी। ठीक है?
1:27:12बंगाली लड़कियां थी। अब बंगालीज में शायद
1:27:14यह कल्चर होता है कि वह पैर छूते हैं। तो,
1:27:17वह सारी लड़कियां आके मम्मी के पैर छू रही
1:27:19एंड मम्मी के लिए इट वाज़ अरे बेटियां पैर
1:27:21नहीं छूती। बेटियां पैर नहीं छूती। एंड दे
1:27:23वर लाइक नहीं आंटी हमारे यहां तो छूती
1:27:25हैं। हमें आपका आशीर्वाद चाहिए। तो ये
1:27:27क्या है? ये एक कल्चरल डिफरेंस है। ठीक
1:27:29है? अगर इसकी वजह से कोई बैरियर उत्पन्न
1:27:32होता है सुनने में तो वो क्या कहलाया जाता
1:27:35है? कल्चरल बैरियर कहलाया जाता है। जब दो
1:27:38लोगों के कल्चरर्स डिफरेंट होते हैं। उसकी
1:27:41वजह से सुनने में अगर कोई रुकावट आती है
1:27:44तो उसे हम बोलते हैं कल्चरल बैरियर।
1:27:46अंडरस्टुड?
1:27:48फिर आता है लैंग्वेज बैरियर। मैं बोलती
1:27:51हूं फर से पंजाबी।
1:27:54ठीक है? मैं बोलती हूं फर से पंजाबी। ठीक
1:27:58है? एक इंसान है फसे वो बोलता है
1:28:03अ क्या बोलेगा वो? तमिल। ठीक है? मेरे को
1:28:07तमिल नहीं समझ में आती। उसको पंजाबी नहीं
1:28:10समझ में आती। हम दोनों को इंग्लिश हिंदी
1:28:12कुछ भी नहीं आती। ऐसे मान लीजिए। तो ऐसे
1:28:15में हम एक दूसरे की बात समझ पाएंगे। आंसर
1:28:18है नहीं समझ पाएंगे। क्यों नहीं समझ
1:28:21पाएंगे? क्योंकि हम दोनों की लैंग्वेज
1:28:23डिफरेंट हैं। हम दोनों अलग-अलग लैंग्वेज
1:28:26बोलते हैं, समझते हैं। दैट्स व्हाई हम एक
1:28:28दूसरे की बात नहीं समझ पाएंगे। इसे हम
1:28:30बोलते हैं लैंग्वेज बैरियर। जब भाषा
1:28:34रुकावट बन जाए सामने वाले की बात समझने के
1:28:36लिए उसे हम बोलते हैं लैंग्वेज बैरियर।
1:28:39फिर आता है टाइम प्रेशर। टाइम प्रेशर क्या
1:28:42होता है?
1:28:44देखो मेरे को ना अपने स्कूल के डेज याद
1:28:46आते हैं। मैं ना मैं मेरे को ना नींद बड़ी
1:28:48प्यारी है। मेरे को मतलब बहुत ही ज्यादा
1:28:50प्यारी है। नींद त्याग करके कोई भी काम
1:28:53करना पड़े जीवन में मुझे ऐसा लगता है छोड़
1:28:54दो इस काम को। नींद ले लो अपनी पूरी। मेरे
1:28:57साथ स्कूल में भी यही होता था। ठीक है?
1:29:00हमारा स्कूल का ऑलमोस्ट टाइम होता था 6:45
1:29:02समटाइ्स 7 मतलब इतने पे आपको स्टे मतलब
1:29:06स्टैंड पे पहुंचना है बस स्टैंड पे। ठीक
1:29:08है? तो मैं बिल्कुल ऐसे 6:15 पे 6:30 पे
1:29:12उठूंगी। फटफट नहाऊंगी, धोऊंगी और फिर
1:29:14तैयार हो के जाऊंगी। उस टाइम पे मेरे दादा
1:29:16जी की आदत थी। उनको बड़ा तेजी से ना ज्ञान
1:29:19आता था उस टाइम पे बांटने के लिए। ठीक है?
1:29:23एंड अगर आपके दादाजी अलाइव हैं तो अगर वो
1:29:26आपको ज्ञान देते हैं तो सुन लिया कीजिए।
1:29:28क्योंकि आई रियली मिस माय दादू। उनका
1:29:30ज्ञान जो वो हर रोज मुझे कुछ ना कुछ नई
1:29:32कांसेप्ट्स पढ़ाते थे। उस टाइम मुझे ऐसा
1:29:34लगता था अरे दादू अभी जाने दो ना यार मेरे
1:29:36पास टाइम नहीं है। लेकिन अब मुझे ऐसा लगता
1:29:37है कि यार आई एक्चुअली मिस हिम। मुझे उनका
1:29:40वो ज्ञान याद आता है। ठीक है? तो अगर आपके
1:29:42दादू अभी हैं या दादी अभी हैं मेक श्योर
1:29:44करें कि आप उनके साथ मैक्सिमम टाइम स्पेंड
1:29:47करें और जितना हो पाए उनसे सीख सकें। ठीक
1:29:49है? चलो तो मेरे दादू की भी आदत थी। वो
1:29:52सुबह-सुबह ही मुझे सारा ज्ञान देते थे। और
1:29:54मैं बोलती थी दादू अभी टाइम नहीं है। हम
1:29:55हमारे दादू को बोलते थे लाला जी। तो मैं
1:29:57बोलती थी लाला जी अभी टाइम नहीं है मैं
1:29:58वापस आकर सुनूंगी। तो ये क्या है? मैंने
1:30:01सुना नहीं क्योंकि मेरे पास टाइम नहीं था।
1:30:04टाइम प्रेशर टाइम की वजह से अगर हम सामने
1:30:06वाले की बात सही तरीके से नहीं सुनते या
1:30:08मैंने सुन ली लेकिन मेरा आधा ध्यान मेरे
1:30:10यू नो भागादौड़ी पे था और उस सब पे था तो
1:30:12ऐसे में हम बोलेंगे उसे टाइम प्रेशर ठीक
1:30:15है टाइम प्रेशर की वजह से जो बैरियर
1:30:17उत्पन्न हुआ है जिसकी वजह से आप लिसनिंग
1:30:19नहीं कर पाए हैं। उसके बाद पेस ऑफ़ स्पीच।
1:30:23होपफुली मेरी बुआ यह वीडियो नहीं देखें।
1:30:26बट मेरी छोटी बुआ मेरी दो बुआ है। उनमें
1:30:28से मेरी जो छोटी बुआ है वो जिस स्पीड में
1:30:31बोलती हैं भाई वो क्या ही स्पीड होती है।
1:30:34किसी को समझ नहीं आता वो क्या बोलती हैं।
1:30:36पूरे खानदान में भी पीपल टॉक अबाउट दिस
1:30:38थिंग। ठीक है? बहुत मारेंगी अगर उन्होंने
1:30:40ये वीडियो देख लिया तो। सो वो ना बहुत
1:30:42फास्ट बोलती हैं। बहुत फास्ट बोलती हैं।
1:30:44और आप चाहो भी ना कितना भी फोकस लगा लो।
1:30:47आप नहीं सुन सकते कि उन्होंने क्या बोला।
1:30:49नहीं समझ पाते कि उन्होंने क्या बोला। तो
1:30:51आपको यहां पे सही से सुनने को नहीं मिल
1:30:53रहा क्योंकि सामने वाले की पेस बहुत
1:30:56ज्यादा है। पेस का मतलब होता है स्पीड
1:30:58बहुत ज्यादा है बोलने की। तो स्पीड अगर
1:31:00किसी की बहुत ज्यादा होती है। बहुत तेज
1:31:04फटाफट फटाफट फटाफट कोई बोलता है तो आपको
1:31:06उसकी बात समझ में नहीं आती। अब तुम मुझे
1:31:08कमेंट सेक्शन में बताओ तुम्हारी बुआ कौन
1:31:10है? आई मीन तुम्हारा ऐसा कौन इंसान है
1:31:12जिसकी बोलने की स्पीड बहुत ज्यादा हाई है।
1:31:15ठीक है? मेरी तो होने वाली है पिटाई फॉर
1:31:17श्योर। देन है टाइम ऑफ वॉइस नहीं टोन ऑफ
1:31:20वॉइस यहां आएगा टोन बोलने का तरीका
1:31:26अच्छा अभी मैं कैसे बोल रही हूं सुनो मेरे
1:31:30बच्चों देखो अगर ऐसा होता है तो अगर कभी
1:31:33ऐसा नहीं हुआ तो तुम्हें पता है ऐसा होता
1:31:36है तो मैं क्या कर रही हूं साउंड को थोड़ा
1:31:38मॉड्यूल कर रही हूं अकॉर्डिंग टू द
1:31:39रिक्वायरमेंट लेकिन अगर मैं एक ही स्वर
1:31:42में बोलती रहूंगी जैसे कुछ लोग बोलते भी
1:31:44हैं कि तुम्हें पता है क्या आज तक ऐसा कभी
1:31:47नहीं हुआ कि हमने ऐसा सोचा हो और फिर वह
1:31:50नहीं हुआ हो। बट तुम जानते हो क्या? अब
1:31:53मैंने कैसे बोला? मैं खुद ही सुनते-सुनते
1:31:55पक गई। ठीक है? अगर आप एक ही टोन में
1:31:58बोलेंगे बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल ऐसे तो
1:32:00भाई सामने वाला आपकी बात में इंटरेस्टेड
1:32:02नहीं होगा। अगर आप ऐसे टोन में बोलेंगे
1:32:05नोबडी विल बी इंटरेस्टेड इन लिसनिंग टू
1:32:08यू। लेकिन अगर आप ऐसे बोलेंगे बीच-बीच में
1:32:12कहीं-कहीं अगर रिक्वायरमेंट हुई बात को
1:32:14ऊपर नीचे करने की तो ऐसे में सामने वाला
1:32:17आपकी बात अच्छे से सुनता है। तो अपनी टोन
1:32:19वैसी रखिए वरना सामने वाला आपकी बात नहीं
1:32:22सुन पाएगा। ठीक है? इंटरप्शंस बहुत सारी
1:32:25रुकावटें आती हैं और नेचर की।
1:32:29कुछ भी रुकावट हो सकती है। किसी भी नेचर
1:32:31की हो सकती है। फिजिकल हो गई, कुछ और हो
1:32:33गई। तो उसकी वजह से टेक्निकल ग्लिच हो
1:32:35गया। जैसे कई-कई बार मैं क्लास ले रही हूं
1:32:37तो लैग हो जाती है। इंटरनेट गायब हो जाता
1:32:39है। ठीक है? तो ये सारी क्या है?
1:32:41इंटरप्शंस हैं। रुकावटें हैं। ठीक है? फिर
1:32:44है इंफॉर्मेशन ओवरलोड। जब मैं तुम लोगों
1:32:46को पेड क्लास में पढ़ाती हूं। कभी-कभी 1
1:32:48घंटे के पार चली जाती है क्लास तो तुम
1:32:50क्या बोलते हो? मैडम अब दिमाग में कुछ
1:32:51नहीं जा रहा है। प्लीज छोड़ दीजिए। उसका
1:32:54मतलब क्या है? कि एक दिन के लिए बहुत
1:32:56इंफॉर्मेशन ओवरलोड हो चुका है। अब दिमाग
1:33:00काम नहीं करेगा। ठीक है? तो दिस इज कॉल्ड
1:33:02इंफॉर्मेशन ओवरलोड। ठीक है? जब बहुत सारी
1:33:05इंफॉर्मेशन एक साथ चली जाती है तो फिर आप
1:33:08और सुनने की क्षमता नहीं रख पाते। दैट इज
1:33:10आल्सो अ बैरियर रुकावट इन लिसनिंग
1:33:12स्किल्स। फिर है बायस। बायस का मतलब क्या
1:33:15होता है? एक तरफ झुकाव। ठीक है? जैसे मैं
1:33:19बोलूं
1:33:20मुझे
1:33:22फॉर से किस चीज के बारे में बोलूं? चलो हम
1:33:26बोलते हैं शिवानी मैडम और गब्बर सर के
1:33:29बारे में। ठीक है। अब बीइंग अ गर्ल शिवानी
1:33:32मैडम मेरी फेवरेट है। ठीक है। गब्बर सर
1:33:34नहीं है। तो मेरा झुकाव किस तरफ है?
1:33:36शिवानी मैडम की तरफ। अच्छा वाकई में ऐसा
1:33:38नहीं है कि गब्बर सर से मेरी दोनों के साथ
1:33:40मेरी इक्वल ही वो है। देन दोनों मेरे
1:33:42इक्वल दोस्त हैं। मैं आपको एग्जांपल दे
1:33:44रही हूं अभी फिलहाल के लिए। ठीक है? तो
1:33:45शिवानी मैम के साथ मेरा जुखाम थोड़ा
1:33:47ज्यादा है। अब कुछ भी ऐसे आ जाइए मतलब ऐसे
1:33:50कोई भी लड़ाई होती है इन दोनों के बीच
1:33:51में। तो मैं किसका साथ दूंगी? गर्ल पावर।
1:33:53गर्ल पावर। शिवानी मैडम का साथ दूंगी। है
1:33:55ना? तो मेरा क्या हुआ? मेरा झुकाव एक तरफ
1:33:59होने की वजह से मैंने क्या किया? दूसरे
1:34:00इंसान की बात ही नहीं सुनी। दूसरे इंसान
1:34:03का क्या वो बोल रहा था वो सुना ही नहीं।
1:34:05तो इसको बोलते हैं बायसनेस। मतलब आपका एक
1:34:08तरफ अगर झुकाव होता है तो आप दूसरे पक्ष
1:34:11को सुनते ही नहीं हैं। अब ये झुकाव किसी
1:34:13भी तरीके के हो सकता है। जैसे जेंडर के
1:34:15टुवर्ड्स कि लड़की है तो ये तो सच ही बोल
1:34:17रही होगी क्योंकि लड़का तो हमेशा झूठ
1:34:19बोलता है। ये क्या है? ये बायसनेस है। ये
1:34:21मैं बोल नहीं रही हूं। ये मैं सिर्फ
1:34:22एग्जांपल दे रही हूं। ठीक है? कमेंट में
1:34:23शुरू मत हो जाना। मैडम कैसी-कसी बातें
1:34:25करती हो। रेस। रेस बोले तो कलर। कोई गोरा
1:34:28है तो उसको ज्यादा अहमियत देना। कोई काला
1:34:30है तो उसे अहमियत नहीं देना। ऐसा भी नहीं
1:34:32करना चाहिए। रिलीजन कोई हिंदू है तो उसको
1:34:35तुम ज्यादा भाव दे रहे हो क्योंकि तुम
1:34:37हिंदू हो। कोई मुस्लिम है तुम उसे भाव
1:34:38नहीं दे रहे क्योंकि वो मुस्लिम है। ऐसा
1:34:40नहीं होना चाहिए। ठीक है? तो किसी भी
1:34:41बेसिस पे आपको बायसनेस नहीं करनी चाहिए।
1:34:43ये नहीं करना चाहिए। ये तो मुस्लिम है ये
1:34:45तो गलत ही बोलेगा। ठीक है? बहुत सारे लोग
1:34:47हैं। मेरा खुद का कजन है जिसको ऐसा लगता
1:34:49है कि भैया मोदी जी जो बोलते हैं वो हमेशा
1:34:52सच होता है। अब ये क्या है? मतलब आप एक
1:34:54इंसान को लेके इतने ब्लाइंड फेथ रख लिए हो
1:34:57कि आप समझ ही नहीं पा रहे हो कि वो इंसान
1:34:59कब सही बोल रहा है, कब गलत बोल रहा है। आप
1:35:01हमेशा उसे सही बोल रहे हो। ठीक है? तो ऐसी
1:35:03चीजें नहीं होनी चाहिए। आपको हमेशा अपना
1:35:05दिमाग लगाना चाहिए और अके मतलब अकल से
1:35:07सोचना चाहिए कि क्या चीज सही है, क्या चीज
1:35:10गलत है। हाउ टू ओवरकम लिसनिंग बैरियर्स?
1:35:13बैरियर्स को कैसे कम किया जा सकता है?
