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0:00पुराने जमानों की बात है। एक छोटी सी
0:02बस्ती में रफीक नामी एक शख्स अपनी बीवी
0:04नसीम के साथ रहता था। बजाहिर उनकी जिंदगी
0:07मामूल के मुताबिक गुजर रही थी। मगर रफीक
0:10के दिल में एक ख्वाहिश ऐसी थी जो वक्त के
0:13साथ बढ़ती ही जा रही थी। वो एक बेटे का
0:15ख्वाहिशमंद था। नसीम पांचवी बार उम्मीद से
0:19थी। मगर इस खुशी के बजाय रफीक के चेहरे पर
0:21खौफगी और बेइत्मीनानी नुमाया थी। एक दिन
0:24रफीक ने दिल की भड़ास निकालते हुए कहा,
0:27"मुझे बताओ, क्या मेरे गुनाह इतने बड़े
0:29हैं कि अल्लाह मुझे एक बेटा भी नहीं दे
0:31रहा। नसीम ने उसकी बात सुनकर नरमी से
0:33समझाया, ऐसी मनहूस बातें जुबान पर मत लाओ।
0:37बेटा हो या बेटी दोनों अल्लाह की नेमत है।
0:40उसकी आवाज में नरमी थी। मगर दिल में दुख
0:43भी था। वो जानती थी कि औलाद इंसान के
0:46इख्तियार में नहीं। मगर रफीक की बेचैनी
0:48उसे अंदर ही अंदर तोड़ रही थी। मगर रफीक
0:51कहां मानने वाला था। उसने तल्खी से कहा,
0:55चार-चार बेटियां हो चुकी हैं। अब पांचवी
0:57औलाद के वक्त भी क्या वही होगा? क्या इस
1:00बार भी बेटी [संगीत] ही होगी? यह अल्फाज
1:02नसीम के दिल में तीर की तरह उतर गए। उसकी
1:05आंखें फौरन आंसुओं [संगीत] से भर आई। वो
1:08कांपती हुई आवाज में बोली, "मैं क्या कहूं
1:11तुम्हें?" ऊपर वाला जो चाहेगा, वही होगा।
1:14इसमें मेरा क्या कसूर है? ऐसी मनहूस बातें
1:17अपनी जुबान [संगीत] से मत निकालो। जो
1:19बच्चा मेरे पेट में है वो भी तो अल्लाह ही
1:22की अमानत है। रफीक खामोश रहा मगर उसके
1:25चेहरे से गुस्सा साफ जाहिर था। वो
1:27बड़बड़ाता हुआ वहां से चला गया और नसीम
1:30[संगीत] को उसके दुख के साथ अकेला छोड़
1:32गया। उस रात नसीम देर तक अकेली बैठी रोती
1:35रही। उसके दिल में आने वाले बच्चे की
1:37फिक्र से ज्यादा रफीक के रवैया का खौफ था।
1:40आंसू उसके रुखसारों पर बहते रहे और वो
1:42बेब्सी से आसमान की तरफ देखकर बोली या
1:45अल्लाह इस बार कम अज कम मेरी लाज रख लेना।
1:48कुछ अरसे बाद नसीम ने एक खूबसूरत बेटी को
1:50[संगीत] जन्म दिया। नन्ही बच्ची का चेहरा
1:52गुलाब की पत्ती की तरह नरम और नाजुक था।
1:55हाथ छोटे-छोटे और बेहद मासूम थे। मगर नसीम
1:59उसे देखकर भी पूरी [संगीत] तरह खुश ना हो
2:01सकी। मां का दिल अपनी बच्ची को देखकर
2:03मोहब्बत से भर रहा था। लेकिन इसी मोहब्बत
2:05के साथ खौफ भी बढ़ता जा रहा था। बार-बार
2:08उसे रफीक का गुस्से से भरा चेहरा याद आता।
2:11उसके दिल में एक ही ख्याल गर्दिश कर रहा
2:13था। अगर उसे पता चल गया कि बेटी हुई है तो
2:16यह मुझे जिंदा नहीं छोड़ेगा। नसीम ने
2:19घबराकर चारों तरफ देखा। वहां कोई ना था।
2:22उसने अपनी नन्ही बच्ची को संभाला और
2:24निहायत एहतियात से पिछले रास्ते से घर से
2:26बाहर निकल गई। बाहर गहरा अंधेरा छाया हुआ
2:29था। रात की खामोशी में उसके कदमों की आहट
2:33भी उसे खौफजदा कर रही थी। वो चलती रही।
2:36यहां तक कि दरिया के किनारे जा पहुंची।
2:38वहां एक बड़ी मिट्टी की हांडी पड़ी थी।
2:41नसीम ने उसे उठाया और बच्ची को सीने से
2:43लगाकर फूट-फूट कर रोने लगी। उसकी आवाज में
2:46मां की बेब्स और दिल का दर्द साफ महसूस हो
2:49रहा था। मेरी शहजादी तू तो मेरे कलेजे का
2:52टुकड़ा है। मैं तुझे बचा ना सकी। मुझे माफ
2:55कर देना। मैं तुझे [संगीत] अल्लाह के
2:58सुपुर्द कर रही हूं। यह कहते हुए उसने
3:00अपनी बच्ची को हांडी के अंदर महफूज़ रखा।
3:03उसके हाथ कांप रहे थे। दिल जैसे सीने से
3:06निकलने को था। मगर वह अपनी बच्ची [संगीत]
3:08को एक लम्हे के लिए भी छोड़ना नहीं चाहती
3:10थी। फिर आखिरकार उसने हांडी को आहिस्ता से
3:13दरिया की धारा में बहा दिया। हांडी लहरों
3:16के साथ आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़ने लगी।
3:19नसीम वहीं जमीन पर बैठ गई। उसकी निगाहें
3:22हांडी का पीछा करती रही। यहां तक [संगीत]
3:24कि वो अंधेरे में दूर होती गई। नसीम की
3:27आंखों से आंसू जारी थे और वो सिर्फ इतना
3:29कह सकी या अल्लाह मेरी बेटी की हिफाजत
3:32करना। अगली सुबह दरिया के दूसरे किनारे
3:35इदरिस नामी एक धोबी कपड़े धो रहा था। वो
3:38अपने काम में मशरूफ [संगीत] था और हल्की
3:40आवाज में गुनगुना भी रहा था। अचानक उसकी
3:43नजर [संगीत] दरिया में बहती हुई हांडी पर
3:45पड़ी। वो हैरान होकर बोला, अरे यह हांडी
3:48यहां कैसे बह रही है? वो फौरन पानी में
3:50उतरा, हांडी को पकड़ा और उसे किनारे पर ले
3:53आया। जैसे ही उसने हांडी के अंदर झांका,
3:56उसकी आंखें हैरत से खुली की खुली रह गई।
