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0:00पुर गांव था रात के 11:00 बज रहे द पूरा
0:03गांव सो रहा था पर मैन शारदा और बेटा रमेश
0:06को नींद नहीं ए रही थी वो हाल में सोफे पे
0:08बैठ के टीवी देख रहे द रमेश की पत्नी
0:11अनामिका गर्भवती थी बिना आराम किए सुबह से
0:15शाम तक वो घर का सारा कम करके बहुत थक
0:19चुकी थी इसीलिए बेडरूम के नीचे जमीन पर
0:22मेड बिछा के वो लेट गई थी बिस्तर पे उसकी
0:255 साल की बेटी नीता सो रही थी सर मैं दर्द
0:28होने की वजह से अनामिका एक कपड़े से बंद
0:30लेती है उसके गालों में हाथ के पंजों का
0:33निशान था पर अपने हाथों को देखकर उसे बहुत
0:36बुरा लगता है वो मणि मैन खुद से कहती है
0:59हान सर पति से ऐसी lanchhana सी पड़े
1:02ईशानी जैसी जिंदगी हो जो की जीवन में सबसे
1:06महत्वपूर्ण है प्रार्थना करके अनामिका
1:09आंखे बंद करती है ताकि वह अनामिका की
1:11आंखें बंद हो जाती है और वो धीरे-धीरे सो
1:14जाती है
1:17शारदा घड़ी की तरफ देखती है उसे वक्त घड़ी
1:21में 11:20 हो रहे द फिर मैन और बेटा हॉल
1:25से धीरे-धीरे बेडरूम में जाते हैं जहां पे
1:27अनामिका सो रही थी बिस्तर पर नीता नींद
1:31में बेहोश थी मैन और बेटा जाके ये भी जांच
1:35करते हैं की अनामिका सच में गहरी नींद में
1:39है या नहीं उन दोनों को लगता है की
1:42अनामिका सो नहीं रही है वह अभी नहीं कर
1:45रही है तभी शारदा कहने लगती है
1:59लगेगा आत्महत्या कर ली
2:02अपना हाथ इस्तेमाल नहीं करेंगे नहीं तो कई
2:05दफे उंगलियों के निशान शरीर में रह जाते
2:07हैं अगर उसके पिताजी रघुपति को किसी भी
2:11तरह से shakwat तो वो पोस्टमार्टम करवा
2:13सकते हैं फिर हमने मारा है यह साबित हो
2:16जाएगा फिर तो हमारा येलो हो जाएगा नहीं
2:19नहीं मुझे नहीं जाना इसीलिए मैं एक तकिया
2:24लेकर उसके पैरों को दबाता हूं और तुम
2:26दूसरा तकिया लेकर उसका मुंह ढाबा दो यह तो
2:30अच्छी बात है चलो वही करते हैं रमेश एक
2:34तकिया लेता है और दूसरा तकिया अपनी मैन
2:36शारदा को देता है फिर दोनों मिलकर अनामिका
2:39की जान लेने की कोशिश करते हैं तभी अचानक
2:43से अनामिका अपनी आंखें खोल लेती है उसे
2:45देखकर दोनों आश्चर्य हो जाते हैं और एक
2:48दूसरे को देखने लगते हैं
2:58क्योंकि आप ने मेरी बेटी को तो वक्त बस
3:01खाना दे रहे हैं पर आज आप लोगों को मेरी
3:04जान लेने में थोड़ी पीछे झक नहीं हुई ये
3:07जानते हुए की मेरे पेट में एक बच्चा पढ़
3:10रहा है इसके बाद में यहां रहना मेरा सही
3:13नहीं होगा ये बात समझ गई हूं क्या तुम घर
3:16छोड़ने का हमें धमकी दे रही हो
3:22इससे पहले एक बात कहना चाहती हूं
3:24पर नहीं है चूड़ी बिंदी पहन के सारी लपेट
3:27के आप बस एक मूंछों वाले आदमी से कम नहीं
3:30ऐसी बातें सुनकर शारदा को बड़ा गुस्सा ए
3:34जाता है वो अनामिका की गल पे कस के एक
3:37थप्पड़ लगती है
3:38अनामिका की आंखों से आंसू बहाने लगते हैं
