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Karam Din Aur Uski Tin Beti Ka Waqia | Moral Islamic Story | Story Factory

Story Factory · 4,583 words · 21 min read

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0:00ये कहानी है एक आदमी और उसकी तीन बेटियों

0:02की है उसकी बीवी कुछ साल पहले वफात पा

0:04चुकी थी उसकी तीनों बेटियां बहुत खूबसूरत

0:07थी मगर सबसे छोटी बेटी अपनी बहनों में

0:11सबसे ज्यादा समझदार थी उसका नाम जैनब था

0:14करम दीन अपनी तीनों बेटियों से बहुत प्यार

0:16करता था उसने कभी अपनी बेटियों को मां की

0:20कमी महसूस नहीं होने दी वह अपनी बेटियों

0:22की हर ख्वाहिश पूरी करता था अब कम दन की

0:25बेटियां बड़ी हो चुकी थी और अपने पिता के

0:28लिए खुद से खाना बनाने लगी थी जब करम दन

0:31काम के सिलसिले में बाहर जाता तो उसकी

0:33बेटियां उसके लिए खाना तैयार करके साथ दे

0:35देती उसी गांव में एक बेवा औरत भी रहती थी

0:38जिसकी एक बेटी थी उस बेवा की आदत थी कि वह

0:41हर घर में कुछ ना कुछ मांगने के लिए चली

0:44जाती थी जब कर्म दीन की बेटियां अपने पिता

0:47के लिए खाना बनाती तो वह औरत अक्सर उसी

0:50समय उनके घर आग मांगने के लिए आ जाती

0:53लेकिन करम दीन की सबसे छोटी बेटी जैनब को

0:56वह बेवा औरत बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती

0:58थी जब भी वह औरत उनके घर आती जैनब अपनी

1:02बहनों से कहती यह औरत हमारे घर क्यों आती

1:05है यह औरत बिल्कुल भी अच्छी नहीं है बड़ी

1:08दोनों बहनें जैनब को समझाती देखो यह बेवा

1:11औरत है और गरीब है अगर हमारे घर से आग ले

1:15जाती है तो इसमें तुम्हारा क्या नुकसान है

1:17जैनब अपनी बहनों की बातें सुनकर चुप हो

1:19जाती लेकिन वह कहती देख लेना यह औरत एक ना

1:24एक दिन हम सबके लिए मुसीबत खड़ी करेगी यह

1:27सिलसिला यूं ही चलता रहा वह औरत रो रोज

1:30उनके घर से आग लेने आती और मौका पाकर कर्म

1:33दन के खाने में राख मिला देती कर्म दन ने

1:35जब अपने खाने में खराबी महसूस की तो उसने

1:38सोचा कि उसकी छोटी-छोटी बेटियां खाना

1:40बनाती हैं इसलिए उनसे कोई गलती हो जाती

1:43होगी वह अपनी बेटियों से बहुत प्यार करता

1:46था और यह बात समझ नहीं पा रहा था कि उसकी

1:49बेटियां उसका खाना क्यों खराब कर रही हैं

1:52फिर एक दिन कम दीन ने सोचा आज मैं अपनी

1:55बेटियों पर नजर रखूंगा आखिर मेरी बेटियां

1:58अचानक से मेरे खाने में मिलाने लगी हैं जब

2:01करम दन की बेटियां खाना बनाने लगी तो वह

2:04छुपकर उन्हें देखने लगा उसकी बड़ी बेटी

2:07साफ पानी से चावल धो रही थी छोटी बेटी

2:10सालन बना रही थी और सबसे छोटी बेटी जैनब

2:14बर्तन साफ कर रही थी जिन बर्तनों में खाना

2:16डाला जाना था कुछ ही देर में खाना पककर

2:19तैयार हो गया खाने में कोई खराबी नहीं थी

2:23करम दन परेशान था लेकिन फिर अचानक उसने जो

2:26देखा उससे उसके पैरों तले जमीन खिसक गई उस

2:29ने देखा कि वही बेवा औरत उनके घर आग लेने

2:32आई है और उसकी छोटी बेटी जैनब उससे बहस कर

2:35रही है वहीं उसकी दूसरी बहनें जैनब को

2:39समझा रही थी कोई बात नहीं जैनब यह बेवा

2:42औरत है इसे आग लेने दो बड़ी बहन ने कहा

2:46लेकिन उस बेवा औरत ने आग लेने के बहाने

2:49नजरें बचाकर कर्म दीन के खाने में राख

2:51मिला दी और सारा खाना खराब कर दिया यह

2:54देखकर करर्म दीन को बहुत गुस्सा आया दूसरे

2:57दिन कर्म दीन ने उस बेवा औरत को अपने घर

3:00बुलाया और गुस्से में पूछा तुम्हारी

