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Complete Modern Indian History in 13 hours through Animation by Aadesh Singh | GS History | UPSC IAS

StudyIQ IAS · 109,765 words · 499 min read

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0:00[संगीत]

0:01स्टडी इक इस अब तैयारी हुई अफॉर्डेबल

0:06वेलकम तू स्टडी इक मेरा नाम है आदेश सिंह

0:10दोस्तों आज हम मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री की

0:13मैराथन वीडियो शुरू करने जा रहे हैं

0:15जिसमें आंटियों मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री के

0:18जीएस सिलेबस को कर किया जाएगा ये वीडियो

0:21तीन पार्ट्स में डिवाइड है सबसे पहले

0:24पार्टी में हम मेंस्ट्रीम इंडियन फ्रीडम

0:27स्ट्रगल को कर करेंगे उसके बाद पार्ट बी

0:30में ब्रिटिश गवर्नेंस सिस्टम को डिटेल में

0:32जानेंगे और पार्ट्स सी ने मेंस्ट्रीम

0:35फ्रीडम स्ट्रगल के साथ चलती कुछ

0:37इंपॉर्टेंट पैरेलल मूवमेंट की बात करेंगे

0:40तो आई शुरू करते हैं पार्टी यानी इंडियन

0:44फ्रीडम स्ट्रगल से

0:46एडवेंचर इन इंडिया

0:53आते हैं और अल्टीमेटली एक पॉलीटिकल पावर

0:56बनकर अपना अंपायर एस्टेब्लिश करते हैं

0:58लेकिन ब्रिटिश के अलावा और भी कुछ

1:01यूरोपियन कंपनी ट्रेड करने के लिए इंडिया

1:04आई हैं पर उनके बड़े में बात करने से पहले

1:06हम यह जानेंगे की ऐसी क्या कंडीशन थी की

1:10यूरोपीय कंपनी ने इंडिया का रुख किया

1:13वही डिड यूरोपियन कंपनी कम तू इंडिया

1:17दोस्तों असिएंट टाइम से ही इंडिया और

1:20यूरोप के अच्छे ट्रेड रिलेशंस थे इंडिया

1:23के कॉटन सिल्क टैक्सटाइल्स और स्पाइसेज की

1:26यूरोप की मार्केट में काफी हाय डिमांड

1:28रहती थी

1:29मिडिल एज में स्ट्रीट की एजेंट पार्ट को

1:32अब मरचेंट्स और मेडिटरेनियन और यूरोपीय

1:35पार्ट को इटालियन डील करते थे

1:38क्योंकि अभी तक वाला रूट डिस्कवर नहीं हुआ

1:41था तो ट्रेड कांस्टेंटिनॉपल यानी प्रेजेंट

1:45दे इस्तांबुल होकर किया जाता था लेकिन जब

1:48ओटोमन टर्म्स एशिया माइनर पर कंट्रोल

1:49एस्टेब्लिश करते हैं और 1453 में

1:52कांस्टेंटिनॉपल को कैप्चर कर लिया जाता है

1:54तब ईस्ट और वेस्ट के बीच के ओल्ड ट्रेड

1:58रूट भी इनके कंट्रोल में ए जाते हैं उसके

2:01अलावा वेनिस और जेनोवा के मर्चेंट

2:03कांस्टेंटिनॉपल के पास लोकेटेड होने का

2:05फायदा उठाकर यूरोप और एशिया के बीच ट्रेड

2:08पर अपनी मोनोपोली एस्टेब्लिश कर लेते हैं

2:10और वो किसी नए यूरोपियन नेशन स्टेट को

2:13इसमें शेर नहीं देना चाहते थे नतीजतन

2:16वेस्ट यूरोपीय स्टेटस और मरचेंट्स नए और

2:19सिर्फ ट्रेड रूट को सर्च करते हैं

2:33इसमें सबसे पहले स्टेप्स लेने वाले थे

2:35पुर्तगाल और स्पेन यहां की गवर्नमेंट

2:38मरचेंट्स की सी वॉयस को स्पॉन्सर करती हैं

2:41साथ ही साइंटिफिक डिस्कवरी जैसे की

2:44मरीनारा कंपास और लॉन्ग डिस्टेंस शिप का

2:47इन्वेंशन भी इसमें हेल्प करता है इन्हें

2:50अवार्ड की वजह से 1492 में स्पेन के

2:53क्रिस्टोफर कोलंबस बॉयज पर निकलते हैं पर

2:56वो इंडिया पहुंचने की जगह अमेरिका पहुंच

2:58जाते हैं फाइनली 1498 में पॉसिबल के

3:03वास्को डा गम यूरोप से इंडिया पहुंचने के

3:05लिए एक नए सी रूठ गायब कैप ऑफ गुड होप की

3:09डिस्कवरी करते हैं तो चलिए डिटेल में

3:11जानते हैं इनके बड़े में

3:15पहुंच चुकी

3:1998 को साउथ वेस्ट इंडिया के एक इंपॉर्टेंट

3:23कालीकट पहुंच

3:27थे उनका स्वागत करते हैं और ट्रेड को

3:31प्रमोट करने के लिए उन्हें कुछ प्रिविलेज

3:33भी ग्रैंड करते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि

3:36ट्रेड लवी लोकल रोलर के लिए इनकम का एक

3:40इंपॉर्टेंट सॉस था इंडिया में 3 महीने

3:42रहने के बाद वास्को डा गम एक रिच कार्गो

3:45के साथ यूरोप वापस लोट जाते हैं इस कार्गो

3:49को वो यूरोप की मार्केट में बहुत हाय रेट

3:51पर सेल करते हैं कहा जाता है की उनकी पुरी

3:54यात्रा की कॉस्ट का 60 टाइम्स रिटर्न

3:57उन्हें मिलता है सेल से वास्को डा गम 1501

4:01एड में फिर से इंडिया

4:04फैक्ट्री सेटअप करते हैं यहां से इंडिया

4:07और पुर्तगाल के बीच ट्रेड लिंक की शुरुआत

4:10होती है

4:11और कालीकट

4:15ट्रेडिंग सेंटर्स बनकर उभरते हैं

4:18पुर्तगीज की बढ़नी हुई पावर्स और उनकी

4:21अनफेयर ट्रेड डिमांड्स जैसे की अरब सी में

4:24मोनोपोली की कोशिश उनके और लोकल रोलर

4:27जमोरेन के बीच हॉस्टल डेज बड़ा देती हैं

4:30पुर्तगीज ट्रेडर्स डिमांड रखते हैं की

4:32जानवरोनिन अपने एरिया में से मुस्लिम

4:34ट्रेडर्स को बाहर कर दें जमोरेन उनकी

4:37डिमांड को नहीं मानते और दोनों के बीच इसी

4:41बात को लेकर एक मिलिट्री फेस ऑफ होता है

4:43जिसमें जमीरन हर जाते हैं और पुर्तगीज के

4:47मिलिट्री सुपीरियर एस्टेब्लिश हो जाति है

4:49इसके बाद से पुर्तगीज पावर का राइस होना

4:51शुरू होता है आई जानते हैं कैसे

4:54राइस ऑफ पुर्तगीज पावर इन इंडिया

5:03आते हैं इनकी पॉलिसी थी इंडियन ओसियन पर

5:07अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश करना इसलिए इनकी

5:09पॉलिसी को ब्लू वाटर पॉलिसी भी बोला जाता

5:12है

5:18बिल्कुल ट्रेड लाइसेंस या पास होता था जो

5:21पुर्तगीज कंपनी से बाकी सभी इंडियन और

5:23एशिया ट्रेडर्स को इंडियन ओसियन में ट्रेड

5:26करने के लिए लेना होता था साथ ही लंबे रूट

5:29के शिप जो पुर्तगीज के कंट्रोल किया हुए

5:32पोर्ट्स पर रुकते हुए स्ट्रेट ऑफ मलका की

5:34तरफ जाते थे उन्हें भी ये कार्टेज लेना

5:36होता था जिनके पास ये पास नहीं होता था

5:39उनकी शिप और कार्गो को पुर्तगीज अपने

5:42कब्जे में ले लेते थे इसे इंप्लीमेंट करने

5:45के लिए पहुंचोगी अपने मिलिट्री शिप और

5:48कैनंस को ट्रेडिंग शिप के साथ रखते थे

5:5215980 में अलमेडा को रिप्लेस करके

5:55अल्फाजों अल्बाकर की गवर्नर बनते हैं यह

5:591580 में बीजापुर के सुल्तान से गोवा को

6:02कैप्चर करते हैं इनको ही इंडिया में

6:04पुर्तगीज पावर का रियल फाउंडर बोला जाता

6:07है

6:11और कालीकट बनवेट हैं

6:15इनके बाद गवर्नर बनते हैं

6:20इंडियन कैपिटल को कोचीन से गोवा शिफ्ट

6:24करते हैं

6:28और वैसे अखबार कर लेते हैं और 1559 एड में

6:33दमन को भी

6:35पुर्तगीज का पोस्ट एरियाज पर कंट्रोल और

6:38उनकी सुपीरियर लेवल पावर उनको बहुत हेल्प

6:40करती है और 16 सेंचुरी का और होते होते

6:43पुर्तगीज एन केवल गोवा दमन दिउ और सेल सेट

6:48पर कैप्चर कर लेते हैं बल्कि इंडियन कास्ट

6:50के अलोंग एक बड़े एरिया पर उनका कंट्रोल

6:53होता है लेकिन फिर 16th सेंचुरी के बाद से

6:56इनकी पावर का डिक्लिन शुरू होता है

6:591631 में पहुंच चुकी इस मुगल एंपरर

7:02शाहजहां के नोबल कासिम खान के हाथों हुगली

7:05को देते हैं

7:06फिर 1661 में पुर्तगाल के किंग बॉम्बे

7:10डोरी के रूप में इंग्लैंड के चार्ल्स डी

7:12सेकंड को दे देते हैं

7:16और वैसे मराठा जीत लेते हैं इस तरह

7:20पुर्तगीज की पावर काफी कम र जाति है लेकिन

7:23इसके बाद भी गोवा डू और दमन पर 1961 तक

7:28इनका कंट्रोल बना राहत है

7:39फेमस जैसी फ्रांसिस्को जेवियर पुर्तगीज

7:43गवर्नर सजा के साथ 1542 में इंडिया आते

7:47हैं इन्हें आज भी इंडिया की कैथोलिक

7:50क्रिश्चियन बहुत मानते हैं

7:52तंबाकू टोमेटो पोटैटो और चिलीज का

7:56कल्टीवेशन भी पहुंचोगी इसने ही इंडिया में

7:58इंट्रोड्यूस किया था

8:001556 एड में इन्होंने इंडिया का फर्स्ट

8:03प्रिंटिंग प्रेस एस्टेब्लिश किया था गोवा

8:05में दोस्तों ये तो बात हुई इंडिया में

8:08ट्रेड करने के लिए आने वाली फर्स्ट

8:09यूरोपीय पावर की आई अब जानते हैं इनको

8:13फॉलो करने वाली नेक्स्ट ट्रेडिंग कंपनी

8:15यानी की डक के बड़े में

8:21देश में रहने वाले लोगों को डक कहा जाता

8:24है

8:33है इस कंपनी को 21 सालों तक इंडिया और

8:37ईस्ट के देश के साथ ट्रेड इनवेजन और

8:39कॉक्वेस्ट करने का राइट भी पार्लियामेंट

8:42ने दिया था यह इंडिया में आकर पुर्तगीज की

8:45मोनोपोली को खत्म करते हैं डक अपनी पहले

8:47फैक्ट्री 165 में आंध्र प्रदेश के

8:51मसूलिपटनम में बनाते हैं उसके बाद और भी

8:54जगह अपनी फैक्टरीज को एस्टेब्लिश करते हैं

8:56जैसे की 1610 में पुलीकट 16-16 में सूरत

9:021653 में चिनसुरा 1659 में पटना बालेश्वर

9:07नागपट्टनम कराईकाल कासिम बाजार और 1663

9:11में कोचिंग में इनका हेड क्वार्टर

9:14तमिलनाडु के पुलीकट में था

9:1717th सेंचुरी में इंडिया से होने वाले

9:20स्पाइस यानी मसाले के व्यापार पर डक अपनी

9:23मोनोपोली एस्टेब्लिश करने में कामयाब होते

9:25हैं इसके अलावा कॉटन टैक्सटाइल्स इंडिगो

9:28सिल्क ओपियो में सत्र का भी एक्सपोर्ट टच

9:31इंडिया से करते थे इंग्लिश कंपनी

9:35शुरू हो जाता है

9:45जिसमें डक को हर का सामना करना पड़ता है

9:48इस बैटल को बैटल ऑफ चिंचूड़ा या बैटल ऑफ

9:52हुगली भी कहा जाता है

9:54फाइनली डच ईस्ट इंडिया कंपनी को 1798 में

9:58लिक्विड कर दिया जाता है दोस्तों बात करते

10:01हैं सबसे ज्यादा सफल ट्रेडिंग कंपनी की

10:04यानी की इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी की

10:09अराइवल ऑफ इंग्लिश इंडिया कंपनी

10:13पुर्तगीज और डक ट्रेडर्स की सक्सेस से

10:16इंप्रेस होकर इंग्लैंड के मरचेंट्स के

10:18मर्चेंट एडवेंचर्स नाम के ग्रुप में 1599

10:22में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी को

10:24एस्टेब्लिश किया था कंपनी का पूरा नाम डी

10:28गवर्नर और कंपनी ऑफ मर्चेंट ऑफ ट्रेडिंग

10:30इन तू डी ईस्ट इंडीज था 31 दिसंबर 1600 को

10:34इंग्लैंड की क्वीन एलिजाबेथ डी फर्स्ट 15

10:37सालों के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी को पूर्वी

10:40ट्रेड का चार्ट ब्रांड करती हैं जिसका

10:42मतलब यह था की इस कंपनी को ईस्ट के साथ

10:45ट्रेड करने की मोनोपोली होगी इंग्लैंड से

10:48और कोई भी कंपनी यहां ट्रेड नहीं

10:53कैप्टन विलियम हॉकिंस को मुगल एंपरर

10:56जहांगीर के दरबार में भेजती है उनका मकसद

10:59जहांगीर से रॉयल फरमान हासिल करना था

11:02जिससे वो सूरत में अपनी ट्रेडिंग फैक्ट्री

11:13जहांगीर के कोर्ट से वापस जाना पड़ता है

11:16अंग्रेज समझ जाते हैं की पुर्तगीज के रहते

11:19उनका ट्रेड करना मुश्किल है इसलिए 1600

11:23लेवल में सूरत के पास वाली होल में एक

11:26लेवल बैटल में पहुंचेगी इसको अंग्रेज हर

11:28देते हैं इससे जहांगीर को भी अंग्रेजन की

11:32पावर का यकीन हो जाता है और फिर

11:351613 में जहांगीर उन्हें इंडिया के वेस्ट

11:38कास्ट पर फैक्ट्री एस्टेब्लिश करने की

11:40परमिशन भी दे देते हैं तब अंग्रेज

11:431613 में सूरत में अपनी पहले फैक्ट्री

11:46एस्टेब्लिश करते हैं

12:01और वो कंपनी को रॉयल चार्ट ग्रैंड करते

12:04हैं जिससे कंपनी को मुगल टेरिटरी में

12:07कहानी भी व्यापार करने और फैक्ट्री

12:09एस्टेब्लिश करने की आजादी मिल जाति है

12:11इसके बाद कंपनी इंडिया में अलग-अलग जगह

12:14फैक्टरीज एस्टेब्लिश करती है जैसे की

12:17मसूलिपटनम आगरा अहमदाबाद उड़ीसा के

12:21बालेश्वर और हरिहरपुर ईटीसी

12:241639 में कंपनी को मद्रास की लेज मिलती है

12:27और यहां फोर्ट सनहोजे बनाया जाता है

12:31और 1668 में कंपनी को चार्ल्स डी सेकंड से

12:35बॉम्बे लेज पर मिल जाता है जो चार्ल्स डी

12:38सेकंड को पुर्तगीज डोरी में मिला था जैसा

12:41की हम पहले देख चुके हैं

12:421698 99 में बंगाल के सूबेदार आजम और शान

12:47की परमिशन से सिर्फ ₹1200 देने पर कंपनी

12:50को

12:51सुतानती गोविंदपुर और कलिकता की जमींदारी

12:54मिल जाति है यहां पर ही 1700 में फोर्ट

12:58विलियम की स्थापना होती है इसके बाद 1771

13:02में मुगल एंपरर फारुख सियार फरमान जारी

13:05करके कंपनी को और भी ज्यादा राइट्स दे

13:08देते हैं जैसे की उन्हें सिर्फ ₹3000

13:11वार्षिक कर के बदले में बंगाल में ड्यूटी

13:13फ्री व्यापार करने का अधिकार मिलता है

13:16कोलकाता के आसपास की जमीन खरीदने की

13:18परमिशन भी दी जाति है इसके अलावा कंपनी

13:21द्वारा मुंबई में इशू किया गए कोइंस को

13:23पूरे मुगल राज्य में चलने की अनुमति भी

13:26मिलती है इसलिए इस फरमान को कंपनी का

13:29मैग्ना भी कहते हैं

13:31इसके बाद कंपनी की पावर बढ़नी ही जाति है

13:33और फाइनली पहले बार बंगाल में कंपनी अपने

13:37अंपायर की शुरुआत करती है जिसके बड़े में

13:39हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में डिटेल से

13:42डिस्कस करेंगे अब चलते हैं अगली यूरोपीय

13:45कंपनी की तरफ

13:50डेनमार्क की ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना

13:531616 में हुई थी इस कंपनी ने 16-20 में

13:57तमिलनाडु के ट्रक व्यापार और 1676 में

14:00बंगाल के सिरमपुर में अपनी

14:02फैक्टरीस्टैब्लिश की थी सेरंपोर इनका

14:05इंर्पोटेंस सेंटर और हैडक्वाटर था लेकिन

14:08ये खुद को इंडिया में ज्यादा स्ट्रांग

14:10नहीं बना पे और 1845 में अपनी सभी

14:13सेटलमेंट ब्रिटिश कंपनी को बेचकर यहां से

14:15चले गए दोस्तों अब बात करते हैं इंडिया

14:18में सबसे लास्ट में आने वाली यूरोपियन

14:21कंपनी की

14:24फ्रेंच

14:26ईस्ट इंडिया कंपनी

14:32के द्वारा फॉर्म किया गया

14:39सूरत में अपनी पहले फैक्ट्री एस्टेब्लिश

14:42करती है उसके बाद 1669 में गोलकुंडा के

14:45सुल्तान से परमिशन लेकर यह अपनी दूसरी

14:48फैक्ट्री

14:58नाम का एक गांव प्राप्त किया

15:01जो बाद में पांडिचेरी के नाम से फेमस हुआ

15:051692 में बंगाल के मुगल सूबेदार शाइस्ता

15:09खान की अनुमति से फ्रेंच कंपनी ने

15:11चंद्रनगर में फैक्ट्री की स्थापना की उसके

15:15बाद फ्रेंच 1724 में मालाबार में माही को

15:19कैप्चर कर लेते हैं और 1739 में तमिलनाडु

15:23में कराईकाल को

15:251724 में ही फ्रेंच गवर्नर डुप्लेक्स

15:28इंडिया आते हैं और उनके साथ ही शुरुआत

15:30होती है कहानी एंग्लो फ्रेंच वर्स की

15:33जिन्हें कार्नेटिक वज भी कहते हैं

15:35कार्नेटिक वज इंग्लिश और फ्रेंच कंपनी के

15:39बीच हुए थे जिनके बड़े में हम अलग वीडियो

15:41में डिटेल से चर्चा करेंगे

15:44कंक्लुजन

15:47तो दोस्तों हमने देखा की कैसे इंडिया और

15:50यूरोप के बीच होने वाले ट्रेड का फायदा

15:52उठाने के लिए अलग-अलग यूरोपियन कंपनी

15:55इंडिया आई हैं

16:00जैसे की मोनोपोली फोर्स का इस्तेमाल नेवी

16:03का उसे करने में भी पीछे नहीं रहती इन सभी

16:06कंपनी के बीच आपस में पावर के लिए स्ट्रगल

16:09चला है जिसमें फाइनली इंग्लिश कंपनी को

16:12सक्सेस मिलती है इंग्लिश ईस्ट इंडिया

16:14कंपनी कैसे एक ट्रेडिंग कंपनी से शुरू

16:16होकर इंडिया में अपना अंपायर खड़ा करती है

16:19यह हम अपनी आने वाली वीडियो में देखेंगे

16:23राइस ऑफ रीजनल पावर्स आफ्टर मुग़ल दोस्तों

16:27पिछले वीडियो में हमने देखा की कैसे डी

16:31माटी मुगल अंपायर का डिक्लिन हुआ हमने

16:34देखा की किस तरह औरंगज़ेब के री के दौरान

16:36डिक्लिन स्टार्ट हुआ और इन कंबटेंट सक्सेस

16:40के करण ये अंपायर पुरी तरह से खत्म हो गया

16:43लोकल और रीजनल पॉलीटिकल फोर्सेस हुआ और

16:47उन्होंने खुद को असर्ट करना शुरू कर दिया

16:50यानी लेट 17थ सेंचुरी में ही पॉलिटिक्स

16:53में मेजर चेंज देखने को मिले 18थ सेंचुरी

16:56के दौरान कई इंडिपेंडेंस और सेमी

16:59इंडिपेंडेंस पावर्स का राइस हुआ जैसे

17:01बंगाल अवध हैदराबाद मैसूर और मराठा

17:04किंग्डम्स यही वो पावर्स थी जिन्होंने

17:08मुगल अंपायर की डिक्लिन के बाद पॉलीटिकल

17:10किया और इन्हीं पावर्स का सामना करके

17:14ब्रिटिश को इंडिया में अपनी सुप्रीमेसी

17:16सेटअप कुर्मी थी दोस्तों आज हम इन्हीं

17:19रीजनल पावर्स के बड़े में डिस्कस करेंगे

17:21जो मुगल अंपायर के बाद राइस हुई

17:26क्लासिफिकेशन से और देखते हैं इन स्टेटस

17:29के फीचर्स क्या थे

17:30क्लासिफिकेशन ऑफ स्टेटस

17:33मुगल अंपायर की डिक्लिन होते ही जो रीजनल

17:36पावर उभरकर आएं उनको तीन कैटिगरीज में

17:39डिवाइड किया जा सकता है पहले सक्सेशन

17:42स्टेटस यानी ऐसे स्टेटस जहां की मुगल

17:45प्रोविंस के गवर्नर में असर्ट करना शुरू

17:48किया जैसे बंगाल अवध और हैदराबाद दूसरी

17:52न्यू स्टेटस यानी ऐसी स्टेटस जहां पे

17:56रिबेलीयन के चलते लोकल चीफ़्टंस जमींदारा

17:59और पेज्जंस ने अपना स्टेट सेटअप किया जैसे

18:02मराठा अफगान जाट और पंजाब और तीसरी

18:07इंडिपेंडेंस स्टेटस यानी ऐसे स्टेटस जहां

18:10मुगल इन्फ्लुएंस का बिल्कुल भी पेनिट्रेशन

18:13नहीं था और मुगल अंपायर की डिश स्टेबलाइजर

18:16होते ही इन स्टेटस ने ऑटोनॉमी अनाउंस कर

18:18दी इसमें मेली साउथ वेस्ट और साउथ ईस्ट

18:21कास्ट और नॉर्थ ईस्ट इंडिया के स्टेटस

18:24इंक्लूड थे जैसे मैसूर केरला राजपूत होम्स

18:29शुरू करते हैं हैदराबाद और कर्नाटक स्टेट

18:32के डिस्कशन से

18:34हैदराबाद और डी कर्नाटक हैदराबाद स्टेट को

18:37निजामुद्दीन

18:401724 में एस्टेब्लिश किया उनको क्लीक खान

18:44के नाम से भी जाना जाता है निजामुद्दीन

18:46औरंगज़ेब के एरा के बाद के लीडिंग नोबल्स

18:49में से एक थे

18:5017-20 में उनको डेक्कन की वायसरॉयल भी

18:54मिली

18:541720 से 1722 के बीच उन्होंने 22 रॉयल्टी

18:59के सभी दावेदारों को डिफीट किया

19:021722 से 1724 के बीच वो मुगल अंपायर के

19:06वजीर थे

19:07एंपरर मोहम्मद शाह की इन कैपेसिटी से

19:10फ्रस्ट्रेटेड होकर उन्होंने डेक्कन में

19:12वापस लौट का फैसला किया जहां वो अपनी

19:15सुप्रीमेसी मेंटेन कर सकते थे यही पर

19:18उन्होंने हैदराबाद स्टेट का फाउंडेशन रखा

19:20उन्होंने कभी भी अपनी इंडिपेंडेंस को

19:23ओपनली अनाउंस नहीं किया लेकिन प्रैक्टिस

19:26में वह एक इंडिपेंडेंस रोलर की तरह ही रूल

19:29करते रहे उन्होंने हिंदू की तरफ टोलरेंट

19:32पॉलिसी को अपनाया एग्जांपल के तोर पर

19:34उन्होंने एक हिंदू पुरानचंद को अपना दीवान

19:37बनाया उन्होंने मुगल पैटर्न पर जागीरदार

19:41सिस्टम को इंप्लीमेंट करके डेक्कन में एक

19:44ऑर्डरली एडमिनिस्ट्रेशन को एस्टेब्लिश

19:46किया और अपनी पावर को कंसोलिडेटेड किया

19:49इसी के साथ उन्होंने पावरफुल मराठस को भी

19:53अपने डोमिनियन से बाहर ही रखा

19:551748 में निजामुल मुल्क की डेथ के बाद

19:58हैदराबाद फिर से डिसइंटीग्रेट हो गया

20:01कर्नाटक की बात करें तो ये रीजन मुग़ल का

20:05एक सुबह था और हैदराबाद के निजाम की

20:07अथॉरिटी के अंदर आता था कर्नाटक रीजन आज

20:11के तमिलनाडु और सदन आंध्र प्रदेश में

20:13पूर्वी घाट और बे का बंगाल के बीच का

20:16पेनिनसुलर रीजन था जी तरह निजाम ने खुद को

20:19दिल्ली से अलग किया वैसे ही कर्नाटक की

20:22डिप्टी गवर्नर ने खुद को डेक्कन के

20:24इन्फ्लुएंस से इंडिपेंडेंस कर दिया जिसके

20:27चलते वह नवाब कर्नाटक कहे जान लगे और ये

20:31ऑफिस भी

20:34कर्नाटक की पहले नवाब बने और उन्होंने

20:37बिना निजाम की परमिशन के 1732 में अपने

20:41नेफ्यू दोस्त अली को अपना सक्सेसर अनाउंस

20:44कर दिया

20:47इंटरनल स्ट्रगलर होने लगी जिसका फायदा

20:50यूरोपियन ट्रेडिंग कंपनी ने उठाया और अब

20:54वो इंटरनल पॉलिटिक्स में डायरेक्टली

20:56इंटरफेयर करने लगे अब आगे बढ़ते हैं और

20:59देखते हैं बंगाल के राइस के बड़े में

21:02बंगाल

21:03सेंट्रल अथॉरिटी की वीकनेस की चलते

21:06एक्सेप्शनल एबिलिटी के दो लोगों ने बंगाल

21:09को एक विरुअली इंडिपेंडेंस स्टेट बना दिया

21:11और ये दो लोग थे मुर्शीद कोली खान और अली

21:15वर्दी खान

21:171717 में मुर्शीद काली खान बंगाल के

21:21गवर्नर बने उन्होंने बंगाल को इंटरनल और

21:24एक्सटर्नल डेंजरस से फ्री करके शांति की

21:26स्थापना की बंगाल को जमींदारा के द्वारा

21:29होने वाली एप्प्राइजिंग से फ्री कर दिया

21:37सर बनाया गया

22:03मुर्शीद कुली खान ने बंगाल में रिवेन्यू

22:06फार्मिंग के सिस्टम को इंट्रोड्यूस किया

22:08दोस्तों रिवेन्यू फार्मिंग एक रिवेन्यू

22:10कलेक्शन का तरीका था जिसमें स्टेट

22:14रिवेन्यू ऑफिशल प्रेजेंस से रिवेन्यू

22:16कलेक्ट करता था और एक फिक्स्ड अमाउंट

22:18स्टेट को देता था खान ने लोकल जमींदारा और

22:22मर्चेंट बैंकर्स से रिवेन्यू फार्मर्स को

22:24रिक्रूट किया उन्होंने डिस्ट्रेस में जी

22:26रहे पुर कल्टीवेटर के लिए एग्रीकल्चर लोन

22:29का प्रोविजन भी रखा जिसको टिकावी कहा जाता

22:33था

22:34मुर्शीद खान और उनकी सक्सेस ने हिंदू और

22:37मुस्लिम दोनों को ही एंप्लॉयमेंट की इक्वल

22:39ऑपच्यरुनिटीज दी हाईएस्ट सिविल और

22:42मिलिट्री पोस्ट को बंगाली से फाइल किया

22:45गया

22:47इंग्लिश और फ्रेंच को कोलकाता और चंद्रनगर

22:51की फैक्टरीज को 45 करने की परमिशन नहीं दी

22:54लेकिन बंगाल के

22:56साबित हुए उन्होंने इंग्लिश ईस्ट इंडिया

22:59कंपनी की बढ़नी टेंडेंसी को इफेक्टिवली और

23:02नहीं किया

23:11अंडरस्टीमेट किया जिसका उन्हें भारी

23:14नुकसान उठाना पड़ा

23:16175657 में अली वर्दी के सक्सेसर

23:19सिराजुद्दौला पर जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने

23:22वार डिक्लेअर किया तब एक स्ट्रांग आर्मी

23:25की अब्सेंस के चलते ब्रिटिशर्स की

23:27विक्ट्री हुई

23:29अब देखते हैं अवध स्टेट के बड़े में

23:31अवध अवध की इंडिपेंडेंस प्रिंसिपल एट के

23:35फाउंडर थे सादात खान बरहन अल मुल्क जिनको

23:391722 में अवध का गवर्नर बनाया गया था उनके

23:43अपॉइंटमेंट के दौरान अवध प्रोविंस में कई

23:46जमींदारा ने रिबेलीयन कर दिया था कई सालों

23:49तक सादात खान को उनसे वार करना पड़ा

23:52फाइनली और बड़ी जमींदारा को सरप्राइज करने

23:55में वो सक्सेसफुल रहे 1723 में उन्होंने

23:59एक नया रिवेन्यू सेटलमेंट किया उन्होंने

24:02रिवेन्यू को इंट्रोड्यूस करके प्रेजेंस की

24:06कंडीशन में सुधार किया इसी के साथ

24:08उन्होंने पैसों को बड़े जमींदारा की

24:10ऑपरेशन से भी प्रोटेक्शन प्रोवाइड की

24:12बंगाल नवाब की तरह

24:27उनके नेफ्यू सफदरजंग ने फिर उनको सकसीड

24:30किया

24:32सफदरजंग को 1748 में मुगल अंपायर का वजीर

24:36बनाया और उनको इलाहाबाद का प्रोविंस भी

24:39ग्रैंड किया गया

24:401754 में उनकी डेथ हुई अपनी डेथ की पहले

24:44उन्होंने अवध और इलाहाबाद में पीस

24:46इस्टैबलिश्ड किया उन्होंने मराठा सरदार से

24:50भी एलियंस किया जिससे मराठा इन कर्जन से

24:52बच्चा जा सके राजपूत चीफ़्टंस की लॉयल्टी

24:55भी उन्होंने हासिल की

24:57सफदरजंग ने एक एक्विटेबल जस्टिस सिस्टम को

25:00भी एस्टेब्लिश किया आगे बढ़ते हैं और

25:03देखते हैं मैसूर स्टेट के बड़े में मैसूर

25:06दोस्तों साउथ इंडिया में हैदराबाद के

25:09अलावा एक और इंपॉर्टेंट पावर यानी मैसूर

25:12का राइस हैदर अली के अंदर 18 सेंचुरी में

25:15हुआ

25:16विजयनगर अंपायर के और होने के बाद से ही

25:19मैसूर स्टेट ने अपना इंडिपेंडेंस बनाए रखा

25:22मुगल अंपायर का वह सिर्फ नॉमिनल पार्ट था

25:251721 में पैदा हुए हैदर अली ने अपने करियर

25:29की शुरुआत मैसूर आर्मी में एक छोटे से

25:32अवसर के रूप में की वो एक ब्रिलियंट

25:34कमांडर थे उन्होंने वेस्टर्न मिलिट्री

25:36ट्रेनिंग की इंर्पोटेंस को समझा और इसे

25:39अपने ट्रूप्स में लागू किया मैसूर के रोलर

25:42नाजराज को उन्होंने 1761 में ओवरथ्रो कर

25:45दिया और अपनी अथॉरिटी एस्टेब्लिश की

25:48मंजू राज वोदिया डायनेस्टी से बिलॉन्ग

25:51करते थे सभी रिबेल्स को उन्होंने कंट्रोल

25:53में किया और जल्द ही विद्नूर सुंडा शेर

25:57कनाडा और मालाबार को कैप्चर किया

26:00उन्होंने भी रिलिजियस टोलरेंस की पॉलिसी

26:03को अपनाया वो लगातार मराठा सरदार निजाम और

26:06ब्रिटिश के साथ वार में इंगेज्ड रहे

26:091782 में उनकी डेथ हुई और उनकी बेटे टीपू

26:13सुल्तान ने उनको सकसीड किया टीपू सुल्तान

26:15ने नए कैलेंडर कॉइन सिस्टम और वीड्स और

26:19मेजर के स्किल को भी इंट्रोड्यूस किया

26:23इस्तेमाल किया जाता था जो की यूरोपियन

26:26फैशन में बनाए जाते थे और मैसूर में ही

26:29मैन्युफैक्चरर किया जाते थे

26:311796 में उन्होंने एक मॉडल नेवी को बनाने

26:35का भी एफर्ट किया

26:39मैसूर वार में उनकी डेथ हो गई

26:42है अब बढ़ते हैं केरल की तरफ केरला

26:4618th सेंचुरी की शुरुआत में केरला बड़े

26:49नंबर ऑफ फैऊदल चिप्स और राजस में डिवाइडेड

26:52था किंग मार्तंड वर्मा ने त्रवंकोर किंगडम

26:56को 1729 के बाद इस एस्टेब्लिश किया उनके

27:00अंपायर की बाउंड्रीज कन्याकुमारी से

27:02कोचिंग तक एक स्टैंड करती थी उन्होंने

27:04वेस्टर्न मॉडल पर बेस्ड एक स्ट्रांग आर्मी

27:07ऑर्गेनाइजर की और मॉडर्न वेपंस का उसे

27:09किया उन्होंने कई इरिगेशन वर्क करवाएं

27:12रोड्स बनवाएं और कम्युनिकेशन के लिए कनाल

27:15बनवाई यहां तक

27:20सेंचुरी में मलयालम लिटरेचर का रिमरकेबल

27:23रिवाइवल देखने को मिला यह रिवाइवल केरला

27:26के राजा और के के करण हुआ

27:35की कैपिटल थी संस्कृत स्कॉलरशिप के एक

27:39फेमस सेंटर के रूप में उभर कर आया

27:42मार्तंड वर्मा को राम वर्मा ने सकसीड किया

27:45और दोनों ने मिलकर त्रवंकोर किंगडम में

27:48लंबे समय तक पीस और प्रोग्रेसिव माहौल

27:51बनाए रखा दोस्तों बात करते हैं दिल्ली के

27:54आसपास के एरियाज के बड़े में और देखते हैं

27:57मुगल अंपायर की डिक्लिन के बाद इनमें क्या

27:59डेवलपमेंट हुए सबसे पहले बात करेगी राजपूत

28:02की

28:04राजपूत

28:06दोस्तों मुगल अंपायर की बढ़नी वीकनेस के

28:09चलते राजपूत स्टेटस ने भी अपने आप को

28:12वर्चुअल फ्री करने की कोशिश की और साथ ही

28:15बाकी के अंपायर में अपने इन्फ्लुएंस को

28:18बढ़ाने की भी कोशिश की राजपूताना स्टेज

28:20अभी भी आपस में डिवाइडेड थे लगभग सभी बड़े

28:24राजपूत स्टेटस के बीच सिविल वर्स होते ही

28:27रहते थे मुगल कोर्ट की तरह यहां भी करप्शन

28:30धोखाधड़ी फैली हुई थी इसी के चलते मारवाड़

28:34के राजा अजीत सिंह को उनके ही बेटे ने

28:371724 में मार दिया जो वहां के बिगड़ने

28:41हालातो का गवाह है

28:4218th सेंचुरी के सबसे आउटस्टैंडिंग राजपूत

28:45रोलर थे राजा सवाई जयसिंह ऑफ अंबे

28:48जिन्होंने 1699 से 1743 डी रोल किया वो एक

28:53डिस्टिंग्विश स्टेटमेंट लव में घर और थे

28:57वो सिटी के फाउंडर थे और उसको साइंस और आठ

29:01का एक ग्रेट सेंटर बनाया

29:07जयपुर उज्जैन वाराणसी और मथुरा में

29:10एस्टॉनोमिकल ऑब्जर्वेट्रीज बनवाई दिल्ली

29:13के जंतर मंत्र को तो हम सब जानते ही हैं

29:15वो एक सोशल रिफॉर्मर भी थे अपनी बेटियों

29:19की शादी में होने वाले लैविश एक्सपेंडिचर

29:22को कम करने के लिए उन्होंने एक डॉ को पास

29:25किया क्योंकि इस प्रैक्टिस ने फीमेल

29:27इन्फैंटिसाइड जैसी प्रैक्टिस को बढ़ावा

29:29दिया दोस्तों अब बात करते हैं जाट के बड़े

29:32में

29:33जाट जाट एक एग्रीकल्चर इस क्लास थी जो

29:37दिल्ली मथुरा और आगरा के आसपास के रीजन

29:40में रहती थी

29:421669 में औरंगज़ेब के रूल में मथुरा रीजन

29:45के जाट पेजयंस ने रिवॉल्ट किया और ऐसा ही

29:48एक और रिवॉल्ट 1688 में दोबारा हुआ इन

29:52रिवॉल्ट्स को कृष तो कर दिया गया लेकिन यह

29:54एरिया डिस्टर्ब ही रहा

29:56औरंगज़ेब की डेथ के बाद दिल्ली के रीजन

29:59में वो लगातार डिस्टरबेंस इस क्रिएट करते

30:01रहे भरतपुर एक जाट स्टेट था जिसको चूड़ा

30:06मां और बदन सिंह ने सेटअप किया था जो की

30:09आज पूर्वी राजस्थान के भरतपुर जिला में है

30:12सूरजमल के अंदर जाट पावर अपने पीठ पर

30:15पहुंची जिन्होंने 1756 से 1763 तक रूल

30:20किया उनकी अथॉरिटी लिस्ट में गंगा से लेकर

30:23साउथ में चंबल तक और वेस्ट आगरा सुबह से

30:27लेकर दिल्ली के सुबह तक फैली हुई थी उनके

30:31स्टेट में आगरा मथुरा मेरठ अलीगढ़ इंक्लूड

30:34थे

30:361763 में उनकी डेथ के बाद जाट स्टेट

30:39डिक्लिन हो गया और पेटीसमींदर्स में

30:42स्प्लिट हो गया दोस्तों अब आगे बढ़ते हैं

30:45और देखते हैं बंगश पत्थंस और रोहिलास के

30:48बड़े में

30:49बंगश पठान और रोहिलास मोहम्मद खान बंगश ने

30:54मुगल एंपरर फारुख सियार और मोहम्मद शाह के

30:57री के दौरान फर्रुखाबाद के आसपास की

31:00टेरिटरी में 17-13 में एक अपना कंट्रोल

31:03एस्टेब्लिश किया यही से बंगश पत्थंस की

31:06शुरुआत हुई

31:09इवेशन के दौरान अली मोहम्मद खान ने

31:12रोहिलखंड नाम से एक अलग प्रिंसिपल किया

31:17रुहुहिलखंड हिमालय के फुट हिल्स में था

31:19यानी साउथ में गंगा और नॉर्थ में कुमाऊं

31:23हिल्स के बीच ही किंगडम था अब देखते हैं

31:25एक इंपॉर्टेंट रीजनल पावर सिक्स के बड़े

31:28में

31:30सिक्स दोस्तों टेंथ और लास्ट सिख गुरु

31:33गुरु गोविंद सिंह ने मुगल की रिपीटेड

31:36एट्रोसिटी से बचाने के लिए सिक्स को एक

31:39मिलिटेंट सेट में ट्रांसफॉर्म किया उनकी

31:42लीडरशिप में सिख कम्युनिटी एक पॉलीटिकल और

31:45मिलिट्री फोर्स बने

31:47बांदा बहादुर जिन्होंने 17008 में लीडरशिप

31:51असम की ने 8 साल तक मुगल आर्मी के अगेंस्ट

31:54स्ट्रगल किया और पैजांस और लोअर कास्ट

31:57लोगों के साथ मार्च किया

31:591715 में उनको कैप्चर कर लिया गया और मार

32:03दिया गया नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली

32:06के लगातार इन विजंस और पंजाब

32:08एडमिनिस्ट्रेशन के फेल होने से सिक्स को

32:11एक बार फिर से राइस होने का मौका मिला

32:141765 से 1800 के बीच सिक्स ने पंजाब और

32:18जम्मू को अपने कंट्रोल में ले लिया

32:3118th सेंचुरी के और में शुगर चकिया मिशन

32:34के के रंजीत सिंह प्रॉमिनेंस में आए

32:39थे और एक एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेटर

32:49पंजाब के स्ट्रांग किंगडम को सेटअप करने

32:52का श्री रंजीत सिंह को ही जाता है उनके

32:55किंगडम में सतलज से लेकर झेलम तक एरिया

32:58इंक्लूड था उन्होंने अपनी आर्मी को

33:01यूरोपीय की मदद से मॉडर्नाइज्ड किया ऐसा

33:04बताया जाता है की इंग्लिश ईस्ट इंडिया

33:06कंपनी के बाद एशिया की सबसे पावरफुल आर्मी

33:09उन्हें के पास थी उनके रेन के अंतिम समय

33:12में ब्रिटिश ने उनको 1838 में त्रिपाठी एक

33:163d साइन करवाई जिसमें उन्होंने ब्रिटिश

33:18आर्मी को पंजाब से काबुल की तरफ पास होने

33:21की परमिशन दी इसके बाद फर्स्ट

33:24एंग्लो-अफगानवर हुआ जिसमें ईस्ट इंडिया

33:27कंपनी और रंजीत सिंह ने कुछ हद तक

33:29कॉर्पोरेट भी किया 1839 में उनकी डेथ हुई

33:32और उनके सक्सेस स्टेट को इंटैक्ट नहीं रख

33:36पे और जल्द ही ब्रिटिश ने उसे पर कब्जा कर

33:39लिया

33:39अब बात करते हैं लास्ट और एक इंपॉर्टेंट

33:42रीजनल पावर यानी मराठस के राइस और फल के

33:45बड़े में

33:51मुगल अंपायर के सामने सबसे बड़ा चैलेंज

33:53मराठा किंगडम की तरफ से आया बल्कि यह कहा

33:57जा सकता है की सिर्फ मराठा किंगडम ही मुगल

34:00अंपायर को रिप्लेस करने की स्ट्रैंथ रखना

34:02था लेकिन मराठा सर्ड्स में यूनिटी की कमी

34:05थी और एक जो इंडिया अंपायर को सेटअप करने

34:08के लिए जरूरी आउटलुक और विजन लॉकिंग था

34:13छत्रपति शिवाजी महाराज के ग्रैंडसन शाहू

34:161689 से ही औरंगज़ेब के प्रिजनर थे

34:20177 में औरंगज़ेब की डेथ के बाद उनको

34:23रिलीज कर दिया गया और जल्द ही सतारा के

34:27शाहू और कोल्हापुर की ताराबाई के बीच एक

34:29सिविल वार छिड़ गई मराठा सरदार में एक

34:32फेक्शनलिज्म क्रिएट हो गया इस कनफ्लिक्ट

34:35के बीच बालाजी विश्वनाथ की लीडरशिप में

34:38मराठा गवर्नमेंट में एक नए तरह का सिस्टम

34:41में वाल्व हुआ ये पीरियड पेशवा डोमिनेशन

34:44का पीरियड था जिसमें मराठा स्टेट एक

34:47अंपायर में ट्रांसफॉर्म हुआ विश्वनाथ 1713

34:51में पेशवा यानी के मिनिस्टर बने स्टेट की

34:54साड़ी पावर पेशवा के पास होने लगी यानी

34:56पेशवा एक तरह से मराठा अंपायर का फंक्शन

35:03फारुख सियार को ओवरथ्रो करने में सैयद

35:06ब्रदर्स की भी मदद की यहां से उनको मुगल

35:09अंपायर की वीकनेस का पता चला और अब वो

35:12नॉर्थ में एक्सपेंड करने के लिए तैयार हुए

36:26करने के लिए फोर्स किया गया मराठस के बड़े

36:30में हम डिटेल में अपनी नेक्स्ट वीडियो में

36:32देखेंगे अब आते हैं कंक्लुजन पर

36:36कंक्लुजन तो दोस्तों हमने देखा की किस तरह

36:39मुगल अंपायर की डिक्लिन के बाद रीजनल

36:42स्टेज का राइस हुआ औरंगज़ेब के री के

36:45दौरान ही मुगल अंपायर का डिक्लिन स्टार्ट

36:47हुआ उनकी कंट्रोवर्शियल रिलिजियस पॉलिसी

36:50की चलती रीजनल स्टेज में रिबेलीयन होने

36:52लगे और जब सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन में वीक

36:55रुलर्स आने लगे तो ये प्रोसेस और भी फास्ट

36:58हो गया

36:59वीक सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन के चलते रीजनल

37:03पावर्स उभर कर आने लगी और उन्होंने

37:05ऑटोनॉमी डिक्लेअर कर दी जल्द ही इंडिया

37:08में अंपायर एस्टेब्लिश करने की स्ट्रगल

37:10स्टार्ट हुई इसी बीच ब्रिटिशर्स लगातार

37:13अपना स्ट्रांग हॉल बढ़ाने लगे और

37:15ग्रैजुअली इंटरनल पॉलिटिक्स में इंटरफेयर

37:18करने लगे

37:20और आगे चलकर इन्हीं रीजनल पावर्स और

37:23इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच स्ट्रगल

37:26स्टार्ट हुआ जिसकी कहानी हम आगे चलकर

37:29देखेंगे

37:34दोस्तों हमने पिछली वीडियो में डिस्कस

37:37किया था की कैसे इंडिया में ट्रेड करने के

37:40लिए अलग-अलग यूरोपियन कंपनी आई हैं आज हम

37:43उन्हें में से दो कंपनी इंग्लिश और फ्रेंच

37:45के बीच की रायबरेली को डिस्कस करेंगे तो

37:48चलिए शुरू करते हैं

37:50इंट्रोडक्शन दोस्तों वैसे तो ब्रिटिश और

37:53फ्रेंच ट्रेड करने के लिए इंडिया आते हैं

37:55लेकिन बाद में यह दोनों इंडिया के

37:58पॉलिटिक्स में इंवॉल्व हो जाते हैं ऐसा

38:00इसलिए क्योंकि ये दोनों ही कंपनी

38:02मर्चेंडाइज्म में यकीन करती थी जिसके

38:05अकॉर्डिंग प्रॉफिट को मैक्सिमाइज करने के

38:07लिए ट्रेड में मोनोपोली होना जरूरी माना

38:09जाता था दोनों पावर्स इंडिया में कमर्शियल

38:12मोनोपोली जाति थी इसलिए दोनों पॉलीटिकल

38:15पावर इस एस्टेब्लिश करने में ग जाते हैं

38:17तो दोनों के बीच रायबरेली होना भी नेचुरल

38:20था इसके साथ ही वर्ल्ड हिस्ट्री में पहले

38:22से चली ए रही ट्रेडिशनल एंग्लो फ्रेंच

38:24रिवॉल्री का रिफ्लेक्शन भी इंडिया में

38:26देखने को मिलता है

38:32तो आई एक-एक करके जानते हैं तीनों

38:35कार्नेटिक वज के बड़े में

38:401748 बैकग्राउंड

38:44कोरोमंडल कास्ट और उसके आसपास के एरिया को

38:47यूरोपीय ने कर्नाटक नाम दिया था इंग्लिश

38:50और फ्रेंच के बीच इंडिया में हुए सभी शब्द

38:53जनरली इसी एरिया में हुए थे इसीलिए इन्हें

38:56कर्नाटक

39:00में हुए ऑस्ट्रिया वार ऑफ सक्सेशन का

39:03इंडिया में एक्सटेंशन था 1740

39:13यूरोप की ड्राइवरी इंडिया में पहुंच जाति

39:15है फर्स्ट कार्नेटिक वार के रूप में

39:17फर्स्ट कार्नेटिक वार के दौरान मद्रास में

39:201746 में बैटल ऑफ सिंह थॉमस होता है

39:23जिसमें कर्नाटक के नवाब अनवारुद्दीन और

39:26फ्रेंच फोर्सेस आमने-सामने होते हैं आई

39:29जानते हैं ऐसा क्यों होता है

39:36जब 1745 में इंग्लिश नेवी कोमोडोर कर्टिस

39:41बनते की लीडरशिप में कुछ फ्रेंडशिप कर

39:44लेती है इसका बदला लेने के लिए फ्रेंच

39:46गवर्नर डुप्लेक्स मॉरीशस से एक फ्रेंच

39:49फ्रीज

39:53अंग्रेजन की मद्रास फैक्ट्री पर अटैक करती

39:55है और आसानी से मद्रास को जीत लिया जाता

39:58है लेकिन इसी बीच कर्नाटक के नवाब

40:01अनवारुद्दीन खान फ्रेंच से कहते हैं की

40:03उनकी टेरिटरी में वो इस तरह फाइट नहीं कर

40:06सकते और तुरंत मद्रास से वापस जान का

40:09ऑर्डर देते हैं और फ्रेंच गवर्नर

40:10डुप्लेक्स उन्हें यह कहकर शांत कर देते

40:12हैं की मद्रास को जितने के बाद वो उसे

40:15नवाब को गिफ्ट कर देंगे जब फ्रेंच मद्रास

40:18जितने के बाद भी नवाब से किया हुआ अपना

40:20प्रॉमिस नहीं पूरा करते तो अंदर उद्दीन

40:23अपने बेटे महफूज खान की कमांड में 10000

40:26सोल्जर की एक आर्मी मद्रास को कैप्चर करने

40:29के लिए भेज देते हैं फिर फ्रेंच की आर्मी

40:31के साथ का सामना होता है सन थॉमस नाम की

40:34जगह पर जो रिवर आद्यार के बैंक पर लोकेटेड

40:46आर्मी आसानी से एक बड़ी इंडियन आर्मी को

40:50हर शक्ति है क्योंकि इस बैटल में फ्रेंच

40:52साइड से 20030 यूरोपीय और 700 इंडियन

40:56सोल्जर मिलकर नेटिव आदमी की 10000 की

40:59फोर्स को हर देते हैं उसके अलावा डेक्कन

41:02में चल रहे एंग्लो फ्रेंच कनफ्लिक्ट में

41:04लेवल फोर्स की इंर्पोटेंस भी इस वार के

41:06बाद बहुत क्लियर हो जाति है दोस्तों बेल

41:10की संधि से फर्स्ट कार्नेटिक वार का एंड

41:13तो हो गया लेकिन इनके आपस में रिश्ते इससे

41:16फ्रेंडली नहीं बनते हैं इनकी रिवरी

41:19कंटिन्यू रहती है और जन्म देती है सेकंड

41:21कर्नाटक वार को आई अब उसके बड़े में जानते

41:24हैं

41:26सेकंड कर्नाटक वह 1749 तू 1754 बैकग्राउंड

41:32फर्स्ट कार्नेटिक वार के बाद फ्रेंच

41:34गवर्नर डुप्लेक्स के पॉलीटिकल एंबिशियस

41:36बाढ़ जाते हैं वह साउदर्न इंडिया में

41:38फ्रेंच की पावर और पॉलीटिकल प्रभाव को

41:41बढ़ाने के लिए वहां के लोकल डायनेस्टिक

41:43डिस्प्यूट में इंटरफेयर करना शुरू करते

41:45हैं उनका एक एक इसमें अंग्रेजन की पावर को

41:49कम करना भी था उनको ऐसा करने का मौका

41:51मिलता है जब हैदराबाद और कर्नाटक के थ्रू

41:54को लेकर डिस्प्यूट शुरू हो जाता है

41:55हैदराबाद के निजाम आजम जहां की 21st मे

41:591748 को मृत्यु हो जाति है और उनकी बेटे

42:02नसीब जंग हैदराबाद के अगली निजाम बनते हैं

42:06लेकिन इनके नेफ्यू और आसिफ जहां के

42:08ग्रैंडसन मुजफ्फर जंग इनको चैलेंज करते

42:11हैं और खुद निजाम की गाड़ी चाहते हैं उधर

42:14दूसरी तरफ कर्नाटक में नवाब अनवारुद्दीन

42:17को चैलेंज कर रहे होते हैं वहां के फॉर्म

42:19और नवाब दोस्त अली के सन इन डॉ चंदा साहब

42:23डुप्लेक्स को इसमें अपनी पॉलीटिकल स्कीम

42:25को आगे बढ़ाने का मौका दिखता है इसलिए वो

42:28डेक्कन में मुजफ्फर जंग और कर्नाटक की

42:31नवाब शिव के लिए चंदा साहब का सपोर्ट करने

42:33का डिसीजन लेते हैं यह देखने पर इंग्लिश

42:36नासिर जंग और अनवारुद्दीन की साइड हो जाते

42:39हैं इस तरह यहां से शुरू होती है सेकंड

42:41कर्नाटक वार की कहानी जो 1749 से 1754 तक

42:46चला है आई जानते हैं इस वार के दौरान

42:48क्या-क्या घटनाएं हुई

42:50कोर्स ऑफ डी वर्ल्ड

42:53डुप्लेक्स के प्लेन को सक्सेस मिलती है जब

42:55मुजफ्फर जंग चंदा साहब और फ्रेंच की

42:58कंबाइंड आर्मी के हाथों 1749 में वेल्लोर

43:01के पास हुई बैटल ऑफ अंबर के दौरान

43:03अनवारुद्दीन की हर और मृत्यु हो जाति है

43:06और दिसंबर 1750 में नासिर जंग को भी मार

43:10दिया जाता है

43:13और डुप्लेक्स को रिवॉर्ड के तोर पर रिवर

43:16कृष्णा के साउथ की पुरी मुगल टेरिटरी का

43:19गवर्नर डिक्लेअर कर देते हैं इसके अलावा

43:21नॉर्दन सरकार के कुछ डिस्ट्रिक्ट भी

43:24फ्रेंच को दे दिए जाते हैं और निजाम की

43:27रिक्वेस्ट पर एक फ्रेंच आर्मी को हैदराबाद

43:29में तैनात कर दिया जाता है जिसे वहां

43:32फ्रेंच एंट्रेंस को सुरक्षित रखा जा सके

43:35लेकिन कुछ ही मीना के बाद मुजफ्फर जंग को

43:38मार दिया जाता है और फ्रेंच मुजफ्फर के

43:41अंकल सलबत जंग को नया निजाम बनाते हैं

43:441751 में चंदा साहब कार्नेट के नवाब बन

43:48जाते हैं इस समय डुप्लेक्स अपनी पॉलीटिकल

43:50पावर की हाइट पर होते हैं लेकिन जल्दी ही

43:53कहानी में ट्वीट आता है लेट नवाब

43:56अनवारुद्दीन के बेटे मोहम्मद अली तृष्णो

43:58बाली के फोर्ट में रिफ्यूज लिए हुए थे

44:01चंदा साहब और फ्रेंच के अनेक प्रयासों के

44:04बाद भी जिला नहीं जीता जाता अंग्रेज भी

44:07शांत नहीं बैठने थे रॉबर्ट क्लाइव जो

44:10मोहम्मद अली को तृष्णापल्ली में इफेक्टिव

44:12रिइंफोर्समेंट नहीं दे पाते गवर्नर

44:14साउंड्स को एक काउंटर मूव सो जाते हैं

44:17जिसके तहत कार्नेटिक की कैपिटल पर एक

44:21सरप्राइज अटैक प्लेन किया जाता है जिससे

44:23तिरछीणा पाली से प्रेशर को डाइवर्ट किया

44:26जा सके प्लेन के मुताबिक लाइव सिर्फ 210

44:30सोल्जर के फोर्स के साथ अगस्त 1751 में

44:33अर्को को कैप्चर कर लेते हैं चंदा साहब के

44:36द्वारा तिरछी नपोली से डाइवर्ट करके 4000

44:39की फोर्स भेजी जाति है लेकिन यह फोर्स

44:42एयरपोर्ट को जितने में असफल रहती है

44:44आर्कोट की सफलता के बाद अंग्रेजन का मनोबल

44:48और भी बाढ़ जाता है और 1752 में स्ट्रिंगर

44:52लॉरेंस एक स्ट्रांग इंग्लिश फोर्स के साथ

44:54किचेनॉनपल्ली में फ्रेंच से सुरेंद्र कर

44:56लेते हैं और इसी बीच चंदा साहब को तंजौर

45:00के राजा षड्यंत्र करके मार डालते हैं

45:02मोहम्मद अली कर्नाटक के नवाब बन जाते हैं

45:05तिरुचिरापल्ली में हुए डिजास्टर के बाद

45:07डुप्लेक्स की किस्मत का सितारा डूबने लगता

45:10है फ्रेंच कंपनी के डायरेक्टर डुप्लेक्स

45:13के पॉलीटिकल एंबीशन और उसे पर हुए खर्च से

45:16खुश नहीं होते और उन्हें इंडिया से वापस

45:18फ्रांस बुला लिया जाता है 1754 में

45:22डुप्लेक्स को रिप्लेस करके फ्रेंच के नए

45:24गवर्नर बनते हैं गोरे हुए अंग्रेजन के साथ

45:28नेगोशिएशंस शुरू करते हैं और 1755 में

45:31ट्रीटी का पांडिचेरी साइन करते हैं

45:40उसको भी समझते हैं इंप्लीकेशंस

45:43सेकंड कार्नेटिक वार से ये साफ हो गया की

45:46यूरोपीय कंपनी को सक्सेस के लिए इंडियन

45:49अथॉरिटी के सपोर्ट की जरूर नहीं है बल्कि

45:51उल्टा इंडियन अथॉरिटी कंपनी के ऊपर

45:54डिपेंडेंट होने लगी थी कर्नाटक में

45:57मोहम्मद अली और हैदराबाद में सलबत जंग

46:00यूरोपीय कंपनी के पत्रों एन होकर क्लाइंट

46:03बन गए थे इंग्लिश और फ्रेंच के बीच

46:05कनफ्लिक्ट का ये दूसरा राउंड भी

46:07इनकनक्लूसिव रहा क्योंकि अंग्रेजन के

46:10कैंडिडेट मोहम्मद अली कर्नतें के नवाब तो

46:13बन जाते हैं लेकिन फ्रेंच डेक्कन में अभी

46:16भी स्ट्रांग थे उनके कैंडिडेट सलबत जंग

46:19हैदराबाद के निजाम थे साथ ही सालाना 30

46:22लाख रुपए रिवेन्यू देने वाले नॉर्दर्न

46:24सरकार के कुछ इंपॉर्टेंट डिस्ट्रिक्ट भी

46:27फ्रेंच कंपनी को मिल गए

46:31साउथ इंडिया में फ्रेंच की पोजीशन कुछ

46:33कमजोर और अंग्रेजों की पोजीशन कुछ

46:36स्ट्रांग जरूर होती है

46:37इंडिया में एंग्लो फ्रेंच रिवरी का डिसाइड

46:40एक्शन होता है थर्ड कर्नाटक वार में तो आई

46:43अब उसके बड़े में डिस्कस करते हैं थर्ड

46:46कर्नाटक वी ऑटो

46:501758 तू 1763

46:53फर्स्ट कर्नाटक

46:56भी यूरोप में चल रही इंग्लिश और फ्रेंच के

46:59स्ट्रगल की इंडिया में गंज थी

47:021756 में यूरोप में 7 इयर्स वार शुरू हो

47:05जाता है और फिर से इंग्लैंड और फ्रांस

47:08आमने सामने होते हैं इसका एक्सटेंशन

47:10इंडिया तक होता है फ्रेंच गवर्नमेंट 1757

47:14में जनरल काउंटिंग लाली को इंडिया भेजती

47:17है जो 12 महीने की यात्रा के बाद 1758 में

47:21यहां पहुंचने हैं इसी बीच ब्रिटिश 1757

47:25में बंगाल में प्लासी का बैटल जीत चुके

47:27होते हैं जिससे उन्हें रिसोर्सेस मिल जाते

47:31हैं और 1758 में

47:35कैप्चर कर लेते हैं लाली का नेक्स्ट

47:37मद्रास को गर्ने का होता है लेकिन वहां

47:40अंग्रेजन की एक स्ट्रांग नवल फोर्स ए

47:42पहुंचती है और लाली को मजबूर होकर घेराव

47:45खत्म करना पड़ता है इसके बाद लाली

47:47हैदराबाद से वासी को बुला लेते हैं ये

47:50फ्रेंच की एक बड़ी गलती साबित होती है

47:52क्योंकि इससे उनकी लैंड गैरसैण कमजोर पद

47:55गई और इसी बीच पोकोक के कमांड में इंग्लिश

47:58फ्लीट फ्रेंच फ्रीज को तीन बार हर देती है

48:01और फ्रेंच फ्रीज को इंडियन वाटर छोड़कर

48:04जान पर मजबूर कर देते हैं सी पर कमांड

48:06होने के बाद अब अंग्रेजन के लिए जीत का

48:09रास्ता खुला जाता है और उनकी फाइनल

48:11विक्ट्री में कोई डाउट नहीं राहत फ्रेंच

48:13को 20 सेकंड जनवरी 1760 को तमिलनाडु में

48:17वांडीवाश की बैटल में सर कू के हाथों बुरी

48:21तरह हर का स्वाद रखना पड़ता है वासी को

48:24प्रिजनर बना लिया जाता है

48:288 महीने के ब्लॉक आते के बाद पांडिचेरी भी

48:31अंग्रेजन द्वारा जीत लिया जाता है और 16th

48:35जनवरी 1761 को ला सुरेंद्र कर देते हैं

48:39उसके बाद जल्दी ही फ्रेंच माहे और जिंगी

48:43को भी को देते हैं इस तरह साउथ इंडिया में

48:45एंग्लो फ्रेंच रिवरी के ड्रामा का फाइनली

48:48पर्दा गिरता है फ्रेंच की पोजीशन अब वापस

48:51उठने लायक नहीं र गई थी यूरोप में 7 इयर्स

48:55बर का और होता है 1763 में ट्रीटी का

48:58पेरिस के द्वारा इसके प्रोविजंस के अनुसार

49:00फ्रेंच को पांडिचेरी और कुछ अन्य सेटलमेंट

49:03वापस कर दिए जाते हैं लेकिन इस शर्ट पर की

49:07इनको कभी भी 45 नहीं किया जाएगा इस तरह

49:10इंडिया में फ्रेंच की पॉलीटिकल एंबिशियस

49:12का हमेशा के लिए और हो जाता है दोस्तों यह

49:15तो हमने जान लिया की फ्रेंच और इंग्लिश

49:17कंपनी के कनफ्लिक्ट में फाइनली इंग्लिश को

49:20जीत मिलती है और फ्रेंच को हर पर इसके

49:23पीछे के कुछ रीजंस को भी जानते हैं

49:37है इसलिए कम कर रहे लोगों में ऐंठूसियाज्म

49:40और सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी नहीं थी कंपनी

49:43इंस्टेंट डिसीजंस भी ले शक्ति थी क्योंकि

49:45उन्हें गवर्नमेंट की परमिशन नहीं चाहिए

49:47होती थी दूसरी तरफ फ्रेंच कंपनी गवर्नमेंट

49:50की कंट्रोल में थी इससे डिसीजन मेकिंग में

49:53भी डिले होता था दूसरा रीजन था अंग्रेजन

49:56की सुपीरियर नेवी इसकी हेल्प से वो सभी

49:59इंपॉर्टेंट बॉटल्स जीत पाते हैं साथ ही

50:02इंडिया की बड़ी और इंपॉर्टेंट सिटीज पर

50:04ब्रिटिश का ही कंट्रोल था जैसे की कोलकाता

50:07बॉम्बे और मद्रास जबकि फ्रेंच के पास

50:10सिर्फ पांडिचेर ही था ऐसा कई हिस्टोरियन

50:13का मानना भी है की इंग्लिश कोलकाता से

50:15शुरू करके पूरे इंडिया को कंट्रोल कर सकते

50:18थे लेकिन पांडिचेरी से शुरू करके फ्रेंच

50:20गया कोई भी ऐसा नहीं कर सकता था इसके

50:23अलावा इंग्लिश कंपनी के पास फंड्स की कमी

50:26नहीं थी कार्नेटिक वर्स के बीच में ही

50:281757 में प्लासी का बैटल होता है जिसमें

50:31जितने पर कंपनी की वेल्थ में और भी ज्यादा

50:33इजाफा होता है लेकिन फ्रेंच के पास फंड्स

50:36की शॉर्टेज बनी रहती है है वह पॉलीटिकल

50:38एंबिशियस की वजह से कमर्शियल इंटरेस्ट की

50:41अनदेखी कर देते हैं एक और इंपॉर्टेंट रीजन

50:44था ब्रिटिश सक्सेस के पीछे अंग्रेजन की

50:47सुपीरियर मिलिट्री कमांड्स इंग्लिश साइट

50:50पर सरण कू मेजर स्ट्रिंग लॉरेंस रॉबर्ट

50:53क्लाइव जैसे लीडर्स की लंबी लिस्ट के

50:55कंपैरिजन में फ्रेंच साइट पर सिर्फ

50:57डुप्लेक्स का ही नाम याद राहत है दोस्तों

51:00ये थे कुछ रीजंस जिनकी वजह से इंग्लिश

51:03फ्रेंच को हराकर इंडिया में अपना डोमिनेंस

51:06बनाने में कामयाब होते हैं कंक्लुजन थर्ड

51:10कर्नाटक वार में जीत के बाद इंडिया में

51:12इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी का कोई भी

51:14यूरोपियन राइवल नहीं बचत और इसके बाद वो

51:17अपना पूरा ध्यान इंडिया में एक डोमिनेंट

51:20पॉलीटिकल पावर बने पर लगा देते हैं ईस्ट

51:23इंडिया कंपनी कैसे धीरे-धीरे एक अंपायर

51:26सेट अप करती है यह हम अपनी आने वाली

51:29वीडियो में देखेंगे

51:32रोड तू प्लासी इन बक्सर दोस्तों अभी तक

51:35हमने देखा की कैसे इंग्लिश ईस्ट इंडिया

51:38कंपनी इंडिया में अपने सभी यूरोपियन

51:40राइवल्स को हराकर मोनोपोलिस्टेब्लिश कर

51:43लेती है अब हम जानेंगे की कंपनी कैसे

51:46इंडियन रुलर्स को हराकर इंडिया में एक

51:48डोमिनेंट पॉलीटिकल पावर बनकर उभरती है

51:53इंडियन प्रोविंस को जीत लेती है और इसमें

51:56सबसे पहले नंबर आता है बंगाल का बैटल ऑफ

52:00प्लासी और बक्सर को इंडियन हिस्ट्री के

52:03मेजर टर्निंग प्वाइंट्स में से माना जाता

52:04है तो आज हम इन्हीं गेम चेंजिंग बॉटल्स के

52:07बड़े में डिस्कस करेंगे तो चलिए शुरू करते

52:10हैं

52:11इंट्रोडक्शन

52:13बंगाल उसे समय के इंडिया के प्रोविंस में

52:16सबसे ज्यादा फर्टाइल और रिच था आज के

52:19बांग्लादेश बिहार और उड़ीसा इसके पाठ होते

52:22थे यहां की इंडस्ट्रीज और कॉमर्स भी वेल

52:25डेवलप्ड थी नाम के लिए तो यह मुगल अंपायर

52:28का पार्ट था लेकिन यहां के नवाब वास्तव

52:31में इंडिपेंडेंस रोलर की तरह शासन कर रहे

52:33थे इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल में

52:37कई जगह अपनी फैक्टरीज एस्टेब्लिश करती है

52:39और कोलकाता में 1696 से 176 के बीच एक

52:44फोर्ट का भी कंस्ट्रक्शन करती है इस फोर्ट

52:47का नाम इंग्लैंड के किंग विलियम डी थर्ड

52:49के ओनर में फोर्ट विलियम रखा जाता है

52:58मतलब यह डिफरेंस की परपज के लिए

53:03होता था जिसमें कॉटन और सिल्क टैक्सटाइल्स

53:07मेजर ट्रेड आइटम थे

53:1017

53:11मुगल एंपरर फारुख सियार अपने फरमान के

53:14द्वारा कंपनी को बंगाल में ड्यूटी फ्री

53:17ट्रेड करने की परमिशन भी दे देते हैं

53:20हम का सकते हैं की बंगाल में कंपनी के

53:22काफी स्ट्रांग ट्रेडिंग इंटरेस्ट थे फिर

53:25ऐसा क्या हुआ की कंपनी और बंगाल के नवाब

53:28के बीच 1757 में प्लासी की बैटल होती है

53:31आई जानते हैं बैकग्राउंड तू बैटल ऑफ

53:35प्लासी

53:36बंगाल में सिचुएशन तब बदलने लगती है जब

53:391756 में एक स्ट्रांग रोलर नवाब अली वर्दी

53:43खान की मृत्यु हो जाति है और उनके

53:46ग्रैंडसन सिराजुद्दौला बंगाल के नवाब बनते

53:48हैं

53:49सिराजुद्दौला की कुछ राइवल्स थे जो उनकी

53:52जगह खुद नवाब बन्ना चाहते थे जैसे की

53:55पूर्णिया की शौकत जंग और ढाका की घसीटी

53:58बेगम इसके साथ ही कर्नाटक वर्स के बाद से

54:01ही नवाब इंग्लिश कंपनी के प्लांस को लेकर

54:03डू में थे ऐसी सिचुएशन में जब इंग्लिश

54:06कंपनी इनडायरेक्ट नवाब की राइवल घसीटी

54:09बेगम को सपोर्ट करती है और बंगाल की

54:12पॉलीटिकल ऑफेंडर्स भी देती है तो नवाब का

54:15गुस्सा और भी बाढ़ जाता है

54:17है इसके अलावा मुगल फरमान के अनुसार जो

54:20दस्तक यानी की फ्री पैसेज कंपनी को अपने

54:23ट्रेड के लिए मिलते थे कंपनियां का मिस

54:25उसे करना शुरू कर देती है कंपनी के

54:28एम्पलाइज कंपनी के ट्रेड के साथ-साथ अपने

54:30प्राइवेट ट्रेड में भी इन फ्री पैसेज का

54:33उसे करते थे जबकि मुगल फरमान में सिर्फ

54:36कंपनी के ट्रेड को ही ये राइट दिया गया था

54:38इसके अलावा इंडियन मरचेंट्स को भी पैसेज

54:41बीच देते थे यह एक तरह से चीटिंग थी और

54:44इसे नवाब को काफी रिवेन्यू लॉस भी उठाना

54:47पद रहा था इसी बीच कंपनी फोर्ट विलियम को

54:50और भी ज्यादा 45 करने लगती है और फोर्ट की

54:53वाल्स पर गंज तैनात कर दी जाति हैं

54:55क्योंकि अंग्रेजन को डर था की फ्रेंच से

54:58चल रहा कनफ्लिक्ट बंगाल तक एक्सटेंड कर

55:00सकता है यह सब देखने के बाद नवाब कंपनी को

55:03वार्निंग देते हैं की वह ऐसा करना बैंड

55:06करें लेकिन कंपनी उनकी बात नहीं सुनती

55:08नवाब को लगता है की कंपनी उनकी सॉवरेन्टी

55:12को चैलेंज कर रही है इसलिए वो कंपनी के

55:14खिलाफ एक्शन लेते हैं और कोलकाता की तरफ

55:16मार्च शुरू करते हुए फोर्ट विलियम को 28

55:19जून 1756 को कैप्चर कर लेते हैं फिर नवाब

55:23अपनी इस आसन जीत को सेलिब्रेट करने के लिए

55:26कोलकाता का चार्ज मानिकचंद को देकर अपनी

55:29कैपिटल मुर्शिदाबाद लोट जाते हैं यह नवाब

55:32की बहुत बड़ी गलती साबित होती है वो अपने

55:35एनीमी की स्ट्रैंथ को अंडरस्टीमेट कर लेते

55:37हैं इसका फायदा उठाकर कुछ अंग्रेज अपनी

55:40शिप के साथ हुगली रिवर के रास्ते भाग जाते

55:43हैं क्योंकि मानिकचंद के पास कोई नवल

55:45फोर्स नहीं थी इसीलिए वो अंग्रेजन को ऐसा

55:48करने से रॉक नहीं पाते इंग्लिश ऑफिशल्स सी

55:52के पास फूलता नाम की जगह पर शरण लेते हैं

55:54क्योंकि यहां अपनी नवल स्ट्रैंथ की वजह से

55:57वह सेफ र सकते थे

55:59यहां वह मद्रास से हेल्प अपने का वेट करते

56:02हैं कोलकाता के फल की न्यूज़ अगस्त 1756

56:05तक मद्रास पहुंचती है और फिर कुछ डिले के

56:08बाद 16th अक्टूबर 1756 को एडमिरल वाटसन और

56:13करनाल क्लाइव की लीडरशिप में मद्रास से एक

56:16स्ट्रांग नवल और मिलिट्री फोर्स कोलकाता

56:18के लिए भेज दी जाति है यह फोर्स दिसंबर

56:211756 में कोलकाता पहुंच जाति है और इसके

56:24बाद सेकंड जनवरी 1757 को ही क्लाइव

56:28मानिकचंद को ब्राइब देकर कोलकाता को वापस

56:31जीत लेते हैं और फरवरी 1757 में नवाब

56:35सिराजुद्दौला क्लाइव के साथ अलीपुर की

56:38ट्वीटी साइन करते हैं नवाब ने कोलकाता को

56:41जितने के बाद उसका नाम अलीपुर कर दिया था

56:43इस ट्वीटी के अनुसार नवाब अंग्रेजन को

56:47उनके पुराने ट्रेडिंग प्रिविलेज वापस कर

56:49देते हैं उनको कोलकाता को 45 करने की

56:52परमिशन दे देते हैं और इस दौरान हुए

56:54अंग्रेजन के पूरे नुकसान की भरणी का भी

56:56प्रॉमिस करते हैं लेकिन इसके बाद भी

56:59अंग्रेज संतुष्ट नहीं होते और एक

57:01कंस्पायरेसी प्लेन की जाति है जो जन्म

57:03देती है बैटल ऑफ प्लासी को तो आई जानते

57:07हैं इस कंस्पायरेसी और बैटल ऑफ प्लासी के

57:09बड़े में

57:11बैटल ऑफ प्लासी अंग्रेज समझ चुके होते हैं

57:14किस राजू दौला के नवाब रहते हुए उनके ऊपर

57:17खतरा हमेशा बना रहेगा इसलिए वो नवाब के

57:20खिलाफ चल रही एक इंस्पीरसी से जुड़ जाते

57:22हैं इस कंस्पायरेसी के अनुसार

57:25सिराजुद्दौला की जगह उनके ही मीर बक्शी

57:28मीर जफर को नवाब बनाने का प्लेन होता है

57:31मीर जफर के अलावा इसमें शामिल होते हैं

57:33मानिकचंद जो कोलकाता के ऑफिसर इंचार्ज

57:36होते हैं अमीचंद जो एक रिच मर्चेंट थे जगत

57:40सीट जो बंगाल के सबसे बड़े बनकर थे और

57:43खादिम खान जो नवाब की आर्मी में कमांडर थे

57:46प्लेन के अकॉर्डिंग अंग्रेज नवाब के सामने

57:49ऐसी डिमांड रखते हैं जिन्हें नवाब कभी

57:52नहीं मां सकते थे नवाब समझ जाते हैं की अब

57:55अंग्रेजों के साथ वार के अलावा और कोई

57:57रास्ता नहीं है दोनों साइड 23rd जून 1757

58:01को प्लासी के मैदान पर जो मुर्शिदाबाद से

58:04अराउंड 30 किलोमीटर की दूरी पर था मिलते

58:07हैं लेकिन प्लासी का बैटल सिर्फ नाम के

58:10लिए ही बैटल था इसमें अंग्रेजन की साइड से

58:1250 से भी कम लोग मारे जाते हैं जबकि नवाब

58:15लगभग अपने 500 आदमी को देते हैं दबाव की

58:19आर्मी का मेजर पार्ट जो ट्रेडर्स मीर जफर

58:22और राय दुर्लभ की कमांड में था बैटल में

58:25कोई हिस्सा ही नहीं लेट दबाव के सोल्जर का

58:28सिर्फ एक छोटा सा ग्रुप ही जिसको मीर मदन

58:30और मोहनलाल लीड कर रहे थे बहादुर के साथ

58:34लड़ता है लेकिन अंत में नवाब मैदान छोड़कर

58:37जान पर मजबूर हो जाते हैं और मीर जफर के

58:39पुत्र मीरां उनको मुर्शिदाबाद के रास्ते

58:42में मार देते हैं मीर जफर को बंगाल का

58:45नवाब बना दिया जाता है और इनाम के रूप में

58:47अंग्रेजन को 24 परगना की जमींदारी दी जाति

58:50है और साथ ही कोलकाता पर अटैक की कंपनसेशन

58:53के लिए एक करोड़ 7700000 मीर जफर कंपनी को

58:58देते हैं इसके अलावा बहुत से गिफ्ट और

59:00ब्राइब कंपनी के ऑफिशल्स को भी दिए जाते

59:03हैं जैसे की क्लाइव को अराउंड 2 मिलियन से

59:06भी ज्यादा का इनाम मिलता है दोस्तों यह तो

59:09थी बैटल ऑफ प्लासी कहानी जो अंग्रेजन के

59:12लिए बंगाल के मास्टर बने का रास्ता खोल

59:14देती है और कैसे मीर जफर जैसे एक बंदे की

59:17ट्रचूड़ी की वजह से इतिहास की दिशा ही

59:20बादल जाति है ईस्ट इंडिया कंपनी अब

59:22कमर्शियल के साथ पॉलीटिकल एनटीटी भी बन

59:25जाति है इससे उनकी प्रेस्टीज में भी

59:27ज्यादा होता है और एक ही झटका में वो

59:30इंडिया के अंपायर की एक मेजर कंटेंडर बन

59:33जाते हैं बंगाल से मिलने वाले रिवेन्यू की

59:36वजह से ही अंग्रेज एक स्ट्रांग आर्मी

59:38ऑर्गेनाइजर कर पाते हैं और देश के बाकी

59:40हसन को जितने का खर्चा भी मैनेज कर पाते

59:43हैं इसके अलावा बंगाल पर कंट्रोल एंग्लो

59:46फ्रेंच स्ट्रगल में भी डिसाइसिव रोल

59:48निभाते है जैसा की हमने अपनी पिछली वीडियो

59:50में देखा था तो दोस्तों यह तो बात हुई

59:53प्लासी के युद्ध की लेकिन बंगाल को जितने

59:56की कहानी यहां खत्म नहीं होती वो खत्म

59:59होती है बक्सर के युद्ध के बाद तो चलिए अब

1:00:02उसके बड़े में भी चर्चा करते हैं

1:00:05बैटल ऑफ बक्सर प्लासी की बैटल में कंपनी

1:00:09का साथ देने के बदले में मीर जफर को बंगाल

1:00:12की नवाबशिप मिल जाति है लेकिन उन्हें

1:00:15जल्दी ही एहसास होता है की उन्हें यह डील

1:00:17काफी महंगी पद रही है कंपनी और उसके

1:00:20ऑफिसर्स की डिमांड बढ़नी ही रहती हैं और

1:00:22नवाब की ट्रेजरी धीरे-धीरे खाली होने लगती

1:00:25है कंपनी के डायरेक्टर ने भी ऑर्डर दे

1:00:28दिया था की बंगाल से ही मुंबई और मद्रास

1:00:31प्रेसिडेंसी का खर्चा भी निकाला जाए और

1:00:33बंगाल के रेवेन्यू से ही कंपनी इंडिया से

1:00:36होने वाले एक्सपोर्ट्स को परचेज करेगी

1:00:38इसका मतलब कंपनी अब सिर्फ इंडिया से ट्रेड

1:00:42नहीं कर रही थी बल्कि बंगाल के नवाब पर

1:00:44अपने कंट्रोल का उसे करके वहां की वेल्थ

1:00:47को ड्रीम करने में लगी थी

1:00:49मीर जफर समझ गए की कंपनी और उसके ऑफिशल्स

1:00:53की डिमांड्स को पूरा करना नामुमकिन है

1:00:55दूसरी तरफ कंपनी के ऑफिशल्स भी नवाब को

1:00:58क्रिटिसाइज करने लगता हैं क्योंकि वो उनकी

1:01:01एक्सपेक्टशंस को पूरा नहीं कर रहे थे

1:01:02इसलिए अक्टूबर 1760 में कंपनी मीर जफर को

1:01:07फोर्स करती है की वो नवाब की गाड़ी अपने

1:01:09सोनल डॉ अमीर कासिम के फीवर में छोड़ दें

1:01:12और इस तरह मीर जफर को रिप्लेस करके बंगाल

1:01:16के नवाब बन जाते हैं मीर खासी मीर खासिम

1:01:20बदले में कंपनी को बर्दवान मिदनापुर और

1:01:23चित्तागोंग डिस्ट्रिक्ट की जमींदारी दे

1:01:25देते हैं साथ ही इंग्लिश ऑफिशल्स को करीब

1:01:2729 लाख रुपए के प्रेजेंस भी गिफ्ट करते

1:01:30हैं कंपनी ने सोचा था की मीर कासिम उनके

1:01:34पपेट की तरह रहेंगे लेकिन मीर कासिम कंपनी

1:01:37की ऐसी सभी उम्मीद पर पानी फ़िर देते हैं

1:01:39वह एक टेबल एफिशिएंट और स्ट्रांग रोलर थे

1:01:43मीर कासिम अपने आप को फॉरेन कंट्रोल से

1:01:46फ्री करना चाहते थे उनको यह रिलाइज होता

1:01:49है की अपनी इंडिपेंडेंस को मेंटेन करने के

1:01:51लिए उनके पास एक एफिशिएंट आर्मी और फूल

1:01:54ट्रेजरी का होना जरूरी है इसलिए वह

1:01:57अलग-अलग रिफॉर्म्स के थ्रू अपनी इनकम

1:01:59बढ़ाने की कोशिश करते हैं जैसे की

1:02:01रिवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन में से करप्शन को

1:02:04खत्म करके इसके साथ ही वह यूरोपियंस की

1:02:06तरह एक मॉडर्न और डिसिप्लिन आर्मी बनाने

1:02:09की कोशिश करते हैं

1:02:11कंपनी से दूरी बनाने के लिए वह अपनी

1:02:14कैपिटल को भी मुर्शिदाबाद से मुंगेर शिफ्ट

1:02:17कर लेते हैं मीर कासिम कंपनी के ऑफिसर्स

1:02:20के द्वारा होने वाले दस्तक का मिसयूज

1:02:22रोकने के लिए एक दृष्टिक स्टेप लेते हैं

1:02:24और इंटरनल ट्रेड पर लगे वाली सभी ड्यूटीज

1:02:27को खत्म कर देते हैं एक सावरेन रोलर होने

1:02:30के नाइट वो ऐसा कर सकते थे इसकी वजह से

1:02:33इंडिया के और कंपनी के मरचेंट्स की पोजीशन

1:02:35एक जैसी हो जाति है यह सब कंपनी को

1:02:38बिल्कुल भी पसंद नहीं आता वो अपने और

1:02:41इंडियन के बीच एक क्वालिटी को टॉलरेट नहीं

1:02:43कर सकते थे कंपनी नवाब से डिमांड करती है

1:02:46की इंडियन ट्रेडर्स पर फिर से इंपोज कर दी

1:02:49जाए इसी बात पर बंगाल के नवाब और कंपनी के

1:02:52बीच एक बार फिर बैटल की शुरुआत होती है

1:02:551763 में शुरू की कुछ बॉटल्स में मीर

1:02:58कासिम हर जाते हैं और वह अवध चले जाते हैं

1:03:02अवध में मीर कासिम वहां के नवाब सुझाव

1:03:06डोला और मुगल एंपरर शाह आलम तू के साथ

1:03:09एलाइंस बनाते हैं यह तीनों मिलकर 22nd

1:03:12अक्टूबर 1764 को बक्सर में मेजर मंगरो की

1:03:16कमांड में कंपनी की आर्मी से आमना सामना

1:03:18करते हैं इन तीनों पावर्स की 40 हजार से

1:03:2160000 की कंबाइंड आर्मी कंपनी की अराउंड

1:03:247000 की आर्मी से बुरी तरह हर जाति है और

1:03:28बक्सर के बैटल में अंग्रेजन की जीत होती

1:03:30है दोस्तों यह तो हुई बक्सर के युद्ध की

1:03:34कहानी आई अब इसके रिजल्ट्स क्या रहे वो भी

1:03:37जानते हैं

1:03:38आफ्टर मठ ऑफ बक्सर

1:03:40बक्सर का बैटल इंडियन हिस्ट्री की मोस्ट

1:03:43डिसाइसिव बॉटल्स में से एक माना जाता है

1:03:46इसने दो मेजर इंडियन पावर्स की कंबाइंड

1:03:49आर्मी के अगेंस्ट इंग्लिश आर्म्स की

1:03:51सुपीरियर को साबित कर दिया था इसने

1:03:53ब्रिटिशर्स को बंगाल बिहार और उड़ीसा का

1:03:56मास्टर बना दिया और अवध को भी इनकी दया पर

1:03:59लाकर खड़ा कर दिया

1:04:01मुगल एंपरर शाह आलम तू से कंपनी को बंगाल

1:04:04बिहार और उड़ीसा के दीवानी राइट्स मिल

1:04:06जाते हैं यानी की यहां से रिवेन्यू कलेक्ट

1:04:09करने का राइट अब कंपनी के पास होगा इस तरह

1:04:12बंगाल पर कंपनी का कंट्रोल अब लीगलाइज्ड

1:04:15हो जाता है कंपनी इसके बदले में मुगल

1:04:17एंपरर को 26 लाख रुपए की सब्सिडी देने का

1:04:20प्रॉमिस करती है और अवध के दो डिस्ट्रिक्ट

1:04:23कोरा और इलाहाबाद भी इन्हें दे देती है

1:04:26मुगल एंपरर 6 साल तक इलाहाबाद के फोर्ट

1:04:29में एक तरह से अंग्रेजन के प्रिजनर के

1:04:32जैसे रहते हैं अवध के नवाब सुझाव दौला के

1:04:35साथ 16th अगस्त 1765 को इलाहाबाद की

1:04:39त्रुटि साइन होती है इसके अनुसार नवाब

1:04:42कंपनी को 5000000 युद्ध के हर्जन के रूप

1:04:45में देते हैं और साथ ही कोरा और इलाहाबाद

1:04:48के जिला एंपरर शाह आलम तू को सुरेंद्र कर

1:04:51देते हैं और दोनों के बीच एक एलाइंस साइन

1:04:54होता है जिसमें कंपनी किसी भी आउटसाइड

1:04:56अटैक से नवाब को प्रोटेस्ट करने का

1:04:58प्रॉमिस करती है अगर नवाब कंपनी की आर्मी

1:05:01का खर्चा उठा ले इस एलियंस के बाद अवध के

1:05:05नवाब कंपनी के डिपेंडेंट बन जाते हैं इस

1:05:08तरह बक्सर के युद्ध के बाद कंपनी को एन

1:05:10सिर्फ बंगाल का डायरेक्ट कंट्रोल मिल जाता

1:05:12है बल्कि अवध भी इनडायरेक्ट इनके कंट्रोल

1:05:15में ए जाता है दोस्तों यह तो बात हुई

1:05:18अंग्रेजन द्वारा बंगाल के कांग्रेस की

1:05:21प्लासी और फिर बक्सर के बैटल से अंग्रेजन

1:05:24ने बंगाल को अपने कंट्रोल में कर लिया था

1:05:26इस सब में एक इंपॉर्टेंट पर्सनालिटी का

1:05:29राइस हम देखते हैं वो थे रॉबर्ट क्लाइव जो

1:05:33बंगाल के पहले गवर्नर अप्वॉइंट किया जाते

1:05:35हैं तो आई उनके राइस को भी डिस्कस कर लेते

1:05:38हैं

1:05:39राइस ऑफ लाइफ

1:05:41रॉबर्ट क्लाइव बंगाल प्रेसीडेंसी के पहले

1:05:44ब्रिटिश गवर्नर थे क्लाइव का करियर कंपनी

1:05:48के एक ऑर्डिनरी एम्पलाई के रूप में शुरू

1:05:50होता है और कंपनी की सबसे इंपॉर्टेंट

1:05:52प्रेसीडेंसी के गवर्नर बने तक चला है सबसे

1:05:55पहले 1744 में क्लाइव ईस्ट इंडिया कंपनी

1:05:59के लिए फैक्टर या कंपनी एजेंट के रूप में

1:06:01कम करने के लिए मद्रास से सन जॉर्ज फोर्ट

1:06:04पहुंचने हैं इसके बाद वो अपनी एबिलिटी

1:06:07साबित करने के लिए कंपनी की आर्मी में

1:06:10भारती हो जाते हैं सेकंड कार्नेटिक वार के

1:06:13समय आर्कोट की सीध में ब्रिटिश विक्ट्री

1:06:15में अपने रोल के लिए क्लाइव को काफी फेम

1:06:18और प्रशंसा मिलती है फिर 1753 में वो

1:06:22ब्रिटेन लोट जाते हैं लेकिन 1755 में ही

1:06:25उन्हें इंडिया वापस बुला लिया जाता है

1:06:27क्योंकि फ्रेंच के साथ फिर से युद्ध की

1:06:30सिचुएशन बन रही थी उनको

1:06:33डिप्टी गवर्नर बनाया जाता है

1:06:39मिलकर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला से

1:06:42कोलकाता को रीकैप्चर करते हैं इसके बाद

1:06:45क्लाइव कंस्पायरेसी की हेल्प से बैटल ऑफ

1:06:48प्लासी में सिराजुद्दौला को हर देते हैं

1:06:50क्लाइव बंगाल में कुछ फ्रेंच पोर्ट्स को

1:06:53भी कैप्चर कर लेते हैं इन अचीवमेंट्स के

1:06:55लिए उन्हें लॉर्ड क्लाइव बैरन ऑफ प्लासी

1:06:58का टाइटल दिया जाता है प्लासी की जीत के

1:07:01बाद कंपनी इंडिया में एक पैरामाउंट पावर

1:07:03बन जाति है बंगाल उनका हो जाता है जिससे

1:07:07कंपनी के फॉर्चून में बहुत बड़ा इजाफा

1:07:09होता है

1:07:101760 में लाइव फिर से इंग्लैंड लोट जाते

1:07:12हैं इसके बाद 1765 में वो बंगाल के गवर्नर

1:07:17और कमांडर इन के के रूप में इंडिया वापस

1:07:19आते हैं

1:07:21बक्सर की बैटल के बाद होने वाले इलाहाबाद

1:07:24की त्रुटि को नेगोशिएट और साइन करते हैं

1:07:30क्योंकि वो अवध को ब्रिटिश और मराठस के

1:07:33बीच बफर की तरह उसे करना चाहते थे

1:07:36है इसके साथ ही बंगाल में क्लाइव सिस्टम

1:07:38ऑफ ड्यूल गवर्नमेंट इंट्रोड्यूस करते हैं

1:07:41इस सिस्टम के अनुसार बंगाल में दीवानी

1:07:43राइट तो कंपनी के पास रहते हैं लेकिन

1:07:45निजामत यानी की एडमिनिस्ट्रेशन देखने के

1:07:48राइट्स नवाब के पास ही रहते हैं इसका मतलब

1:07:51था कंपनी के पास पावर तो पुरी रहेगी लेकिन

1:07:54रिस्पांसिबिलिटी कुछ भी नहीं लाइव 1767 तक

1:07:59बंगाल के गवर्नर रहते हैं हम का सकते हैं

1:08:01की इंडिया में कंपनी का अंपायर एस्टेब्लिश

1:08:04करने में क्लाइव का काफी इंपॉर्टेंट रोल

1:08:06था

1:08:07कंक्लुजन दोस्तों यह थी अंग्रेजन द्वारा

1:08:11बंगाल के कांग्रेस की पुरी हिस्ट्री जहां

1:08:14एक तरफ प्लासी का बैटल इंग्लैंड के लिए

1:08:17बंगाल का दरवाजा खोलना है वही बक्सर कंपनी

1:08:20की राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं पर एक मोर

1:08:23लगा देता है इसके साथ ही हमने क्लाइव की

1:08:26स्टोरी को भी समझा जो बंगाल के पहले

1:08:28ब्रिटिश गवर्नर बनते हैं अब आगे आने वाली

1:08:31वीडियो में हम देखेंगे की इंग्लिश ईस्ट

1:08:34इंडिया कंपनी कैसे बंगाल के बाद इंडिया के

1:08:37बाकी पार्ट्स पर भी एक-एक करके अपना

1:08:39कंट्रोल एस्टेब्लिश करती है

1:08:47बैटल ऑफ प्लासी और बक्सर को डिस्कस करने

1:08:50के बाद आज हम साउथ इंडिया के मैसूर रीजन

1:08:53की बात करेंगे और जब मैसूर का नाम लिया

1:08:56जाता है तब टाइगर का मैसूर यानी टीपू

1:08:59सुल्तान की बात ना हो ऐसा तो हो ही नहीं

1:09:02सकता तो आज हम टीपू सुल्तान और अंग्रेजन

1:09:05के साथ उनकी रिवरी को डिस्कस करने वाले

1:09:07हैं लेकिन उससे पहले हम उनके पिता हैदर

1:09:10अली के बड़े में भी बात करेंगे और डिटेल

1:09:12में समझेंगे

1:09:20बैकग्राउंड के बड़े में तो आई शुरू करते

1:09:23हैं

1:09:24किंगडम ऑफ मी शो दोस्तों 14th सेंचुरी से

1:09:2817th सेंचुरी के बीच मैसूर विजयनगर अंपायर

1:09:32का सबोर्डिनेट स्टेट हुआ करता था जब

1:09:35विजयनगर अंपायर का डिक्लिन हो जाता है तब

1:09:37बहुत से छोटे-छोटे किंग्डम्स इस रीजन में

1:09:40इमर्ज होते हैं ऐसा ही एक इंडिपेंडेंस

1:09:42हिंदू किंगडम 1612 में मैसूर में बोडिया

1:09:46डायनेस्टी के अंदर इमेज होता है

1:09:4917th सेंचुरी में नर्स राजा बॉडीगार्ड और

1:09:52चिकर आज वोदेयर के रूल के समय मैसूर की

1:09:55टेरिटरी का काफी एक्सपेंशन हुआ इस

1:09:58एक्सपेंशन के बाद मैसूर की टेरिटरी में

1:10:00वेस्टर्न घाट से लेकर कोरोमंडल प्लेन की

1:10:03वेस्टर्न बाउंड्रीज तक का एरिया था यह

1:10:06किंगडम बड़ा होता गया और फिर 1734 में

1:10:09यहां के राजा बने कृष्णा राजा वोट यार डी

1:10:11सेकंड इनका इंटरेस्ट राज्य चलने में नहीं

1:10:14था इसलिए साड़ी बवास इनके दो मंत्री नजराज

1:10:18और देवराज के हाथों में थी

1:10:20इसका मतलब था की कृष्णा

1:10:37[संगीत]

