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0:00किसी वक्त की बात है कि एक छोटे से गांव
0:02में गुलाम हैदर नाम का एक किसान अपनी बीवी
0:05और बेटे सलमान के साथ रहता था। उनके पास
0:08थोड़ी सी जमीन थी जिस पर वह गन्ना उगाते
0:11उसका रस निकालकर गुड़ बनाते और वही बाजार
0:14में बेचकर गुजारा करते थे। सर्दियों के
0:17दिन थे। गुलाम हैदर और सलमान सुबह से शाम
0:20तक खेतों में काम करते। गन्ना काटते और
0:23चूल्हे पर गुड़ पकाते। गुलाम हैदर हमेशा
0:26गुड़ लेकर खुद बाजार जाता क्योंकि उसे
0:28लगता था कि सलमान अभी छोटा है और बाजार के
0:31सौदे की समझ नहीं रखता। एक दिन गुलाम हैदर
0:34ने बैलगाड़ी में गुड़ लोड किया और बाजार
0:37रवाना हो गया। वहां जाकर उसने गाड़ी खड़ी
0:40की और ग्राहकों का इंतजार करने लगा। कुछ
0:43देर बाद एक व्यापारी वहां से गुजरा। उसे
0:46याद आया कि उसकी बीवी ने आज गुड़ वाली खीर
0:49बनाने को कहा था। तो वो गुलाम हैदर के पास
0:52आकर बोला भाई क्या बेच रहे हो? गुलाम हैदर
0:56ने खुश होकर जवाब दिया जनाब आज ही ताजा
1:00गुड़ तैयार किया है। आप चाहे तो सस्ते
1:03दामों दे दूंगा। व्यापारी को गुलाम हैदर
1:06बहुत सीधा सादा और भोला लगा। उसने कहा यह
1:09पूरी गाड़ी का गुड़ कितने में दोगे? गुलाम
1:12हैदर खुश हो गया कि उसे इंतजार नहीं करना
1:15पड़ेगा। उसने कहा ₹500 दे दे सारा ले
1:19जाइए। व्यापारी ने ₹500 निकाले और कहा तो
1:23फिर इस गुड़ को मेरे घर तक पहुंचा दो।
1:25गुलाम हैदर ने व्यापारी को भी गाड़ी पर
1:28बिठा लिया और उसके घर की तरफ चल दिया। जब
1:31वह घर पहुंचे तो गुलाम हैदर ने कहा, जनाब
1:35जरा जल्दी गाड़ी खाली करवा दीजिए। मुझे घर
1:38वापस जाना है। यह सुनकर व्यापारी मुस्कुरा
1:40कर बोला, "कौन सी गाड़ी? तुम्हें तो मैं
1:43पूरी गाड़ी के ₹500 दे चुका हूं। अब यह सब
1:46मेरा माल है। गुलाम हैदर हैरत से बोला,
1:50जनाब, मैंने गुड़ के दाम बताए थे। गाड़ी
1:53तो मेरी है। व्यापारी सख्त लहजे में बोला,
1:56"मैंने पूछा था कि पूरी गाड़ी का क्या दाम
1:59है? तुमने खुद कहा 500। अब जुबान से फिर
2:02रहे हो। तुम जैसे लोग वादे के पाबंद नहीं
2:06होते। फिर उसने नौकरों को आवाज दी।
2:09जिन्होंने गुलाम हैदर के कपड़े उतरवाए और
2:11उसे घर से धकेल कर निकाल दिया। गुलाम हैदर
2:14बेइज्जती और शर्मिंदगीगी की हालत में सारा
2:17दिन जंगल में छुपा रहा। जैसे ही रात हुई
2:21वो अंधेरे में चुपके से अपने घर आया। उसकी
2:24हालत देखकर बीवी और बेटा फौरन लपक कर आए।
2:27चादर ओढ़ाई और वजह पूछी। गुलाम हैदर ने
2:30आंसू भरी आंखों से सारा वाकया सुनाया कि
2:33कैसे उस व्यापारी ने उसकी सादगी का फायदा
2:36उठाया और सिर्फ ₹500 में उसकी इज्जत भी