1:35:15लिसनिंग बैरियर्स को कैसे कम किया जा सकता
1:35:16है? मोर और लेस जो हमने पहले पॉइंट्स पढ़े
1:35:19हैं एकदम वैसे ही है। मिनिमाइज
1:35:20डिस्ट्रैक्शंस। डिस्ट्रैक्शंस को हटाइए।
1:35:23लिसनिंग फुल्ली बिफोर गिविंग एडवाइस।
1:35:25सामने वाले को एडवाइस देने से पहले पूरी
1:35:27बात सुन तो लो। वो सामने वाला बोलना क्या
1:35:29चाह रहा था? तुमने उसकी बात आधी सुनी और
1:35:31बीच में ही एडवाइस देना शुरू कर दिया। ये
1:35:32काम नहीं होना चाहिए। प्रायोरिटाइज
1:35:34लिसनिंग ओवर स्पीकिंग। हमेशा बोलने बोलने
1:35:37बोलने पे फोकस मत करो। सुनो पहले अच्छे
1:35:40से। जैसे बहुत लोगों की आदत होती है। उनको
1:35:42ये होता है मैं पहले बोल दूं। मैं पहले
1:35:43बोल दूं। ठीक है? तो वो नहीं होना चाहिए।
1:35:45सुनो सामने वाले की बात। रिड्यूस आउटसाइड
1:35:47नॉइज़। जितना हो पाए पॉसिबल बाहर की जो
1:35:50नॉइज़ होती है उसको दूर रखने की कोशिश
1:35:51कीजिए। देन आई आस्क क्वेश्चन। जब भी आपको
1:35:54लगता है कि क्वेश्चन पूछने की आवश्यकता है
1:35:55इन ऑर्डर टू गेट क्लेरिटी पूछिए। ठीक है?
1:35:58इन ऑर्डर टू गेट क्लेरिटी का मतलब है
1:36:00सामने वाले से क्लेरिटी लेने के लिए। ठीक
1:36:02है? अब हम आ जाते हैं हमारे कम्युनिकेशन
1:36:05बैरियर्स पे। देखो बेटा, अभी हमने पढ़े हैं
1:36:08लिसनिंग बैरियर्स। लिसनिंग क्या होता है?
1:36:11कम्युनिकेशन का ही एक हिस्सा होता है।
1:36:15अब आई होप यह तो क्लेरिटी तुम्हें होगी।
1:36:17कम्युनिकेशन का मतलब होता है
1:36:21बोलना
1:36:24एंड सुनना।
1:36:27साथ में समझना भी।
1:36:30ठीक है? तो कम्युनिकेशन किससे किस से
1:36:32मिलकर बना है? बोलने और सुनने दोनों से
1:36:34मिलकर बना है। हमने सुनने के जो बैरियर्स
1:36:37होते थे वो डिस्कस कर लिए। अब हम डिस्कस
1:36:40कर रहे हैं कम्युनिकेशन के बैरियर्स। तो
1:36:43बेटा कहीं ना कहीं क्या ये ऑलमोस्ट सिमिलर
1:36:46नहीं होंगे? क्योंकि ये भी तो इसी का
1:36:48पार्ट है। बस इसमें थोड़े से और बैरियर्स
1:36:50ऐड हो जाएंगे लिसनिंग से रिलेटेड। हो
1:36:52जाएंगे ना? तो बिल्कुल जो आपने लिसनिंग
1:36:54में बैरियर्स पढ़े हुए हैं मोर और लेस
1:36:57कम्युनिकेशन के भी वही बैरियर्स हैं। जैसे
1:36:59कि आप यहां पे देख सकते हैं। फर्स्ट है
1:37:01साइकोलॉजिकल फिजिकल लैंग्वेज फिजियोलॉजिकल
1:37:06होगा यहां पे।
1:37:10ठीक है? एंड देन है एटीट्यूडनल मतलब
1:37:12एटीट्यूड रिलेटेड। अब इनका क्या मतलब होता
1:37:15है? वन बाय वन वी विल अंडरस्टैंड। ओके?
1:37:18देखिए स्टार्टिंग के तीन जो यह बैरियर्स
1:37:21हैं इनका मीनिंग एग्जैक्टली सेम है जो
1:37:23हमने लिसनिंग स्किल्स में पढ़ा था। ठीक
1:37:25है? तो अब हमें पढ़ने हैं ये दो। फर्स्ट
1:37:28है फिजियोलॉजिकल। इसका क्या मतलब होता है?
1:37:31मानिए आप एक ऐसे इंसान से बात कर रहे हैं
1:37:33जिसे ऊंचा सुनाई देता है। तो यह क्या है?
1:37:37यह एक इंसान उस इंसान की एक प्रॉब्लम है
1:37:39जिसकी वजह से वह आपकी बात ढंग से नहीं सुन
1:37:42पा रहा है। या अगर आप किसी इंसान की बात
1:37:45सुन रहे हैं यहां पे आपकी लिसनिंग स्किल्स
1:37:47एप्लीकेबल है और वो इंसान थोड़ा हकला के
1:37:49बोलता है तो ऐसे सिनेरियो में आपको हो
1:37:52सकता है उसकी बात समझ में नहीं आए। तो ये
1:37:54सारे फिजियोलॉजिकल बैरियर्स में आते हैं।
1:37:56ठीक है? उसके बाद आता है एटीट्यूड नल
1:37:59बैरियर। इसका क्या मतलब होता है? जब आपका
1:38:01एटीट्यूड ही ऐसा हो कि मुझे तो इससे
1:38:03ज्यादा पता है। मैं इसकी बात क्यों सुनूं?
1:38:05तो ऐसे में आपका एटीट्यूड ही वैसा है कि
1:38:07आप पूरा सुनते ही नहीं हैं जिसकी वजह से
1:38:10आपको सामने वाले की बात समझ में नहीं आएगी
1:38:12और इसकी वजह से एक बैरियर क्रिएट हो
1:38:14जाएगा। मतलब यहां पे आपका एटीट्यूड उस
1:38:17नेचर का है। इदर इट्स इगोइसिस्टिक कि भाई
1:38:20मैं इसकी बात क्यों सुनूं? मैं तो इसका
1:38:21सुपीरियर हूं वैसा वाला टाइप्स। ठीक है?
1:38:24सो ये थे हमारे पांच कम्युनिकेशन
1:38:26बैरियर्स। अब हम बात करते हैं कि इन्हें
1:38:29कैसे ओवरकम किया जा सकता है? तो पहला यह
1:38:32बोलते हैं बी अवेयर ऑफ लैंग्वेज मैसेज एंड
1:38:34टोन। सामने वाला किस लैंग्वेज में बात
1:38:37करने वाला है, किस टोन के साथ बात करने
1:38:39वाला है? उसके लिए अवेयर होइए। अगर आपको
1:38:42लगता है जैपनीज़ इंसान है। इफ केस इफ इट इज़
1:38:44पॉसिबल तो थोड़ी बहुत जैपनीज़ सीख लीजिए।
1:38:46नहीं पॉसिबल तो ट्रांसमिटर को साथ लेके
1:38:49जाइए। ठीक है? कंसिस्टेंसी ऑफ़ मैसेज। जब
1:38:52सामने वाले से बात कर रहे हो तो
1:38:53कंसिस्टेंट रहो। मतलब अपना मैसेज बार-बार
1:38:56बार-बार चेंज मत करो। अपने मैसेज का तरीका
1:38:58बार-बार चेंज मत करो। सेम गोज़ फॉर सुनने
1:39:00का भी तरीका। एक बार अगर किसी की एक बात
1:39:02समझ में आ गई तो उसी सेम टोन में आप उसकी
1:39:04सारी बातें सुनो। ठीक है? कंसल्ट अदर्स
1:39:07बिफोर कम्युनिकेशन। सबसे बात करो और उसके
1:39:10बाद कम्युनिकेशन करो। मतलब कंसल्ट करके
1:39:12कम्युनिकेट करो। मेक श्योर टू रिसीव
1:39:15प्रॉपर फीडबैक। सामने वाले को तुम्हारी
1:39:16बात समझ में आई है कि नहीं आई है? प्रॉपर
1:39:18फीडबैक लो। जैसे जब भी कोई टीचर तुम्हें
1:39:20पढ़ाता है, लास्ट में पूछता है ना समझ में
1:39:22आया? राइट सीसी इन द कमेंट सेक्शन। तो बस
1:39:24उसका मतलब क्या है? फीडबैक ले रहा है। मेक
1:39:26श्योर टू रिसीव कम्युनिकेट अकॉर्डिंग टू द
1:39:28नीड ऑफ़ रिसीवर। अपने अकॉर्डिंग मत बात
1:39:31करो। तुम कम्युनिकेट कर रहे हो। तुम बात
1:39:32कर रहे हो लेकिन अपने अकॉर्डिंग मत करो।
1:39:34सामने वाले की क्या रिक्वायरमेंट है उसके
1:39:36अकॉर्डिंग करो। जैसे तुम्हें टीचर्स कैसे
1:39:38पढ़ाते होंगे? जैसे उन्हें पढ़ाना आता है
1:39:40वैसे नहीं। जैसे उनके सामने बच्चे होते
1:39:42हैं वैसे। अब मैं 11 12th क्लास को भी
1:39:44पढ़ाती हूं, तुम लोगों को भी पढ़ाती हूं। बट
1:39:46क्या मेरा तरीका दोनों के साथ सेम होता
1:39:48है? नहीं। नहीं 11 12th वालों को मुझे
1:39:49बहुत ही बेस से पढ़ाना होता है क्योंकि वो
1:39:51बहुत छोटे बच्चे हैं। आप लोग थोड़े
1:39:52मैच्योर हो चुके हैं, बड़े हो चुके हैं तो
1:39:54आपको मैं अलग तरीके से थोड़ी मैच्योरिटी
1:39:56के साथ पढ़ाती हूं। अब मैं सीएस
1:39:57एग्जीक्यूटिव या प्रोफेशनल में पढ़ाऊंगी
1:39:59तो मैं और ज्यादा मैच्योरिटी के साथ
1:40:00पढ़ाऊंगी। ठीक है? क्योंकि वो और ज्यादा
1:40:02बड़े बच्चे होंगे। फॉलो अप। फॉलो अप का
1:40:04मतलब होता है ट्रैक रखना। ये नहीं कि
1:40:06कन्वर्सेशन खत्म हुई उसके बाद कभी दोबारा
1:40:08से बातचीत ही नहीं हुई। फॉलो अप रखिए
1:40:10कम्युनिकेशन का। क्या बात हुई थी? कैसे
1:40:12हुई थी? वो सारा आपके ट्रैक पे होना
1:40:14चाहिए। ठीक है? इन सारे तरीकों से आप क्या
1:40:17कर सकते हैं? कम्युनिकेशन बैरियर्स को
1:40:19खत्म कर सकते हैं। नाउ वी विल टॉक अबाउट
1:40:22एिकेट्स। क्या होते हैं एिकेट्स? देखिए
1:40:26बचपन से आपकी मम्मी कुछ चीजें आपको सिखाती
1:40:28होंगी। जैसे कि सबके साथ अगर बैठ के खा
1:40:32रहे हो तो चपचप की आवाज मत करो। अगर सब
1:40:36लोग खाना खा रहे हैं और तुम्हारा खाना
1:40:39कंप्लीट हो गया है तो उठ के मत चले जाओ।
1:40:42यह रूडनेस मानी जाती है। जब कोई बड़ा
1:40:45बुजुर्ग बात कर रहा होता है तो सामने से
1:40:48उनको उल्टा जवाब मत दो। किसी से फॉर द
1:40:52वेरी फर्स्ट टाइम मिलते हो तो एक स्माइल
1:40:53पास कर दो। कोई नहीं भी पसंद है रिश्तेदार
1:40:56रिश्तेदार कोई भी मिल जाते हैं तुम ऐसे
1:40:58टकर जाते हैं। तो यह नहीं तुम बदतमीजी
1:41:00करना शुरू कर दोगे। उनसे भी प्रेम पूर्वक
1:41:02बात करोगे, स्माइल करोगे। ठीक है? ये सारी
1:41:05चीजें तुम्हें सिखाई जाती है ना। बस यही
1:41:07सारी चीजें हमारे एटीिकेट्स में आती हैं।
1:41:10यह बोलते हैं कि भाई अगर बफे सिस्टम लगा
1:41:12हुआ है ना तो ऐसे हाथ डाल के खाना मत
1:41:14निकाल लो। जैसे बहुत सारे इंडियंस करते
1:41:16हैं। स्पेशली जिनके पास फ्री फंड का पैसा
1:41:18होता है ना फ्री फंड का पैसे से मेरा मतलब
1:41:20है ब्लैक मनी है। ठीक है? पॉलिटिशियंस के
1:41:22खानदान के हैं या कहीं ऐसे हैं। पैसे आ गए
1:41:25तमीज तो आई नहीं। ठीक है? अच्छे-अच्छे
1:41:27होटल्स में जाएंगे। ताज जैसे होटल में आई
1:41:29हैव सीन पीपल। मतलब वहां से आपकी पता चल
1:41:32जाती है आपका बैकग्राउंड क्या है। आप हाथ
1:41:34से उठा रहे वहां पे सामने पड़ा हुआ है। सब
1:41:36सर्व सब स्पून पड़ा हुआ है। सब कुछ पड़ा
1:41:38हुआ है। बट फिर भी हाथ डाल के फ्रूट्स उठा
1:41:39रहे हो। तुमने चार फ्रूट को हाथ लगा दिया।
1:41:41अब कोई उसे खाएगा नहीं। तो ये सब हरकतें
1:41:44नहीं करनी चाहिए। ये आती हैं आपके बेसिक
1:41:46एटीिकेट्स में। बेसिक मैनर्स में। सो आपको
1:41:50पढ़ाया जा रहा है यहां पे एटीिकेट्स। मैडम
1:41:53क्यों पढ़ाया जा रहा है? हमें क्या लेना
1:41:55देना इससे? तो बेटा देखो कल तुम सीएस
1:41:57बनोगे। सीएस बनने के बाद तुम जाओगे किसी
1:41:59कंपनी में। तुम्हारा उठना बैठना होगा 100
1:42:02लोगों के साथ। खाना पीना भी खाओगे तुम
1:42:03उनके साथ और वहां पे अगर तुम्हारे अंदर
1:42:05बेसिक मैनर्स नहीं हुए ना तो तुम बहुत ही
1:42:07अजीब दिखोगे। ठीक है? तो थोड़ा सा यहां से
1:42:10सीख लो कि बेसिक मैनर्स किस-किस प्रकार के
1:42:12होते हैं। एिकेट्स मींस सेट ऑफ कस्टम्स और
1:42:16ग्रीटिंग्स एंड गुड बाय रूल्स फॉर पोलाइट
1:42:18बिहेवियर एस्पेशली अमंग अ पर्टिकुलर क्लास
1:42:20ऑफ़ पीपल और इन अ पर्टिकुलर प्रोफेशन। एक
1:42:23पर्टिकुलर प्रोफेशन या क्लास ऑफ पीपल में
1:42:25जो एक तरीका अपनाया जाता है, एक बिहेवियर
1:42:28का तरीका पोलाइटनेस अपनाई जाती है या फिर
1:42:31ग्रीट करने की या फिर गुड बाय बोलने की।
1:42:33ग्रीट करने का मतलब होता है जैसे तुम
1:42:34क्लास में सुबह-सुबह टीचर आती है तो तुम
1:42:36क्या बोलते हो? गुड मॉर्निंग मैडम। तो ये
1:42:39क्या होता है? दिस इज़ गुड। मतलब आप सामने
1:42:40वाले को ग्रीट कर रहे हो। ठीक है? और गुड
1:42:43बाय। जब टीचर जाती है। थैंक यू मैडम। ये
1:42:46क्या है? गुड बाय बोलने का तरीका है। ठीक
1:42:47है? तो ये सारे तरीके आपको सिखाए जाते
1:42:49हैं। कस्टम्स हैं ये हमारे। कस्टम्स मतलब
1:42:51सालों से चलते हुए आ रही हैं चीजें तो
1:42:54उन्हें हम एटिकेट्स का नाम देते हैं।
1:42:56जिसके कुछ एग्जांपल्स मैंने आपको बता भी
1:42:58दिए हैं। वहां से आपको आईडिया लग गया
1:42:59होगा। ये बोलते हैं सोशल एटिकेट्स क्या
1:43:02होते हैं? इंडियन सोशल एटिकेट्स आर अ
1:43:04मिक्स ऑफ़ डिफरेंट रिलीजंस, रीजंस, कास्ट,
1:43:07लैंग्वेज। देखो तुम सबको पता है हमारे
1:43:09यहां पे 200 साल ब्रिटिशर्स राज करके गए
1:43:12हैं। ठीक है? तो हमने उनसे भी कुछ उनके
1:43:15बिहेवियर्स अडप्ट किए होंगे। तो हमारा जो
1:43:18सोशल एटीिकेट्स वाला सिस्टम है ना वो
1:43:20काइंड ऑफ मिक्सचर है। ब्रिटिशर्स का,
1:43:22वेस्टर्न कल्चर का, हमारा खुद का मतलब
1:43:25हमारे पास्ट का तो उन सबको मिलके बना हुआ
1:43:27है। ठीक है? अब मोस्ट कॉमन इसमें क्या है?