3:02हिम्मत कैसे हुई मेरा खाना खराब करने की

3:06वह औरत बड़ी नाटकीय अंदाज में क्रम दीन के

3:08पास आई और उसके सीने पर हाथ फेरते हुए

3:11कहने लगी अरे मैं तो यह देख रही थी कि तुम

3:15सच में अपनी बेटियों से प्यार करते हो या

3:17नहीं खाना खराब होने पर तुम उन्हें डांटते

3:20हो या नहीं लेकिन तुम तो बड़े अच्छे इंसान

3:23निकले अपनी बेटियों से बहुत प्यार करने

3:25वाले तुमने तो मेरी चोरी फौरन पकड़ ली अब

3:29मुझे यकीन हो गया है कि तुम अपनी बेटियों

3:31से बहुत प्यार करते हो आइंदा ऐसा कुछ नहीं

3:34होगा कर्म दिन उसकी बातों और उसके नाटक पर

3:37यकीन करने लगा क्योंकि वह बेवा औरत

3:39खूबसूरत थी कर्म दन उसके व्यवहार से

3:42प्रभावित होकर कुछ भी कहने की बजाय उसे

3:45अपनी पत्नी बनाने का फैसला कर बैठा कुछ ही

3:48दिनों में उसने अपनी बेटियों की इजाजत के

3:50बिना उस बेवा औरत से शादी कर ली और उसे

3:54अपने घर ले आया शादी के कुछ ही दिनों बाद

3:57वह बेवा औरत कर्म दन की तीनों बेटियों से

4:00सख्त नफरत करने लगी वह चाहती थी कि किसी

4:03भी तरह कर्म दीन की बेटियां इस घर से निकल

4:06जाएं उसने उन्हें घर से निकालने के लिए

4:08तरह-तरह के मंसूबे बनाने शुरू कर दिए वह

4:12सोचती थी कि अगर बेटियां घर से चली जाएंगी

4:14तो वह और उसकी अपनी बेटी आराम से ऐश की

4:17जिंदगी जी सकेंगी साथ ही कर्म दीन का पूरा

4:21ध्यान सिर्फ उसी और उसकी बेटी पर रहेगा वह

4:24जानती थी कि कर्म दन अपनी बेटियों से बहुत

4:27मोहब्बत करता है और उन्हें जरा भी दुखी

4:29नहीं नहीं देख सकता उसकी अपनी बेटी हमेशा

4:32कीमती कपड़े पहनकर घूमती रहती थी जिससे वह

4:35मॉडर्न लगती थी लेकिन सौतेली मां ने कर्म

4:38दन की तीनों बेटियों को घर का सारा काम

4:40करने पर मजबूर कर दिया वह उन्हें ठीक से

4:43पेट भर खाना भी नहीं देती थी और धीरे-धीरे

4:46उनकी दूसरी जरूरतें भी कम कर दी तीनों

4:50बहनें हर समय दुखी रहने लगी एक दिन दो

4:53बड़ी बहनें रो रही थी तो जैनब अपनी बड़ी

4:56बहनों के पास आई और कहने लगी प्यारी बहनों

4:58आओ हम तीनों कहीं बाहर चले ताकि हमारा

5:01दिमाग फ्रेश हो जाए फिर वह तीनों बहनें घर

5:04से निकल गई और चलते-चलते एक जंगल में जा

5:06पहुंची वहां एक घने दरख्त के नीचे बैठकर

5:10वे रो-रोकर अपनी मां को याद करने लगी इतने

5:13में उनके पास से एक अल्लाह वाले बुजुर्ग

5:15का गुजर हुआ जैनब जमीन पर बैठी रो रही थी

5:18और कह रही थी ऐ मेरे अल्लाह हम मजलूम

5:22लड़कियां हैं और बहुत दुखी हैं आप देख रहे

5:25हैं ना कि हमारी सौतेली मां हम पर कितना

5:28जुल्म करती है हम कितने दिनों से भूखे हैं

5:31अल्लाह वाले बुजुर्ग पास ही खड़े होकर

5:33उनकी बातें सुन रहे थे फिर वे जैनब से

5:36मुखातिब होकर बोले बेटियों तुम तीनों यहां

5:39इस दरख्त के नीचे रोज आती हो तुम्हें क्या

5:42दुख है तुम मुझे बता सकती हो जैनब ने रोते

5:46हुए अल्लाह वाले बुजुर्ग को सारा वाकया

5:48सुना दिया उनकी बात सुनकर बुजुर्ग को बहुत

5:50दुख हुआ वे बोले बेटी यहां से थोड़ी दूरी

5:54पर मेरी झोपड़ी है मैं वहां रहता हूं और

5:57इबादत करता हूं मेरी झोंपड़ी के बाहर एक

5:59अनार का दरख्त लगा है जिस पर पके हुए अनार

6:02लगे हुए हैं तुम जाओ और उस दरख्त से जितने

6:05मर्जी अनार तोड़कर खा लो यह सुनकर तीनों

6:08लड़कियां खुशी-खुशी उस झोपड़ी के पास

6:11पहुंची उन्होंने देखा कि दरख्त पर बहुत ही

6:14खूबसूरत और रसीले अनार लगे हुए हैं तीनों

6:17ने एक-एक अनार तोड़ा और बैठकर मजे से खाने