2:40खरीद ली। गुलाम हैदर की जुबानी सारा वाकया
2:43सुनकर सलमान का खौल उठा। उसने गुस्से में
2:46कहा अब्बा जी कल बाजार में मैं जाऊंगा और
2:50उस ताजिर से आपकी बेइज्जती का हिसाब भी
2:53लूंगा और अपनी बैलगाड़ी भी वापस लेकर
2:56आऊंगा। बाप ने बेटे के जज्बात देखे लेकिन
2:59नरमी से समझाया। नहीं बेटा वो ताजिर बहुत
3:03चालाक और जालिम है। कहीं तू भी किसी
3:06मुसीबत में ना पड़ जाए। मगर सलमान ने
3:09पुरज्म लहजे में कहा अब्बा जी बस आप मुझे
3:13उसका हुलिया बता दीजिए। फिर देखिए आपका
3:16बेटा कैसे आपकी इस्त वापस लाता है। गुलाम
3:19हैदर ने ताजिर का मुकम्मल हुलिया सलमान को
3:22समझा दिया। अगले दिन सुबह सवेरे सलमान ने
3:25पड़ोसी से एक बैलगाड़ी मांगी। उसमें खुद
3:28का बनाया हुआ ताजा गुड़ रखा और बाजार का
3:31रुख किया। वह बिल्कुल उसी जगह जा खड़ा हुआ
3:34जहां उसके बाप को धोखा दिया गया था। कुछ
3:38देर गुजरी थी कि वही ताजिर तक भरे अंदाज
3:41में आ निकला। सलमान को देखकर रुक गया।
3:45सलमान का मासूम और नरम लहजा सुनकर ताजिर
3:48ने दिल में सोचा। कल बाप को बेवकूफ बनाया।
3:51आज बेटे की बारी है। यह तो और भी सादा लग
3:54रहा है। अबकी बार सारा गुड़ और गाड़ी
3:57दोनों हाथ लगेंगे। ताजिर सलमान के पास आया
4:00और बोला, "भाई इस गाड़ी में क्या है?
4:03सलमान ने नरमी से जवाब दिया। जनाब ताजा
4:07गुड़ है। ऐसा खालिस गुड़ आपने कभी नहीं
4:10चखा होगा। ताजिर ने कहा, तो बताओ पूरी
4:14गाड़ी का क्या दाम लगाया है? सलमान ने
4:17मुस्कुरा कर कहा बस जनाब एक मुट्ठी भर
4:20रुपए दे दीजिए सौदा आपका ताजिर के चेहरे
4:24पर खबीसत से भरी मुस्कुराहट फैल गई दिल
4:27में सोचा वाह यह तो बाप से भी ज्यादा
4:31नादान है एक मुट्ठी में 10 नोट रखकर ₹100
4:34दे दूंगा और सारी गाड़ी मेरी हो जाएगी
4:37ताजिर बोला ठीक है भाई सौदा मंजूर है मगर
4:41पैसे मैं घर जाकर दूंगा तुम बस गाड़ी मेरे
4:44घर पहुंचा दो सलमान सलमान खामोशी से तैयार
4:47हो गया। जब वो ताजिर के घर पहुंचे, ताजिर
4:50ने गाड़ी अंदर खड़ी करवाई। फिर जेब से 10
4:53अंक 10 के नोट निकालकर अपनी मुट्ठी में
4:55दबाए और सलमान की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ले
4:58लो मुट्ठी भर दाम और गाड़ी यहीं छोड़कर
5:01वापस जाओ। यही तय हुआ था ना? सलमान ने
5:04तैमूल से कहा, जनाब, दाम तो गुड़ के लगे
5:08थे। गाड़ी मेरे बाप की है, मेरी है। आप
5:12मेहरबानी फरमा कर सिर्फ गुड़ उतरवाइए।
5:14गाड़ी मुझे वापस ले जाने दीजिए। ताजिर
5:17बोला, "क्या बात करते हो? तुमने खुद कहा
5:21था कि एक मुट्ठी भर रुपए में सारी गाड़ी
5:23दे दोगे। अब जुबान से फिर रहे हो। सलमान
5:26ने संजीदगी से कहा, नहीं जनाब। जो कहा था
5:31वही मांग रहा हूं। गुड़ बेचा है। गाड़ी
