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कृष्ण संपूर्ण बाल लीलाएं सुंदर वर्णन|| Indresh Maharaj katha|| #indreshji

yashaswini shri radhey · 7,747 words · 36 min read

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0:01प्रकट करो चित ने से लाला अब देखो गैया कौन है पता है ठाकुर जी की रक्षक है पूरे विश्व की रक्षा ठाकुर जी करते हैं ठाकुर जी की रक्षा गैया करती है यहां पर वर्णन आया है कि गौत्र स्ना पिवा पुनर गरज सार्व कम रक्षम चक्र

0:22सकता द्वादशा नाम ठाकुर जी की रक्षा की जिम्मेवारी गैया लेकर के आई है और कोई भी लीला ठाकुर जी करते हैं चाहे वह गोवर्धन लीला की हो चाहे वोह पूतना मर्दन लीला हो हर लीला के बाद गैया के गरज को ही ठाकुर जी के द्वादश अंगों पर लगा कर के गौ मूत्र से स्नान मैया कराती है कहीं मेरे

0:44लाला को कोई अला बला नजर ना लगी हो नित्य ठाकुर जी जो तिलक लगाते हैं ना उस तिलक में भी अच्छा जिस समय ठाकुर जी प्रकट हुए उस समय कोई संप्रदाय तो थे नहीं कौन सा तिलक ठाकुर जी लगाते होंगे एक बार मैंने प्रश्न किया एक संत से कि ठाकुर जी कौन सा तिलक लगाते थे हम लोग रामानुज जी

1:05श्री लगाते हैं वल्लभ कुली गोल श्री लगाते हैं उर्द पुंड लगाते हैं सब लोगों के अपने अपने तिलक अपने संप्रदाय अनुसार ठाकुर जी जब पृथ्वी पर आए तो व तिलक क्या लगाते थे तब वर्णन सूरदास जी आदि के पदों में आता है केसर तिलक कस्तूरी तिल कम ललाट

1:25पटले ठाकुर जी कस्तूरी का तिलक लगाते हैं केसर का तिलक लगाते हैं केसर चंदन लगाते हैं और इन सबके साथ-साथ ठाकुर जी गौ रज लगाते हैं गैया की रज चरणों की खुर की रज उसमें यमुना जल मिलाकर के फिर ठाकुर जी उसको अपने अंग पर लगाते अपने माथे पर लगाते द्वादश संग में लगाते

1:48हैं इस प्रकार ठाकुर जी गैया के रज से द्वादश संग में तिलक कर देती हैं यशोदा मैया छह दिन के लाला है और पूतना का वध भगवान ने किया है बोलो भक्त वत्सल भगवान की जय तीन महीना के जब ठाकुर जी हुए तो ठाकुर जी का पलना उत्सव हुआ और उस पलना

2:09उत्सव में सटासर नाम का दैत्य आया भगवान ने अपने बाम चरण को इतना लंबा करके महाराज बैलगाड़ी में एक पाद प्रहार किया और सटासर का उसमें वध हो गया ठाकुर जी अब धीरे-धीरे एक वर्ष के है गए हैं और एक वर्ष के लाल जी जैसी भए हैं

2:32तो दो दतिया निकर आई है ठाकुर जी के घुंघराले केश हैं ठाकुर जी के और लाला अब नेक नेक धीरे-धीरे उठे कोई सहारा पकड़ कर के खड़े हो जाए और खड़े करके फिर यशोदा मैया उंगली पकड़ाए दे सो ठाकुर जी धम्म धम्म करके नेक नेक चले

2:52जैसे ही यशोदा मैया अपनी उंगली छोड़ दे भयभीत हो जाते हैं ठाकुर जी अब गिरो आगे की तरफ जावे फिर पीछे जावे फिर आगे जावे फिर पीछे जा फिर धड़ाम से गिर जाए फिर रो में और रो कार बुलवा जमीन को देख के रो रहे मैया जाने में मारो बोल तो सके ना नेक ने कभी बस आए करें

3:13आ ठाकुर जी की ऐसी लीला लाला एक वर्ष के है गए श्री गर्गाचार्य जी महाराज गोकुल में नामकरण संस्कार के लिए पधारे गर्गाचार्य जी महाराज ने आकर के कही बोले मैया कल को महूरत बहुत बढ़िया कल तुम्हारे

3:34लाला को नामकरण संस्कार करूंगा मैं लेकिन मैया एक मेरी बात सुन ले यशोदा मैया बोली आज्ञा करो बाबा बोले मैया तुम जितने उत्सव करो इतनो ढंडोरा पीट दे कि कोई ना कोई राक्षस आही जावे लाला को परेशान करवे याय मार मेरी बात मानो लाला को नामकरण संस्कार तो

3:55गोपनीय भाव से करियो कोई को मत बतायो यदा मैया बोली हम तो पड़ोसी इन कोना बताएंगे और रही बात भंडार करनो तो या बार गयान को करेंगे न लाख गयान के बीच में बैठ कर के ठाकुर जी को नामकरण संस्कार करेंगे गर्गाचार्य जी बोले कल की तिथि बढ़िया है कल

4:15करेंगे मैया मेरे संग मेरे ठाकुर जी आए हैं तो ठाकुर जी के मैं अपने हाथ से भोजन बना कर के प्रसादी करूं तो आप मु को सामग्री दे दो सूखी मैंने एक सामग्री बनाए ल ठाकुर जी को भोग लगाए दू यशोदा मैया ने गोबर को चौका लगायो सब सामग्री लाकर के गर्गाचार्य जी को प्रदान कर द बोले बाबा आप बढ़िया प्रेम से भोग

4:37बनाओ आरो गाओ ठाकुर जी को गर्गाचार्य जी ने बढ़िया सुंदर सामग्री बनाई खीर बनाई सब्जी बनाई रोटी बनाई जो जो सामग्री बनाई खीर बड़ी रज रज के बनाई केसर युक्त इलायची युक्त मिश्री खांड की मिश्री की खीर

5:00ऐसी सुंदर खीर बनाई कि महाराज भीतर नंद भवन में क्रीड़ा कर रहे ठाकुर जी को सुगंधी आए गई और जैसे ही लाल जी को सुगंधी आई खेलते खेलते ठाकुर जी तो रुक गए नेक्स से लाला और नेक्स से बलराम जी बलराम जी क लाला कायो तू रुक का को

5:20गयो बो बाबा देख बाहर एक पंडित आयो गर्गाचार्य ने ऐसी जोर की खीर बनाई है मेरे तो मुंह में पानी आ रहा देखो यह उन लोगों के लिए सीख है जो केवल सामान्य रोटी सब्जी बना कर के ठाकुर जी के आगे धरे आते भोग लगा लो ठाकुर जी को ऐसे

5:41भोग की कोई आवश्यकता नहीं है ठाकुर जी के लिए प्रसादी ऐसी बनाओ कि महाराज कादना रसोई घर में बनाते बनाते पीछे देखो तो खिड़की में दिख जाए ठाकुर जी झांकते हुए कहा बना रहे भैया ऐसी जोर की सुगंधी आ रही है मु जिस भोजन की सुगंध और रस से मानव नहीं

6:01रीज उससे ठाकुर जी कैसे रीझ और एक और बात ठाकुर जी की प्रसादी में आप मसाले कितने डालो व्यंजन कितने डालो इसकी आवश्यकता नहीं है आप जो भी बनाओ उसमें केवल प्रेम मिश्रित होना चाहिए खूब प्रेम से कोई भी