6:20लगी जब उनका पेट भर गया तो उन्होंने

6:23बुजुर्ग का शुक्रिया अदा किया और घर वापस

6:26आ गई इसके बाद जब उनकी सौतेली मां उन्हें

6:29खाना नहीं देती तो वे रोज जंगल जाती और उन

6:32अनार को खाकर अपना पेट भर लेती धीरे-धीरे

6:35उन्होंने अपनी मां का दिया हुआ खाना

6:37बिल्कुल छोड़ दिया अब उनकी सौतेली मां

6:40सोचने लगी मैं इन लड़कियों को खाने को कुछ

6:42नहीं देती मैं इनसे इतना काम करवाती हूं

6:45उन्हें जलील करती हूं फिर भी इनके चेहरे

6:48पर एक अजीब सी चमक है इनमें से कोई बीमार

6:50भी नहीं पड़ती बल्कि इनकी खूबसूरती बढ़ती

6:53जा रही है और मेरी बेटी जिसे मैं इतना

6:56अच्छा खाना देती हूं वह उनके आगे बदसूरत

7:00लगती है दूसरे दिन जब वह लड़कियां जंगल की

7:02तरफ गई तो सौतेली मां ने अपनी बेटी को

7:05उनका पीछा करने के लिए भेज दिया जब तीनों

7:08लड़कियां अनार तोड़कर खा रही थी तो जैनब

7:11ने अपनी सौतेली बहन को देख लिया उसने बाकी

7:14बहनों से कहा यह लड़की हमारा पीछा कर रही

7:17है मैं इसे यहां से भगा देती हूं फिर जैनब

7:21ने अपने हाथ में पकड़ा अनार छुपा लिया और

7:23बोली अगर यह सब कुछ अपनी मां को बता देगी

7:26तो यह हमारे लिए परेशानी का कारण बन सकती

7:29है लेकिन जैनब की दूसरी बहनें बोली जैनब

7:32तुम कैसी बातें कर रही हो यह बेचारी

7:35बेकसूर है जैनब की बड़ी बहने बोली हमारी

7:38सौतेली मां तंग करती हैं यह तो हमें कुछ

7:41नहीं कहती इसके बाद तीनों बहनों ने अपनी

7:43सौतेली बहन को पास बिठाया और उसे एक अनार

7:46पकड़ा दिया लेकिन सौतेली बहन ने अनार नहीं

7:49खाया और जल्दी से अपनी मां के पास जाकर

7:52कहने लगी मां वे लड़कियां भूखी नहीं रहती

7:56वे तो जंगल में एक दरख्त से अनार तोड़कर

7:58खा लेती हैं उसी दरख्त के पास एक बुजुर्ग

8:01भी इबादत कर रहे थे और उन्होंने भी उन्हें

8:03रोकने की कोशिश नहीं की यह सुनकर सौतेली

8:06मां को बहुत गुस्सा आया वह सोचने लगी मैं

8:09इन लड़कियों को अनार खाने से कैसे रोकूं

8:12पूरा दिन वह गुस्से में ही रही जब शाम को

8:15करम दीन काम से घर वापस आया तो उसने अपनी

8:18बीवी को परेशान देखा वह बोला तुम्हें क्या

8:21परेशानी है क्यों इतनी उदास बैठी हो वह

8:24कहने लगी मेरे सिर में बहुत तेज दर्द है

8:27और यह किसी दवा से ठीक नहीं होगा कर्म दीन

8:30ने पूछा तो फिर कैसे ठीक होगा वह तुरंत

8:34बोली जंगल में एक अनार का दरख्त है जिस पर

8:37लाल लाल अनार लगे हैं अगर तुम उस दरख्त को

8:40जड़ से कटवा दो और उसकी जड़ें उबालकर दवा

8:43बना लो और मेरे माथे पर लगाओ तो मेरा सिर

8:46दर्द ठीक हो सकता है कर्म दीन ने कहा बस

8:49इतनी सी बात फिर उसने कुछ आदमियों को

8:52बुलाया और उन्हें पैसे देकर कहा जंगल में

8:55एक अनार का दरख्त है तुम लोग उसे जड़ से

8:58उखाड़ फेंको को और उसकी जड़ें मुझे लाकर

9:01दो कुछ ही घंटों में वे आदमी उस दरख्त को

9:04जड़ से उखाड़कर उसकी जड़ें कर्म दीन के

9:07पास ले आए करम दीन ने जल्दी से आग जलाई और

9:10उन जड़ों से दवा बनाकर अपनी बीवी के माथे

9:12पर मलने लगा थोड़ी ही देर में उसकी बीवी

9:15कहने लगी अब मुझे आराम है अगले दिन जब

9:18तीनों बहनें जंगल गई तो उन्होंने देखा कि

9:21अनार का दरख्त किसी ने जड़ से उखाड़ दिया

9:23है यह देखकर वे बहुत परेशान हो गई और

9:26सोचने लगी अब हम क्या खाएंगे

9:29तभी वे तीनों लड़कियां वहीं बैठकर रोने

9:32लगी उनके रोने की आवाज सुनकर अल्लाह वाले

9:35बुजुर्ग अपनी झोपड़ी से बाहर आए वे समझ गए

9:38कि लड़कियां क्यों रो रही हैं वे बोले