5:34नहीं। गाड़ी तो मेरा जरिया माश है। ताजिर
5:38ने गुस्से से दांत पीसते हुए कहा, अब अगर
5:41ज्यादा बात की तो मैं तुम्हें भी तुम्हारे
5:43बाप की तरह जलील करके निकाल दूंगा। सलमान
5:46ने ताजिर की धमकी सुनी तो खामोशी से बोला,
5:49"अच्छा जनाब।" अगर बात ऐसी है तो लाइए। वो
5:52मुट्ठी भर दाम। ताजिर जैसे ही मुट्ठी आगे
5:54बढ़ाने लगा। सलमान ने उसका हाथ मजबूती से
5:57थाम लिया और जेब से चाकू निकालते हुए कहा,
6:00"सनिए सेठ जी, मैं अपनी गाड़ी आपके पास
6:03छोड़ रहा हूं। लेकिन बदले में आपकी यह
6:06मुट्ठी साथ ले जा रहा हूं। वो कांपने लगा।
6:09यह क्या बदखलाकी है? हाथ छोड़ो मेरा।
6:12सलमान ने कहा, आपने मेरी पूरी गाड़ी सिर्फ
6:15एक मुट्ठी के बदले हड़प ली थी ना। अब यह
6:17मुट्ठी मेरी है। चाकू तेज था। और सलमान का
6:21इरादा सच्चा। जैसे ही उसने हाथ पर दबाव
6:24डाला। ताजिर चीख उठा। गड़गड़ाते हुए बोला।
6:27खुदा का वास्ता है बेटा। जो चाहिए ले जाओ।
6:31बस मुझे छोड़ दो। सलमान ने कहा पहले वो
6:34गाड़ी खाली करो जो कल मेरे बाप गुलाम हैदर
6:37से छीन ली थी वो भी वापस दो और हां अब
6:41तुम्हें मुझे ₹2000 महीने पर अपने घर में
6:43नौकरी भी देनी होगी ताजिर के पास कोई
6:46रास्ता ना बचा अपनी जान बचाने के लिए हाथ
6:49जोड़कर बोला ठीक है जैसा तुम कहोगे वैसा
6:53ही होगा सलमान ने चाकू पीछे किया और कहा
6:56अगर तुम अपनी जुबान से फरे या नौकरी से
6:59निकालने की कोशिश की या तनख्वाह में टालम
7:02टोल की तो फिर याद रखना मैं तुम्हारी नाक
7:05और कान दोनों काट दूंगा। ताजिर ने कांपते
7:08हुए सर हिलाया और वादा कर लिया। उसने
7:10गुलाम हैदर की गाड़ी भी खाली करवा दी।
7:13₹2000 गुड़ के भी दिए और नौकरी की हामी भी
7:16भर ली। सलमान दो बैलगाड़ियां लेकर अपने
7:18गांव वापस लौटा। गुलाम हैदर दूर से अपने
7:22बेटे को आते देखकर खुशी से बेकाबू हो गया।
7:25दौड़कर बेटे को गले लगा लिया। सलमान ने
7:28सारी कहानी सुनाई और नौकरी की बात भी
7:30बताई। बाप ने फिक्रमंदी से कहा बेटा वह
7:34ताजिर बदला लेने वाला शख्स है। खबरदार
7:37हमेशा होशियार रहना। सलमान ने मुस्कुरा कर
7:40कहा अब्बा जी अगर वो शेर है तो मैं सवा
7:44शेर हूं। अब आप फिक्र ना करें। अगले दिन
7:48सुबह सलमान ताज़िर के घर काम पर पहुंच गया।
7:50ताजिर ने दिल में सोचा मैं इसे इतना
7:53थकाऊंगा कि खुद ही भाग जाएगा। वह बोला
7:56सलमान दो खेत जोतो फिर शाम को लकड़ियां भी
8:00लाना चूल्हे के लिए सलमान खामोशी से निकला
8:04खेत की तरफ गया और दिन भर एक पेड़ के नीचे
8:07सोया रहा शाम भले उसने हल्के तीनचार
8:10टुकड़े किए उन्हें काट कर ग्ठा बनाया सर
8:13पर रखा और वापस आ गया घर पहुंचा लकड़ी का
8:16ग्ठा फेंका और खामोशी से खाने बैठ गया