1:43:30टॉक टू पीपल विद स्माइल। जब लोगों से बात
1:43:32कर रहे हो तो स्माइल करके बात कर रहे हो।
1:43:34लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सामने वाला
1:43:36तुम्हें डांट रहा है। तुम सामने से स्माइल
1:43:37कर रहे हो। ऐसा भी नहीं होना चाहिए।
1:43:39सिचुएशन देखो कैसी है और उसके अकॉर्डिंग
1:43:41पास अ स्माइल। रिस्पेक्ट पर्सनल स्पेस।
1:43:44किसी की पर्सनल स्पेस को रिस्पेक्ट करो।
1:43:46मेट्रो में ट्रैवल कर रहे हो। कोई अगर
1:43:47अपने फोन में लगा हुआ है तो उसके फोन में
1:43:49ऐसे झांको नहीं। देखो नहीं। वो अपनी
1:43:51गर्लफ्रेंड को मैसेज कर रहा है या
1:43:52बॉयफ्रेंड को। ऐसा नहीं करना चाहिए। सामने
1:43:55वाले के पर्सनल स्पेस को रिस्पेक्ट करना
1:43:57चाहिए। बी पंक्चुअल। अगर तुम्हें किसी
1:44:00मीटिंग के लिए बुलाया गया, किसी बर्थडे
1:44:02पार्टी के लिए बुलाया गया तो टाइम पे
1:44:03पहुंचो यार। यह क्या मतलब होता है कि शादी
1:44:05पे 7:00 बजे बुलाया गया और तुम 10:00 बजे
1:44:07पहुंच रहे हो। ऐसा नहीं होना चाहिए। ठीक
1:44:09है? चलिए फिर है बिनेस मीटिंग के क्या
1:44:13एटीिकेट्स होते हैं? फर्स्ट दे से बी
1:44:16योरसेल्फ। बी योरसेल्फ का मतलब है अपने आप
1:44:18जैसे रहो। जैसे तुम हो वैसे रहो। किसी को
1:44:21कॉपी करने की कोशिश मत करो। जबरदस्ती कुछ
1:44:23और बनने की कोशिश मत करो। ठीक है? स्माइल।
1:44:26जैसे कुछ लोग क्या करते हैं? वो देखते हैं
1:44:28यार इसकी पर्सनालिटी अच्छी है। फिर ट्राई
1:44:30करेंगे उसकी तरह बनने का। नहीं भाई तुम
1:44:32अपने आप में यूनिक पीस हो यार। भगवान ने
1:44:34तुम्हारे जैसा क्या दूसरा कोई बनाया है?
1:44:35नहीं बनाया। इसलिए अपने जैसे ही रहो।
1:44:38स्माइल जहां पे भी लगे स्माइल पास करो। अब
1:44:41तुम्हारा क्लाइंट, तुम्हारा कस्टमर
1:44:42तुम्हें डांट रहा है, तुम्हें चिल्ला रहा
1:44:44है कि तुमने बुरा काम किया है। तो उस टाइम
1:44:46पर स्माइल मत करना। बस तुम्हें मिल रहा है
1:44:49फर्स्ट टाइम तो स्माइल पास कर दो। उसके
1:44:50बाद उसका रिएक्शन देखो और अकॉर्डिंगली
1:44:52एक्ट करो। बी अ गुड लिसनर। सामने वाला अगर
1:44:54कोई बात बोल रहा है तो सुनो बैठ के आराम
1:44:56से। ठीक है? डू नॉट फोर्स द कन्वर्सेशन।
1:44:59अगर तुम्हें लग रहा है सामने वाला
1:45:00तुम्हारी बात सुनने में इंटरेस्टेड नहीं
1:45:01है। जबरदस्ती। जबरदस्ती उसे बोलने की
1:45:03कोशिश मत करो। जैसे हम किसी से बात कर रहे
1:45:05होते हैं तो हमें समझ में आ जाता है हमारी
1:45:06बात सुनने में इंटरेस्टेड होगा कि नहीं
1:45:07होगा। बट फिर भी हम बोलते जा रहे हैं,
1:45:09बोलते जा रहे हैं, बोलते जा रहे हैं। तो
1:45:10ये इल मैनर्स कंसीडर किए जाते हैं। ये
1:45:12एटिकेट्स वाली बात नहीं मानी जाती। ठीक
1:45:14है? नेक्स्ट है आपका टेलीफोन एटिकेट्स।
1:45:17फोन पे बात करते हुए किन मैनर्स का आपको
1:45:19ध्यान रखना पड़ता है? तो पहला ये बोलते
1:45:20हैं मिरर द रिस्पॉनडेंट।
1:45:27ठीक है? बोले तो सामने वाला जिस तरीके से
1:45:30बात कर रहा है, जिस लहजे से बात कर रहा
1:45:31है, वैसी ही बात करिए। ठीक है? अगर वो
1:45:33बहुत पोलाइटली बात कर रहा है, तो बहुत
1:45:35पोलाइटली बात करिए। वो बहुत काम वे में
1:45:36बात कर रहे हैं। तो काम वे में बात करिए।
1:45:38मिरर का मतलब होता है जैसा वो कर रहा है
1:45:40बिल्कुल वैसे करो। मिरर में क्या होता है?
1:45:41शीशे में क्या होता है? जैसे आप दिख रहे
1:45:43होते हो वैसे ही दिखते हो ना? राइट? बस
1:45:44वही करना है। स्माइल अगेन यहां पे भी
1:45:47स्माइल। अब तुम सोच रहे होगे यार फोन पे
1:45:49किसको स्माइल दिख रही है? तो ये बोलते हैं
1:45:50भाई इनके लॉजिक के अकॉर्डिंग कि जब इंसान
1:45:52स्माइल करके बात कर रहा होता है तो सामने
1:45:54वाले इंसान को पता चल जाता है कि उसके
1:45:56चेहरे पे स्माइल होएगी। आई डोंट नो हाउ।
1:45:58बट बोला गया है तो मैं तुम्हें बता रही
1:45:59हूं। यूज़ कॉलर्स नेम। कॉलर का नाम लो
1:46:02बार-बार। फर से मैं बात कर रही हूं किसके
1:46:04साथ? मेरा दोस्त है रिहान। ठीक है? मैं
1:46:06उससे बात कर रही हूं। मैं बीच-बीच में
1:46:08बोलूंगी रिहान तुझे पता है। रिहान तुझे
1:46:10पता है? रिहान उस दिन ऐसा हो गया तो
1:46:12बीच-बीच में सामने वाले का नाम लेते रहो।
1:46:14उससे अटेंशन बनी रहती है। ठीक है? बी हंबल
1:46:16इन योर लैंग्वेज। अपनी लैंग्वेज में बहुत
1:46:18हंबल रहो। पोलाइट रहो। जबरदस्ती शोरशराबा
1:46:22करने की जरूरत नहीं है। गुस्सा करने की
1:46:23जरूरत नहीं है। इंपोलाइट वर्ड्स बोलने की
1:46:25जरूरत नहीं है। एकको इंपॉर्टेंट पॉइंट्स।
1:46:27अगर तुम्हें लगता है कन्वर्सेशन के बीच
1:46:29में कुछ ऐसे पॉइंट्स हैं जिस पे सामने
1:46:30वाले का फोकस होना चाहिए तो एकको करो।
1:46:32मतलब उसको रिपीट करो। काइंड ऑफ एकको का
1:46:34मतलब क्या होता है? जब हम किसी बंद कमरे
1:46:37में कुछ बोलते हैं पायल तो एकदम से बाहर
1:46:39सारी जगह से आवाज आती है। पायल पायल पायल
1:46:41पायल ऐसा एक पहाड़ भी है जहां जाके आप
1:46:44अपना नाम लेते हो तो वो एकको करता है आपका
1:46:46आवाज रिपीट करता है। तो रिपीट करो जो भी
1:46:48इंपॉर्टेंट पॉइंट्स होते हैं। ठीक है?
1:46:50रिकॉर्ड योर कन्वर्सेशन फॉर फीडबैक। सामने
1:46:52वाले पे भरोसा नहीं है। रिकॉर्ड कर लो
1:46:54उसकी कन्वर्सेशन। मतलब भरोसा है, नहीं भी
1:46:56है तब भी हर सिनेरियो में उसकी कन्वर्सेशन
1:46:58रिकॉर्ड कर लो। ये फीडबैक के लिए
1:47:00इंपॉर्टेंट होती है। जैसे तुमने कभी भी
1:47:01किसी अ कस्टमर सर्विस स्टेशन पे कॉल किया
1:47:04होगा तो वो क्या करते हैं? दिस कॉल विल बी
1:47:06रिकॉर्डेड फॉर फीडबैक नहीं फॉर इवैल्यूएशन
1:47:10पर्पस। कुछ तो ऐसा बोलते हैं तो वो हमेशा
1:47:11अपनी कॉल्स को रिकॉर्ड करते हैं। फीडबैक
1:47:13के लिए करते हैं ताकि उनको पता लग सके कि
1:47:15उनके जो एंप्लाइजज़ हैं वो ढंग से काम कर
1:47:17रहे हैं कि नहीं कर रहे। इंपोलाइट वे में
1:47:19बात तो नहीं कर रहे कस्टमर्स के साथ। फिर
1:47:22आते हैं आपके वर्क प्लेस एजुकेट्स इन अ
1:47:24मल्टीकल्चरल वर्क प्लेस। एक ऐसा जगह काम
1:47:28का जहां पे मल्टीपल ऐसे लोग काम कर रहे
1:47:31हैं जो डिफरेंट-डिफरेंट कल्चर से आते हैं।
1:47:34फॉर एग्जांपल पीडब्ल्यू ले लीजिए।
1:47:35पीडब्ल्यू में हमारी जो दत्ता मैडम है
1:47:37सीएस कैटेगरी में वो क्या है? वो बंगाली
1:47:40हैं। फिर हमारी जो गीता मैडम है वो पहाड़न
1:47:43है। ठीक है? हमारी जो सीजल मैडम है वो
1:47:46नेपाल की हैं। भाई आजकल गोवा में रहती
1:47:48हैं। ठीक है। उसके बाद शिवानी मैडम पंजाबी
1:47:51हैं। मैं पंजाबी हूं। गब्बर सर। गब्बर सर
1:47:54कौन है?
1:47:55गब्बर सर आगरा के पास रहते हैं। इतना मुझे
1:47:57पता है लेकिन कौन है वो मुझे नहीं पता।
1:47:59ठीक है? तो हम क्या है? डिफरेंट-डिफरेंट
1:48:01कल्चर से आते हैं। तो ऐसे डिफरेंट-डिफरेंट
1:48:04कल्चर से जब आप आते हैं तो आपको किस तरह
1:48:06से बिहेव करने चाहिए? क्या आपके अंदर
1:48:07एटिकेट्स होने चाहिए? उसके बारे में हम
1:48:09यहां पे बात करेंगे। तो यहां पे सबसे पहले
1:48:11वो बोलते हैं टीम वर्क। देखो जब ना से सेम
1:48:14बिरादरी के होते हैं ना लोग तो एक दूसरे
1:48:16से बहुत जल्दी जेल अप कर लेते हैं। जैसे
1:48:18मैं ऑर्गेनाइजेशन में आई मुझे शिवानी मैडम
1:48:20मिली। एंड शिवानी मैडम वाज़ पंजाबी। मैं
1:48:22पंजाबी, वो हरियाणा से मैं हरियाणा से। से
1:48:24तो हमने एकदम से कनेक्ट कर लिया। ठीक है?
1:48:26क्योंकि सेम कैटेगरी थी। सेम हमारा
1:48:28बैकग्राउंड था। लेकिन कई बार क्या होता
1:48:30है? दूसरे बैकग्राउंड के इंसान के साथ
1:48:32कनेक्ट बिठाने में समय लगता है। बट
1:48:34ऑर्गेनाइजेशन तब अच्छे से वर्क कर पाता है
1:48:36जब आप टीम वर्क पे बिलीव करते हो। तो आपको
1:48:38सबसे पहले तो अपने दिमाग में ये रखना
1:48:40चाहिए कि चाहे कोई किसी भी कल्चर से क्यों
1:48:42ना आता हो, किसी भी बैकग्राउंड से क्यों
1:48:44ना आता हो। मैं उसके साथ कदम से कदम मिला
1:48:46के चलूंगी। कोऑर्डिनेट करके चलूंगी।
1:48:47तालमेल बिठा के चलूंगी। तो इससे टीम वर्क
1:48:50बनेगा आपके बीच में। रिस्पेक्ट एवरीवंस
1:48:52कल्चर एंड ट्रेडिशन। सामने वाले का चाहे
1:48:54कोई भी कल्चर हो तुम उससे यू नो तुम्हें
1:48:57तुम्हारे अकॉर्डिंग वो सही हो कि नहीं हो
1:48:59बट तुम्हें हमेशा उसकी रिस्पेक्ट करनी
1:49:00चाहिए। ठीक है? जैसे हमें बहुत सारी चीजें
1:49:02दूसरे रिलीजंस की पसंद नहीं आती। दूसरे
1:49:04कल्चर की पसंद नहीं आती। बट उसका मतलब ये
1:49:06नहीं है कि हम उसकी बेइज्जती करना शुरू कर
1:49:08दें। बदतमीजी करना शुरू कर दें। ऐसा नहीं
1:49:10होना चाहिए। ठीक है? कम्युनिकेशन इज़ दैट
1:49:12की। जब भी तुम्हें लगे कि हां कोई खटपिट आ
1:49:15रही है बात कर लो। बात करके सॉर्ट करो।
1:49:17ठीक है? अगर बात कर लोगे तो जो दोनों के
1:49:20मन में होगा वो सामने आ जाएगा। प्लस
1:49:22क्लेरिटी मिल जाएगी कि क्या हो रहा था,
1:49:24क्या नहीं हो रहा था। बी प्रोफेशनल इन योर
1:49:26बिहेवियर। जब किसी से बात कर रहे हो, किसी
1:49:29के साथ बिहेव कर रहे हो, बी प्रोफेशनल इन
1:49:31योर टोन। ऐसा नहीं कि मनचाहे वे में तुम
1:49:33बात कर रहे हो। और हेलो क्या कर रही है
1:49:35तू? ऐसे सब नहीं करना। ठीक है? बिहेव
1:49:38प्रॉपर्ली। ओके? चाहे तुम्हारी बाहर
1:49:40दोस्ती हो उस इंसान के साथ ऑफिस में वो
1:49:42तुम्हारा कोलीग है। अप्रिशिएट डायवर्सिटी
1:49:45एंड सेलिब्रेट डिफरेंसेस। भाई देखो अगर
1:49:47तुम्हारे ऑफिस में डिफरेंट-डिफरेंट कल्चर
1:49:49के लोग हैं तो तुम ऐसा मानो जैसे मैंने
1:49:51अभी एग्जांपल दिया दत्ता मैडम कहां की
1:49:53हैं? वेस्ट बंगाल की हैं। बंगाली हैं। ठीक
1:49:54है? तो दुर्गा पूजा पे उनको बोलो यार
1:49:56मिठाई खिलाओ। है ना? तुम्हें मिठाई खाने
1:49:58को मिल जाएगी। शिवानी मैडम पंजाबी हैं तो
1:50:02जनवरी के टाइम पे उनको बोलो चलो मक्की की
1:50:04वो खिलाओ सब चीजें। ठीक है? सर्दी के मौसम
1:50:07में उनको बोलो उनकी मम्मी तो बनाती भी
1:50:08बड़े टेस्टी-टेस्टी खाना है। तो उनको बोलो
1:50:10चलो मक्की की रोटी, सरसों का साग खिला दो।
1:50:12ठीक है? अब गब्बर सर आगरा के पास रहते थे
1:50:15तो उनको बोलो आगरा के पेड़े खिलाओ सर। ठीक
1:50:17है? तो ये जो ये कल्चरल डायवर्सिटी है ना
1:50:20जो अलग-अलग कल्चर से लोग आ रहे हैं उसको
1:50:22एक अच्छी चीज की तरह लो। उसे अप्रिशिएट
1:50:24करो कि तुम्हें एक एनवायरमेंट में रह के
1:50:26कितने सारे कल्चरर्स का टेस्ट पता चल रहा
1:50:29है। ठीक है? तो उस चीज का फायदा भी उठाओ।
1:50:31पार्टी वार्टी मांगते रहो उनसे। उनके टाइम
1:50:33पे जो भी फेस्टिवल्स आते हैं और खुश भी
1:50:36रहो। अप्रिशिएट भी करो, प्रज़ भी करो,
1:50:38तारीफ भी करो। ओके?