1:10:39क्वालिटीज के चलते वो मैसूर आर्मी में

1:10:42प्रमोट होते गए

1:10:46हैदर अली ने वेस्टर्न मिलिट्री ट्रेनिंग

1:10:48के फायदे को समझा और अपने सोल्जर को उसमें

1:10:51ट्रेन भी किया फ्रेंच कंपनी के एक्सपट्र्स

1:10:54की हेल्प से 1755 में तमिलनाडु के

1:10:57डिंडीगुल में हैदर अली ने कैनन फैक्ट्री

1:11:00भी लगे थी यहां से हैदर अली और फ्रेंच

1:11:03कंपनी के बीच अच्छे रिलेशंस की शुरुआत भी

1:11:05होती है

1:11:07यहां तक की कार्नेटिक वर्स के समय हैदर

1:11:10अली और उनकी बटालियन ने फ्रेंच कमांडर्स

1:11:12जैसे की डुप्लेक्स डॉ डी लाली और डबासी के

1:11:16अंदर सब भी किया था लेकिन मैसूर में एक

1:11:19वीक रोलर होने की वजह से मराठस और

1:11:22हैदराबाद के निजाम मैसूर पर लगातार हमला

1:11:25कर रहे थे जिसकी वजह से मैसूर पॉलिटिकल और

1:11:28फाइनेंशली वीक होने लगा था इससे सिचुएशन

1:11:31में मैसूर को एक स्ट्रांग लीडर की जरूर थी

1:11:34ऐसे में हैदर अली ने 1761 में तक्ता पलट

1:11:38कर दिया और मैसूर के सुल्तान बन गए फिर

1:11:421761 और 1763 के बीच हैदर अली

1:11:48और मालाबार को कैप्चर कर लेते हैं वह

1:11:54फैऊदल लॉर्ड्स पर भी अपना कंट्रोल बना

1:11:56लेते हैं इसके बाद पालीगढ़ टाइम से

1:11:59रिवेन्यू जमा करने लगता हैं

1:12:01इन सब रीजंस की वजह से मैसूर फिर से एक

1:12:04प्रॉस्परस स्टेट बने लगा दोस्तों यह तो

1:12:07बात हुई मैसूर और उसकी सुल्तान हैदर अली

1:12:10की

1:12:11इनकी टक्कर अंग्रेजन के साथ कैसे हुई बात

1:12:15करते हैं फर्स्ट एंग्लो मैसूर वार की

1:12:19फर्स्ट एंग्लो मैसूर वार

1:12:22176-769 मैसूर के फ्रेंच कंपनी के साथ

1:12:26अच्छे रिलेशंस और हैदर अली का मालाबार के

1:12:29रिच ट्रेड पर कंट्रोल इंग्लिश ईस्ट इंडिया

1:12:31कंपनी को अपने पॉलीटिकल और कमर्शियल

1:12:33इंटरेस्ट के लिए खतरा लगे लगता हैं

1:12:37बंगाल के नवाब के खिलाफ बक्सर के युद्ध

1:12:40में मिली सफलता के बाद अंग्रेज हैदराबाद

1:12:42के निजाम के साथ एक ट्वीटी साइन करते हैं

1:12:46जिसके अनुसार हैदर अली से निजाम की

1:12:49सुरक्षा करने के बदले में अंग्रेजन को

1:12:51नॉर्दर्न सरकार इसका जिला मिल जाता है

1:12:53इसके बाद हैदराबाद का निजाम मराठस और

1:12:57अंग्रेज हैदर अली के खिलाफ एक एलाइंस

1:12:59बनाकर युद्ध करते हैं लेकिन हैदर अपनी

1:13:02डिप्लोमेटिक एबिलिटी का उसे करके मराठस को

1:13:06युद्ध में न्यूट्रल कर देते हैं और निजाम

1:13:08को अपना एली बना लेते हैं

1:13:10हैदर अली और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच वार

1:13:13कंटिन्यू राहत है और लगभग वन और हाफ येर

1:13:17तक बिना किसी कंक्लुजन की चला राहत है फिर

1:13:20हैदर अपनी स्ट्रीट्स चेंज करते हैं और

1:13:23अचानक मद्रास के सामने पहुंच जाते हैं

1:13:25इससे मद्रास में कंप्लीट किया और पानी की

1:13:28सिचुएशन हो जाति है जी वजह से अंग्रेज

1:13:31मजबूर होकर हैदर अली के साथ 4th अप्रैल

1:13:341769 को एक त्रुटि साइन करते हैं जिसे

1:13:37ट्रीटी का मद्रास बोला जाता है

1:13:40ट्रीटी के प्रोविजंस के अनुसार वार में जो

1:13:43भी प्रिजनर्स बनाए गए थे उनको एक्सचेंज

1:13:45करना था और साथ ही कन्कर्ड किया हुए

1:13:48एरियाज को भी एक दूसरे को लौटना था इसके

1:13:51साथ ही अंग्रेज हैदर अली से यह भी प्रॉमिस

1:13:54करते हैं की अगर कोई और मैसूर पर अटैक

1:13:56करता है तो वह हैदर अली को हेल्प प्रोवाइड

1:13:59करेंगे

1:14:05तो चलिए समझते हैं ऐसा क्यों होता है

1:14:14दोस्तों

1:14:151769 में फर्स्ट एंग्लो मैसूर वार और होता

1:14:18है और सिर्फ 11 साल बाद ही 1780 में मैसूर

1:14:23और ईस्ट इंडिया कंपनी फिर से आमने सामने

1:14:25होते हैं

1:14:27है इसका एक रीजन था अंग्रेजन द्वारा

1:14:29मद्रास की ट्रीटी का वायलेशन होता यह है

1:14:32की 1771 में मराठा मैसूर पर अटैक कर देते

1:14:36हैं और ऐसे में जब हैदर अली ईस्ट इंडिया

1:14:39कंपनी से हेल्प मांगते हैं तो वो हेल्प

1:14:41देने से माना कर देते हैं

1:14:43इसकी वजह से मराठा मैसूर को बहुत ज्यादा

1:14:46नुकसान पहुंचने हैं और हैदर अली को मजबूर

1:14:49होकर मराठस को 36 लाख रुपए देने पढ़ते हैं

1:14:52शांति समझौते के लिए इस वजह से हैदर अली

1:14:56ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से बहुत ज्यादा

1:14:58नाराज थे

1:15:00लेकिन कंपनी सिर्फ यहां नहीं रुकी वो 1779

1:15:04में मैसूर की टेरिटरी माही पर अटैक कर

1:15:07देती है माही मालाबार कास्ट पर लोकेटेड था

1:15:10और हैदर अली ने इसे फ्रेंच कंपनी को दिया

1:15:12हुआ था

1:15:14माही के थ्रू ही मैसूर को फ्रेंच से

1:15:16एडवांस्ड वार मैटेरियल्स जैसे मिलता था

1:15:20इसके बदले में हैदर अली ने माही की

1:15:22प्रोटेक्शन के लिए अपने ट्रूप्स वहां

1:15:24दिप्लाई किया हुए

1:15:26अटैक के बाद हैदर अली ने भी वार की तैयारी

1:15:29शुरू कर दी

1:15:30है उन्होंने अंग्रेजन के खिलाफ मराठस और

1:15:33निजाम के साथ एलियंस बना लिया लेकिन मराठस

1:15:36और निजाम के साथ तो मैसूर के रिश्ते इतने

1:15:39अच्छे नहीं थे फिर ये एक साथ कैसे ए गए तो

1:15:42दोस्तों मराठाज हैदर अली के साथ इसलिए ए

1:15:45जाते हैं क्योंकि इस समय यानी की 1775 में

1:15:49फर्स्ट एंग्लो मराठा वार भी शुरू हो चुका

1:15:51था और अंग्रेज मराठस और हैदर अली के आम

1:15:55एनीमी बन चुके थे

1:15:57मराठस को तो ठीक पर हैदराबाद मैसूर के साथ

1:16:00कैसे ए जाता है उसका पहले रीजन था निजाम

1:16:04अंग्रेजन से नॉर्दर्न सरकार वापस लेना

1:16:06चाहते थे और दूसरा हैदर अली उन्हें

1:16:09प्रॉमिस करते हैं की निजाम के दुश्मन के

1:16:12नवाब वाला जहां पर अटैक करेंगे और कैप्चरड

1:16:16टेरिटरी को निजाम के साथ शेर

1:16:24कंपनी से हेल्प मांगते हैं

1:16:30अंदर लीडरशिप ऑफ एक्टर मुनरो

1:16:34है और दूसरी टुकड़ी कर्नल विलियम बेली के

1:16:37नेतृत्व में गुंटुर में जो की नॉर्दर्न

1:16:39सरकार कपाट था तैयार की जाति है अंग्रेजन

1:16:42का प्लेन था की यह दोनों ट्रूप्स कांजीवरम

1:16:45में मिलेंगे और मिलकर हैदर अली की आर्मी

1:16:48पर अटैक कर देंगे लेकिन हैदर अली के बेटे

1:16:51टीपू करनाल बेली को कांजीवरम से पहले ही

1:16:54बोली लर नाम की जगह पर रॉक देते हैं और

1:16:57दोनों ब्रिटिश आर्मी को कंबाइन नहीं होने

1:16:59देते

1:17:001780 में पॉलीनुर की बैटल हुई जिसमें

1:17:03इंग्लिश आर्मी को हर का सामना करना पड़ा

1:17:05और करनाल बेली ने सुरेंद्र कर दिया दूसरी

1:17:09तरफ एक्टर मंगरो की आर्मी पर हैदर अली ने

1:17:12अटैक कर दिया और हेक्टर माणुरोब भाग कर

1:17:14अपनी आर्मी के साथ वापस मद्रास पहुंच गए

1:17:17हैदर अली मद्रास जान की जगह वापस की तरफ

1:17:21जाते हैं और घेर को और मजबूत करते हैं तभी

1:17:24खबर आई है की मैसूर

1:17:26ब्रिटिश आर्मी ने कैप्चर करना शुरू कर

1:17:29दिया है उनको रोकने के लिए टीपू मालाबार

1:17:32की तरफ चले जाते हैं इसी बीच बंगाल से एक

1:17:35बहुत बड़ी ब्रिटिश आर्मी कू की लीडरशिप

1:17:38में मद्रास पहुंच जाति है

1:17:40सराय कू मद्रास पहुंचकर सबसे पहले अपनी

1:17:43डिप्लोमेटिक स्किल को उसे करके मराठस और

1:17:46निजाम को हैदर अली से अलग कर देते हैं और

1:17:50फिर 1781 में हैदर अली और कू के बीच कई

1:17:54सारे बॉटल्स होते हैं जिसमें से तीन

1:17:56इंपॉर्टेंट बॉटल्स बैटल ऑफ प्रोटॉन और

1:18:00शॉलिंगुर में सरकुट हैदर अली को हर देते

1:18:03हैं

1:18:05लेकिन इसी बीच सेवंथ दिसंबर 1782 को हैदर

1:18:09अली की कैंसर से डेथ हो जाति है उसके बाद

1:18:12उनके बेटे टीपू मैसूर के सुल्तान बनते हैं

1:18:15हैदर अली की डेथ के बाद टीपू और कंपनी के

1:18:18बीच लगभग एक और साल तक बॉटल्स में हर जीत

1:18:22का सिलसिला चला रहा इतने समय तक वार चलने

1:18:25के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकाल रहा था

1:18:27इसलिए फाइनली दोनों पार्टी पीस करने का

1:18:30फैसला करती हैं और 1784 में

1:18:33मंगलौर साइन की जाति है

1:18:40वापस कर देती हैं इस तरह से सेकंड एंग्लो

1:18:44मैसूर वार का भी और हो जाता है

1:18:47लेकिन मैसूर और इंग्लिश कंपनी के बीच

1:18:49कनफ्लिक्ट खत्म नहीं होता और 1790 में एक

1:18:53बार फिर से दोनों के बीच वार शुरू होता है

1:18:55लेकिन थर्ड एंग्लो मैसूर वार को डिस्कस

1:18:58करने से पहले हम टीपू सुल्तान के बड़े में

1:19:00जान लेते हैं

1:19:02टीपू सुल्तान नवंबर

1:19:06टीपू सुल्तान हैदर अली ग्रेट वारियर थे

1:19:10जिन्हें टाइगर ऑफ मैसूर के नाम से भी जाना

1:19:13जाता है

1:19:14टीपू वेल एजुकेटेड थे जिन्हें एरोबिक

1:19:17परसों कैलोरीज और उर्दू का ज्ञान था

1:19:21अपने फादर हैदर अली की तरह टीपू भी एक

1:19:24एफिशिएंट मिलिट्री जनरल थे वह अपनी आर्मी

1:19:27को यूरोपीय मॉडल के बेसिस पर ऑर्गेनाइज

1:19:30करते हैं इसके साथ ही वह अपने सोल्जर को

1:19:33ट्रेन करने में फ्रेंच ऑफिसर्स की हेल्प

1:19:35भी लेते हैं

1:19:36टीपू लेवल फोर्स की इंर्पोटेंस को बहुत

1:19:38अच्छी तरह समझते थे इसलिए 1796 में वह

1:19:42बोर्ड ऑफ रियलिटी को सेटअप करते हैं उनका

1:19:45प्लेन 22 बैटलशिप की

1:19:48बड़े फिगर्स तैयार करने का था

1:19:51इसके अलावा उन्होंने मंगलौर बजे दबाव और

1:19:55मोलीदाबाद में तीन डॉकयार्ड भी बनवाई टीपू

1:19:58सुल्तान साइंस और टेक्नोलॉजी

1:20:06ऑपरेशन को एक्सप्लेन करने वाली एक

1:20:09मिलिट्री मैन्युअल लिखी थी

1:20:11टीपू लैंड रिवेन्यू सिस्टम में भी

1:20:14रिफॉर्म्स लेकर आते हैं और मैसूर में

1:20:16सेरीकल्चर को भी प्रमोट करते हैं उन्होंने

1:20:19एक स्टेट कमर्शियल कॉरपोरेशन को भी कमीशन

1:20:22किया था यूरोपीय की तरह फैक्टरीज सेटअप

1:20:25करने के लिए हम का सकते हैं की टीपू

1:20:28सुल्तान एक एबल मिलिट्री जनरल के साथ एक

1:20:31एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेटर भी थे

1:20:33उनका एक कोटेशन है की तू लाइव लाइक ए लायन

1:20:36पर ए दे इस फॉर बटर दें तू लाइव 100 इयर्स

1:20:39लाइक एन जाकर और अपनी लाइफ और डेथ में

1:20:42टीपू इसे पूरा भी करते हैं तो आई अब वापस

1:20:46चलते हैं टीपू सुल्तान और इंग्लिश कंपनी

1:20:48के बीच हुए थर्ड एंग्लो मैसूर वार पर

1:20:53थर्ड एंग्लो मैसूर वार 79292

1:20:59सुल्तान और अंग्रेजन के बीच कनफ्लिक्ट को

1:21:02रिजॉल्व करने के लिए काफी नहीं थी

1:21:04दोनों ही डेक्कन के रीजन में अपनी

1:21:07पॉलीटिकल सुप्रीमेसी एस्टेब्लिश करना

1:21:09चाहते थे थर्ड एंग्लो मैसूर होता है जब

1:21:13टीपू ट्रैवल को और पर अटैक कर देते हैं

1:21:16त्रवंकोर अंग्रेजन का और ईस्ट इंडिया

1:21:20कंपनी के लिए पेपर का एकमात्र सोर्स भी

1:21:26करता है यह दोनों कोचिंग स्टेट का पार्ट

1:21:29है जो की टीपू का

1:21:33इसलिए टीपू ट्रैवल कर के इस एक्ट को अपने

1:21:36सावरेन राइट्स का वायलेशन मानते हैं और

1:21:39उसे पर अटैक करते हैं इसके बाद ब्रिटिश

1:21:42त्रवंकोर की साइड लेते हुए मैसूर पर अटैक

1:21:45कर देते हैं

1:21:46इसके साथ ही निजाम और मराठा जो की टीपू की

1:21:50बढ़नी हुई पावर सेजल थे ब्रिटिशर्स को

1:21:53जॉइन कर लेते हैं

1:21:55टीपू सुल्तान जनरल मडोज के अंदर ब्रिटिश

1:21:58आर्मी को हर देते हैं

1:22:01फिर 791 में लॉर्ड कार्नवालिस आर्मी को

1:22:04लीड करते हुए श्रीरंगपट्टनम पहुंच जाते

1:22:06हैं जो टीपू की कैपिटल थी

1:22:09मराठाज और निजाम की सपोर्ट से अंग्रेज

1:22:12श्रीरंगपट्टनम पर अटैक करते हैं टीपू

1:22:15बहादुर के साथ उनका सामना करते हैं लेकिन

1:22:17तीनों की कंबाइन पावर के सामने फाइनली हर

1:22:20जाते हैं

1:22:35बड़ा महल दिल्ली और मालाबार अंग्रेजन को

1:22:38मिलते हैं जबकि तुंगभद्र और उसकी

1:22:40ट्रिब्यूटरीज के आसपास के रीजन मराठस को

1:22:43मिल जाते हैं और निजाम को रिवर कृष्णा से

1:22:46न तक का एरिया मिलता है

1:22:48है इसके अलावा और डैमेज के रूप में टीपू

1:22:51से ₹3 करोड़ भी मांगे जाते हैं जिसमें से

1:22:54हाफ अमाउंट को तुरंत पे करना था और बाकी

1:22:57को इंस्टॉलमेंट में और इसकी गारंटी के लिए

1:23:00अंग्रेज टीपू के दो बेटों को अपना होस्टेस

1:23:02बना लेते हैं थर्ड एंग्लो मैसूर वार साउथ

1:23:06में टीपू की डोमिनेंट पोजीशन को डिस्ट्रॉय

1:23:08कर देता है और वहां ब्रिटिश सुप्रीमेसी को

1:23:11एस्टेब्लिश करता है

1:23:13टीपू सुल्तान की पावर डिस्ट्रॉय तो हुई थी

1:23:15लेकिन पुरी तरह खत्म नहीं अंग्रेजन को अभी

1:23:19भी उनसे खतरा महसूस होता था इसलिए 1799

1:23:23में फिर से एक वार होता है तो चलिए उसको

1:23:26भी डिस्कस करते हैं

1:23:33टीपू सुल्तान को काफी हमिलिएट होना पड़ा

1:23:36था लेकिन फिर भी टीपू ट की सभी कंडीशंस को

1:23:40पूरा करते हैं और ब्रिटिशर्स को और

1:23:43कंपनसेशन का बच्चा हुआ अमाउंट देकर अपने

1:23:45बेटों को भी रिलीज करवा लेते हैं

1:23:48है लेकिन टीपू को अपने हमिलिएशन का बदला

1:23:51भी चाहिए था इसलिए वह 1792 से 1799 के बीच

1:23:56अपने सभी लॉसेस को रिकवर करते हैं

1:23:59और इसके साथ ही वह फ्रेंच ईस्ट इंडिया

1:24:02कंपनी से अपने रिश्ते अच्छे करते हैं इसके

1:24:05लिए वो फ्रेंच ऑफिसर्स के द्वारा मैसूर

1:24:07में 1794 में जैकोबिन क्लब की

1:24:10एस्टेब्लिशमेंट का भी सपोर्ट करते हैं

1:24:13जैकोबिन क्लब फ्रांस की एक रिवॉल्यूशनरी

1:24:15ऑर्गेनाइजेशन थी जो फ्रांस में मोनोकी की

1:24:18जगह रिपब्लिकन गवर्नमेंट चाहते थे

1:24:21टीपू खुद भी जैकोबिन क्लब के मेंबर बनते

1:24:24हैं और श्री गंगा पटनम में ट्री ऑफ

1:24:27लिबर्टी भी प्लांट करते हैं और इसी समय

1:24:29टीपू फ्रांस के नेपोलियन बोनापार्ट जो

1:24:32इजिप्ट में कैंपेन कर रहे होते हैं उनके

1:24:35साथ कांटेक्ट करते हैं वह ब्रिटिश ईस्ट

1:24:38इंडिया कंपनी के खिलाफ साथ में मिलकर

1:24:40लड़ने के लिए इनवाइट करते हैं

1:24:43इसके अलावा टीपू सुल्तान अपने

1:24:49भेजते हैं उम्मीद थी की यहां से भी उन्हें

1:24:53सपोर्ट मिलेगा और सब मिलकर ब्रिटिश का

1:24:56सफाई कर देंगे लेकिन अंग्रेजन को टीपू के

1:24:59प्लांस के बड़े में पता चल जाता है और

1:25:011798 में नए गवर्नर जनरल लॉर्ड इंडिया में

1:25:06ए चुके होते

1:25:08फ्रांस के बीच बढ़नी हुई दोस्ती को लेकर

1:25:11काफी कंसर्न थे

1:25:13टीपू की इंडिपेंडेंस को खत्म करने के लिए

1:25:16बैलंसली उन्हें सब्सिडियरी एलाइंस की

1:25:18ट्वीटी पर साइन करने के लिए कहते हैं जब

1:25:21टीपू सुल्तान ऐसी किसी भी त्रुटि पर साइन

1:25:23करने से माना कर देते हैं तब फोर्थ एंग्लो

1:25:26मैसूर वार की शुरुआत होती है

1:25:29इस वार में भी मराठाज और निजाम अंग्रेजन

1:25:32की हेल्प करते हैं क्योंकि मराठाज को टीपू

1:25:36की आदि टेरिटरी देने का प्रॉमिस किया जाता

1:25:38है और निजाम पहले ही अंग्रेजन के साथ

1:25:41सब्सिडियरी एलाइंस साइन कर चुके थे इन

1:25:441798

1:25:46यह वार 17th अप्रैल 1799 को शुरू होती है

1:25:49और फोर्थ में 1799 को श्री रंग पटनम के फल

1:25:53के साथ खत्म हो जाति है

1:25:56टीपू अपनी कैपिटल को बचाने के लिए बहादुर

1:25:59से लड़ते हैं और इसमें उनकी मृत्यु हो

1:26:01जाति है उनकी पुरी ट्रेजरी पर अंग्रेज

1:26:04कब्जा कर लेते

1:26:10मराठस को ऑफर करते हैं लेकिन मराठाज

1:26:13उन्हें लेने से माना कर देते

1:26:17और गरम गोंडा डिस्ट्रिक्ट दिए जाते हैं और

1:26:21ब्रिटिश अपने पास का नारा वायानाड

1:26:23कोयंबटूर द्वारा

1:26:34कृष्णा राजा थे थर्ड को दे दिया जाता है

1:26:37कृष्णा राजद ए थर्ड अंग्रेजन के साथ

1:26:40सब्सिडियरी एलाइंस भी साइन कर लेते हैं

1:26:43कंक्लुजन तो दोस्तों आज हमने समझा की कैसे

1:26:48मैसूर और इंग्लिश कंपनी के बीच लगभग 32

1:26:51सालों तक कनफ्लिक्ट चला और इनके बीच कर

1:26:54वर्स हुए इसके साथ ही अंग्रेज कैसे इंडियन

1:26:57स्टेटस की आपस की रिवरी का फायदा उठाते

1:27:00हैं ये भी हमें एंग्लो मैसूर वर्स में

1:27:02देखने को मिलता है बिना मराठाज और निजाम

1:27:05की हेल्प के अंग्रेज शायद मैसूर को कभी

1:27:08नहीं जीत पाते और हमने टाइगर ऑफ मैसूर कहे

1:27:12जान वाले टीपू सुल्तान के बड़े में भी

1:27:14जाना

1:27:19चाहते हैं की मराठा अंपायर जिसके फाउंडर

1:27:21छत्रपति शिवाजी महाराज थे जिसे बालाजी

1:27:24विश्वनाथ और बाजीराव वन जैसे एंबिशियस

1:27:27पेशवा और भी स्ट्रांग पावर बना देते हैं

1:27:29उसका अल्टीमेटली डिक्लिन कैसे होता है आज

1:27:32हम इसी क्वेश्चन का आंसर अपनी इस वीडियो

1:27:34के थ्रू समझेंगे हम डिस्कस करेंगे की कैसे

1:27:38ब्रिटिश के आने के बाद उनका और मराठस का

1:27:41कनफ्लिक्ट शुरू होता है दोनों पावर के बीच

1:27:43हुए एंग्लो मराठा वर्स को भी समझेंगे और

1:27:46देखेंगे की आखिर मराठा अंपायर के डिक्लिन

1:27:48के पीछे क्या रीजन थे तो आई शुरू करते हैं

1:27:52सबसे पहले जानते हैं की ब्रिटिश के साथ

1:27:54कनफ्लिक्ट से जस्ट पहले मराठा अंपायर की

1:27:57क्या सिचुएशन थी

1:27:59मराठा अंपायर ड्यूरिंग सेकंड हाफ का थे

1:28:0218th सेंचुरी

1:28:04दोस्तों आपने थर्ड बैटल ऑफ पानीपत के बड़े

1:28:06में तो सुना ही होगा यह बैटल 14th जनवरी

1:28:091761 को मराठस और अफगान रोलर अहमद शाह

1:28:13अब्दाली के फोर्सेस के बीच हुई थी पानीपत

1:28:16में मराठस की हर उनके लिए एक डिजास्टर

1:28:19साबित होती है मराठस पानीपत की बैटल में

1:28:22लगभग

1:28:2328000 सोल्जर और सदाशिव राव और विश्वास

1:28:26राव जैसे इविल मिलिट्री कमांडर्स को को

1:28:28देते हैं इसके साथ ही उनकी पॉलीटिकल

1:28:30प्रेस्टीज को भी बड़ा झटका लगता है इस

1:28:33बैरल के समय उनके पेशवा थे बालाजी बाजीराव

1:28:36और पानीपत में मिली हर के सदमे की वजह से

1:28:39जून 1761 में इनकी भी मृत्यु हो जाति है

1:28:43तब फिर इनके 17 साल

1:28:48और स्टेट्समैन थे 11 साल के छोटे से

1:28:51पीरियड में ही माधवराव वन पानीपत की बैटल

1:28:54के बाद कोई हुई मराठा पावर को रिस्टोर

1:28:56करने में कामयाब होते हैं वो 1762 में

1:29:00हैदराबाद में निजाम को हर देते हैं मैसूर

1:29:03के हैदर अली को 1767 में ट्रिब्यूट पे

1:29:06करने के लिए मजबूर कर देते हैं और साथ ही

1:29:08नॉर्थ इंडिया में रोहिलास को हराकर राजपूत

1:29:11स्टेटस और जाट के को सबजूगेट करके वहां

1:29:14अपने कंट्रोल को रिसेट करते हैं इस तरह एक

1:29:17बार फिर से मराठा अंपायर पावरफुल होने

1:29:19लगता है की तभी कहानी में एक और ट्वीट आता

1:29:22है

1:29:231772 में माधवराव वन की टीवी की बीमारी के

1:29:27करण मृत्यु हो जाति है इसके बाद मराठस के

1:29:30बीच सक्सेशन को लेकर कनफ्लिक्ट शुरू होता

1:29:32है और यही फर्स्ट एंग्लो मराठा वार का

1:29:35बैकग्राउंड बंता है तो आई समझते हैं इस

1:29:38कनफ्लिक्ट और फर्स्ट एंग्लो मराठा वार को

1:29:42फर्स्ट एंग्लो मराठा वार 1775 तू 1782

1:29:47माधवराव की मृत्यु के बाद उनके भाई नारायण

1:29:50राव और अंकल रघुनाथ राव के बीच पावर के

1:29:53लिए तास शुरू हो जाता है नारायण राव पेशवा

1:29:57तो बन जाते हैं लेकिन 1773 में ही उनको

1:30:00मारवा दिया जाता है रघुनाथ राव को लगता है

1:30:03की नारायण राव की मृत्यु के बाद तो पेशवा

1:30:05की गति उनको ही मिलेगी लेकिन उनके सारे

1:30:08अरमानों पर जल्द ही पानी फिर जाता है ऐसा

1:30:10इसलिए क्योंकि नाना फडणवीस और मजी सिंधिया

1:30:14जैसे प्रॉमिनेंट मराठा जनरल्स की काउंसिल

1:30:16पेशवा की गाड़ी के लिए सवाई माधवराव को

1:30:19सपोर्ट करने का डिसीजन लेती है

1:30:23और इसे 12 भाई काउंसिल कहा जाता था इसके

1:30:26लीडर नाना फडणवीस थे

1:30:29सवाई माधवराव का जन्म नारायण राव की

1:30:31मृत्यु के कुछ मीना बाद हुआ था और वह

1:30:34सिर्फ 40 दिन के ही थे जब उन्हें पेशवा

1:30:37बना दिया जाता है इन्हें माधवराव तू के

1:30:39नाम से भी जाना जाता है इसके बाद

1:30:41फ्रस्ट्रेटेड होकर रघुनाथ राव 1775 में

1:30:45ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की बॉम्बे

1:30:47काउंसिल से मिलते हैं और पेशवा बने के लिए

1:30:49उनसे हेल्प मांगते हैं कंपनी हेल्प करने

1:30:52के बदले में सेल सेट और बैसीन को लेने की

1:30:55डिमांड करती है और साथ ही सूरत और भरूच

1:30:58जिला से मिलने वाले रिवेन्यू में भी शेर

1:31:01मांग लेती है रघुनाथ राव इसके लिए एग्री

1:31:04हो जाते हैं और बदले में कंपनियां ने अपने

1:31:06251 सोल्जर दे देती है इस एग्रीमेंट को

1:31:09ट्रीटी का सूरत कहा जाता है यहां से

1:31:12शुरुआत होती है फर्स्ट एंग्लो मराठा वार

1:31:14की स्तुति कंपनी को भी सेंड कर दी जाति है

1:31:18क्योंकि रेगुलेटिंग एक्टिव 1773 के बाद

1:31:22बंगाल के पास मुंबई और मद्रास काउंसिल के

1:31:25सुपरविजन की पावर थी इसलिए किसी भी डिसीजन

1:31:28का बंगाल पेंसिल से रतीफाई होना जरूरी था

1:31:30इधर 15थ मार्च 1775 को रघुनाथ राव और

1:31:34करनाल की टीम की लीडरशिप में ब्रिटिश

1:31:37फोर्सेस बैटल के लिए मराठाज की तरफ बढ़ाने

1:31:39लगती है मराठस की तरफ से लीड कर रहे थे

1:31:42हरि पेंट के दोनों बैटलफील्ड में

1:31:45आमने-सामने होते हैं और फर्स्ट एंग्लो

1:31:47मराठा वार की शुरुआत होती है

1:31:49मराठस ने गोरिल्ला वार टेक्निक्स का उसे

1:31:52करके ब्रिटिश फोर्सेस की हालात खराब कर दी

1:31:54यह वार अभी चल ही रही थी की कंपनी की

1:31:57बंगाल काउंसिल के पास सूरत क्रिटिकल लेटर

1:32:00पहुंच जाता है गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग

1:32:02ट्रीटी का सूरत को कंडोम करते हैं और

1:32:05मुंबई काउंसिल को वार रोकने का ऑर्डर दे

1:32:07देते हैं और साथ ही मराठस को भी मैसेज

1:32:10भेजते हैं की वह वार ना करके उनसे एक

1:32:13फ्रेंडली ट्वीटी करना चाहते

1:32:16उनको मराठस के पास भेजते हैं और 1776 में

1:32:21ट्रीटी का पुरंदर साइन करते हैं

1:32:28साथ ही ये प्रॉमिस करते हैं की वो मराठस

1:32:31के किसी भी रेबल को सपोर्ट नहीं करेंगे

1:32:33बदले में वार के टाइम मराठाज ने जिन

1:32:36ब्रिटिश टेरिटरीज को जीत लिया था वो

1:32:38ब्रिटिशर्स को वापस मिल जाएगी लेकिन

1:32:40ट्रीटी का पुरंदर के बाद भी फर्स्ट एंग्लो

1:32:43मराठा वार खत्म नहीं होती क्योंकि एक तरफ

1:32:45तो बॉम्बे काउंसिल ने रघुनाथ राव को अभी

1:32:48भी शरण दी हुई थी और दूसरी तरफ इंग्लैंड

1:32:51में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स पुरंदर की

1:32:52ट्वीटी को एक्सेप्ट नहीं करते इस तरह फिर

1:32:55से वार शुरू हो जाता है ब्रिटिशर्स मराठस

1:32:58पर अटैक करते हैं और मराठा आर्मी को खुद

1:33:01महाद्वीप सिंधिया लीड करते हैं

1:33:03तलेगांव में दोनों के बीच बैटल होता है और

1:33:06ब्रिटिश को यहां हर मिलती है ब्रिटिश

1:33:08आर्मी यहां से भाग कर वडगांव पहुंच जाति

1:33:11है लेकिन मजी सिंधिया की आर्मी वहां भी

1:33:14उन्हें घर लेती है और 1779 में ब्रिटिश

1:33:17आर्मी सुरेंद्र कर देती है यहां पर ही

1:33:20ट्वीटी ऑफ बड़गांव साइन की जाति है जिसके

1:33:22अकॉर्डिंग ब्रिटिश गवर्नमेंट ने मराठाज की

1:33:25जितनी भी टेरिटरीज होती हैं 17 125 से सब

1:33:30वापस करनी पड़ती हैं यह ट्रीटी बॉम्बे

1:33:33काउंसिल और मराठस के बीच हुई थी लेकिन एक

1:33:36बार फिर वारेन हेस्टिंग्स बॉम्बे काउंसिल

1:33:38की ट्वीटी को एक्सेप्ट नहीं करते और

1:33:40कोलकाता से तीन डिफरेंट ब्रिटिश फोर्सेस

1:33:43को भेज देते हैं एक कर्नल गोदादर की

1:33:45लीडरशिप में दूसरी कैप्टन परफॉर्म की और

1:33:48तीसरी जनरल केमच की लीडरशिप में फरवरी

1:33:521779 में करनाल गोदर अहमदाबाद को कैप्चर

1:33:55कर लेते हैं और फिर अगस्त 1780 में कैप्टन

1:33:58परफॉर्म ग्वालियर को इसके बाद दिसंबर 1780

1:34:02में करनाल गॉड ब्लेसिंग को भी कैप्चर कर

1:34:04लेते हैं और फरवरी 1781 में जनरल कबक ने

1:34:08महाजी सिंधिया को भी हर दिया

1:34:11है इसके बाद वारेन हेस्टिंग्स मराठस के

1:34:13साथ ट्वीटी साइन करने का डिसीजन लेते हैं

1:34:15यह थी ट्रीटी का सालबाई जो फर्स्ट एंग्लो

1:34:19मराठा वार की सबसे इंपॉर्टेंट ट्रीटी थी

1:34:21इसके अकॉर्डिंग सेल्सियस के पास ही रहेगा

1:34:25लेकिन ट्रीटी का पुरंदर के बाद एक्वायर की

1:34:27हुई बाकी सभी मराठा टेरिटरी उन्हें वापस

1:34:30कर दी जाएगी साथ ही ब्रिटिशर्स रघुनाथ राव

1:34:33का सपोर्ट नहीं करेंगे और पेशवा रघुनाथ

1:34:36राव को पेंशन दे देंगे इसके अलावा यह भी

1:34:39डिसाइड होता है की पेशवा और किसी भी

1:34:41यूरोपियन पावर को सपोर्ट नहीं करेंगे इस

1:34:44तरह ट्रीटी का सालबाई से 1782 में फाइनली

1:34:48फर्स्ट एंग्लो मराठा वार का और होता है

1:34:50सालबाई की ट्वीटी के बाद मराठस और ब्रिटिश

1:34:53के बीच 20 साल तक तो कोई कनफ्लिक्ट नहीं

1:34:56होता यह टाइम ब्रिटिश

1:34:59को कंप्लीट करने में लगाते हैं और दूसरी

1:35:02तरफ मराठा कांफिडूरीसी में दरार और ज्यादा

1:35:05बाढ़ जाति है

1:35:06कनफेडरेसी की बात करें तो दोस्तों पेशवा

1:35:10बाजीराव वन के टेन्योर में मराठा अंपायर

1:35:12को कर पावरफुल मराठा चिप्स के बीच डिवाइड

1:35:15कर दिया गया था ये थे ग्वालियर के सिंधिया

1:35:18नागपुर के भोसले इंदौर के होलकर और बड़ौदा

1:35:21के गायकवाड

1:35:23यह सभी चिप्स मिलकर मराठा कांफिडोसी बनाते

1:35:26थे और पेशवा कनफेडरेसी के ऑफिशल हेड होते

1:35:30थे लेकिन पावर स्ट्रगल और म्युचुअल जूलूस

1:35:33के चलते चिप्स के बीच हमेशा कनफ्लिक्ट चला

1:35:36राहत था यह कनफ्लिक्ट पेशवा के वीक होने

1:35:39पर और भी ज्यादा बाढ़ जाता है जैसे की

1:35:42सेकंड एंग्लो मराठा वार के टाइम देखने को

1:35:44मिलता है तो आई सेकंड एंग्लो मराठा वार को

1:35:48डिस्कस करते हैं

1:35:50सेकंड एंग्लो मराठा वार 18002 तू 18005

1:35:54दोस्तों सेकंड एंग्लो मराठा वार को डिस्कस

1:35:58करने से पहले इसका बैकग्राउंड जान लेते

1:36:00हैं

1:36:001795 में पेशवा माधवराव सेकंड सुसाइड

1:36:04कमेंट कर लेते हैं इनकी आगे सिर्फ 21 साल

1:36:07थी और तब तक इनकी कोई संतान भी नहीं थी

1:36:10रघुनाथ राव जो पेंशन लेकर रिटायर हो चुके

1:36:13थे उनके तीन बेटे थे बाजीराव सेकंड सीमा

1:36:17जी राव सेकंड और अमृत राव इन कंडीशंस में

1:36:20बाजीराव सेकंड पेशवा बनते हैं बाजीराव

1:36:23सेकंड तो एक वीक पेशवा थे लेकिन नाना

1:36:26फडणवीस इनके के मिनिस्टर बनकर मराठा पावर

1:36:30को संभाले हुए थे लेकिन 1800 में नाना

1:36:33फडणवीस की मृत्यु हो जाति है और इसके बाद

1:36:35मराठा कांफिडोसी को संभालने वाला कोई भी

1:36:38नहीं बचत मराठा कांफिडोसी के के के बीच

1:36:41आपस में ही वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो जाति

1:36:43है उसे टाइम सबसे पावरफुल के थे इंदौर के

1:36:47जसवंत राव होलकर और ग्वालियर के यात्राओं

1:36:50सिंधिया होलकर और सिंधिया के बीच आपस में

1:36:53टकराव होते रहते थे और इसमें पेशवा

1:36:55सिंधिया को सपोर्ट कर रहे थे जसवंत राव

1:36:58होलकर बिना पेशवा की परमिशन के नॉर्थ की

1:37:01तरफ टेरिटरी एक्वायर करने के लिए कैंपेन

1:37:03कर रहे थे इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई

1:37:06बिट्टू जी होलकर को साउथ की तरफ कैंपेन के

1:37:09लिए भेजो था लेकिन विठू जी पेशवा की ही

1:37:12टेरिटरी को लूटने लगता हैं तब पेशवा

1:37:15बाजीराव सेकंड उन्हें अरेस्ट कर लेते हैं

1:37:17और ऑर्डर देते हैं की बिट्टू जी होलकर को

1:37:19हाथी के पैरों से कुचलकर मारवा दिया जाए

1:37:22यह सुनकर जसवंत राव होलकर आज बाबला हो

1:37:25जाते हैं और 18002 में सिंधिया और पेशवा

1:37:29की कंबाइंड आर्मी पर अटैक कर देते हैं

1:37:31होलकर इनकी आर्मी को पुणे के पास बुरी तरह

1:37:34से हर देते हैं

1:37:36होलकर के डर की वजह से बाजीराव सेकंड पूना

1:37:39छोड़कर वैसे ही चले जाते हैं जसवंत राव

1:37:43होलकर पुणे में अपने करीबी विनायक राव को

1:37:46पेशवा डिक्लेअर कर देते हैं विनायक राव

1:37:48अमृत राव के बेटे और बाजीराव सेकंड के

1:37:51भतीजे थे बाजीराव सेकंड वापस पेशवा बने के

1:37:55लिए ब्रिटिश से हेल्प मांगते हैं यानी की

1:37:57जो गलती उनके पिताजी रघुनाथ राव ने की थी

1:37:59ये भी वही करते हैं मराठस के इंटरनल मटर

1:38:03में ब्रिटिश इंटरफ्रेंस को इनवाइट करके

1:38:06बाजीराव सेकंड और ब्रिटिशर्स के बीच 18002

1:38:10में साइन होती है 20 साल बाद यह मराठस और

1:38:14ब्रिटिशर्स के बीच फिर से एक इंपॉर्टेंट

1:38:16ट्रीटी थी इसके प्रोविजंस के अकॉर्डिंग

1:38:18सूरत ब्रिटिशर्स को मिलन था और साथ ही

1:38:21मराठाज हैदराबाद के निजाम से जो चौथ की

1:38:24डिमांड करते थे वह भी बैंड करनी थी इसके

1:38:27बदले में कंपनी 6000 ट्रूप्स बाजीराव

1:38:29सेकंड को दे रही थी जो पेशवा बने में तो

1:38:32उनकी हेल्प करने ही वाले थे लेकिन उसके

1:38:34बाद भी बाजीराव सेकंड को इन्हें अपनी

1:38:36मिलिट्री में ही रखना था और इनका पूरा

1:38:38खर्चा उठाना था दूसरे शब्दों में कहें तो

1:38:41बाजीराव सेकंड ब्रिटिशर्स के साथ एक

1:38:43सब्सिडियरी एलाइंस की त्रुटि साइन कर लेते

1:38:46हैं जिसमें प्रचारक लॉर्ड वालेस्ले थे

1:38:4813th में 18003 को ब्रिटिशर्स के

1:38:52प्रोटेक्शन में बाजी राव सेकंड फिर से

1:38:54पेशवा बन गए लेकिन पेशवा अब ब्रिटिशर्स के

1:38:57कंट्रोल में हो गए थे सब्सिडियरी एलाइंस

1:38:59की ये ट्रीटी किसी भी मराठा के को पसंद

1:39:02नहीं ए रही थी क्योंकि उन्हें अपनी फ्रीडम

1:39:05बहुत पसंद थी और सब्सिडियरी एलाइंस साइन

1:39:07करके पेशवा ने मराठस की फ्रीडम एक तरह से

1:39:11ब्रिटिश को दे दी थी और यही करण बंता है

1:39:14सेकंड एंग्लो मराठा वार का सिंधिया और

1:39:17भोसले कोशिश करते हैं की ब्रिटिश को हराकर

1:39:20पेशवा को इस ट्रीटी के दाल से बाहर निकाला

1:39:22जाए लेकिन उनकी यह कोशिश असफल रहती है

1:39:27और सभी मराठा चिप्स के साथ अलग-अलग ट साइन

1:39:31करते हैं घोसला के साथ 17th दिसंबर 183 को

1:39:36ट्रीटी ऑफ देवगांव साइन होती है और

1:39:38सिंधिया के साथ 30th दिसंबर 183 को ट्रीटी

1:39:43का सुरजी अंजनगांव सिंधिया से ब्रिटिशर्स

1:39:46को रोहतक गंगा यमुना द्वारा गुड़गांव

1:39:48दिल्ली आगरा रीजन ब्रोच गुजरात के कुछ

1:39:52डिस्ट्रिक्ट बुंदेलखंड का कुछ पार्ट और

1:39:54अहमदनगर का फोर्ट मिलता है और भोसले से

1:39:57घटक बालेश्वर और वर्धारी भर के वेस्ट का

1:40:00एरिया इन्हें मिल जाता है

1:40:02184 में होलकर भी ब्रिटिशर्स पर अटैक करते

1:40:06हैं लेकिन 185 तक यह भी हर जाते हैं और

1:40:1018006 में इनके साथ होती है ट्रीटी का

1:40:13राजपुर घाट होलकर से ब्रिटिश को टोंक

1:40:16बूंदी और रामपुर की टेरिटरी मिलती है

1:40:19दोस्तों यहां समझना वाली बात यह है की सभी

1:40:23मराठा चिप्स अलग रहे थे इन्होंने यूनाइटेड

1:40:36और का और हो जाता है इस वार में मराठस को

1:40:39काफी ज्यादा टेरिटरीज का लॉस होता है और

1:40:41साथ ही मराठा चिप्स सब्सिडियरी एलाइंस भी

1:40:44एक्सेप्ट कर लेते हैं उनकी पोजीशन अब

1:40:46कंपनी की तुलना में कमजोर हो जाति है

1:40:48लेकिन मराठस और ब्रिटिशर्स के बीच का

1:40:51कनफ्लिक्ट यहां भी खत्म नहीं होता और

1:40:54दोनों के बीच थर्ड एंग्लो मराठा वार होती

1:40:56है तो चलिए अब थर्ड एंग्लो मराठा वार को

1:40:59डिस्कस करते हैं थर्ड एंग्लो मराठा वार

1:41:021817 तू 18 18 दोस्तों थर्ड एंग्लो मराठा

1:41:06वार होती है पिंडारी इसके इश्यूज पर

1:41:09मराठस जब भी किसी बैटल या एक्सपेंडिचर पर

1:41:12जाते थे तो पिंडारी को भी अपनी सी के साथ

1:41:15रखते थे पिंडारी इस बेसिकली मिलिट्री

1:41:18प्लंडर हुआ करते थे जो मराठा आर्मी के साथ

1:41:21जोड़ने थे

1:41:23मिशनरीज मतलब की यह लोग मराठा से कोई भी

1:41:27फीस चार्ज नहीं करते थे बल्कि जितने के

1:41:29बाद यह अपना हिस्सा उसे एरिया को ल कर

1:41:32वसूल करते थे मराठस की तरफ से इन्हें इस

1:41:35बात की पोजीशन थी पिंडारी इसको यह कास्ट

1:41:38नहीं थी बल्कि इनमें अलग-अलग कास्ट और

1:41:41क्लासेस के लोग शामिल होते थे अब होता यह

1:41:44है की सेकंड एंग्लो मराठा वार के बाद

1:41:46मराठस काफी वीक हो जाते हैं ब्रिटिश ईस्ट

1:41:49इंडिया कंपनी का कंट्रोल उनके ऊपर बढ़ता

1:41:52जा रहा था और ऐसे में मराठाज जब कोई

1:41:55एक्सपीडिशन कर ही नहीं रहे थे तो पिंडारी

1:41:57को भी मराठा से कोई कम नहीं मिल का रहा था

1:42:00अब रेगुलर एंप्लॉयमेंट ना मिलने के करण

1:42:03पिंडारी ने आसपास की टेरिटरीज को प्लंडर

1:42:06करना शुरू कर दिया उन्होंने हैदराबाद के

1:42:09निजाम कर्नाटक के नवाब मालाबार और ब्रिटिश

1:42:12ईस्ट इंडिया कंपनी की टेरिटरीज में भी

1:42:14लूटपाट कर दी इससे परेशान होकर ब्रिटिश

1:42:17कंपनी के गवर्नर जनरल वारेन हस्त ने

1:42:201817 में पिंडारी पर अटैक कर दिया पिंडारी

1:42:24पर अटैक एक तरह से मराठा सॉवरेन्टी पर

1:42:26अटैक और मराठा इसका जवाब ब्रिटिश कंपनी को

1:42:30देना चाहते थे इसके साथ ही सेकंड एंग्लो

1:42:33मराठा वार के टाइम जो सब्सिडियरी एलाइंस

1:42:35ट्वीट हुई थी उसके अकॉर्डिंग ब्रिटिश

1:42:38कंपनी ने हर एक मराठा के के कोर्ट में

1:42:41रेजिडेंट यानी की ब्रिटिश एजेंट अप्वॉइंट

1:42:43कर दिया था और ये रेजिडेंस मराठा चिप्स पर

1:42:47नजर रखते थे की वो कोई कंस्पायरेसी ना कर

1:42:49पाएं मराठा इन रेजिडेंस के इंटरफेरेंड से

1:42:52भी परेशान थे ऐसे में ब्रिटिश मराठस पर

1:42:56पिंडारी इसको हेल्प करने का एक्विजिशन भी

1:42:58लगा देते हैं तब ईश्वर मराठा चिप्स डिसाइड

1:43:01करते हैं की उन्हें ब्रिटिशर्स का मिलकर

1:43:04सामना करना चाहिए पेशवा बाजीराव तू मल्हार

1:43:08राव होलकर और मधु जी भोसले तू एक यूनाइटेड

1:43:11फ्रंट का फॉर्मेशन करते हैं लेकिन एक बार

1:43:13फिर से ब्रिटिशर्स की जीत होती है और

1:43:16मराठस के साथ फिर से साइन की जाति हैं

1:43:19सिंधिया के साथ 1871 में ग्वालियर साइन की

1:43:24जाति है

1:43:32पेशवा को गाड़ी से हटा दिया जाता है और

1:43:35पेंशन अगर कानपुर के पास बिठूर भेज दिया

1:43:38जाता है उनकी ज्यादातर टेरिटरी बॉम्बे

1:43:41प्रेसीडेंसी का हिस्सा बन जाति है और इस

1:43:44तरह थर्ड एंग्लो मराठा वार के साथ मराठा

1:43:47अंपायर का भी और हो जाता है सभी मराठा

1:43:50चिप्स ब्रिटिशर्स के आगे सुरेंद्र कर देते

1:43:52हैं और इसके साथ ही पंजाब और सिंह के

1:43:55अलावा पुरी इंडियन टेरिटरी पर ब्रिटिश का

1:43:58डायरेक्ट या इनडायरेक्ट कंट्रोल

1:43:59एस्टेब्लिश हो जाता है दोस्तों ये तो बात

1:44:03हुई एंग्लो मराठा वर्स की अब ऐसे कुछ

1:44:06ओवरऑल रीजंस को भी समझते हैं जिनकी वजह से

1:44:08मराठस को ब्रिटिशर्स से हर का सामना करना

1:44:11पड़ता है

1:44:12रीजंस पर मराठा लॉस

1:44:15मराठस की हरकत सबसे बड़ा करण था मराठा

1:44:18चिप्स के बीच यूनिटी ना होना

1:44:36जुडिशल की साइड लेने लगता हैं इसके अलावा

1:44:38मराठा ब्रिटिशर्स की पॉलीटिकल और

1:44:41डिप्लोमेटिक स्ट्रैंथ को भी नहीं समझ पे

1:44:43हमने देखा की कैसे हर बार मराठा लीडर्स

1:44:46ब्रिटिशर्स के साथ ट्रीटी के झांसी में ए

1:44:49जाते हैं इसके अलावा मराठाज की हर के पीछे

1:44:52और भी रीजंस थे जैसे की मराठा चिप्स की इन

1:44:55एक्ट लीडरशिप उनका इनफीरियर मिलिट्री

1:44:58सिस्टम वो गोरिल्ला वाॅरफेयर में तो माहिर

1:45:00थे लेकिन ब्रिटिशर्स के साथ आमने-सामने की

1:45:03बैटल में नहीं इसके साथ ही ब्रिटिशर्स की

1:45:06सुपीरियर डिप्लोमेटिक स्किल जिसकी हेल्प

1:45:08से वो ये इंश्योर कर लेते हैं की हैदराबाद

1:45:11या मैसूर जैसे स्टेटस मराठस और ब्रिटिशर्स

1:45:14के अफेयर्स में कोई इंटरफ्रेंस ना करें यह

1:45:17मराठस की हर का एक करण कहानी जा शक्ति हैं

1:45:20इन सभी रीजंस की वजह से अल्टीमेटली मराठस

1:45:24ब्रिटिश से हर जाते हैं और एंग्लो मराठा

1:45:26वर्स के बाद उनके अंपायर का फाइनल डिक्लिन

1:45:29होता है

1:45:30कनक्लूडिंग रिमार्क्स दोस्तों इस तरह

1:45:34ब्रिटिश ने इंडिया की एक और इंपॉर्टेंट

1:45:36पावर मराठस को भी रास्ते से हटा दिया

1:45:39बंगाल और मैसूर पर उनकी जीत को हम पहले ही

1:45:43कर कर चुके हैं जैसा की हमने पहले भी

1:45:45बताया की अब पंजाब और सिंह को छोड़कर

1:45:48ब्रिटिशर्स का कंट्रोल ऑलमोस्ट पूरे

1:45:50इंडिया पर हो चुका था कुछ एरियाज पर

1:45:53डायरेक्ट कंट्रोल था और कुछ पर इनडायरेक्ट

1:45:55जैसे की अवध हैदराबाद ईटीसी पर सब्सिडियरी

1:45:59एलाइंस की हेल्प से पंजाब और सिंह की उनकी

1:46:02जीत को हम अपनी आने वाली वीडियो में कर

1:46:05करेंगे

1:46:10ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी लगभग पुरी

1:46:13इंडियन टेरिटरी पर अपना डायरेक्ट या

1:46:15इनडायरेक्ट कंट्रोल एस्टेब्लिश कर चुकी थी

1:46:18लेकिन इंडिया का नॉर्थ वेस्ट एरिया यानी

1:46:20की सिंह प्रांत और सिख अंपायर अभी भी उसकी

1:46:24कंट्रोल से बाहर था आज हम इन्हीं दोनों

1:46:27एरियाज के बड़े में बात करने वाले हैं हम

1:46:29जानेंगे की इनके साथ कंपनी के रिलेशंस

1:46:32कैसे थे कंपनी के लिए इन एरियाज की क्या

1:46:35इंर्पोटेंस थी और ऐवेंंचुअली कंपनी इन्हें

1:46:38कब और कैसे अनेक कर लेती है तो आई शुरू

1:46:41करते हैं सबसे पहले बात करते हैं जिंदगी

1:46:49दोस्तों सिंह सिंधु यानी की सिंदरी बार के

1:46:52किनारे पर बस हुआ है 18th सेंचुरी से ही

1:46:55सिंह को कुछ बलूची चीज कलेक्टिवली रूल कर

1:46:58रहे थे जिन्हें अमिरज़ कहा जाता था ईस्ट

1:47:02इंडिया कंपनी ने यहां अपनी पहले फैक्ट्री

1:47:051775 में छता नाम की जगह पर एस्टेब्लिश की

1:47:08थी लेकिन 1792 में पॉलीटिकल और रेस्ट और

1:47:12फिजिकल प्रॉब्लम्स की वजह से उन्होंने इस

1:47:14फैक्ट्री को छोड़ दिया था इसके बाद 189

1:47:17में लॉर्ड मिंटो वन ने सिंह के अमीरस के

1:47:20साथ ट्विटर वेटरनल फ्रेंडशिप साइन की थी

1:47:25प्रॉमिस करते हैं की वो सिंह में फ्रेंच

1:47:28को सेटल नहीं होने देंगे

1:47:34इस बार अमेरिकंस को भी सिंह से बाहर रखना

1:47:37का प्रोविजन ट्रीटी में एड कर दिया जाता

1:47:39है

1:47:40कुछ समय बाद ही कंपनी का ध्यान सिंधु रिवर

1:47:43की कमर्शियल और नेवीगेशनल वैल्यू की तरफ

1:47:45आकर्षित होता है

1:47:471832 में विलियम बेंटिक आमिर्स के साथ एक

1:47:51नई कमर्शियल त्रुटि साइन करने के लिए

1:47:53करनाल पोर्टिंग को सिंह भेजते हैं साथ ही

1:47:57लेफ्टिनेंट डेल होस्ट को लोअर इंडस्ट्रीज

1:47:59के कोर्स का सर्वे करने के लिए भेज दिया

1:48:01जाता है

1:48:04फॉलोइंग टर्म्स पर ट्रीटी साइन करते हैं

1:48:07पहले पॉइंट था की इंग्लिश ट्रैवल्स और

1:48:10मरचेंट्स को सिंह से फ्री पैसेज दिया

1:48:12जाएगा और रिवर सिंधु को कमर्शियल परपज के

1:48:15लिए उसे करने दिया जाएगा लेकिन वर्स के

1:48:17लिए कोई भी शिव या गुड्स सिंधु के थ्रू

1:48:20नहीं ले जाएंगे दूसरा पॉइंट था की सिंह

1:48:24में कोई भी इंग्लिश मर्चेंट सेटल नहीं

1:48:26होगा और ट्रैवल्स को पासपोर्ट रखना होगा

1:48:28तीसरा की

1:48:32मिलिट्री न्यूज़ या टूल्स की डिमांड नहीं

1:48:35राखी जाएगी

1:48:36है इसके साथ ही फ्रेंडशिप की पुरानी टूटीज

1:48:38को भी कंफर्म किया गया और प्रॉमिस किया

1:48:40गया की दोनों पार्टी एक दूसरे के एरियाज

1:48:43को एनएक्स करने की कोशिश नहीं करेंगे और

1:48:46आखिर में करनाल पॉटिंगर कंपनी के पॉलीटिकल

1:48:49एजेंट की तरह सिंह में रहेंगे इसके बाद

1:48:521839 में सिंह के अमीरस को एक बार फिर से

1:48:55फोर्स करके उनके साथ सब्सिडियरी एलाइंस की

1:48:58त्रुटि साइन की जाति है यहां भी

1:49:00ब्रिटिशर्स यह प्रॉमिस करते हैं की सिंह

1:49:02को कभी एनएक्स नहीं करेंगे दोस्तों 1832

1:49:06और फिर 1839 की ट्वीटी में तो प्रॉमिस

1:49:09किया गया था की सिंह का कभी एनेक्सेशन

1:49:11नहीं होगा फिर ऐसा क्या हुआ की 1843 में

1:49:15ब्रिटिशर्स सिंह को मिक्स कर लेते हैं आई

1:49:18जानते हैं

1:49:24दोस्तों सिंह का एनेक्सेशन करने के पीछे

1:49:27स्ट्रैटेजिक और कमर्शियल दोनों ही रीजंस

1:49:29थे पहले स्ट्रैटेजिक रीजंस को समझते हैं

1:49:3442 तक एंग्लो अफगान वार हुआ था जिसमें

1:49:38ब्रिटिश की बुरी तरह हर हो जाति है इस

1:49:41हार्ड से ब्रिटिश को बहुत बड़ा झटका लगता

1:49:43है अपनी कोई हुई प्रेस्टीज को वापस अपने

1:49:46के लिए कंपनी को जरूर थी एक जीत की और

1:49:50जितने के लिए पंजाब और सिंधी बच्चे हुए थे

1:49:53लेकिन पंजाब में राजा रंजीत सिंह जैसे

1:49:56स्ट्रांग रोलर का रूल था कंपनी उनके

1:49:58अगेंस्ट रिस्क नहीं लेना चाहती थी इसलिए

1:50:01वह अपना निशाना बनाते हैं पहले से ही

1:50:03कमजोर सिंह को यह तो हुआ पहले स्ट्रैटेजिक

1:50:06रीजन एक और स्वीटी करण था जिंदगी अनेक

1:50:09सेशन का जिसे अक्सर फोबिया कहा जाता है और

1:50:13वो था रसिया की इन्वेस्टियन का डर ब्रिटिश

1:50:17को लगता था की रसिया इंडिया में उनके

1:50:20अंपायर पर अटैक कर सकता है और इसी अटैक को

1:50:23प्रीवेंट करने यह वह अपने इंडियन अंपायर

1:50:26का नॉर्थ वेस्टर्न बॉर्डर स्ट्रांग करना

1:50:28चाहते थे इसके साथ ही ब्रिटिशर्स को यह भी

1:50:31डर था की पंजाब के राजा रंजीत सिंह सिंह

1:50:34को जीत सकते हैं और ये वो कभी नहीं चाहते

1:50:37थे इसलिए कंपनी डिसाइड करती है की सिंह

1:50:40उनके डायरेक्ट कंट्रोल में होना चाहिए

1:50:43स्ट्रैटेजिक रीजंस के अलावा सिंह को आयनिक

1:50:45करने की कमर्शियल रीजंस भी थे सिंह पर

1:50:48कंट्रोल होने से सिंधु रिवर के थ्रू होने

1:50:51वाले ट्रेड को कंट्रोल किया जा सकता था

1:50:53जिससे कंपनी नॉर्थ वेस्ट इंडिया और पंजाब

1:50:56के साथ इजीली ट्वीट कर शक्ति थी इन्हीं

1:50:59सभी रीजंस की वजह से ब्रिटिशर्स ने सिंह

1:51:01को एनएक्स करने का डिसीजन लिया कंपनी सिंह

1:51:05के अमीरस पर यह आप लगती है की उन्होंने

1:51:08एंग्लो अफगान वार के समय ब्रिटिश की हेल्प

1:51:11नहीं की और इसका सेटलमेंट ब्रिटिश

1:51:13रेजिडेंट पर छोड़ने की जगह

1:51:18कंप्लीट पॉलीटिकल और मिलिट्री अथॉरिटी के

1:51:21साथ सिंह भेज देते हैं

1:51:35इसके बाद बलोची सोल्जर रिवॉर्ड कर देते

1:51:38हैं और ओपन वार शुरू हो जाता है

1:51:47और सिंह का अनेक सेशन कंप्लीट हो जाता है

1:51:51है इस अलेक्सेशन से एंग्लो इंडियन अंपायर

1:51:54को वेस्ट की तरफ एक शार्टर और सफर

1:51:56फ्रंटियर मिल जाता है इसके साथ ही सिंधु

1:51:59रिवर की कमांड भी उनके हाथों में ए जाति

1:52:01है जिससे ब्रिटिशर्स के लिए सेंट्रल एशिया

1:52:03तक एक डायरेक्ट कमर्शियल वे ओपन हो जाता

1:52:06है

1:52:10लेकिन कंकर करने वाले चार्ल्स नेपियर इस

1:52:14आइनेक्सेशन की रायचौयस को लेकर कन्वेंस

1:52:16नहीं थे अपनी डायरी में उन्होंने लिखा था

1:52:19वे हैव नो राइट तू सी सिंह ये विशाल

1:52:25इन ह्यूमन पीस ऑफ रिसेलिटी आईटी बिल बी

1:52:29दोस्तों सिंह के एनेक्सेशन के बाद अब

1:52:32सिर्फ पंजाब ही ऐसा रीजन था जहां कंपनी का

1:52:35कंट्रोल एस्टेब्लिश नहीं हुआ था तो आई अब

1:52:38पंजाब की स्टोरी को समझते हैं

1:52:46महाराजा रंजीत सिंह जो की एक स्ट्रांग और

1:52:50कैपेबल लीडर थे उन्होंने अपनी आर्मी को

1:52:52यूरोपीय मॉडल पर ट्रेन किया था ऐसा कहा

1:52:56जाता है की उनके पास एशिया की सेकंड बेस्ट

1:52:58आर्मी थी मतलब इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी

1:53:03ईस्ट इंडिया कंपनी और महाराजा रंजीत सिंह

1:53:06के बीच रिलेशंस की शुरुआत होती है 189 की

1:53:09ट्विटर अमृतसर से

1:53:12दोस्तों ट्रीटी का अमृतसर 1817 की ट्रीटी

1:53:15का दिलसित से काफी ज्यादा कनेक्ट है

1:53:18ट्रीटी का तिलचात फ्रांस के नेपोलियन और

1:53:21रसिया के रोलर सिकंदर डी वन के बीच हुई थी

1:53:24और इसमें डिसाइड हुआ था की ये दोनों पावर

1:53:27लैंड रूट के थ्रू इंडिया को एवढे करेंगे

1:53:30इसी पॉसिबल इनवेजन से अपने अंपायर को से

1:53:33करने के लिए ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड

1:53:36मिंटो वन 18

1:53:39को लाहौर भेजते हैं

1:53:42सिर्फ और डिफेंसिव एलाइंस का प्रपोज

1:53:45महाराजा रंजीत सिंह के सामने रखते हैं

1:53:47रंजीत सिंह इस प्रपोज को एक्सेप्ट करने के

1:53:50लिए अपनी दो कंडीशंस रखते

1:53:55रहेंगे और दूसरी कंडीशन थी की ब्रिटिश

1:53:59रंजीत सिंह को एंटीरे पंजाब इंक्लूडिंग

1:54:03मालवा टेरिटरीज का सोरेन एक्सेप्ट कर

1:54:05लेंगे

1:54:06मालवा टेरिटरीज का यहां मतलब है मॉडर्न

1:54:09सदन पंजाब और हरियाणा का रीजन जिसे सर

1:54:12सतलुज रीजन भी कहा जाता था

1:54:15187 की नेगोशिएशंस तो फेल हो जाति हैं

1:54:18लेकिन 2 साल बाद ही पॉलीटिकल सिचुएशन पुरी

1:54:21तरह चेंज हो जाति है वह यह था की महाराजा

1:54:24रंजीत सिंह ने सितंबर 18 में मालवा रीजन

1:54:27को एवं करने की कोशिश की थी लेकिन फरवरी

1:54:30189 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनके ऊपर

1:54:33अटैक कर दिया इस अटैक में कंपनी को काफी

1:54:36सक्सेस मिलती है ऐसी सिचुएशन में महाराजा

1:54:39रंजीत सिंह को समझ में ए गया की कंपनी के

1:54:42साथ ज्यादा टक्कर लेना सही नहीं है और वो

1:54:45अमृतसर की ट्वीटी साइन करने के लिए तैयार

1:54:47अमृतसर में महाराजा रंजीत सिंह को यह

1:54:50एक्सेप्ट करना पड़ा की वो सतलुज रिवर को

1:54:53अपनी सदन बाउंड्री मां लेंगे और कभी भी

1:54:55इसे बाहर नहीं करेंगे दोस्तों ट्रीटी का

1:54:58अमृतसर के बाद रंजीत सिंह और कंपनी के बीच

1:55:01और कोई तकरार देखने को नहीं मिलता लेकिन

1:55:04कहानी में ट्वीट आता है जब जून 1839 में

1:55:07महाराजा रंजीत सिंह की डेथ हो जाति है

1:55:15फर्स्ट एंग्लो सिख वार 18456

1:55:20दोस्तों महाराजा रंजीत सिंह की डेथ के बाद

1:55:22उनके बेटे खड़क सिंह राजा बनते हैं लेकिन

1:55:25उनमें अपने पिता जैसी कोई भी खूबी नहीं थी

1:55:28वो नसे के आदि थे और हर वक्त शराब और अफीम

1:55:31के नसे में धूत रहते थे और जब वो ज्यादातर

1:55:34बीमा रहने लगे तो कुछ मीना बाद ही उनके

1:55:37बेटे नवनेहाल सिंह को राजा बना दिया गया

1:55:39फिर नवंबर 1840 में खड़क सिंह की मृत्यु

1:55:43हो गई और उनके फ्यूनरल से वापस आते समय

1:55:46महाराजा नव निहाल सिंह के ऊपर गेट के ऊपर

1:55:49से बहुत बड़ा पत्थर टूट करके गया और इस

1:55:52तरह उनकी भी डेथ हो गई इसके बाद खड़क सिंह

1:55:55की वाइफ और नवनिहाल सिंह की मदर चंद कौर

1:55:59नवनिहाल के

1:56:00रीजेंट बनकर गाड़ी संभालती हैं लेकिन यह

1:56:04बात रंजीत सिंह के एक और बेटे शेर सिंह को

1:56:07पसंद नहीं ए रही थी और उन्होंने 70 हजार

1:56:10की फौजी के साथ लाहौर का घेराव कर लिया और

1:56:14जैनुअरी 1841 में खुद को महाराजा डिक्लेअर

1:56:17कर दिया लेकिन 1843

1:56:20वीर सिंह को भी धोखे से मार दिया गया इसके

1:56:23बाद सितंबर 1843 में रंजीत सिंह के 5 साल

1:56:27के बेटे दिलीप सिंह को महाराजा बनाया जाता

1:56:29है दिलीप सिंह की मदर जींद कौर उनका

1:56:32रीजेंट बन के राजपथ संभालती हैं इस तरह

1:56:36पॉलीटिकल इंस्टेबिलिटी के चलते आर्मी

1:56:38कमजोर पढ़ने लगती है सोल्जर को समय से

1:56:41वेतन नहीं मिल का रहा था और आर्मी में

1:56:43इंडिसिप्लिन बढ़ता जा रहा था दोस्तों

1:56:45पंजाब की सिचुएशन पर कंपनियां अपनी नजर

1:56:48बनाए हुए थे उन्हें समझ ए गया था की पंजाब

1:56:51किंगडम पहले की तरह स्ट्रांग नहीं है इसके

1:56:54साथ ही ब्रिटिशर्स ने 1843 में सिंह को दो

1:56:57एनएक्स कर ही लिया था तो अब बस पंजाब ही

1:57:00उनके कंट्रोल से बाहर था सिंह के अनेक

1:57:02सेशन के बाद पंजाब को भी डर था की कहानी

1:57:05कंपनी उनके ऊपर अटैक ना कर दे सिचुएशन और

1:57:08ज्यादा टेंशन होने लगती है जब 1845 में

1:57:11गवर्नर जनरल लॉर्ड होर्डिंग सतलज रिवर पर

1:57:14हजारों की संख्या में अपनी ट्रूप्स भेजना

1:57:16लगता हैं ऐसे में सिख आर्मी को समझ नहीं ए

1:57:20रहा था की ब्रिटिश कंपनी लाहौर पर अटैक

1:57:22करने वाली है या उनका कुछ और प्लेन है

1:57:25कन्फ्यूजन की सिचुएशन में सिख आर्मी के

1:57:27कुछ डस्टन ने यानी बटालियन ने 11th दिसंबर

1:57:301845 में सतलज रिवर को क्रॉस कर दिया

1:57:33क्योंकि सिख आर्मी का मानना था की अगर ये

1:57:37ईस्ट इंडिया कंपनी को बर चाहिए तो वो उनके

1:57:39ही एरिया में होगी ना की पंजाब में इसलिए

1:57:42वो सतलज को क्रॉस करके बहादुर से अपने

1:57:45दुश्मन का सामना करने पहुंच जाते हैं

1:57:48ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के हिसाब से

1:57:50सतलज रिवर को क्रॉस करना मतलब

1:57:55इसी को करण बनाकर दिसंबर 1845 में ब्रिटिश

1:57:59ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब किंगडम पर

1:58:02अटैक कर दिया

1:58:03सिख आर्मी को लीड कर रहे थे उनके जनरल

1:58:06तेजा सिंह और लाल सिंह पहले बात तो यह

1:58:09दोनों ही लीडर्स कैपेबल नहीं थे और दूसरी

1:58:12बात यह की कंपनी से भी मिले हुए थे तो ऐसी

1:58:15सिचुएशन में जब फर्स्ट एंग्लो सिख वार हुआ

1:58:17तो सिख आर्मी को हर जगह हर का सामना करना

1:58:21पड़ा ये शब्द दिसंबर 1845 में शुरू होकर

1:58:24मार्च 1846 में ट्रीटी का लाहौर के साथ

1:58:28खत्म होती है ट्रीटी का लाहौर में ब्रिटिश

1:58:30कहते हैं की वो दिलीप सिंह को पंजाब

1:58:33किंगडम का रोलर और रानी जिंदल को उनका

1:58:36रीजेंट एक्सेप्ट करते हैं इसके साथ ही लाल

1:58:39सिंह को वजीर माने के लिए भी तैयार हैं

1:58:40लेकिन अब पंजाब की आर्मी को सिर्फ ₹20000

1:58:43इंफिनिटी और 12000 केवलारी तक सीमित कर

1:58:46दिया जाता है सिख आर्मी का रिकॉग्निशन

1:58:49होने तक महाराजा और लाहौर के लोगों की

1:58:52सुरक्षा के लिए एक ब्रिटिश फोर्स को लाहौर

1:58:55में तैनात कर दिया जाता है

1:59:06कंपनी लाहौर किंगडम से एक करोड़ रुपए से

1:59:09ज्यादा की वारिडिटी की मांग भी करती है

1:59:12लाहौर किंगडम के पास इतना पैसा नहीं था

1:59:14इसलिए कंपनी लाहौर किंगडम के पार्ट जम्मू

1:59:18और कश्मीर को गुलाब सिंह को बीच देती है

1:59:20गुलाब सिंह इसके बदले में कंपनी को 75 लाख

1:59:24रुपए देते हैं इसके साथ ही व्यास और सतलुज

1:59:27के बीच का एरिया जालंधर दवाब को भी

1:59:30ब्रिटिश एनेक्स कर लेते हैं

1:59:32तो दोस्तों यह थी 1846 की ट्रीटी का लाहौर

1:59:35इस हमिलिटी से सिख खुश नहीं थे और वो

1:59:40रिबेलीयन कर देते हैं कंपनी इजीली इस

1:59:43रिबेलीयन को कृष कर देती है और कहती है की

1:59:45यह रिबेलीयन महारानी जींद के खाने पर हुआ

1:59:48है इसलिए एक और ट्रीटी साइन की जाति है

1:59:50जिसके अकॉर्डिंग महारानी जींद को पेंशन

1:59:53देकर बनारस भेज दिया जाता है और ब्रिटिश

1:59:56रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस की लीडरशिप में एक

1:59:59रीजेंसी काउंसिल बनाई गई जिसमें 86 सर्ड्स

2:00:03को रखा गया कहा गया की अब से ये रीजन सी

2:00:05काउंसिल महाराजा दिलीप सिंह के रीजेंट के

2:00:07रूप में कम करेगी यह थी ट्रीटी का भैरव्वल

2:00:12जो हुई थी दिसंबर 1846 में इस ट्वीटी के

2:00:15हिसाब से जो ब्रिटिश ट्रूप्स 1846 के और

2:00:18में लाहौर से विद्रोह करने वाले थे उन्हें

2:00:21अब तब तक लाहौर में ही रहना था जब तक की

2:00:24दिलीप सिंह माइनर है और इसके बदले में

2:00:27पंजाब को कंपनी को हर साल 22 लाख रुपए भी

2:00:30देने होंगे

2:00:31दोस्तों इस ट्वीटी के बाद यह साफ हो गया

2:00:33की पंजाब की रियल पावर अब ब्रिटिश

2:00:36रेजिडेंट के हाथ में ए चुकी है और पंजाब

2:00:38अब सिर्फ एक वेसल स्टेट बन गया है यहां से

2:00:42पंजाब की इंटरनल एडमिनिस्ट्रेशन के

2:00:44रिस्पांसिबिलिटी भी ईस्ट इंडिया कंपनी की

2:00:46हो जाति है लेकिन ब्रिटिश यहां भी नहीं

2:00:49रुकते सिर्फ 2 साल के बाद ही 1848 में

2:00:53सेकंड एंग्लो सिख वार के थ्रू वो पंजाब को

2:00:56पुरी तरह एनएक्स कर लेते हैं आई फिर सेकंड

2:01:00एंग्लो सिख वार को भी समझते हैं सेकंड

2:01:03एंग्लो सिख वार 184849

2:01:06दोस्तों यह तो हमने समझा की फर्स्ट एंग्लो

2:01:09सिख वार के बाद हुई ट्वीटी सिक्स के लिए

2:01:11बहुत ही हमिलिएटिंग थी और साड़ी पावर्स अब

2:01:14ब्रिटिश रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस के हाथों

2:01:17में ए चुकी थी ऐसे में 1848 में हेनरी

2:01:20लॉरेंस मुल्तान के गवर्नर दीवान मूलराज से

2:01:23इंक्रीज रिवेन्यू की डिमांड करते हैं

2:01:25लेकिन मूलराज ने एन तो बड़ा हुआ रिवेन्यू

2:01:29देने की बात मनी और ना ही पुराना हिसाब

2:01:31किताब जूता किया उन्होंने भी अपनी तरफ से

2:01:34तैयारी कर ली थी की अगर ब्रिटिश रेजिडेंट

2:01:36कोई जबरदस्ती करने की कोशिश करेंगे तो देख

2:01:39लेंगे तब ब्रिटिश रेजिडेंट डिसाइड करते

2:01:41हैं की मूलराज को रिप्लेस करके किसी और को

2:01:45मुल्तान का गवर्नर बना दिया जाए लेकिन

2:01:47मुल्तान की जनता मूलराज के फीवर में थी

2:01:50इसलिए मुल्तान के नए सिख गवर्नर को दो

2:01:53ब्रिटिश ऑफिसर लेफ्टिनेंट पैट्रिक वनजाग

2:01:56न्यू और लिफ्टेड एंडरसन के साथ मुल्तान

2:01:59भेजो गया

2:02:00जब यह मुल्तान पहुंचे तो वहां की जनता

2:02:02पहले से ही भड़की हुई थी उन्होंने इन

2:02:05दोनों ब्रिटिश ऑफिसर्स को मार दिया फर्स्ट

2:02:08एंग्लो सिख वार की हमिलिएशन से परेशान

2:02:10पंजाब के लोगों को मूलराज में अपना नया

2:02:13लीडर मिल गया और जल्दी ही सिख ट्रूप्स ने

2:02:16भी मूलराज को जॉइन कर लिया और पंजाब में

2:02:19एक ओपन रिबेलीयन की शुरुआत हो गई उसे समय

2:02:23गवर्नर जनरल थे लॉर्ड डलहौजी पंजाब की

2:02:26स्थिति देखकर लॉर्ड डलहौजी ने डिसाइड किया

2:02:29की यह एक बहुत ही बढ़िया मौका है पंजाब को

2:02:32एनएक्स करने का उन्होंने पंजाब पर अटैक कर

2:02:35दिया और इस तरह सेकंड एंग्लो सिख वार की

2:02:38शुरुआत हो गई इस वार के दौरान कुछ

2:02:40इंपॉर्टेंट बॉटल्स हुई थी जैसे की बैटल ऑफ

2:02:43रामनगर बैटल ऑफ चिलियांवाला और बैटल ऑफ

2:02:47गुजरात

2:02:50आर्मी को सुरेंद्र करना पड़ा पंजाब को

2:02:54अनेक कर लिया गया और अब पंजाब भी ब्रिटिश

2:02:57कंपनी की टेरिटरी बन गया

2:02:59दोस्तों पंजाब के अनेक सेशन के लिए कहा

2:03:02जाता है की दी एनेक्सेशन ऑफ पंजाब वैसे नो

2:03:05एनेक्सेशन आईटी वज एन सीक्रेट ब्रीच ऑफ

2:03:08ट्रस्ट ऐसा इसलिए क्योंकि 1846 की ट्रीटी

2:03:12में भैरू वाल के बाद से ब्रिटिश रेजिडेंट

2:03:15ही सही मेन में पंजाब को रूल कर रहे थे

2:03:18सभी सिविल और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर्स उनकी

2:03:21ही हाथों में थी महाराजा दिलीप सिंह तो

2:03:23माइनर थे और उनका सिर्फ नाम ही उसे हो रहा

2:03:26था

2:03:27रिबेलीयन सिख आर्मी ने किया था ना की

2:03:30महाराजा या उनकी रीजेंसी कम से लेने और

2:03:33महाराजा का रीजन होने के नाइट यह ब्रिटिश

2:03:35रेजिडेंट की ड्यूटी थी की वह मूलराज और

2:03:38सिख आर्मी के रिबेलीयन को सरप्राइज करें

2:03:40महाराजा दिलीप सिंह को तो किसी भी तरह इस

2:03:43रिबेलीयन के लिए रिस्पांसिबल नहीं माना जा

2:03:45सकता इसलिए इस बेसिस पर उनसे उनका किंगडम

2:03:49छन लेना पुरी तरह अंजस्ट था

2:03:52कंक्लुजन तो दोस्तों हमने देखा की कैसे

2:03:55ब्रिटिश कंपनी ने अपने फायदे के लिए पहले

2:03:58सिंह और फिर पंजाब दोनों से ही फ्रेंडली

2:04:01रिलेशंस बनाए और इसके बाद जब उन्हें सही

2:04:03मौका मिला तब इस फ्रेंडशिप को भूलकर

2:04:06उन्होंने इन्हें एनएक्स कर लिया यह

2:04:09ब्रिटिश कंपनी

2:04:14में ए चुकी थी

2:04:17वारेन हेस्टिंग्स

2:04:191772

2:04:212785 हम अपनी पिछली कुछ वीडियो में देख

2:04:24चुके हैं की कैसे ब्रिटिशर्स इंडिया में

2:04:26आगे एन ट्रेडिंग कंपनी आते हैं और फिर

2:04:28ग्रैजुअली यहां पर अपना अंपायर एस्टेब्लिश

2:04:31करते हैं ब्रिटिशर्स द्वारा अंपायर

2:04:33एस्टेब्लिश करने और उसके बाद यहां

2:04:35एडमिनिस्ट्रेशन चलने में बहुत इंपॉर्टेंट

2:04:38रोल था ब्रिटिश गवर्नर और गवर्नर जनरल्स

2:04:41का हम बंगाल प्रेसीडेंसी के पहले गवर्नर

2:04:43रॉबर्ट क्लाइव के बड़े में पहले ही डिस्कस

2:04:45कर चुके हैं आज हम बंगाल के नेक्स्ट

2:04:48गवर्नर और फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल

2:04:50वारेन हेस्टिंग्स के बड़े में बात करने

2:04:53वाले हैं तो आई शुरू करते हैं

2:04:56इंट्रोडक्शन

2:04:59वारेन हेस्टिंग

2:05:011750 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को

2:05:05जॉइन करते हैं कंपनी में डिफरेंट पोजीशंस

2:05:07पर सर्व करने के बाद फाइनली 1772 में

2:05:10इन्हें बंगाल प्रेसीडेंसी का गवर्नर

2:05:13अप्वॉइंट किया जाता है बंगाल 1764 में

2:05:16बैटल ऑफ बक्सर के बाद ब्रिटिश कंपनी के

2:05:19कंट्रोल में ए चुका था और उसे समय बंगाल

2:05:22की गवर्नर रॉबर्ट क्लाइव थे जो यहां ड्यूल

2:05:25गवर्नमेंट सिस्टम को एस्टेब्लिश करते हैं

2:05:26इसके तहत रिवेन्यू कलेक्शन यानी की दीवानी

2:05:29राइट्स तो कंपनी मैनेज करती है लेकिन

2:05:31निजामत राइट्स यानी की एडमिनिस्ट्रेशन

2:05:34संभालने की रिस्पांसिबिलिटी बंगाल के नवाब

2:05:37के पास ही रहती है

2:05:381772 में गवर्नर बने के बाद वारेन

2:05:41हेस्टिंग्स के सामने सबसे इंपॉर्टेंट

2:05:42टास्क था बंगाल में एक स्टेबल

2:05:45एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम

2:05:55में ए चुके थे इनके गवर्नर बने के कुछ समय

2:05:59बाद ही 1773 में ब्रिटिश पार्लियामेंट

2:06:02रेगुलेटिंग एक्ट पास करती है दोस्तों

2:06:04रेगुलेटिंग एक्ट क्यों लाया गया था और

2:06:07इसके इंपॉर्टेंट प्रोविजंस क्या थे आई

2:06:09अपने नेक्स्ट क्षेत्र में समझते हैं

2:06:11रेगुलेटिंग एक्ट ऑफ 1773

2:06:17प्लासी और बक्सर के बैटल के बाद ब्रिटिश

2:06:19कंपनी बंगाल पर रूल करने लगती है अब कंपनी

2:06:23सिर्फ एक ट्रेडिंग ऑर्गेनाइजेशन में रहकर

2:06:24एक एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी भी थी इसीलिए

2:06:27कंपनी की फंक्शनिंग को रेगुलेट करने के

2:06:30लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट 1773 में

2:06:33रेगुलेटिंग एक्ट पास करती है इस एक्ट के

2:06:36अनुसार मद्रास और मुंबई की प्रेसिडेंट

2:06:38बंगाल के कंट्रोल में ए गए बंगाल के

2:06:41गवर्नर की पोस्ट अब गवर्नर जनरल की पोस्ट

2:06:44बन गई और इस तरह वारेन हेस्टिंग्स पहले

2:06:47गवर्नर जनरल बन गए गवर्नर जनरल को एसिस्ट

2:06:50करने के लिए फोर मेंबर की एक एग्जीक्यूटिव

2:06:52काउंसिल भी बनाएगी सभी डिसीजंस मेजॉरिटी

2:06:56के बेसिस पर लिए जान थे और गवर्नर जनरल

2:06:58सिर्फ टी के कैसे में ही वोट कर सकते थे

2:07:02एक्टीनो कंपनी के सर्वेंट को प्राइवेट

2:07:04ट्रेड करने और नेटिव से ब्राइब्स और

2:07:06प्रेजेंट लेने से भी प्रोहिबिट किया इसके

2:07:09साथ ही फोर्ट विलियम कोलकाता में सुप्रीम

2:07:11कोर्ट को भी एस्टेब्लिश किया गया दोस्तों

2:07:14यह तो बात हुई रेगुलेटिंग एक्टिव 17

2:07:17जिसने वारेन हेस्टिंग्स को गवर्नर जनरल

2:07:20बनाया अब बात करते हैं वारेन हेस्टिंग्स

2:07:22की डिफरेंट रिफॉर्म्स की जो उन्होंने

2:07:24गवर्नर और गवर्नर जनरल रहते हुए

2:07:27इंट्रोड्यूस किया

2:07:28रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस बाय वारेन

2:07:30हेस्टिंग्स वारेन हेस्टिंग अलग-अलग फील्ड

2:07:34में रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करते हैं जैसे

2:07:36की एडमिनिस्ट्रेटिव रिवेन्यू जुडिशल और

2:07:40कमर्शियल आई एक-एक करके इन्हें डिस्कस

2:07:42करते हैं सबसे पहले बात करते हैं

2:07:45एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स की

2:07:48एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स

2:07:52वारेन हेस्टिंग्स का सबसे इंपॉर्टेंट

2:07:54एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म था बंगाल में

2:07:57रॉबर्ट क्लाइव द्वारा इस्टैबलिश्ड ड्यूल

2:07:59सिस्टम ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन को अबॉलिश करना

2:08:01दोस्तों आपको याद होगा की ड्यूल सिस्टम

2:08:03में निजामत राइट्स तो नवाब के पास थे

2:08:06लेकिन जमींदारी राइट्स कंपनी

2:08:17इलाहाबाद ट्रीटी के अनुसार कंपनी मुगल

2:08:20एंपरर को जो 26 लाख

2:08:29से वापस लेकर 50 लाख रुपए में अवध को बीच

2:08:33देते हैं इन सभी एक्शंस के पीछे रीजन

2:08:36कंपनी की इकोनामी को बटर करना था

2:08:38एडमिनिस्ट्रेशन के बाद अब देखते हैं

2:08:40रिवेन्यू रिफॉर्म्स को

2:08:43रिवेन्यू रिफॉर्म्स रिवेन्यू कलेक्शन के

2:08:46लिए वारेन हेस्टिंग कोलकाता में एक बोर्ड

2:08:48ऑफ रिवेन्यू सेटअप करते हैं हर एक जिला

2:08:51में एक ब्रिटिश कलेक्टर और अकाउंटेंट जनरल

2:08:53अप्वॉइंट किया जाता है ब्रिटिश ट्रेजेडी

2:08:56को मुर्शिदाबाद से कोलकाता मूव कर दिया

2:08:58जाता है

2:08:591772 में कोलकाता बंगाल की कैपिटल

2:09:02डिक्लेअर की जाति है

2:09:041772 में ही वारेन हेस्टिंग्स लैंड

2:09:07रिवेन्यू के लिए 5 इयर्स सेटलमेंट की

2:09:09शुरुआत करते हैं इस सिस्टम के अकॉर्डिंग

2:09:11सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को पांच साल के

2:09:14लिए रिवेन्यू कलेक्ट करने का राइट मिल

2:09:16जाता है इन्हें रिवेन्यू फार्मर्स बोला

2:09:18जाता है लेकिन यह सिस्टम फेल हो जाता है

2:09:21क्योंकि बोली लगाने वालों को लैंड में कोई

2:09:24इंटरेस्ट नहीं होता था वो सिर्फ

2:09:25स्पैकुलेटर थे और इसलिए वह कल्टीवेटर से

2:09:29ज्यादा से ज्यादा वसूल करने की कोशिश करते

2:09:31थे इसके अलावा लैंड को ओवरस्सेस भी किया

2:09:34गया था और स्टेट की डिमांड बहुत हाय राखी

2:09:37गई थी इसके ऊपर से कलेक्शन का मेथड बहुत

2:09:40हर्ष था कंपनी के कलेक्टर्स रिवेन्यू

2:09:43फॉर्म को हरायस करते थे इन सभी रीजंस की

2:09:45वजह से रिवेन्यू फॉर्म्स पर काफी ज्यादा

2:09:48बकाया हो जाता है और बहुत लोगों को

2:09:50डिफॉल्ट के लिए अरेस्ट भी किया जाता है

2:09:531776 में जब 5 एयर सेटलमेंट एक्सपायर हो

2:09:56जाता है तो वारेन हेस्टिंग्स 1 एयर

2:09:59सेटलमेंट करते हैं इस बार सेटलमेंट के लिए

2:10:01प्रेफरेंस जमींदारा को दी जाति है और

2:10:04इन्हीं रिफॉर्म्स से सिख लेकर नेक्स्ट

2:10:06गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस के रिवेन्यू

2:10:09रिफॉर्म्स एक स्टेप आगे होते हैं जिनके

2:10:11बड़े में हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में

2:10:13डिस्कस करेंगे तो ये तो थे वारेन

2:10:16हेस्टिंग्स के रिवेन्यू फील्ड में

2:10:17एक्सपेरिमेंट आई अब बात करते हैं उनके

2:10:20जुडिशल रिफॉर्म्स की

2:10:23जुडिशल रिफॉर्म्स दोस्तों रिवेन्यू

2:10:26रिफॉर्म्स में तो वारेन हेस्टिंग्स को

2:10:28ज्यादा सक्सेस नहीं मिली लेकिन उनके

2:10:30जुडिशल रिफॉर्म्स जरूर सक्सेसफुल होते हैं

2:10:33वारेन हेस्टिंग्स का सबसे पहले जुडिशल

2:10:36रिफॉर्म होता है जमींदारा की जुडिशल

2:10:38पावर्स को खत्म करना

2:10:411772 में वारेन हेस्टिंग्स जिला लेवल पर

2:10:44दीवानी अदालत और फौजदारी अदालत सेटअप करते

2:10:47हैं दीवाने अदालत को कलेक्टर यानी की

2:10:50यूरोपीय ऑफिसर प्रेसीडे करता था और

2:10:52फौजदारी अदालत को इंडियन जज इसके अलावा

2:10:56दीवानी अदालत में हाइंड्स का कैसे हिंदू

2:10:58लॉस के अकॉर्डिंग डिसाइड होता था और

2:11:01मुस्लिम का मुस्लिम डॉ के अकॉर्डिंग लेकिन

2:11:03फौजदारी अदालत में सभी का डिसीजन मुस्लिम

2:11:06डॉ के अकॉर्डिंग ही होता था जिला कोट्स के

2:11:10डिसीजन के अगेंस्ट अपील के लिए कोलकाता

2:11:12में सदर दीवानी अदालत और सदर निजामत अदालत

2:11:15भी सेटअप की गई थी इसके अलावा वारेन

2:11:19हेस्टिंग मुस्लिम और हिंदू लॉस को कोडिफाई

2:11:22करने की कोशिश भी करते हैं

2:11:231776 में हिंदू कोड का एक इंग्लिश

2:11:26ट्रांसलेशन

2:11:33द्वारा इंट्रोड्यूस किया गए जुडिशल

2:11:35रिफॉर्म्स अब लास्ट में उनके कुछ कमर्शियल

2:11:38रिफॉर्म्स को भी जान लेते हैं

2:11:41कमर्शियल रिफॉर्म्स वारेन हेस्टिंग बंगाल

2:11:44के इंटरनल ट्रेड में बोतल नेक को क्लियर

2:11:46करने के लिए कुछ स्टेप्स लेते हैं सबसे

2:11:49पहले वह जमींद्रीज में चल रहे अनेक कस्टम

2:11:52हाउसेस को सरप्राइज करते हैं अब सिर्फ 5

2:11:55कस्टम हाउसेस मेंटेन किया जाते हैं

2:11:57कोलकाता हुगली मुर्शिदाबाद ढाका और पटना

2:12:01में हेस्टिंग्स दस्तक के मिसयूज को भी चेक

2:12:04करते हैं ड्यूटीज को कम करके 2 और 1/2% कर

2:12:08दिया जाता है और ये इंडियन और यूरोपीय

2:12:10दोनों पर ही लगे जाति हैं इसके साथ ही ये

2:12:13कंपनी सर्वेंट के प्राइवेट ट्रेड पर भी

2:12:15रिस्ट्रिक्शंस लगाते हैं दोस्तों वारेन

2:12:18हेस्टिंग्स के रिफॉर्म्स की तो बात हो गई

2:12:20आई अब उनके टाइम पीरियड के कुछ अदर

2:12:23इंपॉर्टेंट इवेंट्स पर भी एक नजर डालते

2:12:25हैं इंपॉर्टेंट इवेंट्स ड्यूरिंग वारेन

2:12:28हेस्टिंग्स पीरियड

2:12:291772 2785 वारेन हेस्टिंग्स के 13 साल के

2:12:34कार्यकाल में बहुत से इंपॉर्टेंट इवेंट्स

2:12:36हुए थे एक-एक करके उनको डिस्कस करते हैं

2:12:38सबसे पहले इंपॉर्टेंट इवेंट था 1774 में

2:12:42होने वाला फर्स्ट रोहिल्ला वार लिए इसको

2:12:45डिटेल में समझते हैं

2:12:48फर्स्ट रोहिल्ला वार

2:12:50दोस्तों रोहिलास बेसिकली अफ़ग़ानस थे जो

2:12:5418थ सेंचुरी में मुगल अंपायर के डिक्लिन

2:12:56के समय इंडिया आते हैं और रोहिलखंड के

2:12:59एरिया पर अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश कर लेते

2:13:01हैं

2:13:03जब पेशवा माधवराव वन की लीडरशिप में मराठा

2:13:06पावर एक बार फिर से राइस कर रही थी तब

2:13:09रोहिलास को मराठा अटैक का डर सताने लगता

2:13:11है

2:13:121772 की शुरुआत में मराठस ने रोहिल्ला

2:13:15चीफ़्टेन जवित खान को हराकर उनकी पुरी

2:13:18टेरिटरी पर कब्ज भी कर लिया था ऐसे में

2:13:21रोहिल्ला लीडर हाफिज रहमत खान मराठा से

2:13:24प्रोटेक्शन के लिए 17th जून 1772 को अवध

2:13:28के नवाब के साथ ट्वीटी साइन करते हैं

2:13:36और इसके बदले में रोहिलास उन्हें 40 लाख

2:13:39की पेमेंट करने का प्रॉमिस करते हैं

2:13:42मराठस रोहिलखंड पर अटैक प्लेन भी करते हैं

2:13:45लेकिन तभी पेशवा माधवराव वन की मृत्यु हो

2:13:48जाति है और इस तरह रुहेलखंड टाटा टैक्स से

2:13:51बैक जाता है मराठस का अटैक तो नहीं होता

2:13:54लेकिन अवध के नवाब फिर भी रोहिल्ला से

2:13:57ट्रीटी में प्रॉमिस की गई 40 लाख की

2:13:59अमाउंट डिमांड करते हैं जब रोहिल्लाजों ने

2:14:02पे करने से माना कर देते हैं तब नवाब

2:14:04रोहिलखंड को एनएक्स करने का डिसीजन लेते

2:14:06हैं इस एनेक्सेशन के लिए वो ब्रिटिश कंपनी

2:14:10से हेल्प मांगते हैं और इंटरेस्टिंग वारेन

2:14:13हेस्टिंग 40 लाख के पेमेंट के बदले में

2:14:15हेल्प देने के लिए तैयार हो जाते हैं 23rd

2:14:18अप्रैल 1774 को बैटल ऑफ ईरानपुर कटरा होती

2:14:22है जिसमें करनाल सिकंदर चैंपियन की

2:14:25फोर्सेस हाफिज रहमत खान की लीडरशिप में

2:14:27रोहिलास को हर देते हैं बैटल में हाफिज

2:14:30रहमत खान की मृत्यु हो जाति है और रोहिलास

2:14:33लाल डोंग के माउंटेंस की तरफ भाग जाते हैं

2:14:36इस तरह रॉयल खंड अवध को मिल जाता है और

2:14:39फिर रोहिल्ला वर्क और हो जाता है

2:14:46वारेन हेस्टिंग्स के टाइम में ही 1776 से

2:14:501782 के बीच फर्स्ट एंग्लो मराठा वार होती

2:14:53है और 1780 से 1784 के बीच सेकंड एंग्लो

2:14:58मैसूर वार भी होती है इन दोनों टॉपिक को

2:15:00हम पहले ही अपनी वीडियो में कर कर चुके

2:15:02हैं इसीलिए डिटेल में समझना के लिए आप

2:15:05वीडियो को रेफर कर सकते हैं

2:15:071784 में ओरिएंटल स्टडीज को इनकरेज करने

2:15:10के लिए एशियाई सोसाइटी ऑफ बंगाल की

2:15:13फाउंडेशन भी की जाति है वारेन हेस्टिंग्स

2:15:16ने इसकी एस्टेब्लिशमेंट के लिए से विलियम

2:15:18जॉन्स को इनकरेज और सपोर्ट किया था

2:15:211784 में ही ब्रिटिश पार्लियामेंट पिच

2:15:24इंडिया एक्ट भी पास करती है ये एक्ट 1773

2:15:27के रेगुलेटिंग एक्ट की शॉर्टकट्स को दूर

2:15:30करता है आई इसको थोड़ा डिटेल में समझते

2:15:32हैं

2:15:34इट्स इंडिया एक्ट 1784

2:15:37पिट्स इंडिया एक्ट कंपनी के पॉलीटिकल और

2:15:40कमर्शियल फंक्शंस को अलग-अलग करता है यह

2:15:43एक्ट इंडिया में ब्रिटिश पजेशन पर ड्यूल

2:15:46कंट्रोल एस्टेब्लिश करता है मतलब इमीडिएट

2:15:48कंट्रोल तो कंपनी का रहेगा लेकिन फाइनल

2:15:50अथॉरिटी ब्रिटिश गवर्नमेंट की होगी

2:15:52पॉलीटिकल मैटर्स को देखने के लिए बोर्ड ऑफ

2:15:55कंट्रोल एस्टेब्लिश किया जाता है और

2:15:57कमर्शियल अफेयर्स के लिए कोर्ट ऑफ

2:15:59डायरेक्टर्स को अप्वॉइंट किया जाता है

2:16:00कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स कंपनी को रिप्रेजेंट

2:16:03करते थे और बोर्ड ऑफ कंट्रोल ब्रिटिश

2:16:05गवर्नमेंट को बोर्ड ऑफ कंट्रोल में 6

2:16:08मेंबर्स थे सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जो बोर्ड

2:16:10के प्रेसिडेंट थे चांसलर ऑफ डी एक्स चेकर

2:16:13और कर परी विकास

2:16:16करता है की सभी सिविल और मिलिट्री ऑफिसर्स

2:16:20जॉइन करने के 2 मीना के अंदर इंडिया और

2:16:23ब्रिटेन में अपनी प्रॉपर्टी को डिस्क्लोज

2:16:25करेंगे

2:16:33कर मेंबर्स की वजह से गवर्नर जनरल को अपने

2:16:36अकॉर्डिंग लेने काफी समस्या होती थी लेकिन

2:16:39अब उन्हें सिर्फ एक मेंबर की सहमति चाहिए

2:16:41बड़े डिसीजंस लेने के लिए तीन मेंबर्स में

2:16:44से एक मेंबर की पोस्ट इंडिया में ब्रिटिश

2:16:47क्राउन की आर्मी के कमांडर इन के को दी

2:16:49जाएगी इसके साथ ही काउंसिल में अब गवर्नर

2:16:52जनरल को वीटो पावर भी दे दिए गए मद्रास और

2:16:55बॉम्बे प्रेसिडेंसी को बंगाल प्रेसिडेंट

2:16:58का सबोर्डिनेट डिक्लेअर कर दिया गया और

2:17:00कोलकाता अब इंडिया में ब्रिटिश की कैपिटल

2:17:02बन गई दोस्तों पिट्स इंडिया एक्ट इसलिए

2:17:05इंपॉर्टेंट हो जाता है क्योंकि इसी एक्ट

2:17:08के द्वारा इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन पर

2:17:10ब्रिटिश गवर्मेंट का डायरेक्ट कंट्रोल

2:17:12एस्टेब्लिश हुआ था इससे पहले तक तो साड़ी

2:17:15रिस्पांसिबिलिटी सिर्फ कंपनी की ही थी

2:17:17साथी गवर्नर जनरल की पोजीशन अबाउट

2:17:20स्ट्रांग हो जाति है क्योंकि काउंसिल का

2:17:23कंट्रोल अब पहले जितना स्ट्रांग नहीं राहत

2:17:25दोस्तों यह तो हुआ पिट्स इंडिया एक्ट का

2:17:28डिस्कशन आई अब अपने टॉपिक की तरफ वापस

2:17:31चलते हैं वारेन हेस्टिंग्स का टाइम पीरियड

2:17:33उनके कुछ कंट्रोवर्शियल डिसीजंस के लिए भी

2:17:36जाना जाता है तो चलिए अब उनके बड़े में

2:17:38डिस्कस करते हैं

2:17:45दोस्तों जय सिंह बनारस के राजा हुआ करते

2:17:48थे और बनारस अवध का फ्यूडिटरी या

2:17:51सबोर्डिनेट स्टेट था

2:17:531775 में जब अवध के नवाब सुझाव दौला की

2:17:56मृत्यु हो जाति है तब उनके बेटे आसफोला

2:18:00नवाब बनते हैं वारेन हेस्टिंग इस चेंज का

2:18:03फायदा उठाते हैं और नए नवाब को फोर्स करते

2:18:05हैं एक नई त्रुटि साइन करने के लिए इस

2:18:09ट्रीटी के अकॉर्डिंग बनारस कंपनी को

2:18:11ट्रांसफर कर दिया जाता है और चैट सिंह अब

2:18:14कंपनी के सबोर्डिनेट बन जाते हैं

2:18:17की जय सिंह कंपनी को 22 लाख रुपए एनुअल पे

2:18:21करेंगे और इसके अलावा उनके ऊपर और कोई

2:18:24डिमांड नहीं राखी जाएगी उनको पीसफुली

2:18:26बनारस में रूल करने दिया

2:18:31इस प्रोविजन को वायलेट करते हैं और

2:18:34क्वेश्चन नंबर डिमांड रखना लगता हैं

2:18:441779 और 1780 में फिर से यह डिमांड रिपीट

2:18:48की जाति है

2:18:491780 में राजा 2 लाख रुपए की ब्राइब वारेन

2:18:52हेस्टिंग्स को भेजते हैं जिससे अब आगे और

2:18:55कोई डिमांड ना राखी जाए लेकिन वारेन

2:18:58हेस्टिंग फिर भी एक्स्ट्रा सब्सिडी और

2:19:002000 कैलोरी कंटिजेंट भेजना की डिमांड

2:19:03करते हैं राजा वारेन हेस्टिंग्स को लेटर

2:19:05लिखकर माफी मांगते हैं की वो ये डिमांड

2:19:08पुरी नहीं कर सकते

2:19:09वारेन हेस्टिंग राजा चैट सिंह को पनिश

2:19:12करने का डिसीजन लेते हैं और उनके ऊपर 50

2:19:15लाख का फाइन इंपोज कर देते हैं वो खुद

2:19:18बनारस की तरफ प्रोसीड करते हैं राजा उनसे

2:19:20बक्सर में आकर मिलते हैं और अपनी टर्बन

2:19:23उनके पैरों में रख देते हैं लेकिन वारेन

2:19:26हेस्टिंग बनारस पहुंचने से पहले कोई भी

2:19:28डिसीजन करने से माना कर देते हैं और बनारस

2:19:31पहुंचने पर वह जेट सिंह को अरेस्ट करवा

2:19:34लेते हैं चैट सिंह के सोल्जर अपने राजा का

2:19:37अपमान देखने पर ब्रिटिश के खिलाफ विद्रोह

2:19:40कर देते हैं लेकिन उनकी रिबेलीयन को इजीली

2:19:43सरप्राइज कर किया जाता है

2:19:46नारायण को 22 लाख की जगह 40 लाख के एनुअल

2:19:50पेमेंट के बदले में राजा बना दिया जाता

2:19:53बनारस के राजा अब सिर्फ कंपनी के पेंशनर

2:19:56बन के र जाते हैं बनारस के बाद वारेन

2:19:59हेस्टिंग्स अवध को निशाना बनाते हैं अवध

2:20:02के नवाब आसफोला पर कंपनी के करीब 15 लाख

2:20:05रुपए थे अमाउंट उन्हें अवध में स्टेशन

2:20:08सब्सिडियरी फोर्स के लिए पे करने थे जब

2:20:11कंपनी उनके ऊपर पेमेंट करने के लिए दबाव

2:20:14डालते है तब आसफोला सजेस्ट करते हैं की

2:20:17उन्हें लेट नवाब की वाइफ यानी की अवध की

2:20:20बेगम का ट्रेजर लेने की परमिशन दे दी जाए

2:20:23इससे पहले भी ब्रिटिश रेजिडेंट के

2:20:25इंटरफ्रेंस पर नवाब बेगम से

2:20:28560000 ले चुके थे तब कोलकाता काउंसिल ने

2:20:32गारंटी दी थी की इसके बाद बेगम से और कोई

2:20:35डिमांड नहीं की जाएगी लेकिन नवाब के सजेशन

2:20:38पर वारेन हेस्टिंग अपनी दी हुई गारंटी को

2:20:41भूलकर ब्रिटिश रेजिडेंट को बेगम से रुपए

2:20:44लेने का ऑर्डर दे देते हैं

2:20:45बेगम को प्रेशराइज करके उनसे 105 लाख की

2:20:50अमाउंट ले ली जाति है जिसका ज्यादातर

2:20:52हिस्सा कंपनी का डेड चुकाने में चला जाता

2:20:54है ये दोनों ही इंसीडेंट इतने

2:20:57कंट्रोवर्शियल थे की जब वारेन हेस्टिंग्स

2:20:59इंग्लैंड वापस पहुंचने हैं तो वहां की

2:21:02पार्लियामेंट उनके ऊपर इंपिचमेंट का कैसे

2:21:04भी चलती है यह ट्रायल 178 से 1795 तक चला

2:21:09है लेकिन और में उन्हें सभी चार्ज से फ्री

2:21:12कर दिया जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी

2:21:14कंट्री का तो फायदा ही किया था और

2:21:16इंग्लैंड की जनता उन्हें हीरो मानती थी

2:21:20कंक्लुजन

2:21:22दोस्तों हम का सकते हैं की वारेन

2:21:25हेस्टिंग्स ने एक तरफ तो इंडिया में

2:21:27ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम की

2:21:29फाउंडेशन को बनाया और दूसरी तरफ इंडिया

2:21:32में कंपनी की टेरिटरी को और ज्यादा

2:21:34इंक्रीज भी किया फिर चाहे वह फर्स्ट

2:21:37एंग्लो मराठा वार में जीता हुआ सायल सेट

2:21:39हो या अवध से लिया हुआ बनारस वारेन

2:21:42हेस्टिंग्स ने अपनी मिलिट्री और

2:21:44डिप्लोमेटिक स्किल का उसे करके ब्रिटिश के

2:21:47इंडियन अंपायर का एक्सपेंशन किया था उनके

2:21:50बाद गवर्नर जनरल बनते हैं लॉर्ड

2:21:52कार्नवालिस जिनके बड़े में हम अपनी आने

2:21:55वाली वीडियो में डिस्कस करेंगे

2:21:57लॉर्ड कार्नवालिस 1786 2793 दोस्तों हमने

2:22:04अपनी पिछली वीडियो में फर्स्ट गवर्नर जनरल

2:22:06ऑफ बंगाल वारेन हेस्टिंग्स के बड़े में

2:22:08डिस्कस किया था आज हम इसी सीरीज को आगे ले

2:22:11जाते हुए नेक्स्ट गवर्नर जनरल लॉर्ड

2:22:13कार्नवालिस के बड़े में जानेंगे लॉर्ड

2:22:16कार्नवालिस को लोग अक्सर याद करते हैं

2:22:18अमेरिकन रिवॉल्यूशन के समय उनकी हर के लिए

2:22:2128 सितंबर से 19th अक्टूबर 1781 के बीच

2:22:25योगदान वर्जीनिया में अमेरिकन रिवॉल्यूशन

2:22:28के लास्ट इंपॉर्टेंट कैंपेन में उन्हें

2:22:30अमेरिकन रिवॉल्यूशनरीज ने हर दिया था

2:22:32लेकिन उनकी लाइफ के बेस्ट इयर्स का आना तो

2:22:35अभी बाकी था जो वो इंडिया में गवर्नर जनरल

2:22:38बने के बाद जीते हैं

2:22:44सितंबर 1786 तक बंगाल की एक्टिंग गवर्नर

2:22:48रहे थे लेकिन उनके इस शॉर्ट टाइम पीरियड

2:22:51में कोई इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट देखने को

2:22:53नहीं मिलता इसलिए हम डायरेक्ट

2:22:57चलते हैं

2:22:59इंट्रोडक्शन

2:23:04दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस को 1786 में

2:23:08बंगाल प्रेसीडेंसी का गवर्नर जनरल

2:23:10अप्वॉइंट किया जाता है इसके साथ ही उन्हें

2:23:13ब्रिटिश इंडिया के कमांडर इन के की पोस्ट

2:23:15भी दी जाति है इसका मतलब हुआ की लॉर्ड

2:23:18कार्नवालिस के पास हाईएस्ट सिविल अथॉरिटी

2:23:20के साथ साथ हाईएस्ट मिलिट्री अथॉरिटी की

2:23:23पावर भी ए गई थी कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने

2:23:25उन्हें टास्क दिया था की वो इंडियन

2:23:27एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम को रे ऑर्गेनाइजर

2:23:29करें और साथ ही लैंड रिवेन्यू की समस्या

2:23:32का भी कुछ समाधान निकले लॉर्ड कार्नवालिस

2:23:35अपने प्रेडिसेसर वारेन हेस्टिंग्स द्वारा

2:23:37एस्टेब्लिश किया गए सिस्टम को और इंप्रूव

2:23:40करते हैं और इंडिया में एडमिनिस्ट्रेशन का

2:23:42एक ऐसा सुपरस्ट्रक्चर तैयार करते हैं जो

2:23:45यहां 1858 तक चला है तो आई एक एक करके

2:23:49लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा किया गए

2:23:51रिफॉर्म्स को समझते हैं

2:23:56वारेन हेस्टिंग्स ने जो जुडिशल सिस्टम

2:23:58एस्टेब्लिश किया था कार्नवालिस उसमें कुछ

2:24:01चेंज करते हैं जैसे की 1787 में वो जिला

2:24:05कलेक्टर्स को फिर से दीवानी अदालत का जज

2:24:07बना देते हैं इससे पहले वारेन हेस्टिंग्स

2:24:10ने 1774 में कलेक्टोरस की जुडिशल पावर्स

2:24:13को खत्म कर दिया था लॉर्ड कार्नवालिस में

2:24:16सिर्फ कलेक्टर्स की जुडिशल पावर्स को

2:24:18रिस्टोर करते हैं बल्कि उन्हें पहले से भी

2:24:20ज्यादा माजीस्तूरियल पावर्स दे देते हैं

2:24:22दूसरा रिफॉर्म 79 से 92 के पीरियड में

2:24:26क्रिमिनल एडमिनिस्ट्रेशन की फील्ड में

2:24:28इंट्रोड्यूस होता है जिला फौजदारी अदालत

2:24:31को अबॉलिश करके उनकी जगह कर सर्किट कोर्स

2:24:34बनाई जाति हैं इनमें से तीन बंगाल में थी

2:24:36और एक भी हर में और इन सर्किट कोट्स में

2:24:39यूरोपियन ऑफिसर्स को ही जज पॉइंट किया

2:24:42जाता है और इनको एसिस्ट करते थे अजीज और

2:24:45मुफ्तीज इससे पहले फौजदारी अदालत में

2:24:47इंडियन को ही जज अप्वॉइंट किया जाता था हम

2:24:50का सकते हैं की यहां से जुडिशल सिस्टम में

2:24:52से इंडियन को अलग करने की शुरुआत हो जाति

2:24:55है लॉर्ड कार्नवालिस का सबसे इंपॉर्टेंट

2:24:58जुडिशल रिफॉर्म था उनका 1793 का कौन बाल

2:25:01स्कूल में उनके सभी रिफॉर्म्स फाइनल शॉप

2:25:05लेते हैं और ये प्रायमरीली सिपरेशन ऑफ

2:25:08पावर के प्रिंसिपल पर बेस्ड था कौन वो

2:25:11इसको रिलाइज होता है की कलेक्टर्स के हाथ

2:25:13में जुडिशल पावर्स देना सही डिसीजन नहीं

2:25:15था क्योंकि जिनके पास रिवेन्यू कलेक्शन की

2:25:18पावर थी वो रिवेन्यू के केसेस को

2:25:20इंपर्शाली कैसे डिसाइड कर सकते थे इसलिए

2:25:23कार्नवालिस कोर्ट में वो सिपरेशन ऑफ

2:25:26पावर्स के प्रिंसिपल को फॉलो करते हैं और

2:25:28कलेक्टर्स की सभी जुडिशल और मैजिस्टिशियल

2:25:31पावर्स को खत्म कर दिया जाता है सिविल

2:25:34कोट्स को प्रेसीडे करने के लिए जिला जज

2:25:36नाम से एक नई ऑफिसर क्लास की शुरुआत की

2:25:39जाति है इसके अलावा कंडोम

2:25:47क्वालिटी और जस्टिस के वेस्टर्न आइडिया पर

2:25:50बेस्ड थे इसीलिए रिलिजियस लॉस की जगह

2:25:55इन ट्रोड्यूस किया जाता है लेकिन एकदम नया

2:25:58सिस्टम था और आम जनता को इसे समझना में

2:26:00काफी दिक्कत होती थी साथ ही जस्टिस के लिए

2:26:03अब लॉयर्स की जरूर भी होने लगी थी इसीलिए

2:26:05एक तरह से जस्टिस अब एक्सपेंसिव हो गई थी

2:26:08और आम मां की रेट से बाहर

2:26:12वालों इसके जुडिशल रिफॉर्म्स की बात लिए

2:26:16अब उनके पुलिस रिफॉर्म्स को जानते हैं

2:26:22जुडिशल रिफॉर्म्स को सप्लीमेंट करने के

2:26:24लिए पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन में भी कुछ

2:26:26इंपॉर्टेंट चेंज किया जाते हैं सबसे पहले

2:26:29तो लॉर्ड कार्नवालिस जमींदारा की पुलिस

2:26:32पावर्स को खत्म कर देते हैं उनकी जगह अब

2:26:35जिला पुलिस का कंट्रोल इंग्लिश

2:26:36मैजिस्ट्रेट को दिया जाता है हर एक

2:26:39डिस्ट्रिक्ट को थाना या पुलिस सर्किल में

2:26:41डिवाइड कर दिया जाता है एक सर्किल का

2:26:44एरिया लगभग 20 स्क्वायर माइल्स का होता

2:26:47ठाणे का इंचार्ज इंडियन ऑफिसर के पास होता

2:26:49था जिसे दरोगा कहते थे और उन्हें एसिस्ट

2:26:53करने के लिए बहुत से कांस्टेबल भी होते थे

2:26:55हम का सकते हैं की इंडिया में मॉडर्न

2:26:58पुलिस सिस्टम की शुरुआत यहां से होती है

2:27:00दोस्तों जुडिशल और पुलिस रिफॉर्म्स के साथ

2:27:03ही लॉर्ड कार्नवालिस अपने

2:27:09फादर ऑफ सिविल सर्विसेज भी कहा जाता है

2:27:19कौन वॉइस सबसे पहले कंपनी सर्वेंट के

2:27:22द्वारा किया जान वाले प्राइवेट ट्रेड की

2:27:24प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए स्टेप्स

2:27:26लेते हैं उनको रिलीज होता है की कंपनी के

2:27:30एम्पलाइज की सैलरी बहुत कम है और उसको

2:27:32सप्लीमेंट करने के लिए वो करप्शन या इलीगल

2:27:35मिंस का उसे करते हैं इसलिए वो एम्पलाइज

2:27:38की सैलरी रेस कर देते हैं इसके साथी कौन

2:27:41वालरस कंपनी में नेपोटिज्म और पॉलीटिकल

2:27:44फेवरेटीज्म को भी कम करते हैं वो मेरिट के

2:27:47बेसिस पे अपॉइंटमेंट स्टार्ट करते हैं

2:27:49यहां तक की एक बार वो प्रिंस ऑफ वेल्स की

2:27:52रिकमेंडेशन को भी माना कर देते हैं लॉर्ड

2:27:54कार्नवालिस इंडिया में सिविल सर्विसेज को

2:27:57कोवीनेटेड सिविल सर्विस और अनकंवीनियंट

2:28:00सिविल सर्विस में डिवाइड करते हैं कवर्ड

2:28:03सर्विसेज में इंडियन को अप्वॉइंट नहीं

2:28:05किया जाता था

2:28:14इससे हमें पता चला है की पॉलिसी रेसिजम से

2:28:18प्रभावित थी

2:28:20लॉर्ड कार्नवालिस ही एडमिनिस्ट्रेटिव

2:28:22मशीनरी के यूरोपिनाइजेशन के लिए

2:28:24रिस्पांसिबल थे यूरोपिनाइजेशन ऑफ

2:28:27एडमिनिस्ट्रेशन

2:28:28दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस रेसियल

2:28:32डिस्क्रिमिनेशन के सपोर्टर थे उनके

2:28:34अकॉर्डिंग तो हर एक इंडियन क्राफ्ट था

2:28:36इसलिए सभी हायर सर्विसेज को वो सिर्फ

2:28:39यूरोपीय के लिए रिजर्व कर देते हैं

2:28:41कोविनेटेड सर्विसेज के दरवाजे भी उन्होंने

2:28:44ही इंडियन के लिए बैंड कर दिए थे आर्मी

2:28:47में इंडियन सूबेदार की पोस्ट से आगे नहीं

2:28:50जा सकते थे और सिविल सर्विसेज में मुसिप्स

2:28:53या डिप्टी कलेक्टर से ऊपर की पोस्ट पर

2:28:55उनका अपॉइंटमेंट नहीं हो सकता था सोने

2:28:58वाली बात यह है की उसे समय की इंग्लैंड

2:29:00में भी एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज करप्शन

2:29:03से फ्री नहीं थी और कंपनी

2:29:13को इंप्रूव करने के लिए तो उन्होंने उनकी

2:29:16सैलरी को इंक्रीज कर दिया था लेकिन इंडियन

2:29:19एम्पलाइज के लिए उन्होंने कभी सिम मेथड

2:29:21अप्लाई करने की कोशिश भी नहीं की इससे साफ

2:29:24होता है

2:29:28उन्होंने ही राशलिज्म की पॉलिसी पर ऑफिशल

2:29:32मोर भी लगा दी थी और इस राशलिज्म की

2:29:35पॉलिसी से एंग्लो इंडियन रिलेशंस ब्रिटिश

2:29:37रूल के आखिरी समय तक ग्रसित रहते हैं

2:29:43कमर्शियल रिफॉर्म्स को डिस्कस कर लेते हैं

2:29:46कमर्शियल रिफॉर्म्स दोस्तों

2:29:55कंपनी के खुद के गुड्स तो यूरोप में कई

2:29:57बार घाटे में बेचे जा रहे थे लेकिन कंपनी

2:30:00के सर्वेंट जो गुड्स खुद यूरोप भेजते थे

2:30:02अपनी प्राइवेट ट्रेड के लिए उन्हें काफी

2:30:05मुनाफा हो रहा था

2:30:061774 में कोलकाता में बोर्ड ऑफ ट्रेड

2:30:09एस्टेब्लिश किया गया था और तभी से कंपनी

2:30:12अपने गुड्स यूरोपियन और इंडियन ठेकेदार के

2:30:15थ्रू प्रोक्योर करती थी यह ठेकेदार

2:30:17यूजुअली गुड्स को हाय प्राइसेस पर सप्लाई

2:30:20करते थे और साथ ही इनकी क्वालिटी भी

2:30:22इनफीरियर होती थी बोर्ड के मेंबर्स

2:30:24ठेकेदार पर एक्शन लेने की जगह

2:30:33से कम करके 5 मेंबर्स की कर देते हैं इसके

2:30:36साथ ही कांट्रैक्ट्स के थ्रू

2:30:38प्रोक्योरमेंट का मेथड खत्म कर दिया जाता

2:30:40है और इसकी जगह अब कमर्शियल रेजिडेंट्स और

2:30:43एजेंट के थ्रू सप्लाई के मेथड को अपना

2:30:45लिया जाता है

2:31:12लैंड रिवेन्यू सिस्टम में सुधार लाना

2:31:14कार्नवालिस का सबसे बड़ा कंसर्न था वारेन

2:31:17हेस्टिंग्स के फाइव एयर और 1 एयर सेटलमेंट

2:31:19जो बिल्डिंग सिस्टम पर बेस्ड थे फेल हो

2:31:22चुके थे

2:31:22कंपनी को टाइम पर रिवेन्यू नहीं मिल पता

2:31:25था और उसकी अमाउंट भी फिक्स नहीं थी इसके

2:31:28साथ ही वारेन हेस्टिंग्स के बिडिंग सिस्टम

2:31:30की वजह से कल्टीवेटर भी परेशान थे इन सभी

2:31:33प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए

2:31:34कार्नवालिस 1793 में बंगाल में परमानेंट

2:31:38सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करते हैं इस सिस्टम

2:31:41के अकॉर्डिंग जमींदारा को लैंड ओनर माना

2:31:43गया और उनके साथ 79 में 10 साल का

2:31:47सेटलमेंट किया जाता है जिसे 1793 में

2:31:50परमानेंट कर दिया जाता है जमींदारा को

2:31:52लैंड में हेरेडिटरी राइट्स मिल गए मतलब

2:31:55उनके बाद जमींदारी उनके ही सक्सेस को

2:31:58ट्रांसफर हो जाएगी सेटलमेंट के अकॉर्डिंग

2:32:00टोटल रिवेन्यू का 89% शेर कंपनी का होगा

2:32:03और 11% जमींदारा अपनी पास रख सकते हैं

2:32:07इसमें परमानेंट का मतलब था की लैंड

2:32:09रिवेन्यू का अमाउंट हमेशा के लिए फिक्स कर

2:32:11दिया

2:32:12यह अमाउंट लैंड का सर्वे करके उसकी

2:32:15प्रोडक्टिविटी और पेस्ट की रिवेन्यू

2:32:17रिकॉर्ड्स के बेसिस पर फिक्स किया जाना था

2:32:19यानी की अब रेगुलर बेसिस पर लैंड रिवेन्यू

2:32:23की डिमांड चेंज नहीं की जाएगी और अमाउंट

2:32:25को बिडिंग से भी डिसाइड नहीं किया जाएगा

2:32:27परमानेंट सेटलमेंट करने के पीछे कंपनी का

2:32:30मोटर था की उन्हें रेगुलर और फिक्स

2:32:33रिवेन्यू मिलता रहे इसके साथी कौन बोल

2:32:35इसका विचार था की क्योंकि जमींदार जब लैंड

2:32:37ऑनर्स थे और प्रोडक्टिविटी इंक्रीज करने

2:32:40में उनका अपना फायदा था तो वो लैंड में

2:32:42इन्वेस्ट करेंगे साथ ही कल्टीवेटर पर भी

2:32:45बिडिंग सिस्टम के जैसे एक्सेसिव रिवेन्यू

2:32:47का प्रेशर नहीं आएगा एक तरह से लॉर्ड

2:32:50कार्नवालिस इंडिया के जमींदारा को

2:32:52इंग्लैंड के लैंडलॉर्ड वाला रोल देना

2:32:54चाहते थे इस सेटलमेंट का एक फीचर सनसेट

2:32:57क्लोज़ भी था इसका मतलब होता है की

2:33:00जमींदारा को फिक्स डेट पर शाम होने से

2:33:03पहले रिवेन्यू डिपॉजिट करना होता था अगर

2:33:05वो ऐसा नहीं करते थे तो उनके जमींदारी

2:33:08राइट्स को नीलम कर दिया जाता था हम का

2:33:11सकते हैं की परमानेंट सेटल के पीछे

2:33:13इंटेंशन तो अच्छी थी लेकिन फिर भी इसमें

2:33:15बहुत सी प्रॉब्लम्स देखने को मिलती है

2:33:17सबसे पहले प्रॉब्लम थी की लैंड रिवेन्यू

2:33:21के अमाउंट का रेट बहुत ही रखा गया था

2:33:23क्योंकि कंपनी परमानेंट तोर पर रेट फिक्स

2:33:26कर रही थी इसलिए उनकी कोशिश थी की ज्यादा

2:33:29से ज्यादा रेट रखा जाए इससे होता ये है की

2:33:32जमींदारा इतना रिवेन्यू कलेक्ट नहीं कर

2:33:34पाते थे और सनसेट क्लोज़ के तहत उनकी

2:33:37जिम्मेदारी भी चली जाति थी इसके साथ ही

2:33:39जमीदार ज्यादा से ज्यादा रिवेन्यू कलेक्ट

2:33:42करने के लिए कल्टीवेटर को बहुत ज्यादा

2:33:44हरायस भी करने लगता हैं जमींदारा को लॉन्ग

2:33:47टर्म के लिए लैंड में इन्वेस्ट करने का

2:33:49कोई इंसेंटिव भी इस सिस्टम में नहीं था

2:33:51परमानेंट सेटलमेंट लैंडलॉर्डिज्म के

2:33:54फिनोफेना को भी जन्म देता है

2:33:58जब लैंड ओनर अपनी लैंड होल्डिंग के पास एन

2:34:01रहकर कहानी दूर रहने लगता है जैसे की इसकी

2:34:04इसमें लैंड रोड सिटी में रहने ग जाते

2:34:07इस सेटलमेंट की वजह से ही पहले बार

2:34:09प्रेजेंट्स लैंड पर अपने राइट्स को देते

2:34:11हैं और टेनेंस आते बिल बन जाते हैं हम का

2:34:15सकते हैं की परमानेंट सेटलमेंट भी लैंड

2:34:17रिवेन्यू का परमानेंट सॉल्यूशन नहीं दे

2:34:19पता और आगे जाकर ब्रिटिशर्स बाकी प्रोविंस

2:34:24लैंड रिवेन्यू सिस्टम इंट्रोड्यूस करते

2:34:26हैं

2:34:36अदर इंपॉर्टेंट इवेंट्स

2:34:42दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस के टाइम में ही

2:34:441790 में थर्ड एंग्लो मैसूर वार भी हुआ था

2:34:47इसमें कौन वालिस ने टीपू सुल्तान को हराकर

2:34:50उनके साथ 1792 में ट्रीटी का श्रीरंगापटना

2:34:54साइन की थी एंग्लो मैसूर वर्स को हम अपनी

2:34:57वीडियो में पहले ही कर कर चुके हैं डिटेल

2:35:00में समझना के लिए आप वो वीडियो रेफर कर

2:35:02सकते हैं लॉर्ड कार्नवालिस के टाइम में ही

2:35:041791 में बनारस में संस्कृत कॉलेज स्टार्ट

2:35:08किया गया था जिसके फाउंडर जोनाथन थे

2:35:12कंक्लुजन

2:35:15दोस्तों

2:35:1786 से 1793 तक गवर्नर जनरल की पोस्ट पर

2:35:21रहते हैं लेकिन इसके साथ ही ये पहले ऐसे

2:35:24गवर्नर जनरल भी थे जिन्हें इस पोस्ट पर

2:35:27फिर से अप्वॉइंट किया जाता है जनवरी 185

2:35:30में

2:35:33जनरल अप्वॉइंट होते हैं लेकिन उनका सेकंड

2:35:36टर्म राहत है क्योंकि अक्टूबर 185 में

2:35:39इलनेस की वजह से प्रेजेंट अप के गाजीपुर

2:35:43में उनकी मृत्यु हो जाति है

2:35:47और आज भी यहां उनका मौसम लिए मौजूद है तो

2:35:51दोस्तों हमने एक और इंपॉर्टेंट ब्रिटिश

2:35:54गवर्नर को भी कर कर लिया है अब हम अपनी

2:35:57नेक्स्ट वीडियो में

2:36:00डिस्कस करेंगे

2:36:021823

2:36:10[संगीत]

2:36:12दोस्तों आज हम इस वीडियो में दो

2:36:14इंपॉर्टेंट ब्रिटिश गवर्नर जनरल्स के बड़े

2:36:17में बात करने वाले हैं

2:36:18हमने अपनी पिछली वीडियो में लॉर्ड

2:36:21कॉर्नवालिस्को कर किया था जो 1793 तक

2:36:24गवर्नर जनरल की पोस्ट पर रहते हैं उनके

2:36:27बाद 1793 से लेकर 1798 तक गवर्नर जनरल रहे

2:36:31थे सकों शो जिनके टाइम पीरियड में कोई खास

2:36:34रोमांचक घटना घटित नहीं होती और इनके बाद

2:36:371798 में गवर्नर जनरल बनते हैं लॉजेली जो

2:36:42की इंपॉर्टेंट गवर्नर जनरल्स में से एक

2:36:44हैं और इसीलिए इनके बड़े में डिटेल में

2:36:46चर्चा करना जरूरी हो जाता है तो आई शुरू

2:36:49करते हैं

2:36:58गवर्नर जनरल बने से पहले ब्रिटिश ट्रेजरी

2:37:01के लोड और बोर्ड ऑफ कंट्रोल में कमिश्नर

2:37:04की ऑफिस हॉल कर चुके थे लेकिन इंग्लैंड की

2:37:06पॉलीटिकल लाइफ में वो अपना कुछ खास

2:37:09इंप्रेशन नहीं बना पे थे या फिर ये का

2:37:11सकते हैं की उन्हें अभी कैसा मौका ही नहीं

2:37:13मिला था जहां वो अपनी काबिलियत दिखा पाएं

2:37:15उन्हें ये मौका मिला है जब 1798 में उनका

2:37:19अपॉइंटमेंट गवर्नर जनरल की पोस्ट पर होता

2:37:21है

2:37:22इंडिया में अपने मिशन को लेकर बहुत क्लियर

2:37:24विजन से आए थे वो कंपनी को इंडिया में

2:37:27सुप्रीम पावर बना देना चाहते थे उसकी

2:37:29टेरिटरीज को और भी ज्यादा इंक्रीस करना

2:37:31चाहते थे और सभी इंडियन स्टेटस को कंपनी

2:37:34के डिपेंडेंट की पोजीशन में ले आना चाहते

2:37:36थे

2:37:39और नॉन-इंचन की पॉलिसी को छोड़कर वार की

2:37:42पॉलिसी शुरू करते हैं उनके अकॉर्डिंग नॉन

2:37:45इंटरवेंशन की पॉलिसी से सिर्फ कंपनी के

2:37:48दुश्मनों को ही फायदा हो सकता था और उनकी

2:37:50इस फॉरवर्ड पॉलिसी को इंग्लैंड की वार

2:37:52मिनिस्ट्री भी सपोर्ट करती है

2:37:55इंडियन रुलर्स के अगेंस्ट बहुत ही ऑफेंसिव

2:37:58एटीट्यूड अडॉप्ट करते हैं

2:38:00वो खुद को बंगाल टाइगर कहते थे जो हमेशा

2:38:04ही शिकार की तलाश में राहत था और बंगाल के

2:38:07इस टाइगर का पहले शिकार बनते हैं मैसूर के

2:38:10टाइगर टीपू सुल्तान

2:38:11टीपू सुल्तान के साथ 1799 में होता है

2:38:14फोर्थ एंग्लो मैसूर वार इस वार में टीपू

2:38:18सुल्तान मारे जाते हैं और मैसूर की आदि से

2:38:20ज्यादा टेरिटरी पर कंपनी का कब्ज हो जाता

2:38:23है जो टेरिटरी बजती है उसको बॉडीगार्ड

2:38:26डायनेस्टी के एक माइनर राजा को दे दिया

2:38:28जाता है और उनके साथ सब्सिडियरी एलाइंस की

2:38:31ट्वीटी साइन कर ली जाति है मतलब

2:38:33इनडायरेक्ट पूरा मैसूर ही कंपनी के

2:38:36कंट्रोल में ए चुका था मैसूर के बाद

2:38:38बैलंसली अपना अगला शिकार बनाते हैं मराठस

2:38:41को उनके साथ 183 से 1800 के बीच होता है

2:38:45सेकंड एंग्लो मराठा वार

2:38:48सेकंड एंग्लो मराठा वार के और होने पर

2:38:50कंपनी पेशवा के साथ-साथ होलकर सिंधिया और

2:38:54भोसले के साथ भी सब्सिडियरी एलाइंस की

2:38:56त्रुटीज साइन कर लेती है इसके साथ ही

2:38:59मराठा अंपायर की टेरिटरी का एक बड़ा

2:39:02हिस्सा भी कंपनी के कब्जे में ए जाता है

2:39:04तो दोस्तों यह थे लॉर्ड वालेस्ले के टाइम

2:39:07पीरियड के दो इंपॉर्टेंट हुआ जिनके ध्रुव

2:39:10वह समय इंडिया की सबसे पावरफुल पावर्स कहे

2:39:13जान वाले मैसूर और मराठा अंपायर को

2:39:15डिस्ट्रॉय कर देते हैं आई अब जानते हैं

2:39:18लॉर्ड वेलेजली की सबसे इंपॉर्टेंट पॉलिसी

2:39:20यानी की सब्सिडियरी एलाइंस सिस्टम के बड़े

2:39:23में

2:39:24सब्सिडियरी एलाइंस दोस्तों सब्सिडियरी

2:39:28एलाइंस बेसिकली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी

2:39:31और इंडियन स्टेटस के बीच होने वाली

2:39:34जिसमें इंडियन किंग्डम्स अपनी सॉवरेन्टी

2:39:37को देते हैं इंडिया में ब्रिटिश अंपायर को

2:39:40खड़ा करने में सब्सिडियरी एलाइंस सिस्टम

2:39:42की बड़ी भूमिका रहती है लॉर्ड वेलेजली ने

2:39:44इस सिस्टम को फार्मूले फ्रेम किया था

2:39:47लेकिन इसका सबसे पहले बार उसे किया था

2:39:49फ्रेंच गवर्नर डी प्लेन आपको याद ही होगा

2:39:53की कैसे करना ठीक शब्द के समय डबल इंडियन

2:39:57सिस्टम के साथ एलियंस बनाते हैं जिसमें

2:39:59उन्हें प्रोटेक्शन देने के बदले में वह

2:40:02उनसे ट्रिब्यूट और टेरिटरीज दोनों ही ले

2:40:04लेते हैं इसके बाद ब्रिटिश के साथ इस तरह

2:40:07के एलाइंस में आने वाले पहले रोलर थे अवध

2:40:10के नवाब सुझाव द्वारा

2:40:24ये कम किया था वैली ने वो सब्सिडियरी

2:40:27एलाइंस के प्रोविजंस को वेल डिफाइंड बनाते

2:40:29हैं और फिर इसे ब्रिटिश अंपायर के

2:40:31एक्सपेंशन के लिए एक हथियार की तरह उसे

2:40:34करते हैं आई अब सब्सिडियरी एलाइंस के

2:40:37फीचर्स को समझते हैं फीचर्स ऑफ सब्सिडियरी

2:40:40एलाइंस दोस्तों जो इंडियन रुलर्स ब्रिटिश

2:40:43के साथ सब्सिडियरी एलाइंस में इंटर करते

2:40:46थे उन्हें अपनी आर्मी को डिसोल्व करके

2:40:48अपनी टेरिटरी में ब्रिटिश फोर्स को रखना

2:40:51होता था और इस ब्रिटिश आर्मी की मेंटेनेंस

2:40:54का खर्चा भी उन्हें ही देना होता था अगर

2:40:57कोई रोलर पेमेंट करने में फेल हो जाता था

2:40:59तो उसकी टेरिटरी का कुछ पार्ट कंपनी अपने

2:41:02कब्जे में कर लेती थी इसके बदले में

2:41:04ब्रिटिश इंडियन स्टेट को किसी भी फॉरेन

2:41:07अटैक या फिर इंटरनल रिवॉर्ड से प्रोटेक्शन

2:41:10ऑफर करते थे इंडियन रुलर्स को अपने कोर्ट

2:41:13में एक ब्रिटिश रेजिडेंट को भी रखना होता

2:41:15था वैसे तो ट्रीटी में प्रॉमिस किया जाता

2:41:18था की यह रेजिडेंस इंडियन स्टेट के इंटरनल

2:41:21अफेयर्स में कोई इंटरफ्रेंस नहीं करेंगे

2:41:22लेकिन यह अक्सर पेपर पर ही र जाता था इसके

2:41:27साथ ही इंडियन स्टेट किसी भी और फॉरेन

2:41:30पावर के साथ कोई एलाइंस नहीं कर सकता था

2:41:32और ना ही अपने यहां ब्रिटिशर्स के अलावा

2:41:35किसी और यूरोपियन को सर्विस पर रख सकता था

2:41:37और अगर एलिजंस साइन करने से पहले कोई

2:41:41यूरोपियन उनके यहां कम कर रहा होता था तो

2:41:44उनकी सर्विस को भी टर्मिनेट करना होता था

2:41:46इस प्रोविजन का मोटे था फ्रेंच इन्फ्लुएंस

2:41:49को कम करना बिना ब्रिटिश अप्रूवल के

2:41:52इंडियन रोलर किसी दूसरे इंडियन रोलर के

2:41:55साथ भी किसी तरह के राजनैतिक संबंध नहीं

2:41:58बना सकते थे इस तरह से इंडियन रोलर अपनी

2:42:01सभी मिलिट्री और फॉरेन पावर्स को को देते

2:42:03हैं दूसरे शब्दों में कहें तो वह अपनी

2:42:06साड़ी इंडिपेंडेंस होकर ब्रिटिश बन जाते

2:42:09हैं और इस तरह धीरे-धीरे इंडिया का बहुत

2:42:13सर पार्ट ब्रिटिश कंट्रोल में ए जाता है

2:42:241799 में मैसूर और तंजौर 1801 में अवध

2:42:2918002 में पेशवा 183 में घोसला और 18004

2:42:34में सिंधिया भी सब्सिडियरी एलाइंस पर साइन

2:42:36कर देते हैं इसके अलावा जोधपुर

2:42:40मछरी बूंदी और भरतपुर के स्टेटस भी सेलेंस

2:42:44के पार्ट बनते हैं दोस्तों सब्सिडियरी

2:42:47एलाइंस की वजह से इंडिया का एक बहुत बड़ा

2:42:49हिस्सा कंपनी के इनडायरेक्ट कंट्रोल में ए

2:42:52जाता है इसके साथ ही अब इंडियन रुलर्स के

2:42:55खर्च पर कंपनी एक बड़े आर्मी को भी मेंटेन

2:42:58कर शक्ति थी यही आर्मी आगे चलकर इंडिया के

2:43:01बाकी पार्ट्स को जितने में उनकी हेल्प

2:43:03करती है इसीलिए सब्सिडियरी एलाइंस इंडिया

2:43:07में ब्रिटिश अंपायर के एक्सपेंशन के लिए

2:43:09बहुत इंपॉर्टेंट पॉलिसी मनी जाति है

2:43:12इस तरह लॉर्ड वेलेजली अपने विजन को पूरा

2:43:15करने में सफल रहते हैं उन्होंने एन सिर्फ

2:43:18इंडिया में ब्रिटिश अंपायर का टेरिटोरियल

2:43:20एक्सपेंशन किया बल्कि कंपनी को इंडिया की

2:43:23सुप्रीम मिलिट्री अथॉरिटी भी बना दिया

2:43:25दोस्तों लोट बैलंसली के बाद एक बार फिर से

2:43:28लॉर्ड कार्नवालिस गवर्नर जनरल बनकर इंडिया

2:43:31आते हैं लेकिन जैसा की हमने अपनी पिछली

2:43:34वीडियो में भी आपको बताया था इससे पहले की

2:43:36वह अपने सेकंड टर्म में कुछ इंपॉर्टेंट

2:43:38करते उनकी मृत्यु हो जाति है उनके बाद 185

2:43:42से 1800 तक जोसे बार लोग गवर्नर जनरल रहे

2:43:46थे उनके टाइम पीरियड की सिर्फ एक ही चीज

2:43:48याद रखना लायक है और वो है 186 में हुई

2:43:51वेल्लोर से पोयम उतनी दोस्तों यह मुटनी

2:43:55वेल्लोर में स्टेशन मद्रास रेजीमेंट की

2:43:57कुछ सिपहिया द्वारा की गई थी इसके पीछे का

2:44:00करण था ट्रेडिशनल

2:44:03के उसे समय के गवर्नर जनरल बंटिंग के पास

2:44:06किया था विलियम

2:44:09बेंटिकिनी को सरप्राइज भी कर दिया था

2:44:12इसके बाद 187 से लेकर 1813 तक लॉर्ड मिंटो

2:44:16वन गवर्नर जनरल की पोस्ट पर रहते हैं उनका

2:44:19टाइम पीरियड भी हमारे लिए इंपॉर्टेंट नहीं

2:44:21है इसलिए अब हम चलते हैं अगले गवर्नर जनरल

2:44:24लॉर्ड हेस्टिंग्स की तरफ

2:44:27लॉर्ड हेस्टिंग 1813 तू 1823 दोस्तों जहां

2:44:33एक तरफ लोट बैलेंस लेने इंडिया में कंपनी

2:44:35की मिलिट्री सुप्रीमेसी को एस्टेब्लिश

2:44:37किया था वहीं लॉर्ड हेस्टिंग्स ने इंडिया

2:44:40में ब्रिटिश पैरामाउंटसी को इंपोज करने का

2:44:43कम किया था लेकिन इंडिया में आने के बाद

2:44:45उनके सामने सबसे पहले चैलेंज था गोरखास का

2:44:48तो आई इसको थोड़ा डिटेल में डिस्कस करते

2:44:51हैं गोरखा वार और दी एंग्लो नेपाल वार 18

2:44:5514 तू 1816

2:44:58दोस्तों

2:44:591768 में गोरखास ने नेपाल पर अपना कंट्रोल

2:45:02एस्टेब्लिश कर लिया था इसके बाद वह अपनी

2:45:05डोमिनियन को माउंटेन के आगे एक्सपेंड करना

2:45:07शुरू करते हैं नॉर्थ में तो चाइनीस इन्हें

2:45:10एक्सपेंशन करने नहीं देते इसलिए यह बंगाल

2:45:13और अवध की तरफ पुश करते हैं

2:45:17गोरखपुर जिला

2:45:23में ए जाता है इसके बाद कनफ्लिक्ट शुरू

2:45:26होता है जब गुरखास बुधवार और शिवराज जिला

2:45:29पर कब्जा कर लेते हैं उसे समय तो ब्रिटिश

2:45:32बिना किसी ओपन कनफ्लिक्ट के इंडस्ट्रीज को

2:45:35रे ऑक्युपी कर लेते

2:45:41तीन पुलिस स्टेशंस पर अटैक कर देते हैं

2:45:47और गोरखास के अगेंस्ट ऑफेंसिव लॉन्च करने

2:45:51का डिसीजन लेते हैं

2:45:5212000 की गोरख आर्मी के अगेंस्ट

2:45:54हेस्टिंग्स 34000 सोल्जर की बड़े आर्मी

2:45:58तैयार करते हैं लेकिन 1814 का यह कैंपेन

2:46:02बुरी तरह फूल हो जाता है इसके बाद भी

2:46:04ब्रिटिश हर नहीं मानते और फिर से कोशिश

2:46:07करते हैं अप्रैल 1815 में वो कुमाऊं हिल्स

2:46:11में अल्मोड़ा को कैप्चर करने में कामयाब

2:46:13होते हैं और मैं 1815 में अमर सिंह थापा

2:46:17से मालाओं का वोट भी जीत लिया जाता है

2:46:19मालाओं के फल के बाद गोरखास नेगोशिएशंस

2:46:23करने के लिए तैयार हो जाते हैं लेकिन

2:46:25हेस्टिंग्स की डिमांड्स उनके एटीट्यूड

2:46:27चेंज कर देती हैं और एक बार फिर से दोनों

2:46:30के बीच होस्टिलिटीज शुरू हो जाति हैं

2:46:36बुरी तरह हर दिया जाता है इसके बाद गोरखा

2:46:39समझ जाते हैं की उनके लिए अब ब्रिटिश को

2:46:42और रजिस्टर करना पॉसिबल नहीं है और इसीलिए

2:46:45मार्च 1816 में वो ट्रीटी का सुगौली को

2:46:48एक्सेप्ट कर लेते हैं

2:46:52कुमाऊं जिला कंपनी को सुरेंद्र कर देते

2:46:55हैं इसके साथ ही दोनों के बीच तराई

2:46:57बाउंड्री को पिलर्स के थ्रू मार्क कर दिया

2:47:00जाता है

2:47:01गुरखास काठमांडू में ब्रिटिश रेजिडेंट

2:47:03रखना के लिए भी मां जाते हैं और इसके साथ

2:47:06ही सिक्किम से परमानेंटली विद्रोह करने के

2:47:08लिए तैयार हो जाते हैं

2:47:10ब्रिटिशर्स को हिल स्टेशंस और समर कैपिटल

2:47:13के लिए साइट भी मिल जाति है जैसे की शिमला

2:47:16मसूरी रानीखेतसेत्र इसके साथ ही

2:47:19ब्रिटिशर्स गोरखास को अपनी आर्मी में भी

2:47:22शामिल कर लेते हैं जो आगे छलके इंडिया में

2:47:25कंपनी की डोमिनियन को एक्सपेंड करने में

2:47:27काफी हेल्प करते हैं तो दोस्तों इसके बाद

2:47:30लॉर्ड हेस्टिंग्स का नेक्स्ट चैलेंज होता

2:47:32है पिंडारी का इशू

2:47:35पिंडारी इसके बड़े में हमने एंग्लो मराठा

2:47:38वर्स के लेक्चर में डिटेल में डिस्कस किया

2:47:40था इसके अलावा मराठस के साथ 1816 से 18-18

2:47:44तक थर्ड एंग्लो मराठा वार भी लॉर्ड

2:47:47हेस्टिंग्स के पीरियड में ही हुआ था थर्ड

2:47:50एंग्लो मराठा वार से पहले हिस्ट्री मराठस

2:47:52के चैलेंज को हमेशा के लिए खत्म कर देते

2:47:54हैं दोस्तों मराठस के डिक्लिन के बाद

2:47:57प्रैक्टिकल तो कंपनी इंडिया में सुप्रीम

2:48:00पावर बन गई थी लेकिन अभी भी मुगल रोलर

2:48:02सेरेमोनियल तोर पर इंडिया के एंपरर थे और

2:48:05गवर्नर जनरल की सेल पर डी सर्वेंट ऑफ

2:48:08एंपरर फ्रिज लिखा होता था लॉर्ड

2:48:10हेस्टिंग्स इसे बदलना चाहते थे इसलिए वह

2:48:13अपने नॉर्दर्न इंडिया के टूर पर मुगल

2:48:15एंपरर अकबर डी सेकंड से मिलने से इनकार कर

2:48:18देते हैं वो साफ कर देते हैं की मुगल

2:48:20एंपरर को पहले सभी ऐसी सेरेमनी को खत्म

2:48:23करना होगा जो कंपनी के डोमिनियंस पर उनकी

2:48:25सुप्रीमेसी दर्शाती हो मतलब की अंपायर को

2:48:29कंपनी के साथ एक क्वालिटी के स्टेटस पर

2:48:31मिलन होगा

2:48:35और मुगल एंपरर अकबर डी सेकंड

2:48:42पर मीटिंग करते हैं इस तरह से लॉर्ड

2:48:45हेस्टिंग्स ने एन सिर्फ कंपनी को सुप्रीम

2:48:47पावर बनाया बल्कि उसको एक सुप्रीम पावर की

2:48:49तरह बिहेव करना भी शिखा दिया दोस्तों वैसे

2:48:53तो लॉर्ड हेस्टिंग्स अपनी वर्स के लिए ही

2:48:55जान जाते हैं लेकिन इनके टाइम पीरियड में

2:48:58कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स भी हुए थे

2:49:00आई उनको भी डिस्कस कर लेते हैं

2:49:04एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स अंदर

2:49:06हेस्टिंग्स दोस्तों लॉर्ड हेस्टिंग्स काफी

2:49:09लकी थे क्योंकि उनके पास जॉन मालकिन

2:49:13स्टंट और चार्ल्स में कफ जैसे कैपेबल

2:49:16एडमिनिस्ट्रेटर मौजूद थे यही

2:49:19एडमिनिस्ट्रेटर उनके टाइम पीरियड में

2:49:21रिफॉर्म्स को इंट्रोड्यूस करते हैं जैसे

2:49:23की थॉमस मुनरो जो 1820 में मद्रास के

2:49:27गवर्नर बनते हैं मालाबार कोयंबटूर मदुरई

2:49:30और डिंडीगुल में लैंड टेन्योर के रियट

2:49:33वादी सिस्टम को इंट्रोड्यूस करते हैं रूट

2:49:35बड़ी सिस्टम में सेटलमेंट डायरेक्टली

2:49:37रीयूडीएच यानी की एक्चुअल टिलर के साथ

2:49:40किया जाता था मतलब कल्टीवेटर ही लैंड

2:49:43रिवेन्यू का डायरेक्ट पैर बन जाता है बिना

2:49:46किसी जमींदार या विलेज कम्युनिटी के बीच

2:49:48में आए इसी तरह नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंस

2:49:51में मारवाड़ी सिस्टम इंट्रोड्यूस किया

2:49:53जाता है इसके अकॉर्डिंग सेटलमेंट विलेज

2:49:56कम्युनिटी या महल के रिप्रेजेंटेटिव के

2:49:58साथ किया जाता था इंडिविजुअल कल्टीवेटर का

2:50:01शेर विलेज के लोग आपस में सेटल कर सकते

2:50:04दोस्तों ट्रायोटवारी और महालवाड़ी

2:50:06सेटलमेंट को और ज्यादा डिटेल में हम अपनी

2:50:09लैंड रिवेन्यू सिस्टम की वीडियो में कर

2:50:11करेंगे

2:50:18ज्यूडिशरी और एग्जीक्यूटिव का सिपरेशन कर

2:50:20दिया था लेकिन हिस्ट्री कलेक्टर को

2:50:24मजिस्ट्रेट का ऑफिस देना शुरू कर देते हैं

2:50:26तो यह थे लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय में

2:50:28होने वाले कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स

2:50:31कंक्लुजन दोस्तों इस तरह लौटबे

2:50:36दोनों ने ही इंडिया में ब्रिटिश अंपायर के

2:50:39एक्सपेंशन का कम किया यह दोनों ही अवार्ड

2:50:42के सपोर्टर थे और कंपनी को इंडिया की

2:50:45सुप्रीम पावर बना देना चाहते थे और हमने

2:50:47देखा की कैसे वो अपने इस विजन में कामयाबी

2:50:51रहते हैं

2:51:00इन्हें ही जाता है

2:51:0438 तू 1835 आज हम एक ऐसे ब्रिटिश गवर्नर

2:51:09जनरल की बात करने वाले हैं जो इंडिया में

2:51:11अपने सोशल रिफॉर्म्स के लिए जानी जाति हैं

2:51:13इसके साथ ही वह फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ

2:51:17इंडिया

2:51:18विलियम बेंटिक जो जेरेमी बेंथम की

2:51:22यूटिलिटेरियन फिलासफी के फॉलोअर थे जिसका

2:51:25सिंपल शब्दों में मतलब होता है मैक्सिमम

2:51:27गुड पर मैक्सिमम पीपल इसी फिलासफी से

2:51:31इंस्पायर होकर वो इंडिया में अलग-अलग

2:51:33रिफॉर्म्स को इंट्रोड्यूस करते हैं तो आई

2:51:35शुरू करते हैं इंट्रोडक्शन दोस्तों

2:51:42की थी उन्होंने 1791 में 16 साल की छोटी

2:51:47सी आगे में ही ई जॉइन कर ली थी और 1798

2:51:50में करनाल की रैंक तक भी पहुंच गए थे

2:51:53वह इंग्लैंड में हाउस ऑफ कॉमनस के मेंबर

2:51:56भी थे इंडिया में उनके करियर की शुरुआत

2:51:58होती है 183 में जब उन्हें मद्रास का

2:52:02गवर्नर अप्वॉइंट किया जाता है दोस्तों 186

2:52:05में वेल्लोर मुटनी के समय विलियम बेंटिक

2:52:08ही मद्रास की गवर्नर है उन्होंने ऑर्डर

2:52:11दिया था की नेटिव सोल्जर अपनी ट्रेडिशनल

2:52:13अटायर नहीं पहन सकते जिसकी वजह से वेल्लोर

2:52:17में तैनात कुछ मद्रास रेजीमेंट विद्रोह कर

2:52:19देती हैं वेल्लोर मुटनी को तो इन्होंने

2:52:22सरप्राइज कर दिया था लेकिन इसके बाद 187

2:52:25में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स इन्हें इंग्लैंड

2:52:27वापस बुला लेते हैं इसके बाद विलियम

2:52:30बेंटिक 1828 में गवर्नर जनरल की पोस्ट पर

2:52:33इंडिया वापस आते हैं

2:52:35गवर्नर जनरल रहते हुए उन्होंने बहुत सारे

2:52:38रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस किया थे आई एक-एक

2:52:41करके उनके रिफॉर्म्स को डिस्कस करते हैं

2:52:43सोशल रिफॉर्म्स ऑफ बेंटिक दोस्तों विलियम

2:52:48बेंटिक से पहले किसी भी गवर्नर जनरल ने

2:52:50इंडिया की सोशल प्रॉब्लम्स को टैकल करने

2:52:52की हिम्मत नहीं दिखाई थी बेंटिक पहले ऐसी

2:52:56गवर्नर जनरल थे जो सोशल इविल्स के अगेंस्ट

2:52:59डॉ पास करते हैं जैसा की आप सब जानते ही

2:53:02होंगे की इंडिया में सती प्रथम का प्रचलन

2:53:05था इस प्रथम के अनुसार हसबैंड की डेथ के

2:53:08बाद वाइफ को भी हसबैंड की चिता के साथ ही

2:53:11जल दिया जाता था इस प्रथम के खिलाफ

2:53:13राजाराम मोहन राय जैसे सोशल रिफॉर्मर्स

2:53:16कैंपबेल शुरू करते हैं इसके साथ ही वह

2:53:19विलियम बेंटिक पर सती प्रथम को इलीगल

2:53:22डिक्लेअर करने का प्रेशर भी बनाते हैं

2:53:25विलियम बेंटिक इनके कैंपेन का सपोर्ट करते

2:53:27हुए दिसंबर 1829 में रेगुलेशन नंबर 17 पास

2:53:32करते हैं जिसके अनुसार सती प्रथम को इलीगल

2:53:35डिक्लेअर कर दिया जाता है और साथ ही इसे

2:53:38एक क्रिमिनल ऑफेंस बना दिया जाता है

2:53:41शुरुआत में यह रेगुलेशन सिर्फ बंगाल

2:53:43प्रेसीडेंसी में एप्लीकेबल होता है लेकिन

2:53:461830 में इसे मद्रास और बॉम्बे

2:53:48प्रेसीडेंसी में भी एक्सटेंड कर दिया जाता

2:53:50है दोस्तों सती प्रथम के अलावा विलियम

2:53:54बेंटिक इंफिनिटी साइड और चाइल्ड सैक्रिफिस

2:53:57जैसी सोशल इविल्स को भी सरप्राइज करते हैं

2:54:00बहुत साड़ी कम्युनिटी में गर्ल चाइल्ड की

2:54:03हत्या करने की प्रथम चली ए रही थी वैसे तो

2:54:061795 में बंगाल रेगुलेशन 16 और 1800 पर मी

2:54:11रेगुलेशन थ्री ने इंफिनिटी साइट कोई लीगल

2:54:13डिक्लेअर कर दिया था फिर भी ये इन ह्यूमन

2:54:16प्रैक्टिस कंटिन्यू थी इसीलिए बैंकिंग ने

2:54:19इसको प्रथम को खत्म करने के लिए कठोर कम

2:54:22उठा थे इसके साथ ही बंगाल अगर आयरलैंड पर

2:54:25कुछ स्पेशल ऑकेजंस पर चाइल्ड सेक्रेफिसिस

2:54:28ऑफर करने की प्रथम थी जब बैंकिंग को इसके

2:54:31बड़े में पता चला है तो वो तुरंत इस पर

2:54:33रॉक लगाने का ऑर्डर दे देते हैं दोस्तों

2:54:36विलियम बेंटिक को ठग्स के सिपरेशन का भी

2:54:39श्री दिया जाता है की मोस्टली सेंट्रल

2:54:42इंडिया और बंगाल के रीजन में सक्रिय थे

2:54:44ठग्स ऐसे हेरिटेज हत्यारे और लुटेरे होते

2:54:47थे जो भोले-भाले और डिफेंसलेस ट्रैवल्स को

2:54:51अपना निशाना बनाते थे

2:54:52इनकी काफी डिसेबल्ड ऑर्गेनाइजेशन थी इनमें

2:54:56से अगर कुछ एक्सपट्र्स ट्राएंगल्स थे तो

2:54:58कुछ कुछ डेड बॉडीज के क्विक डिस्पोजल में

2:55:00महारत हासिल थी और कुछ अच्छे स्पाइस और

2:55:03इनफॉर्मेंट थे इनके अपने कोड शब्द और साइन

2:55:06होते थे इनकी ऑर्गेनाइजेशन इतनी एफिशिएंट

2:55:09थी की गवर्नमेंट की नोटिस में इनका एक भी

2:55:12फेलियर नहीं आया था विलियम बेंटिक ठग्स को

2:55:16सरप्राइज करने के लिए 1835 में ठगी और डी

2:55:19क्वालिटी डिपार्मेंट एस्टेब्लिश करते हैं

2:55:21इस डिपार्मेंट का चार्ज वो करनाल विलियम्स

2:55:24लेमन कर लेते हैं इंडियन रुलर्स को भी इस

2:55:27टास्क में कॉर्पोरेट करने के लिए इनवाइट

2:55:29किया जाता है करना करीब 1500 ठग्स को

2:55:34गिरफ्तार करते हैं और इन्हें मृत्यु दंड

2:55:36या उम्र कैद की सजा सुने जाति है इनके

2:55:39एफर्ट्स की वजह से 1837 के बाद से

2:55:42ऑर्गेनाइज्ड स्किल पर होने वाली ठगी देखने

2:55:45को नहीं मिलती दोस्तों विलियम बेंटिक के

2:55:48सोशल रिफॉर्म्स एक तरह से इंफेक्शन पॉइंट

2:55:50थे और इन रिफॉर्म्स की छवि आज तक हमें

2:55:53अपने इंडियन सिस्टम में देखने को मिलती है

2:55:55आई उनके टाइम में इंट्रोड्यूस हुए

2:55:58एजुकेशनल रिफॉर्म्स की बात करते हैं

2:56:01एजुकेशनल रिफॉर्म्स दोस्तों विलियम बेंटिक

2:56:05के टाइम पीरियड में 1835 में मकोली मिनट्स

2:56:10किया गए थे

2:56:14कंपनी का चार्ट 20 साल के लिए रिन्यू किया

2:56:17था तब उसमें प्रोविजन यह भी था की कंपनी

2:56:20को हर साल ₹1 लाख नेटिव्स की एजुकेशन पर

2:56:23खर्च करने होंगे है इसके लिए कमेटी ऑफ

2:56:25पब्लिक इंस्ट्रक्शंस फॉर्म की जाति है और

2:56:28विलियम बेंटिक लॉर्ड मकोली को कमेटी का

2:56:30प्रेसिडेंट अप्वॉइंट करते हैं इस कमेटी को

2:56:33डिसाइड करना था की एजुकेशन के लिए आने

2:56:35वाली गवर्नमेंट ग्रांट को किस तरह खर्च

2:56:38किया जाए कमेटी के मेंबर्स दो ग्रुप में

2:56:41डिवाइड हो चुके थे एक तरफ थे विल्सन और

2:56:44प्रिंसिपल ब्रदर्स जैसे ओरिएंटलिस्ट जो

2:56:47ओरिएंटल लैंग्वेज और इंडियन लिटरेचर की

2:56:49एजुकेशन को प्रमोट करना चाहते थे दूसरी

2:56:52तरफ से चार्ल्स ट्रैवलिंग जैसे

2:56:55जो वेस्टर्न साइंस और लिटरेचर के सपोर्टर

2:57:00थीम्स को और फरवरी 1835 की अपने फेमस मिनट

2:57:05में वह वेस्टर्न एजुकेशन और इंग्लिश

2:57:07मीडियम में एजुकेशन प्रपोज करते हैं

2:57:11लाइब्रेरी की सिंगल सेल्फी इंडिया और अब

2:57:15की पुरी की पुरी नेटिव लिटरेचर के बराबर

2:57:17है

2:57:20और सेवंथ मार्च 1835 को एक रेजोल्यूशन पास

2:57:24कर बाढ़ जाता है जिसके अकॉर्डिंग हायर

2:57:27एजुकेशन में इंग्लिश मीडियम और वेस्टर्न

2:57:29लिटरेचर को प्रमोट करने का डिसीजन लिया

2:57:31जाता है दोस्तों मंगोली मिनट इंडिया में

2:57:34मॉडर्न एजुकेशन की फाउंडेशन

2:57:39के जुडिशल रिफॉर्म्स की चर्चा करते हैं

2:57:42जुडिशल रिफॉर्म्स दोस्तों विलियम बेंटिक

2:57:46लॉर्ड कार्नवालिस की जुडिशल सिस्टम में

2:57:48कुछ बदलाव करते हैं जैसे की वह कौन वालरस

2:57:51द्वारा सेटअप प्रोविंशियल कोर्ट से अपील

2:57:54और सर्किट कोट्स को अबॉलिश कर देते हैं

2:57:56विलियम बेंटिक कोर्स की ड्यूटी मजिस्ट्रेट

2:58:00और कलेक्टर्स को ट्रांसफर कर देते हैं और

2:58:02इनके सुपरविजन के लिए कमिश्नर ऑफ रिवेन्यू

2:58:05और सर्किट अप्वॉइंट करते हैं इसके अलावा

2:58:10अदालत और सदर दीवानी अदालत एस्टेब्लिश

2:58:13करते हैं जिसकी वजह से अप और दिल्ली के

2:58:16लोगों को अपील के लिए अब कोलकाता जान की

2:58:18जरूर नहीं रहती दोस्तों अभी तक

2:58:24में पर्शियन को इंग्लिश से रिप्लेस कर

2:58:27देते हैं और इसी के साथ ही लोअर कोट्स में

2:58:29पर्शियन के साथ साथ वर्नाकुलर लैंग्वेज

2:58:32में कैसे फाइल करने का ऑप्शन भी दे देते

2:58:34हैं इस तरह से विलियम बेंटिक ने जुडिशल

2:58:37सिस्टम को इंडियन के लिए एक्सेसिबल बनाने

2:58:40की कोशिश की थी दोस्तों विलियम बेंटिक ने

2:58:43कुछ फाइनेंशियल रिफॉर्म्स भी इंट्रोड्यूस

2:58:46किया थे आई अब उनके बड़े में जानते हैं

2:58:49फाइनेंशियल रिफॉर्म्स कंपनी की फाइनेंशियल

2:58:52कंडीशन को बटर करने के लिए विलियम बेंटिक

2:58:55बहुत सारे स्टेप्स लेते हैं जैसे की वह

2:58:58मिलिट्री ऑफिसर को मिलने वाले एक्स्ट्रा

2:59:00अलाउंस या भट्टे को कम कर देते हैं नए

2:59:03रूल्स के अकॉर्डिंग अगर ट्रूप्स कोलकाता

2:59:05के 400 माइल्स के विदीन स्टेशन रहेंगे तो

2:59:08उन्हें सिर्फ आधा भट्ट ही दिया जाएगा इस

2:59:11स्टेप से मेंटेन एक साल में गरीब 20000

2:59:15पाउंड बच्चा लेते हैं इसी तरह सिविल

2:59:17सर्वेंट के अलावा

2:59:21भी पॉसिबल था वहां हाय स्पीड यूरोपियंस की

2:59:25जगह इंडियन को एम्पलाई करते हैं

2:59:28बैंकिंग अफीम ट्रेड को भी रेगुलराइज और

2:59:31लाइसेंस करते हैं और अफीम के एक्सपोर्ट की

2:59:34परमिशन सिर्फ बॉम्बे पोर्ट को देते हैं

2:59:36जिससे कंपनी को ड्यूटीज के थ्रू प्रॉफिट

2:59:39में शेर मिल जाता है विलियम बेंटिक के इन

2:59:42सभी स्टेप्स की वजह से पहले हर साल होने

2:59:45वाला 1 करोड़ का डिफिसिट 1835 तक दो करोड़

2:59:49के सरप्लस में बादल जाता है दोस्तों ये तो

2:59:52बात हो गई पेंटिंग के रिफॉर्म्स की अब

2:59:55उनके टाइम पीरियड के कुछ और इंपॉर्टेंट

2:59:57इवेंट्स को भी डिस्कस कर लेते हैं अगर

3:00:00इंपॉर्टेंट इवेंट्स दोस्तों विलियम बेंटिक

3:00:04के टाइम पीरियड में ही 1833 का चार्ट एक्ट

3:00:07पास हुआ था इस एक्ट के इंपॉर्टेंट

3:00:09प्रोविजंस कुछ इस तरह

3:00:15जनरल ऑफ इंडिया बना दिया जाता है इस तरह

3:00:19विलियम बेंटिक फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ

3:00:21इंडिया बनते हैं

3:00:22एडमिनिस्ट्रेशन को यूनिफाइड कर दिया जाता

3:00:25है मतलब की बॉम्बे और मद्रास के गवर्नर की

3:00:28लेजिसलेटिव पावर्स खत्म कर दी जाति हैं और

3:00:31पूरे ब्रिटिश इंडिया की लेजिसलेटिव

3:00:33वाल्विस गवर्नर जनरल को दे दी जाति है

3:00:36कंपनी के सिविल और मिलिट्री अफेयर्स को

3:00:39कंट्रोल करने के लिए गवर्नर जनरल की

3:00:41काउंसिल फॉर्म की जाति है जिसमें 4

3:00:43मेंबर्स रखें जाते हैं पहले बार गवर्नर

3:00:46जनरल की गवर्नमेंट को गवर्नमेंट ऑफ इंडिया

3:00:48कहा जाता है और काउंसिल को इंडिया काउंसिल

3:00:51इस एक्ट के थ्रू कंपनी की टी और चाइनीस

3:00:55ट्रेड पर मोनोपोली को भी खत्म कर दिया

3:00:57जाता है

3:01:00यूरोपियंस को इंडिया में प्रॉपर्टी परचेज

3:01:03करने की परमिशन भी दे देता है

3:01:07एडमिनिस्ट्रेशन को सेंट्रलाइज्ड करने का

3:01:10कम किया और गवर्नर जनरल की पोजीशन को और

3:01:13भी ज्यादा स्ट्रांग बना दिया

3:01:15दोस्तों अब बात करते हैं

3:01:24विलियम बेंटिक वैसे तो इंडियन स्टेटस के

3:01:27साथ नॉन इंटरफ्रेंस की पॉलिसी फॉलो करते

3:01:29हैं जैसे की जयपुर में ब्रिटिश रेजिडेंट

3:01:32पर अटैक होने के बाद भी वो कोई एक्शन नहीं

3:01:34लेते इसी तरह जोधपुर बूंदी कोटा और भोपाल

3:01:39में भी इंटरफ्रेंस के स्ट्रांग रीजंस होने

3:01:41के बावजूद

3:01:42नॉन-इंशन की पॉलिसी को ही फॉलो करते हैं

3:01:46है लेकिन कुछ केसेस में ऐसा नहीं होता और

3:01:491831 में बैंकिंग मैसूर को मिस गवर्नेंस

3:01:53की प्लाई पर एनएक्स कर लेते हैं इसी तरह

3:01:551834 में वो कुर्ग और कचरा को भी एनएक्स

3:01:59कर लेते हैं दोस्तों विलियम बेंटिक को

3:02:02सेंट्रल एशिया में चल रहे रोशनी डांसर का

3:02:05भी आइडिया था रसिया के किसी भी पॉसिबल

3:02:08इनवेजन को प्रीवेंट करने के लिए वो पंजाब

3:02:10के राजा रंजीत सिंह के साथ 1831 में

3:02:13ट्रीटी का पर्पेटुअल फ्रेंडशिप साइन करते

3:02:16हैं इसके साथ ही सिंह के अमीरस के साथ भी

3:02:19एक कमर्शियल कम पॉलीटिकल ट्रीटी कनक्लूड

3:02:22करते हैं

3:02:23कंक्लुजन दोस्तों विलियम बेंटिक के

3:02:27एडमिनिस्ट्रेशन के लिए साथ-साथ लगातार चली

3:02:30ए रही अवार्ड और एनेक्सेशंस की पॉलिसी के

3:02:33बीच एक शांतिपूर्ण पीरियड की तरह लगता हैं

3:02:40जिन्होंने अपने रिफॉर्म्स के थ्रू इंडिया

3:02:43में एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल लाइफ को

3:02:45लिबरलाइज करने की कोशिश की

3:02:501848 तो 1856

3:02:54दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं गवर्नर

3:02:56जनरल लॉर्ड डलहौजी की जिन्हें मकर ऑफ

3:03:00मॉडर्न इंडिया भी कहा जाता है वैसे तो

3:03:03लॉर्ड डलहौजी सबसे ज्यादा फेमस है अपनी

3:03:05डॉक्ट्रिन अब लैब की पॉलिसी के लिए लेकिन

3:03:07इन्होंने बहुत सारे रिफॉर्म्स भी

3:03:09इंट्रोड्यूस किया थे आज हम लाड डलहौजी के

3:03:12सभी रिफॉर्म्स और पॉलिसी को डिटेल में कर

3:03:14करने वाले हैं तो आई शुरू करते हैं

3:03:20इंट्रोडक्शन

3:03:271848 से लेकर 1856 तक इंडिया के गवर्नर

3:03:31जनरल रहते हैं यह इंडिया की यंगेस्ट

3:03:34गवर्नर जनरल भी रहे थे इनकी टाइम पीरियड

3:03:36में एक तरफ तो इंडिया का काफी तेजी से

3:03:39मॉडर्नाइजेशन हुआ था और दूसरी तरफ

3:03:41इन्होंने अपनी पॉलिसी से देश में एक आज सी

3:03:46लगा दी थी आई सबसे पहले

3:03:51बात करते हैं

3:03:58दोस्तों लॉर्ड डलहौजी इंडिया में

3:04:00इंपिरियलिस्टिक एंबिशियस के साथ आए थे वह

3:04:03इंडिया में ब्रिटिश अंपायर को एक्सपीएनडी

3:04:05और कंसोलिडेटेड करना चाहते थे और अपने इस

3:04:08एक को पूरा करने के लिए डलहौजी अलग-अलग

3:04:10मैथर्ड अडॉप्ट करते हैं सबसे पहले मेथड तो

3:04:14ऑब्वीजली वार ही था इन्होंने 184849 में

3:04:17सेकंड एंग्लो सिख वार के थ्रू पंजाब को

3:04:20एनएक्स कर लिया था जिसकी पुरी कहानी हम

3:04:23आपको पहले ही बता चुकी हैं इसके साथ ही

3:04:25डलहौजी के टाइम पीरियड में ही 1852 में

3:04:28सेकंड एंग्लो बर्मा वार भी हुआ था जिसके

3:04:31थ्रू लोअर बर्मा यानी की पेगुआर कर लिया

3:04:34जाता है

3:04:361850 में लाड डलहौजी सिक्किम के राजा पर

3:04:39दो इंग्लिश डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार

3:04:42करने और उन्हें इंप्रिजन करने का आप लगाते

3:04:44हैं और इसी आप में सिक्किम के कुछ

3:04:47डिस्ट्रिक्ट को एनएक्स कर लेते हैं जिसमें

3:04:49दार्जिलिंग भी शामिल था और 1853 में जब

3:04:53हैदराबाद के निजाम ईस्ट इंडिया कंपनी को

3:04:55उनकी ऑक्जिलिअरी फोर्स के लिए पेमेंट करने

3:04:58में फेल हो जाते हैं तब लोट डलहौजी निजाम

3:05:01को फोर्स करते हैं की हैदराबाद कंटिजेंट

3:05:03की मेंटेनेंस के लिए वो विरार और उसके

3:05:06आसपास के कुछ डिस्ट्रिक्ट जिनका रिवेन्यू

3:05:08लगभग 50 लाख का था कंपनी के हवाले कर दें

3:05:11इस तरह बरार जो आज के महाराष्ट्र के

3:05:14विदर्भ रीजन में लोकेटेड है कंपनी की

3:05:17टेरिटरी बन जाता है दोस्तों एक तरह से कहा

3:05:20जा सकता है

3:05:23अलग-अलग मैथर्ड के द्वारा कंपनी की

3:05:26टेरिटरीज को एक्सपेंड करने में लगे हुए थे

3:05:28और इसमें सबसे ज्यादा सफल मेथड साबित होती

3:05:31है उनकी डॉक्टरी नव लैब की पॉलिसी तो आई

3:05:35डॉक्टर

3:05:43दोस्तों अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो

3:05:46डॉक्ट्रिन ऑफ लैब के अनुसार अडॉप्टेड सन

3:05:48यानी की गॉड लिया हुआ बेटा अपने फादर की

3:05:52प्राइवेट प्रॉपर्टी का तो और हो सकता है

3:05:53लेकिन स्टेट कर रहे हैं यह डिसीजन

3:05:56पैरामाउंट पावर मतलब की ब्रिटिश कंपनी का

3:05:59होगा की स्टेट को अडॉप्टेड सन को दिया जाए

3:06:02या फिर उसे एनएक्स कर लिया जाए अक्सर

3:06:05लॉर्ड डलहौजी को ही डॉक्ट्रिन अब लैब की

3:06:08इस पॉलिसी का इन्वेंटर समझ लिया जाता है

3:06:09लेकिन यह सही नहीं है दरअसल सच तो ये है

3:06:13की 1834 में ही कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने

3:06:16ये साफ कर दिया था की लिनियल सक्सेस के

3:06:20फेलियर की कैसे में अडॉप्ट करने की परमिशन

3:06:22देना कंपनी पर निर्भर करेगा और यह परमिशन

3:06:25एक्सेप्शन की तरह होगी ना की रूल की तरह

3:06:28मतलब ऐसी परमिशन सिर्फ स्पेशल केसेस में

3:06:32ही दी जाएगी और इसके तहत 1839 में मांडवी

3:06:36स्टेट और 1840 में कोलाबा और जालौन स्टेट

3:06:40को एनएक्स भी किया गया था लेकिन बहुत से

3:06:43इसमें अडॉप्टेड सन को रूल करने की परमिशन

3:06:45भी गई थी जैसे की 1827 में दौलत राव

3:06:48सिंधिया की डेथ के बाद उनके अडॉप्टेड सन

3:06:51जंगकोजी उनके स्टेट को और करते हैं और

3:06:551843 में जान को जी की डेथ के बाद एक बार

3:06:58फिर से गॉड लिए हुए बेटे जय जी राव को ही

3:07:01गति मिलती है जॉन सलवान के अनुसार 1826 से

3:07:061848 के बीच कम से कम 15 नेटिव रुलर्स को

3:07:09अपने एस अडॉप्ट करने की परमिशन दी गई थी

3:07:12इसका मतलब यह हुआ की लाड डलहौजी से पहले

3:07:15तक इस पॉलिसी को अंग्रेजन द्वारा

3:07:17यूनिफॉर्म तरीके से अप्लाई नहीं किया जा

3:07:19रहा था लेकिन जब डलहौजी इंडिया आते हैं तो

3:07:22वो कुछ प्रिंसिपल्स अडॉप्ट करते हैं

3:07:25उन्होंने इंडियन स्टेटस को तीन कैटिगरीज

3:07:27में डिवाइड कर दिया पहले कैटिगरी में वह

3:07:30स्टेटस आते थे जिन्हें डायरेक्टली या

3:07:32इनडायरेक्ट ब्रिटिश ने क्रिएट किया था

3:07:34दूसरी कैटिगरी में थे ब्रिटिश के

3:07:37डिपेंडेंट स्टेटस और तीसरी कैटिगरी थी

3:07:40इंडिपेंडेंस स्टेटस की

3:07:43डलहौजी डिसाइड करते हैं की पहले कैटिगरी

3:07:46के स्टेटस को किसी भी कंडीशन में अपने आगे

3:07:49अडॉप्ट करना अलाउड नहीं होगा और दूसरी

3:07:52कैटिगरी के स्टेज को एडॉप्शन के कैसे में

3:07:54ब्रिटिश से परमिशन लेनी होगी यह परमिशन दी

3:07:57भी जा शक्ति है और नहीं

3:08:00थर्ड कैटिगरी के स्टेटस पुरी तरह फ्री थे

3:08:03अपने आगे अडॉप्ट करने के लिए

3:08:06डॉक्ट्रिन का लैप्स की पॉलिसी को अप्लाई

3:08:08करके लाड डलहौजी ने 1848 में सतारा को

3:08:121849 में जैतपुर और संबलपुर को 1850 में

3:08:16भगत को

3:08:171852 में उदयपुर को 1853 में झांसी को और

3:08:211854 में नागपुर को एनएक्स किया था

3:08:25दोस्तों लॉर्ड डलहौजी बेसिकली एक

3:08:28आइनेक्सेशनल थे

3:08:30डॉक्टर की पॉलिसी को अप्लाई करके वो

3:08:33इंडिया में अपने एंबीशन पूरा कर रहे थे और

3:08:35जहां डॉक्टर इन लैब सप्लाई नहीं हो पाती

3:08:37वहां किसी और बहाने से उन्होंने

3:08:42अवध स्टेट का एनेक्सेशन आई उसके बड़े में

3:08:45भी जानते हैं

3:08:49दोस्तों आपको याद होगा की 1765 में बैटल

3:08:53ऑफ बक्सर के बाद अवध के नवाब के साथ

3:08:56ब्रिटिशर्स ने ट्रीटी ऑफ इलाहाबाद साइन की

3:08:58थी और उसके बाद 1801 में बैलंसली ने अवध

3:09:02के साथ सब्सिडियरी एलाइंस की त्रुटि साइन

3:09:04कर ली थी जिसके बाद से ही अवध के नवाब

3:09:07एक्सटर्नल डिफरेंस और लायन ऑर्डर की

3:09:09मेंटेनेंस के लिए पुरी तरह से कंपनी पर

3:09:12डिपेंड हो गए थे

3:09:131856 में लॉर्ड डलहौजी अवध को मेल

3:09:17एडमिनिस्ट्रेशन के बेसिस पर एनएक्स कर

3:09:19लेते हैं मतलब यह हुआ की अवध के नवाब पर

3:09:22यह आप लगाया जाता है की वो अवध को सही से

3:09:26रूल नहीं कर का रहे हैं वहां के

3:09:28एडमिनिस्ट्रेशन की स्थिति बहुत खराब हो

3:09:30चुकी है और प्रजा परेशान है इसलिए अवध के

3:09:34लोगों को अच्छा एडमिनिस्ट्रेशन देने के

3:09:36लिए जरूरी है की वहां नवाब का शासन खत्म

3:09:39करके ब्रिटिश रूल एस्टेब्लिश किया जाए और

3:09:42इस तरह अवध भी ब्रिटिश टेरिटरी का हिस्सा

3:09:45बन जाता है

3:09:46दोस्तों ध्यान देने वाली बात यह है की अवध

3:09:49में शासन की खराब स्थिति के लिए अल में

3:09:51ब्रिटिशर्स ही रिस्पांसिबल थे सब्सिडियरी

3:09:54फोर्सेस के मेंटेनेंस के लिए अवध का काफी

3:09:56हिस्सा उन्होंने पहले ही एनएक्स कर लिया

3:09:58था अवध के नवाब तो पुरी तरह उनके ऊपर ही

3:10:02डिपेंड थे इसलिए वाले एडमिनिस्ट्रेशन को

3:10:04अनेक स्टेशन का वैलिड रीजन नहीं कहा जा

3:10:06सकता वो तो बस लोट डलहौजी के लिए बहन था

3:10:09अवध को एनएक्स करने का अल में तो इंग्लैंड

3:10:12में चल रही इंडस्ट्रियलिज्म के लिए कॉटन

3:10:15की बहुत ज्यादा डिमांड थी और अवध कॉटन

3:10:18प्रोडक्शन का एक फर्टाइल ग्राउंड था लॉर्ड

3:10:21डलहौजी की अनेक सेशन पॉलिसी की वजह से

3:10:23इंडिया की नेटिव रुलर्स और आम जनता में

3:10:26ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट एक आक्रोश की भावना

3:10:29पैदा हो जाति है जो आगे चलकर 1857 की

3:10:33क्रांति का एक करण भी बंटी है

3:10:38सबसे पहले जानते हैं उनके एडमिनिस्ट्रेटिव

3:10:41रिफॉर्म्स के बड़े में

3:10:45एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स

3:10:48दोस्तों लॉर्ड डलहौजी के इंडिया आने तक

3:10:51गवर्नर जनरल्स एन सिर्फ इंडिया में एंटीरे

3:10:54ब्रिटिश टेरिटरी का सुपरविजन कर रहे थे

3:10:56बल्कि बंगाल प्रोविंस को गवन करने की

3:10:59रिस्पांसिबिलिटी भी उन्हें के हाथों थी इस

3:11:02वजह से उनके ऊपर कम का बटन बहुत ज्यादा

3:11:05राहत था इसलिए लॉर्ड डलहौजी ने बंगाल के

3:11:08एडमिनिस्ट्रेशन को देखने के लिए अलग से एक

3:11:10लेफ्टिनेंट गवर्नर का अपॉइंटमेंट कर दिया

3:11:12इससे गवर्नर जनरल अब सिर्फ जो इंडिया

3:11:16फैयर्स पर अपना ध्यान दे सकता था इसी तरह

3:11:18से न्यूली एक्वायर ट्रेडर्स का चार्ज भी

3:11:21कमिश्नर्स को दे दिया गया था जैसे की

3:11:23पंजाब के कैसे में इसके अलावा लॉर्ड

3:11:25डलहौजी से पहले तक पब्लिक वर्क की

3:11:28कंस्ट्रक्शन का कम मिलिट्री बोर्ड ही देखा

3:11:30था यानी ब्रिज बनाना हो या सड़क बनानी हो

3:11:33मिलिट्री से ही सर कम लिया जाता था आप समझ

3:11:37सकते हैं की इससे सोल्जर की क्या हालात

3:11:39होती होगी इसलिए डलहौजी ने पब्लिक

3:11:42कंस्ट्रक्शन के लिए एक नया डिपार्मेंट

3:11:44शुरू किया जिसे पब्लिक वर्क डिपार्मेंट

3:11:46यानी की पीडी कहा जाता है यह डिपार्मेंट

3:11:55से पेशावर तक ग्रैंड ट्रक रोड कर

3:11:58रिकंस्ट्रक्शन किया गया

3:12:04बहुत से बृजेश का कंस्ट्रक्शन भी हुआ था

3:12:07यह तो बात हुई के एडमिनिस्ट्रेटिव

3:12:11रिफॉर्म्स की

3:12:13मिलिट्री रिफॉर्म्स के बड़े में

3:12:21दोस्तों डलहौजी के अनेक सेशंस ने ब्रिटिश

3:12:24इंडिया को ईस्ट में बंगाल से लेकर वेस्ट

3:12:27में पंजाब और सिंधतक स्टैंड कर दिया था अब

3:12:30इतने एक्सटेंशन एरिया के स्ट्रीट्स

3:12:32कंट्रोल के लिए ट्रूप्स के बटर

3:12:34डिस्ट्रीब्यूशन की जरूर भी महसूस होती है

3:12:36इसलिए डलहौजी ने बंगाल आर्टिलरी के

3:12:39हैडक्वाटर्स को कोलकाता से मेरठ शिफ्ट कर

3:12:42दिया था इसके साथ ही आर्मी के परमानेंट

3:12:45हैडक्वाटर्स को भी शिमला शिफ्ट करने का कम

3:12:47शुरू हो जाता है यह प्रोसेस फाइनली 1865

3:12:50में कंप्लीट हुआ था इसके साथ ही डलहौजी को

3:12:53यह भी महसूस होता है की आर्मी में इंग्लिश

3:12:56सोल्जर की तुलना में इंडियन सोल्जर का

3:12:58नंबर बहुत ज्यादा बाढ़ गया है जो की

3:13:01अंपायर की सुरक्षा के लिए कभी भी खतरा बन

3:13:03सकता है इसलिए वह इंग्लिश सोल्जर के नंबर

3:13:06को बढ़ाने की कोशिश भी करते हैं इंग्लिश

3:13:09सोल्जर की तीन नई रेजीमेंट रेस की जाति

3:13:12हैं पंजाब में ब्रिटिश ऑफिसर के अंदर में

3:13:15एक सिख आर्मी को भी रेस करते हैं इसके

3:13:18अलावा डलहौजी इंडियन आर्मी में गोरखास की

3:13:20एक नई रेजीमेंट भी फॉर्म करते हैं और

3:13:23इसमें कोई संदेह नहीं की लाड डलहौजी के इन

3:13:26मेजर में 1857 की क्रांति को सरप्राइज

3:13:29करने में ब्रिटिशर्स की काफी मदद की थी

3:13:31लेकिन वो कैसे इसको हम अपनी नेक्स्ट

3:13:34वीडियो में समझेंगे फिलहाल चलते हैं

3:13:36डलहौजी के एजुकेशनल रिफॉर्म्स की तरफ

3:13:42एजुकेशनल रिफॉर्म्स

3:13:45दोस्तों लो डलहौजी के टाइम में एजुकेशन की

3:13:48फील्ड में कई सारे इंपॉर्टेंट रिफॉर्म्स

3:13:50इंट्रोड्यूस किया गए थे

3:13:521853 में डलहौजी में प्राइमरी एजुकेशन से

3:13:55रिलेटेड रेगुलेशंस पास की थी यह रेगुलेशंस

3:13:58थॉमसूनियन सिस्टम और न्यूक्लियर एजुकेशन

3:14:00पर बेस्ड थी इसमें कहा गया था की प्राइमरी

3:14:03एजुकेशन वर्नाकुलर यानी की लोकल लैंग्वेज

3:14:06में दी जाए

3:14:08डलहौजी के समय में ही 1854 में वुड

3:14:11डिस्पैच भी आया था जिसे इंडिया में

3:14:13इंग्लिश एजुकेशन का मैग्नाकार्टा भी कहा

3:14:16जाता है इसमें कहा गया था की हर जिला में

3:14:20स्कूल और कॉलेज खोल जैन इसके साथ ही सभी

3:14:23प्रेसीडेंसी टाउन में यानी की बॉम्बे

3:14:25मद्रास और कोलकाता में एक यूनिवर्सिटी को

3:14:28एस्टेब्लिश किया जाए इसमें यह भी सजेस्ट

3:14:31किया गया था की गवर्नमेंट प्राइवेट

3:14:33ऑर्गेनाइजेशंस और इंडिविजुअल्स को स्कूल

3:14:36और कॉलेजेस शुरू करने के लिए सब्सिडी देकर

3:14:39है इसके साथ ही हर जिला में एक इंस्पेक्टर

3:14:42ऑफ स्कूल होना चाहिए और हर एक प्रॉब्लम्स

3:14:44में एक डायरेक्टर और एजुकेशन

3:14:46डलहौजी ने वुड डिस्पैच के इन सजेशन को

3:14:50जहां तक संभव था इंप्लीमेंट करने की कोशिश

3:14:52की

3:14:531857 में कोलकाता मद्रास और बॉम्बे में

3:14:56यूनिवर्सिटी एस्टेब्लिश हुई थी इसके साथ

3:14:59ही 1846 में रुड़की में इंजीनियरिंग कॉलेज

3:15:02और कोलकाता में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूशन

3:15:05भी एस्टेब्लिश की गई थी दोस्तों बात करते

3:15:08हैं डलहौजी के उन रिफॉर्म्स के बड़े में

3:15:10जिसकी वजह से उन्हें मकर ऑफ मॉडर्न इंडिया

3:15:13भी कहा जाता है यानी की रेलवे टेलीग्राफ

3:15:17और पोस्ट सर्विसेज के रिफॉर्म्स के बड़े

3:15:19में

3:15:21डेवलपमेंट ऑफ रेलवे टेलीग्राफ और पोस्ट

3:15:24सर्विसेज

3:15:26दोस्तों डलहौजी के टाइम पीरियड में इंडिया

3:15:29में ब्रिटिश डोमिनियंस को आयरन लाइन से

3:15:31जोड़ दिया गया मतलब की रेलवे लाइंस का

3:15:34डेवलपमेंट शुरू हो जाता है

3:15:361853 के अपने फेमस रेलवे मिनट में लोड

3:15:40डलहौजी ने स्कीम की ब्रेड आउटलाइंस को

3:15:42सामने रखा था जो इंडिया में फ्यूचर रेलवे

3:15:45एक्सटेंशन का बेसिस फॉर्म करती हैं

3:15:471853 में ही बॉम्बे से ठाणे तक फर्स्ट

3:15:51रेलवे लाइन को तैयार किया गया इसके अगले

3:15:53साल कोलकाता से रानीगंज कोलफील्ड तक रेलवे

3:15:57लाइन शुरू की गई ध्यान रखना वाली बात यह

3:16:00है दोस्तों की इंडिया में रेलवे का

3:16:02डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के द्वारा किया

3:16:04जा रहा था और वो भी ब्रिटिश कंपनी रेलवे

3:16:08में इन्वेस्ट करने पर उन्हें ब्रिटिश

3:16:10गवर्नमेंट 5% का गारंटीड इंटरेस्ट भी

3:16:13प्रॉमिस करती है रेलवे का डेवलपमेंट लॉर्ड

3:16:16डलहौजी इंडिया को मॉडर्नाइज करने के लिए

3:16:18नहीं करते बल्कि उनका मकसद तो ब्रिटिश

3:16:21ट्रेड को प्रमोट करना और कॉलोनियल

3:16:23इंटरेस्ट को आगे ले जाना ही था लेकिन फिर

3:16:26रेलवे के डेवलपमेंट ने इंडिया को यूनिफाई

3:16:29करने का कम किया और इनडायरेक्ट नेशनलिज्म

3:16:32को प्रमोट किया

3:16:341852 में इंडिया में इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ

3:16:37सिस्टम भी इंट्रोड्यूस किया गया ये एक

3:16:39बहुत ही इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट था क्योंकि

3:16:41टेलीग्राफ की मदद से देश के एक कोनी से

3:16:44दूसरे कोनी तक तुरंत मैसेज पहुंच सकते थे

3:16:47लगभग 4000 माइल्स की इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ

3:16:51लाइंस कंस्ट्रक्ट की जाति हैं जो कोलकाता

3:16:53को पेशावर बॉम्बे मद्रास और देश के अन्य

3:16:56हसन से जोड़ देती हैं इसके अलावा 1854 में

3:17:00एक नया पोस्ट ऑफिस एक्ट पास हुआ और पहले

3:17:03बार पोस्टेड स्टंप्स इशू किया गए लेटर को

3:17:07चाहे कितनी भी डिस्टेंस के लिए भेजना हो

3:17:09हर लेटर के लिए आधा आना यानी की दो पैसे

3:17:12का यूनिफॉर्म रेट फिक्स कर दिया गया

3:17:19था अब एक सोर्स ऑफ रिवेन्यू बन जाता है

3:17:23दोस्तों

3:17:27इंडिया में ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन को

3:17:30मॉडर्नाइज करने का कम किया

3:17:33कंक्लुजन

3:17:36डलहौजी ने इंडिया में बहुत से रिफॉर्म्स

3:17:39इंट्रोड्यूस किया थे लेकिन उनका प्राइमरी

3:17:41मोटिव इंडिया में ब्रिटिश अंपायर को

3:17:44सेफगार्ड और कंसोलिडेटेड करना ही था

3:17:46दोस्तों हमें नहीं भूलना चाहिए की डलहौजी

3:17:50एक इंपिरियलिस्ट थे उन्हें इंडिया के

3:17:53लोगों की विशेष या सेंटीमेंट की कोई परवाह

3:17:55नहीं थी इसलिए उन्होंने अनेक सेशंस करते

3:17:58समय किसी भी तरह के मोरल को फॉलो नहीं

3:18:00किया फिर बात चाहे पंजाब के साथ भी ट्रायल

3:18:04की हो या अवध जैसे पुराने इलाए को धोखा

3:18:06देने की डलहौजी ने ब्रिटिश अंपायर को

3:18:09एक्सपेंड करने के लिए सम दम दंड भेद सभी

3:18:13तरह की नेशन का इस्तेमाल किया और जैसा की

3:18:16हम पहले ही बता चुके हैं उनकी पॉलिसी को

3:18:191857 की क्रांति का एक इंपॉर्टेंट करण भी

3:18:23माना जाता है फॉरेन पॉलिसी ऑफ डी ब्रिटिश

3:18:30दोस्तों

3:18:36के साथ भी ब्रिटिश का कांटेक्ट

3:18:48के साथ ब्रिटिश रिलेशनशिप की बात करते हैं

3:18:52[संगीत]