8:19ताजिर ने नौकर से कहा इसे एक मुट्ठी चावल
8:22दे दो और एक चम्मच डाल यही यहां की
8:25तनख्वाह है। सलमान ने सेठ की बात सुनी।
8:28यहां रहना है तो एक मुट्ठी चावल पर रहो
8:31वरना निकल जाओ। सलमान ने खामोशी से वह
8:34चावल खाए। पानी पिया और उठकर अपने कमरे
8:37में चला गया। लेकिन रात को भूख ने उसे
8:39सोने ना दिया। पेट में चूहे दौड़ रहे थे।
8:43कुछ देर करवटें बदलता रहा। फिर उठा और
8:45बाहर सहन में वाकई गाय के बाड़े की तरफ
8:48चला गया। वहां जाकर देखा कि एक छोटा सा
8:51बछड़ा रस्सी से बंधा हुआ है। सलमान ने
8:53चुपके से बछड़े की रस्सी खोली। बछड़ा फौरन
8:56अपनी मां के नीचे जाकर दूध पीने लगा। जैसे
8:59ही बछड़े ने मुंह लगाया, गाय के थन में
9:02दूध आ गया। सलमान ने मौका गनीमत जाना।
9:05बछड़े को दोबारा बांधा और सारा दूध खुद पी
9:08गया। पेट भरने के बाद उसने सुकून की नींद
9:11सोई। अगली सुबह जब ताजिर दूध निकालने गया
9:14तो थन बिल्कुल खाली थे। वो हैरान रह गया।
9:17अभी वह गाय के करीब झुका ही था कि गाय ने
9:20जोर की लात मारी और वह पीछे जा गिरा। यह
9:23रोज का मामूल बन गया। सलमान हर रात बछड़े
9:26को छोड़ता। गाय दूध देती, वह पीता और दिन
9:29भर काम करता रहता। लेकिन वह जिस्मानी तौर
9:32पर कमजोर होने के बजाय पहले से भी ज्यादा
9:34तंदुरुस्त और मजबूत दिखाई देता। ताजिर
9:37हैरान रह जाता। यह लड़का एक मुट्ठी चावल
9:40खाता है। सारा दिन काम करता है। और फिर भी
9:43ऐसे फिट कैसे हैं? उसे क्या खबर थी कि
9:45उसकी गाय का सारा दूध सलमान के पेट में जा
9:48रहा है। कुछ दिन बाद ताजिर की बीवी अपने
9:50मायके चली गई। पूरा महीना गुजर गया। वो
9:53वापस ना आई। ताजिर अकेला होकर उदास रहने
9:56लगा। आखिरकार उसने फैसला किया कि खुद जाकर
9:59अपनी बीवी को वापस लाएगा। उसने सलमान से
10:02कहा, सलमान मेरे साथ चलना है। बीवी को
10:06लेने जाना है। सिर्फ एक घोड़ा था। उस पर
10:09ताज़िर खुद बैठा और सलमान को पैदल साथ चलने
10:12को कहा। सलमान दिल में मुस्कुराया। अच्छा
10:15तरीका निकाला है मुझसे जान छुड़ाने का।
10:18सोचा होगा मैं रास्ते में मर जाऊंगा और यह
10:20जनाब घोड़े पर आराम से ससुराल पहुंच
10:22जाएंगे। अगर तुझे होश ना दिलाई तो मेरा
10:24नाम भी सलमान नहीं। कुछ फासले पर जाकर
10:27ताजिर थक गया। एक पेड़ के नीचे लेट कर
10:30आराम करने लगा और सलमान से कहा, "जरा
10:33घोड़े का ख्याल रखना। मैं जरा आंख लगा रहा
10:36हूं। थोड़ी ही देर बाद कुछ ताज़िर काफिले
10:39के साथ वहां से गुजरे। सलमान ने घोड़े की
10:42दुम का थोड़ा सा हिस्सा काटा और उसे अपने
10:44पास रख लिया। फिर पूरा घोड़ा उन ताजिरों
10:47को बेच दिया। सौदे के बाद सलमान एक झाड़ी
10:50के करीब जाकर बैठ गया और दुम का कटा हुआ