1:50:41नेक्स्ट है पब्लिक रिलेशन। ये ऑल टुगेदर
1:50:43एक नया टॉपिक है। अब इसका मतलब क्या होता
1:50:45है? पहले हम वो समझ लेते हैं। आजकल आप एक
1:50:48टर्म सुनते होंगे पीआर। उसकी पीआर टीम तो
1:50:51बहुत स्ट्रांग है। तो वो पीआर का मतलब
1:50:53पब्लिक रिलेशन ही होता है। ठीक है? अब
1:50:56इसको समझाने के लिए मैं आपको एक एग्जांपल
1:50:57दूंगी। बट बिफोर दैट मैं पानी पी लूं। ठीक
1:50:59है?
1:51:08ऐसे मानिए डोमिनोज़ है। ऐसे मानिए मत
1:51:12डोमिनोज़ है ही। ठीक है? यह केस स्टडी ही
1:51:14है जो आपकी बुक में शायद दी हुई है। बट
1:51:16पीआर को समझने के लिए बेस्ट है। यह केस
1:51:18स्टडी क्या बोलती है? डोमिनोज़ का ना एक
1:51:20समय आया था जब इसका पिज़्ज़ा लोगों को बहुत
1:51:24ही नापसंद आ रहा था। मतलब लोगों को ऐसा हो
1:51:27रहा था कि यार पैसे भी लगाए और क्वालिटी
1:51:29भी नहीं मिली। आज की डेट में भी तो मेरे
1:51:31को ऐसा ही लगता है कि पिज़्ज़ा इनका बहुत ही
1:51:33बेकार हो चुका है। लेकिन इससे पहले भी एक
1:51:35समय आया था जब डोमिनोज़ का पिज़्ज़ा बहुत ही
1:51:37खराब मिल रहा था। बहुत ही खराब मिल रहा
1:51:38था। तो लोग क्या कर रहे थे? वीडियोस बना
1:51:41रहे थे। ठीक है? लोग क्या कर रहे थे?
1:51:44वीडियोस बना रहे थे। स्टेटिंग हमने
1:51:46डोमिनोज का पिज़्ज़ा मंगवाया था। बहुत ही
1:51:47रद्दी आया। बहुत ही बेकार आया। बहुत ही
1:51:49घटिया आया। ठीक है? डोमिनोज़ तक ये वीडियोस
1:51:51पहुंची।
1:51:53अब सोचो बीइंग डोमिनोज़ इतनी बड़ी
1:51:56ऑर्गेनाइजेशन इसने क्या किया होगा? कोशिश
1:51:59की होगी कि वीडियोस हटवा दें। है ना? बड़ी
1:52:02ऑर्गेनाइजेशन क्या करती है? खत्म कर दो उस
1:52:04इंसान को जिसने हमारे अगेंस्ट बात बोली है
1:52:06या हटा दो ऐसी सारी वीडियोस को ब्लॉक कर
1:52:09दो इन सब चीजों को। यही होता है। लेकिन
1:52:11डोमिनोस ने ऐसा नहीं किया। इसने क्या
1:52:13किया? इसने अपनी रेसिपी चेंज करी। इसने
1:52:17क्या करी? अपनी रेसिपी चेंज करी और उसके
1:52:20बाद इसने बनाया
1:52:22एक नया ऐड जिसमें इसने पहले इन लोगों की
1:52:27जो वीडियोस थी वह चलाई। फिर दिखाया कि
1:52:30हमने रेसिपी में चेंजेस करे हैं। ठीक है?
1:52:33और फिर कस्टमर्स के हैप्पी रिएक्शन दिखाए
1:52:37कि अब कस्टमर्स खुश हैं हमारे ये पिज़्ज़ाज़
1:52:40ट्राई करके। क्या किया? कोई भी बड़ी
1:52:43ऑर्गेनाइजेशन होती डोमिनोज़ की जगह तो वो
1:52:45ये करती कि ऐसी वीडियोस को डिलीट करवा
1:52:47देती। लेकिन डोमिनोज़ ने ऐसा नहीं किया।
1:52:49उसने क्या किया? अपनी रेसिपी चेंज करी।
1:52:52फिर एक ऐड बनाई कि देखिए बहुत सारे लोग
1:52:55हमारी जो पुरानी रेसिपी थी उससे खुश नहीं
1:52:57थे। तो हमने हमारी रेसिपी में चेंज किया
1:52:59है और चेंज करने के बाद हमने देखिए नया
1:53:02डोमिनोज का यू नो बिल्कुल मेन्यू आप लोगों
1:53:05के सामने रखा है। आइए खाइए मस्त उसका
1:53:07लुफ्त उठाइए। हैप्पी कस्टमर्स की फोटो
1:53:09चिपका दी। अब इससे क्या हुआ? इससे लोगों
1:53:11को ऐसा लगा यार डोमिनोज कितना सही इंसान
1:53:14है। मतलब कितना बढ़िया ऑर्गेनाइजेशन है।
1:53:16जो चीज छुपानी चाहिए लोगों को दिखा रहा
1:53:19है। और लोगों की बात सुनके इसने अपने
1:53:20प्रोडक्ट में चेंजेस करे हैं। कौन करता है
1:53:23ऐसा आज की डेट में? कितना मानस क्या कितना
1:53:26क्या बोलते हैं महापुरुष क्या बोलते हैं
1:53:28आई डोंट नो कुछ तो एक बोलते हैं वर्ड ठीक
1:53:30है कितना महान इंसान है कितना महान
1:53:32ऑर्गेनाइजेशन है ना तो इसने एक चीज करके
1:53:35फट से लोगों के बीच में अपनी एक
1:53:40एक इमेज बना ली लोगों के बीच में ट्रस्ट
1:53:43एस्टैब्लिश कर दिया अब लोग इस पे फिर से
1:53:45भरोसा करने लग जाएंगे भैया डोमिनोज़ सुनता
1:53:47है लोगों की है ना ये जो डोमिनोज़ ने यहां
1:53:50पे किया है ना इसको हम बोलते हैं पब्लिक
1:53:52रिलेशन लोगों के साथ रिश्ता बनाना, लोगों
1:53:55के अंदर अपने ऑर्गेनाइजेशन को लेके, अपने
1:53:58प्रोडक्ट को लेके, अपने ब्रांड को लेके
1:54:00लॉयल्टी बढ़ाना। ठीक है? अब क्या होगा?
1:54:03ज्यादातर लोग डोमिनोज जाएंगे क्योंकि
1:54:05उन्हें लगेगा कि डोमिनोज सुनता है हमारी।
1:54:06इफ इन केस हमें मजा नहीं भी आया तो
1:54:08डोमिनोज उसका भी निवारण हमें प्रोवाइड
1:54:10करेगा। राइट? तो इसने एक एक्ट करके अपनी
1:54:13इमेज इतनी बढ़िया बना ली पब्लिक के बीच
1:54:15में। उनके साथ एक रिश्ता जोड़ लिया। और
1:54:17इसी को हम बोलते हैं पब्लिक रिलेशन। ठीक
1:54:19है?
1:54:20तो पीआर में बेसिकली कोई भी इंसान क्या
1:54:22करता है? अपना रिलेशनशिप पब्लिक के साथ
1:54:25स्ट्रांग करता है। ठीक है? आजकल Instagram
1:54:27पे यह बहुत एक्टिव चीज लग रही है।ेंस क्या
1:54:30है? बिल्ट फेथ। आपके ब्रांड के टुवर्ड्स
1:54:33लोगों का फेथ बिल्ट हो जाता है। भरोसा
1:54:37भरोसा करने लगते हैं लोग आपके ब्रांड पे।
1:54:41फिर है मैनेजेस क्राइसिस। अगर मान लीजिए
1:54:44कोई बुरी खबर आई है आपके लिए। कोई बहुत ही
1:54:47डिजास्टरस चीज हो गई है जो आपके
1:54:48ऑर्गेनाइजेशन को बहुत यू नो नुकसान पहुंचा
1:54:51सकती थी। उस टाइम पे अगर आपकी पीआर
1:54:53स्ट्रांग होएगी तो वो उस चीज को ठीक कर
1:54:56लेगी। वो इस चीज को ठीक कर लेगी। अच्छा
1:54:59मैं तुम्हें ना वैसे प्रैक्टिकली पीआर को
1:55:01समझने के लिए एक एग्जांपल दूं। आजकल ना एक
1:55:04शो चल रहा है लॉकअप करके। आप देखना
1:55:07Instagram अगर आप खोलोगे Facebook अगर आप
1:55:10खोलोगे तो आपको एक-ए मिनट की क्लिप्स
1:55:12मिलेंगी। किसकी मिलेंगी? ज्यादातर उसमें
1:55:15सोनल सोनल कालरा ऐसे करके एक लड़की है
1:55:17उसकी मिलेंगी या आकांक्षा चौधरी उसकी
1:55:21मिलेंगी। मतलब कौन से फेमस एक्टर की बीवी
1:55:23है वो। ठीक है? या फिर एक आधी क्लिप आपको
1:55:26राम कपूर की मिलेगी। क्यों? क्योंकि इन
1:55:29तीनों की पीआर काम कर रही है। वो इनकी
1:55:32क्लिप्स बना रही है, वायरल कर रही है।
1:55:33क्लिप्स बना रही है, वायरल कर रही है। और
1:55:35क्या कोशिश कर रही है? इनको अच्छे वे में
1:55:37दिखाने की कोशिश कर रही है। पॉजिटिव वे
1:55:39में दिखाने की कोशिश कर रही है। यहां से
1:55:41आप इस एस्पेक्ट को समझ सकते हैं कि पीआर
1:55:43के थ्रू अगर आपने कुछ नेगेटिव भी किया हो।
1:55:46जैसे सोनल कालरा जो है वो उस शो में बहुत
1:55:48ही बेकार काम कर रही है। कुछ-कुछ उसने
1:55:50बहुत ही बेकार काम किए हैं। बट उसको ऐसे
1:55:52दिखाया जा रहा है ऐसे पोट्रे किया जा रहा
1:55:54है कि वो तो विक्टिम है। आपने एकदम से
1:55:56लोगों का ओपिनियन बदल दिया उसके बारे में।
1:55:58अगर कोई इंसान शो देख के आया तो उसे लगेगा
1:56:00ये कितनी नेगेटिव लड़की है। लेकिन वो
1:56:02रील्स देख के आपको उसकी वो साइड दिखेगी जो
1:56:05आपको शो में दिख ही नहीं रही। आपको लगेगा
1:56:07यार नहीं यार इसके साथ गलत हो रहा है यार।
1:56:09यह तो सही बंदी है। तो पीआर आपके माइंड के
1:56:11साथ खेलता है। आपके दिमाग के साथ खेलता
1:56:13है। मतलब आप आप अपना जो पर्सनल ओपिनियन
1:56:17होता है वह साइड रख के आप उनके ओपिनियन के
1:56:19अकॉर्डिंग चलने लग जाते हो। आपने एक बात
1:56:21सुनी होगी हमेशा कि अगर झूठ चिल्ला चिल्ला
1:56:24के बताया जाए और बहुत बार बताया जाए तो वो
1:56:27सच लगने लगता है। तो बस वही काम करता है
1:56:29पीआर वाला। इमरजेंसी का टाइम है, क्राइसिस
1:56:32का टाइम है। ये आपको पॉजिटिव इमेज,
1:56:34पॉजिटिव इमेज, पॉजिटिव इमेज, पॉजिटिव इमेज
1:56:36ऐसे करके दिखाएगा कि आप विश्वास कर लेंगे
1:56:38कि हां यार चीजें पॉजिटिव ही हैं।
1:56:41सपोर्ट्स मार्केटिंग। जब आप पीआर पे
1:56:43स्पेंड करते हो ना, काइंड ऑफ़ ये आपकी
1:56:45एडवरटाइजमेंट का खर्चा बढ़ा देता है।
1:56:47क्योंकि लोग आपसे कनेक्ट करने लग जाते
1:56:49हैं। फिर आपको अलग से मार्केटिंग बहुत
1:56:51ज्यादा करनी नहीं पड़ती। लोगों का कनेक्शन
1:56:53ही वह काम आ जाता है आपको प्रोडक्ट बेचने
1:56:54में या कुछ भी करने में। इंप्रूव्स इंटरनल
1:56:56रिलेशन। जो एंप्लाइजज़ ऑर्गेनाइजेशन में
1:56:58काम कर रहे होते हैं ना वो भी एक दूसरे के
1:57:00साथ बॉन्डिंग बढ़ा लेते हैं पीआर के चलते
1:57:02हुए क्योंकि कम्युनिकेशन इतना स्ट्रांग
1:57:04होता है। ब्रांड लॉयल्टी इंक्रीजसेस जो
1:57:07लोग आपके ब्रांड को खरीदते थे पहले अब वो
1:57:09आपके ब्रांड के लिए और लॉयल हो जाएंगे और
1:57:11आप ही के ब्रांड से बार-बार खरीदते
1:57:13रहेंगे। ठीक है? तो ब्रांड लॉयल्टी भी
1:57:15क्या होती है? इनक्रीस होती है। आपके
1:57:17टुवर्ड्स ब्रांड मतलब लोग क्या होते हैं?
1:57:19अ आपके टुवर्ड्स लॉयल हो जाते हैं और आप
1:57:23ही के प्रोडक्ट्स को वो बार-बार खरीदना
1:57:25पसंद करते हैं। ठीक है? चैलेंजेस
1:57:27क्या-क्या आते हैं? चैलेंजेस पहला तो यह
1:57:29आता है फेक न्यूज़ बहुत जल्दी फैलती हैं।
1:57:32Instagram पे खोल के देखो तुम। ठीक है? एक
1:57:35न्यूज़ फैली है। उसके बाद बैक टू बैक बैक
1:57:37टू बैक बैक टू बैक सेम नेचर की न्यूज़
1:57:39फैलती जाएंगी। एक एक पब्लिक हाउस ने वो
1:57:42किया है। दूसरे जैसे मैं आपको बताऊं
1:57:45धर्मेंद्र जी का एग्जांपल हमारे एक बहुत
1:57:48ही वेटरन एक्टर रहे हैं धर्मेंद्र जी। अभी
1:57:50ही इज़ नॉट अलाइव। बट वो जिस दिन मरे थे ना
1:57:53उससे तीन दिन पहले ही Instagram पे न्यूज़
1:57:56आ गई थी दैट ही इज़ डेड ही इज़ डेड ही इज़
1:57:58डेड ये क्या था? ये पीआर का खेल था। ठीक
1:58:01है? पीआर ने ऐसी चाल चली। फटाफट फटाफट
1:58:03फटाफट सारे न्यू सारे लोग उसको कॉपी करने
1:58:06लगे। बिना चेक किए कि इंसान वाकई में
1:58:08जीवित है या मर चुके हैं। तो ऐसे में आपने
1:58:11वो चीज जो हुई नहीं थी वो पहले से ही दिखा
1:58:13दी। फेक न्यूज़ दिखा दी। तो वो बहुत जल्दी
1:58:15फैलती है। वो भी नहीं होना चाहिए। देन
1:58:17कल्चरल सेंसिटिविटी। कई-कई बार क्या होता
1:58:19है? लोगों का कल्चर डिफरेंट होता है। आपने
1:58:22कोई ऐसी चीज़ प्रमोट कर दी या ऐसी चीज़ करके
1:58:24दिखा दी जो दूसरों के कल्चर को हार्म
1:58:26पहुंचा सकती है। थोड़ा सा वो यू नो उसको
1:58:29नेगेटिव वे में देख सकते हैं। उनको थोड़ा
1:58:31बुरा लग सकता है। हर्ट कर सकती है। ठीक
1:58:32है? उसके उनकी भावनाओं को ओवर एक्सपोज़र।
1:58:36आज की डेट में आप ऐसे लोग देख लो जो
1:58:40वॉगिंग करते हैं और काफी फेमस है। अभी
1:58:42मैंने परसों परसों एक न्यूज़ देखी थी। क्या
1:58:44था उसमें? सौरव जोशी जो है जो इंडिया का
1:58:47आई गेस सबसे बड़ा ब्लॉगर कंसीडर किया जाता
1:58:49है। उसने पहले तो अपना नया घर बनाया जो कि
1:58:52उसने बहुत बड़ा विशाल सा बनाया है। अब वो
1:58:54क्या कर रहा है? अपने आसपास की प्रॉपर्टी
1:58:56भी खरीद रहा है। ठीक है? क्यों खरीद रहा
1:58:58है? प्राइवेसी इशूज़। उसके आसपास की
1:59:01प्रॉपर्टी वो इसलिए खरीद रहा है ताकि वो
1:59:02उस पे भी नजर रख सके ताकि कोई भी इंसान
1:59:05आके जबरदस्ती उसके घर से उसकी ऐसी कुछ
1:59:07वीडियोस नहीं बना ले। फोटो नहीं खींच ले
1:59:09जो वो नहीं चाहता लोगों तक पहुंचे। यह किस
1:59:12वजह से हो रहा है? क्योंकि उसने ओवर
1:59:14एक्सपोज़र दे दिया है अपनी लाइफ का दुनिया
1:59:16को थ्रू ऑनलाइन मीडियम। ठीक है? तो वो चीज
1:59:19एक हो जाती है। फिर है मेज़रमेंट। ये बोलते
1:59:22हैं पीआर ने कितने हद तक काम किया है वो
1:59:24मेजर करना थोड़ा सा पॉसिबल नहीं हो पाता।
1:59:26जैसे अगर मैं एडवर्टाइजमेंट चलाऊं तो उसकी
1:59:28वजह से मेरा प्रोडक्ट कितना सेल हुआ है।
1:59:30ये तो मैं मेजर कर सकती हूं कि
1:59:31एडवरटाइजमेंट में मैंने इतना खर्चा किया
1:59:33और इतने मेरे सेल्स हुए हैं। वहां से मुझे
1:59:35पता पता चल जाएगा एडवरटाइजमेंट ने कितना
1:59:37बढ़िया परफॉर्म किया है। लेकिन पीआर पे
1:59:40मैं स्पेंड करूं। ट्रस्ट बिल्ड करने की
1:59:42कोशिश कर रही हूं। लेकिन ट्रस्ट कितने
1:59:43लेवल तक बिल्ड हुआ है? मुझे कैसे समझ में
1:59:45आएगा? क्या हम ट्रस्ट को मेजर कर सकते हैं
1:59:47पॉइंटर्स में? नहीं कर सकते। तो वो चीज
1:59:50थोड़ी सी मुश्किल हो जाती है। फिर है
1:59:51क्राइसिस स्पीड। कई-कई बार क्या होता है?
