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Houthies Shot Down Saudi F-15: Answers to Pakistani Pilot Question? | Akram Naeem Bharoka

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0:0016 सितंबर को हूदियों ने सऊदी अरब का एक

0:03जहाज गिरा दिया। उसमें दो पायलट थे।

0:08आठ दिन गुजर गए हैं। ना उन पायलट्स के नाम

0:11आए हैं। ना तस्वीरें, ना लाशें, ना मारने

0:16वालों की कोई आवाज, ना भेजने वालों का कोई

0:19जवाब। दो पायलट गायब हैं और दोनों फरीक

0:22खामोश हैं। ऐसा कब होता है?

0:27और जो सवाल इस वक्त पाकिस्तान में हर

0:30दूसरा आदमी पूछ रहा है मैं उसे छुपाऊंगा

0:33नहीं। क्या इस जहाज में कोई पाकिस्तानी

0:36पायलट भी था?

0:39एक F16 का पायलट F15 जहाज उड़ा सकता है?

0:43जवाब हां भी है और नहीं भी। और पूरा फर्क

0:47छह परवाजों और छह महीनों के दरमियान है।

0:52जिस जहाज के बारे में 50 साल से कहा जाता

0:56है कि यह कभी गिराया नहीं गया उसे उस कौम

0:59ने गिरा दिया जिसके पास एक भी जहाज नहीं

1:03है। 231 के मुकाबले में सिफर यह हुआ कैसे?

1:14टाइमलाइन में खुशामदीद। अस्सलाम वालेकुम।

1:16कैसे हैं आप? उम्मीद है कि आप खैरियत से

1:19होंगे। 16 सितंबर की सुबह यमन के सूबेमारब

1:23से एक वीडियो आई है। एक पहाड़ी ढलवान है।

1:26जली हुई जमीन है और बीच में एक जहाज की

1:30दुम सीधी खड़ी हुई है। जैसे किसी ने उसे

1:33जमीन में गाड़ दिया हो। दुम पर सऊदी अरब

1:36का सब्ज परचम साफ नजर आ रहा है और उसके

1:39साथ खड़े चंद आदमी हैं, हूतीज़ हैं। जिनमें

1:43से किसी के पांव में जूता नहीं है। आजाद

1:46मायरीन ने इस तस्वीर की जगह का ताइन भी कर

1:49लिया है। यह मारब शहर से तकरीबन 40 कि.मी.

1:53मगरब में गिरा है जहाज। इसकी टेल पर लिखा

1:56नंबर भी पढ़ा जा सकता है। 5539 यह सऊदी

2:00अरब की 55th स्क्वाड्रन का जहाज था। खमेस

2:03मुशद का शाह खालिद एयरबेस ये सब हमें

2:06मालूम है। जहाज का नंबर मालूम है। उसका

2:09स्क्वाडन नंबर भी मालूम है। वो किस अड्डे

2:12से उड़ा ये भी मालूम है। लेकिन जो दो

2:15इंसान इस जहाज के अंदर बैठे थे उनके बारे

2:18में कुछ भी मालूम नहीं हुआ। ना नाम है ना

2:21उम्र है ना कौमियत है और ये भी कि वो

2:24जिंदा है या नहीं। और ये भी नहीं कि

2:27उन्होंने कोई छलांग लगा दी। पैराशूट का

2:29इस्तेमाल किया या जहाज के साथ ही गिर गए।

2:32अब जरा ध्यान दीजिए कि ये कितनी गैर

2:34मामूली बात है। जंग में जब कोई जहाज गिरता

2:37है तो दो में से एक बात तो जरूर होती है।

2:40या तो गिराने वाला पायलट को पकड़ लेता है

2:42और दुनिया को उसकी तस्वीर दिखाता है।

2:45क्योंकि एक जिंदा कैदी मलबे से कहीं

2:47ज्यादा कीमती होता है। या फिर जिस मुल्क

2:50का जहाज गिरा है वो अपने आदमियों का ऐलान

2:53करता है। उन्हें शहीद कहता है। उनके जनाजे

2:56होते हैं। इस बार ना पहली बात हुई ना

2:58दूसरी। भूतियों ने जहाज की वीडियो तो जारी

3:01की मलबे की तस्वीरें भी जारी कर दी और

3:04उसकी टेल का नंबर तक दिखा दिया। मगर किसी

3:07कैदी की एक तस्वीर भी जारी नहीं की। और ये

3:10बात बड़ी अजीब है क्योंकि अगर उनके पास एक

3:13जिंदा सऊदी पायलट होता इसमें तो दो पायलट

3:16थे तो वो उसे छुपाते क्यों? उनके मुफाद

3:19में तो यह था कि दुनिया को दिखाएं। 2020

3:22में जब उन्होंने एक टोरनेडो जहाज गिराया

3:25था, तो अमले की तस्वीरें फ़ौरन आ गई थी। और

3:28फिर रियाज़ का रद्दे अमल क्या आया है?

