Full transcript
0:00सोचिए अगर आपको आज से तकरीबन 1400 साल
0:03पहले की दुनिया में ले जाया जाए। एक ऐसी
0:06दुनिया जहां एक मासूम बच्ची की जिंदगी की
0:09कोई कीमत ना थी। जहां एक कतरा पानी एक ऊंट
0:13या मामूली सी बात पर कबायल नस्लों तक
0:16तलवें उठा लेते थे। जहां शराब, जुआ, सूत
0:21और बुटपरस्ती [संगीत]
0:22को जिंदगी का हिस्सा समझा जाता था। जहां
0:26ताकत ही कानून थी और कमजोर की कोई सुनने
0:29वाला ना था। [संगीत] तो क्या आप यकीन
0:31करेंगे कि इसी तहरीक अंधेरे में अल्लाह
0:35ताला एक ऐसी रहमत भेजने वाले थे जो हमेशा
0:38के लिए इंसानियत
0:39[संगीत][गाना गाने की आवाज़] की तारीख बदल
0:41देगी। यह सिर्फ अरब की कहानी नहीं थी। उस
0:45वक्त पूरी दुनिया एक अजीब मौत पर खड़ी थी।
0:48रोम और परर्शिया अपनी ताकत के नाशे में
0:52डूबे हुए थे। अरब के रेगिस्तान में 307 से
0:56ज्यादा बुट काबा के गिर्द खड़े थे। सूद
1:00गरीब को खा रहा था। जुआ घर बर्बाद कर रहा
1:04था। शराब अकल छीन रही थी। बेतियों को
1:08जिंदा दफन किया जाता था। कमजोर का हक छीन
1:12लिया जाता था। और कभी पानी, [संगीत] चरागा
1:15या मामूली सी बात पर कबायल नस्लों तक एक
1:19[संगीत] दूसरे का खून बहते रहते थे।
1:22लेकिन क्या यह सब हमेशा इसी तरह चलने वाला
1:26था? एक सवाल आज भी तरीक से पूछा जाता है।
1:30उस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी ताकत रोम थी?
1:35परर्शिया था। फिर अल्लाह ताला ने अपने
1:38आखरी रसूल [संगीत] सल्लल्लाहहु अलैहि
1:40वसल्लम के लिए अरब ही को क्यों चुना? क्या
1:44यह सिर्फ एक रेगिस्तान था या इस वीरा जमीन
1:48के सीने में कोई ऐसा राज छुपा था जो
1:51दुनिया की सबसे बड़ी सल्तनतें [संगीत]
1:53भी ना समझ सके और सबसे हैरराकुन बात उस
1:58हस्ती की पैदाइश से पहले ही कुछ [संगीत]
2:00ऐसे वाक्यात का जिक्र मिलता है जिन्हें
2:03देखकर लोग सदियों तक हैरा रहे जब इस अजीम
2:08हस्ती की आमद का वक्त करीब आया तो बाज
2:11पुरानी सीरा और तरीकी रिवायतों [संगीत]
2:13में कुछ गैर मामूली वाक्यात का जिक्र
2:16मिलता है। रिवायत है कि फारस की वो आग जो
2:19सदियों से बुझी ना थी अचानक बुझ गई। किसरा
2:23के शानदार महल में दरारें पड़ गई और उसके
2:27कई गिर गए। कुछ रिवायतों में जमजम के
2:31पानी का उबालना और आसमान में गैर मामूली
2:34मनाजीर का भी जिक्र मिलता है। और फिर
2:38इंतजार की वो रात आ पहुंची। [संगीत]
2:41बानू हाशिम के घर एक ऐसे बच्चे की पैदाइश
2:44होने वाली थी जो ना किसी सल्तनत का बादशाह
2:48था ना किसी लश्कर का सिपा सलार [संगीत]
2:51लेकिन चंद ही सालों में उसका पैगम रोम और
2:55परर्शिया के तख्तों तक पहुंचने [संगीत]
2:57वाला था रिवायत है कि सैयदा आमीना रजि
3:01अल्लाहहु अन्हा ने इस मुबारक पैदाइश के
3:04वक्त कुछ गैर मामूली मजीर देखे मगर एक बात
3:08पर तमाम [संगीत] मुसलमान मुत्तफिक
3:11कि इसी रात अल्लाह ताला ने [संगीत] अपनी
3:14आखरी हिदायत के सफर की इब्तदा फरमा दी।
3:18लेकिन इस मुबारक पैदाइश के साथ [संगीत] एक
3:20और दर्दनाक हकीकत भी जुड़ी हुई थी। इस
3:23बच्चे ने इस दुनिया में कदम रखने से पहले