1:59:54आपको बहुत ही एक्टिव वे में फटाफट डील
1:59:58करना पड़ता है। मतलब चीजें इतनी जल्दी
1:59:59फैलती हैं। जैसे एक न्यूज़ फैली सुबह। ठीक
2:00:02है? सुबह पहले फैली 11:00 बजे। 12:00 बजे
2:00:04तक वो वायरल हो चुकी थी। तो आपको जब पीआर
2:00:07में एक्ट करना होता है ना तो बहुत
2:00:09इंस्टेंट वे में करना होता है। आप यूं
2:00:10नहीं सोच सकते पहले मैं थोड़ा मेकअप कर
2:00:12लूं उसके बाद वीडियो बनाऊंगी और उसके बाद
2:00:14लोगों को बताऊंगी। नहीं देयर इज़ नो टाइम
2:00:16फॉर दैट। आपको इंस्टेंटली डील करना पड़ता
2:00:18है। तो कई-कई बार क्राइसिस को आपको बहुत
2:00:20ही स्पीडी वे में डील करना पड़ता है। ठीक
2:00:22है? नेक्स्ट है आपका प्रैक्टिकल टिप्स फॉर
2:00:25इफेक्टिव पीआर। इफेक्टिव पीआर रखनी है तो
2:00:27उसके लिए प्रैक्टिकल टिप्स क्या है? ऑलवेज
2:00:29स्पीक्स ट्रुथ। यह बोलते हैं भैया देखो
2:00:32झूठ बोल के आप बच नहीं सकते। आज नहीं तो
2:00:35कल तुम पकड़े ही जाओगे। तो बेटर है सच
2:00:38बोलो। चाहे फिर वह कितना भी बिटर क्यों ना
2:00:41हो, कड़वा क्यों नहीं हो लेकिन सच बोलो।
2:00:43सच बोलने वाले लोगों से ना लोग बहुत जल्दी
2:00:45कनेक्ट करते हैं। लोगों को ऐसा लगता है
2:00:47यार ये सच बोल रहा है। तो चलो ठीक है। गलत
2:00:49बात करी इसने लेकिन एटलीस्ट बोल तो सच रहा
2:00:51है। तो वो वहां से आपको आपसे कनेक्ट कर
2:00:53लेते हैं। तो हमेशा सच बोलो। बिल्ड रिलेशन
2:00:55विद जर्नलिस्ट एंड मीडिया हाउसेस। जितने
2:00:57भी जर्नलिस्ट हैं, मीडिया हाउसेस हैं उन
2:01:00सब से कनेक्शन अच्छे से फॉर्म करो। जैसे
2:01:02अभी राखी सावन कहीं पे भी जाती है एकदम से
2:01:04सारे मीडिया पर्सनंस आ जाते हैं। कैसे आ
2:01:06जाते हैं? क्योंकि वो कॉल करके उन्हें
2:01:08बुलाती है कि मैं यहां पे पहुंचूंगी आ
2:01:10जाना। अब वो वो भी क्यों पहुंचते हैं?
2:01:12क्योंकि उनको भी थोड़ा सा यू नो व्यूज
2:01:14वगैरह चाहिए होते हैं। प्लस राखी के साथ
2:01:16उसका अच्छा उनके अच्छे रिलेशनशिप है। तब
2:01:18वो पहुंच जाते हैं। तो सारे जर्नलिस्ट और
2:01:20मीडिया हाउसेस से अच्छे रिलेशनशिप बना के
2:01:22रखो। मॉनिटर सोशल मीडिया। सोशल मीडिया को
2:01:24मॉनिटर करते रहो। क्या चल रहा है? क्या
2:01:25नया आ रहा है? क्या पुराना चल रहा है? सब
2:01:27कुछ स्टोरी टेलिंग का इस्तेमाल करो।
2:01:29स्टोरी सुनाओ। लोगों को स्टोरी सुनना बहुत
2:01:31पसंद होता है और वो बहुत इमोशनली कनेक्ट
2:01:33भी करते हैं कि हां मेरे साथ भी ऐसा हुआ
2:01:35था। अरे जिस चीज में इसने मेंशन किया वो
2:01:37मेरे साथ भी एक बार हुई थी। तो वहां से
2:01:39कनेक्शन बिल्ड होता है। तो स्टोरी टेलिंग
2:01:40शुरू करो। एंगेज्ड एंप्लाइजज़ एंप्लाइजज़ के
2:01:43साथ एंगेज करो जितना कर सकते हो ताकि वो
2:01:45भी उनको भी लगे कि हम भी अहमियत रखते हैं।
2:01:48बी कल्चरली अवेयर। सारे कल्चरर्स के बारे
2:01:50में आपको पता होना चाहिए ताकि आप कोई भी
2:01:52ऐसी हर्टफुल चीज नहीं बोल दो जो बैकफायर
2:01:54कर जाए। जैसे तारक मेहता का उल्टा चश्मा
2:01:57में एक कैरेक्टर थी बबीता जी। है ना? ठीक
2:02:00है शायद अभी भी है। है ना? उन्होंने एक
2:02:02बार एक ऐसा वर्ड इस्तेमाल कर दिया था
2:02:04ऑनलाइन जो कि उन्हें पता नहीं था कि एक
2:02:06कैटेगरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है और
2:02:08वो बहुत बैकफायर किया था। बहुत लोगों ने
2:02:10उनको बहुत बुरा भरा बोला था। राइट? तो वो
2:02:12सब चीजें नहीं होनी चाहिए क्योंकि यहां पे
2:02:13वायरल होने के चांसेस ज्यादा होते हैं।
2:02:15इसलिए आपको बहुत ही सोच समझ के बोलना
2:02:17चाहिए। किसी के भी यू नो कल्चरल उसको
2:02:20हार्म नहीं पहुंचाना चाहिए। हर्ट नहीं
2:02:22करना चाहिए। ठीक है? अब हम बात करते हैं
2:02:24एडवरटाइजमेंट एंड बिनेस कम्युनिकेशन के
2:02:27बारे में। सबसे पहले तो यह बोलते हैं
2:02:30एडवरटाइजमेंट का मतलब क्या होता है? आप
2:02:33ऐसे समझिए मेरे पास कोई वो है
2:02:37ये रखा हुआ है ऑर्बिट का डब्बा। अब देखो
2:02:41जिसने ये ऑर्बिट की चिंगम्स बनाई होंगी।
2:02:45उस इंसान ने इसको बनाने के बाद ऐसे ही तो
2:02:48मार्केट में ल्च नहीं कर दिया होगा। उसने
2:02:50पहले लोगों को बताया होगा कि मैंने एक नई
2:02:53ट्विंगम लाई है जिसको यूज करने से शुगर
2:02:56फ्री वे में यह शायद शुगर फ्री है। है ना?
2:02:59अ हां शुगर फ्री है। इससे क्या होता है?
2:03:03आपको शुगर रश मतलब आपके अंदर शुगर नहीं
2:03:05जाएगी। जैसे बहुत लोग आजकल शुगर को लेके
2:03:07बहुत सेंसिटिव होते हैं कि हम शुगर
2:03:09कंज्यूम नहीं करेंगे। तो आपके अंदर शुगर
2:03:10नहीं जाएगी। इस नेचर की शुगर फ्री वो है।
2:03:14प्राइस इसका यह है। बिल्कुल वेजिटेरियन
2:03:16लोगों के लिए है। और इसकी वजह से यह होता
2:03:18है। इसकी वजह से वह होता है। सारे इसके
2:03:20यूएसपीस जो भी होंगे, सारे इसके फीचर्स जो
2:03:22भी होंगे उन्होंने एक्सप्लेन किए होंगे।
2:03:24ठीक है? यह उन्होंने क्यों किए हैं? ताकि
2:03:26एक नया प्रोडक्ट मार्केट में आया है। वो
2:03:28इनेशन आप तक पहुंच पाए। यही काम होता है
2:03:31एडवर्टाइजमेंट्स का। एड्स बेसिकली आपको यह
2:03:33बताती हैं कि कोई नया प्रोडक्ट आया है
2:03:36उसमें ये ये फीचर्स हैं। ये पुराने वाले
2:03:38से इस तरीके से डिफरेंट है। तो अगर आपको
2:03:40खरीदना है तो आप जाके खरीद सकते हैं। ये
2:03:42होता है एडवरटाइजमेंट का काम। नाउ व्हाट
2:03:44इज द डिफरेंस बिटवीन एडवरटाइजमेंट एंड
2:03:46बिज़नेस कम्युनिकेशन? मैंने आपको बिज़नेस
2:03:48कम्युनिकेशन का क्या मतलब बताया था? काम
2:03:51की बात करना। चाहे ऑर्गेनाइजेशन के अंदर
2:03:54या ऑर्गेनाइजेशन के बाहर। तो यहां पे आप
2:03:56क्या कर रहे हैं? काम की बात कर रहे हैं।
2:03:58लेकिन एडवर्टाइजमेंट में आप क्या कर रहे
2:04:00हैं? बाहर वालों को स्पेसिफिकली बाहर
2:04:02वालों को ऑर्गेनाइजेशन वालों को थोड़ी ना
2:04:04तुम बताओगे ऐड देके कि हमने यह नई चीज लाई
2:04:06है। नहीं तुम बाहर वालों को बताओगे ऐड चला
2:04:09के देखो हमने कोई नई चीज लाई है। दैट्स
2:04:11व्हाई हम इसको बोलते हैं आउटवर्ड फेसिंग।
2:04:13क्योंकि हम बाहर वालों को कोई चीज बता रहे
2:04:16हैं। और बिजनेस कम्युनिकेशन क्योंकि
2:04:19मैक्सिमम बिनेस के अंदर होता है। तो इसको
2:04:21हम बोलते हैं इनवर्ड फेसिंग। मतलब इसका
2:04:23फोकस अंदर की तरफ रहता है। ठीक है? ये
2:04:26डिफरेंस है बेसिकली इन दोनों में।
2:04:28एडवरटाइजमेंट इज द पेड कम्युनिकेशन टू
2:04:30प्रमोट प्रोडक्ट। अपने प्रोडक्ट को प्रमोट
2:04:32करना है तो उसके लिए पेड कम्युनिकेशन जो
2:04:34आप करते हैं उसको एडवर्टाइजमेंट बोलते
2:04:36हैं। इट यूजसेस न्यूज़पेपर, टीवी, रेडियो
2:04:38ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स। आज की डेट में इन
2:04:40सबका इस्तेमाल होता है और इसके अलावा और
2:04:42भी बहुत सारी चीजों का इस्तेमाल होता है
2:04:43ऐड चलाने के लिए। इवैल्यूएशन अगर करें
2:04:48इवैल्यूएशन नहीं एक्चुअली इवोल्यूशन।
2:04:51इवोल्यूशन अगर हम देखें इवोल्यूशन का मतलब
2:04:54है कि कैसे क्या हुआ था। पहले क्या आया था
2:04:56फिर बाद में क्या आया था? फिर बाद में
2:04:58क्या आया? ठीक है? तो ये बोलते हैं सबसे
2:05:00पहले एंशिएंट एडवर्टाइजमेंट पुराने जमाने
2:05:04की बहुत ही ज्यादा पुराने जमाने की बाबा
2:05:06आदम के जमाने में कैसी एडवर्टाइजमेंट होती
2:05:09थी जो इजिप इजिपशियंस होते थे ना वो क्या
2:05:12करते थे? स्टोन वॉल्स लेते थे और उसके ऊपर
2:05:16ठक ठक ठक ठक ठक करके पूरी एड्स प्रिंट
2:05:18करते थे। मतलब क्या? पत्थर लिया आपने बड़ा
2:05:21सा और उस पे आपने स्टोन से कार्विंग की।
2:05:23मतलब आपने सॉरी उससे हैमर से कार्विंग की
2:05:26और उस पे आपने पूरी एडवर्टाइजमेंट छाप दी।
2:05:29ठीक है? या फिर टाउन क्रायर्स होते थे।
2:05:31टाउन क्रायर समझते हैं? आज ही हमारी
2:05:33कॉलोनी में आया था। एक इंसान होगा भोपु
2:05:36लेके पूरी कॉलोनी में घूमेगा जो चिल्लाता
2:05:38रहेगा। आ रहे हैं आपके शहर में एक नए
2:05:41साड़ी बेचने वाले। तो आइएगा इस मार्केट
2:05:44में ये करने वो करने। इनको बोलते हैं टाउन
2:05:46क्रायर्स। चिल्ला-चिल्ला के स्कीम बताने
2:05:48वाले सबको। ठीक है? सो ये एंशिएंट
2:05:50एडवर्टाइजमेंट थी। पहले इस तरह से
2:05:52एडवरटाइजमेंट होती थी। फिर प्रिंट
2:05:54रेवोल्यूशन आया। अब यहां पे आपको नाम से
2:05:56समझ में आ रहा होगा प्रिंट रेवोल्यूशन
2:05:57मतलब कुछ प्रिंटेड होता होगा। क्या
2:05:59प्रिंटेड होता है? न्यूज़पेपर में
2:06:00प्रिंटेड होता है या फिर पोस्टर्स में या
2:06:02प्लेट्स में या मैगजींस में ये सारे
2:06:05प्रिंटेड इनेशन आप क्या करते हो? मतलब
2:06:07प्रिंट वे में लिख के ऐड दिखा देते हो।
2:06:10जैसे तुम कोई भी न्यूज़पेपर उठाओ आज की
2:06:12डेट में। इनिशियल तीन-चार पेजेस तुम्हें
2:06:14पूरे के पूरे एडवर्टाइजमेंट से भरे हुए
2:06:15मिलेंगे। वो क्यों? क्योंकि वो प्रिंट
2:06:17रेवोल्यूशन का पार्ट हैं। फिर है 20थ
2:06:19सेंचुरी। 20थ सेंचुरी में हमने रेडियो और
2:06:21टीवी को भी इस्तेमाल करना शुरू कर दिया ऐड
2:06:23चलाने के लिए और एडवर्टाइजमेंट के लिए
2:06:25हमने सेलिब्रिटीज को हायर करना शुरू कर
2:06:27दिया। जैसे आमिर खान कोई सोप बेच रहा है
2:06:31या फिर शाहरुख खान कोई पान मसाला बेच रहा
2:06:33है। तो इसमें हम क्या कर रहे हैं? टीवी
2:06:35एक्टर्स को सॉरी सेलिब्रिटीज को इस्तेमाल
2:06:37कर रहे हैं इन ऑर्डर टू सेल योर प्रोडक्ट।
2:06:39फिर आता है डिजिटल एरा जो कि आज की डेट
2:06:41में चल रहा है। Google, YouTube,
2:06:43Instagram, Facebook, एड्स, रीच मिलियंस।
2:06:46ओके? यह फायदा लिखा हुआ है इसका। तो ये
2:06:48सारे प्लेटफॉर्म्स हैं जिस पे आजकल एड्स
2:06:50चलती हैं। अगर आप खोलो जैसे मैं जब भी
2:06:51अपना mntra जब भी मैं अपना Instagram
2:06:53खोलती हूं ना उसमें MNTRa के जो बेस्ट
2:06:55प्रोडक्ट्स होते हैं वो सामने आए होते हैं
2:06:57कि भैया खरीद लो खरीद लो हमारे प्रोडक्ट्स
2:06:59और मैं फिर उनमें क्लिक जरूर करती हूं और
2:07:00मैं एक ना एक चीज अपनी कार्ड में जरूर ऐड
2:07:02करती हूं। चाहे फिर मैं ऑर्डर करती हूं
2:07:04नहीं करती लेकिन कार्ड में जरूर ऐड करती
2:07:06हूं। तो ये आदत क्यों डेवलप हो रही है?