6:23वस्तु बनाया करो तो उस समय विचार करके बनाया करो कि इसको ठाकुर जी कैसे पाएंगे उनका रूप इसको पाते में कैसा होगा अपने आप वो वस्तु इतनी प्यारी बनेगी इतनी इतनी आनंददाई बनेगी खीर बनाओ तो खीर बनाते बनाते मन में भाव रखो लाला के हाथ सन जाएंगे खावे ग तो नाक पर लग जाएगा होठ पर लग जाएगा पूरे

6:45मुंह पर चुपका लेगो और फिर जीभ निका निक के चाटे ग ऐसी तो बने कि मुंह पर लगे वो लपटे मासी खीर लपटे मासी खीर समझे महाराज खीर कम रबड़ी ज्यादा लगे खीर कैसी बनाते हैं हम लोग दूध ही दूध दिख र है और चावल अलग तैर रहे हैं ऐसी नहीं ऐसी खीर बने कि महाराज दूध गाढो हो जाए और

7:07चम्मच से उठाओ तो ऐसी बिल्कुल लगे कि हां रबड़ी जैसी है और वा को रंग कैसा हो केसरिया जैसा रंग हो मुह में पानी आग दिखे सबन के लाला को आगे होग बोले जल्दी आज मु पवा भैया आके ऐसी खीर बने महाराज ऐसी सामग्री बने ठाकुर जी आनंद में आ

7:28जाए हमारे ब्रजमंडल में दाऊ दादा का स्थान है दाऊ जी इतनी छोटी-छोटी पूड़ी बनती है वहां पर क्यों बोले शाम को समय है ग दाऊ दादा भांग घोट घाट के बैठे हैं अब भांग घोट के बैठे हैं तो पूड़ी तोड़ेंगे तो श्रम है जाएगा तो इतनी छोटी पूड़ी है कि सब्जी में लगाओ

7:49सीधी खा जाओ पूरी पूरी पूड़ी ऐसे भाव इन भावों से भोग जब निर्माण होता है तब ठाकुर जी उसको स्वीकार करते ठाकुर जी के लिए प्रसादी बड़े भाव से बनाओ श्री गर्गाचार्य जी ने खीर बनाई ठाकुर जी के तो मोह में

8:10पानी आ गयो बलराम जी तो बोले बाबा मैं तो जा रहा हूं पावे और मो बढ़िया लगी तो तुमको इशारो कर दूंगा तुम आ जायो बलराम जी बोले लाला मैं तो जानू तो बढ़िया लगी अकेलो ही चट्ट कर जाए ना बुलावे को मैं जानू तो लेकिन तू चलो जा तू पाले कोई बात नहीं जी गुटम गुटम गए और

8:31निकल कर के बाहर आए गर्गाचार्य जी की थाल में रखे ई सुंदर खीर उठाई ल और प्रेम से पाने लगे गर्गाचार्य जी तो नेत्र बंद करके यम वस्तु गोविंद तु समप ग्रहण सु मुखो भक्तवा प्रस परमेश्वर नाम जप कर रहे थे ठाकुर जी आए आकर के जैसे ही पात्र

8:52उठाकर पाने लगे गर्गाचार्य जी ने नेत्र खोल कर के सामने थाल की और देखा तो खीर की पात्र गायब वहां से नेत्र घुमा कर के देखा तो बगल में छोटे से ठाकुर जी बैठे हैं पूरे नाक पर मुंह प आंख पर सब जगह खीर लगा लि यहां य तक खीर लग रही है और जीभ निक निक

9:13के ने से लाल जी चाट रहे हैं पहले तो हंसे अरे यशोदा देख तेरो लाला तो भूख दिखे अरे देख मेरे गोपाल जी की मेरे ठाकुर जी की भोग प्रसादी खीर खा गए हो अब मैया भोग तो सब झूठ है अ मु को दोबारा बनाना पड़ गर्गाचार्य जी बेचारे पहली बार हुई ना तो बड़े हस हस के बोल रहे

9:35हैं मैया आई बाबा क्षमा कर दियो लाला चंचल है बड़ो मैं या को अभी अंदर कर आऊ ठाकुर जी को उठा कर के भीतर कर आई फिर से गोबर चौका लगायो फिर से सामग्री दई गर्गाचार्य जी ने फिर से सामग्री बनाई दाऊ दादा बोले लाला कैसी रही खीर बो खड़ तो बहुत जोर की

9:55लेकिन चेला ने कच्चो है मैया तो शिकायत कर दे मेरी आधी अधूरी खीर में खींच लियो में कोई बात ना लाला तू तो कृपालु है बोले हां भैया चलो खेलेंगे हम तो गर्गाचार्य जी ने दोबारा खीर बनाई और बढ़िया बनाई पहले से बढ़िया सुंदर युक्त कर दे अपने ठाकुर जी

10:15से ठाकुर जी अब भोग लगाओ नन्हे से बालक ने झूठा कर दिया आपका प्रसाद अब प्रेम से पाओ यम वस्तु गोविंद तु समप ठाकुर जी भीतर खेलते खेलते फिर रुक गए बलराम जी बोले का लाला बोले अब की बार तो पहले तो जोर की बनाई है खीर बो लाला बार-बार मत जावे शिकायत कर दे

10:36बोले कहा करेगी मैया ने एक आथ थप्पड़ ी तो मारेगी लेकिन मोह तो मीठा है जाएगा अच्छा ठाकुर जी की भोग में एक चीज समझो ठाकुर जी को जब भी प्रसाद धरा हो ना मिष्ठान जो है वह ठाकुर जी के आगे रखो जैसे थाली रखते हो आप उसमें मिष्ठान वाला जो स्थान है उस उसका अंग जो वो जो भाव है वो ठाकुर जी के

10:58सामने होना चाहिए और जो सब्जी दाल आदि य सब ये एक तरफ होने चाहिए ठाकुर जी प्रारंभ करते पहले मीठे थे मीठो ही पाम सबसे पहले ठाकुर जी घुटमन घुटमन चल के आए गर्गाचार्य जी नेत्र बंद करके बैठे भोग में खीर को पात्र उठा लियो अबकी बार पायो आहा इतना स्वाद ठाकुर जी प्रेम प्रेम से

11:21पाने लगे खूब प्रेम से सुंदर स्वीकार कर रहे हैं आपको पता है ठाकुर जी को पंचामृत स्नान पसंद क्यों है यह दूध घी दही शक्कर शहद इन सबसे स्नान प्रिय क्यों ठाकुर जी को पहले घी से नवा पहले दूध से नवाव फिर दही से नवाव फिर घी से नवाव इन सबसे

11:44अलग नवा फिर अंत में पंचामृत एक संग निभाव तो ऐसा वर्णन आता है कि जब ठाकुर जी का पंचामृत अभिषेक होता है तो बीच-बीच में ठाकुर जी जीभ निकाल के भोग भी लगा लेते हैं तो ठाकुर जी का पेट भी भर जाता है स्नान भी हो जाता है तो ठाकुर जी को पंचाम बहुत प्रिय है पंचामृत स्नान इसलिए कभी जभ और अभी तो शीतकाल का

