Full transcript
0:00[संगीत]
0:01स्टडी इक इस अब तैयारी हुई अफॉर्डेबल
0:06वेलकम तू स्टडी इक मेरा नाम है आदेश सिंह
0:10दोस्तों आज हम मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री की
0:13मैराथन वीडियो शुरू करने जा रहे हैं
0:15जिसमें आंटियों मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री के
0:18जीएस सिलेबस को कर किया जाएगा ये वीडियो
0:21तीन पार्ट्स में डिवाइड है सबसे पहले
0:24पार्टी में हम मेंस्ट्रीम इंडियन फ्रीडम
0:27स्ट्रगल को कर करेंगे उसके बाद पार्ट बी
0:30में ब्रिटिश गवर्नेंस सिस्टम को डिटेल में
0:32जानेंगे और पार्ट्स सी ने मेंस्ट्रीम
0:35फ्रीडम स्ट्रगल के साथ चलती कुछ
0:37इंपॉर्टेंट पैरेलल मूवमेंट की बात करेंगे
0:40तो आई शुरू करते हैं पार्टी यानी इंडियन
0:44फ्रीडम स्ट्रगल से
0:46एडवेंचर इन इंडिया
0:53आते हैं और अल्टीमेटली एक पॉलीटिकल पावर
0:56बनकर अपना अंपायर एस्टेब्लिश करते हैं
0:58लेकिन ब्रिटिश के अलावा और भी कुछ
1:01यूरोपियन कंपनी ट्रेड करने के लिए इंडिया
1:04आई हैं पर उनके बड़े में बात करने से पहले
1:06हम यह जानेंगे की ऐसी क्या कंडीशन थी की
1:10यूरोपीय कंपनी ने इंडिया का रुख किया
1:13वही डिड यूरोपियन कंपनी कम तू इंडिया
1:17दोस्तों असिएंट टाइम से ही इंडिया और
1:20यूरोप के अच्छे ट्रेड रिलेशंस थे इंडिया
1:23के कॉटन सिल्क टैक्सटाइल्स और स्पाइसेज की
1:26यूरोप की मार्केट में काफी हाय डिमांड
1:28रहती थी
1:29मिडिल एज में स्ट्रीट की एजेंट पार्ट को
1:32अब मरचेंट्स और मेडिटरेनियन और यूरोपीय
1:35पार्ट को इटालियन डील करते थे
1:38क्योंकि अभी तक वाला रूट डिस्कवर नहीं हुआ
1:41था तो ट्रेड कांस्टेंटिनॉपल यानी प्रेजेंट
1:45दे इस्तांबुल होकर किया जाता था लेकिन जब
1:48ओटोमन टर्म्स एशिया माइनर पर कंट्रोल
1:49एस्टेब्लिश करते हैं और 1453 में
1:52कांस्टेंटिनॉपल को कैप्चर कर लिया जाता है
1:54तब ईस्ट और वेस्ट के बीच के ओल्ड ट्रेड
1:58रूट भी इनके कंट्रोल में ए जाते हैं उसके
2:01अलावा वेनिस और जेनोवा के मर्चेंट
2:03कांस्टेंटिनॉपल के पास लोकेटेड होने का
2:05फायदा उठाकर यूरोप और एशिया के बीच ट्रेड
2:08पर अपनी मोनोपोली एस्टेब्लिश कर लेते हैं
2:10और वो किसी नए यूरोपियन नेशन स्टेट को
2:13इसमें शेर नहीं देना चाहते थे नतीजतन
2:16वेस्ट यूरोपीय स्टेटस और मरचेंट्स नए और
2:19सिर्फ ट्रेड रूट को सर्च करते हैं
2:33इसमें सबसे पहले स्टेप्स लेने वाले थे
2:35पुर्तगाल और स्पेन यहां की गवर्नमेंट
2:38मरचेंट्स की सी वॉयस को स्पॉन्सर करती हैं
2:41साथ ही साइंटिफिक डिस्कवरी जैसे की
2:44मरीनारा कंपास और लॉन्ग डिस्टेंस शिप का
2:47इन्वेंशन भी इसमें हेल्प करता है इन्हें
2:50अवार्ड की वजह से 1492 में स्पेन के
2:53क्रिस्टोफर कोलंबस बॉयज पर निकलते हैं पर
2:56वो इंडिया पहुंचने की जगह अमेरिका पहुंच
2:58जाते हैं फाइनली 1498 में पॉसिबल के
3:03वास्को डा गम यूरोप से इंडिया पहुंचने के
3:05लिए एक नए सी रूठ गायब कैप ऑफ गुड होप की
3:09डिस्कवरी करते हैं तो चलिए डिटेल में
3:11जानते हैं इनके बड़े में
3:15पहुंच चुकी
3:1998 को साउथ वेस्ट इंडिया के एक इंपॉर्टेंट
3:23कालीकट पहुंच
3:27थे उनका स्वागत करते हैं और ट्रेड को
3:31प्रमोट करने के लिए उन्हें कुछ प्रिविलेज
3:33भी ग्रैंड करते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि
3:36ट्रेड लवी लोकल रोलर के लिए इनकम का एक
3:40इंपॉर्टेंट सॉस था इंडिया में 3 महीने
3:42रहने के बाद वास्को डा गम एक रिच कार्गो
3:45के साथ यूरोप वापस लोट जाते हैं इस कार्गो
3:49को वो यूरोप की मार्केट में बहुत हाय रेट
3:51पर सेल करते हैं कहा जाता है की उनकी पुरी
3:54यात्रा की कॉस्ट का 60 टाइम्स रिटर्न
3:57उन्हें मिलता है सेल से वास्को डा गम 1501
4:01एड में फिर से इंडिया
4:04फैक्ट्री सेटअप करते हैं यहां से इंडिया
4:07और पुर्तगाल के बीच ट्रेड लिंक की शुरुआत
4:10होती है
4:11और कालीकट
4:15ट्रेडिंग सेंटर्स बनकर उभरते हैं
4:18पुर्तगीज की बढ़नी हुई पावर्स और उनकी
4:21अनफेयर ट्रेड डिमांड्स जैसे की अरब सी में
4:24मोनोपोली की कोशिश उनके और लोकल रोलर
4:27जमोरेन के बीच हॉस्टल डेज बड़ा देती हैं
4:30पुर्तगीज ट्रेडर्स डिमांड रखते हैं की
4:32जानवरोनिन अपने एरिया में से मुस्लिम
4:34ट्रेडर्स को बाहर कर दें जमोरेन उनकी
4:37डिमांड को नहीं मानते और दोनों के बीच इसी
4:41बात को लेकर एक मिलिट्री फेस ऑफ होता है
4:43जिसमें जमीरन हर जाते हैं और पुर्तगीज के
4:47मिलिट्री सुपीरियर एस्टेब्लिश हो जाति है
4:49इसके बाद से पुर्तगीज पावर का राइस होना
4:51शुरू होता है आई जानते हैं कैसे
4:54राइस ऑफ पुर्तगीज पावर इन इंडिया
5:03आते हैं इनकी पॉलिसी थी इंडियन ओसियन पर
5:07अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश करना इसलिए इनकी
5:09पॉलिसी को ब्लू वाटर पॉलिसी भी बोला जाता
5:12है
5:18बिल्कुल ट्रेड लाइसेंस या पास होता था जो
5:21पुर्तगीज कंपनी से बाकी सभी इंडियन और
5:23एशिया ट्रेडर्स को इंडियन ओसियन में ट्रेड
5:26करने के लिए लेना होता था साथ ही लंबे रूट
5:29के शिप जो पुर्तगीज के कंट्रोल किया हुए
5:32पोर्ट्स पर रुकते हुए स्ट्रेट ऑफ मलका की
5:34तरफ जाते थे उन्हें भी ये कार्टेज लेना
5:36होता था जिनके पास ये पास नहीं होता था
5:39उनकी शिप और कार्गो को पुर्तगीज अपने
5:42कब्जे में ले लेते थे इसे इंप्लीमेंट करने
5:45के लिए पहुंचोगी अपने मिलिट्री शिप और
5:48कैनंस को ट्रेडिंग शिप के साथ रखते थे
5:5215980 में अलमेडा को रिप्लेस करके
5:55अल्फाजों अल्बाकर की गवर्नर बनते हैं यह
5:591580 में बीजापुर के सुल्तान से गोवा को
6:02कैप्चर करते हैं इनको ही इंडिया में
6:04पुर्तगीज पावर का रियल फाउंडर बोला जाता
6:07है
6:11और कालीकट बनवेट हैं
6:15इनके बाद गवर्नर बनते हैं
6:20इंडियन कैपिटल को कोचीन से गोवा शिफ्ट
6:24करते हैं
6:28और वैसे अखबार कर लेते हैं और 1559 एड में
6:33दमन को भी
6:35पुर्तगीज का पोस्ट एरियाज पर कंट्रोल और
6:38उनकी सुपीरियर लेवल पावर उनको बहुत हेल्प
6:40करती है और 16 सेंचुरी का और होते होते
6:43पुर्तगीज एन केवल गोवा दमन दिउ और सेल सेट
6:48पर कैप्चर कर लेते हैं बल्कि इंडियन कास्ट
6:50के अलोंग एक बड़े एरिया पर उनका कंट्रोल
6:53होता है लेकिन फिर 16th सेंचुरी के बाद से
6:56इनकी पावर का डिक्लिन शुरू होता है
6:591631 में पहुंच चुकी इस मुगल एंपरर
7:02शाहजहां के नोबल कासिम खान के हाथों हुगली
7:05को देते हैं
7:06फिर 1661 में पुर्तगाल के किंग बॉम्बे
7:10डोरी के रूप में इंग्लैंड के चार्ल्स डी
7:12सेकंड को दे देते हैं
7:16और वैसे मराठा जीत लेते हैं इस तरह
7:20पुर्तगीज की पावर काफी कम र जाति है लेकिन
7:23इसके बाद भी गोवा डू और दमन पर 1961 तक
7:28इनका कंट्रोल बना राहत है
7:39फेमस जैसी फ्रांसिस्को जेवियर पुर्तगीज
7:43गवर्नर सजा के साथ 1542 में इंडिया आते
7:47हैं इन्हें आज भी इंडिया की कैथोलिक
7:50क्रिश्चियन बहुत मानते हैं
7:52तंबाकू टोमेटो पोटैटो और चिलीज का
7:56कल्टीवेशन भी पहुंचोगी इसने ही इंडिया में
7:58इंट्रोड्यूस किया था
8:001556 एड में इन्होंने इंडिया का फर्स्ट
8:03प्रिंटिंग प्रेस एस्टेब्लिश किया था गोवा
8:05में दोस्तों ये तो बात हुई इंडिया में
8:08ट्रेड करने के लिए आने वाली फर्स्ट
8:09यूरोपीय पावर की आई अब जानते हैं इनको
8:13फॉलो करने वाली नेक्स्ट ट्रेडिंग कंपनी
8:15यानी की डक के बड़े में
8:21देश में रहने वाले लोगों को डक कहा जाता
8:24है
8:33है इस कंपनी को 21 सालों तक इंडिया और
8:37ईस्ट के देश के साथ ट्रेड इनवेजन और
8:39कॉक्वेस्ट करने का राइट भी पार्लियामेंट
8:42ने दिया था यह इंडिया में आकर पुर्तगीज की
8:45मोनोपोली को खत्म करते हैं डक अपनी पहले
8:47फैक्ट्री 165 में आंध्र प्रदेश के
8:51मसूलिपटनम में बनाते हैं उसके बाद और भी
8:54जगह अपनी फैक्टरीज को एस्टेब्लिश करते हैं
8:56जैसे की 1610 में पुलीकट 16-16 में सूरत
9:021653 में चिनसुरा 1659 में पटना बालेश्वर
9:07नागपट्टनम कराईकाल कासिम बाजार और 1663
9:11में कोचिंग में इनका हेड क्वार्टर
9:14तमिलनाडु के पुलीकट में था
9:1717th सेंचुरी में इंडिया से होने वाले
9:20स्पाइस यानी मसाले के व्यापार पर डक अपनी
9:23मोनोपोली एस्टेब्लिश करने में कामयाब होते
9:25हैं इसके अलावा कॉटन टैक्सटाइल्स इंडिगो
9:28सिल्क ओपियो में सत्र का भी एक्सपोर्ट टच
9:31इंडिया से करते थे इंग्लिश कंपनी
9:35शुरू हो जाता है
9:45जिसमें डक को हर का सामना करना पड़ता है
9:48इस बैटल को बैटल ऑफ चिंचूड़ा या बैटल ऑफ
9:52हुगली भी कहा जाता है
9:54फाइनली डच ईस्ट इंडिया कंपनी को 1798 में
9:58लिक्विड कर दिया जाता है दोस्तों बात करते
10:01हैं सबसे ज्यादा सफल ट्रेडिंग कंपनी की
10:04यानी की इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी की
10:09अराइवल ऑफ इंग्लिश इंडिया कंपनी
10:13पुर्तगीज और डक ट्रेडर्स की सक्सेस से
10:16इंप्रेस होकर इंग्लैंड के मरचेंट्स के
10:18मर्चेंट एडवेंचर्स नाम के ग्रुप में 1599
10:22में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी को
10:24एस्टेब्लिश किया था कंपनी का पूरा नाम डी
10:28गवर्नर और कंपनी ऑफ मर्चेंट ऑफ ट्रेडिंग
10:30इन तू डी ईस्ट इंडीज था 31 दिसंबर 1600 को
10:34इंग्लैंड की क्वीन एलिजाबेथ डी फर्स्ट 15
10:37सालों के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी को पूर्वी
10:40ट्रेड का चार्ट ब्रांड करती हैं जिसका
10:42मतलब यह था की इस कंपनी को ईस्ट के साथ
10:45ट्रेड करने की मोनोपोली होगी इंग्लैंड से
10:48और कोई भी कंपनी यहां ट्रेड नहीं
10:53कैप्टन विलियम हॉकिंस को मुगल एंपरर
10:56जहांगीर के दरबार में भेजती है उनका मकसद
10:59जहांगीर से रॉयल फरमान हासिल करना था
11:02जिससे वो सूरत में अपनी ट्रेडिंग फैक्ट्री
11:13जहांगीर के कोर्ट से वापस जाना पड़ता है
11:16अंग्रेज समझ जाते हैं की पुर्तगीज के रहते
11:19उनका ट्रेड करना मुश्किल है इसलिए 1600
11:23लेवल में सूरत के पास वाली होल में एक
11:26लेवल बैटल में पहुंचेगी इसको अंग्रेज हर
11:28देते हैं इससे जहांगीर को भी अंग्रेजन की
11:32पावर का यकीन हो जाता है और फिर
11:351613 में जहांगीर उन्हें इंडिया के वेस्ट
11:38कास्ट पर फैक्ट्री एस्टेब्लिश करने की
11:40परमिशन भी दे देते हैं तब अंग्रेज
11:431613 में सूरत में अपनी पहले फैक्ट्री
11:46एस्टेब्लिश करते हैं
12:01और वो कंपनी को रॉयल चार्ट ग्रैंड करते
12:04हैं जिससे कंपनी को मुगल टेरिटरी में
12:07कहानी भी व्यापार करने और फैक्ट्री
12:09एस्टेब्लिश करने की आजादी मिल जाति है
12:11इसके बाद कंपनी इंडिया में अलग-अलग जगह
12:14फैक्टरीज एस्टेब्लिश करती है जैसे की
12:17मसूलिपटनम आगरा अहमदाबाद उड़ीसा के
12:21बालेश्वर और हरिहरपुर ईटीसी
12:241639 में कंपनी को मद्रास की लेज मिलती है
12:27और यहां फोर्ट सनहोजे बनाया जाता है
12:31और 1668 में कंपनी को चार्ल्स डी सेकंड से
12:35बॉम्बे लेज पर मिल जाता है जो चार्ल्स डी
12:38सेकंड को पुर्तगीज डोरी में मिला था जैसा
12:41की हम पहले देख चुके हैं
12:421698 99 में बंगाल के सूबेदार आजम और शान
12:47की परमिशन से सिर्फ ₹1200 देने पर कंपनी
12:50को
12:51सुतानती गोविंदपुर और कलिकता की जमींदारी
12:54मिल जाति है यहां पर ही 1700 में फोर्ट
12:58विलियम की स्थापना होती है इसके बाद 1771
13:02में मुगल एंपरर फारुख सियार फरमान जारी
13:05करके कंपनी को और भी ज्यादा राइट्स दे
13:08देते हैं जैसे की उन्हें सिर्फ ₹3000
13:11वार्षिक कर के बदले में बंगाल में ड्यूटी
13:13फ्री व्यापार करने का अधिकार मिलता है
13:16कोलकाता के आसपास की जमीन खरीदने की
13:18परमिशन भी दी जाति है इसके अलावा कंपनी
13:21द्वारा मुंबई में इशू किया गए कोइंस को
13:23पूरे मुगल राज्य में चलने की अनुमति भी
13:26मिलती है इसलिए इस फरमान को कंपनी का
13:29मैग्ना भी कहते हैं
13:31इसके बाद कंपनी की पावर बढ़नी ही जाति है
13:33और फाइनली पहले बार बंगाल में कंपनी अपने
13:37अंपायर की शुरुआत करती है जिसके बड़े में
13:39हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में डिटेल से
13:42डिस्कस करेंगे अब चलते हैं अगली यूरोपीय
13:45कंपनी की तरफ
13:50डेनमार्क की ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
13:531616 में हुई थी इस कंपनी ने 16-20 में
13:57तमिलनाडु के ट्रक व्यापार और 1676 में
14:00बंगाल के सिरमपुर में अपनी
14:02फैक्टरीस्टैब्लिश की थी सेरंपोर इनका
14:05इंर्पोटेंस सेंटर और हैडक्वाटर था लेकिन
14:08ये खुद को इंडिया में ज्यादा स्ट्रांग
14:10नहीं बना पे और 1845 में अपनी सभी
14:13सेटलमेंट ब्रिटिश कंपनी को बेचकर यहां से
14:15चले गए दोस्तों अब बात करते हैं इंडिया
14:18में सबसे लास्ट में आने वाली यूरोपियन
14:21कंपनी की
14:24फ्रेंच
14:26ईस्ट इंडिया कंपनी
14:32के द्वारा फॉर्म किया गया
14:39सूरत में अपनी पहले फैक्ट्री एस्टेब्लिश
14:42करती है उसके बाद 1669 में गोलकुंडा के
14:45सुल्तान से परमिशन लेकर यह अपनी दूसरी
14:48फैक्ट्री
14:58नाम का एक गांव प्राप्त किया
15:01जो बाद में पांडिचेरी के नाम से फेमस हुआ
15:051692 में बंगाल के मुगल सूबेदार शाइस्ता
15:09खान की अनुमति से फ्रेंच कंपनी ने
15:11चंद्रनगर में फैक्ट्री की स्थापना की उसके
15:15बाद फ्रेंच 1724 में मालाबार में माही को
15:19कैप्चर कर लेते हैं और 1739 में तमिलनाडु
15:23में कराईकाल को
15:251724 में ही फ्रेंच गवर्नर डुप्लेक्स
15:28इंडिया आते हैं और उनके साथ ही शुरुआत
15:30होती है कहानी एंग्लो फ्रेंच वर्स की
15:33जिन्हें कार्नेटिक वज भी कहते हैं
15:35कार्नेटिक वज इंग्लिश और फ्रेंच कंपनी के
15:39बीच हुए थे जिनके बड़े में हम अलग वीडियो
15:41में डिटेल से चर्चा करेंगे
15:44कंक्लुजन
15:47तो दोस्तों हमने देखा की कैसे इंडिया और
15:50यूरोप के बीच होने वाले ट्रेड का फायदा
15:52उठाने के लिए अलग-अलग यूरोपियन कंपनी
15:55इंडिया आई हैं
16:00जैसे की मोनोपोली फोर्स का इस्तेमाल नेवी
16:03का उसे करने में भी पीछे नहीं रहती इन सभी
16:06कंपनी के बीच आपस में पावर के लिए स्ट्रगल
16:09चला है जिसमें फाइनली इंग्लिश कंपनी को
16:12सक्सेस मिलती है इंग्लिश ईस्ट इंडिया
16:14कंपनी कैसे एक ट्रेडिंग कंपनी से शुरू
16:16होकर इंडिया में अपना अंपायर खड़ा करती है
16:19यह हम अपनी आने वाली वीडियो में देखेंगे
16:23राइस ऑफ रीजनल पावर्स आफ्टर मुग़ल दोस्तों
16:27पिछले वीडियो में हमने देखा की कैसे डी
16:31माटी मुगल अंपायर का डिक्लिन हुआ हमने
16:34देखा की किस तरह औरंगज़ेब के री के दौरान
16:36डिक्लिन स्टार्ट हुआ और इन कंबटेंट सक्सेस
16:40के करण ये अंपायर पुरी तरह से खत्म हो गया
16:43लोकल और रीजनल पॉलीटिकल फोर्सेस हुआ और
16:47उन्होंने खुद को असर्ट करना शुरू कर दिया
16:50यानी लेट 17थ सेंचुरी में ही पॉलिटिक्स
16:53में मेजर चेंज देखने को मिले 18थ सेंचुरी
16:56के दौरान कई इंडिपेंडेंस और सेमी
16:59इंडिपेंडेंस पावर्स का राइस हुआ जैसे
17:01बंगाल अवध हैदराबाद मैसूर और मराठा
17:04किंग्डम्स यही वो पावर्स थी जिन्होंने
17:08मुगल अंपायर की डिक्लिन के बाद पॉलीटिकल
17:10किया और इन्हीं पावर्स का सामना करके
17:14ब्रिटिश को इंडिया में अपनी सुप्रीमेसी
17:16सेटअप कुर्मी थी दोस्तों आज हम इन्हीं
17:19रीजनल पावर्स के बड़े में डिस्कस करेंगे
17:21जो मुगल अंपायर के बाद राइस हुई
17:26क्लासिफिकेशन से और देखते हैं इन स्टेटस
17:29के फीचर्स क्या थे
17:30क्लासिफिकेशन ऑफ स्टेटस
17:33मुगल अंपायर की डिक्लिन होते ही जो रीजनल
17:36पावर उभरकर आएं उनको तीन कैटिगरीज में
17:39डिवाइड किया जा सकता है पहले सक्सेशन
17:42स्टेटस यानी ऐसे स्टेटस जहां की मुगल
17:45प्रोविंस के गवर्नर में असर्ट करना शुरू
17:48किया जैसे बंगाल अवध और हैदराबाद दूसरी
17:52न्यू स्टेटस यानी ऐसी स्टेटस जहां पे
17:56रिबेलीयन के चलते लोकल चीफ़्टंस जमींदारा
17:59और पेज्जंस ने अपना स्टेट सेटअप किया जैसे
18:02मराठा अफगान जाट और पंजाब और तीसरी
18:07इंडिपेंडेंस स्टेटस यानी ऐसे स्टेटस जहां
18:10मुगल इन्फ्लुएंस का बिल्कुल भी पेनिट्रेशन
18:13नहीं था और मुगल अंपायर की डिश स्टेबलाइजर
18:16होते ही इन स्टेटस ने ऑटोनॉमी अनाउंस कर
18:18दी इसमें मेली साउथ वेस्ट और साउथ ईस्ट
18:21कास्ट और नॉर्थ ईस्ट इंडिया के स्टेटस
18:24इंक्लूड थे जैसे मैसूर केरला राजपूत होम्स
18:29शुरू करते हैं हैदराबाद और कर्नाटक स्टेट
18:32के डिस्कशन से
18:34हैदराबाद और डी कर्नाटक हैदराबाद स्टेट को
18:37निजामुद्दीन
18:401724 में एस्टेब्लिश किया उनको क्लीक खान
18:44के नाम से भी जाना जाता है निजामुद्दीन
18:46औरंगज़ेब के एरा के बाद के लीडिंग नोबल्स
18:49में से एक थे
18:5017-20 में उनको डेक्कन की वायसरॉयल भी
18:54मिली
18:541720 से 1722 के बीच उन्होंने 22 रॉयल्टी
18:59के सभी दावेदारों को डिफीट किया
19:021722 से 1724 के बीच वो मुगल अंपायर के
19:06वजीर थे
19:07एंपरर मोहम्मद शाह की इन कैपेसिटी से
19:10फ्रस्ट्रेटेड होकर उन्होंने डेक्कन में
19:12वापस लौट का फैसला किया जहां वो अपनी
19:15सुप्रीमेसी मेंटेन कर सकते थे यही पर
19:18उन्होंने हैदराबाद स्टेट का फाउंडेशन रखा
19:20उन्होंने कभी भी अपनी इंडिपेंडेंस को
19:23ओपनली अनाउंस नहीं किया लेकिन प्रैक्टिस
19:26में वह एक इंडिपेंडेंस रोलर की तरह ही रूल
19:29करते रहे उन्होंने हिंदू की तरफ टोलरेंट
19:32पॉलिसी को अपनाया एग्जांपल के तोर पर
19:34उन्होंने एक हिंदू पुरानचंद को अपना दीवान
19:37बनाया उन्होंने मुगल पैटर्न पर जागीरदार
19:41सिस्टम को इंप्लीमेंट करके डेक्कन में एक
19:44ऑर्डरली एडमिनिस्ट्रेशन को एस्टेब्लिश
19:46किया और अपनी पावर को कंसोलिडेटेड किया
19:49इसी के साथ उन्होंने पावरफुल मराठस को भी
19:53अपने डोमिनियन से बाहर ही रखा
19:551748 में निजामुल मुल्क की डेथ के बाद
19:58हैदराबाद फिर से डिसइंटीग्रेट हो गया
20:01कर्नाटक की बात करें तो ये रीजन मुग़ल का
20:05एक सुबह था और हैदराबाद के निजाम की
20:07अथॉरिटी के अंदर आता था कर्नाटक रीजन आज
20:11के तमिलनाडु और सदन आंध्र प्रदेश में
20:13पूर्वी घाट और बे का बंगाल के बीच का
20:16पेनिनसुलर रीजन था जी तरह निजाम ने खुद को
20:19दिल्ली से अलग किया वैसे ही कर्नाटक की
20:22डिप्टी गवर्नर ने खुद को डेक्कन के
20:24इन्फ्लुएंस से इंडिपेंडेंस कर दिया जिसके
20:27चलते वह नवाब कर्नाटक कहे जान लगे और ये
20:31ऑफिस भी
20:34कर्नाटक की पहले नवाब बने और उन्होंने
20:37बिना निजाम की परमिशन के 1732 में अपने
20:41नेफ्यू दोस्त अली को अपना सक्सेसर अनाउंस
20:44कर दिया
20:47इंटरनल स्ट्रगलर होने लगी जिसका फायदा
20:50यूरोपियन ट्रेडिंग कंपनी ने उठाया और अब
20:54वो इंटरनल पॉलिटिक्स में डायरेक्टली
20:56इंटरफेयर करने लगे अब आगे बढ़ते हैं और
20:59देखते हैं बंगाल के राइस के बड़े में
21:02बंगाल
21:03सेंट्रल अथॉरिटी की वीकनेस की चलते
21:06एक्सेप्शनल एबिलिटी के दो लोगों ने बंगाल
21:09को एक विरुअली इंडिपेंडेंस स्टेट बना दिया
21:11और ये दो लोग थे मुर्शीद कोली खान और अली
21:15वर्दी खान
21:171717 में मुर्शीद काली खान बंगाल के
21:21गवर्नर बने उन्होंने बंगाल को इंटरनल और
21:24एक्सटर्नल डेंजरस से फ्री करके शांति की
21:26स्थापना की बंगाल को जमींदारा के द्वारा
21:29होने वाली एप्प्राइजिंग से फ्री कर दिया
21:37सर बनाया गया
22:03मुर्शीद कुली खान ने बंगाल में रिवेन्यू
22:06फार्मिंग के सिस्टम को इंट्रोड्यूस किया
22:08दोस्तों रिवेन्यू फार्मिंग एक रिवेन्यू
22:10कलेक्शन का तरीका था जिसमें स्टेट
22:14रिवेन्यू ऑफिशल प्रेजेंस से रिवेन्यू
22:16कलेक्ट करता था और एक फिक्स्ड अमाउंट
22:18स्टेट को देता था खान ने लोकल जमींदारा और
22:22मर्चेंट बैंकर्स से रिवेन्यू फार्मर्स को
22:24रिक्रूट किया उन्होंने डिस्ट्रेस में जी
22:26रहे पुर कल्टीवेटर के लिए एग्रीकल्चर लोन
22:29का प्रोविजन भी रखा जिसको टिकावी कहा जाता
22:33था
22:34मुर्शीद खान और उनकी सक्सेस ने हिंदू और
22:37मुस्लिम दोनों को ही एंप्लॉयमेंट की इक्वल
22:39ऑपच्यरुनिटीज दी हाईएस्ट सिविल और
22:42मिलिट्री पोस्ट को बंगाली से फाइल किया
22:45गया
22:47इंग्लिश और फ्रेंच को कोलकाता और चंद्रनगर
22:51की फैक्टरीज को 45 करने की परमिशन नहीं दी
22:54लेकिन बंगाल के
22:56साबित हुए उन्होंने इंग्लिश ईस्ट इंडिया
22:59कंपनी की बढ़नी टेंडेंसी को इफेक्टिवली और
23:02नहीं किया
23:11अंडरस्टीमेट किया जिसका उन्हें भारी
23:14नुकसान उठाना पड़ा
23:16175657 में अली वर्दी के सक्सेसर
23:19सिराजुद्दौला पर जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने
23:22वार डिक्लेअर किया तब एक स्ट्रांग आर्मी
23:25की अब्सेंस के चलते ब्रिटिशर्स की
23:27विक्ट्री हुई
23:29अब देखते हैं अवध स्टेट के बड़े में
23:31अवध अवध की इंडिपेंडेंस प्रिंसिपल एट के
23:35फाउंडर थे सादात खान बरहन अल मुल्क जिनको
23:391722 में अवध का गवर्नर बनाया गया था उनके
23:43अपॉइंटमेंट के दौरान अवध प्रोविंस में कई
23:46जमींदारा ने रिबेलीयन कर दिया था कई सालों
23:49तक सादात खान को उनसे वार करना पड़ा
23:52फाइनली और बड़ी जमींदारा को सरप्राइज करने
23:55में वो सक्सेसफुल रहे 1723 में उन्होंने
23:59एक नया रिवेन्यू सेटलमेंट किया उन्होंने
24:02रिवेन्यू को इंट्रोड्यूस करके प्रेजेंस की
24:06कंडीशन में सुधार किया इसी के साथ
24:08उन्होंने पैसों को बड़े जमींदारा की
24:10ऑपरेशन से भी प्रोटेक्शन प्रोवाइड की
24:12बंगाल नवाब की तरह
24:27उनके नेफ्यू सफदरजंग ने फिर उनको सकसीड
24:30किया
24:32सफदरजंग को 1748 में मुगल अंपायर का वजीर
24:36बनाया और उनको इलाहाबाद का प्रोविंस भी
24:39ग्रैंड किया गया
24:401754 में उनकी डेथ हुई अपनी डेथ की पहले
24:44उन्होंने अवध और इलाहाबाद में पीस
24:46इस्टैबलिश्ड किया उन्होंने मराठा सरदार से
24:50भी एलियंस किया जिससे मराठा इन कर्जन से
24:52बच्चा जा सके राजपूत चीफ़्टंस की लॉयल्टी
24:55भी उन्होंने हासिल की
24:57सफदरजंग ने एक एक्विटेबल जस्टिस सिस्टम को
25:00भी एस्टेब्लिश किया आगे बढ़ते हैं और
25:03देखते हैं मैसूर स्टेट के बड़े में मैसूर
25:06दोस्तों साउथ इंडिया में हैदराबाद के
25:09अलावा एक और इंपॉर्टेंट पावर यानी मैसूर
25:12का राइस हैदर अली के अंदर 18 सेंचुरी में
25:15हुआ
25:16विजयनगर अंपायर के और होने के बाद से ही
25:19मैसूर स्टेट ने अपना इंडिपेंडेंस बनाए रखा
25:22मुगल अंपायर का वह सिर्फ नॉमिनल पार्ट था
25:251721 में पैदा हुए हैदर अली ने अपने करियर
25:29की शुरुआत मैसूर आर्मी में एक छोटे से
25:32अवसर के रूप में की वो एक ब्रिलियंट
25:34कमांडर थे उन्होंने वेस्टर्न मिलिट्री
25:36ट्रेनिंग की इंर्पोटेंस को समझा और इसे
25:39अपने ट्रूप्स में लागू किया मैसूर के रोलर
25:42नाजराज को उन्होंने 1761 में ओवरथ्रो कर
25:45दिया और अपनी अथॉरिटी एस्टेब्लिश की
25:48मंजू राज वोदिया डायनेस्टी से बिलॉन्ग
25:51करते थे सभी रिबेल्स को उन्होंने कंट्रोल
25:53में किया और जल्द ही विद्नूर सुंडा शेर
25:57कनाडा और मालाबार को कैप्चर किया
26:00उन्होंने भी रिलिजियस टोलरेंस की पॉलिसी
26:03को अपनाया वो लगातार मराठा सरदार निजाम और
26:06ब्रिटिश के साथ वार में इंगेज्ड रहे
26:091782 में उनकी डेथ हुई और उनकी बेटे टीपू
26:13सुल्तान ने उनको सकसीड किया टीपू सुल्तान
26:15ने नए कैलेंडर कॉइन सिस्टम और वीड्स और
26:19मेजर के स्किल को भी इंट्रोड्यूस किया
26:23इस्तेमाल किया जाता था जो की यूरोपियन
26:26फैशन में बनाए जाते थे और मैसूर में ही
26:29मैन्युफैक्चरर किया जाते थे
26:311796 में उन्होंने एक मॉडल नेवी को बनाने
26:35का भी एफर्ट किया
26:39मैसूर वार में उनकी डेथ हो गई
26:42है अब बढ़ते हैं केरल की तरफ केरला
26:4618th सेंचुरी की शुरुआत में केरला बड़े
26:49नंबर ऑफ फैऊदल चिप्स और राजस में डिवाइडेड
26:52था किंग मार्तंड वर्मा ने त्रवंकोर किंगडम
26:56को 1729 के बाद इस एस्टेब्लिश किया उनके
27:00अंपायर की बाउंड्रीज कन्याकुमारी से
27:02कोचिंग तक एक स्टैंड करती थी उन्होंने
27:04वेस्टर्न मॉडल पर बेस्ड एक स्ट्रांग आर्मी
27:07ऑर्गेनाइजर की और मॉडर्न वेपंस का उसे
27:09किया उन्होंने कई इरिगेशन वर्क करवाएं
27:12रोड्स बनवाएं और कम्युनिकेशन के लिए कनाल
27:15बनवाई यहां तक
27:20सेंचुरी में मलयालम लिटरेचर का रिमरकेबल
27:23रिवाइवल देखने को मिला यह रिवाइवल केरला
27:26के राजा और के के करण हुआ
27:35की कैपिटल थी संस्कृत स्कॉलरशिप के एक
27:39फेमस सेंटर के रूप में उभर कर आया
27:42मार्तंड वर्मा को राम वर्मा ने सकसीड किया
27:45और दोनों ने मिलकर त्रवंकोर किंगडम में
27:48लंबे समय तक पीस और प्रोग्रेसिव माहौल
27:51बनाए रखा दोस्तों बात करते हैं दिल्ली के
27:54आसपास के एरियाज के बड़े में और देखते हैं
27:57मुगल अंपायर की डिक्लिन के बाद इनमें क्या
27:59डेवलपमेंट हुए सबसे पहले बात करेगी राजपूत
28:02की
28:04राजपूत
28:06दोस्तों मुगल अंपायर की बढ़नी वीकनेस के
28:09चलते राजपूत स्टेटस ने भी अपने आप को
28:12वर्चुअल फ्री करने की कोशिश की और साथ ही
28:15बाकी के अंपायर में अपने इन्फ्लुएंस को
28:18बढ़ाने की भी कोशिश की राजपूताना स्टेज
28:20अभी भी आपस में डिवाइडेड थे लगभग सभी बड़े
28:24राजपूत स्टेटस के बीच सिविल वर्स होते ही
28:27रहते थे मुगल कोर्ट की तरह यहां भी करप्शन
28:30धोखाधड़ी फैली हुई थी इसी के चलते मारवाड़
28:34के राजा अजीत सिंह को उनके ही बेटे ने
28:371724 में मार दिया जो वहां के बिगड़ने
28:41हालातो का गवाह है
28:4218th सेंचुरी के सबसे आउटस्टैंडिंग राजपूत
28:45रोलर थे राजा सवाई जयसिंह ऑफ अंबे
28:48जिन्होंने 1699 से 1743 डी रोल किया वो एक
28:53डिस्टिंग्विश स्टेटमेंट लव में घर और थे
28:57वो सिटी के फाउंडर थे और उसको साइंस और आठ
29:01का एक ग्रेट सेंटर बनाया
29:07जयपुर उज्जैन वाराणसी और मथुरा में
29:10एस्टॉनोमिकल ऑब्जर्वेट्रीज बनवाई दिल्ली
29:13के जंतर मंत्र को तो हम सब जानते ही हैं
29:15वो एक सोशल रिफॉर्मर भी थे अपनी बेटियों
29:19की शादी में होने वाले लैविश एक्सपेंडिचर
29:22को कम करने के लिए उन्होंने एक डॉ को पास
29:25किया क्योंकि इस प्रैक्टिस ने फीमेल
29:27इन्फैंटिसाइड जैसी प्रैक्टिस को बढ़ावा
29:29दिया दोस्तों अब बात करते हैं जाट के बड़े
29:32में
29:33जाट जाट एक एग्रीकल्चर इस क्लास थी जो
29:37दिल्ली मथुरा और आगरा के आसपास के रीजन
29:40में रहती थी
29:421669 में औरंगज़ेब के रूल में मथुरा रीजन
29:45के जाट पेजयंस ने रिवॉल्ट किया और ऐसा ही
29:48एक और रिवॉल्ट 1688 में दोबारा हुआ इन
29:52रिवॉल्ट्स को कृष तो कर दिया गया लेकिन यह
29:54एरिया डिस्टर्ब ही रहा
29:56औरंगज़ेब की डेथ के बाद दिल्ली के रीजन
29:59में वो लगातार डिस्टरबेंस इस क्रिएट करते
30:01रहे भरतपुर एक जाट स्टेट था जिसको चूड़ा
30:06मां और बदन सिंह ने सेटअप किया था जो की
30:09आज पूर्वी राजस्थान के भरतपुर जिला में है
30:12सूरजमल के अंदर जाट पावर अपने पीठ पर
30:15पहुंची जिन्होंने 1756 से 1763 तक रूल
30:20किया उनकी अथॉरिटी लिस्ट में गंगा से लेकर
30:23साउथ में चंबल तक और वेस्ट आगरा सुबह से
30:27लेकर दिल्ली के सुबह तक फैली हुई थी उनके
30:31स्टेट में आगरा मथुरा मेरठ अलीगढ़ इंक्लूड
30:34थे
30:361763 में उनकी डेथ के बाद जाट स्टेट
30:39डिक्लिन हो गया और पेटीसमींदर्स में
30:42स्प्लिट हो गया दोस्तों अब आगे बढ़ते हैं
30:45और देखते हैं बंगश पत्थंस और रोहिलास के
30:48बड़े में
30:49बंगश पठान और रोहिलास मोहम्मद खान बंगश ने
30:54मुगल एंपरर फारुख सियार और मोहम्मद शाह के
30:57री के दौरान फर्रुखाबाद के आसपास की
31:00टेरिटरी में 17-13 में एक अपना कंट्रोल
31:03एस्टेब्लिश किया यही से बंगश पत्थंस की
31:06शुरुआत हुई
31:09इवेशन के दौरान अली मोहम्मद खान ने
31:12रोहिलखंड नाम से एक अलग प्रिंसिपल किया
31:17रुहुहिलखंड हिमालय के फुट हिल्स में था
31:19यानी साउथ में गंगा और नॉर्थ में कुमाऊं
31:23हिल्स के बीच ही किंगडम था अब देखते हैं
31:25एक इंपॉर्टेंट रीजनल पावर सिक्स के बड़े
31:28में
31:30सिक्स दोस्तों टेंथ और लास्ट सिख गुरु
31:33गुरु गोविंद सिंह ने मुगल की रिपीटेड
31:36एट्रोसिटी से बचाने के लिए सिक्स को एक
31:39मिलिटेंट सेट में ट्रांसफॉर्म किया उनकी
31:42लीडरशिप में सिख कम्युनिटी एक पॉलीटिकल और
31:45मिलिट्री फोर्स बने
31:47बांदा बहादुर जिन्होंने 17008 में लीडरशिप
31:51असम की ने 8 साल तक मुगल आर्मी के अगेंस्ट
31:54स्ट्रगल किया और पैजांस और लोअर कास्ट
31:57लोगों के साथ मार्च किया
31:591715 में उनको कैप्चर कर लिया गया और मार
32:03दिया गया नादिर शाह और अहमद शाह अब्दाली
32:06के लगातार इन विजंस और पंजाब
32:08एडमिनिस्ट्रेशन के फेल होने से सिक्स को
32:11एक बार फिर से राइस होने का मौका मिला
32:141765 से 1800 के बीच सिक्स ने पंजाब और
32:18जम्मू को अपने कंट्रोल में ले लिया
32:3118th सेंचुरी के और में शुगर चकिया मिशन
32:34के के रंजीत सिंह प्रॉमिनेंस में आए
32:39थे और एक एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेटर
32:49पंजाब के स्ट्रांग किंगडम को सेटअप करने
32:52का श्री रंजीत सिंह को ही जाता है उनके
32:55किंगडम में सतलज से लेकर झेलम तक एरिया
32:58इंक्लूड था उन्होंने अपनी आर्मी को
33:01यूरोपीय की मदद से मॉडर्नाइज्ड किया ऐसा
33:04बताया जाता है की इंग्लिश ईस्ट इंडिया
33:06कंपनी के बाद एशिया की सबसे पावरफुल आर्मी
33:09उन्हें के पास थी उनके रेन के अंतिम समय
33:12में ब्रिटिश ने उनको 1838 में त्रिपाठी एक
33:163d साइन करवाई जिसमें उन्होंने ब्रिटिश
33:18आर्मी को पंजाब से काबुल की तरफ पास होने
33:21की परमिशन दी इसके बाद फर्स्ट
33:24एंग्लो-अफगानवर हुआ जिसमें ईस्ट इंडिया
33:27कंपनी और रंजीत सिंह ने कुछ हद तक
33:29कॉर्पोरेट भी किया 1839 में उनकी डेथ हुई
33:32और उनके सक्सेस स्टेट को इंटैक्ट नहीं रख
33:36पे और जल्द ही ब्रिटिश ने उसे पर कब्जा कर
33:39लिया
33:39अब बात करते हैं लास्ट और एक इंपॉर्टेंट
33:42रीजनल पावर यानी मराठस के राइस और फल के
33:45बड़े में
33:51मुगल अंपायर के सामने सबसे बड़ा चैलेंज
33:53मराठा किंगडम की तरफ से आया बल्कि यह कहा
33:57जा सकता है की सिर्फ मराठा किंगडम ही मुगल
34:00अंपायर को रिप्लेस करने की स्ट्रैंथ रखना
34:02था लेकिन मराठा सर्ड्स में यूनिटी की कमी
34:05थी और एक जो इंडिया अंपायर को सेटअप करने
34:08के लिए जरूरी आउटलुक और विजन लॉकिंग था
34:13छत्रपति शिवाजी महाराज के ग्रैंडसन शाहू
34:161689 से ही औरंगज़ेब के प्रिजनर थे
34:20177 में औरंगज़ेब की डेथ के बाद उनको
34:23रिलीज कर दिया गया और जल्द ही सतारा के
34:27शाहू और कोल्हापुर की ताराबाई के बीच एक
34:29सिविल वार छिड़ गई मराठा सरदार में एक
34:32फेक्शनलिज्म क्रिएट हो गया इस कनफ्लिक्ट
34:35के बीच बालाजी विश्वनाथ की लीडरशिप में
34:38मराठा गवर्नमेंट में एक नए तरह का सिस्टम
34:41में वाल्व हुआ ये पीरियड पेशवा डोमिनेशन
34:44का पीरियड था जिसमें मराठा स्टेट एक
34:47अंपायर में ट्रांसफॉर्म हुआ विश्वनाथ 1713
34:51में पेशवा यानी के मिनिस्टर बने स्टेट की
34:54साड़ी पावर पेशवा के पास होने लगी यानी
34:56पेशवा एक तरह से मराठा अंपायर का फंक्शन
35:03फारुख सियार को ओवरथ्रो करने में सैयद
35:06ब्रदर्स की भी मदद की यहां से उनको मुगल
35:09अंपायर की वीकनेस का पता चला और अब वो
35:12नॉर्थ में एक्सपेंड करने के लिए तैयार हुए
36:26करने के लिए फोर्स किया गया मराठस के बड़े
36:30में हम डिटेल में अपनी नेक्स्ट वीडियो में
36:32देखेंगे अब आते हैं कंक्लुजन पर
36:36कंक्लुजन तो दोस्तों हमने देखा की किस तरह
36:39मुगल अंपायर की डिक्लिन के बाद रीजनल
36:42स्टेज का राइस हुआ औरंगज़ेब के री के
36:45दौरान ही मुगल अंपायर का डिक्लिन स्टार्ट
36:47हुआ उनकी कंट्रोवर्शियल रिलिजियस पॉलिसी
36:50की चलती रीजनल स्टेज में रिबेलीयन होने
36:52लगे और जब सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन में वीक
36:55रुलर्स आने लगे तो ये प्रोसेस और भी फास्ट
36:58हो गया
36:59वीक सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेशन के चलते रीजनल
37:03पावर्स उभर कर आने लगी और उन्होंने
37:05ऑटोनॉमी डिक्लेअर कर दी जल्द ही इंडिया
37:08में अंपायर एस्टेब्लिश करने की स्ट्रगल
37:10स्टार्ट हुई इसी बीच ब्रिटिशर्स लगातार
37:13अपना स्ट्रांग हॉल बढ़ाने लगे और
37:15ग्रैजुअली इंटरनल पॉलिटिक्स में इंटरफेयर
37:18करने लगे
37:20और आगे चलकर इन्हीं रीजनल पावर्स और
37:23इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच स्ट्रगल
37:26स्टार्ट हुआ जिसकी कहानी हम आगे चलकर
37:29देखेंगे
37:34दोस्तों हमने पिछली वीडियो में डिस्कस
37:37किया था की कैसे इंडिया में ट्रेड करने के
37:40लिए अलग-अलग यूरोपियन कंपनी आई हैं आज हम
37:43उन्हें में से दो कंपनी इंग्लिश और फ्रेंच
37:45के बीच की रायबरेली को डिस्कस करेंगे तो
37:48चलिए शुरू करते हैं
37:50इंट्रोडक्शन दोस्तों वैसे तो ब्रिटिश और
37:53फ्रेंच ट्रेड करने के लिए इंडिया आते हैं
37:55लेकिन बाद में यह दोनों इंडिया के
37:58पॉलिटिक्स में इंवॉल्व हो जाते हैं ऐसा
38:00इसलिए क्योंकि ये दोनों ही कंपनी
38:02मर्चेंडाइज्म में यकीन करती थी जिसके
38:05अकॉर्डिंग प्रॉफिट को मैक्सिमाइज करने के
38:07लिए ट्रेड में मोनोपोली होना जरूरी माना
38:09जाता था दोनों पावर्स इंडिया में कमर्शियल
38:12मोनोपोली जाति थी इसलिए दोनों पॉलीटिकल
38:15पावर इस एस्टेब्लिश करने में ग जाते हैं
38:17तो दोनों के बीच रायबरेली होना भी नेचुरल
38:20था इसके साथ ही वर्ल्ड हिस्ट्री में पहले
38:22से चली ए रही ट्रेडिशनल एंग्लो फ्रेंच
38:24रिवॉल्री का रिफ्लेक्शन भी इंडिया में
38:26देखने को मिलता है
38:32तो आई एक-एक करके जानते हैं तीनों
38:35कार्नेटिक वज के बड़े में
38:401748 बैकग्राउंड
38:44कोरोमंडल कास्ट और उसके आसपास के एरिया को
38:47यूरोपीय ने कर्नाटक नाम दिया था इंग्लिश
38:50और फ्रेंच के बीच इंडिया में हुए सभी शब्द
38:53जनरली इसी एरिया में हुए थे इसीलिए इन्हें
38:56कर्नाटक
39:00में हुए ऑस्ट्रिया वार ऑफ सक्सेशन का
39:03इंडिया में एक्सटेंशन था 1740
39:13यूरोप की ड्राइवरी इंडिया में पहुंच जाति
39:15है फर्स्ट कार्नेटिक वार के रूप में
39:17फर्स्ट कार्नेटिक वार के दौरान मद्रास में
39:201746 में बैटल ऑफ सिंह थॉमस होता है
39:23जिसमें कर्नाटक के नवाब अनवारुद्दीन और
39:26फ्रेंच फोर्सेस आमने-सामने होते हैं आई
39:29जानते हैं ऐसा क्यों होता है
39:36जब 1745 में इंग्लिश नेवी कोमोडोर कर्टिस
39:41बनते की लीडरशिप में कुछ फ्रेंडशिप कर
39:44लेती है इसका बदला लेने के लिए फ्रेंच
39:46गवर्नर डुप्लेक्स मॉरीशस से एक फ्रेंच
39:49फ्रीज
39:53अंग्रेजन की मद्रास फैक्ट्री पर अटैक करती
39:55है और आसानी से मद्रास को जीत लिया जाता
39:58है लेकिन इसी बीच कर्नाटक के नवाब
40:01अनवारुद्दीन खान फ्रेंच से कहते हैं की
40:03उनकी टेरिटरी में वो इस तरह फाइट नहीं कर
40:06सकते और तुरंत मद्रास से वापस जान का
40:09ऑर्डर देते हैं और फ्रेंच गवर्नर
40:10डुप्लेक्स उन्हें यह कहकर शांत कर देते
40:12हैं की मद्रास को जितने के बाद वो उसे
40:15नवाब को गिफ्ट कर देंगे जब फ्रेंच मद्रास
40:18जितने के बाद भी नवाब से किया हुआ अपना
40:20प्रॉमिस नहीं पूरा करते तो अंदर उद्दीन
40:23अपने बेटे महफूज खान की कमांड में 10000
40:26सोल्जर की एक आर्मी मद्रास को कैप्चर करने
40:29के लिए भेज देते हैं फिर फ्रेंच की आर्मी
40:31के साथ का सामना होता है सन थॉमस नाम की
40:34जगह पर जो रिवर आद्यार के बैंक पर लोकेटेड
40:46आर्मी आसानी से एक बड़ी इंडियन आर्मी को
40:50हर शक्ति है क्योंकि इस बैटल में फ्रेंच
40:52साइड से 20030 यूरोपीय और 700 इंडियन
40:56सोल्जर मिलकर नेटिव आदमी की 10000 की
40:59फोर्स को हर देते हैं उसके अलावा डेक्कन
41:02में चल रहे एंग्लो फ्रेंच कनफ्लिक्ट में
41:04लेवल फोर्स की इंर्पोटेंस भी इस वार के
41:06बाद बहुत क्लियर हो जाति है दोस्तों बेल
41:10की संधि से फर्स्ट कार्नेटिक वार का एंड
41:13तो हो गया लेकिन इनके आपस में रिश्ते इससे
41:16फ्रेंडली नहीं बनते हैं इनकी रिवरी
41:19कंटिन्यू रहती है और जन्म देती है सेकंड
41:21कर्नाटक वार को आई अब उसके बड़े में जानते
41:24हैं
41:26सेकंड कर्नाटक वह 1749 तू 1754 बैकग्राउंड
41:32फर्स्ट कार्नेटिक वार के बाद फ्रेंच
41:34गवर्नर डुप्लेक्स के पॉलीटिकल एंबिशियस
41:36बाढ़ जाते हैं वह साउदर्न इंडिया में
41:38फ्रेंच की पावर और पॉलीटिकल प्रभाव को
41:41बढ़ाने के लिए वहां के लोकल डायनेस्टिक
41:43डिस्प्यूट में इंटरफेयर करना शुरू करते
41:45हैं उनका एक एक इसमें अंग्रेजन की पावर को
41:49कम करना भी था उनको ऐसा करने का मौका
41:51मिलता है जब हैदराबाद और कर्नाटक के थ्रू
41:54को लेकर डिस्प्यूट शुरू हो जाता है
41:55हैदराबाद के निजाम आजम जहां की 21st मे
41:591748 को मृत्यु हो जाति है और उनकी बेटे
42:02नसीब जंग हैदराबाद के अगली निजाम बनते हैं
42:06लेकिन इनके नेफ्यू और आसिफ जहां के
42:08ग्रैंडसन मुजफ्फर जंग इनको चैलेंज करते
42:11हैं और खुद निजाम की गाड़ी चाहते हैं उधर
42:14दूसरी तरफ कर्नाटक में नवाब अनवारुद्दीन
42:17को चैलेंज कर रहे होते हैं वहां के फॉर्म
42:19और नवाब दोस्त अली के सन इन डॉ चंदा साहब
42:23डुप्लेक्स को इसमें अपनी पॉलीटिकल स्कीम
42:25को आगे बढ़ाने का मौका दिखता है इसलिए वो
42:28डेक्कन में मुजफ्फर जंग और कर्नाटक की
42:31नवाब शिव के लिए चंदा साहब का सपोर्ट करने
42:33का डिसीजन लेते हैं यह देखने पर इंग्लिश
42:36नासिर जंग और अनवारुद्दीन की साइड हो जाते
42:39हैं इस तरह यहां से शुरू होती है सेकंड
42:41कर्नाटक वार की कहानी जो 1749 से 1754 तक
42:46चला है आई जानते हैं इस वार के दौरान
42:48क्या-क्या घटनाएं हुई
42:50कोर्स ऑफ डी वर्ल्ड
42:53डुप्लेक्स के प्लेन को सक्सेस मिलती है जब
42:55मुजफ्फर जंग चंदा साहब और फ्रेंच की
42:58कंबाइंड आर्मी के हाथों 1749 में वेल्लोर
43:01के पास हुई बैटल ऑफ अंबर के दौरान
43:03अनवारुद्दीन की हर और मृत्यु हो जाति है
43:06और दिसंबर 1750 में नासिर जंग को भी मार
43:10दिया जाता है
43:13और डुप्लेक्स को रिवॉर्ड के तोर पर रिवर
43:16कृष्णा के साउथ की पुरी मुगल टेरिटरी का
43:19गवर्नर डिक्लेअर कर देते हैं इसके अलावा
43:21नॉर्दन सरकार के कुछ डिस्ट्रिक्ट भी
43:24फ्रेंच को दे दिए जाते हैं और निजाम की
43:27रिक्वेस्ट पर एक फ्रेंच आर्मी को हैदराबाद
43:29में तैनात कर दिया जाता है जिसे वहां
43:32फ्रेंच एंट्रेंस को सुरक्षित रखा जा सके
43:35लेकिन कुछ ही मीना के बाद मुजफ्फर जंग को
43:38मार दिया जाता है और फ्रेंच मुजफ्फर के
43:41अंकल सलबत जंग को नया निजाम बनाते हैं
43:441751 में चंदा साहब कार्नेट के नवाब बन
43:48जाते हैं इस समय डुप्लेक्स अपनी पॉलीटिकल
43:50पावर की हाइट पर होते हैं लेकिन जल्दी ही
43:53कहानी में ट्वीट आता है लेट नवाब
43:56अनवारुद्दीन के बेटे मोहम्मद अली तृष्णो
43:58बाली के फोर्ट में रिफ्यूज लिए हुए थे
44:01चंदा साहब और फ्रेंच के अनेक प्रयासों के
44:04बाद भी जिला नहीं जीता जाता अंग्रेज भी
44:07शांत नहीं बैठने थे रॉबर्ट क्लाइव जो
44:10मोहम्मद अली को तृष्णापल्ली में इफेक्टिव
44:12रिइंफोर्समेंट नहीं दे पाते गवर्नर
44:14साउंड्स को एक काउंटर मूव सो जाते हैं
44:17जिसके तहत कार्नेटिक की कैपिटल पर एक
44:21सरप्राइज अटैक प्लेन किया जाता है जिससे
44:23तिरछीणा पाली से प्रेशर को डाइवर्ट किया
44:26जा सके प्लेन के मुताबिक लाइव सिर्फ 210
44:30सोल्जर के फोर्स के साथ अगस्त 1751 में
44:33अर्को को कैप्चर कर लेते हैं चंदा साहब के
44:36द्वारा तिरछी नपोली से डाइवर्ट करके 4000
44:39की फोर्स भेजी जाति है लेकिन यह फोर्स
44:42एयरपोर्ट को जितने में असफल रहती है
44:44आर्कोट की सफलता के बाद अंग्रेजन का मनोबल
44:48और भी बाढ़ जाता है और 1752 में स्ट्रिंगर
44:52लॉरेंस एक स्ट्रांग इंग्लिश फोर्स के साथ
44:54किचेनॉनपल्ली में फ्रेंच से सुरेंद्र कर
44:56लेते हैं और इसी बीच चंदा साहब को तंजौर
45:00के राजा षड्यंत्र करके मार डालते हैं
45:02मोहम्मद अली कर्नाटक के नवाब बन जाते हैं
45:05तिरुचिरापल्ली में हुए डिजास्टर के बाद
45:07डुप्लेक्स की किस्मत का सितारा डूबने लगता
45:10है फ्रेंच कंपनी के डायरेक्टर डुप्लेक्स
45:13के पॉलीटिकल एंबीशन और उसे पर हुए खर्च से
45:16खुश नहीं होते और उन्हें इंडिया से वापस
45:18फ्रांस बुला लिया जाता है 1754 में
45:22डुप्लेक्स को रिप्लेस करके फ्रेंच के नए
45:24गवर्नर बनते हैं गोरे हुए अंग्रेजन के साथ
45:28नेगोशिएशंस शुरू करते हैं और 1755 में
45:31ट्रीटी का पांडिचेरी साइन करते हैं
45:40उसको भी समझते हैं इंप्लीकेशंस
45:43सेकंड कार्नेटिक वार से ये साफ हो गया की
45:46यूरोपीय कंपनी को सक्सेस के लिए इंडियन
45:49अथॉरिटी के सपोर्ट की जरूर नहीं है बल्कि
45:51उल्टा इंडियन अथॉरिटी कंपनी के ऊपर
45:54डिपेंडेंट होने लगी थी कर्नाटक में
45:57मोहम्मद अली और हैदराबाद में सलबत जंग
46:00यूरोपीय कंपनी के पत्रों एन होकर क्लाइंट
46:03बन गए थे इंग्लिश और फ्रेंच के बीच
46:05कनफ्लिक्ट का ये दूसरा राउंड भी
46:07इनकनक्लूसिव रहा क्योंकि अंग्रेजन के
46:10कैंडिडेट मोहम्मद अली कर्नतें के नवाब तो
46:13बन जाते हैं लेकिन फ्रेंच डेक्कन में अभी
46:16भी स्ट्रांग थे उनके कैंडिडेट सलबत जंग
46:19हैदराबाद के निजाम थे साथ ही सालाना 30
46:22लाख रुपए रिवेन्यू देने वाले नॉर्दर्न
46:24सरकार के कुछ इंपॉर्टेंट डिस्ट्रिक्ट भी
46:27फ्रेंच कंपनी को मिल गए
46:31साउथ इंडिया में फ्रेंच की पोजीशन कुछ
46:33कमजोर और अंग्रेजों की पोजीशन कुछ
46:36स्ट्रांग जरूर होती है
46:37इंडिया में एंग्लो फ्रेंच रिवरी का डिसाइड
46:40एक्शन होता है थर्ड कर्नाटक वार में तो आई
46:43अब उसके बड़े में डिस्कस करते हैं थर्ड
46:46कर्नाटक वी ऑटो
46:501758 तू 1763
46:53फर्स्ट कर्नाटक
46:56भी यूरोप में चल रही इंग्लिश और फ्रेंच के
46:59स्ट्रगल की इंडिया में गंज थी
47:021756 में यूरोप में 7 इयर्स वार शुरू हो
47:05जाता है और फिर से इंग्लैंड और फ्रांस
47:08आमने सामने होते हैं इसका एक्सटेंशन
47:10इंडिया तक होता है फ्रेंच गवर्नमेंट 1757
47:14में जनरल काउंटिंग लाली को इंडिया भेजती
47:17है जो 12 महीने की यात्रा के बाद 1758 में
47:21यहां पहुंचने हैं इसी बीच ब्रिटिश 1757
47:25में बंगाल में प्लासी का बैटल जीत चुके
47:27होते हैं जिससे उन्हें रिसोर्सेस मिल जाते
47:31हैं और 1758 में
47:35कैप्चर कर लेते हैं लाली का नेक्स्ट
47:37मद्रास को गर्ने का होता है लेकिन वहां
47:40अंग्रेजन की एक स्ट्रांग नवल फोर्स ए
47:42पहुंचती है और लाली को मजबूर होकर घेराव
47:45खत्म करना पड़ता है इसके बाद लाली
47:47हैदराबाद से वासी को बुला लेते हैं ये
47:50फ्रेंच की एक बड़ी गलती साबित होती है
47:52क्योंकि इससे उनकी लैंड गैरसैण कमजोर पद
47:55गई और इसी बीच पोकोक के कमांड में इंग्लिश
47:58फ्लीट फ्रेंच फ्रीज को तीन बार हर देती है
48:01और फ्रेंच फ्रीज को इंडियन वाटर छोड़कर
48:04जान पर मजबूर कर देते हैं सी पर कमांड
48:06होने के बाद अब अंग्रेजन के लिए जीत का
48:09रास्ता खुला जाता है और उनकी फाइनल
48:11विक्ट्री में कोई डाउट नहीं राहत फ्रेंच
48:13को 20 सेकंड जनवरी 1760 को तमिलनाडु में
48:17वांडीवाश की बैटल में सर कू के हाथों बुरी
48:21तरह हर का स्वाद रखना पड़ता है वासी को
48:24प्रिजनर बना लिया जाता है
48:288 महीने के ब्लॉक आते के बाद पांडिचेरी भी
48:31अंग्रेजन द्वारा जीत लिया जाता है और 16th
48:35जनवरी 1761 को ला सुरेंद्र कर देते हैं
48:39उसके बाद जल्दी ही फ्रेंच माहे और जिंगी
48:43को भी को देते हैं इस तरह साउथ इंडिया में
48:45एंग्लो फ्रेंच रिवरी के ड्रामा का फाइनली
48:48पर्दा गिरता है फ्रेंच की पोजीशन अब वापस
48:51उठने लायक नहीं र गई थी यूरोप में 7 इयर्स
48:55बर का और होता है 1763 में ट्रीटी का
48:58पेरिस के द्वारा इसके प्रोविजंस के अनुसार
49:00फ्रेंच को पांडिचेरी और कुछ अन्य सेटलमेंट
49:03वापस कर दिए जाते हैं लेकिन इस शर्ट पर की
49:07इनको कभी भी 45 नहीं किया जाएगा इस तरह
49:10इंडिया में फ्रेंच की पॉलीटिकल एंबिशियस
49:12का हमेशा के लिए और हो जाता है दोस्तों यह
49:15तो हमने जान लिया की फ्रेंच और इंग्लिश
49:17कंपनी के कनफ्लिक्ट में फाइनली इंग्लिश को
49:20जीत मिलती है और फ्रेंच को हर पर इसके
49:23पीछे के कुछ रीजंस को भी जानते हैं
49:37है इसलिए कम कर रहे लोगों में ऐंठूसियाज्म
49:40और सेल्फ कॉन्फिडेंस की कमी नहीं थी कंपनी
49:43इंस्टेंट डिसीजंस भी ले शक्ति थी क्योंकि
49:45उन्हें गवर्नमेंट की परमिशन नहीं चाहिए
49:47होती थी दूसरी तरफ फ्रेंच कंपनी गवर्नमेंट
49:50की कंट्रोल में थी इससे डिसीजन मेकिंग में
49:53भी डिले होता था दूसरा रीजन था अंग्रेजन
49:56की सुपीरियर नेवी इसकी हेल्प से वो सभी
49:59इंपॉर्टेंट बॉटल्स जीत पाते हैं साथ ही
50:02इंडिया की बड़ी और इंपॉर्टेंट सिटीज पर
50:04ब्रिटिश का ही कंट्रोल था जैसे की कोलकाता
50:07बॉम्बे और मद्रास जबकि फ्रेंच के पास
50:10सिर्फ पांडिचेर ही था ऐसा कई हिस्टोरियन
50:13का मानना भी है की इंग्लिश कोलकाता से
50:15शुरू करके पूरे इंडिया को कंट्रोल कर सकते
50:18थे लेकिन पांडिचेरी से शुरू करके फ्रेंच
50:20गया कोई भी ऐसा नहीं कर सकता था इसके
50:23अलावा इंग्लिश कंपनी के पास फंड्स की कमी
50:26नहीं थी कार्नेटिक वर्स के बीच में ही
50:281757 में प्लासी का बैटल होता है जिसमें
50:31जितने पर कंपनी की वेल्थ में और भी ज्यादा
50:33इजाफा होता है लेकिन फ्रेंच के पास फंड्स
50:36की शॉर्टेज बनी रहती है है वह पॉलीटिकल
50:38एंबिशियस की वजह से कमर्शियल इंटरेस्ट की
50:41अनदेखी कर देते हैं एक और इंपॉर्टेंट रीजन
50:44था ब्रिटिश सक्सेस के पीछे अंग्रेजन की
50:47सुपीरियर मिलिट्री कमांड्स इंग्लिश साइट
50:50पर सरण कू मेजर स्ट्रिंग लॉरेंस रॉबर्ट
50:53क्लाइव जैसे लीडर्स की लंबी लिस्ट के
50:55कंपैरिजन में फ्रेंच साइट पर सिर्फ
50:57डुप्लेक्स का ही नाम याद राहत है दोस्तों
51:00ये थे कुछ रीजंस जिनकी वजह से इंग्लिश
51:03फ्रेंच को हराकर इंडिया में अपना डोमिनेंस
51:06बनाने में कामयाब होते हैं कंक्लुजन थर्ड
51:10कर्नाटक वार में जीत के बाद इंडिया में
51:12इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी का कोई भी
51:14यूरोपियन राइवल नहीं बचत और इसके बाद वो
51:17अपना पूरा ध्यान इंडिया में एक डोमिनेंट
51:20पॉलीटिकल पावर बने पर लगा देते हैं ईस्ट
51:23इंडिया कंपनी कैसे धीरे-धीरे एक अंपायर
51:26सेट अप करती है यह हम अपनी आने वाली
51:29वीडियो में देखेंगे
51:32रोड तू प्लासी इन बक्सर दोस्तों अभी तक
51:35हमने देखा की कैसे इंग्लिश ईस्ट इंडिया
51:38कंपनी इंडिया में अपने सभी यूरोपियन
51:40राइवल्स को हराकर मोनोपोलिस्टेब्लिश कर
51:43लेती है अब हम जानेंगे की कंपनी कैसे
51:46इंडियन रुलर्स को हराकर इंडिया में एक
51:48डोमिनेंट पॉलीटिकल पावर बनकर उभरती है
51:53इंडियन प्रोविंस को जीत लेती है और इसमें
51:56सबसे पहले नंबर आता है बंगाल का बैटल ऑफ
52:00प्लासी और बक्सर को इंडियन हिस्ट्री के
52:03मेजर टर्निंग प्वाइंट्स में से माना जाता
52:04है तो आज हम इन्हीं गेम चेंजिंग बॉटल्स के
52:07बड़े में डिस्कस करेंगे तो चलिए शुरू करते
52:10हैं
52:11इंट्रोडक्शन
52:13बंगाल उसे समय के इंडिया के प्रोविंस में
52:16सबसे ज्यादा फर्टाइल और रिच था आज के
52:19बांग्लादेश बिहार और उड़ीसा इसके पाठ होते
52:22थे यहां की इंडस्ट्रीज और कॉमर्स भी वेल
52:25डेवलप्ड थी नाम के लिए तो यह मुगल अंपायर
52:28का पार्ट था लेकिन यहां के नवाब वास्तव
52:31में इंडिपेंडेंस रोलर की तरह शासन कर रहे
52:33थे इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल में
52:37कई जगह अपनी फैक्टरीज एस्टेब्लिश करती है
52:39और कोलकाता में 1696 से 176 के बीच एक
52:44फोर्ट का भी कंस्ट्रक्शन करती है इस फोर्ट
52:47का नाम इंग्लैंड के किंग विलियम डी थर्ड
52:49के ओनर में फोर्ट विलियम रखा जाता है
52:58मतलब यह डिफरेंस की परपज के लिए
53:03होता था जिसमें कॉटन और सिल्क टैक्सटाइल्स
53:07मेजर ट्रेड आइटम थे
53:1017
53:11मुगल एंपरर फारुख सियार अपने फरमान के
53:14द्वारा कंपनी को बंगाल में ड्यूटी फ्री
53:17ट्रेड करने की परमिशन भी दे देते हैं
53:20हम का सकते हैं की बंगाल में कंपनी के
53:22काफी स्ट्रांग ट्रेडिंग इंटरेस्ट थे फिर
53:25ऐसा क्या हुआ की कंपनी और बंगाल के नवाब
53:28के बीच 1757 में प्लासी की बैटल होती है
53:31आई जानते हैं बैकग्राउंड तू बैटल ऑफ
53:35प्लासी
53:36बंगाल में सिचुएशन तब बदलने लगती है जब
53:391756 में एक स्ट्रांग रोलर नवाब अली वर्दी
53:43खान की मृत्यु हो जाति है और उनके
53:46ग्रैंडसन सिराजुद्दौला बंगाल के नवाब बनते
53:48हैं
53:49सिराजुद्दौला की कुछ राइवल्स थे जो उनकी
53:52जगह खुद नवाब बन्ना चाहते थे जैसे की
53:55पूर्णिया की शौकत जंग और ढाका की घसीटी
53:58बेगम इसके साथ ही कर्नाटक वर्स के बाद से
54:01ही नवाब इंग्लिश कंपनी के प्लांस को लेकर
54:03डू में थे ऐसी सिचुएशन में जब इंग्लिश
54:06कंपनी इनडायरेक्ट नवाब की राइवल घसीटी
54:09बेगम को सपोर्ट करती है और बंगाल की
54:12पॉलीटिकल ऑफेंडर्स भी देती है तो नवाब का
54:15गुस्सा और भी बाढ़ जाता है
54:17है इसके अलावा मुगल फरमान के अनुसार जो
54:20दस्तक यानी की फ्री पैसेज कंपनी को अपने
54:23ट्रेड के लिए मिलते थे कंपनियां का मिस
54:25उसे करना शुरू कर देती है कंपनी के
54:28एम्पलाइज कंपनी के ट्रेड के साथ-साथ अपने
54:30प्राइवेट ट्रेड में भी इन फ्री पैसेज का
54:33उसे करते थे जबकि मुगल फरमान में सिर्फ
54:36कंपनी के ट्रेड को ही ये राइट दिया गया था
54:38इसके अलावा इंडियन मरचेंट्स को भी पैसेज
54:41बीच देते थे यह एक तरह से चीटिंग थी और
54:44इसे नवाब को काफी रिवेन्यू लॉस भी उठाना
54:47पद रहा था इसी बीच कंपनी फोर्ट विलियम को
54:50और भी ज्यादा 45 करने लगती है और फोर्ट की
54:53वाल्स पर गंज तैनात कर दी जाति हैं
54:55क्योंकि अंग्रेजन को डर था की फ्रेंच से
54:58चल रहा कनफ्लिक्ट बंगाल तक एक्सटेंड कर
55:00सकता है यह सब देखने के बाद नवाब कंपनी को
55:03वार्निंग देते हैं की वह ऐसा करना बैंड
55:06करें लेकिन कंपनी उनकी बात नहीं सुनती
55:08नवाब को लगता है की कंपनी उनकी सॉवरेन्टी
55:12को चैलेंज कर रही है इसलिए वो कंपनी के
55:14खिलाफ एक्शन लेते हैं और कोलकाता की तरफ
55:16मार्च शुरू करते हुए फोर्ट विलियम को 28
55:19जून 1756 को कैप्चर कर लेते हैं फिर नवाब
55:23अपनी इस आसन जीत को सेलिब्रेट करने के लिए
55:26कोलकाता का चार्ज मानिकचंद को देकर अपनी
55:29कैपिटल मुर्शिदाबाद लोट जाते हैं यह नवाब
55:32की बहुत बड़ी गलती साबित होती है वो अपने
55:35एनीमी की स्ट्रैंथ को अंडरस्टीमेट कर लेते
55:37हैं इसका फायदा उठाकर कुछ अंग्रेज अपनी
55:40शिप के साथ हुगली रिवर के रास्ते भाग जाते
55:43हैं क्योंकि मानिकचंद के पास कोई नवल
55:45फोर्स नहीं थी इसीलिए वो अंग्रेजन को ऐसा
55:48करने से रॉक नहीं पाते इंग्लिश ऑफिशल्स सी
55:52के पास फूलता नाम की जगह पर शरण लेते हैं
55:54क्योंकि यहां अपनी नवल स्ट्रैंथ की वजह से
55:57वह सेफ र सकते थे
55:59यहां वह मद्रास से हेल्प अपने का वेट करते
56:02हैं कोलकाता के फल की न्यूज़ अगस्त 1756
56:05तक मद्रास पहुंचती है और फिर कुछ डिले के
56:08बाद 16th अक्टूबर 1756 को एडमिरल वाटसन और
56:13करनाल क्लाइव की लीडरशिप में मद्रास से एक
56:16स्ट्रांग नवल और मिलिट्री फोर्स कोलकाता
56:18के लिए भेज दी जाति है यह फोर्स दिसंबर
56:211756 में कोलकाता पहुंच जाति है और इसके
56:24बाद सेकंड जनवरी 1757 को ही क्लाइव
56:28मानिकचंद को ब्राइब देकर कोलकाता को वापस
56:31जीत लेते हैं और फरवरी 1757 में नवाब
56:35सिराजुद्दौला क्लाइव के साथ अलीपुर की
56:38ट्वीटी साइन करते हैं नवाब ने कोलकाता को
56:41जितने के बाद उसका नाम अलीपुर कर दिया था
56:43इस ट्वीटी के अनुसार नवाब अंग्रेजन को
56:47उनके पुराने ट्रेडिंग प्रिविलेज वापस कर
56:49देते हैं उनको कोलकाता को 45 करने की
56:52परमिशन दे देते हैं और इस दौरान हुए
56:54अंग्रेजन के पूरे नुकसान की भरणी का भी
56:56प्रॉमिस करते हैं लेकिन इसके बाद भी
56:59अंग्रेज संतुष्ट नहीं होते और एक
57:01कंस्पायरेसी प्लेन की जाति है जो जन्म
57:03देती है बैटल ऑफ प्लासी को तो आई जानते
57:07हैं इस कंस्पायरेसी और बैटल ऑफ प्लासी के
57:09बड़े में
57:11बैटल ऑफ प्लासी अंग्रेज समझ चुके होते हैं
57:14किस राजू दौला के नवाब रहते हुए उनके ऊपर
57:17खतरा हमेशा बना रहेगा इसलिए वो नवाब के
57:20खिलाफ चल रही एक इंस्पीरसी से जुड़ जाते
57:22हैं इस कंस्पायरेसी के अनुसार
57:25सिराजुद्दौला की जगह उनके ही मीर बक्शी
57:28मीर जफर को नवाब बनाने का प्लेन होता है
57:31मीर जफर के अलावा इसमें शामिल होते हैं
57:33मानिकचंद जो कोलकाता के ऑफिसर इंचार्ज
57:36होते हैं अमीचंद जो एक रिच मर्चेंट थे जगत
57:40सीट जो बंगाल के सबसे बड़े बनकर थे और
57:43खादिम खान जो नवाब की आर्मी में कमांडर थे
57:46प्लेन के अकॉर्डिंग अंग्रेज नवाब के सामने
57:49ऐसी डिमांड रखते हैं जिन्हें नवाब कभी
57:52नहीं मां सकते थे नवाब समझ जाते हैं की अब
57:55अंग्रेजों के साथ वार के अलावा और कोई
57:57रास्ता नहीं है दोनों साइड 23rd जून 1757
58:01को प्लासी के मैदान पर जो मुर्शिदाबाद से
58:04अराउंड 30 किलोमीटर की दूरी पर था मिलते
58:07हैं लेकिन प्लासी का बैटल सिर्फ नाम के
58:10लिए ही बैटल था इसमें अंग्रेजन की साइड से
58:1250 से भी कम लोग मारे जाते हैं जबकि नवाब
58:15लगभग अपने 500 आदमी को देते हैं दबाव की
58:19आर्मी का मेजर पार्ट जो ट्रेडर्स मीर जफर
58:22और राय दुर्लभ की कमांड में था बैटल में
58:25कोई हिस्सा ही नहीं लेट दबाव के सोल्जर का
58:28सिर्फ एक छोटा सा ग्रुप ही जिसको मीर मदन
58:30और मोहनलाल लीड कर रहे थे बहादुर के साथ
58:34लड़ता है लेकिन अंत में नवाब मैदान छोड़कर
58:37जान पर मजबूर हो जाते हैं और मीर जफर के
58:39पुत्र मीरां उनको मुर्शिदाबाद के रास्ते
58:42में मार देते हैं मीर जफर को बंगाल का
58:45नवाब बना दिया जाता है और इनाम के रूप में
58:47अंग्रेजन को 24 परगना की जमींदारी दी जाति
58:50है और साथ ही कोलकाता पर अटैक की कंपनसेशन
58:53के लिए एक करोड़ 7700000 मीर जफर कंपनी को
58:58देते हैं इसके अलावा बहुत से गिफ्ट और
59:00ब्राइब कंपनी के ऑफिशल्स को भी दिए जाते
59:03हैं जैसे की क्लाइव को अराउंड 2 मिलियन से
59:06भी ज्यादा का इनाम मिलता है दोस्तों यह तो
59:09थी बैटल ऑफ प्लासी कहानी जो अंग्रेजन के
59:12लिए बंगाल के मास्टर बने का रास्ता खोल
59:14देती है और कैसे मीर जफर जैसे एक बंदे की
59:17ट्रचूड़ी की वजह से इतिहास की दिशा ही
59:20बादल जाति है ईस्ट इंडिया कंपनी अब
59:22कमर्शियल के साथ पॉलीटिकल एनटीटी भी बन
59:25जाति है इससे उनकी प्रेस्टीज में भी
59:27ज्यादा होता है और एक ही झटका में वो
59:30इंडिया के अंपायर की एक मेजर कंटेंडर बन
59:33जाते हैं बंगाल से मिलने वाले रिवेन्यू की
59:36वजह से ही अंग्रेज एक स्ट्रांग आर्मी
59:38ऑर्गेनाइजर कर पाते हैं और देश के बाकी
59:40हसन को जितने का खर्चा भी मैनेज कर पाते
59:43हैं इसके अलावा बंगाल पर कंट्रोल एंग्लो
59:46फ्रेंच स्ट्रगल में भी डिसाइसिव रोल
59:48निभाते है जैसा की हमने अपनी पिछली वीडियो
59:50में देखा था तो दोस्तों यह तो बात हुई
59:53प्लासी के युद्ध की लेकिन बंगाल को जितने
59:56की कहानी यहां खत्म नहीं होती वो खत्म
59:59होती है बक्सर के युद्ध के बाद तो चलिए अब
1:00:02उसके बड़े में भी चर्चा करते हैं
1:00:05बैटल ऑफ बक्सर प्लासी की बैटल में कंपनी
1:00:09का साथ देने के बदले में मीर जफर को बंगाल
1:00:12की नवाबशिप मिल जाति है लेकिन उन्हें
1:00:15जल्दी ही एहसास होता है की उन्हें यह डील
1:00:17काफी महंगी पद रही है कंपनी और उसके
1:00:20ऑफिसर्स की डिमांड बढ़नी ही रहती हैं और
1:00:22नवाब की ट्रेजरी धीरे-धीरे खाली होने लगती
1:00:25है कंपनी के डायरेक्टर ने भी ऑर्डर दे
1:00:28दिया था की बंगाल से ही मुंबई और मद्रास
1:00:31प्रेसिडेंसी का खर्चा भी निकाला जाए और
1:00:33बंगाल के रेवेन्यू से ही कंपनी इंडिया से
1:00:36होने वाले एक्सपोर्ट्स को परचेज करेगी
1:00:38इसका मतलब कंपनी अब सिर्फ इंडिया से ट्रेड
1:00:42नहीं कर रही थी बल्कि बंगाल के नवाब पर
1:00:44अपने कंट्रोल का उसे करके वहां की वेल्थ
1:00:47को ड्रीम करने में लगी थी
1:00:49मीर जफर समझ गए की कंपनी और उसके ऑफिशल्स
1:00:53की डिमांड्स को पूरा करना नामुमकिन है
1:00:55दूसरी तरफ कंपनी के ऑफिशल्स भी नवाब को
1:00:58क्रिटिसाइज करने लगता हैं क्योंकि वो उनकी
1:01:01एक्सपेक्टशंस को पूरा नहीं कर रहे थे
1:01:02इसलिए अक्टूबर 1760 में कंपनी मीर जफर को
1:01:07फोर्स करती है की वो नवाब की गाड़ी अपने
1:01:09सोनल डॉ अमीर कासिम के फीवर में छोड़ दें
1:01:12और इस तरह मीर जफर को रिप्लेस करके बंगाल
1:01:16के नवाब बन जाते हैं मीर खासी मीर खासिम
1:01:20बदले में कंपनी को बर्दवान मिदनापुर और
1:01:23चित्तागोंग डिस्ट्रिक्ट की जमींदारी दे
1:01:25देते हैं साथ ही इंग्लिश ऑफिशल्स को करीब
1:01:2729 लाख रुपए के प्रेजेंस भी गिफ्ट करते
1:01:30हैं कंपनी ने सोचा था की मीर कासिम उनके
1:01:34पपेट की तरह रहेंगे लेकिन मीर कासिम कंपनी
1:01:37की ऐसी सभी उम्मीद पर पानी फ़िर देते हैं
1:01:39वह एक टेबल एफिशिएंट और स्ट्रांग रोलर थे
1:01:43मीर कासिम अपने आप को फॉरेन कंट्रोल से
1:01:46फ्री करना चाहते थे उनको यह रिलाइज होता
1:01:49है की अपनी इंडिपेंडेंस को मेंटेन करने के
1:01:51लिए उनके पास एक एफिशिएंट आर्मी और फूल
1:01:54ट्रेजरी का होना जरूरी है इसलिए वह
1:01:57अलग-अलग रिफॉर्म्स के थ्रू अपनी इनकम
1:01:59बढ़ाने की कोशिश करते हैं जैसे की
1:02:01रिवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन में से करप्शन को
1:02:04खत्म करके इसके साथ ही वह यूरोपियंस की
1:02:06तरह एक मॉडर्न और डिसिप्लिन आर्मी बनाने
1:02:09की कोशिश करते हैं
1:02:11कंपनी से दूरी बनाने के लिए वह अपनी
1:02:14कैपिटल को भी मुर्शिदाबाद से मुंगेर शिफ्ट
1:02:17कर लेते हैं मीर कासिम कंपनी के ऑफिसर्स
1:02:20के द्वारा होने वाले दस्तक का मिसयूज
1:02:22रोकने के लिए एक दृष्टिक स्टेप लेते हैं
1:02:24और इंटरनल ट्रेड पर लगे वाली सभी ड्यूटीज
1:02:27को खत्म कर देते हैं एक सावरेन रोलर होने
1:02:30के नाइट वो ऐसा कर सकते थे इसकी वजह से
1:02:33इंडिया के और कंपनी के मरचेंट्स की पोजीशन
1:02:35एक जैसी हो जाति है यह सब कंपनी को
1:02:38बिल्कुल भी पसंद नहीं आता वो अपने और
1:02:41इंडियन के बीच एक क्वालिटी को टॉलरेट नहीं
1:02:43कर सकते थे कंपनी नवाब से डिमांड करती है
1:02:46की इंडियन ट्रेडर्स पर फिर से इंपोज कर दी
1:02:49जाए इसी बात पर बंगाल के नवाब और कंपनी के
1:02:52बीच एक बार फिर बैटल की शुरुआत होती है
1:02:551763 में शुरू की कुछ बॉटल्स में मीर
1:02:58कासिम हर जाते हैं और वह अवध चले जाते हैं
1:03:02अवध में मीर कासिम वहां के नवाब सुझाव
1:03:06डोला और मुगल एंपरर शाह आलम तू के साथ
1:03:09एलाइंस बनाते हैं यह तीनों मिलकर 22nd
1:03:12अक्टूबर 1764 को बक्सर में मेजर मंगरो की
1:03:16कमांड में कंपनी की आर्मी से आमना सामना
1:03:18करते हैं इन तीनों पावर्स की 40 हजार से
1:03:2160000 की कंबाइंड आर्मी कंपनी की अराउंड
1:03:247000 की आर्मी से बुरी तरह हर जाति है और
1:03:28बक्सर के बैटल में अंग्रेजन की जीत होती
1:03:30है दोस्तों यह तो हुई बक्सर के युद्ध की
1:03:34कहानी आई अब इसके रिजल्ट्स क्या रहे वो भी
1:03:37जानते हैं
1:03:38आफ्टर मठ ऑफ बक्सर
1:03:40बक्सर का बैटल इंडियन हिस्ट्री की मोस्ट
1:03:43डिसाइसिव बॉटल्स में से एक माना जाता है
1:03:46इसने दो मेजर इंडियन पावर्स की कंबाइंड
1:03:49आर्मी के अगेंस्ट इंग्लिश आर्म्स की
1:03:51सुपीरियर को साबित कर दिया था इसने
1:03:53ब्रिटिशर्स को बंगाल बिहार और उड़ीसा का
1:03:56मास्टर बना दिया और अवध को भी इनकी दया पर
1:03:59लाकर खड़ा कर दिया
1:04:01मुगल एंपरर शाह आलम तू से कंपनी को बंगाल
1:04:04बिहार और उड़ीसा के दीवानी राइट्स मिल
1:04:06जाते हैं यानी की यहां से रिवेन्यू कलेक्ट
1:04:09करने का राइट अब कंपनी के पास होगा इस तरह
1:04:12बंगाल पर कंपनी का कंट्रोल अब लीगलाइज्ड
1:04:15हो जाता है कंपनी इसके बदले में मुगल
1:04:17एंपरर को 26 लाख रुपए की सब्सिडी देने का
1:04:20प्रॉमिस करती है और अवध के दो डिस्ट्रिक्ट
1:04:23कोरा और इलाहाबाद भी इन्हें दे देती है
1:04:26मुगल एंपरर 6 साल तक इलाहाबाद के फोर्ट
1:04:29में एक तरह से अंग्रेजन के प्रिजनर के
1:04:32जैसे रहते हैं अवध के नवाब सुझाव दौला के
1:04:35साथ 16th अगस्त 1765 को इलाहाबाद की
1:04:39त्रुटि साइन होती है इसके अनुसार नवाब
1:04:42कंपनी को 5000000 युद्ध के हर्जन के रूप
1:04:45में देते हैं और साथ ही कोरा और इलाहाबाद
1:04:48के जिला एंपरर शाह आलम तू को सुरेंद्र कर
1:04:51देते हैं और दोनों के बीच एक एलाइंस साइन
1:04:54होता है जिसमें कंपनी किसी भी आउटसाइड
1:04:56अटैक से नवाब को प्रोटेस्ट करने का
1:04:58प्रॉमिस करती है अगर नवाब कंपनी की आर्मी
1:05:01का खर्चा उठा ले इस एलियंस के बाद अवध के
1:05:05नवाब कंपनी के डिपेंडेंट बन जाते हैं इस
1:05:08तरह बक्सर के युद्ध के बाद कंपनी को एन
1:05:10सिर्फ बंगाल का डायरेक्ट कंट्रोल मिल जाता
1:05:12है बल्कि अवध भी इनडायरेक्ट इनके कंट्रोल
1:05:15में ए जाता है दोस्तों यह तो बात हुई
1:05:18अंग्रेजन द्वारा बंगाल के कांग्रेस की
1:05:21प्लासी और फिर बक्सर के बैटल से अंग्रेजन
1:05:24ने बंगाल को अपने कंट्रोल में कर लिया था
1:05:26इस सब में एक इंपॉर्टेंट पर्सनालिटी का
1:05:29राइस हम देखते हैं वो थे रॉबर्ट क्लाइव जो
1:05:33बंगाल के पहले गवर्नर अप्वॉइंट किया जाते
1:05:35हैं तो आई उनके राइस को भी डिस्कस कर लेते
1:05:38हैं
1:05:39राइस ऑफ लाइफ
1:05:41रॉबर्ट क्लाइव बंगाल प्रेसीडेंसी के पहले
1:05:44ब्रिटिश गवर्नर थे क्लाइव का करियर कंपनी
1:05:48के एक ऑर्डिनरी एम्पलाई के रूप में शुरू
1:05:50होता है और कंपनी की सबसे इंपॉर्टेंट
1:05:52प्रेसीडेंसी के गवर्नर बने तक चला है सबसे
1:05:55पहले 1744 में क्लाइव ईस्ट इंडिया कंपनी
1:05:59के लिए फैक्टर या कंपनी एजेंट के रूप में
1:06:01कम करने के लिए मद्रास से सन जॉर्ज फोर्ट
1:06:04पहुंचने हैं इसके बाद वो अपनी एबिलिटी
1:06:07साबित करने के लिए कंपनी की आर्मी में
1:06:10भारती हो जाते हैं सेकंड कार्नेटिक वार के
1:06:13समय आर्कोट की सीध में ब्रिटिश विक्ट्री
1:06:15में अपने रोल के लिए क्लाइव को काफी फेम
1:06:18और प्रशंसा मिलती है फिर 1753 में वो
1:06:22ब्रिटेन लोट जाते हैं लेकिन 1755 में ही
1:06:25उन्हें इंडिया वापस बुला लिया जाता है
1:06:27क्योंकि फ्रेंच के साथ फिर से युद्ध की
1:06:30सिचुएशन बन रही थी उनको
1:06:33डिप्टी गवर्नर बनाया जाता है
1:06:39मिलकर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला से
1:06:42कोलकाता को रीकैप्चर करते हैं इसके बाद
1:06:45क्लाइव कंस्पायरेसी की हेल्प से बैटल ऑफ
1:06:48प्लासी में सिराजुद्दौला को हर देते हैं
1:06:50क्लाइव बंगाल में कुछ फ्रेंच पोर्ट्स को
1:06:53भी कैप्चर कर लेते हैं इन अचीवमेंट्स के
1:06:55लिए उन्हें लॉर्ड क्लाइव बैरन ऑफ प्लासी
1:06:58का टाइटल दिया जाता है प्लासी की जीत के
1:07:01बाद कंपनी इंडिया में एक पैरामाउंट पावर
1:07:03बन जाति है बंगाल उनका हो जाता है जिससे
1:07:07कंपनी के फॉर्चून में बहुत बड़ा इजाफा
1:07:09होता है
1:07:101760 में लाइव फिर से इंग्लैंड लोट जाते
1:07:12हैं इसके बाद 1765 में वो बंगाल के गवर्नर
1:07:17और कमांडर इन के के रूप में इंडिया वापस
1:07:19आते हैं
1:07:21बक्सर की बैटल के बाद होने वाले इलाहाबाद
1:07:24की त्रुटि को नेगोशिएट और साइन करते हैं
1:07:30क्योंकि वो अवध को ब्रिटिश और मराठस के
1:07:33बीच बफर की तरह उसे करना चाहते थे
1:07:36है इसके साथ ही बंगाल में क्लाइव सिस्टम
1:07:38ऑफ ड्यूल गवर्नमेंट इंट्रोड्यूस करते हैं
1:07:41इस सिस्टम के अनुसार बंगाल में दीवानी
1:07:43राइट तो कंपनी के पास रहते हैं लेकिन
1:07:45निजामत यानी की एडमिनिस्ट्रेशन देखने के
1:07:48राइट्स नवाब के पास ही रहते हैं इसका मतलब
1:07:51था कंपनी के पास पावर तो पुरी रहेगी लेकिन
1:07:54रिस्पांसिबिलिटी कुछ भी नहीं लाइव 1767 तक
1:07:59बंगाल के गवर्नर रहते हैं हम का सकते हैं
1:08:01की इंडिया में कंपनी का अंपायर एस्टेब्लिश
1:08:04करने में क्लाइव का काफी इंपॉर्टेंट रोल
1:08:06था
1:08:07कंक्लुजन दोस्तों यह थी अंग्रेजन द्वारा
1:08:11बंगाल के कांग्रेस की पुरी हिस्ट्री जहां
1:08:14एक तरफ प्लासी का बैटल इंग्लैंड के लिए
1:08:17बंगाल का दरवाजा खोलना है वही बक्सर कंपनी
1:08:20की राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं पर एक मोर
1:08:23लगा देता है इसके साथ ही हमने क्लाइव की
1:08:26स्टोरी को भी समझा जो बंगाल के पहले
1:08:28ब्रिटिश गवर्नर बनते हैं अब आगे आने वाली
1:08:31वीडियो में हम देखेंगे की इंग्लिश ईस्ट
1:08:34इंडिया कंपनी कैसे बंगाल के बाद इंडिया के
1:08:37बाकी पार्ट्स पर भी एक-एक करके अपना
1:08:39कंट्रोल एस्टेब्लिश करती है
1:08:47बैटल ऑफ प्लासी और बक्सर को डिस्कस करने
1:08:50के बाद आज हम साउथ इंडिया के मैसूर रीजन
1:08:53की बात करेंगे और जब मैसूर का नाम लिया
1:08:56जाता है तब टाइगर का मैसूर यानी टीपू
1:08:59सुल्तान की बात ना हो ऐसा तो हो ही नहीं
1:09:02सकता तो आज हम टीपू सुल्तान और अंग्रेजन
1:09:05के साथ उनकी रिवरी को डिस्कस करने वाले
1:09:07हैं लेकिन उससे पहले हम उनके पिता हैदर
1:09:10अली के बड़े में भी बात करेंगे और डिटेल
1:09:12में समझेंगे
1:09:20बैकग्राउंड के बड़े में तो आई शुरू करते
1:09:23हैं
1:09:24किंगडम ऑफ मी शो दोस्तों 14th सेंचुरी से
1:09:2817th सेंचुरी के बीच मैसूर विजयनगर अंपायर
1:09:32का सबोर्डिनेट स्टेट हुआ करता था जब
1:09:35विजयनगर अंपायर का डिक्लिन हो जाता है तब
1:09:37बहुत से छोटे-छोटे किंग्डम्स इस रीजन में
1:09:40इमर्ज होते हैं ऐसा ही एक इंडिपेंडेंस
1:09:42हिंदू किंगडम 1612 में मैसूर में बोडिया
1:09:46डायनेस्टी के अंदर इमेज होता है
1:09:4917th सेंचुरी में नर्स राजा बॉडीगार्ड और
1:09:52चिकर आज वोदेयर के रूल के समय मैसूर की
1:09:55टेरिटरी का काफी एक्सपेंशन हुआ इस
1:09:58एक्सपेंशन के बाद मैसूर की टेरिटरी में
1:10:00वेस्टर्न घाट से लेकर कोरोमंडल प्लेन की
1:10:03वेस्टर्न बाउंड्रीज तक का एरिया था यह
1:10:06किंगडम बड़ा होता गया और फिर 1734 में
1:10:09यहां के राजा बने कृष्णा राजा वोट यार डी
1:10:11सेकंड इनका इंटरेस्ट राज्य चलने में नहीं
1:10:14था इसलिए साड़ी बवास इनके दो मंत्री नजराज
1:10:18और देवराज के हाथों में थी
1:10:20इसका मतलब था की कृष्णा
1:10:37[संगीत]
1:10:39क्वालिटीज के चलते वो मैसूर आर्मी में
1:10:42प्रमोट होते गए
1:10:46हैदर अली ने वेस्टर्न मिलिट्री ट्रेनिंग
1:10:48के फायदे को समझा और अपने सोल्जर को उसमें
1:10:51ट्रेन भी किया फ्रेंच कंपनी के एक्सपट्र्स
1:10:54की हेल्प से 1755 में तमिलनाडु के
1:10:57डिंडीगुल में हैदर अली ने कैनन फैक्ट्री
1:11:00भी लगे थी यहां से हैदर अली और फ्रेंच
1:11:03कंपनी के बीच अच्छे रिलेशंस की शुरुआत भी
1:11:05होती है
1:11:07यहां तक की कार्नेटिक वर्स के समय हैदर
1:11:10अली और उनकी बटालियन ने फ्रेंच कमांडर्स
1:11:12जैसे की डुप्लेक्स डॉ डी लाली और डबासी के
1:11:16अंदर सब भी किया था लेकिन मैसूर में एक
1:11:19वीक रोलर होने की वजह से मराठस और
1:11:22हैदराबाद के निजाम मैसूर पर लगातार हमला
1:11:25कर रहे थे जिसकी वजह से मैसूर पॉलिटिकल और
1:11:28फाइनेंशली वीक होने लगा था इससे सिचुएशन
1:11:31में मैसूर को एक स्ट्रांग लीडर की जरूर थी
1:11:34ऐसे में हैदर अली ने 1761 में तक्ता पलट
1:11:38कर दिया और मैसूर के सुल्तान बन गए फिर
1:11:421761 और 1763 के बीच हैदर अली
1:11:48और मालाबार को कैप्चर कर लेते हैं वह
1:11:54फैऊदल लॉर्ड्स पर भी अपना कंट्रोल बना
1:11:56लेते हैं इसके बाद पालीगढ़ टाइम से
1:11:59रिवेन्यू जमा करने लगता हैं
1:12:01इन सब रीजंस की वजह से मैसूर फिर से एक
1:12:04प्रॉस्परस स्टेट बने लगा दोस्तों यह तो
1:12:07बात हुई मैसूर और उसकी सुल्तान हैदर अली
1:12:10की
1:12:11इनकी टक्कर अंग्रेजन के साथ कैसे हुई बात
1:12:15करते हैं फर्स्ट एंग्लो मैसूर वार की
1:12:19फर्स्ट एंग्लो मैसूर वार
1:12:22176-769 मैसूर के फ्रेंच कंपनी के साथ
1:12:26अच्छे रिलेशंस और हैदर अली का मालाबार के
1:12:29रिच ट्रेड पर कंट्रोल इंग्लिश ईस्ट इंडिया
1:12:31कंपनी को अपने पॉलीटिकल और कमर्शियल
1:12:33इंटरेस्ट के लिए खतरा लगे लगता हैं
1:12:37बंगाल के नवाब के खिलाफ बक्सर के युद्ध
1:12:40में मिली सफलता के बाद अंग्रेज हैदराबाद
1:12:42के निजाम के साथ एक ट्वीटी साइन करते हैं
1:12:46जिसके अनुसार हैदर अली से निजाम की
1:12:49सुरक्षा करने के बदले में अंग्रेजन को
1:12:51नॉर्दर्न सरकार इसका जिला मिल जाता है
1:12:53इसके बाद हैदराबाद का निजाम मराठस और
1:12:57अंग्रेज हैदर अली के खिलाफ एक एलाइंस
1:12:59बनाकर युद्ध करते हैं लेकिन हैदर अपनी
1:13:02डिप्लोमेटिक एबिलिटी का उसे करके मराठस को
1:13:06युद्ध में न्यूट्रल कर देते हैं और निजाम
1:13:08को अपना एली बना लेते हैं
1:13:10हैदर अली और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच वार
1:13:13कंटिन्यू राहत है और लगभग वन और हाफ येर
1:13:17तक बिना किसी कंक्लुजन की चला राहत है फिर
1:13:20हैदर अपनी स्ट्रीट्स चेंज करते हैं और
1:13:23अचानक मद्रास के सामने पहुंच जाते हैं
1:13:25इससे मद्रास में कंप्लीट किया और पानी की
1:13:28सिचुएशन हो जाति है जी वजह से अंग्रेज
1:13:31मजबूर होकर हैदर अली के साथ 4th अप्रैल
1:13:341769 को एक त्रुटि साइन करते हैं जिसे
1:13:37ट्रीटी का मद्रास बोला जाता है
1:13:40ट्रीटी के प्रोविजंस के अनुसार वार में जो
1:13:43भी प्रिजनर्स बनाए गए थे उनको एक्सचेंज
1:13:45करना था और साथ ही कन्कर्ड किया हुए
1:13:48एरियाज को भी एक दूसरे को लौटना था इसके
1:13:51साथ ही अंग्रेज हैदर अली से यह भी प्रॉमिस
1:13:54करते हैं की अगर कोई और मैसूर पर अटैक
1:13:56करता है तो वह हैदर अली को हेल्प प्रोवाइड
1:13:59करेंगे
1:14:05तो चलिए समझते हैं ऐसा क्यों होता है
1:14:14दोस्तों
1:14:151769 में फर्स्ट एंग्लो मैसूर वार और होता
1:14:18है और सिर्फ 11 साल बाद ही 1780 में मैसूर
1:14:23और ईस्ट इंडिया कंपनी फिर से आमने सामने
1:14:25होते हैं
1:14:27है इसका एक रीजन था अंग्रेजन द्वारा
1:14:29मद्रास की ट्रीटी का वायलेशन होता यह है
1:14:32की 1771 में मराठा मैसूर पर अटैक कर देते
1:14:36हैं और ऐसे में जब हैदर अली ईस्ट इंडिया
1:14:39कंपनी से हेल्प मांगते हैं तो वो हेल्प
1:14:41देने से माना कर देते हैं
1:14:43इसकी वजह से मराठा मैसूर को बहुत ज्यादा
1:14:46नुकसान पहुंचने हैं और हैदर अली को मजबूर
1:14:49होकर मराठस को 36 लाख रुपए देने पढ़ते हैं
1:14:52शांति समझौते के लिए इस वजह से हैदर अली
1:14:56ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी से बहुत ज्यादा
1:14:58नाराज थे
1:15:00लेकिन कंपनी सिर्फ यहां नहीं रुकी वो 1779
1:15:04में मैसूर की टेरिटरी माही पर अटैक कर
1:15:07देती है माही मालाबार कास्ट पर लोकेटेड था
1:15:10और हैदर अली ने इसे फ्रेंच कंपनी को दिया
1:15:12हुआ था
1:15:14माही के थ्रू ही मैसूर को फ्रेंच से
1:15:16एडवांस्ड वार मैटेरियल्स जैसे मिलता था
1:15:20इसके बदले में हैदर अली ने माही की
1:15:22प्रोटेक्शन के लिए अपने ट्रूप्स वहां
1:15:24दिप्लाई किया हुए
1:15:26अटैक के बाद हैदर अली ने भी वार की तैयारी
1:15:29शुरू कर दी
1:15:30है उन्होंने अंग्रेजन के खिलाफ मराठस और
1:15:33निजाम के साथ एलियंस बना लिया लेकिन मराठस
1:15:36और निजाम के साथ तो मैसूर के रिश्ते इतने
1:15:39अच्छे नहीं थे फिर ये एक साथ कैसे ए गए तो
1:15:42दोस्तों मराठाज हैदर अली के साथ इसलिए ए
1:15:45जाते हैं क्योंकि इस समय यानी की 1775 में
1:15:49फर्स्ट एंग्लो मराठा वार भी शुरू हो चुका
1:15:51था और अंग्रेज मराठस और हैदर अली के आम
1:15:55एनीमी बन चुके थे
1:15:57मराठस को तो ठीक पर हैदराबाद मैसूर के साथ
1:16:00कैसे ए जाता है उसका पहले रीजन था निजाम
1:16:04अंग्रेजन से नॉर्दर्न सरकार वापस लेना
1:16:06चाहते थे और दूसरा हैदर अली उन्हें
1:16:09प्रॉमिस करते हैं की निजाम के दुश्मन के
1:16:12नवाब वाला जहां पर अटैक करेंगे और कैप्चरड
1:16:16टेरिटरी को निजाम के साथ शेर
1:16:24कंपनी से हेल्प मांगते हैं
1:16:30अंदर लीडरशिप ऑफ एक्टर मुनरो
1:16:34है और दूसरी टुकड़ी कर्नल विलियम बेली के
1:16:37नेतृत्व में गुंटुर में जो की नॉर्दर्न
1:16:39सरकार कपाट था तैयार की जाति है अंग्रेजन
1:16:42का प्लेन था की यह दोनों ट्रूप्स कांजीवरम
1:16:45में मिलेंगे और मिलकर हैदर अली की आर्मी
1:16:48पर अटैक कर देंगे लेकिन हैदर अली के बेटे
1:16:51टीपू करनाल बेली को कांजीवरम से पहले ही
1:16:54बोली लर नाम की जगह पर रॉक देते हैं और
1:16:57दोनों ब्रिटिश आर्मी को कंबाइन नहीं होने
1:16:59देते
1:17:001780 में पॉलीनुर की बैटल हुई जिसमें
1:17:03इंग्लिश आर्मी को हर का सामना करना पड़ा
1:17:05और करनाल बेली ने सुरेंद्र कर दिया दूसरी
1:17:09तरफ एक्टर मंगरो की आर्मी पर हैदर अली ने
1:17:12अटैक कर दिया और हेक्टर माणुरोब भाग कर
1:17:14अपनी आर्मी के साथ वापस मद्रास पहुंच गए
1:17:17हैदर अली मद्रास जान की जगह वापस की तरफ
1:17:21जाते हैं और घेर को और मजबूत करते हैं तभी
1:17:24खबर आई है की मैसूर
1:17:26ब्रिटिश आर्मी ने कैप्चर करना शुरू कर
1:17:29दिया है उनको रोकने के लिए टीपू मालाबार
1:17:32की तरफ चले जाते हैं इसी बीच बंगाल से एक
1:17:35बहुत बड़ी ब्रिटिश आर्मी कू की लीडरशिप
1:17:38में मद्रास पहुंच जाति है
1:17:40सराय कू मद्रास पहुंचकर सबसे पहले अपनी
1:17:43डिप्लोमेटिक स्किल को उसे करके मराठस और
1:17:46निजाम को हैदर अली से अलग कर देते हैं और
1:17:50फिर 1781 में हैदर अली और कू के बीच कई
1:17:54सारे बॉटल्स होते हैं जिसमें से तीन
1:17:56इंपॉर्टेंट बॉटल्स बैटल ऑफ प्रोटॉन और
1:18:00शॉलिंगुर में सरकुट हैदर अली को हर देते
1:18:03हैं
1:18:05लेकिन इसी बीच सेवंथ दिसंबर 1782 को हैदर
1:18:09अली की कैंसर से डेथ हो जाति है उसके बाद
1:18:12उनके बेटे टीपू मैसूर के सुल्तान बनते हैं
1:18:15हैदर अली की डेथ के बाद टीपू और कंपनी के
1:18:18बीच लगभग एक और साल तक बॉटल्स में हर जीत
1:18:22का सिलसिला चला रहा इतने समय तक वार चलने
1:18:25के बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकाल रहा था
1:18:27इसलिए फाइनली दोनों पार्टी पीस करने का
1:18:30फैसला करती हैं और 1784 में
1:18:33मंगलौर साइन की जाति है
1:18:40वापस कर देती हैं इस तरह से सेकंड एंग्लो
1:18:44मैसूर वार का भी और हो जाता है
1:18:47लेकिन मैसूर और इंग्लिश कंपनी के बीच
1:18:49कनफ्लिक्ट खत्म नहीं होता और 1790 में एक
1:18:53बार फिर से दोनों के बीच वार शुरू होता है
1:18:55लेकिन थर्ड एंग्लो मैसूर वार को डिस्कस
1:18:58करने से पहले हम टीपू सुल्तान के बड़े में
1:19:00जान लेते हैं
1:19:02टीपू सुल्तान नवंबर
1:19:06टीपू सुल्तान हैदर अली ग्रेट वारियर थे
1:19:10जिन्हें टाइगर ऑफ मैसूर के नाम से भी जाना
1:19:13जाता है
1:19:14टीपू वेल एजुकेटेड थे जिन्हें एरोबिक
1:19:17परसों कैलोरीज और उर्दू का ज्ञान था
1:19:21अपने फादर हैदर अली की तरह टीपू भी एक
1:19:24एफिशिएंट मिलिट्री जनरल थे वह अपनी आर्मी
1:19:27को यूरोपीय मॉडल के बेसिस पर ऑर्गेनाइज
1:19:30करते हैं इसके साथ ही वह अपने सोल्जर को
1:19:33ट्रेन करने में फ्रेंच ऑफिसर्स की हेल्प
1:19:35भी लेते हैं
1:19:36टीपू लेवल फोर्स की इंर्पोटेंस को बहुत
1:19:38अच्छी तरह समझते थे इसलिए 1796 में वह
1:19:42बोर्ड ऑफ रियलिटी को सेटअप करते हैं उनका
1:19:45प्लेन 22 बैटलशिप की
1:19:48बड़े फिगर्स तैयार करने का था
1:19:51इसके अलावा उन्होंने मंगलौर बजे दबाव और
1:19:55मोलीदाबाद में तीन डॉकयार्ड भी बनवाई टीपू
1:19:58सुल्तान साइंस और टेक्नोलॉजी
1:20:06ऑपरेशन को एक्सप्लेन करने वाली एक
1:20:09मिलिट्री मैन्युअल लिखी थी
1:20:11टीपू लैंड रिवेन्यू सिस्टम में भी
1:20:14रिफॉर्म्स लेकर आते हैं और मैसूर में
1:20:16सेरीकल्चर को भी प्रमोट करते हैं उन्होंने
1:20:19एक स्टेट कमर्शियल कॉरपोरेशन को भी कमीशन
1:20:22किया था यूरोपीय की तरह फैक्टरीज सेटअप
1:20:25करने के लिए हम का सकते हैं की टीपू
1:20:28सुल्तान एक एबल मिलिट्री जनरल के साथ एक
1:20:31एफिशिएंट एडमिनिस्ट्रेटर भी थे
1:20:33उनका एक कोटेशन है की तू लाइव लाइक ए लायन
1:20:36पर ए दे इस फॉर बटर दें तू लाइव 100 इयर्स
1:20:39लाइक एन जाकर और अपनी लाइफ और डेथ में
1:20:42टीपू इसे पूरा भी करते हैं तो आई अब वापस
1:20:46चलते हैं टीपू सुल्तान और इंग्लिश कंपनी
1:20:48के बीच हुए थर्ड एंग्लो मैसूर वार पर
1:20:53थर्ड एंग्लो मैसूर वार 79292
1:20:59सुल्तान और अंग्रेजन के बीच कनफ्लिक्ट को
1:21:02रिजॉल्व करने के लिए काफी नहीं थी
1:21:04दोनों ही डेक्कन के रीजन में अपनी
1:21:07पॉलीटिकल सुप्रीमेसी एस्टेब्लिश करना
1:21:09चाहते थे थर्ड एंग्लो मैसूर होता है जब
1:21:13टीपू ट्रैवल को और पर अटैक कर देते हैं
1:21:16त्रवंकोर अंग्रेजन का और ईस्ट इंडिया
1:21:20कंपनी के लिए पेपर का एकमात्र सोर्स भी
1:21:26करता है यह दोनों कोचिंग स्टेट का पार्ट
1:21:29है जो की टीपू का
1:21:33इसलिए टीपू ट्रैवल कर के इस एक्ट को अपने
1:21:36सावरेन राइट्स का वायलेशन मानते हैं और
1:21:39उसे पर अटैक करते हैं इसके बाद ब्रिटिश
1:21:42त्रवंकोर की साइड लेते हुए मैसूर पर अटैक
1:21:45कर देते हैं
1:21:46इसके साथ ही निजाम और मराठा जो की टीपू की
1:21:50बढ़नी हुई पावर सेजल थे ब्रिटिशर्स को
1:21:53जॉइन कर लेते हैं
1:21:55टीपू सुल्तान जनरल मडोज के अंदर ब्रिटिश
1:21:58आर्मी को हर देते हैं
1:22:01फिर 791 में लॉर्ड कार्नवालिस आर्मी को
1:22:04लीड करते हुए श्रीरंगपट्टनम पहुंच जाते
1:22:06हैं जो टीपू की कैपिटल थी
1:22:09मराठाज और निजाम की सपोर्ट से अंग्रेज
1:22:12श्रीरंगपट्टनम पर अटैक करते हैं टीपू
1:22:15बहादुर के साथ उनका सामना करते हैं लेकिन
1:22:17तीनों की कंबाइन पावर के सामने फाइनली हर
1:22:20जाते हैं
1:22:35बड़ा महल दिल्ली और मालाबार अंग्रेजन को
1:22:38मिलते हैं जबकि तुंगभद्र और उसकी
1:22:40ट्रिब्यूटरीज के आसपास के रीजन मराठस को
1:22:43मिल जाते हैं और निजाम को रिवर कृष्णा से
1:22:46न तक का एरिया मिलता है
1:22:48है इसके अलावा और डैमेज के रूप में टीपू
1:22:51से ₹3 करोड़ भी मांगे जाते हैं जिसमें से
1:22:54हाफ अमाउंट को तुरंत पे करना था और बाकी
1:22:57को इंस्टॉलमेंट में और इसकी गारंटी के लिए
1:23:00अंग्रेज टीपू के दो बेटों को अपना होस्टेस
1:23:02बना लेते हैं थर्ड एंग्लो मैसूर वार साउथ
1:23:06में टीपू की डोमिनेंट पोजीशन को डिस्ट्रॉय
1:23:08कर देता है और वहां ब्रिटिश सुप्रीमेसी को
1:23:11एस्टेब्लिश करता है
1:23:13टीपू सुल्तान की पावर डिस्ट्रॉय तो हुई थी
1:23:15लेकिन पुरी तरह खत्म नहीं अंग्रेजन को अभी
1:23:19भी उनसे खतरा महसूस होता था इसलिए 1799
1:23:23में फिर से एक वार होता है तो चलिए उसको
1:23:26भी डिस्कस करते हैं
1:23:33टीपू सुल्तान को काफी हमिलिएट होना पड़ा
1:23:36था लेकिन फिर भी टीपू ट की सभी कंडीशंस को
1:23:40पूरा करते हैं और ब्रिटिशर्स को और
1:23:43कंपनसेशन का बच्चा हुआ अमाउंट देकर अपने
1:23:45बेटों को भी रिलीज करवा लेते हैं
1:23:48है लेकिन टीपू को अपने हमिलिएशन का बदला
1:23:51भी चाहिए था इसलिए वह 1792 से 1799 के बीच
1:23:56अपने सभी लॉसेस को रिकवर करते हैं
1:23:59और इसके साथ ही वह फ्रेंच ईस्ट इंडिया
1:24:02कंपनी से अपने रिश्ते अच्छे करते हैं इसके
1:24:05लिए वो फ्रेंच ऑफिसर्स के द्वारा मैसूर
1:24:07में 1794 में जैकोबिन क्लब की
1:24:10एस्टेब्लिशमेंट का भी सपोर्ट करते हैं
1:24:13जैकोबिन क्लब फ्रांस की एक रिवॉल्यूशनरी
1:24:15ऑर्गेनाइजेशन थी जो फ्रांस में मोनोकी की
1:24:18जगह रिपब्लिकन गवर्नमेंट चाहते थे
1:24:21टीपू खुद भी जैकोबिन क्लब के मेंबर बनते
1:24:24हैं और श्री गंगा पटनम में ट्री ऑफ
1:24:27लिबर्टी भी प्लांट करते हैं और इसी समय
1:24:29टीपू फ्रांस के नेपोलियन बोनापार्ट जो
1:24:32इजिप्ट में कैंपेन कर रहे होते हैं उनके
1:24:35साथ कांटेक्ट करते हैं वह ब्रिटिश ईस्ट
1:24:38इंडिया कंपनी के खिलाफ साथ में मिलकर
1:24:40लड़ने के लिए इनवाइट करते हैं
1:24:43इसके अलावा टीपू सुल्तान अपने
1:24:49भेजते हैं उम्मीद थी की यहां से भी उन्हें
1:24:53सपोर्ट मिलेगा और सब मिलकर ब्रिटिश का
1:24:56सफाई कर देंगे लेकिन अंग्रेजन को टीपू के
1:24:59प्लांस के बड़े में पता चल जाता है और
1:25:011798 में नए गवर्नर जनरल लॉर्ड इंडिया में
1:25:06ए चुके होते
1:25:08फ्रांस के बीच बढ़नी हुई दोस्ती को लेकर
1:25:11काफी कंसर्न थे
1:25:13टीपू की इंडिपेंडेंस को खत्म करने के लिए
1:25:16बैलंसली उन्हें सब्सिडियरी एलाइंस की
1:25:18ट्वीटी पर साइन करने के लिए कहते हैं जब
1:25:21टीपू सुल्तान ऐसी किसी भी त्रुटि पर साइन
1:25:23करने से माना कर देते हैं तब फोर्थ एंग्लो
1:25:26मैसूर वार की शुरुआत होती है
1:25:29इस वार में भी मराठाज और निजाम अंग्रेजन
1:25:32की हेल्प करते हैं क्योंकि मराठाज को टीपू
1:25:36की आदि टेरिटरी देने का प्रॉमिस किया जाता
1:25:38है और निजाम पहले ही अंग्रेजन के साथ
1:25:41सब्सिडियरी एलाइंस साइन कर चुके थे इन
1:25:441798
1:25:46यह वार 17th अप्रैल 1799 को शुरू होती है
1:25:49और फोर्थ में 1799 को श्री रंग पटनम के फल
1:25:53के साथ खत्म हो जाति है
1:25:56टीपू अपनी कैपिटल को बचाने के लिए बहादुर
1:25:59से लड़ते हैं और इसमें उनकी मृत्यु हो
1:26:01जाति है उनकी पुरी ट्रेजरी पर अंग्रेज
1:26:04कब्जा कर लेते
1:26:10मराठस को ऑफर करते हैं लेकिन मराठाज
1:26:13उन्हें लेने से माना कर देते
1:26:17और गरम गोंडा डिस्ट्रिक्ट दिए जाते हैं और
1:26:21ब्रिटिश अपने पास का नारा वायानाड
1:26:23कोयंबटूर द्वारा
1:26:34कृष्णा राजा थे थर्ड को दे दिया जाता है
1:26:37कृष्णा राजद ए थर्ड अंग्रेजन के साथ
1:26:40सब्सिडियरी एलाइंस भी साइन कर लेते हैं
1:26:43कंक्लुजन तो दोस्तों आज हमने समझा की कैसे
1:26:48मैसूर और इंग्लिश कंपनी के बीच लगभग 32
1:26:51सालों तक कनफ्लिक्ट चला और इनके बीच कर
1:26:54वर्स हुए इसके साथ ही अंग्रेज कैसे इंडियन
1:26:57स्टेटस की आपस की रिवरी का फायदा उठाते
1:27:00हैं ये भी हमें एंग्लो मैसूर वर्स में
1:27:02देखने को मिलता है बिना मराठाज और निजाम
1:27:05की हेल्प के अंग्रेज शायद मैसूर को कभी
1:27:08नहीं जीत पाते और हमने टाइगर ऑफ मैसूर कहे
1:27:12जान वाले टीपू सुल्तान के बड़े में भी
1:27:14जाना
1:27:19चाहते हैं की मराठा अंपायर जिसके फाउंडर
1:27:21छत्रपति शिवाजी महाराज थे जिसे बालाजी
1:27:24विश्वनाथ और बाजीराव वन जैसे एंबिशियस
1:27:27पेशवा और भी स्ट्रांग पावर बना देते हैं
1:27:29उसका अल्टीमेटली डिक्लिन कैसे होता है आज
1:27:32हम इसी क्वेश्चन का आंसर अपनी इस वीडियो
1:27:34के थ्रू समझेंगे हम डिस्कस करेंगे की कैसे
1:27:38ब्रिटिश के आने के बाद उनका और मराठस का
1:27:41कनफ्लिक्ट शुरू होता है दोनों पावर के बीच
1:27:43हुए एंग्लो मराठा वर्स को भी समझेंगे और
1:27:46देखेंगे की आखिर मराठा अंपायर के डिक्लिन
1:27:48के पीछे क्या रीजन थे तो आई शुरू करते हैं
1:27:52सबसे पहले जानते हैं की ब्रिटिश के साथ
1:27:54कनफ्लिक्ट से जस्ट पहले मराठा अंपायर की
1:27:57क्या सिचुएशन थी
1:27:59मराठा अंपायर ड्यूरिंग सेकंड हाफ का थे
1:28:0218th सेंचुरी
1:28:04दोस्तों आपने थर्ड बैटल ऑफ पानीपत के बड़े
1:28:06में तो सुना ही होगा यह बैटल 14th जनवरी
1:28:091761 को मराठस और अफगान रोलर अहमद शाह
1:28:13अब्दाली के फोर्सेस के बीच हुई थी पानीपत
1:28:16में मराठस की हर उनके लिए एक डिजास्टर
1:28:19साबित होती है मराठस पानीपत की बैटल में
1:28:22लगभग
1:28:2328000 सोल्जर और सदाशिव राव और विश्वास
1:28:26राव जैसे इविल मिलिट्री कमांडर्स को को
1:28:28देते हैं इसके साथ ही उनकी पॉलीटिकल
1:28:30प्रेस्टीज को भी बड़ा झटका लगता है इस
1:28:33बैरल के समय उनके पेशवा थे बालाजी बाजीराव
1:28:36और पानीपत में मिली हर के सदमे की वजह से
1:28:39जून 1761 में इनकी भी मृत्यु हो जाति है
1:28:43तब फिर इनके 17 साल
1:28:48और स्टेट्समैन थे 11 साल के छोटे से
1:28:51पीरियड में ही माधवराव वन पानीपत की बैटल
1:28:54के बाद कोई हुई मराठा पावर को रिस्टोर
1:28:56करने में कामयाब होते हैं वो 1762 में
1:29:00हैदराबाद में निजाम को हर देते हैं मैसूर
1:29:03के हैदर अली को 1767 में ट्रिब्यूट पे
1:29:06करने के लिए मजबूर कर देते हैं और साथ ही
1:29:08नॉर्थ इंडिया में रोहिलास को हराकर राजपूत
1:29:11स्टेटस और जाट के को सबजूगेट करके वहां
1:29:14अपने कंट्रोल को रिसेट करते हैं इस तरह एक
1:29:17बार फिर से मराठा अंपायर पावरफुल होने
1:29:19लगता है की तभी कहानी में एक और ट्वीट आता
1:29:22है
1:29:231772 में माधवराव वन की टीवी की बीमारी के
1:29:27करण मृत्यु हो जाति है इसके बाद मराठस के
1:29:30बीच सक्सेशन को लेकर कनफ्लिक्ट शुरू होता
1:29:32है और यही फर्स्ट एंग्लो मराठा वार का
1:29:35बैकग्राउंड बंता है तो आई समझते हैं इस
1:29:38कनफ्लिक्ट और फर्स्ट एंग्लो मराठा वार को
1:29:42फर्स्ट एंग्लो मराठा वार 1775 तू 1782
1:29:47माधवराव की मृत्यु के बाद उनके भाई नारायण
1:29:50राव और अंकल रघुनाथ राव के बीच पावर के
1:29:53लिए तास शुरू हो जाता है नारायण राव पेशवा
1:29:57तो बन जाते हैं लेकिन 1773 में ही उनको
1:30:00मारवा दिया जाता है रघुनाथ राव को लगता है
1:30:03की नारायण राव की मृत्यु के बाद तो पेशवा
1:30:05की गति उनको ही मिलेगी लेकिन उनके सारे
1:30:08अरमानों पर जल्द ही पानी फिर जाता है ऐसा
1:30:10इसलिए क्योंकि नाना फडणवीस और मजी सिंधिया
1:30:14जैसे प्रॉमिनेंट मराठा जनरल्स की काउंसिल
1:30:16पेशवा की गाड़ी के लिए सवाई माधवराव को
1:30:19सपोर्ट करने का डिसीजन लेती है
1:30:23और इसे 12 भाई काउंसिल कहा जाता था इसके
1:30:26लीडर नाना फडणवीस थे
1:30:29सवाई माधवराव का जन्म नारायण राव की
1:30:31मृत्यु के कुछ मीना बाद हुआ था और वह
1:30:34सिर्फ 40 दिन के ही थे जब उन्हें पेशवा
1:30:37बना दिया जाता है इन्हें माधवराव तू के
1:30:39नाम से भी जाना जाता है इसके बाद
1:30:41फ्रस्ट्रेटेड होकर रघुनाथ राव 1775 में
1:30:45ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की बॉम्बे
1:30:47काउंसिल से मिलते हैं और पेशवा बने के लिए
1:30:49उनसे हेल्प मांगते हैं कंपनी हेल्प करने
1:30:52के बदले में सेल सेट और बैसीन को लेने की
1:30:55डिमांड करती है और साथ ही सूरत और भरूच
1:30:58जिला से मिलने वाले रिवेन्यू में भी शेर
1:31:01मांग लेती है रघुनाथ राव इसके लिए एग्री
1:31:04हो जाते हैं और बदले में कंपनियां ने अपने
1:31:06251 सोल्जर दे देती है इस एग्रीमेंट को
1:31:09ट्रीटी का सूरत कहा जाता है यहां से
1:31:12शुरुआत होती है फर्स्ट एंग्लो मराठा वार
1:31:14की स्तुति कंपनी को भी सेंड कर दी जाति है
1:31:18क्योंकि रेगुलेटिंग एक्टिव 1773 के बाद
1:31:22बंगाल के पास मुंबई और मद्रास काउंसिल के
1:31:25सुपरविजन की पावर थी इसलिए किसी भी डिसीजन
1:31:28का बंगाल पेंसिल से रतीफाई होना जरूरी था
1:31:30इधर 15थ मार्च 1775 को रघुनाथ राव और
1:31:34करनाल की टीम की लीडरशिप में ब्रिटिश
1:31:37फोर्सेस बैटल के लिए मराठाज की तरफ बढ़ाने
1:31:39लगती है मराठस की तरफ से लीड कर रहे थे
1:31:42हरि पेंट के दोनों बैटलफील्ड में
1:31:45आमने-सामने होते हैं और फर्स्ट एंग्लो
1:31:47मराठा वार की शुरुआत होती है
1:31:49मराठस ने गोरिल्ला वार टेक्निक्स का उसे
1:31:52करके ब्रिटिश फोर्सेस की हालात खराब कर दी
1:31:54यह वार अभी चल ही रही थी की कंपनी की
1:31:57बंगाल काउंसिल के पास सूरत क्रिटिकल लेटर
1:32:00पहुंच जाता है गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग
1:32:02ट्रीटी का सूरत को कंडोम करते हैं और
1:32:05मुंबई काउंसिल को वार रोकने का ऑर्डर दे
1:32:07देते हैं और साथ ही मराठस को भी मैसेज
1:32:10भेजते हैं की वह वार ना करके उनसे एक
1:32:13फ्रेंडली ट्वीटी करना चाहते
1:32:16उनको मराठस के पास भेजते हैं और 1776 में
1:32:21ट्रीटी का पुरंदर साइन करते हैं
1:32:28साथ ही ये प्रॉमिस करते हैं की वो मराठस
1:32:31के किसी भी रेबल को सपोर्ट नहीं करेंगे
1:32:33बदले में वार के टाइम मराठाज ने जिन
1:32:36ब्रिटिश टेरिटरीज को जीत लिया था वो
1:32:38ब्रिटिशर्स को वापस मिल जाएगी लेकिन
1:32:40ट्रीटी का पुरंदर के बाद भी फर्स्ट एंग्लो
1:32:43मराठा वार खत्म नहीं होती क्योंकि एक तरफ
1:32:45तो बॉम्बे काउंसिल ने रघुनाथ राव को अभी
1:32:48भी शरण दी हुई थी और दूसरी तरफ इंग्लैंड
1:32:51में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स पुरंदर की
1:32:52ट्वीटी को एक्सेप्ट नहीं करते इस तरह फिर
1:32:55से वार शुरू हो जाता है ब्रिटिशर्स मराठस
1:32:58पर अटैक करते हैं और मराठा आर्मी को खुद
1:33:01महाद्वीप सिंधिया लीड करते हैं
1:33:03तलेगांव में दोनों के बीच बैटल होता है और
1:33:06ब्रिटिश को यहां हर मिलती है ब्रिटिश
1:33:08आर्मी यहां से भाग कर वडगांव पहुंच जाति
1:33:11है लेकिन मजी सिंधिया की आर्मी वहां भी
1:33:14उन्हें घर लेती है और 1779 में ब्रिटिश
1:33:17आर्मी सुरेंद्र कर देती है यहां पर ही
1:33:20ट्वीटी ऑफ बड़गांव साइन की जाति है जिसके
1:33:22अकॉर्डिंग ब्रिटिश गवर्नमेंट ने मराठाज की
1:33:25जितनी भी टेरिटरीज होती हैं 17 125 से सब
1:33:30वापस करनी पड़ती हैं यह ट्रीटी बॉम्बे
1:33:33काउंसिल और मराठस के बीच हुई थी लेकिन एक
1:33:36बार फिर वारेन हेस्टिंग्स बॉम्बे काउंसिल
1:33:38की ट्वीटी को एक्सेप्ट नहीं करते और
1:33:40कोलकाता से तीन डिफरेंट ब्रिटिश फोर्सेस
1:33:43को भेज देते हैं एक कर्नल गोदादर की
1:33:45लीडरशिप में दूसरी कैप्टन परफॉर्म की और
1:33:48तीसरी जनरल केमच की लीडरशिप में फरवरी
1:33:521779 में करनाल गोदर अहमदाबाद को कैप्चर
1:33:55कर लेते हैं और फिर अगस्त 1780 में कैप्टन
1:33:58परफॉर्म ग्वालियर को इसके बाद दिसंबर 1780
1:34:02में करनाल गॉड ब्लेसिंग को भी कैप्चर कर
1:34:04लेते हैं और फरवरी 1781 में जनरल कबक ने
1:34:08महाजी सिंधिया को भी हर दिया
1:34:11है इसके बाद वारेन हेस्टिंग्स मराठस के
1:34:13साथ ट्वीटी साइन करने का डिसीजन लेते हैं
1:34:15यह थी ट्रीटी का सालबाई जो फर्स्ट एंग्लो
1:34:19मराठा वार की सबसे इंपॉर्टेंट ट्रीटी थी
1:34:21इसके अकॉर्डिंग सेल्सियस के पास ही रहेगा
1:34:25लेकिन ट्रीटी का पुरंदर के बाद एक्वायर की
1:34:27हुई बाकी सभी मराठा टेरिटरी उन्हें वापस
1:34:30कर दी जाएगी साथ ही ब्रिटिशर्स रघुनाथ राव
1:34:33का सपोर्ट नहीं करेंगे और पेशवा रघुनाथ
1:34:36राव को पेंशन दे देंगे इसके अलावा यह भी
1:34:39डिसाइड होता है की पेशवा और किसी भी
1:34:41यूरोपियन पावर को सपोर्ट नहीं करेंगे इस
1:34:44तरह ट्रीटी का सालबाई से 1782 में फाइनली
1:34:48फर्स्ट एंग्लो मराठा वार का और होता है
1:34:50सालबाई की ट्वीटी के बाद मराठस और ब्रिटिश
1:34:53के बीच 20 साल तक तो कोई कनफ्लिक्ट नहीं
1:34:56होता यह टाइम ब्रिटिश
1:34:59को कंप्लीट करने में लगाते हैं और दूसरी
1:35:02तरफ मराठा कांफिडूरीसी में दरार और ज्यादा
1:35:05बाढ़ जाति है
1:35:06कनफेडरेसी की बात करें तो दोस्तों पेशवा
1:35:10बाजीराव वन के टेन्योर में मराठा अंपायर
1:35:12को कर पावरफुल मराठा चिप्स के बीच डिवाइड
1:35:15कर दिया गया था ये थे ग्वालियर के सिंधिया
1:35:18नागपुर के भोसले इंदौर के होलकर और बड़ौदा
1:35:21के गायकवाड
1:35:23यह सभी चिप्स मिलकर मराठा कांफिडोसी बनाते
1:35:26थे और पेशवा कनफेडरेसी के ऑफिशल हेड होते
1:35:30थे लेकिन पावर स्ट्रगल और म्युचुअल जूलूस
1:35:33के चलते चिप्स के बीच हमेशा कनफ्लिक्ट चला
1:35:36राहत था यह कनफ्लिक्ट पेशवा के वीक होने
1:35:39पर और भी ज्यादा बाढ़ जाता है जैसे की
1:35:42सेकंड एंग्लो मराठा वार के टाइम देखने को
1:35:44मिलता है तो आई सेकंड एंग्लो मराठा वार को
1:35:48डिस्कस करते हैं
1:35:50सेकंड एंग्लो मराठा वार 18002 तू 18005
1:35:54दोस्तों सेकंड एंग्लो मराठा वार को डिस्कस
1:35:58करने से पहले इसका बैकग्राउंड जान लेते
1:36:00हैं
1:36:001795 में पेशवा माधवराव सेकंड सुसाइड
1:36:04कमेंट कर लेते हैं इनकी आगे सिर्फ 21 साल
1:36:07थी और तब तक इनकी कोई संतान भी नहीं थी
1:36:10रघुनाथ राव जो पेंशन लेकर रिटायर हो चुके
1:36:13थे उनके तीन बेटे थे बाजीराव सेकंड सीमा
1:36:17जी राव सेकंड और अमृत राव इन कंडीशंस में
1:36:20बाजीराव सेकंड पेशवा बनते हैं बाजीराव
1:36:23सेकंड तो एक वीक पेशवा थे लेकिन नाना
1:36:26फडणवीस इनके के मिनिस्टर बनकर मराठा पावर
1:36:30को संभाले हुए थे लेकिन 1800 में नाना
1:36:33फडणवीस की मृत्यु हो जाति है और इसके बाद
1:36:35मराठा कांफिडोसी को संभालने वाला कोई भी
1:36:38नहीं बचत मराठा कांफिडोसी के के के बीच
1:36:41आपस में ही वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो जाति
1:36:43है उसे टाइम सबसे पावरफुल के थे इंदौर के
1:36:47जसवंत राव होलकर और ग्वालियर के यात्राओं
1:36:50सिंधिया होलकर और सिंधिया के बीच आपस में
1:36:53टकराव होते रहते थे और इसमें पेशवा
1:36:55सिंधिया को सपोर्ट कर रहे थे जसवंत राव
1:36:58होलकर बिना पेशवा की परमिशन के नॉर्थ की
1:37:01तरफ टेरिटरी एक्वायर करने के लिए कैंपेन
1:37:03कर रहे थे इसके साथ ही उन्होंने अपने भाई
1:37:06बिट्टू जी होलकर को साउथ की तरफ कैंपेन के
1:37:09लिए भेजो था लेकिन विठू जी पेशवा की ही
1:37:12टेरिटरी को लूटने लगता हैं तब पेशवा
1:37:15बाजीराव सेकंड उन्हें अरेस्ट कर लेते हैं
1:37:17और ऑर्डर देते हैं की बिट्टू जी होलकर को
1:37:19हाथी के पैरों से कुचलकर मारवा दिया जाए
1:37:22यह सुनकर जसवंत राव होलकर आज बाबला हो
1:37:25जाते हैं और 18002 में सिंधिया और पेशवा
1:37:29की कंबाइंड आर्मी पर अटैक कर देते हैं
1:37:31होलकर इनकी आर्मी को पुणे के पास बुरी तरह
1:37:34से हर देते हैं
1:37:36होलकर के डर की वजह से बाजीराव सेकंड पूना
1:37:39छोड़कर वैसे ही चले जाते हैं जसवंत राव
1:37:43होलकर पुणे में अपने करीबी विनायक राव को
1:37:46पेशवा डिक्लेअर कर देते हैं विनायक राव
1:37:48अमृत राव के बेटे और बाजीराव सेकंड के
1:37:51भतीजे थे बाजीराव सेकंड वापस पेशवा बने के
1:37:55लिए ब्रिटिश से हेल्प मांगते हैं यानी की
1:37:57जो गलती उनके पिताजी रघुनाथ राव ने की थी
1:37:59ये भी वही करते हैं मराठस के इंटरनल मटर
1:38:03में ब्रिटिश इंटरफ्रेंस को इनवाइट करके
1:38:06बाजीराव सेकंड और ब्रिटिशर्स के बीच 18002
1:38:10में साइन होती है 20 साल बाद यह मराठस और
1:38:14ब्रिटिशर्स के बीच फिर से एक इंपॉर्टेंट
1:38:16ट्रीटी थी इसके प्रोविजंस के अकॉर्डिंग
1:38:18सूरत ब्रिटिशर्स को मिलन था और साथ ही
1:38:21मराठाज हैदराबाद के निजाम से जो चौथ की
1:38:24डिमांड करते थे वह भी बैंड करनी थी इसके
1:38:27बदले में कंपनी 6000 ट्रूप्स बाजीराव
1:38:29सेकंड को दे रही थी जो पेशवा बने में तो
1:38:32उनकी हेल्प करने ही वाले थे लेकिन उसके
1:38:34बाद भी बाजीराव सेकंड को इन्हें अपनी
1:38:36मिलिट्री में ही रखना था और इनका पूरा
1:38:38खर्चा उठाना था दूसरे शब्दों में कहें तो
1:38:41बाजीराव सेकंड ब्रिटिशर्स के साथ एक
1:38:43सब्सिडियरी एलाइंस की त्रुटि साइन कर लेते
1:38:46हैं जिसमें प्रचारक लॉर्ड वालेस्ले थे
1:38:4813th में 18003 को ब्रिटिशर्स के
1:38:52प्रोटेक्शन में बाजी राव सेकंड फिर से
1:38:54पेशवा बन गए लेकिन पेशवा अब ब्रिटिशर्स के
1:38:57कंट्रोल में हो गए थे सब्सिडियरी एलाइंस
1:38:59की ये ट्रीटी किसी भी मराठा के को पसंद
1:39:02नहीं ए रही थी क्योंकि उन्हें अपनी फ्रीडम
1:39:05बहुत पसंद थी और सब्सिडियरी एलाइंस साइन
1:39:07करके पेशवा ने मराठस की फ्रीडम एक तरह से
1:39:11ब्रिटिश को दे दी थी और यही करण बंता है
1:39:14सेकंड एंग्लो मराठा वार का सिंधिया और
1:39:17भोसले कोशिश करते हैं की ब्रिटिश को हराकर
1:39:20पेशवा को इस ट्रीटी के दाल से बाहर निकाला
1:39:22जाए लेकिन उनकी यह कोशिश असफल रहती है
1:39:27और सभी मराठा चिप्स के साथ अलग-अलग ट साइन
1:39:31करते हैं घोसला के साथ 17th दिसंबर 183 को
1:39:36ट्रीटी ऑफ देवगांव साइन होती है और
1:39:38सिंधिया के साथ 30th दिसंबर 183 को ट्रीटी
1:39:43का सुरजी अंजनगांव सिंधिया से ब्रिटिशर्स
1:39:46को रोहतक गंगा यमुना द्वारा गुड़गांव
1:39:48दिल्ली आगरा रीजन ब्रोच गुजरात के कुछ
1:39:52डिस्ट्रिक्ट बुंदेलखंड का कुछ पार्ट और
1:39:54अहमदनगर का फोर्ट मिलता है और भोसले से
1:39:57घटक बालेश्वर और वर्धारी भर के वेस्ट का
1:40:00एरिया इन्हें मिल जाता है
1:40:02184 में होलकर भी ब्रिटिशर्स पर अटैक करते
1:40:06हैं लेकिन 185 तक यह भी हर जाते हैं और
1:40:1018006 में इनके साथ होती है ट्रीटी का
1:40:13राजपुर घाट होलकर से ब्रिटिश को टोंक
1:40:16बूंदी और रामपुर की टेरिटरी मिलती है
1:40:19दोस्तों यहां समझना वाली बात यह है की सभी
1:40:23मराठा चिप्स अलग रहे थे इन्होंने यूनाइटेड
1:40:36और का और हो जाता है इस वार में मराठस को
1:40:39काफी ज्यादा टेरिटरीज का लॉस होता है और
1:40:41साथ ही मराठा चिप्स सब्सिडियरी एलाइंस भी
1:40:44एक्सेप्ट कर लेते हैं उनकी पोजीशन अब
1:40:46कंपनी की तुलना में कमजोर हो जाति है
1:40:48लेकिन मराठस और ब्रिटिशर्स के बीच का
1:40:51कनफ्लिक्ट यहां भी खत्म नहीं होता और
1:40:54दोनों के बीच थर्ड एंग्लो मराठा वार होती
1:40:56है तो चलिए अब थर्ड एंग्लो मराठा वार को
1:40:59डिस्कस करते हैं थर्ड एंग्लो मराठा वार
1:41:021817 तू 18 18 दोस्तों थर्ड एंग्लो मराठा
1:41:06वार होती है पिंडारी इसके इश्यूज पर
1:41:09मराठस जब भी किसी बैटल या एक्सपेंडिचर पर
1:41:12जाते थे तो पिंडारी को भी अपनी सी के साथ
1:41:15रखते थे पिंडारी इस बेसिकली मिलिट्री
1:41:18प्लंडर हुआ करते थे जो मराठा आर्मी के साथ
1:41:21जोड़ने थे
1:41:23मिशनरीज मतलब की यह लोग मराठा से कोई भी
1:41:27फीस चार्ज नहीं करते थे बल्कि जितने के
1:41:29बाद यह अपना हिस्सा उसे एरिया को ल कर
1:41:32वसूल करते थे मराठस की तरफ से इन्हें इस
1:41:35बात की पोजीशन थी पिंडारी इसको यह कास्ट
1:41:38नहीं थी बल्कि इनमें अलग-अलग कास्ट और
1:41:41क्लासेस के लोग शामिल होते थे अब होता यह
1:41:44है की सेकंड एंग्लो मराठा वार के बाद
1:41:46मराठस काफी वीक हो जाते हैं ब्रिटिश ईस्ट
1:41:49इंडिया कंपनी का कंट्रोल उनके ऊपर बढ़ता
1:41:52जा रहा था और ऐसे में मराठाज जब कोई
1:41:55एक्सपीडिशन कर ही नहीं रहे थे तो पिंडारी
1:41:57को भी मराठा से कोई कम नहीं मिल का रहा था
1:42:00अब रेगुलर एंप्लॉयमेंट ना मिलने के करण
1:42:03पिंडारी ने आसपास की टेरिटरीज को प्लंडर
1:42:06करना शुरू कर दिया उन्होंने हैदराबाद के
1:42:09निजाम कर्नाटक के नवाब मालाबार और ब्रिटिश
1:42:12ईस्ट इंडिया कंपनी की टेरिटरीज में भी
1:42:14लूटपाट कर दी इससे परेशान होकर ब्रिटिश
1:42:17कंपनी के गवर्नर जनरल वारेन हस्त ने
1:42:201817 में पिंडारी पर अटैक कर दिया पिंडारी
1:42:24पर अटैक एक तरह से मराठा सॉवरेन्टी पर
1:42:26अटैक और मराठा इसका जवाब ब्रिटिश कंपनी को
1:42:30देना चाहते थे इसके साथ ही सेकंड एंग्लो
1:42:33मराठा वार के टाइम जो सब्सिडियरी एलाइंस
1:42:35ट्वीट हुई थी उसके अकॉर्डिंग ब्रिटिश
1:42:38कंपनी ने हर एक मराठा के के कोर्ट में
1:42:41रेजिडेंट यानी की ब्रिटिश एजेंट अप्वॉइंट
1:42:43कर दिया था और ये रेजिडेंस मराठा चिप्स पर
1:42:47नजर रखते थे की वो कोई कंस्पायरेसी ना कर
1:42:49पाएं मराठा इन रेजिडेंस के इंटरफेरेंड से
1:42:52भी परेशान थे ऐसे में ब्रिटिश मराठस पर
1:42:56पिंडारी इसको हेल्प करने का एक्विजिशन भी
1:42:58लगा देते हैं तब ईश्वर मराठा चिप्स डिसाइड
1:43:01करते हैं की उन्हें ब्रिटिशर्स का मिलकर
1:43:04सामना करना चाहिए पेशवा बाजीराव तू मल्हार
1:43:08राव होलकर और मधु जी भोसले तू एक यूनाइटेड
1:43:11फ्रंट का फॉर्मेशन करते हैं लेकिन एक बार
1:43:13फिर से ब्रिटिशर्स की जीत होती है और
1:43:16मराठस के साथ फिर से साइन की जाति हैं
1:43:19सिंधिया के साथ 1871 में ग्वालियर साइन की
1:43:24जाति है
1:43:32पेशवा को गाड़ी से हटा दिया जाता है और
1:43:35पेंशन अगर कानपुर के पास बिठूर भेज दिया
1:43:38जाता है उनकी ज्यादातर टेरिटरी बॉम्बे
1:43:41प्रेसीडेंसी का हिस्सा बन जाति है और इस
1:43:44तरह थर्ड एंग्लो मराठा वार के साथ मराठा
1:43:47अंपायर का भी और हो जाता है सभी मराठा
1:43:50चिप्स ब्रिटिशर्स के आगे सुरेंद्र कर देते
1:43:52हैं और इसके साथ ही पंजाब और सिंह के
1:43:55अलावा पुरी इंडियन टेरिटरी पर ब्रिटिश का
1:43:58डायरेक्ट या इनडायरेक्ट कंट्रोल
1:43:59एस्टेब्लिश हो जाता है दोस्तों ये तो बात
1:44:03हुई एंग्लो मराठा वर्स की अब ऐसे कुछ
1:44:06ओवरऑल रीजंस को भी समझते हैं जिनकी वजह से
1:44:08मराठस को ब्रिटिशर्स से हर का सामना करना
1:44:11पड़ता है
1:44:12रीजंस पर मराठा लॉस
1:44:15मराठस की हरकत सबसे बड़ा करण था मराठा
1:44:18चिप्स के बीच यूनिटी ना होना
1:44:36जुडिशल की साइड लेने लगता हैं इसके अलावा
1:44:38मराठा ब्रिटिशर्स की पॉलीटिकल और
1:44:41डिप्लोमेटिक स्ट्रैंथ को भी नहीं समझ पे
1:44:43हमने देखा की कैसे हर बार मराठा लीडर्स
1:44:46ब्रिटिशर्स के साथ ट्रीटी के झांसी में ए
1:44:49जाते हैं इसके अलावा मराठाज की हर के पीछे
1:44:52और भी रीजंस थे जैसे की मराठा चिप्स की इन
1:44:55एक्ट लीडरशिप उनका इनफीरियर मिलिट्री
1:44:58सिस्टम वो गोरिल्ला वाॅरफेयर में तो माहिर
1:45:00थे लेकिन ब्रिटिशर्स के साथ आमने-सामने की
1:45:03बैटल में नहीं इसके साथ ही ब्रिटिशर्स की
1:45:06सुपीरियर डिप्लोमेटिक स्किल जिसकी हेल्प
1:45:08से वो ये इंश्योर कर लेते हैं की हैदराबाद