2:07:07क्योंकि Instagram मुझे बार-बार एड्स दिखा
2:07:09रहा है। तो आज की डेट में डिजिटल एरा चल
2:07:12रहा है कि आपको ऑनलाइन सोशल मीडियास पे ही
2:07:14एड्स देखने को मिलेंगे। आप YouTube पे
2:07:16वीडियो देखते हो बीच में वो रुक जाती है
2:07:17ऐड आती है वो भी क्या है वो Google मतलब
2:07:20वो डिजिटल एरा का ही पार्ट है इससे क्या
2:07:22होता है एक ऐड मिलियंस लोगों तक एक साथ
2:07:24पहुंच पाती है बहुत सारे लोगों तक एक साथ
2:07:27पहुंच पाती है प्रैक्टिकल टिप्स की बात
2:07:29करें तो ये बोलते हैं अपनी एडवरटाइजमेंट्स
2:07:32को जितना ट्रुथफुल रखोगे अगर कोई प्रोडक्ट
2:07:34तुम्हारा अच्छा है तो उसकी उतनी ही तारीफ
2:07:36करो जितना बनता है जबरदस्ती उस पे जैसे
2:07:40बहुत सारे लोग पहले ऐसी क्रीम्स बनाते थे
2:07:43इस क्रीम को इस्तेमाल करके के सात गिन सात
2:07:45ही दिन में आप क्या हो जाएंगे? गोरे हो
2:07:47जाएंगे। ठीक है? तो ऐसा मतलब ऐसा रेस वाला
2:07:50डिस्क्रिमिनेशन भी चलता था। आज की डेट में
2:07:52तो नहीं बनाते हैं क्योंकि रूल्स बन गए
2:07:53हैं। बट पहले ऐसा बनता था। तो ये क्या है?
2:07:557 दिन में कोई गोरा होता है क्या? नहीं
2:07:57होता। तो ये झूठी न्यूज़ है। ऐसी न्यूज़
2:07:59नहीं चलानी चाहिए। ऐसी एडवर्टाइजमेंट नहीं
2:08:01चलानी चाहिए। यूज़ सिंपल लैंग्वेज इन
2:08:03बिनेस कम्युनिकेशन। मतलब जब भी आप ऐड बना
2:08:06रहे हो तो कोशिश करो सिंपल लैंग्वेज का
2:08:08इस्तेमाल करो। बहुत ही जो सबको समझ में आए
2:08:10क्योंकि ऐड तो कोई भी देख सकता है ना यार।
2:08:11ऐड देखने के लिए किसी भी इंसान को
2:08:13एजुकेटेड होना, लिटरेट होना जरूरी नहीं
2:08:15है। कोई अनपढ़ इंसान भी ऐड देख सकता है तो
2:08:17उसको भी समझ में आनी चाहिए। इसलिए बहुत ही
2:08:19सिंपल लैंग्वेज में अपनी ऐड बनाओ। अवॉयड
2:08:21जर्गंस अननेसेसरी अनलेस नेसेसरी। जर्गंस
2:08:25का इस्तेमाल मत करो। जैसे आजकल क्या होता
2:08:27है? कुछ ऐसे डॉक्टर्स दिखा देते हैं एड्स
2:08:29में जो कि टेक्निकल लैंग्वेज इस्तेमाल
2:08:31करते हैं। इस क्रीम में ये केमिकल डला है।
2:08:33ये केमिकल डला है। ऐसा हुआ है, वैसा हुआ
2:08:35है। इस यू नो वेजिटेबल ऑयल में ये चीज डली
2:08:38हुई है। वो चीज डली हुई है। तो ये सारे
2:08:40जर्गन्स हैं। ठीक है? ये वैसे तो इस्तेमाल
2:08:42नहीं करने चाहिए। हैं। मुझे तो ऐसी ऐड समझ
2:08:44में भी नहीं आती जिसमें जार्ग्स इस्तेमाल
2:08:45होते हैं। बाय द वे जार्ग्स का मतलब होता
2:08:47है टेक्निकल वर्ड्स जो कि एक पर्टिकुलर
2:08:49फील्ड से रिलेट करते हैं। एक पर्टिकुलर यू
2:08:51नो अ कैटेगरी से रिलेट करते हैं। जैसे
2:08:54बैलेंस शीट, एसेट्स, लायबिलिटीज़ ये सारे
2:08:56कॉमर्स के जारगंस माने जाते हैं। तो वो सब
2:08:58नहीं इस्तेमाल करने चाहिए क्योंकि लोगों
2:09:00को समझ में नहीं आएगा। लेकिन बहुत ही
2:09:02ज्यादा नेसेसरी हो गया है। देन इन दैट
2:09:03सिनेरियो यू कैन यूज़ फ्यू। ऑलवेज प्रूफ
2:09:06ईमेल्स एंड
2:09:08ओके। ये बोलते हैं जब भी आप ईमेल्स वगैरह
2:09:10भेज रहे हैं तो उसको रीड कर लो। रीरीड करो
2:09:13मतलब पढ़ो बार-बार कि कुछ गलत नहीं चला
2:09:15जाए। ठीक है? चूज़ द राइट चैनल। सही चैनल
2:09:18का इस्तेमाल करो। अगर तुम्हें लगता है
2:09:20तुम्हारी पब्लिक ज्यादातर Instagram पे
2:09:22मिलेगी तो अपनी एड्स Instagram पे चलाओ।
2:09:24तुम्हें लगता है तुम्हारी पब्लिक ज्यादातर
2:09:26टीवी के सामने बैठी हुई मिलेगी तो टीवी पे
2:09:28एड्स चलाओ। ऐसी एक गाड़ी का ब्रांड है जो
2:09:32कभी भी टीवी पे एड्स नहीं चलाता। और उसका
2:09:34रीजन यह है वो यह बोलते हैं कि हमें हमारी
2:09:36गाड़ियां खरीदने वाले लोग कभी भी टीवी
2:09:38नहीं देखते। दैट्स व्हाई हम कभी भी वो ऐड
2:09:41चलाते ही नहीं है टीवी पे। अब तुम्हें
2:09:43मुझे बताना है कमेंट सेक्शन में मैं किस
2:09:44गाड़ी किस ब्रांड की बात कर रही हूं।
2:09:46फटाफट। ठीक है? ये गए प्रैक्टिकल टिप्स
2:09:49एडवरटाइजमेंट से रिलेटेड। नाउ लेट्स टॉक
2:09:51अबाउट कम्युनिकेशन थ्रू सोशल मीडिया। आज
2:09:55की डेट में सबसे ज्यादा जो चलता है वो ये
2:09:57वाला कम्युनिकेशन है। तुम मुझे बताओ तुम
2:10:00अपने दोस्त से किस पे बात करते हो?
2:10:01WhatsApp पे, Instagram पे, Snapchaat पे।
2:10:04इन्हीं सब मीडियम्स पे बात करते हो ना?
2:10:06किसी भी इंसान को किसी भी इंसान से बात
2:10:07करनी होती है। आजकल इन्हीं मीडियम्स का
2:10:09इस्तेमाल करते हैं हम लोग। किसी को यू नो
2:10:11आप बच्चों को मुझसे डाउट पूछ रहे होते
2:10:13हैं। आप मुझे Instagram पे डीएम करते हो
2:10:15तो आप भी क्या कर रहे हो? सोशल मीडिया का
2:10:17इस्तेमाल कर रहे हो कम्युनिकेट करने के
2:10:19लिए। तो कम्युनिकेशन आज की डेट में बहुत
2:10:21हद तक Lindin, Instagram, Twitter,
2:10:23WhatsApp पे हो गया है। और इसे हम बोलते
2:10:26हैं कम्युनिकेशन थ्रू सोशल मीडिया। सोशल
2:10:28मीडिया का इस्तेमाल करके आप क्या कर रहे
2:10:30हैं? एक दूसरे से वार्तालाप कर रहे हैं,
2:10:32बातचीत कर रहे हैं। अब इसके कुछ फायदे हैं
2:10:35और इसके कुछ नुकसान हैं। क्या फायदे हैं?
2:10:37क्या नुकसान है? पढ़ लेते हैं। यह बोलते
2:10:39हैं ग्लोबल रीच। मेरा एक फ्रेंड है कनाडा
2:10:42में है। मेरा एक फ्रेंड है यूएस में है।
2:10:44मेरे दो फ्रेंड्स हैं ऑस्ट्रेलिया में
2:10:46रहती हैं। ठीक है? अब ये चार लोगों से अगर
2:10:49मुझे बात करनी होती है। मुझे बस कुछ नहीं
2:10:50करना। WhatsApp पे उन्हें मैसेज ड्रॉप
2:10:52करती हूं या डायरेक्टली कॉल कर लेती हूं।
2:10:53कितना सिंपल हो गया है। पहले क्या होता था
2:10:56कि चिट्ठियां लिखो। महीने भर में वो पहुंच
2:10:58जाएंगी। 2 महीने में पहुंचेंगी। फिर
2:11:00रिप्लाई आएगा आज की डेट में हाउ इजी एंड
2:11:03कन्वीनिएंट इट इज़ टू टॉक टू समवन हु इज
2:11:05लिविंग फार अवे फ्रॉम यू? कनाडा में किसी
2:11:08से बात करनी है 2 सेकंड में कॉल पॉसिबल हो
2:11:11जाएगा। कैसे सोशल मीडिया को इस्तेमाल करके
2:11:14ठीक है? तो ग्लोबल रीच है इसकी। आप किसी
2:11:16से भी किसी टाइम पे भी बात कर सकते हो
2:11:18किसी भी जगह पे बैठे हुए। लो कॉस्ट पैसे
2:11:21ज्यादा नहीं लगते हैं। इंस्टेंट फीडबैक
2:11:24जैसे नॉर्मल कॉल हमें करते थे ना अगर किसी
2:11:26दूसरे देश कॉल करना होता तो बहुत-बहुत
2:11:28पैसे लगते थे। 7-7 आधे-आधे मिनट के लगते
2:11:31थे उस टाइम पे जब सात में ₹7 की बहुत कीमत
2:11:34होती थी। तो आज की डेट में तो आप फ्री फंड
2:11:35में बात कर रहे हो यार WhatsApp पे।
2:11:37इंस्टेंट फीडबैक फट से आप फॉलो करोगे
2:11:39सामने वाला पिक करेगा। आप अपनी बात करोगे
2:11:41वो अपना रिप्लाई देगा। इंस्टेंट फीडबैक
2:11:43मिल जाएगा। एंगेजमेंट बहुत अच्छा हो गया
2:11:45है। लोग एक दूसरे से कनेक्टेड रह सकते
2:11:47हैं। टारगेटेड मार्केटिंग। आपको जिसको
2:11:50भेजना है जो मैसेज उस तक पहुंचेगा। जैसे
2:11:53कैसे हर बार mnta का ऐड मुझे ही दिखाई
2:11:55देता है क्योंकि mnta वालों को भी पता है
2:11:57और Instagram वालों को भी पता है कि मैं
2:11:59ही mntra से शॉपिंग करती हूं तो वो मुझे
2:12:00ही ऐड दिखाएंगे। जो इंसान Amazon से
2:12:03शॉपिंग करता होगा उसको Amazon का ऐड
2:12:05दिखाएंगे। जो इंसान Flipkart से शॉपिंग
2:12:07करता होगा उसको Flipkart का ऐड दिखाएंगे।
2:12:09तो Instagram को बहुत अच्छे तरीके से पता
2:12:10है कि इस बंदे की शॉपिंग कहां से होती है।
2:12:13तो फिर वो एड्स भी वहीं के ही दिखाते हैं।
2:12:15ठीक है? ब्रांड पर्सनालिटी। ब्रांड की
2:12:18पर्सनालिटी पे भी डिपेंड करता है। मतलब
2:12:19ब्रांड की पर्सनालिटी भी बिल्ड हो जाती
2:12:21है। कहीं ना कहीं सोशल मीडिया के थ्रू।
2:12:24डिसएडवांटेजेस क्या हैं? फेक न्यूज़ बहुत
2:12:26जल्दी फैलती है। मिसइफेशन बहुत जल्दी
2:12:28फैलती है। ट्रोलिंग बहुत ज्यादा होती है।
2:12:30नेगेटिव कमेंट्स बहुत आते हैं। आप एक बार
2:12:32वीडियो डालो। इतने नेगेटिव कमेंट्स भर
2:12:34जाते हैं कि कई लोग तो सोशल मीडिया के
2:12:37ट्रोलिंग की वजह से सुसाइड भी कमिट कर
2:12:39चुके हैं। तो आप समझ सकते हो कितनी
2:12:41इंटेंसिफाई सिचुएशन हो जाती है।
2:12:44सिक्योरिटी रिस्क ऑनलाइन जो भी चीज है उस
2:12:46पे सिक्योरिटी रिस्क तो है ही है। कोई भी
2:12:48हैकर हैक कर लेगा चीजें खत्म हो जाएंगी।
2:12:51शॉर्ट अटेंशन स्पैन आज की डेट में आप
2:12:53देखते हो कोई इंसान 1 मिनट की रील भी
2:12:55ध्यान से नहीं देख पाता। उसको भी वो हम 2x
2:12:57कर लेते हैं। मतलब जो हम स्क्रीन पे क्लिक
2:12:59करके रखते हैं तो वो 2x की स्पीड पे चलती
2:13:01है। मैं तो ज्यादातर रील्स ऐसे देखती हूं
2:13:02तो हमारा टाइम स्पैन बहुत कम हो गया
2:13:04अटेंशन का। हम बहुत ज्यादा अटेंशन दे ही
2:13:06नहीं पाते। मैं एक वीडियो बनाऊंगी 2 घंटे
2:13:08की फिर भी चल जाएगी। मैं एक वीडियो
2:13:10बनाऊंगी 8 घंटे की। उसको बहुत टाइम लगेगा
2:13:12चलने में। ठीक है? क्यों? क्योंकि अटेंशन
2:13:14स्पैन लोगों का खत्म हो गया है। ओवर
2:13:16एक्सपोज़र इंटरनेट है, सोशल मीडिया है भाई।
2:13:19हजारों करोड़ों लोग इस्तेमाल करते हैं। तो
2:13:21अगर आप उस पे जा रहे हैं तो मतलब आप अपनी
2:13:23लाइफ को ओवर एक्सपोज कर ही रहे हैं। जिसका
2:13:26एग्जांपल मैं आपको ऑलरेडी दे चुकी हूं। अब
2:13:29हम बात करते हैं इंटर इंटरकल्चरल एंड
2:13:31इंटरनेशनल बिजनेस कम्युनिकेशन के बारे
2:13:34में। दो चीजें इस्तेमाल हुई हैं।
2:13:35इंटरनेशनल मतलब यहां पे दो नेशन के बारे
2:13:38में बात हो रही है मिनिमम। ठीक है? इंडिया
2:13:40और कोई और नेशन। ठीक है? और इंटरकल्चरल
2:13:44बोले तो यहां पे दो कल्चरर्स के बारे में
2:13:46बात हो रही है। चाहे फिर वो पंजाबी,
2:13:48हरियाणवी कुछ भी ऐसा हो सकता है। ठीक है?