3:18:5619th सेंचुरी के दौरान ब्रिटिशर्स द्वारा

3:18:59बहुत से डिप्लोमेटिक मिशन भूटान भेजें

3:19:01जाते हैं इनको ऑफीशियली तो यही करण बताया

3:19:04जाता है की भूटान क्रॉस बॉर्डर रीड कर रहा

3:19:07है या फिर डिसिडेंस को शेल्टर दे रहा है

3:19:10लेकिन असली वजह तो ब्रिटिश के

3:19:12इंपिरियलिस्ट एंबिशियस थे भूटान इंडो

3:19:16तिब्बती ट्रेड के लिए तो विटल था ही इसके

3:19:18अलावा टी प्लांटेशन के लिए द्वारा रीजन की

3:19:21कमर्शियल वायबिलिटी भी सभी जानते थे सबसे

3:19:24इंपॉर्टेंट पीस मिशन

3:19:26186364 में वायसराय लॉर्ड इलजन द्वारा

3:19:29भेजो जाता है इसी अश्लील ईडन की नेतृत्व

3:19:33में भेजो गया था लेकिन भूतनी इस इनकी ऑफर

3:19:36को रिजेक्ट कर देते हैं

3:19:38की भूटान में उन्हें मिस्त्री किया गया

3:19:41जिसके बाद नवंबर 1864 में ब्रिटिश भूटान

3:19:45के गेस्ट बोर्ड डिक्लेअर कर देते हैं इसे

3:19:48द्वारा और कहा जाता है

3:19:56निरोज स्वॉर्ड्स निव्स जैसे वेपंस के साथ

3:19:59वल्ड ब्रिटिश आर्मी का सामना करती है यह

3:20:03वार सिर्फ 5 महीने तक ही चला है और भूटान

3:20:06अपनी लगभग 20% टेरिटरीज में को देता है

3:20:09इसके साथ ही पिछले बॉर्डर क्लैशस में

3:20:12ऑक्युपी की हुई इंडियन टेरिटरीज को भी

3:20:14सुरेंद्र करता है इसके बाद 11th नवंबर

3:20:171865 को ट्रीटी का सींचुला साइन की जाति

3:20:21है जिसके अनुसार भूटान आसिम द्वारा और

3:20:24बंगाल ड्वॉर्फ्स की टेरिटरीज ब्रिटिश को

3:20:27दे देता है यही सुरेंद्र किया हुए

3:20:29डिस्ट्रिक्ट ब्रिटिशर्स द्वारा टी गार्डन

3:20:32के रूप में डेवलप किया जाते हैं

3:20:34इसके अलावा साउथ पूर्वी भूटान में दीवान

3:20:37गिरी की 83 स्क्वायर किलोमीटर की टेरिटरी

3:20:40भी ब्रिटिश की हो जाति है जिसके बदले में

3:20:43भूटान को 50000 की एनुअल सब्सिडी देने का

3:20:47प्रॉमिस किया जाता है

3:20:531910 में इसे रिवाइज करके नई त्रुटि साइन

3:20:57की जाति है जिसे ट्रीटी का पूनाखा कहते

3:21:00हैं

3:21:01ट्रीटी का पुणे का 8 जनवरी 1910 को साइन

3:21:04की जाति है इसमें ब्रिटेन भूटान को

3:21:07इंडिपेंडेंस की गारंटी देता है साथ ही

3:21:10भूटानी रॉयल गवर्नमेंट को दिए जान वाला

3:21:12स्टाइपेंड भी बड़ा देता है और बदले में

3:21:15भूतनी फॉरेन रिलेशंस ब्रिटिश इंडिया की

3:21:18कंट्रोल में ए जाते हैं

3:21:201947 तक ट्वीटी और पूनाखा ही भूटान के साथ

3:21:24ब्रिटिश इंडिया के रिलेशंस को गाइड करती

3:21:26है

3:21:27भूटान के बाद अब दूसरे माउंटेन इस नेबर्स

3:21:30यानी की नेपाल की बात करते हैं

3:21:37दोस्तों 1768 में गोरखास ने नेपाल पर अपना

3:21:41कंट्रोल एस्टेब्लिश कर लिया था इसके बाद

3:21:44वो अपनी डोमिनियन को माउंटेंस के आगे

3:21:46एक्सपेंड करना शुरू करते हैं नॉर्थ में तो

3:21:49चाइनीस इन्हें एक्सपेंशन करने नहीं देते

3:21:51इसलिए ये बंगाल और अवध की तरफ पुश करते

3:21:54हैं दूसरी तरफ 1801 में ईस्ट इंडिया कंपनी

3:21:58गोरखपुर जिला को ऑक्युपी कर लेती है जिसके

3:22:01बाद उनका फ्रंटियर गोरखास की टेरिटरी के

3:22:04डायरेक्ट टच में ए जाता है और दोनों के

3:22:07बीच कनफ्लिक्ट शुरू होता है जब गोरखास

3:22:10बुटवल और शिवराज डिस्ट्रिक्ट पर कब्जा कर

3:22:12लेते हैं उसे समय तो ब्रिटिशर्स बिना किसी

3:22:15ओपन कनफ्लिक्ट के जिला को रे ऑक्युपी कर

3:22:18लेते हैं

3:22:21गोरखास एक बार फिर से बटवाल की तीन पुलिस

3:22:24स्टेशन पर अटैक कर देते हैं

3:22:30और गोरखास के अगेंस्ट ऑफेंसिव लॉन्च करने

3:22:33का डिसीजन लेते हैं 12000 की गोरख आर्मी

3:22:36के अगेंस्ट

3:22:3734000 सोल्जर की बड़ी आर्मी तैयार करते

3:22:40हैं लेकिन 1814 का यह कैंपेन बुरी तरह फेल

3:22:44हो जाता है इसके बाद भी ब्रिटिश हर नहीं

3:22:47मानते और फिर से कोशिश करते हैं

3:22:501815 में वो कुमाऊं हिल्स में अल्मोड़ा को

3:22:53कैप्चर करने में कामयाब होते हैं और मैं

3:22:561815 में अमर सिंह थापा से मालाओं का वोट

3:23:00भी जीत लिया जाता है मालाओं के फल के बाद

3:23:03गोरखास नेगोशिएशंस करने के लिए तैयार हो

3:23:05जाते हैं लेकिन हेस्टिंग्स की डिमांड्स

3:23:08उनका एटीट्यूड चेंज कर देती है और एक बार

3:23:11फिर से दोनों के बीच होस्टिलिटीज शुरू हो

3:23:14जाति हैं

3:23:18बुरी तरह हर दिया जाता है इसके बाद गोरखास

3:23:22समझ जाते हैं की उनके लिए अब ब्रिटिश को

3:23:24और विशिष्ट करना पॉसिबल नहीं है और इसीलिए

3:23:27मार्च 1816 में वो ट्रीटी का सुगौली को

3:23:31एक्सेप्ट कर लेते हैं

3:23:323d के अकॉर्डिंग गोरखास गढ़वाल और कुमाऊं

3:23:35जिला कंपनी को सुरेंद्र कर देते हैं इसके

3:23:38साथ ही दोनों के बीच तराई बाउंड्री को

3:23:40पिलर्स के थ्रू मार्क कर दिया जाता है

3:23:43गुरखास काठमांडू में ब्रिटिश रेजिडेंट

3:23:46रखना के लिए भी मां जाते हैं और इसके साथ

3:23:48ही सिक्किम से परमानेंटली विड्रॉ करने के

3:23:51लिए तैयार हो जाते हैं

3:23:52ब्रिटिशर्स को हिल स्टेशंस और समर कैपिटल

3:23:55के लिए साइट भी मिल जाति है जैसे की शिमला

3:23:58मसूरी रानीखेत से इसके साथ ही ब्रिटिशर्स

3:24:02गोरखास को अपनी आर्मी में भी शामिल कर

3:24:04लेते हैं जो आगे चलकर इंडिया में कंपनी के

3:24:08डोमिनियन को एक्सपेंड करने में काफी हेल्प

3:24:10करते हैं

3:24:2219th सेंचुरी की शुरुआत में बर्मा एक फ्री

3:24:25कंट्री हुआ करता था और वेस्ट की तरफ अपनी

3:24:28टेरिटरी एक्सपेंड करना चाहता था लेकिन

3:24:31इंडिया में ब्रिटिश का रूल था और वह बर्मा

3:24:33पर अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश करना चाहते थे

3:24:35इसके पीछे बहुत सी करण थे सबसे पहले तो

3:24:39बर्मा के फॉरेस्ट रिसोर्सेस में ब्रिटिश

3:24:41का इंटरेस्ट था उसके अलावा बर्मा ब्रिटिश

3:24:45मैन्युफैक्चरर्स के लिए मार्केट भी

3:24:46प्रोवाइड कर सकता था इसके साथ ही

3:24:49ब्रिटिशर्स बर्मा और बाकी के साउथईस्ट

3:24:51एशिया में फ्रेंच एंबिशियस को नियंत्रित

3:24:54भी करना चाहते थे इसकी वजह से तीन एंग्लो

3:24:57बर्मीज वार होती हैं और 1885 में बर्मा को

3:25:01ब्रिटिश इंडिया में एनएक्स कर लिया जाता

3:25:03है आई 24

3:25:1119th सेंचुरी की शुरुआत में बर्मीज वेस्ट

3:25:14शब्द यानी की इंडिया की तरफ एक्सपेंशन

3:25:16करने की कोशिश करते हैं जिसमें वो अरकान

3:25:19और मणिपुर को ऑक्युपी कर लेते हैं साथ ही

3:25:22आसिम और ब्रह्म पुत्र वाली को भी लगातार

3:25:25थ्रेट इन करते हैं इसकी वजह से ब्रिटिश के

3:25:28साथ इनका लगातार गतिरोध बना राहत है और

3:25:32फिर सितंबर 1823 में बर्मा चित्तागोंग के

3:25:35पास लोकेटेड आयरलैंड पर कब्जा कर लेट है

3:25:38इस आयरलैंड को ईस्ट इंडिया कंपनी अपनी

3:25:41टेरिटरी समझती थी इसके बाद से ही दोनों के

3:25:44बीच बॉटल्स का सिलसिला शुरू हो जाता है

3:25:46शुरुआत में यह बॉटल्स अरकान और मणिपुर के

3:25:49रीजंस में होते हैं जहां बर्मा ब्रिटिश पर

3:25:53भारी पड़ती हैं क्योंकि उन्हें यहां के

3:25:55जंगल में फाइट करने का काफी एक्सपीरियंस

3:25:57था इसलिए ब्रिटिश फाइट को बर्मीज मैनलैंड

3:26:01पर ले जाते हैं 11th में 1824 को अचानक से

3:26:05ब्रिटिश लेवल फोर्स यंग ऑन यानी की रंगून

3:26:08हार्बर में इंटर करती है और बर्मीज को

3:26:11सरप्राइज ले लेती है इसके बाद लगभग 2 साल

3:26:13तक दोनों के बीच इंटेंस बॉटल्स होते हैं

3:26:16फाइनली दिसंबर 1825 में बर्मीज ब्रिटिश के

3:26:20साथ कस करने के लिए तैयार हो जाते हैं

3:26:23नेगोशिएशन शुरू होती हैं और फरवरी 1826

3:26:26में ट्रीटी का यंडाबों के जरिए दोनों के

3:26:29बीच शांति स्थापित होती है

3:26:31इस विधि के अनुसार बर्मा की गवर्नमेंट एक

3:26:35करोड़ रुपए वार कंपटीशन के रूप में देने

3:26:37के लिए तैयार होती है साथ ही अपने कोस्टल

3:26:40प्रोविंस अरकान और टेनेसम ब्रिटिशर्स को

3:26:43दे देती हैं इसके अलावा असम कछार और

3:26:47जयंतिया पर क्लेम करना भी छोड़ देती हैं

3:26:49और मणिपुर को एक इंडिपेंडेंस स्टेट की तरह

3:26:52रिकॉग्नाइज्ड कर लेती हैं

3:27:00और कैपिटल आवामी ब्रिटिश रेजिडेंट को

3:27:03एक्सेप्ट करती है साथ ही कोलकाता में

3:27:05बर्मीज ऑन बाय भी पोस्ट किया जाता है इस

3:27:09वार में ब्रिटिश इंडिया के फाइनेंस को

3:27:11पुरी तरह बर्बाद कर दिया था लगभग 13

3:27:14मिलियन पाउंड स्टर्लिंग इस वार पर खर्च

3:27:17हुए थे और करीब 15000 सोल्जर की इस पूरे

3:27:20कैंपेन के दौरान डेथ हो गई थी जिसमें

3:27:23मेजॉरिटी इंडियन ट्रूप्स की थी इस तरह

3:27:26ब्रिटिश की इंपिरियलिस्ट एम्स को पूरा

3:27:28करने के लिए इंडियन रिवेन्यू और ह्यूमन

3:27:31रिसोर्सेस को एक्सप्लोइट किया गया था

3:27:34इसके बाद 1852 में एक और एंग्लो बर्मा वार

3:27:38होती है सेकंड बर्मा वार 1852 बर्मा के

3:27:43साथ ब्रिटिश का सेकंड वार कमर्शियल नीड और

3:27:46लॉर्ड डलहौजी की इंपिरियलिस्ट पॉलिसी की

3:27:48वजह से होता है ब्रिटिश मरचेंट्स अपार

3:27:51बर्मा की टिंबर रिसोर्सेस चाहते थे साथ ही

3:27:54बर्मीज मार्केट में और ज्यादा पेनिट्रेट

3:27:56करना चाहते थे

3:27:581852 में लॉर्ड डलहौजी ट्रीटी का यंडाबों

3:28:01से रिलेटेड कुछ माइनर इश्यूज को रिजॉल्व

3:28:03करने के बहाने कोमोडोर जॉर्ज लैंबर्ट को

3:28:06बर्मा भेजते हैं

3:28:10लेकिन फिर भी लैंबर्ट रंगून के पोर्ट को

3:28:13ब्लॉक कर देते हैं

3:28:18इस तरह

3:28:24की शुरुआत हो जाति है

3:28:35दिसंबर 1852 में किंग को इन्फॉर्म किया

3:28:38जाता है की अब से बेगू कंपनी डोमिनियन का

3:28:41पाठ होगा जो की बर्मा का आखिरी कोस्टल

3:28:44प्रोविंस था

3:28:4520th जनवरी 1853 को फॉर्मल प्रोक्लेमेशन

3:28:49इशू कर दी

3:28:54और हो जाता है इसके बाद 1885 में एक बार

3:28:58फिर से बर्मा के साथ कनफ्लिक्ट शुरू होता

3:29:01है

3:29:03थर्ड बर्मा वार 1885

3:29:0718 के दौरान बर्मा और फ्रांस के बीच बढ़नी

3:29:11नजदीकियां ब्रिटिशर्स के लिए कंसर्न बन

3:29:13जाति हैं

3:29:141885 में फ्रेंच काउंसिल मास बर्मीज

3:29:18गवर्नमेंट के साथ में घोषित करने के लिए

3:29:19मंडली आते हैं और बर्मा में एक फ्रेंच

3:29:23बैंक और मंडली से ब्रिटिश बर्मा की

3:29:25नॉर्दर्न बॉर्डर तक रेल लिंक के

3:29:27कंस्ट्रक्शन की बात करते हैं

3:29:29ब्रिटिशर्स यहां अपनी डिप्लोमेटिक पावर्स

3:29:32का उसे करते हैं और फ्रेंच गवर्नमेंट को

3:29:34बर्मा से हाउस को रिकॉल करने के लिए

3:29:36कन्वेंस कर लेते हैं इस बार तो फ्रेंच

3:29:39बर्मा से वापस चले जाते लेकिन इस तरह की

3:29:42इवेंट्स ब्रिटिश को बर्मा के अगेंस्ट

3:29:44एक्शन लेने के लिए कन्वेंस कर देते हैं अब

3:29:47उन्हें बस एक मौके की तलाश थी जो जल्द ही

3:29:50उन्हें मिल जाता है बर्मा में कम कर रही

3:29:52एक ब्रिटिश टिंबर कंपनी मुंबई बर्मा

3:29:55ट्रेडिंग कॉरपोरेशन परमस कोर्ट फाइंड लगा

3:29:58देती है

3:30:00एक्सट्रैक्शन को अंदर रिपोर्ट किया था और

3:30:04अपने एम्पलाइज को भी पी नहीं किया था

3:30:06बर्मीज ऑफिशल कंपनी के टिंबर को सीएस कर

3:30:09लेते हैं लेकिन कंपनी और ब्रिटिश

3:30:11गवर्नमेंट क्लेम करती है की यह चार्ज गलत

3:30:14है और बर्मीज कोड्स करप्ट हैं ब्रिटिशर्स

3:30:18बर्मी गवर्नमेंट से डिमांड करते हैं की इस

3:30:20डिस्प्यूट को सेटल करने के लिए वो ब्रिटिश

3:30:23अपॉइंटेड आर्बिट्रेटर को एक्सेप्ट कर ले

3:30:25और जब बर्मीज ऐसा करने से माना कर देते

3:30:28हैं तब 12 अक्टूबर 1885 को ब्रिटिश

3:30:32गवर्नमेंट एक अल्टीमेटम इशू करती है

3:30:34जिसमें कहा जाता है की बर्मीज मंडली में

3:30:38एक नया ब्रिटिश रेजिडेंट एक्सेप्ट करें और

3:30:41उसके अराइवल तक कंपनी पर लगा कोई भी लीगल

3:30:44एक्शन या फाइन सस्पेंड किया जाए साथ ही

3:30:47बर्मा अपनी फौरन रिलेशंस ब्रिटिश कंट्रोल

3:30:49में दे दें इसके अलावा नॉर्दर्न बर्मा और

3:30:53चीन के बीच ट्रेड के विकास के लिए ब्रिटिश

3:30:55को कमर्शियल फैसेलिटीज भी प्रोवाइड करें

3:30:58इस अल्टीमेट टीम को एक्सेप्ट करने से

3:31:00बर्मा के रियल इंडिपेंडेंस खत्म हो जाति

3:31:03है

3:31:07जिसके बाद थर्ड एंग्लो बर्मीज वार की

3:31:10शुरुआत हो जाति है

3:31:15और बर्मा के किंग सुरेंद्र कर देते हैं

3:31:17फर्स्ट जनवरी 1886 को बर्मा को फॉर्मूली

3:31:21ब्रिटिश इंडिया में एनएक्स कर लिया जाता

3:31:23है

3:31:28गोरिल्ला प्राइसिंग शुरू हो जाति है जो

3:31:311896 तक चलती रहती है

3:31:34और फिर फर्स्ट वर्ल्ड वार के बाद यहां

3:31:37नेशनलिस्ट मूवमेंट शुरू होता है बर्मा के

3:31:40नेशनलिस्ट इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ

3:31:42हाथ मिला लेते हैं इस लिंक को कमजोर करने

3:31:45के लिए 1935 में बर्मा को इंडिया से

3:31:49सेपरेट कर दिया जाता है हो वांग सॉन्ग की

3:31:51लीडरशिप में बर्मीज नेशनलिस्ट मूवमेंट और

3:31:54ज्यादा तीव्र होता है और फाइनली फोर्थ

3:31:57जनवरी 1948 को बर्मा को इंडिपेंडेंस मिलती

3:32:00है अब बात करते हैं की बैच के साथ ब्रिटिश

3:32:04रिलेशंस की

3:32:07एंग्लो तिब्बती रिलेशंस

3:32:11तिब्बत में फियोक्रेटिक रूल हुआ करता था

3:32:14इसे बुद्धिस्ट मांग सिया लमन रूल कर रहे

3:32:18थे और चीन की सिर्फ नॉमिनल सुसरेंटिस पर

3:32:21थी

3:32:21ब्रिटिशर्स ने काफी कोशिश की थी टिबैत के

3:32:24साथ फ्रेंडली और कमर्शियल रिलेशन स्थापित

3:32:27करने की लेकिन गर्जन के आने तक उन्हें

3:32:30इसमें कोई सफलता नहीं मिली थी

3:32:32वायसराय लोड कर्जन के समय लास में रूस

3:32:36इन्फ्लुएंस बढ़ता ही जा रहा था तिब्बत में

3:32:38ऋष्णम और अमिनेशन आने की रिपोर्ट ए रही थी

3:32:41जो गर्जन के लिए चिंता की बात थी इसलिए वह

3:32:45करनाल यंग हसबैंड के नेतृत्व में एक गोरख

3:32:47कंटिजेंट को तिब्बत के साथ एग्रीमेंट करने

3:32:50के लिए भेज देते हैं

3:32:51तिब्बतंस नेगोशिएट करने से इनकार कर देते

3:32:54हैं और नॉन वायलेट तरीके से विरोध शुरू

3:32:57करते हैं

3:33:02उसे समय के दलाई लामा लास छोड़कर भाग जान

3:33:05पर मजबूर होते हैं और यंग हसबैंड तिब्बती

3:33:08ऑफिशल्स के साथ फोर्सफुली त्रुटि साइन

3:33:11करते जिसे वीडियो लास कहा जाता है इसके

3:33:15अनुसार तिब्बत को 75 लाख की इंडिमनिटी पे

3:33:18करने के लिए कहा जाता है पेमेंट की

3:33:20सिक्योरिटी के रूप में 75 साल तक चुंबी

3:33:23वाली को ब्रिटिशर्स ऑक्युपी कर लेते हैं

3:33:26इसके साथ ही या तुम ज्ञान से और गाटोंक

3:33:29में ट्रेडमार्क ओपन करने के लिए भी कहा

3:33:32जाता है इसके अलावा तिब्बती रेलवे रोड या

3:33:35टेलीग्राफ के लिए किसी भी फॉरेन स्टेट को

3:33:37कोई कंसेशन नहीं दे सकता था सिर्फ ग्रेट

3:33:41ब्रिटेन को तिब्बत के फॉरेन अफेयर्स में

3:33:43कुछ कंट्रोल दिया जाता है

3:33:51नॉर्थ के बाद अब नॉर्थ वेस्टर्न फ्रंटियर

3:33:54की तरफ चलते हैं और डिस्कस करते हैं

3:33:59एंग्लो अफगान रिलेशंस

3:34:03दोस्तों 19th सेंचुरी की शुरुआत में रूस

3:34:06इन्फ्लुएंस काफी बढ़ाने लगता है

3:34:13की रसिया उनकी इंडियन अंपायर पर अटैक

3:34:16प्लेन कर रहा है

3:34:22इसलिए अफगानिस्तान में एक फ्रेंडली रोलर

3:34:25की जरूर महसूस की जाति है जो ब्रिटिश

3:34:27कंट्रोल में रहे इसी इंटेंशन से एंग्लो ऑफ

3:34:31गण रिलेशंस गाइड होते हैं

3:34:351836 में लॉर्ड ऑकलैंड इंडिया के गवर्नर

3:34:38जनरल बनते हैं और यह फॉरवर्ड पॉलिसी की

3:34:41बात करते हैं इसका मतलब था की कंपनी खुद

3:34:45से इनिशिएटिव लगी ब्रिटिश इंडिया की

3:34:47बाउंड्री को प्रोबेबल रूस अटैक से

3:34:49प्रोटेस्ट करने के लिए इस ऑब्जेक्टिव को

3:34:52दो तरीके से पूरा किया जा सकता था या तो

3:34:55नेबरिंग कंट्रीज के साथ ट्रीटी करके या

3:34:58फिर उन्हें पुरी तरह एनएक्स करके

3:35:00अफगानिस्तान की अमीर दोस्त मोहम्मद

3:35:03ब्रिटिशर्स के साथ फ्रेंडशिप तो करना

3:35:06चाहते थे लेकिन इस शर्ट पर की ब्रिटिश सिख

3:35:09से पेशावर को रिकवर करने में उनकी हेल्प

3:35:11करें

3:35:29शाहूजा के साथ

3:35:31शाहूजा तब से लुधियाना में ब्रिटिश पेंशनर

3:35:34बन के र रहे थे

3:35:36इस ट्रीटी में डिसाइड होता है की सिक्स की

3:35:38मिलिट्री हेल्प के जारी शहशुजा को वापस

3:35:41अफगानिस्तान के थ्रू पर बैठाया जाएगा

3:35:43जिसके बाद शाह सजा फॉरेन अफेयर्स सिक्स और

3:35:47ब्रिटिशर्स की एडवाइस के अनुसार कंडक्ट

3:35:49करेंगे साथ ही वह सिंह के अमीरस पर अपने

3:35:53सावरेन राइट्स भी छोड़ देंगे और रिवर

3:35:55सिंधु के राइट बैंक पर लोकेटेड अफगान

3:35:58टेरिटरी पर महाराजा रंजीत सिंह के क्लेम

3:36:01को एक्सेप्ट कर लेंगे इसके बाद शुरुआत

3:36:03होती है फर्स्ट एंग्लो अफगान वार की आई

3:36:06जानते हैं इसके बड़े में

3:36:09फर्स्ट एंग्लो अफगान वार 1839 तू 1842

3:36:14ब्रिटिश आर्मी अगस्त 1839 में काबुल में

3:36:17इंटर करती है

3:36:23दोस्त मोहम्मद सुरेंद्र कर देते हैं और

3:36:26शाह पूजा को अफगानिस्तान का अमीर बना दिया

3:36:29जाता है लेकिन अफगानिस्तान

3:36:37की हत्या कर दी जाति है

3:36:44जिसमें यह अफगानिस्तान को इबे एक्यूरेट

3:36:47करने के लिए तैयार होते हैं और दोस्त

3:36:49मोहम्मद को रिस्टोर भी करते हैं फर्स्ट

3:36:52अफगान वार में इंडिया की डेड करोड़ रुपए

3:36:55खर्च हो जाते हैं और लगभग 20000 लोग इसमें

3:36:58मारे जाते हैं जॉन लॉरेंस और थे पॉलिसी का

3:37:02मास्टरी इन एक्टिविटी

3:37:04फर्स्ट अफगान वार के डिजास्टर के बाद जॉन

3:37:07लॉरेंस मास्टर ली इन एक्टिविटी पॉलिसी को

3:37:09फॉलो करते हैं

3:37:111863 में दोस्त मोहम्मद की डेथ के बाद भी

3:37:14वार ऑफ सक्सेशन में कोई इंटरफ्रेंस नहीं

3:37:16किया जाता

3:37:18लॉरेंस की पॉलिसी दो कंडीशंस पर आधारित थी

3:37:20पहले फ्रंटियर पर पीस डिस्टर्ब ना हो और

3:37:24दूसरा सिविल वार में कोई भी कैंडिडेट फौरन

3:37:27हेल्प ना मांगे इसके बाद शेर अली खुद को

3:37:31अफगानिस्तान के थ्रोन पर कब्ज करते हैं तो

3:37:34लॉरेंस उनके साथ फ्रेंडशिप कल्टीवेट करने

3:37:37की कोशिश करते हैं लेकिन

3:37:421876 में लैटिन इंडिया के वायसराय बनते

3:37:45हैं और नई फॉरेन पॉलिसी शुरू करते हैं

3:37:48जिसे प्राउड रिजर्व की नीति कहा जाता है

3:37:51इसका मकसद साइंटिफिक फ्रंटियर्स को मेंटेन

3:37:54करना और स्फियर्स ऑफ इन्फ्लुएंस को

3:37:57सेफगार्ड करना था लियोन के अनुसार

3:37:59अफगानिस्तान के साथ रिलेशनशिप को अंबिगुअस

3:38:02नहीं रखा जा सकता था और इसीलिए सेकंड

3:38:05एंग्लो अफगान वार की शुरुआत होती है आई

3:38:07जानते हैं इसके बड़े में भी सेकंड एंग्लो

3:38:10अफगान वार 1870 तो 1880

3:38:14लिटिल शेर अली को एक फेवरेबल त्रिनिटी का

3:38:17ऑफर देते हैं लेकिन अमीर अपने दोनों

3:38:20पावरफुल नेबर्स यानी की रसिया और ब्रिटिश

3:38:22इंडिया के साथ फ्रेंडशिप चाहते थे साथ ही

3:38:25दोनों में से किसी का बहुत ज्यादा

3:38:27इंटरफ्रेंस भी नहीं होने देना चाहते थे

3:38:29बाद में शेर अली काबुल में ब्रिटिश और बाय

3:38:32रखना से भी माना कर देते हैं जबकि इससे

3:38:35पहले रसियन को यह कंसेशन दे दिया गया

3:38:39[संगीत]

3:38:41और जब रूस अपना न्वोक काबुल से वीडियो कर

3:38:44लेते हैं तब लिटन अफगानिस्तान को एवं करने

3:38:47का फैसला करते हैं

3:38:49इनवेजन की स्थिति में शेर अली भाग जाते

3:38:52हैं और ब्रिटिशर्स में 1879 में शेर अली

3:38:55के एल्डेस्ट सन याकूब खान के साथ ट्रीटी

3:38:59का गंधक साइन करते हैं इसमें डिसाइड होता

3:39:02है की अमीर अपनी फॉरेन पॉलिसी गवर्नमेंट

3:39:05ऑफ इंडिया यानी ब्यूटियस की एडवाइस के

3:39:07अनुसार कंडक्ट करेंगे काबुल में परमानेंट

3:39:10ब्रिटिश रेजिडेंट तैनात किया जाएगा

3:39:12ब्रिटिश इंडिया गवर्नमेंट फॉरेन अग्रेशन

3:39:15के अगेंस्ट आमिर को पूरा सपोर्ट देगी और

3:39:18एनुअल सब्सिडी भी देगी लेकिन जल्द ही

3:39:20पॉपुलर प्रेशर्स के करण याकूब को भी थ्रोन

3:39:23छोड़ना पड़ता है और ब्रिटिश को काबुल और

3:39:26कंधार रीकैप्चर करने पढ़ते हैं

3:39:31लेकिन अफगानिस्तान को तोड़ने का प्लेन

3:39:34बनाते हैं लेकिन इसे इंप्लीमेंट नहीं कर

3:39:36पाते और नेक्स्ट वायसराय लॉर्ड रिपन इस

3:39:39प्लेन को फॉलो नहीं करते बल्कि

3:39:41अफगानिस्तान को एक बफर स्टेट की तरह ट्वीट

3:39:44करने की पॉलिसी अपनाते हैं रूस रिवॉल्यूशन

3:39:47और फर्स्ट वर्ल्ड वार के बाद अफगानिस्तान

3:39:49फूल इंडिपेंडेंस की डिमांड करते हैं

3:39:521909 में अब्दुल रहमान के सक्सेसर बने

3:39:55हबीबुल्लाह की 1990 में हत्या कर दी जाति

3:39:58है और नए रोलर अमानुल्लाह ब्रिटिशर्स के

3:40:02अगेंस्ट ओपन वार डिक्लेअर कर देते हैं

3:40:051921 में ब्रिटिशर्स हर मां लेते हैं और

3:40:08अफगानिस्तान फॉरेन अफेयर्स में अपनी

3:40:10इंडिपेंडेंस रिकवर कर लेट है

3:40:14कंक्लुजन

3:40:19एस की फौरन पॉलिसी उनके इंपिरियलिस्ट

3:40:22एंबीशन से गाइड थी एक तो वो किसी भी राइवल

3:40:25पावर जैसे की रसिया या फ्रांस से अपने

3:40:28इंडियन अंपायर को प्रोटेस्ट करना चाहते थे

3:40:30और दूसरा अपने मार्केट को भी एक्सपेंड

3:40:32करना चाहते थे इन्हीं दोनों मोटिव्स के

3:40:35साथ वह फॉरेन पॉलिसी को कंडक्ट करते हैं

3:40:38लेकिन यहां समस्या यह थी की अपने एंबीशन

3:40:41को पूरा करने के लिए यह इंडियन रिवेन्यू

3:40:44और मैनपॉवर का उसे करते हैं फिर चाहे

3:40:46अफगानिस्तान के साथ वार हो या फिर बर्मा

3:40:49के साथ इनका कनफ्लिक्ट इंडियन सोल्जर ही

3:40:52इनके लिए फाइट करते हैं और लाखों रुपए इन

3:40:56वर्स पर खर्च कर दिए जाते हैं

3:40:58सिविल उप्राइजिंग इन ट्राईबल रिवॉल्वेस

3:41:021757 तू 1856

3:41:05दोस्तों 1857 की क्रांति के बड़े में तो

3:41:08हम सभी कुछ ना कुछ जरूर जानते हैं लेकिन

3:41:11उससे पहले भी ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट

3:41:14विद्रोह की कई आवाज़ उठी थी जिनके बड़े

3:41:16में अक्सर लोगों को कम पता होता है आज हम

3:41:20ऐसे ही कुछ रिवॉल्ट्स और उप्राइजिंग की

3:41:22चर्चा करने वाले हैं यह रिवॉल्ट्स देश के

3:41:25अलग-अलग हसन में अलग-अलग समय पर हुए थे

3:41:29मुख्य तोर पर इन रिबेलियंस के तीन फॉर्म्स

3:41:32देखें जाते हैं

3:41:44सबसे पहले बात करते हैं

3:41:59सबसे पहले उनको समझते हैं

3:42:07सबसे बड़ा करण इकोनामी एडमिनिस्ट्रेशन और

3:42:11लैंड रिवेन्यू सिस्टम में ब्रिटिश द्वारा

3:42:13तेजी से किया गया बदलाव था

3:42:16है जिसकी वजह से एग्रेरियन सोसाइटी पुरी

3:42:19तरह से उथल-पुथल हो गई थी उदाहरण के तोर

3:42:22पर लैंड रिवेन्यू रेट्स इतने हाय कर दिए

3:42:25गए थे की बैगन और जमींदारा दोनों ही

3:42:28परेशान थे इसी तरह ब्रिटिश ने नया जस्टिस

3:42:32सिस्टम भी इंट्रोड्यूस कर दिया था जिससे

3:42:35जस्टिस एन सिर्फ महंगा बल्कि लोगों से दूर

3:42:38हो गया था इंडियन हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्रीज

3:42:41का डिक्लिन होने से हजारों की संख्या में

3:42:44आर्टिजंस की रोजी रोटी छन गई थी इसके

3:42:47अलावा ब्रिटिश रूल का फौरन करैक्टर भी

3:42:50विद्रोह का एक करण था लोगों को एक विदेशी

3:42:53शक्ति के अधीन होना कभी अच्छा नहीं लगता

3:42:56इंडियन के प्राइड को भी ब्रिटिश रूल में

3:42:59हट किया था और इसीलिए फॉरेनर को अपनी जमीन

3:43:02से बाहर करने के बहुत से एफर्ट्स देखने को

3:43:05मिलते हैं

3:43:06ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट रिबेलियंस उनका

3:43:09बंगाल पर कब्जा होने से ही शुरू हो जाता

3:43:11है शायद ही ऐसा कोई साल गया हो जब इनके

3:43:14विरुद्ध कोई आम रिबेलीयन ना हुआ हो

3:43:171763 से 1856 के बीच 40 से ज्यादा मेजर

3:43:22रिबेलियंस होते हैं इसके अलावा 100 से

3:43:25ज्यादा माइनर वंश भी थे

3:43:27आई अब अलग रीजंस में होने वाले सिविल

3:43:30रिबेलियंस के कुछ उदाहरण देखते हैं शुरुआत

3:43:33करते हैं बंगाल और पूर्वी इंडिया से

3:43:35रिवॉल्ट्स इन बंगाल

3:43:42में ही एस्टेब्लिश किया था इसलिए सबसे

3:43:46पहले विद्रोह भी यही शुरू होता है और वह

3:43:491763 में होने वाला

3:43:54मंगस यानी सन्यासी और बेदखल किया हुए

3:43:58जमींदारा लीड कर रहे थे

3:44:00और इनका साथ देते हैं पेजयंस और नीचे

3:44:03बार्बी से निकले हुए सोल्जर

3:44:05सन्यासी रिवॉल्ट के पीछे में करण होली

3:44:08प्लेस को विजिट करने पर लगे गई

3:44:10रिस्ट्रिक्शंस थी

3:44:12सन्यासी अक्सर होली श्रीस की यात्रा करते

3:44:15थे और वहीं के लोकल जमीदार इन्हें दक्षिण

3:44:18दिया करते थे लेकिन ब्रिटिश को लगता है की

3:44:21यह लोग उनका हिस्सा ले रहे हैं साथ ही

3:44:25इतने बड़े स्टार पर लोगों का घूमने उन्हें

3:44:27डॉ और ऑर्डर की प्रॉब्लम लगता था इसलिए वह

3:44:30सन्यासी की विजिट पर रिस्ट्रिक्शंस लगा

3:44:33देते हैं और इसी से नाराज सन्यासी उनके

3:44:36खिलाफ विद्रोह कर देते हैं

3:44:38रिवॉल्ट के दौरान कंपनी की फैक्टरीज और

3:44:41स्टेट ट्रेजरीज पर रेड की जाति है यह लोग

3:44:44कंपनी की आम फोर्सेस का बहादुर से सामना

3:44:47करते हैं इनका विद्रोह 1800 तक चला राहत

3:44:50है बंकिम चंद्र चटर्जी की नवल आनंद मठ इसी

3:44:54विद्रोह पर बेस्ड है

3:44:56सन्यासी रिबेलीयन के बाद 176 से 1772 तक

3:45:01चौर विद्रोह हुआ था यह बंगाल और बिहार के

3:45:04पांच डिस्ट्रिक्ट में फैला था इसके अलावा

3:45:07पूर्वी इंडिया के मेजर रिबेल्स में

3:45:101783 में होने वाला रंगपुर और दिनाजपुर

3:45:14रिबिन

3:45:151799 में विष्णुपुर और बीरभूम 1800 पर

3:45:20सेवेंटीन के बीच उड़ीसा के जमींदारा का

3:45:23विद्रोह और 1827 से 40 तक चलने वाला

3:45:26संबलपुर रिवॉल्ट आता है

3:45:28पूर्वी इंडिया के बाद आई अब साउथ इंडिया

3:45:31की तरफ चलते हैं रिवार्ड्स इन साउथ इंडिया

3:45:34दोस्तों साउथ इंडिया में विजयनगरम के राजा

3:45:381794 में रिवॉर्ड करते हैं

3:45:44[संगीत]

3:45:46पॉलीगर्स बेसिकली साउथ इंडिया की जमींदारा

3:45:49को कहा जाता था और इनका विद्रोह टैक्सेशन

3:45:51को लेकर हुआ था इसके अलावा 185 में

3:45:55त्रवंकोर के दीवान वेल थंबिका हेयर तेल

3:45:58रिवॉल्ट होता है

3:46:0018005 में ब्रिटिश गवर्नर जनरल वैलेंस

3:46:03लेने ट्रैवल कर के राजा पर सब्सिडियरी

3:46:06एलाइंस ट्वीट पोस्ट कर दी थी लेकिन राजा

3:46:08ट्रीटी के हर स्टंट्स की वजह से नाराज हो

3:46:11जाते हैं और सब्सिडी पे नहीं करते ऐसे में

3:46:15ब्रिटिश रेजिडेंट जब इन्हें सब्सिडी पे

3:46:18करने के लिए फोर्स करने लगता है तो उसके

3:46:20एटीट्यूड से लोगों की नाराजगी और ज्यादा

3:46:22बाढ़ जाति है और दीवार

3:46:26के सपोर्ट से रिवॉल्ट कर देते हैं

3:46:32इस विद्रोह को दबाने और यहां शांति

3:46:34स्थापित करने के लिए

3:46:39विशाखापट्टनम में 1835 में गंजाम में और

3:46:43184647 में कुरनूल में

3:46:46मिलती हैं अब बात करते हैं वेस्टर्न

3:46:50इंडिया की रिपोर्ट इन वेस्टर्न इंडिया

3:46:54दोस्तों 1816 से 1832 के बीच सौराष्ट्र के

3:46:59के बार-बार ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट विद्रोह

3:47:01करते हैं इसी तरह गुजरात के कॉलेज भी 1824

3:47:06से 28 तक 1839 में और फिर 1849 में

3:47:10विद्रोह का बिगुल बजाते हैं इनके विद्रोह

3:47:13का करण ब्रिटिश रूल का इंपोजिशन और उनके

3:47:16द्वारा कोहली के फोर्स को टोडा जाना था

3:47:19इसके अलावा कंपनी द्वारा इस इस्टैबलिश्ड

3:47:22नए एडमिनिस्ट्रेशन की वजह से बड़ी संख्या

3:47:25में यह लोग बेरोजगार भी हो गए थे

3:47:27पेशवा की हर के बाद से ही महाराष्ट्र में

3:47:30लगातार विद्रोह का सिलसिला चला राहत है

3:47:32जिसमें 1818 से 1831 के बीच भील

3:47:37उप्राइजिंग हुई थी भील खानदेश के हिल

3:47:39रेंजेस में रहते थे और ब्रिटिशर्स ने इनके

3:47:42रीजन में इंट्रूड करना शुरू कर दिया था

3:47:45लोकल्स इस इंट्रूजन से ना खुश थे और

3:47:48उन्होंने इस बात का रिपोर्ट किया इसके साथ

3:47:51ही 1824 में चुनाव द्वारा लाड की टूर

3:47:55एप्प्राइजिंग 1841 की सतारा प्राइसिंग और

3:47:581844 का गडकरी इसका रिवॉल्यूशन प्रॉमिनेंट

3:48:02है

3:48:10दोस्तों 1824 में आज के अप और हरियाणा ने

3:48:14ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट हथियार उठा लिए थे

3:48:17इसके अलावा 185 में बिलासपुर का विद्रोह

3:48:211814 से 17 के बीच अलीगढ़ के तालुकदार का

3:48:25विद्रोह

3:48:261842 में जबलपुर के बुंदेला का रिपोर्ट और

3:48:301852 में खानदेश में हुआ विद्रोह मेजर

3:48:33रिबेलियंस की कैटिगरी में आते हैं

3:48:37ये तो बात हुई मेजर सिविल रिबेलियंस के

3:48:39कुछ उदाहरणों की अयूब इनका थोड़ा एनालिसिस

3:48:42भी करते हैं

3:48:43एनालिसिस ऑफ सिविल उप्राइजिंग

3:48:47दोस्तों देश के अलग-अलग हसन में हुई 100

3:48:50से भी ज्यादा इन सिविल उप्राइजिंग में

3:48:52हमें आम लोगों का करेज देखने को मिलता है

3:48:54इससे पता चला है की कैसे ब्रिटिश रूल की

3:48:58शुरुआती सालों से ही इंडिया के लोग इसका

3:49:01विद्रोह करने लगे थे और कैसे इन लोगों ने

3:49:04अपने से शक्तिशाली ब्रिटिश फोर्सेस का

3:49:06सामना किया था दोस्तों लगातार चलने वाले

3:49:10ये रिबेलियंस एक साथ देखने पर मसीव लगता

3:49:13हैं लेकिन अल में यह अपने फैलाव में पुरी

3:49:16तरह लोकल थे और एक दूसरे से आइसोलेटेड थे

3:49:20इन सभी का करैक्टर इसीलिए एक जैसा नहीं था

3:49:23की यह किसी नेशनल या आम एफर्ट को

3:49:26रिप्रेजेंट कर रहे थे बल्कि इसलिए था

3:49:28क्योंकि यह आम कंडीशंस को रिप्रेजेंट करते

3:49:31थे लेकिन समय और जगह

3:49:39फैऊदल लीडर्स बैकवर्ड लुकिंग और ट्रेडिशनल

3:49:42आउटलुक वाले थे जो अभी भी पुरानी दुनिया

3:49:45में र रहे थे मॉडर्न वर्ल्ड की बैंकिंग और

3:49:47अप्रोच से कोसों दूर बस पुराने फॉर्म्स ऑफ

3:49:51रूल और सोशल रिलेशंस को फिर से एस्टेब्लिश

3:49:53करना चाहते थे ब्रिटिश एक करके सभी

3:49:57रेगुलेरियस को शांत कर लेते हैं

3:50:01तो कुछ पुरी तरह खत्म करके उदाहरण के तोर

3:50:05पर वेल थंपी को मृत्यु होने के बाद भी

3:50:07पब्लिकली हैंग किया जाता है जिससे लोगों

3:50:11के मां में एक डर पैदा कर सकें इन सिविल

3:50:14रिबेलियंस का सप्रेशन एक करण बंता है की

3:50:181857 की क्रांति का असर साउथ इंडिया और

3:50:21ज्यादातर वेस्टर्न और पूर्वी इंडिया में

3:50:23देखने को नहीं मिलता इनका हिस्टोरिकल

3:50:26साइनिफिकेंस इस बात में है की यह ब्रिटिश

3:50:29रूल के अगेंस्ट विद्रोह का एक स्ट्रांग और

3:50:31वैल्युएबल लोकल ट्रेडीशन एस्टेब्लिश करते

3:50:33हैं और आजादी के लिए आगे होने वाले संघर्ष

3:50:37में इंडियन के लिए प्रेरणा का एक सोर्स

3:50:39बनते हैं

3:50:53बहुत ही साहस के साथ यह लोग विद्रोह में

3:50:56अपनी भागीदारी देते हैं ट्राईबल लोगों की

3:50:58नाराजगी के कई करण

3:51:03सबसे पहले करण तो यह था की कॉलोनियल

3:51:06एडमिनिस्ट्रेशन ने इनके रिलेटिव आइसोलेशन

3:51:09को खत्म कर दिया था जहां अभी तक ये अपनी

3:51:12कम्युनिटी में पीसफुली र रहे थे इनका

3:51:15मेंस्ट्रीम सोसाइटी से बहुत ज्यादा लिंक

3:51:17नहीं था वहीं ब्रिटिश रूल के आने के बाद

3:51:19ट्राईबल्स को मेंस्ट्रीम एडमिनिस्ट्रेशन

3:51:22के साथ तेजी से जोड़ा जान लगा कुछ जगह पर

3:51:26ब्रिटिशर्स ट्राईबल के को जमींदारा

3:51:28रिकॉग्नाइज्ड कर लेते हैं और लैंड

3:51:30रिवेन्यू का नया सिस्टम इंट्रोड्यूस कर

3:51:32देते हैं ट्राईबल प्रोडक्ट्स पर टैक्स लगा

3:51:35दिया जाता है साथ ही ट्राईबल एरियाज में

3:51:38क्रिश्चियन मिशनरीज का आना भी बहुत बाढ़

3:51:40जाता है यह लोग ट्रायल्स को कन्वर्ट करने

3:51:43की पुरी कोशिश करते हैं

3:51:45है इसके अलावा ब्रिटिश रूल के दौरान

3:51:48ट्राईबल्स के बीच मनी लैंडर्स ट्रेडर्स

3:51:51रिवेन्यू फार्मर्स जैसे मिडिलमैन की

3:51:54संख्या बहुत अधिक हो जाति है यह लोग सीड्स

3:51:57थे और धीरे-धीरे ट्राईबल्स को डेड के दाल

3:52:00में फंसा कर उनके लैंड पर कब्जा करने लगता

3:52:03हैं इसकी वजह से ट्राईबल पीपल एग्रीकल्चर

3:52:06लेबर्स शेर क्रॉपर्स और टिनेंट्स की

3:52:09पोजीशन में आने लगे थे

3:52:11कॉलोनियलिज्म की वजह से फॉरेस्ट के साथ भी

3:52:14ट्राईबल्स की रिलेशनशिप में चेंज आता है

3:52:17ज्यादातर ट्रबल कम्युनिटी अपनी लाइवलीहुड

3:52:20के लिए फॉरेस्ट रिसोर्सेस पर डिपेंड करते

3:52:22थे लेकिन ब्रिटिश ने इन फॉरेस्ट पर भी

3:52:25अपना कब्जा कर लिया था और ट्राईबल्स के

3:52:28फॉरेस्ट एरिया एक्सेस करने पर

3:52:29रिस्ट्रिक्शंस लगा दिए थे इसके अलावा

3:52:32पुलिसमैन और बाकी ऑफिशल्स के द्वारा शोषण

3:52:36और एक्सपोर्टेशन भी ट्राईबल्स के लिए आम

3:52:38हो गया था

3:52:39रिवेन्यू फार्मर्स और गवर्नमेंट एजेंट

3:52:42ट्राईबल से बेकार यानी की फोर्स अनपेड

3:52:45लेबर का कम भी लिए

3:52:49करती थी लेकिन ट्राईबल कम्युनिटी के

3:52:52पुराने लिविंग सिस्टम को ब्रिटिश रूल ने

3:52:55काफी हद तक डिस्ट्रिक्ट कर दिया था और यही

3:52:57एक आम फैक्टर था सभी ट्रैवलर प्राइस के

3:53:01पीछे

3:53:04और उसके कुछ उदाहरण को देखते हैं

3:53:07मैथर्ड ऑफ ट्रबल रिवार्ड्स और एग्जांपल्स

3:53:11दोस्तों ज्यादातर ट्रबल एप्प्राइजिंग

3:53:14ब्रेड बेस्ड होती थी इनमें हजारों की

3:53:17संख्या में ट्रबल्स भाग लेते थे रिबेलीयन

3:53:20तब शुरू होता था जब ट्राईबल्स शोषण से

3:53:22पुरी तरह दुखी हो जाते थे और उन्हें लगता

3:53:25था की अब उनके पास फाइट करने के अलावा और

3:53:28कोई ऑप्शन नहीं बच्चा है

3:53:30विद्रोह के दौरान आउटसाइडर्स जैसे की मनी

3:53:33लैंडर्स जमींदार गवर्नमेंट ऑफिशल्स पर

3:53:36अटैक किया जाता था उनकी प्रॉपर्टी को लूट

3:53:38जाता था और उन्हें गांव से बाहर कर दिया

3:53:41जाता था कई जगह पर ट्रबल रिवार्ड्स को

3:53:44रिलिजियस

3:53:45ने लीड किया था जिन्हें मसीह बोला जाता था

3:53:49यह लोग क्लेम करते थे की इनके पास मैजिकल

3:53:53पावर्स हैं जिनकी हेल्प से यह ब्रिटिशर्स

3:53:55को हर सकते हैं इनकी खाने पर बड़ी संख्या

3:53:58में ट्रबल मैसेज विद्रोह से जुड़ जाते थे

3:54:02हालांकि ट्राईबल्स और ब्रिटिशर्स का

3:54:04मुकाबला बराबरी का नहीं था एक तरफ सभी

3:54:07मॉडर्न वेपंस के साथ ट्रेन आर्मी हुआ करती

3:54:09थी

3:54:10तो दूसरी तरफ हाथ में पत्थर भला कुल्हाड़ी

3:54:14जैसे हथियार लिए ट्रेवल्स इस अनइक्वल

3:54:17वाॅरफेयर में लाखों की संख्या में ट्रबल्स

3:54:20अपनी लाइफ सैक्रिफिस करते हैं दोस्तों

3:54:23मेजर ट्रबल रिवार्ड्स के कुछ एग्जांपल इस

3:54:25तरह पहले ट्रबल रिबेलीयन 1768 में बंगाल

3:54:30में हुआ था इसे चौर रिबेलीयन कहा जाता है

3:54:33इसके अलावा बंगाल में ही 1783 का रंगपुर

3:54:37रबालियां वेस्टर्न महाराष्ट्र में सेवाराम

3:54:40की लीडरशिप में 1825 का भी रिपोर्ट छोटा

3:54:44नागपुर एरिया में हुई 1832 की कला प्राइस

3:54:47और 1855 का संथाल होल इंपॉर्टेंट है

3:54:52ट्रबल रिवार्ड्स को और अच्छे से समझना के

3:54:55लिए 21 स्टडी देखते हैं

3:54:57सबसे बड़े ट्रबल रिवॉर्ड कहे जान वाले

3:55:00संथाल फूल की

3:55:06दोस्तों संथाल्स भागलपुर और राजमहल के बीच

3:55:09के एरिया में रहते थे इसे दमन ए को कहा

3:55:13जाता था ब्रिटिश रूल के आने के बाद इनके

3:55:16एरिया में आउटसाइडर यानी की दिखेयूज इंटर

3:55:19करते हैं और संथाल्स का शोषण शुरू हो जाता

3:55:22है जमीन दर्ज मनी लैंडर्स और ब्रिटिश

3:55:25ऑफिशल्स की वजह से संथाल्स की लाइफ बदलने

3:55:28लगती है इनके ऊपर हैवी टैक्स लगा दिए जाते

3:55:31हैं जमींदारा और गवर्नमेंट ऑफिशल्स

3:55:34तरह-तरह के एक्सप्लोजंस करने लगता हैं लोन

3:55:37लेने पर 50 से 500% तक के हाय इंटरेस्ट

3:55:41रेट चार्ज किया जाते हैं अलग-अलग त्रिकोण

3:55:44से संथाल्स की प्रॉपर्टी पर कब्जा करना

3:55:46शुरू हो जाता है मार्केट और हार्ट में

3:55:49इन्हें धोखा देकर ज्यादा वसूली की जाति है

3:55:52इस तरह के शोषण और अत्याचारों से परेशान

3:55:56होकर

3:55:57विद्रोह करने पर मजबूर होते हैं

3:56:001854 में ट्रबल हिट्स यानी की माजीस और

3:56:04परगनास मिलकर विद्रोह के बड़े में

3:56:06प्लानिंग करने लगता हैं

3:56:08जमींदारा और मनी लैंडर्स को लूटने की कुछ

3:56:11घटनाएं भी शुरू हो जाति हैं 30 जून 1855

3:56:15को ट्राईबल लीडर्स

3:56:17भाग निधि विलेज में करीब 6000 साल की

3:56:21असेंबली बुलेट हैं यह 400 विलेज को

3:56:24रिप्रेजेंट करती है यहां पर रिवॉल्ट का

3:56:27बैनर रेस करने और आउटसाइडर्स को बाहर करने

3:56:29का फैसला लिया जाता है सिद्धू और कानून

3:56:39से हथियार उठाने और आजादी के लिए फाइट

3:56:42करने को कहा है

3:56:43लीडर्स संथाल मां और वूमेन को बड़ी संख्या

3:56:47में मोबिलाइज करना शुरू करते हैं इसके लिए

3:56:50गांव-गांव में प्रशासन निकले जाते हैं

3:56:52जल्द ही 60000 संथाल इन्हें जॉइन कर लेते

3:56:56यह लोग 1500 से 2000 के बैंड्स बनाकर

3:57:00जमींदारा और महाजनस पर हमला शुरू कर देते

3:57:03हैं इनके घर पुलिस स्टेशन रेलवे

3:57:06कंस्ट्रक्शन साइट्स पोस्ट करियर्स एडसेटरा

3:57:09पर अटैक किया जाता है खाने का मतलब यह है

3:57:12की दिकू एक्सप्लोइटेशन और कॉलोनियल पावर

3:57:15के सभी सिंबल्स पर अटैक होता है

3:57:35जैसे ही ब्रिटिश गवर्नमेंट को रिबेलीयन के

3:57:37बड़े स्टार के बड़े में पता चला है वह

3:57:41इनके विरुद्ध मिलिट्री कैंपेन लॉन्च कर

3:57:43देती है आर्मी की 10 से भी ज्यादा

3:57:45रेजीमेंट को बुलाया जाता है

3:57:50और विद्रोह के नेताओं को पकाने के लिए

3:57:5310000 रुपए तक के इनाम की घोषणा कर दी

3:57:56जाति है

3:57:57बहुत ही कुर्ता के साथ संथाल्स के विद्रोह

3:58:00को ढाबा दिया जाता है

3:58:0215000 से ज्यादा संथाल्स की हत्या कर दी

3:58:05जाति है 10 से भी ज्यादा गांव को पुरी तरह

3:58:08तबाह कर दिया जाता है

3:58:10सिदो को पड़कर अगस्त 1855 में मार दिया

3:58:14जाता है वहीं कानून फरवरी 1856 में

3:58:17विद्रोह के बिल्कुल अंतिम पड़ाव में

3:58:19एक्सीडेंट के जारी पकड़े जाते हैं

3:58:22राजमहल हिल्स पुरी तरह संथाल के खून में

3:58:26नहा चुके होते हैं

3:58:27संथाल उसने बहुत ज्यादा साहस का परिचय

3:58:30दिया और आखरी दम तक सुरेंद्र नहीं किया

3:58:43जाता है

3:58:51कंक्लुजन

3:58:53तो दोस्तों यह थी 1857 से पहले के कुछ

3:58:56मेजर सिविल और ट्रबल रिबेलियंस की कहानी

3:58:59इससे पता चला है की 1857 की क्रांति अचानक

3:59:04से नहीं हुई थी

3:59:05उसके पीछे ब्रिटिश डोमिनेशन के अगेंस्ट

3:59:08विद्रोह करने की एक लंबी हिस्ट्री रही थी

3:59:11फर्क बस इतना था की 1857 से पहले के

3:59:15ज्यादातर विद्रोह का स्टार लोकल या रीजनल

3:59:18रहा था जबकि 1857 की क्रांति काफी बड़े

3:59:22स्टार पर हुई थी

3:59:25प्रेजेंट मूवमेंट्स

3:59:28दोस्तों इंडिया में ब्रिटिश रूल के

3:59:30एस्टेब्लिशमेंट के बाद बहुत से पॉलीटिकल

3:59:32इकोनामिक और एडमिनिस्ट्रेटिव चेंज हुए थे

3:59:35और इन चेंज का सबसे ज्यादा इफेक्ट हमें

3:59:37इंडियन प्रेजेंस पर देखने को मिलता है

3:59:41बादल जाति है हर लेवल पर उनका शोषण होने

3:59:45लगता है और जब इस शोषण का लेवल्स के

3:59:48टोलरेंस लेवल को पर करता है तो वो इसके

3:59:50अगेंस्ट विद्रोह या आंदोलन करते हैं आज के

3:59:54वीडियो में हम ऐसे ही कुछ इंपॉर्टेंट

3:59:55मोमेंट्स की चर्चा करेंगे सबसे पहले इनकी

3:59:59पीछे की जनरल कॉसेस को समझते हैं

4:00:07दोस्तों ब्रिटिश रूल के समय इंडिया का

4:00:10एग्रेरियन स्ट्रक्चर पुरी तरह बादल जाता

4:00:13है इसके बहुत से करण देखें जा सकते हैं

4:00:15जैसे की ब्रिटिश की इकोनामिक पॉलिसी उनके

4:00:19द्वारा किया गया इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स का

4:00:21री जिसकी वजह से लैंड पर प्रेशर बढ़ता है

4:00:24नई लैंड रिवेन्यू सिस्टम और कॉलोनियल

4:00:27एडमिनिस्ट्रेटिव और जुडिशल

4:00:31सिस्टम को हाय रेंज लीगल न्यूज़ पोस्ट

4:00:35अफेक्शंस और अनपेड लेबर जैसी प्रॉब्लम्स

4:00:38फेस करनी पड़ती थी वही एरियाज में खुद

4:00:41गवर्नमेंट ने बहुत हाय रिवेन्यू रेट फिक्स

4:00:44किया हुआ था जिसे चुकाने के लिए किसान

4:00:47अक्सर लोकल मनी लैंडर से हेल्प लेने को

4:00:49मजबूर होते थे और यह

4:00:54किसने को बहुत हाय इंटरेस्ट रेट पर पैसे

4:00:57उधर दिए जाते थे जिसके लिए किसान अपनी

4:01:00जमीन और कैथल को गिरवी रखते थे और जब यह

4:01:03लोन नहीं चुका पाते थे तो गिरवी राखी गई

4:01:06प्रॉपर्टी मनी दूर की हो जाति थी इस तरह

4:01:09धीरे-धीरे बहुत बड़े एरियाज पर एक्चुअल

4:01:12सिर्फ 10 इंच शेर क्रॉपर्स और लैंडलेस

4:01:16लेबर्स में तब्दील हो गए थे किसान अक्सर

4:01:18इस शोषण का विरोध करते थे और कई बार इन

4:01:22हालातो से परेशान होकर किसान क्राइम का

4:01:24रास्ता भी चुन लेते थे क्योंकि भूखे करने

4:01:27से तो वही रास्ता अच्छा नजर आता था इसलिए

4:01:30कुछ किसान रोबरी डेकोरेटिव और सोशल

4:01:33बांडेटरी जैसी एक्टिविटीज में भी इंवॉल्वड

4:01:35होते दिखते हैं और एक दूसरा रास्ता था साथ

4:01:38मिलकर विद्रोह करना जिसके कुछ एग्जांपल्स

4:01:41को आज हम डिस्कस करने वाले हैं प्रेजेंट

4:01:43मूवमेंट्स को हम दो कैटिगरीज में डिवाइड

4:01:46कर सकते हैं

4:02:101859 में हुए इंडिगो रिपोर्ट की

4:02:15इंडिगो रिवॉल्ट 185960

4:02:18इंडिगो रिवॉल्ट यह नील विद्रोह

4:02:21185960 के बीच बंगाल में हुआ था यहां

4:02:25किसने ने यूरोपीय प्लांटर्स के खिलाफ

4:02:27विद्रोह किया था जो उन्हें इंडिगो यानी की

4:02:30नील की खेती करने के लिए फोर्स करते थे

4:02:33बंगाल में इंडिगो का कल्टीवेशन 1780 के

4:02:37अराउंड शुरू हो गया था उसे समय

4:02:39इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन की वजह से यूरोप

4:02:42में इंडिगो की डिमांड काफी हाय रहती थी

4:02:44क्योंकि इस ब्लू दी का उसे टेक्सटाइल

4:02:47इंडस्ट्री में किया जाता था इसी का फायदा

4:02:50उठाने के लिए यूरोपियन प्लांटर्स इंडिया

4:02:52में इंडिगो कल्टीवेशन करवाते थे

4:02:55कल्टीवेशन

4:03:02अपनी जमीन पर ही इंडिगो कल्टीवेट करते थे

4:03:05और सिस्टम में प्लांटर्स बंगाल के किसने

4:03:08की जमीन पर इंडिगो की खेती करते थे

4:03:11है इसके लिए यह किसने के साथ कॉन्ट्रैक्ट

4:03:14साइन करते थे और उन्हें एडवांस लोन ऑफर

4:03:17करते थे यह पूरा सिस्टम बहुत ही ऑपरेशन

4:03:19हुआ करता था किसान को उसकी सबसे अच्छी

4:03:22जमीन पर इंडिगो गो करनी पड़ती थी इसके

4:03:25अलावा प्लांटर्स इनके प्रोड्यूस का बहुत

4:03:27ही कम रेट ऑफर करते थे जी वजह से किसान ना

4:03:31तो कभी इनका लोन रिपेयर कर पाते थे और ना

4:03:33ही इस सिस्टम से खुद को बाहर कर पाते थे

4:03:35गवर्नमेंट अथॉरिटी और रूल्स भी प्लांटर्स

4:03:39को ही फीवर करते थे इस शोषण से परेशान

4:03:42होकर 1859 में बंगाल के नदिया जिला के

4:03:46प्रेजेंस इंडिगो कल्टीवेट करने से माना कर

4:03:48देते हैं इन्हें लीड कर रहे थे दो भाई

4:03:51दिगंबर विश्वास और विष्णु विश्वास और जब

4:03:55प्लांटर्स इन्हें फोर्स करने के लिए अपने

4:03:57लाठील्स भेजते हैं तो यह उनके ऊपर काउंटर

4:04:00अटैक कर देते हैं

4:04:02बंगाल की एजुकेटेड क्लास भी इस आंदोलन में

4:04:05इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती है न्यूज़ पेपर

4:04:07कैंपेन मास मीटिंग्स और पीजेंस के

4:04:10ग्रीवेंस पर मेमोरंडा तैयार करके इनके

4:04:13कैसे को सपोर्ट किया जाता है

4:04:15दीनबंधु मित्र अपने प्ले नील दर्पण के

4:04:18जारी किसने की मिसरेबल कंडीशन को हाईलाइट

4:04:21करते हैं और ये रिवॉल्ट के लिए एक

4:04:23इंपॉर्टेंट सोर्स ऑफ इंस्पिरेशन बन जाता

4:04:25है आंदोलन को तीव्र होता देख ब्रिटिश

4:04:28गवर्नमेंट एक नोटिफिकेशन इशू करती है

4:04:30जिसमें कहा जाता है की रेट अपनी जमीन पर

4:04:33अपनी पसंद की क्रॉप गो करने के लिए फ्री

4:04:36हैं और पुलिस का कम है की उनके इस राइट को

4:04:39प्रोटेस्ट किया जाए अगर प्लांटर्स को लगता

4:04:42है की किसी ने कॉन्ट्रैक्ट को ब्लीच किया

4:04:44है तो वो सिविल कोर्ट में अपील कर सकते

4:04:46हैं इसके अलावा 1860 में इंडिगो कमीशन भी

4:04:50अप्वॉइंट की जाति है और इसकी रिकमेंडेशन

4:04:52को 1860 के एक्ट सिक्स में शामिल किया

4:04:55जाता है इसके बाद इंडिगो प्लांटर्स

4:04:58धीरे-धीरे बंगाल से बिहार और उत्तर प्रदेश

4:05:00की तरफ मूव कर जाते हैं इंडिगो रिवॉल्ट के

4:05:04बाद अब बात करते हैं बंगाल में ही हुए एक

4:05:07और आंदोलन

4:05:111870 और 1880 के दौरान पूर्वी बंगाल के एक

4:05:15बड़े हिस में एग्रेरियन अनरेस्ट देखने को

4:05:18मिलता है इसका मुख्य करण जमींदारा की

4:05:21ऑपरेसिव प्रैक्टिस थी

4:05:23जमींदार्ज अक्सर लीगल लिमिट से ज्यादा

4:05:26रिवेन्यू डिमांड करते थे इसके अलावा 1859

4:05:30के रेंट एक्ट 10 के अनुसार किसने को

4:05:33ऑक्युपेंसी राइट्स भी नहीं लेने देते थे

4:05:35एक्ट के अनुसार अगर लगातार 12 साल तक कोई

4:05:39किसान सिम प्लॉट ऑफ लैंड को कल्टीवेट करता

4:05:41है तो उसे लैंड के ऑक्युपेंसी राइट्स दिए

4:05:44जान थे लेकिन जमींदार जैसा बिल्कुल नहीं

4:05:47जाते थे और इसीलिए वो अक्सर फोर्सफुली

4:05:50किसने को जमीन से लिखल कर देते थे उनकी

4:05:53फसल और कैटल को साइज कर लेते थे और कोर्ट

4:05:56में लिटिगेशन भी फाइल कर देते थे जो काफी

4:05:59लंबा चलते थे और किसान के लिए महंगे साबित

4:06:01होते थे

4:06:02है इस सबसे परेशान होकर पावना जिला के

4:06:05युसूफ शाही परगना के किसान एग्रेरियन लीग

4:06:09की फॉर्मेशन करते हैं

4:06:10लेग रेंट स्ट्राइक ऑर्गेनाइजर करती है

4:06:13यानी की किसान बड़ा हुआ रिवेन्यू देने से

4:06:15माना कर देते हैं और जमींदारा को कोट्स

4:06:18में चैलेंज करते हैं कोर्ट के इसको फाइट

4:06:21करने के किसान फंड जमा करते हैं इनका

4:06:24संघर्ष पूरे भावना और पूर्वी बंगाल के कुछ

4:06:27और डिस्ट्रिक्ट तक फेल जाता है यहां

4:06:30स्ट्रगल का में फॉर्म लीगल रेजिस्टेंस ही

4:06:32राहत है और इसीलिए बहुत कम वायलेंस देखने

4:06:35को मिलती है

4:06:36किसने का संघर्ष वैसे तो 1885 तक चला राहत

4:06:40है लेकिन ज्यादातर केसेस थोड़ा ऑफिशल

4:06:42परसूएसन और थोड़ा जमींदार के डर की वजह

4:06:47को ऑक्युपेंसी राइट्स मिल जाते हैं और

4:06:50बड़ा हुआ रेंट भी नहीं चुकाना पड़ता इसके

4:06:53अलावा गवर्नमेंट जमींदारा के ऑपरेशन को

4:06:56प्रोटेस्ट करने के लिए कानून बनाने का

4:06:58प्रॉमिस भी करती है

4:07:02किया जाता है पबन रिवॉल्ट के दौरान भी

4:07:05बहुत सी इंडियन इंटेलेक्चुअल ने पेजयंस

4:07:08कैसे को सपोर्ट किया था इसमें बंकिम चंद्र

4:07:10चटर्जी आरसी डेट और सुरेंद्रनाथ बनर्जी के

4:07:14नेतृत्व में इंडियन संगठन शामिल थी

4:07:17पूर्वी रीजन के बाद अब चलते हैं वेस्टर्न

4:07:20इंडिया की तरफ डेक्कन राय

4:07:23वेस्टर्न इंडिया के डेक्कन रीजन में

4:07:25ब्रिटिश वादी सिस्टम इंट्रोड्यूस किया था

4:07:28यहां के किसान इस सिस्टम के तहत लगाएं गए

4:07:31हैवी टैक्सेशन से परेशान थे जिसके करण वो

4:07:35मनी लैंडर की दाल में फैंस चुके थे यह मनी

4:07:38लैंडर्स ज्यादातर आउटसाइडर्स थे और

4:07:40मारवाड़ी और गुजराती कम्युनिटी को बिलॉन्ग

4:07:43करते थे

4:07:441864 में अमेरिकन सिविल वार खत्म होने के

4:07:47बाद सिचुएशन और खराब हो जाति है क्योंकि

4:07:50अमेरिका से एक बार फिर कॉटन की सप्लाई

4:07:52होने लगती है और इसलिए कॉटन के दम काफी

4:07:56गिर जाते हैं ऐसे समय में 1867 में

4:07:59गवर्नमेंट लैंड रिवेन्यू को भी 50% तक

4:08:02बड़ा देती है और साथ ही कई साल लगातार

4:08:05यहां के किसान क्रॉप फेलियर का सामना करते

4:08:08हैं इन सब के करण किसान की कंडीशन और

4:08:11ज्यादा खराब होने लगती है

4:08:131874 में मनी लैंडर्स और किसने के बीच

4:08:16टकराव बहुत बाढ़ जाता है और किसान आउटसाइड

4:08:23मूवमेंट शुरू कर देते हैं यह लोग उनकी शॉप

4:08:26से समाज लेना बैंड

4:08:29की जमीन को कल्टीवेट नहीं करता और गांव के

4:08:33बाबर्स वाशमान श मार्क्स भी इन्हें सर्व

4:08:36करने से माना कर देते

4:08:39ही पुणे अहमदनगर सोलापुर और सतारा के गांव

4:08:43तक फेल जाता है और उसके बाद सोशल बॉयकॉट

4:08:47एग्रेरियन राइट्स में ट्रांसफार्मर होने

4:08:49लगता है

4:08:50मनीलेंडर के घर और दुकान पर अटैक शुरू हो

4:08:53जाते हैं किसान नेट बैंड और डीडीएस को

4:08:56अपने कब्जे में लेकर इन्हें पब्लिकली जल

4:08:58देते हैं लेकिन गवर्नमेंट फोर्स का उसे

4:09:02करके मूवमेंट को सरप्राइज करने में सफल

4:09:04रहती है

4:09:11[संगीत]

4:09:12इस आंदोलन के दौरान भी महाराष्ट्र के

4:09:15इंटेलिजेंस आने किसने को सपोर्ट किया था

4:09:19दोस्तों 19 सेंचुरी के कुछ इंपॉर्टेंट

4:09:22प्रेजेंट मूवमेंट को दो हमने डिस्कस कर

4:09:24लिया आई अब इनके फीचर्स को समझ लेते हैं

4:09:28करैक्टेरिस्टिक फीचर्स ऑफ 19 सेंचुरी

4:09:30प्रेजेंट मोमेंट्स

4:09:3319th सेंचुरी के दौरान हुए किसान आंदोलन

4:09:36में पिजेंसी में फोर्स बनकर उभरते हैं यह

4:09:39लोग डायरेक्टली अपनी डिमांड्स के लिए फाइट

4:09:41करते दिखते हैं और इनकी ज्यादातर डिमांड

4:09:44इकोनामिक इश्यूज से संबंधित थी यह आंदोलन

4:09:48किसान की इमीडिएट एनीमीज के अगेंस्ट

4:09:50डायरेक्टेड थे फिर चाहे वो फॉरेन

4:09:53प्लांटर्स हो इंडिजन जमींदारा हो या फिर

4:09:56मनीलेंडर इसके अलावा आंदोलन की

4:09:58ऑब्जेक्टिव्स भी स्पेसिफिक और लिमिटेड ही

4:10:01थे यह सिर्फ कुछ पर्टिकुलर ग्रीवेंस का ही

4:10:04रिड्रेसल चाहते थे इन्होंने डायरेक्ट

4:10:07कॉलोनियलिज्म को टारगेट नहीं किया था और

4:10:11एक्सप्लोइटेशन या सबोर्डिनेशन के सिस्टम

4:10:13को खत्म करना था

4:10:15इन आंदोलन की टेरिटोरियल रिच भी लिमिटेड

4:10:18थी

4:10:19संघर्ष में कोई कंटिन्यूटी या फिर लॉन्ग

4:10:22टर्म ऑर्गेनाइजेशन भी देखने को नहीं मिलता

4:10:26अपने लीगल राइट्स के प्रति स्ट्रांग

4:10:28अवेयरनेस डेवलप करते हैं और इन्हें कोट्स

4:10:31के बाहर और अंदर असार भी करते हैं

4:10:34किसान आंदोलन के फीचर्स को समझना के बाद

4:10:37इनकी कुछ लिमिटेशंस भी जान लेते हैं

4:10:39लिमिटेड

4:10:50या फिर नया सोशल इकोनामिक और पॉलीटिकल

4:10:53प्रोग्राम भी नहीं था यह संघर्ष मिलिटेंट

4:10:57होते हुए भी ओल्ड सोसाइटल ऑर्डर के

4:11:00फ्रेमवर्क में ही हुए थे और उनके पास और

4:11:02टर्निंग सोसाइटी को लेकर किसी भी तरह का

4:11:05कॉन्सेप्ट नहीं था

4:11:06है लेकिन 20th सेंचुरी के प्रेजेंट

4:11:09मूवमेंट्स नेशनल फ्रीडम स्ट्रगल से डिपलाई

4:11:12इन्फ्लुएंस भी थे और इनका इंपैक्ट भी

4:11:14फ्रीडम स्ट्रगल पर देखने को मिलता है तो

4:11:17आई अब इनके बड़े में बात करते हैं

4:11:2020th सेंचुरी प्रेजेंट मूवमेंट्स 20th

4:11:23सेंचुरी के प्रेजेंट मूवमेंट्स में सबसे

4:11:25पहले गांधीजी द्वारा लीड 1917 का चंपारण

4:11:28सत्याग्रह और 1918 का खेड़ा सत्याग्रह आते

4:11:32हैं इन्हें हमने गांधी जी के इनिशियल

4:11:35मूवमेंट के वीडियो में कर किया हुआ है

4:11:37इसके अलावा इस दौरान किसान सभा मूवमेंट भी

4:11:40शुरू होता है आई उसके बड़े में जानते हैं

4:11:49अप में ऑर्गेनाइजर किया जाता है फरवरी

4:11:521918 में गौरी शंकर मिश्रा और इंद्र

4:11:56नारायण द्विवेदी यूनाइटेड प्रोविंस किसान

4:11:58सभा सेट अप करते हैं

4:12:00मदन मोहन मालवीय भी इनके एफर्ट्स को

4:12:03सपोर्ट करते हैं

4:12:10इसके साथ हिंगोली सिंह दुर्गापाल सिंह और

4:12:13बाबा रामचंद्र जैसे प्रॉमिनेंट लीडर्स भी

4:12:16जुड़ने हैं जून 1920 में बाबा रामचंद्र

4:12:20नेहरू जी से यहां के गांव को विजिट करने

4:12:23के लिए कहते हैं

4:12:31फिर अक्टूबर 1920 में अवध किसान सभा की

4:12:34फॉर्मेशन होती है यह किसने से कहते हैं की

4:12:37वो बेदखली लैंड को तिल ना करें और साथ ही

4:12:40बगर यानी की उन पेड़ लेबर ऑफर ना करने का

4:12:44भी सुझाव देते हैं जो लोग इन कंडीशंस को

4:12:47नहीं मानते उनका बॉयकॉट किया जाता है और

4:12:50सभी डिस्प्यूट को पंचायत के द्वारा सॉल्व

4:12:53किया जाता है

4:12:54किसान सभा पहले मास मीटिंग्स और

4:12:58मोबिलाइजेशन के द्वारा ही प्रोटेस्ट करती

4:13:00हैं लेकिन जैनुअरी 1921 में यह पैटर्न

4:13:03चेंज हो जाता है और बाजार घर और अनाज

4:13:07गोदाम को लूटना शुरू कर दिया जाता है

4:13:14एक्टिविटी के मेजर सेंटर रायबरेली फैजाबाद

4:13:17और सुल्तानपुर के जिला थे लेकिन यह आंदोलन

4:13:21जल्दी ही डिक्लिन हो जाता है

4:13:31से लेकिन कुछ समय बाद ही अप में एक और

4:13:33किसान आंदोलन शुरू हो जाता है

4:13:36टीका मूवमेंट

4:13:381921 के और में एक बार फिर अप के नॉर्दर्न

4:13:42डिस्ट्रिक्ट जैसे की हरदोई बहराइच और

4:13:45सीतापुर में प्रेजेंट डिस्कंटेंट दिखने

4:13:48लगता है इसके पीछे कई करण थे जैसे की हाय

4:13:51रेंज जो की रिकॉर्डिंग रेट से 50% ही था

4:13:54रिवेन्यू कलेक्शन के इंचार्ज द्वारा किसने

4:13:57का शोषण और शेर रेंस की प्रैक्टिस

4:14:00इसके अगेंस्ट शुरू होता है एक आया यूनिटी

4:14:04मूवमेंट इसको लीडरशिप देते हैं मदारी पासी

4:14:07और बाकी के लोगास्ट लीडर बहुत से छोटे

4:14:11जमीदार भी इनका साथ देते हैं इसकी

4:14:14मीटिंग्स में किसने को प्रतिज्ञा दिलाई

4:14:16जाति है की वो सिर्फ रिकॉर्ड रिवेन्यू को

4:14:19ही पे करेंगे अपनी जमीन से बेदखल किया जान

4:14:22पर वहां से नहीं जाएंगे फोर्स लेबर से

4:14:26इनकार करेंगे और पंचायत के डिसीजंस का

4:14:29पालनपुर करेंगे

4:14:30आंदोलन काफी तेजी से फैलता है लेकिन

4:14:33अथॉरिटी द्वारा सीवर रिप्रेशन के करण

4:14:35मार्च 1922 तक इस आंदोलन का भी और हो जाता

4:14:39है

4:14:40नॉर्थ के बाद अब चलते हैं सदन रीजन की तरफ

4:14:43जहां किसान आंदोलन नेशनल मूवमेंट के साथ

4:14:46मौज होता है

4:14:50मैपिला रिवॉल्ट

4:14:52मैपिलर्स मालाबार रीजन में रहने वाले

4:14:54मुस्लिम टिनेंट्स थे और यहां ज्यादातर

4:14:57जमींदारा हिंदू

4:14:59में भी जमींदारा के द्वारा किया जा रहे

4:15:02शोषण का विरोध किया

4:15:10और बाकी के शोषणकारी इलीगल डिमांड जाते थे

4:15:141920 में लोकल कांग्रेस बॉडी टैलेंट

4:15:18लैंडलॉर्ड रिलेशनशिप को रेगुलेट करने के

4:15:20लिए गवर्नमेंट से लेजिसलेशन लाने की

4:15:22डिमांड करती है इससे माप्पिलास का भी

4:15:24हौसला बढ़ता है और जल्दी ही इनका आंदोलन

4:15:27उसे समय चल रहे खिलाफत एजीटेशन के साथ

4:15:30मर्ज हो जाता है

4:15:32खिलाफत आंदोलन के नेता जैसे की गांधीजी

4:15:34शोकत अली और मौलाना आजाद मैपिलाज की

4:15:38मीटिंग्स को एड्रेस करते हैं नेशनल लीडर्स

4:15:41के अरेस्ट के बाद लीडरशिप लोकल मैपिला

4:15:43लीडर्स के हाथ में ए जाति है

4:15:45अगस्त 1921 में सिचुएशन खराब होने लगती है

4:15:49क्योंकि इनके एक लीडर अली मसलिया को

4:15:52अरेस्ट कर लिया जाता है जिसके बाद बड़े

4:15:55शुरू हो जाते हैं शुरुआत में तो ब्रिटिश

4:15:58अथॉरिटी के सिंबल्स को टारगेट किया जाता

4:16:00है लेकिन बाद में रिबेलीयन पुरी तरह अपना

4:16:03करैक्टर चेंज कर लेट है

4:16:07शुरू कर देते हैं क्योंकि इन्हें लगता है

4:16:18है और एक एंटी गवर्नमेंट और एंटी

4:16:20लैंडलॉर्ड आंदोलन कम्युनल होने लगता है

4:16:22इसके बाद गवर्नमेंट अपनी पुरी ताकत के साथ

4:16:26इसको सरप्राइज करने में ग जाति है और

4:16:28दिसंबर 1921 तक आंदोलन पुरी तरह खत्म हो

4:16:32जाता है

4:16:33मैपिलाज को इस तरह से प्रेस किया गया की

4:16:36आजादी तक उन्होंने फिर किसी आंदोलन में

4:16:39भाग नहीं लिया

4:16:41आई अब 28 सेंचुरी के दौरान हुए बाकी के

4:16:44प्रेजेंट मूवमेंट्स और उनसे रिलेटेड

4:16:46डेवलपमेंट को ब्रीफ में देखते हैं अगर

4:16:48इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट्स दोस्तों 28th

4:16:52सेंचुरी के प्रेजेंट मूवमेंट में बारडोली

4:16:54सत्याग्रह भी आता है यह 1926 में गुजरात

4:16:58के बारडोली जिला में शुरू हुआ था यहां

4:17:01किसान लैंड रिवेन्यू में की गई 30% की

4:17:04बढ़ोतरी का विरोध कर रहे थे इसे सरदार

4:17:07वल्लभभाई पटेल

4:17:09ने ही उन्हें सरदार का टाइटल दिया था

4:17:13आंदोलन तेज होने पर ब्रिटिश गवर्नमेंट एक

4:17:16कमेटी सेटअप करती है जिसमें रिवेन्यू हाय

4:17:19को ऊंजस्ट पाया जाता है और सिर्फ

4:17:226.03% का ही इंक्रीज किया जाता है

4:17:25है इसके अलावा अप्रैल 1936 में लखनऊ में

4:17:28जो इंडिया किसान सभा फॉर्म की जाति है

4:17:31स्वामी सहजानंद सरस्वती इसके प्रेसिडेंट

4:17:34बनते हैं और ग रंग जनरल सेक्रेटरी किसान

4:17:38मेनिफेस्टो इशू किया जाता है और इंदु लाल

4:17:40याग्निक के अंदर प्रिडिकल भी शुरू किया

4:17:43जाता है इसके अलावा आजादी मिलने से ठीक

4:17:46पहले भी कुछ पेशेंट मूवमेंट्स देखने को

4:17:49मिलते हैं जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी का

4:17:51रोल बहुत ज्यादा राहत है पहले था 1946 में

4:17:55बंगाल में हुआ तेभागा मूवमेंट यहां बंगाल

4:17:58प्रोविंशियल किसान सभा

4:18:07स्टूडेंट गांव जाकर शेर क्रॉपर्स को

4:18:10ऑर्गेनाइजर करते हैं लेकिन जल्दी ही ये

4:18:12आंदोलन कमजोर हो जाता है इसके पीछे कुछ

4:18:14मुख्य करण थे जैसे की मुस्लिम लीग की

4:18:17मिनिस्ट्री द्वारा बार्गधारी विला अनाउंस

4:18:20करना जिसमें रेंट पे कुछ रिलीफ ऑफर की गई

4:18:23थी

4:18:24दूसरा आंदोलन जुलाई 1946 में शुरू हुआ था

4:18:27इसे तेलंगाना मूवमेंट बोला जाता है

4:18:34यह मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री का सबसे बड़ा

4:18:36प्रेजेंट गोरिल्ला वार था इसका इफेक्ट

4:18:393000 गांव और लगभग 30 लाख लोगों पर हुआ था

4:18:43यहां कम्युनिस्ट के नेतृत्व में

4:18:46निजाम की रजाकार फोर्स का बहादुर से सामना

4:18:50करते हैं और लगभग 2 साल तक अपना संघर्ष

4:18:53जारी रखते हैं

4:18:551948 में इंडियन सिक्योरिटी फोर्सेस

4:18:57द्वारा हैदराबाद की टेकओवर के बाद ये

4:19:00आंदोलन धीरे-धीरे खत्म हो जाता है

4:19:03कंक्लुजन दोस्तों इस तरह प्रेजेंट

4:19:06मूवमेंट्स के द्वारा इंडिया के किसने ने

4:19:09ब्रिटिश अथॉरिटी को लगातार चैलेंज किया था

4:19:12शुरुआत में भले ही इनके टारगेट्स में

4:19:14सिर्फ इमीडिएट ऑपरेशंस हो लेकिन बाद में

4:19:17यह डायरेक्टली ब्रिटिश कॉलोनियल रूल का

4:19:20विरोध करते दिखते हैं इन्होंने नेशनल

4:19:22मूवमेंट को भी अपनी प्रेजेंट से स्ट्रेंजर

4:19:25किया किसने के पार्टिसिपेशन के बिना नेशनल

4:19:28मूवमेंट कभी सफल नहीं हो सकता था यह बात

4:19:31गांधीजी बहुत अच्छी तरह समझते थे और

4:19:34इसीलिए उन्होंने पैसों को डायरेक्टली

4:19:36नेशनल मूवमेंट से जोड़ने का कम किया

4:19:38प्रेजेंट मूवमेंट्स ने पोस्ट इंडिपेंडेंस

4:19:41एग्रेरियन रिफॉर्म्स का एटमॉस्फेयर भी

4:19:43क्रिएट किया जैसे की आजादी के बाद

4:19:46जमींदारी सिस्टम को अबॉलिश कर दिया जाता

4:19:48है और भी बहुत साड़ी रिफॉर्म्स

4:19:50इंट्रोड्यूस किया जाते हैं जो कहानी ना

4:19:53कहानी आजादी से पहले प्रेजेंट मूवमेंट की

4:19:55डिमांड रहे थे

4:19:57डी रिवॉल्ट 1857 पार्ट वन दोस्तों आज हम

4:20:02बात करने वाले हैं 1857 के रिवॉल्ट की

4:20:05जिसे सिपाही मुटनी क्रीलिन या फर्स्ट वार

4:20:10ऑफ इंडिपेंडेंस जैसे नाम से भी जाना जाता

4:20:12है

4:20:1410th में 1857 को मेरठ से और यह धीरे-धीरे

4:20:18नॉर्थ में पंजाब से लेकर साउथ में नर्मदा

4:20:22तक और ईस्ट में बिहार से लेकर वेस्ट में

4:20:24राजपूताना रीजन तक को कर कर लेट है

4:20:27रिवॉल्ट की डीटेल्स में जान से पहले इसके

4:20:30पीछे के करण समझना जरूरी हो जाता है तो आई

4:20:33पहले उन्हें समझते हैं

4:20:41कोई एक करण नहीं बल्कि बहुत से करण

4:20:44जिम्मेदार थे यह रिपोर्ट नतीजा था ब्रिटिश

4:20:47कॉलोनियल रूल के 100 साल के अत्याचारों जी

4:20:51हां 1757 की बैटल ऑफ प्लासी के बाद इंडिया

4:20:54में ब्रिटिश कॉलोनियल रूल की शुरुआत हुई

4:20:56थी और तब से लेकर 1857 आने तक ब्रिटिश ने

4:21:00बहुत से ऐसे कम किया थे जिसकी वजह से

4:21:03इंडिया के लोगों में उनके खिलाफ आक्रोश

4:21:05पैदा हो रहा था इस आक्रोश कोचिंग गाड़ी

4:21:08मिलती है 1857 में और शुरुआत होती है

4:21:10इंडिया के फर्स्ट वार ऑफ इंडिपेंडेंस की

4:21:14आई पहले आक्रोश के अलग-अलग कर्म को समझते

4:21:17हैं सबसे पहले बात करते हैं पॉलीटिकल

4:21:20ज्ञानी की राजनीति कर्म की

4:21:22पॉलीटिकल कॉसेस दोस्तों ब्रिटिश इंडिया

4:21:27कंपनी इंडिया में अपनी पावर और प्रेस्टीज

4:21:29को बढ़ाने के लिए जो कुछ भी पॉसिबल था कर

4:21:32रही थी इसके लिए चाहे उसे अपने प्रोमाइज

4:21:35को तोड़ना पड़े या फिर क्यूटिस को

4:21:37डिसऑर्डर करना पड़े इसकी वजह इंडियन

4:21:39रुलर्स को उनकी इंटेंशंस पर डाउट होने लगा

4:21:42था और जब ब्रिटिश सब्सिडियरी एलाइंस और

4:21:45फिर डॉक्टरी नवलप्स जैसी पॉलिसी के तहत

4:21:48इंडियन स्टेटस को एनएक्स करना शुरू कर

4:21:50देते हैं तब जैसे पानी सर से ऊपर ही चला

4:21:53जाता है सभी इंडियन रुलर्स के मां में यह

4:21:56डर ए जाता है की अगला नंबर उनका ही हो

4:21:59सकता है यही वजह थी की बहुत से इंडियन

4:22:02रुलर्स 1857 के रिवॉल्वड के समय ब्रिटिश

4:22:05के खिलाफ हथियार उठा लेते हैं अब बात करते

4:22:08हैं

4:22:13इकोनामिक कॉसेस दोस्तों ब्रिटिश ईस्ट

4:22:17इंडिया कंपनी का में मोटिव तो इंडिया में

4:22:19ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट ऑन करना ही था

4:22:21इसके लिए तरीके उन्होंने अलग-अलग इस्तेमाल

4:22:27से इंडिया की ट्रेडिशनल इकोनामी पुरी तरह

4:22:31से डिस्ट्रॉय होने लगती है

4:22:32ऐसी कोई इकोनामिक क्लास नहीं थी जिसे

4:22:36ब्रिटिश रूल में नुकसान नहीं हुआ चाहे फिर

4:22:39वो बैगन सो मर्चेंट हूं आर्टिजंसू या फिर

4:22:42जमीदार ही क्यों ना हो

4:22:44ब्रिटिशर्स ने जो लैंड रिवेन्यू सिस्टम

4:22:46इंडिया में इंट्रोड्यूस किया थे जैसे की

4:22:48परमानेंट सेटलमेंट रियट वादी सिस्टम या

4:22:51महालवाड़ी सिस्टम सभी में रिवेन्यू रेट्स

4:22:54इतने ही रखें गए थे की प्रेजेंस की कंडीशन

4:22:56मिसिबल हो जाति है रिवेन्यू चुकाने के लिए

4:23:00उन्हें कर्ज लेने की जरूर पढ़ने लगती है

4:23:02और इस तरह वो धीरे-धीरे मनी लैंडर्स के

4:23:04दाल में फंसे लगता हैं इसके साथ ही

4:23:07एग्रीकल्चर के बढ़ते कमर्शियल ने भी

4:23:09प्रेजेंस की हालात खराब कर दी थी इसी तरह

4:23:12ट्रेडिशनल कम जमींदारा को भी रिवेन्यू

4:23:14चुकाने में डर होने पर सनसेट क्लोज़ की

4:23:17वजह से कई बार अपनी जमींदारी से हाथ धोना

4:23:19पड़ता था एग्जांपल के तोर पर अवध में

4:23:2221000 ताल्लुकदर्स जो की वहां की जमींदारा

4:23:26को कहा जाता था उनकी स्टेटस को कन्फ्यूज्ड

4:23:28कर लिया गया था इसी तरह इंडियन ट्रेड और

4:23:32मर्केंटाइल क्लास को भी ब्रिटिश पॉलिसीज

4:23:34की वजह से नुकसान हो रहा था ब्रिटिशर्स ने

4:23:37इंडिया के गुड्स पर तो हाईटेक ड्यूटीज

4:23:39इंपोज कर दी थी जबकि इंडिया में ब्रिटिश

4:23:42गुड्स के इंपोर्ट पर बहुत ही लो टैरिफ

4:23:45रखें हुए थे इसकी वजह से इंडिया से कॉटन

4:23:47और सिल्क टैक्सटाइल्स का एक्सपोर्ट पुरी

4:23:50तरह खत्म होने की कागर पर ए गया था

4:23:52आर्टिजंस और हैंडीक्राफ्ट के लोगों को भी

4:23:55अनइंप्लॉयमेंट का सामना करना पद रहा था

4:23:57इंडियन रुलर्स जो इन्हें पैट्रिक देने का

4:24:00कम करते थे उनके स्टेटस को तो ब्रिटिशर्स

4:24:02ने अलेक्स कर लिया था इसके साथ ही इंडियन

4:24:05हैंडीक्राफ्ट्स को डिस्चार्ज करके ब्रिटिश

4:24:07गुड्स को प्रमोट किया जा रहा था जिसके

4:24:10परिणाम स्वरूप इंडियन आर्टिजंस अपा के लिए

4:24:13कोई दूसरा रास्ता खोजना पर मजबूर हो गए थे

4:24:16और वो मिलन भी बहुत मुश्किल हो रहा था

4:24:18क्योंकि मॉडर्न इंडस्ट्रीज का डेवलपर भी

4:24:20इंडिया में नहीं हो रहा था इस तरह से

4:24:23ब्रिटिश की शोषणकारी आर्थिक नेशन के करण

4:24:26इंडिया के लोगों की आर्थिक स्थिति खराब

4:24:29होती जा रही थी और ये एक बहुत बड़ा करण

4:24:32बंटी है 1857 के रिपोर्ट का आई अब बात

4:24:36करते हैं कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव कर्म की

4:24:39एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्सेज दोस्तों कंपनी के

4:24:43एडमिनिस्ट्रेशन में बहुत ज्यादा करप्शन

4:24:45फैला हुआ था जिसकी वजह से आम लोग बहुत

4:24:48परेशान थे इसके साथ ही कंपनी का

4:24:51एडमिनिस्ट्रेशन इंडिया के लोगों के लिए

4:24:52एकदम फौरन था कंपनी के साथ किसी भी तरह का

4:24:56कोई रिलेशन लोग महसूस नहीं कर पाते थे साथ

4:25:00ही एडमिनिस्ट्रेशन की भाषा और दूर तरीके

4:25:02भी उनके लिए समझना मुश्किल हो रहा था

4:25:08कोई भी नहीं था इस वजह से भी लोगों में

4:25:11ब्रिटिश रूल के खिलाफ असंतोष की भावना बनी

4:25:14हुई थी अब बात करते हैं कंपनी के खिलाफ

4:25:17पैदा हुए आक्रोश के पीछे के कुछ सोशल

4:25:20रिलिजियस कॉसेस की

4:25:23सोशल रिलिजियस कोर्सेज दोस्तों ब्रिटिशर्स

4:25:27कभी भी इंडियन को अपने बराबर का नहीं

4:25:29समझते थे उनके एटीट्यूड में रेसिजम और

4:25:32सुपीरियर परिसर भारत हुआ था इसकी वजह से

4:25:36एक आक्रोश तो लोगों में था ही इसके साथ ही

4:25:39ब्रिटिशर्स बहुत सी ऐसी सोशल रिलिजियस

4:25:41पॉलिसी फॉलो करते हैं जिसकी वजह से ये

4:25:44आक्रोश और भी ज्यादा बढ़ाने लगता है इसमें

4:25:46सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है क्रिश्चियन

4:25:48मिशनरीज की एक्टिविटी वो अलग-अलग त्रिकोण

4:25:51से इंडिया के लोगों को कन्वर्ट करने की

4:25:53कोशिश कर रहे थे जिसकी वजह से लोग उन्हें

4:25:56एक खतरे की तरह देखने लगे थे इसके साथ ही

4:25:59ब्रिटिशर्स भी ऐसे कुछ कानून बनाते हैं

4:26:01जिससे लोगों को विश्वास होने लगता है की

4:26:04ब्रिटिश उनके रिलिजन को चैलेंज कर रहे हैं

4:26:07इसके एग्जांपल्स हैं मंदिर और मस्जिद की

4:26:10जमीन पर टैक्स लगाने का डिसीजन

4:26:121856 का रिलिजियस डिसेबिलिटीज एक्ट जिसमें

4:26:16कहा गया था की रिलिजन चेंज करने पर भी

4:26:18एन्सेस्ट्राल प्रॉपर्टी में हिस्सा बना

4:26:20रहेगा

4:26:21इसके साथ ही ब्रिटिशर्स के द्वारा किया गए

4:26:24कुछ सोशल रिलिजियस रिफॉर्म्स को भी लोग

4:26:26अपने ट्रेडीशंस में बाहरी दखल की तरह

4:26:28देखते हैं फिर चाहे बात सती प्रथम पर बन

4:26:31की हो विडोरी मैरिज एक्ट पास करने की या

4:26:34फिर वूमेन को एजुकेशन देने की इन सभी

4:26:37रिफॉर्म्स की वजह से भी समाज के एक बड़े

4:26:40वर्ग में ब्रिटिश के खिलाफ आक्रोश की

4:26:42भावना जन्म ले चुकी थी दोस्तों 1857 के

4:26:46रिवॉल्वड की शुरुआत आर्मी के सिपाही के

4:26:48द्वारा हुई थी इसलिए कुछ ऐसे कर्म को भी

4:26:52समझ लेते हैं जिनका संबंध इसके साथ था

4:26:55रीजंस पर बॉयज

4:27:01भी अल में पार्ट तो इंडियन सोसाइटी के ही

4:27:04थे इसीलिए जो भी परेशानी जनरल सोसाइटी में

4:27:07हो रही थी वह सब रीजन टॉयज में आक्रोश

4:27:10पैदा कर ही रहे थे और इसमें भी सबसे

4:27:13ज्यादा जी बात का उन्हें डर था वह थी की

4:27:15ब्रिटिशर्स उनका धर्म नष्ट करना चाहते

4:27:25हैं

4:27:32गली देकर बुलाया करते थे साथ ही इंडियन के

4:27:35लिए आगे बढ़ाने के रास्ते भी नहीं खुला थे

4:27:37वो सूबेदार की पोस्ट से आगे नहीं जा सकते

4:27:40थे यह ब्रिटिशर्स के रेसिजम का एक प्रतीक

4:27:43था

4:27:44सेप्वॉयज के डिसेटिस्फेक्शन का एक रिसेंट

4:27:47करण भी था और वह था ब्रिटिश का एक ऑर्डर

4:27:50जिसमें कहा गया था की सिंह और पंजाब में

4:27:54सर्विस के लिए जान पर सेप्वॉयज को कोई

4:27:56फॉरेन अलाउंस नहीं मिलेगा जैसा की उन्हें

4:27:58अब तक मिलता आया था इसके साथ ही अवध

4:28:02कईनेक्सेशन एक बड़ा करण था क्योंकि

4:28:04ब्रिटिश आर्मी में कम कर रहे बहुत से

4:28:06सैनिक अवध को ही बिलॉन्ग करते थे इसलिए

4:28:09उनके लिए अवध को हैं एक्स किया जाना उनके

4:28:11घर को हैं एक्स करना जैसा था इन सभी रीजंस

4:28:15की वजह से बॉयज के अंदर ब्रिटिश के खिलाफ

4:28:18आक्रोश की आज सुलाने लगी थी हिसाब को

4:28:21विस्फोट में बदलने के लिए अब बस एक

4:28:24चिंगारी की जरूर थी और वो चिंगारी कब और

4:28:27कैसे मिलती है आई जानते हैं इमीडिएट कैसे

4:28:30दोस्तों 1857 रिवॉल्ट के लिए चिंगारी का

4:28:34कम किया था और फील्ड राइफल के इंट्रोडक्शन

4:28:37इसके कार्टेजेस पर ग्रीस पेपर कर हुआ करता

4:28:40था जिसे राइफल में लोड करने से पहले मुंह

4:28:43से काटकर खोलना पड़ता था और यह जो ग्रीस

4:28:46था वो सूअर और गे की चर्बी से बंता था

4:28:48इससे इंडियन से बॉयज चाहे वो हिंदू हो या

4:28:52मुस्लिम बहुत गुस्से में ए जाते हैं

4:28:54उन्हें लगता है की ब्रिटिश गवर्मेंट जान

4:28:57बूझकर ग्रेज्ड कार्टेज के द्वारा उनका

4:28:59धर्म नष्ट करना चाहती है इसका मतलब अब

4:29:02विद्रोह करने का समय ए गया है दोस्तों यह

4:29:05तो बात हुई 1857 के रिवॉल्ट के पीछे के

4:29:08सभी कर्म की आई अब यह देखते हैं की

4:29:10रिपोर्ट आखिर कब कहां और कैसे शुरू हुआ था

4:29:13डी बिगनिंग और कोर्स ऑफ रिपोर्ट दोस्तों

4:29:17जैसा की हमने आपको शुरुआत में ही बताया था

4:29:191857 का रिकॉर्ड 10th में को मेरठ से शुरू

4:29:23हुआ था और उसके बाद नॉर्दर्न और सेंट्रल

4:29:26इंडिया के एक बड़े हिस में फेल गया था

4:29:28लेकिन मेरठ में और ब्रेक से पहले भी

4:29:30विद्रोह के साइंस दिखने ग गए थे जैसे की

4:29:3329 मार्च 1857 को बैरकपुर में यंग सोल्जर

4:29:38मंगल पांडे को फैंसी दे दी क्योंकि

4:29:40उन्होंने ब्रेस्ट कार्टेज का उसे करने से

4:29:43माना कर दिया था और अपने ब्रिटिश ऑफिसर्स

4:29:45पर अटैक कर दिया था इसी तरह के कुछ और भी

4:29:48इंसीडेंट ये इशारा कर रहे थे की सेप्वॉयज

4:29:51में विद्रोह की आज ग चुकी है

4:29:53और फिर मेरठ में आखिरकार विस्फोट हो ही

4:29:56जाता है 24th अप्रैल को थर्ड नेटिव गैलरी

4:29:59के 90 जवान ग्रीस कार्टेजेस को एक्सेप्ट

4:30:03करने से माना कर देते हैं इसलिए नाइंथ में

4:30:06को उनमें से 85 को आर्मी से तत्काल

4:30:09डिस्टेंस करके 10 साल की सजा सुना दी जाति

4:30:12है और जय में बैंड कर दिया जाता है इस

4:30:15घटना से मेरठ में तैनात सभी से बॉयज के

4:30:17दिल में विद्रोह की आज ग जाति है और 10

4:30:20मैं को वह अपने साथी जवानों को जय से बाहर

4:30:23निकालकर अपने ऑफिसर्स की हत्या करके

4:30:25विद्रोह का बिगुल बजाते हैं

4:30:28सूरज ढलना के बाद सभी जवान दिल्ली की तरफ

4:30:30निकाल पढ़ते हैं और जब अगली सुबह यह

4:30:33सिपाही डेली पहुंचने हैं तो वहां की लोकल

4:30:35इंफिनिटी भी इन्हें जॉइन कर लेती है वो भी

4:30:38अपने यूरोपियन ऑफिसर्स को मार के शहर को

4:30:41सीएस कर लेते हैं इसके बाद यह सोल्जर मुगल

4:30:44एंपरर बहादुर शाह जफर को इंडिया का एंपरर

4:30:47मानते हुए उन्हें अपने रिवॉल्ट का लीडर

4:30:50चुन लेते हैं इस एक्ट से यह सब बॉयज

4:30:52सोल्जर की मुटनी को एक रिवॉल्यूशनरी वार

4:30:55में ट्रांसफॉर्म कर देते हैं इसके बाद

4:30:58अलग-अलग जगह पर सेप्वॉयज विद्रोह करने

4:31:00लगता हैं और सभी दिल्ली की तरफ पहुंचने

4:31:03लगता हैं

4:31:06और शायद उनके प्रेशर पर इंडिया के सभी

4:31:10चिप्स और रुलर्स को लेटर लिखकर कहते हैं

4:31:12की ब्रिटिश रिज्यूम के साथ फाइट करने के

4:31:15लिए

4:31:16ऑर्गेनाइज किया जाए

4:31:18नॉर्थ और सेंट्रल इंडिया के डिफरेंट

4:31:20पार्ट्स में सेप्वॉयज के रिकॉर्ड के

4:31:22साथ-साथ सिविल रिवॉल्ट भी शुरू हो जाते

4:31:24हैं सिविलियन पापुलेशन भी हथियार उठा लेती

4:31:27है और ब्रिटिश के खिलाफ जंग में सेपोइस के

4:31:30साथ खड़ी हो जाति है और देखते ही देखते

4:31:32इंडिया के एक बड़े हिस में क्रांति की

4:31:35ज्वाला जैन लगती है

4:31:371857 के इस रिवॉल्ट के स्टोर्स सेंटर्स

4:31:40बनते हैं दिल्ली कानपुर लखनऊ बरेली झांसी

4:31:44और बिहार दिल्ली में नॉमिनल और सिंबॉलिक

4:31:47लीडर बहादुर शाह जफर के पास थी लेकिन रियल

4:31:51कमांड जनरल वक्त खान की लीडरशिप में कम कर

4:31:54रहे सोल्जर के ग्रुप के हाथों में थी

4:31:56कानपुर में विद्रोहों का नेतृत्व कर रहे

4:31:58थे नाना साहिब जो बाजीराव सेकंड के

4:32:01अडॉप्टेड संत थे नाना साहब कानपुर से

4:32:04अंग्रेजों को भाग देते हैं और खुद को

4:32:07पेशवा डिक्लेअर करते हैं नाना साहब का

4:32:10यहां साथ देते हैं उनके सबसे काबिल और

4:32:12लॉयल साथी टाटिया टॉप

4:32:15लखनऊ में बेगम हजरत महल विद्रोह को लीड कर

4:32:17रही थी उन्होंने अपने बेटे बृजेश कबीर को

4:32:21अवध का नवाब डिक्लेअर कर दिया और 1857 के

4:32:24रिवॉल्ट की सबसे फेमस लीडर रानी

4:32:26लक्ष्मीबाई झांसी में अंग्रेजों के खिलाफ

4:32:29जंग कर रही थी बिहार में रिवॉल्ट की के

4:32:32ऑर्गेनाइजर थी जगदीशपुर के जमीदार कुन से

4:32:34इसके साथ ही फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्ला

4:32:37भी 1857 के रिवॉल्ट के एक आउटस्टैंडिंग

4:32:41लीडर थे इसके अलावा बरेली के खान बहादुर

4:32:44खान मेरठ के कम सिंह संभालपुर यानी की

4:32:48उड़ीसा के सुरेंद्र शाही मथुरा के देवी

4:32:51सिंह हरियाणा के राव तुलाराम गोंडवाना

4:32:54किंगडम के शंकर शाह और रघुनाथ शाह भी 1857

4:32:58रिवॉल्ट के इंपॉर्टेंट लीडर्स थे

4:33:00इन सभी लीडर्स की लीडरशिप में सेप्वॉयज और

4:33:04आम जनता एक साथ आकर ब्रिटिशर्स के खिलाफ

4:33:071857 की क्रांति की आज हर तरफ फैला देते

4:33:10हैं लेकिन जैसा की आप सब जानते ही होंगे

4:33:13की आखिर में 1857 का अवार्ड असफल राहत है

4:33:171859 का एंड होने तक ब्रिटिश विद्रोह को

4:33:21पुरी तरह से दबाने में सफल होते हैं और

4:33:23फिर से अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश कर लेते

4:33:25हैं लेकिन ऐसे क्या करण थे जिनकी वजह से

4:33:281857 का रिकॉर्ड सफल हो जाता है और कैसे

4:33:32ब्रिटिश इसे सरप्राइज करने में सफल होते

4:33:34हैं इसका जवाब आपको हम अपनी अगली वीडियो

4:33:37यानी की 1857 रिवॉल्ट के पार्ट तू में

4:33:41देंगे इसके साथ ही यह भी बताएंगे की 1857

4:33:45रिवॉल्ट की इंर्पोटेंस क्या है और इसके

4:33:48लॉन्ग टर्म क्या रिजल्ट्स रहते हैं

4:34:01इसे सरप्राइज कर दिया था रिवॉल्ट की

4:34:04लिमिटेशंस क्या थी और इसकी नेचर को लेकर

4:34:07जो डिबेट है उसको भी समझना की कोशिश

4:34:09करेंगे साथ ही रिवॉर्ड की इंपैक्ट्स के

4:34:13बड़े में भी बात करेंगे तो आई शुरू करते

4:34:15हैं

4:34:20दोस्तों

4:34:211857 का रिवॉल्ट इंडिया के एक बड़े भाग

4:34:24में तो फैला था लेकिन फिर भी समाज के सभी

4:34:27लोगों ने इसमें पार्टिसिपेशन नहीं किया था

4:34:30साथी पूरे देश में इसका असर देखने को नहीं

4:34:32मिला था

4:34:34और सेंट्रल इंडिया के रीजन तक ही सीमित र

4:34:37जाता है यह साउथ इंडिया तक नहीं पहुंचता

4:34:39और साथ ही पूर्वी और वेस्टर्न इंडिया के

4:34:42भी ज्यादातर हिस इसमें भाग नहीं लेते इसके

4:34:45साथ ही इंडियन स्टेटस के बहुत से रुलर्स

4:34:47और बड़े जमीदार भी इसमें भाग नहीं लेते

4:34:51इसके विपरीत ग्वालियर के सिंधिया इंदौर के

4:34:54होलकर हैदराबाद के निजाम जोधपुर के राजा

4:34:57भोपाल के नवाब पटियाला नाभा और जींद के

4:35:01रुलर्स कश्मीर के महाराजा नेपाल के रनास

4:35:04और बहुत से ऐसे अन्य रुलर्स ने तो ब्रिटिश

4:35:06को खुला सपोर्ट किया था रिपोर्ट को

4:35:08सरप्राइज करने में सभी रुलर्स चिप्स और

4:35:11जमींदारा का सपोर्ट ना मिलन ही 1857

4:35:13रिवॉर्ड की पहले वीकनेस थी इसके अलावा

4:35:16मॉडर्न एजुकेटेड इंडियन ने भी 1857

4:35:19रिपोर्ट को सपोर्ट नहीं किया था ऐसा इसलिए

4:35:22क्योंकि उन्हें लगता था की विद्रोह करने

4:35:24वाले राजा राजवाड़े तो इंडिया को पीछे की

4:35:27तरफ ही ले जाएंगे और इंडिया को मॉडर्न

4:35:29बनाने का कम ब्रिटिश रूल में ही हो सकता

4:35:31है एजुकेटेड इंडियन को यह काफी बाद में

4:35:34एहसास होता है की अल में ब्रिटिश रूल

4:35:37उन्हें मॉडर्न बनाने का नहीं बल्कि लूटने

4:35:40का कम कर रहा है

4:35:41इसके साथ 1857 के विद्रोहियों के पास

4:35:45मॉडर्न वेपंस और युद्ध के बाकी समाज की भी

4:35:47कमी थी

4:35:48ज्यादातर तो तलवार और भले जैसे असिएंट

4:35:51वेपन से ही फाइट कर रहे थे विद्रोही पोली

4:35:54ऑर्गेनाइज्ड भी थे सेप्वॉयज बहादुर तो थे

4:35:56लेकिन उनमें भी डिसिप्लिन की कमी थी कई

4:35:59बार वो देंगे करने वाले मोब की तरह बिहेव

4:36:02करते थे ना की एक डिसिप्लिन आर्मी के जैसे

4:36:051857 के विद्रोहियों के पास मिलिट्री

4:36:08एक्शन का ना तो कोई आम प्लेन था और ना ही

4:36:11कोई सेंट्रलाइज्ड लीडरशिप देश के अलग-अलग

4:36:14कोनी से उठी अप्रिसिंग्स में एक ऑर्डिनेशन

4:36:16की कमी देखने को मिलती है और दूसरी तरफ

4:36:19ब्रिटिश कंपनी के पास रिसोर्सेस की कोई

4:36:22कमी नहीं थी ब्रिटिश गवर्नमेंट ने बड़ी

4:36:25संख्या में मां मनी और आर्म्स की सप्लाई

4:36:27इंडिया में की और वोट को पुरी ताकत के साथ

4:36:30सरप्राइज कर दिया गया

4:36:32विद्रोहियों को पहले झटका लगता है जब 28

4:36:35सितंबर 1857 को जनरल जॉन निखिल सिंह की

4:36:39नेतृत्व में एक लंबी लड़ाई के बाद ब्रिटिश

4:36:41दिल्ली को कैप्चर कर लेते हैं एंपरर

4:36:44बहादुर शाह को बंदी बना लिया जाता है रॉयल

4:36:47प्रिंस को पड़कर वही मार दिया जाता है

4:36:49मुगल एंपरर के खिलाफ कैसे चला है और उनको

4:36:52रंगून में एक्सेल की सजा सुना दी जाति है

4:36:55रंगून में ही 1862 में उनकी मृत्यु हो

4:36:58जाति है इस तरह मुगल वंश का पुरी तरह खत्म

4:37:02हो जाता है दिल्ली के फल के साथ रिवॉल्ट

4:37:06का फोकल पॉइंट तो डिसएप्ल हो जाता है

4:37:07लेकिन रिवॉल्ट के बाकी लीडर्स स्ट्रगल

4:37:10जारी रखते हैं लेकिन पावरफुल ब्रिटिश के

4:37:13सामने एक-एक करके ये सब भी हर जाते हैं

4:37:16कानपुर में नाना साहब बाहर जाते हैं लेकिन

4:37:19वो सुरेंद्र नहीं करते और 1859 में नेपाल

4:37:23भाग जाते हैं जिसके बाद उनके बड़े में कुछ

4:37:26पता नहीं चला

4:37:28इंडिया के जंगल की तरफ चले जाते हैं और

4:37:31वहां से अप्रैल 1859 तक गोरिल्ला वाॅरफेयर

4:37:34जारी रखते हैं लेकिन तभी उनके जमींदार

4:37:37दोस्त उन्हें धोखा दे देते हैं और सोते

4:37:40समय उन्हें पकड़ लिया जाता है और 15th

4:37:42अप्रैल 1859 को एक हर एक ट्रायल के बाद

4:37:45उन्हें भी मार दिया जाता है

4:37:48झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बहादुर के साथ

4:37:51अंग्रेजन का सामना करती हुई 17th जून 1858

4:37:54को युद्ध भूमि में मार दी गई थी

4:37:571859 तक कुंवर सिंह वक्त खान खान बहादुर

4:38:01खान मौलवी अहमदुल्लाह जैसे लीडर्स भी मार

4:38:03दिए जाते हैं और अवध की बेगम नेपाल में

4:38:06जाकर छुपाने के लिए मजबूर हो जाति हैं इस

4:38:09रिपोर्ट के सिपरेशन में कुछ ब्रिटिश

4:38:11कमांडर्स जो मिलिट्री फेम हासिल करते हैं

4:38:13वह थे जॉन लॉरेंस

4:38:16हैवलॉक नील कैंपबेल और यूरोप

4:38:211859 के और होने तक इंडिया में ब्रिटिश

4:38:24अथॉरिटी फिर से पुरी तरह एस्टेब्लिश हो

4:38:26चुकी थी लेकिन 1857 का रिवॉल्ट बेकार नहीं

4:38:30जाता यह हमारे इतिहास का एक ग्लोरियस

4:38:33लैंडमार्क है

4:38:351857 का रिवॉल्ट ब्रिटिश इंपिरियलिज्म से

4:38:38आजादी के लिए भारत के लोगों का पहले ग्रेट

4:38:41स्ट्रग था आगे आने वाले फ्रीडम स्ट्रगल के

4:38:44लिए 1857 के रिवॉल्ट ने इंस्पिरेशन का कम

4:38:47किया

4:38:58दोस्तों 1857 का रिवॉल्ट फेल होने के

4:39:02बावजूद ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन के लिए एक

4:39:05बहुत बड़ा झटका साबित होता है इसकी वजह से

4:39:08ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन में काफी बदलाव

4:39:10देखने को मिलते हैं आई एक-एक करके उनके

4:39:13बड़े में जानते हैं सबसे बड़ा चेंज जाता

4:39:15है 1858 के गवर्मेंट ऑफ इंडिया एक्ट के

4:39:18थ्रू यह एक्ट इंडिया को गवर्न करने की

4:39:21पावर ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर ब्रिटिश

4:39:24क्राउन को ट्रांसफर कर देता है इससे पहले

4:39:26कंपनी के डायरेक्टर्स और बोर्ड ऑफ कंट्रोल

4:39:29के पास इंडिया की अथॉरिटी थी अब यह पावर

4:39:31मिल जाति है सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पर इंडिया

4:39:34को और उसको एसिस्ट करने के लिए काउंसिल भी

4:39:37बना दी जाति है सेक्रेटरी ऑफ स्टेट

4:39:40ब्रिटिश कैबिनेट के एक मेंबर हुआ करते थे

4:39:42और इसलिए पार्लियामेंट के प्रति उनके

4:39:44रिस्पांसिबिलिटी थी इस तरह का सकते हैं की

4:39:47इंडिया के ऊपर अब अल्टीमेट पावर ब्रिटिश

4:39:50पार्लियामेंट की हो गई थी

4:39:51इंडिया में गवर्नमेंट को पहले की तरह

4:39:54गवर्नर जनरल को ही देखना था गवर्नर जनरल

4:39:57को वॉइस राय यानी की क्राउन का पर्सनल

4:39:59रिप्रेजेंटेटिव का टाइटल भी दे दिया जाता

4:40:01है इसके बाद दूसरा सबसे दृष्टिक चेंज जाता

4:40:05है आर्मी के ऑर्गेनाइजेशन में

4:40:071857 जैसा फिर से कोई रिवॉल्ट ना हो इसके

4:40:11लिए आर्मी को रे ऑर्गेनाइजर किया जाता है

4:40:13सबसे पहले तो आर्मी में यूरोपियन सोल्जर

4:40:16की संख्या को बढ़ाया जाता है बंगाल आर्मी

4:40:19में हर दो इंडियन सोल्जर पर एक यूरोपियन

4:40:21सोल्जर और मद्रास और मुंबई में हर पांच

4:40:23इंडियन सोल्जर पर दो यूरोपियन सोल्जर का

4:40:26प्रोपोर्शन फिक्स किया जाता है

4:40:51इसके लिए ई रिक्रूटमेंट में कास्ट रीजन और

4:40:54रिलिजन के बेसिस पर डिस्क्रिमिनेशन शुरू

4:40:57कर दिया

4:40:59और पठान जिन्होंने 1857 के रिवॉल्ट को

4:41:03सरप्राइज करने में ब्रिटिश की मदद की थी

4:41:05उनको मार्शल रेसेज डिक्लेअर कर दिया गया

4:41:07और बड़ी संख्या में इन्हें आर्मी में लिया

4:41:10जान लगा जबकि 1857 रिवॉल्ट में भाग लेने

4:41:14वाले रीजन जैसे की अवध बंगाल और सेंट्रल

4:41:17इंडिया के सोल्जर को नॉन मार्शल डिक्लेअर

4:41:20कर दिया गया और बड़ी संख्या में आर्मी में

4:41:23इनकी भारती को बैंड कर दिया गया

4:41:25इसके अलावा सोल्जर में नेशनलिस्ट

4:41:27सेंटीमेंट को डेवलप होने से रोकने के लिए

4:41:29कम्युनल कास्ट और रीजनल बेसिस पर रेजीमेंट

4:41:33को फॉर्म किया गया इसके साथ ही प्रिंसली

4:41:37स्टेटस के साथ रिलेशंस में भी एक बड़ा

4:41:39बदलाव देखने को मिलता है

4:41:41एनेक्सेशन की पॉलिसी को छोड़ दिया जाता है

4:41:43इंडियन स्टेटस को अपना और अडॉप्ट करने की

4:41:46परमिशन भी दे दी जाति है ऐसा इसलिए

4:41:48क्योंकि 1857 के रिवॉल्ट के समय बहुत से

4:41:52इंडियन रुलर्स ने ब्रिटिशर्स की हेल्प की

4:41:54थी बिना उनकी हेल्प के 1857 के रिवॉल्ट को

4:41:58सरप्राइज करना मुश्किल हो जाता है इसीलिए

4:42:00इसके बाद से ब्रिटिश प्रिंसली स्टेटस को

4:42:03ब्रेक वाटर्स इन डी स्टॉर्म की तरह उसे

4:42:05करते हैं इस तरह से हम का सकते हैं की

4:42:081857 के रिवॉल्ट की वजह से इंडिया में

4:42:11ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन का चेहरा पुरी तरह

4:42:14से बादल जाता है दोस्तों यह तो हुई 1857

4:42:18के रिवॉल्ट की पुरी कहानी अब बात करते हैं

4:42:20इसके नेचर को लेकर डिबेट की

4:42:23नेचर ऑफ डी 1857 रिवॉल्ट

4:42:27दोस्तों 1857 के रिवॉल्ट के नेचर को लेकर

4:42:30अलग-अलग ओपिनियन दिए जाते हैं

4:42:38कुछ इतिहासकारों ने इसे हिंदू और मुस्लिम

4:42:42की कंस्पायरेसी भी का दिया कोई ऐसे बाबर

4:42:45आजम

4:43:04ब्रिटिश हिस्टोरियन इसे सिरोय मुटनी कहकर

4:43:07इसकी इंर्पोटेंस को कम करना चाहते थे हां

4:43:10यह सच है की 1857 के रिवॉल्ट की शुरुआत से

4:43:13बॉयज नहीं की थी लेकिन जैसा की हम देख

4:43:15चुके हैं की इसमें सेप्वॉयज के अलावा

4:43:17पेजयंस सिविलियन पापुलेशन और इंडियन

4:43:20रुलर्स ने भी भाग लिया था फिर से सिर्फ

4:43:23मुटनी का देना बिल्कुल गलत होगा

4:43:26वाद सावरकर ने 1857 के रिवॉल्ट को फर्स्ट

4:43:30वार ऑफ इंडिपेंडेंस का है इसके अगेंस्ट

4:43:33में यह आगमन दिया जाता है की 1857 से पहले

4:43:36तो बहुत से रिवॉल्ट हुए थे जैसे की कॉल

4:43:39विद्रोह पी का विद्रोह संथाल फिर ये

4:43:43फर्स्ट कैसे हुआ

4:43:45दोस्तों यह बिल्कुल सही है की 1857 से

4:43:48पहले भी ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट बहुत से

4:43:50रिवॉल्ट हुए थे लेकिन यह सभी लोकल रिवॉल्ट

4:43:53थे और बहुत छोटे रीजन तकसीमित थे

4:43:571857 को फर्स्ट इसीलिए बोला जाता है

4:43:59क्योंकि इतने बड़े स्टार पर ये पहले ही

4:44:02रिपोर्ट था इसके बाद डिबेट होती है की

4:44:05क्या यह सच में इंडिपेंडेंस के लिए

4:44:07स्ट्रगल था कुछ लोगों का कहना है की यह तो

4:44:11फैऊदल रिपोर्ट था और सभी लीडर्स अपनी अपनी

4:44:14फैऊदल पावर्स को वापस अपने के लिए स्ट्रगल

4:44:16कर रहे थे ब्रिटिश से इंडिपेंडेंस की बात

4:44:19तो कहानी थी ही नहीं यहां याद रखना वाली

4:44:22बात यह है की शुरुआत में भले ही

4:44:24इंडिपेंडेंस का कोई एम ना हो लेकिन

4:44:26रिवॉर्ड शुरू होने के बाद ब्रिटिश रूल को

4:44:29इंडिया से खत्म करने का

4:44:32बहादुर शाह अपने लेटर में भी लिखने हैं की

4:44:36इंडिया से ब्रिटिश सत्ता को समाप्त करने

4:44:38के लिए सभी इंडियन रुलर्स को एक कनफेडरेसी

4:44:41बनानी होगी

4:44:43इसलिए इतिहासकार सीएनसी ने भी कहा है की

4:44:461857 का रिवॉल्ट शुरू भले ही एक से बाय

4:44:49मुटनी की तरह हुआ था लेकिन खत्म

4:44:58के रिपोर्ट को नेशनल मूवमेंट बोलते हैं

4:45:021857 रिवॉल्ट के नेचर को लेकर भले ही

4:45:05अलग-अलग ओपिनियन हो सकते हैं लेकिन इसमें

4:45:07कोई दो राय नहीं है की यह अंग्रेजी हुकूमत

4:45:10के खिलाफ होने वाला एक यादगार रिवॉल्ट बन

4:45:13गया था

4:45:15कंक्लुजन

4:45:17दोस्तों

4:45:191857 का रिवॉल्ट कोई मामूली विद्रोह नहीं

4:45:22था यह इंडियन हिस्ट्री का एक इंपॉर्टेंट

4:45:24टर्निंग पॉइंट था इसके हीरोज इंडिया के घर

4:45:28घर में याद किया जान लगे और आने वाली

4:45:30पीढ़ी के लिए इंस्पिरेशन बन गए यहां तक

4:45:36मिसल देते हैं झांसी की रानी आज भी वूमेन

4:45:40एंपावरमेंट का प्रतीक मनी जाति हैं

4:45:421857 का यह रिपोर्ट भारतीय इतिहास में

4:45:45हमेशा के लिए अमर रहेगा

4:46:12[संगीत]

4:46:17जी सुपरस्टिशंस और ट्वीट के द्वारा किया

4:46:20जा रहा एक्सप्लोइटेशन भी इनके द्वारा

4:46:23कंडोम किया गया था इन्हें सोशल रिलिजियस

4:46:26रिफॉर्म मूवमेंट्स के नाम से जाना जाता है

4:46:28आज हम समझेंगे की इनकी शुरुआत क्यों होती

4:46:31है ये कौन सी रिफॉर्म्स की बात करते हैं

4:46:34और इनका क्या प्रभाव राहत है साथ ही इनकी

4:46:38कुछ लिमिटेशंस की भी चर्चा करेंगे सबसे

4:46:40पहले ये जानते हैं की 19th सेंचुरी में

4:46:43ऐसी क्या कंडीशंस बंटी हैं की सोशल

4:46:46रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स शुरू होते हैं

4:46:49कॉसेस बिहाइंड सोशल रिलिजियस रिफॉर्म

4:46:51मूवमेंट्स दोस्तों पहले और सबसे बड़ा करण

4:46:55था ब्रिटिश रूल और उसका इंडिया की

4:46:59पॉलीटिकल इकोनामिक सोशल लाइफ पर गहरा

4:47:02प्रभाव ब्रिटिश के साथ ही मॉडर्न वेस्टर्न

4:47:06इतिहास जैसे की एक क्वालिटी लिबर्टी

4:47:09फ्रेटरनिटी और जस्टिस भी इंट्रोड्यूस हुए

4:47:12थे मॉडर्न एजुकेशन इन सभी इतिहास को

4:47:16स्प्रेड करती है और धीरे-धीरे एक एजुकेटेड

4:47:19मिडिल क्लास तैयार हो जाति है जो इंडियन

4:47:22सोसाइटी को

4:47:23मॉडर्नलिटी के लेंस से देखना शुरू कर दी

4:47:26है

4:47:26रिफॉर्म मूवमेंट्स को शुरू करने के पीछे

4:47:29दूसरा करण यूरोपियन ओरिएंटलिस्ट के

4:47:32एफर्ट्स थे सब विलियम जॉन्स

4:47:37विलकिंस मैक्स मुइलर जैसे ओरिएंटलिस्ट्स

4:47:40के वर्ग से इंडिया का ग्लोरियस पेस्ट

4:47:43लाईमलाईट में ए जाता है जो इंडियन को

4:47:46कॉन्फिडेंस देता है और उन्हें रिफॉर्म

4:47:48करने की रेशम भी देता है इसके अलावा एक

4:47:51करण क्रिश्चियन मिशनरीज का प्रभाव भी था

4:47:54यह लोग इंडियन कस्टम और रिलिजन को

4:47:57क्रिटिसाइज करते थे और लोगों को

4:48:00क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करने की कोशिश

4:48:02कर रहे थे ऐसी स्थिति में इंडियन कॉलेज को

4:48:06लगता है की इनका मुकाबला करने के लिए पहले

4:48:09अपने धर्म और समाज में सुधार करने की जरूर

4:48:11है

4:48:12इन्हीं सब कर्म से सोशल रिलिजियस रिफॉर्म

4:48:16मूवमेंट्स की शुरुआत होती है करण के साथ

4:48:19ही समझना भी जरूरी है की यह मूवमेंट्स

4:48:22कितने प्रकार के होते थे और रिफॉर्म के

4:48:25लिए कौन-कौन से मैथर्ड अडॉप्ट किया जाते

4:48:28हैं टाइप्स और मैथर्ड ऑफ सोशल रिलिजियस

4:48:31रिफॉर्म मूवमेंट्स

4:48:33दोस्तों सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन को

4:48:36दो कैटिगरीज में डिवाइड किया जाता है

4:49:02जो इंडिया की पेस्ट ग्लोरी में विश्वास

4:49:04करते थे और यह वेस्टर्न इतिहास को अडॉप्ट

4:49:08करने की जगह असिएंट इंडियन ट्रेडीशंस और

4:49:11थॉट्स को रिवाइव करना चाहते थे इसमें आर्य

4:49:14समाज रामकृष्ण मिशन और देवबंद मूवमेंट का

4:49:17एग्जांपल आता है

4:49:18रिफॉर्म मूवमेंट राशनलिज्म और रिलिजियस

4:49:21यूनिवर्सल की आईडियोलॉजी से प्रेरित थे

4:49:24रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करने के लिए

4:49:27अलग-अलग मैथर्ड अडॉप्ट किया जाते हैं जैसे

4:49:30की न्यूज़ पेपर्स और जर्नल्स को पब्लिश

4:49:32करना

4:49:33राजाराम मोहन राय अपना न्यूज़ पेपर संवाद

4:49:37कौमुदी निकलते हैं वही दयानंद सरस्वती

4:49:40सत्यार्थ प्रकाश के जारी अपनी इतिहास

4:49:43फ्लेट हैं

4:49:45दूसरा मेथड था मीटिंग्स बुलाना और

4:49:48गवर्नमेंट पर प्रेशर बेल्ट करना जिसकी

4:49:51हेल्प से यह लोग सती प्रथम बालेश्वर

4:49:55जैसे सोशल लेजिसलेशंस पास करवा पाते हैं

4:49:58इसके अलावा रिफॉर्म मूवमेंट परसूएसन का

4:50:01मेथड बी अडॉप्ट करती हैं इसके तहत लोगों

4:50:04को कन्वेंस करने की कोशिश करते हैं की वो

4:50:06सोशल इविल्स जैसे की सती या पर्दा सिस्टम

4:50:10का सपोर्ट ना करें इसके लिए रीजन के साथ

4:50:13ही स्क्रिप्चर से भी एग्जांपल्स किया जाते

4:50:15हैं सबसे ज्यादा पॉपुलर किया जाता है वह

4:50:20था लाइक माइंडेड पीपल के साथ मिलकर संगठन

4:50:22फॉर्म करना जैसे की ब्रह्म समाज आर्य समाज

4:50:30एसोसिएशंस की चर्चा करते हैं एग्जांपल ऑफ

4:50:34सोशल रिलिजियस रिफॉर्मर एसोसिएशंस ब्रह्म

4:50:37समाज दोस्तों ब्राह्मण समाज की शुरुआत

4:50:411828 में कोलकाता में राजा राममोहन राय ने

4:50:45की थी

4:50:45है इन्हें फादर ऑफ मॉडर्न इंडिया भी कहा

4:50:48जाता है क्योंकि यह पहले ऐसे व्यक्ति थे

4:50:50जो इंडिया में मॉडर्न इतिहास के बेसिस पर

4:50:53सोसाइटी फॉर्म करने की कोशिश करते हैं

4:50:56ब्रह्म समाज आइडल वरशिप पॉलिथीन कास्ट

4:51:00ऑपरेशन और उन नेसेसरी रिचुअल्स के अगेंस्ट

4:51:03फाइट करता है इसके अलावा सती पॉलिगामी

4:51:07पर्दा सिस्टम चाइल्ड मैरिज एट सिटेरा जैसी

4:51:10सोशल इविल्स के खिलाफ भी अपनी आवाज उठाता

4:51:13है इन्होंने वीडियो रे मैरिज और वूमेन की

4:51:16एजुकेशन का भी समर्थन किया राजा राममोहन

4:51:19राय के एफर्ट से ही 1829 में ब्रिटिश

4:51:22गवर्नर जनरल मेंटेंनिंग ने सती प्रथम पर

4:51:26कानून लाकर इसे बन किया था दोस्तों ब्रह्म

4:51:30समाज मेली पूर्वी इंडिया में एक्टिव राहत

4:51:32है अब बात करते हैं ऐसी संगठन की जिसका

4:51:36इफेक्ट वेस्टर्न इंडिया में ज्यादा देखने

4:51:38को मिलता है

4:51:40आर्य समाज दोस्तों आर्य समाज की स्थापना

4:51:441875 में बॉम्बे में हुई थी बाद में इसका

4:51:48हैडक्वाटर्स लाहौर में स्थापित किया गया

4:51:50था इसके फाउंडर स्वामी दयानंद सरस्वती

4:52:06एनिमल सैक्रिफाइस चाइल्ड मैरिज और कास्ट

4:52:10सिस्टम का विरोध किया इसकी फॉलोइंग सबसे

4:52:13ज्यादा नॉर्दर्न और वेस्टर्न इंडिया के

4:52:15एरियाज में अच्छी जाति है

4:52:17दयानंद सरस्वती जी ने अपने विचार सत्यार्थ

4:52:21प्रकाश नाम की किताब में लिखे थे यह

4:52:23इंडिया को एक क्लासलैस और कैशलेस सोसाइटी

4:52:26बनाने का विजन रखते थे साथ ही फ्री और

4:52:30यूनाइटेड इंडिया देखना चाहते थे दोस्तों

4:52:32जैसे की हम पहले बता चुके हैं आर्य समाज

4:52:35रिवाइवलिस्ट कैटिगरी में आने वाला एक

4:52:37संगठन

4:52:40यही दूसरी संगठन की भी बात करते हैं

4:52:43रामकृष्ण मिशन

4:52:45रामकृष्ण मिशन स्वामी विवेकानंद द्वारा

4:52:48शुरू किया गया इसकी स्थापना 1892 में

4:52:52कोलकाता के पास बेलूर नाम की जगह पर हुई

4:52:55थी इसका मकसद विवेकानंद जी के गुरु

4:52:58रामकृष्ण परमहंस जी की टीचिंग्स का प्रचार

4:53:01प्रसार करना था इन्होंने कास्ट सिस्टम और

4:53:04अनटचेबिलिटी का विरोध किया यह सभी

4:53:07रिलिजियस की यूनिवर्सल टीवी पर फॉक्स करते

4:53:09हैं और वेदांत को प्रोपागेट करते हैं

4:53:12स्वामी विवेकानंद दरिद्र नारायण के

4:53:15कॉन्सेप्ट को पॉपुलर करते हैं इसके अनुसार

4:53:17हर गरीब व्यक्ति में ईश्वर है और इसीलिए

4:53:21इनकी सेवा ईश्वर की सेवा के समाज है इसके

4:53:24साथ ही 1893 में शिकागो में ऑर्गेनाइज हुई

4:53:28वर्ल्ड रिलिजियस कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर

4:53:30स्वामी जी ने विश्व मंच पर हिंदुइज्म की

4:53:33फिलासफी का प्रचार भी किया

4:53:36दोस्तों यह तो बात हो गई हिंदुइज्म से

4:53:38रिलेटेड रिफॉर्मर एसोसिएशंस की अब कुछ

4:53:41मुस्लिम रिलिजियस रिफॉर्मर एसोसिएशंस की

4:53:43भी चर्चा करते हैं इसमें सबसे पहले बात

4:53:46करते हैं अलीगढ़ मूव मटकी अलीगढ़ मूवमेंट

4:53:49दोस्तों इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के

4:53:53अलीगढ़ जिला में सर सैयद अहमद खान द्वारा

4:53:561860s में की गई थी इसका मकसद मुस्लिम के

4:54:00बीच वेस्टर्न साइंटिफिक एजुकेशन का प्रचार

4:54:02करना था इसी के तहत 1875 में सैयद अहमद

4:54:06खान ने मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की

4:54:10स्थापना की थी जो 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम

4:54:13यूनिवर्सिटी बन जाता है अपने इतिहास को

4:54:16फैलाने के लिए यह तहदिल अखलाक नाम से

4:54:19मैगजीन पब्लिश करते थे इन्होंने अपनी बुक

4:54:21कंट्री

4:54:25आउटलुक को कंडोम किया था और राशनलिज्म और

4:54:29साइंटिफिक नॉलेज के बेसिस पर अपने खुद के

4:54:32व्यूज शेर किया थे इनका एंपहसिस कुरान की

4:54:35स्टडी पर राहत है इन्होंने सूफिज्म को भी

4:54:38कंडोम किया था साथ ही डिलीवरी को भी अनीस

4:54:42इस्लामिक बताया था अलीगढ़ मूवमेंट के बाद

4:54:44अब इसी के पैरेलल में चलने वाले मुस्लिम

4:54:47रिवाइवलिस्ट यानी की देवबंद मूवमेंट की

4:54:50बात करते हैं

4:54:51देवबंद

4:54:53देवबंद मूवमेंट की शुरुआत अप के सहारनपुर

4:54:56जिला में देवबंद नाम की जगह से 1867 में

4:55:00हुई थी इसके फाउंडर मोहम्मद कासिम नाना

4:55:03तवी और राशिद अहमद गैंग ही थे

4:55:07देवबंद एक रिवाइवलिस्ट मूवमेंट था यह एंटी

4:55:11ब्रिटिश मूवमेंट था जिसका एजुकेशनल

4:55:14एफर्ट्स के थ्रू मुस्लिम का अपलिफ्टमेंट

4:55:16करना था इसके ट्विन ऑब्जेक्टिव्स थे पहले

4:55:19मुस्लिम के बीच कुरान और हदीस की पोती

4:55:22जींस का प्रचार प्रसार करना और दूसरा फौरन

4:55:26रुलर्स के अगेंस्ट जिहाद की स्पिरिट को

4:55:28लाइव रखना लेकिन अलीगढ़ मूवमेंट की तरह यह

4:55:32वेस्टर्न एजुकेशन को प्रमोट नहीं करता

4:55:34बल्कि ट्रेडिशनल इस्लामिक टीचिंग्स पर

4:55:37फॉक्स करता है इसके अलावा दोस्तों और भी

4:55:40बहुत सारे संगठन फॉर्म किया गए थे जैसे की

4:55:43प्रार्थना समाज वेद समाज विदुरी मैरिज

4:55:47संगठन

4:55:54दोस्तों आंदोलन के उदाहरण जन के बाद अब

4:55:57इनके प्रभाव को भी समझ लेते हैं इंपैक्ट्स

4:56:00ऑफ रिफॉर्म मूवमेंट्स सोशल रिलिजियस

4:56:03रिफॉर्म मूवमेंट्स का बहुत ही गहरा प्रभाव

4:56:05देखने को मिलता है इनके एफर्ट्स से सती

4:56:09प्रथम विडोरी मैरिज फीमेल इन्फैंटिसाइड

4:56:12जैसे सोशल इविल्स को अबॉलिश करने के

4:56:15एक्ट्स पास होते हैं समाज में रीजन और

4:56:17राशनलिटी का प्रचार होता है साथ ही इनके

4:56:20द्वारा बहुत से स्कूल और कॉलेज खोल गए थे

4:56:23जिससे मॉडर्न एजुकेशन का स्पीड और ज्यादा

4:56:26इंडिया में होता है इसके अलावा रिफॉर्म

4:56:29मूवमेंट्स का सबसे बड़ा प्रभाव नेशनल

4:56:32मूवमेंट पर देखने को मिलता है सोशल

4:56:35रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स के प्रयासों

4:56:37से इंडिया में नेशनलिज्म प्रमोट होता है

4:56:40लोग एक बार फिर से अपने कलर और

4:56:43सिविलाइजेशन पर गर्व करने लगता हैं यह लोग

4:56:46इंडियन कल्चरल ट्रेडीशंस पर हो रहे

4:56:48ब्रिटिश क्रिटिसिजम का मुंह तोड़ जवाब

4:56:51देते हैं जिसकी वजह से इंडियन में

4:56:54कॉन्फिडेंस डेवलप होता है और नेशनलिज्म की

4:56:57फीलिंग और स्ट्रांग होती है

4:56:58दोस्तों यह तो बात हुई इनकी अचीवमेंट्स की

4:57:01लेकिन रिफॉर्म मूवमेंट पुरी तरह सफल नहीं

4:57:05होते खाने का मतलब यह है की इनके प्रभाव

4:57:08में कुछ लिमिटेशंस र जाति हैं

4:57:12लिमिटेशंस ऑफ रिफॉर्म मूवमेंट्स सोशल

4:57:15रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स की सबसे बड़ी

4:57:17इमिटेशन यह थी की इनका सोशल बेस बहुत ही

4:57:21नैरो राहत है मेली यह एजुकेटेड और अर्बन

4:57:24मिडिल क्लासेस को ही अपने साथ जोड़ पाते

4:57:26हैं जबकि और मैसेज और अर्बन पुर इनके

4:57:30प्रभाव से ज्यादातर बाहर ही र जाते हैं

4:57:33इसके अलावा रिफॉर्मर्स की पेस्ट की

4:57:36ग्रेटनेस को अपील करने की टेंडेंसी और

4:57:38स्क्रिप्ट्रल अथॉरिटी पर रैली करना सुडो

4:57:41साइंटिफिक थिंकिंग को भी जन्म देता है साथ

4:57:44ही हिंदू मुस्लिम सिख और पारसी को भी

4:57:48अलग-अलग सेक्शंस में डिवाइड करने का कम

4:57:50करता है

4:57:51बहुत से हिंदू रिफॉर्मर्स असिएंट पीरियड

4:57:54को प्रेस करते हैं और मेडिकल पीरियड को

4:57:57पुरी तरह डिसिडेंस का युग बता देते हैं

4:57:59इससे इनडायरेक्ट मुस्लिम महसूस करते हैं

4:58:03और कम्युनल टेंडेंसी को भी बढ़ावा मिलता

4:58:06है

4:58:06कंक्लुजन दोस्तों हम का सकते हैं की सोशल

4:58:11रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स पुरी तरह समाज

4:58:14को मॉडर्न या राशन तो नहीं बना पाते लेकिन

4:58:17फिर भी ये कवरेज कोशिश जरूर थी उसे समय की

4:58:21लीडर्स की जो अपनी ही समाज के अगेंस्ट

4:58:24खड़े होकर उन्हें आईना दिखाने का साहसी कम

4:58:27करते हैं लिमिटेड ही सही लेकिन इनका

4:58:30इंपैक्ट तो इंडियन सोसाइटी पर हुआ था इसके

4:58:33अलावा नेशनलिज्म को प्रमोट करके इन्होंने

4:58:36आगे होने वाले नेशनल मूवमेंट को भी

4:58:39स्ट्रांग बनाने का कम किया था 19th

4:58:41सेंचुरी के सु विलेज रिफॉर्म मूवमेंट्स की

4:58:44वजह से ही इंडिया मॉडर्न नेशन बने की र पर

4:58:48अग्रसर होता है

4:58:50लो कास्ट मूवमेंट्स दोस्तों 19th सेंचुरी

4:58:55में इंडिया में सोशल रिलिजियस रिफॉर्म्स

4:58:57के लिए बहुत सारे ऑर्गेनाइजेशंस फॉर्म

4:58:59किया गए थे जैसे की ब्रह्म समाज आर्य समाज

4:59:03यंग बंगाल मूवमेंट प्रार्थना

4:59:07लीडर्स अपार कास्ट हिंदू कम्युनिटी को

4:59:10बिलॉन्ग करते थे इन लोगों ने कास्ट

4:59:13डिस्क्रिमिनेशन के अगेंस्ट आवाज जरूर उठाई

4:59:16थी और अनटचेबिलिटी को भी काफी नाम किया था

4:59:19इसके बावजूद कास्ट डिस्क्रिमिनेशन को

4:59:22रोकने या अनटचेबल्स की कंडीशन में सुधार

4:59:25लाने में इन्हें बहुत ज्यादा सफलता नहीं

4:59:27मिली थी साथ ही 19 और 20th सेंचुरी में

4:59:31कुछ ऐसे सरकमस्टेंसस बनते हैं जिनकी वजह

4:59:34से लोअर कास्ट में क्लास कॉन्शसनेस डेवलप

4:59:37होने लगती है इसके बाद यह लोग खुद कास्ट

4:59:40क्वालिटी के लिए संघर्ष शुरू करते हैं

4:59:42ब्रिटिश की डिवाइडेड रूल की पॉलिसी

4:59:45वेस्टर्न एजुकेशन सिस्टम की ग्रोथ आम

4:59:48इंडियन पैनल कोड कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर

4:59:51का इंट्रोडक्शन रेलवे नेटवर्क का

4:59:54एक्सटेंशन मॉडर्न पॉलीटिकल थॉट की

4:59:56पापुलैरिटी जो एक क्वालिटी और सोशल

4:59:58ईगलिटेरिएनिज्म पर बेस्ड था कुछ ऐसे करण

5:00:01थे जिनकी वजह से कास्ट सिस्टम को डिफेंड

5:00:05करना मुश्किल होता जा रहा था ऐसी सिचुएशन

5:00:08में लोअर कास्ट की कुछ लीडर्स सामने आते

5:00:11हैं और खुद ही मूवमेंट की शुरुआत करते हैं

5:00:14इनके बड़े में बात करने से पहले यह समझना

5:00:17जरूरी है की आखिर लोअर कास्ट पीपल को

5:00:20आंदोलन करने की जरूर भी क्यों पड़ती है

5:00:23कॉसेस ऑफ लोअर जाति मूवमेंट्स

5:00:26दोस्तों लोअर कास्ट से यहां हमारा मतलब

5:00:29उनका से है जिन्हें अनटचेबल्स कहा जाता था

5:00:33इन्हें वर्ण सिस्टम से बाहर रखा जाता था

5:00:35इसमें ज्यादातर मीनल जॉब्स करने वाले लोग

5:00:39जैसे लेदर वर्कर्स गार्डनर्स स्वीपर आते

5:00:43थे

5:00:45इंडियन सोसाइटी में इन लोगों के साथ बहुत

5:00:48ही इन ह्यूमन व्यवहार किया जाता था अपार

5:00:51कास्ट लोगों का मानना था की इनके स्पर्श

5:00:54से ही इंसान पोल्यूटेड हो सकता है इसलिए

5:00:57इन्हें ना तो मैं सरिता कम्युनिटी के साथ

5:00:59रहने दिया जाता था और ना ही यह लोग में

5:01:02सड़क पब्लिक वेल्स टेंपल्स आदि का उसे कर

5:01:05सकते थे

5:01:07है इसके अलावा इन्हें किसी भी तरह के

5:01:09राइट्स भी नहीं दिए जाते थे इसके ऊपर से

5:01:12अपार कास्ट के लोग इनका शोषण करते थे

5:01:15इन्हें बहुत ही अपमानजनक शब्दों से बुलाया

5:01:18जाता था इनके साथ कोई भी अच्छे से बात

5:01:21करने के लिए तैयार नहीं होता था इनके साथ

5:01:24खाना या पीना तो बहुत दूर की बात थी इनका

5:01:27दिखाना भी अशुभ माना जाता था इस तरह लोअर

5:01:31कास्ट के लोग अपने ही देश और समाज में

5:01:33सेकेंडरी सिटीजंस की तरह जीते थे इनकी

5:01:36बस्तियां गांव से बाहर होती थी लेकिन

5:01:39ब्रिटिश रूल के साथ जब मॉडर्न एजुकेशन भी

5:01:42इंडिया में आई है तो सिचुएशन बदलना शुरू

5:01:44करती है शुरुआत में क्रिश्चियन मिशनरीज

5:01:48इन्हें कन्वर्ट करने के लालच में एजुकेशन

5:01:50देना शुरू करते हैं इसके बाद ब्रिटिश

5:01:53गवर्नमेंट भी इन स्कॉलरशिप देने लगती है

5:01:56इसके पीछे उनका मकसद जरूर डिविडेंड रूप था

5:01:59लेकिन इससे अनटचेबल्स कम्युनिटी को फायदा

5:02:02जरूर होता है

5:02:04है इसके अलावा मॉडर्न थॉट्स जैसे लिबर्टी

5:02:06एक क्वालिटी और फ्रेटरनिटी पर जब इंडिया

5:02:09में बात होना शुरू होती है तो बहुत से

5:02:12सोशल रिफॉर्मर्स कास्ट सिस्टम के खिलाफ भी

5:02:14बोलना शुरू करते हैं इससे लोअर कास्ट के

5:02:17लोगों में धीरे-धीरे अवकलन आना शुरू हो

5:02:20जाति है इतना सब होने के बाद भी जब कास्ट

5:02:24डिस्क्रिमिनेशन खत्म नहीं होता तब लोअर

5:02:26कास्ट की कुछ लीडर्स इसे ओपनली चैलेंज

5:02:29करने का साहस दिखाई हैं आई अब ऐसे ही कुछ

5:02:33लीडर्स और उनके मूवमेंट्स के बड़े में

5:02:35जानते हैं

5:02:36ज्योतिबा फूल और सत्यशोधक समाज दोस्तों

5:02:41सबसे पहले लोअर कास्ट मूवमेंट शुरू करने

5:02:43का श्री महाराष्ट्र के ज्योतिबा फूल जी को

5:02:47जाता है इनका जन्म माली कास्ट में हुआ था

5:02:50फ्यूचर कास्ट के लिए भी यह इंस्पिरेशन का

5:02:54कम करते हैं

5:02:58शोधन समाज की स्थापना करते हैं इस

5:03:01ऑर्गेनाइजेशन

5:03:04के लिए सोशल जस्टिस सीकर करना था इन्होंने

5:03:08लोअर कास्ट और वूमेन के लिए बहुत से स्कूल

5:03:11और ऑर्फनेजेस भी ओपन किया थे

5:03:13ज्योतिबा फूल को 1876 में पूनम म्युनिसिपल

5:03:18कमेटी का मेंबर भी इलैक्त किया गया था यह

5:03:21कांग्रेस को भी क्रिटिसाइज करते हैं

5:03:22क्योंकि इनका मानना था की कांग्रेस पुरी

5:03:25तरह नेशनल नहीं बन शक्ति जब तक वो लोअर और

5:03:28बैकवर्ड काश के वेलफेयर में अपना इंटरेस्ट

5:03:31ना शो करें 188 में ज्योतिबा फूल जी को

5:03:35महात्मा की उपाधि से सम्मानित किया गया था

5:03:38फूल जी गुलामगिरी इशारा लाइफ ऑफ शिवाजी

5:03:42जैसी बुक्स की ऑथर थे गुलामगिरी को मराठी

5:03:46में लिखा गया था और यह कास्ट सिस्टम को

5:03:48क्रिटिसाइज करने वाली सबसे पहले बुक्स में

5:03:51से एक मनी जाति है इसे डायलॉग के फॉर्म

5:03:54में लिखा गया था जो ज्योतिबाजी और उनके

5:03:57करैक्टर धोंडीबा के बीच में चला है

5:04:00बुक में बेसिकली कास्टीज्म की थ्योरी को

5:04:03चैलेंज किया गया है ज्योतिबा फूल और उनके

5:04:06मूवमेंट ने अंबेडकर को भी काफी इन्फ्लुएंस

5:04:09किया था महाराष्ट्र के बाद अब बात करते

5:04:12हैं साउथ इंडिया की जहां लोअर जाति

5:04:14मूवमेंट्स की एक स्ट्रांग हिस्ट्री रही है

5:04:17यहां श्री नारायण गुरु और एव रामास्वामी

5:04:20नायकर जैसे लीडर्स ने लोअर कास्ट के

5:04:23एमांसिपेशन के लिए कम किया

5:04:25श्री नारायण धर्म परिपालन योगम संडपी

5:04:29मूवमेंट दोस्तों श्री नारायण गुरु केरला

5:04:33की अनटचेबल्स कम्युनिटी एडवांस या एडवांस

5:04:36को बिलॉन्ग करते थे इन्होंने

5:04:3919023 में श्री नारायण धर्म परिपालन योगम

5:04:43की स्थापना की थी और इसके तहत टेंपल

5:04:46एंट्री मूवमेंट लॉन्च किया गए थे उसे समय

5:04:49लो और कास्ट स्पेशली अनटचेबल्स जैसे की

5:04:52एडवांस को टेंपल में एंट्री का अधिकार

5:04:55नहीं दिया जाता था

5:04:57है इसके अगेंस्ट ही इन्होंने आंदोलन किया

5:05:00श्री नारायण गुरु जी का मानना था की

5:05:03अलग-अलग कास्ट में डिफरेंस सिर्फ

5:05:05सुपरफिशियल है जैसे एक ही ट्री की सभी

5:05:08लीव्स का जूस एक जैसा ही होता है वैसे ही

5:05:11अलग-अलग कास्ट को बिलॉन्ग करने वाले भी एक

5:05:14ही ईश्वर की संतान है और इसीलिए एक समाज

5:05:17ही है इसी पर उन्होंने नारा दिया था वन

5:05:20रिलिजन वन कास्ट और वन गॉड पर मैनकाइंड

5:05:24नारायण गुरु और उनके साथियों ने एयरवेज की

5:05:27अपलिफ्टमेंट के लिए 2 पॉइंट प्रोग्राम

5:05:30लॉन्च किया था इसमें पहले पॉइंट यह था की

5:05:33यह अपनी कास्ट से नीचे की कास्ट के प्रति

5:05:35अनटचेबिलिटी की प्रैक्टिस को छोड़ देंगे

5:05:38और दूसरे पॉइंट के तहत नारायण गुरु बहुत

5:05:42से टेंपल्स बनाते हैं जो सभी कास्ट के लिए

5:05:45ओपन रखें जाते हैं इसके साथ ही वह मैरिज

5:05:48वरशिप और फ्यूनरल से रिलेटेड विजुअल्स को

5:05:51भी सिंपल बनाते हैं नारायण गुरु अनटचेबल्स

5:05:54ग्रुप की ट्रांसपोर्टेशन में काफी हद तक

5:05:57दूर रहते हैं अब बात करते हैं साउथ इंडिया

5:06:00के ही एक दूसरे कास्ट मूवमेंट की जस्टिस

5:06:04पार्टी दोस्तों 28 नवंबर 1916 को मद्रास

5:06:09के लीडिंग नॉन ब्राह्मण सिटीजंस साउथ

5:06:12इंडियन लिबरल फेडरेशन की स्थापना करते हैं

5:06:14इसमें डॉक्टर टीम नायर श्री पीपीटी थे

5:06:18अग्रज चेतियार और बाढ़गल के राजा शामिल थे

5:06:21इस ऑर्गेनाइजेशन को जस्टिस पार्टी के नाम

5:06:24से भी जाना जाता है यह लोग नॉन ब्राह्मण

5:06:27मेनिफेस्टो नाम से एक जॉइंट डिक्लेरेशन

5:06:30इशू करते हैं जिसमें गवर्नमेंट जॉब्स में

5:06:33नॉन ब्राह्मण के लिए रिजर्वेशन की डिमांड

5:06:36राखी जाति है

5:06:371920 में जब मद्रास लेजिसलेटिव काउंसिल के

5:06:40इलेक्शंस होते हैं तब इनकी पार्टी पावर

5:06:42में आई है आगे जाकर जस्टिस पार्टी

5:06:45रामास्वामी नायकर की लीडरशिप में कम करने

5:06:49लगती है और वो इसे एक नई दिशा दिखाई हैं

5:06:53आई वे रामास्वामी नायकर और सेल्फ

5:06:56रिस्पेक्ट मूवमेंट दोस्तों एंटी ब्राह्मण

5:06:59मूवमेंट में एक बड़ा नाम आता है सेल्फ

5:07:02रिस्पेक्ट मूवमेंट का इसे एव रामास्वामी

5:07:06नायकर ने शुरू किया था जिन्हें बेरिया

5:07:08यानी की ग्रेट सोल के नाम से जाना जाता है

5:07:11नायकर पहले कांग्रेस के मेंबर हुआ करते थे

5:07:14इन्होंने नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में भी

5:07:17पार्टिसिपेट किया था लेकिन सोशल जस्टिस और

5:07:20नॉन ब्राह्मण के रिप्रेजेंटेशन के इशू पर

5:07:23कांग्रेस के साथ इनका मतभेद हो जाता है और

5:07:26यह कांग्रेस छोड़कर 1925 में सेल्फ

5:07:29रिस्पेक्ट मूवमेंट लॉन्च करते हैं इस

5:07:32मूवमेंट

5:07:35पैदा करना था इन्होंने अपना जर्नल कुड़ी

5:07:39अरसू भी निकाला था जर्नल और मूवमेंट के

5:07:42द्वारा यह बिना ब्राह्मण प्रीस्ट के

5:07:44वेडिंग करना जबरदस्ती टेंपल में एंट्री

5:07:47करना और मनुस्मृति को जलन जैसी एक्टिविटीज

5:07:50को प्रमोट करते हैं इन फैक्ट

5:07:53साउथ इंडिया स्पेशली तमिलनाडु के सभी नॉन

5:07:56ब्राह्मण के लिए एक अंब्रेला मूवमेंट

5:07:58प्रोवाइड करने की कोशिश करते हैं

5:08:001937 के बाद जस्टिस पार्टी की लीडरशिप

5:08:04इनके हाथों में ए जाति है और इन्हें लगता

5:08:06है की इलेक्टरल पॉलिटिक्स छोड़कर पार्टी

5:08:09को नॉन ब्राह्मण मूवमेंट से एक

5:08:11रिफॉर्मेस्थ मूवमेंट में चेंज करने की

5:08:13जरूर है इसी सोच के साथ

5:08:151944 में सीलम कॉन्फ्रेंस में पार्टी का

5:08:19नाम बदलकर द्रविड़ और गड़गम कर दिया जाता

5:08:21है और फिर ये रिफॉर्म्स की र पर चल देते

5:08:24हैं हालांकि सितंबर 1949 में यह पार्टी

5:08:27स्प्लिट हो जाति है और अन्नादुरई की

5:08:30लीडरशिप में द्रव्यमंत्र कार्यक्रम यानी

5:08:32डीएमके की फॉर्मेशन होती है जो एक बार फिर

5:08:35से इलेक्टरल पॉलिटिक्स जॉइन करती है और

5:08:381967 में तमिलनाडु में पहले बार दम के

5:08:42गवर्नमेंट बंटी है और अन्नादुरई कम

5:08:45इलेक्ट्रिक

5:08:47हिंदुइज्म की भी कड़ी आलोचना करते हैं और

5:08:51हिंदू रिलिजन को ब्रा सी कंट्रोल का एक

5:08:54इंस्ट्रूमेंट कहते हैं वो मनु के लॉस को

5:08:57इन ह्यूमन बताते हैं और पुराना इसको परी

5:09:00टेल्स उन्होंने हिंदुइज्म का उपहास करते

5:09:03हुए कहा था की कुछ चीज ऐसी हैं जिन्हें

5:09:06साधारण नहीं जा सकता सिर्फ खत्म किया जा

5:09:09सकता है और ब्रा मैं निकाल हिंदुइज्म

5:09:11उन्हें में से एक है

5:09:13नायकर ने रिलिजन को एक सुपरस्टिशन बताया

5:09:16और द्रविडियन पर हिंदी इंपोज किया जान का

5:09:20भी विरोध किया वो होटल पर लगे हुए कास्ट

5:09:23के नाम वाले बोर्ड्स को डिस्ट्रॉय कर देते

5:09:25थे ब्राह्मण के होली थ्रेड को कैट देते थे

5:09:28डेट्स को चप्पल से मारते थे और मूर्तियां

5:09:31को भी तोड़ देते थे

5:09:33पेरियार की लिगसी आज भी द्रविडियन मूवमेंट

5:09:36के लिए इंस्पिरेशन का सोर्स है दोस्तों

5:09:39लोअर जाति मूवमेंट की बात दो बी आर

5:09:42अंबेडकर के बिना पुरी नहीं हो शक्ति तो आई

5:09:45उनके ग्रेट कंट्रीब्यूशन के बड़े में

5:09:47जानते हैं दो बी आर अंबेडकर और डिप्रेस्ड

5:09:51क्लासेस मूवमेंट

5:09:52अंबेडकर जी का जन्म 1891 में महाराष्ट्र

5:09:56के मेहर कास्ट में हुआ था बचपन से ही

5:09:59उन्हें कास्ट डिस्क्रिमिनेशन का सामना

5:10:01करना पड़ा था और आगे चलकर वह इसके अगेंस्ट

5:10:04बोलने वाले सबसे बड़े लीडर बनते हैं

5:10:07उन्होंने मुंबई के अल्फेंस्टीन कॉलेज से

5:10:10ग्रेजुएशन कंप्लीट की और अमेरिका की

5:10:12कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अपनी मां और फटी

5:10:16की डिग्री हासिल की जुलाई 1924 में

5:10:19अंबेडकर जी मुंबई में बहिष्कृत हितकारिणी

5:10:23सभा की स्थापना करते हैं इसका अनटचेबल्स

5:10:27की मोरल और मटेरियल प्रोग्रेस करना होता

5:10:29है वो एजीटेशन कभी रास्ता बनाते हैं और

5:10:32दिसंबर 197 में अनटचेबल्स के मंदिर में

5:10:36घुसने और पब्लिक वेल्स में से पानी लेने

5:10:38के राइट्स के लिए सत्याग्रह लॉन्च करते

5:10:40हैं इसे महाद सत्याग्रह के नाम से जाना

5:10:43जाता है

5:10:45आगे बढ़ते हुए 1930 में अंबेडकर जी नेशनल

5:10:49पॉलिटिक्स में इंटर करते हैं और अनटचेबल्स

5:10:52के लिए सेपरेट इलेक्टोरेट्स की डिमांड

5:10:54करते हैं वो ब्रिटिशर्स द्वारा

5:10:56ऑर्गेनाइज्ड तीनों राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस

5:10:58में पार्टिसिपेट करते हैं 1932 में

5:11:01ब्रिटिश पीएम द्वारा एनाउंसर कम्युनल

5:11:04अवार्ड में अंबेडकर जी की सेपरेट

5:11:06इलेक्टरेट की डिमांड एक्सेप्ट कर ली जाति

5:11:09है लेकिन गांधीजी द्वारा इसका विरोध करने

5:11:11और भूख हड़ताल शुरू करने पर अंबेडकर जी

5:11:15कंप्रोमाइज करने के लिए तैयार होते हैं और

5:11:17उनके और गांधी जी के बीच पूना पेस्ट साइन

5:11:20होता है जिसके अकॉर्डिंग सेपरेट इलेक्टरेट

5:11:23की डिमांड वापस ले ली जाति है और उसकी जगह

5:11:26जनरल कांस्टीट्यूएंसी में शेड्यूल कास्ट

5:11:30को रिजर्वेशन दिया जाता है

5:11:32अप्रैल 1942 में जो इंडिया पार्टी के रूप

5:11:35में अंबेडकर जी शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन

5:11:38फॉर्म करते हैं कांग्रेस पार्टी द्वारा

5:11:41उन्हें कांस्टीट्यूएंट असेंबली का मेंबर

5:11:43बनाया जाता है और फिर हमारे

5:11:45कॉन्स्टिट्यूशन की ड्राफ्टिंग कमेटी का

5:11:47हेड बनकर अंबेडकर जी अपना अनमोल योगदान

5:11:51देते हैं उनके प्रयासों से इंडिया को ऐसा

5:11:54कॉन्स्टिट्यूशन मिलता है जिसमें

5:11:56अनटचेबिलिटी को अबॉलिश कर दिया जाता है और

5:11:59जो फंडामेंटल राइट्स और एक क्वालिटी की

5:12:01गारंटी देता है

5:12:03इंडिपेंडेंस के बाद वो गवर्नमेंट में डॉ

5:12:06मेंबर की तरह कम करते हैं और हिंदू कोड

5:12:09बिल लेकर आते हैं हालांकि बिल्कुल लेकर जब

5:12:12असेंबली में विरोध होता है तो पीएम नेहरू

5:12:14इसे वापस ले लेते हैं इस बात से नाराज

5:12:17होकर अंबेडकर जी कैबिनेट से रिजाइन कर

5:12:19देते हैं हालांकि बाद में नेहरू अलग-अलग

5:12:22पार्ट्स में हिंदू कोड बिल पास करवा लेते

5:12:25हैं

5:12:261950 में अंबेडकर जी अपने फॉलोअर्स के साथ

5:12:29बुद्धिस्म अडॉप्ट कर लेते हैं यह उनका

5:12:32तरीका था हिंदू कास्ट सिस्टम को अपोज करने

5:12:35का उनके अनुसार क्योंकि हिंदू रिलिजन और

5:12:39उसका कास्ट सिस्टम अनटचेबल्स को इक्वल

5:12:41राइट्स देने के लिए तैयार नहीं है इसलिए

5:12:44अनटचेबल्स के पास हिंदुइज्म को छोड़ने के

5:12:46अलावा और कोई ऑप्शन नहीं राहत है दोस्तों

5:12:50अंबेडकर जी आज भी लोअर कास्ट पीपल के लिए

5:12:53इंस्पिरेशन का सोर्स हैं उनके विचार और

5:12:56आईडियोलॉजी आज भी देश के युवाओं को

5:12:59प्रेरणा देती हैं

5:13:00कंक्लुजन इस तरह कास्ट डिस्क्रिमिनेशन के

5:13:05अगेंस्ट लो और कास्ट पीपल ने अलग-अलग

5:13:07आंदोलन की अपने साथ हो रही इन ह्यूमन

5:13:10बिहेवियर को चैलेंज करने का इन्होंने साहस

5:13:12दिखाए इन्हीं के प्रयासों का नतीजा था की

5:13:16लो और कास्ट पीपल अपने अधिकारों की प्रति

5:13:18सजग हुए हालांकि निरसा करने वाली बात यह

5:13:22है की इतने प्रयासों के बाद भी कास्ट

5:13:25डिस्क्रिमिनेशन

5:13:26जैसे इविल से देश आजाद नहीं हो सका है आज

5:13:30भी अनटचेबल्स के अगेंस्ट किया जान वाले

5:13:32क्रीमिया अक्सर न्यूज़ पेपर की हैडलाइंस

5:13:34बनते रहते हैं यकीनन ऐसी हैडलाइंस को

5:13:37देखकर ज्योतिबा फूल पेरियार या अंबेडकर

5:13:41जैसे ग्रेट लीडर्स खुश नहीं होते

5:13:44हमें जरूर है हमें जरूर है इन ग्रेट

5:13:47लीडर्स के विजन को पूरा करने की एक

5:13:50कास्टलेस इक्वल सोसाइटी फॉर्म करने की ये

5:13:53किसी एक लीडर से संभव नहीं होगा बल्कि सभी

5:13:56देशवासियों को इसमें सतना होगा

5:13:59लॉर्ड लियोन और लॉर्ड रिपन

5:14:03दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं दो ऐसे

5:14:05ब्रिटिश वाइस-रॉयस की जिन्हें एक दूसरे का

5:14:08अपोजिट भी कहा जा सकता है एक तरफ थे लॉर्ड

5:14:11लिटिल जिन्हें याद किया जाता है उनकी

5:14:14रिप्रेसिव पॉलिसीज के लिए और दूसरी तरफ

5:14:17लाउडरपन जिन्हें उनकी लिबरल पॉलिसीज के

5:14:21लिए जाना जाता है आई शुरू करते हैं लॉर्ड

5:14:24लिटन से

5:14:27लोड लेटर 1876 तू 1880

5:14:37का चार्ज लिया था वह प्रोफेशन से डिप्लोमा

5:14:41थे और अलग-अलग कैपेसिटीज में ब्रिटिश

5:14:44फॉरेन ऑफिस को सर्व कर चुके थे इसके साथ

5:14:46ही वो एक रिपीटेड

5:14:52के नाम से जान जाते थे

5:14:561876 से पहले तक उन्हें एडमिनिस्ट्रेशन का

5:14:59कोई एक्सपीरियंस नहीं था और ना ही वह

5:15:02इंडियन अफेयर्स की जानकारी थे तो इंडिया

5:15:04का वायसराय बने के बाद उन्होंने क्या-क्या

5:15:07कम किया आई जानते हैं

5:15:15सबसे पहले जानते हैं

5:15:17187678 के फैमिन में लॉर्ड लियोन के रोल

5:15:19को

5:15:21डी फैमिन का

5:15:23187678 दोस्तों

5:15:261876 से 78 के बीच इंडिया फैमिन का सामना

5:15:30करना पड़ता है इसका सबसे ज्यादा असर दिखता

5:15:33है मद्रास मुंबई मैसूर हैदराबाद और

5:15:36सेंट्रल इंडिया और पंजाब के कुछ पार्ट्स

5:15:38में एक एस्टीमेट के अनुसार इस फेमस से एक

5:15:42साल के ही अंदर करीब 5 मिलियन लोगों की

5:15:45मृत्यु हो गई थी

5:15:49प्रेसीडेटशिप में कमीशन पॉइंट करते हैं

5:15:54अपनी रिकमेंडेशन देती है जैसे की सभी

5:15:57प्रोविंस में फंड बनाया जाए

5:16:15नेक्स्ट बात करते हैं रॉयल टाइटल ट्रैक

5:16:171876 की और 1877 के दिल्ली दरबार की

5:16:23डी रॉयल टाइटल ट्रैक 1876 और दिल्ली दरबार

5:16:27ऑफ 1877

5:16:29ब्रिटिश पार्लियामेंट 1876 में रॉयल

5:16:32टाइटल्स एक्ट पास करती है जिसके अनुसार

5:16:34इंग्लैंड की क्वीन विक्टोरिया को इंडिया

5:16:37की इंप्रेस होने का टाइटल मिलता है इसे

5:16:40कैसे रे हिंद भीगा जाता था लॉर्ड लियोन

5:16:43इंडिया में इसे सेलिब्रेट करने के लिए

5:16:451877 में डेली दरबार ऑर्गेनाइजर करते हैं

5:16:48जिसमें फैमिली क्वीन विक्टोरिया को इंडिया

5:16:51की रानी अनाउंस किया जाता है ध्यान देने

5:16:54वाली बात यह है की यह दरबार तब ऑर्गेनाइजर

5:16:57किया जा रहा था जब इंडिया में फेम के करण

5:16:59लोग भूखे मा रहे थे और ऐसे समय में लोगों

5:17:02की हेल्प करने की जगह लिटिल दरबार में

5:17:05लाखों खर्च कर देते हैं इससे पता चला है

5:17:09की लियोन के मां में इंडिया के लोगों के

5:17:11लिए किसी भी तरह की कोई सिंपैथी नहीं थी

5:17:13उनके इस एक्ट से लोगों में ब्रिटिश रूल के

5:17:17अगेंस्ट डिस्कंटेंट बढ़ाने लगता है और

5:17:19नेशनलिस्ट फीलींगस और भी प्रखर होती हैं

5:17:22अब बात करते हैं वर्नाकुलर प्रेस एक्ट

5:17:27मार्च 1878 दोस्तों लॉर्ड लिटन की इस तरह

5:17:33पॉलिसीज को वर्नाकुलर प्रेस यानी की

5:17:36इंडियन लैंग्वेज में छापने वाले

5:17:38न्यूज़पेपर और जर्नल्स ओपनली क्रिटिसाइज

5:17:41करने लगता

5:17:43की कैसे फेमेन से बुरी तरह फैक्ट्री लोग

5:17:46गवर्मेंट से कोई हेल्प ना मिलने की वजह से

5:17:49रोबरी करने के लिए मजबूर हो गए हैं का

5:17:52सकते हैं की वर्नाकुलर प्रेस ब्रिटिश रूल

5:17:54पिक्चर सबके सामने लाने का कम कर रही थी

5:17:57इस तरह की भड़काने वाले आर्टिकल्स की तेजी

5:18:00से होती ग्रोथ लॉर्ड लियोन को परेशान करती

5:18:03है और वो रिप्रेसिव पॉलिसी फॉलो करने का

5:18:06डिसीजन लेते

5:18:07मार्च 1878 में वर्नाकुलर प्रेस एक्ट पास

5:18:10कर देते हैं जिसका

5:18:12होने वाले गवर्नमेंट के क्रिटिसिजम को

5:18:15रोकना था एक्ट के अनुसार वर्नाकुलर

5:18:18न्यूजपेपर्स के पब्लिशर को मजिस्ट्रेट के

5:18:20साथ बंद साइन करना था की वो ऐसा कोई भी

5:18:23आर्टिकल पब्लिश नहीं करेंगे जिससे लोगों

5:18:25के अंदर ब्रिटिश गवर्मेंट किया अगेंस्ट

5:18:28दिस अफेक्शन पैदा हो और अगर वो इसको

5:18:30वायलेट करते हैं तो उनके प्रिंटिंग

5:18:32इक्विपमेंट को सीस भी किया जा सकता है

5:18:35मजिस्ट्रेट के एक्शन के अगेंस्ट कोर्ट में

5:18:37कोई अपील भी नहीं की जा शक्ति थी

5:18:40इस एक्ट के थ्रू लोड लिटिल ने फ्रीडम ऑफ

5:18:43स्पीच के राइट को छन लिया था और सबसे बड़ी

5:18:46बात थी की यह सिर्फ वर्नाकुलर प्रेस के

5:18:48लिए ही था एक तरह से डिसलाॅयल नेटिव प्रेस

5:18:52और लॉयल एंग्लो इंडियन प्रेस के बीच

5:18:54भेदभाव का प्रतीक था इस तरह के

5:18:57डिस्क्रिमिनेशन से लोगों को समझ आने ग गया

5:18:59की ब्रिटिशर्स की थ्योरी ऑफ व्हाइट मेंस

5:19:01बर्डन बस एक दिखावा है

5:19:03वर्नाकुलर प्रेस एक्ट से बचाने के लिए

5:19:06अमृत बाजार पत्रिका खुद को रातों रात

5:19:09इंग्लिश पब्लिकेशन बना लेती हैं इस एक्ट

5:19:12से वर्नाकुलर प्रेस को तो कंट्रोल कर लिया

5:19:13गया लेकिन गवर्नमेंट के अगेंस्ट जो

5:19:16डिस्कंटेंट था वो कम नहीं हुआ था बस उसको

5:19:19ओपनली एक्सप्रेस नहीं किया जा रहा था इससे

5:19:22डिस्कंटेंट अंदर ही अंदर और ज्यादा बढ़ता

5:19:24है अब बात करते हैं लियोन के

5:19:27एडमिनिस्ट्रेशन के एक और रिप्रेसिव मेजर

5:19:29की जो था 1878 का आर्म्स एक्ट

5:19:331878 इस एक्ट ने बिना लाइसेंस के हथियार

5:19:38रखना या खरीदने बेचे को क्रिमिनल ऑफेंस

5:19:40डिक्लेअर कर दिया लेकिन एक्ट का वर्स्ट

5:19:43फीचर था इसमें शामिल रेसियल

5:19:45डिस्क्रिमिनेशन क्योंकि यूरोपियंस और

5:19:48एंग्लो इंडियन पर यह एक्ट लागू नहीं होता

5:19:50था मतलब इंडियन के हथियार रखना से ही

5:19:53परेशानी थी दोस्तों रेसियल डिस्क्रिमिनेशन

5:19:56की बात करें तो यह ब्रिटिश की सभी पॉलिसी

5:19:59में दिखता है और इसका सबसे बड़ा एग्जांपल

5:20:02था सिविल सर्विसेज में इंडियन की

5:20:04अपॉइंटमेंट

5:20:10खाने को तो 1833 के चार्ट एक्ट ने इंडियन

5:20:13के लिए सिविल सर्विसेज का रास्ता खोल दिया

5:20:15था लेकिन रियलिटी में यूरोपियन ब्यूरो

5:20:18कृषि कभी भी इंडियन को अपना हिस्सा नहीं

5:20:21बनाना चाहती थी और इसीलिए लॉर्ड लिटन 1878

5:20:25में स्टेट्यूटरी सिविल सर्विस का प्लेन

5:20:27आगे रखते हैं इसके अनुसार गवर्नमेंट ऑफ

5:20:29इंडिया प्रोविंशियल गवर्मेंट के रिकमेंड

5:20:32करने पर कुछ इंडियन को स्टेट्यूटरी सिविल

5:20:34सर्विसेज में एम्पलाई कर शक्ति थी लेकिन

5:20:37इसमें भी शर्ट यह थी की यह अप्वाइंटमेंट्स

5:20:39गवर्नेंस सर्विस में होने वाले टोटल

5:20:42अप्वाइंटमेंट्स के 16 से ज्यादा नहीं हो

5:20:45सकते थे इसके साथ ही स्टेट्यूटरी सिविल

5:20:48सर्विस के स्टेटस और सैलरी भी कवमेंट

5:20:51सर्विसेज के जैसे नहीं थे

5:20:55लॉर्ड लिटन है तो यह भी प्रपोज दिया था की

5:20:58कोविनेटेड सर्विसेज को पुरी तरह से इंडियन

5:21:00के लिए क्लोज कर दिया जाए लेकिन सेक्रेटरी

5:21:04ऑफ स्टेट इस प्रपोज पर एग्री नहीं

5:21:06इंडियन को एग्जाम में कंप्लीट करने से

5:21:09डिस्चार्ज करने के लिए मैक्सिमम आगे को 21

5:21:12से घटकर 19 कर दिया जाता है इस तरह से

5:21:15इंडियन को सिविल सर्विसेज में आने से

5:21:17रोकने की हर संभव कोशिश की गई थी अब बात

5:21:20करते हैं फ्री ट्रेड की फ्री ट्रेड

5:21:23दोस्तों लिटन ने इंग्लैंड की टेक्सटाइल

5:21:26इंडस्ट्री के इंटरेस्ट को ध्यान में रखते

5:21:28हुए

5:21:291879 में कॉटन क्लॉथ पर लगे वाली इंपोर्ट

5:21:32ड्यूटी को अबॉलिश कर दिया था इससे इंडिया

5:21:35में डेवलप हो रही टेक्सटाइल इंडस्ट्री को

5:21:37नुकसान होता है और ब्रिटिश इंडस्ट्रीज को

5:21:40फायदा

5:21:45पॉलिसी

5:21:52हुआ था

5:21:54वार लियोन के प्रोवोग करने पर ही हुआ था

5:21:57और और में एक फेलियर साबित हुई इसमें लिटन

5:22:01इंडिया के रिवेन्यू का बड़ा हिस्सा खर्च

5:22:03कर

5:22:04इन पॉलिसी

5:22:06इंडियन को ब्रिटिश रूल नेचर का एहसास होने

5:22:09लगता है एजुकेटेड इंडियन को रिलाइज होता

5:22:12है की ब्रिटिश कैसे उनके साथ

5:22:14डिस्क्रिमिनेशन कर रहे हैं और इसी वजह से

5:22:17नेशनलिज्म की भावना और ज्यादा प्रमोट होती

5:22:20है

5:22:23वायसराय की पोस्ट से रिजाइन कर देते हैं

5:22:25और नए वायसराय बनते हैं लॉर्ड रिपन तो आई

5:22:29अब लॉर्ड रिपन के बड़े में बात करते हैं

5:22:3284

5:22:38दोस्तों 1880 में इंग्लैंड की लीडरशिप में

5:22:42लिबरल पार्टी पावर में आई है ग्लैडस्टिन

5:22:44इंडिया के लिए अपनी पॉलिसी डिक्लेअर करते

5:22:46हुए कहते हैं की ब्रिटिशर्स का रूल इंडिया

5:22:49की नेटिव लोगों के लिए प्रॉफिटेबल होना

5:22:51चाहिए और हमारी पॉलिसी होगी की हम इंडियन

5:22:54को ये दिखा और समझा भी सके की कैसे

5:22:57ब्रिटिश रूल उनके फायदे के लिए ही है और

5:23:00अपनी इस पॉलिसी को इंप्लीमेंट करने के लिए

5:23:02ग्लैडस्टिन ने लॉर्ड रिपन को इंडिया का

5:23:05वायसराय पॉइंट किया था लॉर्ड रिपन ब्रेड

5:23:08आउट लुक रखना वाले एक ऑनेस्ट परसों थे

5:23:10इसके साथ ही वह डेमोक्रेट भी थे रिपन का

5:23:14पॉलीटिकल नजरिया अपने प्रीति से लोड लिटिल

5:23:17से एकदम उल्टा था यह इंडिया की तरफ ड्यूटी

5:23:20महसूस करते थे लॉर्ड रिपन इंडिया के

5:23:23एडमिनिस्ट्रेशन को लिबरलाइज करने के लिए

5:23:25स्टेप्स लेते हैं आई जानते हैं उनके

5:23:28स्टेप्स के बड़े में शुरू करेंगे इंडिया

5:23:30में आए सबसे पहले फैक्ट्री

5:23:33एक्ट 1881

5:23:36दोस्तों फैक्ट्री लेबर्स की कंडीशन

5:23:38इंप्रूव करने के लिए लॉर्ड रिपन 1881 में

5:23:41पहले फैक्ट्री एक्ट पास करते हैं यह एक्ट

5:23:44सोर्सेस यादव वर्कर्स रखना वाली फैक्टरीज

5:23:47पर लागू होना था इस एक्ट ने 7 साल से कम

5:23:50आगे के बच्चों के एंप्लॉयमेंट पर प्रतिबंध

5:23:52लगा दिया इसके साथ ही 12 साल से कम आगे

5:23:55वालों के लिए वर्किंग हॉर्स को लिमिट कर

5:23:58दिया और डेंजरस मशीनरी को फैंस करने के

5:24:01लिए भी कहा इन इंप्लीमेंटेशन को

5:24:04सुपरवाइज्ड करने के लिए इंस्पेक्टर्स को

5:24:06भी अप्वॉइंट किया गया था

5:24:08यह एक्ट अपने स्कोप में भले ही लिमिटेड था

5:24:10लेकिन इंडिया की इंडस्ट्रियल हिस्ट्री में

5:24:12एक नई फैज की शुरुआत करता है पहले बार

5:24:16लेबर लॉस को लेकर एक पॉजिटिव खबर हमें

5:24:19देखने को मिलती है आगे चलकर इसी के बेसिस

5:24:22पर बटर लेबर लॉस कंट्री में ले गए इसके

5:24:24बाद लॉर्ड रिपन का मेजर स्टेप था

5:24:26वर्नाकुला एक्ट को रिपीट करना और लोकल

5:24:29सेल्फ गवर्नमेंट का रेजोल्यूशन पास करना

5:24:32रिपील ऑफ डी वर्नाकुलर प्रेस एक्ट 1882 और

5:24:36रेजोल्यूशन ऑन लोकल सेल्फ गवर्नमेंट 1882

5:24:39दोस्तों

5:24:40की पॉलिसी की वजह से बड़े हुए डिस्कंटेंट

5:24:44को कम करने की कोशिश करते हैं इसके लिए

5:24:46सबसे पहले वह रिटन द्वारा ले गए वर्नाकुलर

5:24:49प्रेस एक्ट को 1882 में वापस ले लेते हैं

5:24:55बराबर की फ्रीडम मिल जाति है रिपन के इस

5:24:59एक्ट से इंडिया में पब्लिक ओपिनियन को

5:25:01कॉन्सिलिएट करने में मदद मिलती है लेकिन

5:25:03लॉर्ड रिपन को सबसे ज्यादा याद किया जान

5:25:05वाले कम हैं उनका 188 2 में पास किया गया

5:25:09लोकल सेल्फ गवर्नमेंट पर रेजोल्यूशन इसके

5:25:12लिए इन्हें इंडिया में फादर ऑफ लोकल सेल्फ

5:25:15गवर्नमेंट भी कहा जाता है लॉर्ड रिपन

5:25:17इंडिया में म्युनिसिपल इंस्टीट्यूशंस की

5:25:20शुरुआत करते हैं जिसका लोगों को पॉलीटिकल

5:25:23एजुकेशन देना था अब बात करते हैं उनके

5:25:27एजुकेशनल रिफॉर्म्स की एजुकेशनल रिफॉर्म्स

5:25:321882 में ही सब विलियम हंटर की चैंपियनशिप

5:25:35में एक एजुकेशन कमीशन को अप्वॉइंट किया

5:25:38जाता है इसका मैंडेट 1854 के वुड डिस्पैच

5:25:42के बाद इंडिया में एजुकेशन फील्ड में हुई

5:25:44प्रोग्रेस को रिव्यू करना और आगे की

5:25:46पॉलिसी के लिए सुझाव देना था कमीशन

5:25:49प्राइमरी एजुकेशन के एक्सपेंशन और

5:25:51इंप्रूवमेंट के लिए गवर्नमेंट की स्पेशल

5:25:53रिस्पांसिबिलिटी पर जोर देती है इसका

5:25:56सुझाव था की प्राइमरी एजुकेशन को न्यूली

5:25:59इस्टैबलिश्ड म्युनिसिपल और जिला बोर्ड्स

5:26:01की केयर में दे दिया जाए इसके साथ ही

5:26:04सेकेंडरी एजुकेशन में कोर्सेज को दो भाग

5:26:07में बांट दिया जाए पहले लिटरेरी एजुकेशन

5:26:09जो यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस एग्जाम्स के

5:26:12लिए स्टूडेंट को तैयार करें और दूसरा

5:26:15प्रैक्टिकल कोर्स होना चाहिए जो कमर्शियल

5:26:18करियर के लिए तैयार करता इसके अलावा कमीशन

5:26:21ग्रैंड सिस्टम को सेकेंडरी और हायर

5:26:25एजुकेशन तक एक्सटेंड करने का सुझाव भी

5:26:27देती है कमीशन ने फीमेल एजुकेशन को

5:26:29स्प्रेड करने के लिए भी सजेशन दिए थे

5:26:32कमीशन के ज्यादातर सुझावों को गवर्नमेंट

5:26:34एक्सेप्ट कर लेती है इसे देश में काफी

5:26:37तेजी से स्कूल की ग्रोथ देखने को मिलती है

5:26:40अब बात करते हैं उनकी लैंड रिवेन्यू

5:26:43पॉलिसी की

5:26:44रेजोल्यूशन ऑन लैंड रिवेन्यू पॉलिसी

5:26:47दोस्तों

5:26:50लैंड रिवेन्यू पॉलिसी में भी कुछ चेंज

5:26:53इंट्रोड्यूस करने की कोशिश की थी वो बंगाल

5:26:56के परमानेंट सेटलमेंट में कुछ मोडिफिकेशन

5:26:58प्रपोज करते हैं वह रियड को परमानेंट और

5:27:01सिक्योरिटी का शोरूम देना चाहते थे इसके

5:27:04साथ ही गवर्नमेंट की तरफ से प्राइस राइस

5:27:06के अलावा किसी भी और ग्राउंड पर आगे से

5:27:09लैंड रिवेन्यू ना बढ़ाने की कमिटमेंट देना

5:27:11चाहते थे लेकिन बंगाल के जमींदारा उनके इस

5:27:14मेजर का विरोध करते हैं साथ ही प्रेजेंस

5:27:17का सपोर्ट भी उन्हें नहीं मिलता क्योंकि

5:27:19लगता है की एंग्लो इंडियन ब्यूरो कृषि तो

5:27:23जमींदार से भी ज्यादा बुरी है सेक्रेटरी

5:27:26ऑफ स्टेट भी रिपन के प्रपोज को फीवर नहीं

5:27:28करते इसलिए उनका यह रेजोल्यूशन इंप्लीमेंट

5:27:31नहीं हो पता

5:27:33रेजोल्यूशन इंप्लीमेंट भले ही एन हुआ हो

5:27:35लेकिन इससे यह पता चला है की लॉर्ड रिपन

5:27:38की इंटेंशंस अच्छी थी वो बंगाल की मदद ही

5:27:42करना चाहते थे अब बात करते हैं इल्बर्ट

5:27:45बिल्कुल ट्रैवर्सिटी वे इल्बर्ट बिल्कुल

5:27:47ट्रॉफी

5:27:4918834 दोस्तों 1883 में वायसराय काउंसिल

5:27:53के डॉ मेंबर से क एल्बो ने एक बिल

5:27:56इंट्रोड्यूस किया था जिसे इल्बर्ट बिल के

5:27:59नाम से जाना जाता है इसकी इंट्रोडक्शन से

5:28:02पहले तक क्रिमिनल केसेस में यूरोपियंस का

5:28:04ट्रायल इंडियन मजिस्ट्रेट नहीं कर सकते थे

5:28:07उनका ट्रायल सिर्फ यूरोपियन जज ही कर सकते

5:28:10थे

5:28:11अल्बर्ट बिल इसको चेंज करने के लिए लाया

5:28:13गया था इसके अनुसार इंडियन जज भी

5:28:16यूरोपियंस के कैसे को प्रेसीडे कर सकते थे

5:28:18लेकिन अल्बर्ट बिल के इस प्रोविजन से एक

5:28:21बहुत बड़ी कंट्रोवर्सी क्रिएट हो जाति है

5:28:31और इसलिए

5:28:33इंडियन जज के सामने ट्रायल फेस करने की

5:28:35बात भी गलत थी इस बिल के अगेंस्ट कोलकाता

5:28:37में रहने वाली यूरोपियन बिजनेस कम्युनिटी

5:28:39प्रोटेस्ट करना शुरू कर देती है ऐसा इसलिए

5:28:43क्योंकि यह अपने इंडियन सर्वेंट को इल्ट

5:28:45करते थे और कई बार उन्हें जान से ही मार

5:28:48देते थे ऐसे केसेस में इंग्लिश जज तो

5:28:51इन्हें बहुत कम सजाई है बिना सजा के ही

5:28:53जान देते थे इसलिए अपने स्पेशल प्रिविलेज

5:28:56को डिफेंड करने के लिए यूरोपियन कम्युनिटी

5:28:58एक डिफेंस संगठन बनती है यह लोग 15000 का

5:29:02फंड भी कलेक्ट करते हैं जिसकी मदद से ये

5:29:05इंडिया और लंदन दोनों ही जगह मिल्क

5:29:08अगेंस्ट प्रोपेगेंडा शुरू कर देते हैं यह

5:29:11लोग वाइस राय लॉर्ड रिपन को अब उसे करना

5:29:13भी शुरू कर देते हैं और ब्रिटिश गवर्नमेंट

5:29:15से कहते हैं की रिपन को इंडिया से वापस

5:29:18बुला लिया जाए कोलकाता में रेसियल राइट्स

5:29:21की संभावना बढ़ाने लगती है लंदन की न्यूज़

5:29:24पेपर्स में भी रिपन की पॉलिसी की आलोचना

5:29:26होने लगती है यहां तक

5:29:28यह बिल समझदारी से भारत नहीं है

5:29:32बढ़नी हुई प्रोटेस्ट के आगे आखिरकार लॉर्ड

5:29:35रिपन को ही झुकना पड़ता है

5:29:40जिसके बाद इंडियन जज किसी यूरोपियन का

5:29:43कैसे तभी जज कर सकता था जब जूरी की

5:29:46एटलिस्ट 50% मेंबर्स यूरोपीय

5:29:50बिल की कंट्रोवर्सी और कंप्रोमाइज ने

5:29:52इंडियन को ब्रिटिशर्स के और ज्यादा गेस्ट

5:29:55कर दिया जी तरह ब्रिटिशर्स ने अपने हक की

5:29:58बात प्रोटेस्ट करके मानव ली थी उसे इंडियन

5:30:01भी सिख गए की उन्हें भी इसी रास्ते पर

5:30:04चलना होगा और इस वजह से ये इनडायरेक्ट

5:30:07इंडियन नेशनल मूवमेंट और 1885 में

5:30:10कांग्रेस की स्थापना को प्रमोट करने के

5:30:12लिए रिस्पांसिबल था

5:30:13कंक्लुजन दोस्तों कंक्लुजन

5:30:19दोस्तों ये थे वायसराय लॉर्ड रिपन के

5:30:21इंडिया में किया गए रिफॉर्म्स हम का सकते

5:30:24हैं की उन्होंने इंडिया में लिबरल

5:30:26एडमिनिस्ट्रेशन को प्रमोट करने की पुरी

5:30:28कोशिश की वह इसमें कितने सफल हुए

5:30:38की तरह याद किया जाता है

5:30:42[संगीत]

5:30:57उन्हें लगता है की उनका मिशन इंडिया

5:31:07होने से पहले ही 1884 में रिजाइन कर देते

5:31:11हैं और एक हरे हुए इंसान की तरह इंग्लैंड

5:31:14लोट जाते हैं

5:31:16लॉर्ड रिपन एक्यूमेंटेरियन और लिबरल थे

5:31:19लेकिन ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के इंटरेस्ट

5:31:21को आगे ले जान के लिए उनके जैसे इंसान की

5:31:24जरूर नहीं थी इसी वजह से इंडिया में उनका

5:31:27मिशन फेल राहत है हालांकि वो हमें

5:31:29ब्रिटिशर्स की पॉसिबल कमीन सीड्स जरूर

5:31:31दिखा जाते हैं दोस्तों इस समय दुनिया में

5:31:35हर तरफ नेशनलिज्म तेजी से स्प्रेड हो रहा

5:31:37था और इंडिया में इस नेशनलिज्म की स्पिरिट

5:31:41को जागने में लॉर्ड लिटन

5:31:43दोनों ही इंस्ट्रूमेंट साबित होते हैं

5:31:46लेकिन जहां एक एडवर्सरी की तरह इंडिया में

5:31:49नेशनलिज्म की आज को चिंगारी देते हैं

5:31:53इस स्पिरिट को आगे ले जाते हैं

5:32:01[संगीत]

5:32:07की उनका जन्म इंडिया का वायसराय बने के

5:32:11लिए ही हुआ है

5:32:12वायसराय बने से पहले ही लोड कर्जन इंडिया

5:32:15के बड़े में बहुत कुछ जानते थे वह इससे

5:32:18पहले कई बार इंडिया ए भी चुके थे

5:32:201899 में इंडिया के वाइस रॉयल की पोस्ट पर

5:32:24अपॉइंटमेंट लॉर्ड कर्जन के लिए किसी सपना

5:32:26की पूरा होने जैसा था आई जानते हैं लॉर्ड

5:32:30कर्जन कैसे अपने सपना को सच्चाई में बदलते

5:32:33हैं और इंडिया आने के बाद वो क्या क्या

5:32:36करते हैं

5:32:37इंट्रोडक्शन

5:32:40दोस्तों इंडिया का वायसराय बन्ना अपने आप

5:32:43में बहुत बड़ा टास्क तथा इसके अलावा 1896

5:32:47के फेमो और उसके बाद

5:32:50प्रॉब्लम और ज्यादा बड़ा दी थी

5:32:53रेवेन्यू कम होते जा रहे थे इसके साथ ही

5:32:56एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को भी समय के साथ

5:32:58बदलने की जरूर महसूस हो रही थी और

5:33:01ब्रिटिशर्स के लिए इससे भी ज्यादा गंभीर

5:33:03समस्या थी उसे समय के इंडिया का पॉलीटिकल

5:33:06क्लाइमेट क्योंकि इंडियन में अवेयरनेस ए

5:33:09रही थी और वह ब्रिटिश से यह सवाल करने ग

5:33:12गए थे की उन्हें इंडिया पर रूल करने का

5:33:15अधिकार आखिर किसने दिया ऐसी सिचुएशन में

5:33:17इंडिया में अपनी टास्क का एक बहुत क्लियर

5:33:19कॉन्सेप्ट लोड कर्जन के दिमाग में था वो

5:33:23पुरी तरह कन्वेंस थे की एडमिनिस्ट्रेटिव

5:33:26मशीनरी को तुरंत डिपार्मेंट

5:33:40रिफॉर्म्स की

5:33:42पुलिस रिफॉर्म्स

5:33:44दोस्तों रिफॉर्म्स के लिए कर्जन का मेथड

5:33:46था एक एक्सपर्ट कमीशन को अप्वॉइंट करना यह

5:33:49कमीशन डिपार्मेंट की वर्किंग की पुरी जांच

5:33:51करती थी और फिर इसकी रिपोर्ट के आधार पर

5:33:54जरूरी रिफॉर्म्स के लिए कानून बना दिया

5:33:56जाता था

5:33:581912

5:33:59फ्रीजर की अध्यक्षता में पुलिस कमीशन को

5:34:02अप्वॉइंट किया जाता है कमीशन अपनी रिपोर्ट

5:34:05193 में सबमिट कर दी है जिसमें पुलिस

5:34:08फोर्स के इंप्रूवमेंट के लिए कई सारे

5:34:10सुझाव दिए गए थे जैसे की सभी रैंक्स की

5:34:13सैलरी इंक्रीज करना सभी प्रोविंस में

5:34:16पुलिस फोर्स की स्ट्रैंथ को बढ़ाना ऑफिसर

5:34:18और कांस्टेबल दोनों के लिए ही ट्रेनिंग

5:34:20स्कूल खोलना ही रैंक्स के लिए प्रमोशन की

5:34:23जगह डायरेक्ट रिक्रूटमेंट करना

5:34:25प्रोविंशियल पुलिस सर्विस को सेटअप करना

5:34:28सेंट्रल डिपार्मेंट ऑफ क्रिमिनल

5:34:29इंटेलिजेंस को क्रिएट

5:34:34करके इंप्लीमेंट कर दिया जाता है यह तो

5:34:38बात हुई

5:34:43एजुकेशनल रिफॉर्म्स

5:34:46दोस्तों लॉर्ड गर्जन का मानना था की

5:34:49इंडिया में एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस

5:34:51पॉलीटिकल रिवॉल्यूशनरीज को जन्म देने वाली

5:34:53फैक्टरीज बन गई हैं इसके साथ ही एजुकेशन

5:34:56सिस्टम के खराब होते स्टैंडर्ड और उसमें

5:34:59बढ़ते इन डिसिप्लिन ने कर्जन को परेशान

5:35:01किया हुआ था इसलिए 192 में वो यूनिवर्सिटी

5:35:05कमीशन को पॉइंट करते हैं कमीशन की

5:35:08रिकमेंडेशन के आधार पर 1904 में इंडियन

5:35:11यूनिवर्सिटी एक्ट पास किया जाता है इस

5:35:15एक्ट के द्वारा यूनिवर्सिटी के ऊपर

5:35:17गवर्नमेंट कंट्रोल को बड़ा दिया गया था

5:35:19एजुकेटेड इंडियन ने कमीशन की रिपोर्ट और

5:35:22रिजेक्ट का काफी विरोध भी किया था इस तरह

5:35:25लौटकर्जन कोशिश करते हैं की एजुकेशन

5:35:28सिस्टम को इंडियन नेशनलिज्म को सपोर्ट

5:35:30करने से रॉक जाए लेकिन तब तक शायद डर हो

5:35:33चुकी थी नेशनलिज्म का जिन चिराग से बाहर ए

5:35:37चुका था और यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल कर

5:35:39लेने से उसको चिराग में वापस नहीं भेजो जा

5:35:42सकता था बल्कि इस एक्ट ने तो आज में गी

5:35:46डालने का ही कम किया स्टूडेंट और उनके

5:35:48नेशनलिज्म की मिसल हम अगले वीडियो में

5:35:51स्वदेशी मूवमेंट में देखेंगे अब बात करते

5:35:54हैं

5:35:57इकोनामिक रिफॉर्म्स

5:36:00दोस्तों लॉर्ड कर्जन के इकोनामिक

5:36:02रिफॉर्म्स में आते हैं उनके फेम लैंड

5:36:05रिवेन्यू इरिगेशन एग्रीकल्चर रेलवे

5:36:07टैक्सेशन और ई एक सत्र से रिलेटेड

5:36:10लेजिसलेशंस आई एक-एक करके इनके बड़े में

5:36:14जानते हैं

5:36:16फेमस

5:36:17सबसे पहले बात करते

5:36:23साउथ सेंट्रल और वेस्टइंडीज इंडिया का एक

5:36:26बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ था इस दौरान

5:36:29लॉर्ड कर्जन ने काल से प्रभावित लोगों की

5:36:31हर संभव मदद की थी हम का सकते हैं की यह

5:36:35पहले ऐसे वायसराय थे जिन्होंने फेम की

5:36:38समस्या को ह्यूमन टच के साथ टैकल करने की

5:36:41कोशिश की थी

5:36:42कल्टीवेटर को रिवेन्यू पेमेंट से भी

5:36:44एग्जैक्ट कर दिया गया है

5:37:04कमीशन 1901 में ही अपनी रिपोर्ट सबमिट कर

5:37:07देती है कमीशन का कहना था की फेम के समय

5:37:10जो रिलीफ डिस्ट्रीब्यूशन की गई थी वो बहुत

5:37:12ज्यादा थी इसके साथ ही ऐसे मदर्स पर जरूर

5:37:15से ज्यादा इंप्रेस किया गया था जिनकी जरूर

5:37:18ही नहीं थी कमीशन एबल बॉडी परसों के लिए

5:37:21टास्क फोर्स से पेमेंट करने का सुझाव देती

5:37:24है साथ ही फॉदर फेम से डील करने के लिए

5:37:27रूल्स भी तैयार करती है यह तो बात हुई

5:37:30लौटकर्जन के फैमिन रिलीफ मेजर्स की आई बात

5:37:33करते हैं उनके एग्रीकल्चरल रिलेटेड

5:37:35रिफॉर्म्स की

5:37:37एग्रीकल्चर लैंड रिवेन्यू और इरिगेशन

5:37:41लॉर्ड कर्जन रिवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन को

5:37:44इंप्रूव करने के लिए 16th जनवरी 192 को

5:37:47लैंड रेजोल्यूशन इंट्रोड्यूस करते हैं

5:37:50इसमें लैंड रिवेन्यू के लिए तीन

5:37:52प्रिंसिपल्स फिक्स किया जाते हैं जो थे

5:37:55पहले की रिवेन्यू को हमेशा ग्रैजुअली ही

5:37:58इंक्रीज किया जाएगा दूसरा प्रिंसिपल था की

5:38:01रिवेन्यू कलेक्ट करते समय एग्रीकल्चर को

5:38:04कोई नुकसान ना हो इसका पूरा ध्यान रखा जाए

5:38:06और तीसरा था की ड्रॉट या और किसी मुश्किल

5:38:10के समय प्रेजेंट की तुरंत हेल्प की जाए

5:38:13इरिगेशन रिलेटेड रिफॉर्म्स के लिए 1901

5:38:16में

5:38:18कमीशन फॉर्म की जाति है कमीशन आने वाले 20

5:38:22सालों में इरिगेशन के ऊपर

5:38:26अतिरिक्त खर्च करने का सुझाव देती है

5:38:29कर्जन के समय में झेलम कैनाल को कंप्लीट

5:38:32करने के साथ अपार झेलम और लोअर बड़ी दवा

5:38:35कनाल का कम भी शुरू हो जाता है इसके साथ

5:38:38ही 194 में कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज

5:38:41एक्ट के द्वारा कल्टीवेटर के लिए सस्ते

5:38:44रेट्स पर लोन देने का प्रोविजन किया गया

5:38:46था इंडियन एग्रीकल्चर और लाइव स्टॉक की

5:38:49इंप्रूवमेंट के लिए लोट कर्जन इंस्पेक्टर

5:38:51जनरल के अंदर इंपीरियल एग्रीकल्चर

5:38:53डिपार्मेंट भी सेटअप करते हैं जिसका कम

5:38:56कल्टीवेशन के साइंटिफिक मैथर्ड को प्रमोट

5:38:59करना था इस तरह लौटकर्जन इंडिया में

5:39:02एग्रीकल्चर और प्रेजेंस की कंडीशन को

5:39:04इंप्रूव करने की कोशिश करते हैं

5:39:06एग्रीकल्चर रिफॉर्म्स के बाद आई जानते हैं

5:39:08रेलवे रिलेटेड रिफॉर्म्स के बड़े में

5:39:12रेलवे

5:39:15द्वारा इंट्रोड्यूस किया जान के बाद से ही

5:39:18रेलवे का प्रचार प्रसार बहुत तेजी से

5:39:20इंडिया में हो रहा था इसको और आगे ले जान

5:39:23का कम करते हैं लोट कर्जन रेलवे की

5:39:27डेवलपमेंट पर खास ध्यान देते हैं उनके समय

5:39:30में रेलवे की एक्जिस्टिंग लाइंस को

5:39:31इंप्रूव किया जाता है और साथ ही नई लाइंस

5:39:34पर भी कम शुरू किया जाता है रेलवे की

5:39:37वर्किंग और एडमिनिस्ट्रेशन पर एडवाइस देने

5:39:39के लिए इंग्लैंड से रेलवे एक्सपर्ट मिस्टर

5:39:42थॉमस रॉबर्टसन को बुलाया जाता है रॉबर्टसन

5:39:45के अनुसार रेलवे की कंडीशन

5:39:47अनसेटिस्फेक्ट्री थी और इसमें ऊपर से लेकर

5:39:50नीचे तक रिफॉर्म की जरूर थी यह कहते हैं

5:39:53की रेलवे लाइंस को कमर्शियल इंटरप्राइजेज

5:39:55की तरफ बिल्ड किया जाना चाहिए

5:39:57है इसके साथ ही रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन से

5:40:00जुड़े सभी मैटर्स को देखने के लिए एक

5:40:02रेलवे बोर्ड सेटअप करने का सुझाव भी देते

5:40:04हैं

5:40:05लौटकर्जन कमीशन की रिकमेंडेशन को एक्सेप्ट

5:40:08कर लेते हैं और रेलवे का मैनेजमेंट जिसे

5:40:11अभी तक पब्लिक वर्क डिपार्मेंट देखा था

5:40:13रेलवे बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया जाता है

5:40:16अब बात करते हैं टैक्सेशन और ई रिलेटेड

5:40:20मेजर्स की

5:40:22ई और टैक्सेशन

5:40:25दोस्तों 1899 के इंडियन कॉलेज और पेपर ई

5:40:28एक्ट के द्वारा ब्रिटिश ई को इंडिया में

5:40:31लीगल टेंडर डिक्लेअर कर दिया जाता है और

5:40:34एक पाउंड की कीमत ₹15 के बराबर राखी जाति

5:40:37है इसके साथ ही कर्जन शॉर्ट्स टैक्स का

5:40:40रेट भी कम करते हैं

5:40:44[संगीत]

5:40:48दोस्तों यह थे लॉर्ड कर्जन के इंपॉर्टेंट

5:40:50इकोनामिक रिफॉर्म्स अब हम जानते हैं उनके

5:40:53समय में होने वाले आर्मी रिफॉर्म्स के

5:40:55बड़े में

5:40:57आर्मी रिफॉर्म्स

5:40:59लौटकर्जन के समय में हुए आर्मी के

5:41:02रीऑर्गेनाइजेशन का श्री जाता है लॉर्ड

5:41:04किचन को यह 192 से लेकर 198 तक इंडिया के

5:41:09कमांडर इन के रहे थे इंडियन आर्मी को दो

5:41:13कमांड्स में डिवाइड कर दिया जाता है

5:41:14नॉर्दर्न कमांड और सदन कमांड नॉर्दर्न

5:41:18कमांड का हेड क्वार्टर मुरी में और सदन

5:41:21कमान का हैडक्वाटर्स पुणे में था आर्मी की

5:41:24हर डिवीजन में तीन ब्रिगेड बनाई जाति हैं

5:41:26जिसमें दो ब्रिगेड इंडियन बटालियन की और

5:41:29एक ब्रिगेड इंग्लिश बटालियन की होती थी

5:41:31इसके साथ ही ऑफिसर्स को ट्रेन करने के लिए

5:41:34क्वेटा में ट्रेनिंग कॉलेज भी सेटअप किया

5:41:36जाता है ब्रिटिश ट्रूप्स को बेटा आर्म्स

5:41:39की सप्लाई शुरू होती है इसके अलावा आर्मी

5:41:41की हर बटालियन को एक सीवर टेस्ट पास करना

5:41:44होता था जिसका नाम रखा गया

5:41:51इस डिपार्मेंट का खर्चा और ज्यादा बाढ़

5:41:54जाता है दोस्तों लौटकर ने असिएंट

5:41:57मॉन्यूमेंट्स के लिए भी एक एक्ट पास किया

5:41:59था आई जानते हैं उसके बड़े में

5:42:02असिएंट मॉन्यूमेंट्स एक्ट 1904 लोड कर्जन

5:42:06हिस्ट्री के स्टूडेंट रहे थे और

5:42:08आर्कियोलॉजी में उनका दीप इंटरेस्ट था

5:42:10इसीलिए इंडिया के हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट्स

5:42:13को रिपेयर रिस्टोर और प्रोटेस्ट करने के

5:42:16लिए वो 1904 में असिएंट मॉन्यूमेंट्स एक्ट

5:42:19पास करते हैं हिस्टोरिकल बिल्डिंग की

5:42:22रिपेयर के लिए 50000 पाउंड की अमाउंट

5:42:24सैंक्शन कर दी जाति है कर्जन इंडियन

5:42:27स्टेटस पर भी प्रेशर डालते हैं की वो

5:42:29अजंता एलोरा और सांची स्तूप जैसे इंडिया

5:42:32के रिच हेरिटेज को प्रिजर्व करने का कम

5:42:34करें

5:42:36इंडिया में आज भी स्मारक कंजर्वेशन के लिए

5:42:40एक बेडरॉक की तरह माना जाता है दोस्तों इन

5:42:44सभी रिफॉर्म्स के अलावा लौटकर ने 1899 में

5:42:47कोलकाता कॉरपोरेशन एक्ट भी पास किया था इस

5:42:50एक्ट के द्वारा कर्जन लोकल सेल्फ

5:42:52गवर्नमेंट के फील्ड में किया गए लॉर्ड

5:42:54रिपन के कम को अंडो करना चाहते थे ये एक्ट

5:42:58कॉरपोरेशन में इलेक्ट्रिक मेंबर्स की

5:42:59स्ट्रैंथ को कम कर देता है जिससे कलकट

5:43:02कॉरपोरेशन और उसकी कमेटी में ब्रिटिश

5:43:04एलिमेंट की मेजॉरिटी बनी रहती है इंडियन

5:43:08मेंबर्स एक्ट से खुश नहीं थे और 28

5:43:10मेंबर्स अपना विरोध दिखाने के लिए रिजाइन

5:43:13भी कर देते हैं लेकिन कर्जन पर इनकी

5:43:15प्रोटेस्ट का कोई असर नहीं पड़ता बल्कि वह

5:43:18तो अपने कम से इतने खुश थे की 1903 में एक

5:43:22बैंक्विट में कहते हैं की वायसराय की

5:43:24पोस्ट से रिटायर होने के बाद वो कोलकाता

5:43:27का मेयर बन्ना पसंद करेंगे ये एक अकेला

5:43:29ऐसा कम नहीं था कर्जन का जिसने इंडियन को

5:43:32प्रोटेस्ट करने के लिए मजबूर किया उनका

5:43:34सबसे कंट्रोवर्शियल डिसीजन तो बंगाल का

5:43:37पार्टीशन था तो आई उसके बड़े में जानते

5:43:40हैं

5:43:41पार्टीशन ऑफ बंगाल 1905

5:43:44दोस्तों 1905 में बंगाल प्रेसीडेंसी का

5:43:48पार्टीशन कर्जन के सबसे ज्यादा क्रिटिसाइज

5:43:51होने वाले मूव्स में से एक था

5:43:53इसका विरोध एन सिर्फ बंगाल में बल्कि पूरे

5:43:56भारत में किया जाता है आई समझते हैं कर्ज

5:43:59ने ये डिसीजन आखिर क्यों लिया था बंगाल

5:44:02प्रॉब्लम्स उसे समय इंडिया का सबसे ज्यादा

5:44:04पापुलेशन वाला प्रॉफिट था लगभग 8 करोड़ की

5:44:08जनसंख्या थी बंगाल की जिसमें आज का वेस्ट

5:44:11बंगाल बिहार छत्तीसगढ़ के कुछ हिस उड़ीसा

5:44:14असम और आज का बांग्लादेश भी शामिल था

5:44:17कर्जन कहते हैं की पार्टीशन कायम इतनी

5:44:20बड़े प्रॉब्लम्स के एडमिनिस्ट्रेशन को इजी

5:44:22बनाना है लेकिन उनका एक्चुअल मोटिव दो

5:44:25बंगाल प्रोविंस से उठ रही लाउड पॉलीटिकल

5:44:27वॉयस को कृष करना था और उनके बीच रिलिजियस

5:44:31ड्राइव और अपोजिशन को जन्म देना था इसे

5:44:33समझना के लिए पार्टीशन की प्लेन को समझना

5:44:35जरूरी है

5:44:36प्लेन की अकॉर्डिंग 3.1 करो की पापुलेशन

5:44:40के साथ ईस्ट बंगाल और असम को एक नया

5:44:42प्रोविंस बन्ना था इसमें मुस्लिम हिंदू

5:44:45पापुलेशन का रेशों 3:2 था वेस्टर्न बंगाल

5:44:48प्रोविंस में हिंदू मेजॉरिटी रहने वाली थी

5:44:51नेशनलिस्ट लीडर्स कहते हैं की ये स्कीम

5:44:54लोगों को रिलिजियस के बेसिस पर डिवाइड

5:44:56करने के लिए बनाई गई थी इससे मुस्लिम को

5:44:59हिंदू के अगेंस्ट खड़ा कर दिया जाएगा और

5:45:01उनकी यह बात बेगुन याद नहीं थी ये साबित

5:45:04होता है पूर्वी बंगाल के लेफ्टिनेंट

5:45:06गवर्नर की एक डिक्लिनेशन से जिसमें वो

5:45:09कहते हैं की उनकी दो वाइव्स में से

5:45:12मोहम्मडन वाइफ उनकी फेवरेट है एवं लॉर्ड

5:45:14कर्जन भी पूर्वी बंगाल की डोर के समय कहते

5:45:16हैं की पार्टीशन का एकम मोहम्मडन प्रोविंस

5:45:19क्रिएट करना भी है इसके साथ ही यह

5:45:22लिंग्विस्टिक्स बेसिस पर भी डिवाइड और रूल

5:45:24की पॉलिसी थी क्योंकि प्लेन के अकॉर्डिंग

5:45:26वेस्ट बंगाल में बंगाली माइनॉरिटी बना दिए

5:45:29गए थे

5:45:30बंगाल पार्टीशन की विरोध में एक बड़ा

5:45:33मूवमेंट खड़ा हो जाता है जिसे हम स्वदेशी

5:45:36मूवमेंट के नाम से जानते हैं

5:45:47और मटेरियल एडवांटेज का विजन दिखाकर अपनी

5:45:50तरफ किया जाता है

5:45:54इंडिया से वापस चले जाते हैं लेकिन उनकी

5:45:57डिसीजन के अगेंस्ट प्रोटेस्ट आने वाले कई

5:45:59साल तक चलते हैं

5:46:02कंक्लुजन दोस्तों लोट कर्जन ग्रेट

5:46:06इंपिरियलिस्ट थे वह इंडिया में ब्रिटिश

5:46:08कंट्रोल को और ज्यादा स्ट्रांग करना चाहते

5:46:10थे उनके ज्यादातर रिफॉर्म्स और एक्ट्स इसी

5:46:13मोटिव को फुलफिल करने के लिए थे इसके साथ

5:46:16ही इंडियन को लेकर उनका ओपिनियन बहुत ही

5:46:19खराब था वो इंडियन की इंसल्ट करने और उनकी

5:46:22दीपेस्ट फीलींगस को हट करने का कोई भी

5:46:25मौका नहीं जान देते थे एक ऑक्शन पर

5:46:28उन्होंने बंगाली को डरपोक हवाबाज और बस

5:46:31दिखावा करने वाला देश प्रेमी तक का दिया

5:46:33था वह इंडियन नेशनल कांग्रेस के

5:46:36प्रेसिडेंट से मिलने से भी इनकार कर देते

5:46:38हैं और कांग्रेस की एक्टिविटीज को लेटिंग

5:46:41ऑफ गैस की तरह कैरक्टराइज करते हैं इस तरह

5:46:46इंपिरियलिस्ट डिजाइंस की वजह से कर्जन

5:46:49इंडिया के पॉलीटिकल और रेस्ट को बर्स्टिंग

5:46:52पॉइंट तक पहुंच देते हैं और इससे शुरुआत

5:46:54होती है इंडिया में पॉलीटिकल मूवमेंट के

5:46:57एक बिल्कुल नए फेस की

5:46:59गर्जन की टेरैनो की वजह से ही इंडियन में

5:47:02नेशन हुड के और भी स्ट्रांग सेंस का जन्म

5:47:05होता है इस तरह देखा जाए तो कर्जन इंडिया

5:47:09के बेनिफैक्टर प्रूफ होते हैं भले ही उनकी

5:47:11इंटेंशन कभी भी ऐसी ना रही हो

5:47:14वॉइस ऑफ नेशनलिज्म 1857 तू 1885 दोस्तों

5:47:19आज हम बात करेंगे इंडियन नेशनल मूवमेंट की

5:47:22शुरुआती दूर की जिसमें हम जानेंगे उसकी

5:47:25इमरजेंसी के करण हम यह भी जानेंगे की 1885

5:47:29में इंडियन नेशनल कांग्रेस की गठन से पहले

5:47:32वो कौन सी पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशंस थे

5:47:35जिन्होंने इंडियन नेशनल मूवमेंट को

5:47:37इनिशियल पुश देने का कम किया लेकिन सबसे

5:47:40पहले एक बैकग्राउंड जान लेते हैं

5:47:43बैकग्राउंड

5:47:45दोस्तों 1857 की क्रांति के बाद भारत एक

5:47:49मेजर पॉलीटिकल और सोशल चेंज के दूर से

5:47:52गुर्जर रहा था जहां भारत की बागडोर अभी

5:47:54ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों से ब्रिटिश

5:47:56क्राउन के हाथों में चली गई थी अब इंडिया

5:47:59डायरेक्टली ब्रिटिश क्राउन द्वारा गवन

5:48:01होने वाला था वैसे तो ईस्ट इंडिया कंपनी

5:48:04की पावर्स को कम करने की कोशिश 173 के

5:48:07रेगुलेटिंग एक्ट से चल रही थी लेकिन 1857

5:48:10की क्रांति ने इस पूरे प्रोसेस को

5:48:12एक्सीलरेट कर दिया और ब्रिटिश क्राउन ने

5:48:14फाइनली साड़ी पावर्स जूम कर ली लेकिन

5:48:17इंडियन की बात करें तो उनके हालातो में

5:48:19इसे कोई खास फर्क नहीं पड़ा क्योंकि

5:48:22ब्रिटिश क्राउन ने भी ईस्ट इंडिया कंपनी

5:48:24जैसी रिप्रेसिव पॉलिसी

5:48:32इंटेलेक्चुअल और यहां तक की कैपिटल भी

5:48:34ब्रिटिश से काफी नाराज थे इस कांटेक्ट में

5:48:38अब हम जानते हैं की इंडियन नेशनल मूवमेंट

5:48:40के राइस के करण क्या थे और ऐसी क्या वजह

5:48:42थी जिनके चलते 19th सेंचुरी के सेकंड हाफ

5:48:46में इंडियन की पॉलीटिकल

5:48:50फैक्टर्स रिस्पांसिबल पर नेशनल मूवमेंट

5:48:53दोस्तों इंडियन नेशनल मूवमेंट के इमरजेंसी

5:48:56का सबसे में करण लोगों में यह रिलाइजेशन

5:48:59था की उनके पिछड़ेपन में कॉलोनियल रूल का

5:49:02सबसे बड़ा हाथ था और इस रिलाइजेशन की सबसे

5:49:05पहले वजह यह थी की ब्रिटिश राज ने भारत

5:49:08में एक यूनिफाइड स्ट्रक्चर क्रिएट किया

5:49:10थ्रू लॉस और इंस्टीट्यूशंस लाइक सिविल

5:49:13सर्विसेज और ज्यूडिशरी और मॉडर्न मेंस ऑफ

5:49:16ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन लाइक रेलवे

5:49:18रोड टेलीग्राफ ईटीसी इन सब ने इंडियन के

5:49:22फिट को एक दूसरे से जोड़ दिया जिसके चलते

5:49:25एक बंगाली के कंसर्न और एक पंजाबी के

5:49:27कंसर्न्स लगभग सिमिलर थे इसके अलावा

5:49:30अलग-अलग जगह की लीडर्स और इंटेलेक्चुअल को

5:49:33भी इतिहास के एक्सचेंज में मदद मिली

5:49:35ब्रिटिशर्स द्वारा भारत में इंट्रोड्यूस

5:49:37किया गए मॉडर्न एजुकेशन ने वेस्टर्न थॉट

5:49:40और आइडियल को भी इंडियन के सामने

5:49:42इंट्रोड्यूस किया इसकी चलते कई यूरोपियन

5:49:45स्कॉलर्स जैसे

5:49:50की राशनल सेकुलर डेमोक्रेटिक और नेशनलिस्ट

5:49:54इतिहास भी इंडिया में स्प्रेड हुए जिसकी

5:49:56वजह से नेटिव इंटेलेक्चुअल की थिंकिंग में

5:49:59बदलाव आने लगे इसके साथ ही सेकंड हाफ ऑफ

5:50:0219थ सेंचुरी में प्रेस और लिटरेचर ने भी

5:50:04इस रिलाइजेशन में अपना योगदान निभाया इस

5:50:08दूर में लगभग 169 न्यूजपेपर्स पंपलेट और

5:50:12जर्नल्स विनैकुलर लैंग्वेज में पब्लिश हो

5:50:14रहे थे जो ब्रिटिश पॉलिसीज का जोर शोर से

5:50:17क्रिटिसिजम कर रहे थे इनमें से कुछ

5:50:19प्रॉमिनेंट नेशनलिस्ट न्यूज़ पेपर्स थे

5:50:21बंगाल में हिंदू पैतृक अमृत बाजार पत्रिका

5:50:25इंडियन मेरा बंगाली सोम प्रकाश और संजीवनी

5:50:30बॉम्बे में रसग्गुफ्तार नेटिव ओपिनियन

5:50:33इंदु प्रकाश महारथ और केसरी

5:50:37मद्रास में हिंदू स्वदेशी मित्रों आंध्र

5:50:40प्रकाशिक और केरल पत्रिका अप में एडवोकेट

5:50:44हिंदुस्तानी और आजाद पंजाब में ट्रिब्यून

5:50:47अकबर आम और कोहिनूर अगला इंपॉर्टेंट करण

5:50:51था इंडियन का अपने पेस्ट का रे डिस्कवरी

5:50:54कई यूरोपियन स्कॉलर

5:50:57विल्सन रावत सरसों और इंडियन स्कॉलर्स

5:51:01जैसे आरजी भंडारकर ल मित्र और बाद में

5:51:04स्वामी विवेकानंद ने इंडियन हिस्ट्री के

5:51:07आर्ट और कलर को रे डिस्कवर किया जिसकी वजह

5:51:10से इंडियन का सेल्फ मोटिवेशन और

5:51:12कॉन्फिडेंस बड़ा इनमें से कई स्कॉलर्स ने

5:51:15इंडियन रुलर्स जैसे अशोक चंद्रगुप्त और

5:51:18अकबर की पॉलीटिकल अचीवमेंट्स की कहानियां

5:51:21को लोगों तक पहुंचा ब्रिटिश ने इंडिया में

5:51:24अपने रूल को जस्टिफाई करने के लिए अभी तक

5:51:26व्हाइट मांस बर्डन थ्योरी के द्वारा

5:51:28इंडियन को यह बताने की कोशिश की थी की

5:51:31इंडियन बाबरिक और उन सिविलाइज्ड थे जो खुद

5:51:35को गवर्नर नहीं कर सकते थे और इंडियन को

5:51:38सिविलाइज करने हैं लेकिन इंडिया के

5:51:41ग्लोरियस पेस्ट के डिस्कवरी ने इंडियन की

5:51:44कॉन्फिडेंस को बूस्ट किया और उन्हें खुद

5:51:46के कलर पर गर्व करने का एक मौका दिया

5:51:48जिसके थ्रू वो ब्रिटिश आइडिया लॉजिकल

5:51:51डोमिनेंस को चैलेंज कर सकते थे इसके अलावा

5:51:5319th सेंचुरी के सोशियो रिलिजियस रिफॉर्म

5:51:56मूवमेंट ने सोसाइटी के कई वर्गों को

5:51:59जागरूक किया पर एग्जांपल सोशल रिफॉर्मर्स

5:52:02ने कास्ट सिस्टम को क्रिटिसाइज करते हुए

5:52:04कास्ट के बेसिस पर डिवाइडेड इंडियन

5:52:06सोसाइटी में एक सेंस ऑफ यूनिटी को जन्म

5:52:09देने का प्रयास किया इसके अलावा सोशल

5:52:11रिफॉर्म मूवमेंट में वूमेन अपलिफ्टमेंट

5:52:14वूमेन राइट्स विडो रीमैरिज को यंग बंगाल

5:52:17मूवमेंट के फाउंडर हेनरी विवियन डिरोजियों

5:52:20ने सावित्रीबाई पहले के साथ सत्य शोधन

5:52:23समाज ने स्वामी दयानंद सरस्वती के आर्य

5:52:26समाज ने और ईश्वर चंद्र विद्यासागर में भी

5:52:29प्रमोट किया इसके अलावा ब्रिटिश राज के

5:52:32रेडिकल्स ने भी इंडियन में ब्रिटिश राज के

5:52:36प्रति एक नेगेटिव ड्यूटी को जन्म दिया

5:52:38हिस्टोरियन कई ऐसी इंस्टेंस की बात करते

5:52:40हैं जहां इंग्लिश मां ओपनली एजुकेटेड

5:52:43इंडियन को इंसर्ट करते थे 20th सेंचुरी

5:52:47में गांधी जी के साथ हुए रेसियल

5:52:48डिस्क्रिमिनेशन की कहानी तो हम सभी जानते

5:52:50हैं और इसके एग्जांपल्स हमें 19th सेंचुरी

5:52:53में भी मिलते हैं इसके अलावा इंडियन को कई

5:52:56एक्सक्लूसिव इंग्लिशमन क्लब से अलग रखा

5:52:59जाता था और इंडियन को यूरोपीय पेसेजंर्स

5:53:02के साथ ट्रेन कंपार्टमेंट में ट्रैवल करना

5:53:04भी अलाउड नहीं था इन सब ने इंडियन की

5:53:07सेल्फ रिस्पेक्ट को हट करने का कम किया

5:53:09इसके अलावा ब्रिटिश राज की कई ऑफिशल

5:53:12रिप्रेसिव पॉलिसी

5:53:17का सबसे अच्छा एग्जांपल है जिसके थ्रू

5:53:20गवर्नमेंट अपने खिलाफ क्रिटिसिजम को रोकना

5:53:23चाहती थी इसके अलावा 1877 में जब भारत एक

5:53:26बेहद खतरनाक फैमिली से गुर्जर रहा था तभी

5:53:29ब्रिटिश ने एक इंपीरियल दरबार को

5:53:31ऑर्गेनाइजर किया जिसने इंडियन को ब्रिटिश

5:53:34के सेल्फिश एटीट्यूड को एक्सपोज किया 18

5:53:3798 में लिटन ने इंडियन सिविल सर्विसेज की

5:53:40मैक्सिमम आगे को 21 से रिड्यूस करके 19 कर

5:53:43दिया जिससे इंडियन की सिविल सर्विसेज में

5:53:46एंट्री और भी ज्यादा मुश्किल हो गई

5:53:481883 में रिपन की वायसराय शिव के दौरान

5:53:51हुई अल्बर्ट बिल्कुल ट्रबीसी कहानी ना

5:53:54कहानी इमेडिएट फ्लैश पॉइंट वाली जिसके

5:53:57चलते इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड पॉलीटिकल

5:53:59एक्टिविटी में राइस हुआ और 1885 में

5:54:02इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन हुआ इस बिल

5:54:05का मकसद था की क्रिमिनल केसेस में इंडियन

5:54:08जिला मजिस्ट्रेट और सेशन जज को यूरोपीय का

5:54:12ट्रायल करने की परमिशन हनी चाहिए लेकिन कई

5:54:14रेसिस्ट यूरोपियंस ने इस बिल के खिलाफ

5:54:16मैसिव प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज्ड कर इसे रॉक

5:54:19दिया और ये डिक्लेअर किया की इंडियन वन

5:54:22नोट

5:54:24कर दिया गया

5:54:35जो इंडिया

5:54:37क्योंकि इसने इंडियन को एक्रॉस रीजन और

5:54:40कम्युनिटी यूनिट करने में हेल्प किया था

5:54:42तो दोस्तों यह थे इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड

5:54:45नेशनल मूवमेंट के राइस के करण वैसे तो

5:54:48इंडिया में ट्रॉली पान इंडिया ऑर्गेनाइज्ड

5:54:51पॉलीटिकल स्ट्रगल की शुरुआत 1885 में

5:54:53इंडियन नेशनल कांग्रेस के फॉर्मेशन से हुई

5:54:56लेकिन आईएनसी के पहले भी मिड-19 सेंचुरी

5:55:00में कई ऐसे ऑर्गेनाइजेशंस एस्टेब्लिश हुए

5:55:02जिन्होंने आईएनसी के फॉर्मेशन को एक बेस

5:55:06प्रोवाइड करने का कम किया तो चलिए अब कुछ

5:55:09इंपॉर्टेंट परी कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशन की

5:55:12चर्चा करते हैं

5:55:14पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशंस बिफोर इंडियन

5:55:16नेशनल कांग्रेस

5:55:18दोस्तों इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड पॉलीटिकल

5:55:21एक्टिविटीज और इंडियन नेशनल मूवमेंट के

5:55:23जनक कहानी ना कहानी राजा राममोहन राय को

5:55:27माना जाता है जिन्होंने भारत में सबसे

5:55:29पहले सोशल और पॉलीटिकल इश्यूज को

5:55:31ब्रिटिशर्स के सामने रखना का कम किया

5:55:33उन्होंने अपने ब्रह्म समाज के थ्रू वूमेन

5:55:37अपलिफ्टमेंट कास्ट सिस्टम की प्रॉब्लम्स

5:55:39और सिविल सर्विसेज रिफॉर्म्स को लेकर

5:55:41लोगों में अवेयरनेस फैलाने का कम किया

5:55:43इसके अलावा 1857 की क्रांति के पहले बंगाल

5:55:47बिहार और उड़ीसा के लैंडलॉर्ड ने फर्स्ट

5:55:50ऑर्गेनाइज्ड पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन को

5:55:521837 में कोलकाता में एस्टेब्लिश किया था

5:55:55जो लैंडलॉर्ड के इंटरेस्ट के इश्यूज को

5:55:58प्रेजेंट कर रहे थे यह ऑर्गेनाइजेशन बाद

5:56:01में 1851 में बंगाल ब्रिटिश इंडिया

5:56:04सोसाइटी के साथ ब्रिटिश इंडियन संगठन में

5:56:06मर्ज कर दिया गया

5:56:13और पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशंस के क्रिएशन की

5:56:16आवाज और ज्यादा बुलंद हुई

5:56:18प्रोटीन प्रोटीन 66 में ग्रैंड रोड मां ऑफ

5:56:21इंडिया का ही जान वाले दादाभाई नौरोजी ने

5:56:23लंदन में ईस्ट इंडिया संगठन को एस्टेब्लिश

5:56:26किया जिसमें उन्होंने इंडियन की

5:56:28प्रॉब्लम्स को ब्रिटिश गवर्मेंट के सामने

5:56:30रखा नौरोजी ने अपनी किताब पावर्टी और उन

5:56:34ब्रिटिश रूल इन इंडिया और स्कॉलर आरसी डेट

5:56:37ने अपनी किताब डी इकोनामिक हिस्ट्री ऑफ

5:56:39इंडिया के थ्रू इंडियन के एक्सप्लोइटेशन

5:56:41और पावर्टी को एक सिस्टमैटिक तरीके से

5:56:44उजागर करने का कम किया उन्होंने ड्रेन और

5:56:47वेल्थ थ्योरी के थ्रू इंडियन को समझाया की

5:56:50कैसे ब्रिटिशर्स इंडिया को डेवलप नहीं कर

5:56:52रहे थे बल्कि उसे एक्सप्लोइट कर और गरीब

5:56:55बनाते जा रहे थे इसके अलावा 1876 के समय

5:56:58सुरेंद्र नाथ बनर्जी नाम की एक अच्छी

5:57:01राइटर और लोटर और यंगर नेशनलिस्ट लीडर

5:57:04आनंद मोहन बस ने बंगाल में इंडियन संगठन

5:57:08को एस्टेब्लिश किया यह आगे बंगाल के कई

5:57:11गांव और काशन से लोगों को पॉलिटिकल यूनिट

5:57:14करने वाला था इंडियन सिविल सर्विस

5:57:16एग्जामिनेशन में आगे लिमिट रिफॉर्म्स

5:57:18एक्ट और वर्नाकुलर प्रेस एक्ट के अगेंस्ट

5:57:21एजीटेशन में भी इसी ऑर्गेनाइजेशन ने

5:57:23एक्टिवली पार्टिसिपेट किया था बाद में

5:57:26इंडियन संगठन की कुछ ब्रांचेस बंगाल के

5:57:29बाहर भी एस्टेब्लिश हुई जो काफी फेमस हुई

5:57:31लेकिन इसे जो इंडिया बॉडी का रैकेट्जिनेशन

5:57:34नहीं मिला क्योंकि इनकी डिमांड्स लार्जली

5:57:36लोकल रीजंस के इश्यूज तकलिमिटेड थी बाकी

5:57:39की पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन का फंक्शनिंग और

5:57:42स्कोप भी काफी नैरो और लिमिटेड था जिन्हें

5:57:45ज्यादा रैकिंग मिशन नहीं मिला बंगाल के

5:57:48अलावा इंडिया की कई और पार्ट्स में

5:57:50अलग-अलग ऑर्गेनाइजेशन बने जिसमें जस्टिस

5:57:53राणा देने पुनः सार्वजनिक सभा को

5:57:55एस्टेब्लिश किया जो ब्रिटिश पॉलिसीज और

5:57:58इकोनामिक इश्यूज को जर्नल्स के थ्रू रेस

5:58:00कर रहे थे साथ में मद्रास महाजन सभा 1881

5:58:04और मुंबई प्रेसीडेंसी संगठन 1885 ने भी

5:58:08ब्रिटिश गवर्नमेंट की एडमिनिस्ट्रेटिव और

5:58:10लेजिसलेटिव पॉलिसी का भरपूर क्रिटिसिजम

5:58:13किया

5:58:13खैर अब समय ए गया था जहां कई नेशनलिस्ट

5:58:17लीडर्स को लगा की सारे पॉलीटिकल

5:58:19ऑर्गेनाइजेशन को एक यूनिफाइड तरीके से

5:58:22ब्रिटिश गवर्मेंट से अपनी मांगों को

5:58:24पॉलीटिकल तरीके से बावा सकते हैं इसलिए

5:58:27इंडियन संगठन ने कोलकाता में दिसंबर 1883

5:58:31को एक जो इंडिया नेशनल कॉन्फ्रेंस को

5:58:34ऑर्गेनाइज किया जिसमें बंगाल के साथ बाहर

5:58:37की लीडर्स भी शामिल हुए और फिर फाइनली

5:58:401885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन

5:58:43हुआ चलिए ब्रीफली नजर डालते हैं फ्री

5:58:46इंडियन नेशनल कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशंस की

5:58:48डिमांड्स पर

5:58:51डिमांड्स ऑफ फ्री कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशन

5:58:54दोस्तों फ्री कांग्रेस लीडर्स की सबसे

5:58:57पहले डिमांड थी पब्लिक एक्सपेंडिचर को कम

5:58:59करना जिसके थ्रू ब्रिटिश

5:59:03को फुलफिल कर रहे थे दूसरी डिमांड थी

5:59:06इंडियन सिविल सर्विसेज में रिफॉर्म्स

5:59:08जिसकी चर्चा हमने पहले की इसके अलावा यह

5:59:11ऑर्गेनाइजेशंस लेजिसलेटिव काउंसिल में

5:59:14इंडियन के डिमांड को भी पुश कर रहे थे

5:59:16ताकि इंडियन को अपने देश की गवर्नेंस में

5:59:19रिप्रेजेंटेशन मिले वो लेजिसलेटिव काउंसिल

5:59:22को एक पॉलीटिकल प्लेटफॉर्म की तरह उसे कर

5:59:24ब्रिटिश रिप्रेसिव पॉलिसी का पॉलीटिकल

5:59:27विरोध भी करना चाहते थे ताकि सिविल

5:59:29लिबर्टीज पर अटैक कम हो सके

5:59:32वह प्रेस की लिबर्टी के भी सपोर्टर थे

5:59:34इसलिए इनमें से कई ऑर्गेनाइजेशंस ब्रिटिश

5:59:38गवर्नमेंट के वर्नाकुलर प्रेस एक्ट जैसे

5:59:40पॉलिसीज के खिलाफ एजीटेशन भी कर रहे थे

5:59:43फाइनली उनका डिमांड था की मॉडर्न एजुकेशन

5:59:46को विलेज तक पहुंचा जाए जो अभी तक सिर्फ

5:59:49कुछ लिमिटेड सेक्शंस तक ही सी में था

5:59:54कंक्लुजन

5:59:55तो दोस्तों ये भी कहानी इंडियन नेशनल

5:59:58मूवमेंट के शुरुआती दूर की जहां हमने देखा

6:00:01की कैसे इंडिया में सेकंड हाफ ऑफ 19थ

6:00:05सेंचुरी में एक नेशनल वैगनिंग के चलते

6:00:07इंडियन ने अपनी प्रॉब्लम्स और इश्यूज को

6:00:10रिलीज किया और साथ में पॉलीटिकल रिफॉर्म्स

6:00:13की बात की अब हम अगले वीडियो में इंडियन

6:00:16नेशनल कांग्रेस के फॉर्मेशन और उसके

6:00:18अचीवमेंट की बात करेंगे की कैसे आईएनसी ने

6:00:21इंडियन नेशनल मूवमेंट को एक प्रॉपर

6:00:24प्लेटफॉर्म दिया और धीरे-धीरे भारत के सभी

6:00:27वर्गों को इकट्ठा कर अंग्रेजन को भारत से

6:00:30भागने में सफलता हासिल की

6:00:33एरिया ऑफ मॉडरेट्स 1885 2905 दोस्तों हमने

6:00:39पिछली वीडियो में देखा की कैसे 1857 की

6:00:42क्रांति के बाद भारत में नेशनलिज्म के करण

6:00:45शुरू होते हैं कैसे वेरियस पॉलीटिकल और

6:00:49सोशल ऑर्गेनाइजेशंस का गठन होता है और किस

6:00:52तरह वो ब्रिटिशर्स के एक्सप्लोइटेशन को आम

6:00:54जनता के सामने उजागर करते हैं हमने ये भी

6:00:57देखा की किन कर्म से नेशनल मूवमेंट की

6:01:00शुरुआत हुई और कैसे इस मूवमेंट ने खुद को

6:01:03सस्टेन किया आई अब हम बात करेंगे इंडियन

6:01:06नेशनल मूवमेंट के नेक्स्ट फैज की जिसमें

6:01:09इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन हुआ और

6:01:11जिसने इंडियन पॉलिटिक्स को एक नया मोड

6:01:14दिया आई शुरू करते हैं इंडियन नेशनल

6:01:16कांग्रेस के फॉर्मेशन की कहानी से

6:01:18फॉर्मेशन ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस

6:01:21दोस्तों इंडियन नेशनल कांग्रेस आने वाले

6:01:24समय में इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल को लीड

6:01:27करने वाला अंब्रेला ऑर्गेनाइजेशन बने वाला

6:01:29था लेकिन इसके फॉर्मेशन का इतिहास काफी

6:01:33इंटरेस्टिंग और कंट्रोवर्सी का मुद्दा रहा

6:01:34है ऐसा इसलिए क्योंकि इंडियन नेशनल

6:01:37कांग्रेस के गठन का क्रेडिट कई हिस्टोरियन

6:01:40एक रिटायर्ड इंग्लिश सिविल सर्वेंट ओ हम

6:01:43को देते हैं ना की इंडियन लीडर्स को इस

6:01:46आर्गुमेंट को हम सेफ्टी वाल्व थ्योरी के

6:01:49नाम से जानते हैं दोस्तों सेफ्टी वाल्व

6:01:52थ्योरी कहती है की ब्रिटिशर्स ने 1857 की

6:01:55क्रांति को देखा था और उन्हें ये मालूम था

6:01:58की इंडियन पॉलीटिकल सिचुएशन फिर से ऐसे कई

6:02:01मेजर रिबेलियंस को जन्म दे शक्ति थी इसलिए

6:02:04वह चाहते थे की ऐसी टेंशंस को अवॉइड किया

6:02:07जा सके और इसका सबसे अच्छा तरीका था

6:02:10इंडियन को एक पॉलीटिकल प्लेटफॉर्म

6:02:12प्रोवाइड कर उनके गुस्से और डिसइनेंट को

6:02:15बिल्ड अप होने से रोकना ये एक साइकोलॉजिकल

6:02:18गेम की तरह देखा जा सकता है जहां नाराज

6:02:21इंडियन अपनी एनर्जी को एटलिस्ट डिस्कस कर

6:02:24सकें जो उन्हें एक सेंस ऑफ एंपावरमेंट

6:02:26देने में हेल्प करेगा भले ही उनकी एक्चुअल

6:02:29कंडीशन में कोई बदलाव आए या ना आए इसलिए

6:02:31इस थ्योरी प्रमोटर्स कहते हैं की इंडियन

6:02:35नेशनल कांग्रेस का फॉर्मेशन आओ हम द्वारा

6:02:37इंडिया के वायसराय लॉर्ड डफर ने किया था

6:02:40ना की इंडियन नेशनलिस्ट ने ऐसी दाव किया

6:02:44जाते हैं की आओ हम ने दफन के अलावा कई और

6:02:47ब्रिटिशर्स जैसे

6:02:49लॉर्ड रिपन जॉन ब्राइट टेट्रा के साथ भी

6:02:53मीटिंग्स की थी इसके अलावा कई ब्रिटिशर्स

6:02:55जैसे सर विलियम वेडिबल जॉर्ज यू चार्ल्स

6:02:59ब्रांड हमें इस इंडिया वी में सपोर्ट भी

6:03:02किया था हालांकि ये थ्योरी हिस्टोरियन

6:03:05द्वारा लाजली रिजेक्ट की जा चुकी है लेकिन

6:03:08फिर भी इंडियन नेशनल कांग्रेस में ब्रिटिश

6:03:11कंट्रीब्यूशन को नजर अंदाज नहीं किया जा

6:03:13सकता ब्रिटिश कंट्रीब्यूशन को खुद गोपाल

6:03:15कृष्णा गोखले ने 1913 में डिस्क्राइब किया

6:03:19और कहा था की बिना इंग्लिश सपोर्ट के

6:03:21आईएमसी जैसा कोई भी पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन

6:03:24फॉर्म नहीं हो पता क्योंकि अगर ब्रिटिश

6:03:26गवर्नमेंट चाहती तो किसी भी पॉलीटिकल

6:03:28ऑर्गेनाइजेशन को इजीली सरप्राइज कर शक्ति

6:03:31थी इसीलिए गोखले खुद लाइटनिंग कंडक्टर

6:03:34थ्योरी में बिलीव करते थे इस थ्योरी के

6:03:36हिसाब से ब्रिटिशर्स ने आईएमसी को फॉर्म

6:03:38नहीं किया बल्कि इंडियन नेशनलिस्ट ने

6:03:41ब्रिटिशर्स की सहायता से आईएमसी को फॉर्म

6:03:43किया ताकि ब्रिटिश गवर्मेंट का इंडियन के

6:03:46खिलाफ डिस्ट्रस्ट के माहौल में भी आईएमसी

6:03:49सरवाइव कर सके और इंडियन के डिमांड्स को

6:03:51वॉइस मिल सके इसके अलावा आईएमसी में कई

6:03:54इंडियन लीडर्स का रूल था जो यह बताता है

6:03:57की आओ हम का आईएमसी के फॉर्मेशन में रूल

6:04:00लाजली फैसिलिटेटर की तरह था इंडियन लीडर्स

6:04:04ने ही आईएनसी को एक स्ट्रांग ऑर्गेनाइजेशन

6:04:06की तरह डेवलप किया जिसमें दादाभाई नौरोजी

6:04:10बदरुद्दीन तैयब जी फिरोजशाह मेहता आनंद

6:04:13चरलू सन बनर्जी आरसी डेट अंबोस गोपाल

6:04:17कृष्णा गोखले जस्टिस राणा दी और बाल

6:04:20गंगाधर तिलक जैसे इंपॉर्टेंट लीडर्स थे

6:04:23आईएमसी में कई वूमेन लीडर्स कभी

6:04:25कंट्रीब्यूशन रहा जैसे 1890 में कोलकाता

6:04:28यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट कदंबिनी गांगुली

6:04:31पहले वूमेन बनी जिन्होंने कांग्रेस सेशन

6:04:34को एड्रेस किया था खैर आओ हम ने इंडियन

6:04:37लीडर्स को कांटेक्ट किया और इंडियन नेशनल

6:04:40कांग्रेस का पहले सेशन 1885 में बॉम्बे

6:04:43में ऑर्गेनाइजर किया गया जिसे डब्लू सी

6:04:45बानाजी ने प्रेसीडे किया था इसमें लगभग 72

6:04:49डेलीगेट ने भाग लिया था धीरे-धीरे आईएनसी

6:04:52की पापुलैरिटी बढ़ाने लगी और 1889 तक

6:04:55इंडियन डेलिगेट्स की इसमें संख्या 2000 तक

6:04:58पहुंच गई लेकिन आईएनसी इनिशियली एक

6:05:01ऑर्गेनाइजेशन ही रहा जो एजुकेटेड मिडिल

6:05:04क्लासेस द्वारा डोमिनेटेड था आईएमसी के

6:05:07लीडर्स लाजली लॉयर्स जर्नलिस्ट ट्रेडर्स

6:05:10इंडस्ट्री

6:05:18में फ्रेंडली रिलेशंस को प्रमोट करना ताकि

6:05:21पॉलीटिकल यूनिफिकेशन मदद मिले और आईएमसी

6:05:25को और स्ट्रैंथ मिले आईएमसी का दूसरा टीम

6:05:28था नेशनल यूनिटी को एक्रॉस कास्ट क्लास और

6:05:32रिलिजियस लाइंस में डेवलप करना ताकि

6:05:34पॉपुलर डिमांड्स को ब्रिटिश गवर्मेंट के

6:05:36सामने एक यूनिफाइड तरीके से रखा जा सके और

6:05:39साथ में पब्लिक ओपिनियन को ट्रेनिंग के

6:05:41थ्रू ऑर्गेनाइजर किया जा सके आईएमसी ने

6:05:44अपने फॉर्मेशन के बाद कई रिफॉर्म्स की

6:05:46डिमांड्स ब्रिटिश के सामने राखी जिनकी

6:05:48चर्चा अब हम करेंगे शुरू करेंगे सबसे

6:05:51इंपॉर्टेंट मुद्दे से ऑफ कांस्टीट्यूशनल

6:05:54रिफॉर्म्स

6:05:56कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स दोस्तों आईएमसी

6:05:59का सबसे पहले मुद्दा था कांस्टीट्यूशनल

6:06:02रिफॉर्म्स का शुरुआती दूर में नेशनलिस्ट

6:06:05लीडर्स की डिमांड थी की गवर्नमेंट में

6:06:07उनकी हिस्सेदारी ज्यादा से ज्यादा हो

6:06:09बेस्ड ऑन डी प्रिंसिपल

6:06:17में एक्सपेंशन और वोटिंग राइट्स की डिमांड

6:06:20की वह चाहते थे की काउंसिल में इलेक्ट्रिक

6:06:23सेंटिटिव्स को मेंबरशिप मिले और साथ में

6:06:25मेंबर्स की पावर भी इंक्रीज हो इसके चलते

6:06:28ही ब्रिटिशर्स को इंडियन काउंसिल एक्टिव

6:06:301892 को पास करना पड़ा जिसकी वजह से

6:06:33इंपीरियल लेजिसलेटिव काउंसिल आज वेल आज

6:06:35प्रोविंशियल काउंसिल में मेंबर्स इंक्रीज

6:06:38हुए काउंसिल को एनुअल बजट डिस्कस करने की

6:06:41ताकत भी दी गई लेकिन वोटिंग पावर नहीं

6:06:43दिया गया जिसकी वजह से नेशनल एक्टिव 1892

6:06:47से डिसेटिस्फाइड थे और प्रोटेस्ट कर रहे

6:06:49थे

6:06:50नेशनलिस्ट की डिमांड थी की पब्लिक पर्स

6:06:53में इंडियन का कंट्रोल हो ना की

6:06:55ब्रिटिशर्स का इसीलिए नोट टैक्सेशन विदाउट

6:06:58रिप्रेजेंटेशन स्लोगन को प्रमोट किया गया

6:07:01जो अमेरिकन रिवॉल्यूशन से लिया गया था साथ

6:07:04में सिर्फ कुछ मेंबर्स ही इंडियन द्वारा

6:07:07इलेक्ट हो सकते थे वह भी इनडायरेक्ट इसके

6:07:10अलावा अभी भी नॉन इलेक्ट्रिक ऑफिशल्स की

6:07:13मेजॉरिटी कंटिन्यू रही बाद में 28 सेंचुरी

6:07:16की शुरुआत में नेशनलिस्ट लीडर्स ने

6:07:19ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के सेल्फ गवर्निंग

6:07:21मॉडल को इंडिया में

6:07:23स्वराज के कॉन्सेप्ट के थ्रू रेस किया

6:07:24सबसे पहले स्वराज की डिमांड गोखले के

6:07:28बनारस सेशन 1905 और दादाभाई नौरोजी के

6:07:32कोलकाता सेशन 196 से हुई जिसकी चर्चा हम

6:07:36आने वाले वीडियो में करेंगे

6:07:40सबसे इंपॉर्टेंट एजेंडा को ऑफ इकोनॉमिक्स

6:07:45इकोनामिक रिफॉर्म्स दोस्तों अर्ली

6:07:49नेशनलिस्ट लीडर्स ने ब्रिटिश इकोनामिक

6:07:51पॉलिसीज को एक्सपोज किया और समझाया की

6:07:54कैसे वो हमारी इकोनामिक बैकवार्डनेस

6:07:56पार्वती और फेलियर एग्रीकल्चर इन मॉडर्न

6:07:59इंडस्ट्री का करण है

6:08:01दादाभाई नौरोजी ने ड्रेनो वेल्थ थ्योरी के

6:08:04थ्रू ये क्लेम किया की ब्रिटिश इंडियन

6:08:07वेल्थ को इंडिया में इन्वेस्ट करने की

6:08:09बजाएं उसे इंग्लैंड ले जा रहे थे यह

6:08:12थ्योरी इंडियन नेशनलिस्ट मूवमेंट के

6:08:14इकनॉमिक एस्पेक्ट का फाउंडेशन स्टोन बनी

6:08:16खैर अर्ली नेशनलिस्ट ने पावर्टी को

6:08:20इरेडिकेट करने के लिए मॉडर्न इंडस्ट्रीज

6:08:22को तेज गति देने का सजेशन भी दिया और साथ

6:08:26में नेशनलिस्ट छह रहे थे की ब्रिटिश

6:08:28गवर्नमेंट टैरिफ और गवर्मेंट के थ्रू

6:08:31मॉडर्न इंडस्ट्रीज को प्रमोट करें इसके

6:08:33अलावा लेटर फैज में नेशनलिस्ट लीडर्स ने

6:08:36स्वदेशी जैसे न्यू इतिहास को पापुलराइज भी

6:08:39किया और ब्रिटिश गुड्स के बॉयकॉट को

6:08:41प्रमोट किया अपनी डिमांड्स को पूरा करने

6:08:44के लिए इंडियन लीडर्स कई आंदोलन भी किया

6:08:46जिम लैंड रिवेन्यू में रिडक्शन प्लांटेशन

6:08:50लेबर्स के वर्किंग कंडीशंस में

6:08:52इंप्रूवमेंट साल्ट टैक्स का इवोल्यूशन और

6:08:55ब्रिटिश गवर्मेंट की मिलिट्री एक्सपेंडिचर

6:08:58में रिडक्शन जैसी डिमांड्स इंक्लूड थी

6:09:00इकोनॉमिक्स के बाद बात करते हैं

6:09:03एडमिनिस्ट्रेटिव और अदर रिफॉर्म्स की

6:09:06एडमिनिस्ट्रेटिव और अदर रिपोर्ट्स

6:09:08नेशनलिस्ट मांग कर रहे थे की सिविल

6:09:11सर्विसेज में इंडियन को इंक्लूड किया जाए

6:09:13ताकि इंडियन का गवर्मेंट में

6:09:16रिप्रेजेंटेशन बाढ़ सके वह यह उम्मीद कर

6:09:18रहे थे की इंडियन सर्विसेज ब्रिटिश

6:09:21गवर्नमेंट को इंडियन इश्यूज पर सेंसटाइज

6:09:23करेगी जिससे उनकी कंडीशंस इंप्रूव हो

6:09:26सकेंगे इसके अलावा फाइनेंशली बात करें तो

6:09:29सर्विसेज में यूरोपियन मोनोपोली के दो

6:09:32मुख्य नुकसान भी थे जिसके चलते नेशनलिस्ट

6:09:35की डिमांड कर रहे थे पहले यह था की से

6:09:39क्वालिफिकेशन होने के बाद भी यूरोपियन

6:09:42ऑफिशल्स को काफी ज्यादा सैलरी और

6:09:44एमोल्यूमेंट्स मिलते थे है जिसकी वजह से

6:09:47इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट काफी ज्यादा

6:09:49हो जाता था वहीं इंडियन ऑफिशल्स की सैलरीज

6:09:52और एमोल्यूमेंट्स कम होने के करण

6:09:54एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपेंडिचर काफी कम हो

6:09:57सकता था दूसरा यूरोपियन ऑफिशल्स अपनी

6:10:00सैलरी का ज्यादा हिस्सा और पेंशन को

6:10:02इंग्लैंड में भेज देते थे जिसकी वजह से

6:10:05इंडियन ट्रेजरी का ड्रीम होता था अगर हम

6:10:08जुडिशल रिफॉर्म की बात करें तो नेशनलिस्ट

6:10:11की एक मेजर डिमांड थी सिपरेशन ऑफ पावर्स

6:10:13यानी एग्जीक्यूटिव और ज्यूडिशरी का अलग

6:10:16करना इसके अलावा नेशनलिस्ट ने ये डिमांड

6:10:19भी राखी की ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडियन पे

6:10:22ट्रस्ट करें और उन्हें सेल्फ डिफेंस के

6:10:24लिए आर्म्स रखना और उसे करने की परमिशन

6:10:27दें बाकी डिमांड्स में इंक्लूड था वेलफेयर

6:10:31स्टेट का एस्टेब्लिशमेंट मेडिकल और हेल्थ

6:10:33फैसेलिटीज का एक्सपेंशन मॉडर्न एजुकेशन का

6:10:36मांस लेवल पर स्प्रेड और टेक्निकल एजुकेशन

6:10:38और हायर एजुकेशन का प्रमोशन ताकि इंडियन

6:10:42को ब्रिटिश रूल के इंपैक्ट का रिलाइजेशन

6:10:44हो सके

6:10:50एग्रीकल्चरल बैंक्स को एस्टेब्लिश करने की

6:10:52भी मांग की

6:10:54दोस्तों यह मेंशन जरूरी है की नेशनलिस्ट

6:10:57का ध्यान एन केवल एडमिनिस्ट्रेटिव

6:10:59रिफॉर्म्स तक्सीम में था बल्कि पेज्जंस और

6:11:02फार्मर्स के एग्रीकल्चर रिफॉर्म्स पर भी

6:11:04था जिसमें फार्मर्स को फेमेन से बचाने के

6:11:07लिए उन्होंने इरिगेशन को एक्सपेंड करने की

6:11:10मांग की नेशनलिस्ट लीडर्स ने पुलिस सिस्टम

6:11:12को भी रिफॉर्म करने की मांग की जिससे की

6:11:15पुलिस ऑनेस्ट और सही तरीके से कम करें

6:11:17ताकि लोगों का विश्वास पुलिस पर बढ़ लेटर

6:11:21नेशनलिस्ट लीडर्स ने इंडियन वर्कर्स और इन

6:11:24डेंजर लेबर्स को भी डिफेंड किया जो साउथ

6:11:27अफ्रीका मलाई मॉरीशस वेस्टइंडीज और

6:11:30ब्रिटिश गायन में कम कर रहे थे ताकि उनके

6:11:33वर्किंग कंडीशन को बेहतर और वेजेस को

6:11:35इंक्रीज किया जा सके इसके अलावा वो डिफेंस

6:11:39और सिविल राइट्स की भी मांग कर रहे थे

6:11:41इसमें फ्रीडम ऑफ स्पीच और प्रेस के

6:11:43इंपॉर्टेंट सबसे इंपॉर्टेंट मुद्दे थे

6:11:45क्योंकि अब तक नेशनलिस्ट को इनकी

6:11:48इंर्पोटेंस समझ ए गई थी पर एग्जांपल 1897

6:11:52में जब बॉम्बे गवर्नमेंट ने तिलक को

6:11:55ब्रिटिश गवर्नमेंट के अगेंस्ट बोलने और

6:11:57लिखने के लिए अरेस्ट कर लिया और पुणे के

6:11:59दो लीडर्स नटू ब्रदर्स को भी विदाउट

6:12:01ट्रायल अरेस्ट कर लिया गया तब पूरे देश

6:12:04में प्रोटेस्ट देखें गए इसी दूर में तिलक

6:12:07एक पावरफुल लीडर की तरह इंडियन पॉलीटिकल

6:12:09सीन में इमेज भी हुए थे तो दोस्तों यह तो

6:12:13बात हुई वेरियस रिफॉर्म्स की अब बात करते

6:12:15हैं इंडियन नेशनल कांग्रेस के पॉलीटिकल

6:12:17मैथर्ड की जिसको नेशनलिस्ट लीडर्स ने

6:12:20अडॉप्ट किया मैथर्ड ऑफ इंडियन नेशनल

6:12:22कांग्रेस दोस्तों 1885 से 1905 तक आईएमसी

6:12:27में मॉडरेट लीडर्स का डोमिनेंस रहा जैसे

6:12:30दादाभाई नौरोजी सुरेंद्रनाथ बनर्जी आरसी

6:12:33डेट वर्क बनर्जी फिरोज शाह मेहता गोपाल

6:12:36कृष्णा गोखले रासबिहारी बस और एमजी

6:12:41ग्रैजुएल रिफॉर्म्स और स्लो चेंज में

6:12:43विश्वास रखते थे वो ब्रिटिश रिप्रेशन से

6:12:46और इसीलिए वो किसी भी तरीके के नॉन

6:12:50कांस्टीट्यूशनल स्ट्रगल में विश्वास नहीं

6:12:52करते थे

6:12:53इसीलिए उनके मैथर्ड को पिटीशन प्रेयर्स और

6:12:56प्रोटेस्ट या 3p मॉडल के लेंस से देखा

6:12:59जाता था मॉडरेट लीडर्स अपने इश्यूज को

6:13:01जुडिशल रूट पिटीशन तू गवर्मेंट और राइटिंग

6:13:04इन न्यूजपेपर्स जैसे टूल्स के थ्रू राज

6:13:06करते थे और ये उम्मीद करते थे की अगर

6:13:09ब्रिटिशर्स को इंडियन के हालातो के बड़े

6:13:11में अवेयर करवाया गया तो वो उन्हें

6:13:13सुधारने की कोशिश करेंगे वो अपनी स्पीशीज

6:13:17के थ्रू पॉलीटिकल अवेयरनेस को स्प्रेड

6:13:19करने के साथ ही साथ पब्लिक ओपिनियन को भी

6:13:21रेस करते थे इससे मॉडरेट लीडर्स ने इंडियन

6:13:24फ्रीडम मूवमेंट को फाउंडेशन देने का कम

6:13:27किया और डिफरेंट रीजन के लीडर्स को एक

6:13:30पॉलीटिकल प्लेटफॉर्म प्रोवाइड किया इन डी

6:13:32फॉर्म ऑफ आई एन सी

6:13:35के प्रति एटीट्यूड को समझते हैं

6:13:39दोस्तों ब्रिटिश गवर्नमेंट शुरू से ही

6:13:43इंडियन नेशनल मूवमेंट के प्रति काफी

6:13:45होस्टेस

6:13:46ने नेशनल लीडर्स को

6:13:51ब्राह्मण और वायलेट लिंग से संबोधित किया

6:13:54ब्रिटिश गवर्नमेंट ने आईएमसी की कुछ

6:13:57डिमांड्स को एक्सेप्ट भी किया लेकिन

6:13:59ज्यादातर डिमांड्स को नेगलेक्ट किया साथ

6:14:01में आईएमसी के प्रोटेस्ट को रिप्रेसिव

6:14:04पुलिस एक्शन के थ्रू ढाबा दिया गया और

6:14:06सेडिशन के चार्ज में नेशनलिस्ट लीडर्स को

6:14:09जय में दाल दिया गया जिसमें तिलक का नाम

6:14:11इंपॉर्टेंट है खैर अब हम भी वेलवेट करते

6:14:15हैं आईएमसी में मॉडरेट फैज के सक्सेस को

6:14:18इवेलुएशन मॉडरेट फैज दोस्तों मॉडरेट

6:14:22लीडर्स की सबसे इंपॉर्टेंट सक्सेस थी की

6:14:25इन्होंने नेशनल और वीकनिंग को प्रमोट किया

6:14:27इसके साथ ही ब्रिटिश का असली चेहरा इंडियन

6:14:31के सामने एक्सपोज करने का कम भी किया

6:14:33नेशनल मूवमेंट के मॉडरेट फैज में आइडिया

6:14:36ऑफ डेमोक्रेसी को भी प्रोपागेट किया गया

6:14:38था मॉडरेट लीडर्स ने ब्रिटिश रूल के

6:14:41इकोनामिक करैक्टर को एक्सपोज करने के साथ

6:14:43एक आम पॉलीटिकल और इकोनामिक प्रोग्राम को

6:14:49इंडियन को यह मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस दिया

6:14:53की वो खुद को गवन कर सकते हैं और उन्हें

6:14:55ब्रिटिश की कोई जरूर नहीं है दोस्तों यह

6:14:59तो हुई कहानी इंडियन नेशनल कांग्रेस के

6:15:02फॉर्मेशन से लेकर मॉडरेट फैज के

6:15:04अचीवमेंट्स तक की आने वाली वीडियो में हम

6:15:07इंडियन नेशनल कांग्रेस के

6:15:09एक्सट्रीमिस्ट्रेस को देखेंगे जिसने नेशनल

6:15:12मूवमेंट को एक नई दिशा दिखाने का कम किया

6:15:27फॉर्मेशन और उसके मॉडरेट फेस को डिस्कस

6:15:30किया था

6:15:32आज हम बात करेंगे

6:15:35नाम से जाना जाता है इसके अलावा हम

6:15:39स्वदेशी और होमरूल लीग मूवमेंट को भी

6:15:42डिटेल में डिस्कस करेंगे तो आई शुरू करते

6:15:45हैं

6:15:46इंट्रोडक्शन

6:15:49दोस्तों

6:15:5028th सेंचुरी की शुरुआत में इंडिया में

6:15:52नेशनल लीडर्स की एक नई क्लासीमझ होती है

6:15:55जो मॉडरेट ग्रुप से काफी अलग थी यह

6:15:59ब्रिटिश अंपायर के अगेंस्ट और भी ज्यादा

6:16:01एग्रेसिव डांस लेते हैं और इन्हें

6:16:03एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स के नाम से जाना जाता

6:16:05है इसमें ज्यादातर यंग लीडर्स

6:16:09लीडर्स की सॉफ्ट और परसूएसिव अप्रोच पर

6:16:12यकीन नहीं था एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स की

6:16:15लिस्ट में मुख्यतः नाम आता है बाल गंगाधर

6:16:17तिलक लाल लाजपत राय विपिन चंद्र पाल और

6:16:21अरविंद घोष

6:16:23के बड़े में डिटेल में डिस्कस करने से

6:16:26पहले यह समझना जरूरी है की ऐसे क्या करण

6:16:29थे जिनकी वजह से इंडियन नेशनल कांग्रेस

6:16:32में इनका राइस होता है तो आई समझते हैं

6:16:39कॉसेस पर डी राइस ऑफ एक्सट्रीमीज्म

6:16:43दोस्तों एक्सट्रीमिस्ट फैज के उदय के पीछे

6:16:46बहुत से करण जिम्मेदार थे आई एक-एक करके

6:16:49उनको समझते हैं सबसे पहले करण था ब्रिटिश

6:16:53रूल के थ्रू नेचर की पहचान होना अर्ली

6:16:56नेशनलिस्ट लीडर्स ने ब्रिटिशर्स को

6:16:58एक्सपोज करने का कम किया था उन्होंने अपनी

6:17:01राइटिंग्स और स्टैटिसटिक्स डाटा की हेल्प

6:17:04से यह साबित कर दिया था की ब्रिटिश रूल और

6:17:06उसकी पॉलिसी की वजह से ही इंडिया की

6:17:09इकोनामिक हालात इतनी खराब हो चुकी है और

6:17:11गरीबी दिन रोज बढ़नी जा रही है इसी

6:17:15अवेयरनेस का नतीजा था एक स्ट्रीमिस्ट

6:17:17एडोलॉजी की ग्रोथ इन्हें समझ ए जाता है की

6:17:21इंडिया की प्रोग्रेस ब्रिटिश रूल में

6:17:23पॉसिबल ही नहीं है

6:17:27वेस्टर्नाइजेशन के अगेंस्ट एक रिएक्शन के

6:17:29रूप में भी देखा जाता है क्रिश्चियन

6:17:34के लिए एक चैलेंज बन रहे थे

6:17:37मैटेरियलिस्टिक और इंडिविजुअल्स वेस्टर्न

6:17:39सिविलाइजेशन इंडियन सिविलाइजेशन की वालुज

6:17:43को धीरे-धीरे एरोड करती जा रही थी

6:17:46एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स इंडियन स्पिरिचुअल

6:17:49हेरिटेज से इंस्पिरेशन लेते हैं

6:17:51एक्सट्रीमीज्म के राइस का सबसे बड़ा करण

6:17:53था मॉडरेट लीडर्स की लिमिटेशंस

6:17:56मॉडरेट लीडर्स ब्रिटिश अथॉरिटी से अपनी

6:17:59कोई सिग्निफिकेंट डिमांड एक्सेप्ट करने

6:18:02में सफल नहीं हुए थे यहां तक की 1892 के

6:18:06काउंसिल एक्ट में भी उन्हें निराशा ही हाथ

6:18:08लगी थी यही वजह थी की धीरे-धीरे मॉडरेट

6:18:11लीडर्स के मैथर्ड पर से यंग लीडर्स का

6:18:14भरोसा उठने लगता है

6:18:15एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मॉडरेट्स के थ्री

6:18:18पीस यानी की पिटीशन प्रेयर और प्रोटेस्ट

6:18:22के मेथड को पॉलीटिकल मेंडिकेंट नाम देते

6:18:25हैं तिलक कांग्रेस को कांग्रेस और

6:18:27फ्लेटरर्स और कांग्रेस सेशन को हॉलीडे

6:18:30रीक्रिएशन बोलते हैं लाल लाजपत राय का

6:18:33मानना था की कांग्रेस की मीटिंग एनुअल

6:18:36फेस्टिवल ऑफ एजुकेटेड इंडियन से ज्यादा

6:18:38कुछ भी नहीं है इस तरह एक्सट्रीमिस्ट

6:18:41लीडर्स मॉडरेट्स के स्ट्रांग पॉलिटिक्स बन

6:18:44जाते हैं इसके अलावा इंडिया की खराब होती

6:18:47है इकोनामिक कंडीशन भी इंडियन नेशनल

6:18:49एक्टिविटी में एक्सट्रीमीज्म के राइस को

6:18:51प्रमोट करती है

6:18:531896 और 1899 की टेरेबल फेमिंस के साथ

6:18:59महाराष्ट्र में पहले पबोनिक प्लेग ने बड़ी

6:19:02संख्या में लोगों की जान ली थी गवर्नमेंट

6:19:05की रिलीफ मशीनरी पुरी तरह से बेकार साबित

6:19:07हो रही थी तिलक केल्स और ओवर बेयरिंग

6:19:11गवर्नमेंट प्ले कमिश्नर को क्रिटिसाइज भी

6:19:13करते हैं क्योंकि ये कुछ अच्छा करने की

6:19:16जगह सिचुएशन को और ज्यादा बड़ा बना रहे थे

6:19:18तिलक कहते हैं की सरकारी उपाय से कम ट्रॉल

6:19:22तो हमारे लिए प्लेग है यह सभी इवेंट्स

6:19:25इंडियन को एहसास दिलाते हैं की उनकी

6:19:27कंडीशन कितनी हेल्पलेस हो गई है इसके साथ

6:19:30ही बार-बार फेमिंस का आना भी गवर्नमेंट की

6:19:33एंटी नेशनल पॉलिसी का ही रिजल्ट था इसके

6:19:36साथ ही इंडिया के बाहर हो रही इवेंट्स भी

6:19:38यंगर जेनरेशन को काफी इन्फ्लुएंस करते हैं

6:19:41जैसे की ब्रिटिश कॉलोनी स्पेशली साउथ

6:19:44अफ्रीका में इंडियन के साथ होने वाला

6:19:46हमिलिएटिंग ट्रीटमेंट एंटी ब्रिटिश फीलिंग

6:19:49क्रिएट करता है

6:19:52तुर्की और रसिया में चल रही नेशनल

6:19:55मूवमेंट्स भी इंडियन को न्यू हॉप्स और

6:19:58एस्पिरेशन देने का कम करते हैं इंडियन

6:20:00नेशनलिस्ट का कॉन्फिडेंस और ज्यादा बाढ़

6:20:03जाता है जब 1896 में अब सीनरी जैसा देश

6:20:06इटालियन आर्मी के अटैक को रिप्लेस करने

6:20:09में कामयाब राहत है इसके अलावा 1905 में

6:20:12रसिया जैसे पावरफुल देश पर जबान की शानदार

6:20:16जीत भी इंडियन को इंस्पिरेशन देने का कम

6:20:19करती है इन सभी इवेंट्स की वजह से इंडियन

6:20:21लीडर्स को ये विश्वास हो जाता है की

6:20:23ब्रिटिशर्स इन्विंसिबल नहीं है और उन्हें

6:20:26भी हराया जा सकता है दोस्तों नेट

6:20:43सीक्रेट सीक्रेट

6:20:46इंडिया में काफी रिसेंट क्रिएट किया था

6:20:49इसके साथ ही लॉर्ड कर्जन 193 में ऐसे समय

6:20:53में दिल्ली दरबार ऑर्गेनाइज्ड करते हैं जब

6:20:55इंडिया पुरी तरह से

6:20:58189900 के फैमिन के इफेक्ट से बाहर भी

6:21:00नहीं आया था उनका ये एक्ट भी बहुत कॉन्डम

6:21:04किया जाता है और इसी इंटरप्रेट किया जाता

6:21:07है आज एन पंपाउज बेसेंट तू एन स्टार्टिंग

6:21:10पापुलेशन

6:21:11गर्जन एडमिनिस्ट्रेशन का सबसे ज्यादा हिट

6:21:14किया जान वाला एक्ट था बंगाल का पार्टीशन

6:21:17इस एक्ट ने इंडियन की आंखें खोल दी थी और

6:21:20उन्हें ब्रिटिशर्स का असली रंग दिखने ग

6:21:23गया था पब्लिक प्रोटेस्ट के बावजूद

6:21:25पार्टीशन को फोर्स करना दिखता है की

6:21:28ब्रिटिशर्स को इंडियन पब्लिक ओपिनियन की

6:21:30कोई परवाह नहीं थी इससे यह भी साबित होता

6:21:33है की मॉडरेट्स की पिटीशन प्रेयर्स और

6:21:36प्रोटेस्ट की पॉलिसी से तो रिजल्ट्स नहीं

6:21:38मिलने वाले थे इन्हीं सब रीजंस की वजह से

6:21:42होता है

6:21:50मैथर्ड ऑफ एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स दोस्तों

6:21:53एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का गोल स्वराज था

6:21:56जबकि मॉडरेट लीडर्स का गोल तो सिर्फ

6:21:58एडमिनिस्ट्रेशन में ज्यादा से ज्यादा

6:22:00इंडियन को शामिल करना था इसलिए इनके

6:22:03मैथर्ड भी मॉडरेट लीडर्स से अलग है

6:22:06मॉडरेट्स के थ्री पीस के मेथड को ये ओपनली

6:22:10क्रिटिसाइज कर ही चुके थे इसीलिए प्रेयर

6:22:13और पिटीशन की जगह एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स

6:22:15बॉयकॉट और स्वदेशी मैथर्ड को अपनाते हैं

6:22:18यह परसूएसन से ज्यादा कन्फर्टेशनल में

6:22:21बिलीव करते थे इसके साथ ही ब्रिटिश रूल का

6:22:24विरोध करने में भी ये ज्यादा वो कल थे

6:22:27मॉडरेट्स की तरह इन्हें ब्रिटिश जस्टिस

6:22:29में कोई विश्वास नहीं था और ना ही यह

6:22:32ब्रिटिश क्राउन के प्रति कोई लॉयल्टी रखते

6:22:34थे

6:22:35एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मांस मूवमेंट में भी

6:22:38बिलीव करते थे और लोअर मिडिल क्लास को

6:22:40नेशनल मूवमेंट से जोड़ना चाहते थे

6:22:43एक्सट्रीमिस्ट के यह मैथर्ड सबसे पहले बार

6:22:46इंप्लीमेंट हुए थे स्वदेशी मूवमेंट के

6:22:48दौरान तो इस स्वदेशी मूवमेंट को डिटेल में

6:22:51समझते हैं

6:22:56दोस्तों स्वदेशी मूवमेंट बंगाल पार्टीशन

6:22:59के अगेंस्ट ऑर्गेनाइज्ड किया गया था यह

6:23:02इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से एक मांस

6:23:05मूवमेंट करने की पहले कोशिश भी थी लेकिन

6:23:08मास मूवमेंट शुरू होने से पहले कांग्रेस

6:23:10ने पार्टीशन का विरोध मॉडरेट मेथड से ही

6:23:13किया था

6:23:151903 में पार्टीशन का प्लेन आने पर मॉडरेट

6:23:18लीडर्स पिटीशन और प्रेयर्स के द्वारा

6:23:20बंगाल पार्टीशन के अगेंस्ट प्रोटेस्ट करते

6:23:22हैं लेकिन उनकी प्रोटेस्ट का ब्रिटिशर्स

6:23:25पर कोई असर नहीं होता और जुलाई 1905 में

6:23:29बंगाल पार्टीशन का फाइनल अनाउंसमेंट कर

6:23:31दिया जाता है

6:23:38और सेवंथ अगस्त 1905 को कोलकाता टाउन हाल

6:23:42की मीटिंग में बाय गो रेजोल्यूशन के पैसेज

6:23:45के साथ स्वदेशी मूवमेंट का फॉर्मल

6:23:47प्रोक्लेमेशन हो जाता है

6:23:4916 अक्टूबर 1905 को जो पार्टीशन फॉर्म में

6:23:54आता है तब पूरे बंगाल में उसे दिन को डीएफ

6:23:57मॉर्निंग की तरह मनाया जाता है यूनिटी के

6:24:00सिंबल के रूप में लोग एक दूसरे को राखी भी

6:24:03बांधते हैं

6:24:04प्रोफेशनल्स निकले जाते हैं जिसमें लोग

6:24:06वंदे मातरम और अमर सोनार बांग्ला जैसे गीत

6:24:09गेट हैं पॉलीटिकल लीडर्स बड़ी बड़ी

6:24:12गैदरिंग्स को एड्रेस करते हैं जल्दी ही

6:24:15मूवमेंट देश के बाकी हसन तक स्प्रेड हो

6:24:18जाता है तिलक की लीडरशिप में बॉम्बे और

6:24:20पुणे में लाल लाजपत राय और अजीत सिंह की

6:24:23नेतृत्व में पंजाब में मूवमेंट स्प्रेड

6:24:25होने लगता है सैयद हैदर राजा दिल्ली में

6:24:28लीडरशिप प्रोवाइड करते हैं और चिदंबरम

6:24:31पिल्लई मद्रास में मूवमेंट तो शुरू हो

6:24:33जाता है लेकिन कांग्रेस की तरफ से अभी भी

6:24:36इसका कोई फॉर्मल प्लेन नहीं रखा गया था आई

6:24:39जानते हैं कांग्रेस में स्वदेशी मूवमेंट

6:24:42को लेकर क्या चल रहा था

6:24:44डी कांग्रेस पोजीशन

6:24:46दोस्तों 1905 में गोखले की प्रेसीडेटशिप

6:24:50में कांग्रेस की मीटिंग होती है इसमें

6:24:52बंगाल की पार्टीशन और कर्जन की रिएक्शन को

6:24:56कंडोम किया जाता है साथ ही बंगाल में चल

6:24:59रहे स्वदेशी मूवमेंट को सपोर्ट करने का

6:25:01फैसला भी लिया जाता है एक्सट्रीमिस्ट

6:25:03लीडर्स तो मूवमेंट को बंगाल से बाहर देश

6:25:05के दूसरे पार्ट तक एक्सटेंड करना चाहते थे

6:25:08साथी फॉरेन गुड्स के बाय गॉड से आगे बढ़कर

6:25:11एक फूल फ्लेड मास्क स्ट्रगल भी शुरू करना

6:25:14चाहते थे लेकिन उसे समय कांग्रेस में

6:25:16मॉडरेट लीडर्स का डोमिनेंस था और वो इतने

6:25:19आगे नहीं जाना चाहते थे लेकिन नेक्स्ट

6:25:22कांग्रेस सेशन में एक बड़ा स्टेप लिया

6:25:24जाता है इस सेशन को हेड कर रहे थे दादा

6:25:27भाई नौरोजी और यह कोलकाता में हुआ था यहां

6:25:31डिक्लेअर किया जाता है की कांग्रेस का गोल

6:25:33सेल्फ गवर्नमेंट या स्वराज है इस

6:25:36डिक्लेरेशन से एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का

6:25:39कॉन्फिडेंस और बाढ़ जाता है और वह स्वदेशी

6:25:41और बॉयकॉट के साथ पैसिव रेजिस्टेंस की कॉल

6:25:44भी दे देते हैं इसमें गवर्नमेंट स्कूल और

6:25:47कॉलेजेस का गवर्नमेंट सर्विसेज का कोट्स

6:25:50का लेजिसलेटिव काउंसिल का म्युनिसिपालिटीज

6:25:52का और गवर्नमेंट टाइटल्स का बॉयकॉट शामिल

6:25:55था

6:25:56है इसके अलावा और कौन-कौन सी एक्टिविटीज

6:25:59स्वदेशी मूवमेंट के दौरान हुई थी आई जानते

6:26:02हैं न्यू फॉर्म्स ऑफ स्ट्रगल और इंपैक्ट

6:26:05दोस्तों स्वदेशी और बॉयकॉट मूवमेंट के समय

6:26:08फॉरेन गुड्स को बॉयकॉट करने के अलावा भी

6:26:11बहुत सी एक्टिविटी शुरू की जाति है जैसे

6:26:14की करो वॉलिंटियर्स या समिति को

6:26:17ऑर्गेनाइजर किया जाता है इसमें अश्विनी

6:26:19कुमार डेट द्वारा बरिसल में बनाई गई

6:26:22स्वदेश बांधव समिति सबसे ज्यादा पॉपुलर

6:26:25होती है यह समिति मास मोबिलाइजेशन का

6:26:28पावरफुल मेंस बन जाति हैं स्वदेशी मूवमेंट

6:26:31के दौरान मैसेज तक पहुंचने और उनके बीच

6:26:34पॉलीटिकल मैसेज को स्प्रेड करने के लिए

6:26:36पॉपुलर फेस्टिवल्स और मेला कभी इस्तेमाल

6:26:39किया जाता है इसका सबसे अच्छा उदाहरण है

6:26:42तिलक द्वारा शुरू किया गए गणपति और शिवाजी

6:26:45फेस्टिवल

6:26:50किया जाता है

6:26:54और अरविंद होश को इसका प्रिंसिपल बनाया

6:26:58जाता है देखते ही देखते देश के अलग-अलग

6:27:01हसन में नेशनल स्कूल और कॉलेजेस खुलना

6:27:04शुरू हो जाते हैं 15th अगस्त 196 को नेशनल

6:27:09कंट्रोल में एजुकेशन सिस्टम को ऑर्गेनाइज

6:27:11करने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन को

6:27:14सेटअप किया जाता है इसके साथ ही बहुत से

6:27:17स्वदेशी यानी की इंडीजीनस इंटरप्राइजेज की

6:27:20भी शुरुआत होती है इसमें सबसे इंपॉर्टेंट

6:27:22है चिदंबरम पिल्लई के द्वारा इस्टैबलिश्ड

6:27:25नेशनल शिव बिल्डिंग एंटरप्राइज स्वदेशी

6:27:28स्टीम नेवीगेशन कंपनी

6:27:311917 में इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट

6:27:34भी फॉर्म की जाति है इसका एक इंडियन

6:27:37आर्टिस्ट पर इंग्लिश इन्फ्लुएंस को काउंटर

6:27:40करना था यह चाहते थे की इंडियन आर्ट

6:27:43यूरोपियन आर्टिस्ट ना होकर इंडीजीनस आर्ट

6:27:46फॉर्म

6:27:50बनते हैं नंदलाल बस

6:27:53साइंस की फील्ड में जगदीश चंद्र बस

6:27:55प्रफुल्ल चंद्र राय जैसे जीनियस ओरिजिनल

6:27:58रिसर्च से पूरे विश्व में ख्याति बातें इस

6:28:01तरह हम का सकते हैं की स्वदेशी मूवमेंट

6:28:03सिर्फ पॉलीटिकल फील्ड तक ही लिमिटेड नहीं

6:28:06था इसका इंपैक्ट हर फील्ड में देखने को

6:28:09मिलता है और ये इंडियन को एक नया

6:28:11कॉन्फिडेंस देने का कम करता है मूवमेंट

6:28:14में स्टूडेंट का पार्टिसिपेशन बड़े स्केल

6:28:17पर देखने को मिलता है इसके साथ ही वूमेन

6:28:19और वर्किंग क्लास भी पहले बार नेशनल

6:28:22मूवमेंट से जुड़ने हैं लेकिन 198 आते-आते

6:28:26स्वदेशी मूवमेंट खत्म होने की कागर पर ए

6:28:29जाता है ऐसा क्यों

6:28:33डी मूवमेंट आउट

6:28:35स्वदेशी मूवमेंट के डिक्लिन के पीछे बहुत

6:28:38से करण थे सबसे पहले करण था गवर्नमेंट की

6:28:41तरफ से किया गया प्रिपरेशन दोस्तों 1908

6:28:45आते-आते मूवमेंट लीडर एस हो जाता है

6:28:48क्योंकि ज्यादातर लीडर्स को या तो अरेस्ट

6:28:51कर लिया जाता है या फिर डिपो अरबिंदो घोष

6:28:54और विपिन चंद्र पालतू एक्टिव से रिटायर ही

6:28:57हो जाते हैं इसके अलावा मूवमेंट मोस्टली

6:29:00अपार और मिडिल क्लास तक ही सीमित र जाता

6:29:03है यह मैसेज स्पेशली पैग्स को अपने साथ

6:29:06जोड़ने में असफल राहत है और स्वदेशी

6:29:09मूवमेंट के डिक्लिन होने का सबसे बड़ा करण

6:29:11था लीडर्स के बीच की आपसी अनबन मॉडरेट्स

6:29:16और एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मूवमेंट की

6:29:18स्ट्रेटजी को लेकर अलग-अलग ओपिनियन रखते

6:29:20थे उनके बीच की तकरार इतनी ज्यादा बाढ़

6:29:24जाति है की 197 की सूरत सेशन में कांग्रेस

6:29:28दो ग्रुप में स्प्लिट हो जाति है इसे सूरज

6:29:31प्लेट के नाम से जानते हैं

6:29:33आई सूरज प्लेट को डिटेल में समझते हैं

6:29:37सूरज प्लेट

6:29:39197 कांग्रेस सेशन दोस्तों 1917 का सेशन

6:29:44पहले नागपुर में होना था लेकिन नागपुर

6:29:47एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का स्ट्रांग गोल था

6:29:49और मॉडरेट लीडर्स को ये डर था की नागपुर

6:29:53में अगर सेशन हुआ तो तिलक प्रेसिडेंट बन

6:29:55जाएंगे इसलिए मॉडरेट लीडर गोखले सेशन को

6:29:59सूरज शिफ्ट कर देते हैं सूरत क्योंकि तिलक

6:30:02के होम प्रॉब्लम्स में आता था इसीलिए रूल

6:30:04के अकॉर्डिंग वो सेशन के प्रेसिडेंट नहीं

6:30:06बन सकते थे इस तरह 197 के सेशन की शुरुआत

6:30:11मॉडरेट और एक स्त्रीमिस्ट लीडर्स के बीच

6:30:14तकरार के साथ होती है यह मॉडरेट ग्रुप

6:30:16प्रेसिडेंट के लिए रोष बिहार घुस का नाम

6:30:19आगे करते हैं और एक सरिता इस ग्रुप लाल

6:30:22लाजपत राय को प्रेसिडेंट बनाना चाहते थे

6:30:25पहले बार प्रेसिडेंट की पोस्ट के लिए

6:30:27इलेक्शन करना पड़ता है और फाइनली रोशन

6:30:31बिहार घोषित प्रेसिडेंट इलेक्ट होते हैं

6:30:33लेकिन इस सबके बीच दोनों ग्रुप के बीच

6:30:36तकरार इतनी ज्यादा बाढ़ जाति है की सेशन

6:30:39को कॉल ऑफ करना पड़ता है

6:30:43और इस तरह कांग्रेस स्प्लिट हो जाति है

6:30:46दोस्तों कांग्रेस में हुई स्पिरिट का

6:30:49फायदा ब्रिटिश गवर्नमेंट उठाती है और

6:30:51एक्सट्रीम इस पर मैसिव अटैक लॉन्च कर देती

6:30:54है आई देखते हैं कैसे

6:30:57गवर्नमेंट स्ट्रेटजी

6:30:59एंटीगमत एक्टिविटीज को रोकने के लिए 1917

6:31:03से 1911 के बीच ब्रिटिश गवर्नमेंट 5 नए

6:31:07लॉस लेकर आई है यह थे सेडिशन मीटिंग्स 197

6:31:12इंडियन न्यूज़ पेपर इनिसाइटमेंट तू

6:31:15ऑफेंसेस एक्ट 198 क्रिमिनल डॉ अमेंडमेंट

6:31:19एक्ट 198 और दी इंडियन प्रेस एक्ट 1910

6:31:23मिनट्स लीडर तिलक के अगेंस्ट 1909 में

6:31:27सेडिशन के इस फाइल किया जाता है ऐसा इसलिए

6:31:30क्योंकि उन्होंने अपने न्यूज़पेपर केसरी

6:31:33में बंगाल के क्रांतिकारी द्वारा

6:31:35मुजफ्फरनगर में बम फेक जान की घटना पर

6:31:38आर्टिकल लिखा था इन्हें गिल्टी मानते हुए

6:31:40₹1000 का फाइन और 6 साल के लिए बर्मा की

6:31:44मंडलीय जय में रहने की सजा सुने जाति है

6:31:46और

6:31:50लाल लाजपत राय विदेश चले जाते

6:31:54लीडर्स की ऑप्शंस में मूवमेंट कमजोर पढ़ने

6:31:56लगता है और कुछ समय के लिए खत्म सा हो

6:31:59जाता है 1914 में जब तिलक जय से बाहर आते

6:32:02हैं तब एक बार फिर से मूवमेंट की बागडोर

6:32:05अपने हाथ में लेते हैं इस बीच मॉडरेट्स को

6:32:08खुश करने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट 1909

6:32:11में इंडियन काउंसिल एक्ट भी लेकर आई है

6:32:13इसे मौली मिंटो रिफॉर्म्स के नाम से जाना

6:32:16जाता है एक्ट की डीटेल्स को हम एक अलग

6:32:19वीडियो में डिस्कस करेंगे यहां बस इतना

6:32:21समझ लेते हैं की इस एक्ट के द्वारा

6:32:23मॉडरेट्स और मुस्लिम को ब्रिटिश गवर्नमेंट

6:32:26अपनी तरफ करना चाहती थी दोस्तों यह तो बात

6:32:30हुई की ब्रिटिशर्स कैसे अलग स्ट्रेटजी

6:32:32अपनाते हैं एक स्त्रीमिस्ट और मॉडरेट

6:32:35ग्रुप से डील करने

6:32:36केराटिन स्टिक पॉलिसी

6:32:45के लिए स्टिक की तरह

6:32:49जब तिलक जय से बाहर ए जाते हैं तब किस तरह

6:32:53से नेशनल मूवमेंट आगे बढ़ता है आई जानते

6:32:56हैं

6:32:57फर्स्ट वर्ल्ड वार लखनऊ सेशन और होम रूल

6:33:01लीग मूवमेंट दोस्तों

6:33:041914 में जब फर्स्ट वर्ल्ड वार शुरू होती

6:33:07है तब मॉडरेट लीडर्स तो वार में ब्रिटिश

6:33:10का सपोर्ट स एन मटर ऑफ ड्यूटी करते हैं

6:33:12वहीं तिलक जैसे एक्सट्रीमिस्ट ये सोचकर

6:33:15ब्रिटिश के वार एफर्ट्स को सपोर्ट करते

6:33:17हैं की इस लॉयल्टी के बदले में ब्रिटिशर्स

6:33:20उन्हें सेल्फ गवर्नमेंट का तोहफा दे देंगे

6:33:22लेकिन इसके साथ ही लीडर्स को इस बात का भी

6:33:25एहसास था की बिना किसी पॉपुलर प्रेशर की

6:33:28ब्रिटिश गवर्मेंट कभी भी कंसेशन देने के

6:33:31लिए तैयार नहीं होगी इसलिए लीडर्स की तरफ

6:33:34से एक ऑर्गेनाइज्ड एफर्ट तो जरूरी है कुछ

6:33:37और भी करण थे जिसकी वजह से नेशनल मूवमेंट

6:33:40इस दिशा में बढ़ता है जैसे की वार के

6:33:43दौरान इंडिया में गरीब लोगों की हालात और

6:33:45खराब होना

6:33:47क्योंकि वार के समय हैवी टैक्सेशन इंपोज

6:33:49किया जा रहा था और साथ ही रोजमर्रा की

6:33:52चीजों के दम आसमान चुने लगे थे इस वजह से

6:33:55लोग भी प्रोटेस्ट करने के लिए एक एग्रेसिव

6:33:58मूवमेंट के पक्ष में नजर ए रहे थे अब ये

6:34:00मूवमेंट इंडियन नेशनल कांग्रेस की लीडरशिप

6:34:03में होना तो मुश्किल ग रहा था क्योंकि

6:34:05मॉडरेट्स की लीडरशिप में कांग्रेस एक

6:34:07पैसिव और इनर्ट पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन बन

6:34:10कर र गई थी इसलिए कांग्रेस के बाहर से ही

6:34:13मूवमेंट शुरू होता है और यह मूवमेंट था

6:34:16होम रूल लीग

6:34:21के एग्जांपल को फॉलो करता है

6:34:37तिलक अपनी इंडियन होम रूल लीग अप्रैल 1916

6:34:41में सेटअप करते हैं इसकी पहले मीटिंग

6:34:43बेलगांव में होती है और इसका हैडक्वाटर्स

6:34:46पुणे में बन जाता है इनकी लिक बॉम्बे सिटी

6:34:49को छोड़कर महाराष्ट्र कर्नाटक सेंट्रल

6:34:52प्रोविंस और विराट को कर करती हैं लेकिन

6:34:56मेजर डिमांड्स में स्वराज लिंग्विस्टिक्स

6:34:58स्टेटस का फॉर्मेशन और वर्नाकुलर में

6:35:01एजुकेशन देना शामिल था

6:35:03अपनी जो इंडिया होम रूल लीग को सितंबर

6:35:061916 में मद्रास से शुरू करती हैं तिलक के

6:35:10एरियाज को छोड़कर पूरे इंडिया को इनकी लीग

6:35:13कर करती है

6:35:18और इनके अलावा इसमें ब्ल्यू वाडिया और क

6:35:22रामास्वामी अय्यर का भी इंपॉर्टेंट योगदान

6:35:24था

6:35:25है इसी बीच 1916 में कांग्रेस का लखनऊ

6:35:29सेशन भी होता है इसमें एक्सट्रीमिस्ट को

6:35:32वापस कांग्रेस में शामिल कर लिया जाता है

6:35:34ऐसा इसलिए क्योंकि मॉडरेट्स और

6:35:37एक्सट्रीमिस्ट दोनों को ही रिलीज होता है

6:35:39की उनके बीच स्प्लिट ने पॉलीटिकल इन

6:35:42एक्टिविटी को जन्म दे दिया है साथ ही एनी

6:35:44बसंत और तिलक कुछ सालों से रियूनियन के

6:35:47लिए एफर्ट कर ही रहे थे इस बीच गोखले और

6:35:50फिरोज शाह मेहता जैसे मॉडरेट लीडर्स की

6:35:53मृत्यु भी रियूनियन के लिए रास्ता बनाने

6:35:55का कम करती है तो इस तरह मॉडरेट्स और

6:35:59एक्सट्रीमिस्ट फिर से एक साथ कम करने लगता

6:36:01हैं और इस वजह से होम रूल लीग मूवमेंट और

6:36:05भी स्ट्रांग हो जाता है इसे मोतीलाल नेहरू

6:36:07जवाहरलाल नेहरू भोला भाई देसाई मोहम्मद

6:36:10अली जिन्ना तेज बहादुर सप्रू और लाल लाजपत

6:36:14राय जैसे लीडर्स भी जॉइन कर लेते हैं यानी

6:36:16की बहुत से नए लीडर्स इस आंदोलन के दौरान

6:36:19ही पहले बार नेशनल स्ट्रगलेसी जुड़ने हैं

6:36:25बीच में दिखने लगता है जगह पब्लिक

6:36:28मीटिंग्स ऑर्गेनाइजर की जाति हैं न्यूज़

6:36:30पेपर के थ्रू प्रोपेगेंडा चलाया जाता है

6:36:31सोशल वर्क ऑर्गेनाइज किया जाते हैं

6:36:34ब्रिटिश गवर्मेंट मूवमेंट के अगेंस्ट सीवर

6:36:37रिप्रेशन शुरू कर देती है मद्रास में

6:36:40स्टूडेंट की पॉलीटिकल मीटिंग्स अटेंड करने

6:36:42पर बन लगा दिया जाता है तिलक को पंजाब और

6:36:45दिल्ली जान से रॉक दिया जाता है

6:36:47जून 1917 में अन्य बसंत और उनके एसोसिएट्स

6:36:51को अरेस्ट कर लिया जाता है इसकी वजह

6:36:55प्रोटेस्ट शुरू हो जाते हैं अपना विरोध

6:36:58जताने के लिए सर सुब्रह्मण्य अय्यर अपना

6:37:00नाइट हुड रिनाउंस कर देते हैं और तिलक

6:37:03पैसिव रेजिस्टेंस शुरू करने की बात करते

6:37:05हैं इस तरह

6:37:09होने लगता है इसलिए ब्रिटिश गवर्नमेंट

6:37:13सितंबर 1917 में उन्हें रहा कर देती है

6:37:16लेकिन 1998

6:37:23जैसे की इफेक्टिव अंग ग्रेजुएशन करना होना

6:37:271978 के बीच कम्युनल रिच का होना और अगस्त

6:37:301917 की मोंटीगू की डिक्लेरेशन

6:37:33मोंटीगू इंडिया के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थे

6:37:3620th अगस्त 1917 को ये ब्रिटिश

6:37:40पार्लियामेंट में डिक्लेअर करते हैं की

6:37:41इंडिया में ब्रिटिशर्स का लॉन्ग टर्म गोल

6:37:44रिस्पांसिबल गवर्नमेंट एस्टेब्लिश करना है

6:37:46इस डिक्लेरेशन के बाद मॉडरेट्स और अन्य

6:37:49बेसेंट को लगता है की आंदोलन को कंटिन्यू

6:37:51करने की जरूर नहीं है इसके अलावा सितंबर

6:37:551918 में एक कैसे के सिलसिले में तिलक भी

6:37:58विदेश चले जाते हैं इस तरह मूवमेंट हो

6:38:02जाता है और धीरे-धीरे डिक्लिन कर जाता है

6:38:07और यहां से नेशनल मूवमेंट के गांधियन फीस

6:38:11की शुरुआत होती है जिसके बड़े में हम अपनी

6:38:14आने वाली वीडियो में बात करेंगे

6:38:16इवेलुएशन ऑफ एक्सट्रीमिस्ट स्पेस दोस्तों

6:38:20एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का इंडियन नेशनल

6:38:22मूवमेंट में बहुत इंपॉर्टेंट योगदान रहा

6:38:25है इन्हीं लीडर्स की वजह से इंडियन को यह

6:38:28कॉन्फिडेंस आया था की वो ब्रिटिशर्स से

6:38:30स्वराज की डिमांड कर सकते हैं तिलक का

6:38:33स्लोगन स्वराज इस मी बर्थराइट जो हम रूल

6:38:37मूवमेंट के दौरान दिया गया था

6:38:39घर-घर तक पहुंच जाता है और आगे आने वाली

6:38:42पीढ़ी को भी इंस्पायर करने का कम करता है

6:38:45एक्सट्रीमिस्ट फैज के समय ही नेशनल

6:38:47एजुकेशन और स्वदेशी इंटरप्राइजेज का

6:38:50डेवलपमेंट और तेजी से शुरू होता है नेशनल

6:38:53मूवमेंट को एक नई और जरूरी दिशा देने का

6:38:56कम करता है एक्सट्रीमिस्ट्रेस लेकिन इसके

6:38:59साथ ही एक सरिता इस लीडर्स अपने स्वराज के

6:39:02गोल को पूरा करने के लिए कोई स्ट्रांग

6:39:04एक्शन प्लेन नहीं तैयार कर पाते यह

6:39:07यंगस्टर में जोश तो जगह देते हैं लेकिन

6:39:09उनकी एनर्जी को सही दिशा में चैनेलाइज

6:39:11करने में असफल रहते हैं खासकर स्वदेशी

6:39:15मूवमेंट के डिक्लिन के बाद युद्ध

6:39:17डायरेक्टनलेस फूल करते हैं इसका ही नतीजा

6:39:20था की कुछ यंगस्टर रिवॉल्यूशनरी

6:39:22एक्टिविटीज की तरफ चले जाते हैं

6:39:24रिवॉल्यूशनरी फेस के बड़े में हम अपने

6:39:27नेक्स्ट वीडियो में चर्चा करेंगे

6:39:29रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट फर्स्ट फेस

6:39:33दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने

6:39:35इंडियन नेशनल कांग्रेस में एक्सट्रीमिस्ट

6:39:38लीडर्स के राइस की बात की थी साथ ही बंगाल

6:39:40पार्टीशन के अगेंस्ट शुरू हुए स्वदेशी और

6:39:43बॉयकॉट मूवमेंट के बड़े में भी जाना था

6:39:45इसके अलावा होम रूल लीग स्कोर भी समझ लिया

6:39:47था ये सभी डेवलपर कहानी इंडियन नेशनल

6:39:51कांग्रेस से ही रिलेटेड थे लेकिन देश की

6:39:54आजादी के लिए सिर्फ इंडियन नेशनल कांग्रेस

6:39:56ही स्ट्रगल नहीं कर रही थी कांग्रेस के

6:39:59बाहर भी बहुत सारे लोग और ऑर्गेनाइजेशंस

6:40:01ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट खड़े हो चुके थे

6:40:04इन्हीं में से एक स्ट्रांग है

6:40:06रिवॉल्यूशनरीज का इसलिए आज हम

6:40:09रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट के फर्स्ट फैज को

6:40:11डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं तो आई

6:40:14शुरू करते हैं

6:40:16इंट्रोडक्शन

6:40:17रीजंस पर इमरजेंसी

6:40:19दोस्तों

6:40:31इंस्पायर किया था हमने देखा था की कैसे

6:40:34ब्रिटिश की रिप्रेशन के करण ओपन मूवमेंट

6:40:37का डिक्लिन शुरू हो गया था ऐसी सिचुएशन

6:40:40में बहुत से यंग पैट्रियोट्स थे जो चुप

6:40:42नहीं बैठ सकते थे गवर्नमेंट जब शांतिपूर्ण

6:40:46तरीके से विरोध का रास्ता बैंड कर देती है

6:40:48तब यह यंग लीडर्स सीक्रेट रिवॉल्यूशनरी

6:40:51एक्टिविटीज की तरफ चले जाते हैं

6:40:57इसलिए यह उनसे बदला भी लेना चाहते थे

6:41:01है इसके अलावा रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट की

6:41:04शुरू होने का एक करण एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स