3:30रियाज़ ने 8 दिन से इस जहाज का नाम तक नहीं

3:33लिया। ना तस्लीम, ना इंकार और ये भी समझ

3:36लीजिए कि ये कोई मुकम्मल खामोशी की पॉलिसी

3:39नहीं है। क्योंकि 15 सितंबर को उन्होंने

3:41मक्का के करीब एक ड्रोन गिराने का ऐलान तो

3:44खुद किया था। वो तो बोल सकते हैं। वो बोल

3:47रहे हैं। बस इस एक मौजू पर नहीं बोल रहे।

3:50और एक लम्हे के लिए यह भी सोचते हैं कि इस

3:52खामोशी की कीमत कौन अदा कर रहा है? दो

3:55घराने तो हैं। कहीं ना कहीं तो वो बैठे

3:58हैं जिनके दो बच्चे इसमें पायलट शहीद हुए

4:01हैं। कोई हिकमते-ए-अमली का सवाल तो नहीं

4:03है। उनके लिए सवाल सिर्फ इतना है कि वो

4:05जिंदा है या नहीं। और आठ दिन से उन्हें भी

4:08वही बताया जा रहा है जो हमें बताया जा रहा

4:11है। कुछ भी नहीं। और जब मैं ये दोनों

4:14खामोशियां साथ रखकर देखता हूं तो एक बात

4:17ज़हन में आती है जो किसी को अच्छी नहीं

4:20लगेगी। अगर वो दोनों जिंदा होते और

4:23हूदितियों के पास होते तो अब तक कोई ना

4:26कोई तस्वीर तो आ चुकी होती। और अगर वो बा

4:30हिफाजत वापस पहुंच गए होते तो रियाज़ तो

4:33बोल चुका होता। तो वो कहां है? मेरे पास

4:36इसका जवाब बिल्कुल नहीं है। और जिसके पास

4:39है उसकी आवाज नहीं आ रही। एक जंग में इतनी

4:42बड़ी चीज गिरे और दोनों तरफ से कोई आवाज

4:45ना निकले। यह अपनी जगह एक खबर है। और अब

4:49दूसरा सवाल भी और मैं इसे गोलमोल बिल्कुल

4:51नहीं करूंगा। क्या इस जहाज में कोई

4:54पाकिस्तानी पायलट था जिसे छुपाया जा रहा

4:56है। सबसे पहले एक गलतफहमी भी दूर कर ले।

4:59क्योंकि यह दलील दोनों तरफ से गलत

5:02इस्तेमाल हो रही है। कुछ लोग कहते हैं कि

5:05जहाज पर सऊदी परचम था। इसीलिए पायलट भी

5:09सऊदी ही था। यह दलील तो कमजोर है। जहाज पर

5:12लगा परचम तो सिर्फ यह बताता है कि जहाज

5:14किस मुल्क का है। वो यह तो नहीं बता रहा

5:16कि इसको उड़ाने वाले कौन थे। तो फिर सवाल

5:19तो खुला है और यह सवाल बेबुनियाद भी नहीं

5:21है। और इसकी वजह तो तारीख में है। 1966 से

5:251968 तक बर्तानवी पायलट एक मुआयदे के तहत

5:29सऊदी जहाज उड़ाते रहे। यह कोई अफवाह नहीं

5:32यह रिकॉर्ड पर है। उन्हें एक बर्तानवी

5:34कंपनी ने भर्ती किया था और वो सऊदी

5:36लाइटनिंग और हंटर तैयारे उड़ाते थे। और वह

5:39किस अड्डे से उड़ाते थे? इसी खमेस मुशैद

5:42के अड्डे से। सितंबर 1967 में उनमें से एक

5:46पायलट जिसका नाम पीटर था वहीं छलांग लगाकर

5:49बचा था। यानी जिस अड्डे से ये जहाज जो अभी

5:53गिरा है एफ-15 ये जिस अड्डे से उड़ा था

5:56उसी अड्डे से 60 साल पहले गैर मुल्की

5:59पायलट सऊदी जहाज उड़ाते थे। तो सवाल पूछना

6:02तो जायज है। और पाकिस्तान का अपना ताल्लुक

6:05क्या है? 1969 में अलवदीया के महाज पर

6:09पाकिस्तानी पायलट्स के सऊदी तैयारे उड़ाने

6:12का जिक्र मिलता है। मगर मैं आपको साफ बता

6:15दूं कि ये बात बुनियादी तौर पर हमारे अपने

6:18जराय से आती है और इसकी आजाद तस्दीक मौजूद

6:21नहीं है। 1982 का सिक्योरिटी प्रोटोकॉल आज

6:24भी दोनों मुल्कों के दरमियान बुनियादी

6:26दस्तावेज है। अप्रैल 2015 में हमारी

6:29पार्लियामेंट ने मुत्तफिका तौर पर करारदाद

6:32मंजूर की थी। जिसमें दो बातें एक साथ लिखी

6:35गई। एक तो ये कि पाकिस्तान गैर जानबदार

6:37रहेगा और दूसरी ये कि हरमैन शरीफैन को

6:40खतरा हुआ तो पाकिस्तान शानाशाना खड़ा

6:43होगा। उस पे कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं है। वो

6:45हमारी रेड लाइन है। और उसी वक्त हमने जहाज

6:48जहाजरान और फौज देने से इंकार कर दिया।

6:52सितंबर 2025 आता है। सितंबर 2025 में अल

6:56यमामा के महल में एक दिफाई मुयदा होता है।

6:58और उसकी बुनियादी शिक ये होती है कि सऊदी

7:01अरब या पाकिस्तान दोनों पर किसी एक पर

7:03हमला दोनों पर हमला तसवुर होगा। अप्रैल

7:062026 में पाकिस्तानी तैयारे शाह अब्दुल

7:09अजीज एरबेस पर पहुंचते हैं। एक स्क्वाड्रन

7:12और दो ड्रोन स्क्वाड्रंस। और 18 सितंबर को

7:15इस जहाज के गिरने के दो दिन बाद हमारी फौज

7:18के तर्जमान ने कहा कि सऊदी अरब के साथ

7:21हमारा अहद गैर मशरूत है और पाकिस्तान किसी

7:25भी हद तक जाएगा। और उसी हफ्ते दफ्तर खारजा

7:29ने भी कहा कि फिलहाल ऐसी कोई बात ज़रे गौर

7:32नहीं है। ये दो जुमले हैं। एक हफ्ता है और

7:35एक ही हुकूमत है। और मैं इन पर अपना कोई

7:37फैसला नहीं सुना रहा। मैं दोनों आपके

7:39सामने रख रहा हूं। फौजी तर्जुमान और बात

7:42कर रहे हैं और वज़ारत खारजा और बात कर रही

7:44है। लेकिन अब मैं असल जवाब की तरफ आता

7:46हूं। क्या किसी काबिल एतमाद जरिए ने ये

7:49रिपोर्ट किया है कि कोई पाकिस्तानी पायलट

7:52यमन के ऊपर सऊदी जहाज उड़ा रहा है?

7:54बिल्कुल नहीं किया। एक भी नहीं। ना इस जंग

7:57में ना 2015 के बाद किसी भी मौका पर। और

8:01तरदीद भी मौजूद नहीं है। क्योंकि यह सवाल

8:04तो किसी ने पूछा ही नहीं था। और एक और बात

8:07जो सबसे ज्यादा अहम है ये सारा कयास एक

8:10मफूजे पर खड़ा है कि सऊदी अरब के पास

8:13पायलट्स की कमी है। तो मैंने यह तलाश किया

8:16और नतीजा यह निकला कि दुनिया में कहीं भी

8:19सऊदी फिजाइया के पायलट्स की तादाद शाया ही

8:23नहीं हुई और किसी इदारे ने यह नहीं कहा कि

8:26उनके यहां पायलट्स की कमी है। यह मफ्रूजा

8:29ही खाली है। मगर सबसे मजबूत दलील कयास के

8:32खिलाफ आती है ना तारीख से आती है। ना

8:35हिंसों से आती है, ना स्टैट से आती है, ना

8:38फिगर से आती है, ना नंबर से आती है। वो

8:40खुद इस जहाज की मशीन से आती है। और इसके

8:43लिए हमें तीसरे सवाल पर जाना होगा। एक F16

8:47का पायलट क्या F15 जहाज उड़ा सकता है?