3:26ही अपने वालिद का सया [संगीत] खो दिया था।
3:30हजरत अब्दुल्लाह का इंतकाल मोहम्मद
3:32सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की विलादत से
3:35पहले ही हो चुका था। अब एक यतीम बच्चा
3:39जिसके सर पर सिर्फ मां की ममता और दादा
3:42अब्दुल मुत्तलिब की मोहब्बत थी। दुनिया का
3:45सबसे अजीम इंसान बनने जा रहा था। लेकिन
3:49किसी को अंदाजा भी ना था कि इस मासूम
3:52बच्चे का बचपन भी आजमाइशों से भरा होगा।
3:56अरब की पुरानी रिवायत के मुताबिक [संगीत]
3:58मक्का की फीजा बच्चों के लिए ज्यादा
4:01मुनासिब नहीं समझी जाती थी। [संगीत]
4:03इसीलिए कुरैश के बच्चों को बचपन में सेहरा
4:07की साफ हवा और फसे अरबी जबान सीखने के लिए
4:11बदवी कबाइल के हवाली किया जाता था। इसी
4:14रिवायत के मुताबिक [संगीत] मोहम्मद
4:16सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को भी बनू साद
4:19की एक नेक औरत हजरत हलीमा सादिया रज़
4:22अल्लाहहु अन्हा अपने साथ ले गई। [संगीत]
4:25उन्हें उस वक्त बिल्कुल अंदाजा ना था कि
4:28वह किस मुबारक अमानत को अपनी गोद में उठा
4:32रही हैं। लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने
4:35हलीमा सादिया रज्लाहु अन्हा को भी हैरान
4:38कर दिया। पुरानी सीरत की रिवायतों के
4:41मुताबिक जिस घर में पहले तंगी थी वहां
4:44बरकत नजर आने लगी। कमजोर ऊंटनी पहले से
4:47बेहतर चलने लगी। बकरियां पहले से ज्यादा
4:50दूध देने लगी और सूखे रेगिस्तान [संगीत]
4:52में उनके रेवर दूसरों के मुकाबले में
4:55ज्यादा सेहतमंद दिखाई देने लगे। हलीमा को
4:58एहसास होने लगा कि उनकी गोद में कोई आम
5:01बच्चा नहीं बल्कि अल्लाह की एक खास अमानत
5:04है। [संगीत]
5:05लेकिन इन बरकतों से भी ज्यादा हैरान कर
5:07देने वाला वाकया अभी बाकी था। मोहम्मद
5:10[संगीत] सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की उम्र
5:12तकरीबन 4 साल थी। जब बनू साद [संगीत] के
5:15खुले मैदानों में एक ऐसा वाकया पेश आया
5:18जिसने हलीमा सादिया रज अल्लाहहु अन्हा को
5:21हिला कर रख दिया। सही हदीस में आता है कि
5:24दो फरिश्ते आए। उन्होंने मोहम्मद
5:27सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का सीना मुबारक
5:29खोला। दिल मुबारक को जमजम के पानी से धोया
5:32और फिर उसे वापस उसी [संगीत] तरह कर दिया।
5:35इस वाक्य के बाद हलीमा घबरा गई और फैसला
5:38किया कि अब इस अमानत को उसकी वालिदा के
5:41पास [संगीत] वापस पहुंचा देना होगा। हलीमा
5:44सादिया रज अल्लाहहु अन्हा जब मोहम्मद
5:46सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम को मक्का
5:48[संगीत] वापस लेकर आई तो उनका दिल मोहब्बत
5:50और हैरत से भर गया। यह वही बच्चा था जिसकी
5:54वजह से उनके घर में बरकत आई थी। लेकिन अब
5:57एक नया सफर शुरू होने वाला था। मक्का
6:00[संगीत] की पुरानी गलियों में एक मासूम
6:02बचपन खामोशी से गुजर रहा था। हजरत आमना रज
6:05अल्लाहहु अन्हा की ममता के साए में। मगर
6:08तकदीर इस बच्चे के लिए एक ऐसा सफर लिख रही
6:11थी [संगीत] जिसे दुनिया हमेशा याद रखेगी।
6:13मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की उम्र