12:05समय है शीतकाल के समय तो महाराज सुगंधित और मीठा मठा जल बनाओ लेकिन चीनी का नहीं मिश्री का वो भी ऐसा हो जो घुल गई हो ठाकुर जी को कहीं लगे नहीं उसमें इलायची हो उसमें सुंदर सौफ पड़ी हो सुंदर केसर पड़ी हो जल में बढ़िया उसमें मिश्री पड़ी हो पूरी घुल जाए तब ठाकुर जी को उससे

12:27स्नान कराओ तो ठाकुर जी प्रेम से पाते भी रहते हैं स्नान भी कर लेते हैं तो ठाकुर जी ने खीर पाई गर्गाचार्य जी ने नेत्र खोले और जैसे देखे अबकी बार खीर का पात्र नहीं मिला बगल में ठाकुर जी बैठ के पा रहे हैं गर्गाचार्य जी को अब तो क्रोध आ गया बोले

12:47यशोदा अरे मैया देख तेरे लाला ने क कियो मेरे ठाकुर जी को पहले भोग झूठो कर दियो फिरते भोग झूठो कर दि मैया अगर तेरे मन में नाए हो तो मु बता दे मैं कहीं और जाके भोग लगा लूंगा ठाकुर जी इतना लंबा सफर करके आए भूखे प्यासे बैठे बेचारे य तेरो लाला भोग ही ना लगान दे

13:09रो यशोदा मैया आई बोले बाबा क्षमा कर दो बोले ना ना तेरो लाला कछु औरते ज्यादा चंचल है ना एक मैया बरो मत मानियो यशोदा मैया बोली बाबा मैं तो या बात की बड़ी शांति है कि खीर ही खा र है नहीं जे तो शालिगराम जी को गुलाब जामुन समझ के खा जाए

13:30याक शालिग्राम भगवान हमारे नंद बाबा तो अपने शालिग्राम की सेवा करके और ऊपर टान पर धर के जावे कि क लाला के हाथ ना पड़ जाए क्यों बोले एक दिना लाला ऐसे गाल फुला करके और गन के पीछे घूम र और नंद बाबा ढूंढे मेरे ठाकुर जी कहां गए ठाकुर जी कहां गए पता चली लाला चूस र म में धर

13:52के क्यों बोले सते स्नान करे या लगी जय ज मीठो ग स खागो ऐस लाला है ये तो बाबा बड़ी कृपा है ठाकुर जी की केवल खीर खा र नहीं तो तुम्हारे ठाकुर जी स्वा जाते बाबा अब आप चिंता मत करो मैं लाला

14:13को कमरा में बंद कर दूंगी आप जब तक भोग लगाओगे तब तक कमरा में रग आप प्रेम तो भोग लगा लो ठाकुर जी को पकड़ कर के मैया ने कक्ष में बंद कर दियो ठाकुर जी बैठ गए एक वर्ष के हैं और महाराज गुस्सा में भर गए ठाकुर जी लाल पड़ गए चेहरा और एक वर्ष के बालक को

14:36गुस्सा आता है तो व दुनिया का सबसे प्यारा बालक लगता है ठाकुर जी के गाल लाल पड़ गए और ठाकुर जी जंगला पर खड़े पकड़ करके और ऐसे देख रहे गर्गाचार्य जी को गर्गाचार्य जी भी देख रहे हैं शैतान बालक अब आके दिखा ठाकुर जी बोले दारी के भोग लगा मैं

14:56आकर बताऊं तो तेने अभी मेरा रूप ही तो नहीं दे देखो अच्छा ठाकुर जी बोलते थोड़ी बोलना जाने ही ना है लेकिन मनही मन सोच रहे हैं गर्गाचार्य जी ने फिर से भोग बनाया सब सामग्री बनाई अब तो ठाकुर जी को चिड़ा चिड़ा करके मिश्री अबकी बार तो ज्यादा डालिए मैंने मिस्री और मीठी होठ

15:16चिपक जाएंगे ऐसी रबड़ी बनाई है ठाकुर जी बोले नहीं अगर मैंने तेरी खीर को भोग लगाया तो मेरो नाम भी कुवर कन्हैया नहीं बुला के दिखा गर्गाचार्य जी ने जैसे खीर को भोग लगा कर के महाराज अपने ठाकुर जी के सामने पधरा है हो नन्ने से ठाकुर जी कौन ताले वाले उनके

15:37सामने तो नक में महाराज ताले वाले सब खुल गए भारते ठाकुर जी ने किवाड़ खोली और घुटमन घुटमन चल कर के गए और सामने तो खीर उठाई और खीर लेकर के प्रेम से पाने लगे यहां गर्गाचार्य जी यम बस्तु गोविंद थोड़ा अपना जाप बाप करने के बाद नेत्र बंद करके बैठे थे ठाकुर जी भोग लगा रहे हैं और जैसे

15:59ही अबकी बार नेत्र खोल कर के देखा तो नन्ने से गोपाल जी नेक्स से बटुआ से ठाकुर जी के चार भुजा प्रकट हो गई और महाराज एक भुजा से खीर को पात्र पकड़ो है एक भुजा से ठाकुर जी खीर पा रहे और अपनी तीसरी भुजा से वही खीर को लेकर के गर्गाचार्य जी को पवा रहे हैं गर्गाचार्य जी ने जब चतुर्भुज

16:22रूप का दर्शन किया गर्गाचार्य जी के नेत्र सजल हो गए भगवन में आपके रूप को पहचान नहीं पाया ऐसा सुंदर रूप प्रकट करके श्री गर्गाचार्य जी को सुख प्रदान कर रहे हैं ठाकुर जी नन्य से गोपाल जी गर्गाचार्य जी को ठाकुर जी ने कह दिया

16:43बोले हे गर्गाचार्य जी हमने आपको अपने रूप का दर्शन इसलिए कराया कि आप यशोदा मैया को बताना नहीं कि मैं कौन हूं मैं यहां यशोदा मैया और ब्रजवासी इन को प्रेम पावे के काज आया हूं और यदि मैं यह बता द कि मैं साक्षात भगवान हूं तो यह स्वच्छंद प्रेम नहीं करेंगे मोते यह बनावटी प्रेम करेंगे फिर या हमारी मेरी

17:06प्रभुता छुपी रहन दियो इनको मत बताइयो कि मैं साक्षात भगवान हूं गर्गाचार्य जी ने प्रणाम कियो अगले दिना लाला को नामकरण संस्कार भयो सबसे पहले बलराम जी को नाम राम रखा गया पर गर्गाचार्य जी बोले मैया आपके या बालक को नाम राम है पर बल की अधिकता के कारण सब याकूब बलराम कह कर के

17:28पुकारेंगे बोलो बलराम जी महाराज की बलभद्र भैया की बलराम जी को नाम करण है और जैसे ठाकुर जी की बारी आई कि बहु नि संत ना मानी

17:49रूपानी च गुण चते गुण कमान रूपानी वेन जना बहु नि संति रामानी रूपानी सुत स्य च हे मैया आपके लाला के बहुत सारे नाम होंगे

18:10गुण कर्म के अनुसार अलग अलग नाम होंगे मैया बोली बाबा इतने सारे नाम का उधर र है एक ही नाम बता दे मैं कैसे बुलाऊंगा बोले मैया ठीक है आपके लाला का नाम रखता हूं यह कभी शुक्ल वर्ण का था कभी रक्त वर्ण का था कभी किसी किसी वर्ण का था इस बार ये कृष्ण वर्ण का बनक आया है याय मारे