8:50पहले एक आम गलती को यहां दुरुस्त कर लेते

8:53हैं। लोग कहते हैं कि एक किस्म का पायलट

8:56सिर्फ उसी किस्म का जहाज उड़ा सकता है। ये

8:58सच नहीं है। पायलट एक जहाज से दूसरे जहाज

9:01पर मुंतकिल होते रहते हैं। ये रोज होता

9:04है। मगर ये एक बाकायदा कोर्स के जरिए होता

9:07है। और वो कोर्स महीनों का होता है। दिनों

9:10का नहीं है। इसके मैं आपको फिगर्स भी बता

9:13देता हूं। क्योंकि यही पूरा मामला खुल

9:16जाएगा। एक बिल्कुल नया पायलट जब F16 पर

9:20आता है तो उसका कोर्स 37 हफ्ते का होता

9:24है। 9 महीने और उसको 59 परवाज़ें करनी

9:27पड़ती हैं। 70 घंटे उसको हवा में रहना

9:30पड़ता है और 245 घंटे क्लासरूम में सीखना

9:33पड़ता है। सबसे पहले चार हफ्ते सिर्फ

9:36निजाम और हंगामी सूरतों की पढ़ाई होती है।

9:39और उसके बाद कहीं जाकर वो पहली परवाज करता

9:42है। अब वो आदमी लीजिए जो पहले ही

9:44तजुर्बाकार लड़ाका पायलट हो। 500 घंटे

9:47उड़ा चुका हो। तो उसका कोर्स कितना है?

