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माता लक्ष्मी बनी नौकरानी Saas vs Bahu | Saas Bahu Kahaniya | Hindi Stories | Saas Bahu stories

Anamika TV Hindi · 2,507 words · 12 min read

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0:00पुर गांव था रात के 11:00 बज रहे द पूरा

0:03गांव सो रहा था पर मैन शारदा और बेटा रमेश

0:06को नींद नहीं ए रही थी वो हाल में सोफे पे

0:08बैठ के टीवी देख रहे द रमेश की पत्नी

0:11अनामिका गर्भवती थी बिना आराम किए सुबह से

0:15शाम तक वो घर का सारा कम करके बहुत थक

0:19चुकी थी इसीलिए बेडरूम के नीचे जमीन पर

0:22मेड बिछा के वो लेट गई थी बिस्तर पे उसकी

0:255 साल की बेटी नीता सो रही थी सर मैं दर्द

0:28होने की वजह से अनामिका एक कपड़े से बंद

0:30लेती है उसके गालों में हाथ के पंजों का

0:33निशान था पर अपने हाथों को देखकर उसे बहुत

0:36बुरा लगता है वो मणि मैन खुद से कहती है

0:59हान सर पति से ऐसी lanchhana सी पड़े

1:02ईशानी जैसी जिंदगी हो जो की जीवन में सबसे

1:06महत्वपूर्ण है प्रार्थना करके अनामिका

1:09आंखे बंद करती है ताकि वह अनामिका की

1:11आंखें बंद हो जाती है और वो धीरे-धीरे सो

1:14जाती है

1:17शारदा घड़ी की तरफ देखती है उसे वक्त घड़ी

1:21में 11:20 हो रहे द फिर मैन और बेटा हॉल

1:25से धीरे-धीरे बेडरूम में जाते हैं जहां पे

1:27अनामिका सो रही थी बिस्तर पर नीता नींद

1:31में बेहोश थी मैन और बेटा जाके ये भी जांच

1:35करते हैं की अनामिका सच में गहरी नींद में

1:39है या नहीं उन दोनों को लगता है की

1:42अनामिका सो नहीं रही है वह अभी नहीं कर

1:45रही है तभी शारदा कहने लगती है

1:59लगेगा आत्महत्या कर ली

2:02अपना हाथ इस्तेमाल नहीं करेंगे नहीं तो कई

2:05दफे उंगलियों के निशान शरीर में रह जाते

2:07हैं अगर उसके पिताजी रघुपति को किसी भी

2:11तरह से shakwat तो वो पोस्टमार्टम करवा

2:13सकते हैं फिर हमने मारा है यह साबित हो

2:16जाएगा फिर तो हमारा येलो हो जाएगा नहीं

2:19नहीं मुझे नहीं जाना इसीलिए मैं एक तकिया

2:24लेकर उसके पैरों को दबाता हूं और तुम

2:26दूसरा तकिया लेकर उसका मुंह ढाबा दो यह तो

2:30अच्छी बात है चलो वही करते हैं रमेश एक

2:34तकिया लेता है और दूसरा तकिया अपनी मैन

2:36शारदा को देता है फिर दोनों मिलकर अनामिका

2:39की जान लेने की कोशिश करते हैं तभी अचानक

2:43से अनामिका अपनी आंखें खोल लेती है उसे

2:45देखकर दोनों आश्चर्य हो जाते हैं और एक

2:48दूसरे को देखने लगते हैं

2:58क्योंकि आप ने मेरी बेटी को तो वक्त बस

3:01खाना दे रहे हैं पर आज आप लोगों को मेरी

3:04जान लेने में थोड़ी पीछे झक नहीं हुई ये

3:07जानते हुए की मेरे पेट में एक बच्चा पढ़

3:10रहा है इसके बाद में यहां रहना मेरा सही

3:13नहीं होगा ये बात समझ गई हूं क्या तुम घर

3:16छोड़ने का हमें धमकी दे रही हो

3:22इससे पहले एक बात कहना चाहती हूं

3:24पर नहीं है चूड़ी बिंदी पहन के सारी लपेट

3:27के आप बस एक मूंछों वाले आदमी से कम नहीं

3:30ऐसी बातें सुनकर शारदा को बड़ा गुस्सा ए

3:34जाता है वो अनामिका की गल पे कस के एक

3:37थप्पड़ लगती है

3:38अनामिका की आंखों से आंसू बहाने लगते हैं

3:41उसके आंसू के दो-तीन बूंद गीता के ऊपर

3:44गिरता है वह नींद नहीं उठ के देखने लगती

3:47है शारदा जल्दी से मारना बंद करती है

3:50अनामिका के गल लाल हो चुके द अनामिका बहुत

3:53कोशिश करने के बावजूद उसके आंसू रुक नहीं

3:56रहे द लगातार उसके आंखों से आंसू बा जा

3:58रहे द नीता सारी बातें थोड़ी-थोड़ी समझ

4:01लेती है

4:02[संगीत]