1:45:11या मैसूर जैसे स्टेटस मराठस और ब्रिटिशर्स
1:45:14के अफेयर्स में कोई इंटरफ्रेंस ना करें यह
1:45:17मराठस की हर का एक करण कहानी जा शक्ति हैं
1:45:20इन सभी रीजंस की वजह से अल्टीमेटली मराठस
1:45:24ब्रिटिश से हर जाते हैं और एंग्लो मराठा
1:45:26वर्स के बाद उनके अंपायर का फाइनल डिक्लिन
1:45:29होता है
1:45:30कनक्लूडिंग रिमार्क्स दोस्तों इस तरह
1:45:34ब्रिटिश ने इंडिया की एक और इंपॉर्टेंट
1:45:36पावर मराठस को भी रास्ते से हटा दिया
1:45:39बंगाल और मैसूर पर उनकी जीत को हम पहले ही
1:45:43कर कर चुके हैं जैसा की हमने पहले भी
1:45:45बताया की अब पंजाब और सिंह को छोड़कर
1:45:48ब्रिटिशर्स का कंट्रोल ऑलमोस्ट पूरे
1:45:50इंडिया पर हो चुका था कुछ एरियाज पर
1:45:53डायरेक्ट कंट्रोल था और कुछ पर इनडायरेक्ट
1:45:55जैसे की अवध हैदराबाद ईटीसी पर सब्सिडियरी
1:45:59एलाइंस की हेल्प से पंजाब और सिंह की उनकी
1:46:02जीत को हम अपनी आने वाली वीडियो में कर
1:46:05करेंगे
1:46:10ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी लगभग पुरी
1:46:13इंडियन टेरिटरी पर अपना डायरेक्ट या
1:46:15इनडायरेक्ट कंट्रोल एस्टेब्लिश कर चुकी थी
1:46:18लेकिन इंडिया का नॉर्थ वेस्ट एरिया यानी
1:46:20की सिंह प्रांत और सिख अंपायर अभी भी उसकी
1:46:24कंट्रोल से बाहर था आज हम इन्हीं दोनों
1:46:27एरियाज के बड़े में बात करने वाले हैं हम
1:46:29जानेंगे की इनके साथ कंपनी के रिलेशंस
1:46:32कैसे थे कंपनी के लिए इन एरियाज की क्या
1:46:35इंर्पोटेंस थी और ऐवेंंचुअली कंपनी इन्हें
1:46:38कब और कैसे अनेक कर लेती है तो आई शुरू
1:46:41करते हैं सबसे पहले बात करते हैं जिंदगी
1:46:49दोस्तों सिंह सिंधु यानी की सिंदरी बार के
1:46:52किनारे पर बस हुआ है 18th सेंचुरी से ही
1:46:55सिंह को कुछ बलूची चीज कलेक्टिवली रूल कर
1:46:58रहे थे जिन्हें अमिरज़ कहा जाता था ईस्ट
1:47:02इंडिया कंपनी ने यहां अपनी पहले फैक्ट्री
1:47:051775 में छता नाम की जगह पर एस्टेब्लिश की
1:47:08थी लेकिन 1792 में पॉलीटिकल और रेस्ट और
1:47:12फिजिकल प्रॉब्लम्स की वजह से उन्होंने इस
1:47:14फैक्ट्री को छोड़ दिया था इसके बाद 189
1:47:17में लॉर्ड मिंटो वन ने सिंह के अमीरस के
1:47:20साथ ट्विटर वेटरनल फ्रेंडशिप साइन की थी
1:47:25प्रॉमिस करते हैं की वो सिंह में फ्रेंच
1:47:28को सेटल नहीं होने देंगे
1:47:34इस बार अमेरिकंस को भी सिंह से बाहर रखना
1:47:37का प्रोविजन ट्रीटी में एड कर दिया जाता
1:47:39है
1:47:40कुछ समय बाद ही कंपनी का ध्यान सिंधु रिवर
1:47:43की कमर्शियल और नेवीगेशनल वैल्यू की तरफ
1:47:45आकर्षित होता है
1:47:471832 में विलियम बेंटिक आमिर्स के साथ एक
1:47:51नई कमर्शियल त्रुटि साइन करने के लिए
1:47:53करनाल पोर्टिंग को सिंह भेजते हैं साथ ही
1:47:57लेफ्टिनेंट डेल होस्ट को लोअर इंडस्ट्रीज
1:47:59के कोर्स का सर्वे करने के लिए भेज दिया
1:48:01जाता है
1:48:04फॉलोइंग टर्म्स पर ट्रीटी साइन करते हैं
1:48:07पहले पॉइंट था की इंग्लिश ट्रैवल्स और
1:48:10मरचेंट्स को सिंह से फ्री पैसेज दिया
1:48:12जाएगा और रिवर सिंधु को कमर्शियल परपज के
1:48:15लिए उसे करने दिया जाएगा लेकिन वर्स के
1:48:17लिए कोई भी शिव या गुड्स सिंधु के थ्रू
1:48:20नहीं ले जाएंगे दूसरा पॉइंट था की सिंह
1:48:24में कोई भी इंग्लिश मर्चेंट सेटल नहीं
1:48:26होगा और ट्रैवल्स को पासपोर्ट रखना होगा
1:48:28तीसरा की
1:48:32मिलिट्री न्यूज़ या टूल्स की डिमांड नहीं
1:48:35राखी जाएगी
1:48:36है इसके साथ ही फ्रेंडशिप की पुरानी टूटीज
1:48:38को भी कंफर्म किया गया और प्रॉमिस किया
1:48:40गया की दोनों पार्टी एक दूसरे के एरियाज
1:48:43को एनएक्स करने की कोशिश नहीं करेंगे और
1:48:46आखिर में करनाल पॉटिंगर कंपनी के पॉलीटिकल
1:48:49एजेंट की तरह सिंह में रहेंगे इसके बाद
1:48:521839 में सिंह के अमीरस को एक बार फिर से
1:48:55फोर्स करके उनके साथ सब्सिडियरी एलाइंस की
1:48:58त्रुटि साइन की जाति है यहां भी
1:49:00ब्रिटिशर्स यह प्रॉमिस करते हैं की सिंह
1:49:02को कभी एनएक्स नहीं करेंगे दोस्तों 1832
1:49:06और फिर 1839 की ट्वीटी में तो प्रॉमिस
1:49:09किया गया था की सिंह का कभी एनेक्सेशन
1:49:11नहीं होगा फिर ऐसा क्या हुआ की 1843 में
1:49:15ब्रिटिशर्स सिंह को मिक्स कर लेते हैं आई
1:49:18जानते हैं
1:49:24दोस्तों सिंह का एनेक्सेशन करने के पीछे
1:49:27स्ट्रैटेजिक और कमर्शियल दोनों ही रीजंस
1:49:29थे पहले स्ट्रैटेजिक रीजंस को समझते हैं
1:49:3442 तक एंग्लो अफगान वार हुआ था जिसमें
1:49:38ब्रिटिश की बुरी तरह हर हो जाति है इस
1:49:41हार्ड से ब्रिटिश को बहुत बड़ा झटका लगता
1:49:43है अपनी कोई हुई प्रेस्टीज को वापस अपने
1:49:46के लिए कंपनी को जरूर थी एक जीत की और
1:49:50जितने के लिए पंजाब और सिंधी बच्चे हुए थे
1:49:53लेकिन पंजाब में राजा रंजीत सिंह जैसे
1:49:56स्ट्रांग रोलर का रूल था कंपनी उनके
1:49:58अगेंस्ट रिस्क नहीं लेना चाहती थी इसलिए
1:50:01वह अपना निशाना बनाते हैं पहले से ही
1:50:03कमजोर सिंह को यह तो हुआ पहले स्ट्रैटेजिक
1:50:06रीजन एक और स्वीटी करण था जिंदगी अनेक
1:50:09सेशन का जिसे अक्सर फोबिया कहा जाता है और
1:50:13वो था रसिया की इन्वेस्टियन का डर ब्रिटिश
1:50:17को लगता था की रसिया इंडिया में उनके
1:50:20अंपायर पर अटैक कर सकता है और इसी अटैक को
1:50:23प्रीवेंट करने यह वह अपने इंडियन अंपायर
1:50:26का नॉर्थ वेस्टर्न बॉर्डर स्ट्रांग करना
1:50:28चाहते थे इसके साथ ही ब्रिटिशर्स को यह भी
1:50:31डर था की पंजाब के राजा रंजीत सिंह सिंह
1:50:34को जीत सकते हैं और ये वो कभी नहीं चाहते
1:50:37थे इसलिए कंपनी डिसाइड करती है की सिंह
1:50:40उनके डायरेक्ट कंट्रोल में होना चाहिए
1:50:43स्ट्रैटेजिक रीजंस के अलावा सिंह को आयनिक
1:50:45करने की कमर्शियल रीजंस भी थे सिंह पर
1:50:48कंट्रोल होने से सिंधु रिवर के थ्रू होने
1:50:51वाले ट्रेड को कंट्रोल किया जा सकता था
1:50:53जिससे कंपनी नॉर्थ वेस्ट इंडिया और पंजाब
1:50:56के साथ इजीली ट्वीट कर शक्ति थी इन्हीं
1:50:59सभी रीजंस की वजह से ब्रिटिशर्स ने सिंह
1:51:01को एनएक्स करने का डिसीजन लिया कंपनी सिंह
1:51:05के अमीरस पर यह आप लगती है की उन्होंने
1:51:08एंग्लो अफगान वार के समय ब्रिटिश की हेल्प
1:51:11नहीं की और इसका सेटलमेंट ब्रिटिश
1:51:13रेजिडेंट पर छोड़ने की जगह
1:51:18कंप्लीट पॉलीटिकल और मिलिट्री अथॉरिटी के
1:51:21साथ सिंह भेज देते हैं
1:51:35इसके बाद बलोची सोल्जर रिवॉर्ड कर देते
1:51:38हैं और ओपन वार शुरू हो जाता है
1:51:47और सिंह का अनेक सेशन कंप्लीट हो जाता है
1:51:51है इस अलेक्सेशन से एंग्लो इंडियन अंपायर
1:51:54को वेस्ट की तरफ एक शार्टर और सफर
1:51:56फ्रंटियर मिल जाता है इसके साथ ही सिंधु
1:51:59रिवर की कमांड भी उनके हाथों में ए जाति
1:52:01है जिससे ब्रिटिशर्स के लिए सेंट्रल एशिया
1:52:03तक एक डायरेक्ट कमर्शियल वे ओपन हो जाता
1:52:06है
1:52:10लेकिन कंकर करने वाले चार्ल्स नेपियर इस
1:52:14आइनेक्सेशन की रायचौयस को लेकर कन्वेंस
1:52:16नहीं थे अपनी डायरी में उन्होंने लिखा था
1:52:19वे हैव नो राइट तू सी सिंह ये विशाल
1:52:25इन ह्यूमन पीस ऑफ रिसेलिटी आईटी बिल बी
1:52:29दोस्तों सिंह के एनेक्सेशन के बाद अब
1:52:32सिर्फ पंजाब ही ऐसा रीजन था जहां कंपनी का
1:52:35कंट्रोल एस्टेब्लिश नहीं हुआ था तो आई अब
1:52:38पंजाब की स्टोरी को समझते हैं
1:52:46महाराजा रंजीत सिंह जो की एक स्ट्रांग और
1:52:50कैपेबल लीडर थे उन्होंने अपनी आर्मी को
1:52:52यूरोपीय मॉडल पर ट्रेन किया था ऐसा कहा
1:52:56जाता है की उनके पास एशिया की सेकंड बेस्ट
1:52:58आर्मी थी मतलब इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी
1:53:03ईस्ट इंडिया कंपनी और महाराजा रंजीत सिंह
1:53:06के बीच रिलेशंस की शुरुआत होती है 189 की
1:53:09ट्विटर अमृतसर से
1:53:12दोस्तों ट्रीटी का अमृतसर 1817 की ट्रीटी
1:53:15का दिलसित से काफी ज्यादा कनेक्ट है
1:53:18ट्रीटी का तिलचात फ्रांस के नेपोलियन और
1:53:21रसिया के रोलर सिकंदर डी वन के बीच हुई थी
1:53:24और इसमें डिसाइड हुआ था की ये दोनों पावर
1:53:27लैंड रूट के थ्रू इंडिया को एवढे करेंगे
1:53:30इसी पॉसिबल इनवेजन से अपने अंपायर को से
1:53:33करने के लिए ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड
1:53:36मिंटो वन 18
1:53:39को लाहौर भेजते हैं
1:53:42सिर्फ और डिफेंसिव एलाइंस का प्रपोज
1:53:45महाराजा रंजीत सिंह के सामने रखते हैं
1:53:47रंजीत सिंह इस प्रपोज को एक्सेप्ट करने के
1:53:50लिए अपनी दो कंडीशंस रखते
1:53:55रहेंगे और दूसरी कंडीशन थी की ब्रिटिश
1:53:59रंजीत सिंह को एंटीरे पंजाब इंक्लूडिंग
1:54:03मालवा टेरिटरीज का सोरेन एक्सेप्ट कर
1:54:05लेंगे
1:54:06मालवा टेरिटरीज का यहां मतलब है मॉडर्न
1:54:09सदन पंजाब और हरियाणा का रीजन जिसे सर
1:54:12सतलुज रीजन भी कहा जाता था
1:54:15187 की नेगोशिएशंस तो फेल हो जाति हैं
1:54:18लेकिन 2 साल बाद ही पॉलीटिकल सिचुएशन पुरी
1:54:21तरह चेंज हो जाति है वह यह था की महाराजा
1:54:24रंजीत सिंह ने सितंबर 18 में मालवा रीजन
1:54:27को एवं करने की कोशिश की थी लेकिन फरवरी
1:54:30189 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनके ऊपर
1:54:33अटैक कर दिया इस अटैक में कंपनी को काफी
1:54:36सक्सेस मिलती है ऐसी सिचुएशन में महाराजा
1:54:39रंजीत सिंह को समझ में ए गया की कंपनी के
1:54:42साथ ज्यादा टक्कर लेना सही नहीं है और वो
1:54:45अमृतसर की ट्वीटी साइन करने के लिए तैयार
1:54:47अमृतसर में महाराजा रंजीत सिंह को यह
1:54:50एक्सेप्ट करना पड़ा की वो सतलुज रिवर को
1:54:53अपनी सदन बाउंड्री मां लेंगे और कभी भी
1:54:55इसे बाहर नहीं करेंगे दोस्तों ट्रीटी का
1:54:58अमृतसर के बाद रंजीत सिंह और कंपनी के बीच
1:55:01और कोई तकरार देखने को नहीं मिलता लेकिन
1:55:04कहानी में ट्वीट आता है जब जून 1839 में
1:55:07महाराजा रंजीत सिंह की डेथ हो जाति है
1:55:15फर्स्ट एंग्लो सिख वार 18456
1:55:20दोस्तों महाराजा रंजीत सिंह की डेथ के बाद
1:55:22उनके बेटे खड़क सिंह राजा बनते हैं लेकिन
1:55:25उनमें अपने पिता जैसी कोई भी खूबी नहीं थी
1:55:28वो नसे के आदि थे और हर वक्त शराब और अफीम
1:55:31के नसे में धूत रहते थे और जब वो ज्यादातर
1:55:34बीमा रहने लगे तो कुछ मीना बाद ही उनके
1:55:37बेटे नवनेहाल सिंह को राजा बना दिया गया
1:55:39फिर नवंबर 1840 में खड़क सिंह की मृत्यु
1:55:43हो गई और उनके फ्यूनरल से वापस आते समय
1:55:46महाराजा नव निहाल सिंह के ऊपर गेट के ऊपर
1:55:49से बहुत बड़ा पत्थर टूट करके गया और इस
1:55:52तरह उनकी भी डेथ हो गई इसके बाद खड़क सिंह
1:55:55की वाइफ और नवनिहाल सिंह की मदर चंद कौर
1:55:59नवनिहाल के
1:56:00रीजेंट बनकर गाड़ी संभालती हैं लेकिन यह
1:56:04बात रंजीत सिंह के एक और बेटे शेर सिंह को
1:56:07पसंद नहीं ए रही थी और उन्होंने 70 हजार
1:56:10की फौजी के साथ लाहौर का घेराव कर लिया और
1:56:14जैनुअरी 1841 में खुद को महाराजा डिक्लेअर
1:56:17कर दिया लेकिन 1843
1:56:20वीर सिंह को भी धोखे से मार दिया गया इसके
1:56:23बाद सितंबर 1843 में रंजीत सिंह के 5 साल
1:56:27के बेटे दिलीप सिंह को महाराजा बनाया जाता
1:56:29है दिलीप सिंह की मदर जींद कौर उनका
1:56:32रीजेंट बन के राजपथ संभालती हैं इस तरह
1:56:36पॉलीटिकल इंस्टेबिलिटी के चलते आर्मी
1:56:38कमजोर पढ़ने लगती है सोल्जर को समय से
1:56:41वेतन नहीं मिल का रहा था और आर्मी में
1:56:43इंडिसिप्लिन बढ़ता जा रहा था दोस्तों
1:56:45पंजाब की सिचुएशन पर कंपनियां अपनी नजर
1:56:48बनाए हुए थे उन्हें समझ ए गया था की पंजाब
1:56:51किंगडम पहले की तरह स्ट्रांग नहीं है इसके
1:56:54साथ ही ब्रिटिशर्स ने 1843 में सिंह को दो
1:56:57एनएक्स कर ही लिया था तो अब बस पंजाब ही
1:57:00उनके कंट्रोल से बाहर था सिंह के अनेक
1:57:02सेशन के बाद पंजाब को भी डर था की कहानी
1:57:05कंपनी उनके ऊपर अटैक ना कर दे सिचुएशन और
1:57:08ज्यादा टेंशन होने लगती है जब 1845 में
1:57:11गवर्नर जनरल लॉर्ड होर्डिंग सतलज रिवर पर
1:57:14हजारों की संख्या में अपनी ट्रूप्स भेजना
1:57:16लगता हैं ऐसे में सिख आर्मी को समझ नहीं ए
1:57:20रहा था की ब्रिटिश कंपनी लाहौर पर अटैक
1:57:22करने वाली है या उनका कुछ और प्लेन है
1:57:25कन्फ्यूजन की सिचुएशन में सिख आर्मी के
1:57:27कुछ डस्टन ने यानी बटालियन ने 11th दिसंबर
1:57:301845 में सतलज रिवर को क्रॉस कर दिया
1:57:33क्योंकि सिख आर्मी का मानना था की अगर ये
1:57:37ईस्ट इंडिया कंपनी को बर चाहिए तो वो उनके
1:57:39ही एरिया में होगी ना की पंजाब में इसलिए
1:57:42वो सतलज को क्रॉस करके बहादुर से अपने
1:57:45दुश्मन का सामना करने पहुंच जाते हैं
1:57:48ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के हिसाब से
1:57:50सतलज रिवर को क्रॉस करना मतलब
1:57:55इसी को करण बनाकर दिसंबर 1845 में ब्रिटिश
1:57:59ईस्ट इंडिया कंपनी ने पंजाब किंगडम पर
1:58:02अटैक कर दिया
1:58:03सिख आर्मी को लीड कर रहे थे उनके जनरल
1:58:06तेजा सिंह और लाल सिंह पहले बात तो यह
1:58:09दोनों ही लीडर्स कैपेबल नहीं थे और दूसरी
1:58:12बात यह की कंपनी से भी मिले हुए थे तो ऐसी
1:58:15सिचुएशन में जब फर्स्ट एंग्लो सिख वार हुआ
1:58:17तो सिख आर्मी को हर जगह हर का सामना करना
1:58:21पड़ा ये शब्द दिसंबर 1845 में शुरू होकर
1:58:24मार्च 1846 में ट्रीटी का लाहौर के साथ
1:58:28खत्म होती है ट्रीटी का लाहौर में ब्रिटिश
1:58:30कहते हैं की वो दिलीप सिंह को पंजाब
1:58:33किंगडम का रोलर और रानी जिंदल को उनका
1:58:36रीजेंट एक्सेप्ट करते हैं इसके साथ ही लाल
1:58:39सिंह को वजीर माने के लिए भी तैयार हैं
1:58:40लेकिन अब पंजाब की आर्मी को सिर्फ ₹20000
1:58:43इंफिनिटी और 12000 केवलारी तक सीमित कर
1:58:46दिया जाता है सिख आर्मी का रिकॉग्निशन
1:58:49होने तक महाराजा और लाहौर के लोगों की
1:58:52सुरक्षा के लिए एक ब्रिटिश फोर्स को लाहौर
1:58:55में तैनात कर दिया जाता है
1:59:06कंपनी लाहौर किंगडम से एक करोड़ रुपए से
1:59:09ज्यादा की वारिडिटी की मांग भी करती है
1:59:12लाहौर किंगडम के पास इतना पैसा नहीं था
1:59:14इसलिए कंपनी लाहौर किंगडम के पार्ट जम्मू
1:59:18और कश्मीर को गुलाब सिंह को बीच देती है
1:59:20गुलाब सिंह इसके बदले में कंपनी को 75 लाख
1:59:24रुपए देते हैं इसके साथ ही व्यास और सतलुज
1:59:27के बीच का एरिया जालंधर दवाब को भी
1:59:30ब्रिटिश एनेक्स कर लेते हैं
1:59:32तो दोस्तों यह थी 1846 की ट्रीटी का लाहौर
1:59:35इस हमिलिटी से सिख खुश नहीं थे और वो
1:59:40रिबेलीयन कर देते हैं कंपनी इजीली इस
1:59:43रिबेलीयन को कृष कर देती है और कहती है की
1:59:45यह रिबेलीयन महारानी जींद के खाने पर हुआ
1:59:48है इसलिए एक और ट्रीटी साइन की जाति है
1:59:50जिसके अकॉर्डिंग महारानी जींद को पेंशन
1:59:53देकर बनारस भेज दिया जाता है और ब्रिटिश
1:59:56रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस की लीडरशिप में एक
1:59:59रीजेंसी काउंसिल बनाई गई जिसमें 86 सर्ड्स
2:00:03को रखा गया कहा गया की अब से ये रीजन सी
2:00:05काउंसिल महाराजा दिलीप सिंह के रीजेंट के
2:00:07रूप में कम करेगी यह थी ट्रीटी का भैरव्वल
2:00:12जो हुई थी दिसंबर 1846 में इस ट्वीटी के
2:00:15हिसाब से जो ब्रिटिश ट्रूप्स 1846 के और
2:00:18में लाहौर से विद्रोह करने वाले थे उन्हें
2:00:21अब तब तक लाहौर में ही रहना था जब तक की
2:00:24दिलीप सिंह माइनर है और इसके बदले में
2:00:27पंजाब को कंपनी को हर साल 22 लाख रुपए भी
2:00:30देने होंगे
2:00:31दोस्तों इस ट्वीटी के बाद यह साफ हो गया
2:00:33की पंजाब की रियल पावर अब ब्रिटिश
2:00:36रेजिडेंट के हाथ में ए चुकी है और पंजाब
2:00:38अब सिर्फ एक वेसल स्टेट बन गया है यहां से
2:00:42पंजाब की इंटरनल एडमिनिस्ट्रेशन के
2:00:44रिस्पांसिबिलिटी भी ईस्ट इंडिया कंपनी की
2:00:46हो जाति है लेकिन ब्रिटिश यहां भी नहीं
2:00:49रुकते सिर्फ 2 साल के बाद ही 1848 में
2:00:53सेकंड एंग्लो सिख वार के थ्रू वो पंजाब को
2:00:56पुरी तरह एनएक्स कर लेते हैं आई फिर सेकंड
2:01:00एंग्लो सिख वार को भी समझते हैं सेकंड
2:01:03एंग्लो सिख वार 184849
2:01:06दोस्तों यह तो हमने समझा की फर्स्ट एंग्लो
2:01:09सिख वार के बाद हुई ट्वीटी सिक्स के लिए
2:01:11बहुत ही हमिलिएटिंग थी और साड़ी पावर्स अब
2:01:14ब्रिटिश रेजिडेंट हेनरी लॉरेंस के हाथों
2:01:17में ए चुकी थी ऐसे में 1848 में हेनरी
2:01:20लॉरेंस मुल्तान के गवर्नर दीवान मूलराज से
2:01:23इंक्रीज रिवेन्यू की डिमांड करते हैं
2:01:25लेकिन मूलराज ने एन तो बड़ा हुआ रिवेन्यू
2:01:29देने की बात मनी और ना ही पुराना हिसाब
2:01:31किताब जूता किया उन्होंने भी अपनी तरफ से
2:01:34तैयारी कर ली थी की अगर ब्रिटिश रेजिडेंट
2:01:36कोई जबरदस्ती करने की कोशिश करेंगे तो देख
2:01:39लेंगे तब ब्रिटिश रेजिडेंट डिसाइड करते
2:01:41हैं की मूलराज को रिप्लेस करके किसी और को
2:01:45मुल्तान का गवर्नर बना दिया जाए लेकिन
2:01:47मुल्तान की जनता मूलराज के फीवर में थी
2:01:50इसलिए मुल्तान के नए सिख गवर्नर को दो
2:01:53ब्रिटिश ऑफिसर लेफ्टिनेंट पैट्रिक वनजाग
2:01:56न्यू और लिफ्टेड एंडरसन के साथ मुल्तान
2:01:59भेजो गया
2:02:00जब यह मुल्तान पहुंचे तो वहां की जनता
2:02:02पहले से ही भड़की हुई थी उन्होंने इन
2:02:05दोनों ब्रिटिश ऑफिसर्स को मार दिया फर्स्ट
2:02:08एंग्लो सिख वार की हमिलिएशन से परेशान
2:02:10पंजाब के लोगों को मूलराज में अपना नया
2:02:13लीडर मिल गया और जल्दी ही सिख ट्रूप्स ने
2:02:16भी मूलराज को जॉइन कर लिया और पंजाब में
2:02:19एक ओपन रिबेलीयन की शुरुआत हो गई उसे समय
2:02:23गवर्नर जनरल थे लॉर्ड डलहौजी पंजाब की
2:02:26स्थिति देखकर लॉर्ड डलहौजी ने डिसाइड किया
2:02:29की यह एक बहुत ही बढ़िया मौका है पंजाब को
2:02:32एनएक्स करने का उन्होंने पंजाब पर अटैक कर
2:02:35दिया और इस तरह सेकंड एंग्लो सिख वार की
2:02:38शुरुआत हो गई इस वार के दौरान कुछ
2:02:40इंपॉर्टेंट बॉटल्स हुई थी जैसे की बैटल ऑफ
2:02:43रामनगर बैटल ऑफ चिलियांवाला और बैटल ऑफ
2:02:47गुजरात
2:02:50आर्मी को सुरेंद्र करना पड़ा पंजाब को
2:02:54अनेक कर लिया गया और अब पंजाब भी ब्रिटिश
2:02:57कंपनी की टेरिटरी बन गया
2:02:59दोस्तों पंजाब के अनेक सेशन के लिए कहा
2:03:02जाता है की दी एनेक्सेशन ऑफ पंजाब वैसे नो
2:03:05एनेक्सेशन आईटी वज एन सीक्रेट ब्रीच ऑफ
2:03:08ट्रस्ट ऐसा इसलिए क्योंकि 1846 की ट्रीटी
2:03:12में भैरू वाल के बाद से ब्रिटिश रेजिडेंट
2:03:15ही सही मेन में पंजाब को रूल कर रहे थे
2:03:18सभी सिविल और एडमिनिस्ट्रेटिव पावर्स उनकी
2:03:21ही हाथों में थी महाराजा दिलीप सिंह तो
2:03:23माइनर थे और उनका सिर्फ नाम ही उसे हो रहा
2:03:26था
2:03:27रिबेलीयन सिख आर्मी ने किया था ना की
2:03:30महाराजा या उनकी रीजेंसी कम से लेने और
2:03:33महाराजा का रीजन होने के नाइट यह ब्रिटिश
2:03:35रेजिडेंट की ड्यूटी थी की वह मूलराज और
2:03:38सिख आर्मी के रिबेलीयन को सरप्राइज करें
2:03:40महाराजा दिलीप सिंह को तो किसी भी तरह इस
2:03:43रिबेलीयन के लिए रिस्पांसिबल नहीं माना जा
2:03:45सकता इसलिए इस बेसिस पर उनसे उनका किंगडम
2:03:49छन लेना पुरी तरह अंजस्ट था
2:03:52कंक्लुजन तो दोस्तों हमने देखा की कैसे
2:03:55ब्रिटिश कंपनी ने अपने फायदे के लिए पहले
2:03:58सिंह और फिर पंजाब दोनों से ही फ्रेंडली
2:04:01रिलेशंस बनाए और इसके बाद जब उन्हें सही
2:04:03मौका मिला तब इस फ्रेंडशिप को भूलकर
2:04:06उन्होंने इन्हें एनएक्स कर लिया यह
2:04:09ब्रिटिश कंपनी
2:04:14में ए चुकी थी
2:04:17वारेन हेस्टिंग्स
2:04:191772
2:04:212785 हम अपनी पिछली कुछ वीडियो में देख
2:04:24चुके हैं की कैसे ब्रिटिशर्स इंडिया में
2:04:26आगे एन ट्रेडिंग कंपनी आते हैं और फिर
2:04:28ग्रैजुअली यहां पर अपना अंपायर एस्टेब्लिश
2:04:31करते हैं ब्रिटिशर्स द्वारा अंपायर
2:04:33एस्टेब्लिश करने और उसके बाद यहां
2:04:35एडमिनिस्ट्रेशन चलने में बहुत इंपॉर्टेंट
2:04:38रोल था ब्रिटिश गवर्नर और गवर्नर जनरल्स
2:04:41का हम बंगाल प्रेसीडेंसी के पहले गवर्नर
2:04:43रॉबर्ट क्लाइव के बड़े में पहले ही डिस्कस
2:04:45कर चुके हैं आज हम बंगाल के नेक्स्ट
2:04:48गवर्नर और फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल
2:04:50वारेन हेस्टिंग्स के बड़े में बात करने
2:04:53वाले हैं तो आई शुरू करते हैं
2:04:56इंट्रोडक्शन
2:04:59वारेन हेस्टिंग
2:05:011750 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को
2:05:05जॉइन करते हैं कंपनी में डिफरेंट पोजीशंस
2:05:07पर सर्व करने के बाद फाइनली 1772 में
2:05:10इन्हें बंगाल प्रेसीडेंसी का गवर्नर
2:05:13अप्वॉइंट किया जाता है बंगाल 1764 में
2:05:16बैटल ऑफ बक्सर के बाद ब्रिटिश कंपनी के
2:05:19कंट्रोल में ए चुका था और उसे समय बंगाल
2:05:22की गवर्नर रॉबर्ट क्लाइव थे जो यहां ड्यूल
2:05:25गवर्नमेंट सिस्टम को एस्टेब्लिश करते हैं
2:05:26इसके तहत रिवेन्यू कलेक्शन यानी की दीवानी
2:05:29राइट्स तो कंपनी मैनेज करती है लेकिन
2:05:31निजामत राइट्स यानी की एडमिनिस्ट्रेशन
2:05:34संभालने की रिस्पांसिबिलिटी बंगाल के नवाब
2:05:37के पास ही रहती है
2:05:381772 में गवर्नर बने के बाद वारेन
2:05:41हेस्टिंग्स के सामने सबसे इंपॉर्टेंट
2:05:42टास्क था बंगाल में एक स्टेबल
2:05:45एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम
2:05:55में ए चुके थे इनके गवर्नर बने के कुछ समय
2:05:59बाद ही 1773 में ब्रिटिश पार्लियामेंट
2:06:02रेगुलेटिंग एक्ट पास करती है दोस्तों
2:06:04रेगुलेटिंग एक्ट क्यों लाया गया था और
2:06:07इसके इंपॉर्टेंट प्रोविजंस क्या थे आई
2:06:09अपने नेक्स्ट क्षेत्र में समझते हैं
2:06:11रेगुलेटिंग एक्ट ऑफ 1773
2:06:17प्लासी और बक्सर के बैटल के बाद ब्रिटिश
2:06:19कंपनी बंगाल पर रूल करने लगती है अब कंपनी
2:06:23सिर्फ एक ट्रेडिंग ऑर्गेनाइजेशन में रहकर
2:06:24एक एडमिनिस्ट्रेटिव बॉडी भी थी इसीलिए
2:06:27कंपनी की फंक्शनिंग को रेगुलेट करने के
2:06:30लिए ब्रिटिश पार्लियामेंट 1773 में
2:06:33रेगुलेटिंग एक्ट पास करती है इस एक्ट के
2:06:36अनुसार मद्रास और मुंबई की प्रेसिडेंट
2:06:38बंगाल के कंट्रोल में ए गए बंगाल के
2:06:41गवर्नर की पोस्ट अब गवर्नर जनरल की पोस्ट
2:06:44बन गई और इस तरह वारेन हेस्टिंग्स पहले
2:06:47गवर्नर जनरल बन गए गवर्नर जनरल को एसिस्ट
2:06:50करने के लिए फोर मेंबर की एक एग्जीक्यूटिव
2:06:52काउंसिल भी बनाएगी सभी डिसीजंस मेजॉरिटी
2:06:56के बेसिस पर लिए जान थे और गवर्नर जनरल
2:06:58सिर्फ टी के कैसे में ही वोट कर सकते थे
2:07:02एक्टीनो कंपनी के सर्वेंट को प्राइवेट
2:07:04ट्रेड करने और नेटिव से ब्राइब्स और
2:07:06प्रेजेंट लेने से भी प्रोहिबिट किया इसके
2:07:09साथ ही फोर्ट विलियम कोलकाता में सुप्रीम
2:07:11कोर्ट को भी एस्टेब्लिश किया गया दोस्तों
2:07:14यह तो बात हुई रेगुलेटिंग एक्टिव 17
2:07:17जिसने वारेन हेस्टिंग्स को गवर्नर जनरल
2:07:20बनाया अब बात करते हैं वारेन हेस्टिंग्स
2:07:22की डिफरेंट रिफॉर्म्स की जो उन्होंने
2:07:24गवर्नर और गवर्नर जनरल रहते हुए
2:07:27इंट्रोड्यूस किया
2:07:28रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस बाय वारेन
2:07:30हेस्टिंग्स वारेन हेस्टिंग अलग-अलग फील्ड
2:07:34में रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करते हैं जैसे
2:07:36की एडमिनिस्ट्रेटिव रिवेन्यू जुडिशल और
2:07:40कमर्शियल आई एक-एक करके इन्हें डिस्कस
2:07:42करते हैं सबसे पहले बात करते हैं
2:07:45एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स की
2:07:48एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स
2:07:52वारेन हेस्टिंग्स का सबसे इंपॉर्टेंट
2:07:54एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म था बंगाल में
2:07:57रॉबर्ट क्लाइव द्वारा इस्टैबलिश्ड ड्यूल
2:07:59सिस्टम ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन को अबॉलिश करना
2:08:01दोस्तों आपको याद होगा की ड्यूल सिस्टम
2:08:03में निजामत राइट्स तो नवाब के पास थे
2:08:06लेकिन जमींदारी राइट्स कंपनी
2:08:17इलाहाबाद ट्रीटी के अनुसार कंपनी मुगल
2:08:20एंपरर को जो 26 लाख
2:08:29से वापस लेकर 50 लाख रुपए में अवध को बीच
2:08:33देते हैं इन सभी एक्शंस के पीछे रीजन
2:08:36कंपनी की इकोनामी को बटर करना था
2:08:38एडमिनिस्ट्रेशन के बाद अब देखते हैं
2:08:40रिवेन्यू रिफॉर्म्स को
2:08:43रिवेन्यू रिफॉर्म्स रिवेन्यू कलेक्शन के
2:08:46लिए वारेन हेस्टिंग कोलकाता में एक बोर्ड
2:08:48ऑफ रिवेन्यू सेटअप करते हैं हर एक जिला
2:08:51में एक ब्रिटिश कलेक्टर और अकाउंटेंट जनरल
2:08:53अप्वॉइंट किया जाता है ब्रिटिश ट्रेजेडी
2:08:56को मुर्शिदाबाद से कोलकाता मूव कर दिया
2:08:58जाता है
2:08:591772 में कोलकाता बंगाल की कैपिटल
2:09:02डिक्लेअर की जाति है
2:09:041772 में ही वारेन हेस्टिंग्स लैंड
2:09:07रिवेन्यू के लिए 5 इयर्स सेटलमेंट की
2:09:09शुरुआत करते हैं इस सिस्टम के अकॉर्डिंग
2:09:11सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को पांच साल के
2:09:14लिए रिवेन्यू कलेक्ट करने का राइट मिल
2:09:16जाता है इन्हें रिवेन्यू फार्मर्स बोला
2:09:18जाता है लेकिन यह सिस्टम फेल हो जाता है
2:09:21क्योंकि बोली लगाने वालों को लैंड में कोई
2:09:24इंटरेस्ट नहीं होता था वो सिर्फ
2:09:25स्पैकुलेटर थे और इसलिए वह कल्टीवेटर से
2:09:29ज्यादा से ज्यादा वसूल करने की कोशिश करते
2:09:31थे इसके अलावा लैंड को ओवरस्सेस भी किया
2:09:34गया था और स्टेट की डिमांड बहुत हाय राखी
2:09:37गई थी इसके ऊपर से कलेक्शन का मेथड बहुत
2:09:40हर्ष था कंपनी के कलेक्टर्स रिवेन्यू
2:09:43फॉर्म को हरायस करते थे इन सभी रीजंस की
2:09:45वजह से रिवेन्यू फॉर्म्स पर काफी ज्यादा
2:09:48बकाया हो जाता है और बहुत लोगों को
2:09:50डिफॉल्ट के लिए अरेस्ट भी किया जाता है
2:09:531776 में जब 5 एयर सेटलमेंट एक्सपायर हो
2:09:56जाता है तो वारेन हेस्टिंग्स 1 एयर
2:09:59सेटलमेंट करते हैं इस बार सेटलमेंट के लिए
2:10:01प्रेफरेंस जमींदारा को दी जाति है और
2:10:04इन्हीं रिफॉर्म्स से सिख लेकर नेक्स्ट
2:10:06गवर्नर जनरल लॉर्ड कार्नवालिस के रिवेन्यू
2:10:09रिफॉर्म्स एक स्टेप आगे होते हैं जिनके
2:10:11बड़े में हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में
2:10:13डिस्कस करेंगे तो ये तो थे वारेन
2:10:16हेस्टिंग्स के रिवेन्यू फील्ड में
2:10:17एक्सपेरिमेंट आई अब बात करते हैं उनके
2:10:20जुडिशल रिफॉर्म्स की
2:10:23जुडिशल रिफॉर्म्स दोस्तों रिवेन्यू
2:10:26रिफॉर्म्स में तो वारेन हेस्टिंग्स को
2:10:28ज्यादा सक्सेस नहीं मिली लेकिन उनके
2:10:30जुडिशल रिफॉर्म्स जरूर सक्सेसफुल होते हैं
2:10:33वारेन हेस्टिंग्स का सबसे पहले जुडिशल
2:10:36रिफॉर्म होता है जमींदारा की जुडिशल
2:10:38पावर्स को खत्म करना
2:10:411772 में वारेन हेस्टिंग्स जिला लेवल पर
2:10:44दीवानी अदालत और फौजदारी अदालत सेटअप करते
2:10:47हैं दीवाने अदालत को कलेक्टर यानी की
2:10:50यूरोपीय ऑफिसर प्रेसीडे करता था और
2:10:52फौजदारी अदालत को इंडियन जज इसके अलावा
2:10:56दीवानी अदालत में हाइंड्स का कैसे हिंदू
2:10:58लॉस के अकॉर्डिंग डिसाइड होता था और
2:11:01मुस्लिम का मुस्लिम डॉ के अकॉर्डिंग लेकिन
2:11:03फौजदारी अदालत में सभी का डिसीजन मुस्लिम
2:11:06डॉ के अकॉर्डिंग ही होता था जिला कोट्स के
2:11:10डिसीजन के अगेंस्ट अपील के लिए कोलकाता
2:11:12में सदर दीवानी अदालत और सदर निजामत अदालत
2:11:15भी सेटअप की गई थी इसके अलावा वारेन
2:11:19हेस्टिंग मुस्लिम और हिंदू लॉस को कोडिफाई
2:11:22करने की कोशिश भी करते हैं
2:11:231776 में हिंदू कोड का एक इंग्लिश
2:11:26ट्रांसलेशन
2:11:33द्वारा इंट्रोड्यूस किया गए जुडिशल
2:11:35रिफॉर्म्स अब लास्ट में उनके कुछ कमर्शियल
2:11:38रिफॉर्म्स को भी जान लेते हैं
2:11:41कमर्शियल रिफॉर्म्स वारेन हेस्टिंग बंगाल
2:11:44के इंटरनल ट्रेड में बोतल नेक को क्लियर
2:11:46करने के लिए कुछ स्टेप्स लेते हैं सबसे
2:11:49पहले वह जमींद्रीज में चल रहे अनेक कस्टम
2:11:52हाउसेस को सरप्राइज करते हैं अब सिर्फ 5
2:11:55कस्टम हाउसेस मेंटेन किया जाते हैं
2:11:57कोलकाता हुगली मुर्शिदाबाद ढाका और पटना
2:12:01में हेस्टिंग्स दस्तक के मिसयूज को भी चेक
2:12:04करते हैं ड्यूटीज को कम करके 2 और 1/2% कर
2:12:08दिया जाता है और ये इंडियन और यूरोपीय
2:12:10दोनों पर ही लगे जाति हैं इसके साथ ही ये
2:12:13कंपनी सर्वेंट के प्राइवेट ट्रेड पर भी
2:12:15रिस्ट्रिक्शंस लगाते हैं दोस्तों वारेन
2:12:18हेस्टिंग्स के रिफॉर्म्स की तो बात हो गई
2:12:20आई अब उनके टाइम पीरियड के कुछ अदर
2:12:23इंपॉर्टेंट इवेंट्स पर भी एक नजर डालते
2:12:25हैं इंपॉर्टेंट इवेंट्स ड्यूरिंग वारेन
2:12:28हेस्टिंग्स पीरियड
2:12:291772 2785 वारेन हेस्टिंग्स के 13 साल के
2:12:34कार्यकाल में बहुत से इंपॉर्टेंट इवेंट्स
2:12:36हुए थे एक-एक करके उनको डिस्कस करते हैं
2:12:38सबसे पहले इंपॉर्टेंट इवेंट था 1774 में
2:12:42होने वाला फर्स्ट रोहिल्ला वार लिए इसको
2:12:45डिटेल में समझते हैं
2:12:48फर्स्ट रोहिल्ला वार
2:12:50दोस्तों रोहिलास बेसिकली अफ़ग़ानस थे जो
2:12:5418थ सेंचुरी में मुगल अंपायर के डिक्लिन
2:12:56के समय इंडिया आते हैं और रोहिलखंड के
2:12:59एरिया पर अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश कर लेते
2:13:01हैं
2:13:03जब पेशवा माधवराव वन की लीडरशिप में मराठा
2:13:06पावर एक बार फिर से राइस कर रही थी तब
2:13:09रोहिलास को मराठा अटैक का डर सताने लगता
2:13:11है
2:13:121772 की शुरुआत में मराठस ने रोहिल्ला
2:13:15चीफ़्टेन जवित खान को हराकर उनकी पुरी
2:13:18टेरिटरी पर कब्ज भी कर लिया था ऐसे में
2:13:21रोहिल्ला लीडर हाफिज रहमत खान मराठा से
2:13:24प्रोटेक्शन के लिए 17th जून 1772 को अवध
2:13:28के नवाब के साथ ट्वीटी साइन करते हैं
2:13:36और इसके बदले में रोहिलास उन्हें 40 लाख
2:13:39की पेमेंट करने का प्रॉमिस करते हैं
2:13:42मराठस रोहिलखंड पर अटैक प्लेन भी करते हैं
2:13:45लेकिन तभी पेशवा माधवराव वन की मृत्यु हो
2:13:48जाति है और इस तरह रुहेलखंड टाटा टैक्स से
2:13:51बैक जाता है मराठस का अटैक तो नहीं होता
2:13:54लेकिन अवध के नवाब फिर भी रोहिल्ला से
2:13:57ट्रीटी में प्रॉमिस की गई 40 लाख की
2:13:59अमाउंट डिमांड करते हैं जब रोहिल्लाजों ने
2:14:02पे करने से माना कर देते हैं तब नवाब
2:14:04रोहिलखंड को एनएक्स करने का डिसीजन लेते
2:14:06हैं इस एनेक्सेशन के लिए वो ब्रिटिश कंपनी
2:14:10से हेल्प मांगते हैं और इंटरेस्टिंग वारेन
2:14:13हेस्टिंग 40 लाख के पेमेंट के बदले में
2:14:15हेल्प देने के लिए तैयार हो जाते हैं 23rd
2:14:18अप्रैल 1774 को बैटल ऑफ ईरानपुर कटरा होती
2:14:22है जिसमें करनाल सिकंदर चैंपियन की
2:14:25फोर्सेस हाफिज रहमत खान की लीडरशिप में
2:14:27रोहिलास को हर देते हैं बैटल में हाफिज
2:14:30रहमत खान की मृत्यु हो जाति है और रोहिलास
2:14:33लाल डोंग के माउंटेंस की तरफ भाग जाते हैं
2:14:36इस तरह रॉयल खंड अवध को मिल जाता है और
2:14:39फिर रोहिल्ला वर्क और हो जाता है
2:14:46वारेन हेस्टिंग्स के टाइम में ही 1776 से
2:14:501782 के बीच फर्स्ट एंग्लो मराठा वार होती
2:14:53है और 1780 से 1784 के बीच सेकंड एंग्लो
2:14:58मैसूर वार भी होती है इन दोनों टॉपिक को
2:15:00हम पहले ही अपनी वीडियो में कर कर चुके
2:15:02हैं इसीलिए डिटेल में समझना के लिए आप
2:15:05वीडियो को रेफर कर सकते हैं
2:15:071784 में ओरिएंटल स्टडीज को इनकरेज करने
2:15:10के लिए एशियाई सोसाइटी ऑफ बंगाल की
2:15:13फाउंडेशन भी की जाति है वारेन हेस्टिंग्स
2:15:16ने इसकी एस्टेब्लिशमेंट के लिए से विलियम
2:15:18जॉन्स को इनकरेज और सपोर्ट किया था
2:15:211784 में ही ब्रिटिश पार्लियामेंट पिच
2:15:24इंडिया एक्ट भी पास करती है ये एक्ट 1773
2:15:27के रेगुलेटिंग एक्ट की शॉर्टकट्स को दूर
2:15:30करता है आई इसको थोड़ा डिटेल में समझते
2:15:32हैं
2:15:34इट्स इंडिया एक्ट 1784
2:15:37पिट्स इंडिया एक्ट कंपनी के पॉलीटिकल और
2:15:40कमर्शियल फंक्शंस को अलग-अलग करता है यह
2:15:43एक्ट इंडिया में ब्रिटिश पजेशन पर ड्यूल
2:15:46कंट्रोल एस्टेब्लिश करता है मतलब इमीडिएट
2:15:48कंट्रोल तो कंपनी का रहेगा लेकिन फाइनल
2:15:50अथॉरिटी ब्रिटिश गवर्नमेंट की होगी
2:15:52पॉलीटिकल मैटर्स को देखने के लिए बोर्ड ऑफ
2:15:55कंट्रोल एस्टेब्लिश किया जाता है और
2:15:57कमर्शियल अफेयर्स के लिए कोर्ट ऑफ
2:15:59डायरेक्टर्स को अप्वॉइंट किया जाता है
2:16:00कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स कंपनी को रिप्रेजेंट
2:16:03करते थे और बोर्ड ऑफ कंट्रोल ब्रिटिश
2:16:05गवर्नमेंट को बोर्ड ऑफ कंट्रोल में 6
2:16:08मेंबर्स थे सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जो बोर्ड
2:16:10के प्रेसिडेंट थे चांसलर ऑफ डी एक्स चेकर
2:16:13और कर परी विकास
2:16:16करता है की सभी सिविल और मिलिट्री ऑफिसर्स
2:16:20जॉइन करने के 2 मीना के अंदर इंडिया और
2:16:23ब्रिटेन में अपनी प्रॉपर्टी को डिस्क्लोज
2:16:25करेंगे
2:16:33कर मेंबर्स की वजह से गवर्नर जनरल को अपने
2:16:36अकॉर्डिंग लेने काफी समस्या होती थी लेकिन
2:16:39अब उन्हें सिर्फ एक मेंबर की सहमति चाहिए
2:16:41बड़े डिसीजंस लेने के लिए तीन मेंबर्स में
2:16:44से एक मेंबर की पोस्ट इंडिया में ब्रिटिश
2:16:47क्राउन की आर्मी के कमांडर इन के को दी
2:16:49जाएगी इसके साथ ही काउंसिल में अब गवर्नर
2:16:52जनरल को वीटो पावर भी दे दिए गए मद्रास और
2:16:55बॉम्बे प्रेसिडेंसी को बंगाल प्रेसिडेंट
2:16:58का सबोर्डिनेट डिक्लेअर कर दिया गया और
2:17:00कोलकाता अब इंडिया में ब्रिटिश की कैपिटल
2:17:02बन गई दोस्तों पिट्स इंडिया एक्ट इसलिए
2:17:05इंपॉर्टेंट हो जाता है क्योंकि इसी एक्ट
2:17:08के द्वारा इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन पर
2:17:10ब्रिटिश गवर्मेंट का डायरेक्ट कंट्रोल
2:17:12एस्टेब्लिश हुआ था इससे पहले तक तो साड़ी
2:17:15रिस्पांसिबिलिटी सिर्फ कंपनी की ही थी
2:17:17साथी गवर्नर जनरल की पोजीशन अबाउट
2:17:20स्ट्रांग हो जाति है क्योंकि काउंसिल का
2:17:23कंट्रोल अब पहले जितना स्ट्रांग नहीं राहत
2:17:25दोस्तों यह तो हुआ पिट्स इंडिया एक्ट का
2:17:28डिस्कशन आई अब अपने टॉपिक की तरफ वापस
2:17:31चलते हैं वारेन हेस्टिंग्स का टाइम पीरियड
2:17:33उनके कुछ कंट्रोवर्शियल डिसीजंस के लिए भी
2:17:36जाना जाता है तो चलिए अब उनके बड़े में
2:17:38डिस्कस करते हैं
2:17:45दोस्तों जय सिंह बनारस के राजा हुआ करते
2:17:48थे और बनारस अवध का फ्यूडिटरी या
2:17:51सबोर्डिनेट स्टेट था
2:17:531775 में जब अवध के नवाब सुझाव दौला की
2:17:56मृत्यु हो जाति है तब उनके बेटे आसफोला
2:18:00नवाब बनते हैं वारेन हेस्टिंग इस चेंज का
2:18:03फायदा उठाते हैं और नए नवाब को फोर्स करते
2:18:05हैं एक नई त्रुटि साइन करने के लिए इस
2:18:09ट्रीटी के अकॉर्डिंग बनारस कंपनी को
2:18:11ट्रांसफर कर दिया जाता है और चैट सिंह अब
2:18:14कंपनी के सबोर्डिनेट बन जाते हैं
2:18:17की जय सिंह कंपनी को 22 लाख रुपए एनुअल पे
2:18:21करेंगे और इसके अलावा उनके ऊपर और कोई
2:18:24डिमांड नहीं राखी जाएगी उनको पीसफुली
2:18:26बनारस में रूल करने दिया
2:18:31इस प्रोविजन को वायलेट करते हैं और
2:18:34क्वेश्चन नंबर डिमांड रखना लगता हैं
2:18:441779 और 1780 में फिर से यह डिमांड रिपीट
2:18:48की जाति है
2:18:491780 में राजा 2 लाख रुपए की ब्राइब वारेन
2:18:52हेस्टिंग्स को भेजते हैं जिससे अब आगे और
2:18:55कोई डिमांड ना राखी जाए लेकिन वारेन
2:18:58हेस्टिंग फिर भी एक्स्ट्रा सब्सिडी और
2:19:002000 कैलोरी कंटिजेंट भेजना की डिमांड
2:19:03करते हैं राजा वारेन हेस्टिंग्स को लेटर
2:19:05लिखकर माफी मांगते हैं की वो ये डिमांड
2:19:08पुरी नहीं कर सकते
2:19:09वारेन हेस्टिंग राजा चैट सिंह को पनिश
2:19:12करने का डिसीजन लेते हैं और उनके ऊपर 50
2:19:15लाख का फाइन इंपोज कर देते हैं वो खुद
2:19:18बनारस की तरफ प्रोसीड करते हैं राजा उनसे
2:19:20बक्सर में आकर मिलते हैं और अपनी टर्बन
2:19:23उनके पैरों में रख देते हैं लेकिन वारेन
2:19:26हेस्टिंग बनारस पहुंचने से पहले कोई भी
2:19:28डिसीजन करने से माना कर देते हैं और बनारस
2:19:31पहुंचने पर वह जेट सिंह को अरेस्ट करवा
2:19:34लेते हैं चैट सिंह के सोल्जर अपने राजा का
2:19:37अपमान देखने पर ब्रिटिश के खिलाफ विद्रोह
2:19:40कर देते हैं लेकिन उनकी रिबेलीयन को इजीली
2:19:43सरप्राइज कर किया जाता है
2:19:46नारायण को 22 लाख की जगह 40 लाख के एनुअल
2:19:50पेमेंट के बदले में राजा बना दिया जाता
2:19:53बनारस के राजा अब सिर्फ कंपनी के पेंशनर
2:19:56बन के र जाते हैं बनारस के बाद वारेन
2:19:59हेस्टिंग्स अवध को निशाना बनाते हैं अवध
2:20:02के नवाब आसफोला पर कंपनी के करीब 15 लाख
2:20:05रुपए थे अमाउंट उन्हें अवध में स्टेशन
2:20:08सब्सिडियरी फोर्स के लिए पे करने थे जब
2:20:11कंपनी उनके ऊपर पेमेंट करने के लिए दबाव
2:20:14डालते है तब आसफोला सजेस्ट करते हैं की
2:20:17उन्हें लेट नवाब की वाइफ यानी की अवध की
2:20:20बेगम का ट्रेजर लेने की परमिशन दे दी जाए
2:20:23इससे पहले भी ब्रिटिश रेजिडेंट के
2:20:25इंटरफ्रेंस पर नवाब बेगम से
2:20:28560000 ले चुके थे तब कोलकाता काउंसिल ने
2:20:32गारंटी दी थी की इसके बाद बेगम से और कोई
2:20:35डिमांड नहीं की जाएगी लेकिन नवाब के सजेशन
2:20:38पर वारेन हेस्टिंग अपनी दी हुई गारंटी को
2:20:41भूलकर ब्रिटिश रेजिडेंट को बेगम से रुपए
2:20:44लेने का ऑर्डर दे देते हैं
2:20:45बेगम को प्रेशराइज करके उनसे 105 लाख की
2:20:50अमाउंट ले ली जाति है जिसका ज्यादातर
2:20:52हिस्सा कंपनी का डेड चुकाने में चला जाता
2:20:54है ये दोनों ही इंसीडेंट इतने
2:20:57कंट्रोवर्शियल थे की जब वारेन हेस्टिंग्स
2:20:59इंग्लैंड वापस पहुंचने हैं तो वहां की
2:21:02पार्लियामेंट उनके ऊपर इंपिचमेंट का कैसे
2:21:04भी चलती है यह ट्रायल 178 से 1795 तक चला
2:21:09है लेकिन और में उन्हें सभी चार्ज से फ्री
2:21:12कर दिया जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी
2:21:14कंट्री का तो फायदा ही किया था और
2:21:16इंग्लैंड की जनता उन्हें हीरो मानती थी
2:21:20कंक्लुजन
2:21:22दोस्तों हम का सकते हैं की वारेन
2:21:25हेस्टिंग्स ने एक तरफ तो इंडिया में
2:21:27ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम की
2:21:29फाउंडेशन को बनाया और दूसरी तरफ इंडिया
2:21:32में कंपनी की टेरिटरी को और ज्यादा
2:21:34इंक्रीज भी किया फिर चाहे वह फर्स्ट
2:21:37एंग्लो मराठा वार में जीता हुआ सायल सेट
2:21:39हो या अवध से लिया हुआ बनारस वारेन
2:21:42हेस्टिंग्स ने अपनी मिलिट्री और
2:21:44डिप्लोमेटिक स्किल का उसे करके ब्रिटिश के
2:21:47इंडियन अंपायर का एक्सपेंशन किया था उनके
2:21:50बाद गवर्नर जनरल बनते हैं लॉर्ड
2:21:52कार्नवालिस जिनके बड़े में हम अपनी आने
2:21:55वाली वीडियो में डिस्कस करेंगे
2:21:57लॉर्ड कार्नवालिस 1786 2793 दोस्तों हमने
2:22:04अपनी पिछली वीडियो में फर्स्ट गवर्नर जनरल
2:22:06ऑफ बंगाल वारेन हेस्टिंग्स के बड़े में
2:22:08डिस्कस किया था आज हम इसी सीरीज को आगे ले
2:22:11जाते हुए नेक्स्ट गवर्नर जनरल लॉर्ड
2:22:13कार्नवालिस के बड़े में जानेंगे लॉर्ड
2:22:16कार्नवालिस को लोग अक्सर याद करते हैं
2:22:18अमेरिकन रिवॉल्यूशन के समय उनकी हर के लिए
2:22:2128 सितंबर से 19th अक्टूबर 1781 के बीच
2:22:25योगदान वर्जीनिया में अमेरिकन रिवॉल्यूशन
2:22:28के लास्ट इंपॉर्टेंट कैंपेन में उन्हें
2:22:30अमेरिकन रिवॉल्यूशनरीज ने हर दिया था
2:22:32लेकिन उनकी लाइफ के बेस्ट इयर्स का आना तो
2:22:35अभी बाकी था जो वो इंडिया में गवर्नर जनरल
2:22:38बने के बाद जीते हैं
2:22:44सितंबर 1786 तक बंगाल की एक्टिंग गवर्नर
2:22:48रहे थे लेकिन उनके इस शॉर्ट टाइम पीरियड
2:22:51में कोई इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट देखने को
2:22:53नहीं मिलता इसलिए हम डायरेक्ट
2:22:57चलते हैं
2:22:59इंट्रोडक्शन
2:23:04दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस को 1786 में
2:23:08बंगाल प्रेसीडेंसी का गवर्नर जनरल
2:23:10अप्वॉइंट किया जाता है इसके साथ ही उन्हें
2:23:13ब्रिटिश इंडिया के कमांडर इन के की पोस्ट
2:23:15भी दी जाति है इसका मतलब हुआ की लॉर्ड
2:23:18कार्नवालिस के पास हाईएस्ट सिविल अथॉरिटी
2:23:20के साथ साथ हाईएस्ट मिलिट्री अथॉरिटी की
2:23:23पावर भी ए गई थी कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने
2:23:25उन्हें टास्क दिया था की वो इंडियन
2:23:27एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम को रे ऑर्गेनाइजर
2:23:29करें और साथ ही लैंड रिवेन्यू की समस्या
2:23:32का भी कुछ समाधान निकले लॉर्ड कार्नवालिस
2:23:35अपने प्रेडिसेसर वारेन हेस्टिंग्स द्वारा
2:23:37एस्टेब्लिश किया गए सिस्टम को और इंप्रूव
2:23:40करते हैं और इंडिया में एडमिनिस्ट्रेशन का
2:23:42एक ऐसा सुपरस्ट्रक्चर तैयार करते हैं जो
2:23:45यहां 1858 तक चला है तो आई एक एक करके
2:23:49लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा किया गए
2:23:51रिफॉर्म्स को समझते हैं
2:23:56वारेन हेस्टिंग्स ने जो जुडिशल सिस्टम
2:23:58एस्टेब्लिश किया था कार्नवालिस उसमें कुछ
2:24:01चेंज करते हैं जैसे की 1787 में वो जिला
2:24:05कलेक्टर्स को फिर से दीवानी अदालत का जज
2:24:07बना देते हैं इससे पहले वारेन हेस्टिंग्स
2:24:10ने 1774 में कलेक्टोरस की जुडिशल पावर्स
2:24:13को खत्म कर दिया था लॉर्ड कार्नवालिस में
2:24:16सिर्फ कलेक्टर्स की जुडिशल पावर्स को
2:24:18रिस्टोर करते हैं बल्कि उन्हें पहले से भी
2:24:20ज्यादा माजीस्तूरियल पावर्स दे देते हैं
2:24:22दूसरा रिफॉर्म 79 से 92 के पीरियड में
2:24:26क्रिमिनल एडमिनिस्ट्रेशन की फील्ड में
2:24:28इंट्रोड्यूस होता है जिला फौजदारी अदालत
2:24:31को अबॉलिश करके उनकी जगह कर सर्किट कोर्स
2:24:34बनाई जाति हैं इनमें से तीन बंगाल में थी
2:24:36और एक भी हर में और इन सर्किट कोट्स में
2:24:39यूरोपियन ऑफिसर्स को ही जज पॉइंट किया
2:24:42जाता है और इनको एसिस्ट करते थे अजीज और
2:24:45मुफ्तीज इससे पहले फौजदारी अदालत में
2:24:47इंडियन को ही जज अप्वॉइंट किया जाता था हम
2:24:50का सकते हैं की यहां से जुडिशल सिस्टम में
2:24:52से इंडियन को अलग करने की शुरुआत हो जाति
2:24:55है लॉर्ड कार्नवालिस का सबसे इंपॉर्टेंट
2:24:58जुडिशल रिफॉर्म था उनका 1793 का कौन बाल
2:25:01स्कूल में उनके सभी रिफॉर्म्स फाइनल शॉप
2:25:05लेते हैं और ये प्रायमरीली सिपरेशन ऑफ
2:25:08पावर के प्रिंसिपल पर बेस्ड था कौन वो
2:25:11इसको रिलाइज होता है की कलेक्टर्स के हाथ
2:25:13में जुडिशल पावर्स देना सही डिसीजन नहीं
2:25:15था क्योंकि जिनके पास रिवेन्यू कलेक्शन की
2:25:18पावर थी वो रिवेन्यू के केसेस को
2:25:20इंपर्शाली कैसे डिसाइड कर सकते थे इसलिए
2:25:23कार्नवालिस कोर्ट में वो सिपरेशन ऑफ
2:25:26पावर्स के प्रिंसिपल को फॉलो करते हैं और
2:25:28कलेक्टर्स की सभी जुडिशल और मैजिस्टिशियल
2:25:31पावर्स को खत्म कर दिया जाता है सिविल
2:25:34कोट्स को प्रेसीडे करने के लिए जिला जज
2:25:36नाम से एक नई ऑफिसर क्लास की शुरुआत की
2:25:39जाति है इसके अलावा कंडोम
2:25:47क्वालिटी और जस्टिस के वेस्टर्न आइडिया पर
2:25:50बेस्ड थे इसीलिए रिलिजियस लॉस की जगह
2:25:55इन ट्रोड्यूस किया जाता है लेकिन एकदम नया
2:25:58सिस्टम था और आम जनता को इसे समझना में
2:26:00काफी दिक्कत होती थी साथ ही जस्टिस के लिए
2:26:03अब लॉयर्स की जरूर भी होने लगी थी इसीलिए
2:26:05एक तरह से जस्टिस अब एक्सपेंसिव हो गई थी
2:26:08और आम मां की रेट से बाहर
2:26:12वालों इसके जुडिशल रिफॉर्म्स की बात लिए
2:26:16अब उनके पुलिस रिफॉर्म्स को जानते हैं
2:26:22जुडिशल रिफॉर्म्स को सप्लीमेंट करने के
2:26:24लिए पुलिस एडमिनिस्ट्रेशन में भी कुछ
2:26:26इंपॉर्टेंट चेंज किया जाते हैं सबसे पहले
2:26:29तो लॉर्ड कार्नवालिस जमींदारा की पुलिस
2:26:32पावर्स को खत्म कर देते हैं उनकी जगह अब
2:26:35जिला पुलिस का कंट्रोल इंग्लिश
2:26:36मैजिस्ट्रेट को दिया जाता है हर एक
2:26:39डिस्ट्रिक्ट को थाना या पुलिस सर्किल में
2:26:41डिवाइड कर दिया जाता है एक सर्किल का
2:26:44एरिया लगभग 20 स्क्वायर माइल्स का होता
2:26:47ठाणे का इंचार्ज इंडियन ऑफिसर के पास होता
2:26:49था जिसे दरोगा कहते थे और उन्हें एसिस्ट
2:26:53करने के लिए बहुत से कांस्टेबल भी होते थे
2:26:55हम का सकते हैं की इंडिया में मॉडर्न
2:26:58पुलिस सिस्टम की शुरुआत यहां से होती है
2:27:00दोस्तों जुडिशल और पुलिस रिफॉर्म्स के साथ
2:27:03ही लॉर्ड कार्नवालिस अपने
2:27:09फादर ऑफ सिविल सर्विसेज भी कहा जाता है
2:27:19कौन वॉइस सबसे पहले कंपनी सर्वेंट के
2:27:22द्वारा किया जान वाले प्राइवेट ट्रेड की
2:27:24प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए स्टेप्स
2:27:26लेते हैं उनको रिलीज होता है की कंपनी के
2:27:30एम्पलाइज की सैलरी बहुत कम है और उसको
2:27:32सप्लीमेंट करने के लिए वो करप्शन या इलीगल
2:27:35मिंस का उसे करते हैं इसलिए वो एम्पलाइज
2:27:38की सैलरी रेस कर देते हैं इसके साथी कौन
2:27:41वालरस कंपनी में नेपोटिज्म और पॉलीटिकल
2:27:44फेवरेटीज्म को भी कम करते हैं वो मेरिट के
2:27:47बेसिस पे अपॉइंटमेंट स्टार्ट करते हैं
2:27:49यहां तक की एक बार वो प्रिंस ऑफ वेल्स की
2:27:52रिकमेंडेशन को भी माना कर देते हैं लॉर्ड
2:27:54कार्नवालिस इंडिया में सिविल सर्विसेज को
2:27:57कोवीनेटेड सिविल सर्विस और अनकंवीनियंट
2:28:00सिविल सर्विस में डिवाइड करते हैं कवर्ड
2:28:03सर्विसेज में इंडियन को अप्वॉइंट नहीं
2:28:05किया जाता था
2:28:14इससे हमें पता चला है की पॉलिसी रेसिजम से
2:28:18प्रभावित थी
2:28:20लॉर्ड कार्नवालिस ही एडमिनिस्ट्रेटिव
2:28:22मशीनरी के यूरोपिनाइजेशन के लिए
2:28:24रिस्पांसिबल थे यूरोपिनाइजेशन ऑफ
2:28:27एडमिनिस्ट्रेशन
2:28:28दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस रेसियल
2:28:32डिस्क्रिमिनेशन के सपोर्टर थे उनके
2:28:34अकॉर्डिंग तो हर एक इंडियन क्राफ्ट था
2:28:36इसलिए सभी हायर सर्विसेज को वो सिर्फ
2:28:39यूरोपीय के लिए रिजर्व कर देते हैं
2:28:41कोविनेटेड सर्विसेज के दरवाजे भी उन्होंने
2:28:44ही इंडियन के लिए बैंड कर दिए थे आर्मी
2:28:47में इंडियन सूबेदार की पोस्ट से आगे नहीं
2:28:50जा सकते थे और सिविल सर्विसेज में मुसिप्स
2:28:53या डिप्टी कलेक्टर से ऊपर की पोस्ट पर
2:28:55उनका अपॉइंटमेंट नहीं हो सकता था सोने
2:28:58वाली बात यह है की उसे समय की इंग्लैंड
2:29:00में भी एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज करप्शन
2:29:03से फ्री नहीं थी और कंपनी
2:29:13को इंप्रूव करने के लिए तो उन्होंने उनकी
2:29:16सैलरी को इंक्रीज कर दिया था लेकिन इंडियन
2:29:19एम्पलाइज के लिए उन्होंने कभी सिम मेथड
2:29:21अप्लाई करने की कोशिश भी नहीं की इससे साफ
2:29:24होता है
2:29:28उन्होंने ही राशलिज्म की पॉलिसी पर ऑफिशल
2:29:32मोर भी लगा दी थी और इस राशलिज्म की
2:29:35पॉलिसी से एंग्लो इंडियन रिलेशंस ब्रिटिश
2:29:37रूल के आखिरी समय तक ग्रसित रहते हैं
2:29:43कमर्शियल रिफॉर्म्स को डिस्कस कर लेते हैं
2:29:46कमर्शियल रिफॉर्म्स दोस्तों
2:29:55कंपनी के खुद के गुड्स तो यूरोप में कई
2:29:57बार घाटे में बेचे जा रहे थे लेकिन कंपनी
2:30:00के सर्वेंट जो गुड्स खुद यूरोप भेजते थे
2:30:02अपनी प्राइवेट ट्रेड के लिए उन्हें काफी
2:30:05मुनाफा हो रहा था
2:30:061774 में कोलकाता में बोर्ड ऑफ ट्रेड
2:30:09एस्टेब्लिश किया गया था और तभी से कंपनी
2:30:12अपने गुड्स यूरोपियन और इंडियन ठेकेदार के
2:30:15थ्रू प्रोक्योर करती थी यह ठेकेदार
2:30:17यूजुअली गुड्स को हाय प्राइसेस पर सप्लाई
2:30:20करते थे और साथ ही इनकी क्वालिटी भी
2:30:22इनफीरियर होती थी बोर्ड के मेंबर्स
2:30:24ठेकेदार पर एक्शन लेने की जगह
2:30:33से कम करके 5 मेंबर्स की कर देते हैं इसके
2:30:36साथ ही कांट्रैक्ट्स के थ्रू
2:30:38प्रोक्योरमेंट का मेथड खत्म कर दिया जाता
2:30:40है और इसकी जगह अब कमर्शियल रेजिडेंट्स और
2:30:43एजेंट के थ्रू सप्लाई के मेथड को अपना
2:30:45लिया जाता है
2:31:12लैंड रिवेन्यू सिस्टम में सुधार लाना
2:31:14कार्नवालिस का सबसे बड़ा कंसर्न था वारेन
2:31:17हेस्टिंग्स के फाइव एयर और 1 एयर सेटलमेंट
2:31:19जो बिल्डिंग सिस्टम पर बेस्ड थे फेल हो
2:31:22चुके थे
2:31:22कंपनी को टाइम पर रिवेन्यू नहीं मिल पता
2:31:25था और उसकी अमाउंट भी फिक्स नहीं थी इसके
2:31:28साथ ही वारेन हेस्टिंग्स के बिडिंग सिस्टम
2:31:30की वजह से कल्टीवेटर भी परेशान थे इन सभी
2:31:33प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए
2:31:34कार्नवालिस 1793 में बंगाल में परमानेंट
2:31:38सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करते हैं इस सिस्टम
2:31:41के अकॉर्डिंग जमींदारा को लैंड ओनर माना
2:31:43गया और उनके साथ 79 में 10 साल का
2:31:47सेटलमेंट किया जाता है जिसे 1793 में
2:31:50परमानेंट कर दिया जाता है जमींदारा को
2:31:52लैंड में हेरेडिटरी राइट्स मिल गए मतलब
2:31:55उनके बाद जमींदारी उनके ही सक्सेस को
2:31:58ट्रांसफर हो जाएगी सेटलमेंट के अकॉर्डिंग
2:32:00टोटल रिवेन्यू का 89% शेर कंपनी का होगा
2:32:03और 11% जमींदारा अपनी पास रख सकते हैं
2:32:07इसमें परमानेंट का मतलब था की लैंड
2:32:09रिवेन्यू का अमाउंट हमेशा के लिए फिक्स कर
2:32:11दिया
2:32:12यह अमाउंट लैंड का सर्वे करके उसकी
2:32:15प्रोडक्टिविटी और पेस्ट की रिवेन्यू
2:32:17रिकॉर्ड्स के बेसिस पर फिक्स किया जाना था
2:32:19यानी की अब रेगुलर बेसिस पर लैंड रिवेन्यू
2:32:23की डिमांड चेंज नहीं की जाएगी और अमाउंट
2:32:25को बिडिंग से भी डिसाइड नहीं किया जाएगा
2:32:27परमानेंट सेटलमेंट करने के पीछे कंपनी का
2:32:30मोटर था की उन्हें रेगुलर और फिक्स
2:32:33रिवेन्यू मिलता रहे इसके साथी कौन बोल
2:32:35इसका विचार था की क्योंकि जमींदार जब लैंड
2:32:37ऑनर्स थे और प्रोडक्टिविटी इंक्रीज करने
2:32:40में उनका अपना फायदा था तो वो लैंड में
2:32:42इन्वेस्ट करेंगे साथ ही कल्टीवेटर पर भी
2:32:45बिडिंग सिस्टम के जैसे एक्सेसिव रिवेन्यू
2:32:47का प्रेशर नहीं आएगा एक तरह से लॉर्ड
2:32:50कार्नवालिस इंडिया के जमींदारा को
2:32:52इंग्लैंड के लैंडलॉर्ड वाला रोल देना
2:32:54चाहते थे इस सेटलमेंट का एक फीचर सनसेट
2:32:57क्लोज़ भी था इसका मतलब होता है की
2:33:00जमींदारा को फिक्स डेट पर शाम होने से
2:33:03पहले रिवेन्यू डिपॉजिट करना होता था अगर
2:33:05वो ऐसा नहीं करते थे तो उनके जमींदारी
2:33:08राइट्स को नीलम कर दिया जाता था हम का
2:33:11सकते हैं की परमानेंट सेटल के पीछे
2:33:13इंटेंशन तो अच्छी थी लेकिन फिर भी इसमें
2:33:15बहुत सी प्रॉब्लम्स देखने को मिलती है
2:33:17सबसे पहले प्रॉब्लम थी की लैंड रिवेन्यू
2:33:21के अमाउंट का रेट बहुत ही रखा गया था
2:33:23क्योंकि कंपनी परमानेंट तोर पर रेट फिक्स
2:33:26कर रही थी इसलिए उनकी कोशिश थी की ज्यादा
2:33:29से ज्यादा रेट रखा जाए इससे होता ये है की
2:33:32जमींदारा इतना रिवेन्यू कलेक्ट नहीं कर
2:33:34पाते थे और सनसेट क्लोज़ के तहत उनकी
2:33:37जिम्मेदारी भी चली जाति थी इसके साथ ही
2:33:39जमीदार ज्यादा से ज्यादा रिवेन्यू कलेक्ट
2:33:42करने के लिए कल्टीवेटर को बहुत ज्यादा
2:33:44हरायस भी करने लगता हैं जमींदारा को लॉन्ग
2:33:47टर्म के लिए लैंड में इन्वेस्ट करने का
2:33:49कोई इंसेंटिव भी इस सिस्टम में नहीं था
2:33:51परमानेंट सेटलमेंट लैंडलॉर्डिज्म के
2:33:54फिनोफेना को भी जन्म देता है
2:33:58जब लैंड ओनर अपनी लैंड होल्डिंग के पास एन
2:34:01रहकर कहानी दूर रहने लगता है जैसे की इसकी
2:34:04इसमें लैंड रोड सिटी में रहने ग जाते
2:34:07इस सेटलमेंट की वजह से ही पहले बार
2:34:09प्रेजेंट्स लैंड पर अपने राइट्स को देते
2:34:11हैं और टेनेंस आते बिल बन जाते हैं हम का
2:34:15सकते हैं की परमानेंट सेटलमेंट भी लैंड
2:34:17रिवेन्यू का परमानेंट सॉल्यूशन नहीं दे
2:34:19पता और आगे जाकर ब्रिटिशर्स बाकी प्रोविंस
2:34:24लैंड रिवेन्यू सिस्टम इंट्रोड्यूस करते
2:34:26हैं
2:34:36अदर इंपॉर्टेंट इवेंट्स
2:34:42दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस के टाइम में ही
2:34:441790 में थर्ड एंग्लो मैसूर वार भी हुआ था
2:34:47इसमें कौन वालिस ने टीपू सुल्तान को हराकर
2:34:50उनके साथ 1792 में ट्रीटी का श्रीरंगापटना
2:34:54साइन की थी एंग्लो मैसूर वर्स को हम अपनी
2:34:57वीडियो में पहले ही कर कर चुके हैं डिटेल
2:35:00में समझना के लिए आप वो वीडियो रेफर कर
2:35:02सकते हैं लॉर्ड कार्नवालिस के टाइम में ही
2:35:041791 में बनारस में संस्कृत कॉलेज स्टार्ट
2:35:08किया गया था जिसके फाउंडर जोनाथन थे
2:35:12कंक्लुजन
2:35:15दोस्तों
2:35:1786 से 1793 तक गवर्नर जनरल की पोस्ट पर
2:35:21रहते हैं लेकिन इसके साथ ही ये पहले ऐसे
2:35:24गवर्नर जनरल भी थे जिन्हें इस पोस्ट पर
2:35:27फिर से अप्वॉइंट किया जाता है जनवरी 185
2:35:30में
2:35:33जनरल अप्वॉइंट होते हैं लेकिन उनका सेकंड
2:35:36टर्म राहत है क्योंकि अक्टूबर 185 में
2:35:39इलनेस की वजह से प्रेजेंट अप के गाजीपुर
2:35:43में उनकी मृत्यु हो जाति है
2:35:47और आज भी यहां उनका मौसम लिए मौजूद है तो
2:35:51दोस्तों हमने एक और इंपॉर्टेंट ब्रिटिश
2:35:54गवर्नर को भी कर कर लिया है अब हम अपनी
2:35:57नेक्स्ट वीडियो में
2:36:00डिस्कस करेंगे
2:36:021823
2:36:10[संगीत]
2:36:12दोस्तों आज हम इस वीडियो में दो
2:36:14इंपॉर्टेंट ब्रिटिश गवर्नर जनरल्स के बड़े
2:36:17में बात करने वाले हैं
2:36:18हमने अपनी पिछली वीडियो में लॉर्ड
2:36:21कॉर्नवालिस्को कर किया था जो 1793 तक
2:36:24गवर्नर जनरल की पोस्ट पर रहते हैं उनके
2:36:27बाद 1793 से लेकर 1798 तक गवर्नर जनरल रहे
2:36:31थे सकों शो जिनके टाइम पीरियड में कोई खास
2:36:34रोमांचक घटना घटित नहीं होती और इनके बाद
2:36:371798 में गवर्नर जनरल बनते हैं लॉजेली जो
2:36:42की इंपॉर्टेंट गवर्नर जनरल्स में से एक
2:36:44हैं और इसीलिए इनके बड़े में डिटेल में
2:36:46चर्चा करना जरूरी हो जाता है तो आई शुरू
2:36:49करते हैं
2:36:58गवर्नर जनरल बने से पहले ब्रिटिश ट्रेजरी
2:37:01के लोड और बोर्ड ऑफ कंट्रोल में कमिश्नर
2:37:04की ऑफिस हॉल कर चुके थे लेकिन इंग्लैंड की
2:37:06पॉलीटिकल लाइफ में वो अपना कुछ खास
2:37:09इंप्रेशन नहीं बना पे थे या फिर ये का
2:37:11सकते हैं की उन्हें अभी कैसा मौका ही नहीं
2:37:13मिला था जहां वो अपनी काबिलियत दिखा पाएं
2:37:15उन्हें ये मौका मिला है जब 1798 में उनका
2:37:19अपॉइंटमेंट गवर्नर जनरल की पोस्ट पर होता
2:37:21है
2:37:22इंडिया में अपने मिशन को लेकर बहुत क्लियर
2:37:24विजन से आए थे वो कंपनी को इंडिया में
2:37:27सुप्रीम पावर बना देना चाहते थे उसकी
2:37:29टेरिटरीज को और भी ज्यादा इंक्रीस करना
2:37:31चाहते थे और सभी इंडियन स्टेटस को कंपनी
2:37:34के डिपेंडेंट की पोजीशन में ले आना चाहते
2:37:36थे
2:37:39और नॉन-इंचन की पॉलिसी को छोड़कर वार की
2:37:42पॉलिसी शुरू करते हैं उनके अकॉर्डिंग नॉन
2:37:45इंटरवेंशन की पॉलिसी से सिर्फ कंपनी के
2:37:48दुश्मनों को ही फायदा हो सकता था और उनकी
2:37:50इस फॉरवर्ड पॉलिसी को इंग्लैंड की वार
2:37:52मिनिस्ट्री भी सपोर्ट करती है
2:37:55इंडियन रुलर्स के अगेंस्ट बहुत ही ऑफेंसिव
2:37:58एटीट्यूड अडॉप्ट करते हैं
2:38:00वो खुद को बंगाल टाइगर कहते थे जो हमेशा
2:38:04ही शिकार की तलाश में राहत था और बंगाल के
2:38:07इस टाइगर का पहले शिकार बनते हैं मैसूर के
2:38:10टाइगर टीपू सुल्तान
2:38:11टीपू सुल्तान के साथ 1799 में होता है
2:38:14फोर्थ एंग्लो मैसूर वार इस वार में टीपू
2:38:18सुल्तान मारे जाते हैं और मैसूर की आदि से
2:38:20ज्यादा टेरिटरी पर कंपनी का कब्ज हो जाता
2:38:23है जो टेरिटरी बजती है उसको बॉडीगार्ड
2:38:26डायनेस्टी के एक माइनर राजा को दे दिया
2:38:28जाता है और उनके साथ सब्सिडियरी एलाइंस की
2:38:31ट्वीटी साइन कर ली जाति है मतलब
2:38:33इनडायरेक्ट पूरा मैसूर ही कंपनी के
2:38:36कंट्रोल में ए चुका था मैसूर के बाद
2:38:38बैलंसली अपना अगला शिकार बनाते हैं मराठस
2:38:41को उनके साथ 183 से 1800 के बीच होता है
2:38:45सेकंड एंग्लो मराठा वार
2:38:48सेकंड एंग्लो मराठा वार के और होने पर
2:38:50कंपनी पेशवा के साथ-साथ होलकर सिंधिया और
2:38:54भोसले के साथ भी सब्सिडियरी एलाइंस की
2:38:56त्रुटीज साइन कर लेती है इसके साथ ही
2:38:59मराठा अंपायर की टेरिटरी का एक बड़ा
2:39:02हिस्सा भी कंपनी के कब्जे में ए जाता है
2:39:04तो दोस्तों यह थे लॉर्ड वालेस्ले के टाइम
2:39:07पीरियड के दो इंपॉर्टेंट हुआ जिनके ध्रुव
2:39:10वह समय इंडिया की सबसे पावरफुल पावर्स कहे
2:39:13जान वाले मैसूर और मराठा अंपायर को
2:39:15डिस्ट्रॉय कर देते हैं आई अब जानते हैं
2:39:18लॉर्ड वेलेजली की सबसे इंपॉर्टेंट पॉलिसी
2:39:20यानी की सब्सिडियरी एलाइंस सिस्टम के बड़े
2:39:23में
2:39:24सब्सिडियरी एलाइंस दोस्तों सब्सिडियरी
2:39:28एलाइंस बेसिकली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी
2:39:31और इंडियन स्टेटस के बीच होने वाली
2:39:34जिसमें इंडियन किंग्डम्स अपनी सॉवरेन्टी
2:39:37को देते हैं इंडिया में ब्रिटिश अंपायर को
2:39:40खड़ा करने में सब्सिडियरी एलाइंस सिस्टम
2:39:42की बड़ी भूमिका रहती है लॉर्ड वेलेजली ने
2:39:44इस सिस्टम को फार्मूले फ्रेम किया था
2:39:47लेकिन इसका सबसे पहले बार उसे किया था
2:39:49फ्रेंच गवर्नर डी प्लेन आपको याद ही होगा
2:39:53की कैसे करना ठीक शब्द के समय डबल इंडियन
2:39:57सिस्टम के साथ एलियंस बनाते हैं जिसमें
2:39:59उन्हें प्रोटेक्शन देने के बदले में वह
2:40:02उनसे ट्रिब्यूट और टेरिटरीज दोनों ही ले
2:40:04लेते हैं इसके बाद ब्रिटिश के साथ इस तरह
2:40:07के एलाइंस में आने वाले पहले रोलर थे अवध
2:40:10के नवाब सुझाव द्वारा
2:40:24ये कम किया था वैली ने वो सब्सिडियरी
2:40:27एलाइंस के प्रोविजंस को वेल डिफाइंड बनाते
2:40:29हैं और फिर इसे ब्रिटिश अंपायर के
2:40:31एक्सपेंशन के लिए एक हथियार की तरह उसे
2:40:34करते हैं आई अब सब्सिडियरी एलाइंस के
2:40:37फीचर्स को समझते हैं फीचर्स ऑफ सब्सिडियरी
2:40:40एलाइंस दोस्तों जो इंडियन रुलर्स ब्रिटिश
2:40:43के साथ सब्सिडियरी एलाइंस में इंटर करते
2:40:46थे उन्हें अपनी आर्मी को डिसोल्व करके
2:40:48अपनी टेरिटरी में ब्रिटिश फोर्स को रखना
2:40:51होता था और इस ब्रिटिश आर्मी की मेंटेनेंस
2:40:54का खर्चा भी उन्हें ही देना होता था अगर
2:40:57कोई रोलर पेमेंट करने में फेल हो जाता था
2:40:59तो उसकी टेरिटरी का कुछ पार्ट कंपनी अपने
2:41:02कब्जे में कर लेती थी इसके बदले में
2:41:04ब्रिटिश इंडियन स्टेट को किसी भी फॉरेन
2:41:07अटैक या फिर इंटरनल रिवॉर्ड से प्रोटेक्शन
2:41:10ऑफर करते थे इंडियन रुलर्स को अपने कोर्ट
2:41:13में एक ब्रिटिश रेजिडेंट को भी रखना होता
2:41:15था वैसे तो ट्रीटी में प्रॉमिस किया जाता
2:41:18था की यह रेजिडेंस इंडियन स्टेट के इंटरनल
2:41:21अफेयर्स में कोई इंटरफ्रेंस नहीं करेंगे
2:41:22लेकिन यह अक्सर पेपर पर ही र जाता था इसके
2:41:27साथ ही इंडियन स्टेट किसी भी और फॉरेन
2:41:30पावर के साथ कोई एलाइंस नहीं कर सकता था
2:41:32और ना ही अपने यहां ब्रिटिशर्स के अलावा
2:41:35किसी और यूरोपियन को सर्विस पर रख सकता था
2:41:37और अगर एलिजंस साइन करने से पहले कोई
2:41:41यूरोपियन उनके यहां कम कर रहा होता था तो
2:41:44उनकी सर्विस को भी टर्मिनेट करना होता था
2:41:46इस प्रोविजन का मोटे था फ्रेंच इन्फ्लुएंस
2:41:49को कम करना बिना ब्रिटिश अप्रूवल के
2:41:52इंडियन रोलर किसी दूसरे इंडियन रोलर के
2:41:55साथ भी किसी तरह के राजनैतिक संबंध नहीं
2:41:58बना सकते थे इस तरह से इंडियन रोलर अपनी
2:42:01सभी मिलिट्री और फॉरेन पावर्स को को देते
2:42:03हैं दूसरे शब्दों में कहें तो वह अपनी
2:42:06साड़ी इंडिपेंडेंस होकर ब्रिटिश बन जाते
2:42:09हैं और इस तरह धीरे-धीरे इंडिया का बहुत
2:42:13सर पार्ट ब्रिटिश कंट्रोल में ए जाता है
2:42:241799 में मैसूर और तंजौर 1801 में अवध
2:42:2918002 में पेशवा 183 में घोसला और 18004
2:42:34में सिंधिया भी सब्सिडियरी एलाइंस पर साइन
2:42:36कर देते हैं इसके अलावा जोधपुर
2:42:40मछरी बूंदी और भरतपुर के स्टेटस भी सेलेंस
2:42:44के पार्ट बनते हैं दोस्तों सब्सिडियरी
2:42:47एलाइंस की वजह से इंडिया का एक बहुत बड़ा
2:42:49हिस्सा कंपनी के इनडायरेक्ट कंट्रोल में ए
2:42:52जाता है इसके साथ ही अब इंडियन रुलर्स के
2:42:55खर्च पर कंपनी एक बड़े आर्मी को भी मेंटेन
2:42:58कर शक्ति थी यही आर्मी आगे चलकर इंडिया के
2:43:01बाकी पार्ट्स को जितने में उनकी हेल्प
2:43:03करती है इसीलिए सब्सिडियरी एलाइंस इंडिया
2:43:07में ब्रिटिश अंपायर के एक्सपेंशन के लिए
2:43:09बहुत इंपॉर्टेंट पॉलिसी मनी जाति है
2:43:12इस तरह लॉर्ड वेलेजली अपने विजन को पूरा
2:43:15करने में सफल रहते हैं उन्होंने एन सिर्फ
2:43:18इंडिया में ब्रिटिश अंपायर का टेरिटोरियल
2:43:20एक्सपेंशन किया बल्कि कंपनी को इंडिया की
2:43:23सुप्रीम मिलिट्री अथॉरिटी भी बना दिया
2:43:25दोस्तों लोट बैलंसली के बाद एक बार फिर से
2:43:28लॉर्ड कार्नवालिस गवर्नर जनरल बनकर इंडिया
2:43:31आते हैं लेकिन जैसा की हमने अपनी पिछली
2:43:34वीडियो में भी आपको बताया था इससे पहले की
2:43:36वह अपने सेकंड टर्म में कुछ इंपॉर्टेंट
2:43:38करते उनकी मृत्यु हो जाति है उनके बाद 185
2:43:42से 1800 तक जोसे बार लोग गवर्नर जनरल रहे
2:43:46थे उनके टाइम पीरियड की सिर्फ एक ही चीज
2:43:48याद रखना लायक है और वो है 186 में हुई
2:43:51वेल्लोर से पोयम उतनी दोस्तों यह मुटनी
2:43:55वेल्लोर में स्टेशन मद्रास रेजीमेंट की
2:43:57कुछ सिपहिया द्वारा की गई थी इसके पीछे का
2:44:00करण था ट्रेडिशनल
2:44:03के उसे समय के गवर्नर जनरल बंटिंग के पास
2:44:06किया था विलियम
2:44:09बेंटिकिनी को सरप्राइज भी कर दिया था
2:44:12इसके बाद 187 से लेकर 1813 तक लॉर्ड मिंटो
2:44:16वन गवर्नर जनरल की पोस्ट पर रहते हैं उनका
2:44:19टाइम पीरियड भी हमारे लिए इंपॉर्टेंट नहीं
2:44:21है इसलिए अब हम चलते हैं अगले गवर्नर जनरल
2:44:24लॉर्ड हेस्टिंग्स की तरफ
2:44:27लॉर्ड हेस्टिंग 1813 तू 1823 दोस्तों जहां
2:44:33एक तरफ लोट बैलेंस लेने इंडिया में कंपनी
2:44:35की मिलिट्री सुप्रीमेसी को एस्टेब्लिश
2:44:37किया था वहीं लॉर्ड हेस्टिंग्स ने इंडिया
2:44:40में ब्रिटिश पैरामाउंटसी को इंपोज करने का
2:44:43कम किया था लेकिन इंडिया में आने के बाद
2:44:45उनके सामने सबसे पहले चैलेंज था गोरखास का
2:44:48तो आई इसको थोड़ा डिटेल में डिस्कस करते
2:44:51हैं गोरखा वार और दी एंग्लो नेपाल वार 18
2:44:5514 तू 1816
2:44:58दोस्तों
2:44:591768 में गोरखास ने नेपाल पर अपना कंट्रोल
2:45:02एस्टेब्लिश कर लिया था इसके बाद वह अपनी
2:45:05डोमिनियन को माउंटेन के आगे एक्सपेंड करना
2:45:07शुरू करते हैं नॉर्थ में तो चाइनीस इन्हें
2:45:10एक्सपेंशन करने नहीं देते इसलिए यह बंगाल
2:45:13और अवध की तरफ पुश करते हैं
2:45:17गोरखपुर जिला
2:45:23में ए जाता है इसके बाद कनफ्लिक्ट शुरू
2:45:26होता है जब गुरखास बुधवार और शिवराज जिला
2:45:29पर कब्जा कर लेते हैं उसे समय तो ब्रिटिश
2:45:32बिना किसी ओपन कनफ्लिक्ट के इंडस्ट्रीज को
2:45:35रे ऑक्युपी कर लेते
2:45:41तीन पुलिस स्टेशंस पर अटैक कर देते हैं
2:45:47और गोरखास के अगेंस्ट ऑफेंसिव लॉन्च करने
2:45:51का डिसीजन लेते हैं
2:45:5212000 की गोरख आर्मी के अगेंस्ट
2:45:54हेस्टिंग्स 34000 सोल्जर की बड़े आर्मी
2:45:58तैयार करते हैं लेकिन 1814 का यह कैंपेन
2:46:02बुरी तरह फूल हो जाता है इसके बाद भी
2:46:04ब्रिटिश हर नहीं मानते और फिर से कोशिश
2:46:07करते हैं अप्रैल 1815 में वो कुमाऊं हिल्स
2:46:11में अल्मोड़ा को कैप्चर करने में कामयाब
2:46:13होते हैं और मैं 1815 में अमर सिंह थापा
2:46:17से मालाओं का वोट भी जीत लिया जाता है
2:46:19मालाओं के फल के बाद गोरखास नेगोशिएशंस
2:46:23करने के लिए तैयार हो जाते हैं लेकिन
2:46:25हेस्टिंग्स की डिमांड्स उनके एटीट्यूड
2:46:27चेंज कर देती हैं और एक बार फिर से दोनों
2:46:30के बीच होस्टिलिटीज शुरू हो जाति हैं
2:46:36बुरी तरह हर दिया जाता है इसके बाद गोरखा
2:46:39समझ जाते हैं की उनके लिए अब ब्रिटिश को
2:46:42और रजिस्टर करना पॉसिबल नहीं है और इसीलिए
2:46:45मार्च 1816 में वो ट्रीटी का सुगौली को
2:46:48एक्सेप्ट कर लेते हैं
2:46:52कुमाऊं जिला कंपनी को सुरेंद्र कर देते
2:46:55हैं इसके साथ ही दोनों के बीच तराई
2:46:57बाउंड्री को पिलर्स के थ्रू मार्क कर दिया
2:47:00जाता है
2:47:01गुरखास काठमांडू में ब्रिटिश रेजिडेंट
2:47:03रखना के लिए भी मां जाते हैं और इसके साथ
2:47:06ही सिक्किम से परमानेंटली विद्रोह करने के
2:47:08लिए तैयार हो जाते हैं
2:47:10ब्रिटिशर्स को हिल स्टेशंस और समर कैपिटल
2:47:13के लिए साइट भी मिल जाति है जैसे की शिमला
2:47:16मसूरी रानीखेतसेत्र इसके साथ ही
2:47:19ब्रिटिशर्स गोरखास को अपनी आर्मी में भी
2:47:22शामिल कर लेते हैं जो आगे छलके इंडिया में
2:47:25कंपनी की डोमिनियन को एक्सपेंड करने में
2:47:27काफी हेल्प करते हैं तो दोस्तों इसके बाद
2:47:30लॉर्ड हेस्टिंग्स का नेक्स्ट चैलेंज होता
2:47:32है पिंडारी का इशू
2:47:35पिंडारी इसके बड़े में हमने एंग्लो मराठा
2:47:38वर्स के लेक्चर में डिटेल में डिस्कस किया
2:47:40था इसके अलावा मराठस के साथ 1816 से 18-18
2:47:44तक थर्ड एंग्लो मराठा वार भी लॉर्ड
2:47:47हेस्टिंग्स के पीरियड में ही हुआ था थर्ड
2:47:50एंग्लो मराठा वार से पहले हिस्ट्री मराठस
2:47:52के चैलेंज को हमेशा के लिए खत्म कर देते
2:47:54हैं दोस्तों मराठस के डिक्लिन के बाद
2:47:57प्रैक्टिकल तो कंपनी इंडिया में सुप्रीम
2:48:00पावर बन गई थी लेकिन अभी भी मुगल रोलर
2:48:02सेरेमोनियल तोर पर इंडिया के एंपरर थे और
2:48:05गवर्नर जनरल की सेल पर डी सर्वेंट ऑफ
2:48:08एंपरर फ्रिज लिखा होता था लॉर्ड
2:48:10हेस्टिंग्स इसे बदलना चाहते थे इसलिए वह
2:48:13अपने नॉर्दर्न इंडिया के टूर पर मुगल
2:48:15एंपरर अकबर डी सेकंड से मिलने से इनकार कर
2:48:18देते हैं वो साफ कर देते हैं की मुगल
2:48:20एंपरर को पहले सभी ऐसी सेरेमनी को खत्म
2:48:23करना होगा जो कंपनी के डोमिनियंस पर उनकी
2:48:25सुप्रीमेसी दर्शाती हो मतलब की अंपायर को
2:48:29कंपनी के साथ एक क्वालिटी के स्टेटस पर
2:48:31मिलन होगा
2:48:35और मुगल एंपरर अकबर डी सेकंड
2:48:42पर मीटिंग करते हैं इस तरह से लॉर्ड
2:48:45हेस्टिंग्स ने एन सिर्फ कंपनी को सुप्रीम
2:48:47पावर बनाया बल्कि उसको एक सुप्रीम पावर की
2:48:49तरह बिहेव करना भी शिखा दिया दोस्तों वैसे
2:48:53तो लॉर्ड हेस्टिंग्स अपनी वर्स के लिए ही
2:48:55जान जाते हैं लेकिन इनके टाइम पीरियड में
2:48:58कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स भी हुए थे
2:49:00आई उनको भी डिस्कस कर लेते हैं
2:49:04एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स अंदर
2:49:06हेस्टिंग्स दोस्तों लॉर्ड हेस्टिंग्स काफी
2:49:09लकी थे क्योंकि उनके पास जॉन मालकिन
2:49:13स्टंट और चार्ल्स में कफ जैसे कैपेबल
2:49:16एडमिनिस्ट्रेटर मौजूद थे यही
2:49:19एडमिनिस्ट्रेटर उनके टाइम पीरियड में
2:49:21रिफॉर्म्स को इंट्रोड्यूस करते हैं जैसे
2:49:23की थॉमस मुनरो जो 1820 में मद्रास के
2:49:27गवर्नर बनते हैं मालाबार कोयंबटूर मदुरई
2:49:30और डिंडीगुल में लैंड टेन्योर के रियट
2:49:33वादी सिस्टम को इंट्रोड्यूस करते हैं रूट
2:49:35बड़ी सिस्टम में सेटलमेंट डायरेक्टली
2:49:37रीयूडीएच यानी की एक्चुअल टिलर के साथ
2:49:40किया जाता था मतलब कल्टीवेटर ही लैंड
2:49:43रिवेन्यू का डायरेक्ट पैर बन जाता है बिना
2:49:46किसी जमींदार या विलेज कम्युनिटी के बीच
2:49:48में आए इसी तरह नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंस
2:49:51में मारवाड़ी सिस्टम इंट्रोड्यूस किया
2:49:53जाता है इसके अकॉर्डिंग सेटलमेंट विलेज
2:49:56कम्युनिटी या महल के रिप्रेजेंटेटिव के
2:49:58साथ किया जाता था इंडिविजुअल कल्टीवेटर का
2:50:01शेर विलेज के लोग आपस में सेटल कर सकते
2:50:04दोस्तों ट्रायोटवारी और महालवाड़ी
2:50:06सेटलमेंट को और ज्यादा डिटेल में हम अपनी
2:50:09लैंड रिवेन्यू सिस्टम की वीडियो में कर
2:50:11करेंगे
2:50:18ज्यूडिशरी और एग्जीक्यूटिव का सिपरेशन कर
2:50:20दिया था लेकिन हिस्ट्री कलेक्टर को
2:50:24मजिस्ट्रेट का ऑफिस देना शुरू कर देते हैं
2:50:26तो यह थे लॉर्ड हेस्टिंग्स के समय में
2:50:28होने वाले कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स
2:50:31कंक्लुजन दोस्तों इस तरह लौटबे
2:50:36दोनों ने ही इंडिया में ब्रिटिश अंपायर के
2:50:39एक्सपेंशन का कम किया यह दोनों ही अवार्ड
2:50:42के सपोर्टर थे और कंपनी को इंडिया की
2:50:45सुप्रीम पावर बना देना चाहते थे और हमने
2:50:47देखा की कैसे वो अपने इस विजन में कामयाबी
2:50:51रहते हैं
2:51:00इन्हें ही जाता है
2:51:0438 तू 1835 आज हम एक ऐसे ब्रिटिश गवर्नर
2:51:09जनरल की बात करने वाले हैं जो इंडिया में
2:51:11अपने सोशल रिफॉर्म्स के लिए जानी जाति हैं
2:51:13इसके साथ ही वह फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ
2:51:17इंडिया
2:51:18विलियम बेंटिक जो जेरेमी बेंथम की
2:51:22यूटिलिटेरियन फिलासफी के फॉलोअर थे जिसका
2:51:25सिंपल शब्दों में मतलब होता है मैक्सिमम
2:51:27गुड पर मैक्सिमम पीपल इसी फिलासफी से
2:51:31इंस्पायर होकर वो इंडिया में अलग-अलग
2:51:33रिफॉर्म्स को इंट्रोड्यूस करते हैं तो आई
2:51:35शुरू करते हैं इंट्रोडक्शन दोस्तों
2:51:42की थी उन्होंने 1791 में 16 साल की छोटी
2:51:47सी आगे में ही ई जॉइन कर ली थी और 1798
2:51:50में करनाल की रैंक तक भी पहुंच गए थे
2:51:53वह इंग्लैंड में हाउस ऑफ कॉमनस के मेंबर
2:51:56भी थे इंडिया में उनके करियर की शुरुआत
2:51:58होती है 183 में जब उन्हें मद्रास का
2:52:02गवर्नर अप्वॉइंट किया जाता है दोस्तों 186
2:52:05में वेल्लोर मुटनी के समय विलियम बेंटिक
2:52:08ही मद्रास की गवर्नर है उन्होंने ऑर्डर
2:52:11दिया था की नेटिव सोल्जर अपनी ट्रेडिशनल
2:52:13अटायर नहीं पहन सकते जिसकी वजह से वेल्लोर
2:52:17में तैनात कुछ मद्रास रेजीमेंट विद्रोह कर
2:52:19देती हैं वेल्लोर मुटनी को तो इन्होंने
2:52:22सरप्राइज कर दिया था लेकिन इसके बाद 187
2:52:25में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स इन्हें इंग्लैंड
2:52:27वापस बुला लेते हैं इसके बाद विलियम
2:52:30बेंटिक 1828 में गवर्नर जनरल की पोस्ट पर
2:52:33इंडिया वापस आते हैं
2:52:35गवर्नर जनरल रहते हुए उन्होंने बहुत सारे
2:52:38रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस किया थे आई एक-एक
2:52:41करके उनके रिफॉर्म्स को डिस्कस करते हैं
2:52:43सोशल रिफॉर्म्स ऑफ बेंटिक दोस्तों विलियम
2:52:48बेंटिक से पहले किसी भी गवर्नर जनरल ने
2:52:50इंडिया की सोशल प्रॉब्लम्स को टैकल करने
2:52:52की हिम्मत नहीं दिखाई थी बेंटिक पहले ऐसी
2:52:56गवर्नर जनरल थे जो सोशल इविल्स के अगेंस्ट
2:52:59डॉ पास करते हैं जैसा की आप सब जानते ही
2:53:02होंगे की इंडिया में सती प्रथम का प्रचलन
2:53:05था इस प्रथम के अनुसार हसबैंड की डेथ के
2:53:08बाद वाइफ को भी हसबैंड की चिता के साथ ही
2:53:11जल दिया जाता था इस प्रथम के खिलाफ
2:53:13राजाराम मोहन राय जैसे सोशल रिफॉर्मर्स
2:53:16कैंपबेल शुरू करते हैं इसके साथ ही वह
2:53:19विलियम बेंटिक पर सती प्रथम को इलीगल
2:53:22डिक्लेअर करने का प्रेशर भी बनाते हैं
2:53:25विलियम बेंटिक इनके कैंपेन का सपोर्ट करते
2:53:27हुए दिसंबर 1829 में रेगुलेशन नंबर 17 पास
2:53:32करते हैं जिसके अनुसार सती प्रथम को इलीगल
2:53:35डिक्लेअर कर दिया जाता है और साथ ही इसे
2:53:38एक क्रिमिनल ऑफेंस बना दिया जाता है
2:53:41शुरुआत में यह रेगुलेशन सिर्फ बंगाल
2:53:43प्रेसीडेंसी में एप्लीकेबल होता है लेकिन
2:53:461830 में इसे मद्रास और बॉम्बे
2:53:48प्रेसीडेंसी में भी एक्सटेंड कर दिया जाता
2:53:50है दोस्तों सती प्रथम के अलावा विलियम
2:53:54बेंटिक इंफिनिटी साइड और चाइल्ड सैक्रिफिस
2:53:57जैसी सोशल इविल्स को भी सरप्राइज करते हैं
2:54:00बहुत साड़ी कम्युनिटी में गर्ल चाइल्ड की
2:54:03हत्या करने की प्रथम चली ए रही थी वैसे तो
2:54:061795 में बंगाल रेगुलेशन 16 और 1800 पर मी
2:54:11रेगुलेशन थ्री ने इंफिनिटी साइट कोई लीगल
2:54:13डिक्लेअर कर दिया था फिर भी ये इन ह्यूमन
2:54:16प्रैक्टिस कंटिन्यू थी इसीलिए बैंकिंग ने
2:54:19इसको प्रथम को खत्म करने के लिए कठोर कम
2:54:22उठा थे इसके साथ ही बंगाल अगर आयरलैंड पर
2:54:25कुछ स्पेशल ऑकेजंस पर चाइल्ड सेक्रेफिसिस
2:54:28ऑफर करने की प्रथम थी जब बैंकिंग को इसके
2:54:31बड़े में पता चला है तो वो तुरंत इस पर
2:54:33रॉक लगाने का ऑर्डर दे देते हैं दोस्तों
2:54:36विलियम बेंटिक को ठग्स के सिपरेशन का भी
2:54:39श्री दिया जाता है की मोस्टली सेंट्रल
2:54:42इंडिया और बंगाल के रीजन में सक्रिय थे
2:54:44ठग्स ऐसे हेरिटेज हत्यारे और लुटेरे होते
2:54:47थे जो भोले-भाले और डिफेंसलेस ट्रैवल्स को
2:54:51अपना निशाना बनाते थे
2:54:52इनकी काफी डिसेबल्ड ऑर्गेनाइजेशन थी इनमें
2:54:56से अगर कुछ एक्सपट्र्स ट्राएंगल्स थे तो
2:54:58कुछ कुछ डेड बॉडीज के क्विक डिस्पोजल में
2:55:00महारत हासिल थी और कुछ अच्छे स्पाइस और
2:55:03इनफॉर्मेंट थे इनके अपने कोड शब्द और साइन
2:55:06होते थे इनकी ऑर्गेनाइजेशन इतनी एफिशिएंट
2:55:09थी की गवर्नमेंट की नोटिस में इनका एक भी
2:55:12फेलियर नहीं आया था विलियम बेंटिक ठग्स को
2:55:16सरप्राइज करने के लिए 1835 में ठगी और डी
2:55:19क्वालिटी डिपार्मेंट एस्टेब्लिश करते हैं
2:55:21इस डिपार्मेंट का चार्ज वो करनाल विलियम्स
2:55:24लेमन कर लेते हैं इंडियन रुलर्स को भी इस
2:55:27टास्क में कॉर्पोरेट करने के लिए इनवाइट
2:55:29किया जाता है करना करीब 1500 ठग्स को
2:55:34गिरफ्तार करते हैं और इन्हें मृत्यु दंड
2:55:36या उम्र कैद की सजा सुने जाति है इनके
2:55:39एफर्ट्स की वजह से 1837 के बाद से
2:55:42ऑर्गेनाइज्ड स्किल पर होने वाली ठगी देखने
2:55:45को नहीं मिलती दोस्तों विलियम बेंटिक के
2:55:48सोशल रिफॉर्म्स एक तरह से इंफेक्शन पॉइंट
2:55:50थे और इन रिफॉर्म्स की छवि आज तक हमें
2:55:53अपने इंडियन सिस्टम में देखने को मिलती है
2:55:55आई उनके टाइम में इंट्रोड्यूस हुए
2:55:58एजुकेशनल रिफॉर्म्स की बात करते हैं
2:56:01एजुकेशनल रिफॉर्म्स दोस्तों विलियम बेंटिक
2:56:05के टाइम पीरियड में 1835 में मकोली मिनट्स
2:56:10किया गए थे
2:56:14कंपनी का चार्ट 20 साल के लिए रिन्यू किया
2:56:17था तब उसमें प्रोविजन यह भी था की कंपनी
2:56:20को हर साल ₹1 लाख नेटिव्स की एजुकेशन पर
2:56:23खर्च करने होंगे है इसके लिए कमेटी ऑफ
2:56:25पब्लिक इंस्ट्रक्शंस फॉर्म की जाति है और
2:56:28विलियम बेंटिक लॉर्ड मकोली को कमेटी का
2:56:30प्रेसिडेंट अप्वॉइंट करते हैं इस कमेटी को
2:56:33डिसाइड करना था की एजुकेशन के लिए आने
2:56:35वाली गवर्नमेंट ग्रांट को किस तरह खर्च
2:56:38किया जाए कमेटी के मेंबर्स दो ग्रुप में
2:56:41डिवाइड हो चुके थे एक तरफ थे विल्सन और
2:56:44प्रिंसिपल ब्रदर्स जैसे ओरिएंटलिस्ट जो
2:56:47ओरिएंटल लैंग्वेज और इंडियन लिटरेचर की
2:56:49एजुकेशन को प्रमोट करना चाहते थे दूसरी
2:56:52तरफ से चार्ल्स ट्रैवलिंग जैसे
2:56:55जो वेस्टर्न साइंस और लिटरेचर के सपोर्टर
2:57:00थीम्स को और फरवरी 1835 की अपने फेमस मिनट
2:57:05में वह वेस्टर्न एजुकेशन और इंग्लिश
2:57:07मीडियम में एजुकेशन प्रपोज करते हैं
2:57:11लाइब्रेरी की सिंगल सेल्फी इंडिया और अब
2:57:15की पुरी की पुरी नेटिव लिटरेचर के बराबर
2:57:17है
2:57:20और सेवंथ मार्च 1835 को एक रेजोल्यूशन पास
2:57:24कर बाढ़ जाता है जिसके अकॉर्डिंग हायर
2:57:27एजुकेशन में इंग्लिश मीडियम और वेस्टर्न
2:57:29लिटरेचर को प्रमोट करने का डिसीजन लिया
2:57:31जाता है दोस्तों मंगोली मिनट इंडिया में
2:57:34मॉडर्न एजुकेशन की फाउंडेशन
2:57:39के जुडिशल रिफॉर्म्स की चर्चा करते हैं
2:57:42जुडिशल रिफॉर्म्स दोस्तों विलियम बेंटिक
2:57:46लॉर्ड कार्नवालिस की जुडिशल सिस्टम में
2:57:48कुछ बदलाव करते हैं जैसे की वह कौन वालरस
2:57:51द्वारा सेटअप प्रोविंशियल कोर्ट से अपील
2:57:54और सर्किट कोट्स को अबॉलिश कर देते हैं
2:57:56विलियम बेंटिक कोर्स की ड्यूटी मजिस्ट्रेट
2:58:00और कलेक्टर्स को ट्रांसफर कर देते हैं और
2:58:02इनके सुपरविजन के लिए कमिश्नर ऑफ रिवेन्यू
2:58:05और सर्किट अप्वॉइंट करते हैं इसके अलावा
2:58:10अदालत और सदर दीवानी अदालत एस्टेब्लिश
2:58:13करते हैं जिसकी वजह से अप और दिल्ली के
2:58:16लोगों को अपील के लिए अब कोलकाता जान की
2:58:18जरूर नहीं रहती दोस्तों अभी तक
2:58:24में पर्शियन को इंग्लिश से रिप्लेस कर
2:58:27देते हैं और इसी के साथ ही लोअर कोट्स में
2:58:29पर्शियन के साथ साथ वर्नाकुलर लैंग्वेज
2:58:32में कैसे फाइल करने का ऑप्शन भी दे देते
2:58:34हैं इस तरह से विलियम बेंटिक ने जुडिशल
2:58:37सिस्टम को इंडियन के लिए एक्सेसिबल बनाने
2:58:40की कोशिश की थी दोस्तों विलियम बेंटिक ने
2:58:43कुछ फाइनेंशियल रिफॉर्म्स भी इंट्रोड्यूस
2:58:46किया थे आई अब उनके बड़े में जानते हैं
2:58:49फाइनेंशियल रिफॉर्म्स कंपनी की फाइनेंशियल
2:58:52कंडीशन को बटर करने के लिए विलियम बेंटिक
2:58:55बहुत सारे स्टेप्स लेते हैं जैसे की वह
2:58:58मिलिट्री ऑफिसर को मिलने वाले एक्स्ट्रा
2:59:00अलाउंस या भट्टे को कम कर देते हैं नए
2:59:03रूल्स के अकॉर्डिंग अगर ट्रूप्स कोलकाता
2:59:05के 400 माइल्स के विदीन स्टेशन रहेंगे तो
2:59:08उन्हें सिर्फ आधा भट्ट ही दिया जाएगा इस
2:59:11स्टेप से मेंटेन एक साल में गरीब 20000
2:59:15पाउंड बच्चा लेते हैं इसी तरह सिविल
2:59:17सर्वेंट के अलावा
2:59:21भी पॉसिबल था वहां हाय स्पीड यूरोपियंस की
2:59:25जगह इंडियन को एम्पलाई करते हैं
2:59:28बैंकिंग अफीम ट्रेड को भी रेगुलराइज और
2:59:31लाइसेंस करते हैं और अफीम के एक्सपोर्ट की
2:59:34परमिशन सिर्फ बॉम्बे पोर्ट को देते हैं
2:59:36जिससे कंपनी को ड्यूटीज के थ्रू प्रॉफिट
2:59:39में शेर मिल जाता है विलियम बेंटिक के इन
2:59:42सभी स्टेप्स की वजह से पहले हर साल होने
2:59:45वाला 1 करोड़ का डिफिसिट 1835 तक दो करोड़
2:59:49के सरप्लस में बादल जाता है दोस्तों ये तो
2:59:52बात हो गई पेंटिंग के रिफॉर्म्स की अब
2:59:55उनके टाइम पीरियड के कुछ और इंपॉर्टेंट
2:59:57इवेंट्स को भी डिस्कस कर लेते हैं अगर
3:00:00इंपॉर्टेंट इवेंट्स दोस्तों विलियम बेंटिक
3:00:04के टाइम पीरियड में ही 1833 का चार्ट एक्ट
3:00:07पास हुआ था इस एक्ट के इंपॉर्टेंट
3:00:09प्रोविजंस कुछ इस तरह
3:00:15जनरल ऑफ इंडिया बना दिया जाता है इस तरह
3:00:19विलियम बेंटिक फर्स्ट गवर्नर जनरल ऑफ
3:00:21इंडिया बनते हैं
3:00:22एडमिनिस्ट्रेशन को यूनिफाइड कर दिया जाता
3:00:25है मतलब की बॉम्बे और मद्रास के गवर्नर की
3:00:28लेजिसलेटिव पावर्स खत्म कर दी जाति हैं और
3:00:31पूरे ब्रिटिश इंडिया की लेजिसलेटिव
3:00:33वाल्विस गवर्नर जनरल को दे दी जाति है
3:00:36कंपनी के सिविल और मिलिट्री अफेयर्स को
3:00:39कंट्रोल करने के लिए गवर्नर जनरल की
3:00:41काउंसिल फॉर्म की जाति है जिसमें 4
3:00:43मेंबर्स रखें जाते हैं पहले बार गवर्नर
3:00:46जनरल की गवर्नमेंट को गवर्नमेंट ऑफ इंडिया
3:00:48कहा जाता है और काउंसिल को इंडिया काउंसिल
3:00:51इस एक्ट के थ्रू कंपनी की टी और चाइनीस
3:00:55ट्रेड पर मोनोपोली को भी खत्म कर दिया
3:00:57जाता है
3:01:00यूरोपियंस को इंडिया में प्रॉपर्टी परचेज
3:01:03करने की परमिशन भी दे देता है
3:01:07एडमिनिस्ट्रेशन को सेंट्रलाइज्ड करने का
3:01:10कम किया और गवर्नर जनरल की पोजीशन को और
3:01:13भी ज्यादा स्ट्रांग बना दिया
3:01:15दोस्तों अब बात करते हैं
3:01:24विलियम बेंटिक वैसे तो इंडियन स्टेटस के
3:01:27साथ नॉन इंटरफ्रेंस की पॉलिसी फॉलो करते
3:01:29हैं जैसे की जयपुर में ब्रिटिश रेजिडेंट
3:01:32पर अटैक होने के बाद भी वो कोई एक्शन नहीं
3:01:34लेते इसी तरह जोधपुर बूंदी कोटा और भोपाल
3:01:39में भी इंटरफ्रेंस के स्ट्रांग रीजंस होने
3:01:41के बावजूद
3:01:42नॉन-इंशन की पॉलिसी को ही फॉलो करते हैं
3:01:46है लेकिन कुछ केसेस में ऐसा नहीं होता और
3:01:491831 में बैंकिंग मैसूर को मिस गवर्नेंस
3:01:53की प्लाई पर एनएक्स कर लेते हैं इसी तरह
3:01:551834 में वो कुर्ग और कचरा को भी एनएक्स
3:01:59कर लेते हैं दोस्तों विलियम बेंटिक को
3:02:02सेंट्रल एशिया में चल रहे रोशनी डांसर का
3:02:05भी आइडिया था रसिया के किसी भी पॉसिबल
3:02:08इनवेजन को प्रीवेंट करने के लिए वो पंजाब
3:02:10के राजा रंजीत सिंह के साथ 1831 में
3:02:13ट्रीटी का पर्पेटुअल फ्रेंडशिप साइन करते
3:02:16हैं इसके साथ ही सिंह के अमीरस के साथ भी
3:02:19एक कमर्शियल कम पॉलीटिकल ट्रीटी कनक्लूड
3:02:22करते हैं
3:02:23कंक्लुजन दोस्तों विलियम बेंटिक के
3:02:27एडमिनिस्ट्रेशन के लिए साथ-साथ लगातार चली
3:02:30ए रही अवार्ड और एनेक्सेशंस की पॉलिसी के
3:02:33बीच एक शांतिपूर्ण पीरियड की तरह लगता हैं
3:02:40जिन्होंने अपने रिफॉर्म्स के थ्रू इंडिया
3:02:43में एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल लाइफ को
3:02:45लिबरलाइज करने की कोशिश की
3:02:501848 तो 1856
3:02:54दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं गवर्नर
3:02:56जनरल लॉर्ड डलहौजी की जिन्हें मकर ऑफ
3:03:00मॉडर्न इंडिया भी कहा जाता है वैसे तो
3:03:03लॉर्ड डलहौजी सबसे ज्यादा फेमस है अपनी
3:03:05डॉक्ट्रिन अब लैब की पॉलिसी के लिए लेकिन
3:03:07इन्होंने बहुत सारे रिफॉर्म्स भी
3:03:09इंट्रोड्यूस किया थे आज हम लाड डलहौजी के
3:03:12सभी रिफॉर्म्स और पॉलिसी को डिटेल में कर
3:03:14करने वाले हैं तो आई शुरू करते हैं
3:03:20इंट्रोडक्शन
3:03:271848 से लेकर 1856 तक इंडिया के गवर्नर
3:03:31जनरल रहते हैं यह इंडिया की यंगेस्ट
3:03:34गवर्नर जनरल भी रहे थे इनकी टाइम पीरियड
3:03:36में एक तरफ तो इंडिया का काफी तेजी से
3:03:39मॉडर्नाइजेशन हुआ था और दूसरी तरफ
3:03:41इन्होंने अपनी पॉलिसी से देश में एक आज सी
3:03:46लगा दी थी आई सबसे पहले
3:03:51बात करते हैं
3:03:58दोस्तों लॉर्ड डलहौजी इंडिया में
3:04:00इंपिरियलिस्टिक एंबिशियस के साथ आए थे वह
3:04:03इंडिया में ब्रिटिश अंपायर को एक्सपीएनडी
3:04:05और कंसोलिडेटेड करना चाहते थे और अपने इस
3:04:08एक को पूरा करने के लिए डलहौजी अलग-अलग
3:04:10मैथर्ड अडॉप्ट करते हैं सबसे पहले मेथड तो
3:04:14ऑब्वीजली वार ही था इन्होंने 184849 में
3:04:17सेकंड एंग्लो सिख वार के थ्रू पंजाब को
3:04:20एनएक्स कर लिया था जिसकी पुरी कहानी हम
3:04:23आपको पहले ही बता चुकी हैं इसके साथ ही
3:04:25डलहौजी के टाइम पीरियड में ही 1852 में
3:04:28सेकंड एंग्लो बर्मा वार भी हुआ था जिसके
3:04:31थ्रू लोअर बर्मा यानी की पेगुआर कर लिया
3:04:34जाता है
3:04:361850 में लाड डलहौजी सिक्किम के राजा पर
3:04:39दो इंग्लिश डॉक्टर के साथ दुर्व्यवहार
3:04:42करने और उन्हें इंप्रिजन करने का आप लगाते
3:04:44हैं और इसी आप में सिक्किम के कुछ
3:04:47डिस्ट्रिक्ट को एनएक्स कर लेते हैं जिसमें
3:04:49दार्जिलिंग भी शामिल था और 1853 में जब
3:04:53हैदराबाद के निजाम ईस्ट इंडिया कंपनी को
3:04:55उनकी ऑक्जिलिअरी फोर्स के लिए पेमेंट करने
3:04:58में फेल हो जाते हैं तब लोट डलहौजी निजाम
3:05:01को फोर्स करते हैं की हैदराबाद कंटिजेंट
3:05:03की मेंटेनेंस के लिए वो विरार और उसके
3:05:06आसपास के कुछ डिस्ट्रिक्ट जिनका रिवेन्यू
3:05:08लगभग 50 लाख का था कंपनी के हवाले कर दें
3:05:11इस तरह बरार जो आज के महाराष्ट्र के
3:05:14विदर्भ रीजन में लोकेटेड है कंपनी की
3:05:17टेरिटरी बन जाता है दोस्तों एक तरह से कहा
3:05:20जा सकता है
3:05:23अलग-अलग मैथर्ड के द्वारा कंपनी की
3:05:26टेरिटरीज को एक्सपेंड करने में लगे हुए थे
3:05:28और इसमें सबसे ज्यादा सफल मेथड साबित होती
3:05:31है उनकी डॉक्टरी नव लैब की पॉलिसी तो आई
3:05:35डॉक्टर
3:05:43दोस्तों अगर सरल शब्दों में कहा जाए तो
3:05:46डॉक्ट्रिन ऑफ लैब के अनुसार अडॉप्टेड सन
3:05:48यानी की गॉड लिया हुआ बेटा अपने फादर की
3:05:52प्राइवेट प्रॉपर्टी का तो और हो सकता है
3:05:53लेकिन स्टेट कर रहे हैं यह डिसीजन
3:05:56पैरामाउंट पावर मतलब की ब्रिटिश कंपनी का
3:05:59होगा की स्टेट को अडॉप्टेड सन को दिया जाए
3:06:02या फिर उसे एनएक्स कर लिया जाए अक्सर
3:06:05लॉर्ड डलहौजी को ही डॉक्ट्रिन अब लैब की
3:06:08इस पॉलिसी का इन्वेंटर समझ लिया जाता है
3:06:09लेकिन यह सही नहीं है दरअसल सच तो ये है
3:06:13की 1834 में ही कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने
3:06:16ये साफ कर दिया था की लिनियल सक्सेस के
3:06:20फेलियर की कैसे में अडॉप्ट करने की परमिशन
3:06:22देना कंपनी पर निर्भर करेगा और यह परमिशन
3:06:25एक्सेप्शन की तरह होगी ना की रूल की तरह
3:06:28मतलब ऐसी परमिशन सिर्फ स्पेशल केसेस में
3:06:32ही दी जाएगी और इसके तहत 1839 में मांडवी
3:06:36स्टेट और 1840 में कोलाबा और जालौन स्टेट
3:06:40को एनएक्स भी किया गया था लेकिन बहुत से
3:06:43इसमें अडॉप्टेड सन को रूल करने की परमिशन
3:06:45भी गई थी जैसे की 1827 में दौलत राव
3:06:48सिंधिया की डेथ के बाद उनके अडॉप्टेड सन
3:06:51जंगकोजी उनके स्टेट को और करते हैं और
3:06:551843 में जान को जी की डेथ के बाद एक बार
3:06:58फिर से गॉड लिए हुए बेटे जय जी राव को ही
3:07:01गति मिलती है जॉन सलवान के अनुसार 1826 से
3:07:061848 के बीच कम से कम 15 नेटिव रुलर्स को
3:07:09अपने एस अडॉप्ट करने की परमिशन दी गई थी
3:07:12इसका मतलब यह हुआ की लाड डलहौजी से पहले
3:07:15तक इस पॉलिसी को अंग्रेजन द्वारा
3:07:17यूनिफॉर्म तरीके से अप्लाई नहीं किया जा
3:07:19रहा था लेकिन जब डलहौजी इंडिया आते हैं तो
3:07:22वो कुछ प्रिंसिपल्स अडॉप्ट करते हैं
3:07:25उन्होंने इंडियन स्टेटस को तीन कैटिगरीज
3:07:27में डिवाइड कर दिया पहले कैटिगरी में वह
3:07:30स्टेटस आते थे जिन्हें डायरेक्टली या
3:07:32इनडायरेक्ट ब्रिटिश ने क्रिएट किया था
3:07:34दूसरी कैटिगरी में थे ब्रिटिश के
3:07:37डिपेंडेंट स्टेटस और तीसरी कैटिगरी थी
3:07:40इंडिपेंडेंस स्टेटस की
3:07:43डलहौजी डिसाइड करते हैं की पहले कैटिगरी
3:07:46के स्टेटस को किसी भी कंडीशन में अपने आगे
3:07:49अडॉप्ट करना अलाउड नहीं होगा और दूसरी
3:07:52कैटिगरी के स्टेज को एडॉप्शन के कैसे में
3:07:54ब्रिटिश से परमिशन लेनी होगी यह परमिशन दी
3:07:57भी जा शक्ति है और नहीं
3:08:00थर्ड कैटिगरी के स्टेटस पुरी तरह फ्री थे
3:08:03अपने आगे अडॉप्ट करने के लिए
3:08:06डॉक्ट्रिन का लैप्स की पॉलिसी को अप्लाई
3:08:08करके लाड डलहौजी ने 1848 में सतारा को
3:08:121849 में जैतपुर और संबलपुर को 1850 में
3:08:16भगत को
3:08:171852 में उदयपुर को 1853 में झांसी को और
3:08:211854 में नागपुर को एनएक्स किया था
3:08:25दोस्तों लॉर्ड डलहौजी बेसिकली एक
3:08:28आइनेक्सेशनल थे
3:08:30डॉक्टर की पॉलिसी को अप्लाई करके वो
3:08:33इंडिया में अपने एंबीशन पूरा कर रहे थे और
3:08:35जहां डॉक्टर इन लैब सप्लाई नहीं हो पाती
3:08:37वहां किसी और बहाने से उन्होंने
3:08:42अवध स्टेट का एनेक्सेशन आई उसके बड़े में
3:08:45भी जानते हैं
3:08:49दोस्तों आपको याद होगा की 1765 में बैटल
3:08:53ऑफ बक्सर के बाद अवध के नवाब के साथ
3:08:56ब्रिटिशर्स ने ट्रीटी ऑफ इलाहाबाद साइन की
3:08:58थी और उसके बाद 1801 में बैलंसली ने अवध
3:09:02के साथ सब्सिडियरी एलाइंस की त्रुटि साइन
3:09:04कर ली थी जिसके बाद से ही अवध के नवाब
3:09:07एक्सटर्नल डिफरेंस और लायन ऑर्डर की
3:09:09मेंटेनेंस के लिए पुरी तरह से कंपनी पर
3:09:12डिपेंड हो गए थे
3:09:131856 में लॉर्ड डलहौजी अवध को मेल
3:09:17एडमिनिस्ट्रेशन के बेसिस पर एनएक्स कर
3:09:19लेते हैं मतलब यह हुआ की अवध के नवाब पर
3:09:22यह आप लगाया जाता है की वो अवध को सही से
3:09:26रूल नहीं कर का रहे हैं वहां के
3:09:28एडमिनिस्ट्रेशन की स्थिति बहुत खराब हो
3:09:30चुकी है और प्रजा परेशान है इसलिए अवध के
3:09:34लोगों को अच्छा एडमिनिस्ट्रेशन देने के
3:09:36लिए जरूरी है की वहां नवाब का शासन खत्म
3:09:39करके ब्रिटिश रूल एस्टेब्लिश किया जाए और
3:09:42इस तरह अवध भी ब्रिटिश टेरिटरी का हिस्सा
3:09:45बन जाता है
3:09:46दोस्तों ध्यान देने वाली बात यह है की अवध
3:09:49में शासन की खराब स्थिति के लिए अल में
3:09:51ब्रिटिशर्स ही रिस्पांसिबल थे सब्सिडियरी
3:09:54फोर्सेस के मेंटेनेंस के लिए अवध का काफी
3:09:56हिस्सा उन्होंने पहले ही एनएक्स कर लिया
3:09:58था अवध के नवाब तो पुरी तरह उनके ऊपर ही
3:10:02डिपेंड थे इसलिए वाले एडमिनिस्ट्रेशन को
3:10:04अनेक स्टेशन का वैलिड रीजन नहीं कहा जा
3:10:06सकता वो तो बस लोट डलहौजी के लिए बहन था
3:10:09अवध को एनएक्स करने का अल में तो इंग्लैंड
3:10:12में चल रही इंडस्ट्रियलिज्म के लिए कॉटन
3:10:15की बहुत ज्यादा डिमांड थी और अवध कॉटन
3:10:18प्रोडक्शन का एक फर्टाइल ग्राउंड था लॉर्ड
3:10:21डलहौजी की अनेक सेशन पॉलिसी की वजह से
3:10:23इंडिया की नेटिव रुलर्स और आम जनता में
3:10:26ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट एक आक्रोश की भावना
3:10:29पैदा हो जाति है जो आगे चलकर 1857 की
3:10:33क्रांति का एक करण भी बंटी है
3:10:38सबसे पहले जानते हैं उनके एडमिनिस्ट्रेटिव
3:10:41रिफॉर्म्स के बड़े में
3:10:45एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स
3:10:48दोस्तों लॉर्ड डलहौजी के इंडिया आने तक
3:10:51गवर्नर जनरल्स एन सिर्फ इंडिया में एंटीरे
3:10:54ब्रिटिश टेरिटरी का सुपरविजन कर रहे थे
3:10:56बल्कि बंगाल प्रोविंस को गवन करने की
3:10:59रिस्पांसिबिलिटी भी उन्हें के हाथों थी इस
3:11:02वजह से उनके ऊपर कम का बटन बहुत ज्यादा
3:11:05राहत था इसलिए लॉर्ड डलहौजी ने बंगाल के
3:11:08एडमिनिस्ट्रेशन को देखने के लिए अलग से एक
3:11:10लेफ्टिनेंट गवर्नर का अपॉइंटमेंट कर दिया
3:11:12इससे गवर्नर जनरल अब सिर्फ जो इंडिया
3:11:16फैयर्स पर अपना ध्यान दे सकता था इसी तरह
3:11:18से न्यूली एक्वायर ट्रेडर्स का चार्ज भी
3:11:21कमिश्नर्स को दे दिया गया था जैसे की
3:11:23पंजाब के कैसे में इसके अलावा लॉर्ड
3:11:25डलहौजी से पहले तक पब्लिक वर्क की
3:11:28कंस्ट्रक्शन का कम मिलिट्री बोर्ड ही देखा
3:11:30था यानी ब्रिज बनाना हो या सड़क बनानी हो
3:11:33मिलिट्री से ही सर कम लिया जाता था आप समझ
3:11:37सकते हैं की इससे सोल्जर की क्या हालात
3:11:39होती होगी इसलिए डलहौजी ने पब्लिक
3:11:42कंस्ट्रक्शन के लिए एक नया डिपार्मेंट
3:11:44शुरू किया जिसे पब्लिक वर्क डिपार्मेंट
3:11:46यानी की पीडी कहा जाता है यह डिपार्मेंट
3:11:55से पेशावर तक ग्रैंड ट्रक रोड कर
3:11:58रिकंस्ट्रक्शन किया गया
3:12:04बहुत से बृजेश का कंस्ट्रक्शन भी हुआ था
3:12:07यह तो बात हुई के एडमिनिस्ट्रेटिव
3:12:11रिफॉर्म्स की
3:12:13मिलिट्री रिफॉर्म्स के बड़े में
3:12:21दोस्तों डलहौजी के अनेक सेशंस ने ब्रिटिश
3:12:24इंडिया को ईस्ट में बंगाल से लेकर वेस्ट
3:12:27में पंजाब और सिंधतक स्टैंड कर दिया था अब
3:12:30इतने एक्सटेंशन एरिया के स्ट्रीट्स
3:12:32कंट्रोल के लिए ट्रूप्स के बटर
3:12:34डिस्ट्रीब्यूशन की जरूर भी महसूस होती है
3:12:36इसलिए डलहौजी ने बंगाल आर्टिलरी के
3:12:39हैडक्वाटर्स को कोलकाता से मेरठ शिफ्ट कर
3:12:42दिया था इसके साथ ही आर्मी के परमानेंट
3:12:45हैडक्वाटर्स को भी शिमला शिफ्ट करने का कम
3:12:47शुरू हो जाता है यह प्रोसेस फाइनली 1865
3:12:50में कंप्लीट हुआ था इसके साथ ही डलहौजी को
3:12:53यह भी महसूस होता है की आर्मी में इंग्लिश
3:12:56सोल्जर की तुलना में इंडियन सोल्जर का
3:12:58नंबर बहुत ज्यादा बाढ़ गया है जो की
3:13:01अंपायर की सुरक्षा के लिए कभी भी खतरा बन
3:13:03सकता है इसलिए वह इंग्लिश सोल्जर के नंबर
3:13:06को बढ़ाने की कोशिश भी करते हैं इंग्लिश
3:13:09सोल्जर की तीन नई रेजीमेंट रेस की जाति
3:13:12हैं पंजाब में ब्रिटिश ऑफिसर के अंदर में
3:13:15एक सिख आर्मी को भी रेस करते हैं इसके
3:13:18अलावा डलहौजी इंडियन आर्मी में गोरखास की
3:13:20एक नई रेजीमेंट भी फॉर्म करते हैं और
3:13:23इसमें कोई संदेह नहीं की लाड डलहौजी के इन
3:13:26मेजर में 1857 की क्रांति को सरप्राइज
3:13:29करने में ब्रिटिशर्स की काफी मदद की थी
3:13:31लेकिन वो कैसे इसको हम अपनी नेक्स्ट
3:13:34वीडियो में समझेंगे फिलहाल चलते हैं
3:13:36डलहौजी के एजुकेशनल रिफॉर्म्स की तरफ
3:13:42एजुकेशनल रिफॉर्म्स
3:13:45दोस्तों लो डलहौजी के टाइम में एजुकेशन की
3:13:48फील्ड में कई सारे इंपॉर्टेंट रिफॉर्म्स
3:13:50इंट्रोड्यूस किया गए थे
3:13:521853 में डलहौजी में प्राइमरी एजुकेशन से
3:13:55रिलेटेड रेगुलेशंस पास की थी यह रेगुलेशंस
3:13:58थॉमसूनियन सिस्टम और न्यूक्लियर एजुकेशन
3:14:00पर बेस्ड थी इसमें कहा गया था की प्राइमरी
3:14:03एजुकेशन वर्नाकुलर यानी की लोकल लैंग्वेज
3:14:06में दी जाए
3:14:08डलहौजी के समय में ही 1854 में वुड
3:14:11डिस्पैच भी आया था जिसे इंडिया में
3:14:13इंग्लिश एजुकेशन का मैग्नाकार्टा भी कहा
3:14:16जाता है इसमें कहा गया था की हर जिला में
3:14:20स्कूल और कॉलेज खोल जैन इसके साथ ही सभी
3:14:23प्रेसीडेंसी टाउन में यानी की बॉम्बे
3:14:25मद्रास और कोलकाता में एक यूनिवर्सिटी को
3:14:28एस्टेब्लिश किया जाए इसमें यह भी सजेस्ट
3:14:31किया गया था की गवर्नमेंट प्राइवेट
3:14:33ऑर्गेनाइजेशंस और इंडिविजुअल्स को स्कूल
3:14:36और कॉलेजेस शुरू करने के लिए सब्सिडी देकर
3:14:39है इसके साथ ही हर जिला में एक इंस्पेक्टर
3:14:42ऑफ स्कूल होना चाहिए और हर एक प्रॉब्लम्स
3:14:44में एक डायरेक्टर और एजुकेशन
3:14:46डलहौजी ने वुड डिस्पैच के इन सजेशन को
3:14:50जहां तक संभव था इंप्लीमेंट करने की कोशिश
3:14:52की
3:14:531857 में कोलकाता मद्रास और बॉम्बे में
3:14:56यूनिवर्सिटी एस्टेब्लिश हुई थी इसके साथ
3:14:59ही 1846 में रुड़की में इंजीनियरिंग कॉलेज
3:15:02और कोलकाता में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूशन
3:15:05भी एस्टेब्लिश की गई थी दोस्तों बात करते
3:15:08हैं डलहौजी के उन रिफॉर्म्स के बड़े में
3:15:10जिसकी वजह से उन्हें मकर ऑफ मॉडर्न इंडिया
3:15:13भी कहा जाता है यानी की रेलवे टेलीग्राफ
3:15:17और पोस्ट सर्विसेज के रिफॉर्म्स के बड़े
3:15:19में
3:15:21डेवलपमेंट ऑफ रेलवे टेलीग्राफ और पोस्ट
3:15:24सर्विसेज
3:15:26दोस्तों डलहौजी के टाइम पीरियड में इंडिया
3:15:29में ब्रिटिश डोमिनियंस को आयरन लाइन से
3:15:31जोड़ दिया गया मतलब की रेलवे लाइंस का
3:15:34डेवलपमेंट शुरू हो जाता है
3:15:361853 के अपने फेमस रेलवे मिनट में लोड
3:15:40डलहौजी ने स्कीम की ब्रेड आउटलाइंस को
3:15:42सामने रखा था जो इंडिया में फ्यूचर रेलवे
3:15:45एक्सटेंशन का बेसिस फॉर्म करती हैं
3:15:471853 में ही बॉम्बे से ठाणे तक फर्स्ट
3:15:51रेलवे लाइन को तैयार किया गया इसके अगले
3:15:53साल कोलकाता से रानीगंज कोलफील्ड तक रेलवे
3:15:57लाइन शुरू की गई ध्यान रखना वाली बात यह
3:16:00है दोस्तों की इंडिया में रेलवे का
3:16:02डेवलपमेंट प्राइवेट कंपनी के द्वारा किया
3:16:04जा रहा था और वो भी ब्रिटिश कंपनी रेलवे
3:16:08में इन्वेस्ट करने पर उन्हें ब्रिटिश
3:16:10गवर्नमेंट 5% का गारंटीड इंटरेस्ट भी
3:16:13प्रॉमिस करती है रेलवे का डेवलपमेंट लॉर्ड
3:16:16डलहौजी इंडिया को मॉडर्नाइज करने के लिए
3:16:18नहीं करते बल्कि उनका मकसद तो ब्रिटिश
3:16:21ट्रेड को प्रमोट करना और कॉलोनियल
3:16:23इंटरेस्ट को आगे ले जाना ही था लेकिन फिर
3:16:26रेलवे के डेवलपमेंट ने इंडिया को यूनिफाई
3:16:29करने का कम किया और इनडायरेक्ट नेशनलिज्म
3:16:32को प्रमोट किया
3:16:341852 में इंडिया में इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ
3:16:37सिस्टम भी इंट्रोड्यूस किया गया ये एक
3:16:39बहुत ही इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट था क्योंकि
3:16:41टेलीग्राफ की मदद से देश के एक कोनी से
3:16:44दूसरे कोनी तक तुरंत मैसेज पहुंच सकते थे
3:16:47लगभग 4000 माइल्स की इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ
3:16:51लाइंस कंस्ट्रक्ट की जाति हैं जो कोलकाता
3:16:53को पेशावर बॉम्बे मद्रास और देश के अन्य
3:16:56हसन से जोड़ देती हैं इसके अलावा 1854 में
3:17:00एक नया पोस्ट ऑफिस एक्ट पास हुआ और पहले
3:17:03बार पोस्टेड स्टंप्स इशू किया गए लेटर को
3:17:07चाहे कितनी भी डिस्टेंस के लिए भेजना हो
3:17:09हर लेटर के लिए आधा आना यानी की दो पैसे
3:17:12का यूनिफॉर्म रेट फिक्स कर दिया गया
3:17:19था अब एक सोर्स ऑफ रिवेन्यू बन जाता है
3:17:23दोस्तों
3:17:27इंडिया में ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन को
3:17:30मॉडर्नाइज करने का कम किया
3:17:33कंक्लुजन
3:17:36डलहौजी ने इंडिया में बहुत से रिफॉर्म्स
3:17:39इंट्रोड्यूस किया थे लेकिन उनका प्राइमरी
3:17:41मोटिव इंडिया में ब्रिटिश अंपायर को
3:17:44सेफगार्ड और कंसोलिडेटेड करना ही था
3:17:46दोस्तों हमें नहीं भूलना चाहिए की डलहौजी
3:17:50एक इंपिरियलिस्ट थे उन्हें इंडिया के
3:17:53लोगों की विशेष या सेंटीमेंट की कोई परवाह
3:17:55नहीं थी इसलिए उन्होंने अनेक सेशंस करते
3:17:58समय किसी भी तरह के मोरल को फॉलो नहीं
3:18:00किया फिर बात चाहे पंजाब के साथ भी ट्रायल
3:18:04की हो या अवध जैसे पुराने इलाए को धोखा
3:18:06देने की डलहौजी ने ब्रिटिश अंपायर को
3:18:09एक्सपेंड करने के लिए सम दम दंड भेद सभी
3:18:13तरह की नेशन का इस्तेमाल किया और जैसा की
3:18:16हम पहले ही बता चुके हैं उनकी पॉलिसी को
3:18:191857 की क्रांति का एक इंपॉर्टेंट करण भी
3:18:23माना जाता है फॉरेन पॉलिसी ऑफ डी ब्रिटिश
3:18:30दोस्तों
3:18:36के साथ भी ब्रिटिश का कांटेक्ट
3:18:48के साथ ब्रिटिश रिलेशनशिप की बात करते हैं
3:18:52[संगीत]
3:18:5619th सेंचुरी के दौरान ब्रिटिशर्स द्वारा
3:18:59बहुत से डिप्लोमेटिक मिशन भूटान भेजें
3:19:01जाते हैं इनको ऑफीशियली तो यही करण बताया
3:19:04जाता है की भूटान क्रॉस बॉर्डर रीड कर रहा
3:19:07है या फिर डिसिडेंस को शेल्टर दे रहा है
3:19:10लेकिन असली वजह तो ब्रिटिश के
3:19:12इंपिरियलिस्ट एंबिशियस थे भूटान इंडो
3:19:16तिब्बती ट्रेड के लिए तो विटल था ही इसके
3:19:18अलावा टी प्लांटेशन के लिए द्वारा रीजन की
3:19:21कमर्शियल वायबिलिटी भी सभी जानते थे सबसे
3:19:24इंपॉर्टेंट पीस मिशन
3:19:26186364 में वायसराय लॉर्ड इलजन द्वारा
3:19:29भेजो जाता है इसी अश्लील ईडन की नेतृत्व
3:19:33में भेजो गया था लेकिन भूतनी इस इनकी ऑफर
3:19:36को रिजेक्ट कर देते हैं
3:19:38की भूटान में उन्हें मिस्त्री किया गया
3:19:41जिसके बाद नवंबर 1864 में ब्रिटिश भूटान
3:19:45के गेस्ट बोर्ड डिक्लेअर कर देते हैं इसे
3:19:48द्वारा और कहा जाता है
3:19:56निरोज स्वॉर्ड्स निव्स जैसे वेपंस के साथ
3:19:59वल्ड ब्रिटिश आर्मी का सामना करती है यह
3:20:03वार सिर्फ 5 महीने तक ही चला है और भूटान
3:20:06अपनी लगभग 20% टेरिटरीज में को देता है
3:20:09इसके साथ ही पिछले बॉर्डर क्लैशस में
3:20:12ऑक्युपी की हुई इंडियन टेरिटरीज को भी
3:20:14सुरेंद्र करता है इसके बाद 11th नवंबर
3:20:171865 को ट्रीटी का सींचुला साइन की जाति
3:20:21है जिसके अनुसार भूटान आसिम द्वारा और
3:20:24बंगाल ड्वॉर्फ्स की टेरिटरीज ब्रिटिश को
3:20:27दे देता है यही सुरेंद्र किया हुए
3:20:29डिस्ट्रिक्ट ब्रिटिशर्स द्वारा टी गार्डन
3:20:32के रूप में डेवलप किया जाते हैं
3:20:34इसके अलावा साउथ पूर्वी भूटान में दीवान
3:20:37गिरी की 83 स्क्वायर किलोमीटर की टेरिटरी
3:20:40भी ब्रिटिश की हो जाति है जिसके बदले में
3:20:43भूटान को 50000 की एनुअल सब्सिडी देने का
3:20:47प्रॉमिस किया जाता है
3:20:531910 में इसे रिवाइज करके नई त्रुटि साइन
3:20:57की जाति है जिसे ट्रीटी का पूनाखा कहते
3:21:00हैं
3:21:01ट्रीटी का पुणे का 8 जनवरी 1910 को साइन
3:21:04की जाति है इसमें ब्रिटेन भूटान को
3:21:07इंडिपेंडेंस की गारंटी देता है साथ ही
3:21:10भूटानी रॉयल गवर्नमेंट को दिए जान वाला
3:21:12स्टाइपेंड भी बड़ा देता है और बदले में
3:21:15भूतनी फॉरेन रिलेशंस ब्रिटिश इंडिया की
3:21:18कंट्रोल में ए जाते हैं
3:21:201947 तक ट्वीटी और पूनाखा ही भूटान के साथ
3:21:24ब्रिटिश इंडिया के रिलेशंस को गाइड करती
3:21:26है
3:21:27भूटान के बाद अब दूसरे माउंटेन इस नेबर्स
3:21:30यानी की नेपाल की बात करते हैं
3:21:37दोस्तों 1768 में गोरखास ने नेपाल पर अपना
3:21:41कंट्रोल एस्टेब्लिश कर लिया था इसके बाद
3:21:44वो अपनी डोमिनियन को माउंटेंस के आगे
3:21:46एक्सपेंड करना शुरू करते हैं नॉर्थ में तो
3:21:49चाइनीस इन्हें एक्सपेंशन करने नहीं देते
3:21:51इसलिए ये बंगाल और अवध की तरफ पुश करते
3:21:54हैं दूसरी तरफ 1801 में ईस्ट इंडिया कंपनी
3:21:58गोरखपुर जिला को ऑक्युपी कर लेती है जिसके
3:22:01बाद उनका फ्रंटियर गोरखास की टेरिटरी के
3:22:04डायरेक्ट टच में ए जाता है और दोनों के
3:22:07बीच कनफ्लिक्ट शुरू होता है जब गोरखास
3:22:10बुटवल और शिवराज डिस्ट्रिक्ट पर कब्जा कर
3:22:12लेते हैं उसे समय तो ब्रिटिशर्स बिना किसी
3:22:15ओपन कनफ्लिक्ट के जिला को रे ऑक्युपी कर