3:58अरे इसमें तो उसकी बात अभी पूरी भी ना हुई
4:02थी कि अचानक आसमान से परों के फड़फड़ाने
4:04की एक जोरदार आवाज सुनाई दी। एक अजीम
4:07उलजुस्सा उकाब तेजी से नीचे झपटा और अपने
4:10मजबूत पंजों में नन्ही बच्ची को उठाकर उड़
4:12गया। इदरिस हैरत और बेब्सी के आलम में उसे
4:15देखता रह गया। देखते ही देखते उकाब बादलों
4:18के [संगीत] पीछे गायब हो गया। उकाब
4:20उड़तेउते एक अजीम बरगद के दरख्त की सबसे
4:22ऊंची टहनी पर जा बैठी। उसने बच्ची को अपने
4:25करीब रखा और गौर से उसके मासूम चेहरे को
4:28देखने लगी। कितनी नन्ही, कितनी खूबसूरत
4:31[संगीत] बच्ची है। इस नन्ही जान को देखते
4:33ही उकाब के दिल में अचानक एक अजीब [संगीत]
4:35सी ममता जाग उठी। उसने फैसला कर लिया,
4:39नहीं मैं इसे किसी सूरत [संगीत] नहीं खा
4:41सकती। आज से यही मेरी बेटी है। तू मेरी
4:44बच्ची है। मेरे कलेजे का टुकड़ा। मैं तुझे
4:47पालूंगी और अपने हाथों से [संगीत] बड़ा
4:49करूंगी। आज से तेरा नाम मीना है। उस दिन
4:52से उकाब मीना की मां बन गई। जहां उसे
4:54अच्छा खाना नजर आता वो झपटा मारकर अपनी
4:57बेटी के [संगीत] लिए ले आती। बरगद के
4:59दरख्त के नीचे हमेशा ठंडी हवा चलती रहती
5:02थी। और इसी दरख्त की बुलंद शाखों के
5:04दरमियान मीना आहिस्ता-आहिस्ता बड़ी होने
5:06लगी। वक्त के साथ उकाब अपनी बेटी के लिए
5:09आसपास की बस्तियों से रंग बिरंगे कपड़े,
5:11कांच की चूड़ियां, कंघी और आईना भी चुरा
5:14कर लाने लगी। एक दिन वो सुर्ख रंग की
5:16सांपनुमा नक्श वाली एक निहायत नफीस बाली
5:19लेकर आई और खुशी से बोली यह देख मीना मैं
5:22तेरे लिए कितनी खूबसूरत चीज लाई हूं। मीना
5:24ने खुश होकर उसे देखा और बोली वाह मां यह
5:28तो बहुत खूबसूरत [संगीत]
5:29है। लेकिन अगर लोग नाराज हो गए तो तुम
5:31उनके कपड़े और सामान क्यों लाती हो? उकाब
5:34ने उसे तसल्ली देते हुए कहा, लोगों की
5:36फिक्र मत कर। तू इसे पहन इसमें तू किसी
5:39शहजादी जैसी लगेगी। वक्त गुजरता गया। कई
5:43बरस बीत गए और रुकाब की पाली हुई नन्ही
5:45मीना बड़ी होकर एक निहायत हसीन दोशी बन
5:47गई। उसकी खूबसूरती और मासूमियत में वक्त
5:51के साथ मजीद निखारा गया था। एक शाम सूरज
5:54डूबने के वक्त उकाब अपनी बेटी से बोली,
5:56बेटी मीना अब तू बड़ी हो गई है। मैं रोज
5:59तेरे लिए खाने की तलाश में बहुत [संगीत]
6:01दूर चली जाती हूं। मुझे हमेशा डर लगा रहता
6:03है कि कहीं तेरे साथ कुछ बुरा ना हो जाए।
6:06मीना ने मासूमियत से जवाब दिया, मान तुम
6:09क्यों डरती हो? मैं तो तुम्हारे इस दरख्त
6:11की टहनी पर बिल्कुल महफूज हूं। उकाब ने
6:14फिर भी अपनी फिक्र जाहिर करते हुए कहा,
6:16फिर भी बेटी मुझे कुछ ठीक नहीं लगता। अगर
6:19कभी तू किसी मुसीबत में फंस जाए या तुझे
6:22मेरी बहुत याद आए तो वो गीत गाना जो मैंने
6:25तुझे सिखाया है। जब जब इस दरख्त के पत्ते
6:27हिले उकाब मां मेरे [संगीत] सामने आ जाए।
6:30मीना ने मां की बात गौर से सुनी और कहा
6:33मां मैं तुम्हारे इस दरख्त को कभी नहीं
6:35भूलूंगी। एक दिन एक शहजादा इसी जंगल के
6:38रास्ते से गुजर रहा था। तेज धूप की शिद्दत
6:41से वह बहुत थक चुका था। इसलिए बरगद के
6:44दरख्त के नीचे आराम करने के लिए बैठ गया।
6:46अभी वह वहां ठहरा ही था कि अचानक [संगीत]
6:48ऊपर से मीना के लंबे रेशमी बाल लहराते हुए
6:51शहजादे के ऊपर आ गिरे। शहजादे ने हैरत से
6:54ऊपर [संगीत] देखा तो उसकी निगाहें वहीं
6:56रुक गई। बरगद की ऊंची टहनी पर एक निहायत
6:59हसीन लड़की बैठी थी और अपने आप में कोई
7:01गीत गुनगुना रही थी। शहजादा इस मंजर को
7:04देखकर हैरान रह गया। उसके लिए यह तसवुर भी
7:07[संगीत] मुश्किल था कि एक इंसान इस बुलंद
7:09दरख्त की शाख पर कैसे रह सकता है। आखिरकार
7:12उसने हैरानी से पूछा तुम कौन हो? कोई परी
7:15हो या कोई जादुई लड़की? दरख्त की टहनी पर
7:18इंसान कैसे रह सकता है? इस लड़की ने अपनी
7:21पूरी [संगीत] जिंदगी जंगल की तन्हाई और
7:23बरगद के दरख्त की बुलंद शाखों के दरमियान
7:25गुजारी थी। उसने कभी किसी इंसान को अपनी
7:28आंखों से नहीं देखा था। इसलिए जब उसने
7:31नीचे एक अजनबी इंसान को खड़े देखा तो उसके
7:33दिल पर अचानक खौफ तारी हो गया। उसका चेहरा
7:36जर्द पड़ गया और दिल तेजी से धड़कने लगा।
7:39उसे समझ नहीं आ रही थी कि यह शख्स कौन है
7:42और उससे क्या चाहता है। वो घबरा कर अपनी
7:44मां का सिखाया हुआ गीत गाने लगी। उसकी
7:47आवाज में खौफ भी था और अपनी मां को
7:50पुकारने की बेकरारी भी। जब जब इस दरख्त के
7:52पत्ते हिले उकाब मां मेरे सामने आ जाए।
7:56गीत के अल्फाज अभी उसके लबों से पूरी तरह
7:58अदा भी ना हुए थे कि फिजा में परों के