18:32में आपके लाला को नाम कृष्ण रखूं बोलो बाल कृष्ण लाल की जय ठाकुर जी का नाम कृष्ण रखा गया भगवान को नामकरण संस्कार हे गयो अब तो ठाकुर जी नक नक और बड़े हैर यशोदा मैया

18:53उंगली पकड़ कर के चलवा सिखाए ताल बजावे तो ठाकुर जी नाच लग जावे और जैसे ठाकुर जी नृत्य करें यशोदा मैया करताल बजा कर के आनंदित है जाए [संगीत] आहा हो नाचे

19:16नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नंदलाल नचावे हर की मैया चे

19:36नंदलाल नचावे हर की मैया नचावे हर की मैया नचावे प्रभु की मैया नचावे हर की मैया नचावे प्रभु की मैया नचावे हर की मैया नचा प्रभु की

19:59मैया नचावे हर की मैया नचावे प्रभु की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया हो नाचे

20:22नंदलाल नचावे हर की मैया चे नंदला नचावे हर की बोलो बाल कृष्ण लाल की [संगीत]

20:43[संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

21:11दूध ना पीवे लाला दहि ह ना खावे दूध ना पीवे लाला दहि ना खावे दूध ना पीवे लाला दही ना खावे दूध ना पीवे लाला दहि ना खावे दूध भी

21:37ना पीवे दही ना खावे यशोदा मैया गोपीन को बता रही है तो मैया कहा करे तुम्हारो लाला हो माखन मिसरी को पड़ो रे खव माखन मिसरी को बड़ो रे खैया माखन

21:58मिसरी को बढो रे ख वैया माखन मिसरी को बड़ो रेया नाचे नंदलाल नचा हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हरि की

22:21मैया मुकुट ना पहरे लाला स्फा ना बांधे मुकुट ना पहने लाला स्फ ना बाधे पगड़ी ना पहरे कान्हा स्पा ना बांधे पगड़ी ना पहरे लाला

22:45[प्रशंसा] स्प मोर मुकुट को है बड़ो रे पहर र मुकुट कोहे बड़ो रे पहन नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे

23:07नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचा ह की

23:29मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया खेल ना खेले लाला खिलौना ना खेले खेल ना खेले लाला खिलोना ना खेले खेल ना खेले कान्हा खिलौना ना

23:54खेले खेल ना खेले लाला खिना खे यशोदा मैया कह रही है खेल भीना खेले खिलौना दे दो तो फेंक दे मैया तो फिर का करे तुम्हारा लाला वंशी को लाला है बड़ो रे बजैया वंशी को लाला है बड़ो रे

24:18बजैया नाचे नंदलाल नचा महर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया हो नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे

24:39नंदलाल नचावे हर की मैया चंद्र सखी लख बाल कृष्ण छवि चंद्र सखी लख बाल कृष्ण छवी चंद्र सखी लख बाल कृष्ण छवी चंद्र

25:04सकील बाल कृष्ण हस हस कंठ लगावे यशोदा मैया हस हस कंठ लगावे यशोदा मैया नाचे नंद लाल नचावे हरि की

25:27मैया लाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया नाचे नंदलाल नचावे हरि की

25:50मैया नाचे नंदलाल नचावे हर की मैया की ठाकुर जी नाचते हैं यशोदा मैया ताल बजाती है आकाश में इंद्र इंद्राणी प्रकट हो जाते हैं और मन में कहते हैं कि यशोदा

26:10तेरे भाग्य की कही ना जाए उमा पार्वती प्रकट हो जाती हैं और महादेव प्रकट हो जाते हैं वे भी वंदन करते हैं कि यशोदा मैया का कितना बड़ा सौभाग्य है सब देवी देवता यशोदा मैया की सराहना करते हैं मैया तेरे जैस भाग्य कोई को ना है यह धन धर्म हीते पायो नीके राख यशोदा मैया

26:35नारायण घर आयो बंधुओं मैं भी यशोदा हूं आप भी यशोदा हो हम सबके यहां ठाकुर जी पधारे हैं हम सबकी गोद में ठाकुर जी बैठते हैं हम सबके हाथन से श्रृंगार स्वीकार करें हम सबके हाथन की बनी सामग्री स्वीकार करें

26:59पर यशोदा की तरह हमारे भाव कहां है ठाकुर जी के प्रति नीके राख यशोदा मैया नारायण घर आयो हमारे अस्त सखा तो इतना सुंदर वर्णन करते हैं बंधुओ सहचर भाव गोपी प्रेम सब अपनी जगह हैं पर श्री यशोदा जी का जो प्रेम है ना

27:20ठाकुर जी से उसकी उसकी पहुंच कोई नहीं कर सकता रात्रि में सुलाती हैं यशोदा मैया तो मैया के ऐसे भुजा पर ठाकुर जी सर रख कर के सोजा में एक सुंदर प्रसंग

27:42है के यशोदा मैया सुला रही है लाला को और लाला प्रेम से सन कर रहे हैं मैया से कभी कोई बात की जिद करें कभी कोई बात की जिद करें मैया सब बातन को सुने

28:04लाला की कभी कैसी कैसी बात करें मैया ठाकुर जी से कह रही है ठाकुर जी क में बोले मैया तुम को इतना डांटे का कुए [संगीत]

28:30[संगीत] [संगीत] तुम इतनो डांटे का कु है यशोदा मैया क

28:53बोले लाला तू कितन सजा धजाओ तू जाकर के गोबर में खेले मट्टी में सान ले अपने आप या मारे तो डाकू म ऐसा लगे तू पूर्व जन्म को सकर देखे ठाकुर जी बोले और नहीं तो मैया यह बरा भगवान को अवतार जो भयो का मेंही तो

29:13हैतो मैं ही तो हो ऐसी ठाकुर जी बात करें एक प्रसंग है व मुझे उसकी पची मिल नहीं रही व मैंने श्लोक लिख के रखा था उसमें ऐसा वर्णन आता है कि यशोदा मैया ठाकुर जी को राम कथा सुन एक दिन और जब ठाकुर जी सो जाते सन करते हैं यशोदा मैया की भुजा पर सर रख के तो यशोदा

29:38मैया कहती लाला एक राम नाम के राजा है श्लोक में ऐसा वर्णन है ठाकुर जी करते हैं [संगीत] हम आंख बंद करके लेटे हैं और यशोदा मैया उनको कथा सुना रही है उन राम जी की एक अत्यंत सुंदरी कन्या

29:58के साथ ब्याह भयो वा को नाम हतो सीता ठाकुर जी क और लाला दोनों उनको ब्या गयो परंतु कोई कारण के कोई कारण वश उनको वन में जानो पड़ो ठाकुर जी बोले हम और वहां पर लाला एक सुर पखा नाम की एक

30:21राक्षसी आई वाक ठाकुर जी ने नाक कान काट दिए ठाकुर जी बोले लेकिन एक दिना की बात है लाला पंचवटी में सब लीला चल रही तभी एक रावण नाम को राक्षस आयो और वह रावण नाम को राक्षस आकर के सीता जी को हरण कर ले गयो जैसे ही यशोदा मैया

