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Why Did Rahib Bahira Recognize the Young Prophet ﷺ? | Seerah Documentary

Zeeshan Documentaries · 1,839 words · 9 min read

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0:00सोचिए अगर आपको आज से तकरीबन 1400 साल

0:03पहले की दुनिया में ले जाया जाए। एक ऐसी

0:06दुनिया जहां एक मासूम बच्ची की जिंदगी की

0:09कोई कीमत ना थी। जहां एक कतरा पानी एक ऊंट

0:13या मामूली सी बात पर कबायल नस्लों तक

0:16तलवें उठा लेते थे। जहां शराब, जुआ, सूत

0:21और बुटपरस्ती [संगीत]

0:22को जिंदगी का हिस्सा समझा जाता था। जहां

0:26ताकत ही कानून थी और कमजोर की कोई सुनने

0:29वाला ना था। [संगीत] तो क्या आप यकीन

0:31करेंगे कि इसी तहरीक अंधेरे में अल्लाह

0:35ताला एक ऐसी रहमत भेजने वाले थे जो हमेशा

0:38के लिए इंसानियत

0:39[संगीत][गाना गाने की आवाज़] की तारीख बदल

0:41देगी। यह सिर्फ अरब की कहानी नहीं थी। उस

0:45वक्त पूरी दुनिया एक अजीब मौत पर खड़ी थी।

0:48रोम और परर्शिया अपनी ताकत के नाशे में

0:52डूबे हुए थे। अरब के रेगिस्तान में 307 से

0:56ज्यादा बुट काबा के गिर्द खड़े थे। सूद

1:00गरीब को खा रहा था। जुआ घर बर्बाद कर रहा

1:04था। शराब अकल छीन रही थी। बेतियों को

1:08जिंदा दफन किया जाता था। कमजोर का हक छीन

1:12लिया जाता था। और कभी पानी, [संगीत] चरागा

1:15या मामूली सी बात पर कबायल नस्लों तक एक

1:19[संगीत] दूसरे का खून बहते रहते थे।

1:22लेकिन क्या यह सब हमेशा इसी तरह चलने वाला

1:26था? एक सवाल आज भी तरीक से पूछा जाता है।

1:30उस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी ताकत रोम थी?

1:35परर्शिया था। फिर अल्लाह ताला ने अपने

1:38आखरी रसूल [संगीत] सल्लल्लाहहु अलैहि

1:40वसल्लम के लिए अरब ही को क्यों चुना? क्या

1:44यह सिर्फ एक रेगिस्तान था या इस वीरा जमीन

1:48के सीने में कोई ऐसा राज छुपा था जो

1:51दुनिया की सबसे बड़ी सल्तनतें [संगीत]

1:53भी ना समझ सके और सबसे हैरराकुन बात उस

1:58हस्ती की पैदाइश से पहले ही कुछ [संगीत]

2:00ऐसे वाक्यात का जिक्र मिलता है जिन्हें

2:03देखकर लोग सदियों तक हैरा रहे जब इस अजीम

2:08हस्ती की आमद का वक्त करीब आया तो बाज

2:11पुरानी सीरा और तरीकी रिवायतों [संगीत]

2:13में कुछ गैर मामूली वाक्यात का जिक्र

2:16मिलता है। रिवायत है कि फारस की वो आग जो

2:19सदियों से बुझी ना थी अचानक बुझ गई। किसरा

2:23के शानदार महल में दरारें पड़ गई और उसके

2:27कई गिर गए। कुछ रिवायतों में जमजम के

2:31पानी का उबालना और आसमान में गैर मामूली

2:34मनाजीर का भी जिक्र मिलता है। और फिर

2:38इंतजार की वो रात आ पहुंची। [संगीत]

2:41बानू हाशिम के घर एक ऐसे बच्चे की पैदाइश

2:44होने वाली थी जो ना किसी सल्तनत का बादशाह

2:48था ना किसी लश्कर का सिपा सलार [संगीत]

2:51लेकिन चंद ही सालों में उसका पैगम रोम और

2:55परर्शिया के तख्तों तक पहुंचने [संगीत]