9:41इसमें रोने की क्या बात है अल्लाह तुम्हें

9:44इससे भी बेहतर कुछ देगा फिर अल्लाह वाले

9:46बुजुर्ग ने अपनी उंगली से जमीन की तरफ

9:48इशारा किया और वहां पर एक छोटी सी नदी बन

9:51गई जिसमें पानी की जगह दूध बह रहा था

9:54उन्होंने उन लड़कियों को एक मिट्टी का

9:56प्याला दिया और कहा जहां से जितना मर्जी

9:59हो दूध पियो लड़कियां बहुत खुश हुई और

10:02मिट्टी के प्याले में दूध भरकर पीने लगी

10:05जब उनका पेट भर गया तो वे बुजुर्ग का

10:08शुक्रिया अदा करके घर वापस आ गई इसके बाद

10:11उनका रोज का यह मामूल हो गया कि वे तालाब

10:13के पास जाती और मिट्टी के प्याले में दूध

10:16भरकर पी लेती उनकी सौतेली मां उनकी सेहत

10:19देखकर हैरान थी उसने अपनी बेटी को बुलाया

10:22और कहा मैंने तो जंगल से अनार के दरख्त का

10:25नामो निशान मिटा दिया था फिर भी इन

10:28लड़कियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा

10:30मैं तो इन्हें पेट भर खाना भी नहीं देती

10:32आखिर यह ऐसा क्या खा रही है जिससे इनकी

10:35सेहत इतनी अच्छी हो रही है उसने अपनी बेटी

10:38से कहा इनका पीछा करो और पता लगाओ कि यह

10:41क्या खाती हैं लड़की फिर से अपनी बहनों का

10:44पीछा करते हुए जंगल में गई जब तीनों

10:47मिट्टी के प्याले से दूध पी रही थी तो

10:49जैनब ने पीछे मुड़कर देखा उसने अपनी

10:52सौतेली बहन को चुपचाप खड़ा देखकर बाकी

10:54बहनों से कहा देखो यह लड़की फिर हमारा

10:57पीछा कर रही है ने अपनी बहनों से कहा तुम

11:01लोग जल्दी उठो और इसे यहां से भेजो

11:03क्योंकि अगर इसने हमारे तालाब को देख लिया

11:06तो यह घर जाकर सब बता देगी और फिर घर में

11:09हंगामा खड़ा हो जाएगा लेकिन जैनब की बड़ी

11:11बहनों ने उसे डांटते हुए कहा तुम्हारा

11:14आखिर मसला क्या है माना कि हमारी सौतेली

11:18मां हम पर जुल्म करती है लेकिन इसमें इस

11:21बेचारी का क्या कसूर जैनब यह सुनकर चुप हो

11:24गई इसके बाद तीनों ने अपनी सौतेली बहन को

11:27नदी के पास बिठाया और के प्याले में दूध

11:30भरकर उसे दिया उस लड़की ने दूध पिया और

11:33जल्दी से अपनी मां के पास पहुंचकर तालाब

11:36और दूध वाली पूरी बात बता दी सौतेली मां

11:39को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया उसने अपने

11:42गांव के कुछ आदमियों को बुलाया और कहा तुम

11:45जितने पैसे चाहो मैं तुम्हें दूंगी लेकिन

11:48तुम्हें जंगल में जाना होगा वहां एक

11:51बुजुर्ग की झोपड़ी और तालाब है तुमने वह

11:54झोपड़ी खत्म कर देनी है और तालाब में

11:56मिट्टी डाल देनी है बदले में तुम्हें बहुत

11:59पैसा मिलेगा कुछ ही देर में वे आदमी उसकी

12:02मर्जी के मुताबिक सब कुछ करके लौट आए वह

12:05औरत अब बहुत खुश थी अगले दिन जब तीनों

12:08बहनें जंगल में गई तो उन्होंने देखा कि

12:10वहां ना तो तालाब है और ना ही बुजुर्ग की

12:13झोपड़ी यह देखकर उन्हें पहाड़ जैसा दुख

12:15हुआ वे वहीं बैठकर रोने लगी और भूखी

12:19प्यासी अपने घर लौट आई उनकी सौतेली मां यह

12:22देखकर बहुत सुकून महसूस कर रही थी एक दिन

12:25वह फिर बीमारी का बहाना बनाकर लेट गई शाम

12:28को जब दन घर आया तो उसने अपनी बीवी को

12:31प्यार से कहा चाहे मेरा सब कुछ बिक जाए

12:34लेकिन मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूंगा

12:36तुम्हारा इलाज सबसे अच्छे डॉक्टर से

12:38करवाऊंगी लेकिन उसकी बीवी कुछ और ही चालें

12:41चल रही थी उसने कहा आपको इतना कुछ करने की

12:45जरूरत नहीं है मेरी जिंदगी बचाने के लिए

