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0:00हवा में इलेक्ट्रिसिटी स्टोर करने के लिए
0:02जमीन से करीब 1.5 किलोमीटर नीचे 9.8 लाख
0:06क्यूबिक मीटर की एक विशाल अंडरग्राउंड जगह
0:08बनाई गई है। लेकिन आखिर हवा में एनर्जी
0:10स्टोर कैसे की जाती है? 2026 में चाइना के
0:13जांगसू में ऑपरेशनल हुआ। यह दुनिया का
0:16सबसे बड़ा कंप्रेस्ड एयर एनर्जी स्टोरेज
0:18प्लांट है। सबसे पहले साल्ट रॉक तक
0:20ड्रिलिंग की गई। फिर पाइप्स के जरिए पानी
0:22अंदर भेजा गया। जिसने साल्ट को घोलना शुरू
0:24किया। नमकीन पानी पंप से बाहर निकाला गया
0:27और बार-बार यही प्रोसेस दोहराकर एक विशाल
0:29अंडरग्राउंड चेंबर बनाया गया। जब ग्रिड
0:31में एक्स्ट्रा इलेक्ट्रिसिटी होती है तो
0:33बड़े कंप्रेसर्स हवा को बेहद ज्यादा
0:35प्रेशर पर दबाकर इन चेंबर्स में भरते हैं।
0:37कंप्रेशन से हवा बेहद गर्म हो जाती है।
0:39इसलिए इसे हीट एक्सचेंजर से गुजारकर इसकी
0:41हीट मोल्टन साल्ट और हॉट वाटर में स्टोर
0:44की जाती है। फिर कूल्ड कंप्रेस्ड एयर
0:45चेंबर्स में चली जाती है। जब
0:47इलेक्ट्रिसिटी की जरूरत बढ़ती है तो यही
0:49हाई प्रेशर एयर बाहर निकाली जाती है।
0:51प्रेशर कम होने पर हवा तेजी से ठंडी हो
0:53जाती है। हीट एक्सचेंज और स्टर्ड हीट वापस
0:56हवा में पहुंचाता है जिससे गर्म एयर
0:58ज्यादा ताकत से एक्सपेंड होकर टरबाइन को
1:00घुमाती है और जनरेटर इलेक्ट्रिसिटी पैदा
1:02करता है। दो टरबाइन 600 मेगावाट तक बिजली
1:05पैदा कर सकती हैं और पूरा सिस्टम 2400
1:08मेगावाट आवर एनर्जी स्टोर करता