2:57वाला था रिवायत है कि सैयदा आमीना रजि

3:01अल्लाहहु अन्हा ने इस मुबारक पैदाइश के

3:04वक्त कुछ गैर मामूली मजीर देखे मगर एक बात

3:08पर तमाम [संगीत] मुसलमान मुत्तफिक

3:11कि इसी रात अल्लाह ताला ने [संगीत] अपनी

3:14आखरी हिदायत के सफर की इब्तदा फरमा दी।

3:18लेकिन इस मुबारक पैदाइश के साथ [संगीत] एक

3:20और दर्दनाक हकीकत भी जुड़ी हुई थी। इस

3:23बच्चे ने इस दुनिया में कदम रखने से पहले

3:26ही अपने वालिद का सया [संगीत] खो दिया था।

3:30हजरत अब्दुल्लाह का इंतकाल मोहम्मद

3:32सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की विलादत से

3:35पहले ही हो चुका था। अब एक यतीम बच्चा

3:39जिसके सर पर सिर्फ मां की ममता और दादा

3:42अब्दुल मुत्तलिब की मोहब्बत थी। दुनिया का

3:45सबसे अजीम इंसान बनने जा रहा था। लेकिन

3:49किसी को अंदाजा भी ना था कि इस मासूम

3:52बच्चे का बचपन भी आजमाइशों से भरा होगा।

3:56अरब की पुरानी रिवायत के मुताबिक [संगीत]

3:58मक्का की फीजा बच्चों के लिए ज्यादा

4:01मुनासिब नहीं समझी जाती थी। [संगीत]

4:03इसीलिए कुरैश के बच्चों को बचपन में सेहरा

4:07की साफ हवा और फसे अरबी जबान सीखने के लिए

4:11बदवी कबाइल के हवाली किया जाता था। इसी

4:14रिवायत के मुताबिक [संगीत] मोहम्मद

4:16सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को भी बनू साद

4:19की एक नेक औरत हजरत हलीमा सादिया रज़

4:22अल्लाहहु अन्हा अपने साथ ले गई। [संगीत]

4:25उन्हें उस वक्त बिल्कुल अंदाजा ना था कि

4:28वह किस मुबारक अमानत को अपनी गोद में उठा

4:32रही हैं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने

4:35हलीमा सादिया रज्लाहु अन्हा को भी हैरान

4:38कर दिया। पुरानी सीरत की रिवायतों के

4:41मुताबिक जिस घर में पहले तंगी थी वहां

4:44बरकत नजर आने लगी। कमजोर ऊंटनी पहले से

4:47बेहतर चलने लगी। बकरियां पहले से ज्यादा

4:50दूध देने लगी और सूखे रेगिस्तान [संगीत]

4:52में उनके रेवर दूसरों के मुकाबले में

4:55ज्यादा सेहतमंद दिखाई देने लगे। हलीमा को

4:58एहसास होने लगा कि उनकी गोद में कोई आम

5:01बच्चा नहीं बल्कि अल्लाह की एक खास अमानत

5:04है। [संगीत]

5:05लेकिन इन बरकतों से भी ज्यादा हैरान कर

5:07देने वाला वाकया अभी बाकी था। मोहम्मद

5:10[संगीत] सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की उम्र

5:12तकरीबन 4 साल थी। जब बनू साद [संगीत] के

5:15खुले मैदानों में एक ऐसा वाकया पेश आया

5:18जिसने हलीमा सादिया रज अल्लाहहु अन्हा को

5:21हिला कर रख दिया। सही हदीस में आता है कि

5:24दो फरिश्ते आए। उन्होंने मोहम्मद

5:27सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का सीना मुबारक

5:29खोला। दिल मुबारक को जमजम के पानी से धोया

5:32और फिर उसे वापस उसी [संगीत] तरह कर दिया।

5:35इस वाक्य के बाद हलीमा घबरा गई और फैसला

5:38किया कि अब इस अमानत को उसकी वालिदा के

5:41पास [संगीत] वापस पहुंचा देना होगा। हलीमा

5:44सादिया रज अल्लाहहु अन्हा जब मोहम्मद

5:46सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को मक्का

5:48[संगीत] वापस लेकर आई तो उनका दिल मोहब्बत

5:50और हैरत से भर गया। यह वही बच्चा था जिसकी

5:54वजह से उनके घर में बरकत आई थी। लेकिन अब

5:57एक नया सफर शुरू होने वाला था। मक्का

6:00[संगीत] की पुरानी गलियों में एक मासूम

6:02बचपन खामोशी से गुजर रहा था। हजरत आमना रज

6:05अल्लाहहु अन्हा की ममता के साए में। मगर

6:08तकदीर इस बच्चे के लिए एक ऐसा सफर लिख रही

6:11थी [संगीत] जिसे दुनिया हमेशा याद रखेगी।

6:13मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की उम्र

6:15तकरीबन छ साल

6:17[संगीत]