3:41उसके आंसू के दो-तीन बूंद गीता के ऊपर
3:44गिरता है वह नींद नहीं उठ के देखने लगती
3:47है शारदा जल्दी से मारना बंद करती है
3:50अनामिका के गल लाल हो चुके द अनामिका बहुत
3:53कोशिश करने के बावजूद उसके आंसू रुक नहीं
3:56रहे द लगातार उसके आंखों से आंसू बा जा
3:58रहे द नीता सारी बातें थोड़ी-थोड़ी समझ
4:01लेती है
4:02[संगीत]
4:06ना नहीं-नहीं बेटा वो मुझे क्यों मरेंगे
4:10भला वो तो कल क्या पकाना है इस बारे में
4:13का रहे द ठीक है फिर मैं थोड़ी देर में
4:16बाथरूम से आती हूं ऐसा कहा की नीता बिस्तर
4:19से उतर के चली जाती है पता नहीं कैसी
4:22किस्मत है मेरी मैन लक्ष्मी भी
4:24हीरो के घर में ही रहती है मेरे जैसे गरीब
4:27बहु के घर में आती ही नहीं चाहे मेरी
4:29जितना भी कोशिश कर लूं उन्हें रोकने की
4:31कुछ भी कर लो पर वो कैसे भी मुझे छोड़ के
4:35चली जाती है हान मैन लक्ष्मी को भी बस
4:39अमीर लोग ही चाहिए उन्हें बदबूदार करीब
4:42बिल्कुल पसंद नहीं थैंक यू बहुत ज्यादा
4:45दिनों तक उनके साथ नहीं रहती क्योंकि आप
4:48जैसे लोग चाहे कितना भी हो कभी कुछ नहीं
4:51रहते हमेशा आप लोगों को और चाहिए मैं अपनी
4:55बेटी को लेकर चले जाऊंगी आप मुझे मार के
4:58अपने सर बाप का पूजा क्यों लेना चाहती है
5:00बताइए इस तरह के वो अपने कपड़े sametati
5:03है जैसे ही नीता बाथरूम से आती है वो उसे
5:06लेकर बाहर ए जाती है रमेश मुंह पर दरवाजा
5:08बंद कर देता है नीता बुलाती है पर वो जवाब
5:11नहीं देते वह चलते चलते रात में गांव से
5:14निकल आते हैं जब वो जंगल के रास्ते में जा
5:16रहे द बहुत बारिश शुरू हो जाती है बिजली
5:19और बारिश से खुद को बचाने के लिए वह जाकर
5:21बड़े से पेड़ के नीचे छुप जाते हैं तभी एक
5:25बुजुर्ग औरत एक छाता लेकर उसे तरफ से ए
5:27रही थी गर्भवती अनामिका को देखकर वह अपने
5:30कुटिया ले जाती है वो बुजुर्ग महिला कहती
5:32है की वह कुटिया उसी का है वो पास के ही
5:36लक्ष्मी देवी मंदिर में कम करती है
5:38अनामिका कहती है उसके लिए भी वो एक कम
5:40ढूंढते यह सुनकर वो महिला कहती है लक्ष्मी
5:44देवी के मंदिर में सीढ़ियां साफ करना होगा
5:48और बिंदी लगाना होगा बहुत सीढ़ियां हैं
5:51लेकिन करूंगी चाची अपनी बेटी के तो वक्त
5:54के निवाला के लिए मैं कोई भी कम करने के
5:57लिए तैयार हूं ऐसा कहकर गर्वती होने के
6:00बावजूद अपनी बेटी नीता को साथ में लेकर वो
6:04मैन लक्ष्मी देवी मंदिर चली जाती है पास
6:06के ही झड़ने से पानी ले आकर मंदिर की
6:09सीडीओ को साफ करती है और उसकी सजावट करती
6:11है वहीं पर मंदिर में भक्तों के द्वारा
6:14दिए गए प्रसाद फल मूल खाती है और जो डैन
6:18दक्षिण के पैसे होते द उसी को वह बचा के
6:21रखा करती है दिन गुजर रहे द एक दिन उसे
6:24बहुत बाहर आता है वह मंदिर नहीं जा पाती
6:26वो घर पर बिस्तर पर लेती हुई थी नीता मैन
6:30देवी लक्ष्मी के तस्वीर के सामने हाथ