3:22:18लेते हैं
3:22:21गोरखास एक बार फिर से बटवाल की तीन पुलिस
3:22:24स्टेशन पर अटैक कर देते हैं
3:22:30और गोरखास के अगेंस्ट ऑफेंसिव लॉन्च करने
3:22:33का डिसीजन लेते हैं 12000 की गोरख आर्मी
3:22:36के अगेंस्ट
3:22:3734000 सोल्जर की बड़ी आर्मी तैयार करते
3:22:40हैं लेकिन 1814 का यह कैंपेन बुरी तरह फेल
3:22:44हो जाता है इसके बाद भी ब्रिटिश हर नहीं
3:22:47मानते और फिर से कोशिश करते हैं
3:22:501815 में वो कुमाऊं हिल्स में अल्मोड़ा को
3:22:53कैप्चर करने में कामयाब होते हैं और मैं
3:22:561815 में अमर सिंह थापा से मालाओं का वोट
3:23:00भी जीत लिया जाता है मालाओं के फल के बाद
3:23:03गोरखास नेगोशिएशंस करने के लिए तैयार हो
3:23:05जाते हैं लेकिन हेस्टिंग्स की डिमांड्स
3:23:08उनका एटीट्यूड चेंज कर देती है और एक बार
3:23:11फिर से दोनों के बीच होस्टिलिटीज शुरू हो
3:23:14जाति हैं
3:23:18बुरी तरह हर दिया जाता है इसके बाद गोरखास
3:23:22समझ जाते हैं की उनके लिए अब ब्रिटिश को
3:23:24और विशिष्ट करना पॉसिबल नहीं है और इसीलिए
3:23:27मार्च 1816 में वो ट्रीटी का सुगौली को
3:23:31एक्सेप्ट कर लेते हैं
3:23:323d के अकॉर्डिंग गोरखास गढ़वाल और कुमाऊं
3:23:35जिला कंपनी को सुरेंद्र कर देते हैं इसके
3:23:38साथ ही दोनों के बीच तराई बाउंड्री को
3:23:40पिलर्स के थ्रू मार्क कर दिया जाता है
3:23:43गुरखास काठमांडू में ब्रिटिश रेजिडेंट
3:23:46रखना के लिए भी मां जाते हैं और इसके साथ
3:23:48ही सिक्किम से परमानेंटली विड्रॉ करने के
3:23:51लिए तैयार हो जाते हैं
3:23:52ब्रिटिशर्स को हिल स्टेशंस और समर कैपिटल
3:23:55के लिए साइट भी मिल जाति है जैसे की शिमला
3:23:58मसूरी रानीखेत से इसके साथ ही ब्रिटिशर्स
3:24:02गोरखास को अपनी आर्मी में भी शामिल कर
3:24:04लेते हैं जो आगे चलकर इंडिया में कंपनी के
3:24:08डोमिनियन को एक्सपेंड करने में काफी हेल्प
3:24:10करते हैं
3:24:2219th सेंचुरी की शुरुआत में बर्मा एक फ्री
3:24:25कंट्री हुआ करता था और वेस्ट की तरफ अपनी
3:24:28टेरिटरी एक्सपेंड करना चाहता था लेकिन
3:24:31इंडिया में ब्रिटिश का रूल था और वह बर्मा
3:24:33पर अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश करना चाहते थे
3:24:35इसके पीछे बहुत सी करण थे सबसे पहले तो
3:24:39बर्मा के फॉरेस्ट रिसोर्सेस में ब्रिटिश
3:24:41का इंटरेस्ट था उसके अलावा बर्मा ब्रिटिश
3:24:45मैन्युफैक्चरर्स के लिए मार्केट भी
3:24:46प्रोवाइड कर सकता था इसके साथ ही
3:24:49ब्रिटिशर्स बर्मा और बाकी के साउथईस्ट
3:24:51एशिया में फ्रेंच एंबिशियस को नियंत्रित
3:24:54भी करना चाहते थे इसकी वजह से तीन एंग्लो
3:24:57बर्मीज वार होती हैं और 1885 में बर्मा को
3:25:01ब्रिटिश इंडिया में एनएक्स कर लिया जाता
3:25:03है आई 24
3:25:1119th सेंचुरी की शुरुआत में बर्मीज वेस्ट
3:25:14शब्द यानी की इंडिया की तरफ एक्सपेंशन
3:25:16करने की कोशिश करते हैं जिसमें वो अरकान
3:25:19और मणिपुर को ऑक्युपी कर लेते हैं साथ ही
3:25:22आसिम और ब्रह्म पुत्र वाली को भी लगातार
3:25:25थ्रेट इन करते हैं इसकी वजह से ब्रिटिश के
3:25:28साथ इनका लगातार गतिरोध बना राहत है और
3:25:32फिर सितंबर 1823 में बर्मा चित्तागोंग के
3:25:35पास लोकेटेड आयरलैंड पर कब्जा कर लेट है
3:25:38इस आयरलैंड को ईस्ट इंडिया कंपनी अपनी
3:25:41टेरिटरी समझती थी इसके बाद से ही दोनों के
3:25:44बीच बॉटल्स का सिलसिला शुरू हो जाता है
3:25:46शुरुआत में यह बॉटल्स अरकान और मणिपुर के
3:25:49रीजंस में होते हैं जहां बर्मा ब्रिटिश पर
3:25:53भारी पड़ती हैं क्योंकि उन्हें यहां के
3:25:55जंगल में फाइट करने का काफी एक्सपीरियंस
3:25:57था इसलिए ब्रिटिश फाइट को बर्मीज मैनलैंड
3:26:01पर ले जाते हैं 11th में 1824 को अचानक से
3:26:05ब्रिटिश लेवल फोर्स यंग ऑन यानी की रंगून
3:26:08हार्बर में इंटर करती है और बर्मीज को
3:26:11सरप्राइज ले लेती है इसके बाद लगभग 2 साल
3:26:13तक दोनों के बीच इंटेंस बॉटल्स होते हैं
3:26:16फाइनली दिसंबर 1825 में बर्मीज ब्रिटिश के
3:26:20साथ कस करने के लिए तैयार हो जाते हैं
3:26:23नेगोशिएशन शुरू होती हैं और फरवरी 1826
3:26:26में ट्रीटी का यंडाबों के जरिए दोनों के
3:26:29बीच शांति स्थापित होती है
3:26:31इस विधि के अनुसार बर्मा की गवर्नमेंट एक
3:26:35करोड़ रुपए वार कंपटीशन के रूप में देने
3:26:37के लिए तैयार होती है साथ ही अपने कोस्टल
3:26:40प्रोविंस अरकान और टेनेसम ब्रिटिशर्स को
3:26:43दे देती हैं इसके अलावा असम कछार और
3:26:47जयंतिया पर क्लेम करना भी छोड़ देती हैं
3:26:49और मणिपुर को एक इंडिपेंडेंस स्टेट की तरह
3:26:52रिकॉग्नाइज्ड कर लेती हैं
3:27:00और कैपिटल आवामी ब्रिटिश रेजिडेंट को
3:27:03एक्सेप्ट करती है साथ ही कोलकाता में
3:27:05बर्मीज ऑन बाय भी पोस्ट किया जाता है इस
3:27:09वार में ब्रिटिश इंडिया के फाइनेंस को
3:27:11पुरी तरह बर्बाद कर दिया था लगभग 13
3:27:14मिलियन पाउंड स्टर्लिंग इस वार पर खर्च
3:27:17हुए थे और करीब 15000 सोल्जर की इस पूरे
3:27:20कैंपेन के दौरान डेथ हो गई थी जिसमें
3:27:23मेजॉरिटी इंडियन ट्रूप्स की थी इस तरह
3:27:26ब्रिटिश की इंपिरियलिस्ट एम्स को पूरा
3:27:28करने के लिए इंडियन रिवेन्यू और ह्यूमन
3:27:31रिसोर्सेस को एक्सप्लोइट किया गया था
3:27:34इसके बाद 1852 में एक और एंग्लो बर्मा वार
3:27:38होती है सेकंड बर्मा वार 1852 बर्मा के
3:27:43साथ ब्रिटिश का सेकंड वार कमर्शियल नीड और
3:27:46लॉर्ड डलहौजी की इंपिरियलिस्ट पॉलिसी की
3:27:48वजह से होता है ब्रिटिश मरचेंट्स अपार
3:27:51बर्मा की टिंबर रिसोर्सेस चाहते थे साथ ही
3:27:54बर्मीज मार्केट में और ज्यादा पेनिट्रेट
3:27:56करना चाहते थे
3:27:581852 में लॉर्ड डलहौजी ट्रीटी का यंडाबों
3:28:01से रिलेटेड कुछ माइनर इश्यूज को रिजॉल्व
3:28:03करने के बहाने कोमोडोर जॉर्ज लैंबर्ट को
3:28:06बर्मा भेजते हैं
3:28:10लेकिन फिर भी लैंबर्ट रंगून के पोर्ट को
3:28:13ब्लॉक कर देते हैं
3:28:18इस तरह
3:28:24की शुरुआत हो जाति है
3:28:35दिसंबर 1852 में किंग को इन्फॉर्म किया
3:28:38जाता है की अब से बेगू कंपनी डोमिनियन का
3:28:41पाठ होगा जो की बर्मा का आखिरी कोस्टल
3:28:44प्रोविंस था
3:28:4520th जनवरी 1853 को फॉर्मल प्रोक्लेमेशन
3:28:49इशू कर दी
3:28:54और हो जाता है इसके बाद 1885 में एक बार
3:28:58फिर से बर्मा के साथ कनफ्लिक्ट शुरू होता
3:29:01है
3:29:03थर्ड बर्मा वार 1885
3:29:0718 के दौरान बर्मा और फ्रांस के बीच बढ़नी
3:29:11नजदीकियां ब्रिटिशर्स के लिए कंसर्न बन
3:29:13जाति हैं
3:29:141885 में फ्रेंच काउंसिल मास बर्मीज
3:29:18गवर्नमेंट के साथ में घोषित करने के लिए
3:29:19मंडली आते हैं और बर्मा में एक फ्रेंच
3:29:23बैंक और मंडली से ब्रिटिश बर्मा की
3:29:25नॉर्दर्न बॉर्डर तक रेल लिंक के
3:29:27कंस्ट्रक्शन की बात करते हैं
3:29:29ब्रिटिशर्स यहां अपनी डिप्लोमेटिक पावर्स
3:29:32का उसे करते हैं और फ्रेंच गवर्नमेंट को
3:29:34बर्मा से हाउस को रिकॉल करने के लिए
3:29:36कन्वेंस कर लेते हैं इस बार तो फ्रेंच
3:29:39बर्मा से वापस चले जाते लेकिन इस तरह की
3:29:42इवेंट्स ब्रिटिश को बर्मा के अगेंस्ट
3:29:44एक्शन लेने के लिए कन्वेंस कर देते हैं अब
3:29:47उन्हें बस एक मौके की तलाश थी जो जल्द ही
3:29:50उन्हें मिल जाता है बर्मा में कम कर रही
3:29:52एक ब्रिटिश टिंबर कंपनी मुंबई बर्मा
3:29:55ट्रेडिंग कॉरपोरेशन परमस कोर्ट फाइंड लगा
3:29:58देती है
3:30:00एक्सट्रैक्शन को अंदर रिपोर्ट किया था और
3:30:04अपने एम्पलाइज को भी पी नहीं किया था
3:30:06बर्मीज ऑफिशल कंपनी के टिंबर को सीएस कर
3:30:09लेते हैं लेकिन कंपनी और ब्रिटिश
3:30:11गवर्नमेंट क्लेम करती है की यह चार्ज गलत
3:30:14है और बर्मीज कोड्स करप्ट हैं ब्रिटिशर्स
3:30:18बर्मी गवर्नमेंट से डिमांड करते हैं की इस
3:30:20डिस्प्यूट को सेटल करने के लिए वो ब्रिटिश
3:30:23अपॉइंटेड आर्बिट्रेटर को एक्सेप्ट कर ले
3:30:25और जब बर्मीज ऐसा करने से माना कर देते
3:30:28हैं तब 12 अक्टूबर 1885 को ब्रिटिश
3:30:32गवर्नमेंट एक अल्टीमेटम इशू करती है
3:30:34जिसमें कहा जाता है की बर्मीज मंडली में
3:30:38एक नया ब्रिटिश रेजिडेंट एक्सेप्ट करें और
3:30:41उसके अराइवल तक कंपनी पर लगा कोई भी लीगल
3:30:44एक्शन या फाइन सस्पेंड किया जाए साथ ही
3:30:47बर्मा अपनी फौरन रिलेशंस ब्रिटिश कंट्रोल
3:30:49में दे दें इसके अलावा नॉर्दर्न बर्मा और
3:30:53चीन के बीच ट्रेड के विकास के लिए ब्रिटिश
3:30:55को कमर्शियल फैसेलिटीज भी प्रोवाइड करें
3:30:58इस अल्टीमेट टीम को एक्सेप्ट करने से
3:31:00बर्मा के रियल इंडिपेंडेंस खत्म हो जाति
3:31:03है
3:31:07जिसके बाद थर्ड एंग्लो बर्मीज वार की
3:31:10शुरुआत हो जाति है
3:31:15और बर्मा के किंग सुरेंद्र कर देते हैं
3:31:17फर्स्ट जनवरी 1886 को बर्मा को फॉर्मूली
3:31:21ब्रिटिश इंडिया में एनएक्स कर लिया जाता
3:31:23है
3:31:28गोरिल्ला प्राइसिंग शुरू हो जाति है जो
3:31:311896 तक चलती रहती है
3:31:34और फिर फर्स्ट वर्ल्ड वार के बाद यहां
3:31:37नेशनलिस्ट मूवमेंट शुरू होता है बर्मा के
3:31:40नेशनलिस्ट इंडियन नेशनल कांग्रेस के साथ
3:31:42हाथ मिला लेते हैं इस लिंक को कमजोर करने
3:31:45के लिए 1935 में बर्मा को इंडिया से
3:31:49सेपरेट कर दिया जाता है हो वांग सॉन्ग की
3:31:51लीडरशिप में बर्मीज नेशनलिस्ट मूवमेंट और
3:31:54ज्यादा तीव्र होता है और फाइनली फोर्थ
3:31:57जनवरी 1948 को बर्मा को इंडिपेंडेंस मिलती
3:32:00है अब बात करते हैं की बैच के साथ ब्रिटिश
3:32:04रिलेशंस की
3:32:07एंग्लो तिब्बती रिलेशंस
3:32:11तिब्बत में फियोक्रेटिक रूल हुआ करता था
3:32:14इसे बुद्धिस्ट मांग सिया लमन रूल कर रहे
3:32:18थे और चीन की सिर्फ नॉमिनल सुसरेंटिस पर
3:32:21थी
3:32:21ब्रिटिशर्स ने काफी कोशिश की थी टिबैत के
3:32:24साथ फ्रेंडली और कमर्शियल रिलेशन स्थापित
3:32:27करने की लेकिन गर्जन के आने तक उन्हें
3:32:30इसमें कोई सफलता नहीं मिली थी
3:32:32वायसराय लोड कर्जन के समय लास में रूस
3:32:36इन्फ्लुएंस बढ़ता ही जा रहा था तिब्बत में
3:32:38ऋष्णम और अमिनेशन आने की रिपोर्ट ए रही थी
3:32:41जो गर्जन के लिए चिंता की बात थी इसलिए वह
3:32:45करनाल यंग हसबैंड के नेतृत्व में एक गोरख
3:32:47कंटिजेंट को तिब्बत के साथ एग्रीमेंट करने
3:32:50के लिए भेज देते हैं
3:32:51तिब्बतंस नेगोशिएट करने से इनकार कर देते
3:32:54हैं और नॉन वायलेट तरीके से विरोध शुरू
3:32:57करते हैं
3:33:02उसे समय के दलाई लामा लास छोड़कर भाग जान
3:33:05पर मजबूर होते हैं और यंग हसबैंड तिब्बती
3:33:08ऑफिशल्स के साथ फोर्सफुली त्रुटि साइन
3:33:11करते जिसे वीडियो लास कहा जाता है इसके
3:33:15अनुसार तिब्बत को 75 लाख की इंडिमनिटी पे
3:33:18करने के लिए कहा जाता है पेमेंट की
3:33:20सिक्योरिटी के रूप में 75 साल तक चुंबी
3:33:23वाली को ब्रिटिशर्स ऑक्युपी कर लेते हैं
3:33:26इसके साथ ही या तुम ज्ञान से और गाटोंक
3:33:29में ट्रेडमार्क ओपन करने के लिए भी कहा
3:33:32जाता है इसके अलावा तिब्बती रेलवे रोड या
3:33:35टेलीग्राफ के लिए किसी भी फॉरेन स्टेट को
3:33:37कोई कंसेशन नहीं दे सकता था सिर्फ ग्रेट
3:33:41ब्रिटेन को तिब्बत के फॉरेन अफेयर्स में
3:33:43कुछ कंट्रोल दिया जाता है
3:33:51नॉर्थ के बाद अब नॉर्थ वेस्टर्न फ्रंटियर
3:33:54की तरफ चलते हैं और डिस्कस करते हैं
3:33:59एंग्लो अफगान रिलेशंस
3:34:03दोस्तों 19th सेंचुरी की शुरुआत में रूस
3:34:06इन्फ्लुएंस काफी बढ़ाने लगता है
3:34:13की रसिया उनकी इंडियन अंपायर पर अटैक
3:34:16प्लेन कर रहा है
3:34:22इसलिए अफगानिस्तान में एक फ्रेंडली रोलर
3:34:25की जरूर महसूस की जाति है जो ब्रिटिश
3:34:27कंट्रोल में रहे इसी इंटेंशन से एंग्लो ऑफ
3:34:31गण रिलेशंस गाइड होते हैं
3:34:351836 में लॉर्ड ऑकलैंड इंडिया के गवर्नर
3:34:38जनरल बनते हैं और यह फॉरवर्ड पॉलिसी की
3:34:41बात करते हैं इसका मतलब था की कंपनी खुद
3:34:45से इनिशिएटिव लगी ब्रिटिश इंडिया की
3:34:47बाउंड्री को प्रोबेबल रूस अटैक से
3:34:49प्रोटेस्ट करने के लिए इस ऑब्जेक्टिव को
3:34:52दो तरीके से पूरा किया जा सकता था या तो
3:34:55नेबरिंग कंट्रीज के साथ ट्रीटी करके या
3:34:58फिर उन्हें पुरी तरह एनएक्स करके
3:35:00अफगानिस्तान की अमीर दोस्त मोहम्मद
3:35:03ब्रिटिशर्स के साथ फ्रेंडशिप तो करना
3:35:06चाहते थे लेकिन इस शर्ट पर की ब्रिटिश सिख
3:35:09से पेशावर को रिकवर करने में उनकी हेल्प
3:35:11करें
3:35:29शाहूजा के साथ
3:35:31शाहूजा तब से लुधियाना में ब्रिटिश पेंशनर
3:35:34बन के र रहे थे
3:35:36इस ट्रीटी में डिसाइड होता है की सिक्स की
3:35:38मिलिट्री हेल्प के जारी शहशुजा को वापस
3:35:41अफगानिस्तान के थ्रू पर बैठाया जाएगा
3:35:43जिसके बाद शाह सजा फॉरेन अफेयर्स सिक्स और
3:35:47ब्रिटिशर्स की एडवाइस के अनुसार कंडक्ट
3:35:49करेंगे साथ ही वह सिंह के अमीरस पर अपने
3:35:53सावरेन राइट्स भी छोड़ देंगे और रिवर
3:35:55सिंधु के राइट बैंक पर लोकेटेड अफगान
3:35:58टेरिटरी पर महाराजा रंजीत सिंह के क्लेम
3:36:01को एक्सेप्ट कर लेंगे इसके बाद शुरुआत
3:36:03होती है फर्स्ट एंग्लो अफगान वार की आई
3:36:06जानते हैं इसके बड़े में
3:36:09फर्स्ट एंग्लो अफगान वार 1839 तू 1842
3:36:14ब्रिटिश आर्मी अगस्त 1839 में काबुल में
3:36:17इंटर करती है
3:36:23दोस्त मोहम्मद सुरेंद्र कर देते हैं और
3:36:26शाह पूजा को अफगानिस्तान का अमीर बना दिया
3:36:29जाता है लेकिन अफगानिस्तान
3:36:37की हत्या कर दी जाति है
3:36:44जिसमें यह अफगानिस्तान को इबे एक्यूरेट
3:36:47करने के लिए तैयार होते हैं और दोस्त
3:36:49मोहम्मद को रिस्टोर भी करते हैं फर्स्ट
3:36:52अफगान वार में इंडिया की डेड करोड़ रुपए
3:36:55खर्च हो जाते हैं और लगभग 20000 लोग इसमें
3:36:58मारे जाते हैं जॉन लॉरेंस और थे पॉलिसी का
3:37:02मास्टरी इन एक्टिविटी
3:37:04फर्स्ट अफगान वार के डिजास्टर के बाद जॉन
3:37:07लॉरेंस मास्टर ली इन एक्टिविटी पॉलिसी को
3:37:09फॉलो करते हैं
3:37:111863 में दोस्त मोहम्मद की डेथ के बाद भी
3:37:14वार ऑफ सक्सेशन में कोई इंटरफ्रेंस नहीं
3:37:16किया जाता
3:37:18लॉरेंस की पॉलिसी दो कंडीशंस पर आधारित थी
3:37:20पहले फ्रंटियर पर पीस डिस्टर्ब ना हो और
3:37:24दूसरा सिविल वार में कोई भी कैंडिडेट फौरन
3:37:27हेल्प ना मांगे इसके बाद शेर अली खुद को
3:37:31अफगानिस्तान के थ्रोन पर कब्ज करते हैं तो
3:37:34लॉरेंस उनके साथ फ्रेंडशिप कल्टीवेट करने
3:37:37की कोशिश करते हैं लेकिन
3:37:421876 में लैटिन इंडिया के वायसराय बनते
3:37:45हैं और नई फॉरेन पॉलिसी शुरू करते हैं
3:37:48जिसे प्राउड रिजर्व की नीति कहा जाता है
3:37:51इसका मकसद साइंटिफिक फ्रंटियर्स को मेंटेन
3:37:54करना और स्फियर्स ऑफ इन्फ्लुएंस को
3:37:57सेफगार्ड करना था लियोन के अनुसार
3:37:59अफगानिस्तान के साथ रिलेशनशिप को अंबिगुअस
3:38:02नहीं रखा जा सकता था और इसीलिए सेकंड
3:38:05एंग्लो अफगान वार की शुरुआत होती है आई
3:38:07जानते हैं इसके बड़े में भी सेकंड एंग्लो
3:38:10अफगान वार 1870 तो 1880
3:38:14लिटिल शेर अली को एक फेवरेबल त्रिनिटी का
3:38:17ऑफर देते हैं लेकिन अमीर अपने दोनों
3:38:20पावरफुल नेबर्स यानी की रसिया और ब्रिटिश
3:38:22इंडिया के साथ फ्रेंडशिप चाहते थे साथ ही
3:38:25दोनों में से किसी का बहुत ज्यादा
3:38:27इंटरफ्रेंस भी नहीं होने देना चाहते थे
3:38:29बाद में शेर अली काबुल में ब्रिटिश और बाय
3:38:32रखना से भी माना कर देते हैं जबकि इससे
3:38:35पहले रसियन को यह कंसेशन दे दिया गया
3:38:39[संगीत]
3:38:41और जब रूस अपना न्वोक काबुल से वीडियो कर
3:38:44लेते हैं तब लिटन अफगानिस्तान को एवं करने
3:38:47का फैसला करते हैं
3:38:49इनवेजन की स्थिति में शेर अली भाग जाते
3:38:52हैं और ब्रिटिशर्स में 1879 में शेर अली
3:38:55के एल्डेस्ट सन याकूब खान के साथ ट्रीटी
3:38:59का गंधक साइन करते हैं इसमें डिसाइड होता
3:39:02है की अमीर अपनी फॉरेन पॉलिसी गवर्नमेंट
3:39:05ऑफ इंडिया यानी ब्यूटियस की एडवाइस के
3:39:07अनुसार कंडक्ट करेंगे काबुल में परमानेंट
3:39:10ब्रिटिश रेजिडेंट तैनात किया जाएगा
3:39:12ब्रिटिश इंडिया गवर्नमेंट फॉरेन अग्रेशन
3:39:15के अगेंस्ट आमिर को पूरा सपोर्ट देगी और
3:39:18एनुअल सब्सिडी भी देगी लेकिन जल्द ही
3:39:20पॉपुलर प्रेशर्स के करण याकूब को भी थ्रोन
3:39:23छोड़ना पड़ता है और ब्रिटिश को काबुल और
3:39:26कंधार रीकैप्चर करने पढ़ते हैं
3:39:31लेकिन अफगानिस्तान को तोड़ने का प्लेन
3:39:34बनाते हैं लेकिन इसे इंप्लीमेंट नहीं कर
3:39:36पाते और नेक्स्ट वायसराय लॉर्ड रिपन इस
3:39:39प्लेन को फॉलो नहीं करते बल्कि
3:39:41अफगानिस्तान को एक बफर स्टेट की तरह ट्वीट
3:39:44करने की पॉलिसी अपनाते हैं रूस रिवॉल्यूशन
3:39:47और फर्स्ट वर्ल्ड वार के बाद अफगानिस्तान
3:39:49फूल इंडिपेंडेंस की डिमांड करते हैं
3:39:521909 में अब्दुल रहमान के सक्सेसर बने
3:39:55हबीबुल्लाह की 1990 में हत्या कर दी जाति
3:39:58है और नए रोलर अमानुल्लाह ब्रिटिशर्स के
3:40:02अगेंस्ट ओपन वार डिक्लेअर कर देते हैं
3:40:051921 में ब्रिटिशर्स हर मां लेते हैं और
3:40:08अफगानिस्तान फॉरेन अफेयर्स में अपनी
3:40:10इंडिपेंडेंस रिकवर कर लेट है
3:40:14कंक्लुजन
3:40:19एस की फौरन पॉलिसी उनके इंपिरियलिस्ट
3:40:22एंबीशन से गाइड थी एक तो वो किसी भी राइवल
3:40:25पावर जैसे की रसिया या फ्रांस से अपने
3:40:28इंडियन अंपायर को प्रोटेस्ट करना चाहते थे
3:40:30और दूसरा अपने मार्केट को भी एक्सपेंड
3:40:32करना चाहते थे इन्हीं दोनों मोटिव्स के
3:40:35साथ वह फॉरेन पॉलिसी को कंडक्ट करते हैं
3:40:38लेकिन यहां समस्या यह थी की अपने एंबीशन
3:40:41को पूरा करने के लिए यह इंडियन रिवेन्यू
3:40:44और मैनपॉवर का उसे करते हैं फिर चाहे
3:40:46अफगानिस्तान के साथ वार हो या फिर बर्मा
3:40:49के साथ इनका कनफ्लिक्ट इंडियन सोल्जर ही
3:40:52इनके लिए फाइट करते हैं और लाखों रुपए इन
3:40:56वर्स पर खर्च कर दिए जाते हैं
3:40:58सिविल उप्राइजिंग इन ट्राईबल रिवॉल्वेस
3:41:021757 तू 1856
3:41:05दोस्तों 1857 की क्रांति के बड़े में तो
3:41:08हम सभी कुछ ना कुछ जरूर जानते हैं लेकिन
3:41:11उससे पहले भी ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट
3:41:14विद्रोह की कई आवाज़ उठी थी जिनके बड़े
3:41:16में अक्सर लोगों को कम पता होता है आज हम
3:41:20ऐसे ही कुछ रिवॉल्ट्स और उप्राइजिंग की
3:41:22चर्चा करने वाले हैं यह रिवॉल्ट्स देश के
3:41:25अलग-अलग हसन में अलग-अलग समय पर हुए थे
3:41:29मुख्य तोर पर इन रिबेलियंस के तीन फॉर्म्स
3:41:32देखें जाते हैं
3:41:44सबसे पहले बात करते हैं
3:41:59सबसे पहले उनको समझते हैं
3:42:07सबसे बड़ा करण इकोनामी एडमिनिस्ट्रेशन और
3:42:11लैंड रिवेन्यू सिस्टम में ब्रिटिश द्वारा
3:42:13तेजी से किया गया बदलाव था
3:42:16है जिसकी वजह से एग्रेरियन सोसाइटी पुरी
3:42:19तरह से उथल-पुथल हो गई थी उदाहरण के तोर
3:42:22पर लैंड रिवेन्यू रेट्स इतने हाय कर दिए
3:42:25गए थे की बैगन और जमींदारा दोनों ही
3:42:28परेशान थे इसी तरह ब्रिटिश ने नया जस्टिस
3:42:32सिस्टम भी इंट्रोड्यूस कर दिया था जिससे
3:42:35जस्टिस एन सिर्फ महंगा बल्कि लोगों से दूर
3:42:38हो गया था इंडियन हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्रीज
3:42:41का डिक्लिन होने से हजारों की संख्या में
3:42:44आर्टिजंस की रोजी रोटी छन गई थी इसके
3:42:47अलावा ब्रिटिश रूल का फौरन करैक्टर भी
3:42:50विद्रोह का एक करण था लोगों को एक विदेशी
3:42:53शक्ति के अधीन होना कभी अच्छा नहीं लगता
3:42:56इंडियन के प्राइड को भी ब्रिटिश रूल में
3:42:59हट किया था और इसीलिए फॉरेनर को अपनी जमीन
3:43:02से बाहर करने के बहुत से एफर्ट्स देखने को
3:43:05मिलते हैं
3:43:06ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट रिबेलियंस उनका
3:43:09बंगाल पर कब्जा होने से ही शुरू हो जाता
3:43:11है शायद ही ऐसा कोई साल गया हो जब इनके
3:43:14विरुद्ध कोई आम रिबेलीयन ना हुआ हो
3:43:171763 से 1856 के बीच 40 से ज्यादा मेजर
3:43:22रिबेलियंस होते हैं इसके अलावा 100 से
3:43:25ज्यादा माइनर वंश भी थे
3:43:27आई अब अलग रीजंस में होने वाले सिविल
3:43:30रिबेलियंस के कुछ उदाहरण देखते हैं शुरुआत
3:43:33करते हैं बंगाल और पूर्वी इंडिया से
3:43:35रिवॉल्ट्स इन बंगाल
3:43:42में ही एस्टेब्लिश किया था इसलिए सबसे
3:43:46पहले विद्रोह भी यही शुरू होता है और वह
3:43:491763 में होने वाला
3:43:54मंगस यानी सन्यासी और बेदखल किया हुए
3:43:58जमींदारा लीड कर रहे थे
3:44:00और इनका साथ देते हैं पेजयंस और नीचे
3:44:03बार्बी से निकले हुए सोल्जर
3:44:05सन्यासी रिवॉल्ट के पीछे में करण होली
3:44:08प्लेस को विजिट करने पर लगे गई
3:44:10रिस्ट्रिक्शंस थी
3:44:12सन्यासी अक्सर होली श्रीस की यात्रा करते
3:44:15थे और वहीं के लोकल जमीदार इन्हें दक्षिण
3:44:18दिया करते थे लेकिन ब्रिटिश को लगता है की
3:44:21यह लोग उनका हिस्सा ले रहे हैं साथ ही
3:44:25इतने बड़े स्टार पर लोगों का घूमने उन्हें
3:44:27डॉ और ऑर्डर की प्रॉब्लम लगता था इसलिए वह
3:44:30सन्यासी की विजिट पर रिस्ट्रिक्शंस लगा
3:44:33देते हैं और इसी से नाराज सन्यासी उनके
3:44:36खिलाफ विद्रोह कर देते हैं
3:44:38रिवॉल्ट के दौरान कंपनी की फैक्टरीज और
3:44:41स्टेट ट्रेजरीज पर रेड की जाति है यह लोग
3:44:44कंपनी की आम फोर्सेस का बहादुर से सामना
3:44:47करते हैं इनका विद्रोह 1800 तक चला राहत
3:44:50है बंकिम चंद्र चटर्जी की नवल आनंद मठ इसी
3:44:54विद्रोह पर बेस्ड है
3:44:56सन्यासी रिबेलीयन के बाद 176 से 1772 तक
3:45:01चौर विद्रोह हुआ था यह बंगाल और बिहार के
3:45:04पांच डिस्ट्रिक्ट में फैला था इसके अलावा
3:45:07पूर्वी इंडिया के मेजर रिबेल्स में
3:45:101783 में होने वाला रंगपुर और दिनाजपुर
3:45:14रिबिन
3:45:151799 में विष्णुपुर और बीरभूम 1800 पर
3:45:20सेवेंटीन के बीच उड़ीसा के जमींदारा का
3:45:23विद्रोह और 1827 से 40 तक चलने वाला
3:45:26संबलपुर रिवॉल्ट आता है
3:45:28पूर्वी इंडिया के बाद आई अब साउथ इंडिया
3:45:31की तरफ चलते हैं रिवार्ड्स इन साउथ इंडिया
3:45:34दोस्तों साउथ इंडिया में विजयनगरम के राजा
3:45:381794 में रिवॉर्ड करते हैं
3:45:44[संगीत]
3:45:46पॉलीगर्स बेसिकली साउथ इंडिया की जमींदारा
3:45:49को कहा जाता था और इनका विद्रोह टैक्सेशन
3:45:51को लेकर हुआ था इसके अलावा 185 में
3:45:55त्रवंकोर के दीवान वेल थंबिका हेयर तेल
3:45:58रिवॉल्ट होता है
3:46:0018005 में ब्रिटिश गवर्नर जनरल वैलेंस
3:46:03लेने ट्रैवल कर के राजा पर सब्सिडियरी
3:46:06एलाइंस ट्वीट पोस्ट कर दी थी लेकिन राजा
3:46:08ट्रीटी के हर स्टंट्स की वजह से नाराज हो
3:46:11जाते हैं और सब्सिडी पे नहीं करते ऐसे में
3:46:15ब्रिटिश रेजिडेंट जब इन्हें सब्सिडी पे
3:46:18करने के लिए फोर्स करने लगता है तो उसके
3:46:20एटीट्यूड से लोगों की नाराजगी और ज्यादा
3:46:22बाढ़ जाति है और दीवार
3:46:26के सपोर्ट से रिवॉल्ट कर देते हैं
3:46:32इस विद्रोह को दबाने और यहां शांति
3:46:34स्थापित करने के लिए
3:46:39विशाखापट्टनम में 1835 में गंजाम में और
3:46:43184647 में कुरनूल में
3:46:46मिलती हैं अब बात करते हैं वेस्टर्न
3:46:50इंडिया की रिपोर्ट इन वेस्टर्न इंडिया
3:46:54दोस्तों 1816 से 1832 के बीच सौराष्ट्र के
3:46:59के बार-बार ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट विद्रोह
3:47:01करते हैं इसी तरह गुजरात के कॉलेज भी 1824
3:47:06से 28 तक 1839 में और फिर 1849 में
3:47:10विद्रोह का बिगुल बजाते हैं इनके विद्रोह
3:47:13का करण ब्रिटिश रूल का इंपोजिशन और उनके
3:47:16द्वारा कोहली के फोर्स को टोडा जाना था
3:47:19इसके अलावा कंपनी द्वारा इस इस्टैबलिश्ड
3:47:22नए एडमिनिस्ट्रेशन की वजह से बड़ी संख्या
3:47:25में यह लोग बेरोजगार भी हो गए थे
3:47:27पेशवा की हर के बाद से ही महाराष्ट्र में
3:47:30लगातार विद्रोह का सिलसिला चला राहत है
3:47:32जिसमें 1818 से 1831 के बीच भील
3:47:37उप्राइजिंग हुई थी भील खानदेश के हिल
3:47:39रेंजेस में रहते थे और ब्रिटिशर्स ने इनके
3:47:42रीजन में इंट्रूड करना शुरू कर दिया था
3:47:45लोकल्स इस इंट्रूजन से ना खुश थे और
3:47:48उन्होंने इस बात का रिपोर्ट किया इसके साथ
3:47:51ही 1824 में चुनाव द्वारा लाड की टूर
3:47:55एप्प्राइजिंग 1841 की सतारा प्राइसिंग और
3:47:581844 का गडकरी इसका रिवॉल्यूशन प्रॉमिनेंट
3:48:02है
3:48:10दोस्तों 1824 में आज के अप और हरियाणा ने
3:48:14ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट हथियार उठा लिए थे
3:48:17इसके अलावा 185 में बिलासपुर का विद्रोह
3:48:211814 से 17 के बीच अलीगढ़ के तालुकदार का
3:48:25विद्रोह
3:48:261842 में जबलपुर के बुंदेला का रिपोर्ट और
3:48:301852 में खानदेश में हुआ विद्रोह मेजर
3:48:33रिबेलियंस की कैटिगरी में आते हैं
3:48:37ये तो बात हुई मेजर सिविल रिबेलियंस के
3:48:39कुछ उदाहरणों की अयूब इनका थोड़ा एनालिसिस
3:48:42भी करते हैं
3:48:43एनालिसिस ऑफ सिविल उप्राइजिंग
3:48:47दोस्तों देश के अलग-अलग हसन में हुई 100
3:48:50से भी ज्यादा इन सिविल उप्राइजिंग में
3:48:52हमें आम लोगों का करेज देखने को मिलता है
3:48:54इससे पता चला है की कैसे ब्रिटिश रूल की
3:48:58शुरुआती सालों से ही इंडिया के लोग इसका
3:49:01विद्रोह करने लगे थे और कैसे इन लोगों ने
3:49:04अपने से शक्तिशाली ब्रिटिश फोर्सेस का
3:49:06सामना किया था दोस्तों लगातार चलने वाले
3:49:10ये रिबेलियंस एक साथ देखने पर मसीव लगता
3:49:13हैं लेकिन अल में यह अपने फैलाव में पुरी
3:49:16तरह लोकल थे और एक दूसरे से आइसोलेटेड थे
3:49:20इन सभी का करैक्टर इसीलिए एक जैसा नहीं था
3:49:23की यह किसी नेशनल या आम एफर्ट को
3:49:26रिप्रेजेंट कर रहे थे बल्कि इसलिए था
3:49:28क्योंकि यह आम कंडीशंस को रिप्रेजेंट करते
3:49:31थे लेकिन समय और जगह
3:49:39फैऊदल लीडर्स बैकवर्ड लुकिंग और ट्रेडिशनल
3:49:42आउटलुक वाले थे जो अभी भी पुरानी दुनिया
3:49:45में र रहे थे मॉडर्न वर्ल्ड की बैंकिंग और
3:49:47अप्रोच से कोसों दूर बस पुराने फॉर्म्स ऑफ
3:49:51रूल और सोशल रिलेशंस को फिर से एस्टेब्लिश
3:49:53करना चाहते थे ब्रिटिश एक करके सभी
3:49:57रेगुलेरियस को शांत कर लेते हैं
3:50:01तो कुछ पुरी तरह खत्म करके उदाहरण के तोर
3:50:05पर वेल थंपी को मृत्यु होने के बाद भी
3:50:07पब्लिकली हैंग किया जाता है जिससे लोगों
3:50:11के मां में एक डर पैदा कर सकें इन सिविल
3:50:14रिबेलियंस का सप्रेशन एक करण बंता है की
3:50:181857 की क्रांति का असर साउथ इंडिया और
3:50:21ज्यादातर वेस्टर्न और पूर्वी इंडिया में
3:50:23देखने को नहीं मिलता इनका हिस्टोरिकल
3:50:26साइनिफिकेंस इस बात में है की यह ब्रिटिश
3:50:29रूल के अगेंस्ट विद्रोह का एक स्ट्रांग और
3:50:31वैल्युएबल लोकल ट्रेडीशन एस्टेब्लिश करते
3:50:33हैं और आजादी के लिए आगे होने वाले संघर्ष
3:50:37में इंडियन के लिए प्रेरणा का एक सोर्स
3:50:39बनते हैं
3:50:53बहुत ही साहस के साथ यह लोग विद्रोह में
3:50:56अपनी भागीदारी देते हैं ट्राईबल लोगों की
3:50:58नाराजगी के कई करण
3:51:03सबसे पहले करण तो यह था की कॉलोनियल
3:51:06एडमिनिस्ट्रेशन ने इनके रिलेटिव आइसोलेशन
3:51:09को खत्म कर दिया था जहां अभी तक ये अपनी
3:51:12कम्युनिटी में पीसफुली र रहे थे इनका
3:51:15मेंस्ट्रीम सोसाइटी से बहुत ज्यादा लिंक
3:51:17नहीं था वहीं ब्रिटिश रूल के आने के बाद
3:51:19ट्राईबल्स को मेंस्ट्रीम एडमिनिस्ट्रेशन
3:51:22के साथ तेजी से जोड़ा जान लगा कुछ जगह पर
3:51:26ब्रिटिशर्स ट्राईबल के को जमींदारा
3:51:28रिकॉग्नाइज्ड कर लेते हैं और लैंड
3:51:30रिवेन्यू का नया सिस्टम इंट्रोड्यूस कर
3:51:32देते हैं ट्राईबल प्रोडक्ट्स पर टैक्स लगा
3:51:35दिया जाता है साथ ही ट्राईबल एरियाज में
3:51:38क्रिश्चियन मिशनरीज का आना भी बहुत बाढ़
3:51:40जाता है यह लोग ट्रायल्स को कन्वर्ट करने
3:51:43की पुरी कोशिश करते हैं
3:51:45है इसके अलावा ब्रिटिश रूल के दौरान
3:51:48ट्राईबल्स के बीच मनी लैंडर्स ट्रेडर्स
3:51:51रिवेन्यू फार्मर्स जैसे मिडिलमैन की
3:51:54संख्या बहुत अधिक हो जाति है यह लोग सीड्स
3:51:57थे और धीरे-धीरे ट्राईबल्स को डेड के दाल
3:52:00में फंसा कर उनके लैंड पर कब्जा करने लगता
3:52:03हैं इसकी वजह से ट्राईबल पीपल एग्रीकल्चर
3:52:06लेबर्स शेर क्रॉपर्स और टिनेंट्स की
3:52:09पोजीशन में आने लगे थे
3:52:11कॉलोनियलिज्म की वजह से फॉरेस्ट के साथ भी
3:52:14ट्राईबल्स की रिलेशनशिप में चेंज आता है
3:52:17ज्यादातर ट्रबल कम्युनिटी अपनी लाइवलीहुड
3:52:20के लिए फॉरेस्ट रिसोर्सेस पर डिपेंड करते
3:52:22थे लेकिन ब्रिटिश ने इन फॉरेस्ट पर भी
3:52:25अपना कब्जा कर लिया था और ट्राईबल्स के
3:52:28फॉरेस्ट एरिया एक्सेस करने पर
3:52:29रिस्ट्रिक्शंस लगा दिए थे इसके अलावा
3:52:32पुलिसमैन और बाकी ऑफिशल्स के द्वारा शोषण
3:52:36और एक्सपोर्टेशन भी ट्राईबल्स के लिए आम
3:52:38हो गया था
3:52:39रिवेन्यू फार्मर्स और गवर्नमेंट एजेंट
3:52:42ट्राईबल से बेकार यानी की फोर्स अनपेड
3:52:45लेबर का कम भी लिए
3:52:49करती थी लेकिन ट्राईबल कम्युनिटी के
3:52:52पुराने लिविंग सिस्टम को ब्रिटिश रूल ने
3:52:55काफी हद तक डिस्ट्रिक्ट कर दिया था और यही
3:52:57एक आम फैक्टर था सभी ट्रैवलर प्राइस के
3:53:01पीछे
3:53:04और उसके कुछ उदाहरण को देखते हैं
3:53:07मैथर्ड ऑफ ट्रबल रिवार्ड्स और एग्जांपल्स
3:53:11दोस्तों ज्यादातर ट्रबल एप्प्राइजिंग
3:53:14ब्रेड बेस्ड होती थी इनमें हजारों की
3:53:17संख्या में ट्रबल्स भाग लेते थे रिबेलीयन
3:53:20तब शुरू होता था जब ट्राईबल्स शोषण से
3:53:22पुरी तरह दुखी हो जाते थे और उन्हें लगता
3:53:25था की अब उनके पास फाइट करने के अलावा और
3:53:28कोई ऑप्शन नहीं बच्चा है
3:53:30विद्रोह के दौरान आउटसाइडर्स जैसे की मनी
3:53:33लैंडर्स जमींदार गवर्नमेंट ऑफिशल्स पर
3:53:36अटैक किया जाता था उनकी प्रॉपर्टी को लूट
3:53:38जाता था और उन्हें गांव से बाहर कर दिया
3:53:41जाता था कई जगह पर ट्रबल रिवार्ड्स को
3:53:44रिलिजियस
3:53:45ने लीड किया था जिन्हें मसीह बोला जाता था
3:53:49यह लोग क्लेम करते थे की इनके पास मैजिकल
3:53:53पावर्स हैं जिनकी हेल्प से यह ब्रिटिशर्स
3:53:55को हर सकते हैं इनकी खाने पर बड़ी संख्या
3:53:58में ट्रबल मैसेज विद्रोह से जुड़ जाते थे
3:54:02हालांकि ट्राईबल्स और ब्रिटिशर्स का
3:54:04मुकाबला बराबरी का नहीं था एक तरफ सभी
3:54:07मॉडर्न वेपंस के साथ ट्रेन आर्मी हुआ करती
3:54:09थी
3:54:10तो दूसरी तरफ हाथ में पत्थर भला कुल्हाड़ी
3:54:14जैसे हथियार लिए ट्रेवल्स इस अनइक्वल
3:54:17वाॅरफेयर में लाखों की संख्या में ट्रबल्स
3:54:20अपनी लाइफ सैक्रिफिस करते हैं दोस्तों
3:54:23मेजर ट्रबल रिवार्ड्स के कुछ एग्जांपल इस
3:54:25तरह पहले ट्रबल रिबेलीयन 1768 में बंगाल
3:54:30में हुआ था इसे चौर रिबेलीयन कहा जाता है
3:54:33इसके अलावा बंगाल में ही 1783 का रंगपुर
3:54:37रबालियां वेस्टर्न महाराष्ट्र में सेवाराम
3:54:40की लीडरशिप में 1825 का भी रिपोर्ट छोटा
3:54:44नागपुर एरिया में हुई 1832 की कला प्राइस
3:54:47और 1855 का संथाल होल इंपॉर्टेंट है
3:54:52ट्रबल रिवार्ड्स को और अच्छे से समझना के
3:54:55लिए 21 स्टडी देखते हैं
3:54:57सबसे बड़े ट्रबल रिवॉर्ड कहे जान वाले
3:55:00संथाल फूल की
3:55:06दोस्तों संथाल्स भागलपुर और राजमहल के बीच
3:55:09के एरिया में रहते थे इसे दमन ए को कहा
3:55:13जाता था ब्रिटिश रूल के आने के बाद इनके
3:55:16एरिया में आउटसाइडर यानी की दिखेयूज इंटर
3:55:19करते हैं और संथाल्स का शोषण शुरू हो जाता
3:55:22है जमीन दर्ज मनी लैंडर्स और ब्रिटिश
3:55:25ऑफिशल्स की वजह से संथाल्स की लाइफ बदलने
3:55:28लगती है इनके ऊपर हैवी टैक्स लगा दिए जाते
3:55:31हैं जमींदारा और गवर्नमेंट ऑफिशल्स
3:55:34तरह-तरह के एक्सप्लोजंस करने लगता हैं लोन
3:55:37लेने पर 50 से 500% तक के हाय इंटरेस्ट
3:55:41रेट चार्ज किया जाते हैं अलग-अलग त्रिकोण
3:55:44से संथाल्स की प्रॉपर्टी पर कब्जा करना
3:55:46शुरू हो जाता है मार्केट और हार्ट में
3:55:49इन्हें धोखा देकर ज्यादा वसूली की जाति है
3:55:52इस तरह के शोषण और अत्याचारों से परेशान
3:55:56होकर
3:55:57विद्रोह करने पर मजबूर होते हैं
3:56:001854 में ट्रबल हिट्स यानी की माजीस और
3:56:04परगनास मिलकर विद्रोह के बड़े में
3:56:06प्लानिंग करने लगता हैं
3:56:08जमींदारा और मनी लैंडर्स को लूटने की कुछ
3:56:11घटनाएं भी शुरू हो जाति हैं 30 जून 1855
3:56:15को ट्राईबल लीडर्स
3:56:17भाग निधि विलेज में करीब 6000 साल की
3:56:21असेंबली बुलेट हैं यह 400 विलेज को
3:56:24रिप्रेजेंट करती है यहां पर रिवॉल्ट का
3:56:27बैनर रेस करने और आउटसाइडर्स को बाहर करने
3:56:29का फैसला लिया जाता है सिद्धू और कानून
3:56:39से हथियार उठाने और आजादी के लिए फाइट
3:56:42करने को कहा है
3:56:43लीडर्स संथाल मां और वूमेन को बड़ी संख्या
3:56:47में मोबिलाइज करना शुरू करते हैं इसके लिए
3:56:50गांव-गांव में प्रशासन निकले जाते हैं
3:56:52जल्द ही 60000 संथाल इन्हें जॉइन कर लेते
3:56:56यह लोग 1500 से 2000 के बैंड्स बनाकर
3:57:00जमींदारा और महाजनस पर हमला शुरू कर देते
3:57:03हैं इनके घर पुलिस स्टेशन रेलवे
3:57:06कंस्ट्रक्शन साइट्स पोस्ट करियर्स एडसेटरा
3:57:09पर अटैक किया जाता है खाने का मतलब यह है
3:57:12की दिकू एक्सप्लोइटेशन और कॉलोनियल पावर
3:57:15के सभी सिंबल्स पर अटैक होता है
3:57:35जैसे ही ब्रिटिश गवर्नमेंट को रिबेलीयन के
3:57:37बड़े स्टार के बड़े में पता चला है वह
3:57:41इनके विरुद्ध मिलिट्री कैंपेन लॉन्च कर
3:57:43देती है आर्मी की 10 से भी ज्यादा
3:57:45रेजीमेंट को बुलाया जाता है
3:57:50और विद्रोह के नेताओं को पकाने के लिए
3:57:5310000 रुपए तक के इनाम की घोषणा कर दी
3:57:56जाति है
3:57:57बहुत ही कुर्ता के साथ संथाल्स के विद्रोह
3:58:00को ढाबा दिया जाता है
3:58:0215000 से ज्यादा संथाल्स की हत्या कर दी
3:58:05जाति है 10 से भी ज्यादा गांव को पुरी तरह
3:58:08तबाह कर दिया जाता है
3:58:10सिदो को पड़कर अगस्त 1855 में मार दिया
3:58:14जाता है वहीं कानून फरवरी 1856 में
3:58:17विद्रोह के बिल्कुल अंतिम पड़ाव में
3:58:19एक्सीडेंट के जारी पकड़े जाते हैं
3:58:22राजमहल हिल्स पुरी तरह संथाल के खून में
3:58:26नहा चुके होते हैं
3:58:27संथाल उसने बहुत ज्यादा साहस का परिचय
3:58:30दिया और आखरी दम तक सुरेंद्र नहीं किया
3:58:43जाता है
3:58:51कंक्लुजन
3:58:53तो दोस्तों यह थी 1857 से पहले के कुछ
3:58:56मेजर सिविल और ट्रबल रिबेलियंस की कहानी
3:58:59इससे पता चला है की 1857 की क्रांति अचानक
3:59:04से नहीं हुई थी
3:59:05उसके पीछे ब्रिटिश डोमिनेशन के अगेंस्ट
3:59:08विद्रोह करने की एक लंबी हिस्ट्री रही थी
3:59:11फर्क बस इतना था की 1857 से पहले के
3:59:15ज्यादातर विद्रोह का स्टार लोकल या रीजनल
3:59:18रहा था जबकि 1857 की क्रांति काफी बड़े
3:59:22स्टार पर हुई थी
3:59:25प्रेजेंट मूवमेंट्स
3:59:28दोस्तों इंडिया में ब्रिटिश रूल के
3:59:30एस्टेब्लिशमेंट के बाद बहुत से पॉलीटिकल
3:59:32इकोनामिक और एडमिनिस्ट्रेटिव चेंज हुए थे
3:59:35और इन चेंज का सबसे ज्यादा इफेक्ट हमें
3:59:37इंडियन प्रेजेंस पर देखने को मिलता है
3:59:41बादल जाति है हर लेवल पर उनका शोषण होने
3:59:45लगता है और जब इस शोषण का लेवल्स के
3:59:48टोलरेंस लेवल को पर करता है तो वो इसके
3:59:50अगेंस्ट विद्रोह या आंदोलन करते हैं आज के
3:59:54वीडियो में हम ऐसे ही कुछ इंपॉर्टेंट
3:59:55मोमेंट्स की चर्चा करेंगे सबसे पहले इनकी
3:59:59पीछे की जनरल कॉसेस को समझते हैं
4:00:07दोस्तों ब्रिटिश रूल के समय इंडिया का
4:00:10एग्रेरियन स्ट्रक्चर पुरी तरह बादल जाता
4:00:13है इसके बहुत से करण देखें जा सकते हैं
4:00:15जैसे की ब्रिटिश की इकोनामिक पॉलिसी उनके
4:00:19द्वारा किया गया इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स का
4:00:21री जिसकी वजह से लैंड पर प्रेशर बढ़ता है
4:00:24नई लैंड रिवेन्यू सिस्टम और कॉलोनियल
4:00:27एडमिनिस्ट्रेटिव और जुडिशल
4:00:31सिस्टम को हाय रेंज लीगल न्यूज़ पोस्ट
4:00:35अफेक्शंस और अनपेड लेबर जैसी प्रॉब्लम्स
4:00:38फेस करनी पड़ती थी वही एरियाज में खुद
4:00:41गवर्नमेंट ने बहुत हाय रिवेन्यू रेट फिक्स
4:00:44किया हुआ था जिसे चुकाने के लिए किसान
4:00:47अक्सर लोकल मनी लैंडर से हेल्प लेने को
4:00:49मजबूर होते थे और यह
4:00:54किसने को बहुत हाय इंटरेस्ट रेट पर पैसे
4:00:57उधर दिए जाते थे जिसके लिए किसान अपनी
4:01:00जमीन और कैथल को गिरवी रखते थे और जब यह
4:01:03लोन नहीं चुका पाते थे तो गिरवी राखी गई
4:01:06प्रॉपर्टी मनी दूर की हो जाति थी इस तरह
4:01:09धीरे-धीरे बहुत बड़े एरियाज पर एक्चुअल
4:01:12सिर्फ 10 इंच शेर क्रॉपर्स और लैंडलेस
4:01:16लेबर्स में तब्दील हो गए थे किसान अक्सर
4:01:18इस शोषण का विरोध करते थे और कई बार इन
4:01:22हालातो से परेशान होकर किसान क्राइम का
4:01:24रास्ता भी चुन लेते थे क्योंकि भूखे करने
4:01:27से तो वही रास्ता अच्छा नजर आता था इसलिए
4:01:30कुछ किसान रोबरी डेकोरेटिव और सोशल
4:01:33बांडेटरी जैसी एक्टिविटीज में भी इंवॉल्वड
4:01:35होते दिखते हैं और एक दूसरा रास्ता था साथ
4:01:38मिलकर विद्रोह करना जिसके कुछ एग्जांपल्स
4:01:41को आज हम डिस्कस करने वाले हैं प्रेजेंट
4:01:43मूवमेंट्स को हम दो कैटिगरीज में डिवाइड
4:01:46कर सकते हैं
4:02:101859 में हुए इंडिगो रिपोर्ट की
4:02:15इंडिगो रिवॉल्ट 185960
4:02:18इंडिगो रिवॉल्ट यह नील विद्रोह
4:02:21185960 के बीच बंगाल में हुआ था यहां
4:02:25किसने ने यूरोपीय प्लांटर्स के खिलाफ
4:02:27विद्रोह किया था जो उन्हें इंडिगो यानी की
4:02:30नील की खेती करने के लिए फोर्स करते थे
4:02:33बंगाल में इंडिगो का कल्टीवेशन 1780 के
4:02:37अराउंड शुरू हो गया था उसे समय
4:02:39इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन की वजह से यूरोप
4:02:42में इंडिगो की डिमांड काफी हाय रहती थी
4:02:44क्योंकि इस ब्लू दी का उसे टेक्सटाइल
4:02:47इंडस्ट्री में किया जाता था इसी का फायदा
4:02:50उठाने के लिए यूरोपियन प्लांटर्स इंडिया
4:02:52में इंडिगो कल्टीवेशन करवाते थे
4:02:55कल्टीवेशन
4:03:02अपनी जमीन पर ही इंडिगो कल्टीवेट करते थे
4:03:05और सिस्टम में प्लांटर्स बंगाल के किसने
4:03:08की जमीन पर इंडिगो की खेती करते थे
4:03:11है इसके लिए यह किसने के साथ कॉन्ट्रैक्ट
4:03:14साइन करते थे और उन्हें एडवांस लोन ऑफर
4:03:17करते थे यह पूरा सिस्टम बहुत ही ऑपरेशन
4:03:19हुआ करता था किसान को उसकी सबसे अच्छी
4:03:22जमीन पर इंडिगो गो करनी पड़ती थी इसके
4:03:25अलावा प्लांटर्स इनके प्रोड्यूस का बहुत
4:03:27ही कम रेट ऑफर करते थे जी वजह से किसान ना
4:03:31तो कभी इनका लोन रिपेयर कर पाते थे और ना
4:03:33ही इस सिस्टम से खुद को बाहर कर पाते थे
4:03:35गवर्नमेंट अथॉरिटी और रूल्स भी प्लांटर्स
4:03:39को ही फीवर करते थे इस शोषण से परेशान
4:03:42होकर 1859 में बंगाल के नदिया जिला के
4:03:46प्रेजेंस इंडिगो कल्टीवेट करने से माना कर
4:03:48देते हैं इन्हें लीड कर रहे थे दो भाई
4:03:51दिगंबर विश्वास और विष्णु विश्वास और जब
4:03:55प्लांटर्स इन्हें फोर्स करने के लिए अपने
4:03:57लाठील्स भेजते हैं तो यह उनके ऊपर काउंटर
4:04:00अटैक कर देते हैं
4:04:02बंगाल की एजुकेटेड क्लास भी इस आंदोलन में
4:04:05इंपॉर्टेंट रोल प्ले करती है न्यूज़ पेपर
4:04:07कैंपेन मास मीटिंग्स और पीजेंस के
4:04:10ग्रीवेंस पर मेमोरंडा तैयार करके इनके
4:04:13कैसे को सपोर्ट किया जाता है
4:04:15दीनबंधु मित्र अपने प्ले नील दर्पण के
4:04:18जारी किसने की मिसरेबल कंडीशन को हाईलाइट
4:04:21करते हैं और ये रिवॉल्ट के लिए एक
4:04:23इंपॉर्टेंट सोर्स ऑफ इंस्पिरेशन बन जाता
4:04:25है आंदोलन को तीव्र होता देख ब्रिटिश
4:04:28गवर्नमेंट एक नोटिफिकेशन इशू करती है
4:04:30जिसमें कहा जाता है की रेट अपनी जमीन पर
4:04:33अपनी पसंद की क्रॉप गो करने के लिए फ्री
4:04:36हैं और पुलिस का कम है की उनके इस राइट को
4:04:39प्रोटेस्ट किया जाए अगर प्लांटर्स को लगता
4:04:42है की किसी ने कॉन्ट्रैक्ट को ब्लीच किया
4:04:44है तो वो सिविल कोर्ट में अपील कर सकते
4:04:46हैं इसके अलावा 1860 में इंडिगो कमीशन भी
4:04:50अप्वॉइंट की जाति है और इसकी रिकमेंडेशन
4:04:52को 1860 के एक्ट सिक्स में शामिल किया
4:04:55जाता है इसके बाद इंडिगो प्लांटर्स
4:04:58धीरे-धीरे बंगाल से बिहार और उत्तर प्रदेश
4:05:00की तरफ मूव कर जाते हैं इंडिगो रिवॉल्ट के
4:05:04बाद अब बात करते हैं बंगाल में ही हुए एक
4:05:07और आंदोलन
4:05:111870 और 1880 के दौरान पूर्वी बंगाल के एक
4:05:15बड़े हिस में एग्रेरियन अनरेस्ट देखने को
4:05:18मिलता है इसका मुख्य करण जमींदारा की
4:05:21ऑपरेसिव प्रैक्टिस थी
4:05:23जमींदार्ज अक्सर लीगल लिमिट से ज्यादा
4:05:26रिवेन्यू डिमांड करते थे इसके अलावा 1859
4:05:30के रेंट एक्ट 10 के अनुसार किसने को
4:05:33ऑक्युपेंसी राइट्स भी नहीं लेने देते थे
4:05:35एक्ट के अनुसार अगर लगातार 12 साल तक कोई
4:05:39किसान सिम प्लॉट ऑफ लैंड को कल्टीवेट करता
4:05:41है तो उसे लैंड के ऑक्युपेंसी राइट्स दिए
4:05:44जान थे लेकिन जमींदार जैसा बिल्कुल नहीं
4:05:47जाते थे और इसीलिए वो अक्सर फोर्सफुली
4:05:50किसने को जमीन से लिखल कर देते थे उनकी
4:05:53फसल और कैटल को साइज कर लेते थे और कोर्ट
4:05:56में लिटिगेशन भी फाइल कर देते थे जो काफी
4:05:59लंबा चलते थे और किसान के लिए महंगे साबित
4:06:01होते थे
4:06:02है इस सबसे परेशान होकर पावना जिला के
4:06:05युसूफ शाही परगना के किसान एग्रेरियन लीग
4:06:09की फॉर्मेशन करते हैं
4:06:10लेग रेंट स्ट्राइक ऑर्गेनाइजर करती है
4:06:13यानी की किसान बड़ा हुआ रिवेन्यू देने से
4:06:15माना कर देते हैं और जमींदारा को कोट्स
4:06:18में चैलेंज करते हैं कोर्ट के इसको फाइट
4:06:21करने के किसान फंड जमा करते हैं इनका
4:06:24संघर्ष पूरे भावना और पूर्वी बंगाल के कुछ
4:06:27और डिस्ट्रिक्ट तक फेल जाता है यहां
4:06:30स्ट्रगल का में फॉर्म लीगल रेजिस्टेंस ही
4:06:32राहत है और इसीलिए बहुत कम वायलेंस देखने
4:06:35को मिलती है
4:06:36किसने का संघर्ष वैसे तो 1885 तक चला राहत
4:06:40है लेकिन ज्यादातर केसेस थोड़ा ऑफिशल
4:06:42परसूएसन और थोड़ा जमींदार के डर की वजह
4:06:47को ऑक्युपेंसी राइट्स मिल जाते हैं और
4:06:50बड़ा हुआ रेंट भी नहीं चुकाना पड़ता इसके
4:06:53अलावा गवर्नमेंट जमींदारा के ऑपरेशन को
4:06:56प्रोटेस्ट करने के लिए कानून बनाने का
4:06:58प्रॉमिस भी करती है
4:07:02किया जाता है पबन रिवॉल्ट के दौरान भी
4:07:05बहुत सी इंडियन इंटेलेक्चुअल ने पेजयंस
4:07:08कैसे को सपोर्ट किया था इसमें बंकिम चंद्र
4:07:10चटर्जी आरसी डेट और सुरेंद्रनाथ बनर्जी के
4:07:14नेतृत्व में इंडियन संगठन शामिल थी
4:07:17पूर्वी रीजन के बाद अब चलते हैं वेस्टर्न
4:07:20इंडिया की तरफ डेक्कन राय
4:07:23वेस्टर्न इंडिया के डेक्कन रीजन में
4:07:25ब्रिटिश वादी सिस्टम इंट्रोड्यूस किया था
4:07:28यहां के किसान इस सिस्टम के तहत लगाएं गए
4:07:31हैवी टैक्सेशन से परेशान थे जिसके करण वो
4:07:35मनी लैंडर की दाल में फैंस चुके थे यह मनी
4:07:38लैंडर्स ज्यादातर आउटसाइडर्स थे और
4:07:40मारवाड़ी और गुजराती कम्युनिटी को बिलॉन्ग
4:07:43करते थे
4:07:441864 में अमेरिकन सिविल वार खत्म होने के
4:07:47बाद सिचुएशन और खराब हो जाति है क्योंकि
4:07:50अमेरिका से एक बार फिर कॉटन की सप्लाई
4:07:52होने लगती है और इसलिए कॉटन के दम काफी
4:07:56गिर जाते हैं ऐसे समय में 1867 में
4:07:59गवर्नमेंट लैंड रिवेन्यू को भी 50% तक
4:08:02बड़ा देती है और साथ ही कई साल लगातार
4:08:05यहां के किसान क्रॉप फेलियर का सामना करते
4:08:08हैं इन सब के करण किसान की कंडीशन और
4:08:11ज्यादा खराब होने लगती है
4:08:131874 में मनी लैंडर्स और किसने के बीच
4:08:16टकराव बहुत बाढ़ जाता है और किसान आउटसाइड
4:08:23मूवमेंट शुरू कर देते हैं यह लोग उनकी शॉप
4:08:26से समाज लेना बैंड
4:08:29की जमीन को कल्टीवेट नहीं करता और गांव के
4:08:33बाबर्स वाशमान श मार्क्स भी इन्हें सर्व
4:08:36करने से माना कर देते
4:08:39ही पुणे अहमदनगर सोलापुर और सतारा के गांव
4:08:43तक फेल जाता है और उसके बाद सोशल बॉयकॉट
4:08:47एग्रेरियन राइट्स में ट्रांसफार्मर होने
4:08:49लगता है
4:08:50मनीलेंडर के घर और दुकान पर अटैक शुरू हो
4:08:53जाते हैं किसान नेट बैंड और डीडीएस को
4:08:56अपने कब्जे में लेकर इन्हें पब्लिकली जल
4:08:58देते हैं लेकिन गवर्नमेंट फोर्स का उसे
4:09:02करके मूवमेंट को सरप्राइज करने में सफल
4:09:04रहती है
4:09:11[संगीत]
4:09:12इस आंदोलन के दौरान भी महाराष्ट्र के
4:09:15इंटेलिजेंस आने किसने को सपोर्ट किया था
4:09:19दोस्तों 19 सेंचुरी के कुछ इंपॉर्टेंट
4:09:22प्रेजेंट मूवमेंट को दो हमने डिस्कस कर
4:09:24लिया आई अब इनके फीचर्स को समझ लेते हैं
4:09:28करैक्टेरिस्टिक फीचर्स ऑफ 19 सेंचुरी
4:09:30प्रेजेंट मोमेंट्स
4:09:3319th सेंचुरी के दौरान हुए किसान आंदोलन
4:09:36में पिजेंसी में फोर्स बनकर उभरते हैं यह
4:09:39लोग डायरेक्टली अपनी डिमांड्स के लिए फाइट
4:09:41करते दिखते हैं और इनकी ज्यादातर डिमांड
4:09:44इकोनामिक इश्यूज से संबंधित थी यह आंदोलन
4:09:48किसान की इमीडिएट एनीमीज के अगेंस्ट
4:09:50डायरेक्टेड थे फिर चाहे वो फॉरेन
4:09:53प्लांटर्स हो इंडिजन जमींदारा हो या फिर
4:09:56मनीलेंडर इसके अलावा आंदोलन की
4:09:58ऑब्जेक्टिव्स भी स्पेसिफिक और लिमिटेड ही
4:10:01थे यह सिर्फ कुछ पर्टिकुलर ग्रीवेंस का ही
4:10:04रिड्रेसल चाहते थे इन्होंने डायरेक्ट
4:10:07कॉलोनियलिज्म को टारगेट नहीं किया था और
4:10:11एक्सप्लोइटेशन या सबोर्डिनेशन के सिस्टम
4:10:13को खत्म करना था
4:10:15इन आंदोलन की टेरिटोरियल रिच भी लिमिटेड
4:10:18थी
4:10:19संघर्ष में कोई कंटिन्यूटी या फिर लॉन्ग
4:10:22टर्म ऑर्गेनाइजेशन भी देखने को नहीं मिलता
4:10:26अपने लीगल राइट्स के प्रति स्ट्रांग
4:10:28अवेयरनेस डेवलप करते हैं और इन्हें कोट्स
4:10:31के बाहर और अंदर असार भी करते हैं
4:10:34किसान आंदोलन के फीचर्स को समझना के बाद
4:10:37इनकी कुछ लिमिटेशंस भी जान लेते हैं
4:10:39लिमिटेड
4:10:50या फिर नया सोशल इकोनामिक और पॉलीटिकल
4:10:53प्रोग्राम भी नहीं था यह संघर्ष मिलिटेंट
4:10:57होते हुए भी ओल्ड सोसाइटल ऑर्डर के
4:11:00फ्रेमवर्क में ही हुए थे और उनके पास और
4:11:02टर्निंग सोसाइटी को लेकर किसी भी तरह का
4:11:05कॉन्सेप्ट नहीं था
4:11:06है लेकिन 20th सेंचुरी के प्रेजेंट
4:11:09मूवमेंट्स नेशनल फ्रीडम स्ट्रगल से डिपलाई
4:11:12इन्फ्लुएंस भी थे और इनका इंपैक्ट भी
4:11:14फ्रीडम स्ट्रगल पर देखने को मिलता है तो
4:11:17आई अब इनके बड़े में बात करते हैं
4:11:2020th सेंचुरी प्रेजेंट मूवमेंट्स 20th
4:11:23सेंचुरी के प्रेजेंट मूवमेंट्स में सबसे
4:11:25पहले गांधीजी द्वारा लीड 1917 का चंपारण
4:11:28सत्याग्रह और 1918 का खेड़ा सत्याग्रह आते
4:11:32हैं इन्हें हमने गांधी जी के इनिशियल
4:11:35मूवमेंट के वीडियो में कर किया हुआ है
4:11:37इसके अलावा इस दौरान किसान सभा मूवमेंट भी
4:11:40शुरू होता है आई उसके बड़े में जानते हैं
4:11:49अप में ऑर्गेनाइजर किया जाता है फरवरी
4:11:521918 में गौरी शंकर मिश्रा और इंद्र
4:11:56नारायण द्विवेदी यूनाइटेड प्रोविंस किसान
4:11:58सभा सेट अप करते हैं
4:12:00मदन मोहन मालवीय भी इनके एफर्ट्स को
4:12:03सपोर्ट करते हैं
4:12:10इसके साथ हिंगोली सिंह दुर्गापाल सिंह और
4:12:13बाबा रामचंद्र जैसे प्रॉमिनेंट लीडर्स भी
4:12:16जुड़ने हैं जून 1920 में बाबा रामचंद्र
4:12:20नेहरू जी से यहां के गांव को विजिट करने
4:12:23के लिए कहते हैं
4:12:31फिर अक्टूबर 1920 में अवध किसान सभा की
4:12:34फॉर्मेशन होती है यह किसने से कहते हैं की
4:12:37वो बेदखली लैंड को तिल ना करें और साथ ही
4:12:40बगर यानी की उन पेड़ लेबर ऑफर ना करने का
4:12:44भी सुझाव देते हैं जो लोग इन कंडीशंस को
4:12:47नहीं मानते उनका बॉयकॉट किया जाता है और
4:12:50सभी डिस्प्यूट को पंचायत के द्वारा सॉल्व
4:12:53किया जाता है
4:12:54किसान सभा पहले मास मीटिंग्स और
4:12:58मोबिलाइजेशन के द्वारा ही प्रोटेस्ट करती
4:13:00हैं लेकिन जैनुअरी 1921 में यह पैटर्न
4:13:03चेंज हो जाता है और बाजार घर और अनाज
4:13:07गोदाम को लूटना शुरू कर दिया जाता है
4:13:14एक्टिविटी के मेजर सेंटर रायबरेली फैजाबाद
4:13:17और सुल्तानपुर के जिला थे लेकिन यह आंदोलन
4:13:21जल्दी ही डिक्लिन हो जाता है
4:13:31से लेकिन कुछ समय बाद ही अप में एक और
4:13:33किसान आंदोलन शुरू हो जाता है
4:13:36टीका मूवमेंट
4:13:381921 के और में एक बार फिर अप के नॉर्दर्न
4:13:42डिस्ट्रिक्ट जैसे की हरदोई बहराइच और
4:13:45सीतापुर में प्रेजेंट डिस्कंटेंट दिखने
4:13:48लगता है इसके पीछे कई करण थे जैसे की हाय
4:13:51रेंज जो की रिकॉर्डिंग रेट से 50% ही था
4:13:54रिवेन्यू कलेक्शन के इंचार्ज द्वारा किसने
4:13:57का शोषण और शेर रेंस की प्रैक्टिस
4:14:00इसके अगेंस्ट शुरू होता है एक आया यूनिटी
4:14:04मूवमेंट इसको लीडरशिप देते हैं मदारी पासी
4:14:07और बाकी के लोगास्ट लीडर बहुत से छोटे
4:14:11जमीदार भी इनका साथ देते हैं इसकी
4:14:14मीटिंग्स में किसने को प्रतिज्ञा दिलाई
4:14:16जाति है की वो सिर्फ रिकॉर्ड रिवेन्यू को
4:14:19ही पे करेंगे अपनी जमीन से बेदखल किया जान
4:14:22पर वहां से नहीं जाएंगे फोर्स लेबर से
4:14:26इनकार करेंगे और पंचायत के डिसीजंस का
4:14:29पालनपुर करेंगे
4:14:30आंदोलन काफी तेजी से फैलता है लेकिन
4:14:33अथॉरिटी द्वारा सीवर रिप्रेशन के करण
4:14:35मार्च 1922 तक इस आंदोलन का भी और हो जाता
4:14:39है
4:14:40नॉर्थ के बाद अब चलते हैं सदन रीजन की तरफ
4:14:43जहां किसान आंदोलन नेशनल मूवमेंट के साथ
4:14:46मौज होता है
4:14:50मैपिला रिवॉल्ट
4:14:52मैपिलर्स मालाबार रीजन में रहने वाले
4:14:54मुस्लिम टिनेंट्स थे और यहां ज्यादातर
4:14:57जमींदारा हिंदू
4:14:59में भी जमींदारा के द्वारा किया जा रहे
4:15:02शोषण का विरोध किया
4:15:10और बाकी के शोषणकारी इलीगल डिमांड जाते थे
4:15:141920 में लोकल कांग्रेस बॉडी टैलेंट
4:15:18लैंडलॉर्ड रिलेशनशिप को रेगुलेट करने के
4:15:20लिए गवर्नमेंट से लेजिसलेशन लाने की
4:15:22डिमांड करती है इससे माप्पिलास का भी
4:15:24हौसला बढ़ता है और जल्दी ही इनका आंदोलन
4:15:27उसे समय चल रहे खिलाफत एजीटेशन के साथ
4:15:30मर्ज हो जाता है
4:15:32खिलाफत आंदोलन के नेता जैसे की गांधीजी
4:15:34शोकत अली और मौलाना आजाद मैपिलाज की
4:15:38मीटिंग्स को एड्रेस करते हैं नेशनल लीडर्स
4:15:41के अरेस्ट के बाद लीडरशिप लोकल मैपिला
4:15:43लीडर्स के हाथ में ए जाति है
4:15:45अगस्त 1921 में सिचुएशन खराब होने लगती है
4:15:49क्योंकि इनके एक लीडर अली मसलिया को
4:15:52अरेस्ट कर लिया जाता है जिसके बाद बड़े
4:15:55शुरू हो जाते हैं शुरुआत में तो ब्रिटिश
4:15:58अथॉरिटी के सिंबल्स को टारगेट किया जाता
4:16:00है लेकिन बाद में रिबेलीयन पुरी तरह अपना
4:16:03करैक्टर चेंज कर लेट है
4:16:07शुरू कर देते हैं क्योंकि इन्हें लगता है
4:16:18है और एक एंटी गवर्नमेंट और एंटी
4:16:20लैंडलॉर्ड आंदोलन कम्युनल होने लगता है
4:16:22इसके बाद गवर्नमेंट अपनी पुरी ताकत के साथ
4:16:26इसको सरप्राइज करने में ग जाति है और
4:16:28दिसंबर 1921 तक आंदोलन पुरी तरह खत्म हो
4:16:32जाता है
4:16:33मैपिलाज को इस तरह से प्रेस किया गया की
4:16:36आजादी तक उन्होंने फिर किसी आंदोलन में
4:16:39भाग नहीं लिया
4:16:41आई अब 28 सेंचुरी के दौरान हुए बाकी के
4:16:44प्रेजेंट मूवमेंट्स और उनसे रिलेटेड
4:16:46डेवलपमेंट को ब्रीफ में देखते हैं अगर
4:16:48इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट्स दोस्तों 28th
4:16:52सेंचुरी के प्रेजेंट मूवमेंट में बारडोली
4:16:54सत्याग्रह भी आता है यह 1926 में गुजरात
4:16:58के बारडोली जिला में शुरू हुआ था यहां
4:17:01किसान लैंड रिवेन्यू में की गई 30% की
4:17:04बढ़ोतरी का विरोध कर रहे थे इसे सरदार
4:17:07वल्लभभाई पटेल
4:17:09ने ही उन्हें सरदार का टाइटल दिया था
4:17:13आंदोलन तेज होने पर ब्रिटिश गवर्नमेंट एक
4:17:16कमेटी सेटअप करती है जिसमें रिवेन्यू हाय
4:17:19को ऊंजस्ट पाया जाता है और सिर्फ
4:17:226.03% का ही इंक्रीज किया जाता है
4:17:25है इसके अलावा अप्रैल 1936 में लखनऊ में
4:17:28जो इंडिया किसान सभा फॉर्म की जाति है
4:17:31स्वामी सहजानंद सरस्वती इसके प्रेसिडेंट
4:17:34बनते हैं और ग रंग जनरल सेक्रेटरी किसान
4:17:38मेनिफेस्टो इशू किया जाता है और इंदु लाल
4:17:40याग्निक के अंदर प्रिडिकल भी शुरू किया
4:17:43जाता है इसके अलावा आजादी मिलने से ठीक
4:17:46पहले भी कुछ पेशेंट मूवमेंट्स देखने को
4:17:49मिलते हैं जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी का
4:17:51रोल बहुत ज्यादा राहत है पहले था 1946 में
4:17:55बंगाल में हुआ तेभागा मूवमेंट यहां बंगाल
4:17:58प्रोविंशियल किसान सभा
4:18:07स्टूडेंट गांव जाकर शेर क्रॉपर्स को
4:18:10ऑर्गेनाइजर करते हैं लेकिन जल्दी ही ये
4:18:12आंदोलन कमजोर हो जाता है इसके पीछे कुछ
4:18:14मुख्य करण थे जैसे की मुस्लिम लीग की
4:18:17मिनिस्ट्री द्वारा बार्गधारी विला अनाउंस
4:18:20करना जिसमें रेंट पे कुछ रिलीफ ऑफर की गई
4:18:23थी
4:18:24दूसरा आंदोलन जुलाई 1946 में शुरू हुआ था
4:18:27इसे तेलंगाना मूवमेंट बोला जाता है
4:18:34यह मॉडर्न इंडियन हिस्ट्री का सबसे बड़ा
4:18:36प्रेजेंट गोरिल्ला वार था इसका इफेक्ट
4:18:393000 गांव और लगभग 30 लाख लोगों पर हुआ था
4:18:43यहां कम्युनिस्ट के नेतृत्व में
4:18:46निजाम की रजाकार फोर्स का बहादुर से सामना
4:18:50करते हैं और लगभग 2 साल तक अपना संघर्ष
4:18:53जारी रखते हैं
4:18:551948 में इंडियन सिक्योरिटी फोर्सेस
4:18:57द्वारा हैदराबाद की टेकओवर के बाद ये
4:19:00आंदोलन धीरे-धीरे खत्म हो जाता है
4:19:03कंक्लुजन दोस्तों इस तरह प्रेजेंट
4:19:06मूवमेंट्स के द्वारा इंडिया के किसने ने
4:19:09ब्रिटिश अथॉरिटी को लगातार चैलेंज किया था
4:19:12शुरुआत में भले ही इनके टारगेट्स में
4:19:14सिर्फ इमीडिएट ऑपरेशंस हो लेकिन बाद में
4:19:17यह डायरेक्टली ब्रिटिश कॉलोनियल रूल का
4:19:20विरोध करते दिखते हैं इन्होंने नेशनल
4:19:22मूवमेंट को भी अपनी प्रेजेंट से स्ट्रेंजर
4:19:25किया किसने के पार्टिसिपेशन के बिना नेशनल
4:19:28मूवमेंट कभी सफल नहीं हो सकता था यह बात
4:19:31गांधीजी बहुत अच्छी तरह समझते थे और
4:19:34इसीलिए उन्होंने पैसों को डायरेक्टली
4:19:36नेशनल मूवमेंट से जोड़ने का कम किया
4:19:38प्रेजेंट मूवमेंट्स ने पोस्ट इंडिपेंडेंस
4:19:41एग्रेरियन रिफॉर्म्स का एटमॉस्फेयर भी
4:19:43क्रिएट किया जैसे की आजादी के बाद
4:19:46जमींदारी सिस्टम को अबॉलिश कर दिया जाता
4:19:48है और भी बहुत साड़ी रिफॉर्म्स
4:19:50इंट्रोड्यूस किया जाते हैं जो कहानी ना
4:19:53कहानी आजादी से पहले प्रेजेंट मूवमेंट की
4:19:55डिमांड रहे थे
4:19:57डी रिवॉल्ट 1857 पार्ट वन दोस्तों आज हम
4:20:02बात करने वाले हैं 1857 के रिवॉल्ट की
4:20:05जिसे सिपाही मुटनी क्रीलिन या फर्स्ट वार
4:20:10ऑफ इंडिपेंडेंस जैसे नाम से भी जाना जाता
4:20:12है
4:20:1410th में 1857 को मेरठ से और यह धीरे-धीरे
4:20:18नॉर्थ में पंजाब से लेकर साउथ में नर्मदा
4:20:22तक और ईस्ट में बिहार से लेकर वेस्ट में
4:20:24राजपूताना रीजन तक को कर कर लेट है
4:20:27रिवॉल्ट की डीटेल्स में जान से पहले इसके
4:20:30पीछे के करण समझना जरूरी हो जाता है तो आई
4:20:33पहले उन्हें समझते हैं
4:20:41कोई एक करण नहीं बल्कि बहुत से करण
4:20:44जिम्मेदार थे यह रिपोर्ट नतीजा था ब्रिटिश
4:20:47कॉलोनियल रूल के 100 साल के अत्याचारों जी
4:20:51हां 1757 की बैटल ऑफ प्लासी के बाद इंडिया
4:20:54में ब्रिटिश कॉलोनियल रूल की शुरुआत हुई
4:20:56थी और तब से लेकर 1857 आने तक ब्रिटिश ने
4:21:00बहुत से ऐसे कम किया थे जिसकी वजह से
4:21:03इंडिया के लोगों में उनके खिलाफ आक्रोश
4:21:05पैदा हो रहा था इस आक्रोश कोचिंग गाड़ी
4:21:08मिलती है 1857 में और शुरुआत होती है
4:21:10इंडिया के फर्स्ट वार ऑफ इंडिपेंडेंस की
4:21:14आई पहले आक्रोश के अलग-अलग कर्म को समझते
4:21:17हैं सबसे पहले बात करते हैं पॉलीटिकल
4:21:20ज्ञानी की राजनीति कर्म की
4:21:22पॉलीटिकल कॉसेस दोस्तों ब्रिटिश इंडिया
4:21:27कंपनी इंडिया में अपनी पावर और प्रेस्टीज
4:21:29को बढ़ाने के लिए जो कुछ भी पॉसिबल था कर
4:21:32रही थी इसके लिए चाहे उसे अपने प्रोमाइज
4:21:35को तोड़ना पड़े या फिर क्यूटिस को
4:21:37डिसऑर्डर करना पड़े इसकी वजह इंडियन
4:21:39रुलर्स को उनकी इंटेंशंस पर डाउट होने लगा
4:21:42था और जब ब्रिटिश सब्सिडियरी एलाइंस और
4:21:45फिर डॉक्टरी नवलप्स जैसी पॉलिसी के तहत
4:21:48इंडियन स्टेटस को एनएक्स करना शुरू कर
4:21:50देते हैं तब जैसे पानी सर से ऊपर ही चला
4:21:53जाता है सभी इंडियन रुलर्स के मां में यह
4:21:56डर ए जाता है की अगला नंबर उनका ही हो
4:21:59सकता है यही वजह थी की बहुत से इंडियन
4:22:02रुलर्स 1857 के रिवॉल्वड के समय ब्रिटिश
4:22:05के खिलाफ हथियार उठा लेते हैं अब बात करते
4:22:08हैं
4:22:13इकोनामिक कॉसेस दोस्तों ब्रिटिश ईस्ट
4:22:17इंडिया कंपनी का में मोटिव तो इंडिया में
4:22:19ज्यादा से ज्यादा प्रॉफिट ऑन करना ही था
4:22:21इसके लिए तरीके उन्होंने अलग-अलग इस्तेमाल
4:22:27से इंडिया की ट्रेडिशनल इकोनामी पुरी तरह
4:22:31से डिस्ट्रॉय होने लगती है
4:22:32ऐसी कोई इकोनामिक क्लास नहीं थी जिसे
4:22:36ब्रिटिश रूल में नुकसान नहीं हुआ चाहे फिर
4:22:39वो बैगन सो मर्चेंट हूं आर्टिजंसू या फिर
4:22:42जमीदार ही क्यों ना हो
4:22:44ब्रिटिशर्स ने जो लैंड रिवेन्यू सिस्टम
4:22:46इंडिया में इंट्रोड्यूस किया थे जैसे की
4:22:48परमानेंट सेटलमेंट रियट वादी सिस्टम या
4:22:51महालवाड़ी सिस्टम सभी में रिवेन्यू रेट्स
4:22:54इतने ही रखें गए थे की प्रेजेंस की कंडीशन
4:22:56मिसिबल हो जाति है रिवेन्यू चुकाने के लिए
4:23:00उन्हें कर्ज लेने की जरूर पढ़ने लगती है
4:23:02और इस तरह वो धीरे-धीरे मनी लैंडर्स के
4:23:04दाल में फंसे लगता हैं इसके साथ ही
4:23:07एग्रीकल्चर के बढ़ते कमर्शियल ने भी
4:23:09प्रेजेंस की हालात खराब कर दी थी इसी तरह
4:23:12ट्रेडिशनल कम जमींदारा को भी रिवेन्यू
4:23:14चुकाने में डर होने पर सनसेट क्लोज़ की
4:23:17वजह से कई बार अपनी जमींदारी से हाथ धोना
4:23:19पड़ता था एग्जांपल के तोर पर अवध में
4:23:2221000 ताल्लुकदर्स जो की वहां की जमींदारा
4:23:26को कहा जाता था उनकी स्टेटस को कन्फ्यूज्ड
4:23:28कर लिया गया था इसी तरह इंडियन ट्रेड और
4:23:32मर्केंटाइल क्लास को भी ब्रिटिश पॉलिसीज
4:23:34की वजह से नुकसान हो रहा था ब्रिटिशर्स ने
4:23:37इंडिया के गुड्स पर तो हाईटेक ड्यूटीज
4:23:39इंपोज कर दी थी जबकि इंडिया में ब्रिटिश
4:23:42गुड्स के इंपोर्ट पर बहुत ही लो टैरिफ
4:23:45रखें हुए थे इसकी वजह से इंडिया से कॉटन
4:23:47और सिल्क टैक्सटाइल्स का एक्सपोर्ट पुरी
4:23:50तरह खत्म होने की कागर पर ए गया था
4:23:52आर्टिजंस और हैंडीक्राफ्ट के लोगों को भी
4:23:55अनइंप्लॉयमेंट का सामना करना पद रहा था
4:23:57इंडियन रुलर्स जो इन्हें पैट्रिक देने का
4:24:00कम करते थे उनके स्टेटस को तो ब्रिटिशर्स
4:24:02ने अलेक्स कर लिया था इसके साथ ही इंडियन
4:24:05हैंडीक्राफ्ट्स को डिस्चार्ज करके ब्रिटिश
4:24:07गुड्स को प्रमोट किया जा रहा था जिसके
4:24:10परिणाम स्वरूप इंडियन आर्टिजंस अपा के लिए
4:24:13कोई दूसरा रास्ता खोजना पर मजबूर हो गए थे
4:24:16और वो मिलन भी बहुत मुश्किल हो रहा था
4:24:18क्योंकि मॉडर्न इंडस्ट्रीज का डेवलपर भी
4:24:20इंडिया में नहीं हो रहा था इस तरह से
4:24:23ब्रिटिश की शोषणकारी आर्थिक नेशन के करण
4:24:26इंडिया के लोगों की आर्थिक स्थिति खराब
4:24:29होती जा रही थी और ये एक बहुत बड़ा करण
4:24:32बंटी है 1857 के रिपोर्ट का आई अब बात
4:24:36करते हैं कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव कर्म की
4:24:39एडमिनिस्ट्रेटिव कोर्सेज दोस्तों कंपनी के
4:24:43एडमिनिस्ट्रेशन में बहुत ज्यादा करप्शन
4:24:45फैला हुआ था जिसकी वजह से आम लोग बहुत
4:24:48परेशान थे इसके साथ ही कंपनी का
4:24:51एडमिनिस्ट्रेशन इंडिया के लोगों के लिए
4:24:52एकदम फौरन था कंपनी के साथ किसी भी तरह का
4:24:56कोई रिलेशन लोग महसूस नहीं कर पाते थे साथ
4:25:00ही एडमिनिस्ट्रेशन की भाषा और दूर तरीके
4:25:02भी उनके लिए समझना मुश्किल हो रहा था
4:25:08कोई भी नहीं था इस वजह से भी लोगों में
4:25:11ब्रिटिश रूल के खिलाफ असंतोष की भावना बनी
4:25:14हुई थी अब बात करते हैं कंपनी के खिलाफ
4:25:17पैदा हुए आक्रोश के पीछे के कुछ सोशल
4:25:20रिलिजियस कॉसेस की
4:25:23सोशल रिलिजियस कोर्सेज दोस्तों ब्रिटिशर्स
4:25:27कभी भी इंडियन को अपने बराबर का नहीं
4:25:29समझते थे उनके एटीट्यूड में रेसिजम और
4:25:32सुपीरियर परिसर भारत हुआ था इसकी वजह से
4:25:36एक आक्रोश तो लोगों में था ही इसके साथ ही
4:25:39ब्रिटिशर्स बहुत सी ऐसी सोशल रिलिजियस
4:25:41पॉलिसी फॉलो करते हैं जिसकी वजह से ये
4:25:44आक्रोश और भी ज्यादा बढ़ाने लगता है इसमें
4:25:46सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है क्रिश्चियन
4:25:48मिशनरीज की एक्टिविटी वो अलग-अलग त्रिकोण
4:25:51से इंडिया के लोगों को कन्वर्ट करने की
4:25:53कोशिश कर रहे थे जिसकी वजह से लोग उन्हें
4:25:56एक खतरे की तरह देखने लगे थे इसके साथ ही
4:25:59ब्रिटिशर्स भी ऐसे कुछ कानून बनाते हैं
4:26:01जिससे लोगों को विश्वास होने लगता है की
4:26:04ब्रिटिश उनके रिलिजन को चैलेंज कर रहे हैं
4:26:07इसके एग्जांपल्स हैं मंदिर और मस्जिद की
4:26:10जमीन पर टैक्स लगाने का डिसीजन
4:26:121856 का रिलिजियस डिसेबिलिटीज एक्ट जिसमें
4:26:16कहा गया था की रिलिजन चेंज करने पर भी
4:26:18एन्सेस्ट्राल प्रॉपर्टी में हिस्सा बना
4:26:20रहेगा
4:26:21इसके साथ ही ब्रिटिशर्स के द्वारा किया गए
4:26:24कुछ सोशल रिलिजियस रिफॉर्म्स को भी लोग
4:26:26अपने ट्रेडीशंस में बाहरी दखल की तरह
4:26:28देखते हैं फिर चाहे बात सती प्रथम पर बन
4:26:31की हो विडोरी मैरिज एक्ट पास करने की या
4:26:34फिर वूमेन को एजुकेशन देने की इन सभी
4:26:37रिफॉर्म्स की वजह से भी समाज के एक बड़े
4:26:40वर्ग में ब्रिटिश के खिलाफ आक्रोश की
4:26:42भावना जन्म ले चुकी थी दोस्तों 1857 के
4:26:46रिवॉल्वड की शुरुआत आर्मी के सिपाही के
4:26:48द्वारा हुई थी इसलिए कुछ ऐसे कर्म को भी
4:26:52समझ लेते हैं जिनका संबंध इसके साथ था
4:26:55रीजंस पर बॉयज
4:27:01भी अल में पार्ट तो इंडियन सोसाइटी के ही
4:27:04थे इसीलिए जो भी परेशानी जनरल सोसाइटी में
4:27:07हो रही थी वह सब रीजन टॉयज में आक्रोश
4:27:10पैदा कर ही रहे थे और इसमें भी सबसे
4:27:13ज्यादा जी बात का उन्हें डर था वह थी की
4:27:15ब्रिटिशर्स उनका धर्म नष्ट करना चाहते
4:27:25हैं
4:27:32गली देकर बुलाया करते थे साथ ही इंडियन के
4:27:35लिए आगे बढ़ाने के रास्ते भी नहीं खुला थे
4:27:37वो सूबेदार की पोस्ट से आगे नहीं जा सकते
4:27:40थे यह ब्रिटिशर्स के रेसिजम का एक प्रतीक
4:27:43था
4:27:44सेप्वॉयज के डिसेटिस्फेक्शन का एक रिसेंट
4:27:47करण भी था और वह था ब्रिटिश का एक ऑर्डर
4:27:50जिसमें कहा गया था की सिंह और पंजाब में
4:27:54सर्विस के लिए जान पर सेप्वॉयज को कोई
4:27:56फॉरेन अलाउंस नहीं मिलेगा जैसा की उन्हें
4:27:58अब तक मिलता आया था इसके साथ ही अवध
4:28:02कईनेक्सेशन एक बड़ा करण था क्योंकि
4:28:04ब्रिटिश आर्मी में कम कर रहे बहुत से
4:28:06सैनिक अवध को ही बिलॉन्ग करते थे इसलिए
4:28:09उनके लिए अवध को हैं एक्स किया जाना उनके
4:28:11घर को हैं एक्स करना जैसा था इन सभी रीजंस
4:28:15की वजह से बॉयज के अंदर ब्रिटिश के खिलाफ
4:28:18आक्रोश की आज सुलाने लगी थी हिसाब को
4:28:21विस्फोट में बदलने के लिए अब बस एक
4:28:24चिंगारी की जरूर थी और वो चिंगारी कब और
4:28:27कैसे मिलती है आई जानते हैं इमीडिएट कैसे
4:28:30दोस्तों 1857 रिवॉल्ट के लिए चिंगारी का
4:28:34कम किया था और फील्ड राइफल के इंट्रोडक्शन
4:28:37इसके कार्टेजेस पर ग्रीस पेपर कर हुआ करता
4:28:40था जिसे राइफल में लोड करने से पहले मुंह
4:28:43से काटकर खोलना पड़ता था और यह जो ग्रीस
4:28:46था वो सूअर और गे की चर्बी से बंता था
4:28:48इससे इंडियन से बॉयज चाहे वो हिंदू हो या
4:28:52मुस्लिम बहुत गुस्से में ए जाते हैं
4:28:54उन्हें लगता है की ब्रिटिश गवर्मेंट जान
4:28:57बूझकर ग्रेज्ड कार्टेज के द्वारा उनका
4:28:59धर्म नष्ट करना चाहती है इसका मतलब अब
4:29:02विद्रोह करने का समय ए गया है दोस्तों यह
4:29:05तो बात हुई 1857 के रिवॉल्ट के पीछे के
4:29:08सभी कर्म की आई अब यह देखते हैं की
4:29:10रिपोर्ट आखिर कब कहां और कैसे शुरू हुआ था
4:29:13डी बिगनिंग और कोर्स ऑफ रिपोर्ट दोस्तों
4:29:17जैसा की हमने आपको शुरुआत में ही बताया था
4:29:191857 का रिकॉर्ड 10th में को मेरठ से शुरू
4:29:23हुआ था और उसके बाद नॉर्दर्न और सेंट्रल
4:29:26इंडिया के एक बड़े हिस में फेल गया था
4:29:28लेकिन मेरठ में और ब्रेक से पहले भी
4:29:30विद्रोह के साइंस दिखने ग गए थे जैसे की
4:29:3329 मार्च 1857 को बैरकपुर में यंग सोल्जर
4:29:38मंगल पांडे को फैंसी दे दी क्योंकि
4:29:40उन्होंने ब्रेस्ट कार्टेज का उसे करने से
4:29:43माना कर दिया था और अपने ब्रिटिश ऑफिसर्स
4:29:45पर अटैक कर दिया था इसी तरह के कुछ और भी
4:29:48इंसीडेंट ये इशारा कर रहे थे की सेप्वॉयज
4:29:51में विद्रोह की आज ग चुकी है
4:29:53और फिर मेरठ में आखिरकार विस्फोट हो ही
4:29:56जाता है 24th अप्रैल को थर्ड नेटिव गैलरी
4:29:59के 90 जवान ग्रीस कार्टेजेस को एक्सेप्ट
4:30:03करने से माना कर देते हैं इसलिए नाइंथ में
4:30:06को उनमें से 85 को आर्मी से तत्काल
4:30:09डिस्टेंस करके 10 साल की सजा सुना दी जाति
4:30:12है और जय में बैंड कर दिया जाता है इस
4:30:15घटना से मेरठ में तैनात सभी से बॉयज के
4:30:17दिल में विद्रोह की आज ग जाति है और 10
4:30:20मैं को वह अपने साथी जवानों को जय से बाहर
4:30:23निकालकर अपने ऑफिसर्स की हत्या करके
4:30:25विद्रोह का बिगुल बजाते हैं
4:30:28सूरज ढलना के बाद सभी जवान दिल्ली की तरफ
4:30:30निकाल पढ़ते हैं और जब अगली सुबह यह
4:30:33सिपाही डेली पहुंचने हैं तो वहां की लोकल
4:30:35इंफिनिटी भी इन्हें जॉइन कर लेती है वो भी
4:30:38अपने यूरोपियन ऑफिसर्स को मार के शहर को
4:30:41सीएस कर लेते हैं इसके बाद यह सोल्जर मुगल
4:30:44एंपरर बहादुर शाह जफर को इंडिया का एंपरर
4:30:47मानते हुए उन्हें अपने रिवॉल्ट का लीडर
4:30:50चुन लेते हैं इस एक्ट से यह सब बॉयज
4:30:52सोल्जर की मुटनी को एक रिवॉल्यूशनरी वार
4:30:55में ट्रांसफॉर्म कर देते हैं इसके बाद
4:30:58अलग-अलग जगह पर सेप्वॉयज विद्रोह करने
4:31:00लगता हैं और सभी दिल्ली की तरफ पहुंचने
4:31:03लगता हैं
4:31:06और शायद उनके प्रेशर पर इंडिया के सभी
4:31:10चिप्स और रुलर्स को लेटर लिखकर कहते हैं
4:31:12की ब्रिटिश रिज्यूम के साथ फाइट करने के
4:31:15लिए
4:31:16ऑर्गेनाइज किया जाए
4:31:18नॉर्थ और सेंट्रल इंडिया के डिफरेंट
4:31:20पार्ट्स में सेप्वॉयज के रिकॉर्ड के
4:31:22साथ-साथ सिविल रिवॉल्ट भी शुरू हो जाते
4:31:24हैं सिविलियन पापुलेशन भी हथियार उठा लेती
4:31:27है और ब्रिटिश के खिलाफ जंग में सेपोइस के
4:31:30साथ खड़ी हो जाति है और देखते ही देखते
4:31:32इंडिया के एक बड़े हिस में क्रांति की
4:31:35ज्वाला जैन लगती है
4:31:371857 के इस रिवॉल्ट के स्टोर्स सेंटर्स
4:31:40बनते हैं दिल्ली कानपुर लखनऊ बरेली झांसी
4:31:44और बिहार दिल्ली में नॉमिनल और सिंबॉलिक
4:31:47लीडर बहादुर शाह जफर के पास थी लेकिन रियल
4:31:51कमांड जनरल वक्त खान की लीडरशिप में कम कर
4:31:54रहे सोल्जर के ग्रुप के हाथों में थी
4:31:56कानपुर में विद्रोहों का नेतृत्व कर रहे
4:31:58थे नाना साहिब जो बाजीराव सेकंड के
4:32:01अडॉप्टेड संत थे नाना साहब कानपुर से
4:32:04अंग्रेजों को भाग देते हैं और खुद को
4:32:07पेशवा डिक्लेअर करते हैं नाना साहब का
4:32:10यहां साथ देते हैं उनके सबसे काबिल और
4:32:12लॉयल साथी टाटिया टॉप
4:32:15लखनऊ में बेगम हजरत महल विद्रोह को लीड कर
4:32:17रही थी उन्होंने अपने बेटे बृजेश कबीर को
4:32:21अवध का नवाब डिक्लेअर कर दिया और 1857 के
4:32:24रिवॉल्ट की सबसे फेमस लीडर रानी
4:32:26लक्ष्मीबाई झांसी में अंग्रेजों के खिलाफ
4:32:29जंग कर रही थी बिहार में रिवॉल्ट की के
4:32:32ऑर्गेनाइजर थी जगदीशपुर के जमीदार कुन से
4:32:34इसके साथ ही फैजाबाद के मौलवी अहमदुल्ला
4:32:37भी 1857 के रिवॉल्ट के एक आउटस्टैंडिंग
4:32:41लीडर थे इसके अलावा बरेली के खान बहादुर
4:32:44खान मेरठ के कम सिंह संभालपुर यानी की
4:32:48उड़ीसा के सुरेंद्र शाही मथुरा के देवी
4:32:51सिंह हरियाणा के राव तुलाराम गोंडवाना
4:32:54किंगडम के शंकर शाह और रघुनाथ शाह भी 1857
4:32:58रिवॉल्ट के इंपॉर्टेंट लीडर्स थे
4:33:00इन सभी लीडर्स की लीडरशिप में सेप्वॉयज और
4:33:04आम जनता एक साथ आकर ब्रिटिशर्स के खिलाफ
4:33:071857 की क्रांति की आज हर तरफ फैला देते
4:33:10हैं लेकिन जैसा की आप सब जानते ही होंगे
4:33:13की आखिर में 1857 का अवार्ड असफल राहत है
4:33:171859 का एंड होने तक ब्रिटिश विद्रोह को
4:33:21पुरी तरह से दबाने में सफल होते हैं और
4:33:23फिर से अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश कर लेते
4:33:25हैं लेकिन ऐसे क्या करण थे जिनकी वजह से
4:33:281857 का रिकॉर्ड सफल हो जाता है और कैसे
4:33:32ब्रिटिश इसे सरप्राइज करने में सफल होते
4:33:34हैं इसका जवाब आपको हम अपनी अगली वीडियो
4:33:37यानी की 1857 रिवॉल्ट के पार्ट तू में
4:33:41देंगे इसके साथ ही यह भी बताएंगे की 1857
4:33:45रिवॉल्ट की इंर्पोटेंस क्या है और इसके
4:33:48लॉन्ग टर्म क्या रिजल्ट्स रहते हैं
4:34:01इसे सरप्राइज कर दिया था रिवॉल्ट की
4:34:04लिमिटेशंस क्या थी और इसकी नेचर को लेकर
4:34:07जो डिबेट है उसको भी समझना की कोशिश
4:34:09करेंगे साथ ही रिवॉर्ड की इंपैक्ट्स के
4:34:13बड़े में भी बात करेंगे तो आई शुरू करते
4:34:15हैं
4:34:20दोस्तों
4:34:211857 का रिवॉल्ट इंडिया के एक बड़े भाग
4:34:24में तो फैला था लेकिन फिर भी समाज के सभी
4:34:27लोगों ने इसमें पार्टिसिपेशन नहीं किया था
4:34:30साथी पूरे देश में इसका असर देखने को नहीं
4:34:32मिला था
4:34:34और सेंट्रल इंडिया के रीजन तक ही सीमित र
4:34:37जाता है यह साउथ इंडिया तक नहीं पहुंचता
4:34:39और साथ ही पूर्वी और वेस्टर्न इंडिया के
4:34:42भी ज्यादातर हिस इसमें भाग नहीं लेते इसके
4:34:45साथ ही इंडियन स्टेटस के बहुत से रुलर्स
4:34:47और बड़े जमीदार भी इसमें भाग नहीं लेते
4:34:51इसके विपरीत ग्वालियर के सिंधिया इंदौर के
4:34:54होलकर हैदराबाद के निजाम जोधपुर के राजा
4:34:57भोपाल के नवाब पटियाला नाभा और जींद के
4:35:01रुलर्स कश्मीर के महाराजा नेपाल के रनास
4:35:04और बहुत से ऐसे अन्य रुलर्स ने तो ब्रिटिश
4:35:06को खुला सपोर्ट किया था रिपोर्ट को
4:35:08सरप्राइज करने में सभी रुलर्स चिप्स और
4:35:11जमींदारा का सपोर्ट ना मिलन ही 1857
4:35:13रिवॉर्ड की पहले वीकनेस थी इसके अलावा
4:35:16मॉडर्न एजुकेटेड इंडियन ने भी 1857
4:35:19रिपोर्ट को सपोर्ट नहीं किया था ऐसा इसलिए
4:35:22क्योंकि उन्हें लगता था की विद्रोह करने
4:35:24वाले राजा राजवाड़े तो इंडिया को पीछे की
4:35:27तरफ ही ले जाएंगे और इंडिया को मॉडर्न
4:35:29बनाने का कम ब्रिटिश रूल में ही हो सकता
4:35:31है एजुकेटेड इंडियन को यह काफी बाद में
4:35:34एहसास होता है की अल में ब्रिटिश रूल
4:35:37उन्हें मॉडर्न बनाने का नहीं बल्कि लूटने
4:35:40का कम कर रहा है
4:35:41इसके साथ 1857 के विद्रोहियों के पास
4:35:45मॉडर्न वेपंस और युद्ध के बाकी समाज की भी
4:35:47कमी थी
4:35:48ज्यादातर तो तलवार और भले जैसे असिएंट
4:35:51वेपन से ही फाइट कर रहे थे विद्रोही पोली
4:35:54ऑर्गेनाइज्ड भी थे सेप्वॉयज बहादुर तो थे
4:35:56लेकिन उनमें भी डिसिप्लिन की कमी थी कई
4:35:59बार वो देंगे करने वाले मोब की तरह बिहेव
4:36:02करते थे ना की एक डिसिप्लिन आर्मी के जैसे
4:36:051857 के विद्रोहियों के पास मिलिट्री
4:36:08एक्शन का ना तो कोई आम प्लेन था और ना ही
4:36:11कोई सेंट्रलाइज्ड लीडरशिप देश के अलग-अलग
4:36:14कोनी से उठी अप्रिसिंग्स में एक ऑर्डिनेशन
4:36:16की कमी देखने को मिलती है और दूसरी तरफ
4:36:19ब्रिटिश कंपनी के पास रिसोर्सेस की कोई
4:36:22कमी नहीं थी ब्रिटिश गवर्नमेंट ने बड़ी
4:36:25संख्या में मां मनी और आर्म्स की सप्लाई
4:36:27इंडिया में की और वोट को पुरी ताकत के साथ
4:36:30सरप्राइज कर दिया गया
4:36:32विद्रोहियों को पहले झटका लगता है जब 28
4:36:35सितंबर 1857 को जनरल जॉन निखिल सिंह की
4:36:39नेतृत्व में एक लंबी लड़ाई के बाद ब्रिटिश
4:36:41दिल्ली को कैप्चर कर लेते हैं एंपरर
4:36:44बहादुर शाह को बंदी बना लिया जाता है रॉयल
4:36:47प्रिंस को पड़कर वही मार दिया जाता है
4:36:49मुगल एंपरर के खिलाफ कैसे चला है और उनको
4:36:52रंगून में एक्सेल की सजा सुना दी जाति है
4:36:55रंगून में ही 1862 में उनकी मृत्यु हो
4:36:58जाति है इस तरह मुगल वंश का पुरी तरह खत्म
4:37:02हो जाता है दिल्ली के फल के साथ रिवॉल्ट
4:37:06का फोकल पॉइंट तो डिसएप्ल हो जाता है
4:37:07लेकिन रिवॉल्ट के बाकी लीडर्स स्ट्रगल
4:37:10जारी रखते हैं लेकिन पावरफुल ब्रिटिश के
4:37:13सामने एक-एक करके ये सब भी हर जाते हैं
4:37:16कानपुर में नाना साहब बाहर जाते हैं लेकिन
4:37:19वो सुरेंद्र नहीं करते और 1859 में नेपाल
4:37:23भाग जाते हैं जिसके बाद उनके बड़े में कुछ
4:37:26पता नहीं चला
4:37:28इंडिया के जंगल की तरफ चले जाते हैं और
4:37:31वहां से अप्रैल 1859 तक गोरिल्ला वाॅरफेयर
4:37:34जारी रखते हैं लेकिन तभी उनके जमींदार
4:37:37दोस्त उन्हें धोखा दे देते हैं और सोते
4:37:40समय उन्हें पकड़ लिया जाता है और 15th
4:37:42अप्रैल 1859 को एक हर एक ट्रायल के बाद
4:37:45उन्हें भी मार दिया जाता है
4:37:48झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बहादुर के साथ
4:37:51अंग्रेजन का सामना करती हुई 17th जून 1858
4:37:54को युद्ध भूमि में मार दी गई थी
4:37:571859 तक कुंवर सिंह वक्त खान खान बहादुर
4:38:01खान मौलवी अहमदुल्लाह जैसे लीडर्स भी मार
4:38:03दिए जाते हैं और अवध की बेगम नेपाल में
4:38:06जाकर छुपाने के लिए मजबूर हो जाति हैं इस
4:38:09रिपोर्ट के सिपरेशन में कुछ ब्रिटिश
4:38:11कमांडर्स जो मिलिट्री फेम हासिल करते हैं
4:38:13वह थे जॉन लॉरेंस
4:38:16हैवलॉक नील कैंपबेल और यूरोप
4:38:211859 के और होने तक इंडिया में ब्रिटिश
4:38:24अथॉरिटी फिर से पुरी तरह एस्टेब्लिश हो
4:38:26चुकी थी लेकिन 1857 का रिवॉल्ट बेकार नहीं
4:38:30जाता यह हमारे इतिहास का एक ग्लोरियस
4:38:33लैंडमार्क है
4:38:351857 का रिवॉल्ट ब्रिटिश इंपिरियलिज्म से
4:38:38आजादी के लिए भारत के लोगों का पहले ग्रेट
4:38:41स्ट्रग था आगे आने वाले फ्रीडम स्ट्रगल के
4:38:44लिए 1857 के रिवॉल्ट ने इंस्पिरेशन का कम
4:38:47किया
4:38:58दोस्तों 1857 का रिवॉल्ट फेल होने के
4:39:02बावजूद ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन के लिए एक
4:39:05बहुत बड़ा झटका साबित होता है इसकी वजह से
4:39:08ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन में काफी बदलाव
4:39:10देखने को मिलते हैं आई एक-एक करके उनके
4:39:13बड़े में जानते हैं सबसे बड़ा चेंज जाता
4:39:15है 1858 के गवर्मेंट ऑफ इंडिया एक्ट के
4:39:18थ्रू यह एक्ट इंडिया को गवर्न करने की
4:39:21पावर ईस्ट इंडिया कंपनी से लेकर ब्रिटिश
4:39:24क्राउन को ट्रांसफर कर देता है इससे पहले
4:39:26कंपनी के डायरेक्टर्स और बोर्ड ऑफ कंट्रोल
4:39:29के पास इंडिया की अथॉरिटी थी अब यह पावर
4:39:31मिल जाति है सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पर इंडिया
4:39:34को और उसको एसिस्ट करने के लिए काउंसिल भी
4:39:37बना दी जाति है सेक्रेटरी ऑफ स्टेट
4:39:40ब्रिटिश कैबिनेट के एक मेंबर हुआ करते थे
4:39:42और इसलिए पार्लियामेंट के प्रति उनके
4:39:44रिस्पांसिबिलिटी थी इस तरह का सकते हैं की
4:39:47इंडिया के ऊपर अब अल्टीमेट पावर ब्रिटिश
4:39:50पार्लियामेंट की हो गई थी
4:39:51इंडिया में गवर्नमेंट को पहले की तरह
4:39:54गवर्नर जनरल को ही देखना था गवर्नर जनरल
4:39:57को वॉइस राय यानी की क्राउन का पर्सनल
4:39:59रिप्रेजेंटेटिव का टाइटल भी दे दिया जाता
4:40:01है इसके बाद दूसरा सबसे दृष्टिक चेंज जाता
4:40:05है आर्मी के ऑर्गेनाइजेशन में
4:40:071857 जैसा फिर से कोई रिवॉल्ट ना हो इसके
4:40:11लिए आर्मी को रे ऑर्गेनाइजर किया जाता है
4:40:13सबसे पहले तो आर्मी में यूरोपियन सोल्जर
4:40:16की संख्या को बढ़ाया जाता है बंगाल आर्मी
4:40:19में हर दो इंडियन सोल्जर पर एक यूरोपियन
4:40:21सोल्जर और मद्रास और मुंबई में हर पांच
4:40:23इंडियन सोल्जर पर दो यूरोपियन सोल्जर का
4:40:26प्रोपोर्शन फिक्स किया जाता है
4:40:51इसके लिए ई रिक्रूटमेंट में कास्ट रीजन और
4:40:54रिलिजन के बेसिस पर डिस्क्रिमिनेशन शुरू
4:40:57कर दिया
4:40:59और पठान जिन्होंने 1857 के रिवॉल्ट को
4:41:03सरप्राइज करने में ब्रिटिश की मदद की थी
4:41:05उनको मार्शल रेसेज डिक्लेअर कर दिया गया
4:41:07और बड़ी संख्या में इन्हें आर्मी में लिया
4:41:10जान लगा जबकि 1857 रिवॉल्ट में भाग लेने
4:41:14वाले रीजन जैसे की अवध बंगाल और सेंट्रल
4:41:17इंडिया के सोल्जर को नॉन मार्शल डिक्लेअर
4:41:20कर दिया गया और बड़ी संख्या में आर्मी में
4:41:23इनकी भारती को बैंड कर दिया गया
4:41:25इसके अलावा सोल्जर में नेशनलिस्ट
4:41:27सेंटीमेंट को डेवलप होने से रोकने के लिए
4:41:29कम्युनल कास्ट और रीजनल बेसिस पर रेजीमेंट
4:41:33को फॉर्म किया गया इसके साथ ही प्रिंसली
4:41:37स्टेटस के साथ रिलेशंस में भी एक बड़ा
4:41:39बदलाव देखने को मिलता है
4:41:41एनेक्सेशन की पॉलिसी को छोड़ दिया जाता है
4:41:43इंडियन स्टेटस को अपना और अडॉप्ट करने की
4:41:46परमिशन भी दे दी जाति है ऐसा इसलिए
4:41:48क्योंकि 1857 के रिवॉल्ट के समय बहुत से
4:41:52इंडियन रुलर्स ने ब्रिटिशर्स की हेल्प की
4:41:54थी बिना उनकी हेल्प के 1857 के रिवॉल्ट को
4:41:58सरप्राइज करना मुश्किल हो जाता है इसीलिए
4:42:00इसके बाद से ब्रिटिश प्रिंसली स्टेटस को
4:42:03ब्रेक वाटर्स इन डी स्टॉर्म की तरह उसे
4:42:05करते हैं इस तरह से हम का सकते हैं की
4:42:081857 के रिवॉल्ट की वजह से इंडिया में
4:42:11ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन का चेहरा पुरी तरह
4:42:14से बादल जाता है दोस्तों यह तो हुई 1857
4:42:18के रिवॉल्ट की पुरी कहानी अब बात करते हैं
4:42:20इसके नेचर को लेकर डिबेट की
4:42:23नेचर ऑफ डी 1857 रिवॉल्ट
4:42:27दोस्तों 1857 के रिवॉल्ट के नेचर को लेकर
4:42:30अलग-अलग ओपिनियन दिए जाते हैं
4:42:38कुछ इतिहासकारों ने इसे हिंदू और मुस्लिम
4:42:42की कंस्पायरेसी भी का दिया कोई ऐसे बाबर
4:42:45आजम
4:43:04ब्रिटिश हिस्टोरियन इसे सिरोय मुटनी कहकर
4:43:07इसकी इंर्पोटेंस को कम करना चाहते थे हां
4:43:10यह सच है की 1857 के रिवॉल्ट की शुरुआत से
4:43:13बॉयज नहीं की थी लेकिन जैसा की हम देख
4:43:15चुके हैं की इसमें सेप्वॉयज के अलावा
4:43:17पेजयंस सिविलियन पापुलेशन और इंडियन
4:43:20रुलर्स ने भी भाग लिया था फिर से सिर्फ
4:43:23मुटनी का देना बिल्कुल गलत होगा
4:43:26वाद सावरकर ने 1857 के रिवॉल्ट को फर्स्ट
4:43:30वार ऑफ इंडिपेंडेंस का है इसके अगेंस्ट
4:43:33में यह आगमन दिया जाता है की 1857 से पहले
4:43:36तो बहुत से रिवॉल्ट हुए थे जैसे की कॉल
4:43:39विद्रोह पी का विद्रोह संथाल फिर ये
4:43:43फर्स्ट कैसे हुआ
4:43:45दोस्तों यह बिल्कुल सही है की 1857 से
4:43:48पहले भी ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट बहुत से
4:43:50रिवॉल्ट हुए थे लेकिन यह सभी लोकल रिवॉल्ट
4:43:53थे और बहुत छोटे रीजन तकसीमित थे
4:43:571857 को फर्स्ट इसीलिए बोला जाता है
4:43:59क्योंकि इतने बड़े स्टार पर ये पहले ही
4:44:02रिपोर्ट था इसके बाद डिबेट होती है की
4:44:05क्या यह सच में इंडिपेंडेंस के लिए
4:44:07स्ट्रगल था कुछ लोगों का कहना है की यह तो
4:44:11फैऊदल रिपोर्ट था और सभी लीडर्स अपनी अपनी
4:44:14फैऊदल पावर्स को वापस अपने के लिए स्ट्रगल
4:44:16कर रहे थे ब्रिटिश से इंडिपेंडेंस की बात
4:44:19तो कहानी थी ही नहीं यहां याद रखना वाली
4:44:22बात यह है की शुरुआत में भले ही
4:44:24इंडिपेंडेंस का कोई एम ना हो लेकिन
4:44:26रिवॉर्ड शुरू होने के बाद ब्रिटिश रूल को
4:44:29इंडिया से खत्म करने का
4:44:32बहादुर शाह अपने लेटर में भी लिखने हैं की
4:44:36इंडिया से ब्रिटिश सत्ता को समाप्त करने
4:44:38के लिए सभी इंडियन रुलर्स को एक कनफेडरेसी
4:44:41बनानी होगी
4:44:43इसलिए इतिहासकार सीएनसी ने भी कहा है की
4:44:461857 का रिवॉल्ट शुरू भले ही एक से बाय
4:44:49मुटनी की तरह हुआ था लेकिन खत्म
4:44:58के रिपोर्ट को नेशनल मूवमेंट बोलते हैं
4:45:021857 रिवॉल्ट के नेचर को लेकर भले ही
4:45:05अलग-अलग ओपिनियन हो सकते हैं लेकिन इसमें
4:45:07कोई दो राय नहीं है की यह अंग्रेजी हुकूमत
4:45:10के खिलाफ होने वाला एक यादगार रिवॉल्ट बन
4:45:13गया था
4:45:15कंक्लुजन
4:45:17दोस्तों
4:45:191857 का रिवॉल्ट कोई मामूली विद्रोह नहीं
4:45:22था यह इंडियन हिस्ट्री का एक इंपॉर्टेंट
4:45:24टर्निंग पॉइंट था इसके हीरोज इंडिया के घर
4:45:28घर में याद किया जान लगे और आने वाली
4:45:30पीढ़ी के लिए इंस्पिरेशन बन गए यहां तक
4:45:36मिसल देते हैं झांसी की रानी आज भी वूमेन
4:45:40एंपावरमेंट का प्रतीक मनी जाति हैं
4:45:421857 का यह रिपोर्ट भारतीय इतिहास में
4:45:45हमेशा के लिए अमर रहेगा
4:46:12[संगीत]
4:46:17जी सुपरस्टिशंस और ट्वीट के द्वारा किया
4:46:20जा रहा एक्सप्लोइटेशन भी इनके द्वारा
4:46:23कंडोम किया गया था इन्हें सोशल रिलिजियस
4:46:26रिफॉर्म मूवमेंट्स के नाम से जाना जाता है
4:46:28आज हम समझेंगे की इनकी शुरुआत क्यों होती
4:46:31है ये कौन सी रिफॉर्म्स की बात करते हैं
4:46:34और इनका क्या प्रभाव राहत है साथ ही इनकी
4:46:38कुछ लिमिटेशंस की भी चर्चा करेंगे सबसे
4:46:40पहले ये जानते हैं की 19th सेंचुरी में
4:46:43ऐसी क्या कंडीशंस बंटी हैं की सोशल
4:46:46रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स शुरू होते हैं
4:46:49कॉसेस बिहाइंड सोशल रिलिजियस रिफॉर्म
4:46:51मूवमेंट्स दोस्तों पहले और सबसे बड़ा करण
4:46:55था ब्रिटिश रूल और उसका इंडिया की
4:46:59पॉलीटिकल इकोनामिक सोशल लाइफ पर गहरा
4:47:02प्रभाव ब्रिटिश के साथ ही मॉडर्न वेस्टर्न
4:47:06इतिहास जैसे की एक क्वालिटी लिबर्टी
4:47:09फ्रेटरनिटी और जस्टिस भी इंट्रोड्यूस हुए
4:47:12थे मॉडर्न एजुकेशन इन सभी इतिहास को
4:47:16स्प्रेड करती है और धीरे-धीरे एक एजुकेटेड
4:47:19मिडिल क्लास तैयार हो जाति है जो इंडियन
4:47:22सोसाइटी को
4:47:23मॉडर्नलिटी के लेंस से देखना शुरू कर दी
4:47:26है
4:47:26रिफॉर्म मूवमेंट्स को शुरू करने के पीछे
4:47:29दूसरा करण यूरोपियन ओरिएंटलिस्ट के
4:47:32एफर्ट्स थे सब विलियम जॉन्स
4:47:37विलकिंस मैक्स मुइलर जैसे ओरिएंटलिस्ट्स
4:47:40के वर्ग से इंडिया का ग्लोरियस पेस्ट
4:47:43लाईमलाईट में ए जाता है जो इंडियन को
4:47:46कॉन्फिडेंस देता है और उन्हें रिफॉर्म
4:47:48करने की रेशम भी देता है इसके अलावा एक
4:47:51करण क्रिश्चियन मिशनरीज का प्रभाव भी था
4:47:54यह लोग इंडियन कस्टम और रिलिजन को
4:47:57क्रिटिसाइज करते थे और लोगों को
4:48:00क्रिश्चियनिटी में कन्वर्ट करने की कोशिश
4:48:02कर रहे थे ऐसी स्थिति में इंडियन कॉलेज को
4:48:06लगता है की इनका मुकाबला करने के लिए पहले
4:48:09अपने धर्म और समाज में सुधार करने की जरूर
4:48:11है
4:48:12इन्हीं सब कर्म से सोशल रिलिजियस रिफॉर्म
4:48:16मूवमेंट्स की शुरुआत होती है करण के साथ
4:48:19ही समझना भी जरूरी है की यह मूवमेंट्स
4:48:22कितने प्रकार के होते थे और रिफॉर्म के
4:48:25लिए कौन-कौन से मैथर्ड अडॉप्ट किया जाते
4:48:28हैं टाइप्स और मैथर्ड ऑफ सोशल रिलिजियस
4:48:31रिफॉर्म मूवमेंट्स
4:48:33दोस्तों सामाजिक धार्मिक सुधार आंदोलन को
4:48:36दो कैटिगरीज में डिवाइड किया जाता है
4:49:02जो इंडिया की पेस्ट ग्लोरी में विश्वास
4:49:04करते थे और यह वेस्टर्न इतिहास को अडॉप्ट
4:49:08करने की जगह असिएंट इंडियन ट्रेडीशंस और
4:49:11थॉट्स को रिवाइव करना चाहते थे इसमें आर्य
4:49:14समाज रामकृष्ण मिशन और देवबंद मूवमेंट का
4:49:17एग्जांपल आता है
4:49:18रिफॉर्म मूवमेंट राशनलिज्म और रिलिजियस
4:49:21यूनिवर्सल की आईडियोलॉजी से प्रेरित थे
4:49:24रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करने के लिए
4:49:27अलग-अलग मैथर्ड अडॉप्ट किया जाते हैं जैसे
4:49:30की न्यूज़ पेपर्स और जर्नल्स को पब्लिश
4:49:32करना
4:49:33राजाराम मोहन राय अपना न्यूज़ पेपर संवाद
4:49:37कौमुदी निकलते हैं वही दयानंद सरस्वती
4:49:40सत्यार्थ प्रकाश के जारी अपनी इतिहास
4:49:43फ्लेट हैं
4:49:45दूसरा मेथड था मीटिंग्स बुलाना और
4:49:48गवर्नमेंट पर प्रेशर बेल्ट करना जिसकी
4:49:51हेल्प से यह लोग सती प्रथम बालेश्वर
4:49:55जैसे सोशल लेजिसलेशंस पास करवा पाते हैं
4:49:58इसके अलावा रिफॉर्म मूवमेंट परसूएसन का
4:50:01मेथड बी अडॉप्ट करती हैं इसके तहत लोगों
4:50:04को कन्वेंस करने की कोशिश करते हैं की वो
4:50:06सोशल इविल्स जैसे की सती या पर्दा सिस्टम
4:50:10का सपोर्ट ना करें इसके लिए रीजन के साथ
4:50:13ही स्क्रिप्चर से भी एग्जांपल्स किया जाते
4:50:15हैं सबसे ज्यादा पॉपुलर किया जाता है वह
4:50:20था लाइक माइंडेड पीपल के साथ मिलकर संगठन
4:50:22फॉर्म करना जैसे की ब्रह्म समाज आर्य समाज
4:50:30एसोसिएशंस की चर्चा करते हैं एग्जांपल ऑफ
4:50:34सोशल रिलिजियस रिफॉर्मर एसोसिएशंस ब्रह्म
4:50:37समाज दोस्तों ब्राह्मण समाज की शुरुआत
4:50:411828 में कोलकाता में राजा राममोहन राय ने
4:50:45की थी
4:50:45है इन्हें फादर ऑफ मॉडर्न इंडिया भी कहा
4:50:48जाता है क्योंकि यह पहले ऐसे व्यक्ति थे
4:50:50जो इंडिया में मॉडर्न इतिहास के बेसिस पर
4:50:53सोसाइटी फॉर्म करने की कोशिश करते हैं
4:50:56ब्रह्म समाज आइडल वरशिप पॉलिथीन कास्ट
4:51:00ऑपरेशन और उन नेसेसरी रिचुअल्स के अगेंस्ट
4:51:03फाइट करता है इसके अलावा सती पॉलिगामी
4:51:07पर्दा सिस्टम चाइल्ड मैरिज एट सिटेरा जैसी
4:51:10सोशल इविल्स के खिलाफ भी अपनी आवाज उठाता
4:51:13है इन्होंने वीडियो रे मैरिज और वूमेन की
4:51:16एजुकेशन का भी समर्थन किया राजा राममोहन
4:51:19राय के एफर्ट से ही 1829 में ब्रिटिश
4:51:22गवर्नर जनरल मेंटेंनिंग ने सती प्रथम पर
4:51:26कानून लाकर इसे बन किया था दोस्तों ब्रह्म
4:51:30समाज मेली पूर्वी इंडिया में एक्टिव राहत
4:51:32है अब बात करते हैं ऐसी संगठन की जिसका
4:51:36इफेक्ट वेस्टर्न इंडिया में ज्यादा देखने
4:51:38को मिलता है
4:51:40आर्य समाज दोस्तों आर्य समाज की स्थापना
4:51:441875 में बॉम्बे में हुई थी बाद में इसका
4:51:48हैडक्वाटर्स लाहौर में स्थापित किया गया
4:51:50था इसके फाउंडर स्वामी दयानंद सरस्वती
4:52:06एनिमल सैक्रिफाइस चाइल्ड मैरिज और कास्ट
4:52:10सिस्टम का विरोध किया इसकी फॉलोइंग सबसे
4:52:13ज्यादा नॉर्दर्न और वेस्टर्न इंडिया के
4:52:15एरियाज में अच्छी जाति है
4:52:17दयानंद सरस्वती जी ने अपने विचार सत्यार्थ
4:52:21प्रकाश नाम की किताब में लिखे थे यह
4:52:23इंडिया को एक क्लासलैस और कैशलेस सोसाइटी
4:52:26बनाने का विजन रखते थे साथ ही फ्री और
4:52:30यूनाइटेड इंडिया देखना चाहते थे दोस्तों
4:52:32जैसे की हम पहले बता चुके हैं आर्य समाज
4:52:35रिवाइवलिस्ट कैटिगरी में आने वाला एक
4:52:37संगठन
4:52:40यही दूसरी संगठन की भी बात करते हैं
4:52:43रामकृष्ण मिशन
4:52:45रामकृष्ण मिशन स्वामी विवेकानंद द्वारा
4:52:48शुरू किया गया इसकी स्थापना 1892 में
4:52:52कोलकाता के पास बेलूर नाम की जगह पर हुई
4:52:55थी इसका मकसद विवेकानंद जी के गुरु
4:52:58रामकृष्ण परमहंस जी की टीचिंग्स का प्रचार
4:53:01प्रसार करना था इन्होंने कास्ट सिस्टम और
4:53:04अनटचेबिलिटी का विरोध किया यह सभी
4:53:07रिलिजियस की यूनिवर्सल टीवी पर फॉक्स करते
4:53:09हैं और वेदांत को प्रोपागेट करते हैं
4:53:12स्वामी विवेकानंद दरिद्र नारायण के
4:53:15कॉन्सेप्ट को पॉपुलर करते हैं इसके अनुसार
4:53:17हर गरीब व्यक्ति में ईश्वर है और इसीलिए
4:53:21इनकी सेवा ईश्वर की सेवा के समाज है इसके
4:53:24साथ ही 1893 में शिकागो में ऑर्गेनाइज हुई
4:53:28वर्ल्ड रिलिजियस कॉन्फ्रेंस में भाग लेकर
4:53:30स्वामी जी ने विश्व मंच पर हिंदुइज्म की
4:53:33फिलासफी का प्रचार भी किया
4:53:36दोस्तों यह तो बात हो गई हिंदुइज्म से
4:53:38रिलेटेड रिफॉर्मर एसोसिएशंस की अब कुछ
4:53:41मुस्लिम रिलिजियस रिफॉर्मर एसोसिएशंस की
4:53:43भी चर्चा करते हैं इसमें सबसे पहले बात
4:53:46करते हैं अलीगढ़ मूव मटकी अलीगढ़ मूवमेंट
4:53:49दोस्तों इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के
4:53:53अलीगढ़ जिला में सर सैयद अहमद खान द्वारा
4:53:561860s में की गई थी इसका मकसद मुस्लिम के
4:54:00बीच वेस्टर्न साइंटिफिक एजुकेशन का प्रचार
4:54:02करना था इसी के तहत 1875 में सैयद अहमद
4:54:06खान ने मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की
4:54:10स्थापना की थी जो 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम
4:54:13यूनिवर्सिटी बन जाता है अपने इतिहास को
4:54:16फैलाने के लिए यह तहदिल अखलाक नाम से
4:54:19मैगजीन पब्लिश करते थे इन्होंने अपनी बुक
4:54:21कंट्री
4:54:25आउटलुक को कंडोम किया था और राशनलिज्म और
4:54:29साइंटिफिक नॉलेज के बेसिस पर अपने खुद के
4:54:32व्यूज शेर किया थे इनका एंपहसिस कुरान की
4:54:35स्टडी पर राहत है इन्होंने सूफिज्म को भी
4:54:38कंडोम किया था साथ ही डिलीवरी को भी अनीस
4:54:42इस्लामिक बताया था अलीगढ़ मूवमेंट के बाद
4:54:44अब इसी के पैरेलल में चलने वाले मुस्लिम
4:54:47रिवाइवलिस्ट यानी की देवबंद मूवमेंट की
4:54:50बात करते हैं
4:54:51देवबंद
4:54:53देवबंद मूवमेंट की शुरुआत अप के सहारनपुर
4:54:56जिला में देवबंद नाम की जगह से 1867 में
4:55:00हुई थी इसके फाउंडर मोहम्मद कासिम नाना
4:55:03तवी और राशिद अहमद गैंग ही थे
4:55:07देवबंद एक रिवाइवलिस्ट मूवमेंट था यह एंटी
4:55:11ब्रिटिश मूवमेंट था जिसका एजुकेशनल
4:55:14एफर्ट्स के थ्रू मुस्लिम का अपलिफ्टमेंट
4:55:16करना था इसके ट्विन ऑब्जेक्टिव्स थे पहले
4:55:19मुस्लिम के बीच कुरान और हदीस की पोती
4:55:22जींस का प्रचार प्रसार करना और दूसरा फौरन
4:55:26रुलर्स के अगेंस्ट जिहाद की स्पिरिट को
4:55:28लाइव रखना लेकिन अलीगढ़ मूवमेंट की तरह यह
4:55:32वेस्टर्न एजुकेशन को प्रमोट नहीं करता
4:55:34बल्कि ट्रेडिशनल इस्लामिक टीचिंग्स पर
4:55:37फॉक्स करता है इसके अलावा दोस्तों और भी
4:55:40बहुत सारे संगठन फॉर्म किया गए थे जैसे की
4:55:43प्रार्थना समाज वेद समाज विदुरी मैरिज
4:55:47संगठन
4:55:54दोस्तों आंदोलन के उदाहरण जन के बाद अब
4:55:57इनके प्रभाव को भी समझ लेते हैं इंपैक्ट्स
4:56:00ऑफ रिफॉर्म मूवमेंट्स सोशल रिलिजियस
4:56:03रिफॉर्म मूवमेंट्स का बहुत ही गहरा प्रभाव
4:56:05देखने को मिलता है इनके एफर्ट्स से सती
4:56:09प्रथम विडोरी मैरिज फीमेल इन्फैंटिसाइड
4:56:12जैसे सोशल इविल्स को अबॉलिश करने के
4:56:15एक्ट्स पास होते हैं समाज में रीजन और
4:56:17राशनलिटी का प्रचार होता है साथ ही इनके
4:56:20द्वारा बहुत से स्कूल और कॉलेज खोल गए थे
4:56:23जिससे मॉडर्न एजुकेशन का स्पीड और ज्यादा
4:56:26इंडिया में होता है इसके अलावा रिफॉर्म
4:56:29मूवमेंट्स का सबसे बड़ा प्रभाव नेशनल
4:56:32मूवमेंट पर देखने को मिलता है सोशल
4:56:35रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स के प्रयासों
4:56:37से इंडिया में नेशनलिज्म प्रमोट होता है
4:56:40लोग एक बार फिर से अपने कलर और
4:56:43सिविलाइजेशन पर गर्व करने लगता हैं यह लोग
4:56:46इंडियन कल्चरल ट्रेडीशंस पर हो रहे
4:56:48ब्रिटिश क्रिटिसिजम का मुंह तोड़ जवाब
4:56:51देते हैं जिसकी वजह से इंडियन में
4:56:54कॉन्फिडेंस डेवलप होता है और नेशनलिज्म की
4:56:57फीलिंग और स्ट्रांग होती है
4:56:58दोस्तों यह तो बात हुई इनकी अचीवमेंट्स की
4:57:01लेकिन रिफॉर्म मूवमेंट पुरी तरह सफल नहीं
4:57:05होते खाने का मतलब यह है की इनके प्रभाव
4:57:08में कुछ लिमिटेशंस र जाति हैं
4:57:12लिमिटेशंस ऑफ रिफॉर्म मूवमेंट्स सोशल
4:57:15रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स की सबसे बड़ी
4:57:17इमिटेशन यह थी की इनका सोशल बेस बहुत ही
4:57:21नैरो राहत है मेली यह एजुकेटेड और अर्बन
4:57:24मिडिल क्लासेस को ही अपने साथ जोड़ पाते
4:57:26हैं जबकि और मैसेज और अर्बन पुर इनके
4:57:30प्रभाव से ज्यादातर बाहर ही र जाते हैं
4:57:33इसके अलावा रिफॉर्मर्स की पेस्ट की
4:57:36ग्रेटनेस को अपील करने की टेंडेंसी और
4:57:38स्क्रिप्ट्रल अथॉरिटी पर रैली करना सुडो
4:57:41साइंटिफिक थिंकिंग को भी जन्म देता है साथ
4:57:44ही हिंदू मुस्लिम सिख और पारसी को भी
4:57:48अलग-अलग सेक्शंस में डिवाइड करने का कम
4:57:50करता है
4:57:51बहुत से हिंदू रिफॉर्मर्स असिएंट पीरियड
4:57:54को प्रेस करते हैं और मेडिकल पीरियड को
4:57:57पुरी तरह डिसिडेंस का युग बता देते हैं
4:57:59इससे इनडायरेक्ट मुस्लिम महसूस करते हैं
4:58:03और कम्युनल टेंडेंसी को भी बढ़ावा मिलता
4:58:06है
4:58:06कंक्लुजन दोस्तों हम का सकते हैं की सोशल
4:58:11रिलिजियस रिफॉर्म मूवमेंट्स पुरी तरह समाज
4:58:14को मॉडर्न या राशन तो नहीं बना पाते लेकिन
4:58:17फिर भी ये कवरेज कोशिश जरूर थी उसे समय की
4:58:21लीडर्स की जो अपनी ही समाज के अगेंस्ट
4:58:24खड़े होकर उन्हें आईना दिखाने का साहसी कम
4:58:27करते हैं लिमिटेड ही सही लेकिन इनका
4:58:30इंपैक्ट तो इंडियन सोसाइटी पर हुआ था इसके
4:58:33अलावा नेशनलिज्म को प्रमोट करके इन्होंने
4:58:36आगे होने वाले नेशनल मूवमेंट को भी
4:58:39स्ट्रांग बनाने का कम किया था 19th
4:58:41सेंचुरी के सु विलेज रिफॉर्म मूवमेंट्स की
4:58:44वजह से ही इंडिया मॉडर्न नेशन बने की र पर
4:58:48अग्रसर होता है
4:58:50लो कास्ट मूवमेंट्स दोस्तों 19th सेंचुरी
4:58:55में इंडिया में सोशल रिलिजियस रिफॉर्म्स
4:58:57के लिए बहुत सारे ऑर्गेनाइजेशंस फॉर्म
4:58:59किया गए थे जैसे की ब्रह्म समाज आर्य समाज
4:59:03यंग बंगाल मूवमेंट प्रार्थना
4:59:07लीडर्स अपार कास्ट हिंदू कम्युनिटी को
4:59:10बिलॉन्ग करते थे इन लोगों ने कास्ट
4:59:13डिस्क्रिमिनेशन के अगेंस्ट आवाज जरूर उठाई
4:59:16थी और अनटचेबिलिटी को भी काफी नाम किया था
4:59:19इसके बावजूद कास्ट डिस्क्रिमिनेशन को
4:59:22रोकने या अनटचेबल्स की कंडीशन में सुधार
4:59:25लाने में इन्हें बहुत ज्यादा सफलता नहीं
4:59:27मिली थी साथ ही 19 और 20th सेंचुरी में
4:59:31कुछ ऐसे सरकमस्टेंसस बनते हैं जिनकी वजह
4:59:34से लोअर कास्ट में क्लास कॉन्शसनेस डेवलप
4:59:37होने लगती है इसके बाद यह लोग खुद कास्ट
4:59:40क्वालिटी के लिए संघर्ष शुरू करते हैं
4:59:42ब्रिटिश की डिवाइडेड रूल की पॉलिसी
4:59:45वेस्टर्न एजुकेशन सिस्टम की ग्रोथ आम
4:59:48इंडियन पैनल कोड कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर
4:59:51का इंट्रोडक्शन रेलवे नेटवर्क का
4:59:54एक्सटेंशन मॉडर्न पॉलीटिकल थॉट की
4:59:56पापुलैरिटी जो एक क्वालिटी और सोशल
4:59:58ईगलिटेरिएनिज्म पर बेस्ड था कुछ ऐसे करण
5:00:01थे जिनकी वजह से कास्ट सिस्टम को डिफेंड
5:00:05करना मुश्किल होता जा रहा था ऐसी सिचुएशन
5:00:08में लोअर कास्ट की कुछ लीडर्स सामने आते
5:00:11हैं और खुद ही मूवमेंट की शुरुआत करते हैं
5:00:14इनके बड़े में बात करने से पहले यह समझना
5:00:17जरूरी है की आखिर लोअर कास्ट पीपल को
5:00:20आंदोलन करने की जरूर भी क्यों पड़ती है
5:00:23कॉसेस ऑफ लोअर जाति मूवमेंट्स
5:00:26दोस्तों लोअर कास्ट से यहां हमारा मतलब
5:00:29उनका से है जिन्हें अनटचेबल्स कहा जाता था
5:00:33इन्हें वर्ण सिस्टम से बाहर रखा जाता था
5:00:35इसमें ज्यादातर मीनल जॉब्स करने वाले लोग
5:00:39जैसे लेदर वर्कर्स गार्डनर्स स्वीपर आते
5:00:43थे
5:00:45इंडियन सोसाइटी में इन लोगों के साथ बहुत
5:00:48ही इन ह्यूमन व्यवहार किया जाता था अपार
5:00:51कास्ट लोगों का मानना था की इनके स्पर्श
5:00:54से ही इंसान पोल्यूटेड हो सकता है इसलिए
5:00:57इन्हें ना तो मैं सरिता कम्युनिटी के साथ
5:00:59रहने दिया जाता था और ना ही यह लोग में
5:01:02सड़क पब्लिक वेल्स टेंपल्स आदि का उसे कर
5:01:05सकते थे
5:01:07है इसके अलावा इन्हें किसी भी तरह के
5:01:09राइट्स भी नहीं दिए जाते थे इसके ऊपर से
5:01:12अपार कास्ट के लोग इनका शोषण करते थे
5:01:15इन्हें बहुत ही अपमानजनक शब्दों से बुलाया
5:01:18जाता था इनके साथ कोई भी अच्छे से बात
5:01:21करने के लिए तैयार नहीं होता था इनके साथ
5:01:24खाना या पीना तो बहुत दूर की बात थी इनका
5:01:27दिखाना भी अशुभ माना जाता था इस तरह लोअर
5:01:31कास्ट के लोग अपने ही देश और समाज में
5:01:33सेकेंडरी सिटीजंस की तरह जीते थे इनकी
5:01:36बस्तियां गांव से बाहर होती थी लेकिन
5:01:39ब्रिटिश रूल के साथ जब मॉडर्न एजुकेशन भी
5:01:42इंडिया में आई है तो सिचुएशन बदलना शुरू
5:01:44करती है शुरुआत में क्रिश्चियन मिशनरीज
5:01:48इन्हें कन्वर्ट करने के लालच में एजुकेशन
5:01:50देना शुरू करते हैं इसके बाद ब्रिटिश
5:01:53गवर्नमेंट भी इन स्कॉलरशिप देने लगती है
5:01:56इसके पीछे उनका मकसद जरूर डिविडेंड रूप था
5:01:59लेकिन इससे अनटचेबल्स कम्युनिटी को फायदा
5:02:02जरूर होता है
5:02:04है इसके अलावा मॉडर्न थॉट्स जैसे लिबर्टी
5:02:06एक क्वालिटी और फ्रेटरनिटी पर जब इंडिया
5:02:09में बात होना शुरू होती है तो बहुत से
5:02:12सोशल रिफॉर्मर्स कास्ट सिस्टम के खिलाफ भी
5:02:14बोलना शुरू करते हैं इससे लोअर कास्ट के
5:02:17लोगों में धीरे-धीरे अवकलन आना शुरू हो
5:02:20जाति है इतना सब होने के बाद भी जब कास्ट
5:02:24डिस्क्रिमिनेशन खत्म नहीं होता तब लोअर
5:02:26कास्ट की कुछ लीडर्स इसे ओपनली चैलेंज
5:02:29करने का साहस दिखाई हैं आई अब ऐसे ही कुछ
5:02:33लीडर्स और उनके मूवमेंट्स के बड़े में
5:02:35जानते हैं
5:02:36ज्योतिबा फूल और सत्यशोधक समाज दोस्तों
5:02:41सबसे पहले लोअर कास्ट मूवमेंट शुरू करने
5:02:43का श्री महाराष्ट्र के ज्योतिबा फूल जी को
5:02:47जाता है इनका जन्म माली कास्ट में हुआ था
5:02:50फ्यूचर कास्ट के लिए भी यह इंस्पिरेशन का
5:02:54कम करते हैं
5:02:58शोधन समाज की स्थापना करते हैं इस
5:03:01ऑर्गेनाइजेशन
5:03:04के लिए सोशल जस्टिस सीकर करना था इन्होंने
5:03:08लोअर कास्ट और वूमेन के लिए बहुत से स्कूल
5:03:11और ऑर्फनेजेस भी ओपन किया थे
5:03:13ज्योतिबा फूल को 1876 में पूनम म्युनिसिपल
5:03:18कमेटी का मेंबर भी इलैक्त किया गया था यह
5:03:21कांग्रेस को भी क्रिटिसाइज करते हैं
5:03:22क्योंकि इनका मानना था की कांग्रेस पुरी
5:03:25तरह नेशनल नहीं बन शक्ति जब तक वो लोअर और
5:03:28बैकवर्ड काश के वेलफेयर में अपना इंटरेस्ट
5:03:31ना शो करें 188 में ज्योतिबा फूल जी को
5:03:35महात्मा की उपाधि से सम्मानित किया गया था
5:03:38फूल जी गुलामगिरी इशारा लाइफ ऑफ शिवाजी
5:03:42जैसी बुक्स की ऑथर थे गुलामगिरी को मराठी
5:03:46में लिखा गया था और यह कास्ट सिस्टम को
5:03:48क्रिटिसाइज करने वाली सबसे पहले बुक्स में
5:03:51से एक मनी जाति है इसे डायलॉग के फॉर्म
5:03:54में लिखा गया था जो ज्योतिबाजी और उनके
5:03:57करैक्टर धोंडीबा के बीच में चला है
5:04:00बुक में बेसिकली कास्टीज्म की थ्योरी को
5:04:03चैलेंज किया गया है ज्योतिबा फूल और उनके
5:04:06मूवमेंट ने अंबेडकर को भी काफी इन्फ्लुएंस
5:04:09किया था महाराष्ट्र के बाद अब बात करते
5:04:12हैं साउथ इंडिया की जहां लोअर जाति
5:04:14मूवमेंट्स की एक स्ट्रांग हिस्ट्री रही है
5:04:17यहां श्री नारायण गुरु और एव रामास्वामी
5:04:20नायकर जैसे लीडर्स ने लोअर कास्ट के
5:04:23एमांसिपेशन के लिए कम किया
5:04:25श्री नारायण धर्म परिपालन योगम संडपी
5:04:29मूवमेंट दोस्तों श्री नारायण गुरु केरला
5:04:33की अनटचेबल्स कम्युनिटी एडवांस या एडवांस
5:04:36को बिलॉन्ग करते थे इन्होंने
5:04:3919023 में श्री नारायण धर्म परिपालन योगम
5:04:43की स्थापना की थी और इसके तहत टेंपल
5:04:46एंट्री मूवमेंट लॉन्च किया गए थे उसे समय
5:04:49लो और कास्ट स्पेशली अनटचेबल्स जैसे की
5:04:52एडवांस को टेंपल में एंट्री का अधिकार
5:04:55नहीं दिया जाता था
5:04:57है इसके अगेंस्ट ही इन्होंने आंदोलन किया
5:05:00श्री नारायण गुरु जी का मानना था की
5:05:03अलग-अलग कास्ट में डिफरेंस सिर्फ
5:05:05सुपरफिशियल है जैसे एक ही ट्री की सभी
5:05:08लीव्स का जूस एक जैसा ही होता है वैसे ही
5:05:11अलग-अलग कास्ट को बिलॉन्ग करने वाले भी एक
5:05:14ही ईश्वर की संतान है और इसीलिए एक समाज
5:05:17ही है इसी पर उन्होंने नारा दिया था वन
5:05:20रिलिजन वन कास्ट और वन गॉड पर मैनकाइंड
5:05:24नारायण गुरु और उनके साथियों ने एयरवेज की
5:05:27अपलिफ्टमेंट के लिए 2 पॉइंट प्रोग्राम
5:05:30लॉन्च किया था इसमें पहले पॉइंट यह था की
5:05:33यह अपनी कास्ट से नीचे की कास्ट के प्रति
5:05:35अनटचेबिलिटी की प्रैक्टिस को छोड़ देंगे
5:05:38और दूसरे पॉइंट के तहत नारायण गुरु बहुत