8:00फड़फड़ाने की तेज आवाज गूंज उठी। उकाब मां
8:04उड़ती हुई नीचे आ गई। उसने अपनी बेटी के
8:06परेशान चेहरे को देखा तो फौरन [संगीत]
8:08उसके करीब पहुंची और मोहब्बत से पूछा,
8:10"क्या हुआ बेटी? तुम इतनी घबराई हुई क्यों
8:13हो? मीना ने फौरन नीचे की तरफ इशारा किया
8:16और कांपती हुई आवाज में बोली, "मां नीचे
8:19देखो। [संगीत] एक इंसान खड़ा है। वो मुझसे
8:22बात कर रहा है। उकाब ने नीचे देखा तो वहां
8:24एक खूबसूरत शहजादा खड़ा था। वो उसके पास
8:27गई और अपनी बेटी की तरफ देखते [संगीत] हुए
8:29बोली, शहजादे यह मेरी बेटी है। मैंने इसे
8:32अपनी बेटी की तरह पाला है। इसे मैंने अपने
8:35खून पसीने से बड़ा किया है। शहजादा हैरत
8:38से उसकी बात सुनता रहा। उसके लिए यह बात
8:40नाकाबिल यकीन थी कि एक इंसान की बेटी
8:43[संगीत] को एक उकाब ने पाला हो। उसने हैरत
8:45से कहा तुम्हारी बेटी और यह इंसान यह कैसे
8:49मुमकिन है यह तो किसी करिश्मे से कम नहीं
8:52ऐसा हुस्न तो शायद फरिश्तों की दुनिया
8:54[संगीत] में भी नहीं होगा वो कुछ देर मीना
8:57को देखता रहा फिर अपनी हैसियत और दौलत का
8:59जिक्र करते हुए बोला मैं एक दौलतमंद
9:02शहजादा हूं मेरे पास किसी चीज की कमी नहीं
9:05लेकिन मैं तुम्हें एक बात पहले ही बता
9:07देना चाहता हूं मेरी पहले से तीन बीवियां
9:09है अगर तुम्हें कोई ऐतराज ना हो तो मैं
9:12तुम्हारी बेटी से निकाह करना चाहता हूं
9:14मैं वादा वादा करता हूं कि मैं इसे बहुत
9:16सुख से रखूंगा। उकाब मां ने शहजादे की बात
9:19सुनी और इस निकाह के लिए राजी हो गई। फिर
9:21वो अपनी बेटी के [संगीत] पास गई। उसके दिल
9:24में अपनी बच्ची से जुदाई का एहसास जरूर था
9:26मगर वह जानती थी कि अब मीना को इंसानों की
9:29दुनिया में जाना होगा। उसने प्यार से उसे
9:32समझाते हुए कहा, बेटी अब [संगीत] तुझे
9:34इंसानों की दुनिया में जाना होगा। यही
9:37शहजादा अब तेरा शौहर होगा। अगर तुझे कभी
9:40डर लगे या मेरी याद आए तो बस वही गीत गाना
9:42जो मैंने तुझे सिखाया है। मैं फौरन तेरे
9:45पास आ जाऊंगी। मीना ने अपनी मां की बात
9:48दिल में बसा ली। फिर शहजादे ने इस लड़की
9:50से निकाह किया और उसे अपने महल में ले
9:53आया। महल में कदम रखते ही मीना की जिंदगी
9:55बदल गई। मगर इस तब्दीली [संगीत] में सुकून
9:58के साथ एक नई आजमाइश भी छुपी हुई थी।
10:00शहजादे की बाकी तीनों बीवियां नई रानी को
10:03बिल्कुल पसंद [संगीत] नहीं करती थी।
10:05उन्हें इस बात से शदीद नागवारी थी कि
10:07शहजादा नई रानी के साथ ज्यादा वक्त
10:09गुजारता और उसकी तरफ खास तवज्जो देता था।
10:12वह आपस में कहने लगी देख रही हो यह नई आई
10:16है और अब हमारे सर पर बैठने लगी है।
10:18शहजादा तो [संगीत] दिन रात इसी के पास
10:20रहता है। उनके दिलों में पैदा होने वाली
10:22यह नागवारी आहिस्ता-आहिस्ता दुश्मनी में
10:24बदल गई। तीनों मिलकर नई [संगीत] रानी को
10:26परेशान करने के तरीके सोचने लगी। एक दिन
10:29वह सब मीना के पास आई और सख्त लहजे में
10:31बोली ए नई रानी आज से बावर्ची खाने का काम
10:34तुम्हारी [संगीत] जिम्मेदारी है। जाओ और
10:36हमारे लिए खाना बनाओ। मीना ने घबरा कर कहा
10:39लेकिन मुझे तो खाना बनाना आता ही नहीं।
10:42तीनों सौतनों ने तंजिया अंदाज में कहा वाह
10:45बड़े घर की रानी बनी हो और खाना बनाना तक
10:47नहीं आता। बहुत खूब। आज तुम्हें ही हम
10:51सबके लिए खाना बनाना होगा। मीना का दिल
10:53बहुत दुखी हो गया। वो खामोशी से वहां
10:56[संगीत] से चली गई। उसके दिल में बेब्सी
10:58भर गई थी। उसे अपनी मां याद आने लगी। वो
11:02अकेली जाकर रोने लगी। फिर बाद में पहुंची
11:04और अपनी मां का सिखाया हुआ [संगीत] वही
11:06गीत दर्द भरी आवाज में गाने लगी। जब जब इस
11:09दरख्त के पत्ते हिले उकाब मां मेरे सामने
11:12आ जाए। गीत खत्म होते ही उकाब मां उसके
11:15सामने आ गई। उसने अपनी बेटी के चेहरे पर
11:18बहते आंसू देखे तो फौरन पूछा, "क्या हुआ
11:20बेटी? तुम इतनी दुखी क्यों हो? मीना ने
11:23अपनी मां को सारी बात बता दी। उसने बताया
11:26[संगीत] कि महल की बाकी तीनों रानियां उसे
11:28मुसलसल परेशान करती है और आज उन्होंने उसे
11:31सबके लिए खाना बनाने का हुक्म दिया है।
11:33बेटी की बात सुनकर उकाब मां का दिल भर
11:35आया। उसने उसे [संगीत] प्यार से समझाया और
11:38उसकी मदद करने का फैसला किया। उसने मीना
11:41को खाना बनाने की तरकीब समझाई और उसे
11:43तरीका सिखाया। मीना ने पूरी तवज्जो से मां
11:46की बात सुनी [संगीत] और जल्द ही खाना
11:47बनाना सीख गई। उसने थोड़ी ही देर में घर
11:50के सब लोगों के लिए गरमागरम लजीज चावल और