4:06ना नहीं-नहीं बेटा वो मुझे क्यों मरेंगे

4:10भला वो तो कल क्या पकाना है इस बारे में

4:13का रहे द ठीक है फिर मैं थोड़ी देर में

4:16बाथरूम से आती हूं ऐसा कहा की नीता बिस्तर

4:19से उतर के चली जाती है पता नहीं कैसी

4:22किस्मत है मेरी मैन लक्ष्मी भी

4:24हीरो के घर में ही रहती है मेरे जैसे गरीब

4:27बहु के घर में आती ही नहीं चाहे मेरी

4:29जितना भी कोशिश कर लूं उन्हें रोकने की

4:31कुछ भी कर लो पर वो कैसे भी मुझे छोड़ के

4:35चली जाती है हान मैन लक्ष्मी को भी बस

4:39अमीर लोग ही चाहिए उन्हें बदबूदार करीब

4:42बिल्कुल पसंद नहीं थैंक यू बहुत ज्यादा

4:45दिनों तक उनके साथ नहीं रहती क्योंकि आप

4:48जैसे लोग चाहे कितना भी हो कभी कुछ नहीं

4:51रहते हमेशा आप लोगों को और चाहिए मैं अपनी

4:55बेटी को लेकर चले जाऊंगी आप मुझे मार के

4:58अपने सर बाप का पूजा क्यों लेना चाहती है

5:00बताइए इस तरह के वो अपने कपड़े sametati

5:03है जैसे ही नीता बाथरूम से आती है वो उसे

5:06लेकर बाहर ए जाती है रमेश मुंह पर दरवाजा

5:08बंद कर देता है नीता बुलाती है पर वो जवाब

5:11नहीं देते वह चलते चलते रात में गांव से

5:14निकल आते हैं जब वो जंगल के रास्ते में जा

5:16रहे द बहुत बारिश शुरू हो जाती है बिजली

5:19और बारिश से खुद को बचाने के लिए वह जाकर

5:21बड़े से पेड़ के नीचे छुप जाते हैं तभी एक

5:25बुजुर्ग औरत एक छाता लेकर उसे तरफ से ए

5:27रही थी गर्भवती अनामिका को देखकर वह अपने

5:30कुटिया ले जाती है वो बुजुर्ग महिला कहती

5:32है की वह कुटिया उसी का है वो पास के ही

5:36लक्ष्मी देवी मंदिर में कम करती है

5:38अनामिका कहती है उसके लिए भी वो एक कम

5:40ढूंढते यह सुनकर वो महिला कहती है लक्ष्मी

5:44देवी के मंदिर में सीढ़ियां साफ करना होगा

5:48और बिंदी लगाना होगा बहुत सीढ़ियां हैं

5:51लेकिन करूंगी चाची अपनी बेटी के तो वक्त

5:54के निवाला के लिए मैं कोई भी कम करने के

5:57लिए तैयार हूं ऐसा कहकर गर्वती होने के

6:00बावजूद अपनी बेटी नीता को साथ में लेकर वो

6:04मैन लक्ष्मी देवी मंदिर चली जाती है पास

6:06के ही झड़ने से पानी ले आकर मंदिर की

6:09सीडीओ को साफ करती है और उसकी सजावट करती

6:11है वहीं पर मंदिर में भक्तों के द्वारा

6:14दिए गए प्रसाद फल मूल खाती है और जो डैन

6:18दक्षिण के पैसे होते द उसी को वह बचा के