5:05:42से टेंपल्स बनाते हैं जो सभी कास्ट के लिए
5:05:45ओपन रखें जाते हैं इसके साथ ही वह मैरिज
5:05:48वरशिप और फ्यूनरल से रिलेटेड विजुअल्स को
5:05:51भी सिंपल बनाते हैं नारायण गुरु अनटचेबल्स
5:05:54ग्रुप की ट्रांसपोर्टेशन में काफी हद तक
5:05:57दूर रहते हैं अब बात करते हैं साउथ इंडिया
5:06:00के ही एक दूसरे कास्ट मूवमेंट की जस्टिस
5:06:04पार्टी दोस्तों 28 नवंबर 1916 को मद्रास
5:06:09के लीडिंग नॉन ब्राह्मण सिटीजंस साउथ
5:06:12इंडियन लिबरल फेडरेशन की स्थापना करते हैं
5:06:14इसमें डॉक्टर टीम नायर श्री पीपीटी थे
5:06:18अग्रज चेतियार और बाढ़गल के राजा शामिल थे
5:06:21इस ऑर्गेनाइजेशन को जस्टिस पार्टी के नाम
5:06:24से भी जाना जाता है यह लोग नॉन ब्राह्मण
5:06:27मेनिफेस्टो नाम से एक जॉइंट डिक्लेरेशन
5:06:30इशू करते हैं जिसमें गवर्नमेंट जॉब्स में
5:06:33नॉन ब्राह्मण के लिए रिजर्वेशन की डिमांड
5:06:36राखी जाति है
5:06:371920 में जब मद्रास लेजिसलेटिव काउंसिल के
5:06:40इलेक्शंस होते हैं तब इनकी पार्टी पावर
5:06:42में आई है आगे जाकर जस्टिस पार्टी
5:06:45रामास्वामी नायकर की लीडरशिप में कम करने
5:06:49लगती है और वो इसे एक नई दिशा दिखाई हैं
5:06:53आई वे रामास्वामी नायकर और सेल्फ
5:06:56रिस्पेक्ट मूवमेंट दोस्तों एंटी ब्राह्मण
5:06:59मूवमेंट में एक बड़ा नाम आता है सेल्फ
5:07:02रिस्पेक्ट मूवमेंट का इसे एव रामास्वामी
5:07:06नायकर ने शुरू किया था जिन्हें बेरिया
5:07:08यानी की ग्रेट सोल के नाम से जाना जाता है
5:07:11नायकर पहले कांग्रेस के मेंबर हुआ करते थे
5:07:14इन्होंने नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में भी
5:07:17पार्टिसिपेट किया था लेकिन सोशल जस्टिस और
5:07:20नॉन ब्राह्मण के रिप्रेजेंटेशन के इशू पर
5:07:23कांग्रेस के साथ इनका मतभेद हो जाता है और
5:07:26यह कांग्रेस छोड़कर 1925 में सेल्फ
5:07:29रिस्पेक्ट मूवमेंट लॉन्च करते हैं इस
5:07:32मूवमेंट
5:07:35पैदा करना था इन्होंने अपना जर्नल कुड़ी
5:07:39अरसू भी निकाला था जर्नल और मूवमेंट के
5:07:42द्वारा यह बिना ब्राह्मण प्रीस्ट के
5:07:44वेडिंग करना जबरदस्ती टेंपल में एंट्री
5:07:47करना और मनुस्मृति को जलन जैसी एक्टिविटीज
5:07:50को प्रमोट करते हैं इन फैक्ट
5:07:53साउथ इंडिया स्पेशली तमिलनाडु के सभी नॉन
5:07:56ब्राह्मण के लिए एक अंब्रेला मूवमेंट
5:07:58प्रोवाइड करने की कोशिश करते हैं
5:08:001937 के बाद जस्टिस पार्टी की लीडरशिप
5:08:04इनके हाथों में ए जाति है और इन्हें लगता
5:08:06है की इलेक्टरल पॉलिटिक्स छोड़कर पार्टी
5:08:09को नॉन ब्राह्मण मूवमेंट से एक
5:08:11रिफॉर्मेस्थ मूवमेंट में चेंज करने की
5:08:13जरूर है इसी सोच के साथ
5:08:151944 में सीलम कॉन्फ्रेंस में पार्टी का
5:08:19नाम बदलकर द्रविड़ और गड़गम कर दिया जाता
5:08:21है और फिर ये रिफॉर्म्स की र पर चल देते
5:08:24हैं हालांकि सितंबर 1949 में यह पार्टी
5:08:27स्प्लिट हो जाति है और अन्नादुरई की
5:08:30लीडरशिप में द्रव्यमंत्र कार्यक्रम यानी
5:08:32डीएमके की फॉर्मेशन होती है जो एक बार फिर
5:08:35से इलेक्टरल पॉलिटिक्स जॉइन करती है और
5:08:381967 में तमिलनाडु में पहले बार दम के
5:08:42गवर्नमेंट बंटी है और अन्नादुरई कम
5:08:45इलेक्ट्रिक
5:08:47हिंदुइज्म की भी कड़ी आलोचना करते हैं और
5:08:51हिंदू रिलिजन को ब्रा सी कंट्रोल का एक
5:08:54इंस्ट्रूमेंट कहते हैं वो मनु के लॉस को
5:08:57इन ह्यूमन बताते हैं और पुराना इसको परी
5:09:00टेल्स उन्होंने हिंदुइज्म का उपहास करते
5:09:03हुए कहा था की कुछ चीज ऐसी हैं जिन्हें
5:09:06साधारण नहीं जा सकता सिर्फ खत्म किया जा
5:09:09सकता है और ब्रा मैं निकाल हिंदुइज्म
5:09:11उन्हें में से एक है
5:09:13नायकर ने रिलिजन को एक सुपरस्टिशन बताया
5:09:16और द्रविडियन पर हिंदी इंपोज किया जान का
5:09:20भी विरोध किया वो होटल पर लगे हुए कास्ट
5:09:23के नाम वाले बोर्ड्स को डिस्ट्रॉय कर देते
5:09:25थे ब्राह्मण के होली थ्रेड को कैट देते थे
5:09:28डेट्स को चप्पल से मारते थे और मूर्तियां
5:09:31को भी तोड़ देते थे
5:09:33पेरियार की लिगसी आज भी द्रविडियन मूवमेंट
5:09:36के लिए इंस्पिरेशन का सोर्स है दोस्तों
5:09:39लोअर जाति मूवमेंट की बात दो बी आर
5:09:42अंबेडकर के बिना पुरी नहीं हो शक्ति तो आई
5:09:45उनके ग्रेट कंट्रीब्यूशन के बड़े में
5:09:47जानते हैं दो बी आर अंबेडकर और डिप्रेस्ड
5:09:51क्लासेस मूवमेंट
5:09:52अंबेडकर जी का जन्म 1891 में महाराष्ट्र
5:09:56के मेहर कास्ट में हुआ था बचपन से ही
5:09:59उन्हें कास्ट डिस्क्रिमिनेशन का सामना
5:10:01करना पड़ा था और आगे चलकर वह इसके अगेंस्ट
5:10:04बोलने वाले सबसे बड़े लीडर बनते हैं
5:10:07उन्होंने मुंबई के अल्फेंस्टीन कॉलेज से
5:10:10ग्रेजुएशन कंप्लीट की और अमेरिका की
5:10:12कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अपनी मां और फटी
5:10:16की डिग्री हासिल की जुलाई 1924 में
5:10:19अंबेडकर जी मुंबई में बहिष्कृत हितकारिणी
5:10:23सभा की स्थापना करते हैं इसका अनटचेबल्स
5:10:27की मोरल और मटेरियल प्रोग्रेस करना होता
5:10:29है वो एजीटेशन कभी रास्ता बनाते हैं और
5:10:32दिसंबर 197 में अनटचेबल्स के मंदिर में
5:10:36घुसने और पब्लिक वेल्स में से पानी लेने
5:10:38के राइट्स के लिए सत्याग्रह लॉन्च करते
5:10:40हैं इसे महाद सत्याग्रह के नाम से जाना
5:10:43जाता है
5:10:45आगे बढ़ते हुए 1930 में अंबेडकर जी नेशनल
5:10:49पॉलिटिक्स में इंटर करते हैं और अनटचेबल्स
5:10:52के लिए सेपरेट इलेक्टोरेट्स की डिमांड
5:10:54करते हैं वो ब्रिटिशर्स द्वारा
5:10:56ऑर्गेनाइज्ड तीनों राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस
5:10:58में पार्टिसिपेट करते हैं 1932 में
5:11:01ब्रिटिश पीएम द्वारा एनाउंसर कम्युनल
5:11:04अवार्ड में अंबेडकर जी की सेपरेट
5:11:06इलेक्टरेट की डिमांड एक्सेप्ट कर ली जाति
5:11:09है लेकिन गांधीजी द्वारा इसका विरोध करने
5:11:11और भूख हड़ताल शुरू करने पर अंबेडकर जी
5:11:15कंप्रोमाइज करने के लिए तैयार होते हैं और
5:11:17उनके और गांधी जी के बीच पूना पेस्ट साइन
5:11:20होता है जिसके अकॉर्डिंग सेपरेट इलेक्टरेट
5:11:23की डिमांड वापस ले ली जाति है और उसकी जगह
5:11:26जनरल कांस्टीट्यूएंसी में शेड्यूल कास्ट
5:11:30को रिजर्वेशन दिया जाता है
5:11:32अप्रैल 1942 में जो इंडिया पार्टी के रूप
5:11:35में अंबेडकर जी शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन
5:11:38फॉर्म करते हैं कांग्रेस पार्टी द्वारा
5:11:41उन्हें कांस्टीट्यूएंट असेंबली का मेंबर
5:11:43बनाया जाता है और फिर हमारे
5:11:45कॉन्स्टिट्यूशन की ड्राफ्टिंग कमेटी का
5:11:47हेड बनकर अंबेडकर जी अपना अनमोल योगदान
5:11:51देते हैं उनके प्रयासों से इंडिया को ऐसा
5:11:54कॉन्स्टिट्यूशन मिलता है जिसमें
5:11:56अनटचेबिलिटी को अबॉलिश कर दिया जाता है और
5:11:59जो फंडामेंटल राइट्स और एक क्वालिटी की
5:12:01गारंटी देता है
5:12:03इंडिपेंडेंस के बाद वो गवर्नमेंट में डॉ
5:12:06मेंबर की तरह कम करते हैं और हिंदू कोड
5:12:09बिल लेकर आते हैं हालांकि बिल्कुल लेकर जब
5:12:12असेंबली में विरोध होता है तो पीएम नेहरू
5:12:14इसे वापस ले लेते हैं इस बात से नाराज
5:12:17होकर अंबेडकर जी कैबिनेट से रिजाइन कर
5:12:19देते हैं हालांकि बाद में नेहरू अलग-अलग
5:12:22पार्ट्स में हिंदू कोड बिल पास करवा लेते
5:12:25हैं
5:12:261950 में अंबेडकर जी अपने फॉलोअर्स के साथ
5:12:29बुद्धिस्म अडॉप्ट कर लेते हैं यह उनका
5:12:32तरीका था हिंदू कास्ट सिस्टम को अपोज करने
5:12:35का उनके अनुसार क्योंकि हिंदू रिलिजन और
5:12:39उसका कास्ट सिस्टम अनटचेबल्स को इक्वल
5:12:41राइट्स देने के लिए तैयार नहीं है इसलिए
5:12:44अनटचेबल्स के पास हिंदुइज्म को छोड़ने के
5:12:46अलावा और कोई ऑप्शन नहीं राहत है दोस्तों
5:12:50अंबेडकर जी आज भी लोअर कास्ट पीपल के लिए
5:12:53इंस्पिरेशन का सोर्स हैं उनके विचार और
5:12:56आईडियोलॉजी आज भी देश के युवाओं को
5:12:59प्रेरणा देती हैं
5:13:00कंक्लुजन इस तरह कास्ट डिस्क्रिमिनेशन के
5:13:05अगेंस्ट लो और कास्ट पीपल ने अलग-अलग
5:13:07आंदोलन की अपने साथ हो रही इन ह्यूमन
5:13:10बिहेवियर को चैलेंज करने का इन्होंने साहस
5:13:12दिखाए इन्हीं के प्रयासों का नतीजा था की
5:13:16लो और कास्ट पीपल अपने अधिकारों की प्रति
5:13:18सजग हुए हालांकि निरसा करने वाली बात यह
5:13:22है की इतने प्रयासों के बाद भी कास्ट
5:13:25डिस्क्रिमिनेशन
5:13:26जैसे इविल से देश आजाद नहीं हो सका है आज
5:13:30भी अनटचेबल्स के अगेंस्ट किया जान वाले
5:13:32क्रीमिया अक्सर न्यूज़ पेपर की हैडलाइंस
5:13:34बनते रहते हैं यकीनन ऐसी हैडलाइंस को
5:13:37देखकर ज्योतिबा फूल पेरियार या अंबेडकर
5:13:41जैसे ग्रेट लीडर्स खुश नहीं होते
5:13:44हमें जरूर है हमें जरूर है इन ग्रेट
5:13:47लीडर्स के विजन को पूरा करने की एक
5:13:50कास्टलेस इक्वल सोसाइटी फॉर्म करने की ये
5:13:53किसी एक लीडर से संभव नहीं होगा बल्कि सभी
5:13:56देशवासियों को इसमें सतना होगा
5:13:59लॉर्ड लियोन और लॉर्ड रिपन
5:14:03दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं दो ऐसे
5:14:05ब्रिटिश वाइस-रॉयस की जिन्हें एक दूसरे का
5:14:08अपोजिट भी कहा जा सकता है एक तरफ थे लॉर्ड
5:14:11लिटिल जिन्हें याद किया जाता है उनकी
5:14:14रिप्रेसिव पॉलिसीज के लिए और दूसरी तरफ
5:14:17लाउडरपन जिन्हें उनकी लिबरल पॉलिसीज के
5:14:21लिए जाना जाता है आई शुरू करते हैं लॉर्ड
5:14:24लिटन से
5:14:27लोड लेटर 1876 तू 1880
5:14:37का चार्ज लिया था वह प्रोफेशन से डिप्लोमा
5:14:41थे और अलग-अलग कैपेसिटीज में ब्रिटिश
5:14:44फॉरेन ऑफिस को सर्व कर चुके थे इसके साथ
5:14:46ही वो एक रिपीटेड
5:14:52के नाम से जान जाते थे
5:14:561876 से पहले तक उन्हें एडमिनिस्ट्रेशन का
5:14:59कोई एक्सपीरियंस नहीं था और ना ही वह
5:15:02इंडियन अफेयर्स की जानकारी थे तो इंडिया
5:15:04का वायसराय बने के बाद उन्होंने क्या-क्या
5:15:07कम किया आई जानते हैं
5:15:15सबसे पहले जानते हैं
5:15:17187678 के फैमिन में लॉर्ड लियोन के रोल
5:15:19को
5:15:21डी फैमिन का
5:15:23187678 दोस्तों
5:15:261876 से 78 के बीच इंडिया फैमिन का सामना
5:15:30करना पड़ता है इसका सबसे ज्यादा असर दिखता
5:15:33है मद्रास मुंबई मैसूर हैदराबाद और
5:15:36सेंट्रल इंडिया और पंजाब के कुछ पार्ट्स
5:15:38में एक एस्टीमेट के अनुसार इस फेमस से एक
5:15:42साल के ही अंदर करीब 5 मिलियन लोगों की
5:15:45मृत्यु हो गई थी
5:15:49प्रेसीडेटशिप में कमीशन पॉइंट करते हैं
5:15:54अपनी रिकमेंडेशन देती है जैसे की सभी
5:15:57प्रोविंस में फंड बनाया जाए
5:16:15नेक्स्ट बात करते हैं रॉयल टाइटल ट्रैक
5:16:171876 की और 1877 के दिल्ली दरबार की
5:16:23डी रॉयल टाइटल ट्रैक 1876 और दिल्ली दरबार
5:16:27ऑफ 1877
5:16:29ब्रिटिश पार्लियामेंट 1876 में रॉयल
5:16:32टाइटल्स एक्ट पास करती है जिसके अनुसार
5:16:34इंग्लैंड की क्वीन विक्टोरिया को इंडिया
5:16:37की इंप्रेस होने का टाइटल मिलता है इसे
5:16:40कैसे रे हिंद भीगा जाता था लॉर्ड लियोन
5:16:43इंडिया में इसे सेलिब्रेट करने के लिए
5:16:451877 में डेली दरबार ऑर्गेनाइजर करते हैं
5:16:48जिसमें फैमिली क्वीन विक्टोरिया को इंडिया
5:16:51की रानी अनाउंस किया जाता है ध्यान देने
5:16:54वाली बात यह है की यह दरबार तब ऑर्गेनाइजर
5:16:57किया जा रहा था जब इंडिया में फेम के करण
5:16:59लोग भूखे मा रहे थे और ऐसे समय में लोगों
5:17:02की हेल्प करने की जगह लिटिल दरबार में
5:17:05लाखों खर्च कर देते हैं इससे पता चला है
5:17:09की लियोन के मां में इंडिया के लोगों के
5:17:11लिए किसी भी तरह की कोई सिंपैथी नहीं थी
5:17:13उनके इस एक्ट से लोगों में ब्रिटिश रूल के
5:17:17अगेंस्ट डिस्कंटेंट बढ़ाने लगता है और
5:17:19नेशनलिस्ट फीलींगस और भी प्रखर होती हैं
5:17:22अब बात करते हैं वर्नाकुलर प्रेस एक्ट
5:17:27मार्च 1878 दोस्तों लॉर्ड लिटन की इस तरह
5:17:33पॉलिसीज को वर्नाकुलर प्रेस यानी की
5:17:36इंडियन लैंग्वेज में छापने वाले
5:17:38न्यूज़पेपर और जर्नल्स ओपनली क्रिटिसाइज
5:17:41करने लगता
5:17:43की कैसे फेमेन से बुरी तरह फैक्ट्री लोग
5:17:46गवर्मेंट से कोई हेल्प ना मिलने की वजह से
5:17:49रोबरी करने के लिए मजबूर हो गए हैं का
5:17:52सकते हैं की वर्नाकुलर प्रेस ब्रिटिश रूल
5:17:54पिक्चर सबके सामने लाने का कम कर रही थी
5:17:57इस तरह की भड़काने वाले आर्टिकल्स की तेजी
5:18:00से होती ग्रोथ लॉर्ड लियोन को परेशान करती
5:18:03है और वो रिप्रेसिव पॉलिसी फॉलो करने का
5:18:06डिसीजन लेते
5:18:07मार्च 1878 में वर्नाकुलर प्रेस एक्ट पास
5:18:10कर देते हैं जिसका
5:18:12होने वाले गवर्नमेंट के क्रिटिसिजम को
5:18:15रोकना था एक्ट के अनुसार वर्नाकुलर
5:18:18न्यूजपेपर्स के पब्लिशर को मजिस्ट्रेट के
5:18:20साथ बंद साइन करना था की वो ऐसा कोई भी
5:18:23आर्टिकल पब्लिश नहीं करेंगे जिससे लोगों
5:18:25के अंदर ब्रिटिश गवर्मेंट किया अगेंस्ट
5:18:28दिस अफेक्शन पैदा हो और अगर वो इसको
5:18:30वायलेट करते हैं तो उनके प्रिंटिंग
5:18:32इक्विपमेंट को सीस भी किया जा सकता है
5:18:35मजिस्ट्रेट के एक्शन के अगेंस्ट कोर्ट में
5:18:37कोई अपील भी नहीं की जा शक्ति थी
5:18:40इस एक्ट के थ्रू लोड लिटिल ने फ्रीडम ऑफ
5:18:43स्पीच के राइट को छन लिया था और सबसे बड़ी
5:18:46बात थी की यह सिर्फ वर्नाकुलर प्रेस के
5:18:48लिए ही था एक तरह से डिसलाॅयल नेटिव प्रेस
5:18:52और लॉयल एंग्लो इंडियन प्रेस के बीच
5:18:54भेदभाव का प्रतीक था इस तरह के
5:18:57डिस्क्रिमिनेशन से लोगों को समझ आने ग गया
5:18:59की ब्रिटिशर्स की थ्योरी ऑफ व्हाइट मेंस
5:19:01बर्डन बस एक दिखावा है
5:19:03वर्नाकुलर प्रेस एक्ट से बचाने के लिए
5:19:06अमृत बाजार पत्रिका खुद को रातों रात
5:19:09इंग्लिश पब्लिकेशन बना लेती हैं इस एक्ट
5:19:12से वर्नाकुलर प्रेस को तो कंट्रोल कर लिया
5:19:13गया लेकिन गवर्नमेंट के अगेंस्ट जो
5:19:16डिस्कंटेंट था वो कम नहीं हुआ था बस उसको
5:19:19ओपनली एक्सप्रेस नहीं किया जा रहा था इससे
5:19:22डिस्कंटेंट अंदर ही अंदर और ज्यादा बढ़ता
5:19:24है अब बात करते हैं लियोन के
5:19:27एडमिनिस्ट्रेशन के एक और रिप्रेसिव मेजर
5:19:29की जो था 1878 का आर्म्स एक्ट
5:19:331878 इस एक्ट ने बिना लाइसेंस के हथियार
5:19:38रखना या खरीदने बेचे को क्रिमिनल ऑफेंस
5:19:40डिक्लेअर कर दिया लेकिन एक्ट का वर्स्ट
5:19:43फीचर था इसमें शामिल रेसियल
5:19:45डिस्क्रिमिनेशन क्योंकि यूरोपियंस और
5:19:48एंग्लो इंडियन पर यह एक्ट लागू नहीं होता
5:19:50था मतलब इंडियन के हथियार रखना से ही
5:19:53परेशानी थी दोस्तों रेसियल डिस्क्रिमिनेशन
5:19:56की बात करें तो यह ब्रिटिश की सभी पॉलिसी
5:19:59में दिखता है और इसका सबसे बड़ा एग्जांपल
5:20:02था सिविल सर्विसेज में इंडियन की
5:20:04अपॉइंटमेंट
5:20:10खाने को तो 1833 के चार्ट एक्ट ने इंडियन
5:20:13के लिए सिविल सर्विसेज का रास्ता खोल दिया
5:20:15था लेकिन रियलिटी में यूरोपियन ब्यूरो
5:20:18कृषि कभी भी इंडियन को अपना हिस्सा नहीं
5:20:21बनाना चाहती थी और इसीलिए लॉर्ड लिटन 1878
5:20:25में स्टेट्यूटरी सिविल सर्विस का प्लेन
5:20:27आगे रखते हैं इसके अनुसार गवर्नमेंट ऑफ
5:20:29इंडिया प्रोविंशियल गवर्मेंट के रिकमेंड
5:20:32करने पर कुछ इंडियन को स्टेट्यूटरी सिविल
5:20:34सर्विसेज में एम्पलाई कर शक्ति थी लेकिन
5:20:37इसमें भी शर्ट यह थी की यह अप्वाइंटमेंट्स
5:20:39गवर्नेंस सर्विस में होने वाले टोटल
5:20:42अप्वाइंटमेंट्स के 16 से ज्यादा नहीं हो
5:20:45सकते थे इसके साथ ही स्टेट्यूटरी सिविल
5:20:48सर्विस के स्टेटस और सैलरी भी कवमेंट
5:20:51सर्विसेज के जैसे नहीं थे
5:20:55लॉर्ड लिटन है तो यह भी प्रपोज दिया था की
5:20:58कोविनेटेड सर्विसेज को पुरी तरह से इंडियन
5:21:00के लिए क्लोज कर दिया जाए लेकिन सेक्रेटरी
5:21:04ऑफ स्टेट इस प्रपोज पर एग्री नहीं
5:21:06इंडियन को एग्जाम में कंप्लीट करने से
5:21:09डिस्चार्ज करने के लिए मैक्सिमम आगे को 21
5:21:12से घटकर 19 कर दिया जाता है इस तरह से
5:21:15इंडियन को सिविल सर्विसेज में आने से
5:21:17रोकने की हर संभव कोशिश की गई थी अब बात
5:21:20करते हैं फ्री ट्रेड की फ्री ट्रेड
5:21:23दोस्तों लिटन ने इंग्लैंड की टेक्सटाइल
5:21:26इंडस्ट्री के इंटरेस्ट को ध्यान में रखते
5:21:28हुए
5:21:291879 में कॉटन क्लॉथ पर लगे वाली इंपोर्ट
5:21:32ड्यूटी को अबॉलिश कर दिया था इससे इंडिया
5:21:35में डेवलप हो रही टेक्सटाइल इंडस्ट्री को
5:21:37नुकसान होता है और ब्रिटिश इंडस्ट्रीज को
5:21:40फायदा
5:21:45पॉलिसी
5:21:52हुआ था
5:21:54वार लियोन के प्रोवोग करने पर ही हुआ था
5:21:57और और में एक फेलियर साबित हुई इसमें लिटन
5:22:01इंडिया के रिवेन्यू का बड़ा हिस्सा खर्च
5:22:03कर
5:22:04इन पॉलिसी
5:22:06इंडियन को ब्रिटिश रूल नेचर का एहसास होने
5:22:09लगता है एजुकेटेड इंडियन को रिलाइज होता
5:22:12है की ब्रिटिश कैसे उनके साथ
5:22:14डिस्क्रिमिनेशन कर रहे हैं और इसी वजह से
5:22:17नेशनलिज्म की भावना और ज्यादा प्रमोट होती
5:22:20है
5:22:23वायसराय की पोस्ट से रिजाइन कर देते हैं
5:22:25और नए वायसराय बनते हैं लॉर्ड रिपन तो आई
5:22:29अब लॉर्ड रिपन के बड़े में बात करते हैं
5:22:3284
5:22:38दोस्तों 1880 में इंग्लैंड की लीडरशिप में
5:22:42लिबरल पार्टी पावर में आई है ग्लैडस्टिन
5:22:44इंडिया के लिए अपनी पॉलिसी डिक्लेअर करते
5:22:46हुए कहते हैं की ब्रिटिशर्स का रूल इंडिया
5:22:49की नेटिव लोगों के लिए प्रॉफिटेबल होना
5:22:51चाहिए और हमारी पॉलिसी होगी की हम इंडियन
5:22:54को ये दिखा और समझा भी सके की कैसे
5:22:57ब्रिटिश रूल उनके फायदे के लिए ही है और
5:23:00अपनी इस पॉलिसी को इंप्लीमेंट करने के लिए
5:23:02ग्लैडस्टिन ने लॉर्ड रिपन को इंडिया का
5:23:05वायसराय पॉइंट किया था लॉर्ड रिपन ब्रेड
5:23:08आउट लुक रखना वाले एक ऑनेस्ट परसों थे
5:23:10इसके साथ ही वह डेमोक्रेट भी थे रिपन का
5:23:14पॉलीटिकल नजरिया अपने प्रीति से लोड लिटिल
5:23:17से एकदम उल्टा था यह इंडिया की तरफ ड्यूटी
5:23:20महसूस करते थे लॉर्ड रिपन इंडिया के
5:23:23एडमिनिस्ट्रेशन को लिबरलाइज करने के लिए
5:23:25स्टेप्स लेते हैं आई जानते हैं उनके
5:23:28स्टेप्स के बड़े में शुरू करेंगे इंडिया
5:23:30में आए सबसे पहले फैक्ट्री
5:23:33एक्ट 1881
5:23:36दोस्तों फैक्ट्री लेबर्स की कंडीशन
5:23:38इंप्रूव करने के लिए लॉर्ड रिपन 1881 में
5:23:41पहले फैक्ट्री एक्ट पास करते हैं यह एक्ट
5:23:44सोर्सेस यादव वर्कर्स रखना वाली फैक्टरीज
5:23:47पर लागू होना था इस एक्ट ने 7 साल से कम
5:23:50आगे के बच्चों के एंप्लॉयमेंट पर प्रतिबंध
5:23:52लगा दिया इसके साथ ही 12 साल से कम आगे
5:23:55वालों के लिए वर्किंग हॉर्स को लिमिट कर
5:23:58दिया और डेंजरस मशीनरी को फैंस करने के
5:24:01लिए भी कहा इन इंप्लीमेंटेशन को
5:24:04सुपरवाइज्ड करने के लिए इंस्पेक्टर्स को
5:24:06भी अप्वॉइंट किया गया था
5:24:08यह एक्ट अपने स्कोप में भले ही लिमिटेड था
5:24:10लेकिन इंडिया की इंडस्ट्रियल हिस्ट्री में
5:24:12एक नई फैज की शुरुआत करता है पहले बार
5:24:16लेबर लॉस को लेकर एक पॉजिटिव खबर हमें
5:24:19देखने को मिलती है आगे चलकर इसी के बेसिस
5:24:22पर बटर लेबर लॉस कंट्री में ले गए इसके
5:24:24बाद लॉर्ड रिपन का मेजर स्टेप था
5:24:26वर्नाकुला एक्ट को रिपीट करना और लोकल
5:24:29सेल्फ गवर्नमेंट का रेजोल्यूशन पास करना
5:24:32रिपील ऑफ डी वर्नाकुलर प्रेस एक्ट 1882 और
5:24:36रेजोल्यूशन ऑन लोकल सेल्फ गवर्नमेंट 1882
5:24:39दोस्तों
5:24:40की पॉलिसी की वजह से बड़े हुए डिस्कंटेंट
5:24:44को कम करने की कोशिश करते हैं इसके लिए
5:24:46सबसे पहले वह रिटन द्वारा ले गए वर्नाकुलर
5:24:49प्रेस एक्ट को 1882 में वापस ले लेते हैं
5:24:55बराबर की फ्रीडम मिल जाति है रिपन के इस
5:24:59एक्ट से इंडिया में पब्लिक ओपिनियन को
5:25:01कॉन्सिलिएट करने में मदद मिलती है लेकिन
5:25:03लॉर्ड रिपन को सबसे ज्यादा याद किया जान
5:25:05वाले कम हैं उनका 188 2 में पास किया गया
5:25:09लोकल सेल्फ गवर्नमेंट पर रेजोल्यूशन इसके
5:25:12लिए इन्हें इंडिया में फादर ऑफ लोकल सेल्फ
5:25:15गवर्नमेंट भी कहा जाता है लॉर्ड रिपन
5:25:17इंडिया में म्युनिसिपल इंस्टीट्यूशंस की
5:25:20शुरुआत करते हैं जिसका लोगों को पॉलीटिकल
5:25:23एजुकेशन देना था अब बात करते हैं उनके
5:25:27एजुकेशनल रिफॉर्म्स की एजुकेशनल रिफॉर्म्स
5:25:321882 में ही सब विलियम हंटर की चैंपियनशिप
5:25:35में एक एजुकेशन कमीशन को अप्वॉइंट किया
5:25:38जाता है इसका मैंडेट 1854 के वुड डिस्पैच
5:25:42के बाद इंडिया में एजुकेशन फील्ड में हुई
5:25:44प्रोग्रेस को रिव्यू करना और आगे की
5:25:46पॉलिसी के लिए सुझाव देना था कमीशन
5:25:49प्राइमरी एजुकेशन के एक्सपेंशन और
5:25:51इंप्रूवमेंट के लिए गवर्नमेंट की स्पेशल
5:25:53रिस्पांसिबिलिटी पर जोर देती है इसका
5:25:56सुझाव था की प्राइमरी एजुकेशन को न्यूली
5:25:59इस्टैबलिश्ड म्युनिसिपल और जिला बोर्ड्स
5:26:01की केयर में दे दिया जाए इसके साथ ही
5:26:04सेकेंडरी एजुकेशन में कोर्सेज को दो भाग
5:26:07में बांट दिया जाए पहले लिटरेरी एजुकेशन
5:26:09जो यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस एग्जाम्स के
5:26:12लिए स्टूडेंट को तैयार करें और दूसरा
5:26:15प्रैक्टिकल कोर्स होना चाहिए जो कमर्शियल
5:26:18करियर के लिए तैयार करता इसके अलावा कमीशन
5:26:21ग्रैंड सिस्टम को सेकेंडरी और हायर
5:26:25एजुकेशन तक एक्सटेंड करने का सुझाव भी
5:26:27देती है कमीशन ने फीमेल एजुकेशन को
5:26:29स्प्रेड करने के लिए भी सजेशन दिए थे
5:26:32कमीशन के ज्यादातर सुझावों को गवर्नमेंट
5:26:34एक्सेप्ट कर लेती है इसे देश में काफी
5:26:37तेजी से स्कूल की ग्रोथ देखने को मिलती है
5:26:40अब बात करते हैं उनकी लैंड रिवेन्यू
5:26:43पॉलिसी की
5:26:44रेजोल्यूशन ऑन लैंड रिवेन्यू पॉलिसी
5:26:47दोस्तों
5:26:50लैंड रिवेन्यू पॉलिसी में भी कुछ चेंज
5:26:53इंट्रोड्यूस करने की कोशिश की थी वो बंगाल
5:26:56के परमानेंट सेटलमेंट में कुछ मोडिफिकेशन
5:26:58प्रपोज करते हैं वह रियड को परमानेंट और
5:27:01सिक्योरिटी का शोरूम देना चाहते थे इसके
5:27:04साथ ही गवर्नमेंट की तरफ से प्राइस राइस
5:27:06के अलावा किसी भी और ग्राउंड पर आगे से
5:27:09लैंड रिवेन्यू ना बढ़ाने की कमिटमेंट देना
5:27:11चाहते थे लेकिन बंगाल के जमींदारा उनके इस
5:27:14मेजर का विरोध करते हैं साथ ही प्रेजेंस
5:27:17का सपोर्ट भी उन्हें नहीं मिलता क्योंकि
5:27:19लगता है की एंग्लो इंडियन ब्यूरो कृषि तो
5:27:23जमींदार से भी ज्यादा बुरी है सेक्रेटरी
5:27:26ऑफ स्टेट भी रिपन के प्रपोज को फीवर नहीं
5:27:28करते इसलिए उनका यह रेजोल्यूशन इंप्लीमेंट
5:27:31नहीं हो पता
5:27:33रेजोल्यूशन इंप्लीमेंट भले ही एन हुआ हो
5:27:35लेकिन इससे यह पता चला है की लॉर्ड रिपन
5:27:38की इंटेंशंस अच्छी थी वो बंगाल की मदद ही
5:27:42करना चाहते थे अब बात करते हैं इल्बर्ट
5:27:45बिल्कुल ट्रैवर्सिटी वे इल्बर्ट बिल्कुल
5:27:47ट्रॉफी
5:27:4918834 दोस्तों 1883 में वायसराय काउंसिल
5:27:53के डॉ मेंबर से क एल्बो ने एक बिल
5:27:56इंट्रोड्यूस किया था जिसे इल्बर्ट बिल के
5:27:59नाम से जाना जाता है इसकी इंट्रोडक्शन से
5:28:02पहले तक क्रिमिनल केसेस में यूरोपियंस का
5:28:04ट्रायल इंडियन मजिस्ट्रेट नहीं कर सकते थे
5:28:07उनका ट्रायल सिर्फ यूरोपियन जज ही कर सकते
5:28:10थे
5:28:11अल्बर्ट बिल इसको चेंज करने के लिए लाया
5:28:13गया था इसके अनुसार इंडियन जज भी
5:28:16यूरोपियंस के कैसे को प्रेसीडे कर सकते थे
5:28:18लेकिन अल्बर्ट बिल के इस प्रोविजन से एक
5:28:21बहुत बड़ी कंट्रोवर्सी क्रिएट हो जाति है
5:28:31और इसलिए
5:28:33इंडियन जज के सामने ट्रायल फेस करने की
5:28:35बात भी गलत थी इस बिल के अगेंस्ट कोलकाता
5:28:37में रहने वाली यूरोपियन बिजनेस कम्युनिटी
5:28:39प्रोटेस्ट करना शुरू कर देती है ऐसा इसलिए
5:28:43क्योंकि यह अपने इंडियन सर्वेंट को इल्ट
5:28:45करते थे और कई बार उन्हें जान से ही मार
5:28:48देते थे ऐसे केसेस में इंग्लिश जज तो
5:28:51इन्हें बहुत कम सजाई है बिना सजा के ही
5:28:53जान देते थे इसलिए अपने स्पेशल प्रिविलेज
5:28:56को डिफेंड करने के लिए यूरोपियन कम्युनिटी
5:28:58एक डिफेंस संगठन बनती है यह लोग 15000 का
5:29:02फंड भी कलेक्ट करते हैं जिसकी मदद से ये
5:29:05इंडिया और लंदन दोनों ही जगह मिल्क
5:29:08अगेंस्ट प्रोपेगेंडा शुरू कर देते हैं यह
5:29:11लोग वाइस राय लॉर्ड रिपन को अब उसे करना
5:29:13भी शुरू कर देते हैं और ब्रिटिश गवर्नमेंट
5:29:15से कहते हैं की रिपन को इंडिया से वापस
5:29:18बुला लिया जाए कोलकाता में रेसियल राइट्स
5:29:21की संभावना बढ़ाने लगती है लंदन की न्यूज़
5:29:24पेपर्स में भी रिपन की पॉलिसी की आलोचना
5:29:26होने लगती है यहां तक
5:29:28यह बिल समझदारी से भारत नहीं है
5:29:32बढ़नी हुई प्रोटेस्ट के आगे आखिरकार लॉर्ड
5:29:35रिपन को ही झुकना पड़ता है
5:29:40जिसके बाद इंडियन जज किसी यूरोपियन का
5:29:43कैसे तभी जज कर सकता था जब जूरी की
5:29:46एटलिस्ट 50% मेंबर्स यूरोपीय
5:29:50बिल की कंट्रोवर्सी और कंप्रोमाइज ने
5:29:52इंडियन को ब्रिटिशर्स के और ज्यादा गेस्ट
5:29:55कर दिया जी तरह ब्रिटिशर्स ने अपने हक की
5:29:58बात प्रोटेस्ट करके मानव ली थी उसे इंडियन
5:30:01भी सिख गए की उन्हें भी इसी रास्ते पर
5:30:04चलना होगा और इस वजह से ये इनडायरेक्ट
5:30:07इंडियन नेशनल मूवमेंट और 1885 में
5:30:10कांग्रेस की स्थापना को प्रमोट करने के
5:30:12लिए रिस्पांसिबल था
5:30:13कंक्लुजन दोस्तों कंक्लुजन
5:30:19दोस्तों ये थे वायसराय लॉर्ड रिपन के
5:30:21इंडिया में किया गए रिफॉर्म्स हम का सकते
5:30:24हैं की उन्होंने इंडिया में लिबरल
5:30:26एडमिनिस्ट्रेशन को प्रमोट करने की पुरी
5:30:28कोशिश की वह इसमें कितने सफल हुए
5:30:38की तरह याद किया जाता है
5:30:42[संगीत]
5:30:57उन्हें लगता है की उनका मिशन इंडिया
5:31:07होने से पहले ही 1884 में रिजाइन कर देते
5:31:11हैं और एक हरे हुए इंसान की तरह इंग्लैंड
5:31:14लोट जाते हैं
5:31:16लॉर्ड रिपन एक्यूमेंटेरियन और लिबरल थे
5:31:19लेकिन ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के इंटरेस्ट
5:31:21को आगे ले जान के लिए उनके जैसे इंसान की
5:31:24जरूर नहीं थी इसी वजह से इंडिया में उनका
5:31:27मिशन फेल राहत है हालांकि वो हमें
5:31:29ब्रिटिशर्स की पॉसिबल कमीन सीड्स जरूर
5:31:31दिखा जाते हैं दोस्तों इस समय दुनिया में
5:31:35हर तरफ नेशनलिज्म तेजी से स्प्रेड हो रहा
5:31:37था और इंडिया में इस नेशनलिज्म की स्पिरिट
5:31:41को जागने में लॉर्ड लिटन
5:31:43दोनों ही इंस्ट्रूमेंट साबित होते हैं
5:31:46लेकिन जहां एक एडवर्सरी की तरह इंडिया में
5:31:49नेशनलिज्म की आज को चिंगारी देते हैं
5:31:53इस स्पिरिट को आगे ले जाते हैं
5:32:01[संगीत]
5:32:07की उनका जन्म इंडिया का वायसराय बने के
5:32:11लिए ही हुआ है
5:32:12वायसराय बने से पहले ही लोड कर्जन इंडिया
5:32:15के बड़े में बहुत कुछ जानते थे वह इससे
5:32:18पहले कई बार इंडिया ए भी चुके थे
5:32:201899 में इंडिया के वाइस रॉयल की पोस्ट पर
5:32:24अपॉइंटमेंट लॉर्ड कर्जन के लिए किसी सपना
5:32:26की पूरा होने जैसा था आई जानते हैं लॉर्ड
5:32:30कर्जन कैसे अपने सपना को सच्चाई में बदलते
5:32:33हैं और इंडिया आने के बाद वो क्या क्या
5:32:36करते हैं
5:32:37इंट्रोडक्शन
5:32:40दोस्तों इंडिया का वायसराय बन्ना अपने आप
5:32:43में बहुत बड़ा टास्क तथा इसके अलावा 1896
5:32:47के फेमो और उसके बाद
5:32:50प्रॉब्लम और ज्यादा बड़ा दी थी
5:32:53रेवेन्यू कम होते जा रहे थे इसके साथ ही
5:32:56एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को भी समय के साथ
5:32:58बदलने की जरूर महसूस हो रही थी और
5:33:01ब्रिटिशर्स के लिए इससे भी ज्यादा गंभीर
5:33:03समस्या थी उसे समय के इंडिया का पॉलीटिकल
5:33:06क्लाइमेट क्योंकि इंडियन में अवेयरनेस ए
5:33:09रही थी और वह ब्रिटिश से यह सवाल करने ग
5:33:12गए थे की उन्हें इंडिया पर रूल करने का
5:33:15अधिकार आखिर किसने दिया ऐसी सिचुएशन में
5:33:17इंडिया में अपनी टास्क का एक बहुत क्लियर
5:33:19कॉन्सेप्ट लोड कर्जन के दिमाग में था वो
5:33:23पुरी तरह कन्वेंस थे की एडमिनिस्ट्रेटिव
5:33:26मशीनरी को तुरंत डिपार्मेंट
5:33:40रिफॉर्म्स की
5:33:42पुलिस रिफॉर्म्स
5:33:44दोस्तों रिफॉर्म्स के लिए कर्जन का मेथड
5:33:46था एक एक्सपर्ट कमीशन को अप्वॉइंट करना यह
5:33:49कमीशन डिपार्मेंट की वर्किंग की पुरी जांच
5:33:51करती थी और फिर इसकी रिपोर्ट के आधार पर
5:33:54जरूरी रिफॉर्म्स के लिए कानून बना दिया
5:33:56जाता था
5:33:581912
5:33:59फ्रीजर की अध्यक्षता में पुलिस कमीशन को
5:34:02अप्वॉइंट किया जाता है कमीशन अपनी रिपोर्ट
5:34:05193 में सबमिट कर दी है जिसमें पुलिस
5:34:08फोर्स के इंप्रूवमेंट के लिए कई सारे
5:34:10सुझाव दिए गए थे जैसे की सभी रैंक्स की
5:34:13सैलरी इंक्रीज करना सभी प्रोविंस में
5:34:16पुलिस फोर्स की स्ट्रैंथ को बढ़ाना ऑफिसर
5:34:18और कांस्टेबल दोनों के लिए ही ट्रेनिंग
5:34:20स्कूल खोलना ही रैंक्स के लिए प्रमोशन की
5:34:23जगह डायरेक्ट रिक्रूटमेंट करना
5:34:25प्रोविंशियल पुलिस सर्विस को सेटअप करना
5:34:28सेंट्रल डिपार्मेंट ऑफ क्रिमिनल
5:34:29इंटेलिजेंस को क्रिएट
5:34:34करके इंप्लीमेंट कर दिया जाता है यह तो
5:34:38बात हुई
5:34:43एजुकेशनल रिफॉर्म्स
5:34:46दोस्तों लॉर्ड गर्जन का मानना था की
5:34:49इंडिया में एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस
5:34:51पॉलीटिकल रिवॉल्यूशनरीज को जन्म देने वाली
5:34:53फैक्टरीज बन गई हैं इसके साथ ही एजुकेशन
5:34:56सिस्टम के खराब होते स्टैंडर्ड और उसमें
5:34:59बढ़ते इन डिसिप्लिन ने कर्जन को परेशान
5:35:01किया हुआ था इसलिए 192 में वो यूनिवर्सिटी
5:35:05कमीशन को पॉइंट करते हैं कमीशन की
5:35:08रिकमेंडेशन के आधार पर 1904 में इंडियन
5:35:11यूनिवर्सिटी एक्ट पास किया जाता है इस
5:35:15एक्ट के द्वारा यूनिवर्सिटी के ऊपर
5:35:17गवर्नमेंट कंट्रोल को बड़ा दिया गया था
5:35:19एजुकेटेड इंडियन ने कमीशन की रिपोर्ट और
5:35:22रिजेक्ट का काफी विरोध भी किया था इस तरह
5:35:25लौटकर्जन कोशिश करते हैं की एजुकेशन
5:35:28सिस्टम को इंडियन नेशनलिज्म को सपोर्ट
5:35:30करने से रॉक जाए लेकिन तब तक शायद डर हो
5:35:33चुकी थी नेशनलिज्म का जिन चिराग से बाहर ए
5:35:37चुका था और यूनिवर्सिटी पर कंट्रोल कर
5:35:39लेने से उसको चिराग में वापस नहीं भेजो जा
5:35:42सकता था बल्कि इस एक्ट ने तो आज में गी
5:35:46डालने का ही कम किया स्टूडेंट और उनके
5:35:48नेशनलिज्म की मिसल हम अगले वीडियो में
5:35:51स्वदेशी मूवमेंट में देखेंगे अब बात करते
5:35:54हैं
5:35:57इकोनामिक रिफॉर्म्स
5:36:00दोस्तों लॉर्ड कर्जन के इकोनामिक
5:36:02रिफॉर्म्स में आते हैं उनके फेम लैंड
5:36:05रिवेन्यू इरिगेशन एग्रीकल्चर रेलवे
5:36:07टैक्सेशन और ई एक सत्र से रिलेटेड
5:36:10लेजिसलेशंस आई एक-एक करके इनके बड़े में
5:36:14जानते हैं
5:36:16फेमस
5:36:17सबसे पहले बात करते
5:36:23साउथ सेंट्रल और वेस्टइंडीज इंडिया का एक
5:36:26बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ था इस दौरान
5:36:29लॉर्ड कर्जन ने काल से प्रभावित लोगों की
5:36:31हर संभव मदद की थी हम का सकते हैं की यह
5:36:35पहले ऐसे वायसराय थे जिन्होंने फेम की
5:36:38समस्या को ह्यूमन टच के साथ टैकल करने की
5:36:41कोशिश की थी
5:36:42कल्टीवेटर को रिवेन्यू पेमेंट से भी
5:36:44एग्जैक्ट कर दिया गया है
5:37:04कमीशन 1901 में ही अपनी रिपोर्ट सबमिट कर
5:37:07देती है कमीशन का कहना था की फेम के समय
5:37:10जो रिलीफ डिस्ट्रीब्यूशन की गई थी वो बहुत
5:37:12ज्यादा थी इसके साथ ही ऐसे मदर्स पर जरूर
5:37:15से ज्यादा इंप्रेस किया गया था जिनकी जरूर
5:37:18ही नहीं थी कमीशन एबल बॉडी परसों के लिए
5:37:21टास्क फोर्स से पेमेंट करने का सुझाव देती
5:37:24है साथ ही फॉदर फेम से डील करने के लिए
5:37:27रूल्स भी तैयार करती है यह तो बात हुई
5:37:30लौटकर्जन के फैमिन रिलीफ मेजर्स की आई बात
5:37:33करते हैं उनके एग्रीकल्चरल रिलेटेड
5:37:35रिफॉर्म्स की
5:37:37एग्रीकल्चर लैंड रिवेन्यू और इरिगेशन
5:37:41लॉर्ड कर्जन रिवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन को
5:37:44इंप्रूव करने के लिए 16th जनवरी 192 को
5:37:47लैंड रेजोल्यूशन इंट्रोड्यूस करते हैं
5:37:50इसमें लैंड रिवेन्यू के लिए तीन
5:37:52प्रिंसिपल्स फिक्स किया जाते हैं जो थे
5:37:55पहले की रिवेन्यू को हमेशा ग्रैजुअली ही
5:37:58इंक्रीज किया जाएगा दूसरा प्रिंसिपल था की
5:38:01रिवेन्यू कलेक्ट करते समय एग्रीकल्चर को
5:38:04कोई नुकसान ना हो इसका पूरा ध्यान रखा जाए
5:38:06और तीसरा था की ड्रॉट या और किसी मुश्किल
5:38:10के समय प्रेजेंट की तुरंत हेल्प की जाए
5:38:13इरिगेशन रिलेटेड रिफॉर्म्स के लिए 1901
5:38:16में
5:38:18कमीशन फॉर्म की जाति है कमीशन आने वाले 20
5:38:22सालों में इरिगेशन के ऊपर
5:38:26अतिरिक्त खर्च करने का सुझाव देती है
5:38:29कर्जन के समय में झेलम कैनाल को कंप्लीट
5:38:32करने के साथ अपार झेलम और लोअर बड़ी दवा
5:38:35कनाल का कम भी शुरू हो जाता है इसके साथ
5:38:38ही 194 में कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटीज
5:38:41एक्ट के द्वारा कल्टीवेटर के लिए सस्ते
5:38:44रेट्स पर लोन देने का प्रोविजन किया गया
5:38:46था इंडियन एग्रीकल्चर और लाइव स्टॉक की
5:38:49इंप्रूवमेंट के लिए लोट कर्जन इंस्पेक्टर
5:38:51जनरल के अंदर इंपीरियल एग्रीकल्चर
5:38:53डिपार्मेंट भी सेटअप करते हैं जिसका कम
5:38:56कल्टीवेशन के साइंटिफिक मैथर्ड को प्रमोट
5:38:59करना था इस तरह लौटकर्जन इंडिया में
5:39:02एग्रीकल्चर और प्रेजेंस की कंडीशन को
5:39:04इंप्रूव करने की कोशिश करते हैं
5:39:06एग्रीकल्चर रिफॉर्म्स के बाद आई जानते हैं
5:39:08रेलवे रिलेटेड रिफॉर्म्स के बड़े में
5:39:12रेलवे
5:39:15द्वारा इंट्रोड्यूस किया जान के बाद से ही
5:39:18रेलवे का प्रचार प्रसार बहुत तेजी से
5:39:20इंडिया में हो रहा था इसको और आगे ले जान
5:39:23का कम करते हैं लोट कर्जन रेलवे की
5:39:27डेवलपमेंट पर खास ध्यान देते हैं उनके समय
5:39:30में रेलवे की एक्जिस्टिंग लाइंस को
5:39:31इंप्रूव किया जाता है और साथ ही नई लाइंस
5:39:34पर भी कम शुरू किया जाता है रेलवे की
5:39:37वर्किंग और एडमिनिस्ट्रेशन पर एडवाइस देने
5:39:39के लिए इंग्लैंड से रेलवे एक्सपर्ट मिस्टर
5:39:42थॉमस रॉबर्टसन को बुलाया जाता है रॉबर्टसन
5:39:45के अनुसार रेलवे की कंडीशन
5:39:47अनसेटिस्फेक्ट्री थी और इसमें ऊपर से लेकर
5:39:50नीचे तक रिफॉर्म की जरूर थी यह कहते हैं
5:39:53की रेलवे लाइंस को कमर्शियल इंटरप्राइजेज
5:39:55की तरफ बिल्ड किया जाना चाहिए
5:39:57है इसके साथ ही रेलवे एडमिनिस्ट्रेशन से
5:40:00जुड़े सभी मैटर्स को देखने के लिए एक
5:40:02रेलवे बोर्ड सेटअप करने का सुझाव भी देते
5:40:04हैं
5:40:05लौटकर्जन कमीशन की रिकमेंडेशन को एक्सेप्ट
5:40:08कर लेते हैं और रेलवे का मैनेजमेंट जिसे
5:40:11अभी तक पब्लिक वर्क डिपार्मेंट देखा था
5:40:13रेलवे बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया जाता है
5:40:16अब बात करते हैं टैक्सेशन और ई रिलेटेड
5:40:20मेजर्स की
5:40:22ई और टैक्सेशन
5:40:25दोस्तों 1899 के इंडियन कॉलेज और पेपर ई
5:40:28एक्ट के द्वारा ब्रिटिश ई को इंडिया में
5:40:31लीगल टेंडर डिक्लेअर कर दिया जाता है और
5:40:34एक पाउंड की कीमत ₹15 के बराबर राखी जाति
5:40:37है इसके साथ ही कर्जन शॉर्ट्स टैक्स का
5:40:40रेट भी कम करते हैं
5:40:44[संगीत]
5:40:48दोस्तों यह थे लॉर्ड कर्जन के इंपॉर्टेंट
5:40:50इकोनामिक रिफॉर्म्स अब हम जानते हैं उनके
5:40:53समय में होने वाले आर्मी रिफॉर्म्स के
5:40:55बड़े में
5:40:57आर्मी रिफॉर्म्स
5:40:59लौटकर्जन के समय में हुए आर्मी के
5:41:02रीऑर्गेनाइजेशन का श्री जाता है लॉर्ड
5:41:04किचन को यह 192 से लेकर 198 तक इंडिया के
5:41:09कमांडर इन के रहे थे इंडियन आर्मी को दो
5:41:13कमांड्स में डिवाइड कर दिया जाता है
5:41:14नॉर्दर्न कमांड और सदन कमांड नॉर्दर्न
5:41:18कमांड का हेड क्वार्टर मुरी में और सदन
5:41:21कमान का हैडक्वाटर्स पुणे में था आर्मी की
5:41:24हर डिवीजन में तीन ब्रिगेड बनाई जाति हैं
5:41:26जिसमें दो ब्रिगेड इंडियन बटालियन की और
5:41:29एक ब्रिगेड इंग्लिश बटालियन की होती थी
5:41:31इसके साथ ही ऑफिसर्स को ट्रेन करने के लिए
5:41:34क्वेटा में ट्रेनिंग कॉलेज भी सेटअप किया
5:41:36जाता है ब्रिटिश ट्रूप्स को बेटा आर्म्स
5:41:39की सप्लाई शुरू होती है इसके अलावा आर्मी
5:41:41की हर बटालियन को एक सीवर टेस्ट पास करना
5:41:44होता था जिसका नाम रखा गया
5:41:51इस डिपार्मेंट का खर्चा और ज्यादा बाढ़
5:41:54जाता है दोस्तों लौटकर ने असिएंट
5:41:57मॉन्यूमेंट्स के लिए भी एक एक्ट पास किया
5:41:59था आई जानते हैं उसके बड़े में
5:42:02असिएंट मॉन्यूमेंट्स एक्ट 1904 लोड कर्जन
5:42:06हिस्ट्री के स्टूडेंट रहे थे और
5:42:08आर्कियोलॉजी में उनका दीप इंटरेस्ट था
5:42:10इसीलिए इंडिया के हिस्टोरिकल मॉन्यूमेंट्स
5:42:13को रिपेयर रिस्टोर और प्रोटेस्ट करने के
5:42:16लिए वो 1904 में असिएंट मॉन्यूमेंट्स एक्ट
5:42:19पास करते हैं हिस्टोरिकल बिल्डिंग की
5:42:22रिपेयर के लिए 50000 पाउंड की अमाउंट
5:42:24सैंक्शन कर दी जाति है कर्जन इंडियन
5:42:27स्टेटस पर भी प्रेशर डालते हैं की वो
5:42:29अजंता एलोरा और सांची स्तूप जैसे इंडिया
5:42:32के रिच हेरिटेज को प्रिजर्व करने का कम
5:42:34करें
5:42:36इंडिया में आज भी स्मारक कंजर्वेशन के लिए
5:42:40एक बेडरॉक की तरह माना जाता है दोस्तों इन
5:42:44सभी रिफॉर्म्स के अलावा लौटकर ने 1899 में
5:42:47कोलकाता कॉरपोरेशन एक्ट भी पास किया था इस
5:42:50एक्ट के द्वारा कर्जन लोकल सेल्फ
5:42:52गवर्नमेंट के फील्ड में किया गए लॉर्ड
5:42:54रिपन के कम को अंडो करना चाहते थे ये एक्ट
5:42:58कॉरपोरेशन में इलेक्ट्रिक मेंबर्स की
5:42:59स्ट्रैंथ को कम कर देता है जिससे कलकट
5:43:02कॉरपोरेशन और उसकी कमेटी में ब्रिटिश
5:43:04एलिमेंट की मेजॉरिटी बनी रहती है इंडियन
5:43:08मेंबर्स एक्ट से खुश नहीं थे और 28
5:43:10मेंबर्स अपना विरोध दिखाने के लिए रिजाइन
5:43:13भी कर देते हैं लेकिन कर्जन पर इनकी
5:43:15प्रोटेस्ट का कोई असर नहीं पड़ता बल्कि वह
5:43:18तो अपने कम से इतने खुश थे की 1903 में एक
5:43:22बैंक्विट में कहते हैं की वायसराय की
5:43:24पोस्ट से रिटायर होने के बाद वो कोलकाता
5:43:27का मेयर बन्ना पसंद करेंगे ये एक अकेला
5:43:29ऐसा कम नहीं था कर्जन का जिसने इंडियन को
5:43:32प्रोटेस्ट करने के लिए मजबूर किया उनका
5:43:34सबसे कंट्रोवर्शियल डिसीजन तो बंगाल का
5:43:37पार्टीशन था तो आई उसके बड़े में जानते
5:43:40हैं
5:43:41पार्टीशन ऑफ बंगाल 1905
5:43:44दोस्तों 1905 में बंगाल प्रेसीडेंसी का
5:43:48पार्टीशन कर्जन के सबसे ज्यादा क्रिटिसाइज
5:43:51होने वाले मूव्स में से एक था
5:43:53इसका विरोध एन सिर्फ बंगाल में बल्कि पूरे
5:43:56भारत में किया जाता है आई समझते हैं कर्ज
5:43:59ने ये डिसीजन आखिर क्यों लिया था बंगाल
5:44:02प्रॉब्लम्स उसे समय इंडिया का सबसे ज्यादा
5:44:04पापुलेशन वाला प्रॉफिट था लगभग 8 करोड़ की
5:44:08जनसंख्या थी बंगाल की जिसमें आज का वेस्ट
5:44:11बंगाल बिहार छत्तीसगढ़ के कुछ हिस उड़ीसा
5:44:14असम और आज का बांग्लादेश भी शामिल था
5:44:17कर्जन कहते हैं की पार्टीशन कायम इतनी
5:44:20बड़े प्रॉब्लम्स के एडमिनिस्ट्रेशन को इजी
5:44:22बनाना है लेकिन उनका एक्चुअल मोटिव दो
5:44:25बंगाल प्रोविंस से उठ रही लाउड पॉलीटिकल
5:44:27वॉयस को कृष करना था और उनके बीच रिलिजियस
5:44:31ड्राइव और अपोजिशन को जन्म देना था इसे
5:44:33समझना के लिए पार्टीशन की प्लेन को समझना
5:44:35जरूरी है
5:44:36प्लेन की अकॉर्डिंग 3.1 करो की पापुलेशन
5:44:40के साथ ईस्ट बंगाल और असम को एक नया
5:44:42प्रोविंस बन्ना था इसमें मुस्लिम हिंदू
5:44:45पापुलेशन का रेशों 3:2 था वेस्टर्न बंगाल
5:44:48प्रोविंस में हिंदू मेजॉरिटी रहने वाली थी
5:44:51नेशनलिस्ट लीडर्स कहते हैं की ये स्कीम
5:44:54लोगों को रिलिजियस के बेसिस पर डिवाइड
5:44:56करने के लिए बनाई गई थी इससे मुस्लिम को
5:44:59हिंदू के अगेंस्ट खड़ा कर दिया जाएगा और
5:45:01उनकी यह बात बेगुन याद नहीं थी ये साबित
5:45:04होता है पूर्वी बंगाल के लेफ्टिनेंट
5:45:06गवर्नर की एक डिक्लिनेशन से जिसमें वो
5:45:09कहते हैं की उनकी दो वाइव्स में से
5:45:12मोहम्मडन वाइफ उनकी फेवरेट है एवं लॉर्ड
5:45:14कर्जन भी पूर्वी बंगाल की डोर के समय कहते
5:45:16हैं की पार्टीशन का एकम मोहम्मडन प्रोविंस
5:45:19क्रिएट करना भी है इसके साथ ही यह
5:45:22लिंग्विस्टिक्स बेसिस पर भी डिवाइड और रूल
5:45:24की पॉलिसी थी क्योंकि प्लेन के अकॉर्डिंग
5:45:26वेस्ट बंगाल में बंगाली माइनॉरिटी बना दिए
5:45:29गए थे
5:45:30बंगाल पार्टीशन की विरोध में एक बड़ा
5:45:33मूवमेंट खड़ा हो जाता है जिसे हम स्वदेशी
5:45:36मूवमेंट के नाम से जानते हैं
5:45:47और मटेरियल एडवांटेज का विजन दिखाकर अपनी
5:45:50तरफ किया जाता है
5:45:54इंडिया से वापस चले जाते हैं लेकिन उनकी
5:45:57डिसीजन के अगेंस्ट प्रोटेस्ट आने वाले कई
5:45:59साल तक चलते हैं
5:46:02कंक्लुजन दोस्तों लोट कर्जन ग्रेट
5:46:06इंपिरियलिस्ट थे वह इंडिया में ब्रिटिश
5:46:08कंट्रोल को और ज्यादा स्ट्रांग करना चाहते
5:46:10थे उनके ज्यादातर रिफॉर्म्स और एक्ट्स इसी
5:46:13मोटिव को फुलफिल करने के लिए थे इसके साथ
5:46:16ही इंडियन को लेकर उनका ओपिनियन बहुत ही
5:46:19खराब था वो इंडियन की इंसल्ट करने और उनकी
5:46:22दीपेस्ट फीलींगस को हट करने का कोई भी
5:46:25मौका नहीं जान देते थे एक ऑक्शन पर
5:46:28उन्होंने बंगाली को डरपोक हवाबाज और बस
5:46:31दिखावा करने वाला देश प्रेमी तक का दिया
5:46:33था वह इंडियन नेशनल कांग्रेस के
5:46:36प्रेसिडेंट से मिलने से भी इनकार कर देते
5:46:38हैं और कांग्रेस की एक्टिविटीज को लेटिंग
5:46:41ऑफ गैस की तरह कैरक्टराइज करते हैं इस तरह
5:46:46इंपिरियलिस्ट डिजाइंस की वजह से कर्जन
5:46:49इंडिया के पॉलीटिकल और रेस्ट को बर्स्टिंग
5:46:52पॉइंट तक पहुंच देते हैं और इससे शुरुआत
5:46:54होती है इंडिया में पॉलीटिकल मूवमेंट के
5:46:57एक बिल्कुल नए फेस की
5:46:59गर्जन की टेरैनो की वजह से ही इंडियन में
5:47:02नेशन हुड के और भी स्ट्रांग सेंस का जन्म
5:47:05होता है इस तरह देखा जाए तो कर्जन इंडिया
5:47:09के बेनिफैक्टर प्रूफ होते हैं भले ही उनकी
5:47:11इंटेंशन कभी भी ऐसी ना रही हो
5:47:14वॉइस ऑफ नेशनलिज्म 1857 तू 1885 दोस्तों
5:47:19आज हम बात करेंगे इंडियन नेशनल मूवमेंट की
5:47:22शुरुआती दूर की जिसमें हम जानेंगे उसकी
5:47:25इमरजेंसी के करण हम यह भी जानेंगे की 1885
5:47:29में इंडियन नेशनल कांग्रेस की गठन से पहले
5:47:32वो कौन सी पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशंस थे
5:47:35जिन्होंने इंडियन नेशनल मूवमेंट को
5:47:37इनिशियल पुश देने का कम किया लेकिन सबसे
5:47:40पहले एक बैकग्राउंड जान लेते हैं
5:47:43बैकग्राउंड
5:47:45दोस्तों 1857 की क्रांति के बाद भारत एक
5:47:49मेजर पॉलीटिकल और सोशल चेंज के दूर से
5:47:52गुर्जर रहा था जहां भारत की बागडोर अभी
5:47:54ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों से ब्रिटिश
5:47:56क्राउन के हाथों में चली गई थी अब इंडिया
5:47:59डायरेक्टली ब्रिटिश क्राउन द्वारा गवन
5:48:01होने वाला था वैसे तो ईस्ट इंडिया कंपनी
5:48:04की पावर्स को कम करने की कोशिश 173 के
5:48:07रेगुलेटिंग एक्ट से चल रही थी लेकिन 1857
5:48:10की क्रांति ने इस पूरे प्रोसेस को
5:48:12एक्सीलरेट कर दिया और ब्रिटिश क्राउन ने
5:48:14फाइनली साड़ी पावर्स जूम कर ली लेकिन
5:48:17इंडियन की बात करें तो उनके हालातो में
5:48:19इसे कोई खास फर्क नहीं पड़ा क्योंकि
5:48:22ब्रिटिश क्राउन ने भी ईस्ट इंडिया कंपनी
5:48:24जैसी रिप्रेसिव पॉलिसी
5:48:32इंटेलेक्चुअल और यहां तक की कैपिटल भी
5:48:34ब्रिटिश से काफी नाराज थे इस कांटेक्ट में
5:48:38अब हम जानते हैं की इंडियन नेशनल मूवमेंट
5:48:40के राइस के करण क्या थे और ऐसी क्या वजह
5:48:42थी जिनके चलते 19th सेंचुरी के सेकंड हाफ
5:48:46में इंडियन की पॉलीटिकल
5:48:50फैक्टर्स रिस्पांसिबल पर नेशनल मूवमेंट
5:48:53दोस्तों इंडियन नेशनल मूवमेंट के इमरजेंसी
5:48:56का सबसे में करण लोगों में यह रिलाइजेशन
5:48:59था की उनके पिछड़ेपन में कॉलोनियल रूल का
5:49:02सबसे बड़ा हाथ था और इस रिलाइजेशन की सबसे
5:49:05पहले वजह यह थी की ब्रिटिश राज ने भारत
5:49:08में एक यूनिफाइड स्ट्रक्चर क्रिएट किया
5:49:10थ्रू लॉस और इंस्टीट्यूशंस लाइक सिविल
5:49:13सर्विसेज और ज्यूडिशरी और मॉडर्न मेंस ऑफ
5:49:16ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन लाइक रेलवे
5:49:18रोड टेलीग्राफ ईटीसी इन सब ने इंडियन के
5:49:22फिट को एक दूसरे से जोड़ दिया जिसके चलते
5:49:25एक बंगाली के कंसर्न और एक पंजाबी के
5:49:27कंसर्न्स लगभग सिमिलर थे इसके अलावा
5:49:30अलग-अलग जगह की लीडर्स और इंटेलेक्चुअल को
5:49:33भी इतिहास के एक्सचेंज में मदद मिली
5:49:35ब्रिटिशर्स द्वारा भारत में इंट्रोड्यूस
5:49:37किया गए मॉडर्न एजुकेशन ने वेस्टर्न थॉट
5:49:40और आइडियल को भी इंडियन के सामने
5:49:42इंट्रोड्यूस किया इसकी चलते कई यूरोपियन
5:49:45स्कॉलर्स जैसे
5:49:50की राशनल सेकुलर डेमोक्रेटिक और नेशनलिस्ट
5:49:54इतिहास भी इंडिया में स्प्रेड हुए जिसकी
5:49:56वजह से नेटिव इंटेलेक्चुअल की थिंकिंग में
5:49:59बदलाव आने लगे इसके साथ ही सेकंड हाफ ऑफ
5:50:0219थ सेंचुरी में प्रेस और लिटरेचर ने भी
5:50:04इस रिलाइजेशन में अपना योगदान निभाया इस
5:50:08दूर में लगभग 169 न्यूजपेपर्स पंपलेट और
5:50:12जर्नल्स विनैकुलर लैंग्वेज में पब्लिश हो
5:50:14रहे थे जो ब्रिटिश पॉलिसीज का जोर शोर से
5:50:17क्रिटिसिजम कर रहे थे इनमें से कुछ
5:50:19प्रॉमिनेंट नेशनलिस्ट न्यूज़ पेपर्स थे
5:50:21बंगाल में हिंदू पैतृक अमृत बाजार पत्रिका
5:50:25इंडियन मेरा बंगाली सोम प्रकाश और संजीवनी
5:50:30बॉम्बे में रसग्गुफ्तार नेटिव ओपिनियन
5:50:33इंदु प्रकाश महारथ और केसरी
5:50:37मद्रास में हिंदू स्वदेशी मित्रों आंध्र
5:50:40प्रकाशिक और केरल पत्रिका अप में एडवोकेट
5:50:44हिंदुस्तानी और आजाद पंजाब में ट्रिब्यून
5:50:47अकबर आम और कोहिनूर अगला इंपॉर्टेंट करण
5:50:51था इंडियन का अपने पेस्ट का रे डिस्कवरी
5:50:54कई यूरोपियन स्कॉलर
5:50:57विल्सन रावत सरसों और इंडियन स्कॉलर्स
5:51:01जैसे आरजी भंडारकर ल मित्र और बाद में
5:51:04स्वामी विवेकानंद ने इंडियन हिस्ट्री के
5:51:07आर्ट और कलर को रे डिस्कवर किया जिसकी वजह
5:51:10से इंडियन का सेल्फ मोटिवेशन और
5:51:12कॉन्फिडेंस बड़ा इनमें से कई स्कॉलर्स ने
5:51:15इंडियन रुलर्स जैसे अशोक चंद्रगुप्त और
5:51:18अकबर की पॉलीटिकल अचीवमेंट्स की कहानियां
5:51:21को लोगों तक पहुंचा ब्रिटिश ने इंडिया में
5:51:24अपने रूल को जस्टिफाई करने के लिए अभी तक
5:51:26व्हाइट मांस बर्डन थ्योरी के द्वारा
5:51:28इंडियन को यह बताने की कोशिश की थी की
5:51:31इंडियन बाबरिक और उन सिविलाइज्ड थे जो खुद
5:51:35को गवर्नर नहीं कर सकते थे और इंडियन को
5:51:38सिविलाइज करने हैं लेकिन इंडिया के
5:51:41ग्लोरियस पेस्ट के डिस्कवरी ने इंडियन की
5:51:44कॉन्फिडेंस को बूस्ट किया और उन्हें खुद
5:51:46के कलर पर गर्व करने का एक मौका दिया
5:51:48जिसके थ्रू वो ब्रिटिश आइडिया लॉजिकल
5:51:51डोमिनेंस को चैलेंज कर सकते थे इसके अलावा
5:51:5319th सेंचुरी के सोशियो रिलिजियस रिफॉर्म
5:51:56मूवमेंट ने सोसाइटी के कई वर्गों को
5:51:59जागरूक किया पर एग्जांपल सोशल रिफॉर्मर्स
5:52:02ने कास्ट सिस्टम को क्रिटिसाइज करते हुए
5:52:04कास्ट के बेसिस पर डिवाइडेड इंडियन
5:52:06सोसाइटी में एक सेंस ऑफ यूनिटी को जन्म
5:52:09देने का प्रयास किया इसके अलावा सोशल
5:52:11रिफॉर्म मूवमेंट में वूमेन अपलिफ्टमेंट
5:52:14वूमेन राइट्स विडो रीमैरिज को यंग बंगाल
5:52:17मूवमेंट के फाउंडर हेनरी विवियन डिरोजियों
5:52:20ने सावित्रीबाई पहले के साथ सत्य शोधन
5:52:23समाज ने स्वामी दयानंद सरस्वती के आर्य
5:52:26समाज ने और ईश्वर चंद्र विद्यासागर में भी
5:52:29प्रमोट किया इसके अलावा ब्रिटिश राज के
5:52:32रेडिकल्स ने भी इंडियन में ब्रिटिश राज के
5:52:36प्रति एक नेगेटिव ड्यूटी को जन्म दिया
5:52:38हिस्टोरियन कई ऐसी इंस्टेंस की बात करते
5:52:40हैं जहां इंग्लिश मां ओपनली एजुकेटेड
5:52:43इंडियन को इंसर्ट करते थे 20th सेंचुरी
5:52:47में गांधी जी के साथ हुए रेसियल
5:52:48डिस्क्रिमिनेशन की कहानी तो हम सभी जानते
5:52:50हैं और इसके एग्जांपल्स हमें 19th सेंचुरी
5:52:53में भी मिलते हैं इसके अलावा इंडियन को कई
5:52:56एक्सक्लूसिव इंग्लिशमन क्लब से अलग रखा
5:52:59जाता था और इंडियन को यूरोपीय पेसेजंर्स
5:53:02के साथ ट्रेन कंपार्टमेंट में ट्रैवल करना
5:53:04भी अलाउड नहीं था इन सब ने इंडियन की
5:53:07सेल्फ रिस्पेक्ट को हट करने का कम किया
5:53:09इसके अलावा ब्रिटिश राज की कई ऑफिशल
5:53:12रिप्रेसिव पॉलिसी
5:53:17का सबसे अच्छा एग्जांपल है जिसके थ्रू
5:53:20गवर्नमेंट अपने खिलाफ क्रिटिसिजम को रोकना
5:53:23चाहती थी इसके अलावा 1877 में जब भारत एक
5:53:26बेहद खतरनाक फैमिली से गुर्जर रहा था तभी
5:53:29ब्रिटिश ने एक इंपीरियल दरबार को
5:53:31ऑर्गेनाइजर किया जिसने इंडियन को ब्रिटिश
5:53:34के सेल्फिश एटीट्यूड को एक्सपोज किया 18
5:53:3798 में लिटन ने इंडियन सिविल सर्विसेज की
5:53:40मैक्सिमम आगे को 21 से रिड्यूस करके 19 कर
5:53:43दिया जिससे इंडियन की सिविल सर्विसेज में
5:53:46एंट्री और भी ज्यादा मुश्किल हो गई
5:53:481883 में रिपन की वायसराय शिव के दौरान
5:53:51हुई अल्बर्ट बिल्कुल ट्रबीसी कहानी ना
5:53:54कहानी इमेडिएट फ्लैश पॉइंट वाली जिसके
5:53:57चलते इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड पॉलीटिकल
5:53:59एक्टिविटी में राइस हुआ और 1885 में
5:54:02इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन हुआ इस बिल
5:54:05का मकसद था की क्रिमिनल केसेस में इंडियन
5:54:08जिला मजिस्ट्रेट और सेशन जज को यूरोपीय का
5:54:12ट्रायल करने की परमिशन हनी चाहिए लेकिन कई
5:54:14रेसिस्ट यूरोपियंस ने इस बिल के खिलाफ
5:54:16मैसिव प्रोटेस्ट ऑर्गेनाइज्ड कर इसे रॉक
5:54:19दिया और ये डिक्लेअर किया की इंडियन वन
5:54:22नोट
5:54:24कर दिया गया
5:54:35जो इंडिया
5:54:37क्योंकि इसने इंडियन को एक्रॉस रीजन और
5:54:40कम्युनिटी यूनिट करने में हेल्प किया था
5:54:42तो दोस्तों यह थे इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड
5:54:45नेशनल मूवमेंट के राइस के करण वैसे तो
5:54:48इंडिया में ट्रॉली पान इंडिया ऑर्गेनाइज्ड
5:54:51पॉलीटिकल स्ट्रगल की शुरुआत 1885 में
5:54:53इंडियन नेशनल कांग्रेस के फॉर्मेशन से हुई
5:54:56लेकिन आईएनसी के पहले भी मिड-19 सेंचुरी
5:55:00में कई ऐसे ऑर्गेनाइजेशंस एस्टेब्लिश हुए
5:55:02जिन्होंने आईएनसी के फॉर्मेशन को एक बेस
5:55:06प्रोवाइड करने का कम किया तो चलिए अब कुछ
5:55:09इंपॉर्टेंट परी कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशन की
5:55:12चर्चा करते हैं
5:55:14पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशंस बिफोर इंडियन
5:55:16नेशनल कांग्रेस
5:55:18दोस्तों इंडिया में ऑर्गेनाइज्ड पॉलीटिकल
5:55:21एक्टिविटीज और इंडियन नेशनल मूवमेंट के
5:55:23जनक कहानी ना कहानी राजा राममोहन राय को
5:55:27माना जाता है जिन्होंने भारत में सबसे
5:55:29पहले सोशल और पॉलीटिकल इश्यूज को
5:55:31ब्रिटिशर्स के सामने रखना का कम किया
5:55:33उन्होंने अपने ब्रह्म समाज के थ्रू वूमेन
5:55:37अपलिफ्टमेंट कास्ट सिस्टम की प्रॉब्लम्स
5:55:39और सिविल सर्विसेज रिफॉर्म्स को लेकर
5:55:41लोगों में अवेयरनेस फैलाने का कम किया
5:55:43इसके अलावा 1857 की क्रांति के पहले बंगाल
5:55:47बिहार और उड़ीसा के लैंडलॉर्ड ने फर्स्ट
5:55:50ऑर्गेनाइज्ड पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन को
5:55:521837 में कोलकाता में एस्टेब्लिश किया था
5:55:55जो लैंडलॉर्ड के इंटरेस्ट के इश्यूज को
5:55:58प्रेजेंट कर रहे थे यह ऑर्गेनाइजेशन बाद
5:56:01में 1851 में बंगाल ब्रिटिश इंडिया
5:56:04सोसाइटी के साथ ब्रिटिश इंडियन संगठन में
5:56:06मर्ज कर दिया गया
5:56:13और पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशंस के क्रिएशन की
5:56:16आवाज और ज्यादा बुलंद हुई
5:56:18प्रोटीन प्रोटीन 66 में ग्रैंड रोड मां ऑफ
5:56:21इंडिया का ही जान वाले दादाभाई नौरोजी ने
5:56:23लंदन में ईस्ट इंडिया संगठन को एस्टेब्लिश
5:56:26किया जिसमें उन्होंने इंडियन की
5:56:28प्रॉब्लम्स को ब्रिटिश गवर्मेंट के सामने
5:56:30रखा नौरोजी ने अपनी किताब पावर्टी और उन
5:56:34ब्रिटिश रूल इन इंडिया और स्कॉलर आरसी डेट
5:56:37ने अपनी किताब डी इकोनामिक हिस्ट्री ऑफ
5:56:39इंडिया के थ्रू इंडियन के एक्सप्लोइटेशन
5:56:41और पावर्टी को एक सिस्टमैटिक तरीके से
5:56:44उजागर करने का कम किया उन्होंने ड्रेन और
5:56:47वेल्थ थ्योरी के थ्रू इंडियन को समझाया की
5:56:50कैसे ब्रिटिशर्स इंडिया को डेवलप नहीं कर
5:56:52रहे थे बल्कि उसे एक्सप्लोइट कर और गरीब
5:56:55बनाते जा रहे थे इसके अलावा 1876 के समय
5:56:58सुरेंद्र नाथ बनर्जी नाम की एक अच्छी
5:57:01राइटर और लोटर और यंगर नेशनलिस्ट लीडर
5:57:04आनंद मोहन बस ने बंगाल में इंडियन संगठन
5:57:08को एस्टेब्लिश किया यह आगे बंगाल के कई
5:57:11गांव और काशन से लोगों को पॉलिटिकल यूनिट
5:57:14करने वाला था इंडियन सिविल सर्विस
5:57:16एग्जामिनेशन में आगे लिमिट रिफॉर्म्स
5:57:18एक्ट और वर्नाकुलर प्रेस एक्ट के अगेंस्ट
5:57:21एजीटेशन में भी इसी ऑर्गेनाइजेशन ने
5:57:23एक्टिवली पार्टिसिपेट किया था बाद में
5:57:26इंडियन संगठन की कुछ ब्रांचेस बंगाल के
5:57:29बाहर भी एस्टेब्लिश हुई जो काफी फेमस हुई
5:57:31लेकिन इसे जो इंडिया बॉडी का रैकेट्जिनेशन
5:57:34नहीं मिला क्योंकि इनकी डिमांड्स लार्जली
5:57:36लोकल रीजंस के इश्यूज तकलिमिटेड थी बाकी
5:57:39की पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन का फंक्शनिंग और
5:57:42स्कोप भी काफी नैरो और लिमिटेड था जिन्हें
5:57:45ज्यादा रैकिंग मिशन नहीं मिला बंगाल के
5:57:48अलावा इंडिया की कई और पार्ट्स में
5:57:50अलग-अलग ऑर्गेनाइजेशन बने जिसमें जस्टिस
5:57:53राणा देने पुनः सार्वजनिक सभा को
5:57:55एस्टेब्लिश किया जो ब्रिटिश पॉलिसीज और
5:57:58इकोनामिक इश्यूज को जर्नल्स के थ्रू रेस
5:58:00कर रहे थे साथ में मद्रास महाजन सभा 1881
5:58:04और मुंबई प्रेसीडेंसी संगठन 1885 ने भी
5:58:08ब्रिटिश गवर्नमेंट की एडमिनिस्ट्रेटिव और
5:58:10लेजिसलेटिव पॉलिसी का भरपूर क्रिटिसिजम
5:58:13किया
5:58:13खैर अब समय ए गया था जहां कई नेशनलिस्ट
5:58:17लीडर्स को लगा की सारे पॉलीटिकल
5:58:19ऑर्गेनाइजेशन को एक यूनिफाइड तरीके से
5:58:22ब्रिटिश गवर्मेंट से अपनी मांगों को
5:58:24पॉलीटिकल तरीके से बावा सकते हैं इसलिए
5:58:27इंडियन संगठन ने कोलकाता में दिसंबर 1883
5:58:31को एक जो इंडिया नेशनल कॉन्फ्रेंस को
5:58:34ऑर्गेनाइज किया जिसमें बंगाल के साथ बाहर
5:58:37की लीडर्स भी शामिल हुए और फिर फाइनली
5:58:401885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन
5:58:43हुआ चलिए ब्रीफली नजर डालते हैं फ्री
5:58:46इंडियन नेशनल कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशंस की
5:58:48डिमांड्स पर
5:58:51डिमांड्स ऑफ फ्री कांग्रेस ऑर्गेनाइजेशन
5:58:54दोस्तों फ्री कांग्रेस लीडर्स की सबसे
5:58:57पहले डिमांड थी पब्लिक एक्सपेंडिचर को कम
5:58:59करना जिसके थ्रू ब्रिटिश
5:59:03को फुलफिल कर रहे थे दूसरी डिमांड थी
5:59:06इंडियन सिविल सर्विसेज में रिफॉर्म्स
5:59:08जिसकी चर्चा हमने पहले की इसके अलावा यह
5:59:11ऑर्गेनाइजेशंस लेजिसलेटिव काउंसिल में
5:59:14इंडियन के डिमांड को भी पुश कर रहे थे
5:59:16ताकि इंडियन को अपने देश की गवर्नेंस में
5:59:19रिप्रेजेंटेशन मिले वो लेजिसलेटिव काउंसिल
5:59:22को एक पॉलीटिकल प्लेटफॉर्म की तरह उसे कर
5:59:24ब्रिटिश रिप्रेसिव पॉलिसी का पॉलीटिकल
5:59:27विरोध भी करना चाहते थे ताकि सिविल
5:59:29लिबर्टीज पर अटैक कम हो सके
5:59:32वह प्रेस की लिबर्टी के भी सपोर्टर थे
5:59:34इसलिए इनमें से कई ऑर्गेनाइजेशंस ब्रिटिश
5:59:38गवर्नमेंट के वर्नाकुलर प्रेस एक्ट जैसे
5:59:40पॉलिसीज के खिलाफ एजीटेशन भी कर रहे थे
5:59:43फाइनली उनका डिमांड था की मॉडर्न एजुकेशन
5:59:46को विलेज तक पहुंचा जाए जो अभी तक सिर्फ
5:59:49कुछ लिमिटेड सेक्शंस तक ही सी में था
5:59:54कंक्लुजन
5:59:55तो दोस्तों ये भी कहानी इंडियन नेशनल
5:59:58मूवमेंट के शुरुआती दूर की जहां हमने देखा
6:00:01की कैसे इंडिया में सेकंड हाफ ऑफ 19थ
6:00:05सेंचुरी में एक नेशनल वैगनिंग के चलते
6:00:07इंडियन ने अपनी प्रॉब्लम्स और इश्यूज को
6:00:10रिलीज किया और साथ में पॉलीटिकल रिफॉर्म्स
6:00:13की बात की अब हम अगले वीडियो में इंडियन
6:00:16नेशनल कांग्रेस के फॉर्मेशन और उसके
6:00:18अचीवमेंट की बात करेंगे की कैसे आईएनसी ने
6:00:21इंडियन नेशनल मूवमेंट को एक प्रॉपर
6:00:24प्लेटफॉर्म दिया और धीरे-धीरे भारत के सभी
6:00:27वर्गों को इकट्ठा कर अंग्रेजन को भारत से
6:00:30भागने में सफलता हासिल की
6:00:33एरिया ऑफ मॉडरेट्स 1885 2905 दोस्तों हमने
6:00:39पिछली वीडियो में देखा की कैसे 1857 की
6:00:42क्रांति के बाद भारत में नेशनलिज्म के करण
6:00:45शुरू होते हैं कैसे वेरियस पॉलीटिकल और
6:00:49सोशल ऑर्गेनाइजेशंस का गठन होता है और किस
6:00:52तरह वो ब्रिटिशर्स के एक्सप्लोइटेशन को आम
6:00:54जनता के सामने उजागर करते हैं हमने ये भी
6:00:57देखा की किन कर्म से नेशनल मूवमेंट की
6:01:00शुरुआत हुई और कैसे इस मूवमेंट ने खुद को
6:01:03सस्टेन किया आई अब हम बात करेंगे इंडियन
6:01:06नेशनल मूवमेंट के नेक्स्ट फैज की जिसमें
6:01:09इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन हुआ और
6:01:11जिसने इंडियन पॉलिटिक्स को एक नया मोड
6:01:14दिया आई शुरू करते हैं इंडियन नेशनल
6:01:16कांग्रेस के फॉर्मेशन की कहानी से
6:01:18फॉर्मेशन ऑफ इंडियन नेशनल कांग्रेस
6:01:21दोस्तों इंडियन नेशनल कांग्रेस आने वाले
6:01:24समय में इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल को लीड
6:01:27करने वाला अंब्रेला ऑर्गेनाइजेशन बने वाला
6:01:29था लेकिन इसके फॉर्मेशन का इतिहास काफी
6:01:33इंटरेस्टिंग और कंट्रोवर्सी का मुद्दा रहा
6:01:34है ऐसा इसलिए क्योंकि इंडियन नेशनल
6:01:37कांग्रेस के गठन का क्रेडिट कई हिस्टोरियन
6:01:40एक रिटायर्ड इंग्लिश सिविल सर्वेंट ओ हम
6:01:43को देते हैं ना की इंडियन लीडर्स को इस
6:01:46आर्गुमेंट को हम सेफ्टी वाल्व थ्योरी के
6:01:49नाम से जानते हैं दोस्तों सेफ्टी वाल्व
6:01:52थ्योरी कहती है की ब्रिटिशर्स ने 1857 की
6:01:55क्रांति को देखा था और उन्हें ये मालूम था
6:01:58की इंडियन पॉलीटिकल सिचुएशन फिर से ऐसे कई
6:02:01मेजर रिबेलियंस को जन्म दे शक्ति थी इसलिए
6:02:04वह चाहते थे की ऐसी टेंशंस को अवॉइड किया
6:02:07जा सके और इसका सबसे अच्छा तरीका था
6:02:10इंडियन को एक पॉलीटिकल प्लेटफॉर्म
6:02:12प्रोवाइड कर उनके गुस्से और डिसइनेंट को
6:02:15बिल्ड अप होने से रोकना ये एक साइकोलॉजिकल
6:02:18गेम की तरह देखा जा सकता है जहां नाराज
6:02:21इंडियन अपनी एनर्जी को एटलिस्ट डिस्कस कर
6:02:24सकें जो उन्हें एक सेंस ऑफ एंपावरमेंट
6:02:26देने में हेल्प करेगा भले ही उनकी एक्चुअल
6:02:29कंडीशन में कोई बदलाव आए या ना आए इसलिए
6:02:31इस थ्योरी प्रमोटर्स कहते हैं की इंडियन
6:02:35नेशनल कांग्रेस का फॉर्मेशन आओ हम द्वारा
6:02:37इंडिया के वायसराय लॉर्ड डफर ने किया था
6:02:40ना की इंडियन नेशनलिस्ट ने ऐसी दाव किया
6:02:44जाते हैं की आओ हम ने दफन के अलावा कई और
6:02:47ब्रिटिशर्स जैसे
6:02:49लॉर्ड रिपन जॉन ब्राइट टेट्रा के साथ भी
6:02:53मीटिंग्स की थी इसके अलावा कई ब्रिटिशर्स
6:02:55जैसे सर विलियम वेडिबल जॉर्ज यू चार्ल्स
6:02:59ब्रांड हमें इस इंडिया वी में सपोर्ट भी
6:03:02किया था हालांकि ये थ्योरी हिस्टोरियन
6:03:05द्वारा लाजली रिजेक्ट की जा चुकी है लेकिन
6:03:08फिर भी इंडियन नेशनल कांग्रेस में ब्रिटिश
6:03:11कंट्रीब्यूशन को नजर अंदाज नहीं किया जा
6:03:13सकता ब्रिटिश कंट्रीब्यूशन को खुद गोपाल
6:03:15कृष्णा गोखले ने 1913 में डिस्क्राइब किया
6:03:19और कहा था की बिना इंग्लिश सपोर्ट के
6:03:21आईएमसी जैसा कोई भी पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन
6:03:24फॉर्म नहीं हो पता क्योंकि अगर ब्रिटिश
6:03:26गवर्नमेंट चाहती तो किसी भी पॉलीटिकल
6:03:28ऑर्गेनाइजेशन को इजीली सरप्राइज कर शक्ति
6:03:31थी इसीलिए गोखले खुद लाइटनिंग कंडक्टर
6:03:34थ्योरी में बिलीव करते थे इस थ्योरी के
6:03:36हिसाब से ब्रिटिशर्स ने आईएमसी को फॉर्म
6:03:38नहीं किया बल्कि इंडियन नेशनलिस्ट ने
6:03:41ब्रिटिशर्स की सहायता से आईएमसी को फॉर्म
6:03:43किया ताकि ब्रिटिश गवर्मेंट का इंडियन के
6:03:46खिलाफ डिस्ट्रस्ट के माहौल में भी आईएमसी
6:03:49सरवाइव कर सके और इंडियन के डिमांड्स को
6:03:51वॉइस मिल सके इसके अलावा आईएमसी में कई
6:03:54इंडियन लीडर्स का रूल था जो यह बताता है
6:03:57की आओ हम का आईएमसी के फॉर्मेशन में रूल
6:04:00लाजली फैसिलिटेटर की तरह था इंडियन लीडर्स
6:04:04ने ही आईएनसी को एक स्ट्रांग ऑर्गेनाइजेशन
6:04:06की तरह डेवलप किया जिसमें दादाभाई नौरोजी
6:04:10बदरुद्दीन तैयब जी फिरोजशाह मेहता आनंद
6:04:13चरलू सन बनर्जी आरसी डेट अंबोस गोपाल
6:04:17कृष्णा गोखले जस्टिस राणा दी और बाल
6:04:20गंगाधर तिलक जैसे इंपॉर्टेंट लीडर्स थे
6:04:23आईएमसी में कई वूमेन लीडर्स कभी
6:04:25कंट्रीब्यूशन रहा जैसे 1890 में कोलकाता
6:04:28यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट कदंबिनी गांगुली
6:04:31पहले वूमेन बनी जिन्होंने कांग्रेस सेशन
6:04:34को एड्रेस किया था खैर आओ हम ने इंडियन
6:04:37लीडर्स को कांटेक्ट किया और इंडियन नेशनल
6:04:40कांग्रेस का पहले सेशन 1885 में बॉम्बे
6:04:43में ऑर्गेनाइजर किया गया जिसे डब्लू सी
6:04:45बानाजी ने प्रेसीडे किया था इसमें लगभग 72
6:04:49डेलीगेट ने भाग लिया था धीरे-धीरे आईएनसी
6:04:52की पापुलैरिटी बढ़ाने लगी और 1889 तक
6:04:55इंडियन डेलिगेट्स की इसमें संख्या 2000 तक
6:04:58पहुंच गई लेकिन आईएनसी इनिशियली एक
6:05:01ऑर्गेनाइजेशन ही रहा जो एजुकेटेड मिडिल
6:05:04क्लासेस द्वारा डोमिनेटेड था आईएमसी के
6:05:07लीडर्स लाजली लॉयर्स जर्नलिस्ट ट्रेडर्स
6:05:10इंडस्ट्री
6:05:18में फ्रेंडली रिलेशंस को प्रमोट करना ताकि
6:05:21पॉलीटिकल यूनिफिकेशन मदद मिले और आईएमसी
6:05:25को और स्ट्रैंथ मिले आईएमसी का दूसरा टीम
6:05:28था नेशनल यूनिटी को एक्रॉस कास्ट क्लास और
6:05:32रिलिजियस लाइंस में डेवलप करना ताकि
6:05:34पॉपुलर डिमांड्स को ब्रिटिश गवर्मेंट के
6:05:36सामने एक यूनिफाइड तरीके से रखा जा सके और
6:05:39साथ में पब्लिक ओपिनियन को ट्रेनिंग के
6:05:41थ्रू ऑर्गेनाइजर किया जा सके आईएमसी ने
6:05:44अपने फॉर्मेशन के बाद कई रिफॉर्म्स की
6:05:46डिमांड्स ब्रिटिश के सामने राखी जिनकी
6:05:48चर्चा अब हम करेंगे शुरू करेंगे सबसे
6:05:51इंपॉर्टेंट मुद्दे से ऑफ कांस्टीट्यूशनल
6:05:54रिफॉर्म्स
6:05:56कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स दोस्तों आईएमसी
6:05:59का सबसे पहले मुद्दा था कांस्टीट्यूशनल
6:06:02रिफॉर्म्स का शुरुआती दूर में नेशनलिस्ट
6:06:05लीडर्स की डिमांड थी की गवर्नमेंट में
6:06:07उनकी हिस्सेदारी ज्यादा से ज्यादा हो
6:06:09बेस्ड ऑन डी प्रिंसिपल
6:06:17में एक्सपेंशन और वोटिंग राइट्स की डिमांड
6:06:20की वह चाहते थे की काउंसिल में इलेक्ट्रिक
6:06:23सेंटिटिव्स को मेंबरशिप मिले और साथ में
6:06:25मेंबर्स की पावर भी इंक्रीज हो इसके चलते
6:06:28ही ब्रिटिशर्स को इंडियन काउंसिल एक्टिव
6:06:301892 को पास करना पड़ा जिसकी वजह से
6:06:33इंपीरियल लेजिसलेटिव काउंसिल आज वेल आज
6:06:35प्रोविंशियल काउंसिल में मेंबर्स इंक्रीज
6:06:38हुए काउंसिल को एनुअल बजट डिस्कस करने की
6:06:41ताकत भी दी गई लेकिन वोटिंग पावर नहीं
6:06:43दिया गया जिसकी वजह से नेशनल एक्टिव 1892
6:06:47से डिसेटिस्फाइड थे और प्रोटेस्ट कर रहे
6:06:49थे
6:06:50नेशनलिस्ट की डिमांड थी की पब्लिक पर्स
6:06:53में इंडियन का कंट्रोल हो ना की
6:06:55ब्रिटिशर्स का इसीलिए नोट टैक्सेशन विदाउट
6:06:58रिप्रेजेंटेशन स्लोगन को प्रमोट किया गया
6:07:01जो अमेरिकन रिवॉल्यूशन से लिया गया था साथ
6:07:04में सिर्फ कुछ मेंबर्स ही इंडियन द्वारा
6:07:07इलेक्ट हो सकते थे वह भी इनडायरेक्ट इसके
6:07:10अलावा अभी भी नॉन इलेक्ट्रिक ऑफिशल्स की
6:07:13मेजॉरिटी कंटिन्यू रही बाद में 28 सेंचुरी
6:07:16की शुरुआत में नेशनलिस्ट लीडर्स ने
6:07:19ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के सेल्फ गवर्निंग
6:07:21मॉडल को इंडिया में
6:07:23स्वराज के कॉन्सेप्ट के थ्रू रेस किया
6:07:24सबसे पहले स्वराज की डिमांड गोखले के
6:07:28बनारस सेशन 1905 और दादाभाई नौरोजी के
6:07:32कोलकाता सेशन 196 से हुई जिसकी चर्चा हम
6:07:36आने वाले वीडियो में करेंगे
6:07:40सबसे इंपॉर्टेंट एजेंडा को ऑफ इकोनॉमिक्स
6:07:45इकोनामिक रिफॉर्म्स दोस्तों अर्ली
6:07:49नेशनलिस्ट लीडर्स ने ब्रिटिश इकोनामिक
6:07:51पॉलिसीज को एक्सपोज किया और समझाया की
6:07:54कैसे वो हमारी इकोनामिक बैकवार्डनेस
6:07:56पार्वती और फेलियर एग्रीकल्चर इन मॉडर्न
6:07:59इंडस्ट्री का करण है
6:08:01दादाभाई नौरोजी ने ड्रेनो वेल्थ थ्योरी के
6:08:04थ्रू ये क्लेम किया की ब्रिटिश इंडियन
6:08:07वेल्थ को इंडिया में इन्वेस्ट करने की
6:08:09बजाएं उसे इंग्लैंड ले जा रहे थे यह
6:08:12थ्योरी इंडियन नेशनलिस्ट मूवमेंट के
6:08:14इकनॉमिक एस्पेक्ट का फाउंडेशन स्टोन बनी
6:08:16खैर अर्ली नेशनलिस्ट ने पावर्टी को
6:08:20इरेडिकेट करने के लिए मॉडर्न इंडस्ट्रीज
6:08:22को तेज गति देने का सजेशन भी दिया और साथ
6:08:26में नेशनलिस्ट छह रहे थे की ब्रिटिश
6:08:28गवर्नमेंट टैरिफ और गवर्मेंट के थ्रू
6:08:31मॉडर्न इंडस्ट्रीज को प्रमोट करें इसके
6:08:33अलावा लेटर फैज में नेशनलिस्ट लीडर्स ने
6:08:36स्वदेशी जैसे न्यू इतिहास को पापुलराइज भी
6:08:39किया और ब्रिटिश गुड्स के बॉयकॉट को
6:08:41प्रमोट किया अपनी डिमांड्स को पूरा करने
6:08:44के लिए इंडियन लीडर्स कई आंदोलन भी किया
6:08:46जिम लैंड रिवेन्यू में रिडक्शन प्लांटेशन
6:08:50लेबर्स के वर्किंग कंडीशंस में
6:08:52इंप्रूवमेंट साल्ट टैक्स का इवोल्यूशन और
6:08:55ब्रिटिश गवर्मेंट की मिलिट्री एक्सपेंडिचर
6:08:58में रिडक्शन जैसी डिमांड्स इंक्लूड थी
6:09:00इकोनॉमिक्स के बाद बात करते हैं
6:09:03एडमिनिस्ट्रेटिव और अदर रिफॉर्म्स की
6:09:06एडमिनिस्ट्रेटिव और अदर रिपोर्ट्स
6:09:08नेशनलिस्ट मांग कर रहे थे की सिविल
6:09:11सर्विसेज में इंडियन को इंक्लूड किया जाए
6:09:13ताकि इंडियन का गवर्मेंट में
6:09:16रिप्रेजेंटेशन बाढ़ सके वह यह उम्मीद कर
6:09:18रहे थे की इंडियन सर्विसेज ब्रिटिश
6:09:21गवर्नमेंट को इंडियन इश्यूज पर सेंसटाइज
6:09:23करेगी जिससे उनकी कंडीशंस इंप्रूव हो
6:09:26सकेंगे इसके अलावा फाइनेंशली बात करें तो
6:09:29सर्विसेज में यूरोपियन मोनोपोली के दो
6:09:32मुख्य नुकसान भी थे जिसके चलते नेशनलिस्ट
6:09:35की डिमांड कर रहे थे पहले यह था की से
6:09:39क्वालिफिकेशन होने के बाद भी यूरोपियन
6:09:42ऑफिशल्स को काफी ज्यादा सैलरी और
6:09:44एमोल्यूमेंट्स मिलते थे है जिसकी वजह से
6:09:47इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव कॉस्ट काफी ज्यादा
6:09:49हो जाता था वहीं इंडियन ऑफिशल्स की सैलरीज
6:09:52और एमोल्यूमेंट्स कम होने के करण
6:09:54एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपेंडिचर काफी कम हो
6:09:57सकता था दूसरा यूरोपियन ऑफिशल्स अपनी
6:10:00सैलरी का ज्यादा हिस्सा और पेंशन को
6:10:02इंग्लैंड में भेज देते थे जिसकी वजह से
6:10:05इंडियन ट्रेजरी का ड्रीम होता था अगर हम
6:10:08जुडिशल रिफॉर्म की बात करें तो नेशनलिस्ट
6:10:11की एक मेजर डिमांड थी सिपरेशन ऑफ पावर्स
6:10:13यानी एग्जीक्यूटिव और ज्यूडिशरी का अलग
6:10:16करना इसके अलावा नेशनलिस्ट ने ये डिमांड
6:10:19भी राखी की ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडियन पे
6:10:22ट्रस्ट करें और उन्हें सेल्फ डिफेंस के
6:10:24लिए आर्म्स रखना और उसे करने की परमिशन
6:10:27दें बाकी डिमांड्स में इंक्लूड था वेलफेयर
6:10:31स्टेट का एस्टेब्लिशमेंट मेडिकल और हेल्थ
6:10:33फैसेलिटीज का एक्सपेंशन मॉडर्न एजुकेशन का
6:10:36मांस लेवल पर स्प्रेड और टेक्निकल एजुकेशन
6:10:38और हायर एजुकेशन का प्रमोशन ताकि इंडियन
6:10:42को ब्रिटिश रूल के इंपैक्ट का रिलाइजेशन
6:10:44हो सके
6:10:50एग्रीकल्चरल बैंक्स को एस्टेब्लिश करने की
6:10:52भी मांग की
6:10:54दोस्तों यह मेंशन जरूरी है की नेशनलिस्ट
6:10:57का ध्यान एन केवल एडमिनिस्ट्रेटिव
6:10:59रिफॉर्म्स तक्सीम में था बल्कि पेज्जंस और
6:11:02फार्मर्स के एग्रीकल्चर रिफॉर्म्स पर भी
6:11:04था जिसमें फार्मर्स को फेमेन से बचाने के
6:11:07लिए उन्होंने इरिगेशन को एक्सपेंड करने की
6:11:10मांग की नेशनलिस्ट लीडर्स ने पुलिस सिस्टम
6:11:12को भी रिफॉर्म करने की मांग की जिससे की
6:11:15पुलिस ऑनेस्ट और सही तरीके से कम करें
6:11:17ताकि लोगों का विश्वास पुलिस पर बढ़ लेटर
6:11:21नेशनलिस्ट लीडर्स ने इंडियन वर्कर्स और इन
6:11:24डेंजर लेबर्स को भी डिफेंड किया जो साउथ
6:11:27अफ्रीका मलाई मॉरीशस वेस्टइंडीज और
6:11:30ब्रिटिश गायन में कम कर रहे थे ताकि उनके
6:11:33वर्किंग कंडीशन को बेहतर और वेजेस को
6:11:35इंक्रीज किया जा सके इसके अलावा वो डिफेंस
6:11:39और सिविल राइट्स की भी मांग कर रहे थे
6:11:41इसमें फ्रीडम ऑफ स्पीच और प्रेस के
6:11:43इंपॉर्टेंट सबसे इंपॉर्टेंट मुद्दे थे
6:11:45क्योंकि अब तक नेशनलिस्ट को इनकी
6:11:48इंर्पोटेंस समझ ए गई थी पर एग्जांपल 1897
6:11:52में जब बॉम्बे गवर्नमेंट ने तिलक को
6:11:55ब्रिटिश गवर्नमेंट के अगेंस्ट बोलने और
6:11:57लिखने के लिए अरेस्ट कर लिया और पुणे के
6:11:59दो लीडर्स नटू ब्रदर्स को भी विदाउट
6:12:01ट्रायल अरेस्ट कर लिया गया तब पूरे देश
6:12:04में प्रोटेस्ट देखें गए इसी दूर में तिलक
6:12:07एक पावरफुल लीडर की तरह इंडियन पॉलीटिकल
6:12:09सीन में इमेज भी हुए थे तो दोस्तों यह तो
6:12:13बात हुई वेरियस रिफॉर्म्स की अब बात करते
6:12:15हैं इंडियन नेशनल कांग्रेस के पॉलीटिकल
6:12:17मैथर्ड की जिसको नेशनलिस्ट लीडर्स ने
6:12:20अडॉप्ट किया मैथर्ड ऑफ इंडियन नेशनल
6:12:22कांग्रेस दोस्तों 1885 से 1905 तक आईएमसी
6:12:27में मॉडरेट लीडर्स का डोमिनेंस रहा जैसे
6:12:30दादाभाई नौरोजी सुरेंद्रनाथ बनर्जी आरसी
6:12:33डेट वर्क बनर्जी फिरोज शाह मेहता गोपाल
6:12:36कृष्णा गोखले रासबिहारी बस और एमजी
6:12:41ग्रैजुएल रिफॉर्म्स और स्लो चेंज में
6:12:43विश्वास रखते थे वो ब्रिटिश रिप्रेशन से
6:12:46और इसीलिए वो किसी भी तरीके के नॉन
6:12:50कांस्टीट्यूशनल स्ट्रगल में विश्वास नहीं
6:12:52करते थे
6:12:53इसीलिए उनके मैथर्ड को पिटीशन प्रेयर्स और
6:12:56प्रोटेस्ट या 3p मॉडल के लेंस से देखा
6:12:59जाता था मॉडरेट लीडर्स अपने इश्यूज को
6:13:01जुडिशल रूट पिटीशन तू गवर्मेंट और राइटिंग
6:13:04इन न्यूजपेपर्स जैसे टूल्स के थ्रू राज
6:13:06करते थे और ये उम्मीद करते थे की अगर
6:13:09ब्रिटिशर्स को इंडियन के हालातो के बड़े
6:13:11में अवेयर करवाया गया तो वो उन्हें
6:13:13सुधारने की कोशिश करेंगे वो अपनी स्पीशीज
6:13:17के थ्रू पॉलीटिकल अवेयरनेस को स्प्रेड
6:13:19करने के साथ ही साथ पब्लिक ओपिनियन को भी
6:13:21रेस करते थे इससे मॉडरेट लीडर्स ने इंडियन
6:13:24फ्रीडम मूवमेंट को फाउंडेशन देने का कम
6:13:27किया और डिफरेंट रीजन के लीडर्स को एक
6:13:30पॉलीटिकल प्लेटफॉर्म प्रोवाइड किया इन डी
6:13:32फॉर्म ऑफ आई एन सी
6:13:35के प्रति एटीट्यूड को समझते हैं
6:13:39दोस्तों ब्रिटिश गवर्नमेंट शुरू से ही
6:13:43इंडियन नेशनल मूवमेंट के प्रति काफी
6:13:45होस्टेस
6:13:46ने नेशनल लीडर्स को
6:13:51ब्राह्मण और वायलेट लिंग से संबोधित किया
6:13:54ब्रिटिश गवर्नमेंट ने आईएमसी की कुछ
6:13:57डिमांड्स को एक्सेप्ट भी किया लेकिन
6:13:59ज्यादातर डिमांड्स को नेगलेक्ट किया साथ
6:14:01में आईएमसी के प्रोटेस्ट को रिप्रेसिव
6:14:04पुलिस एक्शन के थ्रू ढाबा दिया गया और
6:14:06सेडिशन के चार्ज में नेशनलिस्ट लीडर्स को
6:14:09जय में दाल दिया गया जिसमें तिलक का नाम
6:14:11इंपॉर्टेंट है खैर अब हम भी वेलवेट करते
6:14:15हैं आईएमसी में मॉडरेट फैज के सक्सेस को
6:14:18इवेलुएशन मॉडरेट फैज दोस्तों मॉडरेट
6:14:22लीडर्स की सबसे इंपॉर्टेंट सक्सेस थी की
6:14:25इन्होंने नेशनल और वीकनिंग को प्रमोट किया
6:14:27इसके साथ ही ब्रिटिश का असली चेहरा इंडियन
6:14:31के सामने एक्सपोज करने का कम भी किया
6:14:33नेशनल मूवमेंट के मॉडरेट फैज में आइडिया
6:14:36ऑफ डेमोक्रेसी को भी प्रोपागेट किया गया
6:14:38था मॉडरेट लीडर्स ने ब्रिटिश रूल के
6:14:41इकोनामिक करैक्टर को एक्सपोज करने के साथ
6:14:43एक आम पॉलीटिकल और इकोनामिक प्रोग्राम को
6:14:49इंडियन को यह मोटिवेशन और कॉन्फिडेंस दिया
6:14:53की वो खुद को गवन कर सकते हैं और उन्हें
6:14:55ब्रिटिश की कोई जरूर नहीं है दोस्तों यह
6:14:59तो हुई कहानी इंडियन नेशनल कांग्रेस के
6:15:02फॉर्मेशन से लेकर मॉडरेट फैज के
6:15:04अचीवमेंट्स तक की आने वाली वीडियो में हम
6:15:07इंडियन नेशनल कांग्रेस के
6:15:09एक्सट्रीमिस्ट्रेस को देखेंगे जिसने नेशनल
6:15:12मूवमेंट को एक नई दिशा दिखाने का कम किया
6:15:27फॉर्मेशन और उसके मॉडरेट फेस को डिस्कस
6:15:30किया था
6:15:32आज हम बात करेंगे
6:15:35नाम से जाना जाता है इसके अलावा हम
6:15:39स्वदेशी और होमरूल लीग मूवमेंट को भी
6:15:42डिटेल में डिस्कस करेंगे तो आई शुरू करते
6:15:45हैं
6:15:46इंट्रोडक्शन
6:15:49दोस्तों
6:15:5028th सेंचुरी की शुरुआत में इंडिया में
6:15:52नेशनल लीडर्स की एक नई क्लासीमझ होती है
6:15:55जो मॉडरेट ग्रुप से काफी अलग थी यह
6:15:59ब्रिटिश अंपायर के अगेंस्ट और भी ज्यादा
6:16:01एग्रेसिव डांस लेते हैं और इन्हें
6:16:03एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स के नाम से जाना जाता
6:16:05है इसमें ज्यादातर यंग लीडर्स
6:16:09लीडर्स की सॉफ्ट और परसूएसिव अप्रोच पर
6:16:12यकीन नहीं था एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स की
6:16:15लिस्ट में मुख्यतः नाम आता है बाल गंगाधर
6:16:17तिलक लाल लाजपत राय विपिन चंद्र पाल और
6:16:21अरविंद घोष
6:16:23के बड़े में डिटेल में डिस्कस करने से
6:16:26पहले यह समझना जरूरी है की ऐसे क्या करण
6:16:29थे जिनकी वजह से इंडियन नेशनल कांग्रेस
6:16:32में इनका राइस होता है तो आई समझते हैं
6:16:39कॉसेस पर डी राइस ऑफ एक्सट्रीमीज्म
6:16:43दोस्तों एक्सट्रीमिस्ट फैज के उदय के पीछे
6:16:46बहुत से करण जिम्मेदार थे आई एक-एक करके
6:16:49उनको समझते हैं सबसे पहले करण था ब्रिटिश
6:16:53रूल के थ्रू नेचर की पहचान होना अर्ली
6:16:56नेशनलिस्ट लीडर्स ने ब्रिटिशर्स को
6:16:58एक्सपोज करने का कम किया था उन्होंने अपनी
6:17:01राइटिंग्स और स्टैटिसटिक्स डाटा की हेल्प
6:17:04से यह साबित कर दिया था की ब्रिटिश रूल और
6:17:06उसकी पॉलिसी की वजह से ही इंडिया की
6:17:09इकोनामिक हालात इतनी खराब हो चुकी है और
6:17:11गरीबी दिन रोज बढ़नी जा रही है इसी
6:17:15अवेयरनेस का नतीजा था एक स्ट्रीमिस्ट
6:17:17एडोलॉजी की ग्रोथ इन्हें समझ ए जाता है की
6:17:21इंडिया की प्रोग्रेस ब्रिटिश रूल में
6:17:23पॉसिबल ही नहीं है
6:17:27वेस्टर्नाइजेशन के अगेंस्ट एक रिएक्शन के
6:17:29रूप में भी देखा जाता है क्रिश्चियन
6:17:34के लिए एक चैलेंज बन रहे थे
6:17:37मैटेरियलिस्टिक और इंडिविजुअल्स वेस्टर्न
6:17:39सिविलाइजेशन इंडियन सिविलाइजेशन की वालुज
6:17:43को धीरे-धीरे एरोड करती जा रही थी
6:17:46एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स इंडियन स्पिरिचुअल
6:17:49हेरिटेज से इंस्पिरेशन लेते हैं
6:17:51एक्सट्रीमीज्म के राइस का सबसे बड़ा करण
6:17:53था मॉडरेट लीडर्स की लिमिटेशंस
6:17:56मॉडरेट लीडर्स ब्रिटिश अथॉरिटी से अपनी
6:17:59कोई सिग्निफिकेंट डिमांड एक्सेप्ट करने
6:18:02में सफल नहीं हुए थे यहां तक की 1892 के
6:18:06काउंसिल एक्ट में भी उन्हें निराशा ही हाथ
6:18:08लगी थी यही वजह थी की धीरे-धीरे मॉडरेट
6:18:11लीडर्स के मैथर्ड पर से यंग लीडर्स का
6:18:14भरोसा उठने लगता है
6:18:15एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मॉडरेट्स के थ्री
6:18:18पीस यानी की पिटीशन प्रेयर और प्रोटेस्ट
6:18:22के मेथड को पॉलीटिकल मेंडिकेंट नाम देते
6:18:25हैं तिलक कांग्रेस को कांग्रेस और
6:18:27फ्लेटरर्स और कांग्रेस सेशन को हॉलीडे
6:18:30रीक्रिएशन बोलते हैं लाल लाजपत राय का
6:18:33मानना था की कांग्रेस की मीटिंग एनुअल
6:18:36फेस्टिवल ऑफ एजुकेटेड इंडियन से ज्यादा
6:18:38कुछ भी नहीं है इस तरह एक्सट्रीमिस्ट
6:18:41लीडर्स मॉडरेट्स के स्ट्रांग पॉलिटिक्स बन
6:18:44जाते हैं इसके अलावा इंडिया की खराब होती
6:18:47है इकोनामिक कंडीशन भी इंडियन नेशनल
6:18:49एक्टिविटी में एक्सट्रीमीज्म के राइस को
6:18:51प्रमोट करती है
6:18:531896 और 1899 की टेरेबल फेमिंस के साथ
6:18:59महाराष्ट्र में पहले पबोनिक प्लेग ने बड़ी
6:19:02संख्या में लोगों की जान ली थी गवर्नमेंट
6:19:05की रिलीफ मशीनरी पुरी तरह से बेकार साबित
6:19:07हो रही थी तिलक केल्स और ओवर बेयरिंग
6:19:11गवर्नमेंट प्ले कमिश्नर को क्रिटिसाइज भी
6:19:13करते हैं क्योंकि ये कुछ अच्छा करने की
6:19:16जगह सिचुएशन को और ज्यादा बड़ा बना रहे थे
6:19:18तिलक कहते हैं की सरकारी उपाय से कम ट्रॉल
6:19:22तो हमारे लिए प्लेग है यह सभी इवेंट्स
6:19:25इंडियन को एहसास दिलाते हैं की उनकी
6:19:27कंडीशन कितनी हेल्पलेस हो गई है इसके साथ
6:19:30ही बार-बार फेमिंस का आना भी गवर्नमेंट की
6:19:33एंटी नेशनल पॉलिसी का ही रिजल्ट था इसके
6:19:36साथ ही इंडिया के बाहर हो रही इवेंट्स भी
6:19:38यंगर जेनरेशन को काफी इन्फ्लुएंस करते हैं
6:19:41जैसे की ब्रिटिश कॉलोनी स्पेशली साउथ
6:19:44अफ्रीका में इंडियन के साथ होने वाला
6:19:46हमिलिएटिंग ट्रीटमेंट एंटी ब्रिटिश फीलिंग
6:19:49क्रिएट करता है
6:19:52तुर्की और रसिया में चल रही नेशनल
6:19:55मूवमेंट्स भी इंडियन को न्यू हॉप्स और
6:19:58एस्पिरेशन देने का कम करते हैं इंडियन
6:20:00नेशनलिस्ट का कॉन्फिडेंस और ज्यादा बाढ़
6:20:03जाता है जब 1896 में अब सीनरी जैसा देश
6:20:06इटालियन आर्मी के अटैक को रिप्लेस करने
6:20:09में कामयाब राहत है इसके अलावा 1905 में
6:20:12रसिया जैसे पावरफुल देश पर जबान की शानदार
6:20:16जीत भी इंडियन को इंस्पिरेशन देने का कम
6:20:19करती है इन सभी इवेंट्स की वजह से इंडियन
6:20:21लीडर्स को ये विश्वास हो जाता है की
6:20:23ब्रिटिशर्स इन्विंसिबल नहीं है और उन्हें
6:20:26भी हराया जा सकता है दोस्तों नेट
6:20:43सीक्रेट सीक्रेट
6:20:46इंडिया में काफी रिसेंट क्रिएट किया था
6:20:49इसके साथ ही लॉर्ड कर्जन 193 में ऐसे समय
6:20:53में दिल्ली दरबार ऑर्गेनाइज्ड करते हैं जब
6:20:55इंडिया पुरी तरह से
6:20:58189900 के फैमिन के इफेक्ट से बाहर भी
6:21:00नहीं आया था उनका ये एक्ट भी बहुत कॉन्डम
6:21:04किया जाता है और इसी इंटरप्रेट किया जाता
6:21:07है आज एन पंपाउज बेसेंट तू एन स्टार्टिंग
6:21:10पापुलेशन
6:21:11गर्जन एडमिनिस्ट्रेशन का सबसे ज्यादा हिट
6:21:14किया जान वाला एक्ट था बंगाल का पार्टीशन
6:21:17इस एक्ट ने इंडियन की आंखें खोल दी थी और
6:21:20उन्हें ब्रिटिशर्स का असली रंग दिखने ग
6:21:23गया था पब्लिक प्रोटेस्ट के बावजूद
6:21:25पार्टीशन को फोर्स करना दिखता है की
6:21:28ब्रिटिशर्स को इंडियन पब्लिक ओपिनियन की
6:21:30कोई परवाह नहीं थी इससे यह भी साबित होता
6:21:33है की मॉडरेट्स की पिटीशन प्रेयर्स और
6:21:36प्रोटेस्ट की पॉलिसी से तो रिजल्ट्स नहीं
6:21:38मिलने वाले थे इन्हीं सब रीजंस की वजह से
6:21:42होता है
6:21:50मैथर्ड ऑफ एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स दोस्तों
6:21:53एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का गोल स्वराज था
6:21:56जबकि मॉडरेट लीडर्स का गोल तो सिर्फ
6:21:58एडमिनिस्ट्रेशन में ज्यादा से ज्यादा
6:22:00इंडियन को शामिल करना था इसलिए इनके
6:22:03मैथर्ड भी मॉडरेट लीडर्स से अलग है
6:22:06मॉडरेट्स के थ्री पीस के मेथड को ये ओपनली
6:22:10क्रिटिसाइज कर ही चुके थे इसीलिए प्रेयर
6:22:13और पिटीशन की जगह एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स
6:22:15बॉयकॉट और स्वदेशी मैथर्ड को अपनाते हैं
6:22:18यह परसूएसन से ज्यादा कन्फर्टेशनल में
6:22:21बिलीव करते थे इसके साथ ही ब्रिटिश रूल का
6:22:24विरोध करने में भी ये ज्यादा वो कल थे
6:22:27मॉडरेट्स की तरह इन्हें ब्रिटिश जस्टिस
6:22:29में कोई विश्वास नहीं था और ना ही यह
6:22:32ब्रिटिश क्राउन के प्रति कोई लॉयल्टी रखते
6:22:34थे
6:22:35एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मांस मूवमेंट में भी
6:22:38बिलीव करते थे और लोअर मिडिल क्लास को
6:22:40नेशनल मूवमेंट से जोड़ना चाहते थे
6:22:43एक्सट्रीमिस्ट के यह मैथर्ड सबसे पहले बार
6:22:46इंप्लीमेंट हुए थे स्वदेशी मूवमेंट के
6:22:48दौरान तो इस स्वदेशी मूवमेंट को डिटेल में
6:22:51समझते हैं
6:22:56दोस्तों स्वदेशी मूवमेंट बंगाल पार्टीशन
6:22:59के अगेंस्ट ऑर्गेनाइज्ड किया गया था यह
6:23:02इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से एक मांस
6:23:05मूवमेंट करने की पहले कोशिश भी थी लेकिन
6:23:08मास मूवमेंट शुरू होने से पहले कांग्रेस
6:23:10ने पार्टीशन का विरोध मॉडरेट मेथड से ही
6:23:13किया था
6:23:151903 में पार्टीशन का प्लेन आने पर मॉडरेट
6:23:18लीडर्स पिटीशन और प्रेयर्स के द्वारा
6:23:20बंगाल पार्टीशन के अगेंस्ट प्रोटेस्ट करते
6:23:22हैं लेकिन उनकी प्रोटेस्ट का ब्रिटिशर्स
6:23:25पर कोई असर नहीं होता और जुलाई 1905 में
6:23:29बंगाल पार्टीशन का फाइनल अनाउंसमेंट कर
6:23:31दिया जाता है
6:23:38और सेवंथ अगस्त 1905 को कोलकाता टाउन हाल
6:23:42की मीटिंग में बाय गो रेजोल्यूशन के पैसेज
6:23:45के साथ स्वदेशी मूवमेंट का फॉर्मल
6:23:47प्रोक्लेमेशन हो जाता है
6:23:4916 अक्टूबर 1905 को जो पार्टीशन फॉर्म में
6:23:54आता है तब पूरे बंगाल में उसे दिन को डीएफ
6:23:57मॉर्निंग की तरह मनाया जाता है यूनिटी के
6:24:00सिंबल के रूप में लोग एक दूसरे को राखी भी
6:24:03बांधते हैं
6:24:04प्रोफेशनल्स निकले जाते हैं जिसमें लोग
6:24:06वंदे मातरम और अमर सोनार बांग्ला जैसे गीत
6:24:09गेट हैं पॉलीटिकल लीडर्स बड़ी बड़ी
6:24:12गैदरिंग्स को एड्रेस करते हैं जल्दी ही
6:24:15मूवमेंट देश के बाकी हसन तक स्प्रेड हो
6:24:18जाता है तिलक की लीडरशिप में बॉम्बे और
6:24:20पुणे में लाल लाजपत राय और अजीत सिंह की
6:24:23नेतृत्व में पंजाब में मूवमेंट स्प्रेड
6:24:25होने लगता है सैयद हैदर राजा दिल्ली में
6:24:28लीडरशिप प्रोवाइड करते हैं और चिदंबरम
6:24:31पिल्लई मद्रास में मूवमेंट तो शुरू हो
6:24:33जाता है लेकिन कांग्रेस की तरफ से अभी भी
6:24:36इसका कोई फॉर्मल प्लेन नहीं रखा गया था आई
6:24:39जानते हैं कांग्रेस में स्वदेशी मूवमेंट
6:24:42को लेकर क्या चल रहा था
6:24:44डी कांग्रेस पोजीशन
6:24:46दोस्तों 1905 में गोखले की प्रेसीडेटशिप
6:24:50में कांग्रेस की मीटिंग होती है इसमें
6:24:52बंगाल की पार्टीशन और कर्जन की रिएक्शन को
6:24:56कंडोम किया जाता है साथ ही बंगाल में चल
6:24:59रहे स्वदेशी मूवमेंट को सपोर्ट करने का
6:25:01फैसला भी लिया जाता है एक्सट्रीमिस्ट
6:25:03लीडर्स तो मूवमेंट को बंगाल से बाहर देश
6:25:05के दूसरे पार्ट तक एक्सटेंड करना चाहते थे
6:25:08साथी फॉरेन गुड्स के बाय गॉड से आगे बढ़कर
6:25:11एक फूल फ्लेड मास्क स्ट्रगल भी शुरू करना
6:25:14चाहते थे लेकिन उसे समय कांग्रेस में
6:25:16मॉडरेट लीडर्स का डोमिनेंस था और वो इतने
6:25:19आगे नहीं जाना चाहते थे लेकिन नेक्स्ट
6:25:22कांग्रेस सेशन में एक बड़ा स्टेप लिया
6:25:24जाता है इस सेशन को हेड कर रहे थे दादा
6:25:27भाई नौरोजी और यह कोलकाता में हुआ था यहां
6:25:31डिक्लेअर किया जाता है की कांग्रेस का गोल
6:25:33सेल्फ गवर्नमेंट या स्वराज है इस
6:25:36डिक्लेरेशन से एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का
6:25:39कॉन्फिडेंस और बाढ़ जाता है और वह स्वदेशी
6:25:41और बॉयकॉट के साथ पैसिव रेजिस्टेंस की कॉल
6:25:44भी दे देते हैं इसमें गवर्नमेंट स्कूल और
6:25:47कॉलेजेस का गवर्नमेंट सर्विसेज का कोट्स
6:25:50का लेजिसलेटिव काउंसिल का म्युनिसिपालिटीज
6:25:52का और गवर्नमेंट टाइटल्स का बॉयकॉट शामिल
6:25:55था
6:25:56है इसके अलावा और कौन-कौन सी एक्टिविटीज
6:25:59स्वदेशी मूवमेंट के दौरान हुई थी आई जानते
6:26:02हैं न्यू फॉर्म्स ऑफ स्ट्रगल और इंपैक्ट
6:26:05दोस्तों स्वदेशी और बॉयकॉट मूवमेंट के समय
6:26:08फॉरेन गुड्स को बॉयकॉट करने के अलावा भी
6:26:11बहुत सी एक्टिविटी शुरू की जाति है जैसे
6:26:14की करो वॉलिंटियर्स या समिति को
6:26:17ऑर्गेनाइजर किया जाता है इसमें अश्विनी
6:26:19कुमार डेट द्वारा बरिसल में बनाई गई
6:26:22स्वदेश बांधव समिति सबसे ज्यादा पॉपुलर
6:26:25होती है यह समिति मास मोबिलाइजेशन का
6:26:28पावरफुल मेंस बन जाति हैं स्वदेशी मूवमेंट
6:26:31के दौरान मैसेज तक पहुंचने और उनके बीच
6:26:34पॉलीटिकल मैसेज को स्प्रेड करने के लिए
6:26:36पॉपुलर फेस्टिवल्स और मेला कभी इस्तेमाल
6:26:39किया जाता है इसका सबसे अच्छा उदाहरण है
6:26:42तिलक द्वारा शुरू किया गए गणपति और शिवाजी
6:26:45फेस्टिवल
6:26:50किया जाता है
6:26:54और अरविंद होश को इसका प्रिंसिपल बनाया
6:26:58जाता है देखते ही देखते देश के अलग-अलग
6:27:01हसन में नेशनल स्कूल और कॉलेजेस खुलना
6:27:04शुरू हो जाते हैं 15th अगस्त 196 को नेशनल
6:27:09कंट्रोल में एजुकेशन सिस्टम को ऑर्गेनाइज
6:27:11करने के लिए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन को
6:27:14सेटअप किया जाता है इसके साथ ही बहुत से
6:27:17स्वदेशी यानी की इंडीजीनस इंटरप्राइजेज की
6:27:20भी शुरुआत होती है इसमें सबसे इंपॉर्टेंट
6:27:22है चिदंबरम पिल्लई के द्वारा इस्टैबलिश्ड
6:27:25नेशनल शिव बिल्डिंग एंटरप्राइज स्वदेशी
6:27:28स्टीम नेवीगेशन कंपनी
6:27:311917 में इंडियन सोसाइटी ऑफ ओरिएंटल आर्ट
6:27:34भी फॉर्म की जाति है इसका एक इंडियन
6:27:37आर्टिस्ट पर इंग्लिश इन्फ्लुएंस को काउंटर
6:27:40करना था यह चाहते थे की इंडियन आर्ट
6:27:43यूरोपियन आर्टिस्ट ना होकर इंडीजीनस आर्ट
6:27:46फॉर्म
6:27:50बनते हैं नंदलाल बस
6:27:53साइंस की फील्ड में जगदीश चंद्र बस
6:27:55प्रफुल्ल चंद्र राय जैसे जीनियस ओरिजिनल
6:27:58रिसर्च से पूरे विश्व में ख्याति बातें इस
6:28:01तरह हम का सकते हैं की स्वदेशी मूवमेंट
6:28:03सिर्फ पॉलीटिकल फील्ड तक ही लिमिटेड नहीं
6:28:06था इसका इंपैक्ट हर फील्ड में देखने को
6:28:09मिलता है और ये इंडियन को एक नया
6:28:11कॉन्फिडेंस देने का कम करता है मूवमेंट
6:28:14में स्टूडेंट का पार्टिसिपेशन बड़े स्केल
6:28:17पर देखने को मिलता है इसके साथ ही वूमेन
6:28:19और वर्किंग क्लास भी पहले बार नेशनल
6:28:22मूवमेंट से जुड़ने हैं लेकिन 198 आते-आते
6:28:26स्वदेशी मूवमेंट खत्म होने की कागर पर ए
6:28:29जाता है ऐसा क्यों
6:28:33डी मूवमेंट आउट
6:28:35स्वदेशी मूवमेंट के डिक्लिन के पीछे बहुत
6:28:38से करण थे सबसे पहले करण था गवर्नमेंट की
6:28:41तरफ से किया गया प्रिपरेशन दोस्तों 1908
6:28:45आते-आते मूवमेंट लीडर एस हो जाता है
6:28:48क्योंकि ज्यादातर लीडर्स को या तो अरेस्ट
6:28:51कर लिया जाता है या फिर डिपो अरबिंदो घोष
6:28:54और विपिन चंद्र पालतू एक्टिव से रिटायर ही
6:28:57हो जाते हैं इसके अलावा मूवमेंट मोस्टली
6:29:00अपार और मिडिल क्लास तक ही सीमित र जाता
6:29:03है यह मैसेज स्पेशली पैग्स को अपने साथ
6:29:06जोड़ने में असफल राहत है और स्वदेशी
6:29:09मूवमेंट के डिक्लिन होने का सबसे बड़ा करण
6:29:11था लीडर्स के बीच की आपसी अनबन मॉडरेट्स
6:29:16और एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स मूवमेंट की
6:29:18स्ट्रेटजी को लेकर अलग-अलग ओपिनियन रखते
6:29:20थे उनके बीच की तकरार इतनी ज्यादा बाढ़
6:29:24जाति है की 197 की सूरत सेशन में कांग्रेस
6:29:28दो ग्रुप में स्प्लिट हो जाति है इसे सूरज
6:29:31प्लेट के नाम से जानते हैं
6:29:33आई सूरज प्लेट को डिटेल में समझते हैं
6:29:37सूरज प्लेट
6:29:39197 कांग्रेस सेशन दोस्तों 1917 का सेशन
6:29:44पहले नागपुर में होना था लेकिन नागपुर
6:29:47एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का स्ट्रांग गोल था
6:29:49और मॉडरेट लीडर्स को ये डर था की नागपुर
6:29:53में अगर सेशन हुआ तो तिलक प्रेसिडेंट बन
6:29:55जाएंगे इसलिए मॉडरेट लीडर गोखले सेशन को
6:29:59सूरज शिफ्ट कर देते हैं सूरत क्योंकि तिलक
6:30:02के होम प्रॉब्लम्स में आता था इसीलिए रूल
6:30:04के अकॉर्डिंग वो सेशन के प्रेसिडेंट नहीं
6:30:06बन सकते थे इस तरह 197 के सेशन की शुरुआत
6:30:11मॉडरेट और एक स्त्रीमिस्ट लीडर्स के बीच
6:30:14तकरार के साथ होती है यह मॉडरेट ग्रुप
6:30:16प्रेसिडेंट के लिए रोष बिहार घुस का नाम
6:30:19आगे करते हैं और एक सरिता इस ग्रुप लाल
6:30:22लाजपत राय को प्रेसिडेंट बनाना चाहते थे
6:30:25पहले बार प्रेसिडेंट की पोस्ट के लिए
6:30:27इलेक्शन करना पड़ता है और फाइनली रोशन
6:30:31बिहार घोषित प्रेसिडेंट इलेक्ट होते हैं
6:30:33लेकिन इस सबके बीच दोनों ग्रुप के बीच
6:30:36तकरार इतनी ज्यादा बाढ़ जाति है की सेशन
6:30:39को कॉल ऑफ करना पड़ता है
6:30:43और इस तरह कांग्रेस स्प्लिट हो जाति है
6:30:46दोस्तों कांग्रेस में हुई स्पिरिट का
6:30:49फायदा ब्रिटिश गवर्नमेंट उठाती है और
6:30:51एक्सट्रीम इस पर मैसिव अटैक लॉन्च कर देती
6:30:54है आई देखते हैं कैसे
6:30:57गवर्नमेंट स्ट्रेटजी
6:30:59एंटीगमत एक्टिविटीज को रोकने के लिए 1917
6:31:03से 1911 के बीच ब्रिटिश गवर्नमेंट 5 नए
6:31:07लॉस लेकर आई है यह थे सेडिशन मीटिंग्स 197
6:31:12इंडियन न्यूज़ पेपर इनिसाइटमेंट तू
6:31:15ऑफेंसेस एक्ट 198 क्रिमिनल डॉ अमेंडमेंट
6:31:19एक्ट 198 और दी इंडियन प्रेस एक्ट 1910
6:31:23मिनट्स लीडर तिलक के अगेंस्ट 1909 में
6:31:27सेडिशन के इस फाइल किया जाता है ऐसा इसलिए
6:31:30क्योंकि उन्होंने अपने न्यूज़पेपर केसरी
6:31:33में बंगाल के क्रांतिकारी द्वारा
6:31:35मुजफ्फरनगर में बम फेक जान की घटना पर
6:31:38आर्टिकल लिखा था इन्हें गिल्टी मानते हुए
6:31:40₹1000 का फाइन और 6 साल के लिए बर्मा की
6:31:44मंडलीय जय में रहने की सजा सुने जाति है
6:31:46और
6:31:50लाल लाजपत राय विदेश चले जाते
6:31:54लीडर्स की ऑप्शंस में मूवमेंट कमजोर पढ़ने
6:31:56लगता है और कुछ समय के लिए खत्म सा हो
6:31:59जाता है 1914 में जब तिलक जय से बाहर आते
6:32:02हैं तब एक बार फिर से मूवमेंट की बागडोर
6:32:05अपने हाथ में लेते हैं इस बीच मॉडरेट्स को
6:32:08खुश करने के लिए ब्रिटिश गवर्नमेंट 1909
6:32:11में इंडियन काउंसिल एक्ट भी लेकर आई है
6:32:13इसे मौली मिंटो रिफॉर्म्स के नाम से जाना
6:32:16जाता है एक्ट की डीटेल्स को हम एक अलग
6:32:19वीडियो में डिस्कस करेंगे यहां बस इतना
6:32:21समझ लेते हैं की इस एक्ट के द्वारा
6:32:23मॉडरेट्स और मुस्लिम को ब्रिटिश गवर्नमेंट
6:32:26अपनी तरफ करना चाहती थी दोस्तों यह तो बात
6:32:30हुई की ब्रिटिशर्स कैसे अलग स्ट्रेटजी
6:32:32अपनाते हैं एक स्त्रीमिस्ट और मॉडरेट
6:32:35ग्रुप से डील करने
6:32:36केराटिन स्टिक पॉलिसी
6:32:45के लिए स्टिक की तरह
6:32:49जब तिलक जय से बाहर ए जाते हैं तब किस तरह
6:32:53से नेशनल मूवमेंट आगे बढ़ता है आई जानते
6:32:56हैं
6:32:57फर्स्ट वर्ल्ड वार लखनऊ सेशन और होम रूल
6:33:01लीग मूवमेंट दोस्तों
6:33:041914 में जब फर्स्ट वर्ल्ड वार शुरू होती
6:33:07है तब मॉडरेट लीडर्स तो वार में ब्रिटिश
6:33:10का सपोर्ट स एन मटर ऑफ ड्यूटी करते हैं
6:33:12वहीं तिलक जैसे एक्सट्रीमिस्ट ये सोचकर
6:33:15ब्रिटिश के वार एफर्ट्स को सपोर्ट करते
6:33:17हैं की इस लॉयल्टी के बदले में ब्रिटिशर्स
6:33:20उन्हें सेल्फ गवर्नमेंट का तोहफा दे देंगे
6:33:22लेकिन इसके साथ ही लीडर्स को इस बात का भी
6:33:25एहसास था की बिना किसी पॉपुलर प्रेशर की
6:33:28ब्रिटिश गवर्मेंट कभी भी कंसेशन देने के
6:33:31लिए तैयार नहीं होगी इसलिए लीडर्स की तरफ
6:33:34से एक ऑर्गेनाइज्ड एफर्ट तो जरूरी है कुछ
6:33:37और भी करण थे जिसकी वजह से नेशनल मूवमेंट
6:33:40इस दिशा में बढ़ता है जैसे की वार के
6:33:43दौरान इंडिया में गरीब लोगों की हालात और
6:33:45खराब होना
6:33:47क्योंकि वार के समय हैवी टैक्सेशन इंपोज
6:33:49किया जा रहा था और साथ ही रोजमर्रा की
6:33:52चीजों के दम आसमान चुने लगे थे इस वजह से
6:33:55लोग भी प्रोटेस्ट करने के लिए एक एग्रेसिव
6:33:58मूवमेंट के पक्ष में नजर ए रहे थे अब ये
6:34:00मूवमेंट इंडियन नेशनल कांग्रेस की लीडरशिप
6:34:03में होना तो मुश्किल ग रहा था क्योंकि
6:34:05मॉडरेट्स की लीडरशिप में कांग्रेस एक
6:34:07पैसिव और इनर्ट पॉलीटिकल ऑर्गेनाइजेशन बन
6:34:10कर र गई थी इसलिए कांग्रेस के बाहर से ही
6:34:13मूवमेंट शुरू होता है और यह मूवमेंट था
6:34:16होम रूल लीग
6:34:21के एग्जांपल को फॉलो करता है
6:34:37तिलक अपनी इंडियन होम रूल लीग अप्रैल 1916
6:34:41में सेटअप करते हैं इसकी पहले मीटिंग
6:34:43बेलगांव में होती है और इसका हैडक्वाटर्स
6:34:46पुणे में बन जाता है इनकी लिक बॉम्बे सिटी
6:34:49को छोड़कर महाराष्ट्र कर्नाटक सेंट्रल
6:34:52प्रोविंस और विराट को कर करती हैं लेकिन
6:34:56मेजर डिमांड्स में स्वराज लिंग्विस्टिक्स
6:34:58स्टेटस का फॉर्मेशन और वर्नाकुलर में
6:35:01एजुकेशन देना शामिल था
6:35:03अपनी जो इंडिया होम रूल लीग को सितंबर
6:35:061916 में मद्रास से शुरू करती हैं तिलक के
6:35:10एरियाज को छोड़कर पूरे इंडिया को इनकी लीग
6:35:13कर करती है
6:35:18और इनके अलावा इसमें ब्ल्यू वाडिया और क
6:35:22रामास्वामी अय्यर का भी इंपॉर्टेंट योगदान
6:35:24था
6:35:25है इसी बीच 1916 में कांग्रेस का लखनऊ
6:35:29सेशन भी होता है इसमें एक्सट्रीमिस्ट को
6:35:32वापस कांग्रेस में शामिल कर लिया जाता है
6:35:34ऐसा इसलिए क्योंकि मॉडरेट्स और
6:35:37एक्सट्रीमिस्ट दोनों को ही रिलीज होता है
6:35:39की उनके बीच स्प्लिट ने पॉलीटिकल इन
6:35:42एक्टिविटी को जन्म दे दिया है साथ ही एनी
6:35:44बसंत और तिलक कुछ सालों से रियूनियन के
6:35:47लिए एफर्ट कर ही रहे थे इस बीच गोखले और
6:35:50फिरोज शाह मेहता जैसे मॉडरेट लीडर्स की
6:35:53मृत्यु भी रियूनियन के लिए रास्ता बनाने
6:35:55का कम करती है तो इस तरह मॉडरेट्स और
6:35:59एक्सट्रीमिस्ट फिर से एक साथ कम करने लगता
6:36:01हैं और इस वजह से होम रूल लीग मूवमेंट और
6:36:05भी स्ट्रांग हो जाता है इसे मोतीलाल नेहरू
6:36:07जवाहरलाल नेहरू भोला भाई देसाई मोहम्मद
6:36:10अली जिन्ना तेज बहादुर सप्रू और लाल लाजपत
6:36:14राय जैसे लीडर्स भी जॉइन कर लेते हैं यानी
6:36:16की बहुत से नए लीडर्स इस आंदोलन के दौरान
6:36:19ही पहले बार नेशनल स्ट्रगलेसी जुड़ने हैं
6:36:25बीच में दिखने लगता है जगह पब्लिक
6:36:28मीटिंग्स ऑर्गेनाइजर की जाति हैं न्यूज़
6:36:30पेपर के थ्रू प्रोपेगेंडा चलाया जाता है
6:36:31सोशल वर्क ऑर्गेनाइज किया जाते हैं
6:36:34ब्रिटिश गवर्मेंट मूवमेंट के अगेंस्ट सीवर
6:36:37रिप्रेशन शुरू कर देती है मद्रास में
6:36:40स्टूडेंट की पॉलीटिकल मीटिंग्स अटेंड करने
6:36:42पर बन लगा दिया जाता है तिलक को पंजाब और
6:36:45दिल्ली जान से रॉक दिया जाता है
6:36:47जून 1917 में अन्य बसंत और उनके एसोसिएट्स
6:36:51को अरेस्ट कर लिया जाता है इसकी वजह
6:36:55प्रोटेस्ट शुरू हो जाते हैं अपना विरोध
6:36:58जताने के लिए सर सुब्रह्मण्य अय्यर अपना
6:37:00नाइट हुड रिनाउंस कर देते हैं और तिलक
6:37:03पैसिव रेजिस्टेंस शुरू करने की बात करते
6:37:05हैं इस तरह
6:37:09होने लगता है इसलिए ब्रिटिश गवर्नमेंट
6:37:13सितंबर 1917 में उन्हें रहा कर देती है
6:37:16लेकिन 1998
6:37:23जैसे की इफेक्टिव अंग ग्रेजुएशन करना होना
6:37:271978 के बीच कम्युनल रिच का होना और अगस्त
6:37:301917 की मोंटीगू की डिक्लेरेशन
6:37:33मोंटीगू इंडिया के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थे
6:37:3620th अगस्त 1917 को ये ब्रिटिश
6:37:40पार्लियामेंट में डिक्लेअर करते हैं की
6:37:41इंडिया में ब्रिटिशर्स का लॉन्ग टर्म गोल
6:37:44रिस्पांसिबल गवर्नमेंट एस्टेब्लिश करना है
6:37:46इस डिक्लेरेशन के बाद मॉडरेट्स और अन्य
6:37:49बेसेंट को लगता है की आंदोलन को कंटिन्यू
6:37:51करने की जरूर नहीं है इसके अलावा सितंबर
6:37:551918 में एक कैसे के सिलसिले में तिलक भी
6:37:58विदेश चले जाते हैं इस तरह मूवमेंट हो
6:38:02जाता है और धीरे-धीरे डिक्लिन कर जाता है
6:38:07और यहां से नेशनल मूवमेंट के गांधियन फीस
6:38:11की शुरुआत होती है जिसके बड़े में हम अपनी
6:38:14आने वाली वीडियो में बात करेंगे
6:38:16इवेलुएशन ऑफ एक्सट्रीमिस्ट स्पेस दोस्तों
6:38:20एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स का इंडियन नेशनल
6:38:22मूवमेंट में बहुत इंपॉर्टेंट योगदान रहा
6:38:25है इन्हीं लीडर्स की वजह से इंडियन को यह
6:38:28कॉन्फिडेंस आया था की वो ब्रिटिशर्स से
6:38:30स्वराज की डिमांड कर सकते हैं तिलक का
6:38:33स्लोगन स्वराज इस मी बर्थराइट जो हम रूल
6:38:37मूवमेंट के दौरान दिया गया था
6:38:39घर-घर तक पहुंच जाता है और आगे आने वाली
6:38:42पीढ़ी को भी इंस्पायर करने का कम करता है
6:38:45एक्सट्रीमिस्ट फैज के समय ही नेशनल
6:38:47एजुकेशन और स्वदेशी इंटरप्राइजेज का
6:38:50डेवलपमेंट और तेजी से शुरू होता है नेशनल
6:38:53मूवमेंट को एक नई और जरूरी दिशा देने का
6:38:56कम करता है एक्सट्रीमिस्ट्रेस लेकिन इसके
6:38:59साथ ही एक सरिता इस लीडर्स अपने स्वराज के
6:39:02गोल को पूरा करने के लिए कोई स्ट्रांग
6:39:04एक्शन प्लेन नहीं तैयार कर पाते यह
6:39:07यंगस्टर में जोश तो जगह देते हैं लेकिन
6:39:09उनकी एनर्जी को सही दिशा में चैनेलाइज
6:39:11करने में असफल रहते हैं खासकर स्वदेशी
6:39:15मूवमेंट के डिक्लिन के बाद युद्ध
6:39:17डायरेक्टनलेस फूल करते हैं इसका ही नतीजा
6:39:20था की कुछ यंगस्टर रिवॉल्यूशनरी
6:39:22एक्टिविटीज की तरफ चले जाते हैं
6:39:24रिवॉल्यूशनरी फेस के बड़े में हम अपने
6:39:27नेक्स्ट वीडियो में चर्चा करेंगे
6:39:29रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट फर्स्ट फेस
6:39:33दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने
6:39:35इंडियन नेशनल कांग्रेस में एक्सट्रीमिस्ट
6:39:38लीडर्स के राइस की बात की थी साथ ही बंगाल
6:39:40पार्टीशन के अगेंस्ट शुरू हुए स्वदेशी और
6:39:43बॉयकॉट मूवमेंट के बड़े में भी जाना था
6:39:45इसके अलावा होम रूल लीग स्कोर भी समझ लिया
6:39:47था ये सभी डेवलपर कहानी इंडियन नेशनल
6:39:51कांग्रेस से ही रिलेटेड थे लेकिन देश की
6:39:54आजादी के लिए सिर्फ इंडियन नेशनल कांग्रेस
6:39:56ही स्ट्रगल नहीं कर रही थी कांग्रेस के
6:39:59बाहर भी बहुत सारे लोग और ऑर्गेनाइजेशंस
6:40:01ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट खड़े हो चुके थे
6:40:04इन्हीं में से एक स्ट्रांग है
6:40:06रिवॉल्यूशनरीज का इसलिए आज हम
6:40:09रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट के फर्स्ट फैज को
6:40:11डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं तो आई
6:40:14शुरू करते हैं
6:40:16इंट्रोडक्शन
6:40:17रीजंस पर इमरजेंसी
6:40:19दोस्तों
6:40:31इंस्पायर किया था हमने देखा था की कैसे
6:40:34ब्रिटिश की रिप्रेशन के करण ओपन मूवमेंट
6:40:37का डिक्लिन शुरू हो गया था ऐसी सिचुएशन
6:40:40में बहुत से यंग पैट्रियोट्स थे जो चुप
6:40:42नहीं बैठ सकते थे गवर्नमेंट जब शांतिपूर्ण
6:40:46तरीके से विरोध का रास्ता बैंड कर देती है
6:40:48तब यह यंग लीडर्स सीक्रेट रिवॉल्यूशनरी
6:40:51एक्टिविटीज की तरफ चले जाते हैं
6:40:57इसलिए यह उनसे बदला भी लेना चाहते थे
6:41:01है इसके अलावा रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट की
6:41:04शुरू होने का एक करण एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स
6:41:06का फेलियर भी था
6:41:08एक्सट्रीमिस्ट लीडर्स यूथ के जोश को सही
6:41:11दिशा दिखाने में असफल हो गए थे ब्रिटिश
6:41:14रिप्रेशन के बाद किस तरह मूवमेंट को आगे
6:41:17ले जाना चाहिए इसका कोई एक्शन प्लेन इन
6:41:19लीडर्स के पास नहीं था ऐसी सिचुएशन में
6:41:22युद्ध को जो भी रास्ता सही लगता है वो
6:41:25उसकी तरफ चल देते हैं यह रास्ता और कुछ
6:41:28नहीं बल्कि क्रांतिकारी पाठ ही था आई अब
6:41:32समझते हैं रिवॉल्यूशनरीज की आईडियोलॉजी
6:41:34क्या थी और इनका पियानो एक्शन किया था
6:41:37रिवॉल्यूशनरी प्रोग्राम दोस्तों
6:41:40क्रांतिकारी की बेसिक एडोलॉजी थी ब्रिटिश