6:41:06का फेलियर भी था

6:41:08एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स यूथ के जोश को सही

6:41:11दिशा दिखाने में असफल हो गए थे ब्रिटिश

6:41:14रिप्रेशन के बाद किस तरह मूवमेंट को आगे

6:41:17ले जाना चाहिए इसका कोई एक्शन प्लेन इन

6:41:19लीडर्स के पास नहीं था ऐसी सिचुएशन में

6:41:22युद्ध को जो भी रास्ता सही लगता है वो

6:41:25उसकी तरफ चल देते हैं यह रास्ता और कुछ

6:41:28नहीं बल्कि क्रांतिकारी पाठ ही था आई अब

6:41:32समझते हैं रिवॉल्यूशनरीज की आईडियोलॉजी

6:41:34क्या थी और इनका पियानो एक्शन किया था

6:41:37रिवॉल्यूशनरी प्रोग्राम दोस्तों

6:41:40क्रांतिकारी की बेसिक एडोलॉजी थी ब्रिटिश

6:41:43को फोर्स के जारी इंडिया से बाहर निकालना

6:41:46इसके लिए वह रूस नहीं लिस्ट और आयरलैंड के

6:41:50नेशनलिस्ट से इंस्पिरेशन लेते हैं यह लोग

6:41:53इंडिविजुअल हीरोइन डीडीएस में यकीन करते

6:41:55थे

6:41:56इंडियन रिवॉल्यूशनरीज भी इनके ही दिखाएं

6:41:59मार्ग पर चलते हैं और उन पॉपुलर ब्रिटिश

6:42:02ऑफिशल्स की हत्या करना शुरू कर देते हैं

6:42:04इसके पीछे उनका ब्रिटिशर्स के दिल और

6:42:08दिमाग में टेरर पैदा करना साथ ही देश के

6:42:11लोगों की फीलींगस को अराउस करना जिससे वो

6:42:13ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट क्रांति करने के

6:42:16लिए तैयार हो जाए इनके एक्शन प्रोग्राम

6:42:18में सीक्रेट इसोसिएशन एस्टेब्लिश करना

6:42:21मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोवाइड करना और

6:42:24स्वदेशी डेकोरेटिव डालना भी शामिल था यह

6:42:27तो बात हुई रिवॉल्यूशनरीज की आईडियोलॉजी

6:42:29और उनके बेसिक एक्शन प्लेन की अब बात करते

6:42:32हैं इंडिया के अलग-अलग रीजन में होने वाली

6:42:35रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज के कुछ

6:42:37एग्जांपल्स की

6:42:38रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज इन इंडिया

6:42:41दोस्तों इंडिया में क्रांतिकारी गतिविधि

6:42:44का ट्रेडीशन कोई नया नहीं है स्वदेशी

6:42:47मूवमेंट से पहले भी हमें कुछ रिवॉल्यूशनरी

6:42:49एक्टिविटीज के एग्जांपल्स देखने को मिलते

6:42:51हैं इसमें सबसे इंपॉर्टेंट रीजन था

6:42:54महाराष्ट्र

6:42:55महाराष्ट्र में ही यूरोपियंस का पहले

6:42:58पॉलीटिकल मर्डर कमेंट हुआ था 20 सेकंड जून

6:43:011897 को बालकृष्ण चापेकर और दामोदर चापेकर

6:43:05पूनम प्ले कमेटी के प्रेसिडेंट मिस्टर

6:43:08ब्रांड को गली मार देते हैं हालांकि गलती

6:43:10से लेफ्टिनेंट जो मिस्टर ब्रांड की

6:43:13मिलिट्री एस्कॉर्ट थे उनको भी गली ग जाति

6:43:15है इसके बाद चाबी कर ब्रदर्स को अरेस्ट

6:43:18करके फैंसी की सजा सुना दी जाति है जबिकर

6:43:21ब्रदर्स का यह एक्ट रिवॉल्यूशनरी

6:43:23एक्टिविटी का पहले उदाहरण भी माना जाता है

6:43:26बाल गंगाधर तिलक अपने न्यूज़पेपर केसरी

6:43:29में जापेकर ब्रदर्स के इस एक्शन की तारीफ

6:43:32में एक आर्टिकल लिखने हैं इसके लिए

6:43:34ब्रिटिश गवर्नमेंट उनके ऊपर सेडिशन चार्ज

6:43:36लगा देती है और तिलक को 18 मंथ्स के

6:43:39रिग्रेस इंप्रिजनमेंट की सजा सुने जाति है

6:43:44और उनके भाई नासिक में मित्र मेला नाम से

6:43:48एक सीक्रेट सोसाइटी ऑर्गेनाइज करते हैं

6:43:50मित्र मेला 1904 में अभिनव भारत नाम की

6:43:54सोसाइटी के साथ चेंज हो जाति है जल्दी ही

6:43:57नासिक पुणे और मुंबई बम मैन्युफैक्चरर के

6:44:01सेंटर्स के रूप में उभरते हैं

6:44:031909 में अभिनव भारत के मेंबर अनंत

6:44:06लक्ष्मण कान्हा रे नासिक कलेक्टर एमटी

6:44:09जैक्सन की हत्या कर देते हैं ब्रिटिश

6:44:12इंक्वारी में पाया जाता है की यह हत्या एक

6:44:15बहुत बड़ी कंस्पायरेसी का हिस्सा है ये

6:44:17कंस्पायरेसी थी ब्रिटिश गवर्नमेंट के

6:44:19अगेंस्ट एक आर्म्ड रिवॉल्यूशन ऑर्गेनाइज

6:44:22करना इसमें 38 लोगों को गिरफ्तार किया

6:44:25जाता है साथ ही यह भी पाया जाता है की

6:44:28सावरकर स्किंस्पायरेसी के लीडर हैं इसलिए

6:44:31उन्हें आजीवन देश निकाला की सजा सुना दी

6:44:33जाति है और उनकी साड़ी प्रॉपर्टी जप्त कर

6:44:36ली जाति है

6:44:38इस तरह बंगाल में भी बहुत सी क्रांतिकारी

6:44:41गतिविधियां देखने को मिलती हैं

6:44:43193 में पोलिंग दास ढाका में अनुशीलन

6:44:47समिति की पहले ब्रांच शुरू करते हैं तीन

6:44:50आठ मित्र कोलकाता में इसकी एक और ब्रांच

6:44:52शुरू करते हैं

6:44:53196 में वरिंदर घोष और भूपेंद्रनाथ डेट

6:44:57मिलकर युगांतर समिति एस्टेब्लिश करते हैं

6:45:00इसी नाम से यह एक न्यूज़ पेपर भी निकलते

6:45:03हैं इस न्यूज़ पेपर में एंटी ब्रिटिश

6:45:06इतिहास को छाप जाता था और लोगों में

6:45:08नेशनलिज्म की भावना का प्रसार किया जाता

6:45:10था

6:45:11197 में पूर्वी बंगाल और बंगाल की लिफ्टेड

6:45:15इन गवर्नर को करने के असफल प्रयास भी किया

6:45:18गए थे इसके बाद 30th अप्रैल 198 को

6:45:21मुजफ्फरपुर के जज मिस्टर किंग्सफरड की

6:45:24हत्या का प्रयास किया जाता है इनके ऊपर बम

6:45:27फेंकने की जिम्मेदारी प्रफुल्ल चाचा और

6:45:29खुदीराम बॉस्को दी गई थी लेकिन गलती से बम

6:45:33मिस्टर कैनेडी के कैरिज पर गिर जाता है और

6:45:35दो लेडीज इसमें मेरी जाति हैं

6:45:38प्रफुल्ल चाचा और बस को अरेस्ट कर लिया

6:45:40जाता है चाकी तो खुद को ही गली मार लेते

6:45:43हैं जबकि बस के खिलाफ ट्रायल होता है और

6:45:46उन्हें फैंसी दे दी जाति है

6:45:49गवर्नमेंट कोलकाता में मानिकतला गार्डन और

6:45:53बाकी जगह अवैध हथियारों की तलाशी का

6:45:55अभियान चलती है इसमें 34 लोगों को

6:45:58गिरफ्तार किया जाता है जिसमें अरबिंदो घोष

6:46:01और उनके भाई नरेंद्र घोष भी शामिल थे इन

6:46:05सभी लोगों के ऊपर अलीपुर कंस्पायरेसी कैसे

6:46:08चलाया जाता है अरबिंदो घोष को एविडेंस एन

6:46:10होने की वजह से छोड़ दिया जाता है लेकिन

6:46:12बाकी सभी लोगों को सजा सुने जाति हैं इस

6:46:16तरह बंगाल भी रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट का एक

6:46:18इंपॉर्टेंट सेंटर बन गया

6:46:20रिपोर्ट के अनुसार

6:46:28रिपोर्ट किया गए थे और 60 से ज्यादा मर्डर

6:46:32अटेंप्ट हुए थे ब्रिटिश ऑफिसर पर

6:46:35पंजाब में भी हमें रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट

6:46:38का प्रभाव देखने को मिलता है यहां लाल

6:46:41लाजपत राय और अजीत सिंह मुख्य रूप से लीड

6:46:44कर रहे थे लाल जी जिन्हें पंजाब केसरी और

6:46:47लायन और पंजाब जैसे नाम से जाना जाता है

6:46:49पंजाबी नाम का न्यूज़पेपर निकलते हैं

6:46:52जिसका मोटो होता है किसी भी कीमत पर सेल्फ

6:46:55हेल्प अजीत सिंह जो की भगत सिंह के अंकल

6:46:58थे वो लाहौर में अंजुमन ने मौसी बाय वतन

6:47:01नाम से एक क्रांतिकारी संस्था शुरू करते

6:47:04हैं संस्था भारत माता नाम से एक जनरल भी

6:47:08प्रकाशित करती है लेकिन पंजाब में

6:47:10रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज पर जल्दी ही रॉक

6:47:13लगा दी जाति है क्योंकि में 197 में

6:47:16गवर्नमेंट पॉलीटिकल मीटिंग्स पर बन लगाने

6:47:19के साथ लाल लाजपत राय और अजीत सिंह को

6:47:22रिपोर्ट कर देती है इसके अलावा दिसंबर

6:47:251912 में दिल्ली के चांदनी चौक में भी

6:47:28वायसराय लोड होर्डिंग के ऊपर बम फेंका गया

6:47:31था बिहार उड़ीसा और अप में भी

6:47:35गाड़ी एक्टिव थे लेकिन बाकी एरियाज के

6:47:38कंपैरिजन में यहां प्रभाव कुछ कम देखने को

6:47:40मिलता है दोस्तों यह तो बात हुई देश के

6:47:44अंदर चल रही क्रांतिकारी गतिविधियों की

6:47:48क्रांतिकारी की जो देश के बाहर से आंदोलन

6:47:51कर रहे थे

6:47:52रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज एब्रॉड दोस्तों

6:47:56गवर्मेंट के रिप्रेशन की वजह से बहुत से

6:47:59क्रांतिकारी विदेश चले जाते हैं और वहीं

6:48:01से अपना संघर्ष जारी रखते हैं आई जानते

6:48:04हैं उनके बड़े में

6:48:061905 में श्याम जी कृष्णा वर्मा लंदन में

6:48:10इंडिया हाउस की स्थापना करते हैं यह लंदन

6:48:13में इंडियन स्टूडेंट के लिए एक सेंटर का

6:48:16कम करता है और इंडिया से रेडिकल यूथ को

6:48:19लंदन लाने के लिए एक स्कॉलरशिप स्कीम भी

6:48:22शुरू की जाति है

6:48:23श्याम जी कृष्णा वर्मा वे इंडियन

6:48:25सोशियोलॉजिस्ट नाम से एक जनरल भी शुरू

6:48:28करते हैं सावरकर और लाल हरदयाल जैसे

6:48:31रिवॉल्यूशनरीज इंडिया हाउस का मेंबर बन

6:48:34जाते हैं इसी सर्किल के मदन लाल ढींगरा 19

6:48:37में कर्जन वायलेट जो की सेक्रेटरी ऑफ

6:48:41स्टेट के पॉलीटिकल एडवाइजर थी की हत्या कर

6:48:43देते हैं लंदन के अलावा पेरिस में मैडम

6:48:47भीकाजी काम जो की एक पारसी रिवॉल्यूशनरी

6:48:50थी वंदे मातरम नाम का अखबार निकलते हैं

6:48:52मैडम काम को मधुर इंडियन रिवॉल्यूशनरी

6:48:56मूवमेंट भी कहा जाता है इन्होंने

6:49:01ऑर्गेनाइज्ड वर्ल्ड सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस

6:49:04में इंडियन फ्लैग को फहराया था यह फ्लैग

6:49:07मैडम भीकाजी कृष्णा वर्मा ने मिलकर डिजाइन

6:49:11किया था और आगे जाकर यह इंडिया की नेशनल

6:49:14फ्लैग के लिए एक टेंपलेट्स का कम करता है

6:49:18जर्मनी में वीरेंद्र नाथ चौपाध्याय

6:49:21रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को लीड कर रहे थे

6:49:23उनकी न्यूज़ पेपर का नाम तलवार था फर्स्ट

6:49:27वर्ल्ड वार के शुरू होने के बाद यह जर्मन

6:49:29फॉरेन ऑफिस की हेल्प से ज़िम-अप प्लेन

6:49:31बनाते हैं प्लेन के तहत 1915 में बर्लिन

6:49:36कमेटी पर इंडियन इंडिपेंडेंस एस्टेब्लिश

6:49:38की जाति है इसमें वीरेंद्र नाथ के अलावा

6:49:40भूपेंद्र नाथ दत्ता और लाल हरदयाल जैसे

6:49:44रिवॉल्यूशनरीज भी शामिल थे

6:49:46इनका प्लेन इंडिया में आर्म्ड रिबेलीयन

6:49:49इनसाइड करना था इसके लिए आम और

6:49:52वॉलिंटियर्स को इंडिया में भेजना की

6:49:54तैयारी करते हैं प्लेन के अनुसार उड़ीसा

6:49:56के बालेश्वर में हथियार पहुंचने थे और

6:49:59बंगाल की क्रांतिकारी बाघ जतिन इन्हीं

6:50:02लेने आने वाले थे लेकिन ब्रिटिशर्स को

6:50:04इनके प्लेन की भक ग जाति है और पुलिस

6:50:07फायरिंग में बाघ जतिन मारे जाते हैं

6:50:10दोस्तों इंडिया के बाहर सबसे इंपॉर्टेंट

6:50:12रिवॉल्यूशनरी ग्रुप था गदर पार्टी

6:50:18गदर पार्टी दोस्तों गदर पार्टी का इनिशियल

6:50:22नाम पेसिफिक कास्ट हिंदुस्तान संगठन था और

6:50:26इसे 15th जुलाई 1913 को लाल हरदयाल भगवान

6:50:30सिंह करतार सिंह सराभा और भाई परमानंद

6:50:33जैसे लीडर्स के नेतृत्व में उस में फॉर्म

6:50:36किया गया था इसका हैडक्वाटर्स सन

6:50:39फ्रांसिस्को में था यह लोग गदर नाम से एक

6:50:42पत्रिका भी पब्लिश करते थे जिसमें ब्रिटिश

6:50:44रूल के अगेंस्ट एक आर्म्ड रिवॉल्यूशन की

6:50:47बात होती थी गदर पार्टी इंडिया में

6:50:50क्रांति लाना चाहती थी और इनके इस प्लेन

6:50:53को प्रोत्साहन देने का कम करते हैं 1914

6:50:56के दो इवेंट्स पहले था

6:50:58मारू इंसिडेंट और दूसरा फर्स्ट वर्ल्ड वार

6:51:02की शुरुआत

6:51:03फर्स्ट वर्ल्ड वार

6:51:06इंसिडेंट की डीटेल्स जानना थोड़ा जरूरी है

6:51:09तो आई इसको समझते हैं दोस्तों

6:51:17सिंगापुर यानी कनाडा ले जा रही थी यह

6:51:22पैसेंजर मोस्टली सिंह और पंजाबी मुस्लिम

6:51:26पर पहुंचती है तो कनाडा अथॉरिटीज लोगों को

6:51:30शिवा से उतारने की परमिशन देने में डेरी

6:51:32करती है और लगभग 2 महीने तक पोस्ट पर ही

6:51:36अटकी रहती है इसके बाद इन्हें वापस जान के

6:51:39लिए का दिया जाता है ध्यान देने वाली बात

6:51:42यह है की कनाडा अथॉरिटीज ऐसा ब्रिटिश

6:51:45गवर्मेंट के इन्फ्लुएंस में करती हैं

6:51:47शिव सितंबर 1914 में कोलकाता वापस पहुंचती

6:51:51है वहां इन्हें तुरंत पंजाब जान वाली

6:51:54ट्रेन में बैठने का ऑर्डर दिया जाता है

6:51:56पहले से ही इतनी लंबी यात्रा करने की वजह

6:51:59से यह लोग परेशान थे ऐसे में यह ट्रेन में

6:52:02बैठने से माना कर देते हैं और इसी बात पर

6:52:04पुलिस के साथ इनका कनफ्लिक्ट शुरू हो जाता

6:52:07है

6:52:08कोलकाता के पास बज-बज नाम की जगह पर यह

6:52:11कनफ्लिक्ट होता है और इसमें 22 लोगों की

6:52:14मृत्यु हो जाति है और ब्रिटिश आर्मी की

6:52:16इंडियन सोल्जर को विद्रोह करने के लिए

6:52:18उकसाते हैं

6:52:20गदर पार्टी 21st फरवरी 1915 को फिरोजपुर

6:52:24लाहौर और रावलपिंडी गैरसैण में आर्म्ड

6:52:27रिवॉल्ट की डेट को भी फिक्स कर देती है

6:52:29लेकिन उनका यह प्लेन लास्ट मोमेंट पर

6:52:32धोखेबाजी की वजह से खराब हो जाता है उनका

6:52:35ही एक मेंबर ब्रिटिश अथॉरिटी से जा मिलता

6:52:38है और ब्रिटिशर्स फौरन एक्शन लेते हुए

6:52:41रिबेलियस रेजिमेंट को डिसबैंड कर देते हैं

6:52:44लीडर्स को अरेस्ट करके डिपो कर दिया जाता

6:52:47है और करीब 45 लोगों को फैंसी भी दी जाति

6:52:50है रोष बिहार बस जबान भागने में सफल होते

6:52:54हैं और वहां से अपना संघर्ष जारी रखते हैं

6:52:57दोस्तों गदर मूवमेंट की इंर्पोटेंस उनकी

6:53:01आईडियोलॉजी में है यह पुरी तरह सेकुलर

6:53:04अप्रोच के साथ मिलिटेंट नेशनलिज्म की सिख

6:53:06देते हैं पॉलीटिकल

6:53:09हो जाते हैं क्योंकि इनके पास ऑर्गेनाइज्ड

6:53:12लीडरशिप की कमी थी इसके साथ ही ये आम

6:53:16रिपोर्ट के लिए हर लेवल पर जरूरी

6:53:18प्रिपरेशन को भी अंदर एस्टीमेट कर लेते

6:53:21दोस्तों इस तरह इंडिया से बाहर र कर भी

6:53:24रिवॉल्यूशनरीज देश की आजादी के लिए संघर्ष

6:53:28करते रहते हैं कंक्लुजन

6:53:31दोस्तों यह था रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट का

6:53:34फर्स्ट फेस

6:53:35रिवॉल्यूशनरी भले ही एक बड़ी क्रांति करके

6:53:38ब्रिटिशर्स को देश से भागने में असफल रहते

6:53:40हैं लेकिन इंडियन नेशनल मूवमेंट में उनका

6:53:44कंट्रीब्यूशन अनमोल है अपनी एक्टिविटी से

6:53:47इन्होंने लोगों में नेशनलिज्म की भावना को

6:53:50और ज्यादा प्रबल बनाया था इनकी वजह से

6:53:53देशवासियों में सेल्फ रिस्पेक्ट और सेल्फ

6:53:56कॉन्फिडेंस की वृद्धि होती है यह इन

6:53:59क्रांतिकारी की एक्टिविटीज का ही नतीजा था

6:54:01की ब्रिटिश रूल का डर लोगों में से निगलना

6:54:04शुरू हो जाता है महात्मा गांधी इन साउथ

6:54:08अफ्रीका दोस्तों इंडियन नेशनल मूवमेंट का

6:54:11पाठ बने से पहले गांधीजी साउथ अफ्रीका में

6:54:14ब्रिटिश कॉलोनियल रूल को चैलेंज कर चुके

6:54:16थे आज हम उनके साउथ अफ्रीकन कैंपेन को

6:54:19डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं हम

6:54:21जानेंगे की कैसे गांधीजी साउथ अफ्रीका में

6:54:24एक लीडर के रूप में उभरते हैं और किस तरह

6:54:27यहां इंडियन के राइट्स को प्रोटेस्ट करते

6:54:29हैं

6:54:31शुरू करते हैं इंट्रोडक्शन दोस्तों

6:54:34गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर

6:54:361869 को गुजरात में पोरबंदर नाम की जगह पर

6:54:40हुआ था यह अपने फादर करमचंद गांधी की सबसे

6:54:43छोटी संतान थे इनकी मदर का नाम पुतलीबाई

6:54:47था और वो इनके फादर की फौजी वाइफ थी गांधी

6:54:50जी की स्कूलिंग पास के राजकोट से हुई थी

6:54:53जहां उनके फादर लोकल रोलर के एडवाइजर के

6:54:56रूप में कम करते थे 13 साल की आगे में

6:54:59गांधीजी की शादी कस्तूरबा से हो जाति है

6:55:01फिर सितंबर 1888 में डॉ पढ़ने के लिए

6:55:05गांधीजी इंग्लैंड चले जाते हैं यहां वो

6:55:07सक्सेसफुली अपनी डिग्री कंप्लीट करते हैं

6:55:09और 10 जून 1891 को उन्हें बार में बुलाया

6:55:13जाता है

6:55:14[संगीत]

6:55:17लेकिन इस साल वो इंडिया वापस ए जाते हैं

6:55:20अगले दो साल तक गांधीजी मुंबई में अपनी लो

6:55:23प्रैक्टिस एस्टेब्लिश करने की कोशिश करते

6:55:25हैं लेकिन उन्हें रिलाइज होता है की ना तो

6:55:28उन्हें इंडियन डॉ की इतनी नॉलेज है और ना

6:55:31ही ट्रायल फेस करने का सेल्फ कॉन्फिडेंस

6:55:32इसलिए गांधीजी वापस अपने घर पूर्व बंदर

6:55:36लोट जाते हैं यहां वो अपने फ्यूचर को लेकर

6:55:39परेशान ही हो रहे थे की तभी साउथ अफ्रीका

6:55:41में लोकेटेड एक इंडियन बिजनेस फर्म का

6:55:44रिप्रेजेंटेटिव इसे मिलने आता है

6:55:46वह गांधीजी को एंप्लॉयमेंट को ऑफर देता है

6:55:49हम डिटेल फाइव पाउंड की फीस में 12 महीने

6:55:52के लिए गांधी जी को साउथ अफ्रीका में कम

6:55:54करना था

6:55:55गांधीजी ऑफर को एक्सेप्ट कर लेते हैं और

6:55:58साउथ अफ्रीका की उनकी जर्नी शुरू होती है

6:56:00अराइवल इन साउथ अफ्रीका दोस्तों 24th में

6:56:041893 को गांधीजी डरबन पहुंच जाते हैं यहां

6:56:08उन्हें मर्चेंट दादा अब्दुल्ला के लिए

6:56:10लीगल काउंसिल का कम करना था एक महीने बाद

6:56:14ही कम के सिलसिले में उन्हें ट्रेन से

6:56:16प्रिटोरिया नाम की जगह पर जाना होता है

6:56:18इसी जननी के रास्ते में गांधीजी नेटल के

6:56:21पीटर मैरिज बग स्टेशन से भी गुजरते हैं

6:56:24यहां गांधीजी ट्रेन के फर्स्ट क्लास

6:56:27कंपार्टमेंट में बैठे हुए थे तभी एक

6:56:30व्हाइट परसों कंपार्टमेंट में इंटर करता

6:56:31है और तुरंत रेलवे ऑफिशल्स को बुला लेट है

6:56:35रेलवे ऑफिशल्स गांधीजी को थर्ड क्लास

6:56:37कंपार्टमेंट में जान का ऑर्डर देता है

6:56:39क्योंकि इंडियन और अन्य नॉनवाॅयस को

6:56:42फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में ट्रैवल करने

6:56:44की परमिशन नहीं थी

6:56:45गांधीजी इसका विरोध करते हैं और अपना टिकट

6:56:48भी दिखाई हैं जो की फर्स्ट क्लास

6:56:50कंपार्टमेंट का ही था लेकिन ऑफिसर्स कुछ

6:56:53भी सुनने को तैयार नहीं थे और गांधी जी के

6:56:56ऑर्डर ना माने पर वो उन्हें ट्रेन से

6:56:58धक्का दे देते हैं उनके लगेज को भी

6:57:01प्लेटफॉर्म पर ही फेक दिया जाता है

6:57:03गांधीजी को पुरी रात स्टेशन पर ही गुजरानी

6:57:06पड़ती है यह पहले मौका था जब गांधी जी को

6:57:09रेसिजम का सामना करना पड़ता है

6:57:19की ब्रोकली ड्रेस इंडियन को फर्स्ट और

6:57:22सेकंड क्लास टिकट दे दी जाएगी लेकिन यह

6:57:25गांधीजी की सिर्फ पार्शियल विक्ट्री की थी

6:57:27साउथ अफ्रीका में र रही इंडियन के लिए

6:57:30रेसियल डिस्क्रिमिनेशन आम बात हो चुकी थी

6:57:33उन्हें व्हाइट सीसम की वजह से रोजाना ही

6:57:36हमिलिएशन और कंटेंप्ट झेलना पड़ता था बहुत

6:57:40सी कॉलोनी में बिना परमिट के रात 9:00 बजे

6:57:42के बाद इंडियन को बाहर आने की परमीशंस तक

6:57:45नहीं थी और ना ही ये लोग पब्लिक फुटपाथ का

6:57:48उसे कर सकते थे प्रिटोरिया पहुंचकर

6:57:50गांधीजी अपना लीगल क शुरू कर देते हैं साथ

6:57:53ही वहां र इंडियन की मीटिंग बुलेट हैं और

6:57:56उन्हें ऑर्गेनाइज होकर शोषण का विरोध करने

6:57:59का सुझाव देते हैं साथ ही प्रेस के थ्रू

6:58:02भी गांधीजी अन्य के खिलाफ अपनी आवाज उठाते

6:58:05हैं इस समय तक गांधीजी का साउथ अफ्रीका

6:58:07में रुकने का कोई प्लेन नहीं था लेकिन फिर

6:58:10भी वो अपनी तरफ से

6:58:12अगेंस्ट इंडियन को अराउस करने की पुरी

6:58:15कोशिश करते हैं अपने डॉ के इसको सेटल करने

6:58:18के बाद गांधीजी वापस इंडिया जान की तैयारी

6:58:21करने लगता हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है

6:58:23गांधीजी को साउथ अफ्रीका में अभी लंबे समय

6:58:26के लिए रहना था

6:58:28डी स्ट्रगल बिगिंस दोस्तों एक तरफ तो

6:58:31गांधीजी 1894 में अपना कम खत्म करके वापस

6:58:34इंडिया जान वाले थे और दूसरी तरफ नेपाल की

6:58:38सांसद एक ऐसा बिल लाने की तैयारी में थी

6:58:40जिसे इंडियन से वोटिंग का अधिकार छन लिया

6:58:43जाता अप्रैल 1894 में गांधीजी के फेयरवेल

6:58:47डिनर के समय इस बिल पर डिस्कशन शुरू हो

6:58:49जाता है

6:58:50गांधीजी अपने साथियों से कहते हैं की किसी

6:58:53भी तरह से इस बिल को पास होने से रोकना

6:58:55चाहिए नहीं तो यह उनके कॉफिन की पहले कल

6:58:59बन शक्ति है लेकिन वहां मौजूद सभी लोगों

6:59:02को लगता है की गांधी जी के बिना वो इस बिल

6:59:05का विरोध नहीं कर पाएंगे इसलिए सभी गांधी

6:59:08जी से और 1 महीने साउथ अफ्रीका में ही

6:59:11रुकने के लिए कहते हैं

6:59:13लेकिन यह लोग गांधीजी को ही अपना लीडर

6:59:17क्यों बनाना चाहते थे जो अभी मैच 25 साल

6:59:20के ही थे एक्सपीरियंस और आगे में उनसे भी

6:59:23बड़े-बड़े मरचेंट्स साउथ अफ्रीका में

6:59:25मौजूद थे ऐसा इसलिए क्योंकि जी इंग्लैंड

6:59:29से पढ़ाई करके लौटे थे उन्हें इंग्लिश की

6:59:31अच्छी नॉलेज थी और साउथ अफ्रीका में र रहे

6:59:34ज्यादातर इंडियन को इंग्लिश नहीं आई थी

6:59:36शादी गांधीजी बैरिस्टर भी थे इसलिए पिटीशन

6:59:40ड्राफ्ट कर सकते थे एक वही थे जो रोलर से

6:59:44उनकी ही लैंग्वेज में बात कर सकते थे और

6:59:46इंडियन को उनके सामने रिप्रेजेंट कर सकते

6:59:49थे इसलिए गांधीजी को यह लोग अपना लीडर

6:59:53चुनते हैं उसे समय ना इन्हें पता था और ना

6:59:56ही गांधी जी को अंदाज़ था की आने वाले 20

6:59:59साल तक वो साउथ अफ्रीका में ही र कर अपने

7:00:01लोगों की स्ट्रगल में बड़ी भूमिका

7:00:03निभाएंगे

7:00:051894 296

7:00:07मॉडरेट फेस ऑफ डी स्ट्रग

7:00:10दोस्तों गांधी जी फेयरवेल डिनर को ही एक

7:00:13मीटिंग में बादल देते हैं और यहां पर ही

7:00:16एक्शन कमेटी फॉर्म कर ली जाति है यह कमेटी

7:00:19नडाल लेजिसलेटिव असेंबली के लिए एक पिटीशन

7:00:22ड्राफ्ट करती है वॉलिंटियर्स पिटीशन की

7:00:25कॉप्स बनाते हैं और पुरी रात उसके ऊपर

7:00:27सिग्नेचर कलेक्ट करते हैं

7:00:29पिटीशन को अगली सुबह प्रेस में भी अच्छी

7:00:32खासी पब्लिसिटी मिलती है लेकिन इन सभी

7:00:34एफर्ट्स के बावजूद असेंबली बिल पास कर

7:00:37देती है गांधीजी फिर भी हर नहीं मानते और

7:00:40एक दूसरी पिटीशन पर कम करना शुरू कर देते

7:00:42हैं इस बार पिटीशन लॉर्ड रिपन के लिए

7:00:45तैयार की जा रही थी लॉर्ड रिपन उसे समय

7:00:48सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पर कॉलोनी की पोस्ट

7:00:50हॉल कर रहे थे एक महीने के अंदर ही 10000

7:00:54सिग्नेचर के साथ यह पिटीशन लॉर्ड रिपन के

7:00:57पास भेज दी जाति है डिस्ट्रीब्यूशन के लिए

7:01:00इसकी हजार कॉप्स भी बनाई जाति हैं

7:01:07और पहले बार इंडिया के लोगों को साउथ में

7:01:11र रही अपने साथियों की हालात के बड़े में

7:01:13पता चला है

7:01:1420 सेकंड अगस्त 1894 को गांधीजी साउथ

7:01:18अफ्रीका में इंडियन के राइट्स को

7:01:20प्रोटेस्ट करने के लिए नेटल इंडियन

7:01:22कांग्रेस नाम से पहले पॉलीटिकल

7:01:24ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना करते हैं इंडियन

7:01:26ओपिनियन नाम से अपना एक न्यूज़ पेपर भी

7:01:29शुरू करते हैं

7:01:301894 से 196 तक गांधीजी की पॉलीटिकल

7:01:34एक्टिविटीज को मॉडरेट फैज बोला जा सकता है

7:01:36क्योंकि इस दौरान गांधीजी पिटीशन और

7:01:40मेमोरेंडम्स भेजना पर ही ध्यान देते हैं

7:01:42यह पिटीशन साउथ अफ्रीकन लेजिस्लेटर्स के

7:01:45साथ लंदन में कॉलोनियल सेक्रेटरी और

7:01:48ब्रिटिश पार्लियामेंट तक को भेजी जाति हैं

7:01:51की अगर इंपीरियल गवर्नमेंट के सामने कैसे

7:01:55के सभी फैक्ट्स रख दिए जैन तो ब्रिटिश

7:01:57सेंस ऑफ जस्टिस जग जाएगा और इंपीरियल

7:02:00गवर्नमेंट इंडियन के बिहा पर साउथ अफ्रीका

7:02:03में जरूर करेगी क्योंकि इंडियन आखिर

7:02:06ब्रिटिश सब्जेक्ट्स ही तो थे

7:02:08लेकिन 196 आते आते गांधीजी सभी मॉडरेट

7:02:12मैथर्ड को ट्राई कर चुके थे

7:02:14है और कोई भी सफलता नहीं मिल रही थी इसलिए

7:02:17उनको लगे लगा था की आगे बढ़ाने के लिए

7:02:19किसी और मेथड की जरूर है तब 196 से पैसिव

7:02:25रेजिस्टेंस या सत्याग्रह का फैज शुरू होता

7:02:27है

7:02:2919629914

7:02:31फैज ऑफ पैसिव रेजिस्टेंस और सत्याग्रह

7:02:34दोस्तों पैसिव रेजिस्टेंस या सत्याग्रह का

7:02:37उसे गांधीजी सबसे पहले बार रजिस्ट्रेशन

7:02:40सर्टिफिकेट का विरोध करने के लिए करते हैं

7:02:44196 में कानून लाया गया था जिसके तहत

7:02:47इंडियन को अपने फिंगरप्रिंट्स वाला

7:02:49रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हमेशा अपनी साथ

7:02:52रखना था

7:02:5311th सितंबर 1900

7:02:56के अंपायर थिएटर में एक पब्लिक मीटिंग

7:02:59होती है यहां इंडियन फैसला करते हैं की वह

7:03:02इस कानून को नहीं मानेंगे और उसके परिणाम

7:03:05भुगतने के लिए तैयार हैं

7:03:07गांधी जी कैंपेन को चलने के लिए पैसिव

7:03:10रेजिस्टेंस संगठन की स्थापना करते हैं

7:03:13रजिस्ट्रेशन की लास्ट डेट निकाल जाति है

7:03:16गवर्नमेंट गांधीजी और उनके 26 साथियों के

7:03:20अगेंस्ट करवाई शुरू करती है यह लोग

7:03:24कंट्री छोड़कर जान का ऑर्डर मिलता है और

7:03:27ऑर्डर ना माने पर इन्हें जय में दाल दिया

7:03:29जाता है इसी तरह जय जान वालों की संख्या

7:03:32बढ़नी जाति है जल्दी ही इनका नंबर 155

7:03:35पहुंच जाता है लोगों के मां से जय का डर

7:03:39निकाल जाता है जय को किंग एडवर्ड का होटल

7:03:41कहा जान लगा था ऐसे में जनरल स्मार्ट जो

7:03:45की साउथ अफ्रीका में डिफरेंस और नेटिव

7:03:46अफेयर्स मिनिस्टर थे गांधीजी को बात करने

7:03:49के लिए बुलेट हैं और वादा करते हैं की अगर

7:03:52इंडियन वॉलनटिअरीली रजिस्टर कर लेने तो ये

7:03:55कानून वापस ले लिया जाएगा

7:03:58गांधी जी इनकी बात मां लेते हैं और सबसे

7:04:01पहले खुद ही रजिस्टर करते हैं लेकिन जनरल

7:04:04स्मैश धोखा दे देते हैं और ऑर्डर देते हैं

7:04:07की वॉलंटरी रजिस्ट्रेशन को कानून के तहत

7:04:10रतीफाई किया जाए इसके बदले में इंडियन

7:04:13अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को पब्लिकली

7:04:16जल देते हैं इसी बीच गवर्नमेंट एक और

7:04:19कानून लेकर आई है जिसका मकसद साउथ अफ्रीका

7:04:22में इंडियन इमीग्रेशन पर रिस्ट्रिक्शन

7:04:24लगाना था इसकी अगेंस्ट भी इंडियन

7:04:27प्रोटेस्ट करना शुरू करते हैं गवर्नमेंट

7:04:29प्रोटेस्टर्स को जय में डालना शुरू कर

7:04:31देती है अक्टूबर 1900 में गांधी जी को भी

7:04:35जय हो जाति है इसके बाद भी इन लोगों की

7:04:38स्पिरिट कमजोर नहीं होती

7:04:40ऐसे में गवर्नमेंट इन लोगों को इंडिया

7:04:43डिपो करना शुरू कर देती है

7:04:51आंदोलन अब कमजोर पढ़ने लगता है लिमिटेड

7:04:54सत्याग्रह इसका तो जय से अंदर बाहर होना

7:04:57लगा राहत है लेकिन ज्यादातर लोगों में अब

7:05:00थकावट के साइन दिखने लगता हैं

7:05:03आंदोलन बहुत लंबा होता जा रहा था और

7:05:05गवर्नमेंट अभी भी इनकी डिमांड एक्सेप्ट

7:05:08करने के मूड में नहीं थी

7:05:09सत्याग्रही को सपोर्ट करने के लिए फंड्स

7:05:12भी खत्म होते जा रहे थे ऐसे में अपने एक

7:05:16जर्मन फ्रेंड टैलेंट बा की मदद से गांधीजी

7:05:191910 में जो हेन्सबर्ग के पास टॉलस्टॉय

7:05:23फॉर्म की स्थापना करते हैं इस

7:05:25एक्सपेरिमेंट को गांधीजी इंडिया में भी

7:05:27आगे बढ़ते हैं और साबरमती जैसे आश्रम की

7:05:30स्थापना करते हैं यहां सत्याग्रही इसकी

7:05:33फैमिली र शक्ति थी और खुद को सस्टेन कर

7:05:36शक्ति थी इसके साथ ही इंडिया से भी फंड्स

7:05:39आने लगता हैं सर रतन टाटा 25000 रुपए

7:05:43भेजते हैं कांग्रेस मुस्लिम लीग और

7:05:45हैदराबाद के निजाम भी अपना कंट्रीब्यूशन

7:05:47देते हैं

7:05:49आंदोलन का डेरा समय के साथ बढ़ता जाता है

7:05:521913 आते-आते इसमें टोल टैक्स का विरोध भी

7:05:56शामिल कर लिया जाता है सभी एक-इंडेक्ट

7:05:59इंडियन के ऊपर तीन पाउंड का पाल टैक्स

7:06:01लगाया जाता था

7:06:05जो पहले बांडेड लेबर की तरह कम करते थे

7:06:08इसके अबोलिशन की डिमांड कैंपेन के बेस को

7:06:11और ज्यादा बड़ा कर देती है क्योंकि इन

7:06:14डेंजर

7:06:15लेबर्स अब इससे जुड़ने जाते हैं अब यह

7:06:19सत्याग्रह पुरी तरह से एक मांस मूवमेंट बन

7:06:22जाता है इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का एक

7:06:25ऑर्डर इंडियन मैरिज को इन वैलिडेट कर देता

7:06:28है इस ऑर्डर के हिसाब से जो भी क्रिश्चियन

7:06:32तरीके से नहीं हुई है और रजिस्टर ऑफ मैरिज

7:06:35के पास रजिस्टर नहीं

7:06:37होगी इसका मतलब था की हिंदू मुस्लिम और

7:06:41पारसी मैरिज इलीगल हो गई थी और ऐसी

7:06:44शादियों से होने वाले बच्चों को

7:06:46इलेजिटीमेट कहा गया था

7:06:48इस जजमेंट को इंडियन अपनी वूमेन की इंसल्ट

7:06:51मानते हैं और इस वजह से बहुत साड़ी वूमेन

7:06:54भी अब आंदोलन से जुड़ जाति हैं यहां से

7:06:57आंदोलन का फाइनल फीस शुरू हो जाता है

7:07:00इमीग्रेशन कानून को तोड़ने के लिए लोग

7:07:03इलीगली बॉर्डर क्रॉस करना शुरू करते हैं

7:07:05माइंस और फैक्टरीज में स्ट्रीक्स की जाति

7:07:08है

7:07:08गांधीजी खुद न्यू कैसल टाउन पहुंचकर

7:07:11एजीटेशन को लीड करते हैं

7:07:13न्यूकासल नेपाल में एक मीनिंग टाउन था

7:07:16यहां के वर्कर्स ने स्ट्राइक कर दी थी

7:07:19इसलिए एंपलॉयर्स वर्कर्स क्वार्टर्स की

7:07:21इलेक्ट्रिसिटी और वाटर कनेक्शन कट कर देते

7:07:24हैं ऐसे में यहां रहने वाले करीब 2000

7:07:27लोगों को लेकर गांधी जी ट्रांसवर बॉर्डर

7:07:29के लिए मार्च शुरू करते हैं यह लोग

7:07:32ट्रांसपेरेंट जय में जाना चाहते थे मार्च

7:07:35के दौरान दो बार गांधीजी को अरेस्ट करके

7:07:38छोड़ दिया जाता है और तीसरी बार अरेस्ट

7:07:40होने पर जय भेज दिया जाता है लेकिन

7:07:43वर्कर्स का मॉडल टाउन नहीं होता वो अपना

7:07:46मार्च जारी रखते हैं फिर जबरदस्ती

7:07:55इन लोगों को जय में बहुत ही खराब

7:07:57ट्रीटमेंट दिया जाता है जिसमें स्टार्वेशन

7:08:00और विपिन शामिल था साथ ही फोर्सफुली

7:08:03माइंड्स में भी क कराया जाता है गवर्नमेंट

7:08:06के इस एक्शन से पुरी इंडियन कम्युनिटी

7:08:08गुस्से में ए जाति है

7:08:10प्लांटेशंस और माइंस में कम करने वाले

7:08:12वर्कर्स स्ट्राइक करने लगता हैं एनिमेट और

7:08:15पीसफुल मां और वूमेन के अगेंस्ट उसे किया

7:08:18जा रहे इस ब्रूटल फोर्स की हर जगह निंदा

7:08:21होने लगती है ऐवेंंचुअली गवर्नमेंट

7:08:23गांधीजी के साथ नेगोशिएशंस के लिए तैयार

7:08:26हो जाति है

7:08:27एग्रीमेंट के अनुसार साउथ अफ्रीका की

7:08:31गवर्नमेंट मेजर इंडियन डिमांड्स को मां

7:08:33लेती है यानी की पाल टैक्स और रजिस्ट्रेशन

7:08:36सर्टिफिकेट को खत्म कर दिया जाता है

7:08:38इंडियन रीति रिवाज से होने वाली शादियों

7:08:42को भी मान्य कर दिया जाता है

7:08:50इस तरह साउथ अफ्रीका में गांधीजी का

7:08:53आंदोलन सफल राहत है नॉन वायलेट सिविल

7:08:56डिसऑबेडिएंट से अपने अपॉन्ंस को

7:08:58नेगोशिएटिंग टेबल पर आने के लिए मजबूर कर

7:09:00दिया जाता है और आंदोलन के दौरान राखी गई

7:09:03डिमांड्स को भी पूरा करवा लिया जाता है

7:09:06कंक्लुजन दोस्तों साउथ अफ्रीका के इस

7:09:10स्ट्रगल के दौरान ही गांधीजी एक लीडर बनते

7:09:13हैं यहां पर ही उन्होंने अहिंसा पर आधारित

7:09:16सत्याग्रह टेक्निक कू डेवलप किया इस

7:09:19सत्याग्रह के दौरान उन्होंने अलग-अलग

7:09:21कम्युनिटी के साथ कम करना भी शिखा चाहे वो

7:09:25मुस्लिम हो तमिल हूं पारसी हूं या फिर

7:09:28हिंदू साउथ अफ्रीका में गांधीजी को मौका

7:09:31मिलता है अपने पॉलीटिकल और लीडरशिप स्टाइल

7:09:34को इवॉल्व करने यहां पर वह आंदोलन को

7:09:37मॉडरेट फेस से गांधियन फेस तक लेकर गए थे

7:09:40अब ऐसा ही कुछ उन्हें इंडिया में भी करना

7:09:43था

7:09:451893 में गांधीजी एक वकील के रूप में

7:09:48इंडिया से गए थे लेकिन 1915 में साउथ

7:09:50अफ्रीका से सिर्फ एक वकील नहीं बल्कि एक

7:09:53नेशनल हीरो और लीडर लोट कर आता है जो की

7:09:56आगे चलकर इंडिया के नेशनल मूवमेंट का रुख

7:09:59ही बदलने वाला था आगे आने वाले वीडियो में

7:10:02हम देखेंगे की कैसे गांधीजी इंडिया की

7:10:05आंदोलन की लीडरशिप अपने हाथ में लेते हैं

7:10:08अराइवल ऑफ गांधी और अर्ली मूवमेंट्स

7:10:12दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हम इंडियन

7:10:15नेशनल मूवमेंट के 1917 से 18 तक की

7:10:18इवेंट्स को कर कर चुके हैं इसके बाद का जो

7:10:21टाइम पीरियड है उसे गांधियन एरा के नाम से

7:10:24जाना जाता है

7:10:26नेशनल मूवमेंट की दिशा तो पुरी तरह बदली

7:10:29जाति है साथ ही यह पीरियड आजादी के बाद के

7:10:33भारत को भी दिशा दिखाने का कम करता है आज

7:10:36हम इसी को शुरू करने वाले हैं हम जानेंगे

7:10:39की कैसे गांधीजी इंडिया के नेशनल मूवमेंट

7:10:42को एक नई डायरेक्शन देते हैं साथ ही उनकी

7:10:45एडोलॉजी और शुरुआत के कुछ इंपॉर्टेंट

7:10:48मूवमेंट्स को भी कर करेंगे तो आई शुरू

7:10:51करते हैं

7:10:54अराइवल ऑफ गांधीजी

7:10:57दोस्तों गांधीजी जनवरी 1915 में साउथ

7:11:01अफ्रीका से इंडिया वापस आते हैं उनके साउथ

7:11:04अफ्रीकन कैंपेन को हम अपनी पिछली वीडियो

7:11:07में डिटेल में कर कर चुके हैं साउथ

7:11:09अफ्रीका में किया गए उनके कम के बड़े में

7:11:11सिर्फ एजुकेटेड क्लास ही नहीं बल्कि आम

7:11:14जनता भी जान गई थी इसीलिए इंडिया में उनकी

7:11:17पहचान एक सफल लीडर के रूप में बन चुकी थी

7:11:21साउथ अफ्रीका में संघर्ष के दौरान ही

7:11:23नेशनल मूवमेंट के लिए गांधीजी की

7:11:26आईडियोलॉजी भी डेवलप होती है उनकी एडोलॉजी

7:11:29का बेस सत्य और अहिंसा पर आधारित

7:11:31सत्याग्रह था इसके अलावा गांधीजी सर्वोदय

7:11:36यानी की सभी के विकास में बिलीव करते थे

7:11:39गांधीजी की एडोलॉजी प्रेरित थी उनकी मदर

7:11:42के आदर्श से जैनिज्म फिलासफी से हिंदुइज्म

7:11:46से और लियो टॉलस्टॉय के विचारों से इंडिया

7:11:49आने के बाद अपने राजनैतिक गुरु गोखले की

7:11:52खाने पर गांधी जी एक साल तक देश घूमते हैं

7:11:55जिससे वो देश और उसके लोगों की हालात को

7:11:58अच्छे से समझ सकें गांधीजी उसे समय चल रही

7:12:01होम रूल एजीटेशन की फीवर में नहीं थे

7:12:03क्योंकि उन्हें लगता था की वार के बीच में

7:12:06ब्रिटेन से होम रूल की डिमांड करना सही

7:12:09नहीं यहां तक की वह वार के लिए सोल्जर

7:12:12रिक्रूट करने में भी ब्रिटिश की हेल्प

7:12:15करते हैं इसके लिए उन्हें रिक्रूटिंग

7:12:17सार्जेंट ऑफ डी गवर्नमेंट के नाम से भी

7:12:19जाना जाता है

7:12:21साथ ही वार में उनकी सर्विसेज के लिए

7:12:23ब्रिटिश गवर्नमेंट उन्हें कैसे हिंद मेडल

7:12:26भी देती है

7:12:27फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान ही गांधीजी

7:12:30इंडिया में कुछ लोकल लेवल आंदोलन का

7:12:33हिस्सा भी बनते हैं

7:12:38चंपारण अहमदाबाद और खेड़ा सत्याग्रह

7:12:44दोस्तों बिहार के चंपारण जिला में

7:12:47यूरोपियन प्लांटर्स किसने को इंडिगो यानी

7:12:50की नील की खेती करने के लिए फोर्स कर रहे

7:12:52थे जिसकी वजह से यहां के किसान बहुत

7:12:55परेशान थे ना तो वो अपनी जरूर के अनुसार

7:12:58फूड क्रॉप्स गो कर सकते थे और ना ही

7:13:01उन्हें इंडिगो के लिए सही दम ही मिलते थे

7:13:04यहां जो सिस्टम चल रहा था उसे तीन कठिया

7:13:07सिस्टम कहा जाता था इसका मतलब था की किसान

7:13:10को कम से कम तीन कत्था जमीन पर इंडिगो की

7:13:14खेती करनी होती थी कथा लैंड मेजरमेंट की

7:13:17एक यूनिट थी जिसमें 20 कथा एक बीघा के

7:13:21बराबर होता था शुरुआत में तो किसने को

7:13:23इसके अच्छे दम मिलते थे इसलिए वह इंडिगो

7:13:25की खेती के लिए तैयार हो गए

7:13:31इंडिगो को रिप्लेस करने लगती हैं ऐसी

7:13:34सिचुएशन में अपने प्रॉफिट को मैक्सिमाइज

7:13:37करने के लिए यूरोपियन प्लांटर्स किसने से

7:13:39हाय रेंज और लीगल न्यूज़ की डिमांड करने

7:13:42लगता

7:13:43साथ ही किसने को फोर्स किया जाता है की वो

7:13:46यूरोपियंस के द्वारा फिक्स किया गए

7:13:48प्राइसेस पर अपने प्रोड्यूस को बीच दे और

7:13:50अगर किसान इंडिगो गो करने से माना करते तो

7:13:54पुलिस और ज्यूडिशरी की हेल्प से उन्हें

7:13:56डराया धमकाया जाता था इस वजह से यहां के

7:13:59किसने की हालात बहुत ही खराब हो चुकी थी

7:14:02गांधी जी को इसके बड़े में राजकुमार

7:14:04शुक्ला नाम के एक व्यक्ति से पता चला है

7:14:06जो चंपारण के ही एक किसान थे राजकुमार

7:14:11शुक्ला गांधीजी से मिलकर उन्हें चंपारण के

7:14:14किसने की मदद करने के लिए कहते हैं उसे

7:14:16समय यानी की 1916 में गांधीजी कांग्रेस का

7:14:20सेशन अटेंड करने के लिए लखनऊ में थे उनके

7:14:23पास चंपारण जान का समय नहीं था लेकिन

7:14:26राजकुमार शुक्ला उनका पीछा नहीं छोड़ते वह

7:14:29गांधीजी को हर जगह फॉलो करते हैं और उनसे

7:14:32रिक्वेस्ट करते हैं की वह एक बार चंपारण

7:14:35चलकर किसने की हालात खुद देख लेने फाइनली

7:14:38गांधीजी उन्हें प्रॉमिस करते हैं की वह

7:14:41कोलकाता की विजिट के बाद

7:14:43चंपारण पहुंच जाएंगे

7:14:45गांधी जी जब कोलकाता पहुंचने हैं तब

7:14:48राजकुमार शुक्ला उन्हें चंपारण ले जान के

7:14:50लिए वहां पहले से ही मौजूद होते हैं

7:14:531917 की शुरुआत में गांधीजी चंपारण पहुंच

7:14:57जाते हैं इसके बाद गांधीजी राजेंद्र

7:15:00प्रसाद नरहरि पारीक जी बी कृपलानी और

7:15:03महादेव देसाई जैसे लोकल लीडर्स के साथ

7:15:05मिलकर एक टीम बनाते हैं यह लोग किसने की

7:15:09समस्या को सही तरीके से समझना के लिए एक

7:15:12सर्वे शुरू करते हैं

7:15:13गांधी जी की एक्टिविटीज को देखकर लोकल

7:15:16ब्रिटिश ऑफिसर्स थोड़ा घबरा जाते हैं

7:15:18उन्हें डर लगता है की कहानी साउथ अफ्रीका

7:15:21की तरह गांधीजी यहां भी कोई बड़ा आंदोलन

7:15:24ना खड़ा कर दें इसलिए ब्रिटिश गवर्नमेंट

7:15:26इंडिगो कल्टीवेटर की समस्या का हाल

7:15:29निकालना के लिए खुद ही एक कमेटी सेटअप

7:15:31करती है

7:15:37गांधीजी कम्युनिटी के मेंबर्स को कन्वेंस

7:15:39करने में कामयाब होते हैं की तीन कठिया

7:15:42सिस्टम पुरी तरह गलत है और इसे पॉलिश करने

7:15:45की जरूर है साथ ही इंडिगो प्लांटर्स के

7:15:48साथ एग्रीमेंट करते हैं की उन्होंने किसने

7:15:51से जो इलीगल न्यूज़ वसूल किया थे उसका 25%

7:15:55किसने को कंपनसेशन अमाउंट के रूप में वापस

7:15:58करें इस तरह गांधी

7:16:01के किसने की समस्या हाल हो जाति है यहां

7:16:04पर यह समझना जरूरी है की किसने की फूल

7:16:07कंपनसेशन की डिमांड नहीं मनी जाति लेकिन

7:16:10गांधीजी मिडिल पाठ और कंप्रोमाइज में यकीन

7:16:13करते थे

7:16:14चंपारण के बाद गांधी जी को मार्च 1918 में

7:16:17अहमदाबाद से बुलावा जाता है यहां कॉटन में

7:16:21लर्स और वर्कर्स के बीच प्लेग बोनस के

7:16:24डिस्कंटीन्यूएशन के इशू पर डिस्प्यूट खड़ा

7:16:26हो गया था मिल ऑनर्स बोनस खत्म कर देना

7:16:29चाहते थे और वर्कर्स की डिमांड थी की इसके

7:16:32बदले में उनके वेजेस में 50% की बढ़ोतरी

7:16:36की जाए जिससे वो वो टाइम इन्फ्लेशन में

7:16:38खुद को मैनेज कर सकें लेकिन मिलन्स सिर्फ

7:16:4220% की बढ़ोतरी के लिए तैयार थे इसलिए

7:16:45वर्कर्स हड़ताल पर चले जाते हैं मिल ऑनर्स

7:16:49और वर्कर्स के बीच के रिश्ते और खराब होने

7:16:51लगता हैं जब हड़ताल पर गए वर्कर्स को

7:16:54डिसमिस किया जान लगता है और मुंबई से

7:16:56विवर्स को बुलाने का डिसीजन लिया जाता है

7:16:58ऐसी सिचुएशन में हेल्प के लिए वर्कर्स

7:17:01अनुसुइया साराभाई के पास पहुंचने हैं

7:17:06और अंबालाल साराभाई की बहन भी थी अंबाला

7:17:10होने के साथ-साथ अहमदाबाद मिल ऑनर्स संगठन

7:17:14के प्रेसिडेंट भी थे

7:17:17अनसूया बहन गांधीजी से इस डिस्प्यूट में

7:17:20इंटरव्यू करने की रिक्वेस्ट करती है वैसे

7:17:23तो गांधीजी अंबालाल साराभाई के दोस्त थे

7:17:25अंबालाल जी ने अहमदाबाद में आश्रम बनाने

7:17:28के लिए गांधीजी को डोनेशन भी दी थी लेकिन

7:17:31इसके बावजूद गांधीजी यहां वर्कर्स के साथ

7:17:34खड़े होते हैं अनुसुइया जी भी वर्कर्स को

7:17:37सपोर्ट करती हैं और गांधी जी का पूरा साथ

7:17:40देती हैं गांधी जी वर्कर से वेजेस में 50%

7:17:44की जगह 35% बढ़ोतरी की डिमांड पर हड़ताल

7:17:48करने के लिए कहते हैं इसके साथ ही हड़ताल

7:17:51के दौरान पुरी तरह अहिंसा का पालनपुर करने

7:17:53की सलाह भी वर्कर्स को देते हैं इसके बाद

7:17:56भी जब मिल ऑनर्स नहीं मानते तो वर्कर्स का

7:17:59मनोबल बढ़ाने के लिए गांधीजी खुद आमरण अंश

7:18:02पर बैठ जाते हैं ये पहले मौका था जब

7:18:05इंडिया में किसी पॉलीटिकल कॉल्स के लिए

7:18:07गांधीजी हंगर स्ट्राइक करते हैं

7:18:12और फाइनली

7:18:15के सामने रखना के लिए मां जाते हड़ताल

7:18:19वापस ले ली जाति है और ट्रिब्यूनल वर्कर्स

7:18:21की 35% बीज हाय की डिमांड को मां लिया

7:18:25जाता है

7:18:26अहमदाबाद स्ट्राइक के दौरान ही गांधीजी को

7:18:28खेड़ा आने का इनविटेशन मिल जाता है यहां

7:18:31पर 1918 में ड्रॉट की वजह से किसने की फसल

7:18:35बर्बाद हो गई थी रिवेन्यू कोड में

7:18:37प्रोविजन था की नॉर्मल प्रोड्यूस की तुलना

7:18:40में अगर 14th से भी गम की पैदावार होती है

7:18:43तो किसने का लगन माफ किया जा सकता है

7:18:45किसने की एक ऑर्गेनाइजेशन गुजरात सभा

7:18:48ब्रिटिश अथॉरिटीज के पास पिटीशन भेजती है

7:18:51की साल 1919 के लिए रिवेन्यू एसेसमेंट को

7:18:55सस्पेंड कर दिया जाए लेकिन गवर्नमेंट कुछ

7:18:58भी सुनने के लिए तैयार नहीं थी वह यहां तक

7:19:01का देती है की अगर किसान टैक्स नहीं देंगे

7:19:04तो उनकी प्रॉपर्टीज जप्त कर ली जाएगी

7:19:06खेड़ा में गांधीजी का साथ देने के लिए

7:19:08वल्लभ भाई पटेल नरहरि पारीक मोहनलाल

7:19:11पांड्या और रवि शंकर व्यास जैसे लीडर्स

7:19:14मौजूद थे यह लोग गांव जाकर किसने को

7:19:18ऑर्गेनाइज करते हैं और उन्हें बताते हैं

7:19:20की क्या करना है

7:19:23पेमेंट का डिसीजन लिया गया था इस

7:19:26सत्याग्रह के दौरान किसने ने शानदार

7:19:29अनुशासन और एकता का परिचय दिया था

7:19:33टैक्स पर एन करने की स्थिति में जब

7:19:35गवर्नमेंट किसने की पर्सनल प्रॉपर्टी जमीन

7:19:38ईटीसी को जप्त करना शुरू कर देती है तब भी

7:19:41किसान सरदार पटेल का साथ नहीं छोड़ते और

7:19:44फर्स्ट नॉन कोऑपरेशन आंदोलन में बने रहते

7:19:46हैं आखिर में गवर्नमेंट किसने के साथ

7:19:49समझौते के लिए मां जाति है साल 1919 के

7:19:53लिए टैक्स को सस्पेंड कर दिया जाता है और

7:19:56किसने की जो भी प्रॉपर्टीज की गई थी वो

7:19:59उन्हें लोटा दी जाति है इस तरह चंपारण

7:20:02अहमदाबाद और खेड़ा में गांधीजी लोगों की

7:20:05समस्या सुलझाने में कामयाब होते हैं और

7:20:07किसने और वर्कर्स के बीच अपनी एक पहचान

7:20:10बना लेते हैं इन लोकल लेवल इवेंट्स के बाद

7:20:13अब बड़ी थी एक जो इंडिया मूवमेंट की

7:20:16गांधीजी का पहले जो इंडिया लेवल का आंदोलन

7:20:19कौन सा था और वो किस तरह से होता है आई

7:20:22जानते हैं

7:20:30दोस्तों गांधी जी को उम्मीद थी की वर्ल्ड

7:20:33वार के और होने पर ब्रिटिश गवर्नमेंट

7:20:35इंडिया में जरूर कुछ रिफॉर्म्स लेकर आएगी

7:20:38लेकिन होता इसके उल्टा है इंडियन को

7:20:41कंसेशन की जगह मार्च 1990 में रोलेट एक्ट

7:20:44का तोहफा मिलता है

7:20:46रोल अटैक को थोड़ा डिटेल में समझते हैं

7:20:49वर्ल्ड वार के दौरान इंडियन रिवॉल्यूशनरी

7:20:52एक्टिविटीज को सुप्प्रेस करने के लिए

7:20:54ब्रिटिश डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1915 लेकर

7:20:58आए थे यह इमरजेंसी क्रिमिनल डॉ था मतलब

7:21:01वोट जैसी इमरजेंसी सिचुएशन के दौरान किसी

7:21:05भी तरह की रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी को

7:21:07रोकने के लिए एक हर्ष डॉ था यह वर्ल्ड वार

7:21:11के खत्म होने के 6 महीने बाद तक के लिए

7:21:13लागू किया गया था

7:21:15फर्स्ट वर्ल्ड वार नवंबर

7:21:42चेंज से जस्ट करना

7:21:45है इस कमेटी ने इंडिया में मिलिटेंट

7:21:47नेशनलिज्म को कंट्रोल करने के लिए डिफेंस

7:21:50ऑफ इंडिया एक्ट को इंडेफिनिटी टाइम के लिए

7:21:53एक्सटेंड करने का रिकमेंडेशन दिया यही

7:21:56एक्ट फिर रोलेट एक्ट के नाम से जाना जाता

7:21:58है हालांकि इसका ऑफिशल नाम अनक्कल और

7:22:02रिवॉल्यूशनरी क्राइम एक्ट 1919 है इस एक्ट

7:22:05का इनाम था ब्रिटिशर्स के खिलाफ किसी भी

7:22:08कंस्पायरेसी को शुरू होने से पहले ही खत्म

7:22:11कर देना इसकी प्रोविजंस के अनुसार पुलिस

7:22:14बिना किसी वारंट की किसी भी जगह को सर्च

7:22:17कर शक्ति थी इसके अलावा शक के आधार पर

7:22:20किसी को भी 2 साल के लिए बिना किसी ट्रायल

7:22:23के जय में डाला जा सकता था स्पेशल कोर्ट

7:22:26बनाए गए रौलट एक्ट से रिलेटेड जिसमें तीन

7:22:29जज की बेंच फैसला करती थी और इनके फैसला

7:22:32के खिलाफ किसी भी तरह की अपील नहीं की जा

7:22:35शक्ति थी इसलिए इस एक्ट को नो अपील नो

7:22:38दलील कानून भी कहा जान लगा

7:22:40गांधी जी से एक कल कानून कहते हैं और इसके

7:22:44अगेंस्ट सत्याग्रह शुरू करने का डिसीजन

7:22:46लेते हैं उन्होंने 24th फरवरी 1999 में

7:22:49बॉम्बे में सत्याग्रह सभा शुरू की आंदोलन

7:22:53को ऑर्गेनाइज करने के लिए गांधीजी होम रूल

7:22:56लीग जैसे ऑर्गेनाइजेशंस को भी अपने साथ

7:22:58जोड़ने हैं इसके बाद जगह सत्याग्रह सभा की

7:23:02गई और फिर फैसला किया गया की सिक्स्थ

7:23:05अप्रैल 1990 को रौलट एक्ट के विरोध में

7:23:08पूरे देश में हड़ताल की जाएगी सब कुछ

7:23:11प्लेन के हिसाब से ही हो रहा था की तभी

7:23:14खबर आई है की ब्रिटिशर्स ने पंजाब के दो

7:23:17बड़े लीडर्स सैफुद्दीन किछु और डॉक्टर

7:23:19सत्यपाल को अरेस्ट कर लिया है यह नाइंथ

7:23:22अप्रैल 19 की बात थी इस खबर के बाद पंजाब

7:23:26में माहौल खराब होने में डर नहीं लगती लोग

7:23:29अपने लीडर्स की अरेस्ट के बड़े में सुनकर

7:23:31गुस्से में ए जाते हैं और जगह हिंसक

7:23:34प्रदर्शन होने लगता है भीड़ गवर्नमेंट

7:23:37प्रॉपर्टी को अपना निशाना बनाने लगती है

7:23:39और पूरा पंजाब गुस्से की आज में जलने लगता

7:23:42है सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए 11th

7:23:45अप्रैल को पंजाब में मार्शल डॉ लगा दिया

7:23:47जाता है और पंजाब की जिम्मेदारी जनरल डायर

7:23:51को दे दी जाति है इन सभी बटन से अनजान

7:23:54अमृतसर और उसके आसपास के गांव के लोग 13th

7:23:58अप्रैल को बैसाखी के पाव पर जलियांवाला

7:24:01बैग में इकट्ठा होते हैं बड़ी संख्या में

7:24:03लोगों के कठे होने की खबर मिलने पर जनरल

7:24:06डायर अपनी ट्रूप्स को ओपन फायर करने का

7:24:09ऑर्डर दे देते हैं फायर करने से पहले

7:24:12पब्लिक को किसी भी तरह की वारंग भी नहीं

7:24:14दी जाति इसमें हजारों निहत्थे लोग मारे

7:24:18जाते हैं

7:24:24दूसरी तरफ सत्याग्रह के दौरान देश में

7:24:27फाइल वायलिन से गांधीजी बहुत निरसा हो

7:24:30जाते हैं खासकर बंगाल पंजाब और गुजरात में

7:24:33बहुत ज्यादा हिंसा हो जाति है हिंसा की यह

7:24:36घटनाएं गांधीजी को बहुत आहट कर देती हैं

7:24:39इसलिए 18 अप्रैल 1990 को गांधीजी इस

7:24:44आंदोलन को वापस ले लेते हैं और वह इस

7:24:47सत्याग्रह को एक हिमालय

7:24:49जितनी बड़ी गलती बताते हैं

7:24:54कंक्लुजन

7:24:57दोस्तों इस तरह गांधीजी का पहले जो इंडिया

7:25:00लेवल का मूवमेंट एक तरह से फूल हो जाता है

7:25:05की किसी भी बड़े आंदोलन को शुरू करने से

7:25:08पहले उन्हें लोगों को अहिंसा और सत्याग्रह

7:25:11में ट्रेन करने की जरूर है और इसके लिए

7:25:14उन्हें कांग्रेस जैसे बड़े ऑर्गेनाइजेशन

7:25:16की मदद भी चाहिए होगी इसलिए अपना अगला

7:25:20आंदोलन गांधी जी कांग्रेस के बैनर में ही

7:25:22शुरू करते हैं और वो आंदोलन था नॉन

7:25:25कोऑपरेशन यानी की सहयोग आंदोलन इस आंदोलन

7:25:29के बड़े में हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में

7:25:31चर्चा करेंगे

7:25:33खिलाफत कोऑपरेशन मूवमेंट दोस्तों आज हम

7:25:37बात करने वाले हैं इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल

7:25:39केक ऐसे आंदोलन की जो सिर्फ जान आंदोलन ही

7:25:42नहीं बल्कि कई मैनो में एक इंपॉर्टेंट

7:25:44टर्निंग पॉइंट भी था इसे हम खिलाफत

7:25:48कोऑपरेशन मूवमेंट के नाम से जानते हैं

7:25:51तो आई डिटेल में समझते हैं खिलाफत और नॉन

7:25:54कोऑपरेशन मूवमेंट को

7:25:56बैकग्राउंड

7:26:02के लिए माहौल तैयार होने लगा था इसके पीछे

7:26:06कई करण थे आई इनके बड़े में जानते हैं

7:26:10सबसे पहले करण देश की बिगड़ी इकोनामिक

7:26:13सिचुएशन को माना जा सकता है युद्ध के

7:26:16दौरान चीजों के दम बहुत ज्यादा बाढ़ चुके

7:26:18थे साथ ही ब्रिटिश गवर्नमेंट ने टैक्स और

7:26:22रेंट्स में भी बढ़ोतरी कर दी थी जिसकी वजह

7:26:24सोसाइटी का लगभग हर क्षेत्र परेशान था इस

7:26:28तरह इकोनॉमिक्स हार्डशिप्स ने लोगों में

7:26:30एंटी ब्रिटिश एटीट्यूड को और भी मजबूत कर

7:26:33दिया था इसके अलावा अपनी पिछली वीडियो में

7:26:36हम रोलेट एक्ट और जलियांवाला बैग

7:26:38हत्याकांड के बड़े में तो डिस्कस कर ही

7:26:40चुके हैं

7:26:41यहां अंग्रेजी हुकूमत का एक बहुत ही

7:26:44घिनौना चेहरा सामने आता है इन घटनाओं की

7:26:47वजह से जनता में ब्रिटिश के खिलाफ आक्रोश

7:26:50की एक प्रबल अग्नि फेल गई थी इसके बाद

7:26:53जलियांवाला बैग हत्याकांड की जांच करने के

7:26:56लिए बनाई गई हंटर आदमी गी डालने जैसा कम

7:26:59करती है ये अपनी रिपोर्ट में जनरल डायर के

7:27:03एक्शन को सही बताती है इसके अलावा ब्रिटिश

7:27:06सांसद और वहां की जनता भी जनरल डायर के

7:27:09सपोर्ट में खड़ी दिखती है इस सब ने इंडिया

7:27:12के लोगों के जख्मो पर जैसे नमक लगा दिया

7:27:14था यही वजह थी की लोग अंग्रेजन से सीधी

7:27:18टक्कर लेने के लिए तैयार दिखे रहे थे और

7:27:20आखिर में 1919 में आए मोंटीगू चैंप्स पर

7:27:24रिफॉर्म्स भी इंडियन की सेल्फ गवर्नमेंट

7:27:26की डिमांड को सेटिस्फाई करने में सफल नहीं

7:27:28होते फर्स्ट वर्ल्ड वार में लॉयल्टी

7:27:31दिखाने के बाद काफी लोगों को उम्मीद थी की

7:27:33ब्रिटिश रिफॉर्म्स और दीप और इंडियन के

7:27:36लिए बेनिफिशियल रहेंगे लेकिन ऐसा कुछ भी

7:27:38नहीं होता इसके बाद लोगों को भरोसा हो

7:27:40जाता है की अंग्रेज सीधी तरह से तो इंडियन

7:27:43की कोई भी डिमांड नहीं माने वाले इसलिए एक

7:27:46बड़े आंदोलन की सख्त जरूर है और इसी समय

7:27:49खिलाफत इशू सामने ए जाता है जिसके राउंड

7:27:52आगे चलकर नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट डेवलप होता

7:27:55है तो आई

7:27:59डी खिलाफत इशू वह यह था दोस्तों फर्स्ट

7:28:03वर्ल्ड वार के दौरान हारने वाले देश में

7:28:06ओटोमन तुर्की भी शामिल था और जीत हुई थी

7:28:08ब्रिटेन और उसके लिक सुनने में यह ए रहा

7:28:11था की ओटोमन तुर्की

7:28:14साइन होने जा रही है आप सोच रहे होंगे की

7:28:18ओटोमन तुर्की से इंडियन नेशनल मूवमेंट का

7:28:20क्या कनेक्शन हो सकता है कनेक्शन यह है

7:28:22दोस्तों की पुरी दुनिया के मुस्लिम जिसमें

7:28:24इंडिया में रहने वाले मुस्लिम भी शामिल थे

7:28:26तुर्की के सुल्तान को अपना स्पिरिचुअल

7:28:29लीडर यानी की खलीफा मानते थे इसलिए उनकी

7:28:33सिंपैथी तुर्की के साथ थी लेकिन वार के

7:28:35बाद तुर्की से उसका बड़ा हिस्सा छन लिया

7:28:38गया था और खलीफा को भी पावर से हटाए जा

7:28:41रहा था इसी बात से दुनिया भर में र

7:28:43मुस्लिम पापुलेशन गुस्से में थी इंडिया के

7:28:47मुस्लिम लीडर्स भी ब्रिटिश के सामने कुछ

7:28:49मांग रखते हैं जिसमें पहले मांग थी की

7:28:52मुस्लिम की सीक्रेट प्लेस पर खलीफा का

7:28:54कंट्रोल बने रहने दिया जाए और दूसरी थी

7:28:57टेरिटोरियल अरेंजमेंट के बाद खलीफा के पास

7:29:00सफिशिएंट टेरिटरीज रहने दी जाए ब्रिटिश

7:29:04गवर्नमेंट पर प्रेशर बनाने के लिए 1990 की

7:29:07शुरुआत में अली ब्रदर्स मौलाना आजाद अजमल

7:29:10खान और हजरत मोहनी की लीडरशिप में एक

7:29:13खिलाफत कमेटी फॉर्म की जाति है इस तरह देश

7:29:16व्यापी आंदोलन के लिए जमीन तैयार हो जाति

7:29:18है

7:29:19डेवलपमेंट ऑफ डी खिलाफत नॉन कोऑपरेशन

7:29:22प्रोग्राम दोस्तों शुरुआत में तो खिलाफत

7:29:25लीडर्स सिर्फ मीटिंग्स पिटीशन और डेपुटेशन

7:29:28जैसे मैथर्ड को ही उसे करते हैं लेकिन फिर

7:29:30इसमें एक मिलिटेंट इमेज होने लगता है जो

7:29:33एक्टिव वेजिटेशन के पक्ष में था ये लोग

7:29:36गांधी जी को अपने साथ जोड़ने का फैसला

7:29:38लेते हैं और नवंबर 1990 में गांधी जी को

7:29:42जो इंडिया खिलाफत कमेटी का प्रेसिडेंट बना

7:29:44दिया जाता है

7:29:52दिल्ली में जो इंडिया खिलाफत कॉन्फ्रेंस

7:29:55में ब्रिटिश गुड्स को बॉयकॉट करने की कॉल

7:29:57दी जाति है इसके साथ खिलाफत लीडर्स साफ कर

7:30:01देते हैं की जब तक तुर्की के साथ फेवरेबल

7:30:04टर्म्स पर ट्रीटी साइन नहीं होती तब तक

7:30:06गवर्नमेंट के साथ हर तरह का सहयोग रॉक

7:30:09दिया जाएगा खिलाफत इशू में गांधी जी को

7:30:11ब्रिटिश गवर्मेंट के अगेंस्ट एक यूनाइटेड

7:30:13मास मूवमेंट शुरू करने की अपॉर्चुनिटी नजर

7:30:16आई है इसके लिए उन्हें कांग्रेस के सपोर्ट

7:30:18की भी जरूर थी चलिए जानते हैं की कांग्रेस

7:30:21कैसे इस मूवमेंट के साथ जोडी है कांग्रेस

7:30:25स्टैंड ऑन खिलाफत क्वेश्चन दोस्तों खिलाफत

7:30:28के इशू पर मूवमेंट शुरू करने को लेकर

7:30:30कांग्रेस एक मत नहीं थे बहुत से लीडर्स को

7:30:34लगता था की रिलिजियस इशू को नेशनल मूवमेंट

7:30:37से नहीं जोड़ना चाहिए साथ ही कुछ लीडर्स

7:30:40गांधी जी के नॉन को ऑपरेशन मूवमेंट से भी

7:30:42सहमत नहीं थे उनके मां में सत्याग्रह को

7:30:46लेकर भी कुछ डाउट्स थे लेकिन गांधीजी सभी

7:30:49लीडर्स को कन्वेंस करने में कामयाब रहते

7:30:51हैं और मूवमेंट के लिए कांग्रेस का

7:30:54अप्रूवल मिल जाता है इसके लिए सितंबर 1920

7:30:57में कोलकाता में कांग्रेस का स्पेशल

7:30:59दक्षिण ऑर्गेनाइजर किया जाता है यहां

7:31:01कांग्रेस पंजाब रोंग और खिलाफत इशू पर नॉन

7:31:05कोऑपरेशन प्रोग्राम चलने का अप्रूवल दे

7:31:07देती है इसके बाद दिसंबर 1920 में नागपुर

7:31:12के रेगुलर सेशन में कांग्रेस नॉन कोऑपरेशन

7:31:14मूवमेंट को फॉर्मूली इंडस कर देती है इस

7:31:18सेशन में कांग्रेस के कॉन्स्टिट्यूशन में

7:31:20भी बदलाव किया जाता है कांग्रेस का

7:31:22गोल्कंस्टीट्यूशनल मेंस के द्वारा सेल्फ

7:31:25गवर्नमेंट अटेंड करने की जगह पीसफुल और

7:31:27लेजरमेंट मीन से स्वराज अटेंड करना कर

7:31:30दिया जाता है इस तरह तीन डिमांड्स के साथ

7:31:33नॉन को ऑपरेशन मूवमेंट शुरू किया जाता है

7:31:36पहले डिमांड थी तुर्की के साथ फेवरेबल

7:31:39ट्रीटी दूसरी डिमांड थी पंजाब रोंग का

7:31:43एड्रेस

7:31:44की स्थापना

7:31:47गांधीजी डिक्लेअर करते हैं की अगर पुरी

7:31:49तरह

7:31:50को फॉलो किया जाएगा तो 1 साल में ही

7:31:54स्वराज मिल जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो

7:31:57वो सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट शुरू कर

7:31:59देंगे देखते ही देखते आंदोलन पूरे देश में

7:32:02फैलने लगता है तो आई आंदोलन की स्पीड और

7:32:05इस दौरान होने वाली एक्टिविटीज को समझते

7:32:07हैं

7:32:15दोस्तों नॉन कोऑपरेशन प्रोग्राम में

7:32:18गवर्मेंट स्कूल और कॉलेजेस लोकोड्स

7:32:21लेजिसलेटिव काउंसिल फॉरेन क्लॉथ एत्र का

7:32:24बॉयकॉट करना शामिल था आंदोलन को

7:32:27घर-घर तक पहचाने के लिए गांधीजी अली

7:32:30ब्रदर्स के साथ नेशन व्हाइट डोर करते हैं

7:32:32हजारों की संख्या में स्टूडेंट गवर्मेंट

7:32:35स्कूल और कॉलेज छोड़कर नेशनल स्कूल और

7:32:38कॉलेज जॉइन कर लेते हैं इस दौरान बहुत से

7:32:41एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस ऑर्गेनाइज किया गए

7:32:43जैसे की अलीगढ़ में जामिया मिलिया काशी

7:32:46विद्यापीठ गुजरात विद्यापीठ और बिहार

7:32:49विद्यापीठ बहुत सारे लॉयर्स अपनी

7:32:51प्रैक्टिस छोड़ देते हैं जिसमें मोतीलाल

7:32:54नेहरू जवाहर लाल नेहरू सी आर दास वल्लभभाई

7:32:57पटेल और राजेंद्र प्रसाद जैसे नाम शामिल

7:32:59थे जगह जगह विदेशी कपड़ों की होली जाली

7:33:03जान लगती है और इनका इंपोर्ट लगभग आधा हो

7:33:06जाता है तिलक स्वराज फंड में 1 करोड़

7:33:09कलेक्ट हो जाते हैं जुलाई 1921 में अली

7:33:13ब्रदर्स मुस्लिम को आर्मी से रेस करने के

7:33:15लिए कहते हैं इसके लिए सितंबर में उन्हें

7:33:18अरेस्ट कर लिया जाता है फिर गांधीजी उनकी

7:33:21बात को दोहराते हैं और लोकल कांग्रेस

7:33:23कमेटी को इसके ऊपर रेजोल्यूशन पास करने के

7:33:26लिए कहते हैं

7:33:27असेंबली प्लांटेशन स्टीमर सर्विसेज और असम

7:33:30बंगाल रेलवे में हड़ताल ऑर्गेनाइजर की

7:33:33जाति हैं नवंबर 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स

7:33:36की इंडिया विजिट पर जगह जगह हड़ताल और

7:33:39डेमोंसट्रेशंस ऑर्गेनाइजर होते हैं नॉन

7:33:41कोऑपरेशन मूवमेंट के दौरान बहुत से लोकल

7:33:44मूवमंस भी शुरू होते हैं जैसे की अप में

7:33:47अवध किसान मूवमेंट और ए का मूवमेंट

7:33:49मालाबार में मोबला रिपोर्ट और पंजाब में

7:33:52सिख एजीटेशन इस आंदोलन में समाज के लगभग

7:33:56हर वर्ग में पार्टिसिपेट किया था फिर चाहे

7:33:59वो मिल कलासु बिजनेस क्लास हूं किसान हूं

7:34:02स्टूडेंट हूं या फिर वूमेन इसके साथ ही

7:34:05पहले बार मुस्लिम बड़ी संख्या में नेशनल

7:34:07मूवमेंट से जुड़े थे

7:34:09लेकिन इतने बड़े आंदोलन के बाद भी ब्रिटिश

7:34:12गवर्मेंट झुकना को तैयार नहीं थी वो

7:34:14आंदोलन को सरप्राइज करना शुरू कर देते हैं

7:34:16पब्लिक मीटिंग्स पर बन लगा दिया जाता है

7:34:19प्रेस को सेंसर किया जान लगता है और

7:34:22गांधीजी को छोड़कर लगभग सभी लीडर्स को

7:34:24अरेस्ट कर लिया जाता है गवर्मेंट के

7:34:27रिप्रेशन के बाद गांधी जी पर दबाव बंता है

7:34:28की वो आंदोलन का नेक्स्ट पेज यानी की

7:34:31सिविल डिसऑबेडिएंस शुरू कर दें फर्स्ट

7:34:34फरवरी 1922 को गांधीजी डिक्लेअर करते हैं

7:34:38की अगर पॉलीटिकल प्रिजनर्स को रहा नहीं

7:34:40किया गया और प्रेस पर से कंट्रोल्स नहीं

7:34:43हटाए गए तो वो गुजरात के बारडोली से सिविल

7:34:45डिसऑबेडिएंस मूवमेंट शुरू करेंगे लेकिन

7:34:48इससे पहले की गांधीजी ऐसा कुछ करते एक ऐसी

7:34:51घटना होती है जिसके बाद आंदोलन को ही वापस

7:34:54ले लिया जाता है

7:34:57चोरी चौरा इंसिडेंट

7:35:00दोस्तों अप के गोरखपुर जिला में चोरी चौरा

7:35:04नाम का एक छोटा सा गांव है इतिहास में से

7:35:07याद रखा जाता है यहां फिफ्थ फरवरी 1922 को

7:35:10हुई घटना की वजह से हुआ यह था दोस्तों की

7:35:13आंदोलन के दौरान यहां प्रदर्शन कर रहे

7:35:15लोगों के लीडर को पुलिस ने काफी मारा था

7:35:18इससे गुस्से में आए लोग पुलिस स्टेशन के

7:35:21सामने प्रोटेस्ट करते हैं पुलिस प्रोटेस्ट

7:35:24कर रहे लोगों के ऊपर ओपन फायर करना शुरू

7:35:26कर देती है इससे लोगों में गुस्से की आज

7:35:29और ज्यादा भड़क जाति है और वो पुलिस पर

7:35:31हमला बोल देते हैं पुलिस मां बचाने के लिए

7:35:34स्टेशन के अंदर चुप जाते हैं तभी भीड़

7:35:37स्टेशन को ही आज लगा देती है इस हिंसा में

7:35:4022 पुलिस वाले मारे जाते हैं हिंसा की इस

7:35:43घटना के बड़े में सुनने के बाद गांधीजी

7:35:46तुरंत आंदोलन को वापस ले लेते

7:35:51किसी अरदास मोतीलाल नेहरू सुभाष इत्यादि

7:35:55आश्चर्य जताते हैं लेकिन गांधीजी सिर्फ एक

7:35:59घटना की वजह से पूरे आंदोलन को क्यों वापस

7:36:02ले लेते हैं इसे समझना जरूरी है

7:36:11दोस्तों गांधी जी को लगता था की लोग अभी

7:36:14पुरी तरह से अहिंसा के मेथड को नहीं समझ

7:36:16पाएं हैं चोरी चौरा जैसे इनसीडियस आगे

7:36:20चलकर आंदोलन को और ज्यादा हिंसक बना सकते

7:36:22थे और एक वायलेट मूवमेंट को ब्रिटिश

7:36:25गवर्मेंट बहुत आसानी से सरप्राइज कर शक्ति

7:36:27थी इसके साथ ही आंदोलन में अब थकावट के

7:36:30साइंस भी नजर आने लगे थे और ये स्वाभाविक

7:36:33भी था क्योंकि किसी भी आंदोलन को बहुत

7:36:35लंबे समय तक है पिच पर सस्टेन करना आसन

7:36:38नहीं होता ब्रिटिश गवर्नमेंट भी किसी भी

7:36:41तरह की नेगोशिएशंस करने के मूड में नजर

7:36:43नहीं ए रही थी इसलिए सभी बटन को ध्यान में

7:36:47रखकर गांधीजी आंदोलन को वापस लेने का

7:36:50फैसला करते हैं इसके बाद मार्च 1922 में

7:36:53सरकार के खिलाफ असंतोष फैलाने के जॉर्ज पर

7:36:56गांधी जी को अरेस्ट कर लिया जाता है और

7:36:59उन्हें 6 साल की सजा सुने जाति है

7:37:01कुछ समय बाद खिलाफत इशू भी अपनी

7:37:04साइनिफिकेंस को देता है और इरेलीवेंट बन

7:37:07जाता है क्योंकि 1924 में तुर्की में एक

7:37:10नेशनल रिवॉल्यूशन होता है और वहां मोना की

7:37:13या खिलाफत को अबॉलिश कर दिया जाता है इसके

7:37:16बाद इंडिया में भी खिलाफत मूवमेंट डिड डॉ

7:37:19हो जाता है

7:37:24दोस्तों नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट अपने स्वराज

7:37:27के गोल को तो अचीव नहीं कर पता लेकिन फिर

7:37:30भी ये आंदोलन एक फेलियर नहीं माना जा सकता

7:37:33क्योंकि इसने बहुत कुछ अचीव किया था इस

7:37:36आंदोलन के थ्रू नेशनलिस्ट सेंटीमेंट देश

7:37:39के कोनी कोनी तक पहुंच गए थे बड़ी संख्या

7:37:42में लोग इससे जुड़ने हैं और ये सही मैनो

7:37:45में एक मांस मूवमेंट बंता है आंदोलन में

7:37:48मिडिल क्लास के कंपैरिजन में बैलेंस और

7:37:50वर्कर्स का पार्टिसिपेशन ज्यादा राहत है

7:37:52इसके अलावा मद्रास को छोड़कर टाउनशिप

7:37:55इलेक्शन का बॉयकॉट भी काफी हद तक

7:37:57सक्सेसफुल राहत है पोलिंग एवरेज सिर्फ 5

7:38:01से 8% ही राहत है इकोनामिक बॉयकॉट आंदोलन

7:38:04का सबसे इंपॉर्टेंट फैक्टर था और ये बहुत

7:38:07कामयाब भी राहत है फॉरेन क्लॉथ की

7:38:09इंपॉर्टेंस की वैल्यू

7:38:111921 में 120 मिलियन रुपीज से घटकर 1921

7:38:1622 में सिर्फ

7:38:1850020 ही र जाति है

7:38:21नॉन को ऑपरेशन के साथ गांधीजी के कुछ सोशल

7:38:24मूवमेंट्स भी जुड़े हुए थे जैसे की

7:38:26टंप्रेंस या एंटी लेकर कैंपेन इनका भी

7:38:30व्यापक असर देखने को मिलता है पंजाब

7:38:32मद्रास बिहार और उड़ीसा में लेकर एक्सिस

7:38:36रिवेन्यू में साइनिफिकेंस गिरावट होती है

7:38:38सबसे जरूरी बात इस आंदोलन में भाग लेने के

7:38:41बाद लोगों का कॉन्फिडेंस बाढ़ जाता है और

7:38:44वो ब्रिटिश रूल का सामना करने के लिए

7:38:46तैयार होते हैं हम का सकते हैं की नॉन

7:38:49कोऑपरेशन मूवमेंट इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल

7:38:52का टर्निंग पॉइंट साबित होता है यहां से

7:38:54मास मूवमेंट की शुरुआत होती है यह आंदोलन

7:38:58आगे होने वाले आंदोलन की नीव तैयार करने

7:39:01का कम भी करता है

7:39:03रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट सेकंड फेस दोस्तों

7:39:06आज हम बात करने वाले हैं इंडिया में

7:39:08रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट के सेकंड फेस की

7:39:11फर्स्ट फेस को हम अपनी वीडियो में पहले ही

7:39:13डिस्कस कर चुके हैं आज हम देखेंगे की

7:39:16रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट के सेकंड फेस की

7:39:18शुरुआत कब और कैसे होती है और साथ ही

7:39:21फर्स्ट और सेकंड फेस के बीच की डिफरेंस को

7:39:24भी समझना की कोशिश करेंगे तो आई शुरू करते

7:39:27हैं इंट्रोडक्शन दोस्तों गांधीजी और सियार

7:39:31दास के खाने पर बहुत सी रिवॉल्यूशनरी

7:39:33ग्रुप नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट पर हिस्सा

7:39:36लेते हैं लेकिन जब अचानक से चोरी चौरा के

7:39:39बाद 1922 में यह आंदोलन वापस ले लिया जाता

7:39:42है तब यह लोग बहुत निरसा हो जाते हैं

7:39:45इंडियन नेशनल कांग्रेस की लीडरशिप

7:39:47स्ट्रेटजी और अहिंसा पर से इनका भरोसा ही

7:39:50उठ जाता है

7:39:51फिर यह लोग आजादी अपने के लिए किसी दूसरे

7:39:54विकल्प की तलाश करने लगता

7:39:57के पार्लियामेंट्री क में इंटरेस्ट था और

7:40:00ना ही नो चेंज के कंस्ट्रक्टिव केमोन में

7:40:03इसलिए यह फिर से रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी

7:40:06को रिवाइव करने का फैसला करते हैं इस

7:40:09दौरान रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के दो सेपरेट्स

7:40:11ब्रांड उभरते हैं जिसमें एक पंजाब अप

7:40:14बिहार के एरिया में एक्टिव था और दूसरा

7:40:17बंगाल में इनके बड़े में डिटेल में जानना

7:40:19जरूरी है शुरुआत करते हैं पंजाब अप बिहार

7:40:23वाले ग्रुप से इन पंजाब यूनाइटेड प्रोविंस

7:40:26बिहार दोस्तों इस रीजन में रिवॉल्यूशनरी

7:40:30एक्टिविटी को डोमिनेट करने वाले ग्रुप का

7:40:32नाम था हिंदुस्तान रिपब्लिकन संगठन

7:40:39अक्टूबर 1924 में अप के कानपुर जिला में

7:40:43हुई थी इसके पीछे रामप्रसाद बिस्मिल योगेश

7:40:47चंद्र चटर्जी और सचिंद्रनाथ सान्याल जैसे

7:40:50क्रांतिकारी का

7:40:53रिवॉल्यूशन के जारी कॉलोनियल गवर्नमेंट को

7:40:57ओवरथ्रो करना और उसकी जगह फेडरल रिपब्लिक

7:40:59ऑफ यूनाइटेड स्टेटस ऑफ इंडिया को

7:41:01एस्टेब्लिश करना था आर्म्ड रिवॉल्यूशन को

7:41:04ऑर्गेनाइज करने के लिए इन्हें फंड्स की

7:41:06जरूर थी इसका इंतजाम करने के लिए ये लोग

7:41:09ब्रिटिश ट्रेजरी को लूटने का फैसला करते

7:41:12हैं और 1925 में काकोरी रोबरी का प्लेन

7:41:15तैयार होता है

7:41:17काकोरी लखनऊ के पास एक छोटा सा स्टेशन था

7:41:20जहां 9 अगस्त 1925 को यह लोग आईटी डॉ

7:41:24ट्रेन पर ढाका डालते हैं और इसमें रखें

7:41:27रेलवे के ऑफिशल कैश को ल लेते हैं लेकिन

7:41:30इसके बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट इनके पीछे ग

7:41:32जाति है और बहुत सारे क्रांतिकारी को

7:41:34अरेस्ट कर लिया जाता है जिसमें से 17 को

7:41:37जय भेज दिया जाता है कर को जीवन भर के लिए

7:41:41देश निकाला की सजा दी जाति है और कर

7:41:44क्रांतिकारी को फैंसी भी दी जाति है यह कर

7:41:48क्रांतिकारी थे राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक

7:41:51अल्ला ज्ञान रोशन सिंह और राजेंद्र लहरी

7:41:54इस तरह

7:41:57होती है बहुत सारे क्रांतिकारी एक ही झटका

7:42:01में नेशनल स्ट्रगल से हटा दिए जाते हैं

7:42:03इससे बैग से उभरते के लिए युवक क्रांति

7:42:07ऑर्गेनाइज करने का फैसला लेते हैं सितंबर

7:42:111928 में दिल्ली के फिरोज शाह कोटा में

7:42:14इनकी मीटिंग होती है जहां चंद्रशेखर आजाद

7:42:17की लीडरशिप में हरि का नाम बदलकर आगे एस

7:42:21आर ए यानी की हिंदुस्तान सोशलिस्ट

7:42:24रिपब्लिकन संगठन कर दिया जाता है इस

7:42:27मीटिंग में भगत सिंह सुखदेव भगवती चरण

7:42:30बोहरा विजय कुमार सिंह जयदेव कपूर जैसे

7:42:33युवक क्रांतिकारी नेता भी शामिल थे पिछले

7:42:36सारे कलेक्टिव लीडरशिप से कम करने और

7:42:39सोशलिज्म को ऑफिशल गोल बनाने का फैसला

7:42:42लेती है इसके कुछ समय बाद ही अक्टूबर 1928

7:42:46में

7:42:46कमीशन के दौरान लाठी चार्ज में लाल लाजपत

7:42:51राय शाहिद हो जाते हैं लाल लाजपत राय की

7:42:54इस तरह मृत्यु होने से क्रांतिकारी में

7:42:56आक्रोश की भावना जग जाति है

7:42:58लाठीचार्ज का ऑर्डर ब्रिटिश

7:43:01जीपी स्कॉट ने दिया था इसलिए बदला लेने के

7:43:04लिए जीपी स्कॉट की हत्या का प्लेन बनाया

7:43:07जाता है इस प्लेन में भगत सिंह के साथ

7:43:10चंद्रशेखर आजाद सुखदेव और राजगुरु भी

7:43:13शामिल थे ये लोग जीपी स्कॉट को गली करने

7:43:16के लिए जाते हैं लेकिन इनके क्रांतिकारी

7:43:19साथी जय गोपाल स्कॉट की सही पहचान नहीं कर

7:43:22पाते जी वजह से एसपी साउंड की हत्या हो

7:43:25जाति है इसके बाद इनका अगला बड़ा एक्शन

7:43:28होता है 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल

7:43:32लेजिसलेटिव असेंबली में बम फेंकना इसके

7:43:35पीछे इनकी असेंबली में पास किया जा रहा

7:43:37ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल

7:43:41का विरोध करना था जो सिविल राइट्स के

7:43:44अगेंस्ट था

7:43:46और इसका मकसद भगत सिंह की शब्दों में बैरन

7:43:50को अपनी बात सुनाना था बम फेंकने के बाद

7:43:53भगत सिंह और बटुकेश्वर डेट वहां से भागने

7:43:57की कोशिश नहीं करते बल्कि खुद को अरेस्ट

7:44:00करते हैं खुद को अरेस्ट करना भी इनकी

7:44:02स्ट्रेटजी का हिस्सा था ये लोग ट्रायल

7:44:05कोर्ट को प्रोपेगेंडा फोरम की तरह उसे

7:44:07करना चाहते थे जिससे लोगों तक इनके

7:44:10मूवमेंट और आईडियोलॉजी की जानकारी पहुंच

7:44:12जाए और भी बहुत सारे क्रांतिकारी को पुलिस

7:44:15द्वारा अरेस्ट कर लिया जाता है जय की खराब

7:44:18कंडीशंस के विरोध में क्रांतिकारी द्वारा

7:44:21भूख हड़ताल भी की जाति है यह लोग डिमांड

7:44:24रखते हैं की इनके साथ पॉलीटिकल प्रिजनर्स

7:44:27जैसा बर्ट किया जाए भूख हड़ताल की 64वें

7:44:30दिन जतिन दास नाम की क्रांतिकारी शाहिद हो

7:44:33जाते हैं

7:44:34चंद्रशेखर आजाद भी जय से बाहर थे और

7:44:37दिसंबर 1929 में दिल्ली के पास वायसराय

7:44:41लोड अर्बन की ट्रेन को बम से उड़ने की

7:44:43कोशिश में भी शामिल थे 2 साल तक

7:44:46ब्रिटिशर्स की नाक में दम करने के बाद

7:44:48फरवरी 1931 में एक उन्हें के साथ ही

7:44:51उन्हें धोखा दे देते हैं और इलाहाबाद के

7:44:54पार्क में पुलिस एनकाउंटर के दौरान आजाद

7:44:57शाहिद हो जाते हैं

7:44:59ब्रिटिश सरकार भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु

7:45:03पर लाहौर कंस्पायरेसी कैसे यानी की

7:45:05साउंड्स मर्डर कैसे भी चलती है इसमें

7:45:08इन्हें फैंसी की सजा सुने जाति है इस तरह

7:45:1123 मार्च 1931 को भगत सिंह सुखदेव और

7:45:16राजगुरु फैंसी के फंडे को हंसते-हंसते गले

7:45:19लगा लेते हैं इनका यह बलिदान आज भी इंडियन

7:45:23के लिए इंस्पिरेशन का कम करता है

7:45:26दोस्तों यह तो बात हुई पंजाब अप बिहार के

7:45:29रीजन में एक्टिव रिवॉल्यूशनरी ग्रुप की

7:45:37दोस्तों बंगाल में सबसे फेमस रिवॉल्यूशनरी

7:45:40ग्रुप चित्तागोंग ग्रुप था जो सूर्य सेन

7:45:43की लीडरशिप में कम कर रहा था सूर्य सीन भी

7:45:46नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में पार्टिसिपेट कर

7:45:48चुके थे और चित्तागोंग के नेशनल स्कूल मी

7:45:51टीचर थे इसलिए इन्हें प्यार से मास्टर

7:45:54डाबी कहा जाता था रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी

7:45:57की वजह से 1926 से 1928 तक यह जय में भी

7:46:01रहे थे इसके बाद यह कांग्रेस में कम करना

7:46:05जारी रखते हैं 1929 में सूर्य सीन

7:46:08चित्तागोंग जिला कांग्रेस कमेटी के

7:46:10सेक्रेटरी भी थे सूर्य सेन अनंत सिंह गणेश

7:46:14घुस और लोकनाथ बाल जैसे अपने साथियों के

7:46:17साथ मिलकर एक आम रिबेलीयन ऑर्गेनाइजर करने

7:46:20का फैसला करते हैं इनका प्लेन चित्तागोंग

7:46:23के दो मीन अमरीश पर कब्जा करना होता है

7:46:25जहां से यह आम चीज करके रिवॉल्यूशनरीज तक

7:46:29पहुंच सकें

7:46:30प्लेन को एग्जीक्यूट करने के लिए सूर्य से

7:46:32इंडियन रिपब्लिकन आर्मी चित्तागोंग ब्रांच

7:46:35की फॉर्मेशन करते हैं 18 अप्रैल 1930 को

7:46:39प्लेन एक्शन में लाया जाता है अपने

7:46:42साथियों के साथ सीन चित्तागोंग की पुलिस

7:46:44अमरी पर रीड डालते हैं एक दूसरा ग्रुप

7:46:47असिलिअरी फोर्सेस की अमीरी को रीड करता है

7:46:49रीड के दौरान इन्हें आर्म्स तो मिल जाते

7:46:52हैं लेकिन एम्युनिशन लॉकेट करने में यह

7:46:55फूल हो जाते हैं हालांकि यह टेलीफोन

7:46:57टेलीग्राफ और रेलवे लाइन को डिस्ट्रॉय

7:47:00करने में जरूर कामयाब होते हैं सूर्य सेन

7:47:02पुलिस अमरी के प्रेमिसेस में इंडियन फ्लैग

7:47:05होइस्ट करते हैं और यहां प्रोविंशियल

7:47:07रिवॉल्यूशनरी गवर्नमेंट की प्रोक्लेमेशन

7:47:09करते हैं इसके बाद यह लोग जलालाबाद हिल्स

7:47:13की तरफ भाग जाते हैं 22 अप्रैल को यहां

7:47:16पुलिस फोर्स पहुंच जाति है और इनके बीच गण

7:47:19बैटल शुरू हो जाता है जिसमें 12

7:47:21क्रांतिकारी शाहिद हो जाते हैं और पुलिस

7:47:23के लगभग 80 जवान मारे जाते हैं बाकी

7:47:26क्रांतिकारी के साथ सूर्य सीन यहां से भाग

7:47:29निकलते हैं

7:47:31इसके बाद सूर्यसेन अलग-अलग जगह छुपकर रहते

7:47:34हैं गवर्नमेंट की प्रॉपर्टी पर रेट डालने

7:47:36का सिलसिला भी जारी राहत है लेकिन फरवरी

7:47:391933 में इनके साथ ही नेत्र सीन इन्हें

7:47:43धोखा दे देते हैं जब सूर्य सन इनके घर में

7:47:45छुपी हुए थे तब ये ब्रिटिश को खबर कर देते

7:47:48हैं और सूर्य से इनको अरेस्ट कर लिया जाता

7:47:51है सूर्य सेन पर पुलिस द्वारा जय में बहुत

7:47:54टॉर्चर किया जाते हैं और 12 जनवरी 1934 को

7:47:58इन्हें फैंसी दे दी जाति है

7:48:00इनकी आगे उसे समय मंत्र 39 साल थी इनके

7:48:04बाकी क्रांतिकारी साथी भी या तो भूली से

7:48:07एनकाउंटर में मारे जाते हैं या अरेस्ट कर

7:48:10लिए जाते हैं दोस्तों यह तो बात हुई सेकंड

7:48:13फेस की कुछ इंपॉर्टेंट रिवॉल्यूशनरी ग्रुप

7:48:16और उनकी एक्टिविटीज की

7:48:19सेकंड फैज में रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट कैसे

7:48:22फर्स्ट फेस अलग था

7:48:24डिफरेंस बिटवीन फर्स्ट और सेकंड फैज ऑफ

7:48:28रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट

7:48:29दोस्तों रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट की बेसिक

7:48:32आईडियोलॉजी तो दोनों ही फेस में से थी यही

7:48:35की आर्म्ड रिवॉल्यूशन के जारी इंडिया से

7:48:38ब्रिटिश रूल को खत्म करना है लेकिन इसके

7:48:41अलावा दोनों फेस में कुछ डिफरेंस भी देखने

7:48:44को मिलते हैं आई एक-एक करके इनके बड़े में

7:48:47जानते हैं सबसे पहले डिफरेंस था

7:48:49इंडिविजुअल एक्शन की जगह ग्रुप या

7:48:52कलेक्टिव एक्शन पर ज्यादा एंपहसिस इसीलिए

7:48:55सेकंड फेस में हमें एचएसआरआरई और इंडियन

7:48:58रिपब्लिक के नाम ही जैसी ऑर्गेनाइजेशन

7:48:59देखने को मिलती है इसके अलावा फर्स्ट फैज

7:49:03में जहां सीक्रेट सोसाइटी ज्यादा देखने को

7:49:05मिलती हैं वहीं सेकंड फैज में क्रांतिकारी

7:49:08ओपन मूवमेंट की तरफ ज्यादा नजर आते हैं

7:49:11दूसरा डिफरेंस था वूमेन का पार्टिसिपेशन

7:49:14सेकंड फेस की रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज में

7:49:17बड़े स्केल पर वूमेन का पार्टिसिपेशन

7:49:19देखने को मिलता है जिसमें सूर्य सीन ग्रुप

7:49:22की प्रीतीलता वाडेकर और कल्पना डेट हर की

7:49:26दुर्गा भाभी जैसे नाम शामिल है इनके अलावा

7:49:29कोमिला की जिला मजिस्ट्रेट को गली करने

7:49:31वाली दो स्कूल गर्ल शांति घोष और सुनीति

7:49:35चौधरी और फरवरी 1932 में कन्वोकेशन

7:49:38सेरेमनी के दौरान गवर्नर पर फायर करने

7:49:41वाली बिना दास की बहादुर के किस भी याद

7:49:43किया जाते हैं इसके अलावा दोस्तों फर्स्ट

7:49:46फेस के दौरान हिंदू रिलिजियस सिटी की तरफ

7:49:49एक ट्रेड देखने को मिलता है जैसे की

7:49:52क्रांतिकारी देवी की प्रतिज्ञा जैसी कुछ

7:49:55रसों को फॉलो करते थे लेकिन सेकंड फैज में

7:49:57ऐसा देखने को नहीं मिलता यहां भगत सिंह

7:50:00खासकर क्रांतिकारी आंदोलन में

7:50:02सेक्युलरिज्म को प्रमोट करते हैं जिसकी

7:50:05वजह से इस फेस में मुस्लिम का

7:50:07पार्टिसिपेशन भी बढ़ता दिखता है उदाहरण के

7:50:10तोर पर अशफाक अल ला खान सूर्य सेन ग्रुप

7:50:12के अमीर अहमद तुलुमिया आदि अपना योगदान

7:50:15देते दिखते हैं दोस्तों फर्स्ट फेस और

7:50:18सेकंड फैज में सबसे बड़ा अंतर जो देखने को

7:50:20मिलता है वह

7:50:25राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कोई प्रॉपर

7:50:27विजन क्रांतिकारी के पास नहीं था जबकि

7:50:30क्रांतिकारी इसीलिए कर काफी सजग दिखते हैं

7:50:33वो इंडिया में एक सोशलिस्ट और रिपब्लिक

7:50:36सिस्टम एस्टेब्लिश करना चाहते थे

7:50:40कंक्लुजन

7:50:42दोस्तों क्रांतिकारी के मैथर्ड देश को

7:50:45आजादी दिलाने में कितने कारगर साबित होते

7:50:48हैं इस बात का जवाब देना थोड़ा कठिन हो

7:50:50सकता है लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं

7:50:53की इनके योगदान ने आजादी की लड़ाई को और

7:50:56मजबूत बनाया गांधी जी और कांग्रेस भले ही

7:51:00इनके तरीके से सहमत नहीं थे लेकिन वो भी

7:51:02इनके देश प्रेम का सम्मान जरूर करते थे

7:51:05भगत सिंह के पैट्रियोटिज्म की सराहन करते

7:51:08हुए गांधी जी भी कहते हैं भगत सिंह की

7:51:11बहादुर और बलिदान के आगे हम अपना सर झुकते

7:51:14हैं क्रांतिकारी आंदोलन ने एन सिर्फ

7:51:17अंग्रेजी हुकूमत की नींद उदा दी थी बल्कि

7:51:20देशवासियों के दिल में आजादी की ज्वाला

7:51:23जागने का कम भी किया था इसीलिए आज भी इनके

7:51:27बलिदान को याद करके हम गौरवान्वित महसूस

7:51:30करते हैं

7:51:31इवेंट्स बिटवीन नॉन कोऑपरेशन और सिविल

7:51:34डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

7:51:36दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने

7:51:39खिलाफत और नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को डिस्कस

7:51:41किया था यह भी जाना था की 1922 में चोरी

7:51:46चौरा की घटना के बाद इस आंदोलन को

7:51:48ऑफीशियली और कर दिया गया था लेकिन आंदोलन

7:51:50खत्म होने के बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस

7:51:52की क्या एक्टिविटीज रहती हैं फ्रीडम

7:51:55स्ट्रगल को यहां से आगे ले जान के लिए

7:51:57क्या स्ट्रेटजी अडॉप्ट की जाति है आज हम

7:52:00इन सभी सवालों के जवाब जन की कोशिश करेंगे

7:52:09दोस्तों नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट फरवरी 1922

7:52:13में खत्म हो जाता है और मार्च 1922 में

7:52:16गांधीजी को अरेस्ट करके छह साल के लिए जय

7:52:20भेज दिया जाता है इसके बाद कांग्रेस में

7:52:22एक डिबेट शुरू हो जाति है

7:52:33की गांधीजी के कंस्ट्रक्टिव प्रोग्राम को

7:52:36ही कंटिन्यू किया जाए

7:52:46एक्टिविटीज शामिल थी

7:52:49इस एक्शन को नो चेंज ग्रुप बोलते हैं इसको

7:52:52लीड कर रहे थे वल्लभ भाई पटेल राजेंद्र

7:52:55प्रसाद और सी राजगोपालाचारी और दूसरा

7:52:58फक्शन चाहता था की लेजिसलेटिव काउंसिल का

7:53:01बॉयकॉट छोड़कर इलेक्शंस में पार्टिसिपेट

7:53:04किया जाए इस ग्रुप को प्रोचेंजेज का नाम

7:53:06दिया जाता है इसके लीडर्स सी आर दास और

7:53:09मोतीलाल नेहरू थे इनका मानना था की

7:53:12लेजिसलेटिव असेंबली का पार्ट बनकर उसको

7:53:15एक्सपोज करना चाहिए की कैसे वो सिर्फ

7:53:17दिखावे के लिए बनी है सी आर दास और

7:53:21मोतीलाल नेहरू अपना यह प्रपोज दिसंबर 1922

7:53:25में कांग्रेस के गया सेशन में रखते हैं इस

7:53:27प्रोग्राम को मेंडिंग और एंडिंग अकाउंट्स

7:53:30नाम दिया जाता है लेकिन नो चेंज ग्रुप की

7:53:33अपोजिशन की वजह से इनका प्रपोज हर जाता है

7:53:36इसके फीवर में सिर्फ 800 वोट्स पढ़ने हैं

7:53:40जबकि अगेंस्ट में

7:53:421748 इसके बाद दास और मोतीलाल नेहरू

7:53:46कांग्रेस ने अपनी रिस्पेक्टिव ऑफिसेज

7:53:48दूसरी डिजाइन कर देते हैं और फर्स्ट जनवरी

7:53:511923 को कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी के

7:53:55फॉर्मेशन करते हैं जिसे बाद में स्वराज

7:53:58पार्टी के नाम से जाना जाता है दास इस

7:54:01पार्टी के प्रेसिडेंट बनते हैं और नेहरू

7:54:03सेक्रेटरी इस तरह कांग्रेस का दो

7:54:06फ्रेक्शंस में टूटना

7:54:07197 की सूरत स्प्लिट की यादें ताज कर देता

7:54:10है लेकिन इस बार कांग्रेस को स्प्लिट होने

7:54:13से बच्चा लिया जाता है क्योंकि यहां दोनों

7:54:15ही फ्रेक्शंस को अच्छी तरह पता था की

7:54:18ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट उन्हें यूनाइटेड

7:54:20रहने की जरूर है नो चेंज के साथ ही

7:54:23स्वराजिस्ट भी समझते थे की मांस मूवमेंट

7:54:26के थ्रू ही उनकी डिमांड पुरी हो शक्ति हैं

7:54:29और इसके लिए उनका एक रहना बहुत जरूरी है

7:54:32इसके अलावा दोनों ग्रुप के लीडर्स गांधी

7:54:35जी की लीडरशिप को जरूरी मानते थे इसलिए

7:54:38सितंबर 1923 के दिल्ली कांग्रेस सेशन में

7:54:41काउंसलिंग के अगेंस्ट प्रोपेगेंडा को

7:54:44सस्पेंड कर दिया जाता है और कांग्रेस के

7:54:46मेंबर्स को इलेक्शन में पार्टिसिपेट करने

7:54:48की परमिशन मिल जाति है नवंबर 1923 में

7:54:52लेजिसलेटिव काउंसिल के इलेक्शंस होते हैं

7:54:55स्वराज्यस को इलेक्शन की तैयारी के लिए

7:54:57बहुत कम समय मिल पता है लेकिन फिर भी

7:55:00इलेक्शंस में यह लोग अच्छा प्रदर्शन करते

7:55:03हैं सेंट्रल लेजिसलेटिव असेंबली में 10001

7:55:07इलेक्ट्रिक सीट में 42 सिट्स पर इनकी जीत

7:55:10होती है इसके अलावा सेंट्रल प्रोविंस में

7:55:13भी इन्हें क्लियर मेजॉरिटी मिलती है बंगाल

7:55:16में यह लार्जेस्ट पार्टी बनकर उभरते हैं

7:55:18और मुंबई और अप में भी इनका रिजल्ट काफी

7:55:21अच्छा राहत है इलेक्शंस जितने के बाद

7:55:23स्वराज पार्टी की क्या जीवन से रहती हैं

7:55:26उनको भी जानते हैं

7:55:28अचीवमेंट्स का स्वराज पार्टी

7:55:31दोस्तों काउंसिल का मेंबर रहते हुए स्वराज

7:55:34पार्टी के फॉलोवरिंग अचीवमेंट रहे थे सबसे

7:55:37पहले अचीवमेंट था की अपने कोलिशन

7:55:39पार्टनर्स के साथ मिलकर कई मैकोन पर यह

7:55:42लोग गवर्नमेंट को आउट वोट करने में कामयाब

7:55:45रहते हैं काउंसिल के अंदर ये लोग सेल्फ

7:55:47गवर्नमेंट सिविल लिबर्टीज और

7:55:49इंडस्ट्रियलिज्म जैसे मुद्दों पर पावरफुल

7:55:52स्पीशीज के थ्रू अपनी बात रखते हैं

7:55:541925 में सेंट्रल लेजिसलेटिव के स्पीकर के

7:55:58रूप में विट्ठल भाई पटेल को इलेक्ट करने

7:56:01में कामयाब होते हैं

7:56:021928 में यह लोग पब्लिक सेफ्टी बिल को हर

7:56:06देते हैं यह बिल गवर्नमेंट कम्युनिस्ट

7:56:08एक्टिविटीज को कंट्रोल करने के लिए लेकर

7:56:10आई थी मोंटफोर्ट स्कीम के खोखलेपन को

7:56:13एक्सपोज करने का कम भी करते हैं और ऐसे

7:56:16समय में जब नेशनल मूवमेंट अपनी स्ट्रैंथ

7:56:19वापस अपने की कोशिश कर रहा था यह अपनी

7:56:21एक्टिविटीज से पॉलीटिकल वेक्यूम फूल करते

7:56:24हैं यह लोग दिखा देते हैं की काउंसिल को

7:56:27क्रिएटिविटी भी उसे किया जा सकता है

7:56:29दोस्तों इसी बीच फरवरी 1924 में हेल्थ

7:56:34ग्राउंड पर गांधीजी को जय से रहा कर दिया

7:56:36जाता है और नवंबर 1924 में गांधीजी और दास

7:56:41एक जॉइंट स्टेटमेंट साइन करते हैं इसमें

7:56:43कहा जाता है किस स्वराज पार्टी

7:56:46लेजिस्लेटर्स में कांग्रेस के भी हाफ पर

7:56:48और उसका इंटीग्रल बांट रहकर ही कम करेगी

7:56:51इसके बाद दिसंबर में कांग्रेस के बेलगाम

7:56:55सेशन में इस डिसीजन को इनडोर्स किया जाता

7:56:57है यह कांग्रेस का अकेला ऐसा सेशन था जिसे

7:57:00गांधी जी ने प्रेसीडे किया था लेकिन अब

7:57:03धीरे-धीरे स्वराज पार्टी भी कमजोर पढ़ने

7:57:06लगती है वह कैसे आई समझते हैं

7:57:09लिमिटेशंस और डिक्लिन ऑफ स्वराज पार्टी

7:57:12दोस्तों 16th जून 1925 को सियार दास की

7:57:17मृत्यु हो जाति है अपने फाउंडर लीडर को

7:57:20कोन के बाद स्वराज पार्टी कमजोर होने लगती

7:57:22है पार्टी के कुछ मेंबर्स पावर को रेसिस्ट

7:57:26नहीं कर पाते इस तरह पार्टी रैंक्स में

7:57:28करप्शन भी देखने को मिलता है कोलिशन

7:57:31पार्टनर्स के साथ भी मतभेद शुरू हो जाते

7:57:34हैं इसके साथ ही कम्युनल इंटरेस्ट भी

7:57:36पार्टी में इंटर कर जाते हैं स्वराज

7:57:38पार्टी रिस्पांस और नॉन रिस्पांस में

7:57:42डिवाइड हो जाति है

7:57:43रेस्पॉन्सिव में लाल लाजपत राय मदन मोहन

7:57:46मालवीय और एनसी केलकर जैसे लीड ए जाते थे

7:57:49यह लोग चाहते थे की गवर्मेंट के साथ

7:57:52कॉर्पोरेट किया जाए और जहां भी संभव हो

7:57:55ऑफिस हॉल किया जाए इसके अलावा यह लोग सो

7:57:59कोल्ड हिंदू इंटरेस्ट को भी प्रोटेस्ट

7:58:01करना चाहते थे इस तरह स्वराज पार्टी का

7:58:04डिवीजन शुरू हो जाता है

7:58:06और मैं लीडरशिप मार्च 1926 में

7:58:09लेजिसलेच्योर से खुद को वीडियो कर लेती है

7:58:12जबकि स्वराजित का एक क्षेत्र

7:58:161926 के इलेक्शन में खड़ा होता है लेकिन

7:58:19इनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं राहत सेंटर

7:58:22में ये 40 सिट्स जीत लेते हैं लेकिन अप

7:58:25सेंट्रल प्रोविंस और पंजाब में बुरी तरह

7:58:28हर जाते हैं

7:58:291930 में लाहौर कांग्रेस रेजोल्यूशन के

7:58:32बाद स्वराज फाइनली लेजिसलेच्योर से क आउट

7:58:36करते हैं इस तरह काउंसलिंग का यह पहले

7:58:39एक्सपेरिमेंट 10 साल तक चला है यह आईएमसी

7:58:42और उनके मेंबर्स को बड़ी सिख देकर जाता है

7:58:44इस बीच नो चेंज की क्या एक्टिविटीज रहती

7:58:48हैं आई यह भी जानते हैं

7:58:50कंस्ट्रक्टिव क बाय नो चेंज

7:58:54दोस्तों जी समय स्वराज्यस्त काउंसिल में

7:58:57अपनी पीछे से ब्रिटिश रूल को एक्सपोज करने

7:59:00में लगे थे उसे समय नो चेंज अपने

7:59:03कंस्ट्रक्टिव क से मैसेज के साथ कनेक्शन

7:59:06बना रहे थे यह लोग अलग-अलग जगह आश्रम की

7:59:09स्थापना करते हैं जहां खड़ी और चरखा को

7:59:12प्रमोट किया जाता है इसके साथ ही नेशनल

7:59:15स्कूल और कॉलेज भी सेटअप करते हैं जहां

7:59:18स्टूडेंट को नॉन कॉलोनियल आईडियोलॉजिकल

7:59:20फ्रेमवर्क में ट्रेन किया जाता है इसके

7:59:23अलावा हिंदू-मुस्लिम यूनिटी और

7:59:25अनटचेबिलिटी के रिमूवल के प्रयास भी इनके

7:59:28द्वारा किया जाते हैं फॉरेन क्लॉथ और लिकर

7:59:32का बॉयकॉट भी ऑर्गेनाइज्ड करते हैं फ्लड

7:59:34की टाइम लोगों तक मदद पहचाने का कम भी

7:59:37करते हैं इस तरह कंस्ट्रक्टिव वर्कर्स आने

7:59:40वाले सिविल डिसऑबेडिएंस के लिए एक्टिव

7:59:42ऑर्गेनाइजर का कम करते हैं दोस्तों इस तरह

7:59:46नेशनल मूवमेंट के पास

7:59:48और नो चेंज अपने अपनी तरीके से एक्टिव

7:59:52रहने की कोशिश करते हैं

7:59:54जल्दी ही दोनों ग्रुप के फिर एक साथ आने

7:59:57का मौका भी ए जाता है और यह मौका आता है

8:00:00साइमन कमीशन के रूप में आई समझते हैं

8:00:03साइमन कमीशन और इस मौके को भी अराइवल ऑफ

8:00:07साइमन कमीशन और इंडियन रिस्पांस दोस्तों

8:00:101990 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में

8:00:13प्रोविजन था की गवर्नेंस स्क्रीन की

8:00:16प्रोग्रेस को चेक करने के लिए और नए

8:00:18स्टेप्स का सुझाव देने के लिए 10 साल बाद

8:00:21एक कमीशन अप्वॉइंट की जाएगी इस प्रोविजन

8:00:24के तहत नवंबर 1927 को यानी शेड्यूल से 2

8:00:28साल पहले ही ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडियन

8:00:30स्टेट्यूटरी कमीशन सेटअप करती है यह एक जो

8:00:33व्हाइट सेवन मेंबर कमीशन थी जिसके अध्यक्ष

8:00:37थे इसलिए इसे पॉपुलर साइमन कमीशन कहा जाता

8:00:40है कमीशन को सुझाव देना था की क्या इंडिया

8:00:43फादर कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स के लिए

8:00:45तैयार है और अगर हां तो यह रिफॉर्म्स क्या

8:00:48हनी चाहिए

8:00:49इंडियन लीडर्स इस बात से बहुत नाराज होते

8:00:52हैं की साइमन कमीशन में एक भी इंडियन

8:00:55मेंबर नहीं था और फॉरेनर्स डिसाइड करेंगे

8:00:58की इंडिया सेल्फ गवर्नमेंट के लिए फिट है

8:01:01या नहीं इसे सेल्फ डिटरमिनेशन प्रिंसिपल

8:01:04का वायलेशन समझा जाता है और इंडियन की

8:01:07सेल्फ रिस्पेक्ट को जानबूझकर इंसल्ट करने

8:01:10का एक तरीका कांग्रेस दिसंबर 1927 के

8:01:14मद्रास सेशन में कमीशन को हर स्टेज और हर

8:01:17फॉर्म में बॉयकॉट करने का डिसीजन लेती है

8:01:19कांग्रेस के इस डिसीजन का सपोर्ट हिंदू

8:01:22महासभा के लिबरल्स मुस्लिम लीग का

8:01:25मेजॉरिटी करता है लेकिन पंजाब की यूनियन

8:01:28पार्टी और साउथ की जस्टिस पार्टी इस

8:01:30बॉयकॉट को सपोर्ट नहीं करती थर्ड फरवरी

8:01:341928 को कमीशन मुंबई में लैंड करती है उसे

8:01:38दिन पूरे देश में हड़ताल और मांस

8:01:40ऑर्गेनाइज की जाति हैं कमीशन का स्वागत हर

8:01:43जगह कल झंडा दिखाकर साइमन को बैक के नई से

8:01:47किया जाता है साइमन कमीशन के अगेंस्ट

8:01:49टेस्ट में यूथ लीडर्स एक्टिव रोल निभाते

8:01:52हैं जगह यूथ लीग और कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज

8:01:56की जाति हैं नेहरू और सुभाष चंद्र बस

8:01:58युद्ध के लीडर्स बनकर उभरते हैं पूरे देश

8:02:01में प्रोटेस्ट का माहौल बन जाता है पुलिस

8:02:04प्रदर्शनकारी पर लाठी बरसाने लगती है

8:02:07अक्टूबर 1928 में पुलिस की लाठियां से लाल

8:02:11लाजपत राय की कंडीशन सीरियस हो जाति है और

8:02:1417th नवंबर 1928 को शेर पंजाब अपनी आखिरी

8:02:19सांस लेते हैं इसके बाद प्रदर्शन और भी

8:02:22उग्र होने लगता है दूसरी तरफ क्रांतिकारी

8:02:25संगठन भी एक्टिव हो जाते हैं इसी बीच

8:02:28सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पर इंडिया लॉर्ड बग इन

8:02:31हेड इंडियन लीडर्स को कॉन्स्टिट्यूशन

8:02:33ड्राफ्ट करने का चैलेंज दे देते हैं इनका

8:02:36मानना था की इंडियन कभी एक साथ आकर

8:02:39कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट नहीं कर सकते

8:02:41इंडिया के लीडर्स इनके चैलेंज को एक्सेप्ट

8:02:44कर लेते हैं और इसका जवाब कैसे दिया जाता

8:02:46है आई जानते हैं

8:02:48नेहरू रिपोर्ट दोस्तों लॉर्ड बुकिंग हेड

8:02:52के चैलेंज के जवाब में फरवरी 1928 में एक

8:02:56जो पार्टी कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति

8:02:58है और मोतीलाल नेहरू की अध्यक्ष

8:03:01कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट करने के लिए एक

8:03:04कमेटी अप्वॉइंट की जाति है तेज बहादुर

8:03:06सप्रू सुभाष चंद्र बस एस अन्य मंगल सिंह

8:03:10अली इमाम शोएब कुरैशी और ग्रे प्रधान

8:03:14कमेटी के मेंबर्स थे ये इंडियन द्वारा देश

8:03:17के लिए कांस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क तैयार

8:03:19करने की पहले कोशिश थी कमेटी अगस्त 1928

8:03:23तक अपनी रिपोर्ट फाइनल कर लेती है नेहरू

8:03:26रिपोर्ट की सभी रिकमेंडेशन एक मत से दी गई

8:03:30थी सिर्फ एक एस्पेक्ट को छोड़कर और वह यह

8:03:33था की मेजॉरिटी मेंबर्स तो कॉन्स्टिट्यूशन

8:03:35का बेसिस डोमिनियन स्टेटस चाहते थे लेकिन

8:03:38एक क्षेत्र कंप्लीट इंडिपेंडेंस को बेसिस

8:03:42बनाना चाहता था नेहरू रिपोर्ट की मेजर

8:03:44रिकमेंडेशन कुछ इस तरह से थी|

8:03:48डोमिनियन स्टेटस को इंडियन की डिजायरेबल

8:03:51फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट बताया जाता है

8:03:54सेपरेट इलेक्टोरेट्स की जगह जॉइंट

8:03:57इलेक्ट्रिक जिसमें सेंटर में मुस्लिम के

8:03:59लिए सिट्स रिजर्व करने का प्रोविजन था साथ

8:04:03ही ऐसी प्रोविंस में भी जहां मुस्लिम

8:04:05माइनॉरिटी में है

8:04:06लिंग्विस्टिक्स प्रोविंस बनाने का सुझाव

8:04:09भी शामिल था इसके अलावा 19 फंडामेंटल

8:04:11राइट्स जैसे की इक्वल राइट्स पर वूमेन

8:04:14यूनिवर्सल एडल्ट सफरेज और यूनियन फॉर्म

8:04:17करने का राइट भी नेहरू रिपोर्ट रेकमेंड

8:04:20करती है सेंटर और प्रोविंस में

8:04:23रिस्पांसिबल गवर्नमेंट का प्रोविजन

8:04:25मुस्लिम के कल्चरल और रिलिजियस इंटरेस्ट

8:04:27के फूल प्रोटेक्शन के साथ स्टेट का रिलिजन

8:04:31से पुरी तरह डिसोसिएशन भी इनकी रिकमेंडेशन

8:04:34का हिस्सा था दोस्तों नेहरू रिपोर्ट की

8:04:37रिकमेंडेशन से सभी पार्टी और ग्रुप

8:04:39सेटिस्फाई नहीं होते सबसे पहले तो कम्युनल

8:04:42रिप्रेजेंटेशन के सवाल पर मुस्लिम लीग और

8:04:45हिंदू महासभा रिपोर्ट के अगेंस्ट चली जाति

8:04:48हैं

8:04:48यहां नेहरू रिपोर्ट के अगेंस्ट जिन्ना

8:04:51अपने 14 प्वाइंट्स रखते हैं इसके अलावा

8:04:54कांग्रेस का यंगर क्षेत्र भी नेहरू

8:04:56रिपोर्ट से नाराज होता है इनके लिए

8:04:59रिपोर्ट में डोमिनियन स्टेटस का आइडिया एक

8:05:01कम पीछे ले जान जैसा था

8:05:041928 में कांग्रेस के कोलकाता सेशन में

8:05:07नेहरू रिपोर्ट को अप्रूव किया जाता है

8:05:09लेकिन जवाहर लाल नेहरू और बस कांग्रेस के

8:05:13डोमिनियन स्टेटस के गोल को रिजेक्ट कर

8:05:15देते हैं और मिलकर इंडिपेंडेंस पर इंडिया

8:05:18लीग सेटअप करते हैं

8:05:20कंक्लुजन दोस्तों एक तरफ यंगर क्षेत्र

8:05:24पूर्ण स्वराज यानी की कंप्लीट इंडिपेंडेंस

8:05:27को कांग्रेस का गोल बनाना चाहता था दूसरी

8:05:30तरफ ओल्ड लीडर्स जैसे की गांधीजी और

8:05:33मोतीलाल नेहरू का मानना था की डोमिनियन

8:05:35स्टेटस की डिमांड को इतनी जल्दी खत्म ना

8:05:38किया जाए क्योंकि इसके ऊपर भी कंसेंसस

8:05:42बड़ी मुश्किल से कई सालों में जाकर बना था

8:05:44इसलिए यह लोग सुझाव देते हैं की गवर्नमेंट

8:05:48को डोमिनियन स्टेटस की डिमांड एक्सेप्ट

8:05:50करने के लिए 2 साल का समय दिया जाए लेकिन

8:05:54यंगर एलिमेंट्स के प्रेशर बनाने पर इस समय

8:05:56को 1 साल कर दिया जाता है और डिसाइड होता

8:05:59है की अगर साल के और तक गवर्नमेंट

8:06:02डोमिनियन स्टेटस के साथ कॉन्स्टिट्यूशन को

8:06:04एक्सेप्ट नहीं करती तो कांग्रेस पूर्ण

8:06:07स्वराज की डिमांड के साथ सिविल

8:06:09डिसऑबेडिएंस मूवमेंट लॉन्च कर देगी अपनी

8:06:12अगली वीडियो में हम देखेंगे की गवर्नमेंट

8:06:14का क्या रिस्पांस राहत है और फिर कांग्रेस

8:06:17किस तरह से सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

8:06:19शुरू करती है

8:06:2331

8:06:30दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने देखा

8:06:32था की कैसे 1928 में कांग्रेस ब्रिटिश

8:06:36गवर्नमेंट को एक साल का समय देती है

8:06:38डोमिनियन स्टेटस पर बेस्ड कॉन्स्टिट्यूशन

8:06:41को एक्सेप्ट करने के लिए आज हम देखेंगे की

8:06:44ब्रिटिश गवर्मेंट इस पर क्या रेस्पॉन्ड

8:06:46करती है और इंटर्न कांग्रेस का क्या

8:06:49रिएक्शन राहत है तो आई शुरू करते हैं

8:06:52इंट्रोडक्शन

8:06:56दोस्तों मैं 1929 में ब्रिटेन में राम से

8:07:00मैकडॉनल्ड की लीडरशिप में लेबर पार्टी की

8:07:02सरकार बंटी है और वायसराय लॉर्ड अरविन को

8:07:05कंसंट्रेशन के लिए लंदन बुलाया जाता है

8:07:07इसके बाद 31 अक्टूबर को वायसराय अनाउंस

8:07:11करते हैं की ब्रिटिश सरकार के अनुसार

8:07:19स्टेटस की तरफ ले जाना है और साथ ही साइमन

8:07:23कमीशन के रिपोर्ट सबमिट होते ही राउंड

8:07:25टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर करने का

8:07:27प्रॉमिस भी करते हैं

8:07:29[संगीत]

