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0:06गुनाहों का शहर
0:09पपई 18वीं सदी ईसवी के एक साल में एक
0:13किसान इटली के एक बंजर वीरान इलाके में
0:15रहा करता था यहां पानी एक बड़ी नेमत का
0:19दर्जा रखता था एक दिन उस किसान ने बंजर
0:23जमीन में कुआ खोदने की ठानी किसान की तवील
0:27मशक्कत के बाद खोदे गए उस कुए से पा तो ना
0:30निकला लेकिन कुछ ऐसा बरामद हुआ जिसकी तलाश
0:34सदियों से जारी थी एक गुमशुदा शहर अपने
0:40दौर की शानदार बस्तियों में से एक उस शहर
0:44की तलाश माहरीन को 2000 सालों से थी यह
0:48शहर जिस कदर हैरत अंगेज है उसी तरह इसकी
0:51कहानी भी निहायत
0:53रतनाकर था पम पई
0:57[संगीत]
1:18पपाई एक कदीम रूमी शहर था जो मौजूदा मुल्क
1:22इटली के इलाके कंपनिया में नपोली के नजदीक
1:26वाक था यह शहर सातवीं सदी कबल मसी के
1:30दौरान आबाद हुआ मुख्तलिफ अद्वार में
1:33मुख्तलिफ कमों के जर नगीन रहने के बाद
1:36रोमन अंपायर के तसत में आया फिर इस शहर ने
1:40तरक्की की ऐसी मनाजिल तय की कि यह उस वक्त
1:43की दुनिया के अजीम तरीन शहरों में शुमार
1:46होने
1:47लगा पानी के तालाब क्लब बकरियां कुशा
1:51सड़कें वाटर सप्लाई की स्कीम लाइब्रेरी
1:55कम्युनिटी सेंटर अस्पताल घोड़े बांधने की
1:59के जदीद अस्तबल दो मंजिला मुकाना और
2:03मकानों के पीछे छोटे-छोटे लान और उनमें
2:06नसवार ने उस शहर को जन्नत बना दिया था यह
2:11दुनिया का पहला शहर था जिसमें जेबरा
2:14क्रॉसिंग शुरू हुई यहीं से क्रीम केक ईजाद
2:17हुआ और यहीं से इजतिमा गुसल खानों या हमा
2:20माम के तसव्वुर ने जन्म लिया था यह रोमन
2:24अंपायर के बड़े तिजार शहरों में से एक था
2:27लेकिन दौलत की फरावनी के बाद ता रफता इस
2:30शहर की पहचान तब्दील होने
2:33लगी इजतिमा गुसल खाने या इजतिमा हमाम
2:36बेहयाई के मराकर लगे चंद दिहा के बाद
2:40बेहयाई उस शहर का आम मिजाज बन गई अब इस
2:44शहर की पहचान जरी तिजार या सती शहर की ना
2:48रही बल्कि अब एक बड़े आजाद मुशे फ्री
2:52सोसाइटी का शहर बन गया किसी पाबंदी किसी
2:56रोक टोक हर किस्म के कानूनी और समाजी
2:59बंधनों से आजाद खुले आम जिनसी तालुकात इस
3:03शहर की खास पहचान बन गए यहां कारोबार था
3:07सिर्फ जिस्मों का और लज्ज तों
3:11का आपने लूत अल सलाम और उनकी कौम का वाकया
3:15जरूर सुन रखा होगा जब वह कोम हम चिंस
3:18परस्ती के लानत में मुब्तला हो गए तो उस
3:21पर पत्थरों की बरसात करके उन्हें
3:23नेस्तनाबूद कर दिया गया ऐसा ही कुछ मामला
3:27पपाई के साथ हुआ बंबई जिनसी सरगर्मी और
3:31गैर अखलाकी हरकतों में कहीं आगे निकल चुका
3:34था यहां औरतें औरतों से मर्द मर्दों से
3:39यहां तक के जानवरों के साथ जिंसी तालुकात
3:42बनाना आम हो गया था जिस्म फरोशी इस शहर का
3:46बुनियादी पैशा और मशत का अहम तरीन सतन बन
3:49चुका था सिर्फ औरतें ही नहीं बल्कि कई
3:53तंदुरुस्त मर भी उस काम में पेश पेश थे
3:56गुलामों के साथ-साथ आम शहरिया की एक बड़ी
3:59ता
4:00इस पैश से वाबस्ता थी आवाम के साथ-साथ शहर
4:04के
4:08अशराफुल
4:10कुबा खानों के मालिक थे या फिर जिस्म फरोश
4:14गुलामों की तिजारत में मुलस थे जो जिस्म
4:17फरोशी और गुनाहों की इस लानत में ज्यादा
4:19मुब्तला होता पपई शहर में वह उतनी ही
4:22ज्यादा अहमियत का हकदार था बड़े-बड़े रोमन
4:26अफसरों की बेगमा अजाना तालुकात की उस लानत
4:29में पड़ी थी उस पर शर्म तो दूर की बात है
4:33उसको फखर समझा जाता था उसके खंड राज से