6:41:43को फोर्स के जारी इंडिया से बाहर निकालना
6:41:46इसके लिए वह रूस नहीं लिस्ट और आयरलैंड के
6:41:50नेशनलिस्ट से इंस्पिरेशन लेते हैं यह लोग
6:41:53इंडिविजुअल हीरोइन डीडीएस में यकीन करते
6:41:55थे
6:41:56इंडियन रिवॉल्यूशनरीज भी इनके ही दिखाएं
6:41:59मार्ग पर चलते हैं और उन पॉपुलर ब्रिटिश
6:42:02ऑफिशल्स की हत्या करना शुरू कर देते हैं
6:42:04इसके पीछे उनका ब्रिटिशर्स के दिल और
6:42:08दिमाग में टेरर पैदा करना साथ ही देश के
6:42:11लोगों की फीलींगस को अराउस करना जिससे वो
6:42:13ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट क्रांति करने के
6:42:16लिए तैयार हो जाए इनके एक्शन प्रोग्राम
6:42:18में सीक्रेट इसोसिएशन एस्टेब्लिश करना
6:42:21मिलिट्री ट्रेनिंग प्रोवाइड करना और
6:42:24स्वदेशी डेकोरेटिव डालना भी शामिल था यह
6:42:27तो बात हुई रिवॉल्यूशनरीज की आईडियोलॉजी
6:42:29और उनके बेसिक एक्शन प्लेन की अब बात करते
6:42:32हैं इंडिया के अलग-अलग रीजन में होने वाली
6:42:35रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज के कुछ
6:42:37एग्जांपल्स की
6:42:38रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज इन इंडिया
6:42:41दोस्तों इंडिया में क्रांतिकारी गतिविधि
6:42:44का ट्रेडीशन कोई नया नहीं है स्वदेशी
6:42:47मूवमेंट से पहले भी हमें कुछ रिवॉल्यूशनरी
6:42:49एक्टिविटीज के एग्जांपल्स देखने को मिलते
6:42:51हैं इसमें सबसे इंपॉर्टेंट रीजन था
6:42:54महाराष्ट्र
6:42:55महाराष्ट्र में ही यूरोपियंस का पहले
6:42:58पॉलीटिकल मर्डर कमेंट हुआ था 20 सेकंड जून
6:43:011897 को बालकृष्ण चापेकर और दामोदर चापेकर
6:43:05पूनम प्ले कमेटी के प्रेसिडेंट मिस्टर
6:43:08ब्रांड को गली मार देते हैं हालांकि गलती
6:43:10से लेफ्टिनेंट जो मिस्टर ब्रांड की
6:43:13मिलिट्री एस्कॉर्ट थे उनको भी गली ग जाति
6:43:15है इसके बाद चाबी कर ब्रदर्स को अरेस्ट
6:43:18करके फैंसी की सजा सुना दी जाति है जबिकर
6:43:21ब्रदर्स का यह एक्ट रिवॉल्यूशनरी
6:43:23एक्टिविटी का पहले उदाहरण भी माना जाता है
6:43:26बाल गंगाधर तिलक अपने न्यूज़पेपर केसरी
6:43:29में जापेकर ब्रदर्स के इस एक्शन की तारीफ
6:43:32में एक आर्टिकल लिखने हैं इसके लिए
6:43:34ब्रिटिश गवर्नमेंट उनके ऊपर सेडिशन चार्ज
6:43:36लगा देती है और तिलक को 18 मंथ्स के
6:43:39रिग्रेस इंप्रिजनमेंट की सजा सुने जाति है
6:43:44और उनके भाई नासिक में मित्र मेला नाम से
6:43:48एक सीक्रेट सोसाइटी ऑर्गेनाइज करते हैं
6:43:50मित्र मेला 1904 में अभिनव भारत नाम की
6:43:54सोसाइटी के साथ चेंज हो जाति है जल्दी ही
6:43:57नासिक पुणे और मुंबई बम मैन्युफैक्चरर के
6:44:01सेंटर्स के रूप में उभरते हैं
6:44:031909 में अभिनव भारत के मेंबर अनंत
6:44:06लक्ष्मण कान्हा रे नासिक कलेक्टर एमटी
6:44:09जैक्सन की हत्या कर देते हैं ब्रिटिश
6:44:12इंक्वारी में पाया जाता है की यह हत्या एक
6:44:15बहुत बड़ी कंस्पायरेसी का हिस्सा है ये
6:44:17कंस्पायरेसी थी ब्रिटिश गवर्नमेंट के
6:44:19अगेंस्ट एक आर्म्ड रिवॉल्यूशन ऑर्गेनाइज
6:44:22करना इसमें 38 लोगों को गिरफ्तार किया
6:44:25जाता है साथ ही यह भी पाया जाता है की
6:44:28सावरकर स्किंस्पायरेसी के लीडर हैं इसलिए
6:44:31उन्हें आजीवन देश निकाला की सजा सुना दी
6:44:33जाति है और उनकी साड़ी प्रॉपर्टी जप्त कर
6:44:36ली जाति है
6:44:38इस तरह बंगाल में भी बहुत सी क्रांतिकारी
6:44:41गतिविधियां देखने को मिलती हैं
6:44:43193 में पोलिंग दास ढाका में अनुशीलन
6:44:47समिति की पहले ब्रांच शुरू करते हैं तीन
6:44:50आठ मित्र कोलकाता में इसकी एक और ब्रांच
6:44:52शुरू करते हैं
6:44:53196 में वरिंदर घोष और भूपेंद्रनाथ डेट
6:44:57मिलकर युगांतर समिति एस्टेब्लिश करते हैं
6:45:00इसी नाम से यह एक न्यूज़ पेपर भी निकलते
6:45:03हैं इस न्यूज़ पेपर में एंटी ब्रिटिश
6:45:06इतिहास को छाप जाता था और लोगों में
6:45:08नेशनलिज्म की भावना का प्रसार किया जाता
6:45:10था
6:45:11197 में पूर्वी बंगाल और बंगाल की लिफ्टेड
6:45:15इन गवर्नर को करने के असफल प्रयास भी किया
6:45:18गए थे इसके बाद 30th अप्रैल 198 को
6:45:21मुजफ्फरपुर के जज मिस्टर किंग्सफरड की
6:45:24हत्या का प्रयास किया जाता है इनके ऊपर बम
6:45:27फेंकने की जिम्मेदारी प्रफुल्ल चाचा और
6:45:29खुदीराम बॉस्को दी गई थी लेकिन गलती से बम
6:45:33मिस्टर कैनेडी के कैरिज पर गिर जाता है और
6:45:35दो लेडीज इसमें मेरी जाति हैं
6:45:38प्रफुल्ल चाचा और बस को अरेस्ट कर लिया
6:45:40जाता है चाकी तो खुद को ही गली मार लेते
6:45:43हैं जबकि बस के खिलाफ ट्रायल होता है और
6:45:46उन्हें फैंसी दे दी जाति है
6:45:49गवर्नमेंट कोलकाता में मानिकतला गार्डन और
6:45:53बाकी जगह अवैध हथियारों की तलाशी का
6:45:55अभियान चलती है इसमें 34 लोगों को
6:45:58गिरफ्तार किया जाता है जिसमें अरबिंदो घोष
6:46:01और उनके भाई नरेंद्र घोष भी शामिल थे इन
6:46:05सभी लोगों के ऊपर अलीपुर कंस्पायरेसी कैसे
6:46:08चलाया जाता है अरबिंदो घोष को एविडेंस एन
6:46:10होने की वजह से छोड़ दिया जाता है लेकिन
6:46:12बाकी सभी लोगों को सजा सुने जाति हैं इस
6:46:16तरह बंगाल भी रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट का एक
6:46:18इंपॉर्टेंट सेंटर बन गया
6:46:20रिपोर्ट के अनुसार
6:46:28रिपोर्ट किया गए थे और 60 से ज्यादा मर्डर
6:46:32अटेंप्ट हुए थे ब्रिटिश ऑफिसर पर
6:46:35पंजाब में भी हमें रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट
6:46:38का प्रभाव देखने को मिलता है यहां लाल
6:46:41लाजपत राय और अजीत सिंह मुख्य रूप से लीड
6:46:44कर रहे थे लाल जी जिन्हें पंजाब केसरी और
6:46:47लायन और पंजाब जैसे नाम से जाना जाता है
6:46:49पंजाबी नाम का न्यूज़पेपर निकलते हैं
6:46:52जिसका मोटो होता है किसी भी कीमत पर सेल्फ
6:46:55हेल्प अजीत सिंह जो की भगत सिंह के अंकल
6:46:58थे वो लाहौर में अंजुमन ने मौसी बाय वतन
6:47:01नाम से एक क्रांतिकारी संस्था शुरू करते
6:47:04हैं संस्था भारत माता नाम से एक जनरल भी
6:47:08प्रकाशित करती है लेकिन पंजाब में
6:47:10रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज पर जल्दी ही रॉक
6:47:13लगा दी जाति है क्योंकि में 197 में
6:47:16गवर्नमेंट पॉलीटिकल मीटिंग्स पर बन लगाने
6:47:19के साथ लाल लाजपत राय और अजीत सिंह को
6:47:22रिपोर्ट कर देती है इसके अलावा दिसंबर
6:47:251912 में दिल्ली के चांदनी चौक में भी
6:47:28वायसराय लोड होर्डिंग के ऊपर बम फेंका गया
6:47:31था बिहार उड़ीसा और अप में भी
6:47:35गाड़ी एक्टिव थे लेकिन बाकी एरियाज के
6:47:38कंपैरिजन में यहां प्रभाव कुछ कम देखने को
6:47:40मिलता है दोस्तों यह तो बात हुई देश के
6:47:44अंदर चल रही क्रांतिकारी गतिविधियों की
6:47:48क्रांतिकारी की जो देश के बाहर से आंदोलन
6:47:51कर रहे थे
6:47:52रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज एब्रॉड दोस्तों
6:47:56गवर्मेंट के रिप्रेशन की वजह से बहुत से
6:47:59क्रांतिकारी विदेश चले जाते हैं और वहीं
6:48:01से अपना संघर्ष जारी रखते हैं आई जानते
6:48:04हैं उनके बड़े में
6:48:061905 में श्याम जी कृष्णा वर्मा लंदन में
6:48:10इंडिया हाउस की स्थापना करते हैं यह लंदन
6:48:13में इंडियन स्टूडेंट के लिए एक सेंटर का
6:48:16कम करता है और इंडिया से रेडिकल यूथ को
6:48:19लंदन लाने के लिए एक स्कॉलरशिप स्कीम भी
6:48:22शुरू की जाति है
6:48:23श्याम जी कृष्णा वर्मा वे इंडियन
6:48:25सोशियोलॉजिस्ट नाम से एक जनरल भी शुरू
6:48:28करते हैं सावरकर और लाल हरदयाल जैसे
6:48:31रिवॉल्यूशनरीज इंडिया हाउस का मेंबर बन
6:48:34जाते हैं इसी सर्किल के मदन लाल ढींगरा 19
6:48:37में कर्जन वायलेट जो की सेक्रेटरी ऑफ
6:48:41स्टेट के पॉलीटिकल एडवाइजर थी की हत्या कर
6:48:43देते हैं लंदन के अलावा पेरिस में मैडम
6:48:47भीकाजी काम जो की एक पारसी रिवॉल्यूशनरी
6:48:50थी वंदे मातरम नाम का अखबार निकलते हैं
6:48:52मैडम काम को मधुर इंडियन रिवॉल्यूशनरी
6:48:56मूवमेंट भी कहा जाता है इन्होंने
6:49:01ऑर्गेनाइज्ड वर्ल्ड सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस
6:49:04में इंडियन फ्लैग को फहराया था यह फ्लैग
6:49:07मैडम भीकाजी कृष्णा वर्मा ने मिलकर डिजाइन
6:49:11किया था और आगे जाकर यह इंडिया की नेशनल
6:49:14फ्लैग के लिए एक टेंपलेट्स का कम करता है
6:49:18जर्मनी में वीरेंद्र नाथ चौपाध्याय
6:49:21रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को लीड कर रहे थे
6:49:23उनकी न्यूज़ पेपर का नाम तलवार था फर्स्ट
6:49:27वर्ल्ड वार के शुरू होने के बाद यह जर्मन
6:49:29फॉरेन ऑफिस की हेल्प से ज़िम-अप प्लेन
6:49:31बनाते हैं प्लेन के तहत 1915 में बर्लिन
6:49:36कमेटी पर इंडियन इंडिपेंडेंस एस्टेब्लिश
6:49:38की जाति है इसमें वीरेंद्र नाथ के अलावा
6:49:40भूपेंद्र नाथ दत्ता और लाल हरदयाल जैसे
6:49:44रिवॉल्यूशनरीज भी शामिल थे
6:49:46इनका प्लेन इंडिया में आर्म्ड रिबेलीयन
6:49:49इनसाइड करना था इसके लिए आम और
6:49:52वॉलिंटियर्स को इंडिया में भेजना की
6:49:54तैयारी करते हैं प्लेन के अनुसार उड़ीसा
6:49:56के बालेश्वर में हथियार पहुंचने थे और
6:49:59बंगाल की क्रांतिकारी बाघ जतिन इन्हीं
6:50:02लेने आने वाले थे लेकिन ब्रिटिशर्स को
6:50:04इनके प्लेन की भक ग जाति है और पुलिस
6:50:07फायरिंग में बाघ जतिन मारे जाते हैं
6:50:10दोस्तों इंडिया के बाहर सबसे इंपॉर्टेंट
6:50:12रिवॉल्यूशनरी ग्रुप था गदर पार्टी
6:50:18गदर पार्टी दोस्तों गदर पार्टी का इनिशियल
6:50:22नाम पेसिफिक कास्ट हिंदुस्तान संगठन था और
6:50:26इसे 15th जुलाई 1913 को लाल हरदयाल भगवान
6:50:30सिंह करतार सिंह सराभा और भाई परमानंद
6:50:33जैसे लीडर्स के नेतृत्व में उस में फॉर्म
6:50:36किया गया था इसका हैडक्वाटर्स सन
6:50:39फ्रांसिस्को में था यह लोग गदर नाम से एक
6:50:42पत्रिका भी पब्लिश करते थे जिसमें ब्रिटिश
6:50:44रूल के अगेंस्ट एक आर्म्ड रिवॉल्यूशन की
6:50:47बात होती थी गदर पार्टी इंडिया में
6:50:50क्रांति लाना चाहती थी और इनके इस प्लेन
6:50:53को प्रोत्साहन देने का कम करते हैं 1914
6:50:56के दो इवेंट्स पहले था
6:50:58मारू इंसिडेंट और दूसरा फर्स्ट वर्ल्ड वार
6:51:02की शुरुआत
6:51:03फर्स्ट वर्ल्ड वार
6:51:06इंसिडेंट की डीटेल्स जानना थोड़ा जरूरी है
6:51:09तो आई इसको समझते हैं दोस्तों
6:51:17सिंगापुर यानी कनाडा ले जा रही थी यह
6:51:22पैसेंजर मोस्टली सिंह और पंजाबी मुस्लिम
6:51:26पर पहुंचती है तो कनाडा अथॉरिटीज लोगों को
6:51:30शिवा से उतारने की परमिशन देने में डेरी
6:51:32करती है और लगभग 2 महीने तक पोस्ट पर ही
6:51:36अटकी रहती है इसके बाद इन्हें वापस जान के
6:51:39लिए का दिया जाता है ध्यान देने वाली बात
6:51:42यह है की कनाडा अथॉरिटीज ऐसा ब्रिटिश
6:51:45गवर्मेंट के इन्फ्लुएंस में करती हैं
6:51:47शिव सितंबर 1914 में कोलकाता वापस पहुंचती
6:51:51है वहां इन्हें तुरंत पंजाब जान वाली
6:51:54ट्रेन में बैठने का ऑर्डर दिया जाता है
6:51:56पहले से ही इतनी लंबी यात्रा करने की वजह
6:51:59से यह लोग परेशान थे ऐसे में यह ट्रेन में
6:52:02बैठने से माना कर देते हैं और इसी बात पर
6:52:04पुलिस के साथ इनका कनफ्लिक्ट शुरू हो जाता
6:52:07है
6:52:08कोलकाता के पास बज-बज नाम की जगह पर यह
6:52:11कनफ्लिक्ट होता है और इसमें 22 लोगों की
6:52:14मृत्यु हो जाति है और ब्रिटिश आर्मी की
6:52:16इंडियन सोल्जर को विद्रोह करने के लिए
6:52:18उकसाते हैं
6:52:20गदर पार्टी 21st फरवरी 1915 को फिरोजपुर
6:52:24लाहौर और रावलपिंडी गैरसैण में आर्म्ड
6:52:27रिवॉल्ट की डेट को भी फिक्स कर देती है
6:52:29लेकिन उनका यह प्लेन लास्ट मोमेंट पर
6:52:32धोखेबाजी की वजह से खराब हो जाता है उनका
6:52:35ही एक मेंबर ब्रिटिश अथॉरिटी से जा मिलता
6:52:38है और ब्रिटिशर्स फौरन एक्शन लेते हुए
6:52:41रिबेलियस रेजिमेंट को डिसबैंड कर देते हैं
6:52:44लीडर्स को अरेस्ट करके डिपो कर दिया जाता
6:52:47है और करीब 45 लोगों को फैंसी भी दी जाति
6:52:50है रोष बिहार बस जबान भागने में सफल होते
6:52:54हैं और वहां से अपना संघर्ष जारी रखते हैं
6:52:57दोस्तों गदर मूवमेंट की इंर्पोटेंस उनकी
6:53:01आईडियोलॉजी में है यह पुरी तरह सेकुलर
6:53:04अप्रोच के साथ मिलिटेंट नेशनलिज्म की सिख
6:53:06देते हैं पॉलीटिकल
6:53:09हो जाते हैं क्योंकि इनके पास ऑर्गेनाइज्ड
6:53:12लीडरशिप की कमी थी इसके साथ ही ये आम
6:53:16रिपोर्ट के लिए हर लेवल पर जरूरी
6:53:18प्रिपरेशन को भी अंदर एस्टीमेट कर लेते
6:53:21दोस्तों इस तरह इंडिया से बाहर र कर भी
6:53:24रिवॉल्यूशनरीज देश की आजादी के लिए संघर्ष
6:53:28करते रहते हैं कंक्लुजन
6:53:31दोस्तों यह था रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट का
6:53:34फर्स्ट फेस
6:53:35रिवॉल्यूशनरी भले ही एक बड़ी क्रांति करके
6:53:38ब्रिटिशर्स को देश से भागने में असफल रहते
6:53:40हैं लेकिन इंडियन नेशनल मूवमेंट में उनका
6:53:44कंट्रीब्यूशन अनमोल है अपनी एक्टिविटी से
6:53:47इन्होंने लोगों में नेशनलिज्म की भावना को
6:53:50और ज्यादा प्रबल बनाया था इनकी वजह से
6:53:53देशवासियों में सेल्फ रिस्पेक्ट और सेल्फ
6:53:56कॉन्फिडेंस की वृद्धि होती है यह इन
6:53:59क्रांतिकारी की एक्टिविटीज का ही नतीजा था
6:54:01की ब्रिटिश रूल का डर लोगों में से निगलना
6:54:04शुरू हो जाता है महात्मा गांधी इन साउथ
6:54:08अफ्रीका दोस्तों इंडियन नेशनल मूवमेंट का
6:54:11पाठ बने से पहले गांधीजी साउथ अफ्रीका में
6:54:14ब्रिटिश कॉलोनियल रूल को चैलेंज कर चुके
6:54:16थे आज हम उनके साउथ अफ्रीकन कैंपेन को
6:54:19डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं हम
6:54:21जानेंगे की कैसे गांधीजी साउथ अफ्रीका में
6:54:24एक लीडर के रूप में उभरते हैं और किस तरह
6:54:27यहां इंडियन के राइट्स को प्रोटेस्ट करते
6:54:29हैं
6:54:31शुरू करते हैं इंट्रोडक्शन दोस्तों
6:54:34गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर
6:54:361869 को गुजरात में पोरबंदर नाम की जगह पर
6:54:40हुआ था यह अपने फादर करमचंद गांधी की सबसे
6:54:43छोटी संतान थे इनकी मदर का नाम पुतलीबाई
6:54:47था और वो इनके फादर की फौजी वाइफ थी गांधी
6:54:50जी की स्कूलिंग पास के राजकोट से हुई थी
6:54:53जहां उनके फादर लोकल रोलर के एडवाइजर के
6:54:56रूप में कम करते थे 13 साल की आगे में
6:54:59गांधीजी की शादी कस्तूरबा से हो जाति है
6:55:01फिर सितंबर 1888 में डॉ पढ़ने के लिए
6:55:05गांधीजी इंग्लैंड चले जाते हैं यहां वो
6:55:07सक्सेसफुली अपनी डिग्री कंप्लीट करते हैं
6:55:09और 10 जून 1891 को उन्हें बार में बुलाया
6:55:13जाता है
6:55:14[संगीत]
6:55:17लेकिन इस साल वो इंडिया वापस ए जाते हैं
6:55:20अगले दो साल तक गांधीजी मुंबई में अपनी लो
6:55:23प्रैक्टिस एस्टेब्लिश करने की कोशिश करते
6:55:25हैं लेकिन उन्हें रिलाइज होता है की ना तो
6:55:28उन्हें इंडियन डॉ की इतनी नॉलेज है और ना
6:55:31ही ट्रायल फेस करने का सेल्फ कॉन्फिडेंस
6:55:32इसलिए गांधीजी वापस अपने घर पूर्व बंदर
6:55:36लोट जाते हैं यहां वो अपने फ्यूचर को लेकर
6:55:39परेशान ही हो रहे थे की तभी साउथ अफ्रीका
6:55:41में लोकेटेड एक इंडियन बिजनेस फर्म का
6:55:44रिप्रेजेंटेटिव इसे मिलने आता है
6:55:46वह गांधीजी को एंप्लॉयमेंट को ऑफर देता है
6:55:49हम डिटेल फाइव पाउंड की फीस में 12 महीने
6:55:52के लिए गांधी जी को साउथ अफ्रीका में कम
6:55:54करना था
6:55:55गांधीजी ऑफर को एक्सेप्ट कर लेते हैं और
6:55:58साउथ अफ्रीका की उनकी जर्नी शुरू होती है
6:56:00अराइवल इन साउथ अफ्रीका दोस्तों 24th में
6:56:041893 को गांधीजी डरबन पहुंच जाते हैं यहां
6:56:08उन्हें मर्चेंट दादा अब्दुल्ला के लिए
6:56:10लीगल काउंसिल का कम करना था एक महीने बाद
6:56:14ही कम के सिलसिले में उन्हें ट्रेन से
6:56:16प्रिटोरिया नाम की जगह पर जाना होता है
6:56:18इसी जननी के रास्ते में गांधीजी नेटल के
6:56:21पीटर मैरिज बग स्टेशन से भी गुजरते हैं
6:56:24यहां गांधीजी ट्रेन के फर्स्ट क्लास
6:56:27कंपार्टमेंट में बैठे हुए थे तभी एक
6:56:30व्हाइट परसों कंपार्टमेंट में इंटर करता
6:56:31है और तुरंत रेलवे ऑफिशल्स को बुला लेट है
6:56:35रेलवे ऑफिशल्स गांधीजी को थर्ड क्लास
6:56:37कंपार्टमेंट में जान का ऑर्डर देता है
6:56:39क्योंकि इंडियन और अन्य नॉनवाॅयस को
6:56:42फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में ट्रैवल करने
6:56:44की परमिशन नहीं थी
6:56:45गांधीजी इसका विरोध करते हैं और अपना टिकट
6:56:48भी दिखाई हैं जो की फर्स्ट क्लास
6:56:50कंपार्टमेंट का ही था लेकिन ऑफिसर्स कुछ
6:56:53भी सुनने को तैयार नहीं थे और गांधी जी के
6:56:56ऑर्डर ना माने पर वो उन्हें ट्रेन से
6:56:58धक्का दे देते हैं उनके लगेज को भी
6:57:01प्लेटफॉर्म पर ही फेक दिया जाता है
6:57:03गांधीजी को पुरी रात स्टेशन पर ही गुजरानी
6:57:06पड़ती है यह पहले मौका था जब गांधी जी को
6:57:09रेसिजम का सामना करना पड़ता है
6:57:19की ब्रोकली ड्रेस इंडियन को फर्स्ट और
6:57:22सेकंड क्लास टिकट दे दी जाएगी लेकिन यह
6:57:25गांधीजी की सिर्फ पार्शियल विक्ट्री की थी
6:57:27साउथ अफ्रीका में र रही इंडियन के लिए
6:57:30रेसियल डिस्क्रिमिनेशन आम बात हो चुकी थी
6:57:33उन्हें व्हाइट सीसम की वजह से रोजाना ही
6:57:36हमिलिएशन और कंटेंप्ट झेलना पड़ता था बहुत
6:57:40सी कॉलोनी में बिना परमिट के रात 9:00 बजे
6:57:42के बाद इंडियन को बाहर आने की परमीशंस तक
6:57:45नहीं थी और ना ही ये लोग पब्लिक फुटपाथ का
6:57:48उसे कर सकते थे प्रिटोरिया पहुंचकर
6:57:50गांधीजी अपना लीगल क शुरू कर देते हैं साथ
6:57:53ही वहां र इंडियन की मीटिंग बुलेट हैं और
6:57:56उन्हें ऑर्गेनाइज होकर शोषण का विरोध करने
6:57:59का सुझाव देते हैं साथ ही प्रेस के थ्रू
6:58:02भी गांधीजी अन्य के खिलाफ अपनी आवाज उठाते
6:58:05हैं इस समय तक गांधीजी का साउथ अफ्रीका
6:58:07में रुकने का कोई प्लेन नहीं था लेकिन फिर
6:58:10भी वो अपनी तरफ से
6:58:12अगेंस्ट इंडियन को अराउस करने की पुरी
6:58:15कोशिश करते हैं अपने डॉ के इसको सेटल करने
6:58:18के बाद गांधीजी वापस इंडिया जान की तैयारी
6:58:21करने लगता हैं लेकिन ऐसा होता नहीं है
6:58:23गांधीजी को साउथ अफ्रीका में अभी लंबे समय
6:58:26के लिए रहना था
6:58:28डी स्ट्रगल बिगिंस दोस्तों एक तरफ तो
6:58:31गांधीजी 1894 में अपना कम खत्म करके वापस
6:58:34इंडिया जान वाले थे और दूसरी तरफ नेपाल की
6:58:38सांसद एक ऐसा बिल लाने की तैयारी में थी
6:58:40जिसे इंडियन से वोटिंग का अधिकार छन लिया
6:58:43जाता अप्रैल 1894 में गांधीजी के फेयरवेल
6:58:47डिनर के समय इस बिल पर डिस्कशन शुरू हो
6:58:49जाता है
6:58:50गांधीजी अपने साथियों से कहते हैं की किसी
6:58:53भी तरह से इस बिल को पास होने से रोकना
6:58:55चाहिए नहीं तो यह उनके कॉफिन की पहले कल
6:58:59बन शक्ति है लेकिन वहां मौजूद सभी लोगों
6:59:02को लगता है की गांधी जी के बिना वो इस बिल
6:59:05का विरोध नहीं कर पाएंगे इसलिए सभी गांधी
6:59:08जी से और 1 महीने साउथ अफ्रीका में ही
6:59:11रुकने के लिए कहते हैं
6:59:13लेकिन यह लोग गांधीजी को ही अपना लीडर
6:59:17क्यों बनाना चाहते थे जो अभी मैच 25 साल
6:59:20के ही थे एक्सपीरियंस और आगे में उनसे भी
6:59:23बड़े-बड़े मरचेंट्स साउथ अफ्रीका में
6:59:25मौजूद थे ऐसा इसलिए क्योंकि जी इंग्लैंड
6:59:29से पढ़ाई करके लौटे थे उन्हें इंग्लिश की
6:59:31अच्छी नॉलेज थी और साउथ अफ्रीका में र रहे
6:59:34ज्यादातर इंडियन को इंग्लिश नहीं आई थी
6:59:36शादी गांधीजी बैरिस्टर भी थे इसलिए पिटीशन
6:59:40ड्राफ्ट कर सकते थे एक वही थे जो रोलर से
6:59:44उनकी ही लैंग्वेज में बात कर सकते थे और
6:59:46इंडियन को उनके सामने रिप्रेजेंट कर सकते
6:59:49थे इसलिए गांधीजी को यह लोग अपना लीडर
6:59:53चुनते हैं उसे समय ना इन्हें पता था और ना
6:59:56ही गांधी जी को अंदाज़ था की आने वाले 20
6:59:59साल तक वो साउथ अफ्रीका में ही र कर अपने
7:00:01लोगों की स्ट्रगल में बड़ी भूमिका
7:00:03निभाएंगे
7:00:051894 296
7:00:07मॉडरेट फेस ऑफ डी स्ट्रग
7:00:10दोस्तों गांधी जी फेयरवेल डिनर को ही एक
7:00:13मीटिंग में बादल देते हैं और यहां पर ही
7:00:16एक्शन कमेटी फॉर्म कर ली जाति है यह कमेटी
7:00:19नडाल लेजिसलेटिव असेंबली के लिए एक पिटीशन
7:00:22ड्राफ्ट करती है वॉलिंटियर्स पिटीशन की
7:00:25कॉप्स बनाते हैं और पुरी रात उसके ऊपर
7:00:27सिग्नेचर कलेक्ट करते हैं
7:00:29पिटीशन को अगली सुबह प्रेस में भी अच्छी
7:00:32खासी पब्लिसिटी मिलती है लेकिन इन सभी
7:00:34एफर्ट्स के बावजूद असेंबली बिल पास कर
7:00:37देती है गांधीजी फिर भी हर नहीं मानते और
7:00:40एक दूसरी पिटीशन पर कम करना शुरू कर देते
7:00:42हैं इस बार पिटीशन लॉर्ड रिपन के लिए
7:00:45तैयार की जा रही थी लॉर्ड रिपन उसे समय
7:00:48सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पर कॉलोनी की पोस्ट
7:00:50हॉल कर रहे थे एक महीने के अंदर ही 10000
7:00:54सिग्नेचर के साथ यह पिटीशन लॉर्ड रिपन के
7:00:57पास भेज दी जाति है डिस्ट्रीब्यूशन के लिए
7:01:00इसकी हजार कॉप्स भी बनाई जाति हैं
7:01:07और पहले बार इंडिया के लोगों को साउथ में
7:01:11र रही अपने साथियों की हालात के बड़े में
7:01:13पता चला है
7:01:1420 सेकंड अगस्त 1894 को गांधीजी साउथ
7:01:18अफ्रीका में इंडियन के राइट्स को
7:01:20प्रोटेस्ट करने के लिए नेटल इंडियन
7:01:22कांग्रेस नाम से पहले पॉलीटिकल
7:01:24ऑर्गेनाइजेशन की स्थापना करते हैं इंडियन
7:01:26ओपिनियन नाम से अपना एक न्यूज़ पेपर भी
7:01:29शुरू करते हैं
7:01:301894 से 196 तक गांधीजी की पॉलीटिकल
7:01:34एक्टिविटीज को मॉडरेट फैज बोला जा सकता है
7:01:36क्योंकि इस दौरान गांधीजी पिटीशन और
7:01:40मेमोरेंडम्स भेजना पर ही ध्यान देते हैं
7:01:42यह पिटीशन साउथ अफ्रीकन लेजिस्लेटर्स के
7:01:45साथ लंदन में कॉलोनियल सेक्रेटरी और
7:01:48ब्रिटिश पार्लियामेंट तक को भेजी जाति हैं
7:01:51की अगर इंपीरियल गवर्नमेंट के सामने कैसे
7:01:55के सभी फैक्ट्स रख दिए जैन तो ब्रिटिश
7:01:57सेंस ऑफ जस्टिस जग जाएगा और इंपीरियल
7:02:00गवर्नमेंट इंडियन के बिहा पर साउथ अफ्रीका
7:02:03में जरूर करेगी क्योंकि इंडियन आखिर
7:02:06ब्रिटिश सब्जेक्ट्स ही तो थे
7:02:08लेकिन 196 आते आते गांधीजी सभी मॉडरेट
7:02:12मैथर्ड को ट्राई कर चुके थे
7:02:14है और कोई भी सफलता नहीं मिल रही थी इसलिए
7:02:17उनको लगे लगा था की आगे बढ़ाने के लिए
7:02:19किसी और मेथड की जरूर है तब 196 से पैसिव
7:02:25रेजिस्टेंस या सत्याग्रह का फैज शुरू होता
7:02:27है
7:02:2919629914
7:02:31फैज ऑफ पैसिव रेजिस्टेंस और सत्याग्रह
7:02:34दोस्तों पैसिव रेजिस्टेंस या सत्याग्रह का
7:02:37उसे गांधीजी सबसे पहले बार रजिस्ट्रेशन
7:02:40सर्टिफिकेट का विरोध करने के लिए करते हैं
7:02:44196 में कानून लाया गया था जिसके तहत
7:02:47इंडियन को अपने फिंगरप्रिंट्स वाला
7:02:49रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हमेशा अपनी साथ
7:02:52रखना था
7:02:5311th सितंबर 1900
7:02:56के अंपायर थिएटर में एक पब्लिक मीटिंग
7:02:59होती है यहां इंडियन फैसला करते हैं की वह
7:03:02इस कानून को नहीं मानेंगे और उसके परिणाम
7:03:05भुगतने के लिए तैयार हैं
7:03:07गांधी जी कैंपेन को चलने के लिए पैसिव
7:03:10रेजिस्टेंस संगठन की स्थापना करते हैं
7:03:13रजिस्ट्रेशन की लास्ट डेट निकाल जाति है
7:03:16गवर्नमेंट गांधीजी और उनके 26 साथियों के
7:03:20अगेंस्ट करवाई शुरू करती है यह लोग
7:03:24कंट्री छोड़कर जान का ऑर्डर मिलता है और
7:03:27ऑर्डर ना माने पर इन्हें जय में दाल दिया
7:03:29जाता है इसी तरह जय जान वालों की संख्या
7:03:32बढ़नी जाति है जल्दी ही इनका नंबर 155
7:03:35पहुंच जाता है लोगों के मां से जय का डर
7:03:39निकाल जाता है जय को किंग एडवर्ड का होटल
7:03:41कहा जान लगा था ऐसे में जनरल स्मार्ट जो
7:03:45की साउथ अफ्रीका में डिफरेंस और नेटिव
7:03:46अफेयर्स मिनिस्टर थे गांधीजी को बात करने
7:03:49के लिए बुलेट हैं और वादा करते हैं की अगर
7:03:52इंडियन वॉलनटिअरीली रजिस्टर कर लेने तो ये
7:03:55कानून वापस ले लिया जाएगा
7:03:58गांधी जी इनकी बात मां लेते हैं और सबसे
7:04:01पहले खुद ही रजिस्टर करते हैं लेकिन जनरल
7:04:04स्मैश धोखा दे देते हैं और ऑर्डर देते हैं
7:04:07की वॉलंटरी रजिस्ट्रेशन को कानून के तहत
7:04:10रतीफाई किया जाए इसके बदले में इंडियन
7:04:13अपने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को पब्लिकली
7:04:16जल देते हैं इसी बीच गवर्नमेंट एक और
7:04:19कानून लेकर आई है जिसका मकसद साउथ अफ्रीका
7:04:22में इंडियन इमीग्रेशन पर रिस्ट्रिक्शन
7:04:24लगाना था इसकी अगेंस्ट भी इंडियन
7:04:27प्रोटेस्ट करना शुरू करते हैं गवर्नमेंट
7:04:29प्रोटेस्टर्स को जय में डालना शुरू कर
7:04:31देती है अक्टूबर 1900 में गांधी जी को भी
7:04:35जय हो जाति है इसके बाद भी इन लोगों की
7:04:38स्पिरिट कमजोर नहीं होती
7:04:40ऐसे में गवर्नमेंट इन लोगों को इंडिया
7:04:43डिपो करना शुरू कर देती है
7:04:51आंदोलन अब कमजोर पढ़ने लगता है लिमिटेड
7:04:54सत्याग्रह इसका तो जय से अंदर बाहर होना
7:04:57लगा राहत है लेकिन ज्यादातर लोगों में अब
7:05:00थकावट के साइन दिखने लगता हैं
7:05:03आंदोलन बहुत लंबा होता जा रहा था और
7:05:05गवर्नमेंट अभी भी इनकी डिमांड एक्सेप्ट
7:05:08करने के मूड में नहीं थी
7:05:09सत्याग्रही को सपोर्ट करने के लिए फंड्स
7:05:12भी खत्म होते जा रहे थे ऐसे में अपने एक
7:05:16जर्मन फ्रेंड टैलेंट बा की मदद से गांधीजी
7:05:191910 में जो हेन्सबर्ग के पास टॉलस्टॉय
7:05:23फॉर्म की स्थापना करते हैं इस
7:05:25एक्सपेरिमेंट को गांधीजी इंडिया में भी
7:05:27आगे बढ़ते हैं और साबरमती जैसे आश्रम की
7:05:30स्थापना करते हैं यहां सत्याग्रही इसकी
7:05:33फैमिली र शक्ति थी और खुद को सस्टेन कर
7:05:36शक्ति थी इसके साथ ही इंडिया से भी फंड्स
7:05:39आने लगता हैं सर रतन टाटा 25000 रुपए
7:05:43भेजते हैं कांग्रेस मुस्लिम लीग और
7:05:45हैदराबाद के निजाम भी अपना कंट्रीब्यूशन
7:05:47देते हैं
7:05:49आंदोलन का डेरा समय के साथ बढ़ता जाता है
7:05:521913 आते-आते इसमें टोल टैक्स का विरोध भी
7:05:56शामिल कर लिया जाता है सभी एक-इंडेक्ट
7:05:59इंडियन के ऊपर तीन पाउंड का पाल टैक्स
7:06:01लगाया जाता था
7:06:05जो पहले बांडेड लेबर की तरह कम करते थे
7:06:08इसके अबोलिशन की डिमांड कैंपेन के बेस को
7:06:11और ज्यादा बड़ा कर देती है क्योंकि इन
7:06:14डेंजर
7:06:15लेबर्स अब इससे जुड़ने जाते हैं अब यह
7:06:19सत्याग्रह पुरी तरह से एक मांस मूवमेंट बन
7:06:22जाता है इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का एक
7:06:25ऑर्डर इंडियन मैरिज को इन वैलिडेट कर देता
7:06:28है इस ऑर्डर के हिसाब से जो भी क्रिश्चियन
7:06:32तरीके से नहीं हुई है और रजिस्टर ऑफ मैरिज
7:06:35के पास रजिस्टर नहीं
7:06:37होगी इसका मतलब था की हिंदू मुस्लिम और
7:06:41पारसी मैरिज इलीगल हो गई थी और ऐसी
7:06:44शादियों से होने वाले बच्चों को
7:06:46इलेजिटीमेट कहा गया था
7:06:48इस जजमेंट को इंडियन अपनी वूमेन की इंसल्ट
7:06:51मानते हैं और इस वजह से बहुत साड़ी वूमेन
7:06:54भी अब आंदोलन से जुड़ जाति हैं यहां से
7:06:57आंदोलन का फाइनल फीस शुरू हो जाता है
7:07:00इमीग्रेशन कानून को तोड़ने के लिए लोग
7:07:03इलीगली बॉर्डर क्रॉस करना शुरू करते हैं
7:07:05माइंस और फैक्टरीज में स्ट्रीक्स की जाति
7:07:08है
7:07:08गांधीजी खुद न्यू कैसल टाउन पहुंचकर
7:07:11एजीटेशन को लीड करते हैं
7:07:13न्यूकासल नेपाल में एक मीनिंग टाउन था
7:07:16यहां के वर्कर्स ने स्ट्राइक कर दी थी
7:07:19इसलिए एंपलॉयर्स वर्कर्स क्वार्टर्स की
7:07:21इलेक्ट्रिसिटी और वाटर कनेक्शन कट कर देते
7:07:24हैं ऐसे में यहां रहने वाले करीब 2000
7:07:27लोगों को लेकर गांधी जी ट्रांसवर बॉर्डर
7:07:29के लिए मार्च शुरू करते हैं यह लोग
7:07:32ट्रांसपेरेंट जय में जाना चाहते थे मार्च
7:07:35के दौरान दो बार गांधीजी को अरेस्ट करके
7:07:38छोड़ दिया जाता है और तीसरी बार अरेस्ट
7:07:40होने पर जय भेज दिया जाता है लेकिन
7:07:43वर्कर्स का मॉडल टाउन नहीं होता वो अपना
7:07:46मार्च जारी रखते हैं फिर जबरदस्ती
7:07:55इन लोगों को जय में बहुत ही खराब
7:07:57ट्रीटमेंट दिया जाता है जिसमें स्टार्वेशन
7:08:00और विपिन शामिल था साथ ही फोर्सफुली
7:08:03माइंड्स में भी क कराया जाता है गवर्नमेंट
7:08:06के इस एक्शन से पुरी इंडियन कम्युनिटी
7:08:08गुस्से में ए जाति है
7:08:10प्लांटेशंस और माइंस में कम करने वाले
7:08:12वर्कर्स स्ट्राइक करने लगता हैं एनिमेट और
7:08:15पीसफुल मां और वूमेन के अगेंस्ट उसे किया
7:08:18जा रहे इस ब्रूटल फोर्स की हर जगह निंदा
7:08:21होने लगती है ऐवेंंचुअली गवर्नमेंट
7:08:23गांधीजी के साथ नेगोशिएशंस के लिए तैयार
7:08:26हो जाति है
7:08:27एग्रीमेंट के अनुसार साउथ अफ्रीका की
7:08:31गवर्नमेंट मेजर इंडियन डिमांड्स को मां
7:08:33लेती है यानी की पाल टैक्स और रजिस्ट्रेशन
7:08:36सर्टिफिकेट को खत्म कर दिया जाता है
7:08:38इंडियन रीति रिवाज से होने वाली शादियों
7:08:42को भी मान्य कर दिया जाता है
7:08:50इस तरह साउथ अफ्रीका में गांधीजी का
7:08:53आंदोलन सफल राहत है नॉन वायलेट सिविल
7:08:56डिसऑबेडिएंट से अपने अपॉन्ंस को
7:08:58नेगोशिएटिंग टेबल पर आने के लिए मजबूर कर
7:09:00दिया जाता है और आंदोलन के दौरान राखी गई
7:09:03डिमांड्स को भी पूरा करवा लिया जाता है
7:09:06कंक्लुजन दोस्तों साउथ अफ्रीका के इस
7:09:10स्ट्रगल के दौरान ही गांधीजी एक लीडर बनते
7:09:13हैं यहां पर ही उन्होंने अहिंसा पर आधारित
7:09:16सत्याग्रह टेक्निक कू डेवलप किया इस
7:09:19सत्याग्रह के दौरान उन्होंने अलग-अलग
7:09:21कम्युनिटी के साथ कम करना भी शिखा चाहे वो
7:09:25मुस्लिम हो तमिल हूं पारसी हूं या फिर
7:09:28हिंदू साउथ अफ्रीका में गांधीजी को मौका
7:09:31मिलता है अपने पॉलीटिकल और लीडरशिप स्टाइल
7:09:34को इवॉल्व करने यहां पर वह आंदोलन को
7:09:37मॉडरेट फेस से गांधियन फेस तक लेकर गए थे
7:09:40अब ऐसा ही कुछ उन्हें इंडिया में भी करना
7:09:43था
7:09:451893 में गांधीजी एक वकील के रूप में
7:09:48इंडिया से गए थे लेकिन 1915 में साउथ
7:09:50अफ्रीका से सिर्फ एक वकील नहीं बल्कि एक
7:09:53नेशनल हीरो और लीडर लोट कर आता है जो की
7:09:56आगे चलकर इंडिया के नेशनल मूवमेंट का रुख
7:09:59ही बदलने वाला था आगे आने वाले वीडियो में
7:10:02हम देखेंगे की कैसे गांधीजी इंडिया की
7:10:05आंदोलन की लीडरशिप अपने हाथ में लेते हैं
7:10:08अराइवल ऑफ गांधी और अर्ली मूवमेंट्स
7:10:12दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हम इंडियन
7:10:15नेशनल मूवमेंट के 1917 से 18 तक की
7:10:18इवेंट्स को कर कर चुके हैं इसके बाद का जो
7:10:21टाइम पीरियड है उसे गांधियन एरा के नाम से
7:10:24जाना जाता है
7:10:26नेशनल मूवमेंट की दिशा तो पुरी तरह बदली
7:10:29जाति है साथ ही यह पीरियड आजादी के बाद के
7:10:33भारत को भी दिशा दिखाने का कम करता है आज
7:10:36हम इसी को शुरू करने वाले हैं हम जानेंगे
7:10:39की कैसे गांधीजी इंडिया के नेशनल मूवमेंट
7:10:42को एक नई डायरेक्शन देते हैं साथ ही उनकी
7:10:45एडोलॉजी और शुरुआत के कुछ इंपॉर्टेंट
7:10:48मूवमेंट्स को भी कर करेंगे तो आई शुरू
7:10:51करते हैं
7:10:54अराइवल ऑफ गांधीजी
7:10:57दोस्तों गांधीजी जनवरी 1915 में साउथ
7:11:01अफ्रीका से इंडिया वापस आते हैं उनके साउथ
7:11:04अफ्रीकन कैंपेन को हम अपनी पिछली वीडियो
7:11:07में डिटेल में कर कर चुके हैं साउथ
7:11:09अफ्रीका में किया गए उनके कम के बड़े में
7:11:11सिर्फ एजुकेटेड क्लास ही नहीं बल्कि आम
7:11:14जनता भी जान गई थी इसीलिए इंडिया में उनकी
7:11:17पहचान एक सफल लीडर के रूप में बन चुकी थी
7:11:21साउथ अफ्रीका में संघर्ष के दौरान ही
7:11:23नेशनल मूवमेंट के लिए गांधीजी की
7:11:26आईडियोलॉजी भी डेवलप होती है उनकी एडोलॉजी
7:11:29का बेस सत्य और अहिंसा पर आधारित
7:11:31सत्याग्रह था इसके अलावा गांधीजी सर्वोदय
7:11:36यानी की सभी के विकास में बिलीव करते थे
7:11:39गांधीजी की एडोलॉजी प्रेरित थी उनकी मदर
7:11:42के आदर्श से जैनिज्म फिलासफी से हिंदुइज्म
7:11:46से और लियो टॉलस्टॉय के विचारों से इंडिया
7:11:49आने के बाद अपने राजनैतिक गुरु गोखले की
7:11:52खाने पर गांधी जी एक साल तक देश घूमते हैं
7:11:55जिससे वो देश और उसके लोगों की हालात को
7:11:58अच्छे से समझ सकें गांधीजी उसे समय चल रही
7:12:01होम रूल एजीटेशन की फीवर में नहीं थे
7:12:03क्योंकि उन्हें लगता था की वार के बीच में
7:12:06ब्रिटेन से होम रूल की डिमांड करना सही
7:12:09नहीं यहां तक की वह वार के लिए सोल्जर
7:12:12रिक्रूट करने में भी ब्रिटिश की हेल्प
7:12:15करते हैं इसके लिए उन्हें रिक्रूटिंग
7:12:17सार्जेंट ऑफ डी गवर्नमेंट के नाम से भी
7:12:19जाना जाता है
7:12:21साथ ही वार में उनकी सर्विसेज के लिए
7:12:23ब्रिटिश गवर्नमेंट उन्हें कैसे हिंद मेडल
7:12:26भी देती है
7:12:27फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान ही गांधीजी
7:12:30इंडिया में कुछ लोकल लेवल आंदोलन का
7:12:33हिस्सा भी बनते हैं
7:12:38चंपारण अहमदाबाद और खेड़ा सत्याग्रह
7:12:44दोस्तों बिहार के चंपारण जिला में
7:12:47यूरोपियन प्लांटर्स किसने को इंडिगो यानी
7:12:50की नील की खेती करने के लिए फोर्स कर रहे
7:12:52थे जिसकी वजह से यहां के किसान बहुत
7:12:55परेशान थे ना तो वो अपनी जरूर के अनुसार
7:12:58फूड क्रॉप्स गो कर सकते थे और ना ही
7:13:01उन्हें इंडिगो के लिए सही दम ही मिलते थे
7:13:04यहां जो सिस्टम चल रहा था उसे तीन कठिया
7:13:07सिस्टम कहा जाता था इसका मतलब था की किसान
7:13:10को कम से कम तीन कत्था जमीन पर इंडिगो की
7:13:14खेती करनी होती थी कथा लैंड मेजरमेंट की
7:13:17एक यूनिट थी जिसमें 20 कथा एक बीघा के
7:13:21बराबर होता था शुरुआत में तो किसने को
7:13:23इसके अच्छे दम मिलते थे इसलिए वह इंडिगो
7:13:25की खेती के लिए तैयार हो गए
7:13:31इंडिगो को रिप्लेस करने लगती हैं ऐसी
7:13:34सिचुएशन में अपने प्रॉफिट को मैक्सिमाइज
7:13:37करने के लिए यूरोपियन प्लांटर्स किसने से
7:13:39हाय रेंज और लीगल न्यूज़ की डिमांड करने
7:13:42लगता
7:13:43साथ ही किसने को फोर्स किया जाता है की वो
7:13:46यूरोपियंस के द्वारा फिक्स किया गए
7:13:48प्राइसेस पर अपने प्रोड्यूस को बीच दे और
7:13:50अगर किसान इंडिगो गो करने से माना करते तो
7:13:54पुलिस और ज्यूडिशरी की हेल्प से उन्हें
7:13:56डराया धमकाया जाता था इस वजह से यहां के
7:13:59किसने की हालात बहुत ही खराब हो चुकी थी
7:14:02गांधी जी को इसके बड़े में राजकुमार
7:14:04शुक्ला नाम के एक व्यक्ति से पता चला है
7:14:06जो चंपारण के ही एक किसान थे राजकुमार
7:14:11शुक्ला गांधीजी से मिलकर उन्हें चंपारण के
7:14:14किसने की मदद करने के लिए कहते हैं उसे
7:14:16समय यानी की 1916 में गांधीजी कांग्रेस का
7:14:20सेशन अटेंड करने के लिए लखनऊ में थे उनके
7:14:23पास चंपारण जान का समय नहीं था लेकिन
7:14:26राजकुमार शुक्ला उनका पीछा नहीं छोड़ते वह
7:14:29गांधीजी को हर जगह फॉलो करते हैं और उनसे
7:14:32रिक्वेस्ट करते हैं की वह एक बार चंपारण
7:14:35चलकर किसने की हालात खुद देख लेने फाइनली
7:14:38गांधीजी उन्हें प्रॉमिस करते हैं की वह
7:14:41कोलकाता की विजिट के बाद
7:14:43चंपारण पहुंच जाएंगे
7:14:45गांधी जी जब कोलकाता पहुंचने हैं तब
7:14:48राजकुमार शुक्ला उन्हें चंपारण ले जान के
7:14:50लिए वहां पहले से ही मौजूद होते हैं
7:14:531917 की शुरुआत में गांधीजी चंपारण पहुंच
7:14:57जाते हैं इसके बाद गांधीजी राजेंद्र
7:15:00प्रसाद नरहरि पारीक जी बी कृपलानी और
7:15:03महादेव देसाई जैसे लोकल लीडर्स के साथ
7:15:05मिलकर एक टीम बनाते हैं यह लोग किसने की
7:15:09समस्या को सही तरीके से समझना के लिए एक
7:15:12सर्वे शुरू करते हैं
7:15:13गांधी जी की एक्टिविटीज को देखकर लोकल
7:15:16ब्रिटिश ऑफिसर्स थोड़ा घबरा जाते हैं
7:15:18उन्हें डर लगता है की कहानी साउथ अफ्रीका
7:15:21की तरह गांधीजी यहां भी कोई बड़ा आंदोलन
7:15:24ना खड़ा कर दें इसलिए ब्रिटिश गवर्नमेंट
7:15:26इंडिगो कल्टीवेटर की समस्या का हाल
7:15:29निकालना के लिए खुद ही एक कमेटी सेटअप
7:15:31करती है
7:15:37गांधीजी कम्युनिटी के मेंबर्स को कन्वेंस
7:15:39करने में कामयाब होते हैं की तीन कठिया
7:15:42सिस्टम पुरी तरह गलत है और इसे पॉलिश करने
7:15:45की जरूर है साथ ही इंडिगो प्लांटर्स के
7:15:48साथ एग्रीमेंट करते हैं की उन्होंने किसने
7:15:51से जो इलीगल न्यूज़ वसूल किया थे उसका 25%
7:15:55किसने को कंपनसेशन अमाउंट के रूप में वापस
7:15:58करें इस तरह गांधी
7:16:01के किसने की समस्या हाल हो जाति है यहां
7:16:04पर यह समझना जरूरी है की किसने की फूल
7:16:07कंपनसेशन की डिमांड नहीं मनी जाति लेकिन
7:16:10गांधीजी मिडिल पाठ और कंप्रोमाइज में यकीन
7:16:13करते थे
7:16:14चंपारण के बाद गांधी जी को मार्च 1918 में
7:16:17अहमदाबाद से बुलावा जाता है यहां कॉटन में
7:16:21लर्स और वर्कर्स के बीच प्लेग बोनस के
7:16:24डिस्कंटीन्यूएशन के इशू पर डिस्प्यूट खड़ा
7:16:26हो गया था मिल ऑनर्स बोनस खत्म कर देना
7:16:29चाहते थे और वर्कर्स की डिमांड थी की इसके
7:16:32बदले में उनके वेजेस में 50% की बढ़ोतरी
7:16:36की जाए जिससे वो वो टाइम इन्फ्लेशन में
7:16:38खुद को मैनेज कर सकें लेकिन मिलन्स सिर्फ
7:16:4220% की बढ़ोतरी के लिए तैयार थे इसलिए
7:16:45वर्कर्स हड़ताल पर चले जाते हैं मिल ऑनर्स
7:16:49और वर्कर्स के बीच के रिश्ते और खराब होने
7:16:51लगता हैं जब हड़ताल पर गए वर्कर्स को
7:16:54डिसमिस किया जान लगता है और मुंबई से
7:16:56विवर्स को बुलाने का डिसीजन लिया जाता है
7:16:58ऐसी सिचुएशन में हेल्प के लिए वर्कर्स
7:17:01अनुसुइया साराभाई के पास पहुंचने हैं
7:17:06और अंबालाल साराभाई की बहन भी थी अंबाला
7:17:10होने के साथ-साथ अहमदाबाद मिल ऑनर्स संगठन
7:17:14के प्रेसिडेंट भी थे
7:17:17अनसूया बहन गांधीजी से इस डिस्प्यूट में
7:17:20इंटरव्यू करने की रिक्वेस्ट करती है वैसे
7:17:23तो गांधीजी अंबालाल साराभाई के दोस्त थे
7:17:25अंबालाल जी ने अहमदाबाद में आश्रम बनाने
7:17:28के लिए गांधीजी को डोनेशन भी दी थी लेकिन
7:17:31इसके बावजूद गांधीजी यहां वर्कर्स के साथ
7:17:34खड़े होते हैं अनुसुइया जी भी वर्कर्स को
7:17:37सपोर्ट करती हैं और गांधी जी का पूरा साथ
7:17:40देती हैं गांधी जी वर्कर से वेजेस में 50%
7:17:44की जगह 35% बढ़ोतरी की डिमांड पर हड़ताल
7:17:48करने के लिए कहते हैं इसके साथ ही हड़ताल
7:17:51के दौरान पुरी तरह अहिंसा का पालनपुर करने
7:17:53की सलाह भी वर्कर्स को देते हैं इसके बाद
7:17:56भी जब मिल ऑनर्स नहीं मानते तो वर्कर्स का
7:17:59मनोबल बढ़ाने के लिए गांधीजी खुद आमरण अंश
7:18:02पर बैठ जाते हैं ये पहले मौका था जब
7:18:05इंडिया में किसी पॉलीटिकल कॉल्स के लिए
7:18:07गांधीजी हंगर स्ट्राइक करते हैं
7:18:12और फाइनली
7:18:15के सामने रखना के लिए मां जाते हड़ताल
7:18:19वापस ले ली जाति है और ट्रिब्यूनल वर्कर्स
7:18:21की 35% बीज हाय की डिमांड को मां लिया
7:18:25जाता है
7:18:26अहमदाबाद स्ट्राइक के दौरान ही गांधीजी को
7:18:28खेड़ा आने का इनविटेशन मिल जाता है यहां
7:18:31पर 1918 में ड्रॉट की वजह से किसने की फसल
7:18:35बर्बाद हो गई थी रिवेन्यू कोड में
7:18:37प्रोविजन था की नॉर्मल प्रोड्यूस की तुलना
7:18:40में अगर 14th से भी गम की पैदावार होती है
7:18:43तो किसने का लगन माफ किया जा सकता है
7:18:45किसने की एक ऑर्गेनाइजेशन गुजरात सभा
7:18:48ब्रिटिश अथॉरिटीज के पास पिटीशन भेजती है
7:18:51की साल 1919 के लिए रिवेन्यू एसेसमेंट को
7:18:55सस्पेंड कर दिया जाए लेकिन गवर्नमेंट कुछ
7:18:58भी सुनने के लिए तैयार नहीं थी वह यहां तक
7:19:01का देती है की अगर किसान टैक्स नहीं देंगे
7:19:04तो उनकी प्रॉपर्टीज जप्त कर ली जाएगी
7:19:06खेड़ा में गांधीजी का साथ देने के लिए
7:19:08वल्लभ भाई पटेल नरहरि पारीक मोहनलाल
7:19:11पांड्या और रवि शंकर व्यास जैसे लीडर्स
7:19:14मौजूद थे यह लोग गांव जाकर किसने को
7:19:18ऑर्गेनाइज करते हैं और उन्हें बताते हैं
7:19:20की क्या करना है
7:19:23पेमेंट का डिसीजन लिया गया था इस
7:19:26सत्याग्रह के दौरान किसने ने शानदार
7:19:29अनुशासन और एकता का परिचय दिया था
7:19:33टैक्स पर एन करने की स्थिति में जब
7:19:35गवर्नमेंट किसने की पर्सनल प्रॉपर्टी जमीन
7:19:38ईटीसी को जप्त करना शुरू कर देती है तब भी
7:19:41किसान सरदार पटेल का साथ नहीं छोड़ते और
7:19:44फर्स्ट नॉन कोऑपरेशन आंदोलन में बने रहते
7:19:46हैं आखिर में गवर्नमेंट किसने के साथ
7:19:49समझौते के लिए मां जाति है साल 1919 के
7:19:53लिए टैक्स को सस्पेंड कर दिया जाता है और
7:19:56किसने की जो भी प्रॉपर्टीज की गई थी वो
7:19:59उन्हें लोटा दी जाति है इस तरह चंपारण
7:20:02अहमदाबाद और खेड़ा में गांधीजी लोगों की
7:20:05समस्या सुलझाने में कामयाब होते हैं और
7:20:07किसने और वर्कर्स के बीच अपनी एक पहचान
7:20:10बना लेते हैं इन लोकल लेवल इवेंट्स के बाद
7:20:13अब बड़ी थी एक जो इंडिया मूवमेंट की
7:20:16गांधीजी का पहले जो इंडिया लेवल का आंदोलन
7:20:19कौन सा था और वो किस तरह से होता है आई
7:20:22जानते हैं
7:20:30दोस्तों गांधी जी को उम्मीद थी की वर्ल्ड
7:20:33वार के और होने पर ब्रिटिश गवर्नमेंट
7:20:35इंडिया में जरूर कुछ रिफॉर्म्स लेकर आएगी
7:20:38लेकिन होता इसके उल्टा है इंडियन को
7:20:41कंसेशन की जगह मार्च 1990 में रोलेट एक्ट
7:20:44का तोहफा मिलता है
7:20:46रोल अटैक को थोड़ा डिटेल में समझते हैं
7:20:49वर्ल्ड वार के दौरान इंडियन रिवॉल्यूशनरी
7:20:52एक्टिविटीज को सुप्प्रेस करने के लिए
7:20:54ब्रिटिश डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1915 लेकर
7:20:58आए थे यह इमरजेंसी क्रिमिनल डॉ था मतलब
7:21:01वोट जैसी इमरजेंसी सिचुएशन के दौरान किसी
7:21:05भी तरह की रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी को
7:21:07रोकने के लिए एक हर्ष डॉ था यह वर्ल्ड वार
7:21:11के खत्म होने के 6 महीने बाद तक के लिए
7:21:13लागू किया गया था
7:21:15फर्स्ट वर्ल्ड वार नवंबर
7:21:42चेंज से जस्ट करना
7:21:45है इस कमेटी ने इंडिया में मिलिटेंट
7:21:47नेशनलिज्म को कंट्रोल करने के लिए डिफेंस
7:21:50ऑफ इंडिया एक्ट को इंडेफिनिटी टाइम के लिए
7:21:53एक्सटेंड करने का रिकमेंडेशन दिया यही
7:21:56एक्ट फिर रोलेट एक्ट के नाम से जाना जाता
7:21:58है हालांकि इसका ऑफिशल नाम अनक्कल और
7:22:02रिवॉल्यूशनरी क्राइम एक्ट 1919 है इस एक्ट
7:22:05का इनाम था ब्रिटिशर्स के खिलाफ किसी भी
7:22:08कंस्पायरेसी को शुरू होने से पहले ही खत्म
7:22:11कर देना इसकी प्रोविजंस के अनुसार पुलिस
7:22:14बिना किसी वारंट की किसी भी जगह को सर्च
7:22:17कर शक्ति थी इसके अलावा शक के आधार पर
7:22:20किसी को भी 2 साल के लिए बिना किसी ट्रायल
7:22:23के जय में डाला जा सकता था स्पेशल कोर्ट
7:22:26बनाए गए रौलट एक्ट से रिलेटेड जिसमें तीन
7:22:29जज की बेंच फैसला करती थी और इनके फैसला
7:22:32के खिलाफ किसी भी तरह की अपील नहीं की जा
7:22:35शक्ति थी इसलिए इस एक्ट को नो अपील नो
7:22:38दलील कानून भी कहा जान लगा
7:22:40गांधी जी से एक कल कानून कहते हैं और इसके
7:22:44अगेंस्ट सत्याग्रह शुरू करने का डिसीजन
7:22:46लेते हैं उन्होंने 24th फरवरी 1999 में
7:22:49बॉम्बे में सत्याग्रह सभा शुरू की आंदोलन
7:22:53को ऑर्गेनाइज करने के लिए गांधीजी होम रूल
7:22:56लीग जैसे ऑर्गेनाइजेशंस को भी अपने साथ
7:22:58जोड़ने हैं इसके बाद जगह सत्याग्रह सभा की
7:23:02गई और फिर फैसला किया गया की सिक्स्थ
7:23:05अप्रैल 1990 को रौलट एक्ट के विरोध में
7:23:08पूरे देश में हड़ताल की जाएगी सब कुछ
7:23:11प्लेन के हिसाब से ही हो रहा था की तभी
7:23:14खबर आई है की ब्रिटिशर्स ने पंजाब के दो
7:23:17बड़े लीडर्स सैफुद्दीन किछु और डॉक्टर
7:23:19सत्यपाल को अरेस्ट कर लिया है यह नाइंथ
7:23:22अप्रैल 19 की बात थी इस खबर के बाद पंजाब
7:23:26में माहौल खराब होने में डर नहीं लगती लोग
7:23:29अपने लीडर्स की अरेस्ट के बड़े में सुनकर
7:23:31गुस्से में ए जाते हैं और जगह हिंसक
7:23:34प्रदर्शन होने लगता है भीड़ गवर्नमेंट
7:23:37प्रॉपर्टी को अपना निशाना बनाने लगती है
7:23:39और पूरा पंजाब गुस्से की आज में जलने लगता
7:23:42है सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए 11th
7:23:45अप्रैल को पंजाब में मार्शल डॉ लगा दिया
7:23:47जाता है और पंजाब की जिम्मेदारी जनरल डायर
7:23:51को दे दी जाति है इन सभी बटन से अनजान
7:23:54अमृतसर और उसके आसपास के गांव के लोग 13th
7:23:58अप्रैल को बैसाखी के पाव पर जलियांवाला
7:24:01बैग में इकट्ठा होते हैं बड़ी संख्या में
7:24:03लोगों के कठे होने की खबर मिलने पर जनरल
7:24:06डायर अपनी ट्रूप्स को ओपन फायर करने का
7:24:09ऑर्डर दे देते हैं फायर करने से पहले
7:24:12पब्लिक को किसी भी तरह की वारंग भी नहीं
7:24:14दी जाति इसमें हजारों निहत्थे लोग मारे
7:24:18जाते हैं
7:24:24दूसरी तरफ सत्याग्रह के दौरान देश में
7:24:27फाइल वायलिन से गांधीजी बहुत निरसा हो
7:24:30जाते हैं खासकर बंगाल पंजाब और गुजरात में
7:24:33बहुत ज्यादा हिंसा हो जाति है हिंसा की यह
7:24:36घटनाएं गांधीजी को बहुत आहट कर देती हैं
7:24:39इसलिए 18 अप्रैल 1990 को गांधीजी इस
7:24:44आंदोलन को वापस ले लेते हैं और वह इस
7:24:47सत्याग्रह को एक हिमालय
7:24:49जितनी बड़ी गलती बताते हैं
7:24:54कंक्लुजन
7:24:57दोस्तों इस तरह गांधीजी का पहले जो इंडिया
7:25:00लेवल का मूवमेंट एक तरह से फूल हो जाता है
7:25:05की किसी भी बड़े आंदोलन को शुरू करने से
7:25:08पहले उन्हें लोगों को अहिंसा और सत्याग्रह
7:25:11में ट्रेन करने की जरूर है और इसके लिए
7:25:14उन्हें कांग्रेस जैसे बड़े ऑर्गेनाइजेशन
7:25:16की मदद भी चाहिए होगी इसलिए अपना अगला
7:25:20आंदोलन गांधी जी कांग्रेस के बैनर में ही
7:25:22शुरू करते हैं और वो आंदोलन था नॉन
7:25:25कोऑपरेशन यानी की सहयोग आंदोलन इस आंदोलन
7:25:29के बड़े में हम अपनी नेक्स्ट वीडियो में
7:25:31चर्चा करेंगे
7:25:33खिलाफत कोऑपरेशन मूवमेंट दोस्तों आज हम
7:25:37बात करने वाले हैं इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल
7:25:39केक ऐसे आंदोलन की जो सिर्फ जान आंदोलन ही
7:25:42नहीं बल्कि कई मैनो में एक इंपॉर्टेंट
7:25:44टर्निंग पॉइंट भी था इसे हम खिलाफत
7:25:48कोऑपरेशन मूवमेंट के नाम से जानते हैं
7:25:51तो आई डिटेल में समझते हैं खिलाफत और नॉन
7:25:54कोऑपरेशन मूवमेंट को
7:25:56बैकग्राउंड
7:26:02के लिए माहौल तैयार होने लगा था इसके पीछे
7:26:06कई करण थे आई इनके बड़े में जानते हैं
7:26:10सबसे पहले करण देश की बिगड़ी इकोनामिक
7:26:13सिचुएशन को माना जा सकता है युद्ध के
7:26:16दौरान चीजों के दम बहुत ज्यादा बाढ़ चुके
7:26:18थे साथ ही ब्रिटिश गवर्नमेंट ने टैक्स और
7:26:22रेंट्स में भी बढ़ोतरी कर दी थी जिसकी वजह
7:26:24सोसाइटी का लगभग हर क्षेत्र परेशान था इस
7:26:28तरह इकोनॉमिक्स हार्डशिप्स ने लोगों में
7:26:30एंटी ब्रिटिश एटीट्यूड को और भी मजबूत कर
7:26:33दिया था इसके अलावा अपनी पिछली वीडियो में
7:26:36हम रोलेट एक्ट और जलियांवाला बैग
7:26:38हत्याकांड के बड़े में तो डिस्कस कर ही
7:26:40चुके हैं
7:26:41यहां अंग्रेजी हुकूमत का एक बहुत ही
7:26:44घिनौना चेहरा सामने आता है इन घटनाओं की
7:26:47वजह से जनता में ब्रिटिश के खिलाफ आक्रोश
7:26:50की एक प्रबल अग्नि फेल गई थी इसके बाद
7:26:53जलियांवाला बैग हत्याकांड की जांच करने के
7:26:56लिए बनाई गई हंटर आदमी गी डालने जैसा कम
7:26:59करती है ये अपनी रिपोर्ट में जनरल डायर के
7:27:03एक्शन को सही बताती है इसके अलावा ब्रिटिश
7:27:06सांसद और वहां की जनता भी जनरल डायर के
7:27:09सपोर्ट में खड़ी दिखती है इस सब ने इंडिया
7:27:12के लोगों के जख्मो पर जैसे नमक लगा दिया
7:27:14था यही वजह थी की लोग अंग्रेजन से सीधी
7:27:18टक्कर लेने के लिए तैयार दिखे रहे थे और
7:27:20आखिर में 1919 में आए मोंटीगू चैंप्स पर
7:27:24रिफॉर्म्स भी इंडियन की सेल्फ गवर्नमेंट
7:27:26की डिमांड को सेटिस्फाई करने में सफल नहीं
7:27:28होते फर्स्ट वर्ल्ड वार में लॉयल्टी
7:27:31दिखाने के बाद काफी लोगों को उम्मीद थी की
7:27:33ब्रिटिश रिफॉर्म्स और दीप और इंडियन के
7:27:36लिए बेनिफिशियल रहेंगे लेकिन ऐसा कुछ भी
7:27:38नहीं होता इसके बाद लोगों को भरोसा हो
7:27:40जाता है की अंग्रेज सीधी तरह से तो इंडियन
7:27:43की कोई भी डिमांड नहीं माने वाले इसलिए एक
7:27:46बड़े आंदोलन की सख्त जरूर है और इसी समय
7:27:49खिलाफत इशू सामने ए जाता है जिसके राउंड
7:27:52आगे चलकर नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट डेवलप होता
7:27:55है तो आई
7:27:59डी खिलाफत इशू वह यह था दोस्तों फर्स्ट
7:28:03वर्ल्ड वार के दौरान हारने वाले देश में
7:28:06ओटोमन तुर्की भी शामिल था और जीत हुई थी
7:28:08ब्रिटेन और उसके लिक सुनने में यह ए रहा
7:28:11था की ओटोमन तुर्की
7:28:14साइन होने जा रही है आप सोच रहे होंगे की
7:28:18ओटोमन तुर्की से इंडियन नेशनल मूवमेंट का
7:28:20क्या कनेक्शन हो सकता है कनेक्शन यह है
7:28:22दोस्तों की पुरी दुनिया के मुस्लिम जिसमें
7:28:24इंडिया में रहने वाले मुस्लिम भी शामिल थे
7:28:26तुर्की के सुल्तान को अपना स्पिरिचुअल
7:28:29लीडर यानी की खलीफा मानते थे इसलिए उनकी
7:28:33सिंपैथी तुर्की के साथ थी लेकिन वार के
7:28:35बाद तुर्की से उसका बड़ा हिस्सा छन लिया
7:28:38गया था और खलीफा को भी पावर से हटाए जा
7:28:41रहा था इसी बात से दुनिया भर में र
7:28:43मुस्लिम पापुलेशन गुस्से में थी इंडिया के
7:28:47मुस्लिम लीडर्स भी ब्रिटिश के सामने कुछ
7:28:49मांग रखते हैं जिसमें पहले मांग थी की
7:28:52मुस्लिम की सीक्रेट प्लेस पर खलीफा का
7:28:54कंट्रोल बने रहने दिया जाए और दूसरी थी
7:28:57टेरिटोरियल अरेंजमेंट के बाद खलीफा के पास
7:29:00सफिशिएंट टेरिटरीज रहने दी जाए ब्रिटिश
7:29:04गवर्नमेंट पर प्रेशर बनाने के लिए 1990 की
7:29:07शुरुआत में अली ब्रदर्स मौलाना आजाद अजमल
7:29:10खान और हजरत मोहनी की लीडरशिप में एक
7:29:13खिलाफत कमेटी फॉर्म की जाति है इस तरह देश
7:29:16व्यापी आंदोलन के लिए जमीन तैयार हो जाति
7:29:18है
7:29:19डेवलपमेंट ऑफ डी खिलाफत नॉन कोऑपरेशन
7:29:22प्रोग्राम दोस्तों शुरुआत में तो खिलाफत
7:29:25लीडर्स सिर्फ मीटिंग्स पिटीशन और डेपुटेशन
7:29:28जैसे मैथर्ड को ही उसे करते हैं लेकिन फिर
7:29:30इसमें एक मिलिटेंट इमेज होने लगता है जो
7:29:33एक्टिव वेजिटेशन के पक्ष में था ये लोग
7:29:36गांधी जी को अपने साथ जोड़ने का फैसला
7:29:38लेते हैं और नवंबर 1990 में गांधी जी को
7:29:42जो इंडिया खिलाफत कमेटी का प्रेसिडेंट बना
7:29:44दिया जाता है
7:29:52दिल्ली में जो इंडिया खिलाफत कॉन्फ्रेंस
7:29:55में ब्रिटिश गुड्स को बॉयकॉट करने की कॉल
7:29:57दी जाति है इसके साथ खिलाफत लीडर्स साफ कर
7:30:01देते हैं की जब तक तुर्की के साथ फेवरेबल
7:30:04टर्म्स पर ट्रीटी साइन नहीं होती तब तक
7:30:06गवर्नमेंट के साथ हर तरह का सहयोग रॉक
7:30:09दिया जाएगा खिलाफत इशू में गांधी जी को
7:30:11ब्रिटिश गवर्मेंट के अगेंस्ट एक यूनाइटेड
7:30:13मास मूवमेंट शुरू करने की अपॉर्चुनिटी नजर
7:30:16आई है इसके लिए उन्हें कांग्रेस के सपोर्ट
7:30:18की भी जरूर थी चलिए जानते हैं की कांग्रेस
7:30:21कैसे इस मूवमेंट के साथ जोडी है कांग्रेस
7:30:25स्टैंड ऑन खिलाफत क्वेश्चन दोस्तों खिलाफत
7:30:28के इशू पर मूवमेंट शुरू करने को लेकर
7:30:30कांग्रेस एक मत नहीं थे बहुत से लीडर्स को
7:30:34लगता था की रिलिजियस इशू को नेशनल मूवमेंट
7:30:37से नहीं जोड़ना चाहिए साथ ही कुछ लीडर्स
7:30:40गांधी जी के नॉन को ऑपरेशन मूवमेंट से भी
7:30:42सहमत नहीं थे उनके मां में सत्याग्रह को
7:30:46लेकर भी कुछ डाउट्स थे लेकिन गांधीजी सभी
7:30:49लीडर्स को कन्वेंस करने में कामयाब रहते
7:30:51हैं और मूवमेंट के लिए कांग्रेस का
7:30:54अप्रूवल मिल जाता है इसके लिए सितंबर 1920
7:30:57में कोलकाता में कांग्रेस का स्पेशल
7:30:59दक्षिण ऑर्गेनाइजर किया जाता है यहां
7:31:01कांग्रेस पंजाब रोंग और खिलाफत इशू पर नॉन
7:31:05कोऑपरेशन प्रोग्राम चलने का अप्रूवल दे
7:31:07देती है इसके बाद दिसंबर 1920 में नागपुर
7:31:12के रेगुलर सेशन में कांग्रेस नॉन कोऑपरेशन
7:31:14मूवमेंट को फॉर्मूली इंडस कर देती है इस
7:31:18सेशन में कांग्रेस के कॉन्स्टिट्यूशन में
7:31:20भी बदलाव किया जाता है कांग्रेस का
7:31:22गोल्कंस्टीट्यूशनल मेंस के द्वारा सेल्फ
7:31:25गवर्नमेंट अटेंड करने की जगह पीसफुल और
7:31:27लेजरमेंट मीन से स्वराज अटेंड करना कर
7:31:30दिया जाता है इस तरह तीन डिमांड्स के साथ
7:31:33नॉन को ऑपरेशन मूवमेंट शुरू किया जाता है
7:31:36पहले डिमांड थी तुर्की के साथ फेवरेबल
7:31:39ट्रीटी दूसरी डिमांड थी पंजाब रोंग का
7:31:43एड्रेस
7:31:44की स्थापना
7:31:47गांधीजी डिक्लेअर करते हैं की अगर पुरी
7:31:49तरह
7:31:50को फॉलो किया जाएगा तो 1 साल में ही
7:31:54स्वराज मिल जाएगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो
7:31:57वो सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट शुरू कर
7:31:59देंगे देखते ही देखते आंदोलन पूरे देश में
7:32:02फैलने लगता है तो आई आंदोलन की स्पीड और
7:32:05इस दौरान होने वाली एक्टिविटीज को समझते
7:32:07हैं
7:32:15दोस्तों नॉन कोऑपरेशन प्रोग्राम में
7:32:18गवर्मेंट स्कूल और कॉलेजेस लोकोड्स
7:32:21लेजिसलेटिव काउंसिल फॉरेन क्लॉथ एत्र का
7:32:24बॉयकॉट करना शामिल था आंदोलन को
7:32:27घर-घर तक पहचाने के लिए गांधीजी अली
7:32:30ब्रदर्स के साथ नेशन व्हाइट डोर करते हैं
7:32:32हजारों की संख्या में स्टूडेंट गवर्मेंट
7:32:35स्कूल और कॉलेज छोड़कर नेशनल स्कूल और
7:32:38कॉलेज जॉइन कर लेते हैं इस दौरान बहुत से
7:32:41एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस ऑर्गेनाइज किया गए
7:32:43जैसे की अलीगढ़ में जामिया मिलिया काशी
7:32:46विद्यापीठ गुजरात विद्यापीठ और बिहार
7:32:49विद्यापीठ बहुत सारे लॉयर्स अपनी
7:32:51प्रैक्टिस छोड़ देते हैं जिसमें मोतीलाल
7:32:54नेहरू जवाहर लाल नेहरू सी आर दास वल्लभभाई
7:32:57पटेल और राजेंद्र प्रसाद जैसे नाम शामिल
7:32:59थे जगह जगह विदेशी कपड़ों की होली जाली
7:33:03जान लगती है और इनका इंपोर्ट लगभग आधा हो
7:33:06जाता है तिलक स्वराज फंड में 1 करोड़
7:33:09कलेक्ट हो जाते हैं जुलाई 1921 में अली
7:33:13ब्रदर्स मुस्लिम को आर्मी से रेस करने के
7:33:15लिए कहते हैं इसके लिए सितंबर में उन्हें
7:33:18अरेस्ट कर लिया जाता है फिर गांधीजी उनकी
7:33:21बात को दोहराते हैं और लोकल कांग्रेस
7:33:23कमेटी को इसके ऊपर रेजोल्यूशन पास करने के
7:33:26लिए कहते हैं
7:33:27असेंबली प्लांटेशन स्टीमर सर्विसेज और असम
7:33:30बंगाल रेलवे में हड़ताल ऑर्गेनाइजर की
7:33:33जाति हैं नवंबर 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स
7:33:36की इंडिया विजिट पर जगह जगह हड़ताल और
7:33:39डेमोंसट्रेशंस ऑर्गेनाइजर होते हैं नॉन
7:33:41कोऑपरेशन मूवमेंट के दौरान बहुत से लोकल
7:33:44मूवमंस भी शुरू होते हैं जैसे की अप में
7:33:47अवध किसान मूवमेंट और ए का मूवमेंट
7:33:49मालाबार में मोबला रिपोर्ट और पंजाब में
7:33:52सिख एजीटेशन इस आंदोलन में समाज के लगभग
7:33:56हर वर्ग में पार्टिसिपेट किया था फिर चाहे
7:33:59वो मिल कलासु बिजनेस क्लास हूं किसान हूं
7:34:02स्टूडेंट हूं या फिर वूमेन इसके साथ ही
7:34:05पहले बार मुस्लिम बड़ी संख्या में नेशनल
7:34:07मूवमेंट से जुड़े थे
7:34:09लेकिन इतने बड़े आंदोलन के बाद भी ब्रिटिश
7:34:12गवर्मेंट झुकना को तैयार नहीं थी वो
7:34:14आंदोलन को सरप्राइज करना शुरू कर देते हैं
7:34:16पब्लिक मीटिंग्स पर बन लगा दिया जाता है
7:34:19प्रेस को सेंसर किया जान लगता है और
7:34:22गांधीजी को छोड़कर लगभग सभी लीडर्स को
7:34:24अरेस्ट कर लिया जाता है गवर्मेंट के
7:34:27रिप्रेशन के बाद गांधी जी पर दबाव बंता है
7:34:28की वो आंदोलन का नेक्स्ट पेज यानी की
7:34:31सिविल डिसऑबेडिएंस शुरू कर दें फर्स्ट
7:34:34फरवरी 1922 को गांधीजी डिक्लेअर करते हैं
7:34:38की अगर पॉलीटिकल प्रिजनर्स को रहा नहीं
7:34:40किया गया और प्रेस पर से कंट्रोल्स नहीं
7:34:43हटाए गए तो वो गुजरात के बारडोली से सिविल
7:34:45डिसऑबेडिएंस मूवमेंट शुरू करेंगे लेकिन
7:34:48इससे पहले की गांधीजी ऐसा कुछ करते एक ऐसी
7:34:51घटना होती है जिसके बाद आंदोलन को ही वापस
7:34:54ले लिया जाता है
7:34:57चोरी चौरा इंसिडेंट
7:35:00दोस्तों अप के गोरखपुर जिला में चोरी चौरा
7:35:04नाम का एक छोटा सा गांव है इतिहास में से
7:35:07याद रखा जाता है यहां फिफ्थ फरवरी 1922 को
7:35:10हुई घटना की वजह से हुआ यह था दोस्तों की
7:35:13आंदोलन के दौरान यहां प्रदर्शन कर रहे
7:35:15लोगों के लीडर को पुलिस ने काफी मारा था
7:35:18इससे गुस्से में आए लोग पुलिस स्टेशन के
7:35:21सामने प्रोटेस्ट करते हैं पुलिस प्रोटेस्ट
7:35:24कर रहे लोगों के ऊपर ओपन फायर करना शुरू
7:35:26कर देती है इससे लोगों में गुस्से की आज
7:35:29और ज्यादा भड़क जाति है और वो पुलिस पर
7:35:31हमला बोल देते हैं पुलिस मां बचाने के लिए
7:35:34स्टेशन के अंदर चुप जाते हैं तभी भीड़
7:35:37स्टेशन को ही आज लगा देती है इस हिंसा में
7:35:4022 पुलिस वाले मारे जाते हैं हिंसा की इस
7:35:43घटना के बड़े में सुनने के बाद गांधीजी
7:35:46तुरंत आंदोलन को वापस ले लेते
7:35:51किसी अरदास मोतीलाल नेहरू सुभाष इत्यादि
7:35:55आश्चर्य जताते हैं लेकिन गांधीजी सिर्फ एक
7:35:59घटना की वजह से पूरे आंदोलन को क्यों वापस
7:36:02ले लेते हैं इसे समझना जरूरी है
7:36:11दोस्तों गांधी जी को लगता था की लोग अभी
7:36:14पुरी तरह से अहिंसा के मेथड को नहीं समझ
7:36:16पाएं हैं चोरी चौरा जैसे इनसीडियस आगे
7:36:20चलकर आंदोलन को और ज्यादा हिंसक बना सकते
7:36:22थे और एक वायलेट मूवमेंट को ब्रिटिश
7:36:25गवर्मेंट बहुत आसानी से सरप्राइज कर शक्ति
7:36:27थी इसके साथ ही आंदोलन में अब थकावट के
7:36:30साइंस भी नजर आने लगे थे और ये स्वाभाविक
7:36:33भी था क्योंकि किसी भी आंदोलन को बहुत
7:36:35लंबे समय तक है पिच पर सस्टेन करना आसन
7:36:38नहीं होता ब्रिटिश गवर्नमेंट भी किसी भी
7:36:41तरह की नेगोशिएशंस करने के मूड में नजर
7:36:43नहीं ए रही थी इसलिए सभी बटन को ध्यान में
7:36:47रखकर गांधीजी आंदोलन को वापस लेने का
7:36:50फैसला करते हैं इसके बाद मार्च 1922 में
7:36:53सरकार के खिलाफ असंतोष फैलाने के जॉर्ज पर
7:36:56गांधी जी को अरेस्ट कर लिया जाता है और
7:36:59उन्हें 6 साल की सजा सुने जाति है
7:37:01कुछ समय बाद खिलाफत इशू भी अपनी
7:37:04साइनिफिकेंस को देता है और इरेलीवेंट बन
7:37:07जाता है क्योंकि 1924 में तुर्की में एक
7:37:10नेशनल रिवॉल्यूशन होता है और वहां मोना की
7:37:13या खिलाफत को अबॉलिश कर दिया जाता है इसके
7:37:16बाद इंडिया में भी खिलाफत मूवमेंट डिड डॉ
7:37:19हो जाता है
7:37:24दोस्तों नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट अपने स्वराज
7:37:27के गोल को तो अचीव नहीं कर पता लेकिन फिर
7:37:30भी ये आंदोलन एक फेलियर नहीं माना जा सकता
7:37:33क्योंकि इसने बहुत कुछ अचीव किया था इस
7:37:36आंदोलन के थ्रू नेशनलिस्ट सेंटीमेंट देश
7:37:39के कोनी कोनी तक पहुंच गए थे बड़ी संख्या
7:37:42में लोग इससे जुड़ने हैं और ये सही मैनो
7:37:45में एक मांस मूवमेंट बंता है आंदोलन में
7:37:48मिडिल क्लास के कंपैरिजन में बैलेंस और
7:37:50वर्कर्स का पार्टिसिपेशन ज्यादा राहत है
7:37:52इसके अलावा मद्रास को छोड़कर टाउनशिप
7:37:55इलेक्शन का बॉयकॉट भी काफी हद तक
7:37:57सक्सेसफुल राहत है पोलिंग एवरेज सिर्फ 5
7:38:01से 8% ही राहत है इकोनामिक बॉयकॉट आंदोलन
7:38:04का सबसे इंपॉर्टेंट फैक्टर था और ये बहुत
7:38:07कामयाब भी राहत है फॉरेन क्लॉथ की
7:38:09इंपॉर्टेंस की वैल्यू
7:38:111921 में 120 मिलियन रुपीज से घटकर 1921
7:38:1622 में सिर्फ
7:38:1850020 ही र जाति है
7:38:21नॉन को ऑपरेशन के साथ गांधीजी के कुछ सोशल
7:38:24मूवमेंट्स भी जुड़े हुए थे जैसे की
7:38:26टंप्रेंस या एंटी लेकर कैंपेन इनका भी
7:38:30व्यापक असर देखने को मिलता है पंजाब
7:38:32मद्रास बिहार और उड़ीसा में लेकर एक्सिस
7:38:36रिवेन्यू में साइनिफिकेंस गिरावट होती है
7:38:38सबसे जरूरी बात इस आंदोलन में भाग लेने के
7:38:41बाद लोगों का कॉन्फिडेंस बाढ़ जाता है और
7:38:44वो ब्रिटिश रूल का सामना करने के लिए
7:38:46तैयार होते हैं हम का सकते हैं की नॉन
7:38:49कोऑपरेशन मूवमेंट इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल
7:38:52का टर्निंग पॉइंट साबित होता है यहां से
7:38:54मास मूवमेंट की शुरुआत होती है यह आंदोलन
7:38:58आगे होने वाले आंदोलन की नीव तैयार करने
7:39:01का कम भी करता है
7:39:03रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट सेकंड फेस दोस्तों
7:39:06आज हम बात करने वाले हैं इंडिया में
7:39:08रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट के सेकंड फेस की
7:39:11फर्स्ट फेस को हम अपनी वीडियो में पहले ही
7:39:13डिस्कस कर चुके हैं आज हम देखेंगे की
7:39:16रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट के सेकंड फेस की
7:39:18शुरुआत कब और कैसे होती है और साथ ही
7:39:21फर्स्ट और सेकंड फेस के बीच की डिफरेंस को
7:39:24भी समझना की कोशिश करेंगे तो आई शुरू करते
7:39:27हैं इंट्रोडक्शन दोस्तों गांधीजी और सियार
7:39:31दास के खाने पर बहुत सी रिवॉल्यूशनरी
7:39:33ग्रुप नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट पर हिस्सा
7:39:36लेते हैं लेकिन जब अचानक से चोरी चौरा के
7:39:39बाद 1922 में यह आंदोलन वापस ले लिया जाता
7:39:42है तब यह लोग बहुत निरसा हो जाते हैं
7:39:45इंडियन नेशनल कांग्रेस की लीडरशिप
7:39:47स्ट्रेटजी और अहिंसा पर से इनका भरोसा ही
7:39:50उठ जाता है
7:39:51फिर यह लोग आजादी अपने के लिए किसी दूसरे
7:39:54विकल्प की तलाश करने लगता
7:39:57के पार्लियामेंट्री क में इंटरेस्ट था और
7:40:00ना ही नो चेंज के कंस्ट्रक्टिव केमोन में
7:40:03इसलिए यह फिर से रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी
7:40:06को रिवाइव करने का फैसला करते हैं इस
7:40:09दौरान रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के दो सेपरेट्स
7:40:11ब्रांड उभरते हैं जिसमें एक पंजाब अप
7:40:14बिहार के एरिया में एक्टिव था और दूसरा
7:40:17बंगाल में इनके बड़े में डिटेल में जानना
7:40:19जरूरी है शुरुआत करते हैं पंजाब अप बिहार
7:40:23वाले ग्रुप से इन पंजाब यूनाइटेड प्रोविंस
7:40:26बिहार दोस्तों इस रीजन में रिवॉल्यूशनरी
7:40:30एक्टिविटी को डोमिनेट करने वाले ग्रुप का
7:40:32नाम था हिंदुस्तान रिपब्लिकन संगठन
7:40:39अक्टूबर 1924 में अप के कानपुर जिला में
7:40:43हुई थी इसके पीछे रामप्रसाद बिस्मिल योगेश
7:40:47चंद्र चटर्जी और सचिंद्रनाथ सान्याल जैसे
7:40:50क्रांतिकारी का
7:40:53रिवॉल्यूशन के जारी कॉलोनियल गवर्नमेंट को
7:40:57ओवरथ्रो करना और उसकी जगह फेडरल रिपब्लिक
7:40:59ऑफ यूनाइटेड स्टेटस ऑफ इंडिया को
7:41:01एस्टेब्लिश करना था आर्म्ड रिवॉल्यूशन को
7:41:04ऑर्गेनाइज करने के लिए इन्हें फंड्स की
7:41:06जरूर थी इसका इंतजाम करने के लिए ये लोग
7:41:09ब्रिटिश ट्रेजरी को लूटने का फैसला करते
7:41:12हैं और 1925 में काकोरी रोबरी का प्लेन
7:41:15तैयार होता है
7:41:17काकोरी लखनऊ के पास एक छोटा सा स्टेशन था
7:41:20जहां 9 अगस्त 1925 को यह लोग आईटी डॉ
7:41:24ट्रेन पर ढाका डालते हैं और इसमें रखें
7:41:27रेलवे के ऑफिशल कैश को ल लेते हैं लेकिन
7:41:30इसके बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट इनके पीछे ग
7:41:32जाति है और बहुत सारे क्रांतिकारी को
7:41:34अरेस्ट कर लिया जाता है जिसमें से 17 को
7:41:37जय भेज दिया जाता है कर को जीवन भर के लिए
7:41:41देश निकाला की सजा दी जाति है और कर
7:41:44क्रांतिकारी को फैंसी भी दी जाति है यह कर
7:41:48क्रांतिकारी थे राम प्रसाद बिस्मिल अशफाक
7:41:51अल्ला ज्ञान रोशन सिंह और राजेंद्र लहरी
7:41:54इस तरह
7:41:57होती है बहुत सारे क्रांतिकारी एक ही झटका
7:42:01में नेशनल स्ट्रगल से हटा दिए जाते हैं
7:42:03इससे बैग से उभरते के लिए युवक क्रांति
7:42:07ऑर्गेनाइज करने का फैसला लेते हैं सितंबर
7:42:111928 में दिल्ली के फिरोज शाह कोटा में
7:42:14इनकी मीटिंग होती है जहां चंद्रशेखर आजाद
7:42:17की लीडरशिप में हरि का नाम बदलकर आगे एस
7:42:21आर ए यानी की हिंदुस्तान सोशलिस्ट
7:42:24रिपब्लिकन संगठन कर दिया जाता है इस
7:42:27मीटिंग में भगत सिंह सुखदेव भगवती चरण
7:42:30बोहरा विजय कुमार सिंह जयदेव कपूर जैसे
7:42:33युवक क्रांतिकारी नेता भी शामिल थे पिछले
7:42:36सारे कलेक्टिव लीडरशिप से कम करने और
7:42:39सोशलिज्म को ऑफिशल गोल बनाने का फैसला
7:42:42लेती है इसके कुछ समय बाद ही अक्टूबर 1928
7:42:46में
7:42:46कमीशन के दौरान लाठी चार्ज में लाल लाजपत
7:42:51राय शाहिद हो जाते हैं लाल लाजपत राय की
7:42:54इस तरह मृत्यु होने से क्रांतिकारी में
7:42:56आक्रोश की भावना जग जाति है
7:42:58लाठीचार्ज का ऑर्डर ब्रिटिश
7:43:01जीपी स्कॉट ने दिया था इसलिए बदला लेने के
7:43:04लिए जीपी स्कॉट की हत्या का प्लेन बनाया
7:43:07जाता है इस प्लेन में भगत सिंह के साथ
7:43:10चंद्रशेखर आजाद सुखदेव और राजगुरु भी
7:43:13शामिल थे ये लोग जीपी स्कॉट को गली करने
7:43:16के लिए जाते हैं लेकिन इनके क्रांतिकारी
7:43:19साथी जय गोपाल स्कॉट की सही पहचान नहीं कर
7:43:22पाते जी वजह से एसपी साउंड की हत्या हो
7:43:25जाति है इसके बाद इनका अगला बड़ा एक्शन
7:43:28होता है 8 अप्रैल 1929 को सेंट्रल
7:43:32लेजिसलेटिव असेंबली में बम फेंकना इसके
7:43:35पीछे इनकी असेंबली में पास किया जा रहा
7:43:37ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल
7:43:41का विरोध करना था जो सिविल राइट्स के
7:43:44अगेंस्ट था
7:43:46और इसका मकसद भगत सिंह की शब्दों में बैरन
7:43:50को अपनी बात सुनाना था बम फेंकने के बाद
7:43:53भगत सिंह और बटुकेश्वर डेट वहां से भागने
7:43:57की कोशिश नहीं करते बल्कि खुद को अरेस्ट
7:44:00करते हैं खुद को अरेस्ट करना भी इनकी
7:44:02स्ट्रेटजी का हिस्सा था ये लोग ट्रायल
7:44:05कोर्ट को प्रोपेगेंडा फोरम की तरह उसे
7:44:07करना चाहते थे जिससे लोगों तक इनके
7:44:10मूवमेंट और आईडियोलॉजी की जानकारी पहुंच
7:44:12जाए और भी बहुत सारे क्रांतिकारी को पुलिस
7:44:15द्वारा अरेस्ट कर लिया जाता है जय की खराब
7:44:18कंडीशंस के विरोध में क्रांतिकारी द्वारा
7:44:21भूख हड़ताल भी की जाति है यह लोग डिमांड
7:44:24रखते हैं की इनके साथ पॉलीटिकल प्रिजनर्स
7:44:27जैसा बर्ट किया जाए भूख हड़ताल की 64वें
7:44:30दिन जतिन दास नाम की क्रांतिकारी शाहिद हो
7:44:33जाते हैं
7:44:34चंद्रशेखर आजाद भी जय से बाहर थे और
7:44:37दिसंबर 1929 में दिल्ली के पास वायसराय
7:44:41लोड अर्बन की ट्रेन को बम से उड़ने की
7:44:43कोशिश में भी शामिल थे 2 साल तक
7:44:46ब्रिटिशर्स की नाक में दम करने के बाद
7:44:48फरवरी 1931 में एक उन्हें के साथ ही
7:44:51उन्हें धोखा दे देते हैं और इलाहाबाद के
7:44:54पार्क में पुलिस एनकाउंटर के दौरान आजाद
7:44:57शाहिद हो जाते हैं
7:44:59ब्रिटिश सरकार भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु
7:45:03पर लाहौर कंस्पायरेसी कैसे यानी की
7:45:05साउंड्स मर्डर कैसे भी चलती है इसमें
7:45:08इन्हें फैंसी की सजा सुने जाति है इस तरह
7:45:1123 मार्च 1931 को भगत सिंह सुखदेव और
7:45:16राजगुरु फैंसी के फंडे को हंसते-हंसते गले
7:45:19लगा लेते हैं इनका यह बलिदान आज भी इंडियन
7:45:23के लिए इंस्पिरेशन का कम करता है
7:45:26दोस्तों यह तो बात हुई पंजाब अप बिहार के
7:45:29रीजन में एक्टिव रिवॉल्यूशनरी ग्रुप की
7:45:37दोस्तों बंगाल में सबसे फेमस रिवॉल्यूशनरी
7:45:40ग्रुप चित्तागोंग ग्रुप था जो सूर्य सेन
7:45:43की लीडरशिप में कम कर रहा था सूर्य सीन भी
7:45:46नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट में पार्टिसिपेट कर
7:45:48चुके थे और चित्तागोंग के नेशनल स्कूल मी
7:45:51टीचर थे इसलिए इन्हें प्यार से मास्टर
7:45:54डाबी कहा जाता था रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी
7:45:57की वजह से 1926 से 1928 तक यह जय में भी
7:46:01रहे थे इसके बाद यह कांग्रेस में कम करना
7:46:05जारी रखते हैं 1929 में सूर्य सीन
7:46:08चित्तागोंग जिला कांग्रेस कमेटी के
7:46:10सेक्रेटरी भी थे सूर्य सेन अनंत सिंह गणेश
7:46:14घुस और लोकनाथ बाल जैसे अपने साथियों के
7:46:17साथ मिलकर एक आम रिबेलीयन ऑर्गेनाइजर करने
7:46:20का फैसला करते हैं इनका प्लेन चित्तागोंग
7:46:23के दो मीन अमरीश पर कब्जा करना होता है
7:46:25जहां से यह आम चीज करके रिवॉल्यूशनरीज तक
7:46:29पहुंच सकें
7:46:30प्लेन को एग्जीक्यूट करने के लिए सूर्य से
7:46:32इंडियन रिपब्लिकन आर्मी चित्तागोंग ब्रांच
7:46:35की फॉर्मेशन करते हैं 18 अप्रैल 1930 को
7:46:39प्लेन एक्शन में लाया जाता है अपने
7:46:42साथियों के साथ सीन चित्तागोंग की पुलिस
7:46:44अमरी पर रीड डालते हैं एक दूसरा ग्रुप
7:46:47असिलिअरी फोर्सेस की अमीरी को रीड करता है
7:46:49रीड के दौरान इन्हें आर्म्स तो मिल जाते
7:46:52हैं लेकिन एम्युनिशन लॉकेट करने में यह
7:46:55फूल हो जाते हैं हालांकि यह टेलीफोन
7:46:57टेलीग्राफ और रेलवे लाइन को डिस्ट्रॉय
7:47:00करने में जरूर कामयाब होते हैं सूर्य सेन
7:47:02पुलिस अमरी के प्रेमिसेस में इंडियन फ्लैग
7:47:05होइस्ट करते हैं और यहां प्रोविंशियल
7:47:07रिवॉल्यूशनरी गवर्नमेंट की प्रोक्लेमेशन
7:47:09करते हैं इसके बाद यह लोग जलालाबाद हिल्स
7:47:13की तरफ भाग जाते हैं 22 अप्रैल को यहां
7:47:16पुलिस फोर्स पहुंच जाति है और इनके बीच गण
7:47:19बैटल शुरू हो जाता है जिसमें 12
7:47:21क्रांतिकारी शाहिद हो जाते हैं और पुलिस
7:47:23के लगभग 80 जवान मारे जाते हैं बाकी
7:47:26क्रांतिकारी के साथ सूर्य सीन यहां से भाग
7:47:29निकलते हैं
7:47:31इसके बाद सूर्यसेन अलग-अलग जगह छुपकर रहते
7:47:34हैं गवर्नमेंट की प्रॉपर्टी पर रेट डालने
7:47:36का सिलसिला भी जारी राहत है लेकिन फरवरी
7:47:391933 में इनके साथ ही नेत्र सीन इन्हें
7:47:43धोखा दे देते हैं जब सूर्य सन इनके घर में
7:47:45छुपी हुए थे तब ये ब्रिटिश को खबर कर देते
7:47:48हैं और सूर्य से इनको अरेस्ट कर लिया जाता
7:47:51है सूर्य सेन पर पुलिस द्वारा जय में बहुत
7:47:54टॉर्चर किया जाते हैं और 12 जनवरी 1934 को
7:47:58इन्हें फैंसी दे दी जाति है
7:48:00इनकी आगे उसे समय मंत्र 39 साल थी इनके
7:48:04बाकी क्रांतिकारी साथी भी या तो भूली से
7:48:07एनकाउंटर में मारे जाते हैं या अरेस्ट कर
7:48:10लिए जाते हैं दोस्तों यह तो बात हुई सेकंड
7:48:13फेस की कुछ इंपॉर्टेंट रिवॉल्यूशनरी ग्रुप
7:48:16और उनकी एक्टिविटीज की
7:48:19सेकंड फैज में रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट कैसे
7:48:22फर्स्ट फेस अलग था
7:48:24डिफरेंस बिटवीन फर्स्ट और सेकंड फैज ऑफ
7:48:28रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट
7:48:29दोस्तों रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट की बेसिक
7:48:32आईडियोलॉजी तो दोनों ही फेस में से थी यही
7:48:35की आर्म्ड रिवॉल्यूशन के जारी इंडिया से
7:48:38ब्रिटिश रूल को खत्म करना है लेकिन इसके
7:48:41अलावा दोनों फेस में कुछ डिफरेंस भी देखने
7:48:44को मिलते हैं आई एक-एक करके इनके बड़े में
7:48:47जानते हैं सबसे पहले डिफरेंस था
7:48:49इंडिविजुअल एक्शन की जगह ग्रुप या
7:48:52कलेक्टिव एक्शन पर ज्यादा एंपहसिस इसीलिए
7:48:55सेकंड फेस में हमें एचएसआरआरई और इंडियन
7:48:58रिपब्लिक के नाम ही जैसी ऑर्गेनाइजेशन
7:48:59देखने को मिलती है इसके अलावा फर्स्ट फैज
7:49:03में जहां सीक्रेट सोसाइटी ज्यादा देखने को
7:49:05मिलती हैं वहीं सेकंड फैज में क्रांतिकारी
7:49:08ओपन मूवमेंट की तरफ ज्यादा नजर आते हैं
7:49:11दूसरा डिफरेंस था वूमेन का पार्टिसिपेशन
7:49:14सेकंड फेस की रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज में
7:49:17बड़े स्केल पर वूमेन का पार्टिसिपेशन
7:49:19देखने को मिलता है जिसमें सूर्य सीन ग्रुप
7:49:22की प्रीतीलता वाडेकर और कल्पना डेट हर की
7:49:26दुर्गा भाभी जैसे नाम शामिल है इनके अलावा
7:49:29कोमिला की जिला मजिस्ट्रेट को गली करने
7:49:31वाली दो स्कूल गर्ल शांति घोष और सुनीति
7:49:35चौधरी और फरवरी 1932 में कन्वोकेशन
7:49:38सेरेमनी के दौरान गवर्नर पर फायर करने
7:49:41वाली बिना दास की बहादुर के किस भी याद
7:49:43किया जाते हैं इसके अलावा दोस्तों फर्स्ट
7:49:46फेस के दौरान हिंदू रिलिजियस सिटी की तरफ
7:49:49एक ट्रेड देखने को मिलता है जैसे की
7:49:52क्रांतिकारी देवी की प्रतिज्ञा जैसी कुछ
7:49:55रसों को फॉलो करते थे लेकिन सेकंड फैज में
7:49:57ऐसा देखने को नहीं मिलता यहां भगत सिंह
7:50:00खासकर क्रांतिकारी आंदोलन में
7:50:02सेक्युलरिज्म को प्रमोट करते हैं जिसकी
7:50:05वजह से इस फेस में मुस्लिम का
7:50:07पार्टिसिपेशन भी बढ़ता दिखता है उदाहरण के
7:50:10तोर पर अशफाक अल ला खान सूर्य सेन ग्रुप
7:50:12के अमीर अहमद तुलुमिया आदि अपना योगदान
7:50:15देते दिखते हैं दोस्तों फर्स्ट फेस और
7:50:18सेकंड फैज में सबसे बड़ा अंतर जो देखने को
7:50:20मिलता है वह
7:50:25राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कोई प्रॉपर
7:50:27विजन क्रांतिकारी के पास नहीं था जबकि
7:50:30क्रांतिकारी इसीलिए कर काफी सजग दिखते हैं
7:50:33वो इंडिया में एक सोशलिस्ट और रिपब्लिक
7:50:36सिस्टम एस्टेब्लिश करना चाहते थे
7:50:40कंक्लुजन
7:50:42दोस्तों क्रांतिकारी के मैथर्ड देश को
7:50:45आजादी दिलाने में कितने कारगर साबित होते
7:50:48हैं इस बात का जवाब देना थोड़ा कठिन हो
7:50:50सकता है लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं
7:50:53की इनके योगदान ने आजादी की लड़ाई को और
7:50:56मजबूत बनाया गांधी जी और कांग्रेस भले ही
7:51:00इनके तरीके से सहमत नहीं थे लेकिन वो भी
7:51:02इनके देश प्रेम का सम्मान जरूर करते थे
7:51:05भगत सिंह के पैट्रियोटिज्म की सराहन करते
7:51:08हुए गांधी जी भी कहते हैं भगत सिंह की
7:51:11बहादुर और बलिदान के आगे हम अपना सर झुकते
7:51:14हैं क्रांतिकारी आंदोलन ने एन सिर्फ
7:51:17अंग्रेजी हुकूमत की नींद उदा दी थी बल्कि
7:51:20देशवासियों के दिल में आजादी की ज्वाला
7:51:23जागने का कम भी किया था इसीलिए आज भी इनके
7:51:27बलिदान को याद करके हम गौरवान्वित महसूस
7:51:30करते हैं
7:51:31इवेंट्स बिटवीन नॉन कोऑपरेशन और सिविल
7:51:34डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
7:51:36दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने
7:51:39खिलाफत और नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को डिस्कस
7:51:41किया था यह भी जाना था की 1922 में चोरी
7:51:46चौरा की घटना के बाद इस आंदोलन को
7:51:48ऑफीशियली और कर दिया गया था लेकिन आंदोलन
7:51:50खत्म होने के बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस
7:51:52की क्या एक्टिविटीज रहती हैं फ्रीडम
7:51:55स्ट्रगल को यहां से आगे ले जान के लिए
7:51:57क्या स्ट्रेटजी अडॉप्ट की जाति है आज हम
7:52:00इन सभी सवालों के जवाब जन की कोशिश करेंगे
7:52:09दोस्तों नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट फरवरी 1922
7:52:13में खत्म हो जाता है और मार्च 1922 में
7:52:16गांधीजी को अरेस्ट करके छह साल के लिए जय
7:52:20भेज दिया जाता है इसके बाद कांग्रेस में
7:52:22एक डिबेट शुरू हो जाति है
7:52:33की गांधीजी के कंस्ट्रक्टिव प्रोग्राम को
7:52:36ही कंटिन्यू किया जाए
7:52:46एक्टिविटीज शामिल थी
7:52:49इस एक्शन को नो चेंज ग्रुप बोलते हैं इसको
7:52:52लीड कर रहे थे वल्लभ भाई पटेल राजेंद्र
7:52:55प्रसाद और सी राजगोपालाचारी और दूसरा
7:52:58फक्शन चाहता था की लेजिसलेटिव काउंसिल का
7:53:01बॉयकॉट छोड़कर इलेक्शंस में पार्टिसिपेट
7:53:04किया जाए इस ग्रुप को प्रोचेंजेज का नाम
7:53:06दिया जाता है इसके लीडर्स सी आर दास और
7:53:09मोतीलाल नेहरू थे इनका मानना था की
7:53:12लेजिसलेटिव असेंबली का पार्ट बनकर उसको
7:53:15एक्सपोज करना चाहिए की कैसे वो सिर्फ
7:53:17दिखावे के लिए बनी है सी आर दास और
7:53:21मोतीलाल नेहरू अपना यह प्रपोज दिसंबर 1922
7:53:25में कांग्रेस के गया सेशन में रखते हैं इस
7:53:27प्रोग्राम को मेंडिंग और एंडिंग अकाउंट्स
7:53:30नाम दिया जाता है लेकिन नो चेंज ग्रुप की
7:53:33अपोजिशन की वजह से इनका प्रपोज हर जाता है
7:53:36इसके फीवर में सिर्फ 800 वोट्स पढ़ने हैं
7:53:40जबकि अगेंस्ट में
7:53:421748 इसके बाद दास और मोतीलाल नेहरू
7:53:46कांग्रेस ने अपनी रिस्पेक्टिव ऑफिसेज
7:53:48दूसरी डिजाइन कर देते हैं और फर्स्ट जनवरी
7:53:511923 को कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी के
7:53:55फॉर्मेशन करते हैं जिसे बाद में स्वराज
7:53:58पार्टी के नाम से जाना जाता है दास इस
7:54:01पार्टी के प्रेसिडेंट बनते हैं और नेहरू
7:54:03सेक्रेटरी इस तरह कांग्रेस का दो
7:54:06फ्रेक्शंस में टूटना
7:54:07197 की सूरत स्प्लिट की यादें ताज कर देता
7:54:10है लेकिन इस बार कांग्रेस को स्प्लिट होने
7:54:13से बच्चा लिया जाता है क्योंकि यहां दोनों
7:54:15ही फ्रेक्शंस को अच्छी तरह पता था की
7:54:18ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट उन्हें यूनाइटेड
7:54:20रहने की जरूर है नो चेंज के साथ ही
7:54:23स्वराजिस्ट भी समझते थे की मांस मूवमेंट
7:54:26के थ्रू ही उनकी डिमांड पुरी हो शक्ति हैं
7:54:29और इसके लिए उनका एक रहना बहुत जरूरी है
7:54:32इसके अलावा दोनों ग्रुप के लीडर्स गांधी
7:54:35जी की लीडरशिप को जरूरी मानते थे इसलिए
7:54:38सितंबर 1923 के दिल्ली कांग्रेस सेशन में
7:54:41काउंसलिंग के अगेंस्ट प्रोपेगेंडा को
7:54:44सस्पेंड कर दिया जाता है और कांग्रेस के
7:54:46मेंबर्स को इलेक्शन में पार्टिसिपेट करने
7:54:48की परमिशन मिल जाति है नवंबर 1923 में
7:54:52लेजिसलेटिव काउंसिल के इलेक्शंस होते हैं
7:54:55स्वराज्यस को इलेक्शन की तैयारी के लिए
7:54:57बहुत कम समय मिल पता है लेकिन फिर भी
7:55:00इलेक्शंस में यह लोग अच्छा प्रदर्शन करते
7:55:03हैं सेंट्रल लेजिसलेटिव असेंबली में 10001
7:55:07इलेक्ट्रिक सीट में 42 सिट्स पर इनकी जीत
7:55:10होती है इसके अलावा सेंट्रल प्रोविंस में
7:55:13भी इन्हें क्लियर मेजॉरिटी मिलती है बंगाल
7:55:16में यह लार्जेस्ट पार्टी बनकर उभरते हैं
7:55:18और मुंबई और अप में भी इनका रिजल्ट काफी
7:55:21अच्छा राहत है इलेक्शंस जितने के बाद
7:55:23स्वराज पार्टी की क्या जीवन से रहती हैं
7:55:26उनको भी जानते हैं
7:55:28अचीवमेंट्स का स्वराज पार्टी
7:55:31दोस्तों काउंसिल का मेंबर रहते हुए स्वराज
7:55:34पार्टी के फॉलोवरिंग अचीवमेंट रहे थे सबसे
7:55:37पहले अचीवमेंट था की अपने कोलिशन
7:55:39पार्टनर्स के साथ मिलकर कई मैकोन पर यह
7:55:42लोग गवर्नमेंट को आउट वोट करने में कामयाब
7:55:45रहते हैं काउंसिल के अंदर ये लोग सेल्फ
7:55:47गवर्नमेंट सिविल लिबर्टीज और
7:55:49इंडस्ट्रियलिज्म जैसे मुद्दों पर पावरफुल
7:55:52स्पीशीज के थ्रू अपनी बात रखते हैं
7:55:541925 में सेंट्रल लेजिसलेटिव के स्पीकर के
7:55:58रूप में विट्ठल भाई पटेल को इलेक्ट करने
7:56:01में कामयाब होते हैं
7:56:021928 में यह लोग पब्लिक सेफ्टी बिल को हर
7:56:06देते हैं यह बिल गवर्नमेंट कम्युनिस्ट
7:56:08एक्टिविटीज को कंट्रोल करने के लिए लेकर
7:56:10आई थी मोंटफोर्ट स्कीम के खोखलेपन को
7:56:13एक्सपोज करने का कम भी करते हैं और ऐसे
7:56:16समय में जब नेशनल मूवमेंट अपनी स्ट्रैंथ
7:56:19वापस अपने की कोशिश कर रहा था यह अपनी
7:56:21एक्टिविटीज से पॉलीटिकल वेक्यूम फूल करते
7:56:24हैं यह लोग दिखा देते हैं की काउंसिल को
7:56:27क्रिएटिविटी भी उसे किया जा सकता है
7:56:29दोस्तों इसी बीच फरवरी 1924 में हेल्थ
7:56:34ग्राउंड पर गांधीजी को जय से रहा कर दिया
7:56:36जाता है और नवंबर 1924 में गांधीजी और दास
7:56:41एक जॉइंट स्टेटमेंट साइन करते हैं इसमें
7:56:43कहा जाता है किस स्वराज पार्टी
7:56:46लेजिस्लेटर्स में कांग्रेस के भी हाफ पर
7:56:48और उसका इंटीग्रल बांट रहकर ही कम करेगी
7:56:51इसके बाद दिसंबर में कांग्रेस के बेलगाम
7:56:55सेशन में इस डिसीजन को इनडोर्स किया जाता
7:56:57है यह कांग्रेस का अकेला ऐसा सेशन था जिसे
7:57:00गांधी जी ने प्रेसीडे किया था लेकिन अब
7:57:03धीरे-धीरे स्वराज पार्टी भी कमजोर पढ़ने
7:57:06लगती है वह कैसे आई समझते हैं
7:57:09लिमिटेशंस और डिक्लिन ऑफ स्वराज पार्टी
7:57:12दोस्तों 16th जून 1925 को सियार दास की
7:57:17मृत्यु हो जाति है अपने फाउंडर लीडर को
7:57:20कोन के बाद स्वराज पार्टी कमजोर होने लगती
7:57:22है पार्टी के कुछ मेंबर्स पावर को रेसिस्ट
7:57:26नहीं कर पाते इस तरह पार्टी रैंक्स में
7:57:28करप्शन भी देखने को मिलता है कोलिशन
7:57:31पार्टनर्स के साथ भी मतभेद शुरू हो जाते
7:57:34हैं इसके साथ ही कम्युनल इंटरेस्ट भी
7:57:36पार्टी में इंटर कर जाते हैं स्वराज
7:57:38पार्टी रिस्पांस और नॉन रिस्पांस में
7:57:42डिवाइड हो जाति है
7:57:43रेस्पॉन्सिव में लाल लाजपत राय मदन मोहन
7:57:46मालवीय और एनसी केलकर जैसे लीड ए जाते थे
7:57:49यह लोग चाहते थे की गवर्मेंट के साथ
7:57:52कॉर्पोरेट किया जाए और जहां भी संभव हो
7:57:55ऑफिस हॉल किया जाए इसके अलावा यह लोग सो
7:57:59कोल्ड हिंदू इंटरेस्ट को भी प्रोटेस्ट
7:58:01करना चाहते थे इस तरह स्वराज पार्टी का
7:58:04डिवीजन शुरू हो जाता है
7:58:06और मैं लीडरशिप मार्च 1926 में
7:58:09लेजिसलेच्योर से खुद को वीडियो कर लेती है
7:58:12जबकि स्वराजित का एक क्षेत्र
7:58:161926 के इलेक्शन में खड़ा होता है लेकिन
7:58:19इनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं राहत सेंटर
7:58:22में ये 40 सिट्स जीत लेते हैं लेकिन अप
7:58:25सेंट्रल प्रोविंस और पंजाब में बुरी तरह
7:58:28हर जाते हैं
7:58:291930 में लाहौर कांग्रेस रेजोल्यूशन के
7:58:32बाद स्वराज फाइनली लेजिसलेच्योर से क आउट
7:58:36करते हैं इस तरह काउंसलिंग का यह पहले
7:58:39एक्सपेरिमेंट 10 साल तक चला है यह आईएमसी
7:58:42और उनके मेंबर्स को बड़ी सिख देकर जाता है
7:58:44इस बीच नो चेंज की क्या एक्टिविटीज रहती
7:58:48हैं आई यह भी जानते हैं
7:58:50कंस्ट्रक्टिव क बाय नो चेंज
7:58:54दोस्तों जी समय स्वराज्यस्त काउंसिल में
7:58:57अपनी पीछे से ब्रिटिश रूल को एक्सपोज करने
7:59:00में लगे थे उसे समय नो चेंज अपने
7:59:03कंस्ट्रक्टिव क से मैसेज के साथ कनेक्शन
7:59:06बना रहे थे यह लोग अलग-अलग जगह आश्रम की
7:59:09स्थापना करते हैं जहां खड़ी और चरखा को
7:59:12प्रमोट किया जाता है इसके साथ ही नेशनल
7:59:15स्कूल और कॉलेज भी सेटअप करते हैं जहां
7:59:18स्टूडेंट को नॉन कॉलोनियल आईडियोलॉजिकल
7:59:20फ्रेमवर्क में ट्रेन किया जाता है इसके
7:59:23अलावा हिंदू-मुस्लिम यूनिटी और
7:59:25अनटचेबिलिटी के रिमूवल के प्रयास भी इनके
7:59:28द्वारा किया जाते हैं फॉरेन क्लॉथ और लिकर
7:59:32का बॉयकॉट भी ऑर्गेनाइज्ड करते हैं फ्लड
7:59:34की टाइम लोगों तक मदद पहचाने का कम भी
7:59:37करते हैं इस तरह कंस्ट्रक्टिव वर्कर्स आने
7:59:40वाले सिविल डिसऑबेडिएंस के लिए एक्टिव
7:59:42ऑर्गेनाइजर का कम करते हैं दोस्तों इस तरह
7:59:46नेशनल मूवमेंट के पास
7:59:48और नो चेंज अपने अपनी तरीके से एक्टिव
7:59:52रहने की कोशिश करते हैं
7:59:54जल्दी ही दोनों ग्रुप के फिर एक साथ आने
7:59:57का मौका भी ए जाता है और यह मौका आता है
8:00:00साइमन कमीशन के रूप में आई समझते हैं
8:00:03साइमन कमीशन और इस मौके को भी अराइवल ऑफ
8:00:07साइमन कमीशन और इंडियन रिस्पांस दोस्तों
8:00:101990 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में
8:00:13प्रोविजन था की गवर्नेंस स्क्रीन की
8:00:16प्रोग्रेस को चेक करने के लिए और नए
8:00:18स्टेप्स का सुझाव देने के लिए 10 साल बाद
8:00:21एक कमीशन अप्वॉइंट की जाएगी इस प्रोविजन
8:00:24के तहत नवंबर 1927 को यानी शेड्यूल से 2
8:00:28साल पहले ही ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडियन
8:00:30स्टेट्यूटरी कमीशन सेटअप करती है यह एक जो
8:00:33व्हाइट सेवन मेंबर कमीशन थी जिसके अध्यक्ष
8:00:37थे इसलिए इसे पॉपुलर साइमन कमीशन कहा जाता
8:00:40है कमीशन को सुझाव देना था की क्या इंडिया
8:00:43फादर कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स के लिए
8:00:45तैयार है और अगर हां तो यह रिफॉर्म्स क्या
8:00:48हनी चाहिए
8:00:49इंडियन लीडर्स इस बात से बहुत नाराज होते
8:00:52हैं की साइमन कमीशन में एक भी इंडियन
8:00:55मेंबर नहीं था और फॉरेनर्स डिसाइड करेंगे
8:00:58की इंडिया सेल्फ गवर्नमेंट के लिए फिट है
8:01:01या नहीं इसे सेल्फ डिटरमिनेशन प्रिंसिपल
8:01:04का वायलेशन समझा जाता है और इंडियन की
8:01:07सेल्फ रिस्पेक्ट को जानबूझकर इंसल्ट करने
8:01:10का एक तरीका कांग्रेस दिसंबर 1927 के
8:01:14मद्रास सेशन में कमीशन को हर स्टेज और हर
8:01:17फॉर्म में बॉयकॉट करने का डिसीजन लेती है
8:01:19कांग्रेस के इस डिसीजन का सपोर्ट हिंदू
8:01:22महासभा के लिबरल्स मुस्लिम लीग का
8:01:25मेजॉरिटी करता है लेकिन पंजाब की यूनियन
8:01:28पार्टी और साउथ की जस्टिस पार्टी इस
8:01:30बॉयकॉट को सपोर्ट नहीं करती थर्ड फरवरी
8:01:341928 को कमीशन मुंबई में लैंड करती है उसे
8:01:38दिन पूरे देश में हड़ताल और मांस
8:01:40ऑर्गेनाइज की जाति हैं कमीशन का स्वागत हर
8:01:43जगह कल झंडा दिखाकर साइमन को बैक के नई से
8:01:47किया जाता है साइमन कमीशन के अगेंस्ट
8:01:49टेस्ट में यूथ लीडर्स एक्टिव रोल निभाते
8:01:52हैं जगह यूथ लीग और कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज
8:01:56की जाति हैं नेहरू और सुभाष चंद्र बस
8:01:58युद्ध के लीडर्स बनकर उभरते हैं पूरे देश
8:02:01में प्रोटेस्ट का माहौल बन जाता है पुलिस
8:02:04प्रदर्शनकारी पर लाठी बरसाने लगती है
8:02:07अक्टूबर 1928 में पुलिस की लाठियां से लाल
8:02:11लाजपत राय की कंडीशन सीरियस हो जाति है और
8:02:1417th नवंबर 1928 को शेर पंजाब अपनी आखिरी
8:02:19सांस लेते हैं इसके बाद प्रदर्शन और भी
8:02:22उग्र होने लगता है दूसरी तरफ क्रांतिकारी
8:02:25संगठन भी एक्टिव हो जाते हैं इसी बीच
8:02:28सेक्रेटरी ऑफ स्टेट पर इंडिया लॉर्ड बग इन
8:02:31हेड इंडियन लीडर्स को कॉन्स्टिट्यूशन
8:02:33ड्राफ्ट करने का चैलेंज दे देते हैं इनका
8:02:36मानना था की इंडियन कभी एक साथ आकर
8:02:39कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट नहीं कर सकते
8:02:41इंडिया के लीडर्स इनके चैलेंज को एक्सेप्ट
8:02:44कर लेते हैं और इसका जवाब कैसे दिया जाता
8:02:46है आई जानते हैं
8:02:48नेहरू रिपोर्ट दोस्तों लॉर्ड बुकिंग हेड
8:02:52के चैलेंज के जवाब में फरवरी 1928 में एक
8:02:56जो पार्टी कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति
8:02:58है और मोतीलाल नेहरू की अध्यक्ष
8:03:01कॉन्स्टिट्यूशन ड्राफ्ट करने के लिए एक
8:03:04कमेटी अप्वॉइंट की जाति है तेज बहादुर
8:03:06सप्रू सुभाष चंद्र बस एस अन्य मंगल सिंह
8:03:10अली इमाम शोएब कुरैशी और ग्रे प्रधान
8:03:14कमेटी के मेंबर्स थे ये इंडियन द्वारा देश
8:03:17के लिए कांस्टीट्यूशनल फ्रेमवर्क तैयार
8:03:19करने की पहले कोशिश थी कमेटी अगस्त 1928
8:03:23तक अपनी रिपोर्ट फाइनल कर लेती है नेहरू
8:03:26रिपोर्ट की सभी रिकमेंडेशन एक मत से दी गई
8:03:30थी सिर्फ एक एस्पेक्ट को छोड़कर और वह यह
8:03:33था की मेजॉरिटी मेंबर्स तो कॉन्स्टिट्यूशन
8:03:35का बेसिस डोमिनियन स्टेटस चाहते थे लेकिन
8:03:38एक क्षेत्र कंप्लीट इंडिपेंडेंस को बेसिस
8:03:42बनाना चाहता था नेहरू रिपोर्ट की मेजर
8:03:44रिकमेंडेशन कुछ इस तरह से थी|
8:03:48डोमिनियन स्टेटस को इंडियन की डिजायरेबल
8:03:51फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट बताया जाता है
8:03:54सेपरेट इलेक्टोरेट्स की जगह जॉइंट
8:03:57इलेक्ट्रिक जिसमें सेंटर में मुस्लिम के
8:03:59लिए सिट्स रिजर्व करने का प्रोविजन था साथ
8:04:03ही ऐसी प्रोविंस में भी जहां मुस्लिम
8:04:05माइनॉरिटी में है
8:04:06लिंग्विस्टिक्स प्रोविंस बनाने का सुझाव
8:04:09भी शामिल था इसके अलावा 19 फंडामेंटल
8:04:11राइट्स जैसे की इक्वल राइट्स पर वूमेन
8:04:14यूनिवर्सल एडल्ट सफरेज और यूनियन फॉर्म
8:04:17करने का राइट भी नेहरू रिपोर्ट रेकमेंड
8:04:20करती है सेंटर और प्रोविंस में
8:04:23रिस्पांसिबल गवर्नमेंट का प्रोविजन
8:04:25मुस्लिम के कल्चरल और रिलिजियस इंटरेस्ट
8:04:27के फूल प्रोटेक्शन के साथ स्टेट का रिलिजन
8:04:31से पुरी तरह डिसोसिएशन भी इनकी रिकमेंडेशन
8:04:34का हिस्सा था दोस्तों नेहरू रिपोर्ट की
8:04:37रिकमेंडेशन से सभी पार्टी और ग्रुप
8:04:39सेटिस्फाई नहीं होते सबसे पहले तो कम्युनल
8:04:42रिप्रेजेंटेशन के सवाल पर मुस्लिम लीग और
8:04:45हिंदू महासभा रिपोर्ट के अगेंस्ट चली जाति
8:04:48हैं
8:04:48यहां नेहरू रिपोर्ट के अगेंस्ट जिन्ना
8:04:51अपने 14 प्वाइंट्स रखते हैं इसके अलावा
8:04:54कांग्रेस का यंगर क्षेत्र भी नेहरू
8:04:56रिपोर्ट से नाराज होता है इनके लिए
8:04:59रिपोर्ट में डोमिनियन स्टेटस का आइडिया एक
8:05:01कम पीछे ले जान जैसा था
8:05:041928 में कांग्रेस के कोलकाता सेशन में
8:05:07नेहरू रिपोर्ट को अप्रूव किया जाता है
8:05:09लेकिन जवाहर लाल नेहरू और बस कांग्रेस के
8:05:13डोमिनियन स्टेटस के गोल को रिजेक्ट कर
8:05:15देते हैं और मिलकर इंडिपेंडेंस पर इंडिया
8:05:18लीग सेटअप करते हैं
8:05:20कंक्लुजन दोस्तों एक तरफ यंगर क्षेत्र
8:05:24पूर्ण स्वराज यानी की कंप्लीट इंडिपेंडेंस
8:05:27को कांग्रेस का गोल बनाना चाहता था दूसरी
8:05:30तरफ ओल्ड लीडर्स जैसे की गांधीजी और
8:05:33मोतीलाल नेहरू का मानना था की डोमिनियन
8:05:35स्टेटस की डिमांड को इतनी जल्दी खत्म ना
8:05:38किया जाए क्योंकि इसके ऊपर भी कंसेंसस
8:05:42बड़ी मुश्किल से कई सालों में जाकर बना था
8:05:44इसलिए यह लोग सुझाव देते हैं की गवर्नमेंट
8:05:48को डोमिनियन स्टेटस की डिमांड एक्सेप्ट
8:05:50करने के लिए 2 साल का समय दिया जाए लेकिन
8:05:54यंगर एलिमेंट्स के प्रेशर बनाने पर इस समय
8:05:56को 1 साल कर दिया जाता है और डिसाइड होता
8:05:59है की अगर साल के और तक गवर्नमेंट
8:06:02डोमिनियन स्टेटस के साथ कॉन्स्टिट्यूशन को
8:06:04एक्सेप्ट नहीं करती तो कांग्रेस पूर्ण
8:06:07स्वराज की डिमांड के साथ सिविल
8:06:09डिसऑबेडिएंस मूवमेंट लॉन्च कर देगी अपनी
8:06:12अगली वीडियो में हम देखेंगे की गवर्नमेंट
8:06:14का क्या रिस्पांस राहत है और फिर कांग्रेस
8:06:17किस तरह से सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
8:06:19शुरू करती है
8:06:2331
8:06:30दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने देखा
8:06:32था की कैसे 1928 में कांग्रेस ब्रिटिश
8:06:36गवर्नमेंट को एक साल का समय देती है
8:06:38डोमिनियन स्टेटस पर बेस्ड कॉन्स्टिट्यूशन
8:06:41को एक्सेप्ट करने के लिए आज हम देखेंगे की
8:06:44ब्रिटिश गवर्मेंट इस पर क्या रेस्पॉन्ड
8:06:46करती है और इंटर्न कांग्रेस का क्या
8:06:49रिएक्शन राहत है तो आई शुरू करते हैं
8:06:52इंट्रोडक्शन
8:06:56दोस्तों मैं 1929 में ब्रिटेन में राम से
8:07:00मैकडॉनल्ड की लीडरशिप में लेबर पार्टी की
8:07:02सरकार बंटी है और वायसराय लॉर्ड अरविन को
8:07:05कंसंट्रेशन के लिए लंदन बुलाया जाता है
8:07:07इसके बाद 31 अक्टूबर को वायसराय अनाउंस
8:07:11करते हैं की ब्रिटिश सरकार के अनुसार
8:07:19स्टेटस की तरफ ले जाना है और साथ ही साइमन
8:07:23कमीशन के रिपोर्ट सबमिट होते ही राउंड
8:07:25टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर करने का
8:07:27प्रॉमिस भी करते हैं
8:07:29[संगीत]
8:07:33और दिल्ली मेनिफेस्टो इशू किया जाता है
8:07:36इसमें यह लोग डिमांड करते हैं की ब्रिटिश
8:07:39गवर्नमेंट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस का परपज
8:07:41क्लीयरली बता दे और परपज यह नहीं होना
8:07:44चाहिए की डोमिनियन स्टेटस कब तक दिया
8:07:46जाएगा बल्कि उसकी इंप्लीमेंटेशन की स्कीम
8:07:49फॉर्मीदते करना होना चाहिए
8:07:51है इसके जवाब में फाइनली 23rd दिसंबर को
8:07:54लॉर्ड अर्बन गांधीजी और बाकी लीडर्स को
8:07:57बताते हैं की वो ऐसा कोई एश्योरेंस नहीं
8:08:00दे सकते इस तरह नेगोशिएशंस की स्टेज खत्म
8:08:03हो जाति है और कन्फर्टेशनल की तैयारी शुरू
8:08:06होने लगती है
8:08:08लाहौर सेशन और गोल्फ कंप्लीट इंडिपेंडेंस
8:08:13दोस्तों 1929 का कांग्रेस सेशन लाहौर में
8:08:17ऑर्गेनाइजर किया जाता है इसके प्रेसिडेंट
8:08:19जवाहरलाल नेहरू बनते हैं जो दिखाई हैं की
8:08:22कांग्रेस का ट्रांजिशन यंगर जेनरेशन की
8:08:25तरफ हो रहा था और यहां पर ही पूर्ण स्वराज
8:08:28को कांग्रेस का गोल्ड डिक्लेअर कर दिया
8:08:30जाता है इसके साथ ही 31 दिसंबर 1929 को
8:08:35आदि रात के समय रवि नदी के किनारे पर
8:08:38तिरंगा भी फहराया जाता है और आने वाली
8:08:4126th जनवरी को पूर्ण स्वराज दे के रूप में
8:08:44मनाने की घोषणा की जाति है
8:08:4726th जनवरी 1930 को पूरे देश में पब्लिक
8:08:51मीटिंग्स ऑर्गेनाइज की जाति हैं जिसमें
8:08:54इंडिपेंडेंस प्लीज को रीड और फर्म किया
8:08:57जाता है लाहौर में कांग्रेस वर्किंग कमेटी
8:09:00को सिविल डिसऑबेडिएंस का प्रोग्राम लॉन्च
8:09:02करने के लिए भी ऑथराइज कर दिया गया था साथ
8:09:06ही लेजिसलेच्योर के सभी मेंबर्स को अपनी
8:09:08सीट से रिजाइन करने के लिए भी कहा गया था
8:09:11जैसा की हमने अपनी पिछली वीडियो में बताया
8:09:13था स्वराज पार्टी के मेंबर्स इसके बाद
8:09:16रिजाइन कर देते हैं लाहौर कांग्रेस का
8:09:19मैंडेट आगे ले जाते हुए गांधीजी अपनी 11
8:09:22डिमांड गवर्नमेंट के सामने रख देते हैं और
8:09:25इन डिमांड्स को एक्सेप्ट या रिजेक्ट करने
8:09:27के लिए 31 जनवरी 1930 को अल्टीमेटम देते
8:09:31हैं
8:09:42टोटल प्रोहिबिशन इंट्रोड्यूस किया
8:09:47थर्ड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्मेंट
8:09:50सीआईडी में रिफॉर्म्स किया जैन फोर्थ
8:09:53आर्म्स एक्ट को बदला जाए फिफ्थ पॉलीटिकल
8:09:57बिजनेस को रिलीज किया
8:10:04लिंग एक्सचेंज रेशों को कम किया जाए जिससे
8:10:07एक्सपोर्ट्स में इंडिया को फायदा हो एट
8:10:10टेक्सटाइल प्रोटेक्शन इंट्रोड्यूस किया
8:10:12जाए नाइंथ कोस्टल शिपिंग इंडियन के लिए
8:10:15रिजर्व हो 10th लैंड रिवेन्यू में भी 50%
8:10:19की गिरावट की जाए और 11th आर्मी और सिविल
8:10:24सर्विसेज पर खर्च को 50% तक कम किया जाए
8:10:28है लेकिन गवर्नमेंट की तरफ से कोई पॉजिटिव
8:10:31रिस्पांस ना आता देख मिड फरवरी 1930 में
8:10:34कांग्रेस की वर्किंग कमेटी साबरमती आश्रम
8:10:37में मीटिंग करती है और गांधी जी को फूल
8:10:40पावर्स दे देती है की वो अपनी पसंद की जगह
8:10:42और समय पर सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट की
8:10:46शुरुआत करें तो देखते हैं गांधी जी कब और
8:10:49कहां से आंदोलन की शुरुआत करते हैं दांडी
8:10:52मार्च और साल्ट सत्याग्रह दोस्तों फरवरी
8:10:55एंड तक गांधीजी फैसला ले चुके होते हैं की
8:10:59वो नमक के मुद्दे पर आंदोलन की शुरुआत
8:11:01करेंगे नमक या सॉर्ट को अपने आंदोलन की
8:11:05थीम बनाने का यह फैसला बहुत सोच समझकर
8:11:08लिया गया था नमो की कैसी चीज है जिसकी
8:11:11जरूर सबको है और इस पर टैक्स गरीब लोगों
8:11:14के लिए बहुत भारी पड़ता है साथ ही नमक
8:11:17बनाने पर सरकार की मोनोपोली होने से लोगों
8:11:20से सेल्फ एंप्लॉयमेंट का एक जरिया भी छन
8:11:22लिया गया था
8:11:24है इसलिए सेकंड मार्च 1930 को गांधीजी
8:11:27अपने प्लेन की जानकारी वायसराय को देते
8:11:29हैं इस प्लेन के अकॉर्डिंग गांधीजी
8:11:32साबरमती आश्रम से 78 मेंबर्स के साथ 240
8:11:36माइल्स की यात्रा करते हुए दांडी के कस पर
8:11:39पहुंचेंगे और वहां पहुंचकर बीच से नमक
8:11:42कलेक्ट कर साल्ट डॉ को वायलेट करेंगे इसके
8:11:45साथ ही मार्च के बाद फ्यूचर एक्शन के लिए
8:11:47डायरेक्शन भी गांधीजी द्वारा दी जाति हैं
8:11:50जो इस तरह से थी जहां भी पॉसिबल हो नमक
8:11:54कानून को टोडा जाए विदेशी कपड़े और शराब
8:11:57की दुकानों की पिक्टिंग की जा शक्ति है
8:12:00लॉयर्स अपनी प्रैक्टिस छोड़ सकते हैं और
8:12:02गवर्नमेंट सर्वेंट अपनी पोस्ट से रिजाइन
8:12:05कर सकते हैं सत्य और अहिंसा का अधिकता के
8:12:08साथ पालनपुर करना होगा और गांधीजी के
8:12:10अरेस्ट होने के बाद लोकल लीडर्स को ओबी
8:12:13करना होगा
8:12:14यह ऐतिहासिक दांडी मार्च 12 मार्च को
8:12:17साबरमती आश्रम से शुरू होता है पूरे दांडी
8:12:21मार्च को लोकल और इंटरनेशनल न्यूज़ पेपर
8:12:23द्वारा कर किया गया था हजारों की संख्या
8:12:26में लोग इस मार्च से जुड़ने जाते हैं और
8:12:29रास्ते में जगह-जगह गांधीजी लोगों को
8:12:32संबोधित भी करते हैं फाइनली सिक्स्थ
8:12:35अप्रैल को दांडी पहुंचकर गांधीजी नमक
8:12:38कानून तोड़ते हैं इस तरह सिविल
8:12:40डिसऑबेडिएंस मूवमेंट की शुरुआत हो जाति
8:12:42हैं
8:12:47स्प्रेड ऑफ डी सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
8:12:50दोस्तों दांडी में गांधीजी के द्वारा नमक
8:12:53कानून तोड़ते ही पूरे देश में जगह-जगह नमक
8:12:56कानून टूटना शुरू हो जाता है सी
8:12:59राजगोपालाचारी तिरुचिरापल्ली से वेदारण्यम
8:13:02तक मार्च ऑर्गेनाइजर करते हैं और तंजौर
8:13:05कास्ट पर साल्ट डॉ ब्रेक करते हैं वही
8:13:08मालाबार में कांग्रेस लीडर के केलापन नमक
8:13:11कानून का उलझन करते हैं अप्रैल 1930 में
8:13:15नमक कानून तोड़ने के लिए नेहरू जी को
8:13:17अरेस्ट कर लिया जाता है इसके विरोध में
8:13:20मद्रास कोलकाता और कराची में प्रोटेस्ट
8:13:23ऑर्गेनाइज्ड की जाति हैं उड़ीसा में गोपाल
8:13:26बंधु चौधरी के नेतृत्व में बालेश्वर घटक
8:13:29और पुरी डिस्ट्रिक्ट की कोस्टल रीजंस में
8:13:32सॉर्ट सत्याग्रह ऑर्गेनाइजर किया जाता है
8:13:34इसी बीच गांधीजी अनाउंस करते हैं की वो
8:13:37वेस्ट कास्ट पर धरसाना साल्टवर्क्स पर रीड
8:13:40करने जा रहे हैं इसलिए उन्हें भी फोर्थ
8:13:43में 1930 को अरेस्ट कर लिया जाता है
8:13:48बॉम्बे दिल्ली कोलकाता और सोलापुर में मैं
8:13:52सिर्फ प्रोटेस्ट देखने को मिलते हैं
8:13:56कांग्रेस वर्किंग कमेटी डिफरेंट एक्शन
8:13:58प्लेन को सैंक्शन कर देती है जिससे और लोग
8:14:01जोड़ सकें वो कहते हैं की रेवत वाणी
8:14:04एरियाज में रिवेन्यू पे नहीं किया जाए और
8:14:06जमींदारी एरियाज में नो चौकीदारी टैक्स
8:14:09कैंपियन शुरू किया जाए इसी के साथ साथ
8:14:12सेंट्रल प्रोविंस में फॉरेस्ट लॉस कभी
8:14:15वायलेशन शुरू होगा
8:14:17दर्शन साल्टवर्क्स पर रेड का अनफिनिश
8:14:20टास्क 21st में 1930 को सरोजिनी नायडू
8:14:24इमाम साहिब और गांधी जी के बेटे मणिलाल
8:14:27पूरा करते हैं यहां एनिमेट और पीसफुल
8:14:30क्राउड पर पुलिस ब्रूटल लाठी चार्ज कर
8:14:33देती है इस दौरान दो लोग मारे जाते हैं और
8:14:36320 लोग घायल हो जाते हैं लेकिन इसके
8:14:39बावजूद सत्याग्रही अपनी तरफ से अहिंसा का
8:14:43मार्ग नहीं छोड़ते जैसा की सी ब्लू सी ने
8:14:46मार्गदर्शन किया था यूनाइटेड प्रोविंस में
8:14:49नो रिवेन्यू कैंपेन शुरू हो जाता है वही
8:14:52सेंट्रल प्रोविंस में लोग फॉरेस्ट लॉस का
8:14:55डिफाइन शुरू कर देते हैं इस तरह देश का
8:14:58लगभग हर हिस्सा आंदोलन में अपनी भागीदारी
8:15:00देने लगता है
8:15:02अब यह समझते हैं की आंदोलन के दौरान मांस
8:15:05पार्टिसिपेशन का एक्सेंट क्या राहत है
8:15:12दोस्तों समाज के लगभग हर वर्ग में इस
8:15:15आंदोलन में पार्टिसिपेट किया था एक-एक
8:15:18करके जानते हैं किसकी भागीदारी ज्यादा थी
8:15:20और किसकी कुछ कम सिविल डिसऑबेडिएंस
8:15:24मूवमेंट में वूमेन का पार्टिसिपेशन बड़े
8:15:26स्टार पर देखने को मिलता है दांडी मार्च
8:15:29के दौरान जगह-जगह हजारों की संख्या में
8:15:31वूमेन गांधीजी को सुनने के लिए आई है और
8:15:35आंदोलन शुरू हो जान पर पुरी तरह से उससे
8:15:38जुड़ जाति हैं यह लोग लेकर शॉप्स और
8:15:41विदेशी कपड़े बेचे वाली दुकानों के आगे
8:15:43धरना प्रदर्शन करती हैं वूमेन के साथ साथ
8:15:47स्टूडेंट और यूथ भी आंदोलन में बाढ़ चढ़कर
8:15:50हिस्सा लेते हैं सेंट्रल प्रोविंस
8:15:52महाराष्ट्र और कर्नाटक में ट्राईबल्स इस
8:15:55आंदोलन के एक्टिव पार्टिसिपेंट्स थे वहीं
8:15:58मुंबई कोलकाता मद्रास और सोलापुर आदि
8:16:01स्थान पर वर्कर्स का पार्टिसिपेशन बड़ी
8:16:03संख्या में हुआ था
8:16:05इसके साथ ही मरचेंट्स और ट्रेडर्स भी
8:16:07आंदोलन के दौरान काफी उत्साहित दिखते हैं
8:16:10ट्रेडर्स एसोसिएशंस और कमर्शियल बॉडीज
8:16:14बॉयकॉट को इंप्लीमेंट करने में एक्टिव रोल
8:16:16निभाते हैं खासकर पंजाब और तमिलनाडु में
8:16:19यूनाइटेड प्रोविंस बिहार और गुजरात से
8:16:22पैंस का पार्टिसिपेशन सबसे ज्यादा राहत है
8:16:26है अगर हम मुस्लिम की बात करें तो आंदोलन
8:16:29में मुस्लिम का पार्टिसिपेशन 1920 के नॉन
8:16:33कोऑपरेशन के जैसा नजर नहीं आता क्योंकि
