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0:00अगर मिलादन नबी मनाना बिद्दत है तो पूरी
0:02दुनिया इसे इतने जोरों शोरों से क्यों
0:03मनाती है? आइए जानते हैं। देखिए मिलादन
0:05नबी बिद्दत है। इस बात में तो कोई दो राय
0:07नहीं है। लेकिन अब जानते हैं कि बिद्दत
0:09कैसे होती है। हजरत इमाम शाफी रहमतुल्लाह
0:11अल फरमाते हैं कि बिद्दत दो तरीके की होती
0:13है। एक बिद्दतल हसना और एक बिद्दत अल
0:15शैया। हसना बिद्दत वो होती है जिसे करने
0:17से सवाब मिलता है। और शैया बिद्दत वो होती
0:19है जिसे पूरी तरीके से मना कर दिया गया
0:21है। जो पूरी तरीके से इस्लाम में एक नया
0:22इनोवेशन है और जो पूरी तरीके से गलत है।
0:24अगर बिदत अल हसना की बात करें तो उसमें
0:26ऐसी चीजें आएंगी जैसे कि कुरान को एक
0:28किताब की शक्ल देना। इस्लामिक
0:29यूनिवर्सिटीज बनाना, कुरान की प्रिंटिंग
0:32करना और माइक पर अजान देना। ये सब बिदत अल
0:34हसना में शामिल है। और इब्न हजर अस्कलानी
0:36रहमतुल्लाह अल फरमाते हैं कि मिलाद मनाना
0:38भी बिद्दत अल हसना में शुमार है। लेकिन
0:40उन्होंने कुछ चीजें बताई है। उन्होंने कहा
0:41है कि अगर इस दिन कुरान पढ़ा जाए। नबी
0:43करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की दास्तान
0:45सुनाई जाए। जरूरतमंदों को जकात दी जाए और
0:47गरीबों में खाना तकसीम किया जाए। तो ये
0:50होता है असली मिलाद मनाना। उन्होंने जिस
0:51चीज से मना करा है वह कुछ यूं तरह है।
0:53उन्होंने गाने बजाने से मना किया है।
0:55उन्होंने मर्द और औरत का एक साथ इकट्ठा
0:57होने से मना किया है। इसीलिए मिलाद नबी आप
0:59कैसे मनाते हैं यह आपके ऊपर डिपेंड करता
1:00है। मिलाद नबी मनाना कोई गलत चीज नहीं है।
1:02और वैसे भी जो यह फतवे दे रहे हैं कि
1:04मनाना पूरी तरीके से गलत है, एक बिद्दत
1:06है। देखते हैं कि 23 सितंबर को उनके मुंह
1:07से कैसे फूल झड़ेंगे जब पूरे सऊदी अरेबिया
1:09में सऊदी डे मनाया जाएगा।