9:50उसका कोर्स घटकर 69 दिन रह जाता है। तो

9:53तजुर्बा क्या बचाता है? तजुर्बा छ महीने

9:56बचाता है ट्रेनिंग के। छ महीने चंद हफ्ते

9:58नहीं ये बात याद रखिएगा। और अब उन 69

10:01दिनों के अंदर झांक कर देखते हैं क्योंकि

10:03असल कहानी तो वहीं छुपी हुई है। उन 69

10:06दिनों में छह परवाजें उसको ये सिखाने के

10:09लिए हैं कि जहाज को उड़ाना और उतारना कैसे

10:12है। सिर्फ छह और बाकी 16 से 24 परवाज़ें

10:16और 202 घंटे क्लास रूम उसको यह सिखाने के

10:19लिए हैं कि इस जहाज में लड़ना कैसे है। छह

10:23और 24 ये दो अद याद रखें। यही तनासुब पूरी

10:27बहस का जवाब है। जहाज उड़ाना आसान हिस्सा

10:30है। जहाज से लड़ना मुश्किल हिस्सा है।

10:33यूक्रेन की फिजाइया के तर्जुमान ने यही

10:35बात सादा लफ्जों में कह दी थी। उन्होंने

10:38कहा कि उड़ान भरना, उतरना और एक जगह से

10:42दूसरी जगह जाना ये चंद हफ्तों में सीख

10:45जाते हैं पायलट्स। मगर इस पर लड़ने के

10:48सीखने का जो हुनर है, मिसाइल चलाने का के

10:51सीखने का जो हुनर है, उसमें 6 महीने लगते

10:54हैं। अब सवाल ये है कि आखिर मुश्किल क्या

10:56है? जहाज तो जहाज है। तो आइए चार चीजें

10:59देखते हैं। पहली चीज ये है कि कॉकपिट क्या

11:02होता है? पुराने F16 में पायलट के सामने

11:05कई अलग-अलग स्क्रीनंस होती हैं और हर

11:08मालूमात की अपनी जगह मुकरर है। F35 जो

11:12अमेरिका का स्टेल्थ जहाज है उसमें सिर्फ

11:15एक ही बड़ी स्क्रीन है। ये 20 इंच चौड़ी

11:18है जिस पर पायलट अपनी विंडोज़ अपनी मर्जी

11:21से बनाते हैं और हटाते हैं। और उसमें

11:24सामने शीशे पर मालूमात डालने वाला वो

11:26पुराना निजाम है ही नहीं है। यानी वह जो

11:29जिसको हम एचयूडी कहते हैं वो तो इसमें है

11:32ही नहीं है। सारी अलामतें तो हेलमेट के

11:35शीशे पर आती हैं। एक पायलट ने कहा कि मैं

11:38पूरा मिशन हेलमेट के बैग के नीचे भी उड़ा

11:41सकता हूं। दूसरी चीज वो और ये सबसे कम

11:44समझी जाती है। वो है हाथों का इस्तेमाल।

11:47लड़ाका जहाज का सारा निजाम इस असूल पर

11:50बनता है कि पायलट स्विच को देखे नहीं। वो

11:53हाथ को टटोलने से उसको मिल जाए। बुलंद

11:56दबाव में एक सेकंड से कम वक्त में भी बगैर

12:00नजर हटाए यह सलाहियत हजारों घंटों में

12:03बनती है और जब आप जहाज बदलते हैं तो हर

12:07स्विच का मतलब भी बदल जाता है। उसकी

12:09लोकेशन बदल जाती है। मगर हाथ की आदत तो

12:12वही पुरानी रहती है। मायरीन इसे उल्टा

12:15सीखना कहते हैं। इसको अनलर्निंग कहते हैं।

12:17आपको पहले भूलना पड़ता है फिर सीखना पड़ता

12:20है। और भूलना सीखने से मुश्किल होता है।

12:23तीसरी चीज है दफाई इलेक्ट्रॉनिक का निजाम।

12:26हर जहाज का अपना निजाम होता है दफाई।

12:28फ्रांसीसी राफेल में स्पेक्ट्रा का निजाम

12:31है। यूरोपी टाइफून में प्रिटोरियन है।

12:33सऊदी F1-15 में डओज़ है। और ये सिर्फ

12:36मुख्तलिफ नाम नहीं है। ये मुख्तलिफ

12:39मिजाजों के नाम है। टाइफून का निजाम खुद ब

12:41खुद फैसला करता है और पायलट को तो बाद में

12:44बताता है। पहले वो काम कर चुका होता है।

12:46कुछ दूसरे निजाम पायलट से पूछते हैं। अब

12:49सोचिए जब खतरे की घंटी बजे तो दुरुस्त

12:52रद्दे अमल क्या होगा? कुछ ना करना या फ़ौरन

12:56कुछ करना। यह फैसला हर जहाज के साथ बदलता

12:59है और गलत जवाब दोनों सूरतों में जान ले

13:01सकता है। और एक बात इससे भी गहरी है। इन

13:04निजामों में खतरात की जो फहरिस्त डाली

13:07जाती है, वो हर जहाज के लिए हर मुल्क के

13:10लिए अलग लिखी जाती है। मकसूस लेबोरेटरीज

13:13में अमेरिका का एक ही यूनिट 70 से ज्यादा

13:17किस्म के जहाजों और 27 मुल्कों के लिए ये

13:20फाइल्स अदा अधा लिखता है। और हर जहाज में

13:24ये फाइल्स अधा-अधा अपलोड होती हैं। यानी