6:21रखा करती है दिन गुजर रहे द एक दिन उसे

6:24बहुत बाहर आता है वह मंदिर नहीं जा पाती

6:26वो घर पर बिस्तर पर लेती हुई थी नीता मैन

6:30देवी लक्ष्मी के तस्वीर के सामने हाथ

6:32जोड़कर कहती है मैन लक्ष्मी मेरी मैन को

6:34बुखार आया है यहां पे कोई नहीं है देखभाल

6:37करने वाला मैं छोटी बच्ची हूं मुझे नहीं

6:40पता क्या करना चाहिए इसीलिए मेरी मैन आज

6:44मंदिर की सीढ़ियां साफ करने नहीं ए पाए आप

6:47नाराज मत होना मैप प्रार्थना के दौरान मैन

6:50लक्ष्मी वहां प्रकट हो जाती है और एक

6:53नौकरानी का भेष लेके वो अनामिका का सेवा

6:56करने लगती है अपनी शक्ति से वह अनामिका का

6:59बुखार गायब कर देती है अनामिका आंखे खोल

7:02के देखती है उसे लगता है की मैन लक्ष्मी

7:04खुद वहां पर आकर उसकी सेवा की है इसीलिए

7:07वह प्रार्थना में कहती है

7:10दीदी मैन मैंने आपके बारे में गलत सोचा था

7:13अपने यहां साबित कर दिया गरीब हूं यहां

7:16अमीर सब आपके लिए एक है बस हम आपको कैसे

7:18चाहते हैं ये बड़ी बात है मुझे क्षमा कर

7:21दीजिएगा मैन अपनी गलत शब्दों की वजह से वो

7:24देवी मैन से माफी मांगती है देवी मैन उसे

7:27सोने से भरा हुआ एक घड़ा देती है जिससे वो

7:29अपनी जीविका चला सके और फिर वहां से

7:31अदृश्य हो जाती है तब से अनामिका अपनी

7:34बेटी नीता का ख्याल रखती है और खुशी-खुशी

7:36जीवन बिताती है

7:40सूरज पश्चिम में अस्त हो रहा था अंधेरा

7:43धीरे-धीरे घर रहा था रमेश की बहन अंजलि

7:46अपना सेल फोन लेती है और छत पर चले जाती

7:48है छत पर खड़े होकर वह अपने भाई रमेश का

7:51घर लौटने का इंतजार कर रही थी ताकि जब

7:55रमेश घर लौटे तभी उसे गली के अंत से ही वह

7:58छत से देख लेगी वह नजर टिकाई हुई थी गली

8:02में की देखती है की रमेश गली के रास्ते से

8:05होकर घर की तरफ ए रहा है तभी वह भागते हुए

8:09अपनी मैन शारदा के पास हॉल में जाती है

8:15मैं जा रही हूं कपड़े सुखाने के लिए

8:24किचन में गर्भवती अनामिका थी जो रोते रोते

8:28खाना पका रही थी उसे देखकर शारदा निष्ठुर

8:31था के साथ कहने लगती है बहुत रोना धोना हो

8:34गया और बहुत खाना भी पका ली बहुरानी

8:37तुम्हारे पति मेरा बेटा घर लौट रहा आओ

8:40जाके सो जाओ और याद रखना हमेशा के तरह उसे

8:43देखकर मुस्कुराना कुछ मत कहना नहीं तो

8:48[संगीत]