8:16:35मुस्लिम लीडर्स ने आंदोलन से अलग रहने की
8:16:38अपील की थी साथ ही गवर्नमेंट भी कम्युनल
8:16:41डिस्टेंस को इनकरेज करने में एक्टिव थे
8:16:44लेकिन फिर भी कुछ एरियाज में ओवरव्हेलमिंग
8:16:47पार्टिसिपेशन देखने को मिलता है जैसे की
8:16:50नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस में यहां
8:16:52गांधियन लीडर अब्दुल गफ्फार खान के
8:16:55नेतृत्व में मुस्लिम बढ़-चढ़कर आंदोलन में
8:16:58हिस्सा लेते हैं इसके साथ ही सेन हटा
8:17:01त्रिपुरा गैबांधा बघौरा और नोआखली में भी
8:17:05मिडिल क्लास मुस्लिम आंदोलन में भाग लेते
8:17:08हैं ढाका में भी मुस्लिम लीडर्स शॉपकीपर
8:17:12लोअर क्लास पीपल और अपर क्लास वूमेन
8:17:14आंदोलन में एक्टिव रहती हैं दिल्ली बिहार
8:17:17और लखनऊ में रहने वाली मुस्लिम वीविंग
8:17:19कम्युनिटी को भी आंदोलन से इफेक्टिवेली
8:17:22जोड़ा गया था
8:17:23इतने बड़े आंदोलन पर ब्रिटिश गवर्नमेंट का
8:17:26क्या रिस्पांस राहत है आई देखते हैं
8:17:30गवर्नमेंट रिस्पांस एफर्ट्स फुट रूल्स
8:17:33दोस्तों शुरुआत में तो ब्रिटिश गवर्नमेंट
8:17:36का एटीट्यूड राहत है क्योंकि वह कन्फ्यूजन
8:17:40में थे अगर वह आंदोलन को दबाने के लिए
8:17:42फोर्स का इस्तेमाल करते हैं तो कांग्रेस
8:17:44रिप्रेशन के नाम पर गवर्नमेंट को
8:17:47क्रिटिसाइज करेगी और अगर वो ऐसा नहीं करते
8:17:49तो कांग्रेस इसे अपनी जीत बताएगी दोनों ही
8:17:53कंडीशन में गवर्मेंट की पावर तो कम हनी ही
8:17:55थी गांधी जी को अरेस्ट करने का डिसीजन भी
8:17:59काफी लाल मेटल के बाद ही लिया गया था
8:18:01लेकिन जब एक बार गवर्नमेंट डिप्रेशन करना
8:18:04शुरू करती है तो अपनी पुरी ताकत जोंक देती
8:18:07है सिविल लिबर्टीज को बन कर दिया जाता है
8:18:10प्रेस पर पाबंदी लगा दी जाति है सिविल
8:18:12डिसऑबेडिएंस ऑर्गेनाइजेशंस को बन करने की
8:18:15पुरी आजादी प्रोविंशियल गवर्मेंट को दे दी
8:18:18जाति है इसके साथ ही आंदोलनकारी पर
8:18:21लाठीचार्ज और फायरिंग भी शुरू कर दी जाति
8:18:23है
8:18:30जय में दाल दिया जाता है
8:18:32गवर्नमेंट के रिप्रेशन के बाद आंदोलन कम
8:18:34होने की जगह और भी ज्यादा उग्र होने लगता
8:18:37है इसी बीच साइमन कमीशन की रिपोर्ट भी ए
8:18:40जाति है और जुलाई 1930 में लॉर्ड अर्बन
8:18:44राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर करने की
8:18:46घोषणा कर देते हैं इसके साथ ही सेंट्रल
8:18:48लेजिसलेच्योर के 40 मेंबर्स के सजेशन पर
8:18:51कांग्रेस के साथ शांति की कोशिश की जाति
8:18:54है इसके लिए तेज बहादुर सप्रू और श्री
8:18:57जयकार को मेडिएटर बनाया जाता है अगस्त में
8:19:00मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू को
8:19:03गांधीजी से मिलने के लिए एयर बड़ा जय ले
8:19:06जय जाता है लेकिन इस बातचीत का कोई नतीजा
8:19:09नहीं निकलता
8:19:11है की नवंबर में लंदन में होने वाली
8:19:14फर्स्ट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में कुछ
8:19:17क्षेत्र जरूर हिस्सा लेने वाले लेकिन
8:19:20कांग्रेस इसका हिस्सा नहीं होगी बिना
8:19:23कांग्रेस के राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस भी
8:19:24बेनतीजई रहती है वहां मौजूद लगभग हर
8:19:28डेलीगेट का यही कहना था की बिना कांग्रेस
8:19:30के कॉन्स्टिट्यूशन पर ऑपरेशन करना मीनिंग
8:19:33जैसी है अब ब्रिटिश गवर्नमेंट को समझ आता
8:19:36है की अगर उसे कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स
8:19:39के नाम पर सरवाइव करना है तो कांग्रेस को
8:19:42मानना जरूरी है इसलिए ब्रिटिश प्राइम
8:19:44मिनिस्टर फर्स्ट राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के
8:19:47कंक्लुजन में कहते हैं की उन्हें उम्मीद
8:19:49है की सेकंड राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में
8:19:51कांग्रेस जरूर हिस्सा लगी
8:19:53वायसराय 25th जनवरी को गांधी जी और
8:19:56कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी मेंबर्स की
8:19:59बिना शर्ट रिहाई अनाउंस कर देते हैं जिससे
8:20:02यह लोग फ्रिली और फीयरलेसली ब्रिटिश पीएम
8:20:06की स्टेटमेंट का जवाब दे सकें अब कांग्रेस
8:20:08का क्या जवाब रहने वाला था
8:20:12गांधी अर्बन पेट
8:20:16दोस्तों लगभग तीन हफ्ते के आपसी डिस्कशन
8:20:20और डेलिबरेशंस के बाद कांग्रेस वर्किंग
8:20:22कमेटी वायसराय के साथ बातचीत के लिए
8:20:25गांधीजी को ऑथराइज करती है
8:20:27गांधीजी और वायसराय लोड अर्बन के बीच
8:20:31अराउंड दो हफ्तों तक डिस्कशन होते हैं और
8:20:34फाइनली फिफ्थ मार्च 1931 को गांधी एवं
8:20:38एक्ट पर साइन होते हैं इस पेस्ट के अनुसार
8:20:41हिंसा एन करने वाले सभी पॉलीटिकल
8:20:44प्रिजनर्स को रहा करना था सभी तरह के फाइन
8:20:47जो अभी तक कलेक्ट नहीं किया गए थे उन्हें
8:20:50माफ करना था जब तक की हुई जमीन को वापस
8:20:54करना था साथ ही रिजाइन करने वाले
8:20:56गवर्नमेंट सर्वेंट को लीनियंट ट्रीटमेंट
8:20:58देना था कास्ट के किनारे वाले गांव में
8:21:02कंजप्शन के लिए सॉर्ट बनाने की मंजरी भी
8:21:04सरकार ने दे दी इसके बदले में कांग्रेस
8:21:07सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को रोकने के
8:21:10लिए एग्री होती है और साथ ही नेक्स्ट
8:21:13राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस में पार्टिसिपेट
8:21:15करने के लिए भी तैयार होती है दोस्तों इस
8:21:18तरह सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
8:21:31दोस्तों आंदोलन तो गांधी इर्विन पेस्ट से
8:21:35खत्म हो गया
8:21:37आंदोलन की सफलता ही थी की कांग्रेस पहले
8:21:40बार सरकार के साथ बराबरी पर आकर कोई
8:21:43समझौता कर रही थी आंदोलन के दौरान 90 हजार
8:21:47से ज्यादा लोग जय गए थे यह संख्या 9 को
8:21:50ऑपरेशन मूवमेंट की तुलना में तीन गनी थी
8:21:52ब्रिटेन से कपड़े का इंपोर्ट आधा हो गया
8:21:55था लेकर एक साइज और लैंड रिवेन्यू से होने
8:21:58वाली सरकार की आमदनी पर भी गहरा असर पड़ता
8:22:00है इंडियन नेशनलिज्म की आज समाज के हर
8:22:04वर्ग तक पहुंच जाति है इस तरह यह आंदोलन
8:22:07मैक्स को नेशनल मूवमेंट को एक्टिव
8:22:09पार्टिसिपेशन बनाने में नॉन कोऑपरेशन
8:22:12आंदोलन से भी ज्यादा सफल रहा था साथ ही इस
8:22:15आंदोलन के दौरान हिंसा की कोई बड़ी घटना
8:22:18देखने को नहीं मिलती इसका मतलब था की लोग
8:22:21अब गांधी जी की सत्याग्रह टेक्निक को पुरी
8:22:24तरह अपना चुके थे जिसका सबसे अच्छा उदाहरण
8:22:26धरसाना में देखने को मिला था
8:22:29कंक्लुजन
8:22:32हम का सकते हैं की सिविल डिसऑबेडिएंस
8:22:34मूवमेंट एन सिर्फ इफेक्टिवली ऑर्गेनाइज्ड
8:22:37किया गया बल्कि इसमें कांग्रेस को सही मेन
8:22:40में मांस ऑर्गेनाइजेशन भी बना दिया था यही
8:22:44वजह थी की ब्रिटिश गवर्नमेंट भी कांग्रेस
8:22:46के साथ समझौता करने के लिए झुक जाति है
8:22:50सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट फेस तू
8:22:55दोस्तों हमने अपने पिछले वीडियो में सिविल
8:22:57डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को डिस्कस किया था
8:22:59फिफ्थ मार्च 1931 को हुए गांधी ऐरवा पैक
8:23:03के बाद आंदोलन का फर्स्ट पेज खत्म हो गया
8:23:06था इसके बाद इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल किस
8:23:09दिशा में आगे बढ़ता है आज हम यही जानेंगे
8:23:11आयु शुरू करते हैं मार्च 1931 में हुए
8:23:15इंडियन नेशनल कांग्रेस के कराची सेशन से
8:23:19कराची सेशन
8:23:21दोस्तों गांधी इर्विन या दिल्ली बैठ को
8:23:24इंडस करने के लिए 29 मार्च 1931 को
8:23:28कांग्रेस का कराची सेशन ऑर्गेनाइज्ड किया
8:23:30जाता है यह डेलीपैक्ट को इंडस करने के
8:23:33अलावा फंडामेंटल राइट्स और नेशनल इकोनामिक
8:23:36प्रोग्राम पर रेजोल्यूशन भी पास किया गया
8:23:38था कांग्रेस डिक्लेअर करती है की लोगों का
8:23:41शोषण खत्म करने के लिए पॉलीटिकल फ्रीडम के
8:23:44साथ-साथ इकोनामिक फ्रीडम भी जरूरी है
8:23:47फंडामेंटल राइट्स पर रेजोल्यूशन बेसिक
8:23:49सिविल राइट्स की गारंटी देता है जिसमें
8:23:52फ्री स्पीच फ्री प्रेस फ्री असेंबली और
8:23:55फ्रीडम ऑफ संगठन शामिल थे इसके साथ ही
8:23:58क्वालिटी बिफोर डी डॉ इरेस्पेक्टिव ऑफ
8:24:00कास्ट क्रीड और सेक्स रिलिजियस मैटर्स में
8:24:03स्टेट की न्यूट्रॅलिटी यूनिवर्सल एडल्ट
8:24:05फ्रेंचाइजी की बेसिस पर इलेक्शंस और फ्री
8:24:08और कंपलसरी प्राइमरी एजुकेशन जैसे राइट्स
8:24:11भी इसका पार्ट थे यह माइनॉरिटी और डिफरेंट
8:24:14लैंग्वेज
8:24:16और स्क्रिप्ट को प्रोटेस्ट करने की बात भी
8:24:19कहीं गई थी ध्यान देने वाली बात यह है की
8:24:22इसी रेजोल्यूशन को हम अपने कॉन्स्टिट्यूशन
8:24:24में बाद में फंडामेंटल राइट्स के रूप में
8:24:26पार्ट थ्री में अडॉप्ट करते हैं
8:24:28नेशनल इकोनामिक प्रोग्राम के तहत रेंट और
8:24:32रिवेन्यू में सब्सटेंशियल रिडक्शन प्रॉमिस
8:24:34किया गया था इसके अलावा उन इकोनॉमिक्स
8:24:36होल्डिंग्स होने पर रेंट से एक्सेंप्शन
8:24:40एग्रीकल्चरनेस में रिलीफ और कंट्रोल ऑफ
8:24:42यूजुअली की बात भी की गई थी इसमें वर्कर्स
8:24:46के लिए लिविंग वेज के साथ बटर कंडीशंस
8:24:48लिमिटेड अवर्स ऑफ क प्रोटेक्शन ऑफ वूमेन
8:24:50वर्कर्स और यूनियन फॉर्म करने का राइट भी
8:24:53शामिल था यह प्रोग्राम की इंडस्ट्रीज
8:24:56माइंस और मेंस ऑफ ट्रांसपोर्ट पर स्टेट
8:24:59ओनरशिप भी प्रॉमिस करता है इस तरह से
8:25:02कराची रेजोल्यूशन कांग्रेस के बेसिक
8:25:05पॉलीटिकल और इकोनॉमिक्स प्रोग्राम को
8:25:07रिप्रेजेंट करता है
8:25:08आजादी के बाद भी कांग्रेस पॉलिसीज में
8:25:11इसका एसेंस देखा जा सकता है
8:25:28दोस्तों 29th अगस्त 1931 को गांधीजी सेकंड
8:25:33राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस अटेंड करने लंदन के
8:25:35लिए निकाल जाते हैं सेकंड राउंड टेबल
8:25:38कॉन्फ्रेंस सेवंथ सितंबर 1931 से फर्स्ट
8:25:41दिसंबर 1931 तक लंदन में आयोजित की जाति
8:25:45है इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से
8:25:48गांधीजी को सोल रिप्रेजेंटेटिव बनाया गया
8:25:50था इसके अलावा प्रिंसली स्टेटस के
8:25:53रिप्रेजेंटेटिव भी यहां मौजूद थे
8:25:56मुस्लिम का प्रतिनिधित्व
8:25:59मौलाना शौकत अली मोहम्मद अली जिन्ना
8:26:02मोहम्मद इकबाल जैसे लीडर्स कर रहे थे
8:26:04हिंदू ग्रुप को
8:26:09दीवान बहादुर राजा नरेंद्र नाथ रिप्रेजेंट
8:26:12कर रहे थे इसके अलावा लिबरल पार्टी से गण
8:26:16बसु तेज बहादुर सप्रू और चिमनलाल हरिलाल
8:26:19शीतल वार्ड जैसे लीडर्स पहुंचे हुए थे
8:26:21डिप्रेस्ड क्लासेस का रिप्रेजेंटेशन
8:26:26कर रहे थे
8:26:28गवर्नमेंट का इंडिया
8:26:31नरेंद्र नाथ और एम रामचंद्र राव गए हुए थे
8:26:35खाने का मतलब यह हुआ की इंडियन पालिटी और
8:26:39सोसाइटी के लगभग हर शिक्षक की तरफ से
8:26:41रिप्रेजेंटेटिव सेकंड राउंड टेबल
8:26:43कॉन्फ्रेंस में पहुंच गए
8:26:58गवर्नमेंट इनके जारी ये दिखाना चाहती थी
8:27:00की कांग्रेस सभी इंडियन की इंटरेस्ट को
8:27:04रिप्रेजेंट नहीं करती कॉन्फ्रेंस में
8:27:06गांधीजी कहते हैं की इंडिया और ब्रिटेन के
8:27:09बीच एक क्वालिटी के बेसिस पर पार्टनरशिप
8:27:11हनी चाहिए और डिमांड रखते हैं की सेंटर और
8:27:14प्रोविंस में तुरंत ही रिस्पांसिबल
8:27:17गवर्नमेंट एस्टेब्लिश की जाए इसके साथ ही
8:27:20अनटचेबल्स को हिंदू मानते हुए गांधी जी
8:27:23कहते हैं की इन्हें माइनॉरिटी की तरह
8:27:25ट्वीट नहीं किया जाना चाहिए इसलिए इनके
8:27:28लिए सेपरेट इलेक्ट की आइडिया को वो
8:27:30डिस्कार्ड कर देते हैं इसके अलावा गांधीजी
8:27:34यह भी कहते हैं की मुस्लिम या किसी और
8:27:36माइनॉरिटी ग्रुप के लिए भी सेपरेट
8:27:39इलेक्टरेट की जरूर नहीं है लेकिन बाकी
8:27:42डेलीगेट गांधी जी से सहमत नहीं होते इस
8:27:45तरह अलग डेलीगेट ग्रुप के बीच कोई
8:27:48एग्रीमेंट नहीं बन पता और सेकंड राउंड
8:27:50टेबल कॉन्फ्रेंस में भी इंडिया के
8:27:52कांस्टीट्यूशनल फ्यूचर पर कोई डिसीजन नहीं
8:27:57इंडिया की आजादी की डिमांड को माने से
8:27:59इनकार कर देती है 28 दिसंबर 1931 को
8:28:04गांधीजी हताश होकर वापस इंडिया ए जाते हैं
8:28:07और अगले ही दिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी
8:28:10सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को रिज्यूम
8:28:12करने का डिसीजन लेती है
8:28:16सिविल डिसऑबेडिएंस रिज्यूम्स और गवर्नमेंट
8:28:19रिस्पांस
8:28:23दोस्तों इस तरह सिविल डिसऑबेडिएंस का
8:28:25सेकंड फैज शुरू होता है फर्स्ट फेस के
8:28:28दौरान ब्रिटिश गवर्नमेंट आंदोलन के
8:28:30अगेंस्ट रिस्पांस को लेकर कन्फ्यूजन में
8:28:32अच्छी थी लेकिन सेकंड फेस में ऐसा नहीं
8:28:35होता लोड इर्विन की जगह लॉर्ड विलिंग दान
8:28:38वायसराय बन चुके थे और वो गांधीजी और उनके
8:28:41आंदोलन को किसी भी तरह की दील देने की मूड
8:28:44में नहीं थे इसलिए फोर्थ जनवरी 1932 को
8:28:48गांधी जी को अरेस्ट कर लिया जाता है साथ
8:28:51ही ऑर्डिनेंस के जारी अथॉरिटी को
8:28:54अनलिमिटेड पावर दे दी जाति हैं सभी सिविल
8:28:57लिबर्टीज को खत्म कर दिया जाता है अथॉरिटी
8:29:00अपनी मर्जी से लोगों और उनकी प्रॉपर्टी को
8:29:03सीस कर शक्ति थी
8:29:04इस तरह एक हफ्ते के अंदर ही सभी लीडिंग
8:29:08कांग्रेस मां को जय में दाल दिया जाता है
8:29:10गवर्नमेंट के इस एक्शन के अगेंस्ट इंडिया
8:29:13के लोग गुस्से से रिएक्ट करते हैं
8:29:15कांग्रेस ने भले ही बिना किसी प्रिपरेशन
8:29:18के आंदोलन शुरू किया था लेकिन इसे मैसिव
8:29:21पॉपुलर रिस्पांस मिलता है पहले 4 महीने
8:29:24में ही करीब 80 हजार सत्याग्रही को जय
8:29:27होती है लाखों लोग लेकर और फॉरेन क्लॉथस
8:29:31बेचे वाली शॉप्स की पिकेटिंग करते हैं
8:29:33लीगल गैदरिंग्स नॉन वायलेंस डेमोंसट्रेशंस
8:29:36जैसे मैथर्ड के साथ ऑर्डिनेंस का डिफेंस
8:29:39किया जान लगता है
8:29:41नॉन वायलेट आंदोलन को गवर्नमेंट पुरी
8:29:44शक्ति से दबाना शुरू कर देती है कांग्रेस
8:29:46और उसकी एलिट ऑर्गेनाइजेशंस को इलीगल
8:29:49डिक्लेअर कर दिया जाता है साथ ही उनके
8:29:51ऑफिसेज और फंड्स सीएस कर लिए जाते हैं सभी
8:29:55गांधी आश्रम पर पुलिस अपना कब्जा कर लेती
8:29:57है पीसफुल विकेट्स सत्याग्रही और
8:30:01प्रदर्शनकारी पर लाठी चार्ज किया जाता है
8:30:03मारा जाता है और कठोर दंड और फाइनेंस लगा
8:30:07दिए जाते हैं जय में प्रिजनर्स को बहुत ही
8:30:10करूर था के साथ ट्वीट किया जाता है सजा के
8:30:14तोर पर कूड़े बरसाना रूस की बात हो जाति
8:30:16है और इंडिया के डिफरेंट पार्ट्स में चल
8:30:19रहे नो टैक्स कैंपेन के अगेंस्ट भी कठोर
8:30:22कम लिए जाते हैं लोगों की जमीन घर मवेशी
8:30:25खेती के साधन और बाकी संपत्ति को जप्त कर
8:30:28लिया जाता है पुलिस लोगों का अलग-अलग
8:30:31तरीके से शोषण करने लगती है लोग अपनी तरफ
8:30:34से पुरी कोशिश करते हैं फाइट बैक करने की
8:30:37लेकिन गांधीजी और बाकी लीडर्स को मौका ही
8:30:40नहीं मिलता
8:30:41आंदोलन के टेंपो को बिल्ड करने का इसलिए
8:30:44ज्यादा लंबे समय तक आंदोलन सस्टेन नहीं कर
8:30:46पता कुछ ही मीना के अंदर गवर्मेंट
8:30:49इफेक्टिवेली आंदोलन को कृष कर देती है
8:30:51हालांकि थोड़ी बहुत जान आंदोलन में अभी भी
8:30:54बच्ची हुई थी और अर्ली अप्रैल 1934 तक यह
8:30:58चला राहत है और फिर फाइनली गांधीजी आंदोलन
8:31:02को विद्रोह करने का डिसीजन लेते हैं
8:31:04दोस्तों इस तरह सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
8:31:07का सेकंड फेस भी और हो जाता है इस आंदोलन
8:31:11के दौरान ही एक और महत्वपूर्ण घटना हुई थी
8:31:13जिसकी चर्चा करना जरूरी है
8:31:21डिप्रेस्ड क्लासेस की तरफ से सेपरेट
8:31:23इलेक्टरेट की डिमांड की गई थी जिसका गांधी
8:31:26जी ने विरोध भी किया था लेकिन डिवाइडेड
8:31:28रूल की पॉलिसी को फॉलो करते हुए अगस्त
8:31:311932 में ब्रिटिश पीएम मैकडॉनल्ड सभी
8:31:34माइनॉरिटी के लिए सेपरेट इलेक्टरेट की
8:31:37घोषणा कर देते हैं इसे कम्युनल अवार्ड भी
8:31:40कहा जाता है इसमें डिप्रेस्ड क्लासेस को
8:31:42भी माइनॉरिटी कम्युनिटी माना गया
8:31:51इस कोशिश का वह पूरा विरोध करते हैं इसके
8:31:55लिए गांधीजी 28 सितंबर 1932 को आमरण अंश
8:32:00यानी की फास्ट ऊंटो डेथ शुरू कर देते हैं
8:32:03हैं उनके अनुसार अगर डिप्रेस्ड क्लासेस को
8:32:06एक सेपरेट कम्युनिटी की तरह ट्वीट किया
8:32:09जान लगा तो अनटचेबिलिटी को खत्म करने का
8:32:11सवाल ही नहीं रहेगा और इस दिशा में किया
8:32:14जा रहे हिंदू सोशल रिफॉर्म बेकार हो
8:32:16जाएंगे साथ ही हाइंड्स भी हमेशा के लिए
8:32:19डिवाइड हो जाएंगे इसलिए गांधीजी चाहते थे
8:32:22की डिप्रेस्ड क्लासेस के रिप्रेजेंटेटिव
8:32:25भी जनरल इलेक्ट्रोरेट के द्वारा ही चुने
8:32:28जैन ऐसी सिचुएशन में डिफरेंट पॉलीटिकल
8:32:31परसूएसन के लीडर्स एक साथ आते हैं जिम मदन
8:32:35मोहन मालवीय मेक राजा और बी अंबेडकर शामिल
8:32:38थे यह लोग आखिर में एक समझौते पर राजी हो
8:32:42जाते हैं जिसे पुणे समझौता या पूना पेस्ट
8:32:45कहा जाता है
8:32:47पूना पेस्ट के अनुसार डिप्रेस्ड क्लासेस
8:32:50के लिए सेपरेट इलेक्टरेट का आइडिया छोड़
8:32:52दिया जाता है और इसकी जगह प्रोविंशियल
8:32:54लेजिस्लेटर्स में उनके लिए रिजर्व्ड सिट्स
8:32:57की संख्या को 71 से बढ़कर 147 कर दिया
8:33:01जाता है साथ ही सेंट्रल लेजिसलेच्योर में
8:33:04भी टोटल सिट्स का 18% उनके लिए रिजर्व कर
8:33:07दिया जाता है इस तरह से पूना पेस्ट के बाद
8:33:10गांधीजी अपना फास्ट तोड़ते हैं साथ ही जय
8:33:14से बाहर आने पर सभी कम छोड़कर लगभग 2 साल
8:33:18तक वो अनटचेबिलिटी के अगेंस्ट कैंपेन में
8:33:21ही एक्टिव रहते हैं
8:33:22है इस दौरान सेवंथ नवंबर 1933 से लेकर
8:33:2629th जुलाई 1934 तक यानी की करीब 9 महीने
8:33:30का इंटेंसिव हरिजन टूर भी कंडक्ट करते हैं
8:33:33हरिजन नाम गांधीजी ने डिप्रेस्ड क्लासेस
8:33:36को दिया था इस स्टोर के दौरान गांधीजी
8:33:40गरीब 20000 किलोमीटर की यात्रा करते हैं
8:33:43रिसेंटली फाउंडेड हरिजन सेवक संघ के लिए
8:33:46फंड्स कलेक्ट करते हैं सभी फॉर्म्स में
8:33:49अनटचेबिलिटी की प्रैक्टिस को खत्म करने की
8:33:52अपील करते हैं और सोशल वर्कर्स से कहते
8:33:54हैं की गांव-गांव जाकर हरिजनस के सोशल
8:33:58इकोनामिक कल्चरल और पॉलीटिकल के लिए कम
8:34:01करें दोस्तों इस तरह गांधीजी अपने
8:34:04इन्फ्लुएंस का उसे करके हिंदू उसको डिवाइड
8:34:07होने से बच्चा लेते हैं आई अब वापस नेशनल
8:34:11मूवमेंट की तरफ चला जाए
8:34:13डिबेट आफ्टर सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
8:34:17दोस्तों बड़े आंदोलन के खत्म होने के बाद
8:34:20एक बार फिर से सवाल खड़ा होता है की आगे
8:34:23की स्ट्रीट्स क्या होगी इसे लेकर कांग्रेस
8:34:26में तीन पर्सपेक्टिव सामने आते हैं पहले
8:34:30था की गांधियन लाइंस पर कंस्ट्रक्टिव क
8:34:32किया दूसरा पर्सपेक्टिव था की
8:34:35कांस्टीट्यूशनल स्ट्रगल को रिवाइव किया
8:34:38जाए और 1934 में होने वाले सेंट्रल
8:34:41लेजिसलेच्योर के इलेक्शंस में पार्टिसिपेट
8:34:43किया जाए इसका सपोर्ट
8:34:51कर रहे थे
8:34:53इनके अलावा जो तीसरा प्रोस्पेक्टिव सामने
8:34:55ए रहा था वह कांग्रेस में उभरते स्ट्रांग
8:34:58लेफ्ट ईस्ट ट्रेड का था इसे जवाहरलाल
8:35:01नेहरू जैसे लीडर्स रिप्रेजेंट कर रहे थे
8:35:03और ये लोग कंस्ट्रक्टिव क और काउंसलिंग
8:35:07एंट्री दोनों को ही क्रिटिसाइज करते हैं
8:35:09इसकी जगह यह जान आंदोलन को ही कंटिन्यू
8:35:12रखना के पक्ष में थे
8:35:14फाइनली काउंसिल एंट्री के फीवर में फैसला
8:35:17लिया जाता है मे 1934 में जो इंडिया
8:35:20कांग्रेस कमेटी पटना में मिलती है और
8:35:23पार्लियामेंट्री बोर्ड सेटअप किया जाता है
8:35:25कांग्रेस के बैनर में ही इलेक्शंस फाइट
8:35:28करने का डिसीजन हो जाता है इसी बीच
8:35:31गांधीजी को यह भरोसा हो जाता है की
8:35:33कांग्रेस के पावरफुल ट्रेंड्स के साथ उनके
8:35:36अपने विचार नहीं मिलते बड़े क्षेत्र
8:35:39पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स को फीवर कर रहा
8:35:41था गांधीजी इसके पुरी तरह खिलाफ थे साथ ही
8:35:45सोशलिस्ट ग्रुप से भी उनके फंडामेंटल
8:35:47डिफरेंस थे इसलिए अक्टूबर 1934 में
8:35:52गांधीजी कांग्रेस से रिजाइन कर देते हैं
8:35:54नवंबर 1934 में सेंट्रल लेजिसलेटिव
8:35:58असेंबली के इलेक्शंस होते हैं इसमें टोटल
8:36:0175 इलेक्ट्रिक सिट्स में से 45 पर
8:36:04कांग्रेस की जीत होती है लेकिन इससे भी
8:36:08ज्यादा इंपॉर्टेंट इलेक्शन होना अभी बाकी
8:36:10था
8:36:12इंडिया एक्ट 1935 और इलेक्शंस ऑफ 1937
8:36:16दोस्तों
8:36:181932 के आंदोलन के दौरान ही थर्ड राउंड
8:36:21टेबल कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति है
8:36:23इसमें भी कांग्रेस पार्टिसिपेट नहीं करती
8:36:26यहां पर हुए डिस्कशन के बाद ब्रिटिश
8:36:28गवर्नमेंट 1935 का एक्ट पास करती है इस
8:36:33एक्ट में प्रोविंशियल ऑटोनॉमी इंट्रोड्यूस
8:36:35की गई थी और इसके लिए ही अर्ली 1937 में
8:36:39इलेक्शंस डिक्लेअर कर दिए जाते हैं
8:36:41इलेक्शंस को लेकर एक बार फिर से कांग्रेस
8:36:44में डिबेट शुरू हो जाति है सभी लीडर्स
8:36:46एग्री करते थे की 1935 के एक्ट का विरोध
8:36:50करना है लेकिन यह विरोध किस तरह से किया
8:36:53जाए इसको लेकर सबकी अलग-अलग राय थी
8:36:56फाइनली 1937 के फेसबुक सेशन में इलेक्शंस
8:37:01में पार्टिसिपेट करने पर सहमति बन जाति है
8:37:03और ऑफिस एक्सेप्टेंस का फैसला पोस्ट
8:37:06इलेक्शन पीरियड पर छोड़ दिया जाता है
8:37:09फरवरी 1937 में इलेक्शंस होते हैं जिसमें
8:37:13कांग्रेस शानदार प्रदर्शन करती है
8:37:171161 कंटेस्टेंट सिट्स में से
8:37:20716 सिट्स पर इनकी जीत होती है कुछ मीना
8:37:24की तसल्ली के बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी
8:37:26ऑफिस एक्सेप्ट करने का फैसला लेती है और
8:37:29टोटल 11 में से 8 प्रोविंस में गवर्नमेंट
8:37:33फॉर्म की जाति है जिसमें मद्रास मुंबई
8:37:35सेंट्रल प्रोविंस उड़ीसा बिहार अप
8:37:39नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और असम
8:37:42शामिल था
8:37:43आई जानते हैं गवर्नमेंट फॉर्म करने के बाद
8:37:46कांग्रेस मिनिस्टरीज का परफॉर्मेंस कैसा
8:37:48राहत है
8:37:5028 मठ ऑफ कांग्रेस रूल दोस्तों कांग्रेस
8:37:54मिनिस्टरीज लोगों के वेलफेयर के लिए कम
8:37:57करना शुरू करती है
8:38:00फिर भी यह कुछ रिफॉर्म्स इंट्रोड्यूस करने
8:38:03की कोशिश करते हैं सिविल लिबर्टीज को
8:38:06रिवाइव करते हुए सभी इमरजेंसी पावर्स को
8:38:09रिपील कर दिया जाता है
8:38:10इलीगल डिक्लेअर की गई पॉलीटिकल
8:38:12ऑर्गेनाइजेशन और जर्नल्स पर से बन हटा
8:38:15दिया जाता है प्रेस पर से सभी
8:38:17रिस्ट्रिक्शंस रिमूव कर दिए जाते हैं
8:38:20हजारों पॉलीटिकल प्रिजनर्स के रिलीज का
8:38:22ऑर्डर इशू किया जाता है
8:38:38और दूसरा फाइनेंशियल रिसोर्सेस की भी बहुत
8:38:42कमी थी इसके अलावा टाइम भी कंस्ट्रेंट बन
8:38:45जाता है कांग्रेस मिनिस्टरीज का रूल सिर्फ
8:38:4728 मंथ्स तक ही राहत है
8:38:50यह समय बड़ी एग्रेरियन या एडमिनिस्ट्रेटिव
8:38:53रिफॉर्म्स के लिए काफी नहीं था
8:38:561939 में सेकंड वर्ल्ड वार शुरू हो जाता
8:38:59है और ब्रिटेन बिना इंडियन की परमिशन की
8:39:02इंडिया को वर्ल्ड वार में पार्टिसिपेंट
8:39:04बना देता है इसी के विरोध में कांग्रेस
8:39:07मिनिस्ट्री अक्टूबर 1939 में रिजाइन कर
8:39:10देती हैं
8:39:12कंक्लुजन दोस्तों इलेक्शंस में
8:39:15पार्टिसिपेट करने और फिर गवर्नमेंट फॉर्म
8:39:17करने से कांग्रेस लीडर्स को
8:39:19पार्लियामेंट्री सिस्टम में कम करने का
8:39:21वैल्युएबल एक्सपीरियंस मिलता है यही
8:39:24एक्सपीरियंस आजादी के बाद इंडियन
8:39:27डेमोक्रेसी को सस्टेन करने में काफी हेल्प
8:39:29करता है अपने आगे आने वाले वीडियो में हम
8:39:32देखेंगे की कैसे सेकंड वर्ल्ड वार के
8:39:34दौरान नेशनल मूवमेंट डिसाइसिव फीस में
8:39:38पहुंच जाता है
8:39:40[संगीत]
8:40:06बैकग्राउंड सेकंड वर्ल्ड वार और कांग्रेस
8:40:10इस रिस्पांस दोस्तों सितंबर 1939 में
8:40:14सेकंड वर्ल्ड वार की शुरुआत होती है और
8:40:16ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट कांग्रेस या
8:40:19सेंट्रल लेजिसलेच्योर के इलेक्ट मेंबर
8:40:21किया बिना नहीं इंडिया को भी वार में
8:40:24पार्टिसिपेंट क्लियर कर देती है
8:40:26कांग्रेस पुरी तरह से फैशनिस्ट फोर्सेस के
8:40:29अगेंस्ट थे और एलाइड कैसे का सपोर्ट भी
8:40:32करना चाहती थी लेकिन उनका मानना यह था की
8:40:35खुद गुलामी में रहते हुए इंडिया किसी
8:40:37दूसरे देश की फ्रीडम की फाइट नहीं कर सकता
8:40:40कांग्रेस के ऑफिशल स्टैंड को डिस्कस करने
8:40:43के लिए 10 से 14 सितंबर के बीच वर्धा में
8:40:46कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग होती है
8:40:48यह कांग्रेस लीडर्स की अलग-अलग व्यूज
8:40:52सामने आते हैं
8:40:55शो करते हैं उनका मानना था की वेस्टर्न
8:40:58यूरोप की डेमोक्रेटिक स्टेटस और हिटलर के
8:41:01नाथसी स्टेट में क्लियर डिफरेंस है वही
8:41:03सोशलिस्ट और सुभाष चंद्र बस का कहना था यह
8:41:07वार एक इंपिरियलिस्ट वार है क्योंकि दोनों
8:41:10ही साइज कॉलोनियल टेरिटरीज को जेन करने या
8:41:13डिफेंड करने के लिए ही फाइट कर रही हैं
8:41:15इसलिए किसी भी साइड को सपोर्ट करने का
8:41:18सवाल ही नहीं है बल्कि कांग्रेस को
8:41:20सिचुएशन का फायदा उठाते हुए तुरंत ही
8:41:22आजादी के लिए आंदोलन शुरू कर देना चाहिए
8:41:24इन सब के बीच जवाहर लाल नेहरू का अपना अलग
8:41:28स्टैंड था उनके अनुसार जस्टिस तो ब्रिटेन
8:41:31फ्रांस और पोलन के साथ ही है लेकिन साथ ही
8:41:34ब्रिटेन और फ्रांस इंपिरियलिस्ट कंट्रीज
8:41:36हैं और ये वार केपीटलाइज्म के इनर
8:41:39कांट्रडिक्शंस का ही नतीजा है इसलिए नेहरू
8:41:42जी का कहना था की फ्रीडम मिलने तक ना तो
8:41:45इंडिया को वार जॉइन करना चाहिए और ना ही
8:41:48ब्रिटेन की मुश्किल का फायदा उठाते हुए
8:41:49अभी कोई आंदोलन ही शुरू करना चाहिए फाइनली
8:41:53नेहरू जी के स्टैंड को ही कांग्रेस का
8:41:55ऑफिशल स्टैंड डिक्लेअर किया जाता है कमेटी
8:41:57अपने रेजोल्यूशन पर पोलैंड पर हुए नागजी
8:42:00अटैक को कंडोम करती है साथ ही डिक्लेअर
8:42:03करती है की इंडिया इस वार में पार्टी नहीं
8:42:06बन शक्ति क्योंकि खाने के लिए तो यह वार
8:42:08डेमोक्रेटिक फ्रीडम के लिए लाडा जा रहा है
8:42:10लेकिन इंडिया को यही फ्रीडम नहीं दी जा
8:42:13रही
8:42:14है अगर ब्रिटेन सच में डेमोक्रेसी और
8:42:17फ्रीडम की फाइट कर रहा है तो उसे इंडिया
8:42:19में यह प्रूफ करना चाहिए
8:42:22की अपने वरयाम्स को ब्रिटेन इंडिया में
8:42:26कैसे इंप्लीमेंट करेगा उसके बाद इंडियन
8:42:28खुशी से वार में उनका साथ देने के लिए
8:42:30तैयार है इस रेजोल्यूशन के अगेंस्ट
8:42:34ब्रिटिश गवर्नमेंट का रिस्पांस पुरी तरह
8:42:36नेगेटिव राहत है
8:42:39अक्टूबर 1939 को एक स्टेटमेंट जारी करते
8:42:43हैं जिसमें वो मुस्लिम लीग और प्रिंस को
8:42:46कांग्रेस के अगेंस्ट उसे करने की कोशिश
8:42:48करते हैं ब्रिटेन के वॉरियर्स को डिफाइन
8:42:51करने से साफ इनकार भी कर देते हैं फ्यूचर
8:42:54को लेकर बस इतना प्रॉमिस करते हैं की वार
8:42:57खत्म होने के बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट
8:42:59इंडिया की सेवरल पार्टी कम्युनिटी के
8:43:01रिप्रेजेंटेटिव और इंडियन प्रिंस के साथ
8:43:04कंसल्टेशन करेगी और डिसाइड करेगी की 1935
8:43:08एक्ट को कैसे मॉडिफाई किया जा सकता है
8:43:12इसके रिएक्शन में गांधीजी कहते हैं की
8:43:14ब्रिटिश गवर्नमेंट अपनी डिवाइडेड रूल की
8:43:16पॉलिसी को ही कंटिन्यू कर रही है
8:43:18वायसराय की डिक्लेरेशन से साफ है की अगर
8:43:21ब्रिटेन का बस चले तो इंडिया में कभी भी
8:43:24डेमोक्रेसी नहीं आने देगा कांग्रेस ने तो
8:43:26ब्रेड मांगी थी लेकिन उसे पत्थर मिले हैं
8:43:2923rd अक्टूबर को वर्किंग कमेटी वाइस रॉयल
8:43:32की स्टेटमेंट को रिजेक्ट करते हुए
8:43:33कांग्रेस मिनिस्ट्री से रिजाइन करने के
8:43:36लिए कहती है लेकिन अभी भी जान आंदोलन शुरू
8:43:39करने की कोई बात नहीं होती गवर्नमेंट कुछ
8:43:42भी सुनने के लिए तैयार नहीं थी और एक के
8:43:45बाद एक ऑर्डिनेंस जारी करके सिविल लिबर्टी
8:43:48इस पर रिस्ट्रिक्शंस लगाने लगती है
8:43:52पहले ही आम आदमी दुखी था इकोनॉमिक्स की
8:43:56बेसिक नेसेसिटी अवेलेबल नहीं थी फिर
8:43:58धीरे-धीरे कांग्रेस लीडर
8:44:03को यह बताने का समय ए जाता है की इंडियन
8:44:07कपिल
8:44:10अगस्त ऑफर अन्य इंडिविजुअल सत्याग्रह
8:44:13दोस्तों
8:44:141940 की शुरुआत में वर्ल्ड वार में हिटलर
8:44:17को सक्सेस मिलती जा रही थी बेल्जियम
8:44:20हॉलैंड और फ्रांस को फास्टेस्ट बॉलर्स ने
8:44:23जीत लिया था ऐसे में ब्रिटेन कंसीलर मूड
8:44:26में ए जाता है कांग्रेस भी कंप्रोमाइज के
8:44:29लिए तैयार थी अगर उसे वार के दौरान
8:44:31इंटिरिम गवर्नमेंट फॉर्म करने दिया जाए
8:44:33लेकिन ब्रिटिश गवर्नमेंट कांग्रेस के
8:44:36डिमांड एक्सेप्ट नहीं करती और अपनी तरफ से
8:44:39एक ऑफर लेकर आई है जिसे अगस्त ऑफर कहा
8:44:43जाता है
8:44:44वायसराय लिंग्लित को इसमें अनाउंस करते
8:44:47हैं की इंडिया को डोमिनियन स्टेटस देना
8:44:50ब्रिटिश गवर्मेंट का ऑब्जेक्टिव है साथ ही
8:44:53वायसराय की एग्जीक्यूटिव काउंसिल को
8:44:56एक्सपेंड करने का प्रपोज भी रखते हैं
8:44:57जिसमें इंडियन की मेजॉरिटी होगी
8:45:01वार के बाद इंस्टिट्यूट असेंबली सेट अप
8:45:04करने की बात भी इसमें होती है लेकिन यह भी
8:45:07कहा जाता है की बिना माइनॉरिटी की कंसेंट
8:45:09के कोई भी फ्यूचर कॉन्स्टिट्यूशन नहीं
8:45:13किया जाएगा
8:45:19[संगीत]
8:45:24[संगीत]
8:45:29है इसलिए 1940 के और में कांग्रेस एक बार
8:45:32फिर गांधीजी से कमान संभालने के लिए कहती
8:45:35है और गांधी जी इंडिविजुअल सत्याग्रह शुरू
8:45:39करने का डिसीजन लेते हैं यह सत्याग्रह हर
8:45:42लोकेलिटी में कुछ सिलेक्टेड इंडिविजुअल्स
8:45:44के द्वारा लिया जाना था इस सत्याग्रह का
8:45:47ही लोगों की फीलिंग को एक्सप्रेस करना था
8:45:50की वो वार में इंटरेस्टेड नहीं है उनके
8:45:53लिए नक्सिज्म और इंडिया पर रूल कर रहे डबल
8:45:56और डोक्रेसी में कोई अंतर नहीं है साथ ही
8:45:59सत्याग्रह गवर्नमेंट को एक और मौका देता
8:46:01है की वो पीसफुली कांग्रेस की डिमांड मां
8:46:03लेने सत्याग्रही को एंटीवायरस स्पीच देनी
8:46:06थी इस एक्ट से वह वार के अगेंस्ट अपनी
8:46:09फ्रीडम ऑफ स्पीच की डिमांड करेंगे और अगर
8:46:12गवर्नमेंट उन्हें अरेस्ट नहीं करती है तो
8:46:15इसी स्पीच को जगह जगह जाकर रिपीट करेंगे
8:46:17और गांव से होकर दिल्ली के लिए मार्च
8:46:20करेंगे इस तरह एक आंदोलन की शुरुआत होती
8:46:24है जिसे दिल्ली चलो आंदोलन भी कहा जाता है
8:46:28इसमें सबसे पहले चुने जान वाले सत्याग्रह
8:46:30विनोबा भावे थे और दूसरे सत्याग्रही जवाहर
8:46:34लाल नेहरू बनते हैं मे 1941 तक 25000 से
8:46:39भी ज्यादा लोगों को इंडिविजुअल सत्याग्रह
8:46:42करने के लिए अरेस्ट किया जाता है हालांकि
8:46:44ब्रिटिश गवर्नमेंट इसके बाद भी कांग्रेस
8:46:46की डिमांड्स माने के लिए तैयार नहीं होती
8:46:49लेकिन जल्द ही ऐसी इंटरनेशनल सिचुएशन बंटी
8:46:52है की उन्हें एक और मिशन इंडिया भेजना
8:46:55पड़ता है
8:46:56ट्रिप्स मिशन दोस्तों वर्ल्ड वार में
8:46:59ब्रिटेन की सिचुएशन क्रिटिकल होती जा रही
8:47:02थी 22 जून 1941 को जर्मनी सोवियत यूनियन
8:47:07पर अटैक कर देता है और इसके बाद 7 दिसंबर
8:47:10को जापान पर्ल हार्बर में अमेरिकन फ्लीट
8:47:13पर सरप्राइज अटैक कर देता है जल्दी ही
8:47:15जबान फिलिपींस इंडो चीन इंडोनेशिया और
8:47:19बर्मा पर कब्जा कर लेट है तेजी से आगे
8:47:22बढ़ते हुए मार्च 1942 में रंगून को
8:47:25ऑक्यूपई कर लिया जाता है और इस तरह और अब
8:47:29इंडिया के दरवाजे पर पहुंच जाति है इंडियन
8:47:32लीडर्स को इंडिया के डिफेंस की चिंता होने
8:47:34लगती है साथ ही वार की बिगड़ी सिचुएशन को
8:47:37देखते हुए उस के प्रेसिडेंट रूल्स अबाउट
8:47:40चाइनीस प्रेसिडेंट
8:47:45पर दबाव डालने लगता हैं की वो वार में
8:47:48इंडियन का एक्टिव सपोर्ट लेने की कोशिश
8:47:50करें इसलिए ब्रिटिश पीएम मार्च 1942 में
8:47:55कैबिनेट मिनिस्टर स्टेफोर्ड ग्रिप्स की
8:47:58लीडरशिप में एक मिशन इंडिया भेजते हैं
8:47:59लेकिन ट्रिप्स का प्रपोज भी इंडियन लीडर्स
8:48:03को निराश करता है उन्होंने अपने प्रपोज
8:48:05में वार के बाद इंडिया को डोमिनियन स्टेटस
8:48:08देने और कांस्टीट्यूएंट असेंबली फॉर्म
8:48:10करने का प्रॉमिस किया था इस
8:48:13कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली के मेंबर्स को
8:48:14प्रोविंशियल असेंबली द्वारा इलेक्ट्रिक
8:48:17किया जाना था और प्रिंसली स्टेटस के कैसे
8:48:19में मेंबर्स रुलर्स द्वारा नॉमिनेट होने
8:48:22थे ट्रिप्स प्रपोज में एक प्रोविजन ये भी
8:48:25था की अगर कोई प्रॉब्लम्स न्यू
8:48:27कॉन्स्टिट्यूशन को एक्सेप्ट नहीं करता तो
8:48:30उसे अधिकार होगा की वो अपने फ्यूचर स्टेटस
8:48:32को लेकर ब्रिटेन के साथ एक सेपरेट
8:48:35एग्रीमेंट करें यह प्रोविजन मुस्लिम लीग
8:48:38की सेपरेट स्टेट की डिमांड को एकोमोडेशन
8:48:40करने के लिए था ट्रिप्स प्रपोज के बड़े
8:48:42में जवाहरलाल नेहरू ने लिखा है की जब
8:48:45उन्होंने इसको पहले बार पढ़ा तो वो बहुत
8:48:48डिप्रेस्ड हो गए थे कांग्रेस डोमिनियन
8:48:51स्टेटस इंडिया के पार्टीशन और
8:48:53कांस्टीट्यूएंट असेंबली में नॉमिनेटेड
8:48:55मेंबर्स जैसे प्रोविजंस पर एतराज जताती है
8:48:57ब्रिटिश गवर्नमेंट इनकी इमीडिएट ट्रांसफर
8:49:00ऑफ इफेक्टिव पावर की डिमांड को भी
8:49:02एक्सेप्ट करने से माना कर देती है और इस
8:49:05तरह क्रिप्स मिशन भी फूल हो जाता है यह
8:49:08ध्यान रखना वाली बात यह है की ब्रिटिश
8:49:10पीएम चर्चिल चाहते ही नहीं थे की ट्रिप्स
8:49:13मिशन कामयाब हो उन्होंने ये मिशन सिर्फ
8:49:16इंटरनेशनल कम्युनिटी में दिखावे के लिए ही
8:49:19भेजो था
8:49:20क्रिप्स को साफ बोल दिया गया था की
8:49:22ड्राफ्ट डिक्लेरेशन से अलग वो कुछ भी नहीं
8:49:25कर सकते बाघिन और नेगोशिएट करने की इनके
8:49:28पैसे की वजह से ही ये मिशन फेलियर बंता है
8:49:34ब्रिटिश गवर्नमेंट की इंटेंशंस को भी साफ
8:49:37कर दिया था इंडियन लीडर्स समझ जाते हैं की
8:49:40अब ब्रिटिश के साथ नेगोशिएशंस का कोई
8:49:42फायदा नहीं है जरूर है एक बड़े जन्म
8:49:46आंदोलन की
8:49:47क्यूट इंडिया मूवमेंट
8:49:49दोस्तों टिप्स के जान के बाद गांधीजी
8:49:53ब्रिटिश विड्रोल और जैपनीज इन विजन के
8:49:55अगेंस्ट नॉनवॉयलेट नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट
8:49:58का रेजोल्यूशन तैयार करते हैं
8:50:0014th जुलाई 1942 को वर्धा में कांग्रेस
8:50:04वर्किंग कमेटी की मीटिंग में आंदोलन के
8:50:07आइडिया को एक्सेप्ट किया जाता है इस
8:50:09डिसीजन को अगस्त में जो इंडिया कांग्रेस
8:50:12कमेटी की बॉम्बे मीटिंग में रतीफाई किया
8:50:14जाना था 8 अगस्त 1942 को मुंबई के
8:50:19ग्वालियर टैंक में क्यूट इंडिया
8:50:21रेजोल्यूशन पास किया जाता है यहां पर ही
8:50:24गांधीजी करो या मारो यानी डू और दी का
8:50:28नारा देते हैं वो कहते हैं की या तो हम
8:50:31इंडिया को आजाद कर लेंगे या फिर इस कोशिश
8:50:34में अपनी जान दे देंगे लेकिन अब अंग्रेजी
8:50:37राज की गुलामी में और नहीं रहेंगे ब्रिटिश
8:50:40गवर्नमेंट लेकिन ना तो कांग्रेस से
8:50:42नेगोशिएशन के मूड में थी और ना ही आंदोलन
8:50:45के फार्मूले शुरू होने गए
8:50:49सुबह ही कांग्रेस के सभी टॉप लीडर्स को
8:50:52अरेस्ट कर लिया जाता है कांग्रेस की सभी
8:50:55ऑर्गेनाइजेशंस को भी इलीगल डिक्लेअर कर
8:50:57दिया जाता है गवर्मेंट के इस तरह अचानक
8:51:00अटैक करने से लोगों में इंस्टैन्टेनियस
8:51:03रिएक्शन देखने को मिलता है जैसे ही अरेस्ट
8:51:06की न्यूज़ फैलती है मुंबई के ग्वालियर
8:51:08टैंक में लाखों लोगों की भीड़ जमा हो जाति
8:51:11है और अथॉरिटीज के साथ क्लासेज होने लगता
8:51:15हैं इसी तरह की डिस्टरबेंस 9th अगस्त को
8:51:18अहमदाबाद और पुणे में भी देखने को मिलते
8:51:20हैं और 10 अगस्त को दिल्ली अप और बिहार के
8:51:24बहुत सारे शेरों जैसे की कानपुर इलाहाबाद
8:51:27वाराणसी और पटना में हड़ताल पब्लिक
8:51:31डेमोंसट्रेशंस और प्रोफेशन किया जाते हैं
8:51:33इसके जवाब में गवर्नमेंट प्रेस पर
8:51:36प्रतिबंध लगा देती है इसी बीच कांग्रेस के
8:51:39बहुत से प्रोविजनल लीडर्स जो अरेस्ट होने
8:51:42से बैक गए
8:51:49आंदोलन की खबर गांव तक पहुंचने लगती है
8:51:53पूरे देश में इसका असर दिखने लगता है आई
8:51:56जानते हैं की पब्लिक किस तरह आंदोलन में
8:51:59अपना योगदान देती है
8:52:02पब्लिक ऑन रामपॉगे दोस्तों क्यूट इंडिया
8:52:05मूवमेंट के दौरान लोग सिंबल्स ऑफ अथॉरिटी
8:52:08को अटैक करना शुरू करते हैं पुलिस स्टेशंस
8:52:10पोस्ट ऑफिसेज कोट्स रेलवे स्टेशंस जैसी
8:52:14जगह पर कब्जा करना शुरू कर देते हैं
8:52:16पब्लिक बिल्डिंग पर नेशनल फ्लैग फहराया
8:52:19जाता है रेलवे ट्रेक्स उखाड़ दिए जाते हैं
8:52:21टेलीग्राफ लाइंस को कट कर दिया जाता है और
8:52:25कई जगह ब्रिज उदा दिए जाते हैं कई जगह पर
8:52:28सत्याग्रह हज के ग्रुप तहसील जाकर खुद को
8:52:31अरेस्ट कर लेते हैं पूरे देश में स्टूडेंट
8:52:34स्कूल और कॉलेज की हड़ताल कर देते हैं और
8:52:37इलीगल पत्रिका आज का डिस्ट्रीब्यूशन करने
8:52:39लगता हैं अहमदाबाद मुंबई जमशेदपुर अहमदनगर
8:52:44और पुणे में वर्कर्स हड़ताल शुरू कर देते
8:52:47हैं
8:52:51इसे स्पेंस करने के लिए सरकार अपना पूरा
8:52:55जोर लगा देती है
8:52:57पुलिस और मिलिट्री को एनिमेट क्राउड्स पर
8:53:00फायरिंग का ऑर्डर दे दिया जाता है यहां तक
8:53:03की लो फ्लाइंग एयरक्राफ्ट से मशीन गण भी
8:53:05चलाई जाति है गांव के लोगों को होस्टेस
8:53:08बना लिया जाता है उनके ऊपर करीब 90 लाख
8:53:12रुपए तक का फाइन इंपोज कर दिया जाता है
8:53:14लोगों की बिलोंगिंग्स को लौटकर फाइन मौके
8:53:18पर ही वसूल भी किया जाता है
8:53:20सस्पेक्ट पर कूड़े बरसाए जाते हैं और गांव
8:53:23वालों के भाग जान पर पूरे के पूरे गांव को
8:53:26ही जल दिया जाता है
8:53:281942 के और होने तक 60000 से भी ज्यादा
8:53:32लोगों को अरेस्ट कर लिया जाता है इस तरह
8:53:34की ब्रूटल रिप्रेशन की वजह से स्ट्रगल का
8:53:37मांसपेस 6 से 7 हफ्तों के अंदर ही खत्म कर
8:53:40दिया जाता है इसके बाद शुरुआत होती है
8:53:43अंडरग्राउंड एक्टिविटीज की अंडरग्राउंड
8:53:46एक्टिविटीज
8:53:49दोस्तों गवर्नमेंट के रिप्रेशन की वजह से
8:53:52बहुत सी नेशनलिस्ट अंदर ग्राउंड हो जाते
8:53:54हैं और वहीं से अपनी एक्टी इस जारी रखते
8:53:57हैं इसके प्रॉमिनेंट मेंबर्स अच्युत
8:54:00पटवर्धन अरुण आसफ अली राम मनोहर लोहिया
8:54:04सुचेता कृपलानी बीजू पटनायक आरपी गोयनका
8:54:08और जीपी नारायण जैसे लीड थे बॉम्बे में
8:54:11उषा मेहता अंडरग्राउंड रेडियो ऑपरेट करती
8:54:14है यह लोग लोगों के मोरल को बनाए रखना का
8:54:18कम करते हैं पूरे देश के एक्टिविस्ट को
8:54:21गाइडलाइंस के साथ आर्म्स और अमिनेशन भी
8:54:24प्रोवाइड करते हैं इसी के साथ क्यूट
8:54:27इंडिया मूवमेंट का एक सिग्निफिकेंट फीचर
8:54:29पैरेलल गवर्नमेंट की एस्टेब्लिशमेंट था
8:54:31पहले पैरेलल गवर्नमेंट अगस्त 1942 में
8:54:35ईस्ट अप के बलिया में प्रोक्लेम की गई थी
8:54:37इसके लीडर चित्तू पांडे
8:55:12से पेशेंट के एक्सेंट को समझते हैं
8:55:19दोस्तों क्यूट इंडिया मूवमेंट में बहुत
8:55:22बड़े स्टार पर मांस पार्टिसिपेशन देखने को
8:55:24मिलता है जैसा की हम डिस्कस कर चुके हैं
8:55:27पूरे देश के लोग इस आंदोलन में अपने अपने
8:55:30तरीके से योगदान देते हैं आंदोलन में
8:55:33युद्ध स्पेशली स्टूडेंट सबसे आगे नजर आते
8:55:36हैं इसके साथ ही वूमेन भी कंधे से कंधा
8:55:40मिलकर आंदोलन में अपनी भागीदारी निभाती
8:55:42हैं वर्कर्स और पेजयंस के सहयोग के बिना
8:55:45तो आंदोलन की कल्पना भी नहीं की जा शक्ति
8:55:48अगर पॉलीटिकल पार्टी की बात की जाए तो
8:55:51मुस्लिम लीग इस आंदोलन का विरोध करती है
8:55:53हिंदू महासभा भी क्यूट इंडिया का बॉयकॉट
8:55:57करने का डिसीजन लेती है लेकिन इसके बाद भी
8:55:59मुस्लिम का पार्टिसिपेशन हमें इस आंदोलन
8:56:02में नजर आता है साथी आंदोलन के दौरान किसी
8:56:06भी तरह के कम्युनल क्लासेस भी नहीं हुए थे
8:56:09कम्युनिस्ट पार्टी भी आंदोलन को जॉइन नहीं
8:56:11करती क्योंकि सोवियत रसिया पर जर्मनी का
8:56:15अटैक हो चुका था इसलिए कम्युनिस्ट वार में
8:56:18ब्रिटिश का सपोर्ट करने लगता हैं
8:56:21[संगीत]
8:56:23हालांकि पर्सनल लेवल पर बहुत सारे
8:56:26कम्युनिस्ट लीडर्स आंदोलन का सपोर्ट भी
8:56:28करते हैं इस तरह क्यूट इंडिया मूवमेंट में
8:56:32सोसाइटी का ऑलमोस्ट हर क्षेत्र
8:56:33पार्टिसिपेट करता है और ब्रिटिश को यह
8:56:36एहसास दिलाते हैं की इंडियन की विशेष के
8:56:39अगेंस्ट अब इंडिया को रूल करना पॉसिबल
8:56:41नहीं है इस आंदोलन में आम लोगों का
8:56:45हीरोइज्म भी देखने को मिलता है
8:56:47लीडरशिप के अभाव में और गवर्नमेंट के
8:56:50ब्रूटल रिप्रेशन के बाद भी वो आंदोलन को
8:56:52करने नहीं देते कंक्लुजन
8:56:56दोस्तों क्यूट इंडिया मूवमेंट के बाद यह
8:56:59साफ हो गया था की आजादी को ज्यादा डर तक
8:57:02इंडियन से दूर नहीं रखा जा सकता ब्रिटिश
8:57:05गवर्नमेंट समझ गई थी की अगर फिर से ऐसा एक
8:57:09मूवमेंट होता है तो ब्रिटिशर्स के लिए
8:57:11रिप्रेस करना पॉसिबल नहीं होगा आगे आने
8:57:14वाली वीडियो में हम देखेंगे की किस तरह
8:57:16ब्रिटिशर्स पावर ट्रांसफर करने की तैयारी
8:57:19करते हैं
8:57:21सुबह चंद्र बस और इन दोस्तों अपनी पिछली
8:57:26वीडियो में हमने सेकंड वर्ल्ड वार के
8:57:28दौरान इंडियन नेशनल मूवमेंट की प्रोग्रेस
8:57:30को देखा था और इस दौरान शुरू हुए क्यूट
8:57:33इंडिया मूवमेंट को भी डिस्कस किया था जी
8:57:35समय इंडिया में यह सब घटनाएं हो रही थी
8:57:37उसे समय इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल केक बड़े
8:57:40लीडर यहां मौजूद नहीं थे जी हां हम बात कर
8:57:44रहे हैं सुभाष चंद्र बस की नेताजी दौरान
8:57:48कहां थे और कैसे वहां से आजादी की लड़ाई
8:57:51जारी रखते हैं आज हम इसके बड़े में ही
8:57:53चर्चा करेंगे इंट्रोडक्शन
8:57:56दोस्तों सुभाष चंद्र बस ने 1920 में
8:58:00इंडियन सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन में
8:58:02फोर्थ पोजीशन सिक्योरिटी थी लेकिन 1921
8:58:06में ही सिविल सर्विसेज से रिजाइन करके
8:58:08उन्होंने फ्रीडम स्ट्रगल की र चुन ली थी
8:58:10और कांग्रेस के मेंबर बन गए थे नेताजी के
8:58:14पॉलीटिकल गुरु चितरंजन दास थे जैसा की
8:58:17आपको याद होगा की 1928 में जब मोतीलाल
8:58:21नेहरू जी की रिपोर्ट आई है तो जवाहर लाल
8:58:24नेहरू के साथ सुभाष चंद्र बस ने भी
8:58:26डोमिनियन स्टेटस के प्रोविजन का विरोध
8:58:28किया था और दोनों ने मिलकर इंडिपेंडेंस पर
8:58:31इंडिया लीग की स्थापना की थी दोनों लीडर्स
8:58:35अब इंडिपेंडेंस से कम कुछ नहीं जानते थे
8:58:371938 के हरिपुरा सेशन में सुभाष चंद्र बस
8:58:41कांग्रेस के प्रेसिडेंट बनते हैं और इसी
8:58:43समय जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में
8:58:46नेशनल प्लानिंग कमेटी एस्टेब्लिश करते हैं
8:58:53और कांग्रेस में यंग ब्रिगेड को
8:58:55रिप्रेजेंट करते थे
8:58:56कांग्रेस का अगला सेशन त्रिपुरा में होता
8:58:59है बस एक बार फिर कांग्रेस प्रेसिडेंट के
8:59:02इलेक्शन में खड़े हो जाते हैं इस बार उनके
8:59:04अगेंस्ट गांधियन कैंडिडेट बता भी सीता
8:59:07रमैया खड़े होते हैं इलेक्शन में बस जीत
8:59:10जाते हैं लेकिन गांधी जी उनके साथ कम करने
8:59:12से माना कर देते हैं क्योंकि दोनों की
8:59:15पॉलीटिकल और इकोनामिक आईडियोलॉजी मैच नहीं
8:59:17होती थी
8:59:18इकोनामिक फ्रंट पर जहां गांधीजी ट्रस्ट
8:59:21थ्योरी में विश्वास करते थे वहीं बस
8:59:24सोशलिज्म को फीवर करते थे इसी तरह गांधी
8:59:27जी की पॉलीटिकल एडोलॉजी जहां नॉन वायलेंस
8:59:30पर बेस थी वही बस देश की आजादी के लिए
8:59:33किसी भी हद तक जान के लिए तैयार थे
8:59:35गांधीजी के साथ इन्हीं फंडामेंटल डिफरेंस
8:59:39की चलती बस कांग्रेस प्रेसिडेंट की पोस्ट
8:59:41से रिजाइन करते थे कांग्रेस से बाहर बस
8:59:441939 में अपनी अलग पार्टी फॉरवर्ड ब्लॉक
8:59:48फॉर्म करते हैं जब सेकंड वर्ल्ड वार शुरू
8:59:50होता है तो नेताजी का मानना था की
8:59:52कांग्रेस को मौके का फायदा उठाकर एक बड़ा
8:59:55आंदोलन शुरू कर देना चाहिए और जब कांग्रेस
8:59:58उनके इस मत से सहमत नहीं होती तो बोझ
9:00:01कांग्रेस के बाहर से ही आंदोलन शुरू करने
9:00:03की कोशिश करते हैं
9:00:05मार्च 1940 में रामगढ़ में फॉरवर्ड ब्लॉक
9:00:09और किसान सभा के जॉइंट एफर्ट्स से एक एंटी
9:00:12कंप्रोमाइज कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति
9:00:14है यहां पर ते होता है की सिक्स्थ अप्रैल
9:00:17को वर्ल्ड वाइड स्ट्रगल लॉन्च किया जाएगा
9:00:19और में मनी या मटेरियल किसी भी तरह से
9:00:23इंडियन रिसोर्सेस को इंपिरियलिस्ट वार में
9:00:26उसे करने का विरोध किया जाएगा प्लेन के
9:00:29अकॉर्डिंग सिक्स्थ अप्रैल को लॉन्च हुई
9:00:31स्ट्रगल में लोग बाढ़ चढ़कर भाग भी लेते
9:00:33हैं इसके बाद जुलाई में बस कोलकाता में एक
9:00:37और सत्याग्रह लॉन्च करने की कोशिश करते
9:00:39हैं यह सत्याग्रह स्मारक के रिमूवल के लिए
9:00:43किया जाना था लेकिन इससे पहले ही ब्रिटिश
9:00:46गवर्नमेंट बस को अरेस्ट कर लेती है
9:00:51जिसकी वजह से दिसंबर 1940 में ब्रिटिश
9:00:54इन्हें हाउस अरेस्ट में रख देते
9:00:57फिर खबर आई है की बोझ हाउस अरेस्ट से
9:00:59एस्केप कर चुके हैं 17th जनवरी 1941 को एक
9:01:04पठान के भेस में बस ब्रिटिश ऑफिसर को चकमा
9:01:08देते हुए हाउस अरेस्ट से फरार हो जाते हैं
9:01:10और 26 जनवरी 1941 को पेशावर पहुंच जाते
9:01:15हैं और फिर अफगानिस्तान के रास्ते रसिया
9:01:18चले जाते हैं बस इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल के
9:01:21लिए सोवियत रसिया की हेल्प लेने की कोशिश
9:01:23करते हैं लेकिन जून 1941 में रसिया वर्ल्ड
9:01:27वार में एलियंस को जॉइन कर लेट है मतलब अब
9:01:30वो खुद ब्रिटेन के साथ हो गया था इस बात
9:01:33से बोझ काफी निराश हो जाते हैं और यहां से
9:01:36जर्मनी के लिए प्रस्थान करते हैं उन्होंने
9:01:38उम्मीद किसी भी समय नहीं छोड़ी और निरंतर
9:01:42प्रयास करते रहे उनका मानना था की इंडिया
9:01:45को आजाद करने के लिए और ब्रिटिश
9:01:47इंपिरियलिस्ट फोर्सेस को हारने के लिए
9:01:49वर्ल्ड लेवल पर हेल्प लेनी जरूरी है
9:01:52जर्मनी में बस अपना नाम और लडो में
9:01:57और इटली के द्वारा कैप्चर किया गए इंडियन
9:01:59ओरिजन के वार बिजनेस को लेकर बस एक आर्मी
9:02:03फॉर्म करते हैं जिसे फ्री इंडिया लीजन कहा
9:02:06जाता है जर्मनी के ड्रेसएदिन में इसका
9:02:09ऑफिस बनाया जाता है जर्मनी के लोग बस को
9:02:12नेताजी नाम देते हैं और यहां पर ही फ्री
9:02:15इंडिया सेंटर में बस जय हिंद का नारा देते
9:02:18हैं
9:02:18जरूरी 1942 में बर्लिन रेडियो से बोझ
9:02:22रेगुलर ब्रॉडकास्ट शुरू करते हैं इसी आजाद
9:02:26हिंद रेडियो नाम दिया जाता है मे 1942 में
9:02:29बस की मुलाकात हिटलर से होती है इस मीटिंग
9:02:33के बाद बस को जर्मनी की इंटेंशंस पर डाउट
9:02:36हो जाता है इसके साथ ही बस हिटलर के
9:02:38रेसिस्ट व्यूज कभी विरोध करते हैं उन्हें
9:02:41लगे लगता है की इंडिया की आजादी के लिए
9:02:43जर्मन हेल्प से कम नहीं चलने वाला इसलिए
9:02:46फरवरी 1943 में छोड़ देते हैं और सबमरीन
9:02:51के द्वारा जापान चले जाते हैं और फिर वहां
9:02:53से सिंगापुर पहुंचने हैं सिंगापुर में
9:02:56नेताजी मस्त बिहार बहुत से इंडियन
9:02:58इंडिपेंडेंस मूवमेंट की कमांड अपने हाथों
9:03:01में लेते हैं लेकिन ये इंडियन नेशनल आर्मी
9:03:04का सेकंड फेस होता है और इसे समझना से
9:03:07पहले फर्स्ट फैज को समझना जरूरी है
9:03:10ओरिजन और फर्स्ट फैज ऑफ दी इंडियन नेशनल
9:03:13आर्मी दोस्तों इंडियन प्रिजनर्स अवार्ड
9:03:16यानी पी ओ ब्लू को लेकर ई क्रिएट करने का
9:03:19आइडिया ओरिजनली मोहन सिंह का था ये
9:03:22ब्रिटिश इंडियन आर्मी के ऑफिसर थे
9:03:24जिन्होंने मालय में रिट्रीटिंग ब्रिटिश
9:03:27आर्मी को जॉइन ना करने का फैसला किया था
9:03:29इसके बाद इन्होंने जापानी से हेल्प मांगी
9:03:33थी जैसे की हम जानते हैं की वर्ल्ड वार 2
9:03:35में ब्रिटेन उस और रसिया मिलकर लाड रहे थे
9:03:39जर्मनी और जापान के विरुद्ध जापान ने तेजी
9:03:42से बढ़ते हुए सऊदी एशिया में ब्रिटेन और
9:03:45उसके एलॉयज को हराया था और ब्रिटिश इंडियन
9:03:48सोल्जर को बिजनेस अवार्ड यानी पुज बना
9:03:51लिया था मोहन सिंह द्वारा हेल्प मांगने पर
9:03:54जापानी इंडियन पो ब्लू
9:03:57मोहन सिंह को सोप देते हैं जिन्हें मोहन
9:04:00सिंह इंडियन नेशनल आर्मी में रिक्रूट करने
9:04:02की कोशिश करते हैं बड़ी संख्या में पी ओ
9:04:05ब्लू इस आर्मी को जॉइन करने के लिए तैयार
9:04:08हो जाते हैं क्योंकि एक तो इनके मां में
9:04:11ब्रिटिश के अगेंस्ट गुस्सा था और दूसरा
9:04:13जबान में पी ओ डब्लू कैंपस की कंडीशंस
9:04:16बहुत खराब थी
9:04:17सितंबर 1942 में 16000 से ज्यादा सोल्जर
9:04:22के साथ इन की फर्स्ट डिवीजन तैयार हो जाति
9:04:25है लेकिन जल्दी ही इन के रोल को लेकर मोहन
9:04:29सिंह और जैपनीज के बीच डिफरेंस इमर्ज हो
9:04:31जाते हैं जापानी सिर्फ 2016 की एक टोकन
9:04:36फोर्स की रेस करना चाहते थे जबकि मोहन
9:04:38सिंह का प्लेन एक बड़ी आर्मी क्रिएट करना
9:04:41था
9:04:42है इसके साथ ही इन की ऑटोनॉमी को लेकर भी
9:04:45जापान और मोहन सिंह के विचार अलग-अलग थे
9:04:48इसलिए जापानी दिसंबर 1942 में मोहन सिंह
9:04:52को अपनी कस्टडी में ले लेते हैं और इसी के
9:04:55साथ इन का फर्स्ट फैज और हो जाता है अब
9:04:59बात करते हैं सेकंड फेस की जो सुभाष चंद्र
9:05:02बस के सिंगापुर पहुंचने से शुरू होता है
9:05:06दोस्तों आपको क्रांतिकारी रोशन बिहार
9:05:09बोस्टो याद ही होंगे इंडिया में इनकी
9:05:12रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को जब ब्रिटिशर्स
9:05:14ने फोर्सफुली से प्रेस किया तब 1915 में
9:05:17यह जुबान चले गए थे और ऐवेंंचुअली जबान के
9:05:21नेचरलाइज्ड सिटिजन बन जाते हैं यहां वह
9:05:24जापानी को इंडियन इंडिपेंडेंस मूवमेंट में
9:05:27इंटरेस्ट दिलाने के लिए बहुत एफर्ट्स करते
9:05:29हैं
9:05:34टोक्यो में इंडियन क्लब की फॉर्मेशन करते
9:05:36हैं और वेस्टर्न इंपिरियलिज्म पर लेक्चर
9:05:39भी देते हैं इसके बाद 1942 में जापानी
9:05:43गवर्नमेंट की हेल्प से टोक्यो में राष्ट्र
9:05:45बिहार बस इंडियन इंडिपेंडेंस लीग
9:05:48इनफॉरमेशन करते हैं और जब मोहन सिंह
9:05:50द्वारा इन क्रिएट की जाति है तो यह बहुत
9:05:52एक्साइड होते हैं और सिंगापुर के लिए
9:05:55निकाल जाते हैं जापानी बीएफ फैसला करते
9:05:57हैं की इन अब इंडियन इंडिपेंडेंस लीग की
9:06:00लीडरशिप में ही कम करेगी इस तरह दिसंबर
9:06:031942 से बिहार बोसी इन कमांड संभल रहे
9:06:091943 में सुभाष चंद्र बस सिंगापुर पहुंच
9:06:13जाते हैं और उनकी मुलाकात रोष बिहार बस से
9:06:16होती है अब इंडियन इंडिपेंडेंस लीग
9:06:21सोप दी जाति है 25 अगस्त को नेताजी इन की
9:06:26सुप्रीम कमांडर बन जाते हैं बलिया में बस
9:06:28तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा
9:06:32का पॉपुलर नारा देते हैं नेताजी की
9:06:35पापुलैरिटी इतनी ज्यादा थी की सिर्फ पी ओ
9:06:37ब्लू ही नहीं बल्कि साउथ ईस्ट एशिया में र
9:06:40रहे लोकल इंडियन भी इन्हें जॉइन करने लगता
9:06:43हैं 12 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में
9:06:47प्रोविजनल गवर्नमेंट पर फ्री इंडिया की
9:06:49इनफॉरमेशन करते हैं जिसमें 8c चटर्जी को
9:06:52फाइनेंस
9:06:53को ब्रॉडकास्टिंग और लक्ष्मी स्वामी नाथन
9:06:57को वूमेन डिपार्मेंट दिया जाता है यह
9:07:00प्रोविजनल गवर्नमेंट ब्रिटेन और यूनाइटेड
9:07:02स्टेटस पर वोट डिक्लेअर कर देती है ए आओ
9:07:05उसके द्वारा इसे रिकॉग्नाइज्ड किया जाता
9:07:07है 6 नवंबर 1943 को जापानी आर्मी और
9:07:12निकोबार आईलैंड्स इन को दे देती है सुभाष
9:07:16चंद्र बस इनका नाम बदलकर शाहिद और स्वराज
9:07:19द्वीप रख देते हैं इन रिक्रूटर्स को ट्रेन
9:07:22किया जाता है और फंड्स कलेक्ट किया जाते
9:07:25हैं इन में रानी झांसी रेजीमेंट नाम से एक
9:07:29वूमेन रेजीमेंट भी फॉर्म की जाति है जरूरी
9:07:321944 में इन्हें का हेड क्वार्टर रंगून
9:07:36शिफ्ट कर दिया जाता है और यहां से आर्मी
9:07:38रिक्रूटर्स को इंडिया के लिए मार्च करना
9:07:40था उनका वार क्रि होता है चलो दिल्ली
9:07:45सिक्स्थ जुलाई 1944 को बोझ आजाद हिंद
9:07:49रेडियो से महात्मा गांधी को फादर ऑफ नेशन
9:07:52कहकर एड्रेस करते हैं और गांधीजी से
9:07:55इंडिया की आजादी की आखिरी लड़ाई के लिए
9:07:57आशीर्वाद मांगते हैं
9:07:59शाहनवाज की कमांड में इन की एक बटालियन
9:08:02जापानी आर्मी के साथ इंडो बर्मा फ्रंट पर
9:08:05भेज दी जाति है ये लोग इंफाल कैंपेन में
9:08:09पार्टिसिपेट करते हैं लेकिन यहां जापानी
9:08:11इंडियन के साथ डिस्क्रिमिनेटरी ट्रीटमेंट
9:08:14करने लगता हैं इंडियन सोल्जर को राशन नहीं
9:08:17दिया जाता है और उनसे जापानी यूनिट्स के
9:08:20लिए मेनियल क कराया जाता है इससे आए ने
9:08:23यूनिट होने लगती है इसके बाद भी 18 मार्च
9:08:271944 को इन बर्मा बॉर्डर क्रॉस करके
9:08:31इंडियन तेल पर अपना कम रखती है यहां से
9:08:35कोहिमा और इंफाल की तरफ बाढ़ जाति है 14
9:08:39अप्रैल को बहादुर ग्रुप के करनाल मलिक
9:08:42को होस्ट करते हैं जो आज मनी में है 3
9:08:46महीने तक मोहे रंग में मिलिट्री
9:08:48एडमिनिस्ट्रेशन ड्यूटी संभालती है लेकिन
9:08:51उसके बाद बड़ी संख्या में एलाइड फोर्सेस
9:08:53यहां पहुंचने लगती है
9:08:55एलिट फोर्सेस फेर फाइट के बाद इनक ये
9:08:59टेरिटरी रिटेल्म कर लेती है 18th जुलाई
9:09:021944 को इन की सभी ब्रिगेड विड्रोल शुरू
9:09:06कर देती है इसके बाद जापानी आर्मी की
9:09:09स्टडी रिट्वीट के साथ इन द्वारा इंडिया को
9:09:12लिब्रेट करने की साड़ी उम्मीद भी खत्म हो
9:09:14जाति है
9:09:15मिड 1945 तक यह रिट्वीट जारी रहती है
9:09:1915th अगस्त 1945 को सेकंड वर्ल्ड वार में
9:09:23जवान सुरेंद्र कर देता है और इसी के साथ
9:09:26इन का भी सुरेंद्र होता है रिपोर्ट के
9:09:29अनुसार 18th अगस्त 1945 को नेताजी की
9:09:33संदिग्ध हालात में टाइपिंग में एक और क्रश
9:09:36के दौरान मृत्यु हो जाति है कंक्लुजन
9:09:39दोस्तों इस तरह इन एक बहादुर प्रयास था
9:09:42इंडिया को आजादी दिलाने का इस बात डिबेट
9:09:46जरूर होती रहती है की अगर इंस सच में
9:09:48जापानी हेल्प से देश को आजाद कर लेती तो
9:09:51क्या होता कुछ लोगों का मानना है की
9:09:54जापानी इंपिरियलिज्म ब्रिटिश इंपिरियलिज्म
9:09:57से भी ज्यादा भयानक हो सकता था तो क्या
9:10:00फिर सुभाष चंद्र बस को एक और लड़ाई लड़नी
9:10:03पड़ती जापानी को इंडिया से बाहर करने के
9:10:05लिए शायद ऐसा हो सकता था लेकिन इन और
9:10:09जापान दोनों को ही मिलिट्री एडवेंचर्स में
9:10:12ब्रिटेन के खिलाफ सफलता नहीं मिलती
9:10:14हालांकि जब आई एन के सोल्जर को पी ओ ब्लू
9:10:18की तरह इंडिया वापस लाया जाता है तो इनके
9:10:20डिफेंस में एक बहुत बड़ा मूवमेंट खड़ा हो
9:10:23जाता है और इस मूवमेंट का जरूर एक
9:10:25इंपॉर्टेंट योगदान था देश की आजादी में इस
9:10:29तरह इनडायरेक्ट इन फ्रीडम मूवमेंट में
9:10:32अपना कंट्रीब्यूशन देती है इसके बड़े में
9:10:34अपनी नेक्स्ट वीडियो में हम विस्तार से
9:10:37चर्चा करेंगे
9:10:41दोस्तों अपनी पिछली दो वीडियो में हम
9:10:44सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान हुई इंडियन
9:10:46फ्रीडम स्ट्रगल की एक्टिविटीज को डिस्कस
9:10:48कर चुके हैं जिसमें क्यूट इंडिया मूवमेंट
9:10:51और इंडियन नेशनल आर्मी
9:10:53सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट कहीं जा शक्ति हैं
9:10:56आज हम आगे बढ़ते हुए देखेंगे की वर्ल्ड
9:10:58वार के खत्म होने के बाद क्या-क्या घटनाएं
9:11:01घटित होती हैं इस समय तक विश्व का और भारत
9:11:04का माहौल काफी बादल चुका था
9:11:06इंपिरियलिस्ट फोर्सेस इंक्लूडिंग ब्रिटेन
9:11:08अब वीक हो चुकी थी और इंडिया में
9:11:11नेशनलिज्म की फीलिंग काफी दीप हो चुकी थी
9:11:14इसी बैकग्राउंड को ध्यान में रखते हुए हम
9:11:17सबसे पहले बात करते हैं शिमला कॉन्फ्रेंस
9:11:19की वे बिल ऑफर और शिमला कॉन्फ्रेंस
9:11:23दोस्तों इंडियन
9:11:41लीडर्स के साथ नेगोशिएशन स्टार्ट करने की
9:11:44परमिशन दे देते हैं
9:11:47जिसे विवेल ऑफर के नाम से जाना जाता है
9:11:51वे बिल ऑफर पर डिस्कशन करने के लिए शिमला
9:11:54कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइजर की जाति है और
9:11:56इसमें पार्टिसिपेट करने के लिए कांग्रेस
9:11:59लीडर्स को जून 1945 में ही जय से रिलीज कर
9:12:02दिया जाता है यह कॉन्फ्रेंस 25th जून से
9:12:0514th जुलाई 1945 तक चलती है
9:12:08वायसराय के ऑफर में इंडियन एग्जीक्यूटिव
9:12:11काउंसिल की फॉर्मेशन करना शामिल था जिसमें
9:12:13वायसराय और कमांडर इन के को छोड़कर बाकी
9:12:17सभी मेंबर्स इंडियन रहेंगे इसमें कास्ट
9:12:20हिंदू और मुस्लिम को इक्वल रिप्रेजेंटेशन
9:12:23दिया जाएगा साथ ही शेड्यूल कास्ट का भी
9:12:26अलग से रिप्रेजेंटेशन होगा इसके अलावा नए
9:12:29कॉन्स्टिट्यूशन पर डिस्कशन के दरवाजे भी
9:12:31खोल जाएंगे
9:12:33है लेकिन शिमला कॉन्फ्रेंस असफल रहती है
9:12:36क्योंकि जिन्ना डिमांड रख देते हैं की
9:12:38कैबिनेट के मुस्लिम मेंबर्स को नॉमिनेट
9:12:40करने का राइट सिर्फ लीग के पास ही होना
9:12:43चाहिए कांग्रेस इस डिमांड को एक्सेप्ट
9:12:45नहीं करती इसको एक्सेप्ट करने का मतलब
9:12:48होता की कांग्रेस अपने को सिर्फ कास्ट
9:12:51हिंदू की पार्टी मां लेती है रॉनिकली उसे
9:12:54समय कांग्रेस के प्रेसिडेंट खुद एक
9:12:56मुस्लिम ज्ञानी की मौलाना अब्दुल कलाम
9:12:58आजाद थे ऐसी सिचुएशन में वायसराय विवेल
9:13:02मीटिंग को ही खत्म कर देते हैं उनका मानना
9:13:05था की बिना लीग के कोलिशन गवर्नमेंट कम ही
9:13:08नहीं कर शक्ति यहां ब्रिटिश एक तरह से
9:13:11जिन्ना को बीटो दे देते हैं विवेल का यह
9:13:14स्टेप आगे चलकर बहुत बड़ी गलती साबित होने
9:13:16वाला था इसी बीच ब्रिटेन में इलेक्शंस हो
9:13:19चुके थे और क्लेमेंट अटली के नेतृत्व में
9:13:22लेबर पार्टी पावर में ए जाति है और ये
9:13:25जल्द से जल्द इंडियन इंडिपेंडेंस के इशू
9:13:27को सॉल्व करना चाहते थे लेकिन उससे पहले
9:13:30देश में एक और स्ट्रगल के लिए मंच तैयार
9:13:32हो रहा था
9:13:33एक तरफ तो शिमला कॉन्फ्रेंस फेल हो जाति
9:13:36है और दूसरी तरफ ब्रिटिश गवर्नमेंट इन के
9:13:39सोल्जर और ऑफिसर्स के अगेंस्ट ट्रायल
9:13:42अनाउंस कर देती है इसी के विरोध में एक
9:13:44बड़ा मूवमेंट शुरू होता है दी आई एन ए
9:13:48ट्रायल्स और एजीटेशन दोस्तों इन के सोल्जर
9:13:52और ऑफिसर्स को ब्रिटिशर्स ने बंदी बना
9:13:54लिया था और उनके अगेंस्ट कोर्ट में ट्रायल
9:13:57शुरू करने जा रहे थे क्योंकि ब्रिटिशर्स
9:13:59के अनुसार इन लोगों ने ब्रिटिश क्राउन के
9:14:02प्रति लॉयल्टी की ओटी को ब्रेक किया था और
9:14:04इसीलिए यह ट्वीटर्स थे लेकिन इंडिया की
9:14:08जनता स्वागत नेशनल हीरोज की तरह कर रही थी
9:14:11और जब तीन इन ऑफिसर्स शाहनवाज खान गुरदयाल
9:14:16सिंह ढिल्लों और प्रेम सहगल के खिलाफ
9:14:18दिल्ली के रेड फोर्ट में ट्रायल शुरू करने
9:14:20की घोषणा होती है तो इंडियन पब्लिक इसका
9:14:23जमकर विरोध करती है पूरे देश में इनकी
9:14:26रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू हो
9:14:29जाते हैं कांग्रेस भी सितंबर 1945 मुंबई
9:14:32में अपनी पहले पोस्ट वार सेशन में सपोर्ट
9:14:35में रेजोल्यूशन पास करती है और इन
9:14:38प्रिजनर्स के डिफरेंस के लिए
9:14:44और आसफ अली जैसे लॉयर्स कोर्ट
9:14:50करती है इसका कम रिलीज होने वाले सोल्जर
9:14:54को स्मॉल
9:14:59करने की कोशिश करना भी था
9:15:02इन ट्रायल्स के अगेंस्ट होने वाले
9:15:04प्रोटेस्ट कई मैनो में ऐतिहासिक थे इससे
9:15:07पहले कोई भी कैंपेन इतनी हाय पेज और
9:15:10इंटेंसिटी के साथ नहीं हुआ था एजीटेशन को
9:15:13प्रेस से भी वाइड कवरेज मिलता है
9:15:16511 नवंबर को इन वीक और 12 नवंबर 1945 को
9:15:21इन दी सेलिब्रेट किया गया ये कैंपेन देश
9:15:25के एक बड़े हिस में फैलता है और डायवर्स
9:15:28सोशल ग्रुप और पॉलीटिकल पार्टी इसमें भाग
9:15:31लेते देखते हैं एजीटेशन के नर्व सेंटर्स
9:15:33तो दिल्ली बॉम्बे कोलकाता मद्रास यूनाइटेड
9:15:36प्रोविंस और पंजाब रहे थे लेकिन इसका असर
9:15:40कुर्ग बलूचिस्तान और असम जैसे दूर दराज के
9:15:43इलाकों में भी दिखता है
9:16:03गवर्नमेंट एम्पलाइज इन ए कैसे के लिए
9:16:05फंड्स कलेक्ट करते हैं लॉयलिस्ट ब्रिटिश
9:16:08सरकार से अच्छे इंडो ब्रिटिश रिलेशंस का
9:16:11हवाला देकर इन ट्रायल्स को आबंदों करने की
9:16:14अपील करते हैं
9:16:15आर्म्ड फोर्सेस भी इंस सोल्जर के प्रति
9:16:18सिंपैथी शो करते हैं यह लोग मीटिंग्स
9:16:20अटेंड करते हैं फंड्स में कंट्रीब्यूट
9:16:22करते हैं और साथ ही रिलीज होने वाले
9:16:25सोल्जर को यूनिफॉर्म में रिसीव भी करते
9:16:27हैं इसी समय ब्रिटेन को भी इन इशू की
9:16:30पॉलीटिकल साइनिफिकेंस समझ आने लगती है और
9:16:33इसीलिए कोर्ट मार्शल में गिल्टी कार दिए
9:16:35जान के बावजूद 3 जनवरी 1946 को इन ऑफिसर्स
9:16:40को फ्री कर दिया जाता है ब्रिटिश
9:16:43गवर्नमेंट के इस चेंज्ड एटीट्यूड के पीछे
9:16:45कुछ इंपॉर्टेंट करण थे जिन्हें समझना
9:16:48जरूरी है रीजंस बिहाइंड चेंज्ड एटीट्यूड
9:16:52ऑफ डी ब्रिटिश दोस्तों वर्ल्ड वार और होने
9:16:55के बाद से ही इंडिया को लेकर ब्रिटिश
9:16:58गवर्नमेंट के एटीट्यूड में बदलाव देखने को
9:17:00मिलता है इसका एक करण तो हम आपको शुरू में
9:17:03ही बता चुके हैं वो था ब्रिटेन में लेबर
9:17:06पार्टी का पावर में आना इसकी बहुत से
9:17:08मेंबर्स कांग्रेस की डिमांड्स को सपोर्ट
9:17:10करते थे इसके अलावा वार के बाद वर्ल्ड में
9:17:14बैलेंस ऑफ पावर भी चेंज हो चुका था अब
9:17:17ब्रिटेन नहीं बल्कि उस और सोवियत यूनियन
9:17:19दुनिया की बिग पावर्स बन गए थे और ये
9:17:22दोनों ही इंडिया की फ्रीडम की डिमांड को
9:17:25सपोर्ट कर रहे थे वार में ब्रिटेन की जीत
9:17:28भले ही हुई थी लेकिन उसकी इकोनामिक और
9:17:30मिलिट्री पावर को बहुत बड़ा नुकसान भी हुआ
9:17:32था खुद को रिहैबिलिटेशन करने में ब्रिटेन
9:17:35को अभी सालों लगे वाले थे ब्रिटिश सोल्जर
9:17:39भी वार के बाद तक चुके थे और इंडियन
9:17:41फ्रीडम स्ट्रगल को सरप्राइज करने के लिए
9:17:43और ज्यादा समय अपने घर से दूर इंडिया में
9:17:46बिताने के लिए तैयार नहीं थे इसके साथ ही
9:17:49नेशनल स्ट्रगल को सरप्राइज करने के लिए
9:17:51ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट अब सिविल
9:17:54एडमिनिस्ट्रेशन और आर्म्ड फोर्सेस के
9:17:56इंडियन पर्सनाइल पर भी पुरी तरह
9:18:02बायोटीक इतिहास इंडियन आर्मी के रैंक्स
9:18:05में भी इंटर कर चुके हैं इसी समय फरवरी
9:18:081946 बॉम्बे में इंडियन लेवल रेटिंग्स का
9:18:11रिवॉल्ट भी होता है ये ब्रिटिश कफन के लिए
9:18:14लास्ट नल की तरह कम करता है इसको डिटेल
9:18:17में हम अपने नेक्स्ट क्षेत्र में समझेंगे
9:18:20ब्रिटिश एटीट्यूड में चेंज का सबसे बड़ा
9:18:22करण था इंडियन पीपल का कॉन्फिडेंट और
9:18:25डिटरमाइंड मोड जनता फॉरेन रूल का हमिलिएशन
9:18:30और लंबे समय तक टॉलरेट नहीं कर शक्ति थी
9:18:3419456 के बीच नवल मुटनी और इन एजीटेशन के
9:18:38अलावा पूरे देश में न्यू मॉडल एजीटेशन
9:18:41स्ट्रीक्स और डेमोंसट्रेशंस भी होते हैं
9:18:43ऐसा लगे लगा था की लोग आजादी मिलने तक अब
9:18:47कोई रेस्ट नहीं करेंगे
9:18:55जहां हड़ताल एन की गई हो जुलाई 1946 में
9:19:00पोस्ट और टेलीग्राफ वर्कर्स द्वारा
9:19:02स्ट्राइक की जाति है साउथ इंडिया में
9:19:05अगस्त 1946 में रेलवे वर्कर्स स्ट्राइक पर
9:19:08चले जाते हैं
9:19:15है इसी दौरान 1946 की शुरुआत में
9:19:18प्रोविंशियल असेंबलीज के इलेक्शन भी होते
9:19:20हैं इसमें जनरल सीट पर कांग्रेस को
9:19:23ओवरव्हेलमिंग मेजॉरिटी मिलती है वहीं
9:19:26मुस्लिम के लिए रिजर्व्ड सिट्स पर मुस्लिम
9:19:28लीग का प्रदर्शन शानदार राहत है इलेक्शन
9:19:31रिजल्ट्स एक मेजर पॉलीटिकल डेवलपमेंट
9:19:33साबित होते हैं इन सभी रीजंस को ध्यान में
9:19:36रखते हुए अटली गवर्नमेंट फरवरी 1946 में
9:19:40अनाउंस करती है की एक हाय पावर मिशन
9:19:43इंडिया भेजो जाएगा इसे कैबिनेट मिशन के
9:19:46नाम से जाना जाता है लेकिन कैबिनेट मिशन
9:19:48पर डिस्कशन करने से पहले फरवरी 1946 में
9:19:51ही हुई एक और बड़ी घटना यानी की नवल मुटनी
9:19:55की चर्चा कर लेते हैं
9:20:00दोस्तों फरवरी 1946 में ब्रिटिश राज को एक
9:20:05बड़ा चैलेंज फेस करना पड़ता है और वो था
9:20:07रॉयल इंडियन नेवी में ओपन मुटने इसकी
9:20:11शुरुआत 18 फरवरी को बंबई से होती है यहां
9:20:14पर नीचे मायास तलवार पर तैनात 1100 नवल
9:20:18रेटिंग्स खराब खाने और रेसियल
9:20:20डिस्क्रिमिनेशन के इशू पर हंगर स्ट्राइक
9:20:22शुरू कर देते हैं
9:20:24ई डेट नाम की रेटिंग को ह्मिस तलवार पर
9:20:28क्यूट इंडिया लिखने के लिए अरेस्ट कर लिया
9:20:30जाता है इसके बाद रेटिंग्स का गुस्सा और
9:20:33भी ज्यादा बाढ़ जाता है
9:20:47मुंबई और कोलकाता शहर पैरालाइज जैसी
9:20:50स्थिति में पहुंच जाते हैं जगह मीटिंग्स
9:20:53और प्रोफेशन होते हैं पूरे देश में हड़ताल
9:20:56का सिलसिला शुरू हो जाता है
9:20:58एक्सपीरियंस पर अटैक होने लगता हैं साथ ही
9:21:00बहुत से पुलिस स्टेशंस पोस्ट ऑफिसेज शॉप्स
9:21:03रेलवे स्टेशंस बैंक्स ईटीसेटरा को जल दिया
9:21:06जाता है रॉयल इंडियन एयरफोर्स की बॉम्बे
9:21:09पुणे कोलकाता जसोल और अंबाला यूनिट्स भी
9:21:13सिंपाठ्ठेटिक स्ट्रीक्स करती हैं वहीं
9:21:16जबलपुर के सिपाही स्ट्राइक पर जाते हैं
9:21:18खाने का मतलब यह है की सभी फोर्सेस की तरफ
9:21:21से ब्रिटिश अथॉरिटी को चैलेंज मिलन शुरू
9:21:24हो जाता है और इसमें आम जनता भी इनका साथ
9:21:27देती है और जैसे की हम पहले ही डिस्कस कर
9:21:30चुके हैं इस मुटनी का बड़ा रोल राहत है
9:21:33ब्रिटिश गवर्मेंट के एटीट्यूड को चेंज
9:21:35करने में इसके बाद समझ गए की अब नेटिव
9:21:40फोर्सेस पर पुरी तरह रिलायंस नहीं किया जा
9:21:42सकता और नेशनलिज्म की भावना ने दीप रूट
9:21:45बना ली हैं कंट्री में आई वापस कैबिनेट
9:21:48मिशन की तरफ चलते हैं
9:21:51कैबिनेट मिशन दोस्तों कैबिनेट मिशन के तहत
9:21:543 ब्रिटिश कैबिनेट मिनिस्टर्स को इंडिया
9:21:57भेजो गया था इसके अध्यक्ष पाठक लॉरेंस थे
9:22:00और बाकी दो मेंबर्स थे स्टेफोर्ड ग्रिप्स
9:22:03और एव सिकंदर
9:22:05इनका कम पीसफुल तरीके से ट्रांसफर ऑफ पावर
9:22:08की नेगोशिएशंस करना था
9:22:1024th मार्च 1946 को कैबिनेट मिशन दिल्ली
9:22:14पहुंच जाता है सभी इंडियन पार्टी और ग्रुप
9:22:17की लीडर्स के साथ इंटिरिम गवर्नमेंट और नई
9:22:20कॉन्स्टिट्यूशन के इशू पर लंबे डिस्कशन
9:22:23होते हैं इसके बाद मिशन मे 1946 में अपना
9:22:27प्लेन सामने रखना है
9:22:30इस प्लेन के में पॉइंट कुछ इस तरह थे
9:22:34पाकिस्तान की डिमांड को रिजेक्ट कर देता
9:22:37है
9:22:44हिंदू मेजॉरिटी प्रोविंस मद्रास मुंबई
9:22:47सेंट्रल प्रोविंस यूनाइटेड प्रोविंस बिहार
9:22:50और उड़ीसा को रखा गया था क्षेत्र बी में
9:22:53मुस्लिम मेजॉरिटी प्रोविंस यानी की पंजाब
9:22:56नॉर्थवेस्ट फ्रंटियर
9:23:04तीनों ग्रुप के मेंबर्स अलग से ग्रुप का
9:23:07कॉन्स्टिट्यूशन डिसाइड करेंगे इसी के साथ
9:23:103 टियर स्ट्रक्चर भी प्रपोज किया गया
9:23:13प्रोविंशियल क्षेत्र और यूनियन लेवल पर
9:23:16अलग-अलग एग्जीक्यूटिव और लेजिस्लेचर होंगे
9:23:19अगला इंपॉर्टेंट पॉइंट था की
9:23:22कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली के मेंबर्स को
9:23:23प्रोविंशियल असेंबली द्वारा इलेक्ट्रिक
9:23:25किया जाएगा
9:23:26एक आम सेंटर होगा जो डिफेंस कम्युनिकेशन
9:23:30और एक्सटर्नल अफेयर्स को कंट्रोल करेगा
9:23:32इसके अलावा प्रोविंस को फूल ऑटोनॉमी दी
9:23:36जाएगी और रिजिजू पावर्स भी उनके पास
9:23:38रहेंगे
9:23:39प्रिंसली स्टेटस फ्री होंगे सक्सेसर
9:23:42गवर्मेंट या ब्रिटिश गवर्मेंट के साथ किसी
9:23:44भी अरेंजमेंट में इंटर होने के लिए फर्स्ट
9:23:47जनरल इलेक्शंस के बाद प्रोविंस ग्रुप से
9:23:50बाहर आने के लिए फ्री होंगे और 10 साल बाद
9:23:53ग्रुप या यूनियन कॉन्स्टिट्यूशन को
9:23:55रिकेसिटर करने की डिमांड भी प्रोविंस रख
9:23:58सकते हैं और कॉन्स्टिट्यूशन बने तक
9:24:01गवर्नमेंट फॉर्म की जाएगी जिसके मेंबर
9:24:04कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली से ही चुने जाएंगे
9:24:07कैबिनेट मिशन प्लेन को मुस्लिम लीग और
9:24:10कांग्रेस अपने अपने तरीके से इंटरेक्ट
9:24:13करते हैं कांग्रेस के अनुसार कैबिनेट मिशन
9:24:16ने पाकिस्तान की डिमांड को जानकारी दिया
9:24:18था वही लीग का मानना था की ग्रुपिंग के
9:24:22प्रोविजन में पाकिस्तान की डिमांड भी
9:24:24एंप्लॉय है इसके अलावा कांग्रेस का मानना
9:24:27था की ग्रुपिंग का प्रोविजन ऑप्शनल है वही
9:24:31मुस्लिम लीग के अनुसार ये मैंडेटरी था
9:24:33इसलिए इनिशियली दोनों ही इसको एक्सेप्ट कर
9:24:37लेते हैं
9:24:38सेवंथ जुलाई को कांग्रेस कमेटी की मीटिंग
9:24:41में जवाहरलाल नेहरू कहते हैं की उन्होंने
9:24:44सिर्फ कांस्टीट्यूएंट असेंबली में जाना
9:24:46एक्सेप्ट किया है बाकी और किसी प्रोविजन
9:24:48को माने के लिए वो बाउंड नहीं है इसका
9:24:51मतलब ये था की असेंबली एक सावरेन बॉडी
9:24:54होगी और खुद रूल्स ऑफ प्रोसीजर पर फैसला
9:24:57लगी नेहरू की अनाउंसमेंट के बाद 29th
9:25:00जुलाई 1946 को लीग की तरफ से मिशन की
9:25:04एक्सेप्टेंस को जिन्ना विड्रॉ कर लेते हैं
9:25:06और 16th अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन दे
9:25:11मनाने की घोषणा कर देते हैं जिसके बाद
9:25:14देशभर में स्पेशली कोलकाता में कम्युनल
9:25:17राइट्स शुरू हो जाते हैं नारा दिया जाता
9:25:20है लेकर रहेंगे पाकिस्तान लड़के लेंगे
9:25:23पाकिस्तान इसी बीच सेकंड सितंबर 1946 को
9:25:27लीग के मेंबर्स के बिना ही इंटिरिम
9:25:30गवर्नमेंट फॉर्म की जाति है और नेहरू इसकी
9:25:32दे फैक्टो हेड बनते हैं लेकिन देश में
9:25:35सिविल वार नर्स शुरू हो जाए इस डर से
9:25:37वायसराय लॉर्ड केवल लीग के अपिजमेंट के
9:25:40प्रयास करते हैं और 26 अक्टूबर 1946 को
9:25:44लीग भी इंटिरिम गवर्नमेंट जॉइन कर लेती है
9:25:48लीग ने इंटिरिम गवर्नमेंट जॉइन जरूर कर ली
9:25:51थी लेकिन अपनी डायरेक्ट एक्शन की नीति को
9:25:54भी उन्होंने नहीं छोड़ था इसके साथ ही लीग
9:25:57के मेंबर्स इंटिरिम गवर्नमेंट के कम में
9:25:59कॉपर भी नहीं कर रहे थे उनकी कोशिश हमेशा
9:26:02डिस्क्रिप्शन क्रिएट करने की रहती थी
9:26:04दोस्तों इधर कांग्रेस और मुस्लिम लीग में
9:26:08टसल हर दिन बाढ़ रहा था और उधर ब्रिटेन के
9:26:11पीएम क्लाइमेट
9:26:12में एक इंपॉर्टेंट घोषणा करते हैं
9:26:16डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस
9:26:1828 फरवरी 1947 को ब्रिटिश पीएम अटेली
9:26:23अनाउंस करते हैं की 30th जून 1948 तक
9:26:26ब्रिटिश इंडिया छोड़ देंगे और साथ ही
9:26:29माउंटबेटन को नया वायसराय अप्वॉइंट कर
9:26:32दिया जाता है माउंटबेटन के इंडिया आने पर
9:26:35जहां एक तरफ ट्रांसफर ऑफ पावर पर
9:26:38नेगोशिएशंस तेज हो जाति हैं वही यह भी साफ
9:26:41हो जाता है की पार्टीशन इनएविटेबल बन चुका
9:26:43है क्या रीजन थे की इंडियन लीडर्स
9:26:47पार्टीशन के लिए तैयार हो जाते हैं इसकी
9:26:49चर्चा हम अपने अगले वीडियो में विस्तार से
9:26:51करेंगे और साथ ही जानेंगे की फाइनल
9:26:54ट्रांसफर ऑफ पावर किस तरह से होता है
9:26:57कंक्लुजन
9:26:59दोस्तों इस वीडियो में हमने 1940 में हुए
9:27:03इंपॉर्टेंट इवेंट्स को कर कर लिया है वे
9:27:06बिल ऑफर और शिमला कॉन्फ्रेंस से लेकर इन
9:27:09एजीटेशन रिउतनी और कैबिनेट मिशन तक की
9:27:13डीटेल्स हमने समझ ली हैं क्योंकि इन
9:27:15इवेंट्स को जान लेने के बाद ही हम फाइनल
9:27:18ट्रांसफर ऑफ पावर यानी की इंडियन
9:27:20इंडिपेंडेंस को बेहतर समझ सकते हैं साथ ही
9:27:24हम ब्रिटिशर्स के चेंज्ड एटीट्यूड के पीछे
9:27:27के करण भी जान चुके हैं जिनकी वजह से आखिर
9:27:301947 में वह इंडियन इंडिपेंडेंस की
9:27:33डिक्लेरेशन करने के लिए मजबूर होते हैं
9:27:37इंडिपेंडेंस और पार्टीशन दोस्तों अपनी
9:27:40पिछली वीडियो में हमने देखा था की 28
9:27:43फरवरी 1947 को ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
9:27:47इंडिया को जून 1948 से पहले आजादी देने की
9:27:50घोषणा कर दी थी और इस प्रोसेस को जल्द से
9:27:53जल्द कंप्लीट करने के लिए लॉर्ड माउंटबेटन
9:27:56को इंडिया का वायसराय बनाया गया
9:28:12आज की वीडियो में हम देखेंगे की वायसराय
9:28:15माउंटबेटन किस तरह ट्रांसफर ऑफ पावर की
9:28:17निकोशियशंस को आगे लेकर जाते हैं और क्यों
9:28:20इंडियन लीडर्स पार्टीशन को एक्सेप्ट कर
9:28:23लेते हैं आई शुरू करते हैं
9:28:27टसर बिटवीन मुस्लिम लीग और कांग्रेस
9:28:30दोस्तों 1940 के लाहौर सेशन में मुस्लिम
9:28:34लीग ने पहले बार एक सेपरेट नेशन यानी की
9:28:37पाकिस्तान की डिमांड राखी थी और यहां से
9:28:40जीना उनके सोल स्पोक्सपर्सन की तरह कम
9:28:43करते हैं अब लीग और जिन्ना के लिए मुस्लिम
9:28:46को नेशनल आईडेंटिटी और सेल्फ डिटरमिनेशन
9:28:49का राइट देना नॉन नेगोशिएबल मिनिमम डिमांड
9:28:52बन चुकी थी
9:28:53जिन्होंने 1942 मिशन को भी इसीलिए रिजेक्ट
9:28:57कर दिया था क्योंकि उसमें मुस्लिम के
9:28:59सेल्फ डिटरमिनेशन के राइट को रिकॉग्नाइज्ड
9:29:02नहीं किया गया था इसके बाद 1945
9:29:09दे देते हैं तो उनके हौसले और ज्यादा
9:29:12बुलंद हो जाते हैं
9:29:13है इसके बाद कैबिनेट मिशन को लीग पहले तो
9:29:16एक्सेप्ट कर लेती है क्योंकि उसके अनुसार
9:29:18ग्रुपिंग के प्रोविजन का मतलब पाकिस्तान
9:29:21की डिमांड को मानना ही था लेकिन जब
9:29:24कांग्रेस की तरफ से नेहरू साफ करते हैं की
9:29:27वो सिर्फ कांस्टीट्यूएंट असेंबली के
9:29:29प्रोविजन को एक्सेप्ट कर रहे हैं ना की
9:29:31ग्रुपिंग को तो मुस्लिम लीग ना सिर्फ
9:29:33कैबिनेट मिशन को जानकारी देती है बल्कि
9:29:36डायरेक्ट एक्शन की कॉल भी देती है इसकी
9:29:39वजह से देश में हिंसा बढ़नी जा रही थी
9:29:41कम्युनल हार्मनी को बनाए रखना मुश्किल हो
9:29:44गया था यह स्थिति कैसे ए गई थी
9:29:46कम्युनिकेशन इतना ज्यादा कैसे फैला था
9:29:49इसको हम अलग से डिटेल वीडियो में कर
9:29:52करेंगे यहां इतना समझना जरूरी है की दिन
9:29:56रोज देश का माहौल बिगड़ रहा था और दूसरी
9:29:59तरफ ब्रिटिश को देश छोड़ने की जल्दी थी वो
9:30:03किसी भी तरह पावर ट्रांसफर करके यहां से
9:30:06जाना चाहते थे
9:30:07उनका अब कोई भी इंटरेस्ट नहीं था देश की
9:30:10कम्युनल माहौल को सुलझाने का इसलिए उनकी
9:30:13तरफ से कोई ज्यादा कोशिश भी नहीं की जा
9:30:15रही थी स्थिति को संभालने की ऐसी स्थिति
9:30:19में यह साफ हो जाता है की अगर देश को
9:30:21सिविल वार की सिचुएशन से बचाना है तो
9:30:24आजादी के साथ पार्टीशन भी एक्सेप्ट करना
9:30:26पड़ेगा
9:30:32माउंट पैटर्न प्लेन
9:30:34दोस्तों अप्रैल 1947 में कांग्रेस
9:30:37प्रेसिडेंट कृपलानी वायसराय से कहते हैं
9:30:40की बैटल की अपेक्षा हम उन्हें पाकिस्तान
9:30:43देने के लिए तैयार हैं शर्ट बस ये है की
9:30:46आप बंगाल और पंजाब का विभाजन फेयर मैनर
9:30:50में होने दें
9:30:51माउंटबेटन भी तुरंत डिसीजंस लेने के लिए
9:30:54तैयार थे उन्हें ब्रिटिश गवर्मेंट से साफ
9:30:56आदेश मिला था की जल्द से जल्द इंडिया को
9:30:59क्यूट किया जाए इसी के साथ इंडिया आते ही
9:31:02उन्हें समझ ए गया था की कैबिनेट मिशन तो
9:31:05एक डेड हॉर्स बन चुका है और जीना एक
9:31:08सावरेन स्टेट से कुछ भी कम पर सेटल होने
9:31:10वाले नहीं हैं इसलिए यूनाइटेड इंडिया को
9:31:13पावर हैंडोवर करना नामुमकिन सा हो गया है
9:31:16ऐसे में अप्रैल 1947
9:31:20बनाते हैं जिसे प्लेन कहा जाता है इस
9:31:25प्लेन के अकॉर्डिंग पंजाब और बंगाल का
9:31:27पार्टीशन किया जाना था और पावर प्रोविंस
9:31:30और सब प्रोविंस को ट्रांसफर की जानी थी यह
9:31:33प्रोविंस फ्री थे इंस्टिट्यूट असेंबली के
9:31:36किसी भी ग्रुप को जॉइन करने के लिए इसके
9:31:38अलावा इंटिरिम गवर्नमेंट को जून 1948 तक
9:31:42पावर में रहना था स्ट्रांग सेंटर की
9:31:44अब्सेंस में प्रोविंस को पावर दे देना
9:31:46इंडिया में बालकनाइजेशन को जन्म दे सकता
9:31:49था मतलब की यूरोप के बालकान रीजन की तरह
9:31:52देश छोटी-छोटी हसन में विभाजित हो जाता है
9:31:55इसीलिए नेहरू इस प्लेन को पुरी तरह
9:31:58रिजेक्ट कर देते हैं उनके अनुसार यह प्लेन
9:32:01बिना किसी सिक्योरिटी
9:32:03और स्टेबिलिटी के सिर्फ डिस्ट्रक्टिव
9:32:06टेंडेंसी को जन्म देने वाला है
9:32:08ऐसी सिचुएशन
9:32:10एक अल्टरनेटिव प्लेन प्रपोज करते हैं इस
9:32:14प्लेन को उन्हें के नाम पर माउंटबेटन
9:32:16प्लेन बोला जाता है यह प्लेन थर्ड जून
9:32:191947 को अनाउंस किया जाता है इसके अनुसार
9:32:22पावर दो सक्सेसर डोमिनियन गवर्नमेंट स्कूल
9:32:25ट्रांसफर की जाएगी इंडिया और पाकिस्तान
9:32:28इसके साथ ही पावर ट्रांसफर की डेट को जून
9:32:321948 से आगे बढ़कर
9:32:34तीन अगस्त 1947 भी कर दिया जाता है
9:32:38प्लेन में पंजाब और बंगाल का पार्टीशन
9:32:41प्रपोज किया जाता है
9:32:43हिंदू मेजॉरिटी प्रोविंस जो पहले ही
9:32:46एक्जिस्टिंग इंस्टिट्यूट असेंबली को
9:32:48एक्सेप्ट कर चुकी हैं उन्हें कोई भी चॉइस
9:32:51नहीं दी जाति वही मुस्लिम मेजॉरिटी
9:32:53प्रोविंस यानी की बंगाल पंजाब सिंह नॉर्थ
9:32:56वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस और बलूचिस्तान को
9:32:59डिसाइड करना था की वो एक्जिस्टिंग
9:33:01इंस्टिट्यूट असेंबली को जॉइन करेंगे या
9:33:04फिर पाकिस्तान के लिए बने वाली अलग और नई
9:33:06असेंबली को यह डिसीजन प्रोविडेंशियल
9:33:09असेंबलीज को लेना था नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर
9:33:12प्रोविंस में रेफरेंडम किया जाना था और
9:33:15बलूचिस्तान के कैसे में क्वेटा
9:33:17म्युनिसिपालिटी और ट्राईबल रिप्रेजेंटेटिव
9:33:19के साथ काउंसिल्टेशंस हनी थी अगले ही दिन
9:33:22में नेहरू जी ना और सिक्स के बिहाफ पर
9:33:25सरदार बलदेव सिंह इस प्लेन को इंडस कर
9:33:28देते हैं इस तरह ट्रांसफर और पावर के लिए
9:33:31तेजी से बढ़ाना शुरू हो जाता है यहां एक
9:33:34सवाल यह उठाता है की आखिर कांग्रेस ने
9:33:36डोमिनियन स्टेटस को क्यों एक्सेप्ट कर
9:33:39लिया था और दूसरा है की पावर ट्रांसफर की
9:33:42डेट को ब्रिटिश ने क्यों एडवांस कर दिया
9:33:45था आई एक ही करके दोनों सवालों के जवाब
9:33:48जानते हैं सबसे पहले बात करते हैं की
9:33:50कांग्रेस ने डोमिनियन स्टेटस को क्यों
9:33:53एक्सेप्ट किया
9:33:55वही कांग्रेस एक्सेप्टेड डोमिनियन स्टेटस
9:33:59दोस्तों 1929 की लाहौर कांग्रेस की
9:34:02स्पिरिट के अगेंस्ट जाते हुए कांग्रेस
9:34:04डोमिनियन स्टेटस को एक्सेप्ट करने के लिए
9:34:07तैयार हो जाति है क्योंकि पहले तो इससे
9:34:10पीसफुल और क्विक ट्रांसफर ऑफ पावर इन होना
9:34:12था दूसरा इस समय बन रही एक्सप्लोसिव
9:34:17सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए कांग्रेस
9:34:19के पास अथॉरिटी होना जरूरी हो गया था और
9:34:22तीसरा रीजन था की इससे ब्यूरो कृषि और
9:34:25आर्मी में कंटिन्यूआईटी मेंटेन र शक्ति थी
9:34:27जिसकी बहुत जरूर थी इन सभी रीजंस की वजह
9:34:31से कांग्रेस 1947 में डोमिनियन स्टेटस को
9:34:35एक्सेप्ट कर लेती है अब बात करते हैं की
9:34:38ब्रिटिशर्स को इतनी जल्दी क्या थी पावर
9:34:40ट्रांसफर करने की
9:34:42नेशनल फॉरेन अर्ली डेट अगस्त 15 1947
9:34:47दोस्तों ब्रिटिशर्स जून 1948 की जगह 15th
9:34:52अगस्त 1947 को ही पावर ट्रांसफर करने का
9:34:55बड़ा डिसीजन लेते हैं इसकी पीछे पहले करण
9:34:58था की वो चाहते थे की कांग्रेस डोमिनियन
9:35:01स्टेटस पर एग्री हो जाए उन्हें लगता था की
9:35:04जल्दी पावर ट्रांसफर करने से कांग्रेस
9:35:07डोमिनियन स्टेटस को भी मां लगी और ऐसा हुआ
9:35:10भी इसके साथ ही ब्रिटिश कम्युनल सिचुएशन
9:35:13के रिस्पांसिबिलिटी से भी एस्केप करना छह
9:35:15रही थी जैसा की हम पहले ही बता चुके हैं
9:35:18की ब्रिटिश किसी भी तरह कम्युनल राइट्स
9:35:21में इंगेज नहीं होना चाहते थे जब उन्हें
9:35:24इंडिया से जाना ही था तो वो क्यों अपने
9:35:27रिसोर्सेस और जान यहां जोखिम में डालें
9:35:30इसलिए वह फैसला लेते हैं की इस सिचुएशन से
9:35:33इंडियन को ही निपटाने दिया जाए अब बात
9:35:36करते हैं फाइनल ट्रांसफर ऑफ पावर
9:35:41फाइनल ट्रांसफर विद पार्टीशन
9:35:44दोस्तों 20th जून को बंगाल असेंबली और
9:35:4723rd जून को पंजाब असेंबली पार्टीशन के
9:35:49फीवर में फैसला करती हैं वेस्ट पंजाब और
9:35:52ईस्ट बंगाल पाकिस्तान को जॉइन करने वाले
9:35:55थे वहीं बाकी एरियाज यानी की ईस्ट पंजाब
9:35:59और वेस्ट बंगाल इंडिया में ही रहने वाले
9:36:01थे इसकी कुछ समय बाद ही सिंह बलूचिस्तान
9:36:05और फिर नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस भी
9:36:08पाकिस्तान जॉइन करने का फैसला लेते हैं
9:36:10माउंटबेटन का अगला टास्क था दो बाउंड्री
9:36:14कमीशन को अप्वॉइंट करना एक बंगाल के लिए
9:36:17और दूसरी पंजाब के लिए इंटरनेशनल
9:36:20फ्रंटियर्स को दिल्ली नित करने के लिए यह
9:36:23दोनों ही कमिश्नर सीरियल रेड क्लिफ के
9:36:25नेतृत्व में अप्वॉइंट की जाति हैं और इसे
9:36:28यह कम करने के लिए सिक्स वीक से ज्यादा का
9:36:31समय नहीं मिलता
9:36:33जो बाउंड्रीज अवार्ड के द्वारा
9:36:35प्रिसक्राइब की जाति हैं उनके बड़े में
9:36:38एडमिट करते हैं की वो दोनों सीड्स के
9:36:41लाखों लोगों के लिए पीड़ा का करण बने वाली
9:36:44थी
9:36:44फिफ्थ जुलाई 1947 को माउंटबेटन प्लेन पर
9:36:48बेस्ड इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट को ब्रिटिश
9:36:51पार्लियामेंट द्वारा पास कर दिया जाता है
9:36:53इस एक्ट को 18th जुलाई 1947 को रॉयल एसेंट
9:36:58भी मिल जाति है और फाइनली 15th अगस्त 1947
9:37:02को एक्ट इंप्लीमेंट कर दिया जाता है
9:37:05एक्ट के अकॉर्डिंग 15th अगस्त 1947 को दो
9:37:10इंडिपेंडेंस डोमिनियंस इंडिया और
9:37:13पाकिस्तान का क्रिएशन होता है दोनों ही
9:37:16डोमिनियंस के पास गवर्नर जनरल रहेगा जिसकी
9:37:19रिस्पांसिबिलिटी होगी इस एक्ट को
9:37:21इफेक्टिवली ऑपरेट करना दोनों नए डोमिनियंस
9:37:24की कांस्टीट्यूएंट असेंबली उसे डोमिनियन
9:37:26के लिए लेजिसलेटिव पावर्स को एक्सरसाइज
9:37:28करेंगे एक्जिस्टिंग सेंट्रल लेजिसलेटिव
9:37:31असेंबली और काउंसिल ऑफ स्टेटस ऑटोमेटेकली
9:37:34डिसऑर्डर हो जाएंगे ट्रांजिशनल पीरियड में
9:37:36यानी की जब तक कांस्टीट्यूएंट असेंबली नया
9:37:39कॉन्स्टिट्यूशन अडॉप्ट नहीं कर लेती तब तक
9:37:42दोनों डोमिनियंस में शासन गवर्नमेंट ऑफ
9:37:45इंडिया एक्ट 1935 की अकॉर्डिंग किया जाएगा
9:37:491947 के एक्ट के प्रोविजंस के अनुसार 14th
9:37:53अगस्त को पाकिस्तान और 15th अगस्त को
9:37:55इंडिया को अपनी फ्रीडम मिलती है जिन्ना
9:37:59पाकिस्तान के फर्स्ट गवर्नर जनरल बनते हैं
9:38:01वहीं इंडिया लॉर्ड माउंटबेटन को ही गवर्नर
9:38:05जनरल ऑफ इंडिया की तरह कंटिन्यू करने के
9:38:07लिए कहता है
9:38:0815th अगस्त 1947 मिडनाइट के समय इंडिया की
9:38:13कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली का स्पेशल सेशन
9:38:15होता है और नेहरू अपनी फेमस ट्वीट विथ
9:38:18डेस्टिनी स्पीच देते हैं दूसरे दिन नेहरू
9:38:22फ्री इंडिया के पहले प्राइम मिनिस्टर के
9:38:24रूप में शपथ लेते हैं और देश सेलिब्रेशंस
9:38:27में डब जाता है लेकिन दोस्तों इंडिया में
9:38:30सब सेलिब्रेशन के मूड में नहीं थे इसमें
9:38:33सबसे बड़ा नाम था महात्मा गांधी का वो इस
9:38:36दिन किसी भी तरह की सेलिब्रेशन का हिस्सा
9:38:38नहीं बनते और पूरा दिन फास्टिंग और प्रेयर
9:38:41में ही निकलते हैं ऐसा इसलिए क्योंकि वो
9:38:44पार्टीशन की पुरी तरह खिलाफ थे और देश के
9:38:47विभाजन के साथ मिली ये आजादी उनके लिए
9:38:49अधूरी थी इसके साथ ही ब्रिटिश के इस तरह
9:38:53से पार्टीशन एक दर्दनाक एक्सपीरियंस में
9:38:57बादल जाता है कैसे आई समझते हैं
9:39:02प्रॉब्लम्स अली विड्रोल दोस्तों माउंटबेटन
9:39:06के समय जी तेजी से इवेंट्स घटित होते हैं
9:39:08उसमें पार्टीशन की डीटेल्स को सही तरीके
9:39:11से अरेंज करने का समय ही नहीं मिलता जिसकी
9:39:14वजह से बड़े स्टार पर ब्लू शेड देखने को
9:39:16मिलता है स्पेशली पंजाब मैसाच्यर को
9:39:19प्रीवेंट करने में ये पुरी तरह फूल हो
9:39:21जाते हैं इसका सबसे बड़ा करण था की
9:39:24पार्टीशन की प्रॉब्लम्स को टैकल करने के
9:39:26लिए कोई भी ट्रांजेशनल इंस्टीट्यूशन
9:39:28स्ट्रक्चर नहीं बनाया गया था माउंटबेटन इस
9:39:31उम्मीद पर थे की वह इंडिया और पाकिस्तान
9:39:33के आम गवर्नर जनरल रहेंगे और इस तरह
9:39:36नेसेसरी लिंक प्रोवाइड करेंगे लेकिन
9:39:39जिन्ना ने यह पोजीशन अपने लिए रख ली थी
9:39:41इसके साथ ही बाउंड्री कमीशन अवार्ड को
9:39:44अनाउंस करने में भी डिले किया गया था
9:39:46अवार्ड 12th अगस्त 1947 को ही तैयार हो
9:39:50चुका था लेकिन माउंटबेटन इसे 15थ अगस्त के
9:39:53बाद ही पब्लिक करने का फैसला लेते हैं
9:39:55जिससे ब्रिटिश डिस्टरबेंस की सभी
9:39:58रिस्पांसिबिलिटी से एस्केप कर सकें
9:40:01है इसका नतीजा बहुत ही भयानक होता है सब
9:40:04कॉन्टिनेंट अपनी हिस्ट्री में कम्युनल
9:40:06वायलेंस और ह्यूमन डिस्प्लेसमेंट का
9:40:08वर्स्ट कैसे सिनेरियो विटनेस करता है
9:40:10इस दौरान करीब 10 लाख लोगों की हत्या कर
9:40:14दी जाति है और 75000 से भी ज्यादा वेमन का
9:40:17रेप होता है दोनों ही डायरेक्शंस में डेड
9:40:20बॉडी से भारी हुई ट्रेंस बॉर्डर क्रॉस
9:40:22करती हैं
9:40:23एक करोड़ से ज्यादा लोग डिस्प्लेस होते
9:40:26हैं और रिफ्यूजी कैंपस में आजादी का कड़वा
9:40:29टेस्ट चखना के लिए मजबूर होते हैं इस तरह
9:40:32बहुत से इंडियन के लिए फ्रीडम पार्टीशन के
9:40:35लॉस के साथ आई है और इस कम्युनल फ्रेंज़ी
9:40:38के सबसे बड़े विक्टिम खुद फादर ऑफ नेशन
9:40:41बनते हैं जिनकी 30th जनवरी 1948 को
9:40:45मिलिटेंट हिंदू नेशनलिस्ट द्वारा हत्या कर
9:40:48दी जाति है
9:40:50कंक्लुजन दोस्तों इस तरह 1947 में एक
9:40:55फंडामेंटल शिफ्ट होता है और वो था इंडिया
9:40:59का एक सावरेन स्टेट के रूप में उभारना
9:41:01हालांकि आजादी का जश्न पार्टीशन के गम की
9:41:04वजह से कुछ फीका जरूर राहत है इसी के साथ
9:41:07आजादी अपने साथ न्यू सेटअप चैलेंज भी लेकर
9:41:10आई आगे आने वाले समय में इंडिया की सामने
9:41:14एन सिर्फ प्रिंसली स्टेटस को इंटीग्रेटेड
9:41:16करने का चैलेंज था बल्कि देश की पालिटी
9:41:19इकोनामी और सोसाइटी को भी एक मजबूत
9:41:22फाउंडेशन देना था दोस्तों
9:41:28बी की तरफ
9:41:30यानी ब्रिटिश गवर्नेंस सिस्टम इसमें हम
9:41:34ब्रिटिशर्स द्वारा इंट्रोड्यूस डिफरेंट
9:41:36लैंड रिवेन्यू सिस्टम लोकल सेल्फ
9:41:39गवर्नमेंट के साथ पुलिस आर्मी और
9:41:41ज्यूडिशरी में हुए डेवलपमेंट्स को कर
9:41:43करेंगे साथ ही सभी चार्ट और रेगुलेशन
9:41:46एक्ट्स को भी डिस्कस करेंगे आई शुरू करते
9:41:50हैं पार्ट बी लैंड रिवेन्यू सिस्टम
9:41:54दोस्तों लैंड रिवेन्यू ब्रिटिशर्स के लिए
9:41:57मेजर सोर्सेस ऑफ इनकम में से एक था इस
9:41:59इनकम को मैक्सिमाइज करने के लिए उन्होंने
9:42:01इंडिया में अलग-अलग सिस्टम इंट्रोड्यूस
9:42:04किया थे आज उनके इंपॉर्टेंट लैंड रिवेन्यू
9:42:07सिस्टम को डिटेल में कर करेंगे जानेंगे की
9:42:10यह सिस्टम कब कहां और क्यों ले गए साथी
9:42:14इंडियन एग्रीकल्चर कम्युनिटी पर इनका
9:42:17इंपैक्ट भी डिस्कस करेंगे
9:42:21इंट्रोडक्शन
9:42:25दोस्तों
9:42:261765 में बैटल ऑफ प्लासी के बाद ईस्ट
9:42:30इंडिया कंपनी को बंगाल बिहार और उड़ीसा के
9:42:33दीवानी राइट्स मिले थे और तभी से कंपनी के
9:42:36लैंड रिवेन्यू एक्सपेरिमेंट भी शुरू हो
9:42:37जाते हैं
9:42:391772 में बंगाल के गवर्नर वारेन
9:42:42हेस्टिंग्स फार्मिंग सिस्टम इंट्रोड्यूस
9:42:44करते हैं इस सिस्टम के तहत रिवेन्यू
9:42:46कलेक्शन का चार्ज तो यूरोपियन जिला
9:42:49कलेक्टर्स के पास राहत है लेकिन रिवेन्यू
9:42:51कलेक्ट करने का अधिकार हाईएस्ट बिदार यानी
9:42:54की सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को दिया
9:42:57जाता था
9:42:57फार्मिंग सिस्टम बहुत ज्यादा सफल नहीं
9:43:00होता क्योंकि विदेश प्रोडक्शन प्रोसेस की
9:43:03परवाह किया बिना ज्यादा से ज्यादा
9:43:05रिवेन्यू एक्सट्रैक्ट करने की कोशिश करते
9:43:07हैं और इसकी वजह से प्रेजेंस की हालात
9:43:10बहुत ज्यादा मिसिबल होने लगती है इसलिए
9:43:131784 में लॉर्ड कार्नवालिस को रिवेन्यू
9:43:17एडमिनिस्ट्रेशन को स्ट्रीमलाइन करने के
9:43:19स्पेसिफिक मैंडेट के साथ इंडिया भेजो जाता
9:43:21है
9:43:29परमानेंट सेटलमेंट जो डी जमींदारी सिस्टम
9:43:34दोस्तों लॉर्ड कार्नवालिस 1793 में
9:43:38परमानेंट सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करते हैं
9:43:40इसके तहत लैंड रिवेन्यू कलेक्ट करने की
9:43:44जिम्मेदारी जमींदारा को दी जाति है
9:43:46सेटलमेंट जमींदारा के साथ इसलिए किया जाता
9:43:49है क्योंकि बहुत सारे प्रेजेंस से
9:43:51रिवेन्यू कलेक्ट करने की तुलना में थोड़े
9:43:54से जमींदार से रिवेन्यू कलेक्ट करना
9:43:56ज्यादा इजी राहत साथ ही कंपनी सोसाइटी के
9:43:59एक स्ट्रांग क्षेत्र को अपने साथ जोड़ना
9:44:02चाहती थी इसमें टोटल लैंड रिवेन्यू का 11%
9:44:05जमीन डर अपने पास रख सकते थे और 89%
9:44:09ब्रिटिश सरकार के पास जमा करना होता था इस
9:44:13सिस्टम में जमींदारा को लैंड ऑनर्स माना
9:44:15गया था वो जमीन को खरीद और बीच सकते थे
9:44:18इससे पहले तक जमींदारा के पास लाडनिंग
9:44:21राइट्स नहीं होते थे उनका कम सिर्फ
9:44:24रिवेन्यू कलेक्ट करना होता था
9:44:26इससे एक्चुअल टिक्स को सिर्फ टेरेंस बना
9:44:29दिया गया
9:44:31जमींदार अपनी मर्जी से कभी भी उन्हें जमीन
9:44:34से बेदखल कर सकते थे इसे बंगाल बिहार
9:44:37उड़ीसा के अलावा यूनाइटेड प्रोविंस के
9:44:40बनारस डिवीजन और नॉर्दर्न कार्नेटिक में
9:44:43भी लागू किया गया था जमींदारी सिस्टम
9:44:45ब्रिटिश इंडिया के टोटल एरिया के लगभग 19%
9:44:49एरिया को कर करता था
9:44:51परमानेंट सेटलमेंट में सनसेट क्लोज़ का भी
9:44:54प्रोविजन था इसका मतलब होता था की एक
9:44:57डेफिनेट डेट पर सनसेट होने से पहले
9:45:00जमींदार स्कूल लैंड रिवेन्यू जमा करना
9:45:03होता था ऐसा एन करने पर उनकी जमींदारी
9:45:06नीलम कर दी जाति थी
9:45:08परमानेंट सेटलमेंट इंट्रोड्यूस करने के
9:45:10पीछे लॉर्ड कार्नवालिस का मकसद कंपनी के
9:45:13लिए डेफिनेट सोर्स ऑफ रिवेन्यू फिक्स करना
9:45:15था इससे वह आने वाले बजट और एक्सपेंडिचर
9:45:19को भी प्लेन कर सकते थे इसके अलावा उनका
9:45:22यह भी मानना था की जमींदारा लैंड में
9:45:24इन्वेस्ट करेंगे जिससे प्रोडक्टिविटी भी
9:45:27बढ़ेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होता सबसे
9:45:30पहले दो रिवेन्यू का माउंट इतना हाय फिक्स
9:45:33किया गया था की शुरुआत के सालों में
9:45:36जमींदार्ज के लिए उसे कलेक्ट करना ही
9:45:38मुश्किल हो जाता है इसकी वजह से बहुत सी
9:45:41जमींदारी नीलम कर दी जाति हैं इसके बाद
9:45:44जमींदारा ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कामना
9:45:46चाहते थे इसलिए वो लैंड में भी कोई
9:45:49इन्वेस्टमेंट नहीं करते जो भी रिवेन्यू
9:45:52डिसाइड किया जाता है वो बिना किसी
9:45:54एसेसमेंट के एक अंदाज से किया जाता है
9:45:57नतीजा ये होता है की प्रेजेंस की कंडीशन
9:46:00मिजोरेबल होने लगती है
9:46:02जमींदारा उनसे मनमाना कर वसूल करने लगता
9:46:05हैं क्योंकि सेटलमेंट में कहानी भी यह
9:46:08स्पेसिफाई नहीं किया गया था की जमींदारा
9:46:11कल्टीवेटर से कितना रेंट ले सकते हैं इसी
9:46:14का फायदा उठाकर जमींदारा कल्टीवेटर से
9:46:17बहुत सारे इलीगल न्यूज़ भी वसूल करने लगता
9:46:20हैं साथ ही सिस्टम
9:46:31वेन्यू कलेक्ट करने की जिम्मेदारी किसी
9:46:33दूसरे छोटे जमीदार को दे देता है इससे
9:46:36अल्टीमेटली पेशेंस पर रिवेन्यू का भर बाढ़
9:46:38जाता है यही वजह है की आगे चलकर जमींदारी
9:46:41एरियाज में बहुत साड़ी प्रेजेंट रिपोर्ट्स
9:46:43भी देखने को मिलते हैं प्रेजेंट रिवार्ड्स
9:46:46को हम अलग से अपनी वीडियो में डिस्कस
9:46:48करेंगे
9:46:56रेवत बड़ी सिस्टम
9:46:59दोस्तों समय के साथ ईस्ट इंडिया कंपनी
9:47:02अपना रूल्स साउथ और साउथ वेस्टर्न इंडिया
9:47:04में भी एक्सटेंड कर लेती है ऐसे में यहां
9:47:07लैंड सेटलमेंट की नई समस्या खड़ी होती है
9:47:09ब्रिटिश ऑफिशल्स के अनुसार इस एरिया में
9:47:12पहले से बड़े जमींदारा मौजूद थे इसलिए
9:47:15जमींदारी सिस्टम को यहां इंट्रोड्यूस करना
9:47:18मुश्किल था साथ ही कुछ ब्रिटिश को यह भी
9:47:21लगता था की परमानेंट सेटलमेंट की वजह से
9:47:23कंपनी को फाइनेंशियल लॉस हो रहा है
9:47:25क्योंकि एक तो उन्हें जमींदारा के साथ
9:47:28रिवेन्यू शेर करना पड़ता है और दूसरा लैंड
9:47:31से बढ़नी हुई इनकम पर वह कोई क्लेम नहीं
9:47:34कर सकते इसके साथ ही जमींदार कल्टीवेटर का
9:47:37शोषण भी करते थे
9:47:39इसलिए मंगरो और रीड जैसे ब्रिटिश सजेस्ट
9:47:43करते हैं की सेटलमेंट डायरेक्ट कल्टीवेटर
9:47:46के साथ किया जाए इसके साथ ही सेटलमेंट को
9:47:49परमानेंट एन करके प्रिडिकली रिवाइज किया
9:47:52जान का प्लेन था इस सेटलमेंट का नाम रियट
9:47:55वादी रखा गया क्योंकि सेटलमेंट यानी की
9:47:59कल्टीवेटर के साथ होता है इसे सबसे पहले
9:48:021792 में बड़ा महल एरिया में सिकंदर रीड
9:48:06ने स्टार्ट किया था उसके बाद थॉमस मंगरो
9:48:09ने इसे मद्रास के बाकी एरियाज में
9:48:11एक्सटेंड किया आगे चलकर सिस्टम को बॉम्बे
9:48:14प्रेसीडेंसी में भी लागू किया गया था
9:48:17है दोस्तों वाणी सिस्टम ने लैंड पर
9:48:19प्रेजेंट ओनरशिप सिस्टम को एस्टेब्लिश
9:48:22नहीं किया अल में बहुत सारे जमींदारा की
9:48:25जगह एक बड़े जमींदार यानी की स्टेट ने ले
9:48:28ली थी पेजयंस तो सिर्फ गवर्नमेंट के
9:48:31टेनेंस बन गए थे और समय पर लैंड रिवेन्यू
9:48:33ना जमा कर अपने की स्थिति में इनका लैंड
9:48:36बीच दिया जाता था
9:48:37ज्यादातर एरियाज में लैंड रिवेन्यू का रेट
9:48:40भी बहुत हाय फिक्स किया गया था जैसे की
9:48:43मद्रास में गवर्नमेंट का क्लेम ग्रोस
9:48:45प्रोडक्शन का 45 से 55% तक फिक्स किया गया
9:48:49था ऐसी ही कुछ हालात मुंबई की भी थी नतीजा
9:48:53यह होता है की बेस्ट सीजंस में भी
9:48:56मुश्किल से अपने गुजरे लायक ही बचत था
9:48:59इसके साथ ही गवर्नमेंट के पास कभी भी लैंड
9:49:03रिवेन्यू बढ़ाने का अधिकार भी था ड्रॉट या
9:49:06फ्लड्स के करण फसल बर्बाद होने पर भी
9:49:09किसने को रिवेन्यू पे करना होता था इस वजह
9:49:12से किसान धीरे-धीरे मनी लैंडर्स की दाल
9:49:15में फंसे लगता हैं
9:49:16इस तरह
9:49:18किसने की हालात अच्छी नहीं रहती ब्रिटिश
9:49:22इंडिया के करीब 52% एरिया में इस सिस्टम
9:49:25को इंप्लीमेंट किया गया
9:49:36महालवाड़ी सिस्टम
9:49:41दोस्तों जमींदारी सिस्टम का मॉडिफाइड
9:49:43वर्जन गंगा वाली नॉर्थवेस्ट प्रोविंस
9:49:46सेंट्रल इंडिया के कुछ पार्ट्स और पंजाब
9:49:49में इंट्रोड्यूस किया गया था इसको
9:49:51महालवाड़ी सिस्टम कहा जाता है इसमें
9:49:53रिवेन्यू पूरे विलेज यह स्टेट के लिए
9:49:56फिक्स किया जाता था और सेटलमेंट गांव की
9:49:59मुखिया या जमीदार के साथ होता था इस
9:50:02सेटलमेंट को हॉल मैकेंजी और आम बर्ड जैसे
9:50:05ब्रिटिश ने इंट्रोड्यूस किया था स्टेट का
9:50:09शेर इसमें लैंड की नेट इनकम का 66% तक रखा
9:50:13गया था और सेटलमेंट 30 साल के लिए किया
9:50:15गया
9:50:27बहुत हाय फिक्स किया जाता है और यहां भी
9:50:31प्रॉपर एसेसमेंट नहीं किया जाता जिसकी वजह
9:50:33से
9:50:41चला जाता है
9:50:44कंक्लुजन
9:50:48दोस्तों ब्रिटिश द्वारा इंट्रोड्यूस लैंड
9:50:51रिवेन्यू सिस्टम की वजह से इंडिया की और
9:50:54इकोनामी पुरी तरह डिस्टर्ब होने लगती है
9:50:56विलेज कम्युनिटी का एक्जिस्टिंग पॉलीटिकल
9:51:00इकोनामिक सोशल फ्रेमवर्क पुरी तरह
9:51:02ब्रेकडाउन हो जाता है प्राइवेट प्रॉपर्टी
9:51:05का कॉन्सेप्ट लैंड को एक मार्केट कमोडिटी
9:51:08में टर्न कर देता है सोशल रिलेशनशिप चेंज
9:51:11हो जाति हैं लैंडलॉर्ड मनीलेंडर ट्रेड
9:51:15जैसी नई सोशल क्लासेस की इंर्पोटेंस बाढ़
9:51:17जाति है और वो ओपेसेंस और एग्रीकल्चर लेबर
9:51:21जैसी क्लास के नंबर्स मल्टीप्लाई हो जाते
9:51:24हैं
9:51:27कंपटीशन में बादल जाता है
9:51:33खाने का मतलब यह है की ट्रेडिशनल और
9:51:36एनवायरनमेंट पुरी तरह बादल जाता है
9:51:39रिवेन्यू का ओवर एसेसमेंट सभी सिस्टम का
9:51:42एक आम फीचर निकाल कर आता है क्योंकि कंपनी
9:51:46रिवेन्यू इनकम को मैक्सिमाइज करना ही था
9:51:49इसकी वजह से किसान कर्ज में बने लगता हैं
9:51:54और बहुत से किसने को अपनी ही जमीन से
9:51:57बेदखल होना पड़ता है या एक टैलेंट की तरह
9:52:00कम करना पड़ता है इस तरह यह रिवेन्यू
9:52:04सिस्टम प्रेजेंस में ब्रिटिश की अगेंस्ट
9:52:06आक्रोश को जन्म देते हैं जिसकी परिणाम
9:52:09स्वरूप हमें आने वाले समय में बहुत से
9:52:12प्रेजेंट रिपोर्ट देखने को मिलते हैं
9:52:15इकोनामिक इंपैक्ट ब्रिटिश रूल
9:52:19दोस्तों ब्रिटिशर्स द्वारा फॉलो की गई
9:52:21पॉलिसीज की वजह से इंडियन इकोनामी तेजी से
9:52:24कॉलोनियल इकोनामी में ट्रांसफॉर्म हो गई
9:52:26थी जिसका नेचर और स्ट्रक्चर ब्रिटिश
9:52:29इकोनामी की जरूर के हिसाब से ते होता था
9:52:32ब्रिटिश ने इंडियन इकोनामी के ट्रेडिशनल
9:52:34स्ट्रक्चर को पुरी तरह से डिस्ट्रिक्ट कर
9:52:36दिया था साथ ही ब्रिटिश कभी भी इंडियन
9:52:40लाइफ का इंटीग्रल पार्ट नहीं बने वो हमेशा
9:52:43ही फॉरेनर्स की तरह यहां रहे और इंडियन
9:52:46रिसोर्सेस को एक्सप्लोइट करते रहे और
9:52:48इंडियन वेल्थ को ट्रिब्यूट की तरह यहां से
9:52:51ले जाते रहे इस तरह इंडियन इकोनामी को
9:52:54ब्रिटिश ट्रेड और इंडस्ट्री के इंटरेस्ट
9:52:56का सबोर्डिनेट बना दिया गया
9:52:58जिसकी परिणाम हमें अलग-अलग रूप में देखने
9:53:01को मिलते हैं जैसा की आप जानते हैं की
9:53:04ब्रिटिश ने लगभग 200 साल तक इंडिया पर रोल
9:53:07किया इतने लंबे समय तक एक्सप्लोइटेशन का
9:53:10नेचर एक जैसा नहीं रहा था यह समय के साथ
9:53:13चेंज होता रहा और इसी की बेसिस पर
9:53:15कॉलोनियल रूल को तीन फेस में डिवाइड किया
9:53:18जाता है
9:53:27कॉलोनियल रूल के चेंजिंग इकोनामिक करैक्टर
9:53:29को समझना के लिए इंडियन स्कॉलर आरपी डेट
9:53:32ने इसे तीन फीस में डिवाइड किया है पहले
9:53:35फैज लगभग 1757 से 1813 तक चला है और इसे
9:53:40मर्केंटाइलिज्म या कमर्शियल केपीटलाइज्म
9:53:43का फीस कहा जाता है
9:53:47एक ट्रेड और कॉमर्स पर अपनी मुनाबाली
9:53:50बनाना और दूसरा बुलियन की समस्या का
9:53:53समाधान ढूंढना
9:53:55बुलियन की समस्या से हमारा मतलब है की
9:53:57ब्रिटिशर्स को इंडिया से गुड्स परचेज करने
9:54:00के लिए अपने यहां के गोल्ड सिल्वर और उनके
9:54:03कोइंस का उसे करना पड़ता था जो की
9:54:06मर्केंटाइलिज्म की दृष्टि से फेवरेबल नहीं
9:54:08था मोनोपोली बनाने के लिए ब्रिटिश ईस्ट
9:54:11इंडिया कंपनी
9:54:13की फॉरेन कंपनी को रास्ते से हटा देती हैं
9:54:16और बुलियन की समस्या बैटल ऑफ प्लासी के
9:54:19बाद खत्म होती है जिसे डिटेल में हम थोड़ी
9:54:22डर में देखेंगे
9:54:24इस फेस का फॉक्स इंडिया से ड्रा वेल्थ और
9:54:27ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा डायरेक्ट
9:54:30कॉलोनियल प्लंडर पर राहत है
9:54:32यही से इंडिया की इकोनामी का कॉलोनियल
9:54:35एक्सप्लोइटेशन शुरू हो जाता है इसके बाद
9:54:38दूसरा फेस लगभग 1813 से शुरू होकर 1860 तक
9:54:42चला है इसे इंडस्ट्रियल केपीटलाइज्म का
9:54:46फीस कहते हैं इस समय तक इंग्लैंड में
9:54:48इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन की शुरुआत हो चुकी
9:54:50थी और वहां बड़े स्केल पर गुड्स
9:54:52मैन्युफैक्चरर किया जा रहे थे
9:54:54इन्हीं गुड्स को सेल करने के लिए मार्केट
9:54:57की जरूर थी साथ ही ब्रिटिश इंडस्ट्रीज की
9:55:00और ज्यादा ग्रोथ के लिए बड़ी स्टार पर रा