30:43ने सीता हरण की कथा सुनाई सोई ठाकुर जी के नेत्र खुल गए और नेत्र खुल कर के ठाकुर जी उठकर खड़े हो गए बोले लाओ लक्ष्मण मेरा धनुष बाण कहां है आज इस रावण को मैं यही नष्ट कर दूंगा नहीं ले जाने दूंगा सीताज को यहां से अरे इसकी हिम्मत उस समय तो हम वन में थे मेरे पीछे से हरण करके ले गया

31:03लेकिन मेरा धनुष बाण लेकर के आओ मैं अभी इसको बताता हूं यशोदा मैया तो घबरा गई लाला कन्हैया ओ कन्हैया का गयो और ठाकुर जी तो नेत्र बंद करके निकल के भागे मैया मैया आज मु को रोक मत या रावण के दसों सिरण को काट दूंगा मैं ये कैसे लेकर गए हो सीता जी को अरे मैया लाला लाला ने मेरे

31:22पास आ जा मेरी बात तो सुन ठाकुर जी को अंक में भर लियो और अंक में भर के फिर यशोदा मैया ने लोरी सुनाई तब जाकर लाल जी शांत भए नहीं तो लाल जी तो आज भावा वेश में आ गए बोले वादनालू मैया ने गांड बांध ली कभी राम कथा

31:43नहीं सुनाऊ याय तोय तो रामी बन जावे अपने आप में इतना सुंदर कृष्ण करणामृथम है व श्लोक है श्लोक में ठाकुर जी कहते हैं और फिर खड़े होकर के युद्ध करने के लिए भागते हैं यशोदा मैया सुलाती है लाला को लाल जी

32:04सो जाते हैं रात्रि में यशोदा मैया से लिपट के सोते हैं और जैसे सुबह का प्रात काल होता है यशोदा मैया आती हैं और कैसे आती हैं बड़ी अचक करके आती हैं ठाकुर जी की पीली चदरिया है पीतांबरी चदरिया में ठाकुर जी सोम मैया इत्र वित्र

32:25लगा करर के बढ़िया चद्दर में सुगंधी आवे लाला को ऐसे सहन करा में यशोदा मैया बढ़िया लड्डू बना कर के और सुंदर अधो दूध लेकर के आवे लाला के काजी और चद्दर के भीतर धीरे से अपना हाथ भीतर ले जा कर के पहले हाथन को भारी मल करके नेक नेक उष्ण कर ले कि कहीं लाला को

32:47ठंडे हाथ लग ना जाए और उष्ण करके फिर नेक से लाला के चरणन को पकड़ कर के धीरे-धीरे मैया पावन को दबावे और धीरे-धीरे स्वर में के ला उठ जा बो रहे गई देख चल जल्दी उठ

33:08जा जाग बल जई है मोहन जाग बलज है ला मैं तेरी बलैया ले ल तेरी आरती उतार लू चल जल्दी उठ

33:31जा ठाकुर जी को उठा रही है मैया तो लाल जी अपनी चदरिया नक नीची करें केवल आंख तक खोले और एक आंख देख कर के यशोदा मैया को देखें फिर ऊपर कर ले मैया क लाला देख खेले मत मोते अब तू जल्दी उठ जा ठाकुर जी क मैया पहले मु को े बता तू मु को कहा देगी जा के मारे में

33:53उठू उठ के मो कछु मिलेगा तो तो उठू ना तो आज पूरे दिन सो मैं तब यशोदा मैया ठाकुर जी से के अच्छा लाला कुछ नहीं दूंगी तो उठे को ना बो ना मैया मैं तो आज पूरे दिना संग पहले मुको बता मु को कहां मिलेग तब उठूंगा मैं तब यशोदा मैया कहती

34:15है तेरे कारण श्याम सुंदर मैं नहीं मुरली आले हो लालन

34:36जाग बल लाला देख तेरे काज नई मुरलिया मंगवाई है मैंने और या बंसी को बजावे लाला कितना सुंदर लगे चल जल्दी तो उठ जा सो ठाकुर जी उठ के बैठ क बंसी क बंसी जल्दी बंसी दिखा सोई ठाकुर जी की पुरानी बंसी मैया दे दे ले लाला जरी बंसी मैया जी तो पुरानी है

34:58मैं ना उठ र स सो गए ठाकुर जी फिर से यशोदा मैया कह रही है लाला उठ जा देख तू ऐसे परेशान मत करे कर मैं कैसी बूढ़ी बड़ी है गई हूं तब मैया लोभ दे रही है ठाकुर जी को अनेक प्रकार के बंधुओ ऐसे ही अपने घर के ठाकुर जी को भी कई लोग हैं सीधे मंदिर में

35:19घुस ठाकुर जी के मोपी लाइट जला दे ठाकुर जी की भी आंख बंद हो जाती है भैया ने प्रेम तो उठा देकर और मैं बुरा नहीं मानी सुबह सुबह उठकर के महाराज घंटी बजा दी जोर से ठाकुर जी कान पकड़ लेते होंगे ने धीरे होले करना चाहिए पर उनका एक नियम विधान भाव तो लाओ कि व लाला ही है वास्तव में

35:41धीरे-धीरे घंटी बजाओ धीरे-धीरे इत्र लगा के हाथ में पहले ठाकुर जी के चरण दबाओ गरम गरम दूध को भोग रखो लड्डू रखो ठाकुर जी को मनोहारी करो कि लाला उठ जाओ सीधे उठा मत दो उन्हें जैसे अपने घर के बालक के मनोहारी करते हैं चल बेटा उठ जा स्कूल जाना है फिर उसके बहाने होते हैं फिर गले

36:00से लगाते हैं कई बार फर उठता है वह ऐसे ठाकुर जी यशोदा मैया क देख लाला तू ना उठेगा तो आज बहुत बड़े भाव से वंचित है जाएग ठाकुर जी भीतर से बात करें कहा भावत मैया बोले गायन के गल बंद

36:22खूटे डगर वैन की ल लालन जागिए बल जई है लाला देख तू तो आज यहीं सो तो रह गया और तेरी सबरी गैया बचिया बछड़ा जिनको तू

36:44सवेरे जाए करके खिलावे उन सबन को तो खिलाए बिना देख बलराम लेकर जा रहा वन में और वन में जाकर उन सबन को जन कहां चरा के लावे ग आज तू गैया के संग खेल ही ना पावे ग और जैसे ही सुनी ठाकुर जी ने गैया लेकर बलराम जी जा रहे सोई ठाकुर जी तो उछल के खड़े हो

37:01गए अरे मैया मेरी गयान को लेकर दाऊ दादा कैसे जाएगा सोई ठाकुर जी को पकड़ कर के मैया ने तुरंत तो काजर लगा दियो लाला को कहीं नजर नहीं लगे तुरंत आरती लेकर के ठाकुर जी की मंगला कर दई और तुरंत दूध पिवा करके लड्डू खवाए दियो ठाकुर जी जल्दी मह में लड्डू भर के भागे गौशाला गौशाला में जाक देख सबरी गैया

37:21खड़ी है फिर रोते रोते मैया तेने मु तो झूठ कही बोले टना कहते तो तो सोते ही रहतो या मार कही मैंने तो बोले ठीक है मैया तू कर ले अपने मन की अ तेने उठा तो दि मैं ना ना पर दिनसे र यशोदा मैया के मो क मत नवे वैसे ही कारो