6:32जोड़कर कहती है मैन लक्ष्मी मेरी मैन को
6:34बुखार आया है यहां पे कोई नहीं है देखभाल
6:37करने वाला मैं छोटी बच्ची हूं मुझे नहीं
6:40पता क्या करना चाहिए इसीलिए मेरी मैन आज
6:44मंदिर की सीढ़ियां साफ करने नहीं ए पाए आप
6:47नाराज मत होना मैप प्रार्थना के दौरान मैन
6:50लक्ष्मी वहां प्रकट हो जाती है और एक
6:53नौकरानी का भेष लेके वो अनामिका का सेवा
6:56करने लगती है अपनी शक्ति से वह अनामिका का
6:59बुखार गायब कर देती है अनामिका आंखे खोल
7:02के देखती है उसे लगता है की मैन लक्ष्मी
7:04खुद वहां पर आकर उसकी सेवा की है इसीलिए
7:07वह प्रार्थना में कहती है
7:10दीदी मैन मैंने आपके बारे में गलत सोचा था
7:13अपने यहां साबित कर दिया गरीब हूं यहां
7:16अमीर सब आपके लिए एक है बस हम आपको कैसे
7:18चाहते हैं ये बड़ी बात है मुझे क्षमा कर
7:21दीजिएगा मैन अपनी गलत शब्दों की वजह से वो
7:24देवी मैन से माफी मांगती है देवी मैन उसे
7:27सोने से भरा हुआ एक घड़ा देती है जिससे वो
7:29अपनी जीविका चला सके और फिर वहां से
7:31अदृश्य हो जाती है तब से अनामिका अपनी
7:34बेटी नीता का ख्याल रखती है और खुशी-खुशी
7:36जीवन बिताती है
7:40सूरज पश्चिम में अस्त हो रहा था अंधेरा
7:43धीरे-धीरे घर रहा था रमेश की बहन अंजलि
7:46अपना सेल फोन लेती है और छत पर चले जाती
7:48है छत पर खड़े होकर वह अपने भाई रमेश का
7:51घर लौटने का इंतजार कर रही थी ताकि जब
7:55रमेश घर लौटे तभी उसे गली के अंत से ही वह
7:58छत से देख लेगी वह नजर टिकाई हुई थी गली
8:02में की देखती है की रमेश गली के रास्ते से
8:05होकर घर की तरफ ए रहा है तभी वह भागते हुए
8:09अपनी मैन शारदा के पास हॉल में जाती है
8:15मैं जा रही हूं कपड़े सुखाने के लिए
8:24किचन में गर्भवती अनामिका थी जो रोते रोते
8:28खाना पका रही थी उसे देखकर शारदा निष्ठुर
8:31था के साथ कहने लगती है बहुत रोना धोना हो
8:34गया और बहुत खाना भी पका ली बहुरानी
8:37तुम्हारे पति मेरा बेटा घर लौट रहा आओ
8:40जाके सो जाओ और याद रखना हमेशा के तरह उसे
8:43देखकर मुस्कुराना कुछ मत कहना नहीं तो
8:48[संगीत]
8:49कम से कम दर के मारे ही तुम तो दायरे में
8:52रहोगी नहीं तो मेरा बेटा को अगर शक हुआ ना
8:55अपनी बड़ी-बड़ी आंखें करके शारदा से धमका
8:58के कहती है अनामिका उसे देखकर बहुत दर
9:01जाती है उनका वो भयानक चेहरा देखकर चुपचाप
9:04दर के मारे वो बेडरूम में जाके सो जाती है
9:06ठीक उसी वक्त रमेश घर लौट आता है घर लौट
9:11के पार्किंग करते-करते वो देखता है की
9:13उसकी बहन कपड़े सूखा रही है जैसे ही उसे
9:16लगा की भैया देख रहा है वो तुरंत अपने
9:18हाथों को दबाने लगी मानो की उसके हाथों
9:21में बहुत दर्द हो रहे हो रमेश देखता है पर
9:24बिना कुछ का वे वो घर के अंदर चला जाता है
9:26रमेश के हाथ में लंच बॉक्स था मा मा जब
9:33रमेश एक दो बार मामा चिल्लाता है शारदा
9:35अपना चेहरा लटकते हुए धीरे-धीरे अंदर से