11:53सालन तैयार कर दिए। जब तीनों सौतनों ने यह
11:56देखा तो [संगीत] उनके चेहरों पर हैरत फैल
11:58गई। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि जिस लड़की
12:00को वह खाना बनाना नहीं आता कहकर शर्मिंदा
12:02कर रही थी वो इतना अच्छा खाना [संगीत]
12:05तैयार कर लेगी। लेकिन उनके दिलों की
12:07दुश्मनी खत्म ना हुई। उन्होंने एक और
12:10साजिश सोच ली। वो आपस में बोली आज इसे
12:13बर्तन [संगीत] मांझने का काम देते हैं।
12:15देखते हैं यह कितना अच्छा कर पाती है।
12:18मीना ने इस बार भी अपनी हुकाब मां की मदद
12:20ली। मां की मदद से उसने [संगीत] देखते ही
12:22देखते सारे बर्तन साफ कर दिए। बर्तन इस
12:25कदर चमकने लगे कि जैसे उन पर जमी हुई सारी
12:28मैल [संगीत] एक लम्हे में खत्म हो गई हो।
12:30शहजादा जब मीना की काबिलियत से वाकिफ हुआ
12:32तो बहुत खुश हुआ। वो उसकी समझदारी [संगीत]
12:34और काम करने की सलाहियत से मुतसिर हुआ और
12:37उसकी बहुत तारीफ करने लगा। तीनों सौतनों
12:39[संगीत] ने बहुत सी साजिशें की। मगर वो
12:41छोटी रानी को शहजादे की नजरों में नीचा ना
12:44दिखा सकी। जब भी कोई मुश्किल उसके [संगीत]
12:46सामने आती, किसी ना किसी तरह उकाब मां की
12:49मदद से वह उस मुश्किल से निकल जाती। यूं
12:51वक्त के साथ शहजादे के दिल में मीना की
12:53कदर और इज्जत बढ़ती ही गई। इसी तरह कुछ
12:56दिन [संगीत] गुजर गए। फिर कुछ अरसे बाद
12:58मेले का त्यौहार आने वाला था। शहजादे ने
13:01अपनी सब बीवियों को अपने [संगीत] पास
13:03बुलाया और कहा, मेले का त्यौहार आने वाला
13:05है। मैं चाहता हूं कि तुम सब अपने हाथों
13:08से सूती कपड़ा बुनो। मैं तुम्हें धागा दे
13:11रहा हूं। इससे मेरे लिए धोती और गमछा
13:14तैयार करो। शहजादे की बात सुनते ही बाकी
13:16[संगीत] तीनों बीवियां जोश से काम में लग
13:18गई। वो धागा लेकर कपड़ा बुनने की तैयारी
13:21करने लगी। मगर उकाब की बेटी मीना को कपड़ा
13:24बुनना बिल्कुल नहीं आता था। तीनों सौतने
13:27उसे देखकर हंसने लगी। उनकी हंसी में पहले
13:30जैसी ही तहकीर थी। मीना एक बार फिर परेशान
13:33हो गई। उसे मालूम था कि वो यह काम नहीं कर
13:36सकती। वो दिल ही दिल में अपनी मां को याद
13:38करने लगी। आखिरकार उसने वही गीत गाया
13:41जिसके जरिए उसकी मां हमेशा उसके पास आ
13:43जाती थी। जब जब इस दरख्त के पत्ते हिले
13:46उकाब मां मेरे सामने आ जाए। गीत खत्म होते
13:50ही उकाब मां फौरन उसके सामने आ गई। मीना
13:52ने बेप्सी से कहा, मां मुझे कपड़ा बुनना
13:56नहीं आता। अब मैं क्या करूं? उकाब मां
13:59[संगीत] ने उसे तसल्ली देते हुए कहा, तुझे
14:01किसी बात की फिक्र करने की जरूरत नहीं
14:03बेटी। मैं हूं ना। फिर उसने मीना को कपड़े
14:06की एक बंद थैली दी और कहा इसे त्यौहार के
14:09दिन शहजादे के हाथ में देना। मीना ने हैरत
14:11से पूछा मां बस इतना ही। उकाब मां ने
14:15मोहब्बत से जवाब दिया। हां बेटी बाकी सब
14:18किस्मत पर छोड़ दे। त्यौहार का दिन आ
14:20पहुंचा। महल में हर तरफ तैयारियों का
14:23माहौल था। बाकी तीनों रानियों ने अपने
14:25[संगीत] हाथों से तैयार किए हुए सादा
14:27कपड़े शहजादे के सामने पेश किए। उन्हें
14:30अपने काम पर इत्मीनान भी था और दिल ही दिल
14:32में यह उम्मीद भी कि इस बार वह छोटी
14:34[संगीत] रानी को सबके सामने नीचा दिखाने
14:36में कामयाब हो जाएंगी। मगर जब शहजादे ने
14:39वो थैली खोली जो मीना ने उसे दी थी तो
14:42उसके अंदर से निहायत खूबसूरत रेशमी धोती
14:44और गमछा निकला। कपड़े की नफासत और
14:46खूबसूरती देखकर [संगीत] शहजादे के चेहरे
14:48पर खुशी फैल गई। वो इस कदर मुतसिर हुआ कि
14:51उसने फौरन अपनी छोटी रानी को [संगीत] गले
14:53से लगा लिया। यह मंजर देखकर तीनों सौतनों
14:56के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई। उनके
14:59चेहरों पर हैरत और हसद नुमाया हो गया। वह
15:02समझ चुकी थी कि मीना की हर कामयाबी महज
15:04इत्तेफाक नहीं। इस लड़की के पीछे जरूर कोई
15:07ऐसा राज है जिसकी वजह से वह हर मुश्किल
15:10काम आसानी से कर लेती है। उन्होंने मीना
15:12पर नजर रखना शुरू कर दी। वो चुपके-चुपके
15:15उसका पीछा [संगीत] करती और उसकी हरकात
15:17देखने की कोशिश करती। आखिर एक दिन
15:20उन्होंने वो गीत सुन लिया जो मीना अपनी
15:22मां को बुलाने के [संगीत] लिए गाती थी।
15:24गीत सुनते ही तीनों सौतनों को जैसे अपनी
15:26मतलूबा बात मिल गई। वो आपस में कहने लगी
15:30अच्छा तो यह उस उकाब को बुलाने का गीत है।
15:33अब इस उकाब को खत्म करना होगा। एक दिन
15:35शहजादा शिकार के लिए गया हुआ था। महल में