13:26दो मुल्कों के अगर उसमें अगर एक ही जहाज

13:29हो तो उसका डिफाई निजाम एक जैसा नहीं

13:31होता। उसके नक्शे बदल जाते हैं, मैप्स बदल

13:34जाते हैं। खतरात बदल जाते हैं। आप अक्सर

13:36सुनते होंगे कि फला जहाज जो है वो फोर्थ

13:39जनरेशन का है और फलां फिफ्थ जनरेशन का है।

13:42अब आपको मैं इसका भी मतलब समझाता हूं। जो

13:44फोर्थ जनरेशन जहाज है जिनमें कंप्यूटर ने

13:47पायलट की मदद शुरू की। उनमें F16 आता है,

13:51F15 आता है जो अभी गिरा है। मिग 29 आता

13:54है। इसके बाद 4.5 आते हैं। उनके अंदर डाटा

13:58लिंक आ गया है। रेडर्स तेज हो गए हैं और

14:01ये इनको थोड़ा ज्यादा मल्टी रोल बनाया गया

14:04है। जिसमें हमारा पाकिस्तान का JF7 है।

14:07चीनी जहाज जो डेट J10C है ये 4.5 है। और

14:12यहां पे जो राफेल है वो भी 4.5 है। अब

14:15फिफ्थ जनरेशन को जा जहाज जो है वह रेडार

14:18से बचने के लिए बनाया जाता है। यानी पहले

14:21छुपना फिर उड़ना और दूसरी जो असल निशानी

14:24है वो हथियार जहाज के जो उसके अंदर जो

14:27मिसाइल्स और बॉम्ब्स होते हैं वो जहाज के

14:29अंदर रखे जाते हैं फिफ्थ जनरेशन में।

14:31क्योंकि अगर मिसाइल आप बाहर लगा देंगे तो

14:34आपका सारा छुपने का अमल जो है तो वो तो

14:36खत्म हो जाएगा। इसलिए जो F22 या F35 या

14:40चीनी J20 है या रूसी सुस 57 है इन सबके

14:44हथियार अंदर होते हैं। J20 को देखकर मत

14:47सोचिए कि ये J10 का बड़ा भाई है। ये एक

14:50बिल्कुल डिफरेंट एनिमल है। और दूसरी चीज

14:53जो सबसे कम समझी जाती है। पुराने जहाज में

14:56पायलट खुद तस्वीरों को जोड़ता है। अपने ज़हन

14:59से रेडार से कुछ मिलाकर, कुछ वीडियो से,

15:02कुछ आंख से जो कुछ देखता है वो अपने दिमाग

15:04में जोड़ता है। जो नए जहाज हैं, इनमें जहाज

15:07खुद जोड़ता है सारी चीजें और फिर जवाब

15:10उसके सामने रख देता है। तो क्या यह आसान

15:13हो गया है? उड़ाने में तो बिल्कुल आसान हो

15:15गया है। पायलट खुद कहते हैं कि हत्ता के

15:1835 भी उड़ाना ज्यादा आसान है। मगर मुश्किल

15:21खत्म नहीं हुई। सिर्फ जगह बदल गई है। वह

15:24हाथ से निकल कर अब दिमाग में चली गई है।

15:27और चौथी चीज जो सबसे बड़ी अहम है और यही

15:29इस पूरे सवाल का फैसला कर देती है। F16

15:33जहाज जो है जो पाकिस्तान के पास है वो एक

15:36सीट वाला जहाज है। उसको एक आदमी अकेला

15:38उड़ाता है। और ये जो F15 गिरा है ये दो

15:42सीटों वाला है। और जो पीछे जो आदमी दूसरा

15:44पायलट को-पायलट बैठा होता है वो कोई

15:46मुसाफिर नहीं होता। वो हथियारों और हालात

15:49का अफसर होता है। उसके सामने चार

15:51स्क्रीनंस होती हैं। रेडाज़, बरकी जंग का

15:53निजाम, इंफ्रारेड और फिर नक्शे। और उसके

15:57हाथ में दो कंट्रोल होते हैं। वो खतरात का

15:59अंदाजा लगाता है। हदफ मुंतखिब करता है और

16:02एक मिशन में आधा दर्जन मुख्तलिफ इदारों से

16:06बात करता है। अब सोचिए एक ऐसा पायलट जिसने

16:09सारी जिंदगी अकेले उड़ना सीखा है, अकेले

16:12एक्शन करना सीखा है, जिसने कभी किसी दूसरे

16:14आदमी के साथ काम बांटा नहीं है, वो अचानक

16:18आधा अमला कैसे बन जाएगा? किस वक्त बोलेगा?

16:20किस वक्त चुप रहेगा? कौन सा फैसला उसका

16:23अपना है और कौन सा फैसला उसके पीछे वाले

16:26को पायलट का है। ये सब सीखी हुई चीजें हैं

16:29और इन्हें दोनों आदमी मिलकर सीखते हैं।

16:31अलग-अलग नहीं। लिहाजा ये बात कि एक F16 का

16:35जो पायलट है वो एक F1-15 को उड़ा सकता है

16:38कि नहीं? टेक्निकली उड़ा सकता है।

16:40प्रैक्टिकली बिल्कुल नहीं। और अब वो मिसाल

16:42जो सबसे ज्यादा ताजा है और ये सबसे ज्यादा

16:45फैसला कुन है। यूक्रेन की जंग जंग के ऐन

16:48दरमियान में जब हालात बदतरीन थे जब हर दिन

16:51कीमती था उनके पायलटों को F16 पर मुंतकिल

16:55कर दिया गया और क्या कोर्स छोटा किया गया?