6:15तकरीबन छ साल
6:17[संगीत]
6:17थी। जब उनकी वालिदा हजरत आमना रज़ अल्लाहहु
6:20अन्हा उन्हें लेकर यस गई। वहां उन्होंने
6:23अपने मरहूम शौहर हजरत अब्दुल्लाह की कब्र
6:25की जियारत की और करीबी रिश्तेदारों से
6:28मुलाकात की। कुछ दिन बाद काफिला मक्का की
6:31तरफ वापस रवाना हो गया। यस से वापसी का
6:34सफर शुरू हो चुका था। लेकिन अबवा नाम की
6:36जगह पर हजरत आमना रज़ अल्लाहहु अन्हा अचानक
6:39शदीद बीमार हो गई। रिवायत बताती है कि सफर
6:42वहीं रुक गया और चंद ही दिनों में मोहम्मद
6:45सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने सिर्फ छ साल
6:48की उम्र में अपनी वालिदा [संगीत] को हमेशा
6:50के लिए खो दिया। अबवा की उस सुनसान मकाम
6:53पर मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने
6:55सिर्फ अपनी वालिदा को ही नहीं खोया बल्कि
6:58बचपन का आखिरी सहारा भी खो दिया। रिवायत
7:00बताती है कि उस वक्त उनके साथ सिर्फ उम्मे
7:03ऐन बरका रज अल्लाहहु अन्हा मौजूद थी। बाद
7:06में रसूल्लाह सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम
7:09उनके बारे में फरमाया करते थे। उम्मे ऐन
7:12मेरी वालिदा के बाद मेरी वालिदा हैं। माना
7:14मौजूद है। इसी वफादार खादिमा ने इस मासूम
7:18[संगीत] बच्चे को दोबारा मक्का पहुंचाया।
7:20अबवा की उस खामोश वादी से एक छोटा सा
7:22बच्चा बिना मां के वापस मक्का लौट रहा था।
7:25सोचिए जिस बच्चे के वालिद [संगीत] पैदाइश
7:27से पहले ही दुनिया से चले गए हो और अब
7:30सिर्फ 6 साल की उम्र में मां भी बिछड़ जाए
7:33उसके दिल पर क्या [संगीत] गुजरी होगी
7:35लेकिन अल्लाह उस बच्चे को उस जिम्मेदारी
7:37के लिए तैयार कर रहा था जो पूरी इंसानियत
7:39[संगीत] की हिदायत बनने वाली थी। जब
7:42मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम मक्का
7:44वापस पहुंचे तो उनके दादा हजरत अब्दुल
7:46मुत्तलिब ने उन्हें अपनी हिफाजत में ले
7:48लिया। कुरैश के सरदारों में अब्दुल
7:50[संगीत] मुत्तलिब का रुतबा बहुत बुलंद था।
7:53काबा के मुतव्ली होने की वजह से अरब के
7:55दूर-दूर के कबाइल उनका एतराम करते थे।
7:59लेकिन उनकी मोहब्बत और तवज्जो सबसे ज्यादा
8:01अपने इस यतीम पोते के लिए थी। हर रोज काबा
8:04के साए में हजरत अब्दुल मुत्तलिब के
8:06[संगीत] लिए एक खास बिछौना बिछाया जाता
8:08था। कुरैश का कोई सरदार भी उस पर बैठने की
8:10हिम्मत नहीं करता था। लेकिन छोटे मोहम्मद
8:13सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम बेझिझक उसी
8:15बिछौने पर जा बैठते। चाचा फौरन उन्हें हटा
8:18देते। मगर अब्दुल मुत्तलिब मुस्कुरा कर
8:20फरमाते मेरे पोते को रहने दो। अल्लाह की
8:23कसम इस बच्चे की शान एक दिन बहुत बुलंद
8:26होगी। उन्हें इस यतीम बच्चे से एक अजीब सी
8:29मोहब्बत थी जो दूसरे पोतों से भी ज्यादा
8:31नजर आती थी। लेकिन यह खुशगवार दिन ज्यादा
8:34देर ना रहे। मोहम्मद सल्लल्लाहहु अलैहि
8:36[संगीत] वसल्लम की उम्र तकरीबन 8 साल हुई
8:39तो हजरत अब्दुल मुत्तलिब भी इस दुनिया से
8:42रुखसत हो गए। सीरत की रिवायत के मुताबिक
8:44अपनी वफात से पहले उन्होंने मोहम्मद