2:13:50तो अब इसका क्या वो सीन है वो पढ़ लीजिए
2:13:53यहां पे।
2:13:54देखो यह बोलते हैं कि आज की डेट में
2:13:56ग्लोबलाइजेशन आ चुकी है। जिसके चलते हुए
2:13:59सभी देशों में बहुत अंतर नहीं रहा है। हम
2:14:02बहुत ईजीली एक दूसरे के साथ कम्युनिकेट
2:14:05करते हैं। हम साथ मिलके काम करते हैं।
2:14:07मल्टीीनेशनल कंपनीज़ चलाते हैं। तो वहां पे
2:14:10ना हमें बहुत सारे चैलेंजेस फेस करने को
2:14:13मिलते हैं। क्या-क्या हैं? यहां से
2:14:15स्टार्ट करते हैं। पहला है लैंग्वेज
2:14:17बैरियर। मान लीजिए मैं एक एमएनसी में काम
2:14:20करती हूं और वहां पे मैं एक इंडियन हूं।
2:14:22मुझे हिंदी आती है। और एक इंसान आया है
2:14:25जापान से काम करने के लिए। ठीक है?
2:14:27क्योंकि वह उस पर्टिकुलर कंपनी की एक
2:14:29ब्रांड जापान में भी है। तो जापानीज़ को
2:14:31इंग्लिश नहीं आती। उसे जापानीज़ आती है। तो
2:14:34हम आपस में बात कैसे करेंगे? वो जापानीज़
2:14:36बोल रहा होगा। मैं हिंदी बोल रही हूंगी।
2:14:38एक दूसरे की बात ही नहीं समझ पाएंगे। तो
2:14:40ये एक प्रॉब्लम बहुत फेस करने को मिलती है
2:14:42मल्टीकल्चरल एंड मल्टीीनेशनल कंपनीज़ में।
2:14:45ठीक है? दूसरा है नॉन वर्बल साइंस। देखिए
2:14:49एक जैसे एग्जांपल दूं इसका। हम इंडियंस को
2:14:52बचपन से सिखाया जाता है। मतलब मेरी मम्मी
2:14:54ने तो मुझे बहुत ही बचपन में समझाया था कि
2:14:56जब आप किसी को देखते हो 10 सेकंड से
2:14:58ज्यादा मत देखो। ठीक है? और डोंट लुक इंटू
2:15:01द आइज। ठीक है? वो थोड़ा रूढ़ कंसीडर किया
2:15:04जाता है। लेकिन वहीं पे अमेरिकनंस आंखों
2:15:06में ही आंखें डाल के देखते हैं। उनमें ये
2:15:08कॉन्फिडेंस माना जाता है। तो हमारे
2:15:11अकॉर्डिंग तो वो चीज गलत हो गई। हमें
2:15:13बोलते हैं क्रॉस लेग नहीं बैठना चाहिए
2:15:15किसी अपने बड़े घरवाले के सामने। जैसे
2:15:18ताऊजी के सामने बैठे हुए हो, दादा के
2:15:19सामने बैठे हुए हो। तो क्रॉस लेग्ड मत
2:15:21बैठो क्योंकि वो रुडनेस दिखती है। लेकिन
2:15:24वही चीज यू नो वेस्टर्न नेशंस में कंफर्ट
2:15:27का एक निशाना माना जाता है। तो नॉन वर्बल
2:15:30ऐसे बहुत सारे सिग्नल्स होते हैं जिसका
2:15:32मतलब एक कंट्री में डिफरेंट होता है।
2:15:34दूसरी कंट्री में डिफरेंट होता है। तो ये
2:15:36भी एक प्रॉब्लम है जो आपको फेस करने को
2:15:37मिलती है मल्टी मल्टी कल्चरल या नेशनल
2:15:40कंपनीज़ में। स्टीरियोटाइप्स कई बार क्या
2:15:43करते हैं? हम अपने मन में ना किसी चीज को
2:15:46बिठा लेते हैं और हमें लगता है यह तो ऐसी
2:15:48ही है। जैसे वेस्टर्न लोगों के बारे में
2:15:51हमारे मन में बहुत सारे मिथ्स बैठे हुए
2:15:52हैं कि अरे ये तो छोटे कपड़े पहनते हैं।
2:15:54ये तो कंफर्टेबल होते हैं कुछ भी करने में
2:15:55ऐसा करने में। यहां हम क्या कर रहे हैं?
2:15:57यहां हम स्टीरियोटाइप्स पाल रहे हैं। मतलब
2:16:00दो-चार लोगों को देखा। उसके बेसिस पे एक
2:16:03ओपिनियन फॉर्म कर लिया सबके बारे में।
2:16:05जैसे बहुत सारे वेस्टर्न नेशन के लोग कुछ
2:16:07इंडियंस को देखते हैं और उनको लगता है
2:16:09इंडियंस तो गवार होते हैं। इनमें हाइजीन
2:16:11की कमी होती है। ऐसा होता है वैसा होता
2:16:12है। बहुत सारी रील्स आप देखते भी होंगे।
2:16:14वो बोलते हैं इंडियंस गो बैक। अपने देश
2:16:16जाओ। हमारे देश को तुम गंदा कर रहे हो। वो
2:16:18क्या है? आपने चार लोगों को देखा और उसके
2:16:20बेसिस पे ओपिनियन फॉर्म कर लिया कि सारे
2:16:22इंडियंस ऐसे होते होंगे। राइट? बहुत सारे
2:16:25लोग बाहर से इंडिया में घूमने भी आते हैं।
2:16:26उनका भी यही ओपिनियन होता है कि कुछ बोलते
2:16:28हैं इंडियंस बहुत अच्छे हैं। जिनका
2:16:30एक्सपीरियंस वैसा रहा होता है और कुछ
2:16:31बोलते हैं इंडिया बहुत बेकार है। जिनका
2:16:32एक्सपीरियंस कॉन्टरी रहता है। तो आप क्या
2:16:35करते हो? चार लोगों के बेसिस पे
2:16:37जनरलाइजेशन कर लेते हो। सब लोग को एक समान
2:16:40समझ लेते हो। तो वो चीज नहीं करना चाहिए।
2:16:43फिर आता है टेक्नोलॉजी इशूज़। देखो एक तो
2:16:46टाइम ज़ोन का इशूज़ आता है। जैसे यूएस में
2:16:48जिस टाइम पे रात होएगी हमारे यहां पे दिन
2:16:50होता है एंड वाइसवरसा। ठीक है? और दूसरा
2:16:53कई बार क्या होता है दूसरी कंट्री में
2:16:55टेक्नोलॉजी अलग लेवल की चल रही होती है।
2:16:56जैसे मेरी फ्रेंड मुझे बताती थी कुछ सालों
2:16:59पहले तक जब वो ग्रेजुएशन करने के लिए
2:17:01ऑस्ट्रेलिया गई थी कि हमारे यहां पे तो
2:17:03यार टैप करते हैं हम कार्ड से या फिर
2:17:06कार्ड हमारी जेब में ही होता है। वो बस
2:17:07टैप मशीन हमारे पास से गुजार लेते हैं और
2:17:09हमारे कार्ड से पैसे कट जाते हैं। बट
2:17:12इंडिया में वो टेक्नोलॉजी तब आई नहीं
2:17:14इंडिया में वो टेक्नोलॉजी अब आई है। तो
2:17:15कई-कई बार टेक भी डिफरेंट-डिफरेंट नेशंस
2:17:18पे डिफरेंट-डिफरेंट टाइम पे आता है। उसके
2:17:20बाद है एथनोसेंट्रिज्म। इसका मतलब क्या
2:17:23होता है? जैसे आपने कई बार पंजाबी लोगों
2:17:26को बोलते हुए सुना होगा। पंजाबीज़ बेस्ट
2:17:28होते हैं। है ना? मतलब पंजाबियों में एक
2:17:30एटीट्यूड होता है कि हम तो बेस्ट हैं। ऐसे
2:17:32ही ब्राह्मण लोगों में होता है। ब्राह्मण
2:17:34लोगों को लगता है हम ब्राह्मण हैं। हम
2:17:36श्रेष्ठ हैं। तो ये क्या है? मतलब अपने
2:17:39कल्चर को सुपीरियर मानना और दूसरों के
2:17:41कल्चर को नीचा मानना। ये चीज होती है। ये
2:17:44चीज भी गलत है और ये भी एक प्रॉब्लम है
2:17:45जिससे का निवारण हमें सोचना पड़ेगा, सुन
2:17:48समझना पड़ेगा ताकि ये प्रॉब्लम हमें फेस
2:17:50करने को नहीं मिले। देन आती हैं लीगल
2:17:53एस्पेक्ट ऑफ बिनेस कम्युनिकेशन। देखो
2:17:57बहुत सारे अलग-अलग मीडियम्स इस्तेमाल होते
2:17:59हैं, जरिए इस्तेमाल होते हैं जिससे इंसान
2:18:01आज की डेट में कम्युनिकेट करता है। ठीक
2:18:03है? जैसे अभी आपने थोड़े टाइम पहले सुना
2:18:06होगा नीट का जो एग्जाम था वो टेलीग्राम की
2:18:10वजह से क्या हो गया? लीक हो गया। मतलब
2:18:12Telegram वाज़ नॉट द रीज़न ऑब्वियसली बट ऐसा
2:18:14आया न्यूज़पेपर में कि Telegram का
2:18:17इस्तेमाल करके नीट का एग्जाम लीक हो गया।
2:18:20ऐसे Telegram पे Telegram पे पहले भी
2:18:22एलगेशंस लगे थे कि टेररिस्ट एक्टिविटीज़
2:18:25चलती हैं। जो भी उनको खुफिया खबर एक दूसरे
2:18:27तक पहुंचानी होती है वो Telegram का
2:18:28इस्तेमाल करते हैं। तो इसके लिए जरूरी हो
2:18:31गया सारे मीडियम्स के लिए कुछ लॉज़ लाना।
2:18:35ये बोलते हैं अगर आपके मीडियम का इस्तेमाल
2:18:37करके कुछ भी गलत काम होगा तो हमारे पास
2:18:40पूरा अधिकार है कि हम आपके मीडियम को हटा
2:18:43सकते हैं रोक सकते हैं। जैसे अभी थोड़े
2:18:45दिन के लिए Telegram बैन हुआ था। वो क्यों
2:18:47हो पाया? क्योंकि गवर्नमेंट ने पहले से
2:18:50बताया हुआ है कि आपके मीडियम का इस्तेमाल
2:18:51करके अगर कुछ भी गलत काम हुआ यू विल बी
2:18:53हेल्ड रिस्पांसिबल फॉर दैट। और आपके
2:18:55मीडियम को हटाया जा सकता है। अभी यहां पे
2:18:57कंप्लीटली नहीं हटाया सस्पेंड किया गया।
2:19:00ठीक है? तो वो चीज है लॉज़ एंड गाइडलाइंस
2:19:02दैट गवर्न हाउ ऑर्गेनाइजेशन एक्सचेंज
2:19:04इनफेशन विद एंप्लाइजज़ कस्टमर कंपेटिटर्स
2:19:07पब्लिक। कैसे कस्टमर पब्लिक इन सब से
2:19:09बातचीत करी जाएगी उसके रिगार्डिंग लॉज़
2:19:11वगैरह बनते हैं। प्लस मीडियम्स के
2:19:13रिगार्डिंग भी लॉज़ बनते हैं। ठीक है? दीज़
2:19:16रूल्स मेक श्योर फेयरनेस, प्रिडिक्ट
2:19:17राइट्स एंड मेंटेन ट्रस्ट। ट्रस्ट बना
2:19:20रहे, फेयर रहे चीजें। ये सारी चीजें ये
2:19:23लॉस मेंटेन करते हैं। ये एश्योर करते हैं।
2:19:27इसके बाद है यूज़ ऑफ हाईटेक एंड बिजनेस
2:19:30कम्युनिकेशन। आज की डेट में हम बहुत ही
2:19:32हाईटेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं।
2:19:34हाईटेक टेक्नोलॉजी अपने आप में ही
2:19:36टेक्नोलॉजी होती है। ठीक है? जैसे कि एआई
2:19:39एंड चैटबॉट्स हम बहुत इस्तेमाल करते हैं।
2:19:41ईमेल्स एंड ब्लॉग्स हम बहुत इस्तेमाल करते
2:19:43हैं। प्रोफेशनल जितने भी हमारे
2:19:45कम्युनिकेशन होते हैं वो सारे इसके थ्रू
2:19:47होते हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग वीडियो
2:19:50कॉन्फ्रेंसिंग कैसे करते हैं? चार लोग आपस
2:19:52में एक दूसरे को कॉल करते हैं। वीडियो
2:19:53कॉन्फ्रेंसिंग द हिस्ट्री ऑफ़ कम्युनिकेशन
2:19:55हैज़ ट्रेवल्ड अ लॉन्ग वे। कम्युनिकेशन एक
2:19:58बहुत ही लंबा जर्नी तय करके आया हुआ है।
2:20:01हाई टेक्नोलॉजी हैज़ मेड कम्युनिकेशन फास्ट
2:20:03मोर एक्यूरेट एंड एक्सेसिबल। आज की डेट
2:20:06में अच्छी टेक्नोलॉजी हाईफाई टेक्नोलॉजी
2:20:08की वजह से कम्युनिकेशन बहुत इजी होता जा
2:20:11रहा है। वरना याद करिए वो दिन जब एक दूसरे
2:20:14को लेटर लिखने पड़ते थे। आई डोंट नो आपने
2:20:16वो दिन देखे हैं कि नहीं देखे। लेकिन जब
2:20:18मैं बहुत छोटी थी। बहुत छोटी थी। तब हमारे
2:20:21यहां पे फर्स्ट फोन लगा था। एंड दैट वाज़
2:20:24इन हमारे घर। लैंडलाइन लगा था। एंड दैट
2:20:26वाज़ द फर्स्ट फोन। तब मोबाइल की कांसेप्ट
2:20:28नहीं होती थी। ठीक है? तो मैंने वो वाला
2:20:30एरा देखा है। ठीक है? मतलब मैं बहुत
2:20:32ज्यादा पुरानी नहीं हूं। इट्स जस्ट कि ये
2:20:34एरा बहुत ज्यादा नया है। स्मार्टफोनस
2:20:36WhatsApp ये सब बहुत बाद में आया। ठीक है?
2:20:38मेरे स्कूल के टाइम पे अ यू नो वो वाले
2:20:41फोन चलते थे। ब्लैक बेरी वाले वो बहुत
2:20:44फेमस थे। अगर आपके पास ब्लैकरी फोन है ना
2:20:47तो वो आपका एक स्टेटस सिंबल माना जाता था
2:20:49कि आप बहुत ही अमीर हैं तभी आपके पास
2:20:50ब्लैक बेरी है। ठीक है? और iPhone तब
2:20:54उसमें उस टाइम पे बहुत ज्यादा लोग
2:20:55इस्तेमाल नहीं करते थे। iPhone का क्रेज
2:20:57बाद में आया। ठीक है? तो टेक्नोलॉजी के
2:20:59साथ चीजें बड़ी हैं। और ऑब्वियसली
2:21:01कम्युनिकेशन का जरिया भी बड़ा है। पहले
2:21:03हमें किसी से बात करनी होती थी। हम लेटर
2:21:04लिखते थे। एक महीने में वो वहां पहुंचता
2:21:06था। फिर हमें रिप्लाई मिलता था। फिर हम
2:21:08लिखते थे नहीं लिखते थे। 100 चीजें होती
2:21:10थी। आज की डेट में टक टक टक टक टक सेंड टक
2:21:13टक टक टक सेंड ऐसे करते हैं हम। राइट?