16:58बिल्कुल नहीं। कोर्स पूरा पढ़ाया गया। एक

17:00अमरी जनरल ने कहा कि हम तवील मुद्दत के

17:04बारे में सोच रहे हैं और इस कोर्स को

17:06बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं। इसलिए

17:07कुछ चीजों में वक्त ज्यादा लग गया और जो

17:1032 पायलट्स मुंतखिब हुए थे उनमें से सिर्फ

17:14आठ की अंग्रेजी इस काबिल थी कि वो फौरन यह

17:18कोर्स भी शुरू कर सके। बाकी 24 को पहले

17:22जबान सीखने भेज दिया गया। मैंने पूरी

17:24तारीख में एक मिसाल भी ऐसी नहीं पाई जहां

17:27किसी फिजाइया ने चंद हफ्तों में पायलट

17:29मुंतकिल करके किसी गैर मुल्की जदीद जहाज

17:33पर शदीद खतरे वाले महाज पर भेजा हो। एक भी

17:36नहीं। तो अब पाकिस्तानी पायलट वाले सवाल

17:38का जवाब तो सामने आ जाता है। वो अंदाजे से

17:41नहीं आया। हमारे पायलट JF17 थंडर उड़ाते

17:44हैं। चंद F16 भी उड़ाते हैं। F15 हमारी

17:48फिजाइया में है ही नहीं। उस पर जाने के

17:50लिए महीनों का कोर्स चाहिए। और दो आदमियों

17:53का मिलकर काम करना सीखना चाहिए और एक ऐसा

17:56दफाई निजाम सीखना चाहिए जो सिर्फ सऊदी

17:59जहाजों में है। और दूसरी तरफ सऊदी अरब के

18:02पास पायलटों की कमी का कोई सबूत तो नहीं

18:05है। तो वो ऐसा क्यों करेगा? वो पाकिस्तानी

18:07पायलट क्यों इस्तेमाल करेगा? इसका तो कोई

18:10जवाब ही नहीं बनता। अब हम आते हैं चौथे

18:12सवाल की तरफ। ये जहाज गिरा कैसे? और इसका

18:15जवाब समझने के लिए पहले ये जानना जरूरी

18:18होगा कि ये जहाज है क्या? अक्टूबर 2010

18:21में सऊदी अरब ने अमेरिका के साथ 29.4 अरब

18:25डॉलर का एक मुआयदा किया। 84 नए जहाज और 68

18:30पुराने जहाजों की अपग्रेडिंग करके कुल 152

18:33जहाज सऊदी अरब को दिए। ये एफ-15 जहाजों की

18:37मैं बात कर रहा हूं। यहां एक अद दुरुस्त

18:38भी कर लेते हैं। लोग इस रकम को जहाजों की

18:41तादाद पर तकसीम कर कर कहते हैं कि एक जहाज

18:44350 मिलियन डॉलर का है। ये बिल्कुल गलत

18:46है। इस रकम में अड्डे हैं, तरबियत है,

18:49असला है और बरसों की फ्यूचर की देखभाल भी

18:52शामिल है। आज इस फैमिली के ताजा तरीन जहाज

18:55की कीमत 90 से 97 मिलियन डॉलर है।

18:58पाकिस्तान के पैसों में बदलें इसको तो यह

19:01तकरीबन $.5 खरब बनता है। और सऊदी फिजाइया

19:04के पास इस वक्त हर किस्म के 231 F-15 जहाज़

19:09हैं। बेहतरीन टाइफ़ून जहाज़ हैं। 81 टोरनेडो

19:12जहाज हैं। तकरीबन 385 लड़ाका तैयारे सऊदी

19:15अरब के पास हैं। और जो लोग उस वक्त इस टेल

19:19पर खड़े थे उनके पास कितने हैं? हूतियों

19:21के पास। एक भी नहीं। अब वो जुमला जो आपने

19:24सैकड़ों बार सुना होगा। F-15 कभी मार नहीं

19:27गिराया गया। 104 सिफर। ये आधा सच है और

19:31आधा सच सबसे ज्यादा खतरनाक झूठ होता है।

19:34असल दावे के साथ तीन शर्तें हैं और तीनों

19:37रास्ते में गिर जाएंगी। पहली बात तो ये है

19:40कि ये सिर्फ फिजा से फिजा की लड़ाई का

19:42हिसाब है। जमीन से चलने वाले मिसाइल इस

19:45फिगर में कि जी 104 जंगों में एक भी जहाज

19:48नहीं गिरा। तो ये इसमें मिसाइल वाले शामिल

19:50नहीं है। और दूसरा ये जो अद है ये 2008 पर

19:54रुक जाता है। 18 साल पुराना है। और तीसरी

19:56जो सबसे अहम बात है ये रिकॉर्ड सिर्फ उस

19:59F15 का है जो फिजाई बरतरी के लिए बनाया

20:02गया था। और ये जो मारब में यहूदितियों ने

20:04जहाज गिराया है ये उस जनरेशन से नहीं है।

20:07हमलावर ये हमलावर जनरेशन से है। और इसी

20:10शक्ल के जहाज पहले गिरे हुए हैं। 1991 में

20:14दो गिरे इराक में एक, लीबिया में एक और

20:16इसी साल ईरान के खिलाफ कारवाई में चार

20:19जहाज गिरा चुका है ईरान। और एक हिंसा जो

20:21किसी इश्तहार में नहीं आता। अमरीकी

20:23फिजाइया के 151 F15 हादसात में तबाह हुए

20:28हैं हादसों में। और उनमें 59 पायलट्स भी

20:31मारे गए हैं। और यह एक गलती हूं के हक में

20:34भी दुरुस्त करनी ज़रूरी है। 2018 में दो

20:37बार खबर आई कि हूं ने सऊदी F1-15 गिरा दिए

20:40थे। ये दुरुस्त नहीं है। दोनों बार जहाज

20:43निशाने बने थे। नुकसान उठाया था लेकिन वो

20:46वापस सऊदी अरब में पहुंच गए थे। 14 फरवरी

20:492020 को सऊदी अरब का एक टोरनेडो जहाज वो

20:52भी गिरा था। उस जहाज को क्या हुआ? उसमें

20:54खतरा भांपने का जो निजाम था, सेंसर्स थे,

20:58उसने खबरदार क्यों नहीं किया था? वो निजाम

21:00360 दर्जे में मुसलसल सुनता रहता है। जहां

21:04से भी रेडार की लहर आती है, यह पहचानता

21:06है, पायलट को समत बताता है और जवाबी लहरें

21:09भेजकर दुश्मन को धोखा देता है। यह सुनता

21:13भी है और यह बोलता भी है। एक ही वक्त में

21:15यह बड़ा शानदार निजाम है। इसमें कोई खराबी

21:18नहीं थी। मगर वो सिर्फ एक चीज सुनने के

21:21लिए बना था। वो रेडार को सुनने के लिए बना

21:24था। उसका पूरा वजूद इस मफ्रूजे पर खड़ा था

21:27कि जो चीज आपको मारने आ रही है वो पहले

21:30आपको ढूंढेगी और ढूंढने के लिए कुछ

21:33भेजेगी, कुछ लहरें भेजेगी तो आवाज

21:36निकालेगी, लहरें भेजेगी और जिस मिसाइल ने

21:39ये जहाज मारा वो कोई आवाज नहीं निकालता।

21:42हूदितियों के ये सबसे कारामद मिसाइल हैं।

21:44ये वो हैं जो कभी जहाज से जहाज पर चलने के

21:47लिए नहीं बने थे। ये रूसी R73 है और R27

21:52टी है। इनके आगे रेडार नहीं होता। इनके

21:55आगे एक कैमरा होता है जो गर्मी को भांपता

21:58है जो जो के हीट सेंसिटिव होता है। जहाज

22:01का इंजन तो गर्म होता है। आसमान ठंडा होता

22:04है और उसकी ये जो सेंसर है ये सीधी गर्मी

22:07की तरफ चलता है। ये कुछ भेजता बूझता नहीं

22:10है। ये कोई रेडार नहीं भेजता। ना कोई लहर

22:13भेजता है। ना कोई इशारा ना कोई आवाज। इसे

22:15आप यूं समझिए कि आपने घर में एक ऐसा

22:18अलार्म लगवाया हुआ है जो दरवाजा खुलने पर

22:21बजता है। बेहतरीन अलार्म है। हर दरवाजे पर

22:23लगा हुआ है। अब चोर क्या करेगा? दरवाजा

22:26खोलेगा या खिड़की का शीशा काट कर अंदर

22:28आएगा और फिर अलार्म बजेगा? नहीं बजेगा।

22:31अगर वो खिड़की खिड़की के जरिए आता है।

22:32क्योंकि अलार्म तो सारे आपने दरवाजों पर

22:35लगाए हुए हैं। और इसका मतलब क्या है? कि

22:37अलार्म खराब था। अलार्म तो बिल्कुल ठीक

22:39थे। इसका मतलब ये हुआ कि वो ठीक काम तो कर

22:42रहा था। सिर्फ गलत चीज के लिए वो एक ऐसी

22:45आवाज का इंतजार कर रहा था जो कभी आई आने

22:48वाली नहीं थी क्योंकि जोतियों ने मिसाइल

22:50इस्तेमाल किया है वो तो आवाज को या लेयर

22:53ले इसको वेव्स को यूज़ ही नहीं करता। अच्छा

22:55हूतियों के पास ये मिसाइल आया कहां के है?