10:53हिस्सा एक चूहे के सुराग पर रख दिया जैसे
10:55वह चूहे को पकड़ने बैठा हो। थोड़ी देर बाद
10:58ताजिर की आंख खुली। उसने इधर-उधर नजर
11:01दौड़ाई। घोड़ा गायब था। सलमान झाड़ी के
11:04पास बैठा था। हाथ में दुम का टुकड़ा था।
11:07गुलाम हैदर का बेटा सलमान जो अब एक चालाक
11:11हाजिर दिमाग और जुर्रत नौजवान के तौर पर
11:13अपनी पहचान बना चुका था। ताजिर की हर चाल
11:16का ना सिर्फ जवाब दे रहा था बल्कि उसी की
11:19जुबान में बदला भी ले रहा था। सेठ ने जब
11:22आंख खोली तो सलमान को घोड़े की दुम पकड़े
11:24झाड़ी के पास बैठे देखा। वो गुस्से से
11:27बोला सलमान मेरा घोड़ा कहां गया? सलमान ने
11:31इंतिहाई मासूम लहजे में कहा। सेठ जी घोड़ा
11:35तो चूहे के बिल में घुस गया। मैंने बड़ी
11:37मुश्किल से इसकी दुम पकड़ रखी है। अकेला
11:40खींच नहीं पा रहा। जरा आप भी जोर लगाइए।
11:43ताजिर गुस्से में आ गया और जैसे ही उसने
11:45दुम खींची दुम उसके हाथ में रह गई। यह
11:49क्या मजाक है? सेठ चिल्लाया। सलमान ने
11:52निहायत संजीदगी से कहा। सेठ जी आपने खुद
11:55कहा था। अगर जाना है तो मेरे नाक कान काट
11:58कर जाओ। तो आप ही बताइए। दुम तो मेरे साथ
12:01रह गई। अब घोड़ा नहीं रहा। सेठ कुछ ना कह
12:04सका। मजबूरी में उसे सलमान को फिर साथ
12:07लेकर आगे बढ़ना पड़ा। रास्ते में एक और
12:10बाजार आया। सेठ ने वहां से दूसरा घोड़ा
12:13खरीदा। इस बार काला घोड़ा। वह दोनों आगे
12:16बढ़ने लगे। रास्ते में पड़ाव डाला गया।
12:19सेठ ने पेट भरकर खाना खाया और सलमान से
12:21कहा, "यह घोड़ा खास है। इसे खूब रगड़ कर
12:25नहलाओ। सारी मैल छीलनी चाहिए। सलमान ने
12:28बाजार जाकर वो घोड़ा भी बेच दिया। और इस
12:31बार एक खूबसूरत सफेद खरगोश ले आया। जब सेठ
12:34की आंख खुली तो सलमान खरगोश लिए बैठा था।
12:37सलमान घोड़ा कहां है? सलमान ने बड़ी सादगी
12:41से कहा, सेठ जी आपने कहा था रगड़गड़ के
12:45नहलाओ। मैंने इतना रगड़ा कि घोड़े का काला
12:48रंग उतर गया। अब देखिए यह बिल्कुल सफेद हो
12:51गया और इतना रगड़ा कि वो सिकुड़ कर यह
12:54खरगोश रह गया। सेठ ने दांत पीसे मगर अब वह
12:57कुछ कर भी ना सका। अब दोनों पैदल चलने पर
13:00मजबूर हो गए। ससुराल करीब आ गया था। मगर
13:03सेठ भूख से निढाल हो चुका था। सारी रकम
13:06घोड़ों पर खर्च हो चुकी थी और खानेपीने का
13:09सामान भी खत्म हो चुका था। सेठ एक पेड़ के
13:12नीचे बैठा और सलमान से कहा सलमान जा मेरे
13:16ससुराल इत्तला दे आ कि मेरा दामाद आ रहा
13:18है। वो लोग खुश होकर मेरे लिए खाने पीने
13:21का इंतजाम करेंगे। सलमान रवाना हुआ और
13:24जैसे ही वह सेठ के ससुराल पहुंचा। सेठ की
13:27सास ने फिक्रमंदी से पूछा। बेटा हमारे
13:31दामाद जी खैरियत से तो हैं। सलमान ने