8:07:33और दिल्ली मेनिफेस्टो इशू किया जाता है

8:07:36इसमें यह लोग डिमांड करते हैं की ब्रिटिश

8:07:39गवर्नमेंट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का परपज

8:07:41क्लीयरली बता दे और परपज यह नहीं होना

8:07:44चाहिए की डोमिनियन स्टेटस कब तक दिया

8:07:46जाएगा बल्कि उसकी इंप्लीमेंटेशन की स्कीम

8:07:49फॉर्मीदते करना होना चाहिए

8:07:51है इसके जवाब में फाइनली 23rd दिसंबर को

8:07:54लॉर्ड अर्बन गांधीजी और बाकी लीडर्स को

8:07:57बताते हैं की वो ऐसा कोई एश्योरेंस नहीं

8:08:00दे सकते इस तरह नेगोशिएशंस की स्टेज खत्म

8:08:03हो जाति है और कन्फर्टेशनल की तैयारी शुरू

8:08:06होने लगती है

8:08:08लाहौर सेशन और गोल्फ कंप्लीट इंडिपेंडेंस

8:08:13दोस्तों 1929 का कांग्रेस सेशन लाहौर में

8:08:17ऑर्गेनाइजर किया जाता है इसके प्रेसिडेंट

8:08:19जवाहरलाल नेहरू बनते हैं जो दिखाई हैं की

8:08:22कांग्रेस का ट्रांजिशन यंगर जेनरेशन की

8:08:25तरफ हो रहा था और यहां पर ही पूर्ण स्वराज

8:08:28को कांग्रेस का गोल्ड डिक्लेअर कर दिया

8:08:30जाता है इसके साथ ही 31 दिसंबर 1929 को

8:08:35आदि रात के समय रवि नदी के किनारे पर

8:08:38तिरंगा भी फहराया जाता है और आने वाली

8:08:4126th जनवरी को पूर्ण स्वराज दे के रूप में

8:08:44मनाने की घोषणा की जाति है

8:08:4726th जनवरी 1930 को पूरे देश में पब्लिक

8:08:51मीटिंग्स ऑर्गेनाइज की जाति हैं जिसमें

8:08:54इंडिपेंडेंस प्लीज को रीड और फर्म किया

8:08:57जाता है लाहौर में कांग्रेस वर्किंग कमेटी

8:09:00को सिविल डिसऑबेडिएंस का प्रोग्राम लॉन्च

8:09:02करने के लिए भी ऑथराइज कर दिया गया था साथ

8:09:06ही लेजिसलेच्योर के सभी मेंबर्स को अपनी

8:09:08सीट से रिजाइन करने के लिए भी कहा गया था

8:09:11जैसा की हमने अपनी पिछली वीडियो में बताया

8:09:13था स्वराज पार्टी के मेंबर्स इसके बाद

8:09:16रिजाइन कर देते हैं लाहौर कांग्रेस का

8:09:19मैंडेट आगे ले जाते हुए गांधीजी अपनी 11

8:09:22डिमांड गवर्नमेंट के सामने रख देते हैं और

8:09:25इन डिमांड्स को एक्सेप्ट या रिजेक्ट करने

8:09:27के लिए 31 जनवरी 1930 को अल्टीमेटम देते

8:09:31हैं

8:09:42टोटल प्रोहिबिशन इंट्रोड्यूस किया

8:09:47थर्ड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्मेंट

8:09:50सीआईडी में रिफॉर्म्स किया जैन फोर्थ

8:09:53आर्म्स एक्ट को बदला जाए फिफ्थ पॉलीटिकल

8:09:57बिजनेस को रिलीज किया

8:10:04लिंग एक्सचेंज रेशों को कम किया जाए जिससे

8:10:07एक्सपोर्ट्स में इंडिया को फायदा हो एट

8:10:10टेक्सटाइल प्रोटेक्शन इंट्रोड्यूस किया

8:10:12जाए नाइंथ कोस्टल शिपिंग इंडियन के लिए

8:10:15रिजर्व हो 10th लैंड रिवेन्यू में भी 50%

8:10:19की गिरावट की जाए और 11th आर्मी और सिविल

8:10:24सर्विसेज पर खर्च को 50% तक कम किया जाए

8:10:28है लेकिन गवर्नमेंट की तरफ से कोई पॉजिटिव

8:10:31रिस्पांस ना आता देख मिड फरवरी 1930 में

8:10:34कांग्रेस की वर्किंग कमेटी साबरमती आश्रम

8:10:37में मीटिंग करती है और गांधी जी को फूल

8:10:40पावर्स दे देती है की वो अपनी पसंद की जगह

8:10:42और समय पर सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट की

8:10:46शुरुआत करें तो देखते हैं गांधी जी कब और

8:10:49कहां से आंदोलन की शुरुआत करते हैं दांडी

8:10:52मार्च और साल्ट सत्याग्रह दोस्तों फरवरी

8:10:55एंड तक गांधीजी फैसला ले चुके होते हैं की

8:10:59वो नमक के मुद्दे पर आंदोलन की शुरुआत

8:11:01करेंगे नमक या सॉर्ट को अपने आंदोलन की

8:11:05थीम बनाने का यह फैसला बहुत सोच समझकर

8:11:08लिया गया था नमो की कैसी चीज है जिसकी

8:11:11जरूर सबको है और इस पर टैक्स गरीब लोगों

8:11:14के लिए बहुत भारी पड़ता है साथ ही नमक

8:11:17बनाने पर सरकार की मोनोपोली होने से लोगों

8:11:20से सेल्फ एंप्लॉयमेंट का एक जरिया भी छन

8:11:22लिया गया था

8:11:24है इसलिए सेकंड मार्च 1930 को गांधीजी

8:11:27अपने प्लेन की जानकारी वायसराय को देते

8:11:29हैं इस प्लेन के अकॉर्डिंग गांधीजी

8:11:32साबरमती आश्रम से 78 मेंबर्स के साथ 240

8:11:36माइल्स की यात्रा करते हुए दांडी के कस पर

8:11:39पहुंचेंगे और वहां पहुंचकर बीच से नमक

8:11:42कलेक्ट कर साल्ट डॉ को वायलेट करेंगे इसके

8:11:45साथ ही मार्च के बाद फ्यूचर एक्शन के लिए

8:11:47डायरेक्शन भी गांधीजी द्वारा दी जाति हैं

8:11:50जो इस तरह से थी जहां भी पॉसिबल हो नमक

8:11:54कानून को टोडा जाए विदेशी कपड़े और शराब

8:11:57की दुकानों की पिक्टिंग की जा शक्ति है

8:12:00लॉयर्स अपनी प्रैक्टिस छोड़ सकते हैं और

8:12:02गवर्नमेंट सर्वेंट अपनी पोस्ट से रिजाइन

8:12:05कर सकते हैं सत्य और अहिंसा का अधिकता के

8:12:08साथ पालनपुर करना होगा और गांधीजी के

8:12:10अरेस्ट होने के बाद लोकल लीडर्स को ओबी

8:12:13करना होगा

8:12:14यह ऐतिहासिक दांडी मार्च 12 मार्च को

8:12:17साबरमती आश्रम से शुरू होता है पूरे दांडी

8:12:21मार्च को लोकल और इंटरनेशनल न्यूज़ पेपर

8:12:23द्वारा कर किया गया था हजारों की संख्या

8:12:26में लोग इस मार्च से जुड़ने जाते हैं और

8:12:29रास्ते में जगह-जगह गांधीजी लोगों को

8:12:32संबोधित भी करते हैं फाइनली सिक्स्थ

8:12:35अप्रैल को दांडी पहुंचकर गांधीजी नमक

8:12:38कानून तोड़ते हैं इस तरह सिविल

8:12:40डिसऑबेडिएंस मूवमेंट की शुरुआत हो जाति

8:12:42हैं

8:12:47स्प्रेड ऑफ डी सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

8:12:50दोस्तों दांडी में गांधीजी के द्वारा नमक

8:12:53कानून तोड़ते ही पूरे देश में जगह-जगह नमक

8:12:56कानून टूटना शुरू हो जाता है सी

8:12:59राजगोपालाचारी तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम

8:13:02तक मार्च ऑर्गेनाइजर करते हैं और तंजौर

8:13:05कास्ट पर साल्ट डॉ ब्रेक करते हैं वही

8:13:08मालाबार में कांग्रेस लीडर के केलापन नमक

8:13:11कानून का उलझन करते हैं अप्रैल 1930 में

8:13:15नमक कानून तोड़ने के लिए नेहरू जी को

8:13:17अरेस्ट कर लिया जाता है इसके विरोध में

8:13:20मद्रास कोलकाता और कराची में प्रोटेस्ट

8:13:23ऑर्गेनाइज्ड की जाति हैं उड़ीसा में गोपाल

8:13:26बंधु चौधरी के नेतृत्व में बालेश्वर घटक

8:13:29और पुरी डिस्ट्रिक्ट की कोस्टल रीजंस में

8:13:32सॉर्ट सत्याग्रह ऑर्गेनाइजर किया जाता है

8:13:34इसी बीच गांधीजी अनाउंस करते हैं की वो

8:13:37वेस्ट कास्ट पर धरसाना साल्टवर्क्स पर रीड

8:13:40करने जा रहे हैं इसलिए उन्हें भी फोर्थ

8:13:43में 1930 को अरेस्ट कर लिया जाता है

8:13:48बॉम्बे दिल्ली कोलकाता और सोलापुर में मैं

8:13:52सिर्फ प्रोटेस्ट देखने को मिलते हैं

8:13:56कांग्रेस वर्किंग कमेटी डिफरेंट एक्शन

8:13:58प्लेन को सैंक्शन कर देती है जिससे और लोग

8:14:01जोड़ सकें वो कहते हैं की रेवत वाणी

8:14:04एरियाज में रिवेन्यू पे नहीं किया जाए और

8:14:06जमींदारी एरियाज में नो चौकीदारी टैक्स

8:14:09कैंपियन शुरू किया जाए इसी के साथ साथ

8:14:12सेंट्रल प्रोविंस में फॉरेस्ट लॉस कभी

8:14:15वायलेशन शुरू होगा

8:14:17दर्शन साल्टवर्क्स पर रेड का अनफिनिश

8:14:20टास्क 21st में 1930 को सरोजिनी नायडू

8:14:24इमाम साहिब और गांधी जी के बेटे मणिलाल

8:14:27पूरा करते हैं यहां एनिमेट और पीसफुल

8:14:30क्राउड पर पुलिस ब्रूटल लाठी चार्ज कर

8:14:33देती है इस दौरान दो लोग मारे जाते हैं और

8:14:36320 लोग घायल हो जाते हैं लेकिन इसके

8:14:39बावजूद सत्याग्रही अपनी तरफ से अहिंसा का

8:14:43मार्ग नहीं छोड़ते जैसा की सी ब्लू सी ने

8:14:46मार्गदर्शन किया था यूनाइटेड प्रोविंस में

8:14:49नो रिवेन्यू कैंपेन शुरू हो जाता है वही

8:14:52सेंट्रल प्रोविंस में लोग फॉरेस्ट लॉस का

8:14:55डिफाइन शुरू कर देते हैं इस तरह देश का

8:14:58लगभग हर हिस्सा आंदोलन में अपनी भागीदारी

8:15:00देने लगता है

8:15:02अब यह समझते हैं की आंदोलन के दौरान मांस

8:15:05पार्टिसिपेशन का एक्सेंट क्या राहत है

8:15:12दोस्तों समाज के लगभग हर वर्ग में इस

8:15:15आंदोलन में पार्टिसिपेट किया था एक-एक

8:15:18करके जानते हैं किसकी भागीदारी ज्यादा थी

8:15:20और किसकी कुछ कम सिविल डिसऑबेडिएंस

8:15:24मूवमेंट में वूमेन का पार्टिसिपेशन बड़े

8:15:26स्टार पर देखने को मिलता है दांडी मार्च

8:15:29के दौरान जगह-जगह हजारों की संख्या में

8:15:31वूमेन गांधीजी को सुनने के लिए आई है और

8:15:35आंदोलन शुरू हो जान पर पुरी तरह से उससे

8:15:38जुड़ जाति हैं यह लोग लेकर शॉप्स और

8:15:41विदेशी कपड़े बेचे वाली दुकानों के आगे

8:15:43धरना प्रदर्शन करती हैं वूमेन के साथ साथ

8:15:47स्टूडेंट और यूथ भी आंदोलन में बाढ़ चढ़कर

8:15:50हिस्सा लेते हैं सेंट्रल प्रोविंस

8:15:52महाराष्ट्र और कर्नाटक में ट्राईबल्स इस

8:15:55आंदोलन के एक्टिव पार्टिसिपेंट्स थे वहीं

8:15:58मुंबई कोलकाता मद्रास और सोलापुर आदि

8:16:01स्थान पर वर्कर्स का पार्टिसिपेशन बड़ी

8:16:03संख्या में हुआ था

8:16:05इसके साथ ही मरचेंट्स और ट्रेडर्स भी

8:16:07आंदोलन के दौरान काफी उत्साहित दिखते हैं

8:16:10ट्रेडर्स एसोसिएशंस और कमर्शियल बॉडीज

8:16:14बॉयकॉट को इंप्लीमेंट करने में एक्टिव रोल

8:16:16निभाते हैं खासकर पंजाब और तमिलनाडु में

8:16:19यूनाइटेड प्रोविंस बिहार और गुजरात से

8:16:22पैंस का पार्टिसिपेशन सबसे ज्यादा राहत है

8:16:26है अगर हम मुस्लिम की बात करें तो आंदोलन

8:16:29में मुस्लिम का पार्टिसिपेशन 1920 के नॉन

8:16:33कोऑपरेशन के जैसा नजर नहीं आता क्योंकि

8:16:35मुस्लिम लीडर्स ने आंदोलन से अलग रहने की

8:16:38अपील की थी साथ ही गवर्नमेंट भी कम्युनल

8:16:41डिस्टेंस को इनकरेज करने में एक्टिव थे

8:16:44लेकिन फिर भी कुछ एरियाज में ओवरव्हेलमिंग

8:16:47पार्टिसिपेशन देखने को मिलता है जैसे की

8:16:50नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में यहां

8:16:52गांधियन लीडर अब्दुल गफ्फार खान के

8:16:55नेतृत्व में मुस्लिम बढ़-चढ़कर आंदोलन में

8:16:58हिस्सा लेते हैं इसके साथ ही सेन हटा

8:17:01त्रिपुरा गैबांधा बघौरा और नोआखली में भी

8:17:05मिडिल क्लास मुस्लिम आंदोलन में भाग लेते

8:17:08हैं ढाका में भी मुस्लिम लीडर्स शॉपकीपर

8:17:12लोअर क्लास पीपल और अपर क्लास वूमेन

8:17:14आंदोलन में एक्टिव रहती हैं दिल्ली बिहार

8:17:17और लखनऊ में रहने वाली मुस्लिम वीविंग

8:17:19कम्युनिटी को भी आंदोलन से इफेक्टिवेली

8:17:22जोड़ा गया था

8:17:23इतने बड़े आंदोलन पर ब्रिटिश गवर्नमेंट का

8:17:26क्या रिस्पांस राहत है आई देखते हैं

8:17:30गवर्नमेंट रिस्पांस एफर्ट्स फुट रूल्स

8:17:33दोस्तों शुरुआत में तो ब्रिटिश गवर्नमेंट

8:17:36का एटीट्यूड राहत है क्योंकि वह कन्फ्यूजन

8:17:40में थे अगर वह आंदोलन को दबाने के लिए

8:17:42फोर्स का इस्तेमाल करते हैं तो कांग्रेस

8:17:44रिप्रेशन के नाम पर गवर्नमेंट को

8:17:47क्रिटिसाइज करेगी और अगर वो ऐसा नहीं करते

8:17:49तो कांग्रेस इसे अपनी जीत बताएगी दोनों ही

8:17:53कंडीशन में गवर्मेंट की पावर तो कम हनी ही

8:17:55थी गांधी जी को अरेस्ट करने का डिसीजन भी

8:17:59काफी लाल मेटल के बाद ही लिया गया था

8:18:01लेकिन जब एक बार गवर्नमेंट डिप्रेशन करना

8:18:04शुरू करती है तो अपनी पुरी ताकत जोंक देती

8:18:07है सिविल लिबर्टीज को बन कर दिया जाता है

8:18:10प्रेस पर पाबंदी लगा दी जाति है सिविल

8:18:12डिसऑबेडिएंस ऑर्गेनाइजेशंस को बन करने की

8:18:15पुरी आजादी प्रोविंशियल गवर्मेंट को दे दी

8:18:18जाति है इसके साथ ही आंदोलनकारी पर

8:18:21लाठीचार्ज और फायरिंग भी शुरू कर दी जाति

8:18:23है

8:18:30जय में दाल दिया जाता है

8:18:32गवर्नमेंट के रिप्रेशन के बाद आंदोलन कम

8:18:34होने की जगह और भी ज्यादा उग्र होने लगता

8:18:37है इसी बीच साइमन कमीशन की रिपोर्ट भी ए

8:18:40जाति है और जुलाई 1930 में लॉर्ड अर्बन

8:18:44राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर करने की

8:18:46घोषणा कर देते हैं इसके साथ ही सेंट्रल

8:18:48लेजिसलेच्योर के 40 मेंबर्स के सजेशन पर

8:18:51कांग्रेस के साथ शांति की कोशिश की जाति

8:18:54है इसके लिए तेज बहादुर सप्रू और श्री

8:18:57जयकार को मेडिएटर बनाया जाता है अगस्त में

8:19:00मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू को

8:19:03गांधीजी से मिलने के लिए एयर बड़ा जय ले

8:19:06जय जाता है लेकिन इस बातचीत का कोई नतीजा

8:19:09नहीं निकलता

8:19:11है की नवंबर में लंदन में होने वाली

8:19:14फर्स्ट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में कुछ

8:19:17क्षेत्र जरूर हिस्सा लेने वाले लेकिन

8:19:20कांग्रेस इसका हिस्सा नहीं होगी बिना

8:19:23कांग्रेस के राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस भी

8:19:24बेनतीजई रहती है वहां मौजूद लगभग हर

8:19:28डेलीगेट का यही कहना था की बिना कांग्रेस

8:19:30के कॉन्स्टिट्यूशन पर ऑपरेशन करना मीनिंग

8:19:33जैसी है अब ब्रिटिश गवर्नमेंट को समझ आता

8:19:36है की अगर उसे कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स

8:19:39के नाम पर सरवाइव करना है तो कांग्रेस को

8:19:42मानना जरूरी है इसलिए ब्रिटिश प्राइम

8:19:44मिनिस्टर फर्स्ट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के

8:19:47कंक्लुजन में कहते हैं की उन्हें उम्मीद

8:19:49है की सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में

8:19:51कांग्रेस जरूर हिस्सा लगी

8:19:53वायसराय 25th जनवरी को गांधी जी और

8:19:56कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी मेंबर्स की

8:19:59बिना शर्ट रिहाई अनाउंस कर देते हैं जिससे

8:20:02यह लोग फ्रिली और फीयरलेसली ब्रिटिश पीएम

8:20:06की स्टेटमेंट का जवाब दे सकें अब कांग्रेस

8:20:08का क्या जवाब रहने वाला था

8:20:12गांधी अर्बन पेट

8:20:16दोस्तों लगभग तीन हफ्ते के आपसी डिस्कशन

8:20:20और डेलिबरेशंस के बाद कांग्रेस वर्किंग

8:20:22कमेटी वायसराय के साथ बातचीत के लिए

8:20:25गांधीजी को ऑथराइज करती है

8:20:27गांधीजी और वायसराय लोड अर्बन के बीच

8:20:31अराउंड दो हफ्तों तक डिस्कशन होते हैं और

8:20:34फाइनली फिफ्थ मार्च 1931 को गांधी एवं

8:20:38एक्ट पर साइन होते हैं इस पेस्ट के अनुसार

8:20:41हिंसा एन करने वाले सभी पॉलीटिकल

8:20:44प्रिजनर्स को रहा करना था सभी तरह के फाइन

8:20:47जो अभी तक कलेक्ट नहीं किया गए थे उन्हें

8:20:50माफ करना था जब तक की हुई जमीन को वापस

8:20:54करना था साथ ही रिजाइन करने वाले

8:20:56गवर्नमेंट सर्वेंट को लीनियंट ट्रीटमेंट

8:20:58देना था कास्ट के किनारे वाले गांव में

8:21:02कंजप्शन के लिए सॉर्ट बनाने की मंजरी भी

8:21:04सरकार ने दे दी इसके बदले में कांग्रेस

8:21:07सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को रोकने के

8:21:10लिए एग्री होती है और साथ ही नेक्स्ट

8:21:13राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पार्टिसिपेट

8:21:15करने के लिए भी तैयार होती है दोस्तों इस

8:21:18तरह सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

8:21:31दोस्तों आंदोलन तो गांधी इर्विन पेस्ट से

8:21:35खत्म हो गया

8:21:37आंदोलन की सफलता ही थी की कांग्रेस पहले

8:21:40बार सरकार के साथ बराबरी पर आकर कोई

8:21:43समझौता कर रही थी आंदोलन के दौरान 90 हजार

8:21:47से ज्यादा लोग जय गए थे यह संख्या 9 को

8:21:50ऑपरेशन मूवमेंट की तुलना में तीन गनी थी

8:21:52ब्रिटेन से कपड़े का इंपोर्ट आधा हो गया

8:21:55था लेकर एक साइज और लैंड रिवेन्यू से होने

8:21:58वाली सरकार की आमदनी पर भी गहरा असर पड़ता

8:22:00है इंडियन नेशनलिज्म की आज समाज के हर

8:22:04वर्ग तक पहुंच जाति है इस तरह यह आंदोलन

8:22:07मैक्स को नेशनल मूवमेंट को एक्टिव

8:22:09पार्टिसिपेशन बनाने में नॉन कोऑपरेशन

8:22:12आंदोलन से भी ज्यादा सफल रहा था साथ ही इस

8:22:15आंदोलन के दौरान हिंसा की कोई बड़ी घटना

8:22:18देखने को नहीं मिलती इसका मतलब था की लोग

8:22:21अब गांधी जी की सत्याग्रह टेक्निक को पुरी

8:22:24तरह अपना चुके थे जिसका सबसे अच्छा उदाहरण

8:22:26धरसाना में देखने को मिला था

8:22:29कंक्लुजन

8:22:32हम का सकते हैं की सिविल डिसऑबेडिएंस

8:22:34मूवमेंट एन सिर्फ इफेक्टिवली ऑर्गेनाइज्ड

8:22:37किया गया बल्कि इसमें कांग्रेस को सही मेन

8:22:40में मांस ऑर्गेनाइजेशन भी बना दिया था यही

8:22:44वजह थी की ब्रिटिश गवर्नमेंट भी कांग्रेस

8:22:46के साथ समझौता करने के लिए झुक जाति है

8:22:50सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट फेस तू

8:22:55दोस्तों हमने अपने पिछले वीडियो में सिविल

8:22:57डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को डिस्कस किया था

8:22:59फिफ्थ मार्च 1931 को हुए गांधी ऐरवा पैक

8:23:03के बाद आंदोलन का फर्स्ट पेज खत्म हो गया

8:23:06था इसके बाद इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल किस

8:23:09दिशा में आगे बढ़ता है आज हम यही जानेंगे

8:23:11आयु शुरू करते हैं मार्च 1931 में हुए

8:23:15इंडियन नेशनल कांग्रेस के कराची सेशन से

8:23:19कराची सेशन

8:23:21दोस्तों गांधी इर्विन या दिल्ली बैठ को

8:23:24इंडस करने के लिए 29 मार्च 1931 को

8:23:28कांग्रेस का कराची सेशन ऑर्गेनाइज्ड किया

8:23:30जाता है यह डेलीपैक्ट को इंडस करने के

8:23:33अलावा फंडामेंटल राइट्स और नेशनल इकोनामिक

8:23:36प्रोग्राम पर रेजोल्यूशन भी पास किया गया

8:23:38था कांग्रेस डिक्लेअर करती है की लोगों का

8:23:41शोषण खत्म करने के लिए पॉलीटिकल फ्रीडम के

8:23:44साथ-साथ इकोनामिक फ्रीडम भी जरूरी है

8:23:47फंडामेंटल राइट्स पर रेजोल्यूशन बेसिक

8:23:49सिविल राइट्स की गारंटी देता है जिसमें

8:23:52फ्री स्पीच फ्री प्रेस फ्री असेंबली और

8:23:55फ्रीडम ऑफ संगठन शामिल थे इसके साथ ही

8:23:58क्वालिटी बिफोर डी डॉ इरेस्पेक्टिव ऑफ

8:24:00कास्ट क्रीड और सेक्स रिलिजियस मैटर्स में

8:24:03स्टेट की न्यूट्रॅलिटी यूनिवर्सल एडल्ट

8:24:05फ्रेंचाइजी की बेसिस पर इलेक्शंस और फ्री

8:24:08और कंपलसरी प्राइमरी एजुकेशन जैसे राइट्स

8:24:11भी इसका पार्ट थे यह माइनॉरिटी और डिफरेंट

8:24:14लैंग्वेज

8:24:16और स्क्रिप्ट को प्रोटेस्ट करने की बात भी

8:24:19कहीं गई थी ध्यान देने वाली बात यह है की

8:24:22इसी रेजोल्यूशन को हम अपने कॉन्स्टिट्यूशन

8:24:24में बाद में फंडामेंटल राइट्स के रूप में

8:24:26पार्ट थ्री में अडॉप्ट करते हैं

8:24:28नेशनल इकोनामिक प्रोग्राम के तहत रेंट और

8:24:32रिवेन्यू में सब्सटेंशियल रिडक्शन प्रॉमिस

8:24:34किया गया था इसके अलावा उन इकोनॉमिक्स

8:24:36होल्डिंग्स होने पर रेंट से एक्सेंप्शन

8:24:40एग्रीकल्चरनेस में रिलीफ और कंट्रोल ऑफ

8:24:42यूजुअली की बात भी की गई थी इसमें वर्कर्स

8:24:46के लिए लिविंग वेज के साथ बटर कंडीशंस

8:24:48लिमिटेड अवर्स ऑफ क प्रोटेक्शन ऑफ वूमेन

8:24:50वर्कर्स और यूनियन फॉर्म करने का राइट भी

8:24:53शामिल था यह प्रोग्राम की इंडस्ट्रीज

8:24:56माइंस और मेंस ऑफ ट्रांसपोर्ट पर स्टेट

8:24:59ओनरशिप भी प्रॉमिस करता है इस तरह से

8:25:02कराची रेजोल्यूशन कांग्रेस के बेसिक

8:25:05पॉलीटिकल और इकोनॉमिक्स प्रोग्राम को

8:25:07रिप्रेजेंट करता है

8:25:08आजादी के बाद भी कांग्रेस पॉलिसीज में

8:25:11इसका एसेंस देखा जा सकता है

8:25:28दोस्तों 29th अगस्त 1931 को गांधीजी सेकंड

8:25:33राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस अटेंड करने लंदन के

8:25:35लिए निकाल जाते हैं सेकंड राउंड टेबल

8:25:38कॉन्फ्रेंस सेवंथ सितंबर 1931 से फर्स्ट

8:25:41दिसंबर 1931 तक लंदन में आयोजित की जाति

8:25:45है इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से

8:25:48गांधीजी को सोल रिप्रेजेंटेटिव बनाया गया

8:25:50था इसके अलावा प्रिंसली स्टेटस के

8:25:53रिप्रेजेंटेटिव भी यहां मौजूद थे

8:25:56मुस्लिम का प्रतिनिधित्व

8:25:59मौलाना शौकत अली मोहम्मद अली जिन्ना

8:26:02मोहम्मद इकबाल जैसे लीडर्स कर रहे थे

8:26:04हिंदू ग्रुप को

8:26:09दीवान बहादुर राजा नरेंद्र नाथ रिप्रेजेंट

8:26:12कर रहे थे इसके अलावा लिबरल पार्टी से गण

8:26:16बसु तेज बहादुर सप्रू और चिमनलाल हरिलाल

8:26:19शीतल वार्ड जैसे लीडर्स पहुंचे हुए थे

8:26:21डिप्रेस्ड क्लासेस का रिप्रेजेंटेशन

8:26:26कर रहे थे

8:26:28गवर्नमेंट का इंडिया

8:26:31नरेंद्र नाथ और एम रामचंद्र राव गए हुए थे

8:26:35खाने का मतलब यह हुआ की इंडियन पालिटी और

8:26:39सोसाइटी के लगभग हर शिक्षक की तरफ से

8:26:41रिप्रेजेंटेटिव सेकंड राउंड टेबल

8:26:43कॉन्फ्रेंस में पहुंच गए

8:26:58गवर्नमेंट इनके जारी ये दिखाना चाहती थी

8:27:00की कांग्रेस सभी इंडियन की इंटरेस्ट को

8:27:04रिप्रेजेंट नहीं करती कॉन्फ्रेंस में

8:27:06गांधीजी कहते हैं की इंडिया और ब्रिटेन के

8:27:09बीच एक क्वालिटी के बेसिस पर पार्टनरशिप

8:27:11हनी चाहिए और डिमांड रखते हैं की सेंटर और

8:27:14प्रोविंस में तुरंत ही रिस्पांसिबल

8:27:17गवर्नमेंट एस्टेब्लिश की जाए इसके साथ ही

8:27:20अनटचेबल्स को हिंदू मानते हुए गांधी जी

8:27:23कहते हैं की इन्हें माइनॉरिटी की तरह

8:27:25ट्वीट नहीं किया जाना चाहिए इसलिए इनके

8:27:28लिए सेपरेट इलेक्ट की आइडिया को वो

8:27:30डिस्कार्ड कर देते हैं इसके अलावा गांधीजी

8:27:34यह भी कहते हैं की मुस्लिम या किसी और

8:27:36माइनॉरिटी ग्रुप के लिए भी सेपरेट

8:27:39इलेक्टरेट की जरूर नहीं है लेकिन बाकी

8:27:42डेलीगेट गांधी जी से सहमत नहीं होते इस

8:27:45तरह अलग डेलीगेट ग्रुप के बीच कोई

8:27:48एग्रीमेंट नहीं बन पता और सेकंड राउंड

8:27:50टेबल कॉन्फ्रेंस में भी इंडिया के

8:27:52कांस्टीट्यूशनल फ्यूचर पर कोई डिसीजन नहीं

8:27:57इंडिया की आजादी की डिमांड को माने से

8:27:59इनकार कर देती है 28 दिसंबर 1931 को

8:28:04गांधीजी हताश होकर वापस इंडिया ए जाते हैं

8:28:07और अगले ही दिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी

8:28:10सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को रिज्यूम

8:28:12करने का डिसीजन लेती है

8:28:16सिविल डिसऑबेडिएंस रिज्यूम्स और गवर्नमेंट

8:28:19रिस्पांस

8:28:23दोस्तों इस तरह सिविल डिसऑबेडिएंस का

8:28:25सेकंड फैज शुरू होता है फर्स्ट फेस के

8:28:28दौरान ब्रिटिश गवर्नमेंट आंदोलन के

8:28:30अगेंस्ट रिस्पांस को लेकर कन्फ्यूजन में

8:28:32अच्छी थी लेकिन सेकंड फेस में ऐसा नहीं

8:28:35होता लोड इर्विन की जगह लॉर्ड विलिंग दान

8:28:38वायसराय बन चुके थे और वो गांधीजी और उनके

8:28:41आंदोलन को किसी भी तरह की दील देने की मूड

8:28:44में नहीं थे इसलिए फोर्थ जनवरी 1932 को

8:28:48गांधी जी को अरेस्ट कर लिया जाता है साथ

8:28:51ही ऑर्डिनेंस के जारी अथॉरिटी को

8:28:54अनलिमिटेड पावर दे दी जाति हैं सभी सिविल

8:28:57लिबर्टीज को खत्म कर दिया जाता है अथॉरिटी

8:29:00अपनी मर्जी से लोगों और उनकी प्रॉपर्टी को

8:29:03सीस कर शक्ति थी

8:29:04इस तरह एक हफ्ते के अंदर ही सभी लीडिंग

8:29:08कांग्रेस मां को जय में दाल दिया जाता है

8:29:10गवर्नमेंट के इस एक्शन के अगेंस्ट इंडिया

8:29:13के लोग गुस्से से रिएक्ट करते हैं

8:29:15कांग्रेस ने भले ही बिना किसी प्रिपरेशन

8:29:18के आंदोलन शुरू किया था लेकिन इसे मैसिव

8:29:21पॉपुलर रिस्पांस मिलता है पहले 4 महीने

8:29:24में ही करीब 80 हजार सत्याग्रही को जय

8:29:27होती है लाखों लोग लेकर और फॉरेन क्लॉथस

8:29:31बेचे वाली शॉप्स की पिकेटिंग करते हैं

8:29:33लीगल गैदरिंग्स नॉन वायलेंस डेमोंसट्रेशंस

8:29:36जैसे मैथर्ड के साथ ऑर्डिनेंस का डिफेंस

8:29:39किया जान लगता है

8:29:41नॉन वायलेट आंदोलन को गवर्नमेंट पुरी

8:29:44शक्ति से दबाना शुरू कर देती है कांग्रेस

8:29:46और उसकी एलिट ऑर्गेनाइजेशंस को इलीगल

8:29:49डिक्लेअर कर दिया जाता है साथ ही उनके

8:29:51ऑफिसेज और फंड्स सीएस कर लिए जाते हैं सभी

8:29:55गांधी आश्रम पर पुलिस अपना कब्जा कर लेती

8:29:57है पीसफुल विकेट्स सत्याग्रही और

8:30:01प्रदर्शनकारी पर लाठी चार्ज किया जाता है

8:30:03मारा जाता है और कठोर दंड और फाइनेंस लगा

8:30:07दिए जाते हैं जय में प्रिजनर्स को बहुत ही

8:30:10करूर था के साथ ट्वीट किया जाता है सजा के

8:30:14तोर पर कूड़े बरसाना रूस की बात हो जाति

8:30:16है और इंडिया के डिफरेंट पार्ट्स में चल

8:30:19रहे नो टैक्स कैंपेन के अगेंस्ट भी कठोर

8:30:22कम लिए जाते हैं लोगों की जमीन घर मवेशी

8:30:25खेती के साधन और बाकी संपत्ति को जप्त कर

8:30:28लिया जाता है पुलिस लोगों का अलग-अलग

8:30:31तरीके से शोषण करने लगती है लोग अपनी तरफ

8:30:34से पुरी कोशिश करते हैं फाइट बैक करने की

8:30:37लेकिन गांधीजी और बाकी लीडर्स को मौका ही

8:30:40नहीं मिलता

8:30:41आंदोलन के टेंपो को बिल्ड करने का इसलिए

8:30:44ज्यादा लंबे समय तक आंदोलन सस्टेन नहीं कर

8:30:46पता कुछ ही मीना के अंदर गवर्मेंट

8:30:49इफेक्टिवेली आंदोलन को कृष कर देती है

8:30:51हालांकि थोड़ी बहुत जान आंदोलन में अभी भी

8:30:54बच्ची हुई थी और अर्ली अप्रैल 1934 तक यह

8:30:58चला राहत है और फिर फाइनली गांधीजी आंदोलन

8:31:02को विद्रोह करने का डिसीजन लेते हैं

8:31:04दोस्तों इस तरह सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

8:31:07का सेकंड फेस भी और हो जाता है इस आंदोलन

8:31:11के दौरान ही एक और महत्वपूर्ण घटना हुई थी

8:31:13जिसकी चर्चा करना जरूरी है

8:31:21डिप्रेस्ड क्लासेस की तरफ से सेपरेट

8:31:23इलेक्टरेट की डिमांड की गई थी जिसका गांधी

8:31:26जी ने विरोध भी किया था लेकिन डिवाइडेड

8:31:28रूल की पॉलिसी को फॉलो करते हुए अगस्त

8:31:311932 में ब्रिटिश पीएम मैकडॉनल्ड सभी

8:31:34माइनॉरिटी के लिए सेपरेट इलेक्टरेट की

8:31:37घोषणा कर देते हैं इसे कम्युनल अवार्ड भी

8:31:40कहा जाता है इसमें डिप्रेस्ड क्लासेस को

8:31:42भी माइनॉरिटी कम्युनिटी माना गया

8:31:51इस कोशिश का वह पूरा विरोध करते हैं इसके

8:31:55लिए गांधीजी 28 सितंबर 1932 को आमरण अंश

8:32:00यानी की फास्ट ऊंटो डेथ शुरू कर देते हैं

8:32:03हैं उनके अनुसार अगर डिप्रेस्ड क्लासेस को

8:32:06एक सेपरेट कम्युनिटी की तरह ट्वीट किया

8:32:09जान लगा तो अनटचेबिलिटी को खत्म करने का

8:32:11सवाल ही नहीं रहेगा और इस दिशा में किया

8:32:14जा रहे हिंदू सोशल रिफॉर्म बेकार हो

8:32:16जाएंगे साथ ही हाइंड्स भी हमेशा के लिए

8:32:19डिवाइड हो जाएंगे इसलिए गांधीजी चाहते थे

8:32:22की डिप्रेस्ड क्लासेस के रिप्रेजेंटेटिव

8:32:25भी जनरल इलेक्ट्रोरेट के द्वारा ही चुने

8:32:28जैन ऐसी सिचुएशन में डिफरेंट पॉलीटिकल

8:32:31परसूएसन के लीडर्स एक साथ आते हैं जिम मदन

8:32:35मोहन मालवीय मेक राजा और बी अंबेडकर शामिल

8:32:38थे यह लोग आखिर में एक समझौते पर राजी हो

8:32:42जाते हैं जिसे पुणे समझौता या पूना पेस्ट

8:32:45कहा जाता है

8:32:47पूना पेस्ट के अनुसार डिप्रेस्ड क्लासेस

8:32:50के लिए सेपरेट इलेक्टरेट का आइडिया छोड़

8:32:52दिया जाता है और इसकी जगह प्रोविंशियल

8:32:54लेजिस्लेटर्स में उनके लिए रिजर्व्ड सिट्स

8:32:57की संख्या को 71 से बढ़कर 147 कर दिया

8:33:01जाता है साथ ही सेंट्रल लेजिसलेच्योर में

8:33:04भी टोटल सिट्स का 18% उनके लिए रिजर्व कर

8:33:07दिया जाता है इस तरह से पूना पेस्ट के बाद

8:33:10गांधीजी अपना फास्ट तोड़ते हैं साथ ही जय

8:33:14से बाहर आने पर सभी कम छोड़कर लगभग 2 साल

8:33:18तक वो अनटचेबिलिटी के अगेंस्ट कैंपेन में

8:33:21ही एक्टिव रहते हैं

8:33:22है इस दौरान सेवंथ नवंबर 1933 से लेकर

8:33:2629th जुलाई 1934 तक यानी की करीब 9 महीने

8:33:30का इंटेंसिव हरिजन टूर भी कंडक्ट करते हैं

8:33:33हरिजन नाम गांधीजी ने डिप्रेस्ड क्लासेस

8:33:36को दिया था इस स्टोर के दौरान गांधीजी

8:33:40गरीब 20000 किलोमीटर की यात्रा करते हैं

8:33:43रिसेंटली फाउंडेड हरिजन सेवक संघ के लिए

8:33:46फंड्स कलेक्ट करते हैं सभी फॉर्म्स में

8:33:49अनटचेबिलिटी की प्रैक्टिस को खत्म करने की

8:33:52अपील करते हैं और सोशल वर्कर्स से कहते

8:33:54हैं की गांव-गांव जाकर हरिजनस के सोशल

8:33:58इकोनामिक कल्चरल और पॉलीटिकल के लिए कम

8:34:01करें दोस्तों इस तरह गांधीजी अपने

8:34:04इन्फ्लुएंस का उसे करके हिंदू उसको डिवाइड

8:34:07होने से बच्चा लेते हैं आई अब वापस नेशनल

8:34:11मूवमेंट की तरफ चला जाए

8:34:13डिबेट आफ्टर सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

8:34:17दोस्तों बड़े आंदोलन के खत्म होने के बाद

8:34:20एक बार फिर से सवाल खड़ा होता है की आगे

8:34:23की स्ट्रीट्स क्या होगी इसे लेकर कांग्रेस

8:34:26में तीन पर्सपेक्टिव सामने आते हैं पहले

8:34:30था की गांधियन लाइंस पर कंस्ट्रक्टिव क

8:34:32किया दूसरा पर्सपेक्टिव था की

8:34:35कांस्टीट्यूशनल स्ट्रगल को रिवाइव किया

8:34:38जाए और 1934 में होने वाले सेंट्रल

8:34:41लेजिसलेच्योर के इलेक्शंस में पार्टिसिपेट

8:34:43किया जाए इसका सपोर्ट

8:34:51कर रहे थे

8:34:53इनके अलावा जो तीसरा प्रोस्पेक्टिव सामने

8:34:55ए रहा था वह कांग्रेस में उभरते स्ट्रांग

8:34:58लेफ्ट ईस्ट ट्रेड का था इसे जवाहरलाल

8:35:01नेहरू जैसे लीडर्स रिप्रेजेंट कर रहे थे

8:35:03और ये लोग कंस्ट्रक्टिव क और काउंसलिंग

8:35:07एंट्री दोनों को ही क्रिटिसाइज करते हैं

8:35:09इसकी जगह यह जान आंदोलन को ही कंटिन्यू

8:35:12रखना के पक्ष में थे

8:35:14फाइनली काउंसिल एंट्री के फीवर में फैसला

8:35:17लिया जाता है मे 1934 में जो इंडिया

8:35:20कांग्रेस कमेटी पटना में मिलती है और

8:35:23पार्लियामेंट्री बोर्ड सेटअप किया जाता है

8:35:25कांग्रेस के बैनर में ही इलेक्शंस फाइट

8:35:28करने का डिसीजन हो जाता है इसी बीच

8:35:31गांधीजी को यह भरोसा हो जाता है की

8:35:33कांग्रेस के पावरफुल ट्रेंड्स के साथ उनके

8:35:36अपने विचार नहीं मिलते बड़े क्षेत्र

8:35:39पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स को फीवर कर रहा

8:35:41था गांधीजी इसके पुरी तरह खिलाफ थे साथ ही

8:35:45सोशलिस्ट ग्रुप से भी उनके फंडामेंटल

8:35:47डिफरेंस थे इसलिए अक्टूबर 1934 में

8:35:52गांधीजी कांग्रेस से रिजाइन कर देते हैं

8:35:54नवंबर 1934 में सेंट्रल लेजिसलेटिव

8:35:58असेंबली के इलेक्शंस होते हैं इसमें टोटल

8:36:0175 इलेक्ट्रिक सिट्स में से 45 पर

8:36:04कांग्रेस की जीत होती है लेकिन इससे भी

8:36:08ज्यादा इंपॉर्टेंट इलेक्शन होना अभी बाकी

8:36:10था

8:36:12इंडिया एक्ट 1935 और इलेक्शंस ऑफ 1937

8:36:16दोस्तों

8:36:181932 के आंदोलन के दौरान ही थर्ड राउंड

8:36:21टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति है

8:36:23इसमें भी कांग्रेस पार्टिसिपेट नहीं करती

8:36:26यहां पर हुए डिस्कशन के बाद ब्रिटिश

8:36:28गवर्नमेंट 1935 का एक्ट पास करती है इस

8:36:33एक्ट में प्रोविंशियल ऑटोनॉमी इंट्रोड्यूस

8:36:35की गई थी और इसके लिए ही अर्ली 1937 में

8:36:39इलेक्शंस डिक्लेअर कर दिए जाते हैं

8:36:41इलेक्शंस को लेकर एक बार फिर से कांग्रेस

8:36:44में डिबेट शुरू हो जाति है सभी लीडर्स

8:36:46एग्री करते थे की 1935 के एक्ट का विरोध

8:36:50करना है लेकिन यह विरोध किस तरह से किया

8:36:53जाए इसको लेकर सबकी अलग-अलग राय थी

8:36:56फाइनली 1937 के फेसबुक सेशन में इलेक्शंस

8:37:01में पार्टिसिपेट करने पर सहमति बन जाति है

8:37:03और ऑफिस एक्सेप्टेंस का फैसला पोस्ट

8:37:06इलेक्शन पीरियड पर छोड़ दिया जाता है

8:37:09फरवरी 1937 में इलेक्शंस होते हैं जिसमें

8:37:13कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करती है

8:37:171161 कंटेस्टेंट सिट्स में से

8:37:20716 सिट्स पर इनकी जीत होती है कुछ मीना

8:37:24की तसल्ली के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी

8:37:26ऑफिस एक्सेप्ट करने का फैसला लेती है और

8:37:29टोटल 11 में से 8 प्रोविंस में गवर्नमेंट

8:37:33फॉर्म की जाति है जिसमें मद्रास मुंबई

8:37:35सेंट्रल प्रोविंस उड़ीसा बिहार अप

8:37:39नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और असम

8:37:42शामिल था

8:37:43आई जानते हैं गवर्नमेंट फॉर्म करने के बाद

8:37:46कांग्रेस मिनिस्टरीज का परफॉर्मेंस कैसा

8:37:48राहत है

8:37:5028 मठ ऑफ कांग्रेस रूल दोस्तों कांग्रेस

8:37:54मिनिस्टरीज लोगों के वेलफेयर के लिए कम

8:37:57करना शुरू करती है

8:38:00फिर भी यह कुछ रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करने

8:38:03की कोशिश करते हैं सिविल लिबर्टीज को

8:38:06रिवाइव करते हुए सभी इमरजेंसी पावर्स को

8:38:09रिपील कर दिया जाता है

8:38:10इलीगल डिक्लेअर की गई पॉलीटिकल

8:38:12ऑर्गेनाइजेशन और जर्नल्स पर से बन हटा

8:38:15दिया जाता है प्रेस पर से सभी

8:38:17रिस्ट्रिक्शंस रिमूव कर दिए जाते हैं

8:38:20हजारों पॉलीटिकल प्रिजनर्स के रिलीज का

8:38:22ऑर्डर इशू किया जाता है

8:38:38और दूसरा फाइनेंशियल रिसोर्सेस की भी बहुत

8:38:42कमी थी इसके अलावा टाइम भी कंस्ट्रेंट बन

8:38:45जाता है कांग्रेस मिनिस्टरीज का रूल सिर्फ

8:38:4728 मंथ्स तक ही राहत है

8:38:50यह समय बड़ी एग्रेरियन या एडमिनिस्ट्रेटिव

8:38:53रिफॉर्म्स के लिए काफी नहीं था

8:38:561939 में सेकंड वर्ल्ड वार शुरू हो जाता

8:38:59है और ब्रिटेन बिना इंडियन की परमिशन की

8:39:02इंडिया को वर्ल्ड वार में पार्टिसिपेंट

8:39:04बना देता है इसी के विरोध में कांग्रेस

8:39:07मिनिस्ट्री अक्टूबर 1939 में रिजाइन कर

8:39:10देती हैं

8:39:12कंक्लुजन दोस्तों इलेक्शंस में

8:39:15पार्टिसिपेट करने और फिर गवर्नमेंट फॉर्म

8:39:17करने से कांग्रेस लीडर्स को

8:39:19पार्लियामेंट्री सिस्टम में कम करने का

8:39:21वैल्युएबल एक्सपीरियंस मिलता है यही

8:39:24एक्सपीरियंस आजादी के बाद इंडियन

8:39:27डेमोक्रेसी को सस्टेन करने में काफी हेल्प

8:39:29करता है अपने आगे आने वाले वीडियो में हम

8:39:32देखेंगे की कैसे सेकंड वर्ल्ड वार के

8:39:34दौरान नेशनल मूवमेंट डिसाइसिव फीस में

8:39:38पहुंच जाता है

8:39:40[संगीत]

8:40:06बैकग्राउंड सेकंड वर्ल्ड वार और कांग्रेस

8:40:10इस रिस्पांस दोस्तों सितंबर 1939 में

8:40:14सेकंड वर्ल्ड वार की शुरुआत होती है और

8:40:16ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट कांग्रेस या

8:40:19सेंट्रल लेजिसलेच्योर के इलेक्ट मेंबर

8:40:21किया बिना नहीं इंडिया को भी वार में

8:40:24पार्टिसिपेंट क्लियर कर देती है

8:40:26कांग्रेस पुरी तरह से फैशनिस्ट फोर्सेस के

8:40:29अगेंस्ट थे और एलाइड कैसे का सपोर्ट भी

8:40:32करना चाहती थी लेकिन उनका मानना यह था की

8:40:35खुद गुलामी में रहते हुए इंडिया किसी

8:40:37दूसरे देश की फ्रीडम की फाइट नहीं कर सकता

8:40:40कांग्रेस के ऑफिशल स्टैंड को डिस्कस करने

8:40:43के लिए 10 से 14 सितंबर के बीच वर्धा में

8:40:46कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग होती है

8:40:48यह कांग्रेस लीडर्स की अलग-अलग व्यूज

8:40:52सामने आते हैं

8:40:55शो करते हैं उनका मानना था की वेस्टर्न

8:40:58यूरोप की डेमोक्रेटिक स्टेटस और हिटलर के

8:41:01नाथसी स्टेट में क्लियर डिफरेंस है वही

8:41:03सोशलिस्ट और सुभाष चंद्र बस का कहना था यह

8:41:07वार एक इंपिरियलिस्ट वार है क्योंकि दोनों

8:41:10ही साइज कॉलोनियल टेरिटरीज को जेन करने या

8:41:13डिफेंड करने के लिए ही फाइट कर रही हैं

8:41:15इसलिए किसी भी साइड को सपोर्ट करने का

8:41:18सवाल ही नहीं है बल्कि कांग्रेस को

8:41:20सिचुएशन का फायदा उठाते हुए तुरंत ही

8:41:22आजादी के लिए आंदोलन शुरू कर देना चाहिए

8:41:24इन सब के बीच जवाहर लाल नेहरू का अपना अलग

8:41:28स्टैंड था उनके अनुसार जस्टिस तो ब्रिटेन

8:41:31फ्रांस और पोलन के साथ ही है लेकिन साथ ही

8:41:34ब्रिटेन और फ्रांस इंपिरियलिस्ट कंट्रीज

8:41:36हैं और ये वार केपीटलाइज्म के इनर

8:41:39कांट्रडिक्शंस का ही नतीजा है इसलिए नेहरू

8:41:42जी का कहना था की फ्रीडम मिलने तक ना तो

8:41:45इंडिया को वार जॉइन करना चाहिए और ना ही

8:41:48ब्रिटेन की मुश्किल का फायदा उठाते हुए

8:41:49अभी कोई आंदोलन ही शुरू करना चाहिए फाइनली

8:41:53नेहरू जी के स्टैंड को ही कांग्रेस का

8:41:55ऑफिशल स्टैंड डिक्लेअर किया जाता है कमेटी

8:41:57अपने रेजोल्यूशन पर पोलैंड पर हुए नागजी

8:42:00अटैक को कंडोम करती है साथ ही डिक्लेअर

8:42:03करती है की इंडिया इस वार में पार्टी नहीं

8:42:06बन शक्ति क्योंकि खाने के लिए तो यह वार

8:42:08डेमोक्रेटिक फ्रीडम के लिए लाडा जा रहा है

8:42:10लेकिन इंडिया को यही फ्रीडम नहीं दी जा

8:42:13रही

8:42:14है अगर ब्रिटेन सच में डेमोक्रेसी और

8:42:17फ्रीडम की फाइट कर रहा है तो उसे इंडिया

8:42:19में यह प्रूफ करना चाहिए

8:42:22की अपने वरयाम्स को ब्रिटेन इंडिया में

8:42:26कैसे इंप्लीमेंट करेगा उसके बाद इंडियन

8:42:28खुशी से वार में उनका साथ देने के लिए

8:42:30तैयार है इस रेजोल्यूशन के अगेंस्ट

8:42:34ब्रिटिश गवर्नमेंट का रिस्पांस पुरी तरह

8:42:36नेगेटिव राहत है

8:42:39अक्टूबर 1939 को एक स्टेटमेंट जारी करते

8:42:43हैं जिसमें वो मुस्लिम लीग और प्रिंस को

8:42:46कांग्रेस के अगेंस्ट उसे करने की कोशिश

8:42:48करते हैं ब्रिटेन के वॉरियर्स को डिफाइन

8:42:51करने से साफ इनकार भी कर देते हैं फ्यूचर

8:42:54को लेकर बस इतना प्रॉमिस करते हैं की वार

8:42:57खत्म होने के बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट

8:42:59इंडिया की सेवरल पार्टी कम्युनिटी के

8:43:01रिप्रेजेंटेटिव और इंडियन प्रिंस के साथ

8:43:04कंसल्टेशन करेगी और डिसाइड करेगी की 1935

8:43:08एक्ट को कैसे मॉडिफाई किया जा सकता है

8:43:12इसके रिएक्शन में गांधीजी कहते हैं की

8:43:14ब्रिटिश गवर्नमेंट अपनी डिवाइडेड रूल की

8:43:16पॉलिसी को ही कंटिन्यू कर रही है

8:43:18वायसराय की डिक्लेरेशन से साफ है की अगर

8:43:21ब्रिटेन का बस चले तो इंडिया में कभी भी

8:43:24डेमोक्रेसी नहीं आने देगा कांग्रेस ने तो

8:43:26ब्रेड मांगी थी लेकिन उसे पत्थर मिले हैं

8:43:2923rd अक्टूबर को वर्किंग कमेटी वाइस रॉयल

8:43:32की स्टेटमेंट को रिजेक्ट करते हुए

8:43:33कांग्रेस मिनिस्ट्री से रिजाइन करने के

8:43:36लिए कहती है लेकिन अभी भी जान आंदोलन शुरू

8:43:39करने की कोई बात नहीं होती गवर्नमेंट कुछ

8:43:42भी सुनने के लिए तैयार नहीं थी और एक के

8:43:45बाद एक ऑर्डिनेंस जारी करके सिविल लिबर्टी

8:43:48इस पर रिस्ट्रिक्शंस लगाने लगती है

8:43:52पहले ही आम आदमी दुखी था इकोनॉमिक्स की

8:43:56बेसिक नेसेसिटी अवेलेबल नहीं थी फिर

8:43:58धीरे-धीरे कांग्रेस लीडर

8:44:03को यह बताने का समय ए जाता है की इंडियन

8:44:07कपिल

8:44:10अगस्त ऑफर अन्य इंडिविजुअल सत्याग्रह

8:44:13दोस्तों

8:44:141940 की शुरुआत में वर्ल्ड वार में हिटलर

8:44:17को सक्सेस मिलती जा रही थी बेल्जियम

8:44:20हॉलैंड और फ्रांस को फास्टेस्ट बॉलर्स ने

8:44:23जीत लिया था ऐसे में ब्रिटेन कंसीलर मूड

8:44:26में ए जाता है कांग्रेस भी कंप्रोमाइज के

8:44:29लिए तैयार थी अगर उसे वार के दौरान

8:44:31इंटिरिम गवर्नमेंट फॉर्म करने दिया जाए

8:44:33लेकिन ब्रिटिश गवर्नमेंट कांग्रेस के

8:44:36डिमांड एक्सेप्ट नहीं करती और अपनी तरफ से

8:44:39एक ऑफर लेकर आई है जिसे अगस्त ऑफर कहा

8:44:43जाता है

8:44:44वायसराय लिंग्लित को इसमें अनाउंस करते

8:44:47हैं की इंडिया को डोमिनियन स्टेटस देना

8:44:50ब्रिटिश गवर्मेंट का ऑब्जेक्टिव है साथ ही

8:44:53वायसराय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल को

8:44:56एक्सपेंड करने का प्रपोज भी रखते हैं

8:44:57जिसमें इंडियन की मेजॉरिटी होगी

8:45:01वार के बाद इंस्टिट्यूट असेंबली सेट अप

8:45:04करने की बात भी इसमें होती है लेकिन यह भी

8:45:07कहा जाता है की बिना माइनॉरिटी की कंसेंट

8:45:09के कोई भी फ्यूचर कॉन्स्टिट्यूशन नहीं

8:45:13किया जाएगा

8:45:19[संगीत]

8:45:24[संगीत]

8:45:29है इसलिए 1940 के और में कांग्रेस एक बार

8:45:32फिर गांधीजी से कमान संभालने के लिए कहती

8:45:35है और गांधी जी इंडिविजुअल सत्याग्रह शुरू

8:45:39करने का डिसीजन लेते हैं यह सत्याग्रह हर

8:45:42लोकेलिटी में कुछ सिलेक्टेड इंडिविजुअल्स

8:45:44के द्वारा लिया जाना था इस सत्याग्रह का

8:45:47ही लोगों की फीलिंग को एक्सप्रेस करना था

8:45:50की वो वार में इंटरेस्टेड नहीं है उनके

8:45:53लिए नक्सिज्म और इंडिया पर रूल कर रहे डबल

8:45:56और डोक्रेसी में कोई अंतर नहीं है साथ ही

8:45:59सत्याग्रह गवर्नमेंट को एक और मौका देता

8:46:01है की वो पीसफुली कांग्रेस की डिमांड मां

8:46:03लेने सत्याग्रही को एंटीवायरस स्पीच देनी

8:46:06थी इस एक्ट से वह वार के अगेंस्ट अपनी

8:46:09फ्रीडम ऑफ स्पीच की डिमांड करेंगे और अगर

8:46:12गवर्नमेंट उन्हें अरेस्ट नहीं करती है तो

8:46:15इसी स्पीच को जगह जगह जाकर रिपीट करेंगे

8:46:17और गांव से होकर दिल्ली के लिए मार्च

8:46:20करेंगे इस तरह एक आंदोलन की शुरुआत होती

8:46:24है जिसे दिल्ली चलो आंदोलन भी कहा जाता है

8:46:28इसमें सबसे पहले चुने जान वाले सत्याग्रह

8:46:30विनोबा भावे थे और दूसरे सत्याग्रही जवाहर

8:46:34लाल नेहरू बनते हैं मे 1941 तक 25000 से

8:46:39भी ज्यादा लोगों को इंडिविजुअल सत्याग्रह

8:46:42करने के लिए अरेस्ट किया जाता है हालांकि

8:46:44ब्रिटिश गवर्नमेंट इसके बाद भी कांग्रेस

8:46:46की डिमांड्स माने के लिए तैयार नहीं होती

8:46:49लेकिन जल्द ही ऐसी इंटरनेशनल सिचुएशन बंटी

8:46:52है की उन्हें एक और मिशन इंडिया भेजना

8:46:55पड़ता है

8:46:56ट्रिप्स मिशन दोस्तों वर्ल्ड वार में

8:46:59ब्रिटेन की सिचुएशन क्रिटिकल होती जा रही

8:47:02थी 22 जून 1941 को जर्मनी सोवियत यूनियन

8:47:07पर अटैक कर देता है और इसके बाद 7 दिसंबर

8:47:10को जापान पर्ल हार्बर में अमेरिकन फ्लीट

8:47:13पर सरप्राइज अटैक कर देता है जल्दी ही

8:47:15जबान फिलिपींस इंडो चीन इंडोनेशिया और

8:47:19बर्मा पर कब्जा कर लेट है तेजी से आगे

8:47:22बढ़ते हुए मार्च 1942 में रंगून को

8:47:25ऑक्यूपई कर लिया जाता है और इस तरह और अब

8:47:29इंडिया के दरवाजे पर पहुंच जाति है इंडियन

8:47:32लीडर्स को इंडिया के डिफेंस की चिंता होने

8:47:34लगती है साथ ही वार की बिगड़ी सिचुएशन को

8:47:37देखते हुए उस के प्रेसिडेंट रूल्स अबाउट

8:47:40चाइनीस प्रेसिडेंट

8:47:45पर दबाव डालने लगता हैं की वो वार में

8:47:48इंडियन का एक्टिव सपोर्ट लेने की कोशिश

8:47:50करें इसलिए ब्रिटिश पीएम मार्च 1942 में

8:47:55कैबिनेट मिनिस्टर स्टेफोर्ड ग्रिप्स की

8:47:58लीडरशिप में एक मिशन इंडिया भेजते हैं

8:47:59लेकिन ट्रिप्स का प्रपोज भी इंडियन लीडर्स

8:48:03को निराश करता है उन्होंने अपने प्रपोज

8:48:05में वार के बाद इंडिया को डोमिनियन स्टेटस

8:48:08देने और कांस्टीट्यूएंट असेंबली फॉर्म

8:48:10करने का प्रॉमिस किया था इस

8:48:13कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली के मेंबर्स को

8:48:14प्रोविंशियल असेंबली द्वारा इलेक्ट्रिक

8:48:17किया जाना था और प्रिंसली स्टेटस के कैसे

8:48:19में मेंबर्स रुलर्स द्वारा नॉमिनेट होने

8:48:22थे ट्रिप्स प्रपोज में एक प्रोविजन ये भी

8:48:25था की अगर कोई प्रॉब्लम्स न्यू

8:48:27कॉन्स्टिट्यूशन को एक्सेप्ट नहीं करता तो

8:48:30उसे अधिकार होगा की वो अपने फ्यूचर स्टेटस

8:48:32को लेकर ब्रिटेन के साथ एक सेपरेट

8:48:35एग्रीमेंट करें यह प्रोविजन मुस्लिम लीग

8:48:38की सेपरेट स्टेट की डिमांड को एकोमोडेशन

8:48:40करने के लिए था ट्रिप्स प्रपोज के बड़े

8:48:42में जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है की जब

8:48:45उन्होंने इसको पहले बार पढ़ा तो वो बहुत

8:48:48डिप्रेस्ड हो गए थे कांग्रेस डोमिनियन

8:48:51स्टेटस इंडिया के पार्टीशन और

8:48:53कांस्टीट्यूएंट असेंबली में नॉमिनेटेड

8:48:55मेंबर्स जैसे प्रोविजंस पर एतराज जताती है

8:48:57ब्रिटिश गवर्नमेंट इनकी इमीडिएट ट्रांसफर

8:49:00ऑफ इफेक्टिव पावर की डिमांड को भी

8:49:02एक्सेप्ट करने से माना कर देती है और इस

8:49:05तरह क्रिप्स मिशन भी फूल हो जाता है यह

8:49:08ध्यान रखना वाली बात यह है की ब्रिटिश

8:49:10पीएम चर्चिल चाहते ही नहीं थे की ट्रिप्स

8:49:13मिशन कामयाब हो उन्होंने ये मिशन सिर्फ

8:49:16इंटरनेशनल कम्युनिटी में दिखावे के लिए ही

8:49:19भेजो था

8:49:20क्रिप्स को साफ बोल दिया गया था की

8:49:22ड्राफ्ट डिक्लेरेशन से अलग वो कुछ भी नहीं

8:49:25कर सकते बाघिन और नेगोशिएट करने की इनके

8:49:28पैसे की वजह से ही ये मिशन फेलियर बंता है

8:49:34ब्रिटिश गवर्नमेंट की इंटेंशंस को भी साफ

8:49:37कर दिया था इंडियन लीडर्स समझ जाते हैं की

8:49:40अब ब्रिटिश के साथ नेगोशिएशंस का कोई

8:49:42फायदा नहीं है जरूर है एक बड़े जन्म

8:49:46आंदोलन की

8:49:47क्यूट इंडिया मूवमेंट

8:49:49दोस्तों टिप्स के जान के बाद गांधीजी

8:49:53ब्रिटिश विड्रोल और जैपनीज इन विजन के

8:49:55अगेंस्ट नॉनवॉयलेट नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट

8:49:58का रेजोल्यूशन तैयार करते हैं

8:50:0014th जुलाई 1942 को वर्धा में कांग्रेस

8:50:04वर्किंग कमेटी की मीटिंग में आंदोलन के

8:50:07आइडिया को एक्सेप्ट किया जाता है इस

8:50:09डिसीजन को अगस्त में जो इंडिया कांग्रेस

8:50:12कमेटी की बॉम्बे मीटिंग में रतीफाई किया

8:50:14जाना था 8 अगस्त 1942 को मुंबई के

8:50:19ग्वालियर टैंक में क्यूट इंडिया

8:50:21रेजोल्यूशन पास किया जाता है यहां पर ही

8:50:24गांधीजी करो या मारो यानी डू और दी का

8:50:28नारा देते हैं वो कहते हैं की या तो हम

8:50:31इंडिया को आजाद कर लेंगे या फिर इस कोशिश

8:50:34में अपनी जान दे देंगे लेकिन अब अंग्रेजी

8:50:37राज की गुलामी में और नहीं रहेंगे ब्रिटिश

8:50:40गवर्नमेंट लेकिन ना तो कांग्रेस से

8:50:42नेगोशिएशन के मूड में थी और ना ही आंदोलन

8:50:45के फार्मूले शुरू होने गए

8:50:49सुबह ही कांग्रेस के सभी टॉप लीडर्स को

8:50:52अरेस्ट कर लिया जाता है कांग्रेस की सभी

8:50:55ऑर्गेनाइजेशंस को भी इलीगल डिक्लेअर कर

8:50:57दिया जाता है गवर्मेंट के इस तरह अचानक

8:51:00अटैक करने से लोगों में इंस्टैन्टेनियस

8:51:03रिएक्शन देखने को मिलता है जैसे ही अरेस्ट

8:51:06की न्यूज़ फैलती है मुंबई के ग्वालियर

8:51:08टैंक में लाखों लोगों की भीड़ जमा हो जाति

8:51:11है और अथॉरिटीज के साथ क्लासेज होने लगता

8:51:15हैं इसी तरह की डिस्टरबेंस 9th अगस्त को

8:51:18अहमदाबाद और पुणे में भी देखने को मिलते

8:51:20हैं और 10 अगस्त को दिल्ली अप और बिहार के

8:51:24बहुत सारे शेरों जैसे की कानपुर इलाहाबाद

8:51:27वाराणसी और पटना में हड़ताल पब्लिक

8:51:31डेमोंसट्रेशंस और प्रोफेशन किया जाते हैं

8:51:33इसके जवाब में गवर्नमेंट प्रेस पर

8:51:36प्रतिबंध लगा देती है इसी बीच कांग्रेस के

8:51:39बहुत से प्रोविजनल लीडर्स जो अरेस्ट होने

8:51:42से बैक गए

8:51:49आंदोलन की खबर गांव तक पहुंचने लगती है

8:51:53पूरे देश में इसका असर दिखने लगता है आई

8:51:56जानते हैं की पब्लिक किस तरह आंदोलन में

8:51:59अपना योगदान देती है

8:52:02पब्लिक ऑन रामपॉगे दोस्तों क्यूट इंडिया

8:52:05मूवमेंट के दौरान लोग सिंबल्स ऑफ अथॉरिटी

8:52:08को अटैक करना शुरू करते हैं पुलिस स्टेशंस

8:52:10पोस्ट ऑफिसेज कोट्स रेलवे स्टेशंस जैसी

8:52:14जगह पर कब्जा करना शुरू कर देते हैं

8:52:16पब्लिक बिल्डिंग पर नेशनल फ्लैग फहराया

8:52:19जाता है रेलवे ट्रेक्स उखाड़ दिए जाते हैं

8:52:21टेलीग्राफ लाइंस को कट कर दिया जाता है और

8:52:25कई जगह ब्रिज उदा दिए जाते हैं कई जगह पर

8:52:28सत्याग्रह हज के ग्रुप तहसील जाकर खुद को

8:52:31अरेस्ट कर लेते हैं पूरे देश में स्टूडेंट

8:52:34स्कूल और कॉलेज की हड़ताल कर देते हैं और

8:52:37इलीगल पत्रिका आज का डिस्ट्रीब्यूशन करने

8:52:39लगता हैं अहमदाबाद मुंबई जमशेदपुर अहमदनगर

8:52:44और पुणे में वर्कर्स हड़ताल शुरू कर देते

8:52:47हैं

8:52:51इसे स्पेंस करने के लिए सरकार अपना पूरा

8:52:55जोर लगा देती है

8:52:57पुलिस और मिलिट्री को एनिमेट क्राउड्स पर

8:53:00फायरिंग का ऑर्डर दे दिया जाता है यहां तक

8:53:03की लो फ्लाइंग एयरक्राफ्ट से मशीन गण भी

8:53:05चलाई जाति है गांव के लोगों को होस्टेस

8:53:08बना लिया जाता है उनके ऊपर करीब 90 लाख

8:53:12रुपए तक का फाइन इंपोज कर दिया जाता है

8:53:14लोगों की बिलोंगिंग्स को लौटकर फाइन मौके

8:53:18पर ही वसूल भी किया जाता है

8:53:20सस्पेक्ट पर कूड़े बरसाए जाते हैं और गांव

8:53:23वालों के भाग जान पर पूरे के पूरे गांव को

8:53:26ही जल दिया जाता है

8:53:281942 के और होने तक 60000 से भी ज्यादा

8:53:32लोगों को अरेस्ट कर लिया जाता है इस तरह

8:53:34की ब्रूटल रिप्रेशन की वजह से स्ट्रगल का

8:53:37मांसपेस 6 से 7 हफ्तों के अंदर ही खत्म कर

8:53:40दिया जाता है इसके बाद शुरुआत होती है

8:53:43अंडरग्राउंड एक्टिविटीज की अंडरग्राउंड

8:53:46एक्टिविटीज

8:53:49दोस्तों गवर्नमेंट के रिप्रेशन की वजह से

8:53:52बहुत सी नेशनलिस्ट अंदर ग्राउंड हो जाते

8:53:54हैं और वहीं से अपनी एक्टी इस जारी रखते

8:53:57हैं इसके प्रॉमिनेंट मेंबर्स अच्युत

8:54:00पटवर्धन अरुण आसफ अली राम मनोहर लोहिया

8:54:04सुचेता कृपलानी बीजू पटनायक आरपी गोयनका

8:54:08और जीपी नारायण जैसे लीड थे बॉम्बे में

8:54:11उषा मेहता अंडरग्राउंड रेडियो ऑपरेट करती

8:54:14है यह लोग लोगों के मोरल को बनाए रखना का

8:54:18कम करते हैं पूरे देश के एक्टिविस्ट को

8:54:21गाइडलाइंस के साथ आर्म्स और अमिनेशन भी

8:54:24प्रोवाइड करते हैं इसी के साथ क्यूट

8:54:27इंडिया मूवमेंट का एक सिग्निफिकेंट फीचर

8:54:29पैरेलल गवर्नमेंट की एस्टेब्लिशमेंट था

8:54:31पहले पैरेलल गवर्नमेंट अगस्त 1942 में

8:54:35ईस्ट अप के बलिया में प्रोक्लेम की गई थी

8:54:37इसके लीडर चित्तू पांडे

8:55:12से पेशेंट के एक्सेंट को समझते हैं

8:55:19दोस्तों क्यूट इंडिया मूवमेंट में बहुत

8:55:22बड़े स्टार पर मांस पार्टिसिपेशन देखने को

8:55:24मिलता है जैसा की हम डिस्कस कर चुके हैं

8:55:27पूरे देश के लोग इस आंदोलन में अपने अपने

8:55:30तरीके से योगदान देते हैं आंदोलन में

8:55:33युद्ध स्पेशली स्टूडेंट सबसे आगे नजर आते

8:55:36हैं इसके साथ ही वूमेन भी कंधे से कंधा

8:55:40मिलकर आंदोलन में अपनी भागीदारी निभाती

8:55:42हैं वर्कर्स और पेजयंस के सहयोग के बिना

8:55:45तो आंदोलन की कल्पना भी नहीं की जा शक्ति

8:55:48अगर पॉलीटिकल पार्टी की बात की जाए तो

8:55:51मुस्लिम लीग इस आंदोलन का विरोध करती है

8:55:53हिंदू महासभा भी क्यूट इंडिया का बॉयकॉट

8:55:57करने का डिसीजन लेती है लेकिन इसके बाद भी

8:55:59मुस्लिम का पार्टिसिपेशन हमें इस आंदोलन

8:56:02में नजर आता है साथी आंदोलन के दौरान किसी

8:56:06भी तरह के कम्युनल क्लासेस भी नहीं हुए थे

8:56:09कम्युनिस्ट पार्टी भी आंदोलन को जॉइन नहीं

8:56:11करती क्योंकि सोवियत रसिया पर जर्मनी का

8:56:15अटैक हो चुका था इसलिए कम्युनिस्ट वार में

8:56:18ब्रिटिश का सपोर्ट करने लगता हैं

8:56:21[संगीत]

8:56:23हालांकि पर्सनल लेवल पर बहुत सारे

8:56:26कम्युनिस्ट लीडर्स आंदोलन का सपोर्ट भी

8:56:28करते हैं इस तरह क्यूट इंडिया मूवमेंट में

8:56:32सोसाइटी का ऑलमोस्ट हर क्षेत्र

8:56:33पार्टिसिपेट करता है और ब्रिटिश को यह

8:56:36एहसास दिलाते हैं की इंडियन की विशेष के

8:56:39अगेंस्ट अब इंडिया को रूल करना पॉसिबल

8:56:41नहीं है इस आंदोलन में आम लोगों का

8:56:45हीरोइज्म भी देखने को मिलता है

8:56:47लीडरशिप के अभाव में और गवर्नमेंट के

8:56:50ब्रूटल रिप्रेशन के बाद भी वो आंदोलन को

8:56:52करने नहीं देते कंक्लुजन

8:56:56दोस्तों क्यूट इंडिया मूवमेंट के बाद यह

8:56:59साफ हो गया था की आजादी को ज्यादा डर तक

8:57:02इंडियन से दूर नहीं रखा जा सकता ब्रिटिश

8:57:05गवर्नमेंट समझ गई थी की अगर फिर से ऐसा एक

8:57:09मूवमेंट होता है तो ब्रिटिशर्स के लिए

8:57:11रिप्रेस करना पॉसिबल नहीं होगा आगे आने

8:57:14वाली वीडियो में हम देखेंगे की किस तरह

8:57:16ब्रिटिशर्स पावर ट्रांसफर करने की तैयारी

8:57:19करते हैं

8:57:21सुबह चंद्र बस और इन दोस्तों अपनी पिछली

8:57:26वीडियो में हमने सेकंड वर्ल्ड वार के

8:57:28दौरान इंडियन नेशनल मूवमेंट की प्रोग्रेस

8:57:30को देखा था और इस दौरान शुरू हुए क्यूट

8:57:33इंडिया मूवमेंट को भी डिस्कस किया था जी

8:57:35समय इंडिया में यह सब घटनाएं हो रही थी

8:57:37उसे समय इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल केक बड़े

8:57:40लीडर यहां मौजूद नहीं थे जी हां हम बात कर

8:57:44रहे हैं सुभाष चंद्र बस की नेताजी दौरान

8:57:48कहां थे और कैसे वहां से आजादी की लड़ाई

8:57:51जारी रखते हैं आज हम इसके बड़े में ही

8:57:53चर्चा करेंगे इंट्रोडक्शन

8:57:56दोस्तों सुभाष चंद्र बस ने 1920 में

8:58:00इंडियन सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन में

8:58:02फोर्थ पोजीशन सिक्योरिटी थी लेकिन 1921

8:58:06में ही सिविल सर्विसेज से रिजाइन करके

8:58:08उन्होंने फ्रीडम स्ट्रगल की र चुन ली थी

8:58:10और कांग्रेस के मेंबर बन गए थे नेताजी के

8:58:14पॉलीटिकल गुरु चितरंजन दास थे जैसा की

8:58:17आपको याद होगा की 1928 में जब मोतीलाल

8:58:21नेहरू जी की रिपोर्ट आई है तो जवाहर लाल

8:58:24नेहरू के साथ सुभाष चंद्र बस ने भी

8:58:26डोमिनियन स्टेटस के प्रोविजन का विरोध

8:58:28किया था और दोनों ने मिलकर इंडिपेंडेंस पर

8:58:31इंडिया लीग की स्थापना की थी दोनों लीडर्स

8:58:35अब इंडिपेंडेंस से कम कुछ नहीं जानते थे

8:58:371938 के हरिपुरा सेशन में सुभाष चंद्र बस

8:58:41कांग्रेस के प्रेसिडेंट बनते हैं और इसी

8:58:43समय जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में

8:58:46नेशनल प्लानिंग कमेटी एस्टेब्लिश करते हैं

8:58:53और कांग्रेस में यंग ब्रिगेड को

8:58:55रिप्रेजेंट करते थे

8:58:56कांग्रेस का अगला सेशन त्रिपुरा में होता

8:58:59है बस एक बार फिर कांग्रेस प्रेसिडेंट के

8:59:02इलेक्शन में खड़े हो जाते हैं इस बार उनके

8:59:04अगेंस्ट गांधियन कैंडिडेट बता भी सीता

8:59:07रमैया खड़े होते हैं इलेक्शन में बस जीत

8:59:10जाते हैं लेकिन गांधी जी उनके साथ कम करने

8:59:12से माना कर देते हैं क्योंकि दोनों की

8:59:15पॉलीटिकल और इकोनामिक आईडियोलॉजी मैच नहीं

8:59:17होती थी

8:59:18इकोनामिक फ्रंट पर जहां गांधीजी ट्रस्ट

8:59:21थ्योरी में विश्वास करते थे वहीं बस

8:59:24सोशलिज्म को फीवर करते थे इसी तरह गांधी

8:59:27जी की पॉलीटिकल एडोलॉजी जहां नॉन वायलेंस

8:59:30पर बेस थी वही बस देश की आजादी के लिए

8:59:33किसी भी हद तक जान के लिए तैयार थे

8:59:35गांधीजी के साथ इन्हीं फंडामेंटल डिफरेंस

8:59:39की चलती बस कांग्रेस प्रेसिडेंट की पोस्ट

8:59:41से रिजाइन करते थे कांग्रेस से बाहर बस

8:59:441939 में अपनी अलग पार्टी फॉरवर्ड ब्लॉक

8:59:48फॉर्म करते हैं जब सेकंड वर्ल्ड वार शुरू

8:59:50होता है तो नेताजी का मानना था की

8:59:52कांग्रेस को मौके का फायदा उठाकर एक बड़ा

8:59:55आंदोलन शुरू कर देना चाहिए और जब कांग्रेस

8:59:58उनके इस मत से सहमत नहीं होती तो बोझ

9:00:01कांग्रेस के बाहर से ही आंदोलन शुरू करने

9:00:03की कोशिश करते हैं

9:00:05मार्च 1940 में रामगढ़ में फॉरवर्ड ब्लॉक

9:00:09और किसान सभा के जॉइंट एफर्ट्स से एक एंटी

9:00:12कंप्रोमाइज कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति

9:00:14है यहां पर ते होता है की सिक्स्थ अप्रैल

9:00:17को वर्ल्ड वाइड स्ट्रगल लॉन्च किया जाएगा

9:00:19और में मनी या मटेरियल किसी भी तरह से

9:00:23इंडियन रिसोर्सेस को इंपिरियलिस्ट वार में

9:00:26उसे करने का विरोध किया जाएगा प्लेन के

9:00:29अकॉर्डिंग सिक्स्थ अप्रैल को लॉन्च हुई

9:00:31स्ट्रगल में लोग बाढ़ चढ़कर भाग भी लेते

9:00:33हैं इसके बाद जुलाई में बस कोलकाता में एक

9:00:37और सत्याग्रह लॉन्च करने की कोशिश करते

9:00:39हैं यह सत्याग्रह स्मारक के रिमूवल के लिए

9:00:43किया जाना था लेकिन इससे पहले ही ब्रिटिश

9:00:46गवर्नमेंट बस को अरेस्ट कर लेती है

9:00:51जिसकी वजह से दिसंबर 1940 में ब्रिटिश

9:00:54इन्हें हाउस अरेस्ट में रख देते

9:00:57फिर खबर आई है की बोझ हाउस अरेस्ट से

9:00:59एस्केप कर चुके हैं 17th जनवरी 1941 को एक

9:01:04पठान के भेस में बस ब्रिटिश ऑफिसर को चकमा

9:01:08देते हुए हाउस अरेस्ट से फरार हो जाते हैं

9:01:10और 26 जनवरी 1941 को पेशावर पहुंच जाते

9:01:15हैं और फिर अफगानिस्तान के रास्ते रसिया

9:01:18चले जाते हैं बस इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल के

9:01:21लिए सोवियत रसिया की हेल्प लेने की कोशिश

9:01:23करते हैं लेकिन जून 1941 में रसिया वर्ल्ड

9:01:27वार में एलियंस को जॉइन कर लेट है मतलब अब

9:01:30वो खुद ब्रिटेन के साथ हो गया था इस बात

9:01:33से बोझ काफी निराश हो जाते हैं और यहां से

9:01:36जर्मनी के लिए प्रस्थान करते हैं उन्होंने

9:01:38उम्मीद किसी भी समय नहीं छोड़ी और निरंतर

9:01:42प्रयास करते रहे उनका मानना था की इंडिया

9:01:45को आजाद करने के लिए और ब्रिटिश

9:01:47इंपिरियलिस्ट फोर्सेस को हारने के लिए

9:01:49वर्ल्ड लेवल पर हेल्प लेनी जरूरी है

9:01:52जर्मनी में बस अपना नाम और लडो में

9:01:57और इटली के द्वारा कैप्चर किया गए इंडियन

9:01:59ओरिजन के वार बिजनेस को लेकर बस एक आर्मी

9:02:03फॉर्म करते हैं जिसे फ्री इंडिया लीजन कहा

9:02:06जाता है जर्मनी के ड्रेसएदिन में इसका

9:02:09ऑफिस बनाया जाता है जर्मनी के लोग बस को

9:02:12नेताजी नाम देते हैं और यहां पर ही फ्री

9:02:15इंडिया सेंटर में बस जय हिंद का नारा देते

9:02:18हैं

9:02:18जरूरी 1942 में बर्लिन रेडियो से बोझ

9:02:22रेगुलर ब्रॉडकास्ट शुरू करते हैं इसी आजाद

9:02:26हिंद रेडियो नाम दिया जाता है मे 1942 में

9:02:29बस की मुलाकात हिटलर से होती है इस मीटिंग

9:02:33के बाद बस को जर्मनी की इंटेंशंस पर डाउट

9:02:36हो जाता है इसके साथ ही बस हिटलर के

9:02:38रेसिस्ट व्यूज कभी विरोध करते हैं उन्हें

9:02:41लगे लगता है की इंडिया की आजादी के लिए

9:02:43जर्मन हेल्प से कम नहीं चलने वाला इसलिए

9:02:46फरवरी 1943 में छोड़ देते हैं और सबमरीन

9:02:51के द्वारा जापान चले जाते हैं और फिर वहां

9:02:53से सिंगापुर पहुंचने हैं सिंगापुर में

9:02:56नेताजी मस्त बिहार बहुत से इंडियन

9:02:58इंडिपेंडेंस मूवमेंट की कमांड अपने हाथों

9:03:01में लेते हैं लेकिन ये इंडियन नेशनल आर्मी

9:03:04का सेकंड फेस होता है और इसे समझना से

9:03:07पहले फर्स्ट फैज को समझना जरूरी है

9:03:10ओरिजन और फर्स्ट फैज ऑफ दी इंडियन नेशनल

9:03:13आर्मी दोस्तों इंडियन प्रिजनर्स अवार्ड

9:03:16यानी पी ओ ब्लू को लेकर ई क्रिएट करने का

9:03:19आइडिया ओरिजनली मोहन सिंह का था ये

9:03:22ब्रिटिश इंडियन आर्मी के ऑफिसर थे

9:03:24जिन्होंने मालय में रिट्रीटिंग ब्रिटिश

9:03:27आर्मी को जॉइन ना करने का फैसला किया था

9:03:29इसके बाद इन्होंने जापानी से हेल्प मांगी

9:03:33थी जैसे की हम जानते हैं की वर्ल्ड वार 2

9:03:35में ब्रिटेन उस और रसिया मिलकर लाड रहे थे

9:03:39जर्मनी और जापान के विरुद्ध जापान ने तेजी

9:03:42से बढ़ते हुए सऊदी एशिया में ब्रिटेन और

9:03:45उसके एलॉयज को हराया था और ब्रिटिश इंडियन

9:03:48सोल्जर को बिजनेस अवार्ड यानी पुज बना

9:03:51लिया था मोहन सिंह द्वारा हेल्प मांगने पर

9:03:54जापानी इंडियन पो ब्लू

9:03:57मोहन सिंह को सोप देते हैं जिन्हें मोहन

9:04:00सिंह इंडियन नेशनल आर्मी में रिक्रूट करने

9:04:02की कोशिश करते हैं बड़ी संख्या में पी ओ

9:04:05ब्लू इस आर्मी को जॉइन करने के लिए तैयार

9:04:08हो जाते हैं क्योंकि एक तो इनके मां में

9:04:11ब्रिटिश के अगेंस्ट गुस्सा था और दूसरा

9:04:13जबान में पी ओ डब्लू कैंपस की कंडीशंस

9:04:16बहुत खराब थी

9:04:17सितंबर 1942 में 16000 से ज्यादा सोल्जर

9:04:22के साथ इन की फर्स्ट डिवीजन तैयार हो जाति

9:04:25है लेकिन जल्दी ही इन के रोल को लेकर मोहन

9:04:29सिंह और जैपनीज के बीच डिफरेंस इमर्ज हो

9:04:31जाते हैं जापानी सिर्फ 2016 की एक टोकन

9:04:36फोर्स की रेस करना चाहते थे जबकि मोहन

9:04:38सिंह का प्लेन एक बड़ी आर्मी क्रिएट करना

9:04:41था

9:04:42है इसके साथ ही इन की ऑटोनॉमी को लेकर भी

9:04:45जापान और मोहन सिंह के विचार अलग-अलग थे

9:04:48इसलिए जापानी दिसंबर 1942 में मोहन सिंह

9:04:52को अपनी कस्टडी में ले लेते हैं और इसी के

9:04:55साथ इन का फर्स्ट फैज और हो जाता है अब

9:04:59बात करते हैं सेकंड फेस की जो सुभाष चंद्र

9:05:02बस के सिंगापुर पहुंचने से शुरू होता है

9:05:06दोस्तों आपको क्रांतिकारी रोशन बिहार

9:05:09बोस्टो याद ही होंगे इंडिया में इनकी

9:05:12रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को जब ब्रिटिशर्स

9:05:14ने फोर्सफुली से प्रेस किया तब 1915 में

9:05:17यह जुबान चले गए थे और ऐवेंंचुअली जबान के

9:05:21नेचरलाइज्ड सिटिजन बन जाते हैं यहां वह

9:05:24जापानी को इंडियन इंडिपेंडेंस मूवमेंट में

9:05:27इंटरेस्ट दिलाने के लिए बहुत एफर्ट्स करते

9:05:29हैं

9:05:34टोक्यो में इंडियन क्लब की फॉर्मेशन करते

9:05:36हैं और वेस्टर्न इंपिरियलिज्म पर लेक्चर

9:05:39भी देते हैं इसके बाद 1942 में जापानी

9:05:43गवर्नमेंट की हेल्प से टोक्यो में राष्ट्र

9:05:45बिहार बस इंडियन इंडिपेंडेंस लीग

9:05:48इनफॉरमेशन करते हैं और जब मोहन सिंह

9:05:50द्वारा इन क्रिएट की जाति है तो यह बहुत

9:05:52एक्साइड होते हैं और सिंगापुर के लिए

9:05:55निकाल जाते हैं जापानी बीएफ फैसला करते

9:05:57हैं की इन अब इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की

9:06:00लीडरशिप में ही कम करेगी इस तरह दिसंबर

9:06:031942 से बिहार बोसी इन कमांड संभल रहे

9:06:091943 में सुभाष चंद्र बस सिंगापुर पहुंच

9:06:13जाते हैं और उनकी मुलाकात रोष बिहार बस से

9:06:16होती है अब इंडियन इंडिपेंडेंस लीग

9:06:21सोप दी जाति है 25 अगस्त को नेताजी इन की

9:06:26सुप्रीम कमांडर बन जाते हैं बलिया में बस

9:06:28तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा

9:06:32का पॉपुलर नारा देते हैं नेताजी की

9:06:35पापुलैरिटी इतनी ज्यादा थी की सिर्फ पी ओ

9:06:37ब्लू ही नहीं बल्कि साउथ ईस्ट एशिया में र

9:06:40रहे लोकल इंडियन भी इन्हें जॉइन करने लगता

9:06:43हैं 12 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में

9:06:47प्रोविजनल गवर्नमेंट पर फ्री इंडिया की

9:06:49इनफॉरमेशन करते हैं जिसमें 8c चटर्जी को

9:06:52फाइनेंस

9:06:53को ब्रॉडकास्टिंग और लक्ष्मी स्वामी नाथन

9:06:57को वूमेन डिपार्मेंट दिया जाता है यह

9:07:00प्रोविजनल गवर्नमेंट ब्रिटेन और यूनाइटेड

9:07:02स्टेटस पर वोट डिक्लेअर कर देती है ए आओ

9:07:05उसके द्वारा इसे रिकॉग्नाइज्ड किया जाता

9:07:07है 6 नवंबर 1943 को जापानी आर्मी और

9:07:12निकोबार आईलैंड्स इन को दे देती है सुभाष

9:07:16चंद्र बस इनका नाम बदलकर शाहिद और स्वराज

9:07:19द्वीप रख देते हैं इन रिक्रूटर्स को ट्रेन

9:07:22किया जाता है और फंड्स कलेक्ट किया जाते

9:07:25हैं इन में रानी झांसी रेजीमेंट नाम से एक

9:07:29वूमेन रेजीमेंट भी फॉर्म की जाति है जरूरी

9:07:321944 में इन्हें का हेड क्वार्टर रंगून

9:07:36शिफ्ट कर दिया जाता है और यहां से आर्मी

9:07:38रिक्रूटर्स को इंडिया के लिए मार्च करना

9:07:40था उनका वार क्रि होता है चलो दिल्ली

9:07:45सिक्स्थ जुलाई 1944 को बोझ आजाद हिंद

9:07:49रेडियो से महात्मा गांधी को फादर ऑफ नेशन

9:07:52कहकर एड्रेस करते हैं और गांधीजी से

9:07:55इंडिया की आजादी की आखिरी लड़ाई के लिए

9:07:57आशीर्वाद मांगते हैं

9:07:59शाहनवाज की कमांड में इन की एक बटालियन

9:08:02जापानी आर्मी के साथ इंडो बर्मा फ्रंट पर

9:08:05भेज दी जाति है ये लोग इंफाल कैंपेन में

9:08:09पार्टिसिपेट करते हैं लेकिन यहां जापानी

9:08:11इंडियन के साथ डिस्क्रिमिनेटरी ट्रीटमेंट

9:08:14करने लगता हैं इंडियन सोल्जर को राशन नहीं

9:08:17दिया जाता है और उनसे जापानी यूनिट्स के

9:08:20लिए मेनियल क कराया जाता है इससे आए ने

9:08:23यूनिट होने लगती है इसके बाद भी 18 मार्च

9:08:271944 को इन बर्मा बॉर्डर क्रॉस करके

9:08:31इंडियन तेल पर अपना कम रखती है यहां से

9:08:35कोहिमा और इंफाल की तरफ बाढ़ जाति है 14

9:08:39अप्रैल को बहादुर ग्रुप के करनाल मलिक

9:08:42को होस्ट करते हैं जो आज मनी में है 3

9:08:46महीने तक मोहे रंग में मिलिट्री

9:08:48एडमिनिस्ट्रेशन ड्यूटी संभालती है लेकिन

9:08:51उसके बाद बड़ी संख्या में एलाइड फोर्सेस

9:08:53यहां पहुंचने लगती है

9:08:55एलिट फोर्सेस फेर फाइट के बाद इनक ये

9:08:59टेरिटरी रिटेल्म कर लेती है 18th जुलाई

9:09:021944 को इन की सभी ब्रिगेड विड्रोल शुरू

9:09:06कर देती है इसके बाद जापानी आर्मी की

9:09:09स्टडी रिट्वीट के साथ इन द्वारा इंडिया को

9:09:12लिब्रेट करने की साड़ी उम्मीद भी खत्म हो

9:09:14जाति है

9:09:15मिड 1945 तक यह रिट्वीट जारी रहती है

9:09:1915th अगस्त 1945 को सेकंड वर्ल्ड वार में

9:09:23जवान सुरेंद्र कर देता है और इसी के साथ

9:09:26इन का भी सुरेंद्र होता है रिपोर्ट के

9:09:29अनुसार 18th अगस्त 1945 को नेताजी की

9:09:33संदिग्ध हालात में टाइपिंग में एक और क्रश

9:09:36के दौरान मृत्यु हो जाति है कंक्लुजन

9:09:39दोस्तों इस तरह इन एक बहादुर प्रयास था

9:09:42इंडिया को आजादी दिलाने का इस बात डिबेट

9:09:46जरूर होती रहती है की अगर इंस सच में

9:09:48जापानी हेल्प से देश को आजाद कर लेती तो

9:09:51क्या होता कुछ लोगों का मानना है की

9:09:54जापानी इंपिरियलिज्म ब्रिटिश इंपिरियलिज्म

9:09:57से भी ज्यादा भयानक हो सकता था तो क्या

9:10:00फिर सुभाष चंद्र बस को एक और लड़ाई लड़नी

9:10:03पड़ती जापानी को इंडिया से बाहर करने के

9:10:05लिए शायद ऐसा हो सकता था लेकिन इन और

9:10:09जापान दोनों को ही मिलिट्री एडवेंचर्स में

9:10:12ब्रिटेन के खिलाफ सफलता नहीं मिलती

9:10:14हालांकि जब आई एन के सोल्जर को पी ओ ब्लू

9:10:18की तरह इंडिया वापस लाया जाता है तो इनके

9:10:20डिफेंस में एक बहुत बड़ा मूवमेंट खड़ा हो

9:10:23जाता है और इस मूवमेंट का जरूर एक

9:10:25इंपॉर्टेंट योगदान था देश की आजादी में इस

9:10:29तरह इनडायरेक्ट इन फ्रीडम मूवमेंट में

9:10:32अपना कंट्रीब्यूशन देती है इसके बड़े में

9:10:34अपनी नेक्स्ट वीडियो में हम विस्तार से

9:10:37चर्चा करेंगे

9:10:41दोस्तों अपनी पिछली दो वीडियो में हम

9:10:44सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान हुई इंडियन

9:10:46फ्रीडम स्ट्रगल की एक्टिविटीज को डिस्कस

9:10:48कर चुके हैं जिसमें क्यूट इंडिया मूवमेंट

9:10:51और इंडियन नेशनल आर्मी

9:10:53सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट कहीं जा शक्ति हैं

9:10:56आज हम आगे बढ़ते हुए देखेंगे की वर्ल्ड

9:10:58वार के खत्म होने के बाद क्या-क्या घटनाएं

9:11:01घटित होती हैं इस समय तक विश्व का और भारत

9:11:04का माहौल काफी बादल चुका था

9:11:06इंपिरियलिस्ट फोर्सेस इंक्लूडिंग ब्रिटेन

9:11:08अब वीक हो चुकी थी और इंडिया में

9:11:11नेशनलिज्म की फीलिंग काफी दीप हो चुकी थी

9:11:14इसी बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए हम

9:11:17सबसे पहले बात करते हैं शिमला कॉन्फ्रेंस

9:11:19की वे बिल ऑफर और शिमला कॉन्फ्रेंस

9:11:23दोस्तों इंडियन

9:11:41लीडर्स के साथ नेगोशिएशन स्टार्ट करने की

9:11:44परमिशन दे देते हैं

9:11:47जिसे विवेल ऑफर के नाम से जाना जाता है

9:11:51वे बिल ऑफर पर डिस्कशन करने के लिए शिमला

9:11:54कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति है और

9:11:56इसमें पार्टिसिपेट करने के लिए कांग्रेस

9:11:59लीडर्स को जून 1945 में ही जय से रिलीज कर

9:12:02दिया जाता है यह कॉन्फ्रेंस 25th जून से

9:12:0514th जुलाई 1945 तक चलती है

9:12:08वायसराय के ऑफर में इंडियन एग्जीक्यूटिव

9:12:11काउंसिल की फॉर्मेशन करना शामिल था जिसमें

9:12:13वायसराय और कमांडर इन के को छोड़कर बाकी

9:12:17सभी मेंबर्स इंडियन रहेंगे इसमें कास्ट

9:12:20हिंदू और मुस्लिम को इक्वल रिप्रेजेंटेशन

9:12:23दिया जाएगा साथ ही शेड्यूल कास्ट का भी

9:12:26अलग से रिप्रेजेंटेशन होगा इसके अलावा नए

9:12:29कॉन्स्टिट्यूशन पर डिस्कशन के दरवाजे भी

9:12:31खोल जाएंगे

9:12:33है लेकिन शिमला कॉन्फ्रेंस असफल रहती है

9:12:36क्योंकि जिन्ना डिमांड रख देते हैं की

9:12:38कैबिनेट के मुस्लिम मेंबर्स को नॉमिनेट

9:12:40करने का राइट सिर्फ लीग के पास ही होना

9:12:43चाहिए कांग्रेस इस डिमांड को एक्सेप्ट

9:12:45नहीं करती इसको एक्सेप्ट करने का मतलब

9:12:48होता की कांग्रेस अपने को सिर्फ कास्ट

9:12:51हिंदू की पार्टी मां लेती है रॉनिकली उसे

9:12:54समय कांग्रेस के प्रेसिडेंट खुद एक

9:12:56मुस्लिम ज्ञानी की मौलाना अब्दुल कलाम

9:12:58आजाद थे ऐसी सिचुएशन में वायसराय विवेल

9:13:02मीटिंग को ही खत्म कर देते हैं उनका मानना

9:13:05था की बिना लीग के कोलिशन गवर्नमेंट कम ही

9:13:08नहीं कर शक्ति यहां ब्रिटिश एक तरह से

9:13:11जिन्ना को बीटो दे देते हैं विवेल का यह

9:13:14स्टेप आगे चलकर बहुत बड़ी गलती साबित होने

9:13:16वाला था इसी बीच ब्रिटेन में इलेक्शंस हो

9:13:19चुके थे और क्लेमेंट अटली के नेतृत्व में

9:13:22लेबर पार्टी पावर में ए जाति है और ये

9:13:25जल्द से जल्द इंडियन इंडिपेंडेंस के इशू

9:13:27को सॉल्व करना चाहते थे लेकिन उससे पहले

9:13:30देश में एक और स्ट्रगल के लिए मंच तैयार

9:13:32हो रहा था

9:13:33एक तरफ तो शिमला कॉन्फ्रेंस फेल हो जाति

9:13:36है और दूसरी तरफ ब्रिटिश गवर्नमेंट इन के

9:13:39सोल्जर और ऑफिसर्स के अगेंस्ट ट्रायल

9:13:42अनाउंस कर देती है इसी के विरोध में एक

9:13:44बड़ा मूवमेंट शुरू होता है दी आई एन ए

9:13:48ट्रायल्स और एजीटेशन दोस्तों इन के सोल्जर

9:13:52और ऑफिसर्स को ब्रिटिशर्स ने बंदी बना

9:13:54लिया था और उनके अगेंस्ट कोर्ट में ट्रायल

9:13:57शुरू करने जा रहे थे क्योंकि ब्रिटिशर्स

9:13:59के अनुसार इन लोगों ने ब्रिटिश क्राउन के

9:14:02प्रति लॉयल्टी की ओटी को ब्रेक किया था और

9:14:04इसीलिए यह ट्वीटर्स थे लेकिन इंडिया की

9:14:08जनता स्वागत नेशनल हीरोज की तरह कर रही थी

9:14:11और जब तीन इन ऑफिसर्स शाहनवाज खान गुरदयाल

9:14:16सिंह ढिल्लों और प्रेम सहगल के खिलाफ

9:14:18दिल्ली के रेड फोर्ट में ट्रायल शुरू करने

9:14:20की घोषणा होती है तो इंडियन पब्लिक इसका

9:14:23जमकर विरोध करती है पूरे देश में इनकी

9:14:26रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हो

9:14:29जाते हैं कांग्रेस भी सितंबर 1945 मुंबई

9:14:32में अपनी पहले पोस्ट वार सेशन में सपोर्ट

9:14:35में रेजोल्यूशन पास करती है और इन

9:14:38प्रिजनर्स के डिफरेंस के लिए

9:14:44और आसफ अली जैसे लॉयर्स कोर्ट

9:14:50करती है इसका कम रिलीज होने वाले सोल्जर

9:14:54को स्मॉल

9:14:59करने की कोशिश करना भी था

9:15:02इन ट्रायल्स के अगेंस्ट होने वाले

9:15:04प्रोटेस्ट कई मैनो में ऐतिहासिक थे इससे

9:15:07पहले कोई भी कैंपेन इतनी हाय पेज और

9:15:10इंटेंसिटी के साथ नहीं हुआ था एजीटेशन को

9:15:13प्रेस से भी वाइड कवरेज मिलता है

9:15:16511 नवंबर को इन वीक और 12 नवंबर 1945 को

9:15:21इन दी सेलिब्रेट किया गया ये कैंपेन देश

9:15:25के एक बड़े हिस में फैलता है और डायवर्स

9:15:28सोशल ग्रुप और पॉलीटिकल पार्टी इसमें भाग

9:15:31लेते देखते हैं एजीटेशन के नर्व सेंटर्स

9:15:33तो दिल्ली बॉम्बे कोलकाता मद्रास यूनाइटेड

9:15:36प्रोविंस और पंजाब रहे थे लेकिन इसका असर

9:15:40कुर्ग बलूचिस्तान और असम जैसे दूर दराज के

9:15:43इलाकों में भी दिखता है

9:16:03गवर्नमेंट एम्पलाइज इन ए कैसे के लिए

9:16:05फंड्स कलेक्ट करते हैं लॉयलिस्ट ब्रिटिश

9:16:08सरकार से अच्छे इंडो ब्रिटिश रिलेशंस का

9:16:11हवाला देकर इन ट्रायल्स को आबंदों करने की

9:16:14अपील करते हैं

9:16:15आर्म्ड फोर्सेस भी इंस सोल्जर के प्रति

9:16:18सिंपैथी शो करते हैं यह लोग मीटिंग्स

9:16:20अटेंड करते हैं फंड्स में कंट्रीब्यूट

9:16:22करते हैं और साथ ही रिलीज होने वाले

9:16:25सोल्जर को यूनिफॉर्म में रिसीव भी करते

9:16:27हैं इसी समय ब्रिटेन को भी इन इशू की

9:16:30पॉलीटिकल साइनिफिकेंस समझ आने लगती है और

9:16:33इसीलिए कोर्ट मार्शल में गिल्टी कार दिए

9:16:35जान के बावजूद 3 जनवरी 1946 को इन ऑफिसर्स

9:16:40को फ्री कर दिया जाता है ब्रिटिश

9:16:43गवर्नमेंट के इस चेंज्ड एटीट्यूड के पीछे

9:16:45कुछ इंपॉर्टेंट करण थे जिन्हें समझना

9:16:48जरूरी है रीजंस बिहाइंड चेंज्ड एटीट्यूड

9:16:52ऑफ डी ब्रिटिश दोस्तों वर्ल्ड वार और होने

9:16:55के बाद से ही इंडिया को लेकर ब्रिटिश

9:16:58गवर्नमेंट के एटीट्यूड में बदलाव देखने को

9:17:00मिलता है इसका एक करण तो हम आपको शुरू में

9:17:03ही बता चुके हैं वो था ब्रिटेन में लेबर

9:17:06पार्टी का पावर में आना इसकी बहुत से

9:17:08मेंबर्स कांग्रेस की डिमांड्स को सपोर्ट

9:17:10करते थे इसके अलावा वार के बाद वर्ल्ड में

9:17:14बैलेंस ऑफ पावर भी चेंज हो चुका था अब

9:17:17ब्रिटेन नहीं बल्कि उस और सोवियत यूनियन

9:17:19दुनिया की बिग पावर्स बन गए थे और ये

9:17:22दोनों ही इंडिया की फ्रीडम की डिमांड को

9:17:25सपोर्ट कर रहे थे वार में ब्रिटेन की जीत

9:17:28भले ही हुई थी लेकिन उसकी इकोनामिक और

9:17:30मिलिट्री पावर को बहुत बड़ा नुकसान भी हुआ

9:17:32था खुद को रिहैबिलिटेशन करने में ब्रिटेन

9:17:35को अभी सालों लगे वाले थे ब्रिटिश सोल्जर

9:17:39भी वार के बाद तक चुके थे और इंडियन

9:17:41फ्रीडम स्ट्रगल को सरप्राइज करने के लिए

9:17:43और ज्यादा समय अपने घर से दूर इंडिया में

9:17:46बिताने के लिए तैयार नहीं थे इसके साथ ही

9:17:49नेशनल स्ट्रगल को सरप्राइज करने के लिए

9:17:51ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट अब सिविल

9:17:54एडमिनिस्ट्रेशन और आर्म्ड फोर्सेस के

9:17:56इंडियन पर्सनाइल पर भी पुरी तरह

9:18:02बायोटीक इतिहास इंडियन आर्मी के रैंक्स

9:18:05में भी इंटर कर चुके हैं इसी समय फरवरी

9:18:081946 बॉम्बे में इंडियन लेवल रेटिंग्स का

9:18:11रिवॉल्ट भी होता है ये ब्रिटिश कफन के लिए

9:18:14लास्ट नल की तरह कम करता है इसको डिटेल

9:18:17में हम अपने नेक्स्ट क्षेत्र में समझेंगे

9:18:20ब्रिटिश एटीट्यूड में चेंज का सबसे बड़ा

9:18:22करण था इंडियन पीपल का कॉन्फिडेंट और

9:18:25डिटरमाइंड मोड जनता फॉरेन रूल का हमिलिएशन

9:18:30और लंबे समय तक टॉलरेट नहीं कर शक्ति थी

9:18:3419456 के बीच नवल मुटनी और इन एजीटेशन के

9:18:38अलावा पूरे देश में न्यू मॉडल एजीटेशन

9:18:41स्ट्रीक्स और डेमोंसट्रेशंस भी होते हैं

9:18:43ऐसा लगे लगा था की लोग आजादी मिलने तक अब

9:18:47कोई रेस्ट नहीं करेंगे

9:18:55जहां हड़ताल एन की गई हो जुलाई 1946 में

9:19:00पोस्ट और टेलीग्राफ वर्कर्स द्वारा

9:19:02स्ट्राइक की जाति है साउथ इंडिया में

9:19:05अगस्त 1946 में रेलवे वर्कर्स स्ट्राइक पर

9:19:08चले जाते हैं

9:19:15है इसी दौरान 1946 की शुरुआत में

9:19:18प्रोविंशियल असेंबलीज के इलेक्शन भी होते

9:19:20हैं इसमें जनरल सीट पर कांग्रेस को

9:19:23ओवरव्हेलमिंग मेजॉरिटी मिलती है वहीं

9:19:26मुस्लिम के लिए रिजर्व्ड सिट्स पर मुस्लिम

9:19:28लीग का प्रदर्शन शानदार राहत है इलेक्शन

9:19:31रिजल्ट्स एक मेजर पॉलीटिकल डेवलपमेंट

9:19:33साबित होते हैं इन सभी रीजंस को ध्यान में

9:19:36रखते हुए अटली गवर्नमेंट फरवरी 1946 में

9:19:40अनाउंस करती है की एक हाय पावर मिशन

9:19:43इंडिया भेजो जाएगा इसे कैबिनेट मिशन के

9:19:46नाम से जाना जाता है लेकिन कैबिनेट मिशन

9:19:48पर डिस्कशन करने से पहले फरवरी 1946 में

9:19:51ही हुई एक और बड़ी घटना यानी की नवल मुटनी

9:19:55की चर्चा कर लेते हैं

9:20:00दोस्तों फरवरी 1946 में ब्रिटिश राज को एक

9:20:05बड़ा चैलेंज फेस करना पड़ता है और वो था

9:20:07रॉयल इंडियन नेवी में ओपन मुटने इसकी

9:20:11शुरुआत 18 फरवरी को बंबई से होती है यहां

9:20:14पर नीचे मायास तलवार पर तैनात 1100 नवल

9:20:18रेटिंग्स खराब खाने और रेसियल

9:20:20डिस्क्रिमिनेशन के इशू पर हंगर स्ट्राइक

9:20:22शुरू कर देते हैं

9:20:24ई डेट नाम की रेटिंग को ह्मिस तलवार पर

9:20:28क्यूट इंडिया लिखने के लिए अरेस्ट कर लिया

9:20:30जाता है इसके बाद रेटिंग्स का गुस्सा और

9:20:33भी ज्यादा बाढ़ जाता है

9:20:47मुंबई और कोलकाता शहर पैरालाइज जैसी

9:20:50स्थिति में पहुंच जाते हैं जगह मीटिंग्स

9:20:53और प्रोफेशन होते हैं पूरे देश में हड़ताल

9:20:56का सिलसिला शुरू हो जाता है

9:20:58एक्सपीरियंस पर अटैक होने लगता हैं साथ ही

9:21:00बहुत से पुलिस स्टेशंस पोस्ट ऑफिसेज शॉप्स

9:21:03रेलवे स्टेशंस बैंक्स ईटीसेटरा को जल दिया

9:21:06जाता है रॉयल इंडियन एयरफोर्स की बॉम्बे

9:21:09पुणे कोलकाता जसोल और अंबाला यूनिट्स भी

9:21:13सिंपाठ्ठेटिक स्ट्रीक्स करती हैं वहीं

9:21:16जबलपुर के सिपाही स्ट्राइक पर जाते हैं

9:21:18खाने का मतलब यह है की सभी फोर्सेस की तरफ

9:21:21से ब्रिटिश अथॉरिटी को चैलेंज मिलन शुरू

9:21:24हो जाता है और इसमें आम जनता भी इनका साथ

9:21:27देती है और जैसे की हम पहले ही डिस्कस कर

9:21:30चुके हैं इस मुटनी का बड़ा रोल राहत है

9:21:33ब्रिटिश गवर्मेंट के एटीट्यूड को चेंज

9:21:35करने में इसके बाद समझ गए की अब नेटिव

9:21:40फोर्सेस पर पुरी तरह रिलायंस नहीं किया जा

9:21:42सकता और नेशनलिज्म की भावना ने दीप रूट

9:21:45बना ली हैं कंट्री में आई वापस कैबिनेट

9:21:48मिशन की तरफ चलते हैं

9:21:51कैबिनेट मिशन दोस्तों कैबिनेट मिशन के तहत

9:21:543 ब्रिटिश कैबिनेट मिनिस्टर्स को इंडिया

9:21:57भेजो गया था इसके अध्यक्ष पाठक लॉरेंस थे

9:22:00और बाकी दो मेंबर्स थे स्टेफोर्ड ग्रिप्स

9:22:03और एव सिकंदर

9:22:05इनका कम पीसफुल तरीके से ट्रांसफर ऑफ पावर

9:22:08की नेगोशिएशंस करना था

9:22:1024th मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन दिल्ली

9:22:14पहुंच जाता है सभी इंडियन पार्टी और ग्रुप

9:22:17की लीडर्स के साथ इंटिरिम गवर्नमेंट और नई

9:22:20कॉन्स्टिट्यूशन के इशू पर लंबे डिस्कशन

9:22:23होते हैं इसके बाद मिशन मे 1946 में अपना

9:22:27प्लेन सामने रखना है

9:22:30इस प्लेन के में पॉइंट कुछ इस तरह थे

9:22:34पाकिस्तान की डिमांड को रिजेक्ट कर देता

9:22:37है

9:22:44हिंदू मेजॉरिटी प्रोविंस मद्रास मुंबई

9:22:47सेंट्रल प्रोविंस यूनाइटेड प्रोविंस बिहार

9:22:50और उड़ीसा को रखा गया था क्षेत्र बी में

9:22:53मुस्लिम मेजॉरिटी प्रोविंस यानी की पंजाब

9:22:56नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर

9:23:04तीनों ग्रुप के मेंबर्स अलग से ग्रुप का

9:23:07कॉन्स्टिट्यूशन डिसाइड करेंगे इसी के साथ

9:23:103 टियर स्ट्रक्चर भी प्रपोज किया गया

9:23:13प्रोविंशियल क्षेत्र और यूनियन लेवल पर

9:23:16अलग-अलग एग्जीक्यूटिव और लेजिस्लेचर होंगे

9:23:19अगला इंपॉर्टेंट पॉइंट था की

9:23:22कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली के मेंबर्स को

9:23:23प्रोविंशियल असेंबली द्वारा इलेक्ट्रिक

9:23:25किया जाएगा

9:23:26एक आम सेंटर होगा जो डिफेंस कम्युनिकेशन

9:23:30और एक्सटर्नल अफेयर्स को कंट्रोल करेगा

9:23:32इसके अलावा प्रोविंस को फूल ऑटोनॉमी दी

9:23:36जाएगी और रिजिजू पावर्स भी उनके पास

9:23:38रहेंगे

9:23:39प्रिंसली स्टेटस फ्री होंगे सक्सेसर

9:23:42गवर्मेंट या ब्रिटिश गवर्मेंट के साथ किसी

9:23:44भी अरेंजमेंट में इंटर होने के लिए फर्स्ट

9:23:47जनरल इलेक्शंस के बाद प्रोविंस ग्रुप से

9:23:50बाहर आने के लिए फ्री होंगे और 10 साल बाद

9:23:53ग्रुप या यूनियन कॉन्स्टिट्यूशन को

9:23:55रिकेसिटर करने की डिमांड भी प्रोविंस रख

9:23:58सकते हैं और कॉन्स्टिट्यूशन बने तक

9:24:01गवर्नमेंट फॉर्म की जाएगी जिसके मेंबर

9:24:04कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली से ही चुने जाएंगे

9:24:07कैबिनेट मिशन प्लेन को मुस्लिम लीग और

9:24:10कांग्रेस अपने अपने तरीके से इंटरेक्ट

9:24:13करते हैं कांग्रेस के अनुसार कैबिनेट मिशन

9:24:16ने पाकिस्तान की डिमांड को जानकारी दिया

9:24:18था वही लीग का मानना था की ग्रुपिंग के

9:24:22प्रोविजन में पाकिस्तान की डिमांड भी

9:24:24एंप्लॉय है इसके अलावा कांग्रेस का मानना

9:24:27था की ग्रुपिंग का प्रोविजन ऑप्शनल है वही

9:24:31मुस्लिम लीग के अनुसार ये मैंडेटरी था

9:24:33इसलिए इनिशियली दोनों ही इसको एक्सेप्ट कर

9:24:37लेते हैं

9:24:38सेवंथ जुलाई को कांग्रेस कमेटी की मीटिंग

9:24:41में जवाहरलाल नेहरू कहते हैं की उन्होंने

9:24:44सिर्फ कांस्टीट्यूएंट असेंबली में जाना

9:24:46एक्सेप्ट किया है बाकी और किसी प्रोविजन

9:24:48को माने के लिए वो बाउंड नहीं है इसका

9:24:51मतलब ये था की असेंबली एक सावरेन बॉडी

9:24:54होगी और खुद रूल्स ऑफ प्रोसीजर पर फैसला

9:24:57लगी नेहरू की अनाउंसमेंट के बाद 29th

9:25:00जुलाई 1946 को लीग की तरफ से मिशन की

9:25:04एक्सेप्टेंस को जिन्ना विड्रॉ कर लेते हैं

9:25:06और 16th अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन दे

9:25:11मनाने की घोषणा कर देते हैं जिसके बाद

9:25:14देशभर में स्पेशली कोलकाता में कम्युनल

9:25:17राइट्स शुरू हो जाते हैं नारा दिया जाता

9:25:20है लेकर रहेंगे पाकिस्तान लड़के लेंगे

9:25:23पाकिस्तान इसी बीच सेकंड सितंबर 1946 को

9:25:27लीग के मेंबर्स के बिना ही इंटिरिम

9:25:30गवर्नमेंट फॉर्म की जाति है और नेहरू इसकी

9:25:32दे फैक्टो हेड बनते हैं लेकिन देश में

9:25:35सिविल वार नर्स शुरू हो जाए इस डर से

9:25:37वायसराय लॉर्ड केवल लीग के अपिजमेंट के

9:25:40प्रयास करते हैं और 26 अक्टूबर 1946 को

9:25:44लीग भी इंटिरिम गवर्नमेंट जॉइन कर लेती है

9:25:48लीग ने इंटिरिम गवर्नमेंट जॉइन जरूर कर ली

9:25:51थी लेकिन अपनी डायरेक्ट एक्शन की नीति को

9:25:54भी उन्होंने नहीं छोड़ था इसके साथ ही लीग

9:25:57के मेंबर्स इंटिरिम गवर्नमेंट के कम में

9:25:59कॉपर भी नहीं कर रहे थे उनकी कोशिश हमेशा

9:26:02डिस्क्रिप्शन क्रिएट करने की रहती थी

9:26:04दोस्तों इधर कांग्रेस और मुस्लिम लीग में

9:26:08टसल हर दिन बाढ़ रहा था और उधर ब्रिटेन के

9:26:11पीएम क्लाइमेट

9:26:12में एक इंपॉर्टेंट घोषणा करते हैं

9:26:16डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस

9:26:1828 फरवरी 1947 को ब्रिटिश पीएम अटेली

9:26:23अनाउंस करते हैं की 30th जून 1948 तक

9:26:26ब्रिटिश इंडिया छोड़ देंगे और साथ ही

9:26:29माउंटबेटन को नया वायसराय अप्वॉइंट कर

9:26:32दिया जाता है माउंटबेटन के इंडिया आने पर

9:26:35जहां एक तरफ ट्रांसफर ऑफ पावर पर

9:26:38नेगोशिएशंस तेज हो जाति हैं वही यह भी साफ

9:26:41हो जाता है की पार्टीशन इनएविटेबल बन चुका

9:26:43है क्या रीजन थे की इंडियन लीडर्स

9:26:47पार्टीशन के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी

9:26:49चर्चा हम अपने अगले वीडियो में विस्तार से

9:26:51करेंगे और साथ ही जानेंगे की फाइनल

9:26:54ट्रांसफर ऑफ पावर किस तरह से होता है

9:26:57कंक्लुजन

9:26:59दोस्तों इस वीडियो में हमने 1940 में हुए

9:27:03इंपॉर्टेंट इवेंट्स को कर कर लिया है वे

9:27:06बिल ऑफर और शिमला कॉन्फ्रेंस से लेकर इन

9:27:09एजीटेशन रिउतनी और कैबिनेट मिशन तक की

9:27:13डीटेल्स हमने समझ ली हैं क्योंकि इन

9:27:15इवेंट्स को जान लेने के बाद ही हम फाइनल

9:27:18ट्रांसफर ऑफ पावर यानी की इंडियन

9:27:20इंडिपेंडेंस को बेहतर समझ सकते हैं साथ ही

9:27:24हम ब्रिटिशर्स के चेंज्ड एटीट्यूड के पीछे

9:27:27के करण भी जान चुके हैं जिनकी वजह से आखिर

9:27:301947 में वह इंडियन इंडिपेंडेंस की

9:27:33डिक्लेरेशन करने के लिए मजबूर होते हैं

9:27:37इंडिपेंडेंस और पार्टीशन दोस्तों अपनी

9:27:40पिछली वीडियो में हमने देखा था की 28

9:27:43फरवरी 1947 को ब्रिटिश गवर्नमेंट ने

9:27:47इंडिया को जून 1948 से पहले आजादी देने की

9:27:50घोषणा कर दी थी और इस प्रोसेस को जल्द से

9:27:53जल्द कंप्लीट करने के लिए लॉर्ड माउंटबेटन

9:27:56को इंडिया का वायसराय बनाया गया

9:28:12आज की वीडियो में हम देखेंगे की वायसराय

9:28:15माउंटबेटन किस तरह ट्रांसफर ऑफ पावर की

9:28:17निकोशियशंस को आगे लेकर जाते हैं और क्यों

9:28:20इंडियन लीडर्स पार्टीशन को एक्सेप्ट कर

9:28:23लेते हैं आई शुरू करते हैं

9:28:27टसर बिटवीन मुस्लिम लीग और कांग्रेस

9:28:30दोस्तों 1940 के लाहौर सेशन में मुस्लिम

9:28:34लीग ने पहले बार एक सेपरेट नेशन यानी की

9:28:37पाकिस्तान की डिमांड राखी थी और यहां से

9:28:40जीना उनके सोल स्पोक्सपर्सन की तरह कम

9:28:43करते हैं अब लीग और जिन्ना के लिए मुस्लिम

9:28:46को नेशनल आईडेंटिटी और सेल्फ डिटरमिनेशन

9:28:49का राइट देना नॉन नेगोशिएबल मिनिमम डिमांड

9:28:52बन चुकी थी

9:28:53जिन्होंने 1942 मिशन को भी इसीलिए रिजेक्ट

9:28:57कर दिया था क्योंकि उसमें मुस्लिम के

9:28:59सेल्फ डिटरमिनेशन के राइट को रिकॉग्नाइज्ड

9:29:02नहीं किया गया था इसके बाद 1945

9:29:09दे देते हैं तो उनके हौसले और ज्यादा

9:29:12बुलंद हो जाते हैं

9:29:13है इसके बाद कैबिनेट मिशन को लीग पहले तो

9:29:16एक्सेप्ट कर लेती है क्योंकि उसके अनुसार

9:29:18ग्रुपिंग के प्रोविजन का मतलब पाकिस्तान

9:29:21की डिमांड को मानना ही था लेकिन जब

9:29:24कांग्रेस की तरफ से नेहरू साफ करते हैं की

9:29:27वो सिर्फ कांस्टीट्यूएंट असेंबली के

9:29:29प्रोविजन को एक्सेप्ट कर रहे हैं ना की

9:29:31ग्रुपिंग को तो मुस्लिम लीग ना सिर्फ

9:29:33कैबिनेट मिशन को जानकारी देती है बल्कि

9:29:36डायरेक्ट एक्शन की कॉल भी देती है इसकी

9:29:39वजह से देश में हिंसा बढ़नी जा रही थी

9:29:41कम्युनल हार्मनी को बनाए रखना मुश्किल हो

9:29:44गया था यह स्थिति कैसे ए गई थी

9:29:46कम्युनिकेशन इतना ज्यादा कैसे फैला था

9:29:49इसको हम अलग से डिटेल वीडियो में कर

9:29:52करेंगे यहां इतना समझना जरूरी है की दिन

9:29:56रोज देश का माहौल बिगड़ रहा था और दूसरी

9:29:59तरफ ब्रिटिश को देश छोड़ने की जल्दी थी वो

9:30:03किसी भी तरह पावर ट्रांसफर करके यहां से

9:30:06जाना चाहते थे

9:30:07उनका अब कोई भी इंटरेस्ट नहीं था देश की

9:30:10कम्युनल माहौल को सुलझाने का इसलिए उनकी

9:30:13तरफ से कोई ज्यादा कोशिश भी नहीं की जा

9:30:15रही थी स्थिति को संभालने की ऐसी स्थिति

9:30:19में यह साफ हो जाता है की अगर देश को

9:30:21सिविल वार की सिचुएशन से बचाना है तो

9:30:24आजादी के साथ पार्टीशन भी एक्सेप्ट करना

9:30:26पड़ेगा

9:30:32माउंट पैटर्न प्लेन

9:30:34दोस्तों अप्रैल 1947 में कांग्रेस

9:30:37प्रेसिडेंट कृपलानी वायसराय से कहते हैं

9:30:40की बैटल की अपेक्षा हम उन्हें पाकिस्तान

9:30:43देने के लिए तैयार हैं शर्ट बस ये है की

9:30:46आप बंगाल और पंजाब का विभाजन फेयर मैनर

9:30:50में होने दें

9:30:51माउंटबेटन भी तुरंत डिसीजंस लेने के लिए

9:30:54तैयार थे उन्हें ब्रिटिश गवर्मेंट से साफ

9:30:56आदेश मिला था की जल्द से जल्द इंडिया को

9:30:59क्यूट किया जाए इसी के साथ इंडिया आते ही

9:31:02उन्हें समझ ए गया था की कैबिनेट मिशन तो

9:31:05एक डेड हॉर्स बन चुका है और जीना एक

9:31:08सावरेन स्टेट से कुछ भी कम पर सेटल होने

9:31:10वाले नहीं हैं इसलिए यूनाइटेड इंडिया को

9:31:13पावर हैंडोवर करना नामुमकिन सा हो गया है

9:31:16ऐसे में अप्रैल 1947

9:31:20बनाते हैं जिसे प्लेन कहा जाता है इस

9:31:25प्लेन के अकॉर्डिंग पंजाब और बंगाल का

9:31:27पार्टीशन किया जाना था और पावर प्रोविंस

9:31:30और सब प्रोविंस को ट्रांसफर की जानी थी यह

9:31:33प्रोविंस फ्री थे इंस्टिट्यूट असेंबली के

9:31:36किसी भी ग्रुप को जॉइन करने के लिए इसके

9:31:38अलावा इंटिरिम गवर्नमेंट को जून 1948 तक

9:31:42पावर में रहना था स्ट्रांग सेंटर की

9:31:44अब्सेंस में प्रोविंस को पावर दे देना

9:31:46इंडिया में बालकनाइजेशन को जन्म दे सकता

9:31:49था मतलब की यूरोप के बालकान रीजन की तरह

9:31:52देश छोटी-छोटी हसन में विभाजित हो जाता है

9:31:55इसीलिए नेहरू इस प्लेन को पुरी तरह

9:31:58रिजेक्ट कर देते हैं उनके अनुसार यह प्लेन

9:32:01बिना किसी सिक्योरिटी

9:32:03और स्टेबिलिटी के सिर्फ डिस्ट्रक्टिव

9:32:06टेंडेंसी को जन्म देने वाला है

9:32:08ऐसी सिचुएशन

9:32:10एक अल्टरनेटिव प्लेन प्रपोज करते हैं इस

9:32:14प्लेन को उन्हें के नाम पर माउंटबेटन

9:32:16प्लेन बोला जाता है यह प्लेन थर्ड जून

9:32:191947 को अनाउंस किया जाता है इसके अनुसार

9:32:22पावर दो सक्सेसर डोमिनियन गवर्नमेंट स्कूल

9:32:25ट्रांसफर की जाएगी इंडिया और पाकिस्तान

9:32:28इसके साथ ही पावर ट्रांसफर की डेट को जून

9:32:321948 से आगे बढ़कर

9:32:34तीन अगस्त 1947 भी कर दिया जाता है

9:32:38प्लेन में पंजाब और बंगाल का पार्टीशन

9:32:41प्रपोज किया जाता है

9:32:43हिंदू मेजॉरिटी प्रोविंस जो पहले ही

9:32:46एक्जिस्टिंग इंस्टिट्यूट असेंबली को

9:32:48एक्सेप्ट कर चुकी हैं उन्हें कोई भी चॉइस

9:32:51नहीं दी जाति वही मुस्लिम मेजॉरिटी

9:32:53प्रोविंस यानी की बंगाल पंजाब सिंह नॉर्थ

9:32:56वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और बलूचिस्तान को

9:32:59डिसाइड करना था की वो एक्जिस्टिंग

9:33:01इंस्टिट्यूट असेंबली को जॉइन करेंगे या

9:33:04फिर पाकिस्तान के लिए बने वाली अलग और नई

9:33:06असेंबली को यह डिसीजन प्रोविडेंशियल

9:33:09असेंबलीज को लेना था नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर

9:33:12प्रोविंस में रेफरेंडम किया जाना था और

9:33:15बलूचिस्तान के कैसे में क्वेटा

9:33:17म्युनिसिपालिटी और ट्राईबल रिप्रेजेंटेटिव

9:33:19के साथ काउंसिल्टेशंस हनी थी अगले ही दिन

9:33:22में नेहरू जी ना और सिक्स के बिहाफ पर

9:33:25सरदार बलदेव सिंह इस प्लेन को इंडस कर

9:33:28देते हैं इस तरह ट्रांसफर और पावर के लिए

9:33:31तेजी से बढ़ाना शुरू हो जाता है यहां एक

9:33:34सवाल यह उठाता है की आखिर कांग्रेस ने

9:33:36डोमिनियन स्टेटस को क्यों एक्सेप्ट कर

9:33:39लिया था और दूसरा है की पावर ट्रांसफर की

9:33:42डेट को ब्रिटिश ने क्यों एडवांस कर दिया

9:33:45था आई एक ही करके दोनों सवालों के जवाब

9:33:48जानते हैं सबसे पहले बात करते हैं की

9:33:50कांग्रेस ने डोमिनियन स्टेटस को क्यों

9:33:53एक्सेप्ट किया

9:33:55वही कांग्रेस एक्सेप्टेड डोमिनियन स्टेटस

9:33:59दोस्तों 1929 की लाहौर कांग्रेस की

9:34:02स्पिरिट के अगेंस्ट जाते हुए कांग्रेस

9:34:04डोमिनियन स्टेटस को एक्सेप्ट करने के लिए

9:34:07तैयार हो जाति है क्योंकि पहले तो इससे

9:34:10पीसफुल और क्विक ट्रांसफर ऑफ पावर इन होना

9:34:12था दूसरा इस समय बन रही एक्सप्लोसिव

9:34:17सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए कांग्रेस

9:34:19के पास अथॉरिटी होना जरूरी हो गया था और

9:34:22तीसरा रीजन था की इससे ब्यूरो कृषि और

9:34:25आर्मी में कंटिन्यूआईटी मेंटेन र शक्ति थी

9:34:27जिसकी बहुत जरूर थी इन सभी रीजंस की वजह

9:34:31से कांग्रेस 1947 में डोमिनियन स्टेटस को

9:34:35एक्सेप्ट कर लेती है अब बात करते हैं की

9:34:38ब्रिटिशर्स को इतनी जल्दी क्या थी पावर

9:34:40ट्रांसफर करने की

9:34:42नेशनल फॉरेन अर्ली डेट अगस्त 15 1947

9:34:47दोस्तों ब्रिटिशर्स जून 1948 की जगह 15th

9:34:52अगस्त 1947 को ही पावर ट्रांसफर करने का

9:34:55बड़ा डिसीजन लेते हैं इसकी पीछे पहले करण

9:34:58था की वो चाहते थे की कांग्रेस डोमिनियन

9:35:01स्टेटस पर एग्री हो जाए उन्हें लगता था की

9:35:04जल्दी पावर ट्रांसफर करने से कांग्रेस

9:35:07डोमिनियन स्टेटस को भी मां लगी और ऐसा हुआ

9:35:10भी इसके साथ ही ब्रिटिश कम्युनल सिचुएशन

9:35:13के रिस्पांसिबिलिटी से भी एस्केप करना छह

9:35:15रही थी जैसा की हम पहले ही बता चुके हैं

9:35:18की ब्रिटिश किसी भी तरह कम्युनल राइट्स

9:35:21में इंगेज नहीं होना चाहते थे जब उन्हें

9:35:24इंडिया से जाना ही था तो वो क्यों अपने

9:35:27रिसोर्सेस और जान यहां जोखिम में डालें

9:35:30इसलिए वह फैसला लेते हैं की इस सिचुएशन से

9:35:33इंडियन को ही निपटाने दिया जाए अब बात

9:35:36करते हैं फाइनल ट्रांसफर ऑफ पावर

9:35:41फाइनल ट्रांसफर विद पार्टीशन

9:35:44दोस्तों 20th जून को बंगाल असेंबली और

9:35:4723rd जून को पंजाब असेंबली पार्टीशन के

9:35:49फीवर में फैसला करती हैं वेस्ट पंजाब और

9:35:52ईस्ट बंगाल पाकिस्तान को जॉइन करने वाले

9:35:55थे वहीं बाकी एरियाज यानी की ईस्ट पंजाब

9:35:59और वेस्ट बंगाल इंडिया में ही रहने वाले

9:36:01थे इसकी कुछ समय बाद ही सिंह बलूचिस्तान

9:36:05और फिर नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस भी

9:36:08पाकिस्तान जॉइन करने का फैसला लेते हैं

9:36:10माउंटबेटन का अगला टास्क था दो बाउंड्री

9:36:14कमीशन को अप्वॉइंट करना एक बंगाल के लिए

9:36:17और दूसरी पंजाब के लिए इंटरनेशनल

9:36:20फ्रंटियर्स को दिल्ली नित करने के लिए यह

9:36:23दोनों ही कमिश्नर सीरियल रेड क्लिफ के

9:36:25नेतृत्व में अप्वॉइंट की जाति हैं और इसे

9:36:28यह कम करने के लिए सिक्स वीक से ज्यादा का

9:36:31समय नहीं मिलता

9:36:33जो बाउंड्रीज अवार्ड के द्वारा

9:36:35प्रिसक्राइब की जाति हैं उनके बड़े में

9:36:38एडमिट करते हैं की वो दोनों सीड्स के

9:36:41लाखों लोगों के लिए पीड़ा का करण बने वाली

9:36:44थी

9:36:44फिफ्थ जुलाई 1947 को माउंटबेटन प्लेन पर

9:36:48बेस्ड इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट को ब्रिटिश

9:36:51पार्लियामेंट द्वारा पास कर दिया जाता है

9:36:53इस एक्ट को 18th जुलाई 1947 को रॉयल एसेंट

9:36:58भी मिल जाति है और फाइनली 15th अगस्त 1947

9:37:02को एक्ट इंप्लीमेंट कर दिया जाता है

9:37:05एक्ट के अकॉर्डिंग 15th अगस्त 1947 को दो

9:37:10इंडिपेंडेंस डोमिनियंस इंडिया और

9:37:13पाकिस्तान का क्रिएशन होता है दोनों ही

9:37:16डोमिनियंस के पास गवर्नर जनरल रहेगा जिसकी

9:37:19रिस्पांसिबिलिटी होगी इस एक्ट को

9:37:21इफेक्टिवली ऑपरेट करना दोनों नए डोमिनियंस

9:37:24की कांस्टीट्यूएंट असेंबली उसे डोमिनियन

9:37:26के लिए लेजिसलेटिव पावर्स को एक्सरसाइज

9:37:28करेंगे एक्जिस्टिंग सेंट्रल लेजिसलेटिव

9:37:31असेंबली और काउंसिल ऑफ स्टेटस ऑटोमेटेकली

9:37:34डिसऑर्डर हो जाएंगे ट्रांजिशनल पीरियड में

9:37:36यानी की जब तक कांस्टीट्यूएंट असेंबली नया

9:37:39कॉन्स्टिट्यूशन अडॉप्ट नहीं कर लेती तब तक

9:37:42दोनों डोमिनियंस में शासन गवर्नमेंट ऑफ

9:37:45इंडिया एक्ट 1935 की अकॉर्डिंग किया जाएगा

9:37:491947 के एक्ट के प्रोविजंस के अनुसार 14th

9:37:53अगस्त को पाकिस्तान और 15th अगस्त को

9:37:55इंडिया को अपनी फ्रीडम मिलती है जिन्ना

9:37:59पाकिस्तान के फर्स्ट गवर्नर जनरल बनते हैं

9:38:01वहीं इंडिया लॉर्ड माउंटबेटन को ही गवर्नर

9:38:05जनरल ऑफ इंडिया की तरह कंटिन्यू करने के

9:38:07लिए कहता है

9:38:0815th अगस्त 1947 मिडनाइट के समय इंडिया की

9:38:13कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली का स्पेशल सेशन

9:38:15होता है और नेहरू अपनी फेमस ट्वीट विथ

9:38:18डेस्टिनी स्पीच देते हैं दूसरे दिन नेहरू

9:38:22फ्री इंडिया के पहले प्राइम मिनिस्टर के

9:38:24रूप में शपथ लेते हैं और देश सेलिब्रेशंस

9:38:27में डब जाता है लेकिन दोस्तों इंडिया में

9:38:30सब सेलिब्रेशन के मूड में नहीं थे इसमें

9:38:33सबसे बड़ा नाम था महात्मा गांधी का वो इस

9:38:36दिन किसी भी तरह की सेलिब्रेशन का हिस्सा

9:38:38नहीं बनते और पूरा दिन फास्टिंग और प्रेयर

9:38:41में ही निकलते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि वो

9:38:44पार्टीशन की पुरी तरह खिलाफ थे और देश के

9:38:47विभाजन के साथ मिली ये आजादी उनके लिए

9:38:49अधूरी थी इसके साथ ही ब्रिटिश के इस तरह

9:38:53से पार्टीशन एक दर्दनाक एक्सपीरियंस में

9:38:57बादल जाता है कैसे आई समझते हैं

9:39:02प्रॉब्लम्स अली विड्रोल दोस्तों माउंटबेटन

9:39:06के समय जी तेजी से इवेंट्स घटित होते हैं

9:39:08उसमें पार्टीशन की डीटेल्स को सही तरीके

9:39:11से अरेंज करने का समय ही नहीं मिलता जिसकी

9:39:14वजह से बड़े स्टार पर ब्लू शेड देखने को

9:39:16मिलता है स्पेशली पंजाब मैसाच्यर को

9:39:19प्रीवेंट करने में ये पुरी तरह फूल हो

9:39:21जाते हैं इसका सबसे बड़ा करण था की

9:39:24पार्टीशन की प्रॉब्लम्स को टैकल करने के

9:39:26लिए कोई भी ट्रांजेशनल इंस्टीट्यूशन

9:39:28स्ट्रक्चर नहीं बनाया गया था माउंटबेटन इस

9:39:31उम्मीद पर थे की वह इंडिया और पाकिस्तान

9:39:33के आम गवर्नर जनरल रहेंगे और इस तरह

9:39:36नेसेसरी लिंक प्रोवाइड करेंगे लेकिन

9:39:39जिन्ना ने यह पोजीशन अपने लिए रख ली थी

9:39:41इसके साथ ही बाउंड्री कमीशन अवार्ड को

9:39:44अनाउंस करने में भी डिले किया गया था

9:39:46अवार्ड 12th अगस्त 1947 को ही तैयार हो

9:39:50चुका था लेकिन माउंटबेटन इसे 15थ अगस्त के

9:39:53बाद ही पब्लिक करने का फैसला लेते हैं

9:39:55जिससे ब्रिटिश डिस्टरबेंस की सभी

9:39:58रिस्पांसिबिलिटी से एस्केप कर सकें

9:40:01है इसका नतीजा बहुत ही भयानक होता है सब

9:40:04कॉन्टिनेंट अपनी हिस्ट्री में कम्युनल

9:40:06वायलेंस और ह्यूमन डिस्प्लेसमेंट का

9:40:08वर्स्ट कैसे सिनेरियो विटनेस करता है

9:40:10इस दौरान करीब 10 लाख लोगों की हत्या कर

9:40:14दी जाति है और 75000 से भी ज्यादा वेमन का

9:40:17रेप होता है दोनों ही डायरेक्शंस में डेड

9:40:20बॉडी से भारी हुई ट्रेंस बॉर्डर क्रॉस

9:40:22करती हैं

9:40:23एक करोड़ से ज्यादा लोग डिस्प्लेस होते

9:40:26हैं और रिफ्यूजी कैंपस में आजादी का कड़वा

9:40:29टेस्ट चखना के लिए मजबूर होते हैं इस तरह

9:40:32बहुत से इंडियन के लिए फ्रीडम पार्टीशन के

9:40:35लॉस के साथ आई है और इस कम्युनल फ्रेंज़ी

9:40:38के सबसे बड़े विक्टिम खुद फादर ऑफ नेशन

9:40:41बनते हैं जिनकी 30th जनवरी 1948 को

9:40:45मिलिटेंट हिंदू नेशनलिस्ट द्वारा हत्या कर

9:40:48दी जाति है

9:40:50कंक्लुजन दोस्तों इस तरह 1947 में एक

9:40:55फंडामेंटल शिफ्ट होता है और वो था इंडिया

9:40:59का एक सावरेन स्टेट के रूप में उभारना

9:41:01हालांकि आजादी का जश्न पार्टीशन के गम की

9:41:04वजह से कुछ फीका जरूर राहत है इसी के साथ

9:41:07आजादी अपने साथ न्यू सेटअप चैलेंज भी लेकर

9:41:10आई आगे आने वाले समय में इंडिया की सामने

9:41:14एन सिर्फ प्रिंसली स्टेटस को इंटीग्रेटेड

9:41:16करने का चैलेंज था बल्कि देश की पालिटी

9:41:19इकोनामी और सोसाइटी को भी एक मजबूत

9:41:22फाउंडेशन देना था दोस्तों

9:41:28बी की तरफ

9:41:30यानी ब्रिटिश गवर्नेंस सिस्टम इसमें हम

9:41:34ब्रिटिशर्स द्वारा इंट्रोड्यूस डिफरेंट

9:41:36लैंड रिवेन्यू सिस्टम लोकल सेल्फ

9:41:39गवर्नमेंट के साथ पुलिस आर्मी और

9:41:41ज्यूडिशरी में हुए डेवलपमेंट्स को कर

9:41:43करेंगे साथ ही सभी चार्ट और रेगुलेशन

9:41:46एक्ट्स को भी डिस्कस करेंगे आई शुरू करते

9:41:50हैं पार्ट बी लैंड रिवेन्यू सिस्टम

9:41:54दोस्तों लैंड रिवेन्यू ब्रिटिशर्स के लिए

9:41:57मेजर सोर्सेस ऑफ इनकम में से एक था इस

9:41:59इनकम को मैक्सिमाइज करने के लिए उन्होंने

9:42:01इंडिया में अलग-अलग सिस्टम इंट्रोड्यूस

9:42:04किया थे आज उनके इंपॉर्टेंट लैंड रिवेन्यू

9:42:07सिस्टम को डिटेल में कर करेंगे जानेंगे की

9:42:10यह सिस्टम कब कहां और क्यों ले गए साथी

9:42:14इंडियन एग्रीकल्चर कम्युनिटी पर इनका

9:42:17इंपैक्ट भी डिस्कस करेंगे

9:42:21इंट्रोडक्शन

9:42:25दोस्तों

9:42:261765 में बैटल ऑफ प्लासी के बाद ईस्ट

9:42:30इंडिया कंपनी को बंगाल बिहार और उड़ीसा के

9:42:33दीवानी राइट्स मिले थे और तभी से कंपनी के

9:42:36लैंड रिवेन्यू एक्सपेरिमेंट भी शुरू हो

9:42:37जाते हैं

9:42:391772 में बंगाल के गवर्नर वारेन

9:42:42हेस्टिंग्स फार्मिंग सिस्टम इंट्रोड्यूस

9:42:44करते हैं इस सिस्टम के तहत रिवेन्यू

9:42:46कलेक्शन का चार्ज तो यूरोपियन जिला

9:42:49कलेक्टर्स के पास राहत है लेकिन रिवेन्यू

9:42:51कलेक्ट करने का अधिकार हाईएस्ट बिदार यानी

9:42:54की सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को दिया

9:42:57जाता था

9:42:57फार्मिंग सिस्टम बहुत ज्यादा सफल नहीं

9:43:00होता क्योंकि विदेश प्रोडक्शन प्रोसेस की

9:43:03परवाह किया बिना ज्यादा से ज्यादा

9:43:05रिवेन्यू एक्सट्रैक्ट करने की कोशिश करते

9:43:07हैं और इसकी वजह से प्रेजेंस की हालात

9:43:10बहुत ज्यादा मिसिबल होने लगती है इसलिए

9:43:131784 में लॉर्ड कार्नवालिस को रिवेन्यू

9:43:17एडमिनिस्ट्रेशन को स्ट्रीमलाइन करने के

9:43:19स्पेसिफिक मैंडेट के साथ इंडिया भेजो जाता

9:43:21है

9:43:29परमानेंट सेटलमेंट जो डी जमींदारी सिस्टम

9:43:34दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस 1793 में

9:43:38परमानेंट सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करते हैं

9:43:40इसके तहत लैंड रिवेन्यू कलेक्ट करने की

9:43:44जिम्मेदारी जमींदारा को दी जाति है

9:43:46सेटलमेंट जमींदारा के साथ इसलिए किया जाता

9:43:49है क्योंकि बहुत सारे प्रेजेंस से

9:43:51रिवेन्यू कलेक्ट करने की तुलना में थोड़े

9:43:54से जमींदार से रिवेन्यू कलेक्ट करना

9:43:56ज्यादा इजी राहत साथ ही कंपनी सोसाइटी के

9:43:59एक स्ट्रांग क्षेत्र को अपने साथ जोड़ना

9:44:02चाहती थी इसमें टोटल लैंड रिवेन्यू का 11%

9:44:05जमीन डर अपने पास रख सकते थे और 89%

9:44:09ब्रिटिश सरकार के पास जमा करना होता था इस

9:44:13सिस्टम में जमींदारा को लैंड ऑनर्स माना

9:44:15गया था वो जमीन को खरीद और बीच सकते थे

9:44:18इससे पहले तक जमींदारा के पास लाडनिंग

9:44:21राइट्स नहीं होते थे उनका कम सिर्फ

9:44:24रिवेन्यू कलेक्ट करना होता था

9:44:26इससे एक्चुअल टिक्स को सिर्फ टेरेंस बना

9:44:29दिया गया

9:44:31जमींदार अपनी मर्जी से कभी भी उन्हें जमीन

9:44:34से बेदखल कर सकते थे इसे बंगाल बिहार

9:44:37उड़ीसा के अलावा यूनाइटेड प्रोविंस के

9:44:40बनारस डिवीजन और नॉर्दर्न कार्नेटिक में

9:44:43भी लागू किया गया था जमींदारी सिस्टम

9:44:45ब्रिटिश इंडिया के टोटल एरिया के लगभग 19%

9:44:49एरिया को कर करता था

9:44:51परमानेंट सेटलमेंट में सनसेट क्लोज़ का भी

9:44:54प्रोविजन था इसका मतलब होता था की एक

9:44:57डेफिनेट डेट पर सनसेट होने से पहले

9:45:00जमींदार स्कूल लैंड रिवेन्यू जमा करना

9:45:03होता था ऐसा एन करने पर उनकी जमींदारी

9:45:06नीलम कर दी जाति थी

9:45:08परमानेंट सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करने के

9:45:10पीछे लॉर्ड कार्नवालिस का मकसद कंपनी के

9:45:13लिए डेफिनेट सोर्स ऑफ रिवेन्यू फिक्स करना

9:45:15था इससे वह आने वाले बजट और एक्सपेंडिचर

9:45:19को भी प्लेन कर सकते थे इसके अलावा उनका

9:45:22यह भी मानना था की जमींदारा लैंड में

9:45:24इन्वेस्ट करेंगे जिससे प्रोडक्टिविटी भी

9:45:27बढ़ेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता सबसे

9:45:30पहले दो रिवेन्यू का माउंट इतना हाय फिक्स

9:45:33किया गया था की शुरुआत के सालों में

9:45:36जमींदार्ज के लिए उसे कलेक्ट करना ही

9:45:38मुश्किल हो जाता है इसकी वजह से बहुत सी

9:45:41जमींदारी नीलम कर दी जाति हैं इसके बाद

9:45:44जमींदारा ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कामना

9:45:46चाहते थे इसलिए वो लैंड में भी कोई

9:45:49इन्वेस्टमेंट नहीं करते जो भी रिवेन्यू

9:45:52डिसाइड किया जाता है वो बिना किसी

9:45:54एसेसमेंट के एक अंदाज से किया जाता है

9:45:57नतीजा ये होता है की प्रेजेंस की कंडीशन

9:46:00मिजोरेबल होने लगती है

9:46:02जमींदारा उनसे मनमाना कर वसूल करने लगता

9:46:05हैं क्योंकि सेटलमेंट में कहानी भी यह

9:46:08स्पेसिफाई नहीं किया गया था की जमींदारा

9:46:11कल्टीवेटर से कितना रेंट ले सकते हैं इसी

9:46:14का फायदा उठाकर जमींदारा कल्टीवेटर से

9:46:17बहुत सारे इलीगल न्यूज़ भी वसूल करने लगता

9:46:20हैं साथ ही सिस्टम

9:46:31वेन्यू कलेक्ट करने की जिम्मेदारी किसी

9:46:33दूसरे छोटे जमीदार को दे देता है इससे

9:46:36अल्टीमेटली पेशेंस पर रिवेन्यू का भर बाढ़

9:46:38जाता है यही वजह है की आगे चलकर जमींदारी

9:46:41एरियाज में बहुत साड़ी प्रेजेंट रिपोर्ट्स

9:46:43भी देखने को मिलते हैं प्रेजेंट रिवार्ड्स

9:46:46को हम अलग से अपनी वीडियो में डिस्कस

9:46:48करेंगे

9:46:56रेवत बड़ी सिस्टम

9:46:59दोस्तों समय के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी

9:47:02अपना रूल्स साउथ और साउथ वेस्टर्न इंडिया

9:47:04में भी एक्सटेंड कर लेती है ऐसे में यहां

9:47:07लैंड सेटलमेंट की नई समस्या खड़ी होती है

9:47:09ब्रिटिश ऑफिशल्स के अनुसार इस एरिया में

9:47:12पहले से बड़े जमींदारा मौजूद थे इसलिए

9:47:15जमींदारी सिस्टम को यहां इंट्रोड्यूस करना

9:47:18मुश्किल था साथ ही कुछ ब्रिटिश को यह भी

9:47:21लगता था की परमानेंट सेटलमेंट की वजह से

9:47:23कंपनी को फाइनेंशियल लॉस हो रहा है

9:47:25क्योंकि एक तो उन्हें जमींदारा के साथ

9:47:28रिवेन्यू शेर करना पड़ता है और दूसरा लैंड

9:47:31से बढ़नी हुई इनकम पर वह कोई क्लेम नहीं

9:47:34कर सकते इसके साथ ही जमींदार कल्टीवेटर का

9:47:37शोषण भी करते थे

9:47:39इसलिए मंगरो और रीड जैसे ब्रिटिश सजेस्ट

9:47:43करते हैं की सेटलमेंट डायरेक्ट कल्टीवेटर

9:47:46के साथ किया जाए इसके साथ ही सेटलमेंट को

9:47:49परमानेंट एन करके प्रिडिकली रिवाइज किया

9:47:52जान का प्लेन था इस सेटलमेंट का नाम रियट

9:47:55वादी रखा गया क्योंकि सेटलमेंट यानी की

9:47:59कल्टीवेटर के साथ होता है इसे सबसे पहले

9:48:021792 में बड़ा महल एरिया में सिकंदर रीड

9:48:06ने स्टार्ट किया था उसके बाद थॉमस मंगरो

9:48:09ने इसे मद्रास के बाकी एरियाज में

9:48:11एक्सटेंड किया आगे चलकर सिस्टम को बॉम्बे

9:48:14प्रेसीडेंसी में भी लागू किया गया था

9:48:17है दोस्तों वाणी सिस्टम ने लैंड पर

9:48:19प्रेजेंट ओनरशिप सिस्टम को एस्टेब्लिश

9:48:22नहीं किया अल में बहुत सारे जमींदारा की

9:48:25जगह एक बड़े जमींदार यानी की स्टेट ने ले

9:48:28ली थी पेजयंस तो सिर्फ गवर्नमेंट के

9:48:31टेनेंस बन गए थे और समय पर लैंड रिवेन्यू

9:48:33ना जमा कर अपने की स्थिति में इनका लैंड

9:48:36बीच दिया जाता था

9:48:37ज्यादातर एरियाज में लैंड रिवेन्यू का रेट

9:48:40भी बहुत हाय फिक्स किया गया था जैसे की

9:48:43मद्रास में गवर्नमेंट का क्लेम ग्रोस

9:48:45प्रोडक्शन का 45 से 55% तक फिक्स किया गया

9:48:49था ऐसी ही कुछ हालात मुंबई की भी थी नतीजा

9:48:53यह होता है की बेस्ट सीजंस में भी

9:48:56मुश्किल से अपने गुजरे लायक ही बचत था

9:48:59इसके साथ ही गवर्नमेंट के पास कभी भी लैंड

9:49:03रिवेन्यू बढ़ाने का अधिकार भी था ड्रॉट या

9:49:06फ्लड्स के करण फसल बर्बाद होने पर भी

9:49:09किसने को रिवेन्यू पे करना होता था इस वजह

9:49:12से किसान धीरे-धीरे मनी लैंडर्स की दाल

9:49:15में फंसे लगता हैं

9:49:16इस तरह

9:49:18किसने की हालात अच्छी नहीं रहती ब्रिटिश

9:49:22इंडिया के करीब 52% एरिया में इस सिस्टम

9:49:25को इंप्लीमेंट किया गया

9:49:36महालवाड़ी सिस्टम

9:49:41दोस्तों जमींदारी सिस्टम का मॉडिफाइड

9:49:43वर्जन गंगा वाली नॉर्थवेस्ट प्रोविंस

9:49:46सेंट्रल इंडिया के कुछ पार्ट्स और पंजाब

9:49:49में इंट्रोड्यूस किया गया था इसको

9:49:51महालवाड़ी सिस्टम कहा जाता है इसमें

9:49:53रिवेन्यू पूरे विलेज यह स्टेट के लिए

9:49:56फिक्स किया जाता था और सेटलमेंट गांव की

9:49:59मुखिया या जमीदार के साथ होता था इस

9:50:02सेटलमेंट को हॉल मैकेंजी और आम बर्ड जैसे

9:50:05ब्रिटिश ने इंट्रोड्यूस किया था स्टेट का

9:50:09शेर इसमें लैंड की नेट इनकम का 66% तक रखा

9:50:13गया था और सेटलमेंट 30 साल के लिए किया

9:50:15गया

9:50:27बहुत हाय फिक्स किया जाता है और यहां भी

9:50:31प्रॉपर एसेसमेंट नहीं किया जाता जिसकी वजह

9:50:33से

9:50:41चला जाता है

9:50:44कंक्लुजन

9:50:48दोस्तों ब्रिटिश द्वारा इंट्रोड्यूस लैंड

9:50:51रिवेन्यू सिस्टम की वजह से इंडिया की और

9:50:54इकोनामी पुरी तरह डिस्टर्ब होने लगती है

9:50:56विलेज कम्युनिटी का एक्जिस्टिंग पॉलीटिकल

9:51:00इकोनामिक सोशल फ्रेमवर्क पुरी तरह

9:51:02ब्रेकडाउन हो जाता है प्राइवेट प्रॉपर्टी

9:51:05का कॉन्सेप्ट लैंड को एक मार्केट कमोडिटी

9:51:08में टर्न कर देता है सोशल रिलेशनशिप चेंज

9:51:11हो जाति हैं लैंडलॉर्ड मनीलेंडर ट्रेड

9:51:15जैसी नई सोशल क्लासेस की इंर्पोटेंस बाढ़

9:51:17जाति है और वो ओपेसेंस और एग्रीकल्चर लेबर

9:51:21जैसी क्लास के नंबर्स मल्टीप्लाई हो जाते

9:51:24हैं

9:51:27कंपटीशन में बादल जाता है

9:51:33खाने का मतलब यह है की ट्रेडिशनल और

9:51:36एनवायरनमेंट पुरी तरह बादल जाता है

9:51:39रिवेन्यू का ओवर एसेसमेंट सभी सिस्टम का

9:51:42एक आम फीचर निकाल कर आता है क्योंकि कंपनी

9:51:46रिवेन्यू इनकम को मैक्सिमाइज करना ही था

9:51:49इसकी वजह से किसान कर्ज में बने लगता हैं

9:51:54और बहुत से किसने को अपनी ही जमीन से

9:51:57बेदखल होना पड़ता है या एक टैलेंट की तरह

9:52:00कम करना पड़ता है इस तरह यह रिवेन्यू

9:52:04सिस्टम प्रेजेंस में ब्रिटिश की अगेंस्ट

9:52:06आक्रोश को जन्म देते हैं जिसकी परिणाम

9:52:09स्वरूप हमें आने वाले समय में बहुत से

9:52:12प्रेजेंट रिपोर्ट देखने को मिलते हैं

9:52:15इकोनामिक इंपैक्ट ब्रिटिश रूल

9:52:19दोस्तों ब्रिटिशर्स द्वारा फॉलो की गई

9:52:21पॉलिसीज की वजह से इंडियन इकोनामी तेजी से

9:52:24कॉलोनियल इकोनामी में ट्रांसफॉर्म हो गई

9:52:26थी जिसका नेचर और स्ट्रक्चर ब्रिटिश

9:52:29इकोनामी की जरूर के हिसाब से ते होता था

9:52:32ब्रिटिश ने इंडियन इकोनामी के ट्रेडिशनल

9:52:34स्ट्रक्चर को पुरी तरह से डिस्ट्रिक्ट कर

9:52:36दिया था साथ ही ब्रिटिश कभी भी इंडियन

9:52:40लाइफ का इंटीग्रल पार्ट नहीं बने वो हमेशा

9:52:43ही फॉरेनर्स की तरह यहां रहे और इंडियन

9:52:46रिसोर्सेस को एक्सप्लोइट करते रहे और

9:52:48इंडियन वेल्थ को ट्रिब्यूट की तरह यहां से

9:52:51ले जाते रहे इस तरह इंडियन इकोनामी को

9:52:54ब्रिटिश ट्रेड और इंडस्ट्री के इंटरेस्ट

9:52:56का सबोर्डिनेट बना दिया गया

9:52:58जिसकी परिणाम हमें अलग-अलग रूप में देखने

9:53:01को मिलते हैं जैसा की आप जानते हैं की

9:53:04ब्रिटिश ने लगभग 200 साल तक इंडिया पर रोल

9:53:07किया इतने लंबे समय तक एक्सप्लोइटेशन का

9:53:10नेचर एक जैसा नहीं रहा था यह समय के साथ

9:53:13चेंज होता रहा और इसी की बेसिस पर

9:53:15कॉलोनियल रूल को तीन फेस में डिवाइड किया

9:53:18जाता है

9:53:27कॉलोनियल रूल के चेंजिंग इकोनामिक करैक्टर

9:53:29को समझना के लिए इंडियन स्कॉलर आरपी डेट

9:53:32ने इसे तीन फीस में डिवाइड किया है पहले

9:53:35फैज लगभग 1757 से 1813 तक चला है और इसे

9:53:40मर्केंटाइलिज्म या कमर्शियल केपीटलाइज्म

9:53:43का फीस कहा जाता है

9:53:47एक ट्रेड और कॉमर्स पर अपनी मुनाबाली

9:53:50बनाना और दूसरा बुलियन की समस्या का

9:53:53समाधान ढूंढना

9:53:55बुलियन की समस्या से हमारा मतलब है की

9:53:57ब्रिटिशर्स को इंडिया से गुड्स परचेज करने

9:54:00के लिए अपने यहां के गोल्ड सिल्वर और उनके

9:54:03कोइंस का उसे करना पड़ता था जो की

9:54:06मर्केंटाइलिज्म की दृष्टि से फेवरेबल नहीं

9:54:08था मोनोपोली बनाने के लिए ब्रिटिश ईस्ट

9:54:11इंडिया कंपनी

9:54:13की फॉरेन कंपनी को रास्ते से हटा देती हैं

9:54:16और बुलियन की समस्या बैटल ऑफ प्लासी के

9:54:19बाद खत्म होती है जिसे डिटेल में हम थोड़ी

9:54:22डर में देखेंगे

9:54:24इस फेस का फॉक्स इंडिया से ड्रा वेल्थ और

9:54:27ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा डायरेक्ट

9:54:30कॉलोनियल प्लंडर पर राहत है

9:54:32यही से इंडिया की इकोनामी का कॉलोनियल

9:54:35एक्सप्लोइटेशन शुरू हो जाता है इसके बाद

9:54:38दूसरा फेस लगभग 1813 से शुरू होकर 1860 तक

9:54:42चला है इसे इंडस्ट्रियल केपीटलाइज्म का

9:54:46फीस कहते हैं इस समय तक इंग्लैंड में

9:54:48इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन की शुरुआत हो चुकी

9:54:50थी और वहां बड़े स्केल पर गुड्स

9:54:52मैन्युफैक्चरर किया जा रहे थे

9:54:54इन्हीं गुड्स को सेल करने के लिए मार्केट

9:54:57की जरूर थी साथ ही ब्रिटिश इंडस्ट्रीज की

9:55:00और ज्यादा ग्रोथ के लिए बड़ी स्टार पर रा

9:55:03मैटेरियल्स भी चाहिए थे

9:55:051813 के चार्ट एक्ट के द्वारा ईस्ट इंडिया

9:55:08कंपनी की मोनोपोली को भी खत्म कर दिया गया

9:55:10था और इसी के साथ कॉलोनियल गवर्नमेंट वन

9:55:14साइड फ्री ट्रेड पॉलिसी की शुरुआत भी करती

9:55:16है जिसमें ब्रिटेन से इंडिया आने वाले

9:55:19मैन्युफैक्चर्ड गुड्स पर कोई ड्यूटी नहीं

9:55:22लगे जाति और इंडिया से ब्रिटेन के लिए रा

9:55:25मैटेरियल्स भी बिना किसी किया जाते हैं

9:55:27लेकिन इंग्लैंड में इंडिया से जान वाले

9:55:31किसी भी फिनिश्ड प्रोडक्ट पर हैवी ड्यूटी

9:55:33बनी रहती है उदाहरण के तोर पर इंडियन

9:55:36टैक्सटाइल्स पर 300% ड्यूटी इंपोज की जाति

9:55:40है इस तरह इस पीरियड के दौरान इंडिया में

9:55:43दिन इंडस्ट्रियलिज्म और रुरलीसेशन देखने

9:55:46को मिलता है

9:55:47संक्षेप में कहें तो इंडस्ट्रियल

9:55:49केपीटलाइज्म का फीस इंडियन इकोनामी को

9:55:52ब्रिटिश गुड्स के लिए मार्केट और रा

9:55:55मैटेरियल्स के सप्लायर में कन्वर्ट कर

9:55:56देता है तीसरा और आखिरी फैज लगभग 1860 से

9:56:00शुरू होकर 1947 तक चला है इसे फाइनेंशियल

9:56:04केपीटलाइज्म का फीस बोला जाता है इस दौरान

9:56:07ब्रिटिश इंडिया में कैपिटल इन्वेस्ट करना

9:56:10शुरू करते हैं इसका करण यह था की अब

9:56:13इंडस्ट्रियलिज्म दुनिया के बाकी देश में

9:56:16भी फैलने लगा था जैसे की जर्मनी जापान

9:56:20है इस वजह से ब्रिटिश इंडस्ट्रीज के लिए

9:56:23कंपटीशन बाढ़ जाता है सरवाइव करने के लिए

9:56:25कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन को कम करने की जरूर