6:17थी। जब उनकी वालिदा हजरत आमना रज़ अल्लाहहु

6:20अन्हा उन्हें लेकर यस गई। वहां उन्होंने

6:23अपने मरहूम शौहर हजरत अब्दुल्लाह की कब्र

6:25की जियारत की और करीबी रिश्तेदारों से

6:28मुलाकात की। कुछ दिन बाद काफिला मक्का की

6:31तरफ वापस रवाना हो गया। यस से वापसी का

6:34सफर शुरू हो चुका था। लेकिन अबवा नाम की

6:36जगह पर हजरत आमना रज़ अल्लाहहु अन्हा अचानक

6:39शदीद बीमार हो गई। रिवायत बताती है कि सफर

6:42वहीं रुक गया और चंद ही दिनों में मोहम्मद

6:45सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने सिर्फ छ साल

6:48की उम्र में अपनी वालिदा [संगीत] को हमेशा

6:50के लिए खो दिया। अबवा की उस सुनसान मकाम

6:53पर मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने

6:55सिर्फ अपनी वालिदा को ही नहीं खोया बल्कि

6:58बचपन का आखिरी सहारा भी खो दिया। रिवायत

7:00बताती है कि उस वक्त उनके साथ सिर्फ उम्मे

7:03ऐन बरका रज अल्लाहहु अन्हा मौजूद थी। बाद

7:06में रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम

7:09उनके बारे में फरमाया करते थे। उम्मे ऐन

7:12मेरी वालिदा के बाद मेरी वालिदा हैं। माना

7:14मौजूद है। इसी वफादार खादिमा ने इस मासूम

7:18[संगीत] बच्चे को दोबारा मक्का पहुंचाया।

7:20अबवा की उस खामोश वादी से एक छोटा सा

7:22बच्चा बिना मां के वापस मक्का लौट रहा था।

7:25सोचिए जिस बच्चे के वालिद [संगीत] पैदाइश

7:27से पहले ही दुनिया से चले गए हो और अब

7:30सिर्फ 6 साल की उम्र में मां भी बिछड़ जाए

7:33उसके दिल पर क्या [संगीत] गुजरी होगी

7:35लेकिन अल्लाह उस बच्चे को उस जिम्मेदारी

7:37के लिए तैयार कर रहा था जो पूरी इंसानियत

7:39[संगीत] की हिदायत बनने वाली थी। जब

7:42मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम मक्का

7:44वापस पहुंचे तो उनके दादा हजरत अब्दुल

7:46मुत्तलिब ने उन्हें अपनी हिफाजत में ले

7:48लिया। कुरैश के सरदारों में अब्दुल

7:50[संगीत] मुत्तलिब का रुतबा बहुत बुलंद था।

7:53काबा के मुतव्ली होने की वजह से अरब के

7:55दूर-दूर के कबाइल उनका एतराम करते थे।

7:59लेकिन उनकी मोहब्बत और तवज्जो सबसे ज्यादा

8:01अपने इस यतीम पोते के लिए थी। हर रोज काबा

8:04के साए में हजरत अब्दुल मुत्तलिब के

8:06[संगीत] लिए एक खास बिछौना बिछाया जाता

8:08था। कुरैश का कोई सरदार भी उस पर बैठने की

8:10हिम्मत नहीं करता था। लेकिन छोटे मोहम्मद

8:13सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम बेझिझक उसी

8:15बिछौने पर जा बैठते। चाचा फौरन उन्हें हटा

8:18देते। मगर अब्दुल मुत्तलिब मुस्कुरा कर

8:20फरमाते मेरे पोते को रहने दो। अल्लाह की

8:23कसम इस बच्चे की शान एक दिन बहुत बुलंद

8:26होगी। उन्हें इस यतीम बच्चे से एक अजीब सी

8:29मोहब्बत थी जो दूसरे पोतों से भी ज्यादा

8:31नजर आती थी। लेकिन यह खुशगवार दिन ज्यादा

8:34देर ना रहे। मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि

8:36[संगीत] वसल्लम की उम्र तकरीबन 8 साल हुई

8:39तो हजरत अब्दुल मुत्तलिब भी इस दुनिया से

8:42रुखसत हो गए। सीरत की रिवायत के मुताबिक

8:44अपनी वफात से पहले उन्होंने मोहम्मद