22:57कहां से है? क्योंकि 2015 में यमन का सारा

23:00फिजाई दफाई निजाम तबाह कर दिया गया था।

23:022014 में हूतियों के हाथ में यमनी फौज के

23:05कुछ गोदाम आ गए। उनमें सोवियत दौर का भारी

23:08सामान पड़ा हुआ था। ये तबाह होने से बच

23:11गया था। यह ज्यादातर खराब था और उन्हीं

23:13गोदामों में यमनी जो मेग जहाज थे उनके

23:17मिसाइल भी थे जो जहाज से जहाज पर चलते

23:20हैं। मार्च 2015 में इत्तेहादी मुहिम शुरू

23:23हुई और अप्रैल के वक्त तक यमन की हर रेडार

23:27और हर मुस्तकिल साइट मलबे का ढेर बन चुकी

23:30थी। पुराने रूसी निजाम सेतियों ने सिर्फ

23:33एक शिकार किया। 27 मार्च को एक सुडानी

23:36जहाज को उन्होंने गिरा दिया। अब गौर कीजिए

23:38कि हुआ क्या? जो चीज नजर आती थी वो तो

23:41मारी गई। जो रेडार चलाती थी वो भी मारी गई

23:44और जो खामोश थी वो बच गई। मेघ मर गए उनके

23:47मिसाइल गोदामों में पड़े पड़े नाकारा हो

23:50गए और यही वो लम्हा है जहां से आज की

23:53तस्वीर भी शुरू होती है। फिर वर्कशॉप्स का

23:55जमाना आया। वो मिसाइल जो जहाज के परों के

23:58नीचे लटकते थे। ट्रकों पर लगी सादा

24:01पटड़ियों पर बांधे जाने लगे। कोई जदीद

24:03लांचर नहीं, कोई रेडार नहीं। ियों ने इसको

24:07एक नई साइंस में बदल दिया। उसको

24:10इंप्रोवाइज किया। एक ट्रक है, एक उसके ऊपर

24:13रेल लगी हुई है और एक आंख है जो आसमान में

24:15गर्मी ढूंढती है। हीट सेंसर। 2018 में

24:19ईरानी साख्ता ऐसे हालात भी पकड़े गए जो

24:22खुद कुछ नहीं भेजते। कोई रेडिएशन नहीं

24:24भेजते। कोई वेव्स नहीं भेजते। वो सिर्फ

24:26सुनते हैं। वो जहाजों के अपने सिग्नल पकड़

24:29कर उनकी जगह, बुलंदी, रुख और रफ्तार जो

24:32स्पीड है वो निकाल लेते हैं। तो 250

24:35कि.मी. से ज्यादा दूर तक ये जो ईरानी

24:38टेक्नोलॉजी है ये सुन सकती है। जहाज खुद

24:41बोलता रहता है और जमीन पर बैठा आदमी सिर्फ

24:43सुनता रहता है। और फिर वो रात जो इस साल

24:46आई 14 फरवरी 2020 हुई टोरनेडो उसी रात की

24:50वीडियो में एक चीज साफ नजर आ रही है। जहाज

24:52ने अपने दफा में गरम गोले फायर किए थे और

24:56मिसाइल ने धोखा नहीं खाया। छ साल पहले यह

24:58बात हुई थी। हुई सुरते हाल, हुई नतीजा और

25:02दुनिया ने इसे नजरअंदाज कर दिया था और

25:04यहां मुझे अपने ही दावे को थोड़ा कमजोर भी

25:06करना है। इस वाक्य की वजह अभी तय नहीं

25:08हुई। कुछ मायरीन कहते हैं कि मिसाइल खामोश

25:11था और गर्मी हीट सेंसिंग पर वो आया था।

25:14यहां एक तीसरा इमकान भी है कि कि जहाज जो

25:16सऊदी जहाज है वो किसी फनी खराबी से गिर

25:18गया हो। अभी तक सऊदी अरब इस पर खामोश है।

25:21इसलिए यह सवाल खुला है। और अब पांचवा सवाल

25:24और ये सबसे अजीब है। जहाज गिरने के बाद

25:26हुआ क्या? आप अंदाजा लगाएंगे कि सऊदी

25:29तैयारे कुछ दिन के लिए रुक गए होंगे या

25:32उनकी उन्होंने अपनी ऊंचाई ऊपर बढ़ा ली

25:34होगी। ज्यादा एल्टीट्यूड पर वो सफर कर रहे

25:37होंगे या दूर से मार करने वाले वो

25:39हथियारों पर चले गए होंगे। जिस तरह बीवीआर

25:42हैं या जो दूसरे मिसाइल हैं फौजी बनक तो

25:44यही कहती है लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं है।

25:4718 सितंबर को यानी जहाज जब हुूतियों ने

25:49गिराया है उसके दो दिन बाद हुई F15 जहाज

25:53उसी खमेश मुशद से हमले के लिए उड़ रहे थे।

25:5620 सितंबर को इन्हीं F15 और टाइफून दोनों

26:00किस्म के जहाजों ने और 21 सितंबर को यानी

26:02जहाज गिरने के पांच दिन बाद एक ही दिन में

26:06157 हमले किए उन्होंने के ऊपर। पूरी जंग

26:09का ये सबसे हमलों के लिहाज से बड़ा दिन है।

26:13और यहां मैं एक बात और भी वाज़ कर दूं। ये

26:16जो अद है यहूतिदितियों के तर्जुमान ने दिए

26:19हैं। यानी उस फरीक के जिस पर बम गिर रहे

26:22हैं। सऊदी अरब अपने हमलों के आदादो शुमार

26:24शाया नहीं कर रहा। और इस वक्त कोई आजाद

26:27इदारा उन्हें गिन भी नहीं रहा। जिन पर यह

26:29बम गिर रहे हैं, वह यह गिन रहे हैं और गिन

26:32कर हमें बता रहे हैं। और यह हिंसे जो हैं,

26:35यह जो फिगर्स हैं, यह आपस में बिल्कुल

26:37जुड़ भी जाते हैं। 20 सितंबर तक कुल 760,

26:4021 सितंबर को 157 और ये मजमूआ तकरीबन 917

26:44हमले बनते हैं। हिसाब तो बिल्कुल मुकम्मल

26:47है। 22 सितंबर को सऊदी तैयारों ने मखा की

26:49बंदरगाह पर भी हमला किया है। और हूतियों

26:52के इदारे के मुताबिक उसमें छह शहरी भी

26:54मारे गए थे। जिनमें दो बच्चे और एक खातून

26:57थी। और यहां एक बात और बता दूं मखा वो

27:00बंदरगाह है जो 2017 से सऊदी अरब के अपने

27:04इत्तहादियों के पास थी। 9 साल तक उनके पास

27:07रही। 10 सितंबर को हूतियों ने वो वापस ले

27:11ली और उसके साथ पैरम और हुनैश के जजीरे भी

27:14कब्जे में कर लिए। यानी बाबुल मंदब के

27:17दोनों किनारे अबूतियों के कब्जे में आ

27:19चुके हैं और अब सऊदी तैयारे उसी बंदरगाह

27:22पर बाम गिरा रहे हैं। जो चीज आप संभाल ना

27:25सके उसे तबाह करना फतह तो नहीं कहलाता और

27:28इसका असर सिर्फ यमन तक नहीं रहता। 13

27:30सितंबर को बाबुल मंदब से 31 जहाज गुजरे।

27:34पिछले साल इसी दिन 43 गुजरे थे। तकरीबन

27:381/3 कम और यह वो रास्ता है जिससे यूरोप का

27:41तेल और एशिया का सामान गुजरता है। तो ये

27:44किसका मामला है? सिर्फ यमन का सिर्फ सऊदी

27:47अरब का या हर उस आदमी का जो पेट्रोल पंप

27:51पर खड़ा होकर कीमत देखता रहता है और सोचता

27:54रहता है कि यह बढ़ क्यों रही है। और फिर

27:57उसी दिन दुनिया की सात बड़ी मशतों ने

28:00मुश्तका बयान भी जारी किया। जी7 ने

28:02हूतियों की सख्त तरीन अल्फ़ाज़ में

28:04उन्होंने मुजम्मत कर डाली और फौरी तौर पर

28:06तमाम कारवावयां बंद करने का मुतालबा किया

28:09और ईरान से कहा गया कि हथियार देना बंद कर