9:38चलकर बाहर निकल आती है वह रमेश के हाथ से
9:41लंच बॉक्स लेती है और फिर अंदर चली जाती
9:44है शारदा को देखकर रमेश को लगता है की
9:47शायद वो बहुत ज्यादा थक गई हो
9:50बेचारी मेरी मैन दिन भर कम कर-कर के थक
9:53जाती है बहन के भी हाथों में दर्द हो रहे
9:55हैं सारे कपड़े धो कर सुखाने में एक
9:58नौकरानी रख लेता हूं थोड़े पैसे लगते हैं
10:00तो लगने दो यही सब सोचते सोचते वो बेडरूम
10:03में जाता है देखता हूं बिस्तर में लेती
10:06हुई है वो नाटक कर रही थी सोने का पर उसके
10:09आंखों में आंसू द जो रमेश ने गौर नहीं
10:11किया वो आकर कहने लगा अनामिका उठो अनामिका
10:15आज हमें 8:00 बजे तक चेकअप के लिए जाना है
10:18पता है ना मैंने ये बात मैन से का दिया था
10:20मैंने तुम्हें कहा की नहीं
10:23ने कहा था जी पर काफी वक्त था यह सोचकर
10:25मैं थोड़ा लेट गई ऐसे मैं 10 मिनट में
10:28रेडी होकर आता हूं तुम चेकअप के कागजात
10:31लेकर तैयार रहो ठीक है ना अच्छा ठीक है
10:34अनामिका को इस तरह से का के रमेश वॉशरूम
10:37की तरफ चला जाता है अनामिका डॉक्टर के
10:39कागजात लेके तैयार होके इंतजार कर रही
10:42होती है फिर 10 मिनट के बाद रमेश अनामिका
10:46को लेकर हॉल में आता है मैन और बहन को
10:48बताता है की वो अनामिका को चेकअप के लिए
10:50ले जा रहा है फिर बाइक पे बैठकें वह
10:52अस्पताल ले जाता है वहां चेकअप के बाद
10:55डॉक्टर कहते हैं मिस्टर रमेश अनामिका बहुत
10:58कमजोर है क्या वो खाना नहीं खा रही है फल
11:01नहीं दे रहे हैं दूध प्रोटीन लगता है यह
11:04सब कुछ भी नहीं ले रही है आपके घर के सास
11:07और ननद बहु रानी को कुछ खाने दे भी है या
11:11नहीं अगर ऐसा ही चलता रहा तो बच्चे और मैन
11:14दोनों के जान को बहुत ज्यादा खतरा हो सकता
11:17है डिलीवरी में मुश्किल होगी जब डॉक्टर इस
11:20तरह से गुस्से से का रहे द अनामिका कुछ का
11:24नहीं रही थी यह नहीं का रही थी की वह सब
11:26कुछ समय-समय पे लेती है अनामिका को जवाब
11:29ना देते देख रमेश इस बारे में सोचने लगता
11:32है तब रमेश को अपनी मैन और बहन पर थोड़ा
11:36शक होता है रमेश जानना चाहता था की आखिर
11:39में उसके पीठ पीछे होता क्या है घर में
11:40रमेश अनामिका को घर ले जाता है उसे खाना
11:44देता है दवाई देता है फिर अनामिका सोने
11:46चली जाती है फिर रमेश डाइनिंग टेबल पे आता
11:49है और अपनी मैन और बहन के साथ बैठकर खाना
11:51खाने लगता है मैन मैं आपको और अंजलि को एक
11:55अच्छी खबर सुनने वाला हूं जिसे सुनने के
11:58बाद आप दोनों खुशी के मारे मानो की उछाल
12:01पड़ेंगी मैं इस घर के लिए एक नौकरानी रखने
12:04वाला हूं आपकी बहु रानी आप अंजलि आप सभी
12:08को घर का कम करने में खाना पकाने में बहुत
12:10दिक्कत होती है इसीलिए मैं एक नौकरानी
12:13रखने वाला हूं यह सुनने की बात मैन बेटी
12:15मानो दोनों दर जाती है और उसे घूमने लगती