15:38उसकी गैर मौजूदगी [संगीत] का फायदा उठाते
15:40हुए तीनों सौतने लाठियां लेकर बाग में
15:43पहुंची। उन्होंने बड़ी चालाकी से मीना की
15:45आवाज की नकल की और वही गीत गाने लगी। उकाब
15:48ने जब [संगीत] यह गीत सुना तो उसे यकीन हो
15:50गया कि उसकी बेटी उसे पुकार रही है। मां
15:52की मोहब्बत उसे फौरन अपनी बेटी के पास
15:55खींच लाई। वो आसमान से [संगीत] उड़ती हुई
15:57नीचे उतरी। मगर जैसे ही वह करीब पहुंची,
16:00तीनों सौतनों ने [संगीत] अचानक उस पर हमला
16:02कर दिया। उकाब को संभलने का मौका तक ना
16:05मिला और उन्होंने उसे मार डाला। अगले दिन
16:07मीना ने अपनी मां को बहुत पुकारा। उसकी
16:10आवाज में इंतजार भी था और बेकरारी भी मगर
16:13उकाब मां ना आई। वो बार-बार गीत गाती रही।
16:16मगर इस बार कोई परों की फड़फड़ाहट सुनाई
16:19ना दी। कोई उसके सामने जाहिर ना हुआ।
16:22आखिरकार मीना के दिल ने वो हकीकत महसूस
16:24[संगीत] कर ली जिसे मानने से उसका दिल
16:26इंकार कर रहा था। उसे समझ आ गया कि उसकी
16:29सौतनों [संगीत] ने उसकी मां को मार डाला
16:31है। वो घर के एक कोने में बैठ गई और
16:33फूट-फूट कर रोने लगी। उसके लिए उकाब सिर्फ
16:36एक परिंदा नहीं थी। वो उसकी मां, उसकी
16:39मुहाफिज और उसकी पूरी दुनिया थी। कुछ
16:41दिनों बाद शहजादा किसी जरूरी तजारती
16:44[संगीत] काम से दूर चला गया। उसके जाते ही
16:46तीनों सौतनों ने मीना को एक सौदागर के
16:48हाथों बेच देने की मंसूबाबंदी कर ली। वह
16:51उसे बहला फुसला कर दरिया के किनारे ले गई।
16:54वहां सौदागर ने मीना को देखकर कहा, आओ
16:57खूबसूरत लड़की मेरी कश्ती पर आओ। मेरे पास
17:00बहुत खूबसूरत सजने [संगीत] संवरने का
17:02सामान है। मीना को उनके इरादे का अंदाजा
17:05ना था। तीनों सौतनों ने जबरदस्ती उसे
17:08कश्ती पर चढ़ा दिया। जैसे ही वह कश्ती में
17:10पहुंची, सौदागर कश्ती को बीच दरिया ले गया
17:13और उसे कैद कर लिया। अब चारों तरफ [संगीत]
17:16सिर्फ बेपाया पानी था। दरिया के बीच कश्ती
17:19पर मीना हाथपांव बंधे बेप्सी से पड़ी थी।
17:22उसके आंसू मुसलसल बह रहे थे। आंसुओं की
17:25नमी से कश्ती की लकड़ी तक भीग रही थी।
17:27उसने आसमान की तरफ देखा और धीमी टूटी हुई
17:31आवाज में कहा। मां क्या तुम सच में मुझे
17:34छोड़कर चली गई? तुमने तो कहा था कि जब भी
17:36दरख्त के पत्ते हिलेंगे तुम मेरे सामने आ
17:39जाओगी। आज मेरे दिल के सारे पत्ते कांप
17:42रहे हैं। मां लेकिन तुम फिर भी नहीं आई।
17:45मां तुमने मुझे अपने पर फैलाकर आसमान
17:47देखना सिखाया था। लेकिन इस जमीन पर रहने
17:50वाले इंसान इतने [संगीत] संगदिल हो सकते
17:51हैं। यह तो तुमने मुझे कभी नहीं सिखाया।
17:54अब मैं किसके पास जाऊं? मेरी हिफाजत कौन
17:57करेगा? सौदागर ने उसके आंसू [संगीत] देखकर
18:00बेरहमी से कहा, "रोने से अब कोई फायदा
18:02नहीं है। तुम्हारी वो परों वाली मां अब इस
18:05दुनिया में नहीं रही। अब से मैं ही
18:07तुम्हारा मालिक हूं।"
18:09मैं तुम्हें एक ऐसे देश में ले जाऊंगा
18:11जहां तुम्हारे हुस्न [संगीत] के बदले लोग
18:12तुम पर सोने के सिक्के लुटाएंगे। घनी रात
18:15छा चुकी थी। सौदागर अपनी कश्ती लिए
18:18[संगीत] दरिया के बीच आगे बढ़ता जा रहा
18:20था। कश्ती के एक कोने में मीना हाथपांव
18:23बंधे पड़ी थी। उसका रोना [संगीत] देखकर
18:25सौदागर जोर-जोर से हंसने लगा। रोने से कोई
18:28फायदा नहीं। खूबसूरत लड़की तुम्हारी वो
18:31आसमान में उड़ने वाली मां अब मिट्टी में
18:34मिल चुकी है। अब से तुम्हारी किस्मत का
18:36फैसला मैं करूंगा। मीना ने [संगीत] बेप्सी
18:38से आसमान की तरफ देखा और दुआ मांगी। या
18:41अल्लाह तू तो सबके दिल की बात जानता है।
18:44क्या तू नहीं देख रहा कि इस बेबस लड़की के
18:47साथ कितनी बेरहमी हो रही है। मेरी मां भी
18:49मुझे इस मुसीबत में अकेला छोड़कर हमेशा के
18:52लिए चली गई। अब तेरे सिवा मेरा कौन है?
18:55अगर मेरी उकाब मां की मोहब्बत सच्ची और
18:57पाकीजा थी। तो आज मुझे इस जालिम के हाथों
19:00से बचा ले। यह जिंदगी तूने मुझे दी है। आज
19:03तू ही मेरा इंसाफ कर। मैं जानती हूं कि
19:06तेरे इंसाफ से कोई भी जालिम बच नहीं सकता।
19:08सौदागर ने उसकी दुआ सुनकर मजाक उड़ाया। अब
19:11अल्लाह का नाम लेने से कोई फायदा नहीं
19:14होगा। मगर उसी लम्हे [संगीत] कुदरत ने
19:16अपना हौलनाक रूप दिखाना शुरू कर दिया।
19:18दरिया के बीच अचानक आसमान काला पड़ गया।
19:21तेज बिजली चमकने लगी और हर तरफ खौफनाक
19:24तूफान उठ खड़ा हुआ। सौदागर घबरा कर
19:27चिल्लाया। क्या अचानक इतना खराब कैसे हो
19:30गया? मैं इस दरिया के बीच अब कहां जाऊं?