13:33संजीदगी से जवाब दिया। नहीं माई वक्त ठीक
13:36नहीं है। दामाद जी को सख्त पेट की खराबी
13:39हो गई है। सलमान की हाजिर दिमागी और दानाई
13:42ने गुलाम हैदर के दुख का बदला इस शान से
13:44लिया कि ना सिर्फ बाप का मान बुलंद हुआ।
13:47बल्कि वो जालिम सेठ जो पहले गुलाम हैदर को
13:50बेस्ट करके निकाल चुका था। अब उसी के बेटे
13:53का मोहताज बन गया। सलमान को जब सेठ के साथ
13:56ससुराल जाना पड़ा तो रास्ते भर सेठ ने उसे
13:59सताने का कोई मौका ना छोड़ा। मगर सलमान ने
14:02हर बार अक्ल, सब्र और हाजिर दिमागी से उसे
14:06नाकाम कर दिया। वो कभी घोड़ा बेचकर उसकी
14:09दुम चूहे के बिल में फंसाकर बहाना बनाता
14:12तो कभी खच्चर के बदले खरगोश लाकर सेठ को
14:14घमा देता। लेकिन सेठ कुछ ना कर सकता।
14:18क्योंकि उसने गुलाम हैदर के साथ जो किया
14:20था। उसका कफ्फारा तो अब अदा करना ही था।
14:24जब दोनों ससुराल पहुंचे तो सलमान ने वहां
14:26भी चालाकी दिखाई। सेठ के नाम पर खिचड़ी और
14:30अपने लिए खीर, पूरी, हलवा और रायता तैयार
14:34करवा लिए। सेठ को गुस्सा तो बहुत आया मगर
14:37बोल कुछ ना सका क्योंकि अपना किया कभी माफ
14:40नहीं करता। रात को दोनों की चारपाइयां छत
14:44पर लग गई। सलमान मजे से खर्राटे मारकर सो
14:47गया और सेठ भूखा करवटें बदलता रहा। जब सेठ
14:51ने सलमान को जगाकर कहा यार तूने तो खीर
14:55पूरी खाकर खर्राटे ले लिए। मैं यहां भूखा
14:58प्यासा मरा जा रहा हूं। तो सलमान ने चुपके
15:00से एक तरकीब सोची। छत में पुराना धमला था।
15:04यानी एक सुराख जो पहले जमाने में गेहूं या
15:06मक्की नीचे गिराने के लिए इस्तेमाल होता
15:08था। सलमान ने सेठ की कमर में रस्सी बांधी
15:12और कहा। सेठ जी नीचे रसोई में खाने पड़े
15:15हैं। आप जाइए खा लीजिए। और जब पेट भर जाए
15:19तो रस्सी हिलाकर मुझे जगा दीजिए। मैं आपको
15:22ऊपर खींच लूंगा। सेठ बेहद खुश हुआ। फौरन
15:26नीचे उतर गया और हलवा पूरी पर ऐसे टूट
15:29पड़ा जैसे बरसों से भूखा हो। खा पीकर जब
15:32पेट भरा तो सेठ ने रस्सी को हिलाकर
15:35आहिस्ता आवाज दी। सलमान अब मुझे ऊपर खींच
15:39लो। जब गुलाम हैदर का बेटा सलमान सेठ
15:42करीमुद्दीन के साथ ससुराल पहुंचा तो उसने
15:45एक-एक करके अपनी दाना, अक्लाल और हाजिर
15:48दिमागी से वह सब सबक सिखाए जो बरसों पहले
15:50सेठ ने गुलाम हैदर को जलील करके भुला दिए
15:53थे। रात को सलमान ने चालाकी से सेठ को
15:56रस्सी बांधकर धमला के जरिए रसोई में उतार
16:00दिया। ताकि वह जाकर पेट भरकर खा ले। मगर
16:03फिर खुद सलमान खर्राटे लेते-लेते गहरी
16:06नींद में चला गया। अब नीचे सेठ खा पीकर
16:09तैयार बैठा था। आहिस्ता-आहिस्ता आवाजें दे
16:12रहा था। सलमान अरे सलमान खींच खींच मुझे