12:18है इस बात से कहने लगती है की पैसे
12:21नौकरानी पे क्यों खर्च करना ऐसे अनामिका
12:24की दवाइयां पर खर्च करें यह सुनकर रमेश का
12:26शक और बढ़ जाता है वो सच झूठ का पता लगाना
12:29चाहता था इसीलिए एक दिन वो ऑफिस जाने का
12:32नाम करता है पर ऑफिस नहीं जाता है पीछे के
12:34दीवार फैन के वो चुपके से घर के अंदर आके
12:37बेडरूम में बेड के नीचे सो जाता है ये बात
12:40सास और ननद को पता नहीं था वो अनामिका के
12:43कमरे में आती है और उसे दांत फटक लगाने
12:45लगती है लड़की जाके उठो और घर का सारा कम
12:48काजर खाना पकाओ जैसे मेरा बेटा आने लगे
12:51चुपचाप यहां सो जाना और एक बात याद है ना
12:55हमारे खाने पीने का समय ज्यादा अंजलि अभी
12:58गर्म गरम मुझे नाश्ता बना रहा होगा 12:00
13:02तक मुझे जूस बनाना होगा 2:00 बजे तक मुझे
13:05पकौड़ी डाल सब्जी चिकन फ्राइड सांबर ये सब
13:09कुछ बनाना होगा तुम लोगों के खाने के बाद
13:12पूछा कुछ खाना मैं खाऊंगी फिर बर्तन धो के
13:15कपड़े dhoungi उसके बाद फिर आगे मैं खाना
13:18बनाऊंगी ऐसा कहते-कहते अनामिका रोने लगती
13:21है वहां से शारदा और अंजलि चली जाती है
13:24बिस्तर के नीचे बैठे रमेश यह सब सुनकर
13:27उसकी आंखें भर आती है तुरंत वो बिस्तर के
13:29नीचे से निकल के अनामिका के पास आता है
13:31अनामिका रमेश को देखकर उसे पड़कर तब तक
13:34रोटी है जब तक उसका जी चाहता है अनामिका
13:37को लेकर रमेश हॉल में आता है बेटे को
13:40देखकर सात शारदा और अंजलि दोनों सर झुका
13:43लेती है
13:44तुम एक मैन हो कम से कम एक महिला होने के
13:47नाते तो तुम ऐसा नहीं करती अगर तुम्हारी
13:50बेटी घर में वती होती तो क्या तुम उसके
13:52साथ ऐसा कर पाती मैन मैं उसे महारानी जैसा
13:55देखभाल करती मतलब अनामिका भी तो किसी मैन
13:58की बेटी है ना वो किसका बच्चा अपने पेट
14:01में राखी है किसका कुल रोशन करेगी तुम ही
14:03बताओ मेरे ही पोते को गर्व में राखी है
14:06मेरे इस वंश को तुम बेटी को एक नजर से
14:10देखती हो और बहु को अलग नजर से तुम जैसी
14:12सासुमा जब तक घर पे रहोगी तब तक सब कुछ
14:15भगवान भरोसे ही है इसीलिए तो शादी के बाद
14:17लड़का अपना परिवार लेकर अलग हो जाता है
14:19भले मा कोसती है पर आखिरकार कारण तुम ही
14:22लोगों पता तुम्हें समझ में कब आएगा ई ई इस
14:25तरह से गुस्से से रमेश अपनी मैन और बहन से
14:28कहता है और एक तुम अंजलि तुम्हें भी कहना
14:32तो बेकरी है मैन के साथ रह रहे द तुम भी
14:35मैन की तरह ही हो गई हो कल दिन शादी के
14:37बाद जहां तुम जाओगी वहां तुम्हें भी एक
14:39ऐसी ननंद मिले क्या होगा अगर तुम इसके
14:41बारे में थोड़ा भी सोचती ना तो आज तुम
14:44अपनी भाभी के साथ ऐसा नहीं कर रही होती
14:45ऐसा का के रमेश अपनी पत्नी अनामिका को
14:48लेके उसे घर को छोड़ के अलग परिवार बसा
14:51लेता है वहां अपनी पत्नी का वो ख्याल रखता
14:54है खुशी खुशी जीवन बिताने लगता है