12:47बस एक छोटा सा काम करो कर्म दीन बोला

12:50जल्दी बताओ क्या करना है मैं वही करूंगा

12:53उसकी बीवी बोली तुम अपनी तीनों बेटियों का

12:56खून निकालकर मेरे हाथों और पैरों की

12:59हथेलियों पर मल दो तभी मैं ठीक हो सकती

13:01हूं यह सुनकर कर्म दन की आंखों में आंसू आ

13:04गए क्योंकि वह अपनी बेटियों से बेहद

13:07मोहब्बत करता था वह चुपचाप कमरे से बाहर

13:10निकला और अपनी बेटियों को ढूंढने लगा

13:12लेकिन बेटियां घर में नहीं थी वह परेशान

13:15होकर उन्हें ढूंढते ढूंढते कब्रिस्तान

13:17पहुंचा वहां उसने देखा कि उसकी तीनों

13:19बेटियां अपनी मां की कब्र के पास बैठकर रो

13:22रही हैं यह देखकर करम दन का दिल कांप गया

13:26एक तरफ उसकी बीवी की ख्वाहिश थी और दूसरी

13:29दूसरी तरफ उसकी बेटियों की जिंदगी कर्म

13:31दीन को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें

13:34उसने सोचा कि उसकी बीवी उसकी बेटियों से

13:36कभी खुश नहीं होगी और उसकी बेटियां अपनी

13:39सौतेली मां के साथ खुश नहीं है इसलिए उसने

13:42फैसला किया कि बेटियों को कहीं दूर ले

13:44जाएगा उसने अपनी बेटियों को गले लगाया और

13:47कहा ए बेटियों तुम क्यों परेशान होती हो

13:51मैं तुम्हें कहीं और ले चलता हूं वह अपनी

13:54बेटियों को एक घने जंगल में ले गया वहां

13:56उसने मिट्टी का चूल्हा बनाया और बेटियों

13:59को खाना बनाकर खिलाया जब बेटियों ने पेट

14:02भरकर खाना खा लिया तो वे एक दरख्त के नीचे

14:04सो गई करम दीन ने अपनी बेटियों को वहीं

14:07सोते हुए छोड़ दिया और वहां से भाग गया

14:10उसके दिल में यही ख्याल था कि कम से कम

14:12मेरी बेटियां जिंदा तो रहेंगी और अपनी

14:15सौतेली मां के जुल्म से बची रहेंगी रास्ते

14:18में उसने एक हिरण का शिकार किया और उसका

14:21खून लेकर अपनी बीवी को दे दिया उसकी बीवी

14:24ने वह खून अपने हाथों और पैरों पर लगाया

14:26और खुश होकर कहा अब मुझे आराम है उसे यकीन

14:30हो गया कि कर्म दीन ने अपनी बेटियों को

14:32मार दिया दूसरी तरफ जब तीनों बहनें जागी

14:36तो उन्होंने देखा कि उनका बाप उन्हें

14:38छोड़कर जा चुका है वे अपने बाप को पुकारने

14:40लगी जंगल में जंगली जानवरों की आवाजें

14:43सुनकर वे डर गई और रोने लगी इत्तेफाक से

14:47उसी जंगल में तीन दोस्त शिकार के लिए आए

14:50थे जब वे शिकार करके लौटने लगे तो उनमें

14:53से एक दोस्त जिसका नाम नासिर था कहने लगा

14:57मुझे लगता है नासिर ने कहा

14:59यहां कोई मुसीबत में है क्या तुम लोग किसी

15:02के रोने की आवाज नहीं सुन रहे मुझे तो

15:04किसी के रोने की आवाज आ रही है चलो जल्दी

15:07से देखते हैं शायद किसी को हमारी मदद की

15:10जरूरत हो फिर तीनों दोस्त आवाज की दिशा

15:12में चल पड़े आगे जाकर उन्होंने देखा कि

15:15तीन खूबसूरत लड़कियां बैठी हुई रो रही हैं

15:18नासिर आगे बढ़ा और उनसे पूछा तुम यहां

15:21अकेली क्या कर रही हो और इतना क्यों रो

15:23रही हो जैनब ने नासिर को अपनी पूरी कहानी

15:26सुना दी लड़कों को उन पर बड़ा तरस आया वे

15:29आपस में कहने लगे क्यों ना हम इन लड़कियों

15:32से शादी कर ले इन्हें एक छत मिल जाएगी और

15:35हमारी जिंदगी भी सुकून से गुजरने लगेगी

15:37फिर उन तीनों लड़कों ने उन तीनों लड़कियों

15:41से शादी कर ली जैनब की शादी नासिर के साथ

15:44हो गई संयोग से उन तीनों दोस्तों के घर

15:47पासपास थे तीनों बहनें खुशी-खुशी अपने

15:50अपने घरों में रहने लगी एक साल के बाद

15:53जैनब के घर में बेटे की पैदाइश हुई यह