9:55:03मैटेरियल्स भी चाहिए थे
9:55:051813 के चार्ट एक्ट के द्वारा ईस्ट इंडिया
9:55:08कंपनी की मोनोपोली को भी खत्म कर दिया गया
9:55:10था और इसी के साथ कॉलोनियल गवर्नमेंट वन
9:55:14साइड फ्री ट्रेड पॉलिसी की शुरुआत भी करती
9:55:16है जिसमें ब्रिटेन से इंडिया आने वाले
9:55:19मैन्युफैक्चर्ड गुड्स पर कोई ड्यूटी नहीं
9:55:22लगे जाति और इंडिया से ब्रिटेन के लिए रा
9:55:25मैटेरियल्स भी बिना किसी किया जाते हैं
9:55:27लेकिन इंग्लैंड में इंडिया से जान वाले
9:55:31किसी भी फिनिश्ड प्रोडक्ट पर हैवी ड्यूटी
9:55:33बनी रहती है उदाहरण के तोर पर इंडियन
9:55:36टैक्सटाइल्स पर 300% ड्यूटी इंपोज की जाति
9:55:40है इस तरह इस पीरियड के दौरान इंडिया में
9:55:43दिन इंडस्ट्रियलिज्म और रुरलीसेशन देखने
9:55:46को मिलता है
9:55:47संक्षेप में कहें तो इंडस्ट्रियल
9:55:49केपीटलाइज्म का फीस इंडियन इकोनामी को
9:55:52ब्रिटिश गुड्स के लिए मार्केट और रा
9:55:55मैटेरियल्स के सप्लायर में कन्वर्ट कर
9:55:56देता है तीसरा और आखिरी फैज लगभग 1860 से
9:56:00शुरू होकर 1947 तक चला है इसे फाइनेंशियल
9:56:04केपीटलाइज्म का फीस बोला जाता है इस दौरान
9:56:07ब्रिटिश इंडिया में कैपिटल इन्वेस्ट करना
9:56:10शुरू करते हैं इसका करण यह था की अब
9:56:13इंडस्ट्रियलिज्म दुनिया के बाकी देश में
9:56:16भी फैलने लगा था जैसे की जर्मनी जापान
9:56:20है इस वजह से ब्रिटिश इंडस्ट्रीज के लिए
9:56:23कंपटीशन बाढ़ जाता है सरवाइव करने के लिए
9:56:25कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन को कम करने की जरूर
9:56:27समझी जाति है और साथ ही साथ पिछले फैज के
9:56:31दौरान प्रॉफिट जमा करते-करते ब्रिटिश काफी
9:56:34कैपिटल जमा कर लेते हैं जिसे इन्वेस्ट
9:56:36करने की ऑपच्यरुनिटीज ढूंढी जा रही थी
9:56:39इसके साथ इंडिया में इन्वेस्ट करने से
9:56:41ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होती है साथ ही
9:56:45चिप लेबर भी मिल जाति है इसलिए इस पीरियड
9:56:48में तेजी से ब्रिटिश कैपिटल का फ्लो
9:56:50इंडिया में होता है लेकिन इसका मकसद
9:56:53इंडिया में इंडस्ट्रियल ग्रोथ करना नहीं
9:56:54राहत बल्कि इंडियन रिसोर्सेस का
9:56:57एक्सप्लोइटेशन करना होता है ब्रिटिश
9:57:00कैपिटल उन्हें एक्टिविटीज में लगे जाति है
9:57:02जो ब्रिटिश इंडस्ट्रीज के लिए
9:57:04कंप्लीमेंट्री साबित होती हैं एक एस्टीमेट
9:57:07के अनुसार 1914 से पहले तक लगभग 97%
9:57:12ब्रिटिश कैपिटल रेलवे मर्चेंट शिपिंग
9:57:14मीनिंग और फाइनेंशियल हाउस के डेवलपमेंट
9:57:17में इन्वेस्ट की गई
9:57:21अलग-अलग फेर में हुए इकोनामिक इंपैक्ट को
9:57:24डिस्कस करते हैं शुरुआत करते हैं इंडियन
9:57:27एग्रीकल्चर से
9:57:30इंपैक्ट ऑन इंडियन एग्रीकल्चर
9:57:33कंपनी ने इंडिया में नए लैन्टेनियस जैसे
9:57:36की परमानेंट सेटलमेंट रियट वादी महालवाड़ी
9:57:39सिस्टमैटिक सेटर को इंट्रोड्यूस किया था
9:57:42इन सभी सिस्टम में रिवेन्यू रेट को बहुत
9:57:45हाय रखा गया
9:57:47और महालवाड़ी एरियाज में रेगुलर इंटरवल पर
9:57:51रिवेन्यू रेट बड़ा दिए जाते थे इन नए
9:57:54सिस्टम की वजह से नई सोशल क्लासेस जैसे की
9:57:57लैंडलॉर्ड मनी लैंडर्स लैंड्स स्पैकुलेटर
9:58:01इमर्ज होते हैं और इन बढ़ाने लगती है और
9:58:06इंडियन कल्टीवेटर की कंडीशन खराब होती चली
9:58:08जाति है
9:58:09ज्यादातर कल्टीवेटर गरीबी रेखा से नीचे
9:58:12जीवन बिताने के लिए मजबूर होते हैं लैंड
9:58:15रिवेन्यू सिस्टम के इंपैक्ट को और डिटेल
9:58:17में हमने अलग से एक वीडियो में कर किया है
9:58:19कॉलोनियल पॉलिसी की वजह से इंडियन
9:58:22एग्रीकल्चर का कर्मशलाइजेशन भी देखने को
9:58:24मिलता है स्पेशली सेकंड यानी की
9:58:27इंडस्ट्रियल केपीटलाइज्म वाले फेस के
9:58:29दौरान
9:58:30ब्रिटिश इंडस्ट्रीज को रा मैटेरियल्स
9:58:33चाहिए थे जैसे की कॉटन जूते इंडिगो
9:58:36ईटीसीईटेरा इसलिए इंडिया में फूड क्रॉप्स
9:58:39की जगह ऐसी कमर्शियल क्रॉप्स को प्रमोट
9:58:41किया जाता है
9:58:43फोर्सफुली इन्हें कल्टीवेट कराया जाता है
9:58:46जैसे इंडिगो प्लांटेशन के कैसे में इसकी
9:58:49वजह से पैगिंस पर कर्ज तो बढ़ता ही है साथ
9:58:52ही और इकोनामी की सेल्फ डिपेंड्स खत्म हो
9:58:55जाति है
9:58:57खाने को अनाज नहीं राहत है और ऐसी सिचुएशन
9:59:00में फेमिंस बहुत आम हो जाते हैं ब्रिटिश
9:59:03कॉलोनियल रूल का एडवर्स इंपैक्ट सिर्फ
9:59:06इंडियन एग्रीकल्चर पर ही नहीं होता बल्कि
9:59:09ट्रेडिशनल इंडियन इंडस्ट्रीज को भी यह
9:59:11पुरी तरह डिस्ट्रॉय कर देता है
9:59:21ब्रिटिश रूल का इंडियन हैंडीक्राफ्ट
9:59:23इंडस्ट्रीज पर बहुत ही गहरा प्रभाव देखने
9:59:26को मिलता है ब्रिटिश के आने से पहले तक
9:59:28इंडिया एक एक्सपोर्टिंग कंट्री हुआ करती
9:59:31थी यहां तक की ब्रिटिश भी इंडिया ट्रेड
9:59:34करने के लिए ही आए थे और वो यहां अपने देश
9:59:37के प्रोडक्ट्स का ट्रेड नहीं करते थे
9:59:39बल्कि इंडिया से प्रोडक्ट्स जैसे की
9:59:42टैक्सटाइल्स स्पाइसेज ईटीसेटरा यूरोप में
9:59:45एक्सपोर्ट करते थे
9:59:47मर्केंटाइलिज्म यानी की फर्स्ट फैज के
9:59:49दौरान यही स्थिति बनी रहती है लेकिन सेकंड
9:59:53फैज में शुरू होने के बाद इंग्लैंड से
9:59:55बड़ी संख्या में मशीन मेड प्रोडक्ट्स
9:59:57इंडिया आने लगता हैं जो की इंडियन गुड से
10:00:01काफी सस्ते होते थे जिसकी वजह से इंडियन
10:00:04हैंडीक्राफ्ट्स की डिमांड कम होने लगती है
10:00:06साथ ही वन साइड फ्री ट्रेड जैसी पॉलिसी के
10:00:10करण इंडियन गुड्स पर फॉरेन मार्केट में
10:00:12हैवी ड्यूटी इंपोज की जाति हैं
10:00:15इस तरह डोमेस्टिक और फॉरेन दोनों ही
10:00:17मार्केट में इंडियन गुड्स की डिमांड कम हो
10:00:20जाति है
10:00:21इसके अलावा ब्रिटिश इंडिया से रा मटेरियल
10:00:24जैसे की कॉटन का एक्सपोर्ट शुरू कर देते
10:00:27हैं इस वजह से इंडियन आर्टिजंस को रा
10:00:30मटेरियल या तो मिलता नहीं है या फिर बहुत
10:00:33महंगे मिलने लगता हैं इस करण मजबूरी में
10:00:36इंडियन विवर्स ये कम छोड़ने लगता हैं
10:00:39रेलवे का डेवलपमेंट भी ट्रेडिशनल
10:00:42इंडस्ट्रीज को नुकसान पहुंचना है क्योंकि
10:00:44इससे पहले कम से कम रिमोट कॉर्नर्स में तो
10:00:47इंडियन गुड्स की डिमांड रहती थी लेकिन
10:00:49रेलवे के आने के बाद देश के कोनी कोनी में
10:00:52सस्ते ब्रिटिश गुड्स पहुंच जाते हैं इस
10:00:55तरह हैंडीक्राफ्ट्स इंडस्ट्रीज का डिक्लिन
10:00:57तो तेजी से होता है लेकिन मॉडर्न
10:01:00इंडस्ट्रीज की शुरुआत इतनी जल्दी नहीं
10:01:02होती इसलिए ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज में कम
10:01:05करने वाले लोग बेरोजगार हो जाते हैं
10:01:08गंजेटिक बिहार का स्टैटिसटिक्स डाटा बताता
10:01:11है की यहां टोटल पापुलेशन के मुकाबला
10:01:13इंडस्ट्रियल पापुलेशन का प्रोपोर्शन जो
10:01:1618009 के समय
10:01:1818.6% था वह 191 में घटकर सिर्फ
10:01:238.5% र जाता है कहा जा सकता है की ब्रिटिश
10:01:27रूल के दौरान इंडस्ट्रियल प्रोग्रेस दूर
10:01:30उल्टा इंडियन ट्रेडिशनल इंडस्ट्रीज का
10:01:32डिक्लिन होता है
10:01:35इकोनामिक इंपैक्ट को समझते हैं जिसे
10:01:38इंडियन नेशनलिस्ट लीडर्स
10:01:41की थ्योरी से समझाया है
10:01:45ड्रेन वेल्थ फ्रॉम इंडिया
10:01:49इंडियन नेशनल लीडर्स और इकोनॉमिस्ट के
10:01:52अनुसार इंडिया से इंग्लैंड के लिए होने
10:01:54वाला कांस्टेंट फ्लो ऑफ वेल्थ जिसके बदले
10:01:57में इंडिया को कोई भी इकोनामिक कमर्शियल
10:02:00या मटेरियल रिटर्न नहीं मिलता था ड्रेनो
10:02:03वेल्थ कहलाता है यह साल डर साल इंडिया से
10:02:07इंपीरियल ब्रिटेन द्वारा लिए जा रहे
10:02:09इनडायरेक्ट ट्रिब्यूट की तरह था
10:02:12मर्केंटाइल कॉन्सेप्ट में कहें तो
10:02:14इकोनामिक ग्रीन तब होता है जब एडवर्स
10:02:17बैलेंस ऑफ ट्रेड की वजह से गोल्ड और
10:02:19सिल्वर देश से बाहर जान लगता हैं
10:02:22बैटल ऑफ प्लासी से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी
10:02:25इंडिया में ट्रेड करने के लिए ब्रिटेन से
10:02:28बोलियां इंपोर्ट करती थी लेकिन प्लासी के
10:02:31बाद सिचुएशन बिल्कुल बादल जाति है ईस्ट
10:02:34इंडिया कंपनी अब इंडिया में टेरिटरीज
10:02:36एडमिनिस्ट्रेटर करना शुरू कर देती है और
10:02:39यहां के सरप्लस रेवेन्यू पर उसका अधिकार
10:02:41हो जाता है अब ब्रिटेन से बोलिए लाने की
10:02:44जगह इंडिया के ही रिवेन्यू को उसे करके
10:02:46कंपनी अपने एक्सपोर्ट्स को परचेज करती है
10:02:49इस तरह इंडिया के रिवेन्यू को कंपनी पुरी
10:02:52तरह अपने फायदे के लिए उसे करती है जिसके
10:02:55बदले में इंडिया को कुछ भी नहीं मिलता है
10:02:58यह सिस्टम 1813 के चार्ट एक्ट से खत्म
10:03:01होता है क्योंकि उसमें कंपनी के कमर्शियल
10:03:03और टेरिटोरियल रेवेन्यू को सेपरेट किया
10:03:06जाता है लेकिन इंडिया से इकोनामिक ड्रेन
10:03:08का और यहां भी नहीं होता बस इसका करैक्टर
10:03:12थोड़ा बादल जाता है
10:03:131813 के बाद ग्रीन एक तरफ एक्सपोर्ट्स के
10:03:17फॉर्म में होता है इस इकोनामिक ड्रेन की
10:03:20में कांस्टीट्यूएंट्स कुछ इस तरह थे होम
10:03:23चार्ज
10:03:25ऐसे एक्सपेंडिचर को बोला जाता था जो
10:03:28इंडिया के भी हाथ पर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट
10:03:30द्वारा इंग्लैंड में किया जाते थे
10:03:331857 के रिवॉल्ट से पहले होम चार्ज
10:03:3913% हुआ करते थे
10:03:411897 से 1901 के बीच यह प्रोपोर्शन बढ़कर
10:03:4524% हो गया था और 1921 22 में होम चार्ज
10:03:51सेंट्रल गवर्नमेंट के टोटल रिवेन्यू के
10:03:5340% तक पहुंच गए थे होम चार्ज के अंदर
10:03:56ईस्ट इंडिया कंपनी के शेरहोल्डर्स को दिए
10:03:59जान वाला डिविडेंड कंपनी द्वारा इंडिया के
10:04:02बाहर लिए पब्लिक डेट पर इंटरेस्ट सिविल और
10:04:05मिलिट्री चार्ज और इंग्लैंड में किया गए
10:04:08स्टोर परचेज जाते थे
10:04:09ड्रेन का नेक्स्ट कंपोनेंट था फॉरेन
10:04:12कैपिटल इन्वेस्टमेंट पर दिया जान वाला
10:04:14इंटरेस्ट
10:04:16इंटरेस्ट ऑन फॉरेन कैपिटल इन्वेस्टमेंट 28
10:04:20सेंचुरी में ब्रिटेन से फाइनेंस कैपिटल
10:04:23इंडिया में इंटर होना शुरू होता है यानी
10:04:26की थर्ड फैज फाइनेंशियल केपीटलाइज्म की
10:04:29शुरुआत
10:04:32पीरियड के समय इस पर सालाना लगभग 30 से 60
10:04:36करोड़ रुपए खर्च होते थे यहां ये याद रखना
10:04:39चाहिए की फौरन कैपिटल लिस्ट इंडिया के
10:04:42इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में इंटरेस्टिंग
10:04:44नहीं थे बल्कि अपने फायदे के लिए इंडियन
10:04:47रिसोर्सेस को एक्सप्लोइट करना चाहते थे
10:04:50साथ ही इंडीजीनस कैपिटल एंटरप्राइज को
10:04:53अलग-अलग तरीके से पीछे करने की कोशिश भी
10:04:57करते थे इकोनामिक ड्रेन का एक और कंपोनेंट
10:04:59देखा जा सकता है
10:05:16इसकी ग्रोथ भी नहीं
10:05:19लिखने हुए दादा भाई नौरोजी ने कहा था की
10:05:23ये एविलों जो इविल्स है और इंडियन पावर्टी
10:05:27का सबसे बड़ा करण भी है इनके अनुसार
10:05:29ब्रिटिश रूल की शुरुआत से लेकर 1865 तक कल
10:05:351500 मिलियन पाउंड का ड्रेन इंडिया से हो
10:05:38चुका था और 1883 से 1892 के बीच करीब
10:05:443009 करोड़
10:05:47के जारी मैं सिर्फ ब्रिटिशर्स ने इंडिया
10:05:50की वेल्थ को लूटने का कम किया बल्कि इसकी
10:05:53वजह से इंडिया में इंडस्ट्रियलिज्म भी
10:05:56नहीं हो पाया क्योंकि इसके लिए जो जरूरी
10:05:59कैपिटल थी वो तो ब्रिटेन ट्रांसफर हो रही
10:06:01थी यह तो बात हो गई कॉलोनियल रूल के दौरान
10:06:05इंडिया पर हुए इकोनामिक इंपैक्ट्स की
10:06:08लेकिन यह इंपैक्ट्स सिर्फ कॉलोनियल रूल तक
10:06:11ही सीमित नहीं रहे
10:06:12बल्कि इनकी लिगसी इंडिपेंडेंस इंडिया पर
10:06:16भी देखने को मिलती है कैसे आई जानते हैं
10:06:27200 साल का ब्रिटिश रूल एक्सट्रीम पावर्टी
10:06:30के साथ एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रियल दोनों
10:06:33ही सेक्टर में इकोनामिक बैकवार्डनेस की
10:06:35लिगसी छोड़ जाता है
10:06:371947 में जब ब्रिटिश इंडिया से गए तब
10:06:41दुनिया की सबसे जटिल लैंड प्रॉब्लम पीछे
10:06:44छोड़ गए जिसमें लैंड राइड्स की
10:06:46कॉम्प्लिकेटेड हीेरार की थी लैंड टेन्योर
10:06:49की इनसिक्योरिटी थी कल्टीवेशन की टेक्निक
10:06:52प्रिमिटिव बने हुए थे
10:06:54पेरिल्ड बहुत कम थी एग्रीकल्चरल
10:06:57होल्डिंग्स फ्रेगमैन थी और मनी लैंडर्स का
10:07:00शिकंजा और इकोनामी पर बना हुआ था इसके साथ
10:07:04ही एग्रीकल्चर में इन्वेस्टमेंट तो
10:07:06उन्होंने ना के बराबर किया था
10:07:09दम शब्दों में कहें तो देश पर काल यानी की
10:07:12फेम का खतरा लगातार मंडरा रहा था इस
10:07:15स्थिति से निकालने के लिए देश को कई साल ग
10:07:18गए और एग्रीकल्चर की कुछ समस्या जो
10:07:20ब्रिटिश लिगसी हैं अभी तक बनी हुई हैं
10:07:24इंडस्ट्रियल सेक्टर का हाल भी कुछ ऐसा ही
10:07:26था इंडियन इंडस्ट्रीज का लोपसाइडेड
10:07:29डेवलपमेंट हुआ था प्रोडक्शन टेक्निक्स
10:07:32बहुत ही कम थी इंडस्ट्रियल वर्कर्स की
10:07:34हालात भी कुछ खास अच्छी नहीं थी इसके
10:07:37अलावा इंडस्ट्रीज पर ब्रिटिश फाइनेंस
10:07:39कैपिटल का दबदबा अभी भी बना हुआ था
10:07:42ब्रिटिश इंडिया को लो पर कैपिटा इनकम वाला
10:07:45गरीब देश बना कर चले गए थे एवरेज इंडियन
10:07:49इनकम कुछ इस तरह
10:07:53फोर्ट कर सकते थे वह भी इस शर्ट पर के
10:07:57कपड़े की कोई डिमांड ना हो सर के ऊपर छठ
10:08:00भी ना हो और किसी तरह का कोई एम्यूजमेंट
10:08:02या रीक्रिएशन तो भूल ही जो
10:08:05इस तरह आजादी के समय इंडिया को ब्रिटिश
10:08:08लिगसी के रूप में वर्षों के कॉलोनियल
10:08:10एक्सप्लोइटेशन के नीचे डाबी इकोनामी और
10:08:13गाइड अंदर डेवलपमेंट मिलता है
10:08:16कंक्लुजन
10:08:21दोस्तों हम का सकते हैं की ब्रिटिश
10:08:24कॉलोनियल रूल का सबसे बड़ा प्रभाव इंडियन
10:08:27इकोनामी पर ही दिखता है यही वजह थी की
10:08:30इंडियन
10:08:31नेशनलिस्टरीना वेल्थ की थ्योरी से
10:08:33कॉलोनियल रूल को एक्सपोज करने की कोशिश
10:08:35करते हैं
10:08:37और इंडिया में इकोनामिक नेशनलिज्म की
10:08:40शुरुआत होती है
10:08:41कॉलोनियल रूल एक बड़ी वजह थी की इंडिया
10:08:44में इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन नहीं हो पाया
10:08:46इंडियन एग्रीकल्चर और इंडस्ट्रीज के
10:08:49बैकवार्डनेस के लिए भी कॉलोनियल पॉलिसीज
10:08:52ही रिस्पांसिबल थी
10:08:53चार्ट एक्ट इन रेगुलेशन एक्ट
10:08:58दोस्तों जैसा की हम देख चुके हैं की 1764
10:09:01में हुई बैटल ऑफ बक्सर के बाद ईस्ट इंडिया
10:09:04कंपनी को बंगाल बिहार और उड़ीसा की दीवानी
10:09:07मिल गई थी इसके बाद
10:09:091765 में बंगाल में ड्यूल सिस्टम ऑफ
10:09:13गवर्नमेंट को इंट्रोड्यूस किया गया था
10:09:14जिसके तहत कंपनी के पास रिवेन्यू कलेक्ट
10:09:17करने का राइट राहत है लेकिन
10:09:20एडमिनिस्ट्रेशन के रिस्पांसिबिलिटी नवाब
10:09:22की रहती है इस सिस्टम के करण कंपनी के पास
10:09:26बिना किसी रिस्पांसिबिलिटी के पुरी
10:09:28अथॉरिटी ए चुकी थी इसका रिजल्ट यह होता है
10:09:31की कंपनी के सर्वेंट में करप्शन बहुत
10:09:33ज्यादा बाढ़ जाता है और वो अपने फायदे के
10:09:35लिए प्राइवेट ट्रेड में बीजी रहने लगता
10:09:37हैं इसके साथ ही रिवेन्यू कलेक्शन की वजह
10:09:41से बेसिन ट्री का भी शोषण होने लगता है और
10:09:44इसके ऊपर से 1772 में कंपनी करती है जबकि
10:09:49उसके एम्पलाइज दिन रात फ्लैश कर रहे थे
10:09:52ऐसी सिचुएशन में ब्रिटिश गवर्नमेंट फैसला
10:09:55करती है की कंपनी के अफेयर्स को रेगुलेट
10:09:58करने के लिए अब उसे ही कोई कम उठाना
10:10:00पड़ेगा
10:10:02इस दिशा में सबसे पहले कम होता है 1773 का
10:10:06रेगुलेटिंग एक्ट इसके बाद धीरे-धीरे
10:10:09कंट्रोल इन लॉस का नंबर बढ़ाने लगता है आई
10:10:12सबसे पहले रेगुलेटिंग एक्ट के प्रोविजंस
10:10:15को समझते हैं
10:10:20रेगुलेटिंग एक्ट 1773
10:10:25दोस्तों इस एक्ट के थ्रू ब्रिटिश कैबिनेट
10:10:28पहले बार इंडिया में कंपनी के अफेयर्स पर
10:10:30अपना कंट्रोल एस्टेब्लिश करती है यह
10:10:33गवर्नर ऑफ बंगाल की पोस्ट को गवर्नर जनरल
10:10:36ऑफ बंगाल में चेंज कर देता है इसके अलावा
10:10:39बंगाल की एडमिनिस्ट्रेशन के लिए गवर्नर
10:10:42जनरल की कर मेंबर वाली काउंसिल का
10:10:44प्रोविजन रखा जाता है वारेन हेस्टिंग
10:10:47बंगाल के पहले गवर्नर जनरल बनते हैं
10:10:50रेगुलेटिंग एक्ट के अनुसार मुंबई और
10:10:52मद्रास के गवर्नर को बंगाल के गवर्नर जनरल
10:10:55के अंदर कम करना होता है इसके साथ ही
10:10:58कोलकाता में ओरिजिनल और अपेलत जूरिडिक्शन
10:11:01वाला सुप्रीम कोर्ट एस्टेब्लिश करने का
10:11:03प्रोविजन भी था जिसमें एक के जस्टिस के
10:11:06साथ तीन जज को अप्वॉइंट किया जाना था
10:11:09कंपनी के डायरेक्टर्स को रिवेन्यू अफेयर्स
10:11:12और सिविल और मिलिट्री एडमिनिस्ट्रेशन से
10:11:14रिलेटेड सभी को रेस्पॉन्डेंट्स ब्रिटिश
10:11:17गवर्नमेंट के साथ शेर करने के लिए भी कहा
10:11:19गया था
10:11:25लेकिन इसमें बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिलती
10:11:28और 1784 में एक और एक्ट पास करना पड़ता है
10:11:36विच इंडिया एक्ट 1784
10:11:40बिट्स इंडिया एक्ट ड्यूल सिस्टम को
10:11:42इंट्रोड्यूस करता है यानी की कंपनी के साथ
10:11:45अब ब्रिटिश गवर्मेंट का कंट्रोल भी इंडियन
10:11:48एडमिनिस्ट्रेशन पर एस्टेब्लिश किया जाता
10:11:50है इंडिया में कंपनी की टेरिटोरियल
10:11:52पोजीशंस को एक्ट में ब्रिटिश पजेशन बोला
10:11:55जाता है इस तरह कंपनी अब स्टेट का एक
10:11:58सबोर्डिनेट डिपार्मेंट बन जाता है लेकिन
10:12:00कमर्शियल एक्टिविटीज और दे तू दे
10:12:03एडमिनिस्ट्रेशन पर कंपनी का अपना कंट्रोल
10:12:05बना राहत है ड्यूल सिस्टम के तहत 1784 का
10:12:09यह एक्ट बोर्ड ऑफ कंट्रोल की
10:12:11एस्टेब्लिशमेंट करता है बोर्ड ऑफ कंट्रोल
10:12:13का कम कंपनी के सिविल मिलिट्री और
10:12:15रिवेन्यू अफेयर्स पर कंट्रोल करना था
10:12:18चांसलर ऑफ एक्स चेकर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट
10:12:21और क्राउन द्वारा अपॉइंटेड प्रिवी काउंसिल
10:12:23के कर मेंबर्स इसका हिस्सा थे इसके अलावा
10:12:25गवर्नर जनरल की काउंसिल की स्ट्रैंथ को 4
10:12:28से घटकर 3 मेंबर्स कर दिया जाता है जिसमें
10:12:31एक मेंबर कमांडर इन के को रखा जाता है साथ
10:12:35ही मुंबई और मद्रास की प्रेसिडेंसेस को
10:12:37बंगाल के गवर्नर जनरल का सबोर्डिनेट बना
10:12:39दिया जाता है
10:12:51चार्ट एक्ट 1793
10:12:55दोस्तों ईस्ट इंडिया कंपनी को इंडिया के
10:12:58साथ ट्रेड करने के लिए ब्रिटिश गवर्मेंट
10:13:00से चार्ट मिला था जिसके तहत पूर्वी ट्रेड
10:13:04में इसकी मोनोपोली एस्टेब्लिश की गई थी
10:13:061793 का चार्ट एक्ट इसी चार्ट को और 20
10:13:10साल के लिए रिन्यू कर देता है इस एक्ट के
10:13:13थ्रू गवर्नर जनरल को काउंसिल के डिसीजन को
10:13:16ओवरराइड करने की पावर भी दी जाति है इसमें
10:13:19एक प्रोविजन यह भी होता है की सभी सीनरी
10:13:21ऑफिशल जैसे की गवर्नर जनरल गवर्नर और
10:13:24कमांडर इन के की अपॉइंटमेंट के लिए रॉयल
10:13:27अप्रूवल लेना मैंडेटरी होगा इसके अलावा
10:13:30एक्ट में बोर्ड ऑफ कंट्रोल के मेंबर्स और
10:13:33उसके पूरे स्टाफ का खर्चा अब इंडियन
10:13:35रिवॉल्यूशन से उठा जान का प्रावधान था
10:13:381793 का यह चार्ट एक्ट कंपनी के द्वारा
10:13:41ब्रिटिश गवर्नमेंट को एनुअल 5 लाख पाउंड
10:13:45देने का प्रोविजन भी करता है 20 साल बाद
10:13:48जब इस चार्ट के एक्सपायर होने का समय होता
10:13:50है तब नेक्स्ट चार्ट एक्ट पास किया जाता
10:13:52है
10:14:021813 का चार्ट एक्ट कई मीना में एक
10:14:05लैंडमार्क चार्ट एक्ट इंग्लिश ट्रेडर्स इस
10:14:08समय डिमांड करने लगे थे की उन्हें भी
10:14:10इंडियन ट्रेडमैन शेर मिलन चाहिए यानी की
10:14:13वो ईस्ट इंडिया कंपनी की मोनोपोली का
10:14:16विरोध कर रहे थे इसके पीछे दो करण थे पहले
10:14:19तो लेजर फेयर की स्पिरिट और दूसरा
10:14:21नेपोलियन का कॉन्टिनेंटल सिस्टम जिसके तहत
10:14:24बाकी यूरोपियन पूछ ब्रिटेन के लिए क्लोज
10:14:27कर दिए गए थे इसलिए ब्रिटिश ट्रेडर्स
10:14:30चाहते थे की इंडियन ट्रेड को सभी के लिए
10:14:32ओपन कर दिया जाए इनकी डिमांड्स को ध्यान
10:14:35में रखते हुए ब्रिटिश गवर्नमेंट 1813 का
10:14:38चार्ट एक्ट पास करती है जिसके तहत कंपनी
10:14:42को खत्म कर दिया जाता है लेकिन चीन के साथ
10:14:45और ओवरऑल टी यानी की चाय के ट्रेड में
10:14:48उसकी मोनोपोली बनी रहने दी जाति है साथ ही
10:14:51इंडियन टेरिटरीज और रिवेन्यू को कंपनी और
10:14:5420 साल तक रिटन कर शक्ति थी लेकिन क्राउन
10:14:57की सॉवरेन्टी के अंदर रहते हुए बोर्ड ऑफ
10:15:00कंट्रोल की पावर और ज्यादा बड़ा दी जाति
10:15:02हैं इस एक्ट में इंडिया में एजुकेशन को
10:15:06प्रमोट करने के लिए एनुअल 1 लाख रुपए की
10:15:09ग्रैंड का प्रोफेशन भी था क्रिश्चियन
10:15:12मिशनरीज को भी इंडियन आने और अपना रिलिजन
10:15:15करने की परमिशन दे दी जाति है दोस्तों
10:15:171813 के चार्ट एक्ट के बाद फिर से 20 साल
10:15:21बाद अगला चार्ट एक्ट पास होता है
10:15:26चार्ट एक्ट 1833
10:15:291833 के चार्ट एक्ट में कंपनी को टेरिटरीज
10:15:33और रिवेन्यू कलेक्शन पर मिली 20 साल की
10:15:35लेज को फरदर एक्सटेंड कर दिया जाता है
10:15:38लेकिन चीन और चाय के ट्रेड पर कंपनी की
10:15:41मोनोपोली को इस बार और कर दिया जाता है
10:15:44इसके अलावा यूरोपियन इमीग्रेशन और इंडिया
10:15:47में प्रॉपर्टी के एक्विजिशन पर सभी
10:15:49रिस्ट्रिक्शंस हटा दी जाति हैं जिससे
10:15:52यूरोपियंस द्वारा इंडिया का कॉलोनाइजेशन
10:15:54और तेजी से बढ़ता है
10:15:571833 का यह एक्ट गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल की
10:16:00पोस्ट को गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया की पोस्ट
10:16:03में चेंज कर देता है और उसको कंपनी के सभी
10:16:06सिविल और मिलिट्री अफेयर्स को कंट्रोल और
10:16:09डायरेक्ट करने की पावर दी दी जाति है सभी
10:16:12रेवेन्यू भी गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया की
10:16:14अथॉरिटी में रेस किया जान थे और
10:16:16एक्सपेंडिचर पर भी पुरी तरह उसका कंट्रोल
10:16:19एस्टेब्लिश कर दिया जाता है
10:16:25इंडियन लॉस के कंसोलिडेशन और कोडिफिकेशन
10:16:28के लिए एक डॉ कमीशन का प्रोविजन भी इस
10:16:31एक्ट में था एक्ट गवर्नर जनरल की काउंसिल
10:16:34में एक फोर्थ मेंबर भी एड करता है जो की
10:16:37डॉ मेकिंग में एक लीगल एक्सपर्ट हो इसे
10:16:40लोन मेंबर भी कहा जाता है पहले बार लॉर्ड
10:16:43मौली ये पोजीशन लेते हैं
10:16:45इसके साथ ही मुंबई और मद्रास गवर्नमेंट की
10:16:48लेजिसलेटिव पावर्स पुरी तरह खत्म कर दी
10:16:51जाति हैं अब वो सिर्फ गवर्नर जनरल को
10:16:54प्रपोज भेज सकते थे फाइनल डिसीजन लेने का
10:16:57राइट सिर्फ गवर्नर जनरल के पास ही होता है
10:17:02एडमिनिस्ट्रेशन को डिलीवरी अबॉलिश करने के
10:17:05स्टेप्स लेने के लिए भी कहता है आई अब
10:17:07नेक्स्ट चार्ट एक्ट के प्रोविजंस को समझते
10:17:10हैं
10:17:12चार्ट एक्ट 1853
10:17:161853 का चार्ट एक्ट डिसाइड करता है की जब
10:17:20तक पार्लियामेंट कोई और कानून नहीं बनाता
10:17:22तब तक इंडियन टेरिटरी का पोजीशन कंपनी के
10:17:26पास ही रहेगा यानी पहले बार लेज को 20 और
10:17:29सालों के लिए ऑटोमेटेकली एक्सटेंड नहीं
10:17:32किया जाता इसके अलावा सर्विसेज पर से
10:17:34कंपनी का पैठनिज खत्म कर दिया जाता है
10:17:37मतलब अब कंपनी अपनी पसंद से सर्विसेज में
10:17:40अपॉइंटमेंट नहीं कर शक्ति थी बल्कि इसके
10:17:43लिए ओपन कंपटीशन का प्रोबेशन किया जाता है
10:17:45डॉ मेंबर को गवर्नर जनरल की एग्जीक्यूटिव
10:17:49काउंसिल का फूल मेंबर बना दिया जाता है
10:17:511853 का चार्ट एक्ट गवर्नमेंट के
10:17:54एग्जीक्यूटिव और लेजिसलेटिव फंक्शंस को भी
10:17:57सेपरेट करता है लेजिसलेटिव परपोज के लिए
10:18:00सिक्स एडिशनल मेंबर्स को शामिल किया जाता
10:18:02है इस लेजिसलेटिव विंग को इंडियन
10:18:05लेजिसलेटिव काउंसिल बोला जाता है और इसमें
10:18:08लोकल रिप्रेजेंटेशन को भी इंट्रोड्यूस
10:18:10किया जाता है लेकिन फाइनल डॉ के लिए
10:18:13गवर्नर जनरल की एसेंट की जरूर होती है और
10:18:16वह लेजिसलेटिव काउंसिल किसी भी बिल को कर
10:18:20सकता था
10:18:21दोस्तों 1853 का चार्ट एक्ट आखिरी चार्ट
10:18:25एक्ट क्योंकि इसकी कर साल बाद ही 1857 की
10:18:29क्रांति हो जाति है और उसके बाद पास होता
10:18:31है गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858
10:18:38गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858
10:18:43रिवॉल्ट वेट 357 कंपनी के एडमिनिस्ट्रेशन
10:18:46को पुरी तरह एक्सपोज कर देता है उससे पहले
10:18:50तक इंडिया में मेल एडमिनिस्ट्रेशन के लिए
10:18:52कोई अकाउंटबल नहीं था ब्रिटिश गवर्नमेंट
10:18:55डिसाइड करती है की इस नॉर्मली को
10:18:58रेक्टिफाई करने का समय ए गया है और ये
10:19:00ब्रिटिश गवर्मेंट के लिए सही मौका था
10:19:03कंपनी से इंडियन टेरिटरी की पोजीशन को
10:19:05लेने का 1858 का एक्ट पिट्स इंडिया एक्ट
10:19:09द्वारा इंट्रोड्यूस ड्यूल सिस्टम का और कर
10:19:12देता है अब इंडिया को कंपनी नहीं बल्कि
10:19:15क्राउन के नाम पर गवन किया जाना था इसके
10:19:18लिए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट और उसकी 15 मेंबर
10:19:21की काउंसलर पॉइंट की जाति है
10:19:25अगस्त 1858 में लॉर्ड स्टेनली पहले
10:19:30सेक्रेटरी ऑफ स्टेट बनते हैं
10:19:32गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया के टाइटल को
10:19:35रिप्लेस करके वायसराय कर दिया जाता है
10:19:37जिसका मतलब था क्राउन का इंजन और वायसराय
10:19:41को डायरेक्ट ब्रिटिश गवर्नमेंट अप्वॉइंट
10:19:43करती थी इसके साथ लॉर्ड कैनिंग इंडिया के
10:19:47पहले वायसराय बनते हैं लेकिन दोस्तों
10:19:50समझना वाली बात ये है की इस मूवमेंट पर
10:19:53क्राउन के द्वारा पावर सुूम करना बस एक
10:19:55फॉर्मेलिटी ही थी जैसा की हम देख चुके हैं
10:19:58काफी पहले से ब्रिटिश गवर्नमेंट ही इंडियन
10:20:01अफेयर्स को रेगुलेट कर रही थी का सकते हैं
10:20:03की इस एक्ट ने ऑलरेडी डेड हॉर्स यानी की
10:20:06कंपनी को एक डिसेंट बेरियल देने का कम
10:20:09किया था
10:20:13कंक्लुजन
10:20:16दोस्तों यह थी 1858 तक पास किया गए
10:20:20इंपॉर्टेंट एक्ट्स की समरी जिसमें हमने
10:20:22देखा की कैसे ग्रैजुअली ब्रिटिश गवर्नमेंट
10:20:25ईस्ट इंडिया कंपनी से इंडियन अंपायर को
10:20:28कैप्चर कर लेती है अपने नेक्स्ट वीडियो
10:20:31में हम 1858 के बाद ब्रिटिश गवर्मेंट
10:20:34द्वारा पास किया गए एक्ट्स को समझेंगे
10:20:39आफ्टर 1858 तिल इंडिपेंडेंस
10:20:42दोस्तों अपनी पिछली वीडियो में हमने 1858
10:20:46तक के रेगुलेशंस और चार्ट एक्ट्स को
10:20:48डिस्कस किया था आज हम इसके आगे के एक्ट के
10:20:51बड़े में बात करेंगे जैसा की हम देख चुके
10:20:54हैं की 1858 के एक्ट से कंपनी के रूल का
10:20:58एंड हो जाता है और इंडिया डायरेक्ट
10:21:01ग्राउंड के एडमिनिस्ट्रेशन में ए जाता है
10:21:03इसके बाद पहले एक्ट पास होता है 1861 में
10:21:06जिसे इंडियन काउंसिल एक्ट 1861 बोला जाता
10:21:10है
10:21:15इंडियन काउंसिल एक्ट 1861
10:21:20इंडियन काउंसिल एक्ट 1861 ब्रिटिश
10:21:23पार्लियामेंट का एक एक्ट था जिसने गवर्नर
10:21:26जनरल के काउंसिल में सिग्निफिकेंट चेंज
10:21:29इंट्रोड्यूस किया थे
10:21:30काउंसिल के एग्जीक्यूटिव फंक्शंस के लिए
10:21:33फिफ्थ मेंबर को एड किया जाता है यह फाइव
10:21:36मेंबर्स होम मिलिट्री डॉ रिवेन्यू और
10:21:39फाइनेंस देखते थे इस एक्ट के थ्रू
10:21:42पोर्टफोलियो सिस्टम भी इंट्रोड्यूस किया
10:21:45जाता है जो उसे समय के वायसराय लॉर्ड
10:21:47कैनिंग का आइडिया था
10:21:50इस सिस्टम में एच मेंबर को पर्टिकुलर
10:21:53डिपार्मेंट का पोर्टफोलियो असाइन किया
10:21:55जाता है
10:22:05इन्हें खुद गवर्नर जनरल नॉमिनेट करते थे
10:22:08इनका अपॉइंटमेंट 2 साल के लिए किया जाता
10:22:11था और 12 में से कम से कम हाफ मेंबर्स का
10:22:14नॉन ऑफिशल होना जरूरी था यहां ऑफिशल का
10:22:18मतलब था ऐसे लोग जो गवर्नमेंट सर्विसेज का
10:22:21पाठ नहीं थे और इसमें यूरोपियंस और नेटिव
10:22:24इंडियन दोनों ही शामिल थे
10:22:27यह एक्ट मुंबई और मद्रास की गवर्नर और
10:22:30उनकी काउंसिल की लेजिसलेटिव पावर्स को
10:22:32रिस्टोर कर देता है जिन्हें 1833 के चार्ट
10:22:36एक्ट ने खत्म कर दिया था लेकिन बिना
10:22:39गवर्नर की परमिशन की कोई पास नहीं हो सकता
10:22:41था इसके साथ ही वायसराय के पास काउंसिल के
10:22:45किसी भी डिसीजन को ओवरराइड करने की पावर
10:22:48भी थी इमरजेंसी के दौरान वायसराय को
10:22:51ऑर्डिनेंस पास करने की पावर भी दी जाति है
10:22:54इस एक्ट के अंदर बाकी प्रोविंस में भी
10:22:57लेजिसलेटिव काउंसिल के फॉर्मेशन का
10:22:59प्रोविजन था जिसके तहत 1862 में बंगाल
10:23:031886 में नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रोविंस
10:23:07और 1897 में पंजाब और बर्मा में
10:23:10लेजिसलेटिव काउंसिल का फॉर्मेशन होता है
10:23:12इसके अलावा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट किसी भी
10:23:16लेजिसलेशन को डिसएप्रूव कर सकता था मतलब
10:23:19लेजिसलेशन पर अल्टीमेट पावर ब्रिटेन में
10:23:22बैठे सेक्रेटरी के हाथ में थे
10:23:25200 इस तरह 1861 के एक्ट ने लेजिसलेटिव
10:23:29काउंसिल को इन लाज तो कर दिया लेकिन उनका
10:23:32रोल लिमिटेड ही था यह मेली एडवाइजरी था और
10:23:36फाइनेंस यानी की बजट के ऊपर कोई भी
10:23:38डिस्कशन तक करना अलाउड नहीं था
10:23:42जो 1892 में इंट्रोड्यूस किया गया था
10:23:49इंडियन काउंसिल एक्ट 1892
10:23:541885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की
10:23:57फाउंडेशन हो चुकी थी और कांग्रेस की सबसे
10:23:59बड़ी डिमांड लेजिसलेटिव काउंसिल का
10:24:01रिफॉर्म करना ही थी इसी डिमांड को ध्यान
10:24:04में रखते हुए ब्रिटिश पार्लियामेंट इंडियन
10:24:07काउंसिल एक्ट 1892 भास्कर करती है एक्ट के
10:24:10थ्रू गवर्नर जनरल की लेजिसलेटिव काउंसिल
10:24:12को फरदर इन लॉज किया जाता है साथ ही
10:24:16सेंट्रल और प्रोविंशियल दोनों ही जगह है
10:24:18नॉन ऑफिशल मेंबर्स की संख्या भी बड़ा दी
10:24:21जाति है यूनिवर्सिटी जिला बोर्ड्स
10:24:25म्युनिसिपालिटीज जमींदारा ट्रेड बॉडीज और
10:24:28चैंबर्स ऑफ कॉमर्स को प्रोविंशियल काउंसिल
10:24:31के लिए मेंबर्स रिकमेंड करने की पावर दी
10:24:33जाति है इस तरह यह प्रिंसिपल ऑफ
10:24:37रिप्रेजेंटेशन को इंट्रोड्यूस करता है
10:24:45इनडायरेक्ट इलेक्शन के एलिमेंट को
10:24:48एक्सेप्ट कर लिया गया था इसके साथ ही
10:24:50लेजिस्लेटर्स को बजट पर डिस्कशन करने की
10:24:53पावर दी जाति है और वो कुछ लिमिट्स के
10:24:56अंदर पब्लिक इंटरेस्ट के मैटर्स पर
10:24:58एग्जीक्यूटिव से क्वेश्चन भी कर सकते थे
10:25:00हालांकि इसके लिए उन्हें छह दिन पहले
10:25:03नोटिस देना होता था दोस्तों 1892 का
10:25:06काउंसलिंग कांग्रेस के लिए एक अचीवमेंट
10:25:09जरूर था क्योंकि उनकी लेजिसलेटिव काउंसिल
10:25:12को इन बड़े करने की डिमांड इसने एक्सेप्ट
10:25:14कर ली थी लेकिन अभी भी यह पुरी तरह
10:25:17रिप्रेजेंटेटिव बॉडी नहीं थी और ना ही
10:25:20उनके पास कोई सब्सटेंशियल पावर्स थी इसलिए
10:25:23फुर्थर रिफॉर्म्स की डिमांड बनी रहती है
10:25:25और अगला रिफॉर्मेट 1909 में पास होता है
10:25:32इंडियन काउंसिल एक्ट 1909
10:25:361909 के काउंसिल एक्ट को मौली मिंटो
10:25:40रिफॉर्म्स के नाम से भी जाना जाता है यह
10:25:42इंडिया की गवर्नेंस में रिप्रेजेंटेटिव और
10:25:45पॉपुलर एलिमेंट लाने का पहले ब्रिटिश
10:25:47अटेंप्ट था
10:25:49इसके थ्रू इंपीरियल लेजिसलेटिव काउंसिल की
10:25:52स्ट्रैंथ को 16 मेंबर्स से इंक्रीज करके
10:25:55अब 60 मेंबर्स कर दिया जाता है
10:26:00इंडियन मेंबर को शामिल किया जाता है
10:26:03एग्जीक्यूटिव काउंसिल को जॉइन करने वाले
10:26:05पहले इंडियन सत्येंद्र प्रसाद सिंह बनते
10:26:08हैं उन्होंने लौंग मेंबर के पद पर काउंसिल
10:26:11को जॉइन किया था प्रोविंशियल एग्जीक्यूटिव
10:26:14काउंसिल के मेंबर्स की संख्या भी इंक्रीज
10:26:16कर दी जाति है
10:26:18है इसके अलावा सेंट्रल और प्रोविंशियल
10:26:20लेजिसलेटिव काउंसिल को पहले से ज्यादा
10:26:22पावर्स दी जाति हैं
10:26:24प्रोविंशियल लेजिसलेटिव काउंसिल में नॉन
10:26:27ऑफिशल मेंबर्स की मेजॉरिटी हो जाति है
10:26:29लेजिसलेटिव काउंसिल के मेंबर अब बजट पर
10:26:32डिस्कशन के साथ रेजोल्यूशन भी पास कर सकते
10:26:35थे और सप्लीमेंट्री क्वेश्चन पूछने का
10:26:38राइट भी उन्हें दिया जाता है
10:26:411909 का एक्ट मुस्लिम के लिए सेपरेट
10:26:44इलेक्ट्रिक का प्रोविजन भी करता है साथ ही
10:26:47इंडियन अफेयर्स के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की
10:26:49काउंसिल में भी दो इंडियन को नॉमिनेट किया
10:26:52जाता है इस तरह मौली मिंटू रिफॉर्म्स एक
10:26:55तरफ तो काउंसिल रिफॉर्म्स की बात करते हैं
10:26:57वहीं दूसरी तरफ सेपरेट इलेक्टरेट जैसे
10:27:01प्रोविजंस की हेल्प से डिवाइड और रूल की
10:27:03पॉलिसी को आगे लेकर जाते हैं इसके 10 साल
10:27:06बाद ब्रिटिश गवर्नमेंट अगला रिफॉर्म एक्ट
10:27:08पास करती है
10:27:17दोस्तों 1990
10:27:20चिप्स पर रिफॉर्म्स पर बेस था अगस्त 1917
10:27:24में पहले बार ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
10:27:26डिक्लेअर किया था की उसका ऑब्जेक्टिव
10:27:28इंडिया में ग्रैजुअली रिस्पांसिबल
10:27:31गवर्नमेंट इंट्रोड्यूस करना है ये एक्ट इस
10:27:34दिशा में कम समझा जा सकता है इस एक्ट ने
10:27:36सेंटर में इंडियन लेजिसलेटिव काउंसिल को
10:27:39रिप्लेस करके बाय कैमररल सिस्टम
10:27:41इंट्रोड्यूस किया था जिसमें काउंसिल ऑफ
10:27:43स्टेट यानी की यहां पर हाउस और लेजिसलेटिव
10:27:46असेंबली यानी की लोअर हाउस था दोनों ही
10:27:49हाउसेस में मेजॉरिटी डायरेक्टली इलेक्ट
10:27:52मेंबर्स की होती थी यानी की 1990 का एक्ट
10:27:55पहले बार डायरेक्ट इलेक्शंस का प्रोविजन
10:27:58करता है हालांकि फ्रेंचाइजी वोटिंग का
10:28:02राइट बहुत ही लिमिटेड पापुलेशन के पास ही
10:28:04था यह प्रॉपर्टी टैक्स और एजुकेशन जैसी
10:28:07क्वालिफिकेशन पर बेस था
10:28:09एक्ट में कम्युनल रिप्रेजेंटेशन के
10:28:11प्रिंसिपल को भी एक्सटेंड किया गया था और
10:28:14मुस्लिम के अलावा सिक्स क्रिश्चियन और
10:28:16एंग्लो इंडियन को भी सेपरेट इलेक्टरेट
10:28:19प्रोवाइड कर दिए गए थे
10:28:21है इसके अलावा प्रोविंस में दी की
10:28:24इंट्रोड्यूस की गई थी जिसके तहत
10:28:26सब्जेक्ट्स को दो लिस्ट में डिवाइड किया
10:28:28गया था रिजर्व्ड और ट्रांसफर
10:28:31रिजर्व्ड लिस्ट में आने वाले सब्जेक्ट्स
10:28:34को गवर्नर द्वारा एडमिनिस्टर किया जाना था
10:28:36इसमें लायन ऑर्डर फाइनेंस लैंड रिवेन्यू
10:28:39और इरिगेशन जैसे सब्जेक्ट्स को रखा गया था
10:28:42वहीं ट्रांसफर सब्जेक्ट्स को मिनिस्टर्स
10:28:45एडमिनिस्टर करने वाले थे जिन्हें
10:28:47लेजिसलेटिव काउंसिल के इलेक्ट मेंबर्स के
10:28:50बीच से नॉमिनेट किया जाना था इसमें
10:28:53एजुकेशन इंडस्ट्री एग्रीकल्चर और एक्सिस
10:28:57जैसे सब्जेक्ट्स थे प्रोविंस में
10:28:59कांस्टीट्यूशनल मशीनरी फूल होने की
10:29:01सिचुएशन में गवर्नर ट्रांसफर सब्जेक्ट्स
10:29:04का एडमिनिस्ट्रेशन भी अपने अंदर ले सकता
10:29:07था पहले बार प्रोविंशियल और सेंट्रल बजट
10:29:10को भी सेपरेट किया गया था यानी की
10:29:12प्रोविंस को अब खुद का बजट बनाने की पावर
10:29:15मिल गई थी एक्ट की एक प्रोविजन के अनुसार
10:29:18इंडिया के लिए हाय कमिश्नर को अप्वॉइंट
10:29:21किया बन जाता है जो लंदन में 6 साल तक इस
10:29:24ऑफिस पर रहेगा और उसका कम यूरोप में
10:29:27इंडियन ट्रेड को देखना होगा कुछ फंक्शंस
10:29:30जिन्हें पहले सेक्रेटरी ऑफ स्टेट देखते थे
10:29:32अब हाय कमिश्नर को ट्रांसफर कर दिए जाते
10:29:34हैं एक्ट में यह फैसला भी किया जाता है की
10:29:37सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जिसे अभी तक इंडियन
10:29:40रिवेन्यू से पे किया जाता था अब ब्रिटिश
10:29:42एक्स चेकर से उसकी पेमेंट होगी इससे होम
10:29:46चार्ज कम होते हैं इसके साथ दोस्तों 1919
10:29:49के इस एक्ट की वजह से इंडियन लीडर्स को
10:29:52पहले बार कांस्टीट्यूशनल सेटअप में कम
10:29:54करने का कुछ एडमिनिस्ट्रेटिव एक्सपीरियंस
10:29:56जरूर मिला था लेकिन रिस्पांसिबल गवर्नमेंट
10:30:00की डिमांड को पूरा करने से अभी ये बहुत
10:30:02दूर था इंडियन लेजिसलेच्योर अभी भी एक नॉन
10:30:06सावरेन लव मेकिंग बॉडी थी| और गवर्मेंट
10:30:09एक्टिविटी के सभी अफेयर्स में
10:30:11एग्जीक्यूटिव के सामने पावर एस बनी हुई थी
10:30:13दोस्तों
10:30:151990 के एक्ट में एक प्रोविजन यह भी था की
10:30:1910 साल
10:30:21पॉइंट की जाएगी जो 1990 के रिफॉर्म्स को
10:30:24इवेलुएट करेगी और आगे की रिफॉर्म्स के
10:30:26बड़े में सजेशन देगी
10:30:29है लेकिन नवंबर 1927 में यानी की शेड्यूल
10:30:32से 2 साल पहले ही इस कमीशन के अपॉइंटमेंट
10:30:35को अनाउंस कर दिया जाता है इंडियन
10:30:37स्टेट्यूटरी कमीशन जिसे उसके अध्यक्ष के
10:30:41नाम पर साइमन कमीशन भी कहा जाता है अपनी
10:30:44रिपोर्ट 1930 में सबमिट करती है इसके
10:30:48प्रपोजल्स पर डिस्कशन करने के लिए ब्रिटिश
10:30:50गवर्नमेंट तीन राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस
10:30:52ऑर्गेनाइजर करती है और उसके बाद एक
10:30:55रिपोर्ट तैयार होती है जिसके आधार पर 1935
10:30:59का एक्ट पास किया जाता है
10:31:03गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935
10:31:091935 के गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में
10:31:13451 क्लासेस और 15 शेड्यूल थे इसमें जो
10:31:17इंडिया फेडरेशन को एस्टेब्लिश करने की बात
10:31:19कहीं गई थी जिसके तहत गवर्नर प्रोविंस के
10:31:23कमिश्नर प्रोविंस और इंडियन प्रिंसली
10:31:26स्टेटस का एक यूनियन फॉर्म किया जाना था
10:31:28इसके साथ ही प्रोविंस में डायर की को खत्म
10:31:32कर दिया जाता है लेकिन सेंट्रल
10:31:34एग्जीक्यूटिव में इसे इंट्रोड्यूस किया
10:31:36जाता है इसमें सेंट्रल लेजिसलेटिव हाउसेस
10:31:39के बीच डेडलॉक की स्थिति में जॉइंट सेशन
10:31:42का प्रोविजन भी इंट्रोड्यूस किया जाता है
10:31:44इसके साथ ही लेजिसलेटिव सब्जेक्ट्स को तीन
10:31:48लिस्ट में डिवाइड किया जाता है फेडरल
10:31:51लिस्ट प्रोविंशियल लिस्ट
10:31:55पर लेजिसलेशन
10:31:59फेडरल लेजिसलेच्योर द्वारा पास बिल्कुल वे
10:32:02तू करने की पावर वायसराय के पास बनी रहती
10:32:04है प्रोविंस को ऑटोनॉमी दी जाति है और
10:32:07वहां फूली रिस्पांसिबल गवर्नमेंट को
10:32:09एस्टेब्लिश किया जाता है हालांकि कुछ
10:32:12सेफगार्ड भी रहते हैं प्रोविंशियल
10:32:14लेजिस्लेटर्स को भी फरदर एक्सपेंड किया
10:32:16जाता है मद्रास बॉम्बे बंगाल यूनाइटेड
10:32:19प्रोविंस बिहार और
10:32:21असेंबलीकैमरल लेजिस्लेटर्स एस्टेब्लिश
10:32:24करने का प्रोविजन भी इसमें शामिल था
10:32:26कम्युनल इलेक्ट्रोड के प्रिंसिपल को
10:32:28एक्सटेंड करते हुए डिप्रेस्ड क्लासेस
10:32:31वूमेन और लेबर क्लास के लिए भी इसका
10:32:34प्रोविजन कर दिया जाता है
10:32:361935 का एक्ट फ्रेंचाइजी को भी एक्सटेंड
10:32:39करता है टोटल पापुलेशन में लगभग 10% को अब
10:32:43वोटिंग राइट मिल जाता है एक्ट में फेडरल
10:32:46कोड का प्रोविजन भी था जिसे 1937 में
10:32:49एस्टेब्लिश किया जाता है
10:32:51है इसके पास ओरिजिनल और बैलेट पावर्स के
10:32:53साथ इंटरस्टेट डिस्प्यूट को सेटल करने की
10:32:56पावर भी थी इसके अलावा सेक्रेटरी ऑफ स्टेट
10:33:00की इंडियन काउंसिल को अबॉलिश कर दिया जाता
10:33:02है दोस्तों एक्ट में विजुलाइज जो इंडिया
10:33:06फेडरेशन तो कभी अस्तित्व में नहीं ए पता
10:33:08क्योंकि इंडिया की डिफरेंट पार्टी और
10:33:11स्पेशली प्रिंसली स्टेटस इसके अगेंस्ट हो
10:33:13गए थे फर्स्ट अप्रैल 1937 को प्रोविंशियल
10:33:17ऑटोनॉमी के प्रोविजन को इंप्लीमेंट कर
10:33:19दिया जाता है लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट कुछ
10:33:22माइनर अमेंडमेंट के साथ अभी भी 1990 के
10:33:26एक्ट के अकॉर्डिंग ही कम करती रहती है
10:33:291935 के एक्ट का ऑपरेटिव पार्ट आजादी
10:33:32मिलने तक यानी की 15th अगस्त 1947 तक
10:33:35फोर्स में राहत है यह कोशिश थी इंडिया को
10:33:39रिटर्न कॉन्स्टिट्यूशन देने की लेकिन इसके
10:33:42क्रिएशन में इंडियन को इंवॉल्व नहीं किया
10:33:44गया था इसके साथ ही इसमें अमेंडमेंट का
10:33:48राइट भी ब्रिटिश पार्लियामेंट को ही दिया
10:33:50गया था
10:33:51इंडिया में इस एक्ट की लगभग सभी सेक्शंस
10:33:53ने आलोचना की थी और कांग्रेस ने इसे पुरी
10:33:57तरह रिजेक्ट कर दिया था इसकी जगह कांग्रेस
10:34:00एडल्ट फ्रेंचाइजी पर आधारित
10:34:02कॉन्स्टिट्यूशन
10:34:09बने तक 1935 एक्ट के थ्रू ही इंडिया को
10:34:13गवर्नर किया जाता है और इंडियन
10:34:15कॉन्स्टिट्यूशन भी इसके काफी सारे
10:34:18प्रोविजंस को बर करता है
10:34:22कंक्लुजन
10:34:25दोस्तों इस तरह 1858 के बाद धीरे-धीरे
10:34:28इंडियन कांस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट हुए थे
10:34:31अलग-अलग एक्ट्स के द्वारा इंडिया में कुछ
10:34:34हद तक रिस्पांसिबल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट
10:34:37इंट्रोड्यूस की गई थी हालांकि पुरी तरह
10:34:39इसका फॉर्मेशन आजादी मिलने के बाद ही होता
10:34:42है फिर भी हम का सकते हैं की इन एक्ट्स के
10:34:46थ्रू इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन
10:34:51करते हैं जो आजादी के बाद इंडियन
10:34:54डेमोक्रेसी को सफल बनाने में काफी मदद
10:34:57करता है
10:34:59लोकल सेल्फ गवर्नमेंट
10:35:03दोस्तों इंडिया में एशिया टाइम से लोकल
10:35:06गवर्निंग बॉडीज देखने को मिलती हैं फिर
10:35:09चाहे वो मौर्य अंपायर के दौरान पाटलिपुत्र
10:35:12की सिटी काउंसिल हूं या फिर चोला अंपायर
10:35:14की विलेज असेंबलीज लोकल गवर्नमेंट
10:35:25ब्रिटिश रूल के समय शुरू हुआ था आज हम इसी
10:35:29को यानी ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के दौरान
10:35:31लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के डेवलपमेंट को
10:35:34डिटेल में देखने वाले हैं लेकिन उसे समझना
10:35:36से पहले यह जान लेना जरूरी है की आखिर
10:35:39ब्रिटिश ने इंडिया में लोकल गवर्निंग
10:35:41बॉडीज का डेवलपमेंट क्यों शुरू किया था तो
10:35:44आई जानते हैं
10:35:45रीजंस बिहाइंड डी ग्रोथ ऑफ लोकल बॉडीज
10:35:50बहुत से ऐसे फैक्टर्स थे जिनकी वजह से
10:35:52ब्रिटिश गवर्नमेंट इंडिया में लोकल बॉडीज
10:35:54को एस्टेब्लिश करने का डिसीजन लेती है
10:35:56इसमें सबसे पहले करण था ओवर सेंट्रलाइज की
10:36:00वजह से ए रही फाइनेंशियल डिफिकल्टी
10:36:041857 की क्रांति के बाद कंपनी पर
10:36:07फाइनेंशियल प्रेशर बहुत अधिक बाढ़ गया था
10:36:09ऐसे में डिसेंट्रलाइजेशन करना जरूरी हो
10:36:13गया था जिससे रोड और पब्लिक वर्क की
10:36:16रिस्पांसिबिलिटी लोकल बॉडीज को ट्रांसफर
10:36:18की जा सके और गवर्नमेंट को एडिशनल
10:36:21रिवेन्यू भी मिले इसके अलावा नेशनलिस्ट
10:36:24लीडर्स की भी डिमांड थी की बेसिक सिविक
10:36:27फैसेलिटीज में इंप्रूवमेंट किया जाए जो की
10:36:29लोकल बॉडीज के थ्रू ही बटर हो सकता था साथ
10:36:33ही कुछ ब्रिटिश पॉलिसी मार्क्स का यह भी
10:36:35मानना था की लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के साथ
10:36:37इंडियन को जोड़ने से ब्रिटिश सुप्रीमेसी
10:36:40भी अंडमान नहीं होगी और इंडियन में बढ़ते
10:36:43हुए पॉलिटिसाइजेशन को भी सीमित किया जा
10:36:46सकेगा इसके साथ ही लोकल वेलफेयर के लिए
10:36:49लोकल टैक्सिस का उसे होने से ऑलरेडी बर्डन
10:36:52सेंट्रल ट्रेजरी पर प्रेशर भी नहीं बनेगा
10:37:11डी बिगनिंग
10:37:14सबसे पहले लोकल बॉडीज प्रेसीडेंसी टाउन
10:37:17में इस टैबलेट की जाति है
10:37:191687 में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स ने मद्रास
10:37:22में कॉरपोरेशन सेटअप करने का ऑर्डर दिया
10:37:24था यह कोऑपरेशन ब्रिटिश और इंडियन मेंबर्स
10:37:28से मिलकर बनी थी और इसी सिटी में गढ़ हाल
10:37:30जय स्कूल एट सिटेरा बिल्ड करने के लिए
10:37:33टैक्स लवी करने की पावर दी गई थी लेकिन यह
10:37:37एक्सपेरिमेंट फेल हो जाता है क्योंकि
10:37:39रेजिडेंस डायरेक्ट टैक्स देने के लिए
10:37:41तैयार नहीं थे जी वजह से कॉरपोरेशन कोई भी
10:37:45प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पाती इसके बाद
10:37:4817-26 का चार्ट एक्ट कॉरपोरेशन की जगह
10:37:51मायर्स कोर्ट सेटअप करने का प्रोविजन करता
10:37:54है
10:37:57जुडिशल थी मद्रास के अलावा मुंबई और
10:38:01कोलकाता में भी सिमिलर मायर्स कोर्ट सेटअप
10:38:04किया जाते हैं इसके बाद 1793 का चार्ट
10:38:07एक्ट पहले बार म्युनिसिपल इंस्टीट्यूशंस
10:38:10को स्टेट्यूटरी बेसिस प्रोवाइड करता है
10:38:12इसमें गवर्नर जनरल को मार दी जाति है की
10:38:15वह प्रेसीडेंसी टोंस में जस्टिस ऑफ पीस को
10:38:18अप्वॉइंट कर सकते
10:38:21मीत करने स्कैवेंजिंग और रोड्स को रिपेयर
10:38:25करने के लिए हाउस और लेंस पर टैक्स लगाने
10:38:27की पावर दी गई थी इसके अलावा 1850 में
10:38:31एक्ट पास किया गया था जिसके बाद
10:38:33प्रेसिडेंट के अलावा दूसरे टोंस में भी
10:38:37म्युनिसिपल बॉडीज का डेवलपमेंट शुरू हो
10:38:39गया था इसमें म्युनिसिपल बॉडीज को
10:38:42इनडायरेक्ट टैक्स लगाने की पावर दी गई थी
10:38:44इसका फायदा उठाकर नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंस
10:38:47यानी की मॉडर्न अप और मुंबई के बहुत सारे
10:38:50डांस में म्युनिसिपल समिति सेटअप की गई थी
10:38:53प्रेसीडेंसी टाउन में रेंटल वैल्यू के
10:38:56फाइव परसेंट रेट पर हाउस टैक्स इंपोज किया
10:38:59गया था
10:39:04कॉरपोरेशन के मेंबर्स को सिलेक्ट करने का
10:39:07राइट भी दे दिया गया
10:39:08था लेकिन 1856 में यह सिचुएशन पुरी तरह
10:39:12रिवर्स हो जाति है क्योंकि बॉम्बे में
10:39:14एग्जीक्यूटिव पावर नॉमिनेटेड कमिश्नर के
10:39:17हाथों में कंसंट्रेट कर दी जाति है ऐसा ही
10:39:20प्रोसीजर मद्रास और कोलकाता में भी फॉलो
10:39:22होता है इसके बाद लोकल बॉडीज के इवोल्यूशन
10:39:25में एक बड़ा डेवलपमेंट 1870 में होता है
10:39:29आई इस डेवलपमेंट को डिटेल में समझते हैं
10:39:33न्यूज़ रेजोल्यूशन ऑफ 1870
10:39:361870 में वायसराय लॉर्ड मेयर एक
10:39:39रेजोल्यूशन पास करते हैं यह रेजोल्यूशन
10:39:42फाइनेंशियल डिसेंट्रलाइजेशन से रिलेटेड था
10:39:45एडमिनिस्ट्रेटिव कन्वीनियंस और फाइनेंशियल
10:39:48स्ट्रिजेंसी को देखते हुए इंपीरियल यानी
10:39:50की सेंट्रल गवर्नमेंट ने एडमिनिस्ट्रेशन
10:39:53के कुछ डिपार्टमेंट प्रोविंशियल गारमेंट्स
10:39:56को ट्रांसफर कर दिए थे जैसे की एजुकेशन
10:39:58मेडिकल सर्विसेज और रोड
10:40:01इसके लिए इंपीरियल गवर्नमेंट की तरफ से
10:40:04प्रोविंस को एनुअल ग्रैंड दिए जान थे साथी
10:40:07प्रोविंशियल गवर्मेंट को अपने बजट को
10:40:10बैलेंस करने के लिए लोकल टैक्सेशन का
10:40:12अधिकार भी दिया गया था
10:40:14लॉर्ड मियो के रेजोल्यूशन में कहा गया की
10:40:17एजुकेशन सैनिटेशन मेडिकल रिलीफ और लोकल
10:40:21वर्क के लिए देवोटेड फंड्स को सक्सेसफुली
10:40:24मैनेज करने के लिए लोकल इंटरेस्ट केयर और
10:40:27सुपरविजन बहुत ही जरूरी है खाने का मतलब
10:40:30ये हुआ की लोकल सेल्फ गवर्निंग
10:40:32इंस्टीट्यूशंस को स्ट्रेंजर करने की जरूर
10:40:34थी
10:40:35रेजोल्यूशन में आउटलाइन पॉलिसी को
10:40:38इंप्लीमेंट करने के लिए कई प्रोविंशियल
10:40:40गवर्नमेंट मऊ म्युनिसिपल एक्ट पास करती है
10:40:43बंगाल जिला बोर्ड सिस एक्ट 1871 और बंगाल
10:40:48में लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के लिए लिया गया
10:40:50पहले कम था सिमिलर एक्ट मद्रास नॉर्थवेस्ट
10:40:54प्रोविंस और पंजाब में भी पास होते हैं
10:41:01लोकल बॉडीज के लिए प्रोएक्टिव नजर आते हैं
10:41:05आई जानते हैं उनके बड़े में रेपिन्स
10:41:08रेजोल्यूशन ऑफ 1882
10:41:11लॉर्ड रिपन के समय एडमिनिस्ट्रेशन के
10:41:14हर्षविया में लिबरलाइजेशन देखने को मिलता
10:41:17है उनका 1882 का रेजोल्यूशन लोकल सेल्फ
10:41:21गवर्नमेंट के विकास में एक लैंडमार्क है
10:41:23लॉर्ड रिपन ने जब मायर्स रेजोल्यूशन के
10:41:26बाद लोकल बॉडीज की फील्ड में हुई
10:41:28प्रोग्रेस को रिव्यू किया तो बाय की लोकल
10:41:31रेट्स और सेसेस की मदद से एक बड़ी इनकम
10:41:34जेनरेट हो रही है और कुछ प्रोविंस ने इस
10:41:37इनकम की मैनेजमेंट को पुरी तरह लोकल बॉडीज
10:41:40को सोप हुआ है इस तरह म्युनिसिपालिटीज का
10:41:43मेंबर और यूजफुलनेस दोनों ही बाढ़ गए हैं
10:41:46लेकिन अभी भी देश के अलग-अलग हसन में इन
10:41:49क्वालिटी नजर ए रही है यानी की हर जगह
10:41:52प्रोग्रेस एक जैसी नहीं थी बहुत सी
10:41:55सर्विसेज जिन्हें लोकल बॉडीज को दिया जा
10:41:57सकता था अभी भी प्रोविंशियल गवर्नमेंट के
10:42:00हाथ में ही थी
10:42:01रिपन चाहते थे की प्रोविंशियल गवर्नमेंट
10:42:03लोकल बॉडीज के साथ फाइनेंशियल
10:42:05डिसेंट्रलाइजेशन का वही प्रिंसिपल उसे
10:42:08करें जो लॉर्ड मियो ने शुरू किया था अपनी
10:42:11कंट्रीब्यूशन के लिए लॉर्ड रिपन को फादर
10:42:14ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट भी कहा जाता है
10:42:17लॉर्ड रिपन के रेजोल्यूशन के में
10:42:19प्वाइंट्स कुछ इस तरह थे लोकल बॉडीज का
10:42:22विकास सिर्फ एडमिनिस्ट्रेशन को इंप्रूव
10:42:25करने के लिए ही नहीं बल्कि पॉपुलर और
10:42:27पॉलीटिकल एजुकेशन के इंस्ट्रूमेंट के तोर
10:42:29पर भी होना चाहिए लोकल अफेयर्स को अर्बन
10:42:32और और लोकल बॉडीज के थ्रू एडमिनिस्टर करने
10:42:35की पॉलिसी बनाई जाति है इन्हें डेफिनेट
10:42:38ड्यूटीज और रिवेन्यू के सूटेबल सोर्सेस भी
10:42:40दिए जाते हैं
10:42:45जिन्हें अप्वॉइंट करने के लिए इलेक्शंस भी
10:42:48ऑर्गेनाइज किया जा सकते थे और लोकल बॉडीज
10:42:51के चेयरपर्सन भी सिर्फ नॉन ऑफिशल मेंबर्स
10:42:54ही बन सकते थे ऑफिशल इंटरफ्रेंस को मिनिमम
10:42:57रखना का फैसला किया जाता है और इसी सिर्फ
10:42:59लोकल बॉडीज के एक्ट को रिवाइज और चेक करने
10:43:02के लिए ही किया जा सकता था ना की पॉलिसीज
10:43:05को डिक्टेट करने के लिए
10:43:14ऑफिशल एग्जीक्यूटिव सैंक्शन की जरूर थी
10:43:18है इस रेजोल्यूशन के आधार पर 1883 और 1885
10:43:23के बीच बहुत से एक्ट्स पास किया गए थे
10:43:26जिन्होंने इंडिया में म्युनिसिपल बॉडीज के
10:43:28कॉन्स्टिट्यूशन पावर्स और फंक्शंस को बहुत
10:43:31हद तक बादल दिया था लेकिन अभी इफेक्टिव
10:43:34लोकल सेल्फ गवर्निंग बॉडीज का सपना अधूरा
10:43:37ही था
10:43:38एक्जिस्टिंग लोकल बॉडीज में बहुत साड़ी
10:43:40लिमिटेशंस देखने को मिलती हैं जैसे की सभी
10:43:44जिला बोर्ड्स और बहुत सी मुनेलिटीज में
10:43:46इलेक्ट मेंबर्स माइनॉरिटी में ही थे इसके
10:43:50अलावा फ्रेंच बहुत ही लिमिटेड थी जिला
10:43:53बोर्ड्स को अभी भी जिला ऑफिशल सी एड कर
10:43:56रहे थे साथ ही गवर्नमेंट का स्ट्रिक्ट
10:43:59कंट्रोल बना हुआ था वह कभी भी अपनी मर्जी
10:44:02से इन लोकल बॉडीज को सस्पेंड या सुपर
10:44:05स्पीड कर शक्ति थी
10:44:07इसके अलावा
10:44:10नहीं थे उन्हें लगता था की इंडियन सेल्फ
10:44:14गवर्नमेंट के लिए अनफिट है
10:44:18इंपिरियलिज्म की पॉलिसी डोमिनेंट करती है
10:44:20और इसी की एक बड़े समर्थक लॉर्ड कर्जन
10:44:23लोकल बॉडीज पर ऑफिशल कंट्रोल बढ़ाने की
10:44:26दिशा में कम उठाते हैं
10:44:29एक बार फिर डिसेंट्रलाइजेशन पर कमीशन
10:44:33अप्वॉइंट की जाति है
10:44:35रॉयल कमीशन ऑन डिसेंट्रलाइजेशन 1998
10:44:41इस कमीशन के अनुसार लोकल बॉडीज की
10:44:44इफेक्टिव फंक्शनिंग में सबसे बड़ी समस्या
10:44:46फाइनेंशियल रिसोर्सेस की कमी होना है इसी
10:44:49को ध्यान में रखते हुए कमीशन अपने सुझाव
10:44:52दे दी है जिसमें सबसे पहले सुझाव था की
10:44:54विलेज पंचायत को और ज्यादा पावर्स दी जाए
10:44:57जैसे उन्हें पेटी केसेस में जुडिशल पावर्स
10:45:01मिले माइनर विलेज वर्क स्कूल फ्यूल और
10:45:04फॉदर रिजर्व्स पर खर्च करने की पावर मिले
10:45:07इसके लिए पंचायत को एडेक्वेट सोर्स ऑफ
10:45:10इनकम भी प्रोवाइड करना चाहिए इसके अलावा
10:45:12हर एक तालुका या तहसील में सब जिला
10:45:15बोर्ड्स को एस्टेब्लिश करना चाहिए जिनकी
10:45:18पावर्स और रिवेन्यू सोर्सेस जिला बोर्ड से
10:45:21अलग रखना चाहिए
10:45:35इसे दिया जा सकता था
10:45:38है इसके साथ इम्यूनिटी अगर चाहे तो
10:45:41प्राइमरी एजुकेशन के रिस्पांसिबिलिटी भी
10:45:43ले शक्ति हैं लेकिन सेकेंडरी एजुकेशन
10:45:45अस्पताल रिलीफ पुलिस और वेटरनरी वर्क जैसे
10:45:49मैटर्स के चार्ज से कमीशन लोकल बॉडीज को
10:45:52रिलीज करने के लिए कहती है
10:45:54कमीशन की रिकमेंडेशन पर ऑफिशल व्यू देते
10:45:57हुए 1915 में गवर्नमेंट का एक रेजोल्यूशन
10:46:00कहता है की लोकल रेवेन्यू इन इलास्टिक हैं
10:46:03और इन्हें फादर रिवाइज नहीं किया जा सकता
10:46:06इस तरह डिसेंट्रलाइजेशन कमीशन के सुझाव
10:46:09सिर्फ पीपल पर ही र जाते हैं और लोकल
10:46:12बॉडीज की कंडीशन वैसी ही बनी रहती है जैसे
10:46:15रिपन की समय में थी
10:46:17इसके बाद 1918 में लोकल सेल्फ बॉडीज से
10:46:21रिलेटेड एक और रेजोल्यूशन पास किया जाता
10:46:23है
10:46:2820th अगस्त 1917 को ब्रिटिश गवर्नमेंट ने
10:46:32डिक्लेअर किया था की उनका एक इंडिया में
10:46:35ग्रैजुअली रिस्पांसिबल गवर्नमेंट को डेवलप
10:46:37करना है और इसके लिए पहले स्टेप लोकल
10:46:40सेल्फ गवर्नमेंट के स्फीयर में ही लिया
10:46:42जाना था इसी अनाउंसमेंट को ध्यान में रखते
10:46:45हुए मे 1918 का यह रेजोल्यूशन इंडिया में
10:46:49लोकल सेल्फ गवर्नमेंट को रिव्यू करता है
10:46:51इसमें सजेस्ट किया जाता है की लोकल बॉडीज
10:46:54के ज्यादा से ज्यादा रिप्रेजेंटेटिव बनाए
10:46:56जैन और इन्हें सिर्फ नाम की नहीं बल्कि
10:46:59रियल अथॉरिटी भी दी जाए साथ ही
10:47:02प्रोविंशियल गवर्नमेंट को विलेज पंचायत के
10:47:05डेवलपमेंट की शुरुआत करने के लिए भी कहा
10:47:07जाता है
10:47:071918 के रेजोल्यूशन पर कोई स्टेप्स लिए
10:47:10जाते इससे पहले ही 1919 का गवर्नमेंट ऑफ
10:47:14इंडिया एक्ट पास होता है इसमें लोकल बॉडीज
10:47:16की क्या पोजीशन रहती है आई जानते हैं
10:47:25लोकल सेल्फ गवर्नमेंट को ट्रांसफर
10:47:28सब्जेक्ट की लिस्ट में रखा गया
10:47:31इस पर इलेक्ट मेंबर्स का कंट्रोल था और
10:47:34सभी प्रोविंस को अपनी अपनी जरूर के अनुसार
10:47:37लोकल सेल्फ इंस्टीट्यूशंस को डेवलप करने
10:47:40के लिए कहा गया था
10:47:42लेकिन फाइनेंस रिजर्व्ड सब्जेक्ट था यानी
10:47:46इस पर गवर्नर या एग्जीक्यूटिव काउंसलर का
10:47:49ही कंट्रोल था और फंड्स की कमी के करण
10:47:51इंडियन मिनिस्टर्स लोकल सेल्फ गवर्नमेंट
10:47:54के क्षेत्र में ज्यादा कुछ कम नहीं कर
10:47:56पाते
10:47:581928 के साइमन कमीशन भी अपनी रिपोर्ट में
10:48:01अप बंगाल और मद्रास के अलावा और जगह पर
10:48:05विलेज पंचायत की प्रोग्रेस ना होने की तरफ
10:48:08पॉइंट करती है इसके साथ ही कमीशन
10:48:10एफिशिएंसी के नाम पर लोकल बॉडीज के ऊपर
10:48:13प्रोविंशियल कंट्रोल को बढ़ाने जैसा
10:48:15रेट्रोग्रेट्स स्टेप भी सजेस्ट करती है
10:48:17साइमन कमीशन का यह भी मानना था की इलेक्ट
10:48:21मेंबर्स लोकल टैक्स को इंपोज करने में
10:48:24रेलूक्टेंट रहते हैं और 1919 रिफॉर्म्स के
10:48:27बाद लोकल बॉडीज के फाइनेंस का मैनेजमेंट
10:48:29और खराब हुआ है
10:48:31इसके बाद गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935
10:48:34पास होता है उसे समय लोकल बॉडीज की कंडीशन
10:48:37में क्या चेंज आते हैं आई जानते हैं डी
10:48:40गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 और आफ्टर
10:48:44गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में
10:48:47प्रोविंशियल ऑटोनॉमी प्रोवाइड की जाति है
10:48:49जिसके बाद इंडिया में लोकल सेल्फ गवर्निंग
10:48:53इंस्टीट्यूशंस का और तेजी से विकास संभव
10:48:55होता है पोर्टफोलियो फाइनेंस क्योंकि
10:48:57अभिलेक्टेड मिनिस्टरीज के पास था इसलिए
10:49:00लोकल बॉडीज को डेवलप करने के लिए फंड्स
10:49:03अवेलेबल किया जा सकते थे इसके साथ ही 1990
10:49:06के बाद से प्रोविंशियल और लोकल टैक्सेशन
10:49:09में चला ए रहा देमार्केशन भी खत्म कर दिया
10:49:11जाता है इस दौरान प्रोविंस में नए एक्ट्स
10:49:15पास किया जाते हैं जो लोकल बॉडीज को और
10:49:17ज्यादा अथॉरिटी देते हैं लेकिन फाइनेंशियल
10:49:20रिसोर्सेस और टैक्सेशन की पावर्स लगभग इस
10:49:23लेवल पर रहती हैं जैसी रिपन के समय में थी
10:49:26इसके अलावा 1935 के बाद लोकल बॉडीज पर कुछ
10:49:30रिस्ट्रिक्शंस भी लगा दी जाति हैं जैसे की
10:49:33ट्रेड्स कॉलिंग प्रोफेशनल्स और प्रॉपर्टी
10:49:36पर इनकी टैक्सेशन पावर्स को कम कर दिया
10:49:38जाता है
10:49:39मतलब यह हुआ की आजादी मिलने तक लोकल बॉडीज
10:49:43का बहुत ही सीमित विकास हुआ था इनके पास
10:49:46कोई रियल अथॉरिटी और पावर्स नहीं थी
10:49:49ज्यादातर पावर्स प्रोविंशियल गवर्नमेंट से
10:49:52ही डेरिव थी
10:49:53कंक्लुजन
10:49:55दोस्तों इस तरह ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के
10:49:58समय लोकल बॉडीज को डेवलप करने के कुछ
10:50:00स्टेप्स तो जरूर लिए गए थे लेकिन इसके
10:50:03पीछे ब्रिटिशर्स का में मकसद और ज्यादा
10:50:05रिवेन्यू कलेक्ट करना और अपनी
10:50:07रिस्पांसिबिलिटी से हाथ छुड़वाना था ना की
10:50:10इंडिया में लोकल लेवल पर डेमोक्रेसी डेवलप
10:50:12करना लॉर्ड रिपन जरूर कोशिश करते हैं की
10:50:16इंडियन को लोकल सेल्फ गवर्नमेंट के जारी
10:50:18एडमिनिस्ट्रेशन से जोड़ा जाए लोकल बॉडीज
10:50:21का सही मैनो में विकास आजादी के बाद ही हो
10:50:25पता है इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन आर्टिकल 40
10:50:28के तहत स्टेट गवर्नमेंट स्कूल विलेज
10:50:30पंचायत को ऑर्गेनाइज करने के लिए डायरेक्ट
10:50:32करता है इसके बाद 73 और 74th अमेंडमेंट
10:50:37एक्ट्स के जारी और और अर्बन लोकल बॉडीज को
10:50:40और स्ट्रेंजर किया जाता है लोकल सेल्फ
10:50:43गवर्नमेंट का डेवलपमेंट आज भी एक वर्किंग
10:50:46प्रोग्रेस है और इसमें रेगुलर इवोल्यूशन
10:50:48जरूरी है
10:51:01इवोल्यूशन को समझेंगे हम देखेंगे की किस
10:51:05तरह ब्रिटिश कॉलोनियल रूल की जरूर के
10:51:08हिसाब से इनमें समय के साथ चेंज किया जाते
10:51:11हैं सबसे पहले बात करते हैं पुलिस सिस्टम
10:51:14की इवोल्यूशन की
10:51:16इवोल्यूशन ऑफ पुलिस सिस्टम अंदर ब्रिटिश
10:51:18रूल दोस्तों फ्री कॉलोनियल इंडिया में
10:51:22यानी की मुग़ल और दूसरे नेटिव स्टेटस की
10:51:25गवर्नमेंट ऑटोक्रेटिक नेचर की होती थी और
10:51:28उसे समय कोई सेपरेट या फॉर्मल पुलिस
10:51:30सिस्टम नहीं हुआ करता था मुगल रूल के समय
10:51:33फौजदार डॉ और ऑर्डर मेंटेन किया करते थे
10:51:36इसके साथ ही सिटीज में ये कम कोतवाल का
10:51:39होता था यहां तक की 1765 से 1772 तक बंगाल
10:51:45में ड्यूल रोल के समय भी जमींदारा को ही
10:51:48डॉ और ऑर्डर मेेंटेन करने की जिम्मेदारी
10:51:50दी गई थी लेकिन कई बार जमींदारा अपनी
10:51:53ड्यूटी कर देते थे और कुछ जमींदारा तो
10:51:57डेकोर्स के साथ मिलकर उनकी ल में शेर भी
10:52:00लेते थे
10:52:021770 में फौजदर्स की पोस्ट को खत्म कर
10:52:05दिया गया था लेकिन
10:52:071774 में वारेन हेस्टिंग्स एक बार फिर से
10:52:11फौजदार्ज की इंस्टीट्यूशन को रिस्टोर कर
10:52:13दें और जमींदारा को इन्हें एसिस्ट करने के
10:52:17लिए कहा जाता है
10:52:181775 में बड़े डिस्ट्रिक्ट के मेजर टोंस
10:52:22में फौजदार थाना को एस्टेब्लिश किया जाता
10:52:24है और बहुत से छोटे पुलिस स्टेशन इन्हें
10:52:28एसिस्ट करने के लिए बनाए जाते हैं लेकिन
10:52:30इंडिया में रेगुलर पुलिस फोर्स क्रिएट
10:52:33करने का श्री लॉर्ड कार्नवालिस को जाता है
10:52:35इसके लिए उन्हें फादर ऑफ इंडियन पुलिस
10:52:39सर्विसेज भी कहा जाता है
10:52:401791 में लॉर्ड कार्नवालिस पुलिस फोर्स को
10:52:44ऑर्गेनाइज करने का कम शुरू करते हैं इसके
10:52:47लिए एक जिला को अलग-अलग थाना यानी की
10:52:51सर्कल्स में डिवाइड किया जाता है
10:52:56और जिला
10:52:59यानी की एसपी को बनाया जाता जमींदारा को
10:53:03उनकी पुलिस ड्यूटी से रिलीव कर दिया जाता
10:53:06है इस तरह एक इंडिपेंडेंस डॉ और ऑर्डर
10:53:09मशीनरी एस्टेब्लिश करने की कोशिश की जाति
10:53:11है इसके बाद 18008 में लॉर्ड मियो हर
10:53:16डिवीजन के लिए एक एसपी अप्वॉइंट कर देते
10:53:19हैं और इनकी हेल्प के लिए बहुत से स्पाइस
10:53:22यानी की गोयनका को रखा जाता है लेकिन यह
10:53:26स्पाइस लोकल पीपल का काफी शोषण करते थे
10:53:291814 में कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स के एक
10:53:32ऑर्डर के जारी दारोगाज और उनके
10:53:34सबोर्डिनेट्स का अपॉइंटमेंट बंगाल के
10:53:36अलावा कंपनी की बाकी सभी टेरिटरीज में
10:53:39अबॉलिश कर दिया जाता है इसके बाद बैंकिंग
10:53:42के समय 1828 तू 1835 में एसपी की पोस्ट भी
10:53:47अबॉलिश कर दी जाति है उसकी जगह अब कलेक्टर
10:53:50या मजिस्ट्रेट को पुलिस फोर्स हेड करने की
10:53:54रिस्पांसिबिलिटी मिलती है यानी एक बार फिर
10:53:57फ्यूजन ऑफ पावर देखने को मिलता है और हर
10:54:00डिवीजन की कमिश्नर को
10:54:02स्पीड की तरह एक्ट करना होता है यह
10:54:04अरेंजमेंट सफल नहीं राहत इससे पुलिस फोर्स
10:54:08का ऑर्गेनाइजेशन खराब हो जाता है और
10:54:10कलेक्टर पर बहुत ज्यादा बर्डन ए जाता है
10:54:13फिर 1860 में पुलिस कमिश्नर अप्वॉइंट की
10:54:17जाति है जिसकी रिकमेंडेशन के आधार पर
10:54:19इंडियन पुलिस एक्ट 1861 पास होता है इसके
10:54:24अनुसार सिविल कांस्टेबल का एक सिस्टम
10:54:26तैयार किया जाता है
10:54:28प्रोवेस में इंस्पेक्टर जनरल को पुलिस का
10:54:31हेड बनाया जाता है रेंज में डिप्टी
10:54:34इंस्पेक्टर जनरली ये कम देखा है वही जिला
10:54:37का हेड एक बार फिर से एसपी को बनाया जाता
10:54:40है
10:54:54इसके अलावा नेशनल मूवमेंट को सरप्राइज
10:54:58करने के लिए भी कई इंस्टेंस पर ब्रिटिश
10:55:01पुलिस उसे करते हैं
10:55:03ब्रिटिशर्स ने जो इंडिया पुलिस का क्रिएशन
10:55:06नहीं किया था
10:55:071861 का पुलिस एक्ट सिर्फ प्रोविंस में
10:55:10पुलिस सेटअप की गाइडलाइंस प्रोवाइड करता
10:55:12है हालांकि इसमें मेंशन रैंक्स को
10:55:15यूनिफॉर्म पूरे देश में इंट्रोड्यूस किया
10:55:17गया था इसके अलावा लौटकर्जन के समय 192
10:55:21में एक और पुलिस कमीशन फॉर्म की गई थी
10:55:24इसके हेड एंड्रयू फ्रीजर थे कमीशन की
10:55:28रिकमेंडेशन के आधार पर प्रोविंस में
10:55:30क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्मेंट यानी
10:55:33की सीआईडी और सेंटर में सेंट्रल
10:55:35इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी की सिब को
10:55:38एस्टेब्लिश किया गया था इनका इस्तेमाल
10:55:41इंडिया में रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटी और
10:55:44नेशनल मूवमेंट को सरप्राइज करने के लिए
10:55:46किया जाता था दोस्तों यह तो बात हो गई
10:55:49पुलिस फोर्स के इवोल्यूशन की जिसने
10:55:52ब्रिटिश रूल को इंडिया में बनाए रखना में
10:55:54काफी हेल्प की थी अब बात करते हैं ऐसी
10:55:58फोर्स की जिसकी वजह से ब्रिटिश रूल इंडिया
10:56:01में एस्टेब्लिश हो पाया था और इतने समय
10:56:03कंटिन्यू रहा था यानी की ई
10:56:08ऑर्गेनाइजेशनवामी ड्यूरिंग ब्रिटिश रूल
10:56:11दोस्तों मिलिट्री इंडिया में कंपनी के रूल
10:56:14की बैकबोन हुआ करती थी
10:56:161857 की क्रांति से पहले इंडिया में
10:56:20मिलिट्री फोर्सेस के दोस्त सेपरेट बोर्ड्स
10:56:22ऑपरेट किया करते थे पहले सेटअप यूनिट जिसे
10:56:25क्वींस आर्मी कहा जाता था इंडिया में
10:56:28ड्यूटी पर आए सर्विंग ब्रिटिश ट्रूप्स का
10:56:30था और दूसरा कंपनी के ट्रूप्स हुआ करते थे
10:56:33जो यूरोपीय और नेटिव रेजिमेंट का मिक्सर
10:56:36होते थे
10:56:37क्वींस आर्मी ग्राउंड की मिलिट्री फोर्स
10:56:40का पार्ट हुआ करती थी
10:56:421857 के बाद ई का सिस्टमैटिक
10:56:45रीऑर्गेनाइजेशन किया जाता है इस
10:56:47रिऑर्गेनाइजेशन के पीछे मुख्य करण फिर से
10:56:501857 जैसी क्रांति होने से रोकना था
10:56:54सबसे पहले तो यह एश्योर किया जाता है की
10:56:57आर्मी में यूरोपियन ब्रांच न्यूमेरिकल
10:56:59हमेशा इंडियन ब्रांच को डोमिनेट करें इसके
10:57:03लिए बंगाल आर्मी में हर दो इंडियन सोल्जर
10:57:06पर एक यूरोपियन सोल्जर का प्रोपोर्शन
10:57:08फिक्स किया जाता है और मुंबई और मद्रास
10:57:11में यह प्रोपोर्शन 5 इंडियन सोल्जर पर दो
10:57:15यूरोपियन सोल्जर का राहत है इसके अलावा
10:57:171859 और 1879 की मिलिट्री कमिश्नर 1/3
10:57:21व्हाइट आर्मी के प्रिंसिपल पर इंसिस्ट
10:57:23करती हैं जबकि 1857 से पहले ये व्हाइट
10:57:27आर्मी सिर्फ 14% हुआ करती थी इसके साथ ही
10:57:31की ज्योग्राफिकल लोकेशंस और डिपार्मेंट
10:57:34जैसे की आर्टिलरी टैंक्स और आर्म्ड कर में
10:57:37स्ट्रिक्ट यूरोपियन मोनोपोली मेंटेन की
10:57:40जान लगी थी
10:57:41यहां तक की साल 1900 तक इंडियन को राइफल्स
10:57:45भी इनफीरियर क्वालिटी की दी जाति थी और इन
10:57:48हाईटेक डिपार्मेंट में सेकंड वर्ल्ड वार
10:57:50तक इंडियन को एंट्री नहीं दी गई थी कोई भी
10:57:54इंडियन ऑफिसर रैंक तक नहीं पहुंच सकता था
10:57:571914 तक इंडियन के लिए हाईएस्ट रैंक
10:58:00सूबेदार ही हुआ करती थी दोस्तों आर्मी की
10:58:05इंडियन ब्रांच को डिवाइड और रूल पॉलिसी के
10:58:07बेसिस पर भी रिऑर्गेनाइज किया जाता है
10:58:09इसके तहत मार्शल रेसेज और नॉन मार्शल
10:58:13रिसर्च की आईडियोलॉजी फॉर्म की जाति है
10:58:15जिसमें बताया जाता है की अच्छे सोल्जर
10:58:18सिर्फ स्पेसिफिक कम्युनिटी से ही ए सकते
10:58:21समय
10:58:37कम्युनिटी से इन डिस्क्रिमिनेशन
10:58:40रिक्रूटमेंट की पॉलिसी को जस्टिफाई किया
10:58:42जाता है क्योंकि इन ग्रुप ने 1857 की
10:58:46क्रांति को सरप्राइज करने में ब्रिटिश की
10:58:49हेल्प की थी और साथ ही यह रिलेटिवली
10:58:52मार्जिनल सोशल ग्रुप को बिलॉन्ग करते थे
10:58:54इसलिए इन पर नेशनलिज्म का इफेक्ट होने के
10:58:57चांसेस भी कम थे अवध बिहार सेंट्रल इंडिया
10:59:01और साउथ इंडिया के सोल्जर जिन्होंने 1857
10:59:04के रिवॉल्ट में भाग लिया था उन्हें नॉन
10:59:07मार्शल डिक्लेअर कर दिया जाता है
10:59:10है इसके अलावा सभी रैगनमेंट्स में कास्ट
10:59:13और कम्युनल कंपनी इंट्रोड्यूस कर दी जाति
10:59:15है और इंडियन रेजीमेंट को सोशियो एथेनिक
10:59:18ग्रुप का मिक्सर बना दिया जाता है जिससे
10:59:21ये एक दूसरे को बैलेंस करते रहे इसके साथ
10:59:24ही सोल्जर में नेशनल फीलींगस की ग्रोथ को
10:59:28रोकने के लिए कम्युनल कास्ट ट्रबल और
10:59:31रीजनल कॉन्शसनेस को इनकरेज किया जाता है
10:59:34इसी कॉन्टेक्स्ट में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट
10:59:36पर इंडिया चार्ल्स वुड ने कहा था की मैं
10:59:39डिफरेंट रेजीमेंट में अलग-अलग और राइवल्स
10:59:43स्पिरिट चाहता हूं जिससे जरूर पढ़ने पर
10:59:45बिना किसी संकोच के एक सिख हिंदू पर फायर
10:59:49कर सके और एक गोरख दोनों में से किसी पर
10:59:52भी फायर कर सकें इसके अलावा दोस्तों
10:59:54ब्रिटिश की तरफ से पुरी कोशिश की जाति है
10:59:57की सोल्जर को रेस्ट ऑफ डी पापुलेशन की
11:00:00लाइफ और थॉट से दूर रखा जाए इसके लिए
11:00:04अलग-अलग मैथर्ड अपने जाते हैं जैसे की
11:00:07न्यूज़ पेपर्स जर्नल्स और नेशनल
11:00:10पब्लिकेशंस को सोल्जर तक पहुंचने से रॉक
11:00:13जाता है
11:00:14है इस तरह 1857 के बाद ई का पुरी तरह
11:00:18रिऑर्गेनाइजेशन करके यह एश्योर किया जाता
11:00:21है की इंडिया पर ब्रिटिश हॉल कमजोर ना हो
11:00:24पे साथी इंडियन आर्मी को एशिया और अफ्रीका
11:00:27में ब्रिटिश अंपायर के एक्सपेंशन के लिए
11:00:30भी उसे किया जाता है
11:00:31पुलिस और आर्मी जहां ब्रिटिश रूल को
11:00:34एस्टेब्लिश और प्रोटेस्ट करने का कम करते
11:00:36हैं वहीं जुडिशल सिस्टम इसे कंसोलिडेटेड
11:00:39करने में हेल्प करता है इसलिए ब्रिटिश रूल
11:00:43में जुडिशल रिफॉर्म्स को भी समझ लेते हैं
11:00:46जुडिशल रिफॉर्म्स
11:00:49दोस्तों ब्रिटिश रूल से पहले इंडिया में
11:00:52जुडिशल सिस्टम का ना कोई प्रॉपर प्रोसीजर
11:00:55हुआ करता था और ना ही डॉ कोट्स का हाईएस्ट
11:00:58से लोएस्ट ग्रेडेशन में कोई प्रबल
11:01:00ऑर्गेनाइजेशन
11:01:02हिंदू उसके ज्यादातर केसेस को गांव की
11:01:05पंचायत या जमींदार संभल लेते थे और
11:01:08मुस्लिम के लिए जुडिशल एडमिनिस्ट्रेशन की
11:01:10यूनिट के रूप में उनके रिलिजियस लीडर कई
11:01:13हुआ करते थे इसके अलावा राजा और बादशाह को
11:01:17जस्टिस का फाउंटेन हेड समझा जाता था और वह
11:01:21अपनी समझ से न्याय करते थे उसके लिए कोई
11:01:23फिक्स नियम या कानून अक्सर नहीं होते थे
11:01:26रिकॉर्ड जुडिशल प्रेसिडेंट पर बेस्ड आम
11:01:29लॉस सिस्टम की शुरुआत
11:01:311726 में होती है जब मद्रास मुंबई और
11:01:35कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा
11:01:38मायर्स कोर्स एस्टेब्लिश किया जाते हैं
11:01:40इसके बाद कंपनी का ट्रेडिंग पावर से रनिंग
11:01:44पावर में ट्रांसपोर्टेशन होने के साथ
11:01:45जुडिशल सिस्टम में नए एलिमेंट्स एड होने
11:01:48शुरू हो जाते हैं यह चेंज अलग-अलग गवर्नर
11:01:52जनरल्स द्वारा किया गए थे सबसे पहले बात
11:01:55करते हैं वारेन हेस्टिंग्स के समय में हुए
11:01:57रिफॉर्म्स की
11:01:58रिफॉर्म्स अंदर वारेन हेस्टिंग 1772 2785
11:02:05दोस्तों वारेन हेस्टिंग्स का सबसे पहले
11:02:08जुडिशल रिफॉर्म होता है जमींदारा की
11:02:10जुडिशल पावर्स को खत्म करना
11:02:131772 में वारेन हेस्टिंग्स जिला लेवल पर
11:02:17दीवान अदालत और फौजदारी अदालत सेटअप करते
11:02:20हैं दीवानी अदालत में सिविल केसेस ट्री
11:02:23किया जाते थे और फौजदारी में क्रिमिनल
11:02:26केसेस
11:02:27दीवानी अदालत को कलेक्टर यानी की यूरोपीय
11:02:31ऑफिसर प्रेसीडे करता था और फौजदारी अदालत
11:02:34को इंडियन जज इसके अलावा दीवानी अदालत में
11:02:37हिंदू उसका कैसे हिंदू लॉस के अकॉर्डिंग
11:02:40डिसाइड होता था और मुस्लिम का मुस्लिम डॉ
11:02:43के अकॉर्डिंग लेकिन फौजदारी अदालत में सभी
11:02:47का डिसीजन मुस्लिम डॉ के अकॉर्डिंग ही
11:02:49होता था जिला कोट्स के डिसीजन के अगेंस्ट
11:02:52अपील के लिए कोलकाता में सदर दीवानी अदालत
11:02:56और सदर निजामुद्दीन
11:03:03कोशिश भी करते हैं
11:03:051776 में हिंदू कोड का एक इंग्लिश
11:03:09ट्रांसलेशन कोड ऑफ जंतु लॉस के नाम से
11:03:12पब्लिश भी हो जाता है दोस्तों ये थे वारेन
11:03:16हेस्टिंग्स द्वारा इंट्रोड्यूस किया गए
11:03:18जुडिशल रिफॉर्म्स इसके बाद जुडिशल सिस्टम
11:03:21को फादर रिफॉर्म लॉर्ड कार्नवालिस ने किया
11:03:23था तो आई उनके रिफॉर्म्स को जानते हैं
11:03:26रिफॉर्म्स अंडरग्राउंड वालेस
11:03:281786 2793 दोस्तों वारेन हेस्टिंग्स ने जो
11:03:33जुडिशल सिस्टम एस्टेब्लिश किया था
11:03:35कार्नवालिस उसमें कुछ चेंज करते हैं जैसे
11:03:39की 1787 में वो जिला कलेक्टर्स को फिर से
11:03:43दीवानी अदालत का जज बना देते हैं लॉर्ड
11:03:46कार्नवालिस एन सिर्फ कलेक्टर्स की जुडिशल
11:03:48पावर्स को रिस्टोर करते हैं बल्कि उन्हें
11:03:51पहले से भी ज्यादा मजेस्टिशियल पावर दे
11:03:53देते हैं यह सिपरेशन ऑफ पावर्स की
11:03:56प्रिंसिपल के एकदम उल्टा था दूसरा रिफॉर्म
11:04:001792 के पीरियड में क्रिमिनल
11:04:03एडमिनिस्ट्रेशन की फील्ड में इंट्रोड्यूस
11:04:05होता है
11:04:06जिला फौजदारी अदालत को अबॉलिश करके उनकी
11:04:09जगह कर सर्किट कोर्स बनाई जाति हैं इनमें
11:04:13से तीन बंगाल में थी और एक भी हर में और
11:04:17इन सर्किट कोर्स में यूरोपीय ऑफिसर्स को
11:04:19ही जज अप्वॉइंट किया जाता है और इनको
11:04:22एसिस्ट करते थे काज़ीज़ और मुफ्तीज इससे
11:04:25पहले फौजदारी अदालत में इंडियन को ही जज
11:04:28अप्वॉइंट किया जाता था हम का सकते हैं की
11:04:31यहां से जुडिशल सिस्टम में से इंडियन को
11:04:34अलग करने की शुरुआत हो जाति है और आईसीएम
11:04:37की झलक दिखने लगती है लॉर्ड कार्नवालिस का
11:04:40सबसे इंपॉर्टेंट जुडिशल रिफॉर्म था उनका
11:04:421793 का कौन बाल स्कूल में उनके सभी
11:04:46रिफॉर्म्स फाइनल शिव लेते हैं और यह
11:04:49प्राइमरी सिपरेशन ऑफ पावर के प्रिंसिपल पर
11:04:52बेस था
11:04:54की कलेक्टर्स के हाथ में जुडिशल पावर्स
11:04:58देना सही डिसीजन नहीं था क्योंकि जिनके
11:05:01पास रिवेन्यू कलेक्शन की पावर थी क्या वो
11:05:03रिवेन्यू के केसेस को इंपर्शाली डिसाइड कर
11:05:06सकते थे इसलिए कॉर्न बॉल्स कोड में वह
11:05:09सिपरेशन ऑफ पावर्स के प्रिंसिपल को फॉलो
11:05:11करते हैं और कलेक्टर्स की सभी जुडिशल
11:05:15पावर्स को खत्म कर दिया जाता है
11:05:18है इसके अलावा सिविल कोट्स को प्रेसीडे
11:05:20करने के लिए जिला जज नाम से एक नए ऑफिसर
11:05:23क्लास की शुरुआत की जाति है साथ ही
11:05:26कार्नवालिस कोर्ट फीस को भी अबॉलिश करते
11:05:29हैं
11:05:30यूरोपियन सब्जेक्ट्स को भी इंडियन जुडिशल
11:05:33सिस्टम की जूरिडिक्शन मिलाया जाता है इसके
11:05:35साथ ही गवर्नमेंट सर्वेंट को उनके ऑफिशल
11:05:38एक्शंस के लिए सिविल कोट्स में अनस्टेबल
11:05:41बनाया जाता है
11:05:45डॉ का प्रिंसिपल एस्टेब्लिश होता है इतने
11:05:49सालों से चला रहा सिस्टम अब पुरी तरह बादल
11:05:52चुका था कम से कम पेपर पर तो अब कास्ट
11:05:56क्लास या रिलिजन के बेसिस पर भेदभाव नहीं
11:05:59किया जा सकता
11:06:32जिसकी वजह से अक्सर जस्टिस मिलने में डिले
11:06:36होता था और अनसर्टेन टीवी बनी रहती थी
11:06:39बंटिंग इन कोट्स की ड्यूटी मजिस्ट्रेट और
11:06:43कलेक्टर्स को ट्रांसफर कर देते हैं और
11:06:46इनके सुपरविजन के लिए कमिश्नर ऑफ रिवेन्यू
11:06:48और सर्किट को अप्वॉइंट करते हैं इसके
11:06:51अलावा वो इलाहाबाद में सेपरेट सदर निजामत
11:06:55अदालत और सदर दीवानी अदालत एस्टेब्लिश
11:06:57करते हैं जिसकी वजह से अप और दिल्ली के
11:07:01लोगों को अपील के लिए अब कोलकाता जान की
11:07:04जरूर नहीं रहती दोस्तों अभी तक कोर्ट की
11:07:08लैंग्वेज पर्शियन थी बेंटिक हायर कोर्स
11:07:11में परसों को इंग्लिश से रिप्लेस कर देते
11:07:13हैं और इसके साथ ही लोअर कोट्स में परसों
11:07:17के साथ साथ वर्नाकुलर लैंग्वेज में कैसे
11:07:20फाइल करने का ऑप्शन भी दे देते हैं इस तरह
11:07:22से विलियम बेंटिक जुडिशल सिस्टम को इंडियन
11:07:26के लिए एक्सेसिबल बनाने की कोशिश की थी
11:07:28बेंटिक के बाद भी जुडिशल सिस्टम में
11:07:31समय-समय पर कुछ रिफॉर्म्स ले गए थे आई
11:07:34उनको भी समझ लेते हैं
11:07:39दोस्तों 1833 में इंडियन लॉस के
11:07:43क्वालिफिकेशन के लिए लॉर्ड मौली के
11:07:45चेयरमैनशिप में डॉ कमीशन अप्वॉइंट की गई
11:07:48थी जिसके एफर्ट्स से 1859 में सिविल
11:07:51प्रोसीजर कोड 1860 में इंडियन पैनल कोड और
11:07:561861 में क्रिमिनल प्रोसीजर कोड तैयार हुआ
11:07:59था
11:08:001865 में सुप्रीम कोर्ट और सदर अदालत को
11:08:03मर्ज करके कोलकाता बॉम्बे और मद्रास में
11:08:07तीन हाय कोट्स बना दिए गए थे इसके बाद
11:08:101935 की गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट में
11:08:13फेडरल कोर्ट एस्टेब्लिश करने का प्रोविजन
11:08:16था इसे 1937 में सेटअप किया गया
11:08:23और हाईकोर्ट से अपील्स पर सनी करना था
11:08:27जुडिशल रिफॉर्म्स की चर्चा तो हो गई
11:08:29वैल्यूएशन भी कर लेते हैं आखिर यह
11:08:32रिफॉर्म्स कहां तक सफल थे
11:08:35इवेलुएशन
11:08:37दोस्तों ब्रिटिश रूल के समय इस्टैबलिश्ड
11:08:40जुडिशल सिस्टम के कुछ पॉजिटिव एस्पेक्ट्स
11:08:43देखें जा सकते हैं जैसे की इसके द्वारा
11:08:46इंडिया में रूल ऑफ डॉ की स्थापना होती है
11:08:48इसके अलावा रिलिजियस और रुलर्स के पर्सनल
11:08:51कानून की जगह कोडिफाइड लॉस ए जाते हैं
11:08:55इनके जरिए सोसाइटी में प्रोविडेंट
11:08:57डिस्क्रिमिनेशन को कम करने की कोशिश की
11:09:00जाति है जैसे अब कास्ट के बेसिस पर अलग
11:09:03कानून नहीं था लोगों के सामने सब बराबर हो
11:09:06जाते हैं यूरोपियन सब्जेक्ट्स को भी इसके
11:09:09जूरिडिक्शन मिलाया गया था हालांकि
11:09:11क्रिमिनल केसेस में सिर्फ यूरोपीय जज ही
11:09:14उनके कैसे की सनी कर सकते थे इसके साथ ही
11:09:17गवर्नमेंट सर्वेंट को भी सिविल कोट्स में
11:09:19आंसर डबल बनाया जाता है
11:09:22लेकिन इसकी कुछ नेगेटिव एस्पेक्ट्स भी
11:09:24ध्यान में रखना की जरूर है पहले नेगेटिव
11:09:27यह था की जुडिशल सिस्टम और ज्यादा
11:09:30कॉम्प्लिकेटेड और एक्सपेंसिव हो जाता है
11:09:40लिटिगेशन लंबा समय लेने लगती है जिसका
11:09:44रिजल्ट डिलीट जस्टिस होता है
11:09:48इसके अलावा यूरोपीय जज अक्सर इंडियन यूजेस
11:09:52और ट्रेडीशन से फैमिलियर नहीं होते थे साथ
11:09:56ही जुडिशल सिस्टम का उसे कॉलोनियल
11:09:59इंटरेस्ट को सुरक्षित रखना के लिए ज्यादा
11:10:01किया जाता है और नेटिव स्कूल
11:10:05कंक्लुजन
11:10:08दोस्तों इस तरह इंडिविजुअल ब्रिटिश गवर्नर
11:10:11जनरल्स की समझ और कॉलोनियल इंटरेस्ट को
11:10:14ध्यान में रखते हुए पुलिस आमीन और
11:10:16ज्यूडिशरी का इवोल्यूशन होता है और ये
11:10:19इंडिया में ब्रिटिश अंपायर के मजबूत
11:10:22पिलर्स बनकर उभरते हैं हालांकि पुरी कोशिश
11:10:24के बाद भी ब्रिटिशर्स नेशनलिज्म की वाव को
11:10:28इन तक पहुंचने से नहीं रॉक पाते और फाइनली
11:10:31जब आर्मी और पुलिस फोर्स में नेशनलिस्ट
11:10:34फीलींगस नजर आने लगती हैं तो ब्रिटिशर्स
11:10:37को समझ ए जाता है की उनका रूल अब और
11:10:40ज्यादा नहीं चल सकता
11:10:43[संगीत]
11:10:46दोस्तों इंडिया में मॉडर्न एजुकेशन की
11:10:48शुरुआत ब्रिटिश कॉलोनियल रूल के दौरान ही
11:10:51हुई थी उससे पहले दाग एजुकेशन गुरुकुल
11:10:53मदरसा और मकतब के थ्रू दी जाति थी जिसमें
11:10:57रिलिजियस एजुकेशन के साथ ड्रामा लॉजिक
11:11:00मैथमेटिक्स फिलासफी सब्जेक्ट शिक्षा दी
11:11:04जाति थी इसके अलावा ट्रेडिशनल कास्ट और
11:11:07आर्टिजंस गल्स के द्वारा वोकेशनल एजुकेशन
11:11:10भी प्रोवाइड करते थे लेकिन ब्रिटिश के आने
11:11:13के बाद इंडियन एजुकेशन सिस्टम पुरी तरह से
11:11:16बादल जाता है आज हम बात करने वाले हैं
11:11:19ब्रिटिश रूल के दौरान किस तरह एजुकेशन
11:11:21सिस्टम का डेवलपमेंट इंडिया में होता है
11:11:23और इसके क्या फायदे और क्या नुकसान देखने
11:11:26को मिलते हैं आई शुरू करते हैं
11:11:30इंट्रोडक्शन
11:11:33ब्रिटिश रूल की शुरुआती सालों में
11:11:35प्राइवेट इंडिविजुअल्स द्वारा एजुकेशन
11:11:37फील्ड में कुछ एफर्ट्स किया जाते हैं जैसे
11:11:40की 1781 में वारेन हेस्टिंग्स वर्जन और
11:11:44एरोबिक की लर्निंग को प्रमोट करने के लिए
11:11:46कोलकाता मदरसा की स्थापना करते हैं और
11:11:491791 में जोनाथन डंकन बनारस में संस्कृत
11:11:53कॉलेज की शुरुआत करते हैं इस दौरान
11:11:56गवर्नमेंट की तरफ से एजुकेशन को प्रमोट
11:11:58करने में कोई इंटरेस्ट शो नहीं किया जाता
11:12:011800 में लॉर्ड वालेस्ले ने फोर्ट विलियम
11:12:04कॉलेज सेटअप किया था इसे कंपनी के सिविल
11:12:07सर्विस को ट्रेन करने के लिए बनाया गया
11:12:15ऑफिशल तोर पर ब्रिटिश द्वारा एजुकेशन के
11:12:18डेवलपमेंट की तरफ कम 1813 के चार्ट एक्ट
11:12:21के बाद लिए जाते हैं क्योंकि इस एक्ट में
11:12:24इंडिया में एजुकेशन को प्रमोट करने के लिए
11:12:26एनुअल 1 लाख रुपए का प्रावधान किया गया
11:12:36जाता है
11:12:43जब बात इंडिया में एजुकेशन के डेवलपमेंट
11:12:45की आई है तो सवाल ये उठाता है की यह
11:12:48एजुकेशन इंडियन होगी या वेस्टर्न और इसे
11:12:51वर्नाकुलर लैंग्वेज में इंपोर्ट किया
11:12:53जाएगा या इंग्लिश लैंग्वेज में इसको लेकर
11:12:56दो ग्रुप बन जाते हैं एक ग्रुप
11:12:58ओरिएंटलिस्ट्स तथा और दूसरा एंग्लेसिस
11:13:02ओरिएंटलिस्ट ग्रुप जिसमें
11:13:05प्रिंसिपल्स आते थे इनका मानना था की
11:13:08इंडियन लैंग्वेज में इंडियन सब्जेक्ट्स की
11:13:10नॉलेज को प्रमोट करना चाहिए वहीं
11:13:13एंग्लिसिस्ट इंग्लिश लैंग्वेज के मीडियम
11:13:15से वेस्टर्न एजुकेशन स्प्रेड करने की
11:13:17सपोर्टर थे इस डिबेट को सॉल्व करने के लिए
11:13:20ब्रिटिश इंडियन गवर्नमेंट 1823 में जनरल
11:13:24कमेटी ऑफ पब्लिक इंस्ट्रक्शंस पॉइंट करती
11:13:26है शुरुआत में तो इस कमेटी को ओरिएंटलिस्ट
11:13:29ग्रुप डोमिनेट करता है और यह लोग कोलकाता
11:13:32में संस्कृत कॉलेज आगरा और दिल्ली में दो
11:13:35और ओरिएंटल कॉलेजेस एस्टेब्लिश करने का
11:13:37प्रोग्राम तैयार करते हैं
11:13:39है इसके साथ ही इंडीजीनस लर्निंग को
11:13:41प्रमोट करने के लिए गुरुकुल और मदरसाज को
11:13:44पीटने देने का भी फैसला करते हैं लेकिन
11:13:47जल्दी ही सिचुएशन एनालिसिस्ट ग्रुप के
11:13:50फीवर में टर्न हो जाति है जब 1828 में
11:13:53यूटिलिटेरियन रिफॉर्मेंस विलियम बेंटिक
11:13:56गवर्नर जनरल बनते हैं और 1834 में लॉर्ड
11:14:00मेघौली को जनरल कमेटी ऑफ पब्लिक
11:14:02इंस्ट्रक्शंस का प्रेसिडेंट बना दिया जाता
11:14:04है
11:14:05पुरी तरह से इंग्लिश एजुकेशन के फीवर में
11:14:08थे सेकंड फरवरी 1835 को वो अपने फेमस
11:14:12मुकाबला मिनट्स पब्लिश करते हैं जिसमें
11:14:15इंग्लिश लैंग्वेज और वेस्टर्न एजुकेशन को
11:14:18डेवलप करने का फैसला लिया जाता है यह
11:14:21इंडिया में इंग्लिश एजुकेशन के
11:14:22इंट्रोडक्शन का ब्लूप्रिंट बंता है मकोली
11:14:25के अनुसार एक अच्छी यूरोपियन लाइब्रेरी की
11:14:27सिंगल शेल्फ पुरी ओरिएंटल लिटरेचर के
11:14:30बराबर है बेंटिक 7 मार्च 1835 को ही
11:14:34एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए प्रपोज को
11:14:37इंडस कर देते हैं
11:14:39इस तरह इंडिया में वेस्टर्न एजुकेशन की
11:14:42शुरुआत होती है एजुकेशन फील्ड में अगली
11:14:45डेवलपमेंट 1854 में देखने को मिलती है
11:14:54चार्ल्स वुड बोर्ड ऑफ कंट्रोल के
11:14:57प्रेसिडेंट थे
11:14:581854 में इन्होंने इंडिया में फ्यूचर
11:15:01एजुकेशन की स्कीम को लेकर एक कंप्रिहेंसिव
11:15:03डिस्पैच या डॉक्यूमेंट तैयार किया था इसे
11:15:07इंडिया में इंग्लिश एजुकेशन का
11:15:08मैग्नाकार्टा भी कहा जाता है इसकी में
11:15:11रिकमेंडेशन इस तरह से थी सबसे पहले तो यह
11:15:14डिक्लेअर करता है की गवर्नमेंट की एजुकेशन
11:15:17पॉलिसी का वेस्टर्न एजुकेशन की टीचिंग
11:15:20देना है मीडियम ऑफ इंस्ट्रक्शन को लेकर ये
11:15:23कहता है की हायर एजुकेशन के लिए इंग्लिश
11:15:25लैंग्वेज ही परफेक्ट मीडियम है लेकिन
11:15:28प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन के लिए यह
11:15:31वर्नाकुलर लैंग्वेज के मीडियम को सजेस्ट
11:15:33करता है
11:15:40जिला लेवल पर एफिलिएटिड कॉलेज सेटअप करने
11:15:44का सुझाव देता है
11:15:45साथ ही इसमें एजुकेशन की फील्ड में
11:15:48प्राइवेट एंटरप्राइज को प्रमोट करने के
11:15:50लिए ब्रांच इन 8 सिस्टम का आइडिया भी
11:15:53प्रपोज किया गया था कंपनी टेरिटरीज के सभी
11:15:56फाइव प्रोविंस में डिपार्मेंट ऑफ पब्लिक
11:15:59इंस्ट्रक्शन बनाने का सुझाव दिया जाता है
11:16:01इसका कम प्रॉब्लम्स में एजुकेशन की
11:16:04प्रोग्रेस को रिव्यू करना और गवर्मेंट को
11:16:06एनुअल रिपोर्ट सबमिट करना था लंदन
11:16:08यूनिवर्सिटी के मॉडल पर कोलकाता मद्रास और
11:16:11मुंबई में यूनिवर्सिटी को एस्टेब्लिश करने
11:16:14का प्रपोज दिया गया था इसके साथ ही इसमें
11:16:17वोकेशनल इंस्ट्रक्शन और टेक्निकल स्कूल और
11:16:20कॉलेजेस एस्टेब्लिश करने पर भी इम्फैसीज
11:16:22किया गया था
11:16:23वुड डिस्पैच वूमेन एजुकेशन को प्रमोट करने
11:16:27के बाद भी करता है इसकी लगभग सभी
11:16:29रिकमेंडेशन को इंप्लीमेंट किया गया
11:16:33और मैथर्ड आने वाले लगभग फाइव डिकेड्स तक
11:16:37एजुकेशन की फील्ड को डोमिनेट करते हैं
11:16:39इसके बाद धीरे-धीरे वेस्टर्न सिस्टम
11:16:42इंडिजन सिस्टम को रिप्लेस कर देता है
11:16:571882 में एजुकेशन के फील्ड में वुड
11:17:00डिस्पैच के बाद हुई प्रोग्रेस को रिव्यू
11:17:02करने के लिए गवर्नमेंट एक कमीशन अप्वॉइंट
11:17:04करती है इसे यू हंटर की लीडरशिप में फॉर्म
11:17:08किया जाता है इसलिए इसे हंटर कमीशन बोला
11:17:11जाता है कमीशन को मेली प्राइमरी और
11:17:15सेकेंडरी एजुकेशन की फील्ड में सुझाव देने
11:17:17के लिए कहा गया था इसलिए इंडियन
11:17:19यूनिवर्सिटी की फंक्शनिंग में कमीशन
11:17:22इंक्वारी नहीं करती है इसकी में
11:17:24रिकमेंडेशन कुछ इस तरह थी प्राइमरी
11:17:27एजुकेशन के इंप्रूवमेंट और एक्सटेंशन में
11:17:30स्टेट के स्पेशल रोल को इम्फैसीज किया गया
11:17:32था साथी प्राइमरी एजुकेशन की कंट्रोल को
11:17:36न्यूली सेटअप जिला और म्युनिसिपल बोर्ड्स
11:17:39को देने का प्रस्ताव रखा गया था
11:17:41सेकेंडरी एजुकेशन के लिए दो डिवीजन बनाने
11:17:44का सुझाव था पहले लिटरेरी जो यूनिवर्सिटी
11:17:47तक जाएगा और दूसरा वोकेशनल जिसमें
11:17:50कमर्शियल करियर्स की तैयारी कराई जाएगी
11:17:53कमीशन फीमेल एजुकेशन को लेकर इन एडेक्वेट
11:17:56फैसेलिटीज की तरफ भी ध्यान देने को कहता
11:17:58है अगले दो डकैत में तेजी से सेकेंडरी
11:18:02एजुकेशन का स्प्रेड होता है जिसमें इंडियन
11:18:06का रोल भी काफी इंपॉर्टेंट राहत है इसके
11:18:08अलावा 1882 में पंजाब यूनिवर्सिटी और 1887
11:18:12में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की स्थापना भी
11:18:15होती है
11:18:16प्राइमरी और सेकेंडरी एजुकेशन की बात तो
11:18:19हंटर कमीशन ने कर ली थी इसके बाद अब
11:18:21नेक्स्ट कमीशन स्पेशली इंडियन यूनिवर्सिटी
11:18:24के लिए फॉर्म किया गया
11:18:271994
11:18:3120th सेंचुरी की शुरुआत से ही इंडिया में
11:18:34पॉलीटिकल और रेस्ट बढ़ाने लगता है ऐसे में
11:18:37ब्रिटिश को लगता है की प्राइवेट मैनेजमेंट
11:18:40के अंदर चलने वाले एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस
11:18:43का स्टार गिर चुका है और यहां से पॉलीटिकल
11:18:45रिवॉल्यूशनरीज पैदा हो रहे हैं इसलिए 192
11:18:50में लोड कर्जन रैली कमीशन अप्वॉइंट करते
11:18:53हैं इसका एक इंडियन यूनिवर्सिटी को
11:18:57इंप्रूव करने के लिए मेजर सजेस्ट करना था
11:18:59इसकी रिकमेंडेशन के आधार पर इंडियन
11:19:03यूनिवर्सिटी एक्ट 1904 पास किया जाता है
11:19:06जिसके अनुसार यूनिवर्सिटी इसको स्टडी और
11:19:10रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देने के लिए कहा
11:19:12जाता है यूनिवर्सिटी के फेलोज का नंबर कम
11:19:15कर दिया जाता है और ऑफिस में इनका पीरियड
11:19:17भी रिड्यूस कर दिया जाता है
11:19:21गवर्नमेंट ही नॉमिनेट करती है इसके अलावा
11:19:24गवर्नमेंट के पास यूनिवर्सिटी के
11:19:26रेगुलेशंस को बेटो करने और खुद अपनी तरफ
11:19:29से रेगुलेशंस पास करने की पावर भी ए जाति
11:19:31है प्राइवेट कॉलेज की एफीलिएशंस की
11:19:34कंडीशंस को और स्ट्रिक्ट कर दिया जाता है
11:19:36साथ हायर एजुकेशन और यूनिवर्सिटी को
11:19:40इंप्रूव करने के लिए अगले 5 साल तक पर एनम
11:19:435 लाख रुपए जाते हैं
11:19:46है इस एक्ट के थ्रू यूनिवर्सिटी पर
11:19:49गवर्नमेंट का कंट्रोल बहुत ज्यादा बड़ा
11:19:51दिया जाता है इसको जस्टिफाई करने के लिए
11:19:53कर्जन क्वालिटी और एफिशिएंसी का रीजन देते
11:19:56हैं लेकिन उनका असली मकसद तो इंडियन
11:19:59स्टूडेंट में नेशनलिज्म की फीलिंग को
11:20:02स्प्रेड होने से रोकना था इंडियन लीडर्स
11:20:05इसे इंपिरियलिज्म को स्ट्रेंजर करने और
11:20:08नेशनलिस्ट फीलींगस को सावताश करने का
11:20:10टेंप्ट मानते हैं
11:20:11गोखले इसे रेट्रो ग्रेट मेजर कहते हैं
11:20:15इसके बाद 1913 में गवर्नमेंट एजुकेशन
11:20:18पॉलिसी को लेकर एक रेजोल्यूशन पास करती है
11:20:23गवर्नमेंट रेजोल्यूशन ऑन एजुकेशन पॉलिसी
11:20:261930
11:20:28वह यह था की 196 में बड़ौदा के प्रिंसली
11:20:33स्टेट ने अपनी टेरिटरीज में कंपलसरी
11:20:35प्राइमरी एजुकेशन को इंट्रोड्यूस किया था
11:20:37जिसके बाद नेशनल लीडर्स ब्रिटिश इंडिया
11:20:41में भी ऐसा करने के लिए गवर्नमेंट पर
11:20:43प्रेशर बना रहे थे गोखले ने इशू को
11:20:46लेजिसलेटिव असेंबली में भी रेस किया था
11:20:50लेकिन एजुकेशन पॉलिसी पर अपने 1913 के
11:20:54रेजोल्यूशन में गवर्मेंट कंपलसरी एजुकेशन
11:20:56के रिस्पांसिबिलिटी लेने से माना कर देती
11:20:59है हालांकि इन लिटरेसी रिबूट करने की
11:21:01पॉलिसी को जरूर एक्सेप्ट कर लिया जाता है
11:21:03साथ ही प्रोविंशियल गवर्मेंट से कहा जाता
11:21:06है की वो पूर और बैकवर्ड सेक्शंस को फ्री
11:21:10एलीमेंट्री एजुकेशन देने की तैयारी करें
11:21:12इसके लिए प्राइवेट एफर्ट्स को इनकरेज करना
11:21:15था और सेकेंडरी स्कूल की क्वालिटी को भी
11:21:18इंप्रूव करना था साथ ही हर प्रोविंस में
11:21:21यूनिवर्सिटी एस्टेब्लिश करने का डिसीजन भी
11:21:23लिया जाता है इसके बाद 1917 में एक और
11:21:27कमीशन फॉर्म की जाति है
11:21:34है इस कमीशन को कोलकाता यूनिवर्सिटी की
11:21:37प्रॉब्लम्स को स्टडी और रिपोर्ट करने के
11:21:39लिए फॉर्म किया गया था लेकिन इसकी
11:21:41रिकमेंडेशन बाकी यूनिवर्सिटी पर भी
11:21:43एप्लीकेबल थी कमीशन ने स्कूल एजुकेशन से
11:21:46लेकर यूनिवर्सिटी एजुकेशन तक इन टायर
11:21:49फील्ड को रिव्यू किया था इसका मानना था की
11:21:52यूनिवर्सिटी एजुकेशन को इंप्रूव करने के
11:21:54लिए पहले सेकेंडरी एजुकेशन का इंप्रूव
11:21:57होना जरूरी है अपनी रिपोर्ट में इसने बहुत
11:22:00से सुझाव दिए थे जैसे की स्कूल कोर्स 12
11:22:04साल का होना चाहिए स्टूडेंट को मैट्रिक की
11:22:07जगह इंटरमीडिएट स्टेज के बाद यूनिवर्सिटी
11:22:09में 3 एयर डिग्री कोर्स के लिए इंटर करना
11:22:12चाहिए साथ ही सेकेंडरी और इंटरमीडिएट
11:22:14एजुकेशन के एडमिनिस्ट्रेशन और कंट्रोल के
11:22:18लिए एक सेपरेट बोर्ड होना चाहिए
11:22:20इसके अलावा यूनिवर्सिटी रेगुलेशंस की
11:22:23फ्रेमिंग में रिगिडिटी कम हनी चाहिए और
11:22:26यूनिवर्सिटी को सेंट्रलाइज्ड यूनिटरी
11:22:28रेजिडेंशियल टीचिंग ऑटोनॉमस बॉडी की तरह
11:22:31फंक्शन करना चाहिए ना की स्कैटर्ड
11:22:34एफिलिएटिड कॉलेज की तरह इसके साथ ही फीमेल
11:22:37एजुकेशन एप्लाइड साइंटिफिक और टेक्नोलॉजी
11:22:40का एजुकेशन टीचर्स ट्रेनिंग और प्रोफेशनल
11:22:43और वोकेशनल कॉलेजेस को और ज्यादा एक्सटेंड
11:22:46करना चाहिए
11:22:481920 में गवर्नमेंट सैडलर रिपोर्ट की
11:22:50रिकमेंडेशन को प्रोविंशियल गारमेंट्स को
11:22:53फॉरवर्ड करती है और इन्हें इंप्लीमेंट
11:22:55करने के लिए कहा जाता है
11:22:57सैडलर कमीशन के बाद 1929 में हर डॉग कमेटी
11:23:02का फॉर्मेशन होता है
11:23:041929
11:23:07स्कूल और कॉलेज की संख्या बहुत ज्यादा
11:23:10बढ़ाने से एजुकेशन स्टैंडर्ड गिरने लगता
11:23:12हैं इसलिए एजुकेशन के डेवलपमेंट पर
11:23:15रिपोर्ट देने के लिए हार्ड टॉक कमेटी को
11:23:18सेटअप किया जाता है इसकी में रिकमेंडेशन
11:23:21इस तरह से थी पहले सुझाव था की प्राइमरी
11:23:24एजुकेशन पर जोर देना चाहिए लेकिन इसके लिए
11:23:27किसी कंपल्शन या हिस्ट्री एक्सपेंशन की
11:23:30जरूर नहीं है दूसरा यह था की सिर्फ
11:23:33डिजर्विंग स्टूडेंट को ही हाय स्कूल और
11:23:36इंटरमीडिएट स्टेज तक जाना चाहिए जबकि
11:23:39एवरेज स्टूडेंट को 8th स्टैंडर्ड के बाद
11:23:41वोकेशनल कोर्सेज की तरफ डाइवर्ट कर देना
11:23:44चाहिए इसके अलावा यूनिवर्सिटी एजुकेशन के
11:23:47स्टैंडर्ड में इंप्रूवमेंट लाने के लिए
11:23:49ऐडमिशन को रिस्टिक करने की जरूर है
11:23:54लास्ट एजुकेशन प्लेन की तरफ चलते हैं
11:23:58साजन प्लेन ऑफ एजुकेशन
11:24:02साजन प्लेन को 1944 में सेंट्रल एडवाइजरी
11:24:05बोर्ड एजुकेशन द्वारा तैयार किया गया था
11:24:07इसकी मेजर रिकमेंडेशन कुछ इस तरह से थे
11:24:11इसमें तीन से छह साल के आगे ग्रुप के लिए
11:24:14प्री प्राइमरी एजुकेशन 611 साल के आगे
11:24:18ग्रुप के लिए फ्री यूनिवर्सल और कंपलसरी
11:24:21एलीमेंट्री एजुकेशन 11 से 17 साल की
11:24:24सिलेक्टेड चिल्ड्रन के लिए हाय स्कूल
11:24:26एजुकेशन और फिर हायर सेकेंडरी के बाद 3
11:24:29साल की यूनिवर्सिटी कोर्स का सुझाव था हाय
11:24:33स्कूल दो तरह के होने थे पहले एकेडमिक और
11:24:36दूसरा टेक्निकल और वोकेशन इसके अलावा
11:24:40टेक्निकल कमर्शियल और आर्ट एजुकेशन को
11:24:43रिकमेंड किया गया
11:24:47प्रस्ताव था इसमें 20 साल के अंदर एडल्ट
11:24:50लिटरेसी को खत्म करने का टारगेट दिया गया
11:24:53इसके साथ ही टीचर्स ट्रेनिंग फिजिकल
11:24:56एजुकेशन और फिजिकल और मेंटली हैंडिकैप्ड
11:24:59के लिए एजुकेशन पर भी स्ट्रेस किया गया
11:25:02था की 40 साल के अंदर इंडिया में इंग्लैंड
11:25:06के जैसे लेवल ऑफ एजुकेशन अतिन हो जाना
11:25:08चाहिए यह प्लेन काफी बोल्ड और
11:25:11कंप्रिहेंसिव तो था लेकिन इसमें
11:25:13इंप्लीमेंटेशन के लिए कोई भी मेथाडोलॉजी
11:25:16प्रपोज नहीं की गई थी यह तो बात हो गई
11:25:18एजुकेशन से रिलेटेड डिफरेंट कमिश्नर और
11:25:21प्लांस की
11:25:23ब्रिटिश पॉलिसी को इवेलुएट करते हैं
11:25:26इवेलुएशन ऑफ ब्रिटिश पॉलिसी ऑन एजुकेशन
11:25:30दोस्तों सबसे पहले तो ब्रिटिश ने मॉडर्न
11:25:33एजुकेशन के एक्सपेंशन को लेकर जो मैसर्स
11:25:36लिए थे वो पुरी तरह इन एडेक्वेट थे और
11:25:39दूसरा इनके पीछे उनका मकसद इंडियन की भलाई
11:25:43करना तो बिल्कुल भी नहीं था
11:25:44फिर क्या रीजन थे की ब्रिटिशर्स ने इंडिया
11:25:47में एजुकेशन को प्रमोट किया इसमें सबसे
11:25:51पहले करण था इन लाइटेड इंडियन क्रिश्चियन
11:25:54मिशनरीज और ह्यूमैनिटी इन ऑफिशल्स की तरफ
11:25:57से मॉडर्न एजुकेशन के फीवर में किया गया
11:25:59एजीटेशन दूसरा करण था एडमिनिस्ट्रेशन
11:26:03संभालने के लिए एजुकेटेड इंडियन की के
11:26:06सप्लाई इसके अलावा
11:26:11ब्रिटिश मैन्युफैक्चर्ड गुड्स के लिए
11:26:13डिमांड भी क्रिएट करेंगे
11:26:15साथी एक व्यू यह भी था की वेस्टर्न
11:26:18एजुकेशन इंडियन को ब्रिटिश रूल एक्सेप्ट
11:26:21करने में हेल्प करेगी क्योंकि इसमें
11:26:23ब्रिटिश कॉन्कर्स और उनके एडमिनिस्ट्रेशन
11:26:25को ग्लोरिफाई किया जाता था इस तरह ब्रिटिश
11:26:28मॉडर्न एजुकेशन का उसे इंडिया में अपनी
11:26:32पॉलीटिकल अथॉरिटी को और मजबूत करने के लिए
11:26:35करना चाहते थे वेस्टर्न एजुकेशन के
11:26:37डेवलपमेंट के साथ ही इंडियन लर्निंग के
11:26:40ट्रेडिशनल सिस्टम का धीरे-धीरे डिक्लिन
11:26:42होने लगता है क्योंकि इसे किसी भी तरह का
11:26:45सपोर्ट नहीं मिल पता स्पेशली 1844 के बाद
11:26:49जब यह डिक्लेअर कर दिया जाता है की
11:26:51गवर्नमेंट एंप्लॉयमेंट के लिए इंग्लिश की
11:26:54नॉलेज होना कंपलसरी है
11:26:56इसके साथ ही ब्रिटिश मांस एजुकेशन को
11:26:59नेगलेक्ट करते हैं जिसकी वजह से बड़े
11:27:02स्टार पर इलेक्ट्रिसिटी देखने को मिलती है
11:27:051911 में यह 84% थी और 1921 में 92%
11:27:11क्योंकि एजुकेशन के लिए पैसे देने होते थे
11:27:14इसलिए यह सिर्फ
11:27:16क्लासेस की मोनोपोली बन जाति है और इसकी
11:27:19वजह से एजुकेटेड और मैसेज के बीच बहुत
11:27:22बड़ा लिंग्विस्टिक्स और कल्चरल गल्फ
11:27:25क्रिएट हो जाता है
11:27:27वूमेन की एजुकेशन को पुरी तरह नेगलेक्ट
11:27:30किया था क्योंकि एक तो गवर्नमेंट
11:27:32ऑर्थोडॉक्स सेक्शंस को नाराज नहीं करना
11:27:35चाहती थी और दूसरा वूमेन को एजुकेशन देने
11:27:38से कॉलोनियल रूल को कोई फायदा भी नहीं था
11:27:42साइंटिफिक और टेक्निकल एजुकेशन पर भी बहुत
11:27:44ध्यान नहीं दिया गया था
11:27:461857 तक सिर्फ कोलकाता बॉम्बे और मद्रास
11:27:50में ही तीन मेडिकल कॉलेजेस थे और सिर्फ एक
11:27:53ही अच्छा इंजीनियरिंग कॉलेज था रुड़की में
11:27:56और वह भी सिर्फ यूरोपीय और यूरेशियन के
11:27:59लिए ही ओपन था
11:28:01कंक्लुजन इस तरह हम का सकते हैं की
11:28:05ब्रिटिशर्स ने सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे
11:28:07के लिए इंडिया में मॉडर्न एजुकेशन की
11:28:10शुरुआत की थी लेकिन इंडियन ने इसका पूरा
11:28:13फायदा उठाया मॉडर्न एजुकेशन के इतिहास में
11:28:16इंडिया में जी एजुकेटेड मिडिल क्लास को
11:28:19तैयार किया वही आगे जाकर इंडियन नेशनल
11:28:22मूवमेंट को लीड करती है
11:28:24दोस्तों यहां हमारा पार्ट भी भी खत्म हुआ
11:28:27अब वीडियो के लास्ट और फाइनल पार्ट को
11:28:30शुरू करते हैं जो बात करता है मेंस्ट्रीम
11:28:33फ्रीडम स्ट्रगल के साथ चलती पैरेलल
11:28:35मूवमेंट्स की इसमें हम लेफ्ट के राइस
11:28:38कैपिटल क्लास के राइस वर्कर क्लास के
11:28:41मूवमेंट्स और प्रिंसली स्टेटस में चल रहे
11:28:44मूवमेंट जैसे टॉपिक को कर करने वाले हैं
11:28:46तो आई शुरू करते हैं डी लास्ट सेगमेंट ऑफ
11:28:49दिस वीडियो डी स्टोरी ऑफ पार्टीशन
11:28:53दोस्तों 14th अगस्त 1947 के खत्म होने में
11:28:57बस कुछ ही वक्त बच्चा था और आदि रात को
11:29:00इतिहास लिखा जाना था नई दिल्ली में स्थित
11:29:04कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली के मिडनाइट सेशन
11:29:06को एड्रेस करने आए जवाहर लाल नेहरू ने एक
11:29:09ऐतिहासिक भाषण दिया नाम दिया ट्वीट विथ
11:29:13डेस्टिनी जी तरह नेहरू आजादी को लेकर
11:29:16हॉपफुल थे वैसे ही उनका भाषण भी बेहद
11:29:19हॉपफुल था उन्होंने भारत की आजादी को
11:29:23अनाउंस किया और कहा आते डी स्ट्रोक ऑफ डी
11:29:26मिडनाइट व्हेन डी वर्ल्ड स्लिप्स इंडिया
11:29:29विलन तू लाइफ और फ्रीडम कॉन्स्टिट्यूशन
11:29:32असेंबली खचाखच भारी थी सारे दालों के नेता
11:29:36मौजूद थे लेकिन भारत की आजादी के सबसे
11:29:39बड़ी नेता महात्मा गांधी वह नहीं थे तो
11:29:43कहां थे गांधी दोस्तों वो गांधी जिन्हें
11:29:47नेताजी सुभाष चंद्र बस ने आपसी मतभेद के
11:29:50बावजूद राष्ट्रपति
11:29:54वह दिल्ली से हजारों किलोमीटर दूर नोवा
11:29:58खाली में थे जी हां जब देश आजादी का जश्न
11:30:01माना रहा था तब गांधी बंगाल के नोआखली में
11:30:05लगी आज को बुझने की कोशिश कर रहे थे हमारी
11:30:08आज की कहानी इसी आज की है जो आजादी के
11:30:11वक्त पूरे देश में सुलग रही थी आज की
11:30:14कहानी उसे घटना की है जिसने आजादी के जश्न
11:30:17को फीका कर दिया वो घटना जिसने भारत को
11:30:21अंग्रेजी हुकूमत से आजादी तो दिलाई लेकिन
11:30:24ऐसी कीमत पर जिसका हिसाब भी लगा पन
11:30:27नामुमकिन था यह कहानी है दो ऐसे मुल्कों
11:30:31की स्थापना की जो 75 साल बाद भी एक दूसरे
11:30:35के दुश्मन बने हुए हैं दोस्तों यह कहानी
11:30:39है भारत के विभाजन की इंडिया डिवाइडेड एट
11:30:43थे स्ट्रोक ऑफ डी मिडनाइट टावर 15th अगस्त
11:30:461947 लगभग 200 सालों के दमन के बाद
11:30:50ब्रिटिश राज ने भारत छोड़ और भारत
11:30:54उपमहाद्वीप 2000 देश में विभाजित हुआ
11:30:58हिंदू मेजॉरिटी सेकुलर इंडिया और मुस्लिम
11:31:01मेजॉरिटी सेकुलर पाकिस्तान भारत भी सेकुलर
11:31:05है लेकिन पाकिस्तान का सेक्युलरिज्म 1955
11:31:09में खत्म हो गया और वो एक इस्लामिक स्टेट
11:31:12बन गया खैर पार्टीशन का अंदाज़ 1947 के
11:31:16पहले ही लगाया जा रहा था और जब ब्रिटिशर्स
11:31:18की इंडिया एग्जिट की अटकालीन तेज हुई तो
11:31:21हजारों लाखों की संख्या में हिंदू सिख और
11:31:25मुस्लिम पाकिस्तान और इंडिया के बीच
11:31:27माइग्रेट करने लगे और इनमें से कई लाखों
11:31:31लोग तो बॉर्डर पर पहुंची नहीं पे
11:31:33पार्टीशन की खबरें तेज हुई और ब्रिटेन एक
11:31:37हिस्ट्री विड्रोल के प्लांस बनाने लगा
11:31:39परिणाम स्वरूप भारत में अव्यवस्था और
11:31:42अराजकता के बादल छ गए इस अराजकता के सबसे
11:31:46बड़े शिकार बने दो बॉर्डर प्रोविंस पंजाब
11:31:49और बंगाल जहां दंगों की आज सुलगना लगी
11:31:53अंग्रे ने यह विभाजन पीपल पर लाइंस खींचकर
11:31:57तो कर दिया पर ऑन ग्राउंड इसका अंजाम था
11:31:59हजारों लाखों लोगों का कत्लेआम और
11:32:03डिस्प्लेसमेंट महिलाओं के साथ रेप हुए और
11:32:06बच्चों को किडनैप कर बाजरो में बीच दिया
11:32:09गया
11:32:09नरसंहार यौन वायलेंस डकैती ल पोस्ट
11:32:14कन्वर्जेंस ये सब आम बात हो गई थी एक
11:32:17रिपोर्ट के हिसाब से लगभग 75000 औरतें का
11:32:21हिंसक भीड़ और दंगाइयों द्वारा रेप किया
11:32:23गया और ये सिर्फ रिकॉर्डिंग डाटा है इन
11:32:27रियलिटी तो यह नंबर लाखों में था
11:32:30पड़ोसी ही पड़ोसी का दुश्मन बन गया
11:32:32हैवानियत अपनी चर्म पर थी फेमस लेखक सदर
11:32:37हसन मंटो उसे दूर में विभाजन के इस भयावा