19:33उसी वक्त एक हौलनाक गरज [संगीत] के साथ
19:34आसमान से तेज बिजली सीधी कश्ती पर आ गिरी।
19:38सौदागर उछल कर दरिया के [संगीत] पानी में
19:40जा गिरा। कश्ती बुरी तरह डगमगाने लगी और
19:42टूट कर पानी में बहने लगी। उसी अफरातफरी
19:45में मीना के सर पर भी शदीद चोट लगी
19:47[संगीत] और वो बेहोश हो गई। अगली सुबह जब
19:50उसे होश आया तो उसकी आंखों के सामने एक
19:52नया मंजर था। उसने देखा कि शाह सिकंदर
19:55अपने दो सिपाहियों के साथ एकजी [संगीत]
19:57मुलजुस्सा शेर के सामने फंसे हुए हैं। शेर
19:59की हैबत से दोनों सिपाही खौफ के मारे
20:01बेहोश [संगीत] होकर जमीन पर गिर चुके थे।
20:03जबकि शाह सिकंदर अकेले खामोश खड़े थे। यह
20:07मंजर देखकर मीना ने अपने अंदर हिम्मत पैदा
20:09की। उसने फौरन कुछ [संगीत] सूखी लकड़ियां
20:12और पत्थर इकट्ठे किए। उन्हें आपस में
20:14रगड़कर आग जलाई और फिर एक मशाल हाथ में
20:16उठा ली। फिर एक मशाल हाथ में लेकर मीना
20:19निहायत बहादुरी से शेर के सामने जा खड़ी
20:21हुई। उसके दिल में खौफ जरूर था मगर उस खौफ
20:24[संगीत] से कहीं ज्यादा मजबूत उसका अज्म
20:26था। उसने अपने कदम पीछे ना हटाए बल्कि
20:29पूरी हिम्मत के साथ शेर के मुकाबिल
20:31[संगीत] खड़ी रही। फिर उसने अचानक उकाब की
20:33तरह एक तेज और खौफनाक चीख मारी। उस चीख
20:37में ऐसी शिद्दत थी कि शेर एक लम्हे के लिए
20:39ठिटक गया। फिर वो खौफजदा होकर पीछे
20:41[संगीत] हटा और वहां से भागता हुआ जंगल की
20:44गहराइयों में गायब हो गया। शाह सिकंदर
20:46हैरत से मीना को देखते रह गए। उनके लिए यह
20:49यकीन करना मुश्किल था कि एक निहायत नाजुक
20:51और तन्हा लड़की इस कदर बहादुरी के साथ एक
20:54अजीम उलजसा शेर के सामने [संगीत] खड़ी हो
20:56सकती है। उन्होंने हैरानी और सताई से पूछा
20:59तुम कौन हो? जिस तरह तुमने मौत का सामना
21:02करके मेरी जान बचाई। यह नाका बिल ऐकीन है।
21:05आखिर तुम हो कौन? शाह सिकंदर का सवाल
21:08सुनते ही मीना के दिल में उसका दर्दनाक
21:10माजी जाग उठा। अपनी उकामा महल की सौतने और
21:14दरिया की वो खौफनाक रात सब याद आ गया।
21:17माजी की याद ने उसके दिल को एक बार फिर गम
21:19से भर दिया। मगर उसने अपने जज्बात को
21:22जाहिर ना होने दिया। वो पुरसुकून लहजे में
21:25बोली, बादशाह सलामत मैं इसी जंगल में रहने
21:28[संगीत] वाली एक बेसहारा लड़की हूं। मेरा
21:30कोई अपना नहीं है और मेरा कोई माजी भी
21:32नहीं है। इसलिए बराहेकरम इस बदनसीब
21:34[संगीत] लड़की के माजी के बारे में जानने
21:36की कोशिश मत कीजिए। शाह सिकंदर उसके जवाब
21:39से ज्यादा उसकी बहादुरी, आजजी और अच्छे
21:42अखलाक से मुतासिर हुए। उन्हें महसूस हुआ
21:44कि इस लड़की के दिल में गैर मामूली हौसला
21:47और समझदारी है। चुनांचे वह उसे अपनी मुंह
21:49बोली बेटी बनाकर अपनी रियासत में ले आए और
21:52उसे रियासत की शहजादी करार [संगीत] दे
21:54दिया। वक्त गुजरता गया। कई महीने बीत गए
21:57और मीना अब दरबार की शान बन चुकी थी। वो
22:00सिर्फ अपनी खूबसूरती की [संगीत] वजह से
22:02नहीं बल्कि अपनी समझदारी, नरम मिजाजी और
22:05इंसाफ पसंद तबीयत की वजह से सबकी इज्जत बन
22:08गई थी। एक दिन एक किसान दरबार में हाजिर
22:10हुआ। उसके चेहरे पर परेशानी साफ दिखाई दे
22:13रही थी। उसने बादशाह के सामने अर्ज किया
22:16बादशाह सलामत इस साल फसला अच्छी नहीं हुई
22:20इसलिए हम किसान वक्त पर लगान नहीं दे पा
22:22रहे लेकिन जमींदार हमसे लगान मांग रहे हैं
22:25और ना देने पर हमें घरों से निकालने की
22:27[संगीत] धमकी दे रहे हैं। मीना ने किसान
22:29की बात गौर से सुनी। फिर उसने निहायत
22:31सुकून से बादशाह की तरफ देखा और कहा
22:34बादशाह सलामत खजाना रियाया के पसीने और
22:37आंसुओं से नहीं बल्कि उनकी खुशहाली से
22:40भरना चाहिए। इस साल किसानों का लगान माफ
22:42कर दीजिए और खजाने से उन्हें अच्छे बीज
22:44मुहैया कीजिए। जब उनकी फसल अच्छी होगी तो
22:48वह अपनी मर्जी से खजाने में हिस्सा
22:50डालेंगे। शाह सिकंदर को अपनी बेटी की यह
22:52अनोखी और रियाया दोस्त सलाह बहुत पसंद आई।
22:55एक दिन लोग एक बूढ़े शख्स को पकड़ [संगीत]
22:57कर दरबार में ले आए। उसके पीछे एक बूढ़ी
23:00औरत रोती हुई चली आ रही थी। बूढ़ा शख्स
23:03गुरबत से मजबूर होकर खजाने के जाली
23:05सिक्कों [संगीत] से तिजारत करने की कोशिश
23:07करते हुए पकड़ा गया था। मुआला संगीन था।
23:10इसलिए शाह सिकंदर ने शहजादी मीना से इस
23:13शख्स का फैसला सुनाने को कहा। मीना रियासत
23:16के मुआमलात [संगीत] निहायत खुशसलूबी से
23:17संभालती थी। उसने जुर्म की संगिनी को
23:20देखते हुए [संगीत] बूढ़े शख्स को मौत की
23:22सजा सुना दी। यह फैसला सुनते ही बूढ़ी औरत
23:25की आंखों से आंसू बहने लगे। वो आगे बढ़ी।
23:28हाथ जोड़े और रोते हुए बोली नहीं बेटी रहम
23:31करो शहजादी तुम तो रहम का समंदर हो मेरे
23:35शौहर को मौत की सजा मत दो हां मैं जानती
23:39हूं कि उन्होंने जुर्म किया है उन्होंने
23:41गलत किया है लेकिन मैं [संगीत] उनकी जान
23:43की भीख मांगती हूं उन्हें मत मारो इस बार
23:45उन्हें माफ कर दो वो रोते-रोते [संगीत]
23:48शहजादी के कदमों में गिर गई और उसके पांव
23:50पकड़ लिए इसी लम्हे मीना के हाथ पर बना
23:52हुआ अर्ध चांद नुमा [संगीत] पैदाइशी निशान
23:54बूढ़ी औरत की नजर में आ गया वो अचानक चौक
23:58उठी। उसकी आंखें हैरत से फैल गई और वो जोर
24:01से चीख पड़ी। यह क्या है? यह निशान शहजादी
24:04के हाथ पर यह चांद जैसा निशान क्यों है?