8:47सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम [संगीत] की
8:48जिम्मेदारी अपने बेटे अबू तालिब को सौंपी।
8:51यहीं से नबी सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की
8:53जिंदगी का एक नया बाप शुरू होता है। अबू
8:56तालिब की माली हालत मजबूत नहीं थी। घर का
8:58गुजारा मुश्किल से होता था। लेकिन मोहम्मद
9:01सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी शिकायत
9:03नहीं की। बचपन ही से उनकी फितरत मेहनत,
9:06सच्चाई और खिदमत से भरी हुई थी। सीरत की
9:09किताबें बताती हैं कि वो मक्का के आसपास
9:12बकरियां चराया करते थे। बाद में रसूल्लाह
9:14सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम ने खुद फरमाया
9:17अल्लाह ने जितने भी अंबिया भेजे सब ने
9:19बकरियां चराई हैं। जब मोहम्मद सल्लल्लाहहु
9:22अलैहि वसल्लम की उम्र तकरीबन 12 साल हुई
9:25तो अबू तालिब ने अपने तजारती काफिले के
9:27साथ शाम सीरिया का सफर करने का इरादा
9:30किया। पहले वो इस नन्हे बच्चे को मक्का
9:32में ही छोड़ना चाहते थे। लेकिन मोहम्मद
9:34सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम की मोहब्बत ने
9:36अबू तालिब का दिल पिघला दिया। रिवायत के
9:39मुताबिक वो उन्हें अपने साथ ही ले गए। कई
9:41दिनों के सफर के बाद कुरैश का काफिला शाम
9:45के मशहूर शहर बसरा के करीब पहुंचा। सीरत
9:48की मशहूर रिवायत के मुताबिक इसी इलाके में
9:51एक ईसाई राइब रहता था जिसे तारीख बहरा के
9:54नाम से याद करती है। और यहीं से इस सफर ने
9:58एक नया मोड़ लेना शुरू किया। सीरत की
10:01मशहूर रिवायत के मुताबिक राहिब बहरा ने
10:03दूर से गुजरते इस काफिले को देखा और फौरन
10:06महसूस किया कि इस दफा कुछ मुख्तलिफ है।
10:09रिवायत के मुताबिक उसने पहली बार पूरे
10:12काफिले [संगीत] को अपनी इबादतगाह में
10:13मेहमान बनने की दावत दी। कुरैश के ताजिरों
10:16के लिए यह बात इंतहाई गैर मामूली थी। जब
10:20कुरैश का काफिला बहीरा की दावत पर जमा हुआ
10:23तो राहिब ने हर चेहरे को गौर से देखना
10:25शुरू किया। फिर उसने पूछा क्या तुम सब आ
10:28गए हो? जवाब मिला एक लड़का काफिले के
10:32सामान की हिफाजत के लिए पीछे रह गया है।
10:34बहरा ने फौरन कहा उसे भी बुलाओ [संगीत]
10:37कोई मेहमान पीछे ना रहे। सीरत की मशहूर
10:40रिवायत के मुताबिक उसकी नजर उसी बच्चे
10:43[संगीत] को ढूंढ रही थी। सीरत की मशहूर
10:45रिवायत के मुताबिक जब बहीरा ने उस बच्चे
10:48को करीब से देखा तो उसने अबू तालिब से कहा
10:51इस बच्चे को शाम में ज्यादा देर ना रखिए।
10:54उसे मक्का [संगीत] वापस ले जाइए और उसकी
10:56हिफाजत कीजिए। रिवायत के मुताबिक बहरा को
11:00अंदेशा था कि अहले किताब के कुछ लोग अगर
11:03इस बच्चे की निशानियां पहचान गए तो उसके
11:06लिए खतरा पैदा हो सकता है। और यूं मोहम्मद
11:09सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम का [संगीत] बचपन
11:11का पहला बाप अपने इख्तताम को पहुंचा। हजरत
11:14मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की
11:16जिंदगी का अगला हिस्सा देखने के लिए चैनल
11:20को सब्सक्राइब