15:56देखकर नासिर के दोस्त और जैनब बहने बहुत

15:59खुश हुई धीरे-धीरे जैनब का बेटा दो साल का

16:02हो गया एक दिन नासिर ने अपने दोस्तों से

16:05कहा मेरा आज फिर जंगल में शिकार करने का

16:09मन हो रहा है चलो शिकार पर चलते हैं लेकिन

16:12उसके दोस्तों ने मना कर दिया और कहा हमें

16:15तो किसी जरूरी काम से जाना है हम तुम्हारे

16:17साथ जंगल नहीं जा सकते नासिर ने जैनब से

16:20इजाजत ली और अकेला ही जंगल में शिकार के

16:23लिए चला गया लेकिन इसके बाद कई दिन गुजर

16:25गए और नासिर घर वापस नहीं आया जन बहुत

16:29परेशान हो गई उसकी बहने भी उसकी चिंता

16:31देखकर चिंतित हो गई जैनब के जीजा नासिर के

16:35दोस्त ने उसे तसल्ली देते हुए कहा तुम

16:38फिक्र मत करो हम नासिर को ढूंढकर जरूर

16:41वापस लाएंगे लेकिन करनी खुदा की यह हुई कि

16:44नासिर के दोस्त भी उसे ढूंढने जंगल गए

16:47लेकिन वे भी वापस नहीं लौटे उन तीनों

16:50बहनों पर एक बार फिर से गम का पहाड़ टूट

16:52पड़ा एक दिन जैनब अपने बेटे को सुला रही

16:55थी कि दरवाजे पर दस्तक हुई उसने जल्दी से

16:59जाकर दरवाजा खोला तो क्या देखती है कि एक

17:02बुजुर्ग फकीर जिसने हरे रंग के कपड़े पहने

17:05हुए थे दरवाजे पर खड़ा है जैनब उसे देखकर

17:08बोली बाबा मेरा शौहर घर पर नहीं है मैं

17:11आपको घर में आने की इजाजत नहीं दे सकती जब

17:14मेरा शौहर आएगा तब आप आ जाना उस पर फकीर

17:17बोला बेटी मुझे बहुत भूख लगी है किसी भूखे

17:21को खाना खिलाने में क्या हर्ज है जैनब ने

17:23मजबूरी में उस फकीर को घर में बुला लिया

17:26और उसके लिए खाना बनाने लगी लेकिन वह

17:28जादूगर फकीर बुरी नजरों से जैनब को देखता

17:31रहा फिर वह जादूगर उठकर जैनब के करीब आया

17:34और बोला सुनो लड़की तुम मुझे बहुत अच्छी

17:37लगती हो अपने बेटे को छोड़ दो और मुझसे

17:40शादी कर लो जैनब डर के मारे कांपने लगी और

17:43बोली बाबा आप कैसी बातें कर रहे हैं मैं

17:47शादीशुदा हूं और एक बच्चे की मां हूं आपकी

17:50हिम्मत कैसे हुई ऐसा कहने की यह सुनकर

17:52जादूगर फकीर को गुस्सा आ गया उसने अपने

17:55जादू से जैनब को कुतिया बना दिया और उसके

17:57गले में रस्सी डालकर खींचते हुए ले जाने

17:59लगा इधर जैनब का बेटा जोर-जोर से रो रहा

18:02था जैनब की बहनों ने जब उसके बेटे के रोने

18:05की आवाज सुनी तो वे भागती हुई उसके घर आई

18:08उन्होंने जल्दी से जैनब के बेटे को गले

18:10लगाया और अपनी बहन को घर में ढूंढने लगी

18:13लेकिन उन्हें जैनब कहीं नजर नहीं आई उनकी

18:16सौतेली मां के बाद अब जैनब भी गायब हो

18:18चुकी थी वक्त इसी तरह गुजरता रहा अब जैनब

18:22को गुम हुए भी 14 साल का लंबा वक्त गुजर

18:24चुका था इस दौरान जैनब का बेटा जवान हो

18:27चुका था उ उसकी दोनों खाला हों ने मिलकर

18:30पाला था एक दिन जैनब की खाला हों ने उसे

18:33उसकी मां के बारे में सारी सच्चाई बताई यह

18:36सुनकर वह बहुत परेशान हो गया और बोला खाला

18:39आज मैं अपने मां-बाप को जरूर ढूंढने

18:41जाऊंगा उसकी खाला हों ने उसे समझाते हुए

18:44कहा बेटा जो होना था वह हो चुका जिन्हें

18:48जाना था वे चले गए अब हम तुम्हें नहीं

18:51खोना चाहती हमारे शौहर भी जंगल गए थे और

18:54वे भी कभी वापस नहीं आए अगर तुम भी चले गए

18:57तो हम किसके सहारे जेंगे

18:59लेकिन लड़के ने कहा खाला आप फिक्र मत

19:03कीजिए मैं अपने बाप और बाकी सबको ढूंढकर

19:05वापस जरूर लाऊंगा फिर वह लड़का जंगल की

19:09तरफ निकल पड़ा कई दिनों तक जंगल में