8:49कम से कम दर के मारे ही तुम तो दायरे में

8:52रहोगी नहीं तो मेरा बेटा को अगर शक हुआ ना

8:55अपनी बड़ी-बड़ी आंखें करके शारदा से धमका

8:58के कहती है अनामिका उसे देखकर बहुत दर

9:01जाती है उनका वो भयानक चेहरा देखकर चुपचाप

9:04दर के मारे वो बेडरूम में जाके सो जाती है

9:06ठीक उसी वक्त रमेश घर लौट आता है घर लौट

9:11के पार्किंग करते-करते वो देखता है की

9:13उसकी बहन कपड़े सूखा रही है जैसे ही उसे

9:16लगा की भैया देख रहा है वो तुरंत अपने

9:18हाथों को दबाने लगी मानो की उसके हाथों

9:21में बहुत दर्द हो रहे हो रमेश देखता है पर

9:24बिना कुछ का वे वो घर के अंदर चला जाता है

9:26रमेश के हाथ में लंच बॉक्स था मा मा जब

9:33रमेश एक दो बार मामा चिल्लाता है शारदा

9:35अपना चेहरा लटकते हुए धीरे-धीरे अंदर से

9:38चलकर बाहर निकल आती है वह रमेश के हाथ से

9:41लंच बॉक्स लेती है और फिर अंदर चली जाती

9:44है शारदा को देखकर रमेश को लगता है की

9:47शायद वो बहुत ज्यादा थक गई हो

9:50बेचारी मेरी मैन दिन भर कम कर-कर के थक

9:53जाती है बहन के भी हाथों में दर्द हो रहे

9:55हैं सारे कपड़े धो कर सुखाने में एक

9:58नौकरानी रख लेता हूं थोड़े पैसे लगते हैं

10:00तो लगने दो यही सब सोचते सोचते वो बेडरूम

10:03में जाता है देखता हूं बिस्तर में लेती

10:06हुई है वो नाटक कर रही थी सोने का पर उसके

10:09आंखों में आंसू द जो रमेश ने गौर नहीं

10:11किया वो आकर कहने लगा अनामिका उठो अनामिका

10:15आज हमें 8:00 बजे तक चेकअप के लिए जाना है

10:18पता है ना मैंने ये बात मैन से का दिया था

10:20मैंने तुम्हें कहा की नहीं

10:23ने कहा था जी पर काफी वक्त था यह सोचकर

10:25मैं थोड़ा लेट गई ऐसे मैं 10 मिनट में

10:28रेडी होकर आता हूं तुम चेकअप के कागजात

10:31लेकर तैयार रहो ठीक है ना अच्छा ठीक है

10:34अनामिका को इस तरह से का के रमेश वॉशरूम

10:37की तरफ चला जाता है अनामिका डॉक्टर के

10:39कागजात लेके तैयार होके इंतजार कर रही

10:42होती है फिर 10 मिनट के बाद रमेश अनामिका

10:46को लेकर हॉल में आता है मैन और बहन को

10:48बताता है की वो अनामिका को चेकअप के लिए

10:50ले जा रहा है फिर बाइक पे बैठकें वह

10:52अस्पताल ले जाता है वहां चेकअप के बाद

10:55डॉक्टर कहते हैं मिस्टर रमेश अनामिका बहुत

10:58कमजोर है क्या वो खाना नहीं खा रही है फल

11:01नहीं दे रहे हैं दूध प्रोटीन लगता है यह

11:04सब कुछ भी नहीं ले रही है आपके घर के सास

11:07और ननद बहु रानी को कुछ खाने दे भी है या

11:11नहीं अगर ऐसा ही चलता रहा तो बच्चे और मैन

11:14दोनों के जान को बहुत ज्यादा खतरा हो सकता

11:17है डिलीवरी में मुश्किल होगी जब डॉक्टर इस

11:20तरह से गुस्से से का रहे द अनामिका कुछ का

11:24नहीं रही थी यह नहीं का रही थी की वह सब

11:26कुछ समय-समय पे लेती है अनामिका को जवाब

11:29ना देते देख रमेश इस बारे में सोचने लगता

11:32है तब रमेश को अपनी मैन और बहन पर थोड़ा

11:36शक होता है रमेश जानना चाहता था की आखिर

11:39में उसके पीठ पीछे होता क्या है घर में

11:40रमेश अनामिका को घर ले जाता है उसे खाना

11:44देता है दवाई देता है फिर अनामिका सोने

11:46चली जाती है फिर रमेश डाइनिंग टेबल पे आता

11:49है और अपनी मैन और बहन के साथ बैठकर खाना

11:51खाने लगता है मैन मैं आपको और अंजलि को एक

11:55अच्छी खबर सुनने वाला हूं जिसे सुनने के