16:18ऊपर खींच। मगर सलमान बेखबर था। इधर सेठ की
16:22सांस पानी पीने आई। दरवाजे के पास आई तो
16:25अंदर से आवाजें सुनी। खींच खींच जल्दी
16:30खींच। बेचारी घबरा गई। भागकर खाविन को
16:34जगाया। अरे जी रसोई में कोई जिन या भूत आ
16:38गया है जो बार-बार कह रहा है खींच खींच।
16:41बूढ़े ससुर ने फौरन बेटे, दामाद और हमसाए
16:45जमा किए और सब रसोई के दरवाजे पर कान लगाए
16:48खड़े हो गए। अंदर से आवाजें आ रही थी। तब
16:51तक सलमान जाग गया। जल्दी से रस्सी खींचकर
16:54सेठ को ऊपर खींच लिया। जब तक दरवाजा खोला
16:58गया। सेठ वापस छत पर पहुंच चुका था। नीचे
17:01रसोई खाली देखकर सब हैरान होकर अपने कमरों
17:04में वापस चले गए। लेकिन किस्मत तो कुछ और
17:08लिख चुकी थी। आखिरी जिल्लत सेठ और वो
17:12हांडी। रात के आखिरी पहर सेठ के पेट में
17:16दर्द शुरू हो गया। उसने सलमान को
17:18झिंझोड़ा। उठ मेरे साथ खेतों तक चल। बहुत
17:23जोर का पेट खराब है। सलमान आधी नींद में
17:26बोला। सेड जी बाहर जाने की क्या जरूरत है?
17:30यहां पास एक मिट्टी की हांडी रखी है।
17:33उसमें ही काम निपटा लीजिए। सुबह मैं चुपके
17:36से ले जाकर फेंक आऊंगा। अब भला सेठ करे तो
17:39क्या? मजबूरी थी। हांडी में ही फारिग हो
17:43गया। सुबह जल्दी आंख खुली तो सेठ ने सलमान
17:46को जगाया। उठ जल्दी। यह हांडी बाहर फेंका।
17:50वरना लोग देख लेंगे तो मेरी इस्त खाक में
17:53मिल जाएगी। मगर सलमान तो खर्राटे मार रहा
17:56था। सेठ ने खूब झिंझोड़ा मगर कोई फायदा ना
18:00हुआ। अब इस का सवाल था। सेठ ने चादर ओढ़ी,
18:04हांडी को सिर पर रखा और दबे कदम सीढ़ियां
18:07उतरने लगा। जैसे ही आंगन में पहुंचा क्या
18:11देखता है? ससुर भैंसों को चारा डाल रहा
18:14है। सेठ नजरें चुराकर जल्दी से दरवाजे की
18:16तरफ बढ़ा। मगर सलमान की आखिरी चाल। यह सब
18:21सलमान छत से देख रहा था। मौका गनीमत जाना।
18:25जल्दी से करीब रखी एक लकड़ी। लकड़ी की
18:28मोटी लाठी उठाई। दबे पांव नीचे उतरा और
18:32पीछे से सेठ पर हमला आवर होने के लिए
18:35तैयार हो गया। जैसे ही सेठ चादर ओढ़कर सिर
18:38पर हांडी रखे जंगल की तरफ जा रहा था ताकि
18:41अपनी इस्त बचा सके। सलमान ने फौरन पूरे
18:44गांव में शोर मचा दिया। चोर चोर। अरे देखो
18:49सिर पर हांडी लेकर चादर ओढ़े जा रहा है
18:52चोर। कुछ देहाती जो सुबह सवेरे भैंसों को
18:55चारा देने जाग चुके थे। फौरन डंडे और
18:58लाठियां लेकर आवाज की सूरत दौड़ पड़े।
19:00उन्होंने दूर से सेठ को देखा। चादर ओढ़े
19:04हांडी उठाए जा रहा था। बस यही है चोर। और
19:08फिर दे दनादन दे दनादन। सेठ पर लाठियां
19:12बरसने लगी। कोई हाथ मार रहा था। कोई टांग
19:17कोई आवाजें निकाल रहा था। वो बेहोशी में
19:20चिल्ला रहा था। अरे मैं चोर नहीं हूं। मैं