24:07बेटी तुम्हारे हाथ पर यह निशान कैसे आया?
24:10मीना ने अपने हाथ की तरफ देखा। उसकी आंखों
24:13में अचानक आंसू भर आए। उसने धीमी आवाज में
24:16कहा, "यह मेरा पैदाइशी निशान है। वो बूढ़ी
24:19औरत जो कोई और नहीं बल्कि नसीम थी। कांपने
24:23लगी। 20 साल पुराना दर्द जैसे एक लम्हे
24:26में उसके सामने जिंदा हो गया। उसने लरजती
24:29हुई आवाज में कहा, 20 साल पहले जिस बच्ची
24:32को मैंने अपने हाथों से दरिया में बहा
24:34दिया था। हे अल्लाह यह वही बच्ची है। मैं
24:37मैं इसकी बदनसीब मां हूं। इस पैदाइशी
24:40निशान को मैं कभी नहीं भूल सकती। कभी
24:42नहीं। सच्चाई सामने लाने के लिए इदरिस
24:44[संगीत] धोबी को भी महल में बुलाया गया।
24:47उसने 20 साल पहले पेश आने वाले वाक्य की
24:49[संगीत] पूरी हकीकत बयान कर दी। उसने
24:51बताया कि किस तरह उसे दरिया में एक हाड़ी
24:54मिली थी जिसके अंदर एक नन्ही बच्ची थी और
24:57फिर एक अजीमुलस्सा उकाब [संगीत] उस बच्ची
24:59को उठाकर अपने साथ ले गया था। यह सब सुनकर
25:02मीना की आंखों से भी आंसू बहने लगे। उसने
25:04अपने हकीकी मां बाप की तरफ देखा और दिल के
25:07तमाम सुखों के साथ कहा, बाबा अम्मा तुम
25:11लोगों ने मुझे सिर्फ [संगीत] इसलिए छोड़
25:12दिया था क्योंकि मैं एक बेटी थी। तुमने
25:14सोचा था कि बेटी सिर्फ एक बोझ होती है।
25:16[संगीत] लेकिन आज देख लो वही बेटी इस अजीम
25:20रियासत का मुस्तकबिल तय कर रही है। और आज
25:22इसी बेटी के हाथों तुम्हें मौत की सजा मिल
25:25रही है। रफीक का सर शर्मिंदगीगी से झुक
25:27गया। उसकी आवाज में पछतावा और निदामत साफ
25:30[संगीत] महसूस हो रही थी। बेटी मैं
25:33गुनाहगार हूं। हां, अब मुझे समझ आ गया है
25:36कि बेटी कोई नूसत नहीं होती। जिस बेटी
25:39[संगीत] को मैंने पैदा होते ही मार डालने
25:41की कोशिश की थी। आज वही बेटी मेरा इंसाफ
25:43कर रही है। ऐ अल्लाह तेरा इंसाफ भी कितना
25:46अजीब है। बेटी मुझे अपने सब गुनाहों पर
25:49बहुत शर्मिंदगीगी [संगीत] है। मुझे अपने
25:51किए पर बहुत पछतावा है। रफीक ने खुद को
25:54माफी के काबिल भी ना समझा और बोला मुझे
25:57माफ करने की जरूरत नहीं बेटी। मैं
25:59तुम्हारी माफी के लायक नहीं हूं। बादशाह
26:02सलामत मुझे मौत की सजा [संगीत] दे दीजिए।
26:05मुझे मौत की सजा दे दीजिए। बादशाह सलामत।
26:09मीना ने अपने आंसू पोंछे दिल पर काबू पाया
26:12और अपने जन्म देने वाले बाप की तरफ देखकर
26:14बोली बादशाह सलामत मैं अपने जन्म देने
26:17वाले बाप की मौत की सजा माफ करती हूं
26:19क्योंकि एक औरत होकर मैं मुआशरे को यह
26:22दिखाना चाहती हूं कि हमारा दिल पत्थर का
26:25नहीं होता चाहे मुआशरा हमें कितना ही
26:27ठुकरा दे चाहे लोग हमें कितनी ही बार बेदर
26:30समझे लेकिन हम अपने खानदान को कभी नहीं
26:33ठुकरा सकते माफी और मोहब्बत ही इंसान की
26:35जिंदगी का सबसे बेहतरीन रास्ता है मीना की
26:38आवाज में दर्द भी था। मोहब्बत भी और एक
26:41ऐसी सच्चाई भी जिसने दरबार में मौजूद हर
26:43दिल [संगीत] को छू लिया। उसने अपने सामने
26:45खड़े उन मां-बाप को देखा जिन्होंने कभी
26:47उसे दुनिया में आने के बाद ही बोझ समझ
26:49लिया था। मगर आज वही बेटी उनके सामने खड़ी
26:52थी। उसके दिल में बरसों के दुख थे। माजी
26:56के जख्म थे। मगर उन सबके बावजूद उसके दिल
26:59में नफरत [संगीत] बाकी नहीं रही थी। रफीक
27:01शर्मिंदगीगी से सर झुकाए खड़ा था। उसके
27:04पास अपने किए का [संगीत] कोई जवाब नहीं
27:06था। निदामत का बोझ उसके दिल पर इस कदर
27:08भारी था कि वह जमीन पर गिर पड़ा। उसकी
27:11आंखों में पछतावा था और चेहरे पर अपनी
27:13गलती का [संगीत] एहसास साफ दिखाई दे रहा
27:15था। शहजादी मीना ने यह मंजर देखा तो उसका
27:18दिल भर आया। वो आगे बढ़ी। अपने जन्म देने
27:21वाले मां-बाप को सहारा देकर उठाया और फिर
27:24उन्हें अपने सीने [संगीत] से लगा लिया। उस
27:26लम्हे जैसे 20 बरस का फासला मिट गया। उसने
27:29उन्हें दिल से माफ [संगीत] कर दिया। उसकी
27:31आंखों से आंसू बहने लगे। मगर यह आंसू
27:34सिर्फ गम के नहीं थे। उनमें माफी, मोहब्बत
27:36और अपने बिछड़े हुए रिश्तों को दोबारा पा
27:38लेने की खुशी भी शामिल थी। अपने मां-बाप
27:41को दोबारा पाकर और उनके साथ होने का एहसास
27:43[संगीत] मिलकर मीना का दिल मसरत से भर
27:45गया। जिस दिल ने कभी तन्हाई देखी थी। आज
27:48उसी दिल में अपनों की कुर्बत का सुकून उतर
27:51आया था। इसी दौरान बातें करते-करते शहजादे
27:54की नजर बादशाह [संगीत] सलामत के पास बैठी
27:56हुई शहजादी पर पड़ी। जैसे ही उसकी निगाह
27:59मीना के चेहरे पर ठहरी। वो अचानक बोलते
28:01बोलते रुक गया। [संगीत] उसका जिस्म जैसे