11:32:40रूप को अपनी कहानियां में बताते रहे
11:32:42खुशवंत सिंह ने भी अपनी किताब एन ट्रेन तू
11:32:45पाकिस्तान में पार्टीशन कैसे कुरूप चेहरे
11:32:47की चर्चा की
11:32:49देशभर में फैली इस अराजकता ने देश को ही
11:32:52नहीं बल्कि पुरी दुनिया को झकझोर कर रख
11:32:55दिया
11:32:55हजारों सालों से लाडली एक शांतिपूर्वक
11:32:59माहौल में र रहे लोग अचानक दुश्मन बन गए
11:33:02और उनके बीच बॉर्डर्स बना दिए गए लेकिन
11:33:06दोस्तों ये दुश्मनी अचानक से पैदा नहीं
11:33:08हुई थी इस दुश्मनी का जन्म एक कॉन्शियस
11:33:12प्रोसेस या सूची समझी साजिश के तहत हुआ यह
11:33:16कॉन्शियस प्रोसेस क्या था आगे हम उसकी ही
11:33:18चर्चा करेंगे और देखेंगे कहानी भारत की
11:33:21रोड्स तू पार्टीशन की
11:33:24तू नेशन थ्योरी रोड तू पार्टीशन दोस्तों
11:33:28इंडिया का पार्टीशन उसे लास्ट मिनट
11:33:30एग्रीमेंट का नतीजा था जिसके तहत
11:33:33ब्रिटिशर्स भारत को आजादी देने वाले थे
11:33:35लेकिन इस पार्टीशन के बीच कब बॉय गए इसकी
11:33:39कहानी काफी पुरानी है ब्रिटिश के खिलाफ जब
11:33:42आजादी की लड़ाई छड़ी गई तो इंडियन नेशनल
11:33:45कांग्रेस उसे लड़ाई का सबसे प्रॉमिनेंट
11:33:47ऑर्गेनाइजेशन बन के उभरा इसका फॉर्मेशन
11:33:501885 में दादाभाई नौरोजी ओ हम और डीसी वचन
11:33:55जैसे नेताओं ने किया था लेकिन पार्टीशन तक
11:33:58आते-आते इसका में कंट्रोल महात्मा गांधी
11:34:00और जवाहर लाल नेहरू जैसे नेताओं के हाथ
11:34:03में चला गया इंडियन नेशनल कांग्रेस और
11:34:06उसके मोस्ट प्रॉमिनेंट नेता इंक्लूडिंग
11:34:08महात्मा गांधी वन नेशन के आइडिया की
11:34:11सपोर्टर थे यानी वो मानते थे की देश में
11:34:14रहने वाले अलग-अलग धर्म और जाति के लोग एक
11:34:17राष्ट्र बनाते हैं और वो उसमें पीसफुली र
11:34:20सकते हैं
11:34:21यही वजह थी की महात्मा गांधी पार्टीशन से
11:34:24इतने आहट हुए की जब दिल्ली में कांग्रेस
11:34:27आजादी का जश्न माना रही थी तब गांधी
11:34:30नोआखली जाकर दंगाइयों को हथियार रखना के
11:34:33लिए माना रहे थे गांधी का वन नेशन का सपना
11:34:37टूट गया था वो खुद भी टूट गए थे खैर
11:34:40कांग्रेस और गांधी के इतिहास के खिलाफ
11:34:42सबसे बड़ा अपोजिशन आया राइट विंग पॉलीटिकल
11:34:45ग्रुप से जिनका जन्म कांग्रेस के
11:34:48सेक्युलरिज्म के अगेंस्ट एक रिएक्शन के
11:34:51रूप में हुआ था मुस्लिम लीग जैसे
11:34:53ऑर्गेनाइजेशंस जो माइनॉरिटी को रिप्रेजेंट
11:34:56करने का दवा कर रहे थे उन्होंने
11:34:58स्पेसिफिकली कांग्रेस के वन नेशन के
11:35:01आइडिया को चैलेंज किया लीग के सबसे ताकतवर
11:35:04नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने कांग्रेस को
11:35:07हिंदू ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर दिया और
11:35:09गांधी पर हिंदू मेजॉरिटी रेनिज्म को
11:35:12प्रमोट करने का आप लगाया जीना ने देश के
11:35:15मुस्लिम को यह बोला की क्योंकि 80% लोग
11:35:18भारत में हिंदू हैं और डेमोक्रेसी में
11:35:20मेजॉरिटी सपोर्ट से ही सरकार बंटी है
11:35:22इसलिए आने वाले समय में मुस्लिम के खिलाफ
11:35:25डिस्क्रिमिनेशन होगा इसलिए मुस्लिम को एक
11:35:29अलग देश बनाने की जरूर है जिन्ना ने अपनी
11:35:32तू नेशन थ्योरी में ये भी कहा की मुस्लिम
11:35:35और हिंदू के इंटरेस्ट अलग-अलग
11:35:39शांति से कभी र ही नहीं सकते लीग के अलावा
11:35:43डॉक्टर शशि थरूर कहते हैं की ऐसे ही
11:35:46सिमिलर रागी मंच हिंदू महासभा के नेता
11:35:49विनायक दामोदर सावरकर भी दे रहे थे डॉक्टर
11:35:52जरूर अपनी किताब वही आई एम हिंदू में यह
11:35:55दवा करते हैं की तू नेशन थ्योरी के सबसे
11:35:58पहले दावेदार सावरकर थे जिन्होंने 1937
11:36:02में इस थ्योरी को प्रोपाउंड किया मार्च
11:36:04बिफोर मुस्लिम लीग पाकिस्तान रेजोल्यूशन
11:36:07ऑफ 1940
11:36:09थ्योरी किसने पहले
11:36:35हिंदू मुस्लिम डिवाइड के लिए कांग्रेस
11:36:38मुस्लिम लीग और हिंदू महासभा कनफ्लिक्ट से
11:36:41भी ज्यादा रिस्पांसिबल
11:36:45[संगीत]
11:36:51अंग्रेज जब भारत आए तो उन्होंने कई
11:36:54रिबेलियंस और रिवॉल्ट स्पेस की
11:36:561857 का विद्रोह अंग्रेजी ताकत के लिए
11:36:59सबसे बड़ा एक्जिस्टेंशल थ्रेड बना क्योंकि
11:37:02इसमें हिंदू-मुस्लिम यूनिटी बाढ़ चढ़कर
11:37:05अच्छी गई
11:37:05हिंदू लीडर्स ने मुगल एंपरर बहादुर शाह
11:37:08जफर के अंदर अंग्रेजन के खिलाफ विद्रोह
11:37:11छेद दिया था
11:37:12ब्रिटिश ने इस विद्रोह को कुचल तो दिया
11:37:15लेकिन उन्होंने यह कनक्लूड किया की अगर
11:37:18उन्हें इंडिया में राज करना है तो उन्हें
11:37:21हिंदू मुस्लिम यूनिटी को ब्रेक करना ही
11:37:23होगा इसलिए उन्होंने
11:37:28मैक्सिमम पर बेस्ड डिवाइडेड रूल पॉलिसी
11:37:30अपनी और अपनी पॉलिसी की थ्रू वो हिंदू
11:37:33मुस्लिम डिवाइड को बढ़ावा देने लगे
11:37:36ऐसा नहीं है की हिंदू मुस्लिम कनफ्लिक्ट
11:37:38पहले नहीं था लेकिन उसका स्केल काफी
11:37:41लोकलाइज्ड था और इतिहास का दवा करते हैं
11:37:44की लार्जली हिंदू मुस्लिम इंडिया में
11:37:47पीसफुली ही रहते थे यही भारतीय
11:37:50सिविलाइजेशन ग्लोरी का प्रति बना लेकिन
11:37:52ब्रिटिश डिवाइडेड रूल पॉलिसी ने हिंदू
11:37:55मुस्लिम डिवाइड को एक नेशनल या राष्ट्रीय
11:37:57अवतार दे दिया
11:37:59डिविडेंड रूल सिर्फ रिलिजियस लाइंस में
11:38:02नहीं हुआ बल्कि हर पॉसिबल अंकल से किया
11:38:05गया सेक्स को मुस्लिम किया अगेंस्ट एक
11:38:08कास्ट को दूसरी कास्ट के अगेंस्ट एक रीजन
11:38:11को दूसरी रीजन के अगेंस्ट ट्रबल्स को नॉन
11:38:14ट्राईबल्स के अगेंस्ट अनस्वर यह डिवाइडेड
11:38:16रूल हमें कई ब्रिटिश पॉलिसी में दिखता है
11:38:201857 की क्रांति के बाद अंग्रेजन ने 6
11:38:23पत्थंस और गोरखास को अपील करने के लिए
11:38:26मिलिट्री रिक्रूटमेंट में डिस्क्रिमिनेटरी
11:38:29पॉलिसी को अडॉप्ट किया ऐसा इसलिए क्योंकि
11:38:31सिक्स पत्थंस और गोरखास ने ब्रिटिश को
11:38:34विद्रोह में सपोर्ट किया था
11:38:36जबकि अवध बिहार और साउथ के सोल्जर के
11:38:40खिलाफ डिस्क्रिमिनेशन हुआ क्योंकि ये 1857
11:38:43विद्रोह की में सपोर्टर थे इसके अलावा
11:38:46कास्ट बेसिस पर डिवीजन के लिए ब्रिटिशर्स
11:38:48ने कास्ट बेस्ड रेजीमेंट भी क्रिएट किया
11:38:51ब्रिटिशर्स ने बाकी के एडमिनिस्ट्रेटिव
11:38:54जॉब्स में भी डिस्क्रिमिनेशन कर स्पेसिफिक
11:38:57कम्युनिटीज को अपीस करना चालू किया कई
11:39:00एजुकेटेड और इनफ्लुएंशल लीडर्स को
11:39:02इस्तेमाल करके भी ब्रिटिशर्स ने रिलिजियस
11:39:05डिवाइड को फ्यूल किया पर एग्जांपल
11:39:07ब्रिटिशर्स ने एक्टिव ली मुस्लिम रिफॉर्मर
11:39:10सर सैयद अहमद खान को पीटनाइश किया और उनसे
11:39:13आज किया की वो मुस्लिम को इंडियन नेशनल
11:39:16कांग्रेस को बॉयकॉट करने के लिए मने समय
11:39:19और सिचुएशन के हिसाब से जो भी ग्रुप
11:39:21अंग्रेजन को फेवरेबल लगता वो उन्हें अपील
11:39:24करते और सोसाइटी का विभाजन करते यह पुरी
11:39:27डिवाइडेड रूल पॉलिसी अपनी चर्म पर तक
11:39:30पहुंची जब 1909 का
11:39:32रिफॉर्म्स आया इसके तहत मुस्लिम को सेपरेट
11:39:36इलेक्ट्रोरेट दे दिया इसके तहत मुस्लिम ही
11:39:39मुस्लिम कैंडिडेट को वोट कर सकता था और
11:39:42इसीलिए इसे कम्युनल इलेक्टरेट भी कहा गया
11:39:45इसने हिंदू-मुस्लिम डिफरेंस को पॉलीटिकल
11:39:48साइंस और नेशनलाइज कर दिया और अब किसी भी
11:39:52प्रकार का वैकेंसी मुश्किल लगे लगा कुछ
11:39:55हिस्टोरियन तो यह भी दवा करते हैं की 1857
11:39:59के बाद हुए ऑलमोस्ट सारे दंगों को
11:40:01अंग्रेजों ने ही क्रिएट किया था ब्रिटिश
11:40:05कलेक्टर्स सेक्रेटली हिंदू पंडित को पैसे
11:40:08देकर मुस्लिम के अगेंस्ट स्पीच देने को
11:40:10कहते और मौलवियों को पैसे देकर हाइंड्स के
11:40:14अगेंस्ट स्पीच देने को
11:40:15सिस्टमैटिक कम्युनल प्वाइजन कोलोनियलिज्म
11:40:18का वो कुरूप चेहरा है जो हमारे समाज को आज
11:40:22तक हॉट करता है एन सिर्फ भारत में बल्कि
11:40:25पूरे साउथ एशिया में खैर 25% पापुलेशन के
11:40:29साथ मुस्लिम ब्रिटिश इंडिया की लार्जेस्ट
11:40:32रिलिजियस माइनॉरिटी थे
11:40:34वेस्टर्न प्रोविंस जैसे सिंह पंजाब
11:40:37एनब्ल्यूएसपी और ईस्ट में बंगाल प्रोविंस
11:40:40के कई एरियाज में तो वो मेजॉरिटी में भी
11:40:42थे
11:40:43यही वजह है की मुस्लिम हिंदू डिवाइड
11:40:46ब्रिटिश पॉलिसी का प्रायोरिटी रहा
11:40:48इंपीरियल रूल में मुस्लिम को कई पॉलीटिकल
11:40:51और एडमिनिस्ट्रेटिव एडवांटेज दिए गए जिनके
11:40:54प्रति वो 1947 तक अगस्टम्ड हो गए थे
11:40:57उन्हें डर था की आजादी के बाद शायद उनसे
11:41:01यह बेनिफिट्स छन लिए जाएंगे स्पेशली अगर
11:41:04कांग्रेस पावर में आई तो ऊपर से जीना ने
11:41:07ऑलरेडी कांग्रेस को हाइंड्स की पार्टी
11:41:09डिक्लेअर कर दिया था
11:41:1119456 में मुस्लिम लीग को प्रोविंशियल
11:41:14इलेक्शन में मेजॉरिटी मुस्लिम वोट्स मिले
11:41:17और अब मुस्लिम लीग यह दवा करने लगी की वह
11:41:20मुस्लिम की सोल रिप्रेजेंटेटिव बॉडी है
11:41:22चलिए अब देखते हैं की कैसे ब्रिटिश
11:41:25हिस्ट्री विड्रोल ने सिचुएशन को बाद से
11:41:27बतर बना दिया
11:41:29डी हिस्ट्री ब्रिटिश विद डी रोल दोस्तों
11:41:32वर्ल्ड वार 2 में सेटबैक फेस कर रहा
11:41:34ब्रिटिश अंपायर अपनी ग्लोबल हिजामानी
11:41:36ऑलरेडी को चुका था ऊपर से 1942 में
11:41:40महात्मा गांधी ने क्यूट इंडिया मूवमेंट
11:41:42में करो या मारो का नारा दे दिया था
11:41:44अंग्रेज वार जितने के लिए इंडियन का
11:41:47सपोर्ट चाहते थे और इसलिए उन्हें कांग्रेस
11:41:49की सपोर्ट की जरूर थी इसीलिए उन्होंने कई
11:41:53एक्टिव एफर्ट्स लिए वो कांस्टीट्यूशनल
11:41:55रिफॉर्म्स अगस्त ऑफर ट्रिप्स मिशन और
11:41:59कैबिनेट मिशन इंडिया में कांस्टीट्यूशनल
11:42:02रिफॉर्म्स देने और आजादी की पॉसिबिलिटी को
11:42:04एक्सप्लोर करने के लिए भेजें गए लेकिन इन
11:42:07सभी ने पाकिस्तान के फॉर्मेशन को लॉज ली
11:42:10रिजेक्ट कर दिया पर मार्च 1940 में
11:42:13मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान रेजोल्यूशन को
11:42:16पास कर सिचुएशन को काफी ज्यादा
11:42:18कॉम्प्लिकेटेड कर दिया था
11:42:19लीग के लिए इस रेजोल्यूशन को इंप्लीमेंट
11:42:22करवाना एक क्रेडिबिलिटी टेस्ट था और ऐसे
11:42:25में कांस्टीट्यूशनल एफर्ट्स को लेकर लीग
11:42:28और कांग्रेस में सेटलमेंट नामुमकिन ग रहा
11:42:31था
11:42:321947 के कैबिनेट मिशन को कांग्रेस और लीग
11:42:36दोनों ने रिजेक्ट कर दिया और जीना ने
11:42:39पाकिस्तान के लिए डायरेक्ट एक्शन लॉन्च कर
11:42:41दिया इसका नतीजा था लॉज स्केल कम्युननल
11:42:45वायलेंस अगस्त 1946 में डी ग्रेट कोलकाता
11:42:49किलिंग में लगभग 4000 लोग मारे गए और 1
11:42:53लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए उधर मार्च
11:42:551947 में माउंटबेटन नए वायसराय बना दिए गए
11:42:59जिनका एम था ब्रिटिश का इंडिया से स्पीडी
11:43:03विड्रोल आज अमेरिकन स्पीडी विड्रोल ने जी
11:43:06तरह का किया अफगानिस्तान में क्रिएट किया
11:43:08है वैसा ही कुछ तब भारत में हुआ जून थर्ड
11:43:12को माउंट बैटरी ने कांग्रेस और लीग को
11:43:14उल्टीनेटर दे दिया और कहा की अगस्त 1947
11:43:18तक ब्रिटिश
11:43:19छोड़ देंगे इतने साल के कनफ्लिक्ट के बाद
11:43:22अब नेताओं के पास कोई अल्टरनेटिव नहीं था
11:43:25उनके पास केवल दो चॉइसेज थी या तो वो बिना
11:43:29किसी सॉल्यूशन के एक अराजक आजाद भारत को
11:43:32एक्सेप्ट करें जहां प्रिंसली स्टेटस अपनी
11:43:35इंडिपेंडेंस डिक्लेअर कर देश को फ्रेगमेंट
11:43:37कर लेने या फिर वो पार्टीशन को कस कर केवल
11:43:41दो स्टेटस बनाकर इस अराजकता को अवॉइड करें
11:43:44मोस्टली जो 2 सेपरेट स्टेटस को अपोज कर
11:43:48रहे थे उन्हें भी इस सेटलमेंट को मजबूरी
11:43:50में एक्सेप्ट करना पड़ा और इसके में
11:43:53कल्पित थे अंग्रेज उनकी कॉन्शियस डिवाइस
11:43:57और उनका इरिस्पांसिबल बिहेवियर
11:44:01पाकिस्तान को सीरियल रेडक्लिफ द्वारा
11:44:03दिमागाइटेड बाउंड्रीज के तहत सेपरेट कर
11:44:06दिया गया
11:44:10और इंडिया ने 15th अगस्त को
11:44:13नए मॉडल ऑफीशियली 17th अगस्त को अप्रूव
11:44:17हुए लेकिन हिस्ट्री विड्रोल का एक और
11:44:19नतीजा था
11:44:21इरिस्पांसिबिलिटी मार्केटिड बाउंड्री
11:44:23रेडक्लिफ ने बाद में एडमिट किया की उनके
11:44:26द्वारा बनाई गई बाउंड्रीज आउट ऑफ डेट
11:44:28मैप्स और सेंसेज मटेरियल पर बेस थे इंडियन
11:44:32स्टोन अपार्ट हूं बाज रिस्पांसिबल पर
11:44:35वाइल्डलैंड्स होना गया था पार्टीशन अनाउंस
11:44:38हुआ और देंगे भड़क उठे लाखों लोग सफर
11:44:42टेरिटरी के लिए माइग्रेट करने लगे मुस्लिम
11:44:45पाकिस्तान की और और हिंदू और सिख इंडिया
11:44:48की और एस्टीमेट के हिसाब से लगभग 1.5
11:44:51करोड़ लोगों को डिस्प्लेसमेंट झेलना पड़ा
11:44:54डेथ की बात करें तो लगभग दो से 20 लाख
11:44:58लोगों के मारे जान की खबरें हैं
11:45:00पार्टीशन ने एन सिर्फ वायलिन डेथ को जन्म
11:45:03दिया बल्कि लोग डिजीज भुखमरी और
11:45:06डिप्रिवेशन से भी मारे कई हिस्टोरियन तो
11:45:09ये भी कहते हैं की भले ही पार्टीशन को
11:45:11अवॉइड कर पन 1947 में मुश्किल था लेकिन
11:45:14वायलेंस डेथ और डिप्रेशन शायद अवॉइड किया
11:45:19जा सकता था
11:45:20जी तरह से पार्टीशन की जिम्मेदार मेली
11:45:23अंग्रेज थे वैसे ही इस जनोसाइड और
11:45:25क्राइसिस के जिम्मेदार भी वही थे
11:45:29ब्रिटिशर्स खुद के लोगों को बचाने में
11:45:31बीजी रहे और पंजाब और बंगाल में लायन
11:45:34ऑर्डर मेंटेन करने से परहेज करते रहे
11:45:36इसीलिए कहते हैं की यह मैसिव क्राइसिस
11:45:39क्रिएट करने के बाद भी केवल 6 से 7
11:45:43ब्रिटिशर्स ही इस दूर में मारे गए चलिए अब
11:45:46देखते हैं की विभाजन ने पोस्ट कॉलोनियल
11:45:49साउथ एशिया को कैसे बादल दिया
11:45:52इंपैक्ट ऑन पोस्ट कॉलोनियल साउथ एशिया
11:45:55दोस्तों इस ब्लडी पार्टीशन ने भारत को ही
11:45:59नहीं बल्कि पूरे साउथ एशिया को बादल कर रख
11:46:01दिया एक तरफ जहां हजारों साल तक
11:46:05डाइवर्सिटी इंडियन सबकॉन्टिनेंट का
11:46:07हॉलमार्क रही और अलग-अलग कम्युनिटी के लोग
11:46:10सद्भावना से रहते थे वहीं दूसरी और
11:46:13पार्टीशन के हॉरर ने एक लॉन्ग लास्टिंग
11:46:15ट्रस्ट डिफिसिट को जन्म दिया यह सिर्फ
11:46:18इंडिया में नहीं हुआ बल्कि पाकिस्तान और
11:46:21करंट स्टीम बांग्लादेश में भी हुआ भले ही
11:46:24पाकिस्तान सिर्फ मुस्लिम के लिए क्रिएट
11:46:26किया गया था लेकिन इन रियलिटी ऐसा हुआ
11:46:29नहीं वेस्ट पाकिस्तान में लगभग 1.6% नॉन
11:46:33मुस्लिम थे ईस्ट पाकिस्तान या मॉडर्न दे
11:46:36बांग्लादेश में लगभग 22% नॉन मुस्लिम और
11:46:39इंडिया में लगभग 10% मुस्लिम 1951 के
11:46:43सेंसेक्स के हिसाब से बैक गए ये
11:46:46सब्सटेंशियल नंबर था स्पेशली इंडिया और
11:46:49बांग्लादेश में
11:46:50पार्टीशन में हुई हिंसा का इंपैक्ट इन
11:46:53तीनों देश में इतना गहरा हुआ की समय-समय
11:46:56पर यह राइट्स के रूप में दिखाई देता है
11:46:58इसी रिलिजियस ड्राइव का नतीजा था एक
11:47:01रिलिजियस फेनेटिक द्वारा राष्ट्रपिता
11:47:03महात्मा गांधी की हत्या अंग्रेज चले गए
11:47:06लेकिन उनका फैलाया हुआ जहर रहा और इसने इन
11:47:10देश में एक सरिता आईडियोलॉजी को और ज्यादा
11:47:13फ्यूल किया और एक स्त्रीमिस्ट
11:47:15ऑर्गेनाइजेशंस अपना प्रोपेगेंडा चलते रहे
11:47:18खैर सबसे ज्यादा खराब कंडीशन थी रिफ्यूजी
11:47:21की जो डिप्रिवेशन फेस करते रहे उनका
11:47:25रिहैबिलिटेशन स्टेट के लिए सबसे बड़ा
11:47:27चैलेंज बना दिल्ली रिफ्यूजी क्राइसिस का
11:47:31मेजर सेंटर था
11:47:32रिफ्यूजी क्राइसिस
11:47:34194748 में कश्मीर को लेकर हुए इंडिया पाक
11:47:38वार के चलते और ज्यादा इंटेंस हो गई और
11:47:41रेफ्रिजीस और ज्यादा तेजी से माइग्रेट
11:47:43करने लगे
11:47:45लोग छोटी-छोटी ग्रुप में 1960 तक माइग्रेट
11:47:48करते रहे बिकॉज़ ऑफ डिस्क्रिमिनेशन पेस्ट
11:47:51इंडिया ने तो फिर भी ऑफीशियली खुद को
11:47:54सेकुलर डिक्लेअर कर माइनॉरिटी प्रोटेक्शन
11:47:56का जम्मा उठाया लेकिन पाकिस्तान में ऐसा
11:47:58नहीं हुआ दोस्तों ये इतिहास 75 साल बाद भी
11:48:02भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को गाइड
11:48:05करता है जहां लॉक के एक्रॉस आए दिन
11:48:08सीजफायर वायलेशंस होते हैं दोनों देश आज
11:48:12न्यूक्लियर आम है और इसीलिए दुनिया भर के
11:48:14देश न्यूक्लियर वार की पॉसिबिलिटी से
11:48:17परेशान रहते हैं और इसीलिए फार्मर उस
11:48:20प्रेसिडेंट बिल क्लिंटन ने लॉक को डी
11:48:23मोस्ट डेंजरस प्लेस इन डी वर्ल्ड बताया था
11:48:27राइस ऑफ लेफ्ट इन इंडिया
11:48:41जाता था
11:48:42इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन और फिर सोशलिस्ट
11:48:45और कम्युनिस्ट आईडियोलॉजी के आने के बाद
11:48:47इन टर्म्स का मीनिंग और व्हाइट हो जाता है
11:48:50आज हम इंडिया में लेफ्ट आईडियोलॉजी की
11:48:53ग्रोथ और इससे रिलेटेड पार्टी के फॉर्मेशन
11:48:55की बात करेंगे सबसे पहले जानते हैं कुछ
11:48:58ऐसी कंडीशंस को जो इंडिया में लेफ्ट
11:49:01आईडियोलॉजिस्ट की ग्रोथ को फीवर करती हैं
11:49:04सरकमस्टेंसस फरिंग ग्रोथ ऑफ लेफ्ट
11:49:06आईडियोलॉजिस इन इंडिया
11:49:09फर्स्ट वर्ल्ड वार के और के दौरान कुछ ऐसी
11:49:12पालिटी को इकोनॉमिक्स सरकमस्टेंसस बनते
11:49:14हैं जिनकी वजह से इंडिया में लेप्टिज्म गो
11:49:16करता है जैसे की वार अपने साथ फाइनेंशियल
11:49:20बर्डन लेकर आता है डेली नेसेजिटीज की
11:49:23चीजों के दम आसमान चुने लगता हैं देश में
11:49:26फेम जैसे हालात बन जाते हैं और ऐसे में
11:49:28इंडस्ट्री लिस्ट अपने मुनाफे में लगे होते
11:49:30हैं इस सबसे इंपिरियलिस्ट कैपिटल डोमिनेशन
11:49:33के इविल्स एक्सपोज होते हैं इसके अलावा
11:49:36मार्क्स के रिवॉल्यूशनरी इतिहास और
11:49:39यूएसएसआर का फॉर्मेशन इंडियन इंटेलेक्चुअल
11:49:42को इंस्पायर करता है इसी समय गांधी जी
11:49:44द्वारा स्वराज और स्वदेशी के मैसेज को देश
11:49:47के कोनी कोनी में फैलाने की कोशिश की जाति
11:49:50है जो पॉलीटिकल मूवमेंट को एक नई दिशा
11:49:53देता है और ऐसे में एक ऑर्गेनाइज्ड और
11:49:56ऑडियो लॉजिक इंस्पायर सोशलिस्ट मूवमेंट के
11:49:58लिए जमीन तैयार हो जाति है इसके साथ ही
11:50:01एजुकेटेड मिडिल क्लास की एक नई जेनरेशन
11:50:04अनइंप्लॉयमेंट की वजह से लिबरलिज्म में
11:50:06अपना विश्वास को देती है और रिवॉल्यूशन
11:50:09आर्य सोशल स्टूडियोलॉजिक की तरफ अट्रैक्ट
11:50:11होती है इस तरह लेफ़्टिस्ट मूवमेंट की
11:50:14शुरुआत इंडिया में होने लगती है
11:50:21डी लेफ्ट मूवमेंट्स इंडिया में लेफ्ट
11:50:24मूवमेंट के इमरजेंसी को दो मां स्ट्रीम्स
11:50:26में डिवाइड किया जा सकता है पहले
11:50:28कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के
11:50:30प्लेटफॉर्म पर कम्युनिस्ट कर रहा है जो की
11:50:33इंटरनेशनल कम्युनिस्ट मूवमेंट की ब्रांच
11:50:35की तरह फंक्शन करते हैं और लार्जली कमेंटम
11:50:39द्वारा ही कंट्रोल किया जाते हैं दूसरी
11:50:41सरिता में इंडियन नेशनल कांग्रेस के विदीन
11:50:44लिफ्ट कराई जाता है उदाहरण के तोर पर 1934
11:50:48में फॉर्म की गई कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी
11:50:51ये डेमोक्रेटिक सोशलिज्म की आइडल जी से
11:50:54इंस्पायर होते हैं सबसे पहले बात करते हैं
11:50:56फर्स्ट सरिता यानी की कम्युनिस्ट पार्टी
11:50:59की डी कम्युनिस्ट पार्टी
11:51:02म राय और साथ अक्टूबर 1920 में ताशकंद में
11:51:07कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की इनफॉरमेशन
11:51:09करते हैं इसके अलावा इंडिया में भी 1920
11:51:12के बाद बहुत से लेफ्ट विंग और कम्युनिस्ट
11:51:15ग्रुप एक्जिस्टेंस में ए चुके होते हैं
11:51:17इनमें से ज्यादातर ग्रुप दिसंबर 1925 में
11:51:21कानपुर में एक साथ आकर कम्युनिस्ट पार्टी
11:51:23ऑफ इंडिया नाम से एक जो इंडिया
11:51:25ऑर्गेनाइजेशन बनाते हैं कम्युनिस्ट
11:51:27मूवमेंट के इतिहास को पांच फेस में डिवाइड
11:51:29किया जा सकता है
11:51:35फर्स्ट फैज डी पीरियड ऑफ थ्री कंस्पायरेसी
11:51:38ट्रायल्स
11:51:40मास्को की कम्युनिस्ट यूनिवर्सिटी पर
11:51:42टॉयलेट्स ऑफ डी ईस्ट में ट्रेनिंग लेने के
11:51:45बाद कम्युनिस्ट रिवॉल्यूशनरीज का पहले
11:51:47बैंड इंडिया आता है लेकिन यहां इन्हें
11:51:50ब्रिटिश क्राउन के अगेंस्ट कंस्पायरेसी के
11:51:52लिए एक्स किया जाता है जी वजह से ये अपना
11:51:55ज्यादा प्रभाव बना ही नहीं पाते इसके बाद
11:51:57कॉमिनेस्ट मूवमेंट तब थोड़ा स्ट्रांग बंता
11:52:00है जब ग्रेट ब्रिटेन की कम्युनिस्ट पार्टी
11:52:02इंडिया में इसे सुपरवाइज करने का फैसला
11:52:04लेती है इनकी तरफ से फिलिप्स प्रत को
11:52:07दिसंबर 1926 में इंडिया भेजो जाता है और
11:52:11यहां आकर यह बहुत सी यूनियंस ऑर्गेनाइजर
11:52:13करते हैं न्यूज़ पेपर्स को एडिट करते हैं
11:52:15और कुछ युद्ध और फ्रंट ऑर्गेनाइजेशंस भी
11:52:18लॉन्च करते हैं इनके प्रयासों से बंगाल
11:52:20मुंबई पंजाब और अप में वर्कर्स और पेजयंस
11:52:24पार्टी ऑर्गेनाइजर की जाति हैं दिसंबर
11:52:261928 में सभी वर्कर्स और प्रेजेंस पार्टी
11:52:29को मर्ज करके जो इंडिया वर्कर्स इन
11:52:32प्रेजेंट पार्टी का फॉर्मेशन होता है
11:52:36कम्युनिस्ट पार्टी मुंबई में बहुत साड़ी
11:52:38इंडस्ट्रियल स्ट्रीक्स ऑर्गेनाइजर आई है
11:52:40इस दौरान कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे बड़ी
11:52:43सफलता थी ट्रेड यूनियंस पर अपना
11:52:45इन्फ्लुएंस बनाना
11:52:471920 से 1928 के बीच कम्युनिस्ट का
11:52:51इन्फ्लुएंस वर्कर्स के ऊपर बहुत स्ट्रांग
11:52:53हो जाता है साथ ही गवर्नमेंट हर तरह से
11:52:56लेफ़्टिस्ट मूवमेंट का दमन करने की कोशिश
11:52:58करने लगती है इस पीरियड में कम्युनिस्ट
11:53:01मूवमेंट तीन कंस्पायरेसी ट्रायल्स में
11:53:03इंवॉल्व होकर चढ़ जाएगा विषय बन जाता है
11:53:0719223 में पेशावर कंस्पायरेसी ट्रायल 1924
11:53:11में कानपुर कंस्पायरेसी ट्रायल और 1929
11:53:14में मेरठ कंस्पायरेसी ट्रायल मेरठ ट्रायल
11:53:18जो 3 साल से ज्यादा चला है और 27 लोगों को
11:53:21इसमें कनविक्ट किया जाता है कम्युनिकेशन
11:53:23को मास्टर्स का दर्ज दे देता है यानी की
11:53:26इन्हें काफी पॉपुलर कर देता है कम्युनिस्ट
11:53:28का एंटी ब्रिटिश ट्रांस उन्हें नेशनलिस्ट
11:53:31से भी सिंपैथी जेन करता है कांग्रेस
11:53:33वर्किंग कमेटी इनके डिफेंस के लिए सेंट्रल
11:53:36डिफेंस कमेटी सेटअप करती है और 1500 भी
11:53:39सैंक्शन करती है
11:53:491929 में गांधीजी जय में इसे मिलने जाते
11:53:52हैं और कम्युनिस्ट लीडर्स के प्रति अपनी
11:53:54सिंपैथी एक्सप्रेस करते हैं इस तरह 1934
11:53:58तक कम्युनिस्ट मूवमेंट को इंडिया में काफी
11:54:01रिस्पेक्ट मिलने लगती है और का सकते हैं
11:54:03की कम्युनिकेशन आईडियोलॉजी खुद को यहां
11:54:06एस्टेब्लिश कर लेती है इस तरह 1925 से
11:54:101929 के पीरियड में सीबीआई कांग्रेस के
11:54:13साथ कॉर्पोरेट करती है और उसकी प्रोग्राम
11:54:15को इन्फ्लुएंस करने की कोशिश करती है
11:54:17लेकिन जल्दी ही सिचुएशन रिवर्स हो जाति है
11:54:20जो की सेकंड फेस के अंदर समझा जा सकता है
11:54:22आई देखते हैं
11:54:25सेकंड फैज डी पीरियड ऑफ पॉलीटिकल
11:54:291929 के बाद जब गांधीजी की लीडरशिप में
11:54:32नेशनलिस्ट मूवमेंट तेजी से आगे बाढ़ रहा
11:54:35था तब की ऑर्गेनाइजेशन और आईडियोलॉजिकल
11:54:38दोनों स्टार पर सफर करती है कम्युनिस्ट
11:54:41इंटरनेशनल की सिक्स्थ कांग्रेस में दिए गए
11:54:43डायरेक्शन के अनुसार की कांग्रेस से खुद
11:54:46को अलग कर लेती है साथ ही 1929 में
11:54:49वर्कर्स और पीजेंट पार्टी को यह कहकर
11:54:51डिसोल्व कर दिया जाता है की तू क्लास
11:54:54पार्टी को डेवलप करना इरेशनल है सीबीआई
11:54:571929 से ही कांग्रेस के राइट और लेफ्ट
11:55:00दोनों ही विंग्स को अटैक करने लगती है इस
11:55:03समय कांग्रेस जहां पूर्ण स्वराज का
11:55:05रेजोल्यूशन अडॉप्ट करती है और सिविल
11:55:07डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को लॉन्च करती है वही
11:55:10की कांग्रेस की बॉबी लाती को कम करने के
11:55:13लिए संघर्ष की ट्रे एंगुलर करैक्टर को
11:55:15हाईलाइट करती है जिसमें कहा जाता है की
11:55:18वर्कर्स का स्ट्रगल सिर्फ फॉरेन
11:55:20इंपिरियलिज्म के अगेंस्ट ही नहीं बल्कि
11:55:22इंडियन एक्सप्लोइटर्स के अगेंस्ट भी है यह
11:55:25लोग गांधीजी की लीडरशिप को पेटी बुढ़वा
11:55:28कहकर अटैक करते हैं है और उन्हें
11:55:30इंपिरियलिज्म का एक टूल तक बता देते हैं
11:55:32जो मैसेज के रिवॉल्यूशनरी स्ट्रगल को
11:55:35बितराय कर रहे हैं यह कांग्रेस के लेफ्ट
11:55:37विंग की आलोचना करते हैं कहते हैं की वह
11:55:40एक काउंटर रिवॉल्यूशनरी फोर्स है लेकिन
11:55:42सीबीआई की यह टैक्टिकल अप्रोच
11:55:44अनरियलिस्टिक साबित होती है मैसेज का इनके
11:55:47लिए सपोर्ट कम हो जाता है नेशनलिस्ट
11:55:49लीडरशिप के साथ भी इनके रिलेशंस खराब हो
11:55:52जाते हैं ऐसे में ब्रिटिश गवर्मेंट मौके
11:55:55का फायदा उठाकर जुलाई 1934 में की को
11:55:58इलीगल ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर देती है
11:56:00जिसके बाद कम्युनिस्ट कई ग्रुप में
11:56:03स्प्लिट हो जाते हैं अब बात करते हैं थर्ड
11:56:06फैज की
11:56:08थर्ड फैज कम्युनिस्ट और टीम भी रिलीज
11:56:12यूनाइटेड फ्रॉम प्लेन
11:56:151935 में पीसी जोशी की लीडरशिप में की को
11:56:19एक बार फिर रीऑर्गेनाइज्ड किया जाता है
11:56:221935 में हुई कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की
11:56:25सेवंथ कांग्रेस में कम्युनिस्ट को
11:56:27नेशनलिस्ट फोर्सेस के साथ यूनाइटेड
11:56:29फ्रेंड्स फॉर्म करने के लिए बोला जाता है
11:56:30जिसके बाद एक बार फिर ये लोग कांग्रेस के
11:56:34साथ को ऑपरेशन शुरू कर देते हैं इस मीटिंग
11:56:37में हुई डिलीवरी के आधार पर मार्च 1936
11:56:40में आरती डेट और बेन ब्रैडली अपनी थीसिस
11:56:44पब्लिश करते हैं जिसका नाम था दी एंटी
11:56:47इंपिरियलिस्ट पीपल्स फ्रॉम इन इंडिया डेट
11:56:50ब्रैडली इंडियन नेशनल कांग्रेस को नेशनल
11:56:52स्ट्रगल में इंडियन का यूनाइटेड फ्रंट
11:56:55कहते हैं और कम्युनिस्ट को एडवाइस करते
11:56:57हैं की वो कांग्रेस को जॉइन करें और उसके
11:57:00लेफ्ट विंग को स्ट्रेंजर करें और
11:57:02रिएक्शनरी राइट विंग एलिमेंट्स को
11:57:04कांग्रेस से बाहर करने की कोशिश करें
11:57:15प्लेन बनाते हैं लेकिन कम्युनिस्ट लीडरशिप
11:57:18मूवमेंट के सोशल बेस को ब्रोडें करने में
11:57:20फेल हो जाति है और पॉपुलर फ्रंट कभी
11:57:22एक्जिस्टेंस में ही नहीं आता हालांकि 1930
11:57:26के लेटर हाफ के दौरान मैसेज में बढ़नी हुई
11:57:28पॉलीटिकल एक्टिविटी का फायदा उठाते हुए
11:57:30कम्युनिस्ट अपने पॉलीटिकल कारंटीन से बाहर
11:57:33ए जाते हैं और एक बार फिर से इंडियन
11:57:36पॉलिटिक्स के रेडिकल एलिमेंट्स में अपनी
11:57:38जगह बना लेते हैं इसके बाद सेकंड वर्ल्ड
11:57:40वार के साथ फोर्थ फैज की शुरुआत हो जाति
11:57:42है
11:57:44फोर्थ फीस डी सेकंड वर्ल्ड वार और डी
11:57:48कम्युनिकेशन
11:57:511939 में जब सेकंड वर्ल्ड वार की शुरुआत
11:57:54होती है तो कमेंट ऑन लीडर्स की एडवाइस के
11:57:57अनुसार इंडियन कम्युनिस्ट यूनाइटेड फ्रंट
11:58:00पॉलिसी को कंटिन्यू रखते हैं और हर तरह के
11:58:02इंपिरियलिज्म का विरोध करते हैं लेकिन जून
11:58:051941 में जब हिटलर सोशलिज्म के फादर लैंड
11:58:08सोवियत यूनियन पर अटैक कर देता है तब
11:58:11कम्युनिस्ट खुद को एक ट्रिकी पोजीशन में
11:58:13पाते हैं इंडियन कम्युनिस्ट यू टर्न लेते
11:58:16हुए अब वार को पीपल्स वार में री लेबल कर
11:58:19देते हैं और एलाइड रोशन वार फ्रंट को अपना
11:58:22पूरा सपोर्ट अनाउंस करते हैं ब्रिटिश
11:58:24गवर्नमेंट 1942 में सीबीआई को लीगल
11:58:27ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर देती है
11:58:29कम्युनिस्ट इस दौरान ब्रिटिश वार एफर्ट्स
11:58:32को हर संभव सपोर्ट देते हैं यहां तक की
11:58:351942 में क्यूट इंडिया मूवमेंट को
11:58:37सरप्राइज करने के लिए ब्रिटिशर्स के लिए
11:58:39स्पाइस का कम भी करते हैं कम्युनिस्ट
11:58:42पॉलिसी में आए इस सद्दाम स्विफ्ट की
11:58:44नेशनलिस्ट सर्कल्स में काफी आलोचना की
11:58:46जाति है कम्युनिस्ट देश की आजादी को भी एक
11:58:50फस यानी की छलावा बताते हैं यहां से
11:58:53शुरुआत होती है
11:58:55फिफ्थ फीस डी ट्रांसफर ऑफ पावर नेगोशिएशंस
11:58:59और कम्युनिस्ट मल्टीनेशनल प्लेन इस पीरियड
11:59:03में की का पोस्चर क्रोम मुस्लिम राहत है
11:59:05और वह कांग्रेस लीग के एलियन एशिया को और
11:59:09वाइड करने की कोशिश करते हैं सीबीआई
11:59:11द्वारा सभी सेपरेटिस्ट एलिमेंट्स को
11:59:13इनकरेज किया जाता है और इंडिया को कई सारे
11:59:16सावरेंस स्टेटस में डिवाइड करने का कम
11:59:18किया जाता है इनकी स्ट्रीट्स कम से कम एक
11:59:21ऐसे स्टेट पर अपना कंट्रोल बनाने और फिर
11:59:24उसे बाकी के इंडियन के लिबरेशन के बेस के
11:59:27रूप में उसे करने की थी लेकिन मुस्लिम लीग
11:59:29कम्युनिस्ट के साथ एलाइंस के आइडिया को
11:59:32जानकारी देती है और सीबीआई एक
11:59:34डिस्क्रेडिटेड ऑर्गेनाइजेशन की तरह र जाति
11:59:37है 1942 में ही सीबीआई ने एक रेजोल्यूशन
11:59:40अडॉप्ट किया था जिसमें इंडिया को एक मल्टी
11:59:43नेशनल स्टेट डिक्लेअर किया गया था और करीब
11:59:4616 ऐसी इंडियन नेशंस को आईडेंटिफाई किया
11:59:49गया था
11:59:501947 तक कम्युनिस्ट मूवमेंट इंडियन
11:59:53पॉलिटिक्स में अपनी जगह को देता है और की
11:59:56पुरी तरह डेरी की सिचुएशन में होती है जब
12:00:00ब्रिटिश इंपिरियलिज्म से आजादी ही देश के
12:00:03लोगों का डोमिनेंट इंस्टिंक्ट होता है उसे
12:00:05समय सीबीआई की एक्स्ट्रा नेशनल लॉयल्टी और
12:00:08पुरी तरह यूरोपियन मॉडल पर डिपेंड्स इसे
12:00:11एक सस्पेक्ट ऑर्गेनाइजेशन बना देता है आई
12:00:15अब सेकंड सरिता यानी की कांग्रेस सोशलिस्ट
12:00:17पार्टी की बात करते हैं डी कांग्रेस
12:00:20सोशलिस्ट पार्टी
12:00:22कांग्रेस का लेफ्ट विंग एक राशन लिस्ट
12:00:24रिवॉल्ट की तरह मर्ज होता है जो एक तरफ तो
12:00:27गांधीजी के मिस्ट्री सिस्टम के अगेंस्ट था
12:00:29और दूसरी तरफ कम्युनिज्म के दोगमेटिज्म के
12:00:32भी इनके आईडियोलॉजिकल इंस्पिरेशन
12:00:34मार्क्सिज्म और डेमोक्रेटिक सोशलिज्म से
12:00:37आई हैं और ये एंटी इंपिरियलिज्म नेशनलिज्म
12:00:40और सोशलिज्म की सपोर्टर होती हैं सुभाष
12:00:43चंद्र बस समझते हैं की कांग्रेस
12:00:45लेफ़्टिस्ट सिर्फ एंटी इंपिरियलिस्ट ही
12:00:48नहीं बल्कि वो नेशनल लाइफ को सोशलिस्ट
12:00:50बेसिस पर रिकंस्ट्रक्ट भी करना चाहते हैं
12:00:53अपने गोल को अचीव करने के लिए इन्हें दो
12:00:56फ्रेंड्स पर फाइट करना होता है पहले तो
12:00:58फौरन इंपिरियलिज्म और उसके इंडियन
12:01:00एयरलाइंस के साथ और दूसरा मिल्क वाटर
12:01:03नेशनलिस्ट यानी की राइटर के साथ जो
12:01:06इंपिरियलिज्म के साथ डील करने के लिए
12:01:08तैयार हैं दूसरे शब्दों में कहें तो ये
12:01:11कंप्लीट इंडिपेंडेंस और सोशलिज्म के फीवर
12:01:13में थे यह क्लासेस के लिए नहीं बल्कि
12:01:16मैसेज के लिए स्वराज चाहते थे गांधियन
12:01:19आईडियोलॉजी और नेशनलिस्ट स्ट्रगल से इनका
12:01:22इल्लूजनमेंट पहले बार तब होता है जब 1922
12:01:25में गांधीजी ने नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को
12:01:28विड्रॉ कर लिया था वो भी ऐसे समय में जब
12:01:31नेशन पॉपुलर रिवॉल्ट के बहुत पास था इसी
12:01:34वजह से 1931 में सिविल डिसऑबेडिएंस
12:01:37मूवमेंट को सस्पेंड करना और फिर 1934 में
12:01:40इसे कॉल ऑफ करना भी इन्हें गांधियन
12:01:42आईडियोलॉजी के अगेंस्ट कर देता है लेफ्ट
12:01:45विंग इस निष्कर्ष पर आता है की हमेशा और
12:01:48हर सिचुएशन में नॉन वायलेंस की थ्योरी का
12:01:51प्लेन करना अनसुस्तीनेबल है और स्लिपरी
12:01:54फाऊंडेशंस पर बेस्ड है जुलाई 1931 में
12:01:57जीपी नारायण फूलन प्रसाद वर्मा और कुछ
12:02:00अन्य लीडर्स बिहार सोशलिस्ट पार्टी फॉर्म
12:02:03करते हैं सितंबर 1933 में पंजाब सोशलिस्ट
12:02:07पार्टी एक्जिस्टेंस में आई है इसके बाद
12:02:10अक्टूबर 1934 में जो इंडिया कांग्रेस
12:02:12सोशलिस्ट पार्टी यानी सीसी फॉर्मूली
12:02:15ऑर्गेनाइज्ड की जाति है जिसके पीछे जीपी
12:02:18नारायण आचार्य नरेंद्र देव और मीनू मसानी
12:02:21जैसे लीडर्स कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी
12:02:24कांग्रेस के लिए कोई राइवल पॉलीटिकल
12:02:26ऑर्गेनाइजेशन नहीं थी बल्कि इसे कांग्रेस
12:02:29के ही अंदर कम करने के लिए फॉर्म किया गया
12:02:31था लेकिन फिर भी कांग्रेस का राइट विंग
12:02:34इन्हें इंटरनेशनल सेंट कहता है और
12:02:36कम्युनिस्ट इन्हें सोशल फेस या फेक
12:02:40सोशलिस्ट भी कहते हैं इसका जवाब देते हुए
12:02:42कांग्रेस सोशलिस्ट इंडियन कम्युनिस्ट को
12:02:45यूएसएसआर की सैटेलाइट डिस्क्राइब करते हैं
12:02:48सीसी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 को भी
12:02:51कॉन्डम करती है साथी 1937 इलेक्शंस के
12:02:55दौरान कांग्रेस द्वारा ऑफिस एक्सेप्टेंस
12:02:57की भी आलोचना करती है सोशलिस्ट प्रेशर के
12:03:01ही करण 1936 के कांग्रेस के इलेक्शन
12:03:03मेनिफेस्टो में लोगों के सोचों- इकोनामिक
12:03:06रेवेंस को रिमूव करने का प्रोग्राम शामिल
12:03:09किया गया था सेकंड वर्ल्ड वार के समय सीसी
12:03:12कांग्रेस की तरफ से ब्रिटिश वार फोर्ड के
12:03:15लिए कंडीशनल हेल्प का भी विरोध करती है
12:03:17क्योंकि उनका मानना था की यह वार
12:03:20इंपिरियलिज्म के पार्टनर्स के बीच
12:03:22के रेप पार्टीशन के लिए हो रहा है
12:03:24कांग्रेस सोशलिस्ट चाहते थे की आजादी के
12:03:28लिए कांग्रेस रिवॉल्यूशनरी वार की शुरुआत
12:03:30करें सीसी क्यूट इंडिया मूवमेंट को सपोर्ट
12:03:32करती है और उसे ऑर्गेनाइज करने में लीडिंग
12:03:35रोल निभाती है इसके बाद सीसी ट्रांसफर ऑफ
12:03:39पावर के लिए नेगोशिएट सेटलमेंट के फीवर
12:03:41में भी नहीं थी बल्कि ये इंडिया में
12:03:43इंपिरियलिज्म कम्युनलिज्म और फैऊदलिज्म को
12:03:46डिस्ट्रॉय करने के लिए एक रिवॉल्यूशनरी
12:03:49स्ट्रगल की जरूर बताते हैं कांग्रेस
12:03:51सोशलिस्ट मुस्लिम लीग को इन लिक विद
12:03:55ब्रिटेन कहते हैं और जिन्ना को देश का
12:03:57गद्दार और इंपिरियलिस्ट का टूल बोलते हैं
12:04:00यह लोग हिंदू मुस्लिम यूनिटी की आशा करते
12:04:02हैं लेकिन टेंपरेरी फैक्ट्स या
12:04:05एग्रीमेंट्स के बेसिस पर नहीं बल्कि
12:04:07इकोनामिक इश्यूज पर इम्फैसीज करके जो
12:04:09हिंदू और मुस्लिम दोनों को ही इफेक्ट करते
12:04:12हैं सीसी इंडिया के पार्टीशन को कांग्रेस
12:04:15लीडरशिप का सुरेंद्र बताती है साथ ही
12:04:18अल्टरनेटिव और पॉजिटिव पॉलिसी नाला अपने
12:04:20का अपना और वो रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट का
12:04:23फेलियर भी एक्सेप्ट करती है सीबीआई और
12:04:27सीसी के अलावा कुछ और माइनर लेफ़्टिस्ट
12:04:29पार्टी भी इंडिया में फॉर्म होती हैं आई
12:04:32उनको भी डिस्कस कर लेते हैं
12:04:35माइनर लेफ़्टिस्ट पार्टी
12:04:39कम्युनिस्ट मूवमेंट के शुरू होने के बाद
12:04:411939 40 के पीरियड में बहुत सी माइनर
12:04:45लेफ़्टिस्ट पार्टी की ग्रोथ भी होती है
12:04:47इनमें से ज्यादातर पार्टी पर्सनेलिटीज के
12:04:50राउंड सेंटर रहती हैं और एक बार सेंट्रल
12:04:52फिगर के गायब होने के बाद ये पार्टी भी
12:04:55डिफूंक हो जाति हैं इनमें सबसे पहले बात
12:04:57करते हैं फॉरवर्ड ब्लॉक की
12:05:00डी फॉरवर्ड ब्लॉक
12:05:031919 में कांग्रेस और गांधी जी के साथ
12:05:06मतभेद होने के बाद सुभाष चंद्र बस फॉरवर्ड
12:05:10ब्लॉक का फॉर्मेशन करते हैं यह कांग्रेस
12:05:12की क्रीड पॉलिसी और प्रोग्राम को तो
12:05:14एक्सेप्ट करते हैं लेकिन उसकी हाय कमांड
12:05:16में कॉन्फिडेंस के लिए खुद को बाउंड नहीं
12:05:19करते इसमें सभी एंटी इंपिरियलिस्ट रेडिकल
12:05:22और प्रोग्रेसिव ग्रुप को एक बैनर में लाने
12:05:25की कोशिश की जाति है लेफ्ट कंसोलिडेशन
12:05:27कमेटी को ऑर्गेनाइज करने में ये हम रोल
12:05:30निभाते है
12:05:33कांग्रेस के कोऑपरेशन के एटीट्यूड का
12:05:36विरोध करते हैं और इंडिया में
12:05:38इंपिरियलिज्म को खत्म करने के लिए विदेश
12:05:40से मिलिट्री हेल्प लेने के लिए चले जाते
12:05:42हैं 1947 में जो इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक
12:05:45ट्रांसफर ऑफ पावर को बोगस ट्रांसफर कहता
12:05:48है और आप लगता है की दारा हुआ समाज
12:05:51स्ट्रगल को हारने के लिए ब्रिटिश
12:05:54इंपिरियलिज्म के साथ पार्टनरशिप के लिए
12:05:56तैयार हो गया है
12:05:57अब बात करते हैं रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट
12:06:00पार्टी
12:06:02की रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी
12:06:06अर्ली 20th सेंचुरी के क्रांतिकारी इस
12:06:09पार्टी के ऑर्गेनाइजेशन के लिए न्यूक्लियस
12:06:11प्रोवाइड करते हैं इसे 1940 में लॉन्च
12:06:13किया जाता है यह ब्रिटिश इंपिरियलिज्म के
12:06:16वायलेट ओवर थ्रू और इंडिया में सोशलिज्म
12:06:19के एस्टेब्लिशमेंट को सपोर्ट करते हैं
12:06:21आईडियोलॉजिकली ये कॉमिनेस्ट पार्टी से
12:06:23ज्यादा सीसी के क्लोज होते हैं 1939 में
12:06:27त्रिपुरा कांग्रेस सेशन के दौरान हुए
12:06:29गांधी बस तिल में ये बूस्ट का साथ देते
12:06:32हैं ये लोग यूएसएसआर के वार जॉइन करने के
12:06:35बाद भी वार एफर्ट को सपोर्ट नहीं करते
12:06:37ट्रांसफर ऑफ पावर और पार्टीशन को ये
12:06:40कांग्रेस की उज्जवल लीडरशिप और
12:06:42इंपिरियलिज्म के बीच हुई बागडोर डील बताते
12:06:45हैं इसके अलावा कुछ और मेन पार्टी थी जैसे
12:06:48की 1939 में एन डेट मजूमदार बोलशेविक
12:06:52पार्टी ऑफ इंडिया एस्टेब्लिश करते हैं
12:06:541942 में समंदर नाथ टैगोर रिवॉल्यूशनरी
12:06:58कम्युनिस्ट पार्टी लॉन्च करते हैं और 1941
12:07:01में इंद्रसेन और अजीत राय जैसे
12:07:04बलिनिस्ट पार्टी उसे करते हैं यह सभी
12:07:07डिसिडेंट कम्युनिस्ट ग्रुप थे और हर कोई
12:07:10इंडियन रिवॉल्यूशन को लीड करने के लिए खुद
12:07:13को सबसे फिट पार्टी बताता है इंडिया में
12:07:15कम्युनिस्ट मूवमेंट के पायनियर में राय का
12:07:18मार्क्सिज्म से पुरी तरह मोहभंग हो जाता
12:07:20है और 1940 में वो रेडिकल डेमोक्रेटिक
12:07:24पार्टी ऑर्गेनाइजर करते हैं इनका कहना था
12:07:26की इंडिया में रिवॉल्यूशन अकेले
12:07:28प्रोलिटेरिएट क्लास नहीं ला शक्ति बल्कि
12:07:31यह सिर्फ मल्टी क्लास पार्टी की लीडरशिप
12:07:33में ही ए सकता है
12:07:37कंक्लुजन
12:07:40दोस्तों इस तरह लेफ़्टिस्ट मूवमेंट में कई
12:07:43अलग-अलग ट्रेंड्स देखने को मिलते हैं
12:07:45लेफ्ट मूवमेंट्स देश में सोशलिस्ट
12:07:48आईडियोलॉजी को स्ट्रिंग दिन करते हैं
12:07:49कांग्रेस के सु इकोनामिक प्रोग्राम पर
12:07:52इनका गहरा प्रभाव देखने को मिलता है
12:07:54उदाहरण के तोर पर 1931 के कराची सेशन में
12:07:58लाया गया नेशनल इकोनामिक प्रोग्राम
12:08:00हालांकि कम्युनिस्ट पार्टी बहुत ज्यादा
12:08:03सफल नहीं दिखती उसकी बड़ी वजह यह थी की यह
12:08:06अपने को इंडिया की सिचुएशन के अनुसार मॉडल
12:08:09करने की जगह इंटरनेशनल डिस्टेंस और फॉरेन
12:08:12आईडी को ही अपना बेस बनाए रखते हैं इसके
12:08:15अलावा अलग-अलग कम्युनिस्ट ग्रुप में
12:08:18यूनिटी भी नहीं अच्छी जाति जो इंडिया में
12:08:20कम्युनिस्ट मूवमेंट को कमजोर कर देता है
12:08:28दोस्तों 19th सेंचुरी के सेकंड हाफ के
12:08:31दौरान इंडिया में मॉडर्न इंडस्ट्री की
12:08:33शुरुआत होती है
12:08:34रेलवे की कंस्ट्रक्शन में कम करने वाले
12:08:36हजारों हाथ मॉडर्न इंडियन वर्किंग क्लास
12:08:39का हिस्सा बन जाते हैं रेलवे के साथ ही
12:08:42कुछ ऐसी लेडी इंडस्ट्रीज का डेवलपमेंट भी
12:08:44शुरू होता है जैसे की कॉल इंडस्ट्री तेजी
12:08:48से विकास करती है और लॉज वर्किंग ग्लास को
12:08:50रोजगार देती है इसके बाद कॉटन और जट
12:08:53इंडस्ट्रीज की भी शुरुआत अच्छी जाति है इन
12:08:56सभी इंडस्ट्रीज में कम करने वाले लोग
12:08:58इंडियन वर्किंग क्लास का पाठ कहलाने हैं
12:09:01इंडियन वर्किंग क्लास भी इस तरह के
12:09:04एक्सप्लोइटेशन को फेस कर दी है जैसा की
12:09:06इंडस्ट्रियलिज्म के दौरान यूरोपियन
12:09:08वर्किंग क्लास द्वारा किया गया था
12:09:15वर्किंग कंडीशन चाइल्ड लेबर और बेसिक
12:09:18एमिलाइटिस का अभाव लेकिन इंडिया में
12:09:20कॉलोनियलिज्म का होना वर्किंग क्लास
12:09:22मूवमेंट को एक अलग टच देता है
12:09:25इंडियन वर्कर्स को दो फोर्सेस का एक साथ
12:09:28सामना करना पड़ता है एक तो इंपिरियलिस्ट
12:09:31रनिंग क्लास और दूसरा कैपिटल क्लास का
12:09:34इकोनॉमिक्स
12:09:37दोनों ही तरह की कैपिटल लिस्ट शामिल थे
12:09:40इसलिए वर्किंग क्लास मूवमेंट का
12:09:42इंडिपेंडेंस मूवमेंट के साथ दीप कनेक्शन
12:09:45देखा जा सकता है
12:09:51अली नेशनलिस्ट स्पेशली मॉडरेट्स लेबर कैसे
12:09:55के प्रति बहुत ज्यादा एक्टिव नहीं दिखते
12:09:57इस समय इंडियन ओल्ड फैक्टरीज की लेबर और
12:10:01ब्रिटिश ओल्ड फैक्टरीज की लेबर को अलग-अलग
12:10:03ट्वीट किया जाता था ये भी समझा जाता था की
12:10:06लेबर लेजिसलेशंस इंडियन ओल्ड इंडस्ट्रीज
12:10:09की कम्पेटिटिव आगे को इफेक्ट करेंगे साथ
12:10:12ही अर्ली नेशनलिस्ट क्लास के बेसिस पर
12:10:15इंडिपेंडेंस मूवमेंट में डिवीजन नहीं होने
12:10:17देना चाहते थे इस वजह से देखा जाता है की
12:10:20मॉडरेट्स 1881 और 1891 के फैक्ट्री एक्ट्स
12:10:24कभी विरोध करते हैं इस दौरान वर्कर्स की
12:10:27इकोनामिक कंडीशंस को इंप्रूव करने के लिए
12:10:29कुछ फिलैंथरोपिक एफर्ट्स जरूर हुए थे और
12:10:32यह स्पेसिफिक लोकल ग्रीवेंस को ही हम करते
12:10:35थे ऐसे ही कुछ एफर्ट्स पर नजर डालते हैं
12:10:40बनर्जी वर्किंग मेंस क्लब की शुरुआत करते
12:10:43हैं और भारत श्रमजीवी के नाम से न्यूज़
12:10:46पेपर
12:10:51लेजिसलेटिव काउंसिल में लेबर की बटर
12:10:53वर्किंग कंडीशंस पर एक बिल पास करने की
12:10:55कोशिश करते हैं
12:10:571880 में नारायण मेघा जी लोखंडे दीनबंधु
12:11:01न्यूज़पेपर की शुरुआत करते हैं और साथ ही
12:11:04बॉम्बे मिल और मिल हाथ संगठन को भी सेटअप
12:11:07करते हैं
12:11:071899 में ग्रेट इंडियन पेनिनसुलर रेलवे के
12:11:11सिगनल्स द्वारा पहले स्ट्राइक की जाति है
12:11:13जिसे काफी सपोर्ट भी मिलता है तिलक कई
12:11:17मीना से अपनी न्यूज़ पेपर महाराष्ट्र और
12:11:19केसरी में इस स्ट्राइक के लिए कैंपेन कर
12:11:21रहे थे इसके अलावा 20th सेंचुरी आते-आते
12:11:25बहुत सी नेशनल लीडर्स जैसे की विपिन
12:11:28चंद्रपाल और जी सुब्रह्मण्य अय्यर भी
12:11:30वर्कर्स के लिए बटर कंडीशंस और प्रोन लेबर
12:11:33रिफॉर्म्स की डिमांड करने लगता हैं
12:11:41ड्यूरिंग स्वदेशी अक्सर्ज
12:11:43स्वदेशी आंदोलन में वर्कर्स भी भाग लेते
12:11:46हैं अश्विनी कुमार बनर्जी प्रभात कुमार
12:11:49राय चौधरी प्रेम तो उसे बस और पूर्वक
12:11:52कुमार घोष जैसे लीडर्स के द्वारा जगह
12:11:55स्ट्रीक्स ऑर्गेनाइजर की जाति है ये
12:11:57स्ट्रीक्स गवर्नमेंट प्रेस रेलवे और जट
12:12:01इंडस्ट्री में की जाति हैं
12:12:02सुब्रह्मण्य शिवा और चिदंबरम पिल्लई टूटी
12:12:06गौरी और तिरुनेलवेली में स्ट्राइक लीड
12:12:08करते हुए गवर्नमेंट द्वारा अरेस्ट कर लिए
12:12:11जाते हैं इस दौरान ट्रेड यूनियंस को फॉर्म
12:12:14करने की कोशिश भी की जाति है लेकिन इसमें
12:12:16ज्यादा सफलता नहीं मिलती स्वदेशी आंदोलन
12:12:19के बाद हुआ कल क्लास मूवमेंट में अगला
12:12:21टर्न फर्स्ट वर्ल्ड वार के दौरान होता है
12:12:23आई समझते हैं किस तरह गटर बनाता है
12:12:32चीजों के दम भी आसमान चुने लगे थे और
12:12:35इंडस्ट्रियलिस्ट के लिए यह प्रॉफिट कमाने
12:12:37का पीरियड साबित हो रहा था लेकिन वर्कर्स
12:12:40को भी लो वेजेस ही दी जा रही थी 1915 से
12:12:441924 के दौरान जट मिल द्वारा जहां 140%
12:12:48एवरेज डिविडेंड मिल रहा था वही इंडस्ट्री
12:12:51में कम करने वाले वर्कर्स की एवरेज वेज
12:12:53सिर्फ 12 पाउंड पर एनम थी ऐसी सिचुएशन की
12:12:57वजह से वर्कर्स में डिस्कंटेंट बढ़ता जा
12:12:59रहा था इस समय इंडिया में गांधीजी के आने
12:13:02से नेशनल मूवमेंट और ज्यादा ब्रेड बेस्ट
12:13:04हो गया था और नेशनल कॉल्स के लिए वर्कर्स
12:13:07और प्रेजेंस की मोबिलाइजेशन पर जोर दिया
12:13:09जा रहा था इसके अलावा इंटरनेशनल इवेंट्स
12:13:12जैसे की 1917 में रूस रिवॉल्यूशन और
12:13:15यूएसएसआर का फॉर्मेशन कमेंट ऑन कंफर्मेशन
12:13:18और आईएलओ का सेटअप होना इंडिया की वर्किंग
12:13:21क्लास मूवमेंट को एक नई डाइमेंशन देता है
12:13:23इस सबके बीच वर्कर्स को ट्रेड यूनियंस में
12:13:27ऑर्गेनाइज करने की शुरुआत भी होती है 31
12:13:30अक्टूबर 1920 को जो इंडिया ट्रेड यूनियन
12:13:33कांग्रेस का फॉर्मेशन होता है इसके पहले
12:13:35प्रेसिडेंट लाल लाजपत राय बनते हैं और
12:13:38दीवान चमन लाल को पहले जनरल कंट्री बनाया
12:13:41जाता है लाल लाजपत राय केपीटलाइज्म को
12:13:44इंपिरियलिज्म से लिंक करते हुए कहते हैं
12:13:46की इंपिरियलिज्म और मिलट्वॉइज्म
12:13:49केपीटलाइज्म के जुड़वा बच्चे हैं
12:13:51एटक के तीसरी और चौथ सेशन की अध्यक्षता कर
12:13:55दास करते हैं
12:13:571922 में कांग्रेस के गया सेशन में एटक के
12:14:01फॉर्मेशन को वेलकम किया जाता है और उसे
12:14:03एसिस्ट करने के लिए एक कमेटी भी फॉर्म की
12:14:06जाति है सी आर दास कहते हैं की कांग्रेस
12:14:08को वर्कर्स के कैसे को अपने एजेंडा में
12:14:10शामिल करना चाहिए नहीं तो यह लोग नेशनल
12:14:13मूवमेंट से आइसोलेट हो जाएंगे
12:14:15एटक के साथ नेहरू सुभाष चंद्र बस सन रूस
12:14:19जीएमसी इन गुप्ता वे वे गिरी और सरोजिनी
12:14:22नायडू जैसी लीडर्स भी क्लोज कांटेक्ट में
12:14:24रहते हैं शुरुआत में एटक ब्रिटिश लेबर
12:14:28पार्टी के सोशल डेमोक्रेटिक इतिहास से
12:14:30इन्फ्लुएंस थी इसके बाद गांधीजी की नॉन
12:14:33वायलिन फ्रस्ट्रेशन
12:14:35की फिलासफी का इस पर गहरा प्रभाव पड़ता है
12:14:38इससे पहले 1918 में
12:14:40जिंदाबाद मिल स्ट्राइक के दौरान गांधी जी
12:14:42ने अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर संगठन को भी
12:14:45ऑर्गेनाइजर किया था ट्रेड यूनियंस के
12:14:48फॉर्मेशन को बढ़ता देख 1926 में ब्रिटिश
12:14:51गवर्नमेंट ट्रेड यूनियन एक्ट लेकर आई है
12:14:53इस एक्ट में ट्रेड यूनियंस को लीगल
12:14:56एसोसिएशंस की तरह किया जाता है और उनके
12:14:59रजिस्ट्रेशन और रेगुलेशंस के लिए कुछ
12:15:01कंडीशंस राखी जाति हैं ये एक्ट ट्रेड
12:15:04यूनियंस को सिविल और क्रिमिनल इम्यूनिटी
12:15:06देता है लेकिन सिर्फ लेजिटीमेट एक्टिविटीज
12:15:09के लिए इनकी पॉलीटिकल एक्टिविटीज पर
12:15:11रिस्ट्रिक्शंस लगा दी जाति हैं इसके बाद
12:15:14लीड 1920 का दूर शुरू होता है जब वर्कर
12:15:17मूवमेंट और ज्यादा स्ट्रांग होता दिखता है
12:15:20लीड 1920 से 1930
12:15:26लीड 1920 में वर्कर्स मूवमेंट पर स्ट्रांग
12:15:29कम्युनिस्ट इन्फ्लुएंस देखा जा सकता है जो
12:15:32इसे पहले से ज्यादा मिलिटेंट और
12:15:34रिवॉल्यूशनरी बना देता है कम्युनिस्ट
12:15:36इंटरनेशनल की फोर्थ कांग्रेस एटक को मैसेज
12:15:39भेजती है की सिर्फ फेयर वेजेस से ही
12:15:42संतुष्ट ना हो बल्कि केपीटलाइज्म और
12:15:44इंपिरियलिज्म को उखाड़ फेंकने के लिए कम
12:15:47करें
12:15:471928 के दौरान बड़े स्टार पर इंडस्ट्रियल
12:15:51अनरेस्ट देखने को मिलता है मुंबई
12:15:53टेक्सटाइल मिल में गिनी कामगार यूनियन
12:15:55द्वारा 6 महीने लंबी स्ट्राइक ऑर्गेनाइजर
12:15:58की जाति है कल मिलकर 2003 स्ट्रीक्स होती
12:16:01हैं जिसमें 5 लाख से ज्यादा वर्कर्स
12:16:03इंवॉल्व होते हैं और ये स्ट्रीक्स इमीडिएट
12:16:06इकोनामिक डिमांड से ज्यादा पॉलीटिकल
12:16:08इतिहास से प्रेरित नजर आई हैं इस पीरियड
12:16:11में बहुत से कम्युनिस्ट ग्रुप का
12:16:12क्रिस्टलाइजेशन भी होता है जिन्हें ऐसे
12:16:15देंगे मुजफ्फर अहमद पीसी जोशी सोहन सिंह
12:16:18जोशी जैसे लीडर्स लीड करते हैं ट्रेड
12:16:22यूनियन मूवमेंट की बढ़नी स्ट्रैंथ से
12:16:23घबराकर गवर्नमेंट लेजिसलेटिव
12:16:25रिस्ट्रिक्शंस लेकर
12:16:271929 में पब्लिक सेफ्टी ऑर्डिनेंस और
12:16:30ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट इंट्रोड्यूस किया
12:16:32जाता है ट्रेड डिस्प्यूट इंडस्ट्रियल
12:16:34डिस्प्यूट को सेटल करने के लिए कोट्स
12:16:36इंक्वारी और कंसल्टेशन बोर्ड्स का
12:16:39अपॉइंटमेंट कंपलसरी कर देता है साथ ही
12:16:41पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज जैसे की रेलवे
12:16:44वाटर और इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड्स ईटीसेटरा
12:16:46में स्ट्राइक करने के लिए हर इंडिविजुअल
12:16:48वर्कर को वन मठ का एडवांस नोटिस
12:16:51एडमिनिस्ट्रेशन को देना कंपलसरी कर दिया
12:16:53जाता है इसके बिना सभी स्ट्रीक्स इलीगल
12:16:56डिक्लेअर कर दी जाति हैं इसके अलावा
12:16:58कोरसिव या पीली पॉलीटिकल नेचर की ट्रेड
12:17:01यूनियन एक्टिविटीज करने से भी इन्हें माना
12:17:03कर दिया जाता है यहां तक स्ट्रीक्स भी
12:17:07नहीं की जा शक्ति थी ट्रेड यूनियन मूवमेंट
12:17:09को और ज्यादा रिस्टिक करने के लिए 1929
12:17:13में ही मेरठ कंस्पायरेसी कैसे भी फाइल
12:17:15किया जाता है जिसमें गवर्नमेंट 31 लेबर
12:17:18लीडर्स को अरेस्ट कर लेती है और 3 1/2 एयर
12:17:21की ट्रायल के बाद मुजफ्फरनगर
12:17:26और शौकत उस्मानी जैसे ट्रेड यूनियन लीडर्स
12:17:29को कनविनित किया जाता है इस ट्रायल को
12:17:32दुनिया भर में पब्लिसिटी मिलती है लेकिन
12:17:34इससे इंडियन वर्किंग क्लास मूवमेंट कमजोर
12:17:36पद जाता है जैसा की गवर्नमेंट का एक भी था
12:17:39इस बीच 1930 में शुरू हुए सिविल
12:17:42डिसऑबेडिएंस मूवमेंट में वर्कर्स ने
12:17:44बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था लेकिन ब्रिटिश
12:17:46गवर्नमेंट इन्हें फोर्सफुली ढाबा देती है
12:17:48लॉर्ड स्केल पर वर्कर्स और उनके लीडर्स को
12:17:51अरेस्ट किया जाता है
12:17:53लेजिसलेशंस और कमिश्नर के थ्रू वर्कर्स को
12:17:55विक्टिमाइज किया जाता है इन डेवलपमेंट की
12:17:58वजह से यूनियन लीडर्स को यूनिटी की
12:18:00इंर्पोटेंस समझ आई है और अक्टूबर 1934 में
12:18:03फॉर्म हुई कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी
12:18:05मॉडरेट और रेडिकल ट्रेड यूनियंस को
12:18:08यूनाइटेड करने का प्रयास करती है इसे
12:18:10जयप्रकाश नारायण आचार्य नरेंद्र देव और
12:18:13मीनू मसानी ने मिलकर फॉर्म किया था
12:18:161937 के प्रोविंशियल इलेक्शंस के दौरान
12:18:18आईआईटी उस कांग्रेस को सपोर्ट करती है
12:18:21कांग्रेस मिनिस्टरीज के ट्रेड यूनियंस के
12:18:23प्रति सीमित एटीट्यूड के करण 193 अभी तक
12:18:27इनकी संख्या बढ़कर 296 हो जाति है बिहार
12:18:30बॉम्बे यूनाइटेड प्रोविंस और सेंट्रल
12:18:33प्रोविंस में कांग्रेस गवर्नमेंट लेबर
12:18:35इंक्वारी कमेटी भी अप्वॉइंट करती हैं जो
12:18:38वर्कर्स की कंडीशनस को सुधारने के लिए
12:18:40लिबरल रिकमेंडेशन देती हैं जिसके बाद
12:18:43बॉम्बे इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट एक्ट 1938
12:18:45डी बॉम्बे शॉपर्स सिस्टम सेट 1939 क
12:18:50मेटरनिटी एक्ट 1939 और बंगाल मेटरनिटी
12:18:53एक्ट 1939 जैसे बेनिफिशियल लेजिसलेशंस
12:18:56एनेक्ट किया जाते हैं इसके बाद 1939 में
12:18:59सेकंड वर्ल्ड वार शुरू हो जाता है जब एक
12:19:02बार फिर वर्कर मूवमेंट नया टर्न लेट है आई
12:19:05जानते हैं इस दौरान क्या-क्या होता है
12:19:08ड्यूरिंग और आफ्टर डी सेकंड वर्ल्ड वार
12:19:14सेकंड वर्ल्ड वार एक बार फिर से बढ़ते
12:19:17प्राइसेस और पिछड़ती वेजेस का दूर लेकर
12:19:19आता है साल 1940 बहुत सी स्ट्रीक्स का
12:19:23गवाह बंता है ऐसा इसलिए भी क्योंकि ट्रेड
12:19:26यूनियंस उसे समय चल रहे पॉलीटिकल
12:19:27डेवलपमेंट से खुद को अलग नहीं रख शक्ति थी
12:19:30सितंबर 1940 में फैसियलिज्म और
12:19:33इंपिरियलिज्म के अगेंस्ट एटक एक
12:19:36रेजोल्यूशन अडॉप्ट करती है इसमें कहा जाता
12:19:38है की ऐसी किसी भी वार्म शामिल होना जिससे
12:19:42अपने देश में फ्रीडम और डेमोक्रेसी
12:19:44इस्टैबलिश्ड ना होती हो एन सिर्फ देश के
12:19:46लिए हितकारी होगा बल्कि इसमें वर्किंग
12:19:48क्लास का भी कोई बेनिफिट या हिट नहीं हो
12:19:51सकता इस तरह शुरुआत में तो वर्कर्स
12:19:54मूवमेंट वार को अपोज करता है लेकिन 1941
12:19:57में यूएसएसआर के एलिट पावर्स की तरफ से
12:20:00वार जॉइन करने के बाद कम्युनिस्ट वार को
12:20:03पीपल्स वार कहते हैं और इसे सपोर्ट करने
12:20:06लगता हैं कम्युनिस्ट लीडर एम एंड्राइड एटक
12:20:09छोड़कर इंडियन फेडरेशन ऑफ लेबर नाम की
12:20:12प्रूफ गवर्नमेंट यूनियन बना लेते हैं
12:20:14ब्रिटिश गवर्नमेंट भी इस लॉयल
12:20:16ऑर्गेनाइजेशन के लिए पर मठ 13000 का
12:20:19ग्रैंड सैंक्शन कर देती है और इसीलिए
12:20:22क्यूट इंडिया मूवमेंट के दौरान वर्कर्स का
12:20:24पार्टिसिपेशन कुछ कम देखने को मिलता है इस
12:20:27दौरान कम्युनिस्ट इंडस्ट्रियल पीस की
12:20:29पॉलिसी फॉलो करने की सलाह देते हैं
12:20:31हालांकि आर्गेनाईजेशन सपोर्ट के बाहर
12:20:34इंडिविजुअल वर्कर्स जरूर आंदोलन को सपोर्ट
12:20:36करते हैं इसके बाद 1945 से 1947 के बीच
12:20:41वर्कर्स बड़ी संख्या में पोस्ट वार नेशनल
12:20:43अब्जॉर्जर्स में शामिल होते हैं उदाहरण के
12:20:46तोर पर 1946 में नवल रेटिंग्स के सपोर्ट
12:20:49में जगह-जगह वर्कर्स स्ट्राइक पर जाते हैं
12:20:52फौरन रूल की आखिरी साल में बहुत सी
12:20:54स्ट्राइक अच्छी जाति है जो की पोस्ट रेलवे
12:20:57जैसी एस्टेब्लिशमेंट में की गई थी
12:21:00कंक्लुजन
12:21:06दोस्तों हम का सकते हैं की इंडिया में
12:21:09वर्कर्स मूवमेंट काफी हद तक आजादी के
12:21:11आंदोलन से प्रभावित राहत है शुरुआत में
12:21:14नेशनल लीडर्स ही ट्रेड यूनियंस को लीडरशिप
12:21:17प्रोवाइड करते दिखते हैं लेकिन लेट 1920
12:21:19के बाद इसका नेतृत्व कम्युनिस्ट लीडर्स के
12:21:22हाथों में चला जाता है वर्किंग क्लास
12:21:25नेशनल मूवमेंट को भी ब्रेड बेस प्रधान
12:21:27करती है इनके पार्टनरशिप के बिना नेशनल
12:21:30स्ट्रगल अधूरा ही र जाता वॉइस इंडियन
12:21:34कैपिटल और डी रूल इन नेशनल बुक
12:21:37दोस्तों इंडियन फ्रीडम मूवमेंट एक ऐसी
12:21:40दास्तान है जी सिर्फ एक पर्सपेक्टिव से
12:21:43नहीं देखा जाना चाहिए ये कैसी गुत्थी है
12:21:46जिसमें बड़े-बड़े नेताओं जैसे गोखले तिलक
12:21:50गांधी एट सिटेरा के साथ-साथ कई ऐसे समुदाय
12:21:54और आइडलॉजिस भी शामिल रही जिनका जिक्र
12:21:56किया बिना इसको समझना मुश्किल होने के साथ
12:21:59ही अधूरा भी है
12:22:00यह कहानी है भारत के कैपिटल अर्थात पूंजी
12:22:05पतियों के राइस और इंडियन फ्रीडम मूवमेंट
12:22:07में उनके रोल की जिसने हमारी स्ट्रगल में
12:22:10एक हम भूमिका निभाई लेकिन ये कहानी शुरू
12:22:14करने से पहले जल्दी से जानते हैं कुछ
12:22:16बेसिक फैक्ट्स अबाउट केपीटलाइज्म
12:22:19केपीटलाइज्म
12:22:22सिंपल टर्म्स में अगर समझा जाए तो
12:22:24केपीटलाइज्म अर्थात पूंजीवाद एक ऐसा
12:22:27इकोनामिक सिस्टम है जिसमें कैपिटल गुड्स
12:22:29की ओनरशिप प्राइवेट या कॉरपोरेट के हाथ
12:22:32में होती है कैपिटल गुड्स अर्थात पूंजीगत
12:22:35माल मतलब ऐसे गुड्स जिनका उसे दूसरे
12:22:37कंज्यूमर गुड्स के प्रोडक्शन के लिए होता
12:22:40है प्रोडक्शन प्राइसेस और डिस्ट्रीब्यूशन
12:22:42फ्री मार्केट पर डिपेंडेंट होता है कितना
12:22:45प्रोडक्शन करना है कितना प्राइस रखना है
12:22:48यह सब कुछ प्राइवेट कंपनी डिसाइड करती हैं
12:22:51मार्केट को कंट्रोल करने में सरकार का कोई
12:22:54खास रूल नहीं होता इस सिस्टम को
12:22:56केपीटलाइज्म कहते हैं और ये डिफरेंट है
12:22:59कम्युनिज्म से जिसमें स्टेट एक मेजर
12:23:02कंट्रोलर और इकोनामिक एक्टिविटी होता है
12:23:04आई अब चलते हैं वापस हमारी कहानी की तरफ
12:23:08की कैसे इंडियन कैपिटल क्लास फ्रीडम
12:23:11स्ट्रगल में इंवॉल्व हुई और कैसे उसे
12:23:13इन्फ्लुएंस किया
12:23:15इंट्रोडक्शन
12:23:17दोस्तों
12:23:19कॉलोनियलिज्म के दूर में कई इंडिविजुअल
12:23:21कैपिटल लिस्ट ने नेशनल मूवमेंट में
12:23:24पार्टिसिपेट किया उन्होंने एन केवल
12:23:27कांग्रेस जॉइन किया जय भी गए और उसे दूर
12:23:30की सभी मुश्किलों को एक्सेप्ट किया जो
12:23:33कांग्रेस मां के लिए आम बात थी जमुनालाल
12:23:36बजाज वाडीलाल लाल भाई मेहता लाल शंकर लाल
12:23:40सैमुअल आयरन कुछ ऐसे नाम हैं जो इसमें
12:23:43वेल्लूं रहे कुछ ऐसे भी इंडिविजुअल कैपिटल
12:23:46थे जिन्होंने कांग्रेस जॉइन नहीं किया पर
12:23:49फाइनेंशियल या कोई इनडायरेक्ट हेल्प की
12:23:52जैसे गड़ बिरला अंबाला साराभाई और बालचंद
12:23:56हीराचंद कई छोटे मरचेंट्स या ट्रेडर्स ने
12:24:00भी एक्टिवली सपोर्ट किया दूसरी और कुछ ऐसे
12:24:04इंडिविजुअल कैपिटल या सेक्शंस रहे जो की
12:24:07कांग्रेस या नेशनल मूवमेंट की तरफ
12:24:09न्यूट्रल रहे और कुछ नहीं तो एक्टिवली
12:24:12अपोज भी किया यहां पर हम पुरी कैपिटल
12:24:25ईस्ट क्लास इन इंडिया
12:24:28कैपिटल क्लास
12:24:31पहले इंपॉर्टेंट बात यह है की अगर दूसरी
12:24:34कॉलोनियल इकोनामी से कंपेयर करें तो
12:24:36इंडियन कैपिटल का इकोनामिक डेवलपमेंट काफी
12:24:39संपन्न और कई मैनो में उनकी ग्रोथ का नेचर
12:24:42काफी अलग भी रहा जानते हैं कैसे फर्स्टली
12:24:46इंडियन कैपिटल क्लास मिड 19th सेंचुरी में
12:24:50गो होना चालू हुई मुख्य बात यह है की इनकी
12:24:54कैपिटल अर्थात पूंजी निजी रूप से स्वतंत्र
12:24:57थी ना की किसी फॉरेन कैपिटल के जूनियर
12:25:00पार्टनर की तरह ये उनकी इंडिपेंडेंस
12:25:03कैपिटल थी सेकंड थी इंडियन कैपिटल क्लास
12:25:06इकोनॉमिकली या पॉलिटिकल कभी भी ऐसी
12:25:09सामंतवादी यानी फेयूडलिस्टिक लोगों के
12:25:12अधीन नहीं रहा जो इंपिरियलिज्म के सपोर्ट
12:25:15में थे बल्कि 1944 की फेमस बॉम्बे प्लेन
12:25:19जिनके सिग्नेटरीज जेआरडी टाटा और गड़
12:25:23बिरला जैसे लोग रहे उन्होंने डिटेल लैंड
12:25:26रिफॉर्म्स का सपोर्ट भी किया जिसमें
12:25:28कोऑपरेटिव बनाने की बात की गई
12:25:31थर्डली 1914 से 1947 के दौरान कैपिटल
12:25:36क्लास ने बहुत तेजी से ग्रोथ की इसकी कई
12:25:39कर्म में से एक इंपोर्ट सब्सीट्यूशन रहा
12:25:42जिसके चलते स्वदेशी प्रोडक्ट्स को इनकरेज
12:25:45किया गया बाय लिमिटेड इंपोर्ट आजादी होने
12:25:48तक इंडीजीनस ये स्वदेशी इंटरप्राइजेज का
12:25:51डोमेस्टिक मार्केट शेर
12:25:5373% तक पहुंच गया और ऑर्गेनाइज्ड बैंकिंग
12:25:56सेक्टर के डिपॉजिट का 80% जो साफ-साफ इनकी
12:26:01ग्रोथ को बयान करता है यहां ये समझना
12:26:03जरूरी है की कैपिटल की ग्रोथ कॉलोनियलिज्म
12:26:07के करण नहीं हो रही थी जैसा अक्सर इल्जाम
12:26:09लगाया जाता है बल्कि यह ग्रोथ
12:26:12कॉलोनियलिज्म के खिलाफ लगातार स्ट्रगल
12:26:15करते हुए हुई|
12:26:19जो उनकी इंपिरियलिज्म के खिलाफ लड़ाई के
12:26:22बीच आता बल्कि मिड 1920 तक उन्होंने अपने
12:26:27लॉन्ग टर्म क्लास इंटरेस्ट को सेट किया और
12:26:29इंपिरियलिज्म के खिलाफ अपनी आवाज को खुलकर
12:26:32लोगों तक पहुंचा
12:26:34कैपिटल क्लास की हेसिटेशन सिर्फ यह थी की
12:26:38इंपिरियलिज्म के खिलाफ कौन सा रास्ता
12:26:40चुनाव जाए उन्हें ये डर था की स्ट्रगल ऐसा
12:26:44रास्ता ना ले ले जिससे उनके यानी
12:26:46केपीटलाइज्म के एक्जिस्टेंस पर ही खतरा ए
12:26:49जाए
12:26:49इंपिरियलिज्म और एंटी इंपिरियलिस्ट
12:26:52मूवमेंट की तुलना में कैपिटल क्लास की
12:26:54क्या सोच रही यह समझना से पहले एक नजर इस
12:26:58पर डालना जरूरी है की कैपिटल इस क्लास का
12:27:01इमरजेंसी एक पॉलीटिकल एंटी के रूप में
12:27:03कैसे हुआ
12:27:05इमरजेंसी ऑफ डी कैपिटल
12:27:08एंटी
12:27:101920 की शुरुआत से ही गड़ बिरला और
12:27:14पुरुषोत्तम दास जैसी कैपिटल ने इंडिया की
12:27:17कमर्शियल इंडस्ट्रियल और फाइनेंशियल
12:27:19इंटरेस्ट के लिए एक नेशनल लेवल की
12:27:22ऑर्गेनाइजेशन को बनाने का प्रयास किया
12:27:24जिसकी मदद से कॉलोनियल गवर्नमेंट के सामने
12:27:27अपनी मांगे रख सकें इन्हीं कोशिशें के
12:27:30चलते
12:27:311927 में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ
12:27:34कॉमर्स और इंडस्ट्री अर्थात फीकी का गठन
12:27:37हुआ जिसे कॉलोनियल गवर्नमेंट और इंडियन
12:27:41पब्लिक ने कैपिटल क्लास की एक डोमिनेंट
12:27:44ओपिनियन के रूप में स्वीकार किया कैपिटल
12:27:47क्लास की लीडर्स फीकी को ट्रेड कॉमर्स और
12:27:50इंडस्ट्री के नेशनल गार्जियन के रूप में
12:27:52देखने लगे इस प्रोसेस के दौरान इंडियन
12:27:55कैपिटल ने इंटेलेक्चुअल का इस्तेमाल करके
12:27:58इंपिरियलिज्म की कंप्रिहेंसिव इकोनामिक
12:28:01क्रिटिक को डेवलप किया जिसमें उन्होंने
12:28:03ट्रेड प्रैक्टिस में हो रही एक्सपी पोजीशन
12:28:05को उजागर किया फिर चाहे वो डायरेक्ट
12:28:08एप्रुपरिएशन यानी सीधे ल के मध्य से हूं
12:28:11या फिर ट्रेड फाइनेंस ई मैनिपुलेशन दो
12:28:15कंट्रीज के बीच हो रहे अनइक्विलिक्स चेंज
12:28:18जैसे माध्यमों से हो कांग्रेस लीडर्स ने
12:28:20उनके ओपिनियन और एक्सपर्टीज को हमेशा ही
12:28:23रिस्पेक्ट से ट्वीट किया
12:28:24कैपिटल ने ये महसूस किया की फिक्की लंबे
12:28:28समय तक सिर्फ एक ट्रेड यूनियन मंत्र नहीं
12:28:30र शक्ति उनका मानना था की अब उनको
12:28:33पॉलिटिक्स में इंटरव्यू करना चाहिए
12:28:361928 में फिक्की के प्रेसिडेंट सर
12:28:39पुरुषोत्तम दास ने डिक्लेअर किया वीकेंडो
12:28:42सेपरेटर पॉलिटिक्स फ्रॉम इकोनॉमिक्स
12:28:44इंडियन नेशनलिज्म में फरदर इंवॉल्व होने
12:28:48की बात कहीं गई सिमिलरली गड़ बिरला ने
12:28:511930 में फ्रीडम फाइटर के हाथ मजबूत करने
12:28:55की बात कहीं जिससे गवर्नमेंट को अपनी
12:28:57समक्ष लाया जा सके तो वापस आते हैं एंटी
12:29:00इंपिरियलिस्ट मूवमेंट के सपोर्ट में
12:29:02कैपिटल लिस्ट क्लास के तोर त्रिकोण पर
12:29:06अकॉर्डिंग तू कैपिटल क्लास
12:29:10कैपिटल क्लास का शुरू से यह मानना था की
12:29:13स्ट्रगल के बाद में कभी भी कांस्टीट्यूशनल
12:29:16मेंस और नेगोशिएशंस को आबंदों नहीं किया
12:29:19जाना चाहिए कैपिटल मास्क सिविल
12:29:22डिसऑबेडिएंस के पक्ष में नहीं थे इनके कुछ
12:29:24कर्म पर नजर डालते हैं पहले उन्हें डर था
12:29:28की मांस सिविल डिसऑबेडिएंस सोशल सेंस में
12:29:31रिवॉल्यूशनरी मूवमेंट में कन्वर्ट हो सकता
12:29:33है जिससे केपीटलाइज्म को खतरा होगा दूसरा
12:29:36वो लंबे चलने वाले आंदोलन को सपोर्ट नहीं
12:29:39कर सकते थे क्योंकि उनकी दे टुडे बिजनेस
12:29:42को हनी होती तीसरा उनके कांस्टीट्यूशनल
12:29:46पार्टिसिपेशन और 22 राय की एग्जीक्यूटिव
12:29:48काउंसिल में शामिल होने को सुरेंद्र के
12:29:50तोर पर नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि वो
12:29:54काउंसिल में रहकर इफेक्टिव अपोजिशन देना
12:29:56चाहते थे जिससे ऐसे लोग जो नेशनल इंटरेस्ट
12:29:59के लिए कम नहीं कर रहे थे वो अपनी बात ना
12:30:02मानव लेने ऐसा होने से कैपिटल क्लास और
12:30:06इंडियन इकोनामी को घाट हो सकता था वो केवल
12:30:09अपनी ऊपर ही पार्टिसिपेट करना चाहते थे
12:30:12नेशनल डिमांड्स को आबंदों किया बिना यही
12:30:15करण था की फीकी ने 1934 में रिपोर्ट ऑफ
12:30:19जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन
12:30:20कांस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स पर इंडिया को
12:30:22रिजेक्ट किया चौथ उन्होंने बिना कांग्रेस
12:30:26के इंवॉल्वमेंट की ब्रिटिश गवर्नमेंट से
12:30:28नेगोशिएट करने से इनकार कर दिया राउंड
12:30:31टेबल कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार किया और
12:30:33गांधी जी के इंवॉल्वमेंट को नेसेसरी बताया
12:30:36एस एन फ्री मां नवंबर 1929 में साराभाई ने
12:30:40कहा
12:30:41माइंस तू सपोर्ट ऑफ डी कांग्रेस डी
12:30:44गवर्नमेंट बिल नोट लिसन तू यू फाइनली
12:30:47कैपिटल क्लास ने फ्रीडम स्ट्रगल के और
12:30:50त्रिकोण को साइड लाइन नहीं किया उनके
12:30:52अनुसार
12:30:53कांस्टीट्यूशनलिज्म सिर्फ एक स्टेप था में
12:30:56गोल यानी फ्रीडम की और एग्जांपल
12:31:01को ऑन किया की कांग्रेस अपने गोल्ड तक
12:31:04पहुंचने के लिए ऑफिस जॉइन कर रही है ना की
12:31:07कॉन्स्टिट्यूशन को इन्फोस करने के लिए
12:31:10और अगर दो-तीन साल में प्रोग्रेस नहीं हुई
12:31:12तो मांस सिविल डिसऑबेडिएंस का डायरेक्ट
12:31:15एक्शन लेना जरूरी हो जाएगा दोस्तों कैपिटल
12:31:19क्लास का एटीट्यूड सिविल डिसऑबेडिएंस
12:31:21मूवमेंट की और काफी उलझा देने वाला था एक
12:31:25नजर इस पर भी डालते हैं
12:31:28परिसर एटीट्यूड टुवर्ड्स सिविल
12:31:30डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
12:31:33कैपिटल क्लास बताए गए कर्म से सिविल
12:31:36डिसऑबेडिएंस मूवमेंट से डरती रही पर ये
12:31:39एक्सेप्ट भी किया की जो भी अब तक डिमांड्स
12:31:42एक्सेप्ट हुई हैं वो इस मूवमेंट के करण ही
12:31:45थी
12:31:45जनवरी 1931 में गड़ बिरला ने पुरुषोत्तम
12:31:50दास को लिखने हुए ये माना की गांधी जी के
12:31:52करण ही हमारे ऑफर्स एक्सेप्ट किया गए और
12:31:55किसी भी हाल में मूवमेंट को वीक नहीं होने
12:31:58दिया जा सकता जब भी मूवमेंट लंबा चला तो
12:32:02कैपिटल क्लास 20 और नेगोशिएशन की बात
12:32:04सामने लेकर आई यही उनका ड्यूल ऑब्जेक्ट
12:32:20करने में सपोर्ट नहीं किया बल्कि उन्होंने
12:32:24लगातार गवर्नमेंट को प्रेशराइज किया
12:32:26रिप्रेशन को रोकने के लिए
12:32:29समय के साथ इंडियन कैपिटल के एटीट्यूड में
12:32:32भी काफी अंतर दिखाई दिया पर एग्जांपल
12:32:48बड़े पैमाने पर सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट
12:32:51का सपोर्ट किया
12:32:53फिफ्थ अगस्त 1942 क्यूट इंडिया मूवमेंट के
12:32:57कर दिन पहले वायसराय से पॉलीटिकल फ्रीडम
12:33:00की मांग की ये तो बात हुई कैपिटल क्लास और
12:33:03सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट की और उनकी
12:33:06एटीट्यूड की
12:33:08अब कई बार कांग्रेस पर ये इल्जाम लगे की
12:33:10वो कैपिटल क्लास से इन्फ्लुएंस है इसको
12:33:13समझते हैं
12:33:15नेशनल मूवमेंट और इन्फ्लुएंस ऑफ कैपिटल
12:33:201920 के और तक भले ही इंडियन कैपिटल का एक
12:33:24बड़ा क्षेत्र कांग्रेस को सपोर्ट कर रहा
12:33:25था लेकिन यह समझना जरूरी है की इंडियन
12:33:28नेशनल मूवमेंट नहीं इनके द्वारा क्रिएट
12:33:31किया गया था और ना ही किसी भी तरह से इनके
12:33:34सपोर्ट पर डिपेंडेंट था बल्कि कैपिटल
12:33:38क्लास ने हमेशा ही नेशनल मूवमेंट की
12:33:40स्ट्रेटजी पर रिएक्ट किया और कांग्रेस को
12:33:43फॉलो किया यह भी देखा जाना चाहिए की जो भी
12:33:46कैपिटल नेशनल मूवमेंट का पाठ रहे वो जनरली
12:33:50कंजरवेटिव स्पेक्ट्रम में रहे जिनका
12:33:53मूवमेंट की स्ट्रैटेजिस पर कोई खास
12:33:55इन्फ्लुएंस नहीं रहा फिर भी नेशनल मूवमेंट
12:33:58की ऑटोनॉमी पर लगातार ही सवाल खड़े होते
12:34:01रहे हैं ऐसा कहा गया की कैपिटल ने अपने
12:34:04पैसों के दम पर कांग्रेस को प्रेशराइज
12:34:06किया अपनी डिमांड्स मानवाने के लिए जैसे
12:34:09लोअर रूपी स्टर्लिंग रेशों जिसे एक्सपोर्ट
12:34:13करने पर इंडियन एक्सपोर्टर्स का फायदा
12:34:14होता तारीफ प्रोटेक्शन जिसकी मदद से
12:34:18इंपोर्ट होने वाले गुड्स की डोमेस्टिक गुड
12:34:20से ज्यादा हो जाए और लोकल इंडस्ट्रीज को
12:34:23प्रॉफिट हो मिलिट्री एक्सपेंस जो कॉलोनियल
12:34:26गवर्नमेंट दूसरी कॉलोनी बचाने के लिए करती
12:34:29थी इन सभी स्टेप्स से कैपिटल क्लास का ही
12:34:33फायदा होने वाला था ये भी इल्जाम लगे की
12:34:36कैपिटल ने इस हद तक इन्फ्लुएंस किया की
12:34:39किसी भी मूवमेंट को कब स्टार्ट और एंड
12:34:42करना है ये भी वही डिसाइड करने लगे
12:34:45गांधी अर्बन पेस्ट के बाद सिविल
12:34:48डिसऑबेडिएंस मूवमेंट को बैंड करना इसका ही
12:34:51एक एग्जांपल बताया गया ये सारे एक्यूजेशन
12:34:54रियलिटी को रिफ्लेक्टर नहीं करते आई जानते
12:34:57हैं क्यों फर्स्ट इकोनामिक नेशनलिज्म की
12:35:01डिमांड जैसे प्रोटेक्शन फिजिकल और मॉनिटरी
12:35:04ऑटोनॉमी सिर्फ कैपिटल को फायदा नहीं
12:35:06पहचाने वाली थी बल्कि पुरी कंट्री की
12:35:09डिमांड थी जो की एक्सप्लोइटेशन का शिकार
12:35:12थी
12:35:13जैसे नेहरू सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट ने भी
12:35:17इन डिमांड्स के लिए लड़ाई लड़ी सेकंड
12:35:20इकोनामिक नेशनलिज्म की डिमांड कोई नई बात
12:35:22नहीं थी 50 साल पहले से ही नेशनलिस्ट ने
12:35:26इसकी डिटेल डॉक्ट्रिन डेवलप करनी चालू कर
12:35:28दी थी वह भी तब जब इंडियन कैपिटल एक क्लास
12:35:32के रूप में उभरा भी नहीं था इसलिए यह कहना
12:35:35गलत है की उन्होंने कांग्रेस को
12:35:37इन्फ्लुएंस किया थर्ड ये बात सच है की
12:35:41कांग्रेस को फंड्स की जरूर थी और बिजनेस
12:35:44कम्युनिटी से लेते भी रहे खासकर स्ट्रगल
12:35:47की कांस्टीट्यूशनल फैज के दौरान लेकिन
12:35:49इसका कोई सबूत नहीं है की कांग्रेस की
12:35:51पॉलिसीज को कभी उन्होंने इन्फ्लुएंस किया
12:35:54छोटे डोनेशन और मेंबरशिप फीस पर ही लोकल
12:35:57लीडर्स अपना गुजर करते रहे इस कांटेक्ट
12:36:00में गांधीजी की पोजीशन पर बात करना जरूरी
12:36:03है
12:36:031922 से ही गांधीजी का यह मानना था की भले
12:36:07ही मरचेंट्स और मिल ऑनर्स से सपोर्ट लेना
12:36:09चाहिए पर किसी भी कंडीशन में इस मूवमेंट
12:36:12को उन पर डिपेंडेंट
12:36:16नहीनफेस्टेशन है इसलिए यह मूवमेंट
12:36:19पीटरलेस सी इंडिपेंडेंस तो होना ही चाहिए
12:36:22पर उनके खिलाफ नहीं होना चाहिए हालांकि
12:36:25आगे चलकर गांधी जी का एटीट्यूड नेगेटिव हो
12:36:27गया जब वर्ल्ड वार 2 के दौरान कैपिटल
12:36:30क्लास प्रॉफिट मेकिंग में लगे रहे जबकि
12:36:33लोग फेम से मा रहे थे लास्टली कांग्रेस
12:36:36हमेशा ही बिना कैपिटल के अप्रूवल के
12:36:39मूवमेंट स्टार्ट और एंड करती रही अपने खुद
12:36:42की स्तुति जी परसेप्शन और मैसेज की
12:36:44प्रिपेयरनेस के आधार पर आई अब जानते हैं
12:36:47की कैसे फ्रीडम स्ट्रगल के चलते कैपिटल और
12:36:50लेफ्ट ईस्ट जिन्हें अक्सर अपोजिट और दी
12:36:54आईडियोलॉजिकल स्पेक्ट्रम में समझा जाता है
12:36:55किम टुगेदर पर नेशनल गुड
12:36:59कैपिटल और कोऑपरेशन विद लेफ्ट टेस्ट
12:37:04दोस्तों इंडियन कैपिटल ने कभी कांग्रेस को
12:37:08अपनी क्लास पार्टी के रूप में नहीं देखा
12:37:10बल्कि एक ओपन एंडेड ऑर्गेनाइजेशन के रूप
12:37:13में देखा जो की एक पॉपुलर मूवमेंट को लीड
12:37:16कर रही थी 1930 के दर्श में नेहरू
12:37:19सोशलिस्ट और कम्युनिस्ट के इन्फ्लुएंस के
12:37:22करण जब कांग्रेस में रेडिकलाइजेशन बड़ा तब
12:37:25कैपिटल ने पॉलिटिक्स में एक्टिव पार्ट
12:37:28लेने का डिसीजन लिया सराहनीय है की इसके
12:37:31बावजूद भी उन्होंने इंपिरियलिज्म का साथ
12:37:34नहीं दिया ऐसी ही एक कोशिश को इंडियन
12:37:36कैपिटल ने नाकाम कर दिया जब 1929 में कुछ
12:37:40कैपिटल ने यूरोपीय और इंडियन कैपिटल की एक
12:37:44पार्टी बनाने का सुझाव दिया जो की
12:37:47कम्युनिस्ट एक्टिविटी के खिलाफ होने वाली
12:37:49थी
12:37:501928 में भी पब्लिक सेफ्टी बिल को सपोर्ट
12:37:53करने से इनकार कर दिया जिसका इस्तेमाल
12:38:04अटैक नहीं करना चाहते थे बल्कि वह उन
12:38:06लोगों के हाथ सशक्त करना चाहते थे
12:38:08जिन्होंने केपीटलाइज्म का डेरा नहीं छोड़
12:38:11या फिर सोशलिज्म को अपोज किया
12:38:13कैपिटल जैसे जल मेहता जो की 1943 में
12:38:18फिक्की के प्रेसिडेंट थे का ये मानना था
12:38:20की सोशल चेंज से लड़ने का सबसे अच्छा
12:38:23तरीका है कंसिस्टेंट प्रोग्राम ऑफ
12:38:25रिफॉर्म्स इसी रिफॉर्म प्रोस्पेक्टिव के
12:38:28साथ पोस्ट वार इकोनॉमिक्स डेवलपमेंट कमेटी
12:38:30को कम करना था जिसने फाइनली मुंबई प्लेन
12:38:33को बनाया वो सब कुछ जो सोशलिस्ट मूवमेंट
12:38:37में रीजनेबल था उसे एकोमोडेशन करने की
12:38:40कोशिश की गई बिना केपीटलाइज्म की एसेंशियल
12:38:43फीचर्स को सुरेंद्र की आखिरकार मुंबई
12:38:46प्लेन ने पार्शियल नेशनलाइजेशन पब्लिक
12:38:49सेक्टर लैंड रिफॉर्म और वर्कर्स की
12:38:52वेलफेयर स्कीम्स की नेसेसिटी को भी कुछ हद
12:38:54तक एक्सेप्ट किया
12:38:56कनक्लूडिंग रिमार्क्स
12:38:59तो दोस्तों हमने देखा की इंडियन कैपिटल
12:39:02क्लास प्रो इंपिरियलिस्ट बिल्कुल भी नहीं
12:39:05थी इंडियन कैपिटल क्लास ने अपने लॉन्ग
12:39:08टर्म इंटरेस्ट को आईडेंटिफाई किया और उसको
12:39:11प्रगमैटिकली परसू किया उन्होंने कांग्रेस
12:39:14की इंर्पोटेंस को समझते हुए इंडियन
12:39:16नेशनलिज्म के साथ कभी नहीं छोड़ और लगातार
12:39:20अपनी क्लास इंफ्रास्टेट को सोसाइटी की
12:39:22इंटरेस्ट के तोर पर उजागर किया इन फैक्ट
12:39:25दिस वज डी वेरी ब्यूटी ऑफ ए फ्रीडम
12:39:27स्ट्रगल जहां वेरियस आईडियोलॉजी और
12:39:30क्लासेस के लोगों ने मिलकर कंट्रीब्यूट
12:39:33किया और भारत देश का इतिहास अमर हो गया
12:39:37पॉपुलर स्ट्रगलर इन प्रिंसली स्टेटस
12:39:39दोस्तों जब हम इंडिया के फ्रीडम स्ट्रगल
12:39:42को याद करते हैं तो यूजुअली ब्रिटिशर्स के
12:39:45अगेंस्ट हुए मूवमेंट दिमाग में आते हैं
12:39:47लेकिन क्या आप जानते हैं की ब्रिटिश राज
12:39:50तो इंडिया की खाली 35th टेरिटरी को कर
12:39:52करता था बाकी की 25th टेरिटरी को इंडियन
12:39:56रुलर्स जिन्हें प्रिंसली स्टेटस भी कहा
12:39:58जाता था उनके अंदर में थी सरदार पटेल ने
12:40:02कैसे 500 से ज्यादा रियासतों का भारत में
12:40:05विलय किया इसके बड़े में तो आपने सुना ये
12:40:07पढ़ाई होगा लेकिन आज हम उससे पहले का
12:40:10इतिहास जानते हैं लेकिन उससे पहले जानते
12:40:14हैं व्हाट डू वे मीन बाय डी टर्म प्रिंसली
12:40:16स्टेटस
12:40:17प्रिंसली स्टेटस ब्रिटिश ने जब इंडिया को
12:40:20कंकर किया तो कुछ एरियाज पर डायरेक्ट
12:40:23कंट्रोल एस्टेब्लिश किया जैसे बंगाल
12:40:25मद्रास या अवध का रीजन लेकिन एक बड़ा
12:40:28एरिया ऐसा भी था जहां डायरेक्ट कॉक्वेस्ट
12:40:30की जगह इंडियन प्रिंस को ही रूल करने दिया
12:40:33गया कंडीशन बस यह थी की इन सभी स्टेटस को
12:40:36ब्रिटिश पैरामाउंट से एक्सेप्ट करनी होगी
12:40:40पैरामाउंटसी बेसिकली मेंस की ये स्टेटस
12:40:42ब्रिटिश क्राउन के वेसल होंगे वे एक्सेप्ट
12:40:46सब्सिडियरी एलायंसेज विथ ब्रिटिशर्स सो
12:40:49डिफरेंस
12:40:52के पास होगी और इंटरनल मैटर्स में स्टेटस
12:40:55फ्री होंगे देवाश्म रियली बड़े स्टेटस सच
12:40:59स हैदराबाद मैसूर कश्मीर
12:41:03लाइक बीकानेर बड़ौदा इंदौर जामनगर डी
12:41:07डेक्कन स्टेटस अलवर भरतपुर
12:41:10अब ऐसी क्या कंडीशन थी की इंडियन प्रिंस
12:41:13के रूल के अगेंस्ट मूवमेंट्स हुई वेल बहुत
12:41:17से रीजंस थे आई जानते हैं कॉसेस ऑफ मूव
12:41:20मांस इन प्रिंसली स्टेटस सबसे इंपॉर्टेंट
12:41:23रीजन मोस्ट ऑफ डीज इंडियन रुलर्स
12:41:25ऑटोक्रेटिक स्टाइल में रूल करते थे
12:41:28ब्रिटिशर्स ने इन्हें किसी भी एक्सटर्नल
12:41:30और इंटरनल थ्रेड के अगेंस्ट प्रोटेक्शन भी
12:41:33गारंटी की हुई थी अंदर पैरामाउंट
12:41:35प्रिंसिपल इसलिए मोस्ट ऑफ डेम अपनी प्रजा
12:41:38को भूलकर बस सेल्फिश इंटरेस्ट को बड़ा रहे
12:41:41थे दूसरा रीजन था हाईटेक से आपको जानकर
12:41:46हैरानी होगी की कुछ प्रिंसली स्टेटस में
12:41:48टैक्सेशन रेट्स ब्रिटिश इंडिया से भी
12:41:51ज्यादा थे तीसरा रीजन था लॉक ऑफ सिविल
12:41:54लिबर्टीज
12:41:56यहां रहने वाले लोगों के पास डेमोक्रेटिक
12:41:59राइट्स ना के बराबर थे एक तरफ ये रीजंस थे
12:42:02और दूसरी तरफ ब्रिटिश इंडिया में नेशनल
12:42:04मूवमेंट तेजी से आगे बाढ़ रहा था उसकी वजह
12:42:08से पॉलीटिकल कॉन्शसनेस अबाउट दे किसी
12:42:11रिस्पांसिबल गवर्नमेंट और सिविल लिबर्टीज
12:42:13भी काफी बधाई और दिस वाव ऑफ पॉलीटिकल
12:42:16कॉन्शसनेस अलसो रिच दिस टैक्स 20th
12:42:20सेंचुरी के फर्स्ट और सेकंड डीके में बहुत
12:42:22से इंडियन रिवॉल्यूशनरीज इन स्टेटस में
12:42:24शेल्टर लेने लगे और पॉलिटिसाइजेशन के
12:42:27एजेंट बने इसके बाद नॉन कोऑपरेशन और सिविल
12:42:30डिसऑबेडिएंस जैसे बड़े आंदोलन ने रियासतों
12:42:33के लोगों को और भी ज्यादा इन्फ्लुएंस किया
12:42:36बहुत से स्टेटस में प्रजामंडल्स या स्टेटस
12:42:39पीपल्स कॉन्फ्रेंस ऑर्गेनाइज्ड की गई जैसे
12:42:42की मैसूर हैदराबाद बड़ौदा जामनगर इंदौर
12:42:45ईटीसी में इस प्रोसेस ने तब चर्म छुआ जब
12:42:491927 में बलवंत राय मेहता मणिलाल कोठारी
12:42:53और जी आर अभ्यंकर जैसे लीडर्स के द्वारा
12:42:56जो इंडिया स्टेटस पीपल्स कॉन्फ्रेंस को
12:42:58एस्टेब्लिश किया गया इससे डिफरेंट स्टेटस
12:43:01में होने वाले स्ट्रगलर को एक यूनाइटेड
12:43:03प्लेटफॉर्म मिला पर दोस्तों यह सब
12:43:06ऑर्गेनाइजेशंस और प्लेटफॉर्म
12:43:10रियासतों में आंदोलन को लेकर इंडियन नेशनल
12:43:14कांग्रेस जो की फ्रीडम स्ट्रगल की सबसे
12:43:16इंपॉर्टेंट नेशनल लेवल ऑर्गेनाइजेशन थी
12:43:19उसकी पॉलिसी क्या थी विद रिस्पेक्ट तू
12:43:22प्रिंसली स्टेटस आई जानते हैं नेक्स्ट
12:43:24क्षेत्र में
12:43:25पॉलिसी ऑफ कांग्रेस टुवर्ड्स प्रिंसली
12:43:28स्टेटस सबसे पहले कांग्रेस ने अपनी पॉलिसी
12:43:31आर्टिकल 8 की 1920 के नागपुर सेशन में इस
12:43:36सेशन में कांग्रेस ने इंडियन रुलर्स को
12:43:38अपने स्टेटस में रिस्पांसिबल गवर्नमेंट
12:43:40एस्टेब्लिश करने के लिए बोला और प्रिंसली
12:43:43स्टेटस में रहने वाले लोगों को कांग्रेस
12:43:45का मेंबर बने की परमिशन दी लेकिन वो अपनी
12:43:48स्टेट में कांग्रेस के नाम से कोई आंदोलन
12:43:51शुरू नहीं कर सकते थे पर ऐसा क्यों था की
12:43:54कांग्रेस प्रिंसली स्टेटस में डिस्टेंस
12:43:56रखना छह रही थी तो दोस्तों कई हिस्टोरियन
12:44:00की मैन तो कांग्रेस उसे समय फॉरेन पावर से
12:44:03लड़ने पर फॉक्स करते हुए इंडिपेंडेंस
12:44:05रुलर्स का अपोजिशन नहीं चाहती थी शादी
12:44:09कांग्रेस के कई बड़े बिजनेस मानते थे की
12:44:12डिफरेंट प्रिंसली स्टेटस रिक्वायर्ड
12:44:13डिफरेंट स्ट्रैटेजिस तू फाइट अगेंस्ट डी
12:44:15प्रिंसली रोलर इसीलिए अनलाइक ब्रिटिश
12:44:19इंडिया जहां यूनीफामिटी प्रिंसली स्टेटस
12:44:21में रेजिस्टेंस और फाइट्स टुवर्ड्स पॉपुलर
12:44:24गवर्नमेंट की लड़ाई काफी नेऊेंस होने की
12:44:26जरूर थी इसलिए कांग्रेस उसे समय प्रिंसली
12:44:30स्टेटस के मैसेज को अपने रेजिस्टेंस को
12:44:32खुद बिल्ड अप करने पर फॉक्स करने की
12:44:34पॉलिसी को सपोर्ट करती थी पर जैसे-जैसे
12:44:37फ्रीडम स्ट्रगल और स्ट्रांग हुआ तो यह
12:44:40पॉलिसी भी चेंज हुई 1929 के लाहौर सेशन
12:44:43में जवाहर लाल नेहरू कहते हैं की इंडियन
12:44:45स्टेटस कनॉट लाइव अवार्ड फ्रॉम डी रेस्ट
12:44:48ऑफ इंडिया और यहां के लोगों को अपना
12:44:50फ्यूचर डिटरमिन करने का पूरा अधिकार है
12:44:53इससे पता चला है की कांग्रेस एक
12:44:55इनडायरेक्ट कैटालिस्ट की तरह थी जो पॉपुलर
12:44:58स्ट्रगल इन प्रिंसली स्टेटस को मैच्योर
12:45:01स्ट्रांग और रेसिलियंट बना रही थी इसके
12:45:03बाद कुछ इंपॉर्टेंट डेवलपमेंट्स हुए
12:45:06जिन्होंने सिचुएशन बिल्कुल बादल कर रख
12:45:08पहले 19 55 का एक्ट जिसके तहत फेडरेशन की
12:45:13बात कहीं गई थी जिसका हिस्सा प्रिंसली
12:45:16स्टेटस भी थे प्रिंसली स्टेटस के
12:45:18रिप्रेजेंटेटिव को नॉमिनेट किया जाना था
12:45:21रुलर्स के द्वारा ना की पब्लिक से
12:45:23इलेक्ट्रिक तो इसने रिस्पांसिबल गवर्नमेंट
12:45:25की डिमांड को औरतें कर दिया दूसरा
12:45:28डेवलपमेंट था
12:45:291937 में कांग्रेस मिनिस्टरीज का प्रोविंस
12:45:32में आना और उनका परफॉर्मेंस जिससे लोगों
12:45:35को एक नया कॉन्फिडेंस और एक्सपेक्टेशन
12:45:38मिली हम देखते हैं की
12:45:40193839 के पीरियड में और भी तेजी से
12:45:43स्टेटस में प्रजामंडल्स का फॉर्मेशन होता
12:45:45है इन सभी डेवलपर के बीच कांग्रेस भी अपनी
12:45:48पॉलिसी चेंज करती है कांग्रेस लीडरशिप यह
12:45:51रिलाइज करती है की आईटी इस हाय टाइम की
12:45:54प्रिंसली स्टेटस को भी पुरी तरह आजादी के
12:45:56आंदोलन का हिस्सा बनाया जाए क्योंकि उसके
12:45:58बिना एक यूनाइटेड इंडिपेंडेंस डेमोक्रेटिक
12:46:01कंट्री का विजन जो कांग्रेस देख रही थी वो
12:46:04अधूरा राहत इन बदलती हवाओं की झलक हमें
12:46:07गांधी जी के टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए
12:46:09इंटरव्यू में मिलती है
12:46:10जिसमें वो कहते हैं की जब तक प्रिंसली
12:46:13स्टेटस के लोग अवेयर नहीं थे तब तक
12:46:15कांग्रेस की नॉन इंटरवेंशन परफेक्ट
12:46:18स्टेटमेंट
12:46:27इंडिया के मैसेज को एक समाज मानना
12:46:31है इसलिए कांग्रेस के 1939 त्रिपुरा सेशन
12:46:34में कांग्रेस प्रिंसली स्टेटस को अपने
12:46:37बैनर के अंदर मूवमेंट करना अलाउ कर देती
12:46:39है इसके बाद शुरू होता है स्ट्रगल का
12:46:42फाइनल फेस आई जानते हैं फाइनल फेस अभी तक
12:46:46ब्रिटिश इंडिया और प्रिंसली स्टेटस में
12:46:48अलग-अलग चल रहे आंदोलन को एक किया जाता है
12:46:51इस में
12:46:531939 में नेहरू विकम प्रेसिडेंट ऑफ दी जो
12:46:56इंडिया स्टेटस पीपल्स कॉन्फ्रेंस और वो
12:46:58इम्फैसीज करते हैं आम नेशनल एम्स ऑफ
12:47:01पॉलीटिकल स्ट्रगलर इन ब्रिटिश इंडिया और
12:47:04इन डी प्रिंसली स्टेटस सेकंड वर्ल्ड वार
12:47:07के स्टार्ट होने पर सिचुएशन में दृष्टिक
12:47:09चेंज जाता है कांग्रेस मिनिस्टरीज रिजाइन
12:47:12कर देती हैं और क्यूट इंडिया मूवमेंट
12:47:14लॉन्च किया जाता है इसमें कांग्रेस
12:47:17ब्रिटिश इंडिया और प्रिंसली स्टेटस में
12:47:19कोई डिस्टिंक्शन नहीं रखती पीपल ऑफ
12:47:24इंडियन इंडिपेंडेंस विथ डी क्यूट इंडिया
12:47:26मूवमेंट यहां गांधीजी प्रिंसली स्टेट के
12:47:29रुलर्स और मैसेज दोनों को बताते हैं है
12:47:31जहां रोलर का रोल मसोस को फेयर और जस्ट
12:47:34पॉलिसी के साथ रूल करना है वहीं मैसेज को
12:47:37डिस्पाट प्रिंस के सामने स्ट्रांग्ली खड़ा
12:47:40होकर उनसे अपने राइट्स की डिमांड को रखना
12:47:42चाहिए साथ ही अब कांग्रेस की पॉलिसी में
12:47:46इंडिपेंडेंस ऑफ इंडिया के साथ साथ
12:47:47प्रिंसली स्टेटस को इंडिया का इंटरनल
12:47:50मेंबर बनाने की डिमांड एक इंटीग्रल पार्ट
12:47:53बन जाति है इसके साथ ही स्ट्रगल अगेंस्ट
12:47:55ब्रिटिश राज में फाइनली स्टेटस के पॉपुलर
12:47:58स्ट्रगलर को एक इक्वल इंर्पोटेंस दी जाति
12:48:01है लेकिन दोस्तों प्रिंसली स्टेटस का
12:48:04कंप्लीट इंडिपेंडेंस ब्रिटिश इंडिया के
12:48:07इंडिपेंडेंस से थोड़ा और मुश्किल था
12:48:09प्रिंसली स्टेटस में पॉपुलर स्ट्रगलर का
12:48:12लास्ट लेग हमें इंडिपेंडेंस के बाद देखने
12:48:14को मिलता है जब सरदार पटेल और बीपी मेनन
12:48:18कंप्लीट इंडिया बनाने के लिए स्टेटस को
12:48:20डोमिनियन ऑफ इंडिया में शामिल करने के लिए
12:48:22प्लेन बनाते हैं
12:48:24स्टेटस को इंस्ट्रूमेंट ऑफ एसेशन दिया
12:48:26जाता है जिसके द्वारा वह डोमिनियन ऑफ
12:48:28इंडिया में इंक्लूड हो सकते थे बट इसमें
12:48:31कुछ प्रिंसली स्टेटस पैरामाउंटसी लैप्स
12:48:34होने के बाद अपने आप को डोमिनियन में
12:48:36शामिल ना होकर इंडिपेंडेंस रहने की कोशिश
12:48:39करते हैं इसमें ट्रैवल को कश्मीर हैदराबाद
12:48:42एटरा जैसे प्रिंसली स्टेटस शामिल थे इस
12:48:46एस्पेक्ट को और डिटेल में समझना के लिए दो
12:48:49स्टेटस की स्टोरी को डिटेल में जानते हैं
12:48:51राजकोट और हैदराबाद पहले चलते हैं राजकोट
12:48:55स्टोरी ऑफ राजकोट दोस्तों राजकोट में राजा
12:49:00लक्खा जी राज सिंह जी तू के रूल के टाइम
12:49:02गवर्नमेंट में पॉपुलर पार्टिसिपेशन इनकरेज
12:49:06किया जाता है पर एग्जांपल
12:49:081923 में राजकोट प्रजा प्रतिनिधि सभा
12:49:11एस्टेब्लिश होती है
12:49:14जब 1930 में उनके बेटे धर्मेंद्र सिंह जी
12:49:17राजा बनते हैं जो की पॉपुलर पार्टिसिपेशन
12:49:20इन करेज नहीं करना चाहते थे की वो मोर
12:49:24फ्रस्ट्रेटेड इन है ऑन प्लेजेस और उसको
12:49:26पूरा करने के लिए स्टेट की इकोनामी पर
12:49:28काफी प्रेशर था उसके बाद टैक्स इंक्रीज
12:49:31होने और प्रतिनिधि सभा के लैब होने जैसे
12:49:33रीजन से पब्लिक में डिस्कंटेंट और बढ़ता
12:49:36है फिर स्टार्ट होता है स्ट्रगलर का
12:49:39सिलसिला
12:49:40राजकोट सत्याग्रह का सपोर्ट सरदार पटेल और
12:49:43गांधीजी जैसे नेशनल लीडर्स भी करते हैं और
12:49:46फाइनली एक एग्रीमेंट भी साइन होता है
12:49:48बिटवीन राजदरबार और सरदार पटेल इसमें पीवी
12:49:53पर्स पर लिमिट राखी गई और एक कमेटी का
12:49:55पॉइंट होना था तो सजेस्ट फरदर रिफॉर्म्स
12:49:58इस कमेटी के साथ मेंबर्स को सरदार पटेल
12:50:01रिकमेंड करेंगे यह भी डिसाइड होता है
12:50:03लेकिन यहां पर ब्रिटिश गवर्नमेंट इंटरफेयर
12:50:06करती है वह दरबार को सरदार पटेल की लिस्ट
12:50:09ऑफ मेंबर्स को रिजेक्ट करने को कहती है
12:50:22और गांधीजी डायरेक्टली इंवॉल्व भी होते
12:50:25हैं लेकिन दरबार की पोजीशन में कोई चेंज
12:50:28नहीं होता
12:50:30दूसरी तरफ आंदोलन वायलेट और कम्युनल होने
12:50:34लगता है इसकी वजह से गांधीजी सत्याग्रह
12:50:37खत्म करने का डिसीजन लेते हैं इनोसेंस
12:50:39सत्याग्रह फील्ड बट डी स्ट्रगल ऑफ राजकोट
12:50:42पीपल कंटिन्यू बट जब इंडिपेंडेंस का वक्त
12:50:46आता है डी रोलर ऑफ राजकोट न्यू की अब
12:50:48उन्हें प्रोटेस्ट करने के लिए ब्रिटिश
12:50:50पावर नहीं है सो ही डिसाइड नोट तू चैलेंज
12:50:54एनीमो और ही रीडली साइन डी इंस्ट्रूमेंट
12:50:57ऑफ एसेशन और फाइनली राजकोट की जनता को
12:51:00मिलती है रिस्पांसिबल फॉर्म ऑफ गवर्नमेंट
12:51:03ये थी राजकोट की कहानी अब चलते हैं साउथ
12:51:06के हैदराबाद में स्टोरी ऑफ हैदराबाद
12:51:10डी स्टोरी ऑफ हैदराबाद इसे अपोजिट ऑफ
12:51:13राजकोट यहां पर निजाम का रूल था लेकिन
12:51:16पापुलेशन हिंदू मेजॉरिटी थी
12:51:20कोई
12:51:22कांग्रेस को भी बन कर दिया गया था लेकिन
12:51:25फ्रीडम स्ट्रगल और पॉलीटिकल कॉन्शसनेस का
12:51:28असर यहां के लोगों तक भी है और धीरे-धीरे
12:51:31स्टेट में पॉलीटिकल एक्टिविटीज बधाई
12:51:34सत्याग्रह स्टार्ट हुए लेकिन स्टेट ने
12:51:37उनको रिप्रेस करने की हमेशा कोशिश की इसके
12:51:39अलावा रिलिजियस और कल्चरल ऑपरेशन भी था
12:51:42स्टाइल वो बढ़नी हुई नेशनल कॉन्शसनेस को
12:51:46रॉक नहीं पे और लोगों का स्ट्रगल बढ़ता
12:51:48गया रजाकार जो की एक पारा मिलिट्री फोर्स
12:51:51थी निजाम की उसने स्ट्रगल करने वालों को
12:51:54हरायस करना शुरू किया और सिचुएशन बहुत
12:51:56वालीटाइल हो गई बट फाइनली इंडियन आर्मी के
12:52:001948 ऑपरेशन पोलो की हेल्प से पीपल्स
12:52:03मूवमेंट वन
12:52:04कंक्लुजन
12:52:06प्रिंसली स्टेटस की कंडीशन ब्रिटिश इंडिया
12:52:09से काफी डिफरेंट थी इसलिए यहां होने वाले
12:52:12स्ट्रगलर भी अलग फॉर्म लेते हैं
12:52:18स्पिरिट ऑफ नेशनलिज्म और डेमोक्रेसी यहां
12:52:22भी जीत हासिल करती है
12:52:25और लोगों को रिप्रेजेंटेटिव फॉर्म ऑफ
12:52:28गवर्नमेंट मिलती है
12:52:32[संगीत]
12:52:35बिना इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल की हिस्ट्री
12:52:38अधूरी रहती है उनके द्वारा किया गए
12:52:41सैक्रिफिस का स्थान सबसे ऊंचा है
12:52:44इंडियन वूमेन ने सच्ची स्पिरिट और अद्भुत
12:52:48साहस के साथ आजादी के संघर्ष में अपना
12:52:50योगदान दिया इतिहास में ऐसी भारतीय
12:52:53महिलाओं की एक लंबी लिस्ट है जिन्होंने
12:52:56अपने देश की आजादी के लिए खुद को डेडिकेट
12:52:59किया
12:53:00अपनी आज की इस वीडियो में हम ऐसे ही कुछ
12:53:03ग्रेट इंडियन वूमेन के कंट्रीब्यूशन को
12:53:05समझेंगे हम देखेंगे की कैसे इन्होंने
12:53:08नेशनल मूवमेंट के सभी फेस में अपना अनमोल
12:53:12योगदान दिया आई शुरू करते हैं
12:53:16अर्ली स्ट्रगलर
12:53:19ब्रिटिश रूल के अगेंस्ट हुए संघर्ष में
12:53:21वूमेन का पार्टिसिपेशन 1817 में ही शुरू
12:53:24हो गया
12:53:27यशवंत राव होलकर की बेटी थी बहादुर से
12:53:30लड़ते हुए ब्रिटिश कर्नल मालकिन को
12:53:32गोरिल्ला वाॅरफेयर में हर देती हैं
12:53:42यानी की 1857 की क्रांति से भी पहले
12:53:45इंडियन वूमेन ने ब्रिटिश के साथ टक्कर
12:53:48लेना शुरू कर दिया था
12:53:50अब बात करते हैं 1857 के ग्रेट रिवॉल्ट
12:53:53में वूमेन पार्टिसिपेशन की
12:53:57डी ग्रेट रिवॉल्ट वेटिंग 57
12:54:00ब्रिटिश ने भले ही 1857 की क्रांति को 1
12:54:04साल के अंदर ही कृष कर दिया हो लेकिन यह
12:54:07सबसे पॉपुलर इवॉल्व था जिसमें इंडियन
12:54:09रुलर्स मैसेज और सोल्जर ने बाढ़ चढ़कर
12:54:12हिस्सा लिया था इस क्रांति की सबसे बड़ी
12:54:14हीरोइन को कौन भूल सकता है झांसी की रानी
12:54:18लक्ष्मी बाई
12:54:201857 की क्रांति में रानी लक्ष्मीबाई ने
12:54:23अद्भुत साहस पराक्रम और वीरता का परिचय
12:54:26दिया और हमेशा के लिए भारतीयों के दिलों
12:54:30में अमर हो गई उनकी मिसल आज भी वूमेन
12:54:33एंपावरमेंट के लिए दी जाति है रानी
12:54:35लक्ष्मीबाई अकेली ऐसी महिला नहीं थी
12:54:38जिन्होंने इस क्रांति में भाग लिया उनके
12:54:41साथ उनकी ही सहेली झलकारी बाई ने भी अपनी
12:54:44वीरता का सबूत इस लड़ाई में दिया था इसके
12:54:47अलावा अवध की रानी बेगम हजरत महल
12:55:04शक्ति थी और दूसरा गांधीजी खुद इंडियन
12:55:08वूमेन की पोटेंशियल को समझते थे और इन्हें
12:55:11आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित
12:55:13करते थे तो आई अब गांधियन फीस की चर्चा
12:55:16करते हैं
12:55:18विमेंस पार्टिसिपेशन इन डांडियां फेस
12:55:23गांधीजी ने जब 1920 में नॉन कोऑपरेशन
12:55:26मूवमेंट लॉन्च किया तो उसमें बड़ी संख्या
12:55:28में महिलाओं ने अपनी भागीदारी दी सरल देवी
12:55:31मुथुलक्ष्मी रेड्डी सुशीला नायर राजकुमारी
12:55:35अमृत कौर सुचेता कृपलानी और अरुण आसफ अली
12:55:39जैसी वूमेन ने नॉन वायलेट मूवमेंट में
12:55:42पार्टिसिपेट किया
12:55:43वूमेन बड़ी संख्या में लेकर शॉप्स के आगे
12:55:46धरना देती थी फॉरेन क्लॉथ की होली जलती थी
12:55:49और रैली और माचिस में भी हिस्सा लेती थी
12:55:52गांधी जी की वाइफ कस्तूरबा गांधी और नेहरू
12:55:56फैमिली की वूमेन जैसी कमल नेहरू विजय
12:55:58लक्ष्मी पंडित और स्वरूप रानी ने भी नेशनल
12:56:01मूवमेंट में बाढ़ चढ़कर भाग लिया था
12:56:04लाडू रानी और उनकी डॉटर मनमोहिनी श्याम और
12:56:09जनक लाहौर में नॉन कोऑपरेशन मूवमेंट को
12:56:12लीड करती हैं
12:56:16और सिविल डिसऑबेडिएंस मूवमेंट लॉन्च किया
12:56:19जाता है तो कमल देवी चट्टोपाध्याय गांधीजी
12:56:23से रिक्वेस्ट करती हैं की अपने दांडी
12:56:25मार्च में वह महिलाओं को भी शामिल करें
12:56:27कर्नाटक के बेंगलुरु में जन्मी कमल देवी
12:56:31गांधी जी के इतिहास और नॉन वायलेंस के
12:56:34कॉन्सेप्ट से बहुत प्रेरित थी उन्होंने
12:56:36आजादी के संघर्ष में भाग लेने के लिए 1923
12:56:40में ही कांग्रेस पार्टी को जॉइन कर लिया
12:56:41था
12:56:43है इसके बाद वूमेन जगह नमक कानून तोड़कर
12:56:46फॉरेस्ट लॉस ब्रेक करके और प्रभात फेरीज
12:56:49के जारी अपनी लिबर्टी की तरफ कम बढ़नी हैं
12:56:52मी 1930 में धरसाना साल्टवर्क्स पर रेड
12:56:56करने के लिए गांधीजी खुद सरोजिनी नायडू को
12:56:59नॉमिनेट करते हैं और जी तरह से ये रेड
12:57:02कंडक्ट की जाति है वो अपने आप में आंदोलन
12:57:04के अहिंसात्मक नेचर की मिसल है
12:57:08आंदोलन के दौरान कमल देवी जगह पब्लिक
12:57:10मीटिंग्स एड्रेस करती हैं नमक तैयार करती
12:57:13हैं फॉरेन क्लॉथ और लिकर शॉप्स पर धरना
12:57:16देती हैं इसी दौरान 26th जानुडी 1930 को
12:57:21हुई एक घटना से पूरे देश का ध्यान उनकी
12:57:23तरफ जाता है प्रदर्शन के दौरान पुलिस हमला
12:57:27बोल देती है और अपने हाथ में लिए तिरंगे
12:57:29को बचाने के लिए कमल देवी उससे लिपट जाति
12:57:32हैं पुलिस वाले लाठी बरसते रहते हैं लेकिन
12:57:35वो एक चट्टान की तरह खड़ी रहती है खून
12:57:39बहता राहत है लेकिन कमल देवी तिरंगे को
12:57:42अपने हाथ से नहीं जान देती
12:57:45दूसरी तरफ मणिपुर में रानी गाइडें लाइव
12:57:48ब्रिटिशर्स के अगेंस्ट नागालैंड नेशनलिस्ट
12:57:50के संघर्ष को लीड करती हैं इसके लिए
12:57:53इन्हें 1932 में अरेस्ट कर लिया जाता है
12:57:55देश की आजादी के बाद इन्हें जय से रहा
12:57:58किया जाता है और जवाहर लाल नेहरू इन्हें
12:58:01रानी ऑफ नागार्ज का टाइटल देते हैं
12:58:03इंडिविजुअल एफर्ट के साथ साथ वूमेन बहुत
12:58:06सी ऑर्गेनाइजेशन के जारी भी आंदोलन को
12:58:09सपोर्ट करती हैं उदाहरण के तोर पर
12:58:12नई सत्याग्रह कमेटी महिला राष्ट्रीय संघ
12:58:15और लेडीज विकेट इन बोर्ड जैसे ग्रुप
12:58:18आंदोलन को और मजबूत बनाते हैं
12:58:21भारतीय महिलाओं की भागीदारी सिर्फ नॉन
12:58:23वायलेट मूवमेंट्स तक ही सीमित नहीं थी
12:58:25बल्कि वो रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज में भी
12:58:27पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलकर चलती
12:58:30नजर आई हैं
12:58:34रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज
12:58:37रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज में वूमेन दो तरह
12:58:40से अपना योगदान देती हैं पहले तो पैसिव
12:58:43तरीके से था जिसमें यह रिवॉल्यूशनरीज को
12:58:45छुपाने की जगह देती हैं फंड्स के लिए अपनी
12:58:48ज्वेलरी देती हैं मैसेज और वेपन करियर का
12:58:51कम भी करती हैं और इन डायरेक्टली
12:58:53रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को सपोर्ट करती
12:58:55हैं और दूसरा तरीका एक्टिव था जहां वूमेन
12:58:59खुद हाथ में पिस्तौल्स लेती नजर आई हैं
12:59:02उदाहरण के तोर पर सूर्य सन की नेतृत्व में
12:59:051930 में हुई चित्तागोंग ई रेड में कल्पना
12:59:09डेट और प्रीतीलता वादी डर जैसी
12:59:13रिवॉल्यूशनरी शामिल थी वहीं दिसंबर 1931
12:59:16में शांति घोष और सुनीति चौधरी बंगाल के
12:59:21कोमिला जिला के दम को गली मार देती हैं तो
12:59:2421 साल
12:59:251932 में कन्वोकेशन सेरेमनी के दौरान
12:59:28बंगाल की गवर्नर को शूट करती हैं
12:59:32इतना ही नहीं देश के बाहर भी वूमेन
12:59:34रिवॉल्यूशनरीज आजादी के लिए संघर्ष करती
12:59:37हैं जिसमें सबसे बड़ा नाम मैडम भीकाजीकामा
12:59:40का है इन्हें मदर ऑफ इंडियन रिवॉल्यूशनरी
12:59:43मूवमेंट भी कहा जाता है इन्होंने 197 में
12:59:46जर्मनी के स्रोत गार्डन में ऑर्गेनाइज्ड
12:59:48वर्ल्ड सोशलिस्ट कॉन्फ्रेंस में भाग लिया
12:59:51था और यही पहले बार इंडियन फ्लैग को अनफॉल
12:59:54भी किया था इस तरह क्रांतिकारी एक्टिविटीज
12:59:57में भी महिलाओं ने आगे बढ़कर हिस्सा लिया
12:59:59था आई अब आजादी के आखरी आंदोलन यानी की
13:00:03क्यूट इंडिया मूवमेंट में वूमेन की पार्टी
13:00:05से पेशेंट की बात करते हैं
13:00:09क्यूट इंडिया मूवमेंट
13:00:121942 की क्यूट इंडिया रेजोल्यूशन ने वूमेन
13:00:15को इंडियन फ्रीडम के डिसिप्लिन सोल्जर कहा
13:00:18था जिनकी जरूर आजादी के संघर्ष की ज्वाला
13:00:21को जलाए रखना के लिए बहुत ही ज्यादा थी और
13:00:24इंडियन वूमेन ने ऐसा ही किया
13:00:27आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं
13:00:30में भाग लिया उषा मेहता ने वॉइस ऑफ फ्रीडम
13:00:34नाम से सीक्रेट रेडियो ट्रांसमीटर सेटअप
13:00:36किया था जिसके द्वारा आंदोलन से जुड़े
13:00:39प्रोटेस्ट और अरेस्ट की न्यूज़ यंग
13:00:42नेशनलिस्ट की एक्टिविटीज और गांधीजी के
13:00:44फेमस दो दी मैसेज को लोगों के बीच
13:00:47सर्कुलेट किया गया था
13:00:50सुचेता कृपलानी नॉनवॉयलेट रेजिस्टेंस को
13:00:53लीड करती हैं वहीं अरुण आसफ अली
13:00:55अंडरग्राउंड रिवॉल्यूशनरी एक्टिविटीज को
13:00:58लीडरशिप प्रोवाइड करती हैं इन बड़े नाम के
13:01:01अलावा हजारों की संख्या में ऐसी और वूमेन
13:01:04थी जो आजादी के लिए अपने अपने स्टार पर
13:01:06इनिशिएटिव लेती हैं देश में जब क्यूट
13:01:10इंडिया मूवमेंट चल रहा था तब देश के बाहर
13:01:12सुभाष चंद्र बस इंडियन नेशनल आर्मी का
13:01:15फॉर्मेशन कर रहे थे
13:01:171943 में फॉर्म हुई इस आर्मी में वूमेन
13:01:20रेजीमेंट भी शामिल थी जिसका नाम 1857
13:01:23क्रांति की लीजेंडरी हीरोइन रानी
13:01:26लक्ष्मीबाई के नाम पर रखा गया था इसे लगभग
13:01:2915000 वूमेन ने जॉइन किया था इन्हें फूल
13:01:33मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई थी और कॉम्बैट
13:01:35ड्यूटीज के लिए तैयार किया गया था लेकिन
13:01:38जब शुरुआत में इन्हें सिर्फ नॉन कॉम्बैट
13:01:40रोल दिए जाते हैं तो यह सब अपने लीडर से
13:01:43शिकायत करती हैं जिसके बाद 1945 में
13:01:46इन्हें इंफाल कैंपेन के दौरान एक्चुअल वार
13:01:49ऑपरेशन एस के लिए भेजो जाता है
13:01:52हम का सकते हैं की इंडियन फ्रीडम स्ट्रगल
13:01:55का ऐसा कोई भी फ्रंट नहीं था जहां वूमेन
13:01:58पार्टिसिपेशन मिसिंग हो हर इंडियन वूमेन
13:02:02ने आजादी के इस यज्ञ में अपनी आहूदी दी थी
13:02:05दोस्तों इंटरेस्टिंग बात यह है की सिर्फ
13:02:08इंडियन वूमेन ने ही नेशनल मूवमेंट में भाग
13:02:11नहीं लिया था बल्कि बहुत सी ऐसी फॉरेन
13:02:13नेशनल्स भी थी जिन्होंने इंडियन फ्रीडम
13:02:16स्ट्रगल को एक्टिवली सपोर्ट किया था आई
13:02:19ऐसी कुछ वूमेन के बड़े में भी बात करते
13:02:21हैं
13:02:23फॉरेन वूमेन इन इंडियन नेशनल मूवमेंट
13:02:27जब फ्रीडम स्ट्रगल में नॉन इंडियन वूमेन
13:02:30के पार्टिसिपेशन की बात होती है तो उसमें
13:02:32सबसे बड़ा नाम आयरलैंड की अन्य बेसन का
13:02:35आता है अन्य बसंत इंडिया में थियोसोफिकल
13:02:37सोसाइटी की फाउंडर थी इन्होंने होम रूल
13:02:40लीग की भी शुरुआत की थी जिसका आइरिश होम
13:02:44रूल लीग की तरह इंडिया में होम रूल यानी
13:02:47स्वराज के लिए आंदोलन शुरू करना था इसके
13:02:50अलावा 1917 में यह कांग्रेस प्रेसिडेंट की
13:02:53पोस्ट पर भी सिलेक्ट हुई थी नेशनल मूवमेंट
13:02:56में अन्य बसंत के अनमोल योगदान के लिए
13:02:59इंडिया में आज भी उन्हें ग्रेट फूली याद
13:03:02किया जाता है
13:03:05जिनका नाम मिस मगरित नोबेल था यह जनवरी
13:03:10898 में इंडिया आई हैं और स्वामी
13:03:12विवेकानंद की डिसएबल बंटी हैं इन्हें
13:03:15सिस्टम निवेदिता के नाम से जाना जाता है
13:03:18इन्होंने अमेरिका और यूरोप में इंडिया के
13:03:22संघर्ष का प्रचार प्रसार किया सिस्टर
13:03:25निवेदिता ने 1905 में कांग्रेस का बनारस
13:03:28सेशन भी अटेंड किया था और स्वदेशी मूवमेंट
13:03:31को सपोर्ट किया था पेरिस में जन्मी मीरा
13:03:34अल्फों 1914 में इंडिया आई है और श्री
13:03:38अरबिंदो से मिलती हैं इन्हें युनिवर्सिटी
13:03:40मदर के नाम से जाना जाता है पांडिचेरी के
13:03:43पास इंटरनेशनल टाउन और बिल की स्थापना के
13:03:46पीछे इन्हीं की इंस्पिरेशन है इन्होंने
13:03:49सिर्फ इंडिया के ईद ओल्ड हेरिटेज और कलर
13:03:52को इन रिच किया बल्कि यानी बेसन और नलिनी
13:03:55सेन गुप्ता जैसी वूमेन को इंडिया के लिए
13:03:57फाइट करने के लिए मोटिवेट भी किया इसके
13:04:00अलावा महात्मा गांधी
13:04:03दो इंग्लिश लेडिस मीरा बहन और सरल बहन को
13:04:07कौन भूल सकता है
13:04:11और इनका जन्म इंग्लैंड में हुआ था
13:04:15वही सरल बैंक का नाम कैथरीन मेरी हिलाना
13:04:18था इन्हें इंडियन नेम गांधी जी द्वारा दिए
13:04:21गए थे
13:04:23मीरा बहन गांधीजी के साथ राउंड टेबल
13:04:25कॉन्फ्रेंस में गई थी और इन्होंने और
13:04:28एरियाज में सोशल रिफॉर्म्स के लिए बहुत कम
13:04:31किया था वही सरलाबेन भी एक ग्रेट सोशल
13:04:34रिफॉर्मर थी इन्होंने उत्तराखंड के कौसनी
13:04:37में एक आश्रम स्थापित किया था ये गांव
13:04:40गांव जाकर पॉलीटिकल प्रिजनर्स की फैमिली
13:04:43को हेल्प किया करती थी इस तरह बहुत सी
13:04:46विदेशी महिलाओं ने इंडिया की आजादी में हम
13:04:49रोल निभाया था हम का सकते हैं की भले ही
13:04:52इंडिया की सिटीजंस एन रही हूं लेकिन दिल
13:04:55से जरूर
13:05:02दोस्तों इस तरह आजादी के लिए संघर्ष में
13:05:05महिलाओं ने अपनी जिम्मेदारी निभाई
13:05:06उन्होंने पब्लिक मीटिंग्स की फॉरेन क्लॉथ
13:05:10और अल्कोहल शॉप्स के आगे धरना दिया खड़ी
13:05:13को अपनाया और राष्ट्रीय आंदोलन में बाढ़
13:05:16चढ़कर हिस्सा भी लिया इस दौरान महिलाओं ने
13:05:19पुलिस की बैटिंग को भी फेस किया और जय भी
13:05:22गई हजारों की संख्या में भारतीय महिलाओं
13:05:25ने देश की आजादी के लिए अपनी जिंदगी
13:05:27समर्पित कर दी और ऐसी सभी महान महिला
13:05:30स्वतंत्रता सेनानियों को हमारा शत शत नमन
13:05:35स्टडी इक इस अब तैयारी हुई अफॉर्डेबल