2:21:15चलिए नेक्स्ट है बिजनेस अटायर। ये क्या
2:21:18बोल रहा है? यह बोलता है कि जब आप किसी
2:21:21प्रोफेशनल मीटिंग के लिए जाते हैं,
2:21:23ट्रेनिंग के लिए जाते हैं, तो किस किस्म
2:21:25के कपड़े आपको पहन के जाने चाहिए? उसके
2:21:27बारे में। अभी मैंने एक वीडियो बनाई है
2:21:29ट्रेनिंग के ऊपर जो कि सीएस में होती है।
2:21:31सीएस में जितने भी प्रकार की ट्रेनिंग
2:21:33होती है, उसके रिगार्डिंग जस्ट एक वीडियो
2:21:35शूट की है बिफोर दिस लेक्चर। उसमें भी
2:21:37मैंने इस चीज पे बात करी है कि आपको
2:21:39ट्रेनिंग के टाइम पर क्या कपड़े पहन के
2:21:41जाने चाहिए। बेटा वैसे तो देखो तुम्हें इस
2:21:43बात की बहुत समझ होनी चाहिए। बाय डिफॉल्ट
2:21:46थोड़ा सा सेंस होना ही चाहिए कि फॉर्मल
2:21:48चीज में जा रहे हो तुम। फॉर्मल मीटिंग में
2:21:49जा रहे हो तो किस किस्म के कपड़े तुम्हें
2:21:51पहने होने चाहिए। ठीक है? बट फिर भी कुछ
2:21:53बच्चे गलती करते हैं। इसलिए मैं बता देती
2:21:55हूं। जब भी आप प्रोफेशनली कहीं पे कुछ भी
2:21:57मीटिंग वगैरह अटेंड करने जाते हैं। शर्ट
2:21:59पैंट पहनिए। ठीक है? अगर आप लड़के हैं तो
2:22:01ब्लज़र पहनते हैं तो ब्लज़र पहनिए। टाई
2:22:04लगाते हैं तो टाई लगाइए। ठीक है? लड़की है
2:22:06तो या तो वेस्टर्न कपड़े पहन लो लाइक
2:22:08ब्लज़र, शर्ट, पैंट, ट्राउजर्स एंड नीचे
2:22:10हील्स। ठीक है? अगर आप वेस्टर्न नहीं
2:22:13पहनना चाहते, इंडियन अटायर पहनना चाहते तो
2:22:15साड़ी पहन लो। साड़ी नहीं तो सूट पहन लो।
2:22:18लेकिन सूट मेक श्योर करना ऐसा फ्रिल फ्रिल
2:22:20वाला नहीं हो। ठीक है? नॉर्मल कुर्ता जो
2:22:24कि थोड़ा हम ऑफिस में पहन सकते हैं वैसे
2:22:26वाला। ठीक है? तो ऐसे कपड़े पहन के जाने
2:22:28चाहिए। और इसका अहमियत क्या होता है वो भी
2:22:30सुन लीजिए। देखो अगर मैं चमकीले कपड़े पहन
2:22:34के बड़े-बड़े कांटे पहन के ऐसे मुंह पे
2:22:36लिपस्टिक पोथ के और 1ढ़ किलो मेकअप थोप के
2:22:40किसी मीटिंग में जाऊंगी तो लोगों को लगेगा
2:22:42कैसी गवार औरत है। इसको कुछ भी नहीं पता
2:22:44है कि मीटिंग में कैसे आते हैं। मीटिंग
2:22:46में आप आए हैं कोई चीज डिस्कस करने के
2:22:49लिए। वहां पे आपको प्रेजेंटेबल अलग वे में
2:22:52दिखना था। ऐसे नहीं दिखना था। ठीक है? तो
2:22:55आपका फर्स्ट इंप्रेशन काफी हद तक आपके
2:22:57अटायर से डिसाइड हो जाता है। तो इसलिए
2:22:59किसी को मौका मत दीजिए आपके बारे में कोई
2:23:01भी बात करने का। तो फर्स्ट इंप्रेशन इंसान
2:23:04का उसके कपड़ों से होता है। प्रोफेशनल
2:23:07इमेज अगर आप प्रोफेशनल कपड़े पहन के जाते
2:23:09हैं तो आपकी एक इमेज बन जाती है। जैसे
2:23:11मेरा भाई माय ब्रदर इज़ अ सीए। सीए, सीएस,
2:23:14सीएमए तीनों हैं वो। ठीक है? तो वो सीए
2:23:16में भी और सीएस में भी सेशंस लेते हैं।
2:23:19ठीक है? ओसी होती है, सीएमए और भी कुछ
2:23:21होता है। एमसीएस करके कुछ होता है। फिर
2:23:24सीएस में ईडीपी होती है, एसआईपी होती है।
2:23:27तो वो सारे सेशंस मेरा भाई लेता है भोपाल
2:23:29में। ठीक है? अब मेरे भोपाल भाई की पहचान
2:23:32बन चुकी है पूरे फ्रेटरनिटी में कि जो
2:23:34सबसे वेल ड्रेस्ड आता है ब्लज़र पहन के
2:23:37आएगा, शर्ट पहन के आएगा, टाई लगा के आएगा।
2:23:40प्रॉपर तैयार हो के जो इंसान आता है ना वो
2:23:42मेरा भाई है। हर सेशन में ये बात फेमस है।
2:23:44बच्चे आते सेशन में बाद में उनको पहले से
2:23:47पता होता है कि ये बंदा बहुत ही सही तरीके
2:23:49से तैयार हो के आता है। क्योंकि भोपाल में
2:23:50वो कल्चर ही नहीं है कि लोग सही तरीके से
2:23:53तैयार हो के आए। ठीक है? सेम गोज़ फॉर मी।
2:23:55उसने मुझे भी वही चीज सिखाई है। अब जैसे
2:23:57मैं सीएस की ट्रेनिंग के सेशन लेने जाती
2:23:59हूं। ईडीपी, एसआईपी, टीडीओपी ये सब तो मैं
2:24:03भी बिल्कुल वेल ड्रेस्ड हो के ही जाती
2:24:05हूं। तो अब हमारी सिबलिंग्स की पहचान होती
2:24:07है हमारे कपड़ों के बेसिस पे। तो आपकी
2:24:09काफी हद तक प्रोफेशनल इमेज जो बनती है वो
2:24:12कपड़ों की वजह से बनती है। ठीक है? देन
2:24:15बूस्ट कॉन्फिडेंस। अगर आप अच्छे लग रहे
2:24:17होते हो, प्रेजेंटेबल लग रहे होते हो तो
2:24:19आपके कॉन्फिडेंस में वैसे ही एक यू नो
2:24:21ठहरावपन आ जाता है। बढ़िया हो जाता है
2:24:23आपका कॉन्फिडेंस लेवल। शोज़ रिस्पेक्ट। अगर
2:24:26आप सही के दिख रहे होते हो ना, तो लोग
2:24:28आपकी रिस्पेक्ट अलग से ही करने लग जाते
2:24:29हैं। ठीक है? और ये चीज़ मैंने पर्सनली फील
2:24:32की है। तुम लोगों को लग रहा होगा फ्लेक्स
2:24:33कर रही है बंदी। ऐसा नहीं है। देखो बेटा
2:24:35मैं तुम्हें प्रैक्टिकल जो मैंने चीज फील
2:24:37की है ना वो बता रही हूं। पहले मैं नॉर्मल
2:24:39शर्ट पहन के जाती थी। ठीक है? ईडीपी या
2:24:41एसआईपी में तो ठीक है? नॉर्मल इज्जत मिलती
2:24:45थी। ठीक है? जब से मैंने ब्लज़र पहन के,
2:24:47हील्स पहन के, ट्राउज़र्स पहन के ऐसे जाना
2:24:50शुरू किया बिल्कुल प्रोफेशनल अटायर में।
2:24:52तो आई हैव सीन बच्चों की आंखों में नजर आ
2:24:55जाता है कि बच्चे आपको रिस्पेक्ट कर रहे
2:24:57हैं। एंड बहुत सारे बच्चे फीडबैक में बोल
2:24:58के जाते हैं कि दिस टीचर वाज़ वेरी लाइक यू
2:25:01नो अटायर वाइज़ बहुत अच्छे से वेल ड्रेस्ड
2:25:03थी। तो वो चीज़ फील हो जाती है आपको। लोग
2:25:06आपको यू नो रिस्पेक्ट अलग नजर से देना
2:25:09शुरू कर देते हैं। एनेंस करियर ग्रोथ
2:25:11ऑब्वियसली अब आज की डेट में मैंने बहुत
2:25:14सारे सेशंस नहीं लिए हैं लेकिन भोपाल की
2:25:16विसिनिटी में आज की डेट में उतना नाम हो
2:25:19गया है। क्यों? ग्रोथ मिल गई छोटे से
2:25:21ड्यूरेशन में। क्यों? क्योंकि जो
2:25:23रिक्वायरमेंट थी अटायर वाइज वो पूरी करी
2:25:26जा रही है। ठीक है? बाकी टीचर्स क्या करते
2:25:28हैं? कुछ भी पहन के आ जाते हैं। कोई यू नो
2:25:30साड़ी पहन के आ जाएगा चमक-धमक वाली। तो
2:25:32ऐसे सब चीजें नहीं चलती हैं। तो बच्चे उस
2:25:35उस चीज को भी नोटिस करते हैं एंड देन वो
2:25:36कंपैरिजन करते हैं और वहां से फिर वो पता
2:25:38लगाते हैं कि किसकी ज्यादा वो थी और किसकी
2:25:40वो थी और फिर वो बोलते भी हैं फीडबैक में।
2:25:42अच्छा एक चीज और बता दूं ट्रेनिंग्स जितनी
2:25:44भी आपकी होंगी ना उसमें फैकल्टी का फीडबैक
2:25:47करवाया जाता है। जैसे आप लोगों के यहां पे
2:25:49पेड सेशंस में होता है ना रेटिंग करवाई
2:25:51जाती है। बिल्कुल वैसे ही तो वहां पे
2:25:52बच्चे बताते भी हैं चीजें। मतलब आप लोग भी
2:25:55बता सकते हैं किस फैकल्टी का आपको क्या
2:25:56पॉइंट अच्छा लगा। ठीक है? चलिए वर्क प्लेस
2:25:59हायरार्की। हायरार्की का मतलब क्या होता
2:26:01है? ये सुपीरियर है। ये इसके जूनियर्स
2:26:04हैं। ये इसके जूनियर्स हैं। ये सुपीरियर
2:26:07है। ये इसके जूनियर्स हैं। ये इसके
2:26:08जूनियर्स हैं। ये जो सेटअप बना है ना इसको
2:26:10हम हायरार्की बोलते हैं। कौन ऊपर आएगा?
2:26:12कौन नीचे आएगा? कौन कौन से पोजीशन पे
2:26:14आएगा? तो वर्क प्लेस हायरार्की के बारे
2:26:16में ये बोलते हैं। डिफाइन हु रिपोर्ट्स टू
2:26:18हुम। कौन किसको रिपोर्ट करेगा। ये जूनियर
2:26:20है तो ये अपने सीनियर को रिपोर्ट करेगा।
2:26:22यह इसका जूनियर है तो यह इसको रिपोर्ट
2:26:24करेगा। तो आपको वर्क प्लेस हायरार्की से
2:26:27पता चलता है कि कौन किसको निर्देश देगा।
2:26:29कौन किसको कमांड देगा और कौन किसकी बात
2:26:32सुन के रिपोर्ट करने का काम करेगा। ठीक
2:26:34है?ेंस क्या है इसकी? क्लियर रोल्स एंड
2:26:37रिस्पांसिबिलिटी। हर इंसान को पता होता है
2:26:39उसके क्या रोल्स हैं? उसकी क्या
2:26:40रिस्पांसिबिलिटीज हैं। ठीक है? एफिशिएंट
2:26:43कम्युनिकेशन। कम्युनिकेशन बहुत ही सही
2:26:44तरीके से होता है। क्योंकि आपको पता होता
2:26:46है आपको कौन सी बात किसको बतानी है जाके।
2:26:49ठीक है? अकाउंटेबिलिटी हर कोई अपनी बात के
2:26:51लिए जवाबदेही होता है। क्योंकि सबका
2:26:53सिस्टम सेट है ना। तुम ये काम के लिए
2:26:55रिस्पांसिबल थे तो अब इस काम में कुछ भी
2:26:57अड़चन आएगी। तुम आंसरेबल होगे। तुम्हें
2:26:59जवाब देना पड़ेगा। डिसीजन मेकिंग बहुत सही
2:27:02तरीके से होती है। आप बहुत अच्छे तरीके से
2:27:03डिसाइड कर पाते हो क्योंकि आपके पास सिर्फ
2:27:05आपका को काम होता है। आपका वर्क लोड होता
2:27:07है। दैट्स इट। कॉन्फ्लिक्ट रेोल्यूशन यहां
2:27:10पे आप कॉन्फ्लिक्ट रेज़ोल्यूशन का मतलब
2:27:12होता है लड़ाई झगड़ा जो होता है जो भी
2:27:13कॉन्फ्लिक्ट होता है उसको रॉल्व करना। तो
2:27:15वो चीज भी बहुत ईजीली हो पाती है और
2:27:17मोटिवेशन एंड करियर ग्रोथ भी होती है। लोग
2:27:19अपने जूनियर्स को मोटिवेट करते रहते हैं।
2:27:21उनके करियर पे फोकस करते हैं। वो कैसे और
2:27:23बेहतरीन कर सकते हैं उस पे फोकस करते हैं।
2:27:26आप अपने लेवल के काम बहुत अच्छे तरीके से
2:27:28संभालते हो तो उसकी वजह से आप एक्सपर्ट
2:27:30बनते रहते हो उसमें। वहां से आपकी करियर
2:27:32ग्रोथ होती है। देन है कर्टसी एट वर्क
2:27:34प्लेस। वर्क प्लेस पे कर्टसी का क्या मतलब
2:27:36है? यह बोलते हैं कर्टसी का मतलब होता है
2:27:38वह ऊपर से जो हम स्माइल स्मोइल करते हैं
2:27:40वह सब नहीं। जो अंदर से दिल से जो हम
2:27:42रिस्पेक्ट करते हैं उसको हम करसी बोलते
2:27:44हैं। कर्टसी इज नॉट अबाउट सेरेमोनियल
2:27:47स्माइल्स और रिजिड रूल्स। इट इज़ अबाउट
2:27:49जेनुइन रिस्पेक्ट। दिल से जो रिस्पेक्ट
2:27:52आती है जेन्युइन वाली उसको करसी बोला जाता
2:27:55है। और वर्क प्लेस पे ये होना बहुत ज्यादा
2:27:57जरूरी होता है। अगर मन से आप किसी की
2:27:59इज्जत नहीं करते हैं तो बेटा फिर तो तुम
2:28:03चेहरे पे कितनी बार दिखा लोगे। ठीक है? वो
2:28:06कहीं ना कहीं झलक ही जाएगा कि भाई दिल से
2:28:08नहीं आ रही है ये चीज। ठीक है? और इसी के
2:28:10साथ ये हमारा चैप्टर यहीं पे समाप्त होता
2:28:13है। होमवर्क क्या है वो सुन लीजिए।
2:28:16आपको मॉड्यूल रीड करना है। जो भी इस
2:28:20चैप्टर में पढ़ाया गया है वो सारा का सारा
2:28:23रीड करना है। ठीक है? एंड एंड
2:28:29अ एंड कुछ सब्जेक्टिव क्वेश्चंस सॉल्व
2:28:34करके देखने हैं। सब्जेक्टिव प्लस केस
2:28:37बेस्ड क्वेश्चंस
2:28:41सॉल्व करके देखने हैं। अब अगर आप पूछ रहे
2:28:43हैं मैम यह क्वेश्चंस हम कहां से लेंगे?
2:28:45तो बेटा अगर आप पेड बैच के बच्चे हैं तो
2:28:46मैं ही आपको क्लास में दे देती हूं ये
2:28:48क्वेश्चंस। लेकिन अगर आप पेड बैच के बच्चे
2:28:50नहीं हैं तो चैट जीपीटी किस दिन काम आएगा?
2:28:54उसको बोलो। अपनी बुक डालो उसमें और उसको
2:28:56बोलो इस चैप्टर से मुझे इतने सब्जेक्टिव
2:28:58इतने केस बेस्ड क्वेश्चन निकाल के दे दे।
2:29:00वो दे देगा। ठीक है? वहां से प्रैक्टिस
2:29:02करो। आंसर लिख के देखो। और कम्युनिकेशन
2:29:05बिजनेस कम्युनिकेशन क्योंकि सब्जेक्टिव
2:29:07पेपर है तो बेटा जितना हो पाए उसकी आंसर
2:29:09राइटिंग की प्रैक्टिस करो जितना हो पाए।
2:29:12ओके चलिए इसी के साथ हम इस लेक्चर को यहीं
2:29:16पे समाप्त करते हैं। आप सभी का बहुत-बहुत
2:29:19शुक्रिया मेरे साथ यहां तक बने रहने के
2:29:21लिए। मुझे बहुत अच्छा लगा आपको पढ़ा के।
2:29:23आई होप आपको भी मजा आया हो मुझसे पढ़ के।
2:29:25आपका जो भी फीडबैक हो आप कमेंट सेक्शन में
2:29:27लिख सकते हैं। विद दैट अगर आपको कोई भी
2:29:28डाउट रहा हो पूरे लेक्चर में तो वो भी आप
2:29:31कमेंट सेक्शन में मेंशन कर सकते हैं। ठीक
2:29:33है? चलिए मिलते हैं एक और वन शॉट में बहुत
2:29:36ही जल्दी। टिल देन बाय बाय।