19:11इधर-उधर भटकता रहा लेकिन उसे कुछ समझ नहीं

19:14आया कि वह अपने मां-बाप को कहां ढूंढे इसी

19:17तरह तलाश करते करते वह एक ऐसे इलाके में

19:20पहुंचा जो पूरी तरह पत्थरों का इलाका था

19:23वहां उसने पत्थर की इमारतें देखी और एक

19:26खूबसूरत छोटा सा पत्थर का घर देखा वह गौर

19:29से उस घर को देख रहा था कि तभी उस घर से

19:31एक बुजुर्ग बाहर आए और बोले बेटा तुम यहां

19:35नए लगते हो तुम्हें इस खतरनाक इलाके में

19:38आने की क्या जरूरत थी लड़के ने जवाब दिया

19:41बाबा जी मैं अपने मां बाप और ताया जी को

19:44ढूंढने के लिए यहां आया हूं मेरी मां को

19:47एक जादूगर ने कुतिया बनाकर अपने साथ ले

19:49गया था अल्लाह वाले बुजुर्ग बोले बेटा यह

19:54इलाका एक बहुत बड़े जादूगर का है वह बहुत

19:57ताकतवर है जो भी उससे पंगा लेता है या उसे

20:00बेइज्जत करता है वह उसे पत्थर का बना देता

20:03है यह जो तुम अपने इर्दगिर्द पत्थर देख

20:06रहे हो यह भी कभी इंसान थे जादूगर ने

20:09इन्हें पत्थर बना दिया कुछ साल पहले यहां

20:12एक नौजवान आया था उसके बाद उसके पीछे दो

20:14और नौजवान आए जादूगर ने उन्हें पेड़ और

20:17पत्थर में बदल दिया और उसने एक नेक पाकीजा

20:20लड़की को भी 12 साल से कैद करके रखा है वह

20:23जादूगर उस लड़की से शादी करना चाहता है

20:26लेकिन वह लड़की किसी भी तरह मान नहीं रही

20:28बुजुर्ग की बातें सुनकर लड़का सोचने लगा

20:31यकीनन यह लड़की मेरी मां है और यह लोग

20:34मेरे ही परिवार के लोग हैं आखिरकार मैंने

20:37अपनों को ढूंढ ही लिया इसके बाद लड़के ने

20:40बुजुर्ग को अपनी सारी कहानी बताई और कहा

20:43बाबा जी आप मेरी मदद करें इन लाचार लोगों

20:46को बचाने का कोई तरीका बताएं बुजुर्ग

20:50जिनकी झोपड़ी को कभी जैनब की सौतेली मां

20:52ने जला दिया था मुस्कुराए और बोले बेटा

20:56अल्लाह हमेशा नेक दिल वालों की की मदद

20:59करता है तुम्हें हिम्मत नहीं हार चाहिए

21:01अल्लाह वाले बुजुर्ग मजबूरन इस खतरनाक

21:04इलाके में आकर रहने लगे उन्होंने लड़के से

21:07वादा किया मैं तुम्हारा साथ जरूर दूंगा

21:10बुजुर्ग सोचने लगे क्या पता इस लड़के की

21:13मां को छुड़वाने से बाकी कैदियों को भी

21:16जादूगर की कैद से आजादी मिल जाए बुजुर्ग

21:18ने बाकी गांव वालों को बताया यह मेरा पोता

21:21है जो दूसरे गांव से मुझसे मिलने आया है

21:25जब जादूगर को शक हुआ कि गांव में कोई नया

21:27लड़का आया है तो व तुरंत अल्लाह वाले

21:29बुजुर्ग के पास पहुंचा और पूछने लगा यह

21:32कौन है बुजुर्ग ने जवाब दिया यह मेरा पोता

21:35है इस तरह जादूगर और लड़के की मुलाकात हुई

21:39लड़का अपनी पहचान छुपाकर जादूगर से मिलने

21:41लगा जादूगर ने लड़के को देखकर कहा तुम

21:44बहुत समझदार लगते हो और अपने दादा की तरह

21:47नेक और मासूम हो कल तुम मेरा एक काम करोगे

21:51मैं तुम्हें एक इमारत में भेजूंगा जहां एक

21:53लड़की को मेरा पैगाम देना है मैं उससे

21:55शादी करना चाहता हूं लड़का समझ गया

21:59कि वह अपनी मां से मिलने जा रहा है वह

22:01बहुत खुश हुआ और सोचने लगा कि वह अपनी मां

22:04के लिए फूल ले जाएगा उसने योजना बनाई कि

22:07वक्त आने पर वह अपनी मां को पहचानने के

22:09लिए अपनी पहचान जाहिर करेगा जैनब की शादी

22:12के वक्त नासिर ने उसे एक अंगूठी दी थी जिस

22:15पर उसका नाम लिखा हुआ था बाद में जैनब ने

22:17वह अंगूठी अपने बेटे को पहना दी थी सालों

22:20बाद वह अंगूठी बढ़ाकर दोबारा बनाई गई और

22:23लड़के ने अब भी वही अंगूठी पहनी हुई थी