37:45है और कारो जाए कोई ब ना करे तोते सोई ठाकुर जी अपने आप चले जा में कुआ में जल खच मैया जल्दी नवा ब तो करन तू मैया रोज नवाए कर म को और सुन त त लगा के मु को नवा कर मैं गो जाऊंगा फिर मेरो ब्याह होग ऐसी छोटी छोटी बातें यशोदा मैया से लाल जी

38:03करते हैं यशोदा मैया के प्रेम के उफान भरता है हृदय में ठाकुर जी के प्रति ठाकुर जी साढ़े तीन वर्ष के है गए तोतली वाणी बोलते हैं इतना प्रेम भर के ठाकुर जी रहते हैं और श्री सुका चार्य जी महाराज यहां ठाकुर जी की उधम का वर्णन कर रहे हैं

38:29ठाकुर जी सब ब्रज वासियों के साथ कैसा उधम बताते हैं बोले संगम जलज कंटक संगी गैया के सींग से लटक जाते हैं अग्नि चूले की अग्नि लेकर भागते हैं दिम इतना सुंदर लगता मुझे य प्रसंग ठाकुर जी रो रहे हैं सुबह सुबह यशोदा मैया बोली का

38:52लाला का को रो र बोले मैया कल मेरे संग कल म को पता चली कि मेरे संग तो बत बड़ अत्याचार है रो जन्मते मैया बोली का अत्याचार है लाला तेरे संग बोले मैया कल एक बछिया को जन्म भयो गौशाला में बोले अच्छा फिर मैंने व बचिया को देखी तो मेरे

39:13मन में आई कि मेरो जन्म है तीन साल है गए अभी तक सबरे दांत आए ना या के देख दांत निकले की ना मैंने जैसे जन्म लेती बा बचिया को मो खेलो सबरे दांत आ गए मैया मो लगी अरे राम मेरे संग कितना बरो भयो तीन बर्ष को बूढ़ा हो ग मेरे अभी तक दांते ही ना निकले मैया बा बचिया के सबरे दांत आ गए

39:35मेरे चोना आमरे तब यशोदा मैया अब कहा समझाए लाला को तो लाला से कहे लाला देख तो सांची बताऊं तेरे दांत क्यों ना आ रहे बोले बताओ तू मक्खन बहुत खावे और मक्खन चीकन होवे अब तो चकनो चकनो मक्खन खावे तो तेरे सबरे दांत चकने कि पेट में चले जाए त दूध पिए कर देख

39:55बलराम के दांत ने करया सबरे दूध पीवे और बलराम की चोटी भी लंबी है गई है दूध पीवे सोही ठाकुर जी कूद पड़े बोले मु को दूध पिवा अ पिवा मैया और दूध को पात्र लेकर मुख से लगा ले में अपनी चोटी पकड़ के खड़े हो जाए ठाकुर जी देखू बड़ी है रही है कि ना और फिर दूध पीने के बाद में फिर अपने

40:16दांत गने मैया य तो चार के चार बढ ना रहे यशोदा मैया के लाला तू इतना परेशान करे मु को पूरे दिना कैसे समझाऊ तो आहा ठाकुर जी अब थोड़े-थोड़े बाहर जाने लगे नंद भवन के बहुत सुंदर है श्याम

40:40सुंदर मैया बड़ी नजर की तरीकान ठाकुर जी को भेजे हाथन में कुछु पहनावे कीी और जबरदस्ती ठाकुर जी जैसे ही बाहर जावे की जिद करें तो मैया उनको रूप बिगाड़ दे काजल बिगाड़ दे बालन को ऐसे बिखेर दे कि ज्यादा सुंदर ना लगे नहीं तो नजर लगा देंगी ऐसा बना दे ठाकुर जी है पर ठाकुर जी फिर

41:01भी इतने प्यारे लगे निकर कर के ठाकुर जी नंद भवन से बाहर जावे और आंखन के आगे दिख वारो कोई संत हो महंत हो कोई ब्राह्मण हो व से ऐसे मिलेंगे जैसे या कितने दिना आते जानते हो कोई भी संत महापुरुष मिल जाए ब्राह्मण मिल जाए बा के पास ठाकुर जी अरे आप यहां

41:22खड़े हो कौन है भैया लाला अरे तुम ना जानो मैं तो तुम्हें बहुत जानू बोले भैया तू कैसे जाने बोले वो बाद की बात है पर नंद बाबा ने मोक आपको बुलावे भेजो है यशोदा मैया ने घर में 56 भोग बनाए चलो जल्दी पहुंच जाओ मा पायो बैठ के घर में कोई खबर नहीं है और

41:44यहां 100 200 संतन की जमात पहुंच गई यशोदा भैया बोली कहिए कैसे अरे आपको लाला आए आकर के बोलो आप सुबह से हमारी प्रतीक्षा कर रही हो मैया जल्दी हम तो अयोध्या से आए हैं बड़ी भूखे हैं लाओ प्रसाद पवाओ अब यशोदा मैया मना कैसे करे भीतर जावे नंद बाबा से के तुम्हार लाला कहा करे देखियो

42:05कौन को निमंत्रण दिया जबरदस्ती अच्छा कोई बात नहीं बनाओ पवाओ सब ब्राह्मण उनको भोजन पवा में एक पंगत उठे ना इतने में दूसरी पंगत आ जा बोले मैया आपके लाला ने कही घर में 56 भोग बने हैं जाओ पाओ मैया बोली आज य आन दे लौट के शाम को लौट के ठाकुर जी आए बोलेरे लाला तो कोई को

42:26भी दिया नंद भवन में बैठी यशोदा मैया 5 भोग बनाए जाओ पाओ ऐसा क्यों करे मैया देख तु जाने ना मेरो जन्म तेरे घर में तेरो उद्धार करवे के काज भयो है भया बोली अच्छा मेरो उद्धार करेगा तू बो हम अच्छा तो का को निमंत्रण दे के दो कारण है मैया पहलो कारण जि नंद

42:50बाबा ने इतना कमा कमा के धर लियो कहां ले जाएंगे या याक बढ़िया 5 भोग बना बना ब्राह्मणन को पवा संतन को पवा तो तेरे धन को दान होएगा पहली बात तो दान करवावे के काज और दूसरो कारण बोले मारेगी तो ना बोले बात बता बोले ना पहले वचन दे

43:11मारेगी तो ना ठाकुर जी यशोदा ना मारूंगी ठाकुर जी पहले ही तैयार खड़े दौड़ की स्थिति में यदि मार आई तो मैं दौड़ जाऊंगा बोले मैया आजकल मैं देख रहा हूं तू बहुत मोटी है गई हमारे तू काम करती र हमारे जाऊ अब भागे महाराज गौशाला की ओर यशोदा मैया बोली

43:32दारी के तोय बताऊंगी मैं ऐसी बात न [संगीत] करे ठाकुर जी की बड़ी मधुर लीलाए हैं एक दिन रोने लगे चंद्र खिलौना ले हो मैया मैं चंद्र

43:54खिलौना ले चंद्रमा चाहिए या को लाके दे यशोदा मैया बोली लाला तेरी कोई तुक तू कहा मागे अभी चंदा कैसे लाके द तो बोले मो ना पता चा कछु कर नंद बाबा नसेनी बनवा या तोड़ के ला ऊपर बोले कोई फल तोड़ के ला ऊपर नसनी