19:24मैं सेठ करीम मगर किसी ने सुना नहीं। इसी
19:29शोरशराबे में सेठ के ससुराल वाले भी आन
19:32पहुंचे। सबके हाथों में लाठियां थी। तब
19:35सलमान ने एक आखिरी बात कहकर तमाशा मुकम्मल
19:38कर दिया। अरे सब लोग तो यहां है। पर हमारे
19:43सेठ जी कहां गए? सब चौंक गए। हां वाकई।
19:47दामाद जी तो शोर सुनते ही गायब हो गए।
19:50आखिर कहां है? जब उन्होंने चादर खींच कर
19:53देखा तो सामने खुद उनका दामाद। चेहरा
19:57शर्मिंदगीगी से झुका हुआ। जिस्म नीला पड़ा
20:00और सिर पर हांडी पूरी महफिल में ख गूंज
20:04उठे। हंसी का तूफान था। सेठ शर्म से
20:08पानीपानी हो चुका था। इज्ज गुरूर और फखर
20:12सब मिट्टी में मिल चुका था। सेठ का पछतावा
20:16सलमान की जीत। घर के अंदर ले जाकर दूसरे
20:19कपड़े पहनने को दिए गए। सेठ की बीवी को भी
20:22साथ किया गया और सबने तंजिया मुस्कुराहटों
20:25के साथ रुखसत किया। जब वह घर पहुंचा तो
20:28सलमान ने आहिस्ता से कहा सेठ जी जो आपकी
20:32हांडी पर पहली लाठी पड़ी थी वो मैंने मारी
20:36थी। और जो चोरचोर चिल्लाया था वो भी मैं
20:40ही था। सेठ के कदम जैसे जमीन में धंस गए।
20:44आंसू आंखों में थे। उसने डरी हुई आवाज में
20:47कहा सलमान यह तूने क्यों किया? तुझे इससे
20:51क्या मिला? सलमान ने नरमी और अज्म से जवाब
20:55दिया। मुझे वही मिला जो आपने मेरे बूढ़े
20:58वालिद गुलाम हैदर को नंगा करके जंगल में
21:00छोड़कर हासिल किया था। यह उस जिल्लत का
21:03बदला था। सेठ की गर्दन झुक गई। सलमान मुझे
21:08माफ कर दे। खुदा के लिए अब तू मेरा पीछा
21:12छोड़ दे। सलमान ने संजीदगी से कहा इतनी
21:15आसानी से पीछा नहीं छूटेगा सेठ जी मेरा
21:18आपसे वादा था कि जब आप मुझे नौकरी से
21:21निकालेंगे अपने नाक कान काट कर मेरे हाथ
21:24में रखेंगे सेठ हाथ जोड़कर गड़गड़ा कर
21:28रोने लगा सलमान नाक कान छोड़ जो मांगेगा
21:32दूंगा बस मेरी इस्त बखश दे सलमान ने आखिरी
21:37शर्त रखी वादा करो कि आज के बाद किसी भी
21:40गरीब को धोखा नहीं दोगे किसी का मजाक नहीं
21:43उड़ाओगे और अभी के अभी मेरे हाथ पर ₹500
21:46रख दो। सेठ ने फौरन वादा किया। ₹500 सलमान
21:51के हाथ पर रखे और अपने किए पर पछतावे के
21:54साथ सर झुकाए खामोश होकर बैठ गया। आखिर
21:58में सलमान वापस अपने घर चला गया। सेठ
22:01करीमुद्दीन ने सच में जिंदगी भर का सबक
22:04सीख लिया। अब वो ना किसी को धोखा देता ना
22:07गरीब का मजाक उड़ाता। दिल से तौबा की और
22:11गुलाम हैदर के बेटे से माफी मांगी। सबक
22:15जिसने मांबाप का दिल दुखाया वो जिंदगी में
22:18कभी सुकून ना पा सका। जो गरीब को जलील करे
22:21अल्लाह उसे दुनिया में ही रुसवा कर देता
22:24है। और जो सब्र करे अल्लाह उसे इज्जत अक्ल
22:28और मौका दोनों देता है।