8:47सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम [संगीत] की

8:48जिम्मेदारी अपने बेटे अबू तालिब को सौंपी।

8:51यहीं से नबी सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की

8:53जिंदगी का एक नया बाप शुरू होता है। अबू

8:56तालिब की माली हालत मजबूत नहीं थी। घर का

8:58गुजारा मुश्किल से होता था। लेकिन मोहम्मद

9:01सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी शिकायत

9:03नहीं की। बचपन ही से उनकी फितरत मेहनत,

9:06सच्चाई और खिदमत से भरी हुई थी। सीरत की

9:09किताबें बताती हैं कि वो मक्का के आसपास

9:12बकरियां चराया करते थे। बाद में रसूल्लाह

9:14सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने खुद फरमाया

9:17अल्लाह ने जितने भी अंबिया भेजे सब ने

9:19बकरियां चराई हैं। जब मोहम्मद सल्लल्लाहहु

9:22अलैहि वसल्लम की उम्र तकरीबन 12 साल हुई

9:25तो अबू तालिब ने अपने तजारती काफिले के

9:27साथ शाम सीरिया का सफर करने का इरादा

9:30किया। पहले वो इस नन्हे बच्चे को मक्का

9:32में ही छोड़ना चाहते थे। लेकिन मोहम्मद

9:34सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की मोहब्बत ने

9:36अबू तालिब का दिल पिघला दिया। रिवायत के

9:39मुताबिक वो उन्हें अपने साथ ही ले गए। कई

9:41दिनों के सफर के बाद कुरैश का काफिला शाम

9:45के मशहूर शहर बसरा के करीब पहुंचा। सीरत

9:48की मशहूर रिवायत के मुताबिक इसी इलाके में

9:51एक ईसाई राइब रहता था जिसे तारीख बहरा के

9:54नाम से याद करती है। और यहीं से इस सफर ने

9:58एक नया मोड़ लेना शुरू किया। सीरत की

10:01मशहूर रिवायत के मुताबिक राहिब बहरा ने

10:03दूर से गुजरते इस काफिले को देखा और फौरन

10:06महसूस किया कि इस दफा कुछ मुख्तलिफ है।

10:09रिवायत के मुताबिक उसने पहली बार पूरे

10:12काफिले [संगीत] को अपनी इबादतगाह में

10:13मेहमान बनने की दावत दी। कुरैश के ताजिरों

10:16के लिए यह बात इंतहाई गैर मामूली थी। जब

10:20कुरैश का काफिला बहीरा की दावत पर जमा हुआ

10:23तो राहिब ने हर चेहरे को गौर से देखना

10:25शुरू किया। फिर उसने पूछा क्या तुम सब आ

10:28गए हो? जवाब मिला एक लड़का काफिले के

10:32सामान की हिफाजत के लिए पीछे रह गया है।

10:34बहरा ने फौरन कहा उसे भी बुलाओ [संगीत]

10:37कोई मेहमान पीछे ना रहे। सीरत की मशहूर

10:40रिवायत के मुताबिक उसकी नजर उसी बच्चे

10:43[संगीत] को ढूंढ रही थी। सीरत की मशहूर

10:45रिवायत के मुताबिक जब बहीरा ने उस बच्चे

10:48को करीब से देखा तो उसने अबू तालिब से कहा

10:51इस बच्चे को शाम में ज्यादा देर ना रखिए।

10:54उसे मक्का [संगीत] वापस ले जाइए और उसकी

10:56हिफाजत कीजिए। रिवायत के मुताबिक बहरा को

11:00अंदेशा था कि अहले किताब के कुछ लोग अगर

11:03इस बच्चे की निशानियां पहचान गए तो उसके

11:06लिए खतरा पैदा हो सकता है। और यूं मोहम्मद

11:09सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का [संगीत] बचपन

11:11का पहला बाप अपने इख्तताम को पहुंचा। हजरत

11:14मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की

11:16जिंदगी का अगला हिस्सा देखने के लिए चैनल

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