28:12दे और सऊदी फिजाई कारवाइयों के बारे में

28:15इस बयान में कुछ भी नहीं लिखा था एक लफ्ज

28:18भी नहीं 21 सितंबर को बर्तनानिया ने

28:22साइपरस से एक फिजाई टैंकर भेजने की मंजूरी

28:25भी दी साइपरस में बर्तनानिया का एक फिजाई

28:28अड्डा है वहां से उसने एक फिजाई टैंकर

28:30भेजा कि वो सऊदी तैयारों को हवा में ईंधन

28:33भर सके। हवा जब वो हवा में रहेंगे तो ऊपर

28:36से ही उनको ईंधन भर सके। और बर्तानवी वज़र

28:38आजम के अपने अल्फाज़ ये थे कि ये खालिस्तन

28:41दफाई इकम है और इसका मकसद बोहरा अहमद रेड

28:45सी में कशीदगी को कम करना है क्योंकि इससे

28:48हमारे अपने ईंधन की कीमतें खतरे में पड़

28:50सकती हैं। और फिर उन्होंने कहा कि मुश्किल

28:52वक्त में अच्छे दोस्त साथ खड़े होते हैं।

28:55उसी दिन यमन की सदारती काउंसिल के सरबराह

28:57ने सदर ट्रंप को फोन भी किया और अमकी फौजी

29:00मदद मांगी। जो वही मदद जो पहले एमबीएस

29:04मोहम्मद बिन सलमान भी दो दफा मांग चुके

29:06थे। सदर ट्रंप ने यमनी हुकूमत के सदर से

29:10कोई वादा नहीं किया। उन्होंने फोन किया।

29:12यह बात रिकॉर्ड पर है और उनकी बात नहीं

29:14मानी गई। यह भी रिकॉर्ड पर है। और वह बात

29:17जो इस पूरे हफ्ते में सबसे ज्यादा मानी

29:19रखेगी। इसी हफ्ते जब हमलों का सबसे बड़ा

29:22दिन गुजरा खबरें आना शुरू हो गई कि रियाज

29:25ओमान के जरिए जंगबंदी का रास्ता भी ढूंढ

29:27रहा है। एक ही हफ्ते में एक ही हुकूमत ने

29:30अपनी पूरी जंग का सबसे शदीद तरीन हमलों का

29:34दिन भी गुजारा और बाहर निकलने का दरवाजा

29:36भी टटोलना शुरू कर दिया है। यहां तक जो

29:39कुछ मैंने कहा वो रिकॉर्ड पर है और आगे जो

29:42मैं कहने लगा हूं वो मेरा अपना ख्याल है।

29:44अब हम उस पहली तस्वीर पर वापस आते हैं।

29:47नंगे पांव आदमी और उनके नीचे सब परचम में

29:50लटकी हुई नजर आने वाली वो टेल| दुनिया इसे

29:54एक हादसा समझ रही है| ये हादसा नहीं है।

29:56ये 11 साल पहले किए गए एक फैसले का नतीजा

30:00है और वो फैसला सऊदी अरब ने खुद किया था।

30:032015 की जो मुहिम थी वो नाकाम नहीं हुई

30:06थी। वो कामयाब हुई थी। और यही असल मसला

30:08है। उस मुहिम ने यमन में हर वो चीज खत्म

30:12कर दी जो नजर आती थी। हर वो चीज जो रेडार

30:15चलाती थी खत्म। हर वो चीज जो बोलती थी

30:18खत्म। और जब आप किसी दुश्मन की हर बोलने

30:21वाली चीज को मार देते हैं तो अब उसके पास

30:25सिर्फ खामोश रहने वाली चीजें ही बच जाती

30:28हैं। और फिर उसे आप 10 साल भी दे देते

30:31हैं। 10 साल में उसने अपनी इस कैपेबिलिटी

30:34को ये जो खामोश वाली कैपेबिलिटी है जो

30:37रशियन मैंने आपको दो मिसाइलों के नाम दिए

30:39हैं। तो हूतियों ने यह किसी इंटरनेट से ये

30:42नहीं सीखा। उन्होंने कोई एआई से नहीं

30:44सीखा। उन्हें यह सिखाई गई है और सिखाने

30:46वाले वही थे जो आज उन पर बम गिरा रहे हैं

30:50और उसी जमाने में सऊदी अरब ने अपने जहाजों

30:53के लिए दुनिया का बेहतरीन जो सिस्टम है वो

30:56खरीद लिया। उन 30 अरब डॉलर के सौदे में एक

30:59ऐसी चीज शामिल थी जो 360 दर्जे में यानी

31:03पूरी अपने 100% जो उसकी रेडार है हर लहर

31:07को वो पकड़ लेता है। उन्होंने एक कान तो

31:09बना दिया था और दुश्मन ने आवाज निकालना ही

31:12छोड़ दी। और अब इस हफ्ते की तरफ देखिए

31:14जिसका मैंने अभी जिक्र किया था। जहाज गिरा

31:18जवाब क्या आया? 157 हमलों की शक्ल में। एक

31:21ही दिन में मगर 157 हमलों से एक ऐसा

31:24मिसाइल नहीं मर सका। एक ऐसा मिसाइल वो

31:27तबाह नहीं कर सके जो एक ट्रक पर रखा हुआ

31:29है। जो कोई लहर नहीं छोड़ता और जो आज इस

31:33वादी में है और कल दूसरी वादी में। उसकी

31:36लोकेशन तो आप ट्रेस ही नहीं कर सकते। उसे

31:38आप ढूंढ ही नहीं सकते। तो फिर मारेंगे

31:40कैसे? और किस तरह मारेंगे उसको? और जितनी

31:43ज्यादा परवाज़ें आप करेंगे उतने ज्यादा

31:45मुआके आप उसे देंगे कि वो आपके एक और जहाज

31:48को नीचे गिरा दे। तो फिर 157 हमले क्यों

31:51हुए? क्योंकि फिजाइया यही कर सकती है। एक

31:53फिजाया ऊपर से बम गिराने का आला है। जब वो

31:56काम ना करे तो फिजाया कोई और चीज तो नहीं

31:58बन सकती। वो कोई जमीनी फौज तो नहीं बन

32:01सकती। वो तो फिजाया है। फिजाइया ही रहेगी।

32:03और ये सिर्फ अपने आप को ज्यादा अपग्रेड कर

32:06सकती है। ज्यादा हमले कर सकती है। और जब

32:08किसी के पास जवाब ना हो तो फिर यही हमले

32:10ही ज्यादा हो जाएंगे। 21 सितंबर का वो दिन

32:13जवाब नहीं था। वो ऐलान था कि हम सिर्फ

32:17अपनी फिजाई फौज पर जिंदा है। और यह जो

32:19बयान है वो इस कहानी की सबसे आखिरी आवाज

32:22है। एक मिसाइल जिसने कोई आवाज नहीं

32:24निकाली। एक हुकूमत जिसने आठ दिन में से

32:27कोई आवाज नहीं जवाब भी कोई आवाज नहीं

32:30निकाली। दो पायलट्स हैं जिनका नाम अभी तक

32:33किसी ने नहीं लिया और इन सबके ऊपर एक दिन

32:36में 157 धमाके हैं। इतना शोर है और इसमें

32:39एक भी जवाब नहीं है। और अब आखिर में एक

32:42सवाल और यह सवाल मेरा रियाज़ से सऊदी अरब

32:45से नहीं है। हम सबके साथ जिंदगी में कभी

32:47ना कभी ये तो होता है कि कोई चीज काम करना

32:50छोड़ देती है। और हम उसका हल ये निकालते

32:52हैं कि वही चीज और ज्यादा करने लगे।

32:55ज्यादा मेहनत, ज्यादा पैसा, ज्यादा वक्त

32:58उसी पुराने तरीके पर। तो जरा अपने आप से

33:01पूछिएगा आपकी जिंदगी में वो कौन सा काम है

33:04जो आप इसलिए ज्यादा कर रहे होते हैं कि वो

33:06काम हो नहीं पा रहा होता और क्या आपको

33:08यकीन है कि वह आपका सही जवाब है या वह

33:12सिर्फ आपका एक शोर ही है। उम्मीद है कि आज

33:15का वॉग आपको मुफीद लगा होगा। अब मुझे

33:18इजाजत दीजिए। अल्लाह निगेबान।

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