4:36मिलने वाली तसा वर इस कदर बेहूदा और फश है
4:40कि लोग उन्हें देखकर अपने कानों को हाथ
4:43लगा लेते हैं पंपई की दीवारों पर लिखी गई
4:46गैर अखलाकी और गैर फिी शायरी की मिसाल
4:50माजी और मुस्तकबिल में कहीं नहीं
4:53मिलती माहरीन की तर्जुमा की गई इबार तों
4:56के मुताबिक दीवारों पर कुनिंदा तहरीर दरस
5:00उस कौम के चंद शायरों की शायरी है जो
5:03उन्होंने फितरत के उसूलों के खिलाफ अमल के
5:06हक में की थी दीवारों पर तहरीर दीगर फिक्र
5:09भी इंतहा शर्मनाक और इंसानियत सोच थे
5:13जिनसे पपई के वासियों के अखलाकी गिरावट और
5:16जिनसी रोजन की मनफी का अंदाजा होता है
5:20गर्ज आजाद जिनसी तालुकात के साथ-साथ
5:23मर्दों और औरतों की हम जिंस परस्ती की बद
5:27फलियों में हैवानियत की हदों से आगे गुज
5:29चुके
5:30थे एक आतिश विशा पहाड़ यानी माउंट वेसवे
5:34के दहाने पर वाक होने के बावजूद यह शहर हर
5:38किस्म के खतरों से बेनज अपनी रंग रंगील
5:40हों में मसरूफ था 79 ईसवी में उस कस्बे के
5:45करीब वाके वेस वेस आतिश विशा पहाड़ से
5:48लावा फूट
5:50पड़ा यह आतिश विशा इस कदर शिद्दत से फटा
5:53के आसमान में दूर दूर तक उसकी राख और
5:57पत्थर उड़ने लगे को कुछ ही देर में लाखों
6:00टन वजनी दहकती राख पपई शहर पर आ गिरी पपई
6:05शहर के 200 हज अफराद मौके पर हलाक हो गए
6:09तीन दिन तक य आतिश फशा आग और लावा उगलता
6:13रहा और उस शहर को सफाई हस्ती से मिटा दिया
6:17उस दौर का इंतहा तरकी याफ्ता शहर चार से 6
6:21मीटर 13 से 20 फुट राख के नीचे दफन हो
6:26गया लावे के ठंडा होने के बाद उस मकाम की
6:29तलाश नामुमकिन हो गई कि जहां यह शहरा आबाद
6:33था कई सदियों तक यह इलाका सिर्फ और सिर्फ
6:36राख का एक ढेर था 1748 ईसवी में एक दिन यह
6:42शहर हादसा की तौर पर दरयाफ्त हो गया खंड
6:45रात की खुदाई के माहरीन ने देखा कि उसके
6:48थिएटर खेल के मैदान मार्केट और स्विमिंग
6:52पूल्स जू की तू हालत में मौजूद थे यह अजाब
6:56उस शहर के मुकीन पर उस वक्त नाजिल हुआ जब
6:59उन की अक्त गुनाह आलोद सरगर्मियां में
7:01मुलस थी इस शहर की दरयाफ्त के बाद खुदाई
7:05की गई तो माहरीन आ असारे कदीमा यह देखकर
7:08हैरान रह गए कि लोग मुर्दा हालत में महफूज
7:12हैं और ऐसा लग रहा था जैसे कुदरत ने अखलाक
7:16बखत हरकतें करने वाली कौम को आने वाली
7:19दुनिया के लिए निशाने इबरत बना दिया हो जो
7:23शख्स जिस हालत में था उसी हालत में रह गया
7:27आज भी जब बंबई की बाकिया दरिया होती है तो
7:30वहां के रहने वालों की लाशें बे गोरो कफन
7:33उसी हाल में मिलती हैं जिसमें वह अपने
7:36आखिरी वक्त में मौजूद थे उनसे पता चलता है
7:40के बड़ी तादाद में लोग मर्द औरतें बद
7:43फेलियो में मसरूफ थे कई घरों में रोजमर्रा
7:47मामूला जिंदगी के आसार भी मिलते हैं जू के
7:50तू ऐसे रुके हैं जैसे किसी ने अचानक
7:53उन्हें साक कर दिया
7:56हो इस शहर का ज्यादातर हिस्सा दरयाफ्त कर
7:59लिया गया है खुदाई अभी जारी है पंपई की
8:03पुख्ता सड़क पर चलते हुए हर घर में मौजूद
8:06किचन बात और चश्मों को बा आसानी देखा जा
8:09सकता है उस शहर में साफ पानी के फरा हमी
8:13और नकासी आप से लेकर जिंदगी की हर आइश
8:16मौजूद थी यहां गए लोगों का शुमार उस खि के
8:20अमीर तरीन लोगों में हुआ करता था लेकिन
8:23अफसोस उन ना कदर ने अपने परवरदिगार की
8:26नेमतों का इंतहा गलत इस्तेमाल किया और
8:30आइंदा आने वाली कमों के लिए हमेशा हमेशा
8:34के लिए निशाने इबरत में तब्दील हो गए