28:03साकित हो गया और वह पत्थर के मुजस्मे की
28:06तरह वहीं खड़ा रह गया। उसके चेहरे पर
28:08हैरानी और जज्बात की एक तेज लहर दौड़ गई।
28:11वो बेख्तियार बोला, "यह ये मैं क्या देख
28:15रहा हूं? बादशाह सलामत। यह कौन है? क्या
28:19मेरी आंखें मुझे धोखा दे रही है। यह तो
28:21बिल्कुल उसी रानी जैसी लग रही है जिसे मैं
28:23जंगल के एक [संगीत] बरगद के दरख्त से
28:25बचाकर अपने महल में लाया था। जिसे मैंने
28:28अपने दिल के तख्त पर बिठाया था। मीना की
28:30आंखें भी नम हो गई। उसने अपने शौहर की तरफ
28:33देखा और धीमी आवाज में कहा आका आपने मुझे
28:37पहचान लिया। मैं आपकी वही बदनसीब [संगीत]
28:39रानी हूं। मैं अपनी मर्जी से कहीं नहीं गई
28:42थी। मुझे साजिश करके आपसे दूर किया गया
28:45था। शहजादे के दिल में जैसे बरसों का दर्द
28:48एक साथ जाग उठा। वो बोला रानी मैंने
28:52तुम्हें कितना ढूंढा है। दिन रात जंगलों
28:54[संगीत] में भटकता रहा। लेकिन मेरी बाकी
28:56तीनों बीवियों ने मुझे कुछ और ही कहानी
28:58सुनाई थी। उन्होंने कहा था कि तुम किसी
29:01सौदागर के साथ भाग गई हो। मैंने उनकी बात
29:04पर यकीन कर लिया और तुम्हें याद करके ना
29:06जाने कितनी रातें आंसू बहाते हुए गुजारी।
29:10लेकिन तुम यहां शहजादी बनकर कैसे रह रही
29:12हो। और तुम्हारी वो उकामा कहां है। शाह
29:15सिकंदर यह सब सुनकर हैरान रह गए। उन्हें
29:17यकीन नहीं आ रहा था कि जिस लड़की [संगीत]
29:19को उन्होंने जंगल से लाकर अपनी बेटी बनाया
29:21था। वो दरअसल इसी शहजादे की गुमशुदा रानी
29:24थी। मीना ने दुखी होकर जवाब दिया, आका उन
29:28गुनाहगारों ने मेरी मोहब्बत भरी उकाब
29:30[संगीत] मां को मार मार कर कत्ल कर दिया
29:32था। उसके बाद उन्होंने मुझे एक बेरहम
29:34सौदागर के हाथों बेच दिया। लेकिन अल्लाह
29:37की मेहरबानी से वो सौदागर दरिया में डूब
29:39कर मर गया और शाह सिकंदर ने मुझे पनाह दी।
29:42शहजादे [संगीत] का चेहरा गम और गुस्से से
29:45बदल गया। वो बेख्तियार बोला। इतनी खौफनाक
29:48बेवफाई। मेरी गैर मौजूदगी में उन्होंने
29:50[संगीत] इतना बड़ा जुर्म किया। एक बेकसूर
29:53परिंदे का क्ल और मेरी रानी को एक बांदी
29:55की तरह बेच देना। अब मैं फौरन अपनी रियासत
29:58वापस जाऊंगा। जिन लोगों ने मेरे एतमाद और
30:01मोहब्बत की कदर करना नहीं सीखा उन्हें
30:04मेरी रियासत में रहने का कोई हक नहीं। चलो
30:07रानी अब हक की जीत होकर रहेगी। उसके बाद
30:10मीना ने शाह सिकंदर को अपने माजी की पूरी
30:12कहानी सुनाई। उसने अपनी पैदाइश दरिया में
30:15बहाए जाने उकाब मां की मोहब्बत महल की
30:18सौतनों की साजिश सौदागर की कैद और फिर शाह
30:21सिकंदर की पनाह तक सब कुछ बयान कर दिया।
30:24फिर उसने बादशाह सलामत से रुखसत ली और
30:27अपने शौहर शहजादे के साथ उसकी रियासत के
30:29लिए रवाना हो गई। शहजादा अपनी रियासत में
30:32वापस पहुंचा तो उसने [संगीत] अपनी तीनों
30:34बीवियों को उनके जरा की सख्त सजा दी। उसने
30:37उनके सारे जेवरात छीन लिए। उनके सर मुंडवा
30:39दिए और उन्हें रियासत से बाहर निकाल दिया।
30:42यूं उनकी साजिशें और जुल्म अपने अंजाम को
30:45पहुंचे। बिल आखिर तमाम दुखों का [संगीत]
30:47खात्मा हुआ और हर तरफ सुकून छा गया। एक
30:50दिन दरिया के किनारे उसी पुराने बरगद
30:52[संगीत] के दरख्त के नीचे सब लोग खड़े थे।
30:54मीना ने खामोशी से आसमान की तरफ देखा।
30:57उसकी आंखों में अपनी प्यारी उकाब [संगीत]
30:59मां की याद उतर आई। उसने दिल ही दिल में
31:02अपनी उस मां को याद किया जिसने उसे जन्म
31:04तो नहीं दिया था। मगर अपनी मोहब्बत, शफकत
31:07और कुर्बानी से उसे जिंदगी दी थी। तभी
31:10अचानक [संगीत] आसमान से एक अजीम मुलजुस्सा
31:12उकाब उड़ता हुआ आया और बरगद के दरख्त की
31:15एक टहनी पर आ बैठा। उसने एक बार निहायत
31:18जोरदार आवाज में पुकारा। मीना ने उसे देखा
31:20तो [संगीत] उसके दिल में एक अजीब सी
31:22कैफियत पैदा हो गई। ऐसा महसूस हो रहा था
31:25जैसे उसकी मां आसमान की बुलंदियों [संगीत]
31:27से अपनी बेटी की खुशहाल जिंदगी देखकर उसे
31:29आशीर्वाद दे रही हो। यह मंजर देखकर सबके
31:32दिल खुशी से भर गए। सच्ची मां तो मां ही
31:35होती है। चाहे वह इंसान हो या कोई परिंदा।
31:38मां की मोहब्बत और शफकत का साया हमेशा
31:40अपने बच्चे पर बना रहता है। वो अपने बच्चे
31:42से दूर होकर भी उसके लिए दुआ बनकर रहती है
31:45और उसकी खुशी में अपनी खुशी महसूस करती
31:47है। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो
31:50बहकरम इसे पसंद करें। अपने अजीजों और
31:53दोस्तों के साथ शेयर करें और चैनल को
31:55सब्सक्राइब करना ना भूलें। हम्म