9:56:27समझी जाति है और साथ ही साथ पिछले फैज के

9:56:31दौरान प्रॉफिट जमा करते-करते ब्रिटिश काफी

9:56:34कैपिटल जमा कर लेते हैं जिसे इन्वेस्ट

9:56:36करने की ऑपच्यरुनिटीज ढूंढी जा रही थी

9:56:39इसके साथ इंडिया में इन्वेस्ट करने से

9:56:41ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होती है साथ ही

9:56:45चिप लेबर भी मिल जाति है इसलिए इस पीरियड

9:56:48में तेजी से ब्रिटिश कैपिटल का फ्लो

9:56:50इंडिया में होता है लेकिन इसका मकसद

9:56:53इंडिया में इंडस्ट्रियल ग्रोथ करना नहीं

9:56:54राहत बल्कि इंडियन रिसोर्सेस का

9:56:57एक्सप्लोइटेशन करना होता है ब्रिटिश

9:57:00कैपिटल उन्हें एक्टिविटीज में लगे जाति है

9:57:02जो ब्रिटिश इंडस्ट्रीज के लिए

9:57:04कंप्लीमेंट्री साबित होती हैं एक एस्टीमेट

9:57:07के अनुसार 1914 से पहले तक लगभग 97%

9:57:12ब्रिटिश कैपिटल रेलवे मर्चेंट शिपिंग

9:57:14मीनिंग और फाइनेंशियल हाउस के डेवलपमेंट

9:57:17में इन्वेस्ट की गई

9:57:21अलग-अलग फेर में हुए इकोनामिक इंपैक्ट को

9:57:24डिस्कस करते हैं शुरुआत करते हैं इंडियन

9:57:27एग्रीकल्चर से

9:57:30इंपैक्ट ऑन इंडियन एग्रीकल्चर

9:57:33कंपनी ने इंडिया में नए लैन्टेनियस जैसे

9:57:36की परमानेंट सेटलमेंट रियट वादी महालवाड़ी

9:57:39सिस्टमैटिक सेटर को इंट्रोड्यूस किया था

9:57:42इन सभी सिस्टम में रिवेन्यू रेट को बहुत

9:57:45हाय रखा गया

9:57:47और महालवाड़ी एरियाज में रेगुलर इंटरवल पर

9:57:51रिवेन्यू रेट बड़ा दिए जाते थे इन नए

9:57:54सिस्टम की वजह से नई सोशल क्लासेस जैसे की

9:57:57लैंडलॉर्ड मनी लैंडर्स लैंड्स स्पैकुलेटर

9:58:01इमर्ज होते हैं और इन बढ़ाने लगती है और

9:58:06इंडियन कल्टीवेटर की कंडीशन खराब होती चली

9:58:08जाति है

9:58:09ज्यादातर कल्टीवेटर गरीबी रेखा से नीचे

9:58:12जीवन बिताने के लिए मजबूर होते हैं लैंड

9:58:15रिवेन्यू सिस्टम के इंपैक्ट को और डिटेल

9:58:17में हमने अलग से एक वीडियो में कर किया है

9:58:19कॉलोनियल पॉलिसी की वजह से इंडियन

9:58:22एग्रीकल्चर का कर्मशलाइजेशन भी देखने को

9:58:24मिलता है स्पेशली सेकंड यानी की

9:58:27इंडस्ट्रियल केपीटलाइज्म वाले फेस के

9:58:29दौरान

9:58:30ब्रिटिश इंडस्ट्रीज को रा मैटेरियल्स

9:58:33चाहिए थे जैसे की कॉटन जूते इंडिगो

9:58:36ईटीसीईटेरा इसलिए इंडिया में फूड क्रॉप्स

9:58:39की जगह ऐसी कमर्शियल क्रॉप्स को प्रमोट

9:58:41किया जाता है

9:58:43फोर्सफुली इन्हें कल्टीवेट कराया जाता है

9:58:46जैसे इंडिगो प्लांटेशन के कैसे में इसकी

9:58:49वजह से पैगिंस पर कर्ज तो बढ़ता ही है साथ

9:58:52ही और इकोनामी की सेल्फ डिपेंड्स खत्म हो

9:58:55जाति है

9:58:57खाने को अनाज नहीं राहत है और ऐसी सिचुएशन

9:59:00में फेमिंस बहुत आम हो जाते हैं ब्रिटिश

9:59:03कॉलोनियल रूल का एडवर्स इंपैक्ट सिर्फ

9:59:06इंडियन एग्रीकल्चर पर ही नहीं होता बल्कि

9:59:09ट्रेडिशनल इंडियन इंडस्ट्रीज को भी यह

9:59:11पुरी तरह डिस्ट्रॉय कर देता है

9:59:21ब्रिटिश रूल का इंडियन हैंडीक्राफ्ट

9:59:23इंडस्ट्रीज पर बहुत ही गहरा प्रभाव देखने

9:59:26को मिलता है ब्रिटिश के आने से पहले तक

9:59:28इंडिया एक एक्सपोर्टिंग कंट्री हुआ करती

9:59:31थी यहां तक की ब्रिटिश भी इंडिया ट्रेड

9:59:34करने के लिए ही आए थे और वो यहां अपने देश

9:59:37के प्रोडक्ट्स का ट्रेड नहीं करते थे

9:59:39बल्कि इंडिया से प्रोडक्ट्स जैसे की

9:59:42टैक्सटाइल्स स्पाइसेज ईटीसेटरा यूरोप में

9:59:45एक्सपोर्ट करते थे

9:59:47मर्केंटाइलिज्म यानी की फर्स्ट फैज के

9:59:49दौरान यही स्थिति बनी रहती है लेकिन सेकंड

9:59:53फैज में शुरू होने के बाद इंग्लैंड से

9:59:55बड़ी संख्या में मशीन मेड प्रोडक्ट्स

9:59:57इंडिया आने लगता हैं जो की इंडियन गुड से

10:00:01काफी सस्ते होते थे जिसकी वजह से इंडियन

10:00:04हैंडीक्राफ्ट्स की डिमांड कम होने लगती है

10:00:06साथ ही वन साइड फ्री ट्रेड जैसी पॉलिसी के

10:00:10करण इंडियन गुड्स पर फॉरेन मार्केट में

10:00:12हैवी ड्यूटी इंपोज की जाति हैं

10:00:15इस तरह डोमेस्टिक और फॉरेन दोनों ही

10:00:17मार्केट में इंडियन गुड्स की डिमांड कम हो

10:00:20जाति है

10:00:21इसके अलावा ब्रिटिश इंडिया से रा मटेरियल

10:00:24जैसे की कॉटन का एक्सपोर्ट शुरू कर देते

10:00:27हैं इस वजह से इंडियन आर्टिजंस को रा

10:00:30मटेरियल या तो मिलता नहीं है या फिर बहुत

10:00:33महंगे मिलने लगता हैं इस करण मजबूरी में

10:00:36इंडियन विवर्स ये कम छोड़ने लगता हैं

10:00:39रेलवे का डेवलपमेंट भी ट्रेडिशनल

10:00:42इंडस्ट्रीज को नुकसान पहुंचना है क्योंकि

10:00:44इससे पहले कम से कम रिमोट कॉर्नर्स में तो

10:00:47इंडियन गुड्स की डिमांड रहती थी लेकिन

10:00:49रेलवे के आने के बाद देश के कोनी कोनी में

10:00:52सस्ते ब्रिटिश गुड्स पहुंच जाते हैं इस

10:00:55तरह हैंडीक्राफ्ट्स इंडस्ट्रीज का डिक्लिन

10:00:57तो तेजी से होता है लेकिन मॉडर्न

10:01:00इंडस्ट्रीज की शुरुआत इतनी जल्दी नहीं

10:01:02होती इसलिए ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज में कम

10:01:05करने वाले लोग बेरोजगार हो जाते हैं

10:01:08गंजेटिक बिहार का स्टैटिसटिक्स डाटा बताता

10:01:11है की यहां टोटल पापुलेशन के मुकाबला

10:01:13इंडस्ट्रियल पापुलेशन का प्रोपोर्शन जो

10:01:1618009 के समय

10:01:1818.6% था वह 191 में घटकर सिर्फ

10:01:238.5% र जाता है कहा जा सकता है की ब्रिटिश

10:01:27रूल के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोग्रेस दूर

10:01:30उल्टा इंडियन ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज का

10:01:32डिक्लिन होता है

10:01:35इकोनामिक इंपैक्ट को समझते हैं जिसे

10:01:38इंडियन नेशनलिस्ट लीडर्स

10:01:41की थ्योरी से समझाया है

10:01:45ड्रेन वेल्थ फ्रॉम इंडिया

10:01:49इंडियन नेशनल लीडर्स और इकोनॉमिस्ट के

10:01:52अनुसार इंडिया से इंग्लैंड के लिए होने

10:01:54वाला कांस्टेंट फ्लो ऑफ वेल्थ जिसके बदले

10:01:57में इंडिया को कोई भी इकोनामिक कमर्शियल

10:02:00या मटेरियल रिटर्न नहीं मिलता था ड्रेनो

10:02:03वेल्थ कहलाता है यह साल डर साल इंडिया से

10:02:07इंपीरियल ब्रिटेन द्वारा लिए जा रहे

10:02:09इनडायरेक्ट ट्रिब्यूट की तरह था

10:02:12मर्केंटाइल कॉन्सेप्ट में कहें तो

10:02:14इकोनामिक ग्रीन तब होता है जब एडवर्स

10:02:17बैलेंस ऑफ ट्रेड की वजह से गोल्ड और

10:02:19सिल्वर देश से बाहर जान लगता हैं

10:02:22बैटल ऑफ प्लासी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी

10:02:25इंडिया में ट्रेड करने के लिए ब्रिटेन से

10:02:28बोलियां इंपोर्ट करती थी लेकिन प्लासी के

10:02:31बाद सिचुएशन बिल्कुल बादल जाति है ईस्ट

10:02:34इंडिया कंपनी अब इंडिया में टेरिटरीज

10:02:36एडमिनिस्ट्रेटर करना शुरू कर देती है और

10:02:39यहां के सरप्लस रेवेन्यू पर उसका अधिकार

10:02:41हो जाता है अब ब्रिटेन से बोलिए लाने की

10:02:44जगह इंडिया के ही रिवेन्यू को उसे करके

10:02:46कंपनी अपने एक्सपोर्ट्स को परचेज करती है

10:02:49इस तरह इंडिया के रिवेन्यू को कंपनी पुरी

10:02:52तरह अपने फायदे के लिए उसे करती है जिसके

10:02:55बदले में इंडिया को कुछ भी नहीं मिलता है

10:02:58यह सिस्टम 1813 के चार्ट एक्ट से खत्म

10:03:01होता है क्योंकि उसमें कंपनी के कमर्शियल

10:03:03और टेरिटोरियल रेवेन्यू को सेपरेट किया

10:03:06जाता है लेकिन इंडिया से इकोनामिक ड्रेन

10:03:08का और यहां भी नहीं होता बस इसका करैक्टर

10:03:12थोड़ा बादल जाता है

10:03:131813 के बाद ग्रीन एक तरफ एक्सपोर्ट्स के

10:03:17फॉर्म में होता है इस इकोनामिक ड्रेन की

10:03:20में कांस्टीट्यूएंट्स कुछ इस तरह थे होम

10:03:23चार्ज

10:03:25ऐसे एक्सपेंडिचर को बोला जाता था जो

10:03:28इंडिया के भी हाथ पर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट

10:03:30द्वारा इंग्लैंड में किया जाते थे

10:03:331857 के रिवॉल्ट से पहले होम चार्ज

10:03:3913% हुआ करते थे

10:03:411897 से 1901 के बीच यह प्रोपोर्शन बढ़कर

10:03:4524% हो गया था और 1921 22 में होम चार्ज

10:03:51सेंट्रल गवर्नमेंट के टोटल रिवेन्यू के

10:03:5340% तक पहुंच गए थे होम चार्ज के अंदर

10:03:56ईस्ट इंडिया कंपनी के शेरहोल्डर्स को दिए

10:03:59जान वाला डिविडेंड कंपनी द्वारा इंडिया के

10:04:02बाहर लिए पब्लिक डेट पर इंटरेस्ट सिविल और

10:04:05मिलिट्री चार्ज और इंग्लैंड में किया गए

10:04:08स्टोर परचेज जाते थे

10:04:09ड्रेन का नेक्स्ट कंपोनेंट था फॉरेन

10:04:12कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर दिया जान वाला

10:04:14इंटरेस्ट

10:04:16इंटरेस्ट ऑन फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट 28

10:04:20सेंचुरी में ब्रिटेन से फाइनेंस कैपिटल

10:04:23इंडिया में इंटर होना शुरू होता है यानी

10:04:26की थर्ड फैज फाइनेंशियल केपीटलाइज्म की

10:04:29शुरुआत

10:04:32पीरियड के समय इस पर सालाना लगभग 30 से 60

10:04:36करोड़ रुपए खर्च होते थे यहां ये याद रखना

10:04:39चाहिए की फौरन कैपिटल लिस्ट इंडिया के

10:04:42इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में इंटरेस्टिंग

10:04:44नहीं थे बल्कि अपने फायदे के लिए इंडियन

10:04:47रिसोर्सेस को एक्सप्लोइट करना चाहते थे

10:04:50साथ ही इंडीजीनस कैपिटल एंटरप्राइज को

10:04:53अलग-अलग तरीके से पीछे करने की कोशिश भी

10:04:57करते थे इकोनामिक ड्रेन का एक और कंपोनेंट

10:04:59देखा जा सकता है

10:05:16इसकी ग्रोथ भी नहीं

10:05:19लिखने हुए दादा भाई नौरोजी ने कहा था की

10:05:23ये एविलों जो इविल्स है और इंडियन पावर्टी

10:05:27का सबसे बड़ा करण भी है इनके अनुसार

10:05:29ब्रिटिश रूल की शुरुआत से लेकर 1865 तक कल

10:05:351500 मिलियन पाउंड का ड्रेन इंडिया से हो

10:05:38चुका था और 1883 से 1892 के बीच करीब

10:05:443009 करोड़

10:05:47के जारी मैं सिर्फ ब्रिटिशर्स ने इंडिया

10:05:50की वेल्थ को लूटने का कम किया बल्कि इसकी

10:05:53वजह से इंडिया में इंडस्ट्रियलिज्म भी

10:05:56नहीं हो पाया क्योंकि इसके लिए जो जरूरी

10:05:59कैपिटल थी वो तो ब्रिटेन ट्रांसफर हो रही

10:06:01थी यह तो बात हो गई कॉलोनियल रूल के दौरान

10:06:05इंडिया पर हुए इकोनामिक इंपैक्ट्स की

10:06:08लेकिन यह इंपैक्ट्स सिर्फ कॉलोनियल रूल तक

10:06:11ही सीमित नहीं रहे

10:06:12बल्कि इनकी लिगसी इंडिपेंडेंस इंडिया पर

10:06:16भी देखने को मिलती है कैसे आई जानते हैं

10:06:27200 साल का ब्रिटिश रूल एक्सट्रीम पावर्टी

10:06:30के साथ एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल दोनों

10:06:33ही सेक्टर में इकोनामिक बैकवार्डनेस की

10:06:35लिगसी छोड़ जाता है

10:06:371947 में जब ब्रिटिश इंडिया से गए तब

10:06:41दुनिया की सबसे जटिल लैंड प्रॉब्लम पीछे

10:06:44छोड़ गए जिसमें लैंड राइड्स की

10:06:46कॉम्प्लिकेटेड हीेरार की थी लैंड टेन्योर

10:06:49की इनसिक्योरिटी थी कल्टीवेशन की टेक्निक

10:06:52प्रिमिटिव बने हुए थे

10:06:54पेरिल्ड बहुत कम थी एग्रीकल्चरल

10:06:57होल्डिंग्स फ्रेगमैन थी और मनी लैंडर्स का

10:07:00शिकंजा और इकोनामी पर बना हुआ था इसके साथ

10:07:04ही एग्रीकल्चर में इन्वेस्टमेंट तो

10:07:06उन्होंने ना के बराबर किया था

10:07:09दम शब्दों में कहें तो देश पर काल यानी की

10:07:12फेम का खतरा लगातार मंडरा रहा था इस

10:07:15स्थिति से निकालने के लिए देश को कई साल ग

10:07:18गए और एग्रीकल्चर की कुछ समस्या जो

10:07:20ब्रिटिश लिगसी हैं अभी तक बनी हुई हैं

10:07:24इंडस्ट्रियल सेक्टर का हाल भी कुछ ऐसा ही

10:07:26था इंडियन इंडस्ट्रीज का लोपसाइडेड

10:07:29डेवलपमेंट हुआ था प्रोडक्शन टेक्निक्स

10:07:32बहुत ही कम थी इंडस्ट्रियल वर्कर्स की

10:07:34हालात भी कुछ खास अच्छी नहीं थी इसके

10:07:37अलावा इंडस्ट्रीज पर ब्रिटिश फाइनेंस

10:07:39कैपिटल का दबदबा अभी भी बना हुआ था

10:07:42ब्रिटिश इंडिया को लो पर कैपिटा इनकम वाला

10:07:45गरीब देश बना कर चले गए थे एवरेज इंडियन

10:07:49इनकम कुछ इस तरह

10:07:53फोर्ट कर सकते थे वह भी इस शर्ट पर के

10:07:57कपड़े की कोई डिमांड ना हो सर के ऊपर छठ

10:08:00भी ना हो और किसी तरह का कोई एम्यूजमेंट

10:08:02या रीक्रिएशन तो भूल ही जो

10:08:05इस तरह आजादी के समय इंडिया को ब्रिटिश

10:08:08लिगसी के रूप में वर्षों के कॉलोनियल

10:08:10एक्सप्लोइटेशन के नीचे डाबी इकोनामी और

10:08:13गाइड अंदर डेवलपमेंट मिलता है

10:08:16कंक्लुजन

10:08:21दोस्तों हम का सकते हैं की ब्रिटिश

10:08:24कॉलोनियल रूल का सबसे बड़ा प्रभाव इंडियन

10:08:27इकोनामी पर ही दिखता है यही वजह थी की

10:08:30इंडियन

10:08:31नेशनलिस्टरीना वेल्थ की थ्योरी से

10:08:33कॉलोनियल रूल को एक्सपोज करने की कोशिश

10:08:35करते हैं

10:08:37और इंडिया में इकोनामिक नेशनलिज्म की

10:08:40शुरुआत होती है

10:08:41कॉलोनियल रूल एक बड़ी वजह थी की इंडिया

10:08:44में इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन नहीं हो पाया

10:08:46इंडियन एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रीज के

10:08:49बैकवार्डनेस के लिए भी कॉलोनियल पॉलिसीज

10:08:52ही रिस्पांसिबल थी

10:08:53चार्ट एक्ट इन रेगुलेशन एक्ट

10:08:58दोस्तों जैसा की हम देख चुके हैं की 1764

10:09:01में हुई बैटल ऑफ बक्सर के बाद ईस्ट इंडिया

10:09:04कंपनी को बंगाल बिहार और उड़ीसा की दीवानी

10:09:07मिल गई थी इसके बाद

10:09:091765 में बंगाल में ड्यूल सिस्टम ऑफ

10:09:13गवर्नमेंट को इंट्रोड्यूस किया गया था

10:09:14जिसके तहत कंपनी के पास रिवेन्यू कलेक्ट

10:09:17करने का राइट राहत है लेकिन

10:09:20एडमिनिस्ट्रेशन के रिस्पांसिबिलिटी नवाब

10:09:22की रहती है इस सिस्टम के करण कंपनी के पास

10:09:26बिना किसी रिस्पांसिबिलिटी के पुरी

10:09:28अथॉरिटी ए चुकी थी इसका रिजल्ट यह होता है

10:09:31की कंपनी के सर्वेंट में करप्शन बहुत

10:09:33ज्यादा बाढ़ जाता है और वो अपने फायदे के

10:09:35लिए प्राइवेट ट्रेड में बीजी रहने लगता

10:09:37हैं इसके साथ ही रिवेन्यू कलेक्शन की वजह

10:09:41से बेसिन ट्री का भी शोषण होने लगता है और

10:09:44इसके ऊपर से 1772 में कंपनी करती है जबकि

10:09:49उसके एम्पलाइज दिन रात फ्लैश कर रहे थे

10:09:52ऐसी सिचुएशन में ब्रिटिश गवर्नमेंट फैसला

10:09:55करती है की कंपनी के अफेयर्स को रेगुलेट

10:09:58करने के लिए अब उसे ही कोई कम उठाना

10:10:00पड़ेगा

10:10:02इस दिशा में सबसे पहले कम होता है 1773 का

10:10:06रेगुलेटिंग एक्ट इसके बाद धीरे-धीरे

10:10:09कंट्रोल इन लॉस का नंबर बढ़ाने लगता है आई

10:10:12सबसे पहले रेगुलेटिंग एक्ट के प्रोविजंस

10:10:15को समझते हैं

10:10:20रेगुलेटिंग एक्ट 1773

10:10:25दोस्तों इस एक्ट के थ्रू ब्रिटिश कैबिनेट

10:10:28पहले बार इंडिया में कंपनी के अफेयर्स पर

10:10:30अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश करती है यह

10:10:33गवर्नर ऑफ बंगाल की पोस्ट को गवर्नर जनरल

10:10:36ऑफ बंगाल में चेंज कर देता है इसके अलावा

10:10:39बंगाल की एडमिनिस्ट्रेशन के लिए गवर्नर

10:10:42जनरल की कर मेंबर वाली काउंसिल का

10:10:44प्रोविजन रखा जाता है वारेन हेस्टिंग

10:10:47बंगाल के पहले गवर्नर जनरल बनते हैं

10:10:50रेगुलेटिंग एक्ट के अनुसार मुंबई और

10:10:52मद्रास के गवर्नर को बंगाल के गवर्नर जनरल

10:10:55के अंदर कम करना होता है इसके साथ ही

10:10:58कोलकाता में ओरिजिनल और अपेलत जूरिडिक्शन

10:11:01वाला सुप्रीम कोर्ट एस्टेब्लिश करने का

10:11:03प्रोविजन भी था जिसमें एक के जस्टिस के

10:11:06साथ तीन जज को अप्वॉइंट किया जाना था

10:11:09कंपनी के डायरेक्टर्स को रिवेन्यू अफेयर्स

10:11:12और सिविल और मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन से

10:11:14रिलेटेड सभी को रेस्पॉन्डेंट्स ब्रिटिश

10:11:17गवर्नमेंट के साथ शेर करने के लिए भी कहा

10:11:19गया था

10:11:25लेकिन इसमें बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिलती

10:11:28और 1784 में एक और एक्ट पास करना पड़ता है

10:11:36विच इंडिया एक्ट 1784

10:11:40बिट्स इंडिया एक्ट ड्यूल सिस्टम को

10:11:42इंट्रोड्यूस करता है यानी की कंपनी के साथ

10:11:45अब ब्रिटिश गवर्मेंट का कंट्रोल भी इंडियन

10:11:48एडमिनिस्ट्रेशन पर एस्टेब्लिश किया जाता

10:11:50है इंडिया में कंपनी की टेरिटोरियल

10:11:52पोजीशंस को एक्ट में ब्रिटिश पजेशन बोला

10:11:55जाता है इस तरह कंपनी अब स्टेट का एक

10:11:58सबोर्डिनेट डिपार्मेंट बन जाता है लेकिन

10:12:00कमर्शियल एक्टिविटीज और दे तू दे

10:12:03एडमिनिस्ट्रेशन पर कंपनी का अपना कंट्रोल

10:12:05बना राहत है ड्यूल सिस्टम के तहत 1784 का

10:12:09यह एक्ट बोर्ड ऑफ कंट्रोल की

10:12:11एस्टेब्लिशमेंट करता है बोर्ड ऑफ कंट्रोल

10:12:13का कम कंपनी के सिविल मिलिट्री और

10:12:15रिवेन्यू अफेयर्स पर कंट्रोल करना था

10:12:18चांसलर ऑफ एक्स चेकर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट

10:12:21और क्राउन द्वारा अपॉइंटेड प्रिवी काउंसिल

10:12:23के कर मेंबर्स इसका हिस्सा थे इसके अलावा

10:12:25गवर्नर जनरल की काउंसिल की स्ट्रैंथ को 4

10:12:28से घटकर 3 मेंबर्स कर दिया जाता है जिसमें

10:12:31एक मेंबर कमांडर इन के को रखा जाता है साथ

10:12:35ही मुंबई और मद्रास की प्रेसिडेंसेस को

10:12:37बंगाल के गवर्नर जनरल का सबोर्डिनेट बना

10:12:39दिया जाता है

10:12:51चार्ट एक्ट 1793

10:12:55दोस्तों ईस्ट इंडिया कंपनी को इंडिया के

10:12:58साथ ट्रेड करने के लिए ब्रिटिश गवर्मेंट

10:13:00से चार्ट मिला था जिसके तहत पूर्वी ट्रेड

10:13:04में इसकी मोनोपोली एस्टेब्लिश की गई थी

10:13:061793 का चार्ट एक्ट इसी चार्ट को और 20

10:13:10साल के लिए रिन्यू कर देता है इस एक्ट के

10:13:13थ्रू गवर्नर जनरल को काउंसिल के डिसीजन को

10:13:16ओवरराइड करने की पावर भी दी जाति है इसमें

10:13:19एक प्रोविजन यह भी होता है की सभी सीनरी

10:13:21ऑफिशल जैसे की गवर्नर जनरल गवर्नर और

10:13:24कमांडर इन के की अपॉइंटमेंट के लिए रॉयल

10:13:27अप्रूवल लेना मैंडेटरी होगा इसके अलावा

10:13:30एक्ट में बोर्ड ऑफ कंट्रोल के मेंबर्स और

10:13:33उसके पूरे स्टाफ का खर्चा अब इंडियन

10:13:35रिवॉल्यूशन से उठा जान का प्रावधान था

10:13:381793 का यह चार्ट एक्ट कंपनी के द्वारा

10:13:41ब्रिटिश गवर्नमेंट को एनुअल 5 लाख पाउंड

10:13:45देने का प्रोविजन भी करता है 20 साल बाद

10:13:48जब इस चार्ट के एक्सपायर होने का समय होता

10:13:50है तब नेक्स्ट चार्ट एक्ट पास किया जाता

10:13:52है

10:14:021813 का चार्ट एक्ट कई मीना में एक

10:14:05लैंडमार्क चार्ट एक्ट इंग्लिश ट्रेडर्स इस

10:14:08समय डिमांड करने लगे थे की उन्हें भी

10:14:10इंडियन ट्रेडमैन शेर मिलन चाहिए यानी की

10:14:13वो ईस्ट इंडिया कंपनी की मोनोपोली का

10:14:16विरोध कर रहे थे इसके पीछे दो करण थे पहले

10:14:19तो लेजर फेयर की स्पिरिट और दूसरा

10:14:21नेपोलियन का कॉन्टिनेंटल सिस्टम जिसके तहत

10:14:24बाकी यूरोपियन पूछ ब्रिटेन के लिए क्लोज

10:14:27कर दिए गए थे इसलिए ब्रिटिश ट्रेडर्स

10:14:30चाहते थे की इंडियन ट्रेड को सभी के लिए

10:14:32ओपन कर दिया जाए इनकी डिमांड्स को ध्यान

10:14:35में रखते हुए ब्रिटिश गवर्नमेंट 1813 का

10:14:38चार्ट एक्ट पास करती है जिसके तहत कंपनी

10:14:42को खत्म कर दिया जाता है लेकिन चीन के साथ

10:14:45और ओवरऑल टी यानी की चाय के ट्रेड में

10:14:48उसकी मोनोपोली बनी रहने दी जाति है साथ ही

10:14:51इंडियन टेरिटरीज और रिवेन्यू को कंपनी और

10:14:5420 साल तक रिटन कर शक्ति थी लेकिन क्राउन

10:14:57की सॉवरेन्टी के अंदर रहते हुए बोर्ड ऑफ

10:15:00कंट्रोल की पावर और ज्यादा बड़ा दी जाति

10:15:02हैं इस एक्ट में इंडिया में एजुकेशन को

10:15:06प्रमोट करने के लिए एनुअल 1 लाख रुपए की

10:15:09ग्रैंड का प्रोफेशन भी था क्रिश्चियन

10:15:12मिशनरीज को भी इंडियन आने और अपना रिलिजन

10:15:15करने की परमिशन दे दी जाति है दोस्तों

10:15:171813 के चार्ट एक्ट के बाद फिर से 20 साल

10:15:21बाद अगला चार्ट एक्ट पास होता है

10:15:26चार्ट एक्ट 1833

10:15:291833 के चार्ट एक्ट में कंपनी को टेरिटरीज

10:15:33और रिवेन्यू कलेक्शन पर मिली 20 साल की

10:15:35लेज को फरदर एक्सटेंड कर दिया जाता है

10:15:38लेकिन चीन और चाय के ट्रेड पर कंपनी की

10:15:41मोनोपोली को इस बार और कर दिया जाता है

10:15:44इसके अलावा यूरोपियन इमीग्रेशन और इंडिया

10:15:47में प्रॉपर्टी के एक्विजिशन पर सभी

10:15:49रिस्ट्रिक्शंस हटा दी जाति हैं जिससे

10:15:52यूरोपियंस द्वारा इंडिया का कॉलोनाइजेशन

10:15:54और तेजी से बढ़ता है

10:15:571833 का यह एक्ट गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल की

10:16:00पोस्ट को गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया की पोस्ट

10:16:03में चेंज कर देता है और उसको कंपनी के सभी

10:16:06सिविल और मिलिट्री अफेयर्स को कंट्रोल और

10:16:09डायरेक्ट करने की पावर दी दी जाति है सभी

10:16:12रेवेन्यू भी गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया की

10:16:14अथॉरिटी में रेस किया जान थे और

10:16:16एक्सपेंडिचर पर भी पुरी तरह उसका कंट्रोल

10:16:19एस्टेब्लिश कर दिया जाता है

10:16:25इंडियन लॉस के कंसोलिडेशन और कोडिफिकेशन

10:16:28के लिए एक डॉ कमीशन का प्रोविजन भी इस

10:16:31एक्ट में था एक्ट गवर्नर जनरल की काउंसिल

10:16:34में एक फोर्थ मेंबर भी एड करता है जो की

10:16:37डॉ मेकिंग में एक लीगल एक्सपर्ट हो इसे

10:16:40लोन मेंबर भी कहा जाता है पहले बार लॉर्ड

10:16:43मौली ये पोजीशन लेते हैं

10:16:45इसके साथ ही मुंबई और मद्रास गवर्नमेंट की

10:16:48लेजिसलेटिव पावर्स पुरी तरह खत्म कर दी

10:16:51जाति हैं अब वो सिर्फ गवर्नर जनरल को

10:16:54प्रपोज भेज सकते थे फाइनल डिसीजन लेने का

10:16:57राइट सिर्फ गवर्नर जनरल के पास ही होता है

10:17:02एडमिनिस्ट्रेशन को डिलीवरी अबॉलिश करने के

10:17:05स्टेप्स लेने के लिए भी कहता है आई अब

10:17:07नेक्स्ट चार्ट एक्ट के प्रोविजंस को समझते

10:17:10हैं

10:17:12चार्ट एक्ट 1853

10:17:161853 का चार्ट एक्ट डिसाइड करता है की जब

10:17:20तक पार्लियामेंट कोई और कानून नहीं बनाता

10:17:22तब तक इंडियन टेरिटरी का पोजीशन कंपनी के

10:17:26पास ही रहेगा यानी पहले बार लेज को 20 और

10:17:29सालों के लिए ऑटोमेटेकली एक्सटेंड नहीं

10:17:32किया जाता इसके अलावा सर्विसेज पर से

10:17:34कंपनी का पैठनिज खत्म कर दिया जाता है

10:17:37मतलब अब कंपनी अपनी पसंद से सर्विसेज में

10:17:40अपॉइंटमेंट नहीं कर शक्ति थी बल्कि इसके

10:17:43लिए ओपन कंपटीशन का प्रोबेशन किया जाता है

10:17:45डॉ मेंबर को गवर्नर जनरल की एग्जीक्यूटिव

10:17:49काउंसिल का फूल मेंबर बना दिया जाता है

10:17:511853 का चार्ट एक्ट गवर्नमेंट के

10:17:54एग्जीक्यूटिव और लेजिसलेटिव फंक्शंस को भी

10:17:57सेपरेट करता है लेजिसलेटिव परपोज के लिए

10:18:00सिक्स एडिशनल मेंबर्स को शामिल किया जाता

10:18:02है इस लेजिसलेटिव विंग को इंडियन

10:18:05लेजिसलेटिव काउंसिल बोला जाता है और इसमें

10:18:08लोकल रिप्रेजेंटेशन को भी इंट्रोड्यूस

10:18:10किया जाता है लेकिन फाइनल डॉ के लिए

10:18:13गवर्नर जनरल की एसेंट की जरूर होती है और

10:18:16वह लेजिसलेटिव काउंसिल किसी भी बिल को कर

10:18:20सकता था

10:18:21दोस्तों 1853 का चार्ट एक्ट आखिरी चार्ट

10:18:25एक्ट क्योंकि इसकी कर साल बाद ही 1857 की

10:18:29क्रांति हो जाति है और उसके बाद पास होता

10:18:31है गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858

10:18:38गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858

10:18:43रिवॉल्ट वेट 357 कंपनी के एडमिनिस्ट्रेशन

10:18:46को पुरी तरह एक्सपोज कर देता है उससे पहले

10:18:50तक इंडिया में मेल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए

10:18:52कोई अकाउंटबल नहीं था ब्रिटिश गवर्नमेंट

10:18:55डिसाइड करती है की इस नॉर्मली को

10:18:58रेक्टिफाई करने का समय ए गया है और ये

10:19:00ब्रिटिश गवर्मेंट के लिए सही मौका था

10:19:03कंपनी से इंडियन टेरिटरी की पोजीशन को

10:19:05लेने का 1858 का एक्ट पिट्स इंडिया एक्ट

10:19:09द्वारा इंट्रोड्यूस ड्यूल सिस्टम का और कर

10:19:12देता है अब इंडिया को कंपनी नहीं बल्कि

10:19:15क्राउन के नाम पर गवन किया जाना था इसके

10:19:18लिए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और उसकी 15 मेंबर

10:19:21की काउंसलर पॉइंट की जाति है

10:19:25अगस्त 1858 में लॉर्ड स्टेनली पहले

10:19:30सेक्रेटरी ऑफ स्टेट बनते हैं

10:19:32गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया के टाइटल को

10:19:35रिप्लेस करके वायसराय कर दिया जाता है

10:19:37जिसका मतलब था क्राउन का इंजन और वायसराय

10:19:41को डायरेक्ट ब्रिटिश गवर्नमेंट अप्वॉइंट

10:19:43करती थी इसके साथ लॉर्ड कैनिंग इंडिया के

10:19:47पहले वायसराय बनते हैं लेकिन दोस्तों

10:19:50समझना वाली बात ये है की इस मूवमेंट पर

10:19:53क्राउन के द्वारा पावर सुूम करना बस एक

10:19:55फॉर्मेलिटी ही थी जैसा की हम देख चुके हैं

10:19:58काफी पहले से ब्रिटिश गवर्नमेंट ही इंडियन

10:20:01अफेयर्स को रेगुलेट कर रही थी का सकते हैं

10:20:03की इस एक्ट ने ऑलरेडी डेड हॉर्स यानी की

10:20:06कंपनी को एक डिसेंट बेरियल देने का कम

10:20:09किया था

10:20:13कंक्लुजन

10:20:16दोस्तों यह थी 1858 तक पास किया गए

10:20:20इंपॉर्टेंट एक्ट्स की समरी जिसमें हमने

10:20:22देखा की कैसे ग्रैजुअली ब्रिटिश गवर्नमेंट

10:20:25ईस्ट इंडिया कंपनी से इंडियन अंपायर को

10:20:28कैप्चर कर लेती है अपने नेक्स्ट वीडियो

10:20:31में हम 1858 के बाद ब्रिटिश गवर्मेंट

10:20:34द्वारा पास किया गए एक्ट्स को समझेंगे

10:20:39आफ्टर 1858 तिल इंडिपेंडेंस

10:20:42दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने 1858

10:20:46तक के रेगुलेशंस और चार्ट एक्ट्स को

10:20:48डिस्कस किया था आज हम इसके आगे के एक्ट के

10:20:51बड़े में बात करेंगे जैसा की हम देख चुके

10:20:54हैं की 1858 के एक्ट से कंपनी के रूल का

10:20:58एंड हो जाता है और इंडिया डायरेक्ट

10:21:01ग्राउंड के एडमिनिस्ट्रेशन में ए जाता है

10:21:03इसके बाद पहले एक्ट पास होता है 1861 में

10:21:06जिसे इंडियन काउंसिल एक्ट 1861 बोला जाता

10:21:10है

10:21:15इंडियन काउंसिल एक्ट 1861

10:21:20इंडियन काउंसिल एक्ट 1861 ब्रिटिश

10:21:23पार्लियामेंट का एक एक्ट था जिसने गवर्नर

10:21:26जनरल के काउंसिल में सिग्निफिकेंट चेंज

10:21:29इंट्रोड्यूस किया थे

10:21:30काउंसिल के एग्जीक्यूटिव फंक्शंस के लिए

10:21:33फिफ्थ मेंबर को एड किया जाता है यह फाइव

10:21:36मेंबर्स होम मिलिट्री डॉ रिवेन्यू और

10:21:39फाइनेंस देखते थे इस एक्ट के थ्रू

10:21:42पोर्टफोलियो सिस्टम भी इंट्रोड्यूस किया

10:21:45जाता है जो उसे समय के वायसराय लॉर्ड

10:21:47कैनिंग का आइडिया था

10:21:50इस सिस्टम में एच मेंबर को पर्टिकुलर

10:21:53डिपार्मेंट का पोर्टफोलियो असाइन किया

10:21:55जाता है

10:22:05इन्हें खुद गवर्नर जनरल नॉमिनेट करते थे

10:22:08इनका अपॉइंटमेंट 2 साल के लिए किया जाता

10:22:11था और 12 में से कम से कम हाफ मेंबर्स का

10:22:14नॉन ऑफिशल होना जरूरी था यहां ऑफिशल का

10:22:18मतलब था ऐसे लोग जो गवर्नमेंट सर्विसेज का

10:22:21पाठ नहीं थे और इसमें यूरोपियंस और नेटिव

10:22:24इंडियन दोनों ही शामिल थे

10:22:27यह एक्ट मुंबई और मद्रास की गवर्नर और

10:22:30उनकी काउंसिल की लेजिसलेटिव पावर्स को

10:22:32रिस्टोर कर देता है जिन्हें 1833 के चार्ट

10:22:36एक्ट ने खत्म कर दिया था लेकिन बिना

10:22:39गवर्नर की परमिशन की कोई पास नहीं हो सकता

10:22:41था इसके साथ ही वायसराय के पास काउंसिल के

10:22:45किसी भी डिसीजन को ओवरराइड करने की पावर

10:22:48भी थी इमरजेंसी के दौरान वायसराय को

10:22:51ऑर्डिनेंस पास करने की पावर भी दी जाति है

10:22:54इस एक्ट के अंदर बाकी प्रोविंस में भी

10:22:57लेजिसलेटिव काउंसिल के फॉर्मेशन का

10:22:59प्रोविजन था जिसके तहत 1862 में बंगाल

10:23:031886 में नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस

10:23:07और 1897 में पंजाब और बर्मा में

10:23:10लेजिसलेटिव काउंसिल का फॉर्मेशन होता है

10:23:12इसके अलावा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट किसी भी

10:23:16लेजिसलेशन को डिसएप्रूव कर सकता था मतलब

10:23:19लेजिसलेशन पर अल्टीमेट पावर ब्रिटेन में

10:23:22बैठे सेक्रेटरी के हाथ में थे

10:23:25200 इस तरह 1861 के एक्ट ने लेजिसलेटिव

10:23:29काउंसिल को इन लाज तो कर दिया लेकिन उनका

10:23:32रोल लिमिटेड ही था यह मेली एडवाइजरी था और

10:23:36फाइनेंस यानी की बजट के ऊपर कोई भी

10:23:38डिस्कशन तक करना अलाउड नहीं था

10:23:42जो 1892 में इंट्रोड्यूस किया गया था

10:23:49इंडियन काउंसिल एक्ट 1892

10:23:541885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की

10:23:57फाउंडेशन हो चुकी थी और कांग्रेस की सबसे

10:23:59बड़ी डिमांड लेजिसलेटिव काउंसिल का

10:24:01रिफॉर्म करना ही थी इसी डिमांड को ध्यान

10:24:04में रखते हुए ब्रिटिश पार्लियामेंट इंडियन

10:24:07काउंसिल एक्ट 1892 भास्कर करती है एक्ट के

10:24:10थ्रू गवर्नर जनरल की लेजिसलेटिव काउंसिल

10:24:12को फरदर इन लॉज किया जाता है साथ ही

10:24:16सेंट्रल और प्रोविंशियल दोनों ही जगह है

10:24:18नॉन ऑफिशल मेंबर्स की संख्या भी बड़ा दी

10:24:21जाति है यूनिवर्सिटी जिला बोर्ड्स

10:24:25म्युनिसिपालिटीज जमींदारा ट्रेड बॉडीज और

10:24:28चैंबर्स ऑफ कॉमर्स को प्रोविंशियल काउंसिल

10:24:31के लिए मेंबर्स रिकमेंड करने की पावर दी

10:24:33जाति है इस तरह यह प्रिंसिपल ऑफ

10:24:37रिप्रेजेंटेशन को इंट्रोड्यूस करता है

10:24:45इनडायरेक्ट इलेक्शन के एलिमेंट को

10:24:48एक्सेप्ट कर लिया गया था इसके साथ ही

10:24:50लेजिस्लेटर्स को बजट पर डिस्कशन करने की

10:24:53पावर दी जाति है और वो कुछ लिमिट्स के

10:24:56अंदर पब्लिक इंटरेस्ट के मैटर्स पर

10:24:58एग्जीक्यूटिव से क्वेश्चन भी कर सकते थे

10:25:00हालांकि इसके लिए उन्हें छह दिन पहले

10:25:03नोटिस देना होता था दोस्तों 1892 का

10:25:06काउंसलिंग कांग्रेस के लिए एक अचीवमेंट

10:25:09जरूर था क्योंकि उनकी लेजिसलेटिव काउंसिल

10:25:12को इन बड़े करने की डिमांड इसने एक्सेप्ट

10:25:14कर ली थी लेकिन अभी भी यह पुरी तरह

10:25:17रिप्रेजेंटेटिव बॉडी नहीं थी और ना ही

10:25:20उनके पास कोई सब्सटेंशियल पावर्स थी इसलिए

10:25:23फुर्थर रिफॉर्म्स की डिमांड बनी रहती है

10:25:25और अगला रिफॉर्मेट 1909 में पास होता है

10:25:32इंडियन काउंसिल एक्ट 1909

10:25:361909 के काउंसिल एक्ट को मौली मिंटो

10:25:40रिफॉर्म्स के नाम से भी जाना जाता है यह

10:25:42इंडिया की गवर्नेंस में रिप्रेजेंटेटिव और

10:25:45पॉपुलर एलिमेंट लाने का पहले ब्रिटिश

10:25:47अटेंप्ट था

10:25:49इसके थ्रू इंपीरियल लेजिसलेटिव काउंसिल की

10:25:52स्ट्रैंथ को 16 मेंबर्स से इंक्रीज करके

10:25:55अब 60 मेंबर्स कर दिया जाता है

10:26:00इंडियन मेंबर को शामिल किया जाता है

10:26:03एग्जीक्यूटिव काउंसिल को जॉइन करने वाले

10:26:05पहले इंडियन सत्येंद्र प्रसाद सिंह बनते

10:26:08हैं उन्होंने लौंग मेंबर के पद पर काउंसिल

10:26:11को जॉइन किया था प्रोविंशियल एग्जीक्यूटिव

10:26:14काउंसिल के मेंबर्स की संख्या भी इंक्रीज

10:26:16कर दी जाति है

10:26:18है इसके अलावा सेंट्रल और प्रोविंशियल

10:26:20लेजिसलेटिव काउंसिल को पहले से ज्यादा

10:26:22पावर्स दी जाति हैं

10:26:24प्रोविंशियल लेजिसलेटिव काउंसिल में नॉन

10:26:27ऑफिशल मेंबर्स की मेजॉरिटी हो जाति है

10:26:29लेजिसलेटिव काउंसिल के मेंबर अब बजट पर

10:26:32डिस्कशन के साथ रेजोल्यूशन भी पास कर सकते

10:26:35थे और सप्लीमेंट्री क्वेश्चन पूछने का

10:26:38राइट भी उन्हें दिया जाता है

10:26:411909 का एक्ट मुस्लिम के लिए सेपरेट

10:26:44इलेक्ट्रिक का प्रोविजन भी करता है साथ ही

10:26:47इंडियन अफेयर्स के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की

10:26:49काउंसिल में भी दो इंडियन को नॉमिनेट किया

10:26:52जाता है इस तरह मौली मिंटू रिफॉर्म्स एक

10:26:55तरफ तो काउंसिल रिफॉर्म्स की बात करते हैं

10:26:57वहीं दूसरी तरफ सेपरेट इलेक्टरेट जैसे

10:27:01प्रोविजंस की हेल्प से डिवाइड और रूल की

10:27:03पॉलिसी को आगे लेकर जाते हैं इसके 10 साल

10:27:06बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट अगला रिफॉर्म एक्ट

10:27:08पास करती है

10:27:17दोस्तों 1990

10:27:20चिप्स पर रिफॉर्म्स पर बेस था अगस्त 1917

10:27:24में पहले बार ब्रिटिश गवर्नमेंट ने

10:27:26डिक्लेअर किया था की उसका ऑब्जेक्टिव

10:27:28इंडिया में ग्रैजुअली रिस्पांसिबल

10:27:31गवर्नमेंट इंट्रोड्यूस करना है ये एक्ट इस

10:27:34दिशा में कम समझा जा सकता है इस एक्ट ने

10:27:36सेंटर में इंडियन लेजिसलेटिव काउंसिल को

10:27:39रिप्लेस करके बाय कैमररल सिस्टम

10:27:41इंट्रोड्यूस किया था जिसमें काउंसिल ऑफ

10:27:43स्टेट यानी की यहां पर हाउस और लेजिसलेटिव

10:27:46असेंबली यानी की लोअर हाउस था दोनों ही

10:27:49हाउसेस में मेजॉरिटी डायरेक्टली इलेक्ट

10:27:52मेंबर्स की होती थी यानी की 1990 का एक्ट

10:27:55पहले बार डायरेक्ट इलेक्शंस का प्रोविजन

10:27:58करता है हालांकि फ्रेंचाइजी वोटिंग का

10:28:02राइट बहुत ही लिमिटेड पापुलेशन के पास ही

10:28:04था यह प्रॉपर्टी टैक्स और एजुकेशन जैसी

10:28:07क्वालिफिकेशन पर बेस था

10:28:09एक्ट में कम्युनल रिप्रेजेंटेशन के

10:28:11प्रिंसिपल को भी एक्सटेंड किया गया था और

10:28:14मुस्लिम के अलावा सिक्स क्रिश्चियन और

10:28:16एंग्लो इंडियन को भी सेपरेट इलेक्टरेट

10:28:19प्रोवाइड कर दिए गए थे

10:28:21है इसके अलावा प्रोविंस में दी की

10:28:24इंट्रोड्यूस की गई थी जिसके तहत

10:28:26सब्जेक्ट्स को दो लिस्ट में डिवाइड किया

10:28:28गया था रिजर्व्ड और ट्रांसफर

10:28:31रिजर्व्ड लिस्ट में आने वाले सब्जेक्ट्स

10:28:34को गवर्नर द्वारा एडमिनिस्टर किया जाना था

10:28:36इसमें लायन ऑर्डर फाइनेंस लैंड रिवेन्यू

10:28:39और इरिगेशन जैसे सब्जेक्ट्स को रखा गया था

10:28:42वहीं ट्रांसफर सब्जेक्ट्स को मिनिस्टर्स

10:28:45एडमिनिस्टर करने वाले थे जिन्हें

10:28:47लेजिसलेटिव काउंसिल के इलेक्ट मेंबर्स के

10:28:50बीच से नॉमिनेट किया जाना था इसमें

10:28:53एजुकेशन इंडस्ट्री एग्रीकल्चर और एक्सिस

10:28:57जैसे सब्जेक्ट्स थे प्रोविंस में

10:28:59कांस्टीट्यूशनल मशीनरी फूल होने की

10:29:01सिचुएशन में गवर्नर ट्रांसफर सब्जेक्ट्स

10:29:04का एडमिनिस्ट्रेशन भी अपने अंदर ले सकता

10:29:07था पहले बार प्रोविंशियल और सेंट्रल बजट

10:29:10को भी सेपरेट किया गया था यानी की

10:29:12प्रोविंस को अब खुद का बजट बनाने की पावर

10:29:15मिल गई थी एक्ट की एक प्रोविजन के अनुसार

10:29:18इंडिया के लिए हाय कमिश्नर को अप्वॉइंट

10:29:21किया बन जाता है जो लंदन में 6 साल तक इस

10:29:24ऑफिस पर रहेगा और उसका कम यूरोप में

10:29:27इंडियन ट्रेड को देखना होगा कुछ फंक्शंस

10:29:30जिन्हें पहले सेक्रेटरी ऑफ स्टेट देखते थे

10:29:32अब हाय कमिश्नर को ट्रांसफर कर दिए जाते

10:29:34हैं एक्ट में यह फैसला भी किया जाता है की

10:29:37सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जिसे अभी तक इंडियन

10:29:40रिवेन्यू से पे किया जाता था अब ब्रिटिश

10:29:42एक्स चेकर से उसकी पेमेंट होगी इससे होम

10:29:46चार्ज कम होते हैं इसके साथ दोस्तों 1919

10:29:49के इस एक्ट की वजह से इंडियन लीडर्स को

10:29:52पहले बार कांस्टीट्यूशनल सेटअप में कम

10:29:54करने का कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपीरियंस

10:29:56जरूर मिला था लेकिन रिस्पांसिबल गवर्नमेंट

10:30:00की डिमांड को पूरा करने से अभी ये बहुत

10:30:02दूर था इंडियन लेजिसलेच्योर अभी भी एक नॉन

10:30:06सावरेन लव मेकिंग बॉडी थी| और गवर्मेंट

10:30:09एक्टिविटी के सभी अफेयर्स में

10:30:11एग्जीक्यूटिव के सामने पावर एस बनी हुई थी

10:30:13दोस्तों

10:30:151990 के एक्ट में एक प्रोविजन यह भी था की

10:30:1910 साल

10:30:21पॉइंट की जाएगी जो 1990 के रिफॉर्म्स को

10:30:24इवेलुएट करेगी और आगे की रिफॉर्म्स के

10:30:26बड़े में सजेशन देगी

10:30:29है लेकिन नवंबर 1927 में यानी की शेड्यूल

10:30:32से 2 साल पहले ही इस कमीशन के अपॉइंटमेंट

10:30:35को अनाउंस कर दिया जाता है इंडियन

10:30:37स्टेट्यूटरी कमीशन जिसे उसके अध्यक्ष के

10:30:41नाम पर साइमन कमीशन भी कहा जाता है अपनी

10:30:44रिपोर्ट 1930 में सबमिट करती है इसके

10:30:48प्रपोजल्स पर डिस्कशन करने के लिए ब्रिटिश

10:30:50गवर्नमेंट तीन राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस

10:30:52ऑर्गेनाइजर करती है और उसके बाद एक

10:30:55रिपोर्ट तैयार होती है जिसके आधार पर 1935

10:30:59का एक्ट पास किया जाता है

10:31:03गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935

10:31:091935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में

10:31:13451 क्लासेस और 15 शेड्यूल थे इसमें जो

10:31:17इंडिया फेडरेशन को एस्टेब्लिश करने की बात

10:31:19कहीं गई थी जिसके तहत गवर्नर प्रोविंस के

10:31:23कमिश्नर प्रोविंस और इंडियन प्रिंसली

10:31:26स्टेटस का एक यूनियन फॉर्म किया जाना था

10:31:28इसके साथ ही प्रोविंस में डायर की को खत्म

10:31:32कर दिया जाता है लेकिन सेंट्रल

10:31:34एग्जीक्यूटिव में इसे इंट्रोड्यूस किया

10:31:36जाता है इसमें सेंट्रल लेजिसलेटिव हाउसेस

10:31:39के बीच डेडलॉक की स्थिति में जॉइंट सेशन

10:31:42का प्रोविजन भी इंट्रोड्यूस किया जाता है

10:31:44इसके साथ ही लेजिसलेटिव सब्जेक्ट्स को तीन

10:31:48लिस्ट में डिवाइड किया जाता है फेडरल

10:31:51लिस्ट प्रोविंशियल लिस्ट

10:31:55पर लेजिसलेशन

10:31:59फेडरल लेजिसलेच्योर द्वारा पास बिल्कुल वे

10:32:02तू करने की पावर वायसराय के पास बनी रहती

10:32:04है प्रोविंस को ऑटोनॉमी दी जाति है और

10:32:07वहां फूली रिस्पांसिबल गवर्नमेंट को

10:32:09एस्टेब्लिश किया जाता है हालांकि कुछ

10:32:12सेफगार्ड भी रहते हैं प्रोविंशियल

10:32:14लेजिस्लेटर्स को भी फरदर एक्सपेंड किया

10:32:16जाता है मद्रास बॉम्बे बंगाल यूनाइटेड

10:32:19प्रोविंस बिहार और

10:32:21असेंबलीकैमरल लेजिस्लेटर्स एस्टेब्लिश

10:32:24करने का प्रोविजन भी इसमें शामिल था

10:32:26कम्युनल इलेक्ट्रोड के प्रिंसिपल को

10:32:28एक्सटेंड करते हुए डिप्रेस्ड क्लासेस

10:32:31वूमेन और लेबर क्लास के लिए भी इसका

10:32:34प्रोविजन कर दिया जाता है

10:32:361935 का एक्ट फ्रेंचाइजी को भी एक्सटेंड

10:32:39करता है टोटल पापुलेशन में लगभग 10% को अब

10:32:43वोटिंग राइट मिल जाता है एक्ट में फेडरल

10:32:46कोड का प्रोविजन भी था जिसे 1937 में

10:32:49एस्टेब्लिश किया जाता है

10:32:51है इसके पास ओरिजिनल और बैलेट पावर्स के

10:32:53साथ इंटरस्टेट डिस्प्यूट को सेटल करने की

10:32:56पावर भी थी इसके अलावा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट

10:33:00की इंडियन काउंसिल को अबॉलिश कर दिया जाता

10:33:02है दोस्तों एक्ट में विजुलाइज जो इंडिया

10:33:06फेडरेशन तो कभी अस्तित्व में नहीं ए पता

10:33:08क्योंकि इंडिया की डिफरेंट पार्टी और

10:33:11स्पेशली प्रिंसली स्टेटस इसके अगेंस्ट हो

10:33:13गए थे फर्स्ट अप्रैल 1937 को प्रोविंशियल

10:33:17ऑटोनॉमी के प्रोविजन को इंप्लीमेंट कर

10:33:19दिया जाता है लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट कुछ

10:33:22माइनर अमेंडमेंट के साथ अभी भी 1990 के

10:33:26एक्ट के अकॉर्डिंग ही कम करती रहती है

10:33:291935 के एक्ट का ऑपरेटिव पार्ट आजादी

10:33:32मिलने तक यानी की 15th अगस्त 1947 तक

10:33:35फोर्स में राहत है यह कोशिश थी इंडिया को

10:33:39रिटर्न कॉन्स्टिट्यूशन देने की लेकिन इसके

10:33:42क्रिएशन में इंडियन को इंवॉल्व नहीं किया

10:33:44गया था इसके साथ ही इसमें अमेंडमेंट का

10:33:48राइट भी ब्रिटिश पार्लियामेंट को ही दिया

10:33:50गया था

10:33:51इंडिया में इस एक्ट की लगभग सभी सेक्शंस

10:33:53ने आलोचना की थी और कांग्रेस ने इसे पुरी

10:33:57तरह रिजेक्ट कर दिया था इसकी जगह कांग्रेस

10:34:00एडल्ट फ्रेंचाइजी पर आधारित

10:34:02कॉन्स्टिट्यूशन

10:34:09बने तक 1935 एक्ट के थ्रू ही इंडिया को

10:34:13गवर्नर किया जाता है और इंडियन

10:34:15कॉन्स्टिट्यूशन भी इसके काफी सारे

10:34:18प्रोविजंस को बर करता है

10:34:22कंक्लुजन

10:34:25दोस्तों इस तरह 1858 के बाद धीरे-धीरे

10:34:28इंडियन कांस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट हुए थे

10:34:31अलग-अलग एक्ट्स के द्वारा इंडिया में कुछ

10:34:34हद तक रिस्पांसिबल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट

10:34:37इंट्रोड्यूस की गई थी हालांकि पुरी तरह

10:34:39इसका फॉर्मेशन आजादी मिलने के बाद ही होता

10:34:42है फिर भी हम का सकते हैं की इन एक्ट्स के

10:34:46थ्रू इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन

10:34:51करते हैं जो आजादी के बाद इंडियन

10:34:54डेमोक्रेसी को सफल बनाने में काफी मदद

10:34:57करता है

10:34:59लोकल सेल्फ गवर्नमेंट

10:35:03दोस्तों इंडिया में एशिया टाइम से लोकल

10:35:06गवर्निंग बॉडीज देखने को मिलती हैं फिर

10:35:09चाहे वो मौर्य अंपायर के दौरान पाटलिपुत्र

10:35:12की सिटी काउंसिल हूं या फिर चोला अंपायर

10:35:14की विलेज असेंबलीज लोकल गवर्नमेंट

10:35:25ब्रिटिश रूल के समय शुरू हुआ था आज हम इसी

10:35:29को यानी ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के दौरान

10:35:31लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के डेवलपमेंट को

10:35:34डिटेल में देखने वाले हैं लेकिन उसे समझना

10:35:36से पहले यह जान लेना जरूरी है की आखिर

10:35:39ब्रिटिश ने इंडिया में लोकल गवर्निंग

10:35:41बॉडीज का डेवलपमेंट क्यों शुरू किया था तो

10:35:44आई जानते हैं

10:35:45रीजंस बिहाइंड डी ग्रोथ ऑफ लोकल बॉडीज

10:35:50बहुत से ऐसे फैक्टर्स थे जिनकी वजह से

10:35:52ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडिया में लोकल बॉडीज

10:35:54को एस्टेब्लिश करने का डिसीजन लेती है

10:35:56इसमें सबसे पहले करण था ओवर सेंट्रलाइज की

10:36:00वजह से ए रही फाइनेंशियल डिफिकल्टी

10:36:041857 की क्रांति के बाद कंपनी पर

10:36:07फाइनेंशियल प्रेशर बहुत अधिक बाढ़ गया था

10:36:09ऐसे में डिसेंट्रलाइजेशन करना जरूरी हो

10:36:13गया था जिससे रोड और पब्लिक वर्क की

10:36:16रिस्पांसिबिलिटी लोकल बॉडीज को ट्रांसफर

10:36:18की जा सके और गवर्नमेंट को एडिशनल

10:36:21रिवेन्यू भी मिले इसके अलावा नेशनलिस्ट

10:36:24लीडर्स की भी डिमांड थी की बेसिक सिविक

10:36:27फैसेलिटीज में इंप्रूवमेंट किया जाए जो की

10:36:29लोकल बॉडीज के थ्रू ही बटर हो सकता था साथ

10:36:33ही कुछ ब्रिटिश पॉलिसी मार्क्स का यह भी

10:36:35मानना था की लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ

10:36:37इंडियन को जोड़ने से ब्रिटिश सुप्रीमेसी

10:36:40भी अंडमान नहीं होगी और इंडियन में बढ़ते

10:36:43हुए पॉलिटिसाइजेशन को भी सीमित किया जा

10:36:46सकेगा इसके साथ ही लोकल वेलफेयर के लिए

10:36:49लोकल टैक्सिस का उसे होने से ऑलरेडी बर्डन

10:36:52सेंट्रल ट्रेजरी पर प्रेशर भी नहीं बनेगा

10:37:11डी बिगनिंग

10:37:14सबसे पहले लोकल बॉडीज प्रेसीडेंसी टाउन

10:37:17में इस टैबलेट की जाति है

10:37:191687 में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने मद्रास

10:37:22में कॉरपोरेशन सेटअप करने का ऑर्डर दिया

10:37:24था यह कोऑपरेशन ब्रिटिश और इंडियन मेंबर्स

10:37:28से मिलकर बनी थी और इसी सिटी में गढ़ हाल

10:37:30जय स्कूल एट सिटेरा बिल्ड करने के लिए

10:37:33टैक्स लवी करने की पावर दी गई थी लेकिन यह

10:37:37एक्सपेरिमेंट फेल हो जाता है क्योंकि

10:37:39रेजिडेंस डायरेक्ट टैक्स देने के लिए

10:37:41तैयार नहीं थे जी वजह से कॉरपोरेशन कोई भी

10:37:45प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पाती इसके बाद

10:37:4817-26 का चार्ट एक्ट कॉरपोरेशन की जगह

10:37:51मायर्स कोर्ट सेटअप करने का प्रोविजन करता

10:37:54है

10:37:57जुडिशल थी मद्रास के अलावा मुंबई और

10:38:01कोलकाता में भी सिमिलर मायर्स कोर्ट सेटअप

10:38:04किया जाते हैं इसके बाद 1793 का चार्ट

10:38:07एक्ट पहले बार म्युनिसिपल इंस्टीट्यूशंस

10:38:10को स्टेट्यूटरी बेसिस प्रोवाइड करता है

10:38:12इसमें गवर्नर जनरल को मार दी जाति है की

10:38:15वह प्रेसीडेंसी टोंस में जस्टिस ऑफ पीस को

10:38:18अप्वॉइंट कर सकते

10:38:21मीत करने स्कैवेंजिंग और रोड्स को रिपेयर

10:38:25करने के लिए हाउस और लेंस पर टैक्स लगाने

10:38:27की पावर दी गई थी इसके अलावा 1850 में

10:38:31एक्ट पास किया गया था जिसके बाद

10:38:33प्रेसिडेंट के अलावा दूसरे टोंस में भी

10:38:37म्युनिसिपल बॉडीज का डेवलपमेंट शुरू हो

10:38:39गया था इसमें म्युनिसिपल बॉडीज को

10:38:42इनडायरेक्ट टैक्स लगाने की पावर दी गई थी

10:38:44इसका फायदा उठाकर नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंस

10:38:47यानी की मॉडर्न अप और मुंबई के बहुत सारे

10:38:50डांस में म्युनिसिपल समिति सेटअप की गई थी

10:38:53प्रेसीडेंसी टाउन में रेंटल वैल्यू के

10:38:56फाइव परसेंट रेट पर हाउस टैक्स इंपोज किया

10:38:59गया था

10:39:04कॉरपोरेशन के मेंबर्स को सिलेक्ट करने का

10:39:07राइट भी दे दिया गया

10:39:08था लेकिन 1856 में यह सिचुएशन पुरी तरह

10:39:12रिवर्स हो जाति है क्योंकि बॉम्बे में

10:39:14एग्जीक्यूटिव पावर नॉमिनेटेड कमिश्नर के

10:39:17हाथों में कंसंट्रेट कर दी जाति है ऐसा ही

10:39:20प्रोसीजर मद्रास और कोलकाता में भी फॉलो

10:39:22होता है इसके बाद लोकल बॉडीज के इवोल्यूशन

10:39:25में एक बड़ा डेवलपमेंट 1870 में होता है

10:39:29आई इस डेवलपमेंट को डिटेल में समझते हैं

10:39:33न्यूज़ रेजोल्यूशन ऑफ 1870

10:39:361870 में वायसराय लॉर्ड मेयर एक

10:39:39रेजोल्यूशन पास करते हैं यह रेजोल्यूशन

10:39:42फाइनेंशियल डिसेंट्रलाइजेशन से रिलेटेड था

10:39:45एडमिनिस्ट्रेटिव कन्वीनियंस और फाइनेंशियल

10:39:48स्ट्रिजेंसी को देखते हुए इंपीरियल यानी

10:39:50की सेंट्रल गवर्नमेंट ने एडमिनिस्ट्रेशन

10:39:53के कुछ डिपार्टमेंट प्रोविंशियल गारमेंट्स

10:39:56को ट्रांसफर कर दिए थे जैसे की एजुकेशन

10:39:58मेडिकल सर्विसेज और रोड

10:40:01इसके लिए इंपीरियल गवर्नमेंट की तरफ से

10:40:04प्रोविंस को एनुअल ग्रैंड दिए जान थे साथी

10:40:07प्रोविंशियल गवर्मेंट को अपने बजट को

10:40:10बैलेंस करने के लिए लोकल टैक्सेशन का

10:40:12अधिकार भी दिया गया था

10:40:14लॉर्ड मियो के रेजोल्यूशन में कहा गया की

10:40:17एजुकेशन सैनिटेशन मेडिकल रिलीफ और लोकल

10:40:21वर्क के लिए देवोटेड फंड्स को सक्सेसफुली

10:40:24मैनेज करने के लिए लोकल इंटरेस्ट केयर और

10:40:27सुपरविजन बहुत ही जरूरी है खाने का मतलब

10:40:30ये हुआ की लोकल सेल्फ गवर्निंग

10:40:32इंस्टीट्यूशंस को स्ट्रेंजर करने की जरूर

10:40:34थी

10:40:35रेजोल्यूशन में आउटलाइन पॉलिसी को

10:40:38इंप्लीमेंट करने के लिए कई प्रोविंशियल

10:40:40गवर्नमेंट मऊ म्युनिसिपल एक्ट पास करती है

10:40:43बंगाल जिला बोर्ड सिस एक्ट 1871 और बंगाल

10:40:48में लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के लिए लिया गया

10:40:50पहले कम था सिमिलर एक्ट मद्रास नॉर्थवेस्ट

10:40:54प्रोविंस और पंजाब में भी पास होते हैं

10:41:01लोकल बॉडीज के लिए प्रोएक्टिव नजर आते हैं

10:41:05आई जानते हैं उनके बड़े में रेपिन्स

10:41:08रेजोल्यूशन ऑफ 1882

10:41:11लॉर्ड रिपन के समय एडमिनिस्ट्रेशन के

10:41:14हर्षविया में लिबरलाइजेशन देखने को मिलता

10:41:17है उनका 1882 का रेजोल्यूशन लोकल सेल्फ

10:41:21गवर्नमेंट के विकास में एक लैंडमार्क है

10:41:23लॉर्ड रिपन ने जब मायर्स रेजोल्यूशन के

10:41:26बाद लोकल बॉडीज की फील्ड में हुई

10:41:28प्रोग्रेस को रिव्यू किया तो बाय की लोकल

10:41:31रेट्स और सेसेस की मदद से एक बड़ी इनकम

10:41:34जेनरेट हो रही है और कुछ प्रोविंस ने इस

10:41:37इनकम की मैनेजमेंट को पुरी तरह लोकल बॉडीज

10:41:40को सोप हुआ है इस तरह म्युनिसिपालिटीज का

10:41:43मेंबर और यूजफुलनेस दोनों ही बाढ़ गए हैं

10:41:46लेकिन अभी भी देश के अलग-अलग हसन में इन

10:41:49क्वालिटी नजर ए रही है यानी की हर जगह

10:41:52प्रोग्रेस एक जैसी नहीं थी बहुत सी

10:41:55सर्विसेज जिन्हें लोकल बॉडीज को दिया जा

10:41:57सकता था अभी भी प्रोविंशियल गवर्नमेंट के

10:42:00हाथ में ही थी

10:42:01रिपन चाहते थे की प्रोविंशियल गवर्नमेंट

10:42:03लोकल बॉडीज के साथ फाइनेंशियल

10:42:05डिसेंट्रलाइजेशन का वही प्रिंसिपल उसे

10:42:08करें जो लॉर्ड मियो ने शुरू किया था अपनी

10:42:11कंट्रीब्यूशन के लिए लॉर्ड रिपन को फादर

10:42:14ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट भी कहा जाता है

10:42:17लॉर्ड रिपन के रेजोल्यूशन के में

10:42:19प्वाइंट्स कुछ इस तरह थे लोकल बॉडीज का

10:42:22विकास सिर्फ एडमिनिस्ट्रेशन को इंप्रूव

10:42:25करने के लिए ही नहीं बल्कि पॉपुलर और

10:42:27पॉलीटिकल एजुकेशन के इंस्ट्रूमेंट के तोर

10:42:29पर भी होना चाहिए लोकल अफेयर्स को अर्बन

10:42:32और और लोकल बॉडीज के थ्रू एडमिनिस्टर करने

10:42:35की पॉलिसी बनाई जाति है इन्हें डेफिनेट

10:42:38ड्यूटीज और रिवेन्यू के सूटेबल सोर्सेस भी

10:42:40दिए जाते हैं

10:42:45जिन्हें अप्वॉइंट करने के लिए इलेक्शंस भी

10:42:48ऑर्गेनाइज किया जा सकते थे और लोकल बॉडीज

10:42:51के चेयरपर्सन भी सिर्फ नॉन ऑफिशल मेंबर्स

10:42:54ही बन सकते थे ऑफिशल इंटरफ्रेंस को मिनिमम

10:42:57रखना का फैसला किया जाता है और इसी सिर्फ

10:42:59लोकल बॉडीज के एक्ट को रिवाइज और चेक करने

10:43:02के लिए ही किया जा सकता था ना की पॉलिसीज

10:43:05को डिक्टेट करने के लिए

10:43:14ऑफिशल एग्जीक्यूटिव सैंक्शन की जरूर थी

10:43:18है इस रेजोल्यूशन के आधार पर 1883 और 1885

10:43:23के बीच बहुत से एक्ट्स पास किया गए थे

10:43:26जिन्होंने इंडिया में म्युनिसिपल बॉडीज के

10:43:28कॉन्स्टिट्यूशन पावर्स और फंक्शंस को बहुत

10:43:31हद तक बादल दिया था लेकिन अभी इफेक्टिव

10:43:34लोकल सेल्फ गवर्निंग बॉडीज का सपना अधूरा

10:43:37ही था

10:43:38एक्जिस्टिंग लोकल बॉडीज में बहुत साड़ी

10:43:40लिमिटेशंस देखने को मिलती हैं जैसे की सभी

10:43:44जिला बोर्ड्स और बहुत सी मुनेलिटीज में

10:43:46इलेक्ट मेंबर्स माइनॉरिटी में ही थे इसके

10:43:50अलावा फ्रेंच बहुत ही लिमिटेड थी जिला

10:43:53बोर्ड्स को अभी भी जिला ऑफिशल सी एड कर

10:43:56रहे थे साथ ही गवर्नमेंट का स्ट्रिक्ट

10:43:59कंट्रोल बना हुआ था वह कभी भी अपनी मर्जी

10:44:02से इन लोकल बॉडीज को सस्पेंड या सुपर

10:44:05स्पीड कर शक्ति थी

10:44:07इसके अलावा

10:44:10नहीं थे उन्हें लगता था की इंडियन सेल्फ

10:44:14गवर्नमेंट के लिए अनफिट है

10:44:18इंपिरियलिज्म की पॉलिसी डोमिनेंट करती है

10:44:20और इसी की एक बड़े समर्थक लॉर्ड कर्जन

10:44:23लोकल बॉडीज पर ऑफिशल कंट्रोल बढ़ाने की

10:44:26दिशा में कम उठाते हैं

10:44:29एक बार फिर डिसेंट्रलाइजेशन पर कमीशन

10:44:33अप्वॉइंट की जाति है

10:44:35रॉयल कमीशन ऑन डिसेंट्रलाइजेशन 1998

10:44:41इस कमीशन के अनुसार लोकल बॉडीज की

10:44:44इफेक्टिव फंक्शनिंग में सबसे बड़ी समस्या

10:44:46फाइनेंशियल रिसोर्सेस की कमी होना है इसी

10:44:49को ध्यान में रखते हुए कमीशन अपने सुझाव

10:44:52दे दी है जिसमें सबसे पहले सुझाव था की

10:44:54विलेज पंचायत को और ज्यादा पावर्स दी जाए

10:44:57जैसे उन्हें पेटी केसेस में जुडिशल पावर्स

10:45:01मिले माइनर विलेज वर्क स्कूल फ्यूल और

10:45:04फॉदर रिजर्व्स पर खर्च करने की पावर मिले

10:45:07इसके लिए पंचायत को एडेक्वेट सोर्स ऑफ

10:45:10इनकम भी प्रोवाइड करना चाहिए इसके अलावा

10:45:12हर एक तालुका या तहसील में सब जिला

10:45:15बोर्ड्स को एस्टेब्लिश करना चाहिए जिनकी

10:45:18पावर्स और रिवेन्यू सोर्सेस जिला बोर्ड से

10:45:21अलग रखना चाहिए

10:45:35इसे दिया जा सकता था

10:45:38है इसके साथ इम्यूनिटी अगर चाहे तो

10:45:41प्राइमरी एजुकेशन के रिस्पांसिबिलिटी भी

10:45:43ले शक्ति हैं लेकिन सेकेंडरी एजुकेशन

10:45:45अस्पताल रिलीफ पुलिस और वेटरनरी वर्क जैसे

10:45:49मैटर्स के चार्ज से कमीशन लोकल बॉडीज को

10:45:52रिलीज करने के लिए कहती है

10:45:54कमीशन की रिकमेंडेशन पर ऑफिशल व्यू देते

10:45:57हुए 1915 में गवर्नमेंट का एक रेजोल्यूशन

10:46:00कहता है की लोकल रेवेन्यू इन इलास्टिक हैं

10:46:03और इन्हें फादर रिवाइज नहीं किया जा सकता

10:46:06इस तरह डिसेंट्रलाइजेशन कमीशन के सुझाव

10:46:09सिर्फ पीपल पर ही र जाते हैं और लोकल

10:46:12बॉडीज की कंडीशन वैसी ही बनी रहती है जैसे

10:46:15रिपन की समय में थी

10:46:17इसके बाद 1918 में लोकल सेल्फ बॉडीज से

10:46:21रिलेटेड एक और रेजोल्यूशन पास किया जाता

10:46:23है

10:46:2820th अगस्त 1917 को ब्रिटिश गवर्नमेंट ने

10:46:32डिक्लेअर किया था की उनका एक इंडिया में

10:46:35ग्रैजुअली रिस्पांसिबल गवर्नमेंट को डेवलप

10:46:37करना है और इसके लिए पहले स्टेप लोकल

10:46:40सेल्फ गवर्नमेंट के स्फीयर में ही लिया

10:46:42जाना था इसी अनाउंसमेंट को ध्यान में रखते

10:46:45हुए मे 1918 का यह रेजोल्यूशन इंडिया में

10:46:49लोकल सेल्फ गवर्नमेंट को रिव्यू करता है

10:46:51इसमें सजेस्ट किया जाता है की लोकल बॉडीज

10:46:54के ज्यादा से ज्यादा रिप्रेजेंटेटिव बनाए

10:46:56जैन और इन्हें सिर्फ नाम की नहीं बल्कि

10:46:59रियल अथॉरिटी भी दी जाए साथ ही

10:47:02प्रोविंशियल गवर्नमेंट को विलेज पंचायत के

10:47:05डेवलपमेंट की शुरुआत करने के लिए भी कहा

10:47:07जाता है

10:47:071918 के रेजोल्यूशन पर कोई स्टेप्स लिए

10:47:10जाते इससे पहले ही 1919 का गवर्नमेंट ऑफ

10:47:14इंडिया एक्ट पास होता है इसमें लोकल बॉडीज

10:47:16की क्या पोजीशन रहती है आई जानते हैं

10:47:25लोकल सेल्फ गवर्नमेंट को ट्रांसफर

10:47:28सब्जेक्ट की लिस्ट में रखा गया

10:47:31इस पर इलेक्ट मेंबर्स का कंट्रोल था और

10:47:34सभी प्रोविंस को अपनी अपनी जरूर के अनुसार

10:47:37लोकल सेल्फ इंस्टीट्यूशंस को डेवलप करने

10:47:40के लिए कहा गया था

10:47:42लेकिन फाइनेंस रिजर्व्ड सब्जेक्ट था यानी

10:47:46इस पर गवर्नर या एग्जीक्यूटिव काउंसलर का

10:47:49ही कंट्रोल था और फंड्स की कमी के करण

10:47:51इंडियन मिनिस्टर्स लोकल सेल्फ गवर्नमेंट

10:47:54के क्षेत्र में ज्यादा कुछ कम नहीं कर

10:47:56पाते

10:47:581928 के साइमन कमीशन भी अपनी रिपोर्ट में

10:48:01अप बंगाल और मद्रास के अलावा और जगह पर

10:48:05विलेज पंचायत की प्रोग्रेस ना होने की तरफ

10:48:08पॉइंट करती है इसके साथ ही कमीशन

10:48:10एफिशिएंसी के नाम पर लोकल बॉडीज के ऊपर

10:48:13प्रोविंशियल कंट्रोल को बढ़ाने जैसा

10:48:15रेट्रोग्रेट्स स्टेप भी सजेस्ट करती है

10:48:17साइमन कमीशन का यह भी मानना था की इलेक्ट

10:48:21मेंबर्स लोकल टैक्स को इंपोज करने में

10:48:24रेलूक्टेंट रहते हैं और 1919 रिफॉर्म्स के

10:48:27बाद लोकल बॉडीज के फाइनेंस का मैनेजमेंट

10:48:29और खराब हुआ है

10:48:31इसके बाद गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935

10:48:34पास होता है उसे समय लोकल बॉडीज की कंडीशन

10:48:37में क्या चेंज आते हैं आई जानते हैं डी

10:48:40गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 और आफ्टर

10:48:44गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में

10:48:47प्रोविंशियल ऑटोनॉमी प्रोवाइड की जाति है

10:48:49जिसके बाद इंडिया में लोकल सेल्फ गवर्निंग

10:48:53इंस्टीट्यूशंस का और तेजी से विकास संभव

10:48:55होता है पोर्टफोलियो फाइनेंस क्योंकि

10:48:57अभिलेक्टेड मिनिस्टरीज के पास था इसलिए

10:49:00लोकल बॉडीज को डेवलप करने के लिए फंड्स

10:49:03अवेलेबल किया जा सकते थे इसके साथ ही 1990

10:49:06के बाद से प्रोविंशियल और लोकल टैक्सेशन

10:49:09में चला ए रहा देमार्केशन भी खत्म कर दिया

10:49:11जाता है इस दौरान प्रोविंस में नए एक्ट्स

10:49:15पास किया जाते हैं जो लोकल बॉडीज को और

10:49:17ज्यादा अथॉरिटी देते हैं लेकिन फाइनेंशियल

10:49:20रिसोर्सेस और टैक्सेशन की पावर्स लगभग इस

10:49:23लेवल पर रहती हैं जैसी रिपन के समय में थी

10:49:26इसके अलावा 1935 के बाद लोकल बॉडीज पर कुछ

10:49:30रिस्ट्रिक्शंस भी लगा दी जाति हैं जैसे की

10:49:33ट्रेड्स कॉलिंग प्रोफेशनल्स और प्रॉपर्टी

10:49:36पर इनकी टैक्सेशन पावर्स को कम कर दिया

10:49:38जाता है

10:49:39मतलब यह हुआ की आजादी मिलने तक लोकल बॉडीज

10:49:43का बहुत ही सीमित विकास हुआ था इनके पास

10:49:46कोई रियल अथॉरिटी और पावर्स नहीं थी

10:49:49ज्यादातर पावर्स प्रोविंशियल गवर्नमेंट से

10:49:52ही डेरिव थी

10:49:53कंक्लुजन

10:49:55दोस्तों इस तरह ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के

10:49:58समय लोकल बॉडीज को डेवलप करने के कुछ

10:50:00स्टेप्स तो जरूर लिए गए थे लेकिन इसके

10:50:03पीछे ब्रिटिशर्स का में मकसद और ज्यादा

10:50:05रिवेन्यू कलेक्ट करना और अपनी

10:50:07रिस्पांसिबिलिटी से हाथ छुड़वाना था ना की

10:50:10इंडिया में लोकल लेवल पर डेमोक्रेसी डेवलप

10:50:12करना लॉर्ड रिपन जरूर कोशिश करते हैं की

10:50:16इंडियन को लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के जारी

10:50:18एडमिनिस्ट्रेशन से जोड़ा जाए लोकल बॉडीज

10:50:21का सही मैनो में विकास आजादी के बाद ही हो

10:50:25पता है इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल 40

10:50:28के तहत स्टेट गवर्नमेंट स्कूल विलेज

10:50:30पंचायत को ऑर्गेनाइज करने के लिए डायरेक्ट

10:50:32करता है इसके बाद 73 और 74th अमेंडमेंट

10:50:37एक्ट्स के जारी और और अर्बन लोकल बॉडीज को

10:50:40और स्ट्रेंजर किया जाता है लोकल सेल्फ

10:50:43गवर्नमेंट का डेवलपमेंट आज भी एक वर्किंग

10:50:46प्रोग्रेस है और इसमें रेगुलर इवोल्यूशन

10:50:48जरूरी है

10:51:01इवोल्यूशन को समझेंगे हम देखेंगे की किस

10:51:05तरह ब्रिटिश कॉलोनियल रूल की जरूर के

10:51:08हिसाब से इनमें समय के साथ चेंज किया जाते

10:51:11हैं सबसे पहले बात करते हैं पुलिस सिस्टम

10:51:14की इवोल्यूशन की

10:51:16इवोल्यूशन ऑफ पुलिस सिस्टम अंदर ब्रिटिश

10:51:18रूल दोस्तों फ्री कॉलोनियल इंडिया में

10:51:22यानी की मुग़ल और दूसरे नेटिव स्टेटस की

10:51:25गवर्नमेंट ऑटोक्रेटिक नेचर की होती थी और

10:51:28उसे समय कोई सेपरेट या फॉर्मल पुलिस

10:51:30सिस्टम नहीं हुआ करता था मुगल रूल के समय

10:51:33फौजदार डॉ और ऑर्डर मेंटेन किया करते थे

10:51:36इसके साथ ही सिटीज में ये कम कोतवाल का

10:51:39होता था यहां तक की 1765 से 1772 तक बंगाल

10:51:45में ड्यूल रोल के समय भी जमींदारा को ही

10:51:48डॉ और ऑर्डर मेेंटेन करने की जिम्मेदारी

10:51:50दी गई थी लेकिन कई बार जमींदारा अपनी

10:51:53ड्यूटी कर देते थे और कुछ जमींदारा तो

10:51:57डेकोर्स के साथ मिलकर उनकी ल में शेर भी

10:52:00लेते थे

10:52:021770 में फौजदर्स की पोस्ट को खत्म कर

10:52:05दिया गया था लेकिन

10:52:071774 में वारेन हेस्टिंग्स एक बार फिर से

10:52:11फौजदार्ज की इंस्टीट्यूशन को रिस्टोर कर

10:52:13दें और जमींदारा को इन्हें एसिस्ट करने के

10:52:17लिए कहा जाता है

10:52:181775 में बड़े डिस्ट्रिक्ट के मेजर टोंस

10:52:22में फौजदार थाना को एस्टेब्लिश किया जाता

10:52:24है और बहुत से छोटे पुलिस स्टेशन इन्हें

10:52:28एसिस्ट करने के लिए बनाए जाते हैं लेकिन

10:52:30इंडिया में रेगुलर पुलिस फोर्स क्रिएट

10:52:33करने का श्री लॉर्ड कार्नवालिस को जाता है

10:52:35इसके लिए उन्हें फादर ऑफ इंडियन पुलिस

10:52:39सर्विसेज भी कहा जाता है

10:52:401791 में लॉर्ड कार्नवालिस पुलिस फोर्स को

10:52:44ऑर्गेनाइज करने का कम शुरू करते हैं इसके

10:52:47लिए एक जिला को अलग-अलग थाना यानी की

10:52:51सर्कल्स में डिवाइड किया जाता है

10:52:56और जिला

10:52:59यानी की एसपी को बनाया जाता जमींदारा को

10:53:03उनकी पुलिस ड्यूटी से रिलीव कर दिया जाता

10:53:06है इस तरह एक इंडिपेंडेंस डॉ और ऑर्डर

10:53:09मशीनरी एस्टेब्लिश करने की कोशिश की जाति

10:53:11है इसके बाद 18008 में लॉर्ड मियो हर

10:53:16डिवीजन के लिए एक एसपी अप्वॉइंट कर देते

10:53:19हैं और इनकी हेल्प के लिए बहुत से स्पाइस

10:53:22यानी की गोयनका को रखा जाता है लेकिन यह

10:53:26स्पाइस लोकल पीपल का काफी शोषण करते थे

10:53:291814 में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के एक

10:53:32ऑर्डर के जारी दारोगाज और उनके

10:53:34सबोर्डिनेट्स का अपॉइंटमेंट बंगाल के

10:53:36अलावा कंपनी की बाकी सभी टेरिटरीज में

10:53:39अबॉलिश कर दिया जाता है इसके बाद बैंकिंग

10:53:42के समय 1828 तू 1835 में एसपी की पोस्ट भी

10:53:47अबॉलिश कर दी जाति है उसकी जगह अब कलेक्टर

10:53:50या मजिस्ट्रेट को पुलिस फोर्स हेड करने की

10:53:54रिस्पांसिबिलिटी मिलती है यानी एक बार फिर

10:53:57फ्यूजन ऑफ पावर देखने को मिलता है और हर

10:54:00डिवीजन की कमिश्नर को

10:54:02स्पीड की तरह एक्ट करना होता है यह

10:54:04अरेंजमेंट सफल नहीं राहत इससे पुलिस फोर्स

10:54:08का ऑर्गेनाइजेशन खराब हो जाता है और

10:54:10कलेक्टर पर बहुत ज्यादा बर्डन ए जाता है

10:54:13फिर 1860 में पुलिस कमिश्नर अप्वॉइंट की

10:54:17जाति है जिसकी रिकमेंडेशन के आधार पर

10:54:19इंडियन पुलिस एक्ट 1861 पास होता है इसके

10:54:24अनुसार सिविल कांस्टेबल का एक सिस्टम

10:54:26तैयार किया जाता है

10:54:28प्रोवेस में इंस्पेक्टर जनरल को पुलिस का

10:54:31हेड बनाया जाता है रेंज में डिप्टी

10:54:34इंस्पेक्टर जनरली ये कम देखा है वही जिला

10:54:37का हेड एक बार फिर से एसपी को बनाया जाता

10:54:40है

10:54:54इसके अलावा नेशनल मूवमेंट को सरप्राइज

10:54:58करने के लिए भी कई इंस्टेंस पर ब्रिटिश

10:55:01पुलिस उसे करते हैं

10:55:03ब्रिटिशर्स ने जो इंडिया पुलिस का क्रिएशन

10:55:06नहीं किया था

10:55:071861 का पुलिस एक्ट सिर्फ प्रोविंस में

10:55:10पुलिस सेटअप की गाइडलाइंस प्रोवाइड करता

10:55:12है हालांकि इसमें मेंशन रैंक्स को

10:55:15यूनिफॉर्म पूरे देश में इंट्रोड्यूस किया

10:55:17गया था इसके अलावा लौटकर्जन के समय 192

10:55:21में एक और पुलिस कमीशन फॉर्म की गई थी

10:55:24इसके हेड एंड्रयू फ्रीजर थे कमीशन की

10:55:28रिकमेंडेशन के आधार पर प्रोविंस में

10:55:30क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्मेंट यानी

10:55:33की सीआईडी और सेंटर में सेंट्रल

10:55:35इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी की सिब को

10:55:38एस्टेब्लिश किया गया था इनका इस्तेमाल

10:55:41इंडिया में रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी और

10:55:44नेशनल मूवमेंट को सरप्राइज करने के लिए

10:55:46किया जाता था दोस्तों यह तो बात हो गई

10:55:49पुलिस फोर्स के इवोल्यूशन की जिसने

10:55:52ब्रिटिश रूल को इंडिया में बनाए रखना में

10:55:54काफी हेल्प की थी अब बात करते हैं ऐसी

10:55:58फोर्स की जिसकी वजह से ब्रिटिश रूल इंडिया

10:56:01में एस्टेब्लिश हो पाया था और इतने समय

10:56:03कंटिन्यू रहा था यानी की ई

10:56:08ऑर्गेनाइजेशनवामी ड्यूरिंग ब्रिटिश रूल

10:56:11दोस्तों मिलिट्री इंडिया में कंपनी के रूल

10:56:14की बैकबोन हुआ करती थी

10:56:161857 की क्रांति से पहले इंडिया में

10:56:20मिलिट्री फोर्सेस के दोस्त सेपरेट बोर्ड्स

10:56:22ऑपरेट किया करते थे पहले सेटअप यूनिट जिसे

10:56:25क्वींस आर्मी कहा जाता था इंडिया में

10:56:28ड्यूटी पर आए सर्विंग ब्रिटिश ट्रूप्स का

10:56:30था और दूसरा कंपनी के ट्रूप्स हुआ करते थे

10:56:33जो यूरोपीय और नेटिव रेजिमेंट का मिक्सर

10:56:36होते थे

10:56:37क्वींस आर्मी ग्राउंड की मिलिट्री फोर्स

10:56:40का पार्ट हुआ करती थी

10:56:421857 के बाद ई का सिस्टमैटिक

10:56:45रीऑर्गेनाइजेशन किया जाता है इस

10:56:47रिऑर्गेनाइजेशन के पीछे मुख्य करण फिर से

10:56:501857 जैसी क्रांति होने से रोकना था

10:56:54सबसे पहले तो यह एश्योर किया जाता है की

10:56:57आर्मी में यूरोपियन ब्रांच न्यूमेरिकल

10:56:59हमेशा इंडियन ब्रांच को डोमिनेट करें इसके

10:57:03लिए बंगाल आर्मी में हर दो इंडियन सोल्जर

10:57:06पर एक यूरोपियन सोल्जर का प्रोपोर्शन

10:57:08फिक्स किया जाता है और मुंबई और मद्रास

10:57:11में यह प्रोपोर्शन 5 इंडियन सोल्जर पर दो

10:57:15यूरोपियन सोल्जर का राहत है इसके अलावा

10:57:171859 और 1879 की मिलिट्री कमिश्नर 1/3

10:57:21व्हाइट आर्मी के प्रिंसिपल पर इंसिस्ट

10:57:23करती हैं जबकि 1857 से पहले ये व्हाइट

10:57:27आर्मी सिर्फ 14% हुआ करती थी इसके साथ ही

10:57:31की ज्योग्राफिकल लोकेशंस और डिपार्मेंट

10:57:34जैसे की आर्टिलरी टैंक्स और आर्म्ड कर में

10:57:37स्ट्रिक्ट यूरोपियन मोनोपोली मेंटेन की

10:57:40जान लगी थी

10:57:41यहां तक की साल 1900 तक इंडियन को राइफल्स

10:57:45भी इनफीरियर क्वालिटी की दी जाति थी और इन

10:57:48हाईटेक डिपार्मेंट में सेकंड वर्ल्ड वार

10:57:50तक इंडियन को एंट्री नहीं दी गई थी कोई भी

10:57:54इंडियन ऑफिसर रैंक तक नहीं पहुंच सकता था

10:57:571914 तक इंडियन के लिए हाईएस्ट रैंक

10:58:00सूबेदार ही हुआ करती थी दोस्तों आर्मी की

10:58:05इंडियन ब्रांच को डिवाइड और रूल पॉलिसी के

10:58:07बेसिस पर भी रिऑर्गेनाइज किया जाता है

10:58:09इसके तहत मार्शल रेसेज और नॉन मार्शल

10:58:13रिसर्च की आईडियोलॉजी फॉर्म की जाति है

10:58:15जिसमें बताया जाता है की अच्छे सोल्जर

10:58:18सिर्फ स्पेसिफिक कम्युनिटी से ही ए सकते

10:58:21समय

10:58:37कम्युनिटी से इन डिस्क्रिमिनेशन

10:58:40रिक्रूटमेंट की पॉलिसी को जस्टिफाई किया

10:58:42जाता है क्योंकि इन ग्रुप ने 1857 की

10:58:46क्रांति को सरप्राइज करने में ब्रिटिश की

10:58:49हेल्प की थी और साथ ही यह रिलेटिवली

10:58:52मार्जिनल सोशल ग्रुप को बिलॉन्ग करते थे

10:58:54इसलिए इन पर नेशनलिज्म का इफेक्ट होने के

10:58:57चांसेस भी कम थे अवध बिहार सेंट्रल इंडिया

10:59:01और साउथ इंडिया के सोल्जर जिन्होंने 1857

10:59:04के रिवॉल्ट में भाग लिया था उन्हें नॉन

10:59:07मार्शल डिक्लेअर कर दिया जाता है

10:59:10है इसके अलावा सभी रैगनमेंट्स में कास्ट

10:59:13और कम्युनल कंपनी इंट्रोड्यूस कर दी जाति

10:59:15है और इंडियन रेजीमेंट को सोशियो एथेनिक

10:59:18ग्रुप का मिक्सर बना दिया जाता है जिससे

10:59:21ये एक दूसरे को बैलेंस करते रहे इसके साथ

10:59:24ही सोल्जर में नेशनल फीलींगस की ग्रोथ को

10:59:28रोकने के लिए कम्युनल कास्ट ट्रबल और

10:59:31रीजनल कॉन्शसनेस को इनकरेज किया जाता है

10:59:34इसी कॉन्टेक्स्ट में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट

10:59:36पर इंडिया चार्ल्स वुड ने कहा था की मैं

10:59:39डिफरेंट रेजीमेंट में अलग-अलग और राइवल्स

10:59:43स्पिरिट चाहता हूं जिससे जरूर पढ़ने पर

10:59:45बिना किसी संकोच के एक सिख हिंदू पर फायर

10:59:49कर सके और एक गोरख दोनों में से किसी पर

10:59:52भी फायर कर सकें इसके अलावा दोस्तों

10:59:54ब्रिटिश की तरफ से पुरी कोशिश की जाति है

10:59:57की सोल्जर को रेस्ट ऑफ डी पापुलेशन की

11:00:00लाइफ और थॉट से दूर रखा जाए इसके लिए

11:00:04अलग-अलग मैथर्ड अपने जाते हैं जैसे की

11:00:07न्यूज़ पेपर्स जर्नल्स और नेशनल

11:00:10पब्लिकेशंस को सोल्जर तक पहुंचने से रॉक

11:00:13जाता है

11:00:14है इस तरह 1857 के बाद ई का पुरी तरह

11:00:18रिऑर्गेनाइजेशन करके यह एश्योर किया जाता

11:00:21है की इंडिया पर ब्रिटिश हॉल कमजोर ना हो

11:00:24पे साथी इंडियन आर्मी को एशिया और अफ्रीका

11:00:27में ब्रिटिश अंपायर के एक्सपेंशन के लिए

11:00:30भी उसे किया जाता है

11:00:31पुलिस और आर्मी जहां ब्रिटिश रूल को

11:00:34एस्टेब्लिश और प्रोटेस्ट करने का कम करते

11:00:36हैं वहीं जुडिशल सिस्टम इसे कंसोलिडेटेड

11:00:39करने में हेल्प करता है इसलिए ब्रिटिश रूल

11:00:43में जुडिशल रिफॉर्म्स को भी समझ लेते हैं

11:00:46जुडिशल रिफॉर्म्स

11:00:49दोस्तों ब्रिटिश रूल से पहले इंडिया में

11:00:52जुडिशल सिस्टम का ना कोई प्रॉपर प्रोसीजर

11:00:55हुआ करता था और ना ही डॉ कोट्स का हाईएस्ट

11:00:58से लोएस्ट ग्रेडेशन में कोई प्रबल

11:01:00ऑर्गेनाइजेशन

11:01:02हिंदू उसके ज्यादातर केसेस को गांव की

11:01:05पंचायत या जमींदार संभल लेते थे और

11:01:08मुस्लिम के लिए जुडिशल एडमिनिस्ट्रेशन की

11:01:10यूनिट के रूप में उनके रिलिजियस लीडर कई

11:01:13हुआ करते थे इसके अलावा राजा और बादशाह को

11:01:17जस्टिस का फाउंटेन हेड समझा जाता था और वह

11:01:21अपनी समझ से न्याय करते थे उसके लिए कोई

11:01:23फिक्स नियम या कानून अक्सर नहीं होते थे

11:01:26रिकॉर्ड जुडिशल प्रेसिडेंट पर बेस्ड आम

11:01:29लॉस सिस्टम की शुरुआत

11:01:311726 में होती है जब मद्रास मुंबई और

11:01:35कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा

11:01:38मायर्स कोर्स एस्टेब्लिश किया जाते हैं

11:01:40इसके बाद कंपनी का ट्रेडिंग पावर से रनिंग

11:01:44पावर में ट्रांसपोर्टेशन होने के साथ

11:01:45जुडिशल सिस्टम में नए एलिमेंट्स एड होने

11:01:48शुरू हो जाते हैं यह चेंज अलग-अलग गवर्नर

11:01:52जनरल्स द्वारा किया गए थे सबसे पहले बात

11:01:55करते हैं वारेन हेस्टिंग्स के समय में हुए

11:01:57रिफॉर्म्स की

11:01:58रिफॉर्म्स अंदर वारेन हेस्टिंग 1772 2785

11:02:05दोस्तों वारेन हेस्टिंग्स का सबसे पहले

11:02:08जुडिशल रिफॉर्म होता है जमींदारा की

11:02:10जुडिशल पावर्स को खत्म करना

11:02:131772 में वारेन हेस्टिंग्स जिला लेवल पर

11:02:17दीवान अदालत और फौजदारी अदालत सेटअप करते

11:02:20हैं दीवानी अदालत में सिविल केसेस ट्री

11:02:23किया जाते थे और फौजदारी में क्रिमिनल

11:02:26केसेस

11:02:27दीवानी अदालत को कलेक्टर यानी की यूरोपीय

11:02:31ऑफिसर प्रेसीडे करता था और फौजदारी अदालत

11:02:34को इंडियन जज इसके अलावा दीवानी अदालत में

11:02:37हिंदू उसका कैसे हिंदू लॉस के अकॉर्डिंग

11:02:40डिसाइड होता था और मुस्लिम का मुस्लिम डॉ

11:02:43के अकॉर्डिंग लेकिन फौजदारी अदालत में सभी

11:02:47का डिसीजन मुस्लिम डॉ के अकॉर्डिंग ही

11:02:49होता था जिला कोट्स के डिसीजन के अगेंस्ट

11:02:52अपील के लिए कोलकाता में सदर दीवानी अदालत

11:02:56और सदर निजामुद्दीन

11:03:03कोशिश भी करते हैं

11:03:051776 में हिंदू कोड का एक इंग्लिश

11:03:09ट्रांसलेशन कोड ऑफ जंतु लॉस के नाम से

11:03:12पब्लिश भी हो जाता है दोस्तों ये थे वारेन

11:03:16हेस्टिंग्स द्वारा इंट्रोड्यूस किया गए

11:03:18जुडिशल रिफॉर्म्स इसके बाद जुडिशल सिस्टम

11:03:21को फादर रिफॉर्म लॉर्ड कार्नवालिस ने किया

11:03:23था तो आई उनके रिफॉर्म्स को जानते हैं

11:03:26रिफॉर्म्स अंडरग्राउंड वालेस

11:03:281786 2793 दोस्तों वारेन हेस्टिंग्स ने जो

11:03:33जुडिशल सिस्टम एस्टेब्लिश किया था

11:03:35कार्नवालिस उसमें कुछ चेंज करते हैं जैसे

11:03:39की 1787 में वो जिला कलेक्टर्स को फिर से

11:03:43दीवानी अदालत का जज बना देते हैं लॉर्ड

11:03:46कार्नवालिस एन सिर्फ कलेक्टर्स की जुडिशल

11:03:48पावर्स को रिस्टोर करते हैं बल्कि उन्हें

11:03:51पहले से भी ज्यादा मजेस्टिशियल पावर दे

11:03:53देते हैं यह सिपरेशन ऑफ पावर्स की

11:03:56प्रिंसिपल के एकदम उल्टा था दूसरा रिफॉर्म

11:04:001792 के पीरियड में क्रिमिनल

11:04:03एडमिनिस्ट्रेशन की फील्ड में इंट्रोड्यूस

11:04:05होता है

11:04:06जिला फौजदारी अदालत को अबॉलिश करके उनकी

11:04:09जगह कर सर्किट कोर्स बनाई जाति हैं इनमें

11:04:13से तीन बंगाल में थी और एक भी हर में और

11:04:17इन सर्किट कोर्स में यूरोपीय ऑफिसर्स को

11:04:19ही जज अप्वॉइंट किया जाता है और इनको

11:04:22एसिस्ट करते थे काज़ीज़ और मुफ्तीज इससे

11:04:25पहले फौजदारी अदालत में इंडियन को ही जज

11:04:28अप्वॉइंट किया जाता था हम का सकते हैं की

11:04:31यहां से जुडिशल सिस्टम में से इंडियन को

11:04:34अलग करने की शुरुआत हो जाति है और आईसीएम

11:04:37की झलक दिखने लगती है लॉर्ड कार्नवालिस का

11:04:40सबसे इंपॉर्टेंट जुडिशल रिफॉर्म था उनका

11:04:421793 का कौन बाल स्कूल में उनके सभी

11:04:46रिफॉर्म्स फाइनल शिव लेते हैं और यह

11:04:49प्राइमरी सिपरेशन ऑफ पावर के प्रिंसिपल पर

11:04:52बेस था

11:04:54की कलेक्टर्स के हाथ में जुडिशल पावर्स

11:04:58देना सही डिसीजन नहीं था क्योंकि जिनके

11:05:01पास रिवेन्यू कलेक्शन की पावर थी क्या वो

11:05:03रिवेन्यू के केसेस को इंपर्शाली डिसाइड कर

11:05:06सकते थे इसलिए कॉर्न बॉल्स कोड में वह

11:05:09सिपरेशन ऑफ पावर्स के प्रिंसिपल को फॉलो

11:05:11करते हैं और कलेक्टर्स की सभी जुडिशल

11:05:15पावर्स को खत्म कर दिया जाता है

11:05:18है इसके अलावा सिविल कोट्स को प्रेसीडे

11:05:20करने के लिए जिला जज नाम से एक नए ऑफिसर

11:05:23क्लास की शुरुआत की जाति है साथ ही

11:05:26कार्नवालिस कोर्ट फीस को भी अबॉलिश करते

11:05:29हैं

11:05:30यूरोपियन सब्जेक्ट्स को भी इंडियन जुडिशल

11:05:33सिस्टम की जूरिडिक्शन मिलाया जाता है इसके

11:05:35साथ ही गवर्नमेंट सर्वेंट को उनके ऑफिशल

11:05:38एक्शंस के लिए सिविल कोट्स में अनस्टेबल

11:05:41बनाया जाता है

11:05:45डॉ का प्रिंसिपल एस्टेब्लिश होता है इतने

11:05:49सालों से चला रहा सिस्टम अब पुरी तरह बादल

11:05:52चुका था कम से कम पेपर पर तो अब कास्ट

11:05:56क्लास या रिलिजन के बेसिस पर भेदभाव नहीं

11:05:59किया जा सकता

11:06:32जिसकी वजह से अक्सर जस्टिस मिलने में डिले

11:06:36होता था और अनसर्टेन टीवी बनी रहती थी

11:06:39बंटिंग इन कोट्स की ड्यूटी मजिस्ट्रेट और

11:06:43कलेक्टर्स को ट्रांसफर कर देते हैं और

11:06:46इनके सुपरविजन के लिए कमिश्नर ऑफ रिवेन्यू

11:06:48और सर्किट को अप्वॉइंट करते हैं इसके

11:06:51अलावा वो इलाहाबाद में सेपरेट सदर निजामत

11:06:55अदालत और सदर दीवानी अदालत एस्टेब्लिश

11:06:57करते हैं जिसकी वजह से अप और दिल्ली के

11:07:01लोगों को अपील के लिए अब कोलकाता जान की

11:07:04जरूर नहीं रहती दोस्तों अभी तक कोर्ट की

11:07:08लैंग्वेज पर्शियन थी बेंटिक हायर कोर्स

11:07:11में परसों को इंग्लिश से रिप्लेस कर देते

11:07:13हैं और इसके साथ ही लोअर कोट्स में परसों

11:07:17के साथ साथ वर्नाकुलर लैंग्वेज में कैसे

11:07:20फाइल करने का ऑप्शन भी दे देते हैं इस तरह

11:07:22से विलियम बेंटिक जुडिशल सिस्टम को इंडियन

11:07:26के लिए एक्सेसिबल बनाने की कोशिश की थी

11:07:28बेंटिक के बाद भी जुडिशल सिस्टम में

11:07:31समय-समय पर कुछ रिफॉर्म्स ले गए थे आई

11:07:34उनको भी समझ लेते हैं

11:07:39दोस्तों 1833 में इंडियन लॉस के

11:07:43क्वालिफिकेशन के लिए लॉर्ड मौली के

11:07:45चेयरमैनशिप में डॉ कमीशन अप्वॉइंट की गई

11:07:48थी जिसके एफर्ट्स से 1859 में सिविल

11:07:51प्रोसीजर कोड 1860 में इंडियन पैनल कोड और

11:07:561861 में क्रिमिनल प्रोसीजर कोड तैयार हुआ

11:07:59था

11:08:001865 में सुप्रीम कोर्ट और सदर अदालत को

11:08:03मर्ज करके कोलकाता बॉम्बे और मद्रास में

11:08:07तीन हाय कोट्स बना दिए गए थे इसके बाद

11:08:101935 की गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में

11:08:13फेडरल कोर्ट एस्टेब्लिश करने का प्रोविजन

11:08:16था इसे 1937 में सेटअप किया गया

11:08:23और हाईकोर्ट से अपील्स पर सनी करना था

11:08:27जुडिशल रिफॉर्म्स की चर्चा तो हो गई

11:08:29वैल्यूएशन भी कर लेते हैं आखिर यह

11:08:32रिफॉर्म्स कहां तक सफल थे

11:08:35इवेलुएशन

11:08:37दोस्तों ब्रिटिश रूल के समय इस्टैबलिश्ड

11:08:40जुडिशल सिस्टम के कुछ पॉजिटिव एस्पेक्ट्स

11:08:43देखें जा सकते हैं जैसे की इसके द्वारा

11:08:46इंडिया में रूल ऑफ डॉ की स्थापना होती है

11:08:48इसके अलावा रिलिजियस और रुलर्स के पर्सनल

11:08:51कानून की जगह कोडिफाइड लॉस ए जाते हैं

11:08:55इनके जरिए सोसाइटी में प्रोविडेंट

11:08:57डिस्क्रिमिनेशन को कम करने की कोशिश की

11:09:00जाति है जैसे अब कास्ट के बेसिस पर अलग

11:09:03कानून नहीं था लोगों के सामने सब बराबर हो

11:09:06जाते हैं यूरोपियन सब्जेक्ट्स को भी इसके

11:09:09जूरिडिक्शन मिलाया गया था हालांकि

11:09:11क्रिमिनल केसेस में सिर्फ यूरोपीय जज ही

11:09:14उनके कैसे की सनी कर सकते थे इसके साथ ही

11:09:17गवर्नमेंट सर्वेंट को भी सिविल कोट्स में

11:09:19आंसर डबल बनाया जाता है

11:09:22लेकिन इसकी कुछ नेगेटिव एस्पेक्ट्स भी

11:09:24ध्यान में रखना की जरूर है पहले नेगेटिव

11:09:27यह था की जुडिशल सिस्टम और ज्यादा

11:09:30कॉम्प्लिकेटेड और एक्सपेंसिव हो जाता है

11:09:40लिटिगेशन लंबा समय लेने लगती है जिसका

11:09:44रिजल्ट डिलीट जस्टिस होता है

11:09:48इसके अलावा यूरोपीय जज अक्सर इंडियन यूजेस

11:09:52और ट्रेडीशन से फैमिलियर नहीं होते थे साथ

11:09:56ही जुडिशल सिस्टम का उसे कॉलोनियल

11:09:59इंटरेस्ट को सुरक्षित रखना के लिए ज्यादा

11:10:01किया जाता है और नेटिव स्कूल

11:10:05कंक्लुजन

11:10:08दोस्तों इस तरह इंडिविजुअल ब्रिटिश गवर्नर

11:10:11जनरल्स की समझ और कॉलोनियल इंटरेस्ट को

11:10:14ध्यान में रखते हुए पुलिस आमीन और

11:10:16ज्यूडिशरी का इवोल्यूशन होता है और ये

11:10:19इंडिया में ब्रिटिश अंपायर के मजबूत

11:10:22पिलर्स बनकर उभरते हैं हालांकि पुरी कोशिश

11:10:24के बाद भी ब्रिटिशर्स नेशनलिज्म की वाव को

11:10:28इन तक पहुंचने से नहीं रॉक पाते और फाइनली

11:10:31जब आर्मी और पुलिस फोर्स में नेशनलिस्ट

11:10:34फीलींगस नजर आने लगती हैं तो ब्रिटिशर्स

11:10:37को समझ ए जाता है की उनका रूल अब और

11:10:40ज्यादा नहीं चल सकता

11:10:43[संगीत]

11:10:46दोस्तों इंडिया में मॉडर्न एजुकेशन की

11:10:48शुरुआत ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के दौरान ही

11:10:51हुई थी उससे पहले दाग एजुकेशन गुरुकुल

11:10:53मदरसा और मकतब के थ्रू दी जाति थी जिसमें

11:10:57रिलिजियस एजुकेशन के साथ ड्रामा लॉजिक

11:11:00मैथमेटिक्स फिलासफी सब्जेक्ट शिक्षा दी

11:11:04जाति थी इसके अलावा ट्रेडिशनल कास्ट और

11:11:07आर्टिजंस गल्स के द्वारा वोकेशनल एजुकेशन

11:11:10भी प्रोवाइड करते थे लेकिन ब्रिटिश के आने

11:11:13के बाद इंडियन एजुकेशन सिस्टम पुरी तरह से

11:11:16बादल जाता है आज हम बात करने वाले हैं

11:11:19ब्रिटिश रूल के दौरान किस तरह एजुकेशन

11:11:21सिस्टम का डेवलपमेंट इंडिया में होता है

11:11:23और इसके क्या फायदे और क्या नुकसान देखने

11:11:26को मिलते हैं आई शुरू करते हैं

11:11:30इंट्रोडक्शन

11:11:33ब्रिटिश रूल की शुरुआती सालों में

11:11:35प्राइवेट इंडिविजुअल्स द्वारा एजुकेशन

11:11:37फील्ड में कुछ एफर्ट्स किया जाते हैं जैसे

11:11:40की 1781 में वारेन हेस्टिंग्स वर्जन और

11:11:44एरोबिक की लर्निंग को प्रमोट करने के लिए

11:11:46कोलकाता मदरसा की स्थापना करते हैं और

11:11:491791 में जोनाथन डंकन बनारस में संस्कृत

11:11:53कॉलेज की शुरुआत करते हैं इस दौरान

11:11:56गवर्नमेंट की तरफ से एजुकेशन को प्रमोट

11:11:58करने में कोई इंटरेस्ट शो नहीं किया जाता

11:12:011800 में लॉर्ड वालेस्ले ने फोर्ट विलियम

11:12:04कॉलेज सेटअप किया था इसे कंपनी के सिविल

11:12:07सर्विस को ट्रेन करने के लिए बनाया गया

11:12:15ऑफिशल तोर पर ब्रिटिश द्वारा एजुकेशन के

11:12:18डेवलपमेंट की तरफ कम 1813 के चार्ट एक्ट

11:12:21के बाद लिए जाते हैं क्योंकि इस एक्ट में

11:12:24इंडिया में एजुकेशन को प्रमोट करने के लिए

11:12:26एनुअल 1 लाख रुपए का प्रावधान किया गया

11:12:36जाता है

11:12:43जब बात इंडिया में एजुकेशन के डेवलपमेंट

11:12:45की आई है तो सवाल ये उठाता है की यह

11:12:48एजुकेशन इंडियन होगी या वेस्टर्न और इसे

11:12:51वर्नाकुलर लैंग्वेज में इंपोर्ट किया

11:12:53जाएगा या इंग्लिश लैंग्वेज में इसको लेकर

11:12:56दो ग्रुप बन जाते हैं एक ग्रुप

11:12:58ओरिएंटलिस्ट्स तथा और दूसरा एंग्लेसिस

11:13:02ओरिएंटलिस्ट ग्रुप जिसमें

11:13:05प्रिंसिपल्स आते थे इनका मानना था की

11:13:08इंडियन लैंग्वेज में इंडियन सब्जेक्ट्स की

11:13:10नॉलेज को प्रमोट करना चाहिए वहीं

11:13:13एंग्लिसिस्ट इंग्लिश लैंग्वेज के मीडियम

11:13:15से वेस्टर्न एजुकेशन स्प्रेड करने की

11:13:17सपोर्टर थे इस डिबेट को सॉल्व करने के लिए

11:13:20ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट 1823 में जनरल

11:13:24कमेटी ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शंस पॉइंट करती

11:13:26है शुरुआत में तो इस कमेटी को ओरिएंटलिस्ट

11:13:29ग्रुप डोमिनेट करता है और यह लोग कोलकाता

11:13:32में संस्कृत कॉलेज आगरा और दिल्ली में दो

11:13:35और ओरिएंटल कॉलेजेस एस्टेब्लिश करने का

11:13:37प्रोग्राम तैयार करते हैं

11:13:39है इसके साथ ही इंडीजीनस लर्निंग को

11:13:41प्रमोट करने के लिए गुरुकुल और मदरसाज को

11:13:44पीटने देने का भी फैसला करते हैं लेकिन

11:13:47जल्दी ही सिचुएशन एनालिसिस्ट ग्रुप के

11:13:50फीवर में टर्न हो जाति है जब 1828 में

11:13:53यूटिलिटेरियन रिफॉर्मेंस विलियम बेंटिक

11:13:56गवर्नर जनरल बनते हैं और 1834 में लॉर्ड

11:14:00मेघौली को जनरल कमेटी ऑफ पब्लिक

11:14:02इंस्ट्रक्शंस का प्रेसिडेंट बना दिया जाता

11:14:04है

11:14:05पुरी तरह से इंग्लिश एजुकेशन के फीवर में

11:14:08थे सेकंड फरवरी 1835 को वो अपने फेमस

11:14:12मुकाबला मिनट्स पब्लिश करते हैं जिसमें

11:14:15इंग्लिश लैंग्वेज और वेस्टर्न एजुकेशन को

11:14:18डेवलप करने का फैसला लिया जाता है यह

11:14:21इंडिया में इंग्लिश एजुकेशन के

11:14:22इंट्रोडक्शन का ब्लूप्रिंट बंता है मकोली

11:14:25के अनुसार एक अच्छी यूरोपियन लाइब्रेरी की

11:14:27सिंगल शेल्फ पुरी ओरिएंटल लिटरेचर के

11:14:30बराबर है बेंटिक 7 मार्च 1835 को ही

11:14:34एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए प्रपोज को

11:14:37इंडस कर देते हैं

11:14:39इस तरह इंडिया में वेस्टर्न एजुकेशन की

11:14:42शुरुआत होती है एजुकेशन फील्ड में अगली

11:14:45डेवलपमेंट 1854 में देखने को मिलती है

11:14:54चार्ल्स वुड बोर्ड ऑफ कंट्रोल के

11:14:57प्रेसिडेंट थे

11:14:581854 में इन्होंने इंडिया में फ्यूचर

11:15:01एजुकेशन की स्कीम को लेकर एक कंप्रिहेंसिव

11:15:03डिस्पैच या डॉक्यूमेंट तैयार किया था इसे

11:15:07इंडिया में इंग्लिश एजुकेशन का

11:15:08मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है इसकी में

11:15:11रिकमेंडेशन इस तरह से थी सबसे पहले तो यह

11:15:14डिक्लेअर करता है की गवर्नमेंट की एजुकेशन

11:15:17पॉलिसी का वेस्टर्न एजुकेशन की टीचिंग

11:15:20देना है मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन को लेकर ये

11:15:23कहता है की हायर एजुकेशन के लिए इंग्लिश

11:15:25लैंग्वेज ही परफेक्ट मीडियम है लेकिन

11:15:28प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन के लिए यह

11:15:31वर्नाकुलर लैंग्वेज के मीडियम को सजेस्ट

11:15:33करता है

11:15:40जिला लेवल पर एफिलिएटिड कॉलेज सेटअप करने

11:15:44का सुझाव देता है

11:15:45साथ ही इसमें एजुकेशन की फील्ड में

11:15:48प्राइवेट एंटरप्राइज को प्रमोट करने के

11:15:50लिए ब्रांच इन 8 सिस्टम का आइडिया भी

11:15:53प्रपोज किया गया था कंपनी टेरिटरीज के सभी

11:15:56फाइव प्रोविंस में डिपार्मेंट ऑफ पब्लिक

11:15:59इंस्ट्रक्शन बनाने का सुझाव दिया जाता है

11:16:01इसका कम प्रॉब्लम्स में एजुकेशन की

11:16:04प्रोग्रेस को रिव्यू करना और गवर्मेंट को

11:16:06एनुअल रिपोर्ट सबमिट करना था लंदन

11:16:08यूनिवर्सिटी के मॉडल पर कोलकाता मद्रास और

11:16:11मुंबई में यूनिवर्सिटी को एस्टेब्लिश करने

11:16:14का प्रपोज दिया गया था इसके साथ ही इसमें

11:16:17वोकेशनल इंस्ट्रक्शन और टेक्निकल स्कूल और

11:16:20कॉलेजेस एस्टेब्लिश करने पर भी इम्फैसीज

11:16:22किया गया था

11:16:23वुड डिस्पैच वूमेन एजुकेशन को प्रमोट करने

11:16:27के बाद भी करता है इसकी लगभग सभी

11:16:29रिकमेंडेशन को इंप्लीमेंट किया गया

11:16:33और मैथर्ड आने वाले लगभग फाइव डिकेड्स तक

11:16:37एजुकेशन की फील्ड को डोमिनेट करते हैं

11:16:39इसके बाद धीरे-धीरे वेस्टर्न सिस्टम

11:16:42इंडिजन सिस्टम को रिप्लेस कर देता है

11:16:571882 में एजुकेशन के फील्ड में वुड

11:17:00डिस्पैच के बाद हुई प्रोग्रेस को रिव्यू

11:17:02करने के लिए गवर्नमेंट एक कमीशन अप्वॉइंट

11:17:04करती है इसे यू हंटर की लीडरशिप में फॉर्म

11:17:08किया जाता है इसलिए इसे हंटर कमीशन बोला

11:17:11जाता है कमीशन को मेली प्राइमरी और

11:17:15सेकेंडरी एजुकेशन की फील्ड में सुझाव देने

11:17:17के लिए कहा गया था इसलिए इंडियन

11:17:19यूनिवर्सिटी की फंक्शनिंग में कमीशन

11:17:22इंक्वारी नहीं करती है इसकी में

11:17:24रिकमेंडेशन कुछ इस तरह थी प्राइमरी

11:17:27एजुकेशन के इंप्रूवमेंट और एक्सटेंशन में

11:17:30स्टेट के स्पेशल रोल को इम्फैसीज किया गया

11:17:32था साथी प्राइमरी एजुकेशन की कंट्रोल को

11:17:36न्यूली सेटअप जिला और म्युनिसिपल बोर्ड्स

11:17:39को देने का प्रस्ताव रखा गया था

11:17:41सेकेंडरी एजुकेशन के लिए दो डिवीजन बनाने

11:17:44का सुझाव था पहले लिटरेरी जो यूनिवर्सिटी

11:17:47तक जाएगा और दूसरा वोकेशनल जिसमें

11:17:50कमर्शियल करियर्स की तैयारी कराई जाएगी

11:17:53कमीशन फीमेल एजुकेशन को लेकर इन एडेक्वेट

11:17:56फैसेलिटीज की तरफ भी ध्यान देने को कहता

11:17:58है अगले दो डकैत में तेजी से सेकेंडरी

11:18:02एजुकेशन का स्प्रेड होता है जिसमें इंडियन

11:18:06का रोल भी काफी इंपॉर्टेंट राहत है इसके

11:18:08अलावा 1882 में पंजाब यूनिवर्सिटी और 1887

11:18:12में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की स्थापना भी

11:18:15होती है

11:18:16प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन की बात तो

11:18:19हंटर कमीशन ने कर ली थी इसके बाद अब

11:18:21नेक्स्ट कमीशन स्पेशली इंडियन यूनिवर्सिटी

11:18:24के लिए फॉर्म किया गया

11:18:271994

11:18:3120th सेंचुरी की शुरुआत से ही इंडिया में

11:18:34पॉलीटिकल और रेस्ट बढ़ाने लगता है ऐसे में

11:18:37ब्रिटिश को लगता है की प्राइवेट मैनेजमेंट

11:18:40के अंदर चलने वाले एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस

11:18:43का स्टार गिर चुका है और यहां से पॉलीटिकल

11:18:45रिवॉल्यूशनरीज पैदा हो रहे हैं इसलिए 192

11:18:50में लोड कर्जन रैली कमीशन अप्वॉइंट करते

11:18:53हैं इसका एक इंडियन यूनिवर्सिटी को

11:18:57इंप्रूव करने के लिए मेजर सजेस्ट करना था

11:18:59इसकी रिकमेंडेशन के आधार पर इंडियन

11:19:03यूनिवर्सिटी एक्ट 1904 पास किया जाता है

11:19:06जिसके अनुसार यूनिवर्सिटी इसको स्टडी और

11:19:10रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा

11:19:12जाता है यूनिवर्सिटी के फेलोज का नंबर कम

11:19:15कर दिया जाता है और ऑफिस में इनका पीरियड

11:19:17भी रिड्यूस कर दिया जाता है

11:19:21गवर्नमेंट ही नॉमिनेट करती है इसके अलावा

11:19:24गवर्नमेंट के पास यूनिवर्सिटी के

11:19:26रेगुलेशंस को बेटो करने और खुद अपनी तरफ

11:19:29से रेगुलेशंस पास करने की पावर भी ए जाति

11:19:31है प्राइवेट कॉलेज की एफीलिएशंस की

11:19:34कंडीशंस को और स्ट्रिक्ट कर दिया जाता है

11:19:36साथ हायर एजुकेशन और यूनिवर्सिटी को

11:19:40इंप्रूव करने के लिए अगले 5 साल तक पर एनम

11:19:435 लाख रुपए जाते हैं

11:19:46है इस एक्ट के थ्रू यूनिवर्सिटी पर

11:19:49गवर्नमेंट का कंट्रोल बहुत ज्यादा बड़ा

11:19:51दिया जाता है इसको जस्टिफाई करने के लिए

11:19:53कर्जन क्वालिटी और एफिशिएंसी का रीजन देते

11:19:56हैं लेकिन उनका असली मकसद तो इंडियन

11:19:59स्टूडेंट में नेशनलिज्म की फीलिंग को

11:20:02स्प्रेड होने से रोकना था इंडियन लीडर्स

11:20:05इसे इंपिरियलिज्म को स्ट्रेंजर करने और

11:20:08नेशनलिस्ट फीलींगस को सावताश करने का

11:20:10टेंप्ट मानते हैं

11:20:11गोखले इसे रेट्रो ग्रेट मेजर कहते हैं

11:20:15इसके बाद 1913 में गवर्नमेंट एजुकेशन

11:20:18पॉलिसी को लेकर एक रेजोल्यूशन पास करती है

11:20:23गवर्नमेंट रेजोल्यूशन ऑन एजुकेशन पॉलिसी

11:20:261930

11:20:28वह यह था की 196 में बड़ौदा के प्रिंसली

11:20:33स्टेट ने अपनी टेरिटरीज में कंपलसरी

11:20:35प्राइमरी एजुकेशन को इंट्रोड्यूस किया था

11:20:37जिसके बाद नेशनल लीडर्स ब्रिटिश इंडिया

11:20:41में भी ऐसा करने के लिए गवर्नमेंट पर

11:20:43प्रेशर बना रहे थे गोखले ने इशू को

11:20:46लेजिसलेटिव असेंबली में भी रेस किया था

11:20:50लेकिन एजुकेशन पॉलिसी पर अपने 1913 के

11:20:54रेजोल्यूशन में गवर्मेंट कंपलसरी एजुकेशन

11:20:56के रिस्पांसिबिलिटी लेने से माना कर देती

11:20:59है हालांकि इन लिटरेसी रिबूट करने की

11:21:01पॉलिसी को जरूर एक्सेप्ट कर लिया जाता है

11:21:03साथ ही प्रोविंशियल गवर्मेंट से कहा जाता

11:21:06है की वो पूर और बैकवर्ड सेक्शंस को फ्री

11:21:10एलीमेंट्री एजुकेशन देने की तैयारी करें

11:21:12इसके लिए प्राइवेट एफर्ट्स को इनकरेज करना

11:21:15था और सेकेंडरी स्कूल की क्वालिटी को भी

11:21:18इंप्रूव करना था साथ ही हर प्रोविंस में

11:21:21यूनिवर्सिटी एस्टेब्लिश करने का डिसीजन भी

11:21:23लिया जाता है इसके बाद 1917 में एक और

11:21:27कमीशन फॉर्म की जाति है

11:21:34है इस कमीशन को कोलकाता यूनिवर्सिटी की

11:21:37प्रॉब्लम्स को स्टडी और रिपोर्ट करने के

11:21:39लिए फॉर्म किया गया था लेकिन इसकी

11:21:41रिकमेंडेशन बाकी यूनिवर्सिटी पर भी

11:21:43एप्लीकेबल थी कमीशन ने स्कूल एजुकेशन से

11:21:46लेकर यूनिवर्सिटी एजुकेशन तक इन टायर

11:21:49फील्ड को रिव्यू किया था इसका मानना था की

11:21:52यूनिवर्सिटी एजुकेशन को इंप्रूव करने के

11:21:54लिए पहले सेकेंडरी एजुकेशन का इंप्रूव

11:21:57होना जरूरी है अपनी रिपोर्ट में इसने बहुत

11:22:00से सुझाव दिए थे जैसे की स्कूल कोर्स 12

11:22:04साल का होना चाहिए स्टूडेंट को मैट्रिक की

11:22:07जगह इंटरमीडिएट स्टेज के बाद यूनिवर्सिटी

11:22:09में 3 एयर डिग्री कोर्स के लिए इंटर करना

11:22:12चाहिए साथ ही सेकेंडरी और इंटरमीडिएट

11:22:14एजुकेशन के एडमिनिस्ट्रेशन और कंट्रोल के

11:22:18लिए एक सेपरेट बोर्ड होना चाहिए

11:22:20इसके अलावा यूनिवर्सिटी रेगुलेशंस की

11:22:23फ्रेमिंग में रिगिडिटी कम हनी चाहिए और

11:22:26यूनिवर्सिटी को सेंट्रलाइज्ड यूनिटरी

11:22:28रेजिडेंशियल टीचिंग ऑटोनॉमस बॉडी की तरह

11:22:31फंक्शन करना चाहिए ना की स्कैटर्ड

11:22:34एफिलिएटिड कॉलेज की तरह इसके साथ ही फीमेल

11:22:37एजुकेशन एप्लाइड साइंटिफिक और टेक्नोलॉजी

11:22:40का एजुकेशन टीचर्स ट्रेनिंग और प्रोफेशनल

11:22:43और वोकेशनल कॉलेजेस को और ज्यादा एक्सटेंड

11:22:46करना चाहिए

11:22:481920 में गवर्नमेंट सैडलर रिपोर्ट की

11:22:50रिकमेंडेशन को प्रोविंशियल गारमेंट्स को

11:22:53फॉरवर्ड करती है और इन्हें इंप्लीमेंट

11:22:55करने के लिए कहा जाता है

11:22:57सैडलर कमीशन के बाद 1929 में हर डॉग कमेटी

11:23:02का फॉर्मेशन होता है

11:23:041929

11:23:07स्कूल और कॉलेज की संख्या बहुत ज्यादा

11:23:10बढ़ाने से एजुकेशन स्टैंडर्ड गिरने लगता

11:23:12हैं इसलिए एजुकेशन के डेवलपमेंट पर

11:23:15रिपोर्ट देने के लिए हार्ड टॉक कमेटी को

11:23:18सेटअप किया जाता है इसकी में रिकमेंडेशन

11:23:21इस तरह से थी पहले सुझाव था की प्राइमरी

11:23:24एजुकेशन पर जोर देना चाहिए लेकिन इसके लिए

11:23:27किसी कंपल्शन या हिस्ट्री एक्सपेंशन की

11:23:30जरूर नहीं है दूसरा यह था की सिर्फ

11:23:33डिजर्विंग स्टूडेंट को ही हाय स्कूल और

11:23:36इंटरमीडिएट स्टेज तक जाना चाहिए जबकि

11:23:39एवरेज स्टूडेंट को 8th स्टैंडर्ड के बाद

11:23:41वोकेशनल कोर्सेज की तरफ डाइवर्ट कर देना

11:23:44चाहिए इसके अलावा यूनिवर्सिटी एजुकेशन के

11:23:47स्टैंडर्ड में इंप्रूवमेंट लाने के लिए

11:23:49ऐडमिशन को रिस्टिक करने की जरूर है

11:23:54लास्ट एजुकेशन प्लेन की तरफ चलते हैं

11:23:58साजन प्लेन ऑफ एजुकेशन

11:24:02साजन प्लेन को 1944 में सेंट्रल एडवाइजरी

11:24:05बोर्ड एजुकेशन द्वारा तैयार किया गया था

11:24:07इसकी मेजर रिकमेंडेशन कुछ इस तरह से थे

11:24:11इसमें तीन से छह साल के आगे ग्रुप के लिए

11:24:14प्री प्राइमरी एजुकेशन 611 साल के आगे

11:24:18ग्रुप के लिए फ्री यूनिवर्सल और कंपलसरी

11:24:21एलीमेंट्री एजुकेशन 11 से 17 साल की

11:24:24सिलेक्टेड चिल्ड्रन के लिए हाय स्कूल

11:24:26एजुकेशन और फिर हायर सेकेंडरी के बाद 3

11:24:29साल की यूनिवर्सिटी कोर्स का सुझाव था हाय

11:24:33स्कूल दो तरह के होने थे पहले एकेडमिक और

11:24:36दूसरा टेक्निकल और वोकेशन इसके अलावा

11:24:40टेक्निकल कमर्शियल और आर्ट एजुकेशन को

11:24:43रिकमेंड किया गया

11:24:47प्रस्ताव था इसमें 20 साल के अंदर एडल्ट

11:24:50लिटरेसी को खत्म करने का टारगेट दिया गया

11:24:53इसके साथ ही टीचर्स ट्रेनिंग फिजिकल

11:24:56एजुकेशन और फिजिकल और मेंटली हैंडिकैप्ड

11:24:59के लिए एजुकेशन पर भी स्ट्रेस किया गया

11:25:02था की 40 साल के अंदर इंडिया में इंग्लैंड

11:25:06के जैसे लेवल ऑफ एजुकेशन अतिन हो जाना

11:25:08चाहिए यह प्लेन काफी बोल्ड और

11:25:11कंप्रिहेंसिव तो था लेकिन इसमें

11:25:13इंप्लीमेंटेशन के लिए कोई भी मेथाडोलॉजी

11:25:16प्रपोज नहीं की गई थी यह तो बात हो गई

11:25:18एजुकेशन से रिलेटेड डिफरेंट कमिश्नर और

11:25:21प्लांस की

11:25:23ब्रिटिश पॉलिसी को इवेलुएट करते हैं

11:25:26इवेलुएशन ऑफ ब्रिटिश पॉलिसी ऑन एजुकेशन

11:25:30दोस्तों सबसे पहले तो ब्रिटिश ने मॉडर्न

11:25:33एजुकेशन के एक्सपेंशन को लेकर जो मैसर्स

11:25:36लिए थे वो पुरी तरह इन एडेक्वेट थे और

11:25:39दूसरा इनके पीछे उनका मकसद इंडियन की भलाई

11:25:43करना तो बिल्कुल भी नहीं था

11:25:44फिर क्या रीजन थे की ब्रिटिशर्स ने इंडिया

11:25:47में एजुकेशन को प्रमोट किया इसमें सबसे

11:25:51पहले करण था इन लाइटेड इंडियन क्रिश्चियन

11:25:54मिशनरीज और ह्यूमैनिटी इन ऑफिशल्स की तरफ

11:25:57से मॉडर्न एजुकेशन के फीवर में किया गया

11:25:59एजीटेशन दूसरा करण था एडमिनिस्ट्रेशन

11:26:03संभालने के लिए एजुकेटेड इंडियन की के

11:26:06सप्लाई इसके अलावा

11:26:11ब्रिटिश मैन्युफैक्चर्ड गुड्स के लिए

11:26:13डिमांड भी क्रिएट करेंगे

11:26:15साथी एक व्यू यह भी था की वेस्टर्न

11:26:18एजुकेशन इंडियन को ब्रिटिश रूल एक्सेप्ट

11:26:21करने में हेल्प करेगी क्योंकि इसमें

11:26:23ब्रिटिश कॉन्कर्स और उनके एडमिनिस्ट्रेशन

11:26:25को ग्लोरिफाई किया जाता था इस तरह ब्रिटिश

11:26:28मॉडर्न एजुकेशन का उसे इंडिया में अपनी

11:26:32पॉलीटिकल अथॉरिटी को और मजबूत करने के लिए

11:26:35करना चाहते थे वेस्टर्न एजुकेशन के

11:26:37डेवलपमेंट के साथ ही इंडियन लर्निंग के

11:26:40ट्रेडिशनल सिस्टम का धीरे-धीरे डिक्लिन

11:26:42होने लगता है क्योंकि इसे किसी भी तरह का

11:26:45सपोर्ट नहीं मिल पता स्पेशली 1844 के बाद

11:26:49जब यह डिक्लेअर कर दिया जाता है की

11:26:51गवर्नमेंट एंप्लॉयमेंट के लिए इंग्लिश की

11:26:54नॉलेज होना कंपलसरी है

11:26:56इसके साथ ही ब्रिटिश मांस एजुकेशन को

11:26:59नेगलेक्ट करते हैं जिसकी वजह से बड़े

11:27:02स्टार पर इलेक्ट्रिसिटी देखने को मिलती है

11:27:051911 में यह 84% थी और 1921 में 92%

11:27:11क्योंकि एजुकेशन के लिए पैसे देने होते थे

11:27:14इसलिए यह सिर्फ

11:27:16क्लासेस की मोनोपोली बन जाति है और इसकी

11:27:19वजह से एजुकेटेड और मैसेज के बीच बहुत

11:27:22बड़ा लिंग्विस्टिक्स और कल्चरल गल्फ

11:27:25क्रिएट हो जाता है

11:27:27वूमेन की एजुकेशन को पुरी तरह नेगलेक्ट

11:27:30किया था क्योंकि एक तो गवर्नमेंट

11:27:32ऑर्थोडॉक्स सेक्शंस को नाराज नहीं करना

11:27:35चाहती थी और दूसरा वूमेन को एजुकेशन देने

11:27:38से कॉलोनियल रूल को कोई फायदा भी नहीं था

11:27:42साइंटिफिक और टेक्निकल एजुकेशन पर भी बहुत

11:27:44ध्यान नहीं दिया गया था

11:27:461857 तक सिर्फ कोलकाता बॉम्बे और मद्रास

11:27:50में ही तीन मेडिकल कॉलेजेस थे और सिर्फ एक

11:27:53ही अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज था रुड़की में

11:27:56और वह भी सिर्फ यूरोपीय और यूरेशियन के

11:27:59लिए ही ओपन था

11:28:01कंक्लुजन इस तरह हम का सकते हैं की

11:28:05ब्रिटिशर्स ने सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे

11:28:07के लिए इंडिया में मॉडर्न एजुकेशन की

11:28:10शुरुआत की थी लेकिन इंडियन ने इसका पूरा

11:28:13फायदा उठाया मॉडर्न एजुकेशन के इतिहास में

11:28:16इंडिया में जी एजुकेटेड मिडिल क्लास को

11:28:19तैयार किया वही आगे जाकर इंडियन नेशनल

11:28:22मूवमेंट को लीड करती है

11:28:24दोस्तों यहां हमारा पार्ट भी भी खत्म हुआ

11:28:27अब वीडियो के लास्ट और फाइनल पार्ट को

11:28:30शुरू करते हैं जो बात करता है मेंस्ट्रीम

11:28:33फ्रीडम स्ट्रगल के साथ चलती पैरेलल

11:28:35मूवमेंट्स की इसमें हम लेफ्ट के राइस

11:28:38कैपिटल क्लास के राइस वर्कर क्लास के

11:28:41मूवमेंट्स और प्रिंसली स्टेटस में चल रहे

11:28:44मूवमेंट जैसे टॉपिक को कर करने वाले हैं

11:28:46तो आई शुरू करते हैं डी लास्ट सेगमेंट ऑफ

11:28:49दिस वीडियो डी स्टोरी ऑफ पार्टीशन

11:28:53दोस्तों 14th अगस्त 1947 के खत्म होने में

11:28:57बस कुछ ही वक्त बच्चा था और आदि रात को

11:29:00इतिहास लिखा जाना था नई दिल्ली में स्थित

11:29:04कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली के मिडनाइट सेशन

11:29:06को एड्रेस करने आए जवाहर लाल नेहरू ने एक

11:29:09ऐतिहासिक भाषण दिया नाम दिया ट्वीट विथ

11:29:13डेस्टिनी जी तरह नेहरू आजादी को लेकर

11:29:16हॉपफुल थे वैसे ही उनका भाषण भी बेहद

11:29:19हॉपफुल था उन्होंने भारत की आजादी को

11:29:23अनाउंस किया और कहा आते डी स्ट्रोक ऑफ डी

11:29:26मिडनाइट व्हेन डी वर्ल्ड स्लिप्स इंडिया

11:29:29विलन तू लाइफ और फ्रीडम कॉन्स्टिट्यूशन

11:29:32असेंबली खचाखच भारी थी सारे दालों के नेता

11:29:36मौजूद थे लेकिन भारत की आजादी के सबसे

11:29:39बड़ी नेता महात्मा गांधी वह नहीं थे तो

11:29:43कहां थे गांधी दोस्तों वो गांधी जिन्हें

11:29:47नेताजी सुभाष चंद्र बस ने आपसी मतभेद के

11:29:50बावजूद राष्ट्रपति

11:29:54वह दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर नोवा

11:29:58खाली में थे जी हां जब देश आजादी का जश्न

11:30:01माना रहा था तब गांधी बंगाल के नोआखली में

11:30:05लगी आज को बुझने की कोशिश कर रहे थे हमारी

11:30:08आज की कहानी इसी आज की है जो आजादी के

11:30:11वक्त पूरे देश में सुलग रही थी आज की

11:30:14कहानी उसे घटना की है जिसने आजादी के जश्न

11:30:17को फीका कर दिया वो घटना जिसने भारत को

11:30:21अंग्रेजी हुकूमत से आजादी तो दिलाई लेकिन

11:30:24ऐसी कीमत पर जिसका हिसाब भी लगा पन

11:30:27नामुमकिन था यह कहानी है दो ऐसे मुल्कों

11:30:31की स्थापना की जो 75 साल बाद भी एक दूसरे

11:30:35के दुश्मन बने हुए हैं दोस्तों यह कहानी

11:30:39है भारत के विभाजन की इंडिया डिवाइडेड एट

11:30:43थे स्ट्रोक ऑफ डी मिडनाइट टावर 15th अगस्त

11:30:461947 लगभग 200 सालों के दमन के बाद

11:30:50ब्रिटिश राज ने भारत छोड़ और भारत

11:30:54उपमहाद्वीप 2000 देश में विभाजित हुआ

11:30:58हिंदू मेजॉरिटी सेकुलर इंडिया और मुस्लिम

11:31:01मेजॉरिटी सेकुलर पाकिस्तान भारत भी सेकुलर

11:31:05है लेकिन पाकिस्तान का सेक्युलरिज्म 1955

11:31:09में खत्म हो गया और वो एक इस्लामिक स्टेट

11:31:12बन गया खैर पार्टीशन का अंदाज़ 1947 के

11:31:16पहले ही लगाया जा रहा था और जब ब्रिटिशर्स

11:31:18की इंडिया एग्जिट की अटकालीन तेज हुई तो

11:31:21हजारों लाखों की संख्या में हिंदू सिख और

11:31:25मुस्लिम पाकिस्तान और इंडिया के बीच

11:31:27माइग्रेट करने लगे और इनमें से कई लाखों

11:31:31लोग तो बॉर्डर पर पहुंची नहीं पे

11:31:33पार्टीशन की खबरें तेज हुई और ब्रिटेन एक

11:31:37हिस्ट्री विड्रोल के प्लांस बनाने लगा

11:31:39परिणाम स्वरूप भारत में अव्यवस्था और

11:31:42अराजकता के बादल छ गए इस अराजकता के सबसे

11:31:46बड़े शिकार बने दो बॉर्डर प्रोविंस पंजाब

11:31:49और बंगाल जहां दंगों की आज सुलगना लगी

11:31:53अंग्रे ने यह विभाजन पीपल पर लाइंस खींचकर

11:31:57तो कर दिया पर ऑन ग्राउंड इसका अंजाम था

11:31:59हजारों लाखों लोगों का कत्लेआम और

11:32:03डिस्प्लेसमेंट महिलाओं के साथ रेप हुए और

11:32:06बच्चों को किडनैप कर बाजरो में बीच दिया

11:32:09गया

11:32:09नरसंहार यौन वायलेंस डकैती ल पोस्ट

11:32:14कन्वर्जेंस ये सब आम बात हो गई थी एक

11:32:17रिपोर्ट के हिसाब से लगभग 75000 औरतें का

11:32:21हिंसक भीड़ और दंगाइयों द्वारा रेप किया

11:32:23गया और ये सिर्फ रिकॉर्डिंग डाटा है इन

11:32:27रियलिटी तो यह नंबर लाखों में था

11:32:30पड़ोसी ही पड़ोसी का दुश्मन बन गया

11:32:32हैवानियत अपनी चर्म पर थी फेमस लेखक सदर

11:32:37हसन मंटो उसे दूर में विभाजन के इस भयावा

11:32:40रूप को अपनी कहानियां में बताते रहे

11:32:42खुशवंत सिंह ने भी अपनी किताब एन ट्रेन तू

11:32:45पाकिस्तान में पार्टीशन कैसे कुरूप चेहरे

11:32:47की चर्चा की

11:32:49देशभर में फैली इस अराजकता ने देश को ही

11:32:52नहीं बल्कि पुरी दुनिया को झकझोर कर रख

11:32:55दिया

11:32:55हजारों सालों से लाडली एक शांतिपूर्वक

11:32:59माहौल में र रहे लोग अचानक दुश्मन बन गए

11:33:02और उनके बीच बॉर्डर्स बना दिए गए लेकिन

11:33:06दोस्तों ये दुश्मनी अचानक से पैदा नहीं

11:33:08हुई थी इस दुश्मनी का जन्म एक कॉन्शियस

11:33:12प्रोसेस या सूची समझी साजिश के तहत हुआ यह

11:33:16कॉन्शियस प्रोसेस क्या था आगे हम उसकी ही

11:33:18चर्चा करेंगे और देखेंगे कहानी भारत की

11:33:21रोड्स तू पार्टीशन की

11:33:24तू नेशन थ्योरी रोड तू पार्टीशन दोस्तों

11:33:28इंडिया का पार्टीशन उसे लास्ट मिनट

11:33:30एग्रीमेंट का नतीजा था जिसके तहत

11:33:33ब्रिटिशर्स भारत को आजादी देने वाले थे

11:33:35लेकिन इस पार्टीशन के बीच कब बॉय गए इसकी

11:33:39कहानी काफी पुरानी है ब्रिटिश के खिलाफ जब

11:33:42आजादी की लड़ाई छड़ी गई तो इंडियन नेशनल

11:33:45कांग्रेस उसे लड़ाई का सबसे प्रॉमिनेंट

11:33:47ऑर्गेनाइजेशन बन के उभरा इसका फॉर्मेशन

11:33:501885 में दादाभाई नौरोजी ओ हम और डीसी वचन

11:33:55जैसे नेताओं ने किया था लेकिन पार्टीशन तक

11:33:58आते-आते इसका में कंट्रोल महात्मा गांधी

11:34:00और जवाहर लाल नेहरू जैसे नेताओं के हाथ

11:34:03में चला गया इंडियन नेशनल कांग्रेस और

11:34:06उसके मोस्ट प्रॉमिनेंट नेता इंक्लूडिंग

11:34:08महात्मा गांधी वन नेशन के आइडिया की

11:34:11सपोर्टर थे यानी वो मानते थे की देश में

11:34:14रहने वाले अलग-अलग धर्म और जाति के लोग एक

11:34:17राष्ट्र बनाते हैं और वो उसमें पीसफुली र

11:34:20सकते हैं

11:34:21यही वजह थी की महात्मा गांधी पार्टीशन से

11:34:24इतने आहट हुए की जब दिल्ली में कांग्रेस

11:34:27आजादी का जश्न माना रही थी तब गांधी

11:34:30नोआखली जाकर दंगाइयों को हथियार रखना के

11:34:33लिए माना रहे थे गांधी का वन नेशन का सपना

11:34:37टूट गया था वो खुद भी टूट गए थे खैर

11:34:40कांग्रेस और गांधी के इतिहास के खिलाफ

11:34:42सबसे बड़ा अपोजिशन आया राइट विंग पॉलीटिकल

11:34:45ग्रुप से जिनका जन्म कांग्रेस के

11:34:48सेक्युलरिज्म के अगेंस्ट एक रिएक्शन के

11:34:51रूप में हुआ था मुस्लिम लीग जैसे

11:34:53ऑर्गेनाइजेशंस जो माइनॉरिटी को रिप्रेजेंट

11:34:56करने का दवा कर रहे थे उन्होंने

11:34:58स्पेसिफिकली कांग्रेस के वन नेशन के

11:35:01आइडिया को चैलेंज किया लीग के सबसे ताकतवर

11:35:04नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने कांग्रेस को

11:35:07हिंदू ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर दिया और

11:35:09गांधी पर हिंदू मेजॉरिटी रेनिज्म को

11:35:12प्रमोट करने का आप लगाया जीना ने देश के

11:35:15मुस्लिम को यह बोला की क्योंकि 80% लोग

11:35:18भारत में हिंदू हैं और डेमोक्रेसी में

11:35:20मेजॉरिटी सपोर्ट से ही सरकार बंटी है

11:35:22इसलिए आने वाले समय में मुस्लिम के खिलाफ

11:35:25डिस्क्रिमिनेशन होगा इसलिए मुस्लिम को एक

11:35:29अलग देश बनाने की जरूर है जिन्ना ने अपनी

11:35:32तू नेशन थ्योरी में ये भी कहा की मुस्लिम

11:35:35और हिंदू के इंटरेस्ट अलग-अलग

11:35:39शांति से कभी र ही नहीं सकते लीग के अलावा

11:35:43डॉक्टर शशि थरूर कहते हैं की ऐसे ही

11:35:46सिमिलर रागी मंच हिंदू महासभा के नेता

11:35:49विनायक दामोदर सावरकर भी दे रहे थे डॉक्टर

11:35:52जरूर अपनी किताब वही आई एम हिंदू में यह

11:35:55दवा करते हैं की तू नेशन थ्योरी के सबसे

11:35:58पहले दावेदार सावरकर थे जिन्होंने 1937

11:36:02में इस थ्योरी को प्रोपाउंड किया मार्च

11:36:04बिफोर मुस्लिम लीग पाकिस्तान रेजोल्यूशन

11:36:07ऑफ 1940

11:36:09थ्योरी किसने पहले

11:36:35हिंदू मुस्लिम डिवाइड के लिए कांग्रेस

11:36:38मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा कनफ्लिक्ट से

11:36:41भी ज्यादा रिस्पांसिबल

11:36:45[संगीत]