22:26अल्लाह वाले बुजुर्ग ने लड़के से कहा

22:29अपनी अंगूठी को फूलों के गुलदस्ते में

22:31छुपा दो जब तुम्हारी मां इसे देखेगी तो वह

22:34तुरंत तुम्हें पहचान लेगी लेकिन यह काम

22:37आसान नहीं होगा जादूगर ने जैनब की निगरानी

22:40के लिए एक चौकीदार तैनात कर रखा है जो हर

22:43वक्त सख्ती से नजर रखता है जादूगर अल्लाह

22:46वाले बुजुर्ग की बहुत इज्जत करता था और

22:49उनके पोते को नेक समझता था उसने लड़के को

22:52गुलदस्ता देकर रोजाना जैनब के पास भेजना

22:55शुरू कर दिया लड़के की कम उम्र महज 14 साल

22:59की वजह से जादूगर को उस पर कोई शक नहीं

23:01हुआ जैनब को एक कमरे में कैद करके रखा गया

23:05था जहां किसी मर्द को जाने की इजाजत नहीं

23:07थी लड़का रोजाना गुलदस्ता लेकर जैनब के

23:11पास जाता और वहां जादूगर की एक दासी हमेशा

23:14जैनब के साथ रहती एक दिन किस्मत ने लड़के

23:17का साथ दिया ऐसा मौका मिला जब कमरे में

23:21जैनब के सिवा कोई नहीं था लड़के ने जल्दी

23:24से अपनी उंगली से अंगूठी उतारी और फूलों

23:26के गुलदस्ते में छुपाकर

23:28जैनब के कदमों में रख दिया जैसे ही

23:30गुलदस्ता जमीन पर रखा अंगूठी की आवाज हुई

23:34जैनब ने हैरानी से गुलदस्ता उठाया और

23:37फूलों में बंधी अंगूठी को पहचान लिया यह

23:40वही अंगूठी थी जो उसने सालों पहले अपने

23:43बेटे को पहनाई थी जैनब की नजरें फौरन

23:46गुलदस्ता लाने वाले लड़के की तरफ उठी

23:48दोनों की नजरें मिलते ही हकीकत साफ हो गई

23:51जादूगर ने जैनब को कैद कर रखा था लेकिन

23:54उसका बेटा अपनी मां को आजाद कराने का

23:57मंसूबा बनाने लगा

23:58जैनब ने जादूगर से शादी की रजामंदी जताई

24:01और उसकी ताकत का राज मालूम किया जादूगर ने

24:05बताया कि उसकी जान एक तोते में है जो एक

24:07पिंजरे में बंद है और एक घने जंगल के

24:10दरख्त के नीचे सख्त पहरे में रखा गया है

24:13जैनब ने यह राज अपने बेटे को बताया लेकिन

24:16उसे खतरे से बचाने के लिए जाने से मना

24:18किया फिर भी बेटे ने अपनी मां को यकीन

24:21दिलाया कि वह कामयाब होकर लौटेगा कई दिनों

24:23की मशक्कत के बाद वह जंगल में पहुंचा एक

24:26मौका देखकर उसने तोते को प से निकाल लिया

24:29और जादूगर की इमारत तक वापस ले आया जादूगर

24:32उसे देखकर तोते की वापसी की भीख मांगने

24:34लगा लड़के ने चालाकी से जादूगर से सभी

24:37कैदियों को आजाद करवाया इसके बाद उसने

24:40तोते के पंख खींचे जिससे जादूगर की ताकत

24:43खत्म हो गई अंत में उसने तोते की गर्दन

24:47मरोड़ दी जिससे जादूगर मर गया लड़के ने

24:50अपनी मां जैनब पिता नासिर और बाकी सभी

24:53कैदियों को आजाद कराया फिर वह सब अल्लाह

24:56वाले बुजुर्ग के पास पहुंचे

24:58सबने बुजुर्ग का शुक्रिया अदा किया और

25:01अपने घर लौट आए जैनब की बहनें अपने शौहर

25:04से मिलकर बहुत खुश हुई जो जादूगर की कैद

25:07में सालों तक रहे थे उनके पिता जो अपनी

25:10बेटियों को खोने के गम में डूबे थे उन्हें

25:12सही सलामत देखकर खुशी से रोने लगे

25:15उन्होंने बेटियों से माफी मांगी और बताया

25:17कि उनकी बीवी की साजिशों की वजह से यह सब

25:21हुआ बेटियों ने अपने पिता को तसल्ली दी और

25:23कहा हम अपनी जिंदगियों से खुश हैं उनके

25:27पिता ने बताया कि उनकी की सौतेली मां जो

25:29उन पर जुल्म करती थी एक गंदी बीमारी का

25:32शिकार होकर इस दुनिया से चली गई इसके बाद

25:36सबने खुशी और सुकून के साथ अपनी जिंदगी

25:39गुजारनी शुरू की

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