44:16समझते हैं नहीं समझते नहीं समझते नसेनी उड़िया मैंने स अभिषेक क भाई उसी को आती उड़िया हमारे य नसेनी दो बांस के ऐसे व ऊपर चढ़ने वाली उसको हमारे य नसेनी बोलते हैं क्या अरे हमे सीढ़ी वह सिडी होती है कोई सिड तो यह

44:39होती है जो घरों के अंदर होती है उसको सिडी थोड़ी बोलते वो तो नसेनी साप सीढ़ी तो वही सीढ़ी उसको हमारी ब्रज भाषा में बोलते हैं नसनी अच्छा सीढ़ी तो उसको

45:01भी हम भी सड्डी बोलते हैं जो घरों के अंदर होती है पर यह बांस वाली इसको नसेनी बोलते हैं तो ठाकुर जी कह रहे मैया तू बाबा तो क इतनी बड़ी नसेनी बनवा या कुछ तोड़ के ला ऊपर से यशोदा मैया बोली लाला मैं नहीं जा रही चल तू चुपचाप बैठ जा और मैया ने एक परात में पानी भर के लाला कोवई में

45:21प्रतिबिंब दिखा दियो गोद में लेकर के मैया बैठ गई देख लाला रो चंद्रमा ठाकुर जी देख कर के पहले तो बड़े आनंदित है गए खुश है गए अरे मैया चंद्रमा आ गयो हमारे यहां बोले हां आ ग देख लाला यह रखो सामने अब ठाकुर जी थोड़ी देर तो खेलते रहे थोड़ी देर तो आ यशोदा मैया बड़ी शांत बोले चलो

45:40कम से कम चुप तो भयो इतने में ठाकुर जी ने चंद्रमा पकड़ को जैसे ही हाथ मारो सही पानी छलक गयो मैया के मैया तुमते झूठ बोल रही तू पानी भला तु पागल बना रही अरे लाला अरे ना लाला रो मत रो मत और तो ठाकुर जी चीख चिल्ला में रो

46:01में जई हो लोट अही धरनी प तेरी गोद ना आई हो लेट गए जमीन में महाराज सिर पटकन लगे अपन तेरी गोद में ना आऊ मैया हो तो सुत में नंद बाबा को तेरो सुत ना क हो मैया

46:23पूरे गोकुल में हल्ला कर दूंगा मैं तो नंद बाबा को लाला तेरो हूं ही ना मैं ऐसी ऐसी बात यशोदा मैया बोली अब कैसे शांत करूं याक मैया ने जैसे तैसे ठाकुर अच्छा लाला सुन सुन सुन चंदा ते सुंदर चंदा ते गोरी तोक नई दुलहनया दे हो सभी

46:45ठाकुर जी रुक गए आंसू पहुच के बोले मैया कहा बोले एक दुल्हन दे दूंगी तो मैया मु गोद में ले जल्दी गोद में ले अपनी गोद में चढ़ गए मैया सुन मेरी बात बोले कहा मैं अई बय जाई हूं मैं अभी जाऊंगा ब्या कर तु को घोड़ी

47:07मगवा अभी मगवा नंद बाबा ते क गोपी मंगल गाने गबा दे और मैया बंधन बार बांध हाथ हाथन में मेदी लगवा तो ब्या कर यशोदा मैया बोली नाला बड़ त जा बोले मैया और साढ़े तीन बर्ष को बूढो गयो और कितन बड़ो चावे अब कर दे मेरो ब्या और धमकी क्या दे रहे हैं बोले मैया यदि

47:30तेने मेरो भ्यान नहीं करायो तो अबही मेरे सखा को भ भयो मैं बाकी बह ले आऊंगा यशोदा मैया बोले लाला तोते कहां जाऊ मैं ऐसे ठाकुर जी की लीला फिर ठाकुर जी ने माखन चोरी प्रारंभ कर दी गोपियों के यहां जाते हैं ठाकुर जी माखन चोरी करते हैं एक

47:51दिन ठाकुर जी की अलग इच्छा प्रकट हो गई मैया से कहने लगे बो मैया बोले कहा भयो बोले अब मैं बड़ा हो गया हूं अब तु को जिम्मेवारी दे मैया बोली कहा जिम्मेवारी दू बता बोले अकेली इतनी गयान को चरावे नंद बाबा बलराम जा में अब कछु गयान को चरावे मैं जाऊंगा मैया बोली ना ना ना ना लाला यह सब

48:13नहीं होने दूंगी बो ना भैया मैं तो गैया चरावे जाऊंगा बहुत सुंदर भाव है श्री परमानंद दास जी का पद है जी मैया से कह रहे हैं गाय चरा वन ज हो हे मैया

48:40मोरी गाय चरा वन जय हो सुमैया मोरी तू कहे महर नंद बाबा सो तू कहे मैं ह नंद

49:00बाबास बड़ो भयो ना डरे हो सुमैया मुरी बड़ो भयो ना डरे सुमैया मैया तू अब नंद बाबा से कह मेरी गैया चरावे की व्यवस्था करवा दे अब मैं बड़ो मैं डर ना और श्रीदा

49:24माले आदि सखा सब श्री दमाल आदि सखा स अरुर अरु हलधर संग ले हो सुमैया मरी और

49:45अलर जैसे बालक अपने माता पिता से आज भी जिद करता कहीं जाने की ऐसे ठाकुर जी गैया चरावे की जिद कर रहे हैं दयो मात कवरी भरी ले ह दयो मात कावरी भर ले हो भूख लगे तब खे हो

50:09सुमैया मोरी मैया मैं खूब सार दही भर के ले जाऊंगा और रास्ता में कहीं मो को भूख लगेगी स वही दही को निकाल के खा लूंगा मैया लेकिन तुम को जान देना सब व्यवस्था ठाकुर जी बता रहे हैं और वंशी वट की शीत ल छया वंसी भट की शीतल

50:34सया खेलत में सुख पे ह सुमैया मुरी खेलत में सुख पे ह सु मैया मरी परमानंद दास संग खेलो परमानंद

50:57[संगीत] जाए जमुन तट हो सुमैया मुरी चाय जमुन तट ने हो सुमैया मोरी गैया चरावे जय हो सुमैया मोरी गैया

51:19चरावे जय हो ठाकुर जी जिद कर रहे मैया मैं गैया चरावे जाऊंगा अब तो रोने लगे यशोदा मैया मानी ना रही है लाला की बात नंद बाबा आ गए नंद बाबा ने आकर लाला का को रो र बोले बाबा मैं गैया चरावे जाऊंगा तू मैया समझा दे मैं अब डरंगा ना बड़ा गैया चरानी है ठाकुर

51:42जी बोले लाला देख रुक मैं कोई ब्राह्मण को बुलाऊ पहले महूरत निकलवा तभी वहां श्री साल मुनि पधारे और साल मुनि ने मुहूर्त निकाला ठाकुर जी गैया चरावे को और कार्तिक की सुंदर अष्टमी के दिन ठाकुर जी यह वैद ना रो रहे सांड मुनि

52:02तो आके बोले बाबा तुम्हारो लाला महूरत परही रोवे आज कोई महूरत सबसे बढ़िया आज ही लाला जाएग गैया चरावे लेकिन लाला गैया चरावे जावे ग वन में जाएग कहीं कोई बिलनी की नजर ना लग जाए कोई अन्य नगर की गोपी की नजर ना लगे या के काज लाला के काजे कामड़ बांधो या के कमर पर कामरिया