11:36:51अंग्रेज जब भारत आए तो उन्होंने कई

11:36:54रिबेलियंस और रिवॉल्ट स्पेस की

11:36:561857 का विद्रोह अंग्रेजी ताकत के लिए

11:36:59सबसे बड़ा एक्जिस्टेंशल थ्रेड बना क्योंकि

11:37:02इसमें हिंदू-मुस्लिम यूनिटी बाढ़ चढ़कर

11:37:05अच्छी गई

11:37:05हिंदू लीडर्स ने मुगल एंपरर बहादुर शाह

11:37:08जफर के अंदर अंग्रेजन के खिलाफ विद्रोह

11:37:11छेद दिया था

11:37:12ब्रिटिश ने इस विद्रोह को कुचल तो दिया

11:37:15लेकिन उन्होंने यह कनक्लूड किया की अगर

11:37:18उन्हें इंडिया में राज करना है तो उन्हें

11:37:21हिंदू मुस्लिम यूनिटी को ब्रेक करना ही

11:37:23होगा इसलिए उन्होंने

11:37:28मैक्सिमम पर बेस्ड डिवाइडेड रूल पॉलिसी

11:37:30अपनी और अपनी पॉलिसी की थ्रू वो हिंदू

11:37:33मुस्लिम डिवाइड को बढ़ावा देने लगे

11:37:36ऐसा नहीं है की हिंदू मुस्लिम कनफ्लिक्ट

11:37:38पहले नहीं था लेकिन उसका स्केल काफी

11:37:41लोकलाइज्ड था और इतिहास का दवा करते हैं

11:37:44की लार्जली हिंदू मुस्लिम इंडिया में

11:37:47पीसफुली ही रहते थे यही भारतीय

11:37:50सिविलाइजेशन ग्लोरी का प्रति बना लेकिन

11:37:52ब्रिटिश डिवाइडेड रूल पॉलिसी ने हिंदू

11:37:55मुस्लिम डिवाइड को एक नेशनल या राष्ट्रीय

11:37:57अवतार दे दिया

11:37:59डिविडेंड रूल सिर्फ रिलिजियस लाइंस में

11:38:02नहीं हुआ बल्कि हर पॉसिबल अंकल से किया

11:38:05गया सेक्स को मुस्लिम किया अगेंस्ट एक

11:38:08कास्ट को दूसरी कास्ट के अगेंस्ट एक रीजन

11:38:11को दूसरी रीजन के अगेंस्ट ट्रबल्स को नॉन

11:38:14ट्राईबल्स के अगेंस्ट अनस्वर यह डिवाइडेड

11:38:16रूल हमें कई ब्रिटिश पॉलिसी में दिखता है

11:38:201857 की क्रांति के बाद अंग्रेजन ने 6

11:38:23पत्थंस और गोरखास को अपील करने के लिए

11:38:26मिलिट्री रिक्रूटमेंट में डिस्क्रिमिनेटरी

11:38:29पॉलिसी को अडॉप्ट किया ऐसा इसलिए क्योंकि

11:38:31सिक्स पत्थंस और गोरखास ने ब्रिटिश को

11:38:34विद्रोह में सपोर्ट किया था

11:38:36जबकि अवध बिहार और साउथ के सोल्जर के

11:38:40खिलाफ डिस्क्रिमिनेशन हुआ क्योंकि ये 1857

11:38:43विद्रोह की में सपोर्टर थे इसके अलावा

11:38:46कास्ट बेसिस पर डिवीजन के लिए ब्रिटिशर्स

11:38:48ने कास्ट बेस्ड रेजीमेंट भी क्रिएट किया

11:38:51ब्रिटिशर्स ने बाकी के एडमिनिस्ट्रेटिव

11:38:54जॉब्स में भी डिस्क्रिमिनेशन कर स्पेसिफिक

11:38:57कम्युनिटीज को अपीस करना चालू किया कई

11:39:00एजुकेटेड और इनफ्लुएंशल लीडर्स को

11:39:02इस्तेमाल करके भी ब्रिटिशर्स ने रिलिजियस

11:39:05डिवाइड को फ्यूल किया पर एग्जांपल

11:39:07ब्रिटिशर्स ने एक्टिव ली मुस्लिम रिफॉर्मर

11:39:10सर सैयद अहमद खान को पीटनाइश किया और उनसे

11:39:13आज किया की वो मुस्लिम को इंडियन नेशनल

11:39:16कांग्रेस को बॉयकॉट करने के लिए मने समय

11:39:19और सिचुएशन के हिसाब से जो भी ग्रुप

11:39:21अंग्रेजन को फेवरेबल लगता वो उन्हें अपील

11:39:24करते और सोसाइटी का विभाजन करते यह पुरी

11:39:27डिवाइडेड रूल पॉलिसी अपनी चर्म पर तक

11:39:30पहुंची जब 1909 का

11:39:32रिफॉर्म्स आया इसके तहत मुस्लिम को सेपरेट

11:39:36इलेक्ट्रोरेट दे दिया इसके तहत मुस्लिम ही

11:39:39मुस्लिम कैंडिडेट को वोट कर सकता था और

11:39:42इसीलिए इसे कम्युनल इलेक्टरेट भी कहा गया

11:39:45इसने हिंदू-मुस्लिम डिफरेंस को पॉलीटिकल

11:39:48साइंस और नेशनलाइज कर दिया और अब किसी भी

11:39:52प्रकार का वैकेंसी मुश्किल लगे लगा कुछ

11:39:55हिस्टोरियन तो यह भी दवा करते हैं की 1857

11:39:59के बाद हुए ऑलमोस्ट सारे दंगों को

11:40:01अंग्रेजों ने ही क्रिएट किया था ब्रिटिश

11:40:05कलेक्टर्स सेक्रेटली हिंदू पंडित को पैसे

11:40:08देकर मुस्लिम के अगेंस्ट स्पीच देने को

11:40:10कहते और मौलवियों को पैसे देकर हाइंड्स के

11:40:14अगेंस्ट स्पीच देने को

11:40:15सिस्टमैटिक कम्युनल प्वाइजन कोलोनियलिज्म

11:40:18का वो कुरूप चेहरा है जो हमारे समाज को आज

11:40:22तक हॉट करता है एन सिर्फ भारत में बल्कि

11:40:25पूरे साउथ एशिया में खैर 25% पापुलेशन के

11:40:29साथ मुस्लिम ब्रिटिश इंडिया की लार्जेस्ट

11:40:32रिलिजियस माइनॉरिटी थे

11:40:34वेस्टर्न प्रोविंस जैसे सिंह पंजाब

11:40:37एनब्ल्यूएसपी और ईस्ट में बंगाल प्रोविंस

11:40:40के कई एरियाज में तो वो मेजॉरिटी में भी

11:40:42थे

11:40:43यही वजह है की मुस्लिम हिंदू डिवाइड

11:40:46ब्रिटिश पॉलिसी का प्रायोरिटी रहा

11:40:48इंपीरियल रूल में मुस्लिम को कई पॉलीटिकल

11:40:51और एडमिनिस्ट्रेटिव एडवांटेज दिए गए जिनके

11:40:54प्रति वो 1947 तक अगस्टम्ड हो गए थे

11:40:57उन्हें डर था की आजादी के बाद शायद उनसे

11:41:01यह बेनिफिट्स छन लिए जाएंगे स्पेशली अगर

11:41:04कांग्रेस पावर में आई तो ऊपर से जीना ने

11:41:07ऑलरेडी कांग्रेस को हाइंड्स की पार्टी

11:41:09डिक्लेअर कर दिया था

11:41:1119456 में मुस्लिम लीग को प्रोविंशियल

11:41:14इलेक्शन में मेजॉरिटी मुस्लिम वोट्स मिले

11:41:17और अब मुस्लिम लीग यह दवा करने लगी की वह

11:41:20मुस्लिम की सोल रिप्रेजेंटेटिव बॉडी है

11:41:22चलिए अब देखते हैं की कैसे ब्रिटिश

11:41:25हिस्ट्री विड्रोल ने सिचुएशन को बाद से

11:41:27बतर बना दिया

11:41:29डी हिस्ट्री ब्रिटिश विद डी रोल दोस्तों

11:41:32वर्ल्ड वार 2 में सेटबैक फेस कर रहा

11:41:34ब्रिटिश अंपायर अपनी ग्लोबल हिजामानी

11:41:36ऑलरेडी को चुका था ऊपर से 1942 में

11:41:40महात्मा गांधी ने क्यूट इंडिया मूवमेंट

11:41:42में करो या मारो का नारा दे दिया था

11:41:44अंग्रेज वार जितने के लिए इंडियन का

11:41:47सपोर्ट चाहते थे और इसलिए उन्हें कांग्रेस

11:41:49की सपोर्ट की जरूर थी इसीलिए उन्होंने कई

11:41:53एक्टिव एफर्ट्स लिए वो कांस्टीट्यूशनल

11:41:55रिफॉर्म्स अगस्त ऑफर ट्रिप्स मिशन और

11:41:59कैबिनेट मिशन इंडिया में कांस्टीट्यूशनल

11:42:02रिफॉर्म्स देने और आजादी की पॉसिबिलिटी को

11:42:04एक्सप्लोर करने के लिए भेजें गए लेकिन इन

11:42:07सभी ने पाकिस्तान के फॉर्मेशन को लॉज ली

11:42:10रिजेक्ट कर दिया पर मार्च 1940 में

11:42:13मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान रेजोल्यूशन को

11:42:16पास कर सिचुएशन को काफी ज्यादा

11:42:18कॉम्प्लिकेटेड कर दिया था

11:42:19लीग के लिए इस रेजोल्यूशन को इंप्लीमेंट

11:42:22करवाना एक क्रेडिबिलिटी टेस्ट था और ऐसे

11:42:25में कांस्टीट्यूशनल एफर्ट्स को लेकर लीग

11:42:28और कांग्रेस में सेटलमेंट नामुमकिन ग रहा

11:42:31था

11:42:321947 के कैबिनेट मिशन को कांग्रेस और लीग

11:42:36दोनों ने रिजेक्ट कर दिया और जीना ने

11:42:39पाकिस्तान के लिए डायरेक्ट एक्शन लॉन्च कर

11:42:41दिया इसका नतीजा था लॉज स्केल कम्युननल

11:42:45वायलेंस अगस्त 1946 में डी ग्रेट कोलकाता

11:42:49किलिंग में लगभग 4000 लोग मारे गए और 1

11:42:53लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए उधर मार्च

11:42:551947 में माउंटबेटन नए वायसराय बना दिए गए

11:42:59जिनका एम था ब्रिटिश का इंडिया से स्पीडी

11:43:03विड्रोल आज अमेरिकन स्पीडी विड्रोल ने जी

11:43:06तरह का किया अफगानिस्तान में क्रिएट किया

11:43:08है वैसा ही कुछ तब भारत में हुआ जून थर्ड

11:43:12को माउंट बैटरी ने कांग्रेस और लीग को

11:43:14उल्टीनेटर दे दिया और कहा की अगस्त 1947

11:43:18तक ब्रिटिश

11:43:19छोड़ देंगे इतने साल के कनफ्लिक्ट के बाद

11:43:22अब नेताओं के पास कोई अल्टरनेटिव नहीं था

11:43:25उनके पास केवल दो चॉइसेज थी या तो वो बिना

11:43:29किसी सॉल्यूशन के एक अराजक आजाद भारत को

11:43:32एक्सेप्ट करें जहां प्रिंसली स्टेटस अपनी

11:43:35इंडिपेंडेंस डिक्लेअर कर देश को फ्रेगमेंट

11:43:37कर लेने या फिर वो पार्टीशन को कस कर केवल

11:43:41दो स्टेटस बनाकर इस अराजकता को अवॉइड करें

11:43:44मोस्टली जो 2 सेपरेट स्टेटस को अपोज कर

11:43:48रहे थे उन्हें भी इस सेटलमेंट को मजबूरी

11:43:50में एक्सेप्ट करना पड़ा और इसके में

11:43:53कल्पित थे अंग्रेज उनकी कॉन्शियस डिवाइस

11:43:57और उनका इरिस्पांसिबल बिहेवियर

11:44:01पाकिस्तान को सीरियल रेडक्लिफ द्वारा

11:44:03दिमागाइटेड बाउंड्रीज के तहत सेपरेट कर

11:44:06दिया गया

11:44:10और इंडिया ने 15th अगस्त को

11:44:13नए मॉडल ऑफीशियली 17th अगस्त को अप्रूव

11:44:17हुए लेकिन हिस्ट्री विड्रोल का एक और

11:44:19नतीजा था

11:44:21इरिस्पांसिबिलिटी मार्केटिड बाउंड्री

11:44:23रेडक्लिफ ने बाद में एडमिट किया की उनके

11:44:26द्वारा बनाई गई बाउंड्रीज आउट ऑफ डेट

11:44:28मैप्स और सेंसेज मटेरियल पर बेस थे इंडियन

11:44:32स्टोन अपार्ट हूं बाज रिस्पांसिबल पर

11:44:35वाइल्डलैंड्स होना गया था पार्टीशन अनाउंस

11:44:38हुआ और देंगे भड़क उठे लाखों लोग सफर

11:44:42टेरिटरी के लिए माइग्रेट करने लगे मुस्लिम

11:44:45पाकिस्तान की और और हिंदू और सिख इंडिया

11:44:48की और एस्टीमेट के हिसाब से लगभग 1.5

11:44:51करोड़ लोगों को डिस्प्लेसमेंट झेलना पड़ा

11:44:54डेथ की बात करें तो लगभग दो से 20 लाख

11:44:58लोगों के मारे जान की खबरें हैं

11:45:00पार्टीशन ने एन सिर्फ वायलिन डेथ को जन्म

11:45:03दिया बल्कि लोग डिजीज भुखमरी और

11:45:06डिप्रिवेशन से भी मारे कई हिस्टोरियन तो

11:45:09ये भी कहते हैं की भले ही पार्टीशन को

11:45:11अवॉइड कर पन 1947 में मुश्किल था लेकिन

11:45:14वायलेंस डेथ और डिप्रेशन शायद अवॉइड किया

11:45:19जा सकता था

11:45:20जी तरह से पार्टीशन की जिम्मेदार मेली

11:45:23अंग्रेज थे वैसे ही इस जनोसाइड और

11:45:25क्राइसिस के जिम्मेदार भी वही थे

11:45:29ब्रिटिशर्स खुद के लोगों को बचाने में

11:45:31बीजी रहे और पंजाब और बंगाल में लायन

11:45:34ऑर्डर मेंटेन करने से परहेज करते रहे

11:45:36इसीलिए कहते हैं की यह मैसिव क्राइसिस

11:45:39क्रिएट करने के बाद भी केवल 6 से 7

11:45:43ब्रिटिशर्स ही इस दूर में मारे गए चलिए अब

11:45:46देखते हैं की विभाजन ने पोस्ट कॉलोनियल

11:45:49साउथ एशिया को कैसे बादल दिया

11:45:52इंपैक्ट ऑन पोस्ट कॉलोनियल साउथ एशिया

11:45:55दोस्तों इस ब्लडी पार्टीशन ने भारत को ही

11:45:59नहीं बल्कि पूरे साउथ एशिया को बादल कर रख

11:46:01दिया एक तरफ जहां हजारों साल तक

11:46:05डाइवर्सिटी इंडियन सबकॉन्टिनेंट का

11:46:07हॉलमार्क रही और अलग-अलग कम्युनिटी के लोग

11:46:10सद्भावना से रहते थे वहीं दूसरी और

11:46:13पार्टीशन के हॉरर ने एक लॉन्ग लास्टिंग

11:46:15ट्रस्ट डिफिसिट को जन्म दिया यह सिर्फ

11:46:18इंडिया में नहीं हुआ बल्कि पाकिस्तान और

11:46:21करंट स्टीम बांग्लादेश में भी हुआ भले ही

11:46:24पाकिस्तान सिर्फ मुस्लिम के लिए क्रिएट

11:46:26किया गया था लेकिन इन रियलिटी ऐसा हुआ

11:46:29नहीं वेस्ट पाकिस्तान में लगभग 1.6% नॉन

11:46:33मुस्लिम थे ईस्ट पाकिस्तान या मॉडर्न दे

11:46:36बांग्लादेश में लगभग 22% नॉन मुस्लिम और

11:46:39इंडिया में लगभग 10% मुस्लिम 1951 के

11:46:43सेंसेक्स के हिसाब से बैक गए ये

11:46:46सब्सटेंशियल नंबर था स्पेशली इंडिया और

11:46:49बांग्लादेश में

11:46:50पार्टीशन में हुई हिंसा का इंपैक्ट इन

11:46:53तीनों देश में इतना गहरा हुआ की समय-समय

11:46:56पर यह राइट्स के रूप में दिखाई देता है

11:46:58इसी रिलिजियस ड्राइव का नतीजा था एक

11:47:01रिलिजियस फेनेटिक द्वारा राष्ट्रपिता

11:47:03महात्मा गांधी की हत्या अंग्रेज चले गए

11:47:06लेकिन उनका फैलाया हुआ जहर रहा और इसने इन

11:47:10देश में एक सरिता आईडियोलॉजी को और ज्यादा

11:47:13फ्यूल किया और एक स्त्रीमिस्ट

11:47:15ऑर्गेनाइजेशंस अपना प्रोपेगेंडा चलते रहे

11:47:18खैर सबसे ज्यादा खराब कंडीशन थी रिफ्यूजी

11:47:21की जो डिप्रिवेशन फेस करते रहे उनका

11:47:25रिहैबिलिटेशन स्टेट के लिए सबसे बड़ा

11:47:27चैलेंज बना दिल्ली रिफ्यूजी क्राइसिस का

11:47:31मेजर सेंटर था

11:47:32रिफ्यूजी क्राइसिस

11:47:34194748 में कश्मीर को लेकर हुए इंडिया पाक

11:47:38वार के चलते और ज्यादा इंटेंस हो गई और

11:47:41रेफ्रिजीस और ज्यादा तेजी से माइग्रेट

11:47:43करने लगे

11:47:45लोग छोटी-छोटी ग्रुप में 1960 तक माइग्रेट

11:47:48करते रहे बिकॉज़ ऑफ डिस्क्रिमिनेशन पेस्ट

11:47:51इंडिया ने तो फिर भी ऑफीशियली खुद को

11:47:54सेकुलर डिक्लेअर कर माइनॉरिटी प्रोटेक्शन

11:47:56का जम्मा उठाया लेकिन पाकिस्तान में ऐसा

11:47:58नहीं हुआ दोस्तों ये इतिहास 75 साल बाद भी

11:48:02भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को गाइड

11:48:05करता है जहां लॉक के एक्रॉस आए दिन

11:48:08सीजफायर वायलेशंस होते हैं दोनों देश आज

11:48:12न्यूक्लियर आम है और इसीलिए दुनिया भर के

11:48:14देश न्यूक्लियर वार की पॉसिबिलिटी से

11:48:17परेशान रहते हैं और इसीलिए फार्मर उस

11:48:20प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन ने लॉक को डी

11:48:23मोस्ट डेंजरस प्लेस इन डी वर्ल्ड बताया था

11:48:27राइस ऑफ लेफ्ट इन इंडिया

11:48:41जाता था

11:48:42इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन और फिर सोशलिस्ट

11:48:45और कम्युनिस्ट आईडियोलॉजी के आने के बाद

11:48:47इन टर्म्स का मीनिंग और व्हाइट हो जाता है

11:48:50आज हम इंडिया में लेफ्ट आईडियोलॉजी की

11:48:53ग्रोथ और इससे रिलेटेड पार्टी के फॉर्मेशन

11:48:55की बात करेंगे सबसे पहले जानते हैं कुछ

11:48:58ऐसी कंडीशंस को जो इंडिया में लेफ्ट

11:49:01आईडियोलॉजिस्ट की ग्रोथ को फीवर करती हैं

11:49:04सरकमस्टेंसस फरिंग ग्रोथ ऑफ लेफ्ट

11:49:06आईडियोलॉजिस इन इंडिया

11:49:09फर्स्ट वर्ल्ड वार के और के दौरान कुछ ऐसी

11:49:12पालिटी को इकोनॉमिक्स सरकमस्टेंसस बनते

11:49:14हैं जिनकी वजह से इंडिया में लेप्टिज्म गो

11:49:16करता है जैसे की वार अपने साथ फाइनेंशियल

11:49:20बर्डन लेकर आता है डेली नेसेजिटीज की

11:49:23चीजों के दम आसमान चुने लगता हैं देश में

11:49:26फेम जैसे हालात बन जाते हैं और ऐसे में

11:49:28इंडस्ट्री लिस्ट अपने मुनाफे में लगे होते

11:49:30हैं इस सबसे इंपिरियलिस्ट कैपिटल डोमिनेशन

11:49:33के इविल्स एक्सपोज होते हैं इसके अलावा

11:49:36मार्क्स के रिवॉल्यूशनरी इतिहास और

11:49:39यूएसएसआर का फॉर्मेशन इंडियन इंटेलेक्चुअल

11:49:42को इंस्पायर करता है इसी समय गांधी जी

11:49:44द्वारा स्वराज और स्वदेशी के मैसेज को देश

11:49:47के कोनी कोनी में फैलाने की कोशिश की जाति

11:49:50है जो पॉलीटिकल मूवमेंट को एक नई दिशा

11:49:53देता है और ऐसे में एक ऑर्गेनाइज्ड और

11:49:56ऑडियो लॉजिक इंस्पायर सोशलिस्ट मूवमेंट के

11:49:58लिए जमीन तैयार हो जाति है इसके साथ ही

11:50:01एजुकेटेड मिडिल क्लास की एक नई जेनरेशन

11:50:04अनइंप्लॉयमेंट की वजह से लिबरलिज्म में

11:50:06अपना विश्वास को देती है और रिवॉल्यूशन

11:50:09आर्य सोशल स्टूडियोलॉजिक की तरफ अट्रैक्ट

11:50:11होती है इस तरह लेफ़्टिस्ट मूवमेंट की

11:50:14शुरुआत इंडिया में होने लगती है

11:50:21डी लेफ्ट मूवमेंट्स इंडिया में लेफ्ट

11:50:24मूवमेंट के इमरजेंसी को दो मां स्ट्रीम्स

11:50:26में डिवाइड किया जा सकता है पहले

11:50:28कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के

11:50:30प्लेटफॉर्म पर कम्युनिस्ट कर रहा है जो की

11:50:33इंटरनेशनल कम्युनिस्ट मूवमेंट की ब्रांच

11:50:35की तरह फंक्शन करते हैं और लार्जली कमेंटम

11:50:39द्वारा ही कंट्रोल किया जाते हैं दूसरी

11:50:41सरिता में इंडियन नेशनल कांग्रेस के विदीन

11:50:44लिफ्ट कराई जाता है उदाहरण के तोर पर 1934

11:50:48में फॉर्म की गई कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी

11:50:51ये डेमोक्रेटिक सोशलिज्म की आइडल जी से

11:50:54इंस्पायर होते हैं सबसे पहले बात करते हैं

11:50:56फर्स्ट सरिता यानी की कम्युनिस्ट पार्टी

11:50:59की डी कम्युनिस्ट पार्टी

11:51:02म राय और साथ अक्टूबर 1920 में ताशकंद में

11:51:07कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की इनफॉरमेशन

11:51:09करते हैं इसके अलावा इंडिया में भी 1920

11:51:12के बाद बहुत से लेफ्ट विंग और कम्युनिस्ट

11:51:15ग्रुप एक्जिस्टेंस में ए चुके होते हैं

11:51:17इनमें से ज्यादातर ग्रुप दिसंबर 1925 में

11:51:21कानपुर में एक साथ आकर कम्युनिस्ट पार्टी

11:51:23ऑफ इंडिया नाम से एक जो इंडिया

11:51:25ऑर्गेनाइजेशन बनाते हैं कम्युनिस्ट

11:51:27मूवमेंट के इतिहास को पांच फेस में डिवाइड

11:51:29किया जा सकता है

11:51:35फर्स्ट फैज डी पीरियड ऑफ थ्री कंस्पायरेसी

11:51:38ट्रायल्स

11:51:40मास्को की कम्युनिस्ट यूनिवर्सिटी पर

11:51:42टॉयलेट्स ऑफ डी ईस्ट में ट्रेनिंग लेने के

11:51:45बाद कम्युनिस्ट रिवॉल्यूशनरीज का पहले

11:51:47बैंड इंडिया आता है लेकिन यहां इन्हें

11:51:50ब्रिटिश क्राउन के अगेंस्ट कंस्पायरेसी के

11:51:52लिए एक्स किया जाता है जी वजह से ये अपना

11:51:55ज्यादा प्रभाव बना ही नहीं पाते इसके बाद

11:51:57कॉमिनेस्ट मूवमेंट तब थोड़ा स्ट्रांग बंता

11:52:00है जब ग्रेट ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी

11:52:02इंडिया में इसे सुपरवाइज करने का फैसला

11:52:04लेती है इनकी तरफ से फिलिप्स प्रत को

11:52:07दिसंबर 1926 में इंडिया भेजो जाता है और

11:52:11यहां आकर यह बहुत सी यूनियंस ऑर्गेनाइजर

11:52:13करते हैं न्यूज़ पेपर्स को एडिट करते हैं

11:52:15और कुछ युद्ध और फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस भी

11:52:18लॉन्च करते हैं इनके प्रयासों से बंगाल

11:52:20मुंबई पंजाब और अप में वर्कर्स और पेजयंस

11:52:24पार्टी ऑर्गेनाइजर की जाति हैं दिसंबर

11:52:261928 में सभी वर्कर्स और प्रेजेंस पार्टी

11:52:29को मर्ज करके जो इंडिया वर्कर्स इन

11:52:32प्रेजेंट पार्टी का फॉर्मेशन होता है

11:52:36कम्युनिस्ट पार्टी मुंबई में बहुत साड़ी

11:52:38इंडस्ट्रियल स्ट्रीक्स ऑर्गेनाइजर आई है

11:52:40इस दौरान कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे बड़ी

11:52:43सफलता थी ट्रेड यूनियंस पर अपना

11:52:45इन्फ्लुएंस बनाना

11:52:471920 से 1928 के बीच कम्युनिस्ट का

11:52:51इन्फ्लुएंस वर्कर्स के ऊपर बहुत स्ट्रांग

11:52:53हो जाता है साथ ही गवर्नमेंट हर तरह से

11:52:56लेफ़्टिस्ट मूवमेंट का दमन करने की कोशिश

11:52:58करने लगती है इस पीरियड में कम्युनिस्ट

11:53:01मूवमेंट तीन कंस्पायरेसी ट्रायल्स में

11:53:03इंवॉल्व होकर चढ़ जाएगा विषय बन जाता है

11:53:0719223 में पेशावर कंस्पायरेसी ट्रायल 1924

11:53:11में कानपुर कंस्पायरेसी ट्रायल और 1929

11:53:14में मेरठ कंस्पायरेसी ट्रायल मेरठ ट्रायल

11:53:18जो 3 साल से ज्यादा चला है और 27 लोगों को

11:53:21इसमें कनविक्ट किया जाता है कम्युनिकेशन

11:53:23को मास्टर्स का दर्ज दे देता है यानी की

11:53:26इन्हें काफी पॉपुलर कर देता है कम्युनिस्ट

11:53:28का एंटी ब्रिटिश ट्रांस उन्हें नेशनलिस्ट

11:53:31से भी सिंपैथी जेन करता है कांग्रेस

11:53:33वर्किंग कमेटी इनके डिफेंस के लिए सेंट्रल

11:53:36डिफेंस कमेटी सेटअप करती है और 1500 भी

11:53:39सैंक्शन करती है

11:53:491929 में गांधीजी जय में इसे मिलने जाते

11:53:52हैं और कम्युनिस्ट लीडर्स के प्रति अपनी

11:53:54सिंपैथी एक्सप्रेस करते हैं इस तरह 1934

11:53:58तक कम्युनिस्ट मूवमेंट को इंडिया में काफी

11:54:01रिस्पेक्ट मिलने लगती है और का सकते हैं

11:54:03की कम्युनिकेशन आईडियोलॉजी खुद को यहां

11:54:06एस्टेब्लिश कर लेती है इस तरह 1925 से

11:54:101929 के पीरियड में सीबीआई कांग्रेस के

11:54:13साथ कॉर्पोरेट करती है और उसकी प्रोग्राम

11:54:15को इन्फ्लुएंस करने की कोशिश करती है

11:54:17लेकिन जल्दी ही सिचुएशन रिवर्स हो जाति है

11:54:20जो की सेकंड फेस के अंदर समझा जा सकता है

11:54:22आई देखते हैं

11:54:25सेकंड फैज डी पीरियड ऑफ पॉलीटिकल

11:54:291929 के बाद जब गांधीजी की लीडरशिप में

11:54:32नेशनलिस्ट मूवमेंट तेजी से आगे बाढ़ रहा

11:54:35था तब की ऑर्गेनाइजेशन और आईडियोलॉजिकल

11:54:38दोनों स्टार पर सफर करती है कम्युनिस्ट

11:54:41इंटरनेशनल की सिक्स्थ कांग्रेस में दिए गए

11:54:43डायरेक्शन के अनुसार की कांग्रेस से खुद

11:54:46को अलग कर लेती है साथ ही 1929 में

11:54:49वर्कर्स और पीजेंट पार्टी को यह कहकर

11:54:51डिसोल्व कर दिया जाता है की तू क्लास

11:54:54पार्टी को डेवलप करना इरेशनल है सीबीआई

11:54:571929 से ही कांग्रेस के राइट और लेफ्ट

11:55:00दोनों ही विंग्स को अटैक करने लगती है इस

11:55:03समय कांग्रेस जहां पूर्ण स्वराज का

11:55:05रेजोल्यूशन अडॉप्ट करती है और सिविल

11:55:07डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को लॉन्च करती है वही

11:55:10की कांग्रेस की बॉबी लाती को कम करने के

11:55:13लिए संघर्ष की ट्रे एंगुलर करैक्टर को

11:55:15हाईलाइट करती है जिसमें कहा जाता है की

11:55:18वर्कर्स का स्ट्रगल सिर्फ फॉरेन

11:55:20इंपिरियलिज्म के अगेंस्ट ही नहीं बल्कि

11:55:22इंडियन एक्सप्लोइटर्स के अगेंस्ट भी है यह

11:55:25लोग गांधीजी की लीडरशिप को पेटी बुढ़वा

11:55:28कहकर अटैक करते हैं है और उन्हें

11:55:30इंपिरियलिज्म का एक टूल तक बता देते हैं

11:55:32जो मैसेज के रिवॉल्यूशनरी स्ट्रगल को

11:55:35बितराय कर रहे हैं यह कांग्रेस के लेफ्ट

11:55:37विंग की आलोचना करते हैं कहते हैं की वह

11:55:40एक काउंटर रिवॉल्यूशनरी फोर्स है लेकिन

11:55:42सीबीआई की यह टैक्टिकल अप्रोच

11:55:44अनरियलिस्टिक साबित होती है मैसेज का इनके

11:55:47लिए सपोर्ट कम हो जाता है नेशनलिस्ट

11:55:49लीडरशिप के साथ भी इनके रिलेशंस खराब हो

11:55:52जाते हैं ऐसे में ब्रिटिश गवर्मेंट मौके

11:55:55का फायदा उठाकर जुलाई 1934 में की को

11:55:58इलीगल ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर देती है

11:56:00जिसके बाद कम्युनिस्ट कई ग्रुप में

11:56:03स्प्लिट हो जाते हैं अब बात करते हैं थर्ड

11:56:06फैज की

11:56:08थर्ड फैज कम्युनिस्ट और टीम भी रिलीज

11:56:12यूनाइटेड फ्रॉम प्लेन

11:56:151935 में पीसी जोशी की लीडरशिप में की को

11:56:19एक बार फिर रीऑर्गेनाइज्ड किया जाता है

11:56:221935 में हुई कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की

11:56:25सेवंथ कांग्रेस में कम्युनिस्ट को

11:56:27नेशनलिस्ट फोर्सेस के साथ यूनाइटेड

11:56:29फ्रेंड्स फॉर्म करने के लिए बोला जाता है

11:56:30जिसके बाद एक बार फिर ये लोग कांग्रेस के

11:56:34साथ को ऑपरेशन शुरू कर देते हैं इस मीटिंग

11:56:37में हुई डिलीवरी के आधार पर मार्च 1936

11:56:40में आरती डेट और बेन ब्रैडली अपनी थीसिस

11:56:44पब्लिश करते हैं जिसका नाम था दी एंटी

11:56:47इंपिरियलिस्ट पीपल्स फ्रॉम इन इंडिया डेट

11:56:50ब्रैडली इंडियन नेशनल कांग्रेस को नेशनल

11:56:52स्ट्रगल में इंडियन का यूनाइटेड फ्रंट

11:56:55कहते हैं और कम्युनिस्ट को एडवाइस करते

11:56:57हैं की वो कांग्रेस को जॉइन करें और उसके

11:57:00लेफ्ट विंग को स्ट्रेंजर करें और

11:57:02रिएक्शनरी राइट विंग एलिमेंट्स को

11:57:04कांग्रेस से बाहर करने की कोशिश करें

11:57:15प्लेन बनाते हैं लेकिन कम्युनिस्ट लीडरशिप

11:57:18मूवमेंट के सोशल बेस को ब्रोडें करने में

11:57:20फेल हो जाति है और पॉपुलर फ्रंट कभी

11:57:22एक्जिस्टेंस में ही नहीं आता हालांकि 1930

11:57:26के लेटर हाफ के दौरान मैसेज में बढ़नी हुई

11:57:28पॉलीटिकल एक्टिविटी का फायदा उठाते हुए

11:57:30कम्युनिस्ट अपने पॉलीटिकल कारंटीन से बाहर

11:57:33ए जाते हैं और एक बार फिर से इंडियन

11:57:36पॉलिटिक्स के रेडिकल एलिमेंट्स में अपनी

11:57:38जगह बना लेते हैं इसके बाद सेकंड वर्ल्ड

11:57:40वार के साथ फोर्थ फैज की शुरुआत हो जाति

11:57:42है

11:57:44फोर्थ फीस डी सेकंड वर्ल्ड वार और डी

11:57:48कम्युनिकेशन

11:57:511939 में जब सेकंड वर्ल्ड वार की शुरुआत

11:57:54होती है तो कमेंट ऑन लीडर्स की एडवाइस के

11:57:57अनुसार इंडियन कम्युनिस्ट यूनाइटेड फ्रंट

11:58:00पॉलिसी को कंटिन्यू रखते हैं और हर तरह के

11:58:02इंपिरियलिज्म का विरोध करते हैं लेकिन जून

11:58:051941 में जब हिटलर सोशलिज्म के फादर लैंड

11:58:08सोवियत यूनियन पर अटैक कर देता है तब

11:58:11कम्युनिस्ट खुद को एक ट्रिकी पोजीशन में

11:58:13पाते हैं इंडियन कम्युनिस्ट यू टर्न लेते

11:58:16हुए अब वार को पीपल्स वार में री लेबल कर

11:58:19देते हैं और एलाइड रोशन वार फ्रंट को अपना

11:58:22पूरा सपोर्ट अनाउंस करते हैं ब्रिटिश

11:58:24गवर्नमेंट 1942 में सीबीआई को लीगल

11:58:27ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर देती है

11:58:29कम्युनिस्ट इस दौरान ब्रिटिश वार एफर्ट्स

11:58:32को हर संभव सपोर्ट देते हैं यहां तक की

11:58:351942 में क्यूट इंडिया मूवमेंट को

11:58:37सरप्राइज करने के लिए ब्रिटिशर्स के लिए

11:58:39स्पाइस का कम भी करते हैं कम्युनिस्ट

11:58:42पॉलिसी में आए इस सद्दाम स्विफ्ट की

11:58:44नेशनलिस्ट सर्कल्स में काफी आलोचना की

11:58:46जाति है कम्युनिस्ट देश की आजादी को भी एक

11:58:50फस यानी की छलावा बताते हैं यहां से

11:58:53शुरुआत होती है

11:58:55फिफ्थ फीस डी ट्रांसफर ऑफ पावर नेगोशिएशंस

11:58:59और कम्युनिस्ट मल्टीनेशनल प्लेन इस पीरियड

11:59:03में की का पोस्चर क्रोम मुस्लिम राहत है

11:59:05और वह कांग्रेस लीग के एलियन एशिया को और

11:59:09वाइड करने की कोशिश करते हैं सीबीआई

11:59:11द्वारा सभी सेपरेटिस्ट एलिमेंट्स को

11:59:13इनकरेज किया जाता है और इंडिया को कई सारे

11:59:16सावरेंस स्टेटस में डिवाइड करने का कम

11:59:18किया जाता है इनकी स्ट्रीट्स कम से कम एक

11:59:21ऐसे स्टेट पर अपना कंट्रोल बनाने और फिर

11:59:24उसे बाकी के इंडियन के लिबरेशन के बेस के

11:59:27रूप में उसे करने की थी लेकिन मुस्लिम लीग

11:59:29कम्युनिस्ट के साथ एलाइंस के आइडिया को

11:59:32जानकारी देती है और सीबीआई एक

11:59:34डिस्क्रेडिटेड ऑर्गेनाइजेशन की तरह र जाति

11:59:37है 1942 में ही सीबीआई ने एक रेजोल्यूशन

11:59:40अडॉप्ट किया था जिसमें इंडिया को एक मल्टी

11:59:43नेशनल स्टेट डिक्लेअर किया गया था और करीब

11:59:4616 ऐसी इंडियन नेशंस को आईडेंटिफाई किया

11:59:49गया था

11:59:501947 तक कम्युनिस्ट मूवमेंट इंडियन

11:59:53पॉलिटिक्स में अपनी जगह को देता है और की

11:59:56पुरी तरह डेरी की सिचुएशन में होती है जब

12:00:00ब्रिटिश इंपिरियलिज्म से आजादी ही देश के

12:00:03लोगों का डोमिनेंट इंस्टिंक्ट होता है उसे

12:00:05समय सीबीआई की एक्स्ट्रा नेशनल लॉयल्टी और

12:00:08पुरी तरह यूरोपियन मॉडल पर डिपेंड्स इसे

12:00:11एक सस्पेक्ट ऑर्गेनाइजेशन बना देता है आई

12:00:15अब सेकंड सरिता यानी की कांग्रेस सोशलिस्ट

12:00:17पार्टी की बात करते हैं डी कांग्रेस

12:00:20सोशलिस्ट पार्टी

12:00:22कांग्रेस का लेफ्ट विंग एक राशन लिस्ट

12:00:24रिवॉल्ट की तरह मर्ज होता है जो एक तरफ तो

12:00:27गांधीजी के मिस्ट्री सिस्टम के अगेंस्ट था

12:00:29और दूसरी तरफ कम्युनिज्म के दोगमेटिज्म के

12:00:32भी इनके आईडियोलॉजिकल इंस्पिरेशन

12:00:34मार्क्सिज्म और डेमोक्रेटिक सोशलिज्म से

12:00:37आई हैं और ये एंटी इंपिरियलिज्म नेशनलिज्म

12:00:40और सोशलिज्म की सपोर्टर होती हैं सुभाष

12:00:43चंद्र बस समझते हैं की कांग्रेस

12:00:45लेफ़्टिस्ट सिर्फ एंटी इंपिरियलिस्ट ही

12:00:48नहीं बल्कि वो नेशनल लाइफ को सोशलिस्ट

12:00:50बेसिस पर रिकंस्ट्रक्ट भी करना चाहते हैं

12:00:53अपने गोल को अचीव करने के लिए इन्हें दो

12:00:56फ्रेंड्स पर फाइट करना होता है पहले तो

12:00:58फौरन इंपिरियलिज्म और उसके इंडियन

12:01:00एयरलाइंस के साथ और दूसरा मिल्क वाटर

12:01:03नेशनलिस्ट यानी की राइटर के साथ जो

12:01:06इंपिरियलिज्म के साथ डील करने के लिए

12:01:08तैयार हैं दूसरे शब्दों में कहें तो ये

12:01:11कंप्लीट इंडिपेंडेंस और सोशलिज्म के फीवर

12:01:13में थे यह क्लासेस के लिए नहीं बल्कि

12:01:16मैसेज के लिए स्वराज चाहते थे गांधियन

12:01:19आईडियोलॉजी और नेशनलिस्ट स्ट्रगल से इनका

12:01:22इल्लूजनमेंट पहले बार तब होता है जब 1922

12:01:25में गांधीजी ने नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को

12:01:28विड्रॉ कर लिया था वो भी ऐसे समय में जब

12:01:31नेशन पॉपुलर रिवॉल्ट के बहुत पास था इसी

12:01:34वजह से 1931 में सिविल डिसऑबेडिएंस

12:01:37मूवमेंट को सस्पेंड करना और फिर 1934 में

12:01:40इसे कॉल ऑफ करना भी इन्हें गांधियन

12:01:42आईडियोलॉजी के अगेंस्ट कर देता है लेफ्ट

12:01:45विंग इस निष्कर्ष पर आता है की हमेशा और

12:01:48हर सिचुएशन में नॉन वायलेंस की थ्योरी का

12:01:51प्लेन करना अनसुस्तीनेबल है और स्लिपरी

12:01:54फाऊंडेशंस पर बेस्ड है जुलाई 1931 में

12:01:57जीपी नारायण फूलन प्रसाद वर्मा और कुछ

12:02:00अन्य लीडर्स बिहार सोशलिस्ट पार्टी फॉर्म

12:02:03करते हैं सितंबर 1933 में पंजाब सोशलिस्ट

12:02:07पार्टी एक्जिस्टेंस में आई है इसके बाद

12:02:10अक्टूबर 1934 में जो इंडिया कांग्रेस

12:02:12सोशलिस्ट पार्टी यानी सीसी फॉर्मूली

12:02:15ऑर्गेनाइज्ड की जाति है जिसके पीछे जीपी

12:02:18नारायण आचार्य नरेंद्र देव और मीनू मसानी

12:02:21जैसे लीडर्स कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी

12:02:24कांग्रेस के लिए कोई राइवल पॉलीटिकल

12:02:26ऑर्गेनाइजेशन नहीं थी बल्कि इसे कांग्रेस

12:02:29के ही अंदर कम करने के लिए फॉर्म किया गया

12:02:31था लेकिन फिर भी कांग्रेस का राइट विंग

12:02:34इन्हें इंटरनेशनल सेंट कहता है और

12:02:36कम्युनिस्ट इन्हें सोशल फेस या फेक

12:02:40सोशलिस्ट भी कहते हैं इसका जवाब देते हुए

12:02:42कांग्रेस सोशलिस्ट इंडियन कम्युनिस्ट को

12:02:45यूएसएसआर की सैटेलाइट डिस्क्राइब करते हैं

12:02:48सीसी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 को भी

12:02:51कॉन्डम करती है साथी 1937 इलेक्शंस के

12:02:55दौरान कांग्रेस द्वारा ऑफिस एक्सेप्टेंस

12:02:57की भी आलोचना करती है सोशलिस्ट प्रेशर के

12:03:01ही करण 1936 के कांग्रेस के इलेक्शन

12:03:03मेनिफेस्टो में लोगों के सोचों- इकोनामिक

12:03:06रेवेंस को रिमूव करने का प्रोग्राम शामिल

12:03:09किया गया था सेकंड वर्ल्ड वार के समय सीसी

12:03:12कांग्रेस की तरफ से ब्रिटिश वार फोर्ड के

12:03:15लिए कंडीशनल हेल्प का भी विरोध करती है

12:03:17क्योंकि उनका मानना था की यह वार

12:03:20इंपिरियलिज्म के पार्टनर्स के बीच

12:03:22के रेप पार्टीशन के लिए हो रहा है

12:03:24कांग्रेस सोशलिस्ट चाहते थे की आजादी के

12:03:28लिए कांग्रेस रिवॉल्यूशनरी वार की शुरुआत

12:03:30करें सीसी क्यूट इंडिया मूवमेंट को सपोर्ट

12:03:32करती है और उसे ऑर्गेनाइज करने में लीडिंग

12:03:35रोल निभाती है इसके बाद सीसी ट्रांसफर ऑफ

12:03:39पावर के लिए नेगोशिएट सेटलमेंट के फीवर

12:03:41में भी नहीं थी बल्कि ये इंडिया में

12:03:43इंपिरियलिज्म कम्युनलिज्म और फैऊदलिज्म को

12:03:46डिस्ट्रॉय करने के लिए एक रिवॉल्यूशनरी

12:03:49स्ट्रगल की जरूर बताते हैं कांग्रेस

12:03:51सोशलिस्ट मुस्लिम लीग को इन लिक विद

12:03:55ब्रिटेन कहते हैं और जिन्ना को देश का

12:03:57गद्दार और इंपिरियलिस्ट का टूल बोलते हैं

12:04:00यह लोग हिंदू मुस्लिम यूनिटी की आशा करते

12:04:02हैं लेकिन टेंपरेरी फैक्ट्स या

12:04:05एग्रीमेंट्स के बेसिस पर नहीं बल्कि

12:04:07इकोनामिक इश्यूज पर इम्फैसीज करके जो

12:04:09हिंदू और मुस्लिम दोनों को ही इफेक्ट करते

12:04:12हैं सीसी इंडिया के पार्टीशन को कांग्रेस

12:04:15लीडरशिप का सुरेंद्र बताती है साथ ही

12:04:18अल्टरनेटिव और पॉजिटिव पॉलिसी नाला अपने

12:04:20का अपना और वो रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट का

12:04:23फेलियर भी एक्सेप्ट करती है सीबीआई और

12:04:27सीसी के अलावा कुछ और माइनर लेफ़्टिस्ट

12:04:29पार्टी भी इंडिया में फॉर्म होती हैं आई

12:04:32उनको भी डिस्कस कर लेते हैं

12:04:35माइनर लेफ़्टिस्ट पार्टी

12:04:39कम्युनिस्ट मूवमेंट के शुरू होने के बाद

12:04:411939 40 के पीरियड में बहुत सी माइनर

12:04:45लेफ़्टिस्ट पार्टी की ग्रोथ भी होती है

12:04:47इनमें से ज्यादातर पार्टी पर्सनेलिटीज के

12:04:50राउंड सेंटर रहती हैं और एक बार सेंट्रल

12:04:52फिगर के गायब होने के बाद ये पार्टी भी

12:04:55डिफूंक हो जाति हैं इनमें सबसे पहले बात

12:04:57करते हैं फॉरवर्ड ब्लॉक की

12:05:00डी फॉरवर्ड ब्लॉक

12:05:031919 में कांग्रेस और गांधी जी के साथ

12:05:06मतभेद होने के बाद सुभाष चंद्र बस फॉरवर्ड

12:05:10ब्लॉक का फॉर्मेशन करते हैं यह कांग्रेस

12:05:12की क्रीड पॉलिसी और प्रोग्राम को तो

12:05:14एक्सेप्ट करते हैं लेकिन उसकी हाय कमांड

12:05:16में कॉन्फिडेंस के लिए खुद को बाउंड नहीं

12:05:19करते इसमें सभी एंटी इंपिरियलिस्ट रेडिकल

12:05:22और प्रोग्रेसिव ग्रुप को एक बैनर में लाने

12:05:25की कोशिश की जाति है लेफ्ट कंसोलिडेशन

12:05:27कमेटी को ऑर्गेनाइज करने में ये हम रोल

12:05:30निभाते है

12:05:33कांग्रेस के कोऑपरेशन के एटीट्यूड का

12:05:36विरोध करते हैं और इंडिया में

12:05:38इंपिरियलिज्म को खत्म करने के लिए विदेश

12:05:40से मिलिट्री हेल्प लेने के लिए चले जाते

12:05:42हैं 1947 में जो इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक

12:05:45ट्रांसफर ऑफ पावर को बोगस ट्रांसफर कहता

12:05:48है और आप लगता है की दारा हुआ समाज

12:05:51स्ट्रगल को हारने के लिए ब्रिटिश

12:05:54इंपिरियलिज्म के साथ पार्टनरशिप के लिए

12:05:56तैयार हो गया है

12:05:57अब बात करते हैं रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट

12:06:00पार्टी

12:06:02की रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी

12:06:06अर्ली 20th सेंचुरी के क्रांतिकारी इस

12:06:09पार्टी के ऑर्गेनाइजेशन के लिए न्यूक्लियस

12:06:11प्रोवाइड करते हैं इसे 1940 में लॉन्च

12:06:13किया जाता है यह ब्रिटिश इंपिरियलिज्म के

12:06:16वायलेट ओवर थ्रू और इंडिया में सोशलिज्म

12:06:19के एस्टेब्लिशमेंट को सपोर्ट करते हैं

12:06:21आईडियोलॉजिकली ये कॉमिनेस्ट पार्टी से

12:06:23ज्यादा सीसी के क्लोज होते हैं 1939 में

12:06:27त्रिपुरा कांग्रेस सेशन के दौरान हुए

12:06:29गांधी बस तिल में ये बूस्ट का साथ देते

12:06:32हैं ये लोग यूएसएसआर के वार जॉइन करने के

12:06:35बाद भी वार एफर्ट को सपोर्ट नहीं करते

12:06:37ट्रांसफर ऑफ पावर और पार्टीशन को ये

12:06:40कांग्रेस की उज्जवल लीडरशिप और

12:06:42इंपिरियलिज्म के बीच हुई बागडोर डील बताते

12:06:45हैं इसके अलावा कुछ और मेन पार्टी थी जैसे

12:06:48की 1939 में एन डेट मजूमदार बोलशेविक

12:06:52पार्टी ऑफ इंडिया एस्टेब्लिश करते हैं

12:06:541942 में समंदर नाथ टैगोर रिवॉल्यूशनरी

12:06:58कम्युनिस्ट पार्टी लॉन्च करते हैं और 1941

12:07:01में इंद्रसेन और अजीत राय जैसे

12:07:04बलिनिस्ट पार्टी उसे करते हैं यह सभी

12:07:07डिसिडेंट कम्युनिस्ट ग्रुप थे और हर कोई

12:07:10इंडियन रिवॉल्यूशन को लीड करने के लिए खुद

12:07:13को सबसे फिट पार्टी बताता है इंडिया में

12:07:15कम्युनिस्ट मूवमेंट के पायनियर में राय का

12:07:18मार्क्सिज्म से पुरी तरह मोहभंग हो जाता

12:07:20है और 1940 में वो रेडिकल डेमोक्रेटिक

12:07:24पार्टी ऑर्गेनाइजर करते हैं इनका कहना था

12:07:26की इंडिया में रिवॉल्यूशन अकेले

12:07:28प्रोलिटेरिएट क्लास नहीं ला शक्ति बल्कि

12:07:31यह सिर्फ मल्टी क्लास पार्टी की लीडरशिप

12:07:33में ही ए सकता है

12:07:37कंक्लुजन

12:07:40दोस्तों इस तरह लेफ़्टिस्ट मूवमेंट में कई

12:07:43अलग-अलग ट्रेंड्स देखने को मिलते हैं

12:07:45लेफ्ट मूवमेंट्स देश में सोशलिस्ट

12:07:48आईडियोलॉजी को स्ट्रिंग दिन करते हैं

12:07:49कांग्रेस के सु इकोनामिक प्रोग्राम पर

12:07:52इनका गहरा प्रभाव देखने को मिलता है

12:07:54उदाहरण के तोर पर 1931 के कराची सेशन में

12:07:58लाया गया नेशनल इकोनामिक प्रोग्राम

12:08:00हालांकि कम्युनिस्ट पार्टी बहुत ज्यादा

12:08:03सफल नहीं दिखती उसकी बड़ी वजह यह थी की यह

12:08:06अपने को इंडिया की सिचुएशन के अनुसार मॉडल

12:08:09करने की जगह इंटरनेशनल डिस्टेंस और फॉरेन

12:08:12आईडी को ही अपना बेस बनाए रखते हैं इसके

12:08:15अलावा अलग-अलग कम्युनिस्ट ग्रुप में

12:08:18यूनिटी भी नहीं अच्छी जाति जो इंडिया में

12:08:20कम्युनिस्ट मूवमेंट को कमजोर कर देता है

12:08:28दोस्तों 19th सेंचुरी के सेकंड हाफ के

12:08:31दौरान इंडिया में मॉडर्न इंडस्ट्री की

12:08:33शुरुआत होती है

12:08:34रेलवे की कंस्ट्रक्शन में कम करने वाले

12:08:36हजारों हाथ मॉडर्न इंडियन वर्किंग क्लास

12:08:39का हिस्सा बन जाते हैं रेलवे के साथ ही

12:08:42कुछ ऐसी लेडी इंडस्ट्रीज का डेवलपमेंट भी

12:08:44शुरू होता है जैसे की कॉल इंडस्ट्री तेजी

12:08:48से विकास करती है और लॉज वर्किंग ग्लास को

12:08:50रोजगार देती है इसके बाद कॉटन और जट

12:08:53इंडस्ट्रीज की भी शुरुआत अच्छी जाति है इन

12:08:56सभी इंडस्ट्रीज में कम करने वाले लोग

12:08:58इंडियन वर्किंग क्लास का पाठ कहलाने हैं

12:09:01इंडियन वर्किंग क्लास भी इस तरह के

12:09:04एक्सप्लोइटेशन को फेस कर दी है जैसा की

12:09:06इंडस्ट्रियलिज्म के दौरान यूरोपियन

12:09:08वर्किंग क्लास द्वारा किया गया था

12:09:15वर्किंग कंडीशन चाइल्ड लेबर और बेसिक

12:09:18एमिलाइटिस का अभाव लेकिन इंडिया में

12:09:20कॉलोनियलिज्म का होना वर्किंग क्लास

12:09:22मूवमेंट को एक अलग टच देता है

12:09:25इंडियन वर्कर्स को दो फोर्सेस का एक साथ

12:09:28सामना करना पड़ता है एक तो इंपिरियलिस्ट

12:09:31रनिंग क्लास और दूसरा कैपिटल क्लास का

12:09:34इकोनॉमिक्स

12:09:37दोनों ही तरह की कैपिटल लिस्ट शामिल थे

12:09:40इसलिए वर्किंग क्लास मूवमेंट का

12:09:42इंडिपेंडेंस मूवमेंट के साथ दीप कनेक्शन

12:09:45देखा जा सकता है

12:09:51अली नेशनलिस्ट स्पेशली मॉडरेट्स लेबर कैसे

12:09:55के प्रति बहुत ज्यादा एक्टिव नहीं दिखते

12:09:57इस समय इंडियन ओल्ड फैक्टरीज की लेबर और

12:10:01ब्रिटिश ओल्ड फैक्टरीज की लेबर को अलग-अलग

12:10:03ट्वीट किया जाता था ये भी समझा जाता था की

12:10:06लेबर लेजिसलेशंस इंडियन ओल्ड इंडस्ट्रीज

12:10:09की कम्पेटिटिव आगे को इफेक्ट करेंगे साथ

12:10:12ही अर्ली नेशनलिस्ट क्लास के बेसिस पर

12:10:15इंडिपेंडेंस मूवमेंट में डिवीजन नहीं होने

12:10:17देना चाहते थे इस वजह से देखा जाता है की

12:10:20मॉडरेट्स 1881 और 1891 के फैक्ट्री एक्ट्स

12:10:24कभी विरोध करते हैं इस दौरान वर्कर्स की

12:10:27इकोनामिक कंडीशंस को इंप्रूव करने के लिए

12:10:29कुछ फिलैंथरोपिक एफर्ट्स जरूर हुए थे और

12:10:32यह स्पेसिफिक लोकल ग्रीवेंस को ही हम करते

12:10:35थे ऐसे ही कुछ एफर्ट्स पर नजर डालते हैं

12:10:40बनर्जी वर्किंग मेंस क्लब की शुरुआत करते

12:10:43हैं और भारत श्रमजीवी के नाम से न्यूज़

12:10:46पेपर

12:10:51लेजिसलेटिव काउंसिल में लेबर की बटर

12:10:53वर्किंग कंडीशंस पर एक बिल पास करने की

12:10:55कोशिश करते हैं

12:10:571880 में नारायण मेघा जी लोखंडे दीनबंधु

12:11:01न्यूज़पेपर की शुरुआत करते हैं और साथ ही

12:11:04बॉम्बे मिल और मिल हाथ संगठन को भी सेटअप

12:11:07करते हैं

12:11:071899 में ग्रेट इंडियन पेनिनसुलर रेलवे के

12:11:11सिगनल्स द्वारा पहले स्ट्राइक की जाति है

12:11:13जिसे काफी सपोर्ट भी मिलता है तिलक कई

12:11:17मीना से अपनी न्यूज़ पेपर महाराष्ट्र और

12:11:19केसरी में इस स्ट्राइक के लिए कैंपेन कर

12:11:21रहे थे इसके अलावा 20th सेंचुरी आते-आते

12:11:25बहुत सी नेशनल लीडर्स जैसे की विपिन

12:11:28चंद्रपाल और जी सुब्रह्मण्य अय्यर भी

12:11:30वर्कर्स के लिए बटर कंडीशंस और प्रोन लेबर

12:11:33रिफॉर्म्स की डिमांड करने लगता हैं

12:11:41ड्यूरिंग स्वदेशी अक्सर्ज

12:11:43स्वदेशी आंदोलन में वर्कर्स भी भाग लेते

12:11:46हैं अश्विनी कुमार बनर्जी प्रभात कुमार

12:11:49राय चौधरी प्रेम तो उसे बस और पूर्वक

12:11:52कुमार घोष जैसे लीडर्स के द्वारा जगह

12:11:55स्ट्रीक्स ऑर्गेनाइजर की जाति है ये

12:11:57स्ट्रीक्स गवर्नमेंट प्रेस रेलवे और जट

12:12:01इंडस्ट्री में की जाति हैं

12:12:02सुब्रह्मण्य शिवा और चिदंबरम पिल्लई टूटी

12:12:06गौरी और तिरुनेलवेली में स्ट्राइक लीड

12:12:08करते हुए गवर्नमेंट द्वारा अरेस्ट कर लिए

12:12:11जाते हैं इस दौरान ट्रेड यूनियंस को फॉर्म

12:12:14करने की कोशिश भी की जाति है लेकिन इसमें

12:12:16ज्यादा सफलता नहीं मिलती स्वदेशी आंदोलन

12:12:19के बाद हुआ कल क्लास मूवमेंट में अगला

12:12:21टर्न फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान होता है

12:12:23आई समझते हैं किस तरह गटर बनाता है

12:12:32चीजों के दम भी आसमान चुने लगे थे और

12:12:35इंडस्ट्रियलिस्ट के लिए यह प्रॉफिट कमाने

12:12:37का पीरियड साबित हो रहा था लेकिन वर्कर्स

12:12:40को भी लो वेजेस ही दी जा रही थी 1915 से

12:12:441924 के दौरान जट मिल द्वारा जहां 140%

12:12:48एवरेज डिविडेंड मिल रहा था वही इंडस्ट्री

12:12:51में कम करने वाले वर्कर्स की एवरेज वेज

12:12:53सिर्फ 12 पाउंड पर एनम थी ऐसी सिचुएशन की

12:12:57वजह से वर्कर्स में डिस्कंटेंट बढ़ता जा

12:12:59रहा था इस समय इंडिया में गांधीजी के आने

12:13:02से नेशनल मूवमेंट और ज्यादा ब्रेड बेस्ट

12:13:04हो गया था और नेशनल कॉल्स के लिए वर्कर्स

12:13:07और प्रेजेंस की मोबिलाइजेशन पर जोर दिया

12:13:09जा रहा था इसके अलावा इंटरनेशनल इवेंट्स

12:13:12जैसे की 1917 में रूस रिवॉल्यूशन और

12:13:15यूएसएसआर का फॉर्मेशन कमेंट ऑन कंफर्मेशन

12:13:18और आईएलओ का सेटअप होना इंडिया की वर्किंग

12:13:21क्लास मूवमेंट को एक नई डाइमेंशन देता है

12:13:23इस सबके बीच वर्कर्स को ट्रेड यूनियंस में

12:13:27ऑर्गेनाइज करने की शुरुआत भी होती है 31

12:13:30अक्टूबर 1920 को जो इंडिया ट्रेड यूनियन

12:13:33कांग्रेस का फॉर्मेशन होता है इसके पहले

12:13:35प्रेसिडेंट लाल लाजपत राय बनते हैं और

12:13:38दीवान चमन लाल को पहले जनरल कंट्री बनाया

12:13:41जाता है लाल लाजपत राय केपीटलाइज्म को

12:13:44इंपिरियलिज्म से लिंक करते हुए कहते हैं

12:13:46की इंपिरियलिज्म और मिलट्वॉइज्म

12:13:49केपीटलाइज्म के जुड़वा बच्चे हैं

12:13:51एटक के तीसरी और चौथ सेशन की अध्यक्षता कर

12:13:55दास करते हैं

12:13:571922 में कांग्रेस के गया सेशन में एटक के

12:14:01फॉर्मेशन को वेलकम किया जाता है और उसे

12:14:03एसिस्ट करने के लिए एक कमेटी भी फॉर्म की

12:14:06जाति है सी आर दास कहते हैं की कांग्रेस

12:14:08को वर्कर्स के कैसे को अपने एजेंडा में

12:14:10शामिल करना चाहिए नहीं तो यह लोग नेशनल

12:14:13मूवमेंट से आइसोलेट हो जाएंगे

12:14:15एटक के साथ नेहरू सुभाष चंद्र बस सन रूस

12:14:19जीएमसी इन गुप्ता वे वे गिरी और सरोजिनी

12:14:22नायडू जैसी लीडर्स भी क्लोज कांटेक्ट में

12:14:24रहते हैं शुरुआत में एटक ब्रिटिश लेबर

12:14:28पार्टी के सोशल डेमोक्रेटिक इतिहास से

12:14:30इन्फ्लुएंस थी इसके बाद गांधीजी की नॉन

12:14:33वायलिन फ्रस्ट्रेशन

12:14:35की फिलासफी का इस पर गहरा प्रभाव पड़ता है

12:14:38इससे पहले 1918 में

12:14:40जिंदाबाद मिल स्ट्राइक के दौरान गांधी जी

12:14:42ने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर संगठन को भी

12:14:45ऑर्गेनाइजर किया था ट्रेड यूनियंस के

12:14:48फॉर्मेशन को बढ़ता देख 1926 में ब्रिटिश

12:14:51गवर्नमेंट ट्रेड यूनियन एक्ट लेकर आई है

12:14:53इस एक्ट में ट्रेड यूनियंस को लीगल

12:14:56एसोसिएशंस की तरह किया जाता है और उनके

12:14:59रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशंस के लिए कुछ

12:15:01कंडीशंस राखी जाति हैं ये एक्ट ट्रेड

12:15:04यूनियंस को सिविल और क्रिमिनल इम्यूनिटी

12:15:06देता है लेकिन सिर्फ लेजिटीमेट एक्टिविटीज

12:15:09के लिए इनकी पॉलीटिकल एक्टिविटीज पर

12:15:11रिस्ट्रिक्शंस लगा दी जाति हैं इसके बाद

12:15:14लीड 1920 का दूर शुरू होता है जब वर्कर

12:15:17मूवमेंट और ज्यादा स्ट्रांग होता दिखता है

12:15:20लीड 1920 से 1930

12:15:26लीड 1920 में वर्कर्स मूवमेंट पर स्ट्रांग

12:15:29कम्युनिस्ट इन्फ्लुएंस देखा जा सकता है जो

12:15:32इसे पहले से ज्यादा मिलिटेंट और

12:15:34रिवॉल्यूशनरी बना देता है कम्युनिस्ट

12:15:36इंटरनेशनल की फोर्थ कांग्रेस एटक को मैसेज

12:15:39भेजती है की सिर्फ फेयर वेजेस से ही

12:15:42संतुष्ट ना हो बल्कि केपीटलाइज्म और

12:15:44इंपिरियलिज्म को उखाड़ फेंकने के लिए कम

12:15:47करें

12:15:471928 के दौरान बड़े स्टार पर इंडस्ट्रियल

12:15:51अनरेस्ट देखने को मिलता है मुंबई

12:15:53टेक्सटाइल मिल में गिनी कामगार यूनियन

12:15:55द्वारा 6 महीने लंबी स्ट्राइक ऑर्गेनाइजर

12:15:58की जाति है कल मिलकर 2003 स्ट्रीक्स होती

12:16:01हैं जिसमें 5 लाख से ज्यादा वर्कर्स

12:16:03इंवॉल्व होते हैं और ये स्ट्रीक्स इमीडिएट

12:16:06इकोनामिक डिमांड से ज्यादा पॉलीटिकल

12:16:08इतिहास से प्रेरित नजर आई हैं इस पीरियड

12:16:11में बहुत से कम्युनिस्ट ग्रुप का

12:16:12क्रिस्टलाइजेशन भी होता है जिन्हें ऐसे

12:16:15देंगे मुजफ्फर अहमद पीसी जोशी सोहन सिंह

12:16:18जोशी जैसे लीडर्स लीड करते हैं ट्रेड

12:16:22यूनियन मूवमेंट की बढ़नी स्ट्रैंथ से

12:16:23घबराकर गवर्नमेंट लेजिसलेटिव

12:16:25रिस्ट्रिक्शंस लेकर

12:16:271929 में पब्लिक सेफ्टी ऑर्डिनेंस और

12:16:30ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट इंट्रोड्यूस किया

12:16:32जाता है ट्रेड डिस्प्यूट इंडस्ट्रियल

12:16:34डिस्प्यूट को सेटल करने के लिए कोट्स

12:16:36इंक्वारी और कंसल्टेशन बोर्ड्स का

12:16:39अपॉइंटमेंट कंपलसरी कर देता है साथ ही

12:16:41पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज जैसे की रेलवे

12:16:44वाटर और इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड्स ईटीसेटरा

12:16:46में स्ट्राइक करने के लिए हर इंडिविजुअल

12:16:48वर्कर को वन मठ का एडवांस नोटिस

12:16:51एडमिनिस्ट्रेशन को देना कंपलसरी कर दिया

12:16:53जाता है इसके बिना सभी स्ट्रीक्स इलीगल

12:16:56डिक्लेअर कर दी जाति हैं इसके अलावा

12:16:58कोरसिव या पीली पॉलीटिकल नेचर की ट्रेड

12:17:01यूनियन एक्टिविटीज करने से भी इन्हें माना

12:17:03कर दिया जाता है यहां तक स्ट्रीक्स भी

12:17:07नहीं की जा शक्ति थी ट्रेड यूनियन मूवमेंट

12:17:09को और ज्यादा रिस्टिक करने के लिए 1929

12:17:13में ही मेरठ कंस्पायरेसी कैसे भी फाइल

12:17:15किया जाता है जिसमें गवर्नमेंट 31 लेबर

12:17:18लीडर्स को अरेस्ट कर लेती है और 3 1/2 एयर

12:17:21की ट्रायल के बाद मुजफ्फरनगर

12:17:26और शौकत उस्मानी जैसे ट्रेड यूनियन लीडर्स

12:17:29को कनविनित किया जाता है इस ट्रायल को

12:17:32दुनिया भर में पब्लिसिटी मिलती है लेकिन

12:17:34इससे इंडियन वर्किंग क्लास मूवमेंट कमजोर

12:17:36पद जाता है जैसा की गवर्नमेंट का एक भी था

12:17:39इस बीच 1930 में शुरू हुए सिविल

12:17:42डिसऑबेडिएंस मूवमेंट में वर्कर्स ने

12:17:44बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था लेकिन ब्रिटिश

12:17:46गवर्नमेंट इन्हें फोर्सफुली ढाबा देती है

12:17:48लॉर्ड स्केल पर वर्कर्स और उनके लीडर्स को

12:17:51अरेस्ट किया जाता है

12:17:53लेजिसलेशंस और कमिश्नर के थ्रू वर्कर्स को

12:17:55विक्टिमाइज किया जाता है इन डेवलपमेंट की

12:17:58वजह से यूनियन लीडर्स को यूनिटी की

12:18:00इंर्पोटेंस समझ आई है और अक्टूबर 1934 में

12:18:03फॉर्म हुई कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी

12:18:05मॉडरेट और रेडिकल ट्रेड यूनियंस को

12:18:08यूनाइटेड करने का प्रयास करती है इसे

12:18:10जयप्रकाश नारायण आचार्य नरेंद्र देव और

12:18:13मीनू मसानी ने मिलकर फॉर्म किया था

12:18:161937 के प्रोविंशियल इलेक्शंस के दौरान

12:18:18आईआईटी उस कांग्रेस को सपोर्ट करती है

12:18:21कांग्रेस मिनिस्टरीज के ट्रेड यूनियंस के

12:18:23प्रति सीमित एटीट्यूड के करण 193 अभी तक

12:18:27इनकी संख्या बढ़कर 296 हो जाति है बिहार

12:18:30बॉम्बे यूनाइटेड प्रोविंस और सेंट्रल

12:18:33प्रोविंस में कांग्रेस गवर्नमेंट लेबर

12:18:35इंक्वारी कमेटी भी अप्वॉइंट करती हैं जो

12:18:38वर्कर्स की कंडीशनस को सुधारने के लिए

12:18:40लिबरल रिकमेंडेशन देती हैं जिसके बाद

12:18:43बॉम्बे इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1938

12:18:45डी बॉम्बे शॉपर्स सिस्टम सेट 1939 क

12:18:50मेटरनिटी एक्ट 1939 और बंगाल मेटरनिटी

12:18:53एक्ट 1939 जैसे बेनिफिशियल लेजिसलेशंस

12:18:56एनेक्ट किया जाते हैं इसके बाद 1939 में

12:18:59सेकंड वर्ल्ड वार शुरू हो जाता है जब एक

12:19:02बार फिर वर्कर मूवमेंट नया टर्न लेट है आई

12:19:05जानते हैं इस दौरान क्या-क्या होता है

12:19:08ड्यूरिंग और आफ्टर डी सेकंड वर्ल्ड वार

12:19:14सेकंड वर्ल्ड वार एक बार फिर से बढ़ते

12:19:17प्राइसेस और पिछड़ती वेजेस का दूर लेकर

12:19:19आता है साल 1940 बहुत सी स्ट्रीक्स का

12:19:23गवाह बंता है ऐसा इसलिए भी क्योंकि ट्रेड

12:19:26यूनियंस उसे समय चल रहे पॉलीटिकल

12:19:27डेवलपमेंट से खुद को अलग नहीं रख शक्ति थी

12:19:30सितंबर 1940 में फैसियलिज्म और

12:19:33इंपिरियलिज्म के अगेंस्ट एटक एक

12:19:36रेजोल्यूशन अडॉप्ट करती है इसमें कहा जाता

12:19:38है की ऐसी किसी भी वार्म शामिल होना जिससे

12:19:42अपने देश में फ्रीडम और डेमोक्रेसी

12:19:44इस्टैबलिश्ड ना होती हो एन सिर्फ देश के

12:19:46लिए हितकारी होगा बल्कि इसमें वर्किंग

12:19:48क्लास का भी कोई बेनिफिट या हिट नहीं हो

12:19:51सकता इस तरह शुरुआत में तो वर्कर्स

12:19:54मूवमेंट वार को अपोज करता है लेकिन 1941

12:19:57में यूएसएसआर के एलिट पावर्स की तरफ से

12:20:00वार जॉइन करने के बाद कम्युनिस्ट वार को

12:20:03पीपल्स वार कहते हैं और इसे सपोर्ट करने

12:20:06लगता हैं कम्युनिस्ट लीडर एम एंड्राइड एटक

12:20:09छोड़कर इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर नाम की

12:20:12प्रूफ गवर्नमेंट यूनियन बना लेते हैं

12:20:14ब्रिटिश गवर्नमेंट भी इस लॉयल

12:20:16ऑर्गेनाइजेशन के लिए पर मठ 13000 का

12:20:19ग्रैंड सैंक्शन कर देती है और इसीलिए

12:20:22क्यूट इंडिया मूवमेंट के दौरान वर्कर्स का

12:20:24पार्टिसिपेशन कुछ कम देखने को मिलता है इस

12:20:27दौरान कम्युनिस्ट इंडस्ट्रियल पीस की

12:20:29पॉलिसी फॉलो करने की सलाह देते हैं

12:20:31हालांकि आर्गेनाईजेशन सपोर्ट के बाहर

12:20:34इंडिविजुअल वर्कर्स जरूर आंदोलन को सपोर्ट

12:20:36करते हैं इसके बाद 1945 से 1947 के बीच

12:20:41वर्कर्स बड़ी संख्या में पोस्ट वार नेशनल

12:20:43अब्जॉर्जर्स में शामिल होते हैं उदाहरण के

12:20:46तोर पर 1946 में नवल रेटिंग्स के सपोर्ट

12:20:49में जगह-जगह वर्कर्स स्ट्राइक पर जाते हैं

12:20:52फौरन रूल की आखिरी साल में बहुत सी

12:20:54स्ट्राइक अच्छी जाति है जो की पोस्ट रेलवे

12:20:57जैसी एस्टेब्लिशमेंट में की गई थी

12:21:00कंक्लुजन

12:21:06दोस्तों हम का सकते हैं की इंडिया में

12:21:09वर्कर्स मूवमेंट काफी हद तक आजादी के

12:21:11आंदोलन से प्रभावित राहत है शुरुआत में

12:21:14नेशनल लीडर्स ही ट्रेड यूनियंस को लीडरशिप

12:21:17प्रोवाइड करते दिखते हैं लेकिन लेट 1920

12:21:19के बाद इसका नेतृत्व कम्युनिस्ट लीडर्स के

12:21:22हाथों में चला जाता है वर्किंग क्लास

12:21:25नेशनल मूवमेंट को भी ब्रेड बेस प्रधान

12:21:27करती है इनके पार्टनरशिप के बिना नेशनल

12:21:30स्ट्रगल अधूरा ही र जाता वॉइस इंडियन

12:21:34कैपिटल और डी रूल इन नेशनल बुक

12:21:37दोस्तों इंडियन फ्रीडम मूवमेंट एक ऐसी

12:21:40दास्तान है जी सिर्फ एक पर्सपेक्टिव से

12:21:43नहीं देखा जाना चाहिए ये कैसी गुत्थी है

12:21:46जिसमें बड़े-बड़े नेताओं जैसे गोखले तिलक

12:21:50गांधी एट सिटेरा के साथ-साथ कई ऐसे समुदाय

12:21:54और आइडलॉजिस भी शामिल रही जिनका जिक्र

12:21:56किया बिना इसको समझना मुश्किल होने के साथ

12:21:59ही अधूरा भी है

12:22:00यह कहानी है भारत के कैपिटल अर्थात पूंजी

12:22:05पतियों के राइस और इंडियन फ्रीडम मूवमेंट

12:22:07में उनके रोल की जिसने हमारी स्ट्रगल में

12:22:10एक हम भूमिका निभाई लेकिन ये कहानी शुरू

12:22:14करने से पहले जल्दी से जानते हैं कुछ

12:22:16बेसिक फैक्ट्स अबाउट केपीटलाइज्म

12:22:19केपीटलाइज्म

12:22:22सिंपल टर्म्स में अगर समझा जाए तो

12:22:24केपीटलाइज्म अर्थात पूंजीवाद एक ऐसा

12:22:27इकोनामिक सिस्टम है जिसमें कैपिटल गुड्स

12:22:29की ओनरशिप प्राइवेट या कॉरपोरेट के हाथ

12:22:32में होती है कैपिटल गुड्स अर्थात पूंजीगत

12:22:35माल मतलब ऐसे गुड्स जिनका उसे दूसरे

12:22:37कंज्यूमर गुड्स के प्रोडक्शन के लिए होता

12:22:40है प्रोडक्शन प्राइसेस और डिस्ट्रीब्यूशन

12:22:42फ्री मार्केट पर डिपेंडेंट होता है कितना

12:22:45प्रोडक्शन करना है कितना प्राइस रखना है

12:22:48यह सब कुछ प्राइवेट कंपनी डिसाइड करती हैं

12:22:51मार्केट को कंट्रोल करने में सरकार का कोई

12:22:54खास रूल नहीं होता इस सिस्टम को

12:22:56केपीटलाइज्म कहते हैं और ये डिफरेंट है

12:22:59कम्युनिज्म से जिसमें स्टेट एक मेजर

12:23:02कंट्रोलर और इकोनामिक एक्टिविटी होता है

12:23:04आई अब चलते हैं वापस हमारी कहानी की तरफ

12:23:08की कैसे इंडियन कैपिटल क्लास फ्रीडम

12:23:11स्ट्रगल में इंवॉल्व हुई और कैसे उसे

12:23:13इन्फ्लुएंस किया

12:23:15इंट्रोडक्शन

12:23:17दोस्तों

12:23:19कॉलोनियलिज्म के दूर में कई इंडिविजुअल

12:23:21कैपिटल लिस्ट ने नेशनल मूवमेंट में

12:23:24पार्टिसिपेट किया उन्होंने एन केवल

12:23:27कांग्रेस जॉइन किया जय भी गए और उसे दूर

12:23:30की सभी मुश्किलों को एक्सेप्ट किया जो

12:23:33कांग्रेस मां के लिए आम बात थी जमुनालाल

12:23:36बजाज वाडीलाल लाल भाई मेहता लाल शंकर लाल

12:23:40सैमुअल आयरन कुछ ऐसे नाम हैं जो इसमें

12:23:43वेल्लूं रहे कुछ ऐसे भी इंडिविजुअल कैपिटल

12:23:46थे जिन्होंने कांग्रेस जॉइन नहीं किया पर

12:23:49फाइनेंशियल या कोई इनडायरेक्ट हेल्प की

12:23:52जैसे गड़ बिरला अंबाला साराभाई और बालचंद

12:23:56हीराचंद कई छोटे मरचेंट्स या ट्रेडर्स ने

12:24:00भी एक्टिवली सपोर्ट किया दूसरी और कुछ ऐसे

12:24:04इंडिविजुअल कैपिटल या सेक्शंस रहे जो की

12:24:07कांग्रेस या नेशनल मूवमेंट की तरफ

12:24:09न्यूट्रल रहे और कुछ नहीं तो एक्टिवली

12:24:12अपोज भी किया यहां पर हम पुरी कैपिटल

12:24:25ईस्ट क्लास इन इंडिया

12:24:28कैपिटल क्लास

12:24:31पहले इंपॉर्टेंट बात यह है की अगर दूसरी

12:24:34कॉलोनियल इकोनामी से कंपेयर करें तो

12:24:36इंडियन कैपिटल का इकोनामिक डेवलपमेंट काफी

12:24:39संपन्न और कई मैनो में उनकी ग्रोथ का नेचर

12:24:42काफी अलग भी रहा जानते हैं कैसे फर्स्टली

12:24:46इंडियन कैपिटल क्लास मिड 19th सेंचुरी में

12:24:50गो होना चालू हुई मुख्य बात यह है की इनकी

12:24:54कैपिटल अर्थात पूंजी निजी रूप से स्वतंत्र

12:24:57थी ना की किसी फॉरेन कैपिटल के जूनियर

12:25:00पार्टनर की तरह ये उनकी इंडिपेंडेंस

12:25:03कैपिटल थी सेकंड थी इंडियन कैपिटल क्लास

12:25:06इकोनॉमिकली या पॉलिटिकल कभी भी ऐसी

12:25:09सामंतवादी यानी फेयूडलिस्टिक लोगों के

12:25:12अधीन नहीं रहा जो इंपिरियलिज्म के सपोर्ट

12:25:15में थे बल्कि 1944 की फेमस बॉम्बे प्लेन

12:25:19जिनके सिग्नेटरीज जेआरडी टाटा और गड़

12:25:23बिरला जैसे लोग रहे उन्होंने डिटेल लैंड

12:25:26रिफॉर्म्स का सपोर्ट भी किया जिसमें

12:25:28कोऑपरेटिव बनाने की बात की गई

12:25:31थर्डली 1914 से 1947 के दौरान कैपिटल

12:25:36क्लास ने बहुत तेजी से ग्रोथ की इसकी कई

12:25:39कर्म में से एक इंपोर्ट सब्सीट्यूशन रहा

12:25:42जिसके चलते स्वदेशी प्रोडक्ट्स को इनकरेज

12:25:45किया गया बाय लिमिटेड इंपोर्ट आजादी होने

12:25:48तक इंडीजीनस ये स्वदेशी इंटरप्राइजेज का

12:25:51डोमेस्टिक मार्केट शेर

12:25:5373% तक पहुंच गया और ऑर्गेनाइज्ड बैंकिंग

12:25:56सेक्टर के डिपॉजिट का 80% जो साफ-साफ इनकी

12:26:01ग्रोथ को बयान करता है यहां ये समझना

12:26:03जरूरी है की कैपिटल की ग्रोथ कॉलोनियलिज्म

12:26:07के करण नहीं हो रही थी जैसा अक्सर इल्जाम

12:26:09लगाया जाता है बल्कि यह ग्रोथ

12:26:12कॉलोनियलिज्म के खिलाफ लगातार स्ट्रगल

12:26:15करते हुए हुई|

12:26:19जो उनकी इंपिरियलिज्म के खिलाफ लड़ाई के

12:26:22बीच आता बल्कि मिड 1920 तक उन्होंने अपने

12:26:27लॉन्ग टर्म क्लास इंटरेस्ट को सेट किया और

12:26:29इंपिरियलिज्म के खिलाफ अपनी आवाज को खुलकर

12:26:32लोगों तक पहुंचा

12:26:34कैपिटल क्लास की हेसिटेशन सिर्फ यह थी की

12:26:38इंपिरियलिज्म के खिलाफ कौन सा रास्ता

12:26:40चुनाव जाए उन्हें ये डर था की स्ट्रगल ऐसा

12:26:44रास्ता ना ले ले जिससे उनके यानी

12:26:46केपीटलाइज्म के एक्जिस्टेंस पर ही खतरा ए

12:26:49जाए

12:26:49इंपिरियलिज्म और एंटी इंपिरियलिस्ट

12:26:52मूवमेंट की तुलना में कैपिटल क्लास की

12:26:54क्या सोच रही यह समझना से पहले एक नजर इस

12:26:58पर डालना जरूरी है की कैपिटल इस क्लास का

12:27:01इमरजेंसी एक पॉलीटिकल एंटी के रूप में

12:27:03कैसे हुआ

12:27:05इमरजेंसी ऑफ डी कैपिटल

12:27:08एंटी

12:27:101920 की शुरुआत से ही गड़ बिरला और

12:27:14पुरुषोत्तम दास जैसी कैपिटल ने इंडिया की

12:27:17कमर्शियल इंडस्ट्रियल और फाइनेंशियल

12:27:19इंटरेस्ट के लिए एक नेशनल लेवल की

12:27:22ऑर्गेनाइजेशन को बनाने का प्रयास किया

12:27:24जिसकी मदद से कॉलोनियल गवर्नमेंट के सामने

12:27:27अपनी मांगे रख सकें इन्हीं कोशिशें के

12:27:30चलते

12:27:311927 में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ

12:27:34कॉमर्स और इंडस्ट्री अर्थात फीकी का गठन

12:27:37हुआ जिसे कॉलोनियल गवर्नमेंट और इंडियन

12:27:41पब्लिक ने कैपिटल क्लास की एक डोमिनेंट

12:27:44ओपिनियन के रूप में स्वीकार किया कैपिटल

12:27:47क्लास की लीडर्स फीकी को ट्रेड कॉमर्स और

12:27:50इंडस्ट्री के नेशनल गार्जियन के रूप में

12:27:52देखने लगे इस प्रोसेस के दौरान इंडियन

12:27:55कैपिटल ने इंटेलेक्चुअल का इस्तेमाल करके

12:27:58इंपिरियलिज्म की कंप्रिहेंसिव इकोनामिक

12:28:01क्रिटिक को डेवलप किया जिसमें उन्होंने

12:28:03ट्रेड प्रैक्टिस में हो रही एक्सपी पोजीशन

12:28:05को उजागर किया फिर चाहे वो डायरेक्ट

12:28:08एप्रुपरिएशन यानी सीधे ल के मध्य से हूं

12:28:11या फिर ट्रेड फाइनेंस ई मैनिपुलेशन दो

12:28:15कंट्रीज के बीच हो रहे अनइक्विलिक्स चेंज

12:28:18जैसे माध्यमों से हो कांग्रेस लीडर्स ने

12:28:20उनके ओपिनियन और एक्सपर्टीज को हमेशा ही

12:28:23रिस्पेक्ट से ट्वीट किया

12:28:24कैपिटल ने ये महसूस किया की फिक्की लंबे

12:28:28समय तक सिर्फ एक ट्रेड यूनियन मंत्र नहीं

12:28:30र शक्ति उनका मानना था की अब उनको

12:28:33पॉलिटिक्स में इंटरव्यू करना चाहिए

12:28:361928 में फिक्की के प्रेसिडेंट सर

12:28:39पुरुषोत्तम दास ने डिक्लेअर किया वीकेंडो

12:28:42सेपरेटर पॉलिटिक्स फ्रॉम इकोनॉमिक्स

12:28:44इंडियन नेशनलिज्म में फरदर इंवॉल्व होने

12:28:48की बात कहीं गई सिमिलरली गड़ बिरला ने

12:28:511930 में फ्रीडम फाइटर के हाथ मजबूत करने

12:28:55की बात कहीं जिससे गवर्नमेंट को अपनी

12:28:57समक्ष लाया जा सके तो वापस आते हैं एंटी

12:29:00इंपिरियलिस्ट मूवमेंट के सपोर्ट में

12:29:02कैपिटल लिस्ट क्लास के तोर त्रिकोण पर

12:29:06अकॉर्डिंग तू कैपिटल क्लास

12:29:10कैपिटल क्लास का शुरू से यह मानना था की

12:29:13स्ट्रगल के बाद में कभी भी कांस्टीट्यूशनल

12:29:16मेंस और नेगोशिएशंस को आबंदों नहीं किया

12:29:19जाना चाहिए कैपिटल मास्क सिविल

12:29:22डिसऑबेडिएंस के पक्ष में नहीं थे इनके कुछ

12:29:24कर्म पर नजर डालते हैं पहले उन्हें डर था

12:29:28की मांस सिविल डिसऑबेडिएंस सोशल सेंस में

12:29:31रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट में कन्वर्ट हो सकता

12:29:33है जिससे केपीटलाइज्म को खतरा होगा दूसरा

12:29:36वो लंबे चलने वाले आंदोलन को सपोर्ट नहीं

12:29:39कर सकते थे क्योंकि उनकी दे टुडे बिजनेस

12:29:42को हनी होती तीसरा उनके कांस्टीट्यूशनल

12:29:46पार्टिसिपेशन और 22 राय की एग्जीक्यूटिव

12:29:48काउंसिल में शामिल होने को सुरेंद्र के

12:29:50तोर पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि वो

12:29:54काउंसिल में रहकर इफेक्टिव अपोजिशन देना

12:29:56चाहते थे जिससे ऐसे लोग जो नेशनल इंटरेस्ट

12:29:59के लिए कम नहीं कर रहे थे वो अपनी बात ना

12:30:02मानव लेने ऐसा होने से कैपिटल क्लास और

12:30:06इंडियन इकोनामी को घाट हो सकता था वो केवल

12:30:09अपनी ऊपर ही पार्टिसिपेट करना चाहते थे

12:30:12नेशनल डिमांड्स को आबंदों किया बिना यही

12:30:15करण था की फीकी ने 1934 में रिपोर्ट ऑफ

12:30:19जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन

12:30:20कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स पर इंडिया को

12:30:22रिजेक्ट किया चौथ उन्होंने बिना कांग्रेस

12:30:26के इंवॉल्वमेंट की ब्रिटिश गवर्नमेंट से

12:30:28नेगोशिएट करने से इनकार कर दिया राउंड

12:30:31टेबल कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार किया और

12:30:33गांधी जी के इंवॉल्वमेंट को नेसेसरी बताया

12:30:36एस एन फ्री मां नवंबर 1929 में साराभाई ने

12:30:40कहा

12:30:41माइंस तू सपोर्ट ऑफ डी कांग्रेस डी

12:30:44गवर्नमेंट बिल नोट लिसन तू यू फाइनली

12:30:47कैपिटल क्लास ने फ्रीडम स्ट्रगल के और

12:30:50त्रिकोण को साइड लाइन नहीं किया उनके

12:30:52अनुसार

12:30:53कांस्टीट्यूशनलिज्म सिर्फ एक स्टेप था में

12:30:56गोल यानी फ्रीडम की और एग्जांपल

12:31:01को ऑन किया की कांग्रेस अपने गोल्ड तक

12:31:04पहुंचने के लिए ऑफिस जॉइन कर रही है ना की

12:31:07कॉन्स्टिट्यूशन को इन्फोस करने के लिए

12:31:10और अगर दो-तीन साल में प्रोग्रेस नहीं हुई

12:31:12तो मांस सिविल डिसऑबेडिएंस का डायरेक्ट

12:31:15एक्शन लेना जरूरी हो जाएगा दोस्तों कैपिटल

12:31:19क्लास का एटीट्यूड सिविल डिसऑबेडिएंस

12:31:21मूवमेंट की और काफी उलझा देने वाला था एक

12:31:25नजर इस पर भी डालते हैं

12:31:28परिसर एटीट्यूड टुवर्ड्स सिविल

12:31:30डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

12:31:33कैपिटल क्लास बताए गए कर्म से सिविल

12:31:36डिसऑबेडिएंस मूवमेंट से डरती रही पर ये

12:31:39एक्सेप्ट भी किया की जो भी अब तक डिमांड्स

12:31:42एक्सेप्ट हुई हैं वो इस मूवमेंट के करण ही

12:31:45थी

12:31:45जनवरी 1931 में गड़ बिरला ने पुरुषोत्तम

12:31:50दास को लिखने हुए ये माना की गांधी जी के

12:31:52करण ही हमारे ऑफर्स एक्सेप्ट किया गए और

12:31:55किसी भी हाल में मूवमेंट को वीक नहीं होने

12:31:58दिया जा सकता जब भी मूवमेंट लंबा चला तो

12:32:02कैपिटल क्लास 20 और नेगोशिएशन की बात

12:32:04सामने लेकर आई यही उनका ड्यूल ऑब्जेक्ट

12:32:20करने में सपोर्ट नहीं किया बल्कि उन्होंने

12:32:24लगातार गवर्नमेंट को प्रेशराइज किया

12:32:26रिप्रेशन को रोकने के लिए

12:32:29समय के साथ इंडियन कैपिटल के एटीट्यूड में

12:32:32भी काफी अंतर दिखाई दिया पर एग्जांपल

12:32:48बड़े पैमाने पर सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट

12:32:51का सपोर्ट किया

12:32:53फिफ्थ अगस्त 1942 क्यूट इंडिया मूवमेंट के

12:32:57कर दिन पहले वायसराय से पॉलीटिकल फ्रीडम

12:33:00की मांग की ये तो बात हुई कैपिटल क्लास और

12:33:03सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट की और उनकी

12:33:06एटीट्यूड की

12:33:08अब कई बार कांग्रेस पर ये इल्जाम लगे की

12:33:10वो कैपिटल क्लास से इन्फ्लुएंस है इसको

12:33:13समझते हैं

12:33:15नेशनल मूवमेंट और इन्फ्लुएंस ऑफ कैपिटल

12:33:201920 के और तक भले ही इंडियन कैपिटल का एक

12:33:24बड़ा क्षेत्र कांग्रेस को सपोर्ट कर रहा

12:33:25था लेकिन यह समझना जरूरी है की इंडियन

12:33:28नेशनल मूवमेंट नहीं इनके द्वारा क्रिएट

12:33:31किया गया था और ना ही किसी भी तरह से इनके

12:33:34सपोर्ट पर डिपेंडेंट था बल्कि कैपिटल

12:33:38क्लास ने हमेशा ही नेशनल मूवमेंट की

12:33:40स्ट्रेटजी पर रिएक्ट किया और कांग्रेस को

12:33:43फॉलो किया यह भी देखा जाना चाहिए की जो भी

12:33:46कैपिटल नेशनल मूवमेंट का पाठ रहे वो जनरली

12:33:50कंजरवेटिव स्पेक्ट्रम में रहे जिनका

12:33:53मूवमेंट की स्ट्रैटेजिस पर कोई खास

12:33:55इन्फ्लुएंस नहीं रहा फिर भी नेशनल मूवमेंट

12:33:58की ऑटोनॉमी पर लगातार ही सवाल खड़े होते

12:34:01रहे हैं ऐसा कहा गया की कैपिटल ने अपने

12:34:04पैसों के दम पर कांग्रेस को प्रेशराइज

12:34:06किया अपनी डिमांड्स मानवाने के लिए जैसे

12:34:09लोअर रूपी स्टर्लिंग रेशों जिसे एक्सपोर्ट

12:34:13करने पर इंडियन एक्सपोर्टर्स का फायदा

12:34:14होता तारीफ प्रोटेक्शन जिसकी मदद से

12:34:18इंपोर्ट होने वाले गुड्स की डोमेस्टिक गुड

12:34:20से ज्यादा हो जाए और लोकल इंडस्ट्रीज को

12:34:23प्रॉफिट हो मिलिट्री एक्सपेंस जो कॉलोनियल

12:34:26गवर्नमेंट दूसरी कॉलोनी बचाने के लिए करती

12:34:29थी इन सभी स्टेप्स से कैपिटल क्लास का ही

12:34:33फायदा होने वाला था ये भी इल्जाम लगे की

12:34:36कैपिटल ने इस हद तक इन्फ्लुएंस किया की

12:34:39किसी भी मूवमेंट को कब स्टार्ट और एंड

12:34:42करना है ये भी वही डिसाइड करने लगे

12:34:45गांधी अर्बन पेस्ट के बाद सिविल

12:34:48डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को बैंड करना इसका ही

12:34:51एक एग्जांपल बताया गया ये सारे एक्यूजेशन

12:34:54रियलिटी को रिफ्लेक्टर नहीं करते आई जानते

12:34:57हैं क्यों फर्स्ट इकोनामिक नेशनलिज्म की

12:35:01डिमांड जैसे प्रोटेक्शन फिजिकल और मॉनिटरी

12:35:04ऑटोनॉमी सिर्फ कैपिटल को फायदा नहीं

12:35:06पहचाने वाली थी बल्कि पुरी कंट्री की

12:35:09डिमांड थी जो की एक्सप्लोइटेशन का शिकार

12:35:12थी

12:35:13जैसे नेहरू सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट ने भी

12:35:17इन डिमांड्स के लिए लड़ाई लड़ी सेकंड

12:35:20इकोनामिक नेशनलिज्म की डिमांड कोई नई बात

12:35:22नहीं थी 50 साल पहले से ही नेशनलिस्ट ने

12:35:26इसकी डिटेल डॉक्ट्रिन डेवलप करनी चालू कर

12:35:28दी थी वह भी तब जब इंडियन कैपिटल एक क्लास

12:35:32के रूप में उभरा भी नहीं था इसलिए यह कहना

12:35:35गलत है की उन्होंने कांग्रेस को

12:35:37इन्फ्लुएंस किया थर्ड ये बात सच है की

12:35:41कांग्रेस को फंड्स की जरूर थी और बिजनेस

12:35:44कम्युनिटी से लेते भी रहे खासकर स्ट्रगल

12:35:47की कांस्टीट्यूशनल फैज के दौरान लेकिन

12:35:49इसका कोई सबूत नहीं है की कांग्रेस की

12:35:51पॉलिसीज को कभी उन्होंने इन्फ्लुएंस किया

12:35:54छोटे डोनेशन और मेंबरशिप फीस पर ही लोकल

12:35:57लीडर्स अपना गुजर करते रहे इस कांटेक्ट

12:36:00में गांधीजी की पोजीशन पर बात करना जरूरी

12:36:03है

12:36:031922 से ही गांधीजी का यह मानना था की भले

12:36:07ही मरचेंट्स और मिल ऑनर्स से सपोर्ट लेना

12:36:09चाहिए पर किसी भी कंडीशन में इस मूवमेंट

12:36:12को उन पर डिपेंडेंट

12:36:16नहीनफेस्टेशन है इसलिए यह मूवमेंट

12:36:19पीटरलेस सी इंडिपेंडेंस तो होना ही चाहिए

12:36:22पर उनके खिलाफ नहीं होना चाहिए हालांकि

12:36:25आगे चलकर गांधी जी का एटीट्यूड नेगेटिव हो

12:36:27गया जब वर्ल्ड वार 2 के दौरान कैपिटल

12:36:30क्लास प्रॉफिट मेकिंग में लगे रहे जबकि

12:36:33लोग फेम से मा रहे थे लास्टली कांग्रेस

12:36:36हमेशा ही बिना कैपिटल के अप्रूवल के

12:36:39मूवमेंट स्टार्ट और एंड करती रही अपने खुद

12:36:42की स्तुति जी परसेप्शन और मैसेज की

12:36:44प्रिपेयरनेस के आधार पर आई अब जानते हैं

12:36:47की कैसे फ्रीडम स्ट्रगल के चलते कैपिटल और

12:36:50लेफ्ट ईस्ट जिन्हें अक्सर अपोजिट और दी

12:36:54आईडियोलॉजिकल स्पेक्ट्रम में समझा जाता है

12:36:55किम टुगेदर पर नेशनल गुड

12:36:59कैपिटल और कोऑपरेशन विद लेफ्ट टेस्ट

12:37:04दोस्तों इंडियन कैपिटल ने कभी कांग्रेस को

12:37:08अपनी क्लास पार्टी के रूप में नहीं देखा

12:37:10बल्कि एक ओपन एंडेड ऑर्गेनाइजेशन के रूप

12:37:13में देखा जो की एक पॉपुलर मूवमेंट को लीड

12:37:16कर रही थी 1930 के दर्श में नेहरू

12:37:19सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट के इन्फ्लुएंस के

12:37:22करण जब कांग्रेस में रेडिकलाइजेशन बड़ा तब

12:37:25कैपिटल ने पॉलिटिक्स में एक्टिव पार्ट

12:37:28लेने का डिसीजन लिया सराहनीय है की इसके

12:37:31बावजूद भी उन्होंने इंपिरियलिज्म का साथ

12:37:34नहीं दिया ऐसी ही एक कोशिश को इंडियन

12:37:36कैपिटल ने नाकाम कर दिया जब 1929 में कुछ

12:37:40कैपिटल ने यूरोपीय और इंडियन कैपिटल की एक

12:37:44पार्टी बनाने का सुझाव दिया जो की

12:37:47कम्युनिस्ट एक्टिविटी के खिलाफ होने वाली

12:37:49थी

12:37:501928 में भी पब्लिक सेफ्टी बिल को सपोर्ट

12:37:53करने से इनकार कर दिया जिसका इस्तेमाल

12:38:04अटैक नहीं करना चाहते थे बल्कि वह उन

12:38:06लोगों के हाथ सशक्त करना चाहते थे

12:38:08जिन्होंने केपीटलाइज्म का डेरा नहीं छोड़

12:38:11या फिर सोशलिज्म को अपोज किया

12:38:13कैपिटल जैसे जल मेहता जो की 1943 में

12:38:18फिक्की के प्रेसिडेंट थे का ये मानना था

12:38:20की सोशल चेंज से लड़ने का सबसे अच्छा

12:38:23तरीका है कंसिस्टेंट प्रोग्राम ऑफ

12:38:25रिफॉर्म्स इसी रिफॉर्म प्रोस्पेक्टिव के

12:38:28साथ पोस्ट वार इकोनॉमिक्स डेवलपमेंट कमेटी

12:38:30को कम करना था जिसने फाइनली मुंबई प्लेन

12:38:33को बनाया वो सब कुछ जो सोशलिस्ट मूवमेंट

12:38:37में रीजनेबल था उसे एकोमोडेशन करने की

12:38:40कोशिश की गई बिना केपीटलाइज्म की एसेंशियल

12:38:43फीचर्स को सुरेंद्र की आखिरकार मुंबई

12:38:46प्लेन ने पार्शियल नेशनलाइजेशन पब्लिक

12:38:49सेक्टर लैंड रिफॉर्म और वर्कर्स की

12:38:52वेलफेयर स्कीम्स की नेसेसिटी को भी कुछ हद

12:38:54तक एक्सेप्ट किया

12:38:56कनक्लूडिंग रिमार्क्स

12:38:59तो दोस्तों हमने देखा की इंडियन कैपिटल

12:39:02क्लास प्रो इंपिरियलिस्ट बिल्कुल भी नहीं

12:39:05थी इंडियन कैपिटल क्लास ने अपने लॉन्ग

12:39:08टर्म इंटरेस्ट को आईडेंटिफाई किया और उसको

12:39:11प्रगमैटिकली परसू किया उन्होंने कांग्रेस

12:39:14की इंर्पोटेंस को समझते हुए इंडियन

12:39:16नेशनलिज्म के साथ कभी नहीं छोड़ और लगातार

12:39:20अपनी क्लास इंफ्रास्टेट को सोसाइटी की

12:39:22इंटरेस्ट के तोर पर उजागर किया इन फैक्ट

12:39:25दिस वज डी वेरी ब्यूटी ऑफ ए फ्रीडम

12:39:27स्ट्रगल जहां वेरियस आईडियोलॉजी और

12:39:30क्लासेस के लोगों ने मिलकर कंट्रीब्यूट

12:39:33किया और भारत देश का इतिहास अमर हो गया

12:39:37पॉपुलर स्ट्रगलर इन प्रिंसली स्टेटस

12:39:39दोस्तों जब हम इंडिया के फ्रीडम स्ट्रगल

12:39:42को याद करते हैं तो यूजुअली ब्रिटिशर्स के

12:39:45अगेंस्ट हुए मूवमेंट दिमाग में आते हैं

12:39:47लेकिन क्या आप जानते हैं की ब्रिटिश राज

12:39:50तो इंडिया की खाली 35th टेरिटरी को कर

12:39:52करता था बाकी की 25th टेरिटरी को इंडियन

12:39:56रुलर्स जिन्हें प्रिंसली स्टेटस भी कहा

12:39:58जाता था उनके अंदर में थी सरदार पटेल ने

12:40:02कैसे 500 से ज्यादा रियासतों का भारत में

12:40:05विलय किया इसके बड़े में तो आपने सुना ये

12:40:07पढ़ाई होगा लेकिन आज हम उससे पहले का

12:40:10इतिहास जानते हैं लेकिन उससे पहले जानते

12:40:14हैं व्हाट डू वे मीन बाय डी टर्म प्रिंसली

12:40:16स्टेटस

12:40:17प्रिंसली स्टेटस ब्रिटिश ने जब इंडिया को

12:40:20कंकर किया तो कुछ एरियाज पर डायरेक्ट

12:40:23कंट्रोल एस्टेब्लिश किया जैसे बंगाल

12:40:25मद्रास या अवध का रीजन लेकिन एक बड़ा

12:40:28एरिया ऐसा भी था जहां डायरेक्ट कॉक्वेस्ट

12:40:30की जगह इंडियन प्रिंस को ही रूल करने दिया

12:40:33गया कंडीशन बस यह थी की इन सभी स्टेटस को

12:40:36ब्रिटिश पैरामाउंट से एक्सेप्ट करनी होगी

12:40:40पैरामाउंटसी बेसिकली मेंस की ये स्टेटस

12:40:42ब्रिटिश क्राउन के वेसल होंगे वे एक्सेप्ट

12:40:46सब्सिडियरी एलायंसेज विथ ब्रिटिशर्स सो

12:40:49डिफरेंस

12:40:52के पास होगी और इंटरनल मैटर्स में स्टेटस

12:40:55फ्री होंगे देवाश्म रियली बड़े स्टेटस सच

12:40:59स हैदराबाद मैसूर कश्मीर

12:41:03लाइक बीकानेर बड़ौदा इंदौर जामनगर डी

12:41:07डेक्कन स्टेटस अलवर भरतपुर

12:41:10अब ऐसी क्या कंडीशन थी की इंडियन प्रिंस

12:41:13के रूल के अगेंस्ट मूवमेंट्स हुई वेल बहुत

12:41:17से रीजंस थे आई जानते हैं कॉसेस ऑफ मूव

12:41:20मांस इन प्रिंसली स्टेटस सबसे इंपॉर्टेंट

12:41:23रीजन मोस्ट ऑफ डीज इंडियन रुलर्स

12:41:25ऑटोक्रेटिक स्टाइल में रूल करते थे

12:41:28ब्रिटिशर्स ने इन्हें किसी भी एक्सटर्नल

12:41:30और इंटरनल थ्रेड के अगेंस्ट प्रोटेक्शन भी

12:41:33गारंटी की हुई थी अंदर पैरामाउंट

12:41:35प्रिंसिपल इसलिए मोस्ट ऑफ डेम अपनी प्रजा

12:41:38को भूलकर बस सेल्फिश इंटरेस्ट को बड़ा रहे

12:41:41थे दूसरा रीजन था हाईटेक से आपको जानकर

12:41:46हैरानी होगी की कुछ प्रिंसली स्टेटस में

12:41:48टैक्सेशन रेट्स ब्रिटिश इंडिया से भी

12:41:51ज्यादा थे तीसरा रीजन था लॉक ऑफ सिविल

12:41:54लिबर्टीज

12:41:56यहां रहने वाले लोगों के पास डेमोक्रेटिक

12:41:59राइट्स ना के बराबर थे एक तरफ ये रीजंस थे

12:42:02और दूसरी तरफ ब्रिटिश इंडिया में नेशनल

12:42:04मूवमेंट तेजी से आगे बाढ़ रहा था उसकी वजह

12:42:08से पॉलीटिकल कॉन्शसनेस अबाउट दे किसी

12:42:11रिस्पांसिबल गवर्नमेंट और सिविल लिबर्टीज

12:42:13भी काफी बधाई और दिस वाव ऑफ पॉलीटिकल

12:42:16कॉन्शसनेस अलसो रिच दिस टैक्स 20th

12:42:20सेंचुरी के फर्स्ट और सेकंड डीके में बहुत

12:42:22से इंडियन रिवॉल्यूशनरीज इन स्टेटस में

12:42:24शेल्टर लेने लगे और पॉलिटिसाइजेशन के

12:42:27एजेंट बने इसके बाद नॉन कोऑपरेशन और सिविल

12:42:30डिसऑबेडिएंस जैसे बड़े आंदोलन ने रियासतों

12:42:33के लोगों को और भी ज्यादा इन्फ्लुएंस किया

12:42:36बहुत से स्टेटस में प्रजामंडल्स या स्टेटस

12:42:39पीपल्स कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज्ड की गई जैसे

12:42:42की मैसूर हैदराबाद बड़ौदा जामनगर इंदौर

12:42:45ईटीसी में इस प्रोसेस ने तब चर्म छुआ जब

12:42:491927 में बलवंत राय मेहता मणिलाल कोठारी

12:42:53और जी आर अभ्यंकर जैसे लीडर्स के द्वारा

12:42:56जो इंडिया स्टेटस पीपल्स कॉन्फ्रेंस को

12:42:58एस्टेब्लिश किया गया इससे डिफरेंट स्टेटस

12:43:01में होने वाले स्ट्रगलर को एक यूनाइटेड

12:43:03प्लेटफॉर्म मिला पर दोस्तों यह सब

12:43:06ऑर्गेनाइजेशंस और प्लेटफॉर्म

12:43:10रियासतों में आंदोलन को लेकर इंडियन नेशनल

12:43:14कांग्रेस जो की फ्रीडम स्ट्रगल की सबसे

12:43:16इंपॉर्टेंट नेशनल लेवल ऑर्गेनाइजेशन थी

12:43:19उसकी पॉलिसी क्या थी विद रिस्पेक्ट तू

12:43:22प्रिंसली स्टेटस आई जानते हैं नेक्स्ट

12:43:24क्षेत्र में

12:43:25पॉलिसी ऑफ कांग्रेस टुवर्ड्स प्रिंसली

12:43:28स्टेटस सबसे पहले कांग्रेस ने अपनी पॉलिसी

12:43:31आर्टिकल 8 की 1920 के नागपुर सेशन में इस

12:43:36सेशन में कांग्रेस ने इंडियन रुलर्स को

12:43:38अपने स्टेटस में रिस्पांसिबल गवर्नमेंट

12:43:40एस्टेब्लिश करने के लिए बोला और प्रिंसली

12:43:43स्टेटस में रहने वाले लोगों को कांग्रेस

12:43:45का मेंबर बने की परमिशन दी लेकिन वो अपनी

12:43:48स्टेट में कांग्रेस के नाम से कोई आंदोलन

12:43:51शुरू नहीं कर सकते थे पर ऐसा क्यों था की

12:43:54कांग्रेस प्रिंसली स्टेटस में डिस्टेंस

12:43:56रखना छह रही थी तो दोस्तों कई हिस्टोरियन

12:44:00की मैन तो कांग्रेस उसे समय फॉरेन पावर से

12:44:03लड़ने पर फॉक्स करते हुए इंडिपेंडेंस

12:44:05रुलर्स का अपोजिशन नहीं चाहती थी शादी

12:44:09कांग्रेस के कई बड़े बिजनेस मानते थे की

12:44:12डिफरेंट प्रिंसली स्टेटस रिक्वायर्ड

12:44:13डिफरेंट स्ट्रैटेजिस तू फाइट अगेंस्ट डी

12:44:15प्रिंसली रोलर इसीलिए अनलाइक ब्रिटिश

12:44:19इंडिया जहां यूनीफामिटी प्रिंसली स्टेटस

12:44:21में रेजिस्टेंस और फाइट्स टुवर्ड्स पॉपुलर

12:44:24गवर्नमेंट की लड़ाई काफी नेऊेंस होने की

12:44:26जरूर थी इसलिए कांग्रेस उसे समय प्रिंसली

12:44:30स्टेटस के मैसेज को अपने रेजिस्टेंस को

12:44:32खुद बिल्ड अप करने पर फॉक्स करने की

12:44:34पॉलिसी को सपोर्ट करती थी पर जैसे-जैसे

12:44:37फ्रीडम स्ट्रगल और स्ट्रांग हुआ तो यह

12:44:40पॉलिसी भी चेंज हुई 1929 के लाहौर सेशन

12:44:43में जवाहर लाल नेहरू कहते हैं की इंडियन

12:44:45स्टेटस कनॉट लाइव अवार्ड फ्रॉम डी रेस्ट

12:44:48ऑफ इंडिया और यहां के लोगों को अपना

12:44:50फ्यूचर डिटरमिन करने का पूरा अधिकार है

12:44:53इससे पता चला है की कांग्रेस एक

12:44:55इनडायरेक्ट कैटालिस्ट की तरह थी जो पॉपुलर

12:44:58स्ट्रगल इन प्रिंसली स्टेटस को मैच्योर

12:45:01स्ट्रांग और रेसिलियंट बना रही थी इसके

12:45:03बाद कुछ इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट्स हुए

12:45:06जिन्होंने सिचुएशन बिल्कुल बादल कर रख

12:45:08पहले 19 55 का एक्ट जिसके तहत फेडरेशन की

12:45:13बात कहीं गई थी जिसका हिस्सा प्रिंसली

12:45:16स्टेटस भी थे प्रिंसली स्टेटस के

12:45:18रिप्रेजेंटेटिव को नॉमिनेट किया जाना था

12:45:21रुलर्स के द्वारा ना की पब्लिक से

12:45:23इलेक्ट्रिक तो इसने रिस्पांसिबल गवर्नमेंट

12:45:25की डिमांड को औरतें कर दिया दूसरा

12:45:28डेवलपमेंट था

12:45:291937 में कांग्रेस मिनिस्टरीज का प्रोविंस

12:45:32में आना और उनका परफॉर्मेंस जिससे लोगों

12:45:35को एक नया कॉन्फिडेंस और एक्सपेक्टेशन

12:45:38मिली हम देखते हैं की

12:45:40193839 के पीरियड में और भी तेजी से

12:45:43स्टेटस में प्रजामंडल्स का फॉर्मेशन होता

12:45:45है इन सभी डेवलपर के बीच कांग्रेस भी अपनी

12:45:48पॉलिसी चेंज करती है कांग्रेस लीडरशिप यह

12:45:51रिलाइज करती है की आईटी इस हाय टाइम की

12:45:54प्रिंसली स्टेटस को भी पुरी तरह आजादी के

12:45:56आंदोलन का हिस्सा बनाया जाए क्योंकि उसके

12:45:58बिना एक यूनाइटेड इंडिपेंडेंस डेमोक्रेटिक

12:46:01कंट्री का विजन जो कांग्रेस देख रही थी वो

12:46:04अधूरा राहत इन बदलती हवाओं की झलक हमें

12:46:07गांधी जी के टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए

12:46:09इंटरव्यू में मिलती है

12:46:10जिसमें वो कहते हैं की जब तक प्रिंसली

12:46:13स्टेटस के लोग अवेयर नहीं थे तब तक

12:46:15कांग्रेस की नॉन इंटरवेंशन परफेक्ट

12:46:18स्टेटमेंट

12:46:27इंडिया के मैसेज को एक समाज मानना

12:46:31है इसलिए कांग्रेस के 1939 त्रिपुरा सेशन

12:46:34में कांग्रेस प्रिंसली स्टेटस को अपने

12:46:37बैनर के अंदर मूवमेंट करना अलाउ कर देती

12:46:39है इसके बाद शुरू होता है स्ट्रगल का

12:46:42फाइनल फेस आई जानते हैं फाइनल फेस अभी तक

12:46:46ब्रिटिश इंडिया और प्रिंसली स्टेटस में

12:46:48अलग-अलग चल रहे आंदोलन को एक किया जाता है

12:46:51इस में

12:46:531939 में नेहरू विकम प्रेसिडेंट ऑफ दी जो

12:46:56इंडिया स्टेटस पीपल्स कॉन्फ्रेंस और वो

12:46:58इम्फैसीज करते हैं आम नेशनल एम्स ऑफ

12:47:01पॉलीटिकल स्ट्रगलर इन ब्रिटिश इंडिया और

12:47:04इन डी प्रिंसली स्टेटस सेकंड वर्ल्ड वार

12:47:07के स्टार्ट होने पर सिचुएशन में दृष्टिक

12:47:09चेंज जाता है कांग्रेस मिनिस्टरीज रिजाइन

12:47:12कर देती हैं और क्यूट इंडिया मूवमेंट

12:47:14लॉन्च किया जाता है इसमें कांग्रेस

12:47:17ब्रिटिश इंडिया और प्रिंसली स्टेटस में

12:47:19कोई डिस्टिंक्शन नहीं रखती पीपल ऑफ

12:47:24इंडियन इंडिपेंडेंस विथ डी क्यूट इंडिया

12:47:26मूवमेंट यहां गांधीजी प्रिंसली स्टेट के

12:47:29रुलर्स और मैसेज दोनों को बताते हैं है

12:47:31जहां रोलर का रोल मसोस को फेयर और जस्ट

12:47:34पॉलिसी के साथ रूल करना है वहीं मैसेज को

12:47:37डिस्पाट प्रिंस के सामने स्ट्रांग्ली खड़ा

12:47:40होकर उनसे अपने राइट्स की डिमांड को रखना

12:47:42चाहिए साथ ही अब कांग्रेस की पॉलिसी में

12:47:46इंडिपेंडेंस ऑफ इंडिया के साथ साथ

12:47:47प्रिंसली स्टेटस को इंडिया का इंटरनल

12:47:50मेंबर बनाने की डिमांड एक इंटीग्रल पार्ट

12:47:53बन जाति है इसके साथ ही स्ट्रगल अगेंस्ट

12:47:55ब्रिटिश राज में फाइनली स्टेटस के पॉपुलर

12:47:58स्ट्रगलर को एक इक्वल इंर्पोटेंस दी जाति

12:48:01है लेकिन दोस्तों प्रिंसली स्टेटस का

12:48:04कंप्लीट इंडिपेंडेंस ब्रिटिश इंडिया के

12:48:07इंडिपेंडेंस से थोड़ा और मुश्किल था

12:48:09प्रिंसली स्टेटस में पॉपुलर स्ट्रगलर का

12:48:12लास्ट लेग हमें इंडिपेंडेंस के बाद देखने

12:48:14को मिलता है जब सरदार पटेल और बीपी मेनन

12:48:18कंप्लीट इंडिया बनाने के लिए स्टेटस को

12:48:20डोमिनियन ऑफ इंडिया में शामिल करने के लिए

12:48:22प्लेन बनाते हैं

12:48:24स्टेटस को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एसेशन दिया

12:48:26जाता है जिसके द्वारा वह डोमिनियन ऑफ

12:48:28इंडिया में इंक्लूड हो सकते थे बट इसमें

12:48:31कुछ प्रिंसली स्टेटस पैरामाउंटसी लैप्स

12:48:34होने के बाद अपने आप को डोमिनियन में

12:48:36शामिल ना होकर इंडिपेंडेंस रहने की कोशिश

12:48:39करते हैं इसमें ट्रैवल को कश्मीर हैदराबाद

12:48:42एटरा जैसे प्रिंसली स्टेटस शामिल थे इस

12:48:46एस्पेक्ट को और डिटेल में समझना के लिए दो

12:48:49स्टेटस की स्टोरी को डिटेल में जानते हैं

12:48:51राजकोट और हैदराबाद पहले चलते हैं राजकोट

12:48:55स्टोरी ऑफ राजकोट दोस्तों राजकोट में राजा

12:49:00लक्खा जी राज सिंह जी तू के रूल के टाइम

12:49:02गवर्नमेंट में पॉपुलर पार्टिसिपेशन इनकरेज

12:49:06किया जाता है पर एग्जांपल

12:49:081923 में राजकोट प्रजा प्रतिनिधि सभा

12:49:11एस्टेब्लिश होती है

12:49:14जब 1930 में उनके बेटे धर्मेंद्र सिंह जी

12:49:17राजा बनते हैं जो की पॉपुलर पार्टिसिपेशन

12:49:20इन करेज नहीं करना चाहते थे की वो मोर

12:49:24फ्रस्ट्रेटेड इन है ऑन प्लेजेस और उसको

12:49:26पूरा करने के लिए स्टेट की इकोनामी पर

12:49:28काफी प्रेशर था उसके बाद टैक्स इंक्रीज

12:49:31होने और प्रतिनिधि सभा के लैब होने जैसे

12:49:33रीजन से पब्लिक में डिस्कंटेंट और बढ़ता

12:49:36है फिर स्टार्ट होता है स्ट्रगलर का

12:49:39सिलसिला

12:49:40राजकोट सत्याग्रह का सपोर्ट सरदार पटेल और

12:49:43गांधीजी जैसे नेशनल लीडर्स भी करते हैं और

12:49:46फाइनली एक एग्रीमेंट भी साइन होता है

12:49:48बिटवीन राजदरबार और सरदार पटेल इसमें पीवी

12:49:53पर्स पर लिमिट राखी गई और एक कमेटी का

12:49:55पॉइंट होना था तो सजेस्ट फरदर रिफॉर्म्स

12:49:58इस कमेटी के साथ मेंबर्स को सरदार पटेल

12:50:01रिकमेंड करेंगे यह भी डिसाइड होता है

12:50:03लेकिन यहां पर ब्रिटिश गवर्नमेंट इंटरफेयर

12:50:06करती है वह दरबार को सरदार पटेल की लिस्ट

12:50:09ऑफ मेंबर्स को रिजेक्ट करने को कहती है

12:50:22और गांधीजी डायरेक्टली इंवॉल्व भी होते

12:50:25हैं लेकिन दरबार की पोजीशन में कोई चेंज

12:50:28नहीं होता

12:50:30दूसरी तरफ आंदोलन वायलेट और कम्युनल होने

12:50:34लगता है इसकी वजह से गांधीजी सत्याग्रह

12:50:37खत्म करने का डिसीजन लेते हैं इनोसेंस

12:50:39सत्याग्रह फील्ड बट डी स्ट्रगल ऑफ राजकोट

12:50:42पीपल कंटिन्यू बट जब इंडिपेंडेंस का वक्त

12:50:46आता है डी रोलर ऑफ राजकोट न्यू की अब

12:50:48उन्हें प्रोटेस्ट करने के लिए ब्रिटिश

12:50:50पावर नहीं है सो ही डिसाइड नोट तू चैलेंज

12:50:54एनीमो और ही रीडली साइन डी इंस्ट्रूमेंट

12:50:57ऑफ एसेशन और फाइनली राजकोट की जनता को

12:51:00मिलती है रिस्पांसिबल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट

12:51:03ये थी राजकोट की कहानी अब चलते हैं साउथ

12:51:06के हैदराबाद में स्टोरी ऑफ हैदराबाद

12:51:10डी स्टोरी ऑफ हैदराबाद इसे अपोजिट ऑफ

12:51:13राजकोट यहां पर निजाम का रूल था लेकिन

12:51:16पापुलेशन हिंदू मेजॉरिटी थी

12:51:20कोई

12:51:22कांग्रेस को भी बन कर दिया गया था लेकिन

12:51:25फ्रीडम स्ट्रगल और पॉलीटिकल कॉन्शसनेस का

12:51:28असर यहां के लोगों तक भी है और धीरे-धीरे

12:51:31स्टेट में पॉलीटिकल एक्टिविटीज बधाई

12:51:34सत्याग्रह स्टार्ट हुए लेकिन स्टेट ने

12:51:37उनको रिप्रेस करने की हमेशा कोशिश की इसके

12:51:39अलावा रिलिजियस और कल्चरल ऑपरेशन भी था

12:51:42स्टाइल वो बढ़नी हुई नेशनल कॉन्शसनेस को

12:51:46रॉक नहीं पे और लोगों का स्ट्रगल बढ़ता

12:51:48गया रजाकार जो की एक पारा मिलिट्री फोर्स

12:51:51थी निजाम की उसने स्ट्रगल करने वालों को

12:51:54हरायस करना शुरू किया और सिचुएशन बहुत

12:51:56वालीटाइल हो गई बट फाइनली इंडियन आर्मी के

12:52:001948 ऑपरेशन पोलो की हेल्प से पीपल्स

12:52:03मूवमेंट वन

12:52:04कंक्लुजन

12:52:06प्रिंसली स्टेटस की कंडीशन ब्रिटिश इंडिया

12:52:09से काफी डिफरेंट थी इसलिए यहां होने वाले

12:52:12स्ट्रगलर भी अलग फॉर्म लेते हैं

12:52:18स्पिरिट ऑफ नेशनलिज्म और डेमोक्रेसी यहां

12:52:22भी जीत हासिल करती है

12:52:25और लोगों को रिप्रेजेंटेटिव फॉर्म ऑफ

12:52:28गवर्नमेंट मिलती है

12:52:32[संगीत]

12:52:35बिना इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल की हिस्ट्री

12:52:38अधूरी रहती है उनके द्वारा किया गए

12:52:41सैक्रिफिस का स्थान सबसे ऊंचा है

12:52:44इंडियन वूमेन ने सच्ची स्पिरिट और अद्भुत

12:52:48साहस के साथ आजादी के संघर्ष में अपना

12:52:50योगदान दिया इतिहास में ऐसी भारतीय

12:52:53महिलाओं की एक लंबी लिस्ट है जिन्होंने

12:52:56अपने देश की आजादी के लिए खुद को डेडिकेट

12:52:59किया

12:53:00अपनी आज की इस वीडियो में हम ऐसे ही कुछ

12:53:03ग्रेट इंडियन वूमेन के कंट्रीब्यूशन को

12:53:05समझेंगे हम देखेंगे की कैसे इन्होंने

12:53:08नेशनल मूवमेंट के सभी फेस में अपना अनमोल

12:53:12योगदान दिया आई शुरू करते हैं

12:53:16अर्ली स्ट्रगलर

12:53:19ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट हुए संघर्ष में

12:53:21वूमेन का पार्टिसिपेशन 1817 में ही शुरू

12:53:24हो गया

12:53:27यशवंत राव होलकर की बेटी थी बहादुर से

12:53:30लड़ते हुए ब्रिटिश कर्नल मालकिन को

12:53:32गोरिल्ला वाॅरफेयर में हर देती हैं

12:53:42यानी की 1857 की क्रांति से भी पहले

12:53:45इंडियन वूमेन ने ब्रिटिश के साथ टक्कर

12:53:48लेना शुरू कर दिया था

12:53:50अब बात करते हैं 1857 के ग्रेट रिवॉल्ट

12:53:53में वूमेन पार्टिसिपेशन की

12:53:57डी ग्रेट रिवॉल्ट वेटिंग 57

12:54:00ब्रिटिश ने भले ही 1857 की क्रांति को 1

12:54:04साल के अंदर ही कृष कर दिया हो लेकिन यह

12:54:07सबसे पॉपुलर इवॉल्व था जिसमें इंडियन

12:54:09रुलर्स मैसेज और सोल्जर ने बाढ़ चढ़कर

12:54:12हिस्सा लिया था इस क्रांति की सबसे बड़ी

12:54:14हीरोइन को कौन भूल सकता है झांसी की रानी

12:54:18लक्ष्मी बाई

12:54:201857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई ने

12:54:23अद्भुत साहस पराक्रम और वीरता का परिचय

12:54:26दिया और हमेशा के लिए भारतीयों के दिलों

12:54:30में अमर हो गई उनकी मिसल आज भी वूमेन

12:54:33एंपावरमेंट के लिए दी जाति है रानी

12:54:35लक्ष्मीबाई अकेली ऐसी महिला नहीं थी

12:54:38जिन्होंने इस क्रांति में भाग लिया उनके

12:54:41साथ उनकी ही सहेली झलकारी बाई ने भी अपनी

12:54:44वीरता का सबूत इस लड़ाई में दिया था इसके

12:54:47अलावा अवध की रानी बेगम हजरत महल

12:55:04शक्ति थी और दूसरा गांधीजी खुद इंडियन

12:55:08वूमेन की पोटेंशियल को समझते थे और इन्हें

12:55:11आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित

12:55:13करते थे तो आई अब गांधियन फीस की चर्चा

12:55:16करते हैं

12:55:18विमेंस पार्टिसिपेशन इन डांडियां फेस

12:55:23गांधीजी ने जब 1920 में नॉन कोऑपरेशन

12:55:26मूवमेंट लॉन्च किया तो उसमें बड़ी संख्या

12:55:28में महिलाओं ने अपनी भागीदारी दी सरल देवी

12:55:31मुथुलक्ष्मी रेड्डी सुशीला नायर राजकुमारी

12:55:35अमृत कौर सुचेता कृपलानी और अरुण आसफ अली

12:55:39जैसी वूमेन ने नॉन वायलेट मूवमेंट में

12:55:42पार्टिसिपेट किया

12:55:43वूमेन बड़ी संख्या में लेकर शॉप्स के आगे

12:55:46धरना देती थी फॉरेन क्लॉथ की होली जलती थी

12:55:49और रैली और माचिस में भी हिस्सा लेती थी

12:55:52गांधी जी की वाइफ कस्तूरबा गांधी और नेहरू

12:55:56फैमिली की वूमेन जैसी कमल नेहरू विजय

12:55:58लक्ष्मी पंडित और स्वरूप रानी ने भी नेशनल

12:56:01मूवमेंट में बाढ़ चढ़कर भाग लिया था

12:56:04लाडू रानी और उनकी डॉटर मनमोहिनी श्याम और

12:56:09जनक लाहौर में नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को

12:56:12लीड करती हैं

12:56:16और सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट लॉन्च किया

12:56:19जाता है तो कमल देवी चट्टोपाध्याय गांधीजी

12:56:23से रिक्वेस्ट करती हैं की अपने दांडी

12:56:25मार्च में वह महिलाओं को भी शामिल करें

12:56:27कर्नाटक के बेंगलुरु में जन्मी कमल देवी

12:56:31गांधी जी के इतिहास और नॉन वायलेंस के

12:56:34कॉन्सेप्ट से बहुत प्रेरित थी उन्होंने

12:56:36आजादी के संघर्ष में भाग लेने के लिए 1923

12:56:40में ही कांग्रेस पार्टी को जॉइन कर लिया

12:56:41था

12:56:43है इसके बाद वूमेन जगह नमक कानून तोड़कर

12:56:46फॉरेस्ट लॉस ब्रेक करके और प्रभात फेरीज

12:56:49के जारी अपनी लिबर्टी की तरफ कम बढ़नी हैं

12:56:52मी 1930 में धरसाना साल्टवर्क्स पर रेड

12:56:56करने के लिए गांधीजी खुद सरोजिनी नायडू को

12:56:59नॉमिनेट करते हैं और जी तरह से ये रेड

12:57:02कंडक्ट की जाति है वो अपने आप में आंदोलन

12:57:04के अहिंसात्मक नेचर की मिसल है

12:57:08आंदोलन के दौरान कमल देवी जगह पब्लिक

12:57:10मीटिंग्स एड्रेस करती हैं नमक तैयार करती

12:57:13हैं फॉरेन क्लॉथ और लिकर शॉप्स पर धरना

12:57:16देती हैं इसी दौरान 26th जानुडी 1930 को

12:57:21हुई एक घटना से पूरे देश का ध्यान उनकी

12:57:23तरफ जाता है प्रदर्शन के दौरान पुलिस हमला

12:57:27बोल देती है और अपने हाथ में लिए तिरंगे

12:57:29को बचाने के लिए कमल देवी उससे लिपट जाति

12:57:32हैं पुलिस वाले लाठी बरसते रहते हैं लेकिन

12:57:35वो एक चट्टान की तरह खड़ी रहती है खून

12:57:39बहता राहत है लेकिन कमल देवी तिरंगे को

12:57:42अपने हाथ से नहीं जान देती

12:57:45दूसरी तरफ मणिपुर में रानी गाइडें लाइव

12:57:48ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट नागालैंड नेशनलिस्ट

12:57:50के संघर्ष को लीड करती हैं इसके लिए

12:57:53इन्हें 1932 में अरेस्ट कर लिया जाता है

12:57:55देश की आजादी के बाद इन्हें जय से रहा

12:57:58किया जाता है और जवाहर लाल नेहरू इन्हें

12:58:01रानी ऑफ नागार्ज का टाइटल देते हैं

12:58:03इंडिविजुअल एफर्ट के साथ साथ वूमेन बहुत

12:58:06सी ऑर्गेनाइजेशन के जारी भी आंदोलन को

12:58:09सपोर्ट करती हैं उदाहरण के तोर पर

12:58:12नई सत्याग्रह कमेटी महिला राष्ट्रीय संघ

12:58:15और लेडीज विकेट इन बोर्ड जैसे ग्रुप

12:58:18आंदोलन को और मजबूत बनाते हैं

12:58:21भारतीय महिलाओं की भागीदारी सिर्फ नॉन

12:58:23वायलेट मूवमेंट्स तक ही सीमित नहीं थी

12:58:25बल्कि वो रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज में भी

12:58:27पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलकर चलती

12:58:30नजर आई हैं

12:58:34रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज

12:58:37रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज में वूमेन दो तरह

12:58:40से अपना योगदान देती हैं पहले तो पैसिव

12:58:43तरीके से था जिसमें यह रिवॉल्यूशनरीज को

12:58:45छुपाने की जगह देती हैं फंड्स के लिए अपनी

12:58:48ज्वेलरी देती हैं मैसेज और वेपन करियर का

12:58:51कम भी करती हैं और इन डायरेक्टली

12:58:53रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को सपोर्ट करती

12:58:55हैं और दूसरा तरीका एक्टिव था जहां वूमेन

12:58:59खुद हाथ में पिस्तौल्स लेती नजर आई हैं

12:59:02उदाहरण के तोर पर सूर्य सन की नेतृत्व में

12:59:051930 में हुई चित्तागोंग ई रेड में कल्पना

12:59:09डेट और प्रीतीलता वादी डर जैसी

12:59:13रिवॉल्यूशनरी शामिल थी वहीं दिसंबर 1931

12:59:16में शांति घोष और सुनीति चौधरी बंगाल के

12:59:21कोमिला जिला के दम को गली मार देती हैं तो

12:59:2421 साल

12:59:251932 में कन्वोकेशन सेरेमनी के दौरान

12:59:28बंगाल की गवर्नर को शूट करती हैं

12:59:32इतना ही नहीं देश के बाहर भी वूमेन

12:59:34रिवॉल्यूशनरीज आजादी के लिए संघर्ष करती

12:59:37हैं जिसमें सबसे बड़ा नाम मैडम भीकाजीकामा

12:59:40का है इन्हें मदर ऑफ इंडियन रिवॉल्यूशनरी

12:59:43मूवमेंट भी कहा जाता है इन्होंने 197 में

12:59:46जर्मनी के स्रोत गार्डन में ऑर्गेनाइज्ड

12:59:48वर्ल्ड सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस में भाग लिया

12:59:51था और यही पहले बार इंडियन फ्लैग को अनफॉल

12:59:54भी किया था इस तरह क्रांतिकारी एक्टिविटीज

12:59:57में भी महिलाओं ने आगे बढ़कर हिस्सा लिया

12:59:59था आई अब आजादी के आखरी आंदोलन यानी की

13:00:03क्यूट इंडिया मूवमेंट में वूमेन की पार्टी

13:00:05से पेशेंट की बात करते हैं

13:00:09क्यूट इंडिया मूवमेंट

13:00:121942 की क्यूट इंडिया रेजोल्यूशन ने वूमेन

13:00:15को इंडियन फ्रीडम के डिसिप्लिन सोल्जर कहा

13:00:18था जिनकी जरूर आजादी के संघर्ष की ज्वाला

13:00:21को जलाए रखना के लिए बहुत ही ज्यादा थी और

13:00:24इंडियन वूमेन ने ऐसा ही किया

13:00:27आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं

13:00:30में भाग लिया उषा मेहता ने वॉइस ऑफ फ्रीडम

13:00:34नाम से सीक्रेट रेडियो ट्रांसमीटर सेटअप

13:00:36किया था जिसके द्वारा आंदोलन से जुड़े

13:00:39प्रोटेस्ट और अरेस्ट की न्यूज़ यंग

13:00:42नेशनलिस्ट की एक्टिविटीज और गांधीजी के

13:00:44फेमस दो दी मैसेज को लोगों के बीच

13:00:47सर्कुलेट किया गया था

13:00:50सुचेता कृपलानी नॉनवॉयलेट रेजिस्टेंस को

13:00:53लीड करती हैं वहीं अरुण आसफ अली

13:00:55अंडरग्राउंड रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को

13:00:58लीडरशिप प्रोवाइड करती हैं इन बड़े नाम के

13:01:01अलावा हजारों की संख्या में ऐसी और वूमेन

13:01:04थी जो आजादी के लिए अपने अपने स्टार पर

13:01:06इनिशिएटिव लेती हैं देश में जब क्यूट

13:01:10इंडिया मूवमेंट चल रहा था तब देश के बाहर

13:01:12सुभाष चंद्र बस इंडियन नेशनल आर्मी का

13:01:15फॉर्मेशन कर रहे थे

13:01:171943 में फॉर्म हुई इस आर्मी में वूमेन

13:01:20रेजीमेंट भी शामिल थी जिसका नाम 1857

13:01:23क्रांति की लीजेंडरी हीरोइन रानी

13:01:26लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया था इसे लगभग

13:01:2915000 वूमेन ने जॉइन किया था इन्हें फूल

13:01:33मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई थी और कॉम्बैट

13:01:35ड्यूटीज के लिए तैयार किया गया था लेकिन

13:01:38जब शुरुआत में इन्हें सिर्फ नॉन कॉम्बैट

13:01:40रोल दिए जाते हैं तो यह सब अपने लीडर से

13:01:43शिकायत करती हैं जिसके बाद 1945 में

13:01:46इन्हें इंफाल कैंपेन के दौरान एक्चुअल वार

13:01:49ऑपरेशन एस के लिए भेजो जाता है

13:01:52हम का सकते हैं की इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल

13:01:55का ऐसा कोई भी फ्रंट नहीं था जहां वूमेन

13:01:58पार्टिसिपेशन मिसिंग हो हर इंडियन वूमेन

13:02:02ने आजादी के इस यज्ञ में अपनी आहूदी दी थी

13:02:05दोस्तों इंटरेस्टिंग बात यह है की सिर्फ

13:02:08इंडियन वूमेन ने ही नेशनल मूवमेंट में भाग

13:02:11नहीं लिया था बल्कि बहुत सी ऐसी फॉरेन

13:02:13नेशनल्स भी थी जिन्होंने इंडियन फ्रीडम

13:02:16स्ट्रगल को एक्टिवली सपोर्ट किया था आई

13:02:19ऐसी कुछ वूमेन के बड़े में भी बात करते

13:02:21हैं

13:02:23फॉरेन वूमेन इन इंडियन नेशनल मूवमेंट

13:02:27जब फ्रीडम स्ट्रगल में नॉन इंडियन वूमेन

13:02:30के पार्टिसिपेशन की बात होती है तो उसमें

13:02:32सबसे बड़ा नाम आयरलैंड की अन्य बेसन का

13:02:35आता है अन्य बसंत इंडिया में थियोसोफिकल

13:02:37सोसाइटी की फाउंडर थी इन्होंने होम रूल

13:02:40लीग की भी शुरुआत की थी जिसका आइरिश होम

13:02:44रूल लीग की तरह इंडिया में होम रूल यानी

13:02:47स्वराज के लिए आंदोलन शुरू करना था इसके

13:02:50अलावा 1917 में यह कांग्रेस प्रेसिडेंट की

13:02:53पोस्ट पर भी सिलेक्ट हुई थी नेशनल मूवमेंट

13:02:56में अन्य बसंत के अनमोल योगदान के लिए

13:02:59इंडिया में आज भी उन्हें ग्रेट फूली याद

13:03:02किया जाता है

13:03:05जिनका नाम मिस मगरित नोबेल था यह जनवरी

13:03:10898 में इंडिया आई हैं और स्वामी

13:03:12विवेकानंद की डिसएबल बंटी हैं इन्हें

13:03:15सिस्टम निवेदिता के नाम से जाना जाता है

13:03:18इन्होंने अमेरिका और यूरोप में इंडिया के

13:03:22संघर्ष का प्रचार प्रसार किया सिस्टर

13:03:25निवेदिता ने 1905 में कांग्रेस का बनारस

13:03:28सेशन भी अटेंड किया था और स्वदेशी मूवमेंट

13:03:31को सपोर्ट किया था पेरिस में जन्मी मीरा

13:03:34अल्फों 1914 में इंडिया आई है और श्री

13:03:38अरबिंदो से मिलती हैं इन्हें युनिवर्सिटी

13:03:40मदर के नाम से जाना जाता है पांडिचेरी के

13:03:43पास इंटरनेशनल टाउन और बिल की स्थापना के

13:03:46पीछे इन्हीं की इंस्पिरेशन है इन्होंने

13:03:49सिर्फ इंडिया के ईद ओल्ड हेरिटेज और कलर

13:03:52को इन रिच किया बल्कि यानी बेसन और नलिनी

13:03:55सेन गुप्ता जैसी वूमेन को इंडिया के लिए

13:03:57फाइट करने के लिए मोटिवेट भी किया इसके

13:04:00अलावा महात्मा गांधी

13:04:03दो इंग्लिश लेडिस मीरा बहन और सरल बहन को

13:04:07कौन भूल सकता है

13:04:11और इनका जन्म इंग्लैंड में हुआ था

13:04:15वही सरल बैंक का नाम कैथरीन मेरी हिलाना

13:04:18था इन्हें इंडियन नेम गांधी जी द्वारा दिए

13:04:21गए थे

13:04:23मीरा बहन गांधीजी के साथ राउंड टेबल

13:04:25कॉन्फ्रेंस में गई थी और इन्होंने और

13:04:28एरियाज में सोशल रिफॉर्म्स के लिए बहुत कम

13:04:31किया था वही सरलाबेन भी एक ग्रेट सोशल

13:04:34रिफॉर्मर थी इन्होंने उत्तराखंड के कौसनी

13:04:37में एक आश्रम स्थापित किया था ये गांव

13:04:40गांव जाकर पॉलीटिकल प्रिजनर्स की फैमिली

13:04:43को हेल्प किया करती थी इस तरह बहुत सी

13:04:46विदेशी महिलाओं ने इंडिया की आजादी में हम

13:04:49रोल निभाया था हम का सकते हैं की भले ही

13:04:52इंडिया की सिटीजंस एन रही हूं लेकिन दिल

13:04:55से जरूर

13:05:02दोस्तों इस तरह आजादी के लिए संघर्ष में

13:05:05महिलाओं ने अपनी जिम्मेदारी निभाई

13:05:06उन्होंने पब्लिक मीटिंग्स की फॉरेन क्लॉथ

13:05:10और अल्कोहल शॉप्स के आगे धरना दिया खड़ी

13:05:13को अपनाया और राष्ट्रीय आंदोलन में बाढ़

13:05:16चढ़कर हिस्सा भी लिया इस दौरान महिलाओं ने

13:05:19पुलिस की बैटिंग को भी फेस किया और जय भी

13:05:22गई हजारों की संख्या में भारतीय महिलाओं

13:05:25ने देश की आजादी के लिए अपनी जिंदगी

13:05:27समर्पित कर दी और ऐसी सभी महान महिला

13:05:30स्वतंत्रता सेनानियों को हमारा शत शत नमन

13:05:35स्टडी इक इस अब तैयारी हुई अफॉर्डेबल

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