11:58बाद आप दोनों खुशी के मारे मानो की उछाल

12:01पड़ेंगी मैं इस घर के लिए एक नौकरानी रखने

12:04वाला हूं आपकी बहु रानी आप अंजलि आप सभी

12:08को घर का कम करने में खाना पकाने में बहुत

12:10दिक्कत होती है इसीलिए मैं एक नौकरानी

12:13रखने वाला हूं यह सुनने की बात मैन बेटी

12:15मानो दोनों दर जाती है और उसे घूमने लगती

12:18है इस बात से कहने लगती है की पैसे

12:21नौकरानी पे क्यों खर्च करना ऐसे अनामिका

12:24की दवाइयां पर खर्च करें यह सुनकर रमेश का

12:26शक और बढ़ जाता है वो सच झूठ का पता लगाना

12:29चाहता था इसीलिए एक दिन वो ऑफिस जाने का

12:32नाम करता है पर ऑफिस नहीं जाता है पीछे के

12:34दीवार फैन के वो चुपके से घर के अंदर आके

12:37बेडरूम में बेड के नीचे सो जाता है ये बात

12:40सास और ननद को पता नहीं था वो अनामिका के

12:43कमरे में आती है और उसे दांत फटक लगाने

12:45लगती है लड़की जाके उठो और घर का सारा कम

12:48काजर खाना पकाओ जैसे मेरा बेटा आने लगे

12:51चुपचाप यहां सो जाना और एक बात याद है ना

12:55हमारे खाने पीने का समय ज्यादा अंजलि अभी

12:58गर्म गरम मुझे नाश्ता बना रहा होगा 12:00

13:02तक मुझे जूस बनाना होगा 2:00 बजे तक मुझे

13:05पकौड़ी डाल सब्जी चिकन फ्राइड सांबर ये सब

13:09कुछ बनाना होगा तुम लोगों के खाने के बाद

13:12पूछा कुछ खाना मैं खाऊंगी फिर बर्तन धो के

13:15कपड़े dhoungi उसके बाद फिर आगे मैं खाना

13:18बनाऊंगी ऐसा कहते-कहते अनामिका रोने लगती

13:21है वहां से शारदा और अंजलि चली जाती है

13:24बिस्तर के नीचे बैठे रमेश यह सब सुनकर

13:27उसकी आंखें भर आती है तुरंत वो बिस्तर के

13:29नीचे से निकल के अनामिका के पास आता है

13:31अनामिका रमेश को देखकर उसे पड़कर तब तक

13:34रोटी है जब तक उसका जी चाहता है अनामिका

13:37को लेकर रमेश हॉल में आता है बेटे को

13:40देखकर सात शारदा और अंजलि दोनों सर झुका

13:43लेती है

13:44तुम एक मैन हो कम से कम एक महिला होने के

13:47नाते तो तुम ऐसा नहीं करती अगर तुम्हारी

13:50बेटी घर में वती होती तो क्या तुम उसके

13:52साथ ऐसा कर पाती मैन मैं उसे महारानी जैसा

13:55देखभाल करती मतलब अनामिका भी तो किसी मैन

13:58की बेटी है ना वो किसका बच्चा अपने पेट

14:01में राखी है किसका कुल रोशन करेगी तुम ही

14:03बताओ मेरे ही पोते को गर्व में राखी है

14:06मेरे इस वंश को तुम बेटी को एक नजर से

14:10देखती हो और बहु को अलग नजर से तुम जैसी

14:12सासुमा जब तक घर पे रहोगी तब तक सब कुछ

14:15भगवान भरोसे ही है इसीलिए तो शादी के बाद

14:17लड़का अपना परिवार लेकर अलग हो जाता है

14:19भले मा कोसती है पर आखिरकार कारण तुम ही

14:22लोगों पता तुम्हें समझ में कब आएगा ई ई इस

14:25तरह से गुस्से से रमेश अपनी मैन और बहन से

14:28कहता है और एक तुम अंजलि तुम्हें भी कहना

14:32तो बेकरी है मैन के साथ रह रहे द तुम भी

14:35मैन की तरह ही हो गई हो कल दिन शादी के

14:37बाद जहां तुम जाओगी वहां तुम्हें भी एक

14:39ऐसी ननंद मिले क्या होगा अगर तुम इसके

14:41बारे में थोड़ा भी सोचती ना तो आज तुम

14:44अपनी भाभी के साथ ऐसा नहीं कर रही होती

14:45ऐसा का के रमेश अपनी पत्नी अनामिका को

14:48लेके उसे घर को छोड़ के अलग परिवार बसा

14:51लेता है वहां अपनी पत्नी का वो ख्याल रखता

14:54है खुशी खुशी जीवन बिताने लगता है

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