52:25बांधो नंद बाबा कमरिया ले आए साल मुनि बोले जे सब कमरिया नहीं आपके ब्रज में एक अद्भुत कमरिया है वही कमरिया काली कामरिया के कमर पर बांधो बोले कौन सी कमरिया बोले महाराज बरसाने के राजा वृषभानु जी उनकी जो

52:45लाली है ना श्रीमती राधा वा को जब प्रादुर्भाव भयो वा के प्रादुर्भाव के समय पर ब्रह्मा जी ने एक कामर दई वाक व मर जो है काहे स्वयं शंकर जी ने अपने हाथन से बनाई है विष्णु भगवान ने व में अपने हाथन से जड़ जड़ा जड़ अपने हाथन

53:05से जलाए हैं इंद्र ने आकर के वाक रंगीलो कियो है और ब्रह्मा जी ने आकर के वही कामर वृषभानु जी को दई वही कामर के ऊपर वो वृषभानु नंदिनी रोज सोवे अगर कोई बृज भानु जी से जाकर के वा कामर को ले आवे तो वो लाला को पहनाई जाए वा से लाला की रक्षा होएगी

53:28अब तो बाबा सोचने लगे हम कैसे जाए और भैया कोई की कमर कैसे मांग के लाए लेन प्रसंग आता है कि साल मुनि के साथ नंद बाबा बरसाने गए और बरसाने जाकर के वृषभानु जी से कही बोले हमारे लाला गैया चरावे को अब गोपाष्टमी को दिन है तो वाके काज कामर चाहिए अच्छा कोई ऐसा नहीं कि कोई गैया

53:51चराना लज्जा की बात है बधाई गाई जाती थी आज इनको बालक गैया चरावे ग ये तो वहां का तब का व्यापारी है ये वृष मानु जी ने खूब बधाई दई खूब सारी कामर ले आए बोले ले कौन सी चाहिए बोले जेनाए चाहिए बोले कौन सी चाहिए बोले आपकी लाली जाक सेज बना कर के सोवे वही कामर

54:11चाहिए वृषभानु जी बोले वह तो बड़ी पुरानी है गई है वोह तो बड़ी उधर गई है बोले वही चाहिए तब श्री जी जा कावर पर सोवे जा कमरिया पर सोवे वही काली कमरिया ले करके नंद बाबा आए हैं और वोह लाला को धारण कराई है ताकि लाला को नजर ना लगे वही को ड़ कर

54:33के ठाकुर जी जावे गैया चरावे के का ऐसी मधुर लीला यशोदा मैया ठाकुर जी को पादुका पहनाने लगी पावन में ठाकुर जी बोले मैया जी क्या कर रही है बोले पादुका पहन के जा कांटे लग जाएंगे तेरे पावन में ठाकुर जी बोले तो मैया एक काम कर बोले कहा सबरी गयान को और पहना दे इनके पावन में कांटे

54:55लग गए तो दूध दी फिर यशोदा मैया बोली लाला इन सबन के पाम थोड़ी है इन सबन के तो खुर है और खुन में कांटे थोड़ी लगायो करें ठाकुर जी तो जोर जोर से रोने लगे मैया बोली अब का को रो र है बोले मैया मैं

55:16तेरे पेट में हतो तेने खावे पीवे में बड़ी कंजूसी करी जो मेरे पाम खरना बने मेरे पाम पाम ही रह गए अभी तक मैया तेने जरूर खा प में कंजूसी करी होगी यही मारे मेरे पाम खुर नाने मैया बोली अरे लाला कैसी बात करे ये सब तो जानवर है जानवर इन के खुर में ठाकुर जी और जोड़ते रोने लगे शी डोंगरी जी

55:38महाराज कहते इतना रोए ठाकुर जी यशोदा मैया ने जैसे तैसे चुप करा का का को रोरो सब श्रृंगार मिटाई लियो अपन ठाकुर जी बोले मैया मैं तोस भी मैया कहूं और मैं गैया स भी मैया कहूं लेकिन आज तेने व गैया को जानवर कैसे कह दियो आज तेने वा गैया को

56:01जीव जंतु कैसे कह दियो मैया कोई तोस जीव जंतु कहे ग तो को अच्छो लगे ग तवा गैया को जीव कैसे जंतु कैसे कह सके जानवर कैसे कह सके वो तो मेरी मैया है और ठाकुर जी दौड़ कर के गए गैया इनके अंग से लिपट गए बोले मैया इनको कभी जानवर मत कहियो यशोदा मैया

56:21अपने भाग्य की सराना करें कैसो लाला मेरो ऐसो प्रेम करे गैया बोलो बाल कृष्ण लाल की जय यशोदा मैया खोल केवड़िया लाला आयो गाय चरा

56:43यशोदा मैया खोल केवड़िया लाला आयो गाय चला यशोदा मैया फूल की बढिया लाला आयो गाय चरा आयो गाय चराए लाला आयो

57:06गाय [प्रशंसा] चराय आयो गाय चराए आयो गाए चरा अरे हां आयो गाए चराए कान्हा आयो गाय चराए

57:26हा आयो गाय चलायो ला आयो गाय चला यशोदा मैया ल की बढिया लाला आयो गाय चराए सोना मैया ल के बरिया लाला आयो गाई

57:52चरा यशोदा मैया कर आरती यशोदा मैया करे आरती यशोदा मैया करे आरती यशोदा मैया करे आरती हा भूली नाए समाए आज बोली नाए समाए

58:19आज हस हस लेत बलैया मैया हस हस लेत ब बलैया मैया हस हस ले त बलैया मैया हस हस लेत मलैया मैया हां बार बार बली जाए यशोदा

58:41मैया ूल केवड़िया लाला आयो आय चरा यशोदा मैया कोल के बरिया ना आयो य चरा मा यशोदा मैया खोल के वड़िया लाला आयो य चरा

59:04है यशोदा गैया कोरथ बैया दादा आयो गाय चरा आयो गाय चराय कान्हा आयो गाय चराय हा आयो गाय चराई लाला आयो गाय चराए अरे हां आयो गाय

59:31चराए लाला आयो गाय चराय हां आयो गाय चराए लाला आगाय चला हो यशोदा मैया फूल की बढिया लाला आयो य चरा यशोधा मिया कोरई

59:57लाला आयो गाय चरा हो लाला आयो गाय चरा लाला आयो गाए चराला आयो गाय छरा हो लादा आयो

1:00:17गाय बोल गायो के गोपाल की जय ठाकुर जी गोपाष्टमी के दिन गैया चरा कर के लौटे मैया के संग मधुर लीला करें एक दिन मैया की बड़ी पुरानी मटकी ठाकुर जी ने फोड़ दई तो ठाकुर जी को पकड़ कर के मैया ने खल से बांध दियो ठाकुर जी ने बंधे भई खल से दो वृक्ष

1:00:40को स्पर्श कियो दोनों वृक्ष टूट कर के गिर गए यमला अर्जुन के वृक्ष प्रकट भए और उनमें से नल कुवर मणि ग्रीव कुबेर के पुत्र प्रकट हुए उन्होने भगवान की स्तुति गाई ठाकुर जी ने उनको सुख प्रदान कियो बोलो गिरधर लाल

1